विकिपीडिया hiwiki https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.46.0-wmf.22 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिपीडिया विकिपीडिया वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता प्रवेशद्वार प्रवेशद्वार वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk योग 0 1289 6536745 6536195 2026-04-06T04:53:26Z Ravinder Jugran 849799 /* व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार */ कड़ियाँ लगाई , नई जानकारी और संदर्भ जोड़ा 6536745 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२वीं-१३वीं शताब्दी के एक भारतीय चित्र में [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = A male yogi | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = Two female yoginis }} [[चित्र:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रा में यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' ({{langx|sa|योगः}}) प्राचीन भारतीय ऋषिमुनियों और तत्त्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। [[पतंजलि]] ने 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' को योग कहा है। [[वेद व्यास|व्यास]] ने [[समाधि]] को ही योग माना है। [[योगवासिष्ठ]] के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। 'योग' शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा [[हिन्दू धर्म]], [[जैन धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]] में [[ध्यान]] प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], दक्षिण पूर्व एशिया और [[श्री लंका|श्रीलंका]] में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं। सिद्धि के बाद पहली बार [[११]] दिसम्बर [[२०१४]] को [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा ]] ने प्रत्येक वर्ष [[२१]] जून को [[विश्व योग दिवस]] के रूप में मान्यता दी है। हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में योग के अनेक सम्प्रदाय हैं, योग के विभिन्न लक्ष्य हैं तथा योग के अलग-अलग व्यवहार हैं।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [6.1], देखें मनु दोषी (2007) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग तथा इसका आधुनिक रूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। सबसे पहले 'योग' शब्द का उल्लेख [[ऋग्वेद]] में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है। [[कठोपनिषद]] में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना ईसापूर्व पच्चीसवी और तीसवी शताब्दी ईसापूर्व के बीच के कालखण्ड में हुई थी। [[पतञ्जलि]] का [[योगसूत्र]] योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल ईसा की प्रथम शताब्दी या उसके आसपास माना जाता है। [[हठ योग]] के ग्रन्थ ९वीं से लेकर ११वीं शताब्दी में रचे जाने लगे थे। इनका विकास [[तन्त्र]] से हुआ। पश्चिमी जगत में "योग" को हठयोग के आधुनिक रूप में लिया जाता है जिसमें शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य तथा विश्रान्ति (relaxation) की तकनीकों की प्रधानता है। ये तकनीकें मुख्यतः [[आसन|आसनों]] पर आधारित हैं जबकि परम्परागत योग का केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है और वह सांसारिक लगावों से छुटकारा दिलाने का प्रयास करता है। पश्चिमी जगत में आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार भारत से उन देशों में गये गुरुओं ने किया जो प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]] की पश्चिमी जगत में प्रसिद्धि के बाद वहाँ गये थे। == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|धातु]] में ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगाने से निष्पन्न होता है। [[धातुपाठ]] में युज्‌ शब्द के तीन अर्थ उपलब्ध होते हैं - समाधि, संयोग, संयमन । लेकिन योगशात्र का प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातु से बना है जिसका व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । व्यास जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है - "योगः समाधिः"। वैसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ तथा ‘युज संयमने’ धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। पाणिनीय [[गणपाठ]] में तीन 'युज्' धातुओं का पाठ मिलता हैं - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । समाधि का प्रकृति प्रत्यय अर्थ है, सम्यक् स्थापन। दूसरे अर्थ मे समाधि की सिद्धि के लिए जुड़ना । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, जुड़ना, जोड़ना, मेल करना, संयोग करना अर्थात् इस दु:ख रूप संसार से वियोग तथा ईश्वर से संयोग का नाम योग है । भगवद्गीता में भी वर्णन मिलता है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (6/23) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, संयमन अर्थात् मन का संयम अथवा मन का नियमन । मन को संयमित करना ही योग है। इस प्रकार योग का अर्थ हुआ - "योग साधनाओं को अपनाते हुए मन को नियन्त्रित कर, संयमित कर, आत्मा का परमात्मा से मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसी होनी चाहिए जो अव्याप्ति और अतिव्याप्ति दोषों से मुक्त हो, योग शब्द के वाच्यार्थ का ऐसा लक्षण बतला सके जो प्रत्येक प्रसंग के लिये उपयुक्त हो और योग के सिवाय किसी अन्य वस्तु के लिये उपयुक्त न हो। [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ माना जाता है। उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग, भक्तियोग। वास्तव में देखा जाए तो भगवद्गीता सम्पूर्ण योगशात्र है, क्योंकि उसके अन्तर्गत संसार, मन, बुद्धि, इन्द्रिय , आत्मा और परमात्मा का क्रम से वर्णन करते हुए अन्तिम सत्य को विभिन्न मार्गों और साधन पद्धति से बताने का उपक्रम किया गया है, इसी लिए गीता के समस्त अट्ठारह अध्यायों के नाम योग शब्द पर ही पूर्ण होते हैं, जैसे- प्रथम विवाद योग, द्वितीय सांख्ययोग , तृतीय कर्मयोग, इसी प्रकार अन्य भी विभूतियोग, भक्तियोग, पुरुषोत्तमयोग, मोक्षसंन्यासयोग आदि सभी अध्याय, दुसरी बात यह भी कि गीता के रचनाकार महर्षि वेदव्यास जी ने स्वयं इस बात को इसी ग्रन्थ के प्रत्येक अभ्यास की समाप्ति पर - ' योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुसंवादे......' कहकर इसे योगशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना है।<ref>श्रीमद्भगवद्गीता</ref> वेदोत्तर काल में [[भक्तियोग]] और [[हठयोग]] नाम भी प्रचलित हो गए हैं। पतंजलि योगदर्शन में 'क्रियायोग' शब्द देखने में आता है। [[पाशुपत योग]] और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है। इन सब स्थलों में योग शब्द के जो अर्थ हैं वह एक दूसरे से भिन्न हैं । [[गीता]] में [[श्रीकृष्ण]] ने एक स्थल पर कहा है ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' ( कर्मों में कुशलता ही योग है।) यह वाक्य योग की परिभाषा नहीं है। यदि हम गीता के दुसरे अध्याय के पचासवें उपर्युक्त श्लोक को इस अर्थ में लेंगें कि - " कर्मों में कुशलता ही योग है " - तो हम ऐसा करके अर्थ का अनर्थ कर देंगे, क्योंकि - जैसे चोर भी चोरी करने में कुशल होता है- पर हम उसे योग या योगी नहीं कह सकते है, हत्या, लूट , धोखा , भष्टाचार आदि निन्दनीय कर्म करने में भी अनेक मनुष्य बड़े कुशल होते है और तो और अनेक पकड़े भी नहीं जाते है और न्यायालय की सजा से भी बच निकलते है-- अपने कार्य में इतने निपुण होने के बाद भी , हम उन्हें योग या योगी नहीं कह सकते हैं, अत: यहाँ इस श्लोक का अर्थ यह है कि - ' कर्म में योग ही कुशलता है यानि योग्य कर्म करना ही कर्म की कुशलता है अर्थात- मनुष्य के कल्याण करने की शक्ति योग यानि समत्व- समता भाव में है, मात्र कर्म करने में नहीं, समता के भाव में स्थित होकर कुशल कर्म करने में हैं।<ref>साधक संजीवनी</ref> कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते हैं। इस बात को स्वीकार करने में यह बड़ी आपत्ति खड़ी होती है कि [[बौद्ध धर्म|बौद्धमतावलम्बी]] भी, जो परमात्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं करते, योग शब्द का व्यवहार करते और योग का समर्थन करते हैं। यही बात [[सांख्य|सांख्यवादियों]] के लिए भी कही जा सकती है जो ईश्वर की सत्ता को असिद्ध मानते हैं। [[पतञ्जलि]] ने [[योगसूत्र]] में, जो परिभाषा दी है 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं: चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं। योग दर्शन के विद्वानों और टीकाकारों के अनुसार महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन के प्रथम तीन सूत्र - " अथ योगानुशासनम् ।। 1।।, योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: ।।2।।, तदा द्रष्टु: स्वरूपेऽवस्थानम् ।।3।। - में ही योग के सम्पूर्ण स्वरूप और लक्ष्य को परिभाषित कर दिया है, अर्थात- योग विषय की शिक्षा देने वाले ग्रंथ का आरम्भ ; योग का स्वरूप, चित्त में उत्पन्न होने वाली वृत्तियों को रुक जाना यानि शमन हो जाना ; ऐसा होने से दृष्टा यानि साधक अपने स्वरूप में यानि पुरुष शुद्धचेतन रूप में स्थित हो जाता है, जो कि योग का फल है।<ref>पातञ्जलयोगप्रदीप, समाधिपाद, सूत्र- 1,2,3, पृष्ठ- 139,146,153</ref> परन्तु इस परिभाषा पर कई विद्वानों को आपत्ति है। उनका कहना है कि चित्तवृत्तियों के प्रवाह का ही नाम चित्त है। पूर्ण निरोध का अर्थ होगा चित्त के अस्तित्व का पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृतियों और संस्कारों का निःशेष हो जाना। यदि ऐसा हो जाए तो फिर समाधि से उठना संभव नहीं होगा। क्योंकि उस अवस्था के सहारे के लिये कोई भी संस्कार बचा नहीं होगा, प्रारब्ध दग्ध हो गया होगा। निरोध यदि संभव हो तो [[श्रीकृष्ण]] के इस वाक्य का क्या अर्थ होगा? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योग में स्थित होकर कर्म करो। विरुद्धावस्था में कर्म हो नहीं सकता और उस अवस्था में कोई संस्कार नहीं पड़ सकते, स्मृतियाँ नहीं बन सकतीं, जो समाधि से उठने के बाद कर्म करने में सहायक हों। संक्षेप में आशय यह है कि योग के शास्त्रीय स्वरूप, उसके दार्शनिक आधार को सम्यक्‌ रूप से समझना बहुत सरल नहीं है। संसार को मिथ्या माननेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादी]] भी निदिध्याह्न के नाम से उसका समर्थन करता है। अनीश्वरवादी सांख्य विद्वान भी उसका अनुमोदन करता है। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] ही नहीं, [[इस्लाम|मुस्लिम]] [[सूफ़ी]] और [[ईसाई]] मिस्टिक भी किसी न किसी प्रकार अपने संप्रदाय की मान्यताओं और दार्शनिक सिद्धांतों के साथ उसका सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं। इन विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं में किस प्रकार ऐसा समन्वय हो सकता है कि ऐसा धरातल मिल सके जिस पर योग की भित्ति खड़ी की जा सके, यह बड़ा रोचक प्रश्न है परंतु इसके विवेचन के लिये बहुत समय चाहिए। यहाँ उस प्रक्रिया पर थोड़ा सा विचार कर लेना आवश्यक है जिसकी रूपरेखा हमको पतंजलि के सूत्रों में मिलती है। थोड़े बहुत शब्दभेद से यह प्रक्रिया उन सभी समुदायों को मान्य है जो योग के अभ्यास का समर्थन करते हैं। ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]] के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (1/2) अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। *(२) [[सांख्य दर्शन]] के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है। *(३) [[विष्णुपुराण]] के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है। *(४) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (2/48) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। *(५) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। *(६) [[आचार्य हरिभद्र]] के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]] से जोड़ने वाले सभी व्यवहार योग हैं। *(७) [[बौद्ध धर्म]] के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है, -- इसमें कुशल चित्तका भाव यह है कि-- शुभ कर्म, अच्छे कर्म, पूण्य कर्म- पाप ,लोभ ,घृणा, द्वेष, क्रोध, काम ( कामना), मार ( प्रलोभन) आदि राग - द्वेष से रहित कर्म करना अर्थात कुशल कर्म करने से - चित्तकी स्फटिकमणी की भाँति शुद्ध, शान्त, निर्मल अवस्था का हो जाना ही कुशल चित्त है। ===योग के प्रकार=== योग की उच्चावस्था [[समाधि]], [[मोक्ष]], [[कैवल्य]] आदि तक पहुँचने के लिए अनेकों साधकों ने जो साधन अपनाये उन्हीं साधनों का वर्णन योग ग्रन्थों में समय समय पर मिलता रहा। उसी को 'योग के प्रकार' से जाना जाने लगा। योग की प्रामाणिक पुस्तकों में [[शिवसंहिता]] तथा [[गोरक्षशतक]] में योग के चार प्रकारों का वर्णन मिलता है - : ''मंत्रयोगों हष्ष्चैव लययोगस्तृतीयकः। '' : ''चतुर्थो राजयोगः'' (शिवसंहिता , 5/11) : ''मंत्रो लयो हठो राजयोगन्तर्भूमिका क्रमात् '' : ''एक एव चतुर्धाऽयं महायोगोभियते॥'' (गोरक्षशतकम् ) उपर्युक्त दोनों श्लोकों से योग के प्रकार हुए : मंत्रयोग, हठयोग लययोग व राजयोग। ====मंत्रयोग==== '''{{मुख्य|मन्त्र योग}}''' '[[मंत्र]]' का समान्य अर्थ है- 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः'। मन को त्राय (पार कराने वाला) मंत्र ही है। मन्त्र योग का सम्बन्ध मन से है, मन को इस प्रकार परिभाषित किया है- मनन इति मनः। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है। मंत्र योग के बारे में योगतत्वोपनिषद में वर्णन इस प्रकार है- : ''योग सेवन्ते साधकाधमाः।'' ( अल्पबुद्धि साधक मंत्रयोग से सेवा करता है अर्थात मंत्रयोग उन साधकों के लिए है जो अल्पबुद्धि है।) मंत्र के जप उच्चारण से एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें पैदा होती है जो कि जप करते समय शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालता है। मंत्र में साधक जप का प्रयोग करता है, मंत्र जप में तीन घटकों का काफी महत्व है, वें तीन घटक हैं- उच्चारण, लय व ताल। तीनों का सही अनुपात मंत्र शक्ति को बढ़ा देता है। मंत्रजप मुख्यरूप से चार प्रकार से किया जाता है। : (1) वाचिक (2) मानसिक (3) उपांशु (4) अजप्पा । * [[वाचिक जप]] - जिसे [[वैखरी]] जप भी कहते है, यह जप [[साधना]] की प्रारंभिक अवस्था है, जिसमें साधक अपने मुँख से उच्च स्वर से उच्चारण करता हुआ- मन्त्र का जप करता है, ऐसा करने से साधक बाहरी विक्षेपण , ध्वनियों से विचलित नहीं होता है। * [[उपांशु जप]] - यह जप की वैखरी जप से श्रेष्ठ अवस्था है । इसमे साधक बिना उच्चारण किए हुए मंत्र का जप - केवल फुसफुसाहट यानि केवल होठों को हिलाते हुए जप करता है ,जिससे कोई ध्वनी नहीं निकलती है परन्तु साधक को ही जप ध्वनी अनुभव होती है। * [[मानसिक जप]] - यह जप की और अधिक श्रेष्ठ अवस्था है। इसमें साधक बिना ध्वनी किए ,बिना होठ हिलाए , केवल मन ही मन से मन्त्र जपता रहता है, यह जप की शक्तिशाली विधि है। * [[अजप्पा जप]] - यह जप की सबसे श्रेष्ठ अवस्था है, इसमें साधक अपने आते - जाते श्वास को मंत्र के साथ संयुक्त कर लेता है और यह जप 24 घण्टे निरन्तर चलता रहता है, जो कि जप योग साधना को सफल करता है।<ref>जपयोग, दिव्य जीवन संघ</ref> ====हठयोग==== '''{{मुख्य|हठयोग}}''' हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्वक किसी कार्य को करने से लिया जाता है। किसी भी कार्य के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हठी हो जाना ,उसे पूरा करने की ठान लेना, चाहे जैसी भी अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियाँ आएँ। परन्तु योग के सम्बंध में इसका स्वरूप विस्तार व गहराई को धारण किए हुए है। यह योग विद्या की वह पद्धति जिसमें - योगी साधना का अभ्यास करता हुआ, आनन्द के अथाह सागर में डुबकी लगाकर आध्यात्म की अमूल्य निधि को निकाल लाने में सफल होता है - अर्थात योग सिद्धि प्राप्त करने के समान है।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> इस योग धारा का प्रथम प्रवाह आदिनाथ के मुखारबिन्द से माना जाता है, यहाँ आदिनाथ भगवान शिव का ही एक नाम है, जिन्हें आदियोगी भी कहा जाता है। योगी समाज में यह सर्वविदित और सर्वमान्य है और उन्हीं आदियोगी आदिनाथ भगवान शिव ने सांसारिक जीवों के कल्याण करने के उद्देश्य से तप के इस यौगिक मार्ग का प्रतिपादन सर्वप्रथम अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती के सम्मुख इसका उपदेश किया था। इसके साथ- साथ यह भी सर्वविदित मान्यता है कि जगत् में इस योग के प्रचार- प्रसार के लिए गुरू मत्स्येन्द्रनाथ और गुरू गोरखनाथ ने सर्वप्रथम आदिनाथ के ही श्रीमुख से इसका श्रवण कर इस योग पद्धति को ग्रहण किया था। जो कि नाथ सम्प्रदाय के तपस्वी साधक, योगी सन्यासियों की साधना सिद्धि का प्रमुख साधन है। जो कि योग साधना की परम्परा का पालन करता हुआ जिज्ञासुओं के सम्मुख आता रहा और अपने आप को परिमाजित करता हुआ , अधिक कठिन अंशों का त्याग कर और जन - जन उपयोगी बनता हुआ , गुरू गोरखनाथ जी की कृपा से उन्हीं के द्वारा सम्पादित सूत्र में सारभूत और उत्कृष्ट लिपि बद्ध होकर हठयोग प्रदीपिका का स्वरूप ग्रहण करके जगत् के हितार्थ प्रकट हो सम्मुख हुआ।।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> हठ प्रदीपिका पुस्तक में नहीं बल्कि श्री गोरखनाथ रचित पुस्तक "सिद्ध सिद्धांत पद्धति " में वर्णित- हठ का अर्थ इस प्रकार दिया है-<ref> सिद्ध सिद्धांत पद्धति </ ref> यह श्लोक श्री गोरखनाथ विरचित " सिद्ध सिद्धांत पद्धति " के प्रथम उपदेश में वर्णित है, जिसमें हठ शब्द को योग की दृष्टि से परिभाषित किया गया है।< ref>सिद्ध सिद्धांत पद्धति, प्रथम उपदेश के अ न्तर्गत</ ref> लेकिन भ्रमवश इसे हठयोग प्रदीपिका में लिखित बताया जाता है ,जो कि निराधार है। यह हठ योग की परिभाषा है परन्तु हठयोग प्रदीपिका पुस्तक में इस श्लोक का वर्णन कहीं नहीं आता है, हाँ ! परिभाषित करने के लिए विद्वान ऐसा कह देते हैं। <ref>हठयोग प्रदीपिका </ref> : ''हकारेणोच्यते सूर्यष्ठकार चन्द्र उच्यते। '' : ''सूर्या चन्द्रमसो र्योगाद्धठयोगोऽभिधीयते॥'' <ref>प्रथम उपदेश,सिद्ध सिद्धांत पद्धति</ref> '''ह''' का अर्थ [[सूर्य]] तथा '''ठ''' का अर्थ [[चन्द्रमा|चन्द्र]] बताया गया है। सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है। शरीर में बहत्तर हजार नाड़ियाँ है, जोकि मानव शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य का संचालन करती है। ये नाड़ियाँ ऊर्जा के मार्ग है, जो कि शरीर के भिन्न- भिन्न अंगों में ऊर्जाशक्ति का प्रवाह प्रवाहित करके उसे क्रियाशील और प्राणमय बनाए रखती हैं, इनके स्वस्थ रहने से हठयोगी प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करता हुआ,अपनी प्राण शक्ति का ऊर्ध्व गमन करते हुए, योग के लक्ष्य आनन्द की प्राप्ति करता है। उनमें तीन प्रमुख नाड़ियों का वर्णन है, वे इस प्रकार हैं। सूर्यनाड़ी अर्थात पिंगला जो दाहिने स्वर का प्रतीक है। चन्द्रनाड़ी अर्थात इड़ा जो बायें स्वर का प्रतीक है। इन दोनों के बीच तीसरी नाड़ी सुषुम्ना है। इस प्रकार हठयोग वह क्रिया है जिसमें पिंगला और इड़ा नाड़ी के सहारे प्राण को सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कराकर ब्रह्मरन्ध्र में समाधिस्थ किया जाता है। [[हठयोग प्रदीपिका|हठ प्रदीपिका]] में चार अध्याय हैं, जिन्हें उपदेश कहा गया है, जिसमें हठयोग के चार अंगों का वर्णन है- * प्रथम उपदेश - आसन, * द्वितीय उपदेश - प्राणायाम, * तृतीय उपदेश- कुण्डली बोध, मुद्रा और बन्ध तथा * चतुर्थ उपदेश में - नादानुसंधान।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> [[घेरण्डसंहिता]] में सात अंग- ''षटकर्म, आसन, मुद्राबन्ध, प्राणायाम, ध्यान, समाधि'' जबकि योगतत्वोपनिषद और पतंजलि कृत योग दर्शन में भी आठ अंगों का वर्णन है- ''यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि''< ref> पातञ्जलयोगप्रदीप, दुसरा पाद</ref> ====लययोग==== '''{{मुख्य|कुंडलिनी योग}}''' चित्त का अपने स्वरूप विलीन होना या चित्त की निरूद्ध अवस्था लययोग के अन्तर्गत आता है। साधक के चित्त् में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय [[ब्रह्म]] का [[ध्यान]] रहे इसी को लययोग कहते हैं। योगत्वोपनिषद में इस प्रकार वर्णन है- : ''गच्छस्तिष्ठन स्वपन भुंजन् ध्यायेन्त्रिष्कलमीश्वरम् स एव लययोगः स्यात'' (22-23) ==== राजयोग==== '''{{मुख्य|राजयोग}}''' राजयोग सभी योगों का राजा कहलाया जाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ सामग्री अवश्य मिल जाती है। राजयोग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग का वर्णन आता है। राजयोग का विषय चित्तवृत्तियों का निरोध करना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य तथा विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा लेकर आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया है। इन साधनों का उपयोग करके साधक के क्लेशों का नाश होता है, चित्त प्रसन्न होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है और विवेक ख्याति प्राप्त होती है। : ''योगाडांनुष्ठानाद शुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिरा विवेक ख्यातेः'' (2/28) राजयोग के अन्तर्गत महर्षि पतंजलि ने अष्टांग को इस प्रकार बताया है- : ''यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टांगानि।'' <ref>योग दर्शन, साधनपाद ( 2/29 )</ ref> योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं। उपर्युक्त चार प्रकार के अतिरिक्त [[गीता]] में प्रमुखत: तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है- *(१) [[ज्ञानयोग]] *(२) [[भक्तियोग]] *(३) [[कर्म योग]] ज्ञानयोग, सांख्ययोग से सम्बन्ध रखता है। पुरुष प्रकृति के बन्धनों से मुक्त होना ही ज्ञान योग है। सांख्य दर्शन में 25 तत्वों का वर्णन मिलता है। == योग का इतिहास == [[Image:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पा से प्राप्त मुहर में योगमुद्रा]] {{Main|योग का इतिहास}} वैदिक [[संहिता|संहिताओं]] के अंतर्गत तपस्वियों ''तपस (संस्कृत)'' के बारे में ([[ब्राह्मण|(कल | ब्राह्मण)]]) प्राचीन काल से [[वेदों]] में (१९०० से १५०० बी सी ई) उल्लेख मिलता है, जब कि तापसिक साधनाओं का समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणियों में प्राप्त है।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> कई मूर्तियाँ जो सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्रा को प्रदर्शित करती है, [[सिंधु घाटी सभ्यता]] (सी.3300-1700 बी.सी. इ.) के स्थान पर प्राप्त हुईं है। पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्ल के अनुसार," ये मूर्तियाँ योग के धार्मिक संस्कार" के योग से सम्बन्ध को संकेत करती है।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि इस बात का निर्णयात्मक सबूत नहीं है फिर भी अनेक पंडितों की राय में सिंधु घाटी सभ्यता और योग-[[ध्यान]] में सम्बन्ध है।<ref>देखें: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्ती का "योग मुद्रा में बैटे हुए" ऐसा वर्णन करता है। [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखे, "अरौंड द इंडस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिखते है " पुरातात्विक खोज हमें अनुमान करने का समर्थन करता है की आर्य [[भारत]] के पूर्व के लोग योग शास्त्र की क्रियाओं से परिचित थे". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेंरीच ज़िम्मर|हैनरिच ज़िम्मेर]] एक मुद्रा में "योगमुद्रा" का वर्णन करते है। {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थॉमस मअकएविल्ले|थॉमस म्क्विल्ले]] लिखते है कि "यह छह रहस्यमय सिंधु घाटी मुद्रा की छवियों में जो उत्कीर्ण मूर्तियां है उन में हठ योग के ''मूलबन्धासन '' नाम के आसन, या उस से मिलता जुलता ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है। {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजंद मसीह, पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष, हाल ही में प्राप्त एक मुद्रा का वर्णन एक योगी के रूप का कहते है। [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुओं की खोज खंडहर में निहित खजाने की ओर संकेत करता है। ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फ़रवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जोकि अन्य सीलों मे से एक है, के बारे में विवाद करते हुए लिखते है कि यह रूप एक योग मुद्रा में बैठे व्यक्ति की स्पष्ट नहीं लगती या यह एक मानव आकृति का प्रतिनिधित्व करती लगती है। फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सील के बारे में जियोफ्रे सामुएल का मानना है कि,"वास्तव में हमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह मूर्ति किसी नारी या पुरुष, किसकी व्याख्या करती है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]] में उच्च चैतन्य को प्राप्त करने कि रीतियों का विकास श्रमानिक परम्पराओं द्वारा एवं उपनिषद् की परंपरा द्वारा विकसित हुआ था।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्ध के पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रंथों मे [[ध्यान]] के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, बुद्ध के दो शिक्षकों के ध्यान के लक्ष्यों के प्रति कहे वाक्यों के आधार पर वय्न्न यह तर्क करते है की निर्गुण ध्यान की पद्धति ब्रह्मिन परंपरा से निकली इसलिए उपनिषद् की [[सृष्टि]] के प्रति कहे कथनों में एवं ध्यान के लक्ष्यों के लिए कहे कथनों में समानता है।<ref>[28] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> यह संभावित हो भी सकता है, नहीं भी.<ref>[29] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदों में [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानों के वैश्विक कथनों में किसी [[ध्यान]] की रीति की सम्भावना के प्रति तर्क देते हुए कहते है की [[नासदीय सूक्त]] किसी [[ध्यान]] की पद्धति की ओर [[ऋग्वेद]] से पूर्व भी इशारा करते है।<ref>[30] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> [[हिंदू]] ग्रंथ और [[बौद्ध]] ग्रंथ प्राचीन ग्रन्थो में से एक है जिन में ध्यान तकनीकों का वर्णन प्राप्त होता है।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरावदा बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम इंसिएंत बनारस टू माडर्न कोलम्बो.'' रौतलेड्ग और केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44.</ref> वे ध्यान की प्रथाओं और अवस्थाओं का वर्णन करते है जो बुद्ध से पहले अस्तित्व में थीं और साथ ही उन प्रथाओं का वर्णन करते है जो पहले बौद्ध धर्म के भीतर विकसित हुईं.<ref>[32] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50</ref> हिंदु वाङ्मय में,"योग" शब्द पहले कथा उपनिषद में प्रस्तुत हुआ जहाँ ज्ञानेन्द्रियों का नियंत्रण और मानसिक गतिविधि के निवारण के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो उच्चतम स्थिति प्रदान करने वाला माना गया है।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95. विद्वानों कथा उपनिषद को पूर्व बौद्धत्व के साथ सूचीबद्ध नहीं करते, उदाहरण के लिए हेल्मथ वॉन ग्लासेनप्प देख सकते हैं,1950 कार्यवाही की "अकादेमी देर विस्सेंस्चाफ्तें," लितेरातुर अंड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फ़रवरी 2013 }} कुछ लोग कहते हैं कि यह पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा का ए हिस्ट्री ऑफ़ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अंड वेस्ट, वोल. 37, अंख. 3 (जुलाई., 1987) जिसे अरविंद शर्मा ने समीक्षा की है, पीपी. 325-331. पाली शब्द "योग" का उपयोग करने की एक व्यापक जांच के लिए पूर्व बौद्ध ग्रंथों में देखे, थॉमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इंग्लिश शब्दकोष.'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालें., 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदा में "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थ में इस शब्द का प्रयोग के लिए देखे गिल फ्रोंस्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखा.</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जो योग की अवधारणा से सम्बंधित है वे मध्य कालीन [[उपनिषदों|उपनिषद्]], [[महाभारत]],[[भगवद गीता]] 200 BCE) एवं [[पतंजलि योगसूत्र|पतंजलि योग सूत्र]] है। (ca. 400 BCE) ==== पतंजलि के योग सूत्र ==== {{main|योग सूत्र}} [[भारतीय दर्शन]] में, षड् [[आस्तिक|दर्शनों]] में से एक का नाम योग है।<ref>[35] ^ छह आस्तिक दर्शन सम्प्रदायों के एक सिंहावलोकन के लिए, समूह पर विस्तार के साथ देखें : राधाकृष्णन अंड मूर, "सामग्री" और पीपी. स्कूलों [35] ^453-487.</ref><ref>[36] ^ योग घराने के एक संक्षिप्त सिंहावलोकन के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[Samkhya|सांख्य]] स्कूल के साथ निकटता से संबन्धित है।<ref>[37] ^ दर्शन और संख्या के बीच घनिष्ठ संबंध के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> ऋषि [[पतंजलि]] द्वारा व्याख्यायित योग संप्रदाय [[संख्या|सांख्य]] मनोविज्ञान और तत्वमीमांसा को स्वीकार करता है, लेकिन सांख्य घराने की तुलना में अधिक आस्तिक है, यह प्रमाण है क्योंकि सांख्य वास्तविकता के पच्चीस तत्वों में ईश्वरीय सत्ता भी जोड़ी गई है।<ref>[38] ^ अवधारणाओं के योग स्वीकृति के लिए, लेकिन भगवान के लिए एक वर्ग के जोड़ने की क्रिया के साथ देखें: राधाकृष्णन अंड मूर, पी. 453.</ref><ref>[39]^ Samkhya के 25 सिद्धांतों को योगा ने स्वीकार करने के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग और सांख्य एक दूसरे से इतने मिलते-जुलते है कि मेक्स म्युल्लर कहते है,"यह दो दर्शन इतने प्रसिद्ध थे कि एक दूसरे का अंतर समझने के लिए एक को प्रभु के साथ और दूसरे को प्रभु के बिना माना जाता है।...."<ref>[40] ^ म्युलर (1899), अध्याय 7, "योग फिलोसोफी", पी. १०४.</ref> सांख्य और योग के बीच घनिष्ठ संबंध हेंरीच ज़िम्मेर समझाते है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> इन दोनों को भारत में जुड़वा के रूप में माना जाता है, जो एक ही विषय के दो पहलू है।{{IAST|Sāṅkhya}}[41]यहाँ मानव प्रकृति की बुनियादी सैद्धांतिक का प्रदर्शन, विस्तृत विवरण और उसके तत्वों का परिभाषित, बंधन ''(बंधा)'' के स्थिति में उनके सहयोग करने के तरीके, सुलझावट के समय अपने स्थिति का विश्लेषण या मुक्ति में वियोजन [[मोक्ष]] की व्याख्या की गई है। योग विशेष रूप से प्रक्रिया की गतिशीलता के सुलझाव के लिए उपचार करता है और मुक्ति प्राप्त करने की व्यावहारिक तकनीकों को सिद्धांत करता है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' का उपचार करता है।<ref>[42] ^ ज़िम्मेर (1951), पी. 280.</ref> </blockquote> पतंजलि, व्यापक रूप से औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते है।<ref>[43] ^ दार्शनिक प्रणाली के संस्थापक पतंजलि योग को यह रूप दिया, देखें : चटर्जी और पी० दत्त 42</ref> पतंजलि योग, बुद्धि के नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है जिसे [[राज योग]] के रूप में जाना जाता है।<ref>[44] ^ मन के नियंत्रण के लिए एक तंत्र के रूप में "राजा योग" के लिए और एक महत्वपूर्ण कार्य के रूप में पतंजलि के योग सूत्र के साथ संबंध के लिए देखे: फ्लड (1996), पीपी. 96-98.</ref> पतंजलि उनके दूसरे सूत्र मे "योग" शब्द को परिभाषित करते है,<ref name="yogasutrastext">{{cite web| last = Patañjali| first = | authorlink = Patanjali| author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali| work = | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts| date = 2001-02-01| url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading| format = [[etext]]| doi = | accessdate = 2008-11-24| archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading| archive-date = 25 अगस्त 2011| url-status = dead}}</ref> जो उनके पूरे काम के लिए व्याख्या सूत्र माना जाता है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table">'''''योगः चित्त-वृत्ति निरोधः''' '' <br />- योग सूत्र 1.2</blockquote> तीन संस्कृत शब्दों के अर्थ पर यह संस्कृत परिभाषा टिकी है। अई० के० तैम्नी इसकी अनुवाद करते है कि,"योग बुद्धि के संशोधनों (''{{IAST|vṛtti}}'' [49]) का निषेध (''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [48]) है" (''{{IAST|citta}}'' [50])। <ref>पाठ और शब्द मे से शब्द अनुवाद के लिए देखे:तैम्नी पी."योग इस दी इनहिबिशन ऑफ़ दी मोडीफिकेशंस ऑफ़ दी मैंड" 6.</ref> योग की प्रारंभिक परिभाषा मे इस शब्द ''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [52] का उपयोग एक उदाहरण है कि बौद्धिक तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं, योग सूत्र मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है; इससे यह संकेत होता है कि बौद्ध विचारों के बारे में पतंजलि को जानकारी थी और अपने प्रणाली मे उन्हें बुनाई.<ref>[53] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतंजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 9.</ref>[[स्वामी विवेकानंद|स्वामी]] विवेकानंद इस सूत्र को अनुवाद करते हुए कहते है,"योग बुद्धि (चित्त) को विभिन्न रूप (वृत्ति) लेने से अवरुद्ध करता है।<ref>[54] ^ विवेकानाडा, पी. 115</ref> [[चित्र:Yogisculpture.JPG|right|thumb|200px|इस, दिल्ली के बिरला मंदिर में एक हिंदू योगी की मूर्ति]] पतंजलि का लेखन 'अष्टांग योग"("आठ-अंगित योग") एक प्रणाली के लिए आधार बन गया। 29<sup>th</sup> सूत्र के <sup>दूसरी </sup>किताब से यह आठ-अंगित अवधारणा को प्राप्त किया गया था और व्यावहारिक रूप मे भिन्नरूप से सिखाये गए प्रत्येक राज योग की एक मुख्य विशेषता है। आठ अंग हैं: # [[यम]] : सत्य, अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (अनावश्यक धन और सम्पत्ति एकत्र न करना), [[ब्रह्मचर्य]] । # [[नियम]] (पांच "धार्मिक क्रिया") : शौच (पवित्रता), सन्तोष, तपस, [[स्वाध्याय]] और ईश्वरप्राणिधान। # [[आसन]] # [[प्राणायाम]] : ''प्राण'', सांस, "अयाम ", को नियंत्रित करना या बंद करना। साथ ही जीवन शक्ति को नियंत्रण करने की व्याख्या की गयी है। # [[प्रत्याहार]] : बाहरी वस्तुओं से भावना अंगों के प्रत्याहार # [[धारणा]] ("एकाग्रता"): एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना # [[ध्यान]] : ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन # [[समाधि]] : ध्यान के वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना। इसके दो प्रकार है - सविकल्प और निर्विकल्प। निर्विकल्प समाधि में संसार में वापस आने का कोई मार्ग या व्यवस्था नहीं होती। यह योग पद्धति की चरम अवस्था है। इस संप्रदाय के विचार मे, उच्चतम प्राप्ति विश्व के अनुभवी विविधता को [[माया (भ्रम)|भ्रम]] के रूप मे प्रकट नहीं करता. यह दुनिया वास्तव है। इसके अलावा, उच्चतम प्राप्ति ऐसी घटना है जहाँ अनेक में से एक व्यक्तित्व [[आत्मन (हिंदू धर्म)|स्वयं]], आत्म को आविष्कार करता है, कोई एक सार्वभौमिक आत्म नहीं है जो सभी व्यक्तियों द्वारा साझा जाता है।<ref>[55] ^ स्टीफन एच. फिलिप्स, ''क्लास्सिकल इंडियन मेताफ्य्सिक्स: रेफुताशन्स ऑफ़ रेअलिस्म अंड दी एमेर्गेंस ऑफ़ "न्यू लॉजिक". '' ओपन कोर्ट प्रकाशन, 1995, पृष्ठ 12-13.</ref> ==== भगवद गीता ==== {{Main|भगवद्गीता}} भगवद गीता (प्रभु के गीत), बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से ''योग'' शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय (छठा अध्याय) सहित पारंपरिक योग का अभ्यास को समर्पित, ध्यान के सहित, करने के अलावा<ref>[57] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय किया जाता है।<ref>[58] ^ भगवद गीता, एक पूरा अध्याय (ch. 6) पारंपरिक योग का अभ्यास करने के लिए समर्पित सहित. इस गीता मे योग के प्रसिद्ध तीन प्रकारों, जैसे 'ज्ञान' (ज्ञान), 'एक्शन'(कर्म) और 'प्यार' (भक्ति) का परिचय किया है।" फ्लड, पी. 96</ref> * [[कर्म योग]]: कार्रवाई का योग। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। * [[भक्ति योग]]: भक्ति का योग। भगवत कीर्तन। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। * [[ज्ञान योग|ज्ञाना योग]]: ज्ञान का योग - ज्ञानार्जन करना। [[मधुसूदन सरस्वती]] (जन्म 1490) ने गीता को तीन वर्गों में विभाजित किया है, जहाँ प्रथम छह अध्यायों मे कर्म योग के बारे मे, बीच के छह मे भक्ति योग और पिछले छह अध्यायों मे ज्ञाना (ज्ञान) योग के बारे मे बताया गया है।<ref>[59] ^ गम्भिरानान्दा, पी. 16</ref> अन्य टिप्पणीकार प्रत्येक अध्याय को एक अलग 'योग' से संबंध बताते है, जहाँ अठारह अलग योग का वर्णन किया है।<ref>[60] ^ जकोब्सन, पी. 46.</ref> ==== हठयोग ==== {{Main|हठ योग}} हठयोग योग, योग की एक विशेष प्रणाली है जिसे 15वीं सदी के भारत में [[हठयोग प्रदीपिका|हठ योग प्रदीपिका]] के संकलक, योगी स्वात्माराम द्वारा वर्णित किया गया था। जिसका उल्लेख ग्रंथ के रचियता योगी स्वात्माराम जी ने स्वयं पुस्तक के प्रथम उपदेश के तृतीय श्लोक में इस प्रकार किया है - * भ्रांत्या बहुमतध्वांते राजयोगमजानताम्। हठप्रदीपिकां धत्ते स्वात्माराम: कृपाकर:।।<refप्रथम उपदेश, तीसरा श्लोक</ref> अर्थात - " अनेक मतों के गहन अंधकार की भ्रान्ति से उबारने के लिए अपनी आत्मा में रमण करने वाले ( स्वात्माराम) योगी कृपा पूर्वक इस हठयोग प्रदीपिका को प्रकट करते हैं।।"<ref>1 - 3</ ref> हठयोग पतंजलि के राज योग से काफी अलग है राजयोग जो कि सत्कर्म पर केन्द्रित है, तो हठयोग भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है।''[62]'' [63] केवल पतंजलि राजयोग के ध्यान आसन के बदले, [64] यह पूरे शरीर के लोकप्रिय आसनों की चर्चा करता है।<ref name="Burley">[65] ^ हठयोग: यह प्रसंग, थिओरी अंड प्रक्टिस मिकेल बर्ली (पृष्ठ 16) द्वारा लिखा गया है।</ref> हठयोग अपनी कई आधुनिक भिन्नरूपों में एक शैली है जिसे बहुत से लोग "योग" शब्द के साथ जोड़ते है।<ref>[66] ^ फयूएर्स्तें, जोर्ग. 1996).''दी शम्भाला गाइड टू योग'' बोस्टन और लंदन: शम्भाला प्रकाशन, इंक</ref> हठयोग- वास्तव में एक सम्पूर्ण क्रियात्मक योग है यानि यह अपने प्रथम उपदेश से ही शरीर की एक विशेष क्रिया अभ्यास से प्रारंभ होता है , जिसका नाम आसन है। शुरूआत में हठयोग की महिमा वर्णन करने के बाद श्लोक बारहवें में हठयोग के साधक को अभ्यास के लिए शुद्ध- पवित्र वातारण युक्त स्थान पर एक कुटी ( एक छोटा सा अनुकूल कक्ष ) का निर्माण करने की बात कही गई है, अर्थात एक ऐसी जगह हो ,जहाँ साधना करते हुए हठयोगी को कोई बाहरी विक्षेपण विध्न उत्पन्न न कर सके , शीत ,वर्षा, गर्मी ऋतु आदि से बचाव हो सके। बताई और सीखी गई पद्धति से योग अभ्यास करते समय छ: बाधाओं से दूर रहने और छ: गुणों को धारण कर अभ्यास करने का निर्देश किया गया है, जिन्हें साधना की फलवती के लिए पालनीय योग्य बताया गया है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, श्लोक 12 - 15</ref> पतंजलि योगदर्शन की भाँति इसमें भी योग साधना प्रारम्भ करने से पूर्व श्लोक 17 एवं 18 में यम - नियम का वर्णन किया गया है। योगदर्शन में पाँच यम और पाँच नियम, कुल दस आचार गुणों का पालन करने को कहा गया है, तो वहीं हठयोग में यह दस और दस कुल बीस कहे गए हैं। इनके माध्यम से साधक के नैतिक और सामाजिक जीवन की आचार - विचार की पवित्रता, शुद्धतामय जीवन जीने की व्यावहारिकता बनाना है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, 17-18</ref> आसन हठयोग का प्रथम अंग है, इसलिए पहले आसन की ही वार्ता करते हैं। हठयोग के प्रथम उपदेश में स्वयं इस बात को कहा गया है।आसन से ही हठयोग की क्रियात्मक साधना प्रारम्भ होती है -- " हठस्य प्रथम् अंगत्वाद् आसनम् पूर्वमुच्यते। कुर्याद् तदासनं, स्थैर्यम् आरोग्यं च अंगलाघवम्।।"1/19 प्रथम उपदेश के उंनीसवें श्लोक में आसन को हठयोग का प्रथम अंग मानकर उसका प्रारम्भ करने की बात कही गई है, जिसमें प्रथम आसन अभ्यास करने की अनिवार्यता , उसके शरीर फिर मन पर प्रभाव को सरलता से स्पष्ट किया है, जैसे कि - आसन का अभ्यास करने से साधक के शरीर की आरोग्यता प्राप्ति, मन की चंचलता नष्ट होकर, शरीर और मन दोनों की स्थिति स्थिर हो जाती है,और तमोगुण आलस्य नष्ट होकर शरीर लाघवता यानि हल्केपन को प्राप्त होता है। आसन अभ्यास से तीन चीजें प्राप्त होती है -- * आरोग्य शरीर * शरीर में हल्कापन * तन - मन की स्थिरता। यानि हठयोग की कठिन साधना को सफल करनें के लिए शरीर व मन दोनों तैयार हो जाते हैं ,साधना के मार्ग पर चलने के लिए सध जाते है।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/19</ref> हठयोग में इस विषय के प्रारम्भ में कहा गया है कि वशिष्ठ आदि मुनियों और मत्स्येन्द्रनाथ आदि योगियों ने साधना करते हुए जिन आसनों का अभ्यास किया, उनमें से इस ग्रंथ में कुछ प्रमुख आसन का वर्णन किया जाता है। यहाँ जैसा कि पूर्व कह चुकें हैं कि हठयोग के आदि गुरू और प्रवर्तक भगवान आदिनाथ शिव को माना गया है ,अत: उन्होंने ही सर्वप्रथम चौरासी लाख आसनों का वर्णन किया, एक तरह से ये चौरासी लाख आसन " सृष्टि सृजन की चौरासी लाख योनियों " से सम्बन्धित हैं। इसीलिए इन आसनों के नाम भी जगत की स्थावर ,जंगम योनियों से मिलते है , जैसे कि -- वृक्ष आसन, ताड़ासन, मकर आसन , मीन आसन, भुजंगासन, पर्वतासन आदि - आदि, अब आप समझ गए होंगे। परन्तु ये चौरासी लाख आसन तो सबके लिए करने असम्भव थे, अत: साधना के लिए उनमें से चौरासी आसनों का चयन प्रमुखता के साथ किया गया। परन्तु उनमें भी अनेक आसन कठिन, कष्टप्रद और क्लिष्ट थे, जिसके कारण जन सामान्य के लिए आसनी से उनका अभ्यास कर उनसे लाभ उठाना समर्थ नहीं था, अत: उन चौरासी में से भी जो सरल साध्य और अधिक लाभप्रद, करने में आसानी से करणीय लगे ऐसे प्रमुख आसनों का चयन किया गया और उन्हें इस हठयोग साधना में अंगीकार किया गया। उन्हीं प्रमुख आसनों का वर्णन इस हठयोग प्रदीपिका में किया गया है , उन आसनों की संख्या कुल पंद्रह है।।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/22</ref> == अन्य परंपराओं में योग प्रथा == === बौद्ध-धर्म === मेडिटेशन किसे कहते हैं {{main|बौद्ध योग}} [[चित्र:Kamakura-buddha-1.jpg|thumb|right|200px|बुद्ध पद्मासन मुद्रा में योग ध्यान में.]] [[प्राचीन भारत|प्राचीन]] बौद्धिक धर्म ने ध्यानापरणीय अवशोषण अवस्था को निगमित किया।<ref name="Heisig">[68] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 22) द्वारा लिखा गया है।</ref> बुद्ध के प्रारंभिक उपदेशों में योग विचारों का सबसे प्राचीन निरंतर अभिव्यक्ति पाया जाता है।<ref>[69] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतांजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 8.</ref> बुद्ध के एक प्रमुख नवीन शिक्षण यह था की ध्यानापरणीय अवशोषण को परिपूर्ण अभ्यास से संयुक्त करे.<ref>[70] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 73.</ref> बुद्ध के उपदेश और प्राचीन ब्रह्मनिक ग्रंथों में प्रस्तुत अंतर विचित्र है। बुद्ध के अनुसार, ध्यानापरणीय अवस्था एकमात्र अंत नहीं है, उच्चतम ध्यानापरणीय स्थिती में भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। अपने विचार के पूर्ण विराम प्राप्त करने के बजाय, किसी प्रकार का मानसिक सक्रियता होना चाहिए:एक मुक्ति अनुभूति, ध्यान जागरूकता के अभ्यास पर आधारित होना चाहिए। <ref>[71] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 105.</ref> बुद्ध ने मौत से मुक्ति पाने की प्राचीन ब्रह्मनिक अभिप्राय को ठुकराया.<ref>[72] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 96.</ref> ब्रह्मिनिक योगिन को एक [[ध्यान|गैरद्विसंक्य द्रष्टृगत स्थिति]] जहाँ मृत्यु मे अनुभूति प्राप्त होता है, उस स्थिति को वे मुक्ति मानते है। बुद्ध ने योग के निपुण की मौत पर मुक्ति पाने की पुराने ब्रह्मिनिक अन्योक्त ("उत्तेजनाहीन होना, क्षणस्थायी होना") को एक नया अर्थ दिया; उन्हें, ऋषि जो जीवन में मुक्त है के नाम से उल्लेख किया गया था।<ref>[73] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 109.</ref> {{seealso|प्राणायाम}} ==== योगकारा बौद्धिक धर्म ==== योगकारा(संस्कृत:"योग का अभ्यास"<ref>[75] ^ [http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm डान लास्थौस: "वोट इस अंड इसंट योगकारा"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131216190312/http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm |date=16 दिसंबर 2013 }}</ref>, शब्द विन्यास योगाचारा, दर्शन और मनोविज्ञान का एक संप्रदाय है, जो [[भारत]] में 4 वीं से 5 वीं शताब्दी मे विकसित किया गया था। योगकारा को यह नाम प्राप्त हुआ क्योंकि उसने एक'' योग'' प्रदान किया, एक रूपरेखा जिससे [[बोधिसत्त्व]] तक पहुँचने का एक मार्ग दिखाया है।<ref>[76] ^ डान लास्थौस. बौद्ध फेनोमेनोलोगी: ए फिलोसोफिकल इन्वेस्टीगेशन ऑफ़ योगकारा बुद्धिस्म अंड दी चेंग वेई-शिह लुन. (रौटलेड्ज) 2002 प्रकाशित. ISBN 0-7007-1186-4.पग 533</ref> ज्ञान तक पहुँचने के लिए यह योगकारा संप्रदाय ''योग'' सिखाता है।<ref name="Simpkins">[77] ^ सरल तिब्बती बौद्ध धर्म: ए गाइड टू तांत्रिक लिविंग, सी अलेक्जेंडर सिम्प्किंस, अन्नेल्लें एम. सिम्प्किंस द्वारा लिखा गया है। 2001 प्रकाशित. टटल प्रकाशन. ISBN 0-8048-3199-8</ref> ==== छ'अन (सिओन/ ज़ेन) बौद्ध धर्म ==== [[ज़ेनो|ज़ेन]] (जिसका नाम संस्कृत शब्द "ध्याना से" उत्पन्न किया गया चीनी "छ'अन" के माध्यम से<ref>[78] ^ दी बुद्धिस्ट त्रडिशन इन इंडिया, भारत और जापान. विलियम थिओडोर डी बारी द्वारा संपादित किया गया है। पन्ने. 207-208. ISBN 0-394-71696-5 - "दी मेडिटेशन स्कूल ने, चीनी में ''"चान"'' नाम से कहते है जो संस्कृत शब्द ''ध्यान'' से लिया गया है, ''पश्चिम'' में जापानी उच्चारण ''ज़ेन'' " से जाना जाता है।</ref>)[[महायान बौद्ध धर्म]] का एक रूप है। बौद्ध धर्म की महायान संप्रदाय योग के साथ अपनी निकटता के कारण विख्यात किया जाता है।<ref name="Heisig"/> पश्चिम में, जेन को अक्सर योग के साथ व्यवस्थित किया जाता है;ध्यान प्रदर्शन के दो संप्रदायों स्पष्ट परिवारिक उपमान प्रदर्शन करते है।<ref>[80] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पेज xviii)</ref> यह घटना को विशेष ध्यान योग्य है क्योंकि कुछ योग प्रथाओं पर ध्यान की ज़ेन बौद्धिक स्कूल आधारित है।[81]योग की कुछ आवश्यक तत्वों सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और विशेष रूप से ज़ेन धर्म को महत्वपूर्ण हैं।<ref name="Knitter">[82] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौली|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पृष्ठ 13)</ref> ==== भारत और तिब्बत के बौद्धिक धर्म ==== योग [[तिब्बती बौद्ध धर्म]] का केंद्र है। न्यिन्गमा परंपरा में, ध्यान का अभ्यास का रास्ता नौ ''यानों'', या वाहन मे विभाजित है, कहा जाता है यह परम व्यूत्पन्न भी है।<ref>[83] ^ ''दी लैयेन्स रोर: अन इन्त्रोदुक्शन टू तंत्र '' चोग्यम त्रुन्ग्पा द्वारा. शम्भाला, 2001 ISBN 1-57062-895-5</ref> अंतिम के छह को "योग यानास" के रूप मे वर्णित किया जाता है, यह है:''क्रिया योग'', ''उप योग (''चर्या'')'', ''योगा याना'', ''[[महायोग|महा योग]]'', ''[[अनुयोग|अनु योग]]'' और अंतिम अभ्यास ''[[अतियोग|अति योग.]]''<ref>[84] ^''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट'' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया। ISBN 1-57062-917-X पन्ना 37-38</ref> सरमा परंपराओं ने''महायोग और अतियोग की अनुत्तारा वर्ग'' से स्थानापन्न करते हुए क्रिया योग, उपा (चर्या) और योग को शामिल किया हैं। अन्य तंत्र योग प्रथाओं में 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास शामिल हैं।<ref>[85] ^ ''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट '' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया।ISBN 1-57062-917-X पन्ना 57</ref> अन्य तंत्र योग प्रथाओं 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास को शामिल हैं। यह न्यिन्गमा परंपरा यंत्र योग का अभ्यास भी करते है। (तिब. ''तरुल खोर''), यह एक अनुशासन है जिसमे सांस कार्य (या प्राणायाम), ध्यानापरणीय मनन और सटीक गतिशील चाल से अनुसरण करनेवाले का ध्यान को एकाग्रित करते है।<ref>[86] ^ ''योगा:दी तिबेतन योगा ऑफ़ मूवमेंट'', चोग्याल नम्खई नोरबू द्वारा लिखा गया है। स्नो लायन, 2008. ISBN 1-55939-308-4</ref>लुखंग मे दलाई लामा के सम्मर मंदिर के दीवारों पर तिब्बती प्राचीन योगियों के शरीर मुद्राओं चित्रित किया जाता है। चांग (1993) द्वारा एक अर्द्ध तिब्बती योगा के लोकप्रिय खाते ने कन्दली (तिब.''तुम्मो'') अपने शरीर में गर्मी का उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहते है कि "यह संपूर्ण तिब्बती योगा की बुनियाद है".<ref>[87] ^ चांग, जी. सी.सी (1993).''तिबेतन योगा.'' न्यू जर्सी: कैरल प्रकाशन समूह. ISBN 0-8065-1453-1, पन्ना.7</ref> चांग यह भी दावा करते है कि तिब्बती योगा [[प्राण|प्राना]] और मन को सुलह करता है, और उसे [[तांत्रिक|तंत्रिस्म]] के सैद्धांतिक निहितार्थ से संबंधित करते है। === जैन धर्म === [[चित्र:Parsva Shatrunjay.jpg|thumb|right|100px|तीर्थंकर पार्स्व यौगिक ध्यान में कयोत्सर्गा मुद्रा में.]] [[चित्र:Kevalajnana.jpg|thumb|175px][[महावीर]] को केवल ज्ञान प्राप्ति मुलाबंधासना मुद्रा में]] दूसरी शताब्दी के जैन ग्रन्थ ''[[तत्त्वार्थसूत्र]]'', के अनुसार मन, वाणी और शरीर सभी गतिविधियों का कुल 'योग' है। <ref>[88] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.1], मनु दोषी (2007) तत्त्वार्थसूत्र के अनुवाद, अहमदाबाद : श्रुत रत्नाकर पी. 102</ref> [[उमास्वामी]] कहते है कि ''[[आस्रव]]'' या कार्मिक प्रवाह का कारण योग है<ref>[89] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> साथ ही- [[रत्नत्रय (जैन)|सम्यक चरित्र]] अर्थात योग नियंत्रण और अन्त में निरोध मुक्ति के मार्ग मे बेहद आवश्यक है। <ref>[90] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> अपनी ''नियमसार '' में, आचार्य [[कुन्दकुन्द]] ने ''योग भक्ति'' का वर्णन- भक्ति से मुक्ति का मार्ग - भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप मे किया है।<ref>[91] ^ नियमासरा [134-40]</ref> आचार्य [[हरिभद्र]] और आचार्य [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचन्द्र]] के अनुसार पाँच प्रमुख उल्लेख संन्यासियों और 12 समाजिक लघु प्रतिज्ञाओं योग के अंतर्गत शामिल है। इस विचार के वजह से कही इन्डोलोज़िस्ट्स जैसे प्रो रॉबर्ट जे ज़्यीडेन्बोस ने जैन धर्म के बारे मे यह कहा कि यह अनिवार्य रूप से योग सोच की एक योजना है जो एक पूर्ण धर्म के रूप मे बढ़ी हो गयी। <ref>[92] ^ ज्यडेन्बोस, रॉबर्ट. जैनिस्म टुडे अंड इट्स फ्यूचर. मूंछें: मन्या वेर्लग, 2006. पन्ना.66</ref> डॉ॰ हेंरीच ज़िम्मर संतुष्ट किया कि योग प्रणाली को पूर्व आर्यन का मूल था, जिसने वेदों की सत्ता को स्वीकार नहीं किया और इसलिए जैन धर्म के समान उसे एक विधर्मिक सिद्धांतों के रूप में माना गया था <ref>[93] ^ ज़िम्मर, हेंरीच (एड.) जोसेफ कैम्पबेल: फिलोसोफीस ऑफ़ इंडिया.न्यू यॉर्क: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 1969 पन्ना.60</ref> जैन शास्त्र, जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] को ध्यान मे ''[[पद्मासन|पद्मासना]]'' या ''कायोत्सर्ग '' योग मुद्रा में दर्शाया है। ऐसा कहा गया है कि महावीर को'' मुलाबंधासना'' स्थिति में बैठे ''[[केवल ज्ञान|केवला ज्ञान]]'' "आत्मज्ञान" प्राप्त हुआ जो अचरंगा सूत्र मे और बाद में [[कल्पसूत्र]] मे पहली साहित्यिक उल्लेख के रूप मे पाया गया है।<ref>[94] ^ क्रिस्टोफर चप्पल. (1993) नॉनविलँस टू अनिमल्स, अर्थ, अंड सेल्फ इन एशियन त्रदिशन्स.न्यू यॉर्क: सनी प्रेस, 1993 पन्ना. 7</ref> पतंजलि योगसूत्र के पांच यामा या बाधाओं और जैन धर्म के पाँच प्रमुख प्रतिज्ञाओं में अलौकिक सादृश्य है, जिससे जैन धर्म का एक मजबूत प्रभाव का संकेत करता है। <ref>[95] ^ ज्य्देंबोस (2006) पन्ना.66</ref><ref>[96] ^ विवियन वोर्थिन्ग्तन द्वारा ए हिस्ट्री ऑफ़ योगा (1982) रौटलेड्ज ISBN 0-7100-9258-X पन्ना. 29.</ref> लेखक विवियन वोर्थिंगटन ने यह स्वीकार किया कि योग दर्शन और जैन धर्म के बीच पारस्परिक प्रभाव है और वे लिखते है:"योग पूरी तरह से जैन धर्म को अपना ऋण मानता है और विनिमय मे जैन धर्म ने योग के साधनाओं को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लिया". <ref>[97] ^ विवियन वोर्थिंगटन (1982) पन्ना. 35</ref> सिंधु घाटी मुहरों और इकोनोग्रफी भी एक यथोचित साक्ष्य प्रदान करते है कि योग परंपरा और जैन धर्म के बीच सांप्रदायिक सदृश अस्तित्व है। <ref>[98] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, panna.6</ref> विशेष रूप से, विद्वानों और पुरातत्वविदों ने विभिन्न तिर्थन्करों की मुहरों में दर्शाई गई योग और ध्यान मुद्राओं के बीच समानताओं पर टिप्पणी की है: [[ऋषभदेव]] की "कयोत्सर्गा" मुद्रा और [[महावीर]] के ''मुलबन्धासन'' मुहरों के साथ ध्यान मुद्रा में पक्षों में सर्पों की खुदाई [[पार्श्वनाथ]] की खुदाई से मिलती जुलती है। यह सभी न केवल सिंधु घाटी सभ्यता और जैन धर्म के बीच कड़ियों का संकेत कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न योग प्रथाओं को जैन धर्म का योगदान प्रदर्शन करते है।<ref>[99] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, पप.6-9</ref> ===== जैन सिद्धांत और साहित्य के सन्दर्भ ===== {{मुख्य|जैन धर्म में योग}} प्राचीनतम के जैन धर्मवैधानिक साहित्य जैसे आचाराङ्गसूत्र और नियमसार, तत्त्वार्थसूत्र आदि जैसे ग्रंथों ने साधारण व्यक्ति और तपस्वीयों के लिए जीवन का एक मार्ग के रूप में योग पर कई सन्दर्भ दिए है। बाद के ग्रंथ, जिसमे योग की जैन अवधारणा विस्तारपूर्वक दी गयी है, वह निम्नानुसार हैं: * पूज्यपाद (5 वीं शताब्दी ई०) ** ''इष्टोपदेश '' * आचार्य हरिभद्र सूरी (8 वीं शताब्दी ई०) ** '' योगबिन्दु '' ** ''योगद्रिस्तिसमुच्काया '' ** ''योगशतक '' ** ''योगविंशिका '' * आचार्य जोंदु (८वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसार'' * आचार्य हेमचन्द्र (११वीं सदी ई०) ** ''योगशास्त्र '' * आचार्य अमितगति (११वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसारप्राभृत '' === इस्लाम === [[सूफ़ीवाद|सूफी]] संगीत के विकास में भारतीय योग अभ्यास का काफी प्रभाव है, जहाँ वे दोनों शारीरिक मुद्राओं ([[आसन]]) और श्वास नियंत्रण ([[प्राणायाम]]) को अनुकूलित किया है।<ref>[100] ^ [http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc सीटूएटिंग सुफ्फिस्म अंड योगा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090327090930/http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc |date=27 मार्च 2009 }}</ref> 11 वीं शताब्दी के प्राचीन समय में प्राचीन भारतीय योग पाठ, अमृतकुंड, ("अमृत का कुंड") का अरबी और फारसी भाषाओं में अनुवाद किया गया था।<ref>[101] ^ [http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml केरोलिना संगोष्ठी तुलनात्मक इस्लामी अध्ययन] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090825225459/http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml |date=25 अगस्त 2009 }} पर</ref> सन 2008 में मलेशिया के शीर्ष [[इस्लाम|इस्लामिक]] समिति ने कहा जो [[मुस्लिम|मुस्लमान]] योग अभ्यास करते है उनके खिलाफ एक [[फतवा]] लागू किया, जो कानूनी तौर पर गैर बाध्यकारी है, कहते है कि योग में "[[हिंदु|हिंदू]] आध्यात्मिक उपदेशों" के तत्वों है और इस से ईश-निंदा हो सकती है और इसलिए यह [[हराम]] है। मलेशिया में मुस्लिम योग शिक्षकों ने "अपमान" कहकर इस निर्णय की आलोचना कि.<ref name="cnn.com">[102] ^ [http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html श्रेय इस्लामी समुदाय: योगा मुसलमानों के लिए नहीं है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081205182658/http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html|date=5 दिसंबर 2008}} - [[सी एन एन]]</ref> मलेशिया में महिलाओं के<ref name="cnn.com"/> समूह, ने भी अपना निराशा व्यक्त की और उन्होंने कहा कि वे अपनी योग कक्षाओं को जारी रखेंगे.<ref>[103] ^ [http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110622072723/http://thestar.com.my/news/story.asp?file=%2F2008%2F11%2F23%2Fnation%2F2625368&sec=nation |date=22 जून 2011 }}</ref> इस फतवा में कहा गया है कि शारीरिक व्यायाम के रूप में योग अभ्यास अनुमेय है, पर धार्मिक मंत्र का गाने पर प्रतिबंध लगा दिया है,<ref>[104] ^ [http://www.google.com/hostednews/ap/article/ALeqM5gkepLWOtoRT7YiTChjyOPSjkVtzAD94MIV500 "मलेशिया के नेता: योगा मंत्र के बिना योग मुसलमानों के लिए ठीक है,"]{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }} एसोसिएटेड प्रेस</ref> और यह भी कहते है कि भगवान के साथ मानव का मिलाप जैसे शिक्षण इस्लामी दर्शन के अनुरूप नहीं है।<ref>[105] ^ [http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090106003351/http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 |date=6 जनवरी 2009 }}</ref> इसी तरह, उलेमस की परिषद, इंडोनेशिया में एक इस्लामी समिति ने योग पर प्रतिबंध, एक [[फतवा|फतवे]] द्वारा लागू किया क्योंकि इसमें "हिंदू तत्व" शामिल थे।<ref>[106] ^ [http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090217135238/http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm |date=17 फ़रवरी 2009 }}</ref> किन्तु इन फतवों को [[दारुल उलूम देवबन्द|दारुल उलूम देओबंद]] ने आलोचना की है, जो [[देवबन्द|देओबंदी]] इस्लाम का भारत में शिक्षालय है।<ref>{{Cite web |url=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |title=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |access-date=19 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090822195937/http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |archive-date=22 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> सन 2009 मई में, तुर्की के निदेशालय के धार्मिक मामलों के मंत्रालय के प्रधान शासक अली बर्दाकोग्लू ने योग को एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में घोषित किया- योग के संबंध में कुछ आलोचनाये जो इसलाम के तत्वों से मेल नहीं खातीं.<ref>[108] ^ http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111011035805/http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 |date=11 अक्तूबर 2011 }}</ref> === ईसाई धर्म === सन 1989 में, [[वैटिकन]] ने घोषित किया कि ज़ेन और योग जैसे पूर्वी ध्यान प्रथाओं "शरीर के एक गुट में बदज़ात" हो सकते है। वैटिकन के बयान के बावजूद, कई [[कैथोलिक धर्म|रोमन कैथोलिक]] उनके आध्यात्मिक प्रथाओं में योग , बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के तत्वों का प्रयोग किया है।<ref>{{cite news|url=http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9C0CE1D61531F934A35752C0A966958260&sec=&spon=|title=Trying to Reconcile the Ways of the Vatican and the East |last=Steinfels|first=Peter|date=1990-01-07|work=New York Times|accessdate=2008-12-05}}</ref> === तंत्र === {{Main|तंत्र}} तंत्र एक प्रथा है जिसमें उनके अनुसरण करनेवालों का संबंध साधारण, धार्मिक, सामाजिक और तार्किक वास्तविकता में परिवर्तन ले आते है। [[तांत्रिक]] अभ्यास में एक व्यक्ति वास्तविकता को [[माया (भ्रम)|माया]], भ्रम के रूप में अनुभव करता है और यह व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होता है।<ref name="UCP">[112] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म: हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट अई लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 313</ref>[[हिंदुत्व|हिन्दू धर्म]] द्वारा प्रस्तुत किया गया निर्वाण के कई मार्गों में से यह विशेष मार्ग तंत्र को [[भारत में धर्म|भारतीय धर्मों]] के प्रथाओं जैसे योग, ध्यान, और सामाजिक [[संन्यास]] से जोड़ता है, जो सामाजिक संबंधों और विधियों से अस्थायी या स्थायी वापसी पर आधारित हैं।<ref name="UCP"/> तांत्रिक प्रथाओं और अध्ययन के दौरान, छात्र को ध्यान तकनीक में, विशेष रूप से [[चक्र|चक्र ध्यान]], का निर्देश दिया जाता है। जिस तरह यह ध्यान जाना जाता है और तांत्रिक अनुयायियों एवं योगियों के तरीको के साथ तुलना में यह तांत्रिक प्रथाओं एक सीमित रूप में है, लेकिन सूत्रपात के पिछले ध्यान से ज्यादा विस्तृत है। इसे एक प्रकार का [[कुंडलिनी योग]] माना जाता है जिसके माध्यम से ध्यान और पूजा के लिए "हृदय" में स्थित चक्र में देवी को स्थापित करते है।<ref>[114] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म:हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट मैं लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 317</ref> ==भारत के प्रसिद्ध योगगुरु== वैसे तो योग हमेशा से हमारी प्राचीन धरोहर रही है। समय के साथ-साथ योग विश्व प्रख्यात तो हुआ ही है साथ ही इसके महत्व को जानने के बाद आज योग लोगों की दिनचर्या का अभिन्न अंग भी बन गया है। लेकिन योग के प्रचार-प्रसार में विश्व प्रसिद्ध योगगुरुओं का भी योगदान रहा है, जिनमें से '''अयंगार योग''' के संस्थापक [[बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार|बी के एस अयंगर]], [[स्वामी शिवानंद]] और योगगुरु [[बाबा रामदेव|रामदेव]] का नाम अधिक प्रसिद्ध है।<ref>{{Cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402115555/http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बीकेएस अंयगर=== {{मुख्य|बी के एस अयंगार}} अयंगर को विश्व के अग्रणी योग गुरुओं में से एक माना जाता है और उन्होंने योग के दर्शन पर कई किताबें भी लिखी थीं, जिनमें 'लाइट ऑन योगा', 'लाइट ऑन प्राणायाम' और 'लाइट ऑन द योग सूत्राज ऑफ पतंजलि' शामिल हैं। <ref>{{Cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402155843/http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> अयंगर का जन्‍म 14 दिसम्‍बर 1918 को बेल्‍लूर के एक गरीब परिवार में हुआ था। बताया जाता है कि अयंगर बचपन में काफी बीमार रहा करते थे। ठीक नहीं होने पर उन्‍हें योग करने की सलाह दी गयी और तभी से वह योग करने लगे। अयंगर को 'अयंगर योग' का जन्‍मदाता कहा जाता है। उन्होंने इस योग को देश-दुनिया में फैलाया। सांस की तकलीफ के चलते 20 अगस्त 2014 को उनका निधन हो गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402091707/http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बाबा रामदेव=== {{मुख्य|बाबा रामदेव}} बाबा रामदेव भारतीय योग-गुरु हैं, उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया है। [[रामदेव]] स्वयं जगह-जगह जाकर योग शिविरों का आयोजन करते हैं। ==योग दिवस== {{main|अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस}} 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया। दिल्ली में एक साथ ३५९८५ लोगों ने योगाभ्यास किया।इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के एक साथ योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 जून 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150625055155/http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |archive-date=25 जून 2015 |url-status=live }}</ref> योग का उद्देश्य योग के अभ्यास के कई लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है।लोगों के स्वास्थ्य पर योग के महत्व और प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 जून को योग का अभ्यास किया जाता है। शब्द ‘योग‘ संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जुड़ना या एकजुट होना। ==योग का महत्व== वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग संतोष पाने के लिए योग करते हैं। योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्‍तिष्‍क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्‍मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है। अगर आप इसका नियमित अभ्यास करते हैं, तो इससे धीरे-धीरे आपका तनाव भी दूर हो सकता है। == योग का लक्ष्य == योग का लक्ष्य स्वास्थ्य में सुधार से लेकर ''[[मोक्ष]] (आत्मा को [[परमेश्वर]] का अनुभव)'' प्राप्त करने तक है।<ref>[115] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> जैन धर्म, [[अद्वैत वेदांत]] के [[वेदांत|मोनिस्ट]] संप्रदाय और [[शैव सम्प्रदाय|शैव संप्रदाय]] के अन्तर में योग का लक्ष्य मोक्ष का रूप लेता है, जो सभी सांसारिक कष्ट एवं जन्म और मृत्यु के चक्र [[संसार|(संसार)]] से मुक्ति प्राप्त करना है, उस क्षण में परम [[ब्राह्मण|ब्रह्मण]] के साथ समरूपता का एक एहसास है। महाभारत में, योग का लक्ष्य [[ब्रह्मा]] के दुनिया में प्रवेश के रूप में वर्णित किया गया है, ब्रह्म के रूप में, अथवा [[आत्मा|आत्मन]] को अनुभव करते हुए जो सभी वस्तुओं मे व्याप्त है।<ref>जकोब्सन, पी. 9</ref> मीर्चा एलीयाडे योग के बारे में कहते हैं कि यह सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है, एक आध्यात्मिक तकनीक भी है। <ref>मीर्चा ईटु, मीर्चा एलीयाडे, बुखारेस्ट, कल की रोमानिया का प्रकाशन संस्था, दो हज़ार छह, नब्बे का पृष्ठ। (ISBN 973-725-715-4)</ref> [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] लिखते हैं कि समाधि में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं: वितर्क, विचार, आनंद और अस्मिता।<ref>सर्पवल्ली राधाकृष्णन, भारतीय दर्शन, दूसरा खंड, लंडन, जॉर्ज एलन और उइंन का प्रकाशन संस्था, एक हजार नौ सौ छियासठ, तीन सौ अस्सी का पृष्ठ। (ISBN 978-019-569-841-1)</ref> ==योग के प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतंजलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतंजलि]] || ४०० ई. पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरानी संस्कृत पाण्डुलिपि ९वीं-१०वीं शताब्दी की है। |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११वीं शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११वीं-१२वीं शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४वीं-१५वीं शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६वीं शताब्दी |- | '''[[योगसारसंग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६वीं शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५वीं-१६वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७वीं शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७वीं शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० इ. पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० इ.पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७वीं शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८वीं शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई. / यह हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ी बोली की मिलीजुली भाषा में रचित है<br> और शब्दावली संस्कृत के अत्यन्त निकट है। |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०वीं शताब्दी ; हिन्दी में लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसंबर 2022 |archive-date=31 दिसंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१वीं शताब्दी |} ==इन्हें भी देखें== *[[योग का इतिहास]] *[[योग दर्शन]] *[[अष्टांग योग]] *[[योगसूत्र]] *[[हठयोग]] *[[जैन धर्म में योग]] *[[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]] *[[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मानते हैं कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञान का दूसरा नाम है। == बाहरी कड़ियाँ == * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् की इस साइट पर योग के अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध के लिये) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == आगे पढ़ें == {{wiktionary}} * {{cite book |last=Apte |first=Vaman Shivram |authorlink= |author2= |title=The Practical Sanskrit Dictionary |year=1965 |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |location=Delhi |isbn=81-208-0567-4 }}(चौथा संशोधित और विस्तृत संस्करण)। * {{cite book | last = Patañjali | first = | authorlink = Patañjali | author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts | year = 2001 | location = | pages = | url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading | doi = | id = | isbn = | access-date = 19 अगस्त 2009 | archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading | archive-date = 25 अगस्त 2011 | url-status = dead }} * चांग, जी सी सी (1993)। तिब्बती योग. न्यू जर्सी: कैरल पब्लिशिंग ग्रुप . ISBN 0-8065-1453-1 * {{cite book |series= |last=Chatterjee |first=Satischandra |authorlink= |author2=Datta, Dhirendramohan |title=An Introduction to Indian Philosophy |year=1984 |publisher=University of Calcutta |location=Calcutta |edition=Eighth Reprint Edition }} * Donatelle, रेबेका जे हैल्थ: दी बेसिक्स. 6. एड. सैन फ्रांसिस्को: पियर्सन एडूकेशन, इंक 2005. * फयूएर्स्तें, जोर्ज . दी शम्भाला गाइड टु योग. 1. एड. बोस्टन एंड लन्डन: शम्भाला पुब्लिकेशन्स 1996. * {{cite book | last = Flood | first = Gavin | year = 1996 | title = An Introduction to Hinduism | publisher = Cambridge University Press | location = Cambridge | isbn = 0-521-43878-0 | url-access = registration | url = https://archive.org/details/introductiontohi0000floo }} * {{cite book | last = Gambhirananda | first = Swami | year = 1998 | title = Madhusudana Sarasvati Bhagavad_Gita: With the annotation Gūḍhārtha Dīpikā| publisher = [[Advaita Ashrama]] Publication Department| location = Calcutta | isbn=81-7505-194-9}} * {{cite book | last = Harinanda | first = Swami |author2= | year = | title = Yoga and The Portal | publisher = Jai Dee Marketing| location = | isbn=0978142950}} * {{cite book | last = Jacobsen | first = Knut A. (Editor) |author2= Larson, Gerald James (Editor)| year = 2005 | title = Theory And Practice of Yoga: Essays in Honour of Gerald James Larson | publisher = Brill Academic Publishers| location = | isbn=9004147578}} (स्टडीज इन दी हिस्ट्री ऑफ़ रिलिजनस, 110) * {{cite book |last=Keay |first=John|authorlink= |author2= |title=India: A History |year=2000 |publisher=Grove Press |location=New York |isbn=0-8021-3797-0 }} * मार्शल, जॉन (1931)। ''मोहेंजोदारो एंड दी इन्दुस सिविलैज़ेशन:वर्ष 1922-27 के बीच मोहेंजोदारो में भारत सरकार द्वारा किए एक सरकारी खाता पुरातत्व खुदाई के होने के नाते.'' दिल्ली:इन्दोलोगिकल बुक हाउस. * {{cite book |last=Michaels |first=Axel|authorlink= |author2= |title=Hinduism: Past and Present |url=https://archive.org/details/hinduismpastpres0000mich |year=2004 |publisher=Princeton University Press |location=Princeton, New Jersey|isbn=0-691-08953-1 }} * [[धर्म मित्रा|मित्रा, धर्म श्री]]. आसन: 608 योगा मुद्रा. 1. एड. कैलिफोर्निया: नई वर्ल्ड लाइब्रेरी 2003. * {{cite book | last = Müller | first = Max | authorlink= Max Müller |year = 1899 | title = Six Systems of Indian Philosophy; Samkhya and Yoga, Naya and Vaiseshika| publisher = Susil Gupta (India) Ltd.| location = Calcutta | isbn=0-7661-4296-5}}[129] ''पुस्तक का नया संस्करण; मूलतः यह दी सिक्स सिस्टम्स ऑफ़ इंडियन फिलोसोफी के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।'' * {{cite book |last=Possehl |first=Gregory|authorlink=Gregory Possehl |author2= |title=The Indus Civilization: A Contemporary Perspective |url=https://archive.org/details/induscivilizatio0000poss |year=2003 |publisher=AltaMira Press |location= |isbn=978-0759101722 }} * {{cite book |series= |last=Radhakrishnan |first=S. |authorlink=Sarvepalli Radhakrishnan |author2=Moore, CA |title=A Sourcebook in Indian Philosophy |year=1967 |publisher=Princeton |location= |isbn=0-691-01958-4 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/sourcebookinindi00radh }} * सरस्वती, स्वामी सत्यानन्दा. नवंबर 2002 (12 वें संस्करण)। "आसन प्राणायाम मुद्रा बंधा" ISBN 81-86336-14-1 * {{cite book |series= |last=Taimni |first=I. K. |authorlink= |author2=|title=The Science of Yoga |url=https://archive.org/details/scienceofyogayog00unse|year=1961 |publisher=The Theosophical Publishing House |location=Adyar, भारत |isbn=81-7059-212-7 }} * उशाराबुध, आर्य पंडित. फिलोसोफी ऑफ़ हठ योगा. 2. एड. पेन्नीसिलवेनिया : हिमालयन इंस्टीट्युत प्रेस 1977, 1985. * {{cite book |series= |last=Yogshala |first=Ekam Drishti |authorlink=Ekam Drishti Yogshala |author2=|title=Yoga And Its Role In Stress Management: How To Become Calmer And Focused |year=2021 |location=Rishikesh, India }} * {{cite book |series= |last=Vivekananda |first=Swami |authorlink=Swami Vivekananda |author2=|title=Raja Yoga |year=1994 |publisher=[[Advaita Ashrama]] Publication Department |location=Calcutta |isbn=81-85301-16-6 }} 21 रिप्रिंट एडिशन * {{cite book |series= |last=Zimmer |first=Heinrich |authorlink=Heinrich Zimmer |author2=|title=Philosophies of India |year=1951 |publisher=Princeton University Press |location=New York, New York |isbn=0-691-01758-1 }} बोल्लिंगें सीरीज XXVI; जोसेफ कैम्बेल द्वारा संपादित. * {{cite book |series= |last=Weber|first=Hans-Jörg L. |authorlink=Hans-Jörg L. Weber |author2=|title=Yogalehrende in Deutschland: eine humangeographische Studie unter besonderer Berücksichtigung von netzwerktheoretischen, bildungs- und religionsgeographischen Aspekten |year=2007 |publisher=University of Heidelberg |location=Heidelberg |}} https://web.archive.org/web/20090826191058/http://archiv.ub.uni-heidelberg.de/savifadok/volltexte/2008/121/ {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिंदू दार्शनिक अवधारणाएँ]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] bhd6ckbyztdxmyezgrefytat7xg6ho4 6536747 6536745 2026-04-06T04:56:39Z Ravinder Jugran 849799 /* व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार */ कड़ियाँ लगाई , नई जानकारी और संदर्भ जोड़ा 6536747 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२वीं-१३वीं शताब्दी के एक भारतीय चित्र में [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = A male yogi | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = Two female yoginis }} [[चित्र:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रा में यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' ({{langx|sa|योगः}}) प्राचीन भारतीय ऋषिमुनियों और तत्त्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। [[पतंजलि]] ने 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' को योग कहा है। [[वेद व्यास|व्यास]] ने [[समाधि]] को ही योग माना है। [[योगवासिष्ठ]] के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। 'योग' शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा [[हिन्दू धर्म]], [[जैन धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]] में [[ध्यान]] प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], दक्षिण पूर्व एशिया और [[श्री लंका|श्रीलंका]] में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं। सिद्धि के बाद पहली बार [[११]] दिसम्बर [[२०१४]] को [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा ]] ने प्रत्येक वर्ष [[२१]] जून को [[विश्व योग दिवस]] के रूप में मान्यता दी है। हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में योग के अनेक सम्प्रदाय हैं, योग के विभिन्न लक्ष्य हैं तथा योग के अलग-अलग व्यवहार हैं।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [6.1], देखें मनु दोषी (2007) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग तथा इसका आधुनिक रूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। सबसे पहले 'योग' शब्द का उल्लेख [[ऋग्वेद]] में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है। [[कठोपनिषद]] में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना ईसापूर्व पच्चीसवी और तीसवी शताब्दी ईसापूर्व के बीच के कालखण्ड में हुई थी। [[पतञ्जलि]] का [[योगसूत्र]] योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल ईसा की प्रथम शताब्दी या उसके आसपास माना जाता है। [[हठ योग]] के ग्रन्थ ९वीं से लेकर ११वीं शताब्दी में रचे जाने लगे थे। इनका विकास [[तन्त्र]] से हुआ। पश्चिमी जगत में "योग" को हठयोग के आधुनिक रूप में लिया जाता है जिसमें शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य तथा विश्रान्ति (relaxation) की तकनीकों की प्रधानता है। ये तकनीकें मुख्यतः [[आसन|आसनों]] पर आधारित हैं जबकि परम्परागत योग का केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है और वह सांसारिक लगावों से छुटकारा दिलाने का प्रयास करता है। पश्चिमी जगत में आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार भारत से उन देशों में गये गुरुओं ने किया जो प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]] की पश्चिमी जगत में प्रसिद्धि के बाद वहाँ गये थे। == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|धातु]] में ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगाने से निष्पन्न होता है। [[धातुपाठ]] में युज्‌ शब्द के तीन अर्थ उपलब्ध होते हैं - समाधि, संयोग, संयमन । लेकिन योगशात्र का प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातु से बना है जिसका व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । व्यास जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है - "योगः समाधिः"। वैसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ तथा ‘युज संयमने’ धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। पाणिनीय [[गणपाठ]] में तीन 'युज्' धातुओं का पाठ मिलता हैं - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । समाधि का प्रकृति प्रत्यय अर्थ है, सम्यक् स्थापन। दूसरे अर्थ मे समाधि की सिद्धि के लिए जुड़ना । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, जुड़ना, जोड़ना, मेल करना, संयोग करना अर्थात् इस दु:ख रूप संसार से वियोग तथा ईश्वर से संयोग का नाम योग है । भगवद्गीता में भी वर्णन मिलता है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (6/23) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, संयमन अर्थात् मन का संयम अथवा मन का नियमन । मन को संयमित करना ही योग है। इस प्रकार योग का अर्थ हुआ - "योग साधनाओं को अपनाते हुए मन को नियन्त्रित कर, संयमित कर, आत्मा का परमात्मा से मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसी होनी चाहिए जो अव्याप्ति और अतिव्याप्ति दोषों से मुक्त हो, योग शब्द के वाच्यार्थ का ऐसा लक्षण बतला सके जो प्रत्येक प्रसंग के लिये उपयुक्त हो और योग के सिवाय किसी अन्य वस्तु के लिये उपयुक्त न हो। [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ माना जाता है। उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग, भक्तियोग। वास्तव में देखा जाए तो भगवद्गीता सम्पूर्ण योगशात्र है, क्योंकि उसके अन्तर्गत संसार, मन, बुद्धि, इन्द्रिय , आत्मा और परमात्मा का क्रम से वर्णन करते हुए अन्तिम सत्य को विभिन्न मार्गों और साधन पद्धति से बताने का उपक्रम किया गया है, इसी लिए गीता के समस्त अट्ठारह अध्यायों के नाम योग शब्द पर ही पूर्ण होते हैं, जैसे- प्रथम विवाद योग, द्वितीय सांख्ययोग , तृतीय कर्मयोग, इसी प्रकार अन्य भी विभूतियोग, भक्तियोग, पुरुषोत्तमयोग, मोक्षसंन्यासयोग आदि सभी अध्याय, दुसरी बात यह भी कि गीता के रचनाकार महर्षि वेदव्यास जी ने स्वयं इस बात को इसी ग्रन्थ के प्रत्येक अभ्यास की समाप्ति पर - ' योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुसंवादे......' कहकर इसे योगशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना है।<ref>श्रीमद्भगवद्गीता</ref> वेदोत्तर काल में [[भक्तियोग]] और [[हठयोग]] नाम भी प्रचलित हो गए हैं। पतंजलि योगदर्शन में 'क्रियायोग' शब्द देखने में आता है। [[पाशुपत योग]] और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है। इन सब स्थलों में योग शब्द के जो अर्थ हैं वह एक दूसरे से भिन्न हैं । [[गीता]] में [[श्रीकृष्ण]] ने एक स्थल पर कहा है ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' ( कर्मों में कुशलता ही योग है।) यह वाक्य योग की परिभाषा नहीं है। यदि हम गीता के दुसरे अध्याय के पचासवें उपर्युक्त श्लोक को इस अर्थ में लेंगें कि - " कर्मों में कुशलता ही योग है " - तो हम ऐसा करके अर्थ का अनर्थ कर देंगे, क्योंकि - जैसे चोर भी चोरी करने में कुशल होता है- पर हम उसे योग या योगी नहीं कह सकते है, हत्या, लूट , धोखा , भष्टाचार आदि निन्दनीय कर्म करने में भी अनेक मनुष्य बड़े कुशल होते है और तो और अनेक पकड़े भी नहीं जाते है और न्यायालय की सजा से भी बच निकलते है-- अपने कार्य में इतने निपुण होने के बाद भी , हम उन्हें योग या योगी नहीं कह सकते हैं, अत: यहाँ इस श्लोक का अर्थ यह है कि - ' कर्म में योग ही कुशलता है यानि योग्य कर्म करना ही कर्म की कुशलता है अर्थात- मनुष्य के कल्याण करने की शक्ति योग यानि समत्व- समता भाव में है, मात्र कर्म करने में नहीं, समता के भाव में स्थित होकर कुशल कर्म करने में हैं।<ref>साधक संजीवनी</ref> कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते हैं। इस बात को स्वीकार करने में यह बड़ी आपत्ति खड़ी होती है कि [[बौद्ध धर्म|बौद्धमतावलम्बी]] भी, जो परमात्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं करते, योग शब्द का व्यवहार करते और योग का समर्थन करते हैं। यही बात [[सांख्य|सांख्यवादियों]] के लिए भी कही जा सकती है जो ईश्वर की सत्ता को असिद्ध मानते हैं। [[पतञ्जलि]] ने [[योगसूत्र]] में, जो परिभाषा दी है 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं: चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं। योग दर्शन के विद्वानों और टीकाकारों के अनुसार महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन के प्रथम तीन सूत्र - " अथ योगानुशासनम् ।। 1।।, योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: ।।2।।, तदा द्रष्टु: स्वरूपेऽवस्थानम् ।।3।। - में ही योग के सम्पूर्ण स्वरूप और लक्ष्य को परिभाषित कर दिया है, अर्थात- योग विषय की शिक्षा देने वाले ग्रंथ का आरम्भ ; योग का स्वरूप, चित्त में उत्पन्न होने वाली वृत्तियों को रुक जाना यानि शमन हो जाना ; ऐसा होने से दृष्टा यानि साधक अपने स्वरूप में यानि पुरुष शुद्धचेतन रूप में स्थित हो जाता है, जो कि योग का फल है।<ref>पातञ्जलयोगप्रदीप, समाधिपाद, सूत्र- 1,2,3, पृष्ठ- 139,146,153</ref> परन्तु इस परिभाषा पर कई विद्वानों को आपत्ति है। उनका कहना है कि चित्तवृत्तियों के प्रवाह का ही नाम चित्त है। पूर्ण निरोध का अर्थ होगा चित्त के अस्तित्व का पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृतियों और संस्कारों का निःशेष हो जाना। यदि ऐसा हो जाए तो फिर समाधि से उठना संभव नहीं होगा। क्योंकि उस अवस्था के सहारे के लिये कोई भी संस्कार बचा नहीं होगा, प्रारब्ध दग्ध हो गया होगा। निरोध यदि संभव हो तो [[श्रीकृष्ण]] के इस वाक्य का क्या अर्थ होगा? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योग में स्थित होकर कर्म करो। विरुद्धावस्था में कर्म हो नहीं सकता और उस अवस्था में कोई संस्कार नहीं पड़ सकते, स्मृतियाँ नहीं बन सकतीं, जो समाधि से उठने के बाद कर्म करने में सहायक हों। संक्षेप में आशय यह है कि योग के शास्त्रीय स्वरूप, उसके दार्शनिक आधार को सम्यक्‌ रूप से समझना बहुत सरल नहीं है। संसार को मिथ्या माननेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादी]] भी निदिध्याह्न के नाम से उसका समर्थन करता है। अनीश्वरवादी सांख्य विद्वान भी उसका अनुमोदन करता है। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] ही नहीं, [[इस्लाम|मुस्लिम]] [[सूफ़ी]] और [[ईसाई]] मिस्टिक भी किसी न किसी प्रकार अपने संप्रदाय की मान्यताओं और दार्शनिक सिद्धांतों के साथ उसका सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं। इन विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं में किस प्रकार ऐसा समन्वय हो सकता है कि ऐसा धरातल मिल सके जिस पर योग की भित्ति खड़ी की जा सके, यह बड़ा रोचक प्रश्न है परंतु इसके विवेचन के लिये बहुत समय चाहिए। यहाँ उस प्रक्रिया पर थोड़ा सा विचार कर लेना आवश्यक है जिसकी रूपरेखा हमको पतंजलि के सूत्रों में मिलती है। थोड़े बहुत शब्दभेद से यह प्रक्रिया उन सभी समुदायों को मान्य है जो योग के अभ्यास का समर्थन करते हैं। ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]] के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (1/2) अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। *(२) [[सांख्य दर्शन]] के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है। *(३) [[विष्णुपुराण]] के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है। *(४) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (2/48) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। *(५) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। *(६) [[आचार्य हरिभद्र]] के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]] से जोड़ने वाले सभी व्यवहार योग हैं। *(७) [[बौद्ध धर्म]] के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है, -- इसमें कुशल चित्तका भाव यह है कि-- शुभ कर्म, अच्छे कर्म, पूण्य कर्म- पाप ,लोभ ,घृणा, द्वेष, क्रोध, काम ( कामना), मार ( प्रलोभन) आदि राग - द्वेष से रहित कर्म करना अर्थात कुशल कर्म करने से - चित्तकी स्फटिकमणी की भाँति शुद्ध, शान्त, निर्मल अवस्था का हो जाना ही कुशल चित्त है। ===योग के प्रकार=== योग की उच्चावस्था [[समाधि]], [[मोक्ष]], [[कैवल्य]] आदि तक पहुँचने के लिए अनेकों साधकों ने जो साधन अपनाये उन्हीं साधनों का वर्णन योग ग्रन्थों में समय समय पर मिलता रहा। उसी को 'योग के प्रकार' से जाना जाने लगा। योग की प्रामाणिक पुस्तकों में [[शिवसंहिता]] तथा [[गोरक्षशतक]] में योग के चार प्रकारों का वर्णन मिलता है - : ''मंत्रयोगों हष्ष्चैव लययोगस्तृतीयकः। '' : ''चतुर्थो राजयोगः'' (शिवसंहिता , 5/11) : ''मंत्रो लयो हठो राजयोगन्तर्भूमिका क्रमात् '' : ''एक एव चतुर्धाऽयं महायोगोभियते॥'' (गोरक्षशतकम् ) उपर्युक्त दोनों श्लोकों से योग के प्रकार हुए : मंत्रयोग, हठयोग लययोग व राजयोग। ====मंत्रयोग==== '''{{मुख्य|मन्त्र योग}}''' '[[मंत्र]]' का समान्य अर्थ है- 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः'। मन को त्राय (पार कराने वाला) मंत्र ही है। मन्त्र योग का सम्बन्ध मन से है, मन को इस प्रकार परिभाषित किया है- मनन इति मनः। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है। मंत्र योग के बारे में योगतत्वोपनिषद में वर्णन इस प्रकार है- : ''योग सेवन्ते साधकाधमाः।'' ( अल्पबुद्धि साधक मंत्रयोग से सेवा करता है अर्थात मंत्रयोग उन साधकों के लिए है जो अल्पबुद्धि है।) मंत्र के जप उच्चारण से एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें पैदा होती है जो कि जप करते समय शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालता है। मंत्र में साधक जप का प्रयोग करता है, मंत्र जप में तीन घटकों का काफी महत्व है, वें तीन घटक हैं- उच्चारण, लय व ताल। तीनों का सही अनुपात मंत्र शक्ति को बढ़ा देता है। मंत्रजप मुख्यरूप से चार प्रकार से किया जाता है। : (1) वाचिक (2) मानसिक (3) उपांशु (4) अजप्पा । * [[वाचिक जप]] - जिसे [[वैखरी]] जप भी कहते है, यह जप [[साधना]] की प्रारंभिक अवस्था है, जिसमें साधक अपने मुँख से उच्च स्वर से उच्चारण करता हुआ- मन्त्र का जप करता है, ऐसा करने से साधक बाहरी विक्षेपण , ध्वनियों से विचलित नहीं होता है। * [[उपांशु जप]] - यह जप की वैखरी जप से श्रेष्ठ अवस्था है । इसमे साधक बिना उच्चारण किए हुए मंत्र का जप - केवल फुसफुसाहट यानि केवल होठों को हिलाते हुए जप करता है ,जिससे कोई ध्वनी नहीं निकलती है परन्तु साधक को ही जप ध्वनी अनुभव होती है। * [[मानसिक जप]] - यह जप की और अधिक श्रेष्ठ अवस्था है। इसमें साधक बिना ध्वनी किए ,बिना होठ हिलाए , केवल मन ही मन से मन्त्र जपता रहता है, यह जप की शक्तिशाली विधि है। * [[अजप्पा जप]] - यह जप की सबसे श्रेष्ठ अवस्था है, इसमें साधक अपने आते - जाते श्वास को मंत्र के साथ संयुक्त कर लेता है और यह जप 24 घण्टे निरन्तर चलता रहता है, जो कि जप योग साधना को सफल करता है।<ref>जपयोग, दिव्य जीवन संघ</ref> ====हठयोग==== '''{{मुख्य|हठयोग}}''' हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्वक किसी कार्य को करने से लिया जाता है। किसी भी कार्य के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हठी हो जाना ,उसे पूरा करने की ठान लेना, चाहे जैसी भी अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियाँ आएँ। परन्तु योग के सम्बंध में इसका स्वरूप विस्तार व गहराई को धारण किए हुए है। यह योग विद्या की वह पद्धति जिसमें - योगी साधना का अभ्यास करता हुआ, आनन्द के अथाह सागर में डुबकी लगाकर आध्यात्म की अमूल्य निधि को निकाल लाने में सफल होता है - अर्थात योग सिद्धि प्राप्त करने के समान है।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> इस योग धारा का प्रथम प्रवाह आदिनाथ के मुखारबिन्द से माना जाता है, यहाँ आदिनाथ भगवान शिव का ही एक नाम है, जिन्हें आदियोगी भी कहा जाता है। योगी समाज में यह सर्वविदित और सर्वमान्य है और उन्हीं आदियोगी आदिनाथ भगवान शिव ने सांसारिक जीवों के कल्याण करने के उद्देश्य से तप के इस यौगिक मार्ग का प्रतिपादन सर्वप्रथम अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती के सम्मुख इसका उपदेश किया था। इसके साथ- साथ यह भी सर्वविदित मान्यता है कि जगत् में इस योग के प्रचार- प्रसार के लिए गुरू मत्स्येन्द्रनाथ और गुरू गोरखनाथ ने सर्वप्रथम आदिनाथ के ही श्रीमुख से इसका श्रवण कर इस योग पद्धति को ग्रहण किया था। जो कि नाथ सम्प्रदाय के तपस्वी साधक, योगी सन्यासियों की साधना सिद्धि का प्रमुख साधन है। जो कि योग साधना की परम्परा का पालन करता हुआ जिज्ञासुओं के सम्मुख आता रहा और अपने आप को परिमाजित करता हुआ , अधिक कठिन अंशों का त्याग कर और जन - जन उपयोगी बनता हुआ , गुरू गोरखनाथ जी की कृपा से उन्हीं के द्वारा सम्पादित सूत्र में सारभूत और उत्कृष्ट लिपि बद्ध होकर हठयोग प्रदीपिका का स्वरूप ग्रहण करके जगत् के हितार्थ प्रकट हो सम्मुख हुआ।।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> हठ प्रदीपिका पुस्तक में नहीं बल्कि श्री गोरखनाथ रचित पुस्तक "सिद्ध सिद्धांत पद्धति " में वर्णित- हठ का अर्थ इस प्रकार दिया है-<ref> सिद्ध सिद्धांत पद्धति </ ref> यह श्लोक श्री गोरखनाथ विरचित " सिद्ध सिद्धांत पद्धति " के प्रथम उपदेश में वर्णित है, जिसमें हठ शब्द को योग की दृष्टि से परिभाषित किया गया है।< ref>सिद्ध सिद्धांत पद्धति, प्रथम उपदेश के अ न्तर्गत</ ref> लेकिन भ्रमवश इसे हठयोग प्रदीपिका में लिखित बताया जाता है ,जो कि निराधार है। यह हठ योग की परिभाषा है परन्तु हठयोग प्रदीपिका पुस्तक में इस श्लोक का वर्णन कहीं नहीं आता है, हाँ ! परिभाषित करने के लिए विद्वान ऐसा कह देते हैं। <ref>हठयोग प्रदीपिका </ref> : ''हकारेणोच्यते सूर्यष्ठकार चन्द्र उच्यते। '' : ''सूर्या चन्द्रमसो र्योगाद्धठयोगोऽभिधीयते॥'' <ref>प्रथम उपदेश,सिद्ध सिद्धांत पद्धति</ref> '''ह''' का अर्थ [[सूर्य]] तथा '''ठ''' का अर्थ [[चन्द्रमा|चन्द्र]] बताया गया है। सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है। शरीर में बहत्तर हजार नाड़ियाँ है, जोकि मानव शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य का संचालन करती है। ये नाड़ियाँ ऊर्जा के मार्ग है, जो कि शरीर के भिन्न- भिन्न अंगों में ऊर्जाशक्ति का प्रवाह प्रवाहित करके उसे क्रियाशील और प्राणमय बनाए रखती हैं, इनके स्वस्थ रहने से हठयोगी प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करता हुआ,अपनी प्राण शक्ति का ऊर्ध्व गमन करते हुए, योग के लक्ष्य आनन्द की प्राप्ति करता है। उनमें तीन प्रमुख नाड़ियों का वर्णन है, वे इस प्रकार हैं। सूर्यनाड़ी अर्थात पिंगला जो दाहिने स्वर का प्रतीक है। चन्द्रनाड़ी अर्थात इड़ा जो बायें स्वर का प्रतीक है। इन दोनों के बीच तीसरी नाड़ी सुषुम्ना है। इस प्रकार हठयोग वह क्रिया है जिसमें पिंगला और इड़ा नाड़ी के सहारे प्राण को सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कराकर ब्रह्मरन्ध्र में समाधिस्थ किया जाता है। [[हठयोग प्रदीपिका|हठ प्रदीपिका]] में चार अध्याय हैं, जिन्हें उपदेश कहा गया है, जिसमें हठयोग के चार अंगों का वर्णन है- * प्रथम उपदेश - आसन, * द्वितीय उपदेश - प्राणायाम, * तृतीय उपदेश- कुण्डली बोध, मुद्रा और बन्ध तथा * चतुर्थ उपदेश में - नादानुसंधान।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> [[घेरण्डसंहिता]] में सात अंग- ''षटकर्म, आसन, मुद्राबन्ध, प्राणायाम, ध्यान, समाधि'' जबकि योगतत्वोपनिषद और पतंजलि कृत योग दर्शन में भी आठ अंगों का वर्णन है- ''यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि''< ref> पातञ्जलयोगप्रदीप, दुसरा पाद</ref> ====लययोग==== '''{{मुख्य|कुंडलिनी योग}}''' चित्त का अपने स्वरूप विलीन होना या चित्त की निरूद्ध अवस्था लययोग के अन्तर्गत आता है। साधक के चित्त् में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय [[ब्रह्म]] का [[ध्यान]] रहे इसी को लययोग कहते हैं। योगत्वोपनिषद में इस प्रकार वर्णन है- : ''गच्छस्तिष्ठन स्वपन भुंजन् ध्यायेन्त्रिष्कलमीश्वरम् स एव लययोगः स्यात'' (22-23) ==== राजयोग==== '''{{मुख्य|राजयोग}}''' राजयोग सभी योगों का राजा कहलाया जाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ सामग्री अवश्य मिल जाती है। राजयोग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग का वर्णन आता है। राजयोग का विषय चित्तवृत्तियों का निरोध करना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य तथा विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा लेकर आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया है। इन साधनों का उपयोग करके साधक के क्लेशों का नाश होता है, चित्त प्रसन्न होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है और विवेक ख्याति प्राप्त होती है। : ''योगाडांनुष्ठानाद शुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिरा विवेक ख्यातेः'' (2/28) राजयोग के अन्तर्गत महर्षि पतंजलि ने अष्टांग को इस प्रकार बताया है- : ''यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टांगानि।'' <ref>योग दर्शन, साधनपाद ( 2/29 )</ ref> योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं। उपर्युक्त चार प्रकार के अतिरिक्त [[गीता]] में प्रमुखत: तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है- *(१) [[ज्ञानयोग]] *(२) [[भक्तियोग]] *(३) [[कर्म योग]] ज्ञानयोग, सांख्ययोग से सम्बन्ध रखता है। पुरुष प्रकृति के बन्धनों से मुक्त होना ही ज्ञान योग है। सांख्य दर्शन में 25 तत्वों का वर्णन मिलता है। == योग का इतिहास == [[Image:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पा से प्राप्त मुहर में योगमुद्रा]] {{Main|योग का इतिहास}} वैदिक [[संहिता|संहिताओं]] के अंतर्गत तपस्वियों ''तपस (संस्कृत)'' के बारे में ([[ब्राह्मण|(कल | ब्राह्मण)]]) प्राचीन काल से [[वेदों]] में (१९०० से १५०० बी सी ई) उल्लेख मिलता है, जब कि तापसिक साधनाओं का समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणियों में प्राप्त है।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> कई मूर्तियाँ जो सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्रा को प्रदर्शित करती है, [[सिंधु घाटी सभ्यता]] (सी.3300-1700 बी.सी. इ.) के स्थान पर प्राप्त हुईं है। पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्ल के अनुसार," ये मूर्तियाँ योग के धार्मिक संस्कार" के योग से सम्बन्ध को संकेत करती है।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि इस बात का निर्णयात्मक सबूत नहीं है फिर भी अनेक पंडितों की राय में सिंधु घाटी सभ्यता और योग-[[ध्यान]] में सम्बन्ध है।<ref>देखें: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्ती का "योग मुद्रा में बैटे हुए" ऐसा वर्णन करता है। [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखे, "अरौंड द इंडस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिखते है " पुरातात्विक खोज हमें अनुमान करने का समर्थन करता है की आर्य [[भारत]] के पूर्व के लोग योग शास्त्र की क्रियाओं से परिचित थे". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेंरीच ज़िम्मर|हैनरिच ज़िम्मेर]] एक मुद्रा में "योगमुद्रा" का वर्णन करते है। {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थॉमस मअकएविल्ले|थॉमस म्क्विल्ले]] लिखते है कि "यह छह रहस्यमय सिंधु घाटी मुद्रा की छवियों में जो उत्कीर्ण मूर्तियां है उन में हठ योग के ''मूलबन्धासन '' नाम के आसन, या उस से मिलता जुलता ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है। {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजंद मसीह, पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष, हाल ही में प्राप्त एक मुद्रा का वर्णन एक योगी के रूप का कहते है। [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुओं की खोज खंडहर में निहित खजाने की ओर संकेत करता है। ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फ़रवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जोकि अन्य सीलों मे से एक है, के बारे में विवाद करते हुए लिखते है कि यह रूप एक योग मुद्रा में बैठे व्यक्ति की स्पष्ट नहीं लगती या यह एक मानव आकृति का प्रतिनिधित्व करती लगती है। फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सील के बारे में जियोफ्रे सामुएल का मानना है कि,"वास्तव में हमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह मूर्ति किसी नारी या पुरुष, किसकी व्याख्या करती है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]] में उच्च चैतन्य को प्राप्त करने कि रीतियों का विकास श्रमानिक परम्पराओं द्वारा एवं उपनिषद् की परंपरा द्वारा विकसित हुआ था।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्ध के पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रंथों मे [[ध्यान]] के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, बुद्ध के दो शिक्षकों के ध्यान के लक्ष्यों के प्रति कहे वाक्यों के आधार पर वय्न्न यह तर्क करते है की निर्गुण ध्यान की पद्धति ब्रह्मिन परंपरा से निकली इसलिए उपनिषद् की [[सृष्टि]] के प्रति कहे कथनों में एवं ध्यान के लक्ष्यों के लिए कहे कथनों में समानता है।<ref>[28] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> यह संभावित हो भी सकता है, नहीं भी.<ref>[29] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदों में [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानों के वैश्विक कथनों में किसी [[ध्यान]] की रीति की सम्भावना के प्रति तर्क देते हुए कहते है की [[नासदीय सूक्त]] किसी [[ध्यान]] की पद्धति की ओर [[ऋग्वेद]] से पूर्व भी इशारा करते है।<ref>[30] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> [[हिंदू]] ग्रंथ और [[बौद्ध]] ग्रंथ प्राचीन ग्रन्थो में से एक है जिन में ध्यान तकनीकों का वर्णन प्राप्त होता है।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरावदा बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम इंसिएंत बनारस टू माडर्न कोलम्बो.'' रौतलेड्ग और केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44.</ref> वे ध्यान की प्रथाओं और अवस्थाओं का वर्णन करते है जो बुद्ध से पहले अस्तित्व में थीं और साथ ही उन प्रथाओं का वर्णन करते है जो पहले बौद्ध धर्म के भीतर विकसित हुईं.<ref>[32] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50</ref> हिंदु वाङ्मय में,"योग" शब्द पहले कथा उपनिषद में प्रस्तुत हुआ जहाँ ज्ञानेन्द्रियों का नियंत्रण और मानसिक गतिविधि के निवारण के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो उच्चतम स्थिति प्रदान करने वाला माना गया है।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95. विद्वानों कथा उपनिषद को पूर्व बौद्धत्व के साथ सूचीबद्ध नहीं करते, उदाहरण के लिए हेल्मथ वॉन ग्लासेनप्प देख सकते हैं,1950 कार्यवाही की "अकादेमी देर विस्सेंस्चाफ्तें," लितेरातुर अंड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फ़रवरी 2013 }} कुछ लोग कहते हैं कि यह पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा का ए हिस्ट्री ऑफ़ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अंड वेस्ट, वोल. 37, अंख. 3 (जुलाई., 1987) जिसे अरविंद शर्मा ने समीक्षा की है, पीपी. 325-331. पाली शब्द "योग" का उपयोग करने की एक व्यापक जांच के लिए पूर्व बौद्ध ग्रंथों में देखे, थॉमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इंग्लिश शब्दकोष.'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालें., 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदा में "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थ में इस शब्द का प्रयोग के लिए देखे गिल फ्रोंस्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखा.</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जो योग की अवधारणा से सम्बंधित है वे मध्य कालीन [[उपनिषदों|उपनिषद्]], [[महाभारत]],[[भगवद गीता]] 200 BCE) एवं [[पतंजलि योगसूत्र|पतंजलि योग सूत्र]] है। (ca. 400 BCE) ==== पतंजलि के योग सूत्र ==== {{main|योग सूत्र}} [[भारतीय दर्शन]] में, षड् [[आस्तिक|दर्शनों]] में से एक का नाम योग है।<ref>[35] ^ छह आस्तिक दर्शन सम्प्रदायों के एक सिंहावलोकन के लिए, समूह पर विस्तार के साथ देखें : राधाकृष्णन अंड मूर, "सामग्री" और पीपी. स्कूलों [35] ^453-487.</ref><ref>[36] ^ योग घराने के एक संक्षिप्त सिंहावलोकन के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[Samkhya|सांख्य]] स्कूल के साथ निकटता से संबन्धित है।<ref>[37] ^ दर्शन और संख्या के बीच घनिष्ठ संबंध के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> ऋषि [[पतंजलि]] द्वारा व्याख्यायित योग संप्रदाय [[संख्या|सांख्य]] मनोविज्ञान और तत्वमीमांसा को स्वीकार करता है, लेकिन सांख्य घराने की तुलना में अधिक आस्तिक है, यह प्रमाण है क्योंकि सांख्य वास्तविकता के पच्चीस तत्वों में ईश्वरीय सत्ता भी जोड़ी गई है।<ref>[38] ^ अवधारणाओं के योग स्वीकृति के लिए, लेकिन भगवान के लिए एक वर्ग के जोड़ने की क्रिया के साथ देखें: राधाकृष्णन अंड मूर, पी. 453.</ref><ref>[39]^ Samkhya के 25 सिद्धांतों को योगा ने स्वीकार करने के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग और सांख्य एक दूसरे से इतने मिलते-जुलते है कि मेक्स म्युल्लर कहते है,"यह दो दर्शन इतने प्रसिद्ध थे कि एक दूसरे का अंतर समझने के लिए एक को प्रभु के साथ और दूसरे को प्रभु के बिना माना जाता है।...."<ref>[40] ^ म्युलर (1899), अध्याय 7, "योग फिलोसोफी", पी. १०४.</ref> सांख्य और योग के बीच घनिष्ठ संबंध हेंरीच ज़िम्मेर समझाते है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> इन दोनों को भारत में जुड़वा के रूप में माना जाता है, जो एक ही विषय के दो पहलू है।{{IAST|Sāṅkhya}}[41]यहाँ मानव प्रकृति की बुनियादी सैद्धांतिक का प्रदर्शन, विस्तृत विवरण और उसके तत्वों का परिभाषित, बंधन ''(बंधा)'' के स्थिति में उनके सहयोग करने के तरीके, सुलझावट के समय अपने स्थिति का विश्लेषण या मुक्ति में वियोजन [[मोक्ष]] की व्याख्या की गई है। योग विशेष रूप से प्रक्रिया की गतिशीलता के सुलझाव के लिए उपचार करता है और मुक्ति प्राप्त करने की व्यावहारिक तकनीकों को सिद्धांत करता है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' का उपचार करता है।<ref>[42] ^ ज़िम्मेर (1951), पी. 280.</ref> </blockquote> पतंजलि, व्यापक रूप से औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते है।<ref>[43] ^ दार्शनिक प्रणाली के संस्थापक पतंजलि योग को यह रूप दिया, देखें : चटर्जी और पी० दत्त 42</ref> पतंजलि योग, बुद्धि के नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है जिसे [[राज योग]] के रूप में जाना जाता है।<ref>[44] ^ मन के नियंत्रण के लिए एक तंत्र के रूप में "राजा योग" के लिए और एक महत्वपूर्ण कार्य के रूप में पतंजलि के योग सूत्र के साथ संबंध के लिए देखे: फ्लड (1996), पीपी. 96-98.</ref> पतंजलि उनके दूसरे सूत्र मे "योग" शब्द को परिभाषित करते है,<ref name="yogasutrastext">{{cite web| last = Patañjali| first = | authorlink = Patanjali| author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali| work = | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts| date = 2001-02-01| url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading| format = [[etext]]| doi = | accessdate = 2008-11-24| archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading| archive-date = 25 अगस्त 2011| url-status = dead}}</ref> जो उनके पूरे काम के लिए व्याख्या सूत्र माना जाता है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table">'''''योगः चित्त-वृत्ति निरोधः''' '' <br />- योग सूत्र 1.2</blockquote> तीन संस्कृत शब्दों के अर्थ पर यह संस्कृत परिभाषा टिकी है। अई० के० तैम्नी इसकी अनुवाद करते है कि,"योग बुद्धि के संशोधनों (''{{IAST|vṛtti}}'' [49]) का निषेध (''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [48]) है" (''{{IAST|citta}}'' [50])। <ref>पाठ और शब्द मे से शब्द अनुवाद के लिए देखे:तैम्नी पी."योग इस दी इनहिबिशन ऑफ़ दी मोडीफिकेशंस ऑफ़ दी मैंड" 6.</ref> योग की प्रारंभिक परिभाषा मे इस शब्द ''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [52] का उपयोग एक उदाहरण है कि बौद्धिक तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं, योग सूत्र मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है; इससे यह संकेत होता है कि बौद्ध विचारों के बारे में पतंजलि को जानकारी थी और अपने प्रणाली मे उन्हें बुनाई.<ref>[53] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतंजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 9.</ref>[[स्वामी विवेकानंद|स्वामी]] विवेकानंद इस सूत्र को अनुवाद करते हुए कहते है,"योग बुद्धि (चित्त) को विभिन्न रूप (वृत्ति) लेने से अवरुद्ध करता है।<ref>[54] ^ विवेकानाडा, पी. 115</ref> [[चित्र:Yogisculpture.JPG|right|thumb|200px|इस, दिल्ली के बिरला मंदिर में एक हिंदू योगी की मूर्ति]] पतंजलि का लेखन 'अष्टांग योग"("आठ-अंगित योग") एक प्रणाली के लिए आधार बन गया। 29<sup>th</sup> सूत्र के <sup>दूसरी </sup>किताब से यह आठ-अंगित अवधारणा को प्राप्त किया गया था और व्यावहारिक रूप मे भिन्नरूप से सिखाये गए प्रत्येक राज योग की एक मुख्य विशेषता है। आठ अंग हैं: # [[यम]] : सत्य, अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (अनावश्यक धन और सम्पत्ति एकत्र न करना), [[ब्रह्मचर्य]] । # [[नियम]] (पांच "धार्मिक क्रिया") : शौच (पवित्रता), सन्तोष, तपस, [[स्वाध्याय]] और ईश्वरप्राणिधान। # [[आसन]] # [[प्राणायाम]] : ''प्राण'', सांस, "अयाम ", को नियंत्रित करना या बंद करना। साथ ही जीवन शक्ति को नियंत्रण करने की व्याख्या की गयी है। # [[प्रत्याहार]] : बाहरी वस्तुओं से भावना अंगों के प्रत्याहार # [[धारणा]] ("एकाग्रता"): एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना # [[ध्यान]] : ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन # [[समाधि]] : ध्यान के वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना। इसके दो प्रकार है - सविकल्प और निर्विकल्प। निर्विकल्प समाधि में संसार में वापस आने का कोई मार्ग या व्यवस्था नहीं होती। यह योग पद्धति की चरम अवस्था है। इस संप्रदाय के विचार मे, उच्चतम प्राप्ति विश्व के अनुभवी विविधता को [[माया (भ्रम)|भ्रम]] के रूप मे प्रकट नहीं करता. यह दुनिया वास्तव है। इसके अलावा, उच्चतम प्राप्ति ऐसी घटना है जहाँ अनेक में से एक व्यक्तित्व [[आत्मन (हिंदू धर्म)|स्वयं]], आत्म को आविष्कार करता है, कोई एक सार्वभौमिक आत्म नहीं है जो सभी व्यक्तियों द्वारा साझा जाता है।<ref>[55] ^ स्टीफन एच. फिलिप्स, ''क्लास्सिकल इंडियन मेताफ्य्सिक्स: रेफुताशन्स ऑफ़ रेअलिस्म अंड दी एमेर्गेंस ऑफ़ "न्यू लॉजिक". '' ओपन कोर्ट प्रकाशन, 1995, पृष्ठ 12-13.</ref> ==== भगवद गीता ==== {{Main|भगवद्गीता}} भगवद गीता (प्रभु के गीत), बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से ''योग'' शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय (छठा अध्याय) सहित पारंपरिक योग का अभ्यास को समर्पित, ध्यान के सहित, करने के अलावा<ref>[57] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय किया जाता है।<ref>[58] ^ भगवद गीता, एक पूरा अध्याय (ch. 6) पारंपरिक योग का अभ्यास करने के लिए समर्पित सहित. इस गीता मे योग के प्रसिद्ध तीन प्रकारों, जैसे 'ज्ञान' (ज्ञान), 'एक्शन'(कर्म) और 'प्यार' (भक्ति) का परिचय किया है।" फ्लड, पी. 96</ref> * [[कर्म योग]]: कार्रवाई का योग। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। * [[भक्ति योग]]: भक्ति का योग। भगवत कीर्तन। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। * [[ज्ञान योग|ज्ञाना योग]]: ज्ञान का योग - ज्ञानार्जन करना। [[मधुसूदन सरस्वती]] (जन्म 1490) ने गीता को तीन वर्गों में विभाजित किया है, जहाँ प्रथम छह अध्यायों मे कर्म योग के बारे मे, बीच के छह मे भक्ति योग और पिछले छह अध्यायों मे ज्ञाना (ज्ञान) योग के बारे मे बताया गया है।<ref>[59] ^ गम्भिरानान्दा, पी. 16</ref> अन्य टिप्पणीकार प्रत्येक अध्याय को एक अलग 'योग' से संबंध बताते है, जहाँ अठारह अलग योग का वर्णन किया है।<ref>[60] ^ जकोब्सन, पी. 46.</ref> ==== हठयोग ==== {{Main|हठ योग}} हठयोग योग, योग की एक विशेष प्रणाली है जिसे 15वीं सदी के भारत में [[हठयोग प्रदीपिका|हठ योग प्रदीपिका]] के संकलक, योगी स्वात्माराम द्वारा वर्णित किया गया था। जिसका उल्लेख ग्रंथ के रचियता योगी स्वात्माराम जी ने स्वयं पुस्तक के प्रथम उपदेश के तृतीय श्लोक में इस प्रकार किया है - * भ्रांत्या बहुमतध्वांते राजयोगमजानताम्। हठप्रदीपिकां धत्ते स्वात्माराम: कृपाकर:।।<refप्रथम उपदेश, तीसरा श्लोक</ref> अर्थात - " अनेक मतों के गहन अंधकार की भ्रान्ति से उबारने के लिए अपनी आत्मा में रमण करने वाले ( स्वात्माराम) योगी कृपा पूर्वक इस हठयोग प्रदीपिका को प्रकट करते हैं।।"<ref>1 - 3</ ref> हठयोग पतंजलि के राज योग से काफी अलग है राजयोग जो कि सत्कर्म पर केन्द्रित है, तो हठयोग भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है।''[62]'' [63] केवल पतंजलि राजयोग के ध्यान आसन के बदले, [64] यह पूरे शरीर के लोकप्रिय आसनों की चर्चा करता है।<ref name="Burley">[65] ^ हठयोग: यह प्रसंग, थिओरी अंड प्रक्टिस मिकेल बर्ली (पृष्ठ 16) द्वारा लिखा गया है।</ref> हठयोग अपनी कई आधुनिक भिन्नरूपों में एक शैली है जिसे बहुत से लोग "योग" शब्द के साथ जोड़ते है।<ref>[66] ^ फयूएर्स्तें, जोर्ग. 1996).''दी शम्भाला गाइड टू योग'' बोस्टन और लंदन: शम्भाला प्रकाशन, इंक</ref> हठयोग- वास्तव में एक सम्पूर्ण क्रियात्मक योग है यानि यह अपने प्रथम उपदेश से ही शरीर की एक विशेष क्रिया अभ्यास से प्रारंभ होता है , जिसका नाम आसन है। शुरूआत में हठयोग की महिमा वर्णन करने के बाद श्लोक बारहवें में हठयोग के साधक को अभ्यास के लिए शुद्ध- पवित्र वातारण युक्त स्थान पर एक कुटी ( एक छोटा सा अनुकूल कक्ष ) का निर्माण करने की बात कही गई है, अर्थात एक ऐसी जगह हो ,जहाँ साधना करते हुए हठयोगी को कोई बाहरी विक्षेपण विध्न उत्पन्न न कर सके , शीत ,वर्षा, गर्मी ऋतु आदि से बचाव हो सके। बताई और सीखी गई पद्धति से योग अभ्यास करते समय छ: बाधाओं से दूर रहने और छ: गुणों को धारण कर अभ्यास करने का निर्देश किया गया है, जिन्हें साधना की फलवती के लिए पालनीय योग्य बताया गया है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, श्लोक 12 - 15</ref> पतंजलि योगदर्शन की भाँति इसमें भी योग साधना प्रारम्भ करने से पूर्व श्लोक 17 एवं 18 में यम - नियम का वर्णन किया गया है। योगदर्शन में पाँच यम और पाँच नियम, कुल दस आचार गुणों का पालन करने को कहा गया है, तो वहीं हठयोग में यह दस और दस कुल बीस कहे गए हैं। इनके माध्यम से साधक के नैतिक और सामाजिक जीवन की आचार - विचार की पवित्रता, शुद्धतामय जीवन जीने की व्यावहारिकता बनाना है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, 17-18</ref> आसन हठयोग का प्रथम अंग है, इसलिए पहले आसन की ही वार्ता करते हैं। हठयोग के प्रथम उपदेश में स्वयं इस बात को कहा गया है।आसन से ही हठयोग की क्रियात्मक साधना प्रारम्भ होती है -- " हठस्य प्रथम् अंगत्वाद् आसनम् पूर्वमुच्यते। कुर्याद् तदासनं, स्थैर्यम् आरोग्यं च अंगलाघवम्।।"1/19 प्रथम उपदेश के उंनीसवें श्लोक में आसन को हठयोग का प्रथम अंग मानकर उसका प्रारम्भ करने की बात कही गई है, जिसमें प्रथम आसन अभ्यास करने की अनिवार्यता , उसके शरीर फिर मन पर प्रभाव को सरलता से स्पष्ट किया है, जैसे कि - आसन का अभ्यास करने से साधक के शरीर की आरोग्यता प्राप्ति, मन की चंचलता नष्ट होकर, शरीर और मन दोनों की स्थिति स्थिर हो जाती है,और तमोगुण आलस्य नष्ट होकर शरीर लाघवता यानि हल्केपन को प्राप्त होता है। आसन अभ्यास से तीन चीजें प्राप्त होती है -- * आरोग्य शरीर * शरीर में हल्कापन * तन - मन की स्थिरता। यानि हठयोग की कठिन साधना को सफल करनें के लिए शरीर व मन दोनों तैयार हो जाते हैं ,साधना के मार्ग पर चलने के लिए सध जाते है।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/19</ref> हठयोग में इस विषय के प्रारम्भ में कहा गया है कि वशिष्ठ आदि मुनियों और मत्स्येन्द्रनाथ आदि योगियों ने साधना करते हुए जिन आसनों का अभ्यास किया, उनमें से इस ग्रंथ में कुछ प्रमुख आसन का वर्णन किया जाता है। यहाँ जैसा कि पूर्व कह चुकें हैं कि हठयोग के आदि गुरू और प्रवर्तक भगवान आदिनाथ शिव को माना गया है ,अत: उन्होंने ही सर्वप्रथम चौरासी लाख आसनों का वर्णन किया, एक तरह से ये चौरासी लाख आसन " सृष्टि सृजन की चौरासी लाख योनियों " से सम्बन्धित हैं। इसीलिए इन आसनों के नाम भी जगत की स्थावर ,जंगम योनियों से मिलते है , जैसे कि -- वृक्ष आसन, ताड़ासन, मकर आसन , मीन आसन, भुजंगासन, पर्वतासन आदि - आदि, अब आप समझ गए होंगे। परन्तु ये चौरासी लाख आसन तो सबके लिए करने असम्भव थे, अत: साधना के लिए उनमें से चौरासी आसनों का चयन प्रमुखता के साथ किया गया। परन्तु उनमें भी अनेक आसन कठिन, कष्टप्रद और क्लिष्ट थे, जिसके कारण जन सामान्य के लिए आसनी से उनका अभ्यास कर उनसे लाभ उठाना समर्थ नहीं था, अत: उन चौरासी में से भी जो सरल साध्य और अधिक लाभप्रद, करने में आसानी से करणीय लगे ऐसे प्रमुख आसनों का चयन किया गया और उन्हें इस हठयोग साधना में अंगीकार किया गया। उन्हीं प्रमुख आसनों का वर्णन इस हठयोग प्रदीपिका में किया गया है , उन आसनों की संख्या कुल पंद्रह है।।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/22</ref> दुसरी बात यहाँ वशिष्ठ मुनि और मत्स्येन्द्रनाथ योगी यानि मुनि और योगी का वर्णन एक साथ आसन साधना अभ्यास में किया गया है जो कि आध्यात्म साधना में आसन की उपयोगिता और सर्वसाधना के लिए उपयोगिता को दर्शाता है।<ref>हठयोग प्रदीपिका- 1/22</ref> == अन्य परंपराओं में योग प्रथा == === बौद्ध-धर्म === मेडिटेशन किसे कहते हैं {{main|बौद्ध योग}} [[चित्र:Kamakura-buddha-1.jpg|thumb|right|200px|बुद्ध पद्मासन मुद्रा में योग ध्यान में.]] [[प्राचीन भारत|प्राचीन]] बौद्धिक धर्म ने ध्यानापरणीय अवशोषण अवस्था को निगमित किया।<ref name="Heisig">[68] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 22) द्वारा लिखा गया है।</ref> बुद्ध के प्रारंभिक उपदेशों में योग विचारों का सबसे प्राचीन निरंतर अभिव्यक्ति पाया जाता है।<ref>[69] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतांजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 8.</ref> बुद्ध के एक प्रमुख नवीन शिक्षण यह था की ध्यानापरणीय अवशोषण को परिपूर्ण अभ्यास से संयुक्त करे.<ref>[70] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 73.</ref> बुद्ध के उपदेश और प्राचीन ब्रह्मनिक ग्रंथों में प्रस्तुत अंतर विचित्र है। बुद्ध के अनुसार, ध्यानापरणीय अवस्था एकमात्र अंत नहीं है, उच्चतम ध्यानापरणीय स्थिती में भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। अपने विचार के पूर्ण विराम प्राप्त करने के बजाय, किसी प्रकार का मानसिक सक्रियता होना चाहिए:एक मुक्ति अनुभूति, ध्यान जागरूकता के अभ्यास पर आधारित होना चाहिए। <ref>[71] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 105.</ref> बुद्ध ने मौत से मुक्ति पाने की प्राचीन ब्रह्मनिक अभिप्राय को ठुकराया.<ref>[72] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 96.</ref> ब्रह्मिनिक योगिन को एक [[ध्यान|गैरद्विसंक्य द्रष्टृगत स्थिति]] जहाँ मृत्यु मे अनुभूति प्राप्त होता है, उस स्थिति को वे मुक्ति मानते है। बुद्ध ने योग के निपुण की मौत पर मुक्ति पाने की पुराने ब्रह्मिनिक अन्योक्त ("उत्तेजनाहीन होना, क्षणस्थायी होना") को एक नया अर्थ दिया; उन्हें, ऋषि जो जीवन में मुक्त है के नाम से उल्लेख किया गया था।<ref>[73] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 109.</ref> {{seealso|प्राणायाम}} ==== योगकारा बौद्धिक धर्म ==== योगकारा(संस्कृत:"योग का अभ्यास"<ref>[75] ^ [http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm डान लास्थौस: "वोट इस अंड इसंट योगकारा"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131216190312/http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm |date=16 दिसंबर 2013 }}</ref>, शब्द विन्यास योगाचारा, दर्शन और मनोविज्ञान का एक संप्रदाय है, जो [[भारत]] में 4 वीं से 5 वीं शताब्दी मे विकसित किया गया था। योगकारा को यह नाम प्राप्त हुआ क्योंकि उसने एक'' योग'' प्रदान किया, एक रूपरेखा जिससे [[बोधिसत्त्व]] तक पहुँचने का एक मार्ग दिखाया है।<ref>[76] ^ डान लास्थौस. बौद्ध फेनोमेनोलोगी: ए फिलोसोफिकल इन्वेस्टीगेशन ऑफ़ योगकारा बुद्धिस्म अंड दी चेंग वेई-शिह लुन. (रौटलेड्ज) 2002 प्रकाशित. ISBN 0-7007-1186-4.पग 533</ref> ज्ञान तक पहुँचने के लिए यह योगकारा संप्रदाय ''योग'' सिखाता है।<ref name="Simpkins">[77] ^ सरल तिब्बती बौद्ध धर्म: ए गाइड टू तांत्रिक लिविंग, सी अलेक्जेंडर सिम्प्किंस, अन्नेल्लें एम. सिम्प्किंस द्वारा लिखा गया है। 2001 प्रकाशित. टटल प्रकाशन. ISBN 0-8048-3199-8</ref> ==== छ'अन (सिओन/ ज़ेन) बौद्ध धर्म ==== [[ज़ेनो|ज़ेन]] (जिसका नाम संस्कृत शब्द "ध्याना से" उत्पन्न किया गया चीनी "छ'अन" के माध्यम से<ref>[78] ^ दी बुद्धिस्ट त्रडिशन इन इंडिया, भारत और जापान. विलियम थिओडोर डी बारी द्वारा संपादित किया गया है। पन्ने. 207-208. ISBN 0-394-71696-5 - "दी मेडिटेशन स्कूल ने, चीनी में ''"चान"'' नाम से कहते है जो संस्कृत शब्द ''ध्यान'' से लिया गया है, ''पश्चिम'' में जापानी उच्चारण ''ज़ेन'' " से जाना जाता है।</ref>)[[महायान बौद्ध धर्म]] का एक रूप है। बौद्ध धर्म की महायान संप्रदाय योग के साथ अपनी निकटता के कारण विख्यात किया जाता है।<ref name="Heisig"/> पश्चिम में, जेन को अक्सर योग के साथ व्यवस्थित किया जाता है;ध्यान प्रदर्शन के दो संप्रदायों स्पष्ट परिवारिक उपमान प्रदर्शन करते है।<ref>[80] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पेज xviii)</ref> यह घटना को विशेष ध्यान योग्य है क्योंकि कुछ योग प्रथाओं पर ध्यान की ज़ेन बौद्धिक स्कूल आधारित है।[81]योग की कुछ आवश्यक तत्वों सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और विशेष रूप से ज़ेन धर्म को महत्वपूर्ण हैं।<ref name="Knitter">[82] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौली|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पृष्ठ 13)</ref> ==== भारत और तिब्बत के बौद्धिक धर्म ==== योग [[तिब्बती बौद्ध धर्म]] का केंद्र है। न्यिन्गमा परंपरा में, ध्यान का अभ्यास का रास्ता नौ ''यानों'', या वाहन मे विभाजित है, कहा जाता है यह परम व्यूत्पन्न भी है।<ref>[83] ^ ''दी लैयेन्स रोर: अन इन्त्रोदुक्शन टू तंत्र '' चोग्यम त्रुन्ग्पा द्वारा. शम्भाला, 2001 ISBN 1-57062-895-5</ref> अंतिम के छह को "योग यानास" के रूप मे वर्णित किया जाता है, यह है:''क्रिया योग'', ''उप योग (''चर्या'')'', ''योगा याना'', ''[[महायोग|महा योग]]'', ''[[अनुयोग|अनु योग]]'' और अंतिम अभ्यास ''[[अतियोग|अति योग.]]''<ref>[84] ^''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट'' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया। ISBN 1-57062-917-X पन्ना 37-38</ref> सरमा परंपराओं ने''महायोग और अतियोग की अनुत्तारा वर्ग'' से स्थानापन्न करते हुए क्रिया योग, उपा (चर्या) और योग को शामिल किया हैं। अन्य तंत्र योग प्रथाओं में 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास शामिल हैं।<ref>[85] ^ ''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट '' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया।ISBN 1-57062-917-X पन्ना 57</ref> अन्य तंत्र योग प्रथाओं 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास को शामिल हैं। यह न्यिन्गमा परंपरा यंत्र योग का अभ्यास भी करते है। (तिब. ''तरुल खोर''), यह एक अनुशासन है जिसमे सांस कार्य (या प्राणायाम), ध्यानापरणीय मनन और सटीक गतिशील चाल से अनुसरण करनेवाले का ध्यान को एकाग्रित करते है।<ref>[86] ^ ''योगा:दी तिबेतन योगा ऑफ़ मूवमेंट'', चोग्याल नम्खई नोरबू द्वारा लिखा गया है। स्नो लायन, 2008. ISBN 1-55939-308-4</ref>लुखंग मे दलाई लामा के सम्मर मंदिर के दीवारों पर तिब्बती प्राचीन योगियों के शरीर मुद्राओं चित्रित किया जाता है। चांग (1993) द्वारा एक अर्द्ध तिब्बती योगा के लोकप्रिय खाते ने कन्दली (तिब.''तुम्मो'') अपने शरीर में गर्मी का उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहते है कि "यह संपूर्ण तिब्बती योगा की बुनियाद है".<ref>[87] ^ चांग, जी. सी.सी (1993).''तिबेतन योगा.'' न्यू जर्सी: कैरल प्रकाशन समूह. ISBN 0-8065-1453-1, पन्ना.7</ref> चांग यह भी दावा करते है कि तिब्बती योगा [[प्राण|प्राना]] और मन को सुलह करता है, और उसे [[तांत्रिक|तंत्रिस्म]] के सैद्धांतिक निहितार्थ से संबंधित करते है। === जैन धर्म === [[चित्र:Parsva Shatrunjay.jpg|thumb|right|100px|तीर्थंकर पार्स्व यौगिक ध्यान में कयोत्सर्गा मुद्रा में.]] [[चित्र:Kevalajnana.jpg|thumb|175px][[महावीर]] को केवल ज्ञान प्राप्ति मुलाबंधासना मुद्रा में]] दूसरी शताब्दी के जैन ग्रन्थ ''[[तत्त्वार्थसूत्र]]'', के अनुसार मन, वाणी और शरीर सभी गतिविधियों का कुल 'योग' है। <ref>[88] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.1], मनु दोषी (2007) तत्त्वार्थसूत्र के अनुवाद, अहमदाबाद : श्रुत रत्नाकर पी. 102</ref> [[उमास्वामी]] कहते है कि ''[[आस्रव]]'' या कार्मिक प्रवाह का कारण योग है<ref>[89] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> साथ ही- [[रत्नत्रय (जैन)|सम्यक चरित्र]] अर्थात योग नियंत्रण और अन्त में निरोध मुक्ति के मार्ग मे बेहद आवश्यक है। <ref>[90] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> अपनी ''नियमसार '' में, आचार्य [[कुन्दकुन्द]] ने ''योग भक्ति'' का वर्णन- भक्ति से मुक्ति का मार्ग - भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप मे किया है।<ref>[91] ^ नियमासरा [134-40]</ref> आचार्य [[हरिभद्र]] और आचार्य [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचन्द्र]] के अनुसार पाँच प्रमुख उल्लेख संन्यासियों और 12 समाजिक लघु प्रतिज्ञाओं योग के अंतर्गत शामिल है। इस विचार के वजह से कही इन्डोलोज़िस्ट्स जैसे प्रो रॉबर्ट जे ज़्यीडेन्बोस ने जैन धर्म के बारे मे यह कहा कि यह अनिवार्य रूप से योग सोच की एक योजना है जो एक पूर्ण धर्म के रूप मे बढ़ी हो गयी। <ref>[92] ^ ज्यडेन्बोस, रॉबर्ट. जैनिस्म टुडे अंड इट्स फ्यूचर. मूंछें: मन्या वेर्लग, 2006. पन्ना.66</ref> डॉ॰ हेंरीच ज़िम्मर संतुष्ट किया कि योग प्रणाली को पूर्व आर्यन का मूल था, जिसने वेदों की सत्ता को स्वीकार नहीं किया और इसलिए जैन धर्म के समान उसे एक विधर्मिक सिद्धांतों के रूप में माना गया था <ref>[93] ^ ज़िम्मर, हेंरीच (एड.) जोसेफ कैम्पबेल: फिलोसोफीस ऑफ़ इंडिया.न्यू यॉर्क: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 1969 पन्ना.60</ref> जैन शास्त्र, जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] को ध्यान मे ''[[पद्मासन|पद्मासना]]'' या ''कायोत्सर्ग '' योग मुद्रा में दर्शाया है। ऐसा कहा गया है कि महावीर को'' मुलाबंधासना'' स्थिति में बैठे ''[[केवल ज्ञान|केवला ज्ञान]]'' "आत्मज्ञान" प्राप्त हुआ जो अचरंगा सूत्र मे और बाद में [[कल्पसूत्र]] मे पहली साहित्यिक उल्लेख के रूप मे पाया गया है।<ref>[94] ^ क्रिस्टोफर चप्पल. (1993) नॉनविलँस टू अनिमल्स, अर्थ, अंड सेल्फ इन एशियन त्रदिशन्स.न्यू यॉर्क: सनी प्रेस, 1993 पन्ना. 7</ref> पतंजलि योगसूत्र के पांच यामा या बाधाओं और जैन धर्म के पाँच प्रमुख प्रतिज्ञाओं में अलौकिक सादृश्य है, जिससे जैन धर्म का एक मजबूत प्रभाव का संकेत करता है। <ref>[95] ^ ज्य्देंबोस (2006) पन्ना.66</ref><ref>[96] ^ विवियन वोर्थिन्ग्तन द्वारा ए हिस्ट्री ऑफ़ योगा (1982) रौटलेड्ज ISBN 0-7100-9258-X पन्ना. 29.</ref> लेखक विवियन वोर्थिंगटन ने यह स्वीकार किया कि योग दर्शन और जैन धर्म के बीच पारस्परिक प्रभाव है और वे लिखते है:"योग पूरी तरह से जैन धर्म को अपना ऋण मानता है और विनिमय मे जैन धर्म ने योग के साधनाओं को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लिया". <ref>[97] ^ विवियन वोर्थिंगटन (1982) पन्ना. 35</ref> सिंधु घाटी मुहरों और इकोनोग्रफी भी एक यथोचित साक्ष्य प्रदान करते है कि योग परंपरा और जैन धर्म के बीच सांप्रदायिक सदृश अस्तित्व है। <ref>[98] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, panna.6</ref> विशेष रूप से, विद्वानों और पुरातत्वविदों ने विभिन्न तिर्थन्करों की मुहरों में दर्शाई गई योग और ध्यान मुद्राओं के बीच समानताओं पर टिप्पणी की है: [[ऋषभदेव]] की "कयोत्सर्गा" मुद्रा और [[महावीर]] के ''मुलबन्धासन'' मुहरों के साथ ध्यान मुद्रा में पक्षों में सर्पों की खुदाई [[पार्श्वनाथ]] की खुदाई से मिलती जुलती है। यह सभी न केवल सिंधु घाटी सभ्यता और जैन धर्म के बीच कड़ियों का संकेत कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न योग प्रथाओं को जैन धर्म का योगदान प्रदर्शन करते है।<ref>[99] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, पप.6-9</ref> ===== जैन सिद्धांत और साहित्य के सन्दर्भ ===== {{मुख्य|जैन धर्म में योग}} प्राचीनतम के जैन धर्मवैधानिक साहित्य जैसे आचाराङ्गसूत्र और नियमसार, तत्त्वार्थसूत्र आदि जैसे ग्रंथों ने साधारण व्यक्ति और तपस्वीयों के लिए जीवन का एक मार्ग के रूप में योग पर कई सन्दर्भ दिए है। बाद के ग्रंथ, जिसमे योग की जैन अवधारणा विस्तारपूर्वक दी गयी है, वह निम्नानुसार हैं: * पूज्यपाद (5 वीं शताब्दी ई०) ** ''इष्टोपदेश '' * आचार्य हरिभद्र सूरी (8 वीं शताब्दी ई०) ** '' योगबिन्दु '' ** ''योगद्रिस्तिसमुच्काया '' ** ''योगशतक '' ** ''योगविंशिका '' * आचार्य जोंदु (८वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसार'' * आचार्य हेमचन्द्र (११वीं सदी ई०) ** ''योगशास्त्र '' * आचार्य अमितगति (११वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसारप्राभृत '' === इस्लाम === [[सूफ़ीवाद|सूफी]] संगीत के विकास में भारतीय योग अभ्यास का काफी प्रभाव है, जहाँ वे दोनों शारीरिक मुद्राओं ([[आसन]]) और श्वास नियंत्रण ([[प्राणायाम]]) को अनुकूलित किया है।<ref>[100] ^ [http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc सीटूएटिंग सुफ्फिस्म अंड योगा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090327090930/http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc |date=27 मार्च 2009 }}</ref> 11 वीं शताब्दी के प्राचीन समय में प्राचीन भारतीय योग पाठ, अमृतकुंड, ("अमृत का कुंड") का अरबी और फारसी भाषाओं में अनुवाद किया गया था।<ref>[101] ^ [http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml केरोलिना संगोष्ठी तुलनात्मक इस्लामी अध्ययन] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090825225459/http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml |date=25 अगस्त 2009 }} पर</ref> सन 2008 में मलेशिया के शीर्ष [[इस्लाम|इस्लामिक]] समिति ने कहा जो [[मुस्लिम|मुस्लमान]] योग अभ्यास करते है उनके खिलाफ एक [[फतवा]] लागू किया, जो कानूनी तौर पर गैर बाध्यकारी है, कहते है कि योग में "[[हिंदु|हिंदू]] आध्यात्मिक उपदेशों" के तत्वों है और इस से ईश-निंदा हो सकती है और इसलिए यह [[हराम]] है। मलेशिया में मुस्लिम योग शिक्षकों ने "अपमान" कहकर इस निर्णय की आलोचना कि.<ref name="cnn.com">[102] ^ [http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html श्रेय इस्लामी समुदाय: योगा मुसलमानों के लिए नहीं है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081205182658/http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html|date=5 दिसंबर 2008}} - [[सी एन एन]]</ref> मलेशिया में महिलाओं के<ref name="cnn.com"/> समूह, ने भी अपना निराशा व्यक्त की और उन्होंने कहा कि वे अपनी योग कक्षाओं को जारी रखेंगे.<ref>[103] ^ [http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110622072723/http://thestar.com.my/news/story.asp?file=%2F2008%2F11%2F23%2Fnation%2F2625368&sec=nation |date=22 जून 2011 }}</ref> इस फतवा में कहा गया है कि शारीरिक व्यायाम के रूप में योग अभ्यास अनुमेय है, पर धार्मिक मंत्र का गाने पर प्रतिबंध लगा दिया है,<ref>[104] ^ [http://www.google.com/hostednews/ap/article/ALeqM5gkepLWOtoRT7YiTChjyOPSjkVtzAD94MIV500 "मलेशिया के नेता: योगा मंत्र के बिना योग मुसलमानों के लिए ठीक है,"]{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }} एसोसिएटेड प्रेस</ref> और यह भी कहते है कि भगवान के साथ मानव का मिलाप जैसे शिक्षण इस्लामी दर्शन के अनुरूप नहीं है।<ref>[105] ^ [http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090106003351/http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 |date=6 जनवरी 2009 }}</ref> इसी तरह, उलेमस की परिषद, इंडोनेशिया में एक इस्लामी समिति ने योग पर प्रतिबंध, एक [[फतवा|फतवे]] द्वारा लागू किया क्योंकि इसमें "हिंदू तत्व" शामिल थे।<ref>[106] ^ [http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090217135238/http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm |date=17 फ़रवरी 2009 }}</ref> किन्तु इन फतवों को [[दारुल उलूम देवबन्द|दारुल उलूम देओबंद]] ने आलोचना की है, जो [[देवबन्द|देओबंदी]] इस्लाम का भारत में शिक्षालय है।<ref>{{Cite web |url=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |title=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |access-date=19 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090822195937/http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |archive-date=22 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> सन 2009 मई में, तुर्की के निदेशालय के धार्मिक मामलों के मंत्रालय के प्रधान शासक अली बर्दाकोग्लू ने योग को एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में घोषित किया- योग के संबंध में कुछ आलोचनाये जो इसलाम के तत्वों से मेल नहीं खातीं.<ref>[108] ^ http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111011035805/http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 |date=11 अक्तूबर 2011 }}</ref> === ईसाई धर्म === सन 1989 में, [[वैटिकन]] ने घोषित किया कि ज़ेन और योग जैसे पूर्वी ध्यान प्रथाओं "शरीर के एक गुट में बदज़ात" हो सकते है। वैटिकन के बयान के बावजूद, कई [[कैथोलिक धर्म|रोमन कैथोलिक]] उनके आध्यात्मिक प्रथाओं में योग , बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के तत्वों का प्रयोग किया है।<ref>{{cite news|url=http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9C0CE1D61531F934A35752C0A966958260&sec=&spon=|title=Trying to Reconcile the Ways of the Vatican and the East |last=Steinfels|first=Peter|date=1990-01-07|work=New York Times|accessdate=2008-12-05}}</ref> === तंत्र === {{Main|तंत्र}} तंत्र एक प्रथा है जिसमें उनके अनुसरण करनेवालों का संबंध साधारण, धार्मिक, सामाजिक और तार्किक वास्तविकता में परिवर्तन ले आते है। [[तांत्रिक]] अभ्यास में एक व्यक्ति वास्तविकता को [[माया (भ्रम)|माया]], भ्रम के रूप में अनुभव करता है और यह व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होता है।<ref name="UCP">[112] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म: हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट अई लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 313</ref>[[हिंदुत्व|हिन्दू धर्म]] द्वारा प्रस्तुत किया गया निर्वाण के कई मार्गों में से यह विशेष मार्ग तंत्र को [[भारत में धर्म|भारतीय धर्मों]] के प्रथाओं जैसे योग, ध्यान, और सामाजिक [[संन्यास]] से जोड़ता है, जो सामाजिक संबंधों और विधियों से अस्थायी या स्थायी वापसी पर आधारित हैं।<ref name="UCP"/> तांत्रिक प्रथाओं और अध्ययन के दौरान, छात्र को ध्यान तकनीक में, विशेष रूप से [[चक्र|चक्र ध्यान]], का निर्देश दिया जाता है। जिस तरह यह ध्यान जाना जाता है और तांत्रिक अनुयायियों एवं योगियों के तरीको के साथ तुलना में यह तांत्रिक प्रथाओं एक सीमित रूप में है, लेकिन सूत्रपात के पिछले ध्यान से ज्यादा विस्तृत है। इसे एक प्रकार का [[कुंडलिनी योग]] माना जाता है जिसके माध्यम से ध्यान और पूजा के लिए "हृदय" में स्थित चक्र में देवी को स्थापित करते है।<ref>[114] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म:हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट मैं लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 317</ref> ==भारत के प्रसिद्ध योगगुरु== वैसे तो योग हमेशा से हमारी प्राचीन धरोहर रही है। समय के साथ-साथ योग विश्व प्रख्यात तो हुआ ही है साथ ही इसके महत्व को जानने के बाद आज योग लोगों की दिनचर्या का अभिन्न अंग भी बन गया है। लेकिन योग के प्रचार-प्रसार में विश्व प्रसिद्ध योगगुरुओं का भी योगदान रहा है, जिनमें से '''अयंगार योग''' के संस्थापक [[बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार|बी के एस अयंगर]], [[स्वामी शिवानंद]] और योगगुरु [[बाबा रामदेव|रामदेव]] का नाम अधिक प्रसिद्ध है।<ref>{{Cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402115555/http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बीकेएस अंयगर=== {{मुख्य|बी के एस अयंगार}} अयंगर को विश्व के अग्रणी योग गुरुओं में से एक माना जाता है और उन्होंने योग के दर्शन पर कई किताबें भी लिखी थीं, जिनमें 'लाइट ऑन योगा', 'लाइट ऑन प्राणायाम' और 'लाइट ऑन द योग सूत्राज ऑफ पतंजलि' शामिल हैं। <ref>{{Cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402155843/http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> अयंगर का जन्‍म 14 दिसम्‍बर 1918 को बेल्‍लूर के एक गरीब परिवार में हुआ था। बताया जाता है कि अयंगर बचपन में काफी बीमार रहा करते थे। ठीक नहीं होने पर उन्‍हें योग करने की सलाह दी गयी और तभी से वह योग करने लगे। अयंगर को 'अयंगर योग' का जन्‍मदाता कहा जाता है। उन्होंने इस योग को देश-दुनिया में फैलाया। सांस की तकलीफ के चलते 20 अगस्त 2014 को उनका निधन हो गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402091707/http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बाबा रामदेव=== {{मुख्य|बाबा रामदेव}} बाबा रामदेव भारतीय योग-गुरु हैं, उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया है। [[रामदेव]] स्वयं जगह-जगह जाकर योग शिविरों का आयोजन करते हैं। ==योग दिवस== {{main|अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस}} 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया। दिल्ली में एक साथ ३५९८५ लोगों ने योगाभ्यास किया।इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के एक साथ योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 जून 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150625055155/http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |archive-date=25 जून 2015 |url-status=live }}</ref> योग का उद्देश्य योग के अभ्यास के कई लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है।लोगों के स्वास्थ्य पर योग के महत्व और प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 जून को योग का अभ्यास किया जाता है। शब्द ‘योग‘ संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जुड़ना या एकजुट होना। ==योग का महत्व== वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग संतोष पाने के लिए योग करते हैं। योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्‍तिष्‍क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्‍मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है। अगर आप इसका नियमित अभ्यास करते हैं, तो इससे धीरे-धीरे आपका तनाव भी दूर हो सकता है। == योग का लक्ष्य == योग का लक्ष्य स्वास्थ्य में सुधार से लेकर ''[[मोक्ष]] (आत्मा को [[परमेश्वर]] का अनुभव)'' प्राप्त करने तक है।<ref>[115] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> जैन धर्म, [[अद्वैत वेदांत]] के [[वेदांत|मोनिस्ट]] संप्रदाय और [[शैव सम्प्रदाय|शैव संप्रदाय]] के अन्तर में योग का लक्ष्य मोक्ष का रूप लेता है, जो सभी सांसारिक कष्ट एवं जन्म और मृत्यु के चक्र [[संसार|(संसार)]] से मुक्ति प्राप्त करना है, उस क्षण में परम [[ब्राह्मण|ब्रह्मण]] के साथ समरूपता का एक एहसास है। महाभारत में, योग का लक्ष्य [[ब्रह्मा]] के दुनिया में प्रवेश के रूप में वर्णित किया गया है, ब्रह्म के रूप में, अथवा [[आत्मा|आत्मन]] को अनुभव करते हुए जो सभी वस्तुओं मे व्याप्त है।<ref>जकोब्सन, पी. 9</ref> मीर्चा एलीयाडे योग के बारे में कहते हैं कि यह सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है, एक आध्यात्मिक तकनीक भी है। <ref>मीर्चा ईटु, मीर्चा एलीयाडे, बुखारेस्ट, कल की रोमानिया का प्रकाशन संस्था, दो हज़ार छह, नब्बे का पृष्ठ। (ISBN 973-725-715-4)</ref> [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] लिखते हैं कि समाधि में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं: वितर्क, विचार, आनंद और अस्मिता।<ref>सर्पवल्ली राधाकृष्णन, भारतीय दर्शन, दूसरा खंड, लंडन, जॉर्ज एलन और उइंन का प्रकाशन संस्था, एक हजार नौ सौ छियासठ, तीन सौ अस्सी का पृष्ठ। (ISBN 978-019-569-841-1)</ref> ==योग के प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतंजलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतंजलि]] || ४०० ई. पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरानी संस्कृत पाण्डुलिपि ९वीं-१०वीं शताब्दी की है। |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११वीं शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११वीं-१२वीं शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४वीं-१५वीं शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६वीं शताब्दी |- | '''[[योगसारसंग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६वीं शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५वीं-१६वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७वीं शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७वीं शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० इ. पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० इ.पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७वीं शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८वीं शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई. / यह हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ी बोली की मिलीजुली भाषा में रचित है<br> और शब्दावली संस्कृत के अत्यन्त निकट है। |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०वीं शताब्दी ; हिन्दी में लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसंबर 2022 |archive-date=31 दिसंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१वीं शताब्दी |} ==इन्हें भी देखें== *[[योग का इतिहास]] *[[योग दर्शन]] *[[अष्टांग योग]] *[[योगसूत्र]] *[[हठयोग]] *[[जैन धर्म में योग]] *[[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]] *[[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मानते हैं कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञान का दूसरा नाम है। == बाहरी कड़ियाँ == * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् की इस साइट पर योग के अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध के लिये) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == आगे पढ़ें == {{wiktionary}} * {{cite book |last=Apte |first=Vaman Shivram |authorlink= |author2= |title=The Practical Sanskrit Dictionary |year=1965 |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |location=Delhi |isbn=81-208-0567-4 }}(चौथा संशोधित और विस्तृत संस्करण)। * {{cite book | last = Patañjali | first = | authorlink = Patañjali | author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts | year = 2001 | location = | pages = | url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading | doi = | id = | isbn = | access-date = 19 अगस्त 2009 | archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading | archive-date = 25 अगस्त 2011 | url-status = dead }} * चांग, जी सी सी (1993)। तिब्बती योग. न्यू जर्सी: कैरल पब्लिशिंग ग्रुप . ISBN 0-8065-1453-1 * {{cite book |series= |last=Chatterjee |first=Satischandra |authorlink= |author2=Datta, Dhirendramohan |title=An Introduction to Indian Philosophy |year=1984 |publisher=University of Calcutta |location=Calcutta |edition=Eighth Reprint Edition }} * Donatelle, रेबेका जे हैल्थ: दी बेसिक्स. 6. एड. सैन फ्रांसिस्को: पियर्सन एडूकेशन, इंक 2005. * फयूएर्स्तें, जोर्ज . दी शम्भाला गाइड टु योग. 1. एड. बोस्टन एंड लन्डन: शम्भाला पुब्लिकेशन्स 1996. * {{cite book | last = Flood | first = Gavin | year = 1996 | title = An Introduction to Hinduism | publisher = Cambridge University Press | location = Cambridge | isbn = 0-521-43878-0 | url-access = registration | url = https://archive.org/details/introductiontohi0000floo }} * {{cite book | last = Gambhirananda | first = Swami | year = 1998 | title = Madhusudana Sarasvati Bhagavad_Gita: With the annotation Gūḍhārtha Dīpikā| publisher = [[Advaita Ashrama]] Publication Department| location = Calcutta | isbn=81-7505-194-9}} * {{cite book | last = Harinanda | first = Swami |author2= | year = | title = Yoga and The Portal | publisher = Jai Dee Marketing| location = | isbn=0978142950}} * {{cite book | last = Jacobsen | first = Knut A. (Editor) |author2= Larson, Gerald James (Editor)| year = 2005 | title = Theory And Practice of Yoga: Essays in Honour of Gerald James Larson | publisher = Brill Academic Publishers| location = | isbn=9004147578}} (स्टडीज इन दी हिस्ट्री ऑफ़ रिलिजनस, 110) * {{cite book |last=Keay |first=John|authorlink= |author2= |title=India: A History |year=2000 |publisher=Grove Press |location=New York |isbn=0-8021-3797-0 }} * मार्शल, जॉन (1931)। ''मोहेंजोदारो एंड दी इन्दुस सिविलैज़ेशन:वर्ष 1922-27 के बीच मोहेंजोदारो में भारत सरकार द्वारा किए एक सरकारी खाता पुरातत्व खुदाई के होने के नाते.'' दिल्ली:इन्दोलोगिकल बुक हाउस. * {{cite book |last=Michaels |first=Axel|authorlink= |author2= |title=Hinduism: Past and Present |url=https://archive.org/details/hinduismpastpres0000mich |year=2004 |publisher=Princeton University Press |location=Princeton, New Jersey|isbn=0-691-08953-1 }} * [[धर्म मित्रा|मित्रा, धर्म श्री]]. आसन: 608 योगा मुद्रा. 1. एड. कैलिफोर्निया: नई वर्ल्ड लाइब्रेरी 2003. * {{cite book | last = Müller | first = Max | authorlink= Max Müller |year = 1899 | title = Six Systems of Indian Philosophy; Samkhya and Yoga, Naya and Vaiseshika| publisher = Susil Gupta (India) Ltd.| location = Calcutta | isbn=0-7661-4296-5}}[129] ''पुस्तक का नया संस्करण; मूलतः यह दी सिक्स सिस्टम्स ऑफ़ इंडियन फिलोसोफी के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।'' * {{cite book |last=Possehl |first=Gregory|authorlink=Gregory Possehl |author2= |title=The Indus Civilization: A Contemporary Perspective |url=https://archive.org/details/induscivilizatio0000poss |year=2003 |publisher=AltaMira Press |location= |isbn=978-0759101722 }} * {{cite book |series= |last=Radhakrishnan |first=S. |authorlink=Sarvepalli Radhakrishnan |author2=Moore, CA |title=A Sourcebook in Indian Philosophy |year=1967 |publisher=Princeton |location= |isbn=0-691-01958-4 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/sourcebookinindi00radh }} * सरस्वती, स्वामी सत्यानन्दा. नवंबर 2002 (12 वें संस्करण)। "आसन प्राणायाम मुद्रा बंधा" ISBN 81-86336-14-1 * {{cite book |series= |last=Taimni |first=I. K. |authorlink= |author2=|title=The Science of Yoga |url=https://archive.org/details/scienceofyogayog00unse|year=1961 |publisher=The Theosophical Publishing House |location=Adyar, भारत |isbn=81-7059-212-7 }} * उशाराबुध, आर्य पंडित. फिलोसोफी ऑफ़ हठ योगा. 2. एड. पेन्नीसिलवेनिया : हिमालयन इंस्टीट्युत प्रेस 1977, 1985. * {{cite book |series= |last=Yogshala |first=Ekam Drishti |authorlink=Ekam Drishti Yogshala |author2=|title=Yoga And Its Role In Stress Management: How To Become Calmer And Focused |year=2021 |location=Rishikesh, India }} * {{cite book |series= |last=Vivekananda |first=Swami |authorlink=Swami Vivekananda |author2=|title=Raja Yoga |year=1994 |publisher=[[Advaita Ashrama]] Publication Department |location=Calcutta |isbn=81-85301-16-6 }} 21 रिप्रिंट एडिशन * {{cite book |series= |last=Zimmer |first=Heinrich |authorlink=Heinrich Zimmer |author2=|title=Philosophies of India |year=1951 |publisher=Princeton University Press |location=New York, New York |isbn=0-691-01758-1 }} बोल्लिंगें सीरीज XXVI; जोसेफ कैम्बेल द्वारा संपादित. * {{cite book |series= |last=Weber|first=Hans-Jörg L. |authorlink=Hans-Jörg L. Weber |author2=|title=Yogalehrende in Deutschland: eine humangeographische Studie unter besonderer Berücksichtigung von netzwerktheoretischen, bildungs- und religionsgeographischen Aspekten |year=2007 |publisher=University of Heidelberg |location=Heidelberg |}} https://web.archive.org/web/20090826191058/http://archiv.ub.uni-heidelberg.de/savifadok/volltexte/2008/121/ {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिंदू दार्शनिक अवधारणाएँ]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] bwhaybvx7z8f9hncclrg60gojra1qlm 6536944 6536747 2026-04-06T10:52:42Z Ravinder Jugran 849799 /* व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार */ कड़ियाँ लगाई , नई जानकारी और संदर्भ जोड़ा 6536944 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२वीं-१३वीं शताब्दी के एक भारतीय चित्र में [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = A male yogi | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = Two female yoginis }} [[चित्र:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रा में यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' ({{langx|sa|योगः}}) प्राचीन भारतीय ऋषिमुनियों और तत्त्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। [[पतंजलि]] ने 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' को योग कहा है। [[वेद व्यास|व्यास]] ने [[समाधि]] को ही योग माना है। [[योगवासिष्ठ]] के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। 'योग' शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा [[हिन्दू धर्म]], [[जैन धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]] में [[ध्यान]] प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], दक्षिण पूर्व एशिया और [[श्री लंका|श्रीलंका]] में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं। सिद्धि के बाद पहली बार [[११]] दिसम्बर [[२०१४]] को [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा ]] ने प्रत्येक वर्ष [[२१]] जून को [[विश्व योग दिवस]] के रूप में मान्यता दी है। हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में योग के अनेक सम्प्रदाय हैं, योग के विभिन्न लक्ष्य हैं तथा योग के अलग-अलग व्यवहार हैं।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [6.1], देखें मनु दोषी (2007) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग तथा इसका आधुनिक रूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। सबसे पहले 'योग' शब्द का उल्लेख [[ऋग्वेद]] में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है। [[कठोपनिषद]] में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना ईसापूर्व पच्चीसवी और तीसवी शताब्दी ईसापूर्व के बीच के कालखण्ड में हुई थी। [[पतञ्जलि]] का [[योगसूत्र]] योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल ईसा की प्रथम शताब्दी या उसके आसपास माना जाता है। [[हठ योग]] के ग्रन्थ ९वीं से लेकर ११वीं शताब्दी में रचे जाने लगे थे। इनका विकास [[तन्त्र]] से हुआ। पश्चिमी जगत में "योग" को हठयोग के आधुनिक रूप में लिया जाता है जिसमें शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य तथा विश्रान्ति (relaxation) की तकनीकों की प्रधानता है। ये तकनीकें मुख्यतः [[आसन|आसनों]] पर आधारित हैं जबकि परम्परागत योग का केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है और वह सांसारिक लगावों से छुटकारा दिलाने का प्रयास करता है। पश्चिमी जगत में आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार भारत से उन देशों में गये गुरुओं ने किया जो प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]] की पश्चिमी जगत में प्रसिद्धि के बाद वहाँ गये थे। == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|धातु]] में ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगाने से निष्पन्न होता है। [[धातुपाठ]] में युज्‌ शब्द के तीन अर्थ उपलब्ध होते हैं - समाधि, संयोग, संयमन । लेकिन योगशात्र का प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातु से बना है जिसका व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । व्यास जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है - "योगः समाधिः"। वैसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ तथा ‘युज संयमने’ धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। पाणिनीय [[गणपाठ]] में तीन 'युज्' धातुओं का पाठ मिलता हैं - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । समाधि का प्रकृति प्रत्यय अर्थ है, सम्यक् स्थापन। दूसरे अर्थ मे समाधि की सिद्धि के लिए जुड़ना । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, जुड़ना, जोड़ना, मेल करना, संयोग करना अर्थात् इस दु:ख रूप संसार से वियोग तथा ईश्वर से संयोग का नाम योग है । भगवद्गीता में भी वर्णन मिलता है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (6/23) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, संयमन अर्थात् मन का संयम अथवा मन का नियमन । मन को संयमित करना ही योग है। इस प्रकार योग का अर्थ हुआ - "योग साधनाओं को अपनाते हुए मन को नियन्त्रित कर, संयमित कर, आत्मा का परमात्मा से मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसी होनी चाहिए जो अव्याप्ति और अतिव्याप्ति दोषों से मुक्त हो, योग शब्द के वाच्यार्थ का ऐसा लक्षण बतला सके जो प्रत्येक प्रसंग के लिये उपयुक्त हो और योग के सिवाय किसी अन्य वस्तु के लिये उपयुक्त न हो। [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ माना जाता है। उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग, भक्तियोग। वास्तव में देखा जाए तो भगवद्गीता सम्पूर्ण योगशात्र है, क्योंकि उसके अन्तर्गत संसार, मन, बुद्धि, इन्द्रिय , आत्मा और परमात्मा का क्रम से वर्णन करते हुए अन्तिम सत्य को विभिन्न मार्गों और साधन पद्धति से बताने का उपक्रम किया गया है, इसी लिए गीता के समस्त अट्ठारह अध्यायों के नाम योग शब्द पर ही पूर्ण होते हैं, जैसे- प्रथम विवाद योग, द्वितीय सांख्ययोग , तृतीय कर्मयोग, इसी प्रकार अन्य भी विभूतियोग, भक्तियोग, पुरुषोत्तमयोग, मोक्षसंन्यासयोग आदि सभी अध्याय, दुसरी बात यह भी कि गीता के रचनाकार महर्षि वेदव्यास जी ने स्वयं इस बात को इसी ग्रन्थ के प्रत्येक अभ्यास की समाप्ति पर - ' योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुसंवादे......' कहकर इसे योगशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना है।<ref>श्रीमद्भगवद्गीता</ref> वेदोत्तर काल में [[भक्तियोग]] और [[हठयोग]] नाम भी प्रचलित हो गए हैं। पतंजलि योगदर्शन में 'क्रियायोग' शब्द देखने में आता है। [[पाशुपत योग]] और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है। इन सब स्थलों में योग शब्द के जो अर्थ हैं वह एक दूसरे से भिन्न हैं । [[गीता]] में [[श्रीकृष्ण]] ने एक स्थल पर कहा है ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' ( कर्मों में कुशलता ही योग है।) यह वाक्य योग की परिभाषा नहीं है। यदि हम गीता के दुसरे अध्याय के पचासवें उपर्युक्त श्लोक को इस अर्थ में लेंगें कि - " कर्मों में कुशलता ही योग है " - तो हम ऐसा करके अर्थ का अनर्थ कर देंगे, क्योंकि - जैसे चोर भी चोरी करने में कुशल होता है- पर हम उसे योग या योगी नहीं कह सकते है, हत्या, लूट , धोखा , भष्टाचार आदि निन्दनीय कर्म करने में भी अनेक मनुष्य बड़े कुशल होते है और तो और अनेक पकड़े भी नहीं जाते है और न्यायालय की सजा से भी बच निकलते है-- अपने कार्य में इतने निपुण होने के बाद भी , हम उन्हें योग या योगी नहीं कह सकते हैं, अत: यहाँ इस श्लोक का अर्थ यह है कि - ' कर्म में योग ही कुशलता है यानि योग्य कर्म करना ही कर्म की कुशलता है अर्थात- मनुष्य के कल्याण करने की शक्ति योग यानि समत्व- समता भाव में है, मात्र कर्म करने में नहीं, समता के भाव में स्थित होकर कुशल कर्म करने में हैं।<ref>साधक संजीवनी</ref> कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते हैं। इस बात को स्वीकार करने में यह बड़ी आपत्ति खड़ी होती है कि [[बौद्ध धर्म|बौद्धमतावलम्बी]] भी, जो परमात्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं करते, योग शब्द का व्यवहार करते और योग का समर्थन करते हैं। यही बात [[सांख्य|सांख्यवादियों]] के लिए भी कही जा सकती है जो ईश्वर की सत्ता को असिद्ध मानते हैं। [[पतञ्जलि]] ने [[योगसूत्र]] में, जो परिभाषा दी है 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं: चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं। योग दर्शन के विद्वानों और टीकाकारों के अनुसार महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन के प्रथम तीन सूत्र - " अथ योगानुशासनम् ।। 1।।, योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: ।।2।।, तदा द्रष्टु: स्वरूपेऽवस्थानम् ।।3।। - में ही योग के सम्पूर्ण स्वरूप और लक्ष्य को परिभाषित कर दिया है, अर्थात- योग विषय की शिक्षा देने वाले ग्रंथ का आरम्भ ; योग का स्वरूप, चित्त में उत्पन्न होने वाली वृत्तियों को रुक जाना यानि शमन हो जाना ; ऐसा होने से दृष्टा यानि साधक अपने स्वरूप में यानि पुरुष शुद्धचेतन रूप में स्थित हो जाता है, जो कि योग का फल है।<ref>पातञ्जलयोगप्रदीप, समाधिपाद, सूत्र- 1,2,3, पृष्ठ- 139,146,153</ref> परन्तु इस परिभाषा पर कई विद्वानों को आपत्ति है। उनका कहना है कि चित्तवृत्तियों के प्रवाह का ही नाम चित्त है। पूर्ण निरोध का अर्थ होगा चित्त के अस्तित्व का पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृतियों और संस्कारों का निःशेष हो जाना। यदि ऐसा हो जाए तो फिर समाधि से उठना संभव नहीं होगा। क्योंकि उस अवस्था के सहारे के लिये कोई भी संस्कार बचा नहीं होगा, प्रारब्ध दग्ध हो गया होगा। निरोध यदि संभव हो तो [[श्रीकृष्ण]] के इस वाक्य का क्या अर्थ होगा? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योग में स्थित होकर कर्म करो। विरुद्धावस्था में कर्म हो नहीं सकता और उस अवस्था में कोई संस्कार नहीं पड़ सकते, स्मृतियाँ नहीं बन सकतीं, जो समाधि से उठने के बाद कर्म करने में सहायक हों। संक्षेप में आशय यह है कि योग के शास्त्रीय स्वरूप, उसके दार्शनिक आधार को सम्यक्‌ रूप से समझना बहुत सरल नहीं है। संसार को मिथ्या माननेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादी]] भी निदिध्याह्न के नाम से उसका समर्थन करता है। अनीश्वरवादी सांख्य विद्वान भी उसका अनुमोदन करता है। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] ही नहीं, [[इस्लाम|मुस्लिम]] [[सूफ़ी]] और [[ईसाई]] मिस्टिक भी किसी न किसी प्रकार अपने संप्रदाय की मान्यताओं और दार्शनिक सिद्धांतों के साथ उसका सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं। इन विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं में किस प्रकार ऐसा समन्वय हो सकता है कि ऐसा धरातल मिल सके जिस पर योग की भित्ति खड़ी की जा सके, यह बड़ा रोचक प्रश्न है परंतु इसके विवेचन के लिये बहुत समय चाहिए। यहाँ उस प्रक्रिया पर थोड़ा सा विचार कर लेना आवश्यक है जिसकी रूपरेखा हमको पतंजलि के सूत्रों में मिलती है। थोड़े बहुत शब्दभेद से यह प्रक्रिया उन सभी समुदायों को मान्य है जो योग के अभ्यास का समर्थन करते हैं। ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]] के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (1/2) अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। *(२) [[सांख्य दर्शन]] के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है। *(३) [[विष्णुपुराण]] के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है। *(४) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (2/48) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। *(५) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। *(६) [[आचार्य हरिभद्र]] के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]] से जोड़ने वाले सभी व्यवहार योग हैं। *(७) [[बौद्ध धर्म]] के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है, -- इसमें कुशल चित्तका भाव यह है कि-- शुभ कर्म, अच्छे कर्म, पूण्य कर्म- पाप ,लोभ ,घृणा, द्वेष, क्रोध, काम ( कामना), मार ( प्रलोभन) आदि राग - द्वेष से रहित कर्म करना अर्थात कुशल कर्म करने से - चित्तकी स्फटिकमणी की भाँति शुद्ध, शान्त, निर्मल अवस्था का हो जाना ही कुशल चित्त है। ===योग के प्रकार=== योग की उच्चावस्था [[समाधि]], [[मोक्ष]], [[कैवल्य]] आदि तक पहुँचने के लिए अनेकों साधकों ने जो साधन अपनाये उन्हीं साधनों का वर्णन योग ग्रन्थों में समय समय पर मिलता रहा। उसी को 'योग के प्रकार' से जाना जाने लगा। योग की प्रामाणिक पुस्तकों में [[शिवसंहिता]] तथा [[गोरक्षशतक]] में योग के चार प्रकारों का वर्णन मिलता है - : ''मंत्रयोगों हष्ष्चैव लययोगस्तृतीयकः। '' : ''चतुर्थो राजयोगः'' (शिवसंहिता , 5/11) : ''मंत्रो लयो हठो राजयोगन्तर्भूमिका क्रमात् '' : ''एक एव चतुर्धाऽयं महायोगोभियते॥'' (गोरक्षशतकम् ) उपर्युक्त दोनों श्लोकों से योग के प्रकार हुए : मंत्रयोग, हठयोग लययोग व राजयोग। ====मंत्रयोग==== '''{{मुख्य|मन्त्र योग}}''' '[[मंत्र]]' का समान्य अर्थ है- 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः'। मन को त्राय (पार कराने वाला) मंत्र ही है। मन्त्र योग का सम्बन्ध मन से है, मन को इस प्रकार परिभाषित किया है- मनन इति मनः। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है। मंत्र योग के बारे में योगतत्वोपनिषद में वर्णन इस प्रकार है- : ''योग सेवन्ते साधकाधमाः।'' ( अल्पबुद्धि साधक मंत्रयोग से सेवा करता है अर्थात मंत्रयोग उन साधकों के लिए है जो अल्पबुद्धि है।) मंत्र के जप उच्चारण से एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें पैदा होती है जो कि जप करते समय शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालता है। मंत्र में साधक जप का प्रयोग करता है, मंत्र जप में तीन घटकों का काफी महत्व है, वें तीन घटक हैं- उच्चारण, लय व ताल। तीनों का सही अनुपात मंत्र शक्ति को बढ़ा देता है। मंत्रजप मुख्यरूप से चार प्रकार से किया जाता है। : (1) वाचिक (2) मानसिक (3) उपांशु (4) अजप्पा । * [[वाचिक जप]] - जिसे [[वैखरी]] जप भी कहते है, यह जप [[साधना]] की प्रारंभिक अवस्था है, जिसमें साधक अपने मुँख से उच्च स्वर से उच्चारण करता हुआ- मन्त्र का जप करता है, ऐसा करने से साधक बाहरी विक्षेपण , ध्वनियों से विचलित नहीं होता है। * [[उपांशु जप]] - यह जप की वैखरी जप से श्रेष्ठ अवस्था है । इसमे साधक बिना उच्चारण किए हुए मंत्र का जप - केवल फुसफुसाहट यानि केवल होठों को हिलाते हुए जप करता है ,जिससे कोई ध्वनी नहीं निकलती है परन्तु साधक को ही जप ध्वनी अनुभव होती है। * [[मानसिक जप]] - यह जप की और अधिक श्रेष्ठ अवस्था है। इसमें साधक बिना ध्वनी किए ,बिना होठ हिलाए , केवल मन ही मन से मन्त्र जपता रहता है, यह जप की शक्तिशाली विधि है। * [[अजप्पा जप]] - यह जप की सबसे श्रेष्ठ अवस्था है, इसमें साधक अपने आते - जाते श्वास को मंत्र के साथ संयुक्त कर लेता है और यह जप 24 घण्टे निरन्तर चलता रहता है, जो कि जप योग साधना को सफल करता है।<ref>जपयोग, दिव्य जीवन संघ</ref> ====हठयोग==== '''{{मुख्य|हठयोग}}''' हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्वक किसी कार्य को करने से लिया जाता है। किसी भी कार्य के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हठी हो जाना ,उसे पूरा करने की ठान लेना, चाहे जैसी भी अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियाँ आएँ। परन्तु योग के सम्बंध में इसका स्वरूप विस्तार व गहराई को धारण किए हुए है। यह योग विद्या की वह पद्धति जिसमें - योगी साधना का अभ्यास करता हुआ, आनन्द के अथाह सागर में डुबकी लगाकर आध्यात्म की अमूल्य निधि को निकाल लाने में सफल होता है - अर्थात योग सिद्धि प्राप्त करने के समान है।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> इस योग धारा का प्रथम प्रवाह आदिनाथ के मुखारबिन्द से माना जाता है, यहाँ आदिनाथ भगवान शिव का ही एक नाम है, जिन्हें आदियोगी भी कहा जाता है। योगी समाज में यह सर्वविदित और सर्वमान्य है और उन्हीं आदियोगी आदिनाथ भगवान शिव ने सांसारिक जीवों के कल्याण करने के उद्देश्य से तप के इस यौगिक मार्ग का प्रतिपादन सर्वप्रथम अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती के सम्मुख इसका उपदेश किया था। इसके साथ- साथ यह भी सर्वविदित मान्यता है कि जगत् में इस योग के प्रचार- प्रसार के लिए गुरू मत्स्येन्द्रनाथ और गुरू गोरखनाथ ने सर्वप्रथम आदिनाथ के ही श्रीमुख से इसका श्रवण कर इस योग पद्धति को ग्रहण किया था। जो कि नाथ सम्प्रदाय के तपस्वी साधक, योगी सन्यासियों की साधना सिद्धि का प्रमुख साधन है। जो कि योग साधना की परम्परा का पालन करता हुआ जिज्ञासुओं के सम्मुख आता रहा और अपने आप को परिमाजित करता हुआ , अधिक कठिन अंशों का त्याग कर और जन - जन उपयोगी बनता हुआ , गुरू गोरखनाथ जी की कृपा से उन्हीं के द्वारा सम्पादित सूत्र में सारभूत और उत्कृष्ट लिपि बद्ध होकर हठयोग प्रदीपिका का स्वरूप ग्रहण करके जगत् के हितार्थ प्रकट हो सम्मुख हुआ।।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> हठ प्रदीपिका पुस्तक में नहीं बल्कि श्री गोरखनाथ रचित पुस्तक "सिद्ध सिद्धांत पद्धति " में वर्णित- हठ का अर्थ इस प्रकार दिया है-<ref> सिद्ध सिद्धांत पद्धति </ ref> यह श्लोक श्री गोरखनाथ विरचित " सिद्ध सिद्धांत पद्धति " के प्रथम उपदेश में वर्णित है, जिसमें हठ शब्द को योग की दृष्टि से परिभाषित किया गया है।< ref>सिद्ध सिद्धांत पद्धति, प्रथम उपदेश के अ न्तर्गत</ ref> लेकिन भ्रमवश इसे हठयोग प्रदीपिका में लिखित बताया जाता है ,जो कि निराधार है। यह हठ योग की परिभाषा है परन्तु हठयोग प्रदीपिका पुस्तक में इस श्लोक का वर्णन कहीं नहीं आता है, हाँ ! परिभाषित करने के लिए विद्वान ऐसा कह देते हैं। <ref>हठयोग प्रदीपिका </ref> : ''हकारेणोच्यते सूर्यष्ठकार चन्द्र उच्यते। '' : ''सूर्या चन्द्रमसो र्योगाद्धठयोगोऽभिधीयते॥'' <ref>प्रथम उपदेश,सिद्ध सिद्धांत पद्धति</ref> '''ह''' का अर्थ [[सूर्य]] तथा '''ठ''' का अर्थ [[चन्द्रमा|चन्द्र]] बताया गया है। सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है। शरीर में बहत्तर हजार नाड़ियाँ है, जोकि मानव शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य का संचालन करती है। ये नाड़ियाँ ऊर्जा के मार्ग है, जो कि शरीर के भिन्न- भिन्न अंगों में ऊर्जाशक्ति का प्रवाह प्रवाहित करके उसे क्रियाशील और प्राणमय बनाए रखती हैं, इनके स्वस्थ रहने से हठयोगी प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करता हुआ,अपनी प्राण शक्ति का ऊर्ध्व गमन करते हुए, योग के लक्ष्य आनन्द की प्राप्ति करता है। उनमें तीन प्रमुख नाड़ियों का वर्णन है, वे इस प्रकार हैं। सूर्यनाड़ी अर्थात पिंगला जो दाहिने स्वर का प्रतीक है। चन्द्रनाड़ी अर्थात इड़ा जो बायें स्वर का प्रतीक है। इन दोनों के बीच तीसरी नाड़ी सुषुम्ना है। इस प्रकार हठयोग वह क्रिया है जिसमें पिंगला और इड़ा नाड़ी के सहारे प्राण को सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कराकर ब्रह्मरन्ध्र में समाधिस्थ किया जाता है। [[हठयोग प्रदीपिका|हठ प्रदीपिका]] में चार अध्याय हैं, जिन्हें उपदेश कहा गया है, जिसमें हठयोग के चार अंगों का वर्णन है- * प्रथम उपदेश - आसन, * द्वितीय उपदेश - प्राणायाम, * तृतीय उपदेश- कुण्डली बोध, मुद्रा और बन्ध तथा * चतुर्थ उपदेश में - नादानुसंधान।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> [[घेरण्डसंहिता]] में सात अंग- ''षटकर्म, आसन, मुद्राबन्ध, प्राणायाम, ध्यान, समाधि'' जबकि योगतत्वोपनिषद और पतंजलि कृत योग दर्शन में भी आठ अंगों का वर्णन है- ''यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि''< ref> पातञ्जलयोगप्रदीप, दुसरा पाद</ref> ====लययोग==== '''{{मुख्य|कुंडलिनी योग}}''' चित्त का अपने स्वरूप विलीन होना या चित्त की निरूद्ध अवस्था लययोग के अन्तर्गत आता है। साधक के चित्त् में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय [[ब्रह्म]] का [[ध्यान]] रहे इसी को लययोग कहते हैं। योगत्वोपनिषद में इस प्रकार वर्णन है- : ''गच्छस्तिष्ठन स्वपन भुंजन् ध्यायेन्त्रिष्कलमीश्वरम् स एव लययोगः स्यात'' (22-23) ==== राजयोग==== '''{{मुख्य|राजयोग}}''' राजयोग सभी योगों का राजा कहलाया जाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ सामग्री अवश्य मिल जाती है। राजयोग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग का वर्णन आता है। राजयोग का विषय चित्तवृत्तियों का निरोध करना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य तथा विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा लेकर आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया है। इन साधनों का उपयोग करके साधक के क्लेशों का नाश होता है, चित्त प्रसन्न होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है और विवेक ख्याति प्राप्त होती है। : ''योगाडांनुष्ठानाद शुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिरा विवेक ख्यातेः'' (2/28) राजयोग के अन्तर्गत महर्षि पतंजलि ने अष्टांग को इस प्रकार बताया है- : ''यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टांगानि।'' <ref>योग दर्शन, साधनपाद ( 2/29 )</ ref> योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं। उपर्युक्त चार प्रकार के अतिरिक्त [[गीता]] में प्रमुखत: तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है- *(१) [[ज्ञानयोग]] *(२) [[भक्तियोग]] *(३) [[कर्म योग]] ज्ञानयोग, सांख्ययोग से सम्बन्ध रखता है। पुरुष प्रकृति के बन्धनों से मुक्त होना ही ज्ञान योग है। सांख्य दर्शन में 25 तत्वों का वर्णन मिलता है। == योग का इतिहास == [[Image:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पा से प्राप्त मुहर में योगमुद्रा]] {{Main|योग का इतिहास}} वैदिक [[संहिता|संहिताओं]] के अंतर्गत तपस्वियों ''तपस (संस्कृत)'' के बारे में ([[ब्राह्मण|(कल | ब्राह्मण)]]) प्राचीन काल से [[वेदों]] में (१९०० से १५०० बी सी ई) उल्लेख मिलता है, जब कि तापसिक साधनाओं का समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणियों में प्राप्त है।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> कई मूर्तियाँ जो सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्रा को प्रदर्शित करती है, [[सिंधु घाटी सभ्यता]] (सी.3300-1700 बी.सी. इ.) के स्थान पर प्राप्त हुईं है। पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्ल के अनुसार," ये मूर्तियाँ योग के धार्मिक संस्कार" के योग से सम्बन्ध को संकेत करती है।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि इस बात का निर्णयात्मक सबूत नहीं है फिर भी अनेक पंडितों की राय में सिंधु घाटी सभ्यता और योग-[[ध्यान]] में सम्बन्ध है।<ref>देखें: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्ती का "योग मुद्रा में बैटे हुए" ऐसा वर्णन करता है। [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखे, "अरौंड द इंडस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिखते है " पुरातात्विक खोज हमें अनुमान करने का समर्थन करता है की आर्य [[भारत]] के पूर्व के लोग योग शास्त्र की क्रियाओं से परिचित थे". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेंरीच ज़िम्मर|हैनरिच ज़िम्मेर]] एक मुद्रा में "योगमुद्रा" का वर्णन करते है। {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थॉमस मअकएविल्ले|थॉमस म्क्विल्ले]] लिखते है कि "यह छह रहस्यमय सिंधु घाटी मुद्रा की छवियों में जो उत्कीर्ण मूर्तियां है उन में हठ योग के ''मूलबन्धासन '' नाम के आसन, या उस से मिलता जुलता ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है। {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजंद मसीह, पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष, हाल ही में प्राप्त एक मुद्रा का वर्णन एक योगी के रूप का कहते है। [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुओं की खोज खंडहर में निहित खजाने की ओर संकेत करता है। ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फ़रवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जोकि अन्य सीलों मे से एक है, के बारे में विवाद करते हुए लिखते है कि यह रूप एक योग मुद्रा में बैठे व्यक्ति की स्पष्ट नहीं लगती या यह एक मानव आकृति का प्रतिनिधित्व करती लगती है। फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सील के बारे में जियोफ्रे सामुएल का मानना है कि,"वास्तव में हमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह मूर्ति किसी नारी या पुरुष, किसकी व्याख्या करती है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]] में उच्च चैतन्य को प्राप्त करने कि रीतियों का विकास श्रमानिक परम्पराओं द्वारा एवं उपनिषद् की परंपरा द्वारा विकसित हुआ था।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्ध के पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रंथों मे [[ध्यान]] के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, बुद्ध के दो शिक्षकों के ध्यान के लक्ष्यों के प्रति कहे वाक्यों के आधार पर वय्न्न यह तर्क करते है की निर्गुण ध्यान की पद्धति ब्रह्मिन परंपरा से निकली इसलिए उपनिषद् की [[सृष्टि]] के प्रति कहे कथनों में एवं ध्यान के लक्ष्यों के लिए कहे कथनों में समानता है।<ref>[28] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> यह संभावित हो भी सकता है, नहीं भी.<ref>[29] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदों में [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानों के वैश्विक कथनों में किसी [[ध्यान]] की रीति की सम्भावना के प्रति तर्क देते हुए कहते है की [[नासदीय सूक्त]] किसी [[ध्यान]] की पद्धति की ओर [[ऋग्वेद]] से पूर्व भी इशारा करते है।<ref>[30] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> [[हिंदू]] ग्रंथ और [[बौद्ध]] ग्रंथ प्राचीन ग्रन्थो में से एक है जिन में ध्यान तकनीकों का वर्णन प्राप्त होता है।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरावदा बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम इंसिएंत बनारस टू माडर्न कोलम्बो.'' रौतलेड्ग और केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44.</ref> वे ध्यान की प्रथाओं और अवस्थाओं का वर्णन करते है जो बुद्ध से पहले अस्तित्व में थीं और साथ ही उन प्रथाओं का वर्णन करते है जो पहले बौद्ध धर्म के भीतर विकसित हुईं.<ref>[32] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50</ref> हिंदु वाङ्मय में,"योग" शब्द पहले कथा उपनिषद में प्रस्तुत हुआ जहाँ ज्ञानेन्द्रियों का नियंत्रण और मानसिक गतिविधि के निवारण के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो उच्चतम स्थिति प्रदान करने वाला माना गया है।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95. विद्वानों कथा उपनिषद को पूर्व बौद्धत्व के साथ सूचीबद्ध नहीं करते, उदाहरण के लिए हेल्मथ वॉन ग्लासेनप्प देख सकते हैं,1950 कार्यवाही की "अकादेमी देर विस्सेंस्चाफ्तें," लितेरातुर अंड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फ़रवरी 2013 }} कुछ लोग कहते हैं कि यह पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा का ए हिस्ट्री ऑफ़ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अंड वेस्ट, वोल. 37, अंख. 3 (जुलाई., 1987) जिसे अरविंद शर्मा ने समीक्षा की है, पीपी. 325-331. पाली शब्द "योग" का उपयोग करने की एक व्यापक जांच के लिए पूर्व बौद्ध ग्रंथों में देखे, थॉमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इंग्लिश शब्दकोष.'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालें., 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदा में "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थ में इस शब्द का प्रयोग के लिए देखे गिल फ्रोंस्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखा.</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जो योग की अवधारणा से सम्बंधित है वे मध्य कालीन [[उपनिषदों|उपनिषद्]], [[महाभारत]],[[भगवद गीता]] 200 BCE) एवं [[पतंजलि योगसूत्र|पतंजलि योग सूत्र]] है। (ca. 400 BCE) ==== पतंजलि के योग सूत्र ==== {{main|योग सूत्र}} [[भारतीय दर्शन]] में, षड् [[आस्तिक|दर्शनों]] में से एक का नाम योग है।<ref>[35] ^ छह आस्तिक दर्शन सम्प्रदायों के एक सिंहावलोकन के लिए, समूह पर विस्तार के साथ देखें : राधाकृष्णन अंड मूर, "सामग्री" और पीपी. स्कूलों [35] ^453-487.</ref><ref>[36] ^ योग घराने के एक संक्षिप्त सिंहावलोकन के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[Samkhya|सांख्य]] स्कूल के साथ निकटता से संबन्धित है।<ref>[37] ^ दर्शन और संख्या के बीच घनिष्ठ संबंध के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> ऋषि [[पतंजलि]] द्वारा व्याख्यायित योग संप्रदाय [[संख्या|सांख्य]] मनोविज्ञान और तत्वमीमांसा को स्वीकार करता है, लेकिन सांख्य घराने की तुलना में अधिक आस्तिक है, यह प्रमाण है क्योंकि सांख्य वास्तविकता के पच्चीस तत्वों में ईश्वरीय सत्ता भी जोड़ी गई है।<ref>[38] ^ अवधारणाओं के योग स्वीकृति के लिए, लेकिन भगवान के लिए एक वर्ग के जोड़ने की क्रिया के साथ देखें: राधाकृष्णन अंड मूर, पी. 453.</ref><ref>[39]^ Samkhya के 25 सिद्धांतों को योगा ने स्वीकार करने के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग और सांख्य एक दूसरे से इतने मिलते-जुलते है कि मेक्स म्युल्लर कहते है,"यह दो दर्शन इतने प्रसिद्ध थे कि एक दूसरे का अंतर समझने के लिए एक को प्रभु के साथ और दूसरे को प्रभु के बिना माना जाता है।...."<ref>[40] ^ म्युलर (1899), अध्याय 7, "योग फिलोसोफी", पी. १०४.</ref> सांख्य और योग के बीच घनिष्ठ संबंध हेंरीच ज़िम्मेर समझाते है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> इन दोनों को भारत में जुड़वा के रूप में माना जाता है, जो एक ही विषय के दो पहलू है।{{IAST|Sāṅkhya}}[41]यहाँ मानव प्रकृति की बुनियादी सैद्धांतिक का प्रदर्शन, विस्तृत विवरण और उसके तत्वों का परिभाषित, बंधन ''(बंधा)'' के स्थिति में उनके सहयोग करने के तरीके, सुलझावट के समय अपने स्थिति का विश्लेषण या मुक्ति में वियोजन [[मोक्ष]] की व्याख्या की गई है। योग विशेष रूप से प्रक्रिया की गतिशीलता के सुलझाव के लिए उपचार करता है और मुक्ति प्राप्त करने की व्यावहारिक तकनीकों को सिद्धांत करता है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' का उपचार करता है।<ref>[42] ^ ज़िम्मेर (1951), पी. 280.</ref> </blockquote> पतंजलि, व्यापक रूप से औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते है।<ref>[43] ^ दार्शनिक प्रणाली के संस्थापक पतंजलि योग को यह रूप दिया, देखें : चटर्जी और पी० दत्त 42</ref> पतंजलि योग, बुद्धि के नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है जिसे [[राज योग]] के रूप में जाना जाता है।<ref>[44] ^ मन के नियंत्रण के लिए एक तंत्र के रूप में "राजा योग" के लिए और एक महत्वपूर्ण कार्य के रूप में पतंजलि के योग सूत्र के साथ संबंध के लिए देखे: फ्लड (1996), पीपी. 96-98.</ref> पतंजलि उनके दूसरे सूत्र मे "योग" शब्द को परिभाषित करते है,<ref name="yogasutrastext">{{cite web| last = Patañjali| first = | authorlink = Patanjali| author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali| work = | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts| date = 2001-02-01| url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading| format = [[etext]]| doi = | accessdate = 2008-11-24| archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading| archive-date = 25 अगस्त 2011| url-status = dead}}</ref> जो उनके पूरे काम के लिए व्याख्या सूत्र माना जाता है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table">'''''योगः चित्त-वृत्ति निरोधः''' '' <br />- योग सूत्र 1.2</blockquote> तीन संस्कृत शब्दों के अर्थ पर यह संस्कृत परिभाषा टिकी है। अई० के० तैम्नी इसकी अनुवाद करते है कि,"योग बुद्धि के संशोधनों (''{{IAST|vṛtti}}'' [49]) का निषेध (''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [48]) है" (''{{IAST|citta}}'' [50])। <ref>पाठ और शब्द मे से शब्द अनुवाद के लिए देखे:तैम्नी पी."योग इस दी इनहिबिशन ऑफ़ दी मोडीफिकेशंस ऑफ़ दी मैंड" 6.</ref> योग की प्रारंभिक परिभाषा मे इस शब्द ''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [52] का उपयोग एक उदाहरण है कि बौद्धिक तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं, योग सूत्र मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है; इससे यह संकेत होता है कि बौद्ध विचारों के बारे में पतंजलि को जानकारी थी और अपने प्रणाली मे उन्हें बुनाई.<ref>[53] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतंजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 9.</ref>[[स्वामी विवेकानंद|स्वामी]] विवेकानंद इस सूत्र को अनुवाद करते हुए कहते है,"योग बुद्धि (चित्त) को विभिन्न रूप (वृत्ति) लेने से अवरुद्ध करता है।<ref>[54] ^ विवेकानाडा, पी. 115</ref> [[चित्र:Yogisculpture.JPG|right|thumb|200px|इस, दिल्ली के बिरला मंदिर में एक हिंदू योगी की मूर्ति]] पतंजलि का लेखन 'अष्टांग योग"("आठ-अंगित योग") एक प्रणाली के लिए आधार बन गया। 29<sup>th</sup> सूत्र के <sup>दूसरी </sup>किताब से यह आठ-अंगित अवधारणा को प्राप्त किया गया था और व्यावहारिक रूप मे भिन्नरूप से सिखाये गए प्रत्येक राज योग की एक मुख्य विशेषता है। आठ अंग हैं: # [[यम]] : सत्य, अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (अनावश्यक धन और सम्पत्ति एकत्र न करना), [[ब्रह्मचर्य]] । # [[नियम]] (पांच "धार्मिक क्रिया") : शौच (पवित्रता), सन्तोष, तपस, [[स्वाध्याय]] और ईश्वरप्राणिधान। # [[आसन]] # [[प्राणायाम]] : ''प्राण'', सांस, "अयाम ", को नियंत्रित करना या बंद करना। साथ ही जीवन शक्ति को नियंत्रण करने की व्याख्या की गयी है। # [[प्रत्याहार]] : बाहरी वस्तुओं से भावना अंगों के प्रत्याहार # [[धारणा]] ("एकाग्रता"): एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना # [[ध्यान]] : ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन # [[समाधि]] : ध्यान के वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना। इसके दो प्रकार है - सविकल्प और निर्विकल्प। निर्विकल्प समाधि में संसार में वापस आने का कोई मार्ग या व्यवस्था नहीं होती। यह योग पद्धति की चरम अवस्था है। इस संप्रदाय के विचार मे, उच्चतम प्राप्ति विश्व के अनुभवी विविधता को [[माया (भ्रम)|भ्रम]] के रूप मे प्रकट नहीं करता. यह दुनिया वास्तव है। इसके अलावा, उच्चतम प्राप्ति ऐसी घटना है जहाँ अनेक में से एक व्यक्तित्व [[आत्मन (हिंदू धर्म)|स्वयं]], आत्म को आविष्कार करता है, कोई एक सार्वभौमिक आत्म नहीं है जो सभी व्यक्तियों द्वारा साझा जाता है।<ref>[55] ^ स्टीफन एच. फिलिप्स, ''क्लास्सिकल इंडियन मेताफ्य्सिक्स: रेफुताशन्स ऑफ़ रेअलिस्म अंड दी एमेर्गेंस ऑफ़ "न्यू लॉजिक". '' ओपन कोर्ट प्रकाशन, 1995, पृष्ठ 12-13.</ref> ==== भगवद गीता ==== {{Main|भगवद्गीता}} भगवद गीता (प्रभु के गीत), बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से ''योग'' शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय (छठा अध्याय) सहित पारंपरिक योग का अभ्यास को समर्पित, ध्यान के सहित, करने के अलावा<ref>[57] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय किया जाता है।<ref>[58] ^ भगवद गीता, एक पूरा अध्याय (ch. 6) पारंपरिक योग का अभ्यास करने के लिए समर्पित सहित. इस गीता मे योग के प्रसिद्ध तीन प्रकारों, जैसे 'ज्ञान' (ज्ञान), 'एक्शन'(कर्म) और 'प्यार' (भक्ति) का परिचय किया है।" फ्लड, पी. 96</ref> * [[कर्म योग]]: कार्रवाई का योग। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। * [[भक्ति योग]]: भक्ति का योग। भगवत कीर्तन। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। * [[ज्ञान योग|ज्ञाना योग]]: ज्ञान का योग - ज्ञानार्जन करना। [[मधुसूदन सरस्वती]] (जन्म 1490) ने गीता को तीन वर्गों में विभाजित किया है, जहाँ प्रथम छह अध्यायों मे कर्म योग के बारे मे, बीच के छह मे भक्ति योग और पिछले छह अध्यायों मे ज्ञाना (ज्ञान) योग के बारे मे बताया गया है।<ref>[59] ^ गम्भिरानान्दा, पी. 16</ref> अन्य टिप्पणीकार प्रत्येक अध्याय को एक अलग 'योग' से संबंध बताते है, जहाँ अठारह अलग योग का वर्णन किया है।<ref>[60] ^ जकोब्सन, पी. 46.</ref> ==== हठयोग ==== {{Main|हठ योग}} हठयोग योग, योग की एक विशेष प्रणाली है जिसे 15वीं सदी के भारत में [[हठयोग प्रदीपिका|हठ योग प्रदीपिका]] के संकलक, योगी स्वात्माराम द्वारा वर्णित किया गया था। जिसका उल्लेख ग्रंथ के रचियता योगी स्वात्माराम जी ने स्वयं पुस्तक के प्रथम उपदेश के तृतीय श्लोक में इस प्रकार किया है - * भ्रांत्या बहुमतध्वांते राजयोगमजानताम्। हठप्रदीपिकां धत्ते स्वात्माराम: कृपाकर:।।<refप्रथम उपदेश, तीसरा श्लोक</ref> अर्थात - " अनेक मतों के गहन अंधकार की भ्रान्ति से उबारने के लिए अपनी आत्मा में रमण करने वाले ( स्वात्माराम) योगी कृपा पूर्वक इस हठयोग प्रदीपिका को प्रकट करते हैं।।"<ref>1 - 3</ ref> हठयोग पतंजलि के राज योग से काफी अलग है राजयोग जो कि सत्कर्म पर केन्द्रित है, तो हठयोग भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है।''[62]'' [63] केवल पतंजलि राजयोग के ध्यान आसन के बदले, [64] यह पूरे शरीर के लोकप्रिय आसनों की चर्चा करता है।<ref name="Burley">[65] ^ हठयोग: यह प्रसंग, थिओरी अंड प्रक्टिस मिकेल बर्ली (पृष्ठ 16) द्वारा लिखा गया है।</ref> हठयोग अपनी कई आधुनिक भिन्नरूपों में एक शैली है जिसे बहुत से लोग "योग" शब्द के साथ जोड़ते है।<ref>[66] ^ फयूएर्स्तें, जोर्ग. 1996).''दी शम्भाला गाइड टू योग'' बोस्टन और लंदन: शम्भाला प्रकाशन, इंक</ref> हठयोग- वास्तव में एक सम्पूर्ण क्रियात्मक योग है यानि यह अपने प्रथम उपदेश से ही शरीर की एक विशेष क्रिया अभ्यास से प्रारंभ होता है , जिसका नाम आसन है। शुरूआत में हठयोग की महिमा वर्णन करने के बाद श्लोक बारहवें में हठयोग के साधक को अभ्यास के लिए शुद्ध- पवित्र वातारण युक्त स्थान पर एक कुटी ( एक छोटा सा अनुकूल कक्ष ) का निर्माण करने की बात कही गई है, अर्थात एक ऐसी जगह हो ,जहाँ साधना करते हुए हठयोगी को कोई बाहरी विक्षेपण विध्न उत्पन्न न कर सके , शीत ,वर्षा, गर्मी ऋतु आदि से बचाव हो सके। बताई और सीखी गई पद्धति से योग अभ्यास करते समय छ: बाधाओं से दूर रहने और छ: गुणों को धारण कर अभ्यास करने का निर्देश किया गया है, जिन्हें साधना की फलवती के लिए पालनीय योग्य बताया गया है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, श्लोक 12 - 15</ref> पतंजलि योगदर्शन की भाँति इसमें भी योग साधना प्रारम्भ करने से पूर्व श्लोक 17 एवं 18 में यम - नियम का वर्णन किया गया है। योगदर्शन में पाँच यम और पाँच नियम, कुल दस आचार गुणों का पालन करने को कहा गया है, तो वहीं हठयोग में यह दस और दस कुल बीस कहे गए हैं। इनके माध्यम से साधक के नैतिक और सामाजिक जीवन की आचार - विचार की पवित्रता, शुद्धतामय जीवन जीने की व्यावहारिकता बनाना है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, 17-18</ref> आसन हठयोग का प्रथम अंग है, इसलिए पहले आसन की ही वार्ता करते हैं। हठयोग के प्रथम उपदेश में स्वयं इस बात को कहा गया है।आसन से ही हठयोग की क्रियात्मक साधना प्रारम्भ होती है -- " हठस्य प्रथम् अंगत्वाद् आसनम् पूर्वमुच्यते। कुर्याद् तदासनं, स्थैर्यम् आरोग्यं च अंगलाघवम्।।"1/19 प्रथम उपदेश के उंनीसवें श्लोक में आसन को हठयोग का प्रथम अंग मानकर उसका प्रारम्भ करने की बात कही गई है, जिसमें प्रथम आसन अभ्यास करने की अनिवार्यता , उसके शरीर फिर मन पर प्रभाव को सरलता से स्पष्ट किया है, जैसे कि - आसन का अभ्यास करने से साधक के शरीर की आरोग्यता प्राप्ति, मन की चंचलता नष्ट होकर, शरीर और मन दोनों की स्थिति स्थिर हो जाती है,और तमोगुण आलस्य नष्ट होकर शरीर लाघवता यानि हल्केपन को प्राप्त होता है। आसन अभ्यास से तीन चीजें प्राप्त होती है -- * आरोग्य शरीर * शरीर में हल्कापन * तन - मन की स्थिरता। यानि हठयोग की कठिन साधना को सफल करनें के लिए शरीर व मन दोनों तैयार हो जाते हैं ,साधना के मार्ग पर चलने के लिए सध जाते है।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/19</ref> हठयोग में इस विषय के प्रारम्भ में कहा गया है कि वशिष्ठ आदि मुनियों और मत्स्येन्द्रनाथ आदि योगियों ने साधना करते हुए जिन आसनों का अभ्यास किया, उनमें से इस ग्रंथ में कुछ प्रमुख आसन का वर्णन किया जाता है। यहाँ जैसा कि पूर्व कह चुकें हैं कि हठयोग के आदि गुरू और प्रवर्तक भगवान आदिनाथ शिव को माना गया है ,अत: उन्होंने ही सर्वप्रथम चौरासी लाख आसनों का वर्णन किया, एक तरह से ये चौरासी लाख आसन " सृष्टि सृजन की चौरासी लाख योनियों " से सम्बन्धित हैं। इसीलिए इन आसनों के नाम भी जगत की स्थावर ,जंगम योनियों से मिलते है , जैसे कि -- वृक्ष आसन, ताड़ासन, मकर आसन , मीन आसन, भुजंगासन, पर्वतासन आदि - आदि, अब आप समझ गए होंगे। परन्तु ये चौरासी लाख आसन तो सबके लिए करने असम्भव थे, अत: साधना के लिए उनमें से चौरासी आसनों का चयन प्रमुखता के साथ किया गया। परन्तु उनमें भी अनेक आसन कठिन, कष्टप्रद और क्लिष्ट थे, जिसके कारण जन सामान्य के लिए आसनी से उनका अभ्यास कर उनसे लाभ उठाना समर्थ नहीं था, अत: उन चौरासी में से भी जो सरल साध्य और अधिक लाभप्रद, करने में आसानी से करणीय लगे ऐसे प्रमुख आसनों का चयन किया गया और उन्हें इस हठयोग साधना में अंगीकार किया गया। उन्हीं प्रमुख आसनों का वर्णन इस हठयोग प्रदीपिका में किया गया है , उन आसनों की संख्या कुल पंद्रह है।।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/22</ref> दुसरी बात यहाँ वशिष्ठ मुनि और मत्स्येन्द्रनाथ योगी यानि मुनि और योगी का वर्णन एक साथ आसन साधना अभ्यास में किया गया है जो कि आध्यात्म साधना में आसन की उपयोगिता और सर्वसाधना के लिए उपयोगिता को दर्शाता है।<ref>हठयोग प्रदीपिका- 1/20</ref> इस प्रकार आसनों का वर्णन - श्लोक 21 से 35 श्लोक तक - स्वास्तिकासन , गोमुखासन, वीरासन, कूर्मासन, कुक्कुटासन, उत्तान कूर्मासन, धनुरासन, मत्स्येन्द्रासन, पश्चिमोतानासन, मयूरासन, शवासन, - इन ग्यारह आसनों की विधि और उनके होने वाले लाभ का वर्णन है।...... शेष और चार आसन वास्तव में योगी की साधना के सर्वश्रेष्ठ आसन माने गए हैं - जो कि-- सिद्धासन, पद्मासन, सिंहासन और भद्रासन --- इसलिए इनका वर्णन इनकी प्रशंसा, इनकी उपयोगिता, इनके लाभ, प्रभाव आदि का विस्तृत वर्णन- श्लोक- 36 से शुरू करके श्लोक 63 तक किया गया है। वास्तव में ये चारों आसन ध्यान करने के सिद्ध आसन हैं। इन स्थितियों में बैठकर ध्यान शीध्र सिद्ध होने में सहायता मिलती है और मन शीध्र ही एकाग्रचित होने लगता है।<ref>हठयोग प्रदीपिका- 1/21- 63</ref> == अन्य परंपराओं में योग प्रथा == === बौद्ध-धर्म === मेडिटेशन किसे कहते हैं {{main|बौद्ध योग}} [[चित्र:Kamakura-buddha-1.jpg|thumb|right|200px|बुद्ध पद्मासन मुद्रा में योग ध्यान में.]] [[प्राचीन भारत|प्राचीन]] बौद्धिक धर्म ने ध्यानापरणीय अवशोषण अवस्था को निगमित किया।<ref name="Heisig">[68] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 22) द्वारा लिखा गया है।</ref> बुद्ध के प्रारंभिक उपदेशों में योग विचारों का सबसे प्राचीन निरंतर अभिव्यक्ति पाया जाता है।<ref>[69] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतांजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 8.</ref> बुद्ध के एक प्रमुख नवीन शिक्षण यह था की ध्यानापरणीय अवशोषण को परिपूर्ण अभ्यास से संयुक्त करे.<ref>[70] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 73.</ref> बुद्ध के उपदेश और प्राचीन ब्रह्मनिक ग्रंथों में प्रस्तुत अंतर विचित्र है। बुद्ध के अनुसार, ध्यानापरणीय अवस्था एकमात्र अंत नहीं है, उच्चतम ध्यानापरणीय स्थिती में भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। अपने विचार के पूर्ण विराम प्राप्त करने के बजाय, किसी प्रकार का मानसिक सक्रियता होना चाहिए:एक मुक्ति अनुभूति, ध्यान जागरूकता के अभ्यास पर आधारित होना चाहिए। <ref>[71] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 105.</ref> बुद्ध ने मौत से मुक्ति पाने की प्राचीन ब्रह्मनिक अभिप्राय को ठुकराया.<ref>[72] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 96.</ref> ब्रह्मिनिक योगिन को एक [[ध्यान|गैरद्विसंक्य द्रष्टृगत स्थिति]] जहाँ मृत्यु मे अनुभूति प्राप्त होता है, उस स्थिति को वे मुक्ति मानते है। बुद्ध ने योग के निपुण की मौत पर मुक्ति पाने की पुराने ब्रह्मिनिक अन्योक्त ("उत्तेजनाहीन होना, क्षणस्थायी होना") को एक नया अर्थ दिया; उन्हें, ऋषि जो जीवन में मुक्त है के नाम से उल्लेख किया गया था।<ref>[73] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 109.</ref> {{seealso|प्राणायाम}} ==== योगकारा बौद्धिक धर्म ==== योगकारा(संस्कृत:"योग का अभ्यास"<ref>[75] ^ [http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm डान लास्थौस: "वोट इस अंड इसंट योगकारा"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131216190312/http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm |date=16 दिसंबर 2013 }}</ref>, शब्द विन्यास योगाचारा, दर्शन और मनोविज्ञान का एक संप्रदाय है, जो [[भारत]] में 4 वीं से 5 वीं शताब्दी मे विकसित किया गया था। योगकारा को यह नाम प्राप्त हुआ क्योंकि उसने एक'' योग'' प्रदान किया, एक रूपरेखा जिससे [[बोधिसत्त्व]] तक पहुँचने का एक मार्ग दिखाया है।<ref>[76] ^ डान लास्थौस. बौद्ध फेनोमेनोलोगी: ए फिलोसोफिकल इन्वेस्टीगेशन ऑफ़ योगकारा बुद्धिस्म अंड दी चेंग वेई-शिह लुन. (रौटलेड्ज) 2002 प्रकाशित. ISBN 0-7007-1186-4.पग 533</ref> ज्ञान तक पहुँचने के लिए यह योगकारा संप्रदाय ''योग'' सिखाता है।<ref name="Simpkins">[77] ^ सरल तिब्बती बौद्ध धर्म: ए गाइड टू तांत्रिक लिविंग, सी अलेक्जेंडर सिम्प्किंस, अन्नेल्लें एम. सिम्प्किंस द्वारा लिखा गया है। 2001 प्रकाशित. टटल प्रकाशन. ISBN 0-8048-3199-8</ref> ==== छ'अन (सिओन/ ज़ेन) बौद्ध धर्म ==== [[ज़ेनो|ज़ेन]] (जिसका नाम संस्कृत शब्द "ध्याना से" उत्पन्न किया गया चीनी "छ'अन" के माध्यम से<ref>[78] ^ दी बुद्धिस्ट त्रडिशन इन इंडिया, भारत और जापान. विलियम थिओडोर डी बारी द्वारा संपादित किया गया है। पन्ने. 207-208. ISBN 0-394-71696-5 - "दी मेडिटेशन स्कूल ने, चीनी में ''"चान"'' नाम से कहते है जो संस्कृत शब्द ''ध्यान'' से लिया गया है, ''पश्चिम'' में जापानी उच्चारण ''ज़ेन'' " से जाना जाता है।</ref>)[[महायान बौद्ध धर्म]] का एक रूप है। बौद्ध धर्म की महायान संप्रदाय योग के साथ अपनी निकटता के कारण विख्यात किया जाता है।<ref name="Heisig"/> पश्चिम में, जेन को अक्सर योग के साथ व्यवस्थित किया जाता है;ध्यान प्रदर्शन के दो संप्रदायों स्पष्ट परिवारिक उपमान प्रदर्शन करते है।<ref>[80] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पेज xviii)</ref> यह घटना को विशेष ध्यान योग्य है क्योंकि कुछ योग प्रथाओं पर ध्यान की ज़ेन बौद्धिक स्कूल आधारित है।[81]योग की कुछ आवश्यक तत्वों सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और विशेष रूप से ज़ेन धर्म को महत्वपूर्ण हैं।<ref name="Knitter">[82] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौली|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पृष्ठ 13)</ref> ==== भारत और तिब्बत के बौद्धिक धर्म ==== योग [[तिब्बती बौद्ध धर्म]] का केंद्र है। न्यिन्गमा परंपरा में, ध्यान का अभ्यास का रास्ता नौ ''यानों'', या वाहन मे विभाजित है, कहा जाता है यह परम व्यूत्पन्न भी है।<ref>[83] ^ ''दी लैयेन्स रोर: अन इन्त्रोदुक्शन टू तंत्र '' चोग्यम त्रुन्ग्पा द्वारा. शम्भाला, 2001 ISBN 1-57062-895-5</ref> अंतिम के छह को "योग यानास" के रूप मे वर्णित किया जाता है, यह है:''क्रिया योग'', ''उप योग (''चर्या'')'', ''योगा याना'', ''[[महायोग|महा योग]]'', ''[[अनुयोग|अनु योग]]'' और अंतिम अभ्यास ''[[अतियोग|अति योग.]]''<ref>[84] ^''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट'' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया। ISBN 1-57062-917-X पन्ना 37-38</ref> सरमा परंपराओं ने''महायोग और अतियोग की अनुत्तारा वर्ग'' से स्थानापन्न करते हुए क्रिया योग, उपा (चर्या) और योग को शामिल किया हैं। अन्य तंत्र योग प्रथाओं में 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास शामिल हैं।<ref>[85] ^ ''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट '' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया।ISBN 1-57062-917-X पन्ना 57</ref> अन्य तंत्र योग प्रथाओं 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास को शामिल हैं। यह न्यिन्गमा परंपरा यंत्र योग का अभ्यास भी करते है। (तिब. ''तरुल खोर''), यह एक अनुशासन है जिसमे सांस कार्य (या प्राणायाम), ध्यानापरणीय मनन और सटीक गतिशील चाल से अनुसरण करनेवाले का ध्यान को एकाग्रित करते है।<ref>[86] ^ ''योगा:दी तिबेतन योगा ऑफ़ मूवमेंट'', चोग्याल नम्खई नोरबू द्वारा लिखा गया है। स्नो लायन, 2008. ISBN 1-55939-308-4</ref>लुखंग मे दलाई लामा के सम्मर मंदिर के दीवारों पर तिब्बती प्राचीन योगियों के शरीर मुद्राओं चित्रित किया जाता है। चांग (1993) द्वारा एक अर्द्ध तिब्बती योगा के लोकप्रिय खाते ने कन्दली (तिब.''तुम्मो'') अपने शरीर में गर्मी का उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहते है कि "यह संपूर्ण तिब्बती योगा की बुनियाद है".<ref>[87] ^ चांग, जी. सी.सी (1993).''तिबेतन योगा.'' न्यू जर्सी: कैरल प्रकाशन समूह. ISBN 0-8065-1453-1, पन्ना.7</ref> चांग यह भी दावा करते है कि तिब्बती योगा [[प्राण|प्राना]] और मन को सुलह करता है, और उसे [[तांत्रिक|तंत्रिस्म]] के सैद्धांतिक निहितार्थ से संबंधित करते है। === जैन धर्म === [[चित्र:Parsva Shatrunjay.jpg|thumb|right|100px|तीर्थंकर पार्स्व यौगिक ध्यान में कयोत्सर्गा मुद्रा में.]] [[चित्र:Kevalajnana.jpg|thumb|175px][[महावीर]] को केवल ज्ञान प्राप्ति मुलाबंधासना मुद्रा में]] दूसरी शताब्दी के जैन ग्रन्थ ''[[तत्त्वार्थसूत्र]]'', के अनुसार मन, वाणी और शरीर सभी गतिविधियों का कुल 'योग' है। <ref>[88] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.1], मनु दोषी (2007) तत्त्वार्थसूत्र के अनुवाद, अहमदाबाद : श्रुत रत्नाकर पी. 102</ref> [[उमास्वामी]] कहते है कि ''[[आस्रव]]'' या कार्मिक प्रवाह का कारण योग है<ref>[89] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> साथ ही- [[रत्नत्रय (जैन)|सम्यक चरित्र]] अर्थात योग नियंत्रण और अन्त में निरोध मुक्ति के मार्ग मे बेहद आवश्यक है। <ref>[90] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> अपनी ''नियमसार '' में, आचार्य [[कुन्दकुन्द]] ने ''योग भक्ति'' का वर्णन- भक्ति से मुक्ति का मार्ग - भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप मे किया है।<ref>[91] ^ नियमासरा [134-40]</ref> आचार्य [[हरिभद्र]] और आचार्य [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचन्द्र]] के अनुसार पाँच प्रमुख उल्लेख संन्यासियों और 12 समाजिक लघु प्रतिज्ञाओं योग के अंतर्गत शामिल है। इस विचार के वजह से कही इन्डोलोज़िस्ट्स जैसे प्रो रॉबर्ट जे ज़्यीडेन्बोस ने जैन धर्म के बारे मे यह कहा कि यह अनिवार्य रूप से योग सोच की एक योजना है जो एक पूर्ण धर्म के रूप मे बढ़ी हो गयी। <ref>[92] ^ ज्यडेन्बोस, रॉबर्ट. जैनिस्म टुडे अंड इट्स फ्यूचर. मूंछें: मन्या वेर्लग, 2006. पन्ना.66</ref> डॉ॰ हेंरीच ज़िम्मर संतुष्ट किया कि योग प्रणाली को पूर्व आर्यन का मूल था, जिसने वेदों की सत्ता को स्वीकार नहीं किया और इसलिए जैन धर्म के समान उसे एक विधर्मिक सिद्धांतों के रूप में माना गया था <ref>[93] ^ ज़िम्मर, हेंरीच (एड.) जोसेफ कैम्पबेल: फिलोसोफीस ऑफ़ इंडिया.न्यू यॉर्क: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 1969 पन्ना.60</ref> जैन शास्त्र, जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] को ध्यान मे ''[[पद्मासन|पद्मासना]]'' या ''कायोत्सर्ग '' योग मुद्रा में दर्शाया है। ऐसा कहा गया है कि महावीर को'' मुलाबंधासना'' स्थिति में बैठे ''[[केवल ज्ञान|केवला ज्ञान]]'' "आत्मज्ञान" प्राप्त हुआ जो अचरंगा सूत्र मे और बाद में [[कल्पसूत्र]] मे पहली साहित्यिक उल्लेख के रूप मे पाया गया है।<ref>[94] ^ क्रिस्टोफर चप्पल. (1993) नॉनविलँस टू अनिमल्स, अर्थ, अंड सेल्फ इन एशियन त्रदिशन्स.न्यू यॉर्क: सनी प्रेस, 1993 पन्ना. 7</ref> पतंजलि योगसूत्र के पांच यामा या बाधाओं और जैन धर्म के पाँच प्रमुख प्रतिज्ञाओं में अलौकिक सादृश्य है, जिससे जैन धर्म का एक मजबूत प्रभाव का संकेत करता है। <ref>[95] ^ ज्य्देंबोस (2006) पन्ना.66</ref><ref>[96] ^ विवियन वोर्थिन्ग्तन द्वारा ए हिस्ट्री ऑफ़ योगा (1982) रौटलेड्ज ISBN 0-7100-9258-X पन्ना. 29.</ref> लेखक विवियन वोर्थिंगटन ने यह स्वीकार किया कि योग दर्शन और जैन धर्म के बीच पारस्परिक प्रभाव है और वे लिखते है:"योग पूरी तरह से जैन धर्म को अपना ऋण मानता है और विनिमय मे जैन धर्म ने योग के साधनाओं को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लिया". <ref>[97] ^ विवियन वोर्थिंगटन (1982) पन्ना. 35</ref> सिंधु घाटी मुहरों और इकोनोग्रफी भी एक यथोचित साक्ष्य प्रदान करते है कि योग परंपरा और जैन धर्म के बीच सांप्रदायिक सदृश अस्तित्व है। <ref>[98] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, panna.6</ref> विशेष रूप से, विद्वानों और पुरातत्वविदों ने विभिन्न तिर्थन्करों की मुहरों में दर्शाई गई योग और ध्यान मुद्राओं के बीच समानताओं पर टिप्पणी की है: [[ऋषभदेव]] की "कयोत्सर्गा" मुद्रा और [[महावीर]] के ''मुलबन्धासन'' मुहरों के साथ ध्यान मुद्रा में पक्षों में सर्पों की खुदाई [[पार्श्वनाथ]] की खुदाई से मिलती जुलती है। यह सभी न केवल सिंधु घाटी सभ्यता और जैन धर्म के बीच कड़ियों का संकेत कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न योग प्रथाओं को जैन धर्म का योगदान प्रदर्शन करते है।<ref>[99] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, पप.6-9</ref> ===== जैन सिद्धांत और साहित्य के सन्दर्भ ===== {{मुख्य|जैन धर्म में योग}} प्राचीनतम के जैन धर्मवैधानिक साहित्य जैसे आचाराङ्गसूत्र और नियमसार, तत्त्वार्थसूत्र आदि जैसे ग्रंथों ने साधारण व्यक्ति और तपस्वीयों के लिए जीवन का एक मार्ग के रूप में योग पर कई सन्दर्भ दिए है। बाद के ग्रंथ, जिसमे योग की जैन अवधारणा विस्तारपूर्वक दी गयी है, वह निम्नानुसार हैं: * पूज्यपाद (5 वीं शताब्दी ई०) ** ''इष्टोपदेश '' * आचार्य हरिभद्र सूरी (8 वीं शताब्दी ई०) ** '' योगबिन्दु '' ** ''योगद्रिस्तिसमुच्काया '' ** ''योगशतक '' ** ''योगविंशिका '' * आचार्य जोंदु (८वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसार'' * आचार्य हेमचन्द्र (११वीं सदी ई०) ** ''योगशास्त्र '' * आचार्य अमितगति (११वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसारप्राभृत '' === इस्लाम === [[सूफ़ीवाद|सूफी]] संगीत के विकास में भारतीय योग अभ्यास का काफी प्रभाव है, जहाँ वे दोनों शारीरिक मुद्राओं ([[आसन]]) और श्वास नियंत्रण ([[प्राणायाम]]) को अनुकूलित किया है।<ref>[100] ^ [http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc सीटूएटिंग सुफ्फिस्म अंड योगा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090327090930/http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc |date=27 मार्च 2009 }}</ref> 11 वीं शताब्दी के प्राचीन समय में प्राचीन भारतीय योग पाठ, अमृतकुंड, ("अमृत का कुंड") का अरबी और फारसी भाषाओं में अनुवाद किया गया था।<ref>[101] ^ [http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml केरोलिना संगोष्ठी तुलनात्मक इस्लामी अध्ययन] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090825225459/http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml |date=25 अगस्त 2009 }} पर</ref> सन 2008 में मलेशिया के शीर्ष [[इस्लाम|इस्लामिक]] समिति ने कहा जो [[मुस्लिम|मुस्लमान]] योग अभ्यास करते है उनके खिलाफ एक [[फतवा]] लागू किया, जो कानूनी तौर पर गैर बाध्यकारी है, कहते है कि योग में "[[हिंदु|हिंदू]] आध्यात्मिक उपदेशों" के तत्वों है और इस से ईश-निंदा हो सकती है और इसलिए यह [[हराम]] है। मलेशिया में मुस्लिम योग शिक्षकों ने "अपमान" कहकर इस निर्णय की आलोचना कि.<ref name="cnn.com">[102] ^ [http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html श्रेय इस्लामी समुदाय: योगा मुसलमानों के लिए नहीं है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081205182658/http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html|date=5 दिसंबर 2008}} - [[सी एन एन]]</ref> मलेशिया में महिलाओं के<ref name="cnn.com"/> समूह, ने भी अपना निराशा व्यक्त की और उन्होंने कहा कि वे अपनी योग कक्षाओं को जारी रखेंगे.<ref>[103] ^ [http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110622072723/http://thestar.com.my/news/story.asp?file=%2F2008%2F11%2F23%2Fnation%2F2625368&sec=nation |date=22 जून 2011 }}</ref> इस फतवा में कहा गया है कि शारीरिक व्यायाम के रूप में योग अभ्यास अनुमेय है, पर धार्मिक मंत्र का गाने पर प्रतिबंध लगा दिया है,<ref>[104] ^ [http://www.google.com/hostednews/ap/article/ALeqM5gkepLWOtoRT7YiTChjyOPSjkVtzAD94MIV500 "मलेशिया के नेता: योगा मंत्र के बिना योग मुसलमानों के लिए ठीक है,"]{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }} एसोसिएटेड प्रेस</ref> और यह भी कहते है कि भगवान के साथ मानव का मिलाप जैसे शिक्षण इस्लामी दर्शन के अनुरूप नहीं है।<ref>[105] ^ [http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090106003351/http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 |date=6 जनवरी 2009 }}</ref> इसी तरह, उलेमस की परिषद, इंडोनेशिया में एक इस्लामी समिति ने योग पर प्रतिबंध, एक [[फतवा|फतवे]] द्वारा लागू किया क्योंकि इसमें "हिंदू तत्व" शामिल थे।<ref>[106] ^ [http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090217135238/http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm |date=17 फ़रवरी 2009 }}</ref> किन्तु इन फतवों को [[दारुल उलूम देवबन्द|दारुल उलूम देओबंद]] ने आलोचना की है, जो [[देवबन्द|देओबंदी]] इस्लाम का भारत में शिक्षालय है।<ref>{{Cite web |url=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |title=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |access-date=19 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090822195937/http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |archive-date=22 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> सन 2009 मई में, तुर्की के निदेशालय के धार्मिक मामलों के मंत्रालय के प्रधान शासक अली बर्दाकोग्लू ने योग को एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में घोषित किया- योग के संबंध में कुछ आलोचनाये जो इसलाम के तत्वों से मेल नहीं खातीं.<ref>[108] ^ http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111011035805/http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 |date=11 अक्तूबर 2011 }}</ref> === ईसाई धर्म === सन 1989 में, [[वैटिकन]] ने घोषित किया कि ज़ेन और योग जैसे पूर्वी ध्यान प्रथाओं "शरीर के एक गुट में बदज़ात" हो सकते है। वैटिकन के बयान के बावजूद, कई [[कैथोलिक धर्म|रोमन कैथोलिक]] उनके आध्यात्मिक प्रथाओं में योग , बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के तत्वों का प्रयोग किया है।<ref>{{cite news|url=http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9C0CE1D61531F934A35752C0A966958260&sec=&spon=|title=Trying to Reconcile the Ways of the Vatican and the East |last=Steinfels|first=Peter|date=1990-01-07|work=New York Times|accessdate=2008-12-05}}</ref> === तंत्र === {{Main|तंत्र}} तंत्र एक प्रथा है जिसमें उनके अनुसरण करनेवालों का संबंध साधारण, धार्मिक, सामाजिक और तार्किक वास्तविकता में परिवर्तन ले आते है। [[तांत्रिक]] अभ्यास में एक व्यक्ति वास्तविकता को [[माया (भ्रम)|माया]], भ्रम के रूप में अनुभव करता है और यह व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होता है।<ref name="UCP">[112] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म: हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट अई लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 313</ref>[[हिंदुत्व|हिन्दू धर्म]] द्वारा प्रस्तुत किया गया निर्वाण के कई मार्गों में से यह विशेष मार्ग तंत्र को [[भारत में धर्म|भारतीय धर्मों]] के प्रथाओं जैसे योग, ध्यान, और सामाजिक [[संन्यास]] से जोड़ता है, जो सामाजिक संबंधों और विधियों से अस्थायी या स्थायी वापसी पर आधारित हैं।<ref name="UCP"/> तांत्रिक प्रथाओं और अध्ययन के दौरान, छात्र को ध्यान तकनीक में, विशेष रूप से [[चक्र|चक्र ध्यान]], का निर्देश दिया जाता है। जिस तरह यह ध्यान जाना जाता है और तांत्रिक अनुयायियों एवं योगियों के तरीको के साथ तुलना में यह तांत्रिक प्रथाओं एक सीमित रूप में है, लेकिन सूत्रपात के पिछले ध्यान से ज्यादा विस्तृत है। इसे एक प्रकार का [[कुंडलिनी योग]] माना जाता है जिसके माध्यम से ध्यान और पूजा के लिए "हृदय" में स्थित चक्र में देवी को स्थापित करते है।<ref>[114] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म:हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट मैं लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 317</ref> ==भारत के प्रसिद्ध योगगुरु== वैसे तो योग हमेशा से हमारी प्राचीन धरोहर रही है। समय के साथ-साथ योग विश्व प्रख्यात तो हुआ ही है साथ ही इसके महत्व को जानने के बाद आज योग लोगों की दिनचर्या का अभिन्न अंग भी बन गया है। लेकिन योग के प्रचार-प्रसार में विश्व प्रसिद्ध योगगुरुओं का भी योगदान रहा है, जिनमें से '''अयंगार योग''' के संस्थापक [[बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार|बी के एस अयंगर]], [[स्वामी शिवानंद]] और योगगुरु [[बाबा रामदेव|रामदेव]] का नाम अधिक प्रसिद्ध है।<ref>{{Cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402115555/http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बीकेएस अंयगर=== {{मुख्य|बी के एस अयंगार}} अयंगर को विश्व के अग्रणी योग गुरुओं में से एक माना जाता है और उन्होंने योग के दर्शन पर कई किताबें भी लिखी थीं, जिनमें 'लाइट ऑन योगा', 'लाइट ऑन प्राणायाम' और 'लाइट ऑन द योग सूत्राज ऑफ पतंजलि' शामिल हैं। <ref>{{Cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402155843/http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> अयंगर का जन्‍म 14 दिसम्‍बर 1918 को बेल्‍लूर के एक गरीब परिवार में हुआ था। बताया जाता है कि अयंगर बचपन में काफी बीमार रहा करते थे। ठीक नहीं होने पर उन्‍हें योग करने की सलाह दी गयी और तभी से वह योग करने लगे। अयंगर को 'अयंगर योग' का जन्‍मदाता कहा जाता है। उन्होंने इस योग को देश-दुनिया में फैलाया। सांस की तकलीफ के चलते 20 अगस्त 2014 को उनका निधन हो गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402091707/http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बाबा रामदेव=== {{मुख्य|बाबा रामदेव}} बाबा रामदेव भारतीय योग-गुरु हैं, उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया है। [[रामदेव]] स्वयं जगह-जगह जाकर योग शिविरों का आयोजन करते हैं। ==योग दिवस== {{main|अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस}} 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया। दिल्ली में एक साथ ३५९८५ लोगों ने योगाभ्यास किया।इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के एक साथ योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 जून 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150625055155/http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |archive-date=25 जून 2015 |url-status=live }}</ref> योग का उद्देश्य योग के अभ्यास के कई लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है।लोगों के स्वास्थ्य पर योग के महत्व और प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 जून को योग का अभ्यास किया जाता है। शब्द ‘योग‘ संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जुड़ना या एकजुट होना। ==योग का महत्व== वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग संतोष पाने के लिए योग करते हैं। योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्‍तिष्‍क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्‍मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है। अगर आप इसका नियमित अभ्यास करते हैं, तो इससे धीरे-धीरे आपका तनाव भी दूर हो सकता है। == योग का लक्ष्य == योग का लक्ष्य स्वास्थ्य में सुधार से लेकर ''[[मोक्ष]] (आत्मा को [[परमेश्वर]] का अनुभव)'' प्राप्त करने तक है।<ref>[115] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> जैन धर्म, [[अद्वैत वेदांत]] के [[वेदांत|मोनिस्ट]] संप्रदाय और [[शैव सम्प्रदाय|शैव संप्रदाय]] के अन्तर में योग का लक्ष्य मोक्ष का रूप लेता है, जो सभी सांसारिक कष्ट एवं जन्म और मृत्यु के चक्र [[संसार|(संसार)]] से मुक्ति प्राप्त करना है, उस क्षण में परम [[ब्राह्मण|ब्रह्मण]] के साथ समरूपता का एक एहसास है। महाभारत में, योग का लक्ष्य [[ब्रह्मा]] के दुनिया में प्रवेश के रूप में वर्णित किया गया है, ब्रह्म के रूप में, अथवा [[आत्मा|आत्मन]] को अनुभव करते हुए जो सभी वस्तुओं मे व्याप्त है।<ref>जकोब्सन, पी. 9</ref> मीर्चा एलीयाडे योग के बारे में कहते हैं कि यह सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है, एक आध्यात्मिक तकनीक भी है। <ref>मीर्चा ईटु, मीर्चा एलीयाडे, बुखारेस्ट, कल की रोमानिया का प्रकाशन संस्था, दो हज़ार छह, नब्बे का पृष्ठ। (ISBN 973-725-715-4)</ref> [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] लिखते हैं कि समाधि में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं: वितर्क, विचार, आनंद और अस्मिता।<ref>सर्पवल्ली राधाकृष्णन, भारतीय दर्शन, दूसरा खंड, लंडन, जॉर्ज एलन और उइंन का प्रकाशन संस्था, एक हजार नौ सौ छियासठ, तीन सौ अस्सी का पृष्ठ। (ISBN 978-019-569-841-1)</ref> ==योग के प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतंजलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतंजलि]] || ४०० ई. पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरानी संस्कृत पाण्डुलिपि ९वीं-१०वीं शताब्दी की है। |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११वीं शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११वीं-१२वीं शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४वीं-१५वीं शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६वीं शताब्दी |- | '''[[योगसारसंग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६वीं शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५वीं-१६वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७वीं शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७वीं शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० इ. पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० इ.पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७वीं शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८वीं शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई. / यह हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ी बोली की मिलीजुली भाषा में रचित है<br> और शब्दावली संस्कृत के अत्यन्त निकट है। |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०वीं शताब्दी ; हिन्दी में लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसंबर 2022 |archive-date=31 दिसंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१वीं शताब्दी |} ==इन्हें भी देखें== *[[योग का इतिहास]] *[[योग दर्शन]] *[[अष्टांग योग]] *[[योगसूत्र]] *[[हठयोग]] *[[जैन धर्म में योग]] *[[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]] *[[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मानते हैं कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञान का दूसरा नाम है। == बाहरी कड़ियाँ == * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् की इस साइट पर योग के अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध के लिये) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == आगे पढ़ें == {{wiktionary}} * {{cite book |last=Apte |first=Vaman Shivram |authorlink= |author2= |title=The Practical Sanskrit Dictionary |year=1965 |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |location=Delhi |isbn=81-208-0567-4 }}(चौथा संशोधित और विस्तृत संस्करण)। * {{cite book | last = Patañjali | first = | authorlink = Patañjali | author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts | year = 2001 | location = | pages = | url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading | doi = | id = | isbn = | access-date = 19 अगस्त 2009 | archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading | archive-date = 25 अगस्त 2011 | url-status = dead }} * चांग, जी सी सी (1993)। तिब्बती योग. न्यू जर्सी: कैरल पब्लिशिंग ग्रुप . ISBN 0-8065-1453-1 * {{cite book |series= |last=Chatterjee |first=Satischandra |authorlink= |author2=Datta, Dhirendramohan |title=An Introduction to Indian Philosophy |year=1984 |publisher=University of Calcutta |location=Calcutta |edition=Eighth Reprint Edition }} * Donatelle, रेबेका जे हैल्थ: दी बेसिक्स. 6. एड. सैन फ्रांसिस्को: पियर्सन एडूकेशन, इंक 2005. * फयूएर्स्तें, जोर्ज . दी शम्भाला गाइड टु योग. 1. एड. बोस्टन एंड लन्डन: शम्भाला पुब्लिकेशन्स 1996. * {{cite book | last = Flood | first = Gavin | year = 1996 | title = An Introduction to Hinduism | publisher = Cambridge University Press | location = Cambridge | isbn = 0-521-43878-0 | url-access = registration | url = https://archive.org/details/introductiontohi0000floo }} * {{cite book | last = Gambhirananda | first = Swami | year = 1998 | title = Madhusudana Sarasvati Bhagavad_Gita: With the annotation Gūḍhārtha Dīpikā| publisher = [[Advaita Ashrama]] Publication Department| location = Calcutta | isbn=81-7505-194-9}} * {{cite book | last = Harinanda | first = Swami |author2= | year = | title = Yoga and The Portal | publisher = Jai Dee Marketing| location = | isbn=0978142950}} * {{cite book | last = Jacobsen | first = Knut A. (Editor) |author2= Larson, Gerald James (Editor)| year = 2005 | title = Theory And Practice of Yoga: Essays in Honour of Gerald James Larson | publisher = Brill Academic Publishers| location = | isbn=9004147578}} (स्टडीज इन दी हिस्ट्री ऑफ़ रिलिजनस, 110) * {{cite book |last=Keay |first=John|authorlink= |author2= |title=India: A History |year=2000 |publisher=Grove Press |location=New York |isbn=0-8021-3797-0 }} * मार्शल, जॉन (1931)। ''मोहेंजोदारो एंड दी इन्दुस सिविलैज़ेशन:वर्ष 1922-27 के बीच मोहेंजोदारो में भारत सरकार द्वारा किए एक सरकारी खाता पुरातत्व खुदाई के होने के नाते.'' दिल्ली:इन्दोलोगिकल बुक हाउस. * {{cite book |last=Michaels |first=Axel|authorlink= |author2= |title=Hinduism: Past and Present |url=https://archive.org/details/hinduismpastpres0000mich |year=2004 |publisher=Princeton University Press |location=Princeton, New Jersey|isbn=0-691-08953-1 }} * [[धर्म मित्रा|मित्रा, धर्म श्री]]. आसन: 608 योगा मुद्रा. 1. एड. कैलिफोर्निया: नई वर्ल्ड लाइब्रेरी 2003. * {{cite book | last = Müller | first = Max | authorlink= Max Müller |year = 1899 | title = Six Systems of Indian Philosophy; Samkhya and Yoga, Naya and Vaiseshika| publisher = Susil Gupta (India) Ltd.| location = Calcutta | isbn=0-7661-4296-5}}[129] ''पुस्तक का नया संस्करण; मूलतः यह दी सिक्स सिस्टम्स ऑफ़ इंडियन फिलोसोफी के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।'' * {{cite book |last=Possehl |first=Gregory|authorlink=Gregory Possehl |author2= |title=The Indus Civilization: A Contemporary Perspective |url=https://archive.org/details/induscivilizatio0000poss |year=2003 |publisher=AltaMira Press |location= |isbn=978-0759101722 }} * {{cite book |series= |last=Radhakrishnan |first=S. |authorlink=Sarvepalli Radhakrishnan |author2=Moore, CA |title=A Sourcebook in Indian Philosophy |year=1967 |publisher=Princeton |location= |isbn=0-691-01958-4 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/sourcebookinindi00radh }} * सरस्वती, स्वामी सत्यानन्दा. नवंबर 2002 (12 वें संस्करण)। "आसन प्राणायाम मुद्रा बंधा" ISBN 81-86336-14-1 * {{cite book |series= |last=Taimni |first=I. K. |authorlink= |author2=|title=The Science of Yoga |url=https://archive.org/details/scienceofyogayog00unse|year=1961 |publisher=The Theosophical Publishing House |location=Adyar, भारत |isbn=81-7059-212-7 }} * उशाराबुध, आर्य पंडित. फिलोसोफी ऑफ़ हठ योगा. 2. एड. पेन्नीसिलवेनिया : हिमालयन इंस्टीट्युत प्रेस 1977, 1985. * {{cite book |series= |last=Yogshala |first=Ekam Drishti |authorlink=Ekam Drishti Yogshala |author2=|title=Yoga And Its Role In Stress Management: How To Become Calmer And Focused |year=2021 |location=Rishikesh, India }} * {{cite book |series= |last=Vivekananda |first=Swami |authorlink=Swami Vivekananda |author2=|title=Raja Yoga |year=1994 |publisher=[[Advaita Ashrama]] Publication Department |location=Calcutta |isbn=81-85301-16-6 }} 21 रिप्रिंट एडिशन * {{cite book |series= |last=Zimmer |first=Heinrich |authorlink=Heinrich Zimmer |author2=|title=Philosophies of India |year=1951 |publisher=Princeton University Press |location=New York, New York |isbn=0-691-01758-1 }} बोल्लिंगें सीरीज XXVI; जोसेफ कैम्बेल द्वारा संपादित. * {{cite book |series= |last=Weber|first=Hans-Jörg L. |authorlink=Hans-Jörg L. Weber |author2=|title=Yogalehrende in Deutschland: eine humangeographische Studie unter besonderer Berücksichtigung von netzwerktheoretischen, bildungs- und religionsgeographischen Aspekten |year=2007 |publisher=University of Heidelberg |location=Heidelberg |}} https://web.archive.org/web/20090826191058/http://archiv.ub.uni-heidelberg.de/savifadok/volltexte/2008/121/ {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिंदू दार्शनिक अवधारणाएँ]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] e3dzub0jin53dlwppzo4p05s15bdhd3 6536945 6536944 2026-04-06T10:56:03Z Ravinder Jugran 849799 /* व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार */ छोटा सा सुधार किया। 6536945 wikitext text/x-wiki {{multiple image | footer = १२वीं-१३वीं शताब्दी के एक भारतीय चित्र में [[योगी]] तथा [[योगिनी]] | image1 = A yogi seated in a garden.jpg | width1 = 140 | alt1 = A male yogi | image2 = Female Ascetics (Yoginis) LACMA M.2011.156.4 (1 of 2).jpg | width2=160 | alt2 = Two female yoginis }} [[चित्र:Sivakempfort.jpg|thumb|right|200px|[[पद्मासन]] मुद्रा में यौगिक ध्यानस्थ [[शिव]]-मूर्ति]] '''योग''' ({{langx|sa|योगः}}) प्राचीन भारतीय ऋषिमुनियों और तत्त्ववेत्ताओं द्वारा प्रतिपादित एक विशिष्ट आध्यात्मिक प्रक्रिया है। [[पतंजलि]] ने 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' को योग कहा है। [[वेद व्यास|व्यास]] ने [[समाधि]] को ही योग माना है। [[योगवासिष्ठ]] के अनुसार योग वह युक्ति है जिसके द्वारा संसार सागर से पार जाया जा सकता है। योग के कई सारे अंग और प्रकार होते हैं, जिनके जरिए हमें ध्यान, समाधि और मोक्ष तक पहुंचना होता हैै। 'योग' शब्द तथा इसकी प्रक्रिया और धारणा [[हिन्दू धर्म]], [[जैन धर्म]] और [[बौद्ध धर्म]] में [[ध्यान]] प्रक्रिया से सम्बन्धित है। योग शब्द भारत से बौद्ध पन्थ के साथ [[चीन]], [[जापान]], [[तिब्बत]], दक्षिण पूर्व एशिया और [[श्री लंका|श्रीलंका]] में भी फैल गया है और इस समय सारे सभ्य जगत्‌ में लोग इससे परिचित हैं। सिद्धि के बाद पहली बार [[११]] दिसम्बर [[२०१४]] को [[संयुक्त राष्ट्रसंघ|संयुक्त राष्ट्र महासभा ]] ने प्रत्येक वर्ष [[२१]] जून को [[विश्व योग दिवस]] के रूप में मान्यता दी है। हिन्दू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म में योग के अनेक सम्प्रदाय हैं, योग के विभिन्न लक्ष्य हैं तथा योग के अलग-अलग व्यवहार हैं।<ref>Denise Lardner Carmody, John Carmody (1996), Serene Compassion. Oxford University Press US. p. 68.</ref><ref> Stuart Ray Sarbacker, Samādhi: The Numinous and Cessative in Indo-Tibetan Yoga. SUNY Press, 2005, pp. 1–2.</ref><ref> तत्त्वार्थसूत्र [6.1], देखें मनु दोषी (2007) Translation of Tattvarthasutra, Ahmedabad: Shrut Ratnakar p. 102</ref> परम्परागत योग तथा इसका आधुनिक रूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। सबसे पहले 'योग' शब्द का उल्लेख [[ऋग्वेद]] में मिलता है। इसके बाद अनेक उपनिषदों में इसका उल्लेख आया है। [[कठोपनिषद]] में सबसे पहले योग शब्द उसी अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जिस अर्थ में इसे आधुनिक समय में समझा जाता है। माना जाता है कि कठोपनिषद की रचना ईसापूर्व पच्चीसवी और तीसवी शताब्दी ईसापूर्व के बीच के कालखण्ड में हुई थी। [[पतञ्जलि]] का [[योगसूत्र]] योग का सबसे पूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचनाकाल ईसा की प्रथम शताब्दी या उसके आसपास माना जाता है। [[हठ योग]] के ग्रन्थ ९वीं से लेकर ११वीं शताब्दी में रचे जाने लगे थे। इनका विकास [[तन्त्र]] से हुआ। पश्चिमी जगत में "योग" को हठयोग के आधुनिक रूप में लिया जाता है जिसमें शारीरिक फिटनेस, तनाव-शैथिल्य तथा विश्रान्ति (relaxation) की तकनीकों की प्रधानता है। ये तकनीकें मुख्यतः [[आसन|आसनों]] पर आधारित हैं जबकि परम्परागत योग का केन्द्र बिन्दु [[ध्यान]] है और वह सांसारिक लगावों से छुटकारा दिलाने का प्रयास करता है। पश्चिमी जगत में आधुनिक योग का प्रचार-प्रसार भारत से उन देशों में गये गुरुओं ने किया जो प्रायः [[स्वामी विवेकानन्द]] की पश्चिमी जगत में प्रसिद्धि के बाद वहाँ गये थे। == व्युत्पत्ति, परिभाषा एवं प्रकार == '''योग''' शब्द युज् [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|धातु]] में ‘घञ्’ [[प्रत्यय]] लगाने से निष्पन्न होता है। [[धातुपाठ]] में युज्‌ शब्द के तीन अर्थ उपलब्ध होते हैं - समाधि, संयोग, संयमन । लेकिन योगशात्र का प्रतिपादक शब्द निःसन्देह दिवादिगणीय "युज्" धातु से बना है जिसका व्युत्पत्ति लभ्य अर्थ है 'समाधि' । व्यास जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है - "योगः समाधिः"। वैसे ‘योग’ शब्द ‘युजिर योगे’ तथा ‘युज संयमने’ धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। पाणिनीय [[गणपाठ]] में तीन 'युज्' धातुओं का पाठ मिलता हैं - :१) युज् समाधौ – दिवादिगणीय :२) युजिर् योगे – रुधादिगणीय :३) युज् संयमने - चुरादिगणीय '''युज् समाधौ''' – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । समाधि का प्रकृति प्रत्यय अर्थ है, सम्यक् स्थापन। दूसरे अर्थ मे समाधि की सिद्धि के लिए जुड़ना । '''युजिर् योगे''' – रुधादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, जुड़ना, जोड़ना, मेल करना, संयोग करना अर्थात् इस दु:ख रूप संसार से वियोग तथा ईश्वर से संयोग का नाम योग है । भगवद्गीता में भी वर्णन मिलता है - ''तं विद्यात् दुखंसंयोगवियोगं योग संज्ञितम् ।'' (6/23) ''' युज् संयमने''' – चुरादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, संयमन अर्थात् मन का संयम अथवा मन का नियमन । मन को संयमित करना ही योग है। इस प्रकार योग का अर्थ हुआ - "योग साधनाओं को अपनाते हुए मन को नियन्त्रित कर, संयमित कर, आत्मा का परमात्मा से मिलन" । [[परिभाषा]] ऐसी होनी चाहिए जो अव्याप्ति और अतिव्याप्ति दोषों से मुक्त हो, योग शब्द के वाच्यार्थ का ऐसा लक्षण बतला सके जो प्रत्येक प्रसंग के लिये उपयुक्त हो और योग के सिवाय किसी अन्य वस्तु के लिये उपयुक्त न हो। [[भगवद्गीता]] प्रतिष्ठित ग्रन्थ माना जाता है। उसमें योग शब्द का कई बार प्रयोग हुआ है, कभी अकेले और कभी सविशेषण, जैसे बुद्धियोग, सन्यासयोग, कर्मयोग, भक्तियोग। वास्तव में देखा जाए तो भगवद्गीता सम्पूर्ण योगशात्र है, क्योंकि उसके अन्तर्गत संसार, मन, बुद्धि, इन्द्रिय , आत्मा और परमात्मा का क्रम से वर्णन करते हुए अन्तिम सत्य को विभिन्न मार्गों और साधन पद्धति से बताने का उपक्रम किया गया है, इसी लिए गीता के समस्त अट्ठारह अध्यायों के नाम योग शब्द पर ही पूर्ण होते हैं, जैसे- प्रथम विवाद योग, द्वितीय सांख्ययोग , तृतीय कर्मयोग, इसी प्रकार अन्य भी विभूतियोग, भक्तियोग, पुरुषोत्तमयोग, मोक्षसंन्यासयोग आदि सभी अध्याय, दुसरी बात यह भी कि गीता के रचनाकार महर्षि वेदव्यास जी ने स्वयं इस बात को इसी ग्रन्थ के प्रत्येक अभ्यास की समाप्ति पर - ' योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुसंवादे......' कहकर इसे योगशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना है।<ref>श्रीमद्भगवद्गीता</ref> वेदोत्तर काल में [[भक्तियोग]] और [[हठयोग]] नाम भी प्रचलित हो गए हैं। पतंजलि योगदर्शन में 'क्रियायोग' शब्द देखने में आता है। [[पाशुपत योग]] और माहेश्वर योग जैसे शब्दों के भी प्रसंग मिलते है। इन सब स्थलों में योग शब्द के जो अर्थ हैं वह एक दूसरे से भिन्न हैं । [[गीता]] में [[श्रीकृष्ण]] ने एक स्थल पर कहा है ''''योगः कर्मसु कौशलम्'''‌' ( कर्मों में कुशलता ही योग है।) यह वाक्य योग की परिभाषा नहीं है। यदि हम गीता के दुसरे अध्याय के पचासवें उपर्युक्त श्लोक को इस अर्थ में लेंगें कि - " कर्मों में कुशलता ही योग है " - तो हम ऐसा करके अर्थ का अनर्थ कर देंगे, क्योंकि - जैसे चोर भी चोरी करने में कुशल होता है- पर हम उसे योग या योगी नहीं कह सकते है, हत्या, लूट , धोखा , भष्टाचार आदि निन्दनीय कर्म करने में भी अनेक मनुष्य बड़े कुशल होते है और तो और अनेक पकड़े भी नहीं जाते है और न्यायालय की सजा से भी बच निकलते है-- अपने कार्य में इतने निपुण होने के बाद भी , हम उन्हें योग या योगी नहीं कह सकते हैं, अत: यहाँ इस श्लोक का अर्थ यह है कि - ' कर्म में योग ही कुशलता है यानि योग्य कर्म करना ही कर्म की कुशलता है अर्थात- मनुष्य के कल्याण करने की शक्ति योग यानि समत्व- समता भाव में है, मात्र कर्म करने में नहीं, समता के भाव में स्थित होकर कुशल कर्म करने में हैं।<ref>साधक संजीवनी</ref> कुछ विद्वानों का यह मत है कि जीवात्मा और परमात्मा के मिल जाने को योग कहते हैं। इस बात को स्वीकार करने में यह बड़ी आपत्ति खड़ी होती है कि [[बौद्ध धर्म|बौद्धमतावलम्बी]] भी, जो परमात्मा की सत्ता को स्वीकार नहीं करते, योग शब्द का व्यवहार करते और योग का समर्थन करते हैं। यही बात [[सांख्य|सांख्यवादियों]] के लिए भी कही जा सकती है जो ईश्वर की सत्ता को असिद्ध मानते हैं। [[पतञ्जलि]] ने [[योगसूत्र]] में, जो परिभाषा दी है 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः', चित्त की वृत्तियों के निरोध का नाम योग है। इस वाक्य के दो अर्थ हो सकते हैं: चित्तवृत्तियों के निरोध की अवस्था का नाम योग है या इस अवस्था को लाने के उपाय को योग कहते हैं। योग दर्शन के विद्वानों और टीकाकारों के अनुसार महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन के प्रथम तीन सूत्र - " अथ योगानुशासनम् ।। 1।।, योगश्चित्तवृत्तिनिरोध: ।।2।।, तदा द्रष्टु: स्वरूपेऽवस्थानम् ।।3।। - में ही योग के सम्पूर्ण स्वरूप और लक्ष्य को परिभाषित कर दिया है, अर्थात- योग विषय की शिक्षा देने वाले ग्रंथ का आरम्भ ; योग का स्वरूप, चित्त में उत्पन्न होने वाली वृत्तियों को रुक जाना यानि शमन हो जाना ; ऐसा होने से दृष्टा यानि साधक अपने स्वरूप में यानि पुरुष शुद्धचेतन रूप में स्थित हो जाता है, जो कि योग का फल है।<ref>पातञ्जलयोगप्रदीप, समाधिपाद, सूत्र- 1,2,3, पृष्ठ- 139,146,153</ref> परन्तु इस परिभाषा पर कई विद्वानों को आपत्ति है। उनका कहना है कि चित्तवृत्तियों के प्रवाह का ही नाम चित्त है। पूर्ण निरोध का अर्थ होगा चित्त के अस्तित्व का पूर्ण लोप, चित्ताश्रय समस्त स्मृतियों और संस्कारों का निःशेष हो जाना। यदि ऐसा हो जाए तो फिर समाधि से उठना संभव नहीं होगा। क्योंकि उस अवस्था के सहारे के लिये कोई भी संस्कार बचा नहीं होगा, प्रारब्ध दग्ध हो गया होगा। निरोध यदि संभव हो तो [[श्रीकृष्ण]] के इस वाक्य का क्या अर्थ होगा? ''योगस्थः कुरु कर्माणि'', योग में स्थित होकर कर्म करो। विरुद्धावस्था में कर्म हो नहीं सकता और उस अवस्था में कोई संस्कार नहीं पड़ सकते, स्मृतियाँ नहीं बन सकतीं, जो समाधि से उठने के बाद कर्म करने में सहायक हों। संक्षेप में आशय यह है कि योग के शास्त्रीय स्वरूप, उसके दार्शनिक आधार को सम्यक्‌ रूप से समझना बहुत सरल नहीं है। संसार को मिथ्या माननेवाला [[अद्वैत वेदान्त|अद्वैतवादी]] भी निदिध्याह्न के नाम से उसका समर्थन करता है। अनीश्वरवादी सांख्य विद्वान भी उसका अनुमोदन करता है। [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] ही नहीं, [[इस्लाम|मुस्लिम]] [[सूफ़ी]] और [[ईसाई]] मिस्टिक भी किसी न किसी प्रकार अपने संप्रदाय की मान्यताओं और दार्शनिक सिद्धांतों के साथ उसका सामंजस्य स्थापित कर लेते हैं। इन विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं में किस प्रकार ऐसा समन्वय हो सकता है कि ऐसा धरातल मिल सके जिस पर योग की भित्ति खड़ी की जा सके, यह बड़ा रोचक प्रश्न है परंतु इसके विवेचन के लिये बहुत समय चाहिए। यहाँ उस प्रक्रिया पर थोड़ा सा विचार कर लेना आवश्यक है जिसकी रूपरेखा हमको पतंजलि के सूत्रों में मिलती है। थोड़े बहुत शब्दभेद से यह प्रक्रिया उन सभी समुदायों को मान्य है जो योग के अभ्यास का समर्थन करते हैं। ===परिभाषा=== *(१) [[योगसूत्र|पातञ्जल योग दर्शन]] के अनुसार - '''योगश्चित्तवृतिनिरोधः''' (1/2) अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है। *(२) [[सांख्य दर्शन]] के अनुसार - '''पुरुषप्रकृत्योर्वियोगेपि योगइत्यमिधीयते।''' अर्थात् पुरुष एवं प्रकृति के पार्थक्य को स्थापित कर पुरुष का स्व स्वरूप में अवस्थित होना ही योग है। *(३) [[विष्णुपुराण]] के अनुसार - '''योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने''' अर्थात् जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है। *(४) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते''' (2/48) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। *(५) [[भगवद्गीता]] के अनुसार - '''तस्माद्दयोगाययुज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्''' अर्थात् कर्त्तव्य कर्म बन्धक न हो, इसलिए निष्काम भावना से अनुप्रेरित होकर कर्त्तव्य करने का कौशल योग है। *(६) [[आचार्य हरिभद्र]] के अनुसार - '''मोक्खेण जोयणाओ सव्वो वि धम्म ववहारो जोगो''' अर्थात् [[मोक्ष]] से जोड़ने वाले सभी व्यवहार योग हैं। *(७) [[बौद्ध धर्म]] के अनुसार - '''कुशल चितैकग्गता योगः''' अर्थात् कुशल चित्त की एकाग्रता योग है, -- इसमें कुशल चित्तका भाव यह है कि-- शुभ कर्म, अच्छे कर्म, पूण्य कर्म- पाप ,लोभ ,घृणा, द्वेष, क्रोध, काम ( कामना), मार ( प्रलोभन) आदि राग - द्वेष से रहित कर्म करना अर्थात कुशल कर्म करने से - चित्तकी स्फटिकमणी की भाँति शुद्ध, शान्त, निर्मल अवस्था का हो जाना ही कुशल चित्त है। ===योग के प्रकार=== योग की उच्चावस्था [[समाधि]], [[मोक्ष]], [[कैवल्य]] आदि तक पहुँचने के लिए अनेकों साधकों ने जो साधन अपनाये उन्हीं साधनों का वर्णन योग ग्रन्थों में समय समय पर मिलता रहा। उसी को 'योग के प्रकार' से जाना जाने लगा। योग की प्रामाणिक पुस्तकों में [[शिवसंहिता]] तथा [[गोरक्षशतक]] में योग के चार प्रकारों का वर्णन मिलता है - : ''मंत्रयोगों हष्ष्चैव लययोगस्तृतीयकः। '' : ''चतुर्थो राजयोगः'' (शिवसंहिता , 5/11) : ''मंत्रो लयो हठो राजयोगन्तर्भूमिका क्रमात् '' : ''एक एव चतुर्धाऽयं महायोगोभियते॥'' (गोरक्षशतकम् ) उपर्युक्त दोनों श्लोकों से योग के प्रकार हुए : मंत्रयोग, हठयोग लययोग व राजयोग। ====मंत्रयोग==== '''{{मुख्य|मन्त्र योग}}''' '[[मंत्र]]' का समान्य अर्थ है- 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः'। मन को त्राय (पार कराने वाला) मंत्र ही है। मन्त्र योग का सम्बन्ध मन से है, मन को इस प्रकार परिभाषित किया है- मनन इति मनः। जो मनन, चिन्तन करता है वही मन है। मन की चंचलता का निरोध मंत्र के द्वारा करना मंत्र योग है। मंत्र योग के बारे में योगतत्वोपनिषद में वर्णन इस प्रकार है- : ''योग सेवन्ते साधकाधमाः।'' ( अल्पबुद्धि साधक मंत्रयोग से सेवा करता है अर्थात मंत्रयोग उन साधकों के लिए है जो अल्पबुद्धि है।) मंत्र के जप उच्चारण से एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगें पैदा होती है जो कि जप करते समय शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालता है। मंत्र में साधक जप का प्रयोग करता है, मंत्र जप में तीन घटकों का काफी महत्व है, वें तीन घटक हैं- उच्चारण, लय व ताल। तीनों का सही अनुपात मंत्र शक्ति को बढ़ा देता है। मंत्रजप मुख्यरूप से चार प्रकार से किया जाता है। : (1) वाचिक (2) मानसिक (3) उपांशु (4) अजप्पा । * [[वाचिक जप]] - जिसे [[वैखरी]] जप भी कहते है, यह जप [[साधना]] की प्रारंभिक अवस्था है, जिसमें साधक अपने मुँख से उच्च स्वर से उच्चारण करता हुआ- मन्त्र का जप करता है, ऐसा करने से साधक बाहरी विक्षेपण , ध्वनियों से विचलित नहीं होता है। * [[उपांशु जप]] - यह जप की वैखरी जप से श्रेष्ठ अवस्था है । इसमे साधक बिना उच्चारण किए हुए मंत्र का जप - केवल फुसफुसाहट यानि केवल होठों को हिलाते हुए जप करता है ,जिससे कोई ध्वनी नहीं निकलती है परन्तु साधक को ही जप ध्वनी अनुभव होती है। * [[मानसिक जप]] - यह जप की और अधिक श्रेष्ठ अवस्था है। इसमें साधक बिना ध्वनी किए ,बिना होठ हिलाए , केवल मन ही मन से मन्त्र जपता रहता है, यह जप की शक्तिशाली विधि है। * [[अजप्पा जप]] - यह जप की सबसे श्रेष्ठ अवस्था है, इसमें साधक अपने आते - जाते श्वास को मंत्र के साथ संयुक्त कर लेता है और यह जप 24 घण्टे निरन्तर चलता रहता है, जो कि जप योग साधना को सफल करता है।<ref>जपयोग, दिव्य जीवन संघ</ref> ====हठयोग==== '''{{मुख्य|हठयोग}}''' हठ का शाब्दिक अर्थ हठपूर्वक किसी कार्य को करने से लिया जाता है। किसी भी कार्य के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हठी हो जाना ,उसे पूरा करने की ठान लेना, चाहे जैसी भी अनुकूल या प्रतिकूल परिस्थितियाँ आएँ। परन्तु योग के सम्बंध में इसका स्वरूप विस्तार व गहराई को धारण किए हुए है। यह योग विद्या की वह पद्धति जिसमें - योगी साधना का अभ्यास करता हुआ, आनन्द के अथाह सागर में डुबकी लगाकर आध्यात्म की अमूल्य निधि को निकाल लाने में सफल होता है - अर्थात योग सिद्धि प्राप्त करने के समान है।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> इस योग धारा का प्रथम प्रवाह आदिनाथ के मुखारबिन्द से माना जाता है, यहाँ आदिनाथ भगवान शिव का ही एक नाम है, जिन्हें आदियोगी भी कहा जाता है। योगी समाज में यह सर्वविदित और सर्वमान्य है और उन्हीं आदियोगी आदिनाथ भगवान शिव ने सांसारिक जीवों के कल्याण करने के उद्देश्य से तप के इस यौगिक मार्ग का प्रतिपादन सर्वप्रथम अपनी अर्धांगिनी माँ पार्वती के सम्मुख इसका उपदेश किया था। इसके साथ- साथ यह भी सर्वविदित मान्यता है कि जगत् में इस योग के प्रचार- प्रसार के लिए गुरू मत्स्येन्द्रनाथ और गुरू गोरखनाथ ने सर्वप्रथम आदिनाथ के ही श्रीमुख से इसका श्रवण कर इस योग पद्धति को ग्रहण किया था। जो कि नाथ सम्प्रदाय के तपस्वी साधक, योगी सन्यासियों की साधना सिद्धि का प्रमुख साधन है। जो कि योग साधना की परम्परा का पालन करता हुआ जिज्ञासुओं के सम्मुख आता रहा और अपने आप को परिमाजित करता हुआ , अधिक कठिन अंशों का त्याग कर और जन - जन उपयोगी बनता हुआ , गुरू गोरखनाथ जी की कृपा से उन्हीं के द्वारा सम्पादित सूत्र में सारभूत और उत्कृष्ट लिपि बद्ध होकर हठयोग प्रदीपिका का स्वरूप ग्रहण करके जगत् के हितार्थ प्रकट हो सम्मुख हुआ।।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> हठ प्रदीपिका पुस्तक में नहीं बल्कि श्री गोरखनाथ रचित पुस्तक "सिद्ध सिद्धांत पद्धति " में वर्णित- हठ का अर्थ इस प्रकार दिया है-<ref> सिद्ध सिद्धांत पद्धति </ ref> यह श्लोक श्री गोरखनाथ विरचित " सिद्ध सिद्धांत पद्धति " के प्रथम उपदेश में वर्णित है, जिसमें हठ शब्द को योग की दृष्टि से परिभाषित किया गया है।< ref>सिद्ध सिद्धांत पद्धति, प्रथम उपदेश के अ न्तर्गत</ ref> लेकिन भ्रमवश इसे हठयोग प्रदीपिका में लिखित बताया जाता है ,जो कि निराधार है। यह हठ योग की परिभाषा है परन्तु हठयोग प्रदीपिका पुस्तक में इस श्लोक का वर्णन कहीं नहीं आता है, हाँ ! परिभाषित करने के लिए विद्वान ऐसा कह देते हैं। <ref>हठयोग प्रदीपिका </ref> : ''हकारेणोच्यते सूर्यष्ठकार चन्द्र उच्यते। '' : ''सूर्या चन्द्रमसो र्योगाद्धठयोगोऽभिधीयते॥'' <ref>प्रथम उपदेश,सिद्ध सिद्धांत पद्धति</ref> '''ह''' का अर्थ [[सूर्य]] तथा '''ठ''' का अर्थ [[चन्द्रमा|चन्द्र]] बताया गया है। सूर्य और चन्द्र की समान अवस्था हठयोग है। शरीर में बहत्तर हजार नाड़ियाँ है, जोकि मानव शरीर के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य का संचालन करती है। ये नाड़ियाँ ऊर्जा के मार्ग है, जो कि शरीर के भिन्न- भिन्न अंगों में ऊर्जाशक्ति का प्रवाह प्रवाहित करके उसे क्रियाशील और प्राणमय बनाए रखती हैं, इनके स्वस्थ रहने से हठयोगी प्राणायाम आदि यौगिक क्रियाओं का अभ्यास करता हुआ,अपनी प्राण शक्ति का ऊर्ध्व गमन करते हुए, योग के लक्ष्य आनन्द की प्राप्ति करता है। उनमें तीन प्रमुख नाड़ियों का वर्णन है, वे इस प्रकार हैं। सूर्यनाड़ी अर्थात पिंगला जो दाहिने स्वर का प्रतीक है। चन्द्रनाड़ी अर्थात इड़ा जो बायें स्वर का प्रतीक है। इन दोनों के बीच तीसरी नाड़ी सुषुम्ना है। इस प्रकार हठयोग वह क्रिया है जिसमें पिंगला और इड़ा नाड़ी के सहारे प्राण को सुषुम्ना नाड़ी में प्रवेश कराकर ब्रह्मरन्ध्र में समाधिस्थ किया जाता है। [[हठयोग प्रदीपिका|हठ प्रदीपिका]] में चार अध्याय हैं, जिन्हें उपदेश कहा गया है, जिसमें हठयोग के चार अंगों का वर्णन है- * प्रथम उपदेश - आसन, * द्वितीय उपदेश - प्राणायाम, * तृतीय उपदेश- कुण्डली बोध, मुद्रा और बन्ध तथा * चतुर्थ उपदेश में - नादानुसंधान।<ref>हठयोग प्रदीपिका</ref> [[घेरण्डसंहिता]] में सात अंग- ''षटकर्म, आसन, मुद्राबन्ध, प्राणायाम, ध्यान, समाधि'' जबकि योगतत्वोपनिषद और पतंजलि कृत योग दर्शन में भी आठ अंगों का वर्णन है- ''यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि''< ref> पातञ्जलयोगप्रदीप, दुसरा पाद</ref> ====लययोग==== '''{{मुख्य|कुंडलिनी योग}}''' चित्त का अपने स्वरूप विलीन होना या चित्त की निरूद्ध अवस्था लययोग के अन्तर्गत आता है। साधक के चित्त् में जब चलते, बैठते, सोते और भोजन करते समय हर समय [[ब्रह्म]] का [[ध्यान]] रहे इसी को लययोग कहते हैं। योगत्वोपनिषद में इस प्रकार वर्णन है- : ''गच्छस्तिष्ठन स्वपन भुंजन् ध्यायेन्त्रिष्कलमीश्वरम् स एव लययोगः स्यात'' (22-23) ==== राजयोग==== '''{{मुख्य|राजयोग}}''' राजयोग सभी योगों का राजा कहलाया जाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ सामग्री अवश्य मिल जाती है। राजयोग महर्षि पतंजलि द्वारा रचित अष्टांग योग का वर्णन आता है। राजयोग का विषय चित्तवृत्तियों का निरोध करना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार समाहित चित्त वालों के लिए अभ्यास और वैराग्य तथा विक्षिप्त चित्त वालों के लिए क्रियायोग का सहारा लेकर आगे बढ़ने का रास्ता सुझाया है। इन साधनों का उपयोग करके साधक के क्लेशों का नाश होता है, चित्त प्रसन्न होकर ज्ञान का प्रकाश फैलता है और विवेक ख्याति प्राप्त होती है। : ''योगाडांनुष्ठानाद शुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिरा विवेक ख्यातेः'' (2/28) राजयोग के अन्तर्गत महर्षि पतंजलि ने अष्टांग को इस प्रकार बताया है- : ''यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टांगानि।'' <ref>योग दर्शन, साधनपाद ( 2/29 )</ ref> योग के आठ अंगों में प्रथम पाँच बहिरंग तथा अन्य तीन अन्तरंग में आते हैं। उपर्युक्त चार प्रकार के अतिरिक्त [[गीता]] में प्रमुखत: तीन प्रकार के योगों का वर्णन मिलता है- *(१) [[ज्ञानयोग]] *(२) [[भक्तियोग]] *(३) [[कर्म योग]] ज्ञानयोग, सांख्ययोग से सम्बन्ध रखता है। पुरुष प्रकृति के बन्धनों से मुक्त होना ही ज्ञान योग है। सांख्य दर्शन में 25 तत्वों का वर्णन मिलता है। == योग का इतिहास == [[Image:Shiva Pashupati.jpg|300px|thumb|right|मोहनजोदड़ो-हड़प्पा से प्राप्त मुहर में योगमुद्रा]] {{Main|योग का इतिहास}} वैदिक [[संहिता|संहिताओं]] के अंतर्गत तपस्वियों ''तपस (संस्कृत)'' के बारे में ([[ब्राह्मण|(कल | ब्राह्मण)]]) प्राचीन काल से [[वेदों]] में (१९०० से १५०० बी सी ई) उल्लेख मिलता है, जब कि तापसिक साधनाओं का समावेश प्राचीन वैदिक टिप्पणियों में प्राप्त है।<ref name="Flood, p. 94">[21] ^फ्लड, पी. 94.</ref> कई मूर्तियाँ जो सामान्य योग या [[समाधि]] मुद्रा को प्रदर्शित करती है, [[सिंधु घाटी सभ्यता]] (सी.3300-1700 बी.सी. इ.) के स्थान पर प्राप्त हुईं है। पुरातत्त्वज्ञ ग्रेगरी पोस्सेह्ल के अनुसार," ये मूर्तियाँ योग के धार्मिक संस्कार" के योग से सम्बन्ध को संकेत करती है।<ref>[22] ^ पोस्सेह्ल (2003), पीपी. 144-145</ref> यद्यपि इस बात का निर्णयात्मक सबूत नहीं है फिर भी अनेक पंडितों की राय में सिंधु घाटी सभ्यता और योग-[[ध्यान]] में सम्बन्ध है।<ref>देखें: * [[योनातान मार्क केनोयेर|जोनाथन मार्क केनोयेरएक]] मूर्ती का "योग मुद्रा में बैटे हुए" ऐसा वर्णन करता है। [http://www.harappa.com/indus/33.html जोनाथन मार्क केनोयेर द्वारा लिखे, "अरौंड द इंडस इन ९० स्लाइड्स". ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090323041459/http://www.harappa.com/indus/33.html|date=23 मार्च 2009}} * केरल वेर्नर लिखते है " पुरातात्विक खोज हमें अनुमान करने का समर्थन करता है की आर्य [[भारत]] के पूर्व के लोग योग शास्त्र की क्रियाओं से परिचित थे". {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=c6b3lH0-OekC&pg=PA103|title=Yoga and Indian Philosophy|last=Werner|first=Karel|date=1998|publisher=Motilal Banarsidass Publ.|isbn=9788120816091|page=103}}[23] * [[हेंरीच ज़िम्मर|हैनरिच ज़िम्मेर]] एक मुद्रा में "योगमुद्रा" का वर्णन करते है। {{cite book|url=https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm|title=Myths and Symbols in Indian Art and Civilization|last=Zimmer|first=Heinrich|publisher=Princeton University Press, New Ed edition|year=1972|ISBN=978-0691017785|page=[https://archive.org/details/mythssymbolsindi00zimm/page/n182 168]}} * [[थॉमस मअकएविल्ले|थॉमस म्क्विल्ले]] लिखते है कि "यह छह रहस्यमय सिंधु घाटी मुद्रा की छवियों में जो उत्कीर्ण मूर्तियां है उन में हठ योग के ''मूलबन्धासन '' नाम के आसन, या उस से मिलता जुलता ''उत्कटासन '' या ''बद्धा कोनासना '' प्रदर्शित है। {{cite book|url=http://books.google.com/books?id=Vpqr1vNWQhUC&pg=PA219|title=The shape of ancient thought|last=McEvilley|first=Thomas|date=2002|publisher=Allworth Communications|isbn=9781581152036|pages=219-220}} * डॉ॰ फरजंद मसीह, पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष, हाल ही में प्राप्त एक मुद्रा का वर्णन एक योगी के रूप का कहते है। [http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm अपूर्व वस्तुओं की खोज खंडहर में निहित खजाने की ओर संकेत करता है। ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100215133034/http://www.dawn.com/2007/05/08/nat7.htm|date=15 फ़रवरी 2010}} * गेविन फ्लड, "पशुपति सील" जोकि अन्य सीलों मे से एक है, के बारे में विवाद करते हुए लिखते है कि यह रूप एक योग मुद्रा में बैठे व्यक्ति की स्पष्ट नहीं लगती या यह एक मानव आकृति का प्रतिनिधित्व करती लगती है। फ्लड, पीपी. 28-29 . * पशुपति सील के बारे में जियोफ्रे सामुएल का मानना है कि,"वास्तव में हमें यह स्पष्ट नहीं है कि यह मूर्ति किसी नारी या पुरुष, किसकी व्याख्या करती है".{{cite book|url=http://books.google.com/books?id=JAvrTGrbpf4C&pg=PA4|title=The Origins of Yoga and Tantra|last=Samuel|first=Geoffrey|date=2008|publisher=Cambridge University Press|isbn=9780521695343|page=4}}[26]</ref> [[ध्यान]] में उच्च चैतन्य को प्राप्त करने कि रीतियों का विकास श्रमानिक परम्पराओं द्वारा एवं उपनिषद् की परंपरा द्वारा विकसित हुआ था।<ref>[27] ^ फ्लड, पीपी. 94-95.</ref> बुद्ध के पूर्व एवं प्राचीन ब्रह्मिनिक ग्रंथों मे [[ध्यान]] के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते हैं, बुद्ध के दो शिक्षकों के ध्यान के लक्ष्यों के प्रति कहे वाक्यों के आधार पर वय्न्न यह तर्क करते है की निर्गुण ध्यान की पद्धति ब्रह्मिन परंपरा से निकली इसलिए उपनिषद् की [[सृष्टि]] के प्रति कहे कथनों में एवं ध्यान के लक्ष्यों के लिए कहे कथनों में समानता है।<ref>[28] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> यह संभावित हो भी सकता है, नहीं भी.<ref>[29] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 56.</ref> उपनिषदों में [[ब्रह्माण्ड]] सम्बन्धी बयानों के वैश्विक कथनों में किसी [[ध्यान]] की रीति की सम्भावना के प्रति तर्क देते हुए कहते है की [[नासदीय सूक्त]] किसी [[ध्यान]] की पद्धति की ओर [[ऋग्वेद]] से पूर्व भी इशारा करते है।<ref>[30] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौतलेड्ग 2007, पृष्ठ 51.</ref> [[हिंदू]] ग्रंथ और [[बौद्ध]] ग्रंथ प्राचीन ग्रन्थो में से एक है जिन में ध्यान तकनीकों का वर्णन प्राप्त होता है।<ref>[31] ^ [[रिचर्ड गोम्ब्रिच]], ''थेरावदा बौद्ध धर्म: ए सोशल हिस्ट्री फ्रॉम इंसिएंत बनारस टू माडर्न कोलम्बो.'' रौतलेड्ग और केगन पॉल, 1988, पृष्ठ 44.</ref> वे ध्यान की प्रथाओं और अवस्थाओं का वर्णन करते है जो बुद्ध से पहले अस्तित्व में थीं और साथ ही उन प्रथाओं का वर्णन करते है जो पहले बौद्ध धर्म के भीतर विकसित हुईं.<ref>[32] ^ अलेक्जेंडर व्य्न्न, दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन. रौटलेड्ज 2007, पृष्ट 50</ref> हिंदु वाङ्मय में,"योग" शब्द पहले कथा उपनिषद में प्रस्तुत हुआ जहाँ ज्ञानेन्द्रियों का नियंत्रण और मानसिक गतिविधि के निवारण के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है जो उच्चतम स्थिति प्रदान करने वाला माना गया है।<ref>[33] ^ फ्लड, पी. 95. विद्वानों कथा उपनिषद को पूर्व बौद्धत्व के साथ सूचीबद्ध नहीं करते, उदाहरण के लिए हेल्मथ वॉन ग्लासेनप्प देख सकते हैं,1950 कार्यवाही की "अकादेमी देर विस्सेंस्चाफ्तें," लितेरातुर अंड से [http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html http://www.accesstoinsight.org/ lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130204142029/http://www.accesstoinsight.org/lib/authors/vonglasenapp/wheel002.html |date=4 फ़रवरी 2013 }} कुछ लोग कहते हैं कि यह पद बौद्ध है, उदाहरण हाजिम नाकामुरा का ए हिस्ट्री ऑफ़ एअर्ली वेदान्त फिलोसोफी, फिलोसोफी ईस्ट अंड वेस्ट, वोल. 37, अंख. 3 (जुलाई., 1987) जिसे अरविंद शर्मा ने समीक्षा की है, पीपी. 325-331. पाली शब्द "योग" का उपयोग करने की एक व्यापक जांच के लिए पूर्व बौद्ध ग्रंथों में देखे, थॉमस विलियम र्ह्य्स डेविड, विलियम स्टेड, ''पाली-इंग्लिश शब्दकोष.'' मोतीलाल बनारसीदास पुब्ल द्वारा डालें., 1993, पृष्ठ 558: [http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+term&amp;lr=#PRA1-PA558,M1 http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&amp;pg=RA1-PA558&amp;dq=yoga+pali+ term&amp;ir = # PRA1 lr-PA558, M1.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150322083352/http://books.google.com/books?id=xBgIKfTjxNMC&pg=RA1-PA558&dq=yoga+pali+term&lr=#PRA1-PA558,M1 |date=22 मार्च 2015 }} धम्मपदा में "आध्यात्मिक अभ्यास" के अर्थ में इस शब्द का प्रयोग के लिए देखे गिल फ्रोंस्दल, दी धम्मपदा, शम्भाला, 2005, पृष्ठ 56, 130 देखा.</ref> महत्वपूर्ण ग्रन्थ जो योग की अवधारणा से सम्बंधित है वे मध्य कालीन [[उपनिषदों|उपनिषद्]], [[महाभारत]],[[भगवद गीता]] 200 BCE) एवं [[पतंजलि योगसूत्र|पतंजलि योग सूत्र]] है। (ca. 400 BCE) ==== पतंजलि के योग सूत्र ==== {{main|योग सूत्र}} [[भारतीय दर्शन]] में, षड् [[आस्तिक|दर्शनों]] में से एक का नाम योग है।<ref>[35] ^ छह आस्तिक दर्शन सम्प्रदायों के एक सिंहावलोकन के लिए, समूह पर विस्तार के साथ देखें : राधाकृष्णन अंड मूर, "सामग्री" और पीपी. स्कूलों [35] ^453-487.</ref><ref>[36] ^ योग घराने के एक संक्षिप्त सिंहावलोकन के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग दार्शनिक प्रणाली,[[Samkhya|सांख्य]] स्कूल के साथ निकटता से संबन्धित है।<ref>[37] ^ दर्शन और संख्या के बीच घनिष्ठ संबंध के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> ऋषि [[पतंजलि]] द्वारा व्याख्यायित योग संप्रदाय [[संख्या|सांख्य]] मनोविज्ञान और तत्वमीमांसा को स्वीकार करता है, लेकिन सांख्य घराने की तुलना में अधिक आस्तिक है, यह प्रमाण है क्योंकि सांख्य वास्तविकता के पच्चीस तत्वों में ईश्वरीय सत्ता भी जोड़ी गई है।<ref>[38] ^ अवधारणाओं के योग स्वीकृति के लिए, लेकिन भगवान के लिए एक वर्ग के जोड़ने की क्रिया के साथ देखें: राधाकृष्णन अंड मूर, पी. 453.</ref><ref>[39]^ Samkhya के 25 सिद्धांतों को योगा ने स्वीकार करने के लिए देखें: चटर्जी अंड दत्ता, पी. 43.</ref> योग और सांख्य एक दूसरे से इतने मिलते-जुलते है कि मेक्स म्युल्लर कहते है,"यह दो दर्शन इतने प्रसिद्ध थे कि एक दूसरे का अंतर समझने के लिए एक को प्रभु के साथ और दूसरे को प्रभु के बिना माना जाता है।...."<ref>[40] ^ म्युलर (1899), अध्याय 7, "योग फिलोसोफी", पी. १०४.</ref> सांख्य और योग के बीच घनिष्ठ संबंध हेंरीच ज़िम्मेर समझाते है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table"> इन दोनों को भारत में जुड़वा के रूप में माना जाता है, जो एक ही विषय के दो पहलू है।{{IAST|Sāṅkhya}}[41]यहाँ मानव प्रकृति की बुनियादी सैद्धांतिक का प्रदर्शन, विस्तृत विवरण और उसके तत्वों का परिभाषित, बंधन ''(बंधा)'' के स्थिति में उनके सहयोग करने के तरीके, सुलझावट के समय अपने स्थिति का विश्लेषण या मुक्ति में वियोजन [[मोक्ष]] की व्याख्या की गई है। योग विशेष रूप से प्रक्रिया की गतिशीलता के सुलझाव के लिए उपचार करता है और मुक्ति प्राप्त करने की व्यावहारिक तकनीकों को सिद्धांत करता है अथवा 'अलगाव-एकीकरण'''(कैवल्य)'' का उपचार करता है।<ref>[42] ^ ज़िम्मेर (1951), पी. 280.</ref> </blockquote> पतंजलि, व्यापक रूप से औपचारिक योग दर्शन के संस्थापक माने जाते है।<ref>[43] ^ दार्शनिक प्रणाली के संस्थापक पतंजलि योग को यह रूप दिया, देखें : चटर्जी और पी० दत्त 42</ref> पतंजलि योग, बुद्धि के नियंत्रण के लिए एक प्रणाली है जिसे [[राज योग]] के रूप में जाना जाता है।<ref>[44] ^ मन के नियंत्रण के लिए एक तंत्र के रूप में "राजा योग" के लिए और एक महत्वपूर्ण कार्य के रूप में पतंजलि के योग सूत्र के साथ संबंध के लिए देखे: फ्लड (1996), पीपी. 96-98.</ref> पतंजलि उनके दूसरे सूत्र मे "योग" शब्द को परिभाषित करते है,<ref name="yogasutrastext">{{cite web| last = Patañjali| first = | authorlink = Patanjali| author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali| work = | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts| date = 2001-02-01| url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading| format = [[etext]]| doi = | accessdate = 2008-11-24| archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading| archive-date = 25 अगस्त 2011| url-status = dead}}</ref> जो उनके पूरे काम के लिए व्याख्या सूत्र माना जाता है: <blockquote class="toccolours" style="float:none;padding:10px 15px 10px 15px;display:table">'''''योगः चित्त-वृत्ति निरोधः''' '' <br />- योग सूत्र 1.2</blockquote> तीन संस्कृत शब्दों के अर्थ पर यह संस्कृत परिभाषा टिकी है। अई० के० तैम्नी इसकी अनुवाद करते है कि,"योग बुद्धि के संशोधनों (''{{IAST|vṛtti}}'' [49]) का निषेध (''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [48]) है" (''{{IAST|citta}}'' [50])। <ref>पाठ और शब्द मे से शब्द अनुवाद के लिए देखे:तैम्नी पी."योग इस दी इनहिबिशन ऑफ़ दी मोडीफिकेशंस ऑफ़ दी मैंड" 6.</ref> योग की प्रारंभिक परिभाषा मे इस शब्द ''{{IAST|nirodhaḥ}}'' [52] का उपयोग एक उदाहरण है कि बौद्धिक तकनीकी शब्दावली और अवधारणाओं, योग सूत्र मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है; इससे यह संकेत होता है कि बौद्ध विचारों के बारे में पतंजलि को जानकारी थी और अपने प्रणाली मे उन्हें बुनाई.<ref>[53] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतंजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 9.</ref>[[स्वामी विवेकानंद|स्वामी]] विवेकानंद इस सूत्र को अनुवाद करते हुए कहते है,"योग बुद्धि (चित्त) को विभिन्न रूप (वृत्ति) लेने से अवरुद्ध करता है।<ref>[54] ^ विवेकानाडा, पी. 115</ref> [[चित्र:Yogisculpture.JPG|right|thumb|200px|इस, दिल्ली के बिरला मंदिर में एक हिंदू योगी की मूर्ति]] पतंजलि का लेखन 'अष्टांग योग"("आठ-अंगित योग") एक प्रणाली के लिए आधार बन गया। 29<sup>th</sup> सूत्र के <sup>दूसरी </sup>किताब से यह आठ-अंगित अवधारणा को प्राप्त किया गया था और व्यावहारिक रूप मे भिन्नरूप से सिखाये गए प्रत्येक राज योग की एक मुख्य विशेषता है। आठ अंग हैं: # [[यम]] : सत्य, अहिंसा, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (अनावश्यक धन और सम्पत्ति एकत्र न करना), [[ब्रह्मचर्य]] । # [[नियम]] (पांच "धार्मिक क्रिया") : शौच (पवित्रता), सन्तोष, तपस, [[स्वाध्याय]] और ईश्वरप्राणिधान। # [[आसन]] # [[प्राणायाम]] : ''प्राण'', सांस, "अयाम ", को नियंत्रित करना या बंद करना। साथ ही जीवन शक्ति को नियंत्रण करने की व्याख्या की गयी है। # [[प्रत्याहार]] : बाहरी वस्तुओं से भावना अंगों के प्रत्याहार # [[धारणा]] ("एकाग्रता"): एक ही लक्ष्य पर ध्यान लगाना # [[ध्यान]] : ध्यान की वस्तु की प्रकृति का गहन चिंतन # [[समाधि]] : ध्यान के वस्तु को चैतन्य के साथ विलय करना। इसके दो प्रकार है - सविकल्प और निर्विकल्प। निर्विकल्प समाधि में संसार में वापस आने का कोई मार्ग या व्यवस्था नहीं होती। यह योग पद्धति की चरम अवस्था है। इस संप्रदाय के विचार मे, उच्चतम प्राप्ति विश्व के अनुभवी विविधता को [[माया (भ्रम)|भ्रम]] के रूप मे प्रकट नहीं करता. यह दुनिया वास्तव है। इसके अलावा, उच्चतम प्राप्ति ऐसी घटना है जहाँ अनेक में से एक व्यक्तित्व [[आत्मन (हिंदू धर्म)|स्वयं]], आत्म को आविष्कार करता है, कोई एक सार्वभौमिक आत्म नहीं है जो सभी व्यक्तियों द्वारा साझा जाता है।<ref>[55] ^ स्टीफन एच. फिलिप्स, ''क्लास्सिकल इंडियन मेताफ्य्सिक्स: रेफुताशन्स ऑफ़ रेअलिस्म अंड दी एमेर्गेंस ऑफ़ "न्यू लॉजिक". '' ओपन कोर्ट प्रकाशन, 1995, पृष्ठ 12-13.</ref> ==== भगवद गीता ==== {{Main|भगवद्गीता}} भगवद गीता (प्रभु के गीत), बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से ''योग'' शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय (छठा अध्याय) सहित पारंपरिक योग का अभ्यास को समर्पित, ध्यान के सहित, करने के अलावा<ref>[57] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> इस मे योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय किया जाता है।<ref>[58] ^ भगवद गीता, एक पूरा अध्याय (ch. 6) पारंपरिक योग का अभ्यास करने के लिए समर्पित सहित. इस गीता मे योग के प्रसिद्ध तीन प्रकारों, जैसे 'ज्ञान' (ज्ञान), 'एक्शन'(कर्म) और 'प्यार' (भक्ति) का परिचय किया है।" फ्लड, पी. 96</ref> * [[कर्म योग]]: कार्रवाई का योग। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। * [[भक्ति योग]]: भक्ति का योग। भगवत कीर्तन। इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। * [[ज्ञान योग|ज्ञाना योग]]: ज्ञान का योग - ज्ञानार्जन करना। [[मधुसूदन सरस्वती]] (जन्म 1490) ने गीता को तीन वर्गों में विभाजित किया है, जहाँ प्रथम छह अध्यायों मे कर्म योग के बारे मे, बीच के छह मे भक्ति योग और पिछले छह अध्यायों मे ज्ञाना (ज्ञान) योग के बारे मे बताया गया है।<ref>[59] ^ गम्भिरानान्दा, पी. 16</ref> अन्य टिप्पणीकार प्रत्येक अध्याय को एक अलग 'योग' से संबंध बताते है, जहाँ अठारह अलग योग का वर्णन किया है।<ref>[60] ^ जकोब्सन, पी. 46.</ref> ==== हठयोग ==== {{Main|हठ योग}} हठयोग योग, योग की एक विशेष प्रणाली है जिसे 15वीं सदी के भारत में [[हठयोग प्रदीपिका|हठ योग प्रदीपिका]] के संकलक, योगी स्वात्माराम द्वारा वर्णित किया गया था। जिसका उल्लेख ग्रंथ के रचियता योगी स्वात्माराम जी ने स्वयं पुस्तक के प्रथम उपदेश के तृतीय श्लोक में इस प्रकार किया है - * भ्रांत्या बहुमतध्वांते राजयोगमजानताम्। हठप्रदीपिकां धत्ते स्वात्माराम: कृपाकर:।।<refप्रथम उपदेश, तीसरा श्लोक</ref> अर्थात - " अनेक मतों के गहन अंधकार की भ्रान्ति से उबारने के लिए अपनी आत्मा में रमण करने वाले ( स्वात्माराम) योगी कृपा पूर्वक इस हठयोग प्रदीपिका को प्रकट करते हैं।।"<ref>1 - 3</ ref> हठयोग पतंजलि के राज योग से काफी अलग है राजयोग जो कि सत्कर्म पर केन्द्रित है, तो हठयोग भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है।''[62]'' [63] केवल पतंजलि राजयोग के ध्यान आसन के बदले, [64] यह पूरे शरीर के लोकप्रिय आसनों की चर्चा करता है।<ref name="Burley">[65] ^ हठयोग: यह प्रसंग, थिओरी अंड प्रक्टिस मिकेल बर्ली (पृष्ठ 16) द्वारा लिखा गया है।</ref> हठयोग अपनी कई आधुनिक भिन्नरूपों में एक शैली है जिसे बहुत से लोग "योग" शब्द के साथ जोड़ते है।<ref>[66] ^ फयूएर्स्तें, जोर्ग. 1996).''दी शम्भाला गाइड टू योग'' बोस्टन और लंदन: शम्भाला प्रकाशन, इंक</ref> हठयोग- वास्तव में एक सम्पूर्ण क्रियात्मक योग है यानि यह अपने प्रथम उपदेश से ही शरीर की एक विशेष क्रिया अभ्यास से प्रारंभ होता है , जिसका नाम आसन है। शुरूआत में हठयोग की महिमा वर्णन करने के बाद श्लोक बारहवें में हठयोग के साधक को अभ्यास के लिए शुद्ध- पवित्र वातारण युक्त स्थान पर एक कुटी ( एक छोटा सा अनुकूल कक्ष ) का निर्माण करने की बात कही गई है, अर्थात एक ऐसी जगह हो ,जहाँ साधना करते हुए हठयोगी को कोई बाहरी विक्षेपण विध्न उत्पन्न न कर सके , शीत ,वर्षा, गर्मी ऋतु आदि से बचाव हो सके। बताई और सीखी गई पद्धति से योग अभ्यास करते समय छ: बाधाओं से दूर रहने और छ: गुणों को धारण कर अभ्यास करने का निर्देश किया गया है, जिन्हें साधना की फलवती के लिए पालनीय योग्य बताया गया है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, श्लोक 12 - 15</ref> पतंजलि योगदर्शन की भाँति इसमें भी योग साधना प्रारम्भ करने से पूर्व श्लोक 17 एवं 18 में यम - नियम का वर्णन किया गया है। योगदर्शन में पाँच यम और पाँच नियम, कुल दस आचार गुणों का पालन करने को कहा गया है, तो वहीं हठयोग में यह दस और दस कुल बीस कहे गए हैं। इनके माध्यम से साधक के नैतिक और सामाजिक जीवन की आचार - विचार की पवित्रता, शुद्धतामय जीवन जीने की व्यावहारिकता बनाना है।<ref>हठयोग प्रदीपिका , प्रथम उपदेश, 17-18</ref> आसन हठयोग का प्रथम अंग है, इसलिए पहले आसन की ही वार्ता करते हैं। हठयोग के प्रथम उपदेश में स्वयं इस बात को कहा गया है।आसन से ही हठयोग की क्रियात्मक साधना प्रारम्भ होती है -- " हठस्य प्रथम् अंगत्वाद् आसनम् पूर्वमुच्यते। कुर्याद् तदासनं, स्थैर्यम् आरोग्यं च अंगलाघवम्।।"1/19 प्रथम उपदेश के उंनीसवें श्लोक में आसन को हठयोग का प्रथम अंग मानकर उसका प्रारम्भ करने की बात कही गई है, जिसमें प्रथम आसन अभ्यास करने की अनिवार्यता , उसके शरीर फिर मन पर प्रभाव को सरलता से स्पष्ट किया है, जैसे कि - आसन का अभ्यास करने से साधक के शरीर की आरोग्यता प्राप्ति, मन की चंचलता नष्ट होकर, शरीर और मन दोनों की स्थिति स्थिर हो जाती है,और तमोगुण आलस्य नष्ट होकर शरीर लाघवता यानि हल्केपन को प्राप्त होता है। आसन अभ्यास से तीन चीजें प्राप्त होती है -- * आरोग्य शरीर * शरीर में हल्कापन * तन - मन की स्थिरता। यानि हठयोग की कठिन साधना को सफल करनें के लिए शरीर व मन दोनों तैयार हो जाते हैं ,साधना के मार्ग पर चलने के लिए सध जाते है।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/19</ref> हठयोग में इस विषय के प्रारम्भ में कहा गया है कि वशिष्ठ आदि मुनियों और मत्स्येन्द्रनाथ आदि योगियों ने साधना करते हुए जिन आसनों का अभ्यास किया, उनमें से इस ग्रंथ में कुछ प्रमुख आसन का वर्णन किया जाता है। यहाँ जैसा कि पूर्व कह चुकें हैं कि हठयोग के आदि गुरू और प्रवर्तक भगवान आदिनाथ शिव को माना गया है ,अत: उन्होंने ही सर्वप्रथम चौरासी लाख आसनों का वर्णन किया, एक तरह से ये चौरासी लाख आसन " सृष्टि सृजन की चौरासी लाख योनियों " से सम्बन्धित हैं। इसीलिए इन आसनों के नाम भी जगत की स्थावर ,जंगम योनियों से मिलते है , जैसे कि -- वृक्ष आसन, ताड़ासन, मकर आसन , मीन आसन, भुजंगासन, पर्वतासन आदि - आदि, अब आप समझ गए होंगे। परन्तु ये चौरासी लाख आसन तो सबके लिए करने असम्भव थे, अत: साधना के लिए उनमें से चौरासी आसनों का चयन प्रमुखता के साथ किया गया। परन्तु उनमें भी अनेक आसन कठिन, कष्टप्रद और क्लिष्ट थे, जिसके कारण जन सामान्य के लिए आसनी से उनका अभ्यास कर उनसे लाभ उठाना समर्थ नहीं था, अत: उन चौरासी में से भी जो सरल साध्य और अधिक लाभप्रद, करने में आसानी से करणीय लगे ऐसे प्रमुख आसनों का चयन किया गया और उन्हें इस हठयोग साधना में अंगीकार किया गया। उन्हीं प्रमुख आसनों का वर्णन इस हठयोग प्रदीपिका में किया गया है , उन आसनों की संख्या कुल पंद्रह है।।<ref>हठयोग प्रदीपिका, श्लोक 1/20</ref> दुसरी बात यहाँ वशिष्ठ मुनि और मत्स्येन्द्रनाथ योगी यानि मुनि और योगी का वर्णन एक साथ आसन साधना अभ्यास में किया गया है जो कि आध्यात्म साधना में आसन की उपयोगिता और सर्वसाधना के लिए उपयोगिता को दर्शाता है।<ref>हठयोग प्रदीपिका- 1/20</ref> इस प्रकार आसनों का वर्णन - श्लोक 21 से 35 श्लोक तक - स्वास्तिकासन , गोमुखासन, वीरासन, कूर्मासन, कुक्कुटासन, उत्तान कूर्मासन, धनुरासन, मत्स्येन्द्रासन, पश्चिमोतानासन, मयूरासन, शवासन, - इन ग्यारह आसनों की विधि और उनके होने वाले लाभ का वर्णन है।...... शेष और चार आसन वास्तव में योगी की साधना के सर्वश्रेष्ठ आसन माने गए हैं - जो कि-- सिद्धासन, पद्मासन, सिंहासन और भद्रासन --- इसलिए इनका वर्णन इनकी प्रशंसा, इनकी उपयोगिता, इनके लाभ, प्रभाव आदि का विस्तृत वर्णन- श्लोक- 36 से शुरू करके श्लोक 63 तक किया गया है। वास्तव में ये चारों आसन ध्यान करने के सिद्ध आसन हैं। इन स्थितियों में बैठकर ध्यान शीध्र सिद्ध होने में सहायता मिलती है और मन शीध्र ही एकाग्रचित होने लगता है।<ref>हठयोग प्रदीपिका- 1/21- 63</ref> == अन्य परंपराओं में योग प्रथा == === बौद्ध-धर्म === मेडिटेशन किसे कहते हैं {{main|बौद्ध योग}} [[चित्र:Kamakura-buddha-1.jpg|thumb|right|200px|बुद्ध पद्मासन मुद्रा में योग ध्यान में.]] [[प्राचीन भारत|प्राचीन]] बौद्धिक धर्म ने ध्यानापरणीय अवशोषण अवस्था को निगमित किया।<ref name="Heisig">[68] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 22) द्वारा लिखा गया है।</ref> बुद्ध के प्रारंभिक उपदेशों में योग विचारों का सबसे प्राचीन निरंतर अभिव्यक्ति पाया जाता है।<ref>[69] ^ बारबरा स्टोलेर मिलर, ''योगा:डिसिप्लिन टू फ्रीडम योग सूत्र पतांजलि को आरोपित किया है, पाठ का अनुवाद, टीका, परिचय और शब्दावली खोजशब्द के साथ.'' कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1996, पृष्ठ 8.</ref> बुद्ध के एक प्रमुख नवीन शिक्षण यह था की ध्यानापरणीय अवशोषण को परिपूर्ण अभ्यास से संयुक्त करे.<ref>[70] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 73.</ref> बुद्ध के उपदेश और प्राचीन ब्रह्मनिक ग्रंथों में प्रस्तुत अंतर विचित्र है। बुद्ध के अनुसार, ध्यानापरणीय अवस्था एकमात्र अंत नहीं है, उच्चतम ध्यानापरणीय स्थिती में भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता। अपने विचार के पूर्ण विराम प्राप्त करने के बजाय, किसी प्रकार का मानसिक सक्रियता होना चाहिए:एक मुक्ति अनुभूति, ध्यान जागरूकता के अभ्यास पर आधारित होना चाहिए। <ref>[71] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 105.</ref> बुद्ध ने मौत से मुक्ति पाने की प्राचीन ब्रह्मनिक अभिप्राय को ठुकराया.<ref>[72] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 96.</ref> ब्रह्मिनिक योगिन को एक [[ध्यान|गैरद्विसंक्य द्रष्टृगत स्थिति]] जहाँ मृत्यु मे अनुभूति प्राप्त होता है, उस स्थिति को वे मुक्ति मानते है। बुद्ध ने योग के निपुण की मौत पर मुक्ति पाने की पुराने ब्रह्मिनिक अन्योक्त ("उत्तेजनाहीन होना, क्षणस्थायी होना") को एक नया अर्थ दिया; उन्हें, ऋषि जो जीवन में मुक्त है के नाम से उल्लेख किया गया था।<ref>[73] ^ अलेक्जेंडर वैन, ''दी ओरिजिन ऑफ़ बुद्धिस्ट मेडिटेशन.'' रौटलेड्ज 2007, पृष्ठ 109.</ref> {{seealso|प्राणायाम}} ==== योगकारा बौद्धिक धर्म ==== योगकारा(संस्कृत:"योग का अभ्यास"<ref>[75] ^ [http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm डान लास्थौस: "वोट इस अंड इसंट योगकारा"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131216190312/http://www.acmuller.net/yogacara/articles/intro-uni.htm |date=16 दिसंबर 2013 }}</ref>, शब्द विन्यास योगाचारा, दर्शन और मनोविज्ञान का एक संप्रदाय है, जो [[भारत]] में 4 वीं से 5 वीं शताब्दी मे विकसित किया गया था। योगकारा को यह नाम प्राप्त हुआ क्योंकि उसने एक'' योग'' प्रदान किया, एक रूपरेखा जिससे [[बोधिसत्त्व]] तक पहुँचने का एक मार्ग दिखाया है।<ref>[76] ^ डान लास्थौस. बौद्ध फेनोमेनोलोगी: ए फिलोसोफिकल इन्वेस्टीगेशन ऑफ़ योगकारा बुद्धिस्म अंड दी चेंग वेई-शिह लुन. (रौटलेड्ज) 2002 प्रकाशित. ISBN 0-7007-1186-4.पग 533</ref> ज्ञान तक पहुँचने के लिए यह योगकारा संप्रदाय ''योग'' सिखाता है।<ref name="Simpkins">[77] ^ सरल तिब्बती बौद्ध धर्म: ए गाइड टू तांत्रिक लिविंग, सी अलेक्जेंडर सिम्प्किंस, अन्नेल्लें एम. सिम्प्किंस द्वारा लिखा गया है। 2001 प्रकाशित. टटल प्रकाशन. ISBN 0-8048-3199-8</ref> ==== छ'अन (सिओन/ ज़ेन) बौद्ध धर्म ==== [[ज़ेनो|ज़ेन]] (जिसका नाम संस्कृत शब्द "ध्याना से" उत्पन्न किया गया चीनी "छ'अन" के माध्यम से<ref>[78] ^ दी बुद्धिस्ट त्रडिशन इन इंडिया, भारत और जापान. विलियम थिओडोर डी बारी द्वारा संपादित किया गया है। पन्ने. 207-208. ISBN 0-394-71696-5 - "दी मेडिटेशन स्कूल ने, चीनी में ''"चान"'' नाम से कहते है जो संस्कृत शब्द ''ध्यान'' से लिया गया है, ''पश्चिम'' में जापानी उच्चारण ''ज़ेन'' " से जाना जाता है।</ref>)[[महायान बौद्ध धर्म]] का एक रूप है। बौद्ध धर्म की महायान संप्रदाय योग के साथ अपनी निकटता के कारण विख्यात किया जाता है।<ref name="Heisig"/> पश्चिम में, जेन को अक्सर योग के साथ व्यवस्थित किया जाता है;ध्यान प्रदर्शन के दो संप्रदायों स्पष्ट परिवारिक उपमान प्रदर्शन करते है।<ref>[80] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौलिन|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पेज xviii)</ref> यह घटना को विशेष ध्यान योग्य है क्योंकि कुछ योग प्रथाओं पर ध्यान की ज़ेन बौद्धिक स्कूल आधारित है।[81]योग की कुछ आवश्यक तत्वों सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और विशेष रूप से ज़ेन धर्म को महत्वपूर्ण हैं।<ref name="Knitter">[82] ^ ज़ेन बौद्ध धर्म: ए हिस्ट्री (भारत और चीन)[[हेंरीच दुमौली|हेंरीच डमौलिन]], जेम्स डब्ल्यू हेइसिग, पॉल एफ निटटर (पृष्ठ 13) द्वारा लिखा गया है। (पृष्ठ 13)</ref> ==== भारत और तिब्बत के बौद्धिक धर्म ==== योग [[तिब्बती बौद्ध धर्म]] का केंद्र है। न्यिन्गमा परंपरा में, ध्यान का अभ्यास का रास्ता नौ ''यानों'', या वाहन मे विभाजित है, कहा जाता है यह परम व्यूत्पन्न भी है।<ref>[83] ^ ''दी लैयेन्स रोर: अन इन्त्रोदुक्शन टू तंत्र '' चोग्यम त्रुन्ग्पा द्वारा. शम्भाला, 2001 ISBN 1-57062-895-5</ref> अंतिम के छह को "योग यानास" के रूप मे वर्णित किया जाता है, यह है:''क्रिया योग'', ''उप योग (''चर्या'')'', ''योगा याना'', ''[[महायोग|महा योग]]'', ''[[अनुयोग|अनु योग]]'' और अंतिम अभ्यास ''[[अतियोग|अति योग.]]''<ref>[84] ^''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट'' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया। ISBN 1-57062-917-X पन्ना 37-38</ref> सरमा परंपराओं ने''महायोग और अतियोग की अनुत्तारा वर्ग'' से स्थानापन्न करते हुए क्रिया योग, उपा (चर्या) और योग को शामिल किया हैं। अन्य तंत्र योग प्रथाओं में 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास शामिल हैं।<ref>[85] ^ ''सीक्रेट ऑफ़ दी वज्र वर्ल्ड: दी तांत्रिक बुद्धिस्म ऑफ़ तिबेट '' रेय रेगिनाल्ड ए शम्भाला द्वारा : 2002 मे लिखा गया।ISBN 1-57062-917-X पन्ना 57</ref> अन्य तंत्र योग प्रथाओं 108 शारीरिक मुद्राओं के साथ सांस और दिल ताल का अभ्यास को शामिल हैं। यह न्यिन्गमा परंपरा यंत्र योग का अभ्यास भी करते है। (तिब. ''तरुल खोर''), यह एक अनुशासन है जिसमे सांस कार्य (या प्राणायाम), ध्यानापरणीय मनन और सटीक गतिशील चाल से अनुसरण करनेवाले का ध्यान को एकाग्रित करते है।<ref>[86] ^ ''योगा:दी तिबेतन योगा ऑफ़ मूवमेंट'', चोग्याल नम्खई नोरबू द्वारा लिखा गया है। स्नो लायन, 2008. ISBN 1-55939-308-4</ref>लुखंग मे दलाई लामा के सम्मर मंदिर के दीवारों पर तिब्बती प्राचीन योगियों के शरीर मुद्राओं चित्रित किया जाता है। चांग (1993) द्वारा एक अर्द्ध तिब्बती योगा के लोकप्रिय खाते ने कन्दली (तिब.''तुम्मो'') अपने शरीर में गर्मी का उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहते है कि "यह संपूर्ण तिब्बती योगा की बुनियाद है".<ref>[87] ^ चांग, जी. सी.सी (1993).''तिबेतन योगा.'' न्यू जर्सी: कैरल प्रकाशन समूह. ISBN 0-8065-1453-1, पन्ना.7</ref> चांग यह भी दावा करते है कि तिब्बती योगा [[प्राण|प्राना]] और मन को सुलह करता है, और उसे [[तांत्रिक|तंत्रिस्म]] के सैद्धांतिक निहितार्थ से संबंधित करते है। === जैन धर्म === [[चित्र:Parsva Shatrunjay.jpg|thumb|right|100px|तीर्थंकर पार्स्व यौगिक ध्यान में कयोत्सर्गा मुद्रा में.]] [[चित्र:Kevalajnana.jpg|thumb|175px][[महावीर]] को केवल ज्ञान प्राप्ति मुलाबंधासना मुद्रा में]] दूसरी शताब्दी के जैन ग्रन्थ ''[[तत्त्वार्थसूत्र]]'', के अनुसार मन, वाणी और शरीर सभी गतिविधियों का कुल 'योग' है। <ref>[88] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.1], मनु दोषी (2007) तत्त्वार्थसूत्र के अनुवाद, अहमदाबाद : श्रुत रत्नाकर पी. 102</ref> [[उमास्वामी]] कहते है कि ''[[आस्रव]]'' या कार्मिक प्रवाह का कारण योग है<ref>[89] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> साथ ही- [[रत्नत्रय (जैन)|सम्यक चरित्र]] अर्थात योग नियंत्रण और अन्त में निरोध मुक्ति के मार्ग मे बेहद आवश्यक है। <ref>[90] ^ तत्त्वार्थसूत्र [6.2]</ref> अपनी ''नियमसार '' में, आचार्य [[कुन्दकुन्द]] ने ''योग भक्ति'' का वर्णन- भक्ति से मुक्ति का मार्ग - भक्ति के सर्वोच्च रूप के रूप मे किया है।<ref>[91] ^ नियमासरा [134-40]</ref> आचार्य [[हरिभद्र]] और आचार्य [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचन्द्र]] के अनुसार पाँच प्रमुख उल्लेख संन्यासियों और 12 समाजिक लघु प्रतिज्ञाओं योग के अंतर्गत शामिल है। इस विचार के वजह से कही इन्डोलोज़िस्ट्स जैसे प्रो रॉबर्ट जे ज़्यीडेन्बोस ने जैन धर्म के बारे मे यह कहा कि यह अनिवार्य रूप से योग सोच की एक योजना है जो एक पूर्ण धर्म के रूप मे बढ़ी हो गयी। <ref>[92] ^ ज्यडेन्बोस, रॉबर्ट. जैनिस्म टुडे अंड इट्स फ्यूचर. मूंछें: मन्या वेर्लग, 2006. पन्ना.66</ref> डॉ॰ हेंरीच ज़िम्मर संतुष्ट किया कि योग प्रणाली को पूर्व आर्यन का मूल था, जिसने वेदों की सत्ता को स्वीकार नहीं किया और इसलिए जैन धर्म के समान उसे एक विधर्मिक सिद्धांतों के रूप में माना गया था <ref>[93] ^ ज़िम्मर, हेंरीच (एड.) जोसेफ कैम्पबेल: फिलोसोफीस ऑफ़ इंडिया.न्यू यॉर्क: प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस, 1969 पन्ना.60</ref> जैन शास्त्र, जैन [[तीर्थंकर|तीर्थंकरों]] को ध्यान मे ''[[पद्मासन|पद्मासना]]'' या ''कायोत्सर्ग '' योग मुद्रा में दर्शाया है। ऐसा कहा गया है कि महावीर को'' मुलाबंधासना'' स्थिति में बैठे ''[[केवल ज्ञान|केवला ज्ञान]]'' "आत्मज्ञान" प्राप्त हुआ जो अचरंगा सूत्र मे और बाद में [[कल्पसूत्र]] मे पहली साहित्यिक उल्लेख के रूप मे पाया गया है।<ref>[94] ^ क्रिस्टोफर चप्पल. (1993) नॉनविलँस टू अनिमल्स, अर्थ, अंड सेल्फ इन एशियन त्रदिशन्स.न्यू यॉर्क: सनी प्रेस, 1993 पन्ना. 7</ref> पतंजलि योगसूत्र के पांच यामा या बाधाओं और जैन धर्म के पाँच प्रमुख प्रतिज्ञाओं में अलौकिक सादृश्य है, जिससे जैन धर्म का एक मजबूत प्रभाव का संकेत करता है। <ref>[95] ^ ज्य्देंबोस (2006) पन्ना.66</ref><ref>[96] ^ विवियन वोर्थिन्ग्तन द्वारा ए हिस्ट्री ऑफ़ योगा (1982) रौटलेड्ज ISBN 0-7100-9258-X पन्ना. 29.</ref> लेखक विवियन वोर्थिंगटन ने यह स्वीकार किया कि योग दर्शन और जैन धर्म के बीच पारस्परिक प्रभाव है और वे लिखते है:"योग पूरी तरह से जैन धर्म को अपना ऋण मानता है और विनिमय मे जैन धर्म ने योग के साधनाओं को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लिया". <ref>[97] ^ विवियन वोर्थिंगटन (1982) पन्ना. 35</ref> सिंधु घाटी मुहरों और इकोनोग्रफी भी एक यथोचित साक्ष्य प्रदान करते है कि योग परंपरा और जैन धर्म के बीच सांप्रदायिक सदृश अस्तित्व है। <ref>[98] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, panna.6</ref> विशेष रूप से, विद्वानों और पुरातत्वविदों ने विभिन्न तिर्थन्करों की मुहरों में दर्शाई गई योग और ध्यान मुद्राओं के बीच समानताओं पर टिप्पणी की है: [[ऋषभदेव]] की "कयोत्सर्गा" मुद्रा और [[महावीर]] के ''मुलबन्धासन'' मुहरों के साथ ध्यान मुद्रा में पक्षों में सर्पों की खुदाई [[पार्श्वनाथ]] की खुदाई से मिलती जुलती है। यह सभी न केवल सिंधु घाटी सभ्यता और जैन धर्म के बीच कड़ियों का संकेत कर रहे हैं, बल्कि विभिन्न योग प्रथाओं को जैन धर्म का योगदान प्रदर्शन करते है।<ref>[99] ^ क्रिस्टोफर. (1993) चाप्पल, पप.6-9</ref> ===== जैन सिद्धांत और साहित्य के सन्दर्भ ===== {{मुख्य|जैन धर्म में योग}} प्राचीनतम के जैन धर्मवैधानिक साहित्य जैसे आचाराङ्गसूत्र और नियमसार, तत्त्वार्थसूत्र आदि जैसे ग्रंथों ने साधारण व्यक्ति और तपस्वीयों के लिए जीवन का एक मार्ग के रूप में योग पर कई सन्दर्भ दिए है। बाद के ग्रंथ, जिसमे योग की जैन अवधारणा विस्तारपूर्वक दी गयी है, वह निम्नानुसार हैं: * पूज्यपाद (5 वीं शताब्दी ई०) ** ''इष्टोपदेश '' * आचार्य हरिभद्र सूरी (8 वीं शताब्दी ई०) ** '' योगबिन्दु '' ** ''योगद्रिस्तिसमुच्काया '' ** ''योगशतक '' ** ''योगविंशिका '' * आचार्य जोंदु (८वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसार'' * आचार्य हेमचन्द्र (११वीं सदी ई०) ** ''योगशास्त्र '' * आचार्य अमितगति (११वीं शताब्दी ई०) ** ''योगसारप्राभृत '' === इस्लाम === [[सूफ़ीवाद|सूफी]] संगीत के विकास में भारतीय योग अभ्यास का काफी प्रभाव है, जहाँ वे दोनों शारीरिक मुद्राओं ([[आसन]]) और श्वास नियंत्रण ([[प्राणायाम]]) को अनुकूलित किया है।<ref>[100] ^ [http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc सीटूएटिंग सुफ्फिस्म अंड योगा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090327090930/http://www.unc.edu/~cernst/articles/JRAS2.doc |date=27 मार्च 2009 }}</ref> 11 वीं शताब्दी के प्राचीन समय में प्राचीन भारतीय योग पाठ, अमृतकुंड, ("अमृत का कुंड") का अरबी और फारसी भाषाओं में अनुवाद किया गया था।<ref>[101] ^ [http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml केरोलिना संगोष्ठी तुलनात्मक इस्लामी अध्ययन] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090825225459/http://www.unc.edu/depts/islamsem/980522.shtml |date=25 अगस्त 2009 }} पर</ref> सन 2008 में मलेशिया के शीर्ष [[इस्लाम|इस्लामिक]] समिति ने कहा जो [[मुस्लिम|मुस्लमान]] योग अभ्यास करते है उनके खिलाफ एक [[फतवा]] लागू किया, जो कानूनी तौर पर गैर बाध्यकारी है, कहते है कि योग में "[[हिंदु|हिंदू]] आध्यात्मिक उपदेशों" के तत्वों है और इस से ईश-निंदा हो सकती है और इसलिए यह [[हराम]] है। मलेशिया में मुस्लिम योग शिक्षकों ने "अपमान" कहकर इस निर्णय की आलोचना कि.<ref name="cnn.com">[102] ^ [http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html श्रेय इस्लामी समुदाय: योगा मुसलमानों के लिए नहीं है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081205182658/http://www.cnn.com/2008/WORLD/asiapcf/11/22/malaysia.yoga.banned.ap/index.html|date=5 दिसंबर 2008}} - [[सी एन एन]]</ref> मलेशिया में महिलाओं के<ref name="cnn.com"/> समूह, ने भी अपना निराशा व्यक्त की और उन्होंने कहा कि वे अपनी योग कक्षाओं को जारी रखेंगे.<ref>[103] ^ [http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation http://thestar.com.my/news/story.asp?file=/2008/11/23/nation/2625368&amp;sec=nation] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110622072723/http://thestar.com.my/news/story.asp?file=%2F2008%2F11%2F23%2Fnation%2F2625368&sec=nation |date=22 जून 2011 }}</ref> इस फतवा में कहा गया है कि शारीरिक व्यायाम के रूप में योग अभ्यास अनुमेय है, पर धार्मिक मंत्र का गाने पर प्रतिबंध लगा दिया है,<ref>[104] ^ [http://www.google.com/hostednews/ap/article/ALeqM5gkepLWOtoRT7YiTChjyOPSjkVtzAD94MIV500 "मलेशिया के नेता: योगा मंत्र के बिना योग मुसलमानों के लिए ठीक है,"]{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }} एसोसिएटेड प्रेस</ref> और यह भी कहते है कि भगवान के साथ मानव का मिलाप जैसे शिक्षण इस्लामी दर्शन के अनुरूप नहीं है।<ref>[105] ^ [http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090106003351/http://www.islam.gov.my/portal/lihat.php?jakim=3600 |date=6 जनवरी 2009 }}</ref> इसी तरह, उलेमस की परिषद, इंडोनेशिया में एक इस्लामी समिति ने योग पर प्रतिबंध, एक [[फतवा|फतवे]] द्वारा लागू किया क्योंकि इसमें "हिंदू तत्व" शामिल थे।<ref>[106] ^ [http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090217135238/http://news.bbc.co.uk/2/hi/asia-pacific/7850079.stm |date=17 फ़रवरी 2009 }}</ref> किन्तु इन फतवों को [[दारुल उलूम देवबन्द|दारुल उलूम देओबंद]] ने आलोचना की है, जो [[देवबन्द|देओबंदी]] इस्लाम का भारत में शिक्षालय है।<ref>{{Cite web |url=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |title=http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |access-date=19 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090822195937/http://specials.rediff.com/news/2009/jan/29video-islam-allows-yoga-deoband.htm |archive-date=22 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> सन 2009 मई में, तुर्की के निदेशालय के धार्मिक मामलों के मंत्रालय के प्रधान शासक अली बर्दाकोग्लू ने योग को एक व्यावसायिक उद्यम के रूप में घोषित किया- योग के संबंध में कुछ आलोचनाये जो इसलाम के तत्वों से मेल नहीं खातीं.<ref>[108] ^ http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111011035805/http://www.hurriyet.com.tr/english/domestic/11692086.asp?gid=244 |date=11 अक्तूबर 2011 }}</ref> === ईसाई धर्म === सन 1989 में, [[वैटिकन]] ने घोषित किया कि ज़ेन और योग जैसे पूर्वी ध्यान प्रथाओं "शरीर के एक गुट में बदज़ात" हो सकते है। वैटिकन के बयान के बावजूद, कई [[कैथोलिक धर्म|रोमन कैथोलिक]] उनके आध्यात्मिक प्रथाओं में योग , बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के तत्वों का प्रयोग किया है।<ref>{{cite news|url=http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9C0CE1D61531F934A35752C0A966958260&sec=&spon=|title=Trying to Reconcile the Ways of the Vatican and the East |last=Steinfels|first=Peter|date=1990-01-07|work=New York Times|accessdate=2008-12-05}}</ref> === तंत्र === {{Main|तंत्र}} तंत्र एक प्रथा है जिसमें उनके अनुसरण करनेवालों का संबंध साधारण, धार्मिक, सामाजिक और तार्किक वास्तविकता में परिवर्तन ले आते है। [[तांत्रिक]] अभ्यास में एक व्यक्ति वास्तविकता को [[माया (भ्रम)|माया]], भ्रम के रूप में अनुभव करता है और यह व्यक्ति को मुक्ति प्राप्त होता है।<ref name="UCP">[112] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म: हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट अई लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 313</ref>[[हिंदुत्व|हिन्दू धर्म]] द्वारा प्रस्तुत किया गया निर्वाण के कई मार्गों में से यह विशेष मार्ग तंत्र को [[भारत में धर्म|भारतीय धर्मों]] के प्रथाओं जैसे योग, ध्यान, और सामाजिक [[संन्यास]] से जोड़ता है, जो सामाजिक संबंधों और विधियों से अस्थायी या स्थायी वापसी पर आधारित हैं।<ref name="UCP"/> तांत्रिक प्रथाओं और अध्ययन के दौरान, छात्र को ध्यान तकनीक में, विशेष रूप से [[चक्र|चक्र ध्यान]], का निर्देश दिया जाता है। जिस तरह यह ध्यान जाना जाता है और तांत्रिक अनुयायियों एवं योगियों के तरीको के साथ तुलना में यह तांत्रिक प्रथाओं एक सीमित रूप में है, लेकिन सूत्रपात के पिछले ध्यान से ज्यादा विस्तृत है। इसे एक प्रकार का [[कुंडलिनी योग]] माना जाता है जिसके माध्यम से ध्यान और पूजा के लिए "हृदय" में स्थित चक्र में देवी को स्थापित करते है।<ref>[114] ^ शीर्षक: मेसोकोस्म:हिंदू धर्म और नेपाल में एक पारंपरिक नेवार सिटी मे संगठन. लेखक: रॉबर्ट मैं लेवी. प्रकाशित: कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रेस, 1991. पीपी 317</ref> ==भारत के प्रसिद्ध योगगुरु== वैसे तो योग हमेशा से हमारी प्राचीन धरोहर रही है। समय के साथ-साथ योग विश्व प्रख्यात तो हुआ ही है साथ ही इसके महत्व को जानने के बाद आज योग लोगों की दिनचर्या का अभिन्न अंग भी बन गया है। लेकिन योग के प्रचार-प्रसार में विश्व प्रसिद्ध योगगुरुओं का भी योगदान रहा है, जिनमें से '''अयंगार योग''' के संस्थापक [[बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराज अयंगार|बी के एस अयंगर]], [[स्वामी शिवानंद]] और योगगुरु [[बाबा रामदेव|रामदेव]] का नाम अधिक प्रसिद्ध है।<ref>{{Cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402115555/http://khabar.ndtv.com/news/india/yoga-guru-bks-iyengar-dies-at-95-650330 |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बीकेएस अंयगर=== {{मुख्य|बी के एस अयंगार}} अयंगर को विश्व के अग्रणी योग गुरुओं में से एक माना जाता है और उन्होंने योग के दर्शन पर कई किताबें भी लिखी थीं, जिनमें 'लाइट ऑन योगा', 'लाइट ऑन प्राणायाम' और 'लाइट ऑन द योग सूत्राज ऑफ पतंजलि' शामिल हैं। <ref>{{Cite web |url=http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=17 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402155843/http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-BKS-Iyengar-dead-Yoga-legend-passes-away-at-96-Twitter-full-of-condolences-39-39-446211.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> अयंगर का जन्‍म 14 दिसम्‍बर 1918 को बेल्‍लूर के एक गरीब परिवार में हुआ था। बताया जाता है कि अयंगर बचपन में काफी बीमार रहा करते थे। ठीक नहीं होने पर उन्‍हें योग करने की सलाह दी गयी और तभी से वह योग करने लगे। अयंगर को 'अयंगर योग' का जन्‍मदाता कहा जाता है। उन्होंने इस योग को देश-दुनिया में फैलाया। सांस की तकलीफ के चलते 20 अगस्त 2014 को उनका निधन हो गया।<ref>{{Cite web |url=http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 मार्च 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150402091707/http://www.prabhatkhabar.com/news/national/yoga-guru-bks-iyengar-died/142411.html |archive-date=2 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> ===बाबा रामदेव=== {{मुख्य|बाबा रामदेव}} बाबा रामदेव भारतीय योग-गुरु हैं, उन्होंने योगासन व प्राणायामयोग के क्षेत्र में योगदान दिया है। [[रामदेव]] स्वयं जगह-जगह जाकर योग शिविरों का आयोजन करते हैं। ==योग दिवस== {{main|अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस}} 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर 192 देशों और 47 मुस्लिम देशों में योग दिवस का आयोजन किया गया। दिल्ली में एक साथ ३५९८५ लोगों ने योगाभ्यास किया।इसमें 84 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस अवसर पर भारत ने दो विश्व रिकॉर्ड बनाकर 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में अपना नाम दर्ज करा लिया है। पहला रिकॉर्ड एक जगह पर सबसे अधिक लोगों के एक साथ योग करने का बना, तो दूसरा एक साथ सबसे अधिक देशों के लोगों के योग करने का। <ref>{{Cite web |url=http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 जून 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150625055155/http://www.jagran.com/news/national-india-create-two-world-records-on-international-day-12507610.html |archive-date=25 जून 2015 |url-status=live }}</ref> योग का उद्देश्य योग के अभ्यास के कई लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है।लोगों के स्वास्थ्य पर योग के महत्व और प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 21 जून को योग का अभ्यास किया जाता है। शब्द ‘योग‘ संस्कृत से लिया गया है जिसका अर्थ है जुड़ना या एकजुट होना। ==योग का महत्व== वर्तमान समय में अपनी व्यस्त जीवन शैली के कारण लोग संतोष पाने के लिए योग करते हैं। योग से न केवल व्यक्ति का तनाव दूर होता है बल्कि मन और मस्तिष्क को भी शांति मिलती है योग बहुत ही लाभकारी है। योग न केवल हमारे दिमाग, मस्‍तिष्‍क को ही ताकत पहुंचाता है बल्कि हमारी आत्‍मा को भी शुद्ध करता है। आज बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं, उनके लिए योग बहुत ही फायदेमंद है। योग के फायदे से आज सब ज्ञात है, जिस वजह से आज योग विदेशों में भी प्रसिद्ध है। अगर आप इसका नियमित अभ्यास करते हैं, तो इससे धीरे-धीरे आपका तनाव भी दूर हो सकता है। == योग का लक्ष्य == योग का लक्ष्य स्वास्थ्य में सुधार से लेकर ''[[मोक्ष]] (आत्मा को [[परमेश्वर]] का अनुभव)'' प्राप्त करने तक है।<ref>[115] ^ जकोब्सन, पी. 10.</ref> जैन धर्म, [[अद्वैत वेदांत]] के [[वेदांत|मोनिस्ट]] संप्रदाय और [[शैव सम्प्रदाय|शैव संप्रदाय]] के अन्तर में योग का लक्ष्य मोक्ष का रूप लेता है, जो सभी सांसारिक कष्ट एवं जन्म और मृत्यु के चक्र [[संसार|(संसार)]] से मुक्ति प्राप्त करना है, उस क्षण में परम [[ब्राह्मण|ब्रह्मण]] के साथ समरूपता का एक एहसास है। महाभारत में, योग का लक्ष्य [[ब्रह्मा]] के दुनिया में प्रवेश के रूप में वर्णित किया गया है, ब्रह्म के रूप में, अथवा [[आत्मा|आत्मन]] को अनुभव करते हुए जो सभी वस्तुओं मे व्याप्त है।<ref>जकोब्सन, पी. 9</ref> मीर्चा एलीयाडे योग के बारे में कहते हैं कि यह सिर्फ एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है, एक आध्यात्मिक तकनीक भी है। <ref>मीर्चा ईटु, मीर्चा एलीयाडे, बुखारेस्ट, कल की रोमानिया का प्रकाशन संस्था, दो हज़ार छह, नब्बे का पृष्ठ। (ISBN 973-725-715-4)</ref> [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] लिखते हैं कि समाधि में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं: वितर्क, विचार, आनंद और अस्मिता।<ref>सर्पवल्ली राधाकृष्णन, भारतीय दर्शन, दूसरा खंड, लंडन, जॉर्ज एलन और उइंन का प्रकाशन संस्था, एक हजार नौ सौ छियासठ, तीन सौ अस्सी का पृष्ठ। (ISBN 978-019-569-841-1)</ref> ==योग के प्रसिद्ध ग्रन्थ== {| class="wikitable" |- ! ग्रन्थ !! रचयिता !! रचनाकाल/टिप्पणी |- | '''[[पतंजलि योगसूत्र|योगसूत्र]]''' || [[पतंजलि]] || ४०० ई. पूर्व |- | '''[[योगभाष्य]]''' || [[वेदव्यास]] || द्वितीय शताब्दी |- | '''[[तत्त्ववैशारदी]]''' || [[वाचस्पति मिश्र]] || ८४१ ई |- |'''[[योगयाज्ञवल्क्य]]''' || [[याज्ञवल्क्य]] || सबसे पुरानी संस्कृत पाण्डुलिपि ९वीं-१०वीं शताब्दी की है। |- | '''[[भोजवृत्ति]]''' || [[राजा भोज]] || ११वीं शताब्दी |- | '''[[गोरक्षशतक]]''' || [[गुरु गोरख नाथ]] || ११वीं-१२वीं शताब्दी |- | '''[[योगचूडामण्युपनिषद]]''' || - || १४वीं-१५वीं शताब्दी (रिचर्ड रोसेन के अनुसार) |- | '''[[योगवार्तिक]]''' || [[विज्ञानभिक्षु]] || १६वीं शताब्दी |- | '''[[योगसारसंग्रह]]''' || विज्ञानभिक्षु || १६वीं शताब्दी |- | '''[[हठयोगप्रदीपिका]]''' || [[स्वात्माराम|स्वामी स्वात्माराम]] || १५वीं-१६वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रवृत्ति]]''' || गणेशभावा || १७वीं शताब्दी |- | '''[[योगसूत्रवृत्ति]]''' || [[नागेश भट्ट]]<ref>[https://kymyogavaisharadi.org/display/bhashya/vritti/devanagari नागोजीभट्ट कृत वृत्ति]</ref> || १७वीं शताब्दी |- | '''[[शिवसंहिता]]''' || ऋषी आर्यवीर रुद्र || २५०० इ. पूर्व |- | '''[[घेरण्डसंहिता]]''' || [[घेरण्ड मुनि]]|| १५०० इ.पूर्व |- | '''[[हठरत्नावली]] || श्रीनिवास भट्ट || १७वीं शताब्दी |- | '''[[मणिप्रभा]]''' || रामानन्द यति|| १८वीं शताब्दी |- | '''[[सूत्रार्थप्रबोधिनी]]''' || नारायण तीर्थ || १८वीं शताब्दी |- | '''[[जोगप्रदीपिका]]''' || जयतराम || १७३७ ई. / यह हिन्दी, ब्रजभाषा, खड़ी बोली की मिलीजुली भाषा में रचित है<br> और शब्दावली संस्कृत के अत्यन्त निकट है। |- | '''सचित्र योगसाधन''' || शिवमुनि || २०वीं शताब्दी ; हिन्दी में लिखित<ref>{{Cite web |url=https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |title=शिवमुनि महाराज का अमर साहित्य |access-date=31 दिसंबर 2022 |archive-date=31 दिसंबर 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221231051935/https://www.shivmunisamaj.com/list-of-books-by-shivmuni |url-status=dead }}</ref> |- | '''[[योगदर्शनम्]]''' || [[स्वामी सत्यपति परिव्राजक]] || २१वीं शताब्दी |} ==इन्हें भी देखें== *[[योग का इतिहास]] *[[योग दर्शन]] *[[अष्टांग योग]] *[[योगसूत्र]] *[[हठयोग]] *[[जैन धर्म में योग]] *[[अंतरराष्ट्रीय योग दिवस]] *[[भारतीय मनोविज्ञान]] - कुछ लोग मानते हैं कि 'योग' भारतीय मनोविज्ञान का दूसरा नाम है। == बाहरी कड़ियाँ == * [[wikt:योग_शब्दावली|योग-शब्दावली]] * [https://indianculture2025k.blogspot.com/2020/06/disease-prevention-by-yoga.html योग द्वारा रोग निवारण] * [https://kymyogavaisharadi.org/ योगवैशारदी] (कृणमचार्य योग मन्दिरम् की इस साइट पर योग के अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं) *[https://sanskrit.nic.in/syllabus/Prak_Shastri/PS_1_Sem_Yoga.pdf योग सैद्धान्तिक] (प्राक्शास्त्री प्रथमवर्ष, प्रथम सत्रार्ध के लिये) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} == आगे पढ़ें == {{wiktionary}} * {{cite book |last=Apte |first=Vaman Shivram |authorlink= |author2= |title=The Practical Sanskrit Dictionary |year=1965 |publisher=Motilal Banarsidass Publishers |location=Delhi |isbn=81-208-0567-4 }}(चौथा संशोधित और विस्तृत संस्करण)। * {{cite book | last = Patañjali | first = | authorlink = Patañjali | author2 = | title = Yoga Sutras of Patañjali | publisher = Studio 34 Yoga Healing Arts | year = 2001 | location = | pages = | url = http://www.studio34yoga.com/yoga.php#reading | doi = | id = | isbn = | access-date = 19 अगस्त 2009 | archive-url = https://www.webcitation.org/61C1yPwVm?url=http://www.studio34yoga.com/classes#reading | archive-date = 25 अगस्त 2011 | url-status = dead }} * चांग, जी सी सी (1993)। तिब्बती योग. न्यू जर्सी: कैरल पब्लिशिंग ग्रुप . ISBN 0-8065-1453-1 * {{cite book |series= |last=Chatterjee |first=Satischandra |authorlink= |author2=Datta, Dhirendramohan |title=An Introduction to Indian Philosophy |year=1984 |publisher=University of Calcutta |location=Calcutta |edition=Eighth Reprint Edition }} * Donatelle, रेबेका जे हैल्थ: दी बेसिक्स. 6. एड. सैन फ्रांसिस्को: पियर्सन एडूकेशन, इंक 2005. * फयूएर्स्तें, जोर्ज . दी शम्भाला गाइड टु योग. 1. एड. बोस्टन एंड लन्डन: शम्भाला पुब्लिकेशन्स 1996. * {{cite book | last = Flood | first = Gavin | year = 1996 | title = An Introduction to Hinduism | publisher = Cambridge University Press | location = Cambridge | isbn = 0-521-43878-0 | url-access = registration | url = https://archive.org/details/introductiontohi0000floo }} * {{cite book | last = Gambhirananda | first = Swami | year = 1998 | title = Madhusudana Sarasvati Bhagavad_Gita: With the annotation Gūḍhārtha Dīpikā| publisher = [[Advaita Ashrama]] Publication Department| location = Calcutta | isbn=81-7505-194-9}} * {{cite book | last = Harinanda | first = Swami |author2= | year = | title = Yoga and The Portal | publisher = Jai Dee Marketing| location = | isbn=0978142950}} * {{cite book | last = Jacobsen | first = Knut A. (Editor) |author2= Larson, Gerald James (Editor)| year = 2005 | title = Theory And Practice of Yoga: Essays in Honour of Gerald James Larson | publisher = Brill Academic Publishers| location = | isbn=9004147578}} (स्टडीज इन दी हिस्ट्री ऑफ़ रिलिजनस, 110) * {{cite book |last=Keay |first=John|authorlink= |author2= |title=India: A History |year=2000 |publisher=Grove Press |location=New York |isbn=0-8021-3797-0 }} * मार्शल, जॉन (1931)। ''मोहेंजोदारो एंड दी इन्दुस सिविलैज़ेशन:वर्ष 1922-27 के बीच मोहेंजोदारो में भारत सरकार द्वारा किए एक सरकारी खाता पुरातत्व खुदाई के होने के नाते.'' दिल्ली:इन्दोलोगिकल बुक हाउस. * {{cite book |last=Michaels |first=Axel|authorlink= |author2= |title=Hinduism: Past and Present |url=https://archive.org/details/hinduismpastpres0000mich |year=2004 |publisher=Princeton University Press |location=Princeton, New Jersey|isbn=0-691-08953-1 }} * [[धर्म मित्रा|मित्रा, धर्म श्री]]. आसन: 608 योगा मुद्रा. 1. एड. कैलिफोर्निया: नई वर्ल्ड लाइब्रेरी 2003. * {{cite book | last = Müller | first = Max | authorlink= Max Müller |year = 1899 | title = Six Systems of Indian Philosophy; Samkhya and Yoga, Naya and Vaiseshika| publisher = Susil Gupta (India) Ltd.| location = Calcutta | isbn=0-7661-4296-5}}[129] ''पुस्तक का नया संस्करण; मूलतः यह दी सिक्स सिस्टम्स ऑफ़ इंडियन फिलोसोफी के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है।'' * {{cite book |last=Possehl |first=Gregory|authorlink=Gregory Possehl |author2= |title=The Indus Civilization: A Contemporary Perspective |url=https://archive.org/details/induscivilizatio0000poss |year=2003 |publisher=AltaMira Press |location= |isbn=978-0759101722 }} * {{cite book |series= |last=Radhakrishnan |first=S. |authorlink=Sarvepalli Radhakrishnan |author2=Moore, CA |title=A Sourcebook in Indian Philosophy |year=1967 |publisher=Princeton |location= |isbn=0-691-01958-4 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/sourcebookinindi00radh }} * सरस्वती, स्वामी सत्यानन्दा. नवंबर 2002 (12 वें संस्करण)। "आसन प्राणायाम मुद्रा बंधा" ISBN 81-86336-14-1 * {{cite book |series= |last=Taimni |first=I. K. |authorlink= |author2=|title=The Science of Yoga |url=https://archive.org/details/scienceofyogayog00unse|year=1961 |publisher=The Theosophical Publishing House |location=Adyar, भारत |isbn=81-7059-212-7 }} * उशाराबुध, आर्य पंडित. फिलोसोफी ऑफ़ हठ योगा. 2. एड. पेन्नीसिलवेनिया : हिमालयन इंस्टीट्युत प्रेस 1977, 1985. * {{cite book |series= |last=Yogshala |first=Ekam Drishti |authorlink=Ekam Drishti Yogshala |author2=|title=Yoga And Its Role In Stress Management: How To Become Calmer And Focused |year=2021 |location=Rishikesh, India }} * {{cite book |series= |last=Vivekananda |first=Swami |authorlink=Swami Vivekananda |author2=|title=Raja Yoga |year=1994 |publisher=[[Advaita Ashrama]] Publication Department |location=Calcutta |isbn=81-85301-16-6 }} 21 रिप्रिंट एडिशन * {{cite book |series= |last=Zimmer |first=Heinrich |authorlink=Heinrich Zimmer |author2=|title=Philosophies of India |year=1951 |publisher=Princeton University Press |location=New York, New York |isbn=0-691-01758-1 }} बोल्लिंगें सीरीज XXVI; जोसेफ कैम्बेल द्वारा संपादित. * {{cite book |series= |last=Weber|first=Hans-Jörg L. |authorlink=Hans-Jörg L. Weber |author2=|title=Yogalehrende in Deutschland: eine humangeographische Studie unter besonderer Berücksichtigung von netzwerktheoretischen, bildungs- und religionsgeographischen Aspekten |year=2007 |publisher=University of Heidelberg |location=Heidelberg |}} https://web.archive.org/web/20090826191058/http://archiv.ub.uni-heidelberg.de/savifadok/volltexte/2008/121/ {{भारतीय दर्शन}} [[श्रेणी:हिंदू दार्शनिक अवधारणाएँ]] [[श्रेणी:योग]] [[श्रेणी:भारतीय दर्शन]] [[श्रेणी:संस्कृत शब्द]] [[श्रेणी:ध्यान]] [[श्रेणी:व्यायाम]] [[श्रेणी:भारतीय खोज]] k07q2mkx8lqwte6ar4omm59rm8g1aj5 केन्द्र-शासित प्रदेश 0 1715 6536608 6281410 2026-04-05T14:58:55Z ~2026-21140-69 918924 6536608 wikitext text/x-wiki [[File:Indian Union Territory 2022 in Hindi.jpg|thumb|350px|right|भारत के केन्द्र शासित प्रदेश]] '''केन्द्र शासित प्रदेश''' या '''संघ-राज्यक्षेत्र''' या '''संघक्षेत्र''' [[भारत]] के संघीय प्रशासनिक ढाँचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई है। [[भारत के राज्य|भारत के राज्यों]] की अपनी-2 सरकार होती हैं, लेकिन केन्द्र शासित प्रदेशों में सीधे-सीधे [[भारत सरकार]] का शासन होता है। [[भारत के राष्ट्रपति|भारत का राष्ट्रपति]] हर केन्द्र शासित प्रदेश का एक सरकारी प्रशासक या [[उप राज्यपाल]] नामित करता है।<ref>[http://india.gov.in/knowindia/union_territories.php केन्द्र शासित प्रदेश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090815042204/http://india.gov.in/knowindia/union_territories.php |date=15 अगस्त 2009 }} भारत के राष्ट्रीय पोर्टल पर।</ref> वर्तमान में भारत में 8 केन्द्र शासित प्रदेश हैं।<ref name="mha">[http://www.mha.gov.in/unio.htm केन्द्र शासित प्रदेश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080405004645/http://mha.gov.in/unio.htm |date=5 अप्रैल 2008 }} भारतीय गृह मन्त्रालय</ref> भारत की राजधानी [[नई दिल्ली]] जो कि [[दिल्ली]] नामक केन्द्र शासित प्रदेश भी था और [[पुडुचेरी]] को आंशिक राज्य का दर्जा दे दिया गया है। दिल्ली को ''राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश-1992'' के तौर पर पुनः परिभाषित किया गया है। दिल्ली व पुदुचेरी दोनो की अपनी [[विधानसभा]] व कार्यपालिका हैं, लेकिन उनकी शक्तियाँ सीमित हैं - उनके कुछ कानून भारत के राष्ट्रपति के "विचार और स्वीकृति" मिलने पर ही लागू हो सकते हैं। भारत में वर्तमान में निम्नलिखित केन्द्र शासित क्षेत्र हैं :- # [[दिल्ली]] - यह भारत का राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश भी है। # [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह]] # [[चण्डीगढ़]] # [[दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव]] - 26 नवंबर 2019 को घोषित और 26 जनवरी 2020 से प्रभावी। # [[लक्षद्वीप]] # [[पुडुचेरी]] # [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] - 5 अगस्त 2019 को घोषित और 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी।<ref name="राजपत्र">{{Cite web |url=http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/210407.pdf |title=भारत का राजपत्र संख्या 53, दिनांक 9 अगस्त 2019 को प्रकाशित |access-date=6 सितंबर 2019 |archive-date=4 नवंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191104144046/http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/210407.pdf |url-status=dead }}</ref> # [[लद्दाख]] - 5 अगस्त 2019 को घोषित और 31 अक्टूबर 2019 से प्रभावी।<ref name="राजपत्र"></ref> # <!--यह लेख इस पर एक श्रृंखला का हिस्सा है भारत की राजनीति संविधान और कानून सरकार संसद न्यायतंत्र चुनाव और राजनीतिक दल प्रशासनिक प्रभाग संघवाद भारत पोर्टल अन्य देश वी T ई 1951 और 1956 में भारत के प्रशासनिक प्रभागों की तुलना नवंबर 2019 तक जम्मू और कश्मीर के जिले और लद्दाख के जिलों की सूची।--> ===इतिहास=== 1949 में जब भारत का संविधान अपनाया गया, तो भारतीय संघीय ढांचे में शामिल थे: *भाग सी के राज्य, जो मुख्य आयुक्तों के प्रांत थे और कुछ रियासतें थीं, प्रत्येक का शासन भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक मुख्य आयुक्त द्वारा किया जाता था।  भाग सी के दस राज्य अजमेर, भोपाल, बिलासपुर, कूर्ग, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, कच्छ, मणिपुर, त्रिपुरा और विंध्य प्रदेश थे। *एक भाग डी राज्य (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त लेफ्टिनेंट गवर्नर द्वारा प्रशासित होता है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के बाद, भाग सी और भाग डी राज्यों को "केंद्र शासित प्रदेश" की एक ही श्रेणी में जोड़ दिया गया।  विभिन्न अन्य पुनर्गठनों के कारण, केवल 6 केंद्र शासित प्रदेश रह गए: *अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह *लक्षद्वीप, मिनिकॉय और अमिनदीवी द्वीप समूह (बाद में इसका नाम बदलकर लक्षद्वीप कर दिया गया) *दिल्ली *मणिपुर *त्रिपुरा *हिमाचल प्रदेश 1970 के दशक की शुरुआत तक, मणिपुर, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बन गए थे, और चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया था।  अन्य तीन (दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव और पुडुचेरी) अधिग्रहीत क्षेत्रों से बने थे जो पहले गैर-ब्रिटिश औपनिवेशिक शक्तियों (क्रमशः पुर्तगाली भारत और फ्रांसीसी भारत) के थे। अगस्त 2019 में, भारत की संसद ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित किया। इस अधिनियम में 31 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित करने के प्रावधान हैं, एक को उसी नाम से जम्मू और कश्मीर कहा जाएगा, और दूसरे को लद्दाख कहा जाएगा।  2019. नवंबर 2019 में, भारत सरकार ने दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के केंद्र शासित प्रदेशों को एक केंद्र शासित प्रदेश में विलय करने के लिए कानून पेश किया, जिसे दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव के नाम से जाना जाएगा। ===प्रशासन=== भारत की संसद संविधान में संशोधन करने और केंद्र शासित प्रदेश के लिए निर्वाचित सदस्यों और एक मुख्यमंत्री के साथ एक विधानमंडल प्रदान करने के लिए एक कानून पारित कर सकती है, जैसा कि उसने दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और पुडुचेरी के लिए किया है।  आम तौर पर, भारत के राष्ट्रपति प्रत्येक केंद्रशासित प्रदेश के लिए एक प्रशासक या उपराज्यपाल नियुक्त करते हैं। दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर अन्य पांच से अलग तरीके से काम करते हैं।  उन्हें आंशिक राज्य का दर्जा दिया गया और दिल्ली को [राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र] (एनसीटी) के रूप में फिर से परिभाषित किया गया और एक बड़े क्षेत्र में शामिल किया गया जिसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के रूप में जाना जाता है।  दिल्ली, पुदुचेरी, जम्मू और कश्मीर में एक विधान सभा और कार्यपालिका है जिसका कार्य आंशिक रूप से राज्य जैसा है। केंद्र शासित प्रदेशों के अस्तित्व के कारण, कई आलोचकों ने भारत को एक अर्ध-संघीय राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारों के पास अपने-अपने डोमेन और कानून के क्षेत्र हैं।  भारत के केंद्र शासित प्रदेशों को उनके संवैधानिक गठन और विकास के कारण विशेष अधिकार और दर्जा प्राप्त है।  स्वदेशी संस्कृतियों के अधिकारों की सुरक्षा, शासन के मामलों से संबंधित राजनीतिक उथल-पुथल को टालने आदि जैसे कारणों से "केंद्र शासित प्रदेश" का दर्जा भारतीय उप-क्षेत्राधिकार को सौंपा जा सकता है।  अधिक कुशल प्रशासनिक नियंत्रण के लिए भविष्य में इन केंद्र शासित प्रदेशों को राज्यों में बदला जा सकता है। संविधान यह निर्धारित नहीं करता है कि राज्यों के विपरीत, केंद्र शासित प्रदेशों को कर राजस्व कैसे हस्तांतरित किया जाएगा।  केंद्र सरकार द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों को निधि के हस्तांतरण का कोई मानदंड नहीं है जहां सारा राजस्व केंद्र सरकार को जाता है।  केंद्र सरकार द्वारा मनमाने ढंग से कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को अधिक धनराशि प्रदान की जाती है, जबकि अन्य को कम धनराशि दी जाती है।[10]  चूंकि केंद्र शासित प्रदेशों पर सीधे केंद्र सरकार का शासन होता है, इसलिए कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को राज्यों की तुलना में प्रति व्यक्ति और पिछड़ेपन के आधार पर केंद्र सरकार से अधिक धनराशि मिलती है। जीएसटी लागू होने के बाद, यूटी-जीएसटी उन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होता है जहां विधानसभा नहीं है।  यूटी-जीएसटी देश के बाकी हिस्सों में लागू राज्य जीएसटी के बराबर लगाया जाता है जो केंद्र शासित प्रदेशों में पिछले कम कराधान को खत्म कर देगा। ===संवैधानिक स्थिति=== भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 (1) में कहा गया है कि भारत एक "राज्यों का संघ" होगा, जिसे संविधान के भाग V (संघ) और VI (राज्यों) के तहत विस्तृत किया गया है।  अनुच्छेद 1 (3) कहता है कि भारत के क्षेत्र में राज्यों के क्षेत्र, केंद्र शासित प्रदेश और अन्य क्षेत्र शामिल हैं जिनका अधिग्रहण किया जा सकता है।  केंद्र शासित प्रदेशों की अवधारणा संविधान के मूल संस्करण में नहीं थी, बल्कि इसे संविधान (सातवां संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा जोड़ा गया था।[12]  अनुच्छेद 366(30) केंद्र शासित प्रदेश को पहली अनुसूची में निर्दिष्ट किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के रूप में परिभाषित करता है और इसमें भारत के क्षेत्र के भीतर शामिल कोई भी अन्य क्षेत्र शामिल है लेकिन उस अनुसूची में निर्दिष्ट नहीं है।  संविधान में जहां भी यह भारत के क्षेत्रों का उल्लेख करता है, वहां यह केंद्र शासित प्रदेशों सहित पूरे देश पर लागू होता है।  जहां यह केवल भारत को संदर्भित करता है, यह केवल सभी राज्यों पर लागू होता है, केंद्र शासित प्रदेशों पर नहीं।  इस प्रकार, नागरिकता (भाग II), मौलिक अधिकार (भाग III), राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (भाग IV), न्यायपालिका की भूमिका, केंद्र शासित प्रदेश (भाग VIII), अनुच्छेद 245, आदि केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होते हैं क्योंकि यह विशेष रूप से संदर्भित हैं  भारत के क्षेत्र.  संघ की कार्यकारी शक्ति (अर्थात केवल राज्यों का संघ) भारत के राष्ट्रपति के पास है।  अनुच्छेद 239 के अनुसार भारत के राष्ट्रपति केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य प्रशासक भी हैं। संघ लोक सेवा आयोग की भूमिका भारत के सभी क्षेत्रों पर लागू नहीं होती है क्योंकि यह केवल भाग XIV में भारत को संदर्भित करता है। केंद्र शासित प्रदेश की संवैधानिक स्थिति अनुच्छेद 356 के अनुसार बारहमासी राष्ट्रपति शासन के तहत एक राज्य के समान है, जो विधान सभा वाले कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को विशिष्ट छूट के अधीन है।  अनुच्छेद 240 (1) के अनुसार, चंडीगढ़, एनसीटी और पुडुचेरी को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेशों के मामलों को विनियमित करने में राष्ट्रपति को सर्वोच्च शक्ति दी गई है, जिसमें संसद और भारत के संविधान द्वारा बनाए गए कानूनों को खत्म करने की शक्तियां भी शामिल हैं।  अनुच्छेद 240 (2) विदेशी टैक्स हेवन देशों पर निर्भर रहने के बजाय भारत में विदेशी पूंजी और निवेश को आकर्षित करने के लिए इन केंद्र शासित प्रदेशों में टैक्स हेवन कानूनों को लागू करने की अनुमति देता है। संविधान की पहली अनुसूची में सूचीबद्ध राज्यों और विधान सभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अंतर यह है कि राज्यों को संसद के किसी भी संभावित हस्तक्षेप के बिना संविधान में प्रदान की गई स्वायत्त शक्तियां दी गई थीं, जबकि विधान सभा (भाग VIII) वाले केंद्र शासित प्रदेशों के पास समान शक्तियां हैं।  लेकिन संसद को केंद्र शासित प्रदेश द्वारा बनाए गए कानूनों को संशोधित करने या निरस्त करने या निलंबित करने का अधिकार है (राज्यों की स्वतंत्र प्रकृति के विपरीत संसद द्वारा अंतिम अधिकार)। तीन केंद्र शासित प्रदेशों का भारतीय संसद के ऊपरी सदन, राज्यसभा में प्रतिनिधित्व है: दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और पुदुचेरी।  पुदुचेरी, जम्मू और कश्मीर और एनसीटी दिल्ली केवल तीन केंद्र शासित प्रदेश हैं जो केंद्र शासित प्रदेशों में असाधारण हैं क्योंकि प्रत्येक की अपनी स्थानीय रूप से निर्वाचित विधान सभा है और एक मुख्यमंत्री है। [उद्धरण वांछित] == इन्हें भी देखें == * [[भारत के राज्य]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{भारत के राज्य और संघ राज्यक्षेत्र}} [[श्रेणी:भारत के उपविभाग]] [[श्रेणी:भारत के केन्द्र शासित प्रदेश]] 8d1ecnmlz5769a9ecyp53tyjgl9zr0c चेन्नई 0 1764 6536712 6536561 2026-04-05T21:51:19Z Dimple323 881290 /* प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं */ संपादकीय सुधार। ~~~~Dimple323 6536712 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन | name = चेन्नै | native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}} | settlement_type = [[महानगर]] | image_seal = | pushpin_map = India | pushpin_label_position = right | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]] | population_as_of = २०११ | population_total = ६७४८०२६ | population_metro = ८६९६०१० | population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref> | timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] | utc_offset1 = +5:30 | website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}} | footnotes = | official_name = | translit_lang1_type = | image_skyline = {{multiple image |perrow = 1/2/2/2 |border = infobox |total_width = 300 |image1 = Chennai Central.jpg |caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽल्वेऽ स्टेशन]] |image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg |caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]] |image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG |caption3 = वल्लुवर कोट्टम |image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg |caption4 = श्रम की प्रतिमा |image5 = Kathipara Crop.jpg |caption5 = कत्तिपारा जंक्शन |image6 = Ripon Building Chennai.JPG |caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]] |image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg |caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] }} | 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नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था। चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किए जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है। भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमारला चेन्नाप्प नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, ८ अगस्त १६३९ को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर १६४६ में बनाया गया था। १९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसका मद्रास नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है। चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name=itchennai1>{{cite news |title=आईटी इन इण्डिया |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |work=बिज़नेस स्टैण्डर्ड |date=३० सितंबर २००७ |accessdate=19 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref name=itchennai2>{{cite news |title=चेन्नई एमर्जिंग ऐज़ इण्डियाज़ सिलिकॉन वैली? |url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |work=द इकोनोमिक टाइम्स |date=मई 1, 2008 |accessdate=17 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |archive-date=5 मई 2008 |url-status=live }}</ref> चेन्नै मंडल तमिलानाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=सी आई आई लॉन्चेज़ चेन्नई ज़ोन |publisher=द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=इण्डियाज़ डेट्रॉएट |publisher=बिज़नेसटुडे.डिजिटलटुडे.इन |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref> चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केन्द्र है। == नामकरण == मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। परन्तु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदल कर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है। == इतिहास == {{main|चेन्नई का इतिहास}} [[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|विक्टोरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट नमूनों में से एक]] {{Historical populations|type= |align = left |१८८१| 405848 |१८९१| 452518 |१९०१| 509346 |१९११| 518660 |१९२१| 526000 |१९३१| 645000 |१९४१| 776000 |१९५१|1416056 |१९६१|1729141 |१९७१|2420000 |१९८१|3266034 |१९९१|3841398 |२००१|4216268 }} चेन्नै एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]], एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। [[मयलापुर]] नगर जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्त्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे ''साओ तोमे'' कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी। [[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज किला]] बनवाया जो बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर [[फ़्रान्स|फ़्रांसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) की बदौलत हुआ। इस क्षेत्र को फ्रांसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गयी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia | title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल) | url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका | edition = ग्यारहवां संस्करण | year = १९११ | accessdate = २००७-०९-०४ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | archive-date = 1 मई 2008 | url-status = live }}</ref> ब्रिटिशों की हुक़ूमत के अधीन चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के के रूप में उभरा। == भूगोल == {{main|चेन्नई का भूगोल}} [[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामाराजार सलाई जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web |title=Geographical and physical features |work=District Profile |publisher=Govt of India |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal |last = Pulikesi |first = M |author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan |title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005 |journal = Journal of Hazardous Materials |volume = 136 |issue = 3 |pages = 589–596 |date=अगस्त 25, 2006 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill. |doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ही ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news |last=Baskaran |first=Theodore S |title=Death of an Estuary |work=द हिन्दू |date=जनवरी 12, 2003 |url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news |last=Doraisamy |first=Vani |title=A breather for the Adyar estuary |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 31, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news |last=Lakshmi |first=K |title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur |work=द हिन्दू |date=जुलाई 13, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]] चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web |title=Structure of Chennai |work=Second Master Plan - II |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15 |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |format=PDF |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गुंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web |title=Guindy National Park |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |accessdate=10 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |archive-date=28 सितंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Hot spell may continue for some more weeks in the State |work=द हिन्दू |date=मई 18, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web |title=Climate of India |work=National Environment Agency – Singapore |url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |archive-date=6 अक्तूबर 2006 |url-status=dead }}</ref><ref name=hightemp>{{cite news |title=Highest temperature |work=द हिन्दू |date=मई 31, 2003 |url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |accessdate=25 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |archive-date=11 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim |work=द हिन्दू |date=जनवरी 3, 2006 |url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |accessdate=4 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |archive-date=28 फ़रवरी 2007 |url-status=live }}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> {{Infobox Weather |collapsed=yes |metric_first=Yes |single_line=Yes |location = चेन्नई, भारत |Jan_Hi_°F = 83.12 |Feb_Hi_°F = 85.82 |Mar_Hi_°F = 89.42 |Apr_Hi_°F = 92.48 |May_Hi_°F = 97.52 |Jun_Hi_°F = 97.88 |Jul_Hi_°F = 94.46 |Aug_Hi_°F = 93.02 |Sep_Hi_°F = 92.3 |Oct_Hi_°F = 88.52 |Nov_Hi_°F = 84.56 |Dec_Hi_°F = 82.58 |Year_Hi_°F = 90.14 |Jan_Lo_°F = 69.08 |Feb_Lo_°F = 70.16 |Mar_Lo_°F = 73.58 |Apr_Lo_°F = 78.62 |May_Lo_°F = 81.68 |Jun_Lo_°F = 80.96 |Jul_Lo_°F = 78.62 |Aug_Lo_°F = 77.54 |Sep_Lo_°F = 77.54 |Oct_Lo_°F = 75.74 |Nov_Lo_°F = 73.04 |Dec_Lo_°F = 70.88 |Year_Lo_°F = 75.62 |Jan_Precip_mm = 16.2 |Feb_Precip_mm = 3.7 |Mar_Precip_mm = 3.0 |Apr_Precip_mm = 13.6 |May_Precip_mm = 48.9 |Jun_Precip_mm = 53.7 |Jul_Precip_mm = 97.8 |Aug_Precip_mm = 149.7 |Sep_Precip_mm = 109.1 |Oct_Precip_mm = 282.7 |Nov_Precip_mm = 350.3 |Dec_Precip_mm = 138.2 |Year_Precip_mm = 1266.9 |source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref> |accessdate = 25 जनवरी 2009 }} == प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं == {{main|चेन्नई का प्रशासन }} {{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }} {|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं.&nbsp;०७)'''</div> {| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> |<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div> |- |उप-[[महापौर]] |<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div> |- | नगर निगम आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div> |- |पुलिस आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div> |} |} चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web |title=कार्यपालक सारणी |work=अबाउट सी.ओ.सी |publisher=चेन्नई कार्पोरेशन |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |archive-date=11 फ़रवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। [[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]] चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम ज़िला]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web |title=जनरल स्टैटिस्टिक्स |publisher=कार्पोरेशन ऑफ चेन्नई |url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |archive-date=9 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web |title=चेन्नई मेट्रो पॉलिटन एरिया - प्रोफाइल |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटान डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org |accessdate=15 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> [[चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण|चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण]] ([[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी|सी.एम.डी.ए]]) ने नगर के निकट उपग्रह-नगरो के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपग्रह नगरो में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं। ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस-स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी जेले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अन्तर्गत्त हैं। [[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालिण [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]] चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इंवायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (सीवेज ट्रीटमेंट) की निगरानी चेन्नै मेट्र'पॉलिटन वॉऽटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web |title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://chennai.nic.in/emergency.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm |archive-date=30 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़ॉर्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of Indiaटेलीकॉम रेग्युलेत्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news |last=नारायणन |first=आर वाई |title=टचटेल अराइव्स इन [[कोयंबतूर]] |work=[[द हिन्दु]] |date=५ सितंबर २००२ |url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |archive-date=10 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं। नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web |title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004 |work=Operations and maintenance |publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board |url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |accessdate=16 मार्च 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |archive-date=12 अगस्त 2007 |url-status=dead }}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news |last = लक्ष्मी |first = के |title = बंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्स इन सिटी |work = द हिन्दू |date = [[३ अगस्त]],[[२००७]] |url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |accessdate = 11 अगस्त 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |archive-date = 1 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नई परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news |title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai |work=द हिन्दू |date=अगस्त 12, 2005 |url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Radhakrishnan |first=R.K |title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 4, 2007 |url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> == संस्कृति == {{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }} {{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}} [[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]] चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लि प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादमी की स्थापना की वर्षगांठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news |title=Music musings |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |date=फ़रवरी 3, 2005 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |archive-date=7 फ़रवरी 2005 |url-status=live }}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news |author=GR |url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |title=Yearning for Chennai ambience |accessdate=7 सितंबर 2007 |date=दिसम्बर 2, 2000 |work=द हिन्दू |archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |archive-date=29 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्स हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news |url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp |title=Chennai as a home for Music – IV |work=Chennai Online |date=2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp |archive-date=17 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.go-nxg.com/?p=3155 |title=There's a song in the air... |work=NXg |date=जनवरी 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155 |archive-date=15 जून 2013 |url-status=dead }}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसियेशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान क्वायर्स में से एक हैं और इन्होंने विश्व भर में कार्यक्रम दिये हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |title=Chennai choir to sing in England |work=द हिन्दू |date=जून 16, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |archive-date=29 जनवरी 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |title=An aural treat |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 03, 2007 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |archive-date=26 सितंबर 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहां अधिकांश फिल्म स्टूडियों हैं।<ref>{{cite book |last = Ellens |first = Dan |author2= Lakshmi Srinivas |title=A Time for India |publisher=Vantage Press Inc., New York |year = 2006 |page = 150 |isbn = 0533150922 |url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1 |accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग के द्वारा आजकल १५० से अधिक फिल्में वार्षिक बनायी जाती हैं<ref>{{cite book |last = Ganti |first = Tejaswini |title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema |publisher = Routledge, London |year = 2004 |page = 3 |isbn = 0415288541 |url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE |accessdate = 7 सितंबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC |archive-date = 4 जून 2013 |url-status = live }}</ref> और इनके साउण्डट्रैक के एल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नामों में [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकांत]], [[कमल हसन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|तरह तरह के तमिल व्यंजन]] [[ए आर रहमान]] ने चेन्नै को अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news |url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep |work=VOA News |date=फ़रवरी 23, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |archive-date=24 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news |last=Ramesh |first=V |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |title=The Sultan of sarcasm |work=द हिन्दू |date=जुलाई 17, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |archive-date=30 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |last=अशोक कुमार |first=एस आर |url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |title=एक्टर आर एस मनोहर डेड |work=द हिन्दू |date=जनवरी 11, 2006 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |archive-date=26 जून 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Kumar |first=Ranee |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |title=Laughter, the best medicine |work=द हिन्दू |date=दिसम्बर 10, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |archive-date=30 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref> इनके अलावा अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है। नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे [[दीपावली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफिन भी उपलब्ध है, जिसमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिसको गर्मा गर्म या ठंडी कॉफी के साथ परोसा जाता है। == अर्थव्यवस्था == [[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|Tidel Park]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेराम्बूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेलवे डिब्बा निर्माण का कारखाना इन्टीग्रल कोच बिल्डिंग फैक्टरी स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, कागज एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीजल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सीमेन्ट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में अवस्थित हैं। इनमें इण्टिग्रल कोच फैक्टरी, हिन्दुस्तान टेलीप्रिन्टर, चेन्नै रिफाईनरी एवं चेन्नै फर्टिलाइजर आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्रोकेमिकल्स में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है। == जनसांख्यिकी == [[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|[[रंगनाथन स्ट्रीट]] [[टी नगर]] में पटरी पर खरीदने बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]] चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-५, I-१० |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news |last=श्रीवास्तन |first=ए |title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान |date=१२ अप्रैल २००७ |url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |work=[[द हिन्दु]] |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग कि॰मी॰ (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग कि॰मी॰ था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरो में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web |title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी |work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस) |pages=p. 77 |month=मार्च |year=२००७ |publisher=डेमोग्राफ़िया |url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |archive-date=3 मई 2018 |url-status=dead }} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहां का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियां/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web |title=सेन्सस २००१ डाटा |work=भारत की जनगणना |publisher=तमिल नाडु सरकार |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |accessdate=5 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web |title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१ |work=Department of school education |url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |archive-date=17 अगस्त 2005 |url-status=live }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web |title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१ |publisher=भारत सरकार |url=http://www.censusindia.gov.in/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf |archive-date=21 जून 2007 |format=PDF |accessdate=8 मार्च 2007 |url-status=live }}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरो में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |format=PDF |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005 |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=क्राइम इन मेगा सिटीज़ |work=क्राइम इन इन्डिया &nbsp;–&nbsp;२००५ |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |archive-date=14 जून 2007 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहां की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिल नाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आंकड़ों के अनुसार नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=PDF |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-11 |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |format=PDF |title=एरिया एंड पॉपुलेशन |publisher=तमिल नाडु सरकार |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |archive-date=30 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == यातायात == <!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]] --> {{main|चेन्नई में यातायात }} [[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आई.टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखाई दे रहा है]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भांति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अन्तर्राष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टार्मिनल सहित [[चेन्नई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |format=PDF |publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]] |title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |format=PDF |publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण |title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिन्दुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट लगभग २००० करोड़ रु. की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news |title=New greenfield airport to be set up near Chennai |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |date=मई 22, 2007 |accessdate=22 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |archive-date=26 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पोर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पोर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहां ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news |url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |publisher=Business Times |title=Gateway to India for Singapore firms |date=जुलाई 6, 2006 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |archive-date=12 मार्च 2010 |url-status=dead }}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्रप्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज, कहवा, अबरख, मैंगनीज, चाय, मसाला, तेलहन, चमड़ा, नारियल इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पेट्रोलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है। [[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]] आज रेलमार्गों और सड़कों का मुख्य जंक्शन होने के कारण यह नगर देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बंगलोर]], कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भांति जुड़ा हुआ है। यहां से पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफस्सिल बस टर्मिनस, चेन्नै से सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news |last=Dorairaj |first=S |url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |work=द हिन्दू |title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification |date=दिसम्बर 28, 2005 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |archive-date=7 नवंबर 2011 |url-status=live }}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएं संचालित करते हैं। बहुत सी निजी बस सेवाएं भी चेन्नै को अन्य नगरो से सुलभ कराती हैं। चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टार्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेलवे स्टेशन]], जहां से सभी बड़े नगरो जैसे [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बंगलुरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरो की रेल सेवाएं ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरो की भी रेलगाड़ियां यहां से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news |title=35 trains to run at higher speed |date=अगस्त 27, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|[[मेट्रोपॉलिटान ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन, चेन्नई|एम.टी.सी]] की वॉल्वो बस]]<!-- end of image --> नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं: * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]]) * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]]) * [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]]) * चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है। [[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै मेट्रो चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइने प्रयोग में है एवम् अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web |first=TheCSR |title=Chennai metro work begins |date=अप्रैल 18, 2008 |url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |work=द हिन्दू |accessdate=17 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |archive-date=1 नवंबर 2008 |url-status=live }}</ref> मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web |title=The Growth |publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd |url=http://www.mtcbus.org/ |date=मई 31, 2008 |accessdate=31 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/ |archive-date=26 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |format=PDF |title=Land Use and Planning Strategy |work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |page=p. 60 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srivathsan |first=A |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp& |title=Bridge across time Skyline |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 29, 2007 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp& |archive-date=27 मार्च 2011 |url-status=dead }}</ref> और हाल ही में तैयार हुई, इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है। == शिक्षा == [[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]] चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |title=Balancing uniformity and diversity |work=द हिन्दू |date=नवम्बर 20, 2006 |author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा |accessdate=7 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |title=No. of Schools in the Town : Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |archive-date=9 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref> इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं। विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं। == खेल-कूद == [[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web |last=श्रीराम |first=नटराजन |url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |title=MA Chidambaram stadium |publisher=क्रिक्इन्फ़ो |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=live }}</ref> मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |title=India retains Asia Cup hockey title |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 10, 2007 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |archive-date=29 जून 2011 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |title=Radhakrishnan stadium to have new turf |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 20, 2004 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |archive-date=25 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है। [[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news |last=बसु |first=अरुंधती |title=Off-court ace |date=मार्च 19, 2005 |url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |work=द टेलिग्रैफ़ |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Kamesh |title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai |date=दिसम्बर 28, 2001 |url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news |last=Keerthivasan |first=K |title=A trip down memory lane |date=दिसम्बर 30, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |work=द हिन्दू |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |archive-date=29 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.chennaiopen.org |title=About the venue |publisher=[[International Management Group]] |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/ |archive-date=2 जून 2019 |url-status=live }}</ref> सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the road to restoration |date=दिसम्बर 4, 2003 |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है। कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the right track |date=अगस्त 22, 2002 |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> घुड़दौड़ गुंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news |last = Brijnath |first = Rohit |url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |title = India's most consistent champion |work = [[द हिन्दू]] |date = अक्टूबर 6, 2007 |accessdate = 11 अक्टूबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |archive-date = 11 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref><ref>{{cite news |last=Fide |first= |url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |title=FIDE Top 100 Players October 2007 |work=Fide |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |archive-date=24 अप्रैल 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Official site of the 2007 World Chess Championship |first= |url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007 |work= |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |archive-date=14 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> २००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Meera |url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice |work=[[द हिन्दू]] |date=सितम्बर 7, 2007 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web |url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |publisher=Govt. of India |title=Indian Teams in International Competitions |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> == पर्यटन == चेन्नै को सुपर प्रसारित नगर कहते हैं यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केन्द्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन्‌ [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव का घर है। सेंट मेरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है। चेन्नै का [[मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान को चेन्नै वासी शाम को मरीना बीच की अथाह जल राशि में बहा देना चाहते हों। पर्यटकों की सुविधा के लिए मेरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह खतरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गई हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ ही एम.जी.आर. स्मारक भी है जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्वलित रहती है। चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है जिसका निर्माण रोमुलस व्हिटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह पाँच सौ से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गए हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नेशनल आर्ट गैलरी में सहज ही किए जा सकते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गरम जलवायु लिए हुए है जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से खूबसूरत लगता है। == चित्र दीर्घा == <gallery> File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मैलापुर कपिलेश्वर मंदिर File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम ए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat|Chennai|चेन्नई}} * [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन] * [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल] {{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}} {{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}} {{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}} {{भारत के मिलियन+ नगर}} . [[श्रेणी:चेन्नई]] [[श्रेणी:तमिलनाडु]] [[श्रेणी:भारत के महानगर]] [[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]] [[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]] [[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]] [[श्रेणी:कोरोमंडल तट]] 88wjwtccllgok6kyahtiyucgzicdncw 6536715 6536712 2026-04-05T22:00:13Z Dimple323 881290 /* प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं */ संपादकीय एवं व्याकरणिक त्रुटि-संबंधित सुधार।~~~~Dimple323 6536715 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन | name = चेन्नै | native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}} | settlement_type = [[महानगर]] | image_seal = | pushpin_map = India | pushpin_label_position = right | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]] | population_as_of = २०११ | population_total = ६७४८०२६ | population_metro = ८६९६०१० | population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref> | timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] | utc_offset1 = +5:30 | website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}} | footnotes = | official_name = | translit_lang1_type = | image_skyline = {{multiple image |perrow = 1/2/2/2 |border = infobox |total_width = 300 |image1 = Chennai Central.jpg |caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽल्वेऽ स्टेशन]] |image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg |caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]] |image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG |caption3 = वल्लुवर कोट्टम |image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg |caption4 = श्रम की प्रतिमा |image5 = Kathipara Crop.jpg |caption5 = कत्तिपारा जंक्शन |image6 = Ripon Building Chennai.JPG |caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]] |image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg |caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] }} | image_shield = Chennai Corporation Emblem.png | government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]] | governing_body = चेन्नै नगर निगम | leader_title = महापौर | leader_name = प्रिया राजन | leader_title1 = अध्यक्ष | leader_name1 = ज. कुमारगुरुवरन | area_total_km2 = ४२६ | area_metro_km2 = ५०९४ | elevation_m = ७ | population_density_km2 = auto | area_code = +91-44 | registration_plate = टीएन-01, टीएन-14, टीएन-18, टीएन-22 एवं टीएन-85 | blank_info_sec1 = ६००xxx | blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|पिन]] | blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ | blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}} | other_name = मद्रास }} '''चेन्नै''' ({{Langx|ta|சென்னை|Ceṉṉai}}; चेऩ्ऩै, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे १९९६ तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था। चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किए जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है। भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमारला चेन्नाप्प नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, ८ अगस्त १६३९ को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर १६४६ में बनाया गया था। १९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसका मद्रास नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है। चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name=itchennai1>{{cite news |title=आईटी इन इण्डिया |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |work=बिज़नेस स्टैण्डर्ड |date=३० सितंबर २००७ |accessdate=19 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref name=itchennai2>{{cite news |title=चेन्नई एमर्जिंग ऐज़ इण्डियाज़ सिलिकॉन वैली? |url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |work=द इकोनोमिक टाइम्स |date=मई 1, 2008 |accessdate=17 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |archive-date=5 मई 2008 |url-status=live }}</ref> चेन्नै मंडल तमिलानाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=सी आई आई लॉन्चेज़ चेन्नई ज़ोन |publisher=द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=इण्डियाज़ डेट्रॉएट |publisher=बिज़नेसटुडे.डिजिटलटुडे.इन |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref> चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केन्द्र है। == नामकरण == मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। परन्तु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदल कर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है। == इतिहास == {{main|चेन्नई का इतिहास}} [[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|विक्टोरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट नमूनों में से एक]] {{Historical populations|type= |align = left |१८८१| 405848 |१८९१| 452518 |१९०१| 509346 |१९११| 518660 |१९२१| 526000 |१९३१| 645000 |१९४१| 776000 |१९५१|1416056 |१९६१|1729141 |१९७१|2420000 |१९८१|3266034 |१९९१|3841398 |२००१|4216268 }} चेन्नै एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]], एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। [[मयलापुर]] नगर जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्त्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे ''साओ तोमे'' कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी। [[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज किला]] बनवाया जो बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर [[फ़्रान्स|फ़्रांसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) की बदौलत हुआ। इस क्षेत्र को फ्रांसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गयी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia | title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल) | url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका | edition = ग्यारहवां संस्करण | year = १९११ | accessdate = २००७-०९-०४ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | archive-date = 1 मई 2008 | url-status = live }}</ref> ब्रिटिशों की हुक़ूमत के अधीन चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के के रूप में उभरा। == भूगोल == {{main|चेन्नई का भूगोल}} [[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामाराजार सलाई जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web |title=Geographical and physical features |work=District Profile |publisher=Govt of India |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal |last = Pulikesi |first = M |author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan |title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005 |journal = Journal of Hazardous Materials |volume = 136 |issue = 3 |pages = 589–596 |date=अगस्त 25, 2006 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill. |doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ही ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news |last=Baskaran |first=Theodore S |title=Death of an Estuary |work=द हिन्दू |date=जनवरी 12, 2003 |url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news |last=Doraisamy |first=Vani |title=A breather for the Adyar estuary |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 31, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news |last=Lakshmi |first=K |title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur |work=द हिन्दू |date=जुलाई 13, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]] चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web |title=Structure of Chennai |work=Second Master Plan - II |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15 |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |format=PDF |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गुंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web |title=Guindy National Park |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |accessdate=10 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |archive-date=28 सितंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Hot spell may continue for some more weeks in the State |work=द हिन्दू |date=मई 18, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web |title=Climate of India |work=National Environment Agency – Singapore |url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |archive-date=6 अक्तूबर 2006 |url-status=dead }}</ref><ref name=hightemp>{{cite news |title=Highest temperature |work=द हिन्दू |date=मई 31, 2003 |url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |accessdate=25 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |archive-date=11 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim |work=द हिन्दू |date=जनवरी 3, 2006 |url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |accessdate=4 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |archive-date=28 फ़रवरी 2007 |url-status=live }}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> {{Infobox Weather |collapsed=yes |metric_first=Yes |single_line=Yes |location = चेन्नई, भारत |Jan_Hi_°F = 83.12 |Feb_Hi_°F = 85.82 |Mar_Hi_°F = 89.42 |Apr_Hi_°F = 92.48 |May_Hi_°F = 97.52 |Jun_Hi_°F = 97.88 |Jul_Hi_°F = 94.46 |Aug_Hi_°F = 93.02 |Sep_Hi_°F = 92.3 |Oct_Hi_°F = 88.52 |Nov_Hi_°F = 84.56 |Dec_Hi_°F = 82.58 |Year_Hi_°F = 90.14 |Jan_Lo_°F = 69.08 |Feb_Lo_°F = 70.16 |Mar_Lo_°F = 73.58 |Apr_Lo_°F = 78.62 |May_Lo_°F = 81.68 |Jun_Lo_°F = 80.96 |Jul_Lo_°F = 78.62 |Aug_Lo_°F = 77.54 |Sep_Lo_°F = 77.54 |Oct_Lo_°F = 75.74 |Nov_Lo_°F = 73.04 |Dec_Lo_°F = 70.88 |Year_Lo_°F = 75.62 |Jan_Precip_mm = 16.2 |Feb_Precip_mm = 3.7 |Mar_Precip_mm = 3.0 |Apr_Precip_mm = 13.6 |May_Precip_mm = 48.9 |Jun_Precip_mm = 53.7 |Jul_Precip_mm = 97.8 |Aug_Precip_mm = 149.7 |Sep_Precip_mm = 109.1 |Oct_Precip_mm = 282.7 |Nov_Precip_mm = 350.3 |Dec_Precip_mm = 138.2 |Year_Precip_mm = 1266.9 |source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref> |accessdate = 25 जनवरी 2009 }} == प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं == {{main|चेन्नई का प्रशासन }} {{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }} {|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं.&nbsp;०७)'''</div> {| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> |<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div> |- |उप-[[महापौर]] |<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div> |- | नगर निगम आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div> |- |पुलिस आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div> |} |} चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web |title=कार्यपालक सारणी |work=अबाउट सी.ओ.सी |publisher=चेन्नई कार्पोरेशन |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |archive-date=11 फ़रवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। [[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]] चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम ज़िला]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web |title=जनरल स्टैटिस्टिक्स |publisher=कार्पोरेशन ऑफ चेन्नई |url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |archive-date=9 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web |title=चेन्नई मेट्रो पॉलिटन एरिया - प्रोफाइल |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटान डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org |accessdate=15 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> [[चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण|चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण]] ([[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी|सी.एम.डी.ए]]) ने नगर के निकट उपग्रह-नगरो के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपग्रह नगरो में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं। ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस-स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी जेले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अन्तर्गत्त हैं। [[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालीन [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]] चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इंवायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (सीवेज ट्रीटमेंट) की निगरानी चेन्नै मेट्र'पॉलिटन वॉऽटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web |title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://chennai.nic.in/emergency.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm |archive-date=30 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़ॉर्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of Indiaटेलीकॉम रेग्युलेत्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news |last=नारायणन |first=आर वाई |title=टचटेल अराइव्स इन [[कोयंबतूर]] |work=[[द हिन्दु]] |date=५ सितंबर २००२ |url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |archive-date=10 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं। नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web |title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004 |work=Operations and maintenance |publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board |url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |accessdate=16 मार्च 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |archive-date=12 अगस्त 2007 |url-status=dead }}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news |last = लक्ष्मी |first = के |title = बंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्स इन सिटी |work = द हिन्दू |date = [[३ अगस्त]],[[२००७]] |url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |accessdate = 11 अगस्त 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |archive-date = 1 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news |title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai |work=द हिन्दू |date=अगस्त 12, 2005 |url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Radhakrishnan |first=R.K |title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 4, 2007 |url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> == संस्कृति == {{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }} {{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}} [[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]] चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news |title=Music musings |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |date=फ़रवरी 3, 2005 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |archive-date=7 फ़रवरी 2005 |url-status=live }}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news |author=GR |url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |title=Yearning for Chennai ambience |accessdate=7 सितंबर 2007 |date=दिसम्बर 2, 2000 |work=द हिन्दू |archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |archive-date=29 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news |url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp |title=Chennai as a home for Music – IV |work=Chennai Online |date=2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp |archive-date=17 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.go-nxg.com/?p=3155 |title=There's a song in the air... |work=NXg |date=जनवरी 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155 |archive-date=15 जून 2013 |url-status=dead }}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |title=Chennai choir to sing in England |work=द हिन्दू |date=जून 16, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |archive-date=29 जनवरी 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |title=An aural treat |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 03, 2007 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |archive-date=26 सितंबर 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।<ref>{{cite book |last = Ellens |first = Dan |author2= Lakshmi Srinivas |title=A Time for India |publisher=Vantage Press Inc., New York |year = 2006 |page = 150 |isbn = 0533150922 |url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1 |accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं<ref>{{cite book |last = Ganti |first = Tejaswini |title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema |publisher = Routledge, London |year = 2004 |page = 3 |isbn = 0415288541 |url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE |accessdate = 7 सितंबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC |archive-date = 4 जून 2013 |url-status = live }}</ref> और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकान्त|रजनीकांत]], [[कमल हासन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|तरह तरह के तमिल व्यंजन]] [[ए॰ आर॰ रहमान|ए. आर. रहमान]] ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news |url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep |work=VOA News |date=फ़रवरी 23, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |archive-date=24 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news |last=Ramesh |first=V |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |title=The Sultan of sarcasm |work=द हिन्दू |date=जुलाई 17, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |archive-date=30 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |last=अशोक कुमार |first=एस आर |url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |title=एक्टर आर एस मनोहर डेड |work=द हिन्दू |date=जनवरी 11, 2006 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |archive-date=26 जून 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Kumar |first=Ranee |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |title=Laughter, the best medicine |work=द हिन्दू |date=दिसम्बर 10, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |archive-date=30 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref> इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है। नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे [[दीपावली|दीवाली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी|माँसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है। == अर्थव्यवस्था == [[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|टाइडल पार्क]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेराम्बूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेलवे डिब्बा निर्माण का कारखाना इन्टीग्रल कोच बिल्डिंग फैक्टरी स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, कागज एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीजल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सीमेन्ट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में अवस्थित हैं। इनमें इण्टिग्रल कोच फैक्टरी, हिन्दुस्तान टेलीप्रिन्टर, चेन्नै रिफाईनरी एवं चेन्नै फर्टिलाइजर आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्रोकेमिकल्स में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है। == जनसांख्यिकी == [[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|[[रंगनाथन स्ट्रीट]] [[टी नगर]] में पटरी पर खरीदने बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]] चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-५, I-१० |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news |last=श्रीवास्तन |first=ए |title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान |date=१२ अप्रैल २००७ |url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |work=[[द हिन्दु]] |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग कि॰मी॰ (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग कि॰मी॰ था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरो में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web |title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी |work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस) |pages=p. 77 |month=मार्च |year=२००७ |publisher=डेमोग्राफ़िया |url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |archive-date=3 मई 2018 |url-status=dead }} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहां का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियां/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web |title=सेन्सस २००१ डाटा |work=भारत की जनगणना |publisher=तमिल नाडु सरकार |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |accessdate=5 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web |title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१ |work=Department of school education |url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |archive-date=17 अगस्त 2005 |url-status=live }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web |title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१ |publisher=भारत सरकार |url=http://www.censusindia.gov.in/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf |archive-date=21 जून 2007 |format=PDF |accessdate=8 मार्च 2007 |url-status=live }}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरो में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |format=PDF |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005 |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=क्राइम इन मेगा सिटीज़ |work=क्राइम इन इन्डिया &nbsp;–&nbsp;२००५ |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |archive-date=14 जून 2007 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहां की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिल नाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आंकड़ों के अनुसार नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=PDF |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-11 |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |format=PDF |title=एरिया एंड पॉपुलेशन |publisher=तमिल नाडु सरकार |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |archive-date=30 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == यातायात == <!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]] --> {{main|चेन्नई में यातायात }} [[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आई.टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखाई दे रहा है]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भांति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अन्तर्राष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टार्मिनल सहित [[चेन्नई अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |format=PDF |publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]] |title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |format=PDF |publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण |title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिन्दुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट लगभग २००० करोड़ रु. की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news |title=New greenfield airport to be set up near Chennai |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |date=मई 22, 2007 |accessdate=22 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |archive-date=26 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पोर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पोर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहां ऑटोमोबाइल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news |url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |publisher=Business Times |title=Gateway to India for Singapore firms |date=जुलाई 6, 2006 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |archive-date=12 मार्च 2010 |url-status=dead }}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कंक्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्रप्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज, कहवा, अबरख, मैंगनीज, चाय, मसाला, तेलहन, चमड़ा, नारियल इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पेट्रोलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है। [[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]] आज रेलमार्गों और सड़कों का मुख्य जंक्शन होने के कारण यह नगर देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बंगलोर]], कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भांति जुड़ा हुआ है। यहां से पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफस्सिल बस टर्मिनस, चेन्नै से सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news |last=Dorairaj |first=S |url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |work=द हिन्दू |title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification |date=दिसम्बर 28, 2005 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |archive-date=7 नवंबर 2011 |url-status=live }}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएं संचालित करते हैं। बहुत सी निजी बस सेवाएं भी चेन्नै को अन्य नगरो से सुलभ कराती हैं। चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टार्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेलवे स्टेशन]], जहां से सभी बड़े नगरो जैसे [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बंगलुरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरो की रेल सेवाएं ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरो की भी रेलगाड़ियां यहां से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news |title=35 trains to run at higher speed |date=अगस्त 27, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|[[मेट्रोपॉलिटान ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन, चेन्नई|एम.टी.सी]] की वॉल्वो बस]]<!-- end of image --> नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं: * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]]) * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]]) * [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]]) * चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है। [[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै मेट्रो चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइने प्रयोग में है एवम् अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web |first=TheCSR |title=Chennai metro work begins |date=अप्रैल 18, 2008 |url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |work=द हिन्दू |accessdate=17 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |archive-date=1 नवंबर 2008 |url-status=live }}</ref> मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web |title=The Growth |publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd |url=http://www.mtcbus.org/ |date=मई 31, 2008 |accessdate=31 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/ |archive-date=26 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |format=PDF |title=Land Use and Planning Strategy |work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |page=p. 60 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srivathsan |first=A |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp& |title=Bridge across time Skyline |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 29, 2007 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp& |archive-date=27 मार्च 2011 |url-status=dead }}</ref> और हाल ही में तैयार हुई, इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है। == शिक्षा == [[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]] चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |title=Balancing uniformity and diversity |work=द हिन्दू |date=नवम्बर 20, 2006 |author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा |accessdate=7 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |title=No. of Schools in the Town : Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |archive-date=9 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref> इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं। विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं। == खेल-कूद == [[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web |last=श्रीराम |first=नटराजन |url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |title=MA Chidambaram stadium |publisher=क्रिक्इन्फ़ो |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=live }}</ref> मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |title=India retains Asia Cup hockey title |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 10, 2007 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |archive-date=29 जून 2011 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |title=Radhakrishnan stadium to have new turf |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 20, 2004 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |archive-date=25 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है। [[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news |last=बसु |first=अरुंधती |title=Off-court ace |date=मार्च 19, 2005 |url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |work=द टेलिग्रैफ़ |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Kamesh |title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai |date=दिसम्बर 28, 2001 |url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news |last=Keerthivasan |first=K |title=A trip down memory lane |date=दिसम्बर 30, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |work=द हिन्दू |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |archive-date=29 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.chennaiopen.org |title=About the venue |publisher=[[International Management Group]] |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/ |archive-date=2 जून 2019 |url-status=live }}</ref> सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the road to restoration |date=दिसम्बर 4, 2003 |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है। कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the right track |date=अगस्त 22, 2002 |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> घुड़दौड़ गुंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news |last = Brijnath |first = Rohit |url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |title = India's most consistent champion |work = [[द हिन्दू]] |date = अक्टूबर 6, 2007 |accessdate = 11 अक्टूबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |archive-date = 11 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref><ref>{{cite news |last=Fide |first= |url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |title=FIDE Top 100 Players October 2007 |work=Fide |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |archive-date=24 अप्रैल 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Official site of the 2007 World Chess Championship |first= |url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007 |work= |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |archive-date=14 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> २००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Meera |url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice |work=[[द हिन्दू]] |date=सितम्बर 7, 2007 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web |url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |publisher=Govt. of India |title=Indian Teams in International Competitions |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> == पर्यटन == चेन्नै को सुपर प्रसारित नगर कहते हैं यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केन्द्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन्‌ [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव का घर है। सेंट मेरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है। चेन्नै का [[मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान को चेन्नै वासी शाम को मरीना बीच की अथाह जल राशि में बहा देना चाहते हों। पर्यटकों की सुविधा के लिए मेरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह खतरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गई हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ ही एम.जी.आर. स्मारक भी है जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्वलित रहती है। चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है जिसका निर्माण रोमुलस व्हिटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह पाँच सौ से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गए हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नेशनल आर्ट गैलरी में सहज ही किए जा सकते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गरम जलवायु लिए हुए है जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से खूबसूरत लगता है। == चित्र दीर्घा == <gallery> File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मैलापुर कपिलेश्वर मंदिर File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम ए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat|Chennai|चेन्नई}} * [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन] * [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल] {{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}} {{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}} {{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}} {{भारत के मिलियन+ नगर}} . [[श्रेणी:चेन्नई]] [[श्रेणी:तमिलनाडु]] [[श्रेणी:भारत के महानगर]] [[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]] [[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]] [[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]] [[श्रेणी:कोरोमंडल तट]] 6bel7nxnbd0nc865myn9sbnm85p683z 6536716 6536715 2026-04-05T22:13:57Z Dimple323 881290 /* अर्थव्यवस्था */ संपादकीय एवं व्याकरणिक त्रुटि-संबंधित सुधार।~~~~Dimple323 6536716 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन | name = चेन्नै | native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}} | settlement_type = [[महानगर]] | image_seal = | pushpin_map = India | pushpin_label_position = right | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]] | population_as_of = २०११ | population_total = ६७४८०२६ | population_metro = ८६९६०१० | population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref> | timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] | utc_offset1 = +5:30 | website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}} | footnotes = | official_name = | translit_lang1_type = | image_skyline = {{multiple image |perrow = 1/2/2/2 |border = infobox |total_width = 300 |image1 = Chennai Central.jpg |caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽल्वेऽ स्टेशन]] |image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg |caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]] |image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG |caption3 = वल्लुवर कोट्टम |image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg |caption4 = श्रम की प्रतिमा |image5 = Kathipara Crop.jpg |caption5 = कत्तिपारा जंक्शन |image6 = Ripon Building Chennai.JPG |caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]] |image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg |caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] }} | image_shield = Chennai Corporation Emblem.png | government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]] | governing_body = चेन्नै नगर निगम | leader_title = महापौर | leader_name = प्रिया राजन | leader_title1 = अध्यक्ष | leader_name1 = ज. कुमारगुरुवरन | area_total_km2 = ४२६ | area_metro_km2 = ५०९४ | elevation_m = ७ | population_density_km2 = auto | area_code = +91-44 | registration_plate = टीएन-01, टीएन-14, टीएन-18, टीएन-22 एवं टीएन-85 | blank_info_sec1 = ६००xxx | blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|पिन]] | blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ | blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}} | other_name = मद्रास }} '''चेन्नै''' ({{Langx|ta|சென்னை|Ceṉṉai}}; चेऩ्ऩै, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे १९९६ तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था। चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किए जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है। भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमारला चेन्नाप्प नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, ८ अगस्त १६३९ को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर १६४६ में बनाया गया था। १९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसका मद्रास नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है। चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name=itchennai1>{{cite news |title=आईटी इन इण्डिया |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |work=बिज़नेस स्टैण्डर्ड |date=३० सितंबर २००७ |accessdate=19 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref name=itchennai2>{{cite news |title=चेन्नई एमर्जिंग ऐज़ इण्डियाज़ सिलिकॉन वैली? |url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |work=द इकोनोमिक टाइम्स |date=मई 1, 2008 |accessdate=17 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |archive-date=5 मई 2008 |url-status=live }}</ref> चेन्नै मंडल तमिलानाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=सी आई आई लॉन्चेज़ चेन्नई ज़ोन |publisher=द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=इण्डियाज़ डेट्रॉएट |publisher=बिज़नेसटुडे.डिजिटलटुडे.इन |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref> चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केन्द्र है। == नामकरण == मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। परन्तु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदल कर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है। == इतिहास == {{main|चेन्नई का इतिहास}} [[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|विक्टोरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट नमूनों में से एक]] {{Historical populations|type= |align = left |१८८१| 405848 |१८९१| 452518 |१९०१| 509346 |१९११| 518660 |१९२१| 526000 |१९३१| 645000 |१९४१| 776000 |१९५१|1416056 |१९६१|1729141 |१९७१|2420000 |१९८१|3266034 |१९९१|3841398 |२००१|4216268 }} चेन्नै एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]], एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। [[मयलापुर]] नगर जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्त्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे ''साओ तोमे'' कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी। [[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज किला]] बनवाया जो बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर [[फ़्रान्स|फ़्रांसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) की बदौलत हुआ। इस क्षेत्र को फ्रांसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गयी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia | title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल) | url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका | edition = ग्यारहवां संस्करण | year = १९११ | accessdate = २००७-०९-०४ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | archive-date = 1 मई 2008 | url-status = live }}</ref> ब्रिटिशों की हुक़ूमत के अधीन चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के के रूप में उभरा। == भूगोल == {{main|चेन्नई का भूगोल}} [[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामाराजार सलाई जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web |title=Geographical and physical features |work=District Profile |publisher=Govt of India |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal |last = Pulikesi |first = M |author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan |title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005 |journal = Journal of Hazardous Materials |volume = 136 |issue = 3 |pages = 589–596 |date=अगस्त 25, 2006 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill. |doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ही ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news |last=Baskaran |first=Theodore S |title=Death of an Estuary |work=द हिन्दू |date=जनवरी 12, 2003 |url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news |last=Doraisamy |first=Vani |title=A breather for the Adyar estuary |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 31, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news |last=Lakshmi |first=K |title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur |work=द हिन्दू |date=जुलाई 13, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]] चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web |title=Structure of Chennai |work=Second Master Plan - II |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15 |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |format=PDF |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गुंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web |title=Guindy National Park |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |accessdate=10 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |archive-date=28 सितंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Hot spell may continue for some more weeks in the State |work=द हिन्दू |date=मई 18, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web |title=Climate of India |work=National Environment Agency – Singapore |url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |archive-date=6 अक्तूबर 2006 |url-status=dead }}</ref><ref name=hightemp>{{cite news |title=Highest temperature |work=द हिन्दू |date=मई 31, 2003 |url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |accessdate=25 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |archive-date=11 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim |work=द हिन्दू |date=जनवरी 3, 2006 |url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |accessdate=4 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |archive-date=28 फ़रवरी 2007 |url-status=live }}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> {{Infobox Weather |collapsed=yes |metric_first=Yes |single_line=Yes |location = चेन्नई, भारत |Jan_Hi_°F = 83.12 |Feb_Hi_°F = 85.82 |Mar_Hi_°F = 89.42 |Apr_Hi_°F = 92.48 |May_Hi_°F = 97.52 |Jun_Hi_°F = 97.88 |Jul_Hi_°F = 94.46 |Aug_Hi_°F = 93.02 |Sep_Hi_°F = 92.3 |Oct_Hi_°F = 88.52 |Nov_Hi_°F = 84.56 |Dec_Hi_°F = 82.58 |Year_Hi_°F = 90.14 |Jan_Lo_°F = 69.08 |Feb_Lo_°F = 70.16 |Mar_Lo_°F = 73.58 |Apr_Lo_°F = 78.62 |May_Lo_°F = 81.68 |Jun_Lo_°F = 80.96 |Jul_Lo_°F = 78.62 |Aug_Lo_°F = 77.54 |Sep_Lo_°F = 77.54 |Oct_Lo_°F = 75.74 |Nov_Lo_°F = 73.04 |Dec_Lo_°F = 70.88 |Year_Lo_°F = 75.62 |Jan_Precip_mm = 16.2 |Feb_Precip_mm = 3.7 |Mar_Precip_mm = 3.0 |Apr_Precip_mm = 13.6 |May_Precip_mm = 48.9 |Jun_Precip_mm = 53.7 |Jul_Precip_mm = 97.8 |Aug_Precip_mm = 149.7 |Sep_Precip_mm = 109.1 |Oct_Precip_mm = 282.7 |Nov_Precip_mm = 350.3 |Dec_Precip_mm = 138.2 |Year_Precip_mm = 1266.9 |source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref> |accessdate = 25 जनवरी 2009 }} == प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं == {{main|चेन्नई का प्रशासन }} {{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }} {|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं.&nbsp;०७)'''</div> {| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> |<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div> |- |उप-[[महापौर]] |<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div> |- | नगर निगम आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div> |- |पुलिस आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div> |} |} चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web |title=कार्यपालक सारणी |work=अबाउट सी.ओ.सी |publisher=चेन्नई कार्पोरेशन |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |archive-date=11 फ़रवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। [[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]] चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम ज़िला]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web |title=जनरल स्टैटिस्टिक्स |publisher=कार्पोरेशन ऑफ चेन्नई |url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |archive-date=9 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web |title=चेन्नई मेट्रो पॉलिटन एरिया - प्रोफाइल |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटान डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org |accessdate=15 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> [[चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण|चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण]] ([[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी|सी.एम.डी.ए]]) ने नगर के निकट उपग्रह-नगरो के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपग्रह नगरो में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं। ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस-स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी जेले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अन्तर्गत्त हैं। [[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालीन [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]] चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इंवायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (सीवेज ट्रीटमेंट) की निगरानी चेन्नै मेट्र'पॉलिटन वॉऽटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web |title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://chennai.nic.in/emergency.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm |archive-date=30 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़ॉर्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of Indiaटेलीकॉम रेग्युलेत्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news |last=नारायणन |first=आर वाई |title=टचटेल अराइव्स इन [[कोयंबतूर]] |work=[[द हिन्दु]] |date=५ सितंबर २००२ |url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |archive-date=10 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं। नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web |title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004 |work=Operations and maintenance |publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board |url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |accessdate=16 मार्च 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |archive-date=12 अगस्त 2007 |url-status=dead }}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news |last = लक्ष्मी |first = के |title = बंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्स इन सिटी |work = द हिन्दू |date = [[३ अगस्त]],[[२००७]] |url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |accessdate = 11 अगस्त 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |archive-date = 1 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news |title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai |work=द हिन्दू |date=अगस्त 12, 2005 |url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Radhakrishnan |first=R.K |title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 4, 2007 |url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> == संस्कृति == {{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }} {{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}} [[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]] चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news |title=Music musings |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |date=फ़रवरी 3, 2005 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |archive-date=7 फ़रवरी 2005 |url-status=live }}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news |author=GR |url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |title=Yearning for Chennai ambience |accessdate=7 सितंबर 2007 |date=दिसम्बर 2, 2000 |work=द हिन्दू |archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |archive-date=29 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news |url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp |title=Chennai as a home for Music – IV |work=Chennai Online |date=2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp |archive-date=17 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.go-nxg.com/?p=3155 |title=There's a song in the air... |work=NXg |date=जनवरी 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155 |archive-date=15 जून 2013 |url-status=dead }}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |title=Chennai choir to sing in England |work=द हिन्दू |date=जून 16, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |archive-date=29 जनवरी 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |title=An aural treat |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 03, 2007 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |archive-date=26 सितंबर 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।<ref>{{cite book |last = Ellens |first = Dan |author2= Lakshmi Srinivas |title=A Time for India |publisher=Vantage Press Inc., New York |year = 2006 |page = 150 |isbn = 0533150922 |url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1 |accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं<ref>{{cite book |last = Ganti |first = Tejaswini |title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema |publisher = Routledge, London |year = 2004 |page = 3 |isbn = 0415288541 |url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE |accessdate = 7 सितंबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC |archive-date = 4 जून 2013 |url-status = live }}</ref> और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकान्त|रजनीकांत]], [[कमल हासन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|तरह तरह के तमिल व्यंजन]] [[ए॰ आर॰ रहमान|ए. आर. रहमान]] ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news |url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep |work=VOA News |date=फ़रवरी 23, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |archive-date=24 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news |last=Ramesh |first=V |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |title=The Sultan of sarcasm |work=द हिन्दू |date=जुलाई 17, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |archive-date=30 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |last=अशोक कुमार |first=एस आर |url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |title=एक्टर आर एस मनोहर डेड |work=द हिन्दू |date=जनवरी 11, 2006 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |archive-date=26 जून 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Kumar |first=Ranee |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |title=Laughter, the best medicine |work=द हिन्दू |date=दिसम्बर 10, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |archive-date=30 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref> इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है। नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे [[दीपावली|दीवाली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी|माँसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है। == अर्थव्यवस्था == [[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|टाइडल पार्क]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेरांबूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेल्वे डिब्बा निर्माण का कारखाना इंटिग्रल कोच बिल्डिंग फ़ैक्ट्री को स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, काग़ज़ एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीज़ल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सिमेंट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग, आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में उपस्थित हैं। इनमें इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री, हिन्दुस्तान टेलिप्रिंटर, चेन्नै रिफ़ाइनरी एवं चेन्नै फ़र्टिलाइज़र आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्र'केमिकल्ज़ में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है। == जनसांख्यिकी == [[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|रंगनाथन स्ट्रीट [[टी नगर]] में पटरी पर खरीदने बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]] चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी, जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-५, I-१० |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news |last=श्रीवास्तन |first=ए |title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान |date=१२ अप्रैल २००७ |url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |work=[[द हिन्दु]] |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग किमी (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग किमी था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरों में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web |title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी |work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस) |pages=p. 77 |month=मार्च |year=२००७ |publisher=डेमोग्राफ़िया |url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |archive-date=3 मई 2018 |url-status=dead }} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहाँ का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियाँ/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web |title=सेन्सस २००१ डाटा |work=भारत की जनगणना |publisher=तमिल नाडु सरकार |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |accessdate=5 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web |title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१ |work=Department of school education |url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |archive-date=17 अगस्त 2005 |url-status=live }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web |title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१ |publisher=भारत सरकार |url=http://www.censusindia.gov.in/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf |archive-date=21 जून 2007 |format=PDF |accessdate=8 मार्च 2007 |url-status=live }}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरों में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |format=PDF |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005 |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=क्राइम इन मेगा सिटीज़ |work=क्राइम इन इन्डिया &nbsp;–&nbsp;२००५ |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |archive-date=14 जून 2007 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा, कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिलनाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आँकड़ों के अनुसार, नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=PDF |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-11 |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |format=PDF |title=एरिया एंड पॉपुलेशन |publisher=तमिल नाडु सरकार |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |archive-date=30 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == यातायात == <!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]] --> {{main|चेन्नई में यातायात }} [[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आई.टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखाई दे रहा है]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भाँति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अन्तरराष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टर्मिनल सहित [[चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |format=PDF |publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]] |title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |format=PDF |publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण |title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिन्दुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफ़ील्ड एयरपोर्ट लगभग ₹२००० करोड़ की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news |title=New greenfield airport to be set up near Chennai |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |date=मई 22, 2007 |accessdate=22 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |archive-date=26 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पोर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पोर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहाँ ऑटोमोबिल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news |url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |publisher=Business Times |title=Gateway to India for Singapore firms |date=जुलाई 6, 2006 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |archive-date=12 मार्च 2010 |url-status=dead }}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कॉन्क्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज़, कहवा, अरबरक, मैंग्नीज़, चाय, मसाला, तिलहन, चमड़ा, नारियल, इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पिट्रॉलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज़, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, आदि प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है। [[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]] आज रेलमार्गों और सड़कों का मुख्य जंक्शन होने के कारण यह नगर देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बंगलोर]], कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरो से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भांति जुड़ा हुआ है। यहां से पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफस्सिल बस टर्मिनस, चेन्नै से सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news |last=Dorairaj |first=S |url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |work=द हिन्दू |title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification |date=दिसम्बर 28, 2005 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |archive-date=7 नवंबर 2011 |url-status=live }}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएं संचालित करते हैं। बहुत सी निजी बस सेवाएं भी चेन्नै को अन्य नगरो से सुलभ कराती हैं। चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टार्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेलवे स्टेशन]], जहां से सभी बड़े नगरो जैसे [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बंगलुरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरो की रेल सेवाएं ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरो की भी रेलगाड़ियां यहां से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news |title=35 trains to run at higher speed |date=अगस्त 27, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|[[मेट्रोपॉलिटान ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन, चेन्नई|एम.टी.सी]] की वॉल्वो बस]]<!-- end of image --> नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं: * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]]) * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]]) * [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]]) * चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है। [[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै मेट्रो चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइने प्रयोग में है एवम् अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web |first=TheCSR |title=Chennai metro work begins |date=अप्रैल 18, 2008 |url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |work=द हिन्दू |accessdate=17 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |archive-date=1 नवंबर 2008 |url-status=live }}</ref> मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web |title=The Growth |publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd |url=http://www.mtcbus.org/ |date=मई 31, 2008 |accessdate=31 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/ |archive-date=26 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |format=PDF |title=Land Use and Planning Strategy |work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |page=p. 60 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srivathsan |first=A |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp& |title=Bridge across time Skyline |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 29, 2007 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp& |archive-date=27 मार्च 2011 |url-status=dead }}</ref> और हाल ही में तैयार हुई, इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है। == शिक्षा == [[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]] चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |title=Balancing uniformity and diversity |work=द हिन्दू |date=नवम्बर 20, 2006 |author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा |accessdate=7 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |title=No. of Schools in the Town : Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |archive-date=9 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref> इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं। विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं। == खेल-कूद == [[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web |last=श्रीराम |first=नटराजन |url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |title=MA Chidambaram stadium |publisher=क्रिक्इन्फ़ो |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=live }}</ref> मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |title=India retains Asia Cup hockey title |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 10, 2007 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |archive-date=29 जून 2011 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |title=Radhakrishnan stadium to have new turf |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 20, 2004 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |archive-date=25 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है। [[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news |last=बसु |first=अरुंधती |title=Off-court ace |date=मार्च 19, 2005 |url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |work=द टेलिग्रैफ़ |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Kamesh |title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai |date=दिसम्बर 28, 2001 |url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news |last=Keerthivasan |first=K |title=A trip down memory lane |date=दिसम्बर 30, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |work=द हिन्दू |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |archive-date=29 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.chennaiopen.org |title=About the venue |publisher=[[International Management Group]] |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/ |archive-date=2 जून 2019 |url-status=live }}</ref> सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the road to restoration |date=दिसम्बर 4, 2003 |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है। कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the right track |date=अगस्त 22, 2002 |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> घुड़दौड़ गुंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news |last = Brijnath |first = Rohit |url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |title = India's most consistent champion |work = [[द हिन्दू]] |date = अक्टूबर 6, 2007 |accessdate = 11 अक्टूबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |archive-date = 11 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref><ref>{{cite news |last=Fide |first= |url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |title=FIDE Top 100 Players October 2007 |work=Fide |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |archive-date=24 अप्रैल 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Official site of the 2007 World Chess Championship |first= |url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007 |work= |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |archive-date=14 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> २००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Meera |url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice |work=[[द हिन्दू]] |date=सितम्बर 7, 2007 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web |url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |publisher=Govt. of India |title=Indian Teams in International Competitions |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> == पर्यटन == चेन्नै को सुपर प्रसारित नगर कहते हैं यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केन्द्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन्‌ [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव का घर है। सेंट मेरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है। चेन्नै का [[मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान को चेन्नै वासी शाम को मरीना बीच की अथाह जल राशि में बहा देना चाहते हों। पर्यटकों की सुविधा के लिए मेरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह खतरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गई हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ ही एम.जी.आर. स्मारक भी है जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्वलित रहती है। चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है जिसका निर्माण रोमुलस व्हिटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह पाँच सौ से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गए हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नेशनल आर्ट गैलरी में सहज ही किए जा सकते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गरम जलवायु लिए हुए है जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से खूबसूरत लगता है। == चित्र दीर्घा == <gallery> File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मैलापुर कपिलेश्वर मंदिर File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम ए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat|Chennai|चेन्नई}} * [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन] * [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल] {{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}} {{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}} {{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}} {{भारत के मिलियन+ नगर}} . [[श्रेणी:चेन्नई]] [[श्रेणी:तमिलनाडु]] [[श्रेणी:भारत के महानगर]] [[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]] [[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]] [[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]] [[श्रेणी:कोरोमंडल तट]] klz16t6i0sau5bs33xmz1tcse4y7mek 6536717 6536716 2026-04-05T22:21:05Z Dimple323 881290 /* यातायात */ संपादकीय एवं व्याकरणिक त्रुटि-संबंधित सुधार।~~~~Dimple323 6536717 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन | name = चेन्नै | native_name = {{hlist|சென்னை|Chennai}} | settlement_type = [[महानगर]] | image_seal = | pushpin_map = India | pushpin_label_position = right | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] | subdivision_name1 = [[तमिलनाडु]] | subdivision_type2 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name2 = [[चेन्नई जिला|चेन्नै]] | population_as_of = २०११ | population_total = ६७४८०२६ | population_metro = ८६९६०१० | population_footnotes = <ref name="pop">{{Cite web |url=http://www.census2011.co.in/city.php |title=संग्रहीत प्रति |access-date=23 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190321092118/http://www.census2011.co.in/city.php |archive-date=21 मार्च 2019 |url-status=dead }}</ref> | timezone1 = [[भारतीय मानक समय]] | utc_offset1 = +5:30 | website = {{URL|www.chennaicorporation.gov.in}} | footnotes = | official_name = | translit_lang1_type = | image_skyline = {{multiple image |perrow = 1/2/2/2 |border = infobox |total_width = 300 |image1 = Chennai Central.jpg |caption1 = [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेऽल्वेऽ स्टेशन]] |image2 = Kapaleeswarar_Temple%2C_Mylapore%2C_Chennai.jpg |caption2 = [[कपालीश्वर मंदिर]] |image3 = Valluvar_Kottam_Edit1.JPG |caption3 = वल्लुवर कोट्टम |image4 = Chennai LabourStatue Closeup.jpg |caption4 = श्रम की प्रतिमा |image5 = Kathipara Crop.jpg |caption5 = कत्तिपारा जंक्शन |image6 = Ripon Building Chennai.JPG |caption6 = [[राइपन बिल्डिंग]] |image7 = Chennai - bird's-eye view.jpg |caption7 = [[मरीना बीच (चेन्नई)|मरीना बीच]] }} | image_shield = Chennai Corporation Emblem.png | government_type = [[नगर निगम (भारत)|नगर निगम]] | governing_body = चेन्नै नगर निगम | leader_title = महापौर | leader_name = प्रिया राजन | leader_title1 = अध्यक्ष | leader_name1 = ज. कुमारगुरुवरन | area_total_km2 = ४२६ | area_metro_km2 = ५०९४ | elevation_m = ७ | population_density_km2 = auto | area_code = +91-44 | registration_plate = टीएन-01, टीएन-14, टीएन-18, टीएन-22 एवं टीएन-85 | blank_info_sec1 = ६००xxx | blank_name_sec1 = [[डाक सूचक संख्या|पिन]] | blank1_name_sec1 = आधिकारिक भाषाएँ | blank1_info_sec1 = {{hlist|[[तमिल भाषा|तमिल]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]}} | other_name = मद्रास }} '''चेन्नै''' ({{Langx|ta|சென்னை|Ceṉṉai}}; चेऩ्ऩै, {{Langx|en|Chennai|italic=no}}), जिसे १९९६ तक '''मद्रास''' के नाम से जाना जाता था, [[बंगाल की खाड़ी]] के कोरोमंडल तट पर स्थित यह दक्षिण [[भारत]] के सबसे बड़े सांस्कृतिक, आर्थिक और शैक्षिक केंद्रों में से सबसे प्रमुख है। चेन्नै भारतीय राज्य [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] की राजधानी है। २०११ की भारतीय जनगणना (चेन्नै नगर की नयी सीमाओं के लिए समायोजित) के अनुसार, यह चौथा सबसे बड़ा नगर है और भारत में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला नगरीय ढाँचा है। आस-पास के क्षेत्रों के साथ नगर चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया है, जो दुनिया की जनसंख्या के अनुसार ३६वाँ सबसे बड़ा नगरीय क्षेत्र है। चेन्नै विदेशी पर्यटकों द्वारा सबसे ज़्यादा जाने-माने भारतीय नगरों में से एक है। यह वर्ष २०१५ में दुनिया में ४३वें सबसे अधिक दौरा करने वाला स्थल था। लिविंग सर्वेक्षण की गुणवत्ता ने चेन्नै को भारत में सबसे सुरक्षित नगर के रूप में दर्जा दिया। चेन्नै भारत में आने वाले ४५% स्वास्थ्य पर्यटकों और ३०% से ४०% घरेलू स्वास्थ्य पर्यटकों को आकर्षित करती है। जैसे, इसे "भारत का स्वास्थ्य पूँजी" कहा जाता है। एक विकासशील देश में बढ़ते महानगरीय नगर के रूप में, चेन्नै पर्याप्त प्रदूषण और अन्य सैन्य और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का सामना करता है। चेन्नै में भारत की तीसरी सबसे बड़ी प्रवासी जनसंख्या क्रमशः २००९ में ३५ लाख, २०११ में ८५ लाख थी और २०१८ तक डेढ़ करोड़ से अधिक का अनुमान है। राजस्थान का मारवाड़ी समुदाय यहाँ व्यापारी वर्ग में मुख्यत: लिप्त है। चेन्नै में मारवाड़ी समुदाय की ५०,००० से अधिक दुकानें हैं। मारवाड़ियों का रामदेवजी का वरघोड़ा मुख्य पर्व है, जिसमें प्रतिवर्ष २ लाख से ज़्यादा मारवाड़ी लोग एकत्रित होते हैं। जो मिंट स्ट्रीट ,आदियाप्प, गोविंदप्प, एनएससी बोस रोड ओर नेनियप्पा से गुज़रते हैं। १०१५ में यात्रा करने के लिए पर्यटन गाइड प्रकाशक लोनली प्लैनिट ने चेन्नै को दुनिया के शीर्ष दस नगरों में से एक का नाम दिया है। चेन्नै को ग्लोबल सिटीज़ इंडेक्स में बेटा स्तरीय नगर के रूप में स्थान दिया गया है और २०१४ में इंडिया टडेऽ के वार्षिक भारतीय सर्वेक्षण में भारत के सबसे अच्छा नगर के रूप में रहा। २०१५ में, चेन्नै को आधुनिक और पारंपरिक दोनों मूल्यों के मिश्रण का हवाला देते हुए, बीबीसी द्वारा "सबसे गर्म" नगर (मूल्य का दौरा किया और दीर्घकालिक रहने के लिए) के रूप में रहा। नैशनल जिऑग्रफ़िक ने चेन्नै के भोजन को दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्थान दिया है; यह सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय नगर था। लोनली प्लैनिट द्वारा चेन्नै को दुनिया का नौवाँ सबसे अच्छा महानगर भी नामित किया गया था। चेन्नै मेट्र'पॉलिटन एरिया भारत की सबसे बड़ी नगर अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। चेन्नै को "भारत के डिट्रॉइट" की उपाधि दी गयी है, जो नगर में स्थित भारत के ऑटोमोबिल उद्योग का एक-तिहाई से भी अधिक है। जनवरी २०१५ में, प्रति व्यक्ति जीडीपी के संदर्भ में यह तीसरा स्थान था। चेन्नै को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत एक स्मार्ट नगर के रूप में विकसित किए जाने वाले १०० भारतीय नगरो में से एक के रूप में चुना गया है। भारत में ब्रिटिश राज के स्थापित होने से पहले ही मद्रास का जन्म हुआ। माना जाता है कि बंदरगाह-रूपी नगर के पुर्तगाली प्रभाव के चलते इसका नाम मद्रास रखा गया, जो कि एक पुर्तगाली वाक्यांश 'मैए दे दीस' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'भगवान की माता'। कुछ स्रोतों के अनुसार, इस नगर का नाम फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज के उत्तर में एक मछली पकड़ने वाले गाँव मद्रासपट्टिनम से लिया गया था। हालाँकि, यह नाम यूरोपियों के आने से पहले उपयोग में था, इस पर अनिश्चितता है। ब्रिटिश सैन्य मानचित्रकों का मानना ​​था कि मद्रास मूल रूप से मुंदिर-राज या मुंदिरराज के रूप में था। वर्ष १३६७ में विजयनगर युग का एक शिलालेख को, जो कि मादरसन पट्टणम बंदरगाह का उल्लेख करता है, पूर्व तट पर अन्य छोटे बंदरगाहों के साथ २०१५ में खोजा गया था और यह अनुमान लगाया गया था कि उक्त बंदरगाह रोयापुरम का मछली पकड़ने का बंदरगाह है। नगर के चेन्नै नाम का तेलुगु मूल का शब्द होना स्पष्ट रूप से इतिहासकारों द्वारा सिद्ध किया गया है। यह एक तेलुगु शासक दमारला चेन्नाप्प नायकुडू के नाम से प्राप्त हुआ था, जो कि दमनकारी शासक वेंकटपति के नायक थे और विजयनगर साम्राज्य के वेंकट तृतीय के तहत सामान्य रूप से काम करते थे, जहाँ से ब्रिटिश ने नगर को १६३९ में हासिल किया था। चेन्नै नाम का पहला आधिकारिक उपयोग, ८ अगस्त १६३९ को, ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिस डे से पहले, सेन्नेकेसु पेरुमल मंदिर १६४६ में बनाया गया था। १९९६ में, तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर मद्रास से चेन्नै का नाम बदल दिया। उस समय कई भारतीय नगरों के नाम बदल गये थे। हालाँकि, इसका मद्रास नाम नगर के साथ-साथ यहाँ के स्थानों के नामों में, जैसे मद्रास विश्वविद्यालय, आइआइटी मद्रास, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑव टेक्नॉलजी, मद्रास मेडिकल कॉलिज, मद्रास पशु चिकित्सा कॉलिज, मद्रास क्रिश्चियन कॉलिज, आदि में कभी-कभार प्रयुक्त होता रहा है। चेन्नै में ऑटोमोबिल, प्रौद्योगिकी, हार्डवेयर उत्पादन और स्वास्थ्य सम्बंधी उद्योग हैं। यह नगर [[सॉफ्टवेयर|सॉफ़्टवेयर]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सम्बंधी उत्पादों में भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक नगर है। चेन्नै एवं इसके उपनगरीय क्षेत्र में ऑटोमोबाइल उद्योग विकसित है।<ref name=itchennai1>{{cite news |title=आईटी इन इण्डिया |url=http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |work=बिज़नेस स्टैण्डर्ड |date=३० सितंबर २००७ |accessdate=19 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302114400/http://www.business-standard.com/india/storypage.php?autono=299725 |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref name=itchennai2>{{cite news |title=चेन्नई एमर्जिंग ऐज़ इण्डियाज़ सिलिकॉन वैली? |url=http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |work=द इकोनोमिक टाइम्स |date=मई 1, 2008 |accessdate=17 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080505100206/http://economictimes.indiatimes.com/Infotech/Software/Chennai_emerging_as_Indias_Silicon_Valley/articleshow/3000410.cms |archive-date=5 मई 2008 |url-status=live }}</ref> चेन्नै मंडल तमिलानाडु के [[सकल घरेलू उत्पाद|जीडीपी]] का ३९% का और देश के ऑटोमोटिव निर्यात में ६०% का भागीदार है। इसी कारण इसे [[दक्षिण एशिया]] का डिट्रॉइट भी कहा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |title=सी आई आई लॉन्चेज़ चेन्नई ज़ोन |publisher=द हिन्दू बिज़नेस लाइन |date=19 अक्टूबर 2007 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602132120/http://www.thehindubusinessline.com/2007/10/19/stories/2007101951332300.htm |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=एन माधवन |url=http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |title=इण्डियाज़ डेट्रॉएट |publisher=बिज़नेसटुडे.डिजिटलटुडे.इन |date=7 जुलाई 2008 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090101090125/http://businesstoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=6059&issueid=34&Itemid=1 |archive-date=1 जनवरी 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |title=डेट्रॉएट्स नेक्स्ट बिग थ्रेट |publisher=वॉशिंगटनपोस्ट |date= |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110628215213/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2005/12/04/AR2005120401094.html |archive-date=28 जून 2011 |url-status=live }}</ref> चेन्नै सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, यहाँ वार्षिक मद्रास म्यूज़िक सीज़न में सैंकड़ों कलाकार भाग लेते हैं। चेन्नै में रंगशाला संस्कृति भी अच्छे स्तर पर है और यह [[भरतनाट्यम]] का एक महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ का [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, भारत का द्वितीय सबसे बड़ा फ़िल्म उद्योग केन्द्र है। == नामकरण == मद्रास नाम मद्रासपट्नम से लिया गया है। मद्रासपट्नम [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी]] द्वारा सन १६३९ में चुना गया स्थायी निवास स्थल था। इसके दक्षिण में चेन्नपट्नम नामक गाँव उपस्थित था। कुछ समय बाद, इन दोनों गाँवों के संयोग से मिलकर बने नगर को "मद्रास" नाम दिया गया। परन्तु उसी जगह के निवासी इसे "चेन्नपट्नम" या "चेन्नपुरी" कहते थे। सन १९९६ में नगर का नाम बदल कर "चेन्नै" किया गया, क्योंकि "मद्रास" शब्द को पुर्तगाली नाम माना जाता था। यह माना जाता है कि इस नगर का पुर्तगाली नाम माद्रे-दे-सॉइस नामक एक पुर्तगाली सरकारी अफ़सर के नाम से लिया गया था, जो लगभग सन [[१५५०]] में इस जगह को अपने स्थायी निवास बनाने वाले पहले लोगों में शामिल थे। पर कुछ लोग यह मानते हैं कि "मद्रास" शब्द ही तमिल मूल का है तथा "चेन्नै" शब्द किसी अन्य भाषा का हो सकता है। == इतिहास == {{main|चेन्नई का इतिहास}} [[चित्र:Victoria Public Hall, Chennai.JPG|thumb|right|200px|पार्क टाउन, चेन्नै स्थित [[विक्टोरिया पब्लिक हॉल|विक्टोरिया पब्लिक हॉऽल]] - चेन्नै में ब्रिटिश स्थापत्य कला के सबसे उत्कृष्ट नमूनों में से एक]] {{Historical populations|type= |align = left |१८८१| 405848 |१८९१| 452518 |१९०१| 509346 |१९११| 518660 |१९२१| 526000 |१९३१| 645000 |१९४१| 776000 |१९५१|1416056 |१९६१|1729141 |१९७१|2420000 |१९८१|3266034 |१९९१|3841398 |२००१|4216268 }} चेन्नै एवं आस-पास का क्षेत्र पहली सदी से ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सैनिक, एवं आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केन्द्र रहा है। यह [[दक्षिण भारत]] के बहुत से महत्त्वपूर्ण राजवंशों यथा, [[पल्लव वंश|पल्लव]], [[चोल वंश|चोल]], [[पांड्य साम्राज्य|पांड्य]], एवं [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर]] इत्यादि का केन्द्र बिन्दु रहा है। [[मयलापुर]] नगर जो कि अब चेन्नै नगर का हिस्सा है, पल्लवों के ज़माने में एक महत्त्वपूर्ण [[बंदरगाह]] हुआ करता था। आधुनिक काल में [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[१५२२]] में यहाँ आने के बाद एक और बंदरगाह बनाया जिसे ''साओ तोमे'' कहा गया। पुर्तगालियों ने अपना बसेरा आज के चेन्नै के उत्तर में [[पुलीकट]] नामक स्थान पर बसाया और वहीं [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी]] की नींव रखी। [[२२ अगस्त]] [[१६३९]], को संत फ़्रांसिस दिवस के मौके पर ब्रिटिश [[ईस्ट इंडिया कंपनी]] ने विजयनगर के राजा पेडा वेंकट राय से [[कोरोमंडल|कोरोमंडल तट]] [[चंद्रगिरी]] में कुछ ज़मीनें ख़रीदी। इस इलाक़े में दमरेला वेंकटपति, जो इस इलाक़े के नायक थे, उनका शासन था। उन्होंने ब्रितानी व्यापारियों को वहाँ पर एक फ़ैक्ट्री एवं गोदाम बनाने की अनुमति दी। एक वर्ष वाद, ब्रितानी व्यापारियों ने [[सेंट जॉर्ज किला]] बनवाया जो बाद में [[उपनिवेश|औपनिवेशिक]] गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बन गया। [[१७४६]] में, मद्रास एवं सेंट जॉर्ज के किले पर [[फ़्रान्स|फ़्रांसिसी]] फ़ौजों ने अपना क़ब्ज़ा जमा लिया। बाद में, ब्रितानी कंपनी का इस क्षेत्र पर नियंत्रण पुनः [[१७४९]] में [[एक्स ला चैपल संधि|एक्स ला चेपल संधि]] ([[१७४८]]) की बदौलत हुआ। इस क्षेत्र को फ्रांसिसियों एवं [[मैसूर]] के [[सुल्तान]] [[हैदर अली]] के हमलों से बचाने के लिए इस पूरे क्षेत्र की किलेबंदी कर दी गयी। अठारहवीं सदी के अंत होते-होते ब्रिटिशों ने लगभग पूरे आधुनिक [[तमिलनाडु]], [[आंध्र प्रदेश]] एवं [[कर्नाटक]] के हिस्सों को अपने अधीन कर लिया एवं [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास प्रेज़िडंसी]] की स्थापना की, जिसकी राजधानी मद्रास घोषित की गयी।<ref>{{cite encyclopedia | title = मद्रास, इंडिया (कैपिटल) | url = http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | encyclopedia = एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका | edition = ग्यारहवां संस्करण | year = १९११ | accessdate = २००७-०९-०४ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080501001404/http://www.1911encyclopedia.org/Madras,_India_(Capital) | archive-date = 1 मई 2008 | url-status = live }}</ref> ब्रिटिशों की हुक़ूमत के अधीन चेन्नै नगर एक महत्वपूर्ण आधुनिक नगरीय क्षेत्र एवं जलसेना के के रूप में उभरा। == भूगोल == {{main|चेन्नई का भूगोल}} [[चित्र:Kamarajar Salai and Marina Beach.jpg|thumb|कामाराजार सलाई जो मरीना बीच के साथ साथ चलने वाली एक सड़क है]]चेन्नै भारत के दक्षिण पूर्वी तट पर तमिलनाडु राज्य के उत्तरी पूर्वी तटीय क्षेत्र में स्थित है। इस तटीय क्षेत्र को [[पूर्वी तटीय मैदानी क्षेत्र]] भी कहा जाता है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से औसत ऊँचाई ६.७ मीटर है<ref>{{cite web |title=Geographical and physical features |work=District Profile |publisher=Govt of India |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#geog |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> और यह ६० मीटर की ऊँचाई पर सबसे ऊँचा स्थान है।<ref name="highest-point">{{cite journal |last = Pulikesi |first = M |author2= P. Baskaralingam, D. Elango, V.N. Rayudu, V. Ramamurthi, S. Sivanesan |title=Air quality monitoring in Chennai, भारत, in the summer of 2005 |journal = Journal of Hazardous Materials |volume = 136 |issue = 3 |pages = 589–596 |date=अगस्त 25, 2006 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |quote=Chennai is fairly low-lying, its highest point being only 300 metres (934 ft) above sea level is a rugged barren hill opposite to the Airport called Pallavapuram Hill. |doi = 10.1016/j.jhazmat.2005.12.039 |issn=0304-3894}}</ref> [[मरीना बीच]] से प्रसिद्ध चेन्नै के समुद्र तट का विस्तार १२ किलोमीटर तक है। नगर के मध्य में बहने वाली [[कूवम नदी]] और दक्षिण से बहने वाली [[अड्यार नदी]] आज की तारीख़ में बहुत ही ज़्यादा प्रदूषित हो चुकी हैं। अड्यार नदी कूवम से कम प्रदूषित है और इसके तट पर अनेक पशु-पक्षियों का बसेरा है।<ref>{{cite news |last=Baskaran |first=Theodore S |title=Death of an Estuary |work=द हिन्दू |date=जनवरी 12, 2003 |url=http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213173125/http://www.hindu.com/thehindu/mag/2003/01/12/stories/2003011200110200.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref name="adyarestuary2">{{cite news |last=Doraisamy |first=Vani |title=A breather for the Adyar estuary |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 31, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |accessdate=12 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213180648/http://www.hindu.com/2005/10/31/stories/2005103106660500.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> इन दोनों नदियों को [[बकिंघम नहर|बकिंगम नहर]] के द्वारा जोड़ा गया है। यह नहर अपनी ४ किलोमीटर की दूरी समुद्री तट के समानांतर तय करती है। नगर के पश्चिमी भाग में कई झीलें हैं, जिनमें से [[रेड हिल्स|रेड हिल्ज़]], शोलावरम और चेम्बरामबक्क्म से पेय जल की आपूर्ति होती है। चेन्नै का भूमिगत जल भी प्रदूषित होता जा रहा है।<ref>{{cite news |last=Lakshmi |first=K |title=It's no cola, it's the water supplied in Korattur |work=द हिन्दू |date=जुलाई 13, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012215946/http://hindu.com/2004/07/13/stories/2004071312840300.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Cooum2.JPG|thumb|left|चेन्नै में बहने वाली कूवम नदी। प्रदूषण के कारण इस नदी पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है।]] चेन्नै नगर को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै नामक चार भागों में बँटा है। उत्तरी चेन्नै एक औद्योगिक क्षेत्र है। मध्य चेन्नै नगर का व्यावसायिक केंद्र है। यहाँ पर स्थित पेरिज कॉर्नर, जिसे स्थानीय लोग पेरिज भी कहते हैं, एक प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र है। दक्षिण और पश्चिमी चेन्नै सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के रूप में उभरे हैं। बढ़ती आबादी के कारण से, नगर विभिन्न दिशाओं में बढ़ता जा रहा है। जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक विकास हो रहा है, वे हैं- ओल्ड [[महाबलीपुरम]] रोड, दक्षिणी ग्रैंड ट्रंक रोड और पश्चिम में अंबातूर, [[कोयंबतूर]] और श्रीपेरंबतूर के क्षेत्र।<ref>{{cite web |title=Structure of Chennai |work=Second Master Plan - II |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |pages=pp. II–9, II–10, II–11, II–15 |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |format=PDF |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071252/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/B_Chap%20II%20_Structure%20of%20Chennai.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै की नगर सीमा में एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जिसे गिंडी राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता है।<ref>{{cite web |title=Guindy National Park |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |accessdate=10 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120928004229/http://www.forests.tn.nic.in/WildBiodiversity/np_gnp.html |archive-date=28 सितंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वार्षिक तापमान लगभग एक समान होता है। इसका कारण से, चेन्नै का समुद्री तट पर एवं थर्मल इक्वेटर पर स्थित होता है। वर्षभर मौसम आम तौर पर गर्म एवं उमस भरा होता है। मई एवं जून का प्रथम सप्ताह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। इस समय जब तापमान ३८-४२ डिग्री सेल्सियस के आस-पास पहुँच जाता है, तब स्थानीय लोग इसे अग्नि नक्षत्रम या कथिरि वेय्यी कहते है।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Hot spell may continue for some more weeks in the State |work=द हिन्दू |date=मई 18, 2005 |url=http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213191416/http://www.hindu.com/2005/05/18/stories/2005051813790700.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> वर्ष का सबसे ठंडा महीना जनवरी का होता है, जब न्यूनतम तापमान १८-२० डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। अब तक यहाँ का सबसे न्यूनतम तापमान १५.८ डिग्री सेल्सियस और उच्चतम तापमान ४५ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।<ref name=Singapore-temp>{{cite web |title=Climate of India |work=National Environment Agency – Singapore |url=http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061006131405/http://app.nea.gov.sg/cms/htdocs/article.asp?pid=1111 |archive-date=6 अक्तूबर 2006 |url-status=dead }}</ref><ref name=hightemp>{{cite news |title=Highest temperature |work=द हिन्दू |date=मई 31, 2003 |url=http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |accessdate=25 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110711171303/http://www.hinduonnet.com/2003/05/31/stories/2003053104790101.htm |archive-date=11 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में वर्ष में औसतन १,३०० मिलीमीटर वर्षा होती है। मुख्यतः वर्षा के सितंबर से दिसंबर के मध्य होती है। देश के अन्य भागों से विपरीत चेन्नै में वर्षा [[मानसून|मॉनसून]] के लौटने के दौरान उत्तर-पूर्वी हवाओं के चलते होती है। बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात कई बार चेन्नै भी पहुँच जाते हैं। सन २००५ में आज तक की सबसे ज़्यादा वर्षा २,५७० मिलीमीटर दर्ज की गयी थी।<ref>{{cite news |last=Ramakrishnan |first=T |title=Entering 2006, city's reservoirs filled to the brim |work=द हिन्दू |date=जनवरी 3, 2006 |url=http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |accessdate=4 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070228083427/http://www.hindu.com/2006/01/03/stories/2006010315310300.htm |archive-date=28 फ़रवरी 2007 |url-status=live }}</ref> २ नवंबर २०१७ को श्रीलंका के नज़दीक में, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के कारण चेन्नै में लगातार पाँच घंटे तक बारिश हुई थी, जिसके कारण से अनेक इलाक़ों में पानी भर गया था। <ref>{{cite news|first1=दिग्पाल|last1=सिंह|title=चेन्नई की बारिश बजा रही खतरे की घंटी|url=http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|accessdate=7 नवम्बर 2017|agency=दैनिक जागरण|archive-url=https://web.archive.org/web/20171107165805/http://www.jagran.com/news/national-jagran-special-on-chennai-rains-and-climate-change-16966039.html|archive-date=7 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> {{Infobox Weather |collapsed=yes |metric_first=Yes |single_line=Yes |location = चेन्नई, भारत |Jan_Hi_°F = 83.12 |Feb_Hi_°F = 85.82 |Mar_Hi_°F = 89.42 |Apr_Hi_°F = 92.48 |May_Hi_°F = 97.52 |Jun_Hi_°F = 97.88 |Jul_Hi_°F = 94.46 |Aug_Hi_°F = 93.02 |Sep_Hi_°F = 92.3 |Oct_Hi_°F = 88.52 |Nov_Hi_°F = 84.56 |Dec_Hi_°F = 82.58 |Year_Hi_°F = 90.14 |Jan_Lo_°F = 69.08 |Feb_Lo_°F = 70.16 |Mar_Lo_°F = 73.58 |Apr_Lo_°F = 78.62 |May_Lo_°F = 81.68 |Jun_Lo_°F = 80.96 |Jul_Lo_°F = 78.62 |Aug_Lo_°F = 77.54 |Sep_Lo_°F = 77.54 |Oct_Lo_°F = 75.74 |Nov_Lo_°F = 73.04 |Dec_Lo_°F = 70.88 |Year_Lo_°F = 75.62 |Jan_Precip_mm = 16.2 |Feb_Precip_mm = 3.7 |Mar_Precip_mm = 3.0 |Apr_Precip_mm = 13.6 |May_Precip_mm = 48.9 |Jun_Precip_mm = 53.7 |Jul_Precip_mm = 97.8 |Aug_Precip_mm = 149.7 |Sep_Precip_mm = 109.1 |Oct_Precip_mm = 282.7 |Nov_Precip_mm = 350.3 |Dec_Precip_mm = 138.2 |Year_Precip_mm = 1266.9 |source =भारत मौसम विज्ञान विभाग<ref name=weather>{{cite web |url=http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |title=Climatological Information for Chennai |accessdate=25 जनवरी 2009 |publisher=Indian Meteorological Department |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302144024/http://www.imd.ernet.in/section/climate/chennai1.htm |archive-date=2 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref> |accessdate = 25 जनवरी 2009 }} == प्रशासनिक एवं उपयोगी सेवाएं == {{main|चेन्नई का प्रशासन }} {{See also|चेन्नई का स्थापत्य |भारत के उपभाग }} {|cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="float:right; border-collapse:collapse; border:2px white solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |style="background:#659ec7; color:white;"|<div style="text-align: center;">'''नगर के अधिकारीगण, (सितं.&nbsp;०७)'''</div> {| cellpadding="2" cellspacing="0" border="1" style="background:white; border-collapse:collapse; border:1px #747170 solid; font-size:x-small; font-family:verdana;" |- |[[महापौर]]<ref>{{Cite web |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070923001521/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/whoswho.htm |archive-date=23 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |title=दूरभाष-निदेशिका – पुलिस आयुक्त |publisher=Tn.gov.in |date=21 जनवरी 2009 |accessdate=3 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090217205426/http://www.tn.gov.in/telephone/hod/hodPage57.html |archive-date=17 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> |<div style="text-align: center;">'''मा. सुब्रह्मानियम</div> |- |उप-[[महापौर]] |<div style="text-align: center;">'''आर सत्यभामा </div> |- | नगर निगम आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''राजेश लखोनी'''</div> |- |पुलिस आयुक्त |<div style="text-align: center;">'''के राधाकृष्णन'''</div> |} |} चेन्नै नगर का प्रशासन [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] के पास है। [[१६८८]] में स्थापित हुआ यह निगम भारत में ही नहीं, [[ब्रिटेन]] के बाहर किसी भी [[राष्ट्रमंडल देश]] में सबसे पहला नगर निगम है। इसमें १५५ पार्षद है, जो चेन्नै के १५५ वॉऽर्डों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनका चुनाव सीधे चेन्नै की जनता ही करती है। ये लोग अपने आप में से ही एक [[महापौर]] एवं एक उप-महापौर को चुनते हैं, जो छह समितियों का संचालन करता है।<ref name=corp>{{cite web |title=कार्यपालक सारणी |work=अबाउट सी.ओ.सी |publisher=चेन्नई कार्पोरेशन |url=http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |accessdate=4 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080211111439/http://www.chennaicorporation.com/aboutcoc/org-chart.htm |archive-date=11 फ़रवरी 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै, [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की राजधानी होने से राज्य की कार्यपालिका और न्यायपालिका के मुख्यालय नगर में मुख्य रूप से फ़ॉर्ट सेंट जॉर्ज में सचिवालय इमारत में और शेष कार्यालय नगर में विभिन्न स्थानों पर अनेक इमारतों में स्थित हैं। [[मद्रास उच्च न्यायालय]] का अधिकार-क्षेत्र [[तमिल नाडु]] राज्य और [[पुदुचेरी (नगर)|पुदुचेरी]] तक है। यह राज्य की सर्वोच्च न्याय संस्था है और चेन्नै में ही स्थापित है। चेन्नै में तीन लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं – चेन्नै उत्तर, चेन्नै मध्य और चेन्नै दक्षिण और १८ विधान-सभा निर्वाचन क्षेत्र हैं। [[चित्र:Gcp patrol car.jpg|thumb|left|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस का पट्रॉलिंग]] चेन्नै का महानगरीय क्षेत्र कई उपनगरों तक व्याप्त है, जिसमें [[कांचीपुरम जिला|काँचीपुरम ज़िला]] और तिरुवल्लुर ज़िले के भी क्षेत्र आते हैं। बड़े उपनगरों में वहाँ की टाउन-नगर पालिकाएँ हैं और छोटे क्षेत्रों में टाउन-परिषद हैं, जिन्हें पंचायत कहते हैं। नगर का क्षेत्र जहाँ १७४ किमी² (६७ मील²) है,<ref name="cityarea">{{cite web |title=जनरल स्टैटिस्टिक्स |publisher=कार्पोरेशन ऑफ चेन्नई |url=http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070909100447/http://www.chennaicorporation.com/general_stats.htm |archive-date=9 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref> वहीं उपनगरीय क्षेत्र ११८९ किमी² (४५८ मील²) तक फैले हुए हैं।<ref name="metroarea">{{cite web |title=चेन्नई मेट्रो पॉलिटन एरिया - प्रोफाइल |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटान डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org |accessdate=15 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> [[चेन्नई महानगर विकास प्राधिकरण|चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण]] ([[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी|सी.एम.डी.ए]]) ने नगर के निकट उपग्रह-नगरो के विकास के उद्देश्य से एक द्वितीय मास्टरप्लैन को ड्राफ़्ट तैयार किया है। निकटस्थ उपग्रह नगरो में [[महाबलिपुरम]] (दक्षिण में), [[चेंगलपट्टु]] और मरियामलै नगर दक्षिण-पश्चिम में, [[श्रीपेरंबुदूर]], [[तिरुवल्लुर]] और [[अरक्कोणम]] पश्चिम में आते हैं। ग्रेऽटर चेन्नै पुलिस विभाग [[तमिल नाडु पुलिस|तमिलनाडु पुलिस]] का ही एक अनुभाग है, जो नगर में क़ानून-व्यवस्था की देखरेख में संलग्न है। नगर की पुलिस के अध्यक्ष पुलिस आयुक्त, चेन्नै हैं और प्रशासनिक नियंत्रण राज्य गृह मंत्रालय के पास है। इस विभाग में ३६ उप-भाग और १२१ पुलिस-स्टेशन हैं। नगर का यातायात [[चेन्नई सिटी ट्रैफिक पुलिस|चेन्नै सिटी ट्रैफ़िक पुलिस]] द्वारा नियंत्रित होता है। महानगर के उपनगर [[चेन्नई मेट्रोपॉलिटन पुलिस|चेन्नै मेट्र'पॉलिटन पुलिस]] के अधीन आते हैं एवं बाहरी जेले [[कांचीपुरम|काँचीपुरम]] एवं [[तिरुवल्लुर]] पुलिस विभागों के अन्तर्गत्त हैं। [[चित्र:Ripon Building panorama.jpg|thumb|राइपन बिल्डिंग, १९१३ में निर्मित, [[चेन्नई नगर निगम|चेन्नै नगर निगम]] का मुख्यालय तत्कालीन [[वाइसरॉय]] [[लॉर्ड राइपन]] के नाम पर है।]] चेन्नै नगर निगम और उपनगरीय नगरपालिकाएँ नागरिक सुविधाएँ मुहैया कराती हैं। अधिकांश क्षेत्रों में कूड़ा-प्रबंधन नील मेटल फ़नालिका इंवायरनमंट मैनिजमंट; एक निजी कंपनी और कुछ अन्य क्षेत्रों में नगर निगम देखता है। जल-आपूर्ति एवं मल-निकास (सीवेज ट्रीटमेंट) की निगरानी चेन्नै मेट्र'पॉलिटन वॉऽटर सप्लाइ ऐंड स्यूइज बॉर्ड द्वारा होती है। विद्युत आपूर्ति तमिलनाडु विद्युत बॉर्ड प्रबंध करता है।<ref>{{cite web |title=Emergency and Utility Services Contact Details at Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |url=http://chennai.nic.in/emergency.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070930014904/http://chennai.nic.in/emergency.htm |archive-date=30 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> नगर की दूरभाष सेवा छह मोबाइल और चार लैंडलाइन कंपनियों के द्वारा प्रदान होती है<ref>{{cite press release|title=इन्फ़ॉर्मेशन नोट टू द प्रेस (प्रेस विज्ञप्ति सं. ७१/२००७)|publisher=Telecom Regulatory Authority of Indiaटेलीकॉम रेग्युलेत्री अथॉरिटी ऑफ इंडिया|date=२४ अगस्त २००७|url=http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|format=PDF|accessdate=4 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20120515114849/http://www.trai.gov.in/trai/upload/PressReleases/486/pr24aug07no71.pdf|archive-date=15 मई 2012|url-status=live}}, Annexure I lists these six entities as the licensed cellular operators for the Chennai circle. The [[CDMA]] Development Group's official website lists [[Tata Teleservices]] and [[Reliance Communications]] as the only operators to have deployed [[CDMA]] on cellular systems in India. {{cite web|url=http://www.cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|title=CDMA Worldwide: Deployment search - Asia-Pacific|publisher=CDMA Development Group|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011073228/http://cdg.org/worldwide/index.asp?h_area=1|archive-date=11 अक्तूबर 2007|accessdate=4 अक्टूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite news |last=नारायणन |first=आर वाई |title=टचटेल अराइव्स इन [[कोयंबतूर]] |work=[[द हिन्दु]] |date=५ सितंबर २००२ |url=http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |accessdate=7 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090110085422/http://www.thehindubusinessline.com/2002/09/05/stories/2002090502151700.htm |archive-date=10 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> और सिफ़ी तथा हैथवे जैसे कंपनियाँ [[ब्रॉडबैंड सेवा]] द्वारा इंटरनेट भी उपलब्ध कराती हैं। नगर के क्षेत्र से कोई मुख्य नदी नहीं गुज़रती है, अतः चेन्नै में वार्षिक [[मानसून|मॉनसून]] वर्षा के जल को सरोवरों में सहजकर रखने का इतिहास रहा है। नगर की बढ़ती आबादी और [[भूमिगत जल]] के गिरते स्तर के कारण नगर को जल अभाव का सामना करना पड़ा है। इस दिशा में वीरानम झील परियोजना भी कारगर नहीं सिद्ध हुई है। नयी वीरानम परियोजना ने काफ़ी हद तक इस समस्या का समाधान किया है और शहर के सुदूर स्रोतों पर निर्भरता घटी है।<ref>{{cite web |title=Management of water supply during acute water scarcity in 2003 & 2004 |work=Operations and maintenance |publisher=Chennai Metropolitan Water Supply and Sewage Board |url=http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |accessdate=16 मार्च 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070812071544/http://www.chennaimetrowater.com/engg/operationmaintenance/cmwdrw04.htm |archive-date=12 अगस्त 2007 |url-status=dead }}</ref> हाल के वर्षों में भारी मॉनसूनी वर्षाओं के चलते [[अन्ना नगर]] में जल पुनर्चक्रीकरण को सहारा मिला है और इससे नगर में जलाभावों की काफ़ी कमी आयी है।<ref name=hindu_rwh_bangalore>{{cite news |last = लक्ष्मी |first = के |title = बंगलुरु टीम विज़िट्स RWH स्ट्रक्चर्स इन सिटी |work = द हिन्दू |date = [[३ अगस्त]],[[२००७]] |url = http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |accessdate = 11 अगस्त 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071001015212/http://www.hindu.com/2007/08/03/stories/2007080360510500.htm |archive-date = 1 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref> इसके साथ ही, [[तेलुगु गंगा परियोजना]] जैसे नयी परियोजनाओं द्वारा [[आंध्र प्रदेश]] से [[कृष्णा नदी|कृष्ण नदी]] का जल भी पहुचाया जा रहा है, जिसने इस संकट को लगभग समाप्त ही कर दिया है। नगर में समुद्री जल के अलवणीकरण-संयंत्र की स्थापना भी प्रगति पर है, जिससे [[सागर]] के जल को भी जलापूर्ति में प्रयोग किया जा सकेगा।<ref>{{cite news |title=IVRCL to set up desalination plant near Chennai |work=द हिन्दू |date=अगस्त 12, 2005 |url=http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090213183507/http://www.thehindubusinessline.com/2005/08/12/stories/2005081202820300.htm |archive-date=13 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Radhakrishnan |first=R.K |title=Preliminary work on desalination plant to be completed by December-end |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 4, 2007 |url=http://www.hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |accessdate=18 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012002902/http://hindu.com/2007/09/04/stories/2007090460440400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> == संस्कृति == {{main|चेन्नई की संस्कृति |चेन्नई के व्यंजन }} {{See also|तमिल खाना|तमिल चलचित्र}} [[चित्र:anianianiy.jpg|150px|thumb|एक [[भरतनाट्यम]] नर्तकी]] चेन्नै भारत की सांस्कृतिक एवं संगीत राजधानी है।<ref>[http://www.hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm द हिन्दू] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101118022937/http://hindu.com/thehindu/mag/2002/12/01/stories/2002120100770500.htm |date=18 नवंबर 2010 }} पर चेन्नै</ref> नगर शास्त्रीय नृत्य-संगीत कार्यक्रमों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष, चेन्नै में पंच-सप्ताह [[मद्रास म्यूज़िक सीज़न]] कार्यक्रम का आयोजन होता है। यह १९२७ में मद्रास संगीत अकादेमी की स्थापना की वर्षगाँठ मानने के साथ आयोजित होता है।<ref name=Music_season>{{cite news |title=Music musings |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |date=फ़रवरी 3, 2005 |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050207150555/http://www.hindu.com/2005/02/03/stories/2005020301281000.htm |archive-date=7 फ़रवरी 2005 |url-status=live }}</ref> इसमें नगर और निकट के सैंकड़ों कलाकारों के शास्त्रीय [[कर्नाटक संगीत]] के कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक अन्य उत्सम [[चेन्नई संगमम|चेन्नै संगमम]] प्रत्येक वर्ष [[जनवरी]] में [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] राज्य की विभिन्न कलाओं को दर्शाता है। चेन्नै को [[भरतनाट्यम]] के लिए भी जाना जाता है। यह दक्षिण-भारत की प्रसिद्ध नृत्य शैली है। नगर के दक्षिणी भाग में तटीय क्षेत्र में कलाक्षेत्र नामक स्थान [[भरतनाट्यम]] का प्रसिद्ध सांस्कृतिक केन्द्र है।<ref>{{cite news |author=GR |url=http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |title=Yearning for Chennai ambience |accessdate=7 सितंबर 2007 |date=दिसम्बर 2, 2000 |work=द हिन्दू |archive-url=https://web.archive.org/web/20081229133413/http://www.hinduonnet.com/2000/12/02/stories/0902033h.htm |archive-date=29 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में भारत के कुछ सर्वोत्तम कॉयर्ज़ हैं, जो [[क्रिसमस]] के अवसर पर अंग्रेज़ी और तमिल में विभिन्न ''कैरल'' कार्यक्रम करते हैं।<ref>{{cite news |url=http://archives.chennaionline.com/columns/ethnomusic/durga23.asp |title=Chennai as a home for Music – IV |work=Chennai Online |date=2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100117155239/http://archives.chennaionline.com/columns/Ethnomusic/durga23.asp |archive-date=17 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.go-nxg.com/?p=3155 |title=There's a song in the air... |work=NXg |date=जनवरी 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130615082343/http://www.go-nxg.com/?p=3155 |archive-date=15 जून 2013 |url-status=dead }}</ref> मद्रास म्यूज़िकल असोसिएशन भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठावान कॉयर्ज़ में से एक हैं और इन्होंने विश्वभर में कार्यक्रम किये हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |title=Chennai choir to sing in England |work=द हिन्दू |date=जून 16, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080129234646/http://www.hindu.com/2006/06/16/stories/2006061616030200.htm |archive-date=29 जनवरी 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |title=An aural treat |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 03, 2007 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090926071718/http://www.hindu.com/mp/2007/09/03/stories/2007090350690700.htm |archive-date=26 सितंबर 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै [[तमिल चलचित्र]] उद्योग, जिसे [[कॉलीवुड]] भी कहते हैं, का आधार नगर है। यह उद्योग [[कोडमबक्कम]] में स्थित है, जहाँ बड़ी संख्या में फ़िल्म स्टूडियो हैं।<ref>{{cite book |last = Ellens |first = Dan |author2= Lakshmi Srinivas |title=A Time for India |publisher=Vantage Press Inc., New York |year = 2006 |page = 150 |isbn = 0533150922 |url=http://books.google.com/books?id=6Nsyr3J1fpIC&printsec=frontcover&dq=kollywood#PPA150,M1 |accessdate=7 सितंबर 2007}}</ref> इस उद्योग द्वारा आजकल १५० से अधिक फ़िल्में वार्षिक तौर पर बनायी जाती हैं<ref>{{cite book |last = Ganti |first = Tejaswini |title = Bollywood: A Guidebook To Popular Hindi Cinema |publisher = Routledge, London |year = 2004 |page = 3 |isbn = 0415288541 |url = http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC&pg=PA3&dq=tamil+films+per+year&sig=Q9a_mC8aqRjWWyxHaHpsbCV6xuE |accessdate = 7 सितंबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20130604042330/http://books.google.com/books?id=GTEa93azj9EC |archive-date = 4 जून 2013 |url-status = live }}</ref> और इनके साउंडट्रैक के ऐल्बम भी नगर को संगीतमय करते हैं। इस उद्योग से जुड़े कुछ व्यक्तियों के नाम [[इलैयाराजा]], [[के बालाचंदर]], [[शिवाजी गणेशन]], [[एम जी रामचंद्रन]], [[रजनीकान्त|रजनीकांत]], [[कमल हासन]], [[मणि रत्नम]] और [[एस शंकर]] हैं। <!-- [[चित्र:Idly sambar vada.JPG|thumb|[[सांभर |सांभर वड़ा]] और [[इडली]]]]--> [[चित्र:Chennai Veg Cuisine-hi.jpg|thumb|200px|तरह तरह के तमिल व्यंजन]] [[ए॰ आर॰ रहमान|ए. आर. रहमान]] ने चेन्नै को अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलायी है। रहमान को [[२००९]] में [[स्लमडॉग मिलेनियर]] के लिए दो [[ऑस्कर सम्मान]] मिले थे।<ref>{{cite news |url=http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |title=India Celebrates 'Slumdog Millionaire's' Oscar Sweep |work=VOA News |date=फ़रवरी 23, 2009 |accessdate=24 फरवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090224173347/http://www.voanews.com/english/Entertainment/2009-02-23-voa15.cfm |archive-date=24 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में रंगमंच पर तमिल नाटक मंचित किये जाते हैं, जिनमें राजनीतिक, व्यंग्य, हास्य, पौराणिक, आदि सभी रसों का मिश्रण होता है।<ref>{{cite news |last=Ramesh |first=V |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |title=The Sultan of sarcasm |work=द हिन्दू |date=जुलाई 17, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081230073420/http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2003/07/17/stories/2003071700060100.htm |archive-date=30 दिसंबर 2008 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |last=अशोक कुमार |first=एस आर |url=http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |title=एक्टर आर एस मनोहर डेड |work=द हिन्दू |date=जनवरी 11, 2006 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090626151134/http://www.hindu.com/2006/01/11/stories/2006011115150700.htm |archive-date=26 जून 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Kumar |first=Ranee |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |title=Laughter, the best medicine |work=द हिन्दू |date=दिसम्बर 10, 2003 |accessdate=22 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100130103808/http://www.hindu.com/mp/2003/12/10/stories/2003121000390100.htm |archive-date=30 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref> इनके अलावा, अंग्रेज़ी नाटकों का भी मंचन आयोजित होता है। नगर के उत्सवों में [[जनवरी]] माह में आने वाला पंच-दिवसीय [[पोंगल]] प्रमुख है। इसके अलावा सभी मुख्य त्यौहार जैसे [[दीपावली|दीवाली]], [[ईद]], [[क्रिसमस]] आदि भी हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं। [[तमिल]] व्यंजनों में [[शाकाहारी]] और [[मांसाहारी|माँसाहारी]] दोनों ही व्यंजनों का सम्मिलन है। नगर में विभिन्न स्थानों पर अल्पाहार या टिफ़िन भी उपलब्ध हैं, जिनमें [[पोंगल]], [[दोसा]], [[इडली]], [[वड़ा]], आदि मिलते हैं, जिनको गरमागरम या ठंडी कॉफ़ी के साथ परोसा जाता है। == अर्थव्यवस्था == [[चित्र:Tidel Park.jpg|thumb|टाइडल पार्क]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रमुख व्यवसाय-वाणिज्य एवं यातायात का केन्द्र है। १९वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना चेन्नै में हुई। चेन्नै के निकट पेरांबूर में [[भारत]] सरकार द्वारा एशिया का सबसे विशाल रेल्वे डिब्बा निर्माण का कारखाना इंटिग्रल कोच बिल्डिंग फ़ैक्ट्री को स्थापित किया गया है। यहाँ के उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग, रासायनिक उद्योग, काग़ज़ एवं कागज से निर्मित वस्तुओं के उद्योग, मुद्रण यंत्र एवं इससे सम्बन्धित उद्योग, चमड़ा, डीज़ल इंजन, मोटरगाड़ी, साइकिल, सिमेंट, चीनी, दियासलाई, रेल के डिब्बे तैयार करने के उद्योग, आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के उद्योग एवं कारखाने चेन्नै में उपस्थित हैं। इनमें इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री, हिन्दुस्तान टेलिप्रिंटर, चेन्नै रिफ़ाइनरी एवं चेन्नै फ़र्टिलाइज़र आदि प्रमुख हैं। मद्रास पेट्र'केमिकल्ज़ में पेट्रो-रसायन पदार्थ का उत्पादन होता है। == जनसांख्यिकी == [[चित्र:Chennai Shopping.jpg|thumb|right|रंगनाथन स्ट्रीट [[टी नगर]] में पटरी पर खरीदने बेचने वालों की भीड़ लगी रहती है।]] चेन्नै के वासी को अंग्रेज़ी में चेन्नैयाइट और हिन्दी में प्रायः मद्रासी कह दिया जाता है। [[२००१]] में [[भारत की जनगणना]] के अनुसार चेन्नै नगर की जनसंख्या ४३.४ लाख थी, जबकि कुल महानगरीय जनसंख्या ७०.४ लाख थी।<ref name="masterplan_popfigs">{{cite web |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-५, I-१० |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }} The population density for Chennai city and the metropolitan area have been calculated using the population figures and the total area of the respective regions, mentioned in the Second Master Plan. The conversion rate of {{convert|1|mi|km|0|sing=on}} = 1.609 km. has been used to compute the density per sq. mile.</ref> २००६ की अनुमानित महानगरीय जनसंख्या ४५ लाख आयी है।<ref name="Hindu-CMDA">{{cite news |last=श्रीवास्तन |first=ए |title=न्यू लैंड यूज़ प्रॉपोज़ल्स मूटेड इन ड्राफ़्ट मास्टर प्लान |date=१२ अप्रैल २००७ |url=http://www.hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |work=[[द हिन्दु]] |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041105/http://hindu.com/2007/04/12/stories/2007041213350400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> २००१ में नगर का [[जनसंख्या घनत्व]] २४,६८२ वर्ग किमी (६३,९२६ प्रति वर्ग मील) था, जबकि महानगरीय क्षेत्र का घनत्व ५,९२२ प्रति वर्ग किमी था, जिससे यह विश्व के सर्वोच्च जनसंख्या वाले नगरों में गिना जाने लगा।<ref name="masterplan_popfigs"/><ref>{{cite web |title=अएबन एरियाज़ बाए पॉपुलेशन डेन्सिटी |work=वर्ल्ड अर्बन एरियाज़ (वर्ल्ड एग्लोमरेशंस) |pages=p. 77 |month=मार्च |year=२००७ |publisher=डेमोग्राफ़िया |url=http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=9 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180503021711/http://www.demographia.com/db-worldua.pdf |archive-date=3 मई 2018 |url-status=dead }} In terms of population density, Chennai was ranked 51st among all urban agglomerations in the world with over 500,000 people.</ref> यहाँ का [[लिंग अनुपात]] ९५१ स्त्रियाँ/१००० पुरुष है,<ref name="sex-ratio-nic">{{cite web |title=सेन्सस २००१ डाटा |work=भारत की जनगणना |publisher=तमिल नाडु सरकार |url=http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |accessdate=5 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730180830/http://chennai.nic.in/chndistprof.htm#CENSUS |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=dead }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत ९४४ से कुछ अधिक ही है।<ref name=CIA_World_Factbook>{{cite web| title= इंडिया| work= CIA World Factbook| url= https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| accessdate= 4 अगस्त 2005| archive-url= https://web.archive.org/web/20080611033144/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/in.html| archive-date= 11 जून 2008| url-status= live}}</ref> नगर की औसत साक्षरता दर ८०.१४% है,<ref name=literacy>{{cite web |title=डिस्ट्रिक्ट्स पर्फ़ॉर्मैन्स ऑन लिट्रेसी रेट इन तमिल नाडु फ़ॉर ईयर २००१ |work=Department of school education |url=http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |accessdate=4 अगस्त 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050817143108/http://www.tn.gov.in/schooleducation/statistics/table7and8.htm |archive-date=17 अगस्त 2005 |url-status=live }}</ref> जो राष्ट्रीय औसत दर ६४.५% से कहीं अधिक है। नगर में झुग्गी-झोंपड़ी निवासियों की जनसंख्या भारत के अन्य महानगरों के मुकाबले चौथे स्थान पर आती है, जिसमें ८,२०,००० लोग (कुल जनसंख्या का १८.६%) लोग हैं।<ref name=slum>{{cite web |title=स्लम पॉपुलेशन – सेन्सस २००१ |publisher=भारत सरकार |url=http://www.censusindia.gov.in/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20070621135109/http://www.censusindia.net/results/slum/Intro_slum.pdf |archive-date=21 जून 2007 |format=PDF |accessdate=8 मार्च 2007 |url-status=live }}</ref> यह संख्या भारत की कुल जनसंख्या का ५% है। [[२००५]] में नगर में अपराध दर ३१३.३ प्रति १ लाख व्यक्ति थी, जो भारत के सभी प्रधान नगरों में हुए अपराधों का ६.२% है।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |format=PDF |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=Incidence & Rate Of Total Cognizable Crimes (IPC) In States, UTs & Cities During 2005 |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005155/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/Table%201.6.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> ये आंकड़े २००४ से ६१.८% बढ़े हैं।<ref>{{cite web |url=http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |format=पी.डी.एफ़ |accessdate=19 सितंबर 2007 |title=क्राइम इन मेगा सिटीज़ |work=क्राइम इन इन्डिया &nbsp;–&nbsp;२००५ |publisher=भारत सरकार |archive-url=https://web.archive.org/web/20070614203644/http://ncrb.nic.in/crime2005/cii-2005/CHAP2.pdf |archive-date=14 जून 2007 |url-status=live }}</ref> चेन्नै में [[तमिल]] लोग बहुसंख्यक हैं। यहाँ की मुख्य भाषा [[तमिल]] ही है। व्यापार, शिक्षा और अन्य अधिकारी वर्ग के व्यवसायों एवं नौकरियों में [[अंग्रेज़ी]] मुख्यता से बोली जाती है। इनके अलावा, कम किंतु गणनीय संख्या [[तेलुगु]] तथा [[मलयाली]] लोगों की भी है।<ref>{{cite web |url=http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |title=चेन्नई कल्चर |publisher=chennai-online.in |accessdate=8 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071006034403/http://chennai-online.in/Profile/Culture/ |archive-date=6 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै में तमिलनाडु के अन्य भागों व भारत के सभी भागों से आये लोगों की भी अच्छी संख्या है। २००१ के आँकड़ों के अनुसार, नगर के ९,३७,००० प्रवासियों (चेन्नै की कुल जनसंख्या का २१.५७%) में से; ७४.५% राज्य के अन्य भागों से आये थे, २३.८% देश के अन्य भागों से तथा १.७% विदेशियों की जनसंख्या थी।<ref>{{cite web |url=http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |format=PDF |title=डेमोग्राफ़ी |work=द्वितीय मास्टर प्लान - II |pages=पृ. I-11 |publisher=चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डवलपमेंट अथॉरिटी |accessdate=6 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071128071240/http://www.cmdachennai.org/pdfs/SMP/A_Chap%20I%20_Demography.pdf |archive-date=28 नवंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> कुल जनसंख्या में ८२.२७% [[हिन्दू]], ८.३७% [[मुस्लिम]], ७.६३% [[ईसाई]] और १.०५% [[जैन]] हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |format=PDF |title=एरिया एंड पॉपुलेशन |publisher=तमिल नाडु सरकार |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130830215520/http://www.chennai.tn.nic.in/shb-pdf/SHB001%20-%20AREA%20POPULATION.pdf |archive-date=30 अगस्त 2013 |url-status=dead }}</ref> == यातायात == <!-- [[Image:Madras Port In 1996.jpg|thumb|200px|right|Chennai Port]] --> {{main|चेन्नई में यातायात }} [[चित्र:Tidel Park junction panorama.jpg|thumb|300px|चेन्नै में आई.टी हाइवे, जिसके शिरोपरि [[एम आर टी एस (चेन्नई)|एम आर टी एस (चेन्नै)]] निकलता हुआ दिखायी दे रहा है।]] चेन्नै दक्षिण भारत के प्रवेशद्वार की भाँति प्रतीत होता है, जिसमें अन्ना अन्तरराष्ट्रीय टर्मिनल एवं कामराज अन्तर्देशीय टर्मिनल सहित [[चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा|चेन्नै अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा]] [[भारत]] का [[भारत के विमानक्षेत्र|तीसरा व्यस्ततम विमानक्षेत्र]] है।<ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |format=PDF |publisher=[[भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण]] |title=Traffic statistics - Passengers (Intl+Domestic), Annexure IIIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044903/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex3.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |format=PDF |publisher=भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण |title=Traffic statistics - Aircraft movements (Intl+Domestic), Annexure IIC |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070926044906/http://aai.aero/traffic_news/jun2k7annex2.pdf |archive-date=26 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> चेन्नै नगर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया, मध्य पूर्व, [[यूरोप]] एवं [[उत्तरी अमरीका]] के प्रधान बिन्दुओं पर ३० से अधिक राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय विमान सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यह विमानक्षेत्र देश का दूसरा व्यस्ततम कार्गो टर्मिनस है। वर्तमान विमानक्षेत्र में अधिक आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा [[श्रीपेरंबुदूर]] में नया ग्रीनफ़ील्ड एयरपोर्ट लगभग ₹२००० करोड़ की लागत से बनना तय हुआ है।<ref name=New_Airport>{{cite news |title=New greenfield airport to be set up near Chennai |work=द हिन्दू |url=http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |date=मई 22, 2007 |accessdate=22 मई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121026105518/http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200705221441.htm |archive-date=26 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> नगर में दो प्रधान सागरपत्तन (बंदरगाह) हैं, [[चेन्नई पोर्ट|चेन्नै पोर्ट]] जो सबसे बड़े कृत्रिम बंदरगाहों में एक है, तथा [[एन्नोर पोर्ट]]। चेन्नै पोर्ट [[बंगाल की खाड़ी]] में सबसे बड़ा बंदरगाह और भारत का दूसरा सबसे बड़ा सागरीय-व्यापार केन्द्र है, जहाँ ऑटोमोबिल, मोटरसाइकिल, सामान्य औद्योगिक माल और अन्य थोक खनिज की आवाजाही होती है।<ref>{{cite news |url=http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |publisher=Business Times |title=Gateway to India for Singapore firms |date=जुलाई 6, 2006 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100312232206/http://app.mfa.gov.sg/pr/read_content.asp?View,4753, |archive-date=12 मार्च 2010 |url-status=dead }}</ref> [[मुम्बई]] के बाद भारत का यही सबसे बड़ा पत्तन है। इस कृत्रिम बन्दरगाह में जलयानों के लंगर डालने के लिए कॉन्क्रीट की मोटी दीवारें सागर में खड़ी करके एक साथ दर्जनों जलयानों के ठहराने योग्य पोताश्रय बना लिया गया है। दक्षिणी भारत का सारा दक्षिण-पूर्वी भाग ([[तमिलनाडु]], दक्षिणी आन्ध्र प्रदेश तथा कर्नाटक राज्य) इसकी पृष्ठभूमि है। यहाँ मुख्य निर्यात मूँगफली और इसका तेल, तम्बाकू, प्याज़, कहवा, अरबरक, मैंग्नीज़, चाय, मसाला, तिलहन, चमड़ा, नारियल, इत्यादि हैं तथा आयात में कोयला, पिट्रॉलियम, धातु, मशीनरी, लकड़ी, कागज़, मोटर-साइकिल, रसायन, चावल और खाद्यान्न, लम्बे रेशे वाली कपास, रासायनिक पदार्थ, आदि प्रमुख हैं। एक छोटा बंदरगाह [[रोयापुरम]] में भी है, जो स्थानीय मछुआरों और जलपोतों द्वारा प्रयोग होता है। पूर्वी तट पर चेन्नै की महत्त्वपूर्ण स्थिति ने प्राकृतिक सुविधा के अभाव में भी कृत्रिम व्यवस्था द्वारा एक पत्तन का विकास पाया है। एक बन्दरगाह होने के कारण कोलकाता, विशाखापट्टनम, कोलम्बों, रंगून, पोर्ट ब्लेयर आदि स्थानों से समुद्री मार्ग द्वारा सम्बद्ध है। [[चित्र:Velachery Railway station June 2010.jpg|thumb|left|चेन्नै में [[सामूहिक त्वरित यातायात प्रणाली (चेन्नई)|एम.आर.टी.एस]] ट्रेन का स्टेशन]] आज रेलमार्गों और सड़कों के मुख्य जंक्शन होने के कारण से, यह नगर देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। यह वायु मार्ग द्वारा [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद आदि देश के विभिन्न नगरों से जुड़ा हुआ है। चेन्नै देश के अन्य भागों से रेल द्वारा भी भली-भाँति जुड़ा हुआ है। यहाँ से, पाँच मुख्य [[भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग|राष्ट्रीय राजमार्ग]] नगर को [[मुंबई]], [[कोलकाता]], [[तिरुचिरापल्ली]], [[तिरुवल्लुर]], तिंडिवनम और [[पुदुचेरी]] को जोड़ते हैं।<ref name=transport>{{cite web | title= GIS database for Chennai city roads and strategies for improvement | publisher= Geospace Work Portal | url= http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | accessdate= 4 अगस्त 2005 | archive-url= https://web.archive.org/web/20120717045706/http://www.gisdevelopment.net/application/Utility/transport/utilitytr0001.htm | archive-date= 17 जुलाई 2012 | url-status= dead }}</ref> चेन्नै मोफ़स्सिल बस टर्मिनस शहर की सभी अन्तर्राज्यीय बस सेवाओं का अड्डा है। यह [[एशिया]] का सबसे बड़ा बस-अड्डा है।<ref name="thehindu20051228">{{cite news |last=Dorairaj |first=S |url=http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |work=द हिन्दू |title=Koyambedu bus terminus gets ISO certification |date=दिसम्बर 28, 2005 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111107232736/http://www.hindu.com/2005/12/28/stories/2005122816740400.htm |archive-date=7 नवंबर 2011 |url-status=live }}</ref> सात सरकारी यातायात निगम अन्तर-नगरीय और अन्तर्राज्यीय बस सेवाएँ संचालित करते हैं। बहुत-सी निजी बस सेवाएँ भी चेन्नै को अन्य नगरों से सुलभ कराती हैं। चेन्नै [[दक्षिण रेलवे (भारत)|दक्षिण रेलवे]] का मुख्यालय है। नगर में दो मुख्य रेलवे टर्मिनल हैं। [[चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन|चेन्नै सेंट्रल रेल्वे स्टेशन]], जहाँ से सभी बड़े नगरों जैसे [[मुम्बई|मुंबई]], [[कोलकाता]], [[बेंगलुरु|बेंगलूरु]], [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[कोच्चि]], [[कोयंबतूर]], [[तिरुवनंतपुरम]], इत्यादि के लिए रेल-सुविधा उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|title=Sub-urban Train timings|publisher=Indian Railways|accessdate=6 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011023042/http://southernrailway.org/sutt/arr-dep.php|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=dead}}</ref> [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नै एगमोर रेलवे स्टेशन]] से प्रायः [[तमिलनाडु]] के नगरों की रेल सेवाएँ ही उपलब्ध हैं। कुछ निकटवर्ती राज्य के नगरों की भी रेलगाड़ियाँ यहाँ से चलती हैं।<ref name="egmore-trains">{{cite news |title=35 trains to run at higher speed |date=अगस्त 27, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013122036/http://hindu.com/2004/08/28/stories/2004082807870500.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> [[चित्र:Chennai Royapettah clock tower.jpg|thumb|एमटीसी की वॉल्वो बस]]<!-- end of image --> नगर में लोक यातायात हेतु बस, रेल, ऑटोरिक्शा आदि सर्वसुलभ साधन हैं। [[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]] नेट्वर्क भारत में सबसे पुराना है। इसमें चार [[ब्रॉड गेज|ब्रॉड गेऽज]] वाले रेऽल क्षेत्र हैं, जो नगर में दो स्थानों [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]] और [[चेन्नई बीच रेलवे स्टेशन|चेन्नै बीच रेलवे स्टेशन]] पर मिलते हैं। इन टर्मिनल से नगर में निम्न सेक्टरों के लिए नियमित सेवाएँ उपलब्ध हैं: * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/[[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] - [[अरक्कोणम]] - [[तिरुट्टनी]] ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – पश्चिम लाइन]]) * [[चेन्नई सेंट्रल|चेन्नै सेंट्रल]]/ [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – गुम्मिडीपूंडी - सुलुरपेट ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे|चेन्नै उपनगरीय रेलवे]]) * [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] – [[तांबरम]] - [[चेंगलपट्टू]] - तिरुमलैपुर ([[कांचीपुरम|काँचीपुरम]]) ([[चेन्नई उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन|चेन्नै उपनगरीय रेलवे – दक्षिण लाइन]]) * चौथा सेक्टर भूमि से उच्च स्तर पर है और [[चेन्नई बीच|चेन्नै बीच]] को [[वेलाचेरी]] से जोड़ता है और शेष जाल से भी जुड़ा हुआ है। [[चेन्नई मेट्रो|चेन्नै मेट्रो]] चेन्नै के लिए अनुमोदित एक त्वरित यातायात सेवा है। इसके प्रथम चरण में दो लाइनें प्रयोग में है एवं अन्य लाइनों का कार्य निर्माणाधीन है। इस पूरी परियोजना में, पहले चरण के दो गलियारों की लागत ₹१४,६०० करोड़ है, जो ५०.१ किमी तक लंबे हैं। २००७ के आकलन से ₹९,५९६ करोड़ की लागत आयी थी।<ref name="hindumetrorail">{{cite web |first=TheCSR |title=Chennai metro work begins |date=अप्रैल 18, 2008 |url=http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |work=द हिन्दू |accessdate=17 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20081101201943/http://www.hindu.com/2008/04/18/stories/2008041860651200.htm |archive-date=1 नवंबर 2008 |url-status=live }}</ref> मेट्र'पॉलिटन ट्रांसपॉर्ट कॉर्परेशन (एमटीसी) नगर में बस यातायात संचालित करता है। निगम का २७७३ बसों का बेड़ा २८८ मार्गों पर ३२.५ लाख यात्रियों को दैनिक परिवहन उपलब्ध कराता है।<ref name=mtc_details>{{cite web |title=The Growth |publisher=Metropolitan Transport Corporation (Chennai) Ltd |url=http://www.mtcbus.org/ |date=मई 31, 2008 |accessdate=31 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080526170357/http://mtcbus.org/ |archive-date=26 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> नगर के बहुत से मार्गों पर मैक्सी कैब नाम से वैन और सवारी भाड़े पर ऑटोरिक्शा भी चलते हैं, जो बस सेवा का विकल्प देते हैं। चेन्नै की यातायात संरचना अच्छा संपर्क उपलब्ध कराती है, किंतु बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ-साथ यातायात संकुलन और प्रदूषण की समस्याएँ भी खड़ी हो गयी हैं। प्रशासन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए फ़्लाइओवर तथा ग्रेऽड-सेपिरेटर निर्माण किये हैं, जिनका शुभारंभ [[१९७३]] में जेमिनाइ फ़्लाइओवर से नगर की सबसे महत्वपूर्ण सड़क अन्ना सालै से हुआ था।<ref>{{cite web |url=http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |format=PDF |title=Land Use and Planning Strategy |work=Draft Master Plan – II for Chennai Metropolitan Area |publisher=Chennai Metropolitan Development Authority |page=p. 60 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927005157/http://www.hindu.com/nic/draftmasterplanii_short.pdf |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srivathsan |first=A |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007/09/29/&prd=pp& |title=Bridge across time Skyline |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 29, 2007 |accessdate=16 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110327174358/http://www.hinduonnet.com/thehindu/thscrip/print.pl?file=2007092950161200.htm&date=2007%2F09%2F29%2F&prd=pp& |archive-date=27 मार्च 2011 |url-status=dead }}</ref> और हाल ही में तैयार हुई, इस शृंखला की नवीनतम कड़ी काठीपाड़ा फ़्लाइओवर है। == शिक्षा == [[चित्र:Anna-university.jpg|thumb|चेन्नै में स्थित अन्ना विश्वविद्यालय]] चेन्नै में सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के विद्यालय हैं। शिक्षा का माध्यम तमिल अथवा अंग्रेज़ी है। अधिकांश विद्यालय तमिलनाडु राज्य शिक्षा मंडल या केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से जुड़े हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |title=Balancing uniformity and diversity |work=द हिन्दू |date=नवम्बर 20, 2006 |author=रामचंद्रन, के. एवं श्रीनिवासन, मीरा |accessdate=7 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013193537/http://hindu.com/edu/2006/11/20/stories/2006112000410100.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> नगर में कुल १,३८९ विद्यालय हैं, जिनमें से ७३१ प्राथमिक, २३२ माध्यमिक और ४२६ उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |title=No. of Schools in the Town : Chennai |publisher=Govt. of Tamil Nadu |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090409225017/http://www.schools.tn.nic.in/TownSchools.asp?DCODE=02&VTCODE=40200988 |archive-date=9 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref> इंजिनियरिंग शिक्षा के लिए, चेन्नै में [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान चेन्नई|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], १७९४ में स्थापित कॉलिज ऑव इंजिनियरिंग, गिंडी, १९४९ में स्थापित मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान और एस आर एम विश्वविद्यालय जाने माने संस्थान हैं। अधिकांश इंजिनियरिंग महाविद्यालय [[अन्ना विश्वविद्यालय]] से संबद्ध हैं। मद्रास मेडिकल कॉलिज, स्टेनली मेडिकल कॉलिज, किलपॉक मेडिकल कॉलिज और एस आर. एम. मेडिकल कॉलिज एवं अनुसंधान संस्थान चेन्नै के प्रमुख चिकित्सा महाविद्यालय हैं। विज्ञान, कला एवं वाणिज्य क्षेत्र में शिक्षा प्रदान कराने वाले अधिकांश महाविद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। मद्रास विश्वविद्यालय की नगर में तीन परिसर हैं। मद्रास क्रिश्चन कॉलिज, लॉयला कॉलिज, द न्यू कॉलिज और पेट्रिशन कॉलिज कुछ प्रसिद्ध स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय हैं। चेन्नै में कई अनुसंधान केन्द्र भी हैं। == खेल-कूद == [[चित्र:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg|thumb|एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] चेन्नै नगर विविध खेलों के लिए प्रसिद्ध है। नगर ने भारत को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिये हैं। एस वेंकट राघवन और [[कृष्णम्माचारी श्रीकांत]] ने [[क्रिकेट]] में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।<ref>{{cite web|title=Srinivas Venkataraghavan|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=15 अक्टूबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071011202950/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/35656.html|archive-date=11 अक्तूबर 2007|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|title=Kris Srikanth|publisher=क्रिक इन्फ़ो|url=http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|first=प्रताप|last=रामचंद|accessdate=१५ अक्टूबर २००७|archive-url=https://web.archive.org/web/20090214140744/http://content-aus.cricinfo.com/india/content/player/34103.html|archive-date=१४ फ़रवरी २००९|url-status=live}}</ref> [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी [[नासिर हुसैन (क्रिकेट खिलाड़ी)|नासिर हुसैन]] का जन्म भी चेन्नै में हुआ था। [[एम आर एफ़ पेस फ़ाउंडेशन]] एक प्रसिद्ध तेज गेंदबाजी सिखाने की संस्था है, जो सन १९८७ से चेन्नै में संचालित हो रही है। [[इंडियन प्रीमियर लीग|इंडियन प्रेमियर लीग]] में चेन्नै के स्थानीय टीम का नाम [[चेन्नई सुपर किंग्स|चेन्नै सूपर किंग्ज़]] है, जिसके कप्तान [[महेंद्र सिंह धोनी]] हैं। चेपुक में स्थित [[एम ए चिदंबरम स्टेडियम]] भारत के सबसे पुराने क्रिकेट के मैदानो में से एक है।<ref>{{cite web |last=श्रीराम |first=नटराजन |url=http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |title=MA Chidambaram stadium |publisher=क्रिक्इन्फ़ो |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104024506/http://content-usa.cricinfo.com/india/content/ground/58008.html |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=live }}</ref> मेयर राधाकृष्णन स्टेडियम [[हॉकी]] का एक लोकप्रिय मैदान है। यहाँ एशिया कप एवं चैंपियंज़ ट्रोफ़ी जैसी प्रमुख हॉकी प्रतियोगिताएँ हो चुकी हैं।<ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |title=India retains Asia Cup hockey title |work=द हिन्दू |date=सितम्बर 10, 2007 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110629021257/http://www.hindu.com/2007/09/10/stories/2007091055590100.htm |archive-date=29 जून 2011 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |title=Radhakrishnan stadium to have new turf |work=द हिन्दू |date=अक्टूबर 20, 2004 |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090825233850/http://www.hindu.com/2004/10/20/stories/2004102004161800.htm |archive-date=25 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> प्रेमियर हॉकी लीग में चेन्नै का प्रतिनिधित्व चेन्नै वीरंज़ नामक एक टीम करती है। [[चित्र:Nungambakkam SDAT Tennis Stadium floodlit match panorama.jpg|thumb|चेन्नै में आयोजित होने वाली चेन्नै ओपन प्रतियोगिता]][[चेन्नई ओपन|चेन्नै ओपन]] चेन्नै में आयोजित होने वाली एक प्रसिद्ध [[टेनिस]] प्रतियोगिता है। यह भारत की एक मात्र एटीपी प्रतियोगिता है। [[विजय अमृतराज]] और [[रमेश कृष्णन]] प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी हैं, जो चेन्नै से संबंध रखते हैं।<ref name="amirtharajs">{{cite news |last=बसु |first=अरुंधती |title=Off-court ace |date=मार्च 19, 2005 |url=http://www.telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |work=द टेलिग्रैफ़ |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011164652/http://telegraphindia.com/1050319/asp/weekend/story_4513588.asp |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Kamesh |title=For Paes and Bhupathi, glory days began in Chennai |date=दिसम्बर 28, 2001 |url=http://www.hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011212144/http://hindu.com/2001/12/28/stories/2001122801651900.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref name="ramanathan-krishnan">{{cite news |last=Keerthivasan |first=K |title=A trip down memory lane |date=दिसम्बर 30, 2004 |url=http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |work=द हिन्दू |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071029135800/http://www.hindu.com/2004/12/30/stories/2004123006512000.htm |archive-date=29 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.chennaiopen.org |title=About the venue |publisher=[[International Management Group]] |accessdate=13 सितंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190602204450/http://www.chennaiopen.org/ |archive-date=2 जून 2019 |url-status=live }}</ref> सन [[१९९५]] में चेन्नै साउथ एशन गेम्ज़ का मेज़बान रहा है।<ref>{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the road to restoration |date=दिसम्बर 4, 2003 |url=http://www.hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071013194123/http://hindu.com/mp/2003/12/04/stories/2003120400820400.htm |archive-date=13 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम फ़ुटबॉल एवं ऐथिलेटिक स्पर्धाओं के लिए उपयोग होता है। कई अन्य स्पर्धाएँ, जैसे वॉलिबॉल, बास्किटबॉल और टेबल टेनिस का आयोजन, इसी स्टेडियम में होता है। जल क्रीड़ा स्पर्धाओं का आयोजन वेलाचेरी अक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में होता है। कार दौड़ प्रतियोगिताओं में चेन्नै का नाम भारत में सर्वप्रथम लिया जाता है। [[श्रीपेरम्बदूर]] में स्थित इरुन्गट्टुकोट्टाइ में एक रेऽस ट्रैक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कार रेऽस प्रतियोगिता के लिए उपयोग में लाया जाता है।<ref name="hindumotorsport">{{cite news |last=Thyagarajan |first=S |title=On the right track |date=अगस्त 22, 2002 |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |work=द हिन्दू |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071011182248/http://hinduonnet.com/thehindu/mp/2002/08/22/stories/2002082200640400.htm |archive-date=11 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> घुड़दौड़ गिंडी रेऽस कॉर्स में होती है। मद्रास बोट क्लब नौकायान प्रतियोगिता को करवाता है। चेन्नै में दो गोल्फ़ मैदान हैं: कॉस्म'पॉलिटन क्लब और जिम क्लब। विश्वप्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी [[विश्वनाथ आनंद]] का बचपन भी चेन्नै में बीता है।<ref>{{cite news |last = Brijnath |first = Rohit |url = http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |title = India's most consistent champion |work = [[द हिन्दू]] |date = अक्टूबर 6, 2007 |accessdate = 11 अक्टूबर 2007 |archive-url = https://web.archive.org/web/20071011192157/http://www.hindu.com/2007/10/06/stories/2007100655521900.htm |archive-date = 11 अक्तूबर 2007 |url-status = live }}</ref><ref>{{cite news |last=Fide |first= |url=http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |title=FIDE Top 100 Players October 2007 |work=Fide |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080424104027/http://ratings.fide.com/toparc.phtml?cod=117 |archive-date=24 अप्रैल 2008 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |last=Official site of the 2007 World Chess Championship |first= |url=http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |title=Viswanathan Anand the new World Champion 2007 |work= |date=अक्टूबर 15, 2007 |accessdate=15 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071014143041/http://www.chessmexico.com/es/index.php?option=com_content&task=blogcategory&id=22&Itemid=114 |archive-date=14 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref> २००६ राष्ट्रमंडल खेलों में [[टेबल टेनिस]] में स्वर्ण जीतने वाले शरद कमाल<ref>{{cite news |last=Srinivasan |first=Meera |url=http://www.hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |title=Four Chennai teachers have a reason to rejoice |work=[[द हिन्दू]] |date=सितम्बर 7, 2007 |accessdate=4 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071012041902/http://hindu.com/2007/09/07/stories/2007090760930400.htm |archive-date=12 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref> और दो बार की विश्व [[कैरम]] विजेता मारिया इरुदयम भी चेन्नै के निवासी हैं।<ref>{{cite web |url=http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |publisher=Govt. of India |title=Indian Teams in International Competitions |accessdate=11 अक्टूबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927012135/http://sportal.nic.in/front.asp?maincatid=51&headingid=71 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> == पर्यटन == चेन्नै को सुपर प्रसारित नगर कहते हैं यहाँ अनेक दर्शनीय स्थल हैं जिनमें [[मद्रास विश्वविद्यालय]], चेपक महल, मत्स्य पालन केन्द्र, कपिलेश्वर और पार्थसारथी का मंदिर, अजायबघर और चिड़ियाघर आदि प्रमुख हैं। चेन्नै का एक अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण है [[सेंट जॉर्ज फोर्ट|सेंट जॉर्ज फ़ॉर्ट]]। इसे सन्‌ [[१६४०]] में ईस्ट इंडिया कंपनी के फ़्रांसिंस डे ने बनाया था। यह क़िला ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक केंद्र था। १५० वर्षों तक यह युद्धों और षड्यंत्रों का केंद्र बना रहा। इस क़िले में पुरानी सैनिक छावनी, अधिकारियों के मकान, सेंट मेअरी गिरजाघर एवं रॉबर्ट क्लाइव का घर है। सेंट मेरी गिरजाघर अंग्रेज़ों द्वारा भारत में बनवाया गया सबसे पुराना चर्च माना जाता है। चेन्नै का [[मरीना बीच]] पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। यह विश्व का दूसरा सबसे लंबा समुद्र तट है। इसके दो सौ से तीन सौ गज चौड़े रेतीले तट पर शाम को इतनी अधिक भीड़ होती है कि लगता है मानो सारा नगर वहीं आ गया है। सारे दिन की थकान को चेन्नै वासी शाम को मरीना बीच की अथाह जल राशि में बहा देना चाहते हों। पर्यटकों की सुविधा के लिए मेरीना बीच पर एक स्वीमिंग पूल है जो दुर्घटनाओं को घटने से रोकता है क्योंकि यहाँ समुद्र की गहराई और लहरों का तेज प्रवाह खतरनाक है। [[शार्क]] मछलियों की अधिकता भी है, अतः स्नान या तैरने के लिए स्वीमिंग पूल का ही लाभ लेना चाहिए। इसी के पास एक मछलीघर भी है, जिसमें तरह-तरह की देशी-विदेशी मछलियाँ दर्शनार्थ रखी गई हैं। मरीना तट का उत्तरी भाग पूर्व मुख्यमंत्री [[अन्नादुरै]] के समाधि-स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ लोगों को श्रद्धानवत होते देखा जा सकता है। साथ ही एम.जी.आर. स्मारक भी है जिसका प्रवेश द्वार दो विशाल हाथी दाँत के रूप में बनाया गया है। यहाँ एक मशाल हमेशा प्रज्वलित रहती है। चेन्नै का स्नेक पार्क भी पर्यटकों को प्रभावित करता है। यह अपनी तरह का एक अलग ही पार्क है जिसका निर्माण रोमुलस व्हिटेकर नामक एक अमेरिकी ने किया था। यह पाँच सौ से भी ज़्यादा ख़तरनाक भारतीय [[साँपों]] का जीवित संग्रहालय कहा जा सकता है। रेंगते हुए ये विषधर भय मिश्रित रोमांच पैदा करते हैं। यहाँ पर साँपों के अलावा [[सरीसृप वर्ग]] के अन्य जीव जैसे [[मगरमच्छ]], घड़ियाल इत्यादि भी रखे गए हैं। चेन्नै महानगर की कलात्मक संस्कृति के दर्शन पैंथियान रोड स्थित नेशनल आर्ट गैलरी में सहज ही किए जा सकते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से संपूर्ण [[दक्षिण भारत]] एक तीर्थ है जहाँ वास्तुकला और मूर्तिकला के अद्वितीय उदाहरण हैं। इन मंदिरों में भव्यता और कलाशिल्प देखने योग्य है। [[उत्तर भारत]] से एकदम अलग शैली के मंदिर होने के बावजूद श्रद्धा और भक्ति में ये समस्त भारतीय आस्तिकों को आकर्षित करते हैं। तिरुषैलिफेनी में स्थित पार्थ सारथी मंदिर का उल्लेख है, जिसका निर्माण आठवीं शताब्दी में राजा पल्लव ने करवाया था। इस देवस्थान की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियाँ अंकित हैं। दूसरा आकर्षक मंदिर है द्राविड़ शिल्पकला में निर्मित मिलापोर स्थित कालीश्वर मंदिर। यहाँ माता पार्वती की उपासना की गाथा अंकित है। समुद्र की रेत से तपता यह क्षेत्र अत्यंत गरम जलवायु लिए हुए है जो केले, नारियल और पाम के पेड़ों से खूबसूरत लगता है। == चित्र दीर्घा == <gallery> File:MylaporeKapaleeshwararTemple.jpg|मैलापुर कपिलेश्वर मंदिर File:Chennai_corp.jpg| चेन्नै महानगर पालिका भवन File:M. A. Chidambaram Stadium Challenger Trophy 2006.jpg| एम ए चिदंबरम क्रिकेट स्टेडियम File:Chennai_National_Art_Gallery.jpg| चेन्नै में स्थित राष्ट्रीय कला दीर्घा File:Chettinad Palace, Chennai.jpg| अड्यार नदी के तट पर स्थित चेट्टीनाड महल File:Santhome Basilica.jpg| सान्तोम बासेलिका File:Anna Samadhi entrance.jpg| मरीना बीच पर स्थित अन्ना समाधि का प्रवेशद्वार File:Iitm maingate logo.jpg| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नै के प्रवेशद्वार पर लगा संस्था का प्रतीक चिह्न </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commonscat|Chennai|चेन्नई}} * [https://web.archive.org/web/20090422032753/http://www.tourismchennai.com/ चेन्नै पर्यटन] * [https://web.archive.org/web/20110429011354/http://www.chennai.tn.nic.in/ चेन्नै प्रशासन का आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20080501095016/http://www.chennaicorporation.com/ चेन्नै नगर निगम - आधिकारिक जालस्थल] * [https://web.archive.org/web/20070927092854/http://www.cmdachennai.org/ चेन्नै महानगर विकास प्राधिकरण का जालस्थल] {{चेन्नई}}{{चेन्नई में त्वरित यातायात}} {{भारतीय मेट्रोपॉलिटन शहर}} {{भारत के राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के राजधानी}} {{भारत के मिलियन+ नगर}} . [[श्रेणी:चेन्नई]] [[श्रेणी:तमिलनाडु]] [[श्रेणी:भारत के महानगर]] [[श्रेणी:तमिल नाडु के शहर]] [[श्रेणी:कॉमन्स पर निर्वाचित चित्र युक्त लेख]] [[श्रेणी:चेन्नई ज़िला]] [[श्रेणी:कोरोमंडल तट]] gqqg9u6xvcwug4hd46d1jr8ar7r58yv बंगाली भाषा 0 2271 6536634 6508268 2026-04-05T16:05:52Z Zephyrr101 918882 साहित्य अनुभाग में जानकारी जोड़ी 6536634 wikitext text/x-wiki {{बंगाली विस्तार}} {{Infobox language | name = बंगाली | states = {{BGD}}<br>{{IND}} | ethnicity = [[बंगाली लोग|बंगाली]] | pronunciation = {{IPA|bn|baŋˈla||Bn-বাংলা.oga}} | region = * [[बंगाल]] * [[असम ]] ([[बराक घाटी]]) * [[त्रिपुरा]] * [[झारखण्ड|झारखंड]] * [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह|अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह]] | speakers_label = Total speakers | speakers = 23.7 करोड़ (237 मिलियन) (2024) | familycolor = Indo-European | fam1 = [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|भारोपीय]] | fam2 = [[हिन्द-ईरानी भाषाएँ|हिन्द-ईरानी]] | fam3 = [[हिंद-आर्य भाषाएँ |हिन्द-आर्य]] | fam4 = पूर्वी | fam5 = [[बंगाली-असमिया भाषाएँ|बंगाली-असमिया]] | script = *[[पूर्वी नागरी लिपि|बंगाली-असमिया]] (आधिकारिक) *[[बंगाली ब्रेल]] | nation = *{{flag|बांग्लादेश}} *{{flag|भारत}} **[[पश्चिम बंगाल]] **[[त्रिपुरा]] | agency = * [[बांग्ला अकैडमी]] (बांग्लादेश) * [[पश्चिमबंगा बांग्ला अकैडमी]] (भारत) | iso1 = bn | iso2 = ben | iso3 = ben | lingua = 59-AAF-o | image = বাংলা.svg | imagescale = 0.8 | imagecaption = [[पूर्वी नागरी लिपि|बंगाली-असमिया लिपि]] में लिखित "बंगाली" शब्द | map = Geographic_distribution_of_Bengali_language.png | mapcaption = | glotto = beng1280 | glottorefname = Bengali |nativename={{lang|bn|বাংলা}}}} '''बंगाली''' अथवा '''बांग्ला''' (বাংলা), [[बांग्लादेश]] और [[भारत]] के [[पश्चिम बंगाल]] और उत्तर-पूर्वी भारत के [[त्रिपुरा]] तथा [[असम]] राज्यों के कुछ प्रान्तों में बोली जानेवाली एक प्रमुख [[भाषा]] है। [[भाषाई परिवार]] की दृष्टि से यह [[हिन्द यूरोपीय|हिन्द यूरोपीय भाषा परिवार]] का सदस्य है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में [[हिन्दी]], [[नेपाली]], [[पंजाबी]], [[गुजराती]], [[असमिया]], [[ओड़िया]], [[मैथिली]] इत्यादी भाषाएँ हैं। बंगाली बोलने वालों की सँख्या लगभग २३ करोड़ (२३,००,००,०००) है और यह विश्व की छठी सबसे बड़ी भाषा है<ref name="eth">{{cite web|rank = 6|url = http://www.ethnologue.com/ethno_docs/distribution.asp?by=country|title = Statistical Summaries|accessdate = 2007-03-03|year = 2005|work = |publisher = Ethnologue|archive-url = https://web.archive.org/web/20100511105629/http://www.ethnologue.com/ethno_docs/distribution.asp?by=country|archive-date = 11 मई 2010|url-status = live}}</ref><ref name="encarta">{{cite encyclopedia|rank = 6|url = http://encarta.msn.com/media_701500404/Languages_Spoken_by_More_Than_10_Million_People.html|title = Languages spoken by more than 10 million people|accessdate = 2007-03-03|year = 2007|work = |publisher = Encarta Encyclopedia|archiveurl = https://web.archive.org/web/20071203134724/http://encarta.msn.com/media_701500404/Languages_Spoken_by_More_Than_10_Million_People.html|archivedate = 3 दिसंबर 2007|url-status = dead}} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071203134724/http://encarta.msn.com/media_701500404/Languages_Spoken_by_More_Than_10_Million_People.html |date=3 दिसंबर 2007 }} {{Cite web |url=http://encarta.msn.com/media_701500404/Languages_Spoken_by_More_Than_10_Million_People.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=16 अप्रैल 2011 |archive-date=3 दिसंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071203134724/http://encarta.msn.com/media_701500404/Languages_Spoken_by_More_Than_10_Million_People.html |url-status=dead }}</ref>। इसके बोलने वाले [[बांग्लादेश]] और [[भारत]] के अलावा विश्व के बहुत से अन्य देशों में भी फैले हैं। == उद्भव == भारत की अन्य प्रादेशिक भाषाओं की तरह बंगाली भाषा का भी उत्पत्तिकाल सन् १,००० ई. के आस पास माना जा सकता है। [[अपभ्रंश]] से या मगध की भाषा से पृथक् रूप ग्रहण करने के बाद से ही उसमें गीतों और पदों की रचना होने लगी थी। जैसे-जैसे वह जनता के भावों और विचारों को अभिव्यक्त करने का साधन बनती गई, उसमें विविध रचनाओं, काव्यग्रंथों तथा दर्शन, धर्म आदि विषय कृतियों का समावेश होता गया, यहाँ तक कि आज भारतीय भाषाओं में उसे यथेष्ट ऊँचा स्थान प्राप्त हो गया है। == लिपि == {{मुख्य|बंगाली लिपि}} {{बांग्ला-असमिया वर्णमाला}} बंगाली लिपि [[देवनागरी|नागरी लिपि]] से कुछ कुछ भिन्न है किन्तु दोनों में बहुत अधिक साम्य भी है। हिंदी की तरह उसमें भी १४ स्वर तथा ३३ व्यंजन हैं। बंगाली में "व" का उच्चारण प्राय: "ब" की तरह (कभी कभी "उ" की तरह या "भ" की तरह) किया जाता है और आत्मा, लक्ष्मी, महाशय आदि शब्द आत्ताँ (আত্মা), लक्खी (লক্ষ্মী), मोशाय (মশাই) जैसे उच्चरित होते हैं। बंगाली भाषा मुख्यतः बंगाली लिपि में लिखी जाती है, जो ब्राह्मी लिपि से विकसित होकर एक स्वतंत्र लिपि के रूप में स्थापित हुई है। == साहित्य == {{मुख्य|बंगाली साहित्य}} बंगाली साहित्य अत्यन्त समृद्ध है। बांग्ला साहित्य के विस्तृत विवेचन के लिये '''[[बंगाली साहित्य]]''' देखें।बंगाली भाषा का साहित्य अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है, जिसमें कविता, उपन्यास, नाटक और लघुकथाओं की समृद्ध परंपरा रही है। इस साहित्य में रवीन्द्रनाथ ठाकुर, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और काज़ी नज़रुल इस्लाम जैसे महान साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। == सन्दर्भ == {{Reflist|2}} ==इन्हें भी देखें== *[[बाङ्ला साहित्य]] *[[बाङ्ला लिपि]] *[[ब्रजबुलि]] *[[बाङ्ला की बोलियाँ]] == बाहरी कड़ियाँ == * [http://banglaacademy.gov.bd/ बांगला अकादमी] (बंगलादेश) * [http://www.ciil-ebooks.net/html/bbjbengali/contents.html भारतीय भाषा ज्योति बांगला] ([[भारतीय भाषा संस्थान]]) * [https://bharatavani.in/bharatavani/home/book?post_category=book&id=Intensive%20Course%20in%20Bengali An Intensive Course in Bengali] ([[भारतीय भाषा संस्थान]]) * [https://bn.banglapedia.org/index.php?title=%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%A7%E0%A6%BE%E0%A6%A8_%E0%A6%AA%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BE विश्वविज्ञानकोश बांगलापीडीया] * [https://dsal.uchicago.edu/dictionaries/bengali/ बांगला-बांगला और बांगला-अंग्रेज़ी शब्दकोश] ([[शिकागो विश्वविद्यालय]]) {{भारत की भाषाएँ |state=autocollapse}} {{विश्व की प्रमुख भाषाएं}} {{हिन्द-आर्य भाषाएँ}} [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ]] [[श्रेणी:विश्व की प्रमुख भाषाएं]] [[श्रेणी:बंगाल]] [[श्रेणी:बांग्ला भाषा]] [[श्रेणी:भारत की भाषाएँ]] [[श्रेणी:पश्चिम बंगाल की भाषाएँ]] [[श्रेणी:बंगाली संस्कृति]] [[श्रेणी:पूर्वी हिन्द-आर्य भाषाएँ]] qxtlrwueetwm3uy9q0ar00aaqswzq9w अल्बानिया 0 3015 6536832 6515422 2026-04-06T07:00:21Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536832 wikitext text/x-wiki {{इंफ़ोबॉक्स देश| |native_name = Republika e Shqipërisë |conventional_long_name = अल्बानिया गणराज्य |common_name = अल्बानिया |image_flag = Flag of Albania.svg |image_coat = Coat of arms of Albania.svg|image_map = [[File:Location Albania Europe.png|225px|frameless]] |image = |symbol_type = |national_motto = "Ti Shqipëri, më jep nder,<br>më jep emrin Shqipëtar"<br>{{small|("तू अल्बानिया, मुझे सम्मान दो, मुझे अल्बानियाई नाम दो")}} |national_anthem = Himni i Flamurit<br>{{small|(ध्वज के लिए भजन)}}<br /><div style="display:inline-block;margin-top:0.4em;">[[File:Hymni i Flamurit instrumental.ogg]]</div> |official_languages = [[अल्बानियाई भाषा|अल्बानियाई]] |languages_type = क्षेत्रीय रूप से मान्यता प्राप्त भाषाएँ |languages = [[यूनानी भाषा|यूनानी]], [[मेसिडोनियन भाषा|मैसिडोनियाई]] और अन्य भाषाएँ |capital = [[तिराना]] |3=|largest_city = capital |demonym = [[अल्बानियाई लोग|अल्बानियाई]] |government_type= एकात्मक [[संसदीय गणराज्य]] |legislature= [[अल्बानियाई संसद]] |house_titles= |house_names= |area_rank = 140वाँ |area_magnitude = |area_km2 = 28748 |percent_water = 4.7 |population_estimate_rank = १३० |population_census =2402113 |population_census_year =2023 |GDP_PPP_year= 2025 |GDP_PPP = {{increase}} $63.080 अरब<ref name="IMFWEO.AL">{{cite web |url=https://meetings.imf.org/en/IMF/Home/Publications/WEO/weo-database/2025/april/weo-report?c=914,&s=NGDP_RPCH,NGDP,NGDPD,PPPGDP,NGDPPC,NGDPDPC,PPPPC,LP,&sy=2021&ey=2030&ssm=0&scsm=1&scc=0&ssd=1&ssc=0&sic=0&sort=country&ds=.&br=1 |title=World Economic Outlook Database, April 2025 Edition. (Albania) |publisher=[[International Monetary Fund]] |website=IMF.org |date=10 October 2023 |access-date=11 October 2024 |archive-date=3 जुलाई 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250703021509/https://meetings.imf.org/en/IMF/Home/Publications/WEO/weo-database/2025/april/weo-report?c=914%2C&ssd=1&ssc=0&ey=2030&scc=0&br=1&sy=2021&sic=0&ds=.&s=NGDP_RPCH%2CNGDP%2CNGDPD%2CPPPGDP%2CNGDPPC%2CNGDPDPC%2CPPPPC%2CLP%2C&ssm=0&scsm=1&sort=country |url-status=dead }}</ref> |GDP_PPP_rank = 118वाँ |GDP_PPP_per_capita = {{increase}} $23,404 |GDP_PPP_per_capita_rank = 80वाँ |GDP_nominal = {{increase}} $28.372 अरब |GDP_nominal_rank =125वाँ |GDP_nominal_year =2025 |GDP_nominal_per_capita = {{increase}} $10,526 |GDP_nominal_per_capita_rank =79वाँ |HDI_year = 2023 |HDI = 0.810 |HDI_rank = 71वाँ |4=| Gini_year = 2019 | Gini_change = decrease<!--increase/decrease/steady--> | Gini = 34.3<!--number only--> | Gini_ref = <ref name=eurogini>{{cite web |title=Gini coefficient of equivalised disposable 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({{Langx|sq|Shqipëri|italic=no}}) [[दक्षिण-पूर्वी यूरोप|दक्षिण-पूर्व यूरोप]] में स्थित एक देश है।<ref>{{cite web|url=https://hindi.news18.com/news/knowledge/worlds-first-atheist-country-albania-mrj-3174175.html|title=वो मुस्लिम देश, जो दुनिया का पहला नास्तिक देश बन गया|access-date=6 नवंबर 2020|archive-date=14 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201014030245/https://hindi.news18.com/news/knowledge/worlds-first-atheist-country-albania-mrj-3174175.html|url-status=dead}}</ref> इसकी भू सीमाएं उत्तर में [[कोसोवो गणराज्य|कोसोवो]], उत्तर पश्चिम में [[मॉन्टेनीग्रो|मोन्टेनेग्रो]], पूर्व में भूतपूर्व यूगोस्लाविया और दक्षिण में [[यूनान]] से मिलती हैं। तटीय सीमाएं दक्षिण पश्चिम में [[एड्रियाटिक सागर|आड्रियाटिक सागर]] और [[आयोनियन सागर]] से मिलती हैं। अल्बानिया एक [[संसदीय गणतंत्र|संसदीय लोकतंत्र]] और अवस्थांतर अर्थव्यवस्था है। अल्बानिया की राजधानी, [[तिराना]], 5,26,017 निवासियों वाला नगर है जो देश की ३६ लाख की जनसंख्या का चौथाई भाग है और यह नगर अल्बानिया का वित्तीय केन्द्र भी है। मुक्त बाजार सुधारों के कारण विदेशी निवेश के लिए देश की अर्थव्यस्था खोल दी गई है मुख्यतः ऊर्जा के विकास और परिवहन आधारभूत ढांचे में। अल्बानिया [[संयुक्त राष्ट्र]], [[नाटो]], [[यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन]], [[यूरोपीय परिषद]], [[विश्व व्यापार संगठन]], [[इस्लामिक सम्मेलन संगठन]] इत्यादि का सदस्य है और [[भूमध्य क्षेत्र संघ]] के संस्थापक सदस्यों में से एक था। अल्बानिया जनवरी २००३ से [[यूरोपीय संघ]] में विलय के लिए एक संभावित प्रत्याशी रहा है और इसने औपचारिक रूप से [[२८ अप्रैल]], [[२००९]] को यूरोपीय संघ की सदस्यता के लिए आवेदन किया। == 26 नवंबर 2019, मंगलवार का भूकंप == अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार 6.4 तीव्रता के साथ आये भूकंप का केन्द्र राजधानी '''तिराना''' से 30 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। इसके बाद 5.1 और 5.4 की तीव्रता वाले झटके महसूस किए गए।भूकंप से सबसे ज़्यादा नुक़सान दुर्रेस में हुआ है। '''कुर्बिन''' में भूकंप आने पर घबरा कर अपने घर से बाहर छलांग लगा देने के कारण तथा उत्तरी शहर '''लेज्हा''' में सड़क के टूटने से एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई। अल्बानिया के राष्ट्रपति इलिर मेटा ने कहा कि '''थुमाने''' में स्थिति काफी गंभीर है। लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। अल्बानिया के प्रधानमंत्री '''एदी रमा''' ने कहा कि सभी सरकारी एजेंसियां सतर्क हैं और दुर्रेस और थुमाने में लोगों की जान बचाने के लिए काम कर रही हैं। इससे पहले साल 1979 में 6.9 तीव्रता के भूकंप में 136 लोगों की जान गई थी और क़रीब एक हज़ार लोग घायल हुए थे।<ref>{{cite web | last=Kumar | first=Rakesh | title=अल्बानिया में भूकंप से 20 लोगों की मौत, सभी सरकारी एजेंसियां अलर्ट | website=Hindustan | date=2019-11-27 | url=https://www.livehindustan.com/international/story-albania-earthquake-kills-20-rescuers-hunt-for-survivors-2870013.html | language=hi | access-date=2025-11-11}}</ref> == इतिहास == दूसरी से चौथी सदी तक यह क्षेत्र [[रोमन साम्राज्य]] का भाग था। इसके अगले १००० वर्षों तक यह [[यूनानी भाषा]] बोलने वाले ओस्ट्रोमीरिज का भाग था। स्कान्दरबर्ग, जिसे बाद में अल्बानिया के राष्ट्रीय नायक होने का गौरव प्राप्त हुआ, ने अपनी मृत्यु तक तुर्कों को अल्बानिया से खदेड़े रखा। इसके बाद लगभग ५०० वर्षों का तुर्क आधिपत्य काल आया, जिसका अन्त [[बाल्कन युद्ध]] के बाद हुआ और अल्बानिया १९१२ में एक स्वतन्त्र देश बना। प्रथम बाल्कन युद्ध के बाद अल्बानिया ने [[उस्मानी साम्राज्य|ऑटोमन साम्राज्य]] से अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा कर दी। देश में स्थिति अभी भी अशांत थी। [[द्वितीय विश्व युद्घ]] के दौरान [[इटली]] ने इसपर अधिकार कर लिया, लेकिन इसका लगातार एन्वर होक्ज़ा के नेतृत्व में साम्यवादी विरोध जारी रहा और इतालवियों के देश छोड़ने के बाद साम्यवादियों ने सत्ता सम्भाली। १९९० में एन्वर होक्ज़ा की मृत्यु के पाँच वर्षों बाद तक, अल्बानिया एक पृथक्कृत देश था। देश में बहुदलीय व्यस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, लेकिन देश में अभी भी बहुत सी आर्थिक समस्याएं बनीं हुई हैं, जैसे निवेश की कमी और आधारभूत ढाँचे की कमी और अपर्याप्त बिजली आपूर्ती। इसके अतिरिक्त यहाँ भ्रष्टाचार, 'काली' अर्थव्यस्था और संगठित अपराध की भी भारी समस्या है। २००५ में इन समस्याओं का समाधान करने के लिए पहल की गई लेकिन उससे बहुत अधिक उत्साहवर्धक परिणाम नहीं निकले। १९९७ में देश में सशस्त्र विद्रोह हो गया और सैन्य हथियार लूट लिए गए। इसका कारण था जिन कम्पनियों में लोगों ने पैसा निवेश किया था वह ढह गईं और अल्बानियाईयों का पैसा डूब गया। इटली के नेतृत्व में [[नाटो]] सेनाएं यहाँ तैनात की गईं ताकी शांति और कानून व्यस्था बनी रहे। सत्तारूढ राष्ट्रपति साली बेरिशा को अपदस्त होने के लिए बाध्य किया गया और इस बीच समाजवादी नेता फ़ातोस नानो को छोड़ा गया। संसदीय चुनावों के बाद समाजवादी सत्ता में आए। सितम्बर १९९८ में एक प्रमुख नेता आज़ेम हज्दारी की हत्या का प्रयास किया गया जिसके बाद दंगे भड़क उठे। फ़ातोस नानो विदेश भाग गए और उनके स्थान पर एक अन्य समाजवादी नेता पान्देली माज्को सत्ता में आए। अल्बानिया नाटो और [[यूरोपीय संघ]] का सदस्य बनना चाहता है और इसने [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़्गानिस्तान]] और [[इराक़|ईराक]] में अमेरिकी सेना का समर्थन किया है। यूरोपीय संघ, विश्व बैंक इत्यादि ने अल्बानिया की समस्याओं को लेकर इसकी आलोचना की है, लेकिन पिछ्ले कुछ वर्षों में यहाँ विकास हुआ है जिसके बाद यूरोपीय संघ ने अल्बानिया के साथ अब तक की स्थिति के उलट अधिक सहयोग किया है। होक्ज़ा की सत्ता ढहने के बाद से अल्बानिया पर साली बेरिशा के अधीन लोकतन्त्रवादियों का शासन है। २००५ के आम चुनावों में समाजवादियों की हार हुई और लोकतन्त्रवादियों को पुनः सत्ता प्राप्त हुई और इस हार के बाद फ़ातोस नानो ने पार्टी चेयरमैन का पद त्याग दिया और तिराना के मेयर एदि रामा नए चेयरमैन बने। == राजनीति == अल्बानिया में राष्ट्रपति राष्ट्र प्रमुख होता है, जिसका चुनाव कुवेन्दी पॉपुल्लर या विधानसभा द्वारा किया जाता है। विधानसभा के १५५ सदस्यों का चुनाव प्रति पाँच वर्ष में होने वाले चुनावों द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा सरकार के मन्त्रियों का चुनाव किया जाता है जिनका मुखिया अल्बानिया का प्रधानमन्त्री होता है। अल्बानिया में १८ वर्ष से ऊपर के सभी अल्बानियाई नागरिक मतदान कर सकते हैं। ;कार्यकारी शाखा * राष्ट्र प्रमुखः देश का राष्ट्रपति * सरकार प्रमुखः प्रधानमन्त्री * मन्त्रीपरिषदः मन्त्रीपरिषद प्रधानमन्त्री द्वारा सुझाई जाती है, राष्ट्रपति द्वारा नामित होती है और संसद द्वारा स्वीकृत की जाती है। ;विधान शाखा * एकविधायी विधानसभा या कुवेन्दी (''Kuvendi'')(१४० सीटें; १०० सदस्य लोकप्रिय मतों द्वारा और ४० सदस्य आनुपातिक मतों द्वारा चुने जाते हैं जिनका कार्यकाल ४ वर्षों का होता है। * चुनावः पिछले चुनाव [[३ जुलाई]], [[२००५]] को हुए थे, अगले २००९ में। ;न्यायिक शाखा संवैधानिक न्यायालय, उच्चतम न्यायालय (चेयरमैन का चुनाव जन सभा द्वारा चार वर्षीय अवधि के लिए किया जाता है) और विभिन्न जिला स्तरीय न्यायालय। == प्रभाग == अल्बानिया ३६ प्रभागों में विभक्त है, जिन्हें अल्बानिया में रेथे (''rrethe'') कहा जाता है। राजधानी तिराना को विशेष दर्जा प्राप्त है। ये प्रभाग हैं: {| |----- | * बेरात (''Berat'') * बुलकीज़ (''Bulqize'') * डेल्वाइन (''Delvine'') * देवोली (''Devoll'') * डिबर (''Diber'') * डूरेस (''Durrës'') * इल्बासन (''Elbasan'') * फीएर (''Fier'') * जिरोकास्तर (''Gjirokastër'') * ग्राम्श (''Gramsh'') * हास (''Has'') * कावाजे (''Kavaje'') * कोलोन्जे (''Kolonje'') * कोर्से (''Korçë'') * क्रूजे (''Kruje'') * कूसोवे (''Kuçovë'') * कूकेस (''Kukes'') * कूर्बिन (''Kurbin'') | * लेझे (''Lezhe'') * लिब्राझड (''Librazhd'') * लूश्न्जे (''Lushnje'') * मालेसि ई माधे (''Malesi e Madhe'') * मल्लाकास्तर (''Mallakaster'') * माट (''Mat'') * मिरदित (''Mirdite'') * पीकिन (''Peqin'') * पेरमेत (''Permet'') * पोग्राडेक (''Pogradec'') * पूके (''Puke'') * सारान्दे (''Sarande'') * श्कोदर (''Shkodër'') * स्क्रापर (''Skrapar'') * तेपेलीन (''Tepelene'') * तिराने (''Tirane'') * त्रोपोजे (''Tropoje'') * व्लोरे (''Vlorë'') |} == भूगोल == [[File:Albania space.jpg|thumb|400x400px|अल्बानिया का उपग्रह चित्र।]] अल्बानिया का क्षेत्रफल २८,७४८ वर्ग किलोमीटर है। इसकी तटरेखा ३६२ किलोमीटर लंबी है और एड्रियाटिक और आयोनियन सागरों साथ लगती हुई है। पश्चिम की निम्नभूमि एड्रियाटिक सागर की ओर मुखातिब है। देश का ७०% भूपरिदृश्य पर्वतीय है और बाहर से अभिगमन प्रायः दुर्गम है। सबसे ऊँचा पर्वत [[कोराब पर्वत]], दिब्रा जिले में स्थित है और २,७५३ मीटर (९,०३० फुट) ऊँचा है। देश की ऊँचे क्षेत्रों में ठंडी सर्दियों और गर्मियों के साथ जलवायु महाद्वीपीय है। राजधानी तिराना के अतिरिक्त, जिसकी जनसंख्या ८,००,००० है, अन्य प्रमुख नगर हैं डूरेस (''Durrës''), कोर्से (''Korçë''), इल्बासन (''Elbasan''), श्कोदर (''Shkodër''), जिरोकास्तर (''Gjirokastër''), व्लोरे (''Vlorë'') और कूकेस (''Kukës'') हैं। [[बाल्कन|बाल्कन प्रायद्वीप]] की तीन सबसे विशाल और गहरी टेक्टोनिक झीलें आंशिक रूप से अल्बानिया में पड़ती हैं। देश के उत्तर्पश्चिम में स्थित श्कोदेर झील की सतह ३७० किमी<small>२</small> से ५३० किमी<small>२</small> तक है, जिसमें से एक तिहाई अल्बानिया में और शेष मोंटेनेग्रो में आता है। झील से लगता अल्बानियाई तट ५७ किमी का है। ऑर्चिड झील देश के दक्षिण-पश्चिम में है यह अल्बानिया और मैसिडोनिया के बीच विभाजित है। इसकी अधिकतम गहराई २८९ मीटर है यहाँ पर विभिन्न प्रकार के अनूठे वनस्पति और जीव पाए जाते हैं, जैसे "जीवित जीवाश्म" और कई विलुप्त प्रजातियां। अपने प्राकृतिक और एतिहासिक महत्त्व के कारण ऑर्चिड झील [[युनेस्को|यूनेस्को]] के संरक्षण में है। == अर्थव्यवस्था == अल्बानिया, पूर्वी यूरोपीय मानकों के आधार पर एक निर्धन देश है। वर्ष २००८ में इसका प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (पी पी एस में व्यक्त-व्यय शक्ति मानक) यूरोपीय संघ के औसत का २५ प्रतिशत था। फिर भी, अल्बानिया ने आर्थिक विकास की क्षमता दिखाई है, जबसे अधिक से अधिक व्यापार प्रतिष्ठान यहाँ स्थानांतरित हो रहे हैं और वर्तमान वैश्विक लागत-कटौती के चलते उपभोक्ता वस्तुएँ उभरते बाज़ारी व्यापारियों द्वारा यहाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूरोप में केवल अल्बानिया और साइप्रस ही ऐसे दो देश हैं जिन्होंने २००९ की प्रथम तिमाही में आर्थिक विकास दर्ज किया है। देश में तेल और प्राकृतिक गैस के कुछ भण्डार पाए जाते हैं, लेकिन तेल उत्पादन केवल ६,४२५ बैरल प्रतिदिन है। प्राकृतिक गैस का उत्पादन, जो लगभग ३ करोड़ घन मीटर है, घरेलू माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। अन्य प्राकृतिक सन्साधन हैं कोयला, बॉक्साइट, ताँबा और लौह अयस्क। कृषि क्षेत्र सबसे प्रमुख है, जिसमें देश की ५८% कार्यशक्ति लगी हुई है और इससे सकल घरेलू उत्पाद का २१% भाग उत्पन्न होता है। अल्बानिया पर्याप्त मात्रा में गेहूँ, मक्काम तंबाकू, मछली (विश्व में १३ वें स्थान पर) और जैतून का उत्पादन करता है। == जनसांख्यिकी == अल्बानिया एक सजातीय देश है: ९४% लोग मूल अल्बानियाई हैं, जो दो मुख्य समूहों में बँटे हैं - घेस (उत्तर) और तोस्क (दक्षिण) और भौगोलिक रूप से [[श्कुम्बिन नदी]] इस क्षेत्रों को अलग करती है। अन्य जातीय समूह हैं यूनानी (२%), आर्मेनियाई (३%), जिप्सी, सर्ब और मैसिडोनियाई (१%)। १९१३ के हुए बिभाजन के बाद से बहुत से अल्बानियाई पड़ोसी देशों जैसे [[कोसोवो गणराज्य|कोसोवो]], [[उत्तर मैसिडोनिया|मैसिडोनिया]] के पश्चिम में, उत्तरी यूनान इत्यादि में रहते हैं। १९१२-१३ में [[लंदन]] में हुए राजदूत सम्मेलन में हुई सन्धि के कारण अल्बानिया के पड़ोसी देशों को अल्बानिया का ४०% भूभाग और जनसंख्या दिए गए। यूरोप में अल्बानिया की प्रवासन दर सर्वाधिक है, लगभग एक तिहाई अल्बानियाई विदेशों में रहते हैं, २००६ में लगभग ९,००,०००, जिनमें से अधिकांश मुख्यतः दो सीमाई देशों - [[इटली]] और [[यूनान]] में बसे हुए हैं। इसका एक प्रमुख कारण अल्बानिया का शेष यूरोप की तुलना में जीवन स्तर कम होना है। परिणाम स्वरूप देश की कुल जनसंख्या में भी १९९१ और २००१ के बीच जन्म दर के सन्तुलित रहने के पश्चात भी १,००,००० की गिरावट आई है। अभी भी देश में प्रवासन जारी है भले ही आधिकारिक आँकड़ो में इसमें कमी दर्शायी जाती हो। == धर्म == बड़ी संख्या में अल्बानियाई लोग या तो [[नास्तिक]] हैं या [[अज्ञेयवादी]]। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अल्बानिया में धार्मिक कार्यकलापों में लगे हुए लोगों का प्रतिशत २५ से ४० के बीच है, अर्थात् ६०% से ७५% तक अल्बानियाई अधार्मिक हैं (या कम से कम सार्वजनिक रूप से धार्मिक प्रदर्शनों में नहीं हैं)। यद्यपि अल्बानियाई बहुत अधिक धार्मिक नहीं हैं, लेकिन लगभग ७०% लोग सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से [[इस्लाम|मुसलमान]] है, अल्बानियाई ऑर्थडॉक्स २०% और [[कैथोलिक कलीसिया|कैथलिक]] १०% हैं। आज के अल्बानिया में धार्मिक बनावट की बहुत कम भूमिका है और लम्बे समय से यहाँ ईसाई और मुसलमान शान्तिपूर्ण रूप से रहते आए हैं। == भाषा == अल्बानिया की प्रमुख भाषा है [[अल्बानियाई भाषा|अल्बानियाई]], जो एक [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिन्द यूरोपीय]] भाषा है। यह अल्बानिया के अतिरिक्त मैसिडोनिया, मोंटेनेग्रो, कोसोवो और इटली के अर्बेरेश (''Arbëresh'') और यूनान के अर्वानितेस (''Arvanites'') में बोली जाती है। इसकी दो मुख्य बोलियाँ हैं: * घेग, जो श्कुम्बिन नदी के उत्तर में बोली जाती है * तोस्क, जो दक्षिणी अल्बानिया में बोली जाती है, श्कुम्बिन नदी के दक्षिण में १९०९ में इस भाषा को औपचारिक रूप से लातिन लिपि में लिखा जाने लगा और द्वितीय विश्व युद्ध के अन्त से लेकर १९६८ तक कोसोवो, मैसिडोनिया और मोंटेनेग्रो में रह रहे अल्बानियाईयों में इसे आधिकारिक रूप से प्रयुक्त किया। १९७२ में साम्यवाद के उत्त्थान के बाद से इस भाषा को और गति मिली और यह आज अल्बानिया की आधिकारिक भाषा है। == संस्कृति == === संगीत === अल्बानियाई लोक संगीत तीन समूहों में विभाजित है, अन्य महत्वपूर्ण संगीत क्षेत्र श्कोदर और तिराना के आसपास हैं; प्रमुख समूह हैं उत्तर के घेग और दक्षिण के लैब्स और तोस्क। उत्तरी और दक्षिणी परंपराओं में अन्तर है, उत्तरी संगीत "ऊबड़ और वीरतापूर्ण" और दक्षिणी संगीत "शांतिपूर्ण, मृदुल और असाधारण रूप से सुंदर" है। इन दो अलग शैलियों का एकीकरण तब होता है "जब दोनों, कलाकार और श्रोता ध्यानपूर्वक संगीत को देशभक्ति की अभिव्यक्ति के लिए एक माध्यम के रूप में प्रयुक्त करते हैं और मौखिक रूप से इतिहास का वर्णन करते हैं"। अल्बानियाई लोक संगीत का प्रथम संकलन प्जीतर दुन्गु (''Pjetër Dungu'') द्वारा १९४० में किया गया था। === खानपान === अल्बानिया का भोजन अन्य भूमध्य और बाल्कन देशों के ही समान, अपने इतिहास से दृढ़ता से प्रभावित है। अलग अलग समय में, अल्बानिया पर यूनान, इटली और ऑटोमन तुर्को ने अधिकार किया और प्रत्येक ने अल्बानियाई खानपान पर अपनी छाप छोड़ी। अल्बानिया के लोगों का मुख्य भोजन दोपहर का भोजन है और इसमें आमतौर हरी सब्जियों के सलाद जैसे टमाटर, खीरे, हरी मिर्च और जैतून का तेल, सिरका और नमक लिया जाता है। दोपहर के भोजन में प्रमुख व्यंजन रे रूप में सब्जियाँ और मांस भी सम्मिलित है। तटीय क्षेत्रों जैसे डूरेस, व्लोरे और सारान्दे में समुद्री-आहार भी विशेष रूप से प्रचलित है। लम्बे समय से अल्बानिया में यह परम्परा रही है कि किसी सामाजिक सभा का संयोजक, जिसे पापि मूएजर (''Papi Muejer'') कहा जाता है, वहाँ उपस्थित लोगों के लिए किसी स्थानीय मधुशाला में प्रथम बार की मदिरा खरीदता है। === वेशभूषा === {{विस्तार}} == शिक्षा == साम्यवादी शासन से पहले, अल्बानिया में निरक्षरता दर ८५% थी। प्र्थम और द्वितीय विश्व युद्धों के बीच विद्यालय बहुत कम थे। १९४४ में साम्यवादी अधिग्रहण वाली सरकार ने निरक्षरता को समाप्त करने की ठानी। विनियामक इतने कड़े कर दिए गए की १२ से ४० वर्ष तक के आयुवर्ग में जो कोई भी पढ़ना या लिखना नहीं जानता था, के लिए विद्यालय जाना अनिवार्य कर दिया गया। संघर्ष के इस दौर के बाद से देश में साक्षरता की दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज अल्बानिया की साक्षरता दर ९८.७% है, पुरूष साक्षरता ९९.२% और महिला साक्षरता दर ९८.३% है। १९९० के बाद से जनसंख्या के तेज़ी से नगरीय क्षेत्रों की ओर पलायन के कारण शिक्षा का भी पलायन हुआ है और हज़ारों शिक्षक अपने विद्यार्थियों के पीछे-२ नगरीय क्षेत्रों में चले गए हैं। == स्वास्थ्य == समाजवाद के पतन के बाद से देश में स्वास्थ सेवाएं निरंतर चरमराई है, लेकिन २००० के बाद से इस क्षेत्र में आधिनिकीकरण किया गया है। आरंभिक २००० में देशभर में कुल ५१ अस्पताल थे जिन्में एक सैन्य अस्पताल और विशेषज्ञ सुविधाएं भी सम्मिलित हैं। अल्बानिया ने सफ़लतापूर्वक [[मलेरिया]] का उन्मूलन किया है। जीवन प्रत्याशा ७७.४३ वर्ष है, जो विश्व में ५१ वें स्थान पर है और बहुत से अन्य यूरोपीय देशों जैसे [[हंगरी]] और [[चेक गणराज्य]] से अधिक है। आयुर्विज्ञान विद्यालय, तिराना विश्वविद्यालय का चिकित्सा संकाय, तिराना में है। देश के कई अन्य नगरों में भी नर्सिंग विद्यालय हैं। == प्रसिद्ध अल्बानियाई == * [[अनवर होजा]] * [[रोमन साम्राज्य]] के इलिरियाई सम्राट (प्रमुखतः क्लौडियस द्वितीय औरिलियन, डियोक्लेटियन, प्रोबस) * २५ से अधिक ऑटोमन मन्त्री * पोप क्लीमेन्ट एकादशम (१७००) * [[नोबेल पुरस्कार|नोबल पुरस्कार]] विजेता [[मदर टेरेसा]]<ref>अल्बानियाई मूल की भारतीय नागरिक</ref> == सन्दर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == ;सरकार * [https://web.archive.org/web/20190630130626/http://president.al/ अल्बानिया का राष्ट्रपति] * [https://web.archive.org/web/20120113082041/http://www.keshilliministrave.al/ अल्बानियाई सरकार] (''मन्त्री परिषद'') * [https://web.archive.org/web/20180910125355/http://www.parlament.al/ अल्बानिया की सन्सद] * [https://web.archive.org/web/20190322191801/http://www.gjk.gov.al/ अल्बानियाई सम्वैधानिक न्यायालय] * [https://web.archive.org/web/20110219083848/http://instat.gov.al/ अल्बानियाई सांख्यिकी सन्स्थान] * [https://web.archive.org/web/20091026201653/https://www.cia.gov/library/publications/world-leaders-1/world-leaders-a/albania.html राजय प्रमुख और मन्त्री परिषद के सदस्य] ;पर्यटन * [https://web.archive.org/web/20130302070957/http://www.albaniantourism.com/ राष्ट्रीय पर्यटन संगठन] देशाटन और पर्यटन के लिए आधिकारिक जालपृष्ठ * [https://web.archive.org/web/20090905164421/http://albaniaonline.org/ पर्यटन, इतिहास] * [https://web.archive.org/web/20180930145124/http://www.guidetoalbania.com/ अल्बानिया के लिए मार्गदर्शक (चित्रों सहित)] ;अन्य * [[wikt:अल्बानिया]] (विक्षनरी) {{यूरोप}} {{Authority control}} [[श्रेणी:यूरोप के देश]] [[श्रेणी:बाल्कन के देश]] [[श्रेणी:अल्बानिया| ]] [[श्रेणी:गणराज्य]] [[श्रेणी:संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश]] [[श्रेणी:यूरोप परिषद के सदस्य देश]] [[श्रेणी:NATO के सदस्य देश]] h0f4qqn1rr2zghtsdrapwnqqiu5fbuz अरबी भाषा 0 4773 6536678 6516890 2026-04-05T17:47:46Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536678 wikitext text/x-wiki {{Infobox language | name = अरबी | nativename = اَلْعَرَبِيَّة | states = [[अरब देश|अरब दुनिया]] और पड़ोसी देशों | ethnicity = [[अरब]] | speakers = 38 करोड़ | date = 2024 | ref = <ref name=e27>{{e27|ara}}</ref> | speakers2 = 33 करोड़ [[आधुनिक मानक अरबी]] (2023)<ref name="arb">{{e27|arb|Arabic, Standard}}</ref> | 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|archive-url=https://web.archive.org/web/20210121011902/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/eritrea/ |url-status=dead }}</ref> |[[इराक़]] |[[जॉर्डन]] |[[कुवैत]] |[[लेबनान]] |[[लीबिया]] |[[मॉरिटानिया]] |[[मोरक्को]] |[[ओमान]] |[[फिलिस्तीन राज्य|फ़िलिस्तीन]] |[[क़तर]] |[[सउदी अरब]] |[[सोमालिया]] |[[सूडान]] |[[सीरिया]] |[[ट्यूनीशिया]] |[[संयुक्त अरब अमीरात]] |[[यमन]] |[[ज़ांज़ीबार]] |[[सहरावी अरब जनतांत्रिक गणराज्य|सहरावी अरब लोकतांत्रिक गणराज्य]] ||[[सोमालीलैंड]] }} {{Collapsible list | titlestyle = font-weight:normal; background:transparent; text-align:left; | title ='''अंतर्राष्ट्रीय संगठन'''| |[[अफ्रीकी संघ|अफ़्रीकी संघ]] |[[अरब लीग]] |[[इस्लामी सहयोग संगठन]] |[[संयुक्त राष्ट्र]] }} {{Collapsible list | titlestyle = font-weight:normal; background:transparent; text-align:left; | title ='''अन्य'''| |{{flagicon|Iran}} [[ईरान]]{{efn|The constitution of the Islamic Republic of Iran recognizes the Arabic language as the language of Islam, giving it a formal status as the language of religion, and regulates its spreading within the Iranian national curriculum. The constitution declares in Chapter II: (The Official Language, Script, Calendar, and Flag of the Country) in Article 16 "Since the language of the Qur`an and Islamic texts and teachings is Arabic, ..., it must be taught after elementary level, in all classes of secondary school and in all areas of study."<ref name="constituteproject.org">[[Constitution of the Islamic Republic of Iran]]: [https://www.constituteproject.org/constitution/Iran_1989?lang=en ''Iran (Islamic Republic of)'s Constitution of 1979. – Article: 16 Official or national languages''], 1979, retrieved 25 July 2018</ref>}} |[[पाकिस्तान]]{{efn|The constitution of the Islamic Republic of Pakistan states in Article 31 No. 2 that "The State shall endeavour, as respects the Muslims of Pakistan (a) to make the teaching of the Holy Quran and Islamiat compulsory, to encourage and facilitate the learning of Arabic language ..."<ref name="pakistanconstitutionlaw.com">[[Constitution of Pakistan]]: [https://pakistanconstitutionlaw.com/article-31-islamic-way-of-life ''Constitution of Pakistan, 1973 – Article: 31 Islamic way of life''], 1973, retrieved 13 June 2018</ref>}} }} | minority = {{flagicon|Cyprus}} [[साइप्रस]]<ref>{{cite web|url=http://languagecharter.eokik.hu/sites/StatesParties/Cyprus.htm|title=Implementation of the Charter in Cyprus|website=Database for the European Charter for Regional or Minority Languages|publisher=Public Foundation for European Comparative Minority Research|access-date=20 May 2013|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20111024143749/http://languagecharter.eokik.hu/sites/StatesParties/Cyprus.htm|archive-date=24 October 2011}}</ref><br>{{flagicon|Israel}} [[इसराइल]]<ref name="israelbasiclaw">{{cite web|url=https://main.knesset.gov.il/EN/activity/Documents/BasicLawsPDF/BasicLawNationState.pdf|title=Basic Law: Israel – The Nation State of the Jewish People|date=2018-07-19|publisher=Knesset|access-date=2021-01-13|archive-date=10 April 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210410191721/http://knesset.gov.il/laws/special/eng/basiclawnationstate.pdf|url-status=live}}</ref><br>{{flagicon|Mali}} [[माली]]<ref>{{Cite web |title=Mali |url=https://www.axl.cefan.ulaval.ca/afrique/mali.htm |access-date=2023-04-29 |website=www.axl.cefan.ulaval.ca}}</ref><br>{{flagicon|Niger}} [[नाइजर]]<ref>{{Cite web |title=Niger : Loi n° 2001-037 du 31 décembre 2001 fixant les modalités de promotion et de développement des langues nationales|language=fr |url=https://www.axl.cefan.ulaval.ca/afrique/niger-loi-2001-037-LNG.htm |access-date=2023-04-29 |website=www.axl.cefan.ulaval.ca}}</ref><br>{{flagicon|Philippines}} [[फिलीपींस]]<ref>Constitution of the Philippines, Article XIV, Sec 7: For purposes of communication and instruction, the official languages of the Philippines are Filipino and, until otherwise provided by law, English. 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Spanish and Arabic shall be promoted on a voluntary and optional basis.</ref><br>{{flagicon|Senegal}} [[सेनेगल]]<ref name=HassaniyaAlphabet>{{Cite web |url=http://www.jo.gouv.sn/spip.php?article4790 |title=Decret n° 2005-980 du 21 octobre 2005 |access-date=2021-12-10 |archive-date=2015-05-18 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150518092122/http://www.jo.gouv.sn/spip.php?article4790 |url-status=dead }}</ref><br>{{flagicon|South Africa}} [[दक्षिण अफ़्रीका]]<ref name="constitution.1.6">{{cite book|url=https://www.concourt.org.za/images/phocadownload/the_text/english-2013.pdf|title=The Constitution of the Republic of South Africa|publisher=Constitutional Court of South Africa|year=2013|edition=2013 English version|at=ch.&nbsp;1, s.&nbsp;6|access-date=17 April 2020|archive-date=23 August 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180823174423/https://www.concourt.org.za/images/phocadownload/the_text/english-2013.pdf|url-status=live}}</ref> | iso1 = ar | iso2 = ara | iso3 = ara | 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[[इस्लाम|इस्लामी धर्म]] की धर्मभाषा है, जिसमें [[क़ुरआन|क़ुरान]] लिखी गयी है। == देश == अरब कई देशों की राजभाषा है, जैसे [[सउदी अरब]], [[लेबनान]], [[सीरिया]], [[यमन]], [[मिस्र]], [[जॉर्डन]], [[इराक़]], [[अल्जीरिया]], [[लीबिया]], [[सूडान]], [[क़तर]], [[तूनिसीया|ट्यूनिशिया]], [[मोरक्को]], [[माली]] इत्यादि। दुनिया की सारी भाषाए == लिपि == {{मुख्य|अरबी लिपि}} अरबी भाषा को अरबी लिपि में लिखा जाता है। ये दाएँ से बाएँ लिखी जाती है। इसकी कई ध्वनियाँ [[उर्दू भाषा|उर्दू]] की ध्वनियों से अलग हैं। हर एक स्वर या व्यंजन के लिये (जो अरबी भाषा में प्रयुक्त होता है) ==इतिहास== {{विस्तार}} == इन्हें भी देखें == * [[अरबी साहित्य]] ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20150908040929/http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/arabicHindiDictionary.asp '''अरबी-हिन्दी कोश'''] (केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय) {{विश्व की प्रमुख भाषाएं}} [[श्रेणी:सामी भाषाएँ]] [[श्रेणी:विश्व की प्रमुख भाषाएं]] [[श्रेणी:अरबी भाषा]] <references /> rl89cvo5g0cyau37cymvfdsvor1t7x0 परशुराम 0 5415 6536913 6534907 2026-04-06T09:39:35Z Sanjeev bot 127039 [[Special:Contributions/~2026-19985-14|~2026-19985-14]] ([[User talk:~2026-19985-14|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:~2025-44004-4|~2025-44004-4]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6468401 wikitext text/x-wiki {{Infobox deity<!--Wikipedia:WikiProject Hindu mythology--> | name = परशुराम | type = सनातन (हिंदू) | image = [[File:Parashurama with axe.jpg|thumb|right|200px|[[राजा रवि वर्मा]] द्वारा परशुराम का चित्र।]] | caption = | deity_of = {{hlist|संरक्षण के देवता|धर्म के रक्षक|[[कर्म]] के दाता|[[परब्रह्म]] (सर्वोच्च प्राणी)}} | member_of = | affiliation = {{hlist|[[दशावतार]]}} | abode = | symbols = | weapon = | consort = | parents = -[[जमदग्नि]] | siblings = | mount = | mantra = | other_names = | children = | festivals = [[परशुराम जयंती]] | day = [[गुरुवार]] (बृहस्पतिवार) | texts = | color = नील }} '''परशुराम जी''' [[त्रेतायुग|त्रेता युग]] (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहाँ जन्मे थे। जो [[विष्णु]] के छठा अवतार हैं<ref name="जोशी २०१८">{{cite web | last=जोशी | first=अनिरुद्ध | title=parshuram - भगवान परशुराम का जन्म कब और कहां हुआ था? | website=Webdunia Hindi | date=१६ अप्रैल २०१८ | url=http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/lord-parshuram-birthplace-and-time-118041600053_1.html | language=हिन्दी भाषा | accessdate=१७ अप्रैल २०१८ | archive-url=https://web.archive.org/web/20180418031635/http://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/lord-parshuram-birthplace-and-time-118041600053_1.html | archive-date=18 अप्रैल 2018 | url-status=dead }}</ref>। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि [[भृगु]] के पुत्र महर्षि [[जमदग्नि ऋषि|जमदग्नि]] द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज [[इन्द्र]] के वरदान स्वरूप पत्नी [[रेणुका]] के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इन्दौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं। महाभारत और विष्णुपुराण के अनुसार परशुराम का मूल नाम राम था किन्तु जब भगवान शिव ने उन्हें अपना परशु नामक अस्त्र प्रदान किया तभी से उनका नाम परशुराम हो गया। पितामह [[भृगु]] द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और [[शिव|शिवजी]] द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि [[विश्वामित्र]] एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि [[कश्यप]] से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर [[कैलास पर्वत|कैलाश गिरिश्रृंग]] पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया। वे शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने [[भीष्म]], [[द्रोणाचार्य|द्रोण]] व [[कर्ण]] को शस्त्रविद्या प्रदान की थी। उन्होनें कर्ण को श्राप भी दिया था। उन्होंने एकादश छन्दयुक्त "शिव पंचत्वारिंशनाम स्तोत्र" भी लिखा। इच्छित फल-प्रदाता परशुराम गायत्री है-"ॐ जामदग्न्याय च विद्महे महावीराय च धीमहि, तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।" वे पुरुषों के लिये आजीवन एक पत्नीव्रत के पक्षधर थे। उन्होंने [[अत्रि]] की पत्नी [[अनसूया]], [[अगस्त्य]] की पत्नी लोपामुद्रा व अपने प्रिय शिष्य अकृतवण के सहयोग से विराट नारी-जागृति-अभियान का संचालन भी किया था। अवशेष कार्यो में [[कल्कि|कल्कि अवतार]] होने पर उनका गुरुपद ग्रहण कर उन्हें शस्त्रविद्या प्रदान करना भी बताया गया है। == पौराणिक परिचय == [[चित्र:Deshaavathaaram6 parasuraman.jpg|thumb|333x333px|परसुराम की प्रतिमा]] परशुराम का उल्लेख [[रामायण]], [[महाभारत]], [[भागवत पुराण]] और [[कल्कि पुराण]] इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है। वे अहंकारी और धृष्ट हैहय वंशी क्षत्रियों का पृथ्वी से २१ बार संहार करने के लिए प्रसिद्ध हैं<ref name="Śrīvāstava 1998 p. ">{{cite book | last=Śrīvāstava | first=B. | title=Prācīna Bhāratīya pratimā-vijñāna evaṃ mūrti-kalā | publisher=Viśvavidyālaya Prakāśana | year=१९९८ | url=http://books.google.co.in/books?id=EP_VAAAAMAAJ | language=हिन्दी | accessdate=१७ अप्रैल २०१८| page=}}</ref>। वे धरती पर वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे। कहा जाता है कि भारत के अधिकांश ग्राम उन्हीं के द्वारा बसाये गये। जिस मे [[कोंकण]], [[गोवा]] एवं [[केरल]] का समावेश है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने तीर चला कर गुजरात से लेकर केरला तक समुद्र को पिछे धकेल ते हुए नई भूमि का निर्माण किया। और इसी कारण कोंकण, गोवा और केरला मे भगवान परशुराम वंदनीय है। वे भार्गव गोत्र की सबसे आज्ञाकारी सन्तानों में से एक थे, जो सदैव अपने गुरुजनों और माता पिता की आज्ञा का पालन करते थे। वे सदा बड़ों का सम्मान करते थे और कभी भी उनकी अवहेलना नहीं करते थे। उनका भाव इस जीव सृष्टि को इसके प्राकृतिक सौंदर्य सहित जीवन्त बनाये रखना था। वे चाहते थे कि यह सारी सृष्टि पशु पक्षियों, वृक्षों, फल फूल औए समूची प्रकृति के लिए जीवन्त रहे। उनका कहना था कि राजा का धर्म वैदिक जीवन का प्रसार करना है नाकि अपनी प्रजा से आज्ञापालन करवाना। वे एक ब्राह्मण के रूप में जन्में अवश्य थे लेकिन कर्म से एक क्षत्रिय थे। उन्हें भार्गव के नाम से भी जाना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/lord-parshuram-birthplace-and-time-118041600053_1.html|title=parshuram {{!}} भगवान परशुराम का जन्म कब और कहां हुआ था?|last=जोशी|first=अनिरुद्ध|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2022-05-03}}</ref> यह भी ज्ञात है कि परशुराम ने अधिकांश विद्याएँ अपनी बाल्यावस्था में ही अपनी माता की शिक्षाओं से सीख ली थीँ (वह शिक्षा जो ८ वर्ष से कम आयु वाले बालको को दी जाती है)। वे पशु-पक्षियों तक की भाषा समझते थे और उनसे बात कर सकते थे। यहाँ तक कि कई खूँख्वार वनैले पशु भी उनके स्पर्श मात्र से ही उनके मित्र बन जाते थे। उन्होंने सैन्यशिक्षा केवल ब्राह्मणों को ही दी। लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं जैसे [[भीष्म]] और [[कर्ण]]। उनके जाने-माने शिष्य थे - # [[भीष्म]] # [[द्रोणाचार्य|द्रोण]], [[कौरव]]-[[पाण्डव|पाण्डवों]] के गुरु व [[अश्वत्थामा]] के पिता एवं # कर्ण। [[कर्ण]] को यह ज्ञात नहीं था कि वह जन्म से क्षत्रिय है। वह सदैव ही स्वयं को शुद्र समझता रहा लेकिन उसका सामर्थ्य छुपा न रह सका। उन्होन परशुराम को यह बात नहीं बताई की वह शुद्र वर्ण के है। और भगवान परशुराम से शिक्षा प्राप्त कर ली। किन्तु जब परशुराम को इसका ज्ञान हुआ तो उन्होंने कर्ण को यह श्राप दिया की उनका सिखाया हुआ सारा ज्ञान उसके किसी काम नहीं आएगा जब उसे उसकी सर्वाधिक आवश्यकता होगी। इसलिए जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में कर्ण और अर्जुन आमने सामने होते है तब वह [[अर्जुन]] द्वारा मार दिया जाता है क्योंकि उस समय कर्ण को ब्रह्मास्त्र चलाने का ज्ञान ध्यान में ही नहीं रहा। == इतिहास == === जन्म === प्राचीन काल में [[कन्नौज]] में गाधि नाम के एक राजा राज्य करते थे। उनकी सत्यवती नाम की एक अत्यन्त रूपवती कन्या थी। राजा गाधि ने सत्यवती का विवाह भृगुनन्दन ऋषीक के साथ कर दिया। सत्यवती के विवाह के पश्‍चात् वहाँ भृगु ऋषि ने आकर अपनी पुत्रवधू को आशीर्वाद दिया और उससे वर माँगने के लिये कहा। इस पर सत्यवती ने श्‍वसुर को प्रसन्न देखकर उनसे अपनी माता के लिये एक पुत्र की याचना की। सत्यवती की याचना पर भृगु ऋषि ने उसे दो चरु पात्र देते हुये कहा कि जब तुम और तुम्हारी माता ऋतु स्नान कर चुकी हो तब तुम्हारी माँ पुत्र की इच्छा लेकर [[पीपल]] का आलिंगन करना और तुम उसी कामना को लेकर गूलर का आलिंगन करना। फिर मेरे द्वारा दिये गये इन चरुओं का सावधानी के साथ अलग अलग सेवन कर लेना। इधर जब सत्यवती की माँ ने देखा कि भृगु ने अपने पुत्रवधू को उत्तम सन्तान होने का चरु दिया है तो उसने अपने चरु को अपनी पुत्री के चरु के साथ बदल दिया। इस प्रकार सत्यवती ने अपनी माता वाले चरु का सेवन कर लिया। योगशक्‍ति से भृगु को इस बात का ज्ञान हो गया और वे अपनी पुत्रवधू के पास आकर बोले कि पुत्री! तुम्हारी माता ने तुम्हारे साथ छल करके तुम्हारे चरु का सेवन कर लिया है। इसलिये अब तुम्हारी सन्तान ब्राह्मण होते हुये भी क्षत्रिय जैसा आचरण करेगी और तुम्हारी माता की सन्तान क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मण जैसा आचरण करेगी। इस पर सत्यवती ने भृगु से विनती की कि आप आशीर्वाद दें कि मेरा पुत्र ब्राह्मण का ही आचरण करे, भले ही मेरा पौत्र क्षत्रिय जैसा आचरण करे। भृगु ने प्रसन्न होकर उसकी विनती स्वीकार कर ली। समय आने पर सत्यवती के गर्भ से [[जमदग्नि ऋषि|जमदग्नि]] का जन्म हुआ। जमदग्नि अत्यन्त तेजस्वी थे। बड़े होने पर उनका विवाह प्रसेनजित की कन्या रेणुका से हुआ। [[रेणुका]] से उनके पाँच पुत्र हुए जिनके नाम थे - रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्‍वानस और परशुराम।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/lord-parshuram-birthplace-and-time-118041600053_1.html|title=भगवान परशुराम का जन्म कब और कहां हुआ था?|last=|first=|date=|website=Hindi webdunia|archive-url=https://web.archive.org/web/20200326183301/https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/lord-parshuram-birthplace-and-time-118041600053_1.html|archive-date=26 मार्च 2020|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref> === माता पिता भक्त परशुराम === श्रीमद्भागवत में दृष्टान्त है कि गन्धर्वराज चित्ररथ को अप्सराओं के साथ विहार करता देख हवन हेतु गंगा तट पर जल लेने गई रेणुका आसक्त हो गयी और कुछ देर तक वहीं रुक गयीं। हवन काल व्यतीत हो जाने से क्रुद्ध मुनि जमदग्नि ने अपनी पत्नी के आर्य मर्यादा विरोधी आचरण एवं मानसिक व्यभिचार करने के दण्डस्वरूप सभी पुत्रों को माता रेणुका का वध करने की आज्ञा दी। अन्य भाइयों द्वारा ऐसा दुस्साहस न कर पाने पर पिता के तपोबल से प्रभावित परशुराम ने उनकी आज्ञानुसार माता का शिरोच्छेद एवं उन्हें बचाने हेतु आगे आये अपने समस्त भाइयों का वध कर डाला। उनके इस कार्य से प्रसन्न जमदग्नि ने जब उनसे वर माँगने का आग्रह किया तो परशुराम ने सभी को पुनर्जीवित होने एवं उनके द्वारा वध किए जाने सम्बन्धी स्मृति नष्ट हो जाने का ही वर माँगा।<ref>{{Cite web|url=https://aajtak.intoday.in/story/parshuram-jayanti-2019-according-to-hindu-beliefs-know-why-parshuram-cut-his-mother-neck-and-what-happened-to-him-then-1-1081722.html|title=परशुराम ने काट दी थी अपनी ही मां की गर्दन, जानें क्या हुआ उसके बाद|last=|first=|date=|website=आज तक|archive-url=https://web.archive.org/web/20190507100209/https://aajtak.intoday.in/story/parshuram-jayanti-2019-according-to-hindu-beliefs-know-why-parshuram-cut-his-mother-neck-and-what-happened-to-him-then-1-1081722.html|archive-date=7 मई 2019|dead-url=|access-date=|url-status=live}}</ref> === पिता जमदग्नि की हत्या और परशुराम का प्रतिशोध === [[चित्र:Parasurama killing Sahasrarjuna.jpg|thumb|330x330px| Parasurama killing Sahasrarjuna.jpg सहस्त्रार्जुन से युद्धरत परशुराम का एक चित्र]] कथानक है कि हैहय वंशाधिपति का‌र्त्तवीर्यअर्जुन (सहस्त्रार्जुन) ने घोर तप द्वारा भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न कर एक सहस्त्र भुजाएँ तथा युद्ध में किसी से परास्त न होने का वर पाया था। संयोगवश वन में आखेट करते वह जमदग्निमुनि के आश्रम जा पहुँचा और देवराज इन्द्र द्वारा उन्हें प्रदत्त कपिला कामधेनु की सहायता से हुए समस्त सैन्यदल के अद्भुत आतिथ्य सत्कार पर लोभवश जमदग्नि की अवज्ञा करते हुए कामधेनु को बलपूर्वक छीनकर ले गया। कुपित परशुराम ने फरसे के प्रहार से उसकी समस्त भुजाएँ काट डालीं व सिर को धड़ से पृथक कर दिया। तब सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने प्रतिशोध स्वरूप परशुराम की अनुपस्थिति में उनके ध्यानस्थ पिता जमदग्नि की हत्या कर दी। रेणुका पति की चिताग्नि में प्रविष्ट हो सती हो गयीं। इस काण्ड से कुपित परशुराम ने पूरे वेग से महिष्मती नगरी पर आक्रमण कर दिया और उस पर अपना अधिकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक पूरे इक्कीस बार इस पृथ्वी से क्षत्रियों का विनाश किया। यही नहीं उन्होंने हैहय वंशी क्षत्रियों के रुधिर से स्थलत पंचक क्षेत्र के पाँच सरोवर भर दिये और पिता का श्राद्ध सहस्त्रार्जुन के पुत्रों के रक्त से किया। अन्त में महर्षि ऋचीक ने प्रकट होकर परशुराम को ऐसा घोर कृत्य करने से रोका। इसके पश्चात उन्होंने अश्वमेघ महायज्ञ किया और सप्तद्वीप युक्त पृथ्वी महर्षि कश्यप को दान कर दी। केवल इतना ही नहीं, उन्होंने देवराज इन्द्र के समक्ष अपने शस्त्र त्याग दिये और सागर द्वारा उच्छिष्ट भूभाग महेन्द्र पर्वत पर आश्रम बनाकर रहने लगे। === क्षत्रियों का विनाश === श्रीमद्भागवत, रामायण इत्यादि पुराणों के अनुसार परशुराम ने 21 बार समस्त क्षत्रियों को समूल नष्ट किया था। परशुराम ने सहस्त्रार्जुन राजा और इसके पुत्र और पौत्रों का वध किया था और बाद लिए 21 बार समस्त क्षत्रियों का वध कर दिया। हैहयवंश में 5 पुत्रो के वंश को परशुराम ने अभयदान दिया जिससे वृष्णी वितिहोत्रा इत्यादि वंश चले वही बाकी क्षत्रियों का 21 बार अंत किया। जो बच्चे गर्भ में रह जाते थे वह भी नहीं बचते थे। ऋषि वशिष्ठ से शाप का भाजन बनने के कारण सहस्रार्जुन की मति मारी गई थी। सहस्रार्जुन ने परशुराम के पिता जमदग्नि के आश्रम में एक कपिला कामधेनु गाय को देखा और उसे पाने की लालसा से वह कामधेनु को बलपूर्वक आश्रम से ले गया। जब परशुराम को यह बात पता चली तो उन्होंने पिता के सम्मान के खातिर कामधेनु वापस लाने की सोची और सहस्रार्जुन से उन्होंने युद्ध किया। युद्ध में सहस्रार्जुन की सभी भुजाएँ कट गईं और वह मारा गया। तब सहस्रार्जुन के पुत्रों ने प्रतिशोधवश परशुराम की अनुपस्थिति में उनके पिता जमदग्नि को मार डाला। परशुराम की माँ रेणुका पति की हत्या से विचलित होकर उनकी चिताग्नि में प्रविष्ट हो सती हो गयीं। इस घोर घटना ने परशुराम को क्रोधित कर दिया और उन्होंने संकल्प लिया-"मैं सभी क्षत्रियों का नाश करके ही दम लूँगा"। उसके बाद उन्होंने क्षत्रियों से 21 बार युद्ध किया। <br /> == अन्य कथाएँ == [[ब्रह्मवैवर्त पुराण]] में कथानक मिलता है कि [[कैलाश]] स्थित [[शिव|भगवान शंकर]] के अन्त:पुर में प्रवेश करते समय गणेश जी द्वारा रोके जाने पर परशुराम ने बलपूर्वक अन्दर जाने की चेष्ठा की। तब गणपति ने उन्हें स्तम्भित कर अपनी सूँड में लपेटकर समस्त लोकों का भ्रमण कराते हुए गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन कराके भूतल पर पटक दिया। चेतनावस्था में आने पर कुपित परशुराम द्वारा किए गए फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दाँत टूट गया, जिससे वे एकदन्त कहलाये।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/c-16-story-about-dholkal-ganesh-ji-dantewada-chhattisgarh-ra0392-NOR.html|title=लोक कथाएं कहती हैं कहानी, पुराण में हैं ये सब|last=|first=|date=|website=भास्कर|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}{{Dead link|date=दिसंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> === रामायण काल === [[चित्र:Ram and Parashurama.jpg|thumb|250x250px|एक पौरोणिक चित्र: श्रीराम (दायें) और परशुराम (बाएँ)]] उन्होंने त्रेतायुग में रामावतार के समय शिवजी का धनुष भंग होने पर आकाश-मार्ग द्वारा मिथिलापुरी पहुँच कर प्रथम तो स्वयं को "विश्व-विदित क्षत्रिय कुल द्रोही" बताते हुए "बहुत भाँति तिन्ह आँख दिखाये" और क्रोधान्ध हो "सुनहु राम जेहि शिवधनु तोरा, सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" तक कह डाला। तदुपरान्त अपनी शक्ति का संशय मिटते ही वैष्णव धनुष श्रीराम को सौंप दिया और क्षमा याचना करते हुए "अनुचित बहुत कहेउ अज्ञाता, क्षमहु क्षमामन्दिर दोउ भ्राता" तपस्या के निमित्त वन को लौट गये। रामचरित मानस की ये पंक्तियाँ साक्षी हैं- "कह जय जय जय रघुकुलकेतू, भृगुपति गये वनहिं तप हेतू"। [[वाल्मीकि]] [[रामायण]] में वर्णित कथा के अनुसार दशरथनन्दन [[राम|श्रीराम]] ने जमदग्नि कुमार परशुराम का पूजन किया और परशुराम ने रामचन्द्र की परिक्रमा कर आश्रम की ओर प्रस्थान किया। जाते जाते भी उन्होंने श्रीराम से उनके भक्तों का सतत सान्निध्य एवं चरणारविन्दों के प्रति सुदृढ भक्ति की ही याचना की थी। === महाभारत काल === [[भीष्म]] द्वारा स्वीकार न किये जाने के कारण [[अम्बा|अंबा]] प्रतिशोध वश सहायता माँगने के लिये परशुराम के पास आयी। तब सहायता का आश्वासन देते हुए उन्होंने भीष्म को युद्ध के लिये ललकारा। उन दोनों के बीच २३ दिनों तक घमासान युद्ध चला। किन्तु अपने पिता द्वारा इच्छा मृत्यु के वरदान स्वरुप परशुराम उन्हें हरा न सके। परशुराम अपने जीवन भर की कमाई ब्राह्मणों को दान कर रहे थे, तब द्रोणाचार्य उनके पास पहुँचे। किन्तु दुर्भाग्यवश वे तब तक सब कुछ दान कर चुके थे। तब परशुराम ने दयाभाव से द्रोणचार्य से कोई भी अस्त्र-शस्त्र चुनने के लिये कहा। तब चतुर द्रोणाचार्य ने कहा कि मैं आपके सभी अस्त्र शस्त्र उनके मन्त्रों सहित चाहता हूँ ताकि जब भी उनकी आवश्यकता हो, प्रयोग किया जा सके। परशुराम ने कहा-"एवमस्तु!" अर्थात् ऐसा ही हो। इससे [[द्रोणाचार्य]] शस्त्र विद्या में निपुण हो गये। परशुराम [[कर्ण]] के भी गुरु थे। उन्होने [[कर्ण]] को भी विभिन्न प्रकार कि अस्त्र शिक्षा दी थी और ब्रह्मास्त्र चलाना भी सिखाया था। लेकिन कर्ण एक सूत का पुत्र था, फिर भी यह जानते हुए कि परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही अपनी विधा दान करते हैं, कर्ण ने छल करके परशुराम से विधा लेने का प्रयास किया। परशुराम ने उसे ब्राह्मण समझ कर बहुत सी विद्यायें सिखायीं, लेकिन एक दिन जब परशुराम एक वृक्ष के नीचे कर्ण की गोदी में सर रखके सो रहे थे, तब एक भौंरा आकर कर्ण के पैर पर काटने लगा, अपने गुरुजी की नींद में कोई अवरोध न आये इसलिये कर्ण भौंरे को सेहता रहा, भौंरा कर्ण के पैर को बुरी तरह काटे जा रहा था, भौरे के काटने के कारण कर्ण का खून बहने लगा। वो खून बहता हुआ परशुराम के पैरों तक जा पहुँचा। परशुराम की नींद खुल गयी और वे इस खून को तुरन्त पहचान गये कि यह खून तो किसी क्षत्रिय का ही हो सकता है जो इतनी देर तक बगैर उफ़ किये बहता रहा। इस घटना के कारण कर्ण को अपनी अस्त्र विद्या का लाभ नहीं मिल पाया। एक अन्य कथा के अनुसार एक बार गुरु परशुराम कर्ण की एक जंघा पर सिर रखकर सो रहे थे। तभी एक बिच्छू कहीं से आया और कर्ण की जंघा पर घाव बनाने लगा। किन्तु गुरु का विश्राम भंग ना हो, इसलिये कर्ण बिच्छू के दंश को सहता रहा। अचानक परशुराम की निद्रा टूटी और ये जानकर की एक ब्राम्हण पुत्र में इतनी सहनशीलता नहीं हो सकती कि वो बिच्छू के दंश को सहन कर ले। कर्ण के मिथ्याभाषण पर उन्होंने उसे ये श्राप दे दिया कि जब उसे अपनी विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, तब वह उसके काम नहीं आयेगी। अर्ताथ में आप को बता दू जो बिच्छू कर्ण की जांघ पर आया था वो भगवान इंद्रदेव थे इंद्रदेव पता लगाने आए थे की इतना शक्तिशाली एक भ्रमण पुत्र नही हो सकता क्योंकि कर्ण ने अपनी धनुर विद्या और दिव्य शक्ति से इंद्रदेव को भी परास्त कर दिया था और इसी कारण इंद्रदेव को पता चला की कर्ण ना तो क्षेत्रय और न ब्राम्हण कुल के है और पता चला कर्ण एक शुद पुत्र थे == विष्णु अवतार == भृगुश्रेष्ठ महर्षि [[जमदग्नि ऋषि|जमदग्नि]] द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज [[इन्द्र]] के वरदान स्वरूप पत्नी [[रेणुका]] के गर्भ से [[वैशाख]] [[शुक्ल पक्ष|शुक्ल]] तृतीया को विश्ववन्द्य महाबाहु परशुराम का जन्म हुआ था। वे [[विष्णु|भगवान विष्णु]] के छठे अवतार है। == कल्कि पुराण == [[कल्कि पुराण]] के अनुसार परशुराम, [[विष्णु|भगवान विष्णु]] के दसवें तथा अंतिम अवतार [[कल्कि]] के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे। वे ही कल्कि को [[शिव|भगवान शिव]] की तपस्या करके उनके दिव्यास्त्र को प्राप्त करने के लिये कहेंगे। == मार्शल आर्ट में योगदान == भगवान परशुराम शस्त्र विद्या के श्रेष्ठ जानकार थे। परशुराम [[केरल]] के मार्शल आर्ट [[कलरीपायट्टु]] की उत्तरी शैली ''वदक्कन कलरी'' के संस्थापक आचार्य एवं आदि गुरु हैं।<ref name="Zarilli1998">{{cite book |last=Zarrilli |first=Phillip B. |title=When the Body Becomes All Eyes: Paradigms, Discourses and Practices of Power in Kalarippayattu, a South Indian Martial Art |year=1998 |publisher=Oxford University Press |location=Oxford}}</ref> वदक्कन कलरी अस्त्र-शस्त्रों की प्रमुखता वाली शैली है। == सन्दर्भ == {{reflist}} {{दशावतार}} [[श्रेणी:धर्म]] [[श्रेणी:ऋषि मुनि]] [[श्रेणी:धर्म ग्रंथ]] [[श्रेणी:हिन्दू पौराणिक कथाओं के पात्र]] [[श्रेणी:परशुराम]] [[श्रेणी:विष्णु अवतार]] gafwxcmqz23dm4bq9zbv1q0yao93s50 भारतीय साहित्य 0 5419 6536931 6091984 2026-04-06T10:34:53Z Anoop Krishwan 905731 6536931 wikitext text/x-wiki [[Image:Bankim chandra chatterjee.jpg|right|thumb|200px|भारत के राष्ट्र गीत के रचयिता '''[[बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय|बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय]]''']] '''भारतीय साहित्य''' से तात्पर्य सन् 1947 के पहले तक [[भारतीय उपमहाद्वीप]] एवं तत्पश्चात् [[भारत|भारत गणराज्य]] में निर्मित वाचिक और लिखित [[साहित्य]] से है। विश्व का सबसे पुराना [[वाचिक साहित्य]] आदिवासी भाषाओं में मिलता है। इस दृष्टि से [[आदिवासी साहित्य]] सभी साहित्य का मूल स्रोत है। भारतीय गणराज्य में 22 आधिकारिक मान्यता प्राप्त [[भारत की भाषाएँ|भाषाएँ]] है।<ref>{{Cite web|url=http://mha.nic.in/english/sites/upload_files/mhahinglish/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|title=Eighth Schedule|website=[[गृह मंत्रालय, भारत सरकार]]|language=अंग्रेज़ी|trans-title=आठवीं अनुसूची|archive-url=https://web.archive.org/web/20160305010536/http://mha.nic.in/english/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/Eighth_Schedule.pdf|archive-date=५ मार्च 2016|access-date=२० जुलाई २०१७}}</ref> वर्तमान समय में भारत में मुख्यतः दो साहित्यिक पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं, [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] तथा [[ज्ञानपीठ पुरस्कार]]। [[हिन्दी]] तथा [[कन्नड़ भाषा|कन्नड]] भाषाओं को आठ-आठ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किए गये हैं। [[बंगाली भाषा|बांग्ला]] और [[मलयालम भाषा|मलयालम]] को पाँच-पाँच, [[ओड़िया भाषा|उड़िया]] को चार; [[गुजराती भाषा|गुजराती]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[तेलुगू भाषा|तेलुगु]] और [[उर्दू भाषा|उर्दू]] को तीन-तीन, तथा [[असमिया भाषा|असमिया]], [[तमिल]] को दो-दो और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] को एक ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया है।<ref>[http://jnanpith.net/ {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070529142823/http://www.jnanpith.net/ |date=29 मई 2007 }} भारतीय ज्ञानपीठ का आधिकारिक जालस्थल</ref><ref>[https://archive.today/20121205234801/http://www1.timesofindia.indiatimes.com/Delhi/Kunwar_Narayan_to_be_awarded_Jnanpith/articleshow/3752703.cms "कुंवर नारायण को ज्ञानपीठ पुरस्कार". Times of India. 24 November 2008. Archived from the original on 5 December 2012. Retrieved 25 November 2008। ]</ref> == भूमिका == [[चित्र:Gosvami Tulsidas II.jpg|right|thumb|200px|[[तुलसीदास|गोस्वामी तुलसीदास]] द्वारा रचित [[श्रीरामचरितमानस|रामचरितमानस]] भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि है।]] [[भारत]]वर्ष अनेक [[भाषा]]ओं का विशाल देश है - उत्तर-पश्चिम में [[पंजाबी]], [[हिन्दी]] और [[उर्दू भाषा|उर्दू]]; पूर्व में [[ओड़िया भाषा|उड़िया]], बंगाल में [[असमिया भाषा|असमिया]]; मध्य-पश्चिम में [[मराठी भाषा|मराठी]] और [[गुजराती भाषा|गुजराती]] और दक्षिण में [[तमिल]], [[तेलुगू भाषा|तेलुगु]], [[कन्नड़ भाषा|कन्नड]] और [[मलयालम भाषा|मलयालम]]। इनके अतिरिक्त कतिपय और भी भाषाएं हैं जिनका साहित्यिक एवं भाषावैज्ञानिक महत्त्व कम नहीं है- जैसे [[कश्मीरी]], [[डोगरी भाषा|डोगरी]], [[सिंधी]], [[कोंकणी भाषा|कोंकणी]], [[तुलू भाषा|तुलू]] आदि। इनमें से प्रत्येक का, विशेषतः पहली बारह भाषाओं में से प्रत्येक का, अपना साहित्य है जो प्राचीनता, वैविध्य, गुण और परिमाण- सभी की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यदि आधुनिक भारतीय भाषाओं के ही सम्पूर्ण वाङ्मय का संचयन किया जाये तो वह [[यूरोप]] के संकलित वाङ्मय से किसी भी दृष्टि से कम नहीं होगा। वैदिक संस्कृत, [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[पालि भाषा|पालि]], [[प्राकृत|प्राकृतों]] और [[अपभ्रंश|अपभ्रंशों]] का समावेश कर लेने पर तो उसका अनन्त विस्तार कल्पना की सीमा को पार कर जाता है- ज्ञान का अपार भंडार, [[हिन्द महासागर|हिंद महासागर]] से भी गहरा, भारत के भौगोलिक विस्तार से भी व्यापक, [[हिमालय]] के शिखरों से भी ऊँचा और [[ब्रह्म]] की कल्पना से भी अधिक सूक्ष्म। == भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता और उसके आधार-तत्व == भारत की प्रत्येक भाषा के साहित्य का अपना स्वतन्त्र और प्रखर वैशिष्ट्य है जो अपने प्रदेश के व्यक्तित्व से मुद्रांकित है। पंजाबी और सिंधी, इधर हिन्दी और उर्दू की प्रदेश-सीमाएं कितनी मिली हुई हैं, किंतु उनके अपने-अपने साहित्य का वैशिष्ट्य कितना प्रखर है। इसी प्रकार गुजराती और मराठी का जन-जीवन परस्पर ओतप्रोत है, किन्तु क्या उनके बीच में किसी प्रकार की भ्रांति संभव है? दक्षिण की भाषाओं का उद्गम एक है : सभी द्रविड़ परिवार की विभूतियां हैं, परन्तु क्या कन्नड़ और मलयालम या तमिल और तेलुगु के स्वारूप्य के विषय में शंका हो सकती है? यही बात बांग्ला, असमिया और उड़िया के विषय में सत्य है। बंगाल के गहरे प्रभाव को पचाकर असमिया और उड़िया अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाये हुए हैं। इन सभी साहित्यों में अपनी-अपनी विशिष्ट विभूतियां हैं। तमिल का [[संगम साहित्य|संगम-साहित्य]], तेलगु के द्वि-अर्थी काव्य और उदाहरण तथा [[अवधान]]-साहित्य, मलयालम के [[सन्देश काव्य|संदेश-काव्य]] एवं कीर-गीत ([[किलिप्पाट्टु]]) तथा [[मणिप्रवालम|मणिप्रवालम्]] शैली, मराठी के [[पोवाड़ा|वोवाडे]], गुजराती के [[आख्यान (गुजराती)|आख्यान]] और फागु, बँगला का [[मंगलकाव्य|मंगल काव्य]], असमिया के [[बरगीत]] और [[बुरंजी|बुरंजी साहित्य]], पंजाबी के [[रम्याख्यान]] तथा वीरगति, उर्दू की गजल और हिन्दी का रीतिकाव्य तथा [[छायावाद]] आदि अपने-अपने भाषा–साहित्य के वैशिष्ट्य के उज्ज्वल प्रमाण हैं। फिर भी कदाचित् यह पार्थक्य आत्मा का नहीं है। जिस प्रकार अनेक धर्मों, विचार-धाराओं और जीवन प्रणालियों के रहते हुए भी भारतीय संस्कृति की एकता असंदिग्ध है, इसी प्रकार इसी कारण से अनेक भाषाओं और अभिवयंजना-पद्धतियों के रहते हुए भी भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता का अनुसंधान भी सहज-संभव है। भारतीय साहित्य का प्राचुर्य और वैविध्य तो अपूर्व है ही, उसकी यह मौलिकता एकता और भी रमणीय है। === जन्मकाल === दक्षिण में [[तमिल]] और उधर [[उर्दू भाषा|उर्दू]] को छोड़कर भारत की लगभग सभी भारतीय भाषाओं का जन्मकाल प्रायः समान ही है। [[तेलुगू साहित्य|तेलुगु साहित्य]] के प्राचीनतम ज्ञात कवि हैं [[नन्नय्य भट्ट|नन्नय]], जिनका समय है ईसा की ग्यारहवीं सती। [[कन्नड़ भाषा|कन्नड]] का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ है ‘कविराजमार्ग’, जिसके लेखक हैं राष्ट्रकूट-वंश के नरेश [[अमोघवर्ष नृपतुंग|नृपतुंग]] (814-877 ई.); और [[मलयालम भाषा|मलयालम]] की सर्वप्रथम कृति हैं ‘रामचरितम्’ जिसके विषय में रचनाकाल और भाषा-स्वरूप आदि की अनेक समस्याएँ और जो अनुमानतः तेरहवीं शती की रचना है। [[गुजराती भाषा|गुजराती]] तथा [[मराठी भाषा|मराठी]] का आविर्भाव-काल लगभग एक ही है। गुजराती का आदि-ग्रन्थ सन् 1185 ई. में रचित [[शालिभद्र सूरि|शालिभद्र सुरि]] का 'भारतेश्वरबाहुबलिरास’ है। [[मराठी भाषा|मराठी]] के आदिम साहित्य का आविर्भाव बारहवीं शती में हुआ था। यही बात पूर्व की भाषाओं में सत्य है। [[बंगाली भाषा|बँगला]] की [[चर्यापद|चर्यागीतों]] की रचना शायद दसवीं और बारहवीं शताब्दी के बीच किसी समय हुई होगी; [[असमिया साहित्य]] के सबसे प्राचीन उदाहरण प्रायः तेरहवीं शताब्दी के अंत के हैं जिनमें सर्वश्रेष्ठ हैं [[हेम सरस्वती]] की रचनाएँ ‘प्रह्लादचरित्र’ तथा ‘हरिगौरीसंवाद’। [[ओड़िया भाषा|उड़िया भाषा]] में भी तेरहवीं शताब्दी में निश्चित रूप से व्यंग्यात्मक काव्य और [[लोकगीत|लोकगीतों]] के दर्शन होने लगते हैं। उधर चौदहवीं शती में तो उड़िया के [[सारला दास|व्यास सारलादास]] का आविर्भाव हो ही जाता है। इसी प्रकार [[पंजाबी]] और [[हिन्दी]] में ग्यारहवीं शती से व्यस्थित साहित्य उपलब्ध होने लगता है। केवल दो भाषाएँ ऐसी हैं जिनका जन्मकाल भिन्न है—तमिल, जो संस्कृत के समान प्राचीन है (यद्यपि तमिल-भाषी उसका उद्गम और भी पहले मानते हैं) और उर्दू, जिसका वास्तविक आरम्भ पंद्रहवीं शती से पूर्व नहीं माना जा सकता। हालाँकि कुछ विद्वान उर्दू का भी उद्भव 13-14 वीं शती के [[फ़रीदुद्दीन गंजशकर|बाबा फ़रीद]], [[अब्दुल्ला हमीद नागोरी]] तथा [[अमीर ख़ुसरो|अमीर खुसरो]] की रचनाओं से मानने लगे हैं। === विकास के चरण === जन्मकाल के अतिरिक्त आधुनिक भारतीय साहित्यों के विकास के चरण भी प्रायः समान ही हैं। प्रायः सभी का आदिकाल पन्द्रहवीं शती तक चलता है। पूर्वमध्यकाल की समाप्ति मुगल-वैभव के अन्त अर्थात शती के मध्य में तथा सत्रहवीं शती के मध्य में तथा उत्तर मध्याकाल की अंग्रेजी सत्ता की स्थापना के साथ होती है और तभी से आधुनिक युग का आरम्भ हो जाता है। इस प्रकार भारतीय भाषाओं के अधिकांश साहित्यों का विकास-क्रम लगभग एक-सा ही है; सभी प्रायः समकालीन चार चरणों में विभक्त हैं। इस समानांतर विकास-क्रम का आधार अत्यंत स्पष्ट है और वह है भारत के राजनीतिक एवं सांस्कृतिक जीवन का विकास-क्रम। === समान राजनीतिक आधारभूमि === बीच-बीच में व्यवधान होने पर भी भारतवर्ष में शताब्दियों तक समान राजनीतिक व्यवस्था रही है। मुगल-शासन में तो लगभग डेढ़ सौ वर्षों तक उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम में घनिष्ठ संपर्क बना रहा। मुगलों की सत्ता खंडित हो जाने के बाद भी यह संपर्क टूटा नहीं। मुगल-शासन के पहले भी राज्य-विस्तार के प्रयत्न होते रहे थे। राजपूतों में कोई एक छत्र भारत-सम्राट तो नहीं हुआ, किंतु उनके राजवंश भारतवर्ष के अनेक भागों में शासन कर रहे थे। शासन भिन्न-भिन्न होने पर भी उनकी सामंतीय शासन-प्रणाली प्रायः एक-सी थी। इसी प्रकार मुसलमानों की शासन प्रणाली में भी स्पष्ट मूलभूत समानता थी। बाद में अँग्रेजों ने तो केन्द्रीय शासन-व्यवस्था कायम कर इस एकता को और भी दृढ़ कर दिया। इन्हीं सब कारणों से भारत के विभिन्न भाषा-भाषी प्रदेशों की राजनीतिक परिस्थितियों में पर्याप्त साम्य रहा है। === समान सांस्कृतिक आधारभूमि === राजनीतिक परिस्थितियों की अपेक्षा सांस्कृतिक परिस्थितियों का साम्य और भी अधिक रहा है। पिछले सहस्राब्द में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक आंदोलन ऐसे हुए जिनका प्रभाव भारतव्यापी था। बौद्ध-धर्म के ह्रास के युग में उसकी कई शाखाओं और शैव-शाक्त धर्मों के संयोग से नाथ-संप्रदाय उठ खड़ा हुआ जो ईसा के द्वितीय सहस्राब्द के आरंभ में उत्तर में तिब्बत आदि तक, दक्षिण में पूर्वी घाट के प्रदेशों में, पश्चिम में महाराष्ट्र आदि में और पूर्व में प्रायःसर्वत्र फैला हुआ था। योग की प्रधानता होने पर भी इन साधुओं की साधना में, जिनमें नाथ, सिद्ध और शैव सभी थे, जीवन के विचार और भाव-पक्ष की उपेक्षा नहीं थी और इनमें से अनेक साधु आत्माभिव्यक्ति एवं सिद्धांत-प्रतिपादन दोनों के लिए कवि-कर्म में प्रवृत्त होते थे। भारतीय भाषाओं के विकास के प्रथम चरण में इन सम्प्रदायों का प्रभाव प्रायः विद्यमान था। इनके बाद इनके उत्तराधिकारी संत-सम्प्रदायों और नवागत मुसलमानों के सूफी-संत का प्रसार देश के भिन्न-भिन्न भागों में होने लगा। संत-संप्रदाय वेदांत दर्शन से प्रभावित थे और निर्गुण भक्ति की साधना तथा प्रचार करते थे। सूफी धर्म में भी निराकार ब्रह्म की ही उपासना थी, किंतु उसका माध्यम था उत्कट प्रेमानुभूति। सूफी-संतो का यद्यपि उत्तर-पश्चिम में अधिक प्रभुत्व था, फिर भी दक्षिण के बीजापुर और गोलकुंडा राज्यों में भी इनके अनेक केंद्र थे और वहाँ भी अनेक प्रसिद्ध सूफी संत हुए। इनके पश्चात् वैष्णव आंदोलन का आरंभ हुआ जो समस्त देश में बड़े वेग से व्याप्त हो गया। राम और कृष्ण की भक्ति की अनेक मधुर पद्धतियों की देश-भर में प्रसार हुऐ और समस्त भारतवर्ष सगुण ईश्वर के लीला-गान से गुंजारित हो उठा। उधर मुस्लिम संस्कृति और सभ्यता का प्रभाव भी निरंतर बढ़ रहा था। ईरानी संस्कृति के अनेक आकर्षक तत्त्व-जैसे वैभव-विलास, अलंकरण सज्जा आदि भारतीय जीवन में बड़े वेग से घुल-मिल रहे थे और एक नयी दरबारी या नागर संस्कृति का आविर्भव हो रहा था। राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के कारण यह संस्कृति शीघ्र ही अपना प्रसादमय प्रभाव खो बैठी और जीवन के उत्कर्ष एवं आनन्दमय पक्ष के स्थान पर रुग्ण विलासिता है इसमें रह गयी। तभी पश्चिम के व्यापारियों का आगमन हुआ जो अपने साथ पाश्चात्य-शिक्षा का संस्कार लाये और जिनके पीछे-पीछे मसीही प्रचारकों के दल भारत में प्रवेश करने लगे। उन्नीसवीं शती में अंग्रेजी को प्रभुत्व सारे देश में स्थापित हो गया और शासक वर्ग सक्रिय रूप से योजना बनाकर अपनी शिक्षा, संस्कृति और उनके माध्यम से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में अपने धर्म का प्रसार करने लगा। प्राच्य और पाश्चात्य के इस संपर्क और संघर्ष से आधुनिक भारत का जन्म हुआ। === समान साहित्यिक आधारभूमि === भारत की भाषाओं का परिवार यद्यपि एक नहीं है, फिर भी उनका साहित्यिक आधारभूमि एक ही है। [[रामायण]], [[महाभारत]], [[पुराण]], [[भागवत पुराण|भागवत]], संस्कृत का अभिजात्य साहित्य - अर्थात् [[कालिदास]], [[भवभूति]], [[बाणभट्ट]], [[श्रीहर्ष]], [[अमरु|अमरूक]] और [[जयदेव]] आदि की अमर कृतियाँ, [[पालि भाषा|पालि]], [[प्राकृत]] तथा [[अपभ्रंश]] में लिखित बौद्ध, जैन तथा अन्य धर्मों का साहित्य भारत की समस्त भाषाओं को उत्तराधिकार में मिला। शास्त्र के अन्तर्गत [[उपनिषद्]], [[भारतीय दर्शन|षड्दर्शन]], [[स्मृति]]याँ आदि और उधर [[काव्यशास्त्र]] के अनेक अमर ग्रन्थ — [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]], [[ध्वन्यालोक]], [[काव्यप्रकाश]], [[साहित्य दर्पण|साहित्यदर्पण]], [[रसगंगाधर]] आदि की विचार-विभूति का उपयोग भी सभी ने निरन्तर किया है। वास्तव में आधुनिक भारतीय भाषाओं के ये अक्षय प्रेरणा-स्रोत हैं जो प्रायः सभी को समान रूप से प्रभावित करते रहे हैं। इनका प्रभाव निश्चय ही अत्यन्त समन्वयकारी रहा है और इनसे प्रेरित साहित्य में एक प्रकार की मूलभूत समानता स्वतः ही आ गई है।—इस प्रकार समान राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यकि आधारभूमि पर पल्लवित-पुष्पित भारतीय साहित्य में जन्मजात समानता एक सहज घटना है। == भारतीय साहित्य और अनुवाद == भारतीय साहित्य की अवधारणा के निर्माण और प्रसार में [[अनुवाद]] की विशेष भूमिका रही है। भारत एक बहुसांस्कृतिक देश है, जहाँ असंख्य भाषाएं बोली जाती हैं। यहाँ के अधिकतर निवासी आमतौर पर एक से अधिक भाषाओं का व्यवहार करते हैं। जब दो अलग-अलग समुदायों के लोग आपस में बात करते हैं, तो वे अक्सर एक मिली-जुली भाषा का प्रयोग करते हैं, जिससे सार्थक सम्प्रेषण किया जा सके। यही कारण है कि [[गणेश नारायणदास देवी|गणेश देवी]] भारतीय चेतना को 'अनुवाद करने वाली चेतना' के रूप में संदर्भित करते हैं।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Kiran|first=Sai|title=06 - Indian Literature, Multiculturalism and Translation - Guru Charan Behera|url=https://www.academia.edu/17165834/06_Indian_Literature_Multiculturalism_and_Translation_Guru_Charan_Behera}}</ref><blockquote>भारत के लोगों के बीच अंतरभाषाई, अंतरसांस्कृतिक संचार में, साथ ही बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक भारतीय साहित्य के निर्माण में अनुवाद एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, चाहे वह स्पष्ट हो या अस्पष्ट, जानबूझकर हो या सहज रूप से। यह विभिन्न सांस्कृतिक संरचनाओं और विभिन्न भाषाई माध्यमों के बीच संचार के साधन के रूप में और अनुवाद की भाषा के रूप में शक्ति संबंधों पर बातचीत करता है , भाषाओं और संस्कृतियों के बीच पदानुक्रमित संबंधों में योगदान देता है, लुप्त हो रहे ग्रंथों और संस्कृतियों को पुनः प्राप्त करता है, और ज्ञान को कुछ लोगों के नियंत्रण से मुक्त करता है।</blockquote>अनुवाद साहित्य और भाषाई आदान-प्रदान के क्षेत्र में समावेशी वातावरण का निर्माण करता है और यही समावेशित भारतीयता और भारतीय साहित्य की पहचान है। अक्सर भारत की किसी एक भाषा में पनप रही साहित्यिक प्रवृत्ति अपनी सीमाओं के परे जाकर दूसरी भाषाओं में भी दिखाई देने लगती है। [[भक्ति आंदोलन]] इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जो धीरे-धीरे पूरे भारत में फैल गया था। अनुवाद के माध्यम से किसी विशिष्ट भाषा का साहित्यकार दूसरी भाषाओं में रचे जा रहे साहित्य की शैली, तकनीकों एवं प्रयोगों के संपर्क में आता है और उन्हें अपने साहित्य में आत्मसात करता है। उत्तरआधुनिक समाज में बहुसंस्कृतिवाद के प्रभावों की दो संभावनाएं दिखाई पड़ती हैं। पहला, यह संस्कृति को प्रतिद्वंद्विता और प्रतिस्पर्धा के एक स्थल के रूप में प्रस्तुत करता है, जहां विभिन्न तत्वों के बीच आपसी द्वन्द्व दिखाई पड़ता है। दूसरा, ऐतिहासिक बहुसंस्कृतिवाद है, जिसका उद्देश्य खोई हुई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक आवाजों को पुनः प्राप्त करना है। <ref name=":0" /><blockquote>अनुवाद एक समतावादी प्रक्रिया है जो ज्ञान के क्षेत्र को आकार देती है। यह ज्ञान प्रणाली को कुछ व्यक्तियों के एकाधिकार से मुक्त करती है, पाठ को विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित करती है और उसे नए सांस्कृतिक और भाषाई स्वरूप प्रदान करती है। अनुवाद का उद्देश्य केवल अर्थ का स्थानांतरण नहीं है; यह पाठ को रूपांतरित करता है और इस प्रक्रिया में, अर्थ को भी रूपांतरित कर सकता है, जिस पर अक्सर लक्ष्य भाषा की संस्कृति का प्रभाव होता है। </blockquote>इस तरह अनुवाद विभिन्न भारतीय भाषाओं को एक स्तर पर लाता है और किसी भी प्रकार के पदानुक्रम को समाप्त करता है। प्राचीनकाल से ही अनुवाद भारत में साहित्यिक परिदृश्य को अंतरसांस्कृतिक सम्प्रेषण और विविध साहित्यिक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। बीसवीं शताब्दी के उत्तर-औपनिवेशिक परिवेश में अंग्रेजी और हिन्दी के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं के साहित्य के अनुवाद पर भी जोर दिया गया। [[साहित्य अकादमी]] और [[राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत|राष्ट्रीय पुस्तक न्यास]] जैसी संस्थानों ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने का कार्य किया है। इससे अनूदित ग्रंथों की संख्या में वृद्धि हुई, जो भारतीय साहित्य की समृद्ध विविधता की परिचायक है। स्थानीय भाषाओं से अनुवाद करते हुए अनुवादक अनुवादक यह सुनिश्चित करता है कि अनूदित कार्य में स्थानीय बारीकियाँ बनी रहें, जो उसकी सुंदरता और उसकी प्रभावशीलता में योगदान देती हैं। इन बारीकियों के विश्लेषण के माध्यम से अनुवादक सांस्कृतिक मध्यस्थता में योगदान देता यही। अनुवादकों द्वारा अनुवाद करने हेतु अक्सर ऐसी रचनाएँ चुनी जाती हैं, जो क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद भी समस्त देशवासियों को समान रूप से प्रभावित करती हैं और एक साझा अनुभव के विकास में योगदान देती हैं। ऐसी कुछ रचनाएँ [[प्रेमचंद]] की '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]', [[जवाहरलाल नेहरू]] की उत्कृष्ट रचना '[[भारत की खोज]]' तथा [[रबीन्द्रनाथ ठाकुर]] द्वारा रचित '[[गीतांजलि]]' है। अनुवाद भारत को एक राष्ट्र के रूप में संगठित रखने में योगदान देता है। इसके माध्यम से सामाजिक-सांस्कृतिक समन्वयय सुनिश्चित होता है, जो अंततः भारत की एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ करने में योग देता है। बहुभाषी संस्कृति के चलते इस देश ने प्राचीनकाल से ही अनुवाद को बनाए रखा है। भारतीय भाषाओं में लगातार होते रहे अनुवादों के कारण इन भाषाओं की व्याकरणिक संरचना और सांस्कृतिक संरचना में काफी समानता मिलती है। अनुवाद के माध्यम से भारत की विभिन्न भाषाओं के बीच वैचारिक आदान-प्रदान हुआ, जिससे भारतीय साहित्य का संवर्धन हुआ। इसने देश को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया। बीते कुछ वर्षों में भारत में अनुवाद के संबंध में अंग्रेजी भाषा संपर्क भाषा (Lingua Franca) के रूप में उभरी है। अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है, जिसे लगभग सभी भाषाई समुदाय समझते हैं और एक विदेशी भाषा होने के कारण इसका प्रयोग भारत में विभिन्न भाषाओं के मध्य प्रभुत्व के प्रश्न को भी समाप्त कर देता है। अंग्रेजी भाषा का प्रयोग अन्य भाषाओं के साहित्य को समां स्तर पर लाने का कार्य करता है। <blockquote>मूल भाषाओं से किए गए अंग्रेजी अनुवाद हमें भारत को समग्र रूप से समझने में मदद करते हैं। इन अनुवादों के माध्यम से भारत की विविधता और भाषाओं के पीछे छिपी संस्कृतियों का ज्ञान प्राप्त होता है। अंग्रेजी के वैश्वीकरण की भाषा बनने के साथ-साथ, ये अनुवाद न केवल भारतीय साहित्य को समझने में सहायक होते हैं, बल्कि इसे एक व्यापक मंच पर भी प्रस्तुत करते हैं, ताकि पूरा विश्व देश की साहित्यिक विरासत को देख सके।</blockquote>अनुवादक अपने अनुवादों में स्थानीयता को बनाए रखने का प्रयत्न करता है। इससे अंग्रेजी भाषा में भी स्थानीय तत्व सम्मिलित हो जाते हैं। यही कारण है कि भारत में प्रयुक्त होने वाली अंग्रेजी का एक विशिष्ट स्वरूप विकसित हुआ है। अनुवाद भारत में विविधता में एकता एवं अंतरसांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साधन रहा है। इसके माध्यम से विभिन्न भाषाओं में रचे जाने वाले साहित्यिक, ऐतिहासिक व धार्मिक ग्रंथ अपनी सीमाओं को पार करके दूसरी भाषाओं तक पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में यह कहा जा सकता है कि भारत की विभिन्न भाषाएं आपस में गूँथी हुई हैं और इनका साहित्य मिलकर भारतीय साहित्य का निर्माण कर रहा है। == भारतीय साहित्य - एक विहंगम् दृष्टि == सबसे पुराना जीवित साहित्य [[ऋग्वेद]] है जो [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] भाषा में लिखा गया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[पालि भाषा|पालि]], [[प्राकृत]] और [[अपभ्रंश]] आदि अनेक भाषाओं से गुज़रते हुए आज हम भारतीय साहित्य के आधुनिक युग तक पहुंचे हैं। भारत में ३० से भी ज्यादा मुख्य भाषाएँ हैं और १०० से भी अधिक क्षेत्रीय भाषाएँ है। लगभग हर भाषा में साहित्य का प्रचुर विकास हुआ है। भारतीय भाषाओं के साहित्य में लिखित और मौखिक दोनो ही महत्वपूर्ण हैं। प्राचीन भारतीय साहित्य में हिन्दू धार्मिक ग्रंथो की अहम भूमिका रही। [[वेद|वेदों]] के साथ-साथ [[रामायण]] और [[महाभारत]] जैसे महाग्रंथ प्राचीन भारत में रचे गए। अन्य प्राचीन ग्रंथो में [[वास्तु शास्त्र]], [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|कौटिल्य अर्थ-शास्त्र]], [[पञ्चतन्त्र|पंचतंत्र]], [[हितोपदेश]] आदि प्रमुख है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == इन्हें भी देखें == {| class='wikitable' |- | * [[संस्कृत साहित्य]] * [[पालि भाषा का साहित्य|पालि साहित्य]] * [[प्राकृत साहित्य]] * [[हिंदी साहित्य]] * [[उर्दू साहित्य]] * [[मगही साहित्य]] | * [[ओड़िया साहित्य]] * [[बंगाली साहित्य|बांग्ला साहित्य]] * [[असमिया साहित्य]] * [[मराठी साहित्य]] * [[तेलुगू साहित्य|तेलुगु साहित्य]] * [[तमिल साहित्य]] | * [[कन्नड़ साहित्य|कन्नड साहित्य]] * [[गुजराती साहित्य]] * [[मलयालम साहित्य का इतिहास|मलयालम साहित्य]] * [[आदिवासी साहित्य]] * [[प्राचीन भारतीय ग्रन्थकारों की सूची]] * [[भारत की भाषाएँ|भारतीय भाषाएँ]] * [[भारतीय लिपियाँ]] |} == बाहरी कड़ियाँ == *[https://web.archive.org/web/20181110200220/https://books.google.co.in/books?id=BjC6DQAAQBAJ&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय साहित्य की पहचान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सियाराम तिवारी) * [https://web.archive.org/web/20170327030348/http://www.ccrtindia.gov.in/hn/literaryarts.php युग के माध्यम से भारतीय साहित्य] (सांस्‍कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्‍द्र) * [https://web.archive.org/web/20170222052945/http://saagarika.blogspot.in/2013/02/blog-post.html भारतीय साहित्य की अवधारणा] (प्रो ऋषभ देव शर्मा) * [https://web.archive.org/web/20121215041835/http://books.google.co.in/books?id=Oqt5Sox0RlIC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय साहित्य की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - डॉ रामविलास शर्मा) * [http://books.google.co.in/books?id=kLLrhKK8mpwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false भारतीय साहित्य के इतिहास की समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक - डॉ रामविलास शर्मा) * [https://web.archive.org/web/20140328220946/http://books.google.co.in/books?id=ZYsLtoDe3JEC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=true भारतीय साहित्य] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - मूलचंद गौतम) * [https://web.archive.org/web/20120301090009/http://vhv.org.in/story.aspx?aid=75 साहित्य और सांस्कृतिक एकतासाहित्य और सांस्कृतिक एकता] (बालशौरी रेड्डी) * [http://books.google.co.in/books?id=e77_wPmQPXwC&pg=PT61&lpg=PT61&dq=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95&source=bl&ots=jtzHckMlKq&sig=-sAsTS-8SLHDteJvHkO9eKL3nD0&hl=en&ei=q8W4SsW7HtKCkAWi6KXdBQ&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=2#v=onepage&q=%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95&f=false प्राचीन भारतीय साहित्य का इतिहास] (एम् विण्टरनिट्ज) * [https://web.archive.org/web/20121215050035/http://books.google.co.in/books?id=e77_wPmQPXwC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false प्राचीन भारतीय साहित्य का इतिहास, भाग १, खण्ड १ - इतिहास, काव्य, पुराण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - M. Winternitz) * [http://www.google.co.in/url?sa=t&source=web&ct=res&cd=9&url=http%3A%2F%2Fbooks.google.co.in%2Fbooks%3Fid%3DYCJrUfVtZxoC%26pg%3DPR7%26lpg%3DPR7%26dq%3D%2522a%2Bdictionary%2Bof%2Bindian%2522%26source%3Dbl%26ots%3DKtqxi5BIRA%26sig%3DKId8IGEqcshuadNtE10XB_e-IEI%26hl%3Den%26ei%3DHiU2StnGEojykAWG74zTCg%26sa%3DX%26oi%3Dbook_result%26ct%3Dresult%26resnum%3D9&ei=HiU2StnGEojykAWG74zTCg&usg=AFQjCNGxl-QyD5DS0aoKGC3hGEDRmeIpOA&sig2=sjnRKwgBuYjvQBTAxOSZlg A Dictionary of Indian Literature: Beginnings-1850] -by Sujit Mukherjee * [https://web.archive.org/web/20121020141501/http://books.google.co.in/books?id=zB4n3MVozbUC#v=onepage&q=%22hindi%20sahitya%20kosh%22&f=false The Encyclopaedia Of Indian Literature (Volume Two) (Devraj To Jyoti), Volume 2] - By Amaresh Datta * [https://www.drishtiias.com/hindi/to-the-points/paper1/ancient-indian-literature प्राचीन भारतीय साहित्य] * [https://web.archive.org/web/20121102143710/http://books.google.co.in/books?id=QA1V7sICaIwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false Who's who of Indian Writers, 1999: A-M] By Kartik Chandra Dutt, Sahitya Akademi * [https://web.archive.org/web/20121102143710/http://books.google.co.in/books?id=QA1V7sICaIwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false Who's who of Indian Writers, 1999: A-M] (Google booka By Kartik Chandra Dutt, Sahitya Akademi) * [https://www.drishtiias.com/hindi/paper1/ancient-indian-literature प्राचीन भारतीय साहित्य] *[http://mdudde.net/books/MA/MA-hindi/2nd-year/Bhartiya%20Shitya-final.pdf भारतीय साहित्य] (महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय) {{Authority control}} [[श्रेणी:भारतीय साहित्य]] cx8vejoyz8nhl305g2jcuqf0u69tdqi गजपति जिला 0 7204 6536665 6495256 2026-04-05T17:01:16Z Psubhashish 41524 कथित भाषा नमूना + 6536665 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक प्रांत |province_name = गजपति ज़िला<br /><small>Gajapati district</small><br /><small>ଗଜପତି ଜିଲ୍ଲା</small> |loc_map = Gajapati in Odisha (India).svg |capital = [[पारलाखेमूंदी]] |area = 3,850 |pop = 5,75,880 |pop_year = 2011 |pop_density = 133 |sub_province_title = तहसील |sub_provinces = 2 |languages= [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]] }} [[File:OpenSpeaks-srb-Ramani Dalbehera-OG-Aadhaar Experience 01.webm|thumb|एक वक्ता गजपति की दूसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा, सोरा, में बात कर रही हैं]] '''गजपति ज़िला''' [[भारत]] के [[ओडिशा|ओड़िशा]] राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय [[पारलाखेमूंदी]] है। यह 1992 में [[गंजाम जिला|गंजाम ज़िले]] को तोड़कर बनाया गया था।<ref>"[https://books.google.com/books?id=1RBuAAAAMAAJ Orissa reference: glimpses of Orissa]," Sambit Prakash Dash, TechnoCAD Systems, 2001</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=8ukfNZsoNA4C The Orissa Gazette]," Orissa (India), 1964</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=yLU7DwAAQBAJ Lonely Planet India]," Abigail Blasi et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787011991</ref> == इन्हें भी देखें == * [[पारलाखेमूंदी]] * [[ओडिशा|ओड़िशा]] * [[ओड़िशा के जिले]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{ओड़िशा}} [[श्रेणी:ओड़िशा के जिले]] [[श्रेणी:गजपति ज़िला|*]] fiut180icxtl4bdh3mvcw3jmgznf58z 6536666 6536665 2026-04-05T17:02:44Z Psubhashish 41524 6536666 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक प्रांत |province_name = गजपति ज़िला<br /><small>Gajapati district</small><br /><small>ଗଜପତି ଜିଲ୍ଲା</small> |loc_map = Gajapati in Odisha (India).svg |capital = [[पारलाखेमूंदी]] |area = 3,850 |pop = 5,75,880 |pop_year = 2011 |pop_density = 133 |sub_province_title = तहसील |sub_provinces = 2 |languages= [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]] }} [[File:OpenSpeaks-srb-Ramani Dalbehera-OG-Aadhaar Experience 01.webm|thumb|एक वक्ता जिला की दूसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा, सोरा, में बात कर रही हैं]] '''गजपति ज़िला''' [[भारत]] के [[ओडिशा|ओड़िशा]] राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय [[पारलाखेमूंदी]] है। यह 1992 में [[गंजाम जिला|गंजाम ज़िले]] को तोड़कर बनाया गया था।<ref>"[https://books.google.com/books?id=1RBuAAAAMAAJ Orissa reference: glimpses of Orissa]," Sambit Prakash Dash, TechnoCAD 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जाति-संहार था। नाज़ी जर्मनी और इसके सहयोगियों ने तक़रीबन साठ लाख यहूदियों की सुनियोजित तरीक़े से हत्या कर दी। == परिचय == 1933 में [[एडोल्फ़ हिटलर|अडोल्फ़ हिटलर]] [[जर्मनी]] की सत्ता में आया और उसने एक नस्लवादी साम्राज की स्थापना की, जिसमें यहूदियों को सब-ह्यूमन क़रार दिया गया और उन्हें इंसानी नस्ल का हिस्सा नहीं माना गया। 1939 में जर्मनी द्वारा विश्व युद्ध भड़काने के बाद हिटलर ने यहूदियों को जड़ से मिटाने के लिए अपने "अंतिम हल" को अमल में लाना शुरू किया। उसके सैनिक यहूदियों को कुछ ख़ास इलाक़ों में ठूंसने लगे। उनसे काम करवाने, उन्हें एक जगह इकट्ठा करने और मार डालने के लिए विशेष शिविर स्थापित किए गए, जिनमें सबसे कुख्यात था ऑस्चविट्ज। यहूदियों को इन शिविरों में लाया जाता और वहां बंद कमरों में ज़हरीली गैस छोड़कर उन्हें मार डाला जाता। जिन्हें काम करने के काबिल नहीं समझा जाता, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता, जबकि बाकी बचे यहूदियों में से ज्यादातर भूख और बीमारी से दम तोड़ देते। युद्ध के बाद सामने आए दस्तावेजों से पता चलता है कि हिटलर का मकसद दुनिया से एक-एक यहूदी को खत्म कर देना था। युद्ध के छह साल के दौरान नाजियों ने तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी, जिनमें 15 लाख बच्चे थे। यहूदियों को जड़ से मिटाने के अपने मकसद को हिटलर ने इतने प्रभावी ढंग से अंजाम दिया कि दुनिया की एक तिहाई यहूदी आबादी खत्म हो गई। यह नरसंहार संख्या, प्रबंधन और क्रियान्वयन के लिहाज से विलक्षण था। इसके तहत एक समुदाय के लोग जहां भी मिले, वे मारे जाने लगे, सिर्फ इसलिए कि वे यहूदी पैदा हुए थे। इन कारणों के चलते ही इसे अपनी तरह का नाम दिया गया-होलोकॉस्ट। == नाजियों ने यहूदियों की हत्या क्यों की ? == इस सवाल के कई जवाब पेश किए जाते रहे हैं : धार्मिक, ऐतिहासिक, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और मार्क्सवादी। लेकिन कोई भी एक जवाब कभी संतोषजनक नहीं हो सकता। ऐतिहासिक जवाब कुछ इस तरह है- 1930 के दशक में जर्मन जनसंख्या के एक बड़े हिस्से ने एक ऐसे समाज में रहने की रजामंदी जताई, जो नफरत, जातीय श्रेष्ठता की अवधारणा और हिंसा पर आधारित थी। वे जिस व्यवस्था से बंधे थे, उसकी केंद्रीय धारणा यह थी कि यहूदी लोग हर उस चीज की नुमाइंदगी करते हैं, जो जर्मनों के खिलाफ है और इसलिए यहूदियों को खत्म कर दिया जाना चाहिए। यह धारणा दुनिया को देखने के एक नस्ली नजरिए से भी जुड़ी थी, जो जर्मनों को मास्टर रेस का हिस्सा मानती थी और यहूदियों को विनाशकारी भौतिक गुणों वाले एंटी रेस का। जब यहूदियों का भौगोलिक रूप से खात्मा संभव नहीं हो सका, तब उन्होंने सबसे कट्टर रास्ता अख्तियार किया, जो था- अंतिम हल। == क्या होलोकॉस्ट अपनी तरह की एक मात्र घटना है ? == इतिहास में इस तरह की और भी घटनाएं मिलती हैं, लेकिन होलोकॉस्ट की कुछ बातें उसे विलक्षण बनाती हैं। नाजी जर्मनी के अलावा भी कई सरकारों ने कैंप सिस्टम और टेक्नॉलजी का सहारा लिया और इतिहास के ज्यादातर हिस्से में यहूदियों का कत्ल किया जाता रहा। लेकिन दो मुख्य वजहों से होलोकॉस्ट को सबसे अलग कहा जा सकता है। 1. दूसरे समूहों के प्रति अपनी नीतियों से अलग नाजियों ने हर यहूदी को मारने का बीड़ा उठाया। इसके लिए उन्होंने उम्र, लिंग, आस्था या काम की परवाह नहीं की। उन्होंने इस मकसद को अंजाम देने के लिए खास तौर पर एक आधुनिक नौकरशाही का इस्तेमाल किया। 2. नाजी नेतृत्व का कहना था कि दुनिया से यहूदियों को मिटाना जर्मन लोगों और पूरी इंसानियत के लिए फायदेमंद होगा। हालांकि असल में यहूदियों की ओर से उन्हें कोई खतरा नहीं था। == ऐन फ्रैंक == ऐनेलिज मेरी -ऐन फ्रैंक- का जन्म 12 जून 1929 को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में हुआ था। साल 1933 में, जब नाजी सत्ता में आए, चार साल की उम्र में उसे सपरिवार जर्मनी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। वे लोग नीदरलैंड के ऐम्सटर्डम पहुंचे। लेकिन 1940 में वहां नाजियों का कब्जा शुरू होने के साथ ही वे फंस गए। वहां भी जब यहूदी लोगों पर अत्याचार बढ़ने लगा, तब जुलाई 1942 में इस परिवार ने ऐन के पिता के दफ्तर की इमारत में स्थित गुप्त कमरों में शरण ली और वहीं रहने लगा। करीब दो साल बाद उनके साथ विश्वासघात हुआ और वे गिरफ्तार कर लिए गए। अन्य यहूदियों की तरह उन्हें भी यातना शिविरों में भेज दिया गया। गिरफ्तारी के सात महीने बाद ऐन की टाइफायड की वजह से हबर्जन-बेल्शन कंसनट्रेशन शिविर में मौत हो गई। एक हफ्ते पहले ही ऐन की बहन ने दम तोड़ा था। परिवार में सिर्फ ऐन के पिता जीवित बचे, जो युद्ध खत्म होने के बाद ऐम्सटर्डम लौटे। उन्हें वहां ऐन की एक डायरी सुरक्षित मिल गई, जिसे उसने छुप-छुपकर बिताई गई जिंदगी के दौरान लिखा था। काफी प्रयासों के बाद पिता ने यह डायरी 1947 में प्रकाशित करवाई। इस डायरी का डच से अनुवाद हुआ और 1952 में यह -द डायरी ऑफ अ यंग गर्ल-शीर्षक से अंग्रेजी में प्रकाशित की गई। यह डायरी ऐन को उसके 13 वें जन्मदिन पर मिली थी। इसमें उसने 12 जून 1942 से 1 अगस्त 1944 के बीच का अपने जीवन का घटनाक्रम बयां किया था। इस डायरी का कम से कम 67 भाषाओं में अनुवाद हुआ और यह दुनिया की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब बन गई। यह डायरी कई नाटकों और फिल्मों की बुनियाद बनी। ऐन फ्रैंक को उसकी लेखनी की गुणवत्ता और होलोकॉस्ट की सबसे मशहूर और चर्चित पीड़तों में से एक के रूप में जाना जाता है। वह उन 10 लाख यहूदी बच्चों में से थी, जिन्हें होलोकॉस्ट में अपने बचपन, परिवार और जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। == यह भी देखें == * [[रूसीकरण]] - रूसी इतिहास के विभिन्न कालखंडों में घटित एक समान घटना, जिसके कारण संपूर्ण अद्वितीय समाजों का विनाश हुआ, भाषाओं का लोप हुआ, लोगों का निर्वासन और शारीरिक विनाश हुआ, और कुछ रूपों में यह प्रक्रिया आज भी जारी है। * [[ज़हावा बुराक]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20110107170906/http://rachanakar.blogspot.com/2010/10/blog-post_1917.html विजय शर्मा का आलेख : होलोकास्ट एवं सिनेमाः परदे पर मनुष्य की त्रासदी] * [https://web.archive.org/web/20131008062250/http://www.livehindustan.com/news/entertainment/entertainmentnews/article1-story-28-28-103241.html 22 लाख डॉलर में बिकेगी शिंडलर की सूची] * [https://web.archive.org/web/20110505032811/http://www.livehindustan.com/news/videsh/international/article1-Jews-messacre-2-2-169297.html यहूदी नरसंहार संबंधी ऐतिहासिक दस्तावेज हुए ऑनलाइन] {{नस्लवाद सम्बंधित विषय}} [[श्रेणी:यहूदी]] i86q3py93y9g1k2pkvanbz7174y926z माल्कम २ 0 14186 6536770 6462979 2026-04-06T05:25:00Z ~2026-20280-34 918193 अनावश्यक सामग्री हटाई 6536770 wikitext text/x-wiki {{प्रतिलिपि सम्पादन|for=व्याकरण और वर्तनी सुधार|date=मई 2017}} [[चित्र:Malcolm II of Scotland.jpg|अंगूठाकार|माल्कम २]] '''माल्कम द्वितीय''' [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]] का राजा था।<ref>{{Cite web |url=https://www.britannica.com/biography/Malcolm-II |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 मई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170904022525/https://www.britannica.com/biography/Malcolm-II |archive-date=4 सितंबर 2017 |url-status=live }}</ref> वह राजा केन्नथ द्वितीय का बेटा था। [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]] के [[भूगोल|भौगोलिक सीमाओं]] के अनेक राजाओं से यह एक था।उनके साथी राजाओं में स्त्रेथक्लैड का राजा और मोराय का राजा भी आता हैं। वह विध्वंसक के रूप में जाना जाता है। == जीवन वृत्त == [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]] के राजा केन्नथ का पुत्र है। वह [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]]<ref>{{Cite web |url=http://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%9F%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A1 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 मई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170610180411/http://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%9F%E0%A4%B2%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%A1 |archive-date=10 जून 2017 |url-status=dead }}</ref> का माल्कम का पोता है। ९९७ को कान्स्टण्टैन के घातक को केन्नथ बुलाया जाता है।लेकिन तब कोई केन्नथ ज़िदा नहीं था और राजा केन्नेथ की मृत्यु ९९५ को हो चुकी थी।यह बात अब तक साबित नहीं हो पाया है कि माल्कम ने कान्स्टण्टैन को मारा है कि नहीं लेकिन १००५ को उन्होने कान्स्टण्टैन का [[उत्तराधिकार|उत्तराधिकारी]] केन्नथ तृतीय को स्त्रथन में मारा था।फोरडन ने लिखा था की माल्कम ने अपने [[राज्याभिषेक]] के कुछ दिनों बाद ही [[नॉर्वे|नोर्वेजियन]] सेना को पराजित किया। किंतु इस बात का उल्लेख और कहीं नहीं हुआ है। === सन्तान === माल्कम का [[उत्तराधिकार|उत्तरधिकारी]] का चुनाव राजा अएद्ग के वंश से चर्च की अनुमति से माल्कम को खुद करना था।उत्तर [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]] के झगडे को खतम करने केलिए उन्होने [[परम्परा|परंपरा]] के विरुद्ध जाकर अपने [[वंश]] में उत्तराधिकारि ढूढने का निर्णय लिया। माल्कम का कोई पुत्र नहीं था और इसलिए उन्होने अपनी तीन बेटियों का विवाह अपने प्रतिद्वंदियों से करने का निर्णय लिया।इसप्रकार मल्कोम ने अपने प्रतिद्वंदियों का भरोसा जीता।पहले उन्होने अपनी बेटी बेथोक का विवाह ''ताइन ओफ आय्लस'' क्रिनन से करा दिया। अपनी दूसरी बेटी ओलित का विवाह उन्होने ओर्क्नी के राजा सिगर्ड से करा दिया और अपनी बीच की बेटी डोनाडा का [[विवाह]] मोराय के राजा फिनलय से करा दिया।उन्होने २९ साल [[शासन]] किया। === बर्निसिया === माल्कम के [[शासन]] को साबित करनेवाला पहला वृतान्त १००६ को बर्निसिया पर हुआ [[आक्रमण]] था।इस आक्रमण में नोर्थुम्बियन्स का हार हुआ। बर्निसिया पर १०१८ को दुसरा [[युद्ध]] हुआ।माल्कम २ के नेतृत्व में [[स्कॉट्लैण्ड |स्कॉटस]] जीत गए।करहम में हुए युद्ध सफल हुआ।तब तक राजा उक्त्रड की मृत्यु हो चुकी थी और एरिक हाकनार्सन को राजा बना। === ओर्क्नि और मोरय === माल्क्म की बेटी ओलित का विवाह ओर्क्नि का राजा सिगर्ड ह्लोडविस्सण से हुआ था। उनका पुत्र थोर्फिन्न सिगर्डस्सन जब ५ साल का था तब क्लोन्टार्फ के युद्ध में सिगर्ड की मृत्यु हो गई। थोर्फिन अपने नाना के [[महल]] में बड़ा हुआ।थोर्फिन के जीवन का कालक्रम संदिग्ध रहा।ओर्क्नि के [[रियासत]] में उसका हिस्सा शायद रहा होगा। माल्कम ने अगर मोरय पर [[अधिकार]] स्थापित किया था तो उत्त्रर में हुए कई संघर्षो की और यह इशारा करता है।माक बताड के पिता फिन्डलश रुअद्रि को माल ब्रिग्ते के बेटे ने मार दिया।माल ब्रिग्ते ने मोरय पर आधिपत्य स्थापित किया।अंग्रेज़ी और स्कान्डिनेवियन लेखक माक बताड को मोरय का वास्तविक राजा मानते थे।माल्कम के बाद उनका भाई गिल्लेकोग्मन राजा बना।वह ग्रोच का पति था।यह माना गया है कि माक बताड 1032 में गिलिकोग्म्न की हत्या के लिए जिम्मेदार था।माल्कम का कोई बेटा नहीं था और यह उनके शासन केलिए खतरा था और इसके कारण उन्होने अपने भतीजे को मार दिया। === स्त्रेतक्लैड और शासन === राजा ओवेन कारहम में हुए युद्ध में मारे गये और स्कोट्स शासन करने लगे। लेकिन इसका कोई दृढ प्रमाण नहीं है।यह निश्चित है कि ओवेन की [[मृत्यु]] कारहम पर हुआ और यह भी निश्चित है कि १०५४ तक स्त्रेतक्लैड के राजा जिंदा थे। लेकिन यह अब भी स्थापित नहीं हो पाया कि स्कोट्स ने स्त्रेतलैड पर शासन किया था कि नहीं।अगर मालकोम के कोइ पुत्र थे भी उनकी मृत्यु १०३० तक हुआ होगा। माल्कम का पोता तोर्फिन का एक राजा होने की संभावना कम थी और मालकोम ने अपनी अन्य पुत्रियों के बेटों को चुना होगा। == मृत्यु == १०३४ को माल्कम की मृत्यु हुई।विपक्ष की अनुपस्थिति यह साबित करता है कि जीते जी उन्होने अपने विपक्ष से निपटा था। राजाओं का मानना है कि उनकी मृत्यु ग्लमिस<ref>{{Cite web |url=http://www.scotclans.com/scotland/kings-queens/1005-malcolm2/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=8 मई 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170610171940/http://www.scotclans.com/scotland/kings-queens/1005-malcolm2/ |archive-date=10 जून 2017 |url-status=dead }}</ref> पर हुई थी। [[चित्र:King Malcolms Gravestone at Glamis.jpg|अंगूठाकार|ग्लमिस पर राजा की समाधि]] ==सन्दर्भ== {{आधार}} i4d81n2wc01a55gag4eu2gveszn2igr केनेथ तृतीय 0 14187 6536773 6536465 2026-04-06T05:29:39Z ~2026-20280-34 918193 खाली पृष्ठ को 100 शब्दों वाले सन्दर्भित लेख में बदला। 6536773 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | name = केनेथ तृतीय | succession = अल्बा के राजा | reign = 997 – ल॰ 25 मार्च 1005 | predecessor = कोंस्टेटाइन तृतीय | successor = [[माल्कम २]] | issue = बोइते मैक सिनयेदा''?''<br />गिले कोमगैन''?''<br />गिरिक मैक सिनयेदा<br />सुइब्ने'?'' | house = एल्पिन | father = डब, अल्बा का राजा | birth_date = ल॰ 966 | death_date = ल॰ 25 मार्च 1005 (आयु 38–39 वर्ष) | death_place = मोंज़ीवैर्ड | burial_place = आयोना }} '''सिनेड मैक डब''' (Cináed mac Duib; [[स्कॉटिश गैलिक|आधुनिक गैलिक]]: ''Coinneach mac Dhuibh'';<ref>मध्यकालीन गैलिक में इसे ''Cináed mac Duib'' के रूप में लिखा जाता है।</ref> {{Circa|966}} – {{Circa}} 25 मार्च 1005) सन् 997 से 1005 तक अल्बा के राजा थे। उन्हें उनके नाम के [[अंग्रेज़ीकरण|अंग्रेज़ी उच्चारण]] '''केनेथ द्वितीय''' (Kenneth III) है और उनके उपनाम '''''अन डॉन''''' (An Donn; अर्थात् "मुख्य" अथवा "भूरा") से भी जाना जाता है।<ref>पहले वाले की सम्भवना इसलिए है क्योंकि बाद के अंग्रेज़ी-भाषी स्रोतों ने उन्हें "Grim" लिखा; पुरानी आयरिश भाषा के शब्द ''donn'' का [[ऐंग्लो-सैक्सन भाषा|पुरानी अंग्रेज़ी]] के शब्द ''greimm'' जैसा ही है जिसका अर्थ "शक्ति" या "अधिकार" होता है; स्रोत Skene, ''Chronicles'', p. 98; Hudson, ''Celtic Kings'', p. 105.</ref> स्कॉटलैण्ड के विभिन्न स्रोतों में उन्हें केनेथ के पुत्र गिरिक के रूप में सन्दर्भित किया गया है जो स्वयं डब के पुत्र थे। इसे एक त्रुटि माना जाता है।<ref>Duncan, p. 22;</ref> इसकी एक वैकल्पिक व्याख्या यह है कि केनेथ का एक पुत्र था जिसका नाम गिरिक था और उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर शासन किया था।<ref>Smyth, pp. 220–221, 225; also ''ESSH'', p. 522 note 4.</ref><ref name="Bannerman">[https://books.google.com/books?id=pC8njhobGxQC&pg=PA25 Bannerman, MacDuff of Fife, p. 25–26]</ref> == कहानियों में केनेथ == केनेथ तृतीय की मृत्य को 20वीं सदी के स्कॉट लेखक लुईस ग्रासिक गिब्बन के उपन्यास ''क्लाउड होवे'' (Cloud Howe) में उल्लिखीत किया गया है। केनेथ तृतीय अमेरिकी लेखक ग्रेग वीज़मैन की गार्गॉयल्स (कॉमिक्स) में भी दिखाया गया है। == सन्दर्भ == {{Reflist|30em}} ==बाहरी कड़ियाँ== * {{citation |last=हैरिसन |first=रॉबर्ट |title=Macbeth: An Historical Novel of the Last Celtic King |year=2011 |publisher=आईयूनिवर्स |isbn=978-1462016129 |url=https://books.google.com/books?id=t9I26vQrgAoC}} {{s-start}} {{s-hou | हाउस ऑफ़ एल्पिन ||सन् 967 से पूर्व ||25 मार्च 1005}} {{s-reg | }} {{succession box | title=अल्बा के राजा | before=कोंस्टेटाइन तृतीय | after=[[माल्कम २]] | years=997–1005}} {{s-end}}{{Authority control}} [[श्रेणी:१००५ में निधन]] {{आधार}} en3z7y5ywcq10ai33d0h2y5lky2pgex शान्ति 0 18807 6536898 6426029 2026-04-06T08:51:11Z ~2026-21177-42 919041 6536898 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Peace dove.svg|thumb|शान्तिवादी कपोत]] '''शान्ति''' शत्रुता और हिंसा के अभाव में सामाजिक मैत्री और सद्भाव की अवधारणा है। एक सामाजिक अर्थ में, शान्ति का अर्थ साधारणतः संघर्ष (जैसे युद्ध) की कमी और व्यक्तियों या समूहों के बीच हिंसा के भय से मुक्ति के लिए किया जाता है। पूरे इतिहास में, नेताओं ने एक प्रकार का व्यवहार संयम स्थापित करने के लिए शान्ति निर्माण और कूटनीति का उपयोग किया है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार के समझौतों या शान्ति सन्धियों के माध्यम से क्षेत्रीय शान्ति या आर्थिक विकास की स्थापना हुई है। इस प्रकार के व्यवहारिक संयम के परिणामस्वरूप अक्सर कम संघर्ष, अधिक आर्थिक अन्तःक्रियाशीलता और परिणामस्वरूप पर्याप्त समृद्धि होती है। मनोवैज्ञानिक शान्ति (जैसे शांतिपूर्ण सोच और भावनाएँ) शायद कम अच्छी तरह से परिभाषित है, फिर भी अक्सर "व्यवहारिक शान्ति" स्थापित करने के लिए एक आवश्यक अग्रदूत साबित होती है। शान्तिपूर्ण व्यवहार कभी-कभी "शान्तिपूर्ण आन्तरिक स्वभाव" का परिणाम होता है। कुछ लोगों ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि शान्ति की शुरुआत आन्तरिक शान्ति की एक निश्चित गुणवत्ता के साथ की जा सकती है जो दैनिक जीवन की अनिश्चितताओं पर निर्भर नहीं करती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.goodreads.com/quotes/11559-world-peace-must-develop-from-inner-peace-peace-is-not|title=A quote by Dalai Lama XIV|website=www.goodreads.com|access-date=2023-02-02}}</ref> अपने और दूसरों के लिए इस तरह के "शान्तिपूर्ण आन्तरिक स्वभाव" का अधिग्रहण अन्यथा प्रतीत होने वाले अपूरणीय प्रतिस्पर्धी हितों को हल करने में योगदान कर सकता है। शान्ति उत्तेजना की स्थिति नहीं है यद्यपि उत्साहित होने पर हम सुखी होते हैं, लेकिन शान्ति तब होती है जब हमारा मन शान्त और सन्तुष्ट होता है। मेरा विचार: शान्ति से ही व्यक्ति की जीवन में खुशहाली के मार्ग खुलते है। Mr. Yuvraj meena ==सन्दर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:शान्ति]] {{आधार}} 660imlnneodr4xld6tfqf0oriz7o2qk ठाकुर देशराज 0 19123 6536854 6203919 2026-04-06T07:13:32Z Jatland Wiki 919020 6536854 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[[[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]]|अंगूठाकार|पाठ=Thakur Deshraj|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। आपने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। आपने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज: जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} h3vebbk906zsd6tbiowdm9dmizedjr5 6536855 6536854 2026-04-06T07:14:09Z Jatland Wiki 919020 6536855 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[[[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]]]] '''ठाकुर देशराज''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। आपने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। आपने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज: जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} hsdejshz9u7ml1sog8kxbxetulu7hjy 6536856 6536855 2026-04-06T07:14:30Z Jatland Wiki 919020 6536856 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। आपने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। आपने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज: जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} 8bab4fwxetvkdc0cfkldya7te681vkm 6536857 6536856 2026-04-06T07:16:13Z Jatland Wiki 919020 /* सन्दर्भ */ 6536857 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। आपने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। आपने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज : जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} 03l5almjccvrgmus86238m5p8s3pf71 6536875 6536857 2026-04-06T07:24:22Z Jatland Wiki 919020 6536875 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। उन्होंने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। उन्होंने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज : जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} bh62hb3r0b2yeov4fpnwwi9y9p542k9 6536880 6536875 2026-04-06T07:32:13Z ~2026-21184-64 919029 6536880 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज पिलानिया''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। उन्होंने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। उन्होंने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज : जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} iinhyz3mzaasvcez8iz0rnjg7ia0vz2 6536890 6536880 2026-04-06T08:09:36Z Jatland Wiki 919020 6536890 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{छोटी भूमिका|date=अगस्त 2023}} {{स्रोतहीन|date=अगस्त 2023}} {{बन्द सिरा|date=अगस्त 2023}} }} [[File:Thakur Deshraj.jpg|thumb|Thakur Deshraj]] '''ठाकुर देशराज पिलानिया''' (1903-1970) भारत में [[भरतपुर]] में जघीना गाँव मे पैदा हुए। उन्होंने किसानों में जागृति लाने के लिये संघर्ष किया। उन्होंने 1934 में '''[[जाट-इतिहास]]''' पुस्तक लिखी। == परिवार == पिता : ठाकुर छितर सिंह पिलानिया माता : सूरजमुखी == सन्दर्भ == ठाकुर देशराज : जाट इतिहास, 1992 == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] {{श्रेणी कम|date=अगस्त 2023}} {{आधार}} faqxbe1xxcm84c4zk0go5nfgti3znnn गोण्डा 0 19490 6536603 6400006 2026-04-05T14:44:26Z ~2026-20992-90 918922 Ramayan avdhi me likhi gayi hai Gonda me avdhi boli jati hai .Suprim court dara bhi ye mana gaya hai ki Tulsidas ka brith Gonda me hua tha in 2001 . In Rajapur Gonda make kuthi of Tulshidas 6536603 wikitext text/x-wiki {{भूमिका नहीं}} {{About|गोंडा जिला मुख्यालय (उत्तर प्रदेश)|गोंडा जिले|गोंडा जिला}}यह [[भारत]] के प्रान्त [[उत्तर प्रदेश]] के एक प्रमुख [[जिला]] [[गोंडा जिला|गोंडा जिले]] का मुख्यालय है जो पूर्व में [[बस्ती जिला|बस्ती]], पश्चिम में [[बहराइच]], उत्तर में [[बलरामपुर]] तथा दक्षिण में [[बाराबंकी]] और [[फैजाबाद]] से घिरा हुआ है। यहाँ की जिला जेल में [[काकोरी काण्ड]] के एक प्रमुख क्रान्तिकारी [[राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी]] को निर्धारित तिथि से दो दिन पूर्व १७ दिसम्बर १९२७ को बेरहम ब्रिटिश सरकार द्वारा [[फाँसी]] दी गयी थी। गोंडा शहर सन १६२०ई में स्थापित हुआ । सन् १८५६ ई में जिले की रूप में स्थापित हुआ। यहां के राजापुर ग्राम मे गोस्वामी तुलसीदास का जन्म हुआ था। {{Infobox Indian Jurisdiction | | नगर का नाम = गोण्डा | प्रकार = जिला मुख्यालय | latd = 26.47 | longd= 81.30 | प्रदेश = [[उत्तर प्रदेश]] | जिला = [[गोंडा जिला]] | भाषा = अवधी | ऊँचाई = १२० | जनगणना का वर्ष = २००१ | जनगणना स्तर = | जनसंख्या =३४,३१,३८६ | घनत्व = | क्षेत्रफल = ७३५२ वर्ग किलोमीटर | दूरभाष कोड = ०५२६२ | पिनकोड = | वाहन रेजिस्ट्रेशन कोड = up 43 | unlocode = | वेबसाइट = gonda.nic.in | skyline = | skyline_caption = मानस झील, नौखान झील, पार्वती अरगा पक्षी विहार, पथरी झील, बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर, जयप्रभाग्राम, गोण्डा | टिप्पणियाँ = }} == भूगोल == गोण्डा २६° ४७' तथा २७° २०' उत्तरी अक्षांश के मध्य एवं ८१° ३०' तथा ८२° ४६' देशान्तर के मध्य में स्थित है। जनपद का कुल क्षेत्रफल 4003 वर्ग कि0मी0 है जो देवीपाटन मण्डल के कुल क्षेत्रफल का 28.13 प्रतिशत है। इस जनपद में 04 तहसीलें गोण्डा, मनकापुर, करनैलगंज एवं तरबगंज है। इन तहसीलों में तहसील गोण्डा का क्षेत्रफल 1249.48 वर्ग कि0मी0, तहसील मनकापुर का 763.70 वर्ग कि0मी0, तरबगंज का 963.31 वर्ग कि0मी0 व करनैलगंज का 1026.51 वर्ग कि0मी0 है। इस प्रकार जनपद गोण्डा के कुल क्षेत्रफल का 31.21 प्रतिशत तहसील गोण्डा, 19.07 प्रतिशत तहसील मनकापुर, 24.06 प्रतिशत तहसील तरबगंज व 25.64 प्रतिशत तहसील करनैलगंज का क्षेत्रफल है। == इतिहास == {{Unreferenced section|date=January 2021}} गोण्डा प्राचीन काल में कोशल महाजनपद का भाग था, [[मुगल|मुगलों]] के शासन में यह फरवरी १८५६ तक [[अवध]] का हिस्सा था और मुगलों के आधीन था जिसे बाद में [[अंग्रेज|अंग्रेजों]] ने कब्ज़ा लिया। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में [[अयोध्या]] के राजा भगवान [[श्रीराम]] की गायें इस क्षेत्र में चरा करती थी, जिससे इस क्षेत्र का नाम "गोनर्द" पड़ा। यही कालान्तर में अपभ्रंश होकर गोण्डा कहलाया। आज भी बहुत से ग्रामीण "गोण्डा" को "गोंड़ा" कहते हैं। गोण्डा को महाभाष्यकार पतंजलि की जन्मभूमि भी माना जाता है। [[पतंजलि]] को "गोनर्दीय पतंजलि" भी कहा जाता है। यहाँ स्थित "सूकरखेत", जो सूकरक्षेत्र का ही अपभ्रंश है, [[तुलसीदास]] जी की जन्मस्थली माना जाता है। कालान्तर मे चलकर गोण्डा पर भर शासको ने छोटे छोटे राज्य स्थापित किया जिस मे राजा मानिकदेव भर द्वारा स्थापित मनकापुर काफी प्रसिद्ध हुआ यह से दक्षिण 35 कि.मी. पर उमरी बेगमगंज में मां बाराही का विश्व का एकमात्र बड़ा ही पुरातन मंदिर है और इसी दिशा में गोण्डा से 37 कि. मी की दूरी पर पसका (सूूूकरखेत) मे प्रसिद्ध बाराह भगवान मन्दिर है।तथा यही पर तुुुलसीदास जी के गुुरू नरिहरदास जी का आश्रम भी यही है। गोंण्डा में श्री दुःख हरणनाथ मंदिर, काली भवानी, खैरा भवानी, हनुमानगढ़ी, सुरसा मंदिर प्रमुख मंदिर हैं व गोण्डा से 35 कि. मी उत्तर खरगुपुर में एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर का है जो पांडव द्वारा स्थापित है और गोण्डा का गौरव बड़ा रहै है इन्ही के समीप झाली धाम में कामधेनु गौ और विशालकाय कछुए देश विदेश के पर्यटको की उत्सुक्ता का केंद्र है गोण्डा के नवाबगंज में पार्वती अरगा पक्षी विहार है जहां देशी व विदेशी पक्षीयों का दर्शन होता है और मुख्यालय से उत्तर में धानेपुर के समीप एक बहुत बड़ी मनोरम सोहिला झील भी है जिसके पास धरमेई गाँव सुप्रसिद्ध कथाव्यास श्रद्धेय श्रीकृष्णानंद व्यास जी की जन्मस्थली भी है। गोंडा के बीचोंबीच गाँधी पार्क में गांधी जी की बहुत बड़ी मुर्ति स्थित है। "बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर "- ये मंदिर गोंडा शहर से 17 किलोमीटर दूर स्थित है बाबा बालेश्वर नाथ बहुत ही प्राचीन मंदिर है यह गोंडा फैजाबाद रोड पर स्थित डुमरियाडीह बाजार से तरबगंज रोड पर बाल्हाराई ग्राम सभा में स्थित है मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग श्वायाम्भू है औरंगजेब के शाशन काल में इस शिवलिंग पर आरे से प्रहार किया गया था ज़िसका चिन्ह आज भी विद्यमान है तथा इसी के आसपास 7 कोस में बिसेन राजपूत जो कि कालांतर में गौरहा बिसेन क्षत्रिय कहे जाते हैं यहीं निवास करते हैं,और यहीं पूरब में इमिलिया वरजोतपुरवा में वीर क्षत्रिय चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी के वंशज की २४ शाखाओं में से १८ वीं शाखा अवध के राजा श्री बच्छराज कुँवर जी के वंशज श्री कल्पनाथ चौहान के प्रपौत्र रामदुलारे चौहान s/o नागेश्वर चौहान जी की संताने निवास करती हैं। इसी स्थानों पर [[चंदेल वंश|चंदेलों]] की भी बस्तियां पाई जाती है, जिसमें '''हरिश्चंद्र सिंह चंदेल''' (पूर्व प्रधान) मुकुंदपुर निकट (माँ बाराही स्थल) अपने कर्तव्यों ,ईमानदारी और कर्मठता केे लिए विख्यात हैं, उनके प्रपौत्र '''विजय सिंह [[चन्देल|चंदेल]]''' 2015 में उत्तर प्रदेश अवार्ड सोसाइटी द्वारा अन्य कई जिले,राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के पुरष्कारों से नवाज़े जा चुके हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा जिले के माने जाने संस्थान [[फ़ातिमा|फातिमा]] <sub>सीनियर सेकेंडरी स्कूल</sub> से की है। वह जिले में कई मुहिम भी स्कूली शिक्षा के दौरान चला चुके है जैसे , [[नशा मुक्ति कार्यक्रम|नशा]] मुक्ति, [[स्वरोजगार]], [[गरीबी]] उन्मूलन । "स्वामी नारायण मंदिर छपिया" गोंडा जिला मुख्यालय से पूरब की ओर छपिया में श्री घनश्याम जी का भव्य एवम् विशाल मंदिर है जहां पर दूर दूर से सैलानी घूमने आते हैं , यहीं घनश्याम जी की जन्मस्थली भी है। अपने समय के जिले के होनहार विद्यार्थी रहे '''''विजय''''' न कि कुसल वक्ता बल्कि एक अच्छे छात्रनेता भी रहे है, छात्रों की समस्या को '''सड़क से संसद''' तक पहुचाने का काम करतें हैं। ,ज्ञातव्य हो कि ''विजय सिंह चंदेल'' इस समय '''[[इलाहाबाद विश्वविद्यालय|इलाहाबाद]]''' [[विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग|विश्वविद्यालय]] में जिले की गरिमा बढ़ा रहें है । और देश की सर्वोच्च सेवा UPSC की तैयारी कर रहे है, उसके साथ साथ गरीबों और शोषितों की आवाज भी मुखर कर रहे है। <big>ऐसी प्रतिभा पर न कि जिले बल्कि [[देश]] को गुमान है।</big> ''<sub>लहरों से डर गए तो नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।</sub>'' == यातायात == [[गोण्डा जंक्शन रेलवे स्टेशन]] यातायात के लिये एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहाँ से देश की सभी दिशाओं के लिये ट्रेन मिलती हैं, गोण्डा [[पूर्वोत्तर रेलवे (भारत)|पूर्वोतर रेलवे]] का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है, जो [[लखनऊ]] और [[गोरखपुर]] के बीच में पड़ता है। यात्री सुविधा के मामले में गोण्डा रेलवे स्टेशन अव्वल है। गोण्डा प्रदेश की राजधानी [[लखनऊ]], [[फैज़ाबाद]], [[बलरामपुर]] एवं [[बहराइच]] से सड़क मार्ग द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों जैसे [[इलाहाबाद]], [[वाराणसी]], [[कानपुर]], [[बरेली]] आदि तथा राष्ट्रीय राजधानी [[दिल्ली]] को मोटर मार्ग द्वारा नियमित परिवहन बस सेवायें हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.upsrtc.com/en/page/time-table|title=Services {{!}} Time Table {{!}} Official Website of Uttar Pradesh State Road Transport Corporation, Government of Uttar Pradesh, India.|website=www.upsrtc.com|access-date=29 January 2021|archive-date=24 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210124023751/http://upsrtc.com/en/page/time-table|url-status=dead}}</ref> == जनसंख्या == 2011 में, गोंडा की जनसंख्या 3,433,919 थी, जिसमें पुरुष और महिलाएँ क्रमशः 1,787,146 और 1,646,773 थीं। 2024 में गोंडा जिले की अनुमानित जनसंख्या 4,320,000 है | <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/district/554-gonda.html|title=Gonda District Population Census 2011 - 2021 - 2024, Uttar Pradesh literacy sex ratio and density|website=www.census2011.co.in|access-date=2024-12-19}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर]] [[श्रेणी:गोण्डा ज़िला]] [[श्रेणी:गोण्डा ज़िले के नगर]] 6ntzlumalcewauzr5tr3idddyewehyu अनुवाद 0 28504 6536630 6510653 2026-04-05T15:55:42Z अनुनाद सिंह 1634 /* बाहरी कड़ियाँ */ 6536630 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" |- ! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] |- | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] |- | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] |- | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] |- | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[डच]] |- | [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] |- | [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] |- | [[डच]] || [[डैनिश]] |- | [[चेक गणराज्य|चेक]] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] |- | [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] |- | [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || [[फिनिश]] |- | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[नार्वेजियन]] |- | [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || [[यूनानी]] |- | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[बुल्गारियाई]] |- | [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] |- | [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) / [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [http://www.lakesparadise.com/madhumati/show_artical.php?id=624 मलयालम से हिन्दी अनुवाद की समस्याएँ]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} (मधुमती) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] 30yg1f94s8ltbbnc6houxbn98yrf34n 6536631 6536630 2026-04-05T15:56:27Z अनुनाद सिंह 1634 /* इन्हें भी देखें */ 6536631 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" |- ! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] |- | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] |- | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] |- | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] |- | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[डच]] |- | [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] |- | [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] |- | [[डच]] || [[डैनिश]] |- | [[चेक गणराज्य|चेक]] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] |- | [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] |- | [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || [[फिनिश]] |- | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[नार्वेजियन]] |- | [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || [[यूनानी]] |- | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[बुल्गारियाई]] |- | [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] |- | [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) / [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [http://www.lakesparadise.com/madhumati/show_artical.php?id=624 मलयालम से हिन्दी अनुवाद की समस्याएँ]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} (मधुमती) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] oaobk8sptbylnpvwhmgqgg9vc1g3brt 6536641 6536631 2026-04-05T16:14:55Z अनुनाद सिंह 1634 /* बाहरी कड़ियाँ */ 6536641 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" |- ! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] |- | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] |- | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] |- | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] |- | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[डच]] |- | [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] |- | [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] |- | [[डच]] || [[डैनिश]] |- | [[चेक गणराज्य|चेक]] || [[इतालवी भाषा|इतालवी]] |- | [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] |- | [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || [[फिनिश]] |- | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[नार्वेजियन]] |- | [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || [[यूनानी]] |- | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[बुल्गारियाई]] |- | [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] |- | [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) / [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] 3vbbb88fsq27iez56lxmjvzsuiqa3zx 6536652 6536641 2026-04-05T16:25:01Z अनुनाद सिंह 1634 /* 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं */ 6536652 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डच]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[डच]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डैनिश]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) / [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] s9zrj3u4t2xphvfyg2c2brjuk8883kh 6536653 6536652 2026-04-05T16:26:24Z अनुनाद सिंह 1634 /* संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद */ 6536653 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी 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style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] pb61bxane1z5g18gpdralx8jdjn508q 6536664 6536653 2026-04-05T16:59:21Z अनुनाद सिंह 1634 /* इन्हें भी देखें */ 6536664 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डच]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[डच]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डैनिश]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] *[[अनुवाद आन्दोलन]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] mfj5dzg0jy25ktqrls75jmwdee5p0nl 6536670 6536664 2026-04-05T17:08:56Z अनुनाद सिंह 1634 /* इन्हें भी देखें */ 6536670 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डच]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[डच]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डैनिश]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] *[[अरबी अनुवाद आन्दोलन]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] dwyhm01y0borrn24y0v5ixlh22xyldf 6536674 6536670 2026-04-05T17:37:46Z अनुनाद सिंह 1634 /* अनुवाद की परम्परा */ 6536674 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। ==भारत में अनुवाद की परम्परा == भारत एक बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुधर्मी देश है। यहाँ सदियों से संस्कृत, पालि, प्राकृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, उर्दू जैसी सैकड़ों भाषाएँ साथ-साथ फलती-फूलती रही हैं। ऐसी स्थिति में अनुवाद कोई नई बात नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक आवश्यकता रही है। अनुवाद का अर्थ केवल शब्दों को बदलना नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं, धार्मिक उपदेशों, साहित्य और ज्ञान को एक भाषा से दूसरी भाषा में ले जाना है—बिना मूल भाव खोए। भारत में अनुवाद का इतिहास संवाद, आदान-प्रदान और समरसता की परंपरा का इतिहास है। यह धर्म को फैलाता रहा, संस्कृति को जोड़ता रहा, ज्ञान को साझा करता रहा और राष्ट्र को एक रखता रहा। इस लेख में हम अनुवाद की यात्रा को बौद्ध काल से आधुनिक काल तक देखेंगे। यह यात्रा दिखाती है कि अनुवाद ने भारत को विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बनाया है। === अनुवाद की प्रारंभिक नींव === : (बौद्ध काल ; लगभग ५वीं शताब्दी ई.पू. से 5वीं शताब्दी ई.) भारत में संगठित और बड़े पैमाने पर अनुवाद की शुरुआत [[बौद्ध धर्म|बौद्ध काल]] से मानी जाती है। बौद्ध धर्म का प्रसार जब उत्तर भारत से दक्षिण, पूर्व और विदेशों तक हुआ, तो उसके ग्रंथों और उपदेशों को आम लोगों की भाषा में पहुँचाना आवश्यक हो गया। बुद्ध के [[उपदेश]] मूल रूप से [[मागधी]] में थे, जिन्हें [[त्रिपिटक]] के रूप में संकलित किया गया। बौद्ध धर्म जब [[श्रीलंका]], म्यांमार, थाईलैंड गया, तो [[पालि]] में अनुवाद हुआ। भारत में ही इन्हें [[प्राकृत]] और बाद में [[संस्कृत]] में अनूदित किया गया। [[कुमारजीव]] (४थी शताब्दी) ने [[चीन]] जाकर सैकड़ों बौद्ध सूत्रों का [[चीनी भाषा]] में अनुवाद किया। [[अतिश दीपंकर]] और बोधिधर्म ने [[तिब्बती]] और चीनी में अनुवाद किए। श्रीलंका में [[बुद्धघोष]] ने पालि टीकाएँ लिखीं और ग्रंथों को व्यवस्थित किया। बौद्ध अनुवादक शब्द-शब्द अनुवाद नहीं करते थे, वे अर्थ और भाव को प्राथमिकता देते थे। उदाहरण के लिए “दुख” शब्द को चीनी में “कू” कहा गया, जो दुख के साथ जीवन की कठिनाई को भी दर्शाता है। इस प्रकार बौद्ध काल में अनुवाद ने धर्म को जन-जन तक पहुँचाया और भारतीय दर्शन को विश्व स्तर पर स्थापित किया। === गुप्तोत्तर काल और मध्यकाल में अनुवाद परम्परा === (५वीं से १६वीं शताब्दी तक) यह काल भक्ति और सांस्कृतिक एकीकरण का काल था। [[रामायण]] और [[महाभारत]] के अनगिनत अनुवाद हुए : [[तमिल]] में [[कंबन रामायण]] (12वीं शताब्दी), बांग्ला में कृतिवास रामायण, अवधी में तुलसीदास की [[रामचरितमानस]] (16वीं शताब्दी), मराठी में एकनाथ की भागवत रामायण। ये अनुवाद केवल कहानी नहीं, लोक संस्कृति का हिस्सा बने। भक्ति आंदोलन में कबीर, सूरदास, मीरा, नानक ने संस्कृत ग्रंथों के दर्शन को लोकभाषा में ढाला। तुलसीदास ने वाल्मीकि रामायण को भावानुवाद के रूप में प्रस्तुत किया। जयदेव के गीतगोविंद का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। इस्लामी शासन में अकबर ने अनुवाद विभाग बनवाया। महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज़्मनामा, रामायण, उपनिषद, [[पंचतंत्र]], हितोपदेश का [[फ़ारसी]] में अनुवाद हुआ। [[दारा शिकोह]] ने [[उपनिषद|उपनिषदों]] का फ़ारसी अनुवाद कराया, जिसका बाद में लैटिन अनुवाद हुआ। इस काल में अनुवाद ने हिंदू-मुस्लिम संवाद, भक्ति भाव और क्षेत्रीय साहित्य की समृद्धि को बढ़ावा दिया। ===औपनिवेशिक काल === (१८वीं–२०वीं शताब्दी का पूर्वार्ध तक) ब्रिटिश शासन के साथ भारत में अनुवाद की दिशा बदली। अब यह शिक्षा, प्रशासन और मिशनरी कार्य का हिस्सा बना। लेकिन भारतीयों ने इसे राष्ट्रीय जागरण का हथियार भी बनाया। विलियम केरी (फोर्ट विलियम कॉलेज) ने बाइबिल का बांग्ला, हिंदी, मराठी, उड़िया, संस्कृत में अनुवाद किया। इससे भारतीय भाषाओं में आधुनिक गद्य शैली का विकास हुआ। [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र]] ने अंग्रेजी नाटक (शेक्सपियर), संस्कृत नाटक और बांग्ला साहित्य का हिंदी में अनुवाद किया। [[महावीर प्रसाद द्विवेदी]] ने वैज्ञानिक और सामाजिक लेखों का अनुवाद किया। हिंदी में पहली बार निबंध, नाटक, उपन्यास की नई शैली आई। [[रवींद्रनाथ ठाकुर]] ने [[गीतांजलि]] का खुद अंग्रेजी में अनुवाद किया और 1913 में [[नोबेल पुरस्कार]] जीता। यह स्वानुवाद की अनोखी मिसाल थी। राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी के [[हिंद स्वराज]] का गुजराती से हिंदी, अंग्रेजी, मराठी में अनुवाद हुआ। नेहरू, टैगोर, प्रेमचंद के लेख विभिन्न भाषाओं में अनूदित हुए। समाचार-पत्र जैसे केसरी, बॉम्बे क्रॉनिकल में अनुवादित लेख छपते थे। अनुवाद ने आधुनिक शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और भाषाई जागरण को बल दिया। यह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ हथियार भी बना। === स्वतंत्र भारत और आधुनिक काल === (1947 से अब तक) भारत की स्वतंत्रता के बाद अनुवाद राष्ट्रीय एकता, शिक्षा, विज्ञान और वैश्विक संवाद का आधार बना। सरकार, संस्थाएँ और व्यक्ति तीनों स्तरों पर अनुवाद होने लगे। भारतीय संविधान अंग्रेजी और हिंदी में है, सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद हुआ। संसद, विधानसभा, सरकारी योजनाओं का बहुभाषी अनुवाद होता है। [[साहित्य अकादमी]] ने 1954 से परस्पर अनुवाद योजना शुरू की। प्रेमचंद (हिंदी) साहित्य का तमिल, मलयालम; महाश्वेता देवी (बांग्ला) के साहित्य का हिंदी और अंग्रेजी में, आर.के. नारायण के साहित्य का विश्व की 30 से अधिक भाषाओं में, दलित और स्त्री साहित्य का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ। टॉलस्टॉय, दोस्तोव्स्की, काफ्का, मार्केज़, नेरुदा के हिंदी अनुवाद हुए। हैरि पॉटर, लॉर्ड ऑफ द रिंग्स का हिंदी, तमिल, बांग्ला में अनुवाद हुआ । [[जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] जैसे अनेक भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुवाद अध्ययन कोर्स या विषय के रूप स्नातक पाठ्यक्रम शुरू हुआ। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डच]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[डच]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डैनिश]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] *[[अरबी अनुवाद आन्दोलन]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] km9pfrsrhfybkjihr06x8s7bodon5es 6536675 6536674 2026-04-05T17:40:01Z अनुनाद सिंह 1634 /* भारत में अनुवाद की परम्परा */ 6536675 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। ==भारत में अनुवाद की परम्परा == भारत एक बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुधर्मी देश है। यहाँ सदियों से संस्कृत, पालि, प्राकृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, उर्दू जैसी सैकड़ों भाषाएँ साथ-साथ फलती-फूलती रही हैं। ऐसी स्थिति में अनुवाद कोई नई बात नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक आवश्यकता रही है। अनुवाद का अर्थ केवल शब्दों को बदलना नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं, धार्मिक उपदेशों, साहित्य और ज्ञान को एक भाषा से दूसरी भाषा में ले जाना है—बिना मूल भाव खोए। भारत में अनुवाद का इतिहास संवाद, आदान-प्रदान और समरसता की परंपरा का इतिहास है। यह धर्म को फैलाता रहा, संस्कृति को जोड़ता रहा, ज्ञान को साझा करता रहा और राष्ट्र को एक रखता रहा। इस लेख में हम अनुवाद की यात्रा को बौद्ध काल से आधुनिक काल तक देखेंगे। यह यात्रा दिखाती है कि अनुवाद ने भारत को विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बनाया है। === अनुवाद की प्रारंभिक नींव === : (बौद्ध काल ; लगभग ५वीं शताब्दी ई.पू. से 5वीं शताब्दी ई.) भारत में संगठित और बड़े पैमाने पर अनुवाद की शुरुआत [[बौद्ध धर्म|बौद्ध काल]] से मानी जाती है। बौद्ध धर्म का प्रसार जब उत्तर भारत से दक्षिण, पूर्व और विदेशों तक हुआ, तो उसके ग्रंथों और उपदेशों को आम लोगों की भाषा में पहुँचाना आवश्यक हो गया। बुद्ध के [[उपदेश]] मूल रूप से [[मागधी]] में थे, जिन्हें [[त्रिपिटक]] के रूप में संकलित किया गया। बौद्ध धर्म जब [[श्रीलंका]], म्यांमार, थाईलैंड गया, तो [[पालि]] में अनुवाद हुआ। भारत में ही इन्हें [[प्राकृत]] और बाद में [[संस्कृत]] में अनूदित किया गया। [[कुमारजीव]] (४थी शताब्दी) ने [[चीन]] जाकर सैकड़ों बौद्ध सूत्रों का [[चीनी भाषा]] में अनुवाद किया। [[अतीश दीपंकर]] और बोधिधर्म ने [[तिब्बती]] और चीनी में अनुवाद किए। श्रीलंका में [[बुद्धघोष]] ने पालि टीकाएँ लिखीं और ग्रंथों को व्यवस्थित किया। बौद्ध अनुवादक शब्द-शब्द अनुवाद नहीं करते थे, वे अर्थ और भाव को प्राथमिकता देते थे। उदाहरण के लिए “दुख” शब्द को चीनी में “कू” कहा गया, जो दुख के साथ जीवन की कठिनाई को भी दर्शाता है। इस प्रकार बौद्ध काल में अनुवाद ने धर्म को जन-जन तक पहुँचाया और भारतीय दर्शन को विश्व स्तर पर स्थापित किया। === गुप्तोत्तर काल और मध्यकाल में अनुवाद परम्परा === (५वीं से १६वीं शताब्दी तक) यह काल भक्ति और सांस्कृतिक एकीकरण का काल था। [[रामायण]] और [[महाभारत]] के अनगिनत अनुवाद हुए : [[तमिल]] में [[कंबन रामायण]] (12वीं शताब्दी), बांग्ला में कृतिवास रामायण, अवधी में तुलसीदास की [[रामचरितमानस]] (16वीं शताब्दी), मराठी में एकनाथ की भागवत रामायण। ये अनुवाद केवल कहानी नहीं, लोक संस्कृति का हिस्सा बने। भक्ति आंदोलन में कबीर, सूरदास, मीरा, नानक ने संस्कृत ग्रंथों के दर्शन को लोकभाषा में ढाला। तुलसीदास ने वाल्मीकि रामायण को भावानुवाद के रूप में प्रस्तुत किया। जयदेव के गीतगोविंद का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। इस्लामी शासन में अकबर ने अनुवाद विभाग बनवाया। महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज़्मनामा, रामायण, उपनिषद, [[पंचतंत्र]], हितोपदेश का [[फ़ारसी]] में अनुवाद हुआ। [[दारा शिकोह]] ने [[उपनिषद|उपनिषदों]] का फ़ारसी अनुवाद कराया, जिसका बाद में [[लैटिन]] अनुवाद हुआ। इस काल में अनुवाद ने हिंदू-मुस्लिम संवाद, भक्ति भाव और क्षेत्रीय साहित्य की समृद्धि को बढ़ावा दिया। ===औपनिवेशिक काल === (१८वीं–२०वीं शताब्दी का पूर्वार्ध तक) ब्रिटिश शासन के साथ भारत में अनुवाद की दिशा बदली। अब यह शिक्षा, प्रशासन और मिशनरी कार्य का हिस्सा बना। लेकिन भारतीयों ने इसे राष्ट्रीय जागरण का हथियार भी बनाया। विलियम केरी (फोर्ट विलियम कॉलेज) ने बाइबिल का बांग्ला, हिंदी, मराठी, उड़िया, संस्कृत में अनुवाद किया। इससे भारतीय भाषाओं में आधुनिक गद्य शैली का विकास हुआ। [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र]] ने अंग्रेजी नाटक (शेक्सपियर), संस्कृत नाटक और बांग्ला साहित्य का हिंदी में अनुवाद किया। [[महावीर प्रसाद द्विवेदी]] ने वैज्ञानिक और सामाजिक लेखों का अनुवाद किया। हिंदी में पहली बार निबंध, नाटक, उपन्यास की नई शैली आई। [[रवींद्रनाथ ठाकुर]] ने [[गीतांजलि]] का खुद अंग्रेजी में अनुवाद किया और 1913 में [[नोबेल पुरस्कार]] जीता। यह स्वानुवाद की अनोखी मिसाल थी। राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी के [[हिन्द स्वराज]] का गुजराती से हिंदी, अंग्रेजी, मराठी में अनुवाद हुआ। नेहरू, टैगोर, प्रेमचंद के लेख विभिन्न भाषाओं में अनूदित हुए। समाचार-पत्र जैसे केसरी, बॉम्बे क्रॉनिकल में अनुवादित लेख छपते थे। अनुवाद ने आधुनिक शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और भाषाई जागरण को बल दिया। यह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ हथियार भी बना। === स्वतंत्र भारत और आधुनिक काल === (1947 से अब तक) भारत की स्वतंत्रता के बाद अनुवाद राष्ट्रीय एकता, शिक्षा, विज्ञान और वैश्विक संवाद का आधार बना। सरकार, संस्थाएँ और व्यक्ति तीनों स्तरों पर अनुवाद होने लगे। भारतीय संविधान अंग्रेजी और हिंदी में है, सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद हुआ। संसद, विधानसभा, सरकारी योजनाओं का बहुभाषी अनुवाद होता है। [[साहित्य अकादमी]] ने 1954 से परस्पर अनुवाद योजना शुरू की। प्रेमचंद (हिंदी) साहित्य का तमिल, मलयालम; महाश्वेता देवी (बांग्ला) के साहित्य का हिंदी और अंग्रेजी में, आर.के. नारायण के साहित्य का विश्व की 30 से अधिक भाषाओं में, दलित और स्त्री साहित्य का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ। टॉलस्टॉय, दोस्तोव्स्की, काफ्का, मार्केज़, नेरुदा के हिंदी अनुवाद हुए। हैरि पॉटर, लॉर्ड ऑफ द रिंग्स का हिंदी, तमिल, बांग्ला में अनुवाद हुआ । [[जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] जैसे अनेक भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुवाद अध्ययन कोर्स या विषय के रूप स्नातक पाठ्यक्रम शुरू हुआ। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || [[जर्मन भाषा|जर्मन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फ़्रांसीसी शब्द|फ़्रांसिसी]] || [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[जापानी भाषा|जापानी]] |- | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] || [[स्पेनी भाषा|स्पैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डच]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || [[लातिन भाषा|लातिन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] |- | [[डैनिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[रूसी भाषा|रूसी]] || [[डच]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[डैनिश]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[इतालवी भाषा|इतालवी]] || [[प्राचीन यूनानी भाषा|प्राचीन यूनानी]] || [[चेक गणराज्य|चेक]] |- | [[जापानी भाषा|जापानी]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[हंगेरी|हंगेरियन]] || [[पोलिश भाषा|पोलिश]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[फिनिश]] || [[हंगेरी|हंगेरियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[नार्वेजियन]] || [[अरबी]] || [[स्वीडिश भाषा|स्वीडिश]] |- | [[नार्वेजियन]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[यूनानी]] || [[पुर्तगाली भाषा|पुर्तगाली]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[बुल्गारियाई]] || [[इब्रानी भाषा|हिब्रू]] || style="border-right: 3px solid black;" | [[कोरियाई भाषा|कोरियाई]] || [[चीनी]] || [[स्लोवाक भाषा|स्लोवाक]] |} == संस्कृत ग्रन्थों के अरबी में अनुवाद == {| class="wikitable sortable" |+ संस्कृत ग्रंथों के अरबी अनुवाद की सूची |- ! क्रम !! संस्कृत ग्रंथ !! अरबी नाम !! विषय !! मुख्य अनुवादक / विद्वान !! अनुवाद का अनुमानित समय (ईस्वी) |- | 1 || [[ब्रह्मस्फुट सिद्धांत]] || अल-सिंदहिंद || ज्योतिष / गणित || इब्राहिम अल-फजारी, याकूब इब्न तारिक || 771 – 773 ई. |- | 2 || [[खण्डखाद्यक]] || अल-अरकंद || ज्योतिष || अज्ञात (बगदाद दरबार) || 8वीं सदी |- | 3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] *[[अरबी अनुवाद आन्दोलन]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] m25e119g1fzh6h975zawuhx6i985qh8 6536676 6536675 2026-04-05T17:41:43Z अनुनाद सिंह 1634 /* बाहरी कड़ियाँ */ 6536676 wikitext text/x-wiki [[Image:Jingangjing.jpg|right|thumb|350px|[[वज्रच्छेदिकाप्रज्ञापारमितासूत्र]] नामक बौद्ध ग्रन्थ का [[संस्कृत]] से [[चीनी भाषा]] में अनुवाद [[कुमारजीव]] ने किया था। यह विश्व की सबसे प्राचीन (८६८ ई) प्रिन्ट की गयी पुस्तक भी है। ]] किसी [[भाषा]] में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन '''अनुवाद''' (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग [[शिष्य]] द्वारा [[गुरु]] की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' [[प्रत्यय]] जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' [[उपसर्ग]] उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार [[मोनियर विलियम्स]] ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया। वास्तव में अनुवाद भाषा के इन्द्रधनुषी रूप की पहचान का समर्थतम मार्ग है। अनुवाद की अनिवार्यता को किसी भाषा की समृद्धि का शोर मचा कर टाला नहीं जा सकता और न अनुवाद की बहुकोणीय उपयोगिता से इन्कार किया जा सकता है। ज्त्।छैस्।ज्प्व्छ के पर्यायस्वरूप ’अनुवाद‘ शब्द का स्वीकृत अर्थ है, एक भाषा की विचार सामग्री को दूसरी भाषा में पहुँचना। अनुवाद के लिए हिंदी में 'उल्था' का प्रचलन भी है।अँग्रेजी में TRANSLATION के साथ ही TRANSCRIPTION का प्रचलन भी है, जिसे हिन्दी में '[[लिप्यन्तरण]]' कहा जाता है। अनुवाद और लिप्यन्तरण का अन्तर इस उदाहरण से स्पष्ट है- : ''उसके सपने सच हुए। : ''HIS DREAMS BECAME TRUE - अनुवाद : '''USKE SAPNE SACH HUE - लिप्यन्तरण (TRANSCRIPTION) इससे स्पष्ट है कि 'अनुवाद' में हिन्दी वाक्य को अँग्रेजी में प्रस्तुत किया गया है जबकि लिप्यन्तरण में [[नागरी लिपि]] में लिखी गयी बात को मात्र [[रोमन लिपि]] में रख दिया गया है। अनुवाद के लिए 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग भी किया जाता रहा है। लेकिन अब इन दोनों ही शब्दों के नए अर्थ और उपयोग प्रचलित हैं। 'भाषान्तर' और 'रूपान्तर' का प्रयोग अँग्रेजी के INTERPRETATION शब्द के पर्याय-स्वरूप होता है, जिसका अर्थ है दो व्यक्तियों के बीच भाषिक सम्पर्क स्थापित करना। [[कन्नड़ भाषा|कन्नडभाषी]] व्यक्ति और [[असमिया भाषा|असमियाभाषी]] व्यक्ति के बीच की भाषिक दूरी को भाषान्तरण के द्वारा ही दूर किया जाता है। 'रूपान्तर' शब्द इन दिनों प्रायः किसी एक विधा की रचना की अन्य विधा में प्रस्तुति के लिए प्रयुक्त है। जैस, प्रेमचन्द के उपन्यास '[[गोदान (उपन्यास)|गोदान]]' का रूपान्तरण 'होरी' नाटक के रूप में किया गया है। किसी भाषा में अभिव्यक्त विचारों को दूसरी भाषा में यथावत् प्रस्तुत करना अनुवाद है। इस विशेष अर्थ में ही 'अनुवाद' शब्द का अभिप्राय सुनिश्चित है। जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, वह मूलभाषा या स्रोतभाषा है। उससे जिस नई भाषा में अनुवाद करना है, वह 'प्रस्तुत भाषा' या 'लक्ष्य भाषा' है। इस तरह, स्रोत भाषा में प्रस्तुत भाव या विचार को बिना किसी परिवर्तन के लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करना ही अनुवाद है अनुवाद ही देश दुनिया को एक सूत्र में बांधता है ==अनुवादक== '''अनुवाद''' (translator) का कार्य स्रोतभाषा के पाठ को अर्थपूर्ण रूप से लक्ष्यभाषा में अनूदित करता है। अनुवाद का कार्य अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है । एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम भाग में, सम्पादन का काम अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएँ रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है । एक अच्छा अनुवादक वह है जो- # स्रोत भाषा (जिससे अनुवाद करना है) के लिखित एवं वाचिक दोनों रूपों का अच्छा ज्ञाता हो। # लक्ष्य भाषा (जिसमें अनुवाद करना है) के लिखित रूप का अच्छा ज्ञाता हो, # पाठ जिस विषय या टॉपिक का है, उसकी जानकारी रखता हो। === अनुवादक एवं इण्टरप्रेटर === अनुवाद एक लिखित विधा है, जिसे करने के लिए कई साधनों की जरूरत पड़ती है। शब्दकोश, सन्दर्भ ग्रन्थ, विषय विशेषज्ञ या मार्गदर्शक की सहायता से अनुवाद कार्य को पूरा किया जाता है। इसकी कोई समय सीमा नहीं होती। अपनी इच्छानुसार अनुवादक इसे कई बार शुद्धीकरण के बाद पूरा कर सकता है। इण्टरप्रेटशन यानी '''भाषान्तरण''' एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपान्तरण है। इसे करने वाला इण्टरप्रेटर कहलाता है। इण्टरप्रेटर का काम तात्कालिक है। वह किसी भाषा को सुन कर, समझ कर दूसरी भाषा में तुरन्त उसका मौखिक तौर पर रूपान्तरण करता है। इसे मूल भाषा के साथ मौखिक तौर पर आधा मिनट पीछे रहते हुए किया जाता है। बहुत कुछ यान्त्रिक ढँग का भी होता है। == इतिहास == अनुवाद असाधारण रूप से कठिन और आह्वानात्मक कार्य माना जाता है। यह एक xGMhcdजटिल, कृत्रिम, आवश्यकता-जनित, और एक दृष्टि से सर्जनात्मक प्रक्रिया है जिसमें असाधारण और विशिष्ट कोटि की प्रतिभा की आवश्यकता होती है। यह इसकी अपनी प्रकृति है। परन्तु माना जाता है कि मौलिक लेखन न होने के कारण अनुवाद को सम्मान का स्थान नहीं मिलता है। क्योंकि इस बात की अवगणना होती है कि अनुवाद इसीलि7ए कठिन है कि वह मौलिक लेखन नहीं-पहले कही गई बात को ही दुबारा कहना होता है, जिसमें अनेक नियन्त्रणों और बन्धनों का पालन करना आवश्यक हो जाता है। इस प्रकार अमौलिक होने के कारण अनुवाद का महत्त्व तो कम हो गया, परन्तु इसी कारण इसके लिए अपेक्षित नियन्त्रणों और बन्धनों को महत्त्वपूर्ण नहीं समझा गया। इस सम्बन्ध में सृजनशील लेखकों के विचारों की प्रायः चर्चा होती रही है। कुछ विचार इस प्रकार हैं : <ref>अनुवाद : कला और समस्याएँ', 1961</ref> :(क) ''सम्पूर्ण अनुवाद कार्य केवल एक असमाधेय समस्या का समाधान खोजने के लिए किया गया प्रयास मात्र है।'' ([[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट|हुम्बोल्त]]) :(ख) ''किसी कृति का अनुवाद उसके दोषों को बढ़ा देता है और उसके गुणों को विद्रूप कर देता है।'' ([[वोल्टेयर|वाल्तेयर]]) :(ग) ''कला की एक विधा के रूप में अनुवाद कभी सफल नहीं हो सकते।'' ([[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]]) :(घ) ''अनुवादक वंचक होते हैं।'' (एक इतालवी कहावत) ऐसे विचारों के उद्भव के पीछे तत्कालीन परिस्थितियाँ तथा उनसे प्रेरित धारणाएँ मानी जाती हैं। पहले अनुवाद सामग्री का बहुलांश साहित्यिक रचनाएँ होती थीं, जिनका अनुवाद रचनाओं की साहित्यिक प्रकृति की सीमाओं के कारण पाठक की आशा के अनुरूप नहीं हो पाता था। साथ ही यह भी धारणा थी कि रचना की भाषा के प्रत्येक अंश का अनुवाद अपेक्षित है, जिससे मूल संवेदना का कोई अंश छट न पाए, और क्योंकि यह सम्भव नहीं, अतः अनुवाद को प्रवञ्चना की कोटि में रख दिया गया था। === पृष्ठभूमि === यह स्थिति स्थूल रूप से उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक रही जिसमें अनुवाद मुख्य रूप से व्यक्तिगत रुचि से प्रेरित अधिक था, सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित कम। इसके अतिरिक्त मौलिक लेखन की परिमाणगत प्रचुरता के कारण भी इस प्रकार की राय बनी। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् साम्राज्यवाद के खण्डित होने के फलस्वरूप अनेक छोटे-बड़े राष्ट्र स्वतन्त्र हुए तथा उनकी अस्मिता का प्रश्न महत्त्वपूर्ण हो गया। संघीय गणराज्यों के घटक भी अपनी अस्मिता के विषय में सचेत होने लगे। इस सम्पर्क-स्थापना तथा अस्मिता-विकास की स्थिति में भाषा का केन्द्रीय स्थान है, जो बहुभाषिकता की स्थिति के रूप में दिखाई पड़ता है। इसमें अनुवाद की सत्ता अवश्यम्भावी है। इसके फलस्वरूप अनुवाद प्रधान रूप से एक सामाजिक आवश्यकता बन गया है। विविध प्रकार के लेखनों के अनुवाद होने लगे। अनुवाद कार्य एक व्यवसाय हो गया। अनुवादकों को प्रशिक्षित करने के अभिकरण स्थापित हो गए, जिनमें अल्पकालीन और पूर्णसत्रीय पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं आदि का आयोजन किया जाने लगा। इसका यह भी परिणाम हुआ कि एक ओर तो अनुवाद के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण बदला तथा दूसरी ओर ज्ञानात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त के विकास को विशेष बल मिला तथा अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए अनुवाद सिद्धान्त की आवश्यकता को स्वीकार किया गया। फलस्वरूप, अनुवाद सिद्धान्त एक अपेक्षाकृत स्वतन्त्र ज्ञानशाखा बन गया, जिसकी जानकारी अनुवादक, अनुवाद शिक्षक, और अनुवाद समीक्षक, तीनों के लिए उपादेय हुआ। === सामयिक सन्दर्भ === अनुवाद के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा का सूत्रपात आधुनिक युग में ही हुआ, ऐसा समझना तथ्य और तर्क दोनों के ही विपरीत माना जाने लगा। अनुवाद कार्य की लम्बी परम्परा को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत बन गया कि अनुवाद कार्य के विषय में सैद्धान्तिक चर्चा की परम्परा भी पुरानी है। ईसा पूर्व पहली शताब्दी में [[सिसरो]] के लेखन में अनुवाद चिन्तन के बीज प्राप्त होते हैं और तत्पश्चात् भी इस विषय पर विद्वान् अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। इस चिन्तन की पृष्ठभूमि भी अवश्य रही है, यद्यपि उसे स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया। यह अवश्य माना गया कि जिस प्रकार अनुवाद कार्य का संगठित रूप में होना आधुनिक युग की देन है, उसी प्रकार अनुवाद सिद्धान्त की अपेक्षाकृत सुपरिभाषित पृष्ठभूमि का विकसित होना भी आधुनिक युग की देन है। अनुवाद सिद्धान्त के आधुनिक सन्दर्भ की मूल विशेषता है इसकी '''बहुपक्षीयता'''। यह किसी एकान्वित पृष्ठभूमि पर आधारित न होकर अनेक परन्तु परस्पर सम्बद्ध शास्त्रों की समन्वित पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिनके प्रसङ्गोचित अंशों से वह पृष्ठभूमि निर्मित है। मुख्य शास्त्र हैं - '''पाठ संकेत विज्ञान, सम्प्रेषण सिद्धान्त, भाषा प्रयोग सिद्धान्त, और तुलनात्मक अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान'''। यह स्पष्ट करना भी उचित होगा कि एक ओर मानव अनुवाद तथा यान्त्रिक अनुवाद, तथा दूसरी ओर लिखित अनुवाद और मौखिक अनुवाद के व्यावहारिक महत्त्व के कारण इनके सैद्धान्तिक पक्ष के विषय में भी चिन्तन आरम्भ होने लगा है। तथापि मानवकृत लिखित माध्यम के अनुवाद की ही परिमाणगत तथा गुणात्मक प्रधानता मानी जाती रही है तथा इनसे सम्बन्धित सैद्धान्तिक चिन्तन के मुद्दे विशेष रूप से प्रासंगिक (प्रासङ्गिक) हैं। यद्यपि प्राचीन भारतीय परम्परा में अनुवाद चिन्तन की परम्परा उतने व्यवस्थित तथा लेखबद्ध रूप में प्राप्त नहीं होती, जिस प्रकार पश्चिम में, तथापि अनुवाद चिन्तन के बीज अवश्य उपलब्ध हैं। तदनुसार, अनुवाद पुनरुक्ति है - एक भाषा में व्यंजित सन्देश को दूसरी भाषा में पुनः कहना। अनुवाद के प्रति यह दृष्टि पश्चिमी परम्परा में स्वीकृत धारणा से बाह्य स्तर पर ही भिन्न प्रतीत होती है। परन्तु इस दृष्टि को अपनाने से अनुवाद सम्बन्धी अनेक सैद्धान्तिक बिन्दुओं की अधिक विशद तथा संगत व्याख्या की गई है। इसी सम्बन्ध में दूसरी दृष्टि द्वन्द्वात्मकता की है। जो आधुनिक है तथा मुख्य रूप से संरचनावाद की देन है। अनुवाद कार्य की परम्परा को देखने से यह स्पष्ट है कि अनवाद सिद्धान्त सम्बन्धी चिन्तन साहित्यिक कृतियों को लेकर ही अधिक हुआ है। यह स्थिति सङ्गत भी है। विगत युग में साहित्यिक कृतियों को ही अनुवाद के लिए चुना जाता था। अब भी साहित्यिक कृतियों के ही अनुवाद अधिक परिमाण में होते हैं। तथापि, परिस्थितियों के अनुरोध से अब '''साहित्येतर लेखन''' का अनुवाद भी अधिक मात्रा में होने लगा है। विशेष बात यह है कि दोनों कोटियों के लेखनों में एक मूलभूत अन्तर है। जिसे लेखक की व्यक्तिनिष्ठता तथा निर्वैयक्तिकता की शब्दावली में अधिक स्पष्ट रीति से प्रकट कर सकते हैं। व्यक्तिनिष्ठ लेखन का, अपनी प्रकृति की विशेषता से, कुछ अपना ही सन्दर्भ है। यह कहकर हम दोनों की उभयनिष्ठ पृष्ठभूमि का निषेध नहीं कर रहे, परन्तु प्रस्तुत सन्दर्भ में हम दोनों की दूरी और आपेक्षिक स्वायत्तता को विशेष रूप से उभारना चाहते हैं। यह उचित ही है कि भाषाप्रयोग के पक्ष से '''निर्वैयक्तिक लेखन''' के अनुवाद के सैद्धान्तिक सन्दर्भ को भी विशेष रूप से उभारा जाए। === विस्तार === अनुवाद सिद्धान्त का एक विकासमान आयाम है '''अनुसन्धान की प्रवृत्ति'''। अनुवाद सिद्धान्त की बहुविद्यापरक प्रकृति के कारण विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ-भाषाविज्ञानी, समाजशास्त्री, मनोविज्ञानी, शिक्षाविद्, नृतत्वविज्ञानी, सूचना सिद्धान्त विशेषज्ञ-परस्पर सहयोग के साथ अनुवाद के सैद्धान्तिक अंशो पर शोधकार्य में रुचि लेने लगे। अनुवाद कार्य का क्षेत्र बढ़ता गया। अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों में सम्पर्क बढ़ा - लोग विदेशों में शिक्षा के लिए जाते, व्यापारिक-औद्योगिक संगठन विभिन्न देशों में काम करते, विभिन्न भाषा भाषी लोग सम्मेलनों में एक साथ बैठकर विमर्श करते, राष्ट्रों के मध्य राजनयिक अनुबन्ध होने लगे। इन सभी में अनुवाद की अनिवार्य रूप से आवश्यकता प्रतीत हुई और अनुवाद की विशिष्ट समस्याएँ उभरने लगी। इन समस्याओं का अध्ययन अनुवाद सम्बन्धी अनुसन्धान का उर्वर क्षेत्र बना। एक ओर भाषा और संस्कृति तथा दूसरी ओर भाषा और विचार के मध्य सम्बन्ध पर अनुवाद द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर नया चिन्तन सामने आया। मशीन अनुवाद तथा मौखिक अनुवाद के क्षेत्रों में नई-नई सम्भावनाएँ सामने आने लगी, जिसने इन क्षेत्रों में अनुवाद अनुसन्धान को गति प्रदान की। मानव अनुवाद तथा लिखित अनुवाद के परम्परागत क्षेत्रों पर भी भाषा अध्ययन की नई दृष्टियों ने विशेषज्ञों को नूतन पद्धति से विचार करने के लिए प्रेरित किया। इन सब प्रवृत्तियों से अनवाद सिद्धान्त को प्रतिष्ठा का पद मिलने लगा और इसे सैद्धान्तिक शोध के एक उपयुक्त क्षेत्र के रूप में स्वीकृति प्राप्त होने लगी।<ref>अनुवाद व्यवहार में शोध के लिए देखें, डफ 1981</ref> <ref>अनुवाद सिद्धान्त में शोध के लिए ब्रिसलिन १९७६</ref> अनुवाद दशा में पहला सार्थक प्रयास एच. एच. विल्सन ने [[१८५५|1855]] में ‘ग्लोरी ऑफ़ ज्यूडिशियल एण्ड रेवेन्यू टर्म्स' के द्वारा किया। सन् [[१९६१|1961]] में राजभाषा विधायी आयोग की स्थापना हुई। इसका काम अखिल भारतीय मानक विधि शब्दावली तैयार करना था। [[१९७०|1970]] में विधि शब्दावली का प्रकाशन हुआ। इसका परिवर्धन होता आ रहा है। इसका नवीन संस्करण [[१९८४|1984]] में निकला। इस आयोग ने कानून सम्बन्धी अनेक ग्रन्थो का अनुवाद किया है। कई न्यायालयों में न्यायाधीश हिन्दी में भी निर्णय देने लगे है। ==अनुवाद की परम्परा == अनुवाद की परम्परा बहुत पुरानी है। [[बाबल का मीनार|बेबल के मीनार]] (Tower of Babel) की कथा प्रसिद्ध ही है, जो इस तथ्य की ओर सङ्केत करती है कि, मानव समाज में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यह तर्कसङ्गत रूप से अनुमान किया जा सकता है कि पारस्परिक सम्पर्क की सामाजिक अनिवार्यता के कारण अनुवाद व्यवहार का जन्म भी बहुत पहले हो गया होगा। परन्तु जहाँ तक लिखित प्रमाणों का सम्बन्ध है, * अनुवाद परम्परा के आरम्भिक बिन्दु का प्रमाण ईसा से तीन सहस्र वर्ष पहले प्राचीन मिस्र के राज्य में, द्विभाषिक शिलालेखों के रूप में मिलता है। * तत्पश्चात् ईसा से तीन सौ वर्ष पूर्व [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] लोगों के [[यूनान|ग्रीक]] लोगों के सम्पर्क में आने पर [[यूनानी भाषा|ग्रीक]] से [[लातिन भाषा|लैटिन]] में अनुवाद हुए। * बारहवीं शताब्दी में [[स्पेन]] में [[इस्लाम]] के साथ सम्पर्क होने पर यूरोपीय भाषाओं में [[अरबी]] से अनुवाद हुए। बृहत् स्तर पर अनुवाद तभी होता है, जब दो भिन्न भाषाभाषी समुदायों में दीर्घकाल पर्यन्त सम्पर्क बना रहे तथा उसे सन्तुलित करने के प्रयास के अन्तर्गत अल्प विकसित संस्कृति के लोग सुविकसित संस्कृति के लोगों के साहित्य का अनुवाद कर अपने साहित्य को समृद्ध करें। ग्रीक से लैटिन में और अरबी से यूरोपीय भाषाओं में प्रचर अनुवाद इसी प्रवृत्ति के परिणाम माने जाते हैं। अनुवाद कार्य को इतिहास की प्रवृत्तियों की दृष्टि से दो भागों में विभाजित किजा जाता है - प्राचीन और आधुनिक। === प्राचीन परम्परा === प्राचीन युग में मुख्यतः तीन प्रकार की रचनाओँ के अनुवाद प्राप्त होते हैं। क्योंकि इन तीन क्षेत्रों में ही प्रायः ग्रन्थों की रचना होती थी। वें क्षेत्र हैं - साहित्य, दर्शन और धर्म। साहित्यिक रचनाओं में ग्रीक के [[इलियाड|इलियड]] और [[ओदिसी|ओडेसी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] के [[रामायण]] और [[महाभारत]] ऐसे ग्रन्थ हैं, जिनका व्यापक स्तर अनुवाद हुआ। दार्शनिक रचनाओं में [[प्लेटो]] के संवाद, अनुवाद की दृष्टि से लोकप्रिय हुए। धार्मिक रचनाओं में बाइबिल के सबसे अधिक अनुवाद पाए जाते हैं। === आधुनिक परम्परा === आधुनिक युग में अनुवाद के माध्यम से प्राचीन युग के ये महान ग्रन्थ अब विभिन्न भाषा भाषियों को उपलब्ध होने लगे हैं। अनुवाद तकनीक की दृष्टि से इन अनुवादों की विशेषता यह है कि, प्राचीन युग में ये अनुवाद विशेष रूप से एकपक्षीय रूप में होते थे अर्थात् जिस भाषा में अनुवाद किए जाते थे (= लक्ष्यभाषा) उनसे उनकी किसी रचना का मूल ग्रन्थ भाषा (= मूलभाषा या स्रोत भाषा) में अनुवाद नहीं होता था। इसका कारण यह कि मूल ग्रन्थों की तुलना में लक्ष्यभाषा के ग्रन्थ प्रायः उतने उत्कृष्ट नहीं होते थे, दूसरी बात यह कि मूल ग्रथों की भाषा के प्रति अत्यन्त आदर भावना के कारण लक्ष्य भाषा के रूप में प्रयोग में लाना सम्भवतः अनुचित समझा जाता था। आधुनिक युग में अनुवाद का क्षेत्र विस्तृत हो गया है। उपर्युक्त तीन के अतिरि [[विज्ञान]], [[प्रौद्योगिकी]], [[चिकित्साशास्त्र]], [[प्रशासन]], [[राजनय|कूटनीति]], [[विधिशास्त्र|विधि]], [[जनसंपर्क|जनसम्पर्क]] ([[भारत में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों की सूची|समाचार पत्र]] इत्यादि) तथा अन्य अनेक क्षेत्रों के ग्रन्थों और रचनाओं का अनवाद भी होने लगा है। प्राचीन युग के अनुवादों की तुलना में आधुनिक युग के अनुवाद द्विपक्षीय (बहुपक्षीय) रूप में होते हैं। आधुनिक युग में अनुवाद का आर्थिक और राजनीतिक महत्त्व भी प्रतिष्ठित हो गया है। विभिन्न राष्ट्रों के मध्य राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अनुबन्धों के प्रपत्र के द्विभाषिक पाठ तैयार किए जाते हैं। बहुराष्ट्रीय संस्थाओं को एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग करना पड़ता है। [[संयुक्त राष्ट्र]] में प्रत्येक कार्य पाँच या छः भाषाओं में किया जाता है। इन सब में अनिवार्य रूप से अनुवाद की आवश्यकता होती है। इस स्थिति का औचित्य भी है। आधुनिक युग में हुई औद्योगिक, प्रौद्योगिक, आर्थिक और राजनीतिक क्रान्ति के फलस्वरूप विश्व के राष्ट्रों में एक-दूसरे के निकट सम्पर्क की आवश्यकता की चेतना का अतीव शीघ्र विकास हुआ, उसके कारण अनुवाद को यह महत्त्व मिलना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि यदि प्राचीन युग की प्रेरक शक्ति अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि अधिक थी, तो आधुनिक युग में अनुवाद की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक आवश्यकता एक प्रबल प्रेरक शक्ति बनकर सामने आई है। इस स्थिति के अनेक उदाहरण मिलते हैं। भाषायी अल्पसंख्यक वर्ग के लेखकों की रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित होकर अधिक पढ़ी जाती हैं। अपेक्षाकृत छोटे तथा बहुभाषी राष्ट्रों को अपने देश के भीतर ही विभिन्न भाषाभाषी समुदायों के मध्य सम्पर्क स्थापित करने की समस्या का सामना करना पड़ता है। सामाजिक आवश्यकता के अनुरूप अनुवाद के इस महत्त्व के कारण अनुवाद कार्य अब संगठित रूप से होता देखा जाता है। राजनीतिक-आर्थिक कारणों से उत्पन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनुवाद अब एक व्यवसाय बन चुका है तथा व्यक्तिगत होने के साथ-साथ उसका संगठनात्मक रूप भी प्रतिष्ठित होता दिखता है। अनुवाद कौशल को सिखाने के लिए शिक्षा संस्थाओं में प्रबन्ध किए जाते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से भी प्रशिक्षण संस्थान काम करते हैं। ==भारत में अनुवाद की परम्परा == भारत एक बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और बहुधर्मी देश है। यहाँ सदियों से संस्कृत, पालि, प्राकृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला, हिंदी, उर्दू जैसी सैकड़ों भाषाएँ साथ-साथ फलती-फूलती रही हैं। ऐसी स्थिति में अनुवाद कोई नई बात नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक आवश्यकता रही है। अनुवाद का अर्थ केवल शब्दों को बदलना नहीं है, बल्कि विचारों, भावनाओं, धार्मिक उपदेशों, साहित्य और ज्ञान को एक भाषा से दूसरी भाषा में ले जाना है—बिना मूल भाव खोए। भारत में अनुवाद का इतिहास संवाद, आदान-प्रदान और समरसता की परंपरा का इतिहास है। यह धर्म को फैलाता रहा, संस्कृति को जोड़ता रहा, ज्ञान को साझा करता रहा और राष्ट्र को एक रखता रहा। इस लेख में हम अनुवाद की यात्रा को बौद्ध काल से आधुनिक काल तक देखेंगे। यह यात्रा दिखाती है कि अनुवाद ने भारत को विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण बनाया है। === अनुवाद की प्रारंभिक नींव === : (बौद्ध काल ; लगभग ५वीं शताब्दी ई.पू. से 5वीं शताब्दी ई.) भारत में संगठित और बड़े पैमाने पर अनुवाद की शुरुआत [[बौद्ध धर्म|बौद्ध काल]] से मानी जाती है। बौद्ध धर्म का प्रसार जब उत्तर भारत से दक्षिण, पूर्व और विदेशों तक हुआ, तो उसके ग्रंथों और उपदेशों को आम लोगों की भाषा में पहुँचाना आवश्यक हो गया। बुद्ध के [[उपदेश]] मूल रूप से [[मागधी]] में थे, जिन्हें [[त्रिपिटक]] के रूप में संकलित किया गया। बौद्ध धर्म जब [[श्रीलंका]], म्यांमार, थाईलैंड गया, तो [[पालि]] में अनुवाद हुआ। भारत में ही इन्हें [[प्राकृत]] और बाद में [[संस्कृत]] में अनूदित किया गया। [[कुमारजीव]] (४थी शताब्दी) ने [[चीन]] जाकर सैकड़ों बौद्ध सूत्रों का [[चीनी भाषा]] में अनुवाद किया। [[अतीश दीपंकर]] और बोधिधर्म ने [[तिब्बती]] और चीनी में अनुवाद किए। श्रीलंका में [[बुद्धघोष]] ने पालि टीकाएँ लिखीं और ग्रंथों को व्यवस्थित किया। बौद्ध अनुवादक शब्द-शब्द अनुवाद नहीं करते थे, वे अर्थ और भाव को प्राथमिकता देते थे। उदाहरण के लिए “दुख” शब्द को चीनी में “कू” कहा गया, जो दुख के साथ जीवन की कठिनाई को भी दर्शाता है। इस प्रकार बौद्ध काल में अनुवाद ने धर्म को जन-जन तक पहुँचाया और भारतीय दर्शन को विश्व स्तर पर स्थापित किया। === गुप्तोत्तर काल और मध्यकाल में अनुवाद परम्परा === (५वीं से १६वीं शताब्दी तक) यह काल भक्ति और सांस्कृतिक एकीकरण का काल था। [[रामायण]] और [[महाभारत]] के अनगिनत अनुवाद हुए : [[तमिल]] में [[कंबन रामायण]] (12वीं शताब्दी), बांग्ला में कृतिवास रामायण, अवधी में तुलसीदास की [[रामचरितमानस]] (16वीं शताब्दी), मराठी में एकनाथ की भागवत रामायण। ये अनुवाद केवल कहानी नहीं, लोक संस्कृति का हिस्सा बने। भक्ति आंदोलन में कबीर, सूरदास, मीरा, नानक ने संस्कृत ग्रंथों के दर्शन को लोकभाषा में ढाला। तुलसीदास ने वाल्मीकि रामायण को भावानुवाद के रूप में प्रस्तुत किया। जयदेव के गीतगोविंद का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ। इस्लामी शासन में अकबर ने अनुवाद विभाग बनवाया। महाभारत का फ़ारसी अनुवाद रज़्मनामा, रामायण, उपनिषद, [[पंचतंत्र]], हितोपदेश का [[फ़ारसी]] में अनुवाद हुआ। [[दारा शिकोह]] ने [[उपनिषद|उपनिषदों]] का फ़ारसी अनुवाद कराया, जिसका बाद में [[लैटिन]] अनुवाद हुआ। इस काल में अनुवाद ने हिंदू-मुस्लिम संवाद, भक्ति भाव और क्षेत्रीय साहित्य की समृद्धि को बढ़ावा दिया। ===औपनिवेशिक काल === (१८वीं–२०वीं शताब्दी का पूर्वार्ध तक) ब्रिटिश शासन के साथ भारत में अनुवाद की दिशा बदली। अब यह शिक्षा, प्रशासन और मिशनरी कार्य का हिस्सा बना। लेकिन भारतीयों ने इसे राष्ट्रीय जागरण का हथियार भी बनाया। विलियम केरी (फोर्ट विलियम कॉलेज) ने बाइबिल का बांग्ला, हिंदी, मराठी, उड़िया, संस्कृत में अनुवाद किया। इससे भारतीय भाषाओं में आधुनिक गद्य शैली का विकास हुआ। [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र]] ने अंग्रेजी नाटक (शेक्सपियर), संस्कृत नाटक और बांग्ला साहित्य का हिंदी में अनुवाद किया। [[महावीर प्रसाद द्विवेदी]] ने वैज्ञानिक और सामाजिक लेखों का अनुवाद किया। हिंदी में पहली बार निबंध, नाटक, उपन्यास की नई शैली आई। [[रवींद्रनाथ ठाकुर]] ने [[गीतांजलि]] का खुद अंग्रेजी में अनुवाद किया और 1913 में [[नोबेल पुरस्कार]] जीता। यह स्वानुवाद की अनोखी मिसाल थी। राष्ट्रीय आंदोलन में गांधीजी के [[हिन्द स्वराज]] का गुजराती से हिंदी, अंग्रेजी, मराठी में अनुवाद हुआ। नेहरू, टैगोर, प्रेमचंद के लेख विभिन्न भाषाओं में अनूदित हुए। समाचार-पत्र जैसे केसरी, बॉम्बे क्रॉनिकल में अनुवादित लेख छपते थे। अनुवाद ने आधुनिक शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और भाषाई जागरण को बल दिया। यह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ हथियार भी बना। === स्वतंत्र भारत और आधुनिक काल === (1947 से अब तक) भारत की स्वतंत्रता के बाद अनुवाद राष्ट्रीय एकता, शिक्षा, विज्ञान और वैश्विक संवाद का आधार बना। सरकार, संस्थाएँ और व्यक्ति तीनों स्तरों पर अनुवाद होने लगे। भारतीय संविधान अंग्रेजी और हिंदी में है, सभी 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद हुआ। संसद, विधानसभा, सरकारी योजनाओं का बहुभाषी अनुवाद होता है। [[साहित्य अकादमी]] ने 1954 से परस्पर अनुवाद योजना शुरू की। प्रेमचंद (हिंदी) साहित्य का तमिल, मलयालम; महाश्वेता देवी (बांग्ला) के साहित्य का हिंदी और अंग्रेजी में, आर.के. नारायण के साहित्य का विश्व की 30 से अधिक भाषाओं में, दलित और स्त्री साहित्य का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद हुआ। टॉलस्टॉय, दोस्तोव्स्की, काफ्का, मार्केज़, नेरुदा के हिंदी अनुवाद हुए। हैरि पॉटर, लॉर्ड ऑफ द रिंग्स का हिंदी, तमिल, बांग्ला में अनुवाद हुआ । [[जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय]], [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] जैसे अनेक भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुवाद अध्ययन कोर्स या विषय के रूप स्नातक पाठ्यक्रम शुरू हुआ। == व्याख्याएँ == * ''ज्ञातस्य कथनमनुवादः'' - ज्ञात का (पुनः) कथन अनुवाद है। ([[जैमिनिन्यायमाला]]) * ''प्राप्तस्य पुनः कथनेऽनुवादः'' - पूर्वकथित का पुनः कथन अनुवाद है। ([[शब्दार्थचिन्तामणिः]]) * ''आवृत्तिरनुवादो वा'' - पुनरावर्तन ही अनुवाद है। ([[भर्तृहरि]], वाक्यपदीयम्) <ref>{{Cite web|url=https://sa.wikisource.org/wiki/वाक्यपदीयम्/द्वितीयः_खण्डः|title=वाक्यप्रदीपीयम्, द्वितीयः खण्डः, श्लो. ११५|last=|first=|date=|website=|language=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> * लेखक होना सरल है, किन्तु अनुवादक होना अत्यन्त कठिन है। - मामा वरेरकर * प्रत्येक कृति अनुवाद योग्य है, परन्तु प्रत्येक कृति का अच्छा अनुवाद नहीं किया जा सकता। -खुशवन्त सिंह * अनुवाद, प्रकाश के आने के लिए वातायन खोल देता है; वह छिलके को छोड़ देता है जिससे हम गूदे का स्वाद ले सकें। - बाइबिल * If one denies the concept of translation, one must give up the concept of a language community. - KARL VOSSLER * The peculiar (विलक्षण) genious of a language appears best in the process of translation. - MARGARET MUNSTERBERG * Say what one will of the inadequacy of translation, it remains one of the most important and worthiest concerns in the totality of world affaris. - J.W.V. GOETHE == अनुवाद की परिभाषा == एक विशिष्ट प्रकार के भाषिक व्यापार के रूप में अनुवाद, भारतीय परम्परा की दृष्टि से, कोई नई बात नहीं। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द और उससे उपलक्षित भाषिक व्यापार भारतीय परम्परा में बहुत पहले से चले आए हैं। अतः 'अनुवाद' शब्द और इसके अंग्रेजी पर्याय ‘ट्रांसलेशन' के व्युत्पत्तिमूलक और प्रवृत्तिमूलक अर्थों की सहायता से अनुवाद की परिभाषा और उसके स्वरूप को श्रेष्ठतर रूप से जाना जा सकता है। === व्यत्पत्तिमूलक अर्थ === 'अनुवाद' का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है - पुनः कथन; एक बार कही हुई बात को दोबारा कहना। इसमें 'अर्थ की पुनरावृत्ति होती हैं, शब्द (शब्द रूप) की नहीं। 'ट्रांसलेशन' शब्द का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ है 'परिवहन' अर्थात् एक स्थान-बिन्दु से दूसरे स्थान-बिन्दु पर ले जाना। यह स्थान-बिन्दु भाषिक पाठ है। इसमें भी ले जाई जाने वाली वस्तु अर्थ होता है, शब्द नहीं। उपर्युक्त दोनों शब्दों में अन्तर व्युत्पत्तिमूलक अर्थ की दृष्टि से है, अतः सतही है। वास्तविक व्यवहार में दोनों की समानता स्पष्ट है। अर्थ की पुनरावृत्ति को ही दूसरे शब्दों में और प्रकारान्तर से, अर्थ का भाषान्तरण कहा जाता है, जिसमें कई बार मूल भाषा की रूपात्मक-गठनात्मक विशेषताएँ लक्ष्यभाषा में संक्रान्त हो जाती है। वस्तुतः 'अनुवाद' शब्द का भारतीय परम्परा वाला अर्थ आधुनिक सन्दर्भ में भी मान्य है और इसी को केन्द्र बिन्दु बनाकर अनुवाद की प्रकृति को अंशशः समझा जाता है। तदनुसार, '''अनुवाद कार्य के तीन सन्दर्भ हैं - समभाषिक, अन्यभाषिक और अन्तरसंकेतपरक।''' ==== समभाषिक अनुवाद ==== समभाषिक सन्दर्भ में अर्थ की पुनरावृत्ति एक ही भाषा की सीमा के अन्तर्गत होती है, परन्तु इसके आयाम भिन्न-भिन्न हो जाते हैं। मुख्य आयाम दो हैं -'''कालक्रमिक और समकालिक'''। कालक्रमिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद एक ही भाषा के ऐतिहासिक विकास की दो निकटस्थ अवस्थाओं में होता है, जैसे, पुरानी हिन्दी से आधुनिक हिन्दी में अनुवाद। समकालिक आयाम पर समभाषिक अनुवाद मुख्य रूप से तीन स्तरों पर होता है - '''बोली, शैली और माध्यम'''। बोली स्तर पर समभाषिक अनुवाद के चार उपस्तर हो सकते हैं : (क) एक भौगोलिक बोली से दूसरी भौगोलिक बोली में; जैसे [[बृज भाषा|ब्रज]] से [[अवधी]] में। (ख) अमानक बोली से मानक बोली में; जैसे [[गंजाम जिला|गंजाम ओड़िया]] से [[पुरी जिला|पुरी की ओड़िया]] में अथवा [[नागपुरी भाषा|नागपुर मराठी]] से [[पुणे जिला|पुणे मराठी]] में। (ग) बोली रूप से भाषा रूप में, जैसे ब्रज या अवधी से [[हिन्दी]] में (घ) एक सामाजिक बोली से दूसरी सामाजिक बोली में, जैसे अशिक्षितों या अल्पशिक्षितों की भाषा से शिक्षितों की भाषा में या एक धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा से अन्य धर्म में दीक्षित लोगों की भाषा में। शैली स्तर पर समभाषिक अनुवाद को शैली-विकल्पन के रूप में भी देखा जा सकता है। इसका एक अच्छा उदाहरण है औपचारिक शैली से अनौपचारिक शैली में अनुवाद; जैसे ‘धूम्रपान वर्जित है' (औपचारिक शैली) → ‘बीड़ी सिगरेट पीना मना है' (अनौपचारिक शैली)। इसी प्रकार ‘ट्यूबीय वायु आधान में सममिति नहीं रह गई। है' (तकनीकी शैली) -> 'टायर की हवा निकल गई है' (गैरतकनीकी शैली)। माध्यम की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की स्थिति वहाँ होती है जहाँ मौखिक माध्यम में प्रस्तुत सन्देश की लिखित माध्यम में या इसके विपरीत पुनरावृत्ति की जाए; जैसे, मौखिक माध्यम का का एक वाक्य है : "समय की सीमा के कारण मैं अपने श्रोताओं को अधिक विस्तार से इस विषय में नहीं बता पाऊँगा।" इसी को लिखित माध्यम में इस प्रकार से कहना सम्भवतः उचित माना जाता है : "स्थान की सीमा के कारण मैं अपने पाठकों को अधिक विस्तार से इस विषय का स्पष्टीकरण नहीं कर सकुंगा।" ('समय' → 'स्थान', 'श्रोता' → 'पाठक'; 'विषय में बता पाना' > 'का स्पष्टीकरण कर सकना')। समभाषिक अनुवाद के उपर्युक्त उदाहरणों से दो बातें स्पष्ट होती हैं। (क) अर्थान्तरण या अर्थ की पुनरावृत्ति की प्रक्रिया में शब्दचयन तथा वाक्य-विन्यास दोनों प्रभावित होते हैं। माध्यम अनुवाद में [[स्वनप्रक्रिया]] की विशेषताएँ (बलाघात, अनुतान आदि) लिखित व्यवस्था की विशेषताओं (विराम-चिह्न आदि) का रूप ले लेती हैं या इसके विपरीत होता है। (ख) बोली, शैली, और माध्यम के आयामों के मध्य कठोर विभाजन रेखा नहीं, अपि तु इनमें आंशिक अतिव्याप्ति पाई जाती है, जिसकी सम्भावना भाषा प्रयोग की प्रवृत्ति में ही निहित है। जैसे, शैलीगत अनुवाद की आंशिक सत्ता माध्यम अनुवाद में दिखाई देती है, और तदनुसार 'के विषय में बता पाना' जैसा मौखिक माध्यम का, अत एव अनौपचारिक, चयन, लिखित माध्यम में औपचारिकता का स्पर्श लेता हुआ 'का स्पष्टीकरण कर सकना' हो जाता है। इसी प्रकार शैलीगत अनुवाद में सामाजिक बोलीगत अनुवाद भी कभी-कभी समाविष्ट हो जाता है। जैसे, शिक्षितों की बोली में, औपचारिक शैली की प्रधानता की प्रवृत्ति हो सकती है और अल्पशिक्षितों या अशिक्षितों की बोली में अनौपचारिक शैली की। समभाषिक अनुवाद की समस्याएँ न केवल रोचक हैं अपि तु अन्यभाषिक अनुवाद की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भी हैं। अनुवाद को भाषाप्रयोग की एक विधा के रूप में देखने पर समभाषिक अनुवाद का महत्त्व और भी स्पष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्यभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझने की दृष्टि से समभाषिक अनुवाद की प्रकृति को समझना न केवल सहायक है, अपि तु आवश्यक भी है। ये कहा जा सकता है कि '''अनुवाद व्युत्पन्न भाषाप्रयोग है,''' जिसके दो सन्दर्भ हैं - समभाषिक और अन्यभाषिक। इस सन्दर्भ भेद से अनुवाद व्यवहार में अन्तर आ जाता है, परन्तु दोनों ही स्थितियों में अनुवाद की प्रकृति वही रहती है। ==== अन्यभाषिक अनुवाद ==== अन्यभाषिक अनुवाद दो भाषाओं के बीच में होता है। ये दो भाषाएँ ऐतिहासिकता और क्षेत्रीयता के समन्वित मानदण्ड पर स्वतन्त्र भाषाओं के रूप में पहचानी जाती हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से एक ही धारा में आने वाली भाषाओं को सामान्यतः उस स्थिति में स्वतन्त्र भाषा के रूप में देखते हैं यदि वह कालक्रम में एक दूसरे के निकट सन्निहित न हों, जैसे संस्कृत और हिन्दी; इन दोनों के मध्य प्राकृत भाषाएँ आ जाती हैं। इसी प्रकार क्षेत्रीयता की दृष्टि से प्रतिवेशी भाषाओं में अत्यधिक आदन-प्रदान होने पर भी उन्हें भिन्न भाषाएँ ही मानना होगा, जैसे हिन्दी और [[पंजाबी]]। अन्यभाषिक अनुवाद के सन्दर्भ में सम्बन्धित भाषाओं का स्वतन्त्र अस्तित्व महत्त्व की बात होती है। समभाषिक अनुवाद की तुलना में अन्यभाषिक अनुवाद सामाजिक और व्यावहारिक दृष्टि से अधिक महत्त्वपूर्ण है। भाषाप्रयोग की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की समस्याओं में समभाषिक अनुवाद की समस्याओं से गुणात्मक अन्तर दिखाई पड़ता है। इस प्रकार समभाषिक अनुवाद से सम्बन्धित होते हुए भी अन्यभाषिक अनुवाद, अपेक्षाकृत स्वनिष्ठ व्यापार है। ==== अन्तरसंकेतभाषिक / अन्तरसङ्केतभाषिक अनुवाद ==== अनुवाद शब्द के उपर्युक्त दोनों सन्दर्भ अपेक्षाकृत सीमित हैं। इनमें अनुवाद को भाषा-संकेतों का व्यापार माना गया है। वस्तुतः भाषा-संकेत, संंकेतों की एक विशिष्ट श्रेणी है, जिनके द्वारा सम्प्रेषण कार्य सम्पन्न होता है। सम्प्रेषण के लिए विभिन्न कोटियों के संकेतों को काम में लिया जाता है। इन्हें सामान्य संकेत कहा जाता है। इस दृष्टि से भी अनुवाद शब्द की परिभाषा की जाती है। इसके अनुसार एक संकेतों द्वारा कही गई बात को दुसरी कोटि के संकेतों द्वारा पुनः कहना इस प्रकार के अनुवाद को अन्तरसंकेतपरक अनुवाद कहा जाता है। यह सामान्य संकेत विज्ञान के अन्तर्गत है। भाषिक संकेतों को प्रवर्तन बिन्दु मानकर संकेतों को भाषिक और भाषेतर में विभक्त किया जाता है। भाषेतर में दो भाग हैं - बाह्य (बाह्य ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्राह्य) और आन्तरिक (अन्तरिन्द्रिय द्वारा ग्राह्य)। अनुवाद की दृष्टि से संकेत-परिवर्तन के व्यापार की निम्नलिखित कोटियाँ बन सकती हैं : '''[[१|1]]. बाह्य संकेत का बाह्य संकेत में अनुवाद''' - इसके अनुसार किसी देश का मानचित्र उस देश का अनुवाद है; किसी प्राणी का चित्र उस प्राणी का अनुवाद है। '''[[२|2]]. बाह्य संकेत का भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी प्राणी के लिये किसी भाषा में प्रयुक्त कोई शब्द उस प्राणी का अनुवाद है। इस दृष्टि से वस्तुतः यहाँ भाषा दर्शन की समस्या है जिसकी व्याख्या अर्थ के संकेत सिद्धान्त में की गई है। '''[[३|3]]. आन्तरिक संकेत से आन्तरिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी एक घटना को उसकी समशील संवेदना में परिवर्तित करना इस श्रेणी का '''[[४|4]]. आन्तरिक संकेत से भाषिक संकेत में अनुवाद -''' इसके अनुसार किसी आन्तरिक संवेदना के लिए किसी शब्द का प्रयोग करना इस कोटि का अनुवाद है। इसको अधिक स्पष्टता से कहा जाता है कि, किसी भौतिक स्थिति के साथ सम्पर्क होने पर - जैसे, किसी दुर्घटना को देखकर, प्रकृति के किसी दृश्य को देखकर, किसी वस्तु को हाथ लगाकर, कुछ सँघकर; दूसरे शब्दों में इन्द्रियार्थ सन्निकर्ष होने पर - मन में जिस संवेदना का उदय होता है वह एक प्रकार का संकेत है। उसके लिये भाषा के किसी शब्द का प्रयोग करना या भाषिक संकेत द्वारा उसकी पुनरावृत्ति करना इस कोटि का अनुवाद कहलाएगा। उदाहरण के लिए, एक विशिष्ट प्रकार की वेदना का संकेत करने के लिए हिन्दी में ‘शोक' शब्द का प्रयोग किया जाता है और दूसरी के लिए 'प्रेम' का। समझा जाता है कि एक संवेदना का अनुवाद ‘शोक' शब्द द्वारा किया जाता है और दूसरी का 'प्रेम' द्वारा। इस दृष्टि से यह कहा जाता है कि समस्त मौलिक अभिव्यक्ति अनुवाद है।<ref>स० ही वात्स्यायन कहते हैं, "समस्त अभिव्यक्ति अनुवाद है क्योंकि वह अव्यक्त (या अदृश्य आदि) को भाषा (या रेखा या रंग) में प्रस्तुत करती है।" ('अनुवाद : कला और समस्याएँ' 1961, पृ० 4)। यह भी द्रष्टव्य है कि संस्कृत परम्परा में 'अनुवाद' शब्द का एक अर्थ है वाणी का प्रयोग = वाचारंभनमात्रम् (शब्दकल्पद्रुम), जो मौलिक अभिव्यक्ति का पर्याय है ।</ref> वक्ता या लेखक अपने संवेदना रूपी संकेतों की भाषिक संकेतों में पुनरावृत्ति कर देता है। इस दृष्टि से यह भाषा मनोविज्ञान की समस्या है, जिसकी व्याख्या [[उद्दीपक (मनोविज्ञान)|उद्दीपन-अनुक्रिया]] सिद्धान्त में की गई है। इस प्रकार, अनुवाद शब्द की व्यापक परिधि में तीनों सन्दर्भों के अनुवादों का स्थान है -समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद। तीनों का अपना-अपना सैद्धान्तिक आधार है। इन तीनों के मध्य का भेद जानना महत्त्वपूर्ण है। अनुवादक को यह स्थिर करना है कि इन तीनों में केन्द्रीय स्थिति किसकी है तथा शेष दो का उनके साथ कैसा सम्बन्ध है। सैद्धान्तिक औचित्य की दृष्टि से अन्यभाषिक अनुवाद की स्थिति केन्द्रीय है। केवल ‘अनुवाद' शब्द (विशेषणरहित पद) से अन्यभाषिक अनुवाद का अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसका मूल है द्विभाषाबद्धता। अनुवादक का बोधन तथा अभिव्यक्ति दोनों स्थितियों में ही भाषा से बँधे रहते हैं और ये भाषाएँ भी भेद (काल, स्थान या प्रयोग सन्दर्भ पर आधारित भेद) की दृष्टि से नहीं, अपि तु कोड की दृष्टि से भिन्न-भिन्न होती हैं; जैसे हिन्दी और अंग्रेजी, हिन्दी और सिन्धी आदि। इस केन्द्रीय स्थिति के दो छोर हैं। प्रथम छोर पर दोनों स्थितियों में भाषाबद्धता रहती है, परन्तु भाषा वही रहती है। स्थितियों को अन्तर उसी भाषा के भेदों के अन्तर पर आधारित होता है। यह समभाषिक अनुवाद है। पारिभाषिक शब्दों के प्रयोग की स्पष्टता के लिए इसे 'अन्वयान्तर' या 'शब्दान्तरण' कहा जाता है। दूसर छोर पर भाषेतर संकेत का भाषिक संकेत में परिवर्तन होता है। संकेत पद्धति का यह परिवर्तन भाषा प्रयोग की सामान्य स्थिति को जन्म देता है। पारिभाषिक शब्दावली में इसे 'भाषा व्यवहार' कहा जाता है। इन तीनों (समभाषिक अनुवाद, अन्यभाषिक अनुवाद, और अन्तरसंकेतपरक अनुवाद) में सम्बन्ध तथा अन्तर दोनों हैं। यह सम्बन्ध उभयनिष्ठ है। अनुवाद (अन्यभाषिक अनुवाद) की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक अनुवाद कार्य में तथा अनूदित पाठ के मूल्यांकन में अनुवादकों को समभाषिक अनुवाद तथा अन्तरसंकेतपरक अनुवाद की संकल्पनाओं से सहायता मिलती है। यह आवश्यकता तभी मुखर रूप से सामने आती है, जब अनुवाद करते-करते अनुवादक कभी अटक जाते हैं -मूल पाठ का सम्यक् बोधन नहीं हो पातें, लक्ष्यभाषा में शुद्ध और उपयुक्त अनुवाद का पर्याप्ततया अन्वेषण करने में कठिनाई होती है, अनुवादक को यह जाँचना होता है कि अनुवाद कितना सफल है, इत्यादि। === प्रवृत्तिमूलक अर्थ === प्रवृत्तिमूलक में (व्यवहार में) 'अनुवाद' शब्द से अन्यभाषिक अनुवाद का ही अर्थ लिया जाता है। और इसी कारण शनैः शनैः यह बात सिद्धान्त का भी अङ्ग बन गई है कि अनुवाद दो भाषाओं के मध्य होने वाली प्रक्रिया है। इस स्थिति का स्वीकार किया जाता है। संस्कृत परम्परा का 'छाया' शब्द इसी स्थिति का सङ्केत करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। === परिभाषा के दृष्टिकोण === अनुवाद के स्वरूप को समझने के लिए अनुवाद की परिभाषा विशेष रूप से सहायक है। अनुवाद की बहुपक्षीयता को देखते हुए अनुवाद की परिभाषा विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत की गई है। मुख्य दृष्टिकोण तीन प्रकार के हैं - (१) अनुवाद एक प्रक्रिया है। (२) अनुवाद एक प्रक्रिया अथवा/और उसका परिणाम है। (३) अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है। ==== अनुवाद एक प्रक्रिया है ==== इस दृष्टिकोण के अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषाएँ उद्धृत की जाती हैं : (क) "मूलभाषा के सन्देश के सममूल्य सन्देश को लक्ष्यभाषा में प्रस्तुत करने की क्रिया को अनुवाद कहते हैं। सन्देशों की यह मूल्यसमता पहले अर्थ और फिर शैली की दृष्टि से, तथा निकटतम एवं स्वाभाविक होती है।" (नाइडा तथा टेबर)<ref>नाइडा तथा टेबर १९६९ : १२</ref> (ख) "अनुवाद वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण सन्देश या देश का अर्थ) एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा-समुदाय को सम्प्रेषित किया जाता है।" (पट्टनायक)<ref>पट्टनायक १९६८ : ५७</ref> (ग) "एक भाषा की पाठ्यसामग्री को दूसरी भाषा की समानार्थक पाठ्यसामग्री द्वारा प्रस्थापित करना अनुवाद कहलाता है।" (कैटफोर्ड)<ref>कैटफोर्ड १९६५ : २०</ref> (घ) "अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित सन्देश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी सन्देश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।" (न्यूमार्क)<ref>न्यूमार्क १९७६ : ९</ref> ==== अनुवाद एक प्रक्रिया या उसका परिणाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्न लिखित परिभाषा को उद्धृत किया जाता है : (क) "एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्थानान्तरित करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।" (हार्टमन तथा स्टार्क)<ref>हार्टमन तथा स्टार्क १९७२: २४२</ref> ==== अनुवाद एक सम्बन्ध का नाम है ==== इसके अन्तर्गत निम्नलिखित परिभाषा आती है : (क) "अनुवाद एक सम्बन्ध है, जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है; ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं (दोनों पाठों का सन्दर्भ समान होता है और उनसे व्यंजित होने वाला सन्देश भी समान होता है)।" (हैलिडे)<ref>हैलिडे १९६४ : १२४</ref> अनुवाद की परिभाषाओं का यह वर्गीकरण जहाँ अनुवाद की प्रकृति की बहुपक्षीयता को स्पष्ट करता है, वहाँ इससे यह संकेत भी मिलता है कि, विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार अनुवाद की परिभाषाएँ भी भिन्न-भन्न हो सकती हैं। इस प्रकार ये सभी परिभाषाएँ मान्य हैं। इन परिभाषाओं के आधार पर अनुवाद के दो पक्ष माने जाते हैं। === अनुवाद के पक्ष === अनुवाद के दो पक्ष हैं - पहला '''संक्रियात्मक पक्ष''' अत एव गतिशील और दूसरा '''सैद्धान्तिक पक्ष''' अत एव स्थितिशील। ==== संक्रियात्मक पक्ष ==== संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद एक प्रक्रिया है। अनुवाद के पक्ष का सम्बन्ध अनुवाद करने के कार्य से है जिसके लिए 'अनुवाद कार्य' शब्द का प्रयोग करना उचित माना जाता है। ==== सैद्धान्तिक पक्ष ==== सैद्धान्तिक दृष्टि से अनुवाद एक सम्बन्ध है जो दो या दो से अधिक, परन्तु विभिन्न भाषाओं के पाठों के मध्य होता है; परन्तु वे समानार्थक होने चाहिए। इस सम्बन्ध का उद्घाटन तुलनात्मक पद्धति के अध्ययन से किया जाता है। इन दोनों का समन्वित रूप इस धारणा में मिलता है कि अनुवाद एक निष्पत्ति है - कार्य का परिणाम अनुवाद है - जो अपने मूल पाठ से पर्यायता के सम्बन्ध से जुड़ा है। निष्पत्ति के रूप में अनुवाद को 'अनूदित पाठ' कहा जाता है। इस दृष्टि से एक मूल पाठ के अनेक अनुवाद हो सकते हैं। इस प्रकार संक्रियात्मक दृष्टि से अनुवाद को जहाँ भाषा प्रयोग की एक विधा के रूप में जाना जाता है, वहाँ सैद्धान्तिक दृष्टि से इसका सम्बन्ध भाषा पाठ तुलना तथा व्यतिरेकी विश्लेषण की तकनीकों पर आधारित भाषा सम्बन्धों के प्रश्न से (तुलनात्मक-व्यतिरेकी पाठ भाषाविज्ञान यही है) जोड़ा जाता है। अनुवाद को अनुप्रयुक्त [[भाषाविज्ञान]] की शाखा कहा गया है। वस्तुतः, अपने इस रूप में यह अपने प्रक्रिया रूप तथा सम्बन्ध रूप परिभाषाओं की योजक कड़ी है, जिसका संक्रियात्मक आधार अनूदित पाठ है, जिसके मूल में 'अनुवाद एक निष्पत्ति है' की धारणा निहित है। इन परिभाषाओं से अनुवाद के विषय में जो अन्य जानकारी मिलती है, वें बन्दुवार निम्न प्रकार से हैं - (१) अनुवाद एक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषा भेद में होता है। (२) यह प्रक्रिया, परिवर्तन, स्थानान्तरण, प्रतिस्थापन, या पुनरावृत्ति की प्रकृति की होती है। (३) स्थानान्तरित होने वाली वस्तु को विभिन्न नामों से इङ्गित कर सकते हैं, जैसे पाठ्यसामग्री, सार्थक अनुभव, सूचना, सन्देश। ये विभिन्न नाम अनुवाद की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि के विभिन्न आयोमों तथा अनुवाद कार्य के उद्देश्यों में अन्तर से जुड़े हैं। जैसे, भाषागत 'पाठ्यसामग्री' नाम से व्यक्त होने वाली सुनिश्चितता अनुवाद के भाषावैज्ञानिक आधार की विशेषता है, जिसका विशेष उपयोग मशीन अनुवाद में होता है। 'सूचना' और 'सार्थक अनुभव' अनुवाद के समाजभाषागत आधार का संकेत करते हैं; और ‘सन्देश' से अनुवाद की पाठसंकेतपरक पृष्ठभूमि उपलक्षित होती है। (४) उपर्युक्त की विशेषता यह होती है कि इसका दोनों भाषाओं में समान अर्थ होता है। यह अर्थ की समानता व्यापक दृष्टि से होती है और भाषिक अर्थ से लेकर सन्दर्भमूलक अर्थ तक व्याप्त रहती है। संक्षेप में, एक भाषा के विशिष्ट भाषाभेद के विशिष्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्रस्तुत करना अनुवाद है, जिसमें वह मूल के भाषिक अर्थ, प्रयोग के वैशिष्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शैली की विशेषता, विषयवस्तु, तथा सम्बद्ध सांस्कृतिक वैशष्ट्यि को यथासम्भव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभाविक रूप से ग्राह्य प्रतीत हो। == अनुवाद का महत्त्व == बीसवीं सदी को अनुवाद का युग कहा गया है। यद्यपि अनुवाद सबसे प्राचीन व्यवसाय या व्यवसायों में से एक कहलाता है तथापि उसके जो महत्त्व बीसवीं सदी में प्राप्त हुआ वह उससे पहले उसे नहीं मिला ऐसा माना जाता है। इसका मुख्य कारण माना गया है कि बीसवीं शताब्दी में ही भाषासम्पर्क अर्थात् भिन्न भाषाभाषी समुदायों में सम्पर्क की स्थिति प्रमुख रूप से आरम्भ हुई। इसके मूल कारण आर्थिक और राजनीतिक माने जाते हैं। फलस्वरूप, विश्व का आर्थिक-राजनीतिक मानचित्र परिवर्तित होने लगा। वर्तमान यग में अधिकतर राष्ट्रों में यदि एक भाषा प्रधान है तो एक या अधिक भाषाएँ गौण पद पर दिखाई देती हैं। दूसरे शब्दों में, एक ही राजनीतिक-प्रशासनिक इकाई की सीमा के अन्तर्गत भाषायी बहुसंख्यक भी रहते हैं और भाषायी अल्पसंख्यक भी। [[लोकतंत्र|लोकतन्त्र]] में सब लोगों का प्रशासन में समान रूप से भाग लेने का अधिकार तभी सार्थक माना जाता है, जब उनके साथ उनकी भाषा के माध्यम से सम्पर्क किया जाए। इससे बहुभाषिकता की स्थिति उत्पन्न होती है और उसके संरक्षण की प्रक्रिया में अनुवाद कार्य का आश्रय लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न राष्ट्रों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिक, तथा साहित्यिक और सांस्कृतिक स्तर पर बढ़ते हुए आदान-प्रदान के कारण अनुवाद कार्य की अनिवार्यता और महत्ता की नई चेतना प्रबल रूप से विकसित होती हुई दिखती है। अतः अनुवाद एक व्यापक तथा बहुधा अनिवार्य और तर्कसंगत स्थिति मानी जाती है। अनुवाद के महत्त्व को दो भिन्न, परन्तु सम्बन्धित सन्दर्भो में अधिक स्पष्टता से समझया जाता है : (क) सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व, (ख) शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व। === सामाजिक एवं व्यावहारिक महत्त्व === सामाजिक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार अनौपचारिक परिस्थितियों में होता है। इसका सम्बन्ध द्विभाषिकता की स्थिति से है। द्विभाषिकता का सामान्य अर्थ है एक समय में दो भाषाओं का वैकल्पिक रूप से प्रयोग। वर्तमान युग के समाज का एक बृहद् भाग ऐसा है, जो सामाजिक सन्दर्भ की अनौपचारिक स्थिति में दो भाषाओं का वैकल्पिक प्रयोग करता है। सामान्य रूप से प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति, नगरीय परिवेश का अर्ध शिक्षित व्यक्ति, दो भिन्न भाषाभाषी राज्यों के सीमा प्रदेश में रहने वाली जनता, तथा भाषायी अल्पसङ्ख्यक, इनमें अधिक स्पष्ट रूप से द्विभाषिकता की स्थिी देखी जाती है। यह द्विभाषिकता प्रायः आश्रित/संयुक्त द्विभाषिकता की कोटि की होती है। जिसका सामान्य लक्षण यह है कि, सब एक भाषा में (मातृभाषा में) सोचते हैं, परन्तु अन्य भाषा में अभिव्यक्त करते हैं। इस स्थिति में अनुवाद प्रक्रिया का होना अनिवार्य है। परन्तु यह प्रक्रिया अनौपचारिक रूप में ही होती है। व्यक्ति मन ही मन पहली भाषा से अन्य भाषा में अनुवाद कर अपनी बात कह देते हैं। यह माना गया है कि, अन्य भाषा परिवेश में अन्य भाषा सीखते समय अनुवाद का प्रत्यक्ष रूप से अस्तित्व रहता है। यदि स्व-भाषा के ही परिवेश में अन्य भाषा सीखी जाए तो "कोड" परिवर्तन की स्थिति आती है, जिसमें अनुवाद की स्थिति कुछ परोक्ष हो जाती है। अतः द्विभाषी रूप में सभी अनुवाद अनौपचारिक हैं। इस दृष्टि से अनुवाद एक सामाजिक भाषा व्यवहार में महत्त्वपूर्ण भूमिका में दिखता है। === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक महत्त्व === शैक्षणिक एवं ज्ञानात्मक सन्दर्भ में अनुवाद व्यापार औपचारिक स्थिति में होता है। इसके दो भेद हैं : साधन रूप में अनुवाद और साध्य रूप में अनुवाद। ==== साधन रूप में अनुवाद ==== साधन रूप में अनुवाद का प्रयोग [[भाषा शिक्षण]] की एक विधि के रूप में किया जाता है। संज्ञानात्मक कौशल के रूप में अनुवाद के अभ्यास से भाषा अधिगम के दो कौशलों-बोधन और अभिव्यक्ति को पुष्ट किया जाता है। इसी प्रकार साधन रूप में अनुवाद के दो और क्षेत्र हैं : भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य विवेचन। ===== भाषाओं का तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन ===== वस्तुतः भाषाओं के अध्ययन-विश्लेषण के लिए अनुवाद के द्वारा ही व्यक्ति को यह ज्ञात होता है कि, एक वाक्य में किस शब्द का क्या अर्थ है। उसके पश्चात् ही वह दोनों में समानता तथा असमानता के बिन्दु से अवगत हो पाता है। अतः व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण को '''अनुवादात्मक विश्लेषण''' (ट्रांसलेटिव एनालसिस) भी कहा गया है। ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन ===== तुलनात्मक साहित्य विवेचन में साहित्यों के तुलनात्मक अध्ययन के साधन रूप में अनुवाद के प्रयोग के द्वारा सदृश-विसदृश अंशों का अर्थबोध होता है, जिससे अंशों की तुलना की जा सके। इसके अतिरिक्त अन्य भाषा साहित्य की कृतियों के अनुवाद का अभ्यास करना अथवा/और उन्हें अनूदित रूप में पढ़ना तुलनात्मक साहित्य विवेचन में अनुवाद के योगदान का उदाहरण है। ==== साध्य रूप में अनुवाद ==== साध्य रूप में अनुवाद व्यापार अनेक क्षेत्रों में दिखाई पड़ता है। कोशकार्य भी उक प्रकार का अनुवाद कार्य है। समभाषिक कोश में एक ही भाषा के अन्दर अनुवाद होता है और द्विभाषी कोश में दो भाषाओं के मध्य। यह अनुवाद, पाठ की अपेक्षा भाषा के आयाम पर होता है, जिसमें भाषा विश्लेषण के दो स्तर प्रभावित होते हैं। वे दो स्तर - शब्द और शब्द शृङ्खला हैं। इसी प्रकार किसी भाषा के विकास के लिए भी अनुवाद-व्यापार का आश्रय लिया जाता है। जब किसी भाषा को ऐसे व्यवहार-क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है, जिनमें पहले उसका प्रयोग नहीं होता था, तब उसे विषयवस्तु और अभिव्यक्ति पद्धति दोनों ही दृष्टियों से विकसित करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए अन्य भाषाओं से विभिन्न प्रकार के साहित्य का उसमें अनुवाद किया जाता है। फलस्वरूप, विषयवस्तु की परिधि के विस्तार के साथ-साथ भाषा के अभिव्यक्ति-कोश का क्षेत्र भी विस्तृत होता है। अनेक नये शब्द बन जाते हैं, कई बार प्रचलित शब्दों को नया अर्थ मिल जाता है, नये सहप्रयोग विकसित होने लगते हैं, संकर-शब्दावली प्रयोग में आने लगती है, और भाषा प्रयोग के सन्दर्भ की विशेषता के कारण कुल मिलाकर भाषा का एक नवीन भेद विकसित हो जाता है। आधुनिक प्रशासनिक हिन्दी तथा पत्रकारिता हिन्दी इसके अच्छे उदाहरण हैं। इस प्रक्रिया को भाषा नियोजन और भाषा विकास कहते हैं, जो अपने व्यापकतर सन्दर्भ में राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास का अंग है। इस प्रकार अनुवाद के माध्यम से विकासशील भाषा में आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साहित्य का प्रवेश होता है। तब कह सकते हैं कि इस रूप में अनुवाद राष्ट्रीय विकास में भी योगदान करता है। अपने व्यापकतम रूप में अनुवाद भाषा की शक्ति में संवर्धन करता है, पाठों की व्याख्या एवं निर्वचन में सहायक है, भाषा तथा विचार के बीच सम्बन्ध को स्पष्ट करता है, ज्ञान का प्रसार करता है, संस्कृति का संवाहक है, तथा राष्ट्रों के मध्ये परस्पर अवगमन और सद्भाव की वृद्धि में योगदान करता है। गेटे के शब्दों में, अनुवाद (अपनी प्रकृति से) असम्भव होते हुए भी (सामाजिक दृष्टि से) आवश्यक तथा महत्त्वपूर्ण है। == स्वरूप == अनुवाद के स्वरूप के दो उल्लेखनीय पक्ष हैं - समन्वय और सन्तुलन। अनुवाद सिद्धान्त का बहुविद्यापरक आयाम इसका '''समन्वयशील''' पक्ष है। तदनुसार, यद्यपि अनुवाद सिद्धान्त का मूल उद्गम है '''अनुप्रयुक्त तुलनात्मक पाठसङ्केतविज्ञान''', तथापि उसे कुछ अन्य शास्त्र भी स्पर्श करते हैं। 'तुलनात्मक' से अनुवाद का दो भाषाओं से सम्बन्धित होना स्पष्ट ही है, जिसमें भाषाओं की समानता-असमानता के प्रश्न उपस्थित होते हैं। पाठसंकेतविज्ञान के तीनों पक्ष - अर्थविचार, वाक्यविचार तथा सन्दर्भमीमांसा - अनुवाद सिद्धान्त के लिए प्रासंगिक हैं। अर्थविचार में भाषिक संकेत तथा भाषाबाह्य यथार्थ के बीच में सम्बन्ध का अध्ययन होता है। सन्दर्भमीमांसा के अन्तर्गत भाषाप्रयोग की स्थिति के सन्दर्भ के विभिन्न आयामों - वक्ता एवं श्रोता की सामाजिक पहचान, भाषाप्रयोग का उद्देश्य तथा सन्देश के प्रति वक्ता - श्रोता की अभिवृत्ति, भाषाप्रयोग की भौतिक परिस्थितियों की तथा अभिव्यक्ति, माध्यम आदि - की मीमांसा होती है। स्पष्ट है कि संकेतविज्ञान की परिधि भाषाविज्ञान की अपेक्षा व्यापकतर है तथा अनुवाद कार्य जैसे व्यापक सम्प्रेषण व्यापार के अध्ययन के उपयुक्त है। === समन्वय पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त को स्पर्श करने वाले शास्त्रों में है सम्प्रेषण सिद्धान्त जिसकी मान्यताओं के अनुसार अनुवाद कार्य एक सम्प्रेषण व्यापार है, तथा तदनुसार उस पर वे सभी बातें लागू होती हैं, जो सम्प्रेषण व्यापार की प्रकृति में हैं, जैसे सम्प्रेषण का शत्प्रतिशत् यथातथ न होना, अपूर्णता, उद्रिक्तता (व्यतिरिक्तता), आंशिक कृत्रिमता आदि। इसी से अनुवाद कार्य में शब्द-प्रति-शब्द तथा अर्थ-प्रति-अर्थ समानता के स्थान पर सन्देशस्तरीय समानता का औचित्य भी साधा जा सकता है। संक्रियात्मक दृष्टि से एक पाठ या प्रोक्ति अनुवाद कार्य का प्रवर्तन बिन्दु होता है। एक पाठ की अपनी संरचना होती है, भाषिक संसक्ति तथा सन्देशगत सुबद्धता की सङ्कल्पनाओं द्वारा उसके सुगठित अथवा शिथिल होने की जाँच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक पाठ को भाषाप्रकायों की एकीभूत समष्टि के रूप में देखते हुए, उसमें भाषा-प्रयोग शैलीओँ के भाषाप्रकार्यमूलक वितरण के विषय में अधिक निश्चित जानकारी प्राप्त होती हैं। इसी से सम्बन्धित शास्त्र है, समाजभाषाशास्त्र तथा शैलीविज्ञान, जिसमें सामाजिक बोलियों तथा प्रयुक्तियों के अध्ययन के साथ सन्दर्भानुकूल भाषाप्रयोग की शैलीओँ के वितरण की जानकारी अनुवाद सिद्धान्त के लिए वाञ्छनीय है। भाषा से समन्धित होने के कारण [[तर्कशास्त्र का इतिहास|तर्कशास्त्र]] तथा [[भाषा दर्शन|भाषादर्शन]] भी अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट करते हैं। तर्कशास्त्र के अनुसार अनूदित पाठ के सत्यमूल्य की परीक्षा अनुवाद की विशुद्धता को शुद्ध करने का आधार है। भाषादर्शन में होने वाले अर्थ सम्बन्धी चिन्तन से अनुवाद कार्य में अर्थ के अन्तरण या उसकी पुनरावृत्ति से सम्बन्धित समस्याओं को जानने में सहायता मिलती है। विटजेन्स्टीन की मान्यता 'भाषा में शब्द का 'प्रयोग' ही उसका अर्थ है'। अनुवाद सिद्धान्त के लिए इस कारण से विशेष प्रासंगिक है कि पाठ ही अनुवाद कार्य की इकाई है, जिसका सफल अर्थबोध अनुवाद की पहली आवश्यकता है। इस प्रकार वक्ता की विवक्षा में अर्थ का मूल खोजना, भाषिक अर्थ तथा भाषाबाह्य स्थिति (सन्दर्भ) अनुवाद सिद्धान्त के आवश्यक अंग हैं। अर्थ के अन्तरण में जहाँ उपर्युक्त मान्यताओं की एक भूमिका है, वहाँ अर्थगत द्विभाषिक समानता के निर्धारण में घटकीय विश्लेषण की पद्धति की विशेष उपयोगिता स्वीकार की गई है। यह बात विशेष रूप से ध्यान में ली जाती है कि जहाँ विविध शास्त्रों की प्रासङ्गिक मान्यताओं से अनुवाद सिद्धान्त का स्वरूप निर्मित है, वहाँ स्वयं अनुवाद सिद्धान्त उन शास्त्रों का एक विशिष्ट अंग है। === सन्तुलन पक्ष === अनुवाद सिद्धान्त का 'सामान्य' पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी, और यह इसका सन्तुलनशील स्वरूप है - सामान्य और विशिष्ट का सन्तुलन। अनुवाद की परिभाषा के अनुसार कहा जाता है कि अनुवाद व्यवहारतः विशिष्ट भाषाभेद के स्तर पर तथा इसीलिए सिद्धान्ततः सामान्य भाषा के स्तर पर होता है - अंग्रेजी भाषा के एक भेद पत्रकारिता की अंग्रेजी से हिन्दी भाषा के सममूल्य भेद पत्रकारिता की हिन्दी में। तदनुसार, युगपद् रूप से अनुवाद सिद्धान्त का एक सामान्य पक्ष भी है और विशिष्ट पक्ष भी। हम जो बात सामान्य के स्तर पर कहते हैं, उसे व्यावहारिक रूप में भाषाभेद के विशिष्ट स्तर पर उदाहृत करते हैं। == क्षेत्र == 'यथासम्भव अधिकतम पाठ प्रकारों के लिए एक उपयुक्त तथा सामान्य अनुवाद प्रणाली का निर्धारण' ये अनुवाद के क्षेत्र सम्बन्धित एक विचारणीय प्रश्न माना जाता है। प्रणाली के निर्धारण के सम्बन्ध में अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति, अनुवाद (वस्तुतः अनुवाद कार्य) के विभिन्न प्रकार, अनुवाद के सूत्र तथा विभिन्न कोटि के पाठों के अनुवाद के निर्देश निश्चित करने के प्रारूप का निर्धारण, आदि पर विचार करना होता है। अनुवाद का मुख्य उद्देश्य, अनुवाद की इकाई, अनुवाद का कला-कौशल-विज्ञान का स्वरूप, अनुवाद कार्य की सीमाएँ, आदि कुछ अन्य विषय हैं, जिन पर विचार अपेक्षित होता है। === मूलभाषा का ज्ञान === अनुवाद कार्य का मेरुदण्ड है मूलभाषा पाठ। इसकी संरचना, इसका प्रकार, भाषाप्रकार्य प्रारूप के अनुसार मूलपाठ का स्वरूप निर्धारण, आदि के साथ शब्दार्थ-व्यवस्था एवं व्याकरणिक संरचना के विश्लेषणात्मक बोधन के विभिन्न प्रारूप, उनकी शक्तियों और सीमाओं का आकलन, आदि के सम्बन्ध में सैद्धान्तिक चर्चा तथा इनके संक्रियात्मक ढाँचे का निर्धारण, इसके अन्तर्गत आने वाले मुख्य बिन्दु हैं। अनुवाद सिद्धान्त के ही अन्तर्गत कुछ गौण बिन्दुओं की चर्चा भी होती है - रूपक, व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ, पारिभाषिक शब्द, आद्याक्षर (परिवर्णी) शब्द, भौगोलिक नाम, व्यापारिक नाम, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम, सांस्कृतिक शब्द, आदि के अनुवाद के लिए कौन-सी प्रणाली अपनाई जाए; साहित्यिक रचनाओं, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय लेखन, प्रचार साहित्य आदि के लिए अनुवाद प्रणाली का रूप क्या हो, इत्यादि। === विविध शास्त्रों का ज्ञान === इसी से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण बिन्दु है, अनुवाद की विभिन्न युक्तियाँ - लिप्यन्तरण, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद, शब्दानुगामी अनुवाद, आगत अनुवाद, व्याख्या, विस्तरण, सङ्क्षेपण, सांस्कृतिक पर्याय, स्वभाषीकरण आदि। अनुवाद का काम अन्ततोगत्वा एक ही व्यक्ति करता है। एकाकी अनुवाद में तो अनुवादक अकेला होता ही है, सहयोगात्मक अनुवाद में भी, अन्तिम अवधि में, सम्पादन का कार्य अनुवादक को अकेले करना होता है। अतः अनुवादक के साथ अनेक दायित्व जुड़ जाते हैं और कार्य के सफल निष्पादन में उससे अनेक अपेक्षाएं रहती हैं। भाषा ज्ञान, विषय ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, व्यक्तिगत गुण आदि की दृष्टि से अनुवादक से होने वाली अपेक्षाओं पर विचार करना होता है। अनुवाद शिक्षा और अनुवाद समीक्षा, दो अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं। === शिक्षा === अनुवाद की शिक्षा भाषा-अधिगम के, विशेष रूप से अन्य भाषा अधिगम के, साधन के रूप में दी जा सकती है (भाषाशिक्षण की द्विभाषिक पद्धति भी इसी के अन्तर्गत है)। इसमें अनुवाद शिक्षण, भाषा-शिक्षण के अधीन है तथा एक मध्यवर्ती अल्पकालिक अभ्यासक्रम में इसकी योजना की जाती है, जिसमें शिक्षण के सोपान तथा लक्ष्य बिन्दु स्पष्ट तथा निश्चित होते हैं। इसमें शिक्षार्थी का लक्ष्य भाषा सीखना है, अनुवाद करना नहीं। शिक्षा के दूसरे चरण में अनुवाद का अभ्यास, अनुवाद को एक शिल्प या कौशल के रूप में सीखने के लिए किया जाता है, जिसकी प्रगत अवस्था 'अनुवाद कला है' की शब्दावली में निर्दिष्ट की जाती है। इस स्थिति में जो भाषा (मूलभाषा या लक्ष्यभाषा) अनुवादक की अपनी नहीं, उसके अधिगम को भी आनुषङ्गिक रूप में पुष्ट करता जाता है। अभ्यास सामग्री के रूप में पाठ प्रकारों की विविधता तथा कठिनाई की मात्रा के अनुसार पाठों का अनुस्तरण करना होता है। यदि एक सजातीय/विजातीय, स्वेदशी या विदेशी भाषा को सीखने की योजना में उससे या उसमें अनुवाद करने की क्षमता को विकसित करना एक उद्देश्य हो तो अनुवाद-शिक्षण के दोनों सोपानों - साधनपरक तथा साध्यपरक – को अनुस्तरित रूप में देखा जा सकता है। === समीक्षा === अनुवाद समीक्षा, अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा अङ्ग है, जिसका शिथिल रूप में व्यवहार, अनूदित कृति का एक सामान्य पाठक भी करता है, परन्तु जिसकी एक पर्याप्त स्पष्ट सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि है। सिद्धान्तपुष्ट अनुवाद समीक्षा एक ज्ञानात्मक व्यापार है। इसमें एक मूलपाठ के एक या एक से अधिक अनुवादों की समीक्षा की जाती है, तथा मूल की तुलना में अनुवाद का या मूल के विभिन्न अनुवादों का पारस्परिक तुलना द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। इसके तीन सोपान हैं - मूलभाषा पाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ का विश्लेषण, दोनों की तुलना (प्रत्यक्ष तथा परोक्ष समानताओं की तालिका, और अभिव्यक्ति विच्छेदों का परिचयन), और अन्त में लक्ष्यभाषागत विशुद्धता, उपयुक्तता और स्वाभाविकता की दृष्टि से अनुवाद का मूल्यांकन। मूल्याङ्कन के सोपान पर अनुवाद की सफलता की जाँच के लिए विभिन्न परीक्षण तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। == प्रकार == अनुवाद को [[कला]] और [[विज्ञान]] दोनों ही रूपों में स्वीकारने की मानसिकता इसी कारण पल्लवित हुई है कि संसारभर की भाषाओं के पारस्परिक अनुवाद की कोशिश अनुवाद की अनेक शैलियों और प्रविधियों की ओर संकेत करती हैं। अनुवाद की एक भंगिमा तो यही है कि किसी रचना का साहित्यिक-विधा के आधार पर अनुवाद उपस्थित किया जाए। यदि किसी [[नाटक]] का नाटक के रूप में ही अनुवाद किया जाए तो ऐसे अनुवादों में अनुवादक की अपनी सर्जनात्मक प्रतिभा का वैशिष्ट्य भी अपेक्षित होता है। अनुवाद का एक आधार अनुवाद के गद्यात्मक अथवा पद्यात्मक होने पर भी आश्रित है। ऐसा पाया जाता है कि अधिकांशतः गद्य का अनुवाद गद्य में अथवा पद्य में ही उपस्थित हो, लेकिन कभी-कभी यह क्रम बदला हुआ नज़र आता है। कई गद्य कृतियों के पद्यानुवाद मिलते हैं, तो कई काव्यकृतियों के गद्यानुवाद भी उपलब्ध हैं। अनुवादों को विषय के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है। इस आधार पर 'साहित्यिक अनुवाद' , 'तकनीकी अनुवाद' , 'चिकित्सकीय अनुवाद' , और 'विधिक अनुवाद' आदि अनुवाद के वर्ग हैं। और कई स्तरों पर अनुवाद की प्रकृति के अनुरूप उसे मूल-केंद्रित और मूलमुक्त दो वर्गों में भी बाँटा गया है। अनुवाद के जिन सार्थक और प्रचलित प्रभेदों का उल्लेख अनुवाद विज्ञानियों ने किया है, उनमें शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, आशुअनुवाद और रूपान्तरण को सर्वाधिक स्वीकृति मिली है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का एक छोटा वाक्य "There is no room in the car" को लेते हैं। इस वाक्य के शब्दानुवाद, भावानुवाद और सार्थक अनुवाद के उदहरण देखिए- :(१) '''शब्दानुवाद''' : "कार में कोई कमरा नहीं है।" :(२) '''भावानुवाद''' : "कार में कोई स्थान नहीं है।" :(३) '''सार्थक अनुवाद''' : "कार में कोई जगह ही नहीं है।" कहने का आशय है कि अनुवाद ऐसा होना चाहिए कि वह यांत्रिक या निर्जीव न लगे। उसमें सहज प्रवाह तभी आएगा जब वह लक्ष्य-भाषा की प्रकृति एवं संस्कृति के अनुसार होगा। ===शब्दानुवाद=== स्रोतभाषा के प्रत्येक शब्द का लक्ष्यभाषा के प्रत्येक शब्द में यथावत् अनुवादन को शब्दानुवाद कहते हैं। 'मक्षिका स्थाने मक्षिका' पर आधारित शब्दानुवाद वास्तव में अनुवाद की सबसे निकृष्ट कोटि का परिचायक होता है। प्रत्येक भाषा की प्रकृति अन्य भाषा से भिन्न होती है और हर भाषा में शब्द के अनेकानेक अर्थ विद्यमान रहते हैं। इसीलिए मूल भाषा की हर शब्दाभिव्यक्ति को यथावत् लक्ष्यभाषा में नहीं अनुवादित किया जा सकता। कई बार ऐसे शब्दानुवादों के कारण बड़ी हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न हो जाती है। [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] से [[हिन्दी|हिंदी]] में किये गये अनुवाद को कई बार प्रकृति की साम्यता के कारण सह्य होते हैं, लेकिन यूरोपीय परिवार की भाषाओं से किये गए अनुवाद में अर्थ और पदक्रम के दोष सामान्यतः नज़र आते हैं। वास्तव में यदि स्रोत और लक्ष्यभाषा में अर्थ, प्रयोग, वाक्य-विन्यास और शैली की समानता हो, तभी शब्दानुवाद सही होता है, अन्यथा यंत्रावत् किये गए शब्दानुवाद अबोधगम्य, हास्यास्पद एवं कृत्रिम हो जाते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी का निम्नलिखित वाक्य देखें : : " The boy, who does not understand that his future depends on hard studies, is a fool." यदि हिन्दी में इसका अनुवाद इस प्रकार किया जाता है- : "वह लड़का,जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य सख्त अध्ययन पर निर्भर करता है, मूर्ख है।" --> यह वाक्य विन्यास हिन्दी भाषा के वाक्य विन्यास के अनुरूप नहीं होगा, hard के लिए यहाँ 'सख्त' शब्द भी उपयुक्त समानार्थी नहीं लगता। यदि उपर्युक्त अंग्रेजी वाक्य का अनुवाद इस प्रकार किया जाए : : "वह लड़का मूर्ख है जो यह नहीं समझता कि उसका भविष्य कठोर अध्ययन पर निर्भर है।" -- > तो अनुवाद का वाक्य-विन्यास हिन्दी भाषा की प्रकृति के अनुरूप होगा और इसी में अनुवाद की सार्थकता निहित है। इसी प्रकार, हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल और अनुकूल कुछ अनुवाद देखिए- : अंग्रेजी : "I will not go", he said. : हिन्दी की प्रकृति के प्रतिकूल अनुवाद : "मैं नहीं जाऊँगा", उसने कहा। : हिन्दी की प्रकृति के अनुकूल अनुवाद : "उसने कहा कि मैं नहीं जाऊँगा।" ===भावानुवाद=== ऐसे अनुवादकों में स्रोत-भाषा के शब्द, पदक्रम और वाक्य-विन्यास पर ध्यान न देकर अनुवाद मूलभाषा की विचार-सामग्री या भावधारा पर अपने आपको केंद्रित करता है। ऐसे अनुवादों में स्रोतभाषा की भाव-सामग्री को उपस्थित करना ही अनुवादक का लक्ष्य होता है। भावानुवाद की प्रक्रिया में कभी-कभी मूल रचना जैसा मौलिक वैभव आ जाता है, लेकिन कई बार पाठकों को यह शिकायत होती है कि अनुवादक ने मूलभाषा की भावधारा को समझे बिना, लक्ष्य-भाषा की प्रकृति के अनुरूप भाव सामग्री प्रस्तुत कर दी है। जब पाठक किसी रचना को रचनाकार के अभिव्यक्ति-कौशल की दष्ष्टि से पढ़ना चाहता है, तो भावानुवाद उसकी लक्ष्यसिद्धि में सहायक नहीं होता। ===छायानुवाद=== संस्कृत नाटकों में लगातार ऐसे प्रयोग मिलते हैं कि उनकी स्त्रा-पात्रा तथा सेवक, दासी आदि जिस [[प्राकृत]] भाषा का प्रयोग करते हैं , उसकी संस्कृत छाया भी नाटक में विद्यमान रहती है। ऐसे ही प्रयोगों से छायानुवाद का उद्भव हुआ है। अनुवाद की प्रविधि के अंतर्गत अनुवादक न शब्दानुवाद की तरह केवल मूल शब्दों का अनुसरण करता है और न सिर्फ भावों का ही परिपालन करता है, बल्कि मूलभाषा से पूरी तरह बंधा हुआ उसकी छाया में लक्ष्यभाषा में वर्ण्य-विषय की प्रस्तुति करता है। ===सारानुवाद=== इस अनुवाद में मूलभाषा की सामग्री का संक्षिप्त और अतिसंक्षिप्त अनुवाद लक्ष्यभाषा में किया जाता है। लंबे भाषणों और वाद-विवादों के अनुवाद प्रस्तुत करने में यह विधि सहायक होती है। ===व्याख्यानुवाद=== ऐसे अनुवादों में मूलभाषा की सामग्री का लक्ष्यभाषा में व्याख्या सहित अनुवाद उपस्थित किया जाता है। इसमें अनुवादक अपने अध्ययन और दष्ष्टिकोण के अनुरूप मूल भाषा की सामग्री की व्याख्या अपेक्षित प्रमाणों और उदाहरणों आदि के साथ करता है। [[बाल गंगाधर तिलक|लोकमान्य तिलक]] ने ’गीता‘ का अनुवाद इस शैली में किया है। संस्कृत के बहुत सारे भाष्यकारों और हिन्दी के टीकाकारों ने व्याख्यानुवाद की शैली का ही अनुगमन किया है। स्वभावतः व्याख्यानुवाद अथवा भाष्यानुवाद मूल से बहुत बड़ा हो जाता है और कई स्तरों पर तो एकदम मौलिक बन जाता है। ===आशु अनुवाद=== जहाँ अनुवाद दुभाषिये की भूमिका में काम करता है, वहाँ वह केवल आशुअनुवाद कर पाता है। दो दूरस्थ देशों के भिन्न भाषा-भाषी जब आपस में बातें करते हैं, तो उनके बीच दुभाषिया संवाद का माध्यम बनता है। ऐसे अवसरों पर वे अनुवाद शब्द और भाव की सीमाओं को तोड़कर अनुवादक की सत्वर अनुवाद क्षमता पर आधारित हो जाता है। उसके पास इतना समय नहीं होता है कि शब्द के सही भाषायी पर्याय के बारे में सोचे अथवा कोशों की सहायता ले सके। कई बार ऐसे दुभाषिये के आशुअनुवाद के कारण दो देशों में तनाव की स्थिति भी बन जाती है। आशुअनुवाद ही अब भाषांतरण के रूप में चर्चित है। ===रूपान्तरण=== अनुवाद के इस प्रभेद में अनुवादक मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में केवल शब्द और भाव का अनुवादन नहीं करता, अपितु अपनी प्रतिभा और सुविधा के अनुसार मूल रचना का पूरी तरह रूपांतरण कर डालता है। [[विलियम शेक्सपीयर]] के प्रसिद्ध नाटक 'मर्चेन्ट ऑफ वेनिस' का अनुवाद [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने 'दुर्लभ बन्धु' अर्थात् 'वंशपुर का महाजन' नाम से किया है जो रूपांतरण के अनुवाद का अन्यतम उदाहरण है। मूल नाटक के एंटोनियो, बैसोलियो, पोर्शिया, शाइलॉक जैसे नामों को भारतेंदु ने क्रमशः अनंत, बसंत, पुरश्री, शैलाक्ष जैसे रूपांतर प्रदान किये हैं। ऐसे रूपांतरण में अनुवाद की मौलिकता सबसे अधिक उभरकर सामने आती है। अनुवादक के इन प्रभेदों से ज्ञापित होता है कि संसार भर की भाषाओं में अनुवाद की कई शैलियाँ और प्रविधियाँ अपनाई गई हैं, लेकिन यदि अनुवादक सावधानीपूर्वक शब्द और भाव की आत्मा का स्पर्श करते हुए मूलभाषा की प्रकृति के अनुरूप लक्ष्यभाषा में अनुवाद उपस्थित करे तो यही आदर्श अनुवाद होगा। इसीलिए श्रेष्ठ अनुवादक को ऐसा कुशल चिकित्सक कहा जाता है, जो बोतल में रखी दवा को अपनी सिरिंज के द्वारा रोगी के शरीर में यथावत पहुँचा देता है। == अनुवाद के सिद्धान्त == अनुवाद सिद्धान्त कोई अपने में स्वतन्त्र, स्वनिष्ठ, सिद्धान्त नहीं है और न ही यह उस अर्थ में कोई ‘विज्ञान' ही है, जिस अर्थ में [[गणितशास्त्र]], [[भाषाविज्ञान|भाषाशास्त्र]], [[समाजशास्त्र]] आदि हैं। इसकी ऐसी कोई विशिष्ट अध्ययन सामग्री तथा अध्ययन प्रणाली भी नहीं, जो अन्य शास्त्रों की अध्ययन सामग्री तथा प्रणाली से इस रूप में भिन्न हो कि, इसका मूलतः स्वतन्त्र व्यक्तित्व बन सके। वस्तुतः, यह अनुवाद के विभिन्न मुद्दों से सम्बन्धित ज्ञानात्मक सूचनाओं का एक निकाय है, जिससे अनुवाद को एक प्रक्रिया (अनुवाद कार्य), एक निष्पत्ति (अनुदित पाठ), तथा एक सम्बन्ध (सममूल्यता) के रूप में समझने में सहायता मिलती है। इसके लिए सद्यः 'अनुवाद विद्या (ट्रांसलेशन स्टडीज), 'अनुवाद विज्ञान' (साइंस ऑफ ट्रांसलेशन), और 'अनुवादिकी' (ट्रांसलेटालजी) शब्द भी प्रचलित हैं। अनुवाद, भाषाप्रयोग सम्बन्धी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसकी एक सुनिश्चित परिणति होती है तथा जिसके फलस्वरूप मूल एवं निष्पत्ति में 'मूल्य' की दृष्टि से समानता का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है। इस प्रकार प्रक्रिया, निष्पत्ति, और सम्बन्ध की सङ्घटित इकाई के रूप में अनुवाद सम्बन्धी सामान्य प्रकृति की जानकारी ही अनुवाद सिद्धान्त है, जो मूलतः एकान्वित न होते हुए भी सङ्ग्रहणीय, रोचक, ज्ञानवर्धक, तथा एक सीमा तक वास्तविक अनुवाद कार्य के लिए उपादेय है। अपने विकास की वर्तमान अवस्था में यह बहु-विद्यापरक अनुशासन बन गया है। जिसका ज्ञान प्राप्त करना स्वयमेव एक लक्ष्य है तथा जो जिज्ञासु पाठक के लिए बौद्धिक सन्तोष का स्रोत है। अनुवाद सिद्धान्त की अनुवाद कार्य में उपयोगिता का आकलन के समय इस सामयिक तथ्य को ध्यान में रखा जाता है कि वर्तमान काल में अनुवाद एक सङ्गठित व्यवसाय हो गया है, जिसमें व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यावसायिक-सामाजिक आवश्यकता से प्रेरित प्रशिक्षणार्थियों की सङ्ख्या अधिक होती है । विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए तथा सामान्य रूप से रुचिशील अनुवादकों के लिए अनुवाद कार्य में दक्षता विकसित करने में अनुवाद सिद्धान्त के योगदान को निरूपित किया जाता है । इस योगदान का सैद्धान्तिक औचित्य इस दृष्टि से भी है कि अनुवाद कार्य सर्जनात्मक होने के कारण ही गौण रूप से समीक्षात्मक भी होता है । इसे 'सर्जनात्मक-समीक्षात्मक' भी कहा जाता है । सर्जनात्मकता को विशुद्ध तथा पुष्ट करने के लिए जो समीक्षात्मक स्फुरणाएँ अनुवादक में होती हैं, वे अनुवाद सिद्धान्त के ज्ञान से प्ररित होती हैं । अनुवाद की विशुद्धता की निष्पत्ति में सिद्धान्त ज्ञान का योगदान रहता है । साथ ही, अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी उसे पर्याय-चयन में अधिक सावधानी से काम करने में सहायता कर सकती है । इससे अधिक महत्त्वपर्ण बात मानी जाती है कि वह मूर्खतापूर्ण त्रुटियाँ करने से बच सकता है । मूलपाठ का भाषिक, विषयवस्तुगत, तथा सांस्कृतिक महत्त्व का कोई अंश अनूदित होने से न रह जाए, इसके लिए अपेक्षित सतर्क दृष्टि को विकसित करने में भी अनुवाद सिद्धान्त का ज्ञान अनुवादक की सहायता करता है । इसी प्रश्न को दूसरे छोर से भी देखा जाता है । कहा जाता है कि जो लोग मौलिक लिख सकते हैं, वे लिखते हैं, जो लिख नहीं पाते वे अनुवाद करते हैं, और जो लोग अनुवाद नहीं कर सकते, वे अनुवाद के बारे में चर्चा किया करते हैं । वस्तुतः इन तीनों में परिपूरकता है - ये तीनों कुछ भिन्न-भिन्न हैं – तथापि यह माना जाता है कि अनुवाद विषयक चर्चा को अधिक प्रामाणिक तथा विशद बनाने में अनुवाद सिद्धान्त के विद्यार्थी को अनुवाद कार्य सम्बन्धी अनुभव सहायक होता है । यह बात कुछ ऐसा ही है कि सर्जनात्मकता से अनुभव के स्तर पर परिचित साहित्य समीक्षक अपनी समीक्षात्मक प्रतिक्रियाओं को अधिक विश्वासोत्पादक रीति से प्रस्तुत कर सकता है। == अनुवाद सिद्धान्त का विकास == अनुवाद सिद्धान्त के वर्तमान स्वरूप को देखते हुए इसके विकास कों विहङ्ग-दृश्य से दो चरणों में विभक्त करके देखा जाता है : :(१) आधुनिक भाषाविज्ञान, विशेष रूप से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, के विकास से पूर्व का युग - बीसवीं सदी पूर्वार्ध; :(२) इसके पश्चात् का युग - बीसवीं सदी उत्तरार्ध । सामान्य रूप से कहा जाता है कि, सिद्धान्त विकास के विभिन्न युगों में और उसी विभिन्न धाराओं में विवाद का विषय यह रहा कि, अनुवाद शब्दानुगामी हो या अर्थानुगामी, यद्यपि विवाद की 'भाषा' बदलती रही । ईसापूर्व प्रथम शताब्दी में [[रोमन साम्राज्य|रोमन]] युग से आरम्भ होता है, जब [[होरेस|होरेंस]] तथा [[सिसरो]] ने शब्दानुगामी तथा अर्थानुगामी अनुवाद में अन्तर स्पष्ट किया तथा साहित्यिक रचनाओं के लिए अर्थानुगामी अनुवाद को प्रधानता दी । सिसरो ने अच्छे अनुवादक को व्याख्याकार तथा अलङ्कार प्रयोग में दक्ष बताया । रोमन युग के पश्चात्, जिसमें साहित्यिक अनुवादों की प्रधानता थी, दूसरी शक्तिशाली धारा [[बाइबिल]] अनुवाद की है । सन्त [[जेरोम]] (४०० ईस्वी) ने भी बाइबिल के अनुवाद में अर्थानुगामिता को प्रधानता दी तथा अनुवाद में दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा के प्रयोग का समर्थन किया। इसमें विचार यह था कि, बाइबिल का सन्देश जनसाधारण पर्यन्त पहुँच जाए और इसके निमित्त जनसाधारण के लिए बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया जाए, जिसमें स्वभावतः अर्थानुगामी दृष्टिकोण को प्रधानता मिली । [[जान वाइक्लिफ]] (१३३०-८४) तथा [[विलियम टिन्डेल|विलियम टिंडल]] (१४९४-१९३६) ने इस प्रवृत्ति का समर्थन किया। बोधगम्य तथा सुन्दर भाषा में, तथा शैली एवं अर्थ के मध्य सामञ्जस्य की रक्षा करते हुए, बाइबिल के अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला, जिसमें मार्टिन लूथर (१५३०) का योगदान उल्लेखनीय रहा। तृतीय धारा शिक्षाक्रम में अनुवाद के योगदान से सम्बन्धित रही है। [[क्विटिलियन]] (प्रथम शताब्दी) ने अनुवाद तथा समभाषी व्याख्यात्मक शब्दान्तरण की उपयोगिता को लेखन अभ्यास तथा भाषण-दक्षता विकसित करने के सन्दर्भ में देखा। जिसका मध्यकालीन यूरोप में अधिक प्रसार हुआ । इससे स्थानीय भाषाओं का स्तर ऊपर उठा तथा उनकी अभिव्यक्ति सामर्थ्य में वृद्धि भी हुई । समृद्ध और विकसित भाषाओं से विकासशील भाषाओं में अनुवाद की प्रवृत्ति [[मध्यकालीन यूरोप]] के साहित्यिक जगत् की एक प्रमुख प्रवृत्ति है, जिसे ऊर्ध्वस्तरी आयाम की प्रवृत्ति कहा गया और इसी समय प्रचलित समान रूप से विकसित या अविकसित भाषाओं के मध्य अनुवाद की प्रवृत्ति को समस्तरी आयाम की प्रवृत्ति के रूप में देखा गया। मध्यकालीन यूरोप के आरम्भिक सिद्धान्तकारों में फ्रेंच विद्वान ई० दोलेत (१५०९-४६) ने १५४० में प्रकाशित निबन्ध में अनुवाद के पाँच विधि-निषेध प्रस्तावित किए : :(क) अनुवादक को मूल लेखक की भाषा की पूरा ज्ञान हो, परन्तु वह चाहे तो मूलभाषा की दुर्बोधता और अस्पष्टता को दूर कर सकता है। :(ख) अनुवादक का मूलभाषा और लक्ष्यभाषा का पूर्ण ज्ञान हो; :(ग) अनुवादक शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचे; :(घ) अनुवादक दैनन्दिन के व्यवहार की भाषा का प्रयोग करे; :(ङ) अनुवादक ऐसा शब्दचयन तथा शब्दविन्यास करे कि उचित प्रभाव की निष्पत्ति हो। [[जार्ज चैपमन]] (१५५९-१६३४) ने भी इसी प्रकार '[[इलियड]]' के सन्दर्भ में अनुवाद के तीन सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से बचा जाए; :(ख) मूल की भावना पर्यन्त पहुँचने का प्रयास किया जाए; :(ग) अनुवाद, विद्वत्ता के स्पर्श के कारण अति शिथिल न हो । यूरोप के पुनर्जागरण युग में अनुवाद की धारा एक गौण प्रवृत्ति रही । इस युग के अनुवादकों में अर्थ की प्रधानता के साथ पाठक के हितों की रक्षा की प्रवृत्ति दिखाई देती है । [[हालैण्ड]] (१५५२-१६३७) के अनुवाद में मूलपाठ के अर्थ में परिवर्तन-परिवर्धन द्वारा अनूदित पाठ के संस्कार की झलक दीखती है। सत्रहवीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में सर जान डेनहम (१६१५-६९) ने कविता के अनुवाद में शब्दानुगामी होने की प्रवृत्ति का विरोध किया और मूल पाठ के केन्द्रीय तत्त्व को ग्रहण कर लक्ष्यभाषा में उसके पुनस्सर्जन की बात कही; उसे 'अनुसर्जन' (ट्रांसक्रिएशन) कहा जाने लगा। इस अविध में [[जॉन ड्राइडेन|जान ड्राइडन]] (१६३१-१७००) ने महत्त्वपर्ण विचार प्रकट किए। उन्होंने अनुवाद कार्य की तीन कोटियाँ निर्धारित की : :(क) शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद (मेटाफ्रेझ); :(ख) अर्थानुगामी अनुवाद (पैराफ्रेझ), :(ग) अनुकरण (इमिटेशन) । ड्राइडन के अनुसार (क) और (ख) के मध्य का मार्ग अवलम्बन योग्य है । उनके अनुसार कविता के अनुवाद में अनुवादक को दोनों भाषाओं पर अधिकार हो, उसे मूल लेखक के साहित्यिक गुणों और उसकी 'भावना' का ज्ञान हो, तथा वह अपने समय के साहित्यिक आदर्शों का पालन करे। अलेग्जेंडर पोप (१६८८-१७४४) ने भी डाइडन के समान ही विचार प्रकट किए । अठारहवीं शताब्दी में अनुवाद की अतिमूलनिष्ठता तथा अतिस्वतन्त्रता के विवाद से एक सोपान आगे बढ़कर एक समस्या थी कि अपने समकालीन पाठक के प्रति अनुवादक का कर्तव्य । पाठक की ओर अत्यधिक झुकाव के कारण अनूदित पाठ का स्वरूप मूल पाठ से काफी दूर पड़ जाता था। इस पर डॉ. सैम्युएल जानसन (१७०९-८४) ने कहा कि, अनुवाद में मूलपाठ की अपेक्षा परिवर्धन के कारण उत्पन्न परिष्कृति का स्वागत किया जा सकता है, परन्तु मूलपाठ की हानि न हो ये ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार लेखक अपने समकालीन पाठक के लिए लिखता है, उसी प्रकार अनुवादक भी अपने समकालीन पाठक के लिए अनुवाद करता है । डॉ. जानसन की सम्मति में अनुवाद की मूलनिष्ठता तथा पाठकधर्मिता में सन्तुलन मिलता है । उन्होंने अनुवादक को ऐसा चित्रकार या अनुकर्ता कहा जो मूल के प्रति निष्ठावान होते हुए भी उद्दिष्ट दर्शक के हितों का ध्यान रखता है । [[एलेग्जेंडर फ्रेजर टिटलर]] की पुस्तक 'प्रिंसिपल्स आफ ट्रांसलेशन' (१७९१) अनुवाद सिद्धान्त पर पहली व्यवस्थित पुस्तक मानी जाती है । टिटलर ने तीन अनुवाद सूत्र प्रस्तावित किए : :(क) अनुवाद में मूल रचना के भाव का पूरा अनुरक्षण हो; :(ख) अनुवाद की शैली मूल के अनुरूप हो; :(ग) अनुवाद में मूल वाली सुबोधता हो। टिटलर ने ही यह कहा कि, अनुवाद में मूल की भावना इस प्रकार पूर्णतया सङ्क्रान्त हो जाए कि उसे पढकर पाठकों को उतनी ही तीव्र अनुभूति हो, जितनी मूल के पाठकों को हुई थी; प्रभावसमता का सिद्धान्त यही है । उन्नीसवीं शताब्दी में रोमांटिक तथा उत्तर-रोमांटिक युगों में अनुवाद चिन्तन पर तत्कालीन काव्यचिन्तन का प्रभाव दिखाई देता है । ए० डब्ल्यू० श्लेगल ने सब प्रकार के मौखिक एवं लिखित भाषा व्यवहार को अनुवाद की संज्ञा दी (तुलना करें, आधुनिक चिन्तन में 'अन्तर संकेतपरक अनुवाद' से), तथा मूल के गठन को संरक्षित रखने पर बल दिया । इस युग में एक ओर तो अनुवादक को सर्जनात्मक लेखक के तुल्य समझने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो दूसरी ओर अनुवाद को शब्दानुगामी बनाने पर बल देने की बात कही गई । कुछ विद्वानों ने अनुवाद की भिन्न उपभाषा होने का चर्चा की जो उपर्युक्त मान्यताओं से मेल खाती है। विक्टोरियन धारा के अनुवादक इस बात के लिए प्रयत्नशील रहे कि देश और काल की दूरी को अनुवाद में सुरक्षित रखा जाए – विदेशी भाषाओं की प्राचीन रचनाओं के अनुवाद में विदेशीयता और प्राचीनता की हानि न हो - जिसके फलस्वरूप शब्दानुगामी अनुवाद की प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिला । लौंगफेलो (१८०७-८१) इसके समर्थक थे । परन्तु उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवादक फिटजेरल्ड (1809-63) के विचार इसके विपरीत थे । वे इस मान्यता के समर्थक थे कि, अनुवाद के पाठक को मूल भाषा पाठ के निकट लाने के स्थान पर मूलभाषा पाठ की सांस्कृतिक विशेषताओं को लक्ष्यभाषा में इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए कि, वह लक्ष्यभाषा का अपनी सजीव सम्पत्ति प्रतीत हो, तथा इस प्रक्रिया में मूलभाषा से अनुवाद की बढ़ी हुई दूरी की उपेक्षा कर दी जाए । बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में दो-तीन अनुवाद चिन्तक उल्लेखनीय हैं । क्रोचे तथा वेलरी ने अनुवाद की सफलता, विशेष रूप से कविता के अनुवाद की सफलता, में सन्देह व्यक्त किये हैं। मैथ्यू आर्नल्ड ने [[होमर]] की कृतियों के अनुवाद में सरल, प्रत्यक्ष और उदात्त शैली को अपनाने पर बल दिया। इस प्रकार आधुनिक भाषाविज्ञान के उदय से पूर्व की अवधि में अनुवाद चिन्तन प्रायः दो विरोधात्मक मान्यताओं के चारों ओर घूमता रहा। वो दो मान्यताएँ इस प्रकार हैं - :(१) अनुवाद शब्दानुगामी हो या स्वतन्त्र हो, :(२) अनुवाद अपनी आन्तरिक प्रकृति की दृष्टि से असम्भव है, परन्तु सामाजिक दृष्टि से नितान्त आवश्यक । इस अवधि के अनुवाद चिन्तन में कुल मिलाकर सङ्घटनात्मक तथा विभेदात्मक दृष्टियों का सन्तुलन देखा जाता रहा - संघटनात्मक दृष्टि से अनुवाद सिद्धान्त का ऐसा स्वरूप अभिप्रेत है जो सामान्य कोटि का हो, तथा विभेदात्मक दृष्टि में पाठों की प्रकृतिगत विभिन्नता के आधार पर अनुवाद की प्रणाली में आवश्यक परिवर्तन की चर्चा का अन्तर्भाव है । विद्वानों ने इस अवधि में अमूर्त चिन्तन तो किया परन्तु वे अनुवाद प्रणाली का सोदाहरण पल्लवन नहीं कर पाए । मूलपाठ के अन्तर्ज्ञानमूलक बोधन से वे विश्लेषणात्मक बोधन के लक्ष्य की ओर तो बढे परन्तु उसके पीछे सुनिश्चित सिद्धान्त की भूमिका नहीं रही। ऐसे चिन्तकों में अनुवादकों के अतिरिक्त साहित्यकार तथा साहित्य-समीक्षक ही अधिक थे, भाषाविज्ञानी नहीं । इसके अतिरिक्त वे एक-दूसरे के चिन्तन से परिचित हों, ऐसा भी प्रतीत नहीं होता था। आधुनिक [[भाषाविज्ञान का इतिहास|भाषाविज्ञान]] का उदय यद्यपि बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुआ, परन्तु अनुवाद सिद्धान्त की प्रासंगिकता की दृष्टि से उत्तरार्ध की अवधि का महत्त्व है । इस अवधि में भाषाविज्ञान से परिचित अनुवादकों तथा भाषाविज्ञनियों का ध्यान अनुवाद सिद्धान्त की ओर आकृष्ट हुआ । संरचनात्मक भाषाविज्ञान का विकास, अर्थविज्ञान की प्रगति, सम्प्रेषण सिद्धान्त तथा भाषाविज्ञान का समन्वय, तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं - समाजभाषाविज्ञान, शैलीविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान, प्रोक्ति विश्लेषण - का विकास, तथा सङ्केतविज्ञान, विशेषतः पाठ संकेतविज्ञान, का उदय ऐसी घटनाएँ मानी जाती हैं, जो अनुवाद सिद्धान्त को पुष्ट तथा विकसित करने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। आङ्ग्ल-अमरीकी धारा में एक विद्वान् यूजेन नाइडा भी माने जाते हैं। उन्होंने बाइबिल-अनुवाद के अनुभव के आधार पर अनुवाद सिद्धान्त और व्यवहार पर अपने विचार ग्रन्थों के रूप में प्रकट किए (१९६४-१९६९) । इनमें अनुवाद सिद्धान्त का विस्तृत, विशद तथा तर्कसङ्गत रूप देखने को मिलता है। नाइडा ने अनुवाद प्रक्रिया का विवरण देते हुए मूलभाषा पाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषासिद्धान्त प्रस्तुत किया तथा लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त सन्देश के पुनर्गठन के विभिन्न आयाम निर्धारित किए। उन्होंने अनुवाद की स्थिति से सम्बद्ध दोनों भाषाओं के बीच विविधस्तरीय समायोजनों का विवरण प्रस्तुत किया । अन्य विद्वान् कैटफोर्ड (१९६५) हैं, जिनके अनुवाद सिद्धान्त में संरचनात्मक भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग का उदाहरण मिलता है । उन्होंने शुद्ध भाषावैज्ञानिक आधार पर अनुवाद के प्रारूपो का निर्धारण किया, अनुवाद-परिवृत्ति का भाषावैज्ञानिक विवरण दिया, तथा अनुवाद की सीमाओं पर विचार किया । तीसरे प्रभावशाली विद्वान् पीटर न्युमार्क (1981) हैं जिन्होंने सुगठित और घनिष्ठ शैली में अनुवाद सिद्धान्त का तर्कसङ्गत तथा गहन विवेचन प्रस्तुत करने का प्रयास किया । वे अपने विचारों को उपयुक्त उदाहरणों से स्पष्ट करते चलते हैं। उन्होंने नाइडा के विपरीत, पाठ प्ररूपभेद के अनुसार विशिष्ट अनुवाद प्रणाली की मान्यता प्रस्तुत की । उनका अनुवाद सिद्धान्त को योगदान है कि, अनुवाद की अर्थकेन्द्रित (मूलभाषापाठ केन्द्रित) तथा सम्प्रेषण केन्द्रित (अनुवाद के पाठक पर केन्द्रित) प्रणाली की सङ्कल्पना । उन्होंने पाठ विश्लेषण, सन्देशान्तरण तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति की स्थितियों में सम्बन्धित अनेक अनुवाद सूत्र प्रस्तुत किए; यह भी इनका एक उल्लेखनीय वैशिष्ट्य माना जाता है। यूरोपीय परम्परा में [[जर्मन भाषा]] का लीपझिग स्कूल प्रभावशाली माना जाता है । इसकी मान्यता है कि, सब प्रकार के अनुभवों का अनुवाद सम्भव है । यह स्कूल पाठ के संज्ञानात्मक (विकल्पनरहित) तथा सन्दर्भपरक (विकल्पनशील) अङ्गों में अन्तर मानता है तथा रूपान्तरण व्याकरण और पाठसंकेतविज्ञान का भी उपयोग करता है । इस शाला ने साहित्येतर पाठों के अनुवाद पर अधिक ध्यान केन्द्रित किया । वस्तुतः अनवाद सिद्धान्त पर सबसे अधिक साहित्य जर्मन भाषा में मिलता है ऐसा माना जाता है । रूसी परम्परा में फेदोरोव अनुवाद सिद्धान्त को स्वतन्त्र भाषिक अनुशासन मानते हैं । कोमिसारोव ने अनुवाद सम्बन्धी समस्याओं की चर्चा निम्नलिखित शीर्षकों से की : :(क) अनुवाद सिद्धान्त का प्रतिपाद्य, उद्देश्य तथा अनुवाद प्रणाली, :(ख) अनुवाद का सामान्य सिद्धान्त, :(ग) अनुवादगत मूल्यसमता, :(घ) अनुवाद प्रक्रिया, :(ङ) अनुवादक की दृष्टि से भाषाओं का व्यतिरेकी विश्लेषण। [[यान्त्रिक अनुवाद]], आधुनिक युग की एक मुख्य गतिविधि है । यन्त्र की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण के प्रारूप तैयार किए गए हैं, तथा विशेषतया प्रौद्योगिकीय पाठों के अनुवाद में सङ्गणक से सहायता ली गई है। [[भोलानाथ तिवारी]] के अनुसार द्विभाषिक शब्द-संग्रह में तो संगणक बहुत सहायक है ही; अब अनुवाद के क्षेत्र में इसकी सम्भावनाएँ निरन्तर बढ़ती जा रही हैं।<ref>अनुवाद सिद्धान्त और प्रयोग, भोलानाथ तिवारी १९७२ : २०२-१४</ref> == अनुवाद की प्रक्रिया == सैद्धान्तिक दृष्टि से '[[अनुवाद]] कैसे होता है' का निर्वैयक्तिक विवरण ही '''अनुवाद की प्रक्रिया''' है । भाषा व्यवहार की एक विशिष्ट विधा के रूप में अनुवाद प्रक्रिया का स्पष्टीकरण एक ऐसी दृष्टि की अपेक्षा रखता है, जिसमें अनुवाद कार्य सम्बन्धी बहिर्लक्षी परिस्थतियों और भाषा-संरचना एवं भाषा-प्रयोग सम्बन्धी अन्तर्लक्षी स्थितियों का सन्तुलन हो । उपर्युक्त परिस्थितियों से सम्बन्धित सैद्धान्तिक प्रारूपों के सन्दर्भ में यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना आधुनिक अनुवाद सिद्धान्त का वैशिष्ट्य माना जाता है । तदनुसार चिन्तन के अंग के रूप में अनुवाद की इकाई, अनुवाद का पाठक, और कला, कौशल (या शिल्प) एवं विज्ञान की दृष्टि से अनुवाद के स्वरूप पर दृष्टिपात के साथ साथ अनुवाद की प्रक्रिया का विशद विवरण किया जाता है। === अनुवाद की इकाई === सामान्यतः सन्देश का अनुवाद किया जाता है : अतः अनुवाद की इकाई भी सन्देश को माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अनुवादों में सन्देश की अभिव्यञ्जक भाषिक इकाई का आकार भी भिन्न-भिन्न रहता है। यान्त्रिक अनुवाद में एक रूप या पद अनुवाद की इकाई होती है, परन्तु मानव अनुवाद में इकाई का आकार अधिक विशाल होता है । इसी प्रकार आशु मौखिक अनुवाद (अनुभाषण) में यह इकाई एक वाक्य होती है, तो लिखित अनुवाद में इकाई का आकार वाक्य से बड़ा होता है (और क्रमिक मौखिक अनुवाद की इकाई भी एक वाक्य होती है, कभी एकाधिक वाक्यों का समुच्चय भी)। लिखित माध्यम के मानव अनुवाद में, अनुवाद की इकाई एक पाठ को माना जाता है । अनुवादक पाठ स्तर के सन्देश का अनुवाद करते हैं । पाठ के आकार की सीमा एक वाक्य से लेकर एक सम्पूर्ण पुस्तक या पुस्तकों के एक विशिष्ट समूह पर्यन्त कुछ भी हो सकती है, परन्तु एक सन्देश उसमें अपनी पूर्णता में अभिव्यक्त हो जाता हो ये आवश्यक है। उदाहरण के लिए, किसी सार्वजनिक सूचना या निर्देश का एक वाक्य ही पूर्ण सन्देश बन सकता है। जैसे 'प्रवेश वर्जित' है। दूसरी ओर 'रंगभूमि' या 'कामायनी' की पूरी पुस्तक ही पाठ स्तर की हो सकती है। भौतिक सुविधा की दृष्टि से अनुवादक पाठ को तर्कसंगत खण्डों में बाँटकर अनुवाद कार्य करते हैं, ऐसे खण्डों को अनुवादक पाठांश कह सकते हैं अथवा तात्कालिक सन्दर्भ में उन्हें ही पाठ भी कहा जाता है। इन्हें अनुवादक अनुवाद की तात्कालिक इकाई कहते हैं तथा सम्पूर्ण पाठ को अनुवाद की पूर्ण इकाई। ==== पाठ की संरचना ==== पाठ की संरचना का ज्ञान, अनुवाद प्रक्रिया को समझने में विशेष सहायक माना जाता है । पाठ संरचना के तीन आयाम माने गये हैं - '''पाठगत, पाठसहवर्ती तथा अन्य पाठपरक''' । संकेतविज्ञान की मान्यता के अनुसार तीनों का समकालिक अस्तित्व होता है तथा ये तीनों अन्योन्याश्रित होते हैं । ===== पाठगत आयाम ===== पाठगत (पाठान्तर्वर्ती) आयाम पाठ का आन्तरिक आयाम है, जिसमें उसके भाषा पक्ष का ग्रहण होता है । दोनों ही स्थितियों में सुगठनात्मकता पाठ का आन्तरिक गुण है। पाठ की पाठगत संरचना के दो पक्ष हैं - (१) वाक्य के अन्तर्गत आने वाली इकाइयों का अधिक्रम, (२) भाषा-विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर, अनुभव होने वाली संसक्ति । वाक्य की इकाइयाँ, वाक्य, उपवाक्य, पदबन्ध, पद और रूप (प्रत्यय) इस अधिक्रम में संयोजित होती हैं, परन्तु पाठ की दृष्टि से यह बात महत्त्वपूर्ण है कि एक से अधिक वाक्यों वाले पाठ के वाक्य अन्तरवाक्ययोजकों द्वारा इस प्रकार समन्वित होते हैं कि, पूरे पाठ में संसक्ति का गुण अनुभव होने लगता है । परन्तु संसक्ति तत्पर्यन्त सीमित नहीं । उसे हम पाठ विश्लेषण के विभिन्न स्तरों पर भी अनुभव कर सकते हैं । तदनुसार सन्दर्भगत संसक्ति, शब्दगत संसक्ति, और व्याकरणिक संसक्ति की बात की जाती है । ===== पाठसहवर्ती आयाम ===== पाठसहवर्ती आयाम में पाठ की विषयवस्तु, उसकी विशिष्ट विधा, उसका सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष, पाठ के समय या लेखक का अभिव्यक्तिपरक विशिष्ट आशय, उद्दिष्ट पाठक का सामाजिक व्यक्तित्व और उसकी आवश्यकता आदि का अन्तर्भाव होता है । पाठसहवर्ती आयाम के उपर्युक्त पक्ष परस्पर इस प्रकार सुबद्ध रहते हैं कि सम्पूर्ण पाठ एकान्वित इकाई के रूप में अनुभव होता है । यह स्पष्टतया माना जाता है कि, पाठ में पाठगत आयाम से ही पाठसहवर्ती आयाम की अभिव्यक्ति होती है और पाठसहवर्ती आयाम से पाठगत आयाम अनुशासित होता है। इस प्रकार ये दोनों अन्योंन्याश्रित हैं । पाठभेद से सुगठनात्मकता की गहनता में भी अन्तर आ जाता है - अनुभवी पाठक अपने अभ्यासपुष्ट अन्तर्ज्ञान से ग्रहण करता है । तदनुसार, साहित्यिक रचना में सुगठनात्मकता की जो गहनता उपलब्ध होती है वह अन्तिम विवरण में अनुभूत नहीं होती। ===== पाठपरक आयाम ===== पाठ संरचना के अन्य पाठपरक आयाम में एक विशिष्ट पाठ की, उसके समान या भिन्न सन्दर्भ वाले अन्य पाठों से सम्बन्ध की चर्चा होती है। उदाहरण के लिए, एक वस्त्र के विज्ञापन की भाषा की, प्रसाधन सामग्री के विज्ञापन की भाषा से प्रयोग शैली की दृष्टि से जो समानता होगी तथा बैंकिग सेवा के विज्ञापन से जो भिन्नता होगी वो सम्बन्ध पर चर्चा की जाती है। === विभिन्न प्रारूप === इस में अनुवाद प्रक्रिया के प्रमुख प्रारूपों की प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन के विभिन्न पक्षों को जानने के लिये चर्चा होती है। प्रारूपकार प्रायः अपनी अनुवाद परिस्थितियों तथा तत्सम्बन्धी चिन्तन से प्रेरित होने के कारण प्रक्रिया के कुछ ही पक्षों पर विशेष बल दे पाते हैं । सर्वांगीणता में इस न्यूनता की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि, विवेचित पक्ष के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी मिल जाती है । इस दृष्टि से बाथगेट (१९८१) द्रष्टव्य है । अनुवाद प्रक्रिया के प्रारूपों की रचना के पीछे दो प्रेरक तत्त्व प्रधान रूप से माने जाते हैं - मानव अनुवादकों का प्रशिक्षण तथा यन्त्र अनुवाद का यान्त्रिक पक्ष। इन दोनों की आवश्यकताओं से प्रेरित होकर अनुवाद प्रक्रिया के सैद्धान्तिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए गए । बहुधा केवल मानव अनुवादकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता से प्रेरित अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों से होती है। अनुप्रयोगात्मक आयाम में इनकी उपयोगिता स्पष्ट की जाती है । ==== सामान्य सन्दर्भ ==== अनुवाद प्रक्रिया का केन्द्र बिन्दु है लक्ष्यभाषा में मूलभाषा पाठ के अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करना । यह प्रक्रिया एकपक्षीय होती है - मूलभाषा से लक्ष्यभाषा में । परन्तु भाषाओं की यह स्थिति अन्तःपरिवर्त्य होती है - जो प्रथम बार में मूलभाषा है, वह द्वितीय बार में लक्ष्यभाषा हो सकती है । इस प्रक्रिया को सम्प्रेषण सिद्धान्त से समर्थित मानचित्र द्वारा भी समाझाया जाता है, जो निम्न प्रकार से है (न्यूमार्क १९६९) : (१) वक्ता/लेखक का विचार → (२) मूलभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (३) मूलभाषा पाठ → (४) प्रथम श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया → (५) अनुवादक का अर्थबोध → (६) लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रुढियाँ → (७) लक्ष्यभाषा पाठ → (८) द्वितीय श्रोता/पाठक की प्रतिक्रिया इस प्रारूप के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के कुल आठ सोपान हो सकते हैं । लेखक या वक्ता के मन में उठने वाला विचार मूलभाषा की अभिव्यक्ति रूढियों में बँधकर मूलभाषा के पाठ का आकार ग्रहण करता है, जिससे पहले (मूलभाषा के) श्रोता या पाठक के मन में वक्ता/लेखक के विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया प्रकट होती है । तत्पश्चात् अनुवादक अपनी प्रतिभा, भाषाज्ञान और विषयज्ञान के अनुसार मूलभाषा के पाठ का अर्थ समझकर लक्ष्यभाषा की अभिव्यक्ति रूढ़ियों का पालन करते हुए लक्ष्यभाषा के पाठ का सर्जन करता है, जिसे दूसरा (लक्ष्यभाषा का) पाठक ग्रहण करता है । इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि सं० ५, अर्थात् अनुवादक का सं० ३, ४ और १ इन तीनों से सम्बन्ध है । वह मूलभाषा के पाठ का अर्थबोध करते हुए पहले पाठक के समान आचरण करता है, और मूलभाषा का पाठ क्योंकि वक्ता/लेखक के विचार का प्रतीक होता है, अतः अनुवादक उससे भी जुड़ जाता है । इसी प्रारूप को विद्वानों ने प्रकारान्तर से भी प्रस्तुत किया है । उदारण के लिये नाइडा, न्यूमार्क, और बाथगेट के अंशदानों की चर्चा की जाती है। == नाइडा का चिन्तन == नाइडा (१९६४) के अनुसार <ref name="Pandey2007">{{cite book|author=Kailash Nath Pandey|title=Prayojanmulak Hindi Ki Nai Bhumika|url=https://books.google.com/books?id=xBpEuN9CsTMC&pg=PP1|year=2007|publisher=Rajkamal Prakashan Pvt Ltd|isbn=978-81-8031-123-9|pages=1–}}</ref> ये अनुवाद पर्याय जिस प्रक्रिया से निर्धारित होते हैं, उसके दो रूप हैं : प्रत्यक्ष और परोक्ष । इन दोनों में आधारभूत अन्तर है । प्रत्यक्ष प्रक्रिया के प्रारूप के अनुसार मूल पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर उपलब्ध भाषिक इकाइयों के लक्ष्यभाषा में अनुवाद पर्याय निश्चित होते हैं; और अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें मूल पाठ के प्रत्येक अंश का अनुवाद होता है । इस प्रक्रिया में एक मध्यवर्ती स्थिति भी होती है जिसमें एक निर्विशेष और सार्वभौम भाषिक संरचना रहती है; इसका केवल सैद्धान्तिक महत्त्व है । इस प्रारूप की मान्यता के अनुसार, अनुवादक मूलभाषा पाठ के सन्देश को सीधे लक्ष्यभाषा में ले जाता है; वह इन दोनों स्थितियों में मूलभाषा पाठ और लक्ष्यभाषा पाठ की बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही रहता है । अनुवाद-पर्यायों के चयन और प्रस्तुतीकरण का कार्य एक स्वचालित प्रक्रिया के समान होता है । नाइडा ने एक आरेख के द्वारा इसे स्पष्ट किया है : <poem> क ---------------- (य) ---------------- ख </poem> इसमें 'क' मूलभाषा है, 'ख' लक्ष्यभाषा है, और '(य)' वह मध्यवर्ती संरचना है, जो दोनों भाषाओं के लिए समान होती है और जो अनुवाद को सम्भव बनाती है; यहाँ दोनों भाषाएँ एक-दूसरे के साथ इस प्रकार सम्बद्ध हो जाती हैं कि उनका अपना वैशिष्ट्य कुछ समय के लिए लुप्त हो जाता है । परोक्ष प्रक्रिया के प्रारूप में धारणा यह है कि अनुवादक पाठ की बाह्यतलीय संरचना पर्यन्त सीमित रहकर आवश्यकतानुसार, अपि तु प्रायः सदा, पाठ की गहन संरचना में भी जाता है और फिर लक्ष्यभाषा में उपयुक्त अनुवाद पर्याय प्रस्तुत करता है । वस्तुतः इस प्रारूप में पूर्ववर्णित प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप का अन्तर्भाव हो जाता है; दोनों में विरोध नहीं है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप की यह नियम है कि अनुवाद कार्य बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही हो जाता है, जबकि परोक्ष प्रक्रिया के अनुसार अनुवाद कार्य प्रायः पाठ की गहन संरचना के माध्यम से होता है, यद्यपि इस बात की सदा सम्भावना रहती है कि भाषा में मूलभाषा के अनेक अनुवाद पर्याय बाह्यतलीय संरचना के स्तर पर ही मिल जाएँ। नाइडा परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के समर्थक हैं । निम्नलिखित आरेख द्वारा वे इसे स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं - <code> क (मूलभाषा पाठ) ख (लक्ष्यभाषा पाठ) | ↑ | | | | ↓ ↑ (विश्लेषण) (पुनर्गठन) | | | | ↓ ↑ य ———————————— संक्रमण ——————————— र य = मूलभाषा का गहनस्तरीय विश्लेषित पाठ र = लक्ष्यभाषा में सङ्क्रान्त गहनस्तरीय (और समसंरचनात्मक) पाठ </code> नाइडा के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया के वास्तव में तीन सोपान होते हैं- (१) अनुवादक सर्वप्रथम मूलभाषा के पाठ का विश्लेषण करता है; पाठ की व्याकरणिक संरचना तथा शब्दों एवं शब्द श्रृङ्खलाओं का अर्थगत विश्लेषण कर वह मूलपाठ के सन्देश को ग्रहण करता है । इसके लिए वह भाषा-सिद्धान्त पर आधारित भाषा-विश्लेषण की तकनीकों का उपयुक्त रीति से अनुप्रयोग करता है । विशेषतः असामान्य रूप से जटिल तथा दीर्घ और अनेकार्थ वाक्यों और वाक्यांशों/पदबन्धों के अर्थबोधन में हो सकने वाली कठिनाइयों का हल करने में मूलपाठ का विश्लेषण सहायक रहता है। (२) अर्थबोध हो जाने के पश्चात् सन्देश का लक्ष्यभाषा में संक्रमण होता है । यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में होती है । इसमें मूलपाठ के लक्ष्यभाषागत अनुवाद-पर्याय निर्धारित होते हैं तथा दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरों और श्रेणियों में सामञ्जस्य स्थापित होता है । (३) अन्त में अनुवादक मूलभाषा के सन्देश को लक्ष्य भाषा में उसकी संरचना एवं प्रयोग नियमों तथा विधागत रूढ़ियों के अनुसार इस प्रकार पुनर्गठित करता है कि वह लक्ष्यभाषा के पाठक को स्वाभाविक प्रतीत होता है या कम से कम अस्वाभाविक प्रतीत नहीं होता । === विश्लेषण === अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण के सन्दर्भ में नाइडा ने मूलपाठ के विश्लेषण के लिए एक सुनिश्चित भाषा सिद्धान्त तथा विश्लेषण की रूपरेखा प्रस्तुत की है। उनके अनुसार भाषा के दो पक्षों का विश्लेषण अपेक्षित है - व्याकरण तथा शब्दार्थ । नाइडा व्याकरण को केवल वाक्य अथवा निम्नतर श्रेणियों - उपवाक्य, पदबन्ध आदि - के गठनात्मक विश्लेषण पर्यन्त सीमित नहीं मानते । उनके अनुसार व्याकरणिक गठन भी एक प्रकार से अर्थवान् होता है । उदाहरण के लिए, कर्तृवाच्य संरचना और कर्मवाच्य/भाववाच्य संरचना में केवल गठनात्मक अन्तर ही नहीं, अपितु अर्थ का अन्तर भी है । इस सम्बन्ध में उन्होंने अनेकार्थ संरचनाओं की ओर विशेष रूप से ध्यान खींचा है। उदाहरण के लिए, 'यह राम का चित्र है' इस वाक्य के निम्नलिखित तीन अर्थ हो सकते हैं : :(१) यह चित्र राम ने बनाया है। :(२) इस चित्र में राम अंकित है। :(३) यह चित्र राम की सम्पत्ति है। ये तीनों वाक्य, नाइडा के अनुसार, बीजवाक्य या उपबीजवाक्य हैं, जिनका निर्धारण अनुवर्ति रूपान्तरण की विधि से किया गया है । बाह्यस्तरीय संरचना पर इन तीनों वाक्यों का प्रत्यक्षीकरण 'यह राम का चित्र है' इस एक ही वाक्य के रूप में होता है । नाइडा ने उपर्युक्त रूपान्तरण विधि का विस्तार से वर्णन किया है । उनकी रूपान्तरण विषयक धारणा चाम्स्की के रूपान्तरण-प्रजनक व्याकरण की धारणा के समान कठोर तथा गठनबद्ध नहीं, अपि तु अनुप्रयोग की प्रकृति तथा उसके उद्देश्य के अनुरूप लचीली तथा अन्तर्ज्ञानमलक है । इसी प्रकार उन्होंने शब्दार्थ की दो कोटियों - वाच्यार्थ और लक्ष्य-व्यंग्यार्थ- का वर्णनात्मक विश्लेषण किया है । यह ध्यान देने योग्य है कि, नाइडा ने विश्लेषण की उपर्युक्त प्रणाली को मूलभाषा पाठ के अर्थबोधन के साधन के रूप में प्रस्तुत किया है । उनका बल मूलपाठ के अर्थ का यथासम्भव पूर्ण और शुद्ध रीति से समझने पर रहा है । उनकी प्रणाली बाइबिल एवं उसके सदृश अन्य प्राचीन ग्रन्थों की भाषा के विश्लेषणात्मक अर्थबोधन के लिए उपयुक्त माना जाता है; यद्यपि उसका प्रयोग अन्य और आधुनिक भाषाभेदों के पाठों के अर्थबोधन के लिए भी किया जा सकता है । === सङ्क्रमण === विश्लेषण की सहायता से हुए अर्थबोध का लक्ष्यभाषा में संक्रान्त अनुवाद-प्रक्रिया का केन्द्रस्थ सोपान है। अनुवादकार्य में अनुवादक को विश्लेषण और पुनर्गठन के दो ध्रुवों के मध्य गति करते रहना होता है, परन्तु यह गति संक्रमण मध्यवर्ती सोपान के मार्ग से होती है, जहाँ अनुवादक को (क्षण भर के लिए रुकते हुए) पुनर्गठन के सोपान के अंशो को और अधिक स्पष्टता से दर्शन होता है । संक्रमण की यह प्रक्रिया अनुवादक के मस्तिष्क में तथा अपनी प्रकृति से त्वरित तथा अन्तर्ज्ञानमूलक होती है । अनुवाद प्रक्रिया में अनुवादक के व्यक्तित्व की संगति इस सोपान पर है । विश्लेषण से प्राप्त भाषिक तथा सम्प्रेषण सम्बन्धी तथ्यों का, उपयुक्त अनुवाद-पर्याय स्थिर करने में, अनुवादक जैसा उपयोग करता है, उसी में उसकी कुशलता निहित होती है । विश्लेषण तथा पुनर्गठन के सोपानों पर एक अनुवादक अन्य व्यक्तियों से भी कभी कुछ सहायता ले सकता है, परन्तु संक्रमण के सोपान पर वह एकाकी ही होता है । संक्रमण के सोपान पर विचारणीय बातें दो हैं - अनुवादक का अपना व्यक्तित्व तथा मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के बीच संक्रमणकालीन सामञ्जस्य । अनुवादक के व्यक्तित्व में उसका विषयज्ञान, भाषाज्ञान, प्रतिभा, तथा कल्पना इन चार की विशेष अपेक्षा होती है । तथापि प्रधानता की दृष्ट से प्रतिभा और कल्पना को विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान से अधिक महत्त्व देना होता है, क्योंकि अनुवाद प्रधानतया एक व्यावहारिक और क्रियात्मक कार्य है । विषयज्ञान तथा भाषाज्ञान की कमी को अनुवादक दूसरों की सहायता से भी पूरा कर सकता है, परन्तु प्रतिभा और कल्पना की दृष्टि से अपने ऊपर ही निर्भर रहना होता है। मूलभाषा एवं लक्ष्यभाषा के मध्य सामञ्जस्य स्थापित होना अनुवाद-प्रक्रिया की अनिवार्य एवं आन्तरिक आवश्यकता है । भाषान्तरण में सन्देश का प्रतिकूल रूप से प्रभावित होना सम्भावित रहता है । इस प्रतिकूलता के प्रभाव को यथासम्भव कम करने के लिए अर्थपक्ष और व्याकरण दोनों की दृष्टि से दोनों भाषाओं के बीच सामंजस्य की स्थिति लानी होती है । मुहावरे एवं उनका लाक्षणिक प्रयोग, अनेकार्थकता, अर्थ की सामान्यता तथा विशिष्टता, आदि अनेक ऐसे मुद्दे हैं जिनका सामंजस्य करना होता है । व्याकरण की दृष्टि से प्रोक्ति-संरचना एवं प्रकार, वाक्य-संरचना एवं प्रकार तथा पद-संरचना एवं प्रकार सम्बन्धी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनका समायोजन अपेक्षित होता है । उदाहरण के लिए, मूलपाठ में प्रयुक्त किसी विशेष अन्तरवाक्ययोजक के लिए लक्ष्यभाषा के पाठ में किसी अन्तरवाक्ययोजक का प्रयोग अपेक्षित न होना, मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना के लिए लक्ष्यभाषा में कर्तृवाच्य संरचना का उपयुक्त होना व्याकरणिक समायोजन के मुद्दे हैं । संक्रमण का सोपान अनुवाद कार्य की दृष्टि से जितना महत्त्वपूर्ण है, अनुवाद प्रक्रिया के स्पष्टीकरण में उसका अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व शेष दो सोपानों की तुलना में उतना स्पष्ट नहीं । बहुधा संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों के अन्तर को प्रक्रिया के विशदीकरण में स्थापित करना कठिन हो जाता है । विश्लेषण और पुनर्गठन के सोपानों पर, अनुवादक का कर्तृत्व यदि अपेक्षाकृत स्वतन्त्र होता है, तो संक्रमण के सोपान पर वह कुछ अधीनता की स्थिति में रहता है । अधिक मुख्य बात यह है कि, अनुवादक को उन सब मुद्दों की चेतना हो जिनका ऊपर वर्णन किया गया है । यदि अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए ये प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी माने जाएँ, तो अभ्यस्त अनुवादक के अनुवाद-व्यवहार के ये स्वाभाविक अङ्ग माने जा सकते हैं। === पुनर्गठन === मूलपाठ के सन्देश का अर्थबोध, संक्रमण के सोपान में से होते हुए लक्ष्यभाषा में पुनर्गठित होकर अनुवाद (अनुदित पाठ) का रूप धारण करता है । पुनर्गठन का सोपान लक्ष्यभाषा में मूर्त अभिव्यक्ति का सोपान है । अनुवाद प्रक्रिया की जानकारी के सम्बन्ध में अनुवादकों को पुनर्गठन के सोपान पर पाठ के जिन प्रमुख आयामों की उपयुक्तता पर ध्यान देना अभीष्ट है वे हैं - :१) व्याकरणिक संरचना तथा प्रकार, :२) शब्दक्रम, :३) सहप्रयोग, :४) भाषाभेद तथा शैलीगत प्रतिमान । लक्ष्यभाषागत उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता ही इन सबकी आधारभूत कसौटी है। इन गुणों की निष्पत्ति के लिए कई बार दोनों भाषाओं में समानता की स्थिति सहायक होती है, कई बार असमानता की । उदाहरण के लिए, यह आवश्यक नहीं कि, मूलभाषा के पदबन्ध के लिए लक्ष्यभाषा का उपयुक्त अनुवाद-पर्याय एक पदबन्ध ही हो; यह संरचना एक समस्त पद भी हो सकती है; जैसे, Diploma in translation = अनुवाद डिप्लोमा । देखना यह होता है कि, लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन उपर्युक्त घटकों की दृष्टि से उपयुक्तता तथा स्वाभाविकता की स्थिति की निष्पत्ति करें; वे घटक लक्ष्यभाषा की 'आत्मीयता' (जीनियस) तथा परम्परा के अनुरूप हों । मूलभाषा में व्याकरणिक संरचना के कतिपय तथ्यों का लक्ष्यभाषा में स्वरूप बदल सकता है, यद्यपि यह सदा आवश्यक नहीं होता । उदाहरण के लिए, आङ्ग्ल मूलपाठ की कर्मवाच्य संरचना "Steps have been taken by the Government to meet the situation" को हिन्दी में कर्मवाच्य संरचना में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, [[कर्तृवाच्य]] संरचना में भी : " स्थिति का सामना करने के लिए सरकार द्वारा कार्यवाही की गई हैं/स्थिति का सामना करने के लिए सरकार ने कार्यवाही की हैं ।" परन्तु "The meeting was chaired by X" के लिए हिन्दी में कर्तृवाच्य संरचना "य ने बैठक की अध्यक्षता की" उपयुक्त प्रतीत होता है। ऐसे निर्णय पुनर्गठन के स्तर पर किए जाते हैं । यही बात सहप्रयोग के लिए है । सहप्रयोग प्रत्येक भाषा के अपने-अपने होते हैं । अंग्रेजी में to take a step कहते हैं, तो हिन्दी में 'कार्यवाही करना' । इस उदाहरण में to take का अनुवाद 'उठाना' समझना भूल मानी जाएगी : ये दोनों अपनी-अपनी भाषा में ऐसे शाब्दिक इकाइयों के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जिन्हें खण्डित नहीं किया जा सकता। भाषाभेद के अन्तर्गत, कालगत, स्थानगत और प्रयोजनमूलक भाषाभेदों की गणना होती है । तथापि एक सुगठित पाठ के स्तर पर ये सब शैलीभेद के रूप में देखे जाते हैं । उदाहरण के लिए, पुरानी अंग्रेजी की रचना का हिन्दी में अनुवाद करते समय, पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक को यह निर्णय करना होगा कि, लक्ष्यभाषा के किस भाषाभेद के शैलीगत प्रभाव मूलभाषापाठ के शैलीगत प्रभावों के समकक्ष हो सकते हैं । इस दृष्टि से पुरानी अंग्रेजी के पाठ का पुरानी हिन्दी में भी अनुवाद उपयुक्त हो सकता है, आधुनिक हिन्दी में भी । शैलीगत प्रतिमान को विहङ्ग दृष्टि से दो रूपों में समझाया जाता है : साहित्येतर शैली और साहित्यिक शैली । साहित्येतर शैली में औपचारिक के विरुद्ध अनौपचारिक तथा तकनीकी के विरुद्ध गैर-तकनीकी, ये दो भेद प्रमुख रूप से मिलते हैं । साहित्यिक शैली में पाठ के विधागत भेदों - गद्य और पद्य, आदि का विशेष रूप से उल्लेख किया जाता है । इस दृष्टि से औपचारिक शैली के मूलपाठ को लक्ष्यभाषा में औपचारिक शैली में ही प्रस्तुत किया जाए, या मूल गद्य रचना को लक्ष्यभाषा में गद्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए, यह निर्णय लक्ष्यभाषा की परम्परा पर आधारित उपयुक्तता के अनुसार करना होता है । उदाहरण के लिए, भारतीय भाषाओं में गद्य की तुलना में पद्य की परम्परा अधिक पुष्ट है; अतः उनमें मूल गद्य पाठ का यदि पद्यात्मक भाषान्तरण हो, तो वह भी उपयुक्त प्रतीत हो सकता है । सारांश यह कि लक्ष्यभाषा में जो स्वाभिक और उपयुक्त प्रतीत हो तथा जो लक्ष्यभाषा की परम्परा के अनुकूल हो – स्वाभाविकता, उपयुक्तता तथा परम्परानुवर्तिता, ये तीनों एक सीमा तक अन्योन्याश्रित हैं - उसके आधार पर लक्ष्यभाषा में सन्देश का पुनर्गठन होता है । नाइडा की प्रणाली किस प्रकार काम करती है, उसे निम्न उदहारणों की सहायता से भी समझाया जाता है। सार्वजनिक सूचना के सन्दर्भ से एक उदाहरण इस प्रकार है । (१) क = No admission य = Admission is not allowed र = प्रवेश की अनुमति नहीं है। ख = प्रवेश वर्जित है/अन्दर आना मना है । उक्त अनुवाद के अनुसार, 'क' मूलभाषा का पाठ है जो एक सार्वजनिक निर्देश की भाषा का उदाहरण है । यह एक अल्पांग (न्यूनीकृत) वाक्य है । इसके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए विश्लेषण की विधि से अनुगामी रूपान्तरण द्वारा अनुवादक इसका बीजवाक्य निर्धारित करता है, यह बीजवाक्य 'य' है; इसी से 'क' व्युत्पन्न है । संक्रमण के सोपान पर 'य' समसंरचनात्मक और समानार्थक वाक्य 'र' है जो पुरोगामी रूपान्तरण द्वारा पुनर्गठन के स्तर पर 'ख' का रूप धारण कर लेता है । 'ख' के दो भेद हैं; दोनों ही शुद्ध माने जाते हैं; उनमें अन्तर शैली की दृष्टि से है । ‘प्रवेश वर्जित है' में औपचारिकता है तथा वह सुशिक्षित वर्ग के उपयुक्त है; 'अन्दर आना मना है' में अनौपचारिकता है और उसे सामान्य रूप से सभी के लिए और विशेष रूप से अल्पशिक्षित वर्ग के लिए उपयुक्त माना जाता है; सूचनात्मकता तथा (निषेधात्मक) आदेशात्मकता दोनों में सुरक्षित है । यहाँ प्रशासनिक अंग्रेजी का निम्नलिखत वाक्य है, जो मूलपाठ है और उक्त अनुवाद के अनुसार 'क' के स्तर पर है : (२) ''It becomes very inconvenient to move to the section officer's table along with all the relevant papers a number of times during the day in connection with the above mentioned work. [[चित्र:अनुवाद की प्रक्रिया.jpg|center|500px]] :(१) ''one moves to the section officer's table. :(२) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers. :(३) ''one moves to the section officer's table, with all the relevant papers, a number of times during the day. :(४) ''one moves to the section officer's table with all the relevant papers, a number of times during the day, in connection will above mentioned work. चित्र में इस वाक्य का विश्लेषण दो खण्डों में किया गया है । पहले खण्ड (अ) में इसे दो भागों में विभक्त किया गया है - उच्चतर वाक्य तथा निम्नतर वाक्य, जिन्हें स्थूल रूप से वाक्य रचना की परम्परागत कोटियों - मुख्य उपवाक्य और आश्रित उपवाक्यसमकक्ष माना जाता हैं। दूसरे खण्ड (ब) में दोनों - उच्चतर तथा निम्नतर वाक्यों का विश्लेषण है। उच्चतर वाक्य के तीन अङ्ग हैं, जिनमें पूरक का सम्बन्ध कर्ता से है; वह कर्ता का पूरक है । निम्नतर वाक्य में It का पूरक है to move और वह कर्ता के स्थान पर आने के कारण संज्ञापदबन्ध (=संप) है, क्योंकि कर्ता कोई संप ही हो सकता है । यह संप एक वाक्य से व्युत्पन्न है जिसकी आधारभूत संरचना में कर्ता, क्रिया तथा तीन क्रियाविशेषकों की शृंखला दिखाई पड़ती है (चित्र में इसे स्पष्ट किया गया है) । इस आधारभूत, निम्नतर वाक्य की संरचना का स्पष्टीकरण (१) से (४) पर्यन्त के उपवाक्यों में हुआ है । इसमें क्रियाविशेषकों का क्रमिक संयोजन स्पष्ट किया गया है। चित्र में प्रदर्शित नाइडा के मतानुसार यह प्रक्रिया का 'य' स्तर है। तत्पश्चात् प्रत्यक्ष तथा परोक्ष अनुवाद प्रक्रिया प्रारूपों की तुलना की जाती है। प्रत्यक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार उपर्युक्त वाक्य के निम्नलिखित अनुवाद किए जा सकते हैं (इन्हें 'र' स्तर पर माना जा सकता है) : "उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाना असुविधाजनक रहता है" अथवा "यह असुविधाजनक है कि उपर्युक्त कार्य के सम्बन्ध में सभी सम्बन्धित पत्रों को लेकर अनुभाग अधिकारी के पास दिन में अनेक बार जाया जाए।" 'य' से 'र' पर आना संक्रमण का सोपान है, जिस पर मूलपाठ तथा लक्ष्यभाषा पाठ के मध्य ताल-मेल बैठाने के प्रयत्न के चिह्न भी मलते हैं । परन्तु परोक्ष प्रक्रिया प्रारूप के अनुसार अनुवादक उपर्युक्त विश्लेषण की विधि का उपयोग करते हैं, और तदनुसार प्रस्तुत वाक्य का उपयुक्त अनुवाद इस प्रकर हो सकता है -"उपर्युक्त काम के सम्बन्ध में सारे सम्बन्धित पत्रों के साथ अनुभाग अधिकारी के पास, जो दिन में कई बार जाना पड़ता है, उसमें बड़ी असुविधा होती है ।" यह वाक्य 'ख' स्तर पर है तथा पुर्नगठन के सोपान से सम्बन्धित है । उक्त अनुवाद में क्रियाविशेषकों का संयोजन और मूलपाठ के निम्नतर वाक्य की पदबन्धात्मक संरचना - to move to the section officer's table - के स्थान पर अनुवाद में क्रियाविशेषण उपवाक्य की संरचना - 'अनुभाग अधिकारी के पास जो दिन में कई बार जाना पड़ता है' का प्रयोग, ये दो बिन्दु ध्यान देने योग्य हैं, यह बात अनुवादक या अनुवाद प्रशिक्षणार्थी को स्पष्टता के लिये समझाई जाती है । फलस्वरूप, अनुवाद में स्पष्टता और स्वाभाविकता की निष्पत्ति की अपेक्षा होती है । साथ ही, मूलपाठ में मुख्य उपवाक्य (उच्चतर वाक्य) पर अर्थ की दृष्टि से जो बल अभीष्ट है, वह भी सुरक्षित रहता है । इन दोनों वाक्यों का अनुवाद तथा विश्लेषण, मुख्य रूप से विश्लेषण की तकनीक तथा उसकी उपयोगिता के स्पष्टीकरण के लिए द्वारा किया गया है । इन दोनों में भाषाभेद तथा भाषा संरचना की अपनी विशेषताएँ हैं, जिन्हें अनुवाद-प्रशिक्षणार्थीओं को सैद्धान्तिक तथा प्रणालीवैज्ञानिक भूमिका पर समझाया जाता है और अनुवाद प्रक्रिया तथा अनूदित पाठ की उपयुक्तता की जानकारी के प्रति उसमें आत्मविश्वास की भावना का विकास हो सकता है, जो सफल अनुवादक बनने के लिए अपेक्षित माना जाता है। == न्यूमार्क का चिन्तन == न्यूमार्क (१९७६) के अनुसार अनुवाद प्रक्रिया का प्रारूप निम्नलिखित आरेख के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है : <ref name="Neeraja2015">{{cite book|author=Gurramkaunda Neeraja|title=Anuprayukta Bhasha vigyan Ki Vyavaharik Parakh|url=https://books.google.com/books?id=dK3KDgAAQBAJ&pg=PA31|date=5 June 2015|publisher=Vani Prakashan|isbn=978-93-5229-249-3|pages=31–}}</ref> [[चित्र:न्यूमार्क आरेख.jpg|center|500px|]] नाइडा और न्यूमार्क द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया का विहङ्गावलोकन करने से पता चला है कि दोनों की अनुवाद-प्रक्रिया सम्बन्धी धारणा में कोई मौलिक अन्तर नहीं। बाइबिल अनुवादक होने के कारण नाइडा की दृष्टि प्राचीन पाठ के अनुवाद की समस्याओं से अधिक बँधी दिखी; अतः वे विश्लेषण, संक्रमण तथा पुनर्गठन के सोपानों की कल्पना करते हैं । प्राचीन रचना होने के कारण बाइबिल की भाषा में अर्थग्रहण की समस्या भाषा की व्याकरणिक संरचना से अधिक जुड़ी हुई है । इतः नाइडा के अनुवाद सम्बन्धी भाषा सिद्धान्त में व्याकरण को विशेष महत्त्व का स्थान प्राप्त होता है। व्याकरणिक गठन से सम्बन्धित अर्थग्रहण में 'विश्लेषण' विशेष सहायक माना जाता है, अतः नाइडा ने सोपान का नामकरण भी 'विश्लेषण' किया । न्यूमार्क की दृष्टि आधुनिक तथा वैविध्यपूर्ण भाषाभेदों के अनुवाद कार्य की समस्याओं से अनुप्राणित मानी जाती है। अतः वे बोधन तथा अभिव्यक्ति के सोपानों की कल्पना करते हैं। परन्तु वे मूलभाषा पाठ को लक्ष्यभाषा पाठ से भी जोड़ते हैं, जिससे दोनों पाठों का अनुवाद-सम्बन्ध तुलना तथा व्यतिरेक के सन्दर्भ में स्पष्ट हो सके । न्युमार्क भी बोधन के लिए विशिष्ट भाषा सिद्धान्त प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे शब्दार्थविज्ञान को केन्द्रीय महत्त्व का स्थान देते हैं। अपने विभिन्न लेखों में उन्होंने (१९८१) अपनी सैद्धान्तिक स्थापना का विवरण प्रस्तुत किया है । एक उदाहरण के द्वारा उनके प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है : १. मूलभाषा पाठ : Judgment has been reserved. १.१ बोधन (तथा व्याख्या) : Judgment will not be announced immediately. २. अभिव्यक्ति (तथा पुनस्सर्जन) : निर्णय अभी नहीं सुनाया जाएगा। २.१ लक्ष्यभाषा पाठ : निर्णय बाद में सुनाया जाएगा । ३. शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद : निर्णय कर लिया गया है सुरक्षित । शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद से जहाँ दोनों भाषाओं के शब्दक्रम का अन्तर स्पष्ट होता है, वहाँ शब्दार्थ स्तर पर दोनों भाषाओं का सम्बन्ध भी प्रकट हो जाता है । अनुवादकों को ज्ञात हो जाता है कि reserved के लिए हिन्दी में 'सुरक्षित' या 'आरक्षित' सही शब्द है, परन्तु Judgement या 'निर्णय' के ऐसे सहप्रयोग में, जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में दिखाई देता है, शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद करना उपयुक्त न होगा । इससे यह सैद्धान्तिक भी स्पष्ट हो जाता है कि, अनुवाद को दो भाषाओं के मध्य का सम्बन्ध कहने की अपेक्षा दो विशिष्ट भाषा भेदों या दो विशिष्ट पाठों के मध्य का सम्बन्ध कहना अधिक उपयुक्त है, जिसमें अनुवाद की इकाई का आकार, सम्बन्धित भाषाभेद या पाठगत सन्देश की प्रकृति से निर्धारित होता है । प्रस्तुत वाक्य में सम्पूर्ण वाक्य ही अनुवाद की इकाई है, क्योंकि इसमें शब्दों का उपयुक्त अनुवाद अन्योन्याश्रय सम्बन्ध आधारित है । अनुवादक यह भी जान जाते हैं कि, उपर्युक्त वाक्य का हिन्दी समाचार में जो 'निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है' यह अनुवाद प्रायः दिखाई देता है वह क्यों अस्वभाविक, अनुपयुक्त तथा असम्प्रेषणीय-वत् प्रतीत होता है । शब्दशः अनुवाद की उपर्युक्त प्रवृत्ति का प्रदर्शन करने वाले अनुवादों को '''<nowiki/>'अनुवादाभास'''' कहा जाता है। वस्तुतः अनुवाद की प्रक्रिया में आवृत्ति का तत्त्व होता है, अर्थात् अनुवादक दो बार अनुवाद करते हैं । मूलपाठ के बोधन के लिए मूलभाषा में अनुवाद किया जाता है : No admission → admission is not allowed; इसी प्रकार लक्ष्यभाषा में सन्देश के पुनर्गठन या अभिव्यक्ति को लक्ष्यभाषा पाठ का आकार देते हुए हम लक्ष्यभाषा में उसका पुन: अनुवाद करते हैं; 'प्रवेश की अनुमति नहीं है' → 'अन्दर आना मना है'। इस प्रकार अन्यभाषिक अनुवाद में दोनों भाषाओं के स्तर पर समभाषिक अनुवाद की स्थिति आती है। इन्हें क्रमशः बोधनात्मक अनुवाद (डिकोडिंग ट्रांसलेशन) पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद (रि-इनकोडिंग ट्रांसलेशन) कहा जाता है । बोधनात्मक अनुवाद साधन रूप है - मूलपाठ के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया गया है। पुनरभिव्यक्तिमूलक अनुवाद साध्य रूप है - वास्तविक अनूदित पाठ । यदि एक अभ्यस्त अनुवादक के यह अर्ध–औपचारिक या अनौपचारिक रूप में होता है, तो अनुवाद-प्रशिक्षणार्थी के लिए इसके औपचारिक प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता और उपयोगिता होती है जिससे वह अनुवाद-प्रक्रिया को (अनुभवस्तर के साथ-साथ) ज्ञान के स्तर पर भी आत्मसात् कर सके। == बाथगेट का चिन्तन == बाथगेट (१९८०) अपने प्रारूप को संक्रियात्मक प्रारूप कहते हैं, जो अनुवाद कार्य की व्यावहारिक प्रकृति से विशेष मेल खाने के साथ-साथ नाइडा और न्यूमार्क के प्रारूपों से अधिक व्यापक माना जाता है । इसमें सात सोपानों की कल्पना की गई है, जिनमें से पर्यालोचन के सोपान के अतिरिक्त शेष सर्व में अतिव्याप्ति का अवकाश माना जाता है (जो असंगत नहीं) परन्तु सैद्धान्तिक स्तर पर इनके अपेक्षाकृत स्वतन्त्र अस्तित्व को मान्यता प्रदान की गई है । मूलभाषा पाठ का मूल जानना और तदनुसार अपनी मानसिकता का मूलपाठ से तालमेल बैठाना समन्वयन है । यह सोपान मूलपाठ के सब पक्षों के धूमिल से अवबोधन पर आधारित मानसिक सज्जता का सोपान है, जो अनुवाद कार्य में प्रयुक्त होने की अभिप्रेरणा की व्याख्या करता है तथा अनुवाद की कार्यनीति के निर्धारण के लिए आवश्यक भूमिका निर्माण का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है । विश्लेषण और बोधन के सोपान (नाइडा और न्यूमार्क-वत्) पूर्ववत् हैं । पारिभाषिक अभिव्यक्तियों के अन्तर्गत बाथगेट उन अंशों को लेते हैं, जो मूलपाठ के सन्देश की निष्पत्ति में अन्य अंशों की तुलना में विशेष महत्त्व के हैं और जिनके अनुवाद पर्यायों के निर्धारण में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता वो मानते है । पुनर्गठन भी पहले के ही समान है । पुनरीक्षण के अन्तर्गत अनूदित पाठ का सम्पूर्ण अन्वेषण आता है । हस्तलेखन या टङ्कण की त्रुटियों को दूर करने के अतिरिक्त अभिव्यक्ति में व्याकरणनिष्ठता, परिष्करण, श्रुतिमधुरता, स्पष्टता, स्वाभाविकता, उपयुक्तता, सुरुचि, तथा आधुनिक प्रयोग रूढि की दृष्टि से अनूदित पाठ का आवश्यक संशोधन पुनरीक्षण है । यह कार्य प्रायः अनुवादक से भिन्न व्यक्ति, अनुवादक से यथोचित् सहायता लेते हुए, करता है । यदि स्वयं अनुवादक को यह कार्य करना हो तो अनुवाद कार्य तथा पुनरीक्षण कार्य में समय का इतना व्यवधान अवश्य हो कि अनुवादक अनुवाद कार्य कालीन स्मृति के पाश से मुक्तप्राय होकर अनूदित पाठ के प्रति तटस्थ और आलोचनात्मक दृष्टि अपना सके तथा इस प्रकार अनुवादक से भिन्न पुनरीक्षक के दायित्व का वहन कर सके । पर्यालोचन के सोपान में विषय विशेषज्ञ और अनुवादक के मध्य संवाद के द्वारा अनूदित पाठ की प्रामाणिकता की पुष्टि का प्रावधान है । जिन पाठों की विषयवस्तु प्रामाणिकता की अपेक्षा रखती है - जैसे [[विधि]], प्रकृतिविज्ञान, समाज विज्ञान, [[प्रौद्योगिकी]], आदि - उनमें पर्यलोचन की उपयोगिता स्पष्ट होती है। एक उदाहरण के द्वारा बाथगेट के प्रारूप को स्पष्ट किया जाता है। मूलभाषा पाठ है किसी ट्रक पर लिखा हुआ सूचना वाक्यांश Public Carrier. इसके अनुवाद की मानसिक सज्जता करते समय अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, इस वाक्यांश का उद्देश्य जनता को ट्रक की उपलब्धता के विषय में एक विशिष्ट सूचना देना है । इस वाक्यांश के सन्देश में जहाँ प्रभावपरक या सम्बोधनात्मक (श्रोता केन्द्रित) प्रकार्य की सत्ता है, वहाँ सूचनात्मक प्रकार्य भी इस दृष्टि से उपस्थित है कि, उसका [[विधिशास्त्र|विधि]]<nowiki/>क्षेत्रीय और प्रशासनिक पक्ष है - इन दोनों दृष्टियों से ऐसे ट्रक पर कुछ प्रतिबन्ध लागू होते हैं । अतः कुल मिलाकर यह वाक्यांश सम्प्रेषण केन्द्रित प्रणाली के द्वारा अनूदित होने योग्य है। विश्लेषण के सोपान पर अनुगामी रूपान्तरण के द्वारा अनुवादक इसका बोधनात्मक अनुवाद करते हुए बीजवाक्य या वाक्यांश निर्धारित करते हैं : It carries goods of the public = Carrier of public goods. बोधन के सोपान पर अनुवादक को यह स्पष्ट होता है कि, It can be hired = "इसे भाडे पर लिया जा सकता है ।" पारिभाषिक अभिव्यक्ति के सोपान पर अनुवादक इसे विधि-प्रशासनिक अभिव्यक्ति के रूप में पहचानते हैं, जिसके सन्देश के अनुवाद को सम्प्रेषणीय बनाते हुए अनुवादक को उसकी विशुद्धता को भी यथोचित् रूप से सुरक्षित रखना है । पुनर्गठन के सोपान पर अनुवादक के सामने इस वाक्यांश के दो अनुवाद हैं : 'लोकवाहन' (उत्तर प्रदेश में प्रचलित) और 'भाडे का ट्रक' (बिहार में प्रचलित) । पिछले सोपानों की भूमिका पर अनुवादक के सामने यह स्पष्ट हो जाता है कि - ‘लोकवाहन' में सन्देश का वैधानिक पक्ष भले सुरक्षित हो परन्तु यह सम्प्रेषण के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर पाता । इस अभिव्यक्ति से साधारण पढ़े-लिखे को यह तुरन्त पता नहीं चलता कि लोकवाहन का उसके लिए क्या उपयोग है । इसको सम्प्रेषणीय बनाने के लिए इसका पुनरभिव्यक्तिमूलक (समभाषिक) अनुवाद अपेक्षित है - 'भाड़े का ट्रक' – जिससे जनता को यह स्पष्ट हो जाता है कि, इस ट्रक का उसके लिए क्या उपयोग है । मूल अभिव्यक्ति इतनी छोटी तथा उसकी स्वीकृत अनुवाद 'भाड़े का ट्रक' इतना स्पष्ट है कि, इसके सम्बन्ध में पुनरीक्षण तथा पर्यालोचन के सोपान अपेक्षित नहीं, ऐसा कहा जाता है। === निष्कर्ष === अनुवाद प्रक्रिया के विभिन्न प्रारूपों के विवेचन से निष्कर्षस्वरूप दो बातें स्पष्टतः मानी जाती हैं । पहली, अनुवाद प्रक्रिया एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें तीन स्थितियाँ बनती हैं - '''(क) अनुवादपूर्व स्थिति -''' अनुवाद कार्य के सन्दर्भ को समझना । किस पाठसामग्री का, किस उद्देश्य से, किस कोटि के पाठक के लिए, किस माध्यम में, अनुवाद करना है, आदि इसके अन्तर्गत है । '''(ख) अनुवाद कार्य की स्थिति -''' मूलभाषा पाठ का बोधन, सङ्क्रमण, लक्ष्य भाषा में अभिव्यक्ति । '''(ग) अनुवादोत्तर स्थिति -''' अनूदित पाठ का पुनरीक्षण-सम्पादन तथा इस प्रकार अन्ततः ‘सुरचित' पाठ की निष्पत्ति। दूसरी बात यह है कि अनुवाद, मूलपाठ के बोधन तथा लक्ष्यभाषा में अभिव्यक्ति, इन दो ध्रुवों के मध्य निरन्तर होते रहने वाली प्रक्रिया है, जो सीधी और प्रत्यक्ष न होकर घुमावदार तथा परोक्ष है । वह मध्यवर्ती स्थिति जिसके जरिए यह प्रक्रिया सम्पन्न होती है, एक वैचारिक संज्ञानात्मक संरचना है, जो मूलपाठ के बोधन (जिसके लिए आवश्यकतानुसार विश्लेषण की सहायता लेनी होती है) से निष्पन्न होती है तथा जिसमें लक्ष्यभाषागत अभिव्यक्ति के भी बीज निहित रहते हैं । यह भाषा विशेष सापेक्ष शब्दों के बन्धन से मुक्त शुद्ध अर्थमयी सत्ता है । इस मध्यवर्ती संरचना का अधिष्ठान अनुवादक का मस्तिष्क होता है । सांस्कृतिक-संरचनात्मक दृष्टि से अपेक्षाकृत निकट भाषाओं में इस वैचारिक संरचना की सत्ता की चेतना अपेक्षाकृत स्पष्ट होती है । वैचारिक स्तर पर स्थित होने के कारण इसकी भौतिक सत्ता नहीं होती - भाषिक अभिव्यक्ति के स्तर पर यह यथातथ रूप में एक यथार्थ का रूप ग्रहण नहीं करती; यदि अनुवादक भाषिक स्तर पर इसे अभिव्यक्त भी करते हैं, तो केवल सैद्धान्तिक आवश्यकता की दृष्टि से, जिसमें विश्लेषण के रूप में कुछ वाक्यों तथा वाक्यांशों का पुनर्लेखन अन्तर्भूत होता है । परन्तु यह भी सत्य है कि यही वह संरचना है, जो अनूदित होकर लक्ष्यभाषा पाठ में परिणत होती है । इस बात को अन्य शब्दो में भी कहा जाता है कि, अनुवादक मूलभाषापाठ की वैचारिक संरचना का अनुवाद करता है परन्तु अनुवाद की प्रक्रिया की यह आन्तरिक विशेषता है कि जो सरंचना अन्ततोगत्वा लक्ष्य भाषा में अनूदित होती है, वह है मध्यवर्ती वैचारिक संरचना जो मूलपाठ की वैचारिक संरचना के अनुवादक कृत बोध से निष्पन्न है ! अनुवाद प्रक्रिया के इस निरूपण से सैद्धान्तिक स्तर पर दो बातों का स्पष्टीकरण होता है । एक, मूलभाषापाठ के अनुवादकीय बोध से निष्पन्न वैचारिक संरचना ही क्योंकि लक्ष्यभाषापाठ का रूप ग्रहण करती है, अतः अनुवादक भेद से अनुवाद भेद दिखाई पड़ता है । दूसरे, उपर्युक्त वैचारिक संरचना विशिष्ट भाषा निरपेक्ष (या उभय भाषा सापेक्ष) होती है - उसमें दोनों भाषाओं (मूल तथा लक्ष्य) के माध्यम से यथासम्भव समान तथा निकटतम रूप में अभिव्यक्त होने की संभाव्यता होती है । मूलभाषापाठ का सन्देश जो अनूदित हो जाता है उसकी यह व्याख्या है । == अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति == अनुवाद प्रक्रिया के उपर्युक्त विवरण के आधार पर अनुवाद प्रक्रिया की प्रकृति के परस्पर सम्बद्ध तीन मूलतत्त्व निर्धारित किए जाते हैं : '''सममूल्यता, द्वन्द्वात्मकता, और अनुवाद परिवृत्ति'''। === सममूल्यता === अनुवाद कार्य में अनुवादक मूलभाषापाठ के लक्ष्यभाषागत पर्यायों से जिस समानता की बात करता है, वह मूल्य (वैल्यू) की दृष्टि से होती है । यह मूल्य का तत्त्व भाषा के शब्दार्थ तथा व्याकरण के तथ्यों तक सीमित नहीं होता, अपितु प्रायः उनसे कुछ अधिक तथा भाषाप्रयोग के सन्दर्भ से (आन्तरिक और बाह्य दोनों) से उद्भूत होता है । वस्तुतः यह एक पाठसंकेतवैज्ञानिक संकल्पना है तथा सन्देश स्तर की समानता से जुड़ी है । भाषा के भाषावैज्ञानिक विश्लेषण में अर्थ के स्तर पर पर्यायत्ता या अन्ययांतर सम्बन्ध पर आधारित होते हुए भी सममूल्यता सन्देश का गुण है, जिसमें पाठ का उसकी समग्रता में ग्रहण होता है । यह अवश्य है कि सममूल्यता के निर्धारण में पाठसङ्केतविज्ञान के तीन घटकों के अधिक्रम का योगदान रहता है - वाक्यस्तरीय सममूल्यता पर अर्थस्तरीय सममूल्यता को प्राधान्य मिलता है तथा अर्थस्तरीय सममूल्यता पर सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता दी जाती है । दूसरे शब्दों में, यदि दोनों भाषाओं में वाक्यरचना के स्तर पर सममूल्यता स्थापित न हो तो अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित करनी होगी, और यदि अर्थस्तरीय सममूल्यता निर्धारित न हो सके, तो सन्दर्भस्तरीय सममूल्यता को मान्यता देनी होगी । उदाहरण के लिए, The meeting was chaired by X" (कर्मवाच्य) के हिन्दी अनुवाद “क्ष ने बैठक की अध्यक्षता की" (कर्तृवाच्य) में सममूल्यता का निर्धारण वाक्य स्तर से ऊपर अर्थ स्तर पर हुआ है, क्योंकि दोनों की वाक्यरचनाओं में वाच्य की दृष्टि से असमानता है । इसी प्रकार, What time is it? के हिन्दी अनुवाद 'कितने बजे हैं ?' (न कि समय क्या है जो हिन्दी का सहज प्रयोग न होकर अंग्रेजी का शाब्दिक अनुवाद ही अधिक प्रतीत होता है) के बीच सममूल्यता का निर्धारण अर्थस्तर से ऊपर सन्दर्भ - समय पूछना, जो एक दैनिक सामाजिक व्यवहार का सन्दर्भ है - के स्तर पर हुआ है । इस प्रकार सममूल्यता की स्थिति पाठसङ्केत के सङ्घटनात्मक पक्ष में होने के साथ-साथ सम्प्रेषणात्मक पक्ष में भी होती है, जिसमें सम्प्रेषणात्मक पक्ष का स्थान संघटनात्मक पक्ष से ऊपर होता है । सममूल्यता को पाठसंकेत वैज्ञानिक संकल्पना मानने से व्यवहार में जो छूट मिलती है, वह सम्प्रेषण की मान्यता पर आधारित अनुवाद कार्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ है । मूलभाषा का पाठ किस भाषाभेद (प्रयुक्ति) से सम्बन्धित है, उसका उद्दिष्ट/सम्भावित पाठक कौन है (उसका शैक्षिक-सांस्कृतिक स्तर क्या है), अनुवाद करने का उद्देश्य क्या है - इन तथ्यों के आधार पर अनुवाद सममूल्यों का निर्धारण होता है । इस प्रक्रिया में वे यदि कभी शब्दार्थगत पर्यायों तथा गठनात्मक संरचनाओं की सम्वादिता से कभी-कभी भिन्न हो सकते हैं, तो कुछ प्रसंगों में उनसे अभिन्न, अत एव तद्रूप होने की सम्भावना को नकारा भी नहीं किया जा सकता । यह ठीक है कि भाषाएँ संरचना, शैलीय प्रतिमान आदि की दृष्टि से अंशतः असमान होती हैं और यह भी ठीक है कि वे अंशतः समान भी होती हैं; मुख्य बात यह है कि उन समान तथा असमान बिन्दुओं को पहचाना जाए । सम्प्रेषण के सन्दर्भ में समानता एक लचीली स्थिति बन जाती है । अनुवाद में मूल्यगत समानता ही उपलब्ध करनी होती है । अनुवादगत सममूल्यता लक्ष्य भाषापाठ की दृष्टि से यथासम्भव स्वाभाविक तथा मूलभाषापाठ के यथासम्भव निकटतम होती है । इसका एक उल्लेखनीय गुण है। गत्यात्मकता, जिसका तात्पर्य यह है कि अनुवाद के पाठक की अनुवाद सममूल्यों के प्रति वही स्वीकार्यता है जो मूल के पाठकों की मूल की सम्बद्ध अभिव्यक्तियों के प्रति है । स्वीकार्यता या प्रतिक्रिया की यह समानता उभयपक्षीय होने से गतिशील है, और यही अनुवाद सममूल्यता की गत्यात्मकता है । === द्वन्द्वात्मकता === अनुवाद का सम्बन्ध दो स्थितियों के साथ है । इसे अनुवादक द्वन्द्वात्मकता कहेते हैं। यह द्वन्द्वात्मकता केवल भाषा के आयाम तक सीमित नहीं, अपितु समस्त अनुवाद परिस्थिति में व्याप्त है । इसकी मूल विशेषता है सन्तुलन, सामंजस्य या समझौता । एक प्रक्रिया, सम्बन्ध, और निष्पत्ति के रूप में अनुवाद की द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों को इस प्रकार निरूपित किया जाता है : ==== (क) अनुवाद का बाह्य सन्दर्भ ==== १. अनुवाद में, मूल लेखक तथा दूसरे पाठक (अनुवाद का पाठक) के बीच सम्पर्क स्थापित होता है । मूल लेखक और दूसरे पाठक के बीच देश या काल या दोनों की दृष्टि से दूरी या निकटता से द्वन्द्वात्मकता के स्वरूप में अन्तर आता है । स्थान की दृष्टि से मूल लेखक तथा पाठक दोनों ही विदेशी हो सकते हैं, स्वदेशी हो सकते हैं, या इनमें से एक विदेशी और एक स्वदेशी हो सकता है । काल की दृष्टि से दोनों अतीतकालीन हो सकते हैं, दोनों समकालीन हो सकते हैं, या लेखक अतीत का और पाठक समसामयिक हो सकता है । इन सब स्थितियों से अनुवाद प्रक्रिया प्रभावित होती है। २. अनुवाद में, मूल लेखक और अनुवादक में सन्तुलन अपेक्षित होता है । अनुवादक को मूल लेखक की चिन्तन पद्धति और अभिव्यक्ति पद्धति के साथ अपनी चिन्तन पद्धति तथा अभिव्यक्ति पद्धति का सामञ्जस्य स्थापित करना होता है। ३. अनुवाद में, अनुवादक तथा अनुवाद के पाठक के मध्य अनुबन्ध होता है । अनुवादक का अनुवाद करने का उद्देश्य वही हो जो अनुवाद के पाठक का अनुवाद पढ़ने के सम्बन्ध में है । अनुवादक के लिए आवश्यक है कि, वह अपने भाषा प्रयोग को अनुवाद के सम्भावित पाठक की बोधनक्षमता के अनुसार ढाले । ४. अनुवाद में, अनुवादक की व्यक्तिगत रुचि (अनुवाद कार्य तथा अनुवाद सामग्री दोनों की दृष्टि से) तथा उसकी व्यावसायिक आवश्यकता का समन्वय अपेक्षित है । ५. अपनी प्रकृति की दृष्टि से पूर्ण अनुवाद असम्भव है तथा अनूदित रचना मूल रचना के पूर्णतया समान नहीं हो सकती, परन्तु सामाजिक-सांस्कृतिक तथा राजनीतिक-आर्थिक दृष्टि से अनुवाद कार्य न केवल महत्त्वपूर्ण है अपितु आवश्यक और सुसंगत भी । एक सफल अनुवाद में उक्त दोनों स्थितियों का सन्तुलन होता है। ==== (ख) अनुवाद का आन्तरिक सन्दर्भ ==== ६. अनुवाद में, दो भाषाओं के मध्य सम्बन्ध के परिप्रेक्ष्य में, एक और भाषा-संरचना (सन्दर्भरहित) तथा भाषा-प्रयोग (सन्दर्भसहित) के मध्य द्वन्दात्मक सम्बन्ध स्पष्ट होता है, तो दूसरी ओर भाषा-प्रयोग के सामान्य पक्ष और विशिष्ट पक्ष के मध्य सन्तुलन की स्थिति उभरकर सामने आती है । ७. अनुवाद में, दो भाषाओं की विशिष्ट प्रयुक्तियों के दो विशिष्ट पाठों के मध्य विभिन्न स्तरों और आयामों पर समायोजन अपेक्षित होता है । ये स्तर/आयाम हैं - व्याकरणिक गठन, शब्दकोश के स्तर, शब्दक्रम की व्यवस्था, सहप्रयोग, शब्दार्थ, व्यवस्था, भाषाशैली की रूढ़ियाँ, भाषा-प्रकार्य, पाठ प्रकार, साहित्यिक सामाजिक-सांस्कृतिक रूढ़ियाँ । ८. गुणात्मक दृष्टि से अनुवाद में विविध प्रकार के सन्तुलन दिखाई देते हैं। किसी भी पाठ का सब स्तरों/आयामों पर पूर्ण अनुवाद असम्भव है, परन्तु सब प्रकार के पाठों का अनुवाद सम्भव है । एक सफल अनुवाद में निम्नलिखित युग्मों के घटक सन्तुलन की स्थिति में दिखाई देते हैं - विशुद्धता और सम्प्रेषणीयता, रूपनिष्ठता और प्रकार्यात्मकता, शाब्दिकता और स्वतन्त्रता, मूलनिष्ठता और सुन्दरता (रोचकता), और उद्रिक्तता तथा सामासिकता । तदनुसार एक सफल अनुवाद जितना सम्भव हो, उतना विशुद्ध, रूपनिष्ठ, शाब्दिक, और मूलनिष्ठ होता है तथा जितना आवश्यक हो उतना सम्प्रेषणीय प्रकार्यात्मक, स्वतन्त्र, और सुन्दर (रोचक) होता है । इसी प्रकार एक सफल अनुवाद में उद्रिक्तता (सूचना की दृष्टि से मूलपाठ की अपेक्षा लम्बा होना) की प्रवृत्ति है, परन्तु लक्ष्यभाषा प्रयोग के कौशल की दृष्टि से उसका संक्षिप्त होना वाञ्छित होता है। ९. कार्यप्रणाली की दृष्टि से, क्षतिपूर्ति के नियम के अनुसार अनुवाद में मुख्यतया निम्नलिखित युग्मों के घटकों में सह-अस्तित्व दिखाई देता है : छूटना-जुड़ना (सूचना के स्तर पर) और आलंकारिकता-सुबोधता (अभिव्यक्ति के स्तर पर) । लक्ष्यभाषा में व्यक्त सन्देश के सौष्ठवपूर्ण पुनर्गठन के लिए मूल पाठ में से कुछ छूटना तथा लक्ष्यभाषा पाठ में कुछ जुड़ना अवश्यम्भावी है । यदि कुछ छूटेगा तो कुछ जुड़ेगा भी; विशेष बात यह है कि न छूटने लायक यथासम्भव छूटे नहीं तथा न जुड़ने लायक जुड़े नहीं । मूलपाठ की कुछ आलंकारिक अभिव्यक्तियाँ, जैसे रूपक, अनुवाद में जब लक्ष्यभाषा में संक्रान्त नहीं हो पातीं तो अनलंकृत अभिव्यक्तियों का प्रयोग करना होता है - अलंकार की प्रभावोत्पादकता का स्थान सामान्य कथन की सुबोधता ले लेती है । यही बात विपरीत ढंग से भी हो सकती है - मूल की सुबोध अभिव्यक्ति के लिए लक्ष्यभाषा में एक अलंकृत अभिव्यक्ति का चयन कर लिया जाता है, परन्तु वह लक्ष्यभाषा की बहुप्रचलित रूढि हो जो प्रभावोत्पादक होने के साथ-साथ सुबोध भी हो ये अत्यावश्यक होता है। द्वन्द्वात्मकता के विभिन्न आयामों के विवेचन से अनुवादसापेक्ष सम्प्रेषण की प्रकृति पर व्यापक प्रकाश पड़ता है । यह सन्तुलन जितना स्वीकार्य होता है, अनुवाद उतना ही सफल प्रतीत होता है। === अनुवाद परिवृत्ति === अनुवाद कार्य में अनुवाद परिवृत्ति एक अवश्यम्भावी तथा वांछनीय एवं स्वाभाविक स्थिति है । परिवृत्ति से अभिप्राय है दोनों भाषाओं के मध्य विभिन्न स्तरीय सम्वादिता से विचलन । विचलन की दो स्थितियाँ हो सकती हैं - '''अनिवार्य तथा ऐच्छिक''' । अनिवार्य विचलन भाषा की शब्दार्थगत एवं व्याकरणिक संरचना का अन्तरङ्ग है; उदाहरण के लिए [[मराठी भाषा|मराठी]] नपुंसकलिङ्ग संज्ञा [[हिन्दी]] में पुल्लिंग या स्त्रीलिंग संज्ञा के रूप में ही अनूदित होगी । कुछ इसी प्रकार की बात अंग्रेजी वाक्य I have fever के हिन्दी अनुवाद 'मुझे ज्वर है' के लिए कही जा सकती है, क्योंकि 'मैं ज्वर रखता हूँ' हिन्दी में सम्प्रेषणात्मक तथ्य के रूप में स्वीकृत नहीं । ऐच्छिक विचलन में विकल्प की व्यवस्था होती है । अंग्रेजी "The rule states that" को हिन्दी में दो रूपों में कहा जा सकता है - “इस नियम में यह व्यवस्था है कि/ कहा गया है कि " या "यह नियम कहता है कि "। इन दोनों में पहला वाक्य हिन्दी में स्वाभाविक प्रतीत होता है, उतना दूसरा नहीं यद्यपि अब यह भी अधिक प्रचलित माना जाता है । एक उपयुक्त अनुवाद में पहले अनुवाद को प्राथमिकता मिलेगी । अनुवाद के सन्दर्भ में ऐच्छिक विचलन की विशेष प्रासङ्गिकता इस दृष्टि से है कि, इससे अनुवाद को स्वाभाविक बनाने में सहायता मिलती है । अनिवार्य विचलन, तुलनात्मक-व्यतिरेकी भाषा विश्लेषण का एक सामान्य तथ्य है, जिसमें अनुवाद का प्रयोग एक उपकरण के रूप में किया जाता है। ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना ==== अनुवाद-परिवृत्ति की संकल्पना का सम्बन्ध प्रधान रूप से [[व्याकरण]] के साथ माना गया है।<ref>कैटफोर्ड १९६५ : ७३-८२</ref> यह दो रूपों में दिखाई देता है - '''व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति तथा व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति''' । ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक शब्दों की परिवृत्ति का एक उदाहरण उपर्युक्त वाक्ययुग्म में दिखाई देता है । अंग्रेजी का निर्धारक या निश्चयत्मक आर्टिकल the हिन्दी में (सार्वनामिक) सङ्केतवाचक विशेषण 'यह/इस' हो गया है, यद्यपि यह अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है । ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति ===== व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति में अनुवादक दो भेदों की ओर विशेष ध्यान देते हैं - '''व्याकरणिक कोटियों की परिवृत्ति तथा श्रेणी-परिवृत्ति''' । वाक्य में व्याकरणिक कोटियों की विन्यासक्रमात्मक संरचना में परिवृत्ति का उदाहरण है अंग्रेजी के सकर्मक वाक्य में प्रकार्यात्मक कोटियों के क्रम, [[कर्ता]] + [[क्रिया (व्याकरण)|क्रिया]] + [[कर्म]], का हिन्दी में बदलकर कर्ता + कर्म + क्रिया हो जाना । यह परिवृत्ति के अनिवार्य विचलन के अन्तर्गत है; अतः व्यतिरेक है । श्रेणी परिवृत्ति का प्रसिद्ध उदाहरण है मूलभाषा के पदबन्ध का लक्ष्यभाषा में उपवाक्य हो जाना या उपवाक्य का पदबन्ध हो जाना । अंग्रेजी-हिन्दी अनुवाद में इस प्रकार की परिवृत्ति के उदाहरण प्रायः मिल जाते हैं -भारतीय रेलों में सुरक्षा सम्बन्धी निर्देशावली के अंग्रेजी पाठ का शीर्षक है : "Travel safely" (उपवाक्य) और हिन्दी पाठ का शीर्षक है : ‘सुरक्षा के उपाय' (पदबन्ध), जबकि अंग्रेजी में भी एक पदबन्ध हो सकता है - "Measures of safety." इसी प्रकार पदस्तरीय, विशेषतः समस्त पद के स्तर की, इकाई का एक पदबन्ध के रूप में अनूदित होने के उदाहरण भी प्रायः मिल जाते हैं - अंग्रेज़ी "She is a good natured girl" = "वह अच्छे स्वभाव की लड़की है" ('वह एक सुशील लड़की है' में परिवृत्ति नहीं है) । श्रेणी परिवृत्ति के दोनों उदाहरण ऐच्छिक विचलन के अन्तर्गत हैं । अंग्रेज़ी से हिन्दी के अनुवाद के सन्दर्भ में, विशेषतया प्रशासनिक पाठों के अनुवाद के सन्दर्भ में, पाई जाने वाली प्रमुख अनुवाद परिवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं <ref>सुरेश कुमार : १९८० : २८</ref> : (१) अं० निर्जीव कर्ता युक्त सकर्मक संरचना = हि० अकर्मकीकृत संरचना : : The rule states that = इस नियम में यह व्यवस्था है कि (२) अं० कर्मवाच्य/कर्तृवाच्य = हि० कर्तृवाच्य/कर्मवाच्य : : The meeting was chaired by X = य ने बैठक की अध्यक्षता की। : I cannot drink milk now = मुझसे अब दूध नहीं पिया जाएगा । (३) अं० पूर्वसर्गयुक्त/वर्तमानकालिक कृदन्त पदबन्ध = हि० उपवाक्य : : (They are further requested) to issue instructions = (उनसे अनुरोध है कि) वे अनुदेश जारी करें । (४) अं० उपवाक्य = हि० पदबन्ध : : (This may be kept pending) till a decision is taken on the main file = मुख्य मिसिल पर निर्णय होने तक (इसे रोक रखिए)। == अनुवाद की तकनीकें== === मशीनी अनुवाद === [[कंप्यूटर|कम्प्यूटर]] और [[सॉफ्टवेयर|साफ्टवेयर]] की क्षमताओं में अत्यधिक विकास के कारण आजकल अनेक भाषाओं का दूसरी भाषाओं में मशीनी अनुवाद सम्भव हो गया है। यद्यपि इन अनुवादों की गुणवता अभी भी संतोषप्रद नहीं कही जा सकती, तथापि अपने इस रूप में भी यह मशीनी अनुवाद कई अर्थों में और अनेक दृष्टियों से बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। जहाँ कोई चारा न हो, वहाँ मशीनी अनुवाद से कुछ न कुछ अर्थ तो समझ में आ ही जाता है। [[यान्त्रिक अनुवाद|मशीनी अनुवाद]] की दिशा में आने वाले दिनों में काफी प्रगति होने वाली है। मशीनी अनुवाद के कारण दुनिया में एक नयी क्रान्ति आयेगी। === कम्यूटर सहाय्यित अनुवाद === {{मुख्य|संगणक सहायित अनुवाद}} == 20 भाषाएँ जिनसे/जिनमें सर्वाधिक अनुवाद होते हैं == {| class="wikitable" style="text-align:center; border-collapse: collapse;" |- ! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! style="border-right: 3px solid black;" | किसको !! किससे !! किसको |- | [[अंग्रेज़ी 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3 || [[चरक संहिता]] || किताब अल-सरसुर || आयुर्वेद || नाणिक्य || 8वीं सदी के अंत में |- | 4 || [[सुश्रुत संहिता]] || किताब सुसरुद || चिकित्सा / शल्य || माणिक्य और इब्न धन || 8वीं-9वीं सदी |- | 5 || [[अष्टांग हृदय]] || अस्तंकर (Asankar) || आयुर्वेद || इब्न धन || 9वीं सदी के प्रारंभ में |- | 6 || [[माधव निदान]] || किताब अल-बदन || रोग निदान || मणिक्य || 8वीं-9वीं सदी |- | 7 || [[आर्यभटीय]] || अर्जबहर || गणित / खगोल || अज्ञात || 800 ई. के आसपास |- | 8 || [[पंचतंत्र]] || कलिला व दिमना || नीति शास्त्र || इब्न अल-मुकफा || 750 ई. के आसपास |- | 9 || [[योगसूत्र]] ([[पतंजलि]]) || किताब पतंजल || दर्शन / योग || [[अल बेरुनी]] || 1017 – 1030 ई. |- | 10 || [[बृहज्जातक]] || अल-बजीदक || फलित ज्योतिष || अबू माशर अल-बल्खी || 9वीं सदी |- | 11 || [[विष्णु पुराण]] || — || पुराण / दर्शन || अल-बिरूनी || 11वीं सदी |- | 12 || [[सुश्रुत संहिता]] (कल्प स्थान) /<br> [[चाणक्य]] कृत विष-शास्त्र || किताब अल-सुमूम || विष विज्ञान || मनक || 800 ई. के आसपास |} == इन्हें भी देखें== *[[राष्ट्रीय अनुवाद मिशन]] *[[तकनीकी अनुवाद]] *[[यान्त्रिक अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद का इतिहास]] *[[लिप्यन्तरण]] *[[मशीनी लिप्यन्तरण]] *[[अरबी अनुवाद आन्दोलन]] == बाहरी कड़ियाँ == {{विकिसूक्ति|अनुवाद}} * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-भारतीय-परम्परा/ अनुवाद की भारतीय परम्परा] * [https://www.hindistack.com/notes/college-notes/अनुवाद-की-पाश्चात्य-परम्परा/#google_vignette अनुवाद की पाश्चात्य परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20090202094158/http://itaindia.org/home.php भारतीय अनुवादक संघ] * * [https://web.archive.org/web/20211225183220/http://gadyakosh.org/gk/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81_/_%E0%A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2 काव्यानुवाद की समस्याएँ― डॉ.आनंद कुमार शुक्ल] *[https://web.archive.org/web/20130123072201/http://www.ntm.org.in/languages/hindi/translationtradition.asp भारत की अनुवाद परम्परा] * [https://web.archive.org/web/20150924105237/http://www.srijangatha.com/Vyaakaran1-1-Aug-2k10 अनुवाद के नियम-अनियम] (सृजनगाथा) * [https://web.archive.org/web/20140303102959/http://www.prayaslt.blogspot.in/2009/10/blog-post_919.html अनुवाद का स्वरुप] (प्रयास) * [https://web.archive.org/web/20140303093558/http://www.prakashblog-google.blogspot.in/2008/04/translation-definition.html अनुवाद की परिभाषाएं] * [https://web.archive.org/web/20160307010648/http://deoshankarnavin.blogspot.in/2011/01/1.html अनुवाद परम्‍परा की पहचान] *[https://web.archive.org/web/20160403185755/https://www.scribd.com/doc/72664748/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6-%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%A7-%E0%A4%AF%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%A6-%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 अनुवाद के सिद्धांत और अनुवादों का तुलनात्‍मक अध्‍ययन] * [https://web.archive.org/web/20121215052543/http://books.google.co.in/books?id=opjrCSOJn1EC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद व्याकरण] (गूगल पुस्तक ; लेखक - सूरज भान सिंह) * [https://web.archive.org/web/20121215064434/http://books.google.co.in/books?id=1gYUxwircQEC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद विज्ञान की भूमिका] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कृष्ण कुमार गोस्वामी) * [http://books.google.co.in/books?id=a1pg1Ph1XhUC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false साहित्यानुवाद : संवाद और संवेदना] (गूगल पुस्तक) * [https://web.archive.org/web/20140328213340/http://books.google.co.in/books?id=eYXDauxfMBwC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false अनुवाद क्या है? ] (गूगल पुस्तक ; सम्पादक - राजमल वोरा) * [https://web.archive.org/web/20121215060919/http://books.google.co.in/books?id=zfZVQhsH0rUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद कला] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060421/http://books.google.co.in/books?id=-kVvXkoZVyUC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अनुवाद : भाषाएं, समस्याएँ] (गूगल पुस्तक ; लेखक एनई विश्वनाथ अय्यर) * [https://web.archive.org/web/20121215060737/http://books.google.co.in/books?id=f483H-de_fYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false भारतीय भाषाएं एवं हिन्दी अनुवाद : समस्या समाधान] (गूगल पुस्तक ; लेखक - कैलाशचन्द्र भाटिया) * [https://web.archive.org/web/20120104170710/http://anuvaadak.blogspot.com/2010/02/blog-post.html बहुभाषिकता, वैश्विककरण और अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20120105152030/http://www.hinditech.in/news_detail.php?Enews_Id=49&back=1 अनुप्रयुक्त गणित के संदर्भ में अनुवाद] * [https://web.archive.org/web/20071011023948/http://www.unesco.org/culture/lit/ UNESCO Clearing House for Literary Translation] * [https://web.archive.org/web/20090201174507/http://www.proz.com/?sp=profile&eid_s=48653&sp_mode=ctab&tab_id=1214 TRANSLATORS NOW AND THEN : HOW TECHNOLOGY HAS CHANGED THEIR TRADE] By - Luciano O. Monteiro * [https://web.archive.org/web/20131231014913/http://freetranslations.org/ Online Translation] * [https://web.archive.org/web/20100501063154/http://www.indianscripts.com/ IndianScripts] - Translation service provider for Hindi, Bengali, Gujarati, Urdu,Tamil, Telegu, Marathi, Malayalam, Nepali, Sanskrit, Tulu, Assamese, Oriya, English and other languages by native translators == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:अनुवाद सिद्धान्त]] [[श्रेणी:संचार]] [[श्रेणी:भाषा]] 8rihp5xl1ppdz2wf6e6xzqjcqu4aggy अली इब्न अबी तालिब 0 29349 6536772 6534489 2026-04-06T05:28:38Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 2 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536772 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | name = अली इब्न अबी तालिब | image = Rashidun Caliph Ali ibn Abi Talib - علي بن أبي طالب.svg | alt = | caption = अरबी सुलेख में अली का नाम | succession = [[राशिदून ख़लीफ़ा]] के 4वें [[ख़लीफ़ा]] <br> ([[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] दृष्टिकोण) | reign = 656–661<ref name="Britannica"/> | predecessor = [[उस्मान बिन अफ़्फ़ान]] | successor = [[हसन इब्न अली]] | birth_date = 15 सितम्बर 601 (13&nbsp;[[रजब]] [[इस्लामी कैलेंडर|21 हिजरी पूर्व]] in the ancient Arabic calendar)<ref name="Britannica"/><ref name="Iranica"/><ref name="Al-Islam"/> | birth_place = [[काबा]], [[मक्का]], [[हिजाज़]], [[अरब महाद्वीप]]<ref name="Britannica"/><ref name="Guidance">{{cite book|last1=Rahim|first1=Husein A.|last2=Sheriff|first2=Ali Mohamedjaffer|title=Guidance From Qur'an|publisher=Khoja Shia Ithna-asheri Supreme Council|url=https://books.google.com/books?id=9v2qAgAAQBAJ&pg=PA52&dq=ali+was+born+in+kaaba|accessdate=11 April 2017|language=en|year=1993|archive-url=https://web.archive.org/web/20170411140908/https://books.google.com/books?id=9v2qAgAAQBAJ&pg=PA52&dq=ali+was+born+in+kaaba|archive-date=11 अप्रैल 2017|url-status=live}}</ref> | death_date = 29 जनवरी 661 (21&nbsp;[[रमज़ान]] AH&nbsp;40)<br /> (आयु {{age|601|9|15|661|1|29}})<ref name="Iranica"/><ref name="Al-Islam"/><ref>Shad, Abdur Rahman. ''Ali Al-Murtaza''. Kazi Publications; 1978 1st Edition. Mohiyuddin, Dr. Ata. ''Ali The Superman''। Sh. Muhammad Ashraf Publishers; 1980 1st Edition. Lalljee, Yousuf N. ''Ali The Magnificent''. Ansariyan Publications; January 1981 1st Edition.</ref><ref>{{cite book|url=https://archive.org/details/aliIbnAbiTalibr2Vol.Set|last=Sallaabee|first=Ali Muhammad|title=Ali ibn Abi Talib (volume 2)|page=621|accessdate=15 December 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20160914095725/https://archive.org/details/aliIbnAbiTalibr2Vol.Set|archive-date=14 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref> | death_place = [[कूफ़ा]], [[मेसोपोटामिया|इराक़]], [[राशिदूँ साम्राज्य]] | burial_place = [[इमाम अली मस्जिद]], [[नजफ़]], [[इराक़]] | spouse = {{unbulleted list|[[फ़ातिमा ज़हरा|फ़ातिमा]]|[[उम्मह बिन्त ज़ैनब]]|[[उम्म उल-बनीन]]|लैला बिन्त मसऊद|[[Asma bint Umays]]|[[Khawlah bint Ja'far]]|Al Sahba' bint Rabi'ah}} | spouse-type = पत्नियां | issue = {{unbulleted list | '''[[अली की संतान]]''' |[[हसन इब्न अली|अल-हसन]]|[[हुसैन इब्न अली|अल-हुसैन]]|[[ज़ैनब बिन्त अली|ज़ैनब]]|[[उम्म कुलसुम बिन्त अली|उम्म कुलसुम]]|[[मोहसिन इब्न अली|मोहसिन]]|[[मुहम्मद इब्न अल हनफ़िया इब्न अली|मुहम्मद]]|[[अब्बास इब्न अली|अब्बास]]|[[अब्दुल्ला इब्न अली|अब्दुल्ला]]|[[हिलाल इब्न अली|हिलाल]]|[[मुहम्मद इब्न अबी बक्र]](दत्त पुत्र)}} | full name = 'अली इब्न अबी तालिब {{lang-ar|علي ابن أبي طالب}} | house = [[क़ुरैश]] ([[बनू हाशिम]]) | house-type = जनजाति | father = [[अबू तालिब इब्न अब्दुल मुत्तलिब]] | mother = [[फ़ातिमा बिन्त असद]] | religion = (610 में)/[[इस्लाम]] | succession1 = शिया इस्लाम के अनुसार पहले [[इमामह (शिया सिद्धांत)|इमाम]] <br/>([[इस्ना अशरी]], [[ज़ैदी]], और [[निज़ारी|निजारी इस्माइली]] दृष्टिकोण) | reign1 = 632–661 | successor1 = [[हसन इब्न अली]] {{small|(2nd Imam)}} | succession2 = [[Imamah (Ismaili doctrine)|Asās/Wāsih]] of Shia Islam <br/>([[Musta'li|Musta'li Ismaili]] view) | successor2 = [[इब्न अली]] {{small|(1st Imam)}} <!--Hasan is the 1st Imam in the [[Musta'li]] view--> }} '''अली इब्ने अबी तालिब''' (अरबी : علی ابن ابی طالب) का जन्‍म 17 मार्च 600 (13 [[रज्जब]] 24 [[हिजरी]] पूर्व) मुसलमानों के तीर्थ स्थल [[मक्का शहर|काबा]] के अन्दर हुआ था। वे [[पैगम्बर मुहम्मद]] (स.) के चचाजाद [[भाई वैद्य|भाई]] और [[दामोदर नदी|दामाद]] थे और उनका चर्चित नाम [[हज़रत]] अली <ref>{{Cite web|url=https://www.irfani-islam.in/2021/05/hazrat-ali.html|title=Hazrat Ali हज़रत अली का इल्म कुछ खास बाते In Hindi|last=Sheikh|first=Irfan|website=Irfani-Islam - इस्लाम की पूरी मालूमात हिन्दी|access-date=2022-02-15}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>है।<ref>{{cite web|url=https://www.thelallantop.com/tehkhana/story-of-imam-and-fourth-caliphate-hazrat-ali-ibne-abu-talib/|title=किस्सा इस्लाम के उस लीडर का, जिसे मस्जिद में ज़हर में डूबी हुई तलवार से क़त्ल किया गया}}</ref> वे मुसलमानों के [[ख़लीफ़ा]] के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने 656 से 661 तक [[राशिदून ख़िलाफ़त]] के चौथे ख़लीफ़ा के रूप में शासन किया, और [[शिया इस्लाम]] के अनुसार वे 632 से 661 तक पहले इमाम थे। उन्‍होंने वैज्ञानिक जानकारियों को बहुत ही रोचक ढंग से आम आदमी तक पहुँचाया था। अबू तालिब<ref name="Landau_Tasseron">Biographies of the Prophet's companions and their successors, Ṭabarī, translated by Ella Landau-Tasseron, pp. 37–40, Vol:XXXIX.</ref> और फातिमा बिन असद से पैदा हुए, <ref name="Britannica"/> कई शास्त्रीय इस्लामी के अनुसार, इस्लाम में सबसे पवित्र स्थान मक्का के काबा ( अरबी : كعبة ) में पैदा होने वाले अली अकेले व्यक्ति है। स्रोत, विशेष रूप से शिया वाले। <ref name="Britannica"/><ref>{{cite book|url=https://archive.org/details/aliIbnAbiTalibr2Vol.Set|last=Sallabi|first=Dr Ali M|title=Ali ibn Abi Talib (volume 1)|date=2011|pages=52–53|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20160914095725/https://archive.org/details/aliIbnAbiTalibr2Vol.Set|archive-date=14 सितंबर 2016|url-status=live}}</ref><ref name="auto">Sahih Muslim, Book 21, Hadith 57.</ref> अली <ref>{{Cite web|url=https://www.irfani-islam.in/2021/09/Hazrat-Maula-Ali-Shere-Khuda.html|title=Hazrat Maula Ali Shere Khuda की ज़िन्दगी History In Hindi|last=Sheikh|first=Irfan|website=Irfani-Islam - इस्लाम की पूरी मालूमात हिन्दी|access-date=2022-02-15}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>बच्चों में प्रथम थे जिसने इस्लाम को स्वीकार किया, <ref>{{Harvnb|Kelen|2001|p=29}}.</ref><ref name="watt">{{Harvnb|Watt|1953|p=xii}}.</ref> और कुछ लेखकों के मुताबिक पहले मुस्लिम थे। <ref>[https://www.al-islam.org/brother-prophet-muhammad-imam-ali-mohamad-jawad-chirri/4-first-muslims#f_1e0fbce4_5 The First Muslims] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180827173943/https://www.al-islam.org/brother-prophet-muhammad-imam-ali-mohamad-jawad-chirri/4-first-muslims#f_1e0fbce4_5 |date=27 अगस्त 2018 }} www.al-islam.org Retrieved 23 Nov 2017</ref> अली ने मुहम्मद को शुरुआती उम्र से संरक्षित किया <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=72}}</ref> और मुस्लिम समुदाय द्वारा लड़ी लगभग सभी लड़ाई में हिस्सा लिया। मदीना में जाने के बाद, उन्होने मुहम्मद की बेटी फातिमा से विवाह किया। <ref name="Britannica"/> खलीफ उसमान इब्न अफ़ान की हत्या के बाद, 656 में मुहम्मद के साथी (सहाबा) ने उन्हें खलीफा नियुक्त किया था। <ref name="Ashraf (2005), pp. 119-120"/><ref name="Madelung (1997), pp. 141-145" /> अली के शासनकाल में गृह युद्ध हुए और 661 में कुफा कि जामा मस्जिद में प्रार्थना के लिए जाते समय खारजी इब्न मुल्ज़िम ने उन पर हमला किया और हत्या कर दी । <ref>{{Harvnb|Lapidus|2002|p=47}}.</ref><ref>{{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|pp=70–72}}.</ref><ref>{{Harvnb|Tabatabaei|1979|pp=50–75 and 192}}.</ref> राजनीतिक और आध्यात्मिक रूप से [[शिया इस्लाम|शिया]] और [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] दोनों के लिए अली महत्वपूर्ण है। <ref name="EOAli3"/> अली के बारे में कई जीवनी स्रोत अक्सर सांप्रदायिक रेखाओं के अनुसार पक्षपातपूर्ण होते हैं, लेकिन वे इस बात से सहमत हैं कि वह एक पवित्र मुस्लिम थे, जो इस्लाम के कारण और कुरान और सुन्नत के अनुसार एक शासक था। <ref name="Iranica"/> जबकि सुन्नी अली को चौथे खलीफा रशीद मानते हैं, शिया मुसलमानों ने अली को गदिर खुम में घटनाओं की व्याख्या के कारण मुहम्मद (स.अ. व) के बाद पहले इमाम के रूप में माना। शिया मुस्लिम मानते हैं कि अली और अन्य शिया इमाम (जिनमें से सभी मुहम्मद(स.)(अरबी : بيت , घरेलू) के सदस्य हैं) मुहम्मद(स.)के लिए सही उत्तराधिकारी हैं । ==मक्का में जीवन == === प्रारंभिक वर्ष === अली के पिता, [[अबू तालिब इब्न अब्दुल मुत्तलिब|अबू तालिब]], शक्तिशाली कुरैशी जनजाति की एक महत्वपूर्ण शाखा [[बनू हाशिम]] के [[काबा]] गृह के संरक्षक थे और एक शेख (अरबी : شيخ) थे। वह [[मुहम्मद]] के चाचा भी थे, और [[अब्दुल मुत्तलिब]] (अबू तालिब के पिता और मुहम्मद के दादा) के बाद मुहम्मद के पालन पोषण की ज़िम्मेदारी उठाई थी। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|pages=35–36}}</ref><ref>{{cite book|last1=Glubb|first1=Sir John|title=The Life and Times of Mohammed|url=https://archive.org/details/lifetimesofmuh00glub|date=1970}}</ref> अली की मां फातिमा बिन असद भी बानू हाशिम से संबंधित थीं, जो इब्राहीम के पुत्र (अरबी : إبراهيم, अब्राहम) के वंशज थे। <ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|p=5}}.</ref> कई स्रोत, खासकर शिया, यह प्रमाणित करते हैं कि अली मक्का शहर में काबा के अंदर पैदा हुआ थे, <ref name="Britannica"/><ref>{{cite book|title=Illustrated Dictionary of the Muslim World|publisher=Marshall Cavendish Reference|isbn=9780761479291|url=https://books.google.com/books?id=8Zp_5IydPGgC&pg=PA86&dq=ali+was+born+in+kaaba|accessdate=11 April 2017|language=en|year=2011|archive-url=https://web.archive.org/web/20170412065444/https://books.google.com/books?id=8Zp_5IydPGgC&pg=PA86&dq=ali+was+born+in+kaaba|archive-date=12 अप्रैल 2017|url-status=live}}</ref> जहां वह तीन दिनों तक अपनी मां के साथ रहे। <ref name="Britannica"/><ref name="auto"/> काबा का दौरा करते हुए उनकी मां ने अपने श्रम दर्द की शुरुआत महसूस की और वह काबा गृह में प्रवेश किया जहां उनके बेटे अली का जन्म हुआ। कुछ शिया स्रोतों में अली की मां के प्रवेश के चमत्कारी विवरण काबा में हैं। काबा में अली का जन्म शिया के बीच अपने "उच्च आध्यात्मिक केंद्र" को साबित करने वाला एक अनूठा कार्यक्रम माना जाता है, जबकि विभिन्न सुन्नी विद्वानों में यह एक महान माना जाता है, मगर कोई अद्वितीय, भेद नहीं है। <ref name="Islamica">{{cite encyclopedia|last1=Faramarz Haj|first1=Manouchehri|last2=Matthew|first2=Melvin-Koushki|last3=Shah-Kazemi|first3=Reza|last4=Bahramian|first4=Ali|last5=Pakatchi|first5=Ahmad|last6=Muhammad Isa|first6=Waley|last7=Daryoush|first7=Mohammad|last8=Tareh|first8=Masoud|last9=Brown|first9=Keven|last10=Jozi|first10=Mohammad Reza|last11=Sajjadi|first11=Sadeq|last12=Gholami|first12=Rahim|last13=Bulookbashi|first13=Ali A.|last14=Negahban|first14=Farzin|last15=Alizadeh|first15=Mahbanoo|last16=Gholami|first16=Yadollah|title=ʿAlī b. Abī Ṭālib|encyclopedia=Encyclopaedia Islamica|url=http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-islamica/ali-b-abi-talib-COM_0252|publisher=[[Brill Publishers|Brill]]|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160630063854/http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-islamica/ali-b-abi-talib-COM_0252|archivedate=June 30, 2016|df=mdy-all}}</ref> एक परंपरा के अनुसार, मुहम्मद पहले व्यक्ति थे जिन्हें अली ने देखा था क्योंकि उन्होंने अपने हाथों में नवजात शिशु को लिया था। मुहम्मद ने उन्हें अली नाम दिया, जिसका अर्थ है "महान"। अली के माता-पिता के साथ मुहम्मद का घनिष्ठ संबंध था। जब मुहम्मद अनाथ हो गए और बाद में अपने दादा अब्दुल मुत्तलिब को खो दिया, अली के पिता ने उन्हें अपने घर ले आये। <ref name="Britannica"/> मुहम्मद ने [[ख़दीजा बिन्त खुवैलिद]] से शादी के बाद अली का जन्म दो या तीन साल बाद हुआ था। <ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|p=6 and 7}}.</ref> जब अली पांच वर्ष के थे, तो मुहम्मद ने उन्हें अपने घर लाये। कुछ इतिहासकार कहते हैं कि ऐसा इसलिए था क्योंकि उस समय मक्का में एक अकाल था और अली के पिता का समर्थन करने के लिए एक बड़ा परिवार था; हालांकि, अन्य लोग बताते हैं कि अली को उनके पिता पर बोझ नहीं होता था, क्योंकि अली उस समय पांच वर्ष के थे, और अकाल के बावजूद, अली के पिता, जो वित्तीय रूप से अच्छी तरह से थे, अजनबियों को भोजन देने के लिए जाने जाते थे अगर वे अक्सर भूखे रहते थे। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=43}}</ref> जबकि यह विवादित नहीं है कि मुहम्मद अली उठाए, यह किसी भी वित्तीय तनाव के कारण नहीं था कि अली के पिता जा रहे थे। ===इस्लाम की स्वीकृति=== अली पांच साल की उम्र से हज़रत मुहम्मद, (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम) और उनकी पत्नी हज़रत खदीजा़(रज़ि० अन्हा) के साथ रह रहे थे। जब हज़रत अली अलैहिस्सलाम नौ वर्ष के थे, हज़रत मुहम्मद, (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम) ने खुद को इस्लाम के पैगंबर के रूप में घोषित किया, और हज़रत अली अलैहिस्सलाम इस्लाम को स्वीकार करने वाले पहले बच्चे बन गए हज़रत खदीजा़ के बाद इस्लाम को स्वीकार करने के बाद वह दूसरे व्यक्ति थे। इस्लाम और मुसलमानों के इतिहास के पुनर्गठन में सईद अली असगर रज्वी के अनुसार, "अली और कुरान 'मुहम्मद मुस्तफा और खदीजा़-तुल-कुबरा के घर में 'जुड़वां'के रूप में बड़े हो गए।" <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=52|accessdate=28 January 2018}}</ref> हज़रत अली अलैहिस्सलाम की जिंदगी की दूसरी अवधि 610 में शुरू हुई जब उन्होंने 9 साल की उम्र में इस्लाम घोषित कर दिया और हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के हिजरा के साथ 622 में मदीना के साथ समाप्त हो गया। <ref name="Britannica"/> जब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया कि उन्हें एक दिव्य प्रकाशन प्राप्त हुआ है, तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने नौ साल की उम्र में, उनका विश्वास किया और इस्लाम का दावा किया। <ref name="Britannica"/><ref name="Iranica"/><ref name="Tabatabae191">{{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=191}}.</ref><ref name="Ashraf 2005 p=14">{{Harvnb|Ashraf|2005|p=14}}.</ref><ref name="Islam">{{cite encyclopedia|encyclopedia = Encyclopaedia of Islam and the Muslim world; vol.1|last = Steigerwald|first = Diana|title = Alī ibn Abu Talib|publisher = Macmillan|isbn = 978-0-02-865604-5}}</ref> हज़रत अली अलैहिस्सलाम इस्लाम को गले लगाने वाले पहले पुरुष बने। <ref>{{harvnb|Gleave|2015}}.</ref><ref>{{cite book|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|pages=50–52|accessdate=28 January 2018}}</ref><ref>{{cite book|title=Introduction to the Translation of Holy Qur'an|last1=Pickhtall|first1=Marmaduke|date=1975|location=Lahore}}</ref><ref>{{cite book|title=Mohammed, the Man and his Faith|last1=Andre|first1=Tor|date=1960}}</ref> शिया सिद्धांत ने जोर देकर कहा कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दिव्य मिशन को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने इस्लाम को किसी भी पूर्व इस्लामी मक्का पारंपरिक धर्म संस्कार में भाग लेने से पहले स्वीकार किया, जिसे मुस्लिमों द्वारा बहुवादी ( शिर्क) के रूप में माना जाता है या मूर्तिपूजक इसलिए शिया हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में कहते हैं कि उनके चेहरे को सम्मानित किया जाता है, क्योंकि यह मूर्तियों के सामने प्रस्तुतियों से कभी नहीं निकलता था। <ref name="Tabatabae191"/> सुन्नी भी सम्मानित करम अल्लाह वजाहु का उपयोग करते हैं, जिसका अर्थ है "उसके चेहरे पर भगवान का अनुग्रह।" उनकी स्वीकृति को अक्सर रूपांतरण कहा जाता है क्योंकि वह कभी मक्का के लोगों की तरह मूर्ति पूजा करने वाला नहीं था। वह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ढांचे में मूर्तियों को तोड़ने के लिए जाने जाते थे और लोगों से पूछा कि उन्होंने अपनी खुद की कुछ चीज़ों की पूजा क्यों की। <ref>{{cite web|title=Ali|url=http://imamali.net/old/?part=350|publisher=Imamali|accessdate=20 March 2015|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20150320075858/http://imamali.net/old/?part=350|archivedate=20 मार्च 2015|df=mdy-all}}</ref> हज़रत अली अलैहिस्सलाम के दादा, बनी हाशिम कबीले के कुछ सदस्यों के साथ, इस्फ के आने से पहले हनीफ़, या एकेश्वरवादी विश्वास प्रणाली के अनुयायी थे। ===धुल अशीरा का त्यौहार=== हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें सार्वजनिक रूप से आमंत्रित करना शुरू करने से तीन साल पहले लोगों को इस्लाम में गुप्त रूप से आमंत्रित किया था। इस्लाम के चौथे वर्ष में, जब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इस्लाम में आने के लिए अपने करीबी रिश्तेदारों को आमंत्रित करने का आदेश दिया गया था <ref>{{cite quran|26|214|style = ref}}.</ref> उन्होंने एक समारोह में बनू हाशिम कबीले को इकट्ठा किया था। भोज में, वह उन्हें इस्लाम में आमंत्रित करने जा रहा था जब अबू लाहब ने उसे बाधित कर दिया, जिसके बाद हर कोई भोज छोड़ गया। अल्लाह के पैगंबर ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को फिर से 40 लोगों को आमंत्रित करने का आदेश दिया। दूसरी बार, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इस्लाम की घोषणा की और उन्हें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=54}}</ref> उन्होंने उनसे कहा मैं उनकी दया के लिए अल्लाह को धन्यवाद देता हूं। मैं अल्लाह की प्रशंसा करता हूं, और मैं उसका मार्गदर्शन चाहता हूं। मैं उस पर विश्वास करता हूं और मैंने उस पर अपना भरोसा रखा है। मैं गवाह हूं कि अल्लाह को छोड़कर कोई ईश्वर नहीं है; उसके पास कोई साझेदार नहीं है; और मैं उसका दूत हूं। अल्लाह ने मुझे आपको अपने धर्म में आमंत्रित करने का आदेश दिया है: और अपने निकटतम रिश्तेदारों को चेतावनी दीजिए। इसलिए, मैं आपको चेतावनी देता हूं, और आपको यह प्रमाणित करने के लिए बुलाता हूं कि अल्लाह के अलावा कोई ईश्वर नहीं है, और मैं उसका दूत हूं। हे अब्दुल मुतालिब के पुत्र, कोई भी जो तुम्हारे पास लाया गया है उससे बेहतर कुछ भी नहीं पहले। इसे स्वीकार करके, इस कल्याण को इस दुनिया में और इसके बाद में आश्वस्त किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण कर्तव्य को पूरा करने में आप में से कौन मेरी सहायता करेगा? इस काम के बोझ को मेरे साथ कौन साझा करेगा? मेरी कॉल का जवाब कौन देगा? मेरा उपनिवेश, मेरा डिप्टी और मेरा वजीर कौन बन जाएगा? <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|pages=54–55}}</ref><nowiki>}} हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आह्वान का जवाब देने के लिए हज़रत अली अलैहिस्सलाम अकेले थे, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें बैठने के लिए कहा, "रुको! शायद आप के अतिरिक्त कोई और मेरी आवाज पर लब्बैक कहे ।" हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर दूसरी बार बनू हाशिम के सदस्यों से पूछा। एक बार फिर, हज़रत अली जवाब देने वाले अकेले व्यक्ति थे, और फिर, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उसे इंतजार करने के लिए कहा। हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फिर तीसरी बार बनू हाशिम के सदस्यों से पूछा। हज़रत अली अलैहिस्सलाम अभी भी एकमात्र स्वयंसेवक थे। इस बार, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम की पेशकश स्वीकार कर ली थी। हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने "हज़रत अली अलैहिस्सलाम को [करीब] खींचा, उसे अपने दिल पर दबा दिया, और सभा से कहा: 'यह मेरा वजीर, मेरा उत्तराधिकारी और मेरा अनुयायी है। इसे सुनो और इसके आदेशों का पालन करो।'" </nowiki><ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=55}}</ref> एक और वर्णन में, जब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के उत्सुक प्रस्ताव को स्वीकार किया, मुहम्मद ने उदार युवाओं के चारों ओर अपनी बाहों को फेंक दिया, और उसे अपने बस्से पर दबा दिया "और कहा," मेरे भाई, मेरे वज़ीर, मेरे अनुयायी को देखो ... सभी उसके शब्दों को सुनें, और उसकी आज्ञा मानें। " <ref>{{cite book|last1=Irving|first1=Washington|title=The Life of Mohammed|year=1989|url=https://archive.org/details/washingtonirving0000irvi_m2k8}}</ref> सर रिचर्ड बर्टन ने अपनी 1898 की पुस्तक में भोज के बारे में लिखा, "यह [हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम] के लिए जीता, अबू तालिब के पुत्र अली के व्यक्तित्व में एक हज़ार सबार के लायक है।" <ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|pp=16–26}}.</ref> ===मुसलमानों के उत्पीड़न के दौरान=== मक्का में बानू हाशिम के मुसलमानों और बहिष्कार के दौरान, अली मुहम्मद के समर्थन में दृढ़ता से खड़ा थे। <ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|pp=16–26}}.</ref> ===मदीना में प्रवास=== {{मुख्य|हिजरी}} 622 में, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के यश्रिब (अब मदीना) के प्रवासन के वर्ष में, हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बिस्तर पर सोकर, हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हत्या की साजिश को रोकने के लिए अपने जीवन को खतरे में डाल दिया ताकि हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साजिश से बच सके। <ref name="Britannica"/><ref name="Tabatabae191"/><ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|p=28 and 29}}.</ref> इस रात को लैल-तुल-मबीत कहा जाता है। कुछ हदीस के मुताबिक, हिजरा की रात को अपने बलिदान के बारे में हज़रत अली अलैहिस्सलाम के बारे में एक कविता प्रकट हुई थी, जिसमें कहा गया है, "और पुरुषों में वह है जो अल्लाह की खुशी के बदले में अपने नफ (स्वयं) को बेचता है।" <ref>{{cite web |url=http://www.almizan.org/ |title=Tafsir al-Mizan, Volume 3: Surah Baqarah, Verses 204–207 |first=Sayyid Mohammad Hosayn |last=Tabatabaei |publisher=almizan.org |accessdate=2010-11-25 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20090617232037/http://almizan.org/ |archivedate=17 जून 2009 |df=mdy-all }}</ref> हज़रत अली अलैहिस्सलाम साजिश से बच निकले, लेकिन हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के निर्देशों को पूरा करने के लिए मक्का में ही रहने से, फिर से अपने जीवन को खतरे में डाल दिया: अपने मालिकों को सुरक्षित रखरखाव के लिए हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को सौंपे गए सभी सामान और संपत्तियों को बहाल करने के लिए। ' हज़रत अली अलैहिस्सलाम फिर मदीना के पास फातिमाह बिन असद (उनकी मां), फातिमा बिन मुहम्मद (मुहम्मद की बेटी) और दो अन्य महिलाओं के साथ गईं। <ref name="Iranica" /><ref name="Tabatabae191" /> ===मदीना में जीवन=== ====हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का युग==== जब वह मदीना चले गए तो हज़रत अली अलैहिस्सलाम 22 या 23 वर्ष के थे जब हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने साथी के बीच भाईचारे के बंधन बना रहे थे, तो उन्होंने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपने भाई के रूप में चुना। <ref name="Iranica"/><ref name="Tabatabae191"/><ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|pp=30–32}}.</ref> दस वर्षों तक हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मदीना में समुदाय का नेतृत्व किया, हज़रत अली उनकी सेना में उनकी सेवा में बहुत सक्रिय थे, उनकी सेनाओं में सेवा करते थे, हर युद्ध में अपने बैनर के अग्रणी दल छापे पर योद्धाओं, और संदेश और आदेश ले जाने। <ref>See: * {{Harvnb|Momen|1985|p=13 and 14}} * {{Harvnb|Ashraf|2005|pp=28–118}}.</ref> मुहम्मद के लेफ्टिनेंटों में से एक के रूप में, और बाद में उनके दामाद, हज़रत अली मुस्लिम समुदाय में अधिकार और खड़े थे। <ref>{{cite book|author1=Mehboob Desia|title=Islam and non-violence|publisher=Gyan Book Pvt Ltd|isbn=81-212-1026-7|page=150}}</ref> ====पारिवारिक जीवन==== यह भी देखें: [[अहल अल-बैत]] 623 में, मुहम्मद ने अली को बताया कि अल्लाह ने उसे अपनी बेटी फातिमा ज़हरा को शादी में अली को देने का आदेश दिया था। <ref name="Britannica"/> मुहम्मद ने फातिमा से कहा: "मैंने तुमसे मेरे परिवार के सबसे प्यारे से शादी की है।" <ref>{{Harvnb|Singh|2003|p=175}}.</ref> इस परिवार को मुहम्मद द्वारा अक्सर महिमा दिया जाता है और उन्होंने उन्हें मुहहाला और हदीस जैसे घटनाओं में क्लोक के कार्यक्रम के हदीस की तरह अपने अहल अल-बैत के रूप में घोषित किया। उन्हें " शुद्धिकरण की कविता " जैसे कई मामलों में कुरान में भी गौरव दिया गया था। <ref>{{cite quran|33|33|style = ref}}.</ref><ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=14 and 15}}.</ref> अली के पास चार बच्चे थे जो मुहम्मद के एकमात्र बच्चे फतेमाह से पैदा हुए थे, जो जीवित संतान थे। उनके दो बेटों ( हज़रत हसन अलैहिस्सलाम और हज़रत हुसैन अलैहिस्सलाम ) को ह० मुहम्मद मुस्तफा़ स०अ०व० ने अपने बेटों के रूप में उद्धृत किया था, उनके जीवनकाल में कई बार सम्मानित किया था और "जन्नत में युवाओं के सरदार" शीर्षक (स्वर्ग, इसके बाद।) <ref>See: * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|57|89}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|57|96}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|57|89}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|9|88|220}} * {{hadith-usc|usc=yes|Muslim|31|5915|}}.</ref><ref>{{cite encyclopedia|title = Hasan ibn Ali|encyclopedia = Encyclopædia Iranica|accessdate = 2014-01-01|url = http://www.iranicaonline.org/articles/hasan-b-ali|url-status = live|archiveurl = https://web.archive.org/web/20140101025819/http://www.iranicaonline.org/articles/hasan-b-ali|archivedate = January 1, 2014|df = mdy-all}}</ref>अली और फातिमा का तीसरा बेटा मुहसिन भी था; जो ह० मुहम्मद मुस्तफा़ स०अ०व० की मृत्यु(वफ़ात) के बाद ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम ह० फा़तिमा ज़हरा पर हमला किया गया था, परिणामस्वरूप गर्भपात के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी। इस हमले के तुरंत बाद ह० फा़तिमा ज़हरा की मृत्यु हो गई। <ref>{{cite web |title=Hazrat Mohsin Ibn Ali (a.s.): A Victim of Oppression and Terrorism |url=https://www.seratonline.com/8668/hazrat-mohsin-ibn-ali-a-s-a-victim-of-oppression-and-terrorism/#p4 |website=Serat Online |publisher=SeratOnline |accessdate=17 June 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180617192859/https://www.seratonline.com/8668/hazrat-mohsin-ibn-ali-a-s-a-victim-of-oppression-and-terrorism/#p4 |archive-date=17 जून 2018 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book |title=Behaar al-Anwaar, Volume 43 |page=171 |quote=Fatimah’s (s.a.) death resulted from being pierced by the sword which claimed (the unborn) Mohsin’s life. The perpetrator of this crime was Qunfuz, who was acting on his master – Umar’s explicit command}}</ref><ref>{{cite book |last1=Masoodi |title=Isbaat al-Wilaayah |page=142 |quote=They attacked Fatimah’s (s.a.) house. They crushed the Chief of All Women behind the door so violently that it resulted in the miscarriage of Mohsin.}}</ref> शुरुआत में वे बेहद गरीब थे। ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम अक्सर ह० फा़तिमा ज़हरा को उनके घरेलू कार्यों में सहायता करते थे। कुछ सूत्रों के मुताबिक, ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम ने घर के बाहर काम किया और ह० फा़तिमा ज़हरा ने घर के अंदर काम किया, जो ह० मुहम्मद मुस्तफा़ स०अ०व० ने निर्धारित किया था। <ref>{{cite book |last1=al-Qurashi |first1=Baqir Shareef |title=The Life of Fatimah Az- Zahra', The Principal of all Women: Study and Analysis |date=2006 |location=Qum |edition=First |quote=Imam Ali (a.s.) often helped Fatimah (s.a.) in the house affairs.}}</ref> जब मुसलमानों की आर्थिक परिस्थितियां बेहतर हो गईं, तो बीबी फा़तिमा ज़हरा ने कुछ वज़ीफ़े प्राप्त किए और कर्तव्यों का पालन किया। <ref name=EoI>{{cite encyclopedia|last=Vaglieri |first=Veccia|title=Fatima|encyclopedia=Encyclopedia of Islam|page= Vol. 2 844–850 |location=Leiden, The Netherlands |publisher=Brill |ISSN=1573-3912}}</ref> उनकी शादी दस साल बाद हज़रत फा़तिमा ज़हरा की मृत्यु तक चली और उन्हें प्यार और मित्रता से भरा माना जाता था। <ref>{{cite book |last1=al-Qurashi |first1=Baqir Shareef |title=The Life of Fatimah Az- Zahra', The Principal of all Women: Study and Analysis |date=2006 |publisher=Ansariyan Publications |location=Qum |edition=First |quote=The life of Imam Ali (a.s.) and Fatimah (s.a.) was full of love and friendliness.}}</ref> ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम ने हज़रत फा़तिमा ज़हरा के बारे में कहा है, "अल्लाह ने, मैंने कभी उसे क्रोधित नहीं किया था या उसे कुछ भी करने के लिए मजबूर नहीं किया था जब तक कि अल्लाह उसे बेहतर दुनिया में नहीं ले जाता। उसने मुझे कभी क्रोधित नहीं किया और न ही उसने मुझे अवज्ञा की कुछ भी में। जब मैंने उसे देखा, तो मेरे दुःख और दुःखों को राहत मिली। " <ref>{{cite book |last1=al-Qurashi |first1=Baqir Shareef |title=The Life of Fatimah Az- Zahra', The Principal of all Women: Study and Analysis |date=2006 |publisher=Ansariyan Publications |location=Qum}}</ref><ref>{{cite book |title=Bihar al-Anwar, Volume 43 |page=133}}</ref> हालांकि बहुविवाह की अनुमति थी, ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम ने दूसरी महिला से विवाह नहीं किया था, जब तक हज़रत फा़तिमा ज़हरा जीवित थीं, और उसके विवाह से सभी मुस्लिमों के लिए एक विशेष आध्यात्मिक महत्त्व है क्योंकि इसे दो महान किरदारों के बीच विवाह के रूप में देखा जाता है। हज़रत फा़तिमा ज़हरा की मौत के बाद, ह० अली मुर्तज़ा अलैहिस्सलाम ने अन्य महिलाओं से विवाह किया और कई बच्चों को जन्म दिया। <ref name="Britannica"/> ====सैन्य करियर==== ताबोक की लड़ाई के अपवाद के साथ, अली ने इस्लाम के लिए लड़े सभी युद्धों और अभियानों में हिस्सा लिया। <ref name="Tabatabae191"/> साथ ही उन लड़ाइयों में मानक धारक होने के नाते, अली ने योद्धाओं के पक्षियों को दुश्मन भूमि में छापे पर नेतृत्व किया। अली ने पहली बार बदर की लड़ाई में 624 में एक योद्धा के रूप में खुद को प्रतिष्ठित किया। उमायाद चैंपियन वालिद इब्न उट्टा को हराकर अली ने लड़ाई शुरू की; एक इतिहासकार ने युद्ध में अली की उद्घाटन जीत को "इस्लाम की जीत का संकेत" बताया। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|pages=136–137}}</ref> अली ने युद्ध में कई अन्य मक्का सैनिकों को भी हरा दिया। मुस्लिम परंपराओं के मुताबिक अली युद्ध में बीस पच्चीस दुश्मनों के बीच मारे गए, ज्यादातर सातवीं के साथ सहमत हैं; <ref>See: * {{Harvnb|Ashraf|2005|p=36}} * {{Harvnb|Merrick|2005|p=247}}. </ref> जबकि अन्य सभी मुसलमानों ने संयुक्त रूप से एक और सातवीं की हत्या कर दी। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|page=139}}</ref> अली [[उहूद की लड़ाई]] में प्रमुख थे, साथ ही साथ कई अन्य लड़ाईएं जहां उन्होंने एक विभाजित तलवार की रक्षा की जिसे जुल्फिकार कहा जाता है। <ref name="Battles-of-Badr-and-Uhud">{{cite book | last = Khatab| first = Amal| title = Battles of Badr and Uhud| publisher=Ta-Ha Publishers| date = May 1, 1996| isbn = 978-1-897940-39-6 }}</ref> मुहम्मद की रक्षा करने की उनकी विशेष भूमिका थी जब अधिकांश मुस्लिम सेना उहूद <ref name="Britannica"/> की लड़ाई से भाग गई थी और कहा गया था "अली को छोड़कर कोई बहादुर युवा नहीं है और कोई तलवार नहीं है जो जुल्फिकार को छोड़कर सेवा प्रदान करती है।"<ref>Ibn Al Atheer, In his Biography, vol 2 p 107 "لا فتی الا علي لا سيف الا ذوالفقار" </ref> वह खाबर की लड़ाई में मुस्लिम सेना के कमांडर थे। <ref>See: * {{Harvnb|Ashraf|2005|pp=66–68}} * {{Harvnb|Zeitlin|2007|p=134}}</ref> इस युद्ध के बाद मोहम्मद ने अली को असदुल्ला नाम दिया (अरबी : أسد الله), जिसका अर्थ है "भगवान का शेर"। अली ने 630 में हुनैन की लड़ाई में मुहम्मद का भी बचाव किया। <ref name="Britannica"/> ====इस्लाम के लिए मिशन==== [[File:Levha (panel) in honor of Imam 'Ali.jpg|thumb|अरबी सुलेख जिसका अर्थ है "अली को छोड़कर कोई बहादुर युवा नहीं है और वहां कोई तलवार नहीं है जो जुल्फिकार को छोड़कर सेवा प्रदान करती है।"]] मुहम्मद ने 'अली को उन शास्त्रियों में से एक के रूप में नामित किया जो कुरान के पाठ को लिखेंगे, जो पिछले दो दशकों के दौरान मुहम्मद को बताया गया था। जैसे ही इस्लाम पूरे अरब में फैलना शुरू कर दिया, अली ने नए इस्लामी आदेश की स्थापना में मदद की। उन्हें 628 में मुहम्मद और कुरैशी के बीच शांति संधि हुड्डाबिय्याह की संधि लिखने का निर्देश दिया गया था। अली इतने भरोसेमंद और भरोसेमंद थे कि मुहम्मद ने उन्हें संदेश ले जाने और आदेश घोषित करने के लिए कहा था। 630 में, अली ने मक्का में तीर्थयात्रियों की एक बड़ी सभा में सुनाया कि कुरान का एक हिस्सा जिसने मुहम्मद और इस्लामिक समुदाय को अरब बहुविश्वासियों के साथ पहले किए गए समझौते से बंधे नहीं थे। 630 में मक्का की विजय के दौरान, मुहम्मद ने अली से यह गारंटी देने के लिए कहा कि विजय खूनी होगी। उन्होंने अली को पूर्व इस्लामी युग के बहुवाद से अपनी अशुद्धता के बाद बानू औस , बानू खजराज , तैय और काबा के लोगों द्वारा पूजा की जाने वाली सभी मूर्तियों को तोड़ने का आदेश दिया। इस्लाम की शिक्षाओं को फैलाने के लिए अली को एक साल बाद यमन भेजा गया था। उन पर कई विवादों को सुलझाने और विभिन्न जनजातियों के विद्रोह को दूर करने का भी आरोप लगाया गया था। <ref name="Britannica"/><ref name="Iranica"/> ====मुबहालाह की घटना==== यह भी देखें: [[अहल अल-बैत]] हदीस संग्रह के अनुसार, 631 में, नज्रान (वर्तमान में उत्तरी यमन और आंशिक रूप से सऊदी अरब में ) से एक अरब ईसाई दूत मुहम्मद के पास आया और यह तर्क दिया कि दोनों पक्षों ने यीशु के बारे में अपने सिद्धांत में क्या किया था। आदम की सृष्टि के लिए यीशु के चमत्कारी जन्म की तुलना करने के बाद, <ref>{{cite quran|3|59|style = ref}}.</ref> मुहम्मद ने उन्हें मुबहाला (वार्तालाप) कहा, जहां प्रत्येक पार्टी को अपने जानकार पुरुष, महिलाएं और बच्चे लाए, और झूठ बोलने वाली पार्टी और उनके अनुयायियों को शाप देने के लिए अल्लाह से पूछें। <ref name="cite quran|3|61|style = ref">{{cite quran|3|61|style = ref}}.</ref> मुहम्मद, उन्हें साबित करने के लिए कि वह एक भविष्यद्वक्ता था, ने अपनी बेटी फातिमा, अली और उसके पोते हसन और हुसैन को लाया। वह ईसाइयों के पास गया और कहा, "यह मेरा परिवार है" और खुद को और उसके परिवार को एक कपड़ों से ढका दिया। <ref>See: *[[Sahih Muslim]], Chapter of virtues of companions, section of virtues of Ali, 1980 Edition Pub. in Saudi Arabia, Arabic version, v4, p1871, the end of tradition No.&nbsp;32 *Sahih al-Tirmidhi, v5, p654 *{{Harvnb|Madelung|1997|p=15 and 16}}. </ref> मुस्लिम स्रोतों के मुताबिक, जब एक ईसाई भिक्षुओं ने अपने चेहरे देखे, तो उन्होंने अपने साथीों को सलाह दी कि वे अपने जीवन और परिवारों के लिए मुबहाला से वापस आएं। इस प्रकार ईसाई भिक्षु मुबहाला जगह से गायब हो गए। अल्लामेह तबाबातेई ताफसीर अल-मिज़ान में बताती हैं कि इस कविता में "हमारा खुद" शब्द <ref name="cite quran|3|61|style = ref"/> मुहम्मद और अली को संदर्भित करता है। फिर उन्होंने वर्णन किया कि इमाम अली अल-रिडा, आठवीं शिया इमाम, अल-ममुन, अब्बासिद खलीफ के साथ चर्चा में, मुस्लिम समुदाय के बाकी हिस्सों में मुहम्मद के वंश की श्रेष्ठता साबित करने के लिए इस कविता का उल्लेख करते हैं, और इसे सबूत माना जाता है अली के मुहम्मद के रूप में अली बनाने के कारण अली के अधिकार के लिए खलीफा के अधिकार के लिए। <ref>{{cite web |url=http://www.almizan.org/ |title=Tafsir al-Mizan, v.6, Al Imran, verses 61–63 |first=Sayyid Mohammad Hosayn |last=Tabatabaei |publisher=almizan.org |accessdate=2010-11-25 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20090617232037/http://almizan.org/ |archivedate=17 जून 2009 |df=mdy-all }}</ref> ====गदिर खुम==== [[File:Investiture of Ali Edinburgh codex.jpg|thumb|गदीर खुम ( एमएस अरब 161, फोल 162 आर, 1307/8 इल्खानिद पांडुलिपि चित्रण) में अली की जांच।]] चूंकि मुहम्मद 632 में अपनी आखिरी तीर्थयात्रा से लौट रहे थे, उन्होंने अली के बारे में बयान दिए जिन्हें सुन्नीस और शियास ने बहुत अलग तरीके से व्याख्या की है। <ref name="Britannica"/> उन्होंने गदिर खुम में कारवां रुक गई, सांप्रदायिक प्रार्थना के लिए लौटने वाले तीर्थयात्रियों को इकट्ठा किया और उन्हें संबोधित करना शुरू कर दिया। <ref name="Khumm">{{Harvnb|Dakake|2008|pp=34–39}}.</ref> ;इस्लाम के विश्वकोष के अनुसार: {{quote|हाथ से अली लेते हुए, उसने अपने वफादार अनुयायियों से पूछा कि क्या वह मुहम्मद, विश्वासियों के करीब नहीं थे (वेला) खुद के मुकाबले ज्यादा थे; भीड़ ने रोया: "हे ईश्वर का प्रेरित है!"; तब उन्होंने घोषित किया: "जिनके बारे में मैं मावल हूं, उनमें से अली भी मावला ( मन कुंटू मालाहु एफ-'अली मवलु)" है। <ref name="EncyclopediaIslam">{{cite encyclopedia |last=Veccia Vaglieri |first=Laura |authorlink=Laura Veccia Vaglieri |title=G̲h̲adīr K̲h̲umm |encyclopedia=Encyclopædia of Islam, Second Edition |accessdate=2013-03-28 |publisher=Brill Online |url=http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-2/ghadir-khumm-SIM_2439 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130331002156/http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-2/ghadir-khumm-SIM_2439 |archivedate=March 31, 2013 |url-status=live |df=mdy-all }}</ref><ref>See: * {{Harvnb|Dakake|2008|pp=34–37}} * Ibn Taymiyyah, Minhaaj as-Sunnah 7/319 "من كنت مولاه فهذا علي مولاه"</ref>}} शिया इन मुख्यालयों को मुहम्मद के उत्तराधिकारी और पहले इमाम के रूप में अली के पदनाम के रूप में मानते हैं; इसके विपरीत, सुन्नी उन्हें केवल मुहम्मद और अली के बीच घनिष्ठ आध्यात्मिक संबंधों की अभिव्यक्ति के रूप में लेते हैं, और उनकी इच्छा के अनुसार अली, उनके चचेरे भाई और दामाद के रूप में, उनकी मृत्यु पर उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों का उत्तराधिकारी है, लेकिन जरूरी नहीं कि उनका पद राजनीतिक अधिकार <ref name="EOAli3">{{cite encyclopedia |last=Gleave |first=Robert M. |authorlink= |title=Ali ibn Abi Talib |encyclopedia=Encyclopaedia of Islam, THREE |accessdate=2013-03-29 |publisher=Brill Online |url=http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-3/ali-b-abi-talib-COM_26324 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130402034949/http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-3/ali-b-abi-talib-COM_26324 |archivedate=April 2, 2013 |url-status=live |df=mdy-all }}</ref> <ref>See also: * {{Harvnb|Dakake|2008|pp=43–48}} * {{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=40}}.</ref> कई सूफी इस प्रकरण को अली के लिए मुहम्मद की आध्यात्मिक शक्ति और अधिकार के हस्तांतरण के रूप में भी समझते हैं, जिन्हें वे वैली सम उत्कृष्टता के रूप में मानते हैं। <ref name="Britannica"/><ref>{{Harvnb|Dakake|2008|pp=33–35}}. </ref> शिया और सुन्नी दोनों स्रोत बताते हैं कि, उपदेश के बाद, अबू बकर, उमर और उथमान ने अली को निष्ठा का वचन दिया था। <ref>{{cite web|title=A Shi'ite Encyclopedia|url=https://www.al-islam.org/shiite-encyclopedia-ahlul-bayt-dilp-team|website=Al-Islam.org|publisher=Ahlul Bayt Digital Islamic Library Project|accessdate=27 February 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180218134346/https://www.al-islam.org/shiite-encyclopedia-ahlul-bayt-dilp-team|archive-date=18 फ़रवरी 2018|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite book|title=Musnad Ahmad Ibn Hanbal, Volume 4|page=281}}</ref><ref>{{cite book|last1=al-Razi|first1=Fakhr|title=Tafsir al-Kabir, Volume 12|pages=49–50}}</ref> ===मुहम्मद के बाद=== ;मुहम्मद के उत्तराधिकार यह भी देखें: कुरान की उत्पत्ति और विकास, [[मुहम्मद]], सक्फाह, रशीदुन और पद के हदीस के उत्तराधिकार मुहम्मद की मृत्यु के बाद 632 में अली के जीवन का एक और हिस्सा शुरू हुआ और 656 में तीसरा खलीफा 'उथमान इब्न' अफ़ान की हत्या तक चली गई। उन 24 वर्षों के दौरान, अली ने न तो किसी भी युद्ध या विजय में भाग लिया, <ref name="Iranica"/> न ही उन्होंने कोई कार्यकारी पद संभाला। उन्होंने राजनीतिक मामलों से वापस ले लिया, खासतौर पर अपनी पत्नी फातिमा जहर की मृत्यु के बाद। उन्होंने अपने परिवार की सेवा करने और एक किसान के रूप में काम करने के लिए अपना समय इस्तेमाल किया। अली ने बहुत सारे कुएं खोले और मदीना के पास बगीचे लगाए और उन्हें सार्वजनिक उपयोग के लिए संपन्न किया। इन कुओं को आज अबर अली ("अली के कुएं") के रूप में जाना जाता है। <ref>{{cite web|title=Abar Ali mosque|url=http://www.ircicaarchdata.org/ircica/level1.php?id=750|publisher=IRCICAARCH data|accessdate=23 May 2015|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20150402091323/http://www.ircicaarchdata.org/ircica/level1.php?id=750|archivedate=2 अप्रैल 2015|df=mdy-all}}</ref> अली ने मुहम्मद की मृत्यु के छह महीने बाद कुरान, मुसाफ, <ref>{{cite encyclopedia|last = Nasr |first = Seyyed Hossein|authorlink = Seyyed Hossein Nasr|title = Quran |year = 2007| encyclopedia = Encyclopædia Britannica Online|accessdate = 2007-11-04|url=http://www.britannica.com/eb/article-68890/Quran| archiveurl= https://web.archive.org/web/20071016200056/http://www.britannica.com/eb/article-68890/Quran| archivedate= October 16, 2007 <!--DASHBot-->| url-status= live}}</ref> का एक पूर्ण संस्करण संकलित किया। मदीना के अन्य लोगों को दिखाने के लिए वॉल्यूम पूरा हो गया था और ऊंट द्वारा किया गया था। इस mushaf का आदेश उस समय से भिन्न था जो बाद में उथमानिक युग के दौरान इकट्ठा किया गया था। इस पुस्तक को कई लोगों ने खारिज कर दिया जब उन्होंने उन्हें दिखाया। इसके बावजूद, अली ने मानकीकृत mus'haf के खिलाफ कोई प्रतिरोध नहीं किया। <ref>See: * {{Harvnb|Tabatabaei|1987|p=chapter 5}} * Observations on Early Quran Manuscripts in San'a * The Quran as Text'', ed. Wild, Brill, 1996 {{ISBN|978-90-04-10344-3}}</ref> ====अली और राशीदून खलीफ़ा==== [[File:Ambigram - Muhammad and Ali2.svg|thumb|अंबिग्राम मुहम्मद (दाएं) और अली (बाएं) को एक शब्द में लिखा गया है। 180 डिग्री उलटा फॉर्म दोनों शब्दों को दिखाता है।]] अपने जीवन के आखिरी सालों में अरब जनजातियों को एक मुस्लिम धार्मिक राजनीति में एकजुट करने के बाद, 632 में मुहम्मद की मृत्यु ने इस बात पर असहमति व्यक्त की कि मुस्लिम समुदाय के नेता के रूप में उन्हें कौन सफल करेगा। <ref>{{Harvnb|Lapidus|2002|p=31 and 32}}</ref> जबकि अली और बाकी मुहम्मद के करीबी परिवार अपने शरीर को दफनाने के लिए धो रहे थे, जबकि साकिफा में मुस्लिमों के एक छोटे समूह ने भाग लिया, एक मुहम्मद के करीबी साथी अबू बकर को समुदाय के नेतृत्व के लिए नामित किया गया था। दूसरों ने अपना समर्थन जोड़ा और अबू बकर को पहला खलीफा बनाया गया था। अबू बकर की पसंद मुहम्मद के कुछ साथीों ने विवादित की थी, जिन्होंने कहा था कि अली को मुहम्मद ने अपने उत्तराधिकारी को नामित किया था। <ref name="Islam"/><ref>See: * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|p=57}} * {{Harvnb|Madelung|1997|pp=26–27, 30–43 and 356–360}} </ref> बाद में जब [[फ़ातिमा ज़हरा|फ़ातिमा]] और अली ने खलीफ़ा के अधिकार के मामले में सहयगियों से सहायता मांगी, तो उन्होंने उत्तर दिया, 'हे भगवान के मैसेन्जर की बेटी! हमने अबू बकर को अपना निष्ठा दिया है। अगर अली इससे पहले हमारे पास आए थे, तो हम निश्चित रूप से उसे त्याग नहीं पाएंगे। अली ने कहा, 'क्या यह उचित था कि पैगंबर को दफनाए जाने से पहले हमें खलीफा पर झगड़ा करना चाहिए?' <ref>Ibn Qutaybah, al-Imamah wa al-Siyasah, Vol. I, pp. 12–13</ref><ref>Ibn Abi al-Hadid, Sharh; Vol. II, p.5.</ref> खिलाफ़त के चुनाव के बाद, अबू बकर और उमर कुछ अन्य साथी के साथ फातिमा के घर गए और अली और उनके समर्थकों को मजबूर करने के लिए मजबूर किया जो अबू बकर को अपना निष्ठा देने के लिए इकट्ठे हुए थे। फिर, यह आरोप लगाया गया है कि उमर ने आग लगने की धमकी दी थी जब तक वे बाहर नहीं आए और अबू बकर के प्रति निष्ठा की कसम खाई। अपने पति के समर्थन में फातिमा ने एक प्रलोभन शुरू कर दिया और "अपने बालों को उजागर करने" की धमकी दी, जिस पर अबू बकर ने पश्चाताप किया और वापस ले लिया। अली ने बार-बार कहा है कि उनके साथ चालीस पुरुष थे, उन्होंने विरोध किया होगा। अली ने सक्रिय रूप से अपना अधिकार नहीं लगाया क्योंकि वह नवजात मुस्लिम समुदाय को संघर्ष में फेंकना नहीं चाहता था। अन्य सूत्रों का कहना है कि अली ने उमर के चयन को खलीफा के रूप में स्वीकार कर लिया और यहां तक ​​कि उनकी बेटियों उम कुलथुम को शादी में भी दिया। [[File:Mirror writing2.jpg|thumb|तुर्क शताब्दी में 18 वीं शताब्दी में दर्पण लेखन । दोनों दिशाओं में 'अली भगवान का उपाध्यक्ष' वाक्यांश दर्शाता है।]] इस विवादास्पद मुद्दे ने मुसलमानों को बाद में दो समूहों, सुन्नी और शिया में विभाजित कर दिया। सुन्नीस ने जोर देकर कहा कि मुहम्मद ने कभी उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं किया है, फिर भी अबू बकर मुस्लिम समुदाय द्वारा पहले खलीफ चुने गए थे। सुन्नी मुहम्मद के सही उत्तराधिकारी के रूप में पहले चार खलीफों को पहचानते हैं। शियास का मानना ​​है कि मुहम्मद ने स्पष्ट रूप से अली को गदीर खुम में उनके उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया और मुस्लिम नेतृत्व उनसे संबंधित था जो दिव्य आदेश द्वारा निर्धारित किए गए थे। <ref name="Islam"/> विल्फेर्ड मैडेलंग के मुताबिक, अली स्वयं मुहम्मद, उनके घनिष्ठ संबंध और इस्लाम के बारे में उनके ज्ञान और उनके गुणों की सेवा में उनकी योग्यता के साथ अपने करीबी संबंध के आधार पर खलीफा के लिए अपनी वैधता से आश्वस्त थे। उन्होंने अबू बकर से कहा कि खलीफा के रूप में निष्ठा (बाया) को प्रतिज्ञा करने में उनकी देरी उनके पहले के शीर्षक की उनकी धारणा पर आधारित थी। अली ने आखिरकार अबू बकर और फिर उमर और उथमान के प्रति निष्ठा का वचन दिया, लेकिन इस्लाम की एकता के लिए ऐसा किया था, जब एक बार जब यह स्पष्ट हो गया कि मुसलमान उससे दूर हो गए थे। <ref name="Islam"/><ref>See: * {{Harvnb|Madelung|1997|p=141 and 270}} * {{Harvnb|Ashraf|2005|p=99 and 100}} </ref> अली ने यह भी माना कि वह इस लड़ाई के बिना इमामेट की अपनी भूमिका पूरी कर सकता है। <ref>{{Harvnb|Chirri|1982|p=}}</ref> अबू बकर के ख़िलाफ़त की शुरुआत में, मुहम्मद की बेटी, विशेष रूप से फडक , फतिमह और अली के बीच एक तरफ और दूसरी तरफ अबू बकर के बीच एक विवाद था। फातिमा ने अबू बकर से अपनी संपत्ति, फदाक और खयबर की भूमि को बदलने के लिए कहा । लेकिन अबू बकर ने इनकार कर दिया और उनसे कहा कि भविष्यवक्ताओं के पास कोई विरासत नहीं है और फडक मुस्लिम समुदाय से संबंधित था। अबू बकर ने उससे कहा, "अल्लाह के प्रेरित ने कहा, हमारे उत्तराधिकारी नहीं हैं, जो कुछ भी हम छोड़ते हैं वह सदाका है ।" उम्म अयमान के साथ मिलकर, अली ने इस तथ्य की गवाही दी कि मुहम्मद ने इसे फातिमा जहर को दिया, जब अबू बकर ने उनसे अपने दावे के लिए गवाहों को बुलावा देने का अनुरोध किया। फातिमा गुस्से में हो गई और अबू बकर से बात करना बंद कर दिया, और जब तक वह मर गई, तब तक वह रवैया मानते रहे। <ref>See: * {{Harvnb|Madelung|1997|p=50 and 51}} * {{Harvnb|Qazwini|Ordoni|1992|p=211}} * {{cite quran|27|16}} * {{cite quran|21|89}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|4|53|325}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|59|546}} * {{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|57|60}} * {{hadith-usc|usc=yes|muslim|19|4352}}</ref> 'आइशा ने यह भी कहा कि "जब अल्लाह के प्रेषित की मृत्यु हो गई, तो उनकी पत्नियों ने उथमान को अबू बकर को भेजने के लिए कहा कि वह विरासत के अपने हिस्से के लिए कहें।" तब 'ऐशा ने उनसे कहा, "क्या अल्लाह के प्रेरित ने नहीं कहा,' हमारी (प्रेरित ') संपत्ति विरासत में नहीं है, और जो भी हम छोड़ते हैं वह दान में खर्च किया जाना चाहिए?" <ref>Sahih Al Bukhari, Volume 8, Book 80, Number 722 [sahih-bukhari.com]</ref> कुछ सूत्रों के मुताबिक, अली ने वर्ष 633 में अपनी पत्नी फ़ातिमा की मृत्यु के कुछ समय बाद अबू बकर को निष्ठा की शपथ नहीं दी थी। <ref name="Iranica"/> 'अली ने अबू बकर के अंतिम संस्कार में भाग लिया। <ref>See: *{{Harvnb|Ashraf|2005|p=100 and 101}} *{{Harvnb|Madelung|1997|p=141}} *{{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|5|59|546}} *{{Hadith-usc|Bukhari|usc=yes|8|82|817}} *{{hadith-usc|usc=yes|muslim|19|4352}} *{{Harvnb|Rizvi|Saeed|1988|p=24}} *[[The History of the Decline and Fall of the Roman Empire]] by [[Edward Gibbon]], section [http://www.ccel.org/g/gibbon/decline/volume2/chap50.htm Reign of Abubeker; A.D. 632, June 7.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180917181736/http://www.ccel.org/g/gibbon/decline/volume2/chap50.htm|date=17 सितंबर 2018}}</ref> उन्होंने दूसरे खलीफा उमर इब्न खट्टाब के प्रति निष्ठा का वचन दिया और उन्हें एक विश्वसनीय सलाहकार के रूप में मदद की। उमर विशेष रूप से अली पर मदीना के मुख्य न्यायाधीश के रूप में निर्भर था। उन्होंने उमर को इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत के रूप में हिजरा सेट करने की सलाह दी। उमर ने राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ धार्मिक लोगों में अली के सुझावों का इस्तेमाल किया। <ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|pp=107–110}}</ref> 'अली उमर द्वारा नियुक्त तीसरी खलीफा चुनने के लिए चुनावी परिषद में से एक थे। हालांकि 'अली दो प्रमुख उम्मीदवारों में से एक था, परिषद की व्यवस्था उनके ख़िलाफ़ थी। साद इब्न अबी वक्कास और अब्दुर रहमान बिन ऑफ़, जो चचेरे भाई थे, स्वाभाविक रूप से उथमान का समर्थन करने के इच्छुक थे, जो अब्दुर रहमान के दामाद थे। इसके अलावा, उमर ने अब्दुर रहमान को कास्टिंग वोट दिया। अब्दुर रहमान ने इस शर्त पर अली को खलीफा की पेशकश की कि उसे कुरान के अनुसार शासन करना चाहिए, मुहम्मद द्वारा निर्धारित उदाहरण, और पहले दो खलीफा द्वारा स्थापित उदाहरण। अली ने तीसरी शर्त से इंकार कर दिया जबकि उथमैन ने उसे स्वीकार कर लिया। इलॉन अबी अल-हदीद की टिप्पणियों के अनुसार इलोकेंस अली के शिखर पर उनकी प्रतिष्ठा पर जोर दिया गया, लेकिन अधिकांश मतदाताओं ने उथमान और अली को समर्थन देने के लिए अनिच्छुक रूप से आग्रह किया। <ref>See: * {{Harvnb|Madelung|1997|pp=70–72}} * {{Harvnb|Dakake|2008|p=41}} * {{Harvnb|Momen|1985|p=21}} </ref> 'उथमान इब्न' अफ़ान ने अपने रिश्तेदार बानू अब्द-शम्स की ओर उदारता व्यक्त की, जो उनके ऊपर हावी होने लगते थे, और अबू धार अल-घिफ़ारी , अब्द-अल्लाह इब्न मसूद और अमार जैसे कई शुरुआती साथीों के प्रति उनके घमंडी दुर्व्यवहार इब्न यासीर ने लोगों के कुछ समूहों के बीच अपमान को उकसाया। अधिकांश साम्राज्य में 650-651 के बाद से असंतोष और प्रतिरोध खुलेआम उभरा। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=87 and 88}}</ref> उनके शासन और उनके द्वारा नियुक्त सरकारों के साथ असंतोष अरब के बाहर प्रांतों तक ही सीमित नहीं था। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=90}}</ref> जब उथमान के रिश्तेदार, विशेष रूप से मारवान ने उस पर नियंत्रण प्राप्त किया, तो महान परिषद , जिसमें मतदाता परिषद के अधिकांश सदस्य शामिल थे, उनके खिलाफ हो गए या कम से कम अपना समर्थन वापस ले लिया, खलीफा पर दबाव डालने और अपने तरीकों को कम करने के दबाव डालने अपने दृढ़ संबंध का प्रभाव। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|pp=92–107}}</ref> इस समय, अली ने उथमान पर सीधे विरोध किए बिना एक संयम प्रभाव के रूप में कार्य किया था। कई अवसरों पर अली ने उधमान के साथ हुडुद के आवेदन में असहमत; उन्होंने सार्वजनिक रूप से अबू ध्रर अल-घिफ़ारी के लिए सहानुभूति दिखायी थी और अम्मर इब्न यासीर की रक्षा में दृढ़ता से बात की थी। उन्होंने उथमान को अन्य सहयोगियों की आलोचनाओं के बारे में बताया और उथमान की तरफ से प्रांतीय विरोधियों के साथ वार्ताकार के रूप में कार्य किया जो मदीना आए थे; इस वजह से अली और उथमान के परिवार के बीच कुछ अविश्वास उत्पन्न हुआ प्रतीत होता है। आखिरकार, उन्होंने घेराबंदी की गंभीरता को अपने आग्रह से कम करने की कोशिश की कि उथमान को पानी की अनुमति दी जानी चाहिए। <ref name="Iranica"/> इतिहासकारों के बीच अली और उथमान के बीच संबंधों के बारे में विवाद है। हालांकि उथमान के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा करते हुए, अली अपनी कुछ नीतियों से असहमत थे। विशेष रूप से, उन्होंने धार्मिक कानून के सवाल पर उथमान के साथ संघर्ष किया।उन्होंने जोर देकर कहा कि उबायद अल्लाह इब्न उमर और वालिद इब्न उक्बा जैसे कई मामलों में धार्मिक सजा की जानी चाहिए। तीर्थयात्रा के दौरान 650 में, उन्होंने उथमान से प्रार्थना अनुष्ठान के परिवर्तन के लिए अपमान के साथ सामना किया। जब उथमान ने घोषणा की कि वह जो कुछ भी उसे फीस से ले लेगा, तो अली ने कहा कि उस मामले में खलीफा को मजबूर कर दिया जाएगा। अली ने इब्न मसूद जैसे खलीफा द्वारा मातृत्व से साथी की रक्षा करने का प्रयास किया। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=109 and 110}}</ref> इसलिए, कुछ इतिहासकार अली को उथमान के विपक्ष के प्रमुख सदस्यों में से एक मानते हैं, यदि मुख्य नहीं है। लेकिन विल्फेर्ड मैडेलंगइस तथ्य के कारण उनके फैसले को खारिज कर दिया गया कि अली के पास खलीफा के रूप में चुने जाने के लिए कुरैशी का समर्थन नहीं था। उनके अनुसार, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अली के विद्रोहियों के साथ घनिष्ठ संबंध थे जिन्होंने अपने खलीफा का समर्थन किया या उनके कार्यों को निर्देशित किया। <ref>See: * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|p=67 and 68}} * {{Harvnb|Madelung|1997|p=107 and 111}} </ref> कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि अली ने उथमान पर सीधे विरोध किए बिना एक संयम प्रभाव के रूप में कार्य किया था। <ref name="Iranica"/> हालांकि, मदेलंग ने मारवान को बताया कि अली के पोते जैन अल-अबिदीन ने कहा था कि <blockquote>कोई भी [इस्लामिक कुलीनता के बीच] आपके गुरु की तुलना में हमारे गुरु की तुलना में अधिक समशीतोष्ण था। <ref name="Madelung 1997 334">{{Harvnb|Madelung|1997|p=334}}</ref></blockquote> ==ख़िलाफ़त== [[File:First Fitna map blank.svg|thumb|[[राशिदून ख़िलाफ़त]] का इलाक़ा [[राशिदून ख़लीफ़ा|राशिदून खलीफाओं]] के दौर में। अली के दौर में पहले फ़ितने का मामला। {{legend|#00ff00|Strongholds of the Rashidun caliphate of Ali during the First Fitna}} {{legend|#ef1000|Region under the control of [[Muawiyah I]] during the First Fitna}} {{legend|#5200FA|Region under the control of [[Amr ibn al-As]] during the First Fitna}}]] मुस्लिम इतिहास में सबसे कठिन अवधि में से एक के दौरान, अली 656 और 661 के बीच ख़लीफ़ा थे। जो कि पहले फ़ितना (विद्रोह) के साथ भी हुआ था। चूंकि जिन संघर्षों में अली शामिल थे, वे ध्रुवीय सांप्रदायिक इतिहासलेख में कायम थे, जीवनी सामग्री अक्सर पक्षपातपूर्ण होती है। लेकिन सूत्र इस बात से सहमत हैं कि वह एक गहन धार्मिक व्यक्ति था, जो इस्लाम के कारण और कुरान और सुन्नत के अनुसार न्याय का शासन था; वह धार्मिक कर्तव्यों के मामले में मुसलमानों के खिलाफ युद्ध में लगे थे। सूत्रों ने अपने तपस्या, धार्मिक कर्तव्यों का कठोर पालन, और सांसारिक वस्तुओं से अलग होने पर नोटिस में उल्लेख किया है। इस प्रकार कुछ लेखकों ने बताया है कि उन्हें राजनीतिक कौशल और लचीलापन की कमी है। <ref name="Iranica"/> ===चुनाव=== उस्मान की हत्या का मतलब था कि विद्रोहियों को एक नया खलीफा चुनना पड़ा। यह कठिनाइयों से मुलाकात की क्योंकि विद्रोहियों को मुहजीरुन, अंसार, मिस्रवासी, कुफान और बसराइट समेत कई समूहों में विभाजित किया गया था । तीन उम्मीदवार थे: अली, तलहाह और अल-जुबयर । सबसे पहले विद्रोहियों ने अली से संपर्क किया, चौथे खलीफ होने के लिए उन्हें अनुरोध करने का अनुरोध किया। मुहम्मद के कुछ साथी ने अली को कार्यालय स्वीकार करने के लिए राजी करने की कोशिश की, <ref name="Sermon 3">*[[Nahj Al-Balagha]] [http://www.nahjulbalagha.org/SermonDetail.php?Sermon=3 Nahj Al-Balagha Sermon 3] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090923213833/http://www.nahjulbalagha.org/SermonDetail.php?Sermon=3|date=सितम्बर 23, 2009}} *For Isnad of this sermon and the names of scholars who narrate it see [https://books.google.com/books?id=zQjKHj0vA1IC&pg=PA112&dq=Ali+axis++hand-mill&ei=GEPmR5jmDZG0yQSY9InCAg&sig=LitcBMh39oXValrXDMsMwnFTXKA#PPA108,M1 Nahjul Balagha, Mohammad Askari Jafery (1984), pp. 108–112] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160508000517/https://books.google.com/books?id=zQjKHj0vA1IC&pg=PA112&dq=Ali+axis++hand-mill&ei=GEPmR5jmDZG0yQSY9InCAg&sig=LitcBMh39oXValrXDMsMwnFTXKA#PPA108,M1|date=8 मई 2016}}</ref><ref>{{Harvnb|Ashraf|2005|p=119}}</ref><ref>{{Harvnb|Madelung|1997|pp=141–143}}</ref> लेकिन उन्होंने प्रस्ताव को बंद कर दिया, एक प्रमुख के बजाय परामर्शदाता होने का सुझाव दिया। <ref>{{Harvnb|Hamidullah|1988|p=126}}</ref> ताल्हा, जुबयरे और अन्य साथी ने खलीफा के विद्रोहियों के प्रस्ताव से इनकार कर दिया। इसलिए, विद्रोहियों ने मदीना के निवासियों को एक दिन के भीतर एक खलीफा चुनने की चेतावनी दी, या वे कठोर कार्यवाही लागू करेंगे। डेडलॉक को हल करने के लिए, मुस्लिम अल-मस्जिद एन- नाबावी (अरबी : المسجد النبوي , "पैगंबर की मस्जिद") में 18 जून, 656 को खलीफा नियुक्त करने के लिए एकत्र हुए । प्रारंभ में, 'अली ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि सिर्फ उनके सबसे सशक्त समर्थक विद्रोहियों थे। हालांकि, जब मदीना के निवासियों के अलावा मुहम्मद के कुछ उल्लेखनीय साथी ने उन्हें प्रस्ताव स्वीकार करने का आग्रह किया, तो वह अंततः सहमत हुए। अबू मेखनाफ के मुताबिकका वर्णन, तलहाह पहले प्रमुख साथी थे जिन्होंने 'अली को अपना प्रतिज्ञा दी, लेकिन अन्य कथाओं ने अन्यथा दावा किया कि उन्हें अपनी प्रतिज्ञा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अलावा, तलहाह और एज़-जुबयरे ने बाद में दावा किया कि उन्होंने उन्हें अनिच्छा से समर्थन दिया है। भले ही, अली ने इन दावों को खारिज कर दिया, जोर देकर कहा कि उन्होंने उन्हें स्लीप स्वेच्छा से मान्यता दी है। विल्फेर्ड मैडेलंग का मानना ​​है कि बल ने लोगों से प्रतिज्ञा देने का आग्रह नहीं किया और उन्होंने मस्जिद में सार्वजनिक रूप से वचन दिया। <ref name="Ashraf (2005), pp. 119-120">{{Harvnb|Ashraf|2005|p=119 and 120}}</ref><ref name="Madelung (1997), pp. 141-145">{{Harvnb|Madelung|1997|pp=141–145}}</ref> जबकि मदीना की आबादी के साथ-साथ कई विद्रोहियों ने अपनी प्रतिज्ञा दी, कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े या जनजातियों ने ऐसा नहीं किया। उथमान के रिश्तेदार उमाय्याद लेवेंट में भाग गए , या अपने घरों में बने रहे, बाद में 'अली की वैधता' से इनकार कर दिया।साद इब्न अबी वक्कास अनुपस्थित थे और 'अब्दुल्ला इब्न' उमर ने अपने निष्ठा की पेशकश करने से रोक दिया, लेकिन दोनों ने 'अली को आश्वासन दिया कि वे उनके खिलाफ कार्य नहीं करेंगे। <ref name="Ashraf (2005), pp. 119-120"/><ref name="Madelung (1997), pp. 141-145"/> इस प्रकार अली ने रशीदुन खलीफाट को विरासत में मिला - जो पश्चिम में मिस्र से पूर्व में ईरानी पहाड़ियों तक फैला था- जबकि हेजाज और अन्य प्रांतों की स्थिति में उनके चुनाव की पूर्व संध्या पर स्थिति परेशान नहीं थी। अली खलीफा बनने के तुरंत बाद, उन्होंने प्रांतीय गवर्नरों को खारिज कर दिया जिन्हें उथमान ने नियुक्त किया था, उन्हें भरोसेमंद सहयोगियों के साथ बदल दिया था। उन्होंने मुगीरा इब्न शुबा और इब्न अब्बास के वकील के खिलाफ काम किया, जिन्होंने उन्हें सावधानी से अपने शासन के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी थी। मदेलंग का कहना है कि अली अपने अधिकार और उनके धार्मिक मिशन से गहराई से आश्वस्त थे, राजनीतिक योग्यता के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करने के इच्छुक नहीं थे, और भारी बाधाओं के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार थे। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=148 and 149}}</ref> उथमान के संस्थापक मुवायाह प्रथम और लेवंट के गवर्नर ने अली के आदेशों को प्रस्तुत करने से इनकार कर दिया; वह ऐसा करने वाला एकमात्र राज्यपाल था। <ref name="Iranica"/> ===मदीना में उद्घाटन पता=== [[File:Arabic caligraphic seal in Hagia Sophia.jpg|thumb|हजिया सोफ़िया में इस्लामी सुलेख के साथ अली का नाम, (वर्तमान में तुर्की)]] जब उन्हें ख़लीफ़ा नियुक्त किया गया, अली ने मदीना के नागरिकों से कहा कि मुस्लिम राजनीति असंतोष और विवाद से पीड़ित हुई है; वह किसी भी बुराई के इस्लाम को शुद्ध करना चाहता था। उन्होंने जनसंख्या को सच्चे मुस्लिमों के रूप में व्यवहार करने की सलाह दी, चेतावनी दी कि वह कोई राजद्रोह बर्दाश्त नहीं करेगा और जो लोग विध्वंसक गतिविधियों के दोषी पाए गए हैं उन्हें कठोर तरीके से निपटाया जाएगा। <ref name="Ashraf (2005), p. 121">{{Harvnb|Ashraf|2005|p=121}}</ref> ===पहला फ़ितना=== [[आइशा]], [[तल्हा]], [[अल-ज़ुबैर]] और उमय्यदों, विशेष रूप से मुआवियाह ई और मरवन मैं, दंगाइयों जो मार डाला थे दंडित करने के लिए करना चाहता था 'अली उथमान। <ref name="Nahj al Balagha Sermon 72">[http://www.nahjulbalagha.org/SermonDetail.php?Sermon=72 Nahj al Balagha Sermon 72] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130507092829/http://www.nahjulbalagha.org/SermonDetail.php?Sermon=72 |date=मई 7, 2013 }}</ref><ref>{{cite web|url=https://books.google.co.uk/books?id=H-k9oc9xsuAC&pg=PA131&dq=battle+of+the+camel,+Muawiya+and+marwan&hl=en&sa=X&ei=7Q4lUeiNDaO80QWBlYGgDw&ved=0CFAQ6AEwBg#v=onepage&q=battle%20of%20the%20camel%2C%20Muawiya%20and%20marwan&f=false|title=Medieval Islamic Civilization|publisher=|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180917143438/https://books.google.co.uk/books?id=H-k9oc9xsuAC&pg=PA131&dq=battle+of+the+camel,+Muawiya+and+marwan&hl=en&sa=X&ei=7Q4lUeiNDaO80QWBlYGgDw&ved=0CFAQ6AEwBg#v=onepage&q=battle%20of%20the%20camel%2C%20Muawiya%20and%20marwan&f=false|archive-date=17 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref> उन्होंने बसरा के करीब डेरा डाला। वार्ता कई दिनों तक चली और बाद में गरम विनिमय और पैरली के दौरान विरोध प्रदर्शनों से उड़ा, जिससे दोनों तरफ जीवन की हानि हुई। भ्रम में जमल की लड़ाई 656 में शुरू हुई, जहां ह०अली अलैहिस्सलाम विजयी हुए। <ref>See: *Lapidus (2002), p.47 *Holt (1977a), p. 70–72 *Tabatabaei (1979), p. 50–53 *[[Nahj Al-Balagha]] [http://www.nahjulbalagha.org/sermons.php Sermons 8, 31, 171, 173, ] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070927212719/http://www.nahjulbalagha.org/sermons.php|date=सितम्बर 27, 2007}} </ref> कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उन्होंने इस मुद्दे का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को खोजने के लिए किया क्योंकि उन्हें ह०अली अलैहिस्सलाम के खलीफा अपने फायदे के खिलाफ मिला। विद्रोहियों ने कहा कि कुरान और सुन्नत के अनुसार शासन नहीं करने के लिए उथमान को मार डाला गया था, इसलिए कोई प्रतिशोध नहीं किया जाना था। <ref name="Iranica"/><ref name="Tabatabae191"/><ref>See: * {{Harvnb|Madelung|1997|p=147 and 148}} * {{Harvnb|Lewis|1991|p=214}}</ref> कुछ लोग कहते हैं कि खलीफा विद्रोहियों का उपहार था और ह०अली अलैहिस्सलाम के पास उन्हें नियंत्रित करने या दंडित करने के लिए पर्याप्त बल नहीं था, <ref name="Ashraf (2005), p. 121"/> जबकि अन्य कहते हैं कि ह०अली अलैहिस्सलाम ने विद्रोहियों के तर्क को स्वीकार किया या कम से कम विचार नहीं किया उथमान एक शासक। <ref>{{Harvnb|Lewis|1991|p=214}}</ref> ऐसी परिस्थितियों में, एक विवाद हुआ जिसने मुस्लिम इतिहास में पहला गृह युद्ध शुरू किया। उथमानियों के नाम से जाने वाले कुछ मुसलमानों ने उथमान को अंत तक एक सही और सिर्फ खलीफा माना, जिसे अवैध तरीके से मार दिया गया था। कुछ अन्य, जिन्हें अली की पार्टी के नाम से जाना जाता है, का मानना ​​था कि उथमान गलती में गिर गया था, उन्होंने खलीफा को जब्त कर लिया था और कानूनी तरीके से अपने तरीके से सुधारने या कदम उठाने के इनकार करने के लिए कानून में निष्पादित किया था; इस प्रकार अली सिर्फ सही और सच्चे इमाम थे और उनके विरोधियों में नास्तिक। यह खुद अली की स्थिति नहीं थी। इस गृह युद्ध ने मुस्लिम समुदाय के भीतर स्थायी विभाजन बनाए, जिनके पास खलीफा पर कब्जा करने का वैध अधिकार था। प्रथम फिटना, 656-661, उथमान की हत्या के बाद, अली के खलीफा के दौरान जारी रखा, और खलीफा के मुआविया की धारणा द्वारा समाप्त किया गया था। इस गृह युद्ध (जिसे अक्सर फितना कहा जाता है) इस्लामी उम्मह (राष्ट्र) की प्रारंभिक एकता के अंत के रूप में खेद है। <ref>See: * {{Harvnb|Lapidus|2002|p=47}} * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|p=72}} * {{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=57}}</ref> <ref>See: * {{Harvnb|Lapidus|2002|p=47}} * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|pp=70–72}} * {{Harvnb|Tabatabaei|1979|pp=50–53}} </ref> अली ने बसरा के गवर्नर 'अब्द अल्लाह इब्न अल'-अब्बास <ref>{{cite encyclopedia|last=|first=|authorlink=|editor-first=|editor-last=|editor-link=|encyclopedia=Encyclopædia Britannica|title='Abd Allah ibn al-'Abbas|edition=15th|year=2010|publisher=Encyclopædia Britannica, Inc.|volume=I: A-Ak - Bayes|location=Chicago, Illinois|isbn=978-1-59339-837-8|pages=[https://archive.org/details/newencyclopaedia2009ency/page/16 16]|url=https://archive.org/details/newencyclopaedia2009ency/page/16}}</ref> नियुक्त किए और इराक में मुस्लिम गैरीसन शहर कुफा में अपनी राजधानी चली गई। बाद रोमन-फ़ारसी युद्धों और बीजान्टिन सासानी युद्ध कि सैकड़ों वर्षों से चली, वहाँ इराक के बीच गहरी जड़ें मतभेद, औपचारिक रूप से फारसी में थे सस्सनिद साम्राज्य और सीरिया औपचारिक रूप से के तहत बीजान्टिन साम्राज्य। इराक़ी चाहते थे कि नए स्थापित इस्लामी राज्य की राजधानी कुफा में हो ताकि वे अपने क्षेत्र में राजस्व ला सकें और सीरिया का विरोध कर सकें। <ref name="Iraq a Complicated State p. 32"/> उन्होंने अली को कुफा में आने और इराक में कुफा में राजधानी स्थापित करने के लिए आश्वस्त किया। <ref name="Iraq a Complicated State p. 32"/> बाद में लेवंत के गवर्नर मुवायाह प्रथम और उथमान के चचेरे भाई ने अली की निष्ठा की मांगों से इनकार कर दिया। अली ने अपने निष्ठा को वापस पाने की उम्मीदों को खोला, लेकिन मुवायाह ने अपने शासन के तहत लेवेंट स्वायत्तता पर जोर दिया। मुवायाह ने अपने लेवेंटाइन समर्थकों को संगठित करके और अली को श्रद्धांजलि अर्पित करने से इंकार कर दिया कि उनके दल ने अपने चुनाव में भाग नहीं लिया था। अली ने अपनी सेनाओं को उत्तर में स्थानांतरित कर दिया और दोनों सेनाएं एक सौ से अधिक दिनों तक सिफिन में खुद को डेरा डाले, ज्यादातर समय बातचीत में बिताई गई। यद्यपि अली ने मुवायाह के साथ कई पत्रों का आदान-प्रदान किया, लेकिन वह उत्तरार्द्ध को खारिज करने में असमर्थ था, न ही उसे निष्ठा देने का वचन देने के लिए राजी किया। पार्टियों के बीच टकराव ने 657 में सिफिन की लड़ाई का नेतृत्व किया। <ref name="Iranica"/> एक सप्ताह के युद्ध के बाद एक हिंसक लड़ाई के बाद ललित अल-हरिर (कड़वाहट की रात) के नाम से जाना जाता था, मुवायाह की सेना मार्गांतरित होने के बिंदु पर थी जब अमृत ​​इब्न अल-आस ने मुवायाह को अपने सैनिकों को उछालने की सलाह दी थी ( अली की सेना में असहमति और भ्रम पैदा करने के लिए या तो अपने भाषणों पर कुरान के छंदों या इसकी पूरी प्रतियों के साथ वर्णित चर्मपत्र)। अली ने स्ट्रैटेज के माध्यम से देखा, लेकिन केवल एक अल्पसंख्यक लड़ाई का पीछा करना चाहता था। आखिर में दो सेनाएं इस बात को सुलझाने के लिए सहमत हुईं कि मध्यस्थता से खलीफा कौन होना चाहिए। लड़ने के लिए अली की सेना में सबसे बड़ा ब्लॉक का इनकार करना मध्यस्थता की स्वीकृति में निर्णायक कारक था। सवाल यह है कि क्या मध्यस्थ अली या कुफान का प्रतिनिधित्व करेगा, अली की सेना में आगे विभाजन हुआ है। अशथ इब्न क्यू और कुछ अन्य ने अली के उम्मीदवारों को 'अब्द अल्लाह इब्न' अब्बास और मलिक अल- अशतर को खारिज कर दिया, और अबू मूसा अशारी पर अपनी तटस्थता के लिए जोर दिया। अंत में, अली को अबू मूसा को स्वीकार करने का आग्रह किया गया था। अमृत ​​इब्न अल- ए को मुवायाह ने मध्यस्थ के रूप में नियुक्त किया था। सात महीने बाद दो मध्यस्थों ने फरवरी 658 में जॉर्डन में मान के उत्तर पश्चिम में 10 मील उत्तर पश्चिम में मुलाकात की।अमृत ​​इब्न अल- आबू मुसा अशारी ने आश्वस्त किया कि अली और मुवायाह दोनों को कदम उठाना चाहिए और एक नया खलीफा चुने जाने चाहिए। अली और उनके समर्थक इस फैसले से डर गए थे, जिसने खलीफा को विद्रोही मुवायाह की स्थिति में कम कर दिया था। इसलिए अली को मुवायाह और अमृत ​​इब्न अल-एस ने बुलाया था। <ref>{{cite book|title=Conflict and Conquest in the Islamic World: A Historical Encyclopedia|first=Alexander|last=Mikaberidze|authorlink=Alexander Mikaberidze|page=836|url=https://books.google.co.uk/books?id=jBBYD2J2oE4C&pg=PA836&dq=Muawiyah+ali+at+Siffin&hl=en&sa=X&ei=v18mUfCsC-Om0AX99IDQBQ#v=onepage&q=Muawiyah%20ali%20at%20Siffin&f=false|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180917183116/https://books.google.co.uk/books?id=jBBYD2J2oE4C&pg=PA836&dq=Muawiyah+ali+at+Siffin&hl=en&sa=X&ei=v18mUfCsC-Om0AX99IDQBQ#v=onepage&q=Muawiyah%20ali%20at%20Siffin&f=false|archive-date=17 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://books.google.co.uk/books?id=L_xxOM85bD8C&pg=PA602&dq=Muawiyah+ali+at+Siffin&hl=en&sa=X&ei=v18mUfCsC-Om0AX99IDQBQ&ved=0CD4Q6AEwAg#v=onepage&q=Muawiyah%20ali%20at%20Siffin&f=false|title=Ground Warfare|publisher=|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180917143423/https://books.google.co.uk/books?id=L_xxOM85bD8C&pg=PA602&dq=Muawiyah+ali+at+Siffin&hl=en&sa=X&ei=v18mUfCsC-Om0AX99IDQBQ&ved=0CD4Q6AEwAg#v=onepage&q=Muawiyah%20ali%20at%20Siffin&f=false|archive-date=17 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref> जब दाऊमित-उल-जंदल में मध्यस्थों ने इकट्ठा किया , तो उनके लिए मामलों की चर्चा करने के लिए दैनिक बैठकों की एक शृंखला की व्यवस्था की गई। जब खलीफा के बारे में निर्णय लेने के लिए समय आया, अमृत बिन अल-आस ने अबू मुसा अल-अशारी को इस बात का मनोरंजन करने में विश्वास दिलाया कि उन्हें खलीफा के अली और मुवाया दोनों को वंचित करना चाहिए, और मुसलमानों को चुनाव करने का अधिकार देना चाहिए खलीफा अबू मुसा अल-अशारी ने तदनुसार कार्य करने का भी फैसला किया। <ref name="autogenerated16">A Chronology of Islamic History 570–1000 CE By H U Rahman Page 59</ref> पुनावाला के अनुसार, ऐसा लगता है कि मध्यस्थों के बहिष्कार के साथ मध्यस्थ और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने जनवरी 65 9 में नए खलीफ के चयन पर चर्चा के लिए मुलाकात की। अमृत ​​ने मुवायाह का समर्थन किया, जबकि अबू मूसा ने अपने दामाद अब्दुल्ला इब्न उमर को पसंद किया, लेकिन बाद वाले ने सर्वसम्मति से चुनाव के लिए खड़े होने से इनकार कर दिया। अबू मुसा ने प्रस्तावित किया, और अमृत सहमत हुए, अली और मुवायाह दोनों को छोड़ने और शूरा को नए खलीफ का चयन जमा करने के लिए सहमत हुए। अबू मूसा के बाद सार्वजनिक घोषणा में समझौते के अपने हिस्से को देखा गया, लेकिन अमृत ने अली को घोषित कर दिया और मुवाया को खलीफा के रूप में पुष्टि की। <ref name="Iranica"/> अली ने उनके फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और चुनाव होने के लिए और मध्यस्थता का पालन करने के लिए अपने प्रतिज्ञा का उल्लंघन करने में तकनीकी रूप से पाया। <ref name="autogenerated17">A Chronology of Islamic History 570–1000 CE By H U Rahman Page 60</ref><ref>{{cite book| last = Mikaberidze| first = Alexander| title = Conflict and Conquest in the Islamic World A Historical Encyclopedia [2 volumes] A Historical Encyclopedia| url = https://books.google.com/?id=jBBYD2J2oE4C&pg=PA836| year = 2011| publisher = ABC-CLIO| isbn = 978-1-59884-337-8| page = 836 }}</ref><ref>{{cite book| last = Sandler| first = Stanley| title = Ground Warfare An International Encyclopedia| url = https://books.google.com/?id=L_xxOM85bD8C&pg=PA602| accessdate = 2013-04-30| year = 2002| publisher = ABC-CLIO| isbn = 978-1-57607-344-5 }}</ref> 'अली ने विरोध किया, यह बताते हुए कि यह कुरान और सुन्नत के विपरीत तौर इसलिए बाध्यकारी नहीं था। फिर उसने एक नई सेना को व्यवस्थित करने की कोशिश की, लेकिन मलिक अशतर की अगुआई में कुर्र के अवशेष अंसार, और उनके कुछ कुलों ने वफादार बने रहे। <ref name="Iranica"/> इसने अली को अपने समर्थकों के बीच भी एक कमजोर स्थिति में डाल दिया। <ref name="autogenerated17"/> मध्यस्थता के परिणामस्वरूप 'अली के गठबंधन के विघटन में, और कुछ ने कहा है कि यह मुवायाह का इरादा था। <ref name="Iranica"/><ref>See: * {{Harvnb|Madelung|1997|pp=241–259}} * {{Harvnb|Lapidus|2002|p=47}} * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|pp=70–72}} * {{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=53 and 54}}</ref> अली के शिविर में सबसे मुखर विरोधियों ने वही लोग थे जिन्होंने अली को युद्धविराम में मजबूर कर दिया था। उन्होंने अली के बल से तोड़ दिया, नाराजगी के तहत रैली "मध्यस्थता अकेले भगवान से संबंधित है।" इस समूह को खारीजियों ("जो लोग छोड़ते हैं") के रूप में जाना जाने लगा। उन्होंने सभी को अपना दुश्मन माना। 65 9 में अली की सेना और खारीजियों ने नहरवन की लड़ाई में मुलाकात की। तब कुररा खारीजियों के नाम से जाना जाने लगा। तब खारीजियों ने अली के समर्थकों और अन्य मुस्लिमों की हत्या शुरू कर दी। उन्होंने किसी ऐसे व्यक्ति को माना जो अविश्वासी के रूप में अपने समूह का हिस्सा नहीं था। हालांकि 'अली ने एक बड़े अंतर से लड़ाई जीती, फिर भी निरंतर संघर्ष उनकी स्थिति को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। इराक़ियों से निपटने के दौरान, अली को एक अनुशासित सेना और प्रभावी राज्य संस्थानों का निर्माण करना मुश्किल हो गया। उन्होंने खारीजियों से लड़ने में काफी समय बिताया। नतीजतन, 'अली को अपने पूर्वी मोर्चे पर राज्य का विस्तार करना मुश्किल हो गया। <ref name="autogenerated1">A Chronology of Islamic History 570–1000 By H. U. Rahman</ref> लगभग उसी समय, मिस्र में अशांति पैदा हो रही थी। मिस्र के राज्यपाल, क्यूस को याद किया गया था, और अली ने उन्हें मुहम्मद इब्न अबी बकर (आइशा के भाई और इस्लाम के पहले खलीफ अबू बकर के पुत्र) के साथ बदल दिया था। मुवायाह ने मिस्र को जीतने के लिए 'अमृत इब्न अल' की अनुमति दी और अमृत ने सफलतापूर्वक ऐसा किया। <ref name="autogenerated18"/> अमृत ​​ने पहले रोमनों से अठारह साल पहले मिस्र लिया था लेकिन उथमान ने उसे बर्खास्त कर दिया था। <ref name="autogenerated18"/> मुहम्मद इब्न अबी बकर के पास मिस्र में कोई लोकप्रिय समर्थन नहीं था और 2000 पुरुषों के साथ मिलकर कामयाब रहे लेकिन वे बिना लड़ाई के फैल गए। <ref name="autogenerated18"/> अगले वर्षों में, मुवायाह की सेना ने इराक के कई शहरों पर कब्जा कर लिया, जो अली के गवर्नर नहीं रोक सके, और लोगों ने उनके साथ लड़ने के लिए उनका समर्थन नहीं किया। मुवायाह ने मिस्र, हिजाज , यमन और अन्य क्षेत्रों को पराजित किया। अली के खलीफा के आखिरी साल में, कुफा और बसरा में मनोदशा उनके पक्ष में बदल गया क्योंकि लोग मुवायाह के शासनकाल और नीतियों से भ्रमित हो गए। हालांकि, अली के प्रति लोगों का रवैया गहराई से भिन्न था। उनमें से केवल एक छोटी अल्पसंख्यक का मानना ​​था कि अली मुहम्मद के बाद सबसे अच्छा मुस्लिम था और केवल उन पर शासन करने का हकदार था, जबकि बहुमत ने उन्हें मुवायाह के अविश्वास और विरोध के कारण समर्थन दिया था। <ref name="Madelung 1997 p=309">{{Harvnb|Madelung|1997|p=309}}</ref> [[File:Ali Mausoleum compound,Najaf.jpg|thumb|अली मूसोलियम, नजाफ, इराक का एक भव्य दृश्य।|कड़ी=Special:FilePath/Ali_Mausoleum_compound,Najaf.jpg]] ===नीतियां=== ====भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और समतावादी नीतियां==== कहा जाता है कि अली ने उथमान की मौत के बाद खलीफा में सफल होने के लिए जनता द्वारा दबाए जाने के बाद खलीफा के रैंकों में वित्तीय भ्रष्टाचार और अनुचित विशेषाधिकारों के खिलाफ एक असंगत अभियान की शपथ ली और आगाह किया। शियास का तर्क है कि अभिजात वर्ग के साथ अपनी अलोकप्रियता के बावजूद इन सुधारों को धक्का देने में उनका दृढ़ संकल्प अमीर और पैगंबर के विशेषाधिकार प्राप्त पूर्व साथी से शत्रुता का कारण रहा है। <ref>{{Cite web|url=https://www.al-islam.org/imam-ali-s-book-government-ayatullah-muhammadi-rayshahri/politics-two-schools#alawi-politics|title=Politics in two Schools|website=Al-Islam.org|language=en|access-date=2017-04-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20180917143434/https://www.al-islam.org/imam-ali-s-book-government-ayatullah-muhammadi-rayshahri/politics-two-schools#alawi-politics|archive-date=17 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.imamreza.net/eng/imamreza.php?id=10495|title=Hazrat Ali (A.S.): His Poor Subjects and Pro-Poor Government {{!}}{{!}} Imam Reza (A.S.) Network|website=www.imamreza.net|access-date=2017-04-11|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20170412061350/https://www.imamreza.net/eng/imamreza.php?id=10495|archivedate=12 April 2017|df=mdy-all}}</ref> अपने गवर्नर मलिक अशतर को एक प्रसिद्ध पत्र में, उन्होंने अपने समर्थक गरीब विरोधी विरोधी दृष्टिकोण को व्यक्त किया: <blockquote>याद रखें कि सामान्य पुरुषों की नापसंद और अस्वीकृति, महत्वपूर्ण व्यक्तियों की स्वीकृति और कुछ बड़े लोगों की नाराजगी से अधिक असंतुलन से अधिक लोगों को परेशान नहीं किया जाता है, यदि आपके विषय के आम जनता और जनसंपर्क आपके साथ खुश हैं। आम आदमी, गरीब, स्पष्ट रूप से आपके विषयों के कम महत्वपूर्ण वर्ग इस्लाम के खंभे हैं ... उनके साथ अधिक दोस्ताना और अपने आत्मविश्वास और सहानुभूति को सुरक्षित करते हैं। <ref name=":0" /></blockquote> 'अली ने उथमान द्वारा दी गई भूमि को वापस लाया और अपने चुनाव से पहले प्राप्त हुए कुछ भी हासिल करने के लिए कसम खाई। अली ने प्रांतीय राजस्व पर पूंजी नियंत्रण के केंद्रीकरण का विरोध किया, मुस्लिम नागरिकों के बीच करों और लूट के बराबर वितरण का पक्ष लिया; उन्होंने उनके बीच खजाने के पूरे राजस्व को वितरित किया। 'अली ने अपने भाई' अकेल इब्न अबू तालिब सहित भक्तिवाद से बचना। मुस्लिमों को समानता की पेशकश करने की उनकी नीति के मुसलमानों के लिए यह एक संकेत था, जिन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में इस्लाम की सेवा की और मुसलमानों को बाद में विजय में भूमिका निभाई। <ref name="Iranica" /><ref>See: * {{Harvnb|Lapidus|2002|p=46}} * {{Harvnb|Madelung|1997|p=150 and 264}} </ref> ====गठबंधन बनाना==== अली एक व्यापक गठबंधन बनाने में सफल रहा, खासकर ऊंट की लड़ाई के बाद । करों और लूट के बराबर वितरण की उनकी नीति ने मुहम्मद के साथी, विशेष रूप से अंसार का समर्थन प्राप्त किया, जो मुहम्मद, पारंपरिक जनजातीय नेताओं और कुररा या कुरानिक पाठकों के बाद कुरैशी नेतृत्व द्वारा अधीनस्थ थे, जो पवित्र इस्लामी नेतृत्व की मांग करते थे। इस विविध गठबंधन का सफल गठन अली के करिश्माई चरित्र के कारण होता है। इस विविध गठबंधन को शिया अली के रूप में जाना जाता है, जिसका अर्थ है "पार्टी" या "अली का गुट"। हालांकि, शिया के साथ-साथ गैर-शिया रिपोर्टों के मुताबिक, 'अली ने अपने चुनाव के बाद अली को खलीफा के रूप में समर्थन देने के लिए समर्थन दिया, शाही राजनीतिक रूप से शाही थे, धार्मिक रूप से नहीं। यद्यपि इस समय कई लोग राजनीतिक शिया के रूप में गिने गए थे, उनमें से कुछ अली के धार्मिक नेतृत्व पर विश्वास करते थे। <ref>{{Harvnb|Momen|1985|p=63}}</ref> ====शासन सिद्धांत==== मिस्र के गवर्नर की नियुक्ति के बाद मलिक अल-अशतर को भेजे गए पत्र में उनकी नीतियों और शासन के विचार प्रकट हुए हैं। इस निर्देश, जिसे ऐतिहासिक रूप से मदीना के संविधान के साथ इस्लामी शासन के लिए आदर्श संविधान के रूप में देखा गया है, उस समय शासक और राज्य के विभिन्न कार्यकर्ताओं और समाज के मुख्य वर्गों के कर्तव्यों और अधिकारों का विस्तृत विवरण शामिल था। <ref>{{Harvnb|Shah-Kazemi|2007|p=81}}</ref><ref>United Nations Development Program, Arab human development report, (2002), p. 107</ref> अली ने मलिक अल-अशतर को उनके निर्देशों में लिखा था: {{quote|अपने विषयों को अपने विषयों के लिए दया, प्रेम और दयालुता से प्रेरित करें। उनके सामने एक भयानक जानवर न बनें, उन्हें आसानी से शिकार के रूप में गिनें, क्योंकि वे दो प्रकार के हैं: या तो वे विश्वास में या सृष्टि में आपके भाई हैं। त्रुटि उन्हें अनजान पकड़ती है, कमियों को दूर करता है, (बुरा कर्म) जानबूझकर और गलती से उनके द्वारा किए जाते हैं। तो उन्हें अपनी माफी और अपनी क्षमा को उसी हद तक दें जो आपको आशा है कि भगवान आपको क्षमा और उसकी क्षमा दे देंगे। क्योंकि तुम उनके ऊपर हो, और जिसने तुम्हें नियुक्त किया है वह तुम्हारे ऊपर है, और ईश्वर उसके ऊपर है जिसने तुम्हें नियुक्त किया है। भगवान ने आपसे उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की मांग की है और वह आपसे उनके साथ प्रयास कर रहा है। <ref>{{Harvnb|Nasr|Dabashi|Nasr|1989|p=75}}</ref>}} चूंकि 'अली के अधिकांश लोग नाममात्र और किसान थे, इसलिए वह कृषि से चिंतित थे। उन्होंने मलिक को कर के संग्रह की तुलना में भूमि के विकास पर अधिक ध्यान देने का निर्देश दिया, क्योंकि कर केवल जमीन के विकास से प्राप्त किया जा सकता है और जो कोई भी जमीन विकसित किए बिना कर मांगता है, वह देश को बर्बाद कर देता है और लोगों को नष्ट कर देता है। <ref>{{Harvnb|Lambton|1991|p=xix and xx}}</ref> ===कूफ़ा में हत्या=== मुख्य लेख: [[अली की हत्या]] [[File:Martyrdom of Imam Ali - By Yousef Abdinejad.jp.jpg|thumb|यूसेफ अब्दिनेजाद द्वारा अली इब्न अबी तालिब की शहादत का चित्र।]] [[File:Meshed ali usnavy (PD).jpg|thumb|अली इब्न अबी तालिब का आस्ताना।]] 19 रमजान एएच 40 पर, जो 27 जनवरी 661 के अनुरूप होगा, कुफा के महान मस्जिद में प्रार्थना करते समय अली पर खारीजाइट अब्द-अल-रहमान इब्न मुलजम ने हमला किया था। फज्र प्रार्थना में सजदा करते हुए वह इब्न मुलजम की जहर से लेपित तलवार से घायल हो गए थे। <ref name="Tabatabaei 1979 192">{{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=192}}</ref> 'अली ने अपने बेटों को खारीजियों पर हमला नहीं करने का आदेश दिया, बल्कि यह निर्धारित करते हुए कि यदि वह जीवित रहे, तो इब्न मुलजम को माफ़ कर दिया जाएगा, जबकि यदि उनकी मृत्यु हो गई, तो इब्न मुलजम को केवल एक समान हिट दिया जाना चाहिए (इस पर ध्यान दिए बिना कि वह मर गया है या नहीं मारो)। <ref>{{Harvnb|Kelsay|1993|p=92}}</ref> 'दो दिन बाद 29 जनवरी 661 (21 रमजान एएच 40) पर अली की मृत्यु हो गई। <ref name="Iranica" /><ref name="Tabatabaei 1979 192" /> अल-हसन ने क्यूस को पूरा किया और अली की मौत पर इब्न मुलजम को समान सजा दी। <ref name="Madelung 1997 p=309" /> ==बाद में== [[File:InsideImamAliMosqueNajafIraq.JPG|thumb|इमाम अली श्राइन के दृश्य के अंदर (2008 में नवीनीकरण से पहले)]] अली की मौत के बाद, कुफी मुस्लिमों ने विवाद के बिना अपने सबसे बड़े बेटे हसन के प्रति निष्ठा का वचन दिया, क्योंकि कई अवसरों पर अली ने घोषणा की थी कि मुहम्मद सदन के लोग मुस्लिम समुदाय पर शासन करने के हकदार थे। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=313 and 314}}</ref> इस समय, मुवायाह ने लेवंट और मिस्र दोनों को रखा और मुस्लिम साम्राज्य में सबसे बड़ी ताकत के कमांडर के रूप में, खुद को खलीफा घोषित कर दिया और हसन के खलीफा की सीट पर अपनी सेना को इराक में घुमाया। युद्ध शुरू हुआ जिसके दौरान मुवायाह ने धीरे-धीरे हसन की सेना के जनरलों और कमांडरों को बड़ी मात्रा में पैसे और वादे को धोखा दिया जब तक सेना ने उनके खिलाफ विद्रोह नहीं किया। आखिरकार, हसन को शांति बनाने और कुवैफा को मुवायाह में पैदा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस तरह मुवायाह ने इस्लामी खलीफा पर कब्जा कर लिया और इसे एक धर्मनिरपेक्ष साम्राज्य (सल्तनत) में ट्यून किया। उमायाद खलीफाट बाद में अब्द अल-मलिक इब्न मारवान द्वारा केंद्रीकृत राजशाही बन गया। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|pp=319–325}} * {{Harvnb|Robinson|2011|pp=208–211}} * {{Harvnb|Holt|Lambton|Lewis|1970|pp=74–76}} </ref> उमाय्याद ने हर संभव तरीके से अली के परिवार और शिया पर गंभीर दबाव डाला। सामूहिक प्रार्थनाओं में इमाम अली का नियमित सार्वजनिक शाप एक महत्वपूर्ण संस्थान बना रहा जो 60 साल बाद उमर इब्न अब्द अल-अज़ीज़ द्वारा समाप्त नहीं हुआ था। <ref name="Madelung 1997 334"/> मैडेलंग लिखते हैं: <blockquote>उमायद अतिसंवेदनशीलता, भ्रष्टाचार और दमन धीरे-धीरे अली के प्रशंसकों की अल्पसंख्यक को बहुमत में बदलने के लिए थे। बाद की पीढ़ियों की याद में अली वफादार के आदर्श कमांडर बन गए। फर्जी उमाय्याद के मुताबिक इस्लाम में ईश्वर के उप-शासन के रूप में इस्लाम में वैध संप्रभुता का दावा है, और उमायाद विश्वासघात, मनमानी और विभाजनकारी सरकार और विरोधाभासी प्रतिशोध के संदर्भ में, वे अपनी [अली] ईमानदारी की सराहना करने के लिए आए, उनकी असहनीय भक्ति इस्लाम का शासन, उनकी गहरी व्यक्तिगत वफादारी, उनके सभी समर्थकों का समान उपचार, और उनके पराजित शत्रुओं को क्षमा करने में उनकी उदारता। <ref name="Madelung 1997 p=309 and 310"/></blockquote> ===नजफ़ में दफ़न=== [[File:Imam ali's shrine, Arbaeen 2015.JPG|thumb|अरबीन 2015 में अली की मज़ार।]] [[File:Mazar-e sharif - Steve Evans.jpg|thumb|[[Rawze-e-Sharif]], the Blue Mosque, in [[Mazari Sharif]], Afghanistan – where a minority of Muslims believe Ali ibn [[Abu Talib ibn Abd al-Muttalib|Abu Talib]] is buried.]] अफगानिस्तान के मजारी शरीफ में रॉज-ए-शरीफ़ , ब्लू मस्जिद - जहां मुसलमानों की अल्पसंख्यक मानती है कि अली इब्न अबू तालिब को दफनाया गया है। अल-शेख अल-मुफीद के मुताबिक , अली नहीं चाहता था कि उसकी कब्र को उसके दुश्मनों द्वारा अपमानित किया जाए और इसके परिणामस्वरूप उसने अपने दोस्तों और परिवार से उसे चुपचाप दफनाने के लिए कहा। इस गुप्त कब्रिस्तान को उसके वंशज और छठे शिया इमाम इमाम जाफर अल-सादिक द्वारा अब्बासिद खलीफाट के दौरान बाद में पता चला था। <ref>{{Harvnb|Al-Shaykh Al-Mufid|1986|p=}}</ref> अधिकांश शिया स्वीकार करते हैं कि इमाम अली मस्जिद में इमाम अली के मकबरे पर अली को दफनाया गया है जो अब नजाफ शहर है, जो मस्जिद अली नामक मस्जिद और मंदिर के आसपास बढ़ी है। <ref name="Imam Ali Ibn Abu Talib">{{Harvnb|Redha|1999|p=}}</ref><ref name="Medieval"/> हालांकि, कुछ अफगानों द्वारा आमतौर पर बनाए रखा गया एक और कहानी, नोट करती है कि प्रसिद्ध शरीर ब्लू मस्जिद या रॉज-ए-शरीफ़ में अफगान शहर मजार-ए-शरीफ़ में उनके शरीर को ले जाया गया था और दफनाया गया था। <ref>{{cite web|url=http://depts.washington.edu/silkroad/cities/afghanistan/balkh.html|title=Silk Road Seattle - Balkh|publisher=|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160303175438/http://depts.washington.edu/silkroad/cities/afghanistan/balkh.html|archivedate=March 3, 2016|df=mdy-all}}</ref> ==गुण== अली को न केवल एक योद्धा और नेता के रूप में सम्मानित किया जाता है, बल्कि एक लेखक और धार्मिक प्राधिकरण के रूप में। धर्मशास्त्र और exegesis से सुलेख और अंक विज्ञान से विषयों की एक विस्तृत शृंखला, कानून और रहस्यवाद से अरबी व्याकरण और राजनीति से अली द्वारा पहली बार माना जाता है। <ref name="Medieval">{{cite encyclopedia|year=2006|title='Ali ibn Abu Talib|encyclopedia=Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia|publisher=Taylor & Francis|last=Shah-Kazemi|first=Reza|isbn=978-0-415-96691-7}}<!--|accessdate=2008-04-02 -->, Pages 36 and 37</ref> ===भविष्यवाणी ज्ञान=== शिया और सूफी द्वारा वर्णित एक हदीस के मुताबिक, मुहम्मद ने उनके बारे में बताया, "मैं ज्ञान का शहर हूं और अली उसका द्वार है ..." <ref name="Medieval" /><ref>{{Harvnb|Momen|1985|p=14}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.spiritualfoundation.net/sayingsofhadratali.htm|title=Spiritual Foundation|website=www.spiritualfoundation.net|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20070216201058/http://www.spiritualfoundation.net/sayingsofhadratali.htm|archivedate=16 February 2007|df=dmy-all}}</ref> मुस्लिम अली को एक प्रमुख प्राधिकरण मानते हैं इस्लाम। शिया के मुताबिक, अली ने खुद ही यह गवागवाही दे दी और मान लिया गया <blockquote>कुरान की एक भी कविता नहीं थी (भगवान को मैसेन्जर) पर प्रकट किया गया था, जिसे उसने मुझे निर्देशित करने और मुझे पढ़ने के लिए आगे नहीं बढ़े । मैं इसे अपने हाथ से लिखूंगा , और वह मुझे अपने ताफसीर (शाब्दिक स्पष्टीकरण) और ताविल (आध्यात्मिक exegesis ), nasikh (कविता जो निरस्त करता है) के रूप में निर्देशित करेगा और मानसमुख (निरस्त कविता), मुहक्कम और मताशबीह (निश्चित और संदिग्ध), विशेष और सामान्य ... <ref>{{Harvnb|Corbin|1993|p=46}} </ref></blockquote> ===थियोसॉफी=== सेयड होसेन नासर के मुताबिक, अली को इस्लामी धर्मशास्त्र स्थापित करने का श्रेय दिया जाता है और उनके उद्धरणों में भगवान की एकता के मुसलमानों के बीच पहला तर्कसंगत सबूत शामिल है। <ref>{{Harvnb|Nasr|2006|p=120}}</ref> इब्न अबी अल-हदीद ने उद्धृत किया है <blockquote>सिद्धांत के लिए और दिव्यता के मामलों से निपटने के लिए, यह एक अरब कला नहीं थी। इस तरह के कुछ भी उनके विशिष्ट आंकड़ों या निचले रैंकों में से कुछ के बीच प्रसारित नहीं किया गया था। यह कला ग्रीस का अनन्य संरक्षित था, जिसका ऋषि केवल एकमात्र विस्तारक था। अरबों के बीच सौदा करने वाला पहला व्यक्ति अली था। <ref>{{Harvnb|Nasr|Dabashi|Nasr|1996|p=136}}</ref></blockquote> बाद में इस्लामिक दर्शन, विशेष रूप से मुल्ला सदरा और उसके अनुयायियों की शिक्षाओं में, अलेमेह ताबाबातेई की तरह, अली के कहानियों और उपदेशों को आध्यात्मिक ज्ञान, या दिव्य दर्शन के केंद्रीय स्रोतों के रूप में तेजी से माना जाता था। सदरा के स्कूल के सदस्य अली को इस्लाम के सर्वोच्च आध्यात्मिक चिकित्सक मानते हैं। <ref name="Britannica"/> हेनरी कॉर्बिन के अनुसार, नहज अल-बालाघा को शिया विचारकों द्वारा विशेष रूप से 1500 के बाद किए गए सिद्धांतों के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक माना जा सकता है। इसका प्रभाव शब्दों के तार्किक समन्वय, कटौती में महसूस किया जा सकता है सही निष्कर्षों के, और अरबी में कुछ तकनीकी शर्तों का निर्माण जो साहित्यिक और दार्शनिक भाषा में स्वतंत्र रूप से यूनानी ग्रंथों के अरबी में अनुवाद के प्रवेश में प्रवेश किया। <ref>{{Harvnb|Corbin|1993|p=35}}</ref> इसके अलावा, कुछ छुपे हुए या गुप्त विज्ञान जैसे जाफर, इस्लामी अंक विज्ञान, और अरबी वर्णमाला के अक्षरों के प्रतीकात्मक महत्त्व के विज्ञान, अली <ref name="Britannica"/> द्वारा स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से उन्होंने अल- जाफर और अल-जामिया। ===भाषण=== अली अरबी साहित्य का एक महान विद्वान भी था और अरबी व्याकरण और राजनीति के क्षेत्र में अग्रणी था। अली की कई छोटी कहानियां सामान्य इस्लामी संस्कृति का हिस्सा बन गई हैं और दैनिक जीवन में उत्साह और कहानियों के रूप में उद्धृत हैं। वे साहित्यिक कार्यों का आधार भी बन गए हैं या कई भाषाओं में काव्य कविता में एकीकृत किए गए हैं। 8 वीं शताब्दी में, साहित्यिक अधिकारियों जैसे 'अब्द अल-हामिद इब्न याह्या अल-अमीरी ने अली के उपदेशों और कहानियों के अद्वितीय उच्चारण की ओर इशारा किया, जैसा कि निम्नलिखित शताब्दी में अल-जहिज़ ने किया था। <ref name="Britannica"/> उमाय्याद के दिवान के कर्मचारियों ने भी अपने वाक्प्रचार को सुधारने के लिए अली के उपदेशों को पढ़ा। <ref>"حفظت سبعين خطبة من خطب الاصلع ففاضت ثم فاضت ) ويعني بالاصلع أمير المؤمنين عليا عليه السلام " [http://books.rafed.net/turathona/5/ts2.html مقدمة في مصادر نهج البلاغة] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150617233159/http://books.rafed.net/turathona/5/ts2.html |date=जून 17, 2015 }}</ref> अली के शब्दों और लेखन का सबसे प्रसिद्ध चयन 10 वीं शताब्दी के शिया विद्वान, अल-शरीफ अल-रेडियो द्वारा नहज अल-बलघा (लोकता का शिखर) नामक पुस्तक में इकट्ठा किया गया है, जिन्होंने उन्हें अपने एकवचन रोटोरिकल के लिए चुना सुंदरता। <ref>[http://www.islamology.com/Resources/Nahj_Imam/Sermons/bookE/sources.htm Sources of Nahj Al-Balagha] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20121123072458/http://www.islamology.com/Resources/Nahj_Imam/Sermons/bookE/sources.htm |date=नवम्बर 23, 2012 }}</ref> ===डॉट्स और एलीफ के बिना उपदेश=== पुस्तक में उद्धृत उपदेशों के बीच नोट, अनदेखा उपदेश के साथ ही एलेफ के उपदेश भी है। <ref>{{cite news|last1=|title=Sermons without 'dot's and 'Alef'|url=https://www.tasnimnews.com/fa/news/1396/01/16/1370272/%D8%AE%D8%B7%D8%A8%D9%87-%D8%A8%D8%AF%D9%88%D9%86-%D9%86%D9%82%D8%B7%D9%87-%D8%A7%D9%85%DB%8C%D8%B1%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%A4%D9%85%D9%86%DB%8C%D9%86-%D8%B9?ref=shahrekhabar|accessdate=6 April 2017|language=fa|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20170406202149/https://www.tasnimnews.com/fa/news/1396/01/16/1370272/%D8%AE%D8%B7%D8%A8%D9%87-%D8%A8%D8%AF%D9%88%D9%86-%D9%86%D9%82%D8%B7%D9%87-%D8%A7%D9%85%DB%8C%D8%B1%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%A4%D9%85%D9%86%DB%8C%D9%86-%D8%B9?ref=shahrekhabar|archivedate=April 6, 2017|df=mdy-all}}</ref> कथाओं के मुताबिक, मुहम्मद के कुछ साथी बोलने में अक्षरों की भूमिका पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बोलने में एलेफ का सबसे बड़ा योगदान था और बिंदीदार पत्र भी महत्वपूर्ण थे। इस बीच, अली ने दो लंबे अचूक उपदेशों को पढ़ा, एक शेल लेखक लैंग्रोउडी के मुताबिक, एलेफ पत्र का उपयोग किए बिना और दूसरे को बिना डॉट किए गए अक्षरों के, गहरे और वाक्प्रचार अवधारणाओं के बिना। एक ईसाई लेखक जॉर्ज Jordac , ने कहा कि Aleph और डॉट के बिना उपदेश साहित्यिक कृति के रूप में माना जाना था। <ref>{{cite web|title=Sermons without dot/ Christian George Jordac: This sermon is a masterpiece|url=http://www.khabaronline.ir/detail/218098/culture/religion|website=www.khabaronline.ir|accessdate=9 April 2017|language=fa|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160428100751/http://www.khabaronline.ir/detail/218098/culture/religion|archivedate=April 28, 2016|df=mdy-all}}</ref> ===करुणा=== अली को गरीब और अनाथों के लिए गहरी सहानुभूति और समर्थन के लिए सम्मानित किया जाता है, और सामाजिक न्याय प्राप्त करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने खलीफा के दौरान समान समतावादी नीतियों का पालन किया। उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया गया है: <blockquote>यदि भगवान किसी भी व्यक्ति को धन और समृद्धि प्रदान करता है, तो उसे अपने योग्य किथ और रिश्तेदारों को दयालुता दिखानी चाहिए, गरीबों को प्रदान करना चाहिए, उन लोगों की सहायता करना चाहिए जो आपदाओं, दुर्भाग्य और रिवर्स से पीड़ित हैं, गरीबों की मदद करनी चाहिए और ईमानदार लोगों को अपने ऋण को समाप्त करने में सहायता करनी चाहिए ... <ref name=":0" /></blockquote> यह किताब अल- काफी में सुनाई गई है कि अमीर अल-मुमिनिन अली इब्न अबी तालिब को बगदाद के पास स्थानों से शहद और अंजीर के साथ प्रस्तुत किया गया था। उपहार प्राप्त करने पर, उसने अपने अधिकारियों को अनाथों को लाने का आदेश दिया ताकि वे शहद को कंटेनरों से चाटना कर सकें जबकि उन्होंने स्वयं को लोगों के बीच आराम दिया। <ref name="Kulayni"/> ===कार्य=== [[File:Quran by Imam ali.JPG|thumb|'अली इब्न अबी तालिब' द्वारा इस्लामिक दुनिया में कभी भी कुरान की पहली प्रतियों में से एक है। अली को जिम्मेदार उपदेश, व्याख्यान और उद्धरणों का संकलन कई पुस्तकों के रूप में संकलित किया जाता है।]] नहज अल-बलघा (वाक्वेन्स की चोटी) में अली के लिए जिम्मेदार बोलने वाले उपदेश, पत्र और उद्धरण शामिल हैं जिन्हें राख-शरीफ आर-रेडियो (डी 1015) द्वारा संकलित किया गया है। रेजा शाह काज़ेमी कहते हैं: "पाठ की प्रामाणिकता के बारे में चल रहे प्रश्नों के बावजूद, हालिया छात्रवृत्ति से पता चलता है कि इसमें अधिकांश सामग्री वास्तव में अली को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है" और इसके समर्थन में वह मोखतर जेबली द्वारा एक लेख का संदर्भ देता है। अरबी साहित्य में इस पुस्तक की एक प्रमुख स्थिति है। इसे इस्लाम में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक, राजनीतिक और धार्मिक कार्य भी माना जाता है। नहजुल बालाघा के उर्दू अनुवादक सैयद जीशान हैदर जवादी ने एएच 204 से 488 तक 61 लेखकों और उनके लेखकों की सूची संकलित की है, और उन स्रोतों को प्रदान किया है जिनमें शरीफ का संकलन कार्य रज़ी का पता लगाया जा सकता है। अल-सय्यद 'अब्द अल-जहर' अल हुसैन अल-खातिब द्वारा लिखित मसादिर नहज अल-बालाघा वा असानिदह , इनमें से कुछ स्रोत पेश करते हैं। इसके अलावा, मुहम्मद बाकिर अल- महमुदी द्वारा नहज अल-सादाह फाई मस्तद्राक नहज अल-बालाघाह अली के मौजूदा भाषणों, उपदेशों, नियमों, पत्रों, प्रार्थनाओं और एकत्र होने वाले कहानियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें नहज अल-बालाघा और अन्य प्रवचन शामिल हैं जिन्हें राख-शरीफ आर-रेडियो द्वारा शामिल नहीं किया गया था या उनके लिए उपलब्ध नहीं थे। जाहिर है, कुछ एफ़ोरिज़्म को छोड़कर, नहज अल-बालाघा की सभी सामग्री के मूल स्रोत निर्धारित किए गए हैं। सुन्नीस और शियास जैसे इब्न अबी अल-हदीद की टिप्पणियां और मुहम्मद अब्दुध की टिप्पणियों के बारे में कई टिप्पणियां हैं । * विलियम चितिक द्वारा अनुवादित प्रदायक (डुआ)। <ref>{{cite book|year=1990|title=Supplications (Du'a)|publisher=Muhammadi Trust|page=42| isbn=978-0-9506986-4-9 |author=Ali ibn Abi Talib}}</ref> * घुरार अल-हिकम वा दुरार अल-कालीम (ऊंचे एहोरिज्म और भाषण के मोती) जिसे अब्द अल-वाहिद अमिदी (डी 1116) द्वारा संकलित किया गया है, अली के दस हजार से अधिक लघु कथाएं शामिल हैं। <ref>{{Harvnb|Shah-Kazemi|2007|p=4}}</ref> * दिवान-ए अली इब्न अबू तालिब (कविताएं जिन्हें अली इब्न अबू तालिब के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है)। <ref name="Iranica"/> ==वंश== मुख्य लेख: अली इब्न अबी तालिब और अलवी (उपनाम) के वंशज अली ने शुरुआत में फातिमा से शादी की, जो उनकी सबसे प्यारी पत्नी थीं। उसकी मृत्यु के बाद, वह फिर से शादी कर ली। उनके पास फातिमा, हसन इब्न अली, हुसैन इब्न अली, जैनब बिंट अली <ref name="Britannica"/> और उम्म कुलथम बिंट अली के साथ चार बच्चे थे। उनके अन्य जाने-माने बेटे अल-अब्बास इब्न अली थे, जो फातिमा बिनटे हिजाम (उम अल-बानिन) और मुहम्मद इब्न अल-हानाफियाह के लिए पैदा हुए थे। <ref>{{Harvnb|Stearns|Langer|2001|p=1178}}</ref> मुहम्मद इब्न अल-हानाफियाह मध्य अरब के हनीफा वंश से एक और पत्नी के अली के बेटे खवाला बिंट जाफर नाम से थे। फातिमा की मौत के बाद, अली ने बानी हनीफा जनजाति के खवला बिंट जाफर से विवाह किया। 625 में पैदा हुआ हसन दूसरा शिया इमाम था और उसने लगभग छह महीने तक खलीफा के बाहरी कार्य पर कब्जा कर लिया। वर्ष में एएच 50 में वह अपने घर के एक सदस्य द्वारा जहर और मार डाला गया था, जैसा कि इतिहासकारों द्वारा जिम्मेदार ठहराया गया था, मुआयाह द्वारा प्रेरित किया गया था। <ref>{{Harvnb|Tabatabaei|1979|p=194}}</ref> हुसैन, 626 में पैदा हुआ, तीसरा शिया इमाम था। वह मुआयाह द्वारा दमन और उत्पीड़न की गंभीर परिस्थितियों में रहते थे। वर्ष 680 के मुहर्रम के दसवें दिन, वह खलीफा की सेना के सामने अनुयायियों के अपने छोटे बैंड के साथ खड़े हो गए और लगभग सभी करबाला की लड़ाई में मारे गए। उनकी मृत्यु की सालगिरह आशुरा का दिन कहा जाता है और यह शिया मुसलमानों के लिए शोक और धार्मिक अनुष्ठान का दिन है। <ref>{{Harvnb|Tabatabaei|1979|pp=196–201}}</ref> इस लड़ाई में अली के कुछ अन्य पुत्र मारे गए थे। अल-ताबरी ने अपने इतिहास में उनके नामों का उल्लेख किया है: हुसैन के मानक, जाफर, अब्दल्लाह और उथमान के धारक अल-अब्बास इब्न अली, फातिमा बिनटे हिजाम से पैदा हुए चार बेटे; मुहम्मद और अबू बकर। आखिरी की मौत संदिग्ध है। <ref>{{Harvnb|Al-Tabari|1990|pp=vol.XIX pp. 178–179}}</ref> कुछ इतिहासकारों ने अली के अन्य पुत्रों के नाम जोड़े हैं, जो इब्राहिम, उमर और अब्दल्लाह इब्न अल-असकर समेत करबाला में मारे गए थे। <ref>{{cite web|url=http://aashura.tripod.com/martyrs.htm|title=Karbala's Martyrs|publisher=|url-status=dead|archiveurl=https://web.archive.org/web/20090104202432/http://aashura.tripod.com/martyrs.htm|archivedate=4 जनवरी 2009|df=mdy-all|access-date=17 सितंबर 2018}}</ref><ref>[http://www.velaiat.com/shshow.asp?rsabs=43&id=kash List of Martyrs of Karbala] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120629162138/http://www.velaiat.com/shshow.asp?rsabs=43&id=kash |date=जून 29, 2012 }} by Khansari "فرزندان اميراالمؤمنين(ع): 1-ابوبكربن علي(شهادت او مشكوك است). 2-جعفربن علي. 3-عباس بن علي(ابولفضل) 4-عبدالله بن علي. 5-عبدالله بن علي العباس بن علي. 6-عبدالله بن الاصغر. 7-عثمان بن علي. 8-عمر بن علي. 9-محمد الاصغر بن علي. 10-محمدبن العباس بن علي."</ref> उनकी बेटी जैनब-जो करबाला में थीं- याजीद की सेना ने कब्जा कर लिया था और बाद में हुसैन और उसके अनुयायियों के साथ क्या हुआ, यह प्रकट करने में एक बड़ी भूमिका निभाई। <ref>{{cite encyclopedia|title=Zaynab Bint ʿAlĪ|year=2004|encyclopedia=Encyclopedia of Religion|accessdate=2008-04-10|publisher=Gale Group|url=http://www.bookrags.com/research/zaynab-bint-al-eorl-14/|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20081224023158/http://www.bookrags.com/research/zaynab-bint-al-eorl-14/|archivedate=December 24, 2008|df=mdy-all}}</ref> फातिमा द्वारा अली के वंशजों को शरीफ , कहानियां या कहानियों के रूप में जाना जाता है। ये अरबी में आदरणीय खिताब हैं, शरीफ का अर्थ 'महान' है और कहा जाता है या कहा जाता है या 'भगवान' या 'सर' कहता है। मुहम्मद के एकमात्र वंश के रूप में, उन्हें सुन्नी और शिया दोनों का सम्मान किया जाता है। <ref name="Britannica"/> ==दृश्य== ===मुस्लिम विचार=== मुहम्मद के अलावा, इस्लामिक इतिहास में कोई भी नहीं है जिसके बारे में इस्लामी भाषाओं में अली के रूप में लिखा गया है। <ref name="Britannica"/> मुस्लिम संस्कृति में , अली को उनके साहस, ज्ञान, विश्वास, ईमानदारी, इस्लाम के प्रति समर्पण, मुहम्मद को गहरी वफादारी, सभी मुसलमानों के समान उपचार और पराजित दुश्मनों को क्षमा करने में उदारता के लिए सम्मानित किया जाता है, और इसलिए रहस्यमय परंपराओं के लिए केंद्र है इस्लाम में सूफीवाद जैसे। अली कुरानिक exegesis, इस्लामी न्यायशास्र और धार्मिक विचार पर एक अधिकार के रूप में अपने कद बरकरार रखता है। अली लगभग सभी सूफी आदेशों में उच्च स्थान रखता है जो उनके माध्यम से मुहम्मद को उनके वंश का पता लगाता है। पूरे इस्लामी इतिहास में अली का प्रभाव महत्वपूर्ण रहा है। सुन्नी और शिया विद्वान इस बात से सहमत हैं कि विलाह की कविता अली के सम्मान में सुनाई गई थी, लेकिन विलायह और इमामेट की अलग-अलग व्याख्याएं हैं। सुन्नी विद्वानों का मानना ​​है कि कविता अली के बारे में है, लेकिन उन्हें शिया मुस्लिम विचार में, इमाम के रूप में नहीं पहचाना जाता है, अली को भगवान द्वारा मुहम्मद के उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया था। {{sfnp|Steigerwald|2008|p=[https://books.google.com/books?id=xUu04ozMXOcC&pg=PA375 375]}} ===कुरान में अली=== अली या अन्य शिया इमाम का जिक्र करते हुए शिया विद्वानों द्वारा व्याख्या किए गए कई छंद हैं। इस सवाल का जवाब देते हुए कि कुरान में इमाम के नामों का उल्लेख क्यों नहीं किया गया है, मुहम्मद अल-बाकिर उत्तर देते हैं: "अल्लाह ने अपने पैगंबर को सलात का खुलासा किया लेकिन तीन या चार राकतों के बारे में कभी नहीं कहा, जकात का खुलासा किया लेकिन इसके विवरणों का जिक्र नहीं किया हज लेकिन इसके तवाफ और पैगंबर की गिनती नहीं हुई थी । उन्होंने इस कविता का खुलासा किया और पैगंबर ने कहा कि यह कविता अली, हसन, हुसैन और बारह इमाम के बारे में है। " <ref>{{cite book|last1=Naseri|first1=AliAkbar|title=Imamat and Shifa'at|pages=203–204}}</ref><ref>{{cite journal|last1=Feyrahi|first1=Davoud|title=General coordinates of Imaamat|journal=Shia Studies Quarterly|issue=3 and 4|url=http://farsnews.com/newstext.php?nn=8406130237|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20151210181250/http://www.farsnews.com/newstext.php?nn=8406130237|archivedate=December 10, 2015|df=mdy-all}}</ref> अली के अनुसार कुरानिक छंदों की एक चौथाई इमाम के स्टेशन को बता रही है। मामेन ने इन छंदों में से कई को शिया इस्लाम के परिचय में सूचीबद्ध किया है। <ref name="Leaman"/><ref>{{Harvnb|Momen|1985|pp=150–151}}</ref> हालांकि, कुछ छंद हैं कि कुछ सुन्नी टिप्पणीकार अली के संदर्भ में व्याख्या करते हैं, जिनमें से विलाह (कुरान, 5:55) की कविता है कि सुन्नी और शिया विद्वान [बी] इस घटना को संदर्भित करते हैं अली ने अपनी अंगूठी को एक भिखारी को दिया जिसने मस्जिद में अनुष्ठान प्रार्थना करते हुए भक्तों से पूछा। मावड्डा की कविता (कुरान, 42:23 एक और कविता जो की तरह सुन्नी लोगों के साथ शिया विद्वान अल बेयदावी और अल ज़माखषारी और फख्र अद-दीन ए आर-राज़ी मानना है कि वाक्यांश किनशिप अली, को संदर्भित करता है फातिमा और अपने बेटों, हसन और हुसेन। <ref>{{Harvnb|Momen|1985|p=152}}</ref><ref name="mavani">{{cite book|last1=Hamid|first1=Mavani|title=Religious Authority and Political Thought in Twelver Shi'ism|url=https://archive.org/details/religiousauthori0000mava|pp=[https://archive.org/details/religiousauthori0000mava/page/68 68]–73|date=2013|publisher=New York and London: Routledge|isbn=978-0-415-62440-4}}</ref><ref>{{cite book | title=Al-Bidāya wa-n-nihāya | publisher=Dar al-kotob al-Elmie | author=[[Ibn Kathir]] | volume=5 | page=245}}</ref><ref>{{cite book | title=[[Tafsir al-Tabari]] | publisher=Dar al-fekr Publication | author=[[Muhammad ibn Jarir al-Tabari]] | volume=13 | page=27}}</ref> शुद्धिकरण की कविता (कुरान, 33:33) छंदों में से एक है, दोनों सुन्नी और शियाइट ने अली के नाम को कुछ अन्य नामों के साथ जोड़ा। [सी] {{efn|see al-Bahrani, Ghayat al-Marum, p. 126:al-Suyuti, al-Durr al-Manthur, Vol. V, p.199; Ahmad ibn Hanbal, al Musnad, Vol. I, p.331; Fakhr al-Din al-Razi, al-Tafsir al-Kabir, Vol. I, p.783; Ibn Hajar, al-Sawa'iq p.85 }}<ref name="Leaman"/><ref name="mavani" /><ref>Sahih Muslim, ''Chapter of virtues of companions, section of the virtues of the Ahlul-Bayt of the Prophet'', 1980 Edition Pub. in Saudi Arabia, Arabic version, v4, p1883, Tradition #61</ref><ref>Muhammad ibn Jarir al-Tabari. Tafsir al-Tabari vol. XXII. pp. 5–7.</ref><ref name="iranicaonline">{{cite web|url=http://www.iranicaonline.org/articles/al-e-aba-the-family-of-the-cloak-i|title=ĀL-E ʿABĀ|publisher=|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20141018173246/http://www.iranicaonline.org/articles/al-e-aba-the-family-of-the-cloak-i|archivedate=October 18, 2014|df=mdy-all}}</ref><ref>"Fāṭima." Encyclopaedia of Islam, Second Edition. Edited by: P. Bearman, Th. Bianquis, C.E. Bosworth, E. van Donzel, W.P. Heinrichs. Brill Online, 2014. Reference. 08 April 2014</ref> मुबहाला की उपर्युक्त कविता , और यह भी पद 2: 26 9 जिसमें अली को शिया और सुन्नी दोनों टिप्पणीकारों द्वारा अद्वितीय ज्ञान के साथ सम्मानित किया जाता है इस तरह के छंद। <ref name="Leaman">{{cite book|last1=Leaman|first1=Oliver|title=The Quran: an Encyclopedia|date=2006|publisher=Taylor & Francis e-Library|isbn=978-0-415-32639-1|pages=[https://archive.org/details/quranencyclopedi2006unse/page/28 28–31]|url=https://archive.org/details/quranencyclopedi2006unse/page/28}}</ref><ref name="mavani"/><ref>{{Harvnb|Momen|1985|p=16}}</ref> ===शिया=== [[File:Sword and shield reproduction from Bab al Nasr gate Cairo Egypt.jpg|thumb|right|Zulfiqar , और ढाल के बिना। पुरानी इस्लामी काहिरा के गेट्स पर नक्काशीदार अली की तलवार की फातिमिड चित्रण , अर्थात् बाब अल-नासर।]] [[File:Bab al-Nasr in 2017, photo by Hatem Moushir 26.jpg|thumb|अली अल तलवार और ढाल बाबा अल-नासर गेट दीवार, काहिरा पर नक्काशीदार।]] शिया मुहम्मद <ref name="TIO20110610">{{cite web| title = Yawm-e Ali| publisher = TheIsmaili.org| date = 2011-06-10| url = http://www.theismaili.org/festival/yawm-e-ali| accessdate = 2011-06-10| archive-url = https://archive.today/20130415225759/http://www.theismaili.org/festival/yawm-e-ali| archive-date = 15 अप्रैल 2013| url-status = dead}}</ref> के बाद अली को सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति मानते हैं और वह अपनी स्मृति में एक जटिल, पौराणिक व्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।वह गुणों का एक पैरागोन है, जैसे साहस, महानता, ईमानदारी, सीधापन, वाक्प्रचार और गहन ज्ञान। अली धर्मी था लेकिन अन्याय का सामना करना पड़ा, वह आधिकारिक था लेकिन दयालु और विनम्र, जोरदार लेकिन मरीज भी, सीखा लेकिन श्रमिक व्यक्ति भी था। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=fH1pvM0AdNIC&lpg=PP1&pg=PA38#v=onepage&q=ali%20courage&f=false|title=Visualizing Belief and Piety in Iranian Shiism|last=Flaskerud|first=Ingvild|date=2010-12-02|publisher=A&C Black|isbn=9781441149077|language=en|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20120529142030/http://books.google.com/books?id=fH1pvM0AdNIC#v=onepage&q=ali%20courage&f=false|archive-date=29 मई 2012|url-status=live}}</ref> शिया के अनुसार, मुहम्मद ने अपने जीवनकाल के दौरान विभिन्न अवसरों पर सुझाव दिया कि उनकी मृत्यु के बाद अली मुसलमानों का नेता होना चाहिए।यह कई हदीसों द्वारा समर्थित है, जिन्हें शम्स द्वारा सुनाया गया है, जिसमें खुम के तालाब के हदीस , दो भारपूर्ण चीजों के हदीस, कलम और पेपर के हदीस, क्लोक के हदीस, पद के हदीस , निमथ के निमंत्रण करीबी परिवार , और बारह उत्तराधिकारी के हदीस । जाफर अल-सादिक हदीस में वर्णन करता है कि मुहम्मद में जो भी गुण पाया गया वह अली में पाया गया था, जो उसके मार्गदर्शन से दूर होकर अल्लाह और उसके पैगंबर से दूर हो जाएगा। अली स्वयं वर्णन करता है कि वह अल्लाह तक पहुंचने के लिए प्रवेश द्वार और पर्यवेक्षक है। <ref name="Kulayni">{{cite book |last1=Al-Kulayni |first1=Abu Ja’far Muhammad ibn Ya’qub |title=Kitab al-Kafi |url=https://archive.org/details/alkafivolume1of80001alku |date=2015 |publisher=The Islamic Seminary Inc. |location=South Huntington, NY |isbn=9780991430864 }}</ref> इस दृष्टिकोण के अनुसार, मुहम्मद के उत्तराधिकारी के रूप में अली ने न्याय में समुदाय पर शासन नहीं किया, बल्कि शरिया कानून और इसके गूढ़ अर्थ का भी अर्थ दिया ।इसलिए उन्हें त्रुटि और पाप (अचूक) से मुक्त माना जाता था, और मुहम्मद के माध्यम से दिव्य डिक्री (नास) द्वारा भगवान द्वारा नियुक्त किया गया था। <ref name="Nasr 1979 10">{{Harvnb|Nasr|1979|p=10}} preface</ref> यह ट्वेलवर और इस्माली शि इस्लाम में माना जाता है कि 'एक्ल, दैवीय ज्ञान, भविष्यवक्ताओं और इमामों की आत्माओं का स्रोत था और उन्हें गूम नामक गूढ़ ज्ञान दिया गया था और उनके दुःख उनके भक्तों को दिव्य कृपा का साधन थे। <ref name="Britannica"/><ref>{{Harvnb|Nasr|1979|p=15}} preface</ref><ref>{{Harvnb|Corbin|1993|pp=45–51}}</ref> यद्यपि इमाम एक दिव्य प्रकाशन का प्राप्तकर्ता नहीं था, फिर भी वह भगवान के साथ घनिष्ठ संबंध था, जिसके माध्यम से भगवान उसे मार्गदर्शन करता है, और इमाम बदले में लोगों का मार्गदर्शन करता है। उनके शब्दों और कर्म समुदाय के लिए एक गाइड और मॉडल हैं;नतीजतन यह शरिया कानून का स्रोत है। <ref name="Nasr 1979 10"/><ref name="Imamat">{{cite encyclopedia|encyclopedia = Encyclopaedia of Islam and the Muslim world; vol.1 |last = Gleave|first = Robert|title=Imamate|publisher = MacMillan|isbn = 0-02-865604-0}}</ref><ref>{{Harvnb|Momen|1985|p=174}} preface</ref> शिया तीर्थयात्री आमतौर पर ज़ियारत के लिए नजाफ में मशद अली जाते हैं , वहां प्रार्थना करते हैं और " ज़ियारत अमीन अल्लाह " <ref>Trust, p. 695</ref> या अन्य ज़ियारत्ननाम पढ़ते हैं। <ref>Trust, p. 681</ref> सफविद साम्राज्य के तहत, उनकी कब्र बहुत समर्पित ध्यान का केंद्र बन गई, शाह इस्माइल प्रथम द्वारा नजाफ और करबाला की तीर्थयात्रा में उदाहरण दिया गया। <ref name="Islam"/> कई शिया मुस्लिम भी इमाम अली की जयंती (रजब के 13 वें दिन) को पिता दिवस के रूप में मनाते हैं। <ref>{{cite web|title=Iranians to celebrate Father's Day|url=http://www.iran-daily.com/News/190550.html|date=9 April 2017|publisher=|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180917143252/http://www.iran-daily.com/News/190550.html|archive-date=17 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref> ग्रेगोरी तिथि इस के लिए हर साल बदलता है: {|class="wikitable" |- !साल !ग्रेगोरियन तिथि |- |2018 |31 मार्च <ref>{{cite web|title= Iran Public Holidays 2018|url= https://publicholidays.me/iran/2018-dates/|date= |publisher= |access-date= 17 सितंबर 2018|archive-url= https://web.archive.org/web/20180821094037/https://publicholidays.me/iran/2018-dates/|archive-date= 21 अगस्त 2018|url-status= live}}</ref> |- |2019 |20 मार्च |} ===सुन्नी=== मुख्य लेख: अली के सुन्नी दृश्य सुनीस अली को चौथे खलीफा के रूप में देखते हैं। अली इस्लाम के सबसे महान योद्धा चैंपियनों में से एक के रूप में भी जाना जाता है। उदाहरणों में ट्रेंच की लड़ाई में कुरिश चैंपियन को शामिल करना शामिल है जब किसी और ने डर नहीं दिया। खयबर की लड़ाई में किले को तोड़ने के कई असफल प्रयासों के बाद, अली को बुलाया गया, चमत्कारिक रूप से ठीक हो गया और किले पर विजय प्राप्त हुई। <ref>{{cite web|title=Ali|url=http://www.sunnah.org/publication/khulafa_rashideen/caliph4.htm|publisher=Sunnah|accessdate=14 May 2015|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20150403090029/http://sunnah.org/publication/khulafa_rashideen/caliph4.htm|archivedate=April 3, 2015|df=mdy-all}}</ref> ===सूफी=== लगभग सभी सूफी आदेश अली के माध्यम से मुहम्मद को अपनी वंशावली का पता लगाते हैं , जो अबू बकर के माध्यम से जाने वाले नाक्षबंदी के अपवाद हैं। यहां तक ​​कि इस आदेश में, अली के महान महान पोते जाफर अल-सादिक हैं । सूफी का मानना ​​है कि अली ने मुहम्मद से संतृप्त शक्ति विलाह से विरासत में प्रवेश किया जो भगवान को आध्यात्मिक यात्रा संभव बनाता है। <ref name="Britannica"/> जैसे प्रख्यात सूफी अली हु्विरी का दावा है कि परंपरा अली के साथ शुरू हुआ और जुनेयड ऑफ़ बाघदाद के रूप में माना अली शेख सिद्धांतों और सूफी मत के प्रथाओं के। <ref>{{cite web |url=http://www.alim.org/library/biography/khalifa/content/KAL/79/1 |title=Khalifa Ali bin Abu Talib - Ali, The Father of Sufism |publisher=Alim.org |accessdate=2013-12-31 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20131113035327/http://www.alim.org/library/biography/khalifa/content/KAL/79/1 |archivedate=13 नवंबर 2013 |df=mdy-all }}</ref> सुफिस ने अली की प्रशंसा में माणकबत अली को पढ़ा । ==शीर्षक== * 'अली विभिन्न खिताबों से जाने जाते है, कुछ अपने व्यक्तिगत गुणों और दूसरों के कारण उनके जीवन में घटनाओं के कारण दिए जाते हैं: <ref name="Britannica"/> * अल-मुर्तजा ( अरबी : المرتضى , "चुना गया एक") * अमीर अल-मोमनीन (अरबी : أمير المؤمنين , "वफादार लोगों का कमांडर") * बाब-ए-मदीनतुल-इल्म (अरबी : باب مدينة العلم , "ज्ञान के शहर के द्वार") * अबू तुराब (अरबी : أبو تراب , "मृदा का पिता") * असदुल्लाह (अरबी : أسد الله , " अल्लाह का शेर ") * हैदर (अरबी : حيدر , "ब्रेवहार्ट" या "शेर") * वलद अल-काबा ( अरबी : ولد الکعبه , "काबा का बच्चा") <ref name="Piety">{{cite book|last1=Flaskerud|first1=Ingvild|title=Visualizing Belief and Piety in Iranian Shiism|publisher=A&C Black|isbn=9781441149077|url=https://books.google.com/books?id=fH1pvM0AdNIC&pg=PA3&lpg=PA3&dq=ali%27s+birth+ka%27ba|accessdate=11 April 2017|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170411141058/https://books.google.com/books?id=fH1pvM0AdNIC&pg=PA3&lpg=PA3&dq=ali%27s+birth+ka%27ba|archive-date=11 अप्रैल 2017|url-status=live}}</ref> ===एक "देवता" के रूप में=== अली को कुछ परंपराओं में दर्ज किया गया है क्योंकि उन लोगों को मना कर दिया जिन्होंने अपने जीवनकाल में उनकी पूजा करने की मांग की थी। <ref name="Peters 2003 320–321">See: * {{Harvnb|Peters|2003|pp=320–321}} * {{Harvnb|Halm|2004|pp=154–159}}</ref> ===अलावाइट्स === जैसे कुछ समूहों Alawites (अरबी: علوية Alawīyyah) विश्वास है कि अली परमेश्वर था दावा कर रहे हैं अवतार। इस्लामी विद्वानों के बहुमत से उन्हें ग़ुलात (अरबी : غلاة , "exaggerators") के रूप में वर्णित किया गया है। परंपरागत मुसलमानों के मुताबिक, इन समूहों में इस्लाम छोड़ दिया गया है क्योंकि वे मानव के प्रशंसनीय गुणों के अतिवाद के कारण हैं। <ref name="Peters 2003 320–321"/> ===अली-इलहाइज्म === में अली-Illahism , एक समधर्मी विश्वास किया गया लगातार वहाँ है पर धर्म केन्द्रों अवतार उनके के देवता पूरे इतिहास में, और भंडार 'अली, मुहम्मद का बेटा जी ने ऐसे ही एक अवतार माना जाता है के लिए विशेष रूप से श्रद्धा। <ref>Layard, Austen Henry, Discoveries in the Ruins of Nineveh and Babylon, Page 216</ref> ===ड्रुज़=== द्रूज, एक समधर्मी धर्म, मानते हैं कि भगवान था अवतरित मनुष्य में विशेष रूप से, अल-हकीम बि-अम्र अल्लाह अली के वंशज। ==इतिहासलेख == यह भी देखें: प्रारंभिक इस्लाम की ऐतिहासिकता अली के जीवन पर छात्रवृत्ति के लिए प्राथमिक स्रोत कुरान और अहमदी हैं , साथ ही प्रारंभिक इस्लामी इतिहास के अन्य ग्रंथ भी हैं। व्यापक माध्यमिक स्रोतों में, सुन्नी और शीया मुसलमानों, ईसाई अरबों , हिंदुओं और मध्य पूर्व और एशिया के अन्य गैर-मुसलमानों के लेखन और आधुनिक पश्चिमी विद्वानों द्वारा कुछ कार्यों के अलावा, शामिल हैं। हालांकि, शुरुआती इस्लामी स्रोतों में से कुछ अली की तरफ सकारात्मक या नकारात्मक पूर्वाग्रह से कुछ हद तक रंगीन हैं। <ref name="Britannica"/> इन कथनों के खिलाफ पहले पश्चिमी विद्वानों के बीच एक आम प्रवृत्ति रही थी और बाद में सुन्नी और शीया पक्षपातपूर्ण पदों की प्रवृत्ति के कारण बाद की अवधि में एकत्र रिपोर्टें हुईं; बाद में बनावट के रूप में उनके बारे में ऐसे विद्वान। इससे उन्हें कुछ रिपोर्ट किए गए कार्यक्रमों को अनौपचारिक या अप्रासंगिक माना जाता है। इब्न इसाक जैसे इतिहास के शुरुआती कंपाइलर्स द्वारा इस्नाद के बिना रिपोर्ट किए गए खातों के मुनाफे के दौरान लियोन कैतानी ने इब्न अब्बास और ऐशा को ऐतिहासिक रिपोर्टों की विशेषता माना। विल्फेर्ड मैडेलंग ने "शुरुआती स्रोतों" में शामिल नहीं होने वाली हर चीज को अंधाधुंध रूप से खारिज करने के रुख को खारिज कर दिया है और इस दृष्टिकोण में अकेले प्रवृत्ति को देर से उत्पत्ति के लिए कोई सबूत नहीं है।उनके अनुसार, कैतानी का दृष्टिकोण असंगत है। मैडलंग और कुछ बाद के इतिहासकार बाद की अवधि में संकलित किए गए कथाओं को अस्वीकार नहीं करते हैं और इतिहास के संदर्भ में और घटनाओं और आंकड़ों के साथ उनकी संगतता के आधार पर उनका न्याय करने का प्रयास करते हैं। <ref>{{Harvnb|Madelung|1997|p=xi, 19 and 20}}</ref> अब्बासिद खलीफाट के उदय तक, कुछ किताबें लिखी गईं और अधिकांश रिपोर्ट मौखिक थीं। इस अवधि के पिछले सबसे उल्लेखनीय काम सुलेम इब्न क्यूज़ की किताब है, जो सुलेम इब्न क्यूस द्वारा लिखी गई है, जो अब्बासीद के समक्ष रहने वाले अली के एक साथी थे। <ref>{{Harvnb|Lawson|2005|p=59}}</ref> जब मुस्लिम समाज के लिए पेपर पेश किया गया था, 750 और 950 के बीच कई मोनोग्राफ लिखे गए थे। रॉबिन्सन के अनुसार, कम से कम बीस एक अलग मोनोग्राफ सिफिन की लड़ाई पर बनाये गये हैं। अबी मिखनाफ इस अवधि के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक हैं जिन्होंने सभी रिपोर्टों को इकट्ठा करने की कोशिश की। 9वीं और 10 वीं शताब्दी के इतिहासकारों ने एकत्र, चयनित कथाओं का चयन और व्यवस्था की। हालांकि, इनमें से अधिकतर मोनोग्राफ मुहम्मद इब्न जारिर अल- ताबरी (डी.923) द्वारा भविष्य के कार्यों जैसे कि भविष्यवक्ताओं और राजाओं के इतिहास जैसे कुछ कार्यों के अलावा उपयोग नहीं किए गए हैं। <ref>{{Harvnb|Robinson|2003|p=28 and 34}}</ref> इराक के शिया ने मोनोग्राफ लिखने में सक्रिय रूप से भाग लिया लेकिन उनमें से अधिकांश काम खो गए हैं। दूसरी तरफ, 8 वीं और 9वीं शताब्दी में अली के वंशज मुहम्मद अल बाकिर और जाफर जैसे सादिक के रूप में उनके उद्धरण और रिपोर्टों को वर्णित करते हैं जो शिया हदीस किताबों में एकत्र हुए हैं। 10 वीं शताब्दी के बाद लिखा गया शिया काम करता है जो चौदह इन्फैलिबल्स और बारह इमाम की जीवनी के बारे में है। इस क्षेत्र में सबसे पुराना जीवित काम और सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक शैख मुफिद (डी। 1022) द्वारा किताब अल-इरशाद है। लेखक ने अली के विस्तृत खाते में अपनी पुस्तक का पहला भाग समर्पित किया है। मणकिब नामक कुछ किताबें भी हैं जो धार्मिक दृष्टिकोण से अली के चरित्र का वर्णन करती हैं। इस तरह के काम भी एक तरह की इतिहासलेखन का गठन करते हैं। <ref>{{cite web|url=http://www.al-islam.org/message-thaqalayn/general-message-thaqalayn/glance-historiography-shiite-culture-rasul-jafariyan|title=A Glance at Historiography in Shiite Culture|work=Al-Islam.org|access-date=17 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180930043004/https://www.al-islam.org/message-thaqalayn/general-message-thaqalayn/glance-historiography-shiite-culture-rasul-jafariyan|archive-date=30 सितंबर 2018|url-status=dead}}</ref> == इन्हें भी देखें == {{Wikipedia books |1=Sahabah }} {{Portal|इस्लाम|शिया इस्लाम}}<!-- PLEASE RESPECT ALPHABETICAL ORDER --> * [[मुहम्मद का परिवार]] के पारिवारिक पेड़ # परिवार के वृक्ष इमाम को भविष्यद्वक्ताओं को जोड़ते हैं * [[अहल अल-बैत]] * [[अलवी]] * [[अल-फ़ारूक़]] (शीर्षक) * कुरान में अली * अली अरब शेर अली * अली इब्न अबी तालिब का जन्मस्थान * जॉर्डन के हाशिमी रॉयल परिवार * एतिकाफ़ * इडिस मैं मोरक्को का पहला राजा 788 स्थापित किया * मुहम्मद के युग के दौरान अली के अभियान की सूची * मुस्लिम रिपोर्टों की सूची * [[क़ुरैश]] * [[तालूत]] * [[वली]] * [[ज़ुल्फ़िख़ार]] * मुस्लिम संस्कृति में अली * अली इब्न अबी तालिब के मलिक अल-अशतर के पत्र ==फुटनोट्स== {{notelist|2}} ==सन्दर्भ== {{Reflist|colwidth=20em|refs= <ref name="Al-Islam">{{cite web|url=http://www.al-islam.org/articles/life-commander-faithful-ali-ibn-abu-talib|last=Al-Islam|title=The Life of the Commander of the Faithful Ali Ibn Abu Talib (as)|accessdate=6 December 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151210184943/http://www.al-islam.org/articles/life-commander-faithful-ali-ibn-abu-talib|archive-date=10 दिसंबर 2015|url-status=live}}</ref> <ref name="Iranica">{{cite encyclopedia|title = Alī ibn Abu Talib|encyclopedia = Encyclopædia Iranica|accessdate = 2010-12-16|url = http://www.iranicaonline.org/articles/ali-b-abi-taleb|archiveurl = https://web.archive.org/web/20110429163734/http://www.iranicaonline.org/articles/ali-b-abi-taleb|archivedate = April 29, 2011|url-status = live|df = mdy-all}}</ref> <ref name="Britannica">{{cite encyclopedia|last=Nasr |first=Seyyed Hossein |authorlink=Seyyed Hossein Nasr |title=Ali |encyclopedia=Encyclopædia Britannica Online |accessdate=2007-10-12 |publisher=Encyclopædia Britannica, Inc. |url=http://www.britannica.com/eb/article-9005712/Ali |archiveurl=https://web.archive.org/web/20071018014146/http://www.britannica.com/eb/article-9005712/Ali |archivedate=October 18, 2007 <!--DASHBot-->| url-status=live}}</ref> }} ==मूल स्त्रोत== * {{cite book|last = Al-Bukhari |first = Muhammad |title = [[सही बुख़ारी]], Book 4, 5, 8 |id =|authorlink = Muhammad al-Bukhari }} * {{cite book|last = Ali ibn Abi Talib | title = [[Nahj al-Balagha]] (Peak of Eloquence), compiled by [[Sharif Razi|ash-Sharif ar-Radi]] | year = 1984 | publisher = Alhoda UK |isbn = 978-0-940368-43-9}} * {{cite book|last = [[Ali ibn al-Athir]]|title = In his Biography, vol 2 }} * {{cite book|last = [[Ibn Taymiyyah]]|first = Taqi ad-Din Ahmad|title = [[Minhaj as-Sunnah an-Nabawiyyah]]|id = }} (In Arabic) * {{cite book|last = [[Muslim ibn al-Hajjaj]]|title = [[Sahih Muslim]], Book 19, 31| id = }} == बाहरी कड़ियाँ == {{Sister project links}} * [https://web.archive.org/web/20140915042437/http://blog.scientificworld.in/2009/03/Ali-Ibne-Abi-Talib.html अली इब्‍ने अबी तालिब] * [https://web.archive.org/web/20151122010201/http://netinhindi.com/hazrat-ali-quotes-in-hindi/ हज़रत अली के अनमोल वचन] ;शिया पुस्तक * [https://web.archive.org/web/20151210184943/http://www.al-islam.org/articles/life-commander-faithful-ali-ibn-abu-talib The Life of the Commander of the Faithful Ali Ibn Abu Talib (as) ] by [[Shaykh Mufid]] in Kitab al-Irshad * [https://web.archive.org/web/20071205021213/http://www.imamalinet.net/en/indexe.htm Website devoted to the Life of Imam Ali ibn Abi Talib] * [https://web.archive.org/web/20180909182938/http://www.alseraj.net/maktaba/kotob/english/FourteenInfallibles/ABiographical/ahlulbayt14/imam-ali.html A Biographical Profile of Imam Ali] by Syed Muhammad Askari Jafari * [https://web.archive.org/web/20081208133950/http://www.witness-pioneer.org/vil/Articles/companion/00_ali_bin_talib.htm Online Biography by Witness-Pioneer] ;उल्लेख * [https://web.archive.org/web/20160105111729/http://www.think-deep.org/ A Website featuring validated/referenced quotes of Imam Ali ibn Abi Talib] * [https://web.archive.org/web/20180917143305/http://en.abna24.com/service/iran/archive/2016/04/17/747949/story.html "Shadow of the Sun" published on first Shia Imam, a collection of 110 hadiths from Prophet (s) concerning the character of Ali.] {{S-start}} {{s-hou|branch=Clan|name='''अली'''<br> [[अहल अल-बैत]]| [[बनू हाशिम]] के प्रमुख 653|15 सितंबर |601|29 जनवरी |661|[[क़ुरैश (जाती)|बनू क़ुरैश]]}} {{S-rel|sh}} {{S-bef|before = [[मुहम्मद]]<br/>{{small|{{nobold|([[आख़री नबी]])}} }} }} {{S-ttl|title = 1st [[इमामह]] of [[अतना अशरी]], [[ज़ैदी]], [[सात इमाम]] और [[निज़ारी इस्माइली]];<br/>[[इस्माइली इमामों की सूची]] [[मुस्ताली]] |years = 632–661}} {{S-aft|after = [[हसन इब्न अली]]<br/>[[हुसैन इब्न अली]] ([[निजारी]] दृष्टिकोण)}} {{S-rel|su}} {{S-bef|before = [[उस्मान बिन अफ़्फ़ान]]}} {{S-ttl|title = [[ख़लीफ़ा|इस्लामी ख़लीफ़ा]]<br/>4th [[राशिदून ख़लीफ़ा]]|years = 656–661}} {{S-aft|after = [[हसन इब्न अली]]}} {{s-end}} {{Authority control}} {{राशिदून खलीफ़ा}} [[श्रेणी:अली| ]] [[श्रेणी:राशिदून ख़लीफ़ा]] [[श्रेणी:मक्का के लोग]] [[श्रेणी:अरब राजनीतिज्ञ]] [[श्रेणी:सुन्नी इस्लाम]] [[श्रेणी:शिया इस्लाम]] [[श्रेणी:601 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:661 के निधन]] [[श्रेणी:शिया इमाम]] [[श्रेणी:अहल अल-बैत]] [[श्रेणी:अरब के मनीषी]] [[श्रेणी:अरब के वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:इस्लाम]] [[श्रेणी:ख़लीफ़ा]] [[श्रेणी:इस्लाम का इतिहास]] [[श्रेणी:रशीदुन खिलाफत]] [[श्रेणी:इस्लामी नेता]] [[श्रेणी:सहाबा]] njy97df1cs9l6c76292lublhp9nwfns अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ 0 30742 6536891 6463964 2026-04-06T08:13:08Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536891 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ | image = Ashfaqulla Khan 2619.JPG | caption = | other_names = अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ | birth_date = {{birth date|1900|10|22|df=yes}} | birth_place = [[शाहजहाँपुर]], [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|ब्रितानी भारत]] | death_date = {{Death date and age|1927|12|19|1900|10|22|df=yes}} | death_place = [[फ़ैज़ाबाद]], यूनाइटेड प्रांत | known_for = काकोरी ट्रैन घटना के प्रमुख प्रदर्शक | organization = [[हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन|हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन]] }} '''अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ''' (22 अक्टूबर 1900 – 19 दिसम्बर 1927) [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन]] के [[स्वतंत्रता सेनानी]] थे।{{Sfn|S. Waris|2003|p=8-14|loc=}}<ref>{{cite book |last1=राव |first1=एन॰पी॰ शंकरनारायण |title=Ashfaqulla Khan |publisher=लिटेंट |url=https://www.google.co.in/books/edition/Ashfaqulla_Khan/IHPBAgAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=ashfaqulla+khan&printsec=frontcover |language=en}}</ref> ये वीर शहीदों में से एक वीर नाम है इनकी शहादत हम कभी नही भूल सकते।।। ==पूर्व जीवन== ख़ान का जन्म [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|ब्रितानी भारत]] के [[शाहजहाँपुर]] में शफ़िक़ुल्लाह खान और मज़रुनिस्सा के घर हुआ। वो एक [[मुसलमान|मुस्लिम]] [[पठान]] परिवार<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/blogs/politics/freedom-fighter-ashfaqulaah-khan-profile-ram-prasad-bismil-kakori-conspiracy/|title=Ashfaqullah Khan – निर्भय क्रांतिकारी अशफ़ाक उल्ला खान|website=Jagran blog|access-date=2021-03-07|archive-date=31 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201031090126/https://www.jagran.com/blogs/politics/freedom-fighter-ashfaqulaah-khan-profile-ram-prasad-bismil-kakori-conspiracy/|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/education/history/story/ashfaqulla-khan-birth-annivarsary-was-a-freedom-fighter-in-indian-independence-movement-kakori-kand-train-loot-british-government-tedu-570003-2018-10-22|title=अंग्रेजों की नाक के नीचे से लूटा था खजाना, 27 की उम्र में शहीद हुए थे अशफाक उल्ला खां|website=आज तक|language=hi|access-date=2021-03-07}}</ref> के खैबर जनजाति में हुआ था।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/metroplus/theatre-nishas-pandit-aur-pathan-focuses-on-freedom-fighters/article7611592.ece|title=The martyr monologue|last=जोसेफ|first=रवीना|date=2015-09-03|work=[[द हिन्दू]]|access-date=2021-03-07|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite book|last=वारिस|first=प्रो॰ फ़ारुख एस॰ |title=UNSUNG HEROES Volume-II|publisher=इंडस सोर्सबुक्स |isbn=978-81-88569-33-5|pages=8}}</ref> वो छः भाई बहनों में सबसे छोटे थे।<ref name=nic/> वर्ष 1920 में [[महात्मा गांधी]] ने भारत में ब्रितानी शासन के विरुद्ध [[असहयोग आन्दोलन]] आरम्भ किया। लेकिन वर्ष 1922 में [[चौरी चौरा कांड]] के बाद महात्मा गांधी ने आन्दोलन वापस ले लिया।<ref name=TOI/> इस स्थिति में खान सहित विभिन्न युवा लोग खिन्न हुए। इसके बाद खान ने समान विचारों वाले स्वतंत्रता सेनानियों से मिलकर नया संगठन बनाने का निर्णय लिया और वर्ष 1924 में [[हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन|हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन]] का गठन किया।<ref>{{Cite web|url=https://frontline.thehindu.com/cover-story/article30193283.ece|title=A radical legacy|last=तनेजा |first=नलिनी |website=द हिन्दू |language=en|access-date=2021-03-07}}</ref> ==काकोरी रेल एक्शन== {{main|काकोरी काण्ड}} अपने आन्दोलन को आगे बढ़ाने के लिए, हथियार खरिदने और अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक गोलाबारूद इकट्ठा करने के लिए, हिन्दुस्तानी सोशिलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सभी क्रान्तिकारियों ने शाहजहाँपुर में 8 अगस्त 1925 को एक बैठक की। एक लम्बी विवेचना के पश्चात् रेलगाडी में जा रहे सरकारी खजाने को कब्जाने का कार्यक्रम बना। 9 अगस्त 1925 को खान सहित उनके क्रान्तिकारी साथियों [[राम प्रसाद 'बिस्मिल']], [[राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी]], [[रोशन सिंह]], [[शचीन्द्रनाथ बख्शी]], [[चन्द्रशेखर आज़ाद]], [[केशव चक्रवर्ती]], [[बनवारी लाल]], [[बनवारी लाल]], [[मुरारी शर्मा]], [[मुकुन्‍दी लाल]] और [[मन्मथनाथ गुप्त]] ने मिलकर [[लखनऊ]] के निकट [[काकोरी]] में रेलगाड़ी में जा रहा ब्रितानी सरकार का खजाना जो उसने भारत से लूटा था उसे फिर पा लिया।<ref name=nic/><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/explained-who-was-ashfaqullah-khan-the-27-year-old-freedom-fighter-hanged-by-the-british-6206893/|title=Explained: Who was Ashfaqullah Khan, and why did the British hang him?|date=2020-01-10|website=द इंडियन एक्सप्रेस |language=en|access-date=2021-03-07}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/fyi/story/kakori-conspiracy-ram-prasad-bismil-roshan-singh-ashfaqulla-khan-1108738-2017-12-19|title=Kakori Conspiracy: Why were Ram Prasad Bismil, Ashfaqulla Khan and Roshan Singh hanged?|last=December 19|first=India Today Web Desk|last2=December 19|first2=2017UPDATED:|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2021-03-07|last3=Ist|first3=2017 17:14}}</ref> रेलगाडी के लूटे जाने के एक माह बाद भी किसी भी क्रांतिकारी की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी। यद्यपि [[यूनाईटेड किंगडम की सरकार|ब्रिटेन सरकार]] ने एक विस्तृत जाँच का जाल आरम्भ कर दिया था।<ref name=nic/> 26 अक्टूबर 1925 की एक सुबह, बिस्मिल को पुलिस ने पकड़ लिया और खान अकेले थे जिनका पुलिस कोई सुराख नहीं लगा सकी। वो छुपते हुए [[बिहार]] से [[बनारस]] चले गये, जहाँ उन्होंने दस माह तक एक अभियांत्रिकी कंपनी में काम किया। उन्होंने अभियान्त्रिकी के आगे के अध्ययन के लिए विदेश में जाना चाहते थे जिससे स्वतंत्रता की लड़ाई को आगे बढ़ाया जा सके और वो देश छोड़ने के लिए [[दिल्ली]] चले गये। उन्होंने अपने एक पठान दोस्त की सहायता ली जो पहले उनका सहपाठी रह चुका था। दोस्त ने उन्हें धोखा देते हुए उनका ठिकाना पुलिस को बता दिया<ref name=TOI><{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/daredevilry-of-sons-of-the-soil/articleshow/799244.cms|title=Daredevilry of sons of the soil {{!}} Lucknow News - Times of India|last=Aug 2|first=Aparna Singh / TNN /|last2=2004|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया |language=en|access-date=2021-03-07|last3=Ist|first3=02:42}}</ref><ref name=nic/> और 7 दिसंबर 1926 की सुबह पुलिस उनके घर आयी तथा उन्हें गिरफ्तार किया। खान को [[फैज़ाबाद]] कारावस में रखा गया और उनके विरुद्ध एक मामला आरम्भ किया गया। उनके भाई रियासतुल्लाह खान उनके कानूनी अधिवक्ता थे। कारावास के दौरान अशफ़क़ुल्लाह खान ने क़ुरान का पाठ किया और नियमित तौर पर नमाज पढ़ना आरम्भ कर दिया तथा इस्लामी माह [[रमज़ान]] में कठोरता से रोजे रखना आरम्भ कर दिया। काकोरी [[डकैती]] का मामला बिस्मिल, खान, राजेन्द्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनाकर पूरा किया गया।।<ref name=nic>{{cite web |url=http://pib.nic.in/feature/feyr2000/fdec2000/f151220001.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20021105203929/http://pib.nic.in/feature/feyr2000/fdec2000/f151220001.html |archive-date=2002-11-05 |title=Ashfaqulla Khan: The Immortal Revolutionary |publisher=भारत सरकार की वेबसाइट|access-date=7 मार्च 2021}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/society/history-and-culture/wielding-the-pen-and-pistol/article23319486.ece |author=एस॰ रवि|date=22 मार्च 2018|title=Wielding the pen and pistol|newspaper=द हिन्दू|access-date=7 मार्च 2021}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://thewire.in/history/kakori-martyrs-were-symbols-of-communal-harmony-in-indias-freedom-struggle|title=Kakori Martyrs Were Symbols of Communal Harmony in India’s Freedom Struggle|website=द वायर}}</ref> ==निधन और विरासत== खान को 19 दिसम्बर 1927 को फ़ैज़ाबाद कारावास में फ़ांसी की सजा दी गयी।<ref name=TOI/> उनके क्रान्तिकारी व्यक्तित्व, प्रेम, स्पष्ट सोच, अडिग साहस, दृढ़ निश्चय और निष्ठा के कारण लोगों के लिए वो शहीद माने गये।<ref name=nic/><ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/archive/features/tributes-paid-to-martyr-ashfaqulla-khan-149370|title=Tributes paid to martyr Ashfaqulla Khan|last=Service|first=Tribune News|website=Tribuneindia News Service|language=en|access-date=2021-03-07}}</ref> यह क्रांतिकारी व्यक्ति मातृभूमि के प्रति अपने प्रेम, अपनी स्पष्ट सोच, अडिग साहस, दृढ़ता और निष्ठा के कारण अपने लोगों के बीच शहीद और एक किंवदंती बन गया। ==लोकप्रिय मीडिया चित्रण== खान और उसके साथियों के कार्य को हिन्दी फ़िल्म ''[[रंग दे बसंती]]'' (2006) में फ़िल्माया गया है जिसमें खान का अभिनय [[कुणाल कपूर]] ने किया। [[स्टार भारत]] की टेलीविजन शृंखला ''चन्द्रशेखर'' में [[चेतन्य अदीब]] ने खान का अभिनय किया है। वर्ष 2014 में [[डीडी उर्दू]] पर भारतीय टेलीविजन शृंखला ''मुजाहिद-ए-आज़ादी - अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ'' प्रसारित की गयी जिसमें [[गौरव नंदा]] ने अभिनय किया।<ref>{{cite web |title=DD Urdu Program Schedule |url=https://doordarshan.gov.in/sites/default/files/%20DD%20Urdu%20Program%20Schedule%20of%2027th%20July%2C%202019.pdf |website=doordarshan.gov.in |date=27 जुलाई 2019 }}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> ==इन्हें भी देखें== *[[राजगुरु]] ==सन्दर्भ== {{reflist}} == ग्रंथसूची == * {{Cite book|last=S. Waris|first=Prof. Farukh|url=https://esamskriti.com/essays/pdf/13-SEPT-Unsung-hEROES-2.pdf|title=UNSUNG HEROES Volume-II|publisher=Indus Soucebooks|isbn=978-81-88569-33-5|pages=8–14}} {{भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन}} [[श्रेणी:1900 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी]] [[श्रेणी:१९२७ में निधन]] [[श्रेणी:स्वतंत्रता सेनानी]] dkjgoffwop2ersooxpeb4iaup31tii1 राजस्थानी भाषा 0 31069 6536771 6506733 2026-04-06T05:26:28Z Psubhashish 41524 वीडियो + 6536771 wikitext text/x-wiki {{Infobox language |name = राजस्थानी |nativename = <!--In Roman Script-->Rājasthānī<br /> |image = File:Rajasthani dialects.gif |imagesize = |imagecaption = राजस्थानी के प्रयोग के आधार पर नक़्शा |pronunciation = |states = [[राजस्थान]] और [[भारत]] में इसके आस-पास के क्षेत्र, [[पाकिस्तान]] के [[सिंध]] और [[पंजाब]] के कुछ हिस्सों में | ethnicity = राजस्थानी |speakers = ९,००,००,००० |speakers2 = |familycolor = Indo-European |fam2 = [[हिन्द-ईरानी भाषाएँ|हिन्द-ईरानी]] |fam3 = [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|प्रतिच्य हिन्द-आर्य]]<ref>[http://homepages.fh-giessen.de/kausen/klassifikationen/Indogermanisch.doc Ernst Kausen, 2006. ''Die Klassifikation der indogermanischen Sprachen'']</ref> |fam4 =[[संस्कृत भाषा|वैदिक संस्कृत]] |fam5 = [[प्राकृत भाषा|प्राकृत भाषा]] |fam6 = [[शौरसेनी|शौरसेनी प्राकृत भाषा]] |fam7= [[अपभ्रंश|गुर्जरी अपभ्रंश भाषा]] |script = [[महाजनी/मुड़ियावाठी]] |dia1=[[मेंवाड़ी भाषा|मेवाड़ी बोली]] |dia2=[[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी बोली]] |dia3=[[हड़ौती भाषा|हाड़ौती बोली]] |dia4=[[ढूंढाड़ी|ढूंढाड़ी बोली]] |dia5=[[शेखावाटी|शेखावाटी बोली]] |dia6=[[बागड़ी भाषा|बागड़ी बोली]] |dia7=[[बंजारा भाषा|बंजारा बोली]] |dia8=[[मेवाती भाषा|मेवाती बोली]] <ref>[http://hdl.handle.net/10603/16847 ''A Descriptive Grammar of Bagri By Lakhan Gusain, Chapter 1: Rajasthani: Dialects and Classification'']</ref> |iso1 = |iso2 = raj |iso3 = raj |lc4=mup |lc8=noe | notice = IPA | glotto = raja1256 | glottorefname = Rajasthani,marwaadi,mevadi }} [[File:OpenSpeaks-Lmn-Lambadi-Meghavath Sathish-Nenavath Mohan-Problems for not Having Aadhaar.webm |thumb|[[तेलंगाना]] के दो [[बंजारा]] युवक 2019 में [[बंजारा भाषा|बंजारा]] (एक राजस्थानी भाषा) में चर्चा कर रहे हैं]] '''राजस्थानी''' आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में से एक है, जिसका वास्तविक क्षेत्र वर्तमान [[राजस्थान]] प्रान्त तक ही सीमित न होकर [[मध्य प्रदेश|मध्यप्रदेश]] के कतिपय पूर्वी तथा दक्षिणी भाग में और [[पाकिस्तान]] के वहावलपुर जिले तथा दूसरे पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी सीमा प्रदेशों में भी है। यह [[हरियाणा]], [[पंजाब]], [[गुजरात]] और [[मध्य प्रदेश]]<ref>Census of India, 2001. Rajasthan. New Delhi: Government Press</ref> के निकटवर्ती क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाओं और बोलियों का समूह है। पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांतों में भी इसके वक्ता हैं। राजस्थानी पश्चिमी इंडो-आर्यन भाषा होने के कारण पड़ोसी, संबंधित हिंदी भाषाओं से अलग भाषा है। यह भाषा भारत में लगभग नौ करोड़ लोगों के द्वारा बोली, लिखी एवं पढ़ी जाती है। राजस्थानी [[देवनागरी लिपि|नागरी लिपि]] में लिखी जाती है। इसके अतिरिक्त यहाँ के पुराने लोगों में अब भी एक भिन्न लिपि प्रचलित है, जिसे "बाण्याँ वाटी" कहा जाता है। इस लिपि में प्रायः मात्रा-चिह्र नहीं दिए जाते। राजस्थानी बनिये आज भी बहीखातों में इस लिपि का प्रयोग करते हैं। ==राजस्थानी की बोलियाँ== राजस्थानी भाषा की मुख्यतः आठ बोलियां है जिनका कुछ अन्य उपबोलियों में भी विभाजन किया जाता है। भारत की जनगणना 1991 व 2011 के अनुसार निम्न बोलियाँ आधुनिक राजस्थानी भाषा के प्राथमिक वर्गीकरण के अंतर्गत आती है: [[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी बोली]], [[हड़ौती भाषा|हाड़ौती बोली]], [[मेवाड़ी भाषा|मेवाड़ी बोली]], [[ढूंढाड़ी|ढूंढाड़ी बोली]], [[शेखावाटी|शेखावाटी बोली]], [[बागड़ी भाषा|बागड़ी बोली]], [[मेवाती भाषा|मेवाती बोली]], जालोरी बोली, [[मालवी भाषा|मालवी]], [[निमाड़ी]],ऐरावती <ref>[http://hdl.handle.net/10603/16847 ''A Descriptive Grammar of Bagri By Lakhan Gusain, Chapter 1: Rajasthani: Dialects and Classification'']</ref> भारत की जनगणना 1961 में राजस्थानी भाषा के वक्ताओं द्वारा इस भाषा की 73 बोलियां लिखवाई गई किंतु इनमें से 46 बोलियों के वक्ताओं की संख्या 1 हजार से भी कम थी, साथ ही अन्य 13 बोलियों के वक्ताओं की संख्या 50 हजार से भी कम थी। इनमें से मुख्यतः 4 बोलियों के ही वक्ताओं की संख्या 10 लाख से ज्यादा थी। भाषाविदों के अनुसार राजस्थानी की मुख्यतः 8 बोलियां ही है। ==राजस्थानी भाषा की बोलियों का वर्गीकरण== राजस्थानी भाषा पश्चिमी इंडो-आर्यन भाषा परिवार से संबंधित हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.freewebs.com/hanvant/language.htm|title=Rajasthani Language|date=2009-03-27|website=web.archive.org|access-date=2020-12-31|archive-date=27 मार्च 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090327094647/http://www.freewebs.com/hanvant/language.htm|url-status=bot: unknown}}</ref> डॉ॰ ग्रियर्सन ने राजस्थानी की पाँच बोलियाँ मानी हैं- (1) पश्चिमी राजस्थानी (मारवाड़ी), (2) उत्तर पूर्वी राजस्थानी (मेवाती अहीरवाटी), (3) मध्यपूर्वी (या पूर्वी) राजस्थानी (ढूँढाडी हाड़ौती), (4) दक्षिण-पूर्वी राजस्थानी (मालवी), (5) दक्षिणी राजस्थानी ( [[मेवाड़ी भाषा|मेवाड़ी]] )। ग्रियर्सन ने भीली और खानदेशी को स्वतंत्र भाषा वर्ग में माना है, राजस्थानी वर्ग के अंतर्गत पाकिस्तान तथा कश्मीर के सीमांत प्रदेश की गूजरी बोली और तमिल-नाड की सौराष्ट्र बोली भी आती है, जो पूर्वी राजस्थानी से विशेष संबद्ध जान पड़ती है। डॉ॰ चाटुर्ज्या ने ग्रियर्सन के राजस्थानी के पाँच बोली-भेदों को नहीं माना हे। वे मारवाड़ी और ढूँढाडी हाड़ौती को ही "राजस्थानी" संज्ञा देना ठीक समझते हैं। उनके अनुसार राजस्थानी के दो ही वर्ग हैं :- :(1) पश्चिमी राजस्थानी (मारवाड़ी), :(2) पूर्वी राजस्थानी (जैपुरी हाड़ौती)। मेवाती, मालवी और निमाड़ी [[ मेवाड़ी ]] का वे पश्चिमी हिंदी की ही विभाषा मानने के पक्ष में हैं, यद्यपि इस संबंध में व अंतिम निर्णय नहीं देते। ===प्रमुख बोलियाँ=== राजस्थानी भाषा की निम्न किस्में (मुख्य लिखित रूप व बोलियां) है:<ref name=ethno>[http://www.ethnologue.com/show_family.asp?subid=90927 Ethnologue.com: Ethnologue report for Rajasthani]</ref> *'''मानक राजस्थानी''': राजस्थानी लोगों की सामान्य भाषा है और यह राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में 1 करोड़ 80 लाख (2001) से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है।<ref name="censusindia.gov.in">{{Cite web|url=https://studygovtadda.com/rajasthan-language-census-data/|title=Rajasthan language Census Data – 2011|website=the original|archive-url=https://web.archive.org/web/20240109194517/https://studygovtadda.com/wp-content/uploads/2024/01/Rajasthan-language-census-data.pdf|archive-date=9 January 2024|access-date=2015-09-27}}</ref> *[[मारवाड़ी भाषा|मारवाड़ी बोली]]: लगभग 4.5 से 5 करोड़ बोलने वालों के साथ सबसे अधिक बोली जाने वाली राजस्थानी भाषा की मुख्य बोली जो मारवाड़ क्षेत्र में बोली जाती है। यह भाषा मेवाड़ी भाषा से मिलती जुलती है। *[[मेवाड़ी भाषा|मेवाड़ी बोली]]: इसके वक्ताओं की संख्या 50 लाख के करीब है जो राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में बोली जाती है। यह भाषा मारवाड़ी भाषा से मिलती जुलती है। *[[मालवी|मालवी बोली]]: लगभग 1 करोड़ लोग राजस्थानी भाषा की इस बोली को [[मालवा]] क्षेत्र जो [[मध्य प्रदेश]] में है, बोलते है। *[[ढूंढाड़ी|ढूंढाड़ी बोली]]: इसके वक्ताओं की संख्या 80 लाख के करीब है जो राजस्थान के ढूंढाड़ क्षेत्र में बोली जाती है। *[[हड़ौती भाषा|हाड़ौती बोली]]: इसके लगभग 50 लाख वक्ता है जो राजस्थान के ढूंढाड़ क्षेत्र में बोलते है। *अहीरवाटी बोली: इसके वक्ताओं की संख्या 30 लाख के करीब है जो राजस्थान, दिल्ली व हरियाणा के कुछ क्षेत्र में बोली जाती है। *[[शेखावाटी|शेखावाटी बोली]]: इसके वक्ताओं की संख्या 35 लाख के करीब है जो राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में बोली जाती है। *[[बागड़ी भाषा|बागड़ी बोली]]: इसके वक्ताओं की संख्या 1 करोड़ 40 लाख के करीब है जो उतरी राजस्थान, उतरी पश्चिमी हरयाणा व दक्षिणी पंजाब (भारत) के क्षेत्र में बोली जाती है। *[[निमाड़ी भाषा|निमाड़ी बोली]]: इसके वक्ताओं की संख्या 22 लाख के करीब है जो निमाड़ क्षेत्र (मध्यप्रदेश) में बोली जाती है। *इसकी अन्य बोलियों को मिलाकर कुल 73 बोलियां है। == विकास का इतिहास == अधिकांश विद्वानों के मतानुसार राजस्थानी का विकास मध्यदेशीय [[प्राकृत]] या [[शौरसेनी]] से हुआ है, किन्तु डॉ॰ चाटुर्ज्या इसका विकास [[अशोक]]कालीन [[सौराष्ट्री प्राकृत]] से मानते हैं, जो "शौरसेनी या मध्यदेशीय प्राकृत से कुछ विभिन्न थी"। इसी प्राकृत का क्षेत्र [[गुजरात]] प्रांत तथा मारवाड़ प्रांत था और यह बोली यहाँ मध्यप्रदेश से न आकर "उत्तर-भारत के किसी और प्रांत या जनपद से आई थी। इसी आधार पर डॉ॰ चाटुर्ज्यां गुजराती मारवाड़ी को पश्चिमी पंजाब की लँहदा तथा सिंध की सिंधी से विशेष संबद्ध मानते हैं। वैसे इस प्रदेश की बोलियों को मध्ययुग में शौरसेनी ने काफी प्रभावित किया है। ईसा की तीसरी-चौथी सदियों में स्वात प्रदेश के गुर्जर गुजरात, राजस्थान तथा मालवा में आ बसे थे। पिछले दिनों इन लोगों ने यहाँ कई राज्य स्थापित किए और ये लोग ही वर्तमान अग्निवंशी राजपूतों में बदल गए। गुर्जर जाति की मूल बोलियों ने इस प्रदेश की प्राकृत को पर्याप्त प्रभावित किया है तथा अपभ्रंश के विकास में, खास तौर पर उसके शब्दकोश के विकास में, इस जाति का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दंडी ने तो "अपभ्रंश" भाषा को आभीरादि की ही बोलियाँ माना है। नागर अपभ्रंश के ही परवर्ती रूप से, जिसे माकोबी जैसे विद्वान् गुर्जर अपभ्रंश या श्वेतांबर अपभ्रंश कहना अधिक ठीक समझते हैं, गुजराती-राजस्थानी का विकास हुआ है। गुजराती मूलत: राजस्थानी (पश्चिमी राजस्थानी) का ही एक विभाषा थी, जो सोलहवीं सदी तक अविभक्त थी, किंतु बाद में चलकर सांस्कृतिक, प्रांतीय तथा साहित्यिक कारणों से स्वतंत्र भाषा बन बैठी। पश्चिमी राजस्थानी या [[मारवाड़ी]] जहाँ [[गुजराती भाषा|गुजराती]] और [[सिंधी]] के अधिक निकट है वहाँ पूर्वी राजस्थानी (जैपुरी हाड़ौती) ब्रजभाषा (पश्चिमी हिंदी) से पर्याप्त रूप में प्रभावित है। फिर भी पूर्वी राजस्थानी में भी स्पष्ट भेदक तत्त्व मौजूद हैं जो इसे हिंदी की विभाषा मानने से इंकार करते हैं। राजस्थानी भाषा की भाषाशास्त्रीय स्थिति रिहारी तथा पहाड़ी की तरह उन भाषाओं में है, जिन्हें हिंदी की विभाषा नहीं माना जा सकता, किंतु हिंदी के सांस्कृतिक तथा साहित्यिक इतिहास के साथ इसका गठबंधन इतना दृढ़ हो गया है कि साहित्यिक दृष्टि से राजस्थानी भाषा की स्वतंत्र सत्ता न रह पाई और यह उसकी विभाषासी बन गई। == राजस्थानी भाषा की सामान्य विशेषताएँ == राजस्थानी भाषा की सामान्य विशेषताएँ निम्न हैं- (1) राजस्थानी में "ण", "ड़" और (मराठी) "ळ " तीन विशिष्ट ध्वनियाँ (Phonemes) पाई जाती हैं। (2) राजस्थानी तद्भव शब्दों में मूल संस्कृत "अ" ध्वनि कई स्थानों पर "इ" तथा "इ" "उ" के रूप में परिवर्तित होती देखी जाती हैं-"मिनक" (मनुष्य), हरण (हरिण), क"मार (कुंभकार,[[कुम्हार]])। (3) मेवाडी और मालवी में "च, छ, ज, झ" का उच्चारण भीली और मराठी की तरह क्रमश: "त्स, स, द्ज, ज़" की तरह पाया जात है। (4) संस्कृत हिंदी पदादि "स-ध्वनि" पूर्वी राजस्थानी में तो सुरक्षित है, किंतु मेवाड़ी-मालवी-मारवाड़ी में अघोष "ह्ठ" हो जाती है। हि. सास, जैपुरी-हाडौती "सासू", मेवाड़ी-मारवाड़ी "ह्ठाऊ" (5) पदमध्यगत हिंदी शुद्ध प्राणध्वनि या महाप्राण ध्वनि की प्राणता राजस्थानी में प्राय: पदादि व्यंजन में अंतर्भुक्त हो जाती है-हिं. कंधा, रा. खाँदो; हि. पढना, रा. फढ-बो। (6) राजस्थानी के सबल पुलिंग शब्द हिंदी की तरह आकारांत न होकर ओकारांत है :-हि. घोड़ा, रा. घोड़ी, हिं. गधा, रा. ग"द्दो, हिं. मोटा, रा. मोटो। (7) पश्चिमी राजस्थानी में संबंध कारक के परसर्ग "रो-रा-री" हैं, किंतु पूर्वी राजस्थानी में ये हिंदी की तरह "को-का-की" हैं। (8) जैपुरी-हाड़ौती में "नै" परसर्ग का प्रयोग कर्मवाच्य भूतकालिक कर्ता के अतिरिक्त चेतन कर्म तथा संप्रदान के रूप में भी पाया जाता है-"छोरा नै छोरी मारी" (लड़के ने लड़की मारी); "म्हूँ छोरा नै मारस्यँू" (मैं लड़के को पीटूँगा;-चेतन कर्म); "यो लाडू छोरा नै दे दो" (यह लड्डू लड़के को दे दो-संप्रदान)। (9) राजस्थानी में उत्तम पुरुष के श्रोतृ-सापेक्ष "आपाँ-आपण" ओर श्रोतृ निरपेक्ष "महे-म्हें-मे" दुहरे रूप पाए जाते हैं। (10) हिंदी की तरह राजस्थानी के वर्तमानकालिक क्रिया रूप सहायक क्रियायुक्त शतृप्रत्ययांत विकसित रूप न होकर शुद्ध तद्भव रूप हैं। "मूँ जाऊँ छूँ" (मैं जाता हूँ)। (11) सहायक क्रिया के रूप पश्चिमी राजस्थानी में "हूं-हाँ-हो-है" (वर्तमान) और "थो-थी-था" (भूतकाल) हैं, किंतु पूर्वी राजस्थानी में "छूँ-छाँ-छो-छै" (वर्तमान) और "छो-छी-छा" (भूतकाल) हैं। (12) राजस्थानी में तीन प्रकार के भविष्यत्कालिक रूप पाए जाते हैं :-जावैगो, जासी, जावैलो। इनमें द्वितीय रूप संस्कृत के भविष्यत्कालिक तिङंत रूपों का विकास हैं-"जासी" (यास्यति), जास्यूँ (यास्यामि)। (13) राजस्थानी की अन्य पदरचनात्मक विशेषता पूर्वकालिक क्रिया के लिए "-र" प्रत्यय का प्रयोग है : -"ऊ-पढ़-र रोटी खासी" (वह पढ़कर रोटी खाएगा)। (14) राजस्थानी की वाक्यरचनागत विशेषताओं में प्रमुख उक्तिवाचक क्रिया के कर्म के साथ संप्रदान कारक का प्रयोग है, जबकि हिंदी में यहाँ "करण या अपादान" का प्रयोग देखा जाता है1"या बात ऊँनै कह दो" (यह बात उससे कह दो)। पूर्वी राजस्थानी में हिंदी के ही प्रभाव से संप्रदानगत प्रयोगके अतिरिक्त विकल्प से कारण-अपादानगत प्रयोग भी सुनाई पड़ता है-"या बात ऊँ सूँ कह दो"। ==राजस्थानी भाषा पर शोध कार्य== भारत की अन्य प्रांतीय भाषाओं की तरह राजस्थानी की भी अपनी कुछ विशिष्ट विशेषतायें हैं। [[जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन|ग्रियर्सन]] ने Linguistic Survey of India<ref>{{Citation|last=Pandit|first=Prabodh B.|title=The linguistic survey of India - perspectives on language use|date=1975|url=http://files.eric.ed.gov/fulltext/ED104170.pdf#page=77|work=Language surveys in developing nations: papers and reports on sociolinguistic surveys|pages=71–85|publisher=Center for Applied Linguistics|access-date=2020-12-31}}</ref> की 9वीं पुस्तक के भाग-2 के पृष्ठ संख्या 2-3 पर राजस्थानी भाषा की बोलियों का वर्गीकरण इस प्रकार किया है<ref>{{Cite web|url=https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-bhasha/|title=सबदकोस – राजस्थांनी भाषा|website=राजस्थानी सबदकोस|language=en-US|access-date=2020-12-30|archive-date=16 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210116143529/https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-bhasha/|url-status=dead}}</ref>– '''1. पश्चिमी राजस्थानी''' - इसमें मारवाड़ी, थली, बीकानेरी, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी, खैराड़ी, गोडवाड़ी और देवड़ावाटी सम्मिलित हैं। '''2. उत्तर पूर्वी राजस्थानी''' - अहीरवाटी और मेवाती। '''3. ढूंढाड़ी''' - इसे मध्यपूर्वी राजस्थानी भी कहा जाता है, जिसमें तोंरावाटी, जयपुरी, कठैड़ी, राजावाटी, अजमेरी, किशनगढ़ी, शाहपुरी एवं हाडौती सम्मिलित हैं। '''4. मालवी या दक्षिण-पूर्वी-राजस्थानी''' - इसमें रांगड़ी और सोडवाडी हैं। '''5. दक्षिणी राजस्थानी''' - निमाड़ी। मेवाड़ी '''प्राचीन काल में इसका नाम मरुभाषा ही था। कालान्तर में यह [[डिंगल|डिंगळ]] कहलाने लगी।'''<ref>{{Cite web|url=https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-bhasha/|title=सबदकोस – राजस्थांनी भाषा|website=राजस्थानी सबदकोस|language=en-US|access-date=2020-12-30|archive-date=16 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210116143529/https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-bhasha/|url-status=dead}}</ref> इसी नामकरण के समय राजस्थानी में समृद्धतम साहित्य की रचना हुई। आधुनिक समय में मोटे तौर से इसे राजस्थानी ही कहा जाता है। अतः राजस्थानी से हमारा अभिप्राय उसी परंपरागत मरु एवं डिंगळ भाषा से है। कविराजा [[सूर्यमल्ल]] ने [[वंश भास्कर|वंशभास्कर]] में स्थान-स्थान पर इस नाम का प्रयोग किया है। '''भाषा-वैज्ञानिकों का राजस्थानी भाषा का आंकलन:''' राजस्थानी भाषा का शब्द सामर्थ्य, राजस्थानी व्याकरण<ref>{{Cite web|url=https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-vyakaran-1/|title=सबदकोस – राजस्थांनी व्याकरण (भाग-1)|website=राजस्थानी सबदकोस|language=en-US|access-date=2020-12-30|archive-date=16 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210116152131/https://rajsabadkosh.org/rajasthani-sabadkosh/sabadkosh-rajasthani-vyakaran-1/|url-status=dead}}</ref> व राजस्थानी साहित्य के आधार पर इसे विश्व की 16वीं व भारत की 7वीं समृद्धतम भाषा माना जाता है। ==लिखित रूप== '''राजस्थानी भाषा''' को पहले मोड़ी<ref>{{Cite web|url=https://www.maruwani.com/p/language.html|title=Language|language=en-GB|access-date=2020-12-30|archive-date=22 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210122032829/https://www.maruwani.com/p/language.html|url-status=dead}}</ref> या महाजनी<ref>{{Cite web|url=https://www.aapanorajasthan.org/modiyalipi.php|title=आपाणो राजस्थान|website=www.aapanorajasthan.org|access-date=2020-12-30}}</ref> लिपि तथा मरुगुर्जरी लिपी में लिखा जाता था। वर्तमान में इसे आधुनिक [[देवनागरी]] लिपि में लिखा जाता है। पाकिस्तान में इस भाषा को लिखने के लिए सिंधी लिपि का प्रयोग किया जाता है। ==विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश: राजस्थानी वृहत शब्दकोश== विश्व का सबसे बड़ा शब्दकोश [[सीताराम लालस|डॉ. सीताराम लालस]] द्वारा रचित राजस्थानी भाषा (राजस्थानी हिंदी वृहद कोश) वृहद शब्दकोश<ref>{{Cite web|url=https://rajsabadkosh.org/|title=Home|website=राजस्थानी सबदकोस|language=en-US|access-date=2020-12-30|archive-date=16 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210116135910/https://rajsabadkosh.org/|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.charans.org/sitaram-lalas/|title=पद्मश्री डा. सीताराम जी लालस|last=Charans.org|website=Charans.org (चारण समागम)|language=en-US|access-date=2020-12-31}}</ref> है। इसमें 2 लाख से अधिक शब्द है।<ref>{{Cite web|url=https://www.charanshakti.org/2018/11/23/sitaram-lalas/|title=पद्मश्री डा. सीताराम जी लालस|last=admin|date=2018-11-23|website=चारण शक्ति|language=en-US|access-date=2020-12-31|archive-date=29 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221229023138/https://www.charanshakti.org/2018/11/23/sitaram-lalas/|url-status=dead}}</ref> == मान्यता स्थिति == भारत की [[भारतीय साहित्य अकादमी|साहित्य अकादमी]] और [[विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (भारत)|विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] ने राजस्थानी को एक अलग भाषा के रूप में मान्यता दी है, इसे [[जोधपुर]] के [[जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय]], [[उदयपुर]] के [[मोहनलाल सुखाड़िया विश्‍वविद्यालय|मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय]] व [[बीकानेर]] के [[महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय]] में पढ़ाया जाता है। [[माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान|राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान]] ने राजस्थानी भाषा साहित्य को विद्यालयी शिक्षा में शामिल किया है<ref>{{Cite web|url=https://www.google.com/search?kgmid=/m/02vvjv0&hl=en-IN&q=Rajasthani+literature&kgs=77d994ab42d2fba2&shndl=0&source=sh/x/kp/osrp&entrypoint=sh/x/kp/osrp|title=Rajasthani literature - Google Search|website=www.google.com|access-date=2020-12-30}}</ref> और यह 1973 से एक वैकल्पिक विषय रहा है। हालांकि यह भाषा भारतीय संविधान की 8वी अनुसूची में शामिल नहीं है। ==भौगोलिक वितरण== राजस्थानी भाषा मुख्य रूप से [[राजस्थान]] राज्य में बोली जाती हैं, लेकिन [[गुजरात]], [[हरियाणा]] और [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] में भी बोली जाती हैं। राजस्थानी भाषा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के [[बहावलपुर]] और [[मुल्तान]] क्षेत्रों और [[सिंध]] के [[थारपारकर जिला|थारपारकर]] जिले में भी बोली जाती हैं। यह क्रमशः बहावलपुर और मुल्तान क्षेत्रों में रियासी और सरायकी में विलीन हो जाती है। यह सुकुर और उमरकोट के माध्यम से डेरा रहीम यार खान से सिंधी के संपर्क में आता है। यह भाषा [[लाहौर]], पंजाब, पाकिस्तान के कई क्षेत्रों में आम है। [[जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन|जॉर्ज ए ग्रियर्सन]] द्वारा राजस्थानी भाषा भौगोलिक क्षेत्र का एक वितरण '[[भारतीय भाषाई सर्वेक्षण]]' में पाया जाता है। राजस्थानी भाषा मारुगुरजरी शैल अपभ्रंश भाषा है। <nowiki>*</nowiki>वागडी किन्तु सुनीति कुमार चटर्जी इन्हें "राजस्थानी वर्ग" के ही अंतर्गत रखना चाहेंगे, जो अधिक समीचीन जान पड़ता है। डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ तथा आसपास की भीली बोलियों और खानदेशी की व्याकरणिक संघटना राजस्थानी से विशेष भिन्न नहीं है। वस्तुत: ये राजस्थानी के वे रूप हैं जो क्रमश: गुजराती और मराठी तत्वों से मिश्रित हैं।<ref>{{Cite journal|last=-|first=Anita Nagar|date=2023-10-11|title=छीपा (जोशी कुटुम्ब) समाज की अनन्य देन: राजस्थानी फड़ (चित्रकला)|url=https://doi.org/10.36948/ijfmr.2023.v05i05.7238|journal=International Journal For Multidisciplinary Research|volume=5|issue=5|doi=10.36948/ijfmr.2023.v05i05.7238|issn=2582-2160}}</ref> इसके वक्ताओं की संख्या 2 करोड़ 20 लाख है जो राजस्थान के डूंगरपुर व बांसवाड़ा जिसे वागड़ क्षेत्र कहा जाता है, में बोली जाती है। == इन्हें भी देखें == * [[राजस्थानी साहित्य]] * [[डिंगल]] * [[पिंगल]] * [[मेवाड़ी भाषा]] * [[मारवाड़ी भाषा]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20190417201100/http://www.kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80 राजस्थानी कविता कोश] *[https://www.inhindi.co.in/2022/03/computer-types-name-in-hindi.html?m=1 आपणो राजस्थान] *[https://web.archive.org/web/20110223014857/http://www.pressnote.in/profile---rajasthan_95293.html राजस्थान की प्रमुख बोलियाँ] *[https://web.archive.org/web/20090425184713/http://www.freewebs.com/hanvant/ मरुवाणी संघ] (राजस्थानी वेबसाइट) *[https://www.rajsabadkosh.org/Sabadkosh.aspx राजस्थानी शबदकोश] (पद्मश्री डॉ० सीताराम लालस द्वारा संपादित) ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची|2}} [[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ]] [[श्रेणी:राजस्थान की भाषाएँ]] hgqxi6d298mm7aqv6x2boclmlkevsdf केदारनाथ मन्दिर 0 44540 6536948 6533961 2026-04-06T11:20:11Z ~2026-21073-06 919060 6536948 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक मंदिर |image = Kedarnath Temple.jpg |creator= [[पाण्डव]] |name = श्री केदारनाथ मन्दिर |established = |deity= भगवान [[वृषभनाथ ]] |architecture_style = कत्यूरी शैली |location= [[केदारनाथ]], [[उत्तराखण्ड]] }} '''केदारनाथ मन्दिर''' [[भारत]] के [[उत्तराखण्ड]] राज्य के [[रुद्रप्रयाग जिला|रुद्रप्रयाग जिले]] में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध [[मंदिर]] है। [[उत्तराखण्ड]] में [[हिमालय|हिमालय पर्वत]] की गोद में केदारनाथ मन्दिर [[ज्योतिर्लिंग|बारह ज्योतिर्लिंग]] में सम्मिलित होने के साथ [[चार धाम]]{{Ref_label|चारधाम|क|none}} और [[पंच केदार]]{{Ref_label|पंचकेदार|ख|none}} में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह [[मन्दिर]] [[अप्रैल]] से [[नवंबर]] माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण [[पाण्डवों]] के पौत्र [[महाराजा जन्मेजय]] ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू [[शिवलिंग]] अति प्राचीन है। [[आदि शंकराचार्य]] ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया।<ref>{{cite web | url = http://www.kedarnath.org/ | title = केदारनाथ | access-date = 25 जुलाई 2008 | archive-url = https://web.archive.org/web/20080621040239/http://www.kedarnath.org/ | archive-date = 21 जून 2008 | url-status = dead }}</ref> जून २०१३ के दौरान भारत के उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में [[उत्तर भारत बाढ़ २०१३|अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन]] के कारण केदारनाथ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। मंदिर के आसपास की मकानें बह गई ।<ref name=pioneer1>{{cite news|title=फ्लड फरी टोल नाउ 131|url=http://www.dailypioneer.com/top-stories/flood-fury-toll-now-131.html|accessdate=21 जून 2013|newspaper=द पोइनीर, देहरादून|date=19 जून 2013|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20131004225413/http://www.dailypioneer.com/top-stories/flood-fury-toll-now-131.html|archive-date=4 अक्तूबर 2013|url-status=dead}}</ref> इस ऐतिहासिक मन्दिर का मुख्य हिस्सा एवं सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहे लेकिन मन्दिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130621_uttarakhand_disaster_update_rd.shtml|title=उत्तराखंड: तबाही के छह दिन बयान करती छह तस्वीरें|author=शालिनी जोशी|date=21 जून 2013|work=देहरादून से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम|publisher=[[बीबीसी हिन्दी]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20130624050505/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/06/130621_uttarakhand_disaster_update_rd.shtml|archive-date=24 जून 2013|accessdate=21 जून 2013|url-status=live}}</ref> == महिमा व इतिहास == [[File:Kedarnath temple 1880's.jpg|thumb|left| सन् 1880 के आसपास केदारनाथ मंदिर का चित्र]] केदारनाथ की बड़ी महिमा है। उत्तराखण्ड में [[बद्रीनाथ]] और केदारनाथ-ये दो प्रधान [[तीर्थ]] हैं, दोनो के दर्शनों का बड़ा ही माहात्म्य है। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किये बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, उसकी यात्रा निष्फल जाती है और केदारनाथ सहित नर-नारायण-मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश पूर्वक जीवन मुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है। इस मन्दिर की आयु के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, पर एक हजार वर्षों से केदारनाथ एक महत्वपूर्ण तीर्थ रहा है। [[राहुल सांकृत्यायन]] के अनुसार ये १२-१३वीं शताब्दी का है। ग्वालियर से मिली एक राजा भोज स्तुति के अनुसार उनका बनवाया हुआ है जो १०७६-९९ काल के थे।<ref name="भोज">ग्वालियर में पाये गये एक पत्थर का वर्णन करता है, जिसमें मालवा के राजा भोज की स्तुति है, जिनका शासन काल विक्रम-संवत १०७६-१०९९ रहा है और उन्होंने ही केदारेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया। एपीग्राफिक इंडिका, वोल्युम 1 में</ref> एक मान्यतानुसार वर्तमान मंदिर ८वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया जो पांडवों द्वारा द्वापर काल में बनाये गये पहले के मंदिर की बगल में है। मंदिर के बड़े धूसर रंग की सीढ़ियों पर पाली या ब्राह्मी लिपि में कुछ खुदा है, जिसे स्पष्ट जानना मुश्किल है। केदारनाथ जी के तीर्थ पुरोहित इस क्षेत्र के प्राचीन '''ब्राह्मण''' हैं, उनके पूर्वज ऋषि-मुनि भगवान नर-नारायण एवं दक्ष प्रजापति के समय से इस स्वयंभू ज्योतिर्लिंग में तीर्थयात्रियों की पूजा कराते आ रहे हैं। पांडवों के पोत्र राजा जन्मेजय ने उन्हें इस मंदिर में पूजा करने का अधिकार दिया था एवं यह सम्पूर्ण केदार क्षेत्र दान उन्हें स्वरुप दिया था। और वे तब से यहां पर तीर्थयात्रियों की पूजा कराते आ रहे हैं। शुक्ल यजुर्वेद अथवा बाजसेन संहिता का पाठ करने के कारण ये लोग शुक्ला अथवा बाजपेयी कहलाते हैं, शुक्ल यजुर्वेद की माध्यन्दिन शाखा के अनुयायी होने के कारण इनके गोत्र शांडिल्य, उपमन्यु, धौम्य आदि हैं। दक्षिण भारत से जंगम समुदाय के पुजारी मंदिर में शिव लिंग की पूजा करते हैं, जबकि यात्रियों की ओर से पूजा तीर्थ पुरोहित ब्राह्मणों द्वारा की जाती है। <ref name="भोज" /><ref name="गजेटियर"> वर्ष १८८२ में दी हिमालयन गजेटियर, वोल्युम III भाग II, ई.टी. एटकिंस</ref><ref>[http://www.younguttarakhand.com/community/b10/uttarakhand-ke-darshan/15/ केदारनाथ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304190509/http://www.younguttarakhand.com/community/b10/uttarakhand-ke-darshan/15/ |date=4 मार्च 2016 }}।"गढ़वाल सम्राट" पंवार विपिन चंद्र पाल सिंह</ref> मंदिर के सामने पुरोहितों की अपने यजमानों एवं अन्य यात्रियों के लिये पक्की धर्मशालाएं हैं, जबकि मंदिर के पुजारी एवं अन्य कर्मचारियों के भवन मंदिर के दक्षिण की ओर हैं । == मंदिर वास्तुशिल्प == [[चित्र:A Very Good Photo of Kedarnaath Bhairon Baba.jpg|पाठ=|दाएँ|250x250पिक्सेल|भैरव नाथ जी]] यह मन्दिर एक छह फीट ऊँचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मन्दिर में मुख्य भाग मण्डप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। मन्दिर का निर्माण किसने कराया, इसका कोई प्रामाणिक उल्लेख नहीं मिलता है, कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण पांडवो ने किया था, तत्पश्चात उनके पौत्र महाराजा जन्मेजय ने करवाया था। आठवीं सदी में इस मंदिर का जीर्णोद्धार [[आदि शंकराचार्य|आदि गुरु शंकराचार्य]] ने करवाया था। मन्दिर को तीन भागों में बांटा जा सकता है १.गर्भ गृह , २.मध्यभाग  ३. सभा मण्डप । गर्भ गृह के मध्य में भगवान श्री केदारेश्वर जी का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थित है ''जिसके अग्र भाग पर गणेश जी की आकृति और साथ ही माँ पार्वती का श्री यंत्र विद्यमान है । ज्योतिर्लिंग पर प्राकृतिक यगयोपवित और ज्योतिर्लिंग के पृष्ठ भाग पर प्राकृतिक स्फटिक माला को आसानी से देखा जा सकता है ।श्री केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग में नव लिंगाकार विग्रह विधमान है इस कारण इस ज्योतिर्लिंग को नव लिंग केदार भी कहा जाता है स्थानीय लोक गीतों से इसकी पुष्टि होती है ।'' श्री केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के चारों ओर विशालकाय चार स्तंभ विद्यमान है जिनको चारों वेदों का धोतक माना जाता है , जिन पर विशालकाय कमलनुमा मन्दिर की छत टिकी हुई है । ज्योतिर्लिंग के पश्चिमी ओर एक अखंड दीपक है जो कई हजारों सालों से निरंतर जलता रहता है जिसकी हेर देख और निरन्तर जलते रहने की जिम्मेदारी पूर्व काल से तीर्थ पुरोहितों की है । गर्भ गृह की दीवारों पर सुन्दर आकर्षक फूलों और कलाकृतियों को उकर कर सजाया गया है । गर्भ गृह में स्थित चारों विशालकाय खंभों के पीछे से स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान श्री केदारेश्वर जी की परिक्रमा की जाती है । पूर्व काल में श्री केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के चारो ओर सुन्दर कटवे पत्थरों से निर्मित जलेरी बनाई गई थी । श्री योगेश जिन्दल, मैनेजिक डारेक्टर, काशी विश्वनाथ स्टील ,काशीपुर वालों ने मंदिर गर्भ गृह में आठ मिमी मोटी तांबे की नई जलेरी लगवाई थी (वर्ष 2003-04 )अब वतर्मान काल में जलेरी के साथ -साथ गर्भ गृह की दीवारों और मन्दिर के सभी दरवाजों को अपने तीर्थ पुरोहित की प्रेणना से किसी और दानी दाता द्वारा रजत (चाँदी) की करवा दी गई है । इसके गर्भगृह की अटारी पर सोने का मुलम्मा चढ़ा है। मन्दिर की पूजा श्री केदारनाथ द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक माना जाता है। प्रात:काल में शिव-पिण्ड को प्राकृतिक रूप से स्नान कराकर उस पर घी-लेपन किया जाता है। तत्पश्चात धूप-दीप जलाकर आरती उतारी जाती है। इस समय यात्री-गण मंदिर में प्रवेश कर पूजन कर सकते हैं, लेकिन संध्या के समय भगवान का श्रृंगार किया जाता है। उन्हें विविध प्रकार के चित्ताकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भक्तगण दूर से केवल इसका दर्शन ही कर सकते हैं। [[चित्र:Kedarnaath.jpg|पाठ=|दाएँ|350x350पिक्सेल|केदारनाथ जी]] == कथा == * इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का इतिहास संक्षेप में यह है कि हिमालय के केदार शृंग पर [[भगवान विष्णु]] के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर [[भगवान शंकर]] प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया। यह स्थल केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित हैं। * पंचकेदार की कथा ऐसी मानी जाती है कि [[महाभारत]] के युद्ध में विजयी होने पर [[पांडव]] भ्रातृहत्या के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे। इसके लिए वे [[भगवान शंकर]] का आशीर्वाद पाना चाहते थे, लेकिन वे उन लोगों से रुष्ट थे। [[भगवान शंकर]] के दर्शन के लिए [[पांडव]] [[काशी]] गए, पर वे उन्हें वहां नहीं मिले। वे लोग उन्हें खोजते हुए [[हिमालय]] तक आ पहुंचे। [[भगवान शंकर]] [[पांडव|पांडवों]] को दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए वे वहां से अंतध्र्यान हो कर केदार में जा बसे। दूसरी ओर, पांडव भी लगन के पक्के थे, वे उनका पीछा करते-करते केदार पहुंच ही गए। [[भगवान शंकर]] ने तब तक बैल का रूप धारण कर लिया और वे अन्य पशुओं में जा मिले। पांडवों को संदेह हो गया था। अत: [[भीम]] ने अपना विशाल रूप धारण कर दो पहाडों पर पैर फैला दिया। अन्य सब गाय-बैल तो निकल गए, पर शंकर जी रूपी बैल पैर के नीचे से जाने को तैयार नहीं हुए। भीम बलपूर्वक इस बैल पर झपटे, लेकिन बैल भूमि में अंतर्ध्यान होने लगा। तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया। भगवान शंकर पांडवों की भक्ति, दृढ संकल्प देख कर प्रसन्न हो गए। उन्होंने तत्काल दर्शन देकर पांडवों को पाप मुक्त कर दिया। उसी समय से भगवान शंकर बैल की पीठ की आकृति-पिंड के रूप में श्री केदारनाथ में पूजे जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर बैल के रूप में अंतर्ध्यान हुए, तो उनके धड़ से ऊपर का भाग [[काठमाण्डू]] में प्रकट हुआ। अब वहां [[पशुपतिनाथ]] का [[पशुपतिनाथ मन्दिर (नेपाल)|प्रसिद्ध मंदिर]] है। शिव की भुजाएं [[तुंगनाथ]] में, मुख [[रुद्रनाथ]] में, नाभि मद्महेश्वर में और जटा [[कल्पेश्वर]] में प्रकट हुए। इसलिए इन चार स्थानों सहित श्री केदारनाथ को पंचकेदार कहा जाता है। यहां शिवजी के भव्य मंदिर बने हुए हैं। == स्थिति == {{पंचकेदार}} चौरीबारी हिमनद के कुंड से निकलती मंदाकिनी नदी के समीप, केदारनाथ पर्वत शिखर के पाद में, कत्यूरी शैली द्वारा निर्मित, विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर (३,५६२ मीटर) की ऊँचाई पर अवस्थित है। इसे १००० वर्ष से भी पूर्व का निर्मित माना जाता है। जनश्रुति है कि इसका निर्माण पांडवों या उनके वंशज जन्मेजय द्वारा करवाया गया था। साथ ही यह भी प्रचलित है कि मंदिर का जीर्णोद्धार जगद्गुरु [[आदि शंकराचार्य]]<ref>{{cite web | url = http://gov.ua.nic.in/uttaranchaltourism/districts/uttarkashi/Kedarnath.html | title = उत्तराखण्ड सरकार तंत्रजाल | accessdate = १० अप्रैल २००७ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080610074948/http://gov.ua.nic.in/uttaranchaltourism/districts/uttarkashi/Kedarnath.html | archive-date = 10 जून 2008 | url-status = dead }}</ref> ने करवाया था। मंदिर के पृष्ठभाग में शंकराचार्य जी की समाधि है। [[राहुल सांकृत्यायन]] द्वारा इस मंदिर का निर्माणकाल १०वीं व १२वीं शताब्दी के मध्य बताया गया है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत व आकर्षक नमूना है। मंदिर के गर्भ गृह में नुकीली चट्टान भगवान शिव के सदाशिव रूप में पूजी जाती है। केदारनाथ मंदिर के कपाट [[मेष]] [[संक्रांति]] से पंद्रह दिन पूर्व खुलते हैं और [[अगहन]] [[संक्रांति]] के निकट बलराज की रात्रि चारों पहर की पूजा और भइया दूज के दिन, प्रातः चार बजे, श्री केदार को घृत कमल व वस्त्रादि की समाधि के साथ ही, कपाट बंद हो जाते हैं। केदारनाथ के निकट ही गाँधी सरोवर व [[वासुकीताल]] हैं। केदारनाथ पहुँचने के लिए, [[रुद्रप्रयाग]] से [[गुप्तकाशी]] होकर, २० किलोमीटर आगे गौरीकुंड तक, मोटरमार्ग से और १४ किलोमीटर की यात्रा, मध्यम व तीव्र ढाल से होकर गुज़रनेवाले, पैदल मार्ग द्वारा करनी पड़ती है। मंदिर [[मंदाकिनी]] के घाट पर बना हुआ हैं भीतर घारे अन्धकार रहता है और दीपक के सहारे ही शंकर जी के दर्शन होते हैं। शिवलिंग स्वयंभू है। सम्मुख की ओर यात्री जल-पुष्पादि चढ़ाते हैं और दूसरी ओर भगवान को घृत अर्पित कर बाँह भरकर मिलते हैं, मूर्ति चार हाथ लम्बी और डेढ़ हाथ मोटी है। मंदिर के जगमोहन में द्रौपदी सहित पाँच पाण्डवों की विशाल मूर्तियाँ हैं। मंदिर के पीछे कई कुण्ड हैं, जिनमें आचमन तथा तर्पण किया जा सकता है।<ref>{{cite web | url = http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/kedarnath/kedarnath1.htm | title = हिमालये तु केदार | accessdate = २८ जुलाई २००८ | archive-url = https://web.archive.org/web/20080724074517/http://abhivyakti-hindi.org/paryatan/kedarnath/kedarnath1.htm | archive-date = 24 जुलाई 2008 | url-status = dead }}</ref> == केदारनाथ यात्रा == केदारनाथ धाम की यात्रा उत्तराखंड की पवित्र [[छोटा चार धाम]] यात्रा के महत्वपूर्ण चार मंदिरों में से एक है। छोटा चार धाम यात्रा हर वर्ष आयोजित की जाती है। केदारनाथ यात्रा के अलावा अन्य मदिर [[बद्रीनाथ मन्दिर|बद्रीनाथ]], [[गंगोत्री]], और [[यमुनोत्री]] हैं। केदारनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए हर वर्ष मदिर के खुलने की तिथि तय की जाती है। मंदिर के खुलने की तिथि हिंदू पंचांग की गणना के बाद ऊखीमठ में स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारियों द्वारा तय की जाती है। केदारनाथ मंदिर की उद्घाटन तिथि अक्षय तृतीया के शुभ दिन और महा शिवरात्रि पर हर साल घोषित की जाती है। और केदारनाथ मंदिर की समापन तिथि हर वर्ष नवंबर के आसपास दिवाली त्योहार के बाद भाई दूज के दिन होती है। इसके बाद मंदिर के द्वार शीत काल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/religion/religious-places/kedarnath-dham-holy-shrine-doors-opened-today-check-other-details/articleshow/109997597.cms|title=Kedarnath Dham: Holy shrine doors opened today, check other details|date=2024-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-09-19|language=en|trans-title=केदारनाथ धाम: पवित्र धाम के दरवाजे आज खुले, अन्य जानकारी देखें|issn=0971-8257}}</ref> == दर्शन का समय == * केदारनाथ जी का मन्दिर आम दर्शनार्थियों के लिए प्रात: 6:00 बजे खुलता है। * दोपहर तीन से पाँच बजे तक विशेष पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मन्दिर बन्द कर दिया जाता है। * पुन: शाम 5 बजे जनता के दर्शन हेतु मन्दिर खोला जाता है। * पाँच मुख वाली भगवान शिव जी की प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 बजे से 8:30 बजे तक नियमित आरती होती है। * रात्रि 8:30 बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मन्दिर बन्द कर दिया जाता है। * शीतकाल में केदारघाटी बर्फ़ से ढँक जाती है। यद्यपि केदारनाथ-मन्दिर के खोलने और बन्द करने का मुहूर्त निकाला जाता है, किन्तु यह सामान्यत: नवम्बर माह की 15 तारीख से पूर्व (वृश्चिक संक्रान्ति से दो दिन पूर्व) बन्द हो जाता है और छ: माह *बाद अर्थात वैशाखी (13-14 अप्रैल) के बाद कपाट खुलता है। * ऐसी स्थिति में केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ‘उखीमठ’ में लाया जाता हैं। इसी प्रतिमा की पूजा यहाँ भी रावल जी करते हैं। * केदारनाथ में जनता शुल्क जमा कराकर रसीद प्राप्त करती है और उसके अनुसार ही वह मन्दिर की पूजा-आरती कराती है अथवा भोग-प्रसाद ग्रहण करती है। === पूजा का क्रम === भगवान की पूजाओं के क्रम में प्रात:कालिक पूजा, महाभिषेक पूजा, अभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजन, अष्टोपचार पूजन, सम्पूर्ण आरती, पाण्डव पूजा, गणेश पूजा, श्री भैरव पूजा, पार्वती जी की पूजा, शिव सहस्त्रनाम आदि प्रमुख हैं। मन्दिर-समिति द्वारा केदारनाथ मन्दिर में पूजा कराने हेतु जनता से जो दक्षिणा (शुल्क) लिया जाता है, उसमें समिति समय-समय पर परिर्वतन भी करती है। == केदारनाथ से बद्रीनाथ कैसे जाते हैं? == केदारनाथ से बद्रीनाथ की दूरी लगभग 245 किलोमीटर है। 245 किलोमीटर की दूरी में केदारनाथ से गौरीकुंड का 18 किलोमीटर का पैदल ट्रेक भी शामिल है। गौरीकुंड से 5 किलोमीटर की दूरी पर सोनप्रयाग जगह है जहाँ सभी वाहनों की पार्किंग होती है। सोनप्रयाग (केदारनाथ) से बद्रीनाथ की सड़क मार्ग दूरी तय करने में लगभग 7 से 8 घंटे का समय लग जाता है। केदारनाथ से बद्रीनाथ जाने के दो सड़क मार्ग हैं। बद्रीनाथ जाने के लिए केदारनाथ के पास फाटा, गुप्तकाशी या सिरसी हेलिपैड से हेलीकाप्टर भी बुक किया जा सकता है। <ref>{{cite news |last= Dobhal |first= Ashish |date= 2022-05-02 |title= केदारनाथ से बद्रीनाथ की दूरी और जाने का सही रास्ता |url= https://www.pahadiglimpse.com/kedarnath-to-badrinath-distance.html |work= Pahadi Glimpse}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[धाम]] * [[छोटा चार धाम]] * [[पंच केदार]] * [[बद्रीनाथ मन्दिर]] * [[केदारनाथ (फिल्म)]] == सन्दर्भ == <references/> === टीका टिप्पणी === &nbsp;&nbsp;&nbsp;'''क.'''&nbsp;&nbsp;&nbsp; {{Note_label|चारधाम|क|none}} हिन्दुओं के चार धाम हैं १.बद्रीनाथ, २.द्वारका, ३. जगन्नाथ पुरी, ५. रामेश्वरम &nbsp;&nbsp;&nbsp;'''ख.'''&nbsp;&nbsp;&nbsp; {{Note_label|पंचकेदार|ख|none}} हिन्दुओं के पंचकेदार हैं- १.केदारनाथ २.रूद्रनाथ ३.कल्पेश्वर ४.मध्येश्वर ५.तुंगनाथ == बाहरी कड़ियां == * [https://web.archive.org/web/20190628121045/http://www.jyotirlinga.com/ भगवान शिव के दर्शन और तीर्थ, उनकी वीडियो और चित्रों के संग] * [https://web.archive.org/web/20080515133508/http://www.badarikedar.org/ आधिकारिक साइट] * [https://web.archive.org/web/20080616090722/http://migranov.ru/kedarnath.php केदारनाथ] * [http://sss.vn.ua/india/uttarakhand/kedarnath/indexen.htm केदारनाथ मंदिर और निकटवर्ती अन्य तीर्थों के चित्र] * [https://web.archive.org/web/20100131124049/http://kedarnath.bharat.ru/eng/ केदारनाथ और वहां तक की सड़क मार्ग के अनेकों चित्र] {{उत्तराखण्ड के हिन्दू मन्दिर}} {{हिन्दू तीर्थ}} [[श्रेणी:शिव मंदिर]] [[श्रेणी:पंच केदार]] [[श्रेणी:ज्योतिर्लिंग]] [[श्रेणी:भारत के शिव मन्दिर]] [[श्रेणी:राजा भोज]] dd6t6874arp4tkhoagwd6nom87plltt निम्बार्क कोट 0 49744 6536733 6535966 2026-04-06T02:35:20Z Aniruddha025 580663 /* शोभायात्रा */ संख्या सही की है 6536733 wikitext text/x-wiki [[चित्र:निम्बार्क कोट, वृंदावन का मुख्य दरवाजा.jpg|अंगूठाकार|300px|निम्बार्क कोट का मुख्य द्वार]] '''निम्बार्क कोट''' [[उत्तर प्रदेश]] के [[वृन्दावन]] में स्थित [[निम्बार्क सम्प्रदाय]] का एक प्रमुख [[मंदिर]] है। यद्यपि आकार में यह एक सामान्य इमारत जैसा है, लेकिन वृन्दावन की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में इसका एक विशिष्ट स्थान है। 'निम्बार्क कोट' शब्द में 'निम्बार्क' संप्रदाय के मुख्य आचार्य को दर्शाता है, जबकि 'कोट' का अर्थ किला या वह स्थान है जहाँ आचार्य विराजमान हों। यह मंदिर विशेष रूप से 'निम्बार्क जयन्ती' के अवसर पर आयोजित होने वाले एक मासीय समारोह के लिए जाना जाता है, जो यहाँ सन् 1924 से मनाया जा रहा है।<ref>{{Cite web |url=https://archive.org/details/shri-nimbarka-vratotsav-nirnaya-2080/page/n9/mode/1up |title=निम्बार्क पीठ के व्रतोत्सव निर्णय में कार्तिक-मार्गशीष मास |publisher=Archive.org |language=hi}}</ref><ref>{{Cite web |url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/index.php/saints/ |title=संत सेक्शन में निम्बार्क कोट का उल्लेख |website=Nimbark Social Welfare}}</ref> सन् 1923 तक यह उत्सव प्रेम गली स्थित 'उत्सव कुंज' में मनाया जाता था। वर्ष 2025 में इस उत्सव का 182वाँ आयोजन किया गया। इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण वैष्णव संगीत शैली का 'समाज गायन' है। निम्बार्क सम्प्रदाय, वैष्णव धर्म के चार प्रमुख सम्प्रदायों में से एक है, जिसे 'सनकादिक' या 'कुमार सम्प्रदाय' भी कहा जाता है। वैष्णव वे हैं जो विष्णु या उनके अवतारों (विशेषकर राम और कृष्ण) की अपने इष्ट के रूप में उपासना करते हैं। (अन्य तीन प्रमुख वैष्णव सम्प्रदाय हैं: श्री सम्प्रदाय, ब्रह्म या गौड़ीय सम्प्रदाय, और रुद्र या विष्णुस्वामी सम्प्रदाय)। ब्रज की परंपरा में निम्बार्क संप्रदाय के तीन प्रमुख आचार्य माने जाते हैं: आद्याचार्य (हंस एवं सनकादिक), प्रवर्तकाचार्य (निम्बार्क) और रसिकोपासनाचार्य (हरिव्यास देवाचार्य)। निम्बार्क संप्रदाय में 12 'द्वारे' (शाखाएँ) हैं, जिनमें से निम्बार्क कोट मंदिर 'स्वयंभूराम देवाचार्य द्वारे' की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। हरिव्यास देवाचार्य के 12 प्रमुख शिष्यों में स्वयंभूराम देवाचार्य सबसे वरिष्ठ माने जाते हैं। संप्रदाय की मुख्य पीठ राजस्थान के किशनगढ़ स्थित सलेमाबाद (निम्बार्क तीर्थ) में है। [[चित्र:Nimbark Koat.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट के गर्भगृह में विराजमान ठाकुर श्रीराधा रमणलालजी]] स्वयं निम्बार्काचार्य राधा सर्वेश्वर शरण देवाचार्य (श्रीजी महाराज) निम्बार्क कोट तीन बार आए थे। अपने एक प्रवास के दौरान उन्होंने उल्लेख किया था कि उन्होंने पुराना बजाजा के ऋषि बाल्मीकि स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी और वे अक्सर निम्बार्क कोट के प्रांगण में खेला करते थे। सुदामा कुटी की स्थापना करने वाले बाबा सुदामा दास जब रामानंदाचार्य जयंती के लिए मधुकरी (भिक्षा) लेने आते थे, तो वे विश्राम के लिए निम्बार्क कोट के जगमोहन में ही रुकते थे। गीता के मर्मज्ञ संत स्वामी रामसुखदास अपने प्रवचनों में उल्लेख किया करते थे कि यदि वे एकादशी के दिन वृंदावन में होते, तो मधुकरी के लिए निम्बार्क कोट ही जाते क्योंकि वहाँ फलाहारी मधुकरी उपलब्ध होती थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, यहाँ गोस्वामी तुलसीदास द्वारा उपयोग किया गया एक ऐतिहासिक लोटा भी संरक्षित है, जिसमें संतों का चरणामृत रखा जाता है, जिसकी श्रद्धालुओं में अपार महिमा है।<ref>{{Cite AV media |url=https://www.facebook.com/groups/surshyamofficial/posts/2281732275629854/ |title=बाबा राजेंद्र दास जी महाराज निम्बार्क कोट में मौजूद तुलसीदास जी के लोटे का प्रसंग |medium=Video |publisher=Facebook}}</ref> वर्तमान निम्बार्काचार्य श्यामा शरण देवाचार्य भी निम्बार्क कोट पधार चुके हैं। ''नोट: निम्बार्क कोट नाम का एक अन्य मंदिर अजमेर (राजस्थान) में पृथ्वीराज रोड पर भी स्थित है। वृंदावन के इतिहास में 'हरि' नाम वाले तीन प्रमुख आचार्य हुए हैं, जिन्हें 'हरित्रयी' कहा जाता है—स्वामी हरिदास (बांके बिहारी के प्राकट्यकर्ता), हित हरिवंश (राधाबल्लभ के प्राकट्यकर्ता) और हरिराम व्यास (जुगल किशोर के प्राकट्यकर्ता)।'' [[चित्र:Vrindavanank.jpg|अंगूठाकार]] == ब्रज के साहित्य में निम्बार्क कोट == सन् 1968 में प्रकाशित प्रभुदयाल मीतल की पुस्तक ''ब्रज के धर्म संप्रदायों का इतिहास'' (पृष्ठ 550) में निम्बार्क कोट का उल्लेख करते हुए लिखा गया है: "निम्बार्क कोट—यह देवस्थल वृंदावन की छीपी गली में है। इसका निर्माण आचार्य स्वयंभूराम जी की शिष्य परंपरा के बालगोविंद दास जी ने कराया था। उन्होंने सर्वप्रथम आचार्य पंचायतन की स्थापना वृंदावन में की थी। यहाँ निम्बार्कोत्सव बड़े समारोह पूर्वक होता है।"<ref>{{Cite book |title=ब्रज के धर्म संप्रदायों का इतिहास |author=प्रभुदायल मीतल |year=1968 |page=550 |url=https://ia601509.us.archive.org/13/items/in.ernet.dli.2015.401809/2015.401809.Brij-Ke.pdf}}</ref><ref>{{Cite book |title=ब्रजमंडल परिक्रमा |author=अनुरागी महाराज |year=2009 |pages=278-279}}</ref> [[चित्र:Krishna Living God Of Braj.jpg|अंगूठाकार]] इसी पुस्तक के पृष्ठ 539 व 540 पर गोपाल दास, हंसदास और बालगोविंद दास का परिचय दिया गया है: * '''गोपालदास ‘उत्सवी’:''' इनका जन्म संवत 1872 (कुछ स्रोतों में 1868) के आसपास एक गौड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। चार धाम की यात्रा के बाद वे कामवन के गोपाल मंदिर में रहे और बाद में वृंदावन आ गए। उन्होंने निम्बार्क संप्रदाय के आचार्यों की जयंती मनाना और बड़े स्तर पर रास और भागवत-कथा का आयोजन प्रारंभ किया। उनके शिष्यों में हंसदास और ब्रह्मचारी राधेश्याम प्रमुख थे। संवत 1952 में उनका निधन हुआ। गोपालदास भक्तमाल की कथा अत्यंत सरसता से करते थे। भक्तमाल की कथा की जो वर्तमान शैली है, उसका सूत्रपात इन्होंने ही किया था। * '''हंसदास:''' संवत 1916 में लखनऊ के काकोरी में जन्मे हंसदास, महात्मा गोपालदास के शिष्य थे। वे भागवत के प्रसिद्ध वक्ता थे। सन् 1937 में वृंदावन के निम्बार्क कोट परिसर में उनका देहावसान हुआ।<ref>{{Cite AV media |title=श्री हंसदास जी एवं गोपाली बाई जी का चरित्र - भक्तमाल कथा |url=https://www.youtube.com/watch?v=gmBMH3140kw&t=5s |publisher=YouTube}}</ref> उन्होंने 'सिद्धांत रत्नांजलि', 'कृष्ण सिद्धांत सार', 'राधा रहस्य प्रकाशिका',<ref>{{Cite book |title=राधा रहस्य प्रकाशिका |author=बाबा हंसदास |url=https://archive.org/details/ShriRadhaRahashyaPrakashika}}</ref> 'निम्बार्क प्रभा',<ref>{{Cite book |title=निम्बार्क प्रभा |author=बाबा हंसदास |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.343527/page/n1/mode/2up}}</ref> और 'गोदनावारी लीला' जैसे ग्रंथ लिखे। 'गोदनावारी लीला' निम्बार्क कोट के सालाना महोत्सव में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित होती है। उन्होंने केशव काश्मीरी भट्‌ट देवाचार्य का उत्सव भी शुरू किया। * '''बालगोविंददास:''' ये हंसदास के विरक्त शिष्य थे। उन्होंने ही वृंदावन की नाज मंडी में मंदिर बनवाकर आचार्य पंचायतन की प्रतिष्ठा की और निम्बार्क कोट का निर्माण कराया था।<ref>{{Cite book |title=निम्बार्क संप्रदाय और उसके कृष्ण भक्त हिंदी कवि |author=नारायण दत्त शर्मा |year=1964}}</ref> उनके द्वारा कथा-कीर्तन और उत्सव नियमित रूप से किए जाते थे। [[चित्र:Nimbarkkoat Shriharinam.jpg|अंगूठाकार|श्रीहरिनाम पत्रिका के कवर पेज पर निम्बार्क कोट]] अवध बिहारी लाल कपूर द्वारा लिखित पुस्तक ''ब्रज के भक्त'' (भाग-2, पृष्ठ 13 व 86) में भी इन संतों का विस्तृत वर्णन मिलता है।<ref>{{Cite book |title=ब्रज के भक्त (भाग-2) |author=अवध बिहारी लाल कपूर |url=https://dn790006.ca.archive.org/0/items/HindiBook-brijKeBhaktaByA.b.l.kapoorpart-2/HindiBook-brijKeBhaktaByA.b.l.kapoorpart-2.pdf}}</ref> इस मंदिर की परंपराओं पर अमर उजाला (2014), दैनिक जागरण (2014) और इंडिया टुडे (2015) में भी लेख प्रकाशित हो चुके हैं।<ref>{{Cite web |title=निम्बार्क संप्रदाय का मूक साक्षी है वृंदावन का निम्बार्क कोट मंदिर |url=http://nimbarkkoat.blogspot.com/2016/05/blog-post.html |publisher=Blogspot Archives}}</ref> 2016 की नोटबंदी के दौरान इस उत्सव पर पड़े प्रभाव को 'इंडियन एक्सप्रेस' ने भी कवर किया था।<ref>{{Cite news |title=Demonetisation: Donations dry up at temples, dargahs |url=https://indianexpress.com/article/india/india-news-india/demonetisation-uttar-pradesh-donations-dry-up-at-temples-dargahs-anger-over-media-lies-4397392/ |newspaper=The Indian Express |date=2016}}</ref> सन् 2011 में वृंदावन के हरिनाम प्रेम (बाग बुंदेला) से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका श्रीहरिनाम के 465वें अंक (जनवरी, 2011) में कवर स्टोरी के रूप में निम्बार्क कोट को कवर किया और कवर पेज पर विराजमान ठाकुर श्री राधा रमण लालजी की तस्वीर ली। वृंदावन के श्रीजी कुंज से प्रकाशित होने वाली शोध पत्रिका श्रीसर्वेश्वर के श्रीवृंदावनांक में निम्बार्क कोट का जिक्र तीन बार है। पृष्ठ संख्या 349-350 पर आचार्यों गोपालदास जी महाराज, हंसदास जी महाराज और बालगोविंद दास जी महाराज का जिक्र है तो वृंदावन के प्रमुख मंदिरों के विवरण में निम्बार्क कोट का विवरण है और सालभर के उत्सवों के प्रसंग में निम्बार्क आचार्य वृंद जयंती महोत्सव का जिक्र है। प्रो. गोविंद शर्मा के संपादकत्व में प्रकाशित श्रीवृंदावनांक को वृंदावन का प्रामाणिक कोश माना जाता है। डी आनंद की लिखी 1992 में दिल्ली के अभिनव पब्लिकेशंस से प्रकाशित कॉफीटेबल बुक कृष्ण द लिविंग गॉड ऑफ ब्रज में पेज-108-109 पर निम्बार्क कोट के गर्भगृह में विराजमान ठाकुर श्री राधारमण लालजी की तस्वीर दो पन्नों में विस्तार से मंदिर के ब्यौरे के साथ है। == मंदिर का विवरण == [[चित्र:राधारमण लालजी.jpg|अंगूठाकार|राधारमण लालजी]] मंदिर के गर्भगृह के मध्य सिंहासन पर श्रीराधारमणलालजी का विग्रह विराजमान है। युगल सरकार के दोनों ओर निम्बार्क आचार्य पंचायतन स्थित हैं। दाहिनी ओर आद्य आचार्य हंस भगवान, उनके मानस पुत्र (सनक, सनंदन, सनातन व सनतकुमार) और शिष्य नारद जी की प्रतिमाएँ हैं। बाईं ओर निम्बार्क भगवान व उनके शिष्य निवासाचार्य प्रतिष्ठित हैं। [[चित्र:निम्बार्क कोट मंदिर का आंगन.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट मंदिर का आंगन]] गर्भगृह के आगे जगमोहन और एक खुला प्रांगण है, जिनका फर्श काले-सफेद संगमरमर का बना है। जगमोहन में मंदिर के संस्थापक बाल गोविंद दास व उनके छोटे भाई हरिदास श्रृंगारी के चित्रपट स्थापित हैं। गर्भगृह के बाहर चरणपादुकाएं बनी हैं, जहाँ गोपालदास और हंसदास के चित्र हैं। मंदिर में कई प्राचीन चित्र भी मौजूद हैं, जिनमें निम्बार्क भगवान का सर्वेश्वर भगवान की आराधना करते हुए रंगीन चित्र विशेष है। गर्भगृह में राधारमण लाल जी के ठीक पीछे दो सौ साल पुरानी चित्र श्रृंखलाएं हैं, जिनमें निम्बार्क भगवान के विभिन्न रूपों का चित्रण है। [[चित्र:निम्बार्क कोट.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट का आंगन]] वास्तुशिल्प की दृष्टि से गर्भगृह में सिंहासन, दीवारें व फर्श संगमरमर के हैं। जगमोहन में इटेलियन टाइल्स का प्रयोग हुआ है। प्रांगण के तीनों ओर बरामदे हैं और राजस्थानी पत्थर के नक्काशीदार खंभे लगे हैं। पश्चिमी ओर एक अतिरिक्त प्रांगण है जहाँ मंदिर का रसोईघर स्थित है। ''विशेष: वृंदावन के तीन प्रमुख मंदिरों में राधारमण लालजी विराजमान हैं—सप्तदेवालयों में से एक राधारमण मंदिर, शाहजी मंदिर, और निम्बार्क कोट।'' == मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख उत्सव == === श्री निम्बार्क आचार्य वृंद जयंती महोत्सव === [[चित्र:निम्बार्काचार्य वृंद जयंती महोत्सव के शताब्दी आयोजन का चित्र.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट में 1944 में आयोजित शताब्दी समारोह का दृश्य]] यह मंदिर का सबसे बड़ा वार्षिक उत्सव है, जो कार्तिक कृष्ण पंचमी से मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पंचमी तक पूरे एक महीने चलता है। इस दौरान संप्रदाय के कई प्रमुख आचार्यों की जयंती मनाई जाती है: बालगोविंद दास की जयंती (कार्तिक कृष्ण पंचमी), महावाणीकार हरिव्यास देवाचार्य जयंती (कार्तिक कृष्ण द्वादशी), स्वयंभूराम देवाचार्य जयंती (कार्तिक शुक्ल अष्टमी), हंस भगवान व सनकादिक भगवान जयंती (अक्षय नवमी), माधव भट्‌टाचार्य जयंती (देवउठनी एकादशी), और निम्बार्क भगवान की जयंती (पूर्णिमा)। इस उत्सव में दीपावली, अन्नकूट और गोपाष्टमी जैसे पर्व भी शामिल होते हैं। प्रतिदिन शाम को आचार्यों की चरित्र कथा होती है, समाज गायन किया जाता है और नित्य रासलीलाएं आयोजित होती हैं। पूर्णिमा के दिन निम्बार्क भगवान का पंचामृत अभिषेक होता है और एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाती है। हर दिन मंदिर के जगमोहन में एक सिंहासन पर गोपालदास के सेव्य गोपालजी (जिन्हें महंतजी पुकारा जाता है) और निम्बार्क भगवान के चित्रपट विराजमान होते हैं。<ref>{{Cite web |url=https://vrindavantoday.in/nimbark-temples-of-chhipi-gali-nimbark-kot-ajab-manohar-lal/ |title=छीपी गली का निम्बार्क कोट मंदिर |website=Vrindavan Today}}</ref> समाज गायन में 'चलसखी', 'सहज सुख सजनी', 'हेली' जैसे पद गाए जाते हैं और अंत में "सेवों श्री राधारमण उदार" तथा "जय जय श्री राधारमण विराजैं" का गायन होता है। रासलीला में सबसे विशेष 'गोदनावारी लीला' है। भंडारे में द्वादशी को बूंदी, नवमी को मोहनथार, एकादशी को समा की खीर और निम्बार्क भगवान के छठी उत्सव में लड्डू का भोग लगता है। भंडारे की विशेष 'गड्‌ड सब्जी' (मिली-जुली) और लड्डू स्थानीय स्तर पर काफी प्रसिद्ध हैं।<ref>{{Cite book |title=IAVRI Bulletin, Issue 1-12 |publisher=International Association of the Vrindavan Research Institute |year=1975}}</ref> === कार्तिक उत्सव की रासलीलाओं का क्रम === * कार्तिक कृष्ण द्वादशी (धनतेरस): वंशी चोरी लीला * कार्तिक कृष्ण चौदस: केवट लीला * कार्तिक अमावस (दीपावली): चौसर लीला<ref>{{Cite AV media |title=निम्बार्क कोट में दीपावली को होने वाली चौसर लीला |url=https://www.youtube.com/watch?v=ZOQ3fmJZlBE |publisher=YouTube}}</ref> * कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा: मूदरी चोरी लीला * कार्तिक शुक्ल द्वितीया: पनघट लीला * कार्तिक शुक्ल तृतीया: ब्रह्मचारी लीला * कार्तिक शुक्ल चतुर्थी: विदुषी लीला * कार्तिक शुक्ल पंचमी: शंकर लीला * कार्तिक शुक्ल छठी: पांडे लीला * कार्तिक शुक्ल सप्तमी: राधा प्राकटय लीला * कार्तिक शुक्ल अष्टमी (गोपाष्टमी): गोचारण लीला * कार्तिक शुक्ल नवमी (अक्षय नवमी): जोगन लीला * कार्तिक शुक्ल दशमी: श्याम सगाई लीला * कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी): वरुण लीला * कार्तिक शुक्ल द्वादशी: मान लीला * कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी: माखन चोरी लीला * कार्तिक शुक्ल चर्तुदशी: गोदनावारी लीला * कार्तिक पूर्णिमा: सहज सुख के साथ केवल स्वरूप दर्शन * अग्रहायण कृष्ण प्रतिपदा: शोभायात्रा * अग्रहायण कृष्ण द्वितीया: राजदान लीला किसी वर्ष तिथि बढ़ने पर चंद खिलौना, मणि खंभ और सुदामा लीला भी की जाती हैं। पिछले 30 वर्ष से स्वामी अमीचंद शर्मा की मंडली रासलीला करती है। अतीत में दामोदरजी, उदय राम, कन्हैयालाल, शिवदयाल-गिर्राज की मंडलियों ने भी यहाँ रासलीलाएं की हैं।<ref>{{Cite web |title=Nimbarka Acharya-Vrinda Jayanti Mahotsava |url=https://a108.net/blogs/entry/1690-nimbarka-acharya-vrinda-jayanti-mahotsava-to-commence-from-monday/ |publisher=A108.net International Vaishnavas Portal}}</ref> === भंडारे में कीर्तन व जयकारे === बड़े भंडारे के दिन जब ठाकुरजी को भोग लगता है तब समाजी मंदिर में भोग के पद गाते हैं (जैसे 'भोजन कुंज में आए दोउ')। पंगत बैठने और परोसगारी के दौरान साधु-संतों द्वारा निम्नलिखित कीर्तन किए जाते हैं: <blockquote> सीता राम सीता राम सीता राम जय सियावर राम। राधे श्याम राधे श्याम राधे श्याम जय श्यामा श्याम।<br> सिया हरिनारायण गोविंदे, भज रामा कृष्ण गोविंदे। बोलो संतो हरि हरि, मुख पर मुरली अधर धरी।<br> गोविंद गोविंद गाओगे, प्रेम पदारथ पाओगे। गोविंद नाम बिसारोगे, जीती बाजी हारोगे।<br> राम राम भज बारंबारा, चक्र सुदर्शन है रखवारा।<br> जय जय गोपी जय जय ग्वाल, जय जय सदा बिहारी लाल। गले में तुलसी, मुख में राम, हृदय विराजत शालिगराम। </blockquote> जब पंगत पर पूर्ण भोजन आ जाता है, तब एक विस्तृत जयकारा लगाया जाता है: <blockquote> राम कृष्णदेव की जय, राधासर्वेश्वर की जय, राधामाधव की जय, राधा रमण लालजी की जय, आनंद मनोहर की जय, रूप मनोहर की जय, वृंदावनचंद्र की जय, गोवर्धन चंद्र की जय, गोविंद देव की जय, मदनमोहन की जय, गोपीनाथ की जय, गोकुल चंद्रमा की जय, बांके बिहारी लाल की जय, वृंदावन बिहारी लाल की जय, राधाबल्लभ लाल की जय, जुगल किशोर की जय, रसिक बिहारी की जय, बिहारी बिहारिन की जय, कुंज बिहारी लाल की जय, गिरिराज धरण की जय, राधा श्याम सुंदर की जय, राधा दामोदर की जय, लाड़ली लाल की जय, रास बिहारी लाल की जय, यशोदा नंदन की जय, नंद नंदन की जय, नंदगांव बरसाना की जय, विलासगढ़ की जय, नीम गांव की जय, मानसी गंगा की जय, वृंदावन धाम की जय, मधुपुरी अवधपुरी की जय, काशी प्रयाग की जय, गंगा-जमुना की जय, चारों धाम की जय, चार संप्रदाय की जय, हंस भगवान की जय, सनकादिक भगवान की जय, नारद भगवान की जय, निम्बार्क भगवान की जय, निवासाचार्य की जय, द्वादश आचार्यन की जय (विश्वाचार्य, पुरुषोत्तामाचार्य, विलासाचार्य, स्वरूपाचार्य, माधवाचार्य, बलभद्राचार्य, पद्माचार्य, श्यामाचार्य, गोपालाचार्य, कृपाचार्य, देवाचार्य), अष्टादश भट्‌ट आचार्यन की जय (सुंदर भट्ट, पद्मनाभ भट्ट, उपेंद्र भट्ट, रामचंद्र भट्ट, वामन भट्ट, कृष्णभट्ट, पद्माकर भट्ट, वाण भट्ट, भूरि भट्ट, माधव भट्ट, श्याम भट्ट, गोपाल भट्ट, बलभद्र भट्ट, गोपीनाथ भट्ट, केशव भट्ट, गांगल भट्ट, केशव कश्मीरी भट्ट, श्रीभट्ट, हरिव्यास देवाचार्य, स्वयंभूराम देवाचार्य, कर्णहर देव, नारायण देव, हरिदेव, श्याम देव, श्याम दामोदर देव, श्रुति देव, सहजराम देव, रामदेव, ज्ञानदेव, वृंदावन देव, रामशरण देव, धर्म देव, सेवादास जी), महंत गोपाल दास जी की जय, बाबा हंसदास जी की जय, बाबा बालगोविंद दास जी की जय, श्रृंगारी जी की जय, मैया जी श्यामप्यारी की जय, भैया बांके बिहारी की जय, अनंत कोटि वैष्णवन की जय, स्थान पुरुष की जय, रसोइया पुजारी की जय, कोठारी भंडारी की जय, सब सती सेवकन की जय, उनके माता पिता की जय, उनके बाल गोपाल की जय, उनके समस्त परिकर की जय, अपने-अपने गुरु गोविंद की जय। </blockquote> अंत में सभी एक साथ दोहा पढ़ते हैं: <blockquote>बोलना हरे...राम कहें सुख ऊपजे, कृष्ण कहें दुःख जाय। महिमा महाप्रसाद की, पावो प्रीति लगाय।</blockquote> पंगत के मध्य और अंत में "जय जय श्री राधे श्याम" का जयकारा लगाया जाता है।<ref>{{Cite AV media |title=पंगत की धुन सुनाते बाबा राजेंद्र दास |url=https://www.youtube.com/watch?v=8lwyyGVEd8I |publisher=YouTube}}</ref> === शोभायात्रा === निम्बार्क कोट की शोभायात्रा विगत 182 वर्षों से निकलने वाली वृंदावन की सबसे पुरानी शोभायात्राओं में से एक है। इसमें मुख्यरूप से दो डोले होते हैं: एक रासबिहारी के स्वरूप का और दूसरा गोपालजी व निम्बार्क भगवान के चित्रपट का। शोभायात्रा में वृंदावन के सभी अखाड़ों के निशान, कीर्तन मंडली, बैंडबाजे और ताशे शामिल होते हैं। यह छीपी गली से शुरू होकर किशोरपुरा, बिहारीजी, अठखंभा, लोई बाजार, निधिवन, केशीघाट, वंशीवट होते हुए सुदामाकुटी पहुँचती है और फिर ज्ञानगूदड़ी, गोपीनाथ बाजार, चुंगी चौराहा और बाजाजा होते हुए वापस मंदिर लौटती है। इस यात्रा में करीब 6 घंटे लगते हैं। === अन्य उत्सव === मंदिर में नारद जयंती, निवासाचार्य जयंती (बसंत पंचमी), केशवकाश्मीरी भट्‌टदेवाचार्य जयंती, हंसदास जी जयंती, होली, रामनवमी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, हरिदास श्रृंगारी जी जयंती, गुरु पूर्णिमा, सावन झूला उत्सव, शरदोत्सव और अक्षय तृतीया का पाटोत्सव भी विशेष रूप से मनाया जाता है। मंदिर में नियमित रूप से गोपाल सहस्रनाम, विष्णु सहस्रनाम, महावाणी, युगल शतक, रामचरित मानस व वाल्मीकि रामायण का पाठ तथा श्रीमद्भागवत व भक्तमाल की कथाएँ आयोजित होती हैं। === वार्षिक उत्सव कलैंडर === {| class="wikitable" |- ! तिथि !! उत्सव |- | चैत्र शुक्ल प्रतिपदा || संवत्सर (नव वर्ष) |- | चैत्र शुक्ल नवमी || रामनवमी |- | वैशाख शुक्ल तृतीया || अक्षय तृतीया (श्री राधारमणलालजी का पाटोत्सव) |- | वैशाख शुक्ल चतुर्दशी || नृसिंह जयंती चतुर्दशी उत्सव |- | ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्थी || श्रीकेशव काश्मीरी भट्‌टाचार्य पाटोत्सव |- | आषाढ़ कृष्ण तीज || श्री हंसदास जी का निकुंज प्राप्ति उत्सव |- | आषाढ़ पूर्णिमा || गुरु पूर्णिमा उत्सव |- | श्रावण शुक्ल तीज || हरियाली तीज |- | श्रावण शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा || झूला उत्सव |- | भाद्रपद कृष्ण अष्टमी || ठाकुरजी का जन्मोत्सव |- | भाद्रपद कृष्ण नवमी || नंदोत्सव |- | भाद्रपद शुक्ल अष्टमी || श्रीजी (राधा) का जन्मोत्सव |- | भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी || अनंत चतुर्दशी (गुरु महाराज जी का निकुंज प्राप्ति उत्सव) |- | आश्विन कृष्ण त्रयोदशी || मैयाजी का निकुंज प्राप्ति उत्सव |- | आश्विन पूर्णिमा || शरद पूर्णिमा |- | कार्तिक कृष्ण पंचमी || गुरु महाराज जयंती, निम्बार्क महोत्सव का शुभारंभ |- | कार्तिक कृष्ण द्वादशी || श्रीहरिव्यास देवाचार्य जयंती (कथा, समाज व रासलीला आरंभ) |- | कार्तिक अमावस्या || दीपावली उत्सव |- | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा || गोवर्धन पूजा, अन्नकूट |- | कार्तिक शुक्ल अष्टमी || गोपाष्टमी, स्वयंभूराम देवाचार्य जयंती |- | कार्तिक शुक्ल नवमी || अक्षय नवमी (हंस व सनकादिक भगवान जयंती) |- | कार्तिक पूर्णिमा || निम्बार्क भगवान जयंती |- | मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण प्रतिपदा || निम्बार्क भगवान की शोभायात्रा |- | मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी || छठी उत्सव, वैष्णव साधु सेवा बड़ा भंडारा |- | मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशी || नारद भगवान जयंती |- | पौष पूर्णिमा || श्रृंगारीजी का उत्सव |- | माघ शुक्ल पंचमी || वसंत पंचमी, निवासाचार्य जयंती |- | फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा || होली उत्सव |} == एकादशी की परिपाटी == निम्बार्क कोट में एकादशी व अन्य व्रत निम्बार्की सिद्धांत ‘कपालवेध’ के आधार पर मनाए जाते हैं। निम्बार्क संप्रदाय में व्रत-उपवास के लिए 'उदयव्यापिनी तिथि' को स्वीकार किया गया है, अर्थात् जिस तिथि में सूर्योदय होगा, पूरे दिन वही तिथि मानी जाएगी। दिनभर में 60 घटी (घड़ी) होते हैं। यदि दशमी तिथि मध्य रात्रि के बाद 45 घटी तक रहे और उसके बाद एकादशी आए, तो उस दिन एकादशी का स्पर्श (स्पर्श वेध) माना जाता है। ऐसी स्थिति में एकादशी छोड़कर अगले दिन द्वादशी को व्रत करने का विधान है। रात्रि के अर्धभाग के इस वेध को मानने के कारण ही इसे 'कपालवेध सिद्धांत' कहा जाता है। जब एकादशी पूर्व तिथि (दशमी) से जुड़ी हो तो उसे 'विद्धा' और जब अगली तिथि (द्वादशी) से जुड़ी हो तो उसे 'शुद्धा एकादशी' कहते हैं। आचार्यों का निर्देश विद्धा को त्यागकर शुद्धा एकादशी का व्रत करने का है। विशेष योग होने पर महाद्वादशी का व्रत किया जाता है। नारद पुराण के अनुसार त्रिस्पृशा, उन्मीलनी, वंजुलिनी, पक्षवर्धिनी, जया, विजया, जयंती और अपराजिता महाद्वादशी प्रमुख हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार कुछ विशेष ग्रह स्थितियों में शुद्धा एकादशी छोड़कर भी द्वादशी का ही व्रत किया जाता है। === एकादशी का व्रत विधान === वैष्णवों की सगुणोपासना में एकादशी के दिन ठाकुरजी को फलाहारी अर्पण किया जाता है। इस दिन पूर्ण निराहार रहने की बाध्यता नहीं है, किंतु भोजन में अन्न (गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, दाल, चावल) वर्जित है। फलाहार में फल (केला, सेब, अनार आदि) और कंद (आलू, शकरकंद) लिए जा सकते हैं। तरबूज, गाजर, पालक, मटर, गोभी आदि वर्जित हैं। वैष्णवों के लिए प्याज-लहसुन पूर्णतः निषिद्ध है। दूध, दही, पनीर, काजू, बादाम, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा और समा के चावल उपयोग किए जा सकते हैं। साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक और लाल मिर्च के स्थान पर काली मिर्च का उपयोग होता है। हल्दी, हींग, राई और सरसों का तेल इस दिन वर्जित माने जाते हैं। == मंदिर की स्थिति == [[चित्र:निम्बार्क कोट का दक्षिणी दरवाजा.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट का दक्षिणी दरवाजा]] वृन्दावन में निम्बार्क कोट पहुँचना अत्यंत सुगम है। बनखंडी चौराहे से पूर्व दिशा में जाने वाली गली में दाहिनी ओर पाँचवाँ दरवाजा इसी मंदिर का उत्तरी द्वार है। मंदिर का एक दक्षिणी द्वार पुराना बजाजा में है, जो ऋषि बाल्मीकि स्कूल और सब-स्टेशन नं 3 के ठीक सामने है। नेशनल हाइवे 2 (दिल्ली-आगरा) से छटीकरा मोड होते हुए या यमुना एक्सप्रेसवे से वृंदावन कट के जरिए यहाँ पहुँचा जा सकता है। == मंदिर की दिनचर्या और स्तुति == दैनिक रूप से मंदिर में तीन प्रमुख आरतियाँ होती हैं—सुबह मंगला आरती, श्रृंगार आरती और शाम को संध्या आरती। दिन में भोग और रात्रि में शयन के समय धूप आरती होती है। आरतियों में विजय घंट बजाए जाते हैं। श्रृंगार आरती में संक्षिप्त और संध्या आरती में संपूर्ण निम्बार्क स्तुति गाई जाती है। === मंदिर की संध्याकालीन आरती की स्तुति === [[चित्र:निम्बार्क भगवान.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क भगवान]] <poem> श्री हंस च सनत्कुमारप्रभ्रतीन वीणाधरम नारदं। निम्बादित्यगुरुं च द्वादश गुरुं श्री निवासादिकान॥ वन्दे सुन्दर भट्ट देशिक मुखान्वस्विंदु संख्या युतान। श्री व्यासाद्धरिमध्यगा च परितः सर्वान्गुरुन्सादरम॥ हे निम्बार्क दयानिधे गुणनिधे हे भक्त चिंतामने। हे आचार्य शिरोमने मुनि गणेराम्रग्यपादाम्बुजम॥ हे सृष्टिस्थितिपालनप्रभवन हे नाथ मायाधिपे। हे गोवर्धन कन्दरालयविभो मां पाहि सर्वेश्वर। कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षः स्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वर मौक्तिकं करतले वेणु करे कंकणं॥ सर्वांगे हरीचन्दनं सुललितं कंठे च मक्तावली। गोपस्त्रीपरिवेष्ठितो विजयते गोपालचूरामणि॥ फुल्लेंदीवर कान्ति मिंदुवदनं वर्हावतंसन प्रियं। श्री वत्सांगमुदार कौस्तुभधरं पीताम्बर सुन्दरम॥ गोपीनां नयनोत्पलार्ची त तनुं गोगोपसंघाव्रतम। गोविन्दं कलवेणु वादनपरं दिव्यांगभुषम भजे॥ हे राधे वृष भानु भूपतनये हे पूर्ण चंद्रानने। हे कांते कमनीय कोकिलरवे ब्रन्दावनाधीश्वरी॥ हे मत्प्रानपरायने च रसिके हे सर्वयुथेश्वरी। आगत्य त्वरितं प्रतप्त मणिशं मां दीनमानन्दय॥ हे राधे वृषभानुभूपतनये सर्वेश्वरी राधिके। हे कृष्णानन पंकजभ्रमरिके कृष्ण प्रिये माधवी॥ हे वृन्दावननागरी गुणगुरो दामोदरप्रेयसी। हे हे श्री मलललितादिक प्रियसखी प्रनाधिके पाहि माम॥ शिन्जनू पुरपादपदमयुगलामा हंसीं गतिं विभ्रतीम। चंचतखंजनमंजुलोचनयुगां पोनोल्लसत्कंधराम॥ शोभित कांचनकंकनद्युति मिलतपानौ चलच्चामरम। कुरवाणाम हिरराधिकोपरि सदा श्री रंगदेवीं भजे॥ श्री रंगादिसुदेविका च ललिता वैशाखिका चम्पिका। चित्र तंग सुखिंदुलेखकपरा चाष्टो प्रधानाप्रिया॥ चान्या सन्ति प्रियात्प्रिया लघुतमानित्ये च नैमित्तके। वन्दे त्वच चरणारविन्दनितरां दासा वयं श्रद्धया॥ स्वभावतोपास्तसमस्तदोष मशेष कल्याण गुनेकराशिम। व्यूहांगिनं ब्रह्म परंवरेण्यम ध्यायेम कृष्णं कमलेक्षण हरिम॥ अंगे तुवामे ब्रिषभानुजा मुदाविराजमानामनुरूपसौभागाम। सखी सह्त्रै परिसेविताम सदा स्मरेम देवीं सकलेष्टकामदाम॥ नान्यागति कृष्णपदारबिन्दात संद्रेश्यते ब्रह्मशिवादिवंदितात। भक्तेछ्योपत्सुचिन्त्त्यविग्रहादचिन्त्यशक्तेरविचिन्त्यशासनात॥ लोकत्रये यान्यसदीहितानी तान्येव सर्वाणि मया कृतानि। तदीय पाकावसरम विसोढुमसक्नुवन देवमुपैमी नाथ॥ वशीकृतिं यान्ति न हीन्द्रियानी बुद्धिर्नशुद्धिम समुपैति तस्मात्। न साधनं मेस्ती तव प्रसादे दयालुभावेन बिना हरे ते॥ न धर्मनिष्ठोस्मी नचात्मवेदी न भक्तित्मा स्त्वच्चारानार्विंदे। अकिन्चनोनन्यगति शरण्यं त्वत्पादमूलं शरणं प्रपद्ये॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥ </poem> === कीर्तन === <poem> '''दोहा''' पराभक्ति रति वर्द्धनी, स्याम सब सुख दैनि। रसिक मुकुटमनि राधिके, जै नव नीरज नैन।। '''स्तोत्र''' जयति जय राधा रसिकमनि मुकुट मन-हरनी त्रिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 1 ।। जयति गोरी नव किसोरी सकल सुख सीमा श्रिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 2 ।। जयति रति रस वर्द्धनी अति अद्भुता सदया हिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 3 ।। जयति आनंद कंदनी जगबंदनी बर बदनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 4 ।। जयति स्यामा अमित नामा वेद बिधि निर्वाचिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 5 ।। जयति रास-बिलासिनी कल कला कोटि प्रकाशिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 6 ।। जयति बिबिध बिहार कवनी रसिक रवनी सुभ धिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 7 ।। जयति चंचल चारु लोचनि दिव्य दुकुला भरनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 8 ।। जयति प्रेमा प्रेम सीमा कोकिला कल बैनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 9 ।। जयति कंचन दिव्य अंगी नवल नीरज नैनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 10 ।। जयति बल्लभ बल्लभा आनंद कलभा तरुनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 11 ।। जयति नागरि गुन उजागरि प्रान धन मन हरनिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 12 ।। जयति नौतन नित्य लीला नित्य धाम निवासिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 13 ।। जयति गुण माधूर्य भूपा सिद्धि रूपा शक्तिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 14 ।। जयति सुद्ध स्वभाव सीला स्यामला सुकुमारिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 15 ।। जयति जस जग प्रचुर परिकर हरिप्रिया जीवनि जिये। पराभक्ति प्रदायिनी करि कृपा करुणानिधि प्रिये।। 16 ।। [[चित्र:Nimbark koat rare picture.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट मंदिर के चित्र]] '''दोहा''' नव-नव रंगि त्रिभंगि जै, स्याम सुअंगी स्याम। जै राधे जै हरिप्रिये, श्री राधे सुख धाम।। '''स्तोत्र''' जै राधे जै राधे राधे जै राधे जै श्री राधे। जै कृष्ण जै कृष्ण कृष्ण जै कृष्ण जै श्री कृष्ण। 1 । स्याम गोरी नित्य किसोरी प्रीतम जोरी श्री राधे। रसिक रसीलो छैल छबीलो गुन गरबीलो श्री कृष्ण। 2 । रासविहारनि रसबिसतारनि पिय उर धारनि श्री राधे। नव-नव रंगी नवल त्रिभंगी स्याम सुअंगी श्री कृष्ण। 3 । प्रान पियारी रूप उज्यारी अति सुकुंमारी श्री राधे। मैंन मनोहर महा मोदकर सुंदर बर तर श्री कृष्ण। 4 । सोभा सेंनी मोहा मेंनी कोकिल बेंनी श्री राधे। कीरतिवंता कामिनिकंता श्री भगवंता श्री कृष्ण। 5 । चंदा-वदनी कुंदा रदनी सोभा सदनी श्री राधे। परम उदारा प्रभा अपारा अति सुकुंवारा श्री कृष्ण। 6 । हंसागवनी राजति रवनी क्रीड़ा कवनी श्री राधे। रूपा रसाला नैंन बिसाला परम कृपाला श्री कृष्ण। 7 । कंचनबेली रति रस रेली अति अलबेली श्री राधे। सब सुख सागर सब गुन आगर रूप उजागर श्री कृष्ण। 8 । रवनी रम्या तर तर तम्या गुण आगम्या श्री राधे। धाम निवासी प्रभा प्रकासी सहज सुहासी श्री कृष्ण। 9 । शक्तयाह्लादनि अति प्रियवादनि उर उन्मादनि श्री राधे। अंग अंग टोना सरस सलोना सुभग सुठोना श्री कृष्ण। 10 । राधा नामिनि गुण अभिरामिनि हरिप्रिया स्वामिनि श्री राधे। हरे हरे हरि हरे हरे हरि हरे हरे हरि श्री कृष्ण। 11 । अंत में: गोविंद जय जय गोपाल जय जय, राधारमण हरि गोविंद जय जय। </poem> == निम्बार्की हरिव्यासी परंपरा में विशेष == * '''इष्टदेव:''' सर्वेश्वर भगवान श्री कृष्ण * '''कुलदेव:''' रुक्मिणी माता * '''शाखा:''' हंस * '''आचार्य:''' सनकादि * '''मुनि:''' नारद * '''वेद:''' सामवेद * '''आहार:''' हरिनाम * '''अखाड़ा:''' निर्मोही * '''देवता:''' गरुड़ * '''धाम:''' बद्रिकाश्रम * '''माला:''' तुलसी * '''तिलक:''' हरि मंदिर श्याम बिंदी * '''द्वारा:''' स्वयंभूराम (शोभूराम) * '''गोत्र:''' अच्युत * '''गोपाल मंत्र:''' क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजन बल्लभाय स्वाहा: == वैष्णव समाज गायन == कार्तिक मास में निम्बार्क कोट में हर शाम होने वाला समाज गायन महोत्सव का विशेष आकर्षण है। निम्बार्क संप्रदाय में समाज गायन की परंपरा 15वीं-16वीं सदी से मानी जाती है। निम्बार्क कोट में यह परंपरा लगभग 180 वर्ष पुरानी है। यहाँ इसकी शुरुआत स्वामी गोपाल दास ने 1843 ई. में की थी।<ref>{{Cite web |title=डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की बदौलत हो रहा ब्रज संगीत का सुखद पुनरुद्धार |url=https://www.devdiscourse.com/article/arts/278282-braj-sangeet-witnessing-happy-revival-thanks-to-digital-platforms |website=Devdiscourse}}</ref> समाज गायन प्राचीन भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक वैष्णवी शैली है, जिसमें संत समूह आचार्यों की रचित वाणी पदों का गायन करते हैं। [[चित्र:समाज गायन.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क कोट में समाज गायन]] समाज गायन के समय साधु-संत दो दलों (मुखिया दल और झेला दल) में विभक्त होकर आमने-सामने बैठते हैं। मुखिया दल दाईं ओर और झेला दल बाईं ओर होता है। बीच में ऊँची चौकी पर वाणी (समाज शृंखला) रखी जाती है। गायन की शुरुआत मंगलाचरण (बड़ा मंगल व छोटा मंगल) से होती है, जिसमें सूहा विलावल राग का प्रयोग होता है। इसके उपरांत श्रीभट्ट की रचना 'युगल शतक'<ref>{{Cite book |title=युगल शतक |publisher=श्रीजी कुंज |url=https://archive.org/details/LfFC_yugal-shatak-by-bhatta-devacharya-sarveshvar-press/page/n11/mode/1up}}</ref> और हरिव्यास देवाचार्य की 'महावाणी'<ref>{{Cite book |title=महावाणी |url=https://archive.org/details/MahaVaani}}</ref> के पदों का गायन होता है। बधाइयाँ 'हंसवंश यश सागर'<ref>{{Cite book |title=हंसवंश यश सागर |url=https://www.nimbarksocialwelfare.com/nimbark-books/Shri-Hansha-Vansha-Yasha-Sagar.pdf}}</ref> से गाई जाती हैं। निम्बार्क समाज गायन में सूहा विलावल, यमन कल्याण, देव गंधार, काफी, मल्हार, बिहाग, भूपाली आदि अनेक रागों और चौताल, झप, कहरवा, दादरा आदि तालों का प्रयोग होता है।<ref>{{Cite book |title=मध्ययुगीन वैष्णव संप्रदायों में संगीत |author=विजयेंद्र स्नातक, राकेशबाला सक्सेना |year=1990}}</ref> निम्बार्क कोट घराने की समाज गायन में 'दंडक गायन' (झप ताल में लंबे कवित्त) की एक विशेष शैली है, जो कार्तिक शुक्ल दशमी और एकादशी को गाई जाती है। === महावाणी की हस्तलिखित प्रति === निम्बार्क कोट में 'महावाणी' की एक हस्तलिखित प्रति उपलब्ध है, जो संवत 1824 में रूपनगर में जोशी मोतीराम द्वारा लिखी गई थी। यह वृंदावन में प्राप्त महावाणी की सबसे पुरानी प्रतियों में से एक है।<ref>{{Cite book |title=हरिव्यास देवाचार्य एवं महावाणी |author=राजेंद्र प्रसाद गौतम |year=1974 |pages=80-81 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Śrīharivyāsadevācārya_aura_Mahāvā/ZLNichRlNJEC}}</ref> == निम्बार्क कोट मंदिर की आचार्य परंपरा == # '''हंस भगवान व सनकादिक:''' हंस भगवान निम्बार्क संप्रदाय के आद्य आचार्य हैं, जो विष्णु के अवतार माने जाते हैं। धार्मिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा के मानस पुत्रों (सनकादिकों) को सृष्टि से विरक्त कर भगवत चिंतन की ओर मोड़ने के लिए भगवान ने हंस रूप धारण किया था। [[चित्र:हंस भगवान व सनकादिक भगवान.jpg|अंगूठाकार|हंस भगवान व सनकादिक]] # '''नारद भगवान:''' पौराणिक कथाओं में नारद को अनेक युग पुरुषों (ध्रुव, प्रह्लाद, वेदव्यास, निम्बार्काचार्य) का गुरु माना गया है। # '''निम्बार्काचार्य:''' राधाकृष्ण की युगलोपासना के प्रणेता। इनका जन्म मूंगी पैठण (महाराष्ट्र) में हुआ था। इन्होंने ब्रह्मसूत्र पर 'वेदांत पारिजात सौरभ' टीका लिखी और 'द्वैताद्वैत' या 'भेदाभेद' दर्शन प्रस्तुत किया। संप्रदाय की मान्यताओं के अनुसार इन्हें सुदर्शन चक्र का अवतार माना जाता है। [[चित्र:भगवान निम्बार्काचार्य.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्काचार्य]] [[चित्र:भगवान निम्बार्क के अष्ट स्वरूप.jpg|अंगूठाकार|निम्बार्क के अष्ट स्वरूप]] # '''निवासाचार्य:''' निम्बार्काचार्य के पट्‌ट शिष्य, जिन्हें पांचजन्य शंख का अवतार माना जाता है। इन्होंने 'वेदांत कौस्तुभ' की रचना की। # '''विश्वाचार्य:''' निवासाचार्य के शिष्य। किंवदंतियों के अनुसार, निवासाचार्य ने इनसे 11 दार्शनिक प्रश्न किए थे, जिनके उत्तर के बाद वे उनके शिष्य बन गए। # '''पुरुषोत्तामाचार्य''' # '''विलासाचार्य''' # '''स्वरूपाचार्य''' # '''माधवाचार्य''' # '''बलभद्राचार्य''' # '''पद्माचार्य''' # '''श्यामाचार्य''' # '''गोपालाचार्य''' # '''कृपाचार्य''' # '''देवाचार्य''' # '''सुंदर भट्ट''' # '''पद्मनाभ भट्ट देवाचार्य''' # '''उपेंद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''रामचंद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''वामन भट्ट देवाचार्य''' # '''कृष्णभट्ट देवाचार्य''' # '''पद्माकर भट्ट देवाचार्य''' # '''वाण भट्ट देवाचार्य''' # '''भूरि भट्ट देवाचार्य''' # '''माधव भट्ट देवाचार्य''' # '''श्याम भट्ट देवाचार्य''' # '''गोपाल भट्ट देवाचार्य''' # '''बलभद्र भट्ट देवाचार्य''' # '''गोपीनाथ भट्ट देवाचार्य''' # '''केशव भट्ट देवाचार्य''' # '''गांगल भट्ट देवाचार्य''' # '''केशव काश्मीरी भट्‌टाचार्य:''' निम्बार्क परंपरा में 30वें आचार्य। इन्होंने कश्मीर में 'कौस्तुभ प्रभा' और 'क्रम दीपिका' जैसे ग्रंथ लिखे। # '''श्रीभट्ट देवाचार्य:''' 'युगल शतक' के रचयिता। # '''हरिव्यास देवाचार्य:''' 'महावाणी' के प्रणेता। # '''स्वयंभूराम देवाचार्य:''' निम्बार्क कोट के द्वाराचार्य। हरिव्यास देवाचार्य के 12 प्रधान शिष्यों में सबसे वरिष्ठ। # '''कर्णहर देव''' # '''नारायण देव''' # '''हरिदेव''' # '''श्याम देव''' # '''श्याम दामोदर देव''' # '''श्रुति देव''' # '''सहजराम देव''' # '''रामदेव''' # '''ज्ञानदेव''' # '''वृंदावन देव''' # '''रामशरण देव''' # '''धर्म देव''' # '''सेवादास''' # '''बाबा गोपालदास महाराज:''' सेवादास के शिष्य, जिन्होंने 1843 में वृंदावन में निम्बार्क महोत्सव प्रारंभ किया और 'उत्सवी बाबा' के नाम से विख्यात हुए।<ref>{{Cite AV media |title=मेरो वृंदावन चैनल पर निम्बार्क कोट के दर्शन |url=https://www.facebook.com/reel/2063201144459760 |publisher=Facebook}}</ref> # '''बाबा हंसदास:''' गोपालदास के शिष्य। 1895 से 1937 तक निम्बार्क जयंती उत्सव का संचालन किया। # '''बाबा बाल गोविंद दास:''' हंसदास के विरक्त शिष्य, जिन्होंने निम्बार्क कोट का निर्माण कराया। # '''हरिदास श्रृंगारी:''' बालगोविंद दास के छोटे भाई, जो 18 वर्ष की आयु में वृंदावन आ गए थे। राधारमण लालजी की अष्टयाम सेवा में समर्पित रहे। # '''माता श्याम प्यारी:''' हरिदास श्रृंगारी की धर्मपत्नी। 1950 से 1983 तक निम्बार्क कोट का संचालन किया। # '''वृंदावन बिहारी:''' हरिदास श्रृंगारी के पुत्र। वर्तमान में निम्बार्क कोट के सेवायत। === वृंदावन बिहारी === [[चित्र:Vrindavan Bihari.jpg|अंगूठाकार|वृंदावन बिहारी]] श्री वृंदावन बिहारी शर्मा (आयु 88 वर्ष) वर्तमान में निम्बार्क कोट के व्यवस्थापक और सेवायत हैं। वे 14-15 वर्ष की आयु से ही मंदिर की परंपराओं का संचालन कर रहे हैं। समाज गायन, नित्य रासलीला और हस्तलिखित साहित्य के संरक्षण में उनका विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपने पैतृक मंदिर में एक मासीय निम्बार्क जयंती आयोजन में समाज गायन की प्राचीन शैली और रासलीलाओं के क्रम को व्यवस्थित किया। 1970 के दशक में उन्होंने वृंदावन शोध संस्थान में ब्रज की हस्तलिखित पांडुलिपियों (संस्कृत, हिंदी, बंगाली, गुजराती, मराठी, उर्दू) की विस्तृत कैटलॉगिंग का कार्य किया। उन्होंने यमुना के संरक्षण पर शोधपरक पुस्तक ‘यमुना एवं यमुनाष्टक’<ref>{{Cite book |title=यमुना एवं यमुनाष्टक |author=वृंदावन बिहारी |year=1990 |url=https://www.google.co.in/books/edition/Yamun%C4%81_eva%E1%B9%83_yamun%C4%81sh%E1%B9%ADaka/mY8XAAAAIAAJ}}</ref><ref>{{Cite web |title=वृंदावन शोध संस्थान की प्रकाशन सूची |url=https://vribharat.org/hi/prakashan/}}</ref> लिखी है। उनके लिखे गए दो पद आज भी समाज गायन के अंत में गाए जाते हैं: <poem> '''पहला पद:''' सेवों श्री राधा रमण उदार। जिन श्री गोपाल दास जू सेव्यो, गोपाल रूप उर धार। श्री हंस दास जू सेवत मानसी, युगल रूप उर सार। तिनकी कृपा श्री गोविंद बाल जू, दिए सिंहासन बैठार।। '''दूसरा पद:''' जै जै श्री राधा रमण विराजै। निज लावण्य रूप निधि संग लिए, कोटि काम छवि लाजैं। कुंज कुंज मिल बिलसत हुलसत, सेवत सहचरि संग समाजैं। श्री वृंदावन श्री हितु श्री हरिप्रिया, चोज मनोजन काजैं।। </poem> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मन्दिर]] [[श्रेणी:वृन्दावन के मन्दिर]] [[श्रेणी:निम्बार्क सम्प्रदाय]] [[श्रेणी:हिन्दू मन्दिर]] icvz8cvvouetsdlcnuwgwe81j136n2e छत्तीसगढ़ के उत्सव 0 61018 6536734 6536421 2026-04-06T02:38:46Z QuestForTrueTruth 852879 भोरमदेव महोत्सव के बारे में जानकारी दी गई है। 6536734 wikitext text/x-wiki '''[[छत्तीसगढ़]]''' [[भारत]] में सांस्कृतिक और पारंपरिक प्रथाओं की एक विविध श्रृंखला को अपनाता है। राज्य सरकार द्वारा जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सावधानीपूर्वक कदम उठाए जाने के कारण, ये त्योहार और परंपराएँ प्राचीन काल से मनाई जाती रही हैं, जो इस क्षेत्र की गहरी जड़ें जमाए विरासत को दर्शाती हैं। [[छत्तीसगढ़]] में बहुत से त्यौहार, पर्व व उत्सव मनाए जाते हैं। == प्रमुख त्योहार == === बस्तर दशहरा === [[File:Bastar Dusshera Unexplored Bastar.jpg|thumb|right|250px|बस्तर दशहरा जुलूस के दौरान उपयोग किया जाने वाला विशाल लकड़ी का रथ।]] बस्तर दशहरा बस्तर संभाग का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जो आदिवासी समुदायों की सर्वोच्च देवी दंतेश्वरी को समर्पित है। 75 दिनों की अवधि में मनाया जाने वाला यह त्योहार दुनिया के सबसे लंबे त्योहारों में से एक माना जाता है।<ref name="BastarDussehra_Utsav">{{cite web |title=Bastar Dussehra - Jagdalpur, Chhattisgarh |url=https://utsav.gov.in/view-event/bastar-dussehra-jagdalpur-chhattisgarh-1 |publisher=Ministry of Tourism, Government of India |access-date=17 February 2026}}</ref> भारत भर में मनाए जाने वाले मानक [[दशहरा]] के विपरीत, जो [[रामायण|राम की रावण पर विजय]] के लिए मनाया जाता है, यह उत्सव स्थानीय देवताओं के समागम और जनजातीय अनुष्ठानों पर केंद्रित है, जिसकी शुरुआत 13वीं शताब्दी में राजा पुरुषोत्तम देव द्वारा की गई थी।<ref name="SahapediaDussehra">{{cite web |title=Bastaria Dussehra: A Coming Together of Deities |url=https://www.sahapedia.org/bastaria-dussehra-coming-together-of-deities |publisher=Sahapedia |access-date=17 February 2026}}</ref> === बस्तर लोक उत्सव === बस्तर लोक उत्सव छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। यह वर्षा ऋतु के बाद प्रतिवर्ष (आमतौर पर दिसंबर या जनवरी में) मनाया जाता है और इसमें दूरस्थ क्षेत्रों से विभिन्न जनजातीय समूहों की भागीदारी होती है।<ref name="BastarLokotsav_Wiki">{{cite web |title=Bastar Lokotsav: Cultural Extravaganza |url=https://en.wikipedia.org/wiki/Bastar_Lokotsav |access-date=17 February 2026}}</ref> इस समय के दौरान [[जगदलपुर]] में "बस्ता परब" नामक एक प्रमुख आयोजन किया जाता है, जिसमें जनजातीय गीत, नृत्य और दुर्लभ हस्तशिल्प प्रदर्शित किए जाते हैं।<ref name="BastarLokotsav_Wiki" /> === भोरमदेव महोत्सव === यह महोत्सव ऐतिहासिक [[भोरमदेव मंदिर]] परिसर में [[कबीरधाम जिला]] में आयोजित किया जाता है और यह भगवान शिव को समर्पित है। इसे सबसे पहले 14वीं शताब्दी में [[नागवंशी]] वंश के राजाओं द्वारा आयोजित किया गया था।<ref name="Bhoramdeo_Fest">{{cite web |url=https://www.chhattisgarhtours.com/bhoramdeo-festival.html |title=Bhoramdeo Festival of Chhattisgarh |access-date=17 February 2026}}</ref> यह महोत्सव मार्च के अंत में आयोजित होता है, जिसमें पूरे राज्य से लोक कलाकार आते हैं और पंथी तथा राउत नाचा जैसे पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं।<ref name="Bhoramdeo_Fest" /> === होली === जातीय उत्साह की अभिव्यक्ति का एक और उम्दा माध्यम है, छत्तीसगढ़ के अपने तीज-त्यौहार हैं। हिन्दुओं के त्यौहार ही प्रायः मानते हैं। अलबत्ता कुछेक त्यौहार जरुर ऐसे होते हैं जो खास महत्व लिए रहते हैं। इन्हीं में फागुन की मस्ती में डूबा होली विशेष त्यौहार है। होली देवार में काफी उमंग-हड़दंग के संग मनती है। इस दिन समूचा कुनबा महुये की मदमस्ती में मस्त हो जाता है। मांदर, ढोल मंजीरे के संग गीत भी गाये जाते है। होली पर किसी चिन्हित स्थान पर एकत्र होने का चलन है। इस रोज शुभ मुहुर्त देखकर बैगा अनुष्ठान करना है और उसकी अनुमति के उपरांत प्रतीकात्मक होली जलाई जाती है। वृद्ध-जवान और बच्चा मंडली भी मदिरा पीकर लोट-पोट होती है। === पोरा === देवारों में पोरा काफी महत्व है। अलबला तीजा नहीं मानते। सामान्यतः बहन को भाई जिस तरह अपने घर लाते हैं उस परंपरा की बजाय बहन ससुराल में रहकर ही तीजा मानती है। वहीं व्रत-उपवास आदि होता है। लेकिन वस्त्रादि उपहार स्वद्वप देने का कोई चलन नहीं है। पोरा में कुम्हारों से मिट्टी की कुछ वस्तुयें खरीदकर उसकी पूजा के बाद बलि दी जाती है। भादो के शुक्ल पक्ष में ठाकुर देव को भी ये लोग बड़ी आस्था से पूजते हैं और बलि के बाद प्रसाद बंटता है। === सकट === देवारों में सकट का अत्यधिक महत्वपूर्ण पर्व है। सकट में महिलायें अपने माता-पिता के घर आती है। उपवास रखा जाता है। सामूहिक भोज से उपवास तोड़ा जाता है। परिजन वस्त्र, श्रृंगार सामग्रियां अपनी कन्या को देते हैं। === हरेली === हरेली यद्यपि खेतिहर-समाज का पर्व है फिर भी इसके दूसरे स्वरुप यानी तंत्र मंत्र वाले हिस्से को देवारों का वर्ग मानता है। जिस तरह छत्तीसगढ़ के ग्राम्यांचलों में बुरी-बलाओं को बाहर ही रखने नीम की पत्तियों को लवय की तरह इस्तेमाल करते है। उसी तरह देवार भी नीम की डंगालों का सहारा लेते है। सुअर डेरा के बाहर नीम की पत्तियां खोंसी जाती हैं। अपने संगीतिक उपकरण को भी हरेली पर पूजते हैं। लेकिन व्यापक तौर पर हरेली का उत्सव नहीं मनता। [[चित्र:Hareli Festival.jpg|thumb|हरेली के अवसर पर नीम के साथ एक ग्रामीण]] === नृत्य-गान === देवारों की प्रामणिक पहचान उनका सांस्कृतिक ज्ञान हैं। जन-सामान्य में भी उनके इसी रूप की सर्वाधिक ख्याति हैं। इन्हें प्रतिष्ठा दिलवाने में गायन, वादन एवं नृत्य पर इनका अचूक अधिका माना गया हैं। इस जन्म-जात और असाधारण कला-ज्ञान के चलते हर हमेशा से देवार जीवंत बने हुए हैं। जीवन के प्रत्येक पल में गीत नृत्य की खनक दीवारों का जातीय गुण हैं। इनकी इसी विशेषता के दर्शन रोजमर्रा की दिनचर्या में सायंकाल के समय में डेरा में आसानी से कर सकते हैं। जीविकोपार्जन का एक ठोस माध्यम तो यह हैं ही, वाद्य, गायन एवं नर्तन इन तीन बिंदुओं के सहारे भी इनकी विशेषतायें समझी जा सकती है। सांगीतक भेद को आधार मानें तो रायपुरिहा और रतनपुरिहा देवारों की अलग-अलग पहचान हैं। जो इन्हें समझने में भी सहायक बनते हैं। === गोंचा महोत्सव === इसे रथ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, यह पुरी की [[रथ यात्रा]] के साथ मेल खाता है। यह "टुपकी" परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहां आदिवासी युवा बांस की नकली बंदूकों का उपयोग करके गोंचा फलों को बिना नुकसान पहुंचाने वाले प्रक्षेप्य के रूप में चलाते हैं।<ref name="Goncha_Utsav">{{cite web |title=Bastar Goncha Festival |url=https://utsav.gov.in/view-event/bastar-goncha-festival-2025 |publisher=Ministry of Tourism |access-date=17 February 2026}}</ref> === मड़ई उत्सव === [[गोंड जनजाति]] का एक महत्वपूर्ण त्योहार, मड़ई दिसंबर से मार्च तक मनाया जाता है। यह एक भ्रमणशील त्योहार है जो एक गांव से दूसरे गांव (बस्तर से शुरू होकर नारायणपुर और कांकेर की ओर बढ़ते हुए) तक जाता है, जहां भक्त स्थानीय अधिष्ठाता देवता की पूजा करते हैं।<ref name="Madai_Wiki">{{cite web |title=Madai Festival Traditions |url=https://en.wikipedia.org/wiki/Madai_Festival |access-date=17 February 2026}}</ref> === जनजातीय पांडुम === *'''बीजा पांडुम (प्रथम फल उत्सव):''' बस्तर क्षेत्र में एक वार्षिक अनुष्ठान, जहां जनजातीय समुदाय भरपूर फसल सुनिश्चित करने के लिए मौसम के पहले बीज देवताओं को अर्पित करते हैं।<ref name="BastarPandum">{{cite news |title=PM Modi lauds Bastar Pandum Festival |url=https://www.newsonair.gov.in/chhattisgarhs-bastar-pandum-festival-showcases-rich-tribal-culture-says-pm-modi/ |publisher=News On AIR |date=10 February 2026 |access-date=17 February 2026}}</ref> *'''माटी तिहार (पृथ्वी उत्सव):''' जिसे माटी पूजा के नाम से भी जाना जाता है, यह उत्सव धरती माता को समर्पित है। इस दिन जनजातियाँ अपने खेतों से दूर रहती हैं ताकि धरती को विश्राम मिल सके, और उसकी उर्वरता तथा अकाल से सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।<ref name="Bastariya_Mati">{{cite web |url=https://bastariya.com/festivals-in-bastar/ |title=Mati Tihaar (Earth Festival) in Bastar |publisher=Bastariya.com |access-date=17 February 2026}}</ref> == अन्य मेलों की सूची == *'''नारायणपुर मेला:''' नारायणपुर जिले में आयोजित एक प्रमुख मड़ई-शैली का मेला, जिसमें जनजातीय बाज़ार और अनुष्ठानों का प्रदर्शन किया जाता है।<ref name="Narayanpur_Mela">{{cite web |url=https://www.chhattisgarhtours.com/narayanpur-mela.html |title=Narayanpur Mela |access-date=17 February 2026}}</ref> *'''तीजा (तीज):''' एक मानसूनी पर्व जिसमें विवाहित महिलाएँ अपने पति के कल्याण के लिए कठोर निर्जला व्रत रखती हैं और देवी पार्वती को प्रार्थनाएँ अर्पित करती हैं।<ref name="Teej_ClubM">{{cite web |url=https://www.clubmahindra.com/blog/experience/everything-you-need-to-know-about-the-monsoon-festival-of-teej-5 |title=Significance of Teej in Central India |access-date=17 February 2026}}</ref> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:छत्तीसगढ़ के उत्सव]] 0gna3szolspizhgxzty9ims9qe8abhg अमेरिकी डॉलर 0 65430 6536638 6367084 2026-04-05T16:11:43Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 4 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536638 wikitext text/x-wiki {{Infobox currency|currency_name=अमेरिकी डॉलर|image_1=USDnotesNew.png|image_2=File:2014 ATB Quarter Obv.png|image_title_1=फेडरल रिज़र्व नोट|image_title_2=क्वॉर्टर (25 सेंट) सिक्का (सामने)|iso_code=USD|iso_number=840|iso_exponent=2|symbol=[[डॉलर|$]], US$|subunit_name_4=सेंट|subunit_name_3=निकल|subunit_name_2=डाइम|superunit_name_4=ग्रैंड|superunit_name_3=यून्यन|superunit_name_2=ईगल|subunit_ratio_5={{frac|1000}}|superunit_ratio_4=1000|subunit_ratio_4={{frac|100}}|subunit_ratio_3={{frac|20}}|subunit_ratio_2={{frac|10}}|subunit_ratio_1={{frac|4}}|superunit_ratio_3=100|superunit_ratio_2=10|superunit_ratio_1=4|subunit_name_1=क्वॉर्टर|superunit_name_1=स्टेला|subunit_name_5=मिल|symbol_subunit_4=¢|symbol_subunit_5=₥|issuing_authority_website={{URL|https://www.federalreserve.gov}}|printer_website={{URL|https://moneyfactory.gov}}|issuing_authority=[[फेडरल रिज़र्व सिस्टम]]|printer=उत्कीर्णन और मुद्रण ब्यूरो|mint=संयुक्त राज्य मिंट|mint_website={{URL|www.usmint.gov}}|frequently_used_banknotes=$1, $5, $10, $20, $50, $100|frequently_used_coins=1¢, 5¢, 10¢, 25¢|date_of_introduction={{Start date and age|1792|4|2}}|date_of_introduction_source=<ref>{{cite web |title=Coinage Act of 1792 |publisher=[[United States Congress]] |url = http://nesara.org/files/coinage_act_1792.pdf |access-date=2008-04-02 |url-status=dead |archive-url = https://web.archive.org/web/20040407164627/http://nesara.org/files/coinage_act_1792.pdf |archive-date=2004-04-07 }}</ref>|using_countries={{plainlist| * {{flag|United States|size=20px}}}} * {{flag|The Bahamas|size=20px}}{{efn|Widely accepted, especially in cities with large amounts of tourism}} * {{flag|British Virgin Islands|size=20px}} * {{flag|East Timor|size=20px}}<ref>{{cite web |url = https://www.bancocentral.tl/en/go/banknotes-in-circulation |title = Central Bank of Timor-Leste |access-date = Mar 22, 2017 |quote = The official currency of Timor-Leste is the United States dollar, which is legal tender for all payments made in cash. |archive-date = 1 मई 2019 |archive-url = https://web.archive.org/web/20190501173907/https://www.bancocentral.tl/en/go/banknotes-in-circulation |url-status = dead }}</ref>{{efn|Alongside [[East Timor centavo coins]]}} * {{flag|Ecuador|size=20px}}<ref>{{cite web |url = https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/ecuador/ |title = Ecuador |work = [[CIA World Factbook]] |access-date = October 17, 2018 |date = October 18, 2010 |quote = The dollar is legal tender |archive-date = 10 जनवरी 2021 |archive-url = https://web.archive.org/web/20210110072816/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/ecuador |url-status = dead }}</ref>{{efn|Alongside [[Ecuadorian centavo coins]]}} * {{flag|El Salvador|size=20px}}<ref>{{cite web |url = https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/el-salvador/ |title = El Salvador |work = [[CIA World Factbook]] |access-date = October 17, 2018 |date = October 21, 2010 |quote = The US dollar became El Salvador's currency in 2001 |archive-date = 7 मई 2021 |archive-url = https://web.archive.org/web/20210507021641/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/el-salvador/ |url-status = dead }}</ref> * {{flag|Micronesia|size=20px}} * {{flag|Marshall Islands|size=20px}} * {{flag|Palau|size=20px}} * {{flag|Panama|size=20px}}{{efn|Alongside [[Panamanian balboa]] coins}} * {{flag|Zimbabwe|size=20px}}<ref>{{cite web |url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/zimbabwe/ |title=Zimbabwe |work=[[CIA World Factbook]] |access-date=July 15, 2020 |date=June 30, 2020 |quote=The US dollar was adopted as legal currency in 2009 |archive-date=26 जनवरी 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210126032849/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/zimbabwe/ |url-status=dead }} Used alongside several other currencies.</ref>}} डॉलर [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] की राष्ट्रीय मुद्रा है। एक डॉलर में सौ सेंट होते हैं। पचास सेंट के सिक्के को आधा डॉलर कहा जाता है। पच्चीस सेंट के सिक्के को क्वार्टर कहते हैं। दस सेंट का सिक्का [[डाइम]] कहलाता है और पाँच सेंट के सिक्के को निकॅल कहते हैं। एक सेंट को पैनी के नाम से पुकारा जाता है। डॉलर के नोट १,५,१०,२०,५० और १०० डॉलर में मिलते है। == इतिहास == [[चित्र:Wheatback2014.jpg|thumb|150x150px|एक अमेरिकी डॉलर का सिक्का]] १८ वीं शताब्दी के दौरान स्पेन के उपनिवेशों में "स्पेनी डॉलर" नाम की मुद्रा प्रचलन थी और उस दौरान ये मुद्रा अमेरिका में भी वित्त और वाणिज्य की रीढ़ थी। "स्पेनी डॉलर" के कारण ही बाद में अमेरिका की राष्ट्रीय मुद्रा का नाम डॉलर पड़ा। सन १७७५ की [[अमेरिकी क्रान्ति]] के दौरान तो "स्पेनी मुद्रा" के सिक्को का महत्त्व और बढ़ गया और क्रांतिकारियों की मांग थी कि प्रत्येक उपनिवेश की अपनी अधिकृत मुद्रा हो जिसे कॉनटिनेंटल कांग्रेस का भी समर्थन प्राप्त हो। डॉलर शब्द यद्यपि [[अमेरिकी क्रान्ति]] के २०० वर्ष पूर्व से [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी भाषा]] में कठबोली के रूप में प्रचलन में था जिसका [[विलियम शेक्सपीयर|शेक्सपियर]] के कई नाटकों में उल्लेख था। [[तेरह उपनिवेशों]] में "स्पेनी डॉलर" संचलन में था, जो बाद में [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] बना। [[वर्जीनिया|वर्जिनिया]] में भी "स्पेनी डॉलर" को कानूनी निविदा के रूप में मान्यता प्राप्त थी। [[चित्र:Dollar1reverse1963A.JPG|thumb|150x150px|पुराना अमेरिकी डॉलर नोट]] [[चित्र:United States cents 1991 02.png|thumb|150x150px|पुराने अमेरिकी डॉलर के सिक्के]] [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] के प्रारंभिक दिनों में, "डॉलर" वह सिक्का समझा जाता था जिसे [[स्पेन]] द्वारा ढाला गया है और इसे "स्पेनी मिल्ड डॉलर" बुलाया जाता था। ये सिक्के उस समय देश में मानक मुद्रा के रूप में उपयोग में थे। २ अप्रैल १७९२ को, अलेक्जेंडर हैमिल्टन, जो उस समय राजकोष सचिव थे, ने [[चाँदी|चांदी]] की "स्पेनी मिल्ड डॉलर" के सिक्कों में (जो उस समय प्रचलन में थे) वैज्ञानिक ढंग से राशि निर्धारित कर राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस प्रतिवेदन के परिणामस्वरूप, डॉलर परिभाषित किया गया जिसे माप की इकाई माना गया जिसका मूल्य शुद्ध चांदी के ३७१ अन्नाग्रामों का ४/१६ वां भाग या मानक चांदी ४१६ अन्नाग्रामों के बराबर था। डॉलर चिह्न ($) के पीछे का इतिहास ये हैं कि अमेरिकी डॉलर को दर्शाने के लिए अंग्रेज़ी के US यानी यूनाइटेड स्टेट्स (''United States'') को जोड़ दिया गया जिससे अमेरिकी मुद्रा को चिह्नित किया जा सके। विनिमय दर/प्रति $ - ६४.०८६८ [[भारतीय रुपया|रुपये]] (सम्प्रति १५ जून, २०१५)।<ref>{{cite web |url=https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=34181 |title=RBI Reference Rate for US Dollar |trans-title=अमेरिकी डॉलर की संदर्भित दर |language=अंग्रेज़ी |publisher=भारतीय रिज़र्व बैंक |accessdate=१५ जून २०१५ |archive-url=https://web.archive.org/web/20150907212903/https://www.rbi.org.in/Scripts/BS_PressReleaseDisplay.aspx?prid=34181 |archive-date=7 सितंबर 2015 |url-status=live }}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20151223223845/http://www.hindivarta.com/dollar-rupee-exchange/ डॉलर रुपया विनिमय- कैसे निश्चित होता है 1 डॉलर = कितने रुपए] (हिन्दीवार्ता) * [https://web.archive.org/web/20090611214000/http://finance.yahoo.com/currency-converter?u%27#from=USD;to=INR;amt=1 याहू फ़ाइनेन्स पर] $-[[चित्र:Indian Rupee symbol.svg|8px]] की विनिमय दर। * [http://thatshindi.oneindia.in/news/2011/01/18/20110118103315-aid0122.html डॉलर का प्रभुत्व इतिहास की बात : हू जिंताओ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120122035552/http://hindi.oneindia.in/news/2011/01/18/20110118103315-aid0122.html |date=22 जनवरी 2012 }} * [https://web.archive.org/web/20180506020605/http://www.bis-ans-ende-der-welt.net/USA-B-En.htm संयुक्त राज्यको ऐतिहासिक र वर्तमान बैंकनोटहरू] {{in lang|en}} {{In lang|de}} [[श्रेणी:संयुक्त राज्य अमेरिका की मुद्राएँ]] [[श्रेणी:मुद्रा (करंसी)]] dga1obgoywij1imemvxq279rzghc2gl सदस्य वार्ता:Umarkairanvi 3 71211 6536906 6535515 2026-04-06T09:27:46Z संजीव कुमार 78022 /* मुहम्मद बाक़िर क़ालिबफ़ */ उत्तर 6536906 wikitext text/x-wiki {{स्वागत}} == आपके सम्पादनों के साथ मूल समस्यायें == आपके सम्पादन सामान्यतः मूल शोध जैसे होते हैं और आपके सन्दर्भ मुख्यतः tanzil.net से होते हैं। कृपया लेखों को विकि-प्रारूप में लिखें और वैश्विक दृष्टिकोण के साथ लिखें। इसके अतिरिक्त आप लेख में मूल शीर्षक और उपशीर्षकों, अनुभागों का अन्तर नहीं करते हैं जो लेख के महत्त्व को खत्म कर देता है। जब भी लेख में कोई अनुभाग बनायें तो उसमें एक के स्थान पर दो बार बराबर का चिह्न उपयोग में लें। जैसे आपको यदि लेख में उपरी स्तर का अनुभाग निर्मित करना है तो उसे <nowiki>== अनुभाग ==</nowiki> लिखें। आप वर्तमान में इसे <nowiki>= अनुभाग =</nowiki> लिख रहे हो जो उसे अनुभाग के स्थान पर लेख का शीर्षक बना देता है।<span style="color:green;">☆★</span>[[u:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:50, 17 अगस्त 2020 (UTC) ::'''श्रीमान''' [[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]]<span style="color:green;">☆★</span> ::जी<br> ::बहुत खुशी हुई आपने महत्वपूर्ण बातों को बताया, आप बराबर सिखाते भी हैं, इससे नये लिखने वाले भी बहुत कुछ सीखते होंगें। में आपके कार्य को बराबर देख कर कह् रहा हूँ कि विकि गुणवत्ता बनाये रखने में '''आपका परिश्रम सराहनीय है'''। ::आपका यह कहना "'''आपके सम्पादन सामान्यतः मूल शोध जैसे होते हैं"''' किसी भी भावना से कहा गया हो, मेरे लिए अवार्ड जैसा है। दूसरों के पृष्ठ देख कर सीख रहा हूँ,, ::आपने लिखा में एक (=) लगाता हूँ, नहीं में दो बार भी लगाता रहा हूं,,(देखें गुजराती हिन्दू भाई आतंकवाद पर रोकने में बेहद सफल पर [[इबू पटेल]]) ::'''में वाकई कन्फ्यूज हो रह था''' एक बार सही कि दो बार लगाना सही है,, नहीं पता था, में खयाल रखूंगा। ::दूसरी बात तन्ज़ील का लिंक देने की, उधर सब प्रमुख अनुवाद होते हैं, क़ुरआन अनुवाद के संदर्भ में किंग फ़हद प्रेस quranenc.com का भी देता हूँ, ::'''मजबूरी है''' हिंदी में डायरेक्ट नंबर का हवाला उधर होता है या फिर आप बता दें इनसे बहतर क्या रहेगा। ::'''इसका हल''' मुझे लगता है विकि बुक या सोर्स में कहीं डाल दिया जाये। जिससे सभी विकि का ही लिंक प्रयोग करें। ::संदर्भ न दें तो रिवर्ट ::संदर्भ दें तो क्या,क्यूँ, कैसे सीख रहा हूँ। :कुछ और बातें भी '''सीखना चाहता हूँ,''' इधर कैसे कहाँ जानूं, कौन बता सकता है? :1. साँचा कैसे बनाएं, संपादन :2. (1) अपलोड में लाइसेंस की प्रक्रिया क्या? कैसे? अगर किसी व्यक्तित्व की pic अपने मोबाइल से ली तो किया उसे अपलोड कर सकते हैं? :(2) पुस्तक के आवरण के लिए किया नियम हैं। :'''एक बार फिर धन्यवाद''' M. Umar kairanvi 04:12, 18 अगस्त 2020 (UTC) == [[:राकेश टिकैत|राकेश टिकैत]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:राकेश टिकैत|राकेश टिकैत]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center> इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है। यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> '''[[User:Karam06|<span style="color: Orange">Karam</span>]] <sup>[[User talk:Karam06|<span style="color: Pink">''मुझसे बात करें''</span>]]</sup><sub>[[Special:Contributions/Karam06|<span style="color: darkyellow">'''मेरा योगदान'''</span>]]</sub>''' 12:01, 26 जनवरी 2021 (UTC) [[User:Karam06]] जी काफी दिनों बाद इधर देखा,,, मुझे पहली बार लगा था इस प्रश्न या आपत्ति का उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है. पृष्ठ पर भी देखा उधर भी सब ठीक है. स्नेह बनाये रखें धन्यवाद == 2021 Wikimedia Foundation Board elections: Eligibility requirements for voters == Greetings, The eligibility requirements for voters to participate in the 2021 Board of Trustees elections have been published. You can check the requirements on [[:m:Wikimedia_Foundation_elections/2021#Eligibility_requirements_for_voters|this page]]. You can also verify your eligibility using the [https://meta.toolforge.org/accounteligibility/56 AccountEligiblity tool]. [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 16:31, 30 जून 2021 (UTC) <small>''Note: You are receiving this message as part of outreach efforts to create awareness among the voters.''</small> <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:KCVelaga_(WMF)/Targets/Temp&oldid=21669859 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:KCVelaga (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == विकिमीडिया फाउंडेशन के वर्ष 2021 के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के चुनावों में मतदान करना भूलिएगा नही == आपका Umarkairanvi, यह संदेश आपको इसलिए भेजा जा रहा है क्योंकि आप विकिमीडिया फाउंडेशन के वर्ष 2021 के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के चुनावों में मतदान करने के योग्य हैं। इस बार चुनाव 18 अगस्त, 2021 को शुरू होंगे और 31 अगस्त, 2021 को बंद होंगे। विकिमीडिया फाउंडेशन, हिन्दी विकिपीडिया जैसी परियोजनाओं का संचालन करता है और इसके संचालन की जिम्मेदारी बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के हाथों में है। बोर्ड विकिमीडिया फाउंडेशन का निर्णय लेने वाला निकाय है। [[:m:Wikimedia Foundation Board of Trustees/Overview|बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के बारे में अधिक जानकारी यहां से प्राप्त करें]]। इस साल कम्युनिटी के वोटों के आधार पर चार सीटों का चयन किया जाएगा। इन सीटों के लिए दुनिया भर से 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। [[:m:Wikimedia_Foundation_elections/2021/Candidates#Candidate_Table|बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ के वर्ष 2021 के उम्मीदवारों के बारे में अधिक जानकारी यहां से प्राप्त करें]]। कम्युनिटी के लगभग 70,000 सदस्यों को मतदान के लिए आमंत्रण दिया गया है। जिसमें आप भी शामिल हैं! मतदान केवल 31 अगस्त 23:59 UTC तक जारी रहेगी। *[[:hi:Special:SecurePoll/vote/Wikimedia_Foundation_Board_Elections_2021|'''हिन्दी विकिपीडिया के सुरक्षित निर्वाचन पर जाकर मतदान करें''']]। अगर आप पहले ही मतदान कर चुके हैं, तो मतदान करने के लिए धन्यवाद और कृपया इस ई-मेल को नज़रअंदाज़ करें। लोग केवल एक बार वोट कर सकते हैं, भले ही उनके पास कितने भी अकाउंट हों। [[:m:Wikimedia Foundation elections/2021|इस चुनाव के बारे में अधिक जानकारी यहां से पढ़ें]]। [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 11:27, 26 अगस्त 2021 (UTC) <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:KCVelaga_(WMF)/Targets/Temp&oldid=21937838 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:KCVelaga (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == WikiConference India 2023: Program submissions and Scholarships form are now open == Dear Wikimedian, We are really glad to inform you that '''[[:m:WikiConference India 2023|WikiConference India 2023]]''' has been successfully funded and it will take place from 3 to 5 March 2023. The theme of the conference will be '''Strengthening the Bonds'''. We also have exciting updates about the Program and Scholarships. The applications for scholarships and program submissions are already open! You can find the form for scholarship '''[[:m:WikiConference India 2023/Scholarships|here]]''' and for program you can go '''[[:m:WikiConference India 2023/Program Submissions|here]]'''. For more information and regular updates please visit the Conference [[:m:WikiConference India 2023|Meta page]]. If you have something in mind you can write on [[:m:Talk:WikiConference India 2023|talk page]]. ‘‘‘Note’’’: Scholarship form and the Program submissions will be open from '''11 November 2022, 00:00 IST''' and the last date to submit is '''27 November 2022, 23:59 IST'''. Regards [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 11:25, 16 नवम्बर 2022 (UTC) (on behalf of the WCI Organizing Committee) <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/WCI_2023_active_users,_scholarships_and_program&oldid=24082246 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Nitesh Gill@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == WikiConference India 2023: Open Community Call and Extension of program and scholarship submissions deadline == Dear Wikimedian, Thank you for supporting Wiki Conference India 2023. We are humbled by the number of applications we have received and hope to learn more about the work that you all have been doing to take the movement forward. In order to offer flexibility, we have recently extended our deadline for the Program and Scholarships submission- you can find all the details on our [[:m:WikiConference India 2023|Meta Page]]. COT is working hard to ensure we bring together a conference that is truly meaningful and impactful for our movement and one that brings us all together. With an intent to be inclusive and transparent in our process, we are committed to organizing community sessions at regular intervals for sharing updates and to offer an opportunity to the community for engagement and review. Following the same, we are hosting the first Open Community Call on the 3rd of December, 2022. We wish to use this space to discuss the progress and answer any questions, concerns or clarifications, about the conference and the Program/Scholarships. Please add the following to your respective calendars and we look forward to seeing you on the call * '''WCI 2023 Open Community Call''' * '''Date''': 3rd December 2022 * '''Time''': 1800-1900 (IST) * '''Google Link'''': https://meet.google.com/cwa-bgwi-ryx Furthermore, we are pleased to share the email id of the conference contact@wikiconferenceindia.org which is where you could share any thoughts, inputs, suggestions, or questions and someone from the COT will reach out to you. Alternatively, leave us a message on the Conference [[:m:Talk:WikiConference India 2023|talk page]]. Regards [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 16:21, 2 दिसम्बर 2022 (UTC) On Behalf of, WCI 2023 Core organizing team. <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/WCI_2023_active_users,_scholarships_and_program&oldid=24083503 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Nitesh Gill@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == [[:लहू बोलता भी है (पुस्तक)|लहू बोलता भी है (पुस्तक)]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:लहू बोलता भी है (पुस्तक)|लहू बोलता भी है (पुस्तक)]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लहू बोलता भी है (पुस्तक)|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लहू बोलता भी है (पुस्तक)]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>उल्लेखनीयता संदिग्ध</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Sk5505|Sk5505]] ([[सदस्य वार्ता:Sk5505|वार्ता]]) 14:06, 1 जनवरी 2023 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] :पिछले दिनों.... [https://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:j7O75Pc5haIJ:https://hi.wikipedia.org/wiki/%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2582_%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE_%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580_%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588_(%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%2595)&cd=5&hl=en&ct=clnk&gl=in लहू बोलता भी है (पुस्तक) Google Record] .... पर हुयी चर्चा [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लहू बोलता भी है (पुस्तक)]] ::पर दलीलें दुहाई दे कर मुतमईन था कि नहीं हटाया जायेगा, चर्चा आपसे हुयी थी निर्णय पर हैरत हुई? :. :@संजीव कुमार जी, उल्लेखनीयता पर विकि वार्तायें पढ़ता रहा हूँ इस लिए समझता हूँ कि अपने बनाये पृष्ठ को उल्लेखनीयता की कसौटी पर साबित करना मुश्किल होगा, वैसे भी आपकी दूर तक नज़र है इस लिए और भी मुश्किल, फिर भी कुछ कह देना बहतर लगता है, इस लिए अर्ज़ है: :१- इस विषय पर हिन्दी भाषा में कोई काम नहीं मिलता, दो चार अपने लोगों, इलाके या विचार वालों बारे में लिख दिया गया, इस पुस्तक में निम्न वर्ग और उच्च वर्ग सब की कुर्बानियों की बात मिल जाती है, इस लिए उल्लेखनीय है '''जो काम कभी हुआ ही नहीं वो हिंदी भाषा में हुआ''', इस लिए भी वो हिंदी विकी पर पृष्ठ बनने लायक उल्लेखनीय होना चाहिए था। :२ - विकि हिंदी पर बने लेख का''' बंग्ला में भी पृष्ठ बना उन्हों ने भी उल्लेखनीय समझा।''' :३- उलेखनीयता अगर केवल ज्ञानियों की नज़र में होना है तो फिर नये या हम जैसे कम समझ वाले इधर '''केवल अनुवादक''' बन के रह जायेंगे। :४- पुस्तक पर कमेंट्स जो दिए गये और स्वयं कुछ पढ़ी है, हजारों की सूची देख कर अनुमान लगा की भविष्य में उल्लेखनीय बातें इस से निकलती रहेंगी, विकिमीडियन को अपने क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों पर बनाये अपने लेख के लिए संदर्भ मिल सकेंगे। :५- जिस समाज से संबंधित इस पुस्तक में बातें हैं उन्हें भी विकिपीडिया पर उनकी बात मिले, विकि शायद सबका है निति पर चलता है, अभी अगर कम हैं (सन्दर्भ देखें) तो कम उल्लेखनीय से भी पूर्ती की जा सकती है। :. :धन्यवाद 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 09:35, 7 मार्च 2023 (UTC) ::@[[सदस्य:Umarkairanvi|Umarkairanvi]] जी: वहाँ पर मैंने अभी देखा। चर्चा में यह कहीं सिद्ध नहीं हुआ था कि नहीं हटाया जाये। वैसे भी कॉपीराइट उल्लंघन वाले अवतरणों को तो हटाना ही होता है। आप चाहो तो मैं आपको लेख की हटाने से पहले की सामग्री उपलब्ध करवा सकता हूँ। मुझे अब भी लेख के हटाये गये अवतरण में उल्लेखनीयता की कोई सामग्री नहीं दिखाई दे रही। न ही कोई विश्वसनीय स्रोत दिखाई दे रहा है। आपने फ्लिपकार्ट की कड़ी दी है जो केवल सम्बंधित पुस्तक के प्रकाशित होने का सबूत है, उसकी उल्लेखनीयता का नहीं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 7 मार्च 2023 (UTC) == [[:इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची|इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची|इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>अनावश्यक सूची।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:05, 27 फ़रवरी 2023 (UTC) == लेखों में अनुवाद गलतिय == हेल्लो। उमर जी, आप हाल में काफी लेख वना रहे हैं जो अनुवाद करके वनाये गए हैं। लेकिन मेरा आपसे एक सुझाव है कि जब तक एक लेख पूरी तरह पड़ने के योग्य ना हो जाये तब तक दूसरा लेख का निर्माण ना करे। क्योंकि आपके द्वारा वनाये गये लेखों में अंग्रेजी के शब्द रह जाते हैं जिससे लेख की गुणवत्ता खराब हो जाती है। मुझे आशा है कि आप मेरे इस सुझाव को गम्भीरता से लेंगे। ओर मैं आपके योगदानों की सहारना करता हूं। धन्यवाद -'''[[User:J ansari|<span style="background:#5d9731; color:white;padding:1px;">जे. अंसारी</span>]] [[User talk:J ansari|<span style="background:#1049AB; color:white; padding:1px;">वार्ता</span>]]''' 16:55, 3 मार्च 2023 (UTC) :@[[सदस्य:J ansari|J ansari]] जी, सुझाव और सराहना के लिये धन्यवाद, :आप की नज़र में ग़लतियां आ रही होंगी जो में अनजाने में कर रहा हूँ, आप रहनुमाई करें। :मेरी समझ में तो केवल आज [[मुज़फ्फर इकबाल]] लेख में ऐसा हुआ (था) कि पब्लिकेशन के 'अंग्रेजी में' अनुभाग में पुस्तकों के नाम आदि को अनुवाद किया तो अजीब सी हिंदी हो गयी, तो उसे अंग्रेज़ी में ही रहने दिया। सोचा अनुभाग अंग्रेज़ी में है तो चल जाएगा,,, अब आप बतायें यह कैसे उचित रहेगा, '''कहीं और ऐसा हुआ हो तो वो भी बतायें सिखायें'''। भाई साहब मैं जिस तरह के लेख बनाता हूँ वेसों को नियम क़ायदे का अधिक खयाल रखना होता है, लगभग 400 लेख पर एक हटाया गया। :दूसरी बात आजकल काफी अनूदित लेख की एक कारण तो : [[इस्लाम से संबंधित विश्वकोशों की सूची]] जो बांग्ला से अनुदित है अनावश्यक बताकर हटाने पे लगा दिया गया, महनत से बना है और उस जानकारी पर खुशी और फखर भी होता है, जबकि उसपे गतिशील टैग पहले से है। उसे बचाने के लिये उस विषय पर दसियों लेख बनाये गये, अब पता नहीं आधार टैग भी उसे बचा पायेगा या नहीं। चर्चा करूं या ना करूं? :पिछले दिनों [https://webcache.googleusercontent.com/search?q=cache:j7O75Pc5haIJ:https://hi.wikipedia.org/wiki/%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2582_%25E0%25A4%25AC%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%25BE_%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580_%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588_(%25E0%25A4%25AA%25E0%25A5%2581%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A4%25E0%25A4%2595)&cd=5&hl=en&ct=clnk&gl=in लहू बोलता भी है (पुस्तक) google archived] पर चर्चा [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लहू बोलता भी है (पुस्तक)]] :पर दलीलें दुहाई दे कर मुतमईन था कि नहीं हटाया जायेगा, मगर बेरहमी जैसे इतिहास में हज़ारों क़ुरबान होने वालों पर लेख तो क्या ...... नाम ही नहीं छोड़ेंगे। हटा दिया गया। :रहनुमाई की प्रतीक्षा में :धन्यवाद : 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 19:10, 3 मार्च 2023 (UTC) ==आओ चर्चा करें मेरे द्वारा नाम बदलें अनुरोध पर == मेरे द्वारा नाम बदलें अनुरोध जिन पर रखने या रद करने का निर्णय होना है: 1- [[वार्ता:खुदाबक़्श लाइब्रेरी]] बक़्श को बख़्श 2- [[वार्ता:मौलवी खुदाबक़्श खान]] बक़्श को बख़्श 3- [[वार्ता:मौलवी खुदाबक़्श खान]] बक़्श को बख़्श 4- [[हिंदु धर्म से मुस्लिम बनने बालों की सूची]] ...बालों शब्द को वालों किया जाना चाहिए 5- [[वार्ता:मस्जिद अल-क़िबलातयैन]] ......8 जनवरी 2023 ==please vote== Please vote on [[:en:Wikipedia:Articles for deletion/Ved Prakash Upadhyay]] and [[:en:Wikipedia:Articles for deletion/Kalki Avatar and Muhammad]]. [[विशेष:योगदान/202.134.14.139|202.134.14.139]] ([[सदस्य वार्ता:202.134.14.139|वार्ता]]) 09:41, 9 अगस्त 2023 (UTC) ==Taqwa== Can you translate the article Taqwa from bengali, english, urdu and arabic articles? [[:bn:তাকওয়া]], [[:ur:تقوی]], [[:ar:التقوى]] and [[:en:Taqwa]]. [[विशेष:योगदान/202.134.8.135|202.134.8.135]] ([[सदस्य वार्ता:202.134.8.135|वार्ता]]) 11:38, 25 अगस्त 2023 (UTC) :यह [[तक़वा]] नाम से पहले से था कनेक्ट नहीं था। बांग्ला विकि से कुछ विस्तार कर दिया है। -----📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:45, 30 नवम्बर 2023 (UTC) == लेख में विकिपीडिया लेखों की कड़ियाँ == नमस्ते ! कृपया लेखों में संदर्भ देने के लिए अन्य भाषा के विकिपीडिया प्रकल्पों की कड़ियों का प्रयोग न करें। इससे बेहतर है कि आप मूल स्रोत का हवाला दें जहाँ से लेकर उस विकिपीडिया पर चीज़ लिखी गई है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 05:31, 21 नवम्बर 2023 (UTC) ::@[[सदस्य:SM7|SM7]]:... '''[[नमाज़ के औक़ात]]''' लेख में जानकारी का विस्तार करने के लिए, विषय अनुरूप ---- [https://archive.org/details/MukhtasarSahiBukhariInHindiLanguageVolume-1To3Pdf/MukhtasarSahiBukhariInHindiLanguageVolume-1www.momeen.blogspot.com/page/n297/mode/2up मुख्तसर सही बुखारी (हिंदी) नमाज़ों के वक्तों का बयान]arcihive -----बाहरी कड़ी में दिया था, जिसे आपने revert करके यह मेसेज किया है, '''पहली''' बात यह अन्य भाषा विकि से नहीं हिदी से ही है '''दूसरी''' बात संदर्भ भी नहीं, '''तीसरी '''बात '''चीज़ '''लेख में हदीस की किताब से बात हो रही अर्थात मूल स्रोत हदीस पुस्तक में बाहरी कड़ी में विस्तृत जानकारी लिंक दी गई थी। यह revert काबिले अफ़सोस पर कुछ सीखने को ऐसे ही मिलता है। ::'''आप''' दूसरे लेखों की बात कर रहे हैं तो निशानदही करें आसानी रहेगी। पिछली बार लेख '''[[नियोग]]''' में हिंदी भाषा का संदर्भ दिया था revert कर दिया गया, जबकि फरवरी में वार्ता में बात बताकर अक्टूबर में एडिट अर्थात संदर्भ जोड़ा था ,,, अब आप इस में और [[नियोग]] में एडिट के लिए जेसी रहनुमाई करेंगे वेसे कोशिश की जाएगी वो आजकल बिना संदर्भ है,,उसकी [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97 वार्ता] पर eng विकी से सुरक्षित संदर्भ [http://www.vedicpress.com/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20170723183559/http://www.vedicpress.com/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97/] देख कर रहनुमाई करें,,, स्नेह बनाये रखें। :📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 07:17, 21 नवम्बर 2023 (UTC) ::आपने उर्दू विकिपीडिया की कड़ी डाली थी। बाहरी कड़ी में भी विकिपीडिया के किसी अन्य भाषा की कड़ी नहीं देना उचित है। और बाहरी कड़ियाँ भी लेख में सबसे नीचे दी जाती हैं। आप करना क्या चाह रहे थे अगर वो संदर्भ नहीं है आपके हिसाब से तो? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 07:29, 21 नवम्बर 2023 (UTC) :::उर्दू विकिपीडिया की कड़ी कहाँ डाली थी '''बतायें'''? देख कर उचित या अनुचित सीखेंगे। :::इधर [[नमाज़ के औक़ात]] में बाहरी कड़ियाँ के नियमानुसार विषय अनुकूल/अनुरूप hindi भाषा की कड़ी दी है इस पर क्या आपत्ति है? :::अब इसे देखने पर बतायें कि '''क्या '''इसे सबसे नीचे कड़ी में दिया जा सकता है? :::'''या संदर्भ''' के साथ लेख में ऐसे जोड़ा जा सकता है.. :::... "[[हदीस]] के विद्वान [[मुहम्मद अल-बुख़ारी]] ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक [[सहीह अल-बुख़ारी]] का एक पाठ इसी विषय पर रखा है।......[https://archive.org/details/MukhtasarSahiBukhariInHindiLanguageVolume-1To3Pdf/MukhtasarSahiBukhariInHindiLanguageVolume-1www.momeen.blogspot.com/page/n297/mode/2up] 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 09:01, 21 नवम्बर 2023 (UTC) :::::आपने लेख की पहली पंक्ति में बड़े अक्षरों का टैग लगाया था जिसके चलते पूरी पहली लाइन अंतर देखने पर ऐसी प्रतीत हो रही थी मानों उसे आपने जोड़ा हो जिसमें उर्दू विकिपीडिया की कड़ी के साथ उर्दू में नाम लिखा हुआ है। मैंने वापस सुधार कर दिया है और उक्त कड़ी हटा दी है। यह वास्तव में आपके संपादन से पहले से जुडी हुई थी जिसे देखने में मुझी से भूल हुई। हालाँकि, मैंने बड़े अक्षरों का टैग भी हटा दिया है और कुछ अन्य सफ़ाई भी की है। कृपया चीजों को अनावश्यक बोल्ड अथवा big टैग के साथ न लिखें। जहाँ तक ऊपर लिखी कड़ी का सवाल है, यह ब्लॉग को आर्काइव करके बनाई गयी है कोई विश्वसनीय स्रोत से हवाला दे सकते हैं जिसमें यह पुस्तक उपलब्ध हो तो इसे बदल दें। मैं अपनी गलती के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:26, 21 नवम्बर 2023 (UTC) ::::::::::@[[सदस्य:SM7|SM7]]:बहुत ख़ुशी हुई कि आपने लेख को सुधार में और मुझे कुछ सीखने का समय दिया। ऐसे ही स्नेह बनाये रखें। धन्यवाद ::::::📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 05:17, 22 नवम्बर 2023 (UTC) == Translation request == Hello Umarkairanvi, your efforts in translating English articles are commendable. Could you please attempt to translate [[:en:Category:Works_about_Deobandism|these]] well-sourced articles classified under the B category?-[[सदस्य:Owais Al Qarni|Owais Al Qarni]] ([[सदस्य वार्ता:Owais Al Qarni|वार्ता]]) 07:41, 3 दिसम्बर 2023 (UTC) :कुछ काम किया है [[:hi:श्रेणी:देवबंदवाद के बारे में कार्य|देवबंदियत के बारे में कार्य]] देखें --- धन्यवाद 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 05:55, 5 दिसम्बर 2023 (UTC) == [[:डॉ० जेम्स उजामा|डॉ० जेम्स उजामा]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:डॉ० जेम्स उजामा|डॉ० जेम्स उजामा]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center> इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है। यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:51, 15 दिसम्बर 2023 (UTC) इधर पाठक देखेंगे उनकी जानकारी के लिए लिख रहा हूँ कि यह [[अर्नेस्ट जेम्स उजामा]] का अनुप्रेषित पृष्ठ था 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 17:36, 2 जुलाई 2024 (UTC) == जुलाई 2024 == [[Image:Information orange.svg|25px|alt=|link=]] कृपया विकिपीडिया पर अनुपयुक्त [[वि:बाहरी कड़ियाँ|बाहरी कड़ियाँ]] ना जोड़ें, जैसा कि आपने [[:निकाह हलाला]] पर किया। [[वि:जोड़नहीं|विकिपीडिया लिंक्स की सूची नहीं है]], ना ही इसका विज्ञापन अथवा प्रचार के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। अनुपयुक्त लिंक्स में व्यक्तिगत वेबसाईट, आपसे सम्बद्ध वेबसाईट तथा किसी अन्य वेबसाईट पर ग्राहकों को आकर्षित करने अथवा प्रोडक्ट बेचने के उद्देश्य से जोड़े गए लिंक शामिल हैं। अधिक जानकारी हेतु विकिपीडिया पर [[विकिपीडिया:बाहरी कड़ियाँ|बाहरी कड़ियों से सम्बंधित दिशानिर्देश]] व [[विकिपीडिया:स्पैम|स्पैम दिशानिर्देश]] देखें। चूँकि विकिपीडिया nofollow टैग्स का प्रयोग करता है, अतः विकिपीडिया पर कड़ियाँ जोड़ने से सर्च इंजनों में किसी पृष्ठ की रैंकिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अगर आपको लगता है कि लिंक लेख में जोड़ा जाना चाहिये, तो उसको दोबारा डालने से पहले कृपया लेख के संवाद पृष्ठ पर उसके सम्बन्ध में चर्चा कर लें। धन्यवाद।<!-- Template:uw-spam2 --> [[User:NXcrypto|<span style="color:#004400;">'''च҉न҉्҉द҉्҉र҉ ҉व҉र҉्҉ध҉न҉'''</span>]] <small><small>[[User talk:NXcrypto|वार्तालाप करें]]</small></small> 11:41, 2 जुलाई 2024 (UTC) :आपने कुछ यूट्यूब वीडियो की अनुचित कड़ियां जोड़ी थी जो मैने [https://hi.m.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B9_%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&diff=prev&oldid=6150272 हटा] दी है। ऐसा करने से बचे। [[User:NXcrypto|<span style="color:#004400;">'''च҉न҉्҉द҉्҉र҉ ҉व҉र҉्҉ध҉न҉'''</span>]] <small><small>[[User talk:NXcrypto|वार्तालाप करें]]</small></small> 11:47, 2 जुलाई 2024 (UTC) . श्रीमान [[User talk:NXcrypto|च҉न҉्҉द҉्҉र҉ ҉व҉र҉्҉ध҉न҉]] जी ::'''पहली आपत्ती''': अनुपयुक्त [[विकिपीडिया:बाहरी कड़ियाँ|बाहरी कड़ियाँ]] ना जोड़ें, जैसा कि आपने [[निकाह हलाला]] पर किया। ::::जवाब: इन दोनों पैराग्राफ को मैंने जोड़ा था इस में बाहरी कड़ी को कौनसा नियम तोड़ दिया?<blockquote>[[सुनन अबू दाऊद]] (हदीस संख्या : 2076) ने रिवायत किया है कि [[नबी]] [[सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम]] ने फरमाया :<nowiki>''</nowiki>हलाला करने वाले (मुहल्लिल) और हलाला करवाने वाले (मुहल्लल् लहू) व्यक्ति पर अल्लाह की लानत (धिक्कार) हो।<nowiki>''</nowiki> ['''[[इस्लामक्यूए]]'''] ::<blockquote>[[सुनन इब्ने माजह|सुनन इब्न माजा]] (हदीस संख्या : 1936) ने उक़बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत किया है कि '''[[मुहम्मद|पैगंबर मुहम्मद]]''' सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : <nowiki>''</nowiki>क्या मैं तुम्हें किराए पर लिए गए सांड के बारे में न बतलाऊँ? (कि वह कौन होता है) लोगों ने कहा : क्यों नहीं, ऐ अल्लाह के रसूल! आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया : वह हलाला करने वाला व्यक्ति है, अल्लाह तआला हलाला करने वाले और हलाला करवाने वाले पर लानत (अभिशाप) करे।<nowiki>''</nowiki> शैख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने <nowiki>''</nowiki>सहीह सुनन इब्ने माजा<nowiki>''</nowiki> में इस हदीस को हसन कहा है। ['''[[इस्लामक्यूए]]''']</blockquote> ::[https://islamqa.info/hi/answers/109245/%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%B9-%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%B2-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%A5-%E0%A4%B9 islamqa डॉट info: निकाहे हलाला हराम और बातिल (व्यर्थ) है।] ::. ::आपने दोनों पैराग्राफ को [[:en:IslamQA.info|इस्लामक्यूए]] को विश्वसनीय स्रोत नहीं है बता कर हटाया है आपके अनुसार इस्लामी विषय कि बात के लिए भी ['''[[इस्लामक्यूए]]'''] विश्वसनीय नहीं तो इन दोनों पैराग्राफ में लिखा [[सुनन अबू दाऊद]] (हदीस संख्या : 2076) और [[सुनन इब्ने माजह|सुनन इब्न माजा]] (हदीस संख्या: 1936) विश्वसनीय स्रोत नहीं है? मशहूर किताब से refrence के लिए इतना लिखना काफी था अन्यथा ये भी इन दोनों पैराग्राफ में जोड़ा जा सकता था? https://sunnah.com/ibnmajah:1936 https://sunnah.com/abudawud:2076 ::. ::'''दूसरी आपत्ती''': आपने कुछ '''यूट्यूब वीडियो की अनुचित कड़ियां जोड़ी''' थी जो मैने हटा दी है। ऐसा करने से बचे। ::::::जवाब: बाहरी कड़ियाँ में 6 वर्ष से (20 July 2018) यूट्यूब कि एक कड़ी [https://www.youtube.com/watch?v=7NKUJ6tvU88 निकाह हलाला] पहले से थी, विषयअनुरूप दूसरी [https://www.youtube.com/watch?v=dMCHy-X0CF4 हलाला की सच्चाई क्या है?] '''[[सैयद अब्दुल्लाह तारिक]]''' मैं ने जोड़ दी तो यह अनुपयुक्त हो गयी? वो पिछली ५ वर्ष से उपयुक्त थी? अब आपको जवाब देना है कि आपने लिखा '''"कुछ यूट्यूब वीडियो की अनुचित कड़ियां जोड़ी "''' आप एक one को '''कुछ''' कहते हैं या इसके अतिरिक्त भी मैं ने यूट्यूब की कड़ी जोड़ी? तीसरी बात इस में बहुत से पंक्तियाँ अरबी भाषा में दी गयी हैं वो आपने देखी होंगी उनके लिए क्या नियम है? 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 18:56, 2 जुलाई 2024 (UTC) :@[[सदस्य:Umarkairanvi|Umarkairanvi]] आपने ऐसा ही जवाब मेरे वार्ता पृष्ठ पर भी कॉपी पेस्ट कर दिया है। [https://hi.m.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:NXcrypto&diff=prev&oldid=6150724 देखें] । मैं केवल एक ही जगह वार्ता कर सकता हुं, या आपके वार्ता पृष्ठ पर या मेरे। मैं अपने वार्ता पृष्ठ पर आपको उत्तर लिख रहा हूं। ऐसा दोबारा कॉपी पेस्ट न करे। [[User:NXcrypto|<span style="color:#004400;">'''च҉न҉्҉द҉्҉र҉ ҉व҉र҉्҉ध҉न҉'''</span>]] <small><small>[[User talk:NXcrypto|वार्तालाप करें]]</small></small> 04:25, 4 जुलाई 2024 (UTC) <span style="color:green;">☆★</span> चर्चा [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:NXcrypto#c-NXcrypto-20240705040900-Umarkairanvi-20240704104300 इधर देखें] नतीजा सब अच्छा रहा == मदद == बाई जान मूछें अच्छी बात बताई और मेरा सदस्य पेज बनाने की किरपा करके मेरी मदद करे? सदस्य:सय्यद मुहम्मद रफी कादरी। उत्तर प्रदेश भारत,----[[सदस्य:سید محمد رفیع قادری|سید محمد رفیع قادری]] ([[सदस्य वार्ता:سید محمد رفیع قادری|वार्ता]]) 14:26, 24 जुलाई 2024 (UTC) == नई श्रेणी का निर्माण == नमस्ते Umarkairanvi जी, आशा करता हूँ आप सकुशल सानंद होंगे। आपने एक श्रेणी बनाई जर्मनी के मुसलामानों के लिये, लेकिन उसमें अभी एक ही लेख है। शीर्षक थोड़ा सही नहीं था जिसे मैंने सुधार दिया है अपनी समझ अनुसार। मेरा कहना ये है कि केवल एक दो लेखों कोक रखने के लिये श्रेणी बनाना बहुत उचित नहीं। आप श्रेणी जोड़ दें और उसकी कड़ी लाल रहने दें तो भी चलेगा। बाद में जब उस श्रेणी में 4 या अधिक (ये भी मेरा मानना है) लेख हो जाएँ तभी उस श्रेणी का निर्माण करना ठीक रहता। अच्छा काम ज़ारी रखें। शुभकामनायें! --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:05, 4 अगस्त 2024 (UTC) ::[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, आदाब, मैं ठीक हूँ और आपके लिए भी दुआ गो हूँ की अल्लाह आपको भी सकुशल सानंद रखे। :जिन विषयों पर मैं कार्य करता हूँ उस में कई बार उसकी ज़रूरत सामने आने पर सोच समझकर आवश्यकता को देखते हुए श्रेणी बनाता रहा हूँ, मिसाल के लिए इसी श्रेणी [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A5%80:%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8 जर्मन मुसलमान] को देखें तो 6 लेख पहले से बने हैं। लेकिन आपने बहुत उचित तरीका बताया है यह अधिक अच्छा रहेगा, आगे कभी 4 या अधिक लेख होने पर श्रेणी बनाऊँगा। :आपने नाम बदल कर बहतर कर दिया है मिलती जुलती [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A3%E0%A5%80:%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A8_%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE श्रेणी:जर्मन मुस्लिम] को हटाया जा सकता है। :अच्छा काम करने में आप जैसे अच्छे लोगों के रहनुमाई मशवरे ऐसे ही जल्द जल्द मिल जाया करें तो बहुत ख़ुशी की बात होगी📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:31, 5 अगस्त 2024 (UTC) == [[:मुहम्मद अमान होबोहम|मुहम्मद अमान होबोहम]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:मुहम्मद अमान होबोहम|मुहम्मद अमान होबोहम]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मुहम्मद अमान होबोहम|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मुहम्मद अमान होबोहम]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>उल्लेखनीय नहीं।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:43, 20 अगस्त 2024 (UTC) == [[:अवामी लीग की आलोचना|अवामी लीग की आलोचना]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अवामी लीग की आलोचना|अवामी लीग की आलोचना]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है। उल्लेखनीयता यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। [[सदस्य:Suyash.dwivedi|सुयश द्विवेदी]] ([[सदस्य वार्ता:Suyash.dwivedi|वार्ता]]) 10:38, 23 अगस्त 2024 (UTC) == [[:आयशा सलाउद्दीन|आयशा सलाउद्दीन]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:आयशा सलाउद्दीन|आयशा सलाउद्दीन]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है। उल्लेखनीयता यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। [[सदस्य:Suyash.dwivedi|सुयश द्विवेदी]] ([[सदस्य वार्ता:Suyash.dwivedi|वार्ता]]) 12:13, 7 अक्टूबर 2024 (UTC) == [[:आयशा अल-अदाविया|आयशा अल-अदाविया]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:आयशा अल-अदाविया|आयशा अल-अदाविया]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है। उल्लेखनीयता यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। [[सदस्य:Suyash.dwivedi|सुयश द्विवेदी]] ([[सदस्य वार्ता:Suyash.dwivedi|वार्ता]]) 12:14, 7 अक्टूबर 2024 (UTC) == सैफुद्दीन कुत्ज == सैफुद्दीन कुत्ज की हत्या बैबरसने नही कि थी। [[विशेष:योगदान/157.33.246.91|157.33.246.91]] ([[सदस्य वार्ता:157.33.246.91|वार्ता]]) 10:09, 10 अक्टूबर 2024 (UTC) :[[सैफुद्दीन कुटज़]] को उर्दू और इंग्लिश विकी से connect और update कर दिया है...📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 11:42, 10 अक्टूबर 2024 (UTC) == [[:'बनू सलीम|'बनू सलीम]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:'बनू सलीम|'बनू सलीम]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center> इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है। यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:38, 10 अक्टूबर 2024 (UTC) == [[:लिली जे|लिली जे]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:लिली जे|लिली जे]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center> इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा। यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:20, 24 नवम्बर 2024 (UTC) == सूचना और चेतावनी == नमस्ते उमर कैरानवी जी, मैं पिछले कुछ माह से देख रहा हूँ कि आप लगातार [[:en:Wikipedia:Content translation tool|सामग्री अनुवाद]] [[Special:ContentTranslation|उपकरण]] के उपयोग से विभिन्न लेख निर्मित कर रहे हो। मैं हमेशा यह मानकर छोड़ देता हूँ कि अभी अनुवाद जोड़ा है, जल्दी ही सुधार देंगे। लेकिन सम्बंधित लेख कुछ दिन बाद में भी वैसा ही मिलता है। क्या आपकी इन्हें सुधारने की कोई योजना है या केवल मशीनी अनुवाद ही करते जाना है? अब और मशीनी अनुवाद प्रकाशित करने से पहले आप अपने पुराने अनुवादों को सुधारें। यदि आप पुराने अनुवादों को सुधारे बिना ही खराब मशीनी अनुवाद प्रकाशित करना जारी रखते हैं तो मुझे आपको प्रतिबंधित करना होगा।<span style='color:green;'>☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style='color:Magenta;'>संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style='color:blue;'>✉✉</span>]]) 07:21, 8 जनवरी 2025 (UTC) :[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]], मैं अपने कार्य पूर्ण करता हूँ (यह बात अपने 16 वर्ष के अनुभव को याद करते हुए लिख रहा हूँ), कोई भूलवश रह जाये या तकनीक ना जानने के कारण नहीं कर पाता तो उसे यह समझ लेता हूँ हजारों विकिमेडियन में से यह दूसरे ज़िम्मेदारी उठायेंगे। आपका ऐसा रवैया रहा तो जल्द पाबंदी की तलवार भी झेल लेंगे, बस यही देखना रह गया, खेर आप वो लेख बतायें जिनके अनुवादों को सुधारा जाना है या जो अधूरे छोड़े गये? :दूसरी बात :क्या बार बार बात किये जाने पर भी इसे प्रबंधकों के अधूरे कार्य में गिना जा सकता है? :(1) [[वार्ता:मुहम्मद असद]]- ::[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]] ::जी, आशा करता हूँ आप सकुशल सानंद होंगे। ::इन दिनों आपसे श्रेणी बारे में काफी सीखने को मिला और जानकारी बढाने के लिए इधर ::आपसे जानना चाहता था कि यह दोनों श्रेणीयां ::श्रेणी:यहूदी धर्म से इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची....श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची ::आपने क्यूं हटायीं? :(2) नाम बदलें अनुरोध पर कुछ चर्चा के बाद भी निर्णय ना लेना क्या प्रबंधक का अधूरा कार्य नहीं माना जायेगा :a- [[वार्ता:मौलाना अंजार शाह कश्मीरी]] :b- [[वार्ता:खुदाबक़्श लाइब्रेरी]] बक़्श को बख़्श :c- [[वार्ता:मौलवी खुदाबक़्श खान]] बक़्श को बख़्श :d- [[वार्ता:मौलवी खुदाबक़्श खान]] बक़्श को बख़्श :e- [[हिंदु धर्म से मुस्लिम बनने बालों की सूची]] ...बालों शब्द को वालों :f- [[वार्ता:मस्जिद अल-क़िबलातयैन]] ......(((8 जनवरी 2023))) ....अभी इतना ही बाक़ी बहुत कुछ ......... स्नेह बनाये रखें 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:25, 9 जनवरी 2025 (UTC) ::जी, आपने साथी प्रबन्धक के साथ हुई चर्चा के बारे में लिखा है। मुझे लगता है वो आजकल काफी व्यस्त हैं, समय मिला तो जरूर आपको उत्तर देंगे। आपने उपरोक्त वार्ता पृष्ठों का उदाहरण लिखा है, वो काम अधूरे हैं और वहाँ की चर्चा पढ़कर मैं देख पा रहा हूँ कि आपके साथ काफी सकारात्मक चर्चायें हुई हैं। आपके विकिपीडिया अनुभव को देखकर ही मैंने आपके साथ वार्ता करना उचित समझा था। आपके लिए कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ। सम्भव हो तो इस तरक के सुधार सभी लेखों में आवश्यक हैं। ::* [[मी एंड द मस्जिद]], नवम्बर 2024 में निर्मित लेख, पहला वाक्य बिना विराम चिह्नों के बहुत लम्बा रखा गया है और अर्थहीन है। उसे या तो छोटे वाक्यों में तोड़ा जाये या फिर उचित विराम चिह्नों का प्रयोग किया जाये। ::* [[इसरा नोमानी]], नवम्बर 2024 में निर्मित लेख, लेख में उनके लिए "वह" शब्द का उपयोग किया गया है जबकि किसी आतंकवादी या किसी बहुत क्रूर कार्य से जुड़े व्यक्तियों के अलावा, सर्वनाम "वो" काम में लिया जाता है। वह एकवचन है, उसके साथ वाक्य के अंत में "हैं" (अनुस्वार के साथ) बहुवचन नहीं आता है। एकवचन के साथ "है" आता है। ::* [[तारिक अल-सुवैदान]], नवम्बर 2024 में निर्मित लेख। जन्म दिनांक "15 सितंबर, 1953" लिखा है जो मशीनी अनुवाद में आता है। यह या तो "15 सितम्बर 1953" होना चाहिए या फिर "सितम्बर 15, 1953" होना चाहिए। मैं पहले वाले को वरियता देता हूँ लेकिन सम्बंधित व्यक्ति या घटना के मूल देश के अनुसार इसे काम में लिया जा सकता है। अंग्रेज़ी शब्द "and" के तुल्य हिन्दी में "और", "व", "एवं", "तथा" जैसे विभिन्न शब्द हैं अतः "और" के पहले अल्पविराम (,) नहीं आता है। ::* [[लतीफा साइमन]], कुछ दिन पहले निर्मित। इसमें दिनांक और सर्वनाम वाली त्रुटि है। ::* [[संयुक्त राज्य कांग्रेस के मुस्लिम सदस्यों की सूची]], मेरे सन्देश से थोड़ी देर पहले ही निर्मित किया था। इसमें अभी भी मशीनी अनुवाद भरा हुआ है। इसका पहला वाक्य पूर्णतः अर्थहीन और मशीनी है। अमेरिका में कांग्रेस के सदस्यों के लिए सेवा देते हैं जैसे शब्द नहीं लिखे जाते। अंग्रेज़ी शब्द "currently serve" का अनुवाद यहाँ सेवा देना सही नहीं है। सारणी के शीर्षक भी अंग्रेज़ी में ही हैं जिनका अनुवाद आसानी से सम्भव है। ::ये कुछ जल्दी में दिखाई देने वाली त्रुटियाँ (मशीनी अनुवाद का परिणाम) यहाँ लिखी हैं। ऐसी त्रुटियाँ विभिन्न लेखों में उपस्थित हैं।<span style='color:green;'>☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style='color:Magenta;'>संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style='color:blue;'>✉✉</span>]]) 18:16, 9 जनवरी 2025 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी,आदाब! आपने इतनी सारी बातें एकसाथ समझाने के लिए मुझे बहुत समय दिया, यह आपकी भावना अतुलनीय है, बेहद शुक्रिया, मैंने भी कई बार पढ़ कर, ठहर कर सब बातों पर विचार और रिसर्च करके दोबारा काम शुरू किया, आशा करता हूँ बहतर काम होसकेगा, आज [[वक्फ़]] पर एडिटिंग करते हुए आप स्मरण में थे, ऐसे ही स्नेह बनाये रखें, धन्यवाद... 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 07:19, 4 अप्रैल 2025 (UTC) ::::मैं अभी लेख को नहीं देख रहा क्योंकि अभी यह ताज़ा मामला है। अतः आप आराम से अद्यतन करते रहिये। हालांकि आपने पहले से बेहतर अवस्थ में लेख को स्थापित कर दिया है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:31, 4 अप्रैल 2025 (UTC) == Invitation to Participate in the Wikimedia SAARC Conference Community Engagement Survey == Dear Community Members, I hope this message finds you well. Please excuse the use of English; we encourage translations into your local languages to ensure inclusivity. We are conducting a Community Engagement Survey to assess the sentiments, needs, and interests of South Asian Wikimedia communities in organizing the inaugural Wikimedia SAARC Regional Conference, proposed to be held in Kathmandu, Nepal. This initiative aims to bring together participants from eight nations to collaborate towards shared goals. Your insights will play a vital role in shaping the event's focus, identifying priorities, and guiding the strategic planning for this landmark conference. Survey Link: https://forms.gle/en8qSuCvaSxQVD7K6 We kindly request you to dedicate a few moments to complete the survey. Your feedback will significantly contribute to ensuring this conference addresses the community's needs and aspirations. Deadline to Submit the Survey: 20 January 2025 Your participation is crucial in shaping the future of the Wikimedia SAARC community and fostering regional collaboration. Thank you for your time and valuable input. Warm regards,<br> [[:m:User:Biplab Anand|Biplab Anand]] <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Biplab_Anand/lists&oldid=28078122 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Biplab Anand@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == [[झाँवाँ]] लेख का शीर्षक == Umarkairanvi जी नमस्ते। मैंने आपके द्वारा बनाए एक लेख का नाम बदला है। कृपया ध्यान दें कि [[अनुस्वार]] और [[चन्द्रबिन्दु|अनुनासिक]] दो अलग-अलग चीज़ें हैं। आपके लेखों में इनकी ग़लती अक्सर दिखती है। इस ओर थोड़ा सुधार का प्रयास कर सकते हैं। इसी लेख में कांच, दांत इत्यादि शब्द लिखे हुए हैं जिनके उचित हिज्जे काँच और दाँत होने चाहिये। आशा करता हूँ आप ध्यान देंगे। एक और बात, आप लेखों में '''मोटे अक्षर''' में पाठ अनावश्यक रूप से इस्तेमाल करते हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:42, 9 अप्रैल 2025 (UTC) :@SM7 जी आदाब। तीन भाषाओँ के नाम के अनुवाद देख कर दो अनुवाद में जो आया वो दे दिया, बंग्ला से किया था तो उधर पत्थर शब्द भी साथ में दे दिया था, बोल्ड भी अनुवाद में होता है कोशिश करूँगा कि नार्मल रहे। नाम के बदलने में आप कोई संदर्भ / स्रोत देते तो अच्छा था जैसे कि इधर pumic Stone के साथ [https://archive.org/search?query=%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%95+%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B0&sin=TXT झामक पत्थर] लिखा है।..📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:39, 14 अप्रैल 2025 (UTC) ::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, आपसे सीखने समझने का सिलसिला कभी जारी था वो सिलसिला या अधूरी चर्चा बारे में अब क्या कहते हैं: [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6_%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%A6 वार्ता:मुहम्मद असद] पर मेरे ::::प्रश्न '''[[:श्रेणी:यहूदी धर्म से इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची]]....[[:श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची]]''' आपने क्यूं हटायीं? ::::<u>आपका उत्तर</u> : समय मिलते ही यह काम पूरा कर दूँगा। आजकल कुछ ज़्यादा व्यस्तता है। --[SM7--बातचीत-- 08:48, 7 अगस्त 2024].... ::स्नेह बनाये रखें। धन्यवाद 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:55, 14 अप्रैल 2025 (UTC) :::@[[सदस्य:Umarkairanvi|Umarkairanvi]] मतलब मुझे आपसे कुछ कहने का हक़ तभी है जब पहले आपका काम पूरा करूँ? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:29, 14 अप्रैल 2025 (UTC) ::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, आप जैसों का कुछ कहना मुझ जैसे आम सदस्यों का शौभाग्य होता है, जितनी बार चाहें बात कहें गौरव की बात होगी, आपकी बातों को भी सम्मान देता रहा और रहूँगा... इस मामले में भी विकी नियम मुझे यह श्रेणी लगाने से नहीं रोकता होगा लेकिन आपको सम्मान देते हुए .. [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6_%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%A6 वार्ता:मुहम्मद असद] [18 सितंबर] पर भी अंत में '' देखें मैंने केवल अनुमति चाही है, इसे याद दिलाना समझें, उस योग्य भी नहीं समझते तो काबिले अफ़सोस बात है....📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 13:59, 14 अप्रैल 2025 (UTC) :::::@[[सदस्य:Umarkairanvi|Umarkairanvi]] जी, याद दिलाना अलग से होता तो मुझे ऐसा नहीं लगता। आपने वहाँ जो दूसरा संदेश मुझे याद दिलाने के लिए लिखा है उसमें मुझे पिंग/मेंशन नहीं किया है अतः वह तो मुझे मिला ही नहीं। और अब आपने याद यहाँ दिलाया जहाँ कुछ और बात हो रही थी। इसलिए ऐसा लिखा। :::::आप कभी भी याद दिला सकते थे। और सच में मैं बाद में भूल गया था की आपसे इस काम कको करने का वादा किया था। उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ। पर याद दिलाने के लिए मेरे वार्ता पृष्ठ पर लिखते या वहीँ की चर्चा में मेंशन / पिंग करके तो यह घालमेल न होता। :::::अभी, यहाँ आपने याद दिलाया तो मुझे भ्रम हो गया। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 14:17, 14 अप्रैल 2025 (UTC) ::जहाँ तक झाँवाँ के हिज्जे की बात है [[wikt:झाँवाँ]] देख सकते हैं, यह है विक्षनरी पर लेकिन वहाँ मूलतः 'हिंदी शब्दसागर' नामक प्रसिद्द शब्दकोश से लेकर लिखा गया है। और pumice के अर्थ में इस ''झाँवाँ'' शब्द के प्रयोग की बात [https://hindi.oneindia.com/dictionary/pumice-meaning-in-hindi/ यहाँ देख सकते] हैं। ::असल में हिंदी में इसके दो प्रयोग हैं: एक प्राकृतिक पत्थर (pumice) के लिए और दूसरा प्रयोग किसी जली हुई या अधिक पकी हुईईँट के लिए भी। मुझे नहीं लगता कि दोनों पर अलग अलग लेख बनाना ठीक होगा। ऐसे में केवल झाँवाँ शीर्षक से लेख रखकर दोनों विवरण दिए जा सकते हैं। अगर आप और चर्चा करना चाहें तो उस लेख के वार्ता पन्ने पर कर सकते हैं, इससे फ़ायदा यह होगा कि कोई अन्य सदस्य/पाठक भी कभी इसके नाम के बारे में जानना चाहे तो उसके वार्ता पन्ने पे देख सकता है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 14:31, 14 अप्रैल 2025 (UTC) == प्रबंधक समीक्षा == <!--यह भाग सदस्य:Riteze/पहस साँचे से प्रतिस्थापित किया गया है --> आपके द्वारा निर्मित लेख [[मुहम्मद अमान होबोहम]] प्रबंधक {{noping|अजीत कुमार तिवारी}} द्वारा [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/मुहम्मद अमान होबोहम|पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा]] के उपरांत हटा दिया गया है। उम्मीद है कि उक्त प्रबंधक के इस निर्णय से आप संतुष्ट हुए होंगे। किसी भी प्रबंधक के प्रति संतुष्टि या असंतुष्टि [[विकिपीडिया:चौपाल/प्रबंधक समीक्षा]] पृष्ठ पर व्यक्त की जा सकती है। -[[User Talk:Riteze|<span style="color:green;">Riteze</span><sup>(वार्ता)</sup>]] 07:38, 10 अप्रैल 2025 (UTC) :@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] जी आदाब ,,,, 7 महीने पहले की बात याद आ गयी,,,संतुष्ट बिलकुल नहीं हूँ ,,,बात कहाँ रखूँ यह उलझन थी वो आपने दूर कर दी .....आशा करता हूँ ऐसी रहनुमाई आप करते रहेंगे, धन्यवाद 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 07:09, 11 अप्रैल 2025 (UTC) == आपके द्वारा निर्मित श्रेणी == आपने "श्रेणी:हिंदू धर्म से जुड़े विवाद फिल्मों में" निर्मित की है, इसे अन्य भाषाओं की विकि-कड़ियों से नहीं जोड़ा है और सम्बंधित लेखों में भी ऐसा कोई अनुभाग नहीं मिल रहा जिससे इसकी पुष्टि हो रही हो। यदि आपने [[:en:Category:Hinduism-related controversies in film]] के तुल्य श्रेणी निर्मित की है तो भी शीर्षक सुधारने की सहाल दूँगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:44, 1 मई 2025 (UTC) :आप लेखों में कहीं भी वर्ष लिख देते हैं। "2025 इज़राइल में आग" क्या आपको यह शीर्षक किसी भी तरिके से उचित लगता है? यह या तो "सन् 2025 में इज़राइल में आग" या "इज़राइल में आग, 2025" जैसा कुछ होता तो समझ में आता। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:59, 1 मई 2025 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं श्रेणी जोड़ता रहा हूँ यह जोड्ना भूल गया था, इंग्लिश विकी पर जिन लेखों पर उक्त श्रेणी थी उन्हीं पर लगायी, 'हिंदू धर्म से जुड़े विवाद' पहले है और यह "श्रेणी:हिंदू धर्म से जुड़े विवाद फिल्मों में" और तीसरी अगर बनायी जायेगी तो Category:Hinduism-related controversies in television के लिए श्रेणी:हिंदू धर्म से संबंधित विवाद टेलीविजन पर बन सकती है, यह श्रेणी जोड़ते हुए आसानी के साथ search/combined में दिखाई देंगी, फिर भी आप कोई सलाह देना चाहते हैं तो आपके अनुभव के आगे नमस्तक हूँ।.... दूसरी बात वर्ष कही भी लिखने की तो .. अनुवाद में पहले ही आना था,,,'''[[2025 म्यांमार भूकंप]]''' जैसी बहुत सारे नमूने इसी वर्ष के सामने थे जिनमें ऐसे ही [[2025 म्यांमार भूकंप|2025]] दिया जा रहा है, 2025 Israel fires का अनुवाद आज देखा तो auto में '2025 इजराइल में आग लग गई' है देखा तो उलझन बढ़ी। आपने जो नमूने दिए उन में '2025 में इज़राइल में आग' बहतर लग रहा है आप ठीक कर दें और इस सिलसिले में भी रहनुमाई करें...📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 12:00, 2 मई 2025 (UTC) ::::"2025 म्यांमार भूकंप" मशीनी अनुवाद से भरा हुआ है। अतः गलत उदाहरण से हम यह निर्धारित नहीं कर सकते। आप लेख के वार्ता पृष्ठ पर {{tl|नाम बदलें}} के उपयोग से शीर्षक में बदलाव का सुझाव लिख दीजियेगा। इससे कुछ लोगों की चर्चा के बाद एक उचित शीर्षक का निर्धारण हो सकेगा। यदि मैं किसी एक शीर्षक पर स्पष्ट होता तो स्थानान्तरण आपको पूछे बिना ही कर देता। ::::मैंने दोनों श्रेणी देखी हैं। "हिंदू धर्म से जुड़े विवाद" मुझे शीर्षक उचित लगा। "हिंदू धर्म से जुड़े विवाद फ़िल्मों में" उचित नहीं लग रहा। यह या तो "फ़िल्म में हिन्दू धर्म से सम्बंधित विवाद" या "फ़िल्म पर हिन्दू धर्म से सम्बंधित विवाद" कुछ होना चाहिए था। मैं इसके लिए कुछ उदाहरण देता हूँ। फ़िल्म [[ओ माय गॉड (फिल्म)|ओ माय गॉड]] और [[ओएमजी 2]] की कहानी मुख्यतः हिन्दू धर्म की कुछ कमियों के बारे में संदेश देती है लेकिन फ़िल्म [[पद्मावत (फ़िल्म)|पद्मावत]] में हिन्दू धर्म से सम्बंधित कुछ भी विवादित नहीं है लेकिन उसका विरोध कुछ हिन्दू संगठनों ने किया। ऐसा विरोध ओएमजी और ओएमजी2 के लिए भी किया होगा। अतः यह श्रेणी फ़िल्म के अन्दर दिखाये विरोध को लेकर नहीं है अन्यथा उस श्रेणी में [[पीके (फ़िल्म)|पीके]] फ़िल्म भी होती क्योंकि उसमें तो हिन्दू, इस्लाम, ईसाई और सिख धर्म से सम्बंधित कुछ विवाद और कुरुतियाँ दिखाई हैं। लेकिन उसका किसी भी धार्मिक संगठन द्वारा विरोध बहुत कम हुआ था। अतः श्रेणी के नामकरण पर पुनः विचार की आवश्यकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:30, 2 मई 2025 (UTC) :::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी विस्तृत उत्तर के लिए धन्यवाद, मुझे और पाठकों को इससे बहुत कुछ सीखने समझने को मिला, आशा है कि आगे [[वार्ता:2025 इज़राइल में आग|संबंधित चर्चा]] से भी सीखने को मिलेगा, लेख नाम देने के लिए जो नमूने मेरे सामने थे उन्हें चर्चा/उदाहरण के लिए देखें: ::::::[[2025 म्यांमार भूकंप]] ...[[2025 इंडियन प्रीमियर लीग|'''2025''' इंडियन प्रीमियर लीग]] ...'''[[2025 महिला क्रिकेट विश्व कप क्वालीफायर]]... [[2025 सुदीरमन कप|'''2025''' सुदीरमन कप]]...[[2025 तीरंदाजी विश्व कप|'''2025''' तीरंदाजी विश्व कप]]...[[2025 महिला क्रिकेट विश्व कप|'''2025''' महिला क्रिकेट विश्व कप]]...[[2025 ग्रीक राष्ट्रपति चुनाव|'''2025''' ग्रीक राष्ट्रपति चुनाव]]... [[2025 भारतीय राष्ट्रीय खेल|'''2025''' भारतीय राष्ट्रीय खेल]]... [[2025 तीरंदाजी विश्व कप में भारत|'''2025''' तीरंदाजी विश्व कप में भारत]]... [[2025 विश्व तैराकी चैंपियनशिप|'''2025''' विश्व तैराकी चैंपियनशिप]] ...[[2025 आईएसएसएफ विश्व कप|'''2025''' आईएसएसएफ विश्व कप]]... [[2025 महिला रग्बी विश्व कप|'''2025''' महिला रग्बी विश्व कप]]...[[2025 एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप|'''2025''' एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप]]...[[2025 ग्वाटेमाला सिटी बस दुर्घटना|'''2025''' ग्वाटेमाला सिटी बस दुर्घटना]] ...[[2025 आईएसएसएफ विश्व कप में भारत|'''2025''' आईएसएसएफ विश्व कप में भारत]]...[[2025 उत्तर हिंद महासागर चक्रवात का मौसम|'''2025''' उत्तर हिंद महासागर चक्रवात का मौसम]]...[[2025 अंडर-17 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस|'''2025''' अंडर-17 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस]]...[[2025 कोलकाता नाइट राइडर्स सीज़न|'''2025''' कोलकाता नाइट राइडर्स सीज़न]]...[[2025 पीडीसी विश्व डार्ट्स चैम्पियनशिप]]... :::::वर्ष अंक हिंदी में :::::[[२०२५ आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी]]...[[२०२२–२०२५ आईसीसी महिला चैंपियनशिप|२०२२–'''२०२५''' आईसीसी महिला चैंपियनशिप]]... :::::वर्ष अंक अंत में :::::[[प्रयाग महाकुंभ मेला 2025|प्रयाग महाकुंभ मेला '''2025''']]...[[आयकर अधिनियम 2025|आयकर अधिनियम '''2025''']]... :::::वर्ष अंक अंत में कोमे के साथ :::::[[दिल्ली विधान सभा चुनाव, 2025|दिल्ली विधान सभा चुनाव, '''2025''']]... ::::श्रेणी के नामकरण पर आपकी बातें बार बार पढ़ कर गहराई से समझने की कोशिश कर रहा हूँ, क्या उसके लिए उस श्रेणी की वार्ता पर नाम बदलें या साधारण चर्चा की जा सकती है?...एक बार फिर धन्यवाद ...📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 22:30, 2 मई 2025 (UTC) :::::वर्ष वाले पर चर्चा से कुछ परिणाम चाहता हूँ। श्रेणी वाले में अभी के लिए जैसे है वैसे रहने दो। जब आपको नाम स्पष्ट हो जाये और कोई उचित शीर्षक ज्ञात हो तो बता दीजियेगा, बॉट से एकसाथ सुधार दिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:51, 3 मई 2025 (UTC) == [[:सैयद आदिल हुसैन शाह|सैयद आदिल हुसैन शाह]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:सैयद आदिल हुसैन शाह|सैयद आदिल हुसैन शाह]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सैयद आदिल हुसैन शाह|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सैयद आदिल हुसैन शाह]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>यह लेख विषय की उल्लेखनीयता स्थापित नहीं करता। यह व्यक्ति केवल एक आतंकवादी हमले में मारे जाने के कारण समाचारों में आया है, लेकिन इसके अलावा इसका कोई स्वतंत्र या स्थायी महत्व नहीं है। विकिपीडिया समाचार पत्र नहीं है, और केवल मृत्यु की घटना के आधार पर लेख नहीं बनाए जा सकते। यह मामला [[WP:1E]] (एकल घटना) और WP:BLP1E (एकल घटना पर जीवित व्यक्ति/हाल ही में मृत व्यक्ति) जैसे नीतियों के अंतर्गत आता है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 08:05, 15 मई 2025 (UTC) ==विलय नामांकन== आपने [[वार्ता:मोजतबा खामेनेई]] पर {{tlx|विलय}} साँचा जोड़ दिया है। यह साँचा मुख्य नामस्थान पर जोड़ा जाता है, वार्ता पृष्ठ पर नहीं। कृपया वहाँ से ये साँचा हटा दें। लेख में विलय के लिए कोई सामग्री नहीं थी अतः उसे सीधा अनुप्रेषित कर दिया गया है।[[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 02:55, 14 मार्च 2026 (UTC) [[श्रेणी:User talk pages with Uw-spam2 notices|{{PAGENAME}}]] == [[मुहम्मद बाक़िर क़ालिबफ़]] == नमस्ते, कृपया लेख की एक बार पुनः समीक्षा करें। मैंने कुछ सुधार किये लेकिन अभी भी नाम कहीं क़ालिबफ़ लिखा है तो कहीं ग़ालिबफ़। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:54, 31 मार्च 2026 (UTC) :: नमस्ते @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, मशीनी अनुवाद से नाम ना दे कर अरबी और फारसी विकी पर محمدباقر قالیباف नाम में क़ा को देखा फिर उर्दू में भी ग़ा वाला स्वर ना पाया,[https://www.bbc.com/urdu/articles/cdrmy4mj755ov%20%20%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF%20%D8%A8%D8%A7%D9%82%D8%B1%20%D9%82%D8%A7%D9%84%DB%8C%D8%A8%D8%A7%D9%81 محمد باقر قالیباف: وہ ایرانی]और हिन्दी के लिए ईरान से संबन्धित साईट पर गा ना देख कर का अर्थात क़ालिबाफ़ ही देखा [https://parstoday.ir/hi/news/iran-i143520-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6_%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF_%E0%A4%A8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80_%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%83_%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87_%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87_%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4_%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%8B_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B9_%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9_%E0%A4%95%E0%A4%B0_%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87%20%20%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6%20%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF%20%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A6%20%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A4%BC%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BC] तो यह नाम उचित लगा, अब पारस के उस लिंक के अलावा कोई पेज नहीं खुल पा रहा उसका स्क्रीनशॉट ले लिया, आज आज तक देखना हुआ [https://www.aajtak.in/world/story/iran-protest-death-toll-ayatollah-ali-khamenei-crackdown-order-ntc-mnrd-dskc-2436648-2026-01-11?utm_source=chatgpt.com ईरान की संसद में बोलते हुए स्पीकर मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा] तो पता चला की बफ़ नहीं बाफ़ है, इसके लिए खेद है...का और गा पर इतना धियान दिया की इधर चूक हो गयी...📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 12:03, 1 अप्रैल 2026 (UTC) :::तो इसे क़ालिबाफ़ पर मूव कर दें? आप लेख के अंदर बदलाव कर लीजियेगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 13:06, 1 अप्रैल 2026 (UTC) ::::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, बदलाव कर दिये लेकिन "मूव" करना अभी में सीख नहीं सका,... दूसरी बात आपने जो इस में एडिट किया उस को देखते हुए जानना था कि सम्मान जनक शब्द एकवचन में 'हैं' का प्रयोग कर सकते हैं? मुझे जान बूझकर यह हटाना होता है क्योंकि @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] से एक चर्चा में उन्होंने लिखा था ".....'''सर्वनाम "वो" काम में लिया जाता है। वह एकवचन है, उसके साथ वाक्य के अंत में "हैं" (अनुस्वार के साथ) बहुवचन नहीं आता है। एकवचन के साथ "है" आता है'''....."...धन्यवाद 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 06:03, 2 अप्रैल 2026 (UTC) ... :::::::मूव मैं कर दूँगा। जहाँ तक मुझे पता है सम्मान दिखाने के लिये, जो विकिपीडिया पर आम शैली है, '''हैं''' का प्रयोग किया जाता है और यह '''वो''' के साथ भी प्रयोग किया जा सकता है; जिन्हें '''वो''' के साथ '''हैं''' लिखना अटपटा लगता है वे लोग सम्मान जनक भाषा में '''वो''' की जगह भी, सम्मान दिखाने के लिये '''वे''' शब्द का प्रयोग करते हैं - तब '''वे''' सर्वनाम बहुवचन नहीं बल्कि सम्मान दिखाता है। वैसे भी '''वो''' शब्द '''वह''' का ही छोटा रूप है। :::::::उदाहरण: "कखग एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वह वर्तमान में अबस राज्य के मुख्यमंत्री हैं।" इसके दूसरे वाक्य में सर्वनाम चाहे 'वह' लिखिए, या 'वो' लिखिये' या 'वे' लिखिये, अंत में तो 'हैं' ही लिखा जायेगा। :::::::या तो शुरू से आख़ीर तक तुम/वो वाली ग़ैर-सम्मान वाली शैली में ही पूरा लेख लिखें - "कखग एक भारतीय राजनीतिज्ञ है। वो वर्तमान में अबस राज्य का मुख्यमंत्री है। उसका जन्म अमुक तारीख़ को हुआ..." इत्यादि। पर इस शैली में तो किसी के बारे में लिखा नहीं जाता। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 14:27, 2 अप्रैल 2026 (UTC) ::::::::मैं "वो" के साथ "हैं" (अनुस्वार सहित) लिखता हूँ। हालांकि यदि "वे" उचित है तो मैं भी यह बदलाव कर लूँगा। बाकी SM7 जी ने उचित उत्तर दे ही दिया है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:27, 6 अप्रैल 2026 (UTC) fzk6g80ilthyuvbbdaes98lk4f46vrk मिर्च 0 76014 6536719 6265572 2026-04-05T22:49:48Z AMAN KUMAR 911487 ++ 6536719 wikitext text/x-wiki {{Taxobox | name = मिर्च (Chili pepper) | image = Cubanelle Peppers.jpg | image_width = 250px | image_caption = विभिन्न प्रकार की ताज़ी मिर्च | domain = [[यूकैरियोट]] (Eukaryota) | kingdom = [[पादप]] (Plantae) | clade = ट्रेकियोफाइट्स (Tracheophytes) | clade2 = एंजियोस्पर्म (Angiosperms) | clade3 = यूडिकोट्स (Eudicots) | clade4 = एस्टरिड्स (Asterids) | order = [[सोलेनेलेस]] (Solanales) | family = [[सोलेनेसी]] (Solanaceae) | genus = ''[[शिमला मिर्च|कैप्सिकम]]'' (Capsicum) | species_type = प्रमुख प्रजातियाँ (Species) | species = * ''C. annuum'' (सामान्य मिर्च) * ''C. baccatum'' * ''C. chinense'' (भूत जोलोकिया आदि) * ''C. frutescens'' (तबास्को आदि) * ''C. pubescens'' }} [[चित्र:Chilli pickle in a plate 2.jpg|thumb|right|मिर्च का पारंपरिक अचार]] '''मिर्च''' (अंग्रेज़ी: Chili pepper) ''कैप्सिकम'' (Capsicum) वंश के एक [[पादप]] का [[फल]] है, जो [[सोलेनेसी]] (Solanaceae) कुल का सदस्य है। [[वनस्पति विज्ञान]] की दृष्टि से इस पौधे के फल को 'बेरी' (Berry) माना जाता है। अपने तीखेपन, स्वाद और रंग के कारण इसका उपयोग विश्वभर में एक सब्जी ([[शिमला मिर्च]]) या एक [[मसाला|मसाले]] (लाल व हरी मिर्च) के रूप में किया जाता है। == इतिहास और उत्पत्ति == मिर्च का मूल जन्म स्थान [[दक्षिण अमेरिका]] (मुख्यतः मेक्सिको) माना जाता है, जहाँ से यह पूरे विश्व में फैली। क्रिस्टोफर कोलंबस जब अमेरिका पहुँचे, तो उन्होंने इसे खोजा और 'पेपर' (Pepper) नाम दिया, क्योंकि इसका तीखापन यूरोपीय लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली काली मिर्च (Black pepper) जैसा था।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/peppersdomestica00andr|title=Peppers : the domesticated Capsicums|last=Andrews|first=Jean|date=1984|publisher=Austin : University of Texas Press|others=Internet Archive|isbn=978-0-292-76486-6}}</ref> भारत में मिर्च 15वीं शताब्दी के अंत में पुर्तगाली व्यापारियों (मुख्यतः वास्को डी गामा के समुद्री मार्ग खोजने के बाद) द्वारा गोवा लाई गई थी। उससे पहले भारतीय व्यंजनों में तीखेपन के लिए केवल [[काली मिर्च]] और [[पिप्पली]] (Long pepper) का उपयोग होता था।<ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/indianfoodhistor0000acha|title=Indian food : a historical companion|last=Achaya|first=K. T.|date=1998|publisher=Delhi : Oxford University Press|others=Internet Archive|isbn=978-0-19-564416-6}}</ref> == भारत में उत्पादन और प्रमुख किस्में == वर्तमान में, भारत विश्व में मिर्च का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। देश में मिर्च की व्यावसायिक खेती मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान में की जाती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.sciencedirect.com/book/edited-volume/9780857090393/handbook-of-herbs-and-spices|title=Handbook of Herbs and Spices|website=ScienceDirect|language=en-us|access-date=2026-04-05}}</ref> आंध्र प्रदेश का गुंटूर क्षेत्र मिर्च उत्पादन के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है, जहाँ 'गुंटूर सन्नम' (Guntur Sannam) किस्म बहुतायत में उगाई जाती है। पूर्वोत्तर भारत (असम और नागालैंड) में उगाई जाने वाली '[[भूत जोलोकिया]]' (Bhut Jolokia) को दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों में से एक माना जाता है। 2007 में इसे वैज्ञानिक रूप से विश्व की सबसे तीखी मिर्च के रूप में प्रमाणित किया गया था।<ref>{{Cite journal|last=Bosland|first=Paul W.|last2=Baral|first2=Jit B.|date=|title=‘Bhut Jolokia’—The World's Hottest Known Chile Pepper is a Putative Naturally Occurring Interspecific Hybrid|url=https://journals.ashs.org/view/journals/hortsci/42/2/article-p222.xml|journal=HortScience|volume=42|issue=2|pages=222–224|doi=10.21273/HORTSCI.42.2.222|issn=0018-5345}}</ref> दूसरी ओर, 'कश्मीरी लाल मिर्च' अपने गहरे लाल रंग और बहुत कम तीखेपन के लिए जानी जाती है, जिसका उपयोग केवल भोजन को रंग देने के लिए किया जाता है। == गुण और रासायनिक तत्व == * '''तीखापन:''' मिर्च का तीखापन मुख्य रूप से 'कैप्साइसिन' (Capsaicin) नामक एक रासायनिक यौगिक के कारण होता है। यह रसायन जीभ पर मौजूद दर्द रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है, जिससे जलन का अहसास होता है।<ref>{{Cite journal|last=Nelson|first=E. K.|date=|title=THE CONSTITUTION OF CAPSAICIN, THE PUNGENT PRINCIPLE OF CAPSICUM.|url=https://pubs.acs.org/doi/abs/10.1021/ja02228a011|journal=Journal of the American Chemical Society|language=en|volume=41|issue=7|pages=1115–1121|doi=10.1021/ja02228a011|issn=0002-7863}}</ref> * '''रंग:''' पकी हुई लाल मिर्च का आकर्षक रंग 'कैप्सैन्थिन' (Capsanthin) नामक वर्णक (पिगमेंट) के कारण होता है। == उपयोग और स्वास्थ्य लाभ == मिर्च केवल एक मसाला नहीं है, बल्कि यह पोषण और औषधीय गुणों का भी अच्छा स्रोत है: * '''पोषण:''' हरी मिर्च में विटामिन सी (Vitamin C) प्रचुर मात्रा में होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, बी6 और पोटैशियम भी पाया जाता है। * '''औषधीय उपयोग:''' कैप्साइसिन का उपयोग कई दर्द निवारक मलहमों (Pain relief creams) में किया जाता है, क्योंकि यह गठिया (Arthritis) और मांसपेशियों के दर्द को कम करने में वैज्ञानिक रूप से सहायक माना गया है।<ref>{{Cite journal|date=|title=Objectives|url=http://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/10408398609527436|journal=C R C Critical Reviews in Food Science and Nutrition|language=en|volume=24|issue=3|pages=1–1|doi=10.1080/10408398609527436|issn=0099-0248}}</ref> == सन्दर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == {{मसाले}} [[श्रेणी:मसाले]] [[श्रेणी:सब्जियाँ]] [[श्रेणी:सोलेनेसी]] [[श्रेणी:नकदी फसलें]] gm8xbll19tjze8yu7c5gyu7u49aq64o बाल पत्रकारिता 0 83736 6536729 6333726 2026-04-06T01:31:45Z ~2026-20932-38 918980 साहित्य सप्तक गाजियाबाद से प्रकाशित मासिक पत्रिका है। इसका बाल साहित्य विशेषांक बहुत चर्चित हुआ था। 6536729 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=अक्टूबर 2015}} '''बाल पत्रकारिता''' की सुदीर्घ परम्परा को एक आलेख में समेटना निश्चय ही अंजलि में समुद्र भर लेने के समान है। बाल साहित्य की अनेक पत्रिकाएँ विगत पचास वर्षों में प्रकाशित हुई हैं। इन प्रकात्रिओं का सही-सही विवरण दे पाना एक दुरूह कार्य है। बाल साहित्य की पत्रिकाओं में कुछ पत्रिकाएँ तो लम्बे समय से प्रकाशित हो रही हें, परन्तु अधिकतर पत्रिकाएँ काल-कविलत हो गईं। उनके पुराने अंक खोजना कठिन ही नहीं, असम्भव-सा कार्य है। फिर भी जिन पत्रिकाओं का विवरण उपलब्ध हो सका है, उन्हें इस आलेख में समाहित किया जा रहा है। == बाल पत्रकारिता का इतिहास == बाल पत्रकारिता का औपचारिक प्रारम्भ [[भारतेन्दु युग|भारतेन्दु काल]] से माना जा सकता है। 1882 में [[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] की विशेष प्रेरणा से '[[बाल दपर्ण]]' पत्रिका का इलाहाबाद से प्रकाशन हुआ। इसके बाद भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने '[[बाला बोधिनी]]' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया। इन पत्रिकाओं में नैतिक मूल्यों को केन्द्र में रखकार उपदेशात्मक बाल साहित्य प्रकाशित हुआ। इन आरम्भिक बाल पत्रिकाओं के बाद निरन्तर बाल साहित्य की पत्रिकाएँ प्रकाशित होती रहीं। 1891 में लखनऊ से '[[बाल हितकर]]' पत्रिका प्रकाशित हुई। 1906 में अलीगढ़ से '[[छात्र हितैषी]]' पत्रिका प्रकाशित हुई। इसी वर्ष 1906 में ही बनारस से '[[बाल प्रभाकर]]' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। 1910 में इलाहाबाद से '[[विद्यार्थी]]' पत्रिका प्रकाशित हुई। 1912 में '[[मानीटर]]' पत्रिका नरसिंहपुर से प्रकाशित हुई। == बाल पत्रिकारिता के क्षेत्र में नए युग का प्रारम्भ == बाल पत्रिकारिता के क्षेत्र में नए युग का प्रारम्भ '[[शिशु]]' पत्रिका से हुआ। १९१४-१५ में 'शिशु' पत्रिका के प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इसके संपादन [[पं.सुदर्शनाचार्य]] थे। 'शिशु' पत्रिका के प्रकाशन के कुछ समय उपरान्त एक ऑर उत्कृष्ट पत्रिका ने बाल साहित्य के क्षेत्र में पदार्पण किया। इस पत्रिका ने बाल साहित्य के क्षेत्र में क्रांति ला दी। १९१७ में बंगालियों की प्राइवेट लिमिटेड संस्था '[[इण्डियन प्रेस, प्रयाग|इंडियन प्रेस]]' ने '[[बालसखा]]' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ किया। इसके संपादक [[पं.बदरीनाथ भट्ट]] थे। [[द्विवेदी युग]] की यह पत्रिका सर्वाधिक लोकप्रिय रही। 'बालसखा' सबसे अधिक समय अर्थात् ५३ वर्ष तक प्रकाशित होती रही। इस पत्रिका ने बाल पाठकों को बहुत प्रभावित किया तथा बाल साहित्यकारों की अच्छी-खासी संख्या तैयार की। इसी प्रकाशन प्रारम्भ किया श्रृंखला में १९२० में जबलपुर से '[[छात्र सहोदर]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९२४ में दिल्ली से माधव जी के संपादन में '[[वीर बालक]]' का प्रकाशन हुआ। पटना से १९२६ में [[आचार्य रामलोचन शरण]] के संपादन में '[[बालक]]' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९२७ में पं.रामजी लाल शर्मा के संपादन में इलाहाबाद से '[[खिलौना]]' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इलाहबाद से ही 1913 में '[[चमचम]]' का प्रकाशन हुआ। इसके संपादक थे '[[विश्व प्रकाश]]' १९३१ में एक और पत्रिका इलाहाबाद से प्रकाशित हुई, जो आगे चलकर बाल साहित्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुई। यह पत्रिका थी पं.[[रामनरेश त्रिपाठी]] के संपादकत्व में प्रकाशित '[[वानर]]' पत्रिका। पं.[[रामनरेश त्रिपाठी]] के श्रेष्ठ [[बालगीत]] इस पत्रिका के माध्यम से ही बाल पाठकों तक पहुँचकर लोकप्रिय बने। १९३२ में [[कालाकांकर]] से [[कुँवर सुरेश सिंह]] से संपादन में '[[कुमार]]' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। इलाहबाद से १९३४ में 'अक्षय भैया' का प्रकाशन हुआ। रमाशंकर जैतली के संपादन में मुरादाबाद से १९३६ में '[[बाल विनोद]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९३८ में [[पं.राम दहिन मिश्र]] से संपादन में पटना से 'किशोर' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। १९४४ में [[प्रेम नारायण टण्डन]] से संपादन में लखनऊ से 'होनहार' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। १९४६ में [[व्यथित हृदय]] से संपादन में इलाहबाद से '[[तितली]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९४६ में ही इलाहाबाद से [[ठाकुर श्रीनाथ सिंह]] के संपादन में '[[बालबोध]]' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले प्रकाशित इन पत्रिकाओं ने बाल पत्रकारिता में अपना स्थान बना लिया था। पत्रिकाओं ही संख्या निरन्तर बढ़ती गई। कुछ बन्द हुईं, तो कुछ नई पत्रिकाएँ भी प्रकाशित होती रहीं। इन पत्रिकाओं में कहानी, बालगीत, नैतिक कहानियाँ और हास्य की कहानियाँ प्रमुखता से प्रकाशित होती थीं। लोक जीवन में प्रचलित बाल गीत, बाल कथाएँ आदि भी इन पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होती रहीं। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व तक बाल साहित्य के प्रकाशन की स्थिति संतोषजनक कही जा सकती है। इस समय तक बाल साहित्य की लगभग तीस मुद्रित पत्रिकाएँ प्रकाशित हो रही थी तथा सोलह हस्तलिखत पत्रिकाएँ प्रकाशित होती थीं। १९४७ में देश स्वतंत्र हुआ। व्यवस्था परिवर्तित हुई। ऐसे में साहित्य के क्षेत्र में भी एक मोड़ आया। बाल साहित्य में देश प्रेम, खुशी ओर उल्लास से लबालब साहित्य पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगा भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने स्वतंत्रता प्राप्ति से 'बालभारत'का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। यह पत्रिका अद्यतन निरन्तर अत्यन्त लोकप्रिय बनी हुई है। १९४८ में पंजाब से 'प्रकाश' नामक पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९४९ में दिल्ली से 'अमर कहानी' एवं इलाहाबाद से 'मनमोहन' पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ, परन्तु दुर्भाग्य से कुछ अंक निकल कर ये दोनों पत्रिकाएँ काल के गाल में समा गईं। हिन्दी बाल पत्रकारिता के क्षेत्र में इसी समय एक महत्त्वपूर्ण घटना हुई, वह यह कि मद्रास से '[[चन्दामामा (बाल पत्रिका)|चन्दामामा]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९४८ में अहिन्दी भाषी क्षेत्र से अपना प्रकाशन प्रारम्भ करने वाली '[[चन्दामामा (बाल पत्रिका)|चन्दामामा]]' आज तक निरन्तर प्रकाशित होती चली आई है। यह पत्रिका समूचे देश में अत्यन्त लोकप्रिय है। पटना से '[[चुन्नू मुन्नू]]' पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ और यह भी अपने समय में लोकप्रिय पत्रिका बनी रही। १९५१ में प्रो॰लेखराज उल्फत के संपादन में देहरादून से '[[नन्हीं दुनिया]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। लखनऊ से एस.एम. शमीम अनहोनवी से संपादन में 'कलियाँ' पत्रिका निकलनी प्रारम्भ हुई। १९५५ में दिल्ली से लक्ष्मी चन्द्र टी. रूप चंदानी के संपादन में 'बाल मित्र' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इसी कालावधि में '[[वानर]]' पत्रिका का प्रकाशन जयपुर से प्रारम्भ हुआ। १९५७ में तस्र्णभाई के संपादन में 'जीवन शिक्षा' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इसी वर्ष दिल्ली से 'स्वतंत्र बालक'का प्रकाशन यत्न प्रकाशशील के संपादन में प्रारम्भ हुआ। ये पत्रिकाएँ बाल पाठकों के बीच अपनी खास पहचान नहीं बना सकीं। १९५८ में दिल्ली से '[[पराग]]' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इस पत्रिका ने अति शीघ्र बाल पाठकों एवं बाल साहित्य के पाठकों के बीच अपनी पहचान बना ली। लम्बे समय तक अच्छी प्रसार संख्या होने के बावजूद भी पराग का प्रकाशन बन्द हो गया। लुधियाना से सन्तराम के संपादन में १९५८ में 'शोभा' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९५८ में ही उमेश मल्होत्रा के संपादन में जालंधर सिटी से 'नन्हें-मुन्ने' पत्रिका का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। वाराणसी से राजकुमार वाही के संपादन में १९५८ में 'राजा बेटा' का प्रकाशन शुरू हुआ। इसी वर्ष मुरादाबाद से शांति प्रसाद दीक्षित के संपादन में '[[बालबंधु]]' का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। १९५९ में '[[मीनू-टीनू]]' पत्रिका रमाकान्त पाण्डेय के संपादन में चक्रधर (बिहार) से निकली। दयाशंकर मिश्र 'दद्दा' ने दिल्ली से '[[राजा भैया]]' पत्रिका निकाली। अमृतसर से गुस्र्चरण सिंह साखी से संपादन में '[[बाल फुलवारी]]' का प्रकाशन हुआ। १९६० में भगवानदास दत्ता से संपादन में [[करनाल]] से '[[बाल जीवन]]' का प्रकाशन हुआ। श्रीमती सुमन एवं जे.एन. वर्मा से संपादन में '[[हमारा शिशु]]' पत्रिका निकाली। इसी वर्ष भोलानाथ पुस्र्षोत्तम सरन के संपादन में आजमगढ़ से 'विश्व बाल कल्याण' पत्रिका का प्रकाशन हुआ। ये पत्रिकाएँ बाल साहित्य के पाठकों में अधिक लोकप्रिय नहीं हुइंर्। बाल पत्रिकाओं के प्रकाशन ही संख्या निरन्तर बढ़ती रही। साथ-ही-साथ अनेकानेक पत्रिकाएँ बन्द भी होती रहीं। कुछ पत्रिकाएँ तो अपने केवल प्रवेशांक ही प्रकाशित कर पायीं। अलीगढ़ से सन २००९ से प्रकाशित होने वाली त्रैमासिक पत्रिका ' अभिनव बालमन' बच्चों की रचनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित करती है. अब तक लगभग शताधिक बाल रचनाकार इस पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं. २०१२ में नागेश पांडेय संजय के संपादन में गांधी पुस्तकालय, शाहजहांपुर से प्रकाशित बाल प्रभा भी दृष्टि संपन्न बाल पत्रिका है। == प्रमुख बाल पत्रिकाएँ == प्रमुख बाल पत्रिकाएँ १९६० के उपरान्त प्रकाशित हुई बाल पत्रिकाओं में प्रमुख इस प्रकार र्हैं: * ''[[फुलवारी]]'' (१९६१) * ''[[बाल लोक]]'' (१९६१) * ''[[बाल दुनिया]]'' (१९६१) * ''[[बेसिक बाल शिक्षा]]'' (१९६१) * ''[[बाल वाटिका]]'' (१९६२) * ''[[रानी बिटिया]]'' (१९६२) * ''[[शेरसखा]]'' (१९६३, * '[[नन्दन (बाल पत्रिका)|नन्दन]]'' (१९६४) * ''[[मिलिन्द]]'' (१९६४) * ''[[जगंल]]'' (१९६५) * ''[[बाल प्रभात]]'' (१९६६) * ''[[चमकते]]'' (१९६६) * ''[[तारा|सितारे]]'' (१९६६) * ''[[शिशु बन्धु]]'' (१९६७) * ''[[बाल जगत]]'' (१९६७) * ''[[बच्चों का अख़बार]]'' (१९६७) * ''[[बालकुंज]]'' (१९६८) * ''[[चंपक]]'' (१९६८) * ''लइखँर्थ्ीद्ध'' (१९६७) * ''र्थ्ी्कुंझ्र्'' (१९६८) * ''ज्ंंत्त्क'' (१९६८) * ''् पोट'' (१९६९) * ''[[नटखट]]'' (१९६९) * ''[[चन्द्र खिलौना]]'' (१९६९) * ''[[बाल रंग भूमि]]'' (१९७०) * ''[[मुन्ना]]'' (१९७०) * ''[[गोल गप्पा]]'' (१९७०) * ''[[नगराम]]'' (१९७२) * ''[[बच्चे और हम]]'' (१९७२) * ''[[चमाचम]]'' (१९७२) * ''[[गुरु चेला]]'' (१९७३) * ''[[हँसती दुनिया]]'' (१९७३) * ''[[गुड़िया]]'' (१९७३) * ''[[किशोर]]'' (१९७३) * ''[[मिलन्द]]'' (१९७३) * ''[[बाल बन्धु]]'' (१९७३) * ''[[प्यारा बुलबुल]]'' (१९७४) * ''[[लल्लू पंजू]]'' (१९७५) * ''[[शावक]]'' (१९७५) * ''[[बालेश]]'' (१९७५) * ''[[बाल रुचि]]'' (१९७५) * ''[[देवछाया]]'' (१९७५) * ''[[बाल दर्शन]]'' (१९७५) * ''[[शिशुरंग]]'' (१९७७) * ''[[कलरव]]'' (१९७७) * ''[[आदर्श बाल सखा]]'' (१९७७) * ''[[ओ राजा]]'' (१९७७) * ''[[बाल साहित्य समीक्षा]]'' (१९७७) * ''[[बाल पताका]]'' (१९७८) * ''[[मुसकराते फूल]]'' (१९७८) * ''[[बालकल्पना]]'' (१९७९) * ''[[मेला]] (१९७९) * ''[[देव पुत्र]]'' (१९७९) * ''[[रॉकेट|राकेट]]'' (१९८०) * ''[[बालमन]]'' (१९८०) * ''[[बाल रत्न]]'' (१९८०) * ''[[कुटकुट]]'' (१९८१) * ''[[नन्हें तारे]]'' (१९८१) * ''[[नन्हीं मुस्कान]]'' (१९८१) * ''[[नन्हें मुन्नों का अखबार]]'' (१९८१) * ''[[द चिल्ड्रन टाइम्स]]'' (१९८१) * ''[[आनन्द दीप]]'' (१९८२) * ''[[बाल नगर]]'' (१९८२) * ''[[चन्दन]]'' (१९८२) * ''[[लल्लू जगधर]]'' (१९८२) * ''[[सुमन सौरभ]]'' (१९८३) * ''[[किलकारी]]'' (१९८५) * ''[[उपवन]]'' (१९८५) * ''[[चकमक]]'' (१९८५) * ''[[बाल कविता]]'' (१९८५) * ''[[अच्छे भैया]]१९८६) * ''[[नये फूल धरती के]]'' (१९८६) * ''[[बालहंस]]'' (१९८६) * ''[[बालमंच]]'' (१९८७) * ''[[नन्हें सम्राट]]'' (१९८८) * ''[[किशोर लेखनी]]'' (१९८८) * ''[[बाल मेला]]'' (१९८९) * ''[[बाल विवेक]]'' (१९८९) * ''[[समझ झरोखा]]'' (१९८९) * ''[[यू.पी.नन्हा समाचार]]'' (१९८९) * ''[[हिमांक रतन]]'' (१९७७) * ''[[बाल मिलाप]]'' (१९९८) * ''[[बाल प्रतिबिम्ब]]'' (२००३) *अभिनव बालमन ( 2009) * ''[[बाल प्रभा]]'' (2012) * ''[[बाल युग]]'' (2014) == बाल विशेषांक == बाल-पत्रकारिता के क्षेत्र में अद्यतन प्रकाशित होते रहकर अपनी पहचान जिन पत्रिकाओं ने बनाई है, उनमें प्रमुख र्हैं ''[[बाल भारती]]'', ''[[बालहंस]]'', ''[[नदंन]]'', ''[[चपंक]]'', ''[[चन्द्रामामा]]'', [[बाल युग]],''[[बाल वाणी]]'', ''[[बाल वाटिका]]'',पराग ,मेला, ''[[देवपुत्र]]'', ''[[स्नेह]]'', ''[[बाल मीतान]]'', ''[[बच्चों का देश]]'', ''[[जन संप्लव]]'', ''[[हँसती दुनिया]]'', ''[[बालमित्र]]'' आदि। बाल पत्रकारिता के क्षेत्र में उन साहित्यिक पत्रिकाओं के अवदान को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता, जिन्होंने बाल साहित्य के विशेषांक प्रकाशित किए हैं। समय-समय पर प्रकाशित विभिन्न पत्रिकाओं के विशेषांकों ने बाल साहित्यकारों को दिशा निर्देश तो दिया ही, साथ ही उनके द्वारा गए विगत काल के बाल साहित्य का समीक्षात्मक मूल्यांकन भी किया। इन पत्रिकाओं के बाल साहित्य विशेषांकों का यथा उपल्बध विवरण इस प्रकार र्है: * ''[[परिकल्पना]]''(बिहार) ने वर्ष १९६३, १९७३ एवं १९७५ में बाल विशेषांक प्रकाशित किए। * ''[[मधुमती]]'' (उदयपुर, राजस्थान) १९६७ * ''[[पुस्तक परिचय]]'' (१९७०) * ''[[आजकल]]'' (दिल्ली, १९७९); 'आजकल' का नवम्बर माह का अंक प्राय: बाल साहित्य पर केन्द्रित अंक रहता है। * ''[[भाषा]]'' (१९७९) * ''[[योजना]]'' (१९७९) * ''[[हिन्दी प्रकाशक]]'' (१९७९) * ''[[ताम्रपर्णी]]'' (१९७९) * ''[[उत्तर प्रदेश]]'' (१९७९) * ''[[स्वतंत्र भारत सुमन]]'' (१९७९) * ''[[संगीत]]'' (१९८१) * ''[[केशव प्रयास]]'' (१९८२) * ''[[दृष्टि कोण]]'' (१९८५) * ''[[रस सुलभ]]'' (१९८७) * ''[[अभ्यन्तर]]'' (१९९१) * ''[[भारतीय आधुनिक शिक्षा]]'' (१९९१) * बाल दर्शन : बाल किशोर रचनाकार विशेषांक (१९९१)अतिथि सम्पादक देवेंद्र कुमार देवेश, नागेश पांडेय संजय * * ''[[यू.एस.एम. पत्रिका]]'' ((१९९१), ९२), ९३), ९४), ९५), ९६), ९७), ९८) * ''[[अवध पुष्पांजलि]]'' (१९९४) * ''[[जगमग दीप ज्योति]]'' (१९९४) * जिंदगी अखबार होकर रह गई : बाल साहित्य सृजन शोध और आलोचना विशेषांक, संपादक : नागेश पांडेय संजय(१९९५) * ''[[प्रज्ञा]]'' (१९९६) * ''[[आकार]]'' (१९९९) * साहित्य सप्तक, मासिक का बाल साहित्य विशेषांक, अतिथि संपादक : डॉ. नागेश पांडेय संजय (२०२४) === साहित्यिक पत्रिकाओं तथा देनिक समाचार पत्रों के बाल विशेषांक === इन विशेषंकों के अतिरिक्त समय-समय पर साहित्यिक पत्रिकाएँ बाल साहित्य पर केन्द्रित लेखों को प्रकाशित करती रहती हैं। '[[कादंबिनी]]', '[[नवनीत]]', '[[हरिगंधा]]', '[[पंजाब सौरभ]]', '[[समकालीन भारतीय साहित्‍य|समकालीन भारतीय साहित्य]]', '[[मधुमती]]', '[[उत्तर प्रदेश]]' [[आजकल]] आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों में बाल साहित्य पर विभिन्न कोणों से विचार किया गया है। 'साप्ताहिक हिन्दुस्तान' पत्रिका अपने समय में बाल साहित्य पर अच्छी सामग्री प्रकाशित करती रही है। बाल पत्रकारिता के क्षेत्र में दैनिक समाचार पत्रों के साप्ताहिक परिशिष्टों में बाल-साहित्य प्रकाशित कर रहे हैं। बाल पाठक इन अंकों की प्रतीक्षा करते रहते हैं। ऐसे समाचार पत्रों र्में '[[अमर उजाला]]', '[[आज]]', '[[दैनिक जागरण]]', '[[राष्ट्रीय सहारा]]', '[[जनसत्ता]]', '[[डेली मिलाप]]', '[[स्वंतत्र भारत]]', '[[नवभारत टाइम्स]]', '[[दैनिक नवज्योति]]', '[[राजस्थान पत्रिका]]', '[[हिन्दुस्तान]]', '[[दक्षिण समाचार]]', '[[नईदुनिया|नई दुनिया]]', आदि प्रमुख हैं। बाल साहित्य की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन वर्ष एवं उनके नामोल्लेख करने के उपरान्त विगत वर्षों में प्रकाशित होते रहे बाल साहित्य के प्रमुख काव्यांशों को उद्धत करना प्र्रासंगिक प्रतीत हो रहा है, क्योंकि समय-समय पर प्रकाशित बाल साहित्य के इन अंशों से यह सहज अनुमान लगाना संभव हो सकेगा कि बाल साहित्यकारों ने बालमन की संवेदनाओं को कहाँ तक समझा है। === बाहरी कड़ियाँ === * [http://www.scribd.com/doc/70071972/%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%A1%E0%A5%89-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6 बाल पत्रिकाओं की भूमिका और दायित्‍व] [[श्रेणी:पत्रकारिता]] [[श्रेणी:बचपन]] tcan0hm2qgo5wlgbk6iy5k0fyi1cf4e अरविन्द कुमार 0 98674 6536681 5966889 2026-04-05T18:04:05Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536681 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | image = Arvind Kumar, 2019, New Delhi.jpg | name = अरविन्द कुमार | birth_date = {{Birth-date | 17 January 1930}} | birth_place = [[मेरठ]], [[उत्तर प्रदेश]] | death_date = {{Death-date and age |26 April 2021 | 17 January 1930}} | death_place = New Delhi, India | occupation = {{Hlist | पत्रकार | कला-नाटक-फिल्म समीक्षक | लघुकथाकार | अनुवादक | कोशकार}} | years_active = 1945–2021 | notable_works = {{Ubl | ''Samantar Kosh'' (1996) | ''The Penguin English-Hindi/Hindi-English Dictionary and Thesaurus'' (2007) }} | spouse = कुसुम कुमार | children = 2<!-- # of children (e.g., 3); only list names of independently notable or particularly relevant children. --> | family = <!-- Names of siblings or other relatives; include only if independently notable and particularly relevant --> }} '''अरविन्द कुमार''' (जन्म: [[ग्रेगोरियन कैलेंडर|ग्रेगोरी कैलेण्डर]]: जनवरी [[१७|17]], [[१९३०|1930]] / [[भारतीय राष्ट्रीय पंचांग|भारांग]]: पौष [[२७|27]], [[१८५१|1851]] -- 26 अप्रैल 2021), अपनी धर्मपत्नी '''कुसुम कुमार''' (जन्म: [[ग्रेगोरियन कैलेंडर|ग्रेगोरी कैलेण्डर]]: दिसम्बर [[८|8]], [[१९३३|1933]] / [[भारतीय राष्ट्रीय पंचांग|भारांग]]: अग्रहायण [[१७|17]], [[१८५५|1855]]) के साथ [[हिन्दी]] के प्रथम '''[[समान्तर कोश]]''' (थिसॉरस) के निर्माण करने के लिये जाने जाते हैं। उन्होने संसार का सबसे अद्वितीय द्विभाषी थिसॉरस तैयार किया। [[द पेंगुइन इंग्लिश-हिन्दी/हिन्दी-इंग्लिश थिसॉरस ऍण्ड डिक्शनरी]] अपनी तरह एकमात्र और अद्भुत भाषायी संसाधन है। यह किसी भी शब्दकोश और थिसारस से आगे की चीज़ है और संसार में कोशकारिता का एक नया कीर्तिमान स्थापित करता है। इतना बड़ा और इतने अधिक शीर्षकों उपशीर्षकों वाला संयुक्त द्विभाषी थिसॉरस और कोश इस से पहले नहीं था। == जीवनी == '''अरविन्द कुमार''' का जन्म [[उत्तर प्रदेश]] के [[मेरठ]] नगर में हुआ। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा मेरठ के नगरपालिका विद्यालय में हुई। सन 1943 में उनका परिवार [[दिल्ली]] आ गया। यहाँ उन्होने मैट्रिक किया। वे [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] साहित्य में एमए हैं। सम्प्रति '''[[केन्द्रीय हिन्दी संस्थान]], [[आगरा]]''', की [https://web.archive.org/web/20080213220921/http://www.hindisansthan.org/hi/project/Hindi-Lok-Shabd-Kosh.htm हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना] के अवैतनिक प्रधान संपादक हैं। === कार्य === अरविन्द फ़िल्म पत्रिका [[माधुरी]] और [[सर्वोत्तम (पत्रिका)|सर्वोत्तम]] (रीडर्स डाईजेस्ट का हिन्दी संस्करण) के प्रथम सम्पादक थे। पत्रकारिता में उनका प्रवेश [[दिल्ली प्रेस समूह]] की पत्रिका सरिता से हुआ। कई वर्ष इसी समूह की अंग्रेजी पत्रिका [[कैरेवान]] के सहायक सम्पादक भी रहे। कला, नाटक और फ़िल्म समीक्षाओं के अतिरिक्त उनकी अनेक फुटकर कविताएंँ, लेख व कहानियाँ प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। === '''काव्यानुवाद''' === उनके काव्यानुवाद [[विलियम शेक्सपीयर|शेक्सपीयर]] के [[जुलियस सीसर|जूलियस सीजर]] का मंचन [[राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय]] के लिये [[इब्राहिम अल्काजी]] के निर्देशन में हुआ। 1998 में जूलियस सीज़र का मंचन [[अरविन्द गौड़]] के निर्देशन में शेक्सपियर नाटक महोत्सव (असम) और पृथ्वी थिएटर महोत्सव, भारत पर्यावास केन्द्र (इण्डिया हैबिटेट सेण्टर), में [[अस्मिता]] नाट्य संस्था ने किया। अरविन्द कुमार ने [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] की पृष्ठभूमि में इसी नाटक का काव्य रूपान्तर भी किया है, जिसका नाम है - '''विक्रम सैन्धव'''। === '''पूर्व सम्पादक''' === * सर्वोत्तम - रीडर्स डाइजेस्ट (1980-85) * माधुरी (1963-1978) * सहायक सम्पादक: दिल्ली प्रेस समूह (1963 तक) == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20110701114529/http://www.abhivyakti-hindi.org/parikrama/delhi/2011/06_27_11.htm शब्दाचार्य अरविंद कुमार] * [https://web.archive.org/web/20100107064212/http://www.nirantar.org/1006-nidhi-samantar-kosh/ हिन्दी समांतर कोश: एक विराट प्रयास] - हिन्दी ब्लॉगज़ीन [[निरन्तर|निरंतर]] में समान्तर कोश के बारे में अनूप शुक्ला का आलेख। * [http://thatshindi.oneindia.in/art-culture/2008/10/25/english-hindi-thesaurus-dictionary-couple-arvind.html अरविन्द दम्पत्ति - साधना शब्दों की] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081108004631/http://www.robotstxt.org/ |date=8 नवंबर 2008 }} * [https://web.archive.org/web/20081028065047/http://samantar.mywebdunia.com/2008/10/26/1225012560000.html कोश, समांतर कोश और पेगुइन इंग्लिश-हिंदी-हिंदी इंग्लिश थिसारस] (वेबदुनिया) * [https://web.archive.org/web/20090423114355/http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6_%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0 अरविन्द कुमार की रचनाएँ कविताकोश में] [[श्रेणी:हिन्दी पत्रकार]] [[श्रेणी:1930 में जन्मे लोग]] hqc42j8h80se3qmvfd7z9udfd8m5w3r अरबी सब्जी 0 99453 6536679 5846401 2026-04-05T17:49:05Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536679 wikitext text/x-wiki {{About|सब्जी|भाषा|अरबी भाषा}} {{taxobox |name = अरबी |image = TaroAKL.jpg |regnum = [[पादप]] |unranked_divisio = [[सपुष्पक पौधा|एंजियोस्पर्म]] |unranked_classis = [[एकबीजपत्री]] |ordo = [[:en:Alismatales|एलिस्मैटेल्स]] |familia = [[:en:Araceae|एरासी]] |genus = ''[[:en:Colocasia|कोलोकेशिया]]'' |species = '''''सी. एस्क्युलेन्टा''''' |binomial = ''कोलोकेशिया एस्क्युलेन्टा'' |binomial_authority = ([[कार्ल लीनियस|एल]].) [[हीनरिच विल्हेल्म स्कॉट|स्कॉट]] |synonyms = {{Plainlist | style = margin-left: 1em; text-indent: -1em; | * ''Alocasia dussii'' <small>Dammer</small> * ''Alocasia illustris'' <small>W.Bull</small> * ''Aron colocasium'' <small>(L.) St.-Lag.</small> * ''Arum chinense'' <small>L.</small> * ''Arum colocasia'' <small>L.</small> * ''Arum colocasioides'' <small>Desf.</small> * ''Arum esculentum'' <small>L.</small> * ''Arum lividum'' <small>Salisb.</small> * ''Arum nymphaeifolium'' <small>(Vent.) Roxb.</small> * ''Arum peltatum'' <small>Lam.</small> * ''Caladium acre'' <small>R.Br.</small> * ''Caladium colocasia'' <small>(L.) W.Wight</small> nom. illeg. * ''Caladium colocasioides'' <small>(Desf.) Brongn.</small> * ''Caladium esculentum'' <small>(L.) Vent.</small> * ''Caladium glycyrrhizum.'' <small>Fraser</small> * ''Caladium nymphaeifolium'' <small>Vent.</small> * ''Caladium violaceum'' <small>Desf.</small> * ''Caladium violaceum'' <small>Engl.</small> * ''Calla gaby'' <small>Blanco</small> * ''Calla virosa'' <small>Roxb.</small> * ''Colocasia acris'' <small>(R.Br.) Schott</small> * ''Colocasia aegyptiaca'' <small>Samp.</small> * ''Colocasia colocasia'' <small>(L.) Huth</small> nom. inval. * ''Colocasia euchlora'' <small>K.Koch & Linden</small> * ''Colocasia fonstanesii'' <small>Schott</small> * ''Colocasia gracilis'' <small>Engl.</small> * ''Colocasia himalensis'' <small>Royle</small> * ''Colocasia neocaledonica'' <small>Van Houtte</small> * ''Colocasia nymphaeifolia'' <small>(Vent.) Kunth</small> * ''Colocasia peltata'' <small>(Lam.) Samp.</small> * ''Colocasia vera'' <small>Hassk.</small> * ''Colocasia violacea'' <small>(Desf.) auct.</small> * ''Colocasia virosa'' <small>(Roxb.) Kunth</small> * ''Colocasia vulgaris'' <small>Raf.</small> * ''Leucocasia esculenta'' <small>(L.) Nakai</small> * ''Steudnera virosa'' <small>(Roxb.) Prain</small> * ''Zantedeschia virosa'' <small>(Roxb.) K.Koch</small> }} |synonyms_ref = <ref name="Lim2014">{{cite book|author=T. K. Lim|title=Edible Medicinal and Non Medicinal Plants: Volume 9, Modified Stems, Roots, Bulbs|url=https://books.google.com/books?id=t22vBQAAQBAJ&pg=PA454|date=3 December 2014|publisher=Springer|pages= 454–460|isbn=978-94-017-9511-1}}</ref><ref>{{cite web|url= http://www.ipni.org/ipni/idPlantNameSearch.do?id=1170772-2 |title=Colocasia esculenta (L. ) Schott|access-date=15 February 2015}}</ref><ref name="Quattrocchi2016">{{cite book|author=Umberto Quattrocchi|title=CRC World Dictionary of Medicinal and Poisonous Plants: Common Names, Scientific Names, Eponyms, Synonyms, and Etymology |url= https://books.google.com/books?id=-37OBQAAQBAJ&pg=PA1060|date=19 April 2016|publisher=CRC Press|pages=1060–1061 |isbn=978-1-4822-5064-0}}</ref> }} '''अरबी''' ({{lang-en|[[:en:Taro|Taro]]}}) एक उष्णकटिबन्धीय पेड़ है जिसे इसकी जड़ में लगी अरबी नामक सब्जी के लिए मुख्यतः उगाया जाता है। इसके साथ ही इसके बड़े-बड़े पत्ते भी खाद्य हैं। यह बहुत प्राचीन काल से उगाया जाने वाला पेड़ है।<ref>Country profile: Samoa, New Agriculturist Online [http://www.new-agri.co.uk/06-1/countryp.html new-agri.co] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080828122750/http://www.new-agri.co.uk/06-1/countryp.html |date=28 अगस्त 2008 }}, accessed June 12, 2006</ref> कच्चे रूप में पेड़ जहरीला हो सकता है। ऐसा इसमें मौजूद [[कैल्शियम ऑक्ज़ेलेट]] के कारण होता है। <ref>{{Cite web |url=http://www.weird-food.com/weird-food-vegetable.html |title=Weird Foods from around the World<!-- Bot generated title --> |access-date=13 जुलाई 2009 |archive-date=11 अप्रैल 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080411160105/http://www.weird-food.com/weird-food-vegetable.html |url-status=dead }}</ref><ref>[http://www.aspca.org/site/PageServer?pagename=pro_apcc_toxic_tarovine ASPCA: Animal Poison Control Center: Toxic Plant List<!-- Bot generated title -->]</ref> हालांकि ये लवण पकने पर नष्ट हो जाता है।<ref>''The Morton Arboretum Quarterly'', Morton Arboretum/University of California, 1965, p. 36.</ref> या इनको रात भर ठण्डे पानी में रखने पर भी नष्ट हो जाता है। अरबी अत्यन्त प्रसिद्ध और सभी की परिचित वनस्पति है। अरबी प्रकृति ठण्डी और तर होती है। अरबी के पत्तों से पत्तखेलिया नामक बानगी बनती है। अरबी कन्द (फल) कोमल पत्तों और पत्तों की तरकारी बनती है। अरबी गर्मी के मौसम की फसल है। अरबी गर्मी और वर्षा की ऋतु में होती है। अरबी की अनेक किस्मे होती हैं-राजाल, धावालु, काली-अलु, मंडले-अलु, गिमालु और रामालु। इन सबमें काली अरबी उत्तम है। कुछ अरबी में बड़े और कुछ में छोटे कन्द लगते हैं इनसे भाँति-भाँति बानगियाँ बनाई जाती है। अरबी रक्तपित्त को मिटाने वाली, दस्त को रोकने वाली और वायु को प्रकोप करने वाली है। == विभिन्न भाषाओं में नाम == [[चित्र:Taro root for sale.jpg|200px|thumb||अरबी की गांठें]] * [[हिन्दी|हिंदी]] : घुइयां, अरबी, अरुई। * [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]]: कोचई। * [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]]: ग्रेटलीव्ड कैलेडियम। *कुमाऊँनी: पिनालू * [[लातिन भाषा|लैटिन]]: एरम इण्डिकम। * [[मराठी भाषा|मराठी]]: आळु == गुण == अरबी शीतल, अग्निदीपक (भूख को बढ़ाने वाला), बल की वृद्धि करने वाली और स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ाने वाली है। अरबी सेवन से पेशाब अधिक मात्रा में होता है एंव कफ और वायु की वृद्धि होती है। अरबी कन्द में धातुवृद्धि की भी शक्ति है। अरबी के पत्तों का साग वायु तथा कफ बढ़ाता है। पत्तबेलिए बेसन के कारण स्वदिष्ट और रुचिकर लगते है, फिर भी उसका अधिक मात्रा में सेवन उचित नहीं है। अरबी की किसी भी किस्म को कच्ची न रखें। हानिकरक दूध बढ़ाने वाली है। अरबी सेवन से पेशाब अधिक मात्रा में होता है एंव कफ और वायु की वृद्धि होती है। अरबी कन्द में धातुवृद्धि की भी शक्ति है। अरबी के पत्तों का साग वायु तथा कफ बढ़ाता है। अरबी की सब्जी बनाकर खायें। इसकी सब्जी में गरम-मसाला, दालचीनी और लौंग डालें। जिन लोगों को गैस बनती हो, घुटनों के दर्द की शिकायत और खांसी हो, उनके लिए अरबी का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है। == चिकित्सा == * गिल्टी (टयूमर) अरुई के पत्तों के डाली को पीसकर लेप करने से रोग में लाभ होता है। * झुर्रियां अरबी त्वचा का सूखापन और झुर्रियाँ भी दूर करती है। सूखापन चाहे आंतों में हो या सांस-नली में अरबी खाने से लाभ होता है। * पित्त प्रकोप अरबी के कोमल पत्तों का रस और जीरे की बुकनी में मिलाकर देने से पित्त प्रकोप मिटता है। * पेशाब की जलन अरबी के पत्तों का रस 3 दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है। * फोड़े-फुन्सी अरबी के पत्ते के डण्ठल जलाकर उनकी राख तेल में मिलाकर लगाने से फोड़े मिटते है। * महिलाओं के दूध की वृद्धि अरबी की सब्जी खाने से दुग्धपान कराने वाली स्त्रियों का दूध बढ़ता है। * रक्तपित्त (खूनी पित्त) होने पर अरबी के पात्तों का साग रक्तपित्त के रोगी के लिए लाभकारी है। * वायु गुल्म (वायु का गोला) अरबी के पत्ते डण्ठल के साथ उबालकर उसका पानी निकालकर उसमें घी मिलाकर 3 दिन तक सेवन से वायु के गोला दूर होता है। * स्तनों में दूध को बढ़ाने के लिए स्तनों में दूध को बढ़ाने के लिएजच्चा महिलायें अरबी की सब्जी खायें तो बच्चे को पिलाने के लिए दूध बढ़ जायेगा। * हृदय रोग अरबी सब्जी रोजना खाना हृदय रोग में लाभप्रद है। * पाचन इलाज<ref>[http://www.stylecraze.com/articles/benefits-of-taro-vegetable/ Taro's benefits]</ref> ==चित्रदीर्घा== <gallery> Image:Taro corms.JPG| Image:Taro_corms_2.jpg| Image:Colocasia esculenta dsc07801.jpg| Image:Satoimo(Japan).JPG| </gallery> == सन्दर्भ == {{reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == {{commons|Colocasia esculenta}} {{सब्ज़ियाँ}} {{औषधीय पौधे}} [[श्रेणी:एरेसी]] [[श्रेणी:सब्ज़ी]] [[श्रेणी:जड़ीय सब्ज़ियाँ]] [[श्रेणी:पत्तेदार सब्ज़ियाँ]] [[श्रेणी:उष्णकटिबंधीय कृषि]] pal1ptxj5ga6f9qwl91jfaojhd8rx34 सुचेता कृपलानी 0 100704 6536804 6210728 2026-04-06T06:13:35Z ~2026-21027-80 919011 6536804 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | honorific-prefix = | name = सुचेता कृपलानी | honorific-suffix = | image = Sucheta Kriplani.jpg | imagesize = 150pxपूरा नाम सुचेता कृपलानी अन्य नाम सुचेता मज़ूमदार जन्म 25 जून, 1908 जन्म भूमि अम्बाला, पंजाब मृत्यु 1 दिसंबर, 1974 पति/पत्नी जे. बी. कृपलानी नागरिकता भारतीय प्रसिद्धि भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पद उत्तर प्रदेश की चौथी मुख्यमंत्री कार्य काल 2 अक्तूबर, 1963 – 13 मार्च, 1967 शिक्षा बी.ए, एम.ए. विद्यालय पंजाब विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय भाषा हिंदी, अंग्रेज़ी अन्य जानकारी 1948 से 1960 तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव रहीं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में इतिहास की प्राध्यापिका भी रहीं। सुचेता कृपलानी अथवा 'सुचेता मज़ूमदार' (अंग्रेज़ी: Sucheta Kriplani, जन्म- 25 जून, 1908, अम्बाला; मृत्यु- 1 दिसंबर, 1974) प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थीं। ये उत्तर प्रदेश की चौथी और भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं। caption = सुचेता कृपलानी | birth_date = [[२५ जून]] [[१९०८]] | birth_place = [[अम्बाला|अंबाला]], [[हरियाणा]] | death_date = [[१ दिसम्बर]] [[१९७४]] | death_place = | order = [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची|उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री]] | term_start = [[२ अक्तूबर|२ अक्टूबर]] [[१९६३]] | term_end = [[१४ मार्च]] [[१९६७]] | predecessor = [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | successor = [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|INC]] | spouse = | children = | footnotes = }} '''सुचेता कृपलानी''' (मूल नाम: '''सुचेता मजूमदार''') ([[२५ जून]],[[१९०८]]<ref>{{citation | year=2004 | title=Eminent Indian Freedom Fighters | author=S K Sharma | publisher=Anmol Publications PVT. LTD. | isbn=9788126118908 | page=560 | url=http://books.google.com/books?id=pMfpg66gIREC&pg=PA560 }}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> - [[१ दिसम्बर]], [[१९७४]]<ref>{{Cite web |url=http://www.sandesh.org/Story_detail.asp?pageID=1&id=48 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110721153554/http://www.sandesh.org/Story_detail.asp?pageID=1&id=48 |archive-date=21 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://indiancoastguard.nic.in/indiancoastguard/history/morehistory.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120502201216/http://indiancoastguard.nic.in/indiancoastguard/history/morehistory.html |archive-date=2 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थीं। ये [[उत्तर प्रदेश]] की मुख्य मंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं। वे प्रसिद्ध गांधीवादी नेता [[जे॰ बी॰ कृपलानी|आचार्य कृपलानी]] की पत्नी थीं। ==जीवनी== सुचेता कृपलानी का जन्म [[हरियाणा |पंजाब(आज का हरियाणा)]] के [[अंबाला]] शहर में सम्पन्न बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता सरकारी चिकित्सक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कई स्कूलों में पूरी हुई क्योंकि हर दो-तीन वर्ष में पिता का तबादला होता रहता था। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें [[दिल्ली]] भेज दिया गया। [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से उन्होंने [[इतिहास]] विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज से निकलने के बाद, 21 वर्ष की उम्र में ही ये स्वतंत्रता संग्राम में कूदना चाहती थीं पर दुर्भाग्यवश वह ऐसा कर नहीं पायीं क्योंकि 1929 में उनके पिता और बहन की मृत्यु हो गयी और परिवार को संभालने की जिम्मदारी सुचेता के कंधो पर आ गयी। इसके बाद, वे [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] (बीएचयू) में संवैधानिक इतिहास की व्याख्याता बन गईं। सन १९३६ में अठाइस साल की उम्र में उन्होंने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के मुख्य नेता [[जेबी कृपलानी]] से [[विवाह]] किया। सुचेता के इस कदम का उनके घर वालों के साथ [[महात्मा गांधी]] ने भी विरोध किया था। जेबी कृपलानी सिन्धी थे और उम्र में सुचेता कृपलानी से बीस साल बड़े थे। इसके अलावा गाँधीजी को डर था कि इस विवाह के कारण आचार्य जो उनके “दाहिने हाथ” थे, कहीं स्वतंत्रता संग्राम से पीछे न हट जाँय। आचार्य कृपलानी का साथ पाकर सुचेता पूरी तरह से राजनीति में कूद पड़ीं। 1940 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की महिला शाखा – ‘अखिल भारतीय महिला काँग्रेस’ की स्थापना की। 1942 में [[भारत छोड़ो आंदोलन]] में सक्रिय होने के कारण उन्हें एक साल के लिए जेल जाना पड़ा। १९४६ में वह [[संविधान सभा]] की सदस्य चुनी गई। 1949 में उन्हें [[संयुक्त राष्ट्र महासभा]] में एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था। भारत के स्वतंत्र होने के बाद वह भारतीय राजनीति में सक्रिय हो गयीं। जब उनके पति व्यक्तिगत व राजनीतिक मतभेदों के कारण [[जवाहरलाल नेहरू]] से अलग हो गए और अपनी खुद की पार्टी [[किसान मजदूर प्रजा पार्टी]] बनाई तब सुचेता भी इनके साथ हो लीं। 1952 में सुचेता किसान मजदूर पार्टी की ओर से न्यू दिल्ली से चुनाव लड़ी और जीतीं भी। पर शीघ्र ही राजनैतिक मतभेदों के कारण वह काँग्रेस में लौट आयीं। 1957 में काँग्रेस के टिकिट पर इसी सीट से वह दुबारा चुनाव जीतीं और राज्यमंत्री बनायीं गयीं। १९५८ से १९६० तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थी। 1962 में सुचेता कृपलानी ने [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का चुनाव लड़ा। वे [[कानपुर]] निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गयीं और उन्हें श्रम, सामुदायिक विकास और उद्योग विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। १९६३ ई में उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। १९६३ से १९६७ तक वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। 1967 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के [[गोंडा]] जिले से चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ कर जीत हासिल की। [[Image:Ulla Lindstrom, Sucheta Kripalani, Barbara Castle, Cairine Wilson, Eleanor Roosevelt (1949).jpg|right|thumb|300px|सुचेता कृपलानी, अन्य वैश्विक नेत्रियों के साथ ; बाएँ से दाएं- उल्ला लैंडस्ट्रोम, बार्बरा कैसिल, कैराइन विल्सन, एलीनोर रूसवेल्ट (सन १९४९ में)]] सन १९७१ में उन्होने राजनीति से संन्यास ले लिया। राजनीति से सन्यास लेने के बाद वे अपने पति के साथ [[दिल्ली]] में बस गयीं। निःसन्तान होने के कारण उन्होंने अपना सारा धन और संसाधन लोक कल्याण समिति को दान कर दिया। इसी समय, उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एन अनफिनिश्ड ऑटोबायोग्राफी’ लिखनी शुरू की, जो तीन भागों में में प्रकाशित हुई। धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य गिरता गया और 1 दिसम्बर 1974 को [[हृदय]] गति रूक जाने से उनका निधन हो गया। सुचेता कृपलानी भारत के किसी प्रदेश की पहली महिला [[मुख्य मंत्री]] थीं। ये बंटवारे की त्रासदी में [[महात्मा गांधी]] के बेहद करीब रहीं। वे उन चंद महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आजादी की नींव रखी। वह [[नोवाखली]] यात्रा में बापू के साथ थीं। वे दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल की नहीं, दिमाग की सुनती थीं। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य के कर्मचारियों ने लगातार 62 दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुईं, जब उनके रुख में नरमी आई। {| class="wikitable" | {| class="wikitable" | {| class="wikitable" |श्रीमती सुचेता कृपालानी  पूर्व मुख्यमंत्री , उत्तर प्रदेश |} |} |- | {| class="wikitable" |जन्म |पंजाब, जून, 1908। |- |शिक्षा |एम0ए0 |- |कार्यक्षेत्र |राजनीति, समाज सेवा एवं शिक्षा। |- |शिक्षक |एक सफल एवं योग्य अध्यापिका रहीं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रवक्ता थीं। |- |राजनीति | * वर्ष 1938 में स्वतन्त्रता संग्राम में अग्रणीय कार्य किया। * वर्ष 1940 और 1944 में कांग्रेस आन्दोलनों में गिरफ्तार। * १९४२ के [[भारत छोड़ो आन्दोलन]] में गुप्त रूप से दीर्घ काल तक कार्य किया। * वर्ष 1946 में नोआखाली (पूर्व बंगाल) के दंगों में पीड़ितों की सहायता तथा बचाव का कार्य किया। * वर्ष 1948 में प्रथम बार उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्या बनी। * वर्ष 1950-52 में प्रोवीजनल लोक सभा की सदस्या। * वर्ष 1951 से 1956 तक किसान मजदूर प्रजा पार्टी तथा प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में कार्य किया। * वर्ष 1952, 1957 एवं 1967 में लोक सभा की सदस्या निर्वाचित। * दिनांक 12 दिसम्बर,1960 से दिनांक 01 अक्टूबर, 1963 तक श्री चन्द्र भानु गुप्त सरकार में मंत्री। * दिनांक 4 मई,1961 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद् की सदस्या। * वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्या। * दिनांक 2 अक्टूबर,1963 से 13 मार्च, 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। * १९६७ में गोंडा से लोकसभा चुनाव जीता। (चौथी बार) * १९७१ में राजनीति से संन्यास ले लिया। * कांगेस के सहायता विभाग की सेक्रेटरी की हैसियत से भारत के विभाजन के समय शरणार्थियों के पुनर्वासन का कार्य किया। * ट्रेड यूनियनों की अध्यक्षा तथा इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस की दिल्ली शाखा की सभापति। * कस्तूरबा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की संगठन सचिव और गांधी स्मारक निधि की उपसभापति। * दिल्ली विश्वविद्यालय की सीनेट तथा मीरेण्डा हाउस व लेडी श्रीराम कालेज की गवर्निंग कौंसिलों की सदस्या। * नव हिन्द एजूकेशन सोसाइटी की अध्यक्षा। |- |विदेश यात्रा |वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि मंडल की सदस्या होकर अमेरिका गयीं। वर्ष 1954 तथा 1957 में संसदीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर तुर्किस्तान गयीं। बैंकाक में संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में आयोजित सभा में भाग लिया। |- |निधन |दिनांक 1 दिसम्बर, 1974 को नई दिल्ली में देहावसान हो गया। |} |} == सन्दर्भ == {{Reflist}} {{start box}} {{s-off}} {{succession box | before= [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | title = [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची|उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री]] | years = [[२ अक्तूबर|२ अक्टूबर]] [[१९६३]] – [[१४ मार्च]] [[१९६७]] | after = [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] }} {{end box}} {{उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री}} {{भारतीय स्वतंत्रता संग्राम}} {{भारत की पहली महिलाएँ}} [[श्रेणी:1908 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:१९७४ में निधन]] [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री]] [[श्रेणी:प्रथम लोक सभा सदस्य]] [[श्रेणी:द्वितीय लोक सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:चौथी लोक सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:भारत छोड़ो आंदोलन]] [[श्रेणी:ब्रह्मो समाज]] [[श्रेणी:बंगाली राजनीतिज्ञ]] [[श्रेणी:अंबाला के लोग]] [[श्रेणी:कानपुर के लोग]] [[श्रेणी:दिल्ली विश्वविद्यालय अल्युम्नी]] [[श्रेणी:भारतीय महिला राजनीतिज्ञ]] [[श्रेणी:भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी]] {{India-politician-stub}} 3nd0nv1sn5bh0uox62hdc9kqd5m0zob 6536816 6536804 2026-04-06T06:39:48Z AMAN KUMAR 911487 केवल ज्ञानसंदूक को सुधारा 6536816 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = सुचेता कृपलानी | image = | caption = | order = [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची|उत्तर प्रदेश की चौथी मुख्यमंत्री]] | term_start = 2 अक्टूबर 1963 | term_end = 13 मार्च 1967 | predecessor = [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | successor = [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | birth_name = सुचेता मज़ूमदार | birth_date = 25 जून 1908 | birth_place = [[अम्बाला|अंबाला]], पंजाब (अब [[हरियाणा]]), [[ब्रितानी भारत]] | death_date = 1 दिसम्बर 1974 | death_place = [[नई दिल्ली]], [[भारत]] | party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] | spouse = [[जे॰ बी॰ कृपलानी|जे. बी. कृपलानी]] | alma_mater = [[पंजाब विश्वविद्यालय]]<br>[[दिल्ली विश्वविद्यालय]] | occupation = राजनीतिज्ञ, स्वतंत्रता सेनानी, प्राध्यापिका | known_for = भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री }} '''सुचेता कृपलानी''' (जन्म का नाम: '''सुचेता मज़ूमदार'''; 25 जून 1908 – 1 दिसंबर 1974) एक प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थीं। वह [[उत्तर प्रदेश]] की चौथी और [[भारत]] की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं। उन्होंने 2 अक्टूबर 1963 से 13 मार्च 1967 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार सँभाला। स्वतंत्रता संग्राम और राजनीति में उनकी अहम भूमिका रही। 1948 से 1960 तक उन्होंने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की महासचिव के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त, राजनीति में सक्रिय होने से पूर्व वे [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] में इतिहास की प्राध्यापिका भी रही थीं। उनका विवाह प्रसिद्ध समाजवादी नेता [[जे॰ बी॰ कृपलानी]] से हुआ था। '''सुचेता कृपलानी''' (मूल नाम: '''सुचेता मजूमदार''') ([[२५ जून]],[[१९०८]]<ref>{{citation | year=2004 | title=Eminent Indian Freedom Fighters | author=S K Sharma | publisher=Anmol Publications PVT. LTD. | isbn=9788126118908 | page=560 | url=http://books.google.com/books?id=pMfpg66gIREC&pg=PA560 }}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> - [[१ दिसम्बर]], [[१९७४]]<ref>{{Cite web |url=http://www.sandesh.org/Story_detail.asp?pageID=1&id=48 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110721153554/http://www.sandesh.org/Story_detail.asp?pageID=1&id=48 |archive-date=21 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://indiancoastguard.nic.in/indiancoastguard/history/morehistory.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=21 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120502201216/http://indiancoastguard.nic.in/indiancoastguard/history/morehistory.html |archive-date=2 मई 2012 |url-status=dead }}</ref>) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ थीं। ये [[उत्तर प्रदेश]] की मुख्य मंत्री बनीं और भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं। वे प्रसिद्ध गांधीवादी नेता [[जे॰ बी॰ कृपलानी|आचार्य कृपलानी]] की पत्नी थीं। ==जीवनी== सुचेता कृपलानी का जन्म [[हरियाणा |पंजाब(आज का हरियाणा)]] के [[अंबाला]] शहर में सम्पन्न बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता सरकारी चिकित्सक थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कई स्कूलों में पूरी हुई क्योंकि हर दो-तीन वर्ष में पिता का तबादला होता रहता था। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें [[दिल्ली]] भेज दिया गया। [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से उन्होंने [[इतिहास]] विषय में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज से निकलने के बाद, 21 वर्ष की उम्र में ही ये स्वतंत्रता संग्राम में कूदना चाहती थीं पर दुर्भाग्यवश वह ऐसा कर नहीं पायीं क्योंकि 1929 में उनके पिता और बहन की मृत्यु हो गयी और परिवार को संभालने की जिम्मदारी सुचेता के कंधो पर आ गयी। इसके बाद, वे [[बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय]] (बीएचयू) में संवैधानिक इतिहास की व्याख्याता बन गईं। सन १९३६ में अठाइस साल की उम्र में उन्होंने [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के मुख्य नेता [[जेबी कृपलानी]] से [[विवाह]] किया। सुचेता के इस कदम का उनके घर वालों के साथ [[महात्मा गांधी]] ने भी विरोध किया था। जेबी कृपलानी सिन्धी थे और उम्र में सुचेता कृपलानी से बीस साल बड़े थे। इसके अलावा गाँधीजी को डर था कि इस विवाह के कारण आचार्य जो उनके “दाहिने हाथ” थे, कहीं स्वतंत्रता संग्राम से पीछे न हट जाँय। आचार्य कृपलानी का साथ पाकर सुचेता पूरी तरह से राजनीति में कूद पड़ीं। 1940 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की महिला शाखा – ‘अखिल भारतीय महिला काँग्रेस’ की स्थापना की। 1942 में [[भारत छोड़ो आंदोलन]] में सक्रिय होने के कारण उन्हें एक साल के लिए जेल जाना पड़ा। १९४६ में वह [[संविधान सभा]] की सदस्य चुनी गई। 1949 में उन्हें [[संयुक्त राष्ट्र महासभा]] में एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था। भारत के स्वतंत्र होने के बाद वह भारतीय राजनीति में सक्रिय हो गयीं। जब उनके पति व्यक्तिगत व राजनीतिक मतभेदों के कारण [[जवाहरलाल नेहरू]] से अलग हो गए और अपनी खुद की पार्टी [[किसान मजदूर प्रजा पार्टी]] बनाई तब सुचेता भी इनके साथ हो लीं। 1952 में सुचेता किसान मजदूर पार्टी की ओर से न्यू दिल्ली से चुनाव लड़ी और जीतीं भी। पर शीघ्र ही राजनैतिक मतभेदों के कारण वह काँग्रेस में लौट आयीं। 1957 में काँग्रेस के टिकिट पर इसी सीट से वह दुबारा चुनाव जीतीं और राज्यमंत्री बनायीं गयीं। १९५८ से १९६० तक वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव थी। 1962 में सुचेता कृपलानी ने [[उत्तर प्रदेश]] विधानसभा का चुनाव लड़ा। वे [[कानपुर]] निर्वाचन क्षेत्र से चुनी गयीं और उन्हें श्रम, सामुदायिक विकास और उद्योग विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया। १९६३ ई में उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। १९६३ से १९६७ तक वह उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। 1967 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के [[गोंडा]] जिले से चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ कर जीत हासिल की। [[Image:Ulla Lindstrom, Sucheta Kripalani, Barbara Castle, Cairine Wilson, Eleanor Roosevelt (1949).jpg|right|thumb|300px|सुचेता कृपलानी, अन्य वैश्विक नेत्रियों के साथ ; बाएँ से दाएं- उल्ला लैंडस्ट्रोम, बार्बरा कैसिल, कैराइन विल्सन, एलीनोर रूसवेल्ट (सन १९४९ में)]] सन १९७१ में उन्होने राजनीति से संन्यास ले लिया। राजनीति से सन्यास लेने के बाद वे अपने पति के साथ [[दिल्ली]] में बस गयीं। निःसन्तान होने के कारण उन्होंने अपना सारा धन और संसाधन लोक कल्याण समिति को दान कर दिया। इसी समय, उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘एन अनफिनिश्ड ऑटोबायोग्राफी’ लिखनी शुरू की, जो तीन भागों में में प्रकाशित हुई। धीरे-धीरे उनका स्वास्थ्य गिरता गया और 1 दिसम्बर 1974 को [[हृदय]] गति रूक जाने से उनका निधन हो गया। सुचेता कृपलानी भारत के किसी प्रदेश की पहली महिला [[मुख्य मंत्री]] थीं। ये बंटवारे की त्रासदी में [[महात्मा गांधी]] के बेहद करीब रहीं। वे उन चंद महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आजादी की नींव रखी। वह [[नोवाखली]] यात्रा में बापू के साथ थीं। वे दिल की कोमल तो थीं, लेकिन प्रशासनिक फैसले लेते समय वह दिल की नहीं, दिमाग की सुनती थीं। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में राज्य के कर्मचारियों ने लगातार 62 दिनों तक हड़ताल जारी रखी, लेकिन वह कर्मचारी नेताओं से सुलह को तभी तैयार हुईं, जब उनके रुख में नरमी आई। {| class="wikitable" | {| class="wikitable" | {| class="wikitable" |श्रीमती सुचेता कृपालानी  पूर्व मुख्यमंत्री , उत्तर प्रदेश |} |} |- | {| class="wikitable" |जन्म |पंजाब, जून, 1908। |- |शिक्षा |एम0ए0 |- |कार्यक्षेत्र |राजनीति, समाज सेवा एवं शिक्षा। |- |शिक्षक |एक सफल एवं योग्य अध्यापिका रहीं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रवक्ता थीं। |- |राजनीति | * वर्ष 1938 में स्वतन्त्रता संग्राम में अग्रणीय कार्य किया। * वर्ष 1940 और 1944 में कांग्रेस आन्दोलनों में गिरफ्तार। * १९४२ के [[भारत छोड़ो आन्दोलन]] में गुप्त रूप से दीर्घ काल तक कार्य किया। * वर्ष 1946 में नोआखाली (पूर्व बंगाल) के दंगों में पीड़ितों की सहायता तथा बचाव का कार्य किया। * वर्ष 1948 में प्रथम बार उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्या बनी। * वर्ष 1950-52 में प्रोवीजनल लोक सभा की सदस्या। * वर्ष 1951 से 1956 तक किसान मजदूर प्रजा पार्टी तथा प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में कार्य किया। * वर्ष 1952, 1957 एवं 1967 में लोक सभा की सदस्या निर्वाचित। * दिनांक 12 दिसम्बर,1960 से दिनांक 01 अक्टूबर, 1963 तक श्री चन्द्र भानु गुप्त सरकार में मंत्री। * दिनांक 4 मई,1961 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद् की सदस्या। * वर्ष 1962 में उत्तर प्रदेश विधान सभा सदस्या। * दिनांक 2 अक्टूबर,1963 से 13 मार्च, 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। * १९६७ में गोंडा से लोकसभा चुनाव जीता। (चौथी बार) * १९७१ में राजनीति से संन्यास ले लिया। * कांगेस के सहायता विभाग की सेक्रेटरी की हैसियत से भारत के विभाजन के समय शरणार्थियों के पुनर्वासन का कार्य किया। * ट्रेड यूनियनों की अध्यक्षा तथा इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस की दिल्ली शाखा की सभापति। * कस्तूरबा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट की संगठन सचिव और गांधी स्मारक निधि की उपसभापति। * दिल्ली विश्वविद्यालय की सीनेट तथा मीरेण्डा हाउस व लेडी श्रीराम कालेज की गवर्निंग कौंसिलों की सदस्या। * नव हिन्द एजूकेशन सोसाइटी की अध्यक्षा। |- |विदेश यात्रा |वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय प्रतिनिधि मंडल की सदस्या होकर अमेरिका गयीं। वर्ष 1954 तथा 1957 में संसदीय प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर तुर्किस्तान गयीं। बैंकाक में संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में आयोजित सभा में भाग लिया। |- |निधन |दिनांक 1 दिसम्बर, 1974 को नई दिल्ली में देहावसान हो गया। |} |} == सन्दर्भ == {{Reflist}} {{start box}} {{s-off}} {{succession box | before= [[चन्द्र भानु गुप्ता|चंद्रभानु गुप्त]] | title = [[उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची|उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री]] | years = [[२ अक्तूबर|२ अक्टूबर]] [[१९६३]] – [[१४ मार्च]] [[१९६७]] | 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सदैव अग्रणी रहे। मातृ-भूमि के प्रति अगाध प्रेम था। '''दानवीरता''' के लिए [[भामाशाह]] नाम [[इतिहास]] में अमर है।<ref>{{cite news |url=http://www.bhaskar.com/news/RAJ-PALI-c-105-295675-NOR.html |title=दानवीर [[भामाशाह]] ने की थी महाराणा प्रताप की मदद |date=May 03, 2013 |work=भास्कर |language=hi |access-date=19 सितंबर 2014 |archive-date=19 सितंबर 2014 |archive-url=https://archive.today/20140919230447/http://www.bhaskar.com/news/RAJ-PALI-c-105-295675-NOR.html |url-status=dead }}</ref> [[चित्र:Bhama shah.jpg|thumb|right|200px|भामासाह कांवड़िया ओसवाल ]] == जीवनी == दानवीर [[भामाशाह]] का जन्म [[राजस्थान]] के मेवाड़ राज्य में 29 अप्रैल 1547 को कांवड़िया गोत्र के ओसवाल जैन परिवार में हुआ। <ref>{{Cite web |title=Oswals |url=https://oswals.net/gotras/kavadia |access-date=2025-01-01 |website=oswals.net}}</ref><ref>{{Cite web |last=Singh |first=Dr. Chhotu Narayan |title=Bhamashah Report |url=https://www.faces.org.in/Bhamashah-Report.pdf}}</ref><ref>{{Cite web |title=Bhamashah Award{{!}} Annual State Award {{!}} Eternal Mewar |url=https://www.eternalmewar.in/collaboration/bhamashah-award |archive-url=https://web.archive.org/web/20240807034432/http://www.eternalmewar.in/collaboration/bhamashah-award |archive-date=7 अगस्त 2024 |access-date=2025-01-01 |website=www.eternalmewar.in |url-status=live }}</ref> उनके पिता का नाम भारमल था जो [[रणथम्भोर दुर्ग|रणथम्भौर]] के किलेदार थे। [[भामाशाह]] का निष्ठापूर्ण सहयोग [[महाराणा प्रताप]] के जीवन में महत्वपूर्ण और निर्णायक साबित हुआ। मातृ-भूमि की रक्षा के लिए महाराणा प्रताप का सर्वस्व होम हो जाने के बाद भी उनके लक्ष्य को सर्वोपरि मानते हुए अपनी सम्पूर्ण धन-संपदा अर्पित कर दी। यह सहयोग तब दिया जब [[महाराणा प्रताप]] अपना अस्तित्व बनाए रखने के प्रयास में परिवार सहित पहाड़ियों में छिपते भटक रहे थे। मेवाड़ के अस्मिता की रक्षा के लिए दिल्ली गद्दी का प्रलोभन भी ठुकरा दिया। महाराणा प्रताप को दी गई उनकी हरसम्भव सहायता ने मेवाड़ के आत्म सम्मान एवं संघर्ष को नई दिशा दी। [[भामाशाह]] अपनी दानवीरता के कारण इतिहास में अमर हो गए। [[भामाशाह]] के सहयोग ने ही [[महाराणा प्रताप]] को जहाँ संघर्ष की दिशा दी, वहीं मेवाड़ को भी आत्मसम्मान दिया। कहा जाता है कि जब [[महाराणा प्रताप]] अपने परिवार के साथ जंगलों में भटक रहे थे, तब [[भामाशाह]] ने अपनी सारी जमा पूंजी महाराणा को समर्पित कर दी। तब [[भामाशाह]] की दानशीलता के प्रसंग आसपास के इलाकों में बड़े उत्साह के साथ सुने और सुनाए जाते थे। [[हल्दी घाटी]] के युद्ध के पश्चात [[महाराणा प्रताप]] के लिए उन्होंने अपनी निजी सम्पत्ति में इतना धन दान दिया था कि जिससे २५००० सैनिकों का बारह वर्ष तक निर्वाह हो सकता था। प्राप्त सहयोग से [[महाराणा प्रताप]] में नया उत्साह उत्पन्न हुआ और उन्होंने पुन: सैन्य शक्ति संगठित कर [[मुगल]] शासकों को पराजित करा और फिर से [[मेवाड़]] का राज्य प्राप्त किया। वह बेमिसाल दानवीर एवं त्यागी पुरुष थे। आत्मसम्मान और त्याग की यही भावना उनके स्वदेश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करने वाले देश-भक्त के रूप में शिखर पर स्थापित कर देती है। धन अर्पित करने वाले किसी भी दानदाता को दानवीर [[भामाशाह]] कहकर उसका स्मरण-वंदन किया जाता है। उनकी दानशीलता के चर्चे उस दौर में आसपास बड़े उत्साह, प्रेरणा के संग सुने-सुनाए जाते थे। उनके लिए पंक्तियाँ कही गई हैं- :''वह धन्य देश की माटी है, जिसमें भामा सा लाल पला।'' :''उस दानवीर की यश गाथा को, मेट सका क्या काल भला॥'' ऐसी विरल ईमानदारी एंव स्वामिभक्ति के फलस्वरूप भामाशाह के बाद उनके पुत्र जीवाशाह को महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह ने भी प्रधान पद पर बनाये रखा । जीवाशाह के उपरांत उनके पुत्र अक्षयराज को अमर सिंह के पुत्र कर्ण सिंह ने प्रधान पद पर बनाये रखा ।इस तरह एक ही परिवार की तीन पीढ़ियो ने मेवाड़ मे प्रधान पद पर स्वामिभक्ति एंव ईमानदारी से कार्य कर जैन धर्म का मान बढ़ाया। महाराणा स्वरूप सिंह एंव फतेह सिंह ने इस परिवार के लिए सम्मान स्वरुप दो बार राजाज्ञाएँ निकाली कि इस परिवार के मुख्य वंशधर का सामूहिक भोज के आरंभ होने के पूर्व तिलक किया जाये । जैन श्रेष्टी भामाशाह की भव्य हवेली चित्तौड़गढ तोपखाना के पास आज जीर्ण शीर्ण अवस्था मे है । [[चित्र:Delwada.jpg|right|thumb|300px|[[आबू पर्वत]] पर स्थित '''दिलवाड़ा जैन मन्दिर''' जिसे भामाशाह और उनके भाई ताराचन्द ने बनाया था।]] भामाशाह के वंशज कावडिंया परिवार आज भी [[उदयपुर]] मे रहता है। आज भी ओसवाल जैन समाज कावडिंया परिवार का सम्मानपूर्वक सबसे पहले तिलक करते है । आपके सम्मान मे सुप्रसिद्ध उपान्यसकार कवि [[हरिलाल उपाध्याय]] द्वारा 'देशगौरव भामाशाह' नामक ऐतिहासिक उपान्यस लिखी गयी। भामाशाह और उनके भाई ताराचन्द ने [[आबू पर्वत]] मे जैन मंदिर बनाया। लोकहित और आत्मसम्मान के लिए अपना सर्वस्व दान कर देने वाली उदारता के गौरव-पुरुष की इस प्रेरणा को चिरस्थायी रखने के लिए [[छत्तीसगढ़]] शासन ने उनकी स्मृति में दानशीलता, सौहार्द्र एवं अनुकरणीय सहायता के क्षेत्र में [[दानवीर भामाशाह सम्मान]] स्थापित किया है। महाराणा मेवाड फाऊंडेशन की तरफ से दानवीर भामाशाह पुरस्कार राजस्थान मे मेरिट मे आने वाले छात्रो को दिया जाता है। [[उदयपुर]], [[राजस्थान]] में राजाओं की समाधि स्थल के मध्य [[भामाशाह]] की समाधि बनी है। उनके सम्मान में ३१ दिसम्बर २००० को ३ रुपये का [[डाक टिकट]] जारी किया गया। ==इन्हें भी देखें== * [[दानवीर भामाशाह सम्मान]] * [[भामाशाह योजना]] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20090214021129/http://hubpages.com/hub/bhamashah Bhama Shah: Trusted Lieutenent of Maharana Pratap] [[श्रेणी:1542 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:राजस्थान के लोग]] [[श्रेणी:१६०० में निधन]] oi174j39giroyyri0j5pm0vpn807pgc वार्ता:शिवाजी 1 140024 6536882 6536323 2026-04-06T07:35:39Z ~2026-21249-95 919030 /* Semi-protected edit request on 4 अप्रैल 2026 */ नया अनुभाग 6536882 wikitext text/x-wiki {{वार्ता शीर्षक}} == शिवजी की आठ बीवियां थी, इस बात को संदर्ब के सात लिखने में क्या गलत है? == मैं समझ नहीं पाती हूँ के शिवजी की आठ बीवियां थी, इस बात को संदर्ब के सात लिखने में क्या गलत है? [[सदस्य:Dadhush|Dadhush]] ([[सदस्य वार्ता:Dadhush|वार्ता]]) 05:01, 17 नवम्बर 2018 (UTC) :{{सुनो|Dadhush}} अगर आप को पत्नियों के नाम जोड़ने है ज्ञानसन्दूक में जोड़े। लेख में अलग हेडिंग के साथ उल्लेख करना अनावश्यक है।--[[सदस्य:Godric ki Kothri|<span style= "color:#00FFFF"> ''गॉड्रिक की कोठरी''</span>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:Godric ki Kothri|<span style= "color:#00FF00">मुझसे बातचीत करें</span>]]</sup> 05:09, 17 नवम्बर 2018 (UTC) धन्यवाद :)[[सदस्य:Dadhush|Dadhush]] ([[सदस्य वार्ता:Dadhush|वार्ता]]) 05:12, 17 नवम्बर 2018 (UTC) मैंने अपना जोड़ ज्ञानसन्दूक में आपके कहने ही के अनुसार डाला, कृपयैया बताएँ , इस बार क्या गलती हुई है? आशा करती हूँ कि आप इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं ले रहे हो ! [[सदस्य:Dadhush|Dadhush]] ([[सदस्य वार्ता:Dadhush|वार्ता]]) 15:08, 17 नवम्बर 2018 (UTC) == छत्रपती शिवाजी महाराज के जन्मतिथि के बारेमे == छत्रपती शिवाजी महाराज के जन्मतिथि आपने लिखा है वह गलत है 19 फरवरि 1627 है [[सदस्य:DHARMARAJ MARATHE|DHARMARAJ MARATHE]] ([[सदस्य वार्ता:DHARMARAJ MARATHE|वार्ता]]) 03:56, 11 मार्च 2019 (UTC) == Semi-protected edit request on 4 अप्रैल 2026 == It should be written as "Chhatrapati Shivaji Maharaj"not only "shivaji" or 'shivaji Maharaj".. lnee07btt8d0mfse9zt99hjpy1t0x24 सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार 3 147425 6536813 6535839 2026-04-06T06:35:20Z AMAN KUMAR 911487 /* विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026 परिणाम */ उत्तर 6536813 wikitext text/x-wiki {{प्रबन्धकगण}} <!-- Please do NOT delete this line. Thanks! -->{{/header}} <!-- कृपया इस पंक्ति और ऊपर की लाइन को न हटायें, धन्यवाद !--> <!-- नया संदेश इस पंक्ति के नीचे लिखें --> == नए साल की शुभकामनाएँ, अनिरुद्ध कुमार! == <div style="border: 3px solid #FFD700; background-color: #FFFAF0; padding:0.2em 0.4em; height:auto; min-height:173px; {{border-radius|1em}} {{box-shadow|0.1em|0.1em|0.5em|rgba(0,0,0,0.75)}}<!-- -->" class="plainlinks"> [[File:Fuochi d'artificio.gif|left|x173px]][[File:Happy new year 01.svg|x173px|right]] {{Paragraph break}} {{Center|{{resize|179%|'''''[[नव वर्ष|नए साल की शुभकामनाएँ]]!'''''}}}} '''अनिरुद्ध कुमार''',<br />एक समृद्ध, उत्पादक और सुखद [[नया साल]], और विकिपीडिया में आपके योगदान के लिए धन्यवाद। <br /><span style="font-weight:bold">[[सदस्य:मनीष पँवार|<span style="color:black; font-style:italic">मनीष पँवार</span>]] <sup>[[सदस्य वार्ता:मनीष पँवार|<span style="color:green">वार्ता</span>]]</sup></span> 11:04, 31 दिसम्बर 2022 (UTC)<br /><br /> </div> &nbsp;&nbsp;&nbsp;''{{resize|88%|सदस्य वार्ता पृष्ठों में <nowiki>{{</nowiki>मनीष/नव वर्ष<nowiki>}}</nowiki> जोड़कर नव वर्ष की खुशियाँ भेजें।}}'' {{clear}}<!-- From template:Happy New Year fireworks --> == आपकी सहाय की आवश्यकता == अनिरुद्धजी, आशा करता हुं कि आप क्षेमकुशल होंगे। [[वार्ता:वासुदेव]] पर चल रहे विवाद पर आपका ध्यानाकर्षित करना चाहुंगा। अगर आप उस विषय में अपनी टिप्पणी दे तो आभारी रहुंगा। [[:User:Dsvyas|धवल]]<sup>[[:User_talk:Dsvyas|वार्ता]]/[[:Special:Contributions/Dsvyas|योगदान]]</sup> 13:28, 11 मई 2023 (UTC) == सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2023 == इस प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार मुझे ईमेल के माध्यम से प्राप्त हो गया है। वहां बताने को कहा गया था। इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ। धन्यवाद। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:19, 12 अगस्त 2023 (UTC) <Br><br> नमस्कार जी, मुझे अभी तक इस प्रतियोगिता का प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुआ जी। धन्यवाद। [[सदस्य:Ritikpraj|Ritikpraj]] ([[सदस्य वार्ता:Ritikpraj|वार्ता]]) 15:27, 18 अगस्त 2023 (UTC) :प्रिय [[सदस्य:Ritikpraj|Ritikpraj]] प्रमाणपत्र-बनने में अभी समय लगेगा। उसके भेजे जाने की सूचना भी सभी प्रतिभागियों को दी जाएगी। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 06:26, 20 अगस्त 2023 (UTC) == सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2023 == नमस्कार @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी, ऊपर पूछे गए प्रश्नों से लगता है अभी किसी को भी प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुआ है। किन्तु आपसे अनुरोध है क्या आप यह बता सकते है कि अभी और कितना समय लग सकता है प्रमाणपत्र पूर्ण रूप से बन जाने को प्राप्त होने में? [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] ([[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|वार्ता]]) 17:17, 12 सितंबर 2023 (UTC) यदि आपको उचित लगे तो कृपया उत्तर दे [[सदस्य:RJ Raawat|RJ Raawat]] ([[सदस्य वार्ता:RJ Raawat|वार्ता]]) 15:55, 17 नवम्बर 2023 (UTC) ==हिंदी विकिमीडियाई सदस्य समूह पर लॉग-इन== {{re|अनिरुद्ध कुमार}} जी नमस्ते। मेरा निवेदन है कि कृपया मुझे [https://hi.wikimedia.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 हिंदी विकिमीडियाई सदस्य समूह] पर लॉग-इन करने की अनुमति दें। मैं ट्रेन द ट्रेनर 2023 की एक रिपोर्ट अपने समुदाय पर प्रेषित करना चाहता हूँ। कृपया सहायता करें। धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 14:02, 15 अक्टूबर 2023 (UTC) {{सुनो|रोहित साव27}} आप विकिपीडिया पर ही [[सदस्य:रोहित साव27/रपट]] पृष्ठ बनाकर ट्रेन द ट्रेनर 2023 नाम का अनुभाग बना लें तथा अपनी रपट समुदाय के साथ साझा कर दें। आप जिस [[https://hi.wikimedia.org बेवसाइट] पर खाता बनाना चाहते हैं वह विकिमीडिया की बाकी परियोजनाओं से जुड़ा नहीं है। इसलिए हमने उसका प्रयोग किसी भी आयोजन के लिए नहीं किया है। जबतक वह परियोजना बाकी परियोजनाओं के साथ जुड़ नहीं जाती है हम उसके प्रयोग को बढ़ावा नहीं देंगें। वैसे यदि ट्रेन द ट्रेनर वालों ने रपट जमा करने के लिए कोई पृष्ठ नहीं बनाया है तो भी आप उनके आयोजन पृष्ठ में '/सदस्यनाम रपट' लगाकर मेटा पर भी अपनी रपट जमा कर सकते हैं। जैसे आपने पिछले आयोजन के लिए [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2023/रपट]] पृष्ठ पर अपनी रपट जमा की थी। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 06:59, 16 अक्टूबर 2023 (UTC) :{{re|अनिरुद्ध कुमार}} जी बहुत-‌बहुत धन्यवाद। मैं ऐसा ही करूँगा। धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 21:42, 17 अक्टूबर 2023 (UTC) == प्रस्ताव सूचना == {{mbox | type = notice | image = [[चित्र:information.png|40px]] | text = {{PAGENAME}} जी, मैंने [[विकिपीडिया:चौपाल#प्रस्ताव:_नया_सामग्री_सुरक्षा_समूह_'विश्वसनीय_सदस्य'_(trusteduser)|चौपाल]] पर एक नया प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। जिसमें आपकी टिप्पणियों का स्वागत है। }} [[u:DreamRimmer|<b><font color="22C6CB">𝙳𝚛𝚎𝚊𝚖𝚁𝚒𝚖𝚖𝚎𝚛</font></b>]] <sup>[[user talk: DreamRimmer|<font color="orange">(बातचीत)</font>]]</sup> 02:46, 18 अक्टूबर 2023 (UTC) ==लेख जमा करने के संबंध में== {{सुनो|अनिरुद्ध कुमार}} जी नमस्ते। मैंने [[विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2023|गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव]] में [[आदिकाल]] लेख पर कार्य किया है और इसे विस्तार देने का प्रयास किया है। हालांकि मुझसे एक भूल हो गई कि मैंने 30 अक्टूबर तक लेख को उचित स्थान पर ज़मा नहीं किया और कुछ व्यक्तिगत कारणों से असक्रिय रहने के कारण मेरा इस ओर ध्यान भी नहीं गया। सर क्या इस संबंध में अब कुछ किया जा सकता है? हालांकि गलती मेरी है और मैं इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 00:05, 7 नवम्बर 2023 (UTC) :{{सुनो|रोहित साव27}} जब हम किसी प्रतियोगिता में शामिल होते हैं तो कुछ नियमों में स्वयं को बाँधते हैं। वे नियम किसी एक प्रतिभागी के हित को ध्यान में रखकर बदले नहीं जा सकते हैं। हम आपके परिश्रम की सराहना करते हैं। उम्मीद है कि आपसे हुई चूक आगे के लिए आपको बहुत कुछ सिखाने में सक्षम होगी। आगामी संपादनोत्सवों के लिए शुभकामनाएं। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 06:24, 19 नवम्बर 2023 (UTC) ::{{सुनो|अनिरुद्ध कुमार}} जी धन्यवाद सर। अगली बार से मैं अवश्य ध्यान रखूँगा।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 09:20, 19 नवम्बर 2023 (UTC) == गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2023 परिणाम == बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2023|गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2023]] में आयोजक के रूप में भाग लेकर इसे सफल बनाने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है।</span> [[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र/कूपन प्राप्त करने के लिए 30 नवंबर 2023 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeRrZ3rLc_EfAQM3F8TpjtJjnBN3OfWfnqypLTXufq3jUic1g/viewform प्रतिभागी सूचना प्रपत्र] भरकर जमा करें। 15 दिसंबर तक आपको ई-प्रमाण-पत्र/कूपन भेज दिया जाएगा। सूचना प्रपत्र भर लेने तथा प्रमाण-प्रपत्र मिलने की सूचना इस संदेश के उत्तर के रूप में अवश्य दें। --[[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 09:30, 19 नवम्बर 2023 (UTC) == भारतीय संविधान संपादनोत्सव/मूल्यांकन से सम्बंधित == भारतीय संविधान संपादनोत्सव/मूल्यांकन [[अनुच्छेद 4 (भारत का संविधान)]] [[अनुच्छेद 150 (भारत का संविधान)]] [[अनुच्छेद 152 (भारत का संविधान)]] मेरे द्वारा यह पेज बनाये गये है जिस पर माननीय आदरणीय निधिलता तिवारी जी द्वारा मुझे: 0 अंक और आर्टिकल को not accepted के साथ '''न्यूनतम अर्हता से कम शब्द, संदर्भों का समुचित उपयोग नहीं, कुछ खाली अनुभाग''' कहा गया है '''जिससे मैं सहमत नहीं हु''' पर वाही पर [[अनुच्छेद 371 (भारत का संविधान)]] SomnathHealth द्वारा बनाया गया है जिसमे न to सन्दर्भ है न ही मूल पाठ है न ही ज्ञान संदूक है इन्हें निधि जी द्वारा 1अंक दिए है नए विकिपीडिया सदस्यों के साथ इस तरह व्यवहार मुझे अब कभी विकी की और नहीं लायेगा मेरा मूल्यांकनटीम से मेरा विश्वाश उठ गया है विकी हिंदीमें मेरा सफ़र समाप्त क्र देगा... इस तरह से मुल्यांकन किया गया है आप सभी आयोजक मंडल[संपादित करें] अनिरुद्ध कुमार (वार्ता) SM7 --SM7--बातचीत-- संजीव कुमार (वार्ता) अजीत कुमार तिवारी — अजीत कुमार तिवारी बातचीत सदस्य: हंसराज गुर्जर। कोटपुतली जिला वाले से निवेदनहै मुझे आप इस तरह से भेदभाव वाले मूल्यांकनकर्ता को आगे से किसी संपादनोत्सव में न रखे और ,उझे उचित अंक दिए जाये मेरा पेज लगभग अनुच्छेद 9 (भारत का संविधान) रोहितसाव जी द्वारा जेसा ही है फिर क्यों मुझे अंक नहीं दिए गए है, क्या यह संपादनोत्सव केवल अपने करीबीको जितने के लिए आयोजित'किये जाये है मेरा मनोबल टूटगया है मैं भारतीय संविधान संपादनोत्सव के अधूरे लेख को पूर्णकरने वाला था जिससे hindi भाषीलोगो को संविधान आर्टिकल पड़ते समय सुविधाहो मेरा मनोबल टूट गया है भाई भतीजा वाद और भेदभाव के कारन अयोजंकजी कृपया ध्यान दीजिये [[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 16:35, 22 अप्रैल 2024 (UTC) == गौरव देवासी का पेज बनाने हेतु == प्रिय अनिरुद्ध जी में गणेश पाली राजस्थान से.हम आपसे अनुरोध करना चाहते है की क्या हम गौरव देवासी का पृष्ठ बना सकते है.इनके बारे में काफी जानकारी गूगल पर उपलब्ध है.इनका गूगल पेनल भी उपलब्ध है.हमें आपके सहयोग की अति आवशयकता है ताकि आपके सहयोग से हम पृष्ठ जारी कर सके. आप एक सीनियर विकी यूजर हो आपको काफी अनुभव है क्यों की हमें इनका पेज उत्तम बनाना है ताकि इसे कोई ल2 के अंतर्गत डिलीट न करे [[विशेष:योगदान/103.162.178.238|103.162.178.238]] ([[सदस्य वार्ता:103.162.178.238|वार्ता]]) 05:23, 30 अक्टूबर 2024 (UTC) == Invitation to Participate in the Wikimedia SAARC Conference Community Engagement Survey == Dear Community Members, I hope this message finds you well. Please excuse the use of English; we encourage translations into your local languages to ensure inclusivity. We are conducting a Community Engagement Survey to assess the sentiments, needs, and interests of South Asian Wikimedia communities in organizing the inaugural Wikimedia SAARC Regional Conference, proposed to be held in Kathmandu, Nepal. This initiative aims to bring together participants from eight nations to collaborate towards shared goals. Your insights will play a vital role in shaping the event's focus, identifying priorities, and guiding the strategic planning for this landmark conference. Survey Link: https://forms.gle/en8qSuCvaSxQVD7K6 We kindly request you to dedicate a few moments to complete the survey. Your feedback will significantly contribute to ensuring this conference addresses the community's needs and aspirations. Deadline to Submit the Survey: 20 January 2025 Your participation is crucial in shaping the future of the Wikimedia SAARC community and fostering regional collaboration. Thank you for your time and valuable input. Warm regards,<br> [[:m:User:Biplab Anand|Biplab Anand]] <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Biplab_Anand/lists&oldid=28078122 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Biplab Anand@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == LogicallyRight == यह उपयोगकर्ता एक बर्बर है। कृपया ब्लॉक करें। [[User:Cactusisme|'''<span style="color:#0D98BA;">Cactus</span><span style="color:#013220;">🌵</span>''']] <sup>[[User talk:Cactusisme|<i style="color:green">spiky</i>]]</sup> <sup>[[Special:Contributions/Cactusisme|<i style="color:green">ouch</i>]]</sup> 01:44, 18 फ़रवरी 2025 (UTC) :क्या आप [[ डॉ.सीमा मिधा]] को भी हटा सकते हैं और अभिमन्युकुमारपटेल को लेखों में स्पैम लिंक जोड़ने के लिए ब्लॉक कर सकते हैं। [[User:Cactusisme|'''<span style="color:#0D98BA;">Cactus</span><span style="color:#013220;">🌵</span>''']] <sup>[[User talk:Cactusisme|<i style="color:green">spiky</i>]]</sup> <sup>[[Special:Contributions/Cactusisme|<i style="color:green">ouch</i>]]</sup> 02:45, 18 फ़रवरी 2025 (UTC) == [[:WPPT 1996|WPPT 1996]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:WPPT 1996|WPPT 1996]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center> इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है। यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 10:34, 2 मार्च 2025 (UTC) == सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जनवरी 2025 == नमस्कार अनिरुद्ध कुमार जी मैंने पहली बार सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जनवरी 2025 भाग लिया और मुझे पांचवां स्थान मिला, पुरस्कार कब मिलेगा और क्या आप मुझे कोई नमूना दिखा सकते हैं, कैसा रहेगा मैं बहुत उत्साहित हूं? आपका इक्षा हो तो? [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 14:31, 28 मार्च 2025 (UTC) :प्रिय अनिरुद्ध कुमार जी सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जनवरी 2025 के फॉर्म भरे 1 महीने से ज्यादा हो गया पर अभी तक पुरस्कार नहीं मिला | [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 14:08, 5 मई 2025 (UTC) ::प्रिय अनिरुद्ध कुमार जी सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जनवरी 2025 के फॉर्म भरे 2 महीने से ज्यादा हो गया पर अभी तक पुरस्कार नहीं मिला | [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 12:00, 8 जून 2025 (UTC) :::अनिरुद्ध जी क्या कोई अपडेट आया जुलाई मध्य हो गया? अभी तक पुरस्कार नहीं मिला| [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 12:59, 6 जुलाई 2025 (UTC) == मेरे विकिपीडिया के निर्माण के संबंध में == प्रिय अनिरुद्धजी, मुझे अपना हिन्दी विकिपीडिया पेज बनाने में आपकी मदद चाहिए। मैं एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद हूँ, जिसके पास पर्याप्त संदर्भ हैं क्योंकि मैंने भारत और ऑस्ट्रेलिया से भौतिकी, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में असाधारण योग्यता के साथ कुलपति और प्रो-कुलपति, निदेशक आदि के रूप में काम किया है। मुझे न्यू इंग्लैंड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया; यहाँ उपलब्ध है: https://www.une.edu.au/about-une/news-and-events/news/2018/11/distinguished-alumni-learnt-the-power-and-value-of-knowledge-at-une ````OKH [[सदस्य:Mannukumar3$|Mannukumar3$]] ([[सदस्य वार्ता:Mannukumar3$|वार्ता]]) 10:07, 4 जून 2025 (UTC) :@[[सदस्य:Mannukumar3$|Mannukumar3$]] जी, आपने जो लिंक भेजा है उसके अनुसार आपका नाम ओम कुमार हर्ष है। अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर [[:en:O. K. Harsh|O. K. Harsh]] नाम से पिछले सप्ताह किसी ने लेख निर्मित कर दिया है। लेख में अभी भी सुधारों की आवश्यकता है, यदि वो उचित मानकों के अनुसार बना रहता है तो उसे हिन्दी में भी अनुवाद किया जा सकता है। अंग्रेज़ी विकि के लेख को हिन्दी में विभिन्न तरिकों से अनूदित किया जा सकता है, यह निर्भर करता है कि आप लेप्टॉप पर काम करते हैं या मोबाइल पर।<span style='color:green;'>☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style='color:Magenta;'>संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style='color:blue;'>✉✉</span>]]) 13:37, 5 जून 2025 (UTC) ::महोदय बहुत बहुत धन्यवाद। [[विशेष:योगदान/110.174.105.167|110.174.105.167]] ([[सदस्य वार्ता:110.174.105.167|वार्ता]]) 08:51, 8 जून 2025 (UTC) == Hindi Wikimedians == नमस्कार अनिरुद्ध कुमार जी। 🙏🏼 मैं इटली से हूँ और मुझे थोड़ी हिंदी आती है। मैं Indic-Techcom के [[:m:Indic MediaWiki Developers User Group/People involved|user group]] में कभी-कभी मदद करता हूँ। मेरी हिंदी बहुत अच्छी नहीं है, मैं भारतीय नहीं हूँ और मैं कभी एशिया नहीं गया। मैं जानना चाहता था, क्या मैं Hindi Wikimedians User Group में [[:m:special:diff/29147178|शामिल]] हो सकता हूँ। सादर, —<span style="font-family: 'Noto Sans Devanagari', sans-serif;margin:0 .3em">[[user:super nabla|सुपर नबला]]</span>([[user talk:super nabla|🪰 चर्चा]]) 21:37, 18 अगस्त 2025 (UTC) :@[[सदस्य:Super nabla|Super nabla]] जी, मुझे नहीं लगया कि user group के सदस्य बनने में कोई समस्या है। आप सदस्य बन चुके हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:54, 17 सितंबर 2025 (UTC) ::बढ़िया। बहुत शुक्रिया। —<span style="font-family: 'Noto Sans Devanagari', sans-serif;margin:0 .3em">[[user:super nabla|सुपर नबला]]</span>([[user talk:super nabla|🪰 चर्चा]]) 14:39, 17 सितंबर 2025 (UTC) :हाँ सदस्य सूची में आपके द्वारा अपना नाम जोड़ने में कोई समस्या नहीं है। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 15:53, 18 सितंबर 2025 (UTC) == हम अस्थायी खातों के साथ आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेंगे == <section begin="body" /> उत्पाद सुरक्षा एवं अखंडता टीम अस्थायी खातों के संबंध में आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेगी। इस सर्वेक्षण में आपकी भागीदारी हमें यह समझने में सहयता करने में बेहद मूल्यवान होगी कि अस्थायी खाते कितनी अच्छी तरह कार्य कर रहे हैं और हम आगे क्या सुधार कर सकते हैं। इसे पूरा होने में ५ मिनट से अधिक समय नहींं लगना चाहिए। इस सर्वेक्षण की गोपनीयता नीति [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Survey:Temporary_Accounts_Second_Pilot_Feedback_Privacy_Statement|इस लिंक पर देखी जा सकती है]]। इस सर्वेक्षण को पूरा करके, आप गोपनीयता नीति में निर्धारित शर्तों से सहमत होते हैं। अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे संपर्क करें, तो कृपया हमें अपना विकि उपयोगकर्ता नाम बताएँ। '''<big>[https://wikimedia.qualtrics.com/jfe/form/SV_emJJxsotBxVpS18?Q_Language=HI सर्वेक्षण में भाग लें]</big>'''. धन्यवाद!<section end="body" /> <bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]]</bdi> 00:44, 21 अगस्त 2025 (UTC) <!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Quiddity_(WMF)/sandbox4&oldid=29158797 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Quiddity (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश --> == आपके लिए एक बार्नस्टार! == {| style="background-color: var(--background-color-success-subtle, #fdffe7); border: 1px solid var(--border-color-success, #fceb92); color: var(--color-base, #202122);" |rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[चित्र:Original Barnstar Hires.png|100px]] |style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" | '''मौलिक बार्नस्टार''' |- |style="vertical-align: middle; padding: 3px;" | आप अच्छा काम कर रहे हैं, कृपया ऐसे ही काम करते रहिए. [[सदस्य:Sahilrazvii999|Sahilrazvii999]] ([[सदस्य वार्ता:Sahilrazvii999|वार्ता]]) 11:56, 13 अक्टूबर 2025 (UTC) |} ==साईट नोटिस हेतु आवेदन== नमस्कार, विकिपीडिया एशिया महा प्रतियोगिता शुरू हो चुकी है। जिसके लिए एक साईट नोटिस लगाने हेतु आवश्यक है कृपया हिंदी विकि पर नोटिस जारी कर दें। <div style="border: solid 1px #333; border: 1px solid gray; background-color: #F1EEED; border-radius: 0.2em; box-shadow: 0 4px 4px #999; margin-bottom: 1.5em; display: table; width: 90%; height: 100px; line-height: 1.2; text-align: center; cursor: pointer;"> <div style="display: table-cell; vertical-align: middle;"><imagemap>File:Wikipedia Asian Month Banner(hi).svg|left|140px| desc none </imagemap></div> <div style="display: table-cell; vertical-align: bottom;">[[File:Wikipedia-logo-hi.png|80px|right]] <p style="font-size: 1.15em;">'''[[विकिपीडिया:एशियाई माह २०२५|विकिपीडिया:एशियाई माह-2025]]''' प्रतियोगिता जारी है अभी [[विकिपीडिया:एशियाई माह २०२५/प्रतिभागी|प्रतिभागी]] बनें। एशिया से सम्बन्धित लेख बनाएं और पुरस्कार जीतें। <br> '''समय अवधि''': 01 नवम्बर से 30 नवम्बर 2025 तक। </div> </div> धन्यवाद -'''[[User:J ansari|<span style="background:#5d9731; color:white;padding:1px;">जे. अंसारी</span>]] [[User talk:J ansari|<span style="background:#1049AB; color:white; padding:1px;">वार्ता</span>]]''' 07:46, 6 नवम्बर 2025 (UTC) == उपन्यास गोदान पर आर्टिकल पे एक लाइन को मैंने डिस्प्यूट किया है। कृपया देखें == [[गोदान (उपन्यास)]] में ये दावा है कि प्रेमचंद बचपन से ही शोषण के शिकार थे और इसलिए उन्होंने शोषण पर लिखा. ये बहुत बड़ा दावा है और बिना किसी स्रोत के लिखा गया है. एक बार ध्यान दें [[सदस्य:Swapnildixit|Swapnildixit]] ([[सदस्य वार्ता:Swapnildixit|वार्ता]]) 21:55, 17 नवम्बर 2025 (UTC) :आपने ठीक ध्यान दिया है। इस लेख के कई हिस्से ज्ञानकोशीय लहजे में नहीं बल्की निबंध शैली में लिखे गए हैं जिन्हें सुधारने की जरूरत है। आप इस तरह के बिना स्रोत के कथन हटाकर इसे सुधारने में सहयोग कर सकते हैं। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 05:54, 27 नवम्बर 2025 (UTC) == विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जनवरी 2025 परिणाम == नमस्कार @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी मुझे अमेज़न गिफ्ट कार्ड के रूप में पुरस्कार मिल गया पर पुरस्कार 8 में लिखे "पुरस्कार पाने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र एवं बार्नस्टार दिया जाएगा।" मुझे प्राप्त नहीं हुआ, एक साल हो गया लगभग आपकी क्या राय ? [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 03:23, 22 दिसम्बर 2025 (UTC) == 19 फरवरी 2026 के स्वैच्छिक लेख को तिथि में सम्मिलित करने हेतु निवेदन == 19 फरवरी 2026 के स्वैच्छिक लेख को तिथि में सम्मिलित करने हेतु निवेदन [[सदस्य:SATYAJEET MP|SATYAJEET MP]] ([[सदस्य वार्ता:SATYAJEET MP|वार्ता]]) 14:48, 21 फ़रवरी 2026 (UTC) == 19 फरवरी 2026 के स्वैच्छिक लेख को तिथि में सम्मिलित करने हेतु निवेदन == मैंने 19 फरवरी 2026 को अपने निर्धारित 5 प्रतियोगिता लेख पूरे किए थे, जिन्हें प्रतिभागियों की सूची में सम्मिलित भी किया गया। इसके अतिरिक्त उसी दिन मैंने एक स्वैच्छिक विषय पर लेख [[हम भी इंसान हैं (1948 फ़िल्म)]] भी तैयार किया था, जिसे मैंने प्रतियोगिता में जमा नहीं किया, क्योंकि स्वैच्छिक विषयों के अंक प्रतियोगिता में नहीं जोड़े जाते हैं। बाद में मेरे 19 फरवरी 2026 के प्रतियोगिता लेखों में से एक लेख ''Crocs (क्रॉक्स)'' यह कहकर सूची से हटा दिया गया कि उसका लेख हिंदी विकिपीडिया पर अन्य नाम से पहले से मौजूद था। वर्तमान स्थिति में यदि उक्त स्वैच्छिक लेख [[हम भी इंसान हैं (1948 फ़िल्म)]] को अब जमा किया जाता है, तो वह 21 फरवरी 2026 की तिथि में गिना जाएगा, जबकि 21 फरवरी 2026 के लिए मेरे 5 लेख पहले ही पूरे हो चुके हैं, और प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार एक दिन में 5 से अधिक लेख मान्य नहीं होते। अतः निवेदन है कि स्वैच्छिक विषय पर आधारित लेख [[हम भी इंसान हैं (1948 फ़िल्म)]] को 19 फरवरी 2026 की तिथि में सम्मिलित करने पर विचार किया जाए, ताकि लेखों की गणना प्रतियोगिता नियमों के अनुरूप बनी रहे। [[सदस्य:SATYAJEET MP|SATYAJEET MP]] ([[सदस्य वार्ता:SATYAJEET MP|वार्ता]]) 14:52, 21 फ़रवरी 2026 (UTC) == विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026 परिणाम == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] महोदय, क्या इसमें कोई प्रमाणपत्र तथा बर्नस्टार भी दिया जाएगा| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:32, 3 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] महोदय मुझे पुरस्कार प्राप्त हो गया है, और क्या कोई प्रमाणपत्र या बर्नस्टार भी दिया जाएगा| :धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 06:35, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ndrhieltpptmtyxbm14aznj1ufwv1s7 डीएनए वाइरस 0 147786 6536718 6456284 2026-04-05T22:23:18Z AMAN KUMAR 911487 ++ 6536718 wikitext text/x-wiki [[File:Cowpox virus.jpg|thumb|upright=1.2|''[[ऑर्थोपॉक्सवायरस]]'' (Orthopoxvirus) के कण]] '''डीएनए वायरस''' (DNA virus) एक ऐसा [[विषाणु|वायरस]] है जिसका [[जीनोम]] [[डीएनए|डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड]] (DNA) से बना होता है और जिसका प्रतिकृतियन (रेप्लिकेशन) डीएनए पोलीमरेज़ एंजाइम द्वारा किया जाता है। इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: वे जिनके जीनोम में डीएनए के दो रज्जुक (स्ट्रैंड) होते हैं, जिन्हें डबल-स्ट्रैंडेड या द्वि-रज्जुक डीएनए (dsDNA) वायरस कहा जाता है, और वे जिनके जीनोम में डीएनए का केवल एक रज्जुक होता है, जिन्हें सिंगल-स्ट्रैंडेड या एकल-रज्जुक डीएनए (ssDNA) वायरस कहा जाता है। dsDNA वायरस मुख्य रूप से दो [[विषाणु वर्गीकरण|परिमंडलों]] (Realms) से संबंधित हैं: ''डुप्लोडनावीरिया'' (Duplodnaviria) और ''वेरिडनावीरिया'' (Varidnaviria)। दूसरी ओर, ssDNA वायरस लगभग विशेष रूप से ''मोनोडनावीरिया'' (Monodnaviria) परिमंडल में रखे गए हैं, जिसमें कुछ dsDNA वायरस भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कई डीएनए वायरसों को अभी तक उच्चतर टैक्सा (taxa) में वर्गीकृत नहीं किया गया है। रिवर्स ट्रांसक्राइबिंग वायरस (Reverse transcribing viruses), जिनका डीएनए जीनोम एक रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ एंजाइम द्वारा आरएनए (RNA) मध्यवर्ती के माध्यम से प्रतिकृत होता है, उन्हें ''राइबोवीरिया'' (Riboviria) परिमंडल के अंतर्गत ''परार्नावीराए'' (Pararnavirae) जगत (Kingdom) में वर्गीकृत किया गया है। डीएनए वायरस दुनिया भर में सर्वव्यापी हैं, विशेष रूप से समुद्री वातावरण में जहाँ वे समुद्री पारिस्थितिक तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं, और वे [[प्राक्केन्द्रकी जीव|प्रोकैरियोट्स]] व [[यूकैरियोट|यूकैरियोट्स]] दोनों को संक्रमित करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इनकी उत्पत्ति के कई स्रोत हैं, क्योंकि ''मोनोडनावीरिया'' के वायरस संभवतः आर्कियल (archaeal) और बैक्टीरियल [[प्लास्मिड|प्लास्मिड्स]] से कई अलग-अलग अवसरों पर उत्पन्न हुए हैं, हालांकि ''डुप्लोडनावीरिया'' और ''वेरिडनावीरिया'' की उत्पत्ति कम स्पष्ट है। प्रमुख बीमारी पैदा करने वाले डीएनए वायरसों में हर्पीसवायरस (herpesviruses), पैपिलोमावायरस (papillomaviruses), और पॉक्सवायरस (poxviruses) शामिल हैं। == बाल्टीमोर वर्गीकरण == बाल्टीमोर वर्गीकरण (Baltimore classification) प्रणाली का उपयोग वायरसों को उनके [[दूत आरएनए]] (mRNA) संश्लेषण के तरीके के आधार पर एक साथ समूहीकृत करने के लिए किया जाता है। इसे अक्सर मानक वायरस टैक्सोनॉमी (वर्गीकरण) के साथ उपयोग किया जाता है, जो विकासवादी इतिहास पर आधारित है। डीएनए वायरस दो बाल्टीमोर समूहों का निर्माण करते हैं: 'समूह I: डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस', और 'समूह II: सिंगल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस'। हालांकि बाल्टीमोर वर्गीकरण मुख्य रूप से mRNA के [[अनुलेखन]] (transcription) पर आधारित है, प्रत्येक बाल्टीमोर समूह के वायरस आमतौर पर अपने प्रतिकृतियन (रेप्लिकेशन) का तरीका भी साझा करते हैं। यह ज़रूरी नहीं है कि एक बाल्टीमोर समूह के वायरस आनुवंशिक संबंध या आकृति विज्ञान (morphology) भी साझा करें।<ref name=lostroh11 >[[#lostroh|Lostroh 2019]], pp.&nbsp;11–13</ref> ===<span class="anchor" id="Group I: dsDNA viruses"></span>डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस=== डीएनए वायरसों का पहला बाल्टीमोर समूह वह है जिसमें डबल-स्ट्रैंडेड (द्वि-रज्जुक) डीएनए जीनोम होता है। सभी dsDNA वायरसों का mRNA एक तीन-चरणीय प्रक्रिया में संश्लेषित होता है। पहला, एक ट्रांसक्रिप्शन प्रीइनीशिएशन कॉम्प्लेक्स उस स्थान के अपस्ट्रीम (upstream) डीएनए से जुड़ता है जहाँ से अनुलेखन शुरू होता है, जिससे परपोषी (होस्ट) के [[आर॰ऍन॰ए॰ पॉलिमरेज़|आरएनए पॉलिमरेज़]] की नियुक्ति संभव हो पाती है। दूसरा, जब RNA पॉलिमरेज़ जुड़ जाता है, तो यह mRNA स्ट्रैंड्स को संश्लेषित करने के लिए नेगेटिव (ऋणात्मक) स्ट्रैंड का उपयोग टेम्पलेट के रूप में करता है। तीसरा, RNA पॉलिमरेज़ एक विशिष्ट संकेत, जैसे कि पॉलीएडेनिलेशन (polyadenylation) साइट तक पहुँचने पर अनुलेखन को समाप्त कर देता है।<ref name=dsdna >{{cite web|title=dsDNA templated transcription|url=https://viralzone.expasy.org/1942|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref><ref name=rampersad66 >[[#rampersad|Rampersad 2018]], p.&nbsp;66</ref><ref name=fermin36 >[[#fermin|Fermin 2018]], pp.&nbsp;36–40</ref> dsDNA वायरस अपने जीनोम को प्रतिकृत करने के लिए कई तंत्रों (mechanisms) का उपयोग करते हैं। द्विदिशीय प्रतिकृतियन (Bidirectional replication), जिसमें एक प्रतिकृति मूल स्थल (replication origin site) पर दो प्रतिकृति कांटे (replication forks) स्थापित होते हैं और एक दूसरे की विपरीत दिशाओं में बढ़ते हैं, का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।<ref name=bidi >{{cite web|title=dsDNA bidirectional replication|url=https://viralzone.expasy.org/1939|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> एक 'रोलिंग सर्कल' तंत्र जो गोलाकार जीनोम के चारों ओर एक लूप में आगे बढ़ते हुए रैखिक स्ट्रैंड बनाता है, वह भी आम है।<ref name=dsdnarcr >{{cite web|title=dsDNA rolling circle replication|url=https://viralzone.expasy.org/2676|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref><ref>{{cite journal |vauthors=Bernstein H, Bernstein C |date=5 July 1973 |title=Circular and branched circular concatenates as possible intermediates in bacteriophage T4 DNA replication |journal=J Mol Biol |volume=77 |issue=3 |pages=355–361 |doi=10.1016/0022-2836(73)90443-9 |pmid=4580243}}</ref> कुछ dsDNA वायरस एक स्ट्रैंड विस्थापन (strand displacement) पद्धति का उपयोग करते हैं जिसमें एक स्ट्रैंड को टेम्पलेट स्ट्रैंड से संश्लेषित किया जाता है, और फिर पूर्व संश्लेषित स्ट्रैंड से एक पूरक (complementary) स्ट्रैंड संश्लेषित किया जाता है, जिससे एक dsDNA जीनोम बनता है।<ref name=displace >{{cite web|title=DNA strand displacement replication|url=https://viralzone.expasy.org/1940|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> अंततः, कुछ dsDNA वायरस को [[प्रतिकृति स्थानान्तरण]] (replicative transposition) नामक प्रक्रिया के हिस्से के रूप में प्रतिकृत किया जाता है, जिससे किसी होस्ट सेल के डीएनए में मौजूद वायरल जीनोम को होस्ट जीनोम के किसी अन्य भाग में प्रतिकृत किया जाता है।<ref name=reptrans>{{cite web|title=Replicative transposition|url=https://viralzone.expasy.org/4017|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> dsDNA वायरसों को उन वायरसों के बीच उप-विभाजित किया जा सकता है जो [[कोशिका केन्द्रक|कोशिका केंद्रक]] (cell nucleus) में प्रतिकृत होते हैं, और इसलिए अनुलेखन व प्रतिकृतियन के लिए होस्ट सेल की मशीनरी पर अपेक्षाकृत अधिक निर्भर होते हैं, और वे जो [[कोशिकाद्रव्य]] (cytoplasm) में प्रतिकृत होते हैं, जिस स्थिति में उन्होंने अनुलेखन व प्रतिकृतियन को निष्पादित करने के अपने स्वयं के साधन विकसित कर लिए हैं या प्राप्त कर लिए हैं।<ref name=cann122 >[[#cann|Cann 2015]], pp.&nbsp;122–127</ref> dsDNA वायरसों को आमतौर पर 'पूंछ वाले dsDNA वायरस' (tailed dsDNA viruses), जो ''डुप्लोडनावीरिया'' परिमंडल के सदस्यों (आमतौर पर ''कॉडोविरेल्स'' क्रम के पूंछ वाले बैक्टीरियोफेज) को संदर्भित करते हैं, और 'बिना पूंछ वाले dsDNA वायरस' (tailless dsDNA viruses), जो ''वेरिडनावीरिया'' परिमंडल के सदस्य हैं, के बीच भी विभाजित किया जाता है।<ref name=duplo >{{cite web|vauthors=Koonin EV, Dolja VV, Krupovic M, Varsani A, Wolf YI, Yutin N, Zerbini M, Kuhn JH|title=Create a megataxonomic framework, filling all principal/primary taxonomic ranks, for dsDNA viruses encoding HK97-type major capsid proteins|url=https://ictv.global/ictv/proposals/2019.004G.zip|website=International Committee on Taxonomy of Viruses|access-date=24 September 2020|language=en|format=docx|date=18 October 2019}}</ref><ref name=vari >{{cite web|vauthors=Koonin EV, Dolja VV, Krupovic M, Varsani A, Wolf YI, Yutin N, Zerbini M, Kuhn JH|title=Create a megataxonomic framework, filling all principal taxonomic ranks, for DNA viruses encoding vertical jelly roll-type major capsid proteins|url=https://ictv.global/ictv/proposals/2019.003G.zip|website=International Committee on Taxonomy of Viruses|access-date=24 September 2020|language=en|format=docx|date=18 October 2019}}</ref> ===सिंगल-स्ट्रैंडेड डीएनए वायरस=== [[File:Canines_Parvovirus.jpg|thumb|[[कैनाइन पैपिलोमावायरस]] (canine parvovirus) एक ssDNA वायरस है।]] डीएनए वायरसों का दूसरा बाल्टीमोर समूह वह है जिसमें सिंगल-स्ट्रैंडेड (एकल-रज्जुक) डीएनए जीनोम होता है। ssDNA वायरसों में अनुलेखन (ट्रांसक्रिप्शन) का तरीका dsDNA वायरसों के समान ही होता है। हालाँकि, चूंकि जीनोम सिंगल-स्ट्रैंडेड होता है, इसलिए किसी परपोषी कोशिका (होस्ट सेल) में प्रवेश करने पर इसे सबसे पहले एक [[डीएनए पोलीमरेज़]] द्वारा डबल-स्ट्रैंडेड रूप में बदला जाता है। फिर उस डबल-स्ट्रैंडेड रूप से mRNA को संश्लेषित किया जाता है। ssDNA वायरसों का डबल-स्ट्रैंडेड रूप कोशिका में प्रवेश के तुरंत बाद या वायरल जीनोम के प्रतिकृतियन के परिणामस्वरूप उत्पादित हो सकता है।<ref name=ssdna >{{cite web|title=ssDNA Rolling circle|url=https://viralzone.expasy.org/1941|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref><ref name="hairpin">{{Cite web|url=https://viralzone.expasy.org/2656|title=ssDNA strand displacement ~ ViralZone|website=viralzone.expasy.org|access-date=2026-04-05}}</ref> यूकैरियोटिक ssDNA वायरस केंद्रक (nucleus) में प्रतिकृत होते हैं।<ref name=cann122 /><ref name=fermin40 >[[#fermin|Fermin 2018]], pp.&nbsp;40–41</ref> अधिकांश ssDNA वायरसों में गोलाकार जीनोम होते हैं जो रोलिंग सर्कल रेप्लिकेशन (RCR) के माध्यम से प्रतिकृत होते हैं। ssDNA RCR एक एंडोन्यूक्लिएज (endonuclease) द्वारा शुरू किया जाता है जो पॉजिटिव (धनात्मक) स्ट्रैंड से जुड़ता है और उसे काटता है, जिससे डीएनए पॉलिमरेज़ प्रतिकृतियन के लिए नेगेटिव (ऋणात्मक) स्ट्रैंड का उपयोग टेम्पलेट के रूप में कर पाता है। प्रतिकृतियन पॉजिटिव स्ट्रैंड के 3'-सिरे को विस्तारित करके, पूर्व पॉजिटिव स्ट्रैंड को विस्थापित करते हुए जीनोम के चारों ओर एक लूप में आगे बढ़ता है, और एंडोन्यूक्लिएज एक स्टैंडअलोन जीनोम बनाने के लिए पॉजिटिव स्ट्रैंड को फिर से काटता है जिसे एक गोलाकार लूप में लाइगेट (ligated) किया जाता है। नए ssDNA को विरिअन्स (virions) में पैक किया जा सकता है या डीएनए पॉलिमरेज़ द्वारा प्रतिकृत करके अनुलेखन या प्रतिकृति चक्र को जारी रखने के लिए डबल-स्ट्रैंडेड रूप बनाया जा सकता है।<ref name=ssdna /><ref name=rampersad61 >[[#rampersad|Rampersad 2018]], pp.&nbsp;61–62</ref> पार्वोवायरस (Parvoviruses) में रैखिक (linear) ssDNA जीनोम होते हैं जो रोलिंग हेयरपिन रेप्लिकेशन (RHR) के माध्यम से प्रतिकृत होते हैं, जो RCR के समान है। पार्वोवायरस जीनोम के प्रत्येक छोर पर हेयरपिन लूप होते हैं जो डीएनए संश्लेषण की दिशा बदलने के लिए प्रतिकृतियन के दौरान बार-बार खुलते और मुड़ते हैं ताकि जीनोम के साथ आगे-पीछे जा सकें, जिससे एक निरंतर प्रक्रिया में जीनोम की कई प्रतियां बन जाती हैं। फिर व्यक्तिगत जीनोम को वायरल एंडोन्यूक्लिएज द्वारा इस अणु से अलग कर दिया जाता है। पार्वोवायरस के लिए, या तो पॉजिटिव या नेगेटिव सेंस स्ट्रैंड को कैप्सिड में पैक किया जा सकता है, जो वायरस-दर-वायरस भिन्न होता है।<ref name=rampersad61 /><ref>{{cite book |vauthors=Kerr J, Cotmore S, Bloom ME |date=25 November 2005 |title=Parvoviruses |publisher=CRC Press |pages=171–185 |isbn=9781444114782}}</ref> लगभग सभी ssDNA वायरस में पॉजिटिव सेंस जीनोम होते हैं, लेकिन कुछ अपवाद और विशिष्टताएं मौजूद हैं। परिवार ''एनेलोविरिडे'' (Anelloviridae) एकमात्र ऐसा ssDNA परिवार है जिसके सदस्यों में नेगेटिव सेंस जीनोम होते हैं, जो गोलाकार होते हैं।<ref name=fermin40 /> पार्वोवायरस, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, पॉजिटिव या नेगेटिव सेंस स्ट्रैंड दोनों में से किसी को भी विरिअन में पैक कर सकते हैं।<ref name=hairpin /> अंततः, बिडनाविरस (bidnaviruses) पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों रैखिक (linear) स्ट्रैंड्स को पैक करते हैं।<ref name=fermin40 /><ref name=bidna >{{cite web|title=Bidnaviridae|url=https://viralzone.expasy.org/2957|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> == ICTV वर्गीकरण == वायरसों के वर्गीकरण पर अंतर्राष्ट्रीय समिति (ICTV) वायरस वर्गीकरण की देखरेख करती है और आधारभूत स्तर पर परिमंडल (realm) के रैंक पर वायरसों को व्यवस्थित करती है। वायरस परिमंडल सेलुलर (कोशिकीय) जीवन के लिए प्रयुक्त [[डोमेन (जीव विज्ञान)|डोमेन]] के रैंक से मेल खाते हैं, लेकिन इनमें अंतर यह है कि एक परिमंडल के भीतर के वायरस आवश्यक रूप से सामान्य पूर्वज (common ancestry) साझा नहीं करते हैं, और न ही परिमंडल एक दूसरे के साथ सामान्य पूर्वज साझा करते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक वायरस परिमंडल कम से कम एक बार वायरसों के अस्तित्व में आने का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक परिमंडल के भीतर, वायरसों को साझा विशेषताओं के आधार पर समूहीकृत किया जाता है जो समय के साथ अत्यधिक संरक्षित (highly conserved) रहे हैं।<ref name=exec >{{cite journal|author=International Committee on Taxonomy of Viruses Executive Committee|date=May 2020|title=The New Scope of Virus Taxonomy: Partitioning the Virosphere Into 15 Hierarchical Ranks|journal=Nat Microbiol|volume=5|issue=5|pages=668–674|doi=10.1038/s41564-020-0709-x|pmc=7186216|pmid=32341570}}</ref> तीन डीएनए वायरस परिमंडलों को मान्यता प्राप्त है: ''डुप्लोडनावीरिया'' (Duplodnaviria), ''मोनोडनावीरिया'' (Monodnaviria), और ''वेरिडनावीरिया'' (Varidnaviria)। ===''डुप्लोडनावीरिया''=== [[File:Duplodnaviria virion morphology.jpg|thumb|''डुप्लोडनावीरिया'' विरिअन्स का एक सचित्र नमूना]] ''डुप्लोडनावीरिया'' में वे dsDNA वायरस होते हैं जो एक मेजर कैप्सिड प्रोटीन (MCP) को एनकोड करते हैं जिसमें HK97 फोल्ड होता है। इस परिमंडल के वायरस कैप्सिड और कैप्सिड असेंबली से जुड़ी कई अन्य विशेषताएं भी साझा करते हैं, जिसमें एक इकोसाहेड्रल कैप्सिड (icosahedral capsid) आकार और एक टर्मिनेस (terminase) एंजाइम शामिल है जो असेंबली के दौरान कैप्सिड में वायरल डीएनए को पैक करता है। इस परिमंडल में वायरसों के दो समूह शामिल हैं: पूंछ वाले बैक्टीरियोफेज, जो प्रोकैरियोट्स को संक्रमित करते हैं और उन्हें ''कॉडोविरेल्स'' क्रम में रखा गया है, और हर्पीसवायरस, जो जानवरों को संक्रमित करते हैं और उन्हें ''हर्पीसविरालेस'' क्रम में रखा गया है।<ref name=duplo /> ''डुप्लोडनावीरिया'' एक बहुत ही प्राचीन परिमंडल है, जो संभवतः सेलुलर जीवन के अंतिम सार्वभौमिक साझा पूर्वज (LUCA) से भी पहले का है। इसकी उत्पत्ति ज्ञात नहीं है, और न ही यह पता है कि यह मोनोफाइलेटिक (monophyletic) है या पॉलीफ़ाइलेटिक (polyphyletic)। इसकी एक विशिष्ट विशेषता इसके सभी सदस्यों के MCP में पाया जाने वाला HK97-फोल्ड है। यह परिमंडल के बाहर केवल एनकैप्सुलिन (encapsulins) में पाया जाता है, जो बैक्टीरिया में पाया जाने वाला एक प्रकार का नैनो-कम्पार्टमेंट है; इस संबंध को अभी पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।<ref name=duplo /><ref name=krupovic >{{cite journal|vauthors=Krupovic M, Koonin EV|date=21 March 2017|title=Multiple origins of viral capsid proteins from cellular ancestors|journal=Proc Natl Acad Sci U S A|volume=114|issue=12|pages=E2401–E2410|doi=10.1038/pnas.1621061114|pmc=5373398|pmid=28265094|bibcode=2017PNAS..114E2401K |doi-access=free}}</ref><ref name=luca >{{cite journal|last1=Krupovic|first1=M|last2=Dolja|first2=VV|last3=Koonin|first3=EV|title=The LUCA and its complex virome.|journal=Nat Rev Microbiol|date=14 July 2020|volume=18|issue=11|pages=661–670|doi=10.1038/s41579-020-0408-x|pmid=32665595|s2cid=220516514|url=https://bpp.oregonstate.edu/sites/agscid7/files/bpp/attachments/lucavirome2020.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20201027183841/https://bpp.oregonstate.edu/sites/agscid7/files/bpp/attachments/lucavirome2020.pdf |archive-date=2020-10-27 |url-status=live|access-date=24 September 2020}}</ref> कॉडोवायरस और हर्पीसवायरस के बीच संबंध भी अनिश्चित है: वे एक साझा पूर्वज साझा कर सकते हैं या हर्पीसवायरस ''कॉडोविरेल्स'' परिमंडल से एक अलग हुआ क्लैड (clade) हो सकता है। डुप्लोडनावायरसों के बीच एक सामान्य विशेषता यह है कि वे प्रतिकृति के बिना अव्यक्त (latent) संक्रमण पैदा करते हैं, जबकि वे भविष्य में प्रतिकृत होने में सक्षम रहते हैं।<ref>{{cite journal|vauthors=Weidner-Glunde M, Kruminis-Kaszkiel E, Savanagoudar M|date=February 2020|title=Herpesviral Latency—Common Themes|journal=Pathogens|volume=9|issue=2|pages=125|doi=10.3390/pathogens9020125|pmc=7167855|pmid=32075270|doi-access=free}}</ref><ref>{{cite web|title=Virus latency|url=https://viralzone.expasy.org/3970|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> पूंछ वाले बैक्टीरियोफेज दुनिया भर में सर्वव्यापी हैं,<ref>{{cite journal|vauthors=Andrade-Martínez JS, Moreno-Gallego JL, Reyes A|date=August 2019|title=Defining a Core Genome for the Herpesvirales and Exploring their Evolutionary Relationship with the Caudovirales|journal=Sci Rep|volume=9|issue=1|pages=11342 |doi=10.1038/s41598-019-47742-z|pmc=6683198|pmid=31383901|bibcode=2019NatSR...911342A}}</ref> समुद्री पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण हैं,<ref>{{cite journal|vauthors=Wilhelm SW, Suttle CA|date=October 1999|title=Viruses and Nutrient Cycles in the Sea: Viruses play critical roles in the structure and function of aquatic food webs|journal=BioScience|volume=49|issue=10|pages=781–788|doi=10.2307/1313569|jstor=1313569|doi-access=free}}</ref> और बहुत अधिक शोध का विषय हैं।<ref>{{cite journal|vauthors=Keen EC|date=January 2015|title=A century of phage research: Bacteriophages and the shaping of modern biology|journal=BioEssays|volume=37|issue=1|pages=6–9|doi=10.1002/bies.201400152|pmc=4418462|pmid=25521633}}</ref> हर्पीसवायरस विभिन्न प्रकार की उपकला (epithelial) बीमारियों का कारण जाने जाते हैं, जिनमें हर्पीस सिम्प्लेक्स, [[चेचक]] (chickenpox), [[दाद]] (shingles), और कापोसी का सारकोमा (Kaposi's sarcoma) शामिल हैं।<ref>{{cite journal|vauthors=Kukhanova MK, Korovina AN, Kochetkov SN|date=December 2014|title=Human herpes simplex virus: life cycle and development of inhibitors|journal=Biochemistry (Mosc)|volume=79|issue=13|pages=1635–1652|doi=10.1134/S0006297914130124|pmid=25749169|s2cid=7414402}}</ref><ref>{{cite journal|vauthors=Gershon AA, Breuer J, Cohen JI, Cohrs RJ, Gershon MD, Gilden D, Grose C, Hambleton S, Kennedy PG, Oxman MN, Seward JF, Yamanishi K|date=2 July 2015|title=Varicella zoster virus infection|journal=Nat Rev Dis Primers|volume=1|pages=15016|doi=10.1038/nrdp.2015.16|pmc=5381807|pmid=27188665}}</ref><ref>{{cite journal|vauthors=O'Leary JJ, Kennedy MM, McGee JO|date=February 1997|title=Kaposi's sarcoma associated herpes virus (KSHV/HHV 8): epidemiology, molecular biology and tissue distribution|journal=Mol Pathol|volume=50|issue=1|pages=4–8|doi=10.1136/mp.50.1.4|pmc=379571|pmid=9208806}}</ref> ===''मोनोडनावीरिया''=== ''मोनोडनावीरिया'' में वे ssDNA वायरस होते हैं जो HUH सुपरफैमिली के एक एंडोन्यूक्लिएज को एनकोड करते हैं, जो रोलिंग सर्कल रेप्लिकेशन की शुरुआत करता है। इस परिमंडल के प्रोटोटाइपिक सदस्यों को CRESS-DNA वायरस कहा जाता है और इनमें गोलाकार ssDNA जीनोम होते हैं। रैखिक जीनोम वाले ssDNA वायरस उन्हीं से उत्पन्न हुए हैं, और बदले में गोलाकार जीनोम वाले कुछ dsDNA वायरस रैखिक ssDNA वायरसों से उत्पन्न हुए हैं।<ref name=mono /> ऐसा प्रतीत होता है कि ''मोनोडनावीरिया'' के वायरस आर्कियल और बैक्टीरियल [[प्लास्मिड|प्लास्मिड्स]] से कई अलग-अलग अवसरों पर उभरे हैं। प्लास्मिड एक प्रकार का अतिरिक्त-गुणसूत्र (extra-chromosomal) डीएनए अणु होता है जो अपने होस्ट के अंदर स्वयं प्रतिकृत होता है। परिमंडल में जगत ''शोटोकुविराए'' (Shotokuvirae) संभवतः उन पुनर्संयोजन (recombination) घटनाओं से उभरा है जिन्होंने इन प्लास्मिड्स के डीएनए और आरएनए वायरसों के कैप्सिड प्रोटीन को एनकोड करने वाले पूरक डीएनए को मिला दिया।<ref name=mono /><ref>{{cite journal|vauthors=Kazlauskas D, Varsani A, Koonin EV, Krupovic M|date=31 July 2019|title=Multiple Origins of Prokaryotic and Eukaryotic Single-Stranded DNA Viruses From Bacterial and Archaeal Plasmids|journal=Nat Commun|volume=10|issue=1|pages=3425|doi=10.1038/s41467-019-11433-0|pmc=6668415|pmid=31366885|bibcode=2019NatCo..10.3425K}}</ref> CRESS-DNA वायरसों में तीन जगत शामिल हैं जो प्रोकैरियोट्स को संक्रमित करते हैं: ''लोएबविराए'' (Loebvirae), ''संगेरविराए'' (Sangervirae), और ''ट्रैपाविराए'' (Trapavirae)। ''शोटोकुविराए'' जगत में यूकैरियोटिक CRESS-DNA वायरस और ''मोनोडनावीरिया'' के असामान्य सदस्य शामिल हैं।<ref name=mono /> यूकैरियोटिक मोनोडनावायरस कई बीमारियों से जुड़े हैं, और इनमें पैपिलोमावायरस और पॉलीओमावायरस (polyomaviruses) शामिल हैं जो कई कैंसर का कारण बनते हैं,<ref>{{cite web|title=Papillomaviridae|url=https://viralzone.expasy.org/5|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref><ref>{{cite web|title=Polyomaviridae|url=https://viralzone.expasy.org/148|website=ViralZone|publisher=Swiss Institute of Bioinformatics|access-date=24 September 2020}}</ref> और जेमिनीवायरस (geminiviruses), जो कई आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण फसलों को संक्रमित करते हैं।<ref>{{cite journal|vauthors=Malathi VG, Renuka Devi P|date=March 2019|title=ssDNA Viruses: Key Players in Global Virome|journal=VirusDisease|volume=30|issue=1|pages=3–12|doi=10.1007/s13337-019-00519-4|pmc=6517461|pmid=31143827}}</ref> ===''वेरिडनावीरिया''=== [[File:2w0c_monomer.png|thumb|''[[स्यूडोअल्टेरोमोनास वायरस PM2]]'' के MCP का एक [[रिबन आरेख]] (ribbon diagram), जिसमें दो जेली रोल फोल्ड लाल और नीले रंग में हैं।]] ''वेरिडनावीरिया'' में वे डीएनए वायरस होते हैं जो उन MCP को एनकोड करते हैं जिनमें जेली रोल फोल्ड संरचना होती है। इस संरचना में जेली रोल (JR) फोल्ड वायरल कैप्सिड की सतह के लंबवत (perpendicular) होता है। कई सदस्य कई अन्य विशेषताएं भी साझा करते हैं, जिसमें एक माइनर कैप्सिड प्रोटीन जिसमें सिंगल (एकल) JR फोल्ड होता है, एक ATPase जो कैप्सिड असेंबली के दौरान जीनोम को पैकेज करता है, और एक सामान्य डीएनए पोलीमरेज़ शामिल हैं। इसके अंतर्गत दो जगतों को मान्यता प्राप्त है: ''हेल्वेटियाविराए'' (Helvetiavirae), जिसके सदस्यों के MCP में एक वर्टिकल (लंबवत) JR फोल्ड होता है, और ''बैमफोर्डविराए'' (Bamfordvirae), जिसके सदस्यों के MCP में दो वर्टिकल JR फोल्ड होते हैं।<ref name=vari /> वेरिडनावीरिया या तो मोनोफाइलेटिक है या पॉलीफ़ाइलेटिक है और यह LUCA से पहले का हो सकता है। जगत ''बैमफोर्डविराए'' संभवतः दूसरे जगत ''हेल्वेटियाविराए'' से दो MCP के संलयन (fusion) के माध्यम से प्राप्त हुआ है, ताकि एक के बजाय दो जेली रोल फोल्ड वाला MCP प्राप्त हो सके। ''हेल्वेटियाविराए'' के सिंगल जेली रोल (SJR) फोल्ड MCP प्रोटीन के उस समूह से संबंध दिखाते हैं जिनमें SJR फोल्ड होते हैं, जिसमें क्युपिन सुपरफैमिली (Cupin superfamily) और न्यूक्लियोप्लास्मिन (nucleoplasmins) शामिल हैं।<ref name=vari /><ref name=krupovic /><ref name=luca /> ''वेरिडनावीरिया'' के समुद्री वायरस दुनिया भर में सर्वव्यापी हैं और, पूंछ वाले बैक्टीरियोफेज की तरह, समुद्री पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।<ref>{{Cite journal|last=Kauffman|first=Kathryn M.|last2=Hussain|first2=Fatima A.|last3=Yang|first3=Joy|last4=Arevalo|first4=Philip|last5=Brown|first5=Julia M.|last6=Chang|first6=William K.|last7=VanInsberghe|first7=David|last8=Elsherbini|first8=Joseph|last9=Sharma|first9=Radhey S.|date=|title=A major lineage of non-tailed dsDNA viruses as unrecognized killers of marine bacteria|url=https://www.nature.com/articles/nature25474|journal=Nature|language=en|volume=554|issue=7690|pages=118–122|doi=10.1038/nature25474|issn=0028-0836}}</ref> अधिकांश ज्ञात यूकैरियोटिक डीएनए वायरस इसी परिमंडल से संबंधित हैं।<ref name="krupovic2015">{{Cite journal|last=Krupovic|first=Mart|last2=Koonin|first2=Eugene V.|date=|title=Polintons: a hotbed of eukaryotic virus, transposon and plasmid evolution|url=https://www.nature.com/articles/nrmicro3389|journal=Nature Reviews Microbiology|language=en|volume=13|issue=2|pages=105–115|doi=10.1038/nrmicro3389|issn=1740-1526|pmc=5898198|pmid=25534808}}</ref> ''वेरिडनावीरिया'' में उल्लेखनीय बीमारी पैदा करने वाले वायरसों में एडेनोवायरस (adenoviruses), पॉक्सवायरस, और अफ्रीकन स्वाइन फीवर वायरस (African swine fever virus) शामिल हैं।<ref name=ictv >{{cite web|url=https://ictv.global/taxonomy|title=Virus Taxonomy: 2019 Release|website=International Committee on Taxonomy of Viruses|access-date=24 September 2020}}</ref> पॉक्सवायरस आधुनिक चिकित्सा के इतिहास में अत्यधिक प्रमुख रहे हैं, विशेष रूप से ''वैरिओला वायरस'', जो [[चेचक|स्मॉलपॉक्स]] का कारण बना था।<ref>{{Cite journal|last=Meyer|first=Hermann|last2=Ehmann|first2=Rosina|last3=Smith|first3=Geoffrey L.|date=2020-01-24|title=Smallpox in the Post-Eradication Era|url=https://www.mdpi.com/1999-4915/12/2/138|journal=Viruses|language=en|volume=12|issue=2|pages=138|doi=10.3390/v12020138|issn=1999-4915|pmc=7077202|pmid=31991671}}</ref> कई वेरिडनावायरस अपने होस्ट के जीनोम में एंडोजेनाइज़्ड (endogenized) हो सकते हैं; इसका एक अजीब उदाहरण वायरोफेज (virophages) हैं, जो होस्ट को संक्रमित करने के बाद, विशाल वायरसों (giant viruses) से होस्ट की रक्षा कर सकते हैं।<ref name=krupovic2015 /> ===बाल्टीमोर वर्गीकरण=== dsDNA वायरसों को तीन परिमंडलों में वर्गीकृत किया गया है और इनमें कई ऐसे टैक्सा (taxa) शामिल हैं जिन्हें किसी परिमंडल में नहीं रखा गया है: * ''डुप्लोडनावीरिया'' के सभी वायरस dsDNA वायरस हैं।<ref name=duplo /> * ''मोनोडनावीरिया'' में, ''पैपोवाविरिसेट्स'' (Papovaviricetes) वर्ग के सदस्य dsDNA वायरस हैं।<ref name=mono >{{cite web|vauthors=Koonin EV, Dolja VV, Krupovic M, Varsani A, Wolf YI, Yutin N, Zerbini M, Kuhn JH|title=Create a megataxonomic framework, filling all principal taxonomic ranks, for ssDNA viruses|url=https://ictv.global/ictv/proposals/2019.005G.zip|website=International Committee on Taxonomy of Viruses|access-date=24 September 2020|language=en|format=docx|date=18 October 2019}}</ref> * ''वेरिडनावीरिया'' के सभी वायरस dsDNA वायरस हैं।<ref name=vari /> * निम्नलिखित टैक्सा, जो किसी परिमंडल से नहीं जुड़े हैं, विशेष रूप से dsDNA वायरस वाले हैं:<ref name=vari /> ** क्रम: ''लिगामेन्विरेल्स'' (Ligamenvirales) ** परिवार: ''एम्पुलाविरिडे'', ''बैक्यूलोविरिडे'', ''बिकौडाविरिडे'', ''क्लावविरिडे'', ''फ्यूसेलोविरिडे'', ''ग्लोबुलोविरिडे'', ''गुट्टाविरिडे'', ''हाल्स्पीविरिडे'', ''हायट्रोसाविरिडे'', ''निमाविरिडे'', ''न्यूडीविरिडे'', ''ओवलिविरिडे'', ''प्लाज्माविरिडे'', ''पॉलीडनाविरिडे'', ''पोर्टोग्लोबुलोविरिडे'', ''थास्पिविरिडे'', ''ट्रिस्ट्रोमाविरिडे'' ** वंश (Genera): ''डिनोडनावायरस'', ''राइजिडियोवायरस'' ssDNA वायरसों को एक परिमंडल में वर्गीकृत किया गया है और इसमें कई ऐसे परिवार शामिल हैं जिन्हें किसी परिमंडल में नहीं रखा गया है: * ''मोनोडनावीरिया'' में, ''पैपोवाविरिसेट्स'' के वायरसों को छोड़कर सभी सदस्य ssDNA वायरस हैं।<ref name=mono /> * गैर-निर्दिष्ट (unassigned) परिवार ''[[एनेलोविरिडे]]'' और ''[[स्पाइराविरिडे]]'' ssDNA वायरस परिवार हैं।<ref name=mono /> * ''[[फिनलेकविरिडे]]'' (Finnlakeviridae) परिवार के वायरसों में ssDNA जीनोम होते हैं। ''फिनलेकविरिडे'' को किसी परिमंडल में नहीं रखा गया है, लेकिन इसे ''वेरिडनावीरिया'' का एक प्रस्तावित सदस्य माना गया है।<ref name=vari /> == संदर्भ == {{Reflist}} === ग्रंथ सूची === {{Refbegin}} * {{cite book|last=Lostroh|first=P.|year=2019|title=Molecular and Cellular Biology of Viruses|url=https://books.google.com/books?id=BcmWDwAAQBAJ&q=baltimore+classification&pg=PT58|publisher=Garland Science|isbn=978-0429664304|access-date=24 September 2020|ref=lostroh}} * {{cite book|last=Cann|first=A.|date=2015|title=Principles of Molecular Virology|publisher=Elsevier|pages=122–127|isbn=978-0128019559|ref=cann}} * {{cite book|last=Fermin|first=G.|editor1-last=Tennant |editor1-first=P.|editor2-last=Fermin |editor2-first=G.|editor3-last=Foster |editor3-first=J.|date=2018|title=Viruses: Molecular Biology, Host Interactions and Applications to Biotechnology|chapter-url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/B9780128112571000024|publisher=Elsevier|location=San Diego, CA|pages=35–46|doi=10.1016/B978-0-12-811257-1.00002-4|isbn= 978-0128112571|s2cid=89706800|access-date=8 December 2020|chapter=Virion Structure, Genome Organization, and Taxonomy of Viruses|ref=fermin}} * {{cite book |last1=Rampersad |first1=S.|last2=Tennant |first2=P.|editor1-last=Tennant |editor1-first=P.|editor2-last=Fermin |editor2-first=G.|editor3-last=Foster |editor3-first=J. |title=Viruses: Molecular Biology, Host Interactions, and Applications to Biotechnology |date=2018 |publisher=Elsevier |location=San Diego, CA |isbn=978-0128112571 |pages=55–82 |chapter-url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/B9780128112571000036 |access-date=8 December 2020 |chapter=Replication and Expression Strategies of Viruses|doi=10.1016/B978-0-12-811257-1.00003-6|s2cid=90170103|ref=rampersad}} {{Refend}} {{Authority control}} [[Category:डीएनए वायरस| ]] [[Category:डीएनए]] [[श्रेणी:विषाणु]] qhfz9t29oizmjlzb283eqf9tw2xj0pu जय हिन्द 0 184060 6536612 6536541 2026-04-05T15:31:38Z Mnjkhan 900134 [[विशेष:योगदान/~2026-21099-29|~2026-21099-29]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21099-29|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन DreamRimmerके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536612 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Jai Hind Post-mark.gif|thumb|220px|Right|"[[जय हिन्द डाक चिह्न|जय हिन्द]]" का यादगारी डाक चिह्न]] '''जय हिन्द''' विशेषरुप से [[भारत]] में प्रचलित एक देशभक्तिपूर्ण [[नारा]] है जो कि भाषणों में तथा संवाद में भारत के प्रति देशभक्ति प्रकट करने के लिये प्रयोग किया जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ "भारत की विजय" है। यह नारा भारतीय क्रान्तिकारी जैन-उल आब्दीन हसन द्वारा दिया गया था |<ref name=amzn-brothers>{{cite book|url=http://www.amazon.com/Brothers-Against-Raj-Leonard-Gordon/dp/0231074433|title=Brothers Against the Raj|author=Leonard A. Gordon|year=1990|publisher=Columbia University Press|access-date=22 अप्रैल 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20160305104257/http://www.amazon.com/Brothers-Against-Raj-Leonard-Gordon/dp/0231074433|archive-date=5 मार्च 2016|url-status=live}}</ref><ref name=":0">{{cite news|title=A tale of two cities|url=http://www.thehindu.com/features/metroplus/a-tale-of-two-cities/article5635343.ece|newspaper=[[द हिन्दू|The Hindu]]|date=30 January 2014|accessdate=31 January 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140202215813/http://www.thehindu.com/features/metroplus/a-tale-of-two-cities/article5635343.ece|archive-date=2 फ़रवरी 2014|url-status=live}}</ref>। तत्पश्चात यह भारतीयों में प्रचलित हो गया एवं नेता जी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाषचन्द्र बोस]] द्वारा [[आज़ाद हिन्द फ़ौज]] के युद्ध घोष के रूप में प्रचलित किया गया। सुभाषचन्द्र बोस के अनुयायी तथा नौजवान स्वतन्त्रता सेनानी ग्वालर (वर्तमान नाम [[ग्वालियर]]), मध्य भारत के रामचन्द्र मोरेश्वर करकरे ने तथ्यों पर आधारित एक देशभक्तिपूर्ण नाटक "जय हिन्द" लिखा तथा "जय हिन्द" नामक एक हिन्दी पुस्तक प्रकाशित की। कुछ वर्षों पश्चात रामचन्द्र करकरे केन्द्रीय भारतीय प्रोविंस के काँग्रेस अध्यक्ष बने। उन्होंने प्रसिद्ध क्रान्तिकारी [[चन्द्रशेखर आज़ाद|चन्द्रशेखर आज़ाद]] के साथ स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा लिया। == इतिहास == जय हिन्द' नारे का सीधा सम्बन्ध नेताजी से है, मगर सबसे पहले प्रयोगकर्ता नेताजी सुभाष चन्द्र बोस नहीं थे। आइये देखें यह किसके हृदय में पहले पहल उमड़ा और आम भारतीयों के लिए जय-घोष बन गया। “जय हिन्द” के नारे की शुरूआत जिनसे होती है, उन क्रान्तिकारी 'चेम्बाकरमण पिल्लई' का जन्म 15 सितम्बर 1891 को तिरूवनंतपुरम में हुआ था। गुलामी के आदी हो चुके देशवासियों में आज़ादी की आकांक्षा के बीज डालने के लिए उन्होने कॉलेज के दौरान “जय हिन्द” को अभिवादन के रूप में प्रयोग करना शुरू किया। 1908 में पिल्लई जर्मनी चले गए। अर्थशास्त्र में पी.एच.डी करने के बाद जर्मनी से ही अंग्रेजो के विरूद्ध क्रान्तिकारी गतिविधियाँ शुरू की। प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ तो उन्होने जर्मन नौ-सेना में जूनियर अफसर का पद सम्भाला। पिल्लई 1933 में आस्ट्रिया की राजधानी वियना में नेताजी सुभाष से मिले तब “जय हिन्द” से उनका अभिवादन किया। पहली बार सुने ये शब्द नेताजी को प्रभावित कर गए। इधर नेताजी आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना करना चाहते थे। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने जिन ब्रिटिश सैनिको को कैद किया था, उनमें भारतीय सैनिक भी थे। 1941 में जर्मन की क़ैदियों की छावणी में नेताजी ने इन्हे सम्बोधित किया तथा अंग्रेजो का पक्ष छोड़ आज़ाद हिन्द फौज में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। यह समाचार अखबारों में छपा तो जर्मन में रह रहे भारतीय विद्यार्थी आबिद हुसैन ने अपनी पढ़ाई छोड़ नेताजी के सेक्रेट्री का पद सम्भाल लिया। आज़ाद हिन्द फौज के सैनिक आपस में अभिवादन किस भारतीय शब्द से करे यह प्रश्न सामने आया तब हुसैन ने”जय हिन्द” का सुझाव दिया। उसके बाद २ नवम्बर 1941 को “जय-हिन्द” आज़ाद हिंद फ़ौज का युद्धघोष बन गया। जल्दी ही भारत भर में यह गूँजने लगा, मात्र काँग्रेस पर तब इसका प्रभाव नहीं था। 1946 में एक चुनाव सभा में जब लोग “काँग्रेस जिन्दाबाद” के नारे लगा रहे थे, नेहरूजी ने लोगो से “जय हिन्द” का नारा लगाने के लिए कहा। अब तक “वन्दे-मातरम” ही काँग्रेस की अहिंसक लड़ाई का नारा रहा था, 15 अगस्त 1947 को नेहरू जी ने आज़ादी के बाद, लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन, “जय हिन्द” से किया। डाकघरों को सुचना भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेज राजा जोर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आये लेकिन उस पर मुहर “जय हिन्द” की लगाई जाये. यह 31 दिसम्बर 1947 तक यही मुहर चलती रही। केवल जोधपुर के गिर्दीकोट डाकघर ने इसका उपयोग नवम्बर 1955 तक जारी रखा। आज़ाद भारत की पहली डाक टिकट पर भी “जय हिन्द” लिखा हुआ था। == छबि दीर्घा == <gallery widths="200px" heights="200px"> JAI HIND.jpg|[[रामचन्द्र मोरेश्वर करकरे]] द्वारा रचित पुस्तक '''जय हिन्द''' 1947 India Flag 3½ annas.jpg|स्वतन्त्र भारत का पहला डाक टिकट Katni1.jpg|[[कटनी]] स्थित '''जय-हिन्द भवन''', जो अब जीर्ण-शीर्ण हो चुका है। </gallery> == इन्हें भी देखें == * [[आज़ाद हिन्द फौज]] * [[सुभाष चन्द्र बोस]] * जय हिन्द डाक चिह्न * जय हिन्दी गुजराती समाचार पत्र == बाहरी कड़ि<ref name=":0" />याँ == * [https://web.archive.org/web/20100130232223/http://www.tarakash.com/2/science/history/750-jai-hind-story-subhash-chandra-bose.html "जय हिंद" - जोशीले नारे की रोचक कहानी] ==सन्दर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:हिन्दी-उर्दू के नारे]] [[श्रेणी:आज़ाद हिन्द फ़ौज]] [[श्रेणी:भारत के नारे]] 1w0wvrdrevdtyhantopdp49e1q6nir1 वैवस्वत मनु 0 185069 6536777 6399905 2026-04-06T05:38:33Z ~2026-21170-81 919007 6536777 wikitext text/x-wiki {{हिन्दू धर्म सूचना मंजूषा}} '''वैवस्वत मनु या श्राद्धदेव मनु''' [[हिन्दू धर्म]] के अनुसार मानव जाति के प्रणेता व प्रथम पुरुष [[स्वायंभुव मनु]] के बाद सातवें [[मनु]] थे। हरेक [[मन्वंतर]] में एक प्रथम पुरुष होता है, जिसे [[मनु]] कहते हैं। वर्तमान काल में ववस्वत मन्वन्तर चल रहा है, जिसके प्रथम पुरुष वैवस्वत मनु थे, जिनके नाम पर ही मन्वन्तर का भी नाम है। भगवान सूर्य का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ। विवाह के बाद संज्ञा ने श्राद्धदेव और यम ([[यमराज]]) नामक दो पुत्रों और [[यमुना]] (नदी) नामक एक पुत्री को जन्म दिया। श्राद्धदेव की पुत्री का विवाह ब्रह्मा जी के पुत्र भगवान चित्रगुप्त से हुआ।यही विवस्वान यानि सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु कहलाये। वैवस्वत मनु के नेतृत्व में त्रिविष्टप अर्थात [[तिब्बत]] या देवलोक से प्रथम पीढ़ी के मानवों (देवों) का मेरु प्रदेश में अवतरण हुआ। वे देव [[स्वर्ग]] से अथवा अम्बर (आकाश) से पवित्र [[वेद]] भी साथ लाए थे। इसी से [[श्रुति]] और [[स्मृति]] की परम्परा चलती रही। वैवस्वत मनु के समय ही [[भगवान विष्णु]] का [[मत्स्य अवतार]] हुआ। इनकी शासन व्यवस्था में देवों में पाँच तरह के विभाजन थे: देव, दानव, यक्ष, किन्नर और गंधर्व। इनके के दस पुत्र हुए थे। इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यन्त, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध पुत्र थे। इसमें इक्ष्वाकु कुल का ही मुख्यतः विस्तार हुआ। इक्ष्वाकु कुल में कई महान प्रतापी राजा, ऋषि, अरिहंत और भगवान हुए हैं। वैवस्वत सातवें मन्वंतर का स्वामी बनकर मनु पद पर आसीन हुए थे। इस मन्वंतर में पुरंदर नामक [[इन्द्र]] थे। अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप, गौतम, भरद्वाज, विश्वमित्र और जमदग्नि- ये सातों इस मन्वंतर के सप्तर्षि थे। == इतिहास == वेद, पुराणों और अन्य धर्मग्रंथों के साथ वैज्ञानिक शोधों व अध्ययनों से ज्ञात होता है कि मनुष्य व अन्य जीव-जंतुओं की वर्तमान आदि सृष्टि हिमालय के आसपास की भूमि पर हुई थी जिसमें तिब्बत का सर्वधिक महत्त्व है। हिमालय के पास होने के कारण पूर्व में भारत वर्ष को हिमवर्ष भी कहा जाता था। वेद-पुराणों में तिब्बत को त्रिविष्टप कहा गया है। [[महाभारत]] के महाप्रस्थानिक पर्व में स्वर्गारोहण में स्पष्ट किया गया है कि तिब्बत [[हिमालय]] के उस राज्य को पुकारा जाता था जिसमें नंदनकानन नामक देवराज इंद्र का देश था। इससे सिद्ध होता है कि इंद्र स्वर्ग में नहीं धरती पर ही हिमालय क्षेत्र में रहते थे। पूर्व में यह धरती जल प्रलय के कारण जल से ढँक गई थी। कैलाश, गोरी-शंकर की चोटी तक पानी चढ़ गया था। इससे यह सिद्ध होता है कि संपूर्ण धरती ही जलमग्न हो गई थी। कई माह तक वैवस्वत मनु द्वारा नाव में ही गुजारने के बाद उनकी नाव गौरी-शंकर के शिखर से होते हुए नीचे उतरी। गोरी-शंकर जिसे [[माउंट एवरेस्ट]] शिखर भी कहा जाता है, विश्व में सबसे ऊँचा, बर्फ से ढँका हुआ और ठोस पहाड़ है। तिब्बत में धीरे-धीरे जनसंख्या वृद्धि और वातावरण में तेजी से होते परिवर्तन के कारण वैवस्वत मनु की संतानों ने अलग-अलग भूमि की बढ़ना आरंभ किया। विज्ञान के अनुसार भी पहले पृथ्वी के सभी महाद्वीप इकट्ठे थे। अर्थात अमेरिका द्वीप इधर अफ्रीका और उधर चीन तथा रूस से जुड़ा हुआ था। अफ्रीका भारत से जुड़ा हुआ था। धरती की घूर्णन गति और भू-गर्भीय परिवर्तन के कारण धरती द्वीपों में बँट गई। == संतानों का विस्तार == इस जुड़ी हुई धरती पर ही हिमालय की निम्न श्रेणियों को पार कर मनु की संतानें कम ऊँचाई वाले पहाड़ी विस्तारों में बसती गईं। फिर जैसे-जैसे समुद्र का [[जल स्तर]] घटता गया वे और भी मध्य भाग में आते गए। दक्षिण के इलाके तो जलप्रलय से जलमग्न ही थे। लेकिन बहुत काल के बाद धीरे-धीरे जैसे-जैसे समुद्र का जलस्तर घटा मनु का कुल पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी मैदान और पहाड़ी प्रदेशों में फैल गए। जो हिमालय के इधर फैलते गए उन्होंने ही [[अखण्ड भारत]] की सम्पूर्ण भूमि को ब्रह्मावर्त, ब्रह्मार्षिदेश, मध्यदेश, आर्यावर्त एवं भारतवर्ष आदि नाम दिए। जो इधर आए वे सभी मनुष्य आर्य कहलाने लगे। यही लोग साथ में वेद लेकर आए थे। इसी से यह धारणा प्रचलित हुई कि देवभूमि से वेद धरती पर उतरे। स्वर्ग से गंगा को उतारा गया आदि अनेक धारणाएँ। इन आर्यों के ही कई समूह अलग-अलग झुंडों में पूरी धरती पर फैल गए और वहाँ बस कर भाँति-भाँति के धर्म और संस्कृति आदि को जन्म दिया। मनु की संतानें ही आर्य-अनार्य में बँटकर धरती पर फैल गईं। पूर्व में यह सभी देव-दानव कहलाती थीं। इस धरती पर आज जो भी मनुष्य हैं वे सभी वैवस्वत मनु की ही संतानें हैं इस विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। == सन्दर्भ == * [https://web.archive.org/web/20100106102045/http://hindi.webdunia.com/religion/sanatandharma/history/0909/04/1090904045_1.htm वैवस्वत मनु के इतिहास की रूपरेखा ] * [https://web.archive.org/web/20100106102031/http://hindi.webdunia.com/religion/sanatandharma/history/0909/02/1090902058_1.htm हिंदू इतिहास की भूमिका ] [[श्रेणी:मनु]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म]] [[श्रेणी:हिन्दू इतिहास]] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म के चरित्र]] fcmq52jqhopxzouwo4iybk3scv6pj3g बर्बरीक 0 190305 6536870 6536204 2026-04-06T07:22:24Z Dino moreo 917093 6536870 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के कम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखी पूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था इसी स्थानपर पांडवों ने वनवास का समय बिताया थाl वह अहिलावती[[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब वे युद्ध में सहायता देने आये, तब इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें [[काली|रणचंडी]] को बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिल्यावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम लोग!|url=http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|publisher=दैनिक भास्कर|date=२७ दिसम्बर २०१३|archiveurl=https://archive.today/20131228045206/http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|archivedate=28 दिसंबर 2013|access-date=28 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> {{reflist}} *[[खाटूश्यामजी|खाटू श्याम जी]] {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] 3c7sn4bkjqo1llwk9jjmvhkugfjd0m1 6536886 6536870 2026-04-06T07:54:38Z Dino moreo 917093 6536886 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के कम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखी पूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था इसी स्थानपर पांडवों ने वनवास का समय बिताया थाl वह अहिलावती[[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब वे युद्ध में सहायता देने आये, तब इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें [[काली|रणचंडी]] को बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिल्यावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम 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== == दिव्य जन्म == == आकाश में अद्भुत शांति थी। काम्यक वन में पक्षियों का मधुर कलरव था। और ऐसे समय में द्वापर के मतस्य क्षेत्र वर्तमान के लख्खीपुरा (सीकर) के काम्यक वनक्षेत्र में माता मोरवी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी ग्यारस) को एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। == == उसके नेत्रों में असाधारण चमक थी, मानो वह जन्म से ही किसी गहनस्मृति को साथ लेकर आया हो। ऋषियों ने सिर पर बब्बर शेर की तरह बाल अधिक होने कि वजह से उसका नाम रखा - बर्बरीक। == == जन्म के समय ही अनेक शुभ संकेत प्रकट हुए। == == कहते हैं, उस दिन वायु मंद हो गई, और वातावरण में एक अदृश्य ऊर्जा का संचार हुआ। == == मानो प्रकृति स्वयं उस बालक का स्वागत कर रही हो। == == माता मोरवी ने उसे हृदय से लगाया और मन ही मन संकल्प लिया - == == “यह बालक केवल मेरा पुत्र नहीं होगा, == == यह धर्म का प्रहरी बनेगा।” == == मातृत्व का प्रथम पाठ == == बर्बरीक को बाल्यकाल से ही माँ मोरवी ने उन्हें केवल लाड -प्यार से नहीं पाला बल्कि उन्हें वीर योद्वा के रूप में तैयार किया क्योकिं वे जानती थीं - जिसे नियति महान बनाना चाहती है, उसे प्रारंभ से ही अनुशासन की छाया में बढ़ना होगा। == == जब वह चलना सीख रहा था, तभी उसने धनुष को पहली बार छुआ, तब माता मोरवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर == == कहा - == == “पुत्र, शस्त्र केवल धर्म रक्षा के लिए उठाया जाता है, == == अन्यथा वह स्वयं विनाश का कारण बनता है।” == == बालक ध्यान से सुनता। उसकी आँखों में जिज्ञासा थी, पर साथ ही एक अजीब-सी गंभीरता भी। == == शिक्षा और साधना == == घटोत्कच ने उसे युद्धकला का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। लख्खीपुरा वन की विशाल भूमि उसका गुरुकुल बनी। धनुर्विद्या, मायावी युद्धकौशल और असाधारण शारीरिक बल - सब उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगे। परंतु माता मोरवी की शिक्षा भिन्न थी। == == वे उसे प्रतिदिन प्रात: ध्यान करातीं। उसे सिखातीं - क्रोध को नियंत्रित करना, विजय में विनम्र रहना, और पराजित के प्रति करुणा रखना। == == एक दिन बर्बरीक ने प्रश्न किया -“माता, यदि मैं इतना बलवान बन जाऊँ कि कोई मुझे हरा न सके, तो क्या मैं संसार का स्वामी बन जाऊँगा?” == == माता मोरवी मुस्कुराईं। उन्होंने उत्तर दिया - “नहीं पुत्र। संसार का स्वामी वह नहीं जो सबको जीत ले, बल्कि वह है जो अपने भीतर के अहंकार को जीत ले।” == == यह वचन बर्बरीक के हृदय में अंकित हो गया। == == बर्बरीक के तीन बाणों का रहस्य == == माता मोरवी के कठोर प्रशिक्षण एवं पूर्ण शिक्षा के पश्चात् बर्बरीक को सभी विद्याओं में निपुण करके माता मोरवी ने माता दुर्गा (कामाख्या) एवं भगवान शिव से प्राप्त तीन अजेय बाण एवं धनुष सौंपते हुए कहा की हे पुत्र! ये बाण सुदर्शन चक्र को भी रोक सकते है। एक बाण से वह सम्पूर्ण शत्रु सेना को चिह्नित कर सकता है, दूसरे से उन्हें बाँध सकता है, और तीसरे से संपूर्ण युद्ध समाप्त कर सकता है। == == उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखकर कहा - “पुत्र, सदैव उस पक्ष का साथ देना जो दुर्बल हो। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, चाहे वह अपना ही प्रिय क्यों न हो।” इस प्रकार माता मोरवी ने उसे शक्ति का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाई। == == यह वही वचन था जो आगे चलकर उसके जीवन का निर्णायक सिद्धांत बना - ‘हारे का सहारा’। == == मातृ-संस्कार की छाप == == माता मोरवी का स्नेह कोमल था, पर उनका अनुशासन दृढ़। == == उन्होंने उसे युद्ध की महिमा से अधिक त्याग की महत्ता सिखाई। रात्रि में वे उसे धर्मगाथाएँ सुनातीं - राम का वनवास, भीष्म का व्रत, और सत्य की विजय की कथाएँ। == == एक दिन वीर बर्बरीक ने गंभीर स्वर में अपनी माता से प्रश्न किया - == == “हे माता, मोक्ष का मार्ग क्या है? आत्मा को परम शांति कैसे प्राप्त होती है?” == == माता मोरवी ने कुछ क्षण मौन धारण किया। उनके नेत्रों में अनुभव की गहराई थी। फिर उन्होंने शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहा == == “पुत्र, हम राक्षस कुल में जन्मे हैं। हमारे लिए मोक्ष का मार्ग सरल नहीं होता। या तो कठोर तपस्या के द्वारा आत्मशुद्धि करनी होती है, या फिर स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु को प्राप्त होना पड़ता है - तभी आत्मा परमगति को प्राप्त करती है।” == == बर्बरीक ने सहज जिज्ञासा से कहा - “माता, तपस्या का मार्ग अत्यंत कठिन है। दूसरा मार्ग सरल प्रतीत होता है, परंतु मैं भगवान से युद्ध कैसे कर सकता हूँ? ऐसा कैसे संभव होगा कि उनके हाथों मेरा अंत हो और मुझे मोक्ष प्राप्त हो?” == == यह सुनकर माता मोरवी का हृदय भर आया। वे जानती थीं  - == == यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, नियति की भूमिका है। भारी मन से उन्होंने पुत्र को अपने समीप बैठाया और कहा == == “पुत्र, समय आने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जगत-कल्याण और कुरुक्षेत्र में धर्म स्थापना हेतु तुमसे तुम्हारा शीश माँगेंगे। जब वे ऐसा करें, तब तनिक भी विचलित मत होना। सहर्ष उनसे कहना - == == ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ == == स्मरण रखना, उस समय पांडव पक्ष दुर्बल और पराजित है। तुमने वचन दिया है कि तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम्हारा यही शीशदान अंतत: उनकी विजय का कारण बनेगा।” == == बर्बरीक सुनते-सुनते प्रश्न करते है - “माता, क्या धर्म के लिए सब कुछ त्याग देना पड़ता है?” == == माता मोरवी उत्तर देती - “हाँ पुत्र, धर्म का मार्ग सरल नहीं होता। पर जो उस पर चलता है, वह अमर हो जाता है।” == == उन्हें ज्ञात नहीं था कि यही शब्द एक दिन उनके अपने जीवन की परीक्षा बनेंगे। == == भविष्य की आहट == == समय के साथ बर्बरीक की शक्ति अद्वितीय होती चली गई। वन्यजीव तक उसकी उपस्थिति से शांत हो जाते। परंतु माता मोरवी के हृदय में कहीं एक सूक्ष्म आशंका भी थी - == == महान शक्ति सदैव महान परीक्षा को आमंत्रित करती है। == == वे जानती थीं - महाभारत का युद्ध निकट है। और उनका पुत्र उस युद्ध से स्वयं को अलग नहीं रख पाएगा। == == एक संध्या उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए प्रार्थना की - “हे ईश्वर, मेरे पुत्र को केवल वीरता ही नहीं, सही निर्णय की बुद्धि भी देना।” == == वह क्षण मातृत्व की करुणा और शक्ति का संगम था। == {{reflist}} *[[खाटूश्यामजी|खाटू श्याम जी]] {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] aay4fiipxd1nojozwwge0mswy85hn5s 6536888 6536886 2026-04-06T08:00:12Z Dino moreo 917093 6536888 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के कम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखी पूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था इसी स्थानपर पांडवों ने वनवास का समय बिताया थाl वह अहिलावती[[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब वे युद्ध में सहायता देने आये, तब इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें [[काली|रणचंडी]] को बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिल्यावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम लोग!|url=http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|publisher=दैनिक भास्कर|date=२७ दिसम्बर २०१३|archiveurl=https://archive.today/20131228045206/http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|archivedate=28 दिसंबर 2013|access-date=28 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> <nowiki>*</nowiki>तृतीय अध्याय* <nowiki>*</nowiki>वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार* <nowiki>*</nowiki>(मातृत्व की गोद में आकार लेती दिव्य शक्ति)* जन्मस्थली लख्खीपुरा अरावली की शांत वादियों में समय जैसे थम-सा गया था। वन की निस्तब्धता के बीच एक नई कथा आकार ले रही थी  - एक ऐसे बालक की कथा, जिसकी नियति केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि युगों की आस्था बनने वाली थी। विवाह के पश्चात् माता मोरवी का जीवन साधना और संतुलन से परिपूर्ण था। घटोत्कच अपने युद्धकौशल और पराक्रम के लिए विख्यात थे, परंतु माता मोरवी जानती थीं कि केवल बल से इतिहास नहीं बनता  - बल के साथ धर्मबुद्धि आवश्यक है। इसी संतुलन की गोद में एक दिव्य प्रभात आया। दिव्य जन्म आकाश में अद्भुत शांति थी। काम्यक वन में पक्षियों का मधुर कलरव था। और ऐसे समय में द्वापर के मतस्य क्षेत्र वर्तमान के लख्खीपुरा (सीकर) के काम्यक वनक्षेत्र में माता मोरवी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी ग्यारस) को एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। उसके नेत्रों में असाधारण चमक थी, मानो वह जन्म से ही किसी गहनस्मृति को साथ लेकर आया हो। ऋषियों ने सिर पर बब्बर शेर की तरह बाल अधिक होने कि वजह से उसका नाम रखा - बर्बरीक। जन्म के समय ही अनेक शुभ संकेत प्रकट हुए। कहते हैं, उस दिन वायु मंद हो गई, और वातावरण में एक अदृश्य ऊर्जा का संचार हुआ। मानो प्रकृति स्वयं उस बालक का स्वागत कर रही हो। माता मोरवी ने उसे हृदय से लगाया और मन ही मन संकल्प लिया - “यह बालक केवल मेरा पुत्र नहीं होगा, यह धर्म का प्रहरी बनेगा।” मातृत्व का प्रथम पाठ बर्बरीक को बाल्यकाल से ही माँ मोरवी ने उन्हें केवल लाड -प्यार से नहीं पाला बल्कि उन्हें वीर योद्वा के रूप में तैयार किया क्योकिं वे जानती थीं - जिसे नियति महान बनाना चाहती है, उसे प्रारंभ से ही अनुशासन की छाया में बढ़ना होगा। जब वह चलना सीख रहा था, तभी उसने धनुष को पहली बार छुआ, तब माता मोरवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा - “पुत्र, शस्त्र केवल धर्म रक्षा के लिए उठाया जाता है, अन्यथा वह स्वयं विनाश का कारण बनता है।” बालक ध्यान से सुनता। उसकी आँखों में जिज्ञासा थी, पर साथ ही एक अजीब-सी गंभीरता भी। शिक्षा और साधना घटोत्कच ने उसे युद्धकला का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। लख्खीपुरा वन की विशाल भूमि उसका गुरुकुल बनी। धनुर्विद्या, मायावी युद्धकौशल और असाधारण शारीरिक बल - सब उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगे। परंतु माता मोरवी की शिक्षा भिन्न थी। वे उसे प्रतिदिन प्रात: ध्यान करातीं। उसे सिखातीं - क्रोध को नियंत्रित करना, विजय में विनम्र रहना, और पराजित के प्रति करुणा रखना। एक दिन बर्बरीक ने प्रश्न किया -“माता, यदि मैं इतना बलवान बन जाऊँ कि कोई मुझे हरा न सके, तो क्या मैं संसार का स्वामी बन जाऊँगा?” माता मोरवी मुस्कुराईं। उन्होंने उत्तर दिया - “नहीं पुत्र। संसार का स्वामी वह नहीं जो सबको जीत ले, बल्कि वह है जो अपने भीतर के अहंकार को जीत ले।” यह वचन बर्बरीक के हृदय में अंकित हो गया। बर्बरीक के तीन बाणों का रहस्य माता मोरवी के कठोर प्रशिक्षण एवं पूर्ण शिक्षा के पश्चात् बर्बरीक को सभी विद्याओं में निपुण करके माता मोरवी ने माता दुर्गा (कामाख्या) एवं भगवान शिव से प्राप्त तीन अजेय बाण एवं धनुष सौंपते हुए कहा की हे पुत्र! ये बाण सुदर्शन चक्र को भी रोक सकते है। एक बाण से वह सम्पूर्ण शत्रु सेना को चिह्नित कर सकता है, दूसरे से उन्हें बाँध सकता है, और तीसरे से संपूर्ण युद्ध समाप्त कर सकता है। उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखकर कहा - “पुत्र, सदैव उस पक्ष का साथ देना जो दुर्बल हो। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, चाहे वह अपना ही प्रिय क्यों न हो।” इस प्रकार माता मोरवी ने उसे शक्ति का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाई। यह वही वचन था जो आगे चलकर उसके जीवन का निर्णायक सिद्धांत बना - ‘हारे का सहारा’। मातृ-संस्कार की छाप माता मोरवी का स्नेह कोमल था, पर उनका अनुशासन दृढ़। उन्होंने उसे युद्ध की महिमा से अधिक त्याग की महत्ता सिखाई। रात्रि में वे उसे धर्मगाथाएँ सुनातीं - राम का वनवास, भीष्म का व्रत, और सत्य की विजय की कथाएँ। एक दिन वीर बर्बरीक ने गंभीर स्वर में अपनी माता से प्रश्न किया - “हे माता, मोक्ष का मार्ग क्या है? आत्मा को परम शांति कैसे प्राप्त होती है?” माता मोरवी ने कुछ क्षण मौन धारण किया। उनके नेत्रों में अनुभव की गहराई थी। फिर उन्होंने शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहा “पुत्र, हम राक्षस कुल में जन्मे हैं। हमारे लिए मोक्ष का मार्ग सरल नहीं होता। या तो कठोर तपस्या के द्वारा आत्मशुद्धि करनी होती है, या फिर स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु को प्राप्त होना पड़ता है - तभी आत्मा परमगति को प्राप्त करती है।” बर्बरीक ने सहज जिज्ञासा से कहा - “माता, तपस्या का मार्ग अत्यंत कठिन है। दूसरा मार्ग सरल प्रतीत होता है, परंतु मैं भगवान से युद्ध कैसे कर सकता हूँ? ऐसा कैसे संभव होगा कि उनके हाथों मेरा अंत हो और मुझे मोक्ष प्राप्त हो?” यह सुनकर माता मोरवी का हृदय भर आया। वे जानती थीं  - यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, नियति की भूमिका है। भारी मन से उन्होंने पुत्र को अपने समीप बैठाया और कहा “पुत्र, समय आने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जगत-कल्याण और कुरुक्षेत्र में धर्म स्थापना हेतु तुमसे तुम्हारा शीश माँगेंगे। जब वे ऐसा करें, तब तनिक भी विचलित मत होना। सहर्ष उनसे कहना - ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ स्मरण रखना, उस समय पांडव पक्ष दुर्बल और पराजित है। तुमने वचन दिया है कि तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम्हारा यही शीशदान अंतत: उनकी विजय का कारण बनेगा।” बर्बरीक सुनते-सुनते प्रश्न करते है - “माता, क्या धर्म के लिए सब कुछ त्याग देना पड़ता है?” माता मोरवी उत्तर देती - “हाँ पुत्र, धर्म का मार्ग सरल नहीं होता। पर जो उस पर चलता है, वह अमर हो जाता है।” उन्हें ज्ञात नहीं था कि यही शब्द एक दिन उनके अपने जीवन की परीक्षा बनेंगे। भविष्य की आहट समय के साथ बर्बरीक की शक्ति अद्वितीय होती चली गई। वन्यजीव तक उसकी उपस्थिति से शांत हो जाते। परंतु माता मोरवी के हृदय में कहीं एक सूक्ष्म आशंका भी थी - महान शक्ति सदैव महान परीक्षा को आमंत्रित करती है। वे जानती थीं - महाभारत का युद्ध निकट है। और उनका पुत्र उस युद्ध से स्वयं को अलग नहीं रख पाएगा। एक संध्या उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए प्रार्थना की - “हे ईश्वर, मेरे पुत्र को केवल वीरता ही नहीं, सही निर्णय की बुद्धि भी देना।” वह क्षण मातृत्व की करुणा और शक्ति का संगम था।{{reflist}} *[[खाटूश्यामजी|खाटू श्याम जी]] {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] s9x884wn5kayd5kknoxmmd9x9c9ssm9 6536889 6536888 2026-04-06T08:02:03Z Dino moreo 917093 6536889 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के कम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखी पूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था इसी स्थानपर पांडवों ने वनवास का समय बिताया थाl वह अहिलावती[[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब वे युद्ध में सहायता देने आये, तब इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें [[काली|रणचंडी]] को बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिल्यावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 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धर्मयुद्ध है। मुझे भी इसमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।” माता मोरवी शांत रहीं। वे जानती थीं - यह क्षण एक साधारण निर्णय नहीं, नियति का द्वार है। उन्होंने पूछा - “पुत्र, तुम किस पक्ष से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया - “मैं सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दूँगा। जो हारता हुआ दिखाई देगा, मैं उसी की ओर से युद्ध करूँगा।” माता मोरवी ने उसकी ओर गहराई से देखा। उन्हें स्मरण आया - यह वही वचन है जो उन्होंने स्वयं उसे दिया था। क्षण भर मौन के बाद उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखा और कहा - “पुत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे पितामह भीम सहित पाण्ड़वों के साथ शीघ्र ही तुम्हें यात्रा पर ले जाने हेतु यहाँ उपस्थित होगें तब निर्णय लेना"। पर स्मरण रखना - "धर्म केवल शस्त्र से नहीं, त्याग से भी स्थापित होता है।” बर्बरीक ने माता के चरण स्पर्श किए। उसकी आँखों में उत्साह था, पर माता मोरवी के हृदय में एक अनजानी वेदना। उन्हें आभास था - यह यात्रा कभी युद्धभूमि तक नहीं पहुँचेगी बल्कि, इतिहास के अमर अध्याय तक जाएगी। उस घड़ी में काम्यक वन की वायु भी जैसे स्थिर हो गई। माता मोरवी अपने पुत्र को देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, पर मुख पर दृढ़ता। क्योंकि वे जानती थीं - सच्ची माता वही है जो अपने पुत्र को धर्म-पथ पर भेज सके, चाहे वह पथ बलिदान तक ही क्यों न जाता हो। == *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार == {{reflist}} *[[खाटूश्यामजी|खाटू श्याम जी]] {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] 94jnesc9m8xlh8rqttfgrh5be8vvqvo 6536894 6536889 2026-04-06T08:33:36Z Dino moreo 917093 श्याम बाबा की माता मोरबी की कथा नामक पुस्तक से प्राप्त अध्याय को जोड़ा गया 6536894 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के का काम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखीपूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था,इसी स्थान पर पांडवों ने वनवास का समय बिताया था वह अहिलावती[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने को था तब वनवास में रह रहे पांडवों से मिलने कम्यक वन में भगवान श्री कृष्ण ने इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें शीश दान करने को प्रेरित कर बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिलावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार* *(मातृत्व की गोद में आकार लेती दिव्य शक्ति)* जन्मस्थली लख्खीपुरा अरावली की शांत वादियों में समय जैसे थम-सा गया था। वन की निस्तब्धता के बीच एक नई कथा आकार ले रही थी - एक ऐसे बालक की कथा, जिसकी नियति केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि युगों की आस्था बनने वाली थी। विवाह के पश्चात् माता मोरवी का जीवन साधना और संतुलन से परिपूर्ण था। घटोत्कच अपने युद्धकौशल और पराक्रम के लिए विख्यात थे, परंतु माता मोरवी जानती थीं कि केवल बल से इतिहास नहीं बनता - बल के साथ धर्मबुद्धि आवश्यक है। इसी संतुलन की गोद में एक दिव्य प्रभात आया। दिव्य जन्म आकाश में अद्भुत शांति थी। काम्यक वन में पक्षियों का मधुर कलरव था। और ऐसे समय में द्वापर के मतस्य क्षेत्र वर्तमान के लख्खीपुरा (सीकर) के काम्यक वनक्षेत्र में माता मोरवी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी ग्यारस) को एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। उसके नेत्रों में असाधारण चमक थी, मानो वह जन्म से ही किसी गहनस्मृति को साथ लेकर आया हो। ऋषियों ने सिर पर बब्बर शेर की तरह बाल अधिक होने कि वजह से उसका नाम रखा - बर्बरीक। जन्म के समय ही अनेक शुभ संकेत प्रकट हुए। कहते हैं, उस दिन वायु मंद हो गई, और वातावरण में एक अदृश्य ऊर्जा का संचार हुआ। मानो प्रकृति स्वयं उस बालक का स्वागत कर रही हो। माता मोरवी ने उसे हृदय से लगाया और मन ही मन संकल्प लिया - “यह बालक केवल मेरा पुत्र नहीं होगा, यह धर्म का प्रहरी बनेगा।” मातृत्व का प्रथम पाठ बर्बरीक को बाल्यकाल से ही माँ मोरवी ने उन्हें केवल लाड -प्यार से नहीं पाला बल्कि उन्हें वीर योद्वा के रूप में तैयार किया क्योकिं वे जानती थीं - जिसे नियति महान बनाना चाहती है, उसे प्रारंभ से ही अनुशासन की छाया में बढ़ना होगा। जब वह चलना सीख रहा था, तभी उसने धनुष को पहली बार छुआ, तब माता मोरवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा -“पुत्र, शस्त्र केवल धर्म रक्षा के लिए उठाया जाता है, अन्यथा वह स्वयं विनाश का कारण बनता है।” बालक ध्यान से सुनता। उसकी आँखों में जिज्ञासा थी, पर साथ ही एक अजीब-सी गंभीरता भी। शिक्षा और साधना घटोत्कच ने उसे युद्धकला का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। लख्खीपुरा वन की विशाल भूमि उसका गुरुकुल बनी। धनुर्विद्या, मायावी युद्धकौशल और असाधारण शारीरिक बल - सब उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगे। परंतु माता मोरवी की शिक्षा भिन्न थी। वे उसे प्रतिदिन प्रात: ध्यान करातीं। उसे सिखातीं - क्रोध को नियंत्रित करना, विजय में विनम्र रहना, और पराजित के प्रति करुणा रखना। एक दिन बर्बरीक ने प्रश्न किया -“माता, यदि मैं इतना बलवान बन जाऊँ कि कोई मुझे हरा न सके, तो क्या मैं संसार का स्वामी बन जाऊँगा?” माता मोरवी मुस्कुराईं। उन्होंने उत्तर दिया - “नहीं पुत्र। संसार का स्वामी वह नहीं जो सबको जीत ले, बल्कि वह है जो अपने भीतर के अहंकार को जीत ले।” यह वचन बर्बरीक के हृदय में अंकित हो गया। बर्बरीक के तीन बाणों का रहस्य माता मोरवी के कठोर प्रशिक्षण एवं पूर्ण शिक्षा के पश्चात् बर्बरीक को सभी विद्याओं में निपुण करके माता मोरवी ने माता दुर्गा (कामाख्या) एवं भगवान शिव से प्राप्त तीन अजेय बाण एवं धनुष सौंपते हुए कहा की हे पुत्र! ये बाण सुदर्शन चक्र को भी रोक सकते है। एक बाण से वह सम्पूर्ण शत्रु सेना को चिह्नित कर सकता है, दूसरे से उन्हें बाँध सकता है, और तीसरे से संपूर्ण युद्ध समाप्त कर सकता है। उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखकर कहा - “पुत्र, सदैव उस पक्ष का साथ देना जो दुर्बल हो। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, चाहे वह अपना ही प्रिय क्यों न हो।” इस प्रकार माता मोरवी ने उसे शक्ति का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाई। यह वही वचन था जो आगे चलकर उसके जीवन का निर्णायक सिद्धांत बना - ‘हारे का सहारा’। मातृ-संस्कार की छाप माता मोरवी का स्नेह कोमल था, पर उनका अनुशासन दृढ़। उन्होंने उसे युद्ध की महिमा से अधिक त्याग की महत्ता सिखाई। रात्रि में वे उसे धर्मगाथाएँ सुनातीं - राम का वनवास, भीष्म का व्रत, और सत्य की विजय की कथाएँ। एक दिन वीर बर्बरीक ने गंभीर स्वर में अपनी माता से प्रश्न किया - “हे माता, मोक्ष का मार्ग क्या है? आत्मा को परम शांति कैसे प्राप्त होती है?” माता मोरवी ने कुछ क्षण मौन धारण किया। उनके नेत्रों में अनुभव की गहराई थी। फिर उन्होंने शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहा “पुत्र, हम राक्षस कुल में जन्मे हैं। हमारे लिए मोक्ष का मार्ग सरल नहीं होता। या तो कठोर तपस्या के द्वारा आत्मशुद्धि करनी होती है, या फिर स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु को प्राप्त होना पड़ता है - तभी आत्मा परमगति को प्राप्त करती है।” बर्बरीक ने सहज जिज्ञासा से कहा - “माता, तपस्या का मार्ग अत्यंत कठिन है। दूसरा मार्ग सरल प्रतीत होता है, परंतु मैं भगवान से युद्ध कैसे कर सकता हूँ? ऐसा कैसे संभव होगा कि उनके हाथों मेरा अंत हो और मुझे मोक्ष प्राप्त हो?” यह सुनकर माता मोरवी का हृदय भर आया। वे जानती थीं - यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, नियति की भूमिका है। भारी मन से उन्होंने पुत्र को अपने समीप बैठाया और कहा “पुत्र, समय आने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जगत-कल्याण और कुरुक्षेत्र में धर्म स्थापना हेतु तुमसे तुम्हारा शीश माँगेंगे। जब वे ऐसा करें, तब तनिक भी विचलित मत होना। सहर्ष उनसे कहना - ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ स्मरण रखना, उस समय पांडव पक्ष दुर्बल और पराजित है। तुमने वचन दिया है कि तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम्हारा यही शीशदान अंतत: उनकी विजय का कारण बनेगा।” बर्बरीक सुनते-सुनते प्रश्न करते है - “माता, क्या धर्म के लिए सब कुछ त्याग देना पड़ता है?” माता मोरवी उत्तर देती - “हाँ पुत्र, धर्म का मार्ग सरल नहीं होता। पर जो उस पर चलता है, वह अमर हो जाता है।” उन्हें ज्ञात नहीं था कि यही शब्द एक दिन उनके अपने जीवन की परीक्षा बनेंगे। भविष्य की आहट समय के साथ बर्बरीक की शक्ति अद्वितीय होती चली गई। वन्यजीव तक उसकी उपस्थिति से शांत हो जाते। परंतु माता मोरवी के हृदय में कहीं एक सूक्ष्म आशंका भी थी - महान शक्ति सदैव महान परीक्षा को आमंत्रित करती है। वे जानती थीं - महाभारत का युद्ध निकट है। और उनका पुत्र उस युद्ध से स्वयं को अलग नहीं रख पाएगा। एक संध्या उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए प्रार्थना की - “हे ईश्वर, मेरे पुत्र को केवल वीरता ही नहीं, सही निर्णय की बुद्धि भी देना।” वह क्षण मातृत्व की करुणा और शक्ति का संगम था। *वचन, धर्म और नियति का संगम* समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहा। हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र के मध्य युद्ध की आहट अब स्पष्ट सुनाई देने लगी थी। महाभारत का महान संग्राम समीप था। इसी बीच बर्बरीक समस्त विद्याओं में पारंगत होकर चौदह वर्ष की आयु को प्राप्त हो चुके थे। काम्यक वनप्रदेश में भी यह समाचार पहुँचा। बर्बरीक का बाल हृदय उत्साह और कर्तव्य-बोध से भर उठा। वह जानता था - जहाँ धर्म का युद्ध हो, वहाँ एक क्षत्रिय मौन नहीं रह सकता। वह अपनी माता मोरवी के पास पहुँचा। “माता, मैं कुरुक्षेत्र जाना चाहता हूँ। यह धर्मयुद्ध है। मुझे भी इसमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।” माता मोरवी शांत रहीं। वे जानती थीं - यह क्षण एक साधारण निर्णय नहीं, नियति का द्वार है। उन्होंने पूछा - “पुत्र, तुम किस पक्ष से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया - “मैं सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दूँगा। जो हारता हुआ दिखाई देगा, मैं उसी की ओर से युद्ध करूँगा।” माता मोरवी ने उसकी ओर गहराई से देखा। उन्हें स्मरण आया - यह वही वचन है जो उन्होंने स्वयं उसे दिया था। क्षण भर मौन के बाद उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखा और कहा - “पुत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे पितामह भीम सहित पाण्ड़वों के साथ शीघ्र ही तुम्हें यात्रा पर ले जाने हेतु यहाँ उपस्थित होगें तब निर्णय लेना"। पर स्मरण रखना - "धर्म केवल शस्त्र से नहीं, त्याग से भी स्थापित होता है।” बर्बरीक ने माता के चरण स्पर्श किए। उसकी आँखों में उत्साह था, पर माता मोरवी के हृदय में एक अनजानी वेदना। उन्हें आभास था - यह यात्रा कभी युद्धभूमि तक नहीं पहुँचेगी बल्कि, इतिहास के अमर अध्याय तक जाएगी। उस घड़ी में काम्यक वन की वायु भी जैसे स्थिर हो गई। माता मोरवी अपने पुत्र को देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, पर मुख पर दृढ़ता। क्योंकि वे जानती थीं -सच्ची माता वही है जो अपने पुत्र को धर्म-पथ पर भेज सके, चाहे वह पथ बलिदान तक ही क्यों न जाता हो। *शीशदान - मातृत्व की अंतिम परीक्षा* *(जहाँ ममता तप में बदल गई)* कुरुक्षेत्र की भूमि पर महायुद्ध प्रारंभ होने ही वाला था। आकाश में अशुभ संकेत प्रकट हो रहे थे, धरती पर विशाल सेनाएँ सुसज्जित खड़ी थीं, और नियति अपने चरम सत्य की ओर अग्रसर हो रही थी। वातावरण में शंखध्वनि, रणभेरी और रथों की गर्जना दशो दिशाओं में गुंजायमान हो रही थी, मानो सम्पूर्ण सृष्टि इस महासंग्राम की साक्षी बनने को तैयार हो। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण पाण्ड़वों के साथ माता मोरवी के काम्यक वन क्षेत्र में उपस्थित हुए, जहाँ बर्बरीक भी उपस्थित थे। भगवान श्रीकृष्ण के परीक्षा लेने पर बर्बरीक ने अपनी अद्भुत धनुर्विद्या का परिचय देते हुए एक ही बाण से पीपल के वृक्ष के सभी पत्तों को भेद दिया। लीला स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने एक पत्ता अपने चरणों के नीचे दबा लिया, परंतु वह बाण उस पत्ते को भी भेद गया था। एक ही बाण की इस विलक्षण शक्ति को देखकर श्रीकृष्ण क्षणभर में समझ गए की मोरवी ने अपनी समस्त विद्याओं मेंअपने पुत्र को पारंगत कर दिया है। उनके मन में विचार उठा कि यदि यह महावीर युद्धभूमि में उतरा, तो अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार दुर्बल पक्ष का साथ देते हुए अंतत: दोनों ही पक्षों का विनाश कर सकता है और मेरा सुदर्शन चक्र भी इसे रोक नहीं पायेगा। ऐसी स्थिति में यह धर्मयुद्ध अपने नियत परिणाम तक नहीं पहुँच पाएगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गंभीर स्वर में चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक से प्रश्न किया -“हे वीर, यदि तुम इस महायुद्ध में सम्मिलित हुए, तो किस पक्ष की ओर से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने सरलता से उत्तर दिया -“मैं उस पक्ष की सहायता करूँगा जो हारता हुआ प्रतीत होगा।” श्रीकृष्ण ने गंभीर होकर कहा - “तो तुम अकेले ही युद्ध का परिणाम बदलते रहोगे। अंततः सम्पूर्ण सेना नष्ट हो जाएगी।” बर्बरीक क्षण भर मौन रहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की मर्यादा और युद्ध को उसके निश्चित परिणाम तक पहुँचाने हेतु बर्बरीक से दान माँगा। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा -“हे वीर, मुझे तुम्हारा शीश चाहिए।” उन्होंने आगे समझाया - “यदि तुम इस युद्ध में सम्मिलित हुए, तो यह संग्राम कभी अपने अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सकेगा। तुम्हारा संकल्प है कि तुम सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दोगे। जब पांडव पक्ष दुर्बल पड़ेगा, तुम कौरव का संहार कर दोगे। और जब कौरव क्षीण हो जाएँगे, तब तुम पांडवों को भी समाप्त कर दोगे। इस प्रकार युद्ध का संतुलन बार-बार बदलता रहेगा और अंतत: समस्त सेनाएँ नष्ट हो जाएँगी, पर धर्म की स्पष्ट विजय घोषित नहीं हो पाएगी।” भगवान श्रीकृष्ण का स्वर करुणा और दृढ़ता से परिपूर्ण था -“अत: हे महावीर, धर्मयुद्ध की नियति और लोककल्याण के लिए तुम्हारा यह बलिदान आवश्यक है। तुम्हारा शीशदान ही इस संग्राम को उचित परिणाम तक पहुँचाएगा और धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।” वह क्षण केवल दान का निवेदन नहीं था - वह धर्म की रक्षा के लिए एक महान आत्मा का आह्वान था। वह क्षण अत्यंत असाधारण और इतिहास के पटल पर अमिट होने वाला था। चौदह वर्ष का वह वीर बालक अपने सम्मुख जीवन और अपने दिए हुए वचन - दोनों को समान रूप से खड़े देख रहा था। बर्बरीक ने बिना विचलित हुए कहा - “यदि यही धर्म की आवश्यकता है, तो मेरा शीश प्रस्तुत है।” पुत्र ने घुटनों पर बैठ कर पास में ही खड़ी अपनी माता मोरवी को अपने आराध्य भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रणाम किया और माता मोरवी से अंतिम इच्छा प्रकट की - “मैं युद्ध को देखना चाहता हूँ”, लेकिन शीशदान के बाद में युद्ध नहीं देख पाऊंगा। इस पर माता मोरवी ने कहा - हे पुत्र! जब तक युद्ध चलेगा तब तक मैं अपनी शक्तियों से तेरे शीश को जीवित रखूंगी। माता के वचन सुनकर बर्बरीक का हृदय शांत हो गया एवं उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ भगवान श्रीकृष्ण ने चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक की इच्छा सहर्ष स्वीकार की और सुदर्शन चक्र से एक प्रहार में शीश धड़ से अलग हो गया इसके पश्चात् श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य वरदान प्रदान किया - “हे वीर बर्बरीक, कलियुग में तुम मेरे ही नाम से जाने जाकर पूजित होओगे। तुम्हारी और माता मोरवी की कीर्ति ध्वज की भाँति समस्त दिशाओं में फहरेगी। जो भी श्रद्धा और विश्वास से तुम्हारी इस जन्मस्थली पर आएगा, उसके भाग्य में अंकित दुःख भी सुख में परिवर्तित हो जाएँगे। निराश जनों के लिए तुम आशा का आधार बनोगे, और संसार तुम्हें ‘हारे का सहारा’ नाम से जानेगा।” इसमें तुम्हारी शक्तियों को बढ़ाने तुम्हारी माता मोरवी भी साथ होगी। एक माँ का हृदय खण्ड - खण्ड हो गया, काम्यक वन में आसपास के पंछी व वन्यजीव रो पड़े। प्रकृति स्वयं इस शीशदान की साक्षी बनी। माता मोरवी के लिए तो समय जैसे थम गया। उनकी आँखों के सामने वही बालक था, जिसे उन्होंने अपनी गोद में झुलाया था, जिसे संयम और करुणा का पाठ पढ़ाया था। वह शीश का दान कर चुका है। परंतु आँसू के साथ गर्व भी था। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की ओर देखा और कहा - प्रभु, मैंने पुत्र को धर्म पालन की शिक्षा दी थी। आज उसने सिद्ध कर दिया - वह मेरा ही नहीं, धर्म का भी पुत्र था।” ममता का यह क्षण करुण था, पर दुर्बल नहीं। माता मोरवी ने अपने दु:ख को तप में बदल दिया। उसके पश्चात् माता मोरवी से जीवनधारा प्राप्त करते हुए शीश को एक ऊँची पहाड़ी पर स्थापित किया, जहाँ से वे सम्पूर्ण महाभारत के महान संग्राम के साक्षी बने। उस ऊँचाई से उन्होंने देखा कि अंतत: विजय किसी एक योद्धा की नहीं, बल्कि धर्म की होती है। शीशदान का अर्थ बर्बरीक का बलिदान केवल एक वीरगाथा नहीं है। यह उस वचन की परिणति थी -“हारे का सहारा बनूँगा।” यदि वे युद्ध में उतरते, तो संतुलन बार-बार बदलता रहता। उनका त्याग ही धर्म की स्थिरता बना। और इस बलिदान की मूल प्रेरणा थीं - माता मोरवी के संस्कार। मातृत्व की महिमा संसार वीरों की गाथा गाता है, परंतु उन माताओं का स्मरण कम करता है जिन्होंने उन्हें धर्म का मार्ग दिखाया। मोरवी ने पुत्र खोया नहीं - उन्होंने उसे अमरत्व दिया। उनकी ममता रोई अवश्य, पर उनके संस्कार विजयी हुए। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन 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पांडवों ने वनवास का समय बिताया था वह अहिलावती[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने को था तब वनवास में रह रहे पांडवों से मिलने कम्यक वन में भगवान श्री कृष्ण ने इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें शीश दान करने को प्रेरित कर बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिलावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार* *(मातृत्व की गोद में आकार लेती दिव्य शक्ति)* जन्मस्थली लख्खीपुरा अरावली की शांत वादियों में समय जैसे थम-सा गया था। वन की निस्तब्धता के बीच एक नई कथा आकार ले रही थी - एक ऐसे बालक की कथा, जिसकी नियति केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि युगों की आस्था बनने वाली थी। विवाह के पश्चात् माता मोरवी का जीवन साधना और संतुलन से परिपूर्ण था। घटोत्कच अपने युद्धकौशल और पराक्रम के लिए विख्यात थे, परंतु माता मोरवी जानती थीं कि केवल बल से इतिहास नहीं बनता - बल के साथ धर्मबुद्धि आवश्यक है। इसी संतुलन की गोद में एक दिव्य प्रभात आया। दिव्य जन्म आकाश में अद्भुत शांति थी। काम्यक वन में पक्षियों का मधुर कलरव था। और ऐसे समय में द्वापर के मतस्य क्षेत्र वर्तमान के लख्खीपुरा (सीकर) के काम्यक वनक्षेत्र में माता मोरवी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी ग्यारस) को एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। उसके नेत्रों में असाधारण चमक थी, मानो वह जन्म से ही किसी गहनस्मृति को साथ लेकर आया हो। ऋषियों ने सिर पर बब्बर शेर की तरह बाल अधिक होने कि वजह से उसका नाम रखा - बर्बरीक। जन्म के समय ही अनेक शुभ संकेत प्रकट हुए। कहते हैं, उस दिन वायु मंद हो गई, और वातावरण में एक अदृश्य ऊर्जा का संचार हुआ। मानो प्रकृति स्वयं उस बालक का स्वागत कर रही हो। माता मोरवी ने उसे हृदय से लगाया और मन ही मन संकल्प लिया - “यह बालक केवल मेरा पुत्र नहीं होगा, यह धर्म का प्रहरी बनेगा।” मातृत्व का प्रथम पाठ बर्बरीक को बाल्यकाल से ही माँ मोरवी ने उन्हें केवल लाड -प्यार से नहीं पाला बल्कि उन्हें वीर योद्वा के रूप में तैयार किया क्योकिं वे जानती थीं - जिसे नियति महान बनाना चाहती है, उसे प्रारंभ से ही अनुशासन की छाया में बढ़ना होगा। जब वह चलना सीख रहा था, तभी उसने धनुष को पहली बार छुआ, तब माता मोरवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा -“पुत्र, शस्त्र केवल धर्म रक्षा के लिए उठाया जाता है, अन्यथा वह स्वयं विनाश का कारण बनता है।” बालक ध्यान से सुनता। उसकी आँखों में जिज्ञासा थी, पर साथ ही एक अजीब-सी गंभीरता भी। शिक्षा और साधना घटोत्कच ने उसे युद्धकला का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। लख्खीपुरा वन की विशाल भूमि उसका गुरुकुल बनी। धनुर्विद्या, मायावी युद्धकौशल और असाधारण शारीरिक बल - सब उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगे। परंतु माता मोरवी की शिक्षा भिन्न थी। वे उसे प्रतिदिन प्रात: ध्यान करातीं। उसे सिखातीं - क्रोध को नियंत्रित करना, विजय में विनम्र रहना, और पराजित के प्रति करुणा रखना। एक दिन बर्बरीक ने प्रश्न किया -“माता, यदि मैं इतना बलवान बन जाऊँ कि कोई मुझे हरा न सके, तो क्या मैं संसार का स्वामी बन जाऊँगा?” माता मोरवी मुस्कुराईं। उन्होंने उत्तर दिया - “नहीं पुत्र। संसार का स्वामी वह नहीं जो सबको जीत ले, बल्कि वह है जो अपने भीतर के अहंकार को जीत ले।” यह वचन बर्बरीक के हृदय में अंकित हो गया। बर्बरीक के तीन बाणों का रहस्य माता मोरवी के कठोर प्रशिक्षण एवं पूर्ण शिक्षा के पश्चात् बर्बरीक को सभी विद्याओं में निपुण करके माता मोरवी ने माता दुर्गा (कामाख्या) एवं भगवान शिव से प्राप्त तीन अजेय बाण एवं धनुष सौंपते हुए कहा की हे पुत्र! ये बाण सुदर्शन चक्र को भी रोक सकते है। एक बाण से वह सम्पूर्ण शत्रु सेना को चिह्नित कर सकता है, दूसरे से उन्हें बाँध सकता है, और तीसरे से संपूर्ण युद्ध समाप्त कर सकता है। उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखकर कहा - “पुत्र, सदैव उस पक्ष का साथ देना जो दुर्बल हो। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, चाहे वह अपना ही प्रिय क्यों न हो।” इस प्रकार माता मोरवी ने उसे शक्ति का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाई। यह वही वचन था जो आगे चलकर उसके जीवन का निर्णायक सिद्धांत बना - ‘हारे का सहारा’। मातृ-संस्कार की छाप माता मोरवी का स्नेह कोमल था, पर उनका अनुशासन दृढ़। उन्होंने उसे युद्ध की महिमा से अधिक त्याग की महत्ता सिखाई। रात्रि में वे उसे धर्मगाथाएँ सुनातीं - राम का वनवास, भीष्म का व्रत, और सत्य की विजय की कथाएँ। एक दिन वीर बर्बरीक ने गंभीर स्वर में अपनी माता से प्रश्न किया - “हे माता, मोक्ष का मार्ग क्या है? आत्मा को परम शांति कैसे प्राप्त होती है?” माता मोरवी ने कुछ क्षण मौन धारण किया। उनके नेत्रों में अनुभव की गहराई थी। फिर उन्होंने शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहा “पुत्र, हम राक्षस कुल में जन्मे हैं। हमारे लिए मोक्ष का मार्ग सरल नहीं होता। या तो कठोर तपस्या के द्वारा आत्मशुद्धि करनी होती है, या फिर स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु को प्राप्त होना पड़ता है - तभी आत्मा परमगति को प्राप्त करती है।” बर्बरीक ने सहज जिज्ञासा से कहा - “माता, तपस्या का मार्ग अत्यंत कठिन है। दूसरा मार्ग सरल प्रतीत होता है, परंतु मैं भगवान से युद्ध कैसे कर सकता हूँ? ऐसा कैसे संभव होगा कि उनके हाथों मेरा अंत हो और मुझे मोक्ष प्राप्त हो?” यह सुनकर माता मोरवी का हृदय भर आया। वे जानती थीं - यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, नियति की भूमिका है। भारी मन से उन्होंने पुत्र को अपने समीप बैठाया और कहा “पुत्र, समय आने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जगत-कल्याण और कुरुक्षेत्र में धर्म स्थापना हेतु तुमसे तुम्हारा शीश माँगेंगे। जब वे ऐसा करें, तब तनिक भी विचलित मत होना। सहर्ष उनसे कहना - ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ स्मरण रखना, उस समय पांडव पक्ष दुर्बल और पराजित है। तुमने वचन दिया है कि तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम्हारा यही शीशदान अंतत: उनकी विजय का कारण बनेगा।” बर्बरीक सुनते-सुनते प्रश्न करते है - “माता, क्या धर्म के लिए सब कुछ त्याग देना पड़ता है?” माता मोरवी उत्तर देती - “हाँ पुत्र, धर्म का मार्ग सरल नहीं होता। पर जो उस पर चलता है, वह अमर हो जाता है।” उन्हें ज्ञात नहीं था कि यही शब्द एक दिन उनके अपने जीवन की परीक्षा बनेंगे। भविष्य की आहट समय के साथ बर्बरीक की शक्ति अद्वितीय होती चली गई। वन्यजीव तक उसकी उपस्थिति से शांत हो जाते। परंतु माता मोरवी के हृदय में कहीं एक सूक्ष्म आशंका भी थी - महान शक्ति सदैव महान परीक्षा को आमंत्रित करती है। वे जानती थीं - महाभारत का युद्ध निकट है। और उनका पुत्र उस युद्ध से स्वयं को अलग नहीं रख पाएगा। एक संध्या उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए प्रार्थना की - “हे ईश्वर, मेरे पुत्र को केवल वीरता ही नहीं, सही निर्णय की बुद्धि भी देना।” वह क्षण मातृत्व की करुणा और शक्ति का संगम था। *वचन, धर्म और नियति का संगम* समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहा। हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र के मध्य युद्ध की आहट अब स्पष्ट सुनाई देने लगी थी। महाभारत का महान संग्राम समीप था। इसी बीच बर्बरीक समस्त विद्याओं में पारंगत होकर चौदह वर्ष की आयु को प्राप्त हो चुके थे। काम्यक वनप्रदेश में भी यह समाचार पहुँचा। बर्बरीक का बाल हृदय उत्साह और कर्तव्य-बोध से भर उठा। वह जानता था - जहाँ धर्म का युद्ध हो, वहाँ एक क्षत्रिय मौन नहीं रह सकता। वह अपनी माता मोरवी के पास पहुँचा। “माता, मैं कुरुक्षेत्र जाना चाहता हूँ। यह धर्मयुद्ध है। मुझे भी इसमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।” माता मोरवी शांत रहीं। वे जानती थीं - यह क्षण एक साधारण निर्णय नहीं, नियति का द्वार है। उन्होंने पूछा - “पुत्र, तुम किस पक्ष से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया - “मैं सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दूँगा। जो हारता हुआ दिखाई देगा, मैं उसी की ओर से युद्ध करूँगा।” माता मोरवी ने उसकी ओर गहराई से देखा। उन्हें स्मरण आया - यह वही वचन है जो उन्होंने स्वयं उसे दिया था। क्षण भर मौन के बाद उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखा और कहा - “पुत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे पितामह भीम सहित पाण्ड़वों के साथ शीघ्र ही तुम्हें यात्रा पर ले जाने हेतु यहाँ उपस्थित होगें तब निर्णय लेना"। पर स्मरण रखना - "धर्म केवल शस्त्र से नहीं, त्याग से भी स्थापित होता है।” बर्बरीक ने माता के चरण स्पर्श किए। उसकी आँखों में उत्साह था, पर माता मोरवी के हृदय में एक अनजानी वेदना। उन्हें आभास था - यह यात्रा कभी युद्धभूमि तक नहीं पहुँचेगी बल्कि, इतिहास के अमर अध्याय तक जाएगी। उस घड़ी में काम्यक वन की वायु भी जैसे स्थिर हो गई। माता मोरवी अपने पुत्र को देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, पर मुख पर दृढ़ता। क्योंकि वे जानती थीं -सच्ची माता वही है जो अपने पुत्र को धर्म-पथ पर भेज सके, चाहे वह पथ बलिदान तक ही क्यों न जाता हो। *शीशदान - मातृत्व की अंतिम परीक्षा* *(जहाँ ममता तप में बदल गई)* कुरुक्षेत्र की भूमि पर महायुद्ध प्रारंभ होने ही वाला था। आकाश में अशुभ संकेत प्रकट हो रहे थे, धरती पर विशाल सेनाएँ सुसज्जित खड़ी थीं, और नियति अपने चरम सत्य की ओर अग्रसर हो रही थी। वातावरण में शंखध्वनि, रणभेरी और रथों की गर्जना दशो दिशाओं में गुंजायमान हो रही थी, मानो सम्पूर्ण सृष्टि इस महासंग्राम की साक्षी बनने को तैयार हो। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण पाण्ड़वों के साथ माता मोरवी के काम्यक वन क्षेत्र में उपस्थित हुए, जहाँ बर्बरीक भी उपस्थित थे। भगवान श्रीकृष्ण के परीक्षा लेने पर बर्बरीक ने अपनी अद्भुत धनुर्विद्या का परिचय देते हुए एक ही बाण से पीपल के वृक्ष के सभी पत्तों को भेद दिया। लीला स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने एक पत्ता अपने चरणों के नीचे दबा लिया, परंतु वह बाण उस पत्ते को भी भेद गया था। एक ही बाण की इस विलक्षण शक्ति को देखकर श्रीकृष्ण क्षणभर में समझ गए की मोरवी ने अपनी समस्त विद्याओं मेंअपने पुत्र को पारंगत कर दिया है। उनके मन में विचार उठा कि यदि यह महावीर युद्धभूमि में उतरा, तो अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार दुर्बल पक्ष का साथ देते हुए अंतत: दोनों ही पक्षों का विनाश कर सकता है और मेरा सुदर्शन चक्र भी इसे रोक नहीं पायेगा। ऐसी स्थिति में यह धर्मयुद्ध अपने नियत परिणाम तक नहीं पहुँच पाएगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गंभीर स्वर में चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक से प्रश्न किया -“हे वीर, यदि तुम इस महायुद्ध में सम्मिलित हुए, तो किस पक्ष की ओर से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने सरलता से उत्तर दिया -“मैं उस पक्ष की सहायता करूँगा जो हारता हुआ प्रतीत होगा।” श्रीकृष्ण ने गंभीर होकर कहा - “तो तुम अकेले ही युद्ध का परिणाम बदलते रहोगे। अंततः सम्पूर्ण सेना नष्ट हो जाएगी।” बर्बरीक क्षण भर मौन रहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की मर्यादा और युद्ध को उसके निश्चित परिणाम तक पहुँचाने हेतु बर्बरीक से दान माँगा। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा -“हे वीर, मुझे तुम्हारा शीश चाहिए।” उन्होंने आगे समझाया - “यदि तुम इस युद्ध में सम्मिलित हुए, तो यह संग्राम कभी अपने अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सकेगा। तुम्हारा संकल्प है कि तुम सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दोगे। जब पांडव पक्ष दुर्बल पड़ेगा, तुम कौरव का संहार कर दोगे। और जब कौरव क्षीण हो जाएँगे, तब तुम पांडवों को भी समाप्त कर दोगे। इस प्रकार युद्ध का संतुलन बार-बार बदलता रहेगा और अंतत: समस्त सेनाएँ नष्ट हो जाएँगी, पर धर्म की स्पष्ट विजय घोषित नहीं हो पाएगी।” भगवान श्रीकृष्ण का स्वर करुणा और दृढ़ता से परिपूर्ण था -“अत: हे महावीर, धर्मयुद्ध की नियति और लोककल्याण के लिए तुम्हारा यह बलिदान आवश्यक है। तुम्हारा शीशदान ही इस संग्राम को उचित परिणाम तक पहुँचाएगा और धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।” वह क्षण केवल दान का निवेदन नहीं था - वह धर्म की रक्षा के लिए एक महान आत्मा का आह्वान था। वह क्षण अत्यंत असाधारण और इतिहास के पटल पर अमिट होने वाला था। चौदह वर्ष का वह वीर बालक अपने सम्मुख जीवन और अपने दिए हुए वचन - दोनों को समान रूप से खड़े देख रहा था। बर्बरीक ने बिना विचलित हुए कहा - “यदि यही धर्म की आवश्यकता है, तो मेरा शीश प्रस्तुत है।” पुत्र ने घुटनों पर बैठ कर पास में ही खड़ी अपनी माता मोरवी को अपने आराध्य भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रणाम किया और माता मोरवी से अंतिम इच्छा प्रकट की - “मैं युद्ध को देखना चाहता हूँ”, लेकिन शीशदान के बाद में युद्ध नहीं देख पाऊंगा। इस पर माता मोरवी ने कहा - हे पुत्र! जब तक युद्ध चलेगा तब तक मैं अपनी शक्तियों से तेरे शीश को जीवित रखूंगी। माता के वचन सुनकर बर्बरीक का हृदय शांत हो गया एवं उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ भगवान श्रीकृष्ण ने चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक की इच्छा सहर्ष स्वीकार की और सुदर्शन चक्र से एक प्रहार में शीश धड़ से अलग हो गया इसके पश्चात् श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य वरदान प्रदान किया - “हे वीर बर्बरीक, कलियुग में तुम मेरे ही नाम से जाने जाकर पूजित होओगे। तुम्हारी और माता मोरवी की कीर्ति ध्वज की भाँति समस्त दिशाओं में फहरेगी। जो भी श्रद्धा और विश्वास से तुम्हारी इस जन्मस्थली पर आएगा, उसके भाग्य में अंकित दुःख भी सुख में परिवर्तित हो जाएँगे। निराश जनों के लिए तुम आशा का आधार बनोगे, और संसार तुम्हें ‘हारे का सहारा’ नाम से जानेगा।” इसमें तुम्हारी शक्तियों को बढ़ाने तुम्हारी माता मोरवी भी साथ होगी। एक माँ का हृदय खण्ड - खण्ड हो गया, काम्यक वन में आसपास के पंछी व वन्यजीव रो पड़े। प्रकृति स्वयं इस शीशदान की साक्षी बनी। माता मोरवी के लिए तो समय जैसे थम गया। उनकी आँखों के सामने वही बालक था, जिसे उन्होंने अपनी गोद में झुलाया था, जिसे संयम और करुणा का पाठ पढ़ाया था। वह शीश का दान कर चुका है। परंतु आँसू के साथ गर्व भी था। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की ओर देखा और कहा - प्रभु, मैंने पुत्र को धर्म पालन की शिक्षा दी थी। आज उसने सिद्ध कर दिया - वह मेरा ही नहीं, धर्म का भी पुत्र था।” ममता का यह क्षण करुण था, पर दुर्बल नहीं। माता मोरवी ने अपने दु:ख को तप में बदल दिया। उसके पश्चात् माता मोरवी से जीवनधारा प्राप्त करते हुए शीश को एक ऊँची पहाड़ी पर स्थापित किया, जहाँ से वे सम्पूर्ण महाभारत के महान संग्राम के साक्षी बने। उस ऊँचाई से उन्होंने देखा कि अंतत: विजय किसी एक योद्धा की नहीं, बल्कि धर्म की होती है। शीशदान का अर्थ बर्बरीक का बलिदान केवल एक वीरगाथा नहीं है। यह उस वचन की परिणति थी -“हारे का सहारा बनूँगा।” यदि वे युद्ध में उतरते, तो संतुलन बार-बार बदलता रहता। उनका त्याग ही धर्म की स्थिरता बना। और इस बलिदान की मूल प्रेरणा थीं - माता मोरवी के संस्कार। मातृत्व की महिमा संसार वीरों की गाथा गाता है, परंतु उन माताओं का स्मरण कम करता है जिन्होंने उन्हें धर्म का मार्ग दिखाया। मोरवी ने पुत्र खोया नहीं - उन्होंने उसे अमरत्व दिया। उनकी ममता रोई अवश्य, पर उनके संस्कार विजयी हुए। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम लोग!|url=http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|publisher=दैनिक भास्कर|date=२७ दिसम्बर २०१३|archiveurl=https://archive.today/20131228045206/http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|archivedate=28 दिसंबर 2013|access-date=28 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> <nowiki>*</nowiki> == *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार == {{reflist}} {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] eq0keynyzs4k740gw9t0jco5twpyiys 6536896 6536895 2026-04-06T08:36:23Z Dino moreo 917093 6536896 wikitext text/x-wiki '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। उनका जन्म महाभारत काल के का काम्यक वन जो की अरावलीपर्वत श्रृंखला के नजदीक स्थित लखीपूरा ग्राम जिला सीकर में हुआ था,इसी स्थान पर पांडवों ने वनवास का समय बिताया था वह अहिलावती[अहिलावती|(नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को अपनी माता से वे सभी सिद्धियां प्राप्त हुई थी जो उनकी माता अहिलावती ( मोरवी) को माता कामाख्या( देवी दुर्गा )और भगवान शिव से प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने को था तब वनवास में रह रहे पांडवों से मिलने कम्यक वन में भगवान श्री कृष्ण ने इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें शीश दान करने को प्रेरित कर बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना उनकी माता अहिलावती की मायावी शक्तियों से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार* *(मातृत्व की गोद में आकार लेती दिव्य शक्ति)* जन्मस्थली लख्खीपुरा अरावली की शांत वादियों में समय जैसे थम-सा गया था। वन की निस्तब्धता के बीच एक नई कथा आकार ले रही थी - एक ऐसे बालक की कथा, जिसकी नियति केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं थी, बल्कि युगों की आस्था बनने वाली थी। विवाह के पश्चात् माता मोरवी का जीवन साधना और संतुलन से परिपूर्ण था। घटोत्कच अपने युद्धकौशल और पराक्रम के लिए विख्यात थे, परंतु माता मोरवी जानती थीं कि केवल बल से इतिहास नहीं बनता - बल के साथ धर्मबुद्धि आवश्यक है। इसी संतुलन की गोद में एक दिव्य प्रभात आया। दिव्य जन्म आकाश में अद्भुत शांति थी। काम्यक वन में पक्षियों का मधुर कलरव था। और ऐसे समय में द्वापर के मतस्य क्षेत्र वर्तमान के लख्खीपुरा (सीकर) के काम्यक वनक्षेत्र में माता मोरवी ने कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी ग्यारस) को एक तेजस्वी बालक को जन्म दिया। उसके नेत्रों में असाधारण चमक थी, मानो वह जन्म से ही किसी गहनस्मृति को साथ लेकर आया हो। ऋषियों ने सिर पर बब्बर शेर की तरह बाल अधिक होने कि वजह से उसका नाम रखा - बर्बरीक। जन्म के समय ही अनेक शुभ संकेत प्रकट हुए। कहते हैं, उस दिन वायु मंद हो गई, और वातावरण में एक अदृश्य ऊर्जा का संचार हुआ। मानो प्रकृति स्वयं उस बालक का स्वागत कर रही हो। माता मोरवी ने उसे हृदय से लगाया और मन ही मन संकल्प लिया - “यह बालक केवल मेरा पुत्र नहीं होगा, यह धर्म का प्रहरी बनेगा।” मातृत्व का प्रथम पाठ बर्बरीक को बाल्यकाल से ही माँ मोरवी ने उन्हें केवल लाड -प्यार से नहीं पाला बल्कि उन्हें वीर योद्वा के रूप में तैयार किया क्योकिं वे जानती थीं - जिसे नियति महान बनाना चाहती है, उसे प्रारंभ से ही अनुशासन की छाया में बढ़ना होगा। जब वह चलना सीख रहा था, तभी उसने धनुष को पहली बार छुआ, तब माता मोरवी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा -“पुत्र, शस्त्र केवल धर्म रक्षा के लिए उठाया जाता है, अन्यथा वह स्वयं विनाश का कारण बनता है।” बालक ध्यान से सुनता। उसकी आँखों में जिज्ञासा थी, पर साथ ही एक अजीब-सी गंभीरता भी। शिक्षा और साधना घटोत्कच ने उसे युद्धकला का प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। लख्खीपुरा वन की विशाल भूमि उसका गुरुकुल बनी। धनुर्विद्या, मायावी युद्धकौशल और असाधारण शारीरिक बल - सब उसमें स्वाभाविक रूप से विकसित होने लगे। परंतु माता मोरवी की शिक्षा भिन्न थी। वे उसे प्रतिदिन प्रात: ध्यान करातीं। उसे सिखातीं - क्रोध को नियंत्रित करना, विजय में विनम्र रहना, और पराजित के प्रति करुणा रखना। एक दिन बर्बरीक ने प्रश्न किया -“माता, यदि मैं इतना बलवान बन जाऊँ कि कोई मुझे हरा न सके, तो क्या मैं संसार का स्वामी बन जाऊँगा?” माता मोरवी मुस्कुराईं। उन्होंने उत्तर दिया - “नहीं पुत्र। संसार का स्वामी वह नहीं जो सबको जीत ले, बल्कि वह है जो अपने भीतर के अहंकार को जीत ले।” यह वचन बर्बरीक के हृदय में अंकित हो गया। बर्बरीक के तीन बाणों का रहस्य माता मोरवी के कठोर प्रशिक्षण एवं पूर्ण शिक्षा के पश्चात् बर्बरीक को सभी विद्याओं में निपुण करके माता मोरवी ने माता दुर्गा (कामाख्या) एवं भगवान शिव से प्राप्त तीन अजेय बाण एवं धनुष सौंपते हुए कहा की हे पुत्र! ये बाण सुदर्शन चक्र को भी रोक सकते है। एक बाण से वह सम्पूर्ण शत्रु सेना को चिह्नित कर सकता है, दूसरे से उन्हें बाँध सकता है, और तीसरे से संपूर्ण युद्ध समाप्त कर सकता है। उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखकर कहा - “पुत्र, सदैव उस पक्ष का साथ देना जो दुर्बल हो। अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना, चाहे वह अपना ही प्रिय क्यों न हो।” इस प्रकार माता मोरवी ने उसे शक्ति का दुरुपयोग न करने की शपथ दिलाई। यह वही वचन था जो आगे चलकर उसके जीवन का निर्णायक सिद्धांत बना - ‘हारे का सहारा’। मातृ-संस्कार की छाप माता मोरवी का स्नेह कोमल था, पर उनका अनुशासन दृढ़। उन्होंने उसे युद्ध की महिमा से अधिक त्याग की महत्ता सिखाई। रात्रि में वे उसे धर्मगाथाएँ सुनातीं - राम का वनवास, भीष्म का व्रत, और सत्य की विजय की कथाएँ। एक दिन वीर बर्बरीक ने गंभीर स्वर में अपनी माता से प्रश्न किया - “हे माता, मोक्ष का मार्ग क्या है? आत्मा को परम शांति कैसे प्राप्त होती है?” माता मोरवी ने कुछ क्षण मौन धारण किया। उनके नेत्रों में अनुभव की गहराई थी। फिर उन्होंने शांत किंतु दृढ़ स्वर में कहा “पुत्र, हम राक्षस कुल में जन्मे हैं। हमारे लिए मोक्ष का मार्ग सरल नहीं होता। या तो कठोर तपस्या के द्वारा आत्मशुद्धि करनी होती है, या फिर स्वयं भगवान के हाथों मृत्यु को प्राप्त होना पड़ता है - तभी आत्मा परमगति को प्राप्त करती है।” बर्बरीक ने सहज जिज्ञासा से कहा - “माता, तपस्या का मार्ग अत्यंत कठिन है। दूसरा मार्ग सरल प्रतीत होता है, परंतु मैं भगवान से युद्ध कैसे कर सकता हूँ? ऐसा कैसे संभव होगा कि उनके हाथों मेरा अंत हो और मुझे मोक्ष प्राप्त हो?” यह सुनकर माता मोरवी का हृदय भर आया। वे जानती थीं - यह प्रश्न केवल जिज्ञासा नहीं, नियति की भूमिका है। भारी मन से उन्होंने पुत्र को अपने समीप बैठाया और कहा “पुत्र, समय आने पर स्वयं भगवान श्रीकृष्ण जगत-कल्याण और कुरुक्षेत्र में धर्म स्थापना हेतु तुमसे तुम्हारा शीश माँगेंगे। जब वे ऐसा करें, तब तनिक भी विचलित मत होना। सहर्ष उनसे कहना - ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ स्मरण रखना, उस समय पांडव पक्ष दुर्बल और पराजित है। तुमने वचन दिया है कि तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम्हारा यही शीशदान अंतत: उनकी विजय का कारण बनेगा।” बर्बरीक सुनते-सुनते प्रश्न करते है - “माता, क्या धर्म के लिए सब कुछ त्याग देना पड़ता है?” माता मोरवी उत्तर देती - “हाँ पुत्र, धर्म का मार्ग सरल नहीं होता। पर जो उस पर चलता है, वह अमर हो जाता है।” उन्हें ज्ञात नहीं था कि यही शब्द एक दिन उनके अपने जीवन की परीक्षा बनेंगे। भविष्य की आहट समय के साथ बर्बरीक की शक्ति अद्वितीय होती चली गई। वन्यजीव तक उसकी उपस्थिति से शांत हो जाते। परंतु माता मोरवी के हृदय में कहीं एक सूक्ष्म आशंका भी थी - महान शक्ति सदैव महान परीक्षा को आमंत्रित करती है। वे जानती थीं - महाभारत का युद्ध निकट है। और उनका पुत्र उस युद्ध से स्वयं को अलग नहीं रख पाएगा। एक संध्या उन्होंने आकाश की ओर देखते हुए प्रार्थना की - “हे ईश्वर, मेरे पुत्र को केवल वीरता ही नहीं, सही निर्णय की बुद्धि भी देना।” वह क्षण मातृत्व की करुणा और शक्ति का संगम था। *वचन, धर्म और नियति का संगम* समय अपनी गति से आगे बढ़ता रहा। हस्तिनापुर और कुरुक्षेत्र के मध्य युद्ध की आहट अब स्पष्ट सुनाई देने लगी थी। महाभारत का महान संग्राम समीप था। इसी बीच बर्बरीक समस्त विद्याओं में पारंगत होकर चौदह वर्ष की आयु को प्राप्त हो चुके थे। काम्यक वनप्रदेश में भी यह समाचार पहुँचा। बर्बरीक का बाल हृदय उत्साह और कर्तव्य-बोध से भर उठा। वह जानता था - जहाँ धर्म का युद्ध हो, वहाँ एक क्षत्रिय मौन नहीं रह सकता। वह अपनी माता मोरवी के पास पहुँचा। “माता, मैं कुरुक्षेत्र जाना चाहता हूँ। यह धर्मयुद्ध है। मुझे भी इसमें अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।” माता मोरवी शांत रहीं। वे जानती थीं - यह क्षण एक साधारण निर्णय नहीं, नियति का द्वार है। उन्होंने पूछा - “पुत्र, तुम किस पक्ष से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने दृढ़ स्वर में उत्तर दिया - “मैं सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दूँगा। जो हारता हुआ दिखाई देगा, मैं उसी की ओर से युद्ध करूँगा।” माता मोरवी ने उसकी ओर गहराई से देखा। उन्हें स्मरण आया - यह वही वचन है जो उन्होंने स्वयं उसे दिया था। क्षण भर मौन के बाद उन्होंने उसके मस्तक पर हाथ रखा और कहा - “पुत्र स्वयं भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे पितामह भीम सहित पाण्ड़वों के साथ शीघ्र ही तुम्हें यात्रा पर ले जाने हेतु यहाँ उपस्थित होगें तब निर्णय लेना"। पर स्मरण रखना - "धर्म केवल शस्त्र से नहीं, त्याग से भी स्थापित होता है।” बर्बरीक ने माता के चरण स्पर्श किए। उसकी आँखों में उत्साह था, पर माता मोरवी के हृदय में एक अनजानी वेदना। उन्हें आभास था - यह यात्रा कभी युद्धभूमि तक नहीं पहुँचेगी बल्कि, इतिहास के अमर अध्याय तक जाएगी। उस घड़ी में काम्यक वन की वायु भी जैसे स्थिर हो गई। माता मोरवी अपने पुत्र को देखती रहीं। उनकी आँखों में आँसू थे, पर मुख पर दृढ़ता। क्योंकि वे जानती थीं -सच्ची माता वही है जो अपने पुत्र को धर्म-पथ पर भेज सके, चाहे वह पथ बलिदान तक ही क्यों न जाता हो। *शीशदान - मातृत्व की अंतिम परीक्षा* *(जहाँ ममता तप में बदल गई)* कुरुक्षेत्र की भूमि पर महायुद्ध प्रारंभ होने ही वाला था। आकाश में अशुभ संकेत प्रकट हो रहे थे, धरती पर विशाल सेनाएँ सुसज्जित खड़ी थीं, और नियति अपने चरम सत्य की ओर अग्रसर हो रही थी। वातावरण में शंखध्वनि, रणभेरी और रथों की गर्जना दशो दिशाओं में गुंजायमान हो रही थी, मानो सम्पूर्ण सृष्टि इस महासंग्राम की साक्षी बनने को तैयार हो। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण पाण्ड़वों के साथ माता मोरवी के काम्यक वन क्षेत्र में उपस्थित हुए, जहाँ बर्बरीक भी उपस्थित थे। भगवान श्रीकृष्ण के परीक्षा लेने पर बर्बरीक ने अपनी अद्भुत धनुर्विद्या का परिचय देते हुए एक ही बाण से पीपल के वृक्ष के सभी पत्तों को भेद दिया। लीला स्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने एक पत्ता अपने चरणों के नीचे दबा लिया, परंतु वह बाण उस पत्ते को भी भेद गया था। एक ही बाण की इस विलक्षण शक्ति को देखकर श्रीकृष्ण क्षणभर में समझ गए की मोरवी ने अपनी समस्त विद्याओं मेंअपने पुत्र को पारंगत कर दिया है। उनके मन में विचार उठा कि यदि यह महावीर युद्धभूमि में उतरा, तो अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार दुर्बल पक्ष का साथ देते हुए अंतत: दोनों ही पक्षों का विनाश कर सकता है और मेरा सुदर्शन चक्र भी इसे रोक नहीं पायेगा। ऐसी स्थिति में यह धर्मयुद्ध अपने नियत परिणाम तक नहीं पहुँच पाएगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गंभीर स्वर में चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक से प्रश्न किया -“हे वीर, यदि तुम इस महायुद्ध में सम्मिलित हुए, तो किस पक्ष की ओर से युद्ध करोगे?” बर्बरीक ने सरलता से उत्तर दिया -“मैं उस पक्ष की सहायता करूँगा जो हारता हुआ प्रतीत होगा।” श्रीकृष्ण ने गंभीर होकर कहा - “तो तुम अकेले ही युद्ध का परिणाम बदलते रहोगे। अंततः सम्पूर्ण सेना नष्ट हो जाएगी।” बर्बरीक क्षण भर मौन रहा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की मर्यादा और युद्ध को उसके निश्चित परिणाम तक पहुँचाने हेतु बर्बरीक से दान माँगा। उन्होंने गंभीर स्वर में कहा -“हे वीर, मुझे तुम्हारा शीश चाहिए।” उन्होंने आगे समझाया - “यदि तुम इस युद्ध में सम्मिलित हुए, तो यह संग्राम कभी अपने अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सकेगा। तुम्हारा संकल्प है कि तुम सदैव दुर्बल पक्ष का साथ दोगे। जब पांडव पक्ष दुर्बल पड़ेगा, तुम कौरव का संहार कर दोगे। और जब कौरव क्षीण हो जाएँगे, तब तुम पांडवों को भी समाप्त कर दोगे। इस प्रकार युद्ध का संतुलन बार-बार बदलता रहेगा और अंतत: समस्त सेनाएँ नष्ट हो जाएँगी, पर धर्म की स्पष्ट विजय घोषित नहीं हो पाएगी।” भगवान श्रीकृष्ण का स्वर करुणा और दृढ़ता से परिपूर्ण था -“अत: हे महावीर, धर्मयुद्ध की नियति और लोककल्याण के लिए तुम्हारा यह बलिदान आवश्यक है। तुम्हारा शीशदान ही इस संग्राम को उचित परिणाम तक पहुँचाएगा और धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेगा।” वह क्षण केवल दान का निवेदन नहीं था - वह धर्म की रक्षा के लिए एक महान आत्मा का आह्वान था। वह क्षण अत्यंत असाधारण और इतिहास के पटल पर अमिट होने वाला था। चौदह वर्ष का वह वीर बालक अपने सम्मुख जीवन और अपने दिए हुए वचन - दोनों को समान रूप से खड़े देख रहा था। बर्बरीक ने बिना विचलित हुए कहा - “यदि यही धर्म की आवश्यकता है, तो मेरा शीश प्रस्तुत है।” पुत्र ने घुटनों पर बैठ कर पास में ही खड़ी अपनी माता मोरवी को अपने आराध्य भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रणाम किया और माता मोरवी से अंतिम इच्छा प्रकट की - “मैं युद्ध को देखना चाहता हूँ”, लेकिन शीशदान के बाद में युद्ध नहीं देख पाऊंगा। इस पर माता मोरवी ने कहा - हे पुत्र! जब तक युद्ध चलेगा तब तक मैं अपनी शक्तियों से तेरे शीश को जीवित रखूंगी। माता के वचन सुनकर बर्बरीक का हृदय शांत हो गया एवं उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से निवेदन किया कि ‘हे प्रभु, आप स्वयं अपने सुदर्शन चक्र से मेरा शीश उतार लें और धर्मयुद्ध की इस वेदी पर मेरा यह बलिदान स्वीकार करें।’ भगवान श्रीकृष्ण ने चौदह वर्षीय बालक बर्बरीक की इच्छा सहर्ष स्वीकार की और सुदर्शन चक्र से एक प्रहार में शीश धड़ से अलग हो गया इसके पश्चात् श्रीकृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य वरदान प्रदान किया - “हे वीर बर्बरीक, कलियुग में तुम मेरे ही नाम से जाने जाकर पूजित होओगे। तुम्हारी और माता मोरवी की कीर्ति ध्वज की भाँति समस्त दिशाओं में फहरेगी। जो भी श्रद्धा और विश्वास से तुम्हारी इस जन्मस्थली पर आएगा, उसके भाग्य में अंकित दुःख भी सुख में परिवर्तित हो जाएँगे। निराश जनों के लिए तुम आशा का आधार बनोगे, और संसार तुम्हें ‘हारे का सहारा’ नाम से जानेगा।” इसमें तुम्हारी शक्तियों को बढ़ाने तुम्हारी माता मोरवी भी साथ होगी। एक माँ का हृदय खण्ड - खण्ड हो गया, काम्यक वन में आसपास के पंछी व वन्यजीव रो पड़े। प्रकृति स्वयं इस शीशदान की साक्षी बनी। माता मोरवी के लिए तो समय जैसे थम गया। उनकी आँखों के सामने वही बालक था, जिसे उन्होंने अपनी गोद में झुलाया था, जिसे संयम और करुणा का पाठ पढ़ाया था। वह शीश का दान कर चुका है। परंतु आँसू के साथ गर्व भी था। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की ओर देखा और कहा - प्रभु, मैंने पुत्र को धर्म पालन की शिक्षा दी थी। आज उसने सिद्ध कर दिया - वह मेरा ही नहीं, धर्म का भी पुत्र था।” ममता का यह क्षण करुण था, पर दुर्बल नहीं। माता मोरवी ने अपने दु:ख को तप में बदल दिया। उसके पश्चात् माता मोरवी से जीवनधारा प्राप्त करते हुए शीश को एक ऊँची पहाड़ी पर स्थापित किया, जहाँ से वे सम्पूर्ण महाभारत के महान संग्राम के साक्षी बने। उस ऊँचाई से उन्होंने देखा कि अंतत: विजय किसी एक योद्धा की नहीं, बल्कि धर्म की होती है। शीशदान का अर्थ बर्बरीक का बलिदान केवल एक वीरगाथा नहीं है। यह उस वचन की परिणति थी -“हारे का सहारा बनूँगा।” यदि वे युद्ध में उतरते, तो संतुलन बार-बार बदलता रहता। उनका त्याग ही धर्म की स्थिरता बना। और इस बलिदान की मूल प्रेरणा थीं - माता मोरवी के संस्कार। मातृत्व की महिमा संसार वीरों की गाथा गाता है, परंतु उन माताओं का स्मरण कम करता है जिन्होंने उन्हें धर्म का मार्ग दिखाया। मोरवी ने पुत्र खोया नहीं - उन्होंने उसे अमरत्व दिया। उनकी ममता रोई अवश्य, पर उनके संस्कार विजयी हुए। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम लोग!|url=http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|publisher=दैनिक भास्कर|date=२७ दिसम्बर २०१३|archiveurl=https://archive.today/20131228045206/http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|archivedate=28 दिसंबर 2013|access-date=28 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref>श्याम बाबा की माता मोरवी की कथा से लिए गए अध्याय के आधार पर प्रकाशित वर्ष 2003 <nowiki>*</nowiki> == *वीर बर्बरीक का जन्म और बाल्य संस्कार == {{reflist}} {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] 1jqcp6r8hbfrzr4a58p26kljc48qrq7 6536900 6536896 2026-04-06T08:54:29Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/संजीव कुमार|संजीव कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार|वार्ता]]) के अवतरण 6310841 पर पुनर्स्थापित : तटस्थ दृष्टिकोण 6536900 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Khatushyamji Pad Yatra from Kota.JPG|thumbnail|बर्बरीक की पूजा [[खाटूश्यामजी|खाटु श्याम जी]] के रूप में की जाती है।]] '''बर्बरीक''' [[महाभारत]] के एक महान योद्धा थे। वे [[घटोत्कच]] और [[अहिलावती|अहिलावती (नागकन्या माता)]] के सबसे बड़े पुत्र थे। उनके अन्य भाई अंजनपर्व और मेघवर्ण का उल्लेख भी महाभारत में दिया गया है। बर्बरीक को उनकी माँ ने यही सिखाया था कि हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ना और वे इसी सिद्धांत पर लड़ते भी रहे। बर्बरीक को कुछ ऐसी सिद्धियाँ प्राप्त थीं, जिनके बल से पलक झपते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेनेवाले समस्त वीरों को मार सकते थे। जब वे युद्ध में सहायता देने आये, तब इनकी शक्ति का परिचय प्राप्त कर [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] ने अपनी कूटनीति से इन्हें [[काली|रणचंडी]] को बलि चढ़ा दिया। महाभारत युद्ध की समाप्ति तक युद्ध देखने की इनकी कामना श्रीकृष्ण के वरदान से पूर्ण हुई और इनका कटा सिर अंत तक युद्ध देखता और वीरगर्जन करता रहा। कुछ कहानियों के अनुसार बर्बरीक एक [[यक्ष]] थे, जिनका पुनर्जन्म एक इंसान के रूप में हुआ था। बर्बरीक गदाधारी भीमसेन का पोता और घटोत्कच के पुत्र थे। <ref>{{cite web|title=महाभारत के वो 10 पात्र जिन्हें जानते हैं बहुत कम लोग!|url=http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|publisher=दैनिक भास्कर|date=२७ दिसम्बर २०१३|archiveurl=https://archive.today/20131228045206/http://www.bhaskar.com/article-hf/HAR-AMB-mahabharat-characters-known-less-to-people-haryana-4476348-PHO.html?seq=11|archivedate=28 दिसंबर 2013|access-date=28 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> == बर्बरीक की कथा == बाल्यकाल से ही वे बहुत वीर और महान योद्धा थे। उन्होंने अपनी माता के कहने पर युद्ध-कला भगवान श्री [[कृष्ण]] से सीखी और उनके प्रशिक्षण में वे अजेय योद्धा बन गए। माॅं आदिशक्ति की तपस्या कर उन्होंने असीमित शक्तियों को भी अर्जित कर लिया तत्पश्चात् अपने गुरु [[कृष्ण|श्रीकृष्ण]] की आज्ञा से उन्होंने कई वर्षों तक [[शिव|महादेव]] की घोर तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया और भगवान [[शिव|शिव शंकर]] से तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए और 'तीन बाणधारी' का प्रसिद्ध नाम प्राप्त किया। साथ ही [[अग्निदेव]] ने उनसे प्रसन्न होकर उन्हें अपना दिव्य धनुष प्राप्त किया। महाभारत का युद्ध कौरवों और पाण्डवों के मध्य अपरिहार्य हो गया था, अतः यह समाचार बर्बरीक को प्राप्त हुआ तो उनकी भी युद्ध में सम्मिलित होने की इच्छा जागृत हुई। जब वे अपनी माता से आशीर्वाद प्राप्त करने पहुँचे तब माँ को हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन दिया। वे अपने लीले घोड़े, जिसका रंग नीला था, पर तीन बाण और धनुष के साथ कुरूक्षेत्र की रणभूमि की ओर अग्रसर हुए। सर्वव्यापी श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश धारण कर बर्बरीक से परिचित होने के लिए उन्हें रोका और यह जानकर उनकी हँसी भी उड़ायी कि वह मात्र तीन बाण से युद्ध में सम्मिलित होने आया है। ऐसा सुनने पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि मात्र एक बाण शत्रु सेना को परास्त करने के लिये पर्याप्त है और ऐसा करने के बाद बाण वापस तरकस में ही आएगा। यदि तीनों बाणों को प्रयोग में लिया गया तो तीनों लोकों में हाहाकार मच जाएगा। इस पर श्रीकृष्ण ने उन्हें चुनौती दी कि इस पीपल के पेड़ के सभी पत्रों को छेदकर दिखलाओ, जिसके नीचे दोनो खड़े थे। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार की और अपने तुणीर से एक बाण निकाला और ईश्वर को स्मरण कर बाण पेड़ के पत्तों की ओर चलाया। तीर ने क्षण भर में पेड़ के सभी पत्तों को भेद दिया और श्रीकृष्ण के पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा, क्योंकि एक पत्ता उन्होंने अपने पैर के नीचे छुपा लिया था, बर्बरीक ने कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिए वरना ये आपके पैर को चोट पहुँचा देगा। श्रीकृष्ण ने बालक बर्बरीक से पूछा कि वह युद्ध में किस ओर से सम्मिलित होगा तो बर्बरीक ने अपनी माँ को दिये वचन दोहराया कि वह युद्ध में उस ओर से भाग लेगा जिस ओर की सेना निर्बल हो और हार की ओर अग्रसर हो। श्रीकृष्ण जानते थे कि युद्ध में हार तो कौरवों की ही निश्चित है और इस पर अगर बर्बरीक ने उनका साथ दिया तो परिणाम उनके पक्ष में ही होगा। ब्राह्मण वेश में श्रीकृष्ण ने बालक से दान की अभिलाषा व्यक्त की, इस पर वीर बर्बरीक ने उन्हें वचन दिया कि अगर वो उनकी अभिलाषा पूर्ण करने में समर्थ होगा तो अवश्य करेगा। श्रीकृष्ण ने उनसे शीश का दान मांगा। बालक बर्बरीक क्षण भर के लिए चकरा गया, परन्तु उसने अपने वचन की दृढ़ता जतायी। बालक बर्बरीक ने ब्राह्मण से अपने वास्तिवक रूप से अवगत कराने की प्रार्थना की और श्रीकृष्ण के बारे में सुनकर बालक ने उनके विराट रूप के दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की, श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना विराट रूप दिखाया। उन्होंने बर्बरीक को समझाया कि युद्ध आरम्भ होने से पहले युद्धभूमि की पूजा के लिए एक वीरवर क्षत्रिए के शीश के दान की आवश्यकता होती है, उन्होंने बर्बरीक को युद्ध में सबसे वीर की उपाधि से अलंकृत किया, अतएव उनका शीश दान में मांगा। बर्बरीक ने उनसे प्रार्थना की कि वह अंत तक युद्ध देखना चाहता है, श्रीकृष्ण ने उनकी यह बात स्वीकार कर ली। रातभर बर्बरीक ने अपने आराध्य भगवान [[शिव]] की पूजा अर्चना की और फाल्गुन माह की द्वादशी को स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा अर्चना करने के पश्चात् उन्होंने अपने शीश का दान दिया। उनका सिर युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर सुशोभित किया गया, जहाँ से बर्बरीक सम्पूर्ण युद्ध का जायजा ले सकते थे। युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में ही आपसी बहस होने लगी कि युद्ध में विजय का श्रेय किसको जाता है, इस पर श्रीकृष्ण ने उन्हें सुझाव दिया कि बर्बरीक का शीश सम्पूर्ण युद्ध का साक्षी है, अतएव उससे बेहतर निर्णायक भला कौन हो सकता है? सभी इस बात से सहमत हो गये। बर्बरीक के शीश ने उत्तर दिया कि श्रीकृष्ण ही युद्ध में विजय प्राप्त कराने में सबसे महान कार्य किया है। उनकी शिक्षा, उनकी उपस्थिति, उनकी युद्धनीति ही निर्णायक थी। उन्हें युद्धभूमि में सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखायी दे रहा था जो कि शत्रु सेना को काट रहा था। यह सुनकर श्री कृष्ण ने बर्बरीक को वर दिया और कहा कि तुम मेरे श्याम नाम से पूजे जाओगे खाटू नामक ग्राम में प्रकट होने के कारण खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्धि पाओगे और मेरी सभी सोलह कलाएं तुम्हारे शीश में स्थापित होंगी और तुम मेरे ही प्रतिरूप बनकर पूजे जाओगे। ==सन्दर्भ== {{reflist}} ==इन्हें भी देखें== *[[खाटूश्यामजी|खाटू श्याम जी]] {{महाभारत}} [[श्रेणी:महाभारत के पात्र]] j8q1h0jcgz8tp7dz916octolg0dfztx ७९ 0 191623 6536738 6209145 2026-04-06T03:19:07Z ~2026-21069-61 918991 /*अगस्त 6536738 wikitext text/x-wiki '''७९''' [[ग्रेगोरी कैलेंडर|ग्रेगोरी कैलंडर]] का एक साधारण वर्ष है। == घटनाएँ == === जनवरी-मार्च === === अप्रैल-जून === === जुलाई-सितंबर === === अक्टूबर-दिसम्बर === == अज्ञात तारीख़ की घटनाएँ == == जन्म == === जनवरी-मार्च === === अप्रैल-जून === === जुलाई-सितंबर === === अक्टूबर-दिसम्बर === == निधन == === जनवरी-मार्च === === अप्रैल-जून === === जुलाई-सितंबर अगस्त === === अक्टूबर-दिसम्बर === [[श्रेणी:79]] [[श्रेणी:वर्ष]] [[als:70er#Johr 79]] {{आधार}} i3lla27dxk19jt1hykz9ryvn6e7a3n5 6536756 6536738 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Reuters.</ref> | death_place = [[तेहरान]], ईरान | party = {{plainlist| * [[इस्लामिक रिपब्लिकन पार्टी]] (1979–1987) * कॉम्बैटेंट क्लर्जी एसोसिएशन (1977–1989) * निर्दलीय (1989–2026) }} | spouse = {{marriage|मंसूरह ख़ोजस्तेह बागेरज़ादेह|1964}} | children = 6 (जिनमें मुस्तफ़ा, मोजतबा और मसऊद शामिल हैं) | father = जवाद ख़ामेनेई | relatives = {{ubl|मोहम्मद ख़ामेनेई (भाई)|हादी ख़ामेनेई (भाई)|बद्री ख़ामेनेई (बहन)}} | education = {{ubl|ख़ोरासान सेमिनरी|नजफ़ सेमिनरी|क़ोम सेमिनरी}} | signature = Ali Khamenei signature.svg | website = {{URL|english.khamenei.ir}} | allegiance = | branch = {{ubli|[[इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स]]|अनियमित युद्ध मुख्यालय}} | serviceyears = 1979–1989{{efn|सर्वोच्च नेता के रूप में, वे ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रधान सेनापति रहे।}} | commands = {{flagicon image|Seal of the General Staff of the Armed Forces of the Islamic Republic of Iran.svg}} ईरानी सशस्त्र बल | battles = {{tree list}} * [[ईरान–इराक युद्ध]] ** [[ऑपरेशन सामेन-अल-आईमेह]]<ref name="raee">Raee, Sajjad (Winter 2008). نقش آیت‌الله خامنه‌ای در دفاع مقدس [Ayatollah Khamanei's Role in the Sacred Defense]. Negin-e Iran. 7 (26): 9–24.</ref>{{tree list/end}} | module = {{Infobox religious biography|embed=yes | main_interests = उसूल अल-फ़िक़्ह, तफ़्सीर<ref name="cgie">Velayati, Ali Akbar. "Ayatollah Ali Khamenei". The Great Islamic Encyclopedia (in Persian).</ref> | notable_ideas = परमाणु हथियारों के विरुद्ध फ़तवा | religion = [[इस्लाम]] | denomination = [[बारहइमामी शिया]] | jurisprudence = [[जाफ़री]] | creed = [[उसूली]] | teacher = {{ubl|सैय्यद हुसैन बोरुजर्दी|रूहोल्लाह ख़ुमैनी<ref name="cgie"/>}} }} | module2 = {{Listen|pos=center|embed=yes|filename=Ali Khamenei speech at the Hussainiya of Lovers of Karbala, Sari - 14 October 1995 (13740722 2546).wav|title=अली ख़ामेनेई की आवाज़|type=speech|description=सारी के<br />हुसैनिया ऑफ़ लवर्स ऑफ़ कर्बला में<br />14 अक्टूबर 1995 का भाषण}} | footnotes = | death_cause = हवाई हमले में मृत्यु }} '''अली हुसैनी ख़ामेनेई''' (19 अप्रैल 1939 – 28 फ़रवरी 2026) ईरान के एक [[शिया]] आलिम (विद्वान) और राजनेता थे। उन्होंने 1989 से 2026 में इज़राइल और अमेरिका के एक हवाई हमले में अपनी मृत्यु तक ईरान के दूसरे सर्वोच्च नेता के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति भी रहे। सर्वोच्च नेता के रूप में उनका कार्यकाल मध्य पूर्व में किसी भी राष्ट्राध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल था, और ईरान में शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बाद वे सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेता थे। <ref>{{Cite news|url=https://www.britannica.com/biography/Ali-Khamenei|title=Ali Khamenei Biography, Title, History, Successor, Son, & Facts Britannica|work=Encyclopedia Britannica|access-date=2026-03-11|language=en}}</ref> उनका जन्म मशहद में हुआ था, जहाँ उन्होंने इस्लामी मदरसों (हौज़ा) में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। 1958 में वे [[क़ोम]] चले गए और रूहोल्लाह ख़ुमैनी के अधीन अध्ययन किया।<ref>{{Cite web|url=https://farsi.khamenei.ir/file/terror-6-tir/4_1.htm|title=گزارشی از ماجرای ترور 6 تیر 1360|website=farsi.khamenei.ir|access-date=2026-03-11}}</ref> उन्होंने शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासन का विरोध किया, जिसके कारण उन्हें छह बार गिरफ्तार किया गया और तीन वर्षों के लिए निर्वासित भी किया गया। वे 1978–1979 की [[ईरानी क्रांति]] के प्रमुख नेताओं में से एक थे। क्रांति के कुछ समय बाद उन पर हत्या का एक असफल प्रयास हुआ, जिससे उनका दाहिना हाथ स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। 1981 से 1989 तक वे ईरान–इराक युद्ध के दौरान देश के राष्ट्रपति रहे, और इसी दौरान उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किए। 1989 में रूहोल्लाह ख़ुमैनी की मृत्यु के बाद, विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) ने उन्हें ईरान का सर्वोच्च नेता चुना। <ref>{{Cite web|url=http://www.hashemirafsanjani.ir/content/%DA%86%D8%B1%D8%A7-%D8%A2%DB%8C%D8%AA-%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D8%AE%D8%A7%D9%85%D9%86%D9%87-%D8%A7%DB%8C-%D9%88%D8%B5%DB%8C%D8%AA-%D8%A7%D9%85%D8%A7%D9%85-%D8%B1%D8%A7-%D8%AE%D9%88%D8%A7%D9%86%D8%AF%D8%9F-%D9%BE%DB%8C%D8%B4%D9%86%D9%87%D8%A7%D8%AF-%D8%B1%D9%87%D8%A8%D8%B1%DB%8C-%D8%A2%DB%8C%D8%AA-%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%DA%AF%D9%84%D9%BE%D8%A7%DB%8C%DA%AF%D8%A7%D9%86%DB%8C-%D8%A7%D8%B2-%D8%B3%D9%88%DB%8C-%D8%AC%D8%A7%D9%85%D8%B9%D9%87-%D9%85%D8%AF%D8%B1%D8%B3|title=چرا آیت الله خامنه ای وصیت امام را خواند؟/ پیشنهاد رهبری آیت الله گلپایگانی از سوی جامعه مدرسین {{!}} پایگاه اطلاع رسانی آیت الله هاشمی رفسنجانی|website=www.hashemirafsanjani.ir|language=fa|access-date=2026-03-11|archive-date=20 जून 2013|archive-url=https://archive.today/20130620012317/http://www.hashemirafsanjani.ir/content/چرا-آیت-الله-خامنه-ای-وصیت-امام-را-خواند؟-پیشنهاد-رهبری-آیت-الله-گلپایگانی-از-سوی-جامعه-مدرس|url-status=dead}}</ref> सर्वोच्च नेता के रूप में, उन्होंने नागरिक उपयोग के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन किया, जबकि परमाणु हथियारों के निर्माण के विरुद्ध एक धार्मिक आदेश (फ़तवा) भी जारी किया। <ref>{{Cite news|url=http://nuclearenergy.ir/legal-aspects/#Fatwa_against_Nuclear_Weapons|title=Legal Aspects - NuclearEnergy.ir|date=2013-11-04|work=NuclearEnergy.ir|access-date=2026-03-11|language=en-US}}</ref> उनकी विदेश नीति मुख्य रूप से शिया इस्लामवाद के विस्तार और पश्चिमी देशों के विरोध पर केंद्रित रही। उन्होंने IRGC को घरेलू नियंत्रण और क्षेत्रीय प्रभाव के प्रमुख साधन के रूप में विकसित किया। उनके नेतृत्व में ईरान ने सीरिया, इराक, यमन और ग़ज़ा में विभिन्न सशस्त्र गुटों का समर्थन किया, जिसे राजनीतिक रूप से "प्रतिरोध की धुरी" (Axis of Resistance) कहा जाता है। <ref>{{Cite news|url=https://www.abc.net.au/news/2024-10-03/what-is-irans-axis-of-resistance-who-is-part-of-it/104423298|title=What is Iran's so-called Axis of Resistance?|date=2024-10-03|work=ABC News|access-date=2026-03-11|language=en-AU}}</ref> वे इज़राइल के मुखर आलोचक थे और उनके शासनकाल में ईरान इज़राइल और सऊदी अरब के साथ कई प्रॉक्सी युद्धों में शामिल रहा। एक रूढ़िवादी नेता के रूप में, उन्होंने अपने शासन के दौरान कई बड़े जन-आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से सख्ती से निपटा। 1999 के छात्र आंदोलन, 2009 के चुनाव विरोध, और महसा अमीनी विरोध प्रदर्शनों (2022-23) सहित कई आंदोलनों को सरकारी बलों द्वारा दबा दिया गया। उनके शासनकाल में ईशनिंदा और "सर्वोच्च नेता के अपमान" के आरोप में पत्रकारों तथा ब्लॉगर्स पर मुक़दमे चलाए गए। <ref>"[https://2009-2017.state.gov/documents/organization/253135.pdf IRAN 2015 HUMAN RIGHTS REPORT]" (PDF). United States State Department. [https://web.archive.org/web/20170121013928/https://2009-2017.state.gov/documents/organization/253135.pdf Archived] </ref> 28 फ़रवरी 2026 को, इज़राइल और अमेरिका द्वारा किए गए एक संयुक्त हवाई हमले में ख़ामेनेई की मृत्यु हो गई। <ref>{{Cite web|url=https://uk.news.yahoo.com/irans-supreme-leader-ali-khamenei-194449508.html|title=Iran's Supreme Leader Ali Khamenei killed, senior Israeli official says|date=2026-02-28|website=Yahoo News|language=en-GB|access-date=2026-03-11}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == [[चित्र:Childhood_photo_of_Seyed_Ali_Khamenei.jpg|अंगूठाकार|किशोरावस्था में ख़ामेनेई|बाएँ]] अली ख़ामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को [[मशहद]] में हुआ था। उनके पिता जवाद ख़ामेनेई एक शिया आलिम थे, जिनका जन्म इराक के [[नजफ़]] में हुआ था। उनकी माता ख़दीजेह मीरदमादी थीं। वे आठ भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर थे। <ref>{{Cite web|url=https://farsi.khamenei.ir/memory-content?id=26142|title=نگاهی گذرا به زندگینامه‌ی حضرت آیت‌الله‌العظمی شهید سیدعلی حسینی خامنه‌ای|last=Khamenei.ir|website=farsi.khamenei.ir|language=fa|access-date=2026-03-11|archive-date=28 मई 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250528163839/https://farsi.khamenei.ir/memory-content?id=26142|url-status=dead}}</ref> उनके छोटे भाई हादी ख़ामेनेई भी एक धर्मगुरु और समाचार पत्र संपादक हैं। उनकी बड़ी बहन फ़ातेमा हुसैनी ख़ामेनेई का 2015 में निधन हुआ था। <ref>{{Cite news|url=https://www.baharnews.ir/news/72857/%D8%A8%D9%8A%D9%88%DA%AF%D8%B1%D8%A7%D9%81%D9%8A-%D8%AE%D9%88%D8%A7%D9%87%D8%B1-%D9%85%D8%AA%D9%88%D9%81%D9%8A-%D8%B1%D9%87%D8%A8%D8%B1-%D8%A7%D9%86%D9%82%D9%84%D8%A7%D8%A8|title=بيوگرافي خواهر متوفي رهبر انقلاب - بهار نیوز|last=Behnegarsoft.com|date=2015-03-23|work=پایگاه خبری بهار نیوز|access-date=2026-03-11|language=fa}}</ref> उनके पैतृक पूर्वज अज़रबैजानी तुर्क थे, जो ख़ामनेह (तबरीज़ के निकट) से ताल्लुक रखते थे। उनकी माता [[फ़ारसी लोग|फ़ारसी]] मूल की थीं और यज़्द से थीं। <ref>{{Cite web|url=http://www.thedailybeast.com/blogs-and-stories/2009-02-19/change-comes-to-iran|title=Change Comes to Iran - Page 1 - The Daily Beast|website=www.thedailybeast.com|access-date=2026-03-11}}</ref> उनके पूर्वजों का संबंध अफ़तासी सैय्यदों से माना जाता है, जिनकी वंशावली चौथे शिया इमाम अली अल-सज्जाद से जुड़ती है। उनकी शिक्षा चार वर्ष की आयु में [[क़ुरआन]] के अध्ययन से शुरू हुई। उन्होंने अपने बुनियादी और उच्च स्तर के सेमिनरी (हौज़ा) अध्ययन मशहद में पूरे किए, जहाँ उनके प्रमुख शिक्षक शेख हाशिम क़ज़विनी और आयतुल्लाह मिलानी थे। <ref>{{Cite web|url=https://www.hoover.org/research/khamenei-don-quixote-and-culture-wars|title=Khamenei, Don Quixote, and Culture Wars|website=Hoover Institution|language=en|access-date=2026-03-11}}</ref> मशहद में रहते हुए वे धार्मिक विद्वानों के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवियों और "ख़ुदा-परस्त समाजवादी आंदोलन" के सदस्यों के संपर्क में भी आए। यह आंदोलन [[इस्लामी समाजवाद]] का समर्थक था और [[कार्ल मार्क्स]] तथा [[चे ग्वेरा]] जैसे विचारकों से प्रभावित था। 1957 में वे कुछ समय के लिए [[नजफ़]] गए, लेकिन पिता की इच्छा के कारण जल्द ही मशहद लौट आए। 1958 में वे [[क़ोम]] में बस गए, जहाँ उन्होंने रूहोल्लाह ख़ुमैनी और सैय्यद हुसैन बोरुजर्दी की कक्षाओं में हिस्सा लिया और राजनीति में सक्रिय हो गए। == राष्ट्रपति पद (1981–1989) == [[चित्र:Ali_Khamenei_is_shaking_hand_with_his_left_hand.jpg|अंगूठाकार|असफल हत्या प्रयास के कारण दाहिना हाथ क्षतिग्रस्त होने के बाद बाएँ हाथ से हाथ मिलाते हुए ख़ामेनेई।]] 1981 में राष्ट्रपति मोहम्मद-अली रजाई की हत्या के बाद, अली ख़ामेनेई को 97% मतों के साथ [[ईरान के राष्ट्रपति]] के रूप में चुना गया। वे इस पद पर आसीन होने वाले पहले धर्मगुरु थे। 1985 के चुनाव में उन्हें 87% मतों के साथ पुनः राष्ट्रपति चुना गया। अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत में ही ख़ामेनेई ने वामपंथी और उदारवादी राजनीतिक समूहों को समाप्त करने की घोषणा की। 1980 के दशक के दौरान राजनीतिक विरोधियों और विद्रोही संगठनों के सदस्यों को क्रांतिकारी अदालतों द्वारा दंडित किया गया। <ref>Sadjadpour, Karim (2009). Reading Khamenei – [https://www.carnegieendowment.org/files/sadjadpour_iran_final2.pdf The World View of Iran's Most Powerful Leader] (PDF). Carnegie Endowment for International Peace. [https://web.archive.org/web/20110506210735/http://www.carnegieendowment.org/files/sadjadpour_iran_final2.pdf संग्रहित] </ref> === ईरान–इराक युद्ध के दौरान === [[चित्र:Jumu'ah_pray_Ali_Kamenei_as_Jumu'ah_Imam.jpg|अंगूठाकार|1980 में तेहरान के जुमे के इमाम के रूप में ख़ामेनेई]] 1980 के दशक में ईरान–इराक युद्ध के दौरान ख़ामेनेई देश के प्रमुख सैन्य और राजनीतिक रणनीतिकारों में से एक थे। इसी दौरान उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए। <ref>{{Cite news|url=http://www.newsweek.com/2007/04/05/reign-of-the-melted-ones.html|title=How Ayatollah Khamenei Keeps Control - Newsweek|work=Newsweek|access-date=2026-03-11}}</ref> जब 1982 में इराकी सेना को ईरानी क्षेत्र से खदेड़ दिया गया, तो ख़ामेनेई उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने इराक के भीतर जवाबी हमले का विरोध किया था। === युद्ध के बाद === [[चित्र:Ali_Khamenei_(right)_in_trench_during_Iran-Iraq_war.jpg|अंगूठाकार|255x255पिक्सेल|ईरान–इराक युद्ध के दौरान मोर्चे पर ख़ामेनेई]] 10 अप्रैल 1997 को एक जर्मन अदालत ने माइकोनोस रेस्तरां हत्याकांड के मामले में ईरानी खुफिया मंत्री अली फलाहियन के लिए अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया, और कहा कि यह हत्या सर्वोच्च नेतृत्व (ख़ामेनेई और रफ़संजानी) की जानकारी में कराई गई थी। <ref>{{Cite web|url=http://edition.cnn.com/WORLD/9704/10/germany.iran/|title=CNN - German court implicates Iran leaders in '92 killings - Apr. 10, 1997|website=edition.cnn.com|access-date=2026-03-11|archive-date=26 नवंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131126101651/http://edition.cnn.com/WORLD/9704/10/germany.iran/|url-status=dead}}</ref> ईरानी अधिकारियों ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर पूरी तरह खारिज कर दिया था। इस फैसले के कारण ईरान और कई यूरोपीय देशों के बीच महीनों तक कूटनीतिक तनाव बना रहा। == सर्वोच्च नेता (1989–2026) == === सर्वोच्च नेता के रूप में चुनाव === 1989 में आयतुल्लाह ख़ुमैनी ने अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी आयतुल्लाह मोंतज़ेरी को पद से हटा दिया। 4 जून 1989 को ख़ुमैनी की मृत्यु के बाद, विशेषज्ञों की सभा ने अली ख़ामेनेई को कार्यवाहक सर्वोच्च नेता के रूप में चुना। <ref>{{Cite web|url=http://revolution.pchi.ir/show.php?page=contents&id=13054|title=انقلاب اسلامي {{!}} موسسه مطالعات و پژوهش هاي سياسي|website=revolution.pchi.ir|language=en-US|access-date=2026-03-11|archive-date=21 अगस्त 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170821004931/http://revolution.pchi.ir/show.php?page=contents&id=13054|url-status=dead}}</ref> ==== नेतृत्व परिषद प्रस्ताव ==== [[चित्र:Ali_Khamenei_reading_Will_of_Ruhollah_Khomeini_in_Majlis.jpg|अंगूठाकार|ख़ामेनेई, [[रूहोल्लाह ख़ुमैनी]] की वसीयत पढ़ते हुए — [[विशेषज्ञों की सभा]]]] शुरुआत में विशेषज्ञों की सभा के कुछ सदस्यों ने सत्ता एक व्यक्ति को सौंपने के बजाय "नेतृत्व परिषद" (Leadership Council) का प्रस्ताव रखा था। प्रस्तावित परिषद में अली मश्किनी, अब्दुल-करिम मूसवी अर्दबिली और अली ख़ामेनेई शामिल होते। रफ़संजानी और स्वयं ख़ामेनेई इस प्रस्ताव के विरोध में थे। अंततः 45 सदस्यों ने परिषद के प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। इसके बाद ख़ामेनेई को 74 में से 60 वोटों से सर्वोच्च नेता चुना गया। <ref>{{Cite news|url=http://www.rajanews.com/news/214008|title=روایت شاهدان عینی از تلاش هاشمی برای تصویب شورایی شدن رهبری/ وقتی اصرار آقایان سید احمد خمینی، شبستری، امینی، حائری، مشکینی و ... هاشمی را مجبور به بیان وصیت امام(ره) درباره آیت‎الله خامنه‎ای کرد|last=Rajanews.com|date=2015-06-07|access-date=2026-03-11|language=fa}}</ref> ==== मरजा' मानदंड ==== तत्कालीन संविधान के अनुसार सर्वोच्च नेता का 'मरजा' होना आवश्यक था। चूँकि ख़ामेनेई उस समय केवल 'होज्जत-उल-इस्लाम' थे, इसलिए उन्हें शुरुआत में अस्थायी सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था। <ref>{{Cite web|url=https://en.radiofarda.com/a/video-showing-khamenei-election-supreme-leader/28963611.html|title=Shocking Video Clip From 1989 Shows Khamenei Elected Only For One Year As A Caretaker|date=2018-01-09|website=Radio Free Europe / Radio Liberty|language=en|access-date=2026-03-11}}</ref> 28 जुलाई 1989 के जनमत-संग्रह में संविधान संशोधन कर मरजा' की शर्त हटा दी गई, और 6 अगस्त को विशेषज्ञों की सभा ने उन्हें स्थायी सर्वोच्च नेता के रूप में पुनः पुष्टि की। 29 अगस्त 2022 को शिया इतिहास में पहली बार, काज़िम अल-हायरी ने बीमारी के कारण मरजा' पद से इस्तीफ़ा दिया और अपने अनुयायियों से अली ख़ामेनेई का अनुसरण करने को कहा। <ref>{{Cite web|url=http://burathanews.com/arabic/news/418150|title=بيان لسماحة السيد كاظم الحائري يعلن فيه عدم الاستمرار في التصدي للمرجعية بسبب المرض والتقدم في العمر|last=راضي|first=علي محسن|date=2022-08-29|website=وكالة أنباء براثا|language=ar-iq|access-date=2026-03-11}}</ref> === राजनीतिक रणनीति और दर्शन === [[चित्र:Ayatollah_Ali_Khamenei_at_the_Great_Conference_of_Basij_members_at_Azadi_stadium_October_2018_033.jpg|अंगूठाकार|अज़ादी स्टेडियम में बसीज सदस्यों के सम्मेलन में ख़ामेनेई (2018)]] ख़ुमैनी जैसी करिश्माई धार्मिक स्थिति न होने के कारण, ख़ामेनेई ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सेना और धार्मिक संस्थाओं के भीतर अपना नेटवर्क तैयार किया। उन्होंने देश की हर संस्था (सेना, खुफिया, न्यायपालिका) के समानांतर ढाँचे बनाए ताकि कोई एक संस्था अत्यधिक शक्तिशाली न हो सके। <ref>{{Cite web|url=https://www.washingtoninstitute.org/policy-analysis/islamic-republics-will-survive-likely-nuclear-resistance-unlikely-social-revolt|title=The Islamic Republic's Will to Survive: Likely Nuclear Resistance, Unlikely Social Revolt {{!}} The Washington Institute|website=www.washingtoninstitute.org|language=en|access-date=2026-03-11}}</ref> राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रपति पद की कई शक्तियों को सीमित कर दिया और अर्थव्यवस्था, विदेश नीति तथा सुरक्षा से जुड़े सभी अंतिम निर्णय अपने पास सुरक्षित रखे। == सन्दर्भ == {{reflist}} 2tykohj4divtap85b04oj6aef6dvqrn विकिपीडिया:शैली मार्गदर्शक 4 434654 6536837 6510060 2026-04-06T07:03:28Z संन्यासी 673316 /* लेखों के शीर्षक और उपशीर्षक */ शब्दों का अकारण नुक्ता न लगायें। 6536837 wikitext text/x-wiki यह '''शैली मार्गदर्शक''' [[विकिपीडिया]] पर लेख बनाते हुए उचित शैली का प्रयोग करने में सहायता करेगा। इसे पढ़ने से पहले पक्का कर लें कि आपको विकिपीडिया पर लेख सम्पादित करने आते हैं। अगर नहीं आते तो [[विकिपीडिया:स्वशिक्षा|विकिपीडिया पर स्वशिक्षा]] उपलब्ध है जो आपको तेज़ी से यह करना सिखा देगी। लिखाई स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। साधारण हिन्दी का प्रयोग उत्तम है। तकनीकी, अध्ययनशील और कठिन शब्दों का प्रयोग मत करें। लिखाई साधारण हिन्दीभाषियों को समझ आ जानी चाहिए और इसके लिए ऊँचे स्तर की हिन्दी या किसी क्षेत्र में विशेष अध्ययन की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। जहाँ एक से ज़्यादा शैलियाँ ठीक हों, वहाँ पर संपादकों को एक शैली से अपनी पसंदीदा शैली में लेख परिवर्तित नहीं करने चाहिए। शैली के विषय में बार-बार किसी लेख में फेर-बदल की झड़पें करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मतभेद की स्तिथि में लेख के वार्ता पृष्ठ पर सहमति बनाने की कोशिश करें। अगर किसी लेख की शैली पर सहमति नहीं बनती तो नियम यह है कि उस लेख में सब से पहले जिसने महत्वपूर्ण योगदान दिया लेख उसी की शैली पर आधारित होगा। इस शैली मार्गदर्शक पर आप अपनी राय [[विकिपीडिया वार्ता:शैली मार्गदर्शक|वार्ता पृष्ठ]] पर दे सकते हैं, लेकिन बिना सहमति के इसमें कोई बड़ा बदलाव न करें। ==लेखों के शीर्षक और उपशीर्षक== ===लेख शीर्षक=== लेखों के शीर्षक चुनते हुए कुछ मुख्य नीतियाँ हैं। अगर इन नीतियों में किसी स्थिति में आपसी टकराव होता है तो एक संतुलित दृष्टिकोण लेकर निर्णय करना होगा। ये नीतियाँ इस प्रकार हैं: *शीर्षक [[संज्ञा|संज्ञाओं]] के रूप में होने चाहिए: "जीवन का आरम्भ" उचित है, "जीवन के आरम्भ में" अनुचित है *शीर्षक का पहला या अंतिम अक्षर कोई विराम चिह्न नहीं होना चाहिए → “दिल्ली के राजमार्ग” उचित है, “दिल्ली के राजमार्ग।” अनुचित है ===विभाग आयोजन=== हर लेख को एक आरम्भिक अनुच्छेद के साथ शुरू होना चाहिए। इस अनुच्छेद की अधिक-से-अधिक तीन या चार पंक्तियों से पढ़ने वाले को विषय के बारे में कुछ मुख्य तथ्य पता चल जाने चाहिए। इस हिस्से के बाद लेख के विभाग हो सकते हैं। विभागों के आगे एक-के-अन्दर-एक अपने विभाग भी हो सकते हैं। हर विभाग का नाम और सामग्री समझदारी से चुने ताकि वह लेख के विषय के किसी महत्वपूर्ण पहलु के बारे में जानकारी दे सके। विभाग के शीर्षक ऐसे होने चाहिए कि पढ़ने वाला चाहे तो अपनी जिज्ञासानुसार सीधा अपने मतलब का विभाग ढूँढकर उसे पढ़ सके। अगर किसी विभाग की सामग्री स्वयं बहुत बड़ी है तो उसपर आधारित एक नया लेख बनायें और विभाग के शीर्षक के नीचे {{tlx|main|नए लेख का नाम}} लिख दें ताकि पाठक अधिक जानकारी के लिए चाहे तो वहाँ जा सके। हर लेख के अन्त में कुछ सूचियाँ डाली जा सकती हैं: *'''इन्हें भी देखें''' - यह विकिपीडिया पर वे अन्य लेख होते हैं जो इस लेख में दिलचस्पी रखने वाले पाठक की रूचि के हो सकते हैं। इनकी संख्या बहुत अधिक न रखें। २-६ बहुत हैं। *'''बाहरी कड़ियाँ''' - यह वे कड़ियाँ (जोड़ या लिंक्स) हैं जो विकिपीडिया के बाहर हैं और जहाँ और जानकारी मिल सकती है। *'''सन्दर्भ''' - यह वह स्रोत हैं जो लेख की सामग्री को प्रमाणित करते हैं। याद रखें कि मूल अनुसन्धान विकिपीडिया पर वर्जित है। सन्दर्भ कैसे डाले, यह आप [[विकिपीडिया:स्वशिक्षा/सन्दर्भ|स्वशिक्षा के सन्दर्भ विभाग]] में आसानी से सीख सकते हैं। *'''अन्य सामग्री''' - इसमें आप ऐसी किताबों, फ़िल्मों, गानों, इत्यादि के नाम डाल सकते हैं जो [[अंतरजाल]] (इण्टरनेट) पर नहीं हैं लेकिन जिन्हें इस लेख के पाठक दिलचस्प समझ सकते हैं। ===विभाग शीर्षक=== विभागों में शीर्षक कैसे डालते हैं यह आप [[विकिपीडिया:स्वशिक्षा/रूपरंग|स्वशिक्षा के रूपरंग विभाग]] से सरलता से सीख सकते हैं। ध्यान रहे कि - *विभागों के शीर्षक लेख के शीर्षक से भिन्न होने चाहिए, इन्हें दोहरायें नहीं। अगर लेख का नाम "जापान" है तो उसमें केवल "जापान" नाम का विभाग नहीं होना चाहिए। *शीर्षक छोटे रखें। अगर [[जापान]] के लेख में आप जापान के इतिहास पर विभाग बना रहे हैं, जो उसका नाम "जापान का इतिहास" न रखकर केवल "इतिहास" रखें। [[ख़ुबानी|खुबानी]] के लेख में “कई लाभ जो खुबानी खाने से स्वास्थ्य को होते हैं” अच्छा शीर्षक नहीं है। इसकी बजाय “स्वास्थ्य-सम्बन्धी लाभ” नाम अच्छा रहेगा क्योंकि पूरा लेख ही खुबानियों के बारे में है। *शीर्षकों में जोड़ (लिंक) न डालें। उसके नीचे लिखी सामग्री में जोड़ डाल सकते हैं। *दो विभागों या उपविभागों को एक ही शीर्षक न दें वरना लेख के ऊपर स्वयं बनने वाला अनुक्रम गलत हो सकता है। हर विभाग को उसका अलग शीर्षक दें। ==भाषा-शैली== हिन्दी एक बड़े भू-भाग में बोली जाने वाली बहुराष्ट्रीय भाषा है। अलग स्थानों और वर्गों में इसकी प्रथाएँ भिन्न हैं। शब्दों, शब्द-रूपों, व्याकरण और अन्य शैली-सम्बंधित मामलों में झड़पों से कुछ नियमों के प्रयोग से बचा जा सकता है। ===लेखों के भीतर सामंजस्य=== किसी भी लेख के अन्दर जहाँ तक हो सके एक ही शैली रखें ताकि पाठकों को पढ़ते हुए भाषा सामान्य रूप से बहती हुई लगे। उदहारण के लिए हिन्दी में "किये" और "किए" दोनों सही माने जाते हैं, लेकिन एक लेख के अन्दर इसका एक ही रूप प्रयोग करें। इसी तरह "गंधक" और "गन्धक", "अमेरिका" और "अमरीका", "इंग्लैण्ड" और "इंगलैंड" दोनों ठीक हैं लेकिन एक लेख में इनका एक ही रूप प्रयोग करें वरना पढ़ने में अटपटा लगता है। अगर किसी लेख में आप अपनी पसंद के रूप से भिन्न रूप देखते हैं, कृपया केवल उसे बदलने के लिए उस लेख का संपादन न करें। अलग शैलियों के लिए सहनशीलता दिखाएँ। फिर भी कुछ स्थितियों में इस नियम का उल्लंघन करना उचित है: *'''मूल सामग्री में''' - [[बंजरानामा]] नामक काव्य में "सब ठाठ पड़ा रह जावेगा" टीके के रूप में आता है। लेख में अन्य स्थानों पर मानक हिन्दी का "जाएगा" या "जायेगा" प्रयोग होंगे लेकिन कविता से दर्शाई गयी पंक्तियों में "जावेगा" के मूल रूप को ही रहने दें। *'''पुस्तकों, फ़िल्मों और गानों के शीर्षकों में''' - इनके नाम वैसे ही लिखे जैसे मूल रूप में थे। *'''लोगों और स्थानों के नाम''' - इन्हें भी प्रथानुसार मूल रूप में ही लिखें। *'''जहाँ हिन्दी की भिन्न शैलियों की तुलना की जा रही हो''' - अगर कहा जा रहा है कि भोजपुरी में "आसीस" होता है जबकि मानक हिन्दी में "आशीष" होता है तो इनमें से किसी रूप को न बदलें। ===नुक़्तों का प्रयोग=== हिन्दी में बहुत से शब्दों में अक्षरों में नुक्ते (बिंदु) लगते हैं। लेकिन लेखक कभी इन्हें लगाते हैं और कभी नहीं। ग़ज़ल, ग़जल, गज़ल और गजल सभी प्रयोग होते हैं। जैसा लेख में लिखा गया है, इसे वैसे ही छोड़ दें। इनमें फेर-बदल करने के लिए लेख में सम्पादन न करें। हिन्दीभाषी इन शब्दों को बिन्दुओं के साथ और बिन्दुओं के बिना दोनों स्थितियों में पढ़ने में सक्षम होते हैं। हाँ, अगर बिंदु के प्रयोग या अप्रयोग से शब्द के अर्थ में अंतर पड़ जाए तो उसे ठीक करने के लिए सम्पादन ज़रूर करें। उदाहरण के लिए अगर "ज़ंग" (लोहे पर लगा ज़ंग) की जगह ग़लती से "जंग" (युद्ध) लिखा गया हो, तो उसे ठीक कर दें। ===भाषा में लचक=== हिन्दी एक विस्तृत भाषा है जिसमें कई शब्दों का मिलता-जुलता अर्थ निकलता है। इसका लाभ उठाएँ। एक ही चीज़ के लिए अलग-अलग शब्दों के प्रयोग से भाषा में रस रहता है। प्रयत्न करें कि एक ही शब्द का समीपी वाक्यों में प्रयोग न करें। ऐसा मानकीकरण न करें जिससे भाषा पथरा जाए। उदहारण के लिए "इस दृष्टिकोण के कई मानने वाले हैं और इस नज़रिए को बहुत से विदेशी लोगों ने भी अपनाया है" को "इस दृष्टिकोण के कई मानने वाले हैं और इस दृष्टिकोण को बहुत से विदेशी लोगों ने भी अपनाया है" न बनाए क्योंकि इसमें "दृष्टिकोण" शब्द दोहराने से भाषा सीमित लगती है। ==शब्दों के लघुरूप== लघुरूपों (अब्रिविएशन) के प्रयोग के लिए लेख में जब वह शब्द पहली दफ़ा आए तो उसे अपने पूरे रूप में लिखिए और ब्रैकेट के अन्दर उसका लघु रूप लिख दीजिये। उसके उपरान्त आप लेख में लघुरूप का इस्तेमाल कर सकते हैं। मिसाल के लिए: :द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (द्रमुक) तामिलनाडू की एक राजनैतिक पार्टी है। द्रमुक राज्य में कई बार सत्ता में आ चुकी है। जहाँ लघुरूप हिन्दी के अन्य शब्दों के जैसे लगें और पाठकों के असमंजस में पड़ने का ख़तरा हो वहाँ बिन्दुओं (".") अथवा "॰" चिह्न का प्रयोग करें: :'''अनुचित''': माता नलिनी कर्मस्थल (मानक) एक धार्मिक स्थान है। मानक को हर वर्ष एक करोड़ रूपये का चढ़ावा मिलता है। :'''उचित''': माता नलिनी कर्मस्थल (मा॰न॰क॰) एक धार्मिक स्थान है। मा॰न॰क॰ को हर वर्ष एक करोड़ रूपये का चढ़ावा मिलता है। अन्य भाषाओँ के शब्दों या नामों को अनुवादित कर के उनके लघुरूप न बनाए। [[नासा]] (NASA) अमेरिकी अंतरिक्ष संस्थान "नैश्नल एरोनौटिकल ऐण्ड स्पेस ऐड्मिनिस्ट्रेशन" के अंग्रेज़ी रूप का लघुरूप है। इसे हिन्दी में "राष्ट्रीय वायुमंडल और अंतरिक्ष प्राधिकरण" अनुवादित करके "रावाअंप्रा" लिखना शुरू न करें। इसे "नासा" ही कहें। ==बिन्दुओं (बुलेट) और संख्या वाली सूचियाँ== *बिना कारण के किसी अनुच्छेद को सूची न बनाए। *सूचियों में हर बिंदु के नीचे अकारण ही जगह न छोड़ें। *सूचियों में संख्याएँ केवल तब ही प्रयोग करें जब लेख में आगे उनके बारे में बात करने की आवश्यकता हो। *सूचियों में व्याकरण के अलग रूप न मिलाएँ। उदाहरण के लिए यह ग़लत है क्योंकि पहले दो बिन्दुओं का रूप संज्ञा है और अंतिम वाले का क्रिया है: **तुर्की भाषियों की संख्या **तुर्की भाषियों का इतिहास **कमाल अतातुर्क ने तुर्की भाषा को फैलाया (उचित रूप: कमाल अतातुर्क द्वारा तुर्की भाषा का फैलाना) *सूची के हर बिंदु में या तो विराम का इस्तेमाल करें या न करें, लेकिन ऐसा न करें कि एक में विराम हो और दूसरे में नहीं। यह अनुचित है: **यम को बौना ग्रह माना जाता है **वरुण को ग्रह माना जाता है। (यहाँ विराम नहीं होना चाहिए, अथवा तीनों वाक्यों में विराम होना चाहिए) **सूरज को तारा माना जाता है ==इन्हें भी देखें== *[[विकिपीडिया:स्वशिक्षा]] {{विकिनीतियाँ और दिशानिर्देश}} [[श्रेणी:विकिपीडिया शैली मार्गदर्शक]] 8mupjlxhjrqjkwphpz5ienpkiu0rnuw आर्कीमिडीज सिद्धान्त 0 490598 6536606 6535047 2026-04-05T14:48:26Z Computerbird 803855 Created by translating the section "Explanation" from the page "[[:en:Special:Redirect/revision/1334802202|Archimedes' principle]]" 6536606 wikitext text/x-wiki {{सांतत्यक यांत्रिकी}} [[चित्र:Submerged-and-Displacing.svg|right|thumb|220px|आर्कीमिडीज सिद्धांत का उदाहरण : दूसरी परखनली में जो अतिरिक्त आयतन दिख रहा है वह डूबे हुए ठोस के आयतन के बराबर होगा। ठोस पर द्रव द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल इस अतिरिक्त आयतन के द्रव के भार के बराबर होगा।]] '''आर्कीमिडीज सिद्धान्त''' ({{lang-en|Archimedes's principle}}) [[भौतिक नियम]] है जिसके अनुसार- : किसी तरल माध्यम में किसी वस्तु पर लगने वाला [[उत्प्लावन बल]] उस वस्तु द्वारा विस्थपित तरल के भार के बराबर होगा। अन्य शब्दो में, किसी तरल माध्यम में आंशिक या पूर्णतः डूबी हुई वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन [[बल]] उस वस्तु द्वारा विस्थापित तरल के [[भार]] के बराबर होता है। : <math>E = m\;g = \rho_\text{f}\;g\;V\;</math> या, : <math>\mathbf E = - m\;\mathbf g = - \rho_\text{f}\;\mathbf g\;V\;</math> जहाँ '''E''' = उत्प्लावन बल, : <math>\rho_\text{f}</math> = द्रव का [[घनत्व]], g = [[गुरुत्वजनित त्वरण]], V = द्रव द्वारा हटाये गये द्रव का आयतन आर्कीमिडीज सिद्धान्त [[तरल यांत्रिकी]] का एक महत्वपूर्ण और आधारभूत सिद्धांत है। इस सिद्धान्त का नामकरण इसके आविष्कारक [[आर्किमिडिज़]] के सम्मान में किया गया।<ref name=acottLaw>{{Cite journal |author=Acott, Chris |title=The diving "Law-ers": A brief resume of their lives. |journal=[[South Pacific Underwater Medicine Society]] journal |volume=29 |issue=1 |year=1999 |issn=0813-1988 |oclc=16986801 |url=http://archive.rubicon-foundation.org/5990 |accessdate=2009-06-13 |archive-date=2 अप्रैल 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110402073203/http://archive.rubicon-foundation.org/5990 |url-status=dead }}</ref> [[चित्र:Archimedes water balance.gif|left|300px|इस प्रयोग द्वारा उत्प्लावन बल की उपस्थिति एवं उसका प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। यद्यपि हवा में पलड़े के दोनों ओर की वस्तुओं का भार समान है किन्तु द्रव में डुबाने पर बाँयी तरफ की वस्तु पर अधिक उत्प्लावन बल (ऊपर की ओर) लग रहा है, जिससे इधर का पलड़ा ऊपर हो जाता है। ध्यान दें कि बाँयी तरफ की वस्तु का आयतन दाँयीं तरफ वाली वस्तु के आयतन से अधिक है।]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == Explanation == ऑन फ्लोटिंग बॉडीज ([[यूनानी भाषा|यूनानी]]: Περὶ τῶν ἐπιπλεόντων σωμάτων) में, आर्किमिडीज ने सुझाव दिया कि (सी. 246 ईसा पूर्व) किसी वस्तु को किसी तरल (द्रव अथवा गैस) में पूर्णतया अथवा अंशत: डुबोया जाता है, तो उस पर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल कार्य करता है। आर्किमिडीज का सिद्धान्त किसी भी तैरती हुई वस्तु की उत्प्लावनता की गणना करने की अनुमति देता है जो पक्षपात से अथवा पूर्णतया एक तरल में डूबी हुई हो। वस्तु पर नीचे की ओर बल केवल उसका वजन है। वस्तु पर ऊपर की ओर, अथवा उत्प्लावक, बल वह है जो ऊपर आर्किमिडीज के सिद्धान्त द्वारा बताया गया है। इस प्रकार, वस्तु पर शुद्ध बल उत्प्लावक बल तथा उसके भार के परिमाण के बीच का अन्तर है। यदि यह शुद्ध बल धनात्मक है तो वस्तु ऋणात्मक होने पर ऊपर उठती है, वस्तु डूब जाती है तथा यदि शून्य हो तो वस्तु तटस्थ रूप से उत्प्लावक होती है-अर्थात यह बिना ऊपर उठे अथवा डूबने के अपने स्थान पर बनी रहती है। सरल शब्दों में, आर्किमिडीज का सिद्धान्त बताता है कि, जब कोई वस्तु आंशिक रूप से अथवा पूरी तरह से किसी तरल में डूबा होता है, तो यह वजन में एक स्पष्ट कमी का अनुभव करता है जो वस्तु के डूबे हुए हिस्से द्वारा विस्थापित तरल पदार्थ के वजन के समकक्ष होता है। == इन्हें भी देखें== *[[तरल यांत्रिकी]] *[[तरलगतिकी]] *[[द्रवस्थैतिकी]] [[श्रेणी:यूनानी वैज्ञानिक]] [[श्रेणी:भौतिकी के सिद्धांत]] [[श्रेणी:वैज्ञानिक नियम]] t9uavvehl5o0d5tl6en2ufmmvi56i58 बुड्ढा होगा तेरा बाप 0 528095 6536709 4778314 2026-04-05T21:29:39Z ~2026-21080-33 918970 Its 2011, not 2001 6536709 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = बुड्ढा... होगा तेरा बाप | image = Bbuddah Poster.jpg | caption = सिनेमा पोस्टर | director = [[पुरी जगन्नाथ]] | producer = [[अभिषेक बच्चन]]<br>पुरी जगन्नाथ <br>[[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स]] | screenplay = | story = पुरी जगन्नाथ | based on = <!-- {{based on|title of the original work|writer of the original work}} --> | starring = [[अमिताभ बच्चन]]<br>[[हेमा मालिनी]]<br>[[सोनू सूद]]<br>[[प्रकाश राय]]<br>[[सोनल चौहान]]<br>[[रवीना टंडन]]<br>[[चार्मी कौर]] | music = [[विशाल-शेखर]] | cinematography = अमोल राठौड़ | editing = एस आर शेखर | studio = | distributor = [[अमिताभ बच्चन कार्पोरेशन लिमिटेड]]<br>[[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स| वायाकॉम 18 मोशन पिक्चर्स]] | released = {{Film date|df=yes|2011|7|1|}} | runtime = 114 मिनट | country = भारत | language = हिन्दी | budget = {{INRConvert|10|c}} | gross = {{INRConvert|52.6|c}} }} '''''बुड्ढा... होगा तेरा बाप''''' (पूर्व शीर्षक ''बुड्ढा'') २०११ में बनी एक [[हिन्दी सिनेमा|बॉलीवुड]] [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी चलचित्र]] है। इसका निर्देशन [[पुरी जगन्नाथ]] ने अपनी दूसरी हिन्दी फ़िल्म के रूप में किया था। पहली फ़िल्म थी ''[[शर्त: द चैलेंज]]''। इस फ़िल्म में मुख्य अभिनय [[अमिताभ बच्चन]], [[हेमा मालिनी]], [[सोनू सूद]], [[प्रकाश राय]], [[चार्मी कौर]], [[सोनल चौहान]] एवं [[रवीना टंडन|रवीना टण्डन]] ने किये हैं। यह फ़िल्म १ जुलाई २०११ को रिलीज़ हुई थी और इसे आलोचकों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलीं।<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/site/story/bollywood-celebs-praise-delhi-belly-bbuddah-hoga-tera-baap/1/143460.html|title=B-town praises Delhi Belly, Bbuddah Hoga Tera Baap|publisher=इंडिया टुडे|accessdate=2 जुलाई 2011|archiveurl=https://web.archive.org/web/20110712221145/http://indiatoday.intoday.in/site/story/bollywood-celebs-praise-delhi-belly-bbuddah-hoga-tera-baap/1/143460.html|archivedate=12 जुलाई 2011|url-status=live}}</ref> == ध्वनिपथ == {{Infobox album | Name = बुड्ढा... होगा तेरा बाप | Type = साउण्डट्रैक | Artist = [[विशाल-शेखर]] | Cover = | Released = 13 जून 2011 | Recorded = | Genre = फ़िल्म ध्वनिपथ | Length = | Label = [[टी-सीरीज़]] | Producer = }} फ़िल्म का संगीत [[विशाल-शेखर]] ने दिया है और गीत [[अन्विता दत्त गुप्तन]], [[विशाल ददलानी]] एवं [[स्वानंद किरकिरा]] द्वारा लिखे गये हैं। === ट्रैक सूची === {{Track listing | extra_column = गायक | lyrics_credits = yes | title1 = बुड्ढा... होगा तेरा बाप | extra1 = [[अमिताभ बच्चन]] | lyrics1 = [[विशाल ददलानी]] | length1 = 2:46 | title2 = बुड्ढा... होगा तेरा बाप (Dub Step) | extra2 = अमिताभ बच्चन, विशाल ददलानी | lyrics2 = विशाल ददलानी | length2 = 3:21 | title3 = गो मीरा गो | extra3 = अमिताभ बच्चन, [[अभिषेक बच्चन]] | length3 = 6:42 | lyrics3 = [[अन्विता दत्त गुप्तन]] | title4 = हाल-ए-दिल | extra4 = अमिताभ बच्चन, [[मोनाली ठाकुर]], [[शेखर रावजियानी]] | lyrics4 = [[स्वानन्द किरकिरे|स्वानंद किरकिरे]], अन्विता दत्त गुप्तन | length4 = 5:20 | title5 = मैं चण्डीगढ़ दी स्टार | extra5 = [[सुनिधि चौहान]] | lyrics5 = अन्विता दत्त गुप्तन | length5 = 3:18 }} == सन्दर्भ == {{Reflist|2}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{Official website|http://www.bigbisback.com}} * {{IMDb title|1869296|बुड्ढा... होगा तेरा बाप}} * {{Bollywoodhungama|14428|बुड्ढा... होगा तेरा बाप}} [[श्रेणी:2011 में बनी हिन्दी फ़िल्म]] ahyg73nm0gv21jc55gjgixexel5pv25 मॉड्यूल:Convert/data 828 531142 6536694 6534590 2026-04-05T20:05:54Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) के अवतरण 6352954 पर पुनर्स्थापित : संपादक ने हिंदी का अंग्रेजी में अनुवाद किया था 6536694 Scribunto text/plain -- Conversion data used by [[Module:Convert]] which uses mw.loadData() for -- read-only access to this module so that it is loaded only once per page. -- See [[:en:Template:Convert/Transwiki guide]] if copying to another wiki. -- -- These data tables follow: -- all_units all properties for a unit, including default output -- default_exceptions exceptions for default output ('kg' and 'g' have different defaults) -- link_exceptions exceptions for links ('kg' and 'g' have different links) -- -- These tables are generated by a script which reads the wikitext 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impgal", }, ["U.S.drybbl"] = { target = "USdrybbl", sp_us = true, }, ["U.S.drygal"] = { target = "USdrygal", sp_us = true, }, ["U.S.drypt"] = { target = "USdrypt", sp_us = true, }, ["U.S.dryqt"] = { target = "USdryqt", sp_us = true, }, ["U.S.flgal"] = { target = "USflgal", sp_us = true, }, ["U.S.floz"] = { target = "USoz", sp_us = true, }, ["U.S.gal"] = { target = "USgal", sp_us = true, default = "L impgal", link = "U.S. gallon", }, ["u.s.gal"] = { target = "USgal", sp_us = true, default = "L impgal", link = "U.S. gallon", }, ["U.S.gi"] = { target = "USgi", sp_us = true, }, ["U.S.kenning"] = { target = "USkenning", sp_us = true, }, ["U.S.oz"] = { target = "USoz", sp_us = true, }, ["U.S.pk"] = { target = "USpk", sp_us = true, }, ["U.S.pt"] = { target = "USpt", sp_us = true, }, ["U.S.qt"] = { target = "USqt", sp_us = true, default = "L impqt", customary= 2, }, ["usbbl"] = { target = "USbbl", }, ["usbeerbbl"] = { target = "USbeerbbl", }, ["usbsh"] = { target = "USbsh", }, ["usbu"] = { 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= { combination= { "ft", "mi" }, multiple = { 5280 }, utype = "लंबाई", }, ["ydftin"] = { combination= { "in", "ft", "yd" }, multiple = { 12, 3 }, utype = "लंबाई", }, ["ydft"] = { combination= { "ft", "yd" }, multiple = { 3 }, utype = "लंबाई", }, ["ftin"] = { combination= { "in", "ft" }, multiple = { 12 }, utype = "लंबाई", }, ["footin"] = { combination= { "in", "foot" }, multiple = { 12 }, utype = "लंबाई", }, ["handin"] = { combination= { "in", "hand" }, multiple = { 4 }, utype = "लंबाई", }, ["lboz"] = { combination= { "oz", "lb" }, multiple = { 16 }, utype = "द्रव्यमान", }, ["stlb"] = { combination= { "lb", "st" }, multiple = { 14 }, utype = "द्रव्यमान", }, ["stlboz"] = { combination= { "oz", "lb", "st" }, multiple = { 16, 14 }, utype = "द्रव्यमान", }, ["st and lb"] = { combination= { "lb", "st" }, multiple = { 14 }, utype = "द्रव्यमान", }, ["GN LTf"] = { combination= { "GN", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["GN LTf STf"] = { combination= { "GN", "-LTf", "-STf" }, utype = "बल", }, ["GN STf"] = { combination= { "GN", "-STf" }, utype = "बल", }, ["GN STf LTf"] = { combination= { "GN", "-STf", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["kN LTf"] = { combination= { "kN", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["kN LTf STf"] = { combination= { "kN", "-LTf", "-STf" }, utype = "बल", }, ["kN STf"] = { combination= { "kN", "-STf" }, utype = "बल", }, ["kN STf LTf"] = { combination= { "kN", "-STf", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["LTf STf"] = { combination= { "-LTf", "-STf" }, utype = "बल", }, ["MN LTf"] = { combination= { "MN", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["MN LTf STf"] = { combination= { "MN", "-LTf", "-STf" }, utype = "बल", }, ["MN STf"] = { combination= { "MN", "-STf" }, utype = "बल", }, ["MN STf LTf"] = { combination= { "MN", "-STf", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["STf LTf"] = { combination= { "-STf", "-LTf" }, utype = "बल", }, ["L/100 km mpgimp"] = { combination= { "L/100 km", "mpgimp" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["l/100 km mpgimp"] = { combination= { "l/100 km", "mpgimp" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["L/100 km mpgUS"] = { combination= { "L/100 km", "mpgus" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["L/100 km mpgus"] = { combination= { "L/100 km", "mpgus" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["l/100 km mpgus"] = { combination= { "l/100 km", "mpgus" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["mpgimp L/100 km"] = { combination= { "mpgimp", "L/100 km" }, utype = "ईंधन दक्षता", }, ["LT ST t"] = { combination= { "lt", "-ST", "t" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["LT t ST"] = { combination= { "lt", "t", "-ST" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["ST LT t"] = { combination= { "-ST", "lt", "t" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["ST t LT"] = { combination= { "-ST", "t", "lt" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["t LT ST"] = { combination= { "t", "lt", "-ST" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["ton"] = { combination= { "LT", "ST" }, utype = "द्रव्यमान", }, ["kPa kg/cm2"] = { combination= { "kPa", "kgf/cm2" }, utype = "pressure", }, ["kPa lb/in2"] = { combination= { "kPa", "-lb/in2" }, utype = "pressure", }, ["floz"] = { combination= { "impoz", "USoz" }, utype = "आयतन", }, } --------------------------------------------------------------------------- -- Do not change the data in this table because it is created by running -- -- a script that reads the wikitext from a wiki page (see note above). -- --------------------------------------------------------------------------- local default_exceptions = { -- Prefixed units with a default different from that of the base unit. -- Each key item is a prefixed symbol (unitcode for engineering notation). ["cm<sup>2</sup>"] = "sqin", ["dm<sup>2</sup>"] = "sqin", ["e3acre"] = "km2", ["e3m2"] = "e6sqft", ["e6acre"] = "km2", ["e6ha"] = "e6acre", ["e6km2"] = "e6sqmi", ["e6m2"] = "e6sqft", ["e6sqft"] = "v * 9.290304 < 100 ! e3 ! e6 ! m2", ["e6sqmi"] = "e6km2", ["hm<sup>2</sup>"] = "acre", ["km<sup>2</sup>"] = "sqmi", ["mm<sup>2</sup>"] = "sqin", ["aJ"] = "eV", ["e3BTU"] = "MJ", ["e6BTU"] = "GJ", ["EJ"] = "kWh", ["fJ"] = "keV", ["GJ"] = "kWh", ["MJ"] = "kWh", ["PJ"] = "kWh", ["pJ"] = "MeV", ["TJ"] = "kWh", ["YJ"] = "kWh", ["yJ"] = "μeV", ["ZJ"] = "kWh", ["zJ"] = "meV", ["e12cuft/a"] = "v * 2.8316846592 < 100 ! e9 ! e12 ! m3/a", ["e12cuft/d"] = "v * 2.8316846592 < 100 ! e9 ! e12 ! m3/d", ["e12m3/a"] = "Tcuft/a", ["e12m3/d"] = "Tcuft/d", ["e3cuft/a"] = "v * 2.8316846592 < 100 ! ! e3 ! m3/a", ["e3cuft/d"] = "v * 2.8316846592 < 100 ! ! e3 ! m3/d", ["e3cuft/s"] = "v * 2.8316846592 < 100 ! ! e3 ! m3/s", ["e3m3/a"] = "v < 28.316846592 ! k ! M ! cuft/a", ["e3m3/d"] = "v < 28.316846592 ! k ! 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e2tsa5gz5fv33ou7ojyu02zei1ph8s9 6536903 6536893 2026-04-06T09:20:49Z AMAN KUMAR 911487 सुधार किया तथा गोपनीय सूचना हटाई 6536903 wikitext text/x-wiki '''पिलानिया''' (अंग्रेज़ी: Pilania) अथवा '''पिलाणिया''' भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक प्रमुख [[जाट]] गोत्र है। इस गोत्र के लोग मुख्य रूप से भारत के [[राजस्थान]], [[हरियाणा]] और [[उत्तर प्रदेश]] राज्यों में निवास करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mahendragarh.gov.in/public-utility/government-senior-secondary-school-surethi-pilania/|title=Government Senior Secondary School, Surethi Pilania {{!}} DISTRICT MAHENDRAGARH, GOVERNMENT OF HARYANA {{!}} India|language=en-US|access-date=2026-04-06}}</ref> ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पिलानिया गोत्र का अपना एक समृद्ध इतिहास रहा है। कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में स्थित ऐतिहासिक 'ऊंचा गाँव' और वहाँ के किले (Unchagaon Mud Fort) का संबंध पिलानिया जाट शासकों से रहा है, जिनका तत्कालीन तोमर राजवंश से भी पारिवारिक संबंध था।<ref>{{Cite web|url=https://www.prarang.in/meerut/posts/5463/History-of-Jats-hidden-around-Meerut%7Ctitle=%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%A0|title=मेरठ के आसपास छिपा जाटों का इतिहास|website=Prarang|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> कुछ मान्यताओं और लोक-इतिहास के अनुसार, पिलानिया गोत्र मूल रूप से 'उप्पल' जाट गोत्र की ही एक शाखा है। ऐसा माना जाता है कि 'पिलाना' नामक गाँव को बसाने के कारण कालान्तर में इस शाखा के लोग 'पिलानिया' कहलाने लगे।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Caste_State_and_Society/vfn1DwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%22Pilania%22+Jat&pg=PT241&printsec=frontcover|title=Caste, State and Society: Degrees of Democracy in North India|last=Singh|first=Jagpal|date=2020-10-07|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-1-000-19606-1|language=en}}</ref> वर्तमान में इस गोत्र के सदस्य मुख्य रूप से कृषि, भारतीय सशस्त्र बलों, राजनीति और प्रशासनिक सेवाओं में अपना सक्रिय योगदान दे रहे हैं। राजस्थान के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और राज्यसभा के पूर्व सांसद ज्ञान प्रकाश पिलानिया इसी गोत्र के एक प्रमुख और चर्चित व्यक्तित्व हैं।<ref>{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/rajasthan/jaipur/rajasthan-former-dgp-and-jat-leader-dr-gyanprakash-pilania-passed-away/articleshow/114194570.cms|title=राजस्थान के पूर्व DGP और जाट नेता डॉ. ज्ञानप्रकाश पिलानिया का निधन, जानिए इनके बारे में|website=Navbharat Times|language=hi|access-date=2026-04-06}}</ref> == इन्हें भी देखें == == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} {{जाट गोत्र}} [[श्रेणी:जाट गोत्र]] 09cxd0xlg5zo2su1slusbzgdih4y1nq तानाजी मालुसरे 0 551162 6536735 6478250 2026-04-06T02:45:40Z ~2026-21103-37 918986 6536735 wikitext text/x-wiki {{Infobox military person|name=सूबेदार सरदार तानाजी राव मालूसरे|honorific suffix=शेर-ए-शिवाजी|honorific prefix=सेनापति|image=[[File:Tanaji's famous vow during Kondana campaign “Aadhi lagin kondhanyache mag mazya Raybache”.jpg|thumb]]|caption=तानाजी मालूसरे [[सिंहगढ़ का युद्ध|सिंहगढ़ के युद्ध]] पर जाने से पहले|native_name=ताणाजी माळुसरे|nickname=[[शिवाजी]] के शेर|birth_name=तानाजी|birth_place=[[महाबलेश्वर]]|death_date=4 फरवरी 1670|death_place=[[सिंहगढ़]], [[पुणे]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]|allegiance=[[मराठा साम्राज्य]]|branch=[[मराठा सेना]]|rank=[[सूबेदार]]|battles=[[सिंहगढ़ का युद्ध]]|relations=रायभा एवं उमाबाई (बेटा-बेटी), [[देशमुख]] साहेब कालोजी राव मालूसरे एवं पार्वती बाई (माता-पिता),}} '''तानाजी मालूसरे''' [[मराठा साम्राज्य]] के [[मराठा सेना]] मे [[कोली|वीर]] [[सूबेदार]] सरदार थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=QNA-AQAAIAAJ&dq=Tanaji&q=Tanaji&redir_esc=y&hl=en|title=Histories for the Subordinated|last=Hardiman|first=David|date=2007|publisher=Seagull Books|isbn=978-1-905422-38-8|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=8EsfAQAAIAAJ&q=inauthor:%22David+Hardiman%22+tanaji&dq=inauthor:%22David+Hardiman%22+tanaji&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjA4-jQ-pHnAhUFjeYKHeicBb0Q6AEIJDAB|title=Feeding the Baniya: Peasants and Usurers in Western India|last=Hardiman|first=David|date=1996|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-563956-8|language=en}}</ref> वे [[शिवाजी|छत्रपति शिवाजी महाराज]] के साथ [[मराठा साम्राज्य]], [[हिंदवी स्वराज्य]] स्थापना के लिए सूबेदार (किल्लेदार) की भूमिका निभाते थे । तानाजी छत्रपति [[शिवाजी]] [[महाराजा|महाराज]] के बचपन के मित्र थे वे बचपन मे एक साथ खेले थे <ref>{{Cite web|url=www.bhaskar.com|title=किला जितने के बाद हुए थे मराठा सरदार वीरगति को प्राप्त, तिलक से यही मिले थे नेताजी औेर महात्मा गांधीजी.|last=भास्कर|first=दैनिक|date=०५ जुलै २०१७|website=दैनिक भास्कर|publisher=दैनिक भास्कर|language=हिंदी|archive-url=https://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-infog-unknown-facts-of-punes-sinhagad-fort-5638564-NOR.html|archive-date=०५ जुलै २०१७|dead-url=|access-date=२४ ऑक्टोबर २०१९}}</ref> वें १६७० ई. में [[सिंहगढ़ का युद्ध|सिंहगढ़ की लड़ाई]] में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। उस दिन सुभेदार तानाजी मालुसरेजी के पुत्र रायबा के विवाह की तैयारी हो रही थी, तानाजी मालुसरे जी छत्रपती शिवाजी महाराज जी को आमंत्रित करने पहुंचे तब उन्हें ज्ञात हुआ की कोंढाणा पर छत्रपती शिवाजी महाराज चढ़ाई करने वाले हैं, तब तानाजी मालुसरे जी ने कहा राजे मैं कोंढाणा पर आक्रमण करुंगा |''अपने पुत्र रायबा के विवाह'' <ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-infog-unknown-facts-of-punes-sinhagad-fort-5638564-NOR.html|title=किला . के बाद हुए थे मराठा सरदार वीरगति को प्राप्त, याही मुले थे तिलक नेताजी एवं महात्मा गांधी जी से.|last=भास्कर|first=दैनिक|date=०५ जुलै २०१७|website=www.dainikBhaskar.com|publisher=दैनिक भास्कर|archive-url=https://web.archive.org/web/20191023221201/https://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-infog-unknown-facts-of-punes-sinhagad-fort-5638564-NOR.html|archive-date=23 अक्तूबर 2019|dead-url=|access-date=२४ ऑक्टोबर २०१९|url-status=live}}</ref> जैसे महत्वपूर्ण कार्य को महत्व न देते हुए उन्होने शिवाजी महाराज की इच्छा का मान रखते हुए [[कोंढाणा किला]] जीतना ज़्यादा जरुरी समझा। छत्रपती शिवाजी महाराज जी की सेना मे कई सरदार थे परंतु [[छत्रपति]] शिवाजी महाराज जी ने वीर तानाजी मालुसरे जी को कोंंढाना आक्रमण के लिए चुना<ref>{{Cite web|url=www.dainikbhaskar.com|title=छत्रपति शिवाजी महाराज ने तानाजी मालुसरे जी को कोंढाणा किल्ला पर आक्रमण के लिये चुना.|last=भास्कर|first=दैनिक|date=०५ जुलै २०१७|website=दैनिक भास्कर|publisher=Dainik Bhaskar|archive-url=https://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-infog-unknown-facts-of-punes-sinhagad-fort-5638564-NOR.html|archive-date=०५ जुलै २०१७|dead-url=|access-date=२४ ऑक्टोबर २०१९}}</ref> और कोंढणा "स्वराज्य" में शामिल हो गया लेकिन तानाजी मारे गए थे। छत्रपति शिवाजी ने जब यह समाचार सुनी तो वो बोल पड़े "गढ़ तो जीत लिया, लेकिन मेरा "सिंह" नहीं रहा ([[मराठी]] - ''गढ़ आला पण सिंह गेला'')। ==इतिहास== तानाजीराव का जन्म [[सत्रहवीं शताब्दी|17वीं]] शताब्दी में [[महाराष्ट्र]] के [[कोंकण]] प्रान्त में [[महाड़|महाड]] के पास 'उमरथे' में हुआ था। वे बचपन से छत्रपति शिवाजी के साथी थे। ताना और शिवा एक-दूसरे को बहुत अछी तरह से जानते थे। तानाजीराव, शिवाजी के साथ हर लड़ाई में शामिल होते थे। ऐसे ही एक बार शिवाजी महाराज की माताजी लाल महल से कोंडाना किले की ओर देख रहीं थीं। तब शिवाजी ने उनके मन की बात पूछी तो जिजाऊ माता ने कहा कि इस किले पर लगा हरा झण्डा हमारे मन को उद्विग्न कर रहा है। उसके दूसरे दिन शिवाजी महाराज ने अपने राजसभा में सभी सैनिकों को बुलाया और पूछा कि कोंडाना किला जीतने के लिए कौन जायेगा? किसी भी अन्य [[सरदार]] और किलेदार को यह कार्य कर पाने का साहस नहीं हुआ किन्तु तानाजी ने चुनौती स्वीकार की और बोले, "मैं जीतकर लाऊंगा कोंडाना किला"। तानाजीराव के साथ उनके भाई सूर्याजी मालुसरे और मामा ( शेलार मामा) थे। वह पूरे ३४२ सैनिकों के साथ निकले थे। तानाजीराव मालुसरे शरीर से हट्टे-कट्टे और शक्तिपूर्ण थे। कोंडाणा का किला रणनीतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित था और शिवाजी को इसे कब्जा करना के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। Writer ifo कोंडाणा तक पहुंचने पर, तानाजी और ३४२ सैनिकों की उनकी टुकड़ी ने पश्चिमी भाग से किले को एक घनी अंधेरी रात को [[घोरपड़]] नामक एक [[सरीसृप]] की मदद से खड़ी चट्टान को मापने का फैसला किया। घोरपड़ को किसी भी ऊर्ध्व सतह पर खड़ी कर सकते हैं और कई पुरुषों का भार इसके साथ बंधी रस्सी ले सकती है। इसी योजना से तानाजी और उनके बहुत से साथी चुपचाप किले पर चढ़ गए। कोंडाणा का कल्याण दरवाजा खोलने के बाद मुग़लों पर हमला किया। किला [[उदयभान राठौड़]] द्वारा नियंत्रित किया जाता था, जो राजकुमार [[जय सिंह प्रथम|जय सिंह-१]] द्वारा नियुक्त किया गया था। उदय भान राठौड़ के नेतृत्व में ५००० मुगल सैनिकों के साथ तानाजी का भयंकर भयंकर युद्ध हुआ। तानाजी एक लड़ाई लड़े । इस किले को अन्ततः जीत लिया गया, लेकिन इस प्रक्रिया में, तानाजी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। जब छत्रपती शिवाजी महाराज जी को यह दुःखद वार्ता मिली तो वे अत्यंत दुखी एवं आहात हुये। छत्रपती शिवाजी महाराज ने काहा - मराठी - '''गढ़ आला, पण सिंह गेला''' अर्थ -"हमने गढ़ तो जीत लिया, लेकिन मेने मेरा सिंह खो दिया। ==स्मारक== तानाजी मालुसरे की स्मृति में कोंढाणा दुर्ग का नाम बदलकर [[सिंहगढ़]] कर दिया गया है। [[पुणे]] नगर के 'वाकडेवाडी' नामक भाग का नाम बदलकर 'नरबीर तानाजी वाडी' कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त तानाजी के अनेकों स्मारक हैं। ==कोंढाणा किले का युद्ध== छत्रपति शिवाजी महाराज जी के परममित्र सूबेदार तानाजी मालुसरे जी ने बड़े वीरता का परिचय देते हुये कोंढाणा किले को, उसके पास के क्षेत्र को मुगलों के कब्जे से स्वतंत्र कराया. इस युद्ध के समय जब उनकी ढाल टूट गई तो तानाजी मालुसरे जी ने अपने सिर के फेटे (पगड़ी) को अपने हाथ पर बांधा और तलवार के वार अपने हाथों पर लिये एक हाथ से वे वायु की तेज गती से तलवार चलाते रहे. कोंढाणा किले के किलेदार उदयभान सिंह राठौड़ से तानाजी मालुसरे जी ने युद्ध किया और ढाल टूटने के कारण उदयभान की तलवार के वार से तानाजी मालुसरे का एक हाथ कट गया और लड़ाई मे एक हाथ से लड़ते हुए तानाजी मालुसरे ने उदयभान सिंह राठौड़ को मार डाला। युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के कारण तानाजी ने अपने प्राण त्याग दिये । तानाजी के भाई सूर्याजी मालुसरे ने कोंढाणा पर भगवा लहराया। शिवाजी महाराज ने कोंढाणा पर पहुंच कर देखा तो उन्होंने तानाजी को मृत पाया। उनकी मृत देह को देखकर शिवाजी महाराज रोने लगे और कहा "गढ़ आणा पण सिंह गेला" अर्थात् किला तो हाथ आ गया लेकिन मेरा शेर तानाजी चला गया। शिवाजी ने तानाजी मालुसरे के नाम पर किले का नाम कोंढाणा से बदलकर सिंहगढ़ रख दिया। साथ ही पुणे के नरबीर वाकेवाडी नामक स्थान का नाम बदलकर नरबीर तानाजी वाडी रख दिया गया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == इन्हें भी देखें== * [[बावन मावल]] * [[सिंहगढ़]] * [[बाजीप्रभु देशपाण्डे|बाजीप्रभु देशपाण]] == बाहरी कड़ियाँ== *[https://web.archive.org/web/20140201182710/http://www.hindujagruti.org/hindi/h/90.html तानाजी मालुसरे की वीरता तथा त्याग] *[https://web.archive.org/web/20141203225848/http://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%80 तानाजी] (भारत खोज * [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] [[श्रेणी:मराठा साम्राज्य]] १. https://web.archive.org/web/20191023221201/https://www.bhaskar.com/news/MH-PUN-HMU-infog-unknown-facts-of-punes-sinhagad-fort-5638564-NOR.html [[श्रेणी:कोली]] tcnpru53e4v7dxc0dw8d37mdd4z1ds0 सदस्य वार्ता:Zaifox 3 555703 6536573 2309228 2026-04-05T12:14:49Z Ternarius 514430 Ternarius ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:MrZaimon1122]] को [[सदस्य वार्ता:Zaifox]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/MrZaimon1122|MrZaimon1122]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Zaifox|Zaifox]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 2309228 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=MrZaimon1122}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 21:43, 22 फ़रवरी 2014 (UTC) t02a292hc5vcdnk0mkpjdglpiylsedr सदस्य वार्ता:Sanjeev bot 3 582324 6536911 6475528 2026-04-06T09:32:11Z Sanjeev bot 127039 [[Special:Contributions/Gamerzer|Gamerzer]] ([[User talk:Gamerzer|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6456296 wikitext text/x-wiki #अनुप्रेषित [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार]] e6trls33kyc5175idp6imq9dkzjxepr आदित्य रॉय कपूर 0 592449 6536566 6513243 2026-04-05T12:07:18Z ~2026-21004-02 918899 6536566 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति | name = आदित्य रॉय कपूर | image = Aditya Roy Kapur spotted at the gym in Bandra.jpg | caption = | birth_name = | birth_date = {{birth date and age|df=yes|1985|11|16}} | birth_place = [[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]] | years_active = 2009–present. | occupation = [[फ़िल्म अभिनेता]] }} '''आदित्य रॉय कपूर''' हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। वह हाल ही में [[करण जौहर]] की फिल्म [[कलंक]] में दिखाई दिए।<ref name="thehindu">{{cite news|last1=Nair Anand|first1=Shilpa|title=तो मॉडल गर्लफ्रेंड संग अगले साल शादी रचा सकते हैं आदित्य रॉय कपूर|url=https://aajtak.intoday.in/story/aditya-roy-kapur-to-marry-rumoured-girlfriend-diva-dhawan-in-2020-tmov-1-1112734.html|work=[[आज तक]]|date=22 अगस्त 2019|access-date=24 नवंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190913181852/https://aajtak.intoday.in/story/aditya-roy-kapur-to-marry-rumoured-girlfriend-diva-dhawan-in-2020-tmov-1-1112734.html|archive-date=13 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> ==फ़िल्में== {| class="wikitable" |- ! साल !! फ़िल्म !! किरदार !! टिप्पणी |- | 2009 || ''[[लन्दन ड्रीम्स]]'' || वसीम खान || |- | 2010 || ''[[एक्शन रीप्ले]]'' || बंटी || |- | 2010 || ''[[गुज़ारिश]]'' || उमर सिद्दीकी || |- | 2013 || ''[[आशिकी 2]]'' || राहुल जयकर || |- | 2013 || ''[[ये जवानी है दीवानी]]'' || अविनाश "अवी" अरोड़ा || |- | 2014 || ''[[दावत-ए-इश्क (फ़िल्म)|दावत-ए-इश्क]]'' || तारिक "तारू" हैदर || |- | 2015 || ''[[फितूर]]'' || || नूर |- | 2017 || ''[[ओके जानू]] || |- |2020 |मलंग | |- |2023 |गुमराह | |- |2025 |मेट्रो... इन दिनों | |} Newest Movies upcoming == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|3169069}} [[श्रेणी:अभिनेता]] [[श्रेणी:1985 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेता]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:हिन्दी अभिनेता]] [[श्रेणी:भारतीय अभिनेता]] 5pv7h6fkf8nraanhddmzbiwqwuuvf91 6536590 6536566 2026-04-05T13:14:52Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/~2026-21004-02|~2026-21004-02]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21004-02|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: - 6536590 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति | name = आदित्य रॉय कपूर | image = Aditya Roy Kapur spotted at the gym in Bandra.jpg | caption = | birth_name = | birth_date = {{birth date and age|df=yes|1985|11|16}} | birth_place = [[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]] | years_active = 2009–present. | occupation = [[फ़िल्म अभिनेता]] }} '''आदित्य रॉय कपूर''' हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। वह हाल ही में [[करण जौहर]] की फिल्म [[कलंक]] में दिखाई दिए।<ref name="thehindu">{{cite news|last1=Nair Anand|first1=Shilpa|title=तो मॉडल गर्लफ्रेंड संग अगले साल शादी रचा सकते हैं आदित्य रॉय कपूर|url=https://aajtak.intoday.in/story/aditya-roy-kapur-to-marry-rumoured-girlfriend-diva-dhawan-in-2020-tmov-1-1112734.html|work=[[आज तक]]|date=22 अगस्त 2019|access-date=24 नवंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190913181852/https://aajtak.intoday.in/story/aditya-roy-kapur-to-marry-rumoured-girlfriend-diva-dhawan-in-2020-tmov-1-1112734.html|archive-date=13 सितंबर 2019|url-status=live}}</ref> ==फ़िल्में== {| class="wikitable" |- ! साल !! फ़िल्म !! किरदार !! टिप्पणी |- | 2009 || ''[[लन्दन ड्रीम्स]]'' || वसीम खान || |- | 2010 || ''[[एक्शन रीप्ले]]'' || बंटी || |- | 2010 || ''[[गुज़ारिश]]'' || उमर सिद्दीकी || |- | 2013 || ''[[आशिकी 2]]'' || राहुल जयकर || |- | 2013 || ''[[ये जवानी है दीवानी]]'' || अविनाश "अवी" अरोड़ा || |- | 2014 || ''[[दावत-ए-इश्क (फ़िल्म)|दावत-ए-इश्क]]'' || तारिक "तारू" हैदर || |- | 2015 || ''[[फितूर]]'' || || नूर |- | 2017 || ''[[ओके जानू]] || |- |2020 |मलंग | |- |2023 |गुमराह | |- |2025 |मेट्रो... इन दिनों | |} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|3169069}} [[श्रेणी:अभिनेता]] [[श्रेणी:1985 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेता]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:हिन्दी अभिनेता]] [[श्रेणी:भारतीय अभिनेता]] 5ph35qlukszel4kh8yiu1336mr027ri डीडी फ्री डिश 0 599973 6536564 6536349 2026-04-05T11:59:40Z ~2026-20795-28 918896 6536564 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक कम्पनी | name = डीडी फ्री डिश | image = [[File:Logo of DD Free Dish.jpg|150px]] | type = | industry = टेलीविजन उपग्रह सेवा | foundation = {{Start date and age|df=yes|2004|12|16}} | location = [[नई दिल्ली]] | area_served = [[भारत]] | owner = [[प्रसार भारती]]<br> | homepage = [http://www.ddindia.gov.in आधिकारिक जालस्थल] }} '''दूरदर्शन फ्री डिश'''<ref>{{Cite web|url=https://doordarshan.gov.in/dd-free-dish|title=डीडी फ्री डिश {{!}} दूरदर्शन|website=doordarshan.gov.in|access-date=2020-06-22|archive-url=https://web.archive.org/web/20200612170348/https://doordarshan.gov.in/dd-free-dish|archive-date=12 जून 2020|url-status=dead}}</ref> [[प्रसार भारती]] के स्वामित्व में निःशुल्क [[उपग्रह]] [[दूरदर्शन|टेलीविजन]] सेवा प्रदान करने वाली [[भारत]] की पहली उपग्रह सेवा है। डीडी फ्री डिश को पहले [[डीडी फ्री डिश|डीडी डायरेक्ट+]] के नाम से भी जाना जाता था। यह सुविधा [[भारत]] के सभी राज्यों में उपलब्ध है और इसने ग्रामीण इलाकों में मनोरंजन की एक बाढ़ सी ला दी है, जिससे लोगों में एक नई जिज्ञासा जगी है। डीडी फ्री डिश में हर साल एक ई-ऑक्शन का आयोजन किया जाता है जिसमें [[ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड|ब्रॉडकास्टर]] अपने चैनल को डीडी फ्री डिश में जोड़ सकते है।<ref>{{cite web|url=http://samachar4media.com/dd-should-be-the-first-choice-of-the-lower-half-of-the-society-ranjan-p-thakur.html|title=फ्री डिश से बाजार में अपने पैर और पसारना चाहता है दूरदर्शन|publisher=समाचार 4 मीडिया|date=6 दिसम्बर 2013|accessdate=2 नवम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141224195448/http://samachar4media.com/dd-should-be-the-first-choice-of-the-lower-half-of-the-society-ranjan-p-thakur.html|archive-date=24 दिसंबर 2014|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.maabharati.com/2019/11/dd-free-dish-channel-list.html|title=डीडी फ्री डिश क्या है ओर इस पर कितने चैनल मोजूद है यहा आपको डीडी फ्री डिश से जुड़े प्र्श्नो के उत्तर मिल जाएंगे|last=|first=|date=22 जून 2020|website=माँ भारती|archive-url=https://web.archive.org/web/20200610072524/https://www.maabharati.com/2019/11/dd-free-dish-channel-list.html|archive-date=10 जून 2020|access-date=|url-status=dead}}</ref> वर्तमान में, डीडी फ्री डिश में 184 टेलीविजन चैनल स्लॉट हैं, जिनमें से 94 एमपीईजी-2 प्रारूप में और 90 एमपीईजी-4 प्रारूप में हैं। कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए, पीएम ई-विद्या कार्यक्रम के तहत शैक्षिक टीवी चैनल चलाए जाते हैं। == टेलीविजन चैनल सूची == === दूरदर्शन === प्रसार भारती के स्वामित्व वाले चैनल - ==== राष्ट्रीय चैनल ==== * [[डीडी भारती]] – कला और सांस्कृतिक इंफोटेनमेंट चैनल * [[डीडी इंडिया]] – अंतर्राष्ट्रीय चैनल * [[डीडी किसान]] – कृषि शिक्षा और सूचना चैनल * [[डीडी नेशनल]] – सामान्य मनोरंजन चैनल * [[डीडी न्यूज़]] – न्यूज़ चैनल * [[डीडी स्पोर्ट्स]] – खेल चैनल * [[डीडी उर्दू]] – उर्दू इंफोटेनमेंट चैनल (एमपीईजी-4 प्रारूप में उपलब्ध) ==== संसदीय चैनल ==== * [[संसद टेलीविजन|संसद टीवी 1]] * [[संसद टेलीविजन|संसद टीवी 2]] ==== एचडी चैनल ==== डीडी फ्री डिश पर ग्यारह एचडी चैनल एमपीईजी-4 प्रारूप में उपलब्ध हैं – * [[डीडी नेशनल|डीडी नेशनल एचडी]] – डीडी नेशनल का एचडी संस्करण * [[डीडी इंडिया|डीडी इंडिया एचडी]] – डीडी इंडिया का एचडी संस्करण * [[डीडी न्यूज़|डीडी न्यूज़ एचडी]] – डीडी न्यूज़ का एचडी संस्करण * [[डीडी स्पोर्ट्स|डीडी स्पोर्ट्स एचडी]] – डीडी स्पोर्ट्स का एचडी संस्करण * [[संसद टीवी|संसद टीवी 1 एचडी]] – डीडी संसद टीवी 1 का एचडी संस्करण * [[संसद टीवी|संसद टीवी 2 एचडी]] – डीडी संसद टीवी 2 का एचडी संस्करण * [[डीडी किसान|डीडी किसान एचडी]] – डीडी किसान का एचडी संस्करण * [[डीडी तमिल|डीडी तमिल एचडी]] – डीडी तमिल का एचडी संस्करण * [[डीडी सह्याद्री|डीडी सह्याद्री एचडी]] – डीडी सह्याद्री का एचडी संस्करण * [[डीडी गिरनार|डीडी गिरनार एचडी]] – डीडी गिरनार का एचडी संस्करण * [[डीडी ओड़िया|डीडी ओड़िया एचडी]] – डीडी ओड़िया का एचडी संस्करण ==== क्षेत्रीय चैनल (एमपीईजी-2) ==== {| class="wikitable sortable" |- ! नाम ! भाषा ! क्षेत्र |- | [[डीडी अरुणप्रभा]] | [[हिंदी]] तथा [[अंग्रेज़ी]] | [[अरुणाचल प्रदेश]] |- | [[डीडी असम]] | [[असमिया भाषा|असमिया]] | [[असम]] |- | [[डीडी ओड़िया]] | [[उड़िया]] | [[ओडिशा]] |- | [[डीडी उत्तर प्रदेश]] | [[हिंदी]] | [[उत्तर प्रदेश]] |- | [[डीडी उत्तराखंड]] | [[गढ़वाली भाषा|गढ़वाली]], [[कुमाऊँनी भाषा|कुमाऊँनी]] तथा [[हिंदी]] | [[उत्तराखंड]] |- | [[डीडी कशीर]] | [[कश्मीरी]] तथा [[उर्दू]] | [[जम्मू और कश्मीर]] |- | [[डीडी गिरनार]] | [[गुजराती]] | [[गुजरात]] |- | [[डीडी चंदना]] | [[कन्नड़]] | [[कर्नाटक]] |- | [[डीडी छत्तीसगढ़]] | [[हिंदी]] | [[छत्तीसगढ़]] |- | [[डीडी झारखंड]] | [[हिंदी]] | [[झारखंड]] |- | [[डीडी पोढ़ीगै|डीडी पोढ़ीगई]] | [[तमिल]] | [[तमिल नाडू]] |- | [[डीडी पंजाबी]] | [[पंजाबी]] | [[पंजाब]] |- | [[डीडी बांग्ला]] | [[बंगाली]] | [[पश्चिम बंगाल]] |- | [[डीडी बिहार]] | [[हिंदी]] तथा [[बिहारी]] | [[बिहार]] |- | [[डीडी मध्य प्रदेश]] | [[हिंदी]] | [[मध्य प्रदेश]] |- | [[डीडी मलयालम]] | [[मलयालम]] | [[केरल]] |- | [[डीडी यादागिरी]] | [[तेलुगू]] | [[तेलंगाना]] |- | [[डीडी राजस्थान]] | [[हिंदी]] तथा [[राजस्थानी]] | [[राजस्थान]] |- | [[डीडी सप्तगिरी]] | [[तेलुगू]] | [[आंध्र प्रदेश]] |- |[[डीडी हिमाचल]] |[[हिन्दी]] |[[हिमाचल प्रदेश]] |- | [[डीडी त्रिपुरा]] | [[बंगाली]] तथा [[कोक बोरोक भाषा|कोकबोरोक]] | [[त्रिपुरा]] |} ==== क्षेत्रीय चैनल (एमपीईजी-4)==== {| class="wikitable sortable" |- ! नाम ! क्षेत्र |- | डीडी झारखंड | झारखंड |- | [[डीडी नागालैंड]] | [[नागालैंड]] |- | [[डीडी मणिपुर]] | [[मणिपुर]] |- | [[डीडी मिज़ोरम]] | [[मिज़ोरम]] |- | [[डीडी मेघालय]] | [[मेघालय]] |- | [[डीडी हरियाणा]] | [[हरियाणा]] |- |} === प्राइवेट चैनल (एमपीईजी-2)=== ==== हिंदी ==== {| class="wikitable sortable" |- !श्रेणी !चैनल |- | rowspan="18" |'''सामान्य मनोरंजन''' | [[बिग मैजिक]] |- |जी टीवी |- | [[कलर्स रिश्ते]] |- |स्टार प्लस |- | [[दंगल टीवी|दंगल]] |- | [[दंगल 2 (टीवी चैनल)|दंगल 2]] |- | [[मनोरंजन ग्रैंड]] |- | [[मनोरंजन टीवी]] |- | [[नज़ारा टीवी|नज़ारा]] |- | [[द क्यू]] |- | [[शेमारू टीवी]] |- | [[शेमारू उमंग]] |- | [[सोनी पल]] |- | [[स्टार उत्सव]] |- | |- | |- | [[सन नियो]] |- | [[ज़ी अनमोल]] |- |बच्चों के चैनल | यूनीक टीवी |- |rowspan="2"|संगीत | [[बी4यू म्यूज़िक]] |- | [[शो बॉक्स]] |- |rowspan="14"|फ़िल्म | ऑल टाइम मूवीज |- | [[बी4यू (नेटवर्क)|बी4यू कड़क]] |- | [[बी4यू मूवीज़]] |- | [[कलर्स सिनेप्लेक्स बॉलीवुड]] |- | [[रिश्ते सिनेप्लेक्स|कलर्स सिनेप्लेक्स सुपरहिट]] |- | गोल्डमाइंस |- | गोल्डमाइंस बॉलीवुड |- | गोल्डमाइंस मूवीज़ |- | [[चुंबक टीवी|शेमारू जोश]] |- | [[सोनी वाह]] |- | [[स्टार उत्सव मूवीज़]] |- | [[ज़ी मनोरंजन उद्योग|ज़ी एक्शन]] |- | [[ज़ी मनोरंजन उद्योग|ज़ी अनमोल सिनेमा]] |- | [[ज़ी मनोरंजन उद्योग|ज़ी अनमोल सिनेमा 2]] |- |rowspan="14"|समाचार | [[आज तक]] |- | 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| [[टीवी९ तेलुगु|टीवी9 गुजराती]] |- | वीटीवी न्यूज़ |- | [[ज़ी मनोरंजन उद्योग|ज़ी 24 कलक]] |- | कन्नड | [[आस्था टीवी|आस्था कन्नड]] || धार्मिक |- | ओडिया | आर्गस न्यूज़ || News |- | rowspan="3"|पंजाबी | चारदिकला टाइम टीवी || समाचार एवं मनोरंजन |- | पंजाबी हिट्स || संगीत |- | टाब्बर हिट्स || मनोरंजन |- | rowspan="2"|तेलुगु | [[टीवी९ तेलुगु|टीवी9 तेलुगु]] || समाचार |- | [[आस्था टीवी|आस्था तेलुगु]] || धार्मिक |- |} == रेडियो चैनल सूची == ===राष्ट्रीय=== * [[विविध भारती]] - हिंदी संगीत रेडियो चैनल * आकाशवाणी लाइव समाचार - हिंदी और अंग्रेजी समाचार रेडियो * आकाशवाणी रागम - भारतीय शास्त्रीय संगीत रेडियो चैनल * आकाशवाणी आराधना - हिंदी भक्ति रेडियो चैनल ===क्षेत्रीय=== * आकाशवाणी आंध्र - [[तेलुगु भाषा|तेलुगु]] * आकाशवाणी अरुणाचल - [[हिन्दी]] और [[निशि भाषा|निशि]] * आकाशवाणी असम - [[असमिया भाषा|असमिया]] * आकाशवाणी बिहार - हिंदी और [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] * आकाशवाणी छत्तीसगढ़ - हिंदी और [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]] * आकाशवाणी गोवा - [[कोंकणी भाषा|कोंकणी]] * आकाशवाणी गुजरात - [[गुजराती 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तमिलनाडु - [[तमिल भाषा|तमिल]] * आकाशवाणी तेलंगाना - [[तेलुगु भाषा|तेलुगु]] * आकाशवाणी त्रिपुरा - [[बंगाली भाषा|बंगाली]] और [[कोकबोरोक]] * आकाशवाणी उत्तर प्रदेश- [[हिन्दी]] * आकाशवाणी उत्तराखंड - हिंदी * आकाशवाणी वाराणसी - हिंदी * आकाशवाणी पश्चिम बंगाल - [[बंगाली भाषा|बंगाली]] ===एमपीईजी-4 रेडियो=== * एफएम गोल्ड दिल्ली * एफएम रेनबो दिल्ली * आकाशवाणी दरभंगा * आकाशवाणी नजीबाबाद * आकाशवाणी वर्ल्ड सर्विस 1 * आकाशवाणी वर्ल्ड सर्विस 2 * आकाशवाणी नेबरहुड सर्विस 1 * आकाशवाणी नेबरहुड सर्विस 2 == अन्य चैनल == === ई-विद्या चैनल === कक्षा 1 से कक्षा 12 तक प्रत्येक कक्षा के लिए 12 शैक्षणिक चैनल हैं। * ई-विद्या 1 – कक्षा 1 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 2 – कक्षा 2 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 3 – कक्षा 3 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 4 – कक्षा 4 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 5 – कक्षा 5 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 6 – कक्षा 6 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 7 – कक्षा 7 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 8 – कक्षा 8 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 9 – कक्षा 9 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 10 – कक्षा 10 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 11 – कक्षा 11 के छात्रों के लिए * ई-विद्या 12 – कक्षा 12 के छात्रों के लिए === स्वयं प्रभा डीटीएच === * स्व.प्र.-01 सीईसी-यूजीसी : वागीश - भाषा और साहित्य * स्व.प्र.-02 सीईसी-यूजीसी : संस्कृति - इतिहास, संस्कृति और दर्शन * स्व.प्र.-03 सीईसी-यूजीसी : प्रबोध - सामाजिक और व्यवहार विज्ञान * स्व.प्र.-04 सीईसी-यूजीसी : सारस्वत - शिक्षा और गृह विज्ञान * स्व.प्र.-05 सीईसी-यूजीसी : प्रबंध - सूचना, संचार और प्रबंधन अध्ययन * स्व.प्र.-06 सीईसी-यूजीसी : विधिक - कानून और कानूनी अध्ययन * स्व.प्र.-07 सीईसी-यूजीसी : कौटिल्य - अर्थशास्त्र और वाणिज्य * स्व.प्र.-08 सीईसी-यूजीसी : आर्यभट्ट - भौतिक और पृथ्वी विज्ञान * स्व.प्र.-09 सीईसी-यूजीसी : स्पंदन - जीवन विज्ञान * स्व.प्र.-10 सीईसी-यूजीसी : दक्ष - अनुप्रयुक्त विज्ञान * स्व.प्र.-11 एनपीटीईएल : रासायनिक इंजीनियरिंग * स्व.प्र.-12 एनपीटीईएल : सिविल इंजीनियरिंग * स्व.प्र.-13 एनपीटीईएल : कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग * स्व.प्र.-14 एनपीटीईएल : इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग * स्व.प्र.-15 एनपीटीईएल : इंजीनियरिंग विज्ञान और जैविक विज्ञान * स्व.प्र.-16 एनपीटीईएल : मानविकी, सामाजिक विज्ञान और प्रबंधन * स्व.प्र.-17 एनपीटीईएल : मैकेनिकल इंजीनियरिंग और खनन इंजीनियरिंग * स्व.प्र.-18 एनपीटीईएल : गणित और भौतिकी * स्व.प्र.-19 आईआईटी-पीएएल : जीवविज्ञान * स्व.प्र.-20 आईआईटी-पीएएल : रसायन विज्ञान * स्व.प्र.-21 आईआईटी-पीएएल : गणित * स्व.प्र.-22 आईआईटी-पीएएल : भौतिकी * स्व.प्र.-23 इग्नू : उदार कला और मानविकी * स्व.प्र.-24 इग्नू : कृषि और संबद्ध विज्ञान * स्व.प्र.-25 इग्नू : ज्ञान दर्शन 1 * स्व.प्र.-26 इग्नू : राज्य मुक्त विश्वविद्यालय * स्व.प्र.-27 एनआईओएस : पाणिनि - माध्यमिक विद्यालय शिक्षा * स्व.प्र.-28 एनआईओएस : शारदा - उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा * स्व.प्र.-29 यूजीसी-इनफ्लिबनेट : ई-पीजी पाठशाला - स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम * स्व.प्र.-30 एनआईओएस: ज्ञानामृत - सांकेतिक भाषा में शिक्षा * स्व.प्र.-31 एनसीईआरटी: किशोर मंच - माध्यमिक विद्यालय, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और शिक्षक शिक्षा * स्व.प्र.-32 इग्नू-एनआईओएस: वागडा - शिक्षक शिक्षा * स्व.प्र.-33 सीईसी-यूजीसी: व्यास - उच्च शिक्षा चैनल * डिजीशाला - डिजिटल शिक्षा चैनल === वंदे गुजरात === * वंदे गुजरात 1 * वंदे गुजरात 2 * वंदे गुजरात 3 * वंदे गुजरात 4 * वंदे गुजरात 5 * वंदे गुजरात 6 * वंदे गुजरात 7 * वंदे गुजरात 8 * वंदे गुजरात 9 * वंदे गुजरात 10 * वंदे गुजरात 11 * वंदे गुजरात 12 * वंदे गुजरात 13 * वंदे गुजरात 14 * वंदे गुजरात 15 * वंदे गुजरात 16 * डिजी शाला == यह भी देखें == [[भारत में डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणी सूची}} {{भारत की दूरसंचार कंपनियां}} {{भारत में हिन्दी टी वी चैनल}} nlvh3m2fqyos7o7m0g0qo52t767wbnv अभिमन्यु सिंह 0 635210 6536917 6212674 2026-04-06T09:56:52Z ~2026-21185-22 919052 Upnishad ganga ..abhimanyu sir ka lifetime best 6536917 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |name = अभिमन्यु सिंह |image = {{wikidata|property|raw|P18}} | birth_date = {{Wd|properties|linked|references|P569}} | birth_place = {{Wd|properties|linked|references|linked|P19}} |birth_name = {{Wd|properties|linked|references|edit|linked|P1477}} |height = {{Wd|properties|linked|references|edit|linked|P2048}} |weight = 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mila de) ==फिल्मोग्राफी== * [[गोलियों की रासलीला रामलीला]] - मेघजी भाई * [[गुलाल]]-रणन्जय सिंह (राणसा) * [[द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:भारतीय अभिनेता]] [[श्रेणी:1975 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] {{आधार}} c45e4i7r4k4p37bjy7yaiws4el21uqc 6536918 6536917 2026-04-06T09:57:05Z Quinlan83 637675 [[Special:Contributions/~2026-21185-22|~2026-21185-22]] ([[User talk:~2026-21185-22|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:DreamRimmer bot III|DreamRimmer bot III]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया 6212674 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |name = अभिमन्यु सिंह |image = {{wikidata|property|raw|P18}} | birth_date = {{Wd|properties|linked|references|P569}} | birth_place = {{Wd|properties|linked|references|linked|P19}} |birth_name = {{Wd|properties|linked|references|edit|linked|P1477}} |height = {{Wd|properties|linked|references|edit|linked|P2048}} |weight = {{Wd|properties|linked|references|edit|linked|P2048}} |citizenship = 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विकिपीडिया:विकिपरियोजना भूगोल/प्राथमिक लेख 4 662445 6536699 6243105 2026-04-05T20:42:18Z AMAN KUMAR 911487 https://upsc.gov.in/sites/default/files/NDA2_16_GENERAL_ABILITY_TEST_0_0.pdf इसके पेज 18-19 में आप ellipsoid का अनुवाद देख सकते है 6536699 wikitext text/x-wiki ==प्रारंभिक लेख == नीचे दिए गये शीर्षक उन विषयों के हैं जिन पर हिन्दी विकिपीडिया में अच्छे लेख मौजूद होने चाहियें। अनुपलब्ध लेखों के निर्माण और पहले से बने सुधार योग्य लेखों के विस्तार और सुधार हेतु यह सूची निर्मित की गयी है। इन लेखों के '''[[विकिपीडिया:विकिपरियोजना भूगोल/निर्देश#लेखों का आकलन|चिन्ह्निकरण के लिये]]''' निम्नलिखित शैली का प्रयोग किया जाता है: {{Div col|2}} * [[विकिपीडिया:निर्वाचित लेख|निर्वाचित लेख]] {{Icon|FA}} * [[विकिपीडिया:श्रेष्ठ लेख|श्रेष्ठ लेख]] {{Icon|GA}} * A-क्लास लेख {{Icon|A}} * B-क्लास लेख {{Icon|B}} * C-क्लास लेख {{Icon|C}} * Start-क्लास लेख {{Icon|Start}} * Stub-क्लास लेख {{Icon|Stub}} * <small>चिह्नीकरण पैमाने की अधिक जानकारी के लिये:[[विकिपीडिया:विकिपरियोजना भूगोल/निर्देश#लेखों का आकलन|यहाँ 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# [[अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा]] - <small>([[:en:International Date Line|International Date Line]])</small> # [[उत्तरी ध्रुव]] - <small>([[:en:North Pole|North Pole]])</small> # [[प्रधान मध्याह्न रेखा]] - <small>([[:en:Prime meridian|Prime meridian]])</small> # [[दक्षिणी ध्रुव]] - <small>([[:en:South Pole|South Pole]])</small> # [[कर्क रेखा|कर्क वृत्त]] - <small>([[:en:Tropic of Cancer|Tropic of Cancer]])</small> # [[मकर वृत्त]] - <small>([[:en:Tropic of Capricorn|Tropic of Capricorn]])</small> ===महाद्वीप (10 लेख)=== # [[महाद्वीप]] - <small>([[:en:Continent|Continent]])</small> # [[अफ़्रीका]] - <small>([[:en:Africa|Africa]])</small> # [[अमेरिका]] - <small>([[:en:Americas|Americas]])</small> # [[अंटार्कटिका]] - <small>([[:en:Antarctica|Antarctica]])</small> # [[एशिया]] - <small>([[:en:Asia|Asia]])</small> # [[ऑस्ट्रेलिया (महाद्वीप)]] - <small>([[:en:Australia (continent)|Australia]])</small> # [[यूरेशिया]] - <small>([[:en:Eurasia|Eurasia]])</small> # [[यूरोप]] - <small>([[:en:Europe|Europe]])</small> # [[उत्तर अमेरिका]] - <small>([[:en:North America|North America]])</small> # [[दक्षिण अमेरिका]] - <small>([[:en:South America|South America]])</small> {{Div col end}} ==<span id="भौतिक भूगोल"></span>भौतिक भूगोल (366 लेख)== ===जल समूह (195 लेख)=== ====महासागर और सागर (56 लेख)==== {{Div col|3}} # [[आर्कटिक महासागर]] - <small>([[:en:Arctic Ocean|Arctic Ocean]])</small> ## [[बैफिन की खाड़ी]] - <small>([[:en:Baffin Bay|Baffin Bay]])</small> ## [[बैरेंट्स सागर]] - <small>([[:en:Barents Sea|Barents Sea]])</small> ## [[ब्यूफोर्ट सागर]] - <small>([[:en:Beaufort Sea|Beaufort Sea]])</small> ## [[ग्रीनलैण्ड सागर]] - <small>([[:en:Greenland Sea|Greenland Sea]])</small> ## [[हडसन खाड़ी]] - <small>([[:en:Hudson Bay|Hudson Bay]])</small> ## [[कारा सागर]] - <small>([[:en:Kara Sea|Kara Sea]])</small> ## [[सफ़ेद सागर]] - <small>([[:en:White Sea|White Sea]])</small> # [[अटलांटिक महासागर]] - <small>([[:en:Atlantic Ocean|Atlantic Ocean]])</small> ## [[बाल्टिक सागर]] - 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<small>([[:en:Balochistan, Pakistan|Balochistan|]])</small> # [[पंजाब, पाकिस्तान|पंजाब]] - <small>([[:en:Punjab, Pakistan|Punjab|]])</small> ===ओशेनिया (4 लेख)=== # [[मेलानेशिया]] - <small>([[:en:Melanesia|Melanesia]])</small> # [[माइक्रोनेशिया]] - <small>([[:en:Micronesia|Micronesia]])</small> # [[ओशिआनिया]] - <small>([[:en:Oceania|Oceania]])</small> # [[पोलीनेशिया]] - <small>([[:en:Polynesia|Polynesia]])</small> {{Div col end}} 9gimn2xpgg81o3g5t8rei1h0ui6ykky विश्वकर्मा (जाति) 0 698862 6536817 6504320 2026-04-06T06:41:11Z Deep singh kumawat 774240 लेख का विस्तार किया गया पाठ में सुधार (छोटा) 6536817 wikitext text/x-wiki '''विश्वकर्मा''' ब्राह्मण भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक प्राचीन वैदिक पारंपरिक समुदाय है, जिसे सामान्यतः शिल्पकला और निर्माण कार्यों से जोड़ा जाता है। इनका ये समुदाय मध्यकालीन भारत्वके बाद पारंपरिक रूप से शिल्पकर्म ([[बढ़ई]], [[लोहार]], [[स्वर्णकार]], कसेरा/ठठेरा और कुम्हार, मूर्तिकार या पत्थर काटने वाले) जैसे कार्यों में संलग्न रहे हैं। भारत के विभिन्न भागों में इन्हें अलग-अलग नामों और उपसमूहों के रूप में जाना जाता है। विश्वकर्मा ब्राह्मणों का वर्ण - [[लोहार|मनु ब्राह्मण]], [[जांगिड़|मय ब्राह्मण]], [[ताम्रकार|त्वष्टा ब्राह्मण]], [[कुमावत|शिल्पी ब्राह्मण]], [[सुनार|दैवज्ञ ब्राह्मण]] आदि है।<ref name="Ramaswamy">{{cite journal |last=रामास्वामी|first=विजय|year=2004|title=Vishwakarma Craftsmen in Early Medieval Peninsular India|trans-title=प्रारंभिक मध्यकालीन प्रायद्वीपीय भारत में विश्वकर्मा शिल्पकार|url=https://www.jstor.org/stable/pdf/25165073.pdf|journal=जर्नल ऑफ द इकनॉमिक ऐंड सोशल हिस्ट्री ऑफ द ओरियेंट|language=en|volume=47|issue=4|pages=548–582|doi=10.1163/1568520042467154|jstor=25165073|url-access=registration}}</ref> विश्वकर्मा ब्राह्मण अथर्ववेदीय शौनक और पिप्पलाद शाखा से संबंधित हैं। विश्वकर्मा ब्राह्मण समुदाय भगवान [[विश्वकर्मा]] को अपना पूर्वज देव मानते हैं, जिन्हें 'देव शिल्पी' के रूप में जाना जाता है। [[पुराण]]ों और वैदिक ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के वास्तुकार के रूप में वर्णित किया गया है। ==इतिहास और सामाजिक स्थिति== इतिहासकार विजया रामास्वामी का मत है कि मध्यकालीन भारत में विश्वकर्मा समुदाय मुख्य रूप से मंदिर निर्माण और शिल्प कार्यों से जुड़ा हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि इस समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति उन कारीगरों से भिन्न थी जो स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में स्थायी रूप से शामिल थे।<ref name="Ramaswamy" /> कुछ धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में विश्वकर्मा को ब्रह्मा के वंशज के रूप में चित्रित किया गया है, किन्तु आधुनिक जाति व्यवस्था में यह समुदाय आमतौर पर 'शिल्पकार' श्रेणी में रखा गया है।<ref>{{cite journal |last=भगत|first=राम बी॰|date=अप्रैल–जून 2006|title=Census and caste enumeration: British legacy and contemporary practice in India|trans-title=जनगणना और जाति गणना: ब्रिटिश विरासत और भारत में समकालीन प्रथा|url=https://catalog.ihsn.org/citations/34097|journal=जीनस|language=en|volume=62|issue=2|pages=119–134|jstor=29789312}}</ref> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} [[श्रेणी:भारतीय जाति]] k1c708rqrgk2qq4qwbtyj6tj6jmexnz सदस्य वार्ता:Bridgetowisdom 3 717829 6536727 3081286 2026-04-06T01:14:09Z Mfield 881963 Mfield ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:Rayen Ben ALI]] को [[सदस्य वार्ता:Bridgetowisdom]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Rayen Ben ALI|Rayen Ben ALI]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Bridgetowisdom|Bridgetowisdom]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 3081286 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=Rayen Ben ALI}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 10:20, 2 जून 2016 (UTC) dvwk41qxmwwm85owzrio8yltqt9pjdt शशांक 0 720118 6536736 6476491 2026-04-06T03:00:41Z ~2026-21057-26 918987 स्रोत:- एनसीईआरटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारत का शिक्षा मंत्रालय। भारत सरकार 🇮🇳 6536736 wikitext text/x-wiki '''शशांक''', गौड़ ब्राह्मण था जिसने सातवीं शताब्दी के अंतिम चरण में बंगाल पर शासन किया। वह बंगाल का पहला महान् राजा था। उसने गोर / [[गौड़ राज्य]] की स्थापना की। [[मालवा]] के राजा देवगुप्त से दुरभिसंधि करके [[हर्षवर्धन]] की वहन राज्यश्री के पति [[कन्नौज]] के मौखरी राजा ग्रहवर्मन को मारा। तदनंतर राज्यवर्धन को धोखे से मारकर अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयत्न किया। पर जब राज्यवर्धन के कनिष्ठ भ्राता ने उसका पीछा किया तो वह बंगाल चला गया। अंतिम [[गुप्त राजवंश|गुप्त सम्राटों]] की दुर्बलता के कारण जो स्वतंत्र राज्य हुए उनमें उत्तरी बंगाल भी था। जब [[महासेन गुप्त]] सम्राट हुआ। उसकी दुर्बलता से लाभ उठाकर शशांक गौड़ ने स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। उसने [[कर्णसुवर्ण]] को अपनी [[राजधानी]] बनाई। आजकल कर्णसुवर्ण के अवशेष [[मुर्शिदाबाद]] जिले के [[गंगाभाटी]] नामक स्थान में पाए गए हैं। समस्त बंगाल और [[बिहार]] को जीत लिया तथा समस्त उत्तरी भारत पर विजय करने की योजना बनाई। शशांक [[हिन्दू धर्म]] को मानता था और [[बौद्ध धर्म]] का कट्टर शत्रु था। इसकी प्रतिक्रिया यह हुई कि शशांक के बाद बंगाल और बिहार में [[पाल वंश|पाल वंशीय राजाओं]] ने प्रजा की सम्मति से नया राज्य स्थापित किया और बौद्ध धर्म को एक बार फिर आश्रय मिला। 'शशांक' पर प्रसिद्ध इतिहावेत्ता [[राखालदास बनर्जी|राखालदास बंद्योपाध्याय]] ने एक बड़ा ऐतिहासिक [[उपन्यास]] लिखा है। शशांक ने विजयाकिर्ती नामक एक कन्या का अपहरण कर लिया जो कि सय्यीद साम्राज्य की राजकुमारी थी। शशांक के मृत्यु के बाद विजयाकिर्ती ने एक [[पल्लव साम्राज्य]] के किसी एक राजा से विवाह किया। कही उपन्यास बतातें हैं शशांक विजयाकिर्ती से बहुत प्यार करते थे और उनको एक ही पत्नी थी। ==इन्हें भी देखें== * [[गौड़ राज्य]] * [[गौड़ (नगर)]] * [[गौड़ राजपूत]] [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] [[श्रेणी:भारत के शासक]] pl5dhkpeq5mz66qk0my6s8rwi89chh3 6536758 6536736 2026-04-06T05:12:16Z AMAN KUMAR 911487 टैग {{[[साँचा:स्रोतहीन|स्रोतहीन]]}} लेख में जोड़ा जा रहा ([[वि:ट्विंकल|ट्विंकल]]) 6536758 wikitext text/x-wiki {{स्रोतहीन|date=अप्रैल 2026}} '''शशांक''', गौड़ ब्राह्मण था जिसने सातवीं शताब्दी के अंतिम चरण में बंगाल पर शासन किया। वह बंगाल का पहला महान् राजा था। उसने गोर / [[गौड़ राज्य]] की स्थापना की। [[मालवा]] के राजा देवगुप्त से दुरभिसंधि करके [[हर्षवर्धन]] की वहन राज्यश्री के पति [[कन्नौज]] के मौखरी राजा ग्रहवर्मन को मारा। तदनंतर राज्यवर्धन को धोखे से मारकर अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयत्न किया। पर जब राज्यवर्धन के कनिष्ठ भ्राता ने उसका पीछा किया तो वह बंगाल चला गया। अंतिम [[गुप्त राजवंश|गुप्त सम्राटों]] की दुर्बलता के कारण जो स्वतंत्र राज्य हुए उनमें उत्तरी बंगाल भी था। जब [[महासेन गुप्त]] सम्राट हुआ। उसकी दुर्बलता से लाभ उठाकर शशांक गौड़ ने स्वतंत्र राज्य स्थापित किया। उसने [[कर्णसुवर्ण]] को अपनी [[राजधानी]] बनाई। आजकल कर्णसुवर्ण के अवशेष [[मुर्शिदाबाद]] जिले के [[गंगाभाटी]] नामक स्थान में पाए गए हैं। समस्त बंगाल और [[बिहार]] को जीत लिया तथा समस्त उत्तरी भारत पर विजय करने की योजना बनाई। शशांक [[हिन्दू धर्म]] को मानता था और [[बौद्ध धर्म]] का कट्टर शत्रु था। इसकी प्रतिक्रिया यह हुई कि शशांक के बाद बंगाल और बिहार में [[पाल वंश|पाल वंशीय राजाओं]] ने प्रजा की सम्मति से नया राज्य स्थापित किया और बौद्ध धर्म को एक बार फिर आश्रय मिला। 'शशांक' पर प्रसिद्ध इतिहावेत्ता [[राखालदास बनर्जी|राखालदास बंद्योपाध्याय]] ने एक बड़ा ऐतिहासिक [[उपन्यास]] लिखा है। शशांक ने विजयाकिर्ती नामक एक कन्या का अपहरण कर लिया जो कि सय्यीद साम्राज्य की राजकुमारी थी। शशांक के मृत्यु के बाद विजयाकिर्ती ने एक [[पल्लव साम्राज्य]] के किसी एक राजा से विवाह किया। कही उपन्यास बतातें हैं शशांक विजयाकिर्ती से बहुत प्यार करते थे और उनको एक ही पत्नी थी। ==इन्हें भी देखें== * [[गौड़ राज्य]] * [[गौड़ (नगर)]] * [[गौड़ राजपूत]] [[श्रेणी:भारत का इतिहास]] [[श्रेणी:भारत के शासक]] 6ze6ztqy9qhp4oljqzyv4krt2o2wyfw संगीत सिंह सोम 0 727951 6536732 6167298 2026-04-06T02:15:36Z ~2026-16330-13 918983 News me inhone khud accept Kiya tha 6536732 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{उल्लेखनीयता|date=जनवरी 2017}} {{जीवनी स्रोत कम|date=जनवरी 2017}} {{प्रसंग|date=जनवरी 2017}} {{प्राथमिक स्रोत|date=जनवरी 2017}} }} {{Infobox officeholder |name =संगीत सिंह सोम |image = |caption = |office = विधायक - [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना]], [[उत्तर प्रदेश]] |predecessor = |successor = |term = 2012 से 2017 |order1 = |office1 = |predecessor1 = |successor1 = |term1 = |birth_place = |birth_date = |death_date = |alma_mater = |nationality = [[भारतीय]] |religion = }} ठाकुर संगीत सोम (Thakur Sangeet Som) एक भारतीय राजनेता हैं, वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य और मेरठ के सरधना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे | संगीत सोम का जन्म 1 जनवरी 1978 को मेरठ जिले की सरधना तहसील के ग्राम आलमगीर (फरीदपुर) में ठाकुर ओमवीर सिंह के संपन्न कृषि परिवार में हुआ था | उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा मुजफ्फरनगर के करीब स्थित के.के. जैन इंटर कॉलेज, खतौली से 1997 में हासिल की | संगीत सिंह सोम हिंदू राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं | '''संगीत सिंह सोम''',[[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा]] में विधायक रहे। [[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2012|2012 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव]] में इन्होंने उत्तर प्रदेश की [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र]] (निर्वाचन संख्या-44)से चुनाव जीता।<ref>{{Cite web |url=http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |title=उत्तर प्रदेश विधान सभा |access-date=20 जुलाई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160811143300/http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |archive-date=11 अगस्त 2016 |url-status=dead }}</ref> उन्होंने 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सरधना सीट से अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी. उन्हें हिंदू संगठनों द्वारा "हिंदू हृदय सम्राट", "महाठाकुर," "संघर्षवीर," जैसे कई उपनाम दिए गए हैं<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> नफ़रती राजनीति करने में मशहूर है| वह 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों में से एक हैं. उनके खिलाफ 24 सितंबर 2013 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref>. सोम ने उस दौरान तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस पर जन्माष्टमी झड़पों की जांच में धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था | 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में  संगीत सोम सरधना सीट से हार गए हैं | सरधना सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अतुल प्रधान ने संगीत सोम को शिकस्त दी है. इससे पहले 2017 में भी इन दोनों के बीच ही मुकाबला हुआ था. तब बाजी संगीत सोम के हाथ लगी थी. <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/sangeet-som-sardhana-panchayat-baba-bulldozer-ntc-1428215-2022-03-14/?utm_source=Wikipedia_wp|title=हार के बाद जनता के बीच पहुंचे संगीत सोम, कहा- 'शपथ के बाद बाबा का बुलडोजर भी चलेगा और मेरा डंडा भी'|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश 16वीं विधान सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:सरधना के विधायक]] [[श्रेणी:1978 में जन्मे लोग]] {{जीवनचरित-आधार}} h7szuihy699lmfvdoiacga9iit64ihd 6536761 6536732 2026-04-06T05:14:05Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/~2026-16330-13|~2026-16330-13]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-16330-13|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: स्रोत हीन 6536761 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{उल्लेखनीयता|date=जनवरी 2017}} {{जीवनी स्रोत कम|date=जनवरी 2017}} {{प्रसंग|date=जनवरी 2017}} {{प्राथमिक स्रोत|date=जनवरी 2017}} }} {{Infobox officeholder |name =संगीत सिंह सोम |image = |caption = |office = विधायक - [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना]], [[उत्तर प्रदेश]] |predecessor = |successor = |term = 2012 से 2017 |order1 = |office1 = |predecessor1 = |successor1 = |term1 = |birth_place = |birth_date = |death_date = |alma_mater = |nationality = [[भारतीय]] |religion = }} ठाकुर संगीत सोम (Thakur Sangeet Som) एक भारतीय राजनेता हैं, वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य और मेरठ के सरधना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे | संगीत सोम का जन्म 1 जनवरी 1978 को मेरठ जिले की सरधना तहसील के ग्राम आलमगीर (फरीदपुर) में ठाकुर ओमवीर सिंह के संपन्न कृषि परिवार में हुआ था | उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा मुजफ्फरनगर के करीब स्थित के.के. जैन इंटर कॉलेज, खतौली से 1997 में हासिल की | संगीत सिंह सोम हिंदू राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं | '''संगीत सिंह सोम''',[[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा]] में विधायक रहे। [[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2012|2012 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव]] में इन्होंने उत्तर प्रदेश की [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र]] (निर्वाचन संख्या-44)से चुनाव जीता।<ref>{{Cite web |url=http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |title=उत्तर प्रदेश विधान सभा |access-date=20 जुलाई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160811143300/http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |archive-date=11 अगस्त 2016 |url-status=dead }}</ref> उन्होंने 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सरधना सीट से अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी. उन्हें हिंदू संगठनों द्वारा "हिंदू हृदय सम्राट", "महाठाकुर," "संघर्षवीर," जैसे कई उपनाम दिए गए हैं<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> वह 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों में से एक हैं. उनके खिलाफ 24 सितंबर 2013 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref>. सोम ने उस दौरान तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस पर जन्माष्टमी झड़पों की जांच में धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था | 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में  संगीत सोम सरधना सीट से हार गए हैं | सरधना सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अतुल प्रधान ने संगीत सोम को शिकस्त दी है. इससे पहले 2017 में भी इन दोनों के बीच ही मुकाबला हुआ था. तब बाजी संगीत सोम के हाथ लगी थी. <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/sangeet-som-sardhana-panchayat-baba-bulldozer-ntc-1428215-2022-03-14/?utm_source=Wikipedia_wp|title=हार के बाद जनता के बीच पहुंचे संगीत सोम, कहा- 'शपथ के बाद बाबा का बुलडोजर भी चलेगा और मेरा डंडा भी'|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश 16वीं विधान सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:सरधना के विधायक]] [[श्रेणी:1978 में जन्मे लोग]] {{जीवनचरित-आधार}} b6wbb5gl5g0emg6an0ckgocksljpbgy 6536808 6536761 2026-04-06T06:23:50Z अनुनाद सिंह 1634 6536808 wikitext text/x-wiki {{Multiple issues| {{उल्लेखनीयता|date=जनवरी 2017}} {{जीवनी स्रोत कम|date=जनवरी 2017}} {{प्रसंग|date=जनवरी 2017}} {{प्राथमिक स्रोत|date=जनवरी 2017}} }} {{Infobox officeholder |name =संगीत सिंह सोम |image = |caption = |office = विधायक - [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना]], [[उत्तर प्रदेश]] |predecessor = |successor = |term = 2012 से 2017 |order1 = |office1 = |predecessor1 = |successor1 = |term1 = |birth_place = |birth_date = |death_date = |alma_mater = |nationality = [[भारतीय]] |religion = }} '''ठाकुर संगीत सोम''' एक भारतीय राजनेता हैं। वे [[भारतीय जनता पार्टी]] (BJP) के सदस्य और मेरठ के सरधना विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे। वे हिंदू राष्ट्रवादी छवि वाले नेता हैं। संगीत सोम का जन्म 1 जनवरी 1978 को मेरठ जिले की सरधना तहसील के ग्राम आलमगीर (फरीदपुर) में ठाकुर ओमवीर सिंह के संपन्न कृषि परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा [[मुजफ्फरनगर]] के करीब स्थित के०के० जैन इंटर कॉलेज, खतौली से 1997 में प्राप्त की। वे [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश की सोलहवीं विधानसभा]] में विधायक रहे। [[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2012|2012 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव]] में इन्होंने उत्तर प्रदेश की [[सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तर प्रदेश|सरधना विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र]] (निर्वाचन संख्या-44)से चुनाव जीता।<ref>{{Cite web |url=http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |title=उत्तर प्रदेश विधान सभा |access-date=20 जुलाई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160811143300/http://uplegisassembly.gov.in/hi_mlaBiodata.htm |archive-date=11 अगस्त 2016 |url-status=dead }}</ref> उन्होंने 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सरधना सीट से अच्छे अंतर से जीत हासिल की थी. उन्हें हिंदू संगठनों द्वारा "हिंदू हृदय सम्राट", "महाठाकुर," "संघर्षवीर," जैसे कई उपनाम दिए गए हैं<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> वह 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों में से एक हैं। उनके खिलाफ 24 सितंबर 2013 को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/topic/sangeet-som/?utm_source=Wikipedia_wp|title=Sangeet Som Latest News, Updates in Hindi {{!}} संगीत सिंह सोम के समाचार और अपडेट - AajTak|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> सोम ने उस दौरान तत्कालीन [[समाजवादी पार्टी]] सरकार और उत्तर प्रदेश पुलिस पर जन्माष्टमी झड़पों की जांच में धार्मिक आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में  संगीत सोम सरधना सीट से हार गए हैं। सरधना सीट पर इस बार समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अतुल प्रधान ने संगीत सोम को पराजित किया। इससे पहले 2017 में भी इन दोनों के बीच ही मुकाबला हुआ था तब बाजी संगीत सोम के हाथ लगी थी। <ref>{{Cite web|url=https://www.aajtak.in/india/uttar-pradesh/story/sangeet-som-sardhana-panchayat-baba-bulldozer-ntc-1428215-2022-03-14/?utm_source=Wikipedia_wp|title=हार के बाद जनता के बीच पहुंचे संगीत सोम, कहा- 'शपथ के बाद बाबा का बुलडोजर भी चलेगा और मेरा डंडा भी'|website=आज तक|language=hindi|access-date=2022-05-13}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:उत्तर प्रदेश 16वीं विधान सभा के सदस्य]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:सरधना के विधायक]] [[श्रेणी:1978 में जन्मे लोग]] {{जीवनचरित-आधार}} bx3ki5ei4ze7usgn9qpxf6sx8tlffjq अमीना शेख 0 730926 6536609 6531723 2026-04-05T15:09:28Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536609 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = आमिना शेख | native_name = آمنہ شیخ | native_name_lang = ur | image = 287137-AaminaSheikhcropped.jpg | caption = आमिना शेख | birth_date = 29 अगस्त 1981 | birth_place = न्यूयॉर्क शहर, अमेरिका | nationality = पाकिस्तानी | occupation = अभिनेत्री, पूर्व फैशन मॉडल | years_active = 2003–वर्तमान | spouse = {{marriage|मोहिब मिर्ज़ा|2005|2019|reason=तलाक}}<br>{{marriage|उमर फारूकी|2020}} | children = 2 | religion = [[इस्लाम]] | known_for = पाकिस्तानी टेलीविजन और सिनेमा }} '''आमिना शेख''' (उर्दू: آمنہ شیخ; जन्म: 29 अगस्त 1981) एक पाकिस्तानी अभिनेत्री और पूर्व मॉडल हैं। उन्होंने मुख्य रूप से उर्दू टेलीविजन धारावाहिकों और फिल्मों में अभिनय किया है तथा उन्हें उनके कार्य के लिए कई लक्स स्टाइल अवार्ड्स (Lux Style Awards) से सम्मानित किया जा चुका है। == प्रारंभिक जीवन और करियर == आमिना का जन्म न्यूयॉर्क शहर में हुआ था, और उनका पालन-पोषण कराची तथा रियाद में हुआ। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत फैशन मॉडलिंग से की थी।<ref>{{Cite web|url=https://jang.com.pk/thenews/oct2008-weekly/nos-19-10-2008/instep/mainissue.htm|title=INSTEP Magzine|website=jang.com.pk|access-date=2026-03-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.dawn.com/2009/12/06/fashionfrontier-the-dance-of-fashion/|title=Fashionfrontier: The dance of fashion|last=Syed|first=Madeeha|date=2009-12-06|website=Dawn|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> इस दौरान उन्होंने कई ब्रांडों के लिए काम किया और पाकिस्तान में फ्रांसीसी ब्यूटी ब्रांड लॉरियल (L'Oreal Paris) की आधिकारिक प्रवक्ता (Spokesperson) नियुक्त की गईं।<ref>{{Cite web|url=http://www.fashioncentral.pk/people-parties/events/festivals/story-586-launch-of-loral-paris-makeup-studio/|title=Launch of L'Oréal Paris Makeup Studio, L'Oréal Paris Studio in Karachi - Fashion Central|last=parorrey|website=www.fashioncentral.pk|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> == अभिनय करियर == === टेलीविजन === मॉडलिंग के बाद आमिना ने टेलीविजन अभिनय की ओर रुख किया।<ref>{{Cite web|url=http://www.newslinemagazine.com/2010/11/there%E2%80%99s-something-about-aamina/|title=Newsline » Blog Archive » There’s Something About Aamina|website=www.newslinemagazine.com|language=en-US|access-date=2026-03-20|archive-date=29 नवंबर 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20101129190200/http://www.newslinemagazine.com/2010/11/there%E2%80%99s-something-about-aamina/|url-status=dead}}</ref> धारावाहिक 'मात', 'उड़ान', और 'मेरा साईं' में उनके कार्य को आलोचकों द्वारा सराहा गया। मातृत्व अवकाश के कारण कुछ समय तक अभिनय से दूर रहने के बाद,<ref>{{Cite web|url=https://tribune.com.pk/story/1092884/i-want-to-prove-that-mothers-can-work-too-aamina-sheikh|title=I thought very carefully about entering motherhood: Aamina Sheikh|last=|first=|date=2016-04-28|website=The Express Tribune|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> उन्होंने 2025 में ड्रामा 'केस नंबर 9' (Case No. 9) के माध्यम से टेलीविजन पर वापसी की।<ref>{{Cite web|url=https://images.dawn.com/news/1194210|title=Aamina Sheikh’s return to TV with Case No. 9 is a case of doing the right thing at the right time|last=Khalid|first=Eefa|date=2025-09-30|website=Images|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.khaleejtimes.com/entertainment/pakistani-actress-aamina-sheikh-makes-a-powerful-comeback-with-case-no-9|title=Pakistani actress Aamina Sheikh makes a powerful comeback with 'Case No. 9'|website=Khaleej Times|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> === फिल्म === 2014 में उन्होंने एक्शन-थ्रिलर फिल्म 'ऑपरेशन 021' (Operation 021) में अभिनय किया।<ref>{{Cite web|url=https://tribune.com.pk/story/773943/operation-021-its-worth-your-patience|title=Operation 021: It’s worth your patience|last=Zeeshan.Ahmad|date=2014-10-11|website=The Express Tribune|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> 2018 में प्रदर्शित उनकी फिल्म 'केक' (Cake) को व्यावसायिक सफलता प्राप्त हुई और इसके लिए उन्हें आलोचनात्मक प्रशंसा मिली।<ref>{{Cite news|url=http://www.theguardian.com/film/2018/mar/29/cake-review-asim-abbasi-sanam-saeed-aamina-sheikh|title=Cake review – Karachi sister act ditches melodrama for real life|last=McCahill|first=Mike|date=2018-03-29|work=the Guardian|access-date=2026-03-20|language=en-GB|issn=0261-3077}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://tribune.com.pk/story/1678171/cake-takes-big-bite-box-office-share|title='Cake' takes a big bite of box office share|last=|date=2018-04-05|website=The Express Tribune|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> == व्यक्तिगत जीवन == आमिना शेख ने 2005 में पाकिस्तानी अभिनेता मोहिब मिर्ज़ा से विवाह किया था।<ref>{{Cite web|url=https://jang.com.pk/thenews/feb2010-weekly/nos-14-02-2010/instep/mainissue.htm|title=INSTEP Magzine|website=jang.com.pk|access-date=2026-03-20}}</ref> 2019 में दोनों का तलाक हो गया। अगस्त 2020 में, उन्होंने उमर फारूकी के साथ अपने दूसरे विवाह की पुष्टि की। == पुरस्कार और नामांकन == * नामांकित - सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, लक्स स्टाइल अवार्ड्स 2019<ref>{{Cite web|url=https://images.dawn.com/news/1182224|title=Lux Style Awards 2019 nominations are out!|last=Staff|first=Images|date=2019-03-30|website=Images|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref> * विजेता - सर्वश्रेष्ठ टीवी अभिनेत्री (विभिन्न वर्ष)<ref>{{Cite web|url=https://tribune.com.pk/story/405425/lux-style-awards-and-the-best-tv-show-is|title=Lux Style Awards: And the best TV show is...|last=saadia.qamar|date=2012-07-08|website=The Express Tribune|language=en|access-date=2026-03-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.fashioncentral.pk/fashion_events/9th-lux-style-awards-2010/|title=9th LUX Style Awards|website=Fashion Central|language=en-US|access-date=2026-03-20}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.dailytimes.com.pk/entertainment/12-Aug-2014/nominees-announced-for-2014-lux-style-awards|title=Nominees announced for 2014 Lux Style Awards|work=Daily Times|access-date=2026-03-20}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|3132049|आमिना शेख}} * [https://www.wikidata.org/wiki/Q4661481 विकिडाटा पर आमिना शेख] {{नियंत्रण प्राधिकरण}} [[श्रेणी:1981 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:पाकिस्तानी टेलीविजन अभिनेत्रियाँ]] [[श्रेणी:पाकिस्तानी फिल्म अभिनेत्रियाँ]] [[श्रेणी:पाकिस्तानी महिला मॉडल]] [[श्रेणी:न्यूयॉर्क शहर के लोग]] eq0e37clp7qqi0bofbr3ooav55hpwqs गौड़ राज्य 0 752306 6536740 6230513 2026-04-06T03:34:53Z ~2026-21171-63 918993 चीनी भिक्षु शुआनज़ैंग के लेखों में उनका उल्लेख शे-शांग-किया के रूप में किया गया है। उन्हें शशांक गौर, एक शैव ब्राह्मण राजा भी कहा जाता है। स्रोत:- एनसीईआरटी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारत का शिक्षा मंत्रालय। भारत सरकार 🇮🇳 6536740 wikitext text/x-wiki {{Infobox Former Country |native_name = गौड़ राज्य |common_name = गौड़ राज्य |continent = एशिया |region = |country = भारत |era = |government_type = Monarchy |year_start = 590 |year_end = 626 |event_pre = |date_pre = |event_start = |date_start = |event_end = |date_end = |p1 = |flag_p1 = |s1 = |flag_s1 = |image_flag = |image_coat = |image_map = South Asia historical AD625 EN.svg |image_map_caption = Gauda (in eastern India) and its contemporaries, c. 625 CE |capital = [[Murshidabad|Karnasuvarna]] (present day [[West Bengal, India]]) |national_motto = |national_anthem = |common_languages = |religion = [[हिन्दू धर्म]] |currency = |dynasty = [[गौड़ राजपुत]] |leader1 = [[शशांक]] |year_leader1 = 590–625 |leader2 = [[मानव (राजा)|मानव]] |year_leader2 = 625–626 |}} '''गौड़ / गोर राज्य''' ७वीं शताब्दी के बंगाल का एक राज्य था जिसका संस्थापक [[शशांक]] नामक एक गौड़ ब्राह्मण राजा था। [[श्रेणी:प्राचीन भारत]] te8sns57i9n3tkxlna27z2rqvjqs4zq अल उमरी मस्जिद 0 763284 6536614 6529691 2026-04-05T15:33:15Z Mnjkhan 900134 6536614 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building |infobox_width= |image=Mosque of umar, bosra, syria, easter 2004.jpg |image_size= |caption= |building_name=अल उमरी मस्जिद<br />Al-Omari Mosque<br/>المسجد العمري |location={{flagicon|Syria}} [[बुसरा अल शाम|बोसरा]], [[सीरिया]] |geo= |religious_affiliation=[[इस्लाम]] |region=[[लेवंट|लेवेन्ट]] |functional_status=सक्रिया |website= |architect= |architecture_type=[[मस्जिद]] |architecture_style=उमय्यद |year_completed=721 ईस्वी |construction_cost= |capacity= |dome_quantity= |dome_height_outer= |dome_dia_outer= |minaret_quantity=1 |minaret_height= |materials= }} '''अल उमरी मस्जिद''' बोसरा की अल-ओमारी मस्जिद Al-Omari Mosque ({{lang-ar‏|‏‎'''‎المسجد العمري'''‎}}) [[सीरिया]] के प्राचीन रोमन शहर [[बुसरा अल शाम|बोसरा]] में एक मस्जिद है, जो एक [[विश्व धरोहर स्थल]] है। मस्जिद की स्थापना खलीफ़ा हज़रत उमर ने की थी, जिन्होंने 636 ई. में सीरिया पर मुस्लिम विजय का नेतृत्व किया था, और इसे खलीफ़ा यज़ीद द्वितीय द्वारा 721 ई. में पूरा किया गया था। मस्जिद का जीर्णोद्धार 12वीं और 13वीं शताब्दी ई. में अय्यूबिद राजवंशों द्वारा किया गया था। सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान 2012 और 2014 के बीच मस्जिद को हल्का नुकसान पहुँचा था। मस्जिद का जीर्णोद्धार किया गया है।.<ref>{{Cite AV media |url=https://www.youtube.com/watch?v=6xGbOou2170 |title=المسجد العمري في بصرى الشام {{!}} مآذن الشام |date=2018-06-12 |last=Syria TV تلفزيون سوريا |access-date=2025-10-14 |via=YouTube}}</ref> ==इतिहास== यह मस्जिद दुनिया की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। यह यात्रियों, सीरिया से होकर जाने वाले ट्रेड रूट पर अरब कारवां और मक्का जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए आराम करने की जगह का काम करती थी। यात्री मस्जिद के बीच के आंगन को बाज़ार के साथ-साथ सोने की जगह के तौर पर भी इस्तेमाल करते थे। मस्जिद के पूर्वी और पश्चिमी तरफ के आर्केड इस बीच के आंगन को घेरे हुए थे। मस्जिद के दक्षिण की ओर एक डबल आर्केड था जो मस्जिद के प्रार्थना हॉल की ओर जाता था। मस्जिद की चौकोर मीनार उमय्यद-स्टाइल की मीनारों के शुरुआती उदाहरणों में से एक थी। [[दमिश्क]] और [[अलेप्पो]] की मस्जिदों में भी उसी वंश की इसी तरह की मीनारें हैं। मीनारों का यह स्टाइल शायद सीरियाई चर्चों की मीनारों से प्रेरित था। बोसरा को नुकसान 2012 में शुरू हुआ, जब [[सीरियाई गृहयुद्ध]] के दौरान गोले और टैंकों से नुकसान हुआ। 2014 में, गोले के गड्ढे से हुए नुकसान से मस्जिद की छत में छेद हो गया। मस्जिद का मलबा तबाही वाली जगह के आसपास बिखरा हुआ है, और आस-पास के इलाके में भी शेल से नुकसान हुआ है। ==सन्दर्भ== [[श्रेणी:मस्जिद]] [[श्रेणी:सीरिया में मस्जिदें]] igxzm2w1mzn3rh4aw3yvvu9vhdgapts 2014 शीतकालीन ओलंपिक में भारत 0 827351 6536801 6387337 2026-04-06T06:11:57Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:शीतकालीन ओलंपिक २०१४]] जोड़ी 6536801 wikitext text/x-wiki {{infobox country at games | NOC = IND | NOCname = [[भारतीय ओलम्पिक संघ|भारतीय ओलंपिक संघ]] | games = Winter Olympics | year = 2014 | flagcaption = | oldcode = | website = {{url|www.olympic.ind.in }} | location = [[सोची]] | competitors = 3 | sports = 3 | flagbearer = स्वयंसेवी - ओलंपिक ध्वज ([[राष्ट्रों के 2014 शीतकालीन ओलंपिक परेड|प्रारंभिक]])<ref>{{cite web |url=http://www.olympic.org/Documents/Games_Sochi_2014/Flagbearers_Sochi_2014_Opening_Ceremony.pdf |title=Sochi 2014 Opening Ceremony&nbsp;— Flagbearers |author=<!--Staff writer(s); no by-line.--> |date=7 February 2014 |website=olympic.org |publisher=[[Sochi 2014 Olympic and Paralympic Organizing Committee]] |accessdate=7 February 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140326222842/http://www.olympic.org/Documents/Games_Sochi_2014/Flagbearers_Sochi_2014_Opening_Ceremony.pdf |archive-date=26 मार्च 2014 |url-status=live }}</ref><br>[[हिमांशु ठाकुर]] ([[2014 शीतकालीन ओलंपिक समापन समारोह ध्वज धारक|समापन]])<ref>{{cite web|title=Sochi 2014 Closing Ceremony - Flagbearers|url=http://www.olympic.org/Documents/Games_Sochi_2014/Flagbearers_Sochi_2014_Closing_Ceremony.pdf|publisher=The [[अन्तरराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति]] (IOC)|date=23 February 2014|accessdate=23 February 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140327092930/http://www.olympic.org/Documents/Games_Sochi_2014/Flagbearers_Sochi_2014_Closing_Ceremony.pdf|archive-date=27 मार्च 2014|url-status=live}}</ref> | rank = 13 | gold = 0 | silver = 0 | bronze = 0 | officials = | appearances = auto | app_begin_year = 2014 | app_end_year = | summerappearances = | winterappearances = | seealso = {{flagIOC|IND}} }} रूस के सोची में [[2014 शीतकालीन ओलम्पिक|2014 शीतकालीन ओलंपिक]] में 3 एथलीटों ने '''[[भारत]]''' का प्रतिनिधित्व किया, 7 से 23 फरवरी 2014 को। उन्होंने शुरुआत में ओलंपिक ध्वज के तहत प्रतिस्पर्धा करने वाले स्वतंत्र ओलंपिक प्रतिभागियों के रूप में प्रतियोगिता में प्रवेश किया, क्योंकि भारतीय ओलंपिक संघ 2012 से आईओसी द्वारा निलंबित कर दिया गया था।<ref>{{cite news|author= |title=Shiva Kesavan hopes India's suspension lifted before Sochi Olympics |url=http://olympics.cbc.ca/news/article/shiva-kesavan-hopes-india-suspension-lifted-before-sochi-olympics-30984.html |newspaper=[[Canadian Broadcasting Corporation]] |location= |agency=Associated Press |date=18 December 2013 |accessdate=31 January 2014 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20140129111156/http://olympics.cbc.ca/news/article/shiva-kesavan-hopes-india-suspension-lifted-before-sochi-olympics-30984.html |archivedate=29 January 2014 |df=dmy-all }}</ref><ref name="d">{{cite news |last= |first= |date=10 January 2014 |title=Three Indians to take part in Sochi Winter Games |url=http://timesofindia.indiatimes.com/sports/tournaments/2014-sochi-winter-olympics/Three-Indians-to-take-part-in-Sochi-Winter-Games/articleshow/28596848.cms |newspaper=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] |location= |publisher= |accessdate=10 January 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151129170218/http://timesofindia.indiatimes.com/sports/tournaments/2014-sochi-winter-olympics/Three-Indians-to-take-part-in-Sochi-Winter-Games/articleshow/28596848.cms |archive-date=29 नवंबर 2015 |url-status=live }}</ref> हालांकि, 11 फरवरी 2014 को आईओसी ने चुनाव कराने के बाद भारत के एनओसी को दोबारा खारिज कर दिया था, जिसमें दो एथलीटों की अनुमति दी गई थी, जो अब भी स्वतंत्र एथलीटों की बजाए भारतीय ध्वज के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करने की योजना बना रहे थे।<ref name=reinstate>{{cite web |url=http://edition.cnn.com/2014/02/11/world/asia/sochi-olympics-india-reinstated/index.html?hpt=hp_t2 |title=International Olympic Committee reinstates India at Sochi after ban - CNN.com |publisher=Edition.cnn.com |date=2014-02-11 |accessdate=2014-02-11 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140222091016/http://edition.cnn.com/2014/02/11/world/asia/sochi-olympics-india-reinstated/index.html?hpt=hp_t2 |archive-date=22 फ़रवरी 2014 |url-status=live }}</ref> भारत अभी भी अपनी पहली शीतकालीन ओलंपिक पदक जीतने के लिए अभी तक नहीं है। == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:शीतकालीन ओलंपिक २०१४]] na3exlnxk2q7mz68r2au10rb2v76stc अमित जोगी 0 876767 6536836 5012893 2026-04-06T07:03:24Z Chiefofmanythings 905732 6536836 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अमित जोगी | image = | birth_date = {{birth date and age|1977|8|7|df=y}} | office = विधायक, [[छत्तीसगढ़ विधान सभा]] | term = 2013-2018 | nationality = [[भारतीय]] | party = [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] वर्तमान में [[जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे]] | spouse = रिचा जोगी }} अमित जोगी एक भारतीय [[राजनीति]]ज्ञ तथा [[छत्तीसगढ़]] विधानसभा के पूर्व सदस्य रहे है | वे पूर्व मुख्यमंत्री [[अजीत जोगी]] के पुत्र हैं | वर्तमान में [[जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे]] के अध्यक्ष हैं == जग्गी हत्याकांड == अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2003 के रामावतार जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।<ref>{{cite news |title=अमित जोगी को जग्गी हत्याकांड में उम्रकैद |url=https://www.ibc24.in/chhattisgarh/bilaspur/amit-jogi-jaggi-hatyakand-3539895.html |work=IBC24 |access-date=6 अप्रैल 2026}}</ref><ref>{{cite news |title=Chhattisgarh High Court sentences Amit Jogi to life imprisonment in Jaggi murder case |url=https://zeenews.india.com/hindi/india/chhattisgarh/amit-jogi-to-life-imprisonment-in-jaggi-murder-case-chhattisgarh-high-court-sentences/3167615 |work=Zee News |access-date=6 अप्रैल 2026}}</ref> ==सन्दर्भ== [[श्रेणी:भारतीय राजनीतिज्ञ]] joaum0vb8z4zlk4qog2hkajfvi1tm02 विकिपीडिया:प्रयोगस्थल 4 935970 6536589 6536489 2026-04-05T13:02:55Z चाहर धर्मेंद्र 703114 प्रयोगस्थल खाली किया। 6536589 wikitext text/x-wiki {{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!-- * Welcome to the sandbox! * * Please leave this part alone * * The page is 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KANPUR टेलीग्राम चैनल: AGRI SAMRAT KANPUR Facebook: शशि सर डिजिटल उपस्थिति AGRI SAMRAT KANPUR नाम से इनका एक मोबाइल एप्लिकेशन भी Google Play Store पर उपलब्ध है। शिक्षा पोस्ट ग्रेजुएशन (कृषि) व्यक्तिगत जीवन शशि करण चौधरी उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के एक गाँव के निवासी हैं। पिता का नाम: श्री भागीरथ चौधरी है l पेशा: किसान अन्य जानकारी शशि सर अपनी सरल और परीक्षा-उन्मुख शिक्षण शैली के लिए जाने जाते हैं, जिससे छात्र कम समय में बेहतर तैयारी कर पाते हैं। hskly4udt8cavcdgd9jdngjntwb1jdv 6536737 6536682 2026-04-06T03:00:49Z Sanjeev bot 127039 बॉट: प्रयोगस्थल खाली किया। 6536737 wikitext text/x-wiki {{Please leave this line alone (sandbox heading)}}<!-- * Welcome to the sandbox! * * Please leave this part alone * * The page is cleared regularly * * Feel free to try your editing skills below * * अपने परीक्षण संपादन इस लाइन के नीचे करें * ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■--> nqyrael75jv4pl2ws5ryi3yf27rl3hh अशरफ़ अली थानवी 0 983898 6536892 6219601 2026-04-06T08:18:43Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536892 wikitext text/x-wiki {{Infobox Muslim scholar | name = {{big|मोहम्मद अशरफ़ अली}} <br>muhammad Ashraf Ali<br>{{big|{{lang|ur|{{Nastaliq|محمد اشرف علی}}}}}} | image = |caption = |honorific_prefix = [[उलमा]]<br> हकीम उल उम्मत, <br>मौलाना |denomination = [[सुन्नी इस्लाम]] |nationality = [[भारतीय]] |ethnicity = [[भारतीय]] |era = आधुनिक युग |occupation = [[उलमा]] |denomination = [[सुन्नी इस्लाम]] |Madh'hab = [[हनफ़ी पन्थ]] |creed = "मटुरिडी"<ref>{{cite journal|url=https://brill.com/view/journals/wdi/60/2-3/article-p293_6.xml?language=de#FN000073|title=Salafī Challenge and Māturīdī Response: Contemporary Disputes over the Legitimacy of Māturīdī kalām|year=2020|publisher=Brill|doi=10.1163/15700607-06023P06|last1=Bruckmayr|first1=Philipp|journal=Die Welt des Islams|volume=60|issue=2–3|pages=293–324|doi-access=free}}</ref> |module2={{Infobox Muslim scholar |embed =yes |movement = [[देवबन्दी]] |Sufi_order = [[चिश्ती तरीक़ा|चिश्ती]] |disciple_of = [[इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की]] |alma_mater = [[दारुल उलूम देवबन्द]] |main_interests = [[सूफ़ीवाद]] |notable_ideas = जीवन के हर पहलू का सुधार, संयम, और इस्लामीकरण, [[पाकिस्तान]] का निर्माण, [[दो राष्ट्र सिद्धांत]] |works = "बयानुल क़ुरान , बहिश्ती जेवर" |disciples = {{big|खैर मुहम्मद जालंधरी<br>अतहर अली बंगाली}} |influences = {{big|[[अबू हनीफ़ा]]<br>[[इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की]]<br>फतेह मुहम्मद जालंधरी}} |influenced = {{big|शमसुल हक फरीदपुरी<br>मुहम्मद तकी उस्मानी<br>[[मुहम्मद इदरीस कांधलवी]]<br>जमील अहमद थानवी<br>जफर अहमद उस्मानी<br>अब्द अल -फतह अबू घुड्डा<br>इस्लामिक विद्वानों की बाद की पीढ़ी, विशेष रूप से [[देवबन्दी]], उनके खुलाफा}} }}}} {{देवबंदी आंदोलन}} {{इस्लाम}} '''मौलाना मुहम्मद अशरफ़ अली थानवी''' (19 अगस्त 1863 - 4 जुलाई 1943 ईस्वी) (5 रबी-अल-थानी 1280 - 17 [[रज्जब]] 1362 [[हिजरी]]) [[उर्दू]]:{{Nastaliq| مولانا اشرف علی تھانوی}} एक भारतीय विद्वान और [[हनफ़ी पन्थ|हनफ़ी]] स्कूल के सूफ़ी संरक्षक थे।उन्होंने तफ़सीर '''बयान उल कुरान''' और '''बिश्ती ज़ेवर''' लिखा। ==प्रारंभिक जीवन और करियर == ===बचपन === उन्होंने पांच साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था और उनके पिता ने उनकी विशेष देखभाल और ध्यान से पालन-पोषण किया। उनके पिता ने उन्हें और उनके छोटे भाई अकबर 'अली, को अनुशासन और अच्छा चरित्र सिखाया था।<ref name=haqislam>[http://haqislam.org/maulana-ashraf-ali-thanwi/ Profile of Ashraf Ali Thanwi on haqislam.org website] Published 9 November 2014, Retrieved 11 August 2020</ref> === करियर === स्नातक होने के बाद, थानावी ने फैज़-ए-आम मदरसा, [[कानपुर]] में धार्मिक विज्ञान की किताबें पढ़ायीं।<ref name=haqislam/> थोड़े समय में, उन्होंने अन्य विषयों के बीच [[सूफीवाद]] के एक धार्मिक विद्वान के रूप में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त किया।<ref name=haqislam/><ref>Ali Abbasi, Shahid. (2008, January–March)</ref><ref name=haqislam/><ref>Rethinking in Islam: Mawlana Ashraf 'Ali Thanawi on Way and Way-faring. ''Hamdard Islamic-us'', 21(1), 7–23. (Article on Ashraf 'Ali's teachings on Sufism.)</ref> उनके शिक्षण ने कई छात्रों को आकर्षित किया और उनके शोध और प्रकाशन इस्लामी संस्थानों में प्रसिद्ध हो गए। इन वर्षों के दौरान, उन्होंने विभिन्न शहरों और गांवों की यात्रा की, लोगों को सुधारने की आशा में व्याख्यान दिए। उनके व्याख्यानों और प्रवचनों के मुद्रित संस्करण आमतौर पर इन दौरों के तुरंत बाद उपलब्ध हो गए। उस समय तक, कुछ इस्लामी विद्वानों ने अपने व्याख्यान मुद्रित किए थे और व्यापक रूप से अपने जीवनकाल में प्रसारित किए थे। उनके कानपुर प्रवास के दौरान जनता में सुधार की इच्छा तीव्र हो गई।<ref name=haqislam/> आखिरकार, थानवी ने शिक्षण से संन्यास ले लिया और थाना भवन, यूपी, भारत में अपने गुरु, [[इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की]] के आध्यात्मिक केंद्र ([[खानकाह|खानकाह]]) को फिर से स्थापित करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया।<ref name=haqislam/> ==बरेलवियों द्वारा विरोध== 1906 में, [[इमाम अहमद रज़ा]] और अन्य विद्वानों ने थानवी और अन्य देवबंदी नेताओं के खिलाफ "हुसम उल-हरमैन" शीर्षक से एक [[फतवा]] जारी किया। ({{lang-ur|دو مقدس مساجد کی تلوار}}) उन्हें अविश्वासी और शैतानवादी कहते थे<ref>[https://sufimanzil.org/arabic-fatwa-against-deobandis/ 'Arabic Fatwa against Deobandis'] Sufi Manzil website, Published 3 May 2010, Retrieved 11 August 2020</ref><ref>Ahmad Raza Khan. Hussam-ul-Harmain</ref><ref>Fatawa Hussam-ul-Hermayn by [[इमाम अहमद रज़ा|खान, अहमद रज़ा क़ादरी]]</ref><ref>As-samare-ul-Hindiya by Khan, Hashmat Ali</ref> फतवे के आरोपियों सहित देवबंदी के बुजुर्गों ने मामले को स्पष्ट करने के लिए [[हिजाज़]] के विद्वानों द्वारा उन्हें भेजे गए सवालों का जवाब तैयार किया। इस प्रकार, "खलील अहमद सहारनपुरी" की '' "अल -मुहन्नद अला अल-मुफाननद" '' (अस्वीकृत पर तलवार), अरबी में लिखी गई थी और इनके द्वारा हस्ताक्षरित थी। अशरफ अली थानवी सहित सभी देवबंदी विद्वान<ref>{{Cite web|url=https://www.daruliftaa.com/node/151|title=Al-Muhannad ala 'l-Mufannad {{!}} daruliftaa.com|website=www.daruliftaa.com|access-date=2019-09-28}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/AlMuhannadalaAlMufannadTranslation|title=Al Muhannad 'ala Al Mufannad Urdu}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://archive.org/stream/AlMuhannadalaAlMufannadTranslation/Al-Muhannad_%27ala_al-Mufannad_Translation#page/n1/mode/2up|title=Al Muhannad 'ala Al Mufannad English|website=archive.org|access-date=2019-09-28}}</ref> स्पष्टीकरण देखने पर, हिजाज़ के विद्वानों ने अहमद रज़ा खान के फतवे के अनुमोदन को वापस ले लिया जो कि उपर्युक्त ''अल मुहन्नद'' के अंत में प्रकाशित हुआ था<ref>{{Cite web|url=https://dailytimes.com.pk/324512/ttp-and-tlp-different-labels-similar-ideology/|title=TTP and TLP: different labels, similar ideology?|last=Shah|first=Syed Talha|date=2018-11-20|website=Daily Times|language=en-US|access-date=2019-09-28}}</ref> थानवी के शिष्य [[मुर्तजा हसन चांदपुरी]] ने भी थानवी के बचाव में लेख और पत्रक लिखे।<ref name="hifzuliman">{{cite book |author1=Mawlānā Ashraf Ali Thanwi |title=Hifz al-Iman |publisher=Dar al-Kitab, [[देवबन्द]] |page=19}}</ref> ==शिक्षा== अशरफ अली थानवी ने जन्नत प्राप्त करने के लिए इस्लाम का पूरा रास्ता अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने उन [[सूफ़ीवाद|सूफियों]] को त्याग दिया जिन्होंने स्वैच्छिक [[नमाज़| पूजा]] पर जोर दिया लेकिन इस्लाम के अन्य [[ईमान|महत्वपूर्ण आदेशों]] की उपेक्षा की, जिसमें निष्पक्ष व्यवहार और दूसरों के अधिकारों को पूरा करना शामिल था।इस प्रकार उनका जोर बुनियादी व्यक्तिगत सुधार पर अधिक होगा और वज़िफ़ का नुस्खा बाद में आएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ashrafiya.com/2019/09/18/the-essential-instructions-for-mureed/|title=The essential instructions for mureed|last='abd|date=2019-09-18|website=ASHRAFIYA|language=en-US|access-date=2019-09-28}}</ref> कभी-कभी, वह उस मामले के प्रति सावधान और जोर देते थे, जिसे आम तौर पर इस्लाम और आध्यात्मिकता से संबंधित नहीं माना जाता है, लेकिन वह भूले हुए और अनदेखा लिंक की व्याख्या करेंगे। उदाहरण के लिए, एक बार उन्होंने अपने करीबी शिष्य [[मुहम्मद शफी देवबन्दी|मुफ्ती मुहम्मद शफी]] के बेटे पर अपनी लिखावट में सुधार करने पर जोर दिया ताकि दूसरे इसे आसानी से पढ़ सकें। इसके बाद, उन्होंने टिप्पणी की कि वह इस मामले पर जोर देकर उन्हें 'सूफी' बनने के लिए पोषित कर रहे थे। (क्योंकि दूसरे के आराम के प्रति सचेत रहना उनकी सूफीवाद की शिक्षाओं का केंद्र था)<ref>{{Cite web|url=https:///2018/08/05/handwriting-and-spirituality/|title=Handwriting and Spirituality|last=Talhah|first=Sayyid|date=2018-08-05|website=Pearls for Tazkiyah|language=en|access-date=2019-09-28}}{{Dead link|date=अक्तूबर 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> ==राजनैतिक विचार== अशरफ अली थानवी मुस्लिम लीग के प्रबल समर्थक थे।<ref name="Dawn">{{cite news | url=https://www.dawn.com/news/1042583 | title='What's wrong with Pakistan?' | newspaper=Dawn | date=13 September 2013 | access-date=22 January 2020}}</ref> उन्होंने [[अखिल भारतीय मुस्लिम लीग |अखिल भारतीय मुस्लिम लीग(AIML)]] के नेतृत्व के साथ एक पत्राचार बनाए रखा, जिसमें [[मुहम्मद अली जिन्ना| मोहम्मद अली जिन्नाह]] भी शामिल थे। उन्होंने [[मोहम्मद अली जिन्नाह|श्री जिन्ना]] को धार्मिक सलाह और अनुस्मारक देने के लिए उलमा के समूहों को भी भेजा।<ref name=":0">{{Cite book|title=Tehreek e Pakistan aur Ulama e Rabbani|last=Khan|first=Munshi Abdur Rahman|location=Karachi, Pakistan}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|title=Maulana Ashraf Ali Thanwi aur Tehreek e Azadi|last=Saeed|first=Professor Ahmad|location=Lahore, Pakistan}}</ref> उन्होंने और उनके शिष्यों ने पाकिस्तान के निर्माण की मांग को अपना पूरा समर्थन दिया।<ref name="Khan1988">{{cite book|author=Shafique Ali Khan|title=The Lahore resolution: arguments for and against : history and criticism|url=https://books.google.com/books?id=910eAAAAMAAJ|year=1988|publisher=Royal Book Co.|isbn=9789694070810}}</ref> 1940 के दशक के दौरान, कई [[देवबंदी|देवबंदी उलमा]] ने कांग्रेस का समर्थन किया लेकिन अशरफ अली थानवी और [[मुहम्मद शफी देवबन्दी|मुहम्मद शफी]] और "शब्बीर अहमद उस्मानी" सहित कुछ अन्य प्रमुख [[देवबंदी|देवबंदी विद्वान]] मुस्लिम लीग के पक्ष में थे।<ref name="SvanbergWesterlund2012">{{cite book|first1=Ingvar|last1=Svanberg|first2=David|last2=Westerlund|title=Islam Outside the Arab World|url=https://books.google.com/books?id=Jt8rBgAAQBAJ&pg=PA224|date=6 December 2012|publisher=Routledge|isbn=978-1-136-11322-2|page=224}}</ref><ref name="Jetly2012">{{cite book|first=Rajshree|last=Jetly|title=Pakistan in Regional and Global Politics|url=https://books.google.com/books?id=ojQznTkR09kC&pg=PA156|date=27 April 2012|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-1-136-51696-2|pages=156–}}</ref> कांग्रेस समर्थक रुख के कारण थानवी ने देवबंद की प्रबंधन समिति से इस्तीफा दे दिया।<ref name="HutchinsonSmith2000">{{cite book|first=Francis|last=Robinson|editor-first=John|editor-last=Hutchinson|others=Anthony D. Smith|title=Nationalism: Critical Concepts in Political Science|chapter-url=https://books.google.com/books?id=NN0m_c8p6fgC&pg=PA930|year=2000|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-0-415-20112-4|pages=929–930|chapter=Islam and Muslim separatism.}}</ref> [[पाकिस्तान आंदोलन]] के लिए उनके समर्थन और उनके शिष्यों के समर्थन की [[अखिल भारतीय मुस्लिम लीग|अखिल भारतीय मुस्लिम लीग(AIML)]] के नेतृत्व ने काफी सराहना की।<ref name=":0" /><ref name=":1" /> इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पाकिस्तान आजाद हुआ था, पश्चिमी पाकिस्तान में उसका पहला झंडा फहराने का काम अल्लामा "शब्बीर अहमद उस्मानी" ने मुहम्मद अली जिन्ना और [[लियाक़त अली ख़ान|लियाकत अली]] की मौजूदगी में किया था; जबकि पूर्वी पाकिस्तान में, यह [[ख़्वाजा नज़ीमुद्दीन]] की उपस्थिति में अल्लामा ज़फ़र अहमद उस्मानी द्वारा किया गया था।<ref>{{Cite web|/2018/11/22/asia-bibi-case-pakistanis-need-to-bridge-the-mister-mulla-divide/|title=Asia Bibi case: Pakistanis need to bridge the 'mister-mulla' divide|last=Talhah|first=Sayyid|date=2018-11-22|website=Musings of a Muslim Doctor|language=en|access-date=2019-10-01}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://nation.com.pk/09-Dec-2014/npt-sitting-on-usmani|title=NPT sitting on Usmani|date=2014-12-09|website=The Nation|language=en|access-date=2019-10-01}}</ref> ==साहित्यिक कार्य == थानवी ने 345 किताबें और पुस्तिकाएं लिखीं, जबकि उनके भाषणों का संग्रह 300 से अधिक है।<ref>{{Cite book|title=The Islamic Renaissance in South Asia (1707-1867): The Role of Shah Waliallah and His Successors|author=Mahmood Ahmed Ghazi|author-link=Mahmood Ahmed Ghazi|location=New Delhi|publisher=Adam Publishers & Distributors |edition=2004|page=251}}</ref>उनके द्वारा प्रकाशित प्रकाशनों की कुल संख्या (अर्थात उनके स्वयं के लेखन और उनके भाषणों और उपाख्यानों और उनके पत्रों का प्रतिलेखन) को 1000 से अधिक के पार कहा जाता है। अंग्रेजी में उनके कुछ प्रकाशनों में शामिल हैं: * "इस्लाम की आज्ञाओं के पीछे का ज्ञान" * "बयान उल कुरान" * "बहिश्ती ज़ेवरी" * "सिद्धांत और कानून के मसाइल [[हनफ़ी पन्थ|हनफ़ी]] फ़िक़्ह" * "आधुनिकतावाद का उत्तर" * "पवित्र क़ुरआन के उपाय: आमले क़ुरआन का संक्षिप्त अनुवाद" * "मौलाना थानवी की संतों की कहानियां: अनुवाद, क़िससुल अकबर" * "इस्लाम का दर्शन" * "वांछनीय और भयानक के बीच उद्देश्य भेद" * "विलेख और प्रतिशोध: प्रश्न के लिए एक इस्लामी दृष्टिकोण" * "इस्लाम कीपूरी सच्चाई" * "आखीरा की इच्छा" * "सूखे और आपदाओं के लिए एक उपाय" ==विरासत== उनके कई विरोधियों द्वारा भी उनके फतवे और धार्मिक शिक्षाओं को बहुत आधिकारिक माना जाता था। इस प्रकार उनके कई समकालीनों ने भी उनकी सलाह ली और उन्हें उच्च सम्मान में रखा। उदाहरण के लिए, जब [[भारतीय विद्वान सूची|भारतीय विद्वान]], [[इतिहासकार]] और [[भाषाविज्ञान|भाषाविद्]], सैय्यद सुलेमान नदवी, इस्लामी आध्यात्मिकता की तलाश करना चाहते थे, तो वे थाना भवन गए। एक अन्य भारतीय विद्वान अब्दुल मजीद दरियाबादी ने भी ऐसा ही किया। यहां तक ​​कि मुहम्मद इकबाल ने भी एक बार अपने एक मित्र को लिखा था कि रूमी की शिक्षाओं के मामले में उन्होंने मौलाना अशरफ अली थानवी को सबसे बड़ा जीवित अधिकार माना है।<ref>Maqalat-e-Iqbal; Compiled by Syed Abdul Wahid Mueeni</ref><br> पाकिस्तानी विद्वान मुहम्मद इशाक मुल्तानी ने थानवी के सुधार कार्यों के इतिहास के बारे में 10 खंड का विश्वकोश लिखा है। इसमें चार पीढ़ियों तक थानवी के शिष्यों द्वारा की गई आत्मकथाएँ और कार्य भी शामिल हैं। [[मुफ्ती तकी उस्मानी]] जैसे समकालीन विद्वानों ने इस विश्वकोश के लिए प्रशंसा के शब्द लिखे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://taleefat.com/index.php?route=product%2Fproduct&product_id=146&tag=Karwan-mujaddid-thanvi-RA|title=کاروان مجدد تھانوی رحمہ اللہ|access-date=10 अक्तूबर 2021|archive-date=10 अक्तूबर 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20211010184048/https://taleefat.com/index.php?route=product%2Fproduct&product_id=146&tag=Karwan-mujaddid-thanvi-RA|url-status=dead}}</ref><ref>[https://quranwahadith.com/product/karwan-e-mujaddid-thanvi/ Ashraf Ali Thanwi book on quranwahadith.com website] Retrieved 11 August 2020</ref> == इन्हें भी देखें == * [[मुहम्मद शफी देवबन्दी]] == सन्दर्भ == {{Reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== * पीडीएफ़ प्रारूप में [https://web.archive.org/web/20141005060649/http://aapkaislam.com/books-by-ashraf-ali-thanvi.html अशरफ़ अली थानवी पर संकलन] {{authority control}} == आगे पढ़ना == * ज़मान, मुहम्मद कासिम, [https://www.scribd.com/doc/33417145/Ashraf-Ali-Thanawi-Islam-in-Modern-South-Asia-Makers-of-the-Muslim-World Ashraf `Ali Thanawi: Islam in Modern South Asia (Makers of the Muslim World)]{{Dead link|date=जनवरी 2022 |bot=InternetArchiveBot }}, Oneworld, 2007. * अहमद, मुनीरुद्दीन,[http://munir.my-place.us/Thanavi.pdf]{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }} [[श्रेणी:1863 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:१९४३ में निधन]] [[श्रेणी:मौलाना]] [[श्रेणी:क़ुरआन के अनुवादक]] paawybbdi67ppeypwsbf76gnl83j75v चक उपजाति 0 1039353 6536690 6247378 2026-04-05T19:05:42Z Sanjay kumar Khatik 841048 Added Census 1931 reference for historical classification 6536690 wikitext text/x-wiki चक उत्तर प्रदेश में पाई जाने वाली हिन्दू खटीक जाति की ही एक उपजाति है।<ref>{{Cite web|url=https://m.jagran.com/uttar-pradesh/auraiya-11238128.html|title=घर-घर जाएंगे, मतदाताओं में जागरुकता लाएंगे|website=m.jagran.com}}</ref> जिनको [[बुन्देलखण्ड|बुंदेलखंड]] में '''चिकवा''' और [[कानपुर]], [[आगरा]], [[बरेली]] मंडल में [[:en:Chik|चिक]] पुकारा जाता था।<ref>http://www.bcmbcmw.tn.gov.in/obc/faq/uttarpradesh.pdf</ref> बाद में आईपीएस अधिकारी [[एस एन चक]] द्वारा चक उपनाम अपनाने के बाद समस्त चिक, चिकवा समुदाय के लोगों ने चक उपनाम अपना लिया। According to the Census of India, 1931 (United Provinces), the caste category "Khatik" included "Chik" and "Chikwa", indicating that these names were administratively treated as part of the same broader caste group. This classification suggests that the identities of Chik and Chikwa were historically associated within the larger Khatik community in official records. <nowiki><ref>Census of India, 1931, United Provinces.</ref></nowiki> == पुस्तैनी कार्य == '''चक जाति''' का पुश्तैनी कार्य मुस्लिम चिकवा की भांति काटने के लिए बकरा पालना, बेचना, बकरा काट कर मांस, खाल, बेचना रहा है, जिससे सिद्ध होता है कि ये किसी जाति की ही उपजाति नहीं है क्योंकि चक जाति का मुख्य व्यवसाय बकरे का मांस काटने व बेचने से ही सम्बंधित रहा है। == चक जाति का इतिहास == # 1950 के आस पास इस समाज के तत्कालीन महान समाजसेवी स्वर्गीय भैरव प्रसाद उर्फ महाशय जी ने उपनाम में चिकवा, '''चिक''' के बजाय '''चक''' लिखने की शुरुआत की।<ref>{{Cite web|url=http://www.ncbc.nic.in/user_panel/GazetteResolution.aspx?Value=mPICjsL1aLvxbegUDuc3MN4eB5E3Ecc1drRPAf1qXQ+l0IqIfhjN1xHrf4i2h5g0|title=National Commission for Backward Classes|website=www.ncbc.nic.in}}</ref> # [[कानपुर]] के [[झींझक, कानपुर देहात|झींझक]] कस्बे के निवासी और [[मैनपुरी]] में कचहरी में एक वकील के मुंशी श्री ओमप्रकाश, जो कि चक उपजाति (खटीक) के ही थे, ने 8 नवम्बर 1994 को अपनी ओर से व्यक्तिगत हैसियत में आयोग को एक पन्ने का प्रार्थनापत्र दे कर अनुरोध किया कि हम चिकवा, चिक, चक कहलाते हैं और बकरा काटने का काम करते हैं। हमारी तरह जो मुस्लिम बकरे का कार्य करते हैं वे चिकवा, कसाब हैं और पिछड़ी जातियों की सूची में हैं इसलिए उन्हें पिछड़ी जाति के लिए सब लाभ मिलते है लेकिन चूंकि हम पिछड़ी जातियों की सूची में नहीं हैं इसलिए हमें कोई लाभ नही मिल रहा है। श्री ओमप्रकाश ने यह प्रार्थना की कि यूपी की पिछड़ी जातियों की सूची में '''चक''' को भी सम्मिलित कर लिया जाए। परन्तु उन्होंने यह नहीं बताया कि हम चक अनुसूचित जाति का लाभ वर्षों से प्राप्त कर रहे हैं।<ref>{{Cite web |url=http://edistrict.up.nic.in/GOs/CasteListCentral.pdf |title=संग्रहीत प्रति |access-date=18 मई 2019 |archive-date=12 जुलाई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180712181110/http://edistrict.up.nic.in/GOs/CasteListCentral.pdf |url-status=dead }}</ref> # यूपी की तत्कालीन मायावती सरकार ने 1995 में शासनादेश जारी कर चक को प्रदेश की पिछड़ी जातियों की सूची में सम्मिलित कर लिया। # उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जिलों में वृहत स्तर पर फील्ड सर्वे कराया जिससे यह स्पष्ट हो गया कि चक, चिक और चिकवा एक दूसरे के पर्यायवाची हैं । समाज के लोगों ने अनेक बार अधिकारियों को निवेदन दिया है कि इसे पिछड़ी जाति की सूची से बाहर निकाला जाए लेकिन आयोग इसको पिछड़ी सूची से बाहर निकालने के लिए तो तैयार हो गया है लेकिन पुनः अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए सहमति नहीं बन पा रही है।<ref>{{Cite web|url=https://www.khatiksamaj.net/chak-samaj-history/|title=चक उपजाति का इतिहास|last=|first=|date=|website=Khatik Samaj|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}{{Dead link|date=अगस्त 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == महत्वपूर्ण व्यक्ति == श्री [[एस एन चक]], (उप्र पुलिस महानिदेशक, से.नि.)<ref>{{Cite web|url=http://www.khatiksamaj.in/view_profile.php?achiever_id=11|title=Khatik People|last=|first=|date=|website=KhatikSamaj.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20181020085659/http://khatiksamaj.in/view_profile.php?achiever_id=11|archive-date=20 अक्तूबर 2018|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.oneindia.com/2007/07/31/eight-ips-officers-transferred-in-up-1185946860.html|title=Eight officers transferred in Uttar Pradesh|last=|first=|date=|website=|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> == संदर्भ == <references /> [[श्रेणी:जाति]] tlcamy0elbqxk81w1a6wgndq6t78vua वार्ता:चक उपजाति 1 1053032 6536689 4235107 2026-04-05T18:41:24Z Sanjay kumar Khatik 841048 /* Reliable Sources and Content Accuracy Concern */ नया अनुभाग 6536689 wikitext text/x-wiki इस पेज के साथ छेड़छाड़ की गई है, इसका पूरा लेख किसी ने बदल दिया गया है, बिना जानकारी के इस तरह की नीच हरकत नहीं करनी चाहिए। <span style="color:green;">☆★</span>[[u:Sunilbutolia|<u>'''<span style="color:Magenta;">सुनील कुमार</span>'''</u>]] ([[User talk:Sunilbutolia|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 01:33, 30 जून 2019 (UTC)sunilbutolia == Reliable Sources and Content Accuracy Concern == I would like to raise a concern regarding the accuracy and sourcing of content in this article. Some of the current statements appear to lack strong, verifiable references or may not fully reflect established historical and census-based classifications. As per Wikipedia’s policies on verifiability and reliable sourcing, content should be supported by authoritative sources. In this context, I would like to highlight the following reliable references: 1. The Census of India, 1931 (United Provinces), an official government publication, clearly categorizes caste groups and states that "Khatik includes Chik, Chikwa and Khatik." 2. W. Crooke (1896), in "The Tribes and Castes of the North-Western Provinces and Oudh". 3. Ghaus Ansari (1960), in "Muslim Caste in Uttar Pradesh". These are well-documented, scholarly and governmental sources. I request that: - Content be reviewed in light of these sources - Unsourced or weakly sourced claims be reconsidered or improved - Relevant, verifiable information from the above sources be incorporated This is not intended to promote any viewpoint, but to improve the article in line with Wikipedia’s content policies. Thank you. <nowiki>~~~~</nowiki> [[सदस्य:Sanjay kumar Khatik|Sanjay kumar Khatik]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjay kumar Khatik|वार्ता]]) 18:41, 5 अप्रैल 2026 (UTC) 8f9g8kmfqet5sh265bnle3ffrhvxawj रश्मिका मंदाना 0 1072079 6536677 6497677 2026-04-05T17:44:39Z ~2026-21115-82 918951 Information and citation added Successfully 6536677 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |name = [[रश्मिका मंदाना]] |image = Rashmika Mandanna spotted during Goodbye promotions at JW Marriott.jpg |birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1996|04|05}} |owner= |birth_place = [[विराजपेट]] , [[कर्नाटक]] |birth_name= |citizenship = [[भारतीय]] |education = '''रामय: कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस मैसूर''' |religion = [[हिन्दू]] |parents={{ubl| श्री मदन मंदाना | श्रीमती सुमन मंदाना }} |occupation = [[अभिनेत्री]], [[मॉडल]] }} '''रश्मिका मंदाना''' (जन्म 5 अप्रैल 1996), एक भारतीय [[अभिनेत्री]] है जो मुख्य रूप से दक्षिण [[भारत|भारतीय]] [[फिल्म|फिल्मों]] में दिखाई देती है।<ref>{{cite web|url=https://hindi.firstpost.com/entertainment/hot-and-sexy-rashmika-mandanna-calls-off-engagement-with-rakshit-shetty-143239.html|title=OMG : फिल्म के हिट होते ही रश्मिका मंदाना ने रक्षित शेट्टी के साथ तोड़ दी अपनी सगाई|access-date=24 अगस्त 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190824064122/https://hindi.firstpost.com/entertainment/hot-and-sexy-rashmika-mandanna-calls-off-engagement-with-rakshit-shetty-143239.html|archive-date=24 अगस्त 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web |url=https://www.patrika.com/tollywood-news/dear-comrade-rashmika-mandana-engagement-break-after-kissing-scene-4855041/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=24 अगस्त 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190824064124/https://www.patrika.com/tollywood-news/dear-comrade-rashmika-mandana-engagement-break-after-kissing-scene-4855041/ |archive-date=24 अगस्त 2019 |url-status=live }}</ref> उन्होंने 2016 की सबसे सफल व्यावसायिक फिल्म [[किरिक पार्टी]] में अभिनय किया। बैंगलोर टाइम्स ने '30 मोस्ट डिज़ायरेबल वुमन ऑफ़ 2017 'की सूची में अपना पहला स्थान रखा। वह बहुत कम अभिनेत्रियों में से एक हैं जिन्होंने टॉलीवुड में कम समय में 100 करोड़ क्लब में प्रवेश किया। ==करियर== रश्मिका ने 2018 में रोमांटिक ड्रामा चालो के साथ अपना तेलुगु डेब्यू किया, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। उसी वर्ष में, उसने रोमकॉम फिल्म [[गीता गोविंदम]] में अभिनय किया, जो तेलुगु सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक लाभ कमाने वालों में से एक बन गई, जिसने उसे बहुत बड़ी पहचान दिलाई। उनकी तीसरी तेलुगु उद्यम मल्टीस्टारर बड़े बजट की फिल्म थी जिसका नाम देवदास था, जो भारतीय बॉक्स ऑफिस पर औसत हिट रही, इसने अपनी पहली हिट फिल्म के बाद तेलुगु फिल्म उद्योग में एक ही वर्ष में लगातार तीसरी हिट फिल्म हासिल की। कन्नड़ फिल्म उद्योग में हिट, खुद को तेलुगु सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक के रूप में स्थापित किया। उन्होंने व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों जैसे किरिक पार्टी (2016), अंजनी पुत्रा (2017), चमक (2017), चालो (2018), गीता गोविन्दम (2018) और यजमान (2019) में अभिनय किया। फिल्मों की बैक टू बैक सफलता ने उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में सबसे अधिक मांग वाली। रश्मिका मंदाना ने 5 अप्रैल 2026 को ‘मायसा’ का पोस्टर जारी कर फैंस को सरप्राइज दिया।<ref>{{Cite news|url=https://rajasthan18.in/mysaa-first-poster-out-rashmika-mandanna-stuns-in-intense-new-avatar/|title=Mysaa First Poster Out: Rashmika Mandanna Stuns in Intense New Avatar|date=5 April 2026|work=Rajasthan18.in}}</ref> ==निजी जीवन== रश्मिका मंदन्ना का जन्म कर्नाटक के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम मदन मन्दाना और माता का नाम सुमन है इनके पिता कर्नाटक के सरकारी संस्थान में बाबू के पद पर कार्यरत थे रश्मिका मन्दाना ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा कर्नाटक में स्थित पूरब पब्लिक स्कूल से पूरी की. कॉलेज की पढ़ाई के लिए एम एस रमैया कॉलेज में एडमिशन करवाया जहां उन्होंने मास्टर ऑफ साइकोलॉजी में डिग्री प्राप्त की. रश्मिका को बचपन से ही एक्टिंग और मॉडलिंग का बहुत ज्यादा शौक था जिसके चलते वह अपने कॉलेज दिनों में अपने कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ मॉडलिंग भी करती थी और उस समय रश्मिका ने कई सारे विज्ञापनों में भी काम किया <ref>[[http://www.filemywap.in/2021/05/rashmika-mandanna-age-family-career.html]]</ref> ==फिल्म की सूची== {| class="wikitable plainrowheaders sortable" |- !वर्ष!! फिल्म !! भूमिका !! भाषा !class="unsortable" |नोट्स !class="unsortable" |{{Tooltip|संदर्भ}} |- |2016 |''[[किरिक पार्टी]]'' |सानवी जोसेफ |rowspan="3"|[[कन्नड़]] | |<ref>{{Cite web |title=South celebs who will make Bollywood debuts in 2021 |url=https://www.timesnownews.com/entertainment-news/article/from-rashmika-mandanna-to-vijay-deverakond-south-celebs-who-will-make-bollywood-debuts-in/698571 |access-date=2 January 2021 |website=timesnownews.com |language=en}}</ref> |- |rowspan="2"|2017 |''[[अंजनी पुत्र]]'' |गीता | | |- |''[[Chamak (film)|Chamak]]'' |खुशी | | |- |rowspan="3" |2018 |''[[Chalo]]'' |एल. कार्तिका |rowspan="3"|[[तेलुगु भाषा|तेलुगु]] | |<ref>{{Cite web |title=Rashmika makes successful debut in Tollywood |url=https://www.sify.com/movies/rashmika-makes-successful-debut-in-tollywood-imagegallery-tollywood-scgo3oedidaej.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20180206100704/http://www.sify.com/movies/rashmika-makes-successful-debut-in-tollywood-imagegallery-tollywood-scgo3oedidaej.html |url-status=dead |archive-date=6 February 2018 |access-date=2 January 2021 |website=Sify |language=en}}</ref> |- |''[[गीता गोविंदम]]'' |गीता | | |- |''[[देवदास (2018 फिल्म)|देवदास]]'' |पूजा | | |- |rowspan="2"|2019 |''[[यजमान (2019 फिल्म)|यजमान]]'' |कावेरी |कन्नड़ | | |- |''[[डियर कॉमरेड]]'' |अपर्णा "लिली" देवी |rowspan="3"|तेलुगु | | |- |rowspan="2"|2020 |''[[सरिलेरु नीकेववारु]]'' |संस्कृति | | |- |''[[भीष्मा (2020 फिल्म)| भीष्मा]]'' |चैत्रा | |<ref name=":4">{{Cite web |url=https://www.thehansindia.com/cinema/tollywood/bheeshma-to-arrive-on-feb-21-603864 |title='Bheeshma' to arrive on Feb 21 |last=India |first=The Hans |date=9 February 2020 |website=thehansindia.com |language=en |access-date=9 February 2020}}</ref> |- |rowspan="3" |2021 |''[[पोगारू]]'' |गीता |कन्नड़ | |<ref name=":5">{{Cite web |date=19 January 2021 |title=Dhruva Sarja's Pogaru to storm into theatres on Feb 19 |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2021/jan/19/dhruva-sarjaspogaru-to-storm-into-theatres-on-feb-19-2251830.html |access-date=28 October 2021 |website=[[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref> |- |''[[सुलतान (2021 film)|सुलतान]]'' |रुकमणी |तमिल | |<ref name=":6">{{Cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/karthis-sultan-to-hit-screens-during-summer-holidays/articleshow/73297255.cms |title=Karthi's Sultan to hit screens during summer holidays? - Times of India |website=The Times of India}}</ref> |- |''[[पुष्पा: द राइज]] '' |श्रीवल्ली |rowspan="3"|तेलुगु | |<ref name=":0">{{Cite web |url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/allu-arjun-and-rashmika-mandanna-to-resume-shoot-of-pushpa-in-vizag-1735563-2020-10-27 |title=Allu Arjun and Rashmika Mandanna to resume shoot of Pushpa in Vizag |website=India Today |date=27 October 2020}}</ref> |- |rowspan="3"|2022 |''[[आदवल्लू मीकू जोहार्लू (2022 फिल्म)| आदवल्लू मीकू जोहार्लू]]'' |आध्या | | <ref name=":1">{{Cite web |date=9 March 2021 |title=Title poster of Rashmika-Sharwanand film 'Aadavaallu Meeku Johaarlu' released |url=https://www.thenewsminute.com/article/title-poster-rashmika-sharwanand-film-aadavaallu-meeku-johaarlu-released-144896 |access-date=28 March 2021 |website=The News Minute}}</ref> |- |''[[सीता रामम]]'' |वहीदा/अफरीन अली | |<ref name="SR">{{Cite web |title=Birthday Special: Rashmika Mandanna to be seen in a rare avatar in the first look of Dulquer Salmaan's film {{!}} PINKVILLA |url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/south/rashmika-mandanna-sports-never-seen-avatar-muslim-girl-first-look-dulquer-salmaans-film-1060970?amp |access-date=5 April 2022 |website=www.pinkvilla.com |date=5 April 2022 |archive-date=7 अप्रैल 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220407123646/https://www.pinkvilla.com/entertainment/south/rashmika-mandanna-sports-never-seen-avatar-muslim-girl-first-look-dulquer-salmaans-film-1060970?amp |url-status=dead }}</ref> |- |''[[गुडबाय (2022 फिल्म)| गुडबाय]]'' |तारा भल्ला |[[हिन्दी]] | |<ref name=":3">{{Cite web |title='Goodbye': Amitabh Bachchan and Rashmika Mandana kick-start shooting for the film |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/goodbye-amitabh-bachchan-and-rashmika-mandana-kick-start-shooting-for-the-film/articleshow/81868722.cms |access-date=2 April 2021 |work=The Times of India |language=en}}</ref> |- |rowspan="3" |2023 |[[वारिस (बारिसू)|वारिसु]] |दिव्या |तमिल | |<ref>{{Cite web |date=6 April 2022 |title=Vijay-Rashmika Mandanna's Thalapathy 66 begins shoot |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/telugu/vijay-rashmika-mandanna-thalapathy-66-shoot-begins-see-photos-7855895/ |website=The Indian Express}}</ref> |- |''[[मिशन मजनू]]'' |नसरीन हुसैन |rowspan="2"|हिन्दी | |<ref name=":2">{{cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/rashmika-mandanna-wraps-shoot-bollywood-debut-mission-majnu/ |title=Rashmika Mandanna wraps up the shoot of her Bollywood debut Mission Majnu |work=Bollywood Hungama |date=29 August 2021 |access-date=29 August 2021}}</ref> |- |''[[एनिमल (2023 फ़िल्म)|एनिमल]]'' |गीतांजलि सिंह | |<ref>{{Cite web |date=22 April 2022 |title=Ranbir Kapoor, Rashmika Mandanna begin filming for Animal in Manali, pose with fans in Himachali caps. See photos |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-rashmika-mandanna-begin-filming-for-animal-in-manali-pose-with-fans-in-himachali-caps-see-photos/ |access-date=26 April 2022 |website=The Indian Express |language=en}}</ref> |- |2024 |''[[पुष्पा 2: द रूल]]'' |श्रीवल्ली |तेलुगु | |<ref>{{cite web |title=Allu Arjun's Pushpa 2 in 5 points, Rashmika Mandanna demands Rs 3 crore, Sukumar reshoots film |url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/allu-arjun-s-pushpa-2-in-5-points-rashmika-mandanna-demands-rs-3-crore-sukumar-reshoots-film-1900056-2022-01-14 |website=India Today |date=14 January 2022}}</ref> |- |rowspan="5"|2025 !scope="row"|''[[छावा]]'' |[[येसूबाई|महारानी यसुबाई]] |rowspan="2"|हिन्दी | |<ref>{{Cite web |date=25 April 2024 |title=Dhanush and Rashmika Mandanna spotted on the sets of Kubera in Mumbai. Watch |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/tamil/dhanush-and-rashmika-mandanna-spotted-on-the-sets-of-kubera-in-mumbai-watch-9290116/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425110229/https://indianexpress.com/article/entertainment/tamil/dhanush-and-rashmika-mandanna-spotted-on-the-sets-of-kubera-in-mumbai-watch-9290116/ |archive-date=25 April 2024 |access-date=25 April 2024 |website=[[Indian Express]]}}</ref> |- [[सिकंदर (2025 फ़िल्म)|सिकंदर]]'' |सैसरी राजकोट | |<ref>{{Cite web |date=2024-11-11 |title=Salman Khan's first pic from heavily guarded sets of Sikandar in Hyderabad |url=https://www.indiatoday.in/movies/celebrities/story/salman-khan-first-official-photo-from-heavily-guarded-sets-of-sikandar-in-hyderabad-2631631-2024-11-11 |access-date=2024-12-10 |website=India Today |language=en}}</ref> |- !scope="row"|''[[कुबेरा]]'' |समीरा |तेलुगु <br> तमिल | |<ref>{{Cite web |date=28 December 2023 |title=Vicky Kaushal shoots "the biggest action sequence" of his career for Chaava; signs off 2023 with a bang! |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/vicky-kaushal-shoots-biggest-action-sequence-career-chaava-signs-off-2023-bang/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20231228141812/https://www.bollywoodhungama.com/news/features/vicky-kaushal-shoots-biggest-action-sequence-career-chaava-signs-off-2023-bang/ |archive-date=28 December 2023 |access-date=28 December 2023 |website=[[Bollywood Hungama]]}}</ref> |- |{{pending film|italic=no|''[[थामा]]''}} |तडाका |हिन्दी |पूर्ण |<ref>{{Cite web |date=12 December 2024 |title=Ayushmann Khurrana begins shooting for Maddock Films' horror-comedy Thama; Dinesh Vijan says, "Who better than Ayushmann to play Thama?" |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/features/ayushmann-khurrana-begins-shooting-maddock-films-horror-comedy-thama-dinesh-vijan-says-better-ayushmann-play-thama/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20241212093635/https://www.bollywoodhungama.com/news/features/ayushmann-khurrana-begins-shooting-maddock-films-horror-comedy-thama-dinesh-vijan-says-better-ayushmann-play-thama/ |archive-date=12 December 2024 |access-date=12 December 2024 |website=Bollywood Hungama}}</ref> |- |{{pending film|italic=no|'' द गर्लफ्रेंड''}} |{{TableTBA}} |तेलुगु |पूर्ण |<ref>{{Cite web |date=2024-12-10 |title=Vijay Deverakonda And Rashmika Mandanna Share 'The Girlfriend' Teaser; 'Baby Project Is All Set' |url=https://in.mashable.com/entertainment/86466/vijay-deverakonda-and-rashmika-mandanna-share-the-girlfriend-teaser-baby-project-is-all-set |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20241210070417/https://in.mashable.com/entertainment/86466/vijay-deverakonda-and-rashmika-mandanna-share-the-girlfriend-teaser-baby-project-is-all-set |archive-date=10 December 2024 |access-date=2024-12-10 |website=[[Mashable]] India}}</ref> |- |2026 |{{pending film|italic=no|''कॉकटेल 2''}} |{{TableTBA}} |हिन्दी |फिल्मांकन |<ref>{{Cite web |date=14 September 2025 |title=Cocktail 2: Shahid Kapoor, Rashmika Mandanna, Kriti Sanon start shoot| work= India Today |url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/cocktail-2-shahid-kapoor-rashmika-mandanna-kriti-sanon-start-shoot-2787207-2025-09-14 |access-date=15 September 2025}}</ref> |- |TBA |{{pending film|italic=no|''AA22xA6''}} |{{TableTBA}} |तेलुगु |फिल्मांकन |<ref>{{Cite web |date=10 July 2025 |title=Cocktail 2: Shahid Kapoor, Rashmika Mandanna, Kriti Sanon start shoot| work= India Today |url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/aa22xa6-rashmika-mandanna-allu-arjun-atlee-deepika-padukone-mrunal-thakur-janhvi-kapoor/article69794877.ece |access-date=25 September 2025}}</ref> |} === संगीत वीडियो === {| class="wikitable plainrowheaders" |- ! वर्ष ! गीत ! भाषा(एं) ! कलाकार ! class="unsortable"|{{Tooltip|संदर्भ|References}} |- |2021 | टॉप टकर | तमिल<br>हिन्दी | [[युवान शंकर राजा]], [[बादशाह (गायक)|बादशाह]] |<ref>{{Cite web |date=8 February 2021 |title=Top Tucker teaser out now. Rashmika Mandanna is quirky and colourful in new avatar |url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/top-tucker-teaser-out-now-rashmika-mandanna-is-quirky-and-colourful-in-new-avatar-1767098-2021-02-08 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20210210155220/https://www.indiatoday.in/amp/movies/regional-cinema/story/top-tucker-teaser-out-now-rashmika-mandanna-is-quirky-and-colourful-in-new-avatar-1767098-2021-02-08 |archive-date=10 February 2021 |access-date=23 February 2021 |website=India Today}}</ref> |} ==इन्हें भी देखें== * [[सामन्था अक्किनेनी]] * रश्मिका मंदाना का जीवन * [[स्मृति मंधाना]] * [[त्रिधा चौधरी]] * [[रेवती (फ़िल्म अभिनेत्री)|रेवती]] * [[हर्षिका पूनच्चा]] * [[इलियाना डी'क्रूज़]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{कॉमन्स श्रेणी|Rashmika Mandanna|रश्मिका मंदाना}} * {{IMDb name|id=8612305|title=रश्मिका मंदाना}} [[श्रेणी:तेलुगू अभिनेत्री]] [[श्रेणी:तमिल अभिनेत्री]] [[श्रेणी:भारतीय अभिनेत्री]] [[श्रेणी:1996 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]] [[श्रेणी:कन्नड़ अभिनेत्री]] 5mkxqerazs58uc554ni5nj4865fxm5f कश्मीरा परदेशी 0 1096083 6536897 6503049 2026-04-06T08:47:58Z ~2026-21156-73 919039 सूचना जोड़ी गई । 6536897 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति | name = कश्मीरा परदेशी | image = | birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1997|11|03}} | birth_place = [[मुम्बई|मुंबई]], [[महाराष्ट्र]] |residence = [[मुम्बई|मुंबई]], [[महाराष्ट्र]] | alma_mater = | years_active = 2019–वर्तमान |Spouse = | occupation = अभिनेत्री }} '''कश्मीरा परदेशी''' एक भारतीय मॉडल और फिल्म अभिनेत्री है, जो [[तेलुगू भाषा| तेलुगु]], [[हिन्दी| हिंदी]] और [[तमिल भाषा | तमिल]] फिल्म उद्योग में काम कर रही है। उन्होंने अपना पहला तेलुगु नाम नर्तनासाला बनाया । [[कश्मीरा परदेशी]] दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में बहुत सुंदर और सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री है <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/091118/its-a-dream-bollywood-debut-kashmira-pardeshi.html|title=यह एक सपना बॉलीवुड की शुरुआत है: कश्मीरा परदेशी|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191019184346/https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/091118/its-a-dream-bollywood-debut-kashmira-pardeshi.html|archive-date=19 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref> कश्मीरा परदेशी आईपीएल 2026 में [[चेन्नई सुपर किंग्स]] (CSK) और [[पंजाब किंग्स]] (PBKS) के बीच खेले गए मैच के दौरान कश्मीरा परदेशी वायरल हो गईं।<ref>{{Cite news|url=https://rajasthan18.in/actress-kashmira-pardeshi-goes-viral-during-csk-vs-pbks-match/|title=Actress Kashmira Pardeshi Goes Viral During CSK vs PBKS Match|date=5 April 2026|work=Rajasthan18.in}}</ref> ==फिल्मोग्राफी== {| class="wikitable" |+Key | style="background:#FFFFCC;"| {{dagger|alt=Films that have not yet been released}} | उन फिल्मों का प्रदर्शन करता है जो अभी तक रिलीज़ नहीं हुई हैं |} {| class="wikitable" |- style="background:#ccc; text-align:center;" ! साल !! फ़िल्म !! भूमिका !! भाषा!! |- |2018 |''नर्तनशाला'' |मनसा |तेलुगू |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/tollywood/310718/kashmira-pardeshi-to-make-tamil-debut.html|title=Kashmira Pardeshi to make Tamil debut|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180810002318/https://www.deccanchronicle.com/amp/entertainment/tollywood/310718/kashmira-pardeshi-to-make-tamil-debut.html|archive-date=10 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> |- |2019 |''[[मिशन मंगल]]'' |अन्य शिंदे |हिंदी |<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kashmira-pardeshi-will-make-her-bollywood-debut-with-mission-mangal/articleshow/66559501.cms|title=Kashmira Pardeshi will make her Bollywood debut with 'Mission Mangal|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181110094722/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kashmira-pardeshi-will-make-her-bollywood-debut-with-mission-mangal/articleshow/66559501.cms|archive-date=10 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref> |- | 2019||''लाल पीला हरा'' || गेविन || तामिल || <ref>{{Cite web|url=https://www.thenewsminute.com/article/kashmira-pardeshi-play-lead-gv-prakash-kumars-next-siddharth-86768|title=Kashmira Pardeshi to play lead in GV Prakash Kumar's next with Siddharth|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191019181058/https://www.thenewsminute.com/article/kashmira-pardeshi-play-lead-gv-prakash-kumars-next-siddharth-86768|archive-date=19 अक्तूबर 2019|url-status=dead}}</ref> |} == सन्दर्भ == {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== *{{IMDb name|nm10592607}} {{Authority control}} {{DEFAULTSORT: परदेशी, काश्मीर}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1997 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:Indian film actresses]] [[श्रेणी:Actresses in Tamil cinema]] [[श्रेणी:Actresses in Hindi cinema]] [[श्रेणी:Actresses in Telugu cinema]] cupyd7sgnzjr53l4mazo4a74yve253p 6536907 6536897 2026-04-06T09:28:28Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/~2026-21156-73|~2026-21156-73]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21156-73|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: क्षणिक महत्व 6536907 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति | name = कश्मीरा परदेशी | image = | birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1997|11|03}} | birth_place = [[मुम्बई|मुंबई]], [[महाराष्ट्र]] |residence = [[मुम्बई|मुंबई]], [[महाराष्ट्र]] | alma_mater = | years_active = 2019–वर्तमान |Spouse = | occupation = अभिनेत्री }} '''कश्मीरा परदेशी''' एक भारतीय मॉडल और फिल्म अभिनेत्री है, जो [[तेलुगू भाषा| तेलुगु]], [[हिन्दी| हिंदी]] और [[तमिल भाषा | तमिल]] फिल्म उद्योग में काम कर रही है। उन्होंने अपना पहला तेलुगु नाम नर्तनासाला बनाया । [[कश्मीरा परदेशी]] दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में बहुत सुंदर और सबसे लोकप्रिय अभिनेत्री है <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/091118/its-a-dream-bollywood-debut-kashmira-pardeshi.html|title=यह एक सपना बॉलीवुड की शुरुआत है: कश्मीरा परदेशी|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191019184346/https://www.deccanchronicle.com/entertainment/bollywood/091118/its-a-dream-bollywood-debut-kashmira-pardeshi.html|archive-date=19 अक्तूबर 2019|url-status=live}}</ref> ==फिल्मोग्राफी== {| class="wikitable" |+Key | style="background:#FFFFCC;"| {{dagger|alt=Films that have not yet been released}} | उन फिल्मों का प्रदर्शन करता है जो अभी तक रिलीज़ नहीं हुई हैं |} {| class="wikitable" |- style="background:#ccc; text-align:center;" ! साल !! फ़िल्म !! भूमिका !! भाषा!! |- |2018 |''नर्तनशाला'' |मनसा |तेलुगू |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/tollywood/310718/kashmira-pardeshi-to-make-tamil-debut.html|title=Kashmira Pardeshi to make Tamil debut|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180810002318/https://www.deccanchronicle.com/amp/entertainment/tollywood/310718/kashmira-pardeshi-to-make-tamil-debut.html|archive-date=10 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> |- |2019 |''[[मिशन मंगल]]'' |अन्य शिंदे |हिंदी |<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kashmira-pardeshi-will-make-her-bollywood-debut-with-mission-mangal/articleshow/66559501.cms|title=Kashmira Pardeshi will make her Bollywood debut with 'Mission Mangal|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181110094722/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kashmira-pardeshi-will-make-her-bollywood-debut-with-mission-mangal/articleshow/66559501.cms|archive-date=10 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref> |- | 2019||''लाल पीला हरा'' || गेविन || तामिल || <ref>{{Cite web|url=https://www.thenewsminute.com/article/kashmira-pardeshi-play-lead-gv-prakash-kumars-next-siddharth-86768|title=Kashmira Pardeshi to play lead in GV Prakash Kumar's next with Siddharth|access-date=20 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191019181058/https://www.thenewsminute.com/article/kashmira-pardeshi-play-lead-gv-prakash-kumars-next-siddharth-86768|archive-date=19 अक्तूबर 2019|url-status=dead}}</ref> |} == सन्दर्भ == {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== *{{IMDb name|nm10592607}} {{Authority control}} {{DEFAULTSORT: परदेशी, काश्मीर}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1997 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:Indian film actresses]] [[श्रेणी:Actresses in Tamil cinema]] [[श्रेणी:Actresses in Hindi cinema]] [[श्रेणी:Actresses in Telugu cinema]] rtl2b4rmocos2agetixl2h793r5kl4e विकिपीडिया:पृष्ठ सुरक्षा अनुरोध 4 1126107 6536743 6506746 2026-04-06T04:26:12Z AMAN KUMAR 911487 /* सुरक्षित करने हेतु वर्तमान अनुरोध */ नामांकन 6536743 wikitext text/x-wiki {{विकिपीडिया:पृष्ठ सुरक्षा अनुरोध/शीर्षक}} == सुरक्षित करने हेतु वर्तमान अनुरोध == <!-- इसके नीचे नए पृष्ठ-सुरक्षा अनुरोध जोड़ें --> === {{la|भगवा लव ट्रैप}} === * '''अर्ध-सुरक्षित करें:''' यह लेख एक संवेदनशील, समसामयिक और विवादित विषय (एक कथित षड्यंत्र सिद्धांत) पर आधारित है। इस विषय की प्रकृति के कारण, इसमें अपंजीकृत (IP) या नए सदस्यों द्वारा गैर-तटस्थ बदलाव और बर्बरता (Vandalism) करते है। कृपया इसे अर्ध-सुरक्षित (Semi-protect) करने की कृपा करें। --[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 6 अप्रैल 2026 (UTC) == सुरक्षा हटाने हेतु वर्तमान अनुरोध == <!-- इसके नीचे पृष्ठ-सुरक्षा हटाने के नए अनुरोध जोड़ें --> == सम्पूर्ण अनुरोध == <!-- यह अनुभाग केवल अभिलेख (archive) हेतु है, यहाँ नया अनुरोध न जोड़ें --> === पूर्ण हो चुके अनुरोध === <!-- पूरे हो चुके अनुरोधों को यहाँ स्थानांतरित करें --> === निरस्त अनुरोध === <!-- अस्वीकृत या निरस्त किए गए अनुरोधों को यहाँ स्थानांतरित करें --> kjv8eybi8p7po4l4muat1c46as0971i मेहसी 0 1148833 6536667 6536395 2026-04-05T17:05:50Z ~2026-20925-76 918946 6536667 wikitext text/x-wiki {{Infobox settlement | name = मेहसी | native_name = Mehsi | settlement_type = [[शहर]] | image_skyline = File:Mehsi railway station signage view.jpg|Signage of Mehsi railway station | image_caption = Mehsi railway station view | pushpin_map = India Bihar#India | pushpin_label_position = right | mapframe = yes | pushpin_map_caption = | map_caption = मेहसी (बिहार) |coordinates = {{coord|26.35|85.11|display=inline,title}}। (https://geohack.toolforge.org/geohack.php?pagename=Mehsi,_Bihar&params=26.357696_N_85.1133_E_). Mehsi is the largest town in the constituency | subdivision_type = देश | subdivision_name = {{IND}} | subdivision_type1 = [[भारत के राज्य|राज्य]] | subdivision_name1 = [[बिहार]] | subdivision_type2 = [[बिहार के प्रमंडल|प्रमंडल]] | subdivision_name2 = [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] | subdivision_type3 = [[भारत के ज़िले|ज़िला]] | subdivision_name3 = [[पूर्वी चम्पारण जिला|पूर्वी चम्पारण ज़िले]] | postal_code_type = [[पिनकोड|PIN]] | postal_code = 845426-06 | established_title = स्थापना | established_date = 1216 | seat_type = [[नगर पालिका|नगर पालिका]] | seat = [[नगर पालिका|मेहसी नगर पालिका]] | leader_title = [[नगर पालिका|मुख्य पार्षद]] | leader_name = sajda khatoon | unit_pref = Metric | area_footnotes = | area_total_km2 = | elevation_footnotes = | elevation_m = 62 | population_total = {{increase}} 3,54,462<ref name="census_india"/> |population_total = 232159 |population_as_of = 2011 |demographics_type1 = भाषाएँ |demographics1_title1= प्रचलित |demographics1_info1= [[मैथिली भाषा]], [[उर्दू]], [[हिन्दी]], [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]] |timezone1 = [[भारतीय मानक समय|भामस]] |utc_offset1 = +5:30 }} '''मेहसी''' ({{Langx|en|Mehsi|italic=no}}) [[भारत]] के [[बिहार]] राज्य के [[तिरहुत]] प्रमण्डल के [[पूर्वी चम्पारण जिला|पूर्वी चम्पारण ज़िले]] में स्थित नगर पालिका है। यह ज़िले का प्रवेश बिंदु भी है। यह [[बूढ़ी गण्डक नदी]] के किनारे बसा हुआ है अपने जिला मुख्यालय मोतिहारी और मुजफ्फरपुर दोनों के बीचोबीच एक परचलित मेहसी शहर == अवलोकन == पिपरा विधानसभा क्षेत्र '''पुरबी चम्पारण लोकसभा क्षेत्र''' (संख्या 3) का हिस्सा है।<ref name=commission/> यह क्षेत्र [[पिपरा विधानसभा क्षेत्र]] (संख्या 17) के अंतर्गत आता है और इसका भौगोलिक स्थान [26°21′28″N 85°06′48″E](https://geohack.toolforge.org/geohack.php?pagename=Mehsi,_Bihar&params=26.357696_N_85.1133_E_) है। मेहसी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा नगर है। निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, संसद और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन के आदेश, 2008 के तहत, '''पिपरा विधानसभा क्षेत्र''' (संख्या 17) निम्नलिखित [[Community Development Block in India|समुदाय विकास ब्लॉकों]] से बना है: मेहसी, चकिया (पिपरा), टेटरिया।<ref name=commission>{{cite web|url=http://eci.nic.in/eci_main/CurrentElections/CONSOLIDATED_ORDER%20_ECI%20.pdf |title=निर्वाचन आयोग, भारत: संसद और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का आदेश, 2008, अनुसूची XIII|work=Schedule VI Bihar, Part A – Assembly constituencies, Part B – Parliamentary constituencies |access-date=2011-01-10}}</ref> ''' मेहसी: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विवरण ''' ''' परिचय ''' मेहसी बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण कस्बा है। यह कृषि, वाणिज्य, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। मेहसी का इतिहास लगभग 800 वर्षों से जुड़ा हुआ है और यह विभिन्न लोककथाओं, धार्मिक हस्तियों और ऐतिहासिक घटनाओं से समृद्ध है। ''' प्रारंभिक इतिहास और नामकरण ''' प्रारंभ में इस क्षेत्र को “चक लालू” कहा जाता था। 'चक' का अर्थ छोटे गाँव या बस्ती से था, और 'लालू' उस समय के प्रभावशाली व्यक्ति का नाम था। 13वीं सदी के आसपास यह बस्ती प्रमुख हो गई। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, महेश राय नामक एक साधारण और धार्मिक व्यक्ति थे, जो गाय चराते थे। एक दिन ''' दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह ''' यात्रा पर थे और उन्हें अत्यधिक प्यास लगी। जब आसपास पानी नहीं था, तो उन्होंने महेश राय से मदद मांगी। महेश राय ने कुवारी पच्छरा की गाय से दूध निकालकर उनकी प्यास बुझाई। इस चमत्कार को देखकर मिर्ज़ा हलीम शाह ने महेश राय को अपना गुरु मान लिया और उनकी सेवा में जीवन समर्पित कर दिया। इसके बाद, दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह ने महेश राय से पूछा कि उन्हें क्या चाहिए। महेश राय ने कहा कि उन्हें ऐसी चीज दी जाए जिससे कोई भी व्यक्ति जब यहाँ आए या जाए, सबसे पहले उन्हें ही पहचाने। इस अनुरोध को मानते हुए मिर्ज़ा हलीम शाह ने पूरे इलाके का नाम **महेश राय के सम्मान में** रखा। इस तरह चक लालू का पुराना नाम धीरे-धीरे “महेशी” बना, जो आधुनिक रूप में “मेहसी” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ''' दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह और धार्मिक महत्व ''' मेहसी की दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह की दरगाह लगभग 700 वर्ष पुरानी है। यह आज भी धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का केंद्र है। हर साल आयोजित उर्स समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। ''' भूगोल और पर्यावरण''' मेहसी पूर्वी चंपारण के उपजाऊ मैदानों में स्थित है। यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है और कृषि मुख्य व्यवसाय है। प्रमुख फसलें गन्ना, धान, गेहूँ और अन्य अनाज हैं। यह कस्बा ऐतिहासिक रूप से व्यापार और वाणिज्य का केंद्र रहा है। ''' जनसांख्यिकी ''' मेहसी में विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं। भोजपुरी, हिंदी और उर्दू प्रमुख भाषाएँ हैं। जनसंख्या मुख्य रूप से कृषि, व्यापार और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत है। शैक्षणिक और सरकारी संस्थानों के विकास से धीरे-धीरे सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन हुए हैं। ''' अर्थव्यवस्था और उद्योग ''' कृषि मेहसी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गन्ना उत्पादन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा, छोटे उद्योग, स्थानीय बाजार और व्यापारिक केंद्र विकसित हुए हैं। इससे आर्थिक स्थिरता और रोजगार के अवसर बढ़े हैं। ''' शिक्षा और अवसंरचना ''' मेहसी में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय, महाविद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान मौजूद हैं। सड़क संपर्क, बाजार और सार्वजनिक सेवाओं के सुधार ने कस्बे को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ा है। ''' सांस्कृतिक प्रथाएँ और त्योहार ''' मेहसी में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव मनाए जाते हैं। हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के पर्व उत्साह से मनाए जाते हैं। दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह की दरगाह पर आयोजित उर्स धार्मिक और सामाजिक महत्व का कार्यक्रम है। लोक संगीत, पारंपरिक रीति-रिवाज और शिल्प मेहसी की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। ''' ऐतिहासिक समयरेखा ''' - लगभग 1200 ईस्वी: क्षेत्र को “चक लालू” कहा जाता था। - 1216 ईस्वी: बस्ती का महत्व बढ़ा; नाम “महेशी” रखा गया। - 13वीं–15वीं सदी: महेश राय और दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह का क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव स्थापित हुआ। - आने वाले शताब्दियों: दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह की दरगाह प्रमुख धार्मिक स्थल बनी। - आधुनिक काल: मेहसी आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। ''' आधुनिक मेहसी''' आज मेहसी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ आधुनिक विकास को संतुलित करता है। यहाँ बाजार, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शैक्षणिक संस्थान हैं। कृषि अभी भी मुख्य व्यवसाय है, जिसे स्थानीय उद्योग और व्यापार पूरा करते हैं। ''' निष्कर्ष '''' चक लालू से महेशी और आधुनिक मेहसी तक की यात्रा इतिहास, आस्था और सामुदायिक विकास का प्रतीक है। महेश राय और दाता अब्दुल मिर्ज़ा हलीम शाह के योगदान ने इस कस्बे की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को स्थायी किया। दरगाह, लोककथाएँ और आर्थिक विकास मिलकर मेहसी की 800 साल पुरानी यात्रा का चित्रण करते हैं। ''' संदर्भ ''' 1. Mehsi (https://en.wikipedia.org/wiki/Mehsi) 2. [Mehsi Bihar Online](https://eastchamparan.biharonline.in/guide/about-mehsi) 3. [Live Hindustan – दाता मिर्ज़ा हलीम शाह उर्स](https://www.livehindustan.com/bihar/muzaffarpur/story-chadar-poshida-done-on-the-ninth-urs-of-data-mirza-haleem-shah-10266297.html) 4. [Jagran – मजार मिर्ज़ा हलीम शाह](https://www.jagran.com/bihar/east-champaran-the-symbol-of-communal-harmony-is-khwaja-haleem-shahs-mazar-18338740.html) * प्रकार: धार्मिक स्थल (दरगाह) * महत्व: आध्यात्मिक और तीर्थ स्थल * सांस्कृतिक महत्व: सामाजिक सामंजस्य का प्रतीक * निर्देशांक: {{Coord|26.357212|N|85.118445|E||format=dms}} [[चित्र:Mirza_Halim_Shah_Dargah_Mehsi.jpg|अंगूठाकार|मिर्ज़ा हलीम शाह दरगाह, मेहसी]] '''प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), मेहसी''' मेहसी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाला सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। * सेवाएँ: आउट पेशेंट डिपार्टमेंट (OPD), टीकाकरण, मातृ और बाल स्वास्थ्य देखभाल * महत्व: क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता * निर्देशांक: {{Coord|26.357696|N|85.1133|E||format=dms}} [[चित्र:PHC_Hospital_Mehsi.jpg|अंगूठाकार|प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), मेहसी]] '''नगर पंचायत मेहसी''' नगर के नागरिक प्रबंधन और शहरी विकास के लिए जिम्मेदार स्थानीय प्रशासनिक निकाय है। * भूमिका: शहरी शासन और प्रशासन * सेवाएँ: स्वच्छता, सड़क निर्माण और रख-रखाव, जल आपूर्ति, स्थानीय विकास * निर्देशांक: {{Coord|26.357696|N|85.1133|E||format=dms}} [[चित्र:Nagar_Panchayat_Mehsi.jpg|अंगूठाकार|नगर पंचायत कार्यालय, मेहसी]] '''मेहसी बस स्टैंड''' मेहसी को नजदीकी शहरों और कस्बों जैसे मोतीहारी और मुजफ्फरपुर से जोड़ने वाला मुख्य सड़क परिवहन केंद्र है। * कनेक्टिविटी: स्थानीय और क्षेत्रीय बस सेवाएँ * महत्व: दैनिक आवागमन और व्यापार के लिए आवश्यक * निर्देशांक: {{Coord|26.357696|N|85.1133|E||format=dms}} [[चित्र:Bus_Stand_Mehsi.jpg|अंगूठाकार|मेहसी बस स्टैंड]] '''मेहसी रेलवे स्टेशन''' मुजफ्फरपुर–मोतीहारी रेल मार्ग पर स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। * सुविधाएँ: टिकट काउंटर, प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय, बुनियादी यात्री सुविधाएँ * महत्व: यात्री और माल परिवहन के लिए प्रमुख परिवहन लिंक * निर्देशांक: {{Coord|26.357696|N|85.1133|E||format=dms}} [[चित्र:Mehsi_railway_station_platform_view.jpg|अंगूठाकार|मेहसी रेलवे स्टेशन]] ==मेहसी उद्योग== मेहसी में मोती बटन इंडस्ट्री, पूरे देश में अपनी तरह की अकेली इंडस्ट्री है जिसने दुनिया में नाम कमाया है। मेहसी, पूर्वी चंपारण जिले में मोतिहारी से लगभग 48 km पूरब में मेहसी रेलवे स्टेशन के पास एक छोटा सा शहर है। इस इंडस्ट्री की शुरुआत मेहसी के रहने वाले एक मेहनती सब-इंस्पेक्टर, भुलावन लाल की वजह से हुई, जिन्होंने 1905 में सिकरहना नदी में मिलने वाले सीपों से हाथ से बटन बनाना शुरू किया था। भले ही उस समय इस तरह तैयार किए गए बटन अच्छी फिनिशिंग नहीं देते थे, लेकिन देसी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के विचार ने उन्हें ऐसे बटन बनाने के लिए प्रेरित किया। पता चला है कि ऐसे बटनों के कुछ सैंपल अमृता बाज़ार पत्रिका के उस समय के एडिटर श्री मोतीलाल घोष को भेजे गए थे, जिन्होंने लिखा था कि चूंकि बटनों की फिनिशिंग खराब थी, इसलिए उनकी कोई मार्केट वैल्यू नहीं हो सकती थी। उस पुराने पत्रकार की ऐसी बात ने शुरू करने वालों को मशीनें लगाने के लिए मजबूर किया और उनका एक सेट जापान से इंपोर्ट किया गया। इस मशीन और 1000 रुपये की छोटी पूंजी के साथ, तिरहुत मून बटन फैक्टरी के नाम से पहला बटन कारखाना 1908 में यहां स्थापित किया गया था। इसके बाद इसे भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत किया गया। कारखाने ने भारी मुनाफे के साथ मेहसी में कई और कारखानों की स्थापना में मदद की। प्रथम विश्व युद्ध तक उद्योग को भारत में जापानी बटनों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा था लेकिन युद्ध के वर्षों के दौरान जापानी बटन दुर्लभ हो गए और मेहसी के बटनों को बढ़ावा मिला। पहले युद्ध के बाद जापानी बटन ने फिर से भारत के बाजार पर कब्जा कर लिया और मेहसी बटनों को पीछे धकेल दिया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध ने जापान में बने बटनों पर रोक लगा दी और मेहसी बटनों की मांग भारतीय बाजार और कुछ विदेशी देशों में भी बढ़ गई। उस समय मेहसी प्रखंड के 13 पंचायतों में फैले 160 बटन कारखाने सुचारू रूप से चल रहे थे इस कॉटेज इंडस्ट्री में 10,000 कारीगर और मज़दूर काम करते थे। इसमें बचे हुए मोतियों को जोड़ने के लिए और भी मज़दूर काम करते थे, जिनका इस्तेमाल फ़र्श सजाने में होता है। बटन पेपर शीट चिपकाने के लिए बच्चों और महिलाओं को भी काम पर रखा जाता था। फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले कारीगर ज़्यादातर दो कैटेगरी के होते हैं। पहले, वे जो नदियों से सीप के खोल इकट्ठा करते हैं और दूसरे वे जो बटन बनाने में लगे होते हैं। कच्चा माल - सीप के खोल - उत्तरी बिहार के चंपारण, मुज़फ़्फ़रपुर और दरभंगा ज़िलों में सिकरहना, बागमती और महानंदा में मुसहर बटार और अनुसूचित जाति के दूसरे समुदाय के प्रोफ़ेशनल मज़दूर इकट्ठा करते हैं। लगभग 15 हज़ार ऐसे मज़दूर लगे हुए हैं। इन पारंपरिक मज़दूरों को दोहरा फ़ायदा होता है। वे नदी से ज़िंदा सीप के खोल इकट्ठा करते हैं जिससे बटन इंडस्ट्री के मालिकों को बेचे जाने से पहले उनका मांस मिलता है। जब नदी के किनारों से सीप के खोल इकट्ठा करना एक अच्छा बिज़नेस बन गया, तो बिहार सरकार ने दखल दिया और साल 1956 में इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के कंट्रोल में एक सामान्य सेवा संगठन (S.S.S) बनाया। S.S.S. के अधिकारियों ने मालिकों की दिक्कतों से निपटने में मदद करने के लिए इसका हेडक्वार्टर मेहसी में बनाया। सामान्य सेवा संगठन बनाने के पीछे मुख्य मकसद तैयार माल के लिए सामान और मार्केट जुटाना था। पहली बार इस बिज़नेस में खुद सरकार ने बिचौलिए की भूमिका शुरू की। सामान्य सेवा संगठन के कर्मचारी, रेवेन्यू डिपार्टमेंट से ज़रूरी परमिट लेने के बाद, नॉर्थ बिहार के नदी इलाकों से सीप के खोल इकट्ठा करते थे और उन्हें कमीशन के आधार पर मेहसी की बटन बनाने वाली यूनिट्स को सप्लाई करते थे। बटन के इस अनोखे कुटीर उद्योग को 1964 में उस समय गहरा झटका लगा, जब खान एवं खनिज अधिनियम 1964 के तहत नदियों के सीप के खोल का स्वामित्व राजस्व विभाग से खान विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। एक वर्ष के लीज के लिए रॉयल्टी, सरफेस रेंट एवं एडवांस के रूप में खान विभाग को भारी रकम चुकानी पड़ती थी। पहले जहां नदी तल में एक मील तक सीप के खोल एकत्र करने के लिए मात्र 10 रुपये की मामूली रकम चुकानी पड़ती थी, वहीं 1964 के खान अधिनियम के लागू होने के बाद अब करीब 1000 रुपये चुकाने पड़ते हैं। इस अधिनियम को मेहसी में काले कानून के रूप में याद किया जाता है। विदित हो कि खान प्राधिकरण द्वारा लीज प्रदान करते समय नदी तल में एक निश्चित दूरी एवं स्थान, जैसा कि नदी के नक्शे में दर्शाया गया है, संचालन के लिए अनुमति दी जाती है। सीप के खोल जीवित रहने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर रेंगते रहते हैं। ऐसी स्थिति में किसी को भी मौत के मुंह में जाना पड़ सकता है। सीप के खोल इकट्ठा करने के लिए परमिट देने में माइंस डिपार्टमेंट के गलत तरीके, कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमत, और माइंस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी की बिचौलियों के साथ साठगांठ, इन सबने बटन इंडस्ट्री की उम्मीद पर बहुत बुरा असर डाला है। यह इंडस्ट्री अभी भी बिचौलियों-ऑफिस की साठगांठ और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी से हुए नुकसान से उबर ही रही थी कि इसे एक और झटका लगा। नायलॉन बटन बाज़ारों में भर गए। मोती- == इन्हें भी देखें == * '''Mehsi''' पिन कोड 845426, 845406 == <ref>{{Cite journal|last=Begam|first=Shama|last2=Khan|first2=R. A.|date=2002-12-01|title=Impact of the Pollution of River Burhi Gandak on Plankton and Maicofauna at Mehsi, North Bihar Caused by Sugar Mills and Mother of Pearl Button Industries|url=https://doi.org/10.26515/rzsi/v100/i3-4/2002/159588|journal=Records of the Zoological Survey of India|pages=85–100|doi=10.26515/rzsi/v100/i3-4/2002/159588|issn=2581-8686}}</ref>सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:बिहार के शहर]] [[श्रेणी:पूर्वी चम्पारण जिला]] [[श्रेणी:पूर्वी चम्पारण ज़िले के नगर]] ltwk1ieehtlpq6yf0sk9e7ahthzztr3 प्लेइंग विद फायर 0 1153287 6536820 6303531 2026-04-06T06:44:22Z Wheatley2 810120 6536820 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | image = Playing with Fire title.svg | director = [[Andy Fickman]] | producer = {{ubl|[[Todd Garner]]|Sean Robins}} | screenplay = {{ubl|Dan Ewen|Matt Lieberman}} | story = Dan Ewen | starring = {{ubl|[[John Cena]]|[[Keegan-Michael Key]]|[[John Leguizamo]]|[[Brianna Hildebrand]]|[[Dennis Haysbert]]|[[Judy Greer]]}} | music = [[Nathan Wang]] | cinematography = [[Dean Semler]] | editing = Elísabet Ronaldsdóttir | studio = {{ubl|[[Paramount Players]]|[[Nickelodeon Movies]]|[[Walden Media]]|Broken Road Productions}} | distributor = [[Paramount Pictures]] | released = {{Film date|2019|11|8|United States}} | runtime = 96 minutes | country = United States | language = English | budget = $29.9 million<ref name="BOM"/> | gross = $68.6 million<ref name="NUM">{{Cite web |url=https://www.the-numbers.com/movie/Playing-with-Fire-(2019)#tab=summary |title=Playing with Fire (2019) |website=[[The Numbers (website)|The Numbers]] |publisher=[[इंटरनेट मूवी डेटाबेस]] |accessdate=January 24, 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191221174818/https://www.the-numbers.com/movie/Playing-with-Fire-(2019)#tab=summary |archive-date=21 दिसंबर 2019 |url-status=live }}</ref><ref name="BOM">{{Cite web |url=https://www.boxofficemojo.com/title/tt9134216/?ref_=bo_rl_ti |title=Playing with Fire (2019) |website=[[बॉक्स ऑफ़िस मोजो]] |publisher=[[इंटरनेट मूवी डेटाबेस]] |accessdate=February 21, 2020}}</ref> }}<nowiki> </nowiki>'''''प्लेइंग विद फायर''''' एक 2019 अमेरिकी परिवार की [[हास्य फ़िल्म|कॉमेडी]] फिल्म है, जिसे एंडी फिकमैन द्वारा निर्देशित किया गया है, जो इवेन की कहानी पर आधारित डैन इवेन और मैट लेबरमैन की पटकथा से है। फिल्म में [[जॉन सीना]], कीगन-माइकल की, जॉन लेगुइज़ामो, ब्रायना हिल्डेब्रांड, डेनिस हेसबर्ट और जूडी ग्रीर जैसे कलाकार हैं और एक धूम्रपान करने वालों के समूह का अनुसरण करते हैं, जिन्हें एक दुर्घटना के बाद अपने माता-पिता से अलग होने वाले तीन बच्चों को देखना चाहिए। यह ''चार्लोट्स वेब'' और ''डोरा और लॉस्ट सिटी ऑफ गोल्ड के'' बाद निकलोडियन मूवीज की तीसरी वाल्डेन मीडिया फिल्म है। यह फिल्म संयुक्त राज्य अमेरिका में 8 नवंबर, 2019 को [[पैरामाउंट पिक्चर्स]] द्वारा नाटकीय रूप से जारी की गई थी। रिलीज होने पर, फिल्म को आलोचकों और दर्शकों से नकारात्मक समीक्षा मिली, और लगभग $ 30 मिलियन के उत्पादन बजट के साथ दुनिया भर में $ 68 मिलियन की कमाई हुई। == संक्षेप == बीहड़ अग्निशामकों का एक दल अपने मैच को पूरा करता है जब तीन तेजस्वी बच्चों को बचाने का प्रयास किया जाता है। == कास्ट == * जेक "सुपे" कार्सन के रूप में [[जॉन सीना]] * मार्क रोजर्स के रूप में कीगन-माइकल की * रोड्रिगो टोरेस के रूप में जॉन लेगुइज़ामो * ब्रायन के रूप में ब्रायना हिल्डेब्रांड * कमांडर रिचर्ड्स के रूप में डेनिस हेसबर्ट * डॉ। एमी हिक्स के रूप में जूडी ग्रीर * अक्ष के रूप में टायलर माने ** पॉल पोट्स एक्सिस की ओपेरा आवाज के रूप में * क्रिश्चियन कांवर विल के रूप में * जॉय के रूप में फिनाले रोज स्लेटर * महिला के रूप में मौली शैनन (बिना शर्त कैमियो) == उत्पादन == फिल्म की घोषणा अक्टूबर 2018 में की गई थी जब [[जॉन सीना]] को फिल्म में अभिनय करने के लिए चुना गया था। <ref>{{Cite web |url=https://variety.com/2018/film/news/jon-cena-paramount-players-playing-with-fire-1202980555/ |title=John Cena to Star in ‘Playing With Fire’ for Paramount Players (EXCLUSIVE) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200313084412/https://variety.com/2018/film/news/jon-cena-paramount-players-playing-with-fire-1202980555/ |archive-date=13 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref> अगले महीने निर्देशन के लिए एंडी फ़िकमैन को काम पर रखा गया। <ref>{{Cite web |url=https://variety.com/2018/film/news/andy-fickman-playing-with-fire-john-cena-1203022465/ |title=Andy Fickman Signs on to Direct ‘Playing With Fire’ Starring John Cena (EXCLUSIVE) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200315141339/https://variety.com/2018/film/news/andy-fickman-playing-with-fire-john-cena-1203022465/ |archive-date=15 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref> जनवरी 2019 तक, ब्रायना हिल्डेब्रांड, जूडी ग्रीर, कीगन-माइकल की, एडोअर्डो कारफोरा, क्रिश्चियन कॉन्वरी और जॉन लेगुइज़ामो कलाकारों के साथ शामिल हुए। <ref>{{Cite web |url=https://www.hollywoodreporter.com/news/deadpools-brianna-hildebrand-joins-john-cena-playing-fire-1175223 |title='Deadpool' Actress Brianna Hildebrand Joins John Cena in 'Playing With Fire' (Exclusive) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191112004706/https://www.hollywoodreporter.com/news/deadpools-brianna-hildebrand-joins-john-cena-playing-fire-1175223 |archive-date=12 नवंबर 2019 |url-status=live }}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/01/judy-greer-john-cena-playing-with-fire-cast-paramount-players-1202536875/ |title=Judy Greer Joins Paramount Players’ ‘Playing With Fire’ Opposite John Cena |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200307135148/https://deadline.com/2019/01/judy-greer-john-cena-playing-with-fire-cast-paramount-players-1202536875/ |archive-date=7 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://www.hollywoodreporter.com/news/keegan-michael-key-john-leguizamo-join-john-cena-playing-fire-1177321 |title=Keegan-Michael Key, John Leguizamo Joining John Cena in 'Playing with Fire' (Exclusive) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191112004710/https://www.hollywoodreporter.com/news/keegan-michael-key-john-leguizamo-join-john-cena-playing-fire-1177321 |archive-date=12 नवंबर 2019 |url-status=live }}</ref> रोब ग्रोनकोव्स्की को फिल्म में एक भूमिका की पेशकश की गई थी, लेकिन शेड्यूलिंग संघर्षों के कारण इसे ठुकरा दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://www.si.com/nfl/2019/01/29/rob-gronkowski-hollywood-movie-career-post-retirement |title=For Rob Gronkowski, Hollywood Awaits. Can He Make It There? |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200214094028/https://www.si.com/nfl/2019/01/29/rob-gronkowski-hollywood-movie-career-post-retirement |archive-date=14 फ़रवरी 2020 |url-status=live }}</ref> 4 फरवरी, 2019 को बर्नबाई, ब्रिटिश कोलंबिया में फिल्मांकन शुरू हुआ और 29 मार्च को संपन्न हुआ। <ref>{{Cite web |url=https://www.insidevancouver.ca/2018/12/10/filming-in-vancouver-katie-holmes-john-cena-a-million-little-things-and-more/ |title=Filming in Vancouver: Katie Holmes, John Cena, A Million Little Things, and more |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190108200848/https://www.insidevancouver.ca/2018/12/10/filming-in-vancouver-katie-holmes-john-cena-a-million-little-things-and-more/ |archive-date=8 जनवरी 2019 |url-status=dead }}</ref> विज़ुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन [[इंडस्ट्रियल लाइट ऐंड मैजिक|इंडस्ट्रियल लाइट एंड मैजिक]] द्वारा पोस्ट-प्रोडक्शन में किए गए थे। <ref>{{Cite web |url=https://www.ilm.com/vfx/playing-with-fire-credits/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200218203029/https://www.ilm.com/vfx/playing-with-fire-credits/ |archive-date=18 फ़रवरी 2020 |url-status=dead }}</ref> == रिलीज़ == यह फिल्म मूल रूप से 20 मार्च, 2020 को रिलीज़ होने के लिए तैयार थी, लेकिन बाद में इसे 8 नवंबर, 2019 को स्थानांतरित कर दिया गया, जिसमें <nowiki><i id="mwYw">सोनिक द हेजहोग</i></nowiki> की मूल रिलीज़ की तारीख ले ली गई। <ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/01/paramount-crawl-playing-with-fire-loud-house-release-dates-1202537734/ |title=Paramount Dates ‘Crawl’ & ‘Playing With Fire’, Moves ‘Loud House’ Off Schedule |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190203024535/https://deadline.com/2019/01/paramount-crawl-playing-with-fire-loud-house-release-dates-1202537734/ |archive-date=3 फ़रवरी 2019 |url-status=live }}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/05/a-quiet-place-2-sonic-the-hedgehog-playing-with-fire-paramount-release-dates-1202622152/ |title=‘A Quiet Place 2’ Going Earlier In 2020, ‘Playing With Fire’ Takes Over ‘Sonic’s November Spot: Paramount Release Date Changes |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190527020114/https://deadline.com/2019/05/a-quiet-place-2-sonic-the-hedgehog-playing-with-fire-paramount-release-dates-1202622152/ |archive-date=27 मई 2019 |url-status=live }}</ref> == रिसेप्शन == === बॉक्स ऑफिस === {{As of|2020|1|23|df=US}}, ''Playing with Fire'' has grossed $44.5 million in the United States and Canada, and $17.9 million in other territories, for a worldwide total of $62.3 million. संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में, फिल्म को ''डॉक्टर स्लीप'', ''मिडवे'' और ''लास्ट क्रिसमस के'' साथ रिलीज़ किया गया था, और अपने शुरुआती सप्ताहांत में 3,125 सिनेमाघरों से $ 710 मिलियन की कमाई का अनुमान लगाया गया था। <ref>{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-weekend-box-office-opening-stephen-king-emilia-clarke-last-christmas-terminator-1202779022/|title=‘Doctor Sleep’ Eyes $25M-$30M Box Office Start, Will Turn Out Lights On ‘Terminator: Dark Fate’|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 6, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 6, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191214194626/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-weekend-box-office-opening-stephen-king-emilia-clarke-last-christmas-terminator-1202779022/|archive-date=14 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> इसने अपने पहले दिन 3.6 मिलियन डॉलर कमाए, जिसमें गुरुवार रात के साक्षात्कार से $ 500,000 शामिल थे। यह $ 12.8 मिलियन के लिए पहली फिल्म थी, जो अनुमानों को हराती थी, और बॉक्स ऑफिस पर तीसरे स्थान पर रही। <ref name="opening">{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|title=How ‘Doctor Sleep’ Went Into A Coma At The B.O. With Dreary $14M+ Opening, Following Surprise $17M+ Attack By ‘Midway’ – Update|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 10, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 10, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191109161716/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|archive-date=9 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> अपने दूसरे सप्ताहांत में फिल्म ने $ 8.6 मिलियन कमाए, ''[[फोर्ड वी फेरारी]]'', ''मिडवे'' और ''चार्लीज एंजेल्स के'' बाद चौथे स्थान पर रही। <ref>{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/ford-v-ferrari-charlies-angels-weekend-box-office-1202787070/|title='Ford v Ferrari' Cruising To $30M+, 'Charlie's Angels' Kicked Out Of Heaven With $8M+ Start|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 17, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 17, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191120184304/https://deadline.com/2019/11/ford-v-ferrari-charlies-angels-weekend-box-office-1202787070/|archive-date=20 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> === अहमियतभरा जवाब === एग्रीगेटर वेबसाइट [[रॉटेन टमेटोज़|रॉटन टोमाटोज़ पर]], फिल्म ने 70 समीक्षाओं के आधार पर 21% की स्वीकृति रेटिंग रखी है, जिसकी औसत रेटिंग 3.93 / 10 है। वेबसाइट के आलोचकों की आम सहमति पढ़ती है: " ''अग्नि के साथ खेलना'', दुख की बात है, अपने स्वयं के बीमार होने के अस्तित्व के विनाशकारी हीनता से प्रेरित है।" <ref>{{Cite web|url=https://www.rottentomatoes.com/m/playing_with_fire_2019|title=Playing with Fire (2019)|website=[[रॉटेन टमेटोज़]]|publisher=[[Fandango Media]]|access-date=December 26, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20200113030220/https://rottentomatoes.com/m/playing_with_fire_2019|archive-date=13 जनवरी 2020|url-status=live}}</ref> मेटाक्रिटिक ने 14 आलोचकों के आधार पर 100 में से 24 का वज़न औसत स्कोर दिया, जो "आम तौर पर प्रतिकूल समीक्षा" को दर्शाता है। <ref>{{Cite web|url=https://www.metacritic.com/movie/playing-with-fire-2019|title=Playing with Fire (2019) Reviews|website=[[Metacritic]]|publisher=[[CBS Interactive]]|access-date=November 8, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191203011348/https://www.metacritic.com/movie/playing-with-fire-2019|archive-date=3 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> CinemaScore द्वारा प्रदत्त ऑडियंस ने फिल्म को ए + से एफ पैमाने पर "बी +" का औसत ग्रेड दिया, जबकि पोस्टट्रैक के लोगों ने इसे 5 में से औसतन 2.5 स्टार दिए। <ref name="opening">{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|title=How ‘Doctor Sleep’ Went Into A Coma At The B.O. With Dreary $14M+ Opening, Following Surprise $17M+ Attack By ‘Midway’ – Update|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 10, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 10, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191109161716/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|archive-date=9 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> ''द ऑब्जर्वर के'' लिए वेंडी आइडे ने फिल्म को एक स्टार दिया, जिसका वर्णन "अयोग्य से परे" और इसे "सबसे खराब फिल्म के लिए देर से दावेदार" बताया। <ref>{{Cite news|url=https://www.theguardian.com/film/2019/dec/29/playing-with-fire-film-review|title=Playing With Fire review – so unfunny it will extinguish your will to live|last=Ide|first=Wendy|date=December 29, 2019|work=[[The Observer]]|access-date=26 मार्च 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200301232840/https://www.theguardian.com/film/2019/dec/29/playing-with-fire-film-review|archive-date=1 मार्च 2020|url-status=live}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == *{{आईएमडीबी शीर्षक|9134216}} [[श्रेणी:अमेरिकी फ़िल्में]] [[श्रेणी:2019 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:अंग्रेज़ी फ़िल्में]] 1y90vqeidnpypdqn5auw8dwlwldjqq0 6536826 6536820 2026-04-06T06:53:42Z AMAN KUMAR 911487 ज्ञान संदूक सुधारा 6536826 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = प्लेइंग विद फायर | image = Playing with Fire title.svg | director = एंडी फिकमैन (Andy Fickman) | producer = {{ubl|टॉड गार्नर (Todd Garner)|सीन रॉबिन्स (Sean Robins)}} | screenplay = {{ubl|डैन इवेन (Dan Ewen)|मैट लीबरमैन (Matt Lieberman)}} | story = डैन इवेन | starring = {{ubl|जॉन सीना (John Cena)|कीगन-माइकल की (Keegan-Michael Key)|जॉन लेगुइज़ामो (John Leguizamo)|ब्रायना हिल्डेब्रांड (Brianna Hildebrand)|डेनिस हेसबर्ट (Dennis Haysbert)|जूडी ग्रीर (Judy Greer)}} | music = नाथन वांग (Nathan Wang) | cinematography = डीन सेमलर (Dean Semler) | editing = एलिसाबेट रोनाल्ड्सडॉटिर | studio = {{ubl|पैरामाउंट प्लेयर्स|निकेलोडियन मूवीज़|वाल्डन मीडिया|ब्रोकन रोड प्रोडक्शंस}} | distributor = पैरामाउंट पिक्चर्स | released = {{Film date|2019|11|8|संयुक्त राज्य अमेरिका}} | runtime = 96 मिनट | country = संयुक्त राज्य अमेरिका | language = अंग्रेज़ी | budget = $2.99 करोड़ (29.9 मिलियन)<ref name="BOM"/> | gross = $6.86 करोड़ (68.6 मिलियन)<ref name="NUM">{{Cite web |url=https://www.the-numbers.com/movie/Playing-with-Fire-(2019)#tab=summary |title=Playing with Fire (2019) |website=[[The Numbers (website)|The Numbers]] |publisher=[[इंटरनेट मूवी डेटाबेस]] |accessdate=January 24, 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191221174818/https://www.the-numbers.com/movie/Playing-with-Fire-(2019)#tab=summary |archive-date=21 दिसंबर 2019 |url-status=live }}</ref><ref name="BOM">{{Cite web |url=https://www.boxofficemojo.com/title/tt9134216/?ref_=bo_rl_ti |title=Playing with Fire (2019) |website=[[बॉक्स ऑफ़िस मोजो]] |publisher=[[इंटरनेट मूवी डेटाबेस]] |accessdate=February 21, 2020}}</ref> }} '''''प्लेइंग विद फायर''''' (Playing with Fire) 2019 की एक अमेरिकी पारिवारिक [[हास्य फ़िल्म|कॉमेडी फ़िल्म]] है, जिसका निर्देशन एंडी फिकमैन ने किया है। इसकी पटकथा डैन इवेन और मैट लीबरमैन ने लिखी है, जो इवेन की एक कहानी पर आधारित है। फ़िल्म में [[जॉन सीना]], कीगन-माइकल की, जॉन लेगुइज़ामो, ब्रायना हिल्डेब्रांड, डेनिस हेसबर्ट और जूडी ग्रीर ने अभिनय किया है। कहानी 'स्मोकजंपर्स' (जंगल की आग बुझाने वाले अग्निशामकों) के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें एक दुर्घटना में बचाए गए तीन बच्चों की तब तक देखभाल करनी पड़ती है जब तक कि उनके माता-पिता नहीं मिल जाते। यह ''शेर्लोट्स वेब'' और ''डोरा एंड द लॉस्ट सिटी ऑफ़ गोल्ड'' के बाद निकेलोडियन मूवीज़ की तीसरी वाल्डन मीडिया फ़िल्म है। यह फ़िल्म संयुक्त राज्य अमेरिका में 8 नवंबर 2019 को [[पैरामाउंट पिक्चर्स]] द्वारा सिनेमाघरों में रिलीज़ की गई थी। रिलीज़ होने पर, फ़िल्म को आलोचकों और दर्शकों से नकारात्मक समीक्षाएँ मिलीं। लगभग 3 करोड़ डॉलर के निर्माण बजट वाली इस फ़िल्म ने दुनिया भर में कुल 6.8 करोड़ डॉलर की कमाई की। == संक्षेप == जंगल की आग बुझाने वाले सख्त और अनुशासित अग्निशामकों (स्मोकजंपर्स) के एक दल को तब अपनी सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है, जब वे तीन नटखट बच्चों को आग से बचाकर अपने फायर स्टेशन ले आते हैं और उन्हें बच्चों की देखभाल (बेबीसिटिंग) करनी पड़ती है। == कलाकार == * [[जॉन सीना]] - जेक "सुपे" कार्सन के रूप में * कीगन-माइकल की - मार्क रोजर्स के रूप में * जॉन लेगुइज़ामो - रोड्रिगो टोरेस के रूप में * ब्रायना हिल्डेब्रांड - ब्रायन के रूप में * डेनिस हेसबर्ट - कमांडर रिचर्ड्स के रूप में * जूडी ग्रीर - डॉ. एमी हिक्स के रूप में * टायलर माने - ऐक्स (Axe) के रूप में ** पॉल पॉट्स - ऐक्स की ओपेरा आवाज़ के रूप में * क्रिश्चियन कॉनवेरी - विल के रूप में * फिनले रोज़ स्लेटर - ज़ोई के रूप में * मौली शैनन - एक महिला के रूप में (बिना क्रेडिट का कैमियो) == निर्माण == फ़िल्म की घोषणा अक्टूबर 2018 में की गई थी जब [[जॉन सीना]] को मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था।<ref>{{Cite web |url=https://variety.com/2018/film/news/jon-cena-paramount-players-playing-with-fire-1202980555/ |title=John Cena to Star in ‘Playing With Fire’ for Paramount Players (EXCLUSIVE) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200313084412/https://variety.com/2018/film/news/jon-cena-paramount-players-playing-with-fire-1202980555/ |archive-date=13 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref> अगले महीने एंडी फ़िकमैन को निर्देशन के लिए काम पर रखा गया।<ref>{{Cite web |url=https://variety.com/2018/film/news/andy-fickman-playing-with-fire-john-cena-1203022465/ |title=Andy Fickman Signs on to Direct ‘Playing With Fire’ Starring John Cena (EXCLUSIVE) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200315141339/https://variety.com/2018/film/news/andy-fickman-playing-with-fire-john-cena-1203022465/ |archive-date=15 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref> जनवरी 2019 तक, ब्रायना हिल्डेब्रांड, जूडी ग्रीर, कीगन-माइकल की, एडोअर्डो कारफोरा, क्रिश्चियन कॉनवेरी और जॉन लेगुइज़ामो कलाकारों की सूची में शामिल हो गए।<ref>{{Cite web |url=https://www.hollywoodreporter.com/news/deadpools-brianna-hildebrand-joins-john-cena-playing-fire-1175223 |title='Deadpool' Actress Brianna Hildebrand Joins John Cena in 'Playing With Fire' (Exclusive) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191112004706/https://www.hollywoodreporter.com/news/deadpools-brianna-hildebrand-joins-john-cena-playing-fire-1175223 |archive-date=12 नवंबर 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/01/judy-greer-john-cena-playing-with-fire-cast-paramount-players-1202536875/ |title=Judy Greer Joins Paramount Players’ ‘Playing With Fire’ Opposite John Cena |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200307135148/https://deadline.com/2019/01/judy-greer-john-cena-playing-with-fire-cast-paramount-players-1202536875/ |archive-date=7 मार्च 2020 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=https://www.hollywoodreporter.com/news/keegan-michael-key-john-leguizamo-join-john-cena-playing-fire-1177321 |title=Keegan-Michael Key, John Leguizamo Joining John Cena in 'Playing with Fire' (Exclusive) |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191112004710/https://www.hollywoodreporter.com/news/keegan-michael-key-john-leguizamo-join-john-cena-playing-fire-1177321 |archive-date=12 नवंबर 2019 |url-status=live }}</ref> अमेरिकी फुटबॉलर रॉब ग्रोनकोव्स्की को भी फ़िल्म में एक भूमिका की पेशकश की गई थी, लेकिन शेड्यूलिंग विवादों के कारण उन्होंने इसे ठुकरा दिया।<ref>{{Cite web |url=https://www.si.com/nfl/2019/01/29/rob-gronkowski-hollywood-movie-career-post-retirement |title=For Rob Gronkowski, Hollywood Awaits. Can He Make It There? |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200214094028/https://www.si.com/nfl/2019/01/29/rob-gronkowski-hollywood-movie-career-post-retirement |archive-date=14 फ़रवरी 2020 |url-status=live }}</ref> फ़िल्मांकन 4 फरवरी 2019 को बर्नबाई, ब्रिटिश कोलंबिया (कनाडा) में शुरू हुआ और 29 मार्च को संपन्न हुआ।<ref>{{Cite web |url=https://www.insidevancouver.ca/2018/12/10/filming-in-vancouver-katie-holmes-john-cena-a-million-little-things-and-more/ |title=Filming in Vancouver: Katie Holmes, John Cena, A Million Little Things, and more |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190108200848/https://www.insidevancouver.ca/2018/12/10/filming-in-vancouver-katie-holmes-john-cena-a-million-little-things-and-more/ |archive-date=8 जनवरी 2019 |url-status=dead }}</ref> पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान विज़ुअल इफेक्ट्स (VFX) और एनीमेशन का काम [[इंडस्ट्रियल लाइट ऐंड मैजिक]] द्वारा किया गया था।<ref>{{Cite web |url=https://www.ilm.com/vfx/playing-with-fire-credits/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200218203029/https://www.ilm.com/vfx/playing-with-fire-credits/ |archive-date=18 फ़रवरी 2020 |url-status=dead }}</ref> == रिलीज़ == यह फ़िल्म मूल रूप से 20 मार्च 2020 को रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन बाद में इसे 8 नवंबर 2019 की तारीख पर स्थानांतरित कर दिया गया। यह तारीख पहले ''सोनिक द हेजहोग'' (Sonic the Hedgehog) की मूल रिलीज़ के लिए निर्धारित थी।<ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/01/paramount-crawl-playing-with-fire-loud-house-release-dates-1202537734/ |title=Paramount Dates ‘Crawl’ & ‘Playing With Fire’, Moves ‘Loud House’ Off Schedule |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190203024535/https://deadline.com/2019/01/paramount-crawl-playing-with-fire-loud-house-release-dates-1202537734/ |archive-date=3 फ़रवरी 2019 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=https://deadline.com/2019/05/a-quiet-place-2-sonic-the-hedgehog-playing-with-fire-paramount-release-dates-1202622152/ |title=‘A Quiet Place 2’ Going Earlier In 2020, ‘Playing With Fire’ Takes Over ‘Sonic’s November Spot: Paramount Release Date Changes |access-date=26 मार्च 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190527020114/https://deadline.com/2019/05/a-quiet-place-2-sonic-the-hedgehog-playing-with-fire-paramount-release-dates-1202622152/ |archive-date=27 मई 2019 |url-status=live }}</ref> == प्रतिक्रिया == === बॉक्स ऑफिस === फ़रवरी 2020 तक, ''प्लेइंग विद फायर'' ने संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में 4.45 करोड़ (44.5 मिलियन) डॉलर, और अन्य क्षेत्रों में 2.41 करोड़ डॉलर की कमाई की थी। इस तरह फ़िल्म का दुनिया भर में कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 6.86 करोड़ डॉलर रहा। संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में, यह फ़िल्म ''डॉक्टर स्लीप'', ''मिडवे'' और ''लास्ट क्रिसमस'' के साथ रिलीज़ हुई थी, और अपने शुरुआती सप्ताहांत में 3,125 सिनेमाघरों से लगभग 70 लाख से 1 करोड़ डॉलर के बीच कमाई करने का अनुमान था।<ref>{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-weekend-box-office-opening-stephen-king-emilia-clarke-last-christmas-terminator-1202779022/|title=‘Doctor Sleep’ Eyes $25M-$30M Box Office Start, Will Turn Out Lights On ‘Terminator: Dark Fate’|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 6, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 6, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191214194626/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-weekend-box-office-opening-stephen-king-emilia-clarke-last-christmas-terminator-1202779022/|archive-date=14 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> इसने अपने पहले दिन 36 लाख डॉलर कमाए (जिसमें गुरुवार रात के प्रीव्यू से 5 लाख डॉलर शामिल थे)। अपने पहले सप्ताहांत में इसने अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 1.28 करोड़ डॉलर की कमाई की और बॉक्स ऑफिस पर तीसरे स्थान पर रही।<ref name="opening">{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|title=How ‘Doctor Sleep’ Went Into A Coma At The B.O. With Dreary $14M+ Opening, Following Surprise $17M+ Attack By ‘Midway’ – Update|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 10, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 10, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191109161716/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|archive-date=9 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> अपने दूसरे सप्ताहांत में फ़िल्म ने 86 लाख डॉलर कमाए और ''[[फोर्ड वी फेरारी]]'', ''मिडवे'' और ''चार्लीज़ एंजेल्स'' के बाद चौथे स्थान पर खिसक गई।<ref>{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/ford-v-ferrari-charlies-angels-weekend-box-office-1202787070/|title='Ford v Ferrari' Cruising To $30M+, 'Charlie's Angels' Kicked Out Of Heaven With $8M+ Start|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 17, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 17, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191120184304/https://deadline.com/2019/11/ford-v-ferrari-charlies-angels-weekend-box-office-1202787070/|archive-date=20 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> === आलोचनात्मक प्रतिक्रिया === समीक्षा एग्रीगेटर वेबसाइट [[रॉटेन टमेटोज़]] (Rotten Tomatoes) पर, फ़िल्म को 73 समीक्षाओं के आधार पर 21% की स्वीकृति रेटिंग मिली है, जिसकी औसत रेटिंग 3.9/10 है। वेबसाइट के आलोचकों की आम सहमति के अनुसार: "''प्लेइंग विद फायर'', दुखद रूप से, अपने स्वयं के विनाशकारी आधार से उबरने में विफल रहती है।"<ref>{{Cite web|url=https://www.rottentomatoes.com/m/playing_with_fire_2019|title=Playing with Fire (2019)|website=[[रॉटेन टमेटोज़]]|publisher=[[Fandango Media]]|access-date=December 26, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20200113030220/https://rottentomatoes.com/m/playing_with_fire_2019|archive-date=13 जनवरी 2020|url-status=live}}</ref> मेटाक्रिटिक (Metacritic) ने 14 आलोचकों के आधार पर इसे 100 में से 24 का औसत स्कोर दिया, जो "आम तौर पर प्रतिकूल समीक्षाओं" को दर्शाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.metacritic.com/movie/playing-with-fire-2019|title=Playing with Fire (2019) Reviews|website=[[Metacritic]]|publisher=[[CBS Interactive]]|access-date=November 8, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191203011348/https://www.metacritic.com/movie/playing-with-fire-2019|archive-date=3 दिसंबर 2019|url-status=live}}</ref> सिनेमास्कोर (CinemaScore) द्वारा सर्वेक्षण किए गए दर्शकों ने फ़िल्म को A+ से F के पैमाने पर "B+" का औसत ग्रेड दिया, जबकि पोस्टट्रैक (PostTrak) के दर्शकों ने इसे 5 में से औसतन 2.5 स्टार दिए।<ref name="opening">{{Cite web|url=https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|title=How ‘Doctor Sleep’ Went Into A Coma At The B.O. With Dreary $14M+ Opening, Following Surprise $17M+ Attack By ‘Midway’ – Update|last=D'Alessandro|first=Anthony|date=November 10, 2019|website=[[Deadline Hollywood]]|access-date=November 10, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191109161716/https://deadline.com/2019/11/doctor-sleep-midway-last-christmas-opening-weekend-box-office-1202780077/|archive-date=9 नवंबर 2019|url-status=live}}</ref> ''द ऑब्जर्वर'' की वेंडी आइडे ने फ़िल्म को 5 में से 1 स्टार दिया और इसे "असहनीय" तथा "साल की सबसे खराब फ़िल्म के लिए एक मजबूत दावेदार" बताया।<ref>{{Cite news|url=https://www.theguardian.com/film/2019/dec/29/playing-with-fire-film-review|title=Playing With Fire review – so unfunny it will extinguish your will to live|last=Ide|first=Wendy|date=December 29, 2019|work=[[The Observer]]|access-date=26 मार्च 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200301232840/https://www.theguardian.com/film/2019/dec/29/playing-with-fire-film-review|archive-date=1 मार्च 2020|url-status=live}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == *{{आईएमडीबी शीर्षक|9134216}} [[श्रेणी:अमेरिकी फ़िल्में]] [[श्रेणी:2019 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:अंग्रेज़ी फ़िल्में]] noys647glam7frerzdjfokpfpfd3pfo 1962 अंग्रेजी क्रिकेट सीजन 0 1231771 6536793 5014861 2026-04-06T06:05:52Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन]] जोड़ी 6536793 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricket tournament | previous_year = 1961 | previous_tournament = 1961 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न | next_year = 1963 | next_tournament = 1963 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न }} 1962 इंग्लैंड में [[काउंटी चैम्पियनशिप]] क्रिकेट का 63 वां सत्र था। यह मौसम के अंत के बाद समाप्त किए जा रहे शौकीनों ("जेंटलमैन") और पेशेवरों ("खिलाड़ी") के बीच अंतर के परिणामस्वरूप आदरणीय जेंटलमैन वी प्लेयर्स फिचर को पेश करने का आखिरी सीजन था। परिणामस्वरूप, सभी प्रथम श्रेणी के क्रिकेटर नाममात्र के पेशेवर हो गए। यॉर्कशायर ने काउंटी चैम्पियनशिप जीती और इंग्लैंड ने एक अनुभवहीन पाकिस्तान टीम को आसानी से हरा दिया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन]] 7fit0rmzns8jqhg0i616e677jpi8q8n 6536794 6536793 2026-04-06T06:06:19Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:1962]] जोड़ी 6536794 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricket tournament | previous_year = 1961 | previous_tournament = 1961 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न | next_year = 1963 | next_tournament = 1963 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न }} 1962 इंग्लैंड में [[काउंटी चैम्पियनशिप]] क्रिकेट का 63 वां सत्र था। यह मौसम के अंत के बाद समाप्त किए जा रहे शौकीनों ("जेंटलमैन") और पेशेवरों ("खिलाड़ी") के बीच अंतर के परिणामस्वरूप आदरणीय जेंटलमैन वी प्लेयर्स फिचर को पेश करने का आखिरी सीजन था। परिणामस्वरूप, सभी प्रथम श्रेणी के क्रिकेटर नाममात्र के पेशेवर हो गए। यॉर्कशायर ने काउंटी चैम्पियनशिप जीती और इंग्लैंड ने एक अनुभवहीन पाकिस्तान टीम को आसानी से हरा दिया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन]] [[श्रेणी:1962]] ab2h318ibwgzegvdd2fd9xou21ehxym 1969 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न 0 1231776 6536802 5816000 2026-04-06T06:12:32Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:1969]] जोड़ी 6536802 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricket tournament | previous_year = 1968 | previous_tournament = 1968 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न | next_year = 1970 | next_tournament = 1970 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न }} '''1969 का अंग्रेजी क्रिकेट सत्र''' 70 वां था जिसमें [[काउंटी चैम्पियनशिप]] एक आधिकारिक प्रतियोगिता थी। संडे लीग (अब नेशनल लीग) शुरू हुआ, जो जॉन प्लेयर तंबाकू कंपनी द्वारा प्रायोजित है। सभी मैच रविवार को खेले गए जिनमें से 17 प्रथम श्रेणी के काउंटियों में एक-दूसरे के साथ एक-एक बार खेले गए। मैच 40 ओवर के थे। प्रत्येक रविवार को एक मैच बीबीसी द्वारा प्रसारित किया जाता था और यह विचार एक व्यावसायिक सफलता थी, हालांकि क्रिकेट के "पारंपरिक" समर्थकों के बीच इसके आलोचकों की संख्या थी। संडे लीग का एक प्रभाव काउंटी चैंपियनशिप में प्रत्येक टीम द्वारा 28 से 24 तक खेले गए मैचों की संख्या में कमी थी। ग्लैमरगन ने चैम्पियनशिप का खिताब जीता। इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड दोनों को टेस्ट शृंखला में हराया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1969]] 6ny9bz3ygrf58rlkedf1o0e9hrvbv6y 6536803 6536802 2026-04-06T06:12:53Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन]] जोड़ी 6536803 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricket tournament | previous_year = 1968 | previous_tournament = 1968 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न | next_year = 1970 | next_tournament = 1970 अंग्रेजी क्रिकेट सीज़न }} '''1969 का अंग्रेजी क्रिकेट सत्र''' 70 वां था जिसमें [[काउंटी चैम्पियनशिप]] एक आधिकारिक प्रतियोगिता थी। संडे लीग (अब नेशनल लीग) शुरू हुआ, जो जॉन प्लेयर तंबाकू कंपनी द्वारा प्रायोजित है। सभी मैच रविवार को खेले गए जिनमें से 17 प्रथम श्रेणी के काउंटियों में एक-दूसरे के साथ एक-एक बार खेले गए। मैच 40 ओवर के थे। प्रत्येक रविवार को एक मैच बीबीसी द्वारा प्रसारित किया जाता था और यह विचार एक व्यावसायिक सफलता थी, हालांकि क्रिकेट के "पारंपरिक" समर्थकों के बीच इसके आलोचकों की संख्या थी। संडे लीग का एक प्रभाव काउंटी चैंपियनशिप में प्रत्येक टीम द्वारा 28 से 24 तक खेले गए मैचों की संख्या में कमी थी। ग्लैमरगन ने चैम्पियनशिप का खिताब जीता। इंग्लैंड ने वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड दोनों को टेस्ट शृंखला में हराया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1969]] [[श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन]] nnkzlmzehc0fkx30tehn60qlxhssv68 विजय सिंह आंदोलनकारी 0 1241523 6536565 6536563 2026-04-05T12:00:42Z ~2026-21053-72 918895 6536565 wikitext text/x-wiki '''विजय सिंह''' [[मुज़फ़्फ़रनगर|मुझफ्फरनगर]], उत्तरप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी हैं, जिनका जन्म 10 मई 1962 में हुआ। <ref>{{Cite news|url=http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|title=UP govt to constitute team to save public land from mafias|last=|first=|date=17 April 2016|work=|access-date=|archive-date=29 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529014145/http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|url-status=dead}}</ref> वे 26 फरवरी 1996 से भ्रष्टाचार एवं राजनैतिक आपराधीकरण के विरोध में<ref>{{Cite news|url=https://www-amarujala-com.cdn.ampproject.org/v/s/www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/muzaffarnagar/master-vijay-singh?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQHKAFQArABIA%3D%3D#aoh=16090811492951&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s&ampshare=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Futtar-pradesh%2Fmuzaffarnagar%2Fmaster-vijay-singh|title=आंदोलनकारी विजय सिंह बोले|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति/भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवा कर सार्वजनिक कार्यों में उपयोग करवाने अथवा भूमिहीनों में बांटने की मांग के समर्थन में धरना पर बैठे हुए हैं।उनकी इस कार्रवाई को [[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स|लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]] सहित अभिलेखों की विभिन्न पुस्तकों में सबसे लंबे समय तक इस तरह के विरोध के रूप में दर्ज किया गया है। == भ्रष्टाचार विरोधी सक्रियता == सिंह को कार्रवाई करने के लिए एक घटना ने प्रेरित किया, जब उन्होंने एक भूखे बच्चे को देखा, जो रोटी के लिए रो रहा था और अपनी मां को पड़ोसी से आटा लाने के लिए कह रहा था। उन्होंने अपने गांव में भूमि के स्वामित्व पर अनुसंधान करना शुरू किया, और पाया कि ग्राम सभा की चार हजार बीघा जमीन पर निजी व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध कब्जे के खिलाफ काम करने के लिए सिंह ने अपने शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया। <ref>{{Cite news|url=http://archive.indianexpress.com/news/15-yrs-at-dms-office-no-end-to-land-grab-woes/792962/|title=15 yrs at DM’s office, no end to land grab|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> == आंदोलन द्वारा उपलब्धियां == 2008 में, जब तत्कालीन प्रमुख गृह सचिव जे.एन. चैंबर को मामले पर जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी आर. रमेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और 300 बीघा अवैध रूप से अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया। इस मामले में, अतिक्रमण करनेवालों के खिलाफ 136 मामले दर्ज किए गए थे। जांच में 3200 बीघा जमीन अतिक्रमण की साबित हुई है।<ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/city/lucknow/CMs-prompt-action-raises-Masterjis-hope/articleshow/12917021.cms|title=CM’s prompt action raises Masterji’s hope|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> <references group="संदर्भ" responsive="" /> == आंदोलन के 30 साल == भ्रष्टाचार व भू-माफियाओं के विरुद्ध मास्टर विजय सिंह का धरना आज 30 साल पुरे हो गये है,ग्राम चौसाना की 4 हजार बीघा सार्वजनिक कृषि भूमि ;अनुमानित कीमत लगभग 900 करोड़ रुपए व शामली एवं मुजफ्फरनगर की 6 लाख बीघे भूमि से अवैध कब्जा मुक्त कराने की माँग को लेकर 26 फरवरी 1996 को जिलाधिकारी कार्यालय पर सत्यग्रह शुरू हुआ था। अब यह धरना दुनिया का सबसे लंबा धरना बन गया है। <ref>{{https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms}}</ref><ref> {{https://www.univarta.com/news/uttar-pradesh/story/3754991.html }} {{ https://ndtv.in/uttar-pradesh-news/the-longest-protest-is-going-on-in-muzaffarnagar-now-there-is-hope-for-justice-11006685}} {{1https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/muzaffarnagar/muzaffarnagar-master-vijay-singh-strike-completes-28-years-against-corruption-and-land-mafia/articleshow/107987341.cms}} ==बाहरी कड़ियाँ== 1[https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms ] 2[https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html The shanty man] 3{{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210411045315/https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html |date=11 अप्रैल 2021 }} [[श्रेणी : भ्रष्टाचार]] [[श्रेणी:भ्रष्टाचार-विरोधी उपाय]] [[श्रेणी : नैतिकता]] ==इन्हें भी देखे== [[रिंकू सिंह राही]] 2ubfoguxh7i0m0dl77kxrsa1ia1uovw 6536568 6536565 2026-04-05T12:11:08Z ~2026-21053-72 918895 /* भ्रष्टाचार विरोधी सक्रियता */ 6536568 wikitext text/x-wiki '''विजय सिंह''' [[मुज़फ़्फ़रनगर|मुझफ्फरनगर]], उत्तरप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी हैं, जिनका जन्म 10 मई 1962 में हुआ। <ref>{{Cite news|url=http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|title=UP govt to constitute team to save public land from mafias|last=|first=|date=17 April 2016|work=|access-date=|archive-date=29 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529014145/http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|url-status=dead}}</ref> वे 26 फरवरी 1996 से भ्रष्टाचार एवं राजनैतिक आपराधीकरण के विरोध में<ref>{{Cite news|url=https://www-amarujala-com.cdn.ampproject.org/v/s/www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/muzaffarnagar/master-vijay-singh?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQHKAFQArABIA%3D%3D#aoh=16090811492951&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s&ampshare=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Futtar-pradesh%2Fmuzaffarnagar%2Fmaster-vijay-singh|title=आंदोलनकारी विजय सिंह बोले|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति/भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवा कर सार्वजनिक कार्यों में उपयोग करवाने अथवा भूमिहीनों में बांटने की मांग के समर्थन में धरना पर बैठे हुए हैं।उनकी इस कार्रवाई को [[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स|लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]] सहित अभिलेखों की विभिन्न पुस्तकों में सबसे लंबे समय तक इस तरह के विरोध के रूप में दर्ज किया गया है। == भ्रष्टाचार विरोधी अभियान == सिंह को एक घटना ने प्रेरित किया, जब उन्होंने एक भूखे बच्चे को देखा, जो रोटी के लिए रो रहा था और अपनी मां को पड़ोसी से आटा लाने के लिए कह रहा था। उन्होंने अपने गांव में भूमि के सार्वजनिक भूमि पर अनुसंधान करना शुरू किया, और पाया कि ग्राम सभा की 4 हजार बीघा जमीन पर राजनीतिक दबंग भू माफिया का द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध कब्जे के खिलाफ काम करने के लिए सिंह ने अपने शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया। <ref>{{Cite news|url=http://archive.indianexpress.com/news/15-yrs-at-dms-office-no-end-to-land-grab-woes/792962/|title=15 yrs at DM’s office, no end to land grab|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> == आंदोलन द्वारा उपलब्धियां == 2008 में, जब तत्कालीन प्रमुख गृह सचिव जे.एन. चैंबर को मामले पर जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी आर. रमेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और 300 बीघा अवैध रूप से अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया। इस मामले में, अतिक्रमण करनेवालों के खिलाफ 136 मामले दर्ज किए गए थे। जांच में 3200 बीघा जमीन अतिक्रमण की साबित हुई है।<ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/city/lucknow/CMs-prompt-action-raises-Masterjis-hope/articleshow/12917021.cms|title=CM’s prompt action raises Masterji’s hope|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> <references group="संदर्भ" responsive="" /> == आंदोलन के 30 साल == भ्रष्टाचार व भू-माफियाओं के विरुद्ध मास्टर विजय सिंह का धरना आज 30 साल पुरे हो गये है,ग्राम चौसाना की 4 हजार बीघा सार्वजनिक कृषि भूमि ;अनुमानित कीमत लगभग 900 करोड़ रुपए व शामली एवं मुजफ्फरनगर की 6 लाख बीघे भूमि से अवैध कब्जा मुक्त कराने की माँग को लेकर 26 फरवरी 1996 को जिलाधिकारी कार्यालय पर सत्यग्रह शुरू हुआ था। अब यह धरना दुनिया का सबसे लंबा धरना बन गया है। <ref>{{https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms}}</ref><ref> {{https://www.univarta.com/news/uttar-pradesh/story/3754991.html }} {{ https://ndtv.in/uttar-pradesh-news/the-longest-protest-is-going-on-in-muzaffarnagar-now-there-is-hope-for-justice-11006685}} {{1https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/muzaffarnagar/muzaffarnagar-master-vijay-singh-strike-completes-28-years-against-corruption-and-land-mafia/articleshow/107987341.cms}} ==बाहरी कड़ियाँ== 1[https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms ] 2[https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html The shanty man] 3{{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210411045315/https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html |date=11 अप्रैल 2021 }} [[श्रेणी : भ्रष्टाचार]] [[श्रेणी:भ्रष्टाचार-विरोधी उपाय]] [[श्रेणी : नैतिकता]] ==इन्हें भी देखे== [[रिंकू सिंह राही]] kdi0rnldmyefytkqm2zn8rb2vtg7ohv 6536591 6536568 2026-04-05T13:16:30Z ~2026-21053-72 918895 /* आंदोलन के 30 साल */ 6536591 wikitext text/x-wiki '''विजय सिंह''' [[मुज़फ़्फ़रनगर|मुझफ्फरनगर]], उत्तरप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी हैं, जिनका जन्म 10 मई 1962 में हुआ। <ref>{{Cite news|url=http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|title=UP govt to constitute team to save public land from mafias|last=|first=|date=17 April 2016|work=|access-date=|archive-date=29 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529014145/http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|url-status=dead}}</ref> वे 26 फरवरी 1996 से भ्रष्टाचार एवं राजनैतिक आपराधीकरण के विरोध में<ref>{{Cite news|url=https://www-amarujala-com.cdn.ampproject.org/v/s/www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/muzaffarnagar/master-vijay-singh?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQHKAFQArABIA%3D%3D#aoh=16090811492951&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s&ampshare=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Futtar-pradesh%2Fmuzaffarnagar%2Fmaster-vijay-singh|title=आंदोलनकारी विजय सिंह बोले|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति/भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवा कर सार्वजनिक कार्यों में उपयोग करवाने अथवा भूमिहीनों में बांटने की मांग के समर्थन में धरना पर बैठे हुए हैं।उनकी इस कार्रवाई को [[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स|लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]] सहित अभिलेखों की विभिन्न पुस्तकों में सबसे लंबे समय तक इस तरह के विरोध के रूप में दर्ज किया गया है। == भ्रष्टाचार विरोधी अभियान == सिंह को एक घटना ने प्रेरित किया, जब उन्होंने एक भूखे बच्चे को देखा, जो रोटी के लिए रो रहा था और अपनी मां को पड़ोसी से आटा लाने के लिए कह रहा था। उन्होंने अपने गांव में भूमि के सार्वजनिक भूमि पर अनुसंधान करना शुरू किया, और पाया कि ग्राम सभा की 4 हजार बीघा जमीन पर राजनीतिक दबंग भू माफिया का द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध कब्जे के खिलाफ काम करने के लिए सिंह ने अपने शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया। <ref>{{Cite news|url=http://archive.indianexpress.com/news/15-yrs-at-dms-office-no-end-to-land-grab-woes/792962/|title=15 yrs at DM’s office, no end to land grab|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> == आंदोलन द्वारा उपलब्धियां == 2008 में, जब तत्कालीन प्रमुख गृह सचिव जे.एन. चैंबर को मामले पर जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी आर. रमेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और 300 बीघा अवैध रूप से अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया। इस मामले में, अतिक्रमण करनेवालों के खिलाफ 136 मामले दर्ज किए गए थे। जांच में 3200 बीघा जमीन अतिक्रमण की साबित हुई है।<ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/city/lucknow/CMs-prompt-action-raises-Masterjis-hope/articleshow/12917021.cms|title=CM’s prompt action raises Masterji’s hope|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> <references group="संदर्भ" responsive="" /> == आंदोलन के 30 साल == भ्रष्टाचार व भू-माफियाओं के विरुद्ध मास्टर विजय सिंह का धरना को 30 साल पुरे हो गये है,ग्राम चौसाना की 4 हजार बीघा सार्वजनिक कृषि भूमि ;अनुमानित कीमत लगभग 900 करोड़ रुपए व शामली एवं मुजफ्फरनगर की 6 लाख बीघे भूमि से अवैध कब्जा मुक्त कराने की माँग को लेकर 26 फरवरी 1996 को जिलाधिकारी कार्यालय पर सत्यग्रह शुरू हुआ था। अब यह धरना दुनिया का सबसे लंबा धरना बन गया है। <ref>{{https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms}}</ref><ref> {{https://www.univarta.com/news/uttar-pradesh/story/3754991.html }} {{ https://ndtv.in/uttar-pradesh-news/the-longest-protest-is-going-on-in-muzaffarnagar-now-there-is-hope-for-justice-11006685}} {{1https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/muzaffarnagar/muzaffarnagar-master-vijay-singh-strike-completes-28-years-against-corruption-and-land-mafia/articleshow/107987341.cms}} ==बाहरी कड़ियाँ== 1[https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms ] 2[https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html The shanty man] 3{{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210411045315/https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html |date=11 अप्रैल 2021 }} [[श्रेणी : भ्रष्टाचार]] [[श्रेणी:भ्रष्टाचार-विरोधी उपाय]] [[श्रेणी : नैतिकता]] ==इन्हें भी देखे== [[रिंकू सिंह राही]] 5j3eht8xnw1zn1ifis5th6nnw0oqpt3 6536593 6536591 2026-04-05T13:23:02Z ~2026-21053-72 918895 /* आंदोलन के 30 साल */ 6536593 wikitext text/x-wiki '''विजय सिंह''' [[मुज़फ़्फ़रनगर|मुझफ्फरनगर]], उत्तरप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी हैं, जिनका जन्म 10 मई 1962 में हुआ। <ref>{{Cite news|url=http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|title=UP govt to constitute team to save public land from mafias|last=|first=|date=17 April 2016|work=|access-date=|archive-date=29 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529014145/http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|url-status=dead}}</ref> वे 26 फरवरी 1996 से भ्रष्टाचार एवं राजनैतिक आपराधीकरण के विरोध में<ref>{{Cite news|url=https://www-amarujala-com.cdn.ampproject.org/v/s/www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/muzaffarnagar/master-vijay-singh?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQHKAFQArABIA%3D%3D#aoh=16090811492951&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s&ampshare=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Futtar-pradesh%2Fmuzaffarnagar%2Fmaster-vijay-singh|title=आंदोलनकारी विजय सिंह बोले|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति/भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवा कर सार्वजनिक कार्यों में उपयोग करवाने अथवा भूमिहीनों में बांटने की मांग के समर्थन में धरना पर बैठे हुए हैं।उनकी इस कार्रवाई को [[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स|लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]] सहित अभिलेखों की विभिन्न पुस्तकों में सबसे लंबे समय तक इस तरह के विरोध के रूप में दर्ज किया गया है। == भ्रष्टाचार विरोधी अभियान == सिंह को एक घटना ने प्रेरित किया, जब उन्होंने एक भूखे बच्चे को देखा, जो रोटी के लिए रो रहा था और अपनी मां को पड़ोसी से आटा लाने के लिए कह रहा था। उन्होंने अपने गांव में भूमि के सार्वजनिक भूमि पर अनुसंधान करना शुरू किया, और पाया कि ग्राम सभा की 4 हजार बीघा जमीन पर राजनीतिक दबंग भू माफिया का द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध कब्जे के खिलाफ काम करने के लिए सिंह ने अपने शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया। <ref>{{Cite news|url=http://archive.indianexpress.com/news/15-yrs-at-dms-office-no-end-to-land-grab-woes/792962/|title=15 yrs at DM’s office, no end to land grab|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> == आंदोलन द्वारा उपलब्धियां == 2008 में, जब तत्कालीन प्रमुख गृह सचिव जे.एन. चैंबर को मामले पर जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी आर. रमेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और 300 बीघा अवैध रूप से अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया। इस मामले में, अतिक्रमण करनेवालों के खिलाफ 136 मामले दर्ज किए गए थे। जांच में 3200 बीघा जमीन अतिक्रमण की साबित हुई है।<ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/city/lucknow/CMs-prompt-action-raises-Masterjis-hope/articleshow/12917021.cms|title=CM’s prompt action raises Masterji’s hope|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> <references group="संदर्भ" responsive="" /> <ref></ref>== आंदोलन के 30 साल == भ्रष्टाचार व भू-माफियाओं के विरुद्ध मास्टर विजय सिंह का धरना को 30 साल पुरे हो गये है,ग्राम चौसाना की 4 हजार बीघा सार्वजनिक कृषि भूमि ;अनुमानित कीमत लगभग 900 करोड़ रुपए व शामली एवं मुजफ्फरनगर की 6 लाख बीघे भूमि से अवैध कब्जा मुक्त कराने की माँग को लेकर 26 फरवरी 1996 को जिलाधिकारी कार्यालय पर सत्यग्रह शुरू हुआ था। अब यह धरना दुनिया का सबसे 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2021 }} [[श्रेणी : भ्रष्टाचार]] [[श्रेणी:भ्रष्टाचार-विरोधी उपाय]] [[श्रेणी : नैतिकता]] ==इन्हें भी देखे== [[रिंकू सिंह राही]] d53jtqf4lp0fnjmnnesutjn6rvph48x 6536622 6536593 2026-04-05T15:37:15Z Mnjkhan 900134 [[विशेष:योगदान/~2026-21053-72|~2026-21053-72]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21053-72|वार्ता]]) द्वारा अच्छी नीयत से किये गये बदलाव प्रत्यावर्तित किये गये 6536622 wikitext text/x-wiki '''विजय सिंह''' [[मुज़फ़्फ़रनगर|मुझफ्फरनगर]], उत्तरप्रदेश में एक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनकारी हैं, जिनका जन्म 10 मई 1962 में हुआ। <ref>{{Cite news|url=http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|title=UP govt to constitute team to save public land from mafias|last=|first=|date=17 April 2016|work=|access-date=|archive-date=29 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160529014145/http://news.webindia123.com/news/articles/India/20120428/1974045.html|url-status=dead}}</ref> वे 26 फरवरी 1996 से भ्रष्टाचार एवं राजनैतिक आपराधीकरण के विरोध में<ref>{{Cite news|url=https://www-amarujala-com.cdn.ampproject.org/v/s/www.amarujala.com/amp/uttar-pradesh/muzaffarnagar/master-vijay-singh?amp_js_v=a6&amp_gsa=1&usqp=mq331AQHKAFQArABIA%3D%3D#aoh=16090811492951&referrer=https%3A%2F%2Fwww.google.com&amp_tf=From%20%251%24s&ampshare=https%3A%2F%2Fwww.amarujala.com%2Futtar-pradesh%2Fmuzaffarnagar%2Fmaster-vijay-singh|title=आंदोलनकारी विजय सिंह बोले|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> करोड़ों रुपयों की सार्वजनिक सम्पत्ति/भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करवा कर सार्वजनिक कार्यों में उपयोग करवाने अथवा भूमिहीनों में बांटने की मांग के समर्थन में धरना पर बैठे हुए हैं। उनकी इस कार्रवाई को [[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स|लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]] सहित अभिलेखों की विभिन्न पुस्तकों में सबसे लंबे समय तक इस तरह के विरोध के रूप में दर्ज किया गया है। == भ्रष्टाचार विरोधी सक्रियता == सिंह को कार्रवाई करने के लिए एक घटना ने प्रेरित किया, जब उन्होंने एक भूखे बच्चे को देखा, जो रोटी के लिए रो रहा था और अपनी मां को पड़ोसी से आटा लाने के लिए कह रहा था। उन्होंने अपने गांव में भूमि के स्वामित्व पर अनुसंधान करना शुरू किया, और पाया कि ग्राम सभा की चार हजार बीघा जमीन पर निजी व्यक्तियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। अवैध कब्जे के खिलाफ काम करने के लिए सिंह ने अपने शिक्षक के पद से इस्तीफा दे दिया। <ref>{{Cite news|url=http://archive.indianexpress.com/news/15-yrs-at-dms-office-no-end-to-land-grab-woes/792962/|title=15 yrs at DM’s office, no end to land grab|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> == आंदोलन द्वारा उपलब्धियां == 2008 में, जब तत्कालीन प्रमुख गृह सचिव जे.एन. चैंबर को मामले पर जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में कार्रवाई करने का आदेश दिया। जिलाधिकारी आर. रमेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की टीम ने गांव का दौरा किया और 300 बीघा अवैध रूप से अतिक्रमित भूमि को मुक्त कराया। इस मामले में, अतिक्रमण करनेवालों के खिलाफ 136 मामले दर्ज किए गए थे। जांच में 3200 बीघा जमीन अतिक्रमण की साबित हुई है।<ref>{{Cite news|url=https://m.timesofindia.com/city/lucknow/CMs-prompt-action-raises-Masterjis-hope/articleshow/12917021.cms|title=CM’s prompt action raises Masterji’s hope|last=|first=|date=|work=|access-date=}}</ref> <references group="संदर्भ" responsive="" /> == आंदोलन के 30 साल == {{https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms}} {{https://www.univarta.com/news/uttar-pradesh/story/3754991.html }} {{ https://ndtv.in/uttar-pradesh-news/the-longest-protest-is-going-on-in-muzaffarnagar-now-there-is-hope-for-justice-11006685}} {{1https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/muzaffarnagar/muzaffarnagar-master-vijay-singh-strike-completes-28-years-against-corruption-and-land-mafia/articleshow/107987341.cms}} ==बाहरी कड़ियाँ== 1[https://timesofindia.indiatimes.com/city/agra/ex-teachers-protest-against-land-grab-completes-30yrs/articleshow/128821531.cms ] 2[https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html The shanty man] 3{{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210411045315/https://www.theweek.in/features/heroes/vijay-singhs-fight-against-land-mafia-of-uttar-pradesh.html |date=11 अप्रैल 2021 }} [[श्रेणी : भ्रष्टाचार]] [[श्रेणी:भ्रष्टाचार-विरोधी उपाय]] [[श्रेणी : नैतिकता]] ==इन्हें भी देखे== [[रिंकू सिंह राही]] 771e9tvp0yri0vpjmodf6dz2tp1i7h1 अब्दुल मलिक (क्रिकेटर) 0 1263023 6536571 6302686 2026-04-05T12:13:54Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536571 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricketer | name = अब्दुल मलिक | full_name = अब्दुल मलिक खान | birth_date = {{birth date and age|df=yes|1998|03|11}} | birth_place = [[बागलान]], अफगानिस्तान | batting = दाहिने हाथ का बल्ला | bowling = दाहिना हाथ [[ऑफ़ब्रेक]] | country = अफ़ग़ानिस्तान | international = true | onetest = true | testdebutdate = 2 मार्च | testdebutyear = 2021 | testdebutagainst = जिम्बाब्वे | testcap = 20 | lasttestdate = | lasttestyear = | lasttestagainst = | oneodi = | odidebutdate = | odidebutyear = | odidebutagainst = | odicap = | lastodidate = | lastodiyear = | lastodiagainst = | oneT20I = | T20Idebutdate = | T20Idebutyear = | T20Idebutagainst = | T20Icap = | lastT20Idate = | lastT20Iyear = | lastT20Iagainst = | club1 = [[आमो शार्क]] | year1 = 2014–2018 | columns = 3 | column1 = [[टेस्ट क्रिकेट | टेस्ट]] | matches1 = 1 | runs1 = 0 | bat avg1 = 0.0 | 100s/50s1 = –/– | top score1 = 0 | deliveries1 = – | wickets1 = – | bowl avg1 = – | fivefor1 = – | tenfor1 = – | best bowling1 = – | catches/stumpings1 = 2/– | column2 = [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट|एफसी]] | matches2 = 19 | runs2 = 1,383 | bat avg2 = 43.21 | 100s/50s2 = 3/7 | top score2 = 179 | deliveries2 = 30 | wickets2 = 0 | bowl avg2 = – | fivefor2 = 0 | tenfor2 = 0 | best bowling2 = – | catches/stumpings2 = 20/– | column3 = [[लिस्ट ए क्रिकेट | एलए]] | matches3 = 13 | runs3 = 434 | bat avg3 = 48.22 | 100s/50s3 = 1/2 | top score3 = 107 | deliveries3 = 78 | wickets3 = 0 | bowl avg3 = – | fivefor3 = 0 | tenfor3 = 0 | best bowling3 = – | catches/stumpings3 = 6/– | source = http://www.espncricinfo.com/afghanistan/content/player/1059030.html क्रिकइन्फो | date = 3 मार्च 2021 }} '''अब्दुल मलिक खान''' (जन्म 11 मार्च 1998) एक अफगान क्रिकेटर है। उन्होंने मार्च 2021 में अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।<ref name="Bio">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/1059030.html |title=Abdul Malik Khan |access-date=26 October 2017 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 26 अक्टूबर 2017 को [[अहमद शाह अब्दाली 4-दिवसीय टूर्नामेंट]] में [[अमो शार्क|अमो क्षेत्र]] के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया।<ref name="FC">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1124059.html |title=4th Match, Alokozay Ahmad Shah Abdali 4-day Tournament at Amanullah, Oct 26-29 2017 |access-date=26 October 2017 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 10 सितंबर 2019 को गाजी [[अमानुल्ला खान]] क्षेत्रीय एक दिवसीय टूर्नामेंट 2019 में अमो क्षेत्र के लिए अपनी लिस्ट ए की शुरुआत की।<ref>{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1200017.html |title=Ghazi Amanullah Khan Regional One Day Tournament at Amanullah, Sep 10 2019 |work=ESPN Cricinfo |access-date=10 September 2019}}</ref> उन्होंने अपना ट्वेंटी 20 डेब्यू 13 अक्टूबर 2019 को काबुल ईगल्स के लिए 2019 शोभेजा क्रिकेट लीग में किया।<ref name="T20">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1202462.html |title=12th Match, Shpageeza Cricket League at Kabul, Oct 13 2019 |access-date=13 October 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> नवंबर 2019 में, उन्हें बांग्लादेश में 2019 एसीसी इमर्जिंग टीमों एशिया कप के लिए अफगानिस्तान के दस्ते में नामित किया गया था।<ref>{{cite web |url=https://www.cricket.af/post/afghanistan-emerging-travels-to-bangladesh-for-asia-cup |title=Afghanistan Emerging travels to Bangladesh for Asia Cup |work=Afghanistan Cricket Board |access-date=12 November 2019 |archive-date=23 दिसंबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211223043405/https://cricket.af/post/afghanistan-emerging-travels-to-bangladesh-for-asia-cup |url-status=dead }}</ref> फरवरी 2021 में, जिम्बाब्वे के खिलाफ उनकी श्रृंखला के लिए उन्हें अफगानिस्तान के टेस्ट टीम में नामित किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/afg-vs-zim-tests-rashid-khan-in-squad-for-zimbabwe-tests-and-will-miss-large-part-of-psl-season-1252182 |title=Rashid Khan in squad for Zimbabwe Tests, to miss large part of PSL season |work=ESPN Cricinfo |access-date=18 February 2021}}</ref> उन्होंने 2 मार्च 2021 को जिम्बाब्वे के खिलाफ अफगानिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया।<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1252056.html |title=1st Test, Abu Dhabi, Mar 2 - 6 2021, Afghanistan tour of United Arab Emirates |work=ESPN Cricinfo |access-date=2 March 2021}}</ref> हालाँकि, वह अफगानिस्तान के पहले बल्लेबाज़ बने जो टेस्ट क्रिकेट में एक जोड़ी के लिए आउट हुए।<ref>{{cite web|url=https://www.thehindu.com/sport/cricket/williams-century-bowlers-help-zimbabwe-trounce-afghanistan-in-two-day-finish-at-abu-dhabi/article33981504.ece |title=Williams century, bowlers help Zimbabwe trounce Afghanistan in two-day finish at Abu Dhabi |work=The Hindu |access-date=3 March 2021}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1998 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:अफगानिस्तान के क्रिकेट खिलाड़ी]] amyafxd3aeazss20jlav621skx7hvyq अब्दुल वसी 0 1263047 6536578 6255213 2026-04-05T12:22:07Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536578 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricketer | name = अब्दुल वसी | full_name = अब्दुल वसी नूरी | birth_date = {{birth date and age|2002|7|6|df=yes}} | batting = दाहिने हाथ का बल्ला | bowling = [[लेग ब्रेक]] | country = अफ़ग़ानिस्तान | international = true | onetest = true | testdebutdate = 2 मार्च | testdebutyear = 2021 | testdebutagainst = जिम्बाब्वे | testcap = 21 | lasttestdate = | lasttestyear = | lasttestagainst = | oneodi = | odidebutdate = | odidebutyear = | odidebutagainst = | odicap = | lastodidate = | lastodiyear = | lastodiagainst = | oneT20I = | T20Idebutdate = | T20Idebutyear = | T20Idebutagainst = | T20Icap = | lastT20Idate = | lastT20Iyear = | lastT20Iagainst = | club1 = [[एमो शार्क | एमो क्षेत्र]] | year1 = {{nowrap|2017–वर्तमान}} | columns = 2 | column1 = [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट | प्रथम श्रेणी]] | matches1 = 18 | runs1 = 823 | bat avg1 = 32.92 | 100s/50s1 = 0/6 | top score1 = 89 | deliveries1 = 3,603 | wickets1 = 80 | bowl avg1 = 27.61 | fivefor1 = 4 | tenfor1 = 1 | best bowling1 = 6/91 | catches/stumpings1 = 6/– | column2 = [[लिस्ट ए क्रिकेट | लिस्ट ए]] | matches2 = 13 | runs2 = 45 | bat avg2 = 9.00 | 100s/50s2 = 0/0 | top score2 = 23 | deliveries2 = 493 | wickets2 = 9 | bowl avg2 = 45.44 | fivefor2 = 0 | tenfor2 = n/a | best bowling2 = 3/50 | catches/stumpings2 = 2/– | date = 2 मार्च 2021 | source = http://www.espncricinfo.com/afghanistan/content/player/974173.html क्रिकइन्फो }} '''अब्दुल वसी''' (जन्म 6 जुलाई 2002) एक अफगान क्रिकेटर है। उन्होंने मार्च 2021 में [[अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम|अफगानिस्तान क्रिकेट टीम]] के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया।<ref name="Bio">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/974173.html |title=Abdul Wasi |access-date=4 March 2018 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 1 मार्च 2018 को [[अहमद शाह अब्दाली 4-दिवसीय टूर्नामेंट]] में अमो क्षेत्र के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।<ref name="FC">{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1137689.html |title=2nd Match, Alokozay Ahmad Shah Abdali 4-day Tournament at Kunar, Mar 1-4 2018 |work=ESPN Cricinfo |access-date=4 March 2018}}</ref> वह टूर्नामेंट में अमो क्षेत्र के लिए अग्रणी विकेट लेने वाले थे, दस मैचों में 54 के साथ,<ref>{{cite web|url=http://stats.espncricinfo.com/ci/engine/records/averages/batting_bowling_by_team.html?id=12264;team=5461;type=tournament |title=Alokozay Ahmad Shah Abdali 4-day Tournament, 2018: Amo Region, Batting and bowling averages |work=ESPN Cricinfo |access-date=12 May 2018}}</ref> और उन्हें श्रृंखला के खिलाड़ी के रूप में भी नामित किया गया था।<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1137718.html |title=Final, Alokozay Ahmad Shah Abdali 4-day Tournament at Kandahar, May 8-12 2018 |work=ESPN Cricinfo |access-date=12 May 2018}}</ref> उन्होंने 10 जुलाई 2018 को 2018 गाजी अमानुल्ला खान क्षेत्रीय एक दिवसीय टूर्नामेंट में अमो क्षेत्र के लिए अपनी लिस्ट ए की शुरुआत की।<ref name="LA">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1151362.html |title=Group A, Ghazi Amanullah Khan Regional One Day Tournament at Kabul, Jul 10 2018 |access-date=10 July 2018|work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने अपना ट्वेंटी 20 डेब्यू 13 अक्टूबर 2019 को, 2019 शोभेजा क्रिकेट लीग में स्पीन घर टाइगर्स के लिए किया।<ref name="T20">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1202463.html |title=13th Match, Shpageeza Cricket League at Kabul, Oct 13 2019 |access-date=13 October 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> नवंबर 2019 में, उन्हें बांग्लादेश में 2019 एसीसी इमर्जिंग टीमों एशिया कप के लिए अफगानिस्तान के दस्ते में नामित किया गया था।<ref>{{cite web |url=https://www.cricket.af/post/afghanistan-emerging-travels-to-bangladesh-for-asia-cup |title=Afghanistan Emerging travels to Bangladesh for Asia Cup |work=Afghanistan Cricket Board |access-date=12 November 2019 |archive-date=23 दिसंबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211223043405/https://cricket.af/post/afghanistan-emerging-travels-to-bangladesh-for-asia-cup |url-status=dead }}</ref> फरवरी 2021 में, उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ श्रृंखला के लिए अफगानिस्तान के टेस्ट टीम में एक आरक्षित खिलाड़ी के रूप में नामित किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.cricbuzz.com/cricket-news/116292/afghanistan-pick-eight-uncapped-players-for-zimbabwe-tests |title=Afghanistan pick eight uncapped players for Zimbabwe Tests |work=CricBuzz |access-date=18 February 2021}}</ref> उन्होंने 2 मार्च 2021 को जिम्बाब्वे के खिलाफ अफगानिस्तान के लिए [[टेस्ट क्रिकेट]] में पदार्पण किया।<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1252056.html |title=1st Test, Abu Dhabi, Mar 2 - 6 2021, Afghanistan tour of United Arab Emirates |work=ESPN Cricinfo |access-date=2 March 2021}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:2002 में जन्मे लोग]] 9ek2pf6te12t54w2af4nrb7lp3ob618 अलिफ लैला (2020 टीवी धारावाहिक) 0 1267553 6536749 6515381 2026-04-06T05:02:12Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536749 wikitext text/x-wiki {{Infobox television | image = चित्र:Alif laila on Dangal.png | caption = | show_name = '''अलिफ लैला''' | genre = फंतासी | picture_format = 576i SDTV <br> 1080i HDTV | 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रूपांतरित किया गया था लेकिन यह रीमेक संस्करण कुछ परिवर्तनों के साथ मूल से अलग है। शो सितारे अंकित अरोरा और [[शाइनी दोशी]] मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.iwmbuzz.com/hindi/television/news/ankit-arora-and-shiny-doshi-to-play-leads-in-alif-laila/2020/01/20|title=अंकित अरोरा और शाइनी दोषी शो अलिफ लैला में मुख्य किरदार में आएंगे नजर|last=राजेश|first=श्रीविद्या|date=2020-01-20|website=IWMBuzz हिन्दी|language=hi-IN|access-date=2021-03-30}}{{Dead link|date=मई 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> [[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]] [[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]] [[श्रेणी:दंगल टीवी के धारावाहिक]] [[श्रेणी: दंगल टीवी मूल धारावाहिक]] ==कहानी== सुल्तान शाहबाज़ [[बगदाद]] के बादशाह है। वे अपनी पिछली पत्नी नूर ने उनके सतेले भाई शाहजमाँ के साथ मिलकर उसे धोखा दिया, वे दोनों सुल्तान शाहबाज़ को मारने की साजिश रचते है। लेकिन सुलतान को उनकी साजिश के बारे में पता चलता है। और वो अपनी धोखेबाज पत्नी नूर को मार देते हैं और अपने सौतेले भाई शाहजमाँ को काल कोटरी में कैद कर देते हैं। लेकिन उन्हें हररोज पिछले ६ महीने से नूर के धोखेबाजी के सपने आते है। तब उनके वजीर उन्हें शादी करने की सलाह देते हैं पर सुल्तान मना करते हैं। तब वजीर उन्हें ये भी बताते है कि अगर ६ महीने के बाद भी अगर उन्होंने ६ महीने बाद शादी नहीं की तो इस राज्य के कानून के मुताबिक ये राजगद्दी उनके सौतेले भाई शाहजमाँ को दे दी जाएगी अपने तख्त को बचाने के लिए सुल्तान हर रोज़ एक नयी लड़की से शादी करने और अगली सुबह उसे मारने का फैसला करते हैं। ताकि उन्हें धोखा देने और उसे मारने का कोई मौका नहीं मिले। उन्होंने यह भयावह निर्णय लिया क्योंकि उन्हें लगता है कि सभी महिलाएं अपनी मृत पत्नी नूर की तरह दुष्ट, धोखेबाज और षडयंत्रकारी हैं। वज़ीर की बेटी सहेर जो शाहबाज़ से बचपन से प्यार करती थी, उसे किसी भी पाप करने से रोकने के लिए उससे शादी करने का प्रस्ताव देती है। अपनी शादी की रात को उसने अगली सुबह अपनी मौत की याद दिलाते हुए रस्सी से बने एक नोज से उसे डराया क्योंकि उसने अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या करने का फैसला किया था। वह उसके साथ एक जादू की किताब '[[अलिफ लैला]]' के बारे में बात करने में कामयाब रही, जिसमें वह किसी भी कहानी में जा सकती है। और एक पुरुष नायक का जीवन जी सकती है। वह उस किताब को एक पुराने बाबा से ले चुकी है जिसने पहले अपने अनुभव को कई कहानियों में शामिल किया था। उसे शुरू में विश्वास नहीं हुआ लेकिन फिर उसने किताब को आजमाने का फैसला किया क्योंकि वह अगली सुबह वैसे भी मर जाएगी। इससे पहले कि वह पहली कहानी में 'अलीबाबा और चालिस चोर’ में जाता है, वह उससे कहती है कि शरीर उनका होगा लेकिन दिमाग और आत्मा अलीबाबा की होगी और फिर वह बताती है कि उसे सुबह होने से पहले किताब से बाहर आना होगा या वह इसमें हमेशा के लिए फस जाएंगे। उसकी योजना उसे अपनी त्रुटियों का एहसास कराने और उसकी योजना को रोकने की है। इसलिए वह अलग-अलग कहानियों का अनुभव करता रहा। कहानी के अंदर, शाहबाज कहानी में अलीबाबा का जीवन जीता है। दर्शकों के विस्मय के लिए, वह महिला नायक के सामने सेहर का चेहरा देखता है जो मरजीना का है। जब उसकी पहली कहानी भोर से पहले पूरी नहीं होती है, तो वह उसे जारी नहीं रखने पर क्रोधित हो जाता है। कारण यह है कि पुस्तक का उपयोग केवल रात में किया जा सकता है या इसका जादू गायब हो जाएगा। वह लगभग जल्लाद (जल्लाद) खलील द्वारा उसे मार डालने का हुक्म दिया जाता है लेकिन उसने उसके अनुरोध पर वह उसे माफ कर देता है लेकिन उसे चेतावनी दी कि उसे अपनी कहानी पूरी करने के लिए केवल एक रात के लिए बख्शा जाएगा और अगली सुबह मार दिया जाएगा। रात होने से पहले वह फिर से कहानी को जारी रखने के लिए उसे किताब में डालती है, वह उससे पूछता है है कि उसने मरजिना में उसका चेहरा क्यों देखा, जिस पर वह जवाब देती है कि पुस्तक का वह अनोखा हिस्सा है जिसमें वह हर कहानी में एक व्यक्ति को देखेगी जो उस पर है उसका मन। दर्शकों को विस्मित करने और यहां तक ​​कि उनके ', वह हर कहानी में अपनी पत्नी को हर कहानी की महिला नायक के सामने देखता है। वह रात में 1 कहानी पूरी कर लेती है लेकिन दूसरी कहानी शुरू करती है उसे धोखा देकर कि कहानी 1 कहानी से जारी है। अगली सुबह फिर से उसकी कहानी अधूरी है और उसने खलील से उसे मौत के घाट उतारने के लिए कहा। इस बार उसने अपने जीवन को छोड़ने का अनुरोध नहीं किया, लेकिन चुपचाप जा रही थी जब उसने खुद खलील को रोका और उसे फिर से चेतावनी दी कि उसकी कहानी पूरी होने के बाद आज रात उसकी आखिरी रात होगी। तो दूसरी कहानी भी रात में पूरी हो जाती है लेकिन बेतरतीब बातचीत के जरिए वह उसे तीसरी कहानी में ले जाती है जो दुर्भाग्य से सुबह होने से पहले खत्म हो जाती है। वे कहानी के बारे में बात कर रहे थे, जब खलील चलता है, जिसमें सेहर अपनी मौत की याद दिलाता है, लेकिन उसके बाद शाहबाज ने खलील को चिल्लाते हुए कहा कि वह उसे देखे कि वह सुल्ताना के साथ बात कर रहा है और बिना अनुमति के कभी प्रवेश नहीं करेगा या वह उसे फांसी पर चढ़ा देगा। खलील के पत्ते। इसलिए सुबह से पहले पूरी हो चुकी कहानी के साथ उसका जीवन भी उसके साथ है। सेहर के पिता उससे मिलने आते हैं। वह सुबह की घटना के बारे में बता रही है और सुल्तान उसकी कहानियों से कैसे प्रभावित हो रहा है। उसके पिता ने उसे उच्च आशाएँ न रखने की चेतावनी दी लेकिन वह नज़रअंदाज़ कर दिया। रात में, वह खाने जा प्रबंध करती है और शाहबाज को कमरे में खुले आसमान के नीचे कमरे में उससे मिलने के लिए एक पत्र देती है। वह वहाँ जाता है और उसे देखता है। एक सेकंड के लिए, वह उसकी सुंदरता से प्रभावित होता है और मुस्कुराता है, लेकिन फिर वह अपनी पहली पत्नी के साथ अपने सुखद क्षणों को याद करता है और कैसे उसने अपने सौतेले भाई के साथ योजना बनाई कि उसे मारने के लिए वह सेहर पर गुस्सा हो जाए और सेट की गई तारीख को बर्बाद कर दे। वह उसे फंसाने का प्रयास करने का आरोप लगाती है और सभी महिलाएं कैसे धोखा देती हैं। वह उसे यह कहकर डराता है कि वह सुबह की प्रतीक्षा किए बिना उसे मार सकता है और खलील का नाम चिल्लाता है। वह उसे एक और कहानी सुनने के लिए सहमत करने का प्रबंधन करती है। वह उसे बताता है कि वह उसे एक और कहानी सुनाकर जीत सकती है लेकिन अगली सुबह उसे मरना होगा, जिसके बारे में वह कहती है कि उसे अपनी मौत की परवाह नहीं है। वह फिर 4 वीं कहानी में जाता है। फिर से कहानी सुबह होने से पहले पूरी होती है। वह उससे महिलाओं पर उसके अविश्वास के बारे में पूछती है, जिस पर वह उस पर फिर से क्रोधित हो जाता है और अपनी तलवार निकाल देता है, लेकिन उसके बदले एक तकिया पर वार कर देता है। फिर वह उससे कहता है कि वह औरतों की तरह बुद्धिमान नहीं है और वास्तव में दयालु है। कमरे से बाहर निकलने से पहले, वह उसे चेतावनी देती है कि यदि वह अपने जीवन की सुरक्षा चाहती है तो वह इस गलती को दुबारा न दोहराए। तो यह दूसरी बार है जब सुबह होने से पहले कहानी पूरी हो गई। सेहर इस वजह से पूरे दिन उदास रहती है। जब वे सुबह-सुबह प्रार्थना कर रहे थे, तब उनकी नज़र एक पल के लिए उनके आंसू भरे चेहरे पर पड़ी। जब सेहर को नौकरानियों द्वारा तैयार किया जा रहा है, तो वह अभी भी दुखी है और पिछले दिन अपने पिता के शब्दों को याद करती है। रात में, सेहर उदास होकर अपने कमरे से खिड़की के बाहर देख रही है। शाहबाज आता और उसे उदास देखता है। वह महसूस करती है कि वह प्रवेश कर गई और सामान्य स्वर में कहती है और वह नहीं जानती थी कि वह कब प्रवेश करता है और उससे पूछता है कि क्या वह उसे किसी अन्य कहानी में जाने देती है। शाहबाज़ ने शराब पीना शुरू कर दिया जैसे वह आमतौर पर करता है और अपने अतीत के बारे में उदास आवाज़ में बताता है। अपने अतीत में, शाहबाज अपनी शिकार यात्रा से एक दिन पहले अपनी पत्नी के लिए एक उपहार के साथ आता है जो एक छोटे रंगीन पक्षी है। वह कमरे में प्रवेश करता है और अपनी पत्नी को किसी अन्य व्यक्ति के साथ बात करते हुए देखकर हैरान हो जाता है। उसके प्रवेश करने पर, वह शख्स छिप जाता है लेकिन शाहबाज उसे ढूंढ लेता है और उसके आगे के झटके से वह शख्स कोई और नहीं बल्कि उसके सौतेले भाई शाहजमन थे। वह अपनी पत्नी को अपनी तलवार से पेट में मारकर मार डालता है। वह शाहज़मन को भी मारने वाला था, लेकिन उसकी सौतेली माँ जिसे वह हमेशा आँख बंद करके मानता है कि नूर पर सबकुछ आरोप लगाता है, बताती है कि उसका बेटा उसके जाल में आना बेवकूफी है। वह आगे बताती है कि सभी महिलाएं एक जैसी हैं जो धोखेबाज और चरित्रहीन हैं। वर्तमान में वापस आते हुए, सेहर ने उसे बताया कि वह उसे नहीं बता सकती है वह यह नहीं कह सकती कि वह अपने दर्द को समझ सकती है क्योंकि उस व्यक्ति को जो केवल उस व्यक्ति से गुजर रहा है वह समझता है कि वह कैसा महसूस करता है। वह फिर उसे 5 वीं कहानी बताने के लिए आगे बढ़ती है। सुचना: 5 वीं कहानी को पूरी तरह से नहीं दिखाया जा सकता था क्योंकि 20 मार्च को टेलीकास्ट रोक दिया गया था, कोरोना वायरस की वजह से 20 एपिसोड पूरे करने के बाद शूट को रोक कर रखा गया था। == कलाकार == ===मुख्य किरदार=== *अंकित अरोरा - सुल्तान शाहबाज़ और अन्य किरदार (अलीबाबा, अहमद, अब्बास, सुल्तान हासिम और अबदुला) *[[शाइनी दोशी]]- सुल्ताना सहेर और अन्य किरदार (मरजीना, शहजादी नीलोफर, शहजादी फरिया, सुल्ताना जूही और सफीना)<ref>{{Cite web|last=|first=|date=|title=Shiny Doshi Lead Role on Ali Laila|url=https://www.dailypioneer.com/2020/show-time/imagination-takes-flight.html|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20221107070138/https://www.dailypioneer.com/2020/show-time/imagination-takes-flight.html|archive-date=7 नवंबर 2022|access-date=|website=www.dailypioneer.com}}</ref> ===अन्य किरदार=== *अमित कपूर - सुल्तान शाहबाज़ के वजीर और सहेर के पिता *अश्लेषा सावंत - सुल्ताना नूरी (सुल्तान की पहली पत्नी)<ref>{{Cite web|last=|first=|date=|title=Ashlesha Savant bags Dangal TV Show Alif Laila|url= https://www.indiaforums.com/article/ashlesha-savant-bags-dangal-tv-show-alif-laila_160137?ri=3&rv=2260|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=|website=www.indiafourms.com}}</ref> *सोनिया शाह - सुल्तान शाहबाज़ की सौतेली माँ और शाहजमाँ की सगी माँ<ref>{{Cite web|last=|first=|date=|title=Sonia Shah and Meer Ali bag Dangal TV's Alif Laila|url=http://dhunt.in/8LILN?ss=wsp&s=pu|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=|website=Dailyhunt}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> *मीर अली - शहजादे शाहजमाँ (सुल्तान का छोटा सौतेला भाई) ===एपिसोड किरदार=== *चेतन हंसराज - जादूगर मिंगला (बगदाद का चोर कहानी में)<ref>{{Cite web|last=|first=|date=|title=Chetan Hansraj : I Love Playing Negative Characters|url= https://www.tellychakkar.com/tv/tv-news/chetan-hansraj-i-love-playing-negative-characters-200405 |url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=|website=www.tellychakkar.com}}</ref> *वीरेन सिंह राठौड़ - वज़ीर अकानक (फितरेज की शहजादी और मछवारे की कहानी में) *हेलन शास्त्री - शहजादी सारा *मधुरा नाइक - जादूगरनी हिना (डायन हिना कहानी में)<ref>{{Cite web|last=|first=|date=|title=Madhura Naik plays a which in Alif Laila|url=https://m.timesofindia.com/videos/tv/hindi/madhura-naik-plays-a-witch-in-alif-laila/videoshow/75272260.cms|url-status=live|archive-url=|archive-date=|access-date=|website=www.timesofindia.com}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == *[https://m.imdb.com/title/tt14288610 इंटरनेट डेटाबेस मूवी पर अलिफ लैला] *[[यूट्यूब]] पर देखे [https://youtube.com/playlist?list=PLr39c83z4PUnx7WQQ5fGbAhwiUu2BHKD1 अलिफ लैला के सभी एपिसोड्स] [[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]] [[श्रेणी:हिंदी टेलिविजन धारावाहिक]] [[श्रेणी:भारतीय फंतासी सीरियल]] 5iexl9nubjgjsh5fm49wcxe0c87vwzg साधु सीताराम दास बैरागी 0 1281086 6536951 5298368 2026-04-06T11:39:32Z ~2026-21229-47 919063 /* प्रारंभिक जीवन */ 6536951 wikitext text/x-wiki '''साधु सीताराम दास''' (जन्म:1883) एक भारतीय [[क्रांतिकारी]] थे। वह पहले व्यक्ति थे<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=OwcuAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=Sadhu+Sitaram+Das&q=Sadhu+Sitaram+Das&hl=en&redir_esc=y|title=Peasant Movements in Rajasthan, 1920-1949|last=Sharma|first=Brij Kishore|date=1990|publisher=Pointer Publishers|isbn=978-81-7132-024-0|language=en}}</ref> जिन्होंने [[बिजोलिया किसान आन्दोलन|बिजौलिया आंदोलन]] में किसानों का नेतृत्व किया।<ref>https://books.google.co.in/books?id=GnUyAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=Sadhu+Sitaram+Das&q=Sadhu+Sitaram+Das&hl=en&redir_esc=y</ref> साधु सीताराम दास को [[बिजोलिया किसान आन्दोलन|बिजौलिया किसान आंदोलन]] का जनक माना‌ जाता हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/opinion/open-page/bijolias-resonance/article32820050.ece|title=Bijolia’s resonance|last=Kanakk|first=Atul|date=2020-10-11|work=The Hindu|access-date=2021-05-27|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> ==प्रारंभिक जीवन== '''सीताराम दास''' जी का जन्म [[बिजोलिया|बिजौलिया]] के बैरागी परिवार में १८८३ में हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा [[बिजोलिया|बिजौलिया]] में पूरी की और फिर उच्च शिक्षा के लिए [[बनारस]] चले गए। उन्होंने 1905 में [[बिजोलिया|बिजौलिया]] में एक मित्र मंडल (फ्रेंड्स एसोसिएशन) शुरू किया, और इसके माध्यम से [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|ब्रिटिश भारत]] में [[राष्ट्रवाद|राष्ट्रवादी आंदोलन]] के बारे में प्रचार किया गया। '''सीताराम दास''' ने इसे 1907 में बंद कर दिया, जब उन्होंने '''राव''' (बिजौलिया के सरदार) के साथ एक पद संभाला लेकिन असहमति के कारण 1907 में इस पद से इस्तीफा दे दिया। फिर उन्होंने [[आयुर्वेदिक चिकित्सा]] का अभ्यास किया, जिससे वह [[किसान|किसानों]] के संपर्क में आ गए। एक किसान का उन्होंने इलाज किया, उस किसान से सीतारामदास को उनके [[उत्पीड़न]] के बारे में पता चला और वे उनकी [[दशा (ज्योतिष)|दुर्दशा]] के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए गांवों का दौरा करने लगे। और सीताराम दास ने अपना पूरा जीवन गरीब किसानों के [[वर्ग संघर्ष|शोषण]] के खिलाफ आवाज उठाने के लिए [[सर्पणशील|समर्पित]] कर दिया। ==बिजौलिया आंदोलन और साधु सीताराम दास== [[बिजोलिया|बिजौलिया]] आजादी से पहले [[मेवाड़]] का हिस्सा था। [[स्वतंत्रता संग्राम]] के दौरान कस्बे में किसान आंदोलन ने आम आदमी की शक्ति की कहानी सुनाई। यह [[आंदोलन]] 1897 में साधु सीताराम दास के [[नेतृत्व]] में शुरू हुआ था। साधु सीताराम दास ने [[मेवाड़]] के [[दरबार|शाही दरबार]] में आम आदमी (ज्यादातर गरीब किसान) की आवाज उठाने की कोशिश की। नेतृत्व के आधार पर [[बिजोलिया किसान आन्दोलन|बिजौलिया आंदोलन]] को तीन चरणों में वर्गीकृत किया जा सकता है। पहले चरण (1897-1914) का नेतृत्व साधु सीताराम दास ने किया था। मार्च १९१३ में साधु सीताराम दास के नेतृत्व में लगभग १००० किसानों ने [[ज़मींदारी प्रथा|जागीरदार]] के सामने अपनी [[शिकायत|शिकायतें]] प्रस्तुत कीं और जब उन्होंने किसानों को देखने से इनकार कर दिया, तो किसानों ने भूमि पर खेती नहीं करने का फैसला किया। 1913-1914 के वर्षों में [[बिजोलिया|बिजौलिया]] भूमि को परती छोड़ दिया गया था। १९१५ में उनकी मुलाकात [[विजय सिंह पथिक]] से हुई और वे पहली मुलाकात में ही [[विजय सिंह पथिक]]<nowiki/>से प्रभावित हुए। साधु सीताराम दास ने विजय सिंह पथिक को [[बिजोलिया किसान आन्दोलन|बिजौलिया के किसान आंदोलन]] का नेतृत्व करने के लिए कहा। 1915 में सीताराम दास ने विजय सिंह पथिक को अग्रणी [[किसान|किसानों]] की जिम्मेदारी दी। इसके कारण [[बिजोलिया किसान आन्दोलन|बिजौलिया आंदोलन]] के अगले चरण (1916–23) का नेतृत्व [[विजय सिंह पथिक]] ने किया। ==इन्हें भी देखें== *[[विजय सिंह पथिक]] *[[बिजोलिया किसान आन्दोलन]] ==सन्दर्भ== 6kfezxy408irt853ho1zcdnkfx4bsyl अलवीरा खान 0 1303882 6536739 6361386 2026-04-06T03:27:33Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536739 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Alvira Khan at her Ahakzai fashion preview (cropped).jpg |अंगूठाकार|अलवीरा खान]] '''अलवीरा खान अग्निहोत्री''' भारतीय [[फ़िल्म निर्माता]]<ref>{{cite web|url=http://www.indiaglitz.com/salman-khans-next-to-be-directed-by-bodyguard-producer-hindi-news-135919.html|title='Bodyguard'. It will have original script and will be produced by Alvira Khan Agnihotri|work=indiaglitz.com}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> और [[फ़ैशन डिज़ाइनर]] हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.firstpost.com/bollywood/photos-b-town-celebs-at-alvira-khans-store-launch-1198135.html| title=B-town celebs at Alvira Khan's store launch| work=firstpost.com}}</ref><ref>{{cite web |url=http://indiatoday.intoday.in/gallery/b-town-attends-alvira-khans-store-launch-bhai-salman-gives-a-miss/1/10396.html| title= Alvira Khan's store launch| work=indiatoday. intoday. in/}}</ref> वर्ष 2016 में, उन्हें ''सुल्तान'' फ़िल्म में उनके परिधान डिज़ाइन के कार्य के लिए स्टारडस्ट अवार्ड मिला। ==सन्दर्भ== {{reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category}} * {{IMDb name|nm2655625}} {{Authority control}} [[श्रेणी:हिंदी फिल्म निर्माता]] ns5w9qpsigrjd0v5wsmlcruvhc6aw5q अली मेच 0 1312915 6536776 5707059 2026-04-06T05:38:05Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536776 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=Ali Mech|occupation=Tribal chief (Rajah)|known_for=[[Bakhtiyar Khalji's Tibet campaign|Tibet campaign]]|birth_date=13th century|birth_place=Kamatapur Kingdom}} अली मेच 13 वीं शताब्दी के एक आदिवासी राजा थे, जो वर्तमान [[असम]] के बोरो-कचारी उप जनजाति से संबंधित है जिसे मेच कहा जाता है। == जीवनी == अली मेक को असम के पहले मुस्लिम धर्मांतरित माना जाता है।[। <ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/864299/we-dont-want-to-be-identified-in-the-name-of-our-religion-say-assams-indigenous-desi-muslims|title=‘We don’t want to be identified on the basis of our religion,’ say Assam’s indigenous Desi Muslims|last=Saikia|first=Arunabh|website=[[Scroll.in]]|language=en-US|access-date=2021-07-07}}</ref> अली मेच के इस्लाम लाने के बाद कुछ मेक और कोच जनजातियों ने भी इस मज़बहब को अपनाया। <ref name=":1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=sDAXEAAAQBAJ&pg=PA23&dq=ali+mech&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&sa=X|title=The Muslim Question in Assam and Northeast India|last=Nath|first=Monoj Kumar|publisher=Taylor & Francis|year=2021|isbn=978-1-000-37027-0|pages=23|language=en}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.thehillstimes.in/featured/the-ethnicity-of-assamese-muslims/|title=The Ethnicity of Assamese Muslims|last=Ahmed|first=Haamim K.J.|date=12 September 2018|website=[[The Hills Times (Diphu)|The Hills Times]]|access-date=2021-07-25|archive-date=25 जुलाई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210725052538/https://www.thehillstimes.in/featured/the-ethnicity-of-assamese-muslims/|url-status=dead}}</ref> इन लोगों के आधुनिक वंशज असम के देसी मुसलमान माने जाते हैं। <ref name=":1" /> [[कामरूप]] की तलहटी में एक आदिवासी प्रमुख के रूप में, <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=nAUBCwAAQBAJ&pg=PA36|title=Epigraphy and Islamic Culture: Inscriptions of the Early Muslim Rulers of Bengal (1205–1494)|last=Siddiq|first=Mohammad Yusuf|publisher=Routledge|year=2015|isbn=9781317587460|pages=36}}</ref> उन्होंने एक मार्गदर्शक के रूप में १२०६ में तिब्बत पर बख्तियार खिलजी की उनके असफल आक्रमण में सहायता की। <ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=18CTOgAACAAJ|title=Tibet and Tibetan Muslims|last=Nadwi|first=Abu Bakr Amir-uddin|publisher=Library of Tibetan Works and Archives|year=2004|isbn=9788186470350|location=Dharamsala|pages=43–44|translator-last=Sharma|translator-first=Parmananda}}</ref> ई.एल. गैट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ए हिस्ट्री ऑफ असम में  यह उल्लेख किया है कि "एक मेच प्रमुख द्वारा निर्देशित, मुहम्मद बख्तियार ने कोच, मेच और थारू (तराई) जनजाति के निवास वाले देश से दस दिनों के लिए इस नदी (करातोया, वर्तमान में बांग्लादेश में) के दाहिने किनारे के साथ उत्तर की ओर मार्च किया, ।" माना जाता है कि अली मेक के नाम का पहला हिस्सा मुस्लिम नाम है क्योंकि वह इस्लाम को पसंद करते थे और उन्होंने इसे अपनाया। जल्द ही सैकड़ों मेच निवासियों ने हिंदू प्रभुओं और उसकी जाति, रीति-रिवाजों और परंपराओं के हाथों बढ़ते उत्पीड़न के कारण इस्लाम धर्म अपना लिया। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books/about/A_History_of_Assam.html?id=GvcRAAAAYAAJ&printsec=frontcover&source=kp_read_button&newbks=1&newbks_redir=0&gboemv=1&hl=en|title=A History of Assam|last=Gait|first=Edward|date=1906|publisher=Thacker, Spink & Company|isbn=978-0-404-16819-3|language=en}}</ref> == संदर्भ ==   [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची]] 5pu0jmdaiz3yxsvk1j9dufdczsvu5ho सांवरिया जी मंदिर 0 1329124 6536671 6456125 2026-04-05T17:11:39Z ~2026-21030-96 918947 6536671 wikitext text/x-wiki {{Infobox Hindu temple | name = सांवलिया जी मंदिर मंडफिया | governing_body = राजस्थान सरकार | locale = सांवलिया जी- मंडफिया | district = [[चित्तौड़गढ़]] | state = [[राजस्थान]] | province = भदेसर तहसील | coordinates = {{coord|24.66|N|74.40|E|type:landmark|display=inline,title}} | website = [https://shrisanwariyaseth.org/ shrisanwariyaseth.org] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250523145939/https://shrisanwariyaseth.org/ |date=23 मई 2025}} (आधिकारिक वेबसाइट; वर्तमान में निष्क्रिय); [https://sanwariya.org/ sanwariya.org] (भक्तों द्वारा संचालित अनौपचारिक वेबसाइट) | image = File:Sanwaliaji3.JPG | native_name = साँवलिया सेठ }} '''सांवलिया जी मंदिर''' [[राजस्थान]] राज्य के [[चित्तौड़गढ़ जिला|चित्तौड़गढ़]] जिले में स्थित एक प्रसिद्ध [[हिंदू मंदिर]] है। यह मंदिर '''श्री सांवलिया सेठ''' के नाम से भी जाना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/photogallery/rajasthan/chittorgarh-sanwaliya-seth-temple-god-is-a-business-partner-here-know-what-is-the-whole-history-rjsr-3581030.html|title=राजस्थान का सांवलिया सेठ मंदिर: यहां भगवान हैं बिजनेस पार्टनर, जानिये क्या है पूरा इतिहास|website=News18 हिंदी|language=hi-IN|access-date=2021-11-28}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.herzindagi.com/hindi/diary/sanwariya-seth-mandir-chittorgarh-story-article-299517|title=सांवलिया सेठ मंदिर, चित्तौड़गढ़: एक अद्भुत कहानी|website=Herzindagi|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref> == किंवदंती == किंवदंती के अनुसार, वर्ष 1840 में '''भोलाराम''' नामक एक ग्वाला ने बागुंड गाँव के छापर में तीन दिव्य मूर्तियों को भूमिगत दफनाने का सपना देखा। इस स्थल की खुदाई करने पर भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियाँ प्राप्त हुईं, जैसा कि स्वप्न में देखा गया था। इनमें से एक मूर्ति को मंडफिया में स्थापित किया गया, दूसरी भादसोड़ा में और तीसरी मूर्ति बागुंड गाँव के छापर में उसी स्थान पर रखी गई जहाँ यह प्राप्त हुई थी। इन तीनों स्थानों पर मंदिरों का निर्माण किया गया और ये सभी मंदिर एक-दूसरे के नजदीक, लगभग 5 किमी की दूरी पर स्थित हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.patrika.com/jaipur-news/visit-this-krishna-temple-in-rajasthan-on-janmashtami-every-devotee-becomes-a-rich-man-here-18930742|title=राजस्थान का सांवलिया सेठ मंदिर: यहां हर भक्त बनता है अमीर|website=Patrika News|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref> == प्रमुख मंदिर == इन तीनों मंदिरों में, मंडफिया का मंदिर को '''सांवलिया जी धाम''' (सांवलिया का निवास) के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। यह मंदिर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/photogallery/madhya-pradesh/opium-smugglers-here-make-the-sanwariya-seth-god-a-business-partner-offering-black-gold-in-donations-an-interesting-reason-7901053-page-6.html|title=यहां भगवान को बना दिया बिजनेस पार्टनर: दिलचस्प कारण|website=News18 हिंदी|language=hi-IN|access-date=2021-11-28}}</ref> == स्थान == सांवलिया जी मंदिर चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से 41 किमी और डबोक एयरपोर्ट से 65 किमी की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर श्री नाथद्वारा के बाद वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए दूसरा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://m.patrika.com/chittorgarh-news/sanwaliya-seth-temple-chittorgarh-rajasthan-2398436/|title=राजस्थान का अद्भुत मंदिर जहां लोग जितना चढ़ाते हैं उससे कई गुणा ज्यादा पाते हैं|last=dinesh|website=Patrika News|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.herzindagi.com/hindi/diary/sanwariya-seth-mandir-chittorgarh-story-article-299517|title=सांवलिया सेठ मंदिर, चित्तौड़गढ़: एक अद्भुत कहानी|website=Herzindagi|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref> == बाहरी कड़ियाँ == * श्री सांवलिया सेठ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250523145939/https://shrisanwariyaseth.org/|date=23 मई 2025}} पर संग्रहीत है; इसके अतिरिक्त भक्तों द्वारा संचालित एक अनौपचारिक वेबसाइट {{URL|https://sanwariya.org}} उपलब्ध है। == सन्दर्भ == [[श्रेणी:मन्दिर]] jiu696sdh8h42c02fligpge4smul05l अब्दुल रहमान (अफगान क्रिकेटर, जन्म 2001) 0 1336012 6536575 5535327 2026-04-05T12:17:34Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536575 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricketer | name = अब्दुल रहमान | image = | country = अफगानिस्तान | fullname = | birth_date = {{birth date and age|2001|11|22|df=yes}} | birth_place = | death_date = | death_place = | batting = | bowling = | role = | international = | oneodi = | odidebutdate = | odidebutyear = | odidebutagainst = | odicap = | lastodidate = | lastodiyear = | lastodiagainst = | oneT20I = | T20Idebutdate = | T20Idebutyear = | T20Idebutagainst = | T20Icap = | lastT20Idate = | lastT20Iyear = | lastT20Iagainst = | date = 23 जुलाई 2021 | source = http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/819507.html क्रिकइन्फो }} '''अब्दुल रहमान''' (जन्म 22 नवंबर 2001) एक अफगान क्रिकेटर हैं।<ref name="Bio">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/819507.html |title=Abdul Rahman |accessdate=13 October 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 16 अप्रैल 2019 को 2019 अहमद शाह अब्दाली 4 दिवसीय टूर्नामेंट में काबुल क्षेत्र के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया।<ref name="FC">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1179621.html |title=8th Match, Ahmad Shah Abdali 4-day Tournament at Kabul, Apr 16-19 2019 |accessdate=11 October 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 13 अक्टूबर 2019 को 2019 शापेजा क्रिकेट लीग में काबुल ईगल्स के लिए ट्वेंटी 20 की शुरुआत की।<ref name="T20">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1202462.html |title=12th Match, Shpageeza Cricket League at Kabul, Oct 13 2019 |accessdate=13 October 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> दिसंबर 2019 में, उन्हें 2020 अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए अफगानिस्तान की टीम में नामित किया गया था।<ref>{{cite web |url=https://www.cricket.af/post/afghanistan-u19-squad-announced-for-icc-u19-world-cup |title=Afghanistan U19 squad announced for ICC U19 World Cup |work=Afghanistan Cricket Board |accessdate=8 December 2019 |archive-date=8 दिसंबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191208083124/https://cricket.af/post/afghanistan-u19-squad-announced-for-icc-u19-world-cup |url-status=dead }}</ref> जुलाई 2021 में, अब्दुल को पाकिस्तान के खिलाफ उनकी श्रृंखला के लिए अफगानिस्तान के [[एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय]] (वनडे) टीम में नामित किया गया था।<ref>{{cite web|url=https://www.espncricinfo.com/story/fazalhaq-farooqi-noor-ahmad-in-afghanistan-squad-for-their-first-bilateral-odi-series-against-pakistan-1270774 |title=Fazalhaq Farooqi, Noor Ahmad in Afghanistan squad for their first bilateral ODI series against Pakistan |work=ESPN Cricinfo |access-date=23 July 2021}}</ref> उन्होंने 2021 गाजी अमानुल्लाह खान क्षेत्रीय एक दिवसीय टूर्नामेंट में बैंड-ए-अमीर क्षेत्र के लिए 17 अक्टूबर 2021 को अपनी लिस्ट ए की शुरुआत की।<ref>{{cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1282943.html |title=3rd Match, Kandahar, Oct 17 2021, Ghazi Amanullah Khan Regional One Day Tournament |work=ESPN Cricinfo |access-date=16 October 2021}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी : खिलाड़ी]] m7jbt9v9p1y9nw631h64dm75hrx8rln हिजाब 0 1350372 6536708 6236616 2026-04-05T21:26:24Z AMAN KUMAR 911487 /* इन्हें भी देखें */ + 6536708 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Hijab Niqab Muslim Veil.jpg|अंगूठाकार|]] '''हिजाब''' ([[अंग्रेज़ी]]:[[:en:Hijab|Hijab]]) शरीर के कुछ अंगों को [[पर्दा प्रथा |ढकने या छुपाने के लिए]] मुस्लिम महिलाएं और लड़कियां जिस परिधान को प्रयोग में लाती हैं आम जन में उसे भी कहते हैं, मुसलमानों में हैडस्कार्फ और नक़ाब के मिले जुले रूप का ये आधुनिक परिधान है जिसे मुस्लिम महिलाएं बाहर जाने पर पहनती हैं। '''हिजाब''' का शाब्दिक अर्थ है आड़,ओट या परदा।<ref>{{cite journal |title=हिजाब |url=https://hi.wiktionary.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC}}</ref>हिजाब, नक़ाब, स्कॉर्फ वस्त्रों के नामों से फ़र्क़ समझना मुश्किल होता है।<ref>{{cite web|url=https://hindi.news18.com/news/knowledge/what-is-the-difference-between-hijab-niqab-and-burqa-1471195.html|title=क्या आप जानते हैं बुर्के, नकाब और हिजाब में फर्क?|access-date=8 मई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190508153331/https://hindi.news18.com/news/knowledge/what-is-the-difference-between-hijab-niqab-and-burqa-1471195.html|archive-date=8 मई 2019|url-status=dead}}</ref> विभिन्न देशों के मुसलमानों ने इस्लामी परदे के नियम<ref> [[मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी]], परदे का हुक्म, पृष्ठ 215 https://archive.org/details/islam-me-parda-aur-nari-ki-hesiyat-hindi</ref> के लिए अलग-अलग प्रथाओं को अपनाया है। हिजाब परिधान की विभिन्न देशों में अलग-अलग कानूनी और सांस्कृतिक स्थिति है। अफ़ग़ानिस्तान और ईरान में महिलाओं के लिए अनिवार्य है, वहीं फ्रांस में प्रतिबंध है तो तुर्की में प्रतिबंध हटाये गये हैं। सार्वजनिक प्रयोग पर बहस लगातार हो रही है<ref>http://www.debate.org/opinions/should-the-hijab-be-banned-in-schools-public-buildings-or-society-in-general {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220209203339/https://www.debate.org/opinions/should-the-hijab-be-banned-in-schools-public-buildings-or-society-in-general |date=9 फ़रवरी 2022 }} the Hijab be banned in schools, public buildings or society in general?</ref> ==इस्लामी ग्रंथ में == ===क़ुरआन=== [[क़ुरआन]] मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं दोनों को विनम्र तरीके से कपड़े पहनने का निर्देश देता है, फिर भी इन निर्देशों का पालन कैसे किया जाना चाहिए, इस पर असहमति है। पोशाक से संबंधित छंद सिजाब के बजाय खिमार (घूंघट) और जिलबाब (एक पोशाक या लबादा) शब्दों का उपयोग करते हैं। क़ुरआन की 6,000 से अधिक आयतों में से लगभग आधा दर्जन विशेष रूप से एक महिला के कपड़े पहनने और सार्वजनिक रूप से चलने के तरीके का उल्लेख करती हैं। <ref name="Bucar, Elizabeth 2012">Bucar, Elizabeth, The Islamic Veil. Oxford, England: Oneworld Publications , 2012.</ref> मामूली पोशाक की आवश्यकता पर सबसे स्पष्ट [[सूरा]] 24:31 है,जो महिलाओं को अपने जननांगों की रक्षा करने और अपनी छाती पर अपना खिमार (घूंघट) खींचने के लिए कहती है। <ref name=Islamonline>[https://web.archive.org/web/20100626064435/http://www.islamonline.net/servlet/Satellite?pagename=IslamOnline-English-Ask_Scholar%2FFatwaE%2FFatwaE&cid=1119503546760 Evidence in the Qur'an for Covering Women's Hair], [[IslamOnline]].</ref><ref name=Hameed>Hameed, Shahul. "[https://web.archive.org/web/20110222184525/http://www.islamonline.net/servlet/Satellite?c=AskAboutIslamE&cid=1123996016174&pagename=IslamOnline-English-AAbout_Islam%2FAIELayout Is Hijab a Qur’anic Commandment?]," IslamOnline.net. 9 October 2003.</ref> {{Quote|और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे भी अपनी निगाहें बचाकर रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। और अपने शृंगार प्रकट न करें, सिवाय उसके जो उनमें खुला रहता है। और अपने सीनों (वक्षस्थल) पर अपने दुपट्टे डाल रहें और अपना शृंगार किसी पर ज़ाहिर न करें सिवाय अपने पतियों के या अपने बापों के या अपने पतियों के बापों के या अपने बेटों के या अपने पतियों के बेटों के या अपने भाइयों के या अपने भतीजों के या अपने भांजों के या मेल-जोल की स्त्रियों के या जो उनकी अपनी मिल्कियत में हो उनके, या उन अधीनस्थ पुरुषों के जो उस अवस्था को पार कर चुके हों जिससें स्त्री की ज़रूरत होती है, या उन बच्चों के जो स्त्रियों के परदे की बातों से परिचित न हों। और स्त्रियाँ अपने पाँव धरती पर मारकर न चलें कि अपना जो शृंगार छिपा रखा हो, वह मालूम हो जाए। ऐ ईमानवालो! तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो(क़ुरआन|24:31)|{{cite क़ुरआन|24|31|style=nosup}}}} सूरह 33:59 में मुहम्मद को अपने परिवार के सदस्यों और अन्य मुस्लिम महिलाओं को बाहर जाने पर बाहरी वस्त्र पहनने के लिए कहने का आदेश दिया गया है, ताकि उन्हें परेशान न किया जाए: {{Quote|ऐ नबी! अपनी पत्नि यों और अपनी बेटियों और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे अपने ऊपर अपनी चादरों का कुछ हिस्सा लटका लिया करें। इससे इस बात की अधिक सम्भावना है कि वे पहचान ली जाएँ और सताई न जाएँ। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है<ref> [[क़ुरआन]] https://tanzil.net/#trans/hi.farooq/33:59 </ref>|{{cite क़ुरआन|33|59|style=nosup}} }} ===हदीस=== ==ड्रेस कोड == [[File:Two Iranian women.jpg|thumb|हिजाब पहने दो ईरानी महिलाएं]] ===सुन्नी === परंपरागत रूप से, विचार के चार प्रमुख सुन्नी स्कूल (हनफी , शफी , मलिकी और हनबली ) सर्वसम्मति से मानते हैं कि यह महिला के पूरे शरीर के लिए अनिवार्य है, उसके हाथों और चेहरे को छोड़कर (और पैर हनाफिस के अनुसार) ) प्रार्थना के दौरान और करीबी परिवार के सदस्यों के अलावा विपरीत लिंग के लोगों की उपस्थिति में कवर किया जाना चाहिए (जिनसे शादी करना मना है )। हनाफिस और अन्य विद्वानों के अनुसार, ये आवश्यकताएं गैर-मुस्लिम महिलाओं के आसपास भी होती हैं, इस डर से कि वे असंबंधित पुरुषों के लिए उनकी शारीरिक विशेषताओं का वर्णन कर सकते हैं। पुरुषों को अपने पेट के बटन से अपने घुटनों तक ढंकना चाहिए, हालांकि स्कूलों में इस बात पर मतभेद है कि इसमें नाभि और घुटनों को ढंकना शामिल है या केवल उनके बीच क्या है। यह अनुशंसा की जाती है कि महिलाएं ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर के अनुरूप न हों, जैसे कि पश्चिमी कपड़ों के मामूली रूप (लंबी शर्ट और स्कर्ट), या अधिक पारंपरिक जिलबाब , एक उच्च गर्दन वाला, ढीला वस्त्र जो बाहों और पैरों को ढकता है। एक खिमार या शैला , एक स्कार्फ या काउल जो चेहरे को छोड़कर सभी को ढकता है, कई अलग-अलग शैलियों में भी पहना जाता है। मुहम्मद इब्न अल उथैमीन जैसे कुछ सलाफी विद्वानों का मानना ​​है कि सभी वयस्क महिलाओं के लिए हाथ और चेहरे को ढंकना अनिवार्य है। ===शिया === ==विश्व हिजाब दिवस == {{मुख्य|विश्व हिजाब दिवस|विश्व हिजाब दिवस=}} विश्व हिजाब दिवस एक वार्षिक कार्यक्रम है, जो 1 फरवरी को मनाया जाता है। हिजाब दिवस पहली बार 2013 में मनाया गया था, जब नज़मा खान नाम की एक मुस्लिम महिला ने इस दिन को मनाना शुरू किया था। यह दिन पूरी दुनिया में मुस्लिम और गैर-मुस्लिम महिलाओं द्वारा हिजाब पहनकर मनाया जाता है।<ref>{{cite web|url=http://worldhijabday.com/|title=World Hijab Day - Better Awareness. Greater Understanding. Peaceful World|publisher=|accessdate=13 September 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161006192248/http://worldhijabday.com/|archive-date=6 अक्तूबर 2016|url-status=dead|df=}}</ref> == इन्हें भी देखें == *[[:en:Types of hijab|हिजाब के प्रकार]] *[[:en:Hijab by country|हिजाब देश अनुसार]] *[[:en:Intimate parts in Islam|इस्लाम में अंतरंग भाग]] *[[:en:Islamic clothing|Islamic clothing]] * [[कर्नाटक हिजाब विवाद, २०२२]] * [[अबाया]] * [[बुर्क़ा]] * [[विश्व हिजाब दिवस]] * [[आहू दरयाई]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:इस्लाम]] [[श्रेणी:हिजाब]] [[श्रेणी:वस्त्र]] [[श्रेणी:परिधान]] [[श्रेणी:इस्लामिक महिला वस्त्र]] == बाहरी कड़ियाँ == * [https://worldhijabday.com/ ऑफिसियल वेबसाइट वर्ल्ड हिजाब डे] {{इस्लामी संकृति}} qpk5dyx15ozvaokjzmd2scm247z29gb अल्लाह नूर 0 1355851 6536858 5551814 2026-04-06T07:16:18Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536858 wikitext text/x-wiki {{Infobox cricketer | name = अल्लाह नूर | image = | country = | fullname = | birth_date = {{birth date and age|2003|4|22|df=yes}} | birth_place = | death_date = | death_place = | batting = | bowling = | role = | club1 = | year1 = | clubnumber1 = | club2 = | year2 = | clubnumber2 = | date = 4 अगस्त 2019 | source = http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/1076577.html क्रिकइन्फो }} '''अल्लाह नूर''' (जन्म 22 अप्रैल 2003) एक अफगानी क्रिकेटर हैं।<ref name="Bio">{{Cite web|url=http://www.espncricinfo.com/ci/content/player/1076577.html |title=Allah Noor |accessdate=4 August 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> उन्होंने 4 अगस्त 2019 को 2019 अफगानिस्तान प्रांतीय चैलेंज कप टूर्नामेंट में नंगरहार प्रांत के लिए अपनी लिस्ट ए की शुरुआत की।<ref name="LA">{{cite web |url=http://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1196016.html |title=Group B, Provincial Challenge Cup (Grade I) at Amanullah, Aug 4 2019 |accessdate=4 August 2019 |work=ESPN Cricinfo}}</ref> दिसंबर 2021 में, उन्हें वेस्ट इंडीज में [[2022 आईसीसी अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप]] के लिए अफगानिस्तान की टीम में नामित किया गया था।<ref>{{cite web |url=https://cricket.af/post/suliman-safi-to-lead-afghanistan-at-the-icc-u19-cricket-world-cup-2022 |title=Suliman Safi to lead Afghanistan at the ICC U19 Cricket World Cup |work=Afghanistan Cricket Board |access-date=6 December 2021 |archive-date=6 दिसंबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211206203805/https://cricket.af/post/suliman-safi-to-lead-afghanistan-at-the-icc-u19-cricket-world-cup-2022 |url-status=dead }}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:खिलाड़ी]] 0qxkz9ys0pwji1y8o09gt4u1cah61zq सदस्य:चाहर धर्मेंद्र 2 1365499 6536601 6433152 2026-04-05T14:23:51Z चाहर धर्मेंद्र 703114 6536601 wikitext text/x-wiki {| width="100%" cellpadding="5" cellspacing="10" style="background: #FFF0F5; border-style:solid; border-width:2px; border-color: #CD00CC; " | valign="center" style="padding: 0; margin:0;" | <div align=center> <font face="Baskerville Old Face" color="maroon" size="2"><small>मेरी हार्दिक इच्छा है कि [[हिन्दी विकिपीडिया]] से विविध क्षेत्रों में काम करने वाले लोग जुडें और इसको विश्व की अग्रणी भाषाओं की विकिपेडियाओं के स्तर तक ले जाएँ । मेरा विश्वास है कि हिन्दी विकिपीडिया हिन्दी को और गौरवमयी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</small><br />जय श्री राम</font></div><div align="center"> </font><font face="Baskerville Old Face" color="#CD00CC" size="6">'''{{PAGENAME}}'''</font> </div><br clear="all"/> {{समय|right}} {{भारतीय संपादक}} <span style="color:green;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Magenta;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>''''''[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:#6F00FF">--ॐ जय श्री राम--यहाँ पर मेरे से बातचीत करे--</small>]]''''''</sup><sup>[[विशेष:योगदान/चाहर_धर्मेंद्र|यहाँ पर मेरे किये हुए सम्पादन की जांच करे।]]</sup> '''<span style="color:orange;">☆★<span style="color:Magenta;">सरलता कोई साधारण बात नहीं है।</span>''''''<span style="color:orange;">☆★<span style="color:Magenta;">"तुम्हारे अंतरमन की काम-चेतना ही वास्तविकता में तुम हो।</span>''''''<span style="color:orange;">☆★<span style="color:Magenta;">"जैसी तुम्हारी काम-चेतना, वैसी तुम्हारी अभिलाषाएँ।</span>''''''<span style="color:orange;">☆★<span style="color:Magenta;">"जैसी अभिलाषाएँ, वैसे तुम्हारे कर्म।</span>''''''<span style="color:orange;">☆★<span style="color:Magenta;">"जैसे तुम्हारे कर्म, वैसी तुम्हारी नियति॥"</span>''' {{user info | full name ='''<br><font style = "color:orange">धर्मेंद्र<font style = "color:green"> चाहर'''</font></br> | image name = Dharmendra_chahar.jpg | hover text = | job title = हिंदी विकिमीडियन्स सदस्यदल | organization = | short quote = | about me =<br><font style = "color:orange">मैं '''धर्मेंद्र चाहर,''' [[राजस्थान]] के [[सीकर ]] ज़िले का निवासी हूँ। मुझे '''हिन्दी भाषा''' और '''हिन्दी साहित्य''' से अत्यधिक लगाव</font> <font style = "color:रेद">❤</font><font style = "color:orange"> है।</font><br>मेरा जन्म और मेरी परवरिश राजस्थान में हुई। <font style = "color:orange">इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियर हूँ</font> और खुद को एक मुसाफ़िर मानता हूँ। गाने सुनना, चित्रकारी और घूमना मेरे दिल के क़रीब वाले शौक हैं। पुरे ❤ से...सन २०२२ से विकिमीडियन भी हूँ। {{User Wikipedian For|year=2022|month=4|day=18}} {{Template:User oops}} {{User India}} {{साँचा:सदस्य_विकिपीडिया/स्वतः_स्थापित_सदस्य}} | about my work = <br><font style = "color:green">मैंने 18 अप्रैल 2022 से '''विकिपीडिया''' का अपना सफ़र शुरू किया। मै एक '''अनुभवी विषय/सामग्री लेखक''' हु। मैंने विभिन्न वेबसाइटों पर कई लेख प्रकाशित किए हैं।[https://www.axiswebart.com/author/seo-expert-dharmendra-chahar/][https://readwrite.com/author/dharmendra-chahar/][https://htoindia.com/author/dharmendra-chahar/][https://www.agilitypr.com/pr-news/author/dharmendrarchahar/][https://tweakyourbiz.com/posts/author/chahardharma][https://iisc.academia.edu/ChaharDharma][https://hubpages.com/@dharmendra-chahar][https://www.tripoto.com/profile/dharmendrachahar][https://yourstory.com/author/chahardharma][https://www.buzzfeed.com/dharmendrachahar][https://dharmendrachahar.medium.com/][https://www.apsense.com/user/chahardharma]</font><br><br><font style = "color:orange">कुछ महत्वपूर्ण बातें</font><br> <br><font style = "color:green">* दुःख मन की स्थिति है जो तब उत्पन्न होती है जब हम खुद को किसी बुरी परिस्थिति से अलग करके वास्तविक और बुनियादी कारणों को जानने और समझने का प्रयास नहीं करते या समझना ही नहीं चाहते। हम उन बुरी परिस्थितियों को इतना कसकर पकड़ लेते हैं कि ऐसा लगता है कि दु:ख का सारा पहाड़ हम पर ही पड़ा हो।</font><br><font style = "color:orange">* गलत आपके अपने सही वक्त पे वार करते है । कही पढ़ा था, अपनी मन कि बात अपने प्रिय से प्रिये जन को भी नही बताना चाहिए ,वक्त आने पे वो आपको समाज मे हंसी का पात्र बनाते है। | contact me = [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7:%E0%A4%88%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B2_%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82/%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0_%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0 मुझे ई मेल करें] }} {| class="wikitable" cellspacing="1" cellpadding="1" width="100%" style="background:none; border: 1px solid #1188AA;" ! style="background:#E0E8FF" |नए लेख: |- |<div style="height:300px; overflow:auto; background:white;">{{Special:Newpages/500,hidebots}}</div> |} {| cellspacing="1" cellpadding="1" width="100%" style="background:lightgreen; border: 1px solid #1188AA;" ! style="background:#E0E8FF" |हाल में हुए बदलाव: |- |<div style="height:300px; overflow:auto; background:gold;">{{Special:Recentchanges/500}}</div> |} [[श्रेणी:इंजीनियर विकिपीडियन]] [[श्रेणी:हिन्दू विकिपीडियन]] [[श्रेणी:राजस्थान के विकिपीडियन]] [[श्रेणी:भारतीय विकिपीडियन]] [[श्रेणी:विकिपीडियन]] [[श्रेणी:सदस्य hi]] [[श्रेणी:सदस्य en]] [[श्रेणी:सदस्य hi-3]] dwq3t3ty73wj46bn75grc31s6kr91dk सदस्य:Aravind Thory 2 1365968 6536587 6536562 2026-04-05T12:58:43Z चाहर धर्मेंद्र 703114 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#स2|शीह स2]]) 6536587 wikitext text/x-wiki {{db-nouser}} {{Infobox journalist|name=Aravind Thory|image=[[File:Arvind Thory.jpg|thumb|Journalist Arvind Thory]]|caption=Journalist Arvind Thory|birth_date=15 Sep 1999|location=Balotra|birth_place=Sada Dhanji, Sindhari, Rajasthan|education=B.Sc Agriculture, Bachelor of Journalism|title=Indian Journalist {{!}}{{!}} Head of AD News – Arvind Thory|URL=www.adnewslive24.com}} ---- == Aravind Thory == '''Aravind Thory''' is an Indian journalist and media professional currently serving as the Head of News at [https://adnewslive24.com AD News Live]. He is known for his reporting work in Rajasthan, particularly for covering local news and issues from the Balotra district. === Early Life and Education === Arvind Thory is from the state of Rajasthan, India. He completed a '''Bachelor of Journalism''', which laid the foundation for his career in media and reporting. === Career === Thory began his career in journalism as a field reporter. Over time, he gained recognition for his dedication to covering regional news and public issues. He has reported extensively from the Balotra district, focusing on local developments, social concerns, and community-related stories. He currently holds the position of '''Head of News''' at [https://adnewslive24.com AD News Live], where he is responsible for overseeing news operations, editorial decisions, and reporting standards. === Work and Recognition === Arvind Thory is regarded as a committed journalist known for his consistent coverage of regional news in Rajasthan. His reporting is especially focused on grassroots-level issues, making him a notable media figure in the Balotra area. gc6mcl0s3i5dd8l7cd0mk7nkh64e6fu 2023 की हिंदी फिल्मों की सूची 0 1407467 6536744 6536298 2026-04-06T04:49:38Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536744 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2023 में रिलीज़ होने वाली हैं या रिलीज हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस ग्रॉस रेवेन्यू के हिसाब से वर्ष 2023 में रिलीज हुई सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्में इस प्रकार हैं। {| class="wikidiv" |- | style="text-align:center; background:#9fc;"| * | यह निशान वर्तमान मेंं सिनेमाघरों में चल रही फिल्मों को दर्शाता है। |} {| class="wikitable" |- | style="text-align:center; background:#ccc;"|#+ |यह निशान बहुभाषी फिल्म को दर्शाता है और कुल कारोबार में फिल्म के समस्त भाषाओं के संस्करणों की कमाई को शामिल किया गया हैं। |} {| class="wikidiv" |} {| class="wikitable sortable" style="margin:auto; margin:auto;" |+2023 में दुनियाभर में सबसे अधिक कुल सकल कमाई करने वाली फिल्में |- ! स्थान/क्र.स. !! शीर्षक ! निर्माता कंपनी !! वितरक ! वर्ल्डवाइड ग्रॉस !! संदर्भ |- !1 |[[जवान (फ़िल्म)|जवान]] |[[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|'''रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट''']] |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट [[यश राज फ़िल्म्स|यशराज फिल्म्स]] |₹1,148 करोड़ (US$140 मिलियन) |<ref name="boxoffww3">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 2 |''[[पठान (फ़िल्म)|पठान]]'' | colspan="2" style="text-align:center; " |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|1050.30|c}} |<ref>{{cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/pathaan/box-office/|title=Pathaan Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|language=en|access-date=26 January 2023}}</ref><ref name="boxoffww">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|access-date=26 January 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref> |- !3 |[[गदर 2]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]]<nowiki/>अनिल शर्मा प्रोडक्शन्स एमएम मूवीज |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |₹690.54 करोड़ (US$86 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/gadar-2/box-office/|title=Gadar 2 Box Office|date=12 August 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=12 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww4">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !4 |[[रॉकी और रानी की प्रेम कहानी]] |[[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹355.61 करोड़ (US$45 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/#bh-movie-box-office|title=Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani Office|date=28 July 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=30 July 2023}}</ref><ref name="boxoffww5">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !5 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[आदिपुरुष]]* |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|रेट्रोफाइल्स||}} |{{Ubl|एए फिल्म्स|UV क्रियशन्स||}} | style="background:#ccc;" |{{INRConvert|340|c}} #+ |<ref>{{cite news |title=Adipurush box office collection Day 2: Prabhas-starrer grosses Rs 240 crore worldwide despite poor reviews, fan protests |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/adipurush-box-office-collection-day-2-prabhas-ramayana-200-crore-8670222/|date=18 June 2023|work=[[The Indian Express]]|access-date=18 June 2023}}</ref> |- !6 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[द केरल स्टोरी]]* |सनशाइन पिक्चर्स | |{{INRConvert|303.68|c}} |<ref>{{Cite web|title=The Kerala Story Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-kerala-story/box-office/|access-date=16 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !7 |[[ओएमजी 2]] |केप ऑफ गुड फिल्म्स [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] वकाओ फिल्म्स |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹221.08 करोड़ (US$28 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/omg-2/box-office/|title=OMG 2 Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=18 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww6">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" |8 | [[तू झूठी मैं मक्कार]] |{{Ubl|लव फिल्म्स|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स}} |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|220.10|c}} |<ref>{{Cite web |title=Tu Jhoothi Main Makkaar Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/tu-jhoothi-main-makkaar/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=26 March 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 9 | [[किसी का भाई किसी की जान]] |[[सलमान खान फिल्म्स]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|182.44|c}} |<ref>{{Cite web|title=Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=4 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !10 |[[ड्रीम गर्ल 2]] |बालाजी मोशन पिक्चर्स |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट |₹140.26 करोड़ (US$18 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/dream-girl-2-2/box-office/#bh-movie-box-office|title=Dream Girl 2 Box Office|date=5 September 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2023}}</ref><ref name="boxoffww8">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 11 | [[भोला]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[अजय देवगन फिल्म्स]]|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|[[ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स]]}} |{{Ubl|पैनोरमा स्टूडियो|[[पीवीआर पिक्चर्स]]}} |{{INRConvert|111.64|c}} |<ref>{{Cite web |title=Bholaa Box Office|url= https://www.bollywoodhungama.com/movie/bholaa/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=2 April 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 12 | style="text-align:left; background:#9fc;" | ''[[जरा हटके जरा बचके|ज़रा हटके ज़रा बचके*]]'' |{{Ubl|मैडॉक फिल्म्स|जियो स्टूडियोज़}} |जियो स्टूडियोज़ |{{INRConvert|90.39|c}} |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/zara-hatke-zara-bachke/box-office/#bh-movie-box-office|title=Zara Hatke Zara Bachke Box Office|website=Bollywood Hungama|access-date=4 June 2023}}</ref><ref name="boxoffww2">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 13 |[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|गीता आर्ट्स|हरिका और हसीन क्रिएशन्स|ब्रैट फिल्म्स}} |एए फिल्म्स |{{INRConvert|47.43|c}} |<ref>{{Cite web |title=Shehzada Box Office Collection|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shehzada-2/box-office/ |access-date=19 February 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 14 | [[मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे]] |एम्मी एंटरटेनमेंट [[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|36.53|c}} |<ref>{{Cite web|title=Mrs. Chatterjee Vs Norway Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/mrs-chatterjee-vs-norway/box-office/ |access-date=21 March 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 15 | style="text-align:left; background:#9fc;" | [[आईबी71|''आईबी71''*]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|एक्शन हीरो फिल्म्स}} |[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]] |{{INRConvert|29.01|c}} |<ref>{{Cite web|title=IB71 Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/IB71/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=17 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |} == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- ! rowspan="6" |<big>जनवरी</big> | rowspan="2" style="text-align: center;" |'''13''' | style="text-align: center;" |कुत्ते |आसमान भारद्वाज |अर्जुन कपूर, तब्बू |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]] | |- | style="text-align: center;" |लकड़बघा |विक्टर मुखर्जी |रिद्धि डोगरा, मिलिंद सोमान |फर्स्ट राय फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |मिशन मजनू |शांतनु बागची |सिद्धार्थ मल्होत्रा, राश्मिका मदाना |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''25''' | style="text-align:center;" | ''[[पठान (फ़िल्म)|पठान:]]'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[जॉन अब्राहम]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-deepika-padukone-john-abraham-announce-pathaan-power-packed-teaser-releasing-january-25-2023/|title=Shah Rukh Khan, Deepika Padukone, John Abraham announce Pathaan with power-packed teaser, releasing on January 25, 2023|date=2 March 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 March 2022}}</ref> |- ! rowspan="2" |'''26''' | style="text-align: center;" |गांधी गोडसे एक युद्ध | style="text-align: center;" |राजकुमार संतोष |दीपक अंतनी, चिन्मय मदलेकर |पी वी आर पिक्चर | |- | style="text-align:center;" | ''तेहरान'' | अरुण गोपालन |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[मानुषी छिल्लर]]}} | [[मैडॉक फ़िल्म्स|मैडॉक फिल्म्स]], बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-collaborates-with-dinesh-vijan-for-action-thriller-tehran-set-for-january-26-2023-release/|title=John Abraham collaborates with Dinesh Vijan for action thriller Tehran; set for January 26, 2023 release|website=Bollywood Hungama|access-date=22 February 2022}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/manushi-chhillar-joins-john-abraham-dinesh-vijans-tehran-see-photos/|title=Manushi Chhillar joins John Abraham in Dinesh Vijan’s Tehran|date=19 July 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 July 2022}}</ref> |- ! ! | style="text-align: center;" |ऑपरेशन फ्राइडे |विश्राम सावंत |रणदीप हुड्डा |तुतरी वेंचर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |3 | style="text-align: center;" |ऑलमोस्ट प्यार विद डी.जे. मोहब्बत |अनुराग कश्यप |आलाया एफ |ज़ी स्टूडियोज़, गुड बैड फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फ़राज़ |हंसल मेहता |जहान कपूर, आदित्य रावल,आमिर अली, जूही बब्बर |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |10 | style="text-align: center;" |शिव शास्त्री बलबोआ |अजयन् वेणुगोपालन |अनुपम खेर, नीना गुप्ता,जुगल हंसराज |यूएफ़आई मोशन पिक्चर्स, अनुपम खेर स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द टेनेंट [γ] |सुष्रुत जैन |शमिता शेट्टी, रुद्राक्ष जायसवाल |मैड कूली प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |लॉस्ट |अनिरुद्ध रॉय चौधरी |यामी गौतम राहुल खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, नमाह पिक्चर्स, | |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>फरवरी</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | 17 | style="text-align:center;" | ''[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]]'' | रोहित धवन |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कृति सेनन]]|[[परेश रावल]]|[[मनीषा कोइराला]]|[[सचिन खेडेकर]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], अल्लू एंटरटेनमेंट, हारिका एंड हसीन क्रिएशन्स, ब्रैट फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/kartik-aaryan-s-shehzada-to-release-in-theatres-on-feb-10-2023-actor-shares-his-first-look-from-film-1976337-2022-07-16|title=Kartik Aaryan's Shehzada to release in theatres on Feb 10, 2023. Actor shares his first look from film|date=16 July 2022|work=[[India Today]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''17''' | style="text-align:center;" | ''मैदान'' | अमित शर्मा |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[प्रियमणि]]|[[गजराज राव]]}} | [[ज़ी स्टूडियोज़|ज़ी स्टूडियोज]], बायव्यू प्रोजेक्ट्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-starrer-maidaan-gets-new-release-date-hit-big-screen-february-17-2023/|title=Ajay Devgn starrer Maidaan gets new release date; to hit the big screen on February 17, 2023|date=1 October 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''24''' | style="text-align:center;" | ''[[सेल्फी]]'' | राज मेहता |{{Hlist|[[अक्षय कुमार]]|[[इमरान हाशमी]]|[[डायना पेंटी]]|[[नुसरत भरूचा]]}} | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]], पृथ्वीराज प्रोडक्शंस, मैजिक फ्रेम्स, केप ऑफ गुड फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-emraan-hashmi-starrer-selfiee-release-february-24-2023/|title=Akshay Kumar – Emraan Hashmi starrer Selfiee to release on February 24, 2023|date=16 July 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>मार्च</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''8''' | style="text-align:center;" | ''[[लव रंजन]] की अनटाइटल्ड फिल्म'' | [[लव रंजन]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[श्रद्धा कपूर]]}} | [[लव फिल्म्स]], [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-and-shraddha-kapoor-film-with-luv-ranjan-gets-a-release-date-7796503/|title=Ranbir Kapoor and Shraddha Kapoor’s film gets a release date|website=The Indian Express|access-date=1 March 2022}}</ref> |- | 28 | ''[[द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव|भीमा कोरेगांव की लड़ाई]]'' | रमेश थेटे |{{Hlist|[[अर्जुन रामपाल]]|दिगांगना सूर्यवंशी|[[सनी लियोन]]|[[कृष्णा अभिषेक]]}} | रमेश थेटे फिल्म्स | |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''30''' | style="text-align:center;" | ''[[भोला]]'' | [[अजय देवगन]] |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[तब्बू (अभिनेत्री)|तब्बू]]}} | अजय देवगन एफफिल्म्स, [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], [[रिलायंस इंटरटेनमेंट|रिलायंस एंटरटेनमेंट]], ड्रीम वारियर पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-tabu-starrer-bholaa-remake-kaithi-released-march-30-2023/|title=Ajay Devgn and Tabu starrer Bholaa, remake of Kaithi, to be released on March 30, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |गैसलाइट |पवन कृपलानी |विक्रांत मैसी सारा अली ख़ान चित्रांगदा सिंह |टिप्स इंडस्ट्रीज़, 12th स्ट्रीट एंटरटेनमेंट, डिज़्नी+ हॉटस्टार | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | कलाकार ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="8" style="text-align: center;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align: center;" |7 | style="text-align: center;" |गुमराह |वर्धन केटकर |आदित्य रॉय कपूर , रोनित रॉय |टी सीरीज फिल्म्स | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मिसेज़ अंडरकवर |अनुश्री मेहता |राजेश शर्मा , सुमीत व्यास |जी 5 | |- | style="text-align: center;" |सर मैडम सरपंच |प्रवीण मोरछले |सीमा बिस्वास , ज्योति दुबे |संकल प्रोडक्शंस इंटरनेशनल | |- | style="text-align: center;" |पिंकी ब्यूटी पार्लर |अक्षय सिंह |अक्षय सिंह , खुशबू गुप्ता |पेन स्टूडियोज़ | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''21''' | style="text-align:center;" | ''[[किसी का भाई किसी की जान]]'' | फरहाद सामजिक |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[पूजा हेगड़े]]|[[वेंकटेश (अभिनेता)|वेंकटेश]]|[[जगपति बाबू]]}} | [[सलमान खान फिल्म्स]], [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/breaking-tiger-3-kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan-also-postponed-salman-khan-starrer-release-cinemas-eid-2023/|title=BREAKING: After Tiger 3, Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan also postponed; Salman Khan-starrer to release in cinemas on Eid 2023|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |[[चंगेज़]] |राजेश गांगुली |[[जीत (अभिनेता)|जीत]], सुष्मिता चटर्जी, [[रोहित रॉय]], सराफ फिगर | | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |28 |बेड बॉय |राजकुमार संतोषी |नामाशी चक्रवर्ती , अमरीन कुरैशी |इनबॉक्स पिक्चर्स | |- |यू-टर्न |अरिफ़ ख़ान |अलाया एफ , प्रियंशु पैन्युली |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |<big>मई</big> | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |मदर टेरेसा एंड मी |कमल मुसले |दीप्ति नवल , जैकलीन फिट्ची-कोर्नाज़ |करी वेस्टर्न मूवीज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अफ़वाह | style="text-align: center;" |सुधीर मिश्रा |नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , भूमि पेडनेकर |बनारस मीडिया वर्क्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द केरला स्टोरी | style="text-align: center;" |सुदिप्तो सेन | style="text-align: center;" |आदा शर्मा , योगिता बिहानी |सनशाइन पिक्चर्स | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[यारियां २|यारियां 2]]'' |{{Hlist|[[राधिका राव]]|[[विनय सप्रू]]}} |{{Hlist|[[दिव्या खोसला कुमार]]|[[पर्ल वी पुरी]]|[[मीजान जाफरी]]|[[यश दासगुप्ता]]|[[अनसवारा राजन]]||[[प्रिया प्रकाश वारियर]] |वरीना हुसैन}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], बीएलएम पिक्चरर्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/pearl-v-puri-priya-varrier-meezaan-jafri-others-roped-yaariyan-2-release-summer-2023/|title=Divya Khosla Kumar, Pearl V Puri, and Meezaan Jafri roped for Yaariyan 2; film to release in Summer 2023|date=12 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''26''' | style="text-align:center;" | ''[[स्वातंत्र्य वीर सावरकर (फिल्म)|स्वतंत्र वीर सावरकर]]'' | [[रणदीप हुड्डा]] |{{Hlist|[[रणदीप हुड्डा]]|[[अंकिता लोखंडे]]}} | आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स, लीजेंड स्टूडियोज | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/randeep-hooda-takes-director-swatantra-veer-savarkar-begins-shooting/|title=Randeep Hooda takes over as director of Swatantra Veer Savarkar; begins shooting|date=3 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''2''' | style="text-align:center;" | ''[[जवान (फ़िल्म)|जवान]]'' | एटली |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[नयनतारा]]|[[विजय सेतुपति]]|[[प्रियमणि]]|[[सान्या मल्होत्रा]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/watch-shah-rukh-khan-jawan-atlees-next-directorial-release-june-2-2023/|title=Shah Rukh Khan in and as Jawan in Atlee’s next directorial; to release on June 2, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=3 June 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |'''16''' | style="text-align: center;" |''आदिपुरुष'' | style="text-align: center;" |ओम राउत |{{Hlist|[[प्रभास]]|[[सैफ अली खान]]|[[कृति सेनन]]|[[सनी सिंह (अभिनेता)|सनी सिंह]]}} |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], रेट्रोफाइल्स | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''29''' | style="text-align:center;" | ''[[सत्यप्रेम की कथा]]'' | समीर विदवान |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कियारा आडवाणी]]}} | [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]], नमः पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/bollywood/satyaprem-ki-katha-starring-kartik-aaryan-kiara-advani-to-release-on-29th-june-2023-11119781.html|title=‘Satyaprem Ki Katha’ starring Kartik Aaryan & Kiara Advani to release on 29th June 2023|website=Firstpost|access-date=26 August 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;" | ''[[ड्रीम गर्ल 2]]'' | राज शांडिल्य |{{Hlist|[[आयुष्मान खुराना]]|[[अनन्या पांडे]]|[[अन्नू कपूर]]|[[परेश रावल]]|[[विजय राज]]|[[मनोज जोशी (अभिनेता)|मनोज जोशी]]|[[राजपाल यादव]]|[[असरानी]]|[[सीमा पाहवा]]|[[मनजोत सिंह]]|[[अभिषेक बनर्जी (अभिनेता)|अभिषेक बनर्जी]]}} | [[बालाजी मोशन पिक्चर्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ayushmann-khurrana-ananya-panday-headline-dream-girl-2-set-release-june-29-2023-watch-announcement-video/|title=Ayushmann Khurrana and Ananya Panday to headline Dream Girl 2; set to release on June 29, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=16 September 2022}}</ref> |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" | जुलाई |7 |नीयत |अनु मेनन |विद्या बालन, राम कपूर, राहुल बोस |अबुंडेंटिया एंटरटेनमेंट, रिडल फ़िल्म्स, अमेज़न स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | |तरला |पियूष गुप्ता |हुमा क़ुरैशी, शरीब हाशमी |आरएसवीपी मूवीज़,अर्थस्काई पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |ब्लाइंड |शोम मखीजा |सोनम कपूर, पूरब कोहली |जियो स्टूडियोज़,कनाई | |- | style="text-align: center;" | | |72 हूरें |संजय पूरन सिंह चौहान |'''सारू मैनी, आमिर बशीर,रशीद नाज़''' |सार्थी ई एंटरटेनमेंट, एलियंस पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | |14 |इश्क़-ए-नादान |अविषेक घोष |लारा दत्ता, नीना गुप्ता, कंवलजीत सिंह |एवीएमए मीडिया, जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | |21 |बवाल |नितेश तिवारी |वरुण धवन,जान्हवी कपूर |अर्थस्काई पिक्चर्स, नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | |ट्रायल पीरियड |अलेया सेन |जेनेलिया देशमुख, मानव कौल,शक्ति कपूर |जियो स्टूडियोज़,क्रोम पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |माइनस 31: द नागपुर फ़ाइल्स |प्रतीक मोइत्रो |शिवांकित सिंह परिहार, रघुबीर यादव,राजेश शर्मा |ऑरेंजपिक्सल स्टूडियोज़ प्राइवेट लिमिटेड प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | |अजमेर 92 |पुष्पेंद्र सिंह |करण वर्मा, राजेश शर्मा, सयाजी शिंदे |रिलायंस एंटरटेनमेंट, यू एंड के एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | |28 |रॉकी और रानी की प्रेम कहानी |करण जौहर |रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, जया बच्चन |वायकॉम18 स्टूडियोज़, धर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | |वन फ्राइडे नाइट |मनीष गुप्ता |रवीना टंडन,मिलिंद सोमन |जियो स्टूडियोज़,जियोसिनेमा | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |4 | style="text-align: center;" |पंच कृति |सन्नजॉय भार्गव |बृजेंद्र काला, उमेश बाजपेई,सागर वाही |उबोन विज़न प्राइवेट लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लफ़्ज़ों में प्यार |राजा रणदीप गिरी,धीरज मिश्रा |अनीता राज, ज़रीना वहाब, विवेक आनंद मिश्रा |मोनार्क फ़िल्म | |- | rowspan="7" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>अगस्त</big> | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''11''' | style="text-align:center;" | ''जानवर'' | [[संदीप रेड्डी|संदीप रेड्डी वांगा]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[रश्मिका मंदाना]]|[[अनिल कपूर]]|[[बॉबी देओल]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], सिने1 स्टूडियोज, भद्रकाली पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-and-parineeti-chopra-s-animal-to-release-on-aug-11-2023-1878664-2021-11-19|title=Ranbir Kapoor and Parineeti Chopra’s Animal to release on Aug 11, 2023|website=India Today|access-date=19 November 2021}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/rashmika-mandanna-replaces-parineeti-chopra-joins-cast-sandeep-reddy-vanga-ranbir-kapoors-animal/|title=Rashmika Mandanna replaces Parineeti Chopra; joins the cast of Sandeep Reddy Vanga and Ranbir Kapoor’s Animal|website=Bollywood Hungama|access-date=2 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग़दर 2 | style="text-align: center;" |अनिल शर्मा |सनी देओल, अमीषा पटेल |ज़ी स्टूडियोज़, अनिल शर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओएमजी 2 | style="text-align: center;" |अमित राय | style="text-align: center;" |अक्षय कुमार, यामी गौतम,पंकज त्रिपाठी |वायकॉम18 स्टूडियोज़, केप ऑफ गुड फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''15''' | style="text-align:center;" | ''तारिक'' | अरुण गोपालन | [[जॉन अब्राहम]] | जेए एंटरटेनमेंट, बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |घूमर | style="text-align: center;" |आर बाल्की |अभिषेक बच्चन,सैयामी खेर, शबाना आज़मी |होप प्रोडक्शंस,सरस्वती एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |नॉन स्टॉप धमाल | style="text-align: center;" |इरशाद ख़ान | style="text-align: center;" |अन्नू कपूर, राजपाल यादव, आस्रानी |त्रियोम फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''22''' | style="text-align:center;" | ''भाइयों 2'' | [[करण मल्होत्रा]] | [[अक्षय कुमार]] | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |ड्रीम गर्ल 2 |राज शांडिल्य |आयुष्मान खुराना, अनन्या पांडे, अन्नू कपूर |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>सितम्बर</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''5''' | style="text-align:center;" | ''शिक्षक दिवस की मुबारक'' | मिखिल मुसाले |{{Hlist|[[निम्रत कौर]]|[[राधिका मदन]]}} | मैडॉक फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/nimrat-kaur-radhika-madan-star-dinesh-vijans-social-thriller-happy-teachers-day-film-release-september-5-2023/|title=Nimrat Kaur and Radhika Madan to star in Dinesh Vijan’s social thriller Happy Teacher’s Day; film to release on September 5, 2023|date=5 September 2022|work=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''28''' | style="text-align:center;" | ''योद्धा'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[ऋतिक रोशन]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[अनिल कपूर]]}} | मार्फ्लिक्स पिक्चर्स, [[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स|वायकॉम18 स्टूडियोज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/hrithik-roshan-deepika-padukone-starrer-fighter-now-release-september-28-2023/|title=Hrithik Roshan and Deepika Padukone starrer Fighter to now release on September 28, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=10 March 2022}}</ref> |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="17" style="text-align: center;" |<big>अक्टूबर</big> | rowspan="2" |5 | style="text-align: center;" |दोनों |अवनीश एस. बरजात्या |राजवीर देओल , पालोमा |जिओ स्टूडियोज़ , राजश्री प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" |ख़ुफ़िया |विशाल भारद्वाज |तबू , अली फ़ज़ल |नेटफ्लिक्स | |- | rowspan="3" |6 | style="text-align: center;" | मिशन रानीगंज |टीनू सुरेश देसाई |अक्षय कुमार , परिणीति चोपड़ा |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | ''थैंक यू फॉर कमिंग'' |करन बूलानी |भूमि पेंडनेकर, करन कुंदर्रा |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" |यात्री |हरीश व्यास |रघुबीर यादव, सीमा पाहवा |अकिओन एंटेरटैनमेंट | |- | rowspan="4" |13 | style="text-align: center;" |धक् धक् |तरुण डुडएजा |रत्न पाठक, सन शैक |वियकों 18 स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" |गुठली लड्डू |इशरत र खान |संजय मिश्रान हीट शर्मा | | |- | style="text-align: center;" |डरन छू |भरत रत्न |करन पटेल, मनोज जोशी |मार्क मूवी | |- | style="text-align: center;" |भगवान भरोसे |शिलादित्य |विनय पाठक, सतेन्द्र सोनी |प्लाटून वन फिल्म्स | |- | rowspan="2" |20 | style="text-align: center;" |''गणपत'' |विकास बही |अमिताभ बच्चन,कीर्ति सनों |पूजा एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |यारियाँ 2 |राधिका राव |दिव्या खोंसिया कुमार,आणस्वर राजन | | |- | rowspan="6" |27 | style="text-align: center;" |12वीं फेल |विधु विनोद चोपड़ा |विक्रांत मैसी, मेधा शंकर, प्रियांशु चटर्जी, हरीश खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, विनोद चोपड़ा फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |तेजस |सर्वेश मेवाड़ा |कंगना रनौत |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align: center;" |साजिनी शिंदे का वायरल वीडियो |मिकील मूसले |निमरत कौर, सुबोध भावे |मदड़ोकक फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" | मुजीब: द मेकिंग ऑफ़ अ नेशन |श्याम बेनेगल |अरिफिन शुवू, दीपक अंटनी |नैशनल फिल्म देवेलोपमेंट | |- | style="text-align:center;" | ''[[प्यार की पॉलिसी]]'' | सुधीश कुमार शर्मा |{{Hlist|जॉली भाटिया|मनोज बक्शी|मेघा सक्सेना|विकास गिरी|गिरिश थापर|सनी प्रजापति}} | केपीएस फ़िल्म्स, अपान फिल्म्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.cbfcindia.gov.in/cbfcAdmin/search-result.php?recid=Q0EwNTI5MDgyMDIzMDAwMjQ=|title=CBFC {{!}} Search Film|website=www.cbfcindia.gov.in|access-date=2025-12-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |मंडली |राकेश चतुर्वेदी ओम |अभिषेक दुहान , रजनीश डुग्गल | रिल्टिक पिक्चर्स | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |<big>नवम्बर</big> | rowspan="7" |3 | style="text-align: center;" |आँख मिचोली |उमेश शुक्ला |अभिमन्यु दस्सानी , मृणाल ठाकुर |सोनी पिक्चर्स इंडिया | |- | style="text-align: center;" |द लेडी किलर |अजय बहल |अर्जुन कपूर ,भूमि पेडनेकर |कर्मा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" |लकीरें |दुर्गेश पाठक |अशुतोष राणा ,बिदिता बाग |इमेज एंड क्रिएशन | |- | style="text-align: center;" |हुकुस बुकुस |विनय भारद्वाज, सौमित्र सिंह |दर्शील सफारी अरुण गोविल |शाइनिंग सन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |यूटी 69 |शाहनवाज़ अली |राज कुंद्रा , कुमार सौरभ |एसवीएस स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |थ्री ऑफ़ अस |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |नीना कुलकर्णी, मिमी चक्रवर्ती |विंडोज़ प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" |शास्त्री विरुद्ध शास्त्री |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |परेश रावल, शिव पांडित |वायाकॉम18 स्टूडियोज़ | |- |10 | style="text-align: center;" |पिप्पा |राजा कृष्ण मेनन |इशान खट्टर, मृणाल ठाकुर | RSVP मूवीज़ | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[टाइगर 3]]'' | मनीष शर्मा |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[कैटरीना कैफ]]|[[इमरान हाशमी]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/salman-khan-announces-tiger-3-postponed-diwali-2023-unveils-first-poster/|title=Salman Khan announces Tiger 3 postponed to Diwali 2023, unveils first poster|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |15 | style="text-align: center;" |अपूर्वा | style="text-align: center;" |निखिल नागेश भाट | style="text-align: center;" | तारा सुतारिया, अभिषेक बनर्जी |स्टार स्टूडियोज़ | |- |17 | style="text-align: center;" |खिचड़ी 2: मिशन पांथुकिस्तान | style="text-align: center;" |आतिश कपाड़िया | style="text-align: center;" | सुप्रिया पाठक, राजीव मेहता | style="text-align: center;" |Hats Off प्रोडक्शंस | style="text-align: center;" | |- |18 | style="text-align: center;" |सब मोह माया है | style="text-align: center;" |अभिनव पारीक | style="text-align: center;" |शर्मन जोशी, अन्नू कपूर | style="text-align: center;" | वेदा फिल्म फैक्ट्री | style="text-align: center;" | |- | rowspan="2" |24 | style="text-align: center;" |फर्रे | style="text-align: center;" |सौमेंद्र पाधी | style="text-align: center;" |अलिज़ेह अग्निहोत्री, ज़ैन शॉ | style="text-align: center;" |सलमान खान फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | style="text-align: center;" |स्टारफिश | style="text-align: center;" |अखिलेश जायसवाल | style="text-align: center;" |खुशाली कुमार, मिलिंद सोमन | style="text-align: center;" |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | | | style="text-align:center;" | ''100%'' | [[साजिद खान (निर्देशक)|साजिद खान]] |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[रितेश देशमुख]]|[[नोरा फतेही]]|[[शहनाज गिल]]}} | [[टी-सीरीज़]], एसोसिएशन मीडिया द्वारा दोषी | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-riteish-deshmukh-nora-fatehi-shehnaaz-gill-star-come-together-100/|title=John Abraham, Riteish Deshmukh, Nora Fatehi, and Shehnaaz Gill to star in come together for 100%|website=India Today|access-date=29 August 2022}}</ref> |- | rowspan="5" |<big>दिसम्बर</big> |8 | style="text-align: center;" |''[[जोराम (फ़िल्म)|जोराम]]'' |देवाशीष मखीजा |[[मनोज बाजपेयी]], तन्निष्ठा चटर्जी और स्मिता तांबे |ज़ी स्टूडियो, मखीजा फ़िल्म |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/joram/|title=Joram Movie: Review {{!}} Release Date (2023) {{!}} Songs {{!}} Music {{!}} Images {{!}} Official Trailers {{!}} Videos {{!}} Photos {{!}} News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2023-12-08|language=en|access-date=2025-11-13}}</ref> |- | |कडक सिंघ | style="text-align: center;" |अनिरुद्ध रॉय चौदहूरी |पंकज त्रिपाठी, दिलीप संकर |फर्स्ट स्टेप फिल्म | |- | |मस्त में रहने का |विजय मौर्य | style="text-align: center;" |जैकी श्रॉफफ, नीना गुप्ता |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- |15 |कैसी ये डोर |रत्न नीलम पांडे |निखिल पांडे, रत्न नीलम पांडे | style="text-align: center;" | | |- |21 | style="text-align:center;" | ''[[डंकी (फ़िल्म)|डंकी]]'' | [[राजकुमार हिरानी]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[विक्की कौशल]]|[[तापसी पन्नू]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]], राजकुमार हिरानी फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-taapsee-pannus-film-director-rajkumar-hirani-titled-dunki-release-december-22-2023/|title=Shah Rukh Khan and Taapsee Pannu’s film with director Rajkumar Hirani titled Dunki; to release on December 22, 2023|date=19 April 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | |22 | style="text-align: center;" |ड्राई डे |सौरभ शुक्ला |जितेंद्र कुमार अनु कपूर |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- | |26 | style="text-align: center;" |खो गए हम कहां |अर्जुन वरैन सिंह |आदर्श गौरव सिद्धांत चतुर्वेदी |रिलायंस एंटरटेनमेंट | |- | |29 | style="text-align: center;" |सफेद |संदीप सिंह |अभय वर्मा मीरा चोपड़ा |लेजेंड स्टूडियोज़ | |} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] fuoha8zzqprosyy6ya5vmldkd0puu0k 6536752 6536744 2026-04-06T05:05:46Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536752 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2023 में रिलीज़ होने वाली हैं या रिलीज हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस ग्रॉस रेवेन्यू के हिसाब से वर्ष 2023 में रिलीज हुई सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्में इस प्रकार हैं। {| class="wikidiv" |- | style="text-align:center; background:#9fc;"| * | यह निशान वर्तमान मेंं सिनेमाघरों में चल रही फिल्मों को दर्शाता है। |} {| class="wikitable" |- | style="text-align:center; background:#ccc;"|#+ |यह निशान बहुभाषी फिल्म को दर्शाता है और कुल कारोबार में फिल्म के समस्त भाषाओं के संस्करणों की कमाई को शामिल किया गया हैं। |} {| class="wikidiv" |} {| class="wikitable sortable" style="margin:auto; margin:auto;" |+2023 में दुनियाभर में सबसे अधिक कुल सकल कमाई करने वाली फिल्में |- ! स्थान/क्र.स. !! शीर्षक ! निर्माता कंपनी !! वितरक ! वर्ल्डवाइड ग्रॉस !! संदर्भ |- !1 |[[जवान (फ़िल्म)|जवान]] |[[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|'''रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट''']] |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट [[यश राज फ़िल्म्स|यशराज फिल्म्स]] |₹1,148 करोड़ (US$140 मिलियन) |<ref name="boxoffww3">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 2 |''[[पठान (फ़िल्म)|पठान]]'' | colspan="2" style="text-align:center; " |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|1050.30|c}} |<ref>{{cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/pathaan/box-office/|title=Pathaan Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|language=en|access-date=26 January 2023}}</ref><ref name="boxoffww">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|access-date=26 January 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref> |- !3 |[[गदर 2]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]]<nowiki/>अनिल शर्मा प्रोडक्शन्स एमएम मूवीज |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |₹690.54 करोड़ (US$86 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/gadar-2/box-office/|title=Gadar 2 Box Office|date=12 August 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=12 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww4">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !4 |[[रॉकी और रानी की प्रेम कहानी]] |[[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹355.61 करोड़ (US$45 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/#bh-movie-box-office|title=Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani Office|date=28 July 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=30 July 2023}}</ref><ref name="boxoffww5">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !5 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[आदिपुरुष]]* |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|रेट्रोफाइल्स||}} |{{Ubl|एए फिल्म्स|UV क्रियशन्स||}} | style="background:#ccc;" |{{INRConvert|340|c}} #+ |<ref>{{cite news |title=Adipurush box office collection Day 2: Prabhas-starrer grosses Rs 240 crore worldwide despite poor reviews, fan protests |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/adipurush-box-office-collection-day-2-prabhas-ramayana-200-crore-8670222/|date=18 June 2023|work=[[The Indian Express]]|access-date=18 June 2023}}</ref> |- !6 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[द केरल स्टोरी]]* |सनशाइन पिक्चर्स | |{{INRConvert|303.68|c}} |<ref>{{Cite web|title=The Kerala Story Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-kerala-story/box-office/|access-date=16 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !7 |[[ओएमजी 2]] |केप ऑफ गुड फिल्म्स [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] वकाओ फिल्म्स |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹221.08 करोड़ (US$28 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/omg-2/box-office/|title=OMG 2 Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=18 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww6">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" |8 | [[तू झूठी मैं मक्कार]] |{{Ubl|लव फिल्म्स|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स}} |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|220.10|c}} |<ref>{{Cite web |title=Tu Jhoothi Main Makkaar Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/tu-jhoothi-main-makkaar/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=26 March 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 9 | [[किसी का भाई किसी की जान]] |[[सलमान खान फिल्म्स]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|182.44|c}} |<ref>{{Cite web|title=Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=4 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !10 |[[ड्रीम गर्ल 2]] |बालाजी मोशन पिक्चर्स |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट |₹140.26 करोड़ (US$18 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/dream-girl-2-2/box-office/#bh-movie-box-office|title=Dream Girl 2 Box Office|date=5 September 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2023}}</ref><ref name="boxoffww8">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 11 | [[भोला]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[अजय देवगन फिल्म्स]]|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|[[ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स]]}} |{{Ubl|पैनोरमा स्टूडियो|[[पीवीआर पिक्चर्स]]}} |{{INRConvert|111.64|c}} |<ref>{{Cite web |title=Bholaa Box Office|url= https://www.bollywoodhungama.com/movie/bholaa/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=2 April 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 12 | style="text-align:left; background:#9fc;" | ''[[जरा हटके जरा बचके|ज़रा हटके ज़रा बचके*]]'' |{{Ubl|मैडॉक फिल्म्स|जियो स्टूडियोज़}} |जियो स्टूडियोज़ |{{INRConvert|90.39|c}} |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/zara-hatke-zara-bachke/box-office/#bh-movie-box-office|title=Zara Hatke Zara Bachke Box Office|website=Bollywood Hungama|access-date=4 June 2023}}</ref><ref name="boxoffww2">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 13 |[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|गीता आर्ट्स|हरिका और हसीन क्रिएशन्स|ब्रैट फिल्म्स}} |एए फिल्म्स |{{INRConvert|47.43|c}} |<ref>{{Cite web |title=Shehzada Box Office Collection|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shehzada-2/box-office/ |access-date=19 February 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 14 | [[मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे]] |एम्मी एंटरटेनमेंट [[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|36.53|c}} |<ref>{{Cite web|title=Mrs. Chatterjee Vs Norway Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/mrs-chatterjee-vs-norway/box-office/ |access-date=21 March 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 15 | style="text-align:left; background:#9fc;" | [[आईबी71|''आईबी71''*]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|एक्शन हीरो फिल्म्स}} |[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]] |{{INRConvert|29.01|c}} |<ref>{{Cite web|title=IB71 Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/IB71/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=17 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |} == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- ! rowspan="6" |<big>जनवरी</big> | rowspan="2" style="text-align: center;" |'''13''' | style="text-align: center;" |कुत्ते |आसमान भारद्वाज |अर्जुन कपूर, तब्बू |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]] | |- | style="text-align: center;" |लकड़बघा |विक्टर मुखर्जी |रिद्धि डोगरा, मिलिंद सोमान |फर्स्ट राय फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |मिशन मजनू |शांतनु बागची |सिद्धार्थ मल्होत्रा, राश्मिका मदाना |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''25''' | style="text-align:center;" | ''[[पठान (फ़िल्म)|पठान:]]'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[जॉन अब्राहम]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-deepika-padukone-john-abraham-announce-pathaan-power-packed-teaser-releasing-january-25-2023/|title=Shah Rukh Khan, Deepika Padukone, John Abraham announce Pathaan with power-packed teaser, releasing on January 25, 2023|date=2 March 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 March 2022}}</ref> |- ! rowspan="2" |'''26''' | style="text-align: center;" |गांधी गोडसे एक युद्ध | style="text-align: center;" |राजकुमार संतोष |दीपक अंतनी, चिन्मय मदलेकर |पी वी आर पिक्चर | |- | style="text-align:center;" | ''तेहरान'' | अरुण गोपालन |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[मानुषी छिल्लर]]}} | [[मैडॉक फ़िल्म्स|मैडॉक फिल्म्स]], बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-collaborates-with-dinesh-vijan-for-action-thriller-tehran-set-for-january-26-2023-release/|title=John Abraham collaborates with Dinesh Vijan for action thriller Tehran; set for January 26, 2023 release|website=Bollywood Hungama|access-date=22 February 2022}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/manushi-chhillar-joins-john-abraham-dinesh-vijans-tehran-see-photos/|title=Manushi Chhillar joins John Abraham in Dinesh Vijan’s Tehran|date=19 July 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 July 2022}}</ref> |- ! ! | style="text-align: center;" |ऑपरेशन फ्राइडे |विश्राम सावंत |रणदीप हुड्डा |तुतरी वेंचर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |3 | style="text-align: center;" |ऑलमोस्ट प्यार विद डी.जे. मोहब्बत |अनुराग कश्यप |आलाया एफ |ज़ी स्टूडियोज़, गुड बैड फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फ़राज़ |हंसल मेहता |जहान कपूर, आदित्य रावल,आमिर अली, जूही बब्बर |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |10 | style="text-align: center;" |शिव शास्त्री बलबोआ |अजयन् वेणुगोपालन |अनुपम खेर, नीना गुप्ता,जुगल हंसराज |यूएफ़आई मोशन पिक्चर्स, अनुपम खेर स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द टेनेंट [γ] |सुष्रुत जैन |शमिता शेट्टी, रुद्राक्ष जायसवाल |मैड कूली प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |लॉस्ट |अनिरुद्ध रॉय चौधरी |यामी गौतम राहुल खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, नमाह पिक्चर्स, | |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>फरवरी</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | 17 | style="text-align:center;" | ''[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]]'' | रोहित धवन |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कृति सेनन]]|[[परेश रावल]]|[[मनीषा कोइराला]]|[[सचिन खेडेकर]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], अल्लू एंटरटेनमेंट, हारिका एंड हसीन क्रिएशन्स, ब्रैट फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/kartik-aaryan-s-shehzada-to-release-in-theatres-on-feb-10-2023-actor-shares-his-first-look-from-film-1976337-2022-07-16|title=Kartik Aaryan's Shehzada to release in theatres on Feb 10, 2023. Actor shares his first look from film|date=16 July 2022|work=[[India Today]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''17''' | style="text-align:center;" | ''मैदान'' | अमित शर्मा |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[प्रियमणि]]|[[गजराज राव]]}} | [[ज़ी स्टूडियोज़|ज़ी स्टूडियोज]], बायव्यू प्रोजेक्ट्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-starrer-maidaan-gets-new-release-date-hit-big-screen-february-17-2023/|title=Ajay Devgn starrer Maidaan gets new release date; to hit the big screen on February 17, 2023|date=1 October 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''24''' | style="text-align:center;" | ''[[सेल्फी]]'' | राज मेहता |{{Hlist|[[अक्षय कुमार]]|[[इमरान हाशमी]]|[[डायना पेंटी]]|[[नुसरत भरूचा]]}} | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]], पृथ्वीराज प्रोडक्शंस, मैजिक फ्रेम्स, केप ऑफ गुड फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-emraan-hashmi-starrer-selfiee-release-february-24-2023/|title=Akshay Kumar – Emraan Hashmi starrer Selfiee to release on February 24, 2023|date=16 July 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>मार्च</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''8''' | style="text-align:center;" | ''[[लव रंजन]] की अनटाइटल्ड फिल्म'' | [[लव रंजन]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[श्रद्धा कपूर]]}} | [[लव फिल्म्स]], [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-and-shraddha-kapoor-film-with-luv-ranjan-gets-a-release-date-7796503/|title=Ranbir Kapoor and Shraddha Kapoor’s film gets a release date|website=The Indian Express|access-date=1 March 2022}}</ref> |- | 28 | ''[[द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव|भीमा कोरेगांव की लड़ाई]]'' | रमेश थेटे |{{Hlist|[[अर्जुन रामपाल]]|दिगांगना सूर्यवंशी|[[सनी लियोन]]|[[कृष्णा अभिषेक]]}} | रमेश थेटे फिल्म्स | |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''30''' | style="text-align:center;" | ''[[भोला]]'' | [[अजय देवगन]] |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[तब्बू (अभिनेत्री)|तब्बू]]}} | अजय देवगन एफफिल्म्स, [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], [[रिलायंस इंटरटेनमेंट|रिलायंस एंटरटेनमेंट]], ड्रीम वारियर पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-tabu-starrer-bholaa-remake-kaithi-released-march-30-2023/|title=Ajay Devgn and Tabu starrer Bholaa, remake of Kaithi, to be released on March 30, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |गैसलाइट |पवन कृपलानी |विक्रांत मैसी सारा अली ख़ान चित्रांगदा सिंह |टिप्स इंडस्ट्रीज़, 12th स्ट्रीट एंटरटेनमेंट, डिज़्नी+ हॉटस्टार | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | कलाकार ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="8" style="text-align: center;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align: center;" |7 | style="text-align: center;" |गुमराह |वर्धन केटकर |आदित्य रॉय कपूर , रोनित रॉय |टी सीरीज फिल्म्स | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मिसेज़ अंडरकवर |अनुश्री मेहता |राजेश शर्मा , सुमीत व्यास |जी 5 | |- | style="text-align: center;" |सर मैडम सरपंच |प्रवीण मोरछले |सीमा बिस्वास , ज्योति दुबे |संकल प्रोडक्शंस इंटरनेशनल | |- | style="text-align: center;" |पिंकी ब्यूटी पार्लर |अक्षय सिंह |अक्षय सिंह , खुशबू गुप्ता |पेन स्टूडियोज़ | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''21''' | style="text-align:center;" | ''[[किसी का भाई किसी की जान]]'' | फरहाद सामजिक |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[पूजा हेगड़े]]|[[वेंकटेश (अभिनेता)|वेंकटेश]]|[[जगपति बाबू]]}} | [[सलमान खान फिल्म्स]], [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/breaking-tiger-3-kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan-also-postponed-salman-khan-starrer-release-cinemas-eid-2023/|title=BREAKING: After Tiger 3, Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan also postponed; Salman Khan-starrer to release in cinemas on Eid 2023|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |[[चंगेज़]] |राजेश गांगुली |[[जीत (अभिनेता)|जीत]], सुष्मिता चटर्जी, [[रोहित रॉय]], सराफ फिगर | | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |28 |बेड बॉय |राजकुमार संतोषी |नामाशी चक्रवर्ती , अमरीन कुरैशी |इनबॉक्स पिक्चर्स | |- |यू-टर्न |अरिफ़ ख़ान |अलाया एफ , प्रियंशु पैन्युली |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |<big>मई</big> | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |मदर टेरेसा एंड मी |कमल मुसले |दीप्ति नवल , जैकलीन फिट्ची-कोर्नाज़ |करी वेस्टर्न मूवीज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अफ़वाह | style="text-align: center;" |सुधीर मिश्रा |नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , भूमि पेडनेकर |बनारस मीडिया वर्क्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द केरला स्टोरी | style="text-align: center;" |सुदिप्तो सेन | style="text-align: center;" |आदा शर्मा , योगिता बिहानी |सनशाइन पिक्चर्स | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[यारियां २|यारियां 2]]'' |{{Hlist|[[राधिका राव]]|[[विनय सप्रू]]}} |{{Hlist|[[दिव्या खोसला कुमार]]|[[पर्ल वी पुरी]]|[[मीजान जाफरी]]|[[यश दासगुप्ता]]|[[अनसवारा राजन]]||[[प्रिया प्रकाश वारियर]] |वरीना हुसैन}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], बीएलएम पिक्चरर्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/pearl-v-puri-priya-varrier-meezaan-jafri-others-roped-yaariyan-2-release-summer-2023/|title=Divya Khosla Kumar, Pearl V Puri, and Meezaan Jafri roped for Yaariyan 2; film to release in Summer 2023|date=12 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''26''' | style="text-align:center;" | ''[[स्वातंत्र्य वीर सावरकर (फिल्म)|स्वतंत्र वीर सावरकर]]'' | [[रणदीप हुड्डा]] |{{Hlist|[[रणदीप हुड्डा]]|[[अंकिता लोखंडे]]}} | आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स, लीजेंड स्टूडियोज | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/randeep-hooda-takes-director-swatantra-veer-savarkar-begins-shooting/|title=Randeep Hooda takes over as director of Swatantra Veer Savarkar; begins shooting|date=3 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''2''' | style="text-align:center;" | ''[[जवान (फ़िल्म)|जवान]]'' | एटली |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[नयनतारा]]|[[विजय सेतुपति]]|[[प्रियमणि]]|[[सान्या मल्होत्रा]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/watch-shah-rukh-khan-jawan-atlees-next-directorial-release-june-2-2023/|title=Shah Rukh Khan in and as Jawan in Atlee’s next directorial; to release on June 2, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=3 June 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |'''16''' | style="text-align: center;" |''आदिपुरुष'' | style="text-align: center;" |ओम राउत |{{Hlist|[[प्रभास]]|[[सैफ अली खान]]|[[कृति सेनन]]|[[सनी सिंह (अभिनेता)|सनी सिंह]]}} |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], रेट्रोफाइल्स | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''29''' | style="text-align:center;" | ''[[सत्यप्रेम की कथा]]'' | समीर विदवान |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कियारा आडवाणी]]}} | [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]], नमः पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/bollywood/satyaprem-ki-katha-starring-kartik-aaryan-kiara-advani-to-release-on-29th-june-2023-11119781.html|title=‘Satyaprem Ki Katha’ starring Kartik Aaryan & Kiara Advani to release on 29th June 2023|website=Firstpost|access-date=26 August 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;" | ''[[ड्रीम गर्ल 2]]'' | राज शांडिल्य |{{Hlist|[[आयुष्मान खुराना]]|[[अनन्या पांडे]]|[[अन्नू कपूर]]|[[परेश रावल]]|[[विजय राज]]|[[मनोज जोशी (अभिनेता)|मनोज जोशी]]|[[राजपाल यादव]]|[[असरानी]]|[[सीमा पाहवा]]|[[मनजोत सिंह]]|[[अभिषेक बनर्जी (अभिनेता)|अभिषेक बनर्जी]]}} | [[बालाजी मोशन पिक्चर्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ayushmann-khurrana-ananya-panday-headline-dream-girl-2-set-release-june-29-2023-watch-announcement-video/|title=Ayushmann Khurrana and Ananya Panday to headline Dream Girl 2; set to release on June 29, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=16 September 2022}}</ref> |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" | जुलाई |7 |नीयत |अनु मेनन |विद्या बालन, राम कपूर, राहुल बोस |अबुंडेंटिया एंटरटेनमेंट, रिडल फ़िल्म्स, अमेज़न स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | |तरला |पियूष गुप्ता |हुमा क़ुरैशी, शरीब हाशमी |आरएसवीपी मूवीज़,अर्थस्काई पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |ब्लाइंड |शोम मखीजा |सोनम कपूर, पूरब कोहली |जियो स्टूडियोज़,कनाई | |- | style="text-align: center;" | | |72 हूरें |संजय पूरन सिंह चौहान |'''सारू मैनी, आमिर बशीर,रशीद नाज़''' |सार्थी ई एंटरटेनमेंट, एलियंस पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | |14 |इश्क़-ए-नादान |अविषेक घोष |लारा दत्ता, नीना गुप्ता, कंवलजीत सिंह |एवीएमए मीडिया, जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | |21 |बवाल |नितेश तिवारी |वरुण धवन,जान्हवी कपूर |अर्थस्काई पिक्चर्स, नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | |ट्रायल पीरियड |अलेया सेन |जेनेलिया देशमुख, मानव कौल,शक्ति कपूर |जियो स्टूडियोज़,क्रोम पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |माइनस 31: द नागपुर फ़ाइल्स |प्रतीक मोइत्रो |शिवांकित सिंह परिहार, रघुबीर यादव,राजेश शर्मा |ऑरेंजपिक्सल स्टूडियोज़ प्राइवेट लिमिटेड प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | |अजमेर 92 |पुष्पेंद्र सिंह |करण वर्मा, राजेश शर्मा, सयाजी शिंदे |रिलायंस एंटरटेनमेंट, यू एंड के एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | |28 |रॉकी और रानी की प्रेम कहानी |करण जौहर |रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, जया बच्चन |वायकॉम18 स्टूडियोज़, धर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | |वन फ्राइडे नाइट |मनीष गुप्ता |रवीना टंडन,मिलिंद सोमन |जियो स्टूडियोज़,जियोसिनेमा | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |4 | style="text-align: center;" |पंच कृति |सन्नजॉय भार्गव |बृजेंद्र काला, उमेश बाजपेई,सागर वाही |उबोन विज़न प्राइवेट लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लफ़्ज़ों में प्यार |राजा रणदीप गिरी,धीरज मिश्रा |अनीता राज, ज़रीना वहाब, विवेक आनंद मिश्रा |मोनार्क फ़िल्म | |- | rowspan="7" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>अगस्त</big> | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''11''' | style="text-align:center;" | ''जानवर'' | [[संदीप रेड्डी|संदीप रेड्डी वांगा]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[रश्मिका मंदाना]]|[[अनिल कपूर]]|[[बॉबी देओल]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], सिने1 स्टूडियोज, भद्रकाली पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-and-parineeti-chopra-s-animal-to-release-on-aug-11-2023-1878664-2021-11-19|title=Ranbir Kapoor and Parineeti Chopra’s Animal to release on Aug 11, 2023|website=India Today|access-date=19 November 2021}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/rashmika-mandanna-replaces-parineeti-chopra-joins-cast-sandeep-reddy-vanga-ranbir-kapoors-animal/|title=Rashmika Mandanna replaces Parineeti Chopra; joins the cast of Sandeep Reddy Vanga and Ranbir Kapoor’s Animal|website=Bollywood Hungama|access-date=2 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग़दर 2 | style="text-align: center;" |अनिल शर्मा |सनी देओल, अमीषा पटेल |ज़ी स्टूडियोज़, अनिल शर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओएमजी 2 | style="text-align: center;" |अमित राय | style="text-align: center;" |अक्षय कुमार, यामी गौतम,पंकज त्रिपाठी |वायकॉम18 स्टूडियोज़, केप ऑफ गुड फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''15''' | style="text-align:center;" | ''तारिक'' | अरुण गोपालन | [[जॉन अब्राहम]] | जेए एंटरटेनमेंट, बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |घूमर | style="text-align: center;" |आर बाल्की |अभिषेक बच्चन,सैयामी खेर, शबाना आज़मी |होप प्रोडक्शंस,सरस्वती एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |नॉन स्टॉप धमाल | style="text-align: center;" |इरशाद ख़ान | style="text-align: center;" |अन्नू कपूर, राजपाल यादव, आस्रानी |त्रियोम फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''22''' | style="text-align:center;" | ''भाइयों 2'' | [[करण मल्होत्रा]] | [[अक्षय कुमार]] | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |ड्रीम गर्ल 2 |राज शांडिल्य |आयुष्मान खुराना, अनन्या पांडे, अन्नू कपूर |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>सितम्बर</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''5''' | style="text-align:center;" | ''शिक्षक दिवस की मुबारक'' | मिखिल मुसाले |{{Hlist|[[निम्रत कौर]]|[[राधिका मदन]]}} | मैडॉक फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/nimrat-kaur-radhika-madan-star-dinesh-vijans-social-thriller-happy-teachers-day-film-release-september-5-2023/|title=Nimrat Kaur and Radhika Madan to star in Dinesh Vijan’s social thriller Happy Teacher’s Day; film to release on September 5, 2023|date=5 September 2022|work=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''28''' | style="text-align:center;" | ''योद्धा'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[ऋतिक रोशन]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[अनिल कपूर]]}} | मार्फ्लिक्स पिक्चर्स, [[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स|वायकॉम18 स्टूडियोज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/hrithik-roshan-deepika-padukone-starrer-fighter-now-release-september-28-2023/|title=Hrithik Roshan and Deepika Padukone starrer Fighter to now release on September 28, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=10 March 2022}}</ref> |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="17" style="text-align: center;" |<big>अक्टूबर</big> | rowspan="2" |5 | style="text-align: center;" |दोनों |अवनीश एस. बरजात्या |राजवीर देओल , पालोमा |जिओ स्टूडियोज़ , राजश्री प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" |ख़ुफ़िया |विशाल भारद्वाज |तबू , अली फ़ज़ल |नेटफ्लिक्स | |- | rowspan="3" |6 | style="text-align: center;" | मिशन रानीगंज |टीनू सुरेश देसाई |अक्षय कुमार , परिणीति चोपड़ा |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | ''थैंक यू फॉर कमिंग'' |करन बूलानी |भूमि पेंडनेकर, करन कुंदर्रा |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" |यात्री |हरीश व्यास |रघुबीर यादव, सीमा पाहवा |अकिओन एंटेरटैनमेंट | |- | rowspan="4" |13 | style="text-align: center;" |धक् धक् |तरुण डुडएजा |रत्न पाठक, सन शैक |वियकों 18 स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" |गुठली लड्डू |इशरत र खान |संजय मिश्रान हीट शर्मा |यू वी फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" |डरन छू |भरत रत्न |करन पटेल, मनोज जोशी |मार्क मूवी | |- | style="text-align: center;" |भगवान भरोसे |शिलादित्य |विनय पाठक, सतेन्द्र सोनी |प्लाटून वन फिल्म्स | |- | rowspan="2" |20 | style="text-align: center;" |''गणपत'' |विकास बही |अमिताभ बच्चन,कीर्ति सनों |पूजा एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |यारियाँ 2 |राधिका राव |दिव्या खोंसिया कुमार,आणस्वर राजन | | |- | rowspan="6" |27 | style="text-align: center;" |12वीं फेल |विधु विनोद चोपड़ा |विक्रांत मैसी, मेधा शंकर, प्रियांशु चटर्जी, हरीश खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, विनोद चोपड़ा फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |तेजस |सर्वेश मेवाड़ा |कंगना रनौत |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align: center;" |साजिनी शिंदे का वायरल वीडियो |मिकील मूसले |निमरत कौर, सुबोध भावे |मदड़ोकक फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" | मुजीब: द मेकिंग ऑफ़ अ नेशन |श्याम बेनेगल |अरिफिन शुवू, दीपक अंटनी |नैशनल फिल्म देवेलोपमेंट | |- | style="text-align:center;" | ''[[प्यार की पॉलिसी]]'' | सुधीश कुमार शर्मा |{{Hlist|जॉली भाटिया|मनोज बक्शी|मेघा सक्सेना|विकास गिरी|गिरिश थापर|सनी प्रजापति}} | केपीएस फ़िल्म्स, अपान फिल्म्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.cbfcindia.gov.in/cbfcAdmin/search-result.php?recid=Q0EwNTI5MDgyMDIzMDAwMjQ=|title=CBFC {{!}} Search Film|website=www.cbfcindia.gov.in|access-date=2025-12-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |मंडली |राकेश चतुर्वेदी ओम |अभिषेक दुहान , रजनीश डुग्गल | रिल्टिक पिक्चर्स | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |<big>नवम्बर</big> | rowspan="7" |3 | style="text-align: center;" |आँख मिचोली |उमेश शुक्ला |अभिमन्यु दस्सानी , मृणाल ठाकुर |सोनी पिक्चर्स इंडिया | |- | style="text-align: center;" |द लेडी किलर |अजय बहल |अर्जुन कपूर ,भूमि पेडनेकर |कर्मा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" |लकीरें |दुर्गेश पाठक |अशुतोष राणा ,बिदिता बाग |इमेज एंड क्रिएशन | |- | style="text-align: center;" |हुकुस बुकुस |विनय भारद्वाज, सौमित्र सिंह |दर्शील सफारी अरुण गोविल |शाइनिंग सन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |यूटी 69 |शाहनवाज़ अली |राज कुंद्रा , कुमार सौरभ |एसवीएस स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |थ्री ऑफ़ अस |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |नीना कुलकर्णी, मिमी चक्रवर्ती |विंडोज़ प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" |शास्त्री विरुद्ध शास्त्री |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |परेश रावल, शिव पांडित |वायाकॉम18 स्टूडियोज़ | |- |10 | style="text-align: center;" |पिप्पा |राजा कृष्ण मेनन |इशान खट्टर, मृणाल ठाकुर | RSVP मूवीज़ | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[टाइगर 3]]'' | मनीष शर्मा |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[कैटरीना कैफ]]|[[इमरान हाशमी]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/salman-khan-announces-tiger-3-postponed-diwali-2023-unveils-first-poster/|title=Salman Khan announces Tiger 3 postponed to Diwali 2023, unveils first poster|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |15 | style="text-align: center;" |अपूर्वा | style="text-align: center;" |निखिल नागेश भाट | style="text-align: center;" | तारा सुतारिया, अभिषेक बनर्जी |स्टार स्टूडियोज़ | |- |17 | style="text-align: center;" |खिचड़ी 2: मिशन पांथुकिस्तान | style="text-align: center;" |आतिश कपाड़िया | style="text-align: center;" | सुप्रिया पाठक, राजीव मेहता | style="text-align: center;" |Hats Off प्रोडक्शंस | style="text-align: center;" | |- |18 | style="text-align: center;" |सब मोह माया है | style="text-align: center;" |अभिनव पारीक | style="text-align: center;" |शर्मन जोशी, अन्नू कपूर | style="text-align: center;" | वेदा फिल्म फैक्ट्री | style="text-align: center;" | |- | rowspan="2" |24 | style="text-align: center;" |फर्रे | style="text-align: center;" |सौमेंद्र पाधी | style="text-align: center;" |अलिज़ेह अग्निहोत्री, ज़ैन शॉ | style="text-align: center;" |सलमान खान फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | style="text-align: center;" |स्टारफिश | style="text-align: center;" |अखिलेश जायसवाल | style="text-align: center;" |खुशाली कुमार, मिलिंद सोमन | style="text-align: center;" |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | | | style="text-align:center;" | ''100%'' | [[साजिद खान (निर्देशक)|साजिद खान]] |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[रितेश देशमुख]]|[[नोरा फतेही]]|[[शहनाज गिल]]}} | [[टी-सीरीज़]], एसोसिएशन मीडिया द्वारा दोषी | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-riteish-deshmukh-nora-fatehi-shehnaaz-gill-star-come-together-100/|title=John Abraham, Riteish Deshmukh, Nora Fatehi, and Shehnaaz Gill to star in come together for 100%|website=India Today|access-date=29 August 2022}}</ref> |- | rowspan="5" |<big>दिसम्बर</big> |8 | style="text-align: center;" |''[[जोराम (फ़िल्म)|जोराम]]'' |देवाशीष मखीजा |[[मनोज बाजपेयी]], तन्निष्ठा चटर्जी और स्मिता तांबे |ज़ी स्टूडियो, मखीजा फ़िल्म |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/joram/|title=Joram Movie: Review {{!}} Release Date (2023) {{!}} Songs {{!}} Music {{!}} Images {{!}} Official Trailers {{!}} Videos {{!}} Photos {{!}} News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2023-12-08|language=en|access-date=2025-11-13}}</ref> |- | |कडक सिंघ | style="text-align: center;" |अनिरुद्ध रॉय चौदहूरी |पंकज त्रिपाठी, दिलीप संकर |फर्स्ट स्टेप फिल्म | |- | |मस्त में रहने का |विजय मौर्य | style="text-align: center;" |जैकी श्रॉफफ, नीना गुप्ता |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- |15 |कैसी ये डोर |रत्न नीलम पांडे |निखिल पांडे, रत्न नीलम पांडे | style="text-align: center;" | | |- |21 | style="text-align:center;" | ''[[डंकी (फ़िल्म)|डंकी]]'' | [[राजकुमार हिरानी]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[विक्की कौशल]]|[[तापसी पन्नू]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]], राजकुमार हिरानी फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-taapsee-pannus-film-director-rajkumar-hirani-titled-dunki-release-december-22-2023/|title=Shah Rukh Khan and Taapsee Pannu’s film with director Rajkumar Hirani titled Dunki; to release on December 22, 2023|date=19 April 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | |22 | style="text-align: center;" |ड्राई डे |सौरभ शुक्ला |जितेंद्र कुमार अनु कपूर |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- | |26 | style="text-align: center;" |खो गए हम कहां |अर्जुन वरैन सिंह |आदर्श गौरव सिद्धांत चतुर्वेदी |रिलायंस एंटरटेनमेंट | |- | |29 | style="text-align: center;" |सफेद |संदीप सिंह |अभय वर्मा मीरा चोपड़ा |लेजेंड स्टूडियोज़ | |} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] q72nk9xl6ko0rnac7btpmpae6pvpddd 6536765 6536752 2026-04-06T05:19:32Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536765 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2023 में रिलीज़ होने वाली हैं या रिलीज हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस ग्रॉस रेवेन्यू के हिसाब से वर्ष 2023 में रिलीज हुई सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्में इस प्रकार हैं। {| class="wikidiv" |- | style="text-align:center; background:#9fc;"| * | यह निशान वर्तमान मेंं सिनेमाघरों में चल रही फिल्मों को दर्शाता है। |} {| class="wikitable" |- | style="text-align:center; background:#ccc;"|#+ |यह निशान बहुभाषी फिल्म को दर्शाता है और कुल कारोबार में फिल्म के समस्त भाषाओं के संस्करणों की कमाई को शामिल किया गया हैं। |} {| class="wikidiv" |} {| class="wikitable sortable" style="margin:auto; margin:auto;" |+2023 में दुनियाभर में सबसे अधिक कुल सकल कमाई करने वाली फिल्में |- ! स्थान/क्र.स. !! शीर्षक ! निर्माता कंपनी !! वितरक ! वर्ल्डवाइड ग्रॉस !! संदर्भ |- !1 |[[जवान (फ़िल्म)|जवान]] |[[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|'''रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट''']] |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट [[यश राज फ़िल्म्स|यशराज फिल्म्स]] |₹1,148 करोड़ (US$140 मिलियन) |<ref name="boxoffww3">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 2 |''[[पठान (फ़िल्म)|पठान]]'' | colspan="2" style="text-align:center; " |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|1050.30|c}} |<ref>{{cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/pathaan/box-office/|title=Pathaan Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|language=en|access-date=26 January 2023}}</ref><ref name="boxoffww">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|access-date=26 January 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref> |- !3 |[[गदर 2]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]]<nowiki/>अनिल शर्मा प्रोडक्शन्स एमएम मूवीज |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |₹690.54 करोड़ (US$86 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/gadar-2/box-office/|title=Gadar 2 Box Office|date=12 August 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=12 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww4">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !4 |[[रॉकी और रानी की प्रेम कहानी]] |[[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹355.61 करोड़ (US$45 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/rocky-aur-rani-ki-prem-kahani/box-office/#bh-movie-box-office|title=Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani Office|date=28 July 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=30 July 2023}}</ref><ref name="boxoffww5">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- !5 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[आदिपुरुष]]* |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|रेट्रोफाइल्स||}} |{{Ubl|एए फिल्म्स|UV क्रियशन्स||}} | style="background:#ccc;" |{{INRConvert|340|c}} #+ |<ref>{{cite news |title=Adipurush box office collection Day 2: Prabhas-starrer grosses Rs 240 crore worldwide despite poor reviews, fan protests |url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/adipurush-box-office-collection-day-2-prabhas-ramayana-200-crore-8670222/|date=18 June 2023|work=[[The Indian Express]]|access-date=18 June 2023}}</ref> |- !6 | style="text-align:left; background:#9fc;" |[[द केरल स्टोरी]]* |सनशाइन पिक्चर्स | |{{INRConvert|303.68|c}} |<ref>{{Cite web|title=The Kerala Story Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-kerala-story/box-office/|access-date=16 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !7 |[[ओएमजी 2]] |केप ऑफ गुड फिल्म्स [[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] वकाओ फिल्म्स |[[वायकॉम 18|वायाकॉम18 स्टूडियो]] |₹221.08 करोड़ (US$28 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/omg-2/box-office/|title=OMG 2 Box Office|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=18 August 2023}}</ref><ref name="boxoffww6">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" |8 | [[तू झूठी मैं मक्कार]] |{{Ubl|लव फिल्म्स|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स}} |[[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] |{{INRConvert|220.10|c}} |<ref>{{Cite web |title=Tu Jhoothi Main Makkaar Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/tu-jhoothi-main-makkaar/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=26 March 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 9 | [[किसी का भाई किसी की जान]] |[[सलमान खान फिल्म्स]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|182.44|c}} |<ref>{{Cite web|title=Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=4 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- !10 |[[ड्रीम गर्ल 2]] |बालाजी मोशन पिक्चर्स |पेन मरुधर एंटरटेनमेंट |₹140.26 करोड़ (US$18 मिलियन) |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/dream-girl-2-2/box-office/#bh-movie-box-office|title=Dream Girl 2 Box Office|date=5 September 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2023}}</ref><ref name="boxoffww8">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 11 | [[भोला]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[अजय देवगन फिल्म्स]]|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|[[ड्रीम वॉरियर पिक्चर्स]]}} |{{Ubl|पैनोरमा स्टूडियो|[[पीवीआर पिक्चर्स]]}} |{{INRConvert|111.64|c}} |<ref>{{Cite web |title=Bholaa Box Office|url= https://www.bollywoodhungama.com/movie/bholaa/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=2 April 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 12 | style="text-align:left; background:#9fc;" | ''[[जरा हटके जरा बचके|ज़रा हटके ज़रा बचके*]]'' |{{Ubl|मैडॉक फिल्म्स|जियो स्टूडियोज़}} |जियो स्टूडियोज़ |{{INRConvert|90.39|c}} |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/zara-hatke-zara-bachke/box-office/#bh-movie-box-office|title=Zara Hatke Zara Bachke Box Office|website=Bollywood Hungama|access-date=4 June 2023}}</ref><ref name="boxoffww2">{{cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/2023/|title=Bollywood Top Grossers Worldwide 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=26 January 2023}}</ref> |- ! style="text-align:center;" | 13 |[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|गीता आर्ट्स|हरिका और हसीन क्रिएशन्स|ब्रैट फिल्म्स}} |एए फिल्म्स |{{INRConvert|47.43|c}} |<ref>{{Cite web |title=Shehzada Box Office Collection|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shehzada-2/box-office/ |access-date=19 February 2023 |website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 14 | [[मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे]] |एम्मी एंटरटेनमेंट [[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |[[ज़ी स्टूडियोज़|जी स्टूडियोज़]] |{{INRConvert|36.53|c}} |<ref>{{Cite web|title=Mrs. Chatterjee Vs Norway Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/mrs-chatterjee-vs-norway/box-office/ |access-date=21 March 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |- ! style="text-align:center;" | 15 | style="text-align:left; background:#9fc;" | [[आईबी71|''आईबी71''*]] |{{Ubl|[[टी-सीरीज़]] फिल्म्स|[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]]|एक्शन हीरो फिल्म्स}} |[[रिलायंस इंटरटेनमेंट]] |{{INRConvert|29.01|c}} |<ref>{{Cite web|title=IB71 Box Office|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/IB71/box-office/#bh-movie-box-office|access-date=17 May 2023|website=Bollywood Hungama}}</ref><ref name="boxoffww" /> |} == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- ! rowspan="6" |<big>जनवरी</big> | rowspan="2" style="text-align: center;" |'''13''' | style="text-align: center;" |कुत्ते |आसमान भारद्वाज |अर्जुन कपूर, तब्बू |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]] | |- | style="text-align: center;" |लकड़बघा |विक्टर मुखर्जी |रिद्धि डोगरा, मिलिंद सोमान |फर्स्ट राय फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |मिशन मजनू |शांतनु बागची |सिद्धार्थ मल्होत्रा, राश्मिका मदाना |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''25''' | style="text-align:center;" | ''[[पठान (फ़िल्म)|पठान:]]'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[जॉन अब्राहम]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-deepika-padukone-john-abraham-announce-pathaan-power-packed-teaser-releasing-january-25-2023/|title=Shah Rukh Khan, Deepika Padukone, John Abraham announce Pathaan with power-packed teaser, releasing on January 25, 2023|date=2 March 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 March 2022}}</ref> |- ! rowspan="2" |'''26''' | style="text-align: center;" |गांधी गोडसे एक युद्ध | style="text-align: center;" |राजकुमार संतोष |दीपक अंतनी, चिन्मय मदलेकर |पी वी आर पिक्चर | |- | style="text-align:center;" | ''तेहरान'' | अरुण गोपालन |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[मानुषी छिल्लर]]}} | [[मैडॉक फ़िल्म्स|मैडॉक फिल्म्स]], बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-collaborates-with-dinesh-vijan-for-action-thriller-tehran-set-for-january-26-2023-release/|title=John Abraham collaborates with Dinesh Vijan for action thriller Tehran; set for January 26, 2023 release|website=Bollywood Hungama|access-date=22 February 2022}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/manushi-chhillar-joins-john-abraham-dinesh-vijans-tehran-see-photos/|title=Manushi Chhillar joins John Abraham in Dinesh Vijan’s Tehran|date=19 July 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 July 2022}}</ref> |- ! ! | style="text-align: center;" |ऑपरेशन फ्राइडे |विश्राम सावंत |रणदीप हुड्डा |तुतरी वेंचर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |3 | style="text-align: center;" |ऑलमोस्ट प्यार विद डी.जे. मोहब्बत |अनुराग कश्यप |आलाया एफ |ज़ी स्टूडियोज़, गुड बैड फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फ़राज़ |हंसल मेहता |जहान कपूर, आदित्य रावल,आमिर अली, जूही बब्बर |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |10 | style="text-align: center;" |शिव शास्त्री बलबोआ |अजयन् वेणुगोपालन |अनुपम खेर, नीना गुप्ता,जुगल हंसराज |यूएफ़आई मोशन पिक्चर्स, अनुपम खेर स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द टेनेंट [γ] |सुष्रुत जैन |शमिता शेट्टी, रुद्राक्ष जायसवाल |मैड कूली प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |लॉस्ट |अनिरुद्ध रॉय चौधरी |यामी गौतम राहुल खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, नमाह पिक्चर्स, | |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>फरवरी</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | 17 | style="text-align:center;" | ''[[शहज़ादा (2023 फिल्म)|शहज़ादा]]'' | रोहित धवन |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कृति सेनन]]|[[परेश रावल]]|[[मनीषा कोइराला]]|[[सचिन खेडेकर]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], अल्लू एंटरटेनमेंट, हारिका एंड हसीन क्रिएशन्स, ब्रैट फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/kartik-aaryan-s-shehzada-to-release-in-theatres-on-feb-10-2023-actor-shares-his-first-look-from-film-1976337-2022-07-16|title=Kartik Aaryan's Shehzada to release in theatres on Feb 10, 2023. Actor shares his first look from film|date=16 July 2022|work=[[India Today]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''17''' | style="text-align:center;" | ''मैदान'' | अमित शर्मा |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[प्रियमणि]]|[[गजराज राव]]}} | [[ज़ी स्टूडियोज़|ज़ी स्टूडियोज]], बायव्यू प्रोजेक्ट्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-starrer-maidaan-gets-new-release-date-hit-big-screen-february-17-2023/|title=Ajay Devgn starrer Maidaan gets new release date; to hit the big screen on February 17, 2023|date=1 October 2022|website=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=2 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''24''' | style="text-align:center;" | ''[[सेल्फी]]'' | राज मेहता |{{Hlist|[[अक्षय कुमार]]|[[इमरान हाशमी]]|[[डायना पेंटी]]|[[नुसरत भरूचा]]}} | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]], पृथ्वीराज प्रोडक्शंस, मैजिक फ्रेम्स, केप ऑफ गुड फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-emraan-hashmi-starrer-selfiee-release-february-24-2023/|title=Akshay Kumar – Emraan Hashmi starrer Selfiee to release on February 24, 2023|date=16 July 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 July 2022}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>मार्च</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''8''' | style="text-align:center;" | ''[[लव रंजन]] की अनटाइटल्ड फिल्म'' | [[लव रंजन]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[श्रद्धा कपूर]]}} | [[लव फिल्म्स]], [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-and-shraddha-kapoor-film-with-luv-ranjan-gets-a-release-date-7796503/|title=Ranbir Kapoor and Shraddha Kapoor’s film gets a release date|website=The Indian Express|access-date=1 March 2022}}</ref> |- | 28 | ''[[द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव|भीमा कोरेगांव की लड़ाई]]'' | रमेश थेटे |{{Hlist|[[अर्जुन रामपाल]]|दिगांगना सूर्यवंशी|[[सनी लियोन]]|[[कृष्णा अभिषेक]]}} | रमेश थेटे फिल्म्स | |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''30''' | style="text-align:center;" | ''[[भोला]]'' | [[अजय देवगन]] |{{Hlist|[[अजय देवगन]]|[[तब्बू (अभिनेत्री)|तब्बू]]}} | अजय देवगन एफफिल्म्स, [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], [[रिलायंस इंटरटेनमेंट|रिलायंस एंटरटेनमेंट]], ड्रीम वारियर पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-tabu-starrer-bholaa-remake-kaithi-released-march-30-2023/|title=Ajay Devgn and Tabu starrer Bholaa, remake of Kaithi, to be released on March 30, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |गैसलाइट |पवन कृपलानी |विक्रांत मैसी सारा अली ख़ान चित्रांगदा सिंह |टिप्स इंडस्ट्रीज़, 12th स्ट्रीट एंटरटेनमेंट, डिज़्नी+ हॉटस्टार | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | कलाकार ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="8" style="text-align: center;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align: center;" |7 | style="text-align: center;" |गुमराह |वर्धन केटकर |आदित्य रॉय कपूर , रोनित रॉय |टी सीरीज फिल्म्स | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मिसेज़ अंडरकवर |अनुश्री मेहता |राजेश शर्मा , सुमीत व्यास |जी 5 | |- | style="text-align: center;" |सर मैडम सरपंच |प्रवीण मोरछले |सीमा बिस्वास , ज्योति दुबे |संकल प्रोडक्शंस इंटरनेशनल | |- | style="text-align: center;" |पिंकी ब्यूटी पार्लर |अक्षय सिंह |अक्षय सिंह , खुशबू गुप्ता |पेन स्टूडियोज़ | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" | '''21''' | style="text-align:center;" | ''[[किसी का भाई किसी की जान]]'' | फरहाद सामजिक |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[पूजा हेगड़े]]|[[वेंकटेश (अभिनेता)|वेंकटेश]]|[[जगपति बाबू]]}} | [[सलमान खान फिल्म्स]], [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/breaking-tiger-3-kisi-ka-bhai-kisi-ki-jaan-also-postponed-salman-khan-starrer-release-cinemas-eid-2023/|title=BREAKING: After Tiger 3, Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan also postponed; Salman Khan-starrer to release in cinemas on Eid 2023|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |[[चंगेज़]] |राजेश गांगुली |[[जीत (अभिनेता)|जीत]], सुष्मिता चटर्जी, [[रोहित रॉय]], सराफ फिगर | | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |28 |बेड बॉय |राजकुमार संतोषी |नामाशी चक्रवर्ती , अमरीन कुरैशी |इनबॉक्स पिक्चर्स | |- |यू-टर्न |अरिफ़ ख़ान |अलाया एफ , प्रियंशु पैन्युली |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |<big>मई</big> | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |मदर टेरेसा एंड मी |कमल मुसले |दीप्ति नवल , जैकलीन फिट्ची-कोर्नाज़ |करी वेस्टर्न मूवीज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अफ़वाह | style="text-align: center;" |सुधीर मिश्रा |नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी , भूमि पेडनेकर |बनारस मीडिया वर्क्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द केरला स्टोरी | style="text-align: center;" |सुदिप्तो सेन | style="text-align: center;" |आदा शर्मा , योगिता बिहानी |सनशाइन पिक्चर्स | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[यारियां २|यारियां 2]]'' |{{Hlist|[[राधिका राव]]|[[विनय सप्रू]]}} |{{Hlist|[[दिव्या खोसला कुमार]]|[[पर्ल वी पुरी]]|[[मीजान जाफरी]]|[[यश दासगुप्ता]]|[[अनसवारा राजन]]||[[प्रिया प्रकाश वारियर]] |वरीना हुसैन}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज फिल्म्स]], बीएलएम पिक्चरर्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/pearl-v-puri-priya-varrier-meezaan-jafri-others-roped-yaariyan-2-release-summer-2023/|title=Divya Khosla Kumar, Pearl V Puri, and Meezaan Jafri roped for Yaariyan 2; film to release in Summer 2023|date=12 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | '''26''' | style="text-align:center;" | ''[[स्वातंत्र्य वीर सावरकर (फिल्म)|स्वतंत्र वीर सावरकर]]'' | [[रणदीप हुड्डा]] |{{Hlist|[[रणदीप हुड्डा]]|[[अंकिता लोखंडे]]}} | आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स, लीजेंड स्टूडियोज | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/randeep-hooda-takes-director-swatantra-veer-savarkar-begins-shooting/|title=Randeep Hooda takes over as director of Swatantra Veer Savarkar; begins shooting|date=3 October 2022|work=[[बॉलीवुड हँगामा]]|access-date=16 October 2022}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''2''' | style="text-align:center;" | ''[[जवान (फ़िल्म)|जवान]]'' | एटली |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[नयनतारा]]|[[विजय सेतुपति]]|[[प्रियमणि]]|[[सान्या मल्होत्रा]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/watch-shah-rukh-khan-jawan-atlees-next-directorial-release-june-2-2023/|title=Shah Rukh Khan in and as Jawan in Atlee’s next directorial; to release on June 2, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=3 June 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |'''16''' | style="text-align: center;" |''आदिपुरुष'' | style="text-align: center;" |ओम राउत |{{Hlist|[[प्रभास]]|[[सैफ अली खान]]|[[कृति सेनन]]|[[सनी सिंह (अभिनेता)|सनी सिंह]]}} |[[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], रेट्रोफाइल्स | |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''29''' | style="text-align:center;" | ''[[सत्यप्रेम की कथा]]'' | समीर विदवान |{{Hlist|[[कार्तिक आर्यन]]|[[कियारा आडवाणी]]}} | [[नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट]], नमः पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/bollywood/satyaprem-ki-katha-starring-kartik-aaryan-kiara-advani-to-release-on-29th-june-2023-11119781.html|title=‘Satyaprem Ki Katha’ starring Kartik Aaryan & Kiara Advani to release on 29th June 2023|website=Firstpost|access-date=26 August 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;" | ''[[ड्रीम गर्ल 2]]'' | राज शांडिल्य |{{Hlist|[[आयुष्मान खुराना]]|[[अनन्या पांडे]]|[[अन्नू कपूर]]|[[परेश रावल]]|[[विजय राज]]|[[मनोज जोशी (अभिनेता)|मनोज जोशी]]|[[राजपाल यादव]]|[[असरानी]]|[[सीमा पाहवा]]|[[मनजोत सिंह]]|[[अभिषेक बनर्जी (अभिनेता)|अभिषेक बनर्जी]]}} | [[बालाजी मोशन पिक्चर्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ayushmann-khurrana-ananya-panday-headline-dream-girl-2-set-release-june-29-2023-watch-announcement-video/|title=Ayushmann Khurrana and Ananya Panday to headline Dream Girl 2; set to release on June 29, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=16 September 2022}}</ref> |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" | जुलाई |7 |नीयत |अनु मेनन |विद्या बालन, राम कपूर, राहुल बोस |अबुंडेंटिया एंटरटेनमेंट, रिडल फ़िल्म्स, अमेज़न स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | |तरला |पियूष गुप्ता |हुमा क़ुरैशी, शरीब हाशमी |आरएसवीपी मूवीज़,अर्थस्काई पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |ब्लाइंड |शोम मखीजा |सोनम कपूर, पूरब कोहली |जियो स्टूडियोज़,कनाई | |- | style="text-align: center;" | | |72 हूरें |संजय पूरन सिंह चौहान |'''सारू मैनी, आमिर बशीर,रशीद नाज़''' |सार्थी ई एंटरटेनमेंट, एलियंस पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | |14 |इश्क़-ए-नादान |अविषेक घोष |लारा दत्ता, नीना गुप्ता, कंवलजीत सिंह |एवीएमए मीडिया, जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | |21 |बवाल |नितेश तिवारी |वरुण धवन,जान्हवी कपूर |अर्थस्काई पिक्चर्स, नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | |ट्रायल पीरियड |अलेया सेन |जेनेलिया देशमुख, मानव कौल,शक्ति कपूर |जियो स्टूडियोज़,क्रोम पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | |माइनस 31: द नागपुर फ़ाइल्स |प्रतीक मोइत्रो |शिवांकित सिंह परिहार, रघुबीर यादव,राजेश शर्मा |ऑरेंजपिक्सल स्टूडियोज़ प्राइवेट लिमिटेड प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | |अजमेर 92 |पुष्पेंद्र सिंह |करण वर्मा, राजेश शर्मा, सयाजी शिंदे |रिलायंस एंटरटेनमेंट, यू एंड के एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | |28 |रॉकी और रानी की प्रेम कहानी |करण जौहर |रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, जया बच्चन |वायकॉम18 स्टूडियोज़, धर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | |वन फ्राइडे नाइट |मनीष गुप्ता |रवीना टंडन,मिलिंद सोमन |जियो स्टूडियोज़,जियोसिनेमा | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |4 | style="text-align: center;" |पंच कृति |सन्नजॉय भार्गव |बृजेंद्र काला, उमेश बाजपेई,सागर वाही |उबोन विज़न प्राइवेट लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लफ़्ज़ों में प्यार |राजा रणदीप गिरी,धीरज मिश्रा |अनीता राज, ज़रीना वहाब, विवेक आनंद मिश्रा |मोनार्क फ़िल्म | |- | rowspan="7" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" | <big>अगस्त</big> | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''11''' | style="text-align:center;" | ''जानवर'' | [[संदीप रेड्डी|संदीप रेड्डी वांगा]] |{{Hlist|[[रणबीर कपूर]]|[[रश्मिका मंदाना]]|[[अनिल कपूर]]|[[बॉबी देओल]]}} | [[टी-सीरीज़|टी-सीरीज]], सिने1 स्टूडियोज, भद्रकाली पिक्चर्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-and-parineeti-chopra-s-animal-to-release-on-aug-11-2023-1878664-2021-11-19|title=Ranbir Kapoor and Parineeti Chopra’s Animal to release on Aug 11, 2023|website=India Today|access-date=19 November 2021}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/rashmika-mandanna-replaces-parineeti-chopra-joins-cast-sandeep-reddy-vanga-ranbir-kapoors-animal/|title=Rashmika Mandanna replaces Parineeti Chopra; joins the cast of Sandeep Reddy Vanga and Ranbir Kapoor’s Animal|website=Bollywood Hungama|access-date=2 April 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग़दर 2 | style="text-align: center;" |अनिल शर्मा |सनी देओल, अमीषा पटेल |ज़ी स्टूडियोज़, अनिल शर्मा प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओएमजी 2 | style="text-align: center;" |अमित राय | style="text-align: center;" |अक्षय कुमार, यामी गौतम,पंकज त्रिपाठी |वायकॉम18 स्टूडियोज़, केप ऑफ गुड फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''15''' | style="text-align:center;" | ''तारिक'' | अरुण गोपालन | [[जॉन अब्राहम]] | जेए एंटरटेनमेंट, बेक माई केक फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |घूमर | style="text-align: center;" |आर बाल्की |अभिषेक बच्चन,सैयामी खेर, शबाना आज़मी |होप प्रोडक्शंस,सरस्वती एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |नॉन स्टॉप धमाल | style="text-align: center;" |इरशाद ख़ान | style="text-align: center;" |अन्नू कपूर, राजपाल यादव, आस्रानी |त्रियोम फ़िल्म्स | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''22''' | style="text-align:center;" | ''भाइयों 2'' | [[करण मल्होत्रा]] | [[अक्षय कुमार]] | [[धर्मा प्रोडक्शन्स|धर्मा प्रोडक्शंस]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-announces-new-film-tariq-film-set-release-independence-day-2023/|title=John Abraham announces new film Tariq; film set to release on Independence Day 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=15 August 2022}}</ref> |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |ड्रीम गर्ल 2 |राज शांडिल्य |आयुष्मान खुराना, अनन्या पांडे, अन्नू कपूर |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" | <big>सितम्बर</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''5''' | style="text-align:center;" | ''शिक्षक दिवस की मुबारक'' | मिखिल मुसाले |{{Hlist|[[निम्रत कौर]]|[[राधिका मदन]]}} | मैडॉक फिल्म्स | <ref>{{Cite news|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/nimrat-kaur-radhika-madan-star-dinesh-vijans-social-thriller-happy-teachers-day-film-release-september-5-2023/|title=Nimrat Kaur and Radhika Madan to star in Dinesh Vijan’s social thriller Happy Teacher’s Day; film to release on September 5, 2023|date=5 September 2022|work=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2022}}</ref> |- | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | '''28''' | style="text-align:center;" | ''योद्धा'' | [[सिद्धार्थ आनन्द|सिद्धार्थ आनंद]] |{{Hlist|[[ऋतिक रोशन]]|[[दीपिका पादुकोण]]|[[अनिल कपूर]]}} | मार्फ्लिक्स पिक्चर्स, [[वायकॉम 18 मोशन पिक्चर्स|वायकॉम18 स्टूडियोज]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/hrithik-roshan-deepika-padukone-starrer-fighter-now-release-september-28-2023/|title=Hrithik Roshan and Deepika Padukone starrer Fighter to now release on September 28, 2023|website=Bollywood Hungama|access-date=10 March 2022}}</ref> |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" | '''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" | '''निर्देशक''' ! style="width:30%;" | ''' कलाकार''' ! स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) ! संदर्भ। |- | rowspan="17" style="text-align: center;" |<big>अक्टूबर</big> | rowspan="2" |5 | style="text-align: center;" |दोनों |अवनीश एस. बरजात्या |राजवीर देओल , पालोमा |जिओ स्टूडियोज़ , राजश्री प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" |ख़ुफ़िया |विशाल भारद्वाज |तबू , अली फ़ज़ल |नेटफ्लिक्स | |- | rowspan="3" |6 | style="text-align: center;" | मिशन रानीगंज |टीनू सुरेश देसाई |अक्षय कुमार , परिणीति चोपड़ा |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | ''थैंक यू फॉर कमिंग'' |करन बूलानी |भूमि पेंडनेकर, करन कुंदर्रा |बालाजी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" |यात्री |हरीश व्यास |रघुबीर यादव, सीमा पाहवा |अकिओन एंटेरटैनमेंट | |- | rowspan="4" |13 | style="text-align: center;" |धक् धक् |तरुण डुडएजा |रत्न पाठक, सन शैक |वियकों 18 स्टूडियो | |- | style="text-align: center;" |गुठली लड्डू |इशरत र खान |संजय मिश्रान हीट शर्मा |यू वी फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" |डरन छू |भरत रत्न |करन पटेल, मनोज जोशी |मार्क मूवी | |- | style="text-align: center;" |भगवान भरोसे |शिलादित्य |विनय पाठक, सतेन्द्र सोनी |प्लाटून वन फिल्म्स | |- | rowspan="2" |20 | style="text-align: center;" |''गणपत'' |विकास बही |अमिताभ बच्चन,कीर्ति सनों |पूजा एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |यारियाँ 2 |राधिका राव |दिव्या खोंसिया कुमार,आणस्वर राजन |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | |- | rowspan="6" |27 | style="text-align: center;" |12वीं फेल |विधु विनोद चोपड़ा |विक्रांत मैसी, मेधा शंकर, प्रियांशु चटर्जी, हरीश खन्ना |ज़ी स्टूडियोज़, विनोद चोपड़ा फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |तेजस |सर्वेश मेवाड़ा |कंगना रनौत |आर एस वी पी मूवीज | |- | style="text-align: center;" |साजिनी शिंदे का वायरल वीडियो |मिकील मूसले |निमरत कौर, सुबोध भावे |मदड़ोकक फिल्म्स | |- | style="text-align: center;" | मुजीब: द मेकिंग ऑफ़ अ नेशन |श्याम बेनेगल |अरिफिन शुवू, दीपक अंटनी |नैशनल फिल्म देवेलोपमेंट | |- | style="text-align:center;" | ''[[प्यार की पॉलिसी]]'' | सुधीश कुमार शर्मा |{{Hlist|जॉली भाटिया|मनोज बक्शी|मेघा सक्सेना|विकास गिरी|गिरिश थापर|सनी प्रजापति}} | केपीएस फ़िल्म्स, अपान फिल्म्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.cbfcindia.gov.in/cbfcAdmin/search-result.php?recid=Q0EwNTI5MDgyMDIzMDAwMjQ=|title=CBFC {{!}} Search Film|website=www.cbfcindia.gov.in|access-date=2025-12-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |मंडली |राकेश चतुर्वेदी ओम |अभिषेक दुहान , रजनीश डुग्गल | रिल्टिक पिक्चर्स | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |<big>नवम्बर</big> | rowspan="7" |3 | style="text-align: center;" |आँख मिचोली |उमेश शुक्ला |अभिमन्यु दस्सानी , मृणाल ठाकुर |सोनी पिक्चर्स इंडिया | |- | style="text-align: center;" |द लेडी किलर |अजय बहल |अर्जुन कपूर ,भूमि पेडनेकर |कर्मा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" |लकीरें |दुर्गेश पाठक |अशुतोष राणा ,बिदिता बाग |इमेज एंड क्रिएशन | |- | style="text-align: center;" |हुकुस बुकुस |विनय भारद्वाज, सौमित्र सिंह |दर्शील सफारी अरुण गोविल |शाइनिंग सन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |यूटी 69 |शाहनवाज़ अली |राज कुंद्रा , कुमार सौरभ |एसवीएस स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |थ्री ऑफ़ अस |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |नीना कुलकर्णी, मिमी चक्रवर्ती |विंडोज़ प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" |शास्त्री विरुद्ध शास्त्री |शिबोप्रसाद मुखर्जी, नंदिता रॉय |परेश रावल, शिव पांडित |वायाकॉम18 स्टूडियोज़ | |- |10 | style="text-align: center;" |पिप्पा |राजा कृष्ण मेनन |इशान खट्टर, मृणाल ठाकुर | RSVP मूवीज़ | |- | style="text-align:center; background:#dbfff8; textcolor:#000;" | '''12''' | style="text-align:center;" | ''[[टाइगर 3]]'' | मनीष शर्मा |{{Hlist|[[सलमान खान]]|[[कैटरीना कैफ]]|[[इमरान हाशमी]]}} | [[यश राज फ़िल्म्स|यश राज फिल्म्स]] | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/salman-khan-announces-tiger-3-postponed-diwali-2023-unveils-first-poster/|title=Salman Khan announces Tiger 3 postponed to Diwali 2023, unveils first poster|date=15 October 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=15 October 2022}}</ref> |- |15 | style="text-align: center;" |अपूर्वा | style="text-align: center;" |निखिल नागेश भाट | style="text-align: center;" | तारा सुतारिया, अभिषेक बनर्जी |स्टार स्टूडियोज़ | |- |17 | style="text-align: center;" |खिचड़ी 2: मिशन पांथुकिस्तान | style="text-align: center;" |आतिश कपाड़िया | style="text-align: center;" | सुप्रिया पाठक, राजीव मेहता | style="text-align: center;" |Hats Off प्रोडक्शंस | style="text-align: center;" | |- |18 | style="text-align: center;" |सब मोह माया है | style="text-align: center;" |अभिनव पारीक | style="text-align: center;" |शर्मन जोशी, अन्नू कपूर | style="text-align: center;" | वेदा फिल्म फैक्ट्री | style="text-align: center;" | |- | rowspan="2" |24 | style="text-align: center;" |फर्रे | style="text-align: center;" |सौमेंद्र पाधी | style="text-align: center;" |अलिज़ेह अग्निहोत्री, ज़ैन शॉ | style="text-align: center;" |सलमान खान फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | style="text-align: center;" |स्टारफिश | style="text-align: center;" |अखिलेश जायसवाल | style="text-align: center;" |खुशाली कुमार, मिलिंद सोमन | style="text-align: center;" |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स | style="text-align: center;" | |- | | | style="text-align:center;" | ''100%'' | [[साजिद खान (निर्देशक)|साजिद खान]] |{{Hlist|[[जॉन अब्राहम]]|[[रितेश देशमुख]]|[[नोरा फतेही]]|[[शहनाज गिल]]}} | [[टी-सीरीज़]], एसोसिएशन मीडिया द्वारा दोषी | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/john-abraham-riteish-deshmukh-nora-fatehi-shehnaaz-gill-star-come-together-100/|title=John Abraham, Riteish Deshmukh, Nora Fatehi, and Shehnaaz Gill to star in come together for 100%|website=India Today|access-date=29 August 2022}}</ref> |- | rowspan="5" |<big>दिसम्बर</big> |8 | style="text-align: center;" |''[[जोराम (फ़िल्म)|जोराम]]'' |देवाशीष मखीजा |[[मनोज बाजपेयी]], तन्निष्ठा चटर्जी और स्मिता तांबे |ज़ी स्टूडियो, मखीजा फ़िल्म |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/joram/|title=Joram Movie: Review {{!}} Release Date (2023) {{!}} Songs {{!}} Music {{!}} Images {{!}} Official Trailers {{!}} Videos {{!}} Photos {{!}} News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2023-12-08|language=en|access-date=2025-11-13}}</ref> |- | |कडक सिंघ | style="text-align: center;" |अनिरुद्ध रॉय चौदहूरी |पंकज त्रिपाठी, दिलीप संकर |फर्स्ट स्टेप फिल्म | |- | |मस्त में रहने का |विजय मौर्य | style="text-align: center;" |जैकी श्रॉफफ, नीना गुप्ता |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- |15 |कैसी ये डोर |रत्न नीलम पांडे |निखिल पांडे, रत्न नीलम पांडे | style="text-align: center;" | | |- |21 | style="text-align:center;" | ''[[डंकी (फ़िल्म)|डंकी]]'' | [[राजकुमार हिरानी]] |{{Hlist|[[शाहरुख खान]]|[[विक्की कौशल]]|[[तापसी पन्नू]]}} | [[रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट|रेड चिलीज एंटरटेनमेंट]], राजकुमार हिरानी फिल्म्स | <ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shah-rukh-khan-taapsee-pannus-film-director-rajkumar-hirani-titled-dunki-release-december-22-2023/|title=Shah Rukh Khan and Taapsee Pannu’s film with director Rajkumar Hirani titled Dunki; to release on December 22, 2023|date=19 April 2022|website=Bollywood Hungama|access-date=19 April 2022}}</ref> |- | |22 | style="text-align: center;" |ड्राई डे |सौरभ शुक्ला |जितेंद्र कुमार अनु कपूर |अमेज़न एमजीएम स्टूडियोज़ | |- | |26 | style="text-align: center;" |खो गए हम कहां |अर्जुन वरैन सिंह |आदर्श गौरव सिद्धांत चतुर्वेदी |रिलायंस एंटरटेनमेंट | |- | |29 | style="text-align: center;" |सफेद |संदीप सिंह |अभय वर्मा मीरा चोपड़ा |लेजेंड स्टूडियोज़ | |} == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] gt3xpygq5qn2fftpazvj4ugdhes5uwi अर्जुन सरजा 0 1424093 6536691 6515354 2026-04-05T19:49:37Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536691 wikitext text/x-wiki {{Infobox person|name=अर्जुन सरजा|image=Arjun Sarja (1).jpg|caption=2019 में सरजा|birth_name=श्रीनिवास सर्जा|birth_date=<!--Birthdate must be attributed to a reliable published source with an established reputation for fact-checking. No blogs. No IMDb. No public records. 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let me experiment at least now|date=22 June 2017|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=3 May 2018}}</ref> वह भारत के कई राज्यों से प्रशंसकों को आकर्षित करने वाले कुछ [[दक्षिण भारत|दक्षिण भारतीय]] अभिनेताओं में से एक हैं। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehansindia.com/posts/index/Tollywood/2017-05-30/Actor-Arjun-crosses-a-new-milestone/303451|title=Actor Arjun crosses a new milestone|date=30 May 2017|work=[[The Hans India]]|access-date=3 May 2018}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.telugucinema.com/news/arjun-allu-arjuns-next-movie|title=Arjun in Allu Arjun's next movie!|date=27 March 2017|work=[[Telugu Cinema]]|access-date=3 May 2018|archive-date=3 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180503180455/http://www.telugucinema.com/news/arjun-allu-arjuns-next-movie|url-status=dead}}</ref> उन्होंने 12 फिल्मों का निर्देशन किया है और कई फिल्मों का निर्माण और वितरण भी किया है। <ref>{{Cite news|url=http://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2018/feb/04/as-a-director-i-should-be-open-to-directing-all-genres-arjun-sarja-1768357.html|title=As a director, I should be open to directing all genres: Arjun Sarja|work=[[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]]|access-date=9 June 2018}}</ref> 1993 में, उन्होंने [[एस॰ शंकर|एस. शंकर]] की ब्लॉकबस्टर ''[[जेंटलमैन (1993 फ़िल्म)|जेंटलमैन]]'' में अभिनय किया, जिसे सकारात्मक समीक्षा मिली, जबकि अर्जुन ने [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार जीता]] । <ref>{{Cite news|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-03-16/news-interviews/28004178_1_dream-role-versatile-actor-arjun|title=Arjun all set|last=Vijayakumar|first=Sindhu|date=16 March 2009|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=5 February 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20121104055403/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2009-03-16/news-interviews/28004178_1_dream-role-versatile-actor-arjun|archive-date=4 November 2012}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/regional/news-interviews/Arjun-all-set/articleshow/4266988.cms|title=Arjun|last=Vijayakumar|first=Sindhu|date=16 March 2009|work=The Times of India}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://www.hindu.com/cp/2007/09/14/stories/2007091450020100.htm|title=Arjun's avatars|date=14 September 2009|work=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20121110041211/http://www.hindu.com/cp/2007/09/14/stories/2007091450020100.htm|archive-date=10 November 2012|location=Chennai, India}}</ref> इस समय के दौरान, उन्होंने ''[[जय हिंद (1994 फ़िल्म)|जय हिंद]]'' (1994), करना (1995), और एक्शन थ्रिलर फिल्म ''[[करना|कुरुधिपुनल]]'' (1995) जैसी ''[[कुरुथिपुनल (फिल्म)|हिट]]'' फिल्मों में अभिनय किया, जिसके लिए अर्जुन को उनकी भूमिका के लिए प्रशंसा मिली, जबकि फिल्म <ref name="S. Shiva Kumar">{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/silver-screens-valiant-hero/article2815490.ece|title=Silver screen's valiant hero|last=S. Shiva Kumar|date=2012-01-20|work=The Hindu|access-date=2014-08-05}}</ref> के लिए [[ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टियों की सूची|भारत की आधिकारिक प्रविष्टि]] बन गई। [[सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार|सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म]] श्रेणी में [[68वें अकादमी पुरस्कार]] । <ref name="C V Aravind">{{Cite news|url=http://www.deccanherald.com/content/333181/donning-different-roles.html|title=Donning different roles|last=C V Aravind|date=19 May 2013|work=Deccan Herald|access-date=19 June 2013|agency=DHNS}}</ref> <ref name="webcache.googleusercontent.com">{{Cite web|url=https://imsports.rediff.com/style/apr/03sriram.htm|title=Rediff on the Net, Life/Style: The silence that speaks|date=9 October 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171009093138/https://imsports.rediff.com/style/apr/03sriram.htm|archive-date=9 October 2017}}</ref> <ref name="Indiaglitz.com">{{Cite web|url=http://www.indiaglitz.com/channels/tamil/article/56083.html|title=Jai Hind-II from Arjun - Tamil Movie News|date=2010-04-12|website=IndiaGlitz.com|access-date=2014-08-05|archive-date=13 अप्रैल 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20100413224103/http://www.indiaglitz.com/channels/tamil/article/56083.html|url-status=dead}}</ref> 1999 में, उन्होंने राजनीतिक एक्शन-थ्रिलर, ''[[मुधलवन]]'' (1999) में अभिनय किया, जिसने उन्हें उनकी भूमिका के साथ-साथ कई अन्य नामांकन [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार]] दिया। उसके बाद उन्हें [[वसंत]] की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ''[[रिदम (2000 फ़िल्म)|रिदम]]'' में दिखाया गया, जहां उन्होंने एक फोटोग्राफर की भूमिका निभाई, जिसे अंततः एक विधवा से प्यार हो जाता है। एक लोकप्रिय साउंडट्रैक और सकारात्मक समीक्षाओं की शुरुआत के साथ, ''रिदम'' भी एक व्यावसायिक सफलता बन गई। <ref name="Rhythm: Movie Review">{{Cite web|url=http://www.indolink.com/tamil/cinema/Reviews/articles/Rhythm_142548.html|title=Rhythm: Movie Review|publisher=Indolink.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924034603/http://www.indolink.com/tamil/cinema/Reviews/articles/Rhythm_142548.html|archive-date=24 September 2015|access-date=2014-08-05}}</ref> अर्जुन ने द्विभाषी फिल्म ''[[श्री मंजूनाथ (फिल्म)|श्री मंजूनाथ]]'' (2001) और तेलुगु फिल्म ''[[हनुमान जन्कशन|हनुमान जंक्शन]]'' (2001) में अभिनय किया। 2012 में, वह कन्नड़ फिल्म ''[[प्रसाद (2012 फिल्म)|प्रसाद]]'' में दिखाई दिए, जिसे [[बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|बर्लिन फिल्म फेस्टिवल]] में प्रदर्शित किया गया था। <ref name="Prasad Movie Review">{{Cite web|url=http://www.supergoodmovies.com/41825/sandalwood/prasad-movie-review-movie-review-details|title=Prasad Movie Review|date=2012-03-23|publisher=Supergoodmovies.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20140413144152/http://www.supergoodmovies.com/41825/sandalwood/prasad-movie-review-movie-review-details|archive-date=13 April 2014|access-date=2014-08-05}}</ref> उन्होंने फिल्म में अपने काम के [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार|लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार जीता]] । बहुभाषी फिल्म ''[[जयहिंद 2|अभिमन्यु]]'' (2014) ने [[दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार|दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार जीता]] । <ref name="th1">{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/bangalore/film-awards-a-balance-between-main-and-independent-filmmaking-streams/article8230707.ece|title=Film awards: a balance between main and independent film-making streams|last=Khajane|first=Muralidhara|date=13 February 2016|work=The Hindu}}</ref> == व्यक्तिगत जीवन == सरजा का जन्म अभिनेता [[शक्ति प्रसाद]] से हुआ था, <ref>{{Cite news|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-10-13/did-you-know-/34430812_1_black-belt-kannada-film-actor-arjun-sarja|title=Arjun holds a black belt in Karate|date=13 October 2012|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=10 May 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20140202170113/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-10-13/did-you-know-/34430812_1_black-belt-kannada-film-actor-arjun-sarja|archive-date=2 February 2014}}</ref> और उनकी मां लक्ष्मी थीं, जो एक कला शिक्षिका थीं। उनके एक बड़े भाई किशोर सरजा थे, जिन्होंने कन्नड़ फिल्मों का निर्देशन किया था। <ref>{{Cite web|url=http://www.rediff.com/movies/report/kishore-sarja-a-talent-wasted/20090629.htm|title=Kishore Sarja: A talent wasted|date=29 June 2009|publisher=Rediff|access-date=19 June 2013}}</ref> अर्जुन ने हमेशा एक पुलिस अधिकारी बनने के बारे में सोचा और सपना देखा था लेकिन उसका भाग्य उसे बिल्कुल अलग दिशा में ले गया। <ref name="Action King Arjun">{{Cite news|url=https://www.behindwoods.com/tamil-actors/arjun/an-exclusive-interview-with-action-king-arjun.html|title=Action King Arjun|work=BehindWoods|access-date=3 May 2018}}</ref> अर्जुन [[हनुमान]] के प्रबल भक्त हैं। वह चेन्नई के बाहरी इलाके में हनुमान मंदिर बना रहा है। भगवान अंजनेय की 35 फुट की मूर्ति विशेष रूप से मंदिर के लिए बनाई गई थी और हनुमान की मूर्ति बैठी मुद्रा में है और इसका वजन लगभग 140 टन है। हनुमान प्रतिमा की बैठी हुई मुद्रा भारत में अपनी तरह की पहली है। एक पत्थर की मूर्ति 35 फीट ऊंची और 12 फीट चौड़ी और 7 फीट मोटी है। <ref name="Action King Arjun2">{{Cite news|url=https://www.behindwoods.com/tamil-actors/arjun/an-exclusive-interview-with-action-king-arjun.html|title=Action King Arjun|work=BehindWoods|access-date=3 May 2018}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.indiaglitz.com/arjun-builds-a-hanuman-temple-tamil-news-80644.html|title=Arjun builds a Hanuman temple|work=indiaglitz|access-date=3 May 2018}}</ref> उनके भतीजे [[चिरंजीवी सरजा]] और [[ध्रुव सरजा]] ने कन्नड़ फिल्मों में अभिनय किया है। <ref>{{Cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-17/news-interviews/38587116_1_arjun-sarja-duniya-vijay-chiranjeevi-sarja|title=Siblings galore in Sandalwood|date=17 April 2013|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20130421064159/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-17/news-interviews/38587116_1_arjun-sarja-duniya-vijay-chiranjeevi-sarja|archive-date=21 April 2013|access-date=19 June 2013}}</ref> अर्जुन के एक और भतीजे भरत सर्जा ने 2014 में अभिनय की शुरुआत की। <ref>{{Cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-04/news-interviews/32535957_1_kishore-sarja-film-arjun|title=It's films for another Sarja boy|last=Joy|first=Prathibha|date=4 July 2012|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20140202170107/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-07-04/news-interviews/32535957_1_kishore-sarja-film-arjun|archive-date=2 February 2014|access-date=19 June 2013}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://bangaloremirror.indiatimes.com/entertainment/reviews/bharat-sarja-ravishankar-rekha-avinash-raju-talikote-padma-vasanti/articleshow/34212053.cms?|title=Movie review: Veera pulikeshi|last=Shyam Prasad S|website=Bangalore Mirror}}</ref> [[ब्रूस ली]] की 1973 की फिल्म ''[[दैत्य में प्रवेश करो|एंटर द ड्रैगन]]'' से प्रेरित सरजा ने 16 साल की उम्र में [[कराटे]] का प्रशिक्षण शुरू किया <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/photo-features/Tamil-celebs-who-didnt-want-to-act/photostory/48953635.cms?mobile=no|title=Tamil celebs who didn't want to act|work=Times of India|access-date=11 October 2020}}</ref> और अब एक ब्लैक बेल्ट रखती हैं। <ref>{{Cite news|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-10-13/did-you-know-/34430812_1_black-belt-kannada-film-actor-arjun-sarja|title=Arjun holds a black belt in Karate still he supports LTTE group and a follower of prabhakaran|date=13 October 2012|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|access-date=19 June 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20140202170113/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-10-13/did-you-know-/34430812_1_black-belt-kannada-film-actor-arjun-sarja|archive-date=2 February 2014|agency=TNN}}</ref> उन्होंने 1988 में [[निवेदिता अर्जुन]] से शादी की, जो एक पूर्व अभिनेत्री थीं, जो 1986 की [[कन्नड़ भाषा|कन्नड़]] फिल्म ''[[रथ सप्तमी]]'' में आशा रानी के मंच नाम के तहत दिखाई दी थीं। कन्नड़ अभिनेता [[राजेश (कन्नड़ अभिनेता)|राजेश]] उनके ससुर हैं। <ref>{{Cite web|url=http://www.indiaglitz.com/channels/kannada/article/76245.html|title=Rajesh honarary doctorate|date=4 January 2012|website=IndiaGlitz|archive-url=https://web.archive.org/web/20131004222112/http://www.indiaglitz.com/channels/kannada/article/76245.html|archive-date=4 October 2013|access-date=19 June 2013}}</ref> सरजा की दो बेटियां हैं, ऐश्वर्या और अंजना। <ref>{{Cite web|url=http://www.nilacharal.com/enter/celeb/arj.html|title=Nilacharal}}</ref> [[ऐश्वर्या अर्जुन]] ने 2013 में अभिनय की शुरुआत की। <ref>{{Cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-29/news-interviews/38903029_1_pattathu-yaanai-boopathy-pandian-daughter-aishwarya|title=Aishwarya Arjun faints on the sets|date=29 April 2013|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20130513094843/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-04-29/news-interviews/38903029_1_pattathu-yaanai-boopathy-pandian-daughter-aishwarya|archive-date=13 May 2013|access-date=19 June 2013}}</ref> == अभिनय कैरियर == === 1981-1991: प्रारंभिक कैरियर और सफलता === अर्जुन के पिता [[शक्ति प्रसाद]], कन्नड़ फिल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता, नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक अभिनेता बने और अर्जुन को एक किशोर के रूप में मिलने वाली फिल्मों के प्रस्तावों को ठुकरा दिया। एक आश्चर्यजनक कदम में, फिल्म निर्माता [[राजेंद्र सिंह बाबू]] अर्जुन को शक्ति प्रसाद की अनुमति के बिना अपने प्रोडक्शन हाउस के लिए एक फीचर फिल्म की शूटिंग शुरू करने के लिए मनाने में कामयाब रहे और इसके परिणामस्वरूप, उनके पिता अर्जुन की करियर पसंद पर सहमत हुए। फिल्म ''[[सिंहदा मारी सैंया|सिम्हदा मारी सैंया]]'' (1981) में उन्हें एक जूनियर कलाकार के रूप में दिखाया गया था और फिल्म के निर्देशक ने उन्हें उनके मूल नाम अशोक बाबू की जगह अर्जुन का मंच नाम दिया था। <ref name="co">{{Cite web|url=http://www.chennaionline.com/interviews/arjun.asp|title=An enjoyable conversation with Arjun|website=Chennai Online|archive-url=https://web.archive.org/web/20040824235837/http://www.chennaionline.com/interviews/arjun.asp|archive-date=24 August 2004|access-date=2017-09-05}}</ref> जब उन्होंने खुद को कन्नड़ फिल्मों में स्थापित करना शुरू किया, तो उन्हें अभिनेता-निर्माता [[एवीएम राजन]] और निर्देशक [[राम नारायणन]] से एक तमिल फिल्म ''[[नंदरी]]'' (1984) करने का प्रस्ताव मिला। इसके साथ ही उन्हें तेलुगु में एक तेलुगु फिल्म, [[कोडी रामकृष्ण]] की ''[[मां पल्लेलो गोपालुडु|माँ पल्लेलो गोपालुडु]]'' (1985) की भी पेशकश की गई, जो तीन केंद्रों में एक साल तक चलने वाली एक बड़ी सफलता रही। एक अभिनेता के रूप में उनका करियर 1980 के दशक के मध्य में शुरू हुआ और उन्होंने कभी-कभी एक दिन में सात पारियों तक काम किया ताकि वे उन फिल्मों को पूरा कर सकें जिन्हें उन्होंने करने के लिए प्रतिबद्ध किया था। <ref name="co2">{{Cite web|url=http://www.chennaionline.com/interviews/arjun.asp|title=An enjoyable conversation with Arjun|website=Chennai Online|archive-url=https://web.archive.org/web/20040824235837/http://www.chennaionline.com/interviews/arjun.asp|archive-date=24 August 2004|access-date=2017-09-05}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/92756.html|title=Kodi Ramakrishna- Arjun's 'Rani Ranamma' launch|date=15 April 2013|website=IndiaGlitz|access-date=19 June 2013|archive-date=20 जुलाई 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130720221516/http://www.indiaglitz.com/channels/telugu/article/92756.html|url-status=dead}}</ref> तेलुगू में, उन्होंने ''नागा देवता'' (1986) और ''मनावदोस्तुनाडु'' (1987) जैसी फिल्मों में भूमिकाओं के साथ खुद को एक विश्वसनीय अभिनेता के रूप में स्थापित किया। तमिल में, इस अवधि के दौरान उनकी सफल फिल्मों में ''[[शंकर गुरु (1987 फ़िल्म)|शंकर गुरु]]'' (1987), ''[[थाईमेल अनाई|थाईमेल अनाई (1988), वेट्टाइयाडु विलाय्याडु]]'' ''('' 1989) और ''[[सोंथाकरन|सोंथक्करन]]'' (1989) शामिल हैं। 1990 तक, उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस मूल्य खो दिया और वे लगभग एक साल के लिए तमिल और तेलुगु फिल्मों में काम से बाहर हो गए। <ref>{{Cite web|url=http://tmcafe.com/interview/arjun/arjun_interview.htm|title=Tamil Movie Cafe (Tmcafe.com) -Interview with Tamil Movie Actor, Action King Arjun|date=|website=Tamil Movie Cafe|archive-url=https://web.archive.org/web/20010702190308/http://tmcafe.com/interview/arjun/arjun_interview.htm|archive-date=2001-07-02|access-date=2021-07-22}}</ref> === 1992-2001: व्यावसायिक सफलता और आलोचनात्मक प्रशंसा === 1992 में, उन्होंने बाद में अपनी फीचर फिल्म ''[[सेवगन|सेवागन]]'' को निर्देशित करने के लिए चुना। <ref>{{Cite web|url=https://news.google.com/newspapers?id=rmJlAAAAIBAJ&pg=342,1267659|title=The Indian Express - Google News Archive Search|website=news.google.com}}</ref> इसके तुरंत बाद, [[एस॰ शंकर|शंकर]] ने उन्हें अपनी पहली फिल्म, ''[[जेंटलमैन (1993 फ़िल्म)|जेंटलमैन]]'' (1993) में मुख्य भूमिका में लिया, बहुत मनाने के बाद। अर्जुन ने शुरू में शंकर के कथन को सुने बिना फिल्म को अस्वीकार कर दिया था, लेकिन निर्देशक की दृढ़ता ने उन्हें [[भ्रष्टाचार (आचरण)|भ्रष्टाचार]] के खिलाफ एक सतर्क व्यक्ति के रूप में फिल्म में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। फिल्म सकारात्मक समीक्षा के साथ खुली और तमिल फिल्म उद्योग में एक ट्रेंडसेटर बन गई, साथ ही बॉक्स ऑफिस पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की, जबकि अर्जुन ने [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राज्य पुरस्कार जीता]] । <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/silver-screens-valiant-hero/article2815490.ece|title=Silver screen's valiant hero - SouthKannada|last=Kumar|first=S. Shiva|date=20 January 2012|work=The Hindu|access-date=2017-09-05}}</ref> <ref name="C V Aravind2">{{Cite news|url=http://www.deccanherald.com/content/333181/donning-different-roles.html|title=Donning different roles|last=C V Aravind|date=19 May 2013|work=Deccan Herald|access-date=19 June 2013|agency=DHNS}}</ref> बॉक्स ऑफिस पर उनका भाग्य बदलना जारी रहा और अर्जुन ने अपनी देशभक्तिपूर्ण निर्देशन वाली फिल्म ''[[जय हिन्द (1994 फ़िल्म)|जय हिंद]]'' (1994) और ''[[करना]]'' (1995) सहित अपनी फिल्मों के बाद एक्शन फिल्मों में एक भरोसेमंद लीड स्टार के रूप में जमीन हासिल करना शुरू किया, जहां उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई। ब्लॉकबस्टर बनने के लिए। <ref>{{Cite web|url=http://www.indiaglitz.com/channels/tamil/article/56083.html|title=Cinema News &#124; Movie Reviews &#124; Movie Trailers|date=2017-09-01|website=IndiaGlitz|access-date=2017-09-05|archive-date=13 अप्रैल 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20100413224103/http://www.indiaglitz.com/channels/tamil/article/56083.html|url-status=dead}}</ref> [[कमल हासन]] ने एक्शन थ्रिलर फिल्म ''[[कुरुथिपुनल (फिल्म)|कुरुधिपुनल]]'' (1995) में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए अर्जुन से संपर्क किया और अभिनेता ने इस अवसर को स्वीकार किया और कहानी सुने बिना भी फिल्म करने के लिए तैयार हो गए। अर्जुन ने अपनी भूमिका के लिए सकारात्मक प्रशंसा प्राप्त की, जबकि फिल्म [[68वें अकादमी पुरस्कार]] [[सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार|सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म]] श्रेणी के लिए [[ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टियों की सूची|भारत की आधिकारिक प्रविष्टि]] बन गई। <ref name="webcache.googleusercontent.com2">{{Cite web|url=https://imsports.rediff.com/style/apr/03sriram.htm|title=Rediff on the Net, Life/Style: The silence that speaks|date=9 October 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171009093138/https://imsports.rediff.com/style/apr/03sriram.htm|archive-date=9 October 2017}}</ref> 1990 के दशक के अंत में, ''[[सेंगोट्टई (फिल्म)|सेंगोट्टई]]'' (1996) और ''[[थायिन मणिकोडी]]'' (1998) सहित एक्शन फिल्मों की एक श्रृंखला के बाद, उन्होंने राजनीतिक ड्रामा फिल्म ''[[मुधलवन]]'' (1999) में शंकर के साथ फिर से काम किया। एक महत्वाकांक्षी टीवी पत्रकार का किरदार निभाते हुए, जिसे एक दिन के लिए [[तमिल नाडु के मुख्यमंत्रियों की सूची|तमिलनाडु का मुख्यमंत्री]] बनने का अवसर मिलता है, अर्जुन ने शंकर को परियोजना को फिल्माने के लिए बड़ी तारीखों की पेशकश की। फिल्म ने बाद में अर्जुन के साथ सकारात्मक समीक्षा हासिल की, जिसे "चुनौतीपूर्ण भूमिका में खुद को आत्मविश्वास से बरी करने" के रूप में वर्णित किया गया। <ref name="cscsarchive.org">{{Cite web|url=http://www.cscsarchive.org:8081/MediaArchive/art.nsf/(docid)/E8880B73B7238248652569400065DD65|title=Cinema Reviews - The Hindu|date=25 July 2011|website=cscsarchive|archive-url=https://web.archive.org/web/20110725212236/http://www.cscsarchive.org:8081/MediaArchive/art.nsf/%28docid%29/E8880B73B7238248652569400065DD65|archive-date=25 July 2011}}</ref> अर्जुन को उनकी भूमिका के साथ-साथ कई अन्य नामांकन [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार]] मिला। अर्जुन ने फिर नरम भूमिकाओं में प्रयोग किया, [[प्रभु सोलोमन]] के ''[[कन्नोडु कंबथेलम]]'' (1999) में "शेड्स ऑफ़ ग्रे" के साथ व्यवसायी के समीक्षकों द्वारा प्रशंसित चरित्रों को चित्रित किया और ''[[वानविल]]'' (2000) में एक ऊर्जावान सिविल सेवा अधिकारी के रूप में। इसके बाद उन्होंने [[वसंत]] की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ''[[रिदम (2000 फ़िल्म)|रिदम]]'' (2000) में अभिनय किया, जहां उन्होंने एक फोटोग्राफर की भूमिका निभाई, जो अंततः एक अन्य विधुर के प्यार में पड़ जाता है। एक लोकप्रिय साउंडट्रैक और सकारात्मक समीक्षाओं की शुरुआत के साथ, ''रिदम'' भी एक व्यावसायिक सफलता बन गई, जिसमें एक आलोचक ने कहा कि "अर्जुन हमेशा की तरह पॉलिश है" और "जिसने इस विचार की कल्पना की होगी कि" एक्शन किंग "एक नरम स्वभाव का प्रयास कर सकता है" इस तरह की भूमिका"। <ref name="Rhythm: Movie Review2">{{Cite web|url=http://www.indolink.com/tamil/cinema/Reviews/articles/Rhythm_142548.html|title=Rhythm: Movie Review|publisher=Indolink.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924034603/http://www.indolink.com/tamil/cinema/Reviews/articles/Rhythm_142548.html|archive-date=24 September 2015|access-date=2014-08-05}}</ref> उन्होंने अपने अगले निर्देशकीय उद्यम, प्रेम कहानी ''[[वेधम]]'' (2001) में एक हल्के विषय के साथ काम किया, जबकि उन्होंने [[एम राजा|राजा]] के ''[[हनुमान जन्कशन|हनुमान जंक्शन]]'' और ''[[श्री मंजूनाथ (फिल्म)|श्री मंजुनाथ]]'' (2001) में एक हिंदू भक्त के रूप में फिर से तेलुगु सिनेमा में प्रवेश किया। === 2002-2010: कार्य भूमिकाएँ और प्रयोग === "एक्शन किंग" की छवि ने उन्हें शहर और गांव के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया, जिन्होंने अभिनेता की लड़ाई और स्टंट दृश्यों की सराहना की। इस प्रकार उन्होंने एक्शन फिल्मों में विशेषज्ञता के लिए सक्रिय रूप से चुना, अक्सर उन निर्देशकों के साथ सहयोग करते थे जो [[सुंदर सी]], [[ए वेंकटेश (निदेशक)|वेंकटेश]] और [[सेल्वा (निदेशक)|सेल्वा]] जैसे विशेषज्ञ थे। 2000 के दशक के मध्य में, वह एक ही आधार के साथ कई एक्शन फिल्मों में दिखाई दिए, जिसमें अक्सर एक पुलिस अधिकारी या एक स्थानीय अच्छा करने वाले का किरदार निभाया जाता था। उन्होंने ''[[एझुमलाई]]'' (2002) और ''[[परशुराम (फिल्म)|परशुराम]]'' (2003) दोनों एक्शन फिल्मों का निर्देशन और अभिनय किया, जबकि [[एन महाराजन|महाराजन]] की ''[[अरासाची]]'' (2004) में भी शामिल थे। उनकी कुछ फिल्में, ''[[गिरि (फिल्म)|गिरी]]'' (2004) और ''[[मरुधमलाई]]'' (2007), बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं, उनकी कई परियोजनाएं सफल नहीं रहीं, जिनमें ''[[मद्रासी (2006 फ़िल्म)|मद्रासी]]'' (2006), ''[[वाथियार]]'' (2006) और ''[[दुरई (फिल्म)|दुरई]]'' (2008) शामिल हैं, जिनमें से सभी में उन्हें सफलता मिली। कहानीकार. <ref>{{Cite web|url=http://www.sify.com/movies/tamil/interview.php?id=11717550&cid=2408|title=Welcome to|date=2007-01-20|website=Sify.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20140427191631/http://www.sify.com/movies/tamil/interview.php?id=11717550&cid=2408|archive-date=2014-04-27|access-date=2014-08-05}}</ref> 2000 के दशक में किसी भी महत्वपूर्ण हिट फिल्मों को प्राप्त नहीं करने के बावजूद, निर्माता अक्सर अर्जुन को "न्यूनतम गारंटी" अभिनेता के रूप में मानते थे और महसूस करते थे कि भारत के चार दक्षिणी राज्यों के बाद उनके बड़े प्रशंसक डब संस्करणों के माध्यम से भी पैसा वसूल करने में मदद करेंगे। <ref>{{Cite web|url=http://www.hindu.com/fr/2010/06/11/stories/2010061150640100.htm|title=Friday Review Chennai : Start! Camera! Arjun!|date=2010-06-11|website=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20100617073336/http://www.hindu.com/fr/2010/06/11/stories/2010061150640100.htm|archive-date=17 June 2010|access-date=2017-09-05}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://www.telugucinema.com/c/publish/moviereviews/koti.php|title=Movie review: Koti|date=28 April 2009|website=Telugu Cinema|archive-url=https://web.archive.org/web/20090428164849/http://www.telugucinema.com/c/publish/moviereviews/koti.php|archive-date=28 April 2009}}</ref> दशक में उनके लिए एक दुर्लभ प्रयोगात्मक फिल्म में, उन्होंने [[कृष्ण वामसी]] की भक्ति फिल्म ''[[श्री अंजनयम|श्री अंजनेयम]]'' (2004) में हिंदू देवता [[हनुमान]] की भूमिका निभाई और देवता के स्वयं-स्वीकार किए गए उपासक के रूप में पारिश्रमिक प्राप्त किए बिना फिल्म पर काम किया। <ref>{{Cite web|url=http://www.idlebrain.com/srianjaneyam/index.html|title=Telugu cinema director Krishna Vamsi on Telugu Movie Sri Anjaneyam|date=2004-04-11|publisher=Idlebrain.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20040421042955/http://idlebrain.com/srianjaneyam/index.html|archive-date=21 April 2004|access-date=2014-08-05}}</ref> === 2011-वर्तमान: चरित्र भूमिकाएं और हालिया परियोजनाएं === दशक के मोड़ के बाद से, अर्जुन ने अपनी "एक्शन किंग" की छवि से दूर जाने का प्रयास किया और फिल्मों में अभिनय करने के लिए स्वीकार किया, जहां वह प्रतिपक्षी या सहायक भूमिका निभाएगा, फिल्म समीक्षकों से प्रशंसा प्राप्त करने के साथ। <ref>{{Cite web|url=http://www.newindianexpress.com/entertainment/tamil/article325060.ece|title=I'm not the villain in 'Kadal': Arjun|publisher=The New Indian Express|access-date=2017-09-05}}</ref> 2011 में, अर्जुन ने [[वेंकट प्रभु]] की एक्शन थ्रिलर ''[[मनकथा]]'' में [[अजित कुमार]] के साथ अभिनय करने का अवसर स्वीकार किया, आलोचकों ने ब्लॉकबस्टर में एक पुलिस अधिकारी के रूप में उनके प्रदर्शन की प्रशंसा की। <ref>{{Cite web|url=http://www.sify.com/movies/mankatha-review-tamil-14978052.html|title=Review|date=2011-08-31|website=Sify.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20130629171600/http://www.sify.com/movies/mankatha-review-tamil-14978052.html|archive-date=2013-06-29|access-date=2017-09-05}}</ref> अगले वर्ष वह कन्नड़ फिल्म ''[[प्रसाद (2012 फिल्म)|प्रसाद]]'' में दिखाई दिए, जिसके लिए उन्होंने [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार|सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार जीता]] । एक बहरे और गूंगे बेटे के साथ एक मध्यमवर्गीय पिता को चित्रित करते हुए, अर्जुन ने कहा कि यह उनके लिए एक पुरस्कृत अनुभव था कि वह अपनी मानक भूमिकाओं की एकरसता को तोड़ दें और कुछ अलग करने का प्रयास करें, यह स्वीकार करते हुए कि वह स्क्रिप्ट से प्रेरित थे। फिल्म मार्च 2012 में सर्वसम्मति से सकारात्मक समीक्षा के लिए खुली और फिर [[बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|बर्लिन फिल्म महोत्सव]] में प्रदर्शित होने के लिए चुनी गई, आलोचकों ने अर्जुन के चित्रण को "आश्चर्यजनक प्रदर्शन" और उनके "करियर-सर्वश्रेष्ठ" के रूप में लेबल किया। <ref name="Prasad Movie Review2">{{Cite web|url=http://www.supergoodmovies.com/41825/sandalwood/prasad-movie-review-movie-review-details|title=Prasad Movie Review|date=2012-03-23|publisher=Supergoodmovies.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20140413144152/http://www.supergoodmovies.com/41825/sandalwood/prasad-movie-review-movie-review-details|archive-date=13 April 2014|access-date=2014-08-05}}</ref> अर्जुन ने ''[[कदल (2013 फिल्म)|कडल]]'' (2013) के साथ [[मणिरत्नम्|मणिरत्नम]] के साथ सहयोग किया, जिसमें अभिनेता ने तटीय [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] में एक तस्कर की नकारात्मक भूमिका निभाई। जबकि फिल्म मिश्रित समीक्षाओं के साथ खुली और बॉक्स ऑफिस पर असफल हो गई, अर्जुन ने [[सिफ़ी|Sify.com]] के साथ अपने चित्रण के लिए समीक्षा [[द हिन्दू|की]] । <ref>{{Cite web|url=http://www.sify.com/movies/kadal-review-tamil-15019156.html|title=Review : Kadal|date=2013-02-01|website=Sify.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20130607004540/http://www.sify.com/movies/kadal-review-tamil-15019156.html|archive-date=2013-06-07|access-date=2017-09-05}}</ref> फिर ''[[अट्टाहास|उन्होंने कन्नड़ फिल्म अट्टाहसा]]'' [[वसंत|(]] [[के विजय कुमार|2013]] ) में एक वास्तविक जीवन के पुलिस अधिकारी के. रोमांस फिल्म, ''[[मूंदरू प्रति मूंदरू कदल]]'' (2013)। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-cinemaplus/from-kadal-to-kaadhal/article4447690.ece|title=From Kadal to Kaadhal - Delta|last=Rangarajan|first=Malathi|date=2013-02-24|work=The Hindu|access-date=2017-09-05}}</ref> उनके निर्देशकीय उद्यम, ''[[जय हिन्द 2|जय हिंद 2]]'' (2014) में भारतीय शिक्षा प्रणाली की गिरती स्थिति के बारे में एक संदेश था। फिल्म कन्नड़ में बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, जबकि तमिल और तेलुगु संस्करणों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। <ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/features/cinema/bright-spark/article4750098.ece|title=Bright spark|last=Nikhil Raghavan|date=2013-05-25|work=The Hindu|access-date=2014-08-05}}</ref> 2016 में, उन्होंने [[भारतिराजा|भारतीराजा]] की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित ''[[निदेशक का अंतिम कट|फ़ाइनल कट ऑफ़ डायरेक्टर]]'' (तमिल में ''बोम्मालट्टम'' के रूप में डब की गई) में एक यथार्थवादी पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई, जहाँ एक समीक्षक ने महसूस किया कि उनका "नरम, सूक्ष्म अभी तक अविश्वसनीय पुलिस का प्रदर्शन उल्लेखनीय था"। <ref>{{Cite web|url=http://www.hindu.com/fr/2008/12/19/stories/2008121950490200.htm|title=Friday Review Chennai / Film Review : The puppet shocks! - Bommalattam|date=2008-12-19|website=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201095422/http://www.hindu.com/fr/2008/12/19/stories/2008121950490200.htm|archive-date=1 February 2009|access-date=2017-09-05}}</ref> <ref>{{Cite web|url=http://www.hindu.com/fr/2008/12/19/stories/2008121950490200.htm|title=Archive News|last=Archive|date=2008-12-19|website=[[The Hindu]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20090201095422/http://www.hindu.com/fr/2008/12/19/stories/2008121950490200.htm|archive-date=2009-02-01|access-date=2017-09-05}}</ref> 2017 में, वह अपनी 150 वीं फिल्म ''[[निबुनन]]'' में दिखाई दिए, जो एक एक्शन थ्रिलर थी, जहां उन्होंने एक सीरियल किलर का शिकार करने वाले एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी। <ref>{{Cite web|url=https://bangaloremirror.indiatimes.com/entertainment/reviews/vismaya-movie-review-what-the-zodiac-wont-foretell/articleshow/59796892.cms|title=Vismaya movie review: What the zodiac won't foretell|website=Bangalore Mirror}}</ref> फिल्म ने सकारात्मक समीक्षा हासिल की, एक आलोचक ने कहा कि अर्जुन "फिट और ईमानदार अधिकारी के रूप में स्टाइलिश और सौम्य दिखते हैं, और उन्हें मिलने वाले कुछ एक्शन ब्लॉक में उत्कृष्टता प्राप्त करते हैं"। <ref name="timesofindia.indiatimes.com">{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movie-reviews/nibunan/movie-review/59768885.cms|title=Nibunan Review {3.5/5}: A thriller loaded with suspense, mystery, serial murders, sentiments, and more|via=timesofindia.indiatimes.com}}</ref> इसके बाद उन्होंने ''[[प्रेमा बरहा]]'' (2018) नामक एक द्विभाषी फिल्म का निर्देशन किया, जिसमें उनकी बेटी [[ऐश्वर्या अर्जुन]] ने प्रमुख भूमिका निभाई <ref>{{Cite web|url=http://www.newindianexpress.com/entertainment/review/2018/feb/09/prema-baraha-movie-review-love-stunts-and-lots-of-earnestness-1770918.html|title='Prema Baraha' movie review: Love, stunts and lots of earnestness|website=The New Indian Express|access-date=5 जनवरी 2023|archive-date=3 दिसंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181203055506/http://www.newindianexpress.com/entertainment/review/2018/feb/09/prema-baraha-movie-review-love-stunts-and-lots-of-earnestness-1770918.html|url-status=dead}}</ref> जबकि, कन्नड़ संस्करण ने अच्छा प्रदर्शन किया, तमिल संस्करण, ''सोल्लीविदवा'', बॉक्स ऑफिस पर किसी का ध्यान नहीं गया। <ref>{{Cite web|url=http://www.newindianexpress.com/entertainment/review/2018/feb/09/sollividava-movie-review-a-wannabe-dil-se-1770943.html|title='Sollividava' movie review: A wannabe Dil Se|website=The New Indian Express|access-date=5 जनवरी 2023|archive-date=2 दिसंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20181202202746/http://www.newindianexpress.com/entertainment/review/2018/feb/09/sollividava-movie-review-a-wannabe-dil-se-1770943.html|url-status=dead}}</ref> उन्होंने तेलुगु फिल्मों ''[[झूठ (फिल्म)|लाइ]]'' (2017) और ''[[सूर्य द सोल्जर|ना पेरू सूर्या, ना इलू इंडिया]]'' (2018) में अभिनय किया। <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanherald.com/entertainment/entertainment-news/arjun-sarja-to-play-the-villain-in-mahesh-babu-starrer-sarkaru-vaari-paata-reports-992068.html|title=Arjun Sarja to play the villain in Mahesh Babu-starrer 'Sarkaru Vaari Paata': Reports|date=31 May 2021}}</ref> ''[[इरुम्बु थिराई (2018 फिल्म)|इरुम्बु थिराई]]'' (2018) ने दर्शकों को एक अलग अर्जुन दिखाया। ''[[कोलाइगरन]]'' (2019) भी एक प्रदर्शन-उन्मुख फिल्म थी। <ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/tamil/2019/dec/26/interview--i-learned-acting-by-watching-sivaji-and-nagesh-films-says-arjun-2081098.html|title=INTERVIEW &#124; I learned acting by watching Sivaji and Nagesh films, says Arjun}}</ref> [[कर्ण]] के रूप में अर्जुन सरजा का प्रदर्शन फिल्म ''[[कुरुक्षेत्र (2019 फिल्म)|कुरुक्षेत्र]]'' (2019) का एक और आकर्षण है। <ref>{{Cite web|url=https://www.cinemaexpress.com/reviews/kannada/2019/aug/09/kurukshetra-movie-review-darshan-shines-in-a-seamless-retelling-of-mahabharata-13547.html|title=Kurukshetra Movie Review: Darshan shines in this seamless retelling of Mahabharata}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === पुरस्कार === * 1993&nbsp;- ''[[जेंटलमैन (1993 फ़िल्म)|जेंटलमैन]]'' के [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार]] {{Sfn|Dhananjayan|2011|pp=154–155}} * 1999&nbsp;- ''[[मुधलवन]]'' [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार|के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार]] <ref>{{Cite web|url=http://www.dinakaran.com/cinema/english/awards/29-12-00/state.htm|title=Tamilnadu Government Announces Cinema State Awards −1999|publisher=[[Dinakaran]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20010210034542/http://www.dinakaran.com/cinema/english/awards/29-12-00/state.htm|archive-date=2001-02-10|access-date=2009-10-20}}</ref> * 2011&nbsp;- सिल्वर स्क्रीन सनसनीखेज अभिनेता पुरस्कार <ref>{{Cite web|url=https://www.ragalahari.com/localevents/5232/winners-list-of-tsr-tv9-national-film-awards-2011-and-2012.aspx|title=Winners List of TSR-TV9 National Film Awards 2011 and 2012|website=www.ragalahari.com|language=en|access-date=2021-07-22}}</ref> * 2012&nbsp;- ''[[प्रसाद (2012 फिल्म)|प्रसाद]]'' के [[सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार|लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार]] * [[8वां विजय पुरस्कार|2013]]&nbsp;- [[सर्वश्रेष्ठ खलनायक के लिए विजय पुरस्कार]] - ''[[कदल (2013 फिल्म)|कदल]]'' * 2014&nbsp;- ''[[अभिमन्यु (2014 फिल्म)|अभिमन्यु]]'' के [[दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार|लिए दूसरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार]] <ref name="th12">{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/bangalore/film-awards-a-balance-between-main-and-independent-filmmaking-streams/article8230707.ece|title=Film awards: a balance between main and independent film-making streams|last=Khajane|first=Muralidhara|date=13 February 2016|work=The Hindu}}</ref> * 2019 - सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता - ''[[हीरो (2019 तमिल फिल्म)|हीरो]]'' [[नॉर्वे तमिल फिल्म महोत्सव पुरस्कार|के लिए नॉर्वे तमिल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड]] == आरोप == अक्टूबर 2018 में, [[मीटू आन्दोलन|MeToo]] आंदोलन के हिस्से के रूप में, अभिनेत्री [[श्रुति हरिहरन]] ने नवंबर 2015 में 2016 की फिल्म ''विस्मया (तमिल में निबुनन)'' के सेट पर अर्जुन सरजा पर दुराचार का आरोप लगाया, जहां वह अर्जुन सरजा की पत्नी की भूमिका निभा रही थीं। उनके आरोपों के बाद, अर्जुन सरजा ने उनके आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया और श्रुति हरिहरन के खिलाफ 5 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया। <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/regional/arjun-sarja-files-defamation-case-against-sruthi-hariharan-metoo-5418744/|title=Arjun Sarja files Rs 5 crore defamation suit against Sruthi Hariharan|date=27 October 2018|website=[[Indian Express]]|access-date=20 September 2021}}</ref> अर्जुन के मानहानि का मामला दर्ज होने के बाद, श्रुति हरिहरन ने कहानियों के एक नए सेट के साथ पुलिस में यौन उत्पीड़न का मामला दायर किया। बंगलौर पुलिस ने तुरंत इस मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट भी सौंपी। अपनी रिपोर्ट में, उन्होंने कहा कि उसके पक्ष में "कोई सबूत नहीं" था। इस जांच में, इस फिल्म के सभी क्रू सदस्यों ने कहा कि सेट पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी और निर्देशक [[अरुण वैद्यनाथन]], जिन्हें मामले में चश्मदीद के रूप में नामित किया गया था, ने कहा कि अर्जुन सरजा एक अच्छे इंसान हैं। उन्होंने कहा कि रोमांटिक सीन की स्क्रिप्ट शूटिंग से पहले ही फाइनल कर ली गई थी। निर्देशक के अनुसार, अर्जुन सरजा ने फिल्म निर्माता से फिल्म में रोमांटिक दृश्यों को कम करने के लिए कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि अर्जुन सरजा और श्रुति हरिहरन अच्छे दोस्त हैं और उन्होंने अर्जुन सरजा को सेट पर श्रुति के साथ दुर्व्यवहार करते हुए कभी नहीं देखा। <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/kannada/movies/news/metoo-movement-director-arun-vaidyanathan-says-arjun-sarja-is-a-nice-person/articleshow/66447888.cms|title=#MeToo movement: Director Arun Vaidyanathan says Arjun Sarja is a nice person - Times of India|date=31 October 2018|website=[[Indian Express]]|access-date=20 September 2021}}</ref> उसके खिलाफ अर्जुन का मानहानि का मामला अभी भी बेंगलुरु सिटी सिविल कोर्ट में लंबित है। == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:भारतीय अभिनेता]] d9sxu44r2go0eo470gunugl85lk7ne1 चौहरमल 0 1446202 6536757 6535265 2026-04-06T05:11:59Z ~2026-21077-67 919003 6536757 wikitext text/x-wiki " '''चौहरमल''' " या " '''वीर चौहरमल'''" एक भूमिहार जमींदार एवं दुसाध दासी के नाजायज पुत्र थे जिन्होंने भूमिहार जमींदारो के खिलाफ नीची जाति के लोगों को संगठित किया था। अंततः भूमिहार जमींदारो ने उसकी हत्या करवा दिया था जिसके कारण बहुजन समाज उन्हें अपना नायक मानने लगा। बहुजन समाज के वीर योद्धा, जो [[पासवान|दुसाध]](पासवान) जाति के सदस्य थे। बहुजन उन्हें अपना भगवान मानते हैं। यह दलित जाति के महान पुरुषों में से एक है। दुसाध लोककथाओं के भीतर चौहरमल की कहानी एक सशक्त संदेश है। जो [[दलित]] समुदाय को उच्च जाति पर जीत की भावना देती है। <ref name="Narayan 322">{{Citation|last=Narayan|first=Badri|title=Life as a Dalit: Views from the Bottom on Caste in India|url=https://books.google.com/books?id=tTAnAgAAQBAJ|page=317,319,326,328,329,330|year=2013|editor-last=Channa|editor-first=Subhadra Mitra|chapter=Documenting Dissent|publisher=Sage Publications India|isbn=978-8-13211-777-3|editor2-last=Mencher|editor2-first=Joan P.}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kmMFAAAAMAAJ|title=Folklore of Bihar|last=Roy Choudhury|first=Pranab Chandra|publisher=National Book Trust(Original from the University of Michigan)|year=1976|location=India|pages=108,109|access-date=2020-09-19}}</ref>{{पूजनीय ज्ञानसन्दूक|type=|image=File:Chauharmal.jpg|caption=|name=वीर चौहरमल|script_name=Devnagari.|script="चौहरमल"|Sanskrit_transliteration=|Kannada_script=|affiliation=गैर-ब्राह्मणवादी देवता।|god_of=|abode=|mantra=|weapon=तलवार और ढाल|consort=रेश्मा|mount=शेर}} == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:जाति]] [[श्रेणी:भारतीय लोक संस्कृति]] [[श्रेणी:भारत का लोकसाहित्य]] sk20ytjwj4f4qy33soxei5vyntdw160 6536760 6536757 2026-04-06T05:12:42Z ~2026-21077-67 919003 6536760 wikitext text/x-wiki " '''चौहरमल''' " या " '''वीर चुहारमल'''" एक भूमिहार जमींदार एवं दुसाध दासी के नाजायज पुत्र थे जिन्होंने भूमिहार जमींदारो के खिलाफ नीची जाति के लोगों को संगठित किया था। अंततः भूमिहार जमींदारो ने उसकी हत्या करवा दिया था जिसके कारण बहुजन समाज उन्हें अपना नायक मानने लगा। बहुजन समाज के वीर योद्धा, जो [[पासवान|दुसाध]](पासवान) जाति के सदस्य थे। बहुजन उन्हें अपना भगवान मानते हैं। यह दलित जाति के महान पुरुषों में से एक है। दुसाध लोककथाओं के भीतर चौहरमल की कहानी एक सशक्त संदेश है। जो [[दलित]] समुदाय को उच्च जाति पर जीत की भावना देती है। <ref name="Narayan 322">{{Citation|last=Narayan|first=Badri|title=Life as a Dalit: Views from the Bottom on Caste in India|url=https://books.google.com/books?id=tTAnAgAAQBAJ|page=317,319,326,328,329,330|year=2013|editor-last=Channa|editor-first=Subhadra Mitra|chapter=Documenting Dissent|publisher=Sage Publications India|isbn=978-8-13211-777-3|editor2-last=Mencher|editor2-first=Joan P.}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kmMFAAAAMAAJ|title=Folklore of Bihar|last=Roy Choudhury|first=Pranab Chandra|publisher=National Book Trust(Original from the University of Michigan)|year=1976|location=India|pages=108,109|access-date=2020-09-19}}</ref>{{पूजनीय ज्ञानसन्दूक|type=|image=File:Chauharmal.jpg|caption=|name=वीर चौहरमल|script_name=Devnagari.|script="चौहरमल"|Sanskrit_transliteration=|Kannada_script=|affiliation=गैर-ब्राह्मणवादी देवता।|god_of=|abode=|mantra=|weapon=तलवार और ढाल|consort=रेश्मा|mount=शेर}} == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:जाति]] [[श्रेणी:भारतीय लोक संस्कृति]] [[श्रेणी:भारत का लोकसाहित्य]] 9edwj4lq15qhi1gixc74zs2reri3qjx 6536762 6536760 2026-04-06T05:15:10Z ~2026-21077-67 919003 6536762 wikitext text/x-wiki " '''चौहरमल''' " या " '''वीर चुहारमल'''" एक भूमिहार जमींदार एवं दुसाध दासी के नाजायज पुत्र थे जिन्होंने भूमिहार जमींदारो के खिलाफ नीची जाति के लोगों को संगठित किया था। अंततः भूमिहार जमींदारो ने उसकी हत्या करवा दिया था जिसके कारण बहुजन समाज उन्हें अपना नायक मानने लगा। बहुजन समाज के वीर योद्धा, जो [[पासवान|दुसाध]](पासवान) जाति के सदस्य थे। बहुजन उन्हें अपना भगवान मानते हैं। यह दलित जाति के महान पुरुषों में से एक है। दुसाध लोककथाओं के भीतर चौहरमल की कहानी एक सशक्त संदेश है। जो [[दलित]] समुदाय को उच्च जाति पर जीत की भावना देती है। <ref name="Narayan 322">{{Citation|last=Narayan|first=Badri|title=Life as a Dalit: Views from the Bottom on Caste in India|url=https://books.google.com/books?id=tTAnAgAAQBAJ|page=317,319,326,328,329,330|year=2013|editor-last=Channa|editor-first=Subhadra Mitra|chapter=Documenting Dissent|publisher=Sage Publications India|isbn=978-8-13211-777-3|editor2-last=Mencher|editor2-first=Joan P.}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kmMFAAAAMAAJ|title=Folklore of Bihar|last=Roy Choudhury|first=Pranab Chandra|publisher=National Book Trust(Original from the University of Michigan)|year=1976|location=India|pages=108,109|access-date=2020-09-19}}</ref>{{पूजनीय ज्ञानसन्दूक|type=|image=File:Chauharmal.jpg|caption=|name=वीर चौहरमल|script_name=Devnagari.|script="चौहरमल - चुहारमल " चुहा खानेवाले|Sanskrit_transliteration=|Kannada_script=|affiliation=गैर-ब्राह्मणवादी देवता।|god_of=|abode=|mantra=|weapon=हंसिया एवं कुदाल|consort=रेश्मा खातुन ( कुरैशी मुस्लिम)|mount=गधा}} == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:जाति]] [[श्रेणी:भारतीय लोक संस्कृति]] [[श्रेणी:भारत का लोकसाहित्य]] 3ipixa5xn2lir2lzf331s6cvfkydy7q 6536766 6536762 2026-04-06T05:20:49Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) के अवतरण 6402815 पर पुनर्स्थापित : असत्य तथ्य हटाए 6536766 wikitext text/x-wiki " '''चौहरमल''' " या " '''चुहरमल''' " या " '''वीर चौहरमल''' " एक लोक नायक थे, बहुजन समाज के वीर योद्धा, जो [[पासवान|दुसाध]](पासवान) जाति के सदस्य थे। बहुजन उन्हें अपना भगवान मानते हैं। यह दलित जाति के महान पुरुषों में से एक है। दुसाध लोककथाओं के भीतर चौहरमल की कहानी एक सशक्त संदेश है। जो [[दलित]] समुदाय को उच्च जाति पर जीत की भावना देती है। <ref name="Narayan 322">{{Citation|last=Narayan|first=Badri|title=Life as a Dalit: Views from the Bottom on Caste in India|url=https://books.google.com/books?id=tTAnAgAAQBAJ|page=317,319,326,328,329,330|year=2013|editor-last=Channa|editor-first=Subhadra Mitra|chapter=Documenting Dissent|publisher=Sage Publications India|isbn=978-8-13211-777-3|editor2-last=Mencher|editor2-first=Joan P.}}</ref> <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kmMFAAAAMAAJ|title=Folklore of Bihar|last=Roy Choudhury|first=Pranab Chandra|publisher=National Book Trust(Original from the University of Michigan)|year=1976|location=India|pages=108,109|access-date=2020-09-19}}</ref>{{पूजनीय ज्ञानसन्दूक|type=बौद्ध|image=File:Chauharmal.jpg|caption=|name=चौहरमल|script_name=Devnagari.|script="चौहरमल"|Sanskrit_transliteration=|Kannada_script=|affiliation=गैर-ब्राह्मणवादी देवता।|god_of=|abode=|mantra=|weapon=तलवार और ढाल|consort=रेश्मा|mount=शेर}} == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:जाति]] [[श्रेणी:भारतीय लोक संस्कृति]] [[श्रेणी:भारत का लोकसाहित्य]] djwh93xnr5z4rien2dqbsxprv0xfuia भारत में पुलिस पद और प्रतीक चिन्ह 0 1457018 6536624 6516776 2026-04-05T15:38:57Z ~2026-20939-19 918933 6536624 wikitext text/x-wiki {{में विलय|भारत की पुलिस रैंक और प्रतीक चिह्न|date=अप्रैल 2025}} [[File:Ranks_of_Police_National_Police_Museum_New_Delhi_India.jpg|अंगूठाकार|260x260पिक्सेल|[[राष्ट्रीय पुलिस स्मारक|राष्ट्रीय पुलिस स्मारक और संग्रहालय]], नई दिल्ली में भारतीय पुलिस के विभिन्न रैंकों और उनकी संबंधित वर्दी का प्रदर्शन।]] भारत में, पुलिस बल को एक अधिकारी के रैंक और अधिकार को दर्शाने के लिए विभिन्न रैंकों और प्रतीक चिन्हों के साथ पदानुक्रम में व्यवस्थित किया जाता है। भारत में पुलिस रैंक और प्रतीक चिन्ह मुख्य रूप से ब्रिटिश प्रणाली पर आधारित हैं, जिसे औपनिवेशिक काल के दौरान अपनाया गया था। यह ध्यान देने योग्य है कि सटीक संरचना और पदनाम भारत में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच थोड़ा भिन्न हो सकते हैं, लेकिन समग्र पदानुक्रम समान रहता है। सभी एक पदानुक्रमित क्रम में व्यवस्थित हैं। == पुलिस पद या रैंक और पदनाम == सभी पुलिस अधिकारियों के रैंक, पद और पदनाम एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होते हैं क्योंकि कानून और व्यवस्था और पुलिस राज्य का मामला है। लेकिन, आम तौर पर निम्नलिखित पैटर्न देखा जाता है<ref>{{Cite web|url=https://raigadpolice.gov.in/marathi/htmldocs/police-rank.html|title=Raigad Police (Maharashtra State)|website=raigadpolice.gov.in|access-date=2023-09-25}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/career/police-rank-post-full-form-of-dgp-dig-ig-dsp-sp-sho-si-asi-ips-rank-posts-powers-7644773.html|title=DGP, SP से लेकर SHO तक, क्या आप जानते हैं पुलिस के पदों का फुल फॉर्म|date=2023-09-23|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-09-25}}</ref> {| border="1" |+पुलिस पद या रैंक और पदनाम, पद का प्रतीक चिन्ह |-style="color:yellow; background-color:#6644EE;" !पद |{{Center|'''प्रतीक चिन्ह'''}} |-style="font-style:color:#000066" |align="left"|[[पुलिस महानिदेशक]] (SI) {{Small|(अंग्रेजी में: '''डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस''')}} |[[File:Director General of Police.png|thumb|60px]] |- |[[अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक]] (एडीजीपी) {{Small|(अंग्रेजी में: एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस)}} |[[File:Director General of Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस महानिरीक्षक]] (आईजी) {{Small|(अंग्रेजी में: इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस)}} |[[File:Insignia of Inspector General of Police in India- 2013-10-02 16-14.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस उपमहानिरीक्षक]] (डीआईजी) {{Small|(अंग्रेजी में: डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस)}} |[[File:Deputy Inspector General of Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस अधीक्षक|वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक]] (एसएसपी)/ [[पुलिस उपायुक्त]] (डीसीपी) {{Small|(अंग्रेजी में; सीनियर सुपिरिटेंडेंट ऑफ पुलिस/डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस)}} |[[File:AP-Senior Superintendent of Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस अधीक्षक]] (एसपी)/ पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) {{Small|(अंग्रेजी में; सुपिरिटेंडेंट ऑफ पुलिस/डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस)}} |[[File:Superintendent of Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |अपर पुलिस अधीक्षक (Addl.SP)/ अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त(Addl.DCP) {{Small|(अंग्रेजी में; एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस/ एडिशनल डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस)}} |[[File:AP Add Superintendent of Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[सहायक पुलिस अधीक्षक]] (एएसपी) (ASP) {{Small|(अंग्रेजी में; असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस)}} |[[चित्र:ASP IPS.png|पाठ=Thumb|केंद्र|113x113पिक्सेल]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस उपाधीक्षक]] (डीएसपी/ डीवाईएसपी) [[सहायक पुलिस आयुक्त]] (एसीपी) {{Small|(अंग्रेजी में; डेप्युटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस/असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस)}} |[[File:Deupty_Superintendent_of_Police.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस निरीक्षक]] (पीआई) (PI) {{Small|(अंग्रेजी में; इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस)}} |[[File:Police Inspector insignia.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस उप निरीक्षक]] (एसआई) (SI) {{Small|(अंग्रेजी में; सब इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस)}} |[[File:Police Sub-Inspector.png|thumb|60px]] |- |[[पुलिस के सहायक उप निरीक्षक]] (एएसआई) (ASI) {{Small|(अंग्रेजी में; एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस)}} |[[File:Assistant Sub-Inspector.png|thumb|60px]] |-style="font-style:color:#000066" |align="left"|[[हेड कांस्टेबल]] (HC) (हवलदार) |[[File:AP-Police_Head_Constable.png|thumb|60px]] |-style="font-style:color:#000066" |align="left"|[[वरिष्ठ कांस्टेबल]] (SC) (लांस नायक) |[[File:AP Senior Police Constable.png|thumb|60px]] |- style="font-style:color:#000066" | align="left" |[[पुलिस कांस्टेबल]] (PC) |'''''कोई प्रतीक नहीं''''' |} * [[पुलिस आयुक्त]] का पद अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रैंक के अधिकारियों के पास होता है। उदाहरण के लिए, यह केवल [[दिल्ली]] और [[मुम्बई|मुंबई]] में डीजीपी रैंक के अधिकारियों के पास है। [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]], [[गुरुग्राम|गुड़गांव]], [[लुधियाना]] शहरों के पुलिस आयुक्त का पद [[पुलिस महानिरीक्षक]] का होता है । संबंधित राज्य सरकार शहर के महत्व के अनुसार पुलिस आयुक्त का पद तय करेगी। इसलिए पुलिस कमिश्नर एक रैंक नहीं बल्कि एक पद है. इसलिए पुलिस कमिश्नर कोई रैंक नहीं है. यह एक पोस्ट है. * भारत में विशेष रूप से महाराष्ट्र पुलिस में सहायक पुलिस निरीक्षक का पद होता है। [[सहायक पुलिस निरीक्षक]] (एपीआई) महाराष्ट्र पुलिस में एक अराजपत्रित पुलिस अधिकारी रैंक है। यह पुलिस उप-निरीक्षक (पीएसआई) के पद से ऊपर और पुलिस निरीक्षक के पद से नीचे है। * एसडीपीओ, सीओ, एसएचओ, सीआई, टीआई, एसडीओपी कोई पुलिस रैंक नहीं है, बल्कि यह एक पद है ** एसडीपीओ: "'''सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर'''", [[पुलिस उपाधीक्षक]] (DSP) स्तर का एक पुलिस अधिकारी होता है, जो एक पुलिस उपखंड का प्रमुख होता है।एक पुलिस उपविभाग के अधिकार क्षेत्र में कई पुलिस स्टेशन होते हैं. इस पद को भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, उदाहरण के लिए [[मध्य प्रदेश पुलिस|मध्य प्रदेश]] में '''एसडीओपी''' (SDOP), [[उत्तर प्रदेश पुलिस|उत्तर प्रदेश]] और [[राजस्थान पुलिस|राजस्थान]] में '''सीओ''' (CO). ** सर्किल ऑफिसर: "Circle Officer" (CO) सर्किल ऑफिसर पुलिस उपखंड के प्रमुख का पदनाम है। सर्कल ऑफिसर का रैंक [[पुलिस उपाधीक्षक]] (DSP) होता है। एक पुलिस उपविभाग में कई थाना होते हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में इसे इसी नाम से जाना जाता है. ** सर्किल इंस्पेक्टर: "Circle Inspector" (सीआई) एक पुलिस सर्किल का प्रमुख होता है। भारत में कुछ राज्यों में पुलिस उप-विभागों के अंतर्गत पुलिस सर्कल हैं। एक पुलिस सर्किल में दो या तीन थाने होते हैं। इन पुलिस सर्कल का नेतृत्व [[पुलिस निरीक्षक]] रैंक के अधिकारी द्वारा किया जाता है ** एसएचओ:"[[थाना प्रभारी]]" अंग्रेजी में "[[स्टेशन हाउस अफ़सर|स्टेशन हाउस ऑफिसर]]" एक थाना का प्रमुख होता है। बड़े शहरों के पुलिस स्टेशनों में एसएचओ [[पुलिस निरीक्षक|पुलिस इंस्पेक्टर]] रैंक का अधिकारी होता है। ग्रामीण इलाकों के थानों में एसएचओ सब इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी होता है। स्टेशन हाउस ऑफिसर का मतलब पुलिस स्टेशन का प्रभारी अधिकारी या प्रमुख होता है। ==पदानुक्रम== '''अधिकारियों''' *पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) (DGP) *अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) *पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) (IG) *पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) *वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) {{Small|(Selection Grade)}} *पुलिस अधीक्षक (एसपी) (SP) *अपर पुलिस अधीक्षक (Addl.SP) *सहायक एसपी (ASP) ([[भारतीय पुलिस सेवा|आईपीएस]]) या डिप्टी एसपी (DSP) (राज्य पुलिस सेवा) '''अधीनस्थ''' *पुलिस निरीक्षक (PI) *पुलिस उप निरीक्षक (SI) *पुलिस के सहायक उप निरीक्षक (ASI) *हेड कांस्टेबल (HC) *वरिष्ठ कांस्टेबल (SC) *कांस्टेबल (सिपाही) (PC) ==राज्य पुलिस बल== {{Indian State Police Officer Ranks}} *[[केरल पुलिस]] *[[तमिल नाडु पुलिस]] *[[कर्नाटक पुलिस]] *[[आंध्र प्रदेश पुलिस]] *[[तेलंगाना पुलिस]] *[[महाराष्ट्र पुलिस]] *[[गोवा पुलिस]] *[[मध्य प्रदेश पुलिस]] *[[उत्तर प्रदेश पुलिस]] *[[उत्तराखंड पुलिस]] *[[पश्चिम बंगाल पुलिस]] *[[राजस्थान पुलिस]] *[[दिल्ली पुलिस]] *[[गुजरात पुलिस]] *[[पंजाब पुलिस (भारत)]] *[[झारखण्ड पुलिस]] *[[ओडिशा पुलिस]] *[[जम्मू कश्मीर पुलिस]] *[[हिमाचल प्रदेश पुलिस]] == संदर्भ == [[श्रेणी:पुलिस]] tsgjvbu6ogwdesbwfhe6mcu5k4fizhv भगवा लव ट्रैप 0 1462794 6536730 6517950 2026-04-06T01:38:05Z ~2026-21091-54 918981 ये लेख हिन्दू के खिलाफ है जिसमें एक काम इस्लाम के लोग करें तो ठीक और हिन्दू करे तो गलत दिखाया है. इसलिए कुछ संशोधन किए गए है 6536730 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|listed=yes|date=जून 2023}} '''भगवा लव ट्रैप''' [[भारत]] में सोशल मीडिया चर्चाओं और सार्वजनिक प्रवचन में इस्तेमाल होने वाले एक शब्द को संदर्भित करता है, विशेष रूप से हिंदू पुरुषों की कथित घटना के बारे में जो मुस्लिम महिलाओं को अंततः उन्हें [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] में परिवर्तित करने के इरादे से रिश्तों में "लुभाने" का प्रयास करते हैं। यह शब्द "[[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]]" की विवादास्पद अवधारणा के साथ समानता रखता है, जो दावा करता है कि मुस्लिम पुरुष भ्रामक तरीकों से हिंदू महिलाओं को परिवर्तित करना चाहते हैं पर संस्कारिक दृष्टि से देखा जाए तो कहना अनुचित है क्योंकि हिन्दू विवाह एकल विवाह में विश्वास रखता है । == इतिहास == "भगवा लव ट्रैप"<ref name="Digital 2023">{{Cite web|url=https://www.timesnowhindi.com/videos/shows/rashtravad/rashtravad-love-jihad-bhagwa-love-trap--video-100707188|title=Rashtravad : Love Jihad को लेकर था सवाल, कुछ बोल नहीं पाए तो करने लगे 'Bhagwa Love Trap' का जिक्र|date=2 June 2023|website=Times Now Navbharat|language=hi|trans-title=Rashtravad: The question was about Love Jihad, could not say anything then started mentioning 'Bhagwa Love Trap'|access-date=2 June 2023}}</ref> की अवधारणा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया, जहाँ विभिन्न पदों ने मुस्लिम महिलाओं को आकर्षित करने का प्रयास करने वाले हिंदू पुरुषों द्वारा कथित "खतरे" के बारे में जागरूकता बढ़ाने की माँग की।<ref name="GHindi 2023">{{Cite web|url=https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या होता है Bhagwa Love Trap Kya Hai|last=Hindi|first=Gorakhpur|date=19 April 2023|website=Gorakhpur Hindi » Gorakhpur News In Hindi|access-date=2 June 2023|archive-date=2 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230602200111/https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|url-status=dead}}</ref> इस आख्यान के समर्थक अक्सर सबूत के तौर पर कुछ हिंदुत्व समूहों और नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और भाषणों का हवाला देते हैं।<ref name="Singh 2023">{{Cite web|url=https://mobilenews24x7.com/2023/featured/bhagwa-love-trap-takes-a-menacing-shape-in-india/|title='Bhagwa Love Trap' takes a menacing shape in India|last=Singh|first=D.N.|date=31 May 2023|website=Mobile News 24x7 English|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023">{{Cite web|url=https://www.thequint.com/news/india/muslim-woman-harassed-doxed-by-muslim-men-bhagwa-love-trap|title=Muslim Women Seen with Hindu Men Harassed, Doxed - All In the Name of 'Bhagwa Love Trap'|last=Khan|first=Fatima|date=31 May 2023|website=TheQuint|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Dainik Bhaskar 2023">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/woman-filed-a-case-on-behalf-of-a-hindu-organization-distributed-outside-the-mosque-131321254.html|title='बहन तू भगवा लव ट्रैप में ना फंसना': इंदौर में बांटे विवादित पर्चे; बजरंग दल-RSS पर 10 लाख लड़कियों का धर्म बदलवाने का आरोप|date=24 May 2023|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> उदाहरण के लिए, २०१७ में [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] के एक सहयोगी समूह [[हिन्दू जागरण मंच|हिंदू जागरण मंच]] ने "[[विश्व हिंदू परिषद|बेटी बचाओ, बहू लाओ]]" नामक एक अभियान शुरू किया, जो हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं से शादी करने के लिए प्रोत्साहित किया। समूह ने दावा किया कि यह आने वाले महीनों में २,१०० ऐसे जोड़ों की शादियों को सुविधाजनक बनाएगा, इसे "लव जिहाद" का मुकाबला करने और "जनसंख्या नियंत्रण" को बढ़ावा देने के उपाय के रूप में तैयार किया जाएगा।<ref name="Khan 2023"/> मार्च २०२३ में हिंदुत्व नेता काजल हिंदुस्तानी ने [[राम नवमी|रामनवमी]] के अवसर पर गुजरात में एक भड़काऊ भाषण दिया, जिसमें हिंदू पुरुषों से शादी करने वाली मुस्लिम महिलाओं के कथित लाभों पर प्रकाश डाला गया। हिंदुस्तानी को बाद में उनके भाषण के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/why-kajal-hindusthanis-arrest-is-a-message-against-hate-speech-in-bjp-ruled-gujarat-2358617-2023-04-11|title=Why Kajal Hindusthani's arrest is a message against hate speech in BJP-ruled Gujarat|last=Shah|first=Jumana|date=11 April 2023|website=India Today|access-date=2 June 2023}}</ref> === लव जिहाद === [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] यह है कि जिसमें मुस्लिम पुरुष विवाह तक अपनी धार्मिक पहचान को छुपाकर हिंदू महिलाओं को परिवर्तित करने के लिए एक व्यवस्थित अभियान में संलग्न हैं या ये कह सकते हैं कि इस्लाम के अनुयायियों की जनसंख्या में बढ़ोतरी के लिए चलाया जाने वाला एक अभियान है। == विवाद == "भगवा लव ट्रैप" शब्द "लव जिहाद" कथा के एक कथित उलट के रूप में उभरा,<ref>{{Cite web|url=https://deshduniyatoday.com/bhagwa-love-trap/|title=Bhagwa Love Trap: 'लव जिहाद' के बाद देश में जन्मा 'भगवा लव ट्रैप' का मुद्दा, इंदौर में किसी मुस्लिम संगठन ने मुस्लिम लड़कियों को कथित 'भगवा लव ट्रैप' से बचने की अपील तो अपील कर्ताओं पर मामला हुआ दर्ज|date=24 May 2023|website=Deshduniyatoday.com|language=hi|trans-title=Bhagwa Love Trap: After 'Love Jihad', the issue of 'Saffron Love Trap' arose in the country, a Muslim organization in Indore appealed to Muslim girls to avoid the alleged 'Saffron Love Trap', a case was registered against the appellants|access-date=3 June 2023}}</ref> यह दावा करते हुए कि हिंदू लड़के मुस्लिम लड़कियों को आकर्षित करने के लिए मुसलमानों के रूप में पेश करते हैं और अंततः उन्हें हिंदू धर्म में परिवर्तित कर देते हैं। हालाँकि, मुस्लिम समुदाय के भीतर व्यक्तियों द्वारा किए गए इन दावों को प्रमाणित करने के लिए विश्वसनीय डेटा या सत्यापन योग्य स्रोतों की कमी है।<ref>{{Cite web|url=https://techly360.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या है / Bhagwa Love Trap Kya Hai?|date=5 May 2023|website=Techly360.com|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023"/><ref name="Navbharat Times">{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/indore/mp-minister-usha-thakur-statement-on-bhagwa-love-trap-when-muslim-girls-choose-hindus-as-their-life-partners/articleshow/100528917.cms|title=मुस्लिम लड़कियां जब हिंदुओं को अपना जीवन साथी चुनतीं हैं तो... भगवा लव ट्रैप को लेकर क्‍या बोलीं मंत्री उषा ठाकुर|date=26 May 2023|website=Navbharat Times|language=hi|trans-title=MP Minister Usha Thakur statement on bhagwa love trap when muslim girls choose hindus as their life partners|access-date=2 June 2023}}</ref> कुछ हिंदू संगठनों ने सार्वजनिक रूप से मुस्लिम लड़कियों के "दावे" का सुझाव देते हुए विचार व्यक्त किए हैं, जिसकी महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करने और देश में उनके भविष्य के बारे में मुस्लिम समुदाय के भीतर भय पैदा करने के लिए आलोचना की गई है। इसके अतिरिक्त, हिंदू व्यक्तियों के ऑनलाइन गतिविधियों में संलग्न होने के उदाहरण हैं, जैसे कि मुस्लिम लड़कियों की "नीलामी" करना, जिसकी निंदा की गई है। हालाँकि, मुस्लिम लड़कियों के कथित धर्मांतरण के पीछे एक बड़ी साजिश का अस्तित्व असत्यापित है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/> === प्रतिक्रियाएँ और परिणाम === कथित "भगवा लव ट्रैप" के जवाब में, मुस्लिम समुदाय ने लड़कियों की सतर्कता और निगरानी बढ़ाने के उपाय किए हैं, जिससे पुलिसिंग बढ़ गई है और कुछ मामलों में उत्पीड़न हुआ है।<ref name="कास्कर 2023">{{Cite web|url=https://thewirehindi.com/249982/bhagwa-love-trap-muslim-women-seen-with-hindu-men-harassed-attacked-love-jihad/|title=क्या 'भगवा लव ट्रैप' के नाम पर हो रहा है मुस्लिम युवतियों का उत्पीड़न?|last=कास्कर|first=ज़ीशान|date=1 June 2023|website=[[The Wire (India)|The Wire - Hindi]]|access-date=2 June 2023}}</ref> समुदाय के भीतर प्रसारित कुछ वीडियो और संदेश मुस्लिम माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे अपनी बेटियों की गतिविधियों पर नजर रखें, [[मोबाइल फ़ोन|मोबाइल फोन]] तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करें और अन्य धर्मों के व्यक्तियों के साथ बातचीत को रोकने के लिए केवल मुस्लिम स्कूलों में उनका नामाँकन कराएँ।<ref name="SabrangIndia 2023">{{Cite web|url=https://sabrangindia.in/article/there-bhagwasaffron-love-trap-muslim-girls|title=Is There A Bhagwa/Saffron Love Trap For Muslim Girls?|date=31 May 2023|website=SabrangIndia|access-date=2 June 2023}}</ref> मुस्लिम सतर्कता की घटनाओं के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ युवा मुस्लिम पुरुषों के समूहों ने गैर-मुस्लिम लड़कों की संगति में पाई जाने वाली मुस्लिम लड़कियों का सामना किया है। इन मुठभेड़ों के परिणामस्वरूप मौखिक दुर्व्यवहार, शारीरिक धमकी और कुछ मामलों में लड़कियों और उनके साथियों दोनों के खिलाफ हिंसा हुई है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/><ref name="Kumar 2022">{{Cite web|url=https://hindi.boomlive.in/fact-check/gurugram-suitcase-woman-body-found-fake-communal-claim-viral-fact-check-19653|title=Gurugram Suitcase Woman Murder Video is viral on social media with communal spin|last=Kumar|first=Runjay|date=20 October 2022|website=बूम|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ मुस्लिम महिलाओं के बहिष्कार और हाशिए पर जाने में योगदान करती हैं। इसके बजाय, वे शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने की वकालत करते हैं, जिससे उन्हें अपने रिश्तों के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है।<ref name="SabrangIndia 2023"/><ref name="Khan 2023"/> कुछ व्यक्तियों द्वारा नैतिक पुलिसिंग के उदाहरण, विशेष रूप से युवाओं के बीच, बढ़ते हुए देखे गए हैं। दक्षिणपंथी सामग्री सहित सोशल मीडिया ने भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने में भूमिका निभाई है जो हिंदू लड़कियों/महिलाओं को मुस्लिम लड़कों/पुरुषों से दोस्ती करने के खिलाफ सावधान करते हैं। [[मध्य प्रदेश]] के बड़वानी में २०२१ में एक कथित भगवा लव ट्रैप का मामला सामने आया है, जहाँ एक हिंदू लड़के पर एक मुस्लिम लड़की को झूठे प्रेम संबंध में फंसाने, जबरदस्ती मंदिर में शादी करने, उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाने और धर्म बदलने का दबाव बनाने का आरोप है. लड़की को प्रताड़ित करने के लिए मजबूर किया, आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए शिकायत दर्ज कराई।<ref name="Journo Mirror 2021">{{Cite web|url=https://journomirror.com/madhya-pradesh-bhupendra-forcibly-married-a-muslim-girl-by-taking-her-to-the-temple-also-pressurized-her-to-change-religion-along-with-her-companions/|title=मध्य प्रदेश: भूपेंद्र ने मुस्लिम लड़की को मंदिर में ले जाकर जबर्दस्ती शादी की, साथियों के साथ मिलकर धर्म बदलने के लिए भी दबाव बनाया|date=12 October 2021|website=Journo Mirror|trans-title=Madhya Pradesh: Bhupendra forced a Muslim girl to marry her by taking her to a temple, along with his friends also pressurized her to convert|access-date=3 June 2023}}</ref> हालाँकि, इन संदेशों की गलत व्याख्या की खबरें आई हैं, जिसके कारण हैदराबाद में युवा मुस्लिम पुरुषों द्वारा नैतिक पुलिसिंग की घटनाएं हुई हैं, खासकर जब इसमें शामिल लड़की/महिला मुस्लिम है। इस प्रवृत्ति के जवाब में, हैदराबाद में कुछ संगठन, जैसे 'इकरा बिस्मी' सीटीआई संस्थान, इस मुद्दे को हल करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम 20 मई को कबूतर खाना, हुसैनी आलम में आयोजित किया गया था, जिसका विषय था, "इस विश्वासघाती समय में अपनी बहनों और बेटियों को धर्मत्याग से कैसे बचाएं?"इस तरह की घटनाओं से मुस्लिम महिलाओं के पसंदा के विवाह के अधिकार का हनन हुआ है lइस कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती अंतर-विश्वास मित्रता के विषय पर जानकारी प्रदान करना और समुदाय को शिक्षित करना है। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वानों के भाग लेने की उम्मीद थी। ये प्रयास पुलिसिंग के आसपास की चिंताओं को दूर करने और विभिन्न धर्मों के बीच समझ को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं।<ref name="Alamgir 2023">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/hyderabad-moral-policing-of-interfaith-couples-on-the-rise-2593336/|title=Hyderabad: Moral policing of interfaith couples on the rise?|last=Alamgir|first=Mir|date=19 May 2023|website=The Siasat Daily|access-date=3 June 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|title=आखिर मुस्लिम लड़कियां Bhagwa Love Trap का शिकार क्यों?|last=Razvi|first=Ariba|date=2023-05-18|website=Ariba Razvi's Blog|language=en-US|access-date=2023-06-03|archive-date=5 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605024542/https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|url-status=dead}}</ref> == यह सभी देखें == * [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] * ''[[द केरल स्टोरी]]'' == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:हिन्दुत्व]] 37fnww005n7uj3y8jqyofpydf1m56fn 6536731 6536730 2026-04-06T01:42:44Z ~2026-21091-54 918981 हिन्दू के बारे में भ्रामक बातें है 6536731 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|listed=yes|date=जून 2023}} '''भगवा लव ट्रैप''' [[भारत]] में हिन्दू की महिमा खराब करने और एक साजिश के चलते चर्चाओं और सार्वजनिक प्रवचन में इस्तेमाल होने वाले एक शब्द को संदर्भित करता है, विशेष रूप से हिंदू पुरुषों की झूठी घटना के बारे में जो मुस्लिम महिलाओं को अंततः उन्हें [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] में परिवर्तित करने के इरादे से रिश्तों में "लुभाने" का प्रयास करते हैं। यह शब्द "[[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]]" की के साथ समानता रखता है, जिसमें मुस्लिम पुरुष भ्रामक तरीकों से हिंदू महिलाओं को परिवर्तित करना चाहते हैं पर संस्कारिक दृष्टि से देखा जाए तो कहना अनुचित है क्योंकि हिन्दू विवाह एकल विवाह में विश्वास रखता है । == इतिहास == "भगवा लव ट्रैप"<ref name="Digital 2023">{{Cite web|url=https://www.timesnowhindi.com/videos/shows/rashtravad/rashtravad-love-jihad-bhagwa-love-trap--video-100707188|title=Rashtravad : Love Jihad को लेकर था सवाल, कुछ बोल नहीं पाए तो करने लगे 'Bhagwa Love Trap' का जिक्र|date=2 June 2023|website=Times Now Navbharat|language=hi|trans-title=Rashtravad: The question was about Love Jihad, could not say anything then started mentioning 'Bhagwa Love Trap'|access-date=2 June 2023}}</ref> की अवधारणा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया, जहाँ विभिन्न पदों ने मुस्लिम महिलाओं को आकर्षित करने का प्रयास करने वाले हिंदू पुरुषों द्वारा कथित "खतरे" के बारे में जागरूकता बढ़ाने की माँग की।<ref name="GHindi 2023">{{Cite web|url=https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या होता है Bhagwa Love Trap Kya Hai|last=Hindi|first=Gorakhpur|date=19 April 2023|website=Gorakhpur Hindi » Gorakhpur News In Hindi|access-date=2 June 2023|archive-date=2 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230602200111/https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|url-status=dead}}</ref> इस आख्यान के समर्थक अक्सर सबूत के तौर पर कुछ हिंदुत्व समूहों और नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और भाषणों का हवाला देते हैं।<ref name="Singh 2023">{{Cite web|url=https://mobilenews24x7.com/2023/featured/bhagwa-love-trap-takes-a-menacing-shape-in-india/|title='Bhagwa Love Trap' takes a menacing shape in India|last=Singh|first=D.N.|date=31 May 2023|website=Mobile News 24x7 English|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023">{{Cite web|url=https://www.thequint.com/news/india/muslim-woman-harassed-doxed-by-muslim-men-bhagwa-love-trap|title=Muslim Women Seen with Hindu Men Harassed, Doxed - All In the Name of 'Bhagwa Love Trap'|last=Khan|first=Fatima|date=31 May 2023|website=TheQuint|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Dainik Bhaskar 2023">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/woman-filed-a-case-on-behalf-of-a-hindu-organization-distributed-outside-the-mosque-131321254.html|title='बहन तू भगवा लव ट्रैप में ना फंसना': इंदौर में बांटे विवादित पर्चे; बजरंग दल-RSS पर 10 लाख लड़कियों का धर्म बदलवाने का आरोप|date=24 May 2023|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> उदाहरण के लिए, २०१७ में [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] के एक सहयोगी समूह [[हिन्दू जागरण मंच|हिंदू जागरण मंच]] ने "[[विश्व हिंदू परिषद|बेटी बचाओ, बहू लाओ]]" नामक एक अभियान शुरू किया, जो हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं से शादी करने के लिए प्रोत्साहित किया। समूह ने दावा किया कि यह आने वाले महीनों में २,१०० ऐसे जोड़ों की शादियों को सुविधाजनक बनाएगा, इसे "लव जिहाद" का मुकाबला करने और "जनसंख्या नियंत्रण" को बढ़ावा देने के उपाय के रूप में तैयार किया जाएगा।<ref name="Khan 2023"/> मार्च २०२३ में हिंदुत्व नेता काजल हिंदुस्तानी ने [[राम नवमी|रामनवमी]] के अवसर पर गुजरात में एक भड़काऊ भाषण दिया, जिसमें हिंदू पुरुषों से शादी करने वाली मुस्लिम महिलाओं के कथित लाभों पर प्रकाश डाला गया। हिंदुस्तानी को बाद में उनके भाषण के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/why-kajal-hindusthanis-arrest-is-a-message-against-hate-speech-in-bjp-ruled-gujarat-2358617-2023-04-11|title=Why Kajal Hindusthani's arrest is a message against hate speech in BJP-ruled Gujarat|last=Shah|first=Jumana|date=11 April 2023|website=India Today|access-date=2 June 2023}}</ref> === लव जिहाद === [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] यह है कि जिसमें मुस्लिम पुरुष विवाह तक अपनी धार्मिक पहचान को छुपाकर हिंदू महिलाओं को परिवर्तित करने के लिए एक व्यवस्थित अभियान में संलग्न हैं या ये कह सकते हैं कि इस्लाम के अनुयायियों की जनसंख्या में बढ़ोतरी के लिए चलाया जाने वाला एक अभियान है। == विवाद == "भगवा लव ट्रैप" शब्द "लव जिहाद" कथा के एक कथित उलट के रूप में उभरा,<ref>{{Cite web|url=https://deshduniyatoday.com/bhagwa-love-trap/|title=Bhagwa Love Trap: 'लव जिहाद' के बाद देश में जन्मा 'भगवा लव ट्रैप' का मुद्दा, इंदौर में किसी मुस्लिम संगठन ने मुस्लिम लड़कियों को कथित 'भगवा लव ट्रैप' से बचने की अपील तो अपील कर्ताओं पर मामला हुआ दर्ज|date=24 May 2023|website=Deshduniyatoday.com|language=hi|trans-title=Bhagwa Love Trap: After 'Love Jihad', the issue of 'Saffron Love Trap' arose in the country, a Muslim organization in Indore appealed to Muslim girls to avoid the alleged 'Saffron Love Trap', a case was registered against the appellants|access-date=3 June 2023}}</ref> यह दावा करते हुए कि हिंदू लड़के मुस्लिम लड़कियों को आकर्षित करने के लिए मुसलमानों के रूप में पेश करते हैं और अंततः उन्हें हिंदू धर्म में परिवर्तित कर देते हैं। हालाँकि, मुस्लिम समुदाय के भीतर व्यक्तियों द्वारा किए गए इन दावों को प्रमाणित करने के लिए विश्वसनीय डेटा या सत्यापन योग्य स्रोतों की कमी है।<ref>{{Cite web|url=https://techly360.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या है / Bhagwa Love Trap Kya Hai?|date=5 May 2023|website=Techly360.com|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023"/><ref name="Navbharat Times">{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/indore/mp-minister-usha-thakur-statement-on-bhagwa-love-trap-when-muslim-girls-choose-hindus-as-their-life-partners/articleshow/100528917.cms|title=मुस्लिम लड़कियां जब हिंदुओं को अपना जीवन साथी चुनतीं हैं तो... भगवा लव ट्रैप को लेकर क्‍या बोलीं मंत्री उषा ठाकुर|date=26 May 2023|website=Navbharat Times|language=hi|trans-title=MP Minister Usha Thakur statement on bhagwa love trap when muslim girls choose hindus as their life partners|access-date=2 June 2023}}</ref> कुछ हिंदू संगठनों ने सार्वजनिक रूप से मुस्लिम लड़कियों के "दावे" का सुझाव देते हुए विचार व्यक्त किए हैं, जिसकी महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करने और देश में उनके भविष्य के बारे में मुस्लिम समुदाय के भीतर भय पैदा करने के लिए आलोचना की गई है। इसके अतिरिक्त, हिंदू व्यक्तियों के ऑनलाइन गतिविधियों में संलग्न होने के उदाहरण हैं, जैसे कि मुस्लिम लड़कियों की "नीलामी" करना, जिसकी निंदा की गई है। हालाँकि, मुस्लिम लड़कियों के कथित धर्मांतरण के पीछे एक बड़ी साजिश का अस्तित्व असत्यापित है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/> === प्रतिक्रियाएँ और परिणाम === कथित "भगवा लव ट्रैप" के जवाब में, मुस्लिम समुदाय ने लड़कियों की सतर्कता और निगरानी बढ़ाने के उपाय किए हैं, जिससे पुलिसिंग बढ़ गई है और कुछ मामलों में उत्पीड़न हुआ है।<ref name="कास्कर 2023">{{Cite web|url=https://thewirehindi.com/249982/bhagwa-love-trap-muslim-women-seen-with-hindu-men-harassed-attacked-love-jihad/|title=क्या 'भगवा लव ट्रैप' के नाम पर हो रहा है मुस्लिम युवतियों का उत्पीड़न?|last=कास्कर|first=ज़ीशान|date=1 June 2023|website=[[The Wire (India)|The Wire - Hindi]]|access-date=2 June 2023}}</ref> समुदाय के भीतर प्रसारित कुछ वीडियो और संदेश मुस्लिम माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे अपनी बेटियों की गतिविधियों पर नजर रखें, [[मोबाइल फ़ोन|मोबाइल फोन]] तक उनकी पहुंच को प्रतिबंधित करें और अन्य धर्मों के व्यक्तियों के साथ बातचीत को रोकने के लिए केवल मुस्लिम स्कूलों में उनका नामाँकन कराएँ।<ref name="SabrangIndia 2023">{{Cite web|url=https://sabrangindia.in/article/there-bhagwasaffron-love-trap-muslim-girls|title=Is There A Bhagwa/Saffron Love Trap For Muslim Girls?|date=31 May 2023|website=SabrangIndia|access-date=2 June 2023}}</ref> मुस्लिम सतर्कता की घटनाओं के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है, जहाँ युवा मुस्लिम पुरुषों के समूहों ने गैर-मुस्लिम लड़कों की संगति में पाई जाने वाली मुस्लिम लड़कियों का सामना किया है। इन मुठभेड़ों के परिणामस्वरूप मौखिक दुर्व्यवहार, शारीरिक धमकी और कुछ मामलों में लड़कियों और उनके साथियों दोनों के खिलाफ हिंसा हुई है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/><ref name="Kumar 2022">{{Cite web|url=https://hindi.boomlive.in/fact-check/gurugram-suitcase-woman-body-found-fake-communal-claim-viral-fact-check-19653|title=Gurugram Suitcase Woman Murder Video is viral on social media with communal spin|last=Kumar|first=Runjay|date=20 October 2022|website=बूम|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की कार्रवाइयाँ मुस्लिम महिलाओं के बहिष्कार और हाशिए पर जाने में योगदान करती हैं। इसके बजाय, वे शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सशक्त बनाने की वकालत करते हैं, जिससे उन्हें अपने रिश्तों के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है।<ref name="SabrangIndia 2023"/><ref name="Khan 2023"/> कुछ व्यक्तियों द्वारा नैतिक पुलिसिंग के उदाहरण, विशेष रूप से युवाओं के बीच, बढ़ते हुए देखे गए हैं। दक्षिणपंथी सामग्री सहित सोशल मीडिया ने भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने में भूमिका निभाई है जो हिंदू लड़कियों/महिलाओं को मुस्लिम लड़कों/पुरुषों से दोस्ती करने के खिलाफ सावधान करते हैं। [[मध्य प्रदेश]] के बड़वानी में २०२१ में एक कथित भगवा लव ट्रैप का मामला सामने आया है, जहाँ एक हिंदू लड़के पर एक मुस्लिम लड़की को झूठे प्रेम संबंध में फंसाने, जबरदस्ती मंदिर में शादी करने, उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाने और धर्म बदलने का दबाव बनाने का आरोप है. लड़की को प्रताड़ित करने के लिए मजबूर किया, आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए शिकायत दर्ज कराई।<ref name="Journo Mirror 2021">{{Cite web|url=https://journomirror.com/madhya-pradesh-bhupendra-forcibly-married-a-muslim-girl-by-taking-her-to-the-temple-also-pressurized-her-to-change-religion-along-with-her-companions/|title=मध्य प्रदेश: भूपेंद्र ने मुस्लिम लड़की को मंदिर में ले जाकर जबर्दस्ती शादी की, साथियों के साथ मिलकर धर्म बदलने के लिए भी दबाव बनाया|date=12 October 2021|website=Journo Mirror|trans-title=Madhya Pradesh: Bhupendra forced a Muslim girl to marry her by taking her to a temple, along with his friends also pressurized her to convert|access-date=3 June 2023}}</ref> हालाँकि, इन संदेशों की गलत व्याख्या की खबरें आई हैं, जिसके कारण हैदराबाद में युवा मुस्लिम पुरुषों द्वारा नैतिक पुलिसिंग की घटनाएं हुई हैं, खासकर जब इसमें शामिल लड़की/महिला मुस्लिम है। इस प्रवृत्ति के जवाब में, हैदराबाद में कुछ संगठन, जैसे 'इकरा बिस्मी' सीटीआई संस्थान, इस मुद्दे को हल करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम 20 मई को कबूतर खाना, हुसैनी आलम में आयोजित किया गया था, जिसका विषय था, "इस विश्वासघाती समय में अपनी बहनों और बेटियों को धर्मत्याग से कैसे बचाएं?"इस तरह की घटनाओं से मुस्लिम महिलाओं के पसंदा के विवाह के अधिकार का हनन हुआ है lइस कार्यक्रम का उद्देश्य बढ़ती अंतर-विश्वास मित्रता के विषय पर जानकारी प्रदान करना और समुदाय को शिक्षित करना है। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वानों के भाग लेने की उम्मीद थी। ये प्रयास पुलिसिंग के आसपास की चिंताओं को दूर करने और विभिन्न धर्मों के बीच समझ को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं।<ref name="Alamgir 2023">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/hyderabad-moral-policing-of-interfaith-couples-on-the-rise-2593336/|title=Hyderabad: Moral policing of interfaith couples on the rise?|last=Alamgir|first=Mir|date=19 May 2023|website=The Siasat Daily|access-date=3 June 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|title=आखिर मुस्लिम लड़कियां Bhagwa Love Trap का शिकार क्यों?|last=Razvi|first=Ariba|date=2023-05-18|website=Ariba Razvi's Blog|language=en-US|access-date=2023-06-03|archive-date=5 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605024542/https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|url-status=dead}}</ref> == यह सभी देखें == * [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] * ''[[द केरल स्टोरी]]'' == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:हिन्दुत्व]] 5qlgphi6iem9tpzb7085olx2uj4bq7p 6536741 6536731 2026-04-06T04:08:07Z AMAN KUMAR 911487 सुधार किया और लगभग सांप्रदायिक वाक्यों को हटा दिया 6536741 wikitext text/x-wiki '''भगवा लव ट्रैप''' (Saffron Love Trap) भारत में चर्चाओं और सार्वजनिक विमर्श में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है। यह मुख्य रूप से एक कथित षड्यंत्र सिद्धांत (Conspiracy theory) है, जिसमें यह दावा किया जाता है कि हिंदू पुरुष झूठी पहचान या प्रलोभन के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को प्रेम संबंधों में फँसाने का प्रयास करते हैं, जिसका अंतिम उद्देश्य उन्हें [[हिन्दू धर्म]] में परिवर्तित करना होता है। यह शब्द "[[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]]" के सिद्धांत की विपरीत प्रतिक्रिया (Reverse narrative) के रूप में देखा जाता है, जहाँ यह आरोप लगाया जाता है कि मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए विवाह करते हैं। == पृष्ठभूमि और उद्भव == "भगवा लव ट्रैप"<ref name="Digital 2023">{{Cite web|url=https://www.timesnowhindi.com/videos/shows/rashtravad/rashtravad-love-jihad-bhagwa-love-trap--video-100707188|title=Rashtravad : Love Jihad को लेकर था सवाल, कुछ बोल नहीं पाए तो करने लगे 'Bhagwa Love Trap' का जिक्र|date=2 June 2023|website=Times Now Navbharat|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> की अवधारणा ने मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया। कई पोस्ट्स और वीडियो में मुस्लिम महिलाओं को अन्य धर्म के पुरुषों द्वारा आकर्षित करने के कथित प्रयासों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का दावा किया गया।<ref name="GHindi 2023">{{Cite web|url=https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या होता है Bhagwa Love Trap Kya Hai|last=Hindi|first=Gorakhpur|date=19 April 2023|website=Gorakhpur Hindi » Gorakhpur News In Hindi|access-date=2 June 2023|archive-date=2 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230602200111/https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|url-status=dead}}</ref> इस आख्यान (Narrative) के समर्थक अक्सर अपने दावों के समर्थन में कुछ दक्षिणपंथी समूहों और नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और भाषणों का हवाला देते हैं।<ref name="Singh 2023">{{Cite web|url=https://mobilenews24x7.com/2023/featured/bhagwa-love-trap-takes-a-menacing-shape-in-india/|title='Bhagwa Love Trap' takes a menacing shape in India|last=Singh|first=D.N.|date=31 May 2023|website=Mobile News 24x7 English|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023">{{Cite web|url=https://www.thequint.com/news/india/muslim-woman-harassed-doxed-by-muslim-men-bhagwa-love-trap|title=Muslim Women Seen with Hindu Men Harassed, Doxed - All In the Name of 'Bhagwa Love Trap'|last=Khan|first=Fatima|date=31 May 2023|website=TheQuint|access-date=2 June 2023}}</ref> उदाहरण के लिए, 2017 में [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] से जुड़े एक संगठन ने कथित तौर पर एक अभियान शुरू किया था, जिसमें हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। संगठन का दावा था कि वे ऐसे जोड़ों के विवाह को सुविधाजनक बनाएँगे। इसे "लव जिहाद" की अवधारणा के प्रत्युत्तर के रूप में प्रचारित किया गया था।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Dainik Bhaskar 2023">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/woman-filed-a-case-on-behalf-of-a-hindu-organization-distributed-outside-the-mosque-131321254.html|title='बहन तू भगवा लव ट्रैप में ना फंसना': इंदौर में बांटे विवादित पर्चे|date=24 May 2023|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> इसी तरह, मार्च 2023 में गुजरात में [[राम नवमी]] के अवसर पर एक दक्षिणपंथी नेता द्वारा दिए गए भाषण ने भी इस विमर्श को हवा दी, जिसके बाद उन पर कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/why-kajal-hindusthanis-arrest-is-a-message-against-hate-speech-in-bjp-ruled-gujarat-2358617-2023-04-11|title=Why Kajal Hindusthani's arrest is a message against hate speech in BJP-ruled Gujarat|last=Shah|first=Jumana|date=11 April 2023|website=India Today|access-date=2 June 2023}}</ref> == विवाद और विश्वसनीयता == "भगवा लव ट्रैप" शब्द पूरी तरह से "लव जिहाद" की कथा की प्रतिक्रिया के रूप में उभरा है।<ref>{{Cite web|url=https://deshduniyatoday.com/bhagwa-love-trap/|title=Bhagwa Love Trap: 'लव जिहाद' के बाद देश में जन्मा 'भगवा लव ट्रैप' का मुद्दा|date=24 May 2023|website=Deshduniyatoday.com|language=hi|access-date=3 June 2023}}</ref> हालाँकि, इन दावों को प्रमाणित करने के लिए कोई विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटा, सरकारी आँकड़े या स्वतंत्र रूप से सत्यापन योग्य स्रोत (Verifiable sources) मौजूद नहीं हैं जो यह साबित कर सकें कि मुस्लिम महिलाओं के धर्मांतरण के पीछे कोई व्यापक या संगठित साजिश है।<ref>{{Cite web|url=https://techly360.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या है / Bhagwa Love Trap Kya Hai?|date=5 May 2023|website=Techly360.com|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023"/><ref name="Navbharat Times">{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/indore/mp-minister-usha-thakur-statement-on-bhagwa-love-trap-when-muslim-girls-choose-hindus-as-their-life-partners/articleshow/100528917.cms|title=भगवा लव ट्रैप को लेकर क्‍या बोलीं मंत्री उषा ठाकुर|date=26 May 2023|website=Navbharat Times|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को निशाना बनाने वाली कुछ विवादित घटनाओं (जैसे कि ऐप विवाद) ने अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है, जिससे इस प्रकार के षड्यंत्र सिद्धांतों को बल मिला है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/> == प्रतिक्रियाएँ और परिणाम == === मॉरल पुलिसिंग और निगरानी === कथित "भगवा लव ट्रैप" के विमर्श के जवाब में, मुस्लिम समुदाय के भीतर कुछ समूहों द्वारा सतर्कता और मॉरल पुलिसिंग (नैतिक पुलिसिंग) की घटनाएँ सामने आई हैं।<ref name="कास्कर 2023">{{Cite web|url=https://thewirehindi.com/249982/bhagwa-love-trap-muslim-women-seen-with-hindu-men-harassed-attacked-love-jihad/|title=क्या 'भगवा लव ट्रैप' के नाम पर हो रहा है मुस्लिम युवतियों का उत्पीड़न?|last=कास्कर|first=ज़ीशान|date=1 June 2023|website=[[The Wire (India)|The Wire - Hindi]]|access-date=2 June 2023}}</ref> कई ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए हैं जहाँ स्वयंभू रक्षकों (Vigilantes) द्वारा अन्य धर्म के लड़कों के साथ दिखने वाली मुस्लिम लड़कियों को सड़क पर रोका गया, उनसे पूछताछ की गई, उनका वीडियो बनाकर वायरल किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/><ref name="Kumar 2022">{{Cite web|url=https://hindi.boomlive.in/fact-check/gurugram-suitcase-woman-body-found-fake-communal-claim-viral-fact-check-19653|title=Gurugram Suitcase Woman Murder Video is viral on social media with communal spin|last=Kumar|first=Runjay|date=20 October 2022|website=बूम|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर ऐसे कई संदेश प्रसारित हुए हैं जिनमें अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बेटियों की गतिविधियों और मोबाइल फ़ोन के उपयोग पर कड़ी नज़र रखें, ताकि वे अन्य धर्मों के युवाओं के संपर्क में न आएं।<ref name="SabrangIndia 2023">{{Cite web|url=https://sabrangindia.in/article/there-bhagwasaffron-love-trap-muslim-girls|title=Is There A Bhagwa/Saffron Love Trap For Muslim Girls?|date=31 May 2023|website=SabrangIndia|access-date=2 June 2023}}</ref> कुछ शहरों में संगठनों द्वारा इस विषय पर जागरूकता अभियान और सेमिनार भी आयोजित किए गए हैं।<ref name="Alamgir 2023">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/hyderabad-moral-policing-of-interfaith-couples-on-the-rise-2593336/|title=Hyderabad: Moral policing of interfaith couples on the rise?|last=Alamgir|first=Mir|date=19 May 2023|website=The Siasat Daily|access-date=3 June 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|title=आखिर मुस्लिम लड़कियां Bhagwa Love Trap का शिकार क्यों?|last=Razvi|first=Ariba|date=2023-05-18|website=Ariba Razvi's Blog|language=en-US|access-date=2023-06-03|archive-date=5 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605024542/https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|url-status=dead}}</ref> === महिला अधिकारों का हनन === महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की मॉरल पुलिसिंग और निगरानी की कार्रवाइयाँ अंततः महिलाओं के अपने जीवनसाथी चुनने के संवैधानिक अधिकार का हनन करती हैं। यह महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करता है और समाज में उनके हाशिए पर जाने (Marginalization) में योगदान देता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं पर बंदिशें लगाने के बजाय, उन्हें शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि वे अपने जीवन और रिश्तों के बारे में स्वतंत्र व सूचित निर्णय (Informed decisions) ले सकें।<ref name="SabrangIndia 2023"/><ref name="Khan 2023"/> == इन्हें भी देखें == * [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] * [[भारत में साम्प्रदायिक हिंसा]] == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:भारत में सामाजिक मुद्दे]] [[श्रेणी:षड्यंत्र के सिद्धांत]] [[श्रेणी:भारतीय समाज]] lwbqsr1ubkn9npnpvfof9n4x62geal3 6536742 6536741 2026-04-06T04:19:27Z AMAN KUMAR 911487 इसमें कड़ियां जोड़ी 6536742 wikitext text/x-wiki '''भगवा लव ट्रैप''' (Saffron Love Trap) [[भारत]] में चर्चाओं और सार्वजनिक विमर्श में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है। यह मुख्य रूप से एक कथित षड्यंत्र सिद्धांत (Conspiracy theory) है, जिसमें यह दावा किया जाता है कि [[सनातन धर्म|हिंदू]] पुरुष झूठी पहचान या प्रलोभन के माध्यम से [[मुसलमान|मुस्लिम]] महिलाओं को प्रेम संबंधों में फँसाने का प्रयास करते हैं, जिसका अंतिम उद्देश्य उन्हें [[हिन्दू धर्म]] में परिवर्तित करना होता है। यह शब्द "[[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]]" के सिद्धांत की विपरीत प्रतिक्रिया (Reverse narrative) के रूप में देखा जाता है, जहाँ यह आरोप लगाया जाता है कि मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं का धर्म परिवर्तन कराने के लिए विवाह करते हैं। == पृष्ठभूमि और उद्भव == "भगवा लव ट्रैप"<ref name="Digital 2023">{{Cite web|url=https://www.timesnowhindi.com/videos/shows/rashtravad/rashtravad-love-jihad-bhagwa-love-trap--video-100707188|title=Rashtravad : Love Jihad को लेकर था सवाल, कुछ बोल नहीं पाए तो करने लगे 'Bhagwa Love Trap' का जिक्र|date=2 June 2023|website=Times Now Navbharat|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> की अवधारणा ने मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया। कई पोस्ट्स और वीडियो में मुस्लिम महिलाओं को अन्य धर्म के पुरुषों द्वारा आकर्षित करने के कथित प्रयासों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का दावा किया गया।<ref name="GHindi 2023">{{Cite web|url=https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या होता है Bhagwa Love Trap Kya Hai|last=Hindi|first=Gorakhpur|date=19 April 2023|website=Gorakhpur Hindi » Gorakhpur News In Hindi|access-date=2 June 2023|archive-date=2 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230602200111/https://gorakhpurhindi.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|url-status=dead}}</ref> इस [[आख्यान]] (Narrative) के समर्थक अक्सर अपने दावों के समर्थन में कुछ दक्षिणपंथी समूहों और नेताओं द्वारा दिए गए बयानों और भाषणों का हवाला देते हैं।<ref name="Singh 2023">{{Cite web|url=https://mobilenews24x7.com/2023/featured/bhagwa-love-trap-takes-a-menacing-shape-in-india/|title='Bhagwa Love Trap' takes a menacing shape in India|last=Singh|first=D.N.|date=31 May 2023|website=Mobile News 24x7 English|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023">{{Cite web|url=https://www.thequint.com/news/india/muslim-woman-harassed-doxed-by-muslim-men-bhagwa-love-trap|title=Muslim Women Seen with Hindu Men Harassed, Doxed - All In the Name of 'Bhagwa Love Trap'|last=Khan|first=Fatima|date=31 May 2023|website=TheQuint|access-date=2 June 2023}}</ref> उदाहरण के लिए, 2017 में [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] से जुड़े एक संगठन ने कथित तौर पर एक अभियान शुरू किया था, जिसमें हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। संगठन का दावा था कि वे ऐसे जोड़ों के विवाह को सुविधाजनक बनाएँगे। इसे "लव जिहाद" की अवधारणा के प्रत्युत्तर के रूप में प्रचारित किया गया था।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Dainik Bhaskar 2023">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/woman-filed-a-case-on-behalf-of-a-hindu-organization-distributed-outside-the-mosque-131321254.html|title='बहन तू भगवा लव ट्रैप में ना फंसना': इंदौर में बांटे विवादित पर्चे|date=24 May 2023|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> इसी तरह, मार्च 2023 में गुजरात में [[राम नवमी]] के अवसर पर एक दक्षिणपंथी नेता द्वारा दिए गए भाषण ने भी इस विमर्श को हवा दी, जिसके बाद उन पर कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/why-kajal-hindusthanis-arrest-is-a-message-against-hate-speech-in-bjp-ruled-gujarat-2358617-2023-04-11|title=Why Kajal Hindusthani's arrest is a message against hate speech in BJP-ruled Gujarat|last=Shah|first=Jumana|date=11 April 2023|website=India Today|access-date=2 June 2023}}</ref> == विवाद और विश्वसनीयता == "भगवा लव ट्रैप" शब्द पूरी तरह से "लव जिहाद" की कथा की प्रतिक्रिया के रूप में उभरा है।<ref>{{Cite web|url=https://deshduniyatoday.com/bhagwa-love-trap/|title=Bhagwa Love Trap: 'लव जिहाद' के बाद देश में जन्मा 'भगवा लव ट्रैप' का मुद्दा|date=24 May 2023|website=Deshduniyatoday.com|language=hi|access-date=3 June 2023}}</ref> हालाँकि, इन दावों को प्रमाणित करने के लिए कोई विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटा, सरकारी आँकड़े या स्वतंत्र रूप से सत्यापन योग्य स्रोत (Verifiable sources) मौजूद नहीं हैं जो यह साबित कर सकें कि मुस्लिम महिलाओं के धर्मांतरण के पीछे कोई व्यापक या संगठित साजिश है।<ref>{{Cite web|url=https://techly360.com/bhagwa-love-trap-kya-hai/|title=भगवा लव ट्रैप क्या है / Bhagwa Love Trap Kya Hai?|date=5 May 2023|website=Techly360.com|access-date=2 June 2023}}</ref><ref name="Khan 2023"/><ref name="Navbharat Times">{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/indore/mp-minister-usha-thakur-statement-on-bhagwa-love-trap-when-muslim-girls-choose-hindus-as-their-life-partners/articleshow/100528917.cms|title=भगवा लव ट्रैप को लेकर क्‍या बोलीं मंत्री उषा ठाकुर|date=26 May 2023|website=Navbharat Times|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को निशाना बनाने वाली कुछ विवादित घटनाओं (जैसे कि ऐप विवाद) ने अल्पसंख्यक समुदाय के भीतर असुरक्षा की भावना को बढ़ाया है, जिससे इस प्रकार के षड्यंत्र सिद्धांतों को बल मिला है।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/> == प्रतिक्रियाएँ और परिणाम == === मॉरल पुलिसिंग और निगरानी === कथित "भगवा लव ट्रैप" के विमर्श के जवाब में, मुस्लिम समुदाय के भीतर कुछ समूहों द्वारा सतर्कता और नैतिक पुलिसिंग की घटनाएँ सामने आई हैं।<ref name="कास्कर 2023">{{Cite web|url=https://thewirehindi.com/249982/bhagwa-love-trap-muslim-women-seen-with-hindu-men-harassed-attacked-love-jihad/|title=क्या 'भगवा लव ट्रैप' के नाम पर हो रहा है मुस्लिम युवतियों का उत्पीड़न?|last=कास्कर|first=ज़ीशान|date=1 June 2023|website=[[The Wire (India)|The Wire - Hindi]]|access-date=2 June 2023}}</ref> कई ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए हैं जहाँ स्वयंभू रक्षकों (Vigilantes) द्वारा अन्य धर्म के लड़कों के साथ दिखने वाली मुस्लिम लड़कियों को सड़क पर रोका गया, उनसे पूछताछ की गई, उनका वीडियो बनाकर वायरल किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।<ref name="Khan 2023"/><ref name="Singh 2023"/><ref name="Kumar 2022">{{Cite web|url=https://hindi.boomlive.in/fact-check/gurugram-suitcase-woman-body-found-fake-communal-claim-viral-fact-check-19653|title=Gurugram Suitcase Woman Murder Video is viral on social media with communal spin|last=Kumar|first=Runjay|date=20 October 2022|website=बूम|language=hi|access-date=2 June 2023}}</ref> इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर ऐसे कई संदेश प्रसारित हुए हैं जिनमें अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बेटियों की गतिविधियों और मोबाइल फ़ोन के उपयोग पर कड़ी नज़र रखें, ताकि वे अन्य धर्मों के युवाओं के संपर्क में न आएं।<ref name="SabrangIndia 2023">{{Cite web|url=https://sabrangindia.in/article/there-bhagwasaffron-love-trap-muslim-girls|title=Is There A Bhagwa/Saffron Love Trap For Muslim Girls?|date=31 May 2023|website=SabrangIndia|access-date=2 June 2023}}</ref> कुछ शहरों में संगठनों द्वारा इस विषय पर जागरूकता अभियान और सेमिनार भी आयोजित किए गए हैं।<ref name="Alamgir 2023">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/hyderabad-moral-policing-of-interfaith-couples-on-the-rise-2593336/|title=Hyderabad: Moral policing of interfaith couples on the rise?|last=Alamgir|first=Mir|date=19 May 2023|website=The Siasat Daily|access-date=3 June 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|title=आखिर मुस्लिम लड़कियां Bhagwa Love Trap का शिकार क्यों?|last=Razvi|first=Ariba|date=2023-05-18|website=Ariba Razvi's Blog|language=en-US|access-date=2023-06-03|archive-date=5 जून 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605024542/https://aribarazvi.in/why-muslim-girls-are-victims-of-bhagwa-love-trap/18/05/2023/|url-status=dead}}</ref> === महिला अधिकारों का हनन === [[महिलाओं के अधिकार|महिला अधिकार]] कार्यकर्ताओं और [[नागरिक समाज]] के आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की मॉरल पुलिसिंग और निगरानी की कार्रवाइयाँ अंततः महिलाओं के अपने जीवनसाथी चुनने के संवैधानिक अधिकार का हनन करती हैं। यह महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करता है और समाज में उनके हाशिए पर जाने (Marginalization) में योगदान देता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं पर बंदिशें लगाने के बजाय, उन्हें शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाया जाना चाहिए ताकि वे अपने जीवन और रिश्तों के बारे में स्वतंत्र व सूचित निर्णय (Informed decisions) ले सकें।<ref name="SabrangIndia 2023"/><ref name="Khan 2023"/> == इन्हें भी देखें == * [[लव जिहाद षडयंत्र सिद्धांत|लव जिहाद]] * [[भारत में साम्प्रदायिक हिंसा]] == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:भारत में सामाजिक मुद्दे]] [[श्रेणी:षड्यंत्र के सिद्धांत]] [[श्रेणी:भारतीय समाज]] 4byy7qinv7velsxuz6s8tuejco9jetx अमृतसर मेट्रोबस 0 1467386 6536613 6241317 2026-04-05T15:32:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536613 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक सार्वजानिक यातायात|box_width=|name=अमृतसर मेट्रोबस|image=[[File:Amritsarmetrobus11.jpg|300px]]|locale=[[अमृतसर]]|transit_type=बस रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम|lines=८|stations=५६|ridership=९१,०००<ref>{{cite web | title=At 91K, BRTS ridership affects auto drivers | website=The Tribune | date=24 February 2019 | url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/at-71k-brts-ridership-affects-auto-drivers/733968.html | access-date=24 February 2019 | archive-date=24 फ़रवरी 2019 | 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शहर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है।<ref>{{Cite web|url=https://urbantransportnews.com/after-missing-several-deadlines-amritsar-brts-launches-finally/|title=After missing several deadlines, Amritsar BRTS launches finally|last=News|first=Urban Transport|date=29 January 2019|website=Urban Transport News|language=en-US|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224173940/https://urbantransportnews.com/after-missing-several-deadlines-amritsar-brts-launches-finally/|url-status=dead}}</ref> अमृतसर मेट्रोबस मामूली किराए पर शहर के विभिन्न स्थानों जैसे [[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर]], [[जलियाँवाला बाग़|जलियांवाला बाग]], गुरु नानक देव विश्वविद्यालय और खालसा कॉलेज<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/metro-bus-gets-lukewarm-response/721687.html|title=Metro bus gets lukewarm response|date=31 January 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=6 नवंबर 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to put Rs 545 cr BRTS project on track|date=29 January 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224173543/https://www.tribuneindia.com/news/punjab/govt-set-to-put-rs-545-cr-brts-project-on-track/720306.html|url-status=dead}}</ref> निर्माण कार्य २६ फरवरी २०१५ को शुरू हुआ। सितम्बर २०१६ में ९०% काम पूरा हो गया।<ref>{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/news/cities/amritsar/state-govt-departments-unlikely-to-complete-brts-by-march-31-deadline/174327.html|title=State govt departments unlikely to complete BRTS by March 31 deadline|last=Service|first=Tribune News|date=29 December 2015|website=tribuneindia.com|access-date=30 December 2015|archive-date=22 फ़रवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160222211757/http://www.tribuneindia.com/news/cities/amritsar/state-govt-departments-unlikely-to-complete-brts-by-march-31-deadline/174327.html|url-status=dead}}</ref> अमृतसर मेट्रोबस अहमदाबाद के [[जनमार्ग]] बीआरटी मॉडल<ref name="auto">{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chandigarh/Amritsar-to-copy-Ahmedabad-BRTS-model/articleshow/25722789.cms|title=Amritsar to copy Ahmedabad BRTS model &#124; Chandigarh News - Times of India|website=The Times of India|access-date=26 December 2019}}</ref> पर आधारित है और इसका निर्माण [[इस्तांबुल]] के मेट्रोबस की तर्ज पर किया गया था।<ref name="auto" /> वोल्वो बसों ने पवित्र शहर अमृतसर में बीआरटीएस परियोजना में अपनी रुचि दिखाई।<ref>{{Cite web|url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/chandigarh/Infosys-to-start-work-on-Mohali-unit-in-a-month/articleshow/48398869.cms|title=Volvo keen on BRTS|last=TNN|date=8 August 2015|website=The Times of India|access-date=18 August 2015}}</ref> अमृतसर मेट्रोबस [[टाटा मार्कोपोलो]] की ९३ [[वातानुकूलन|वातानुकूलित]] एटी बसों के साथ संचालित होती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.tatamotors.com/press/tata-motors-commences-delivery-of-new-ac-buses-with-automatic-transmission-in-amritsar-for-new-brts-operations/|title=Tata Motors commences delivery of new AC buses, with Automatic Transmission in Amritsar, for new BRTS operations|website=Tata Motors Limited|access-date=24 February 2019|archive-date=11 जुलाई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180711195721/https://www.tatamotors.com/press/tata-motors-commences-delivery-of-new-ac-buses-with-automatic-transmission-in-amritsar-for-new-brts-operations/|url-status=dead}}</ref> लॉन्च के बाद एक सप्ताह के भीतर ४१,००० यात्रियों की मेट्रोबस रिकॉर्डर सवारी।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/brts-begins-drawing-passengers-enormously/725207.html|title=BRTS begins drawing passengers enormously|date=7 February 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224231204/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/brts-begins-drawing-passengers-enormously/725207.html|url-status=dead}}</ref> अमृतसर मेट्रोबस अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर दैनिक यात्रियों को ८,००० से अधिक स्मार्ट कार्ड बेचे।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/brts-has-8-000-smart-card-holders/732470.html|title=BRTS has 8,000 smart card holders|date=21 February 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224173628/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/brts-has-8-000-smart-card-holders/732470.html|url-status=dead}}</ref> वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं तक वर्दीधारी स्कूली छात्रों के लिए परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से निःशुल्क है।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/amritsar/brts-ride-to-be-free-for-school-students-in-uniform/articleshow/64982244.cms|title=BRTS ride to be free for school students in uniform|work=The Times of India|access-date=31 July 2018}}</ref> लॉन्च के बाद पहले तीन महीने तक यह परियोजना यात्रियों के लिए निःशुल्क थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/chandigarh/navjot-singh-sidhu-launches-amritsar-brts-says-wants-to-give-it-a-chance-to-succeed-5558789/|title=Navjot Singh Sidhu launches Amritsar BRTS, says wants to give it a chance to succeed|date=29 January 2019|website=The Indian Express|language=en-IN|access-date=24 February 2019}}</ref> == प्रमुख विशेषताएँ == अमृतसर मेट्रोबस की कुछ प्रमुख विशेषताएँ हैं:<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/Amritsar-BRTS-project-starts-moving/articleshow/36366954.cms|title=Amritsar BRTS project starts moving &#124; India News - Times of India|website=The Times of India|access-date=26 December 2019}}</ref> * यात्रियों की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशनों पर स्वचालित दरवाजे * पैदल यात्रियों के लिए सुने हुए पुल * दोनों दिशाओं में बसों की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग लेन * चौराहे बसों के लिए बोर्डिंग स्थल के रूप में कार्य करेंगे * पूर्ण वातानुकूलित बसें * सभी बसों के स्वचालित दरवाजे * एलिवेटेड कॉरिडोर पर मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों के लिए लिफ्ट * मेट्रो रेल के समान एक विशेष मेट्रो स्मार्ट कार्ड<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/smart-cards-for-metro-bus-passengers-soon/725826.html|title=Smart cards for metro bus passengers soon|date=8 February 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224231217/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/smart-cards-for-metro-bus-passengers-soon/725826.html|url-status=dead}}</ref> * मेट्रो स्टेशनों और मेट्रो बसों में मेट्रो रेलवे के समान स्मार्ट घोषणाएँ * एलिवेटेड कॉरिडोर पर रेट्रोफिटेड मेट्रो स्टेशन == कॉरीडोर == मेट्रो बस के ४६ किलोमीटर मार्ग में कई मार्ग<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/long-brts-routes-for-short-journeys/722918.html|title=Long BRTS routes for short journeys|date=3 February 2019|website=Tribuneindia News Service|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224231208/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/long-brts-routes-for-short-journeys/722918.html|url-status=dead}}</ref> और गलियारे<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/amritsar/amritsar-brts-to-be-revived-soon/articleshow/62386959.cms|title=Amritsar BRTS to be revived soon - Times of India|work=The Times of India|access-date=31 July 2018}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/delay-irks-metro-bus-service-users/724231.html|title=Delay irks metro bus service users|date=5 February 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224231213/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/delay-irks-metro-bus-service-users/724231.html|url-status=dead}}</ref> हैं: * अटारी रोड - आईएसबीटी से इंडिया गेट तक भंडारी ब्रिज, जीएनडीयू, छेहरटा (12 किमी) * जालंधर रोड - आईएसबीटी से एमसीए गेट तक तरवालान पुल (6 किमी) * वेरका रोड - आईएसबीटी से वेरका वाया हुसैनपुरा ब्रिज, जीटी रोड बाईपास (13 किमी) * शाम सिंह अटारी वाला गेट और भंडारी ब्रिज<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/archive/amritsar-grab-the-chance-44663|title=Amritsar, grab the chance|last=Service|first=Tribune News|website=Tribuneindia News Service|access-date=26 December 2019}}</ref> से इंडिया गेट तक * भंडारी ब्रिज से दबुर्जी<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/punjab/commuters-feel-unbearable-heat-as-brts-enters-bhandari-bridge/story-CumX80PWJe0bbfLsLnoGvO.html|title=Commuters feel unbearable heat as BRTS enters Bhandari Bridge|date=15 April 2015|website=Hindustan Times|access-date=26 December 2019}}</ref> * दबुर्जी बाईपास से वेरका * वेरका से सेलिब्रेशन मॉल<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/punjab/rs-600-crore-brts-project-kicks-off-in-amritsar/story-qekn880sE3xUaxsz5DlwJP.html|title=Rs 600-crore BRTS project kicks off in Amritsar|date=21 July 2014|website=Hindustan Times|access-date=26 December 2019}}</ref> * सेलिब्रेशन मॉल से संत सिंह सुक्खा सिंह चौक तक * 4एस चौक से किचलू चौक * किचलू चौक से पुराना सदर पुलिस स्टेशन * [[श्री गुरु रामदास जी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र|अमृतसर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे]] से [[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर]] /घी मंडी तक (अगस्त २०२१ में लॉन्च) फरवरी २०१९ में नागरिकों ने क्षेत्र में लगातार यातायात की भीड़ के कारण सेवा को गोलचक्कर रोड तक विस्तारित करने की माँग की।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/rapid-transit-system-sought-for-congested-circular-road/730144.html|title=Rapid transit system sought for congested Circular Road|date=17 February 2019|website=The Tribune|access-date=24 February 2019|archive-date=24 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190224173624/https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/rapid-transit-system-sought-for-congested-circular-road/730144.html|url-status=dead}}</ref> अगस्त २०२१ में [[श्री गुरु रामदास जी अन्तर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र|अमृतसर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे]] को [[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर]] से सीधे जोड़ने वाला एक नया मार्ग ५०१ (ऊपर/नीचे) लॉन्च किया गया था। नया मार्ग १४.१५ किलोमीटर लंबा है और उसमें १४ मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। == हरित गतिशीलता == अमृतसर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने अमृतसर मेट्रोबस में फीडर सेवा के लिए अतिरिक्त ३० [[विद्युत बस|इलेक्ट्रिक बसें]] और ९,००० इलेक्ट्रिक [[ऑटो रिक्शा]] जोड़ने की योजना बनाई है।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/ascl-bestowed-mobility-solution-award/735533.html|title=ASCL bestowed mobility solution award|date=27 February 2019|website=The Tribune|access-date=3 March 2019}}{{Dead link|date=अगस्त 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == पुरस्कार और मान्यता == नवंबर २०१९ में लखनऊ में १२वें शहरी भारत गतिशीलता सम्मेलन और प्रदर्शनी में अमृतसर मेट्रोबस ने [[शहरी विकास मंत्रालय, भारत सरकार|भारत के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय]] से 'सर्वश्रेष्ठ शहरी जन परिवहन प्रणाली' की श्रेणी के तहत ''उत्कृष्टता का पुरस्कार'' जीता।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/amritsar/city-brts-scripts-a-success-story/862961.html|title=City BRTS scripts a success story|date=19 November 2019|website=The Tribune|access-date=23 November 2019}}{{Dead link|date=अगस्त 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == यह सभी देखें == * [[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर]] == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी संबंध == * [https://www.unescap.org/sites/default/files/2b.2_BRT%20Amritsar_LaghuParashar.pdf अमृतसर बीआरटीएस - संयुक्त राष्ट्र एस्केप] * [http://www.umtc.co.in/bus-rapid-transit%20-system%20-umtc-192 अमृतसर के लिए बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250622113711/https://www.umtc.co.in/bus-rapid-transit%20-system%20-umtc-192 |date=22 जून 2025 }} {{भारत में बस रैपिड ट्रांज़िट|state=expanded}} 8jq1bipabwifphi5dffg7cx38eml4yb अमृत भारत एक्सप्रेस 0 1503259 6536611 6476000 2026-04-05T15:28:01Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536611 wikitext text/x-wiki {{Infobox rail service|box_width=|image=|image_size=300px|caption=भारत की [[वंदे भारत एक्सप्रेस]] ट्रेनों का सेमी-हाई स्पीड उत्तराधिकारी संस्करण|type=[[भारत में एक्सप्रेस ट्रेनें#सुपरफास्ट|सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन]]|status=अभी संचालन होना बाकी है|first={{प्रारंभ तिथि |30 दिसंबर 2023}} (उद्घाटन)|website={{URL|http://indianrail.gov.in}}|line_used=02 (आगामी)|class=शयनयान कोच '''(एसएल)'''<br/>सामान्य अनारक्षित कोच '''(जीएस)'''|sleeping=हा|catering='''''(TBC)'''''|entertainment={{Hlist|[[AC power plugs and sockets: British and related types#Indian IS 1293|Electric Outlets]]|[[Reading lights]]}}|otherfacilities={{Hlist|[[Closed-circuit television|CCTV cameras]]|[[Future of rail transport in India#Bio-toilets in all trains|Bio-Vacuum Toilets]]|[[Tap water|Sensor-based Water Taps]]|[[Passenger information system]]}}|stock=[[Amrit Bharat (trainset)]]|gauge={{track gauge|1676mm|allk=on}}|speed={{Cvt|130|km/h}} (Maximum)}} '''अमृत भारत एक्सप्रेस''' <ref>{{Cite news|url=https://hindi.news18.com/news/business/railways-countrys-first-amrit-bharat-train-the-trial-completed-know-on-which-route-will-run-7819581.html|title=देश की पहली अमृतभारत ट्रेन का ट्रायल पूरा, किस रूट पर चलेगी, जानें|last=Pandey|first=Sharad|date=10 November 2023|work=News18|access-date=11 November 2023|language=hi|archive-date=11 नवंबर 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231111033116/https://hindi.news18.com/news/business/railways-countrys-first-amrit-bharat-train-the-trial-completed-know-on-which-route-will-run-7819581.html|url-status=dead}}</ref> [[भारतीय रेल|भारतीय रेलवे]] द्वारा संचालित एक आगामी नो-फ्रिल्स [[भारत में एक्स्प्रेस और मेल रेलगाड़ियाँ|सुपरफास्ट एक्सप्रेस सेवा]] है। यह एक गैर-एसी स्लीपर सह अनारक्षित श्रेणी सेवा है जिसे कम लागत और लंबी दूरी की सेवा के लिए डिज़ाइन किया गया है। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/heres-a-first-look-of-22-coach-vande-sadharan-train-all-set-to-hit-the-tracks-by-october-end/articleshow/104385929.cms|title=Here's a first look of the 22-coach Vande Sadharan Express train, all set to hit the tracks by October-end|date=13 October 2023|work=The Times of India|access-date=30 October 2023|issn=0971-8257}}</ref> इन्हें रात्रिकालीन एक्सप्रेस ट्रेन सेवाएँ बनाने की योजना है जो 800 से अधिक दूरी वाले भारतीय शहरों को जोड़ेगी या मौजूदा सेवाओं के साथ यात्रा करने में दस घंटे से अधिक का समय लगता है। ट्रेनसेट बहुत तेज़ गति का समर्थन कर सकता है लेकिन रेलवे ट्रैक की गति क्षमता, कई स्टॉपेज और यातायात की भीड़ के कारण, सेवाओं की परिचालन गति 110–130 की सीमा में सीमित है। . ट्रेनसेट में चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा निर्मित 2 [[रेल-इंजन|लोकोमोटिव]] शामिल हैं, जो भारत की सबसे बड़ी लोकोमोटिव विनिर्माण इकाइयों में से एक है, और 22 कोच [[सवारी डिब्बा कारखाना, चेन्नई|इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ)]] द्वारा निर्मित हैं, जो भारतीय रेलवे की पांच रेक उत्पादन इकाइयों में से एक है। <ref>{{Cite news|url=https://www.deccanherald.com/india/indian-railways-to-produce-non-ac-vande-sadharan-trains-1235538.html|title=Indian Railways to produce non-AC Vande Sadharan trains|last=Athrady|first=Ajith|date=10 July 2023|work=Deccan Herald|access-date=30 October 2023|language=en}}</ref> 22 कोच वाला ट्रेनसेट अपनी पूरी यात्रा में लगभग 1,800 यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। पहली सेवा 30 दिसंबर 2023 तक शुरू करने का प्रस्ताव है <ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/pm-modi-to-inaugurate-amrit-bharat-express-on-dec-30-all-you-need-to-know-about-this-sleeper-vande-bharat-train-101703695894391.html|title=PM Modi to inaugurate ‘Amrit Bharat Express’ on Dec 30. All you need to know about this ‘sleeper Vande Bharat’ train|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2023-12-28}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/video/news/pm-modi-to-inaugurates-of-2-amrit-bharat-express-trains-on-december-30-2702745.html|title=PM Modi to inaugurates of 2 Amrit Bharat Express trains on December 30|website=Zee News|language=en|access-date=2023-12-26}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.aninews.in/news/national/politics/pm-modi-to-soon-flag-off-amrit-bharat-train-with-push-pull-tech-says-union-minister-ashwini-vaishnaw20231226061105/|title="PM Modi to soon flag off Amrit Bharat train with 'Push-Pull' tech", says Union Minister Ashwini Vaishnaw|date=26 December 2023|website=ANI News|language=en|access-date=26 December 2023|archive-date=26 दिसंबर 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231226004748/https://www.aninews.in/news/national/politics/pm-modi-to-soon-flag-off-amrit-bharat-train-with-push-pull-tech-says-union-minister-ashwini-vaishnaw20231226061105/|url-status=dead}}</ref> == पृष्ठभूमि == भारतीय रेलवे ने योजनाओं की घोषणा की थी </link> लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर और जनरल कोच वाली एक नॉन-एसी अमृत भारत एक्सप्रेस बनाने की योजना है, जो अंत्योदय एक्सप्रेस, जनसाधारण एक्सप्रेस और एलएचबी कोच वाली ट्रेनों की जगह लेगी। कुशल त्वरण सुनिश्चित करने और टर्मिनल स्टेशनों पर लोकोमोटिव को स्विच करने की आवश्यकता को खत्म करने के लिए इस ट्रेन में 22 एलएचबी कोच और आगे और पीछे के छोर पर दो WAP-5 लोकोमोटिव ( पुश-पुल कॉन्फ़िगरेशन ) होंगे, जिससे यात्रा का समय कम हो जाएगा। WAP5 लोकोमोटिव को वायुगतिकीय फ्रंटल नाक, फ्लैट रियर नाक, एक चालक दल के अनुकूल कंसोल और कैब, मानवजनित चालक दल सीटें, एकीकृत कनवर्टर और होटल लोड कनवर्टर, कवच, आरटीएस, सीवीवीआरएस, एयर कंडीशनिंग, पुश-पुल ऑपरेशन के लिए डब्ल्यूटीबी सक्षम के साथ उन्नत किया गया है। . ये 4 लोकोमोटिव भारतीय रेलवे में अपनी तरह के पहले इंजन हैं जिन्हें विशेष रूप से इसी आवश्यकता के लिए विकसित किया गया है। HOG व्यवस्था से ट्रेन में डीजल जनरेटर की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। ये दोनों लोकोमोटिव दोहरा ट्रैक्टिव प्रयास विकसित करते हैं और इस प्रकार बहुत अधिक त्वरण प्रदान करते हैं। <ref name="timesnownews.com">{{Cite web|url=https://www.timesnownews.com/delhi/indian-railways-to-soon-launch-budget-friendly-non-ac-vande-sadharan-train-article-101458003|title=Indian Railways To Soon Launch Budget-Friendly Non-AC VANDE SADHARN Train|date=3 July 2023}}</ref> ट्रेनों का निर्माण [[सवारी डिब्बा कारखाना, चेन्नई|ICF, चेन्नई]] द्वारा {{INRConvert|65|c}} की लागत से किया जाता है । <ref>{{Cite web|url=https://www.zeebiz.com/indian-railways/news-indian-railways-what-is-vande-sadharan-train-what-are-its-similarities-with-vande-bharat-train-vande-sadharan-train-amenities-stst-244725|title=Indian Railways: What is Vande Sadharan Train? What are its similarities with Vande Bharat train?|date=18 July 2023|website=Zee Business|access-date=30 October 2023}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.mypunepulse.com/vande-sadharan-express-to-begin-services-soon-know-more/|title=Vande Sadharan Express to Begin Services Soon; Know More - PUNE PULSE|date=29 October 2023|language=en-US|access-date=30 October 2023}}</ref> == सुविधाएँ == इस एक्सप्रेस ट्रेन में 22 कोच हैं, जिनमें से 12 कोच नॉन-एसी स्लीपर क्लास (एसएल), 8 जनरल अनारक्षित क्लास (जीएस/यूआर) और 2 लगेज कोच (ईओजी) हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.businesstoday.in/latest/in-focus/story/vande-sadharan-train-all-you-need-to-know-how-it-is-different-from-vande-bharat-train-403792-2023-10-30|title=Vande Sadharan train: All you need to know; How it is different from Vande Bharat train?|date=30 October 2023|website=Business Today|language=en|access-date=30 October 2023}}</ref> इन कोचों में कोचों के बीच सुरक्षित संक्रमण प्रदान करने और शोर और कंपन को कम करने के लिए एक सीलबंद गैंगवे है। वे सीसीटीवी कैमरे, बायो-वैक्यूम शौचालय, सेंसर-आधारित पानी के नल, एक यात्री सूचना प्रणाली, बिजली के आउटलेट, एलईडी लाइट्स से भी सुसज्जित हैं, और पंखे और स्विच आधुनिक डिजाइन के हैं। हर सीट के लिए एक मोबाइल चार्जिंग पॉइंट भी दिया गया है। <ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/railways/vande-sadharan-express-here-s-all-about-upcoming-amrit-bharat-express-train-design-coaches-routes-top-speed-features-2691895.html|title=Vande Sadharan Express: Here’s All About It - Design, Coaches, Routes, Top Speed, Features|website=Zee News|language=en|access-date=2023-11-24}}</ref> === वंदे भारत एक्सप्रेस से तुलना === वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस दो पूरी तरह से अलग ट्रेनें हैं जो अलग-अलग उद्देश्यों के लिए संचालित होती हैं, जबकि केवल रंग और नामकरण योजना में मेल खाती हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.oneindia.com/india/vande-sadharan-vs-vande-bharat-express-5-key-differences-3678753.html|title=Vande Sadharan Vs Vande Bharat Express: 5 Key Differences|date=8 November 2023|language=en-US|access-date=9 November 2023}}</ref> {| class="wikitable" |+ !सुविधाएँ /ट्रेन !अमृत भारत एक्सप्रेस !वंदे भारत एक्सप्रेस |- ! ट्रेन का प्रकार |{{Center|Locomotive hauled [[Push-pull train|(Push-Pull)]] train}} |{{Center|[[Electric multiple unit]]}} |- ! सेवा |{{Center|Long distances (>1000&nbsp;km)}} |{{Center|Medium Distances (500&nbsp;km average)}} |- ! कक्षाओं |{{Center|12 Sleeper and 8 Unreserved}} |{{Center|14 Chair car and 2 Executive}} |- ! अधिकतम गति |{{Center|{{Cvt|130|km/h}}}} |{{Center|{{Cvt|160|km/h}}}} |- !एयर कंडीशनिंग |नहीं  |हाँ |- !ट्रेन में खान -पान की सुविधा |नहीं  |हाँ |- !स्वचालित दरवाजे |नहीं  |हाँ |- !सील्ड गैंगवे |हाँ |हाँ |- !संरक्षा विशेषताएं |{{Center|{{hlist|CCTV cameras}}}} |{{center|{{hlist|CCTV Cameras|Smoke alarms|Electrical fire safety|Centralised coach monitoring system|Passenger voice communication|Disaster management lights}}}} |- !अन्य विशेषताएं |{{center|{{hlist|Electric outlets|Bio vacuum toilets|Sensor-based water taps|Passenger information system}}}} |{{center|{{hlist|Electric outlets|Bio vacuum toilets|Sensor-based water taps|Passenger information system|Reclining seats|Reading light|Foot-rest|Onboard-wifi| Entertainment Systems|Odour control system}}}} |- !टिकट लागत |कम |उच्च |} == गति प्रतिबंध == भारतीय रेलवे के अनुसंधान और परीक्षण विंग, जिसे [[अनुसन्धान अभिकल्प एवं मानक संगठन|आरडीएसओ]] के नाम से जाना जाता है, ने निर्धारित किया है कि विभिन्न श्रेणियों के यात्री डिब्बों के लिए अधिकतम अनुमेय परिचालन गति इस प्रकार है: * आईसीएफ कोच - 110 किमी प्रति घंटा * एलएचबी नॉन-एसी कोच - 130 किमी प्रति घंटा * एलएचबी एसी कोच - 160 किमी प्रति घंटा इसलिए, एलएचबी गैर-एसी ट्रेन होने के कारण अमृत भारत एक्सप्रेस केवल 130 किमी प्रति घंटे की अधिकतम अनुमेय गति (एमपीएस) पर चल सकती है और वह भी मार्ग के केवल 130 एमपीएस फिट खंडों पर। लेकिन अधिकांश भारतीय रेलवे ट्रैक इस गति का समर्थन करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए ये ट्रेनें विभिन्न खंडों पर कम अधिकतम अनुमेय गति जो कि 100-110 किमी प्रति घंटे है, पर चलेंगी। <ref>{{Cite web|url=https://www.timesnownews.com/mumbai/cheaper-travel-from-mumbai-to-ahmedabad-vande-sadharan-express-clocks-130kmph-speed-during-trial-article-105063861|title=Cheaper Travel From Mumbai to Ahmedabad: Vande Sadharan Express Clocks 130kmph Speed During Trial|date=2023-11-08|website=TimesNow|language=en|access-date=2023-11-08}}</ref> <ref name="timesnownews.com"/> == सेवाएं == {{As of|2023|December}}, these are the Amrit Bharat Express train services to be launched. {| class="wikitable sortable" style="font-size: 80%;" ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |{{Abbr|Sr. no.|Serial number}} ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Train name ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Train number ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Originating station ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220 " |Terminal station ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Operator ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Frequency ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Distance ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Travel time ! colspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Speed ! rowspan="2" style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Inauguration |- ! style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Maximum permitted{{Efn|Maximum permissible speed over different sections is approved by the [[Commission of Railway Safety|Commissioner of Railway Safety]] taking into consideration the condition of track, bridges, curvature and gradient. This speed limit shall not be exceeded under any circumstances. In case of late running, a Loco Pilot may run up to the maximum permissible speed subject to other restrictions in force.}} ! style="color: #333333; background-color: #FF7220" |Average{{Efn|Includes stops and traffic congestion.}} |- !1 |Darbhanga–Anand Vihar Terminal Amrit Bharat Express |'''15557/15558''' |[[दरभंगा जंक्शन रेलवे स्टेशन|Darbhanga Junction]] |[[आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन|Anand Vihar Terminal]] |[[पूर्व मध्य रेलेवे|ECR]] |Bi- Weekly |1137 km |21h 35m |{{Convert|130|km/h|mph|abbr=on}} '''''(TBC)''''' |106 km/h | rowspan="2" |30 December 2023<ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.bhaskar.com/national/news/2-double-engine-amrit-bharat-express-trains-will-run-on-the-tracks-132342858.html|title=पटरी पर दौड़ेगीं डबल इंजन वाली 2 अमृत-भारत एक्सप्रेस ट्रेनें:रफ्तार 130 kmph, PM मोदी 30 दिसंबर को हरी झंडी दिखाएंगे|date=25 December 2023|work=Dainik Bhaskar|language=hi}}</ref> |- !2 |SMVT Bengaluru–Malda Town Amrit Bharat Express |'''13433/13434''' |SMVT Bengaluru |[[मालदा टाउन रेलवे स्टेशन|Malda Town]] |[[पूर्व रेलवे (भारत)|ER]] |Once a Week |2247 km |21h 10m |{{Convert|130|km/h|mph|abbr=on}} '''''(TBC)''''' |106 km/h |} {{Notelist}} === अन्य प्रस्तावित सेवाएँ === # सीतामढी - [[अयोध्या]] # [[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस|मुंबई]] - जौनपुर # [[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस|मुंबई]] - [[पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन|पटना]] # [[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस|मुंबई]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई दिल्ली]] # गोमती नगर - [[श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन|कटरा]] # गोमती नगर - [[छत्रपति शिवाजी टर्मिनस|मुंबई]] # गोमती नगर - [[पुरी रेलवे स्टेशन|पुरी]] # [[चारबाग रेलवे स्टेशन|लखनऊ]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई दिल्ली]] # [[चारबाग रेलवे स्टेशन|लखनऊ]] - [[गोरखपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन|गोरखपुर]] # [[चारबाग रेलवे स्टेशन|लखनऊ]] - [[वाराणसी जंक्शन रेलवे स्टेशन|वाराणसी]] # [[पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन|पटना]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई दिल्ली]] # [[हावड़ा जंक्शन रेलवे स्टेशन|हावड़ा]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई दिल्ली]] # [[सिकंदराबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन|हैदराबाद]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई दिल्ली]] # [[एरनाकुलम जंक्शन रेलवे स्टेशन|एर्नाकुलम]] - [[गुवाहाटी रेलवे स्टेशन|गुवाहाटी]] # [[तांबरम|ताम्बरम]] - [[हावड़ा जंक्शन रेलवे स्टेशन|हावड़ा]] # [[जम्मू तवी रेलवे स्टेशन|जम्मू]] - [[चेन्नई एगमोर रेलवे स्टेशन|चेन्नई]] # [[सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन|सीवान]] - [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|नई]] [[नई दिल्ली रेलवे स्टेशन|दिल्ली]] # [[सीवान जंक्शन रेलवे स्टेशन|सीवान]] - [[कोलकाता रेलवे स्टेशन|कोलकाता]] # == यह सभी देखें == * [[भारत में एक्स्प्रेस और मेल रेलगाड़ियाँ|भारत में सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनें]] * [[वंदे भारत एक्सप्रेस]] * रैपिडएक्स == संदर्भ == {{Reflist}}{{Navboxes}} [[श्रेणी:मेल एक्स्प्रेस ट्रेन]] [[श्रेणी:भारत की नामांकित यात्री ट्रेनें]] shz1tjqnqtm8r213hjst03d2xl18ct4 इनविंसिबल (टीवी शृंखला) 0 1507352 6536570 6531246 2026-04-05T12:13:34Z ~2026-21003-51 918898 /* वाच्य कलाकार */ 6536570 wikitext text/x-wiki {{Infobox television | image = Invincible title card.jpg | genre = {{Plainlist| * एक्शन * एडवेंचर * ड्रामा * विज्ञान फांतासी * सुपरहीरो}} | creator = रॉबर्ट 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web|url=https://www.primevideo.com/-/hi/detail/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B2/0O9QQKFZNXT71V3Y7XX9EUQ1JP|title=Prime Video: इंविंसबल - पेश है ईव स्पेशल एपिसोड|website=www.primevideo.com|language=hi-in|access-date=2024-01-19}}</ref><!--Only increment as a new episode has been released, per the documentation of the template!--> | list_episodes = | executive_producer = {{Plainlist| * रॉबर्ट किर्कमैन * साइमन रेसिओप्पा * कोरी वॉकर * डेविड अल्परट * मार्गरेट एम. डीन * कैथरीन विंडर * सेठ रोजेन * इवान गोल्डबर्ग}} | producer = {{Plainlist| * मौड लुईस * हेलेन लेह}} | animator = स्काएबाउन्ड ऐनिमेशन | editor = {{Plainlist| * स्कॉट विनलॉ * मैथ्यू सिप्पल}} | runtime = 45–55 मिनट<ref name="Invincible S1">{{cite web |title=Invincible Season 1 |website=Amazon |url=https://www.amazon.com/Invincible-Season-1-Official-Trailer/dp/B08WJP55PR/|access-date=August 16, 2021}}</ref> | company = {{Plainlist| * स्कायबाउन्ड नॉर्थ<ref name="wss-e" /> * विंड सन स्काय 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जाना जाता है, के मार्गदर्शन में एक सुपरहीरो में उनके परिवर्तन पर आधारित है। अपने परिवर्तन के दौरान, मार्क खुद को अपने निजी जीवन और सुपरहीरो कर्तव्यों के बीच संघर्ष करता हुआ पाता है, जहां उसे यह साबित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा कि वह अपने पिता की तरह हीरो बन सकता है। श्रृंखला में ग्रेसन परिवार के रूप में स्टीवन येउन, सैंड्रा ओह और जे.के. सिमंस हैं,<ref>{{Cite web|last=Romano|first=Evan|date=2021-04-22|title='Invincible' Might Actually Have the Greatest Voice Cast Ever|url=https://www.menshealth.com/entertainment/g36202569/invincible-amazon-prime-voice-cast-characters/|access-date=2021-08-16|website=[[Men's Health]]|language=en-US}}</ref> जबकि बाकी कलाकार आवर्ती पात्रों के रूप में काम करते हैं। अपनी रिलीज़ के बाद, श्रृंखला को इसके एनीमेशन, एक्शन दृश्यों और कहानी के लिए आलोचकों से प्रशंसा मिली।<ref>{{cite web|title=Robert Kirkman's Animated Series 'Invincible' Gets Premiere Date On Amazon|url=https://deadline.com/2021/01/robert-kirkmans-animated-series-invincible-premiere-date-amazon-clip-watch-1234678592/|last=Petski|first=Denise|website=[[Deadline Hollywood]]|date=January 22, 2021|access-date=January 22, 2021}}</ref> अप्रैल 2021 में, पहले सीज़न के समापन से पहले, अमेज़ॅन ने दूसरे और तीसरे सीज़न के लिए श्रृंखला का नवीनीकरण किया।<ref>{{Cite web|last=Otterson|first=Joe|date=April 29, 2021|title='Invincible' Renewed for Season 2 and Season 3 at Amazon|url=https://variety.com/2021/tv/news/invincible-renewed-season-2-amazon-1234963347/|access-date=April 29, 2021|website=Variety|language=en-US}}</ref> 21 जुलाई, 2023 को, अमेज़ॅन ने इनविंसिबल: एटम ईव शीर्षक से एक प्रीक्वल विशेष जारी किया।<ref>{{Cite web |date=2023-07-22 |title=Invincible Gets Standalone Special for Atom Eve Ahead of Season 2 |url=https://www.cbr.com/invincible-atom-eve-prime-video-special/ |access-date=2023-07-29 |website=CBR |language=en}}</ref> दूसरे सीज़न का प्रीमियर 3 नवंबर, 2023 को हुआ।<ref name= "Season2Release">{{Cite web |last1= Otterson |first1=Joe |last2=Vary |first2=Adam B. |title='Invincible' Sets Season 2 Premiere Date at Prime Video, Drops New Teaser |url= https://variety.com/2023/tv/news/invincible-season-2-premiere-date-prime-video-1235675858/ |date=2023-07-21 |website=Variety |language=en-US}}</ref> ==आधार== मार्क ग्रेसन एक सामान्य दिखने वाला किशोर है, सिवाय इस तथ्य के कि उसके पिता नोलन ग्रह पर सबसे शक्तिशाली सुपरहीरो हैं,<ref>{{Cite web|date=May 2, 2021|title='Invincible' Season 1 Summary & Ending, Explained - Too Old and Too Much Cliched {{!}} DMT|url=https://dmtalkies.com/invincible-season-1-summary-ending-explained-2021-animated-series/|access-date=May 2, 2021|website=Digital Mafia Talkies|language=en-US}}</ref> और अपने सत्रहवें जन्मदिन के तुरंत बाद, मार्क अपनी खुद की शक्तियां विकसित करना शुरू कर देता है और सीखता है कि उन्हें कैसे अपने पिता की मदद से इस्तेमाल किया जाए।<ref name="SeriesOrder">{{cite web |last1=Andreeva |first1=Nellie |title=Amazon Greenlights 'Invincible' Superhero Animated Series From Robert Kirkman |url=https://deadline.com/2018/06/amazon-invincible-superhero-animated-series-the-walking-dead-robert-kirkman-1202413387/ |website=Deadline Hollywood|access-date=June 19, 2018 |date=June 19, 2018}}</ref> ==वाच्य कलाकार== हिन्दी में इस शृंखला में वाच्य कलाकारों संबंधित सूची इस प्रकार हैं:<ref>{{Cite web|url=https://www.primevideo.com/-/hi/detail/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B2/0K677J96WQ96K6UY6BL15O70CO|title=Prime Video: इंविंसबल सीज़न १|website=www.primevideo.com|language=hi-in|access-date=2024-01-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.primevideo.com/-/hi/detail/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%AC%E0%A4%B2/0KRK7IABRYDORGPDYP1XO3OT0Q|title=Prime Video: इंविंसबल सीज़न २|website=www.primevideo.com|language=hi-in|access-date=2024-01-19}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.primevideo.com/-/hi/detail/0RI8K407MG2FJ6F2GBY1PQTIGX/ref=atv_dp_season_select_s3|title=Prime Video: इंविंसबल सीज़न ३|website=www.primevideo.com|language=hi-in|access-date=2025-03-06}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.primevideo.com/detail/0L4S6GN5QKGODF5COGHK3Q4D8N/ref=atv_nb_lcl_hi_IN|title=Prime Video: इंविंसबल सीज़न ४|website=www.primevideo.com|language=hi-in|access-date=2026-04-05}}</ref> {| class="wikitable" !पात्र !अंग्रेजी भाषा !हिन्दी भाषा |- |मार्क ग्रेसन/इनविंसिबल |स्टीवन येन |साहिल विनोद कुलकर्णी |- |नोलन ग्रेसन/ऑम्नि-मैन |जे के साइमन्स |पवन कालरा |- |डेबी ग्रेसन |सैंड्रा ओ |सविता शर्मा |- |ऐम्बर [जस्टिन] बेनेट |ज़ैज़ी बीट्ज़ |श्रुति हसन |- |अमांडा/मॉन्स्टर गर्ल |ग्रे ग्रिफ़िन |सुखमनी सदाना |- |सीसिल स्टेडमन |वॉल्टन गॉगिन्स |राजेश खट्टर |- |समैंथा ईव सैम विलकिंस/ऐटम ईव |गिलियन जेकब्स |श्रिया पिल्गाँवकर |- |विलियम क्लॉक्वेल |एंड्रू रैनल्स |सिद्धार्थ निगम |- |मौलर (जुड़वा/क्लोन किए हुए भाई) |केविन माइकल रिचर्डसन |संकेत म्हत्रे |- |डॉनल्ड फरगसन |क्रिस डायमन्थोफ्युलस |अमित मिस्त्री |- |रेक्स स्प्लोड |जेसन मैंज़ुकस |सौरव चक्रबर्ती |- |रुडी/रोबॉट |रॉस मैरक्वँड़<br>ज़ैक्री क्विन्टो</br>(क्रमश:) |सिद्धार्थ गुप्ता<br>संकेत म्हत्रे</br>(क्रमश:) |- |कैथरीन् केट चा/डुप्लि-केट |मैल्सी जॉ |सुखमनी सदाना |- |मार्कस ग्रिम्शॉ/ब्लैक शैडो |खैरी पेटन |राजेश जॉली |- |एडम विल्किन्स |फ्रेड टैटेस्कॉयर |राजेश जॉली |} अतिरिक्त अभिनेता/अभिनेत्रियाँ इस प्रकार हैं:<ref>{{cite|title= Voice behind — Invincible (2021-)|url=https://www.behindthevoiceactors.com/tv-shows/Invincible/|access-date=2024-01-19}}</ref> {| class="wikitable" !अन्य वाच्य कलाकार |- |नन्द किशोर पांडे |- |अर्चित मौर्य |- |अनिता दोकानियाँ |- |लोहित कुमार शर्मा |- |ईश ठक्कर |- |ऋद्धि ठक्कर |- |शिने प्रकाश |- |अनिकेत खाड्य |- |कारण त्रिवेदी |- |नताशा जॉन |- |सुनील नाम्बियार |- |मणिकांत शर्भोय |- |शगुफ्ता अबरार शेख |- |संकेत म्हत्रे |- |सचिन खेदकर |} निम्न सूची में हिन्दी संस्करण के मुख्य टीम इस प्रकार है:{{efn|जैसा के हर एपिसोड के अंतिम क्रेडिट के दौरान बताया गया।<ref>{{Citation|title=Invincible (TV Series 2021– ) - IMDb|url=http://www.imdb.com/title/tt6741278/fullcredits|access-date=2024-01-19}}</ref>}} {| class="wikitable" !कार्य !सदस्य |- |डबिंग स्टूडियो |आराधना फिल्म्स<br>ऋद्धि ठक्कर</br> |- |अनुवादक |सुमिता गांगुली |- |रचनात्मक पर्यवेक्षक |सुभाष चवन |- |रिकॉर्डिंग टेकनीशियन |अंकित कुमार श्रीवास्तव |- |मिक्सिंग स्टूडियो |आराधना फिल्म्स |- |मिक्स इंजीनियर |प्रकाश गुप्ता |- |व्यवस्थापक सहायक |पल्लवी सिंघवन |} ==टिप्पणियाँ== {{notelist}} == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:विज्ञान कथा]] [[श्रेणी:सुपरहीरो]] [[श्रेणी:काल्पनिक विज्ञान]] [[श्रेणी:फांतासी]] [[श्रेणी:वयस्क ऐनिमेशन]] [[श्रेणी:इनविंसिबल]] 90s9hn9tyvlyrp3uiijj7ksjxdwyxey अब्दुल जलील चौधरी 0 1529228 6536569 6251093 2026-04-05T12:11:47Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536569 wikitext text/x-wiki '''अब्दुल जलील चौधरी बदरपुरी''' ({{Nowrap|1925 –}}19 दिसम्बर 1989) एक [[बंगाली लोग|बंगाली]] [[उलमा|आलिम]], शिक्षक और राजनीतिज्ञ थे। वह [[सिलहट]] में [[हुसैन अहमद मदनी]] के वरिष्ठ शिष्यों में से एक थे।<ref name="kum">{{Cite book|title=كتاب البدور المضية في تراجم الحنفية|last=al-Kumillai, Muhammad Hifzur Rahman|publisher=Dar al-Salih|year=2018|location=[[Cairo]], [[Egypt]]|language=ar|chapter=الشيخ الفاضل مولانا عبد الجليل البدربُوري|trans-chapter=The honourable Shaykh, Mawlānā ʿAbd al-Jalīl al-Badarbūrī}}</ref> वह [[बंगाल का विभाजन (1947)]] के बाद [[बदरपुर, असम|बदरपुर, करीमगंज]], में बस गए और कई बार [[असम विधान सभा]] के सदस्य के रूप में कार्य किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.milligazette.com/news/9-education-and-careers/3700-madrasa-education-system-in-south-assam-india/|title=Madrasa Education System in South Assam|last=Khan, Bazlur Rahman|date=25 May 2021|website=The Milli Gazette}}</ref> बदरपुरी ने [[पूर्वोत्तर भारत]] में सामाजिक विकास को कवर करते हुए कई योगदान दिए हैं, और बराक घाटी के बंगाली भाषा आंदोलन में भाग लिया था।<ref name="bhasha">{{Cite book|title=আসামে ভাষা আন্দোলন ও বাঙালি-প্রসঙ্গ ১৯৪৭-১৯৬১|last=Bishwas, Sukumar|publisher=Parul Prakashani Private Limited|isbn=9789386708250|language=bn|trans-title=The language movement and context of Bengalis in Assam, 1947–1961}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == अब्दुल जलील चौधरी का जन्म [[सिलहट जिला]] के [[दक्षिण सुरमा उपज़िला|तुरुकखोला]] गाँव में एक बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता मुहम्मद असग़र चौधरी थे और उनकी माँ शम्सुन्निसा चौधरानी थीं। शुरू में उन्हें स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लेने से पहले अपने शुरुआती वर्षों में घर पर पढ़ाया।<ref name="mr">{{Cite book|title=মাওলানা আবদুল জলীল বদরপুরী জীবন ও সংগ্রাম|last=Rahman, Mukhlisur|publisher=Bangladesh Nadwatul Azkar|language=bn|trans-title=Mawlana Abdul Jalil Badarpuri Life and Struggles}}</ref> इसके बाद उन्होंने दाउदपुर के स्थानीय [[मदरसा]] में और बाद में [[सिलहट सरकारी आलिया मदरसा]] में अध्ययन किया, जहाँ उन्होंने 1940 में अपनी मम्ताज़ुल मुह़द्दिसीन उत्तीर्ण की। वे मदरसे के [[विद्यार्थी संघ|छात्रसंघ]] के सामान्य पर्यवेक्षक भी थे और उन्होंने उस [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|उपनिवेश विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन]] में भाग लिया था जिसके लिए उन्हें कभी जेल जाना पड़ा था इसके बाद वह [[सहारनपुर जिला|सहारनपुर]] के [[दारुल उलूम देवबन्द]] संस्थान में अध्ययन करने के लिए हिंदुस्तान चले गए। उन्हें 1942 में [[हदीस]] संकाय से स्नातक होना था, लेकिन एक छात्र नेता के रूप में [[हुसैन अहमद मदनी]] के विद्रोहों में भाग लेने के परिणामस्वरूप, एक बार फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 1952 में, उन्होंने अंततः हदीस अध्ययन में देवबंद से स्नातक किया। उनके शिक्षकों में हुसैन अहमद मदनी, [[शब्बीर अहमद उस्मानी]], [[इज़ाज़ अली अमरोही]], [[मुहम्मद शफी देवबन्दी]] और [[मुहम्मद इदरीस कांधलवी]] शामिल थे।<ref name="mr"/> == करियर == चौधरी का कार्यकाल [[सिलहट सरकारी उच्च विद्यालय]] में [[फ़ारसी भाषा|फारसी भाषा]] के शिक्षक के रूप में शुरू हुआ। दो साल बाद, उन्हें [[यशोहर आलिया मदरसा]] का प्राचार्य और फिर सिलहट में [[गोलापगञ्ज उपज़िला|फूलबाड़ी]] के [[अजीरिया आलिया मदरसा]] में एक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।<ref name="mr"/> चौधरी की सक्रियता उनके छात्र जीवन में शुरू हुई, और वे भारत के विभाजन का विरोध करते हुए [[ब्रिटिश राज]] से स्वतंत्रता की मांग करने वाले [[जमीयत उलेमा-ए-हिन्द]] से जुड़े थे।<ref>{{Cite web|url=https://twocircles.net/2015jan18/1421562101.html|title=Role of Akram Hussain Saikia in the freedom struggle of India|last=Majumdar, Nurur Rahim|date=18 January 2015|website=Two Circles}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> उनके जीवनीकारों ने उल्लेख किया है कि [[अखिल भारतीय मुस्लिम लीग|मुस्लिम लीग]] के राजनेताओं ने उनके और अन्य प्रभावशाली जमीयत समर्थकों के खिलाफ साजिश रची, और इस प्रकार चौधरी ने [[असम]] में जमीयत के सदस्यों से अनुरोध किया कि वे उन्हें [[भारतीय अधिराज्य]] में स्थानांतरित करने में मदद करें। असम जमीयत के राजनेताओं ने असम के पूर्व मुख्यमंत्री [[गोपीनाथ बोरदोलोई|गोपीनाथ बड़दलै]] से उनकी नागरिकता मांगी, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से चौधरी को असम आने का निमंत्रण देते हुए एक पत्र भेजा था। सितंबर 1947 में जैसे ही चौधरी को पत्र मिला, वह अपने माता-पिता, भाई-बहनों और जीवनसाथी को छोड़कर [[करीमगंज जिला|करीमगंज]] के अलाक़ुलीपुर गांव में बस गए।<ref name="mr"/> अक्टूबर 1947 में, चौधरी को [[देवराइल सीनियर मदरसा]] के संस्थापक [[शाह याक़ूब बदरपुरी]] के निर्देश पर इसका प्राचार्य नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान, मदरसे को [[देवबन्दी]] मानकों पर फिर से तैयार किया गया और 1948 में असम सरकार से आधिकारिक मान्यता प्राप्त की गई। हदीस अध्ययन विभाग का उद्घाटन 24 फरवरी 1954 को [[हुसैन अहमद मदनी]] द्वारा किया गया था, और चौधरी ने अपनी मृत्यु तक इस विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य किया।<ref name="mr"/> वह पूर्वोत्तर भारत के [[इमारत-ए-शरीया]] और समग्र विकास के लिए मुस्लिम धार्मिक संगठन [[नद्वतुत तामीर]] के संस्थापक भी थे।<ref>{{Cite web|url=http://muslimmirror.com/eng/ne-emarat-e-shariah-distributes-scholarship-for-higher-and-professional-studies/|title=NE Emarat-e-Shariah distributes scholarship for higher and professional studies|date=May 19, 2013}}</ref> === राजनीतिक करियर === 1951 में, वह [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी]] में शामिल हो गए और कुल 27 वर्षों तक [[असम विधान सभा]] के निर्वाचित सदस्य रहे। प्रारंभ में बदरपुर का प्रतिनिधित्व करते हुए, उन्होंने अल्गापुर निर्वाचन क्षेत्र में अपना अंतिम कार्यकाल पूरा किया।<ref>{{Cite web|url=https://elections.traceall.in/vidhan-sabha-assembly-election-results/Badarpur-in-Assam|title=Badarpur assembly election results in Assam|website=elections.traceall.in|access-date=16 मई 2024|archive-date=20 जनवरी 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240120062227/https://elections.traceall.in/vidhan-sabha-assembly-election-results/Badarpur-in-Assam|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://assamassembly.gov.in/mla-1957-62.html|title=Assam Legislative Assembly - MLA 1957-62|website=assamassembly.gov.in}}</ref> 1961 में [[बराक घाटी]] के [[बंगाली भाषा]] आंदोलन के दौरान, उन्होंने सार्वजनिक रूप से आंदोलन की वकालत की, इसे सभी बंगालियों के लिए एक दायित्व माना।<ref name="bhasha"/> == निजी जीवन == चौधरी ने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया क्योंकि वह 1947 में भारत के विभाजन के बाद उनके साथ असम जाने को तैयार नहीं थी।<ref name="mr"/> * == संदर्भ == {{Reflist}} <references responsive="1"></references> {{Hanafi scholars}} [[श्रेणी:१९८९ में निधन]] [[श्रेणी:1925 में जन्मे लोग]] 13ljcld2bmk8vu2ctn2uttbbqmuws0n अल्बा बैप्टिस्टा 0 1536208 6536830 6427487 2026-04-06T06:59:30Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536830 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=अल्बा बैप्टिस्टा|image=AlbaBaptista.png|caption=2018 मे बैप्टिस्टा|birth_name=|spouse={{marriage|[[क्रिस इवांस|क्रिस इवान]]|2023}}|birth_date={{Birth date and age|df=yes|1997|7|10}}|birth_place=[[लिस्बन]], पुर्तगाल|occupation=अभिनेत्री|years_active=2012–वर्तमान}}'''अल्बा बैपटिस्टा,''' जन्म 10 जुलाई 1997 को, एक [[पुर्तगाल|पुर्तगाली]] अभिनेत्री हैं।<ref name="uol">{{cite web|url=https://entretenimento.uol.com.br/noticias/redacao/2020/07/15/alba-baptista-de-warrior-nun-e-filha-de-brasileiro-e-fala-cinco-linguas.htm|title=Alba Baptista, de 'Warrior Nun', é filha de brasileiro e fala cinco línguas|author=Beatriz Amendola|date=15 July 2020|website=entretenimento.uol.com.br|language=pt|trans-title=Alba Baptista, from 'Warrior Nun', daughter of a Brazilian father and speaks five languages|accessdate=26 July 2020}}</ref> उन्होंने [[पुर्तगाल]] में अपने करियर की शुरुआत "''जार्डिन्स प्रोइबिडोस''" (2014-2015) श्रृंखला से की। इसके बाद, वह विभिन्न पुर्तगाली श्रृंखलाओं और फिल्मों जैसे "''ए इम्पोस्टोरा''," "''फिलहा दा लेई''," "''ए क्रिआकाओ''," और "''जोगो डुप्लो''" में दिखाई दीं।<ref>{{Cite web|url=https://pro.imdb.com/name/nm4926180/|title=Alba Baptista - Contact Info, Agent, Manager {{!}} IMDbPro|website=pro.imdb.com|access-date=2024-06-23}}</ref> 2020 से 2022 तक, उन्होंने नेटफ्लिक्स श्रृंखला "''वॉरियर नन''" में मुख्य भूमिका निभाई, जिसने उनकी अंग्रेजी भाषा की शुरुआत की।<ref name="deadline-uta">{{cite web|url=https://deadline.com/2020/03/netflix-warrior-nun-alba-baptista-uta/|title=UTA Signs Alba Baptista, Star Of Netflix’s Upcoming Fantasy Series ‘Warrior Nun’|last=Wiseman|first=Andreas|date=4 March 2020|website=Deadline Hollywood}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == बैपटिस्टा का जन्म [[पुर्तगाल]] के [[लिस्बन]] में हुआ था। जब उनकी पुर्तगाली माँ की मुलाकात [[रियो डि जेनेरो|रियो डी जनेरियो]] मे उनके ब्राज़ीलियाई इंजीनियर पिता से हुई,<ref name="uol" /> तब उनकी माँ [[ब्राज़ील]] में अनुवादक के रूप में काम करती थीं। बैपटिस्टा ने पुर्तगाल के एक जर्मन स्कूल में पढ़ाई की।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.wmagazine.com/culture/alba-baptista-interview-mrs-harris-goes-to-paris-2022|title=Alba Baptista Is Still Getting Used to This Whole Hollywood Thing|last=Eckardt|first=Steph|date=2022-08-04|website=W Magazine|language=en|access-date=2022-11-16}}</ref> जब वह लगभग 15 वर्ष की थीं, तब उन्होंने एक अभिनेत्री के रूप में अपना करियर बनाने का फैसला किया।<ref name=":0" /> उन्होंने उल्लेख किया है कि बड़े होते समय उनकी पसंदीदा फिल्म ''द हंचबैक ऑफ नोट्रे डेम (1996)'' थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.glamour.com/story/alba-baptista-interview|title=Alba Baptista Is on Her Way to Becoming Hollywood’s Next It Girl|last=Brody|first=Caitlin|website=Glamour|language=en-US|access-date=2022-11-16}}</ref> == करियर == 16 साल की उम्र में, अल्बा बैपटिस्टा ने सिमो कायटे की लघु फिल्म ''मियामी'' में मुख्य किरदार के रूप में अपना करियर शुरू किया।<ref>{{cite web|url=https://www.vogue.pt/alba-baptista-entrevista-cinema|title=Alba Baptista: "Chegar acaba por ser mais fácil do que permanecer."|author=Sara Andrade|date=2020-03-25|website=[[Vogue (magazine)|Vogue.pt]]|language=Portuguese|trans-title=Alba Baptista: "Getting there turns out to be easier than staying."}}</ref> उनके प्रदर्शन के लिए, उन्हें फेस्टिवल इबेरिको डी सिने में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उन्होंने पुर्तगाली श्रृंखला ''ए क्रिआकाओ'' और ''टेलीनोवेलस ए इम्पोस्टोरा'' और ''जोगो डुप्लो'' में अभिनय करके अपने करियर को आगे बढ़ाया।<ref name=":0" /> अगले वर्षों के दौरान, अल्बा ने [[पुर्तगाल]] में एक मजबूत सिनेमा करियर विकसित किया, साथ ही तीन लोकप्रिय पुर्तगाली श्रृंखलाओं में भूमिकाएँ निभाईं। उनके फिल्मी काम में शामिल हैं: एडगर पेरा द्वारा ''कैमिनहोस मैग्नेटिकोस'', जिसमें उन्होंने "कैटरीना" की भूमिका निभाई; और इवो फरेरा द्वारा ''इक्विनोसियो''। 2019 में वह फिल्म ''पैट्रिक'' में दिखाई दीं, जो गोंकालो वाडिंगटन के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी, और जो सैन सेबेस्टियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रतिस्पर्धा में थी, जहां इसका प्रीमियर हुआ था। वह 2020 की फीचर फिल्म ''फातिमा'' में हार्वे कीटल, सोनिया ब्रागा और जोआना रिबेरो के साथ दिखाई दीं, जो मार्को पोंटेकोर्वो द्वारा निर्देशित है। उनकी पहली अंग्रेजी भाषा की भूमिका [[नेटफ्लिक्स]] की श्रृंखला ''वारियर नन'' में अवा की मुख्य भूमिका के रूप में आई, जो 2 जुलाई, 2020 को रिलीज़ हुई थी।<ref name=":0" /> उन्होंने दूसरे सीज़न में अपनी भूमिका दोहराई, जो 10 नवंबर, 2022 को रिलीज़ हुई थी।<ref>{{Citation|title=Warrior Nun|url=https://www.rottentomatoes.com/tv/warrior-nun/s02|language=en|access-date=2022-11-27}}</ref> 2022 में, उन्होंने ''मिसेज हैरिस गोज़ टू पेरिस'' में 1950 के दशक की डायर म्यूज़ नताशा की भूमिका निभाई।<ref name=":0" /> == व्यक्तिगत जीवन == बैप्टिस्टा ने 9 सितंबर, 2023 को मैसाचुसेट्स के ''केप कॉड'' में एक निजी घरेलू समारोह में अमेरिकी अभिनेता [[क्रिस इवांस]] से शादी की। <ref>{{cite magazine|url=https://people.com/chris-evans-marries-alba-baptista-7503006|title=Chris Evans Marries Alba Baptista in Cape Cod Wedding — with His Superhero Costars as Guests!|work=People|date=September 10, 2023}}</ref> == संदर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ी == * {{IMDb name}} * [https://subtitletalent.com/alba-baptista Alba Baptista] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200618081409/https://subtitletalent.com/alba-baptista |date=18 जून 2020 }} ''Subtitle Talent'' पर प्रोफ़ाइल * [https://www.elitelisbon.com/en/alba-baptista-485/ Alba Baptista] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210629094428/https://www.elitelisbon.com/en/alba-baptista-485/ |date=29 जून 2021 }} ''एलीट लिस्बन'' में प्रोफ़ाइल * [https://www.instagram.com/alba.baptista/ Alba Baptista] ''इंस्टाग्राम'' पर प्रोफाइल jlhkxedacovddh4kemg8g6z82f9vyqp वार्ता:जेफ़री एपस्टीन 1 1538607 6536950 6151114 2026-04-06T11:32:16Z ~2026-21240-33 919062 /* क्या जेफरी एपस्टीन यहुदी था */ नया अनुभाग 6536950 wikitext text/x-wiki {{संपादनोत्सव जून 24}} == क्या जेफरी एपस्टीन यहुदी था == क्या जेफरी एपस्टीन यहुदी था [[विशेष:योगदान/&#126;2026-21240-33|&#126;2026-21240-33]] ([[सदस्य वार्ता:&#126;2026-21240-33|वार्ता]]) 11:32, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 2n1fbmaifivhk7kmy9gqagk4d1evc1c अब्दुल वाहिद पेडरसन 0 1543317 6536579 6196888 2026-04-05T12:23:43Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536579 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=अब्दुल वाहिद पेडरसन|image=Abdul Wahid Pedersen.JPG|image_size=|caption=|birth_name=रीनो एरिल्ड पेडरसन|birth_date={{birth year and age|1954}}|birth_place=|death_date=|death_place=|nationality=डेनिश|other_names=|citizenship=|education=|alma_mater=|occupation=[[इमाम]]|years_active=|employer=|known_for=|spouse=|children=|parents=|relatives=|awards=|website=|footnotes=}} '''अब्दुल वाहिद पेडरसन''' (जन्म: 1954 में '''रीनो एरिल्ड पेडरसन''' ) एक [[डेनमार्क|डेनिश]] [[इमाम]] हैं। == व्यक्तिगत जीवन == पेडरसन का जन्म [[स्वीडन]] में हुआ था और उनकी माँ फ़िनिश हैं। <ref>{{Cite web|url=http://www.svb.se/nyheter/utland-i-stormens-oga|title=UTLAND: I stormens öga|website=Svensk Bokhandel|language=Swedish|archive-url=https://web.archive.org/web/20161226173924/http://www.svb.se/nyheter/utland-i-stormens-oga|archive-date=December 26, 2016|access-date=December 26, 2016}}</ref> पेडरसन ने विभिन्न विश्व धर्मों की लंबी खोज के बाद 1982 में इस्लाम धर्म अपना लिया। उनका पालन-पोषण एक [[ईसाई धर्म|ईसाई]] के रूप में हुआ, 16 वर्ष की आयु में वे एक [[स्वतन्त्र विचार|स्वतंत्र विचारक]] बन गए और अंततः 1982 में [[इस्लाम|इस्लाम धर्म]] अपनाने का निर्णय लेने से पहले चार वर्षों तक [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के अनुयायी रहे। <ref name="dailytimes">{{Cite web|url=https://dailytimes.com.pk/123435/imam-abdul-wahid-pedersen/|title=Imam Abdul Wahid Pedersen|date=2017-07-29|website=Daily Times|language=en-US|access-date=2020-11-17}}</ref> इस्लाम में शामिल होने से पहले, वह कुछ समय के लिए जाइलैंड में एक छोटे से कम्यून में रहे, उस समय उन्होंने धूम्रपान किया और [[गाँजा|भांग]] भी खरीदी और बेची। <ref>Anders Rou Jensen: Islam på jysk. Abdul Wahid Pedersen - fra hippie på Djursland til imam på Nørrebro. Politikens Forlag, 2006 (in Danish).</ref> इसके बाद दिसंबर 1983 में उन्हें आपराधिक संहिता की धारा 191 के तहत एक साल और चार महीने की जेल की सजा सुनाई गई। <ref>{{Cite web|url=https://ekstrabladet.dk/112/article3249934.ece|title=Dansk imam skjuler narko-dom|last=Telefon: 33111313|first=Rådhuspladsen 37 1785 København V.|website=ekstrabladet.dk|language=da|access-date=2020-11-17}}</ref> उनकी शादी एक मोरक्को की पत्नी से हुई है और उनके चार बच्चे हैं, जिनमें डेनिश लेखिका ज़हरा पेडरसन भी शामिल हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.dr.dk/nyheder/indland/imamens-datter-hele-mit-liv-har-jeg-skullet-forsvare-mig|title=Imamens datter: Hele mit liv har jeg skullet forsvare mig|date=2019-10-22|website=DR.dk|language=da|access-date=2021-09-16}}</ref> == आजीविका == पेडरसन संगठन के प्रारंभिक वर्षों में मुस्लिम्स इन डायलॉग के उपाध्यक्ष थे, जो एक डेनिश मुस्लिम बहुजातीय संगठन है जो डेनिश समाज में इस्लाम को बढ़ावा देता है। पेडरसन डेनमार्क मुस्लिम काउंसिल के उपाध्यक्ष हैं, जो एक समय में डेनमार्क में मुस्लिम संगठनों का सबसे बड़ा निकाय था। वह डेनमार्क में मुस्लिम अभिभावकों के बच्चों के लिए तीन निजी स्कूलों के सह-संस्थापक और प्रिंसिपल हैं। वह कोपेनहेगन में इस्लामिक क्रिश्चियन स्टडी सेंटर के सह-संस्थापक और लंबे समय तक उपाध्यक्ष भी रहे हैं। उन्होंने विश्व भर के अनेक देशों में राहत परियोजनाओं का नेतृत्व किया। उदाहरण के लिए, [[तालिबान आन्दोलन|तालिबान]] शासन से पहले [[अफ़ग़ानिस्तान|अफ़गानिस्तान]] के [[कुनर प्रान्त|कुनार]] प्रांत में एक स्कूल की स्थापना की गई जिसमें लड़कियों को भी प्रवेश दिया गया। <ref>{{Cite web|url=https://iow.eui.eu/wp-content/uploads/sites/18/2014/05/Evans-25-Background-Hak.pdf|title=How Islam influenced Abdul Waheb|last=Ahel|first=Danish|date=2019-07-23|website=Daily Dass|archive-url=https://web.archive.org/web/20230923044430/https://iow.eui.eu/wp-content/uploads/sites/18/2014/05/Evans-25-Background-Hak.pdf|archive-date=23 सितंबर 2023|access-date=2020-11-16|url-status=dead}}</ref> उन्होंने इस्लाम पर कई पुस्तकों का डेनिश भाषा में अनुवाद किया है। 1997 में वह डेनिश भाषा में शुक्रवार का उपदेश देने वाले पहले इमाम थे। <ref name=>{{Cite web|url=https://dailytimes.com.pk/123435/imam-abdul-wahid-pedersen/|title=Imam Abdul Wahid Pedersen|date=2017-07-29|website=Daily Times|language=en-US|access-date=2020-11-17}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[https://dailytimes.com.pk/123435/imam-abdul-wahid-pedersen/ "Imam Abdul Wahid Pedersen"]. ''Daily Times''. 2017-07-29<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">2020-11-17</span></span>.</cite></ref> == इन्हें भी देखें == [[अब्दुल क़ादिर अस सूफ़ी]] [[आयेशा बीवली]] [[इस्लाम में धर्मान्तरित लोगों की सूची जो इस्लामी विद्वान हैं|'''इस्लाम''' में धर्मान्तरित लोगों की सूची जो '''इस्लामी''' '''विद्वान''' हैं]] == संदर्भ == <references /> ==बाहरी कड़ियाँ== * [https://web.archive.org/web/20060424150845/http://www.islamonline.net/english/journey/2006/03/jour04.shtml हे ईश्वर, यदि आप हैं तो मेरा मार्गदर्शन करें - एक डेनिश व्यक्ति ने इस्लाम की खोज की] अंग्रेज़ी में A Danish Man Discovers Islam * [https://www.facebook.com/abdulwahidpedersen/ फेसबुक पर] [[श्रेणी:हिन्दू धर्म से इस्लाम में धर्मान्तरित]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1954 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:लेखक]] [[श्रेणी:21वीं सदी के इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]] [[श्रेणी:21वीं सदी के मुसलमान]] [[श्रेणी:इस्लाम में परिवर्तित लोगों की सूची]] [[श्रेणी:डेनमार्क]] a0pdsl38m0oeuggs0czbazuq2gfv0hn अवामी लीग की आलोचना 0 1548660 6536884 6502965 2026-04-06T07:53:26Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536884 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Front_sight_view_of_the_National_Parliament_House_of_Bangladesh.jpg|अंगूठाकार|165x165पिक्सेल|'''[[बांग्लादेश अवामी लीग|बांग्लादेश के राष्ट्रीय संसद भवन के सामने का दृश्य]]''']] '''[[बांग्लादेश अवामी लीग|बांग्लादेश]] [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] की आलोचना:''' बांग्लादेश अवामी लीग नामक [[बांग्लादेशी]] राजनीतिक दल और उसके सभी संबंधित राजनीतिक संगठनों, जिसमें बांग्लादेश छात्र लीग, जुबो लीग, स्वच्छसेबक लीग आदि शामिल हैं, और अन्य संबंधित निकायों की आलोचना की गई घटनाओं और गतिविधियों को संदर्भित करती है, जिसमें अवामी लीग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल है या शामिल होने का दावा करती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.prothomalo.com/politics/cljubngn3w|title=আওয়ামী লীগের ৭৫ বছর: সাফল্যের পাশাপাশি আছে সমালোচনাও|last=হোসেন|first=আনোয়ার|date=2024-06-23|website=Prothomalo|language=bn|access-date=2024-08-21}}</ref> कुछ उल्लेखनीय उदाहरण [[अबरार फ़हद की हत्या|अबरार फहद की हत्या]], पद्म पुल भ्रष्टाचार कांड, [[बिस्वजीत दास की हत्या|विश्वजीत दास की हत्या]], सागर सरोवर और मेहरून रूनी की हत्या, [[बांग्लादेश राइफल्स विद्रोह]], [[2013 शापला स्क्वायर विरोध प्रदर्शन]], बांग्लादेश कोटा सुधार आंदोलन, बांग्लादेश छात्र लीग की हिंसा, एस आलम समूह घोटाला, लोगी बोइथा आंदोलन, 2009,2014 और 2018 में विवादित चुनाव, रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र भ्रष्टाचार आदि हैं।<ref>{{Cite web|url=https://bangla.thedailystar.net/%E0%A6%AE%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%A4/%E0%A6%B8%E0%A6%AC-%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%95%E0%A6%BF-%E0%A6%B6%E0%A7%81%E0%A6%A7%E0%A7%81-%E0%A6%86%E0%A6%93%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%80-%E0%A6%B2%E0%A7%80%E0%A6%97%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%8F%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A6%B0-82975|title=সব দায় কি আওয়ামী লীগের একার?|last=লিটন|first=শাখাওয়াত|date=2017-08-10|website=The Daily Star Bangla|language=en|access-date=2024-08-21}}</ref> == जातीय राखी वाहिनी == == दूसरी क्रांति == == बांग्लादेश में विद्रोह == == 2013 शापला स्क्वायर विरोध प्रदर्शन में नरसंहार == == अबरार फहद की हत्या == [[चित्र:A_protestant_demands_justice_for_killing_abrar_fahad.jpg|अंगूठाकार|'''बुईट छात्र अबरार फहद की हत्या के विरोध में प्रदर्शन''']] '''अबरार फहद''' बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीयूईटी) में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (ईईई) विभाग में द्वितीय वर्ष के छात्र थे। एक छात्र राजनीतिक संगठन, बुईट की [[छात्र लीग]] से जुड़े नेताओं द्वारा बुईट के शेर-ए-बांग्ला हॉल के अंदर उन्हें बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और मार दिया गया। इस घटना ने राष्ट्रीय आक्रोश को जन्म दिया और परिसर में हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। अबरार के हत्यारों को बाद में अत्यधिक प्रचारित मुकदमे के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-49979097|title=Abrar Fahad: Killing of Bangladesh student triggers protests|work=[[बीबीसी न्यूज़]]|access-date=9 October 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191203203527/https://www.bbc.com/news/amp/world-asia-49979097|archive-date=3 December 2019}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/city/6-identified-and-4-held-dmp-says-for-buet-student-abrar-death-1810567?amp|title=9 held over Buet student Abrar murder|work=[[The Daily Star (Bangladesh)|The Daily Star]]|access-date=8 October 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191008022202/https://www.thedailystar.net/city/6-identified-and-4-held-dmp-says-for-buet-student-abrar-death-1810567?amp|archive-date=8 October 2019}}</ref> एक शव परीक्षण रिपोर्ट ने बाद में पुष्टि की कि फहद की मृत्यु गंभीर कुंद बल आघात के परिणामस्वरूप हुई थी।<ref>{{Cite news|url=https://www.dhakatribune.com/bangladesh/dhaka/2019/10/07/autopsy-report-says-abrar-was-beaten-to-death|title=Autopsy report: Abrar was beaten to death|date=7 October 2019|work=[[Dhaka Tribune]]|access-date=8 October 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191008011421/https://www.dhakatribune.com/bangladesh/dhaka/2019/10/07/autopsy-report-says-abrar-was-beaten-to-death|archive-date=8 October 2019}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/frontpage/news/buet-student-beaten-death-critical-fb-post-costs-his-life-1810798|title=Buet student beaten to death: Critical FB post costs him his life?|work=[[The Daily Star (Bangladesh)|The Daily Star]]|access-date=8 October 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191015121326/https://www.thedailystar.net/frontpage/news/buet-student-beaten-death-critical-fb-post-costs-his-life-1810798|archive-date=15 October 2019}}</ref> == सागर सरोवर और मेहरून रूनी की हत्या == सागर सरोवर और मेहरून रूनी की हत्या दो प्रसिद्ध, विवाहित बांग्लादेशी पत्रकारों की अनसुलझी दोहरी हत्या के मामले के बारे में है, जिन्हें चाकू मारकर मार दिया गया था।<ref name="GUARDIAN">{{Cite news|url=https://www.theguardian.com/world/feedarticle/10088200|title=Police: Journalist couple killed in Bangladesh|date=11 February 2012|work=The Guardian|access-date=7 March 2012}}</ref><ref name="DW">{{Cite news|url=http://www.dw.de/ex-deutsche-welle-journalist-victim-of-brutal-stabbing-at-home-in-dhaka/a-15739227|title=Ex Deutsche Welle journalist victim of brutal stabbing at home in Dhaka|last=Berning|first=Sarah|work=Deutsche Welle}}</ref><ref name="DS">{{Cite news|url=http://www.thedailystar.net/newDesign/news-details.php?nid=222110|title=Journalist couple killed|last=Sarkar|first=Kailash|date=12 February 2012|work=The Daily Star|access-date=7 March 2012|last2=Mollah|first2=Shaheen}}</ref><ref name="BD24">{{Cite news|url=http://bdnews24.com/bangladesh/2012/02/12/no-case-probe-headway|title=No case, probe headway|date=12 February 2012|work=bdnews24.com|access-date=24 February 2013}}</ref><ref name="NA">{{Cite news|url=http://newagebd.com/newspaper1/archive_details.php?date=2012-02-11&nid=50052|title=Journalist couple murdered in city|date=11 February 2012|work=New Age|access-date=7 March 2012|archive-url=https://archive.today/20130629234141/http://newagebd.com/newspaper1/archive_details.php?date=2012-02-11&nid=50052|archive-date=29 June 2013}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.huffingtonpost.com/2012/02/11/sagar-sarwar-mehrun-runi-killed-journalist-bangladesh_n_1270069.html|title=Sagar Sarwar And Mehrun Runi, Journalist Couple, Killed in Bangladesh|date=11 February 2012|work=Huffington Post|access-date=7 March 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20120214015725/http://www.huffingtonpost.com/2012/02/11/sagar-sarwar-mehrun-runi-killed-journalist-bangladesh_n_1270069.html|archive-date=14 February 2012|agency=Associated Press}}</ref> मामला अभी भी खुला है और डीएनए परीक्षण से पता चला है कि यह संभव था कि हत्या में दो लोग शामिल थे।<ref name="2015update">{{Cite news|url=http://www.thefinancialexpress-bd.com/2015/02/11/80640|title=No light in sight in Sagar-Runi murder case even after 3 yrs|date=11 February 2015|work=The Financial Express|location=Dhaka}}</ref>दंपति की हत्या ने बांग्लादेश में उच्च-स्तरीय राजनीतिक ध्यान और व्यापक मीडिया कवरेज प्राप्त किया, और जर्मन रुचि को आकर्षित किया क्योंकि सरोवर जर्मनी में रहते थे और [[डॉयचे वेले]] के लिए एक पत्रकार के रूप में काम करते थे। इस मामले को पत्रकारों और अंतर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठनों द्वारा भी बारीकी से देखा गया था।<ref name="DW" /><ref name="BBC">{{Cite news|url=https://www.bbc.co.uk/news/world-asia-16997187|title=Bangladesh: TV journalist couple murdered in Dhaka|date=11 February 2012|access-date=14 March 2013|publisher=BBC News}}</ref><ref name="DC">{{Cite news|url=http://www.dhakacourier.com.bd/?p=4997|title=Turbulence ahead|last=Ahmad|first=Shamim|date=23 February 2012|work=Dhaka Courier|access-date=7 March 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20140820005932/http://www.dhakacourier.com.bd/?p=4997|archive-date=20 August 2014}}</ref><ref name="CPJ">{{Cite web|url=http://cpj.org/blog/2012/02/bangladeshi-journalists-call-for-justice-in-couple.php|title=Bangladeshi journalists call for justice in couple's murder|last=Jones|first=Kristin|date=27 February 2012|publisher=Committee to Protect Journalists|access-date=7 March 2013}}</ref> दंपति की हत्या ने बांग्लादेशी पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों को भी एकीकृत किया जो कभी अलग थे।<ref name="unity">{{Cite news|url=http://www.thedailystar.net/newDesign/news-details.php?nid=262374|title=2 factions of BFUJ, DUJ mull unity|date=24 December 2012|work=The Daily Star|access-date=10 March 2013}}</ref>परिवार के एक प्रतिनिधि ने कहा, "पिछले 25 वर्षों में, यह बांग्लादेश में सबसे अधिक चर्चित/लिखित, प्राथमिकता वाला मामला रहा है।" हत्या की पांचवीं वर्षगांठ के लिए 2017 में एक प्रदर्शन बुलाया गया था ताकि जांच रिपोर्ट जारी करने का आह्वान किया जा सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.thedailystar.net/news/case-open|title=CASE: OPEN|last=Hossain|first=Anika|date=2013-03-05|website=The Daily Star|language=en|access-date=2024-08-21}}</ref><ref name="crime">{{Cite news|url=http://www.daily-sun.com/details_yes_04-03-2012_Many-murders-in-the-month-of-martyrs_74_2_1_1_8.html|title=Many murders in the month of martyrs|last=Ullah|first=Md Ahamed|date=4 March 2012|work=Daily Sun|access-date=7 April 2013|archive-url=https://archive.today/20130628235032/http://www.daily-sun.com/details_yes_04-03-2012_Many-murders-in-the-month-of-martyrs_74_2_1_1_8.html|archive-date=28 June 2013}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.dhakatribune.com/bangladesh/crime/2017/02/11/sagar-runi-killing-journalists-launch-tough-movement/|title=Sagar-Runi killing: Journalists to launch tough movement|date=11 February 2017|work=Dhaka Tribune}}</ref> == विश्वजीत दास की हत्या == '''विश्वजीत दास''' [[ढाका]], बांग्लादेश में एक 24 वर्षीय दर्जी था, जिसकी 9 दिसंबर 2012 को सत्तारूढ़ [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] पार्टी की छात्र शाखा बांग्लादेश छात्र लीग (बी. सी. एल.) के सदस्यों द्वारा हत्या कर दी गई थी।<ref name="ds18Jul2017">{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/backpage/biswajit-murder-hc-verdict-aug-6-1434736|title=Biswajit Murder: HC verdict on Aug 6|date=July 18, 2017|work=The Daily Star|access-date=July 29, 2024}}</ref> उस दिन विपक्षी [[१८ दलीय गठबंधन|18 पार्टी गठबंधन]] द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी सड़क अवरोध थे। उस सुबह, दास पुराने ढाका के शंखारी बाजार में अपनी दुकान, अमानट्रॉन टेलर्स की ओर जा रहे थे, जब जगन्नाथ विश्वविद्यालय के बीसीएल कार्यकर्ताओं के एक विरोधी नाकाबंदी जुलूस के पास एक या अधिक छोटे बम विस्फोट हुए।<ref name="ds3Jun2013">{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/news/21-bcl-men-indicted|title=21 BCL men indicted|date=Jun 3, 2013|work=The Daily Star|access-date=July 29, 2024}}</ref><ref name="bdn18Dec2013">{{Cite news|url=http://bdnews24.com/bangladesh/2013/12/18/eight-to-die-for-biswajit-murder|title=Eight to die for Biswajit murder, 13 get life|date=18 December 2013|work=bdnews24.com|access-date=2017-08-03}}</ref><ref name="livemint">{{Cite news|url=http://www.livemint.com/Home-Page/jmtTMbVQ4hRsD3YibeglWO/Bangladesh-sentences-eight-students-to-death-for-murder.html|title=Bangladesh sentences eight students to death for murder|date=18 December 2013|work=[[LiveMint]]|access-date=2017-08-03|agency=Agence France-Presse}}</ref> उनमें से एक समूह ने दास को एक विपक्षी समर्थक समझ लिया और बहादुर शाह पार्क के पास से पास की एक इमारत में उनका पीछा किया।<ref name="bdn18Dec2013" /> उन्होंने उन पर कुल्हाड़ियों, लोहे की छड़ें और हॉकी की छड़ों से हमला किया।<ref name="ds3Jun2013" /> दास ने भागने का प्रयास किया, लेकिन शंखारी बाजार रोड पर गिर गया। एक रिक्शा चालक दास को [[मिटफोर्ड अस्पताल, ढाका|मिटफोर्ड अस्पताल]] ले गया, जहाँ उनकी जल्द ही मौत हो गई।<ref name="bdn18Dec2013" /> == पद्म पुल भ्रष्टाचार मामला == पद्म पुल भ्रष्टाचार घोटाला 2016 और 2017 में [[बांग्लादेश]] में एक राजनीतिक घोटाला था, जिसमें [[बांग्लादेश अवामी लीग]] और पद्म पुल, [[पद्मा नदी]] पर एक सड़क-रेल पुल और बांग्लादेश का सबसे लंबा पुल शामिल था। [[विश्व बैंक समूह|विश्व बैंक को]] इस परियोजना के लिए 11,367 करोड़ रुपये (1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का ऋण देना था, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार की चिंताओं का हवाला देते हुए हाथ खींच लिए, विशेष रूप से इस बात का हवाला देते हुए कि कनाडाई निर्माण कंपनी एसएनसी-लवलीन ने निर्माण अनुबंध के बदले में एक बांग्लादेशी अधिकारी को रिश्वत दी थी। <ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-south-asia-18655846|title=World Bank cancels Bangladesh bridge loan over corruption|date=30 June 2012|work=BBC News|access-date=31 December 2016|language=en-GB}}</ref> कनाडा में दो एसएनसी-लावलिन अधिकारियों पर आरोप लगाया गया था, लेकिन अदालत द्वारा वायरटैप साक्ष्य को बाहर करने के बाद अभियोजन पक्ष वापस ले लिया और अदालत ने मामले को खारिज कर दिया।<ref name="thedailystar.net">{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/world/north-america/canada-court-finds-no-proof-padma-bridge-graft-conspiracy-1359397|title=Canada court finds no proof of Padma bridge bribery conspiracy|date=11 February 2017|work=The Daily Star|access-date=7 February 2019}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=https://thewire.in/south-asia/did-a-canada-court-really-clear-bangladesh-officials-of-corruption|title=Did a Canada Court Really Clear Bangladesh Officials of Corruption?|website=thewire.in|access-date=2022-01-01}}</ref> == जुलाई नरसंहार == [[बांग्लादेश]] में कोटा सुधार आंदोलन का आयोजन योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियों और भर्ती में कोटा में कमी की मांग के लिए किया गया है।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2024/07/11/world/asia/bangladesh-student-protests-job-quotas.html|title=Tens of Thousands of Students Protest Job Quotas in Bangladesh's Streets|last=Hasnat|first=Saif|date=11 July 2024|work=The New York Times}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.washingtonpost.com/world/2024/07/21/bangladesh-student-protests-curfew-government-jobs-quota/f6a3163c-471c-11ef-83d0-9eaefdc988e8_story.html|title=Bangladesh's top court scales back government jobs quota after deadly unrest that has killed scores|date=21 July 2024|work=Washington Post|access-date=25 July 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.washingtonpost.com/world/2024/07/18/bangladesh-dhaka-student-protests-what-to-know/b2c9737c-44ea-11ef-83d0-9eaefdc988e8_story.html|title=Here's what to know about the violent protests over government jobs roiling Bangladesh|date=19 July 2024|work=Washington Post|access-date=25 July 2024}}</ref> बांग्लादेश में आरक्षण सुधारों के लिए तीन आंदोलन हुए हैं। अब तक, सामान्य विश्वविद्यालय और कॉलेज के छात्र इस आंदोलन के पक्ष में हैं और [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] सत्तारूढ़ बांग्लादेश सरकार, छात्र लीग और अवामी लीग समान विचारधारा वाले संगठन इसके खिलाफ हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2024/07/23/world/asia/bangladesh-protests-sheikh-hasina.html|title=An Unbending Leader's Crackdown Rains Carnage on Bangladesh|last=Mashal|first=Mujib|work=The New York Times}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.dailynayadiganta.com/education/849914/%E0%A6%95%E0%A7%8B%E0%A6%9F%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%82%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8B%E0%A6%B2%E0%A6%A8-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AE%E0%A6%B8%E0%A7%82%E0%A6%9A%E0%A6%BF-%E0%A6%98%E0%A7%8B%E0%A6%B7%E0%A6%A3%E0%A6%BE|title=কোটা সংস্কার আন্দোলন : নতুন কর্মসূচি ঘোষণা|last=দিগন্ত|first=Daily Nayadiganta-নয়া|website=Daily Nayadiganta (নয়া দিগন্ত) : Most Popular Bangla Newspaper|language=bn|access-date=2024-07-17|archive-date=16 जुलाई 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240716020829/https://www.dailynayadiganta.com/education/849914/%E0%A6%95%E0%A7%8B%E0%A6%9F%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%82%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8B%E0%A6%B2%E0%A6%A8-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AE%E0%A6%B8%E0%A7%82%E0%A6%9A%E0%A6%BF-%E0%A6%98%E0%A7%8B%E0%A6%B7%E0%A6%A3%E0%A6%BE|url-status=dead}}</ref> == अयनाघर == अयनाघर बांग्लादेश के सशस्त्र बलों की खुफिया शाखा, महानिदेशालय बल खुफिया (डीजीएफआई) द्वारा संचालित एक गुप्त हिरासत सुविधा है। 2009 और 2021 के बीच, [[शेख हसीना]] के नेतृत्व में, [[बांग्लादेश अवामी लीग|अवामी लीग]] सरकार के खिलाफ असहमति या आलोचना व्यक्त करने वाले व्यक्तियों को गुप्त रूप से गिरफ्तार किया गया और उनकी सीमा के भीतर यातना दी गई। शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान कई विपक्षी नेता और कार्यकर्ता गायब हो गए। उनके स्थानों का खुलासा नहीं किया गया है। लापता लोगों की इस सूची में सैन्य कर्मी भी शामिल हैं। अयनाघर, संक्षेप में, खुफिया एजेंसियों द्वारा प्रबंधित एक गुप्त जेल या निरोध शिविर के रूप में कार्य करता है।<ref name="netra news">{{Cite news|url=https://netra.news/2022/secret-prisoners-of-dhaka/|title=Secret prisoners of Dhaka|date=14 August 2022|work=Netra News — নেত্র নিউজ|access-date=30 August 2022|language=en}}</ref><ref name="VOA news">{{Cite news|url=https://www.voanews.com/a/former-detainees-describe-secret-prison-in-bangladesh/6704053.html|title=Former Detainees Describe Secret Prison in Bangladesh|date=16 August 2022|work=VOA|access-date=30 August 2022|agency=Voice of America|language=en}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[बांग्ला भाषा आन्दोलन|बांग्ला भाषा '''आन्दोलन''']] * [[असहयोग आन्दोलन(2024)|असहयोग '''आन्दोलन'''(2024)]] == संदर्भ == [[श्रेणी:बांग्लादेश अवामी लिग]] [[श्रेणी:बांग्लादेश]] [[श्रेणी:बांग्लादेश का इतिहास (1971-वर्तमान)]] [[श्रेणी:आलोचना]] [[श्रेणी:अवामी लीग के घोटाले]] 29vr4slcnarnrihyysc0afzngkcmpeg अलेक्स एलियास 0 1554987 6536799 6288214 2026-04-06T06:09:39Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536799 wikitext text/x-wiki {{नया असमीक्षित लेख|date=अक्टूबर 2024}} '''अलेक्स एलियास''' (Alex Elias) उपयोगकर्ताओं की पसंद-नापसंद और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं का पता लगाने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (कृ.बु.) कंपनी, क्यूलो, के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == अलेक्स एलियास ने अपनी स्नातक शिक्षा साउदर्न कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से पूरी की थी, जहाँ दो-दो बैचलर ऑफ आर्ट्स डिग्रियाँ—एक गणितीय वित्त में और दूसरी दर्शनशास्त्र में—प्राप्त करने के साथ-साथ उन्हें प्रतिष्ठित रेनेसां स्कॉलरशिप भी मिली थी। अपनी डॉक्टर ऑफ लॉ (जे.डी.) की डिग्री उन्हें न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय स्कूल ऑफ लॉ से प्राप्त हुई। उनकी थीसिस के शीर्षक “प्रस्तावित संघीय उपभोक्ता गोपनीयता विधेयक (सीपीबीआर) का मूल्यांकन” और “उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण के दौरान क्लिक-रैप प्रभावकारिता का अनुभवजन्य अध्ययन” थे।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/cindygordon/2024/02/19/qloo-leading-ai-advances-culture-and-taste-intelligence/|title=Qloo Leading AI Advances Culture And Taste Intelligence|last=Gordon|first=Cindy|website=Forbes|language=en|access-date=2024-10-01}}</ref> == करियर == 2012 में, एनवाईयू लॉ स्कूल में जे.डी. की पढ़ाई के दौरान, अलेक्स एलियास ने जे एल्गर (Jay Alger) के साथ मिलकर क्यूलो की स्थापना की।<ref>{{Cite web|url=https://markets.businessinsider.com/news/stocks/qloo-the-leading-artificial-intelligence-platform-for-culture-and-taste-acquires-tastedive-1027949626|title=Qloo, the Leading Artificial Intelligence Platform for Culture and Taste, Acquires TasteDive|website=markets.businessinsider.com|language=en|access-date=2024-10-01|archive-date=26 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240926081528/https://markets.businessinsider.com/news/stocks/qloo-the-leading-artificial-intelligence-platform-for-culture-and-taste-acquires-tastedive-1027949626|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.latimes.com/business/technology/la-fi-tn-qloo-inspiration-engine-20130317-story.html|title=Start-up Sunday: Qloo, a 'cultural discovery' search engine|last=Naziri|first=Jessica|date=2013-03-17|website=Los Angeles Times|language=en-US|access-date=2024-10-01}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://abcnews.go.com/Business/strategies-south-southwest-entrepreneur/story?id=15933647|title=Strategies: South By Southwest isn't for every entrepreneur|last=News|first=A. B. C.|website=ABC News|language=en|access-date=2024-10-01}}</ref> अलेक्स एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहते थे, जो पहचान पर आधारित जानकारी का इस्तेमाल किए बिना व्यक्तिगत पसंद-नापसंद की भविष्यवाणी कर सके। इस सोच के पीछे संस्कृति में उनकी रुचि और डेटा प्रबंधन में उनके अनुभव का हाथ था।<ref>{{Cite web|url=https://www.usatoday.com/story/tech/2012/11/08/qloo-amazon-pandora-netflix/1684053/|title=Getting a Qloo on where to find similar tastes|last=TODAY|first=Jon Swartz, USA|website=USA TODAY|language=en-US|access-date=2024-10-01}}</ref><ref>{{Citation|title=Watch Using AI to Figure Out What’s Hot in Pop Culture - Bloomberg|date=2017-08-22|url=https://www.bloomberg.com/news/videos/2017-08-22/using-ai-to-figure-out-what-s-hot-in-pop-culture-video|language=en|access-date=2024-10-01}}</ref> आज अलेक्स क्यूलो के सीईओ हैं, जो दुनिया भर में उपभोक्ताओं की पसंद-नापसंद और प्राथमिकताओं का विश्लेषण करने वाली एक प्रमुख कृ.बु. कंपनी है। क्यूलो के भारी-भरकम डेटाबेस में 57.5 करोड़ से अधिक नामी हस्तियाँ, स्थान, चीज़ें, और रुचियाँ शामिल हैं। इस डेटाबेस में 100 खरब से अधिक विशिष्ट व्यवहारिक और भावनात्मक संकेत भी मौजूद हैं—और इनमें से किसी में भी कोई निजी जानकारी नहीं है।<ref>{{Cite web|url=https://www.usatoday.com/story/sports/nfl/2023/12/17/swift-could-help-chiefs-become-americas-team-data-firm-finds/71921921007/|title=Could Chiefs be 'America's team'? Data company says Swift may give team edge over Cowboys|last=West|first=Bryan|website=USA TODAY|language=en-US|access-date=2024-10-01}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://techcrunch.com/2024/02/21/2661267/|title=Qloo raises $25M to predict your favorite movies, TV shows and more|last=Wiggers|first=Kyle|date=2024-02-21|website=TechCrunch|language=en-US|access-date=2024-10-01}}</ref> पर्सनलाइज़्ड कस्टमर एक्सपीरियंस मुहैया कराके अपनी मार्केटिंग रणनीतियों में सुधार लाने में नेटफ्लिक्स, स्टारबक्स, जेसीडेको, और मिशेलिन जैसी कंपनियों के लिए क्यूलो की तकनीक मददगार साबित हुई है।<ref>Beltran, Luisa. [https://www.aol.com/finance/exclusive-leonardo-dicaprio-backed-ai-110000079.html?guccounter=1 «Exclusive: Leonardo DiCaprio-backed AI startup Qloo clinches $20 million investment from Bluestone Equity Partners»]. AOL</ref> 2019 से, अलेक्स एलियास टेस्टडाइव की कमान भी संभाल रहे हैं, जो 75 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाला एक खोज प्लेटफ़ॉर्म है, जहाँ उपभोक्ता अपनी पसंद के आधार पर मनोरंजन सामग्री ढूँढ सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://techcrunch.com/2019/02/13/qloo-acquires-tastedive/|title=Qloo acquires cultural recommendation service TasteDive|last=Ha|first=Anthony|date=2019-02-13|website=TechCrunch|language=en-US|access-date=2024-10-01}}</ref> टेस्टडाइव की मदद से उपयोगकर्ता अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर देखने, पढ़ने, सुनने, और खेलने योग्य सामग्री खोज सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://aijourn.com/author/alexelias/|title=Alex Elias – The AI Journal|date=2024-03-11|website=aijourn.com|language=en-GB|access-date=2024-10-01}}</ref><ref>[https://www.fastcompany.com/90503353/quarantine-culture-report-louis-armstrong-is-trending-billie-eilish-is-not «Quarantine culture report Louis Armstrong is trending. Billie Eilish is not»]. Fast Company.</ref> न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ एंटरप्रेन्योरशिप एडवाइजरी बोर्ड के एक माननीय सदस्य के रूप में लॉ स्कूल में स्टार्टअप पहलों का मार्गदर्शन और समर्थन करने में अलेक्स एलियास का योगदान महत्वपूर्ण है।<ref>{{Cite web|url=https://www.law.nyu.edu/alumni/evc/advisory-board|title=Advisory Board {{!}} NYU School of Law|website=www.law.nyu.edu|access-date=2024-10-01}}</ref><ref name=":0" /> == सन्दर्भ == <references /> 72gmrvsxo2exnhch0rn6xltjba1c3lb सदस्य वार्ता:Renamed user c0363c528b46f6dda07feb9b7bfd14f5 3 1559471 6536726 6285233 2026-04-06T01:14:03Z Mfield 881963 Mfield ने अनुप्रेषण छोड़े बिना पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:ThuMan]] को [[सदस्य वार्ता:Renamed user c0363c528b46f6dda07feb9b7bfd14f5]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/ThuMan|ThuMan]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Renamed user c0363c528b46f6dda07feb9b7bfd14f5|Renamed user c0363c528b46f6dda07feb9b7bfd14f5]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 6285233 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=ThuMan}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 17:23, 26 अक्टूबर 2024 (UTC) btjmqvnjcaikc5u3bda8upj3eguvlu7 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक में भारत 0 1582891 6536805 6454074 2026-04-06T06:14:22Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:पैरालिंपिक में भारत]] जोड़ी 6536805 wikitext text/x-wiki {{Infobox country at games | NPC = IND | NPCname = भारतीय पैरालंपिक समिति | games = ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक | year = 2020 | flagcaption = | oldcode = | website = {{URL|www.paralympic.org.in}} | location = [[टोक्यो]], [[जापान]] | competitors = 54 | sports = 9 | flagbearer_open = [[Tek Chand]] | flagbearer_close = [[Avani Lekhara]] | start_date = {{start date|2024|8|24}} | end_date = {{end date|2024|9|5}} | rank = 24 | gold = 5 | silver = 8 | bronze = 6 | officials = | appearances = | app_begin_year = | app_end_year = | summerappearances = [[1968 ग्रीष्मकालीन पैरालम्पिक में भारत|1968]], [[1972 ग्रीष्मकालीन 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करने वाले 54 एथलीटों से युक्त एक दल भेजा। एथलीट टेक चंद उद्घाटन समारोह के दौरान ध्वजवाहक थे और निशानेबाज [[अवनी लेखरा]] ने समापन समारोह के दौरान ध्वज को ढोया। यह उस समय भारत का सबसे सफल पैरालंपिक अभियान था जिसमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक सहित 19 पदक जीते थे। इस संस्करण से पहले, भारत ने पिछले सभी पैरालंपिक में कुल मिलाकर 12 पदक जीते थे। == पृष्ठभूमि == भारतीय पैरालम्पिक समिति (पीसीआई) का गठन 1994 में किया गया था, जो 1989 में [[अंतर्राष्ट्रीय पैरालम्पिक समिति]] (आईपीसी) की स्थापना के पांच वर्ष बाद हुआ था।<ref>{{cite web|url=https://www.paralympicindia.com/who-we-are/|title=Paralympic India: Who are we?|work=[[Paralympic Committee of India]]|access-date=1 June 2024|archive-date=12 July 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240712113955/https://www.paralympicindia.com/who-we-are/|url-status=live}}</ref> नौवें अंतर्राष्ट्रीय स्टोक मैंडविल खेलों को बाद में [[1960 ग्रीष्मकालीन पैरालम्पिक|1960]] में पहले [[पैरालिंपिक]] के रूप में नामित किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय स्टोक मैंडविल खेल महासंघ ने 1984 तक पैरालिंपिक खेलों का आयोजन किया। 1988 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक|1988 सियोल पैरालिंपिक पैरालिंपिक नाम का उपयोग करने वाला पहला था और तब से यह आयोजन उसी मेजबान शहर में आयोजित किया जाता है, जहां संबंधित [[ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल]] आयोजित किए जाते हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.paralympic.org/ipc/history|title=History of IPC|work=[[International Paralympic Committee]]|access-date=1 June 2024|archive-date=30 November 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191130085921/https://www.paralympic.org/ipc/history|url-status=live}}</ref> राष्ट्र ने 1968 में पैरालिंपिक खेलों में पदार्पण किया और 1984 के बाद से ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक खेलों के प्रत्येक संस्करण में भाग लिया। खेलों के इस संस्करण ने ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक में राष्ट्र की 12वीं उपस्थिति को चिह्नित किया।<ref name="History">{{cite web|url=https://olympics.com/en/news/india-at-the-paralympics-a-brief-history|title=India at the Paralympics: A brief history|date=19 December 2020|access-date=1 June 2024|work=[[Olympics.com]]|archive-date=22 May 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240522133210/https://olympics.com/en/news/india-at-the-paralympics-a-brief-history|url-status=live}}</ref> खेलों के लिए भारतीय दल में नौ खेलों के 54 खिलाड़ी शामिल थे।<ref name="List">{{cite web|url=https://olympics.com/en/news/indian-athletes-qualified-tokyo-2020-paralympics|title=Indians at Tokyo 2020 Paralympics: All the Athletes who qualified for Summer Para Games|date=14 August 2020|access-date=1 June 2024|work=[[Olympics.com]]|archive-date=16 August 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240816073917/https://olympics.com/en/news/indian-athletes-qualified-tokyo-2020-paralympics|url-status=live}}</ref> एथलीट [[मरियप्पन थंगावेलु]] को उद्घाटन समारोह के दौरान ध्वजवाहक के रूप में नामित किया गया था, लेकिन बाद में [[कोविड-19]] संगरोध नियमों के कारण टेक चंद द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।<ref>{{cite news|date=24 August 2021|title=Mariyappan withdrawn as India's Paralympic flag-bearer after coming in contact of Covid positive person|url=https://www.hindustantimes.com/sports/others/mariyappan-withdrawn-as-india-s-paralympic-flag-bearer-after-coming-in-contact-of-covid-positive-person-101629785264410.html|access-date=16 October 2022|newspaper=[[The Hindustan Times]]|archive-date=3 September 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210903112944/https://www.hindustantimes.com/sports/others/mariyappan-withdrawn-as-india-s-paralympic-flag-bearer-after-coming-in-contact-of-covid-positive-person-101629785264410.html|url-status=live}}</ref> निशानेबाज [[अवनि लेखारा]] ने 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक समापन समारोह के दौरान ध्वज उठाया।<ref>{{cite news|url=https://www.indiatoday.in/sports/other-sports/story/tokyo-paralympics-avani-lekhara-to-be-india-flag-bearer-for-closing-ceremony-1849261-2021-09-04|title=Tokyo Paralympics: Twin medalist Avani Lekhara to be India's flag-bearer for closing ceremony|work=[[India Today]]|date=4 September 2021|access-date=1 June 2024|archive-date=25 March 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240325112122/https://www.indiatoday.in/sports/other-sports/story/tokyo-paralympics-avani-lekhara-to-be-india-flag-bearer-for-closing-ceremony-1849261-2021-09-04|url-status=live}}</ref> == तीरंदाजी == भारतीय तीरंदाजों ने 2019 विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में चार कोटा स्थान हासिल किए।<ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/more-sports/others/indian-archers-bag-four-berths-for-tokyo-paralympics/articleshow/69694392.cms|title=Indian archers bag four berths for Tokyo Paralympics|newspaper=[[The Times of India]]|date=7 June 2019|access-date=24 June 2020|archive-date=19 November 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191119012414/https://timesofindia.indiatimes.com/sports/more-sports/others/indian-archers-bag-four-berths-for-tokyo-paralympics/articleshow/69694392.cms|url-status=live}}</ref> ज्योति बालियान को टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए द्विपक्षीय आयोग का निमंत्रण मिला।<ref name="List"/> ;रिकर्व {| class="wikitable" style="font-size:90%; text-align:center" !rowspan=2|खिलाड़ी !rowspan=2|प्रसंग !colspan="2"|रैंकिंग राउंड !32 का दौर !16 का दौर !क्वार्टरफाइनल !सेमीफाइनल !colspan="2"|फाइनल / {{abbr|का.प.|कांस्य पदक}} |- style="font-size:95%" !अंक !बीज !विरोधी<br />अंक !विरोधी<br />अंक !विरोधी<br />अंक !विरोधी<br />अंक !विरोधी<br />अंक !पद |- |align=left|'''[[हरविंदर सिंह (आर्चर)|हरविंदर सिंह]]''' |align=left rowspan=2|व्यक्तिगत पुरुष |600 |21 |{{flagicon|ITA}} [[स्टेफानो ट्रैविसानी|ट्रैविसानी]]<br/>'''जीत''' 6-5 {{abbr|SO|शूटऑफ}} | [[बाटो त्सिडेंडोर्ज़िएव|त्सिडेंडोर्ज़िएव]]<br/>'''जीत''' 6-5 {{abbr|SO|शूटऑफ}} |{{flagicon|GER}} [[माईक शार्स्ज़ेव्स्की|शार्स्ज़ेव्स्की]]<br/>'''जीत''' 6-2 |{{flagicon|USA}} [[केविन माथेर|माथेर]]<br/>'''हार''' 4-6 |{{flagicon|KOR}} [[किम मिन-सु|किम मि-सु]]<br/>'''जीत''' 6-5 {{abbr|SO|शूटऑफ}} |{{PG3}} |- |align=left|विवेक चिकारा |609 |10 |{{n/a}} |{{flagicon|TUR}} [[याग्मुर सेनगुल|सेनगुल]]<br/>'''जीत''' 6-0 |{{flagicon|CHN}} [[वु चुनयान|चुनयान]]<br>'''हार''' 4-6 | colspan=2 {{n/a|अगले दौर में नहीं पहुंचे}} |5 |- |} ;कंपाउंड {{Ol archery header|r64=yes}} |- |align=left|[[Rakesh Kumar (archer)|Rakesh Kumar]] |align=left rowspan="2"|[[Archery at the 2020 Summer Paralympics – Men's individual compound open|Men's individual]] |699 |3 |rowspan="2" {{bye}} |{{flagIPCathlete|[[Ngai Ka Chuen|Ngai KC]]|HKG|2020 Summer}}<br/>'''W''' 144–131 |{{flagIPCathlete|[[Marian Marecak|Marecak]]|SVK|2020 Summer}}<br/>'''W''' 140–137 |{{flagIPCathlete|[[Ai Xinliang|Ai Xl]]|CHN|2020 Summer}}<br/>'''L''' 143–145 |colspan="2" {{n/a|Did not advance}} |5 |- |align=left|[[Shyam Sundar Swami]] |682 |21 |{{flagIPCathlete|[[Matt Stutzman|Stutzman]]|USA|2020 Summer}}<br/>'''L''' 139–142 |rowspan="2" colspan="4" {{n/a|Did not advance}} |17 |- |[[Jyoti Baliyan]] |align=left| [[Archery at the 2020 Summer Paralympics – Women's individual compound open|Women's individual]] |671 |15 |{{n/a}} |{{flagIPCathlete|[[Kerrie-Louise Leonard|Leonard]]|IRL|2020 Summer}} <br/>'''L''' 137–141 |17 |- |[[Jyoti Baliyan]]<br/>[[Rakesh Kumar (archer)|Rakesh Kumar]] |align=left| [[Archery at the 2020 Summer Paralympics – Team compound open|Mixed team]] |1370 |6 |colspan="2" {{n/a}} |{{flagIPCteam|THA|2020 Summer}}<br/>'''W''' 147–141 |{{flagIPCteam|TUR|2020 Summer}}<br/> '''L''' 151–153 |colspan="2" {{n/a|Did not advance}} |5 |} == संदर्भ == {{reflist|2}} [[श्रेणी:पैरालिंपिक में भारत]] dwd9a0jbs7i9hj9i78zylvztxyq4xj1 रामायणम् (2026 फिल्म) 0 1595395 6536751 6536111 2026-04-06T05:05:21Z ~2026-21207-32 919002 Image 6536751 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = रामायणम्<br>{{small|Ramayana}} | image = Ramayana Part 1 (2026 film).jpeg | caption = आधिकारिक टीज़र पोस्टर | director = [[नितेश तिवारी]] | writer = [[:en:Shridhar Raghavan & Kumar Vishwas|श्रीधर राघवन तथा कुमार विश्वास]]<!--यहाँ 'लेखक' शब्द का तात्पर्य फ़िल्म के कहानी-लेखक से है, न कि उस मूल स्रोत सामग्री के वास्तविक लेखक से जिस पर फ़िल्म की कहानी आधारित है।--> | based_on = {{Based on|[[रामायण]]|ऋषि [[वाल्मीकि]]}} | producer = {{plainlist| * [[नमित मल्होत्रा]] <!--यहां केवल निर्माताओं के नाम होने चाहिए, सह-निर्माताओं के नाम नहीं।--> }} | starring = {{plainlist|<!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> * [[रणबीर कपूर]] * [[रवि दुबे]] * [[साई पल्लवी]] * [[सनी देओल]] * [[यश]] * [[अरुण गोविल]] }} | narrator = [[अमिताभ बच्चन]]{{उद्धरण आवश्यक}} | cinematography = {{plainlist| * पंकज कुमार * महेश लिमये }} | editing = | music = '''पृष्ठभूमि''':<br />[[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]]<br />'''गीत''':<br />[[ए. आर. रहमान]] | studio = {{plainlist| * प्राइम फोकस स्टूडियोज़ * मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स * [[डीएनईजी]] }} | distributor = | released = {{film date|2026|11|6|df=y}} | country = भारत | language = [[हिंदी]]<br />[[:en:English language|अंग्रेज़ी]] | budget = ₹2600 -₹4000{{small|करोड़}} (US$280-$420 {{small|मिलियन}}) दोनो फिल्म <ref>{{cite web |title=रणबीर कपूर–यश की 'रामायण' बनी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म – बजट ₹1600 करोड़ |publisher=News18 |date=15 जुलाई 2025 |url=https://www.news18.com/movies/bollywood/ranbir-kapoor-yashs-ramayana-becomes-indias-costliest-film-at-rs-4000-crore-ws-l-9440783.html |access-date=15 जुलाई 2025}}</ref> }}'''''रामायण''''' एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन [[नितेश तिवारी]] ने किया है और जिसका फिल्म-लेखन [[:en:Shridhar Raghavan|श्रीधर राघवन]] ने किया है। यह फिल्म [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक [[प्राचीन भारत|प्राचीन भारतीय]] [[हिन्दू धर्मग्रन्थ|ग्रंथ]] ''[[रामायण]]'' पर आधारित है। यह फिल्म एक नियोजित दो-भागीय श्रृंखला की पहली किस्त है।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=वल्लोप्पिलिल|first=सिंध्या|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/yash-kgf-ramayana-prime-focus-nitesh-tiwari-dangal-1235967679/|title='K.G.F.' Star Yash's Monster Mind, Namit Malhotra's Prime Focus Team on 'Dangal' Filmmaker Nitesh Tiwari's Epic 'Ramayana' (EXCLUSIVE)|last=नमन रामचन्द्रन|date=2024-04-11|website=वैराइटी|access-date=2024-11-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.awn.com/news/prime-focus-studios-announces-ramayana-co-production|title=Prime Focus Studios Announces 'Ramayana' Co-Production|date=30 अप्रैल 2024|website=एनिमेशन वर्ल्ड नेटवर्क|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> इसमें <!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->[[रणबीर कपूर]] (राम {{small|के रूप में}}), [[रवि दुबे]] (लक्ष्मण {{small|के रूप में}}), [[साई पल्लवी]] (सीता {{small|के रूप में}}), [[सनी देओल]] (हनुमान {{small|के रूप में}}) और [[यश (अभिनेता)|यश]] (रावण {{small|के रूप में}}) मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं। अन्य कलाकारों में [[अमिताभ बच्चन]], [[अरुण गोविल]], [[लारा दत्ता]], [[विवेक ओबेरॉय]], [[काजल अग्रवाल]], [[रकुल प्रीत सिंह]], [[कुणाल कपूर]], [[शीबा चड्ढा]], [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] और [[शोभना]] शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-officially-announced-release-in-2-parts-2628896-2024-11-06|title=Ranbir, Sai Pallavi and Yash's Ramayana officially announced, to release in 2 parts|date=2024-11-06|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-to-be-backed-by-namit-malhotra/articleshow/108459580.cms|title=Ranbir Kapoor's Ramayana rights acquired by Namit Malhotra|date=2024-03-13|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-18|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollyreview.com/2026/02/ramayana-part-1-2026.html|title=Ramayana: Part 1 (2026)|date=2026-02-05|website=Holly Review|language=en|access-date=2026-02-07}}</ref> यह फिल्म ₹2600-4000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े भारतीय फिल्म बजट पर बनी है। इसका निर्माण [[नमित मल्होत्रा]] ​​के प्राइम फोकस स्टूडियो, यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और [[चार्ल्स रोवन|चार्ल्स रोवन]] के अमेरिकी स्टूडियो [[एटलस एंटरटेनमेंट]] ने किया है, लेकिन इसकी पूरी शूटिंग और संपादन भारत में हुआ है। इसके विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का काम ब्रिटिश-भारतीय स्टूडियो [[डीएनईजी]] ने संभाला है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-most-expensive-indian-film-rs-835-crore-budget-report-9327597/|title=Ranbir Kapoor, Sai Pallavi's Ramayana to be the most expensive Indian film with Rs 835 crore budget: report|date=2024-05-14|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/ramayana-part-1-this-veteran-actor-with-a-net-worth-of-rs-1600-crore-is-likely-to-join-ranbir-kapoor-and-sam-pallavis-historical-drama-thats-been-made-on-a-staggering-budget-of-rs-835-crore|title=Ramayana Part 1: This veteran actor, with a net worth of Rs 1,600 Crore, is likely to join Ranbir Kapoor and Sai Pallavi's historical drama that's been made on a staggering budget of Rs 835 Crore|last=Shetty|first=Karishma|date=2024-11-06|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> यह फिल्म 6 नवंबर 2026 में [[दीपावली]] के अवसर पर भारत में रिलीज़ होने वाली है।<ref name="SIA">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/oscar-winner-hans-zimmer-joins-for-ramayana-with-a-r-rahman-3004241/|title=Oscar winner Hans Zimmer joins for Ramayana with A.R. Rahman|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-04-05|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-18}}</ref> फिल्म का संगीत [[:en:List_of_awards_and_nominations_received_by_Hans_Zimmer|विश्व-प्रसिद्ध]] [[:en:Germans|जर्मन]] संगीतकार, [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] ({{small|जो अपनी पहली भारतीय परियोजना में काम कर रहे हैं}}), और [[ए. आर. रहमान]] ने मिलकर तैयार किया है। == कलाकार == <!-- मुख्य कलाकार - आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> {| class="wikitable" ! कलाकार !! भूमिका !! सन्दर्भ |- | [[रणबीर कपूर]] || [[राम]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-is-best-choice-for-lord-ram-mukesh-chhabra-breaks-silence-on-casting-for-nitesh-tiwari-ramayana-2585545-2024-08-21|title=Ranbir Kapoor is best choice for Lord Ram: Mukesh Chhabra on Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=21 अगस्त 2024|website=इंडिया टुडे|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/htcity/cinema/ramayana-ranbir-kapoor-to-portray-two-avatars-of-lord-vishnu-amitabh-bachchan-roped-in-for-this-role-101725884855689.html|title=Ramayana: Ranbir Kapoor to portray two avatars of Lord Vishnu; Amitabh Bachchan roped in for THIS role|last=महिमा पाण्डेय|date=9 सितम्बर 2024|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=28 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[रवि दुबे]] || [[लक्ष्मण]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-is-the-only-commercially-viable-artist-of-this-generation-ravi-dubey-confirms-hes-playing-lakshman-in-nitesh-tiwaris-ramayana-9707324/|title='Ranbir Kapoor is the only commercially viable artiste of this generation': Ravi Dubey confirms he's playing Lakshman in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-12-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref> |- | [[साई पल्लवी]] || [[सीता]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-ranbir-kapoor-yash-sai-pallavi-films-release-date-out-makers-of-nitesh-tiwaris-epic-confirm-two-parts-9655800/|title=Ramayana: Ranbir Kapoor-Yash-Sai Pallavi film's release date out, makers of Nitesh Tiwari's epic confirm two parts|date=2024-11-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/heres-how-many-crores-south-superstar-yash-will-earn-for-his-role-as-ravana-in-the-ramayana-starring-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-thats-made-on-a-massive-rs-800-crore-budget|title=Here's how many Crores South superstar Yash will earn for his role as Ravana in Ramayana, starring Ranbir Kapoor and Sai Pallavi, that's made on a massive Rs 800 Crore budget|last=Sonavane|first=Gaurav|date=2024-10-23|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> |- | [[सनी देओल]] || [[हनुमान]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/sunny-deol-confirmed-as-hanuman-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-details-about-role-revealed-8756715.html|title=Sunny Deol CONFIRMED As Hanuman In Ranbir Kapoor Starrer Ramayana; Details About Role Revealed|date=27 जनवरी 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/sunny-deol-hanuman-standalone-film-in-nitesh-tiwari-ramayan-trilogy-2613915-2024-10-09|title=Sunny Deol's Hanuman to get standalone film in Ramayan trilogy - Exclusive|date=2024-10-09|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2024-10-09}}</ref> |- | [[यश (अभिनेता)|यश]] || [[रावण|रावण Lankapati]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/yash-confirms-he-is-playing-ravan-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-toxic-set-to-get-new-release-date/article68785635.ece#:~:text=The%20magnum%20opus%20is%20directed%20by%20Nitesh%20Tiwari&text=Kannada%20superstar%20Yash%20has%20confirmed,and%20Sai%20Pallavi%20as%20Sita.|title=Yash confirms he is playing Ravan in Ranbir Kapoor starrer 'Ramayana'; 'Toxic' set to get new release date|date=23 अक्टूबर 2024|website=द हिन्दू|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[अमिताभ बच्चन]] || [[जटायु]] || {{उद्धरण आवश्यक}} |- | [[लारा दत्ता]] || [[कैकेयी]] || <ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/bollywood/arun-govil-as-dashrath-lara-dutta-as-kaikeyi-and-more-spotted-on-ranbir-kapoors-ramayana-sets-exclusive-pics-article-109041503|title=Arun Govil As Dashrath, Lara Dutta As Kaikeyi And More SPOTTED On Ranbir Kapoor's Ramayana Sets - Exclusive PICS|website=Zoom TV|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[अरुण गोविल]] || [[दशरथ]] || <ref name=":1" /> |- | [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] || [[कौशल्या]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/indira-krishnan-showers-praise-on-ramayan-co-star-ranbir-kapoor-i-cant-see-another-actor-playing-ram/articleshow/114736761.cms|title=Indira Krishnan showers praise on 'Ramayan' co-star Ranbir Kapoor: 'I can't see another actor playing Ram'|date=अक्टूबर 29, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[कुणाल कपूर]] || [[इन्द्र|इंद्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kunal-kapoor-to-play-indra-dev-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/112230254.cms|title=Kunal Kapoor to play Indra Dev in Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=अगस्त 2, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 27, 2024}}</ref> |- | [[काजल अग्रवाल]] || [[:en:Mandodari|मंदोदरी]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kajal-aggarwal-cast-as-mandodari-in-yashs-upcoming-ramayana-adaptation/articleshow/121192838.cms|title=Yash's Ravana finds his Mandodari in Kajal Aggarwal|date=2025-05-16|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|language=en}}</ref> |- | [[रकुल प्रीत सिंह]] || [[शूर्पणखा|शूर्पनखा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-rakul-preet-singh-in-talks-to-come-on-board-nitesh-tiwaris-ramayana-to-play-shurpanakha-1277611|title=EXCLUSIVE: Rakul Preet Singh in talks to come on board Nitesh Tiwari's Ramayana; To play Shurpanakha|date=2024-02-10|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[विवेक ओबेरॉय]] || [[शूर्पणखा#विद्युतजिह्वा से विवाह|विद्युत्जिवा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/vivek-oberoi-joins-nitesh-tiwaris-ramayana-take-a-look-at-full-cast-ws-l-9373870.html|title=Vivek Oberoi Joins Nitesh Tiwari’s Ramayana: Take A Look At Full Cast|website=न्यूज़18|access-date=7 जून 2025}}</ref> |- | [[:en:Adinath Kothare|आदिनाथ कोठारे]] || [[भरत (रामायण)|भरत]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/etimes-exclusive-this-actor-comes-on-board-for-nitesh-tiwari-ranbir-kapoors-ramayana-to-play-rams-beloved-brother-bharat/articleshow/108842263.cms|title=ETimes Exclusive! THIS actor comes on board for Nitesh Tiwari-Ranbir Kapoor's Ramayana; to play Ram's beloved brother Bharat|date=2024-03-28|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[शीबा चड्ढा]] || [[मंथरा]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/sheeba-chadha-to-play-the-role-of-manthara-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/108950314.cms|title=Sheeba Chadha to play the role of Manthara in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-01|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-25}}</ref> |- | [[शिशिर शर्मा]] || [[वसिष्ठ]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-co-star-shishir-sharma-calls-the-film-huge-and-larger-than-life-spills-the-beans-on-his-character-vasishtha/articleshow/111384095.cms|title=Ranbir Kapoor's 'Ramayana' co-star Shishir Sharma calls the film 'huge and larger-than-life'; spills the beans on his character Vasishtha|date=जून 30, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[:en:Ajinkya Deo|अजिंक्या देओ]] || [[विश्वामित्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-smiles-in-new-photo-from-ramayana-sets-poses-with-vishwamitra-check-here-8875502.html|title=Ranbir Kapoor Smiles In New Photo From Ramayana Sets, Poses With 'Vishwamitra' {{!}} Check Here|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[:en:Sonia Balani|सोनिया बलानी]] || [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/the-kerala-story-actress-sonia-balani-will-play-urmilas-character-in-nitesh-tiwaris-ramayana-exclusive/articleshow/110181471.cms|title='The Kerala Story' actress Sonia Balani will play Urmila's character in Nitesh Tiwari's Ramayana- Exclusive!|date=2024-05-16|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[मोहित रैना]] || [[शिव]] जी || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/mohit-raina-to-return-as-mahadev-lord-shiva-in-ranbir-kapoors-ramayana-ws-l-9361070.html|title=Mohit Raina To Return As 'Mahadev' Lord Shiva In Ranbir Kapoor's Ramayana?|date=2025-05-31|website= बॉलीवुड न्यूज़|language=en|access-date=2025-05-31}}</ref> |- | कियारा सध || बालिका सीता || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/ramayana-exclusive-pandya-stores-kiara-sadh-to-essay-young-sita-aka-sai-pallavis-role-in-nitesh-tiwaris-directorial-1298369|title=EXCLUSIVE: THIS Pandya Store child actor to play young Sita in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-23|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-28}}</ref> |} {{Multiple image|image1=Nitesh Tiwari at the ‘Khidkiyaan’ movie festival launch (cropped).jpg|image2=Namit Malhotra.jpg|total_width=300|footer=''रामायण'' नमित मल्होत्रा के साथ [[नितेश तिवारी]] की पहली सहयोगात्मक फिल्म है।}} == उत्पादन == === उत्पत्ति === मई 2017 में, निर्माता अल्लू अरविंद, नमित मल्होत्रा और मधु मंतेना ने हिंदू संस्कृत महाकाव्य रामायण को एक लाइव-एक्शन फीचर फिल्म त्रयी के रूप में ढालने के लिए सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पटकथा का विकास लगभग एक साल से चल रहा था। इस परियोजना को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उड़िया, सिंहली और अंग्रेजी भाषाओं में एक बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में देखा गया, और इसे 3डी में शूट करने की योजना बनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ramayana-to-be-made-into-a-movie-of-rs-500-crore-budget/articleshow/58611990.cms|title='Ramayana' to be made into a movie of Rs 500 crore budget|date=2017-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>अल्लू अरविंद ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की कि वह रामायण को "सबसे शानदार तरीके से" बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने इस महाकाव्य को त्रयी में ढालने की जिम्मेदारी को भी स्वीकार किया। नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी प्राइम फोकस ने हॉलीवुड फिल्मों जैसे 'स्टार वार्स', 'ट्रांसफॉर्मर', 'एक्स-मेन: एपोकैलिप्स' और 'द मार्टियन' में विजुअल इफेक्ट्स का योगदान दिया था, उन्होंने इस त्रयी में भारतीय सिनेमा के लिए नए वैश्विक मानक स्थापित करने की क्षमता देखी।फरवरी 2018 में, मधु मंतेना ने बताया कि फिल्म श्रृंखला बनाने की प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध भारतीय कॉमिक बुक लेखक अनंत पई के जीवन और कार्य से मिली, जिन्होंने अमर चित्र कथा कॉमिक्स बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म श्रृंखला नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति को नवीनतम तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से "सभी संभावित ऑडियो विजुअल महिमा" में फिर से बताने का उनका सामूहिक प्रयास है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-500-crore-film-mou-up-govt-5075106/|title=Makers of Rs 500 crore Ramayana film sign MoU with UP government|date=2018-02-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|title=MoUs worth Rs 4.28 lakh-crore signed on first day of UP Investors Summit 2018|date=2018-02-21|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20230330010105/https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|archive-date=30 मार्च 2023|language=en-us|url-status=live}}</ref> पिछली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त रामायण की रूपांतरण टेलीविजन श्रृंखलाओं, विशेष रूप से रामानंद सागर की 'रामायण' (1987-88) के रूप में थे, लेकिन इस बार निर्माता रामायण को बड़े पर्दे के लिए एक सिनेमाई तमाशे के रूप में लाना चाहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/baahubali-2-the-conclusion-ramayana-film-500-crore-976236-2017-05-10|title=Baahubali 2's success makes way for Rs 500-crore Ramayana film|date=2017-05-10|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thequint.com/entertainment/cinema/500-crore-ramayana-film-in-3-languages#read-more|title=Now Gear up for a Rs 500-Crore 3D 'Ramayana' on the Big Screen|last=Hingorani|first=Karishma|date=2017-05-10|website=द क्विंट|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> === विकास === जुलाई 2019 में, नीतेश तिवारी और रवि उद्यावर ने त्रयी के सह-निर्देशन के लिए हाथ मिलाया, जबकि श्रीधर राघवन को पटकथा लिखने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/ramayanas-trilingual-live-action-trilogy-to-be-helmed-by-dangal-director-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-6953121.html|title=Ramayana's trilingual live-action trilogy to be helmed by Dangal director Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar|date=2019-07-08|website=फर्स्टपोस्ट|language=en-us|access-date=2025-02-17}}</ref> नीतेश तिवारी ने 1987-88 की रामायण टेलीविजन श्रृंखला के बाद से विजुअल इफेक्ट्स में हुए महत्वपूर्ण उन्नयन को इस परियोजना को हाथ में लेने का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि "हमारी सबसे पुरानी, या शुरुआती यादें (महाकाव्य की), अभी भी 30 साल पुरानी हैं। हमने वास्तव में रामायण को उस रूप में नहीं देखा है जिस रूप में इसे बताया जाना चाहिए।" तकनीकी संभावनाओं के अलावा, उन्हें टीम में शामिल होने के लिए कहानी ने भी प्रेरित किया, जिसमें उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में "शानदार विश्वास" था, और यह तथ्य कि उनके निर्माता इसे "बहुत दिलचस्प तरीके से" निष्पादित करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। उद्यावर ने भी बताया कि इस परियोजना में शामिल होने का उनका निर्णय अपने बच्चों के प्रति उसी जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था। उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बताया कि वह और उनकी टीम क्या कर रहे हैं, तो उनका बेटा यह सोचकर "पूरा दिन कूदता रहा" कि रावण और कुंभकर्ण कैसे दिखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच तब था जब उनके बेटे ने उनसे कहा कि "हनुमान सुपरमैन से ज्यादा कूल हैं।" तिवारी ने कहा कि महाकाव्य का आकर्षण उसके पात्रों के समूह में निहित है, विशेष रूप से राम के चरित्र में, "एक आदर्श नेता, पति, पिता और पुत्र"। वहीं, उद्यावर को लगा कि महाकाव्य का जादू उसके आकार बदलने वाले राक्षसों में है, जो उनके विचार में एक छोटे बच्चे को भी पसंद आएगा। तिवारी ने पुष्टि की कि फिल्मों में जो कुछ भी कहा और दिखाया जाएगा, उसमें प्रामाणिकता की मुहर होगी। उन्होंने कहा कि राम और रावण से परे, हर चरित्र—चाहे वह सीता, लक्ष्मण, या हनुमान हो—का कुछ न कुछ सार्थक संदेश है, जिससे रामायण को त्रयी में ढालना आवश्यक हो जाता है। निर्माण टीम ने फिल्मों के सेटिंग, वेशभूषा, कलाकारों और एक्शन के लिए संदर्भ के रूप में पूरे भारत के कलाकारों से जटिल चित्र बनवाए। इस परियोजना का उद्देश्य हिंदी, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और पंजाबी सिनेमा के अभिनेताओं को शामिल करना था, जो एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था ताकि अखिल भारतीय और वैश्विक दर्शकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-reviving-ramayana-with-a-live-action-multilingual-trilogy/articleshow/70119460.cms|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar reviving Ramayana with a live-action, multilingual trilogy|author=Roshmila Bhattacharya|date=जुलाई 8, 2019|newspaper=Mumbai Mirror|access-date=2025-02-17|language=en}}</ref> फिल्म श्रृंखला को शुरू में 500 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट पर बनाने की बात थी। निर्माण टीम ने 2020 तक फिल्मांकन शुरू करने की योजना बनाई थी, जिसमें पहली किस्त 2021 में रिलीज होने वाली थी। फिल्म निर्माताओं का इरादा कहानी की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्रयी के प्रत्येक भाग के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर रखने का था।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-live-action-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-direct-5820177/|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to helm multilingual live-action version of Ramayana|date=2019-07-08|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-bring-ramayana-to-life-at-a-rs-500-crore-budget/articleshow/70126241.cms?from=mdr|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to bring 'Ramayana' to life at a Rs 500 crore budget|date=2019-07-08|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-02-17|issn=0013-0389}}</ref> === पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन) === ==== लेखन और दृश्य विकास ==== नवंबर 2019 में, तिवारी ने कहा कि राघवन पिछले तीन सालों से पटकथा लिख रहे थे, जिसमें कई विद्वानों और पंडितों का मार्गदर्शन था, जिन्हें शास्त्र का व्यापक ज्ञान था, ताकि महाकाव्य को समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|title=I'm happy not following the formula of making a hit film: Nitesh Tiwari|date=2019-11-20|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20240725202209/https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|archive-date=25 जुलाई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अप्रैल 2020 में, उन्होंने कहा कि वे कहानी के संवेदनशील पहलुओं की सावधानीपूर्वक पहचान कर रहे थे, जिन्हें अछूता रहना चाहिए, ताकि उनसे जुड़ी संभावित सार्वजनिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, जबकि उन क्षेत्रों का निर्धारण भी किया जा रहा था जहां वे फिल्म के समग्र देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सीमित सिनेमाई स्वतंत्रता ले सकते थे।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/massive-responsibility-to-do-a-project-like-ramayana-nitesh-tiwari-6066033/|title=Massive responsibility to do a project like Ramayana: Nitesh Tiwari|date=2019-10-12|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>तिवारी ने समझाया कि वह और उनकी टीम कहानी को इस तरह से प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि उनके बच्चों जैसे युवा दर्शकों को, जो "एवेंजर्स के प्रशंसक" हैं, यह रोमांचक लगे, जबकि साथ ही उनकी सास जैसे पुराने दर्शकों का विश्वास भी बनाए रखा जा सके, ताकि उन्हें यह "इतना आकर्षक लगे कि वे कहें कि मैंने रामायण को इस रूप में नहीं देखा है"।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/challenging-to-make-ramayana-appealing-for-all-generations-nitesh-tiwari-6300240/|title=Challenging to make Ramayana appealing for all generations: Nitesh Tiwari|date=2020-03-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> उन्होंने फिल्म को तकनीकी रूप से भारी तैयारी वाली बताया, क्योंकि महाकाव्य के जादुई गुण, जैसे उसमें वर्णित बात करने वाले जानवर या मंत्रमुग्ध वन, उन्हें स्क्रीन पर एक ऐसी दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत करने का अवसर देते थे,<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-on-ramayana-making-it-exciting-for-both-children-and-old-people-is-challenging-1652718-2020-03-05|title=Nitesh Tiwari on Ramayana: Making it exciting for both children and old people is challenging|date=2020-03-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जो उनके विचार में पहले कभी नहीं देखी गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/amid-the-lockdown-nitesh-tiwari-works-on-ramayanas-script-over-group-calls/articleshow/74919720.cms|title=Amid the lockdown, Nitesh Tiwari works on Ramayana's script over group calls|date=2020-03-31|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref> जून 2021 में, मंतेना ने बताया कि वह और उनकी टीम रामायण को एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि "एक उद्देश्य, दुनिया को उसकी पूरी महिमा में रामायण बताने का उद्देश्य" के रूप में देख रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वह त्रयी को "दुनिया में किसी भी अन्य चीज़ की तरह अच्छी तरह से" बनाना चाहते थे, और बताया कि उनकी टीम "हर चीज़ के छोटे से छोटे विवरण" पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि वे वही प्रक्रिया अपना रहे थे जो जेम्स कैमरून ने अवतार के लिए इस्तेमाल की थी, और दुनिया भर के 200 से अधिक कलाकार दो साल से फिल्म पर काम कर रहे थे, जिनमें कुछ अकादमी पुरस्कार विजेता भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/bollywood/madhu-mantena-opens-up-on-ramayana-and-says-expect-the-biggest-cast-in-history-of-indian-cinema-693416|title=Madhu Mantena Opens Up On Ramayana And Says, 'Expect The Biggest Cast In History Of Indian Cinema'|last=Hymavati|first=Ravali|date=2021-06-30|website=द हंस इंडिया|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जुलाई में, मंतेना ने त्रयी के लिए अपनी दृष्टि पर विस्तार से बताया, इसे वाल्मीकि के दृष्टिकोण से रामायण का एक रेखीय पुनर्कथन बताया, जिसमें महाकाव्य की उप-कहानियां भी शामिल थीं, जबकि "राक्षसों, असुरों, गरुड़ आदि जैसे शानदार प्राणियों से भरी एक गहन और सुंदर दुनिया" का वादा किया। सितंबर 2021 में, मंतेना ने कहा कि वे राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों के कार्यों पर विचार कर रहे थे, जिन्होंने उनके अनुसार महाकाव्य को "अपने सुंदर तरीकों से" व्याख्या किया था। उन्होंने कहा कि वे वाल्मीकि की रामायण और उसके वर्णनों का पालन कर रहे थे ताकि एक सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/ramayana-trilogy-for-a-global-audience-but-rooted-in-india-says-producer-madhu-mantena-716208|title='Ramayana' trilogy for a global audience but rooted in India, says producer Madhu Mantena|last1=भसीन|first1=श्रिया|last2=|first2=|date=2021-07-02|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-03-15}}</ref> === कलाकार चयन === {{Multiple image|image1=Ranbir at Besharam launch.jpg|image2=Ravi Dubey.jpg|image3=Sai Pallavi at Mca-pre-release-event.jpg|image4=Sunny Deol at Dev's Anand's autobiography release.jpg|image5=Yash at the ‘KGF’ Press Meet In Chennai (cropped).jpg|total_width=500|direction=horizontal|align=right|footer=[[रणबीर कपूर]], [[रवि दुबे]], [[साई पल्लवी]], [[सनी देओल]] और [[यश (अभिनेता)|यश]], क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में}} जुलाई 2021 में, मधु ने कहा कि वह उस साल दिवाली तक कलाकारों की घोषणा करने वाले थे, जिसमें उन्होंने "भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कास्ट" का वादा किया, जिसमें प्रदर्शन के मामले में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शामिल होंगे। उन्होंने राम, हनुमान, रावण, सीता और लक्ष्मण के पात्रों को "जीवन से बड़ा" बताते हुए जोर दिया कि वह देश भर के कलाकारों को कास्ट करेंगे। इस निर्णय का कारण बताते हुए, उन्होंने विस्तार से कहा कि "यह (रामायण) उत्तर और दक्षिण के बारे में नहीं है, यह देश को एकजुट करने के बारे में है। हम इसे भारत के रूप में कर रहे हैं।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-madhu-mantena-ramayana-nitesh-tiwari-expect-biggest-cast-history-indian-cinema-795001|title=EXCLUSIVE: Madhu Mantena on Ramayana with Nitesh Tiwari: Expect the biggest cast in history of Indian cinema|date=2021-06-30|website=पिंकविला|language=en|access-date=2025-04-27}}</ref> रणबीर कपूर, रवि दुबे, साई पल्लवी, सनी देओल और यश को क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में चुना गया है। === चलचित्रण === फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी अप्रैल 2024 में शुरू हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-ramayana-shoot-begins-first-video-of-grand-ayodhya-set-goes-viral-8840316.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Shoot Begins, FIRST Video of Grand Ayodhya Set Goes Viral|date=5 अप्रैल 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> 5 अप्रैल को, फिल्म के सेट से तस्वीरें लीक हो गईं, जिसमें अरुण गोविल, लारा दत्ता और शीबा चड्ढा अपनी-अपनी भूमिकाओं में और नीतेश तिवारी फिल्म का निर्देशन करते हुए दिखाई दिए।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-fans-angry-lara-dutta-arun-govil-photos-from-ramayana-sets-leaked-8840620.html|title=Ranbir Kapoor Fans ANGRY As Lara Dutta, Arun Govil's Photos From Ramayana Sets LEAKED|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-lara-dutta-and-arjun-govil-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5379317|title=Crazy Viral Pics Of Lara Dutta And Arun Govil From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> इसके बाद, निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर एक सख्त नो-फोन पॉलिसी लागू की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-no-phone-policy-ramayana-set-ranbir-kapoor-look-ram-2523698-2024-04-05|title=Exclusive: 'Ramayana' director Nitesh Tiwari imposes no-phone policy on set|date=2024-04-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> 27 अप्रैल को, फिल्म के सेट से फिर से तस्वीरें लीक हो गईं, इस बार रणबीर कपूर और साई पल्लवी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई दिए, जिससे सोशल मीडिया पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि क्या तस्वीरें खुद निर्माताओं द्वारा प्रचार उत्पन्न करने और वेशभूषा पर सार्वजनिक राय जानने के लिए लीक की जा रही थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5535127|title=Crazy Viral Pics Of Ranbir Kapoor And Sai Pallavi From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavis-looks-get-leaked-fans-gush-about-regal-appearance/articleshow/109644786.cms?from=mdr&from=mdr|title='Ramayana': Ranbir Kapoor- Sai Pallavi's looks get leaked, fans gush about regal appearance|date=2024-04-27|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-03-16|issn=0013-0389}}</ref> मई में, फिल्म का कार्य शीर्षक "गॉड पावर" बताया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|title=Ramayana's working title revealed, Ranbir to also shoot for 'Love And War'|last=Singh Rawat|first=Sudeep|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241109080145/https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|archive-date=9 नवंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana's working title revealed; makers tightens surveillance on set to avoid leaked pics|date=2024-05-17|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526194229/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|archive-date=26 मई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अगस्त में, एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल हुआ जिसमें प्रशंसित अमेरिकी आंदोलन कोच टेरी नोटरी थे, जिन्होंने पुष्टि की कि वह फिल्म श्रृंखला में एक्शन निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। फिल्मांकन नवंबर 2024 में पूरा होने की घोषणा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/avatar-avengers-endgame-veteran-terry-notary-working-on-ranbir-kapoors-ramayana-as-action-director-9528803/|title=Avatar, Avengers Endgame veteran Terry Notary working on Ranbir Kapoor's Ramayana as action director|date=2024-08-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ramayana-avengers-endgame-stunt-coordinator-terry-notary-confirms-working-on-the-ranbir-kapoor-starrer-watch-video/articleshow/112740067.cms|title='Ramayana': Avengers Endgame stunt coordinator Terry Notary CONFIRMS working on the Ranbir Kapoor starrer - WATCH video|date=2024-08-23|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-03-16|issn=0971-8257}}</ref> पार्ट 2 का फिल्मांकन 19 जनवरी 2025 को शुरू हुआ। मई 2025 में, यह बताया गया कि प्रशंसित हॉलीवुड स्टंट निर्देशक गाय नॉरिस, जिन्होंने पहले 'फ्यूरियोसा: ए मैड मैक्स सागा', 'मैड मैक्स: फ्यूरी रोड' और 'द सुसाइड स्क्वाड' जैसी फिल्मों पर काम किया था, को फिल्म के लिए एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए जोड़ा गया था और वह यश के साथ मिलकर काम कर रहे थे।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/yash-mad-max-guy-norris-ramayana-1236411803/|title=Yash Teams With ‘Mad Max’ Stunt Maestro Guy Norris for Epic ‘Ramayana’ Action Sequences (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-05-29|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-06-19}}</ref> जून 2025 में, यह बताया गया कि अकादमी पुरस्कार विजेता हॉलीवुड निर्माता चार्ल्स रोवेन, जो एटलस एंटरटेनमेंट के संस्थापक भी हैं, मल्होत्रा और यश के साथ फिल्म में निर्माता के रूप में भी शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=Valloppillil|first=Sindhya|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref> === पश्च-निर्माण (पोस्ट-प्रोडक्शन) === बताया गया है कि फिल्म 600 दिनों तक पोस्ट-प्रोडक्शन में रहेगी, जिससे यह इतनी व्यापक पोस्ट-प्रोडक्शन समय-सीमा की आवश्यकता वाली कुछ वैश्विक फिल्मों में से एक बन जाएगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.siasat.com/sai-pallavi-ranbirs-ramayana-release-date-budget-more-3073419/|title=Sai Pallavi, Ranbir's Ramayana: Release date, budget & more|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-08-04|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-14}}</ref> == संगीत == फिल्म के [[:en:Film score|पृष्ठभूमि]] [[:en:Soundtrack|साउंडट्रैक]] को [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] द्वारा [[:en:Musical composition|संगीतबद्ध]] किया जा रहा है। कई [[:en:Hans Zimmer discography|प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों]] का संगीत तैयार करने के बाद, संगीतकार ज़िमर इस फिल्म से भारतीय सिनेमा में मूल स्कोर संगीतकार के रूप में पदार्पण कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-hans-zimmer-india-debut-ar-rahman-report-sai-pallavi-yash-101712296514599.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana to mark Hans Zimmer's debut in Bollywood with AR Rahman: Report|date=5 अप्रैल 2024|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> फिल्म के [[:en:Songs|गानो]] की धुने [[ए. आर. रहमान]] द्वारा संगीतबद्ध की जा रही है और गानो के बोल [[कुमार विश्वास]] ने लिखे हैं। == विपणन (मार्केटिंग) == 6 नवंबर 2024 को, मल्होत्रा ने आधिकारिक तौर पर 'रामायण' की घोषणा एक पोस्टर के माध्यम से की, साथ ही दोनों फिल्मों की रिलीज की तारीखें भी बताईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Part 1 and 2 officially announced: See first poster, check release date details|date=2024-11-06|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250312170029/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|archive-date=12 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/ranbir-kapoor-yash-and-sai-pallavis-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-first-poster-out/article68835920.ece|title=Ranbir Kapoor, Yash and Sai Pallavi's 'Ramayana Part 1 and 2' officially announced; first poster out|last=|first=|date=2024-11-06|work=द हिन्दू|access-date=2025-03-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> मल्होत्रा ने बार-बार फिल्म को एक वैश्विक फिल्म के रूप में प्रचारित किया है, जिसमें एक भारतीय विषय को दुनिया के लिए प्रस्तुत किया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ramayanas-producer-namit-malhotra-says-its-massive-responsibility-to-present-the-film-at-global-stage-aa-9245773.html|title=Ramayana's Producer Namit Malhotra Says Its 'Massive Responsibility' To Present The Film At Global Stage|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|title=Ramayana producer Namit Malhotra wants Ranbir Kapoor film to be celebrated globally like Oppenheimer, Forrest Gump|date=2025-03-01|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250302085950/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|archive-date=2 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref> उन्होंने कई मौकों पर फिल्म के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने इसे 'ड्यून्स' या 'अवतार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों के "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े होने की अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|title='I tell filmmakers that if you can dream it (storytelling), we can do it'|last=Kohli-Khandeka|first=Vanita|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241202132258/https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|archive-date=2 दिसंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref> उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह बजट या तकनीकी विशेषज्ञता में सीमाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाएंगे—जो कारक ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर भारतीय प्रस्तुतियों को दृश्य रूप से ऊपर उठने से रोकते रहे हैं—जबकि आत्मविश्वास से कुछ "पहले कभी न देखे गए" दृश्यों का वादा किया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/interviews/namit-malhotra-the-ramayana-belongs-to-the-worldno-one-person-or-entity-owns-it|title=Namit Malhotra: 'The Ramayana' Belongs to The World—No One Person or Entity Owns It|website=द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-first-glimpse-ranbir-kapoor-yash-explode-on-screen-as-lord-ram-ravana-hollywood-level-vfx-wows-fans-101751526412324.html|title=Ramayana first glimpse: Ranbir Kapoor, Yash explode on screen as Lord Ram, Ravana; 'Hollywood-level' VFX wows fans|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=3 जुलाई 2025}}</ref> == प्रदर्शन == फिल्म को 2026 में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavi-s-film-gets-release-date-bonus-new-poster-6955155|title=Ranbir Kapoor And Sai Pallavi's Ramayana Part 1 and 2 Get Official Release Dates|date=6 नवम्बर 2024|website=एनडीटीवी|access-date=30 अक्टूबर 2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]] [[श्रेणी:हिंदी भाषा की फिल्में]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा फिल्म]] [[श्रेणी:रामायण]] [[श्रेणी:राम]] [[श्रेणी:हनुमान]] [[श्रेणी:रावण]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन एडवेंचर फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन ड्रामा फ़िल्में]] [[श्रेणी:आगामी भारतीय फिल्में]] [[श्रेणी:दीपावली]] [[श्रेणी:परशुराम]] [[श्रेणी:इन्द्र]] [[श्रेणी:शिव]] [[श्रेणी:३डी फ़िल्म]] c53ty77ptp0xfccjtav3fcnuokn5j4l 6536753 6536751 2026-04-06T05:06:09Z PieWriter 904009 [[Special:Contributions/~2026-21207-32|~2026-21207-32]] ([[User talk:~2026-21207-32|वार्ता]]) द्वारा किए बदलाव को Chandanvaish321 के बदलाव से पूर्ववत किया: File doesn’t exist 6536753 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = रामायणम्<br>{{small|Ramayana}} | image = Ramayana (2026 film).jpeg | caption = आधिकारिक टीज़र पोस्टर | director = [[नितेश तिवारी]] | writer = [[:en:Shridhar Raghavan & Kumar Vishwas|श्रीधर राघवन तथा कुमार विश्वास]]<!--यहाँ 'लेखक' शब्द का तात्पर्य फ़िल्म के कहानी-लेखक से है, न कि उस मूल स्रोत सामग्री के वास्तविक लेखक से जिस पर फ़िल्म की कहानी आधारित है।--> | based_on = {{Based on|[[रामायण]]|ऋषि [[वाल्मीकि]]}} | producer = {{plainlist| * [[नमित मल्होत्रा]] <!--यहां केवल निर्माताओं के नाम होने चाहिए, सह-निर्माताओं के नाम नहीं।--> }} | starring = {{plainlist|<!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> * [[रणबीर कपूर]] * [[रवि दुबे]] * [[साई पल्लवी]] * [[सनी देओल]] * [[यश]] * [[अरुण गोविल]] }} | narrator = [[अमिताभ बच्चन]]{{उद्धरण आवश्यक}} | cinematography = {{plainlist| * पंकज कुमार * महेश लिमये }} | editing = | music = '''पृष्ठभूमि''':<br />[[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]]<br />'''गीत''':<br />[[ए. आर. रहमान]] | studio = {{plainlist| * प्राइम फोकस स्टूडियोज़ * मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स * [[डीएनईजी]] }} | distributor = | released = {{film date|2026|11|6|df=y}} | country = भारत | language = [[हिंदी]]<br />[[:en:English language|अंग्रेज़ी]] | budget = ₹2600 -₹4000{{small|करोड़}} (US$280-$420 {{small|मिलियन}}) दोनो फिल्म <ref>{{cite web |title=रणबीर कपूर–यश की 'रामायण' बनी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म – बजट ₹1600 करोड़ |publisher=News18 |date=15 जुलाई 2025 |url=https://www.news18.com/movies/bollywood/ranbir-kapoor-yashs-ramayana-becomes-indias-costliest-film-at-rs-4000-crore-ws-l-9440783.html |access-date=15 जुलाई 2025}}</ref> }}'''''रामायण''''' एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन [[नितेश तिवारी]] ने किया है और जिसका फिल्म-लेखन [[:en:Shridhar Raghavan|श्रीधर राघवन]] ने किया है। यह फिल्म [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक [[प्राचीन भारत|प्राचीन भारतीय]] [[हिन्दू धर्मग्रन्थ|ग्रंथ]] ''[[रामायण]]'' पर आधारित है। यह फिल्म एक नियोजित दो-भागीय श्रृंखला की पहली किस्त है।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=वल्लोप्पिलिल|first=सिंध्या|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/yash-kgf-ramayana-prime-focus-nitesh-tiwari-dangal-1235967679/|title='K.G.F.' Star Yash's Monster Mind, Namit Malhotra's Prime Focus Team on 'Dangal' Filmmaker Nitesh Tiwari's Epic 'Ramayana' (EXCLUSIVE)|last=नमन रामचन्द्रन|date=2024-04-11|website=वैराइटी|access-date=2024-11-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.awn.com/news/prime-focus-studios-announces-ramayana-co-production|title=Prime Focus Studios Announces 'Ramayana' Co-Production|date=30 अप्रैल 2024|website=एनिमेशन वर्ल्ड नेटवर्क|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> इसमें <!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->[[रणबीर कपूर]] (राम {{small|के रूप में}}), [[रवि दुबे]] (लक्ष्मण {{small|के रूप में}}), [[साई पल्लवी]] (सीता {{small|के रूप में}}), [[सनी देओल]] (हनुमान {{small|के रूप में}}) और [[यश (अभिनेता)|यश]] (रावण {{small|के रूप में}}) मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं। अन्य कलाकारों में [[अमिताभ बच्चन]], [[अरुण गोविल]], [[लारा दत्ता]], [[विवेक ओबेरॉय]], [[काजल अग्रवाल]], [[रकुल प्रीत सिंह]], [[कुणाल कपूर]], [[शीबा चड्ढा]], [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] और [[शोभना]] शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-officially-announced-release-in-2-parts-2628896-2024-11-06|title=Ranbir, Sai Pallavi and Yash's Ramayana officially announced, to release in 2 parts|date=2024-11-06|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-to-be-backed-by-namit-malhotra/articleshow/108459580.cms|title=Ranbir Kapoor's Ramayana rights acquired by Namit Malhotra|date=2024-03-13|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-18|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollyreview.com/2026/02/ramayana-part-1-2026.html|title=Ramayana: Part 1 (2026)|date=2026-02-05|website=Holly Review|language=en|access-date=2026-02-07}}</ref> यह फिल्म ₹2600-4000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े भारतीय फिल्म बजट पर बनी है। इसका निर्माण [[नमित मल्होत्रा]] ​​के प्राइम फोकस स्टूडियो, यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और [[चार्ल्स रोवन|चार्ल्स रोवन]] के अमेरिकी स्टूडियो [[एटलस एंटरटेनमेंट]] ने किया है, लेकिन इसकी पूरी शूटिंग और संपादन भारत में हुआ है। इसके विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का काम ब्रिटिश-भारतीय स्टूडियो [[डीएनईजी]] ने संभाला है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-most-expensive-indian-film-rs-835-crore-budget-report-9327597/|title=Ranbir Kapoor, Sai Pallavi's Ramayana to be the most expensive Indian film with Rs 835 crore budget: report|date=2024-05-14|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/ramayana-part-1-this-veteran-actor-with-a-net-worth-of-rs-1600-crore-is-likely-to-join-ranbir-kapoor-and-sam-pallavis-historical-drama-thats-been-made-on-a-staggering-budget-of-rs-835-crore|title=Ramayana Part 1: This veteran actor, with a net worth of Rs 1,600 Crore, is likely to join Ranbir Kapoor and Sai Pallavi's historical drama that's been made on a staggering budget of Rs 835 Crore|last=Shetty|first=Karishma|date=2024-11-06|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> यह फिल्म 6 नवंबर 2026 में [[दीपावली]] के अवसर पर भारत में रिलीज़ होने वाली है।<ref name="SIA">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/oscar-winner-hans-zimmer-joins-for-ramayana-with-a-r-rahman-3004241/|title=Oscar winner Hans Zimmer joins for Ramayana with A.R. Rahman|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-04-05|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-18}}</ref> फिल्म का संगीत [[:en:List_of_awards_and_nominations_received_by_Hans_Zimmer|विश्व-प्रसिद्ध]] [[:en:Germans|जर्मन]] संगीतकार, [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] ({{small|जो अपनी पहली भारतीय परियोजना में काम कर रहे हैं}}), और [[ए. आर. रहमान]] ने मिलकर तैयार किया है। == कलाकार == <!-- मुख्य कलाकार - आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> {| class="wikitable" ! कलाकार !! भूमिका !! सन्दर्भ |- | [[रणबीर कपूर]] || [[राम]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-is-best-choice-for-lord-ram-mukesh-chhabra-breaks-silence-on-casting-for-nitesh-tiwari-ramayana-2585545-2024-08-21|title=Ranbir Kapoor is best choice for Lord Ram: Mukesh Chhabra on Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=21 अगस्त 2024|website=इंडिया टुडे|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/htcity/cinema/ramayana-ranbir-kapoor-to-portray-two-avatars-of-lord-vishnu-amitabh-bachchan-roped-in-for-this-role-101725884855689.html|title=Ramayana: Ranbir Kapoor to portray two avatars of Lord Vishnu; Amitabh Bachchan roped in for THIS role|last=महिमा पाण्डेय|date=9 सितम्बर 2024|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=28 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[रवि दुबे]] || [[लक्ष्मण]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-is-the-only-commercially-viable-artist-of-this-generation-ravi-dubey-confirms-hes-playing-lakshman-in-nitesh-tiwaris-ramayana-9707324/|title='Ranbir Kapoor is the only commercially viable artiste of this generation': Ravi Dubey confirms he's playing Lakshman in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-12-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref> |- | [[साई पल्लवी]] || [[सीता]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-ranbir-kapoor-yash-sai-pallavi-films-release-date-out-makers-of-nitesh-tiwaris-epic-confirm-two-parts-9655800/|title=Ramayana: Ranbir Kapoor-Yash-Sai Pallavi film's release date out, makers of Nitesh Tiwari's epic confirm two parts|date=2024-11-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/heres-how-many-crores-south-superstar-yash-will-earn-for-his-role-as-ravana-in-the-ramayana-starring-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-thats-made-on-a-massive-rs-800-crore-budget|title=Here's how many Crores South superstar Yash will earn for his role as Ravana in Ramayana, starring Ranbir Kapoor and Sai Pallavi, that's made on a massive Rs 800 Crore budget|last=Sonavane|first=Gaurav|date=2024-10-23|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> |- | [[सनी देओल]] || [[हनुमान]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/sunny-deol-confirmed-as-hanuman-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-details-about-role-revealed-8756715.html|title=Sunny Deol CONFIRMED As Hanuman In Ranbir Kapoor Starrer Ramayana; Details About Role Revealed|date=27 जनवरी 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/sunny-deol-hanuman-standalone-film-in-nitesh-tiwari-ramayan-trilogy-2613915-2024-10-09|title=Sunny Deol's Hanuman to get standalone film in Ramayan trilogy - Exclusive|date=2024-10-09|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2024-10-09}}</ref> |- | [[यश (अभिनेता)|यश]] || [[रावण|रावण Lankapati]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/yash-confirms-he-is-playing-ravan-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-toxic-set-to-get-new-release-date/article68785635.ece#:~:text=The%20magnum%20opus%20is%20directed%20by%20Nitesh%20Tiwari&text=Kannada%20superstar%20Yash%20has%20confirmed,and%20Sai%20Pallavi%20as%20Sita.|title=Yash confirms he is playing Ravan in Ranbir Kapoor starrer 'Ramayana'; 'Toxic' set to get new release date|date=23 अक्टूबर 2024|website=द हिन्दू|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[अमिताभ बच्चन]] || [[जटायु]] || {{उद्धरण आवश्यक}} |- | [[लारा दत्ता]] || [[कैकेयी]] || <ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/bollywood/arun-govil-as-dashrath-lara-dutta-as-kaikeyi-and-more-spotted-on-ranbir-kapoors-ramayana-sets-exclusive-pics-article-109041503|title=Arun Govil As Dashrath, Lara Dutta As Kaikeyi And More SPOTTED On Ranbir Kapoor's Ramayana Sets - Exclusive PICS|website=Zoom TV|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[अरुण गोविल]] || [[दशरथ]] || <ref name=":1" /> |- | [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] || [[कौशल्या]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/indira-krishnan-showers-praise-on-ramayan-co-star-ranbir-kapoor-i-cant-see-another-actor-playing-ram/articleshow/114736761.cms|title=Indira Krishnan showers praise on 'Ramayan' co-star Ranbir Kapoor: 'I can't see another actor playing Ram'|date=अक्टूबर 29, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[कुणाल कपूर]] || [[इन्द्र|इंद्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kunal-kapoor-to-play-indra-dev-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/112230254.cms|title=Kunal Kapoor to play Indra Dev in Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=अगस्त 2, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 27, 2024}}</ref> |- | [[काजल अग्रवाल]] || [[:en:Mandodari|मंदोदरी]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kajal-aggarwal-cast-as-mandodari-in-yashs-upcoming-ramayana-adaptation/articleshow/121192838.cms|title=Yash's Ravana finds his Mandodari in Kajal Aggarwal|date=2025-05-16|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|language=en}}</ref> |- | [[रकुल प्रीत सिंह]] || [[शूर्पणखा|शूर्पनखा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-rakul-preet-singh-in-talks-to-come-on-board-nitesh-tiwaris-ramayana-to-play-shurpanakha-1277611|title=EXCLUSIVE: Rakul Preet Singh in talks to come on board Nitesh Tiwari's Ramayana; To play Shurpanakha|date=2024-02-10|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[विवेक ओबेरॉय]] || [[शूर्पणखा#विद्युतजिह्वा से विवाह|विद्युत्जिवा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/vivek-oberoi-joins-nitesh-tiwaris-ramayana-take-a-look-at-full-cast-ws-l-9373870.html|title=Vivek Oberoi Joins Nitesh Tiwari’s Ramayana: Take A Look At Full Cast|website=न्यूज़18|access-date=7 जून 2025}}</ref> |- | [[:en:Adinath Kothare|आदिनाथ कोठारे]] || [[भरत (रामायण)|भरत]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/etimes-exclusive-this-actor-comes-on-board-for-nitesh-tiwari-ranbir-kapoors-ramayana-to-play-rams-beloved-brother-bharat/articleshow/108842263.cms|title=ETimes Exclusive! THIS actor comes on board for Nitesh Tiwari-Ranbir Kapoor's Ramayana; to play Ram's beloved brother Bharat|date=2024-03-28|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[शीबा चड्ढा]] || [[मंथरा]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/sheeba-chadha-to-play-the-role-of-manthara-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/108950314.cms|title=Sheeba Chadha to play the role of Manthara in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-01|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-25}}</ref> |- | [[शिशिर शर्मा]] || [[वसिष्ठ]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-co-star-shishir-sharma-calls-the-film-huge-and-larger-than-life-spills-the-beans-on-his-character-vasishtha/articleshow/111384095.cms|title=Ranbir Kapoor's 'Ramayana' co-star Shishir Sharma calls the film 'huge and larger-than-life'; spills the beans on his character Vasishtha|date=जून 30, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[:en:Ajinkya Deo|अजिंक्या देओ]] || [[विश्वामित्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-smiles-in-new-photo-from-ramayana-sets-poses-with-vishwamitra-check-here-8875502.html|title=Ranbir Kapoor Smiles In New Photo From Ramayana Sets, Poses With 'Vishwamitra' {{!}} Check Here|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[:en:Sonia Balani|सोनिया बलानी]] || [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/the-kerala-story-actress-sonia-balani-will-play-urmilas-character-in-nitesh-tiwaris-ramayana-exclusive/articleshow/110181471.cms|title='The Kerala Story' actress Sonia Balani will play Urmila's character in Nitesh Tiwari's Ramayana- Exclusive!|date=2024-05-16|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[मोहित रैना]] || [[शिव]] जी || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/mohit-raina-to-return-as-mahadev-lord-shiva-in-ranbir-kapoors-ramayana-ws-l-9361070.html|title=Mohit Raina To Return As 'Mahadev' Lord Shiva In Ranbir Kapoor's Ramayana?|date=2025-05-31|website= बॉलीवुड न्यूज़|language=en|access-date=2025-05-31}}</ref> |- | कियारा सध || बालिका सीता || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/ramayana-exclusive-pandya-stores-kiara-sadh-to-essay-young-sita-aka-sai-pallavis-role-in-nitesh-tiwaris-directorial-1298369|title=EXCLUSIVE: THIS Pandya Store child actor to play young Sita in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-23|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-28}}</ref> |} {{Multiple image|image1=Nitesh Tiwari at the ‘Khidkiyaan’ movie festival launch (cropped).jpg|image2=Namit Malhotra.jpg|total_width=300|footer=''रामायण'' नमित मल्होत्रा के साथ [[नितेश तिवारी]] की पहली सहयोगात्मक फिल्म है।}} == उत्पादन == === उत्पत्ति === मई 2017 में, निर्माता अल्लू अरविंद, नमित मल्होत्रा और मधु मंतेना ने हिंदू संस्कृत महाकाव्य रामायण को एक लाइव-एक्शन फीचर फिल्म त्रयी के रूप में ढालने के लिए सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पटकथा का विकास लगभग एक साल से चल रहा था। इस परियोजना को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उड़िया, सिंहली और अंग्रेजी भाषाओं में एक बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में देखा गया, और इसे 3डी में शूट करने की योजना बनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ramayana-to-be-made-into-a-movie-of-rs-500-crore-budget/articleshow/58611990.cms|title='Ramayana' to be made into a movie of Rs 500 crore budget|date=2017-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>अल्लू अरविंद ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की कि वह रामायण को "सबसे शानदार तरीके से" बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने इस महाकाव्य को त्रयी में ढालने की जिम्मेदारी को भी स्वीकार किया। नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी प्राइम फोकस ने हॉलीवुड फिल्मों जैसे 'स्टार वार्स', 'ट्रांसफॉर्मर', 'एक्स-मेन: एपोकैलिप्स' और 'द मार्टियन' में विजुअल इफेक्ट्स का योगदान दिया था, उन्होंने इस त्रयी में भारतीय सिनेमा के लिए नए वैश्विक मानक स्थापित करने की क्षमता देखी।फरवरी 2018 में, मधु मंतेना ने बताया कि फिल्म श्रृंखला बनाने की प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध भारतीय कॉमिक बुक लेखक अनंत पई के जीवन और कार्य से मिली, जिन्होंने अमर चित्र कथा कॉमिक्स बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म श्रृंखला नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति को नवीनतम तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से "सभी संभावित ऑडियो विजुअल महिमा" में फिर से बताने का उनका सामूहिक प्रयास है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-500-crore-film-mou-up-govt-5075106/|title=Makers of Rs 500 crore Ramayana film sign MoU with UP government|date=2018-02-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|title=MoUs worth Rs 4.28 lakh-crore signed on first day of UP Investors Summit 2018|date=2018-02-21|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20230330010105/https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|archive-date=30 मार्च 2023|language=en-us|url-status=live}}</ref> पिछली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त रामायण की रूपांतरण टेलीविजन श्रृंखलाओं, विशेष रूप से रामानंद सागर की 'रामायण' (1987-88) के रूप में थे, लेकिन इस बार निर्माता रामायण को बड़े पर्दे के लिए एक सिनेमाई तमाशे के रूप में लाना चाहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/baahubali-2-the-conclusion-ramayana-film-500-crore-976236-2017-05-10|title=Baahubali 2's success makes way for Rs 500-crore Ramayana film|date=2017-05-10|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thequint.com/entertainment/cinema/500-crore-ramayana-film-in-3-languages#read-more|title=Now Gear up for a Rs 500-Crore 3D 'Ramayana' on the Big Screen|last=Hingorani|first=Karishma|date=2017-05-10|website=द क्विंट|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> === विकास === जुलाई 2019 में, नीतेश तिवारी और रवि उद्यावर ने त्रयी के सह-निर्देशन के लिए हाथ मिलाया, जबकि श्रीधर राघवन को पटकथा लिखने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/ramayanas-trilingual-live-action-trilogy-to-be-helmed-by-dangal-director-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-6953121.html|title=Ramayana's trilingual live-action trilogy to be helmed by Dangal director Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar|date=2019-07-08|website=फर्स्टपोस्ट|language=en-us|access-date=2025-02-17}}</ref> नीतेश तिवारी ने 1987-88 की रामायण टेलीविजन श्रृंखला के बाद से विजुअल इफेक्ट्स में हुए महत्वपूर्ण उन्नयन को इस परियोजना को हाथ में लेने का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि "हमारी सबसे पुरानी, या शुरुआती यादें (महाकाव्य की), अभी भी 30 साल पुरानी हैं। हमने वास्तव में रामायण को उस रूप में नहीं देखा है जिस रूप में इसे बताया जाना चाहिए।" तकनीकी संभावनाओं के अलावा, उन्हें टीम में शामिल होने के लिए कहानी ने भी प्रेरित किया, जिसमें उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में "शानदार विश्वास" था, और यह तथ्य कि उनके निर्माता इसे "बहुत दिलचस्प तरीके से" निष्पादित करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। उद्यावर ने भी बताया कि इस परियोजना में शामिल होने का उनका निर्णय अपने बच्चों के प्रति उसी जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था। उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बताया कि वह और उनकी टीम क्या कर रहे हैं, तो उनका बेटा यह सोचकर "पूरा दिन कूदता रहा" कि रावण और कुंभकर्ण कैसे दिखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच तब था जब उनके बेटे ने उनसे कहा कि "हनुमान सुपरमैन से ज्यादा कूल हैं।" तिवारी ने कहा कि महाकाव्य का आकर्षण उसके पात्रों के समूह में निहित है, विशेष रूप से राम के चरित्र में, "एक आदर्श नेता, पति, पिता और पुत्र"। वहीं, उद्यावर को लगा कि महाकाव्य का जादू उसके आकार बदलने वाले राक्षसों में है, जो उनके विचार में एक छोटे बच्चे को भी पसंद आएगा। तिवारी ने पुष्टि की कि फिल्मों में जो कुछ भी कहा और दिखाया जाएगा, उसमें प्रामाणिकता की मुहर होगी। उन्होंने कहा कि राम और रावण से परे, हर चरित्र—चाहे वह सीता, लक्ष्मण, या हनुमान हो—का कुछ न कुछ सार्थक संदेश है, जिससे रामायण को त्रयी में ढालना आवश्यक हो जाता है। निर्माण टीम ने फिल्मों के सेटिंग, वेशभूषा, कलाकारों और एक्शन के लिए संदर्भ के रूप में पूरे भारत के कलाकारों से जटिल चित्र बनवाए। इस परियोजना का उद्देश्य हिंदी, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और पंजाबी सिनेमा के अभिनेताओं को शामिल करना था, जो एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था ताकि अखिल भारतीय और वैश्विक दर्शकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-reviving-ramayana-with-a-live-action-multilingual-trilogy/articleshow/70119460.cms|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar reviving Ramayana with a live-action, multilingual trilogy|author=Roshmila Bhattacharya|date=जुलाई 8, 2019|newspaper=Mumbai Mirror|access-date=2025-02-17|language=en}}</ref> फिल्म श्रृंखला को शुरू में 500 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट पर बनाने की बात थी। निर्माण टीम ने 2020 तक फिल्मांकन शुरू करने की योजना बनाई थी, जिसमें पहली किस्त 2021 में रिलीज होने वाली थी। फिल्म निर्माताओं का इरादा कहानी की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्रयी के प्रत्येक भाग के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर रखने का था।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-live-action-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-direct-5820177/|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to helm multilingual live-action version of Ramayana|date=2019-07-08|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-bring-ramayana-to-life-at-a-rs-500-crore-budget/articleshow/70126241.cms?from=mdr|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to bring 'Ramayana' to life at a Rs 500 crore budget|date=2019-07-08|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-02-17|issn=0013-0389}}</ref> === पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन) === ==== लेखन और दृश्य विकास ==== नवंबर 2019 में, तिवारी ने कहा कि राघवन पिछले तीन सालों से पटकथा लिख रहे थे, जिसमें कई विद्वानों और पंडितों का मार्गदर्शन था, जिन्हें शास्त्र का व्यापक ज्ञान था, ताकि महाकाव्य को समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|title=I'm happy not following the formula of making a hit film: Nitesh Tiwari|date=2019-11-20|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20240725202209/https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|archive-date=25 जुलाई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अप्रैल 2020 में, उन्होंने कहा कि वे कहानी के संवेदनशील पहलुओं की सावधानीपूर्वक पहचान कर रहे थे, जिन्हें अछूता रहना चाहिए, ताकि उनसे जुड़ी संभावित सार्वजनिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, जबकि उन क्षेत्रों का निर्धारण भी किया जा रहा था जहां वे फिल्म के समग्र देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सीमित सिनेमाई स्वतंत्रता ले सकते थे।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/massive-responsibility-to-do-a-project-like-ramayana-nitesh-tiwari-6066033/|title=Massive responsibility to do a project like Ramayana: Nitesh Tiwari|date=2019-10-12|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>तिवारी ने समझाया कि वह और उनकी टीम कहानी को इस तरह से प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि उनके बच्चों जैसे युवा दर्शकों को, जो "एवेंजर्स के प्रशंसक" हैं, यह रोमांचक लगे, जबकि साथ ही उनकी सास जैसे पुराने दर्शकों का विश्वास भी बनाए रखा जा सके, ताकि उन्हें यह "इतना आकर्षक लगे कि वे कहें कि मैंने रामायण को इस रूप में नहीं देखा है"।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/challenging-to-make-ramayana-appealing-for-all-generations-nitesh-tiwari-6300240/|title=Challenging to make Ramayana appealing for all generations: Nitesh Tiwari|date=2020-03-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> उन्होंने फिल्म को तकनीकी रूप से भारी तैयारी वाली बताया, क्योंकि महाकाव्य के जादुई गुण, जैसे उसमें वर्णित बात करने वाले जानवर या मंत्रमुग्ध वन, उन्हें स्क्रीन पर एक ऐसी दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत करने का अवसर देते थे,<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-on-ramayana-making-it-exciting-for-both-children-and-old-people-is-challenging-1652718-2020-03-05|title=Nitesh Tiwari on Ramayana: Making it exciting for both children and old people is challenging|date=2020-03-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जो उनके विचार में पहले कभी नहीं देखी गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/amid-the-lockdown-nitesh-tiwari-works-on-ramayanas-script-over-group-calls/articleshow/74919720.cms|title=Amid the lockdown, Nitesh Tiwari works on Ramayana's script over group calls|date=2020-03-31|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref> जून 2021 में, मंतेना ने बताया कि वह और उनकी टीम रामायण को एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि "एक उद्देश्य, दुनिया को उसकी पूरी महिमा में रामायण बताने का उद्देश्य" के रूप में देख रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वह त्रयी को "दुनिया में किसी भी अन्य चीज़ की तरह अच्छी तरह से" बनाना चाहते थे, और बताया कि उनकी टीम "हर चीज़ के छोटे से छोटे विवरण" पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि वे वही प्रक्रिया अपना रहे थे जो जेम्स कैमरून ने अवतार के लिए इस्तेमाल की थी, और दुनिया भर के 200 से अधिक कलाकार दो साल से फिल्म पर काम कर रहे थे, जिनमें कुछ अकादमी पुरस्कार विजेता भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/bollywood/madhu-mantena-opens-up-on-ramayana-and-says-expect-the-biggest-cast-in-history-of-indian-cinema-693416|title=Madhu Mantena Opens Up On Ramayana And Says, 'Expect The Biggest Cast In History Of Indian Cinema'|last=Hymavati|first=Ravali|date=2021-06-30|website=द हंस इंडिया|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जुलाई में, मंतेना ने त्रयी के लिए अपनी दृष्टि पर विस्तार से बताया, इसे वाल्मीकि के दृष्टिकोण से रामायण का एक रेखीय पुनर्कथन बताया, जिसमें महाकाव्य की उप-कहानियां भी शामिल थीं, जबकि "राक्षसों, असुरों, गरुड़ आदि जैसे शानदार प्राणियों से भरी एक गहन और सुंदर दुनिया" का वादा किया। सितंबर 2021 में, मंतेना ने कहा कि वे राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों के कार्यों पर विचार कर रहे थे, जिन्होंने उनके अनुसार महाकाव्य को "अपने सुंदर तरीकों से" व्याख्या किया था। उन्होंने कहा कि वे वाल्मीकि की रामायण और उसके वर्णनों का पालन कर रहे थे ताकि एक सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/ramayana-trilogy-for-a-global-audience-but-rooted-in-india-says-producer-madhu-mantena-716208|title='Ramayana' trilogy for a global audience but rooted in India, says producer Madhu Mantena|last1=भसीन|first1=श्रिया|last2=|first2=|date=2021-07-02|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-03-15}}</ref> === कलाकार चयन === {{Multiple image|image1=Ranbir at Besharam launch.jpg|image2=Ravi Dubey.jpg|image3=Sai Pallavi at Mca-pre-release-event.jpg|image4=Sunny Deol at Dev's Anand's autobiography release.jpg|image5=Yash at the ‘KGF’ Press Meet In Chennai (cropped).jpg|total_width=500|direction=horizontal|align=right|footer=[[रणबीर कपूर]], [[रवि दुबे]], [[साई पल्लवी]], [[सनी देओल]] और [[यश (अभिनेता)|यश]], क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में}} जुलाई 2021 में, मधु ने कहा कि वह उस साल दिवाली तक कलाकारों की घोषणा करने वाले थे, जिसमें उन्होंने "भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कास्ट" का वादा किया, जिसमें प्रदर्शन के मामले में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शामिल होंगे। उन्होंने राम, हनुमान, रावण, सीता और लक्ष्मण के पात्रों को "जीवन से बड़ा" बताते हुए जोर दिया कि वह देश भर के कलाकारों को कास्ट करेंगे। इस निर्णय का कारण बताते हुए, उन्होंने विस्तार से कहा कि "यह (रामायण) उत्तर और दक्षिण के बारे में नहीं है, यह देश को एकजुट करने के बारे में है। हम इसे भारत के रूप में कर रहे हैं।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-madhu-mantena-ramayana-nitesh-tiwari-expect-biggest-cast-history-indian-cinema-795001|title=EXCLUSIVE: Madhu Mantena on Ramayana with Nitesh Tiwari: Expect the biggest cast in history of Indian cinema|date=2021-06-30|website=पिंकविला|language=en|access-date=2025-04-27}}</ref> रणबीर कपूर, रवि दुबे, साई पल्लवी, सनी देओल और यश को क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में चुना गया है। === चलचित्रण === फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी अप्रैल 2024 में शुरू हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-ramayana-shoot-begins-first-video-of-grand-ayodhya-set-goes-viral-8840316.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Shoot Begins, FIRST Video of Grand Ayodhya Set Goes Viral|date=5 अप्रैल 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> 5 अप्रैल को, फिल्म के सेट से तस्वीरें लीक हो गईं, जिसमें अरुण गोविल, लारा दत्ता और शीबा चड्ढा अपनी-अपनी भूमिकाओं में और नीतेश तिवारी फिल्म का निर्देशन करते हुए दिखाई दिए।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-fans-angry-lara-dutta-arun-govil-photos-from-ramayana-sets-leaked-8840620.html|title=Ranbir Kapoor Fans ANGRY As Lara Dutta, Arun Govil's Photos From Ramayana Sets LEAKED|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-lara-dutta-and-arjun-govil-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5379317|title=Crazy Viral Pics Of Lara Dutta And Arun Govil From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> इसके बाद, निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर एक सख्त नो-फोन पॉलिसी लागू की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-no-phone-policy-ramayana-set-ranbir-kapoor-look-ram-2523698-2024-04-05|title=Exclusive: 'Ramayana' director Nitesh Tiwari imposes no-phone policy on set|date=2024-04-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> 27 अप्रैल को, फिल्म के सेट से फिर से तस्वीरें लीक हो गईं, इस बार रणबीर कपूर और साई पल्लवी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई दिए, जिससे सोशल मीडिया पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि क्या तस्वीरें खुद निर्माताओं द्वारा प्रचार उत्पन्न करने और वेशभूषा पर सार्वजनिक राय जानने के लिए लीक की जा रही थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5535127|title=Crazy Viral Pics Of Ranbir Kapoor And Sai Pallavi From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavis-looks-get-leaked-fans-gush-about-regal-appearance/articleshow/109644786.cms?from=mdr&from=mdr|title='Ramayana': Ranbir Kapoor- Sai Pallavi's looks get leaked, fans gush about regal appearance|date=2024-04-27|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-03-16|issn=0013-0389}}</ref> मई में, फिल्म का कार्य शीर्षक "गॉड पावर" बताया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|title=Ramayana's working title revealed, Ranbir to also shoot for 'Love And War'|last=Singh Rawat|first=Sudeep|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241109080145/https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|archive-date=9 नवंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana's working title revealed; makers tightens surveillance on set to avoid leaked pics|date=2024-05-17|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526194229/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|archive-date=26 मई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अगस्त में, एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल हुआ जिसमें प्रशंसित अमेरिकी आंदोलन कोच टेरी नोटरी थे, जिन्होंने पुष्टि की कि वह फिल्म श्रृंखला में एक्शन निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। फिल्मांकन नवंबर 2024 में पूरा होने की घोषणा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/avatar-avengers-endgame-veteran-terry-notary-working-on-ranbir-kapoors-ramayana-as-action-director-9528803/|title=Avatar, Avengers Endgame veteran Terry Notary working on Ranbir Kapoor's Ramayana as action director|date=2024-08-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ramayana-avengers-endgame-stunt-coordinator-terry-notary-confirms-working-on-the-ranbir-kapoor-starrer-watch-video/articleshow/112740067.cms|title='Ramayana': Avengers Endgame stunt coordinator Terry Notary CONFIRMS working on the Ranbir Kapoor starrer - WATCH video|date=2024-08-23|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-03-16|issn=0971-8257}}</ref> पार्ट 2 का फिल्मांकन 19 जनवरी 2025 को शुरू हुआ। मई 2025 में, यह बताया गया कि प्रशंसित हॉलीवुड स्टंट निर्देशक गाय नॉरिस, जिन्होंने पहले 'फ्यूरियोसा: ए मैड मैक्स सागा', 'मैड मैक्स: फ्यूरी रोड' और 'द सुसाइड स्क्वाड' जैसी फिल्मों पर काम किया था, को फिल्म के लिए एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए जोड़ा गया था और वह यश के साथ मिलकर काम कर रहे थे।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/yash-mad-max-guy-norris-ramayana-1236411803/|title=Yash Teams With ‘Mad Max’ Stunt Maestro Guy Norris for Epic ‘Ramayana’ Action Sequences (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-05-29|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-06-19}}</ref> जून 2025 में, यह बताया गया कि अकादमी पुरस्कार विजेता हॉलीवुड निर्माता चार्ल्स रोवेन, जो एटलस एंटरटेनमेंट के संस्थापक भी हैं, मल्होत्रा और यश के साथ फिल्म में निर्माता के रूप में भी शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=Valloppillil|first=Sindhya|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref> === पश्च-निर्माण (पोस्ट-प्रोडक्शन) === बताया गया है कि फिल्म 600 दिनों तक पोस्ट-प्रोडक्शन में रहेगी, जिससे यह इतनी व्यापक पोस्ट-प्रोडक्शन समय-सीमा की आवश्यकता वाली कुछ वैश्विक फिल्मों में से एक बन जाएगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.siasat.com/sai-pallavi-ranbirs-ramayana-release-date-budget-more-3073419/|title=Sai Pallavi, Ranbir's Ramayana: Release date, budget & more|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-08-04|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-14}}</ref> == संगीत == फिल्म के [[:en:Film score|पृष्ठभूमि]] [[:en:Soundtrack|साउंडट्रैक]] को [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] द्वारा [[:en:Musical composition|संगीतबद्ध]] किया जा रहा है। कई [[:en:Hans Zimmer discography|प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों]] का संगीत तैयार करने के बाद, संगीतकार ज़िमर इस फिल्म से भारतीय सिनेमा में मूल स्कोर संगीतकार के रूप में पदार्पण कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-hans-zimmer-india-debut-ar-rahman-report-sai-pallavi-yash-101712296514599.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana to mark Hans Zimmer's debut in Bollywood with AR Rahman: Report|date=5 अप्रैल 2024|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> फिल्म के [[:en:Songs|गानो]] की धुने [[ए. आर. रहमान]] द्वारा संगीतबद्ध की जा रही है और गानो के बोल [[कुमार विश्वास]] ने लिखे हैं। == विपणन (मार्केटिंग) == 6 नवंबर 2024 को, मल्होत्रा ने आधिकारिक तौर पर 'रामायण' की घोषणा एक पोस्टर के माध्यम से की, साथ ही दोनों फिल्मों की रिलीज की तारीखें भी बताईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Part 1 and 2 officially announced: See first poster, check release date details|date=2024-11-06|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250312170029/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|archive-date=12 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/ranbir-kapoor-yash-and-sai-pallavis-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-first-poster-out/article68835920.ece|title=Ranbir Kapoor, Yash and Sai Pallavi's 'Ramayana Part 1 and 2' officially announced; first poster out|last=|first=|date=2024-11-06|work=द हिन्दू|access-date=2025-03-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> मल्होत्रा ने बार-बार फिल्म को एक वैश्विक फिल्म के रूप में प्रचारित किया है, जिसमें एक भारतीय विषय को दुनिया के लिए प्रस्तुत किया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ramayanas-producer-namit-malhotra-says-its-massive-responsibility-to-present-the-film-at-global-stage-aa-9245773.html|title=Ramayana's Producer Namit Malhotra Says Its 'Massive Responsibility' To Present The Film At Global Stage|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|title=Ramayana producer Namit Malhotra wants Ranbir Kapoor film to be celebrated globally like Oppenheimer, Forrest Gump|date=2025-03-01|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250302085950/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|archive-date=2 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref> उन्होंने कई मौकों पर फिल्म के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने इसे 'ड्यून्स' या 'अवतार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों के "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े होने की अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|title='I tell filmmakers that if you can dream it (storytelling), we can do it'|last=Kohli-Khandeka|first=Vanita|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241202132258/https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|archive-date=2 दिसंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref> उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह बजट या तकनीकी विशेषज्ञता में सीमाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाएंगे—जो कारक ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर भारतीय प्रस्तुतियों को दृश्य रूप से ऊपर उठने से रोकते रहे हैं—जबकि आत्मविश्वास से कुछ "पहले कभी न देखे गए" दृश्यों का वादा किया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/interviews/namit-malhotra-the-ramayana-belongs-to-the-worldno-one-person-or-entity-owns-it|title=Namit Malhotra: 'The Ramayana' Belongs to The World—No One Person or Entity Owns It|website=द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-first-glimpse-ranbir-kapoor-yash-explode-on-screen-as-lord-ram-ravana-hollywood-level-vfx-wows-fans-101751526412324.html|title=Ramayana first glimpse: Ranbir Kapoor, Yash explode on screen as Lord Ram, Ravana; 'Hollywood-level' VFX wows fans|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=3 जुलाई 2025}}</ref> == प्रदर्शन == फिल्म को 2026 में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavi-s-film-gets-release-date-bonus-new-poster-6955155|title=Ranbir Kapoor And Sai Pallavi's Ramayana Part 1 and 2 Get Official Release Dates|date=6 नवम्बर 2024|website=एनडीटीवी|access-date=30 अक्टूबर 2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]] [[श्रेणी:हिंदी भाषा की फिल्में]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा फिल्म]] [[श्रेणी:रामायण]] [[श्रेणी:राम]] [[श्रेणी:हनुमान]] [[श्रेणी:रावण]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन एडवेंचर फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन ड्रामा फ़िल्में]] [[श्रेणी:आगामी भारतीय फिल्में]] [[श्रेणी:दीपावली]] [[श्रेणी:परशुराम]] [[श्रेणी:इन्द्र]] [[श्रेणी:शिव]] [[श्रेणी:३डी फ़िल्म]] 39a2795zumjy1m1lm5lw3oqv1li9bew 6536754 6536753 2026-04-06T05:07:56Z ~2026-21207-32 919002 Country 6536754 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = रामायणम्<br>{{small|Ramayana}} | image = Ramayana (2026 film).jpeg | caption = आधिकारिक टीज़र पोस्टर | director = [[नितेश तिवारी]] | writer = [[:en:Shridhar Raghavan & Kumar Vishwas|श्रीधर राघवन तथा कुमार विश्वास]]<!--यहाँ 'लेखक' शब्द का तात्पर्य फ़िल्म के कहानी-लेखक से है, न कि उस मूल स्रोत सामग्री के वास्तविक लेखक से जिस पर फ़िल्म की कहानी आधारित है।--> | based_on = {{Based on|[[रामायण]]|ऋषि [[वाल्मीकि]]}} | producer = {{plainlist| * [[नमित मल्होत्रा]] <!--यहां केवल निर्माताओं के नाम होने चाहिए, सह-निर्माताओं के नाम नहीं।--> }} | starring = {{plainlist|<!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> * [[रणबीर कपूर]] * [[रवि दुबे]] * [[साई पल्लवी]] * [[सनी देओल]] * [[यश]] * [[अरुण गोविल]] }} | narrator = [[अमिताभ बच्चन]]{{उद्धरण आवश्यक}} | cinematography = {{plainlist| * पंकज कुमार * महेश लिमये }} | editing = | music = '''पृष्ठभूमि''':<br />[[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]]<br />'''गीत''':<br />[[ए. आर. रहमान]] | studio = {{plainlist| * प्राइम फोकस स्टूडियोज़ * मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स * [[डीएनईजी]] }} | distributor = | released = {{film date|2026|11|6|df=y}} | country = भारत India | language = [[हिंदी]]<br />[[:en:English language|अंग्रेज़ी]] | budget = ₹2600 -₹4000{{small|करोड़}} (US$280-$420 {{small|मिलियन}}) दोनो फिल्म <ref>{{cite web |title=रणबीर कपूर–यश की 'रामायण' बनी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म – बजट ₹1600 करोड़ |publisher=News18 |date=15 जुलाई 2025 |url=https://www.news18.com/movies/bollywood/ranbir-kapoor-yashs-ramayana-becomes-indias-costliest-film-at-rs-4000-crore-ws-l-9440783.html |access-date=15 जुलाई 2025}}</ref> }}'''''रामायण''''' एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन [[नितेश तिवारी]] ने किया है और जिसका फिल्म-लेखन [[:en:Shridhar Raghavan|श्रीधर राघवन]] ने किया है। यह फिल्म [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक [[प्राचीन भारत|प्राचीन भारतीय]] [[हिन्दू धर्मग्रन्थ|ग्रंथ]] ''[[रामायण]]'' पर आधारित है। यह फिल्म एक नियोजित दो-भागीय श्रृंखला की पहली किस्त है।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=वल्लोप्पिलिल|first=सिंध्या|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/yash-kgf-ramayana-prime-focus-nitesh-tiwari-dangal-1235967679/|title='K.G.F.' Star Yash's Monster Mind, Namit Malhotra's Prime Focus Team on 'Dangal' Filmmaker Nitesh Tiwari's Epic 'Ramayana' (EXCLUSIVE)|last=नमन रामचन्द्रन|date=2024-04-11|website=वैराइटी|access-date=2024-11-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.awn.com/news/prime-focus-studios-announces-ramayana-co-production|title=Prime Focus Studios Announces 'Ramayana' Co-Production|date=30 अप्रैल 2024|website=एनिमेशन वर्ल्ड नेटवर्क|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> इसमें <!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->[[रणबीर कपूर]] (राम {{small|के रूप में}}), [[रवि दुबे]] (लक्ष्मण {{small|के रूप में}}), [[साई पल्लवी]] (सीता {{small|के रूप में}}), [[सनी देओल]] (हनुमान {{small|के रूप में}}) और [[यश (अभिनेता)|यश]] (रावण {{small|के रूप में}}) मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं। अन्य कलाकारों में [[अमिताभ बच्चन]], [[अरुण गोविल]], [[लारा दत्ता]], [[विवेक ओबेरॉय]], [[काजल अग्रवाल]], [[रकुल प्रीत सिंह]], [[कुणाल कपूर]], [[शीबा चड्ढा]], [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] और [[शोभना]] शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-officially-announced-release-in-2-parts-2628896-2024-11-06|title=Ranbir, Sai Pallavi and Yash's Ramayana officially announced, to release in 2 parts|date=2024-11-06|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-to-be-backed-by-namit-malhotra/articleshow/108459580.cms|title=Ranbir Kapoor's Ramayana rights acquired by Namit Malhotra|date=2024-03-13|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-18|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollyreview.com/2026/02/ramayana-part-1-2026.html|title=Ramayana: Part 1 (2026)|date=2026-02-05|website=Holly Review|language=en|access-date=2026-02-07}}</ref> यह फिल्म ₹2600-4000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े भारतीय फिल्म बजट पर बनी है। इसका निर्माण [[नमित मल्होत्रा]] ​​के प्राइम फोकस स्टूडियो, यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और [[चार्ल्स रोवन|चार्ल्स रोवन]] के अमेरिकी स्टूडियो [[एटलस एंटरटेनमेंट]] ने किया है, लेकिन इसकी पूरी शूटिंग और संपादन भारत में हुआ है। इसके विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का काम ब्रिटिश-भारतीय स्टूडियो [[डीएनईजी]] ने संभाला है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-most-expensive-indian-film-rs-835-crore-budget-report-9327597/|title=Ranbir Kapoor, Sai Pallavi's Ramayana to be the most expensive Indian film with Rs 835 crore budget: report|date=2024-05-14|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/ramayana-part-1-this-veteran-actor-with-a-net-worth-of-rs-1600-crore-is-likely-to-join-ranbir-kapoor-and-sam-pallavis-historical-drama-thats-been-made-on-a-staggering-budget-of-rs-835-crore|title=Ramayana Part 1: This veteran actor, with a net worth of Rs 1,600 Crore, is likely to join Ranbir Kapoor and Sai Pallavi's historical drama that's been made on a staggering budget of Rs 835 Crore|last=Shetty|first=Karishma|date=2024-11-06|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> यह फिल्म 6 नवंबर 2026 में [[दीपावली]] के अवसर पर भारत में रिलीज़ होने वाली है।<ref name="SIA">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/oscar-winner-hans-zimmer-joins-for-ramayana-with-a-r-rahman-3004241/|title=Oscar winner Hans Zimmer joins for Ramayana with A.R. Rahman|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-04-05|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-18}}</ref> फिल्म का संगीत [[:en:List_of_awards_and_nominations_received_by_Hans_Zimmer|विश्व-प्रसिद्ध]] [[:en:Germans|जर्मन]] संगीतकार, [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] ({{small|जो अपनी पहली भारतीय परियोजना में काम कर रहे हैं}}), और [[ए. आर. रहमान]] ने मिलकर तैयार किया है। == कलाकार == <!-- मुख्य कलाकार - आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> {| class="wikitable" ! कलाकार !! भूमिका !! सन्दर्भ |- | [[रणबीर कपूर]] || [[राम]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-is-best-choice-for-lord-ram-mukesh-chhabra-breaks-silence-on-casting-for-nitesh-tiwari-ramayana-2585545-2024-08-21|title=Ranbir Kapoor is best choice for Lord Ram: Mukesh Chhabra on Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=21 अगस्त 2024|website=इंडिया टुडे|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/htcity/cinema/ramayana-ranbir-kapoor-to-portray-two-avatars-of-lord-vishnu-amitabh-bachchan-roped-in-for-this-role-101725884855689.html|title=Ramayana: Ranbir Kapoor to portray two avatars of Lord Vishnu; Amitabh Bachchan roped in for THIS role|last=महिमा पाण्डेय|date=9 सितम्बर 2024|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=28 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[रवि दुबे]] || [[लक्ष्मण]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-is-the-only-commercially-viable-artist-of-this-generation-ravi-dubey-confirms-hes-playing-lakshman-in-nitesh-tiwaris-ramayana-9707324/|title='Ranbir Kapoor is the only commercially viable artiste of this generation': Ravi Dubey confirms he's playing Lakshman in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-12-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref> |- | [[साई पल्लवी]] || [[सीता]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-ranbir-kapoor-yash-sai-pallavi-films-release-date-out-makers-of-nitesh-tiwaris-epic-confirm-two-parts-9655800/|title=Ramayana: Ranbir Kapoor-Yash-Sai Pallavi film's release date out, makers of Nitesh Tiwari's epic confirm two parts|date=2024-11-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/heres-how-many-crores-south-superstar-yash-will-earn-for-his-role-as-ravana-in-the-ramayana-starring-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-thats-made-on-a-massive-rs-800-crore-budget|title=Here's how many Crores South superstar Yash will earn for his role as Ravana in Ramayana, starring Ranbir Kapoor and Sai Pallavi, that's made on a massive Rs 800 Crore budget|last=Sonavane|first=Gaurav|date=2024-10-23|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> |- | [[सनी देओल]] || [[हनुमान]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/sunny-deol-confirmed-as-hanuman-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-details-about-role-revealed-8756715.html|title=Sunny Deol CONFIRMED As Hanuman In Ranbir Kapoor Starrer Ramayana; Details About Role Revealed|date=27 जनवरी 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/sunny-deol-hanuman-standalone-film-in-nitesh-tiwari-ramayan-trilogy-2613915-2024-10-09|title=Sunny Deol's Hanuman to get standalone film in Ramayan trilogy - Exclusive|date=2024-10-09|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2024-10-09}}</ref> |- | [[यश (अभिनेता)|यश]] || [[रावण|रावण Lankapati]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/yash-confirms-he-is-playing-ravan-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-toxic-set-to-get-new-release-date/article68785635.ece#:~:text=The%20magnum%20opus%20is%20directed%20by%20Nitesh%20Tiwari&text=Kannada%20superstar%20Yash%20has%20confirmed,and%20Sai%20Pallavi%20as%20Sita.|title=Yash confirms he is playing Ravan in Ranbir Kapoor starrer 'Ramayana'; 'Toxic' set to get new release date|date=23 अक्टूबर 2024|website=द हिन्दू|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[अमिताभ बच्चन]] || [[जटायु]] || {{उद्धरण आवश्यक}} |- | [[लारा दत्ता]] || [[कैकेयी]] || <ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/bollywood/arun-govil-as-dashrath-lara-dutta-as-kaikeyi-and-more-spotted-on-ranbir-kapoors-ramayana-sets-exclusive-pics-article-109041503|title=Arun Govil As Dashrath, Lara Dutta As Kaikeyi And More SPOTTED On Ranbir Kapoor's Ramayana Sets - Exclusive PICS|website=Zoom TV|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[अरुण गोविल]] || [[दशरथ]] || <ref name=":1" /> |- | [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] || [[कौशल्या]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/indira-krishnan-showers-praise-on-ramayan-co-star-ranbir-kapoor-i-cant-see-another-actor-playing-ram/articleshow/114736761.cms|title=Indira Krishnan showers praise on 'Ramayan' co-star Ranbir Kapoor: 'I can't see another actor playing Ram'|date=अक्टूबर 29, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[कुणाल कपूर]] || [[इन्द्र|इंद्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kunal-kapoor-to-play-indra-dev-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/112230254.cms|title=Kunal Kapoor to play Indra Dev in Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=अगस्त 2, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 27, 2024}}</ref> |- | [[काजल अग्रवाल]] || [[:en:Mandodari|मंदोदरी]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kajal-aggarwal-cast-as-mandodari-in-yashs-upcoming-ramayana-adaptation/articleshow/121192838.cms|title=Yash's Ravana finds his Mandodari in Kajal Aggarwal|date=2025-05-16|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|language=en}}</ref> |- | [[रकुल प्रीत सिंह]] || [[शूर्पणखा|शूर्पनखा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-rakul-preet-singh-in-talks-to-come-on-board-nitesh-tiwaris-ramayana-to-play-shurpanakha-1277611|title=EXCLUSIVE: Rakul Preet Singh in talks to come on board Nitesh Tiwari's Ramayana; To play Shurpanakha|date=2024-02-10|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[विवेक ओबेरॉय]] || [[शूर्पणखा#विद्युतजिह्वा से विवाह|विद्युत्जिवा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/vivek-oberoi-joins-nitesh-tiwaris-ramayana-take-a-look-at-full-cast-ws-l-9373870.html|title=Vivek Oberoi Joins Nitesh Tiwari’s Ramayana: Take A Look At Full Cast|website=न्यूज़18|access-date=7 जून 2025}}</ref> |- | [[:en:Adinath Kothare|आदिनाथ कोठारे]] || [[भरत (रामायण)|भरत]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/etimes-exclusive-this-actor-comes-on-board-for-nitesh-tiwari-ranbir-kapoors-ramayana-to-play-rams-beloved-brother-bharat/articleshow/108842263.cms|title=ETimes Exclusive! THIS actor comes on board for Nitesh Tiwari-Ranbir Kapoor's Ramayana; to play Ram's beloved brother Bharat|date=2024-03-28|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[शीबा चड्ढा]] || [[मंथरा]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/sheeba-chadha-to-play-the-role-of-manthara-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/108950314.cms|title=Sheeba Chadha to play the role of Manthara in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-01|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-25}}</ref> |- | [[शिशिर शर्मा]] || [[वसिष्ठ]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-co-star-shishir-sharma-calls-the-film-huge-and-larger-than-life-spills-the-beans-on-his-character-vasishtha/articleshow/111384095.cms|title=Ranbir Kapoor's 'Ramayana' co-star Shishir Sharma calls the film 'huge and larger-than-life'; spills the beans on his character Vasishtha|date=जून 30, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[:en:Ajinkya Deo|अजिंक्या देओ]] || [[विश्वामित्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-smiles-in-new-photo-from-ramayana-sets-poses-with-vishwamitra-check-here-8875502.html|title=Ranbir Kapoor Smiles In New Photo From Ramayana Sets, Poses With 'Vishwamitra' {{!}} Check Here|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[:en:Sonia Balani|सोनिया बलानी]] || [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/the-kerala-story-actress-sonia-balani-will-play-urmilas-character-in-nitesh-tiwaris-ramayana-exclusive/articleshow/110181471.cms|title='The Kerala Story' actress Sonia Balani will play Urmila's character in Nitesh Tiwari's Ramayana- Exclusive!|date=2024-05-16|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[मोहित रैना]] || [[शिव]] जी || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/mohit-raina-to-return-as-mahadev-lord-shiva-in-ranbir-kapoors-ramayana-ws-l-9361070.html|title=Mohit Raina To Return As 'Mahadev' Lord Shiva In Ranbir Kapoor's Ramayana?|date=2025-05-31|website= बॉलीवुड न्यूज़|language=en|access-date=2025-05-31}}</ref> |- | कियारा सध || बालिका सीता || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/ramayana-exclusive-pandya-stores-kiara-sadh-to-essay-young-sita-aka-sai-pallavis-role-in-nitesh-tiwaris-directorial-1298369|title=EXCLUSIVE: THIS Pandya Store child actor to play young Sita in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-23|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-28}}</ref> |} {{Multiple image|image1=Nitesh Tiwari at the ‘Khidkiyaan’ movie festival launch (cropped).jpg|image2=Namit Malhotra.jpg|total_width=300|footer=''रामायण'' नमित मल्होत्रा के साथ [[नितेश तिवारी]] की पहली सहयोगात्मक फिल्म है।}} == उत्पादन == === उत्पत्ति === मई 2017 में, निर्माता अल्लू अरविंद, नमित मल्होत्रा और मधु मंतेना ने हिंदू संस्कृत महाकाव्य रामायण को एक लाइव-एक्शन फीचर फिल्म त्रयी के रूप में ढालने के लिए सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पटकथा का विकास लगभग एक साल से चल रहा था। इस परियोजना को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उड़िया, सिंहली और अंग्रेजी भाषाओं में एक बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में देखा गया, और इसे 3डी में शूट करने की योजना बनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ramayana-to-be-made-into-a-movie-of-rs-500-crore-budget/articleshow/58611990.cms|title='Ramayana' to be made into a movie of Rs 500 crore budget|date=2017-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>अल्लू अरविंद ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की कि वह रामायण को "सबसे शानदार तरीके से" बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने इस महाकाव्य को त्रयी में ढालने की जिम्मेदारी को भी स्वीकार किया। नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी प्राइम फोकस ने हॉलीवुड फिल्मों जैसे 'स्टार वार्स', 'ट्रांसफॉर्मर', 'एक्स-मेन: एपोकैलिप्स' और 'द मार्टियन' में विजुअल इफेक्ट्स का योगदान दिया था, उन्होंने इस त्रयी में भारतीय सिनेमा के लिए नए वैश्विक मानक स्थापित करने की क्षमता देखी।फरवरी 2018 में, मधु मंतेना ने बताया कि फिल्म श्रृंखला बनाने की प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध भारतीय कॉमिक बुक लेखक अनंत पई के जीवन और कार्य से मिली, जिन्होंने अमर चित्र कथा कॉमिक्स बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म श्रृंखला नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति को नवीनतम तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से "सभी संभावित ऑडियो विजुअल महिमा" में फिर से बताने का उनका सामूहिक प्रयास है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-500-crore-film-mou-up-govt-5075106/|title=Makers of Rs 500 crore Ramayana film sign MoU with UP government|date=2018-02-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|title=MoUs worth Rs 4.28 lakh-crore signed on first day of UP Investors Summit 2018|date=2018-02-21|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20230330010105/https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|archive-date=30 मार्च 2023|language=en-us|url-status=live}}</ref> पिछली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त रामायण की रूपांतरण टेलीविजन श्रृंखलाओं, विशेष रूप से रामानंद सागर की 'रामायण' (1987-88) के रूप में थे, लेकिन इस बार निर्माता रामायण को बड़े पर्दे के लिए एक सिनेमाई तमाशे के रूप में लाना चाहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/baahubali-2-the-conclusion-ramayana-film-500-crore-976236-2017-05-10|title=Baahubali 2's success makes way for Rs 500-crore Ramayana film|date=2017-05-10|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thequint.com/entertainment/cinema/500-crore-ramayana-film-in-3-languages#read-more|title=Now Gear up for a Rs 500-Crore 3D 'Ramayana' on the Big Screen|last=Hingorani|first=Karishma|date=2017-05-10|website=द क्विंट|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> === विकास === जुलाई 2019 में, नीतेश तिवारी और रवि उद्यावर ने त्रयी के सह-निर्देशन के लिए हाथ मिलाया, जबकि श्रीधर राघवन को पटकथा लिखने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/ramayanas-trilingual-live-action-trilogy-to-be-helmed-by-dangal-director-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-6953121.html|title=Ramayana's trilingual live-action trilogy to be helmed by Dangal director Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar|date=2019-07-08|website=फर्स्टपोस्ट|language=en-us|access-date=2025-02-17}}</ref> नीतेश तिवारी ने 1987-88 की रामायण टेलीविजन श्रृंखला के बाद से विजुअल इफेक्ट्स में हुए महत्वपूर्ण उन्नयन को इस परियोजना को हाथ में लेने का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि "हमारी सबसे पुरानी, या शुरुआती यादें (महाकाव्य की), अभी भी 30 साल पुरानी हैं। हमने वास्तव में रामायण को उस रूप में नहीं देखा है जिस रूप में इसे बताया जाना चाहिए।" तकनीकी संभावनाओं के अलावा, उन्हें टीम में शामिल होने के लिए कहानी ने भी प्रेरित किया, जिसमें उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में "शानदार विश्वास" था, और यह तथ्य कि उनके निर्माता इसे "बहुत दिलचस्प तरीके से" निष्पादित करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। उद्यावर ने भी बताया कि इस परियोजना में शामिल होने का उनका निर्णय अपने बच्चों के प्रति उसी जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था। उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बताया कि वह और उनकी टीम क्या कर रहे हैं, तो उनका बेटा यह सोचकर "पूरा दिन कूदता रहा" कि रावण और कुंभकर्ण कैसे दिखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच तब था जब उनके बेटे ने उनसे कहा कि "हनुमान सुपरमैन से ज्यादा कूल हैं।" तिवारी ने कहा कि महाकाव्य का आकर्षण उसके पात्रों के समूह में निहित है, विशेष रूप से राम के चरित्र में, "एक आदर्श नेता, पति, पिता और पुत्र"। वहीं, उद्यावर को लगा कि महाकाव्य का जादू उसके आकार बदलने वाले राक्षसों में है, जो उनके विचार में एक छोटे बच्चे को भी पसंद आएगा। तिवारी ने पुष्टि की कि फिल्मों में जो कुछ भी कहा और दिखाया जाएगा, उसमें प्रामाणिकता की मुहर होगी। उन्होंने कहा कि राम और रावण से परे, हर चरित्र—चाहे वह सीता, लक्ष्मण, या हनुमान हो—का कुछ न कुछ सार्थक संदेश है, जिससे रामायण को त्रयी में ढालना आवश्यक हो जाता है। निर्माण टीम ने फिल्मों के सेटिंग, वेशभूषा, कलाकारों और एक्शन के लिए संदर्भ के रूप में पूरे भारत के कलाकारों से जटिल चित्र बनवाए। इस परियोजना का उद्देश्य हिंदी, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और पंजाबी सिनेमा के अभिनेताओं को शामिल करना था, जो एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था ताकि अखिल भारतीय और वैश्विक दर्शकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-reviving-ramayana-with-a-live-action-multilingual-trilogy/articleshow/70119460.cms|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar reviving Ramayana with a live-action, multilingual trilogy|author=Roshmila Bhattacharya|date=जुलाई 8, 2019|newspaper=Mumbai Mirror|access-date=2025-02-17|language=en}}</ref> फिल्म श्रृंखला को शुरू में 500 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट पर बनाने की बात थी। निर्माण टीम ने 2020 तक फिल्मांकन शुरू करने की योजना बनाई थी, जिसमें पहली किस्त 2021 में रिलीज होने वाली थी। फिल्म निर्माताओं का इरादा कहानी की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्रयी के प्रत्येक भाग के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर रखने का था।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-live-action-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-direct-5820177/|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to helm multilingual live-action version of Ramayana|date=2019-07-08|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-bring-ramayana-to-life-at-a-rs-500-crore-budget/articleshow/70126241.cms?from=mdr|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to bring 'Ramayana' to life at a Rs 500 crore budget|date=2019-07-08|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-02-17|issn=0013-0389}}</ref> === पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन) === ==== लेखन और दृश्य विकास ==== नवंबर 2019 में, तिवारी ने कहा कि राघवन पिछले तीन सालों से पटकथा लिख रहे थे, जिसमें कई विद्वानों और पंडितों का मार्गदर्शन था, जिन्हें शास्त्र का व्यापक ज्ञान था, ताकि महाकाव्य को समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|title=I'm happy not following the formula of making a hit film: Nitesh Tiwari|date=2019-11-20|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20240725202209/https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|archive-date=25 जुलाई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अप्रैल 2020 में, उन्होंने कहा कि वे कहानी के संवेदनशील पहलुओं की सावधानीपूर्वक पहचान कर रहे थे, जिन्हें अछूता रहना चाहिए, ताकि उनसे जुड़ी संभावित सार्वजनिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, जबकि उन क्षेत्रों का निर्धारण भी किया जा रहा था जहां वे फिल्म के समग्र देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सीमित सिनेमाई स्वतंत्रता ले सकते थे।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/massive-responsibility-to-do-a-project-like-ramayana-nitesh-tiwari-6066033/|title=Massive responsibility to do a project like Ramayana: Nitesh Tiwari|date=2019-10-12|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>तिवारी ने समझाया कि वह और उनकी टीम कहानी को इस तरह से प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि उनके बच्चों जैसे युवा दर्शकों को, जो "एवेंजर्स के प्रशंसक" हैं, यह रोमांचक लगे, जबकि साथ ही उनकी सास जैसे पुराने दर्शकों का विश्वास भी बनाए रखा जा सके, ताकि उन्हें यह "इतना आकर्षक लगे कि वे कहें कि मैंने रामायण को इस रूप में नहीं देखा है"।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/challenging-to-make-ramayana-appealing-for-all-generations-nitesh-tiwari-6300240/|title=Challenging to make Ramayana appealing for all generations: Nitesh Tiwari|date=2020-03-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> उन्होंने फिल्म को तकनीकी रूप से भारी तैयारी वाली बताया, क्योंकि महाकाव्य के जादुई गुण, जैसे उसमें वर्णित बात करने वाले जानवर या मंत्रमुग्ध वन, उन्हें स्क्रीन पर एक ऐसी दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत करने का अवसर देते थे,<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-on-ramayana-making-it-exciting-for-both-children-and-old-people-is-challenging-1652718-2020-03-05|title=Nitesh Tiwari on Ramayana: Making it exciting for both children and old people is challenging|date=2020-03-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जो उनके विचार में पहले कभी नहीं देखी गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/amid-the-lockdown-nitesh-tiwari-works-on-ramayanas-script-over-group-calls/articleshow/74919720.cms|title=Amid the lockdown, Nitesh Tiwari works on Ramayana's script over group calls|date=2020-03-31|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref> जून 2021 में, मंतेना ने बताया कि वह और उनकी टीम रामायण को एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि "एक उद्देश्य, दुनिया को उसकी पूरी महिमा में रामायण बताने का उद्देश्य" के रूप में देख रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वह त्रयी को "दुनिया में किसी भी अन्य चीज़ की तरह अच्छी तरह से" बनाना चाहते थे, और बताया कि उनकी टीम "हर चीज़ के छोटे से छोटे विवरण" पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि वे वही प्रक्रिया अपना रहे थे जो जेम्स कैमरून ने अवतार के लिए इस्तेमाल की थी, और दुनिया भर के 200 से अधिक कलाकार दो साल से फिल्म पर काम कर रहे थे, जिनमें कुछ अकादमी पुरस्कार विजेता भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/bollywood/madhu-mantena-opens-up-on-ramayana-and-says-expect-the-biggest-cast-in-history-of-indian-cinema-693416|title=Madhu Mantena Opens Up On Ramayana And Says, 'Expect The Biggest Cast In History Of Indian Cinema'|last=Hymavati|first=Ravali|date=2021-06-30|website=द हंस इंडिया|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जुलाई में, मंतेना ने त्रयी के लिए अपनी दृष्टि पर विस्तार से बताया, इसे वाल्मीकि के दृष्टिकोण से रामायण का एक रेखीय पुनर्कथन बताया, जिसमें महाकाव्य की उप-कहानियां भी शामिल थीं, जबकि "राक्षसों, असुरों, गरुड़ आदि जैसे शानदार प्राणियों से भरी एक गहन और सुंदर दुनिया" का वादा किया। सितंबर 2021 में, मंतेना ने कहा कि वे राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों के कार्यों पर विचार कर रहे थे, जिन्होंने उनके अनुसार महाकाव्य को "अपने सुंदर तरीकों से" व्याख्या किया था। उन्होंने कहा कि वे वाल्मीकि की रामायण और उसके वर्णनों का पालन कर रहे थे ताकि एक सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/ramayana-trilogy-for-a-global-audience-but-rooted-in-india-says-producer-madhu-mantena-716208|title='Ramayana' trilogy for a global audience but rooted in India, says producer Madhu Mantena|last1=भसीन|first1=श्रिया|last2=|first2=|date=2021-07-02|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-03-15}}</ref> === कलाकार चयन === {{Multiple image|image1=Ranbir at Besharam launch.jpg|image2=Ravi Dubey.jpg|image3=Sai Pallavi at Mca-pre-release-event.jpg|image4=Sunny Deol at Dev's Anand's autobiography release.jpg|image5=Yash at the ‘KGF’ Press Meet In Chennai (cropped).jpg|total_width=500|direction=horizontal|align=right|footer=[[रणबीर कपूर]], [[रवि दुबे]], [[साई पल्लवी]], [[सनी देओल]] और [[यश (अभिनेता)|यश]], क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में}} जुलाई 2021 में, मधु ने कहा कि वह उस साल दिवाली तक कलाकारों की घोषणा करने वाले थे, जिसमें उन्होंने "भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कास्ट" का वादा किया, जिसमें प्रदर्शन के मामले में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शामिल होंगे। उन्होंने राम, हनुमान, रावण, सीता और लक्ष्मण के पात्रों को "जीवन से बड़ा" बताते हुए जोर दिया कि वह देश भर के कलाकारों को कास्ट करेंगे। इस निर्णय का कारण बताते हुए, उन्होंने विस्तार से कहा कि "यह (रामायण) उत्तर और दक्षिण के बारे में नहीं है, यह देश को एकजुट करने के बारे में है। हम इसे भारत के रूप में कर रहे हैं।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-madhu-mantena-ramayana-nitesh-tiwari-expect-biggest-cast-history-indian-cinema-795001|title=EXCLUSIVE: Madhu Mantena on Ramayana with Nitesh Tiwari: Expect the biggest cast in history of Indian cinema|date=2021-06-30|website=पिंकविला|language=en|access-date=2025-04-27}}</ref> रणबीर कपूर, रवि दुबे, साई पल्लवी, सनी देओल और यश को क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में चुना गया है। === चलचित्रण === फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी अप्रैल 2024 में शुरू हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-ramayana-shoot-begins-first-video-of-grand-ayodhya-set-goes-viral-8840316.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Shoot Begins, FIRST Video of Grand Ayodhya Set Goes Viral|date=5 अप्रैल 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> 5 अप्रैल को, फिल्म के सेट से तस्वीरें लीक हो गईं, जिसमें अरुण गोविल, लारा दत्ता और शीबा चड्ढा अपनी-अपनी भूमिकाओं में और नीतेश तिवारी फिल्म का निर्देशन करते हुए दिखाई दिए।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-fans-angry-lara-dutta-arun-govil-photos-from-ramayana-sets-leaked-8840620.html|title=Ranbir Kapoor Fans ANGRY As Lara Dutta, Arun Govil's Photos From Ramayana Sets LEAKED|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-lara-dutta-and-arjun-govil-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5379317|title=Crazy Viral Pics Of Lara Dutta And Arun Govil From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> इसके बाद, निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर एक सख्त नो-फोन पॉलिसी लागू की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-no-phone-policy-ramayana-set-ranbir-kapoor-look-ram-2523698-2024-04-05|title=Exclusive: 'Ramayana' director Nitesh Tiwari imposes no-phone policy on set|date=2024-04-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> 27 अप्रैल को, फिल्म के सेट से फिर से तस्वीरें लीक हो गईं, इस बार रणबीर कपूर और साई पल्लवी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई दिए, जिससे सोशल मीडिया पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि क्या तस्वीरें खुद निर्माताओं द्वारा प्रचार उत्पन्न करने और वेशभूषा पर सार्वजनिक राय जानने के लिए लीक की जा रही थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5535127|title=Crazy Viral Pics Of Ranbir Kapoor And Sai Pallavi From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavis-looks-get-leaked-fans-gush-about-regal-appearance/articleshow/109644786.cms?from=mdr&from=mdr|title='Ramayana': Ranbir Kapoor- Sai Pallavi's looks get leaked, fans gush about regal appearance|date=2024-04-27|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-03-16|issn=0013-0389}}</ref> मई में, फिल्म का कार्य शीर्षक "गॉड पावर" बताया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|title=Ramayana's working title revealed, Ranbir to also shoot for 'Love And War'|last=Singh Rawat|first=Sudeep|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241109080145/https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|archive-date=9 नवंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana's working title revealed; makers tightens surveillance on set to avoid leaked pics|date=2024-05-17|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526194229/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|archive-date=26 मई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अगस्त में, एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल हुआ जिसमें प्रशंसित अमेरिकी आंदोलन कोच टेरी नोटरी थे, जिन्होंने पुष्टि की कि वह फिल्म श्रृंखला में एक्शन निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। फिल्मांकन नवंबर 2024 में पूरा होने की घोषणा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/avatar-avengers-endgame-veteran-terry-notary-working-on-ranbir-kapoors-ramayana-as-action-director-9528803/|title=Avatar, Avengers Endgame veteran Terry Notary working on Ranbir Kapoor's Ramayana as action director|date=2024-08-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ramayana-avengers-endgame-stunt-coordinator-terry-notary-confirms-working-on-the-ranbir-kapoor-starrer-watch-video/articleshow/112740067.cms|title='Ramayana': Avengers Endgame stunt coordinator Terry Notary CONFIRMS working on the Ranbir Kapoor starrer - WATCH video|date=2024-08-23|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-03-16|issn=0971-8257}}</ref> पार्ट 2 का फिल्मांकन 19 जनवरी 2025 को शुरू हुआ। मई 2025 में, यह बताया गया कि प्रशंसित हॉलीवुड स्टंट निर्देशक गाय नॉरिस, जिन्होंने पहले 'फ्यूरियोसा: ए मैड मैक्स सागा', 'मैड मैक्स: फ्यूरी रोड' और 'द सुसाइड स्क्वाड' जैसी फिल्मों पर काम किया था, को फिल्म के लिए एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए जोड़ा गया था और वह यश के साथ मिलकर काम कर रहे थे।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/yash-mad-max-guy-norris-ramayana-1236411803/|title=Yash Teams With ‘Mad Max’ Stunt Maestro Guy Norris for Epic ‘Ramayana’ Action Sequences (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-05-29|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-06-19}}</ref> जून 2025 में, यह बताया गया कि अकादमी पुरस्कार विजेता हॉलीवुड निर्माता चार्ल्स रोवेन, जो एटलस एंटरटेनमेंट के संस्थापक भी हैं, मल्होत्रा और यश के साथ फिल्म में निर्माता के रूप में भी शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=Valloppillil|first=Sindhya|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref> === पश्च-निर्माण (पोस्ट-प्रोडक्शन) === बताया गया है कि फिल्म 600 दिनों तक पोस्ट-प्रोडक्शन में रहेगी, जिससे यह इतनी व्यापक पोस्ट-प्रोडक्शन समय-सीमा की आवश्यकता वाली कुछ वैश्विक फिल्मों में से एक बन जाएगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.siasat.com/sai-pallavi-ranbirs-ramayana-release-date-budget-more-3073419/|title=Sai Pallavi, Ranbir's Ramayana: Release date, budget & more|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-08-04|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-14}}</ref> == संगीत == फिल्म के [[:en:Film score|पृष्ठभूमि]] [[:en:Soundtrack|साउंडट्रैक]] को [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] द्वारा [[:en:Musical composition|संगीतबद्ध]] किया जा रहा है। कई [[:en:Hans Zimmer discography|प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों]] का संगीत तैयार करने के बाद, संगीतकार ज़िमर इस फिल्म से भारतीय सिनेमा में मूल स्कोर संगीतकार के रूप में पदार्पण कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-hans-zimmer-india-debut-ar-rahman-report-sai-pallavi-yash-101712296514599.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana to mark Hans Zimmer's debut in Bollywood with AR Rahman: Report|date=5 अप्रैल 2024|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> फिल्म के [[:en:Songs|गानो]] की धुने [[ए. आर. रहमान]] द्वारा संगीतबद्ध की जा रही है और गानो के बोल [[कुमार विश्वास]] ने लिखे हैं। == विपणन (मार्केटिंग) == 6 नवंबर 2024 को, मल्होत्रा ने आधिकारिक तौर पर 'रामायण' की घोषणा एक पोस्टर के माध्यम से की, साथ ही दोनों फिल्मों की रिलीज की तारीखें भी बताईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Part 1 and 2 officially announced: See first poster, check release date details|date=2024-11-06|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250312170029/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|archive-date=12 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/ranbir-kapoor-yash-and-sai-pallavis-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-first-poster-out/article68835920.ece|title=Ranbir Kapoor, Yash and Sai Pallavi's 'Ramayana Part 1 and 2' officially announced; first poster out|last=|first=|date=2024-11-06|work=द हिन्दू|access-date=2025-03-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> मल्होत्रा ने बार-बार फिल्म को एक वैश्विक फिल्म के रूप में प्रचारित किया है, जिसमें एक भारतीय विषय को दुनिया के लिए प्रस्तुत किया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ramayanas-producer-namit-malhotra-says-its-massive-responsibility-to-present-the-film-at-global-stage-aa-9245773.html|title=Ramayana's Producer Namit Malhotra Says Its 'Massive Responsibility' To Present The Film At Global Stage|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|title=Ramayana producer Namit Malhotra wants Ranbir Kapoor film to be celebrated globally like Oppenheimer, Forrest Gump|date=2025-03-01|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250302085950/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|archive-date=2 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref> उन्होंने कई मौकों पर फिल्म के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने इसे 'ड्यून्स' या 'अवतार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों के "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े होने की अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|title='I tell filmmakers that if you can dream it (storytelling), we can do it'|last=Kohli-Khandeka|first=Vanita|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241202132258/https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|archive-date=2 दिसंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref> उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह बजट या तकनीकी विशेषज्ञता में सीमाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाएंगे—जो कारक ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर भारतीय प्रस्तुतियों को दृश्य रूप से ऊपर उठने से रोकते रहे हैं—जबकि आत्मविश्वास से कुछ "पहले कभी न देखे गए" दृश्यों का वादा किया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/interviews/namit-malhotra-the-ramayana-belongs-to-the-worldno-one-person-or-entity-owns-it|title=Namit Malhotra: 'The Ramayana' Belongs to The World—No One Person or Entity Owns It|website=द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-first-glimpse-ranbir-kapoor-yash-explode-on-screen-as-lord-ram-ravana-hollywood-level-vfx-wows-fans-101751526412324.html|title=Ramayana first glimpse: Ranbir Kapoor, Yash explode on screen as Lord Ram, Ravana; 'Hollywood-level' VFX wows fans|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=3 जुलाई 2025}}</ref> == प्रदर्शन == फिल्म को 2026 में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavi-s-film-gets-release-date-bonus-new-poster-6955155|title=Ranbir Kapoor And Sai Pallavi's Ramayana Part 1 and 2 Get Official Release Dates|date=6 नवम्बर 2024|website=एनडीटीवी|access-date=30 अक्टूबर 2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]] [[श्रेणी:हिंदी भाषा की फिल्में]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा फिल्म]] [[श्रेणी:रामायण]] [[श्रेणी:राम]] [[श्रेणी:हनुमान]] [[श्रेणी:रावण]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन एडवेंचर फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन ड्रामा फ़िल्में]] [[श्रेणी:आगामी भारतीय फिल्में]] [[श्रेणी:दीपावली]] [[श्रेणी:परशुराम]] [[श्रेणी:इन्द्र]] [[श्रेणी:शिव]] [[श्रेणी:३डी फ़िल्म]] p3zq2bwlnepd0xbjf8vjywoxjkfa3zb 6536755 6536754 2026-04-06T05:08:45Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/~2026-21207-32|~2026-21207-32]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21207-32|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: अतिरिक्त 6536755 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म | name = रामायणम्<br>{{small|Ramayana}} | image = Ramayana (2026 film).jpeg | caption = आधिकारिक टीज़र पोस्टर | director = [[नितेश तिवारी]] | writer = [[:en:Shridhar Raghavan & Kumar Vishwas|श्रीधर राघवन तथा कुमार विश्वास]]<!--यहाँ 'लेखक' शब्द का तात्पर्य फ़िल्म के कहानी-लेखक से है, न कि उस मूल स्रोत सामग्री के वास्तविक लेखक से जिस पर फ़िल्म की कहानी आधारित है।--> | based_on = {{Based on|[[रामायण]]|ऋषि [[वाल्मीकि]]}} | producer = {{plainlist| * [[नमित मल्होत्रा]] <!--यहां केवल निर्माताओं के नाम होने चाहिए, सह-निर्माताओं के नाम नहीं।--> }} | starring = {{plainlist|<!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> * [[रणबीर कपूर]] * [[रवि दुबे]] * [[साई पल्लवी]] * [[सनी देओल]] * [[यश]] * [[अरुण गोविल]] }} | narrator = [[अमिताभ बच्चन]]{{उद्धरण आवश्यक}} | cinematography = {{plainlist| * पंकज कुमार * महेश लिमये }} | editing = | music = '''पृष्ठभूमि''':<br />[[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]]<br />'''गीत''':<br />[[ए. आर. रहमान]] | studio = {{plainlist| * प्राइम फोकस स्टूडियोज़ * मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स * [[डीएनईजी]] }} | distributor = | released = {{film date|2026|11|6|df=y}} | country = भारत | language = [[हिंदी]]<br />[[:en:English language|अंग्रेज़ी]] | budget = ₹2600 -₹4000{{small|करोड़}} (US$280-$420 {{small|मिलियन}}) दोनो फिल्म <ref>{{cite web |title=रणबीर कपूर–यश की 'रामायण' बनी भारत की सबसे महंगी फ़िल्म – बजट ₹1600 करोड़ |publisher=News18 |date=15 जुलाई 2025 |url=https://www.news18.com/movies/bollywood/ranbir-kapoor-yashs-ramayana-becomes-indias-costliest-film-at-rs-4000-crore-ws-l-9440783.html |access-date=15 जुलाई 2025}}</ref> }}'''''रामायण''''' एक आगामी भारतीय महाकाव्य फिल्म है, जिसके निर्माता नमित मलहोत्रा हैं और जिसका निर्देशन [[नितेश तिवारी]] ने किया है और जिसका फिल्म-लेखन [[:en:Shridhar Raghavan|श्रीधर राघवन]] ने किया है। यह फिल्म [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]] के सबसे महत्वपूर्ण महाकाव्यों में से एक [[प्राचीन भारत|प्राचीन भारतीय]] [[हिन्दू धर्मग्रन्थ|ग्रंथ]] ''[[रामायण]]'' पर आधारित है। यह फिल्म एक नियोजित दो-भागीय श्रृंखला की पहली किस्त है।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=वल्लोप्पिलिल|first=सिंध्या|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/yash-kgf-ramayana-prime-focus-nitesh-tiwari-dangal-1235967679/|title='K.G.F.' Star Yash's Monster Mind, Namit Malhotra's Prime Focus Team on 'Dangal' Filmmaker Nitesh Tiwari's Epic 'Ramayana' (EXCLUSIVE)|last=नमन रामचन्द्रन|date=2024-04-11|website=वैराइटी|access-date=2024-11-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.awn.com/news/prime-focus-studios-announces-ramayana-co-production|title=Prime Focus Studios Announces 'Ramayana' Co-Production|date=30 अप्रैल 2024|website=एनिमेशन वर्ल्ड नेटवर्क|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> इसमें <!-- आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित -->[[रणबीर कपूर]] (राम {{small|के रूप में}}), [[रवि दुबे]] (लक्ष्मण {{small|के रूप में}}), [[साई पल्लवी]] (सीता {{small|के रूप में}}), [[सनी देओल]] (हनुमान {{small|के रूप में}}) और [[यश (अभिनेता)|यश]] (रावण {{small|के रूप में}}) मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं। अन्य कलाकारों में [[अमिताभ बच्चन]], [[अरुण गोविल]], [[लारा दत्ता]], [[विवेक ओबेरॉय]], [[काजल अग्रवाल]], [[रकुल प्रीत सिंह]], [[कुणाल कपूर]], [[शीबा चड्ढा]], [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] और [[शोभना]] शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-officially-announced-release-in-2-parts-2628896-2024-11-06|title=Ranbir, Sai Pallavi and Yash's Ramayana officially announced, to release in 2 parts|date=2024-11-06|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-to-be-backed-by-namit-malhotra/articleshow/108459580.cms|title=Ranbir Kapoor's Ramayana rights acquired by Namit Malhotra|date=2024-03-13|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-18|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollyreview.com/2026/02/ramayana-part-1-2026.html|title=Ramayana: Part 1 (2026)|date=2026-02-05|website=Holly Review|language=en|access-date=2026-02-07}}</ref> यह फिल्म ₹2600-4000 करोड़ के अब तक के सबसे बड़े भारतीय फिल्म बजट पर बनी है। इसका निर्माण [[नमित मल्होत्रा]] ​​के प्राइम फोकस स्टूडियो, यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और [[चार्ल्स रोवन|चार्ल्स रोवन]] के अमेरिकी स्टूडियो [[एटलस एंटरटेनमेंट]] ने किया है, लेकिन इसकी पूरी शूटिंग और संपादन भारत में हुआ है। इसके विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) का काम ब्रिटिश-भारतीय स्टूडियो [[डीएनईजी]] ने संभाला है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-sai-pallavi-ramayana-most-expensive-indian-film-rs-835-crore-budget-report-9327597/|title=Ranbir Kapoor, Sai Pallavi's Ramayana to be the most expensive Indian film with Rs 835 crore budget: report|date=2024-05-14|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/ramayana-part-1-this-veteran-actor-with-a-net-worth-of-rs-1600-crore-is-likely-to-join-ranbir-kapoor-and-sam-pallavis-historical-drama-thats-been-made-on-a-staggering-budget-of-rs-835-crore|title=Ramayana Part 1: This veteran actor, with a net worth of Rs 1,600 Crore, is likely to join Ranbir Kapoor and Sai Pallavi's historical drama that's been made on a staggering budget of Rs 835 Crore|last=Shetty|first=Karishma|date=2024-11-06|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> यह फिल्म 6 नवंबर 2026 में [[दीपावली]] के अवसर पर भारत में रिलीज़ होने वाली है।<ref name="SIA">{{Cite web|url=https://www.siasat.com/oscar-winner-hans-zimmer-joins-for-ramayana-with-a-r-rahman-3004241/|title=Oscar winner Hans Zimmer joins for Ramayana with A.R. Rahman|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-04-05|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-18}}</ref> फिल्म का संगीत [[:en:List_of_awards_and_nominations_received_by_Hans_Zimmer|विश्व-प्रसिद्ध]] [[:en:Germans|जर्मन]] संगीतकार, [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] ({{small|जो अपनी पहली भारतीय परियोजना में काम कर रहे हैं}}), और [[ए. आर. रहमान]] ने मिलकर तैयार किया है। == कलाकार == <!-- मुख्य कलाकार - आधिकारिक टीज़र पोस्टर पर उल्लिखित क्रेडिट क्रम के अनुसार व्यवस्थित --> {| class="wikitable" ! कलाकार !! भूमिका !! सन्दर्भ |- | [[रणबीर कपूर]] || [[राम]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/ranbir-kapoor-is-best-choice-for-lord-ram-mukesh-chhabra-breaks-silence-on-casting-for-nitesh-tiwari-ramayana-2585545-2024-08-21|title=Ranbir Kapoor is best choice for Lord Ram: Mukesh Chhabra on Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=21 अगस्त 2024|website=इंडिया टुडे|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/htcity/cinema/ramayana-ranbir-kapoor-to-portray-two-avatars-of-lord-vishnu-amitabh-bachchan-roped-in-for-this-role-101725884855689.html|title=Ramayana: Ranbir Kapoor to portray two avatars of Lord Vishnu; Amitabh Bachchan roped in for THIS role|last=महिमा पाण्डेय|date=9 सितम्बर 2024|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=28 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[रवि दुबे]] || [[लक्ष्मण]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-is-the-only-commercially-viable-artist-of-this-generation-ravi-dubey-confirms-hes-playing-lakshman-in-nitesh-tiwaris-ramayana-9707324/|title='Ranbir Kapoor is the only commercially viable artiste of this generation': Ravi Dubey confirms he's playing Lakshman in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-12-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref> |- | [[साई पल्लवी]] || [[सीता]] || <ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-ranbir-kapoor-yash-sai-pallavi-films-release-date-out-makers-of-nitesh-tiwaris-epic-confirm-two-parts-9655800/|title=Ramayana: Ranbir Kapoor-Yash-Sai Pallavi film's release date out, makers of Nitesh Tiwari's epic confirm two parts|date=2024-11-06|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.gqindia.com/content/heres-how-many-crores-south-superstar-yash-will-earn-for-his-role-as-ravana-in-the-ramayana-starring-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-thats-made-on-a-massive-rs-800-crore-budget|title=Here's how many Crores South superstar Yash will earn for his role as Ravana in Ramayana, starring Ranbir Kapoor and Sai Pallavi, that's made on a massive Rs 800 Crore budget|last=Sonavane|first=Gaurav|date=2024-10-23|website=GQ India|language=en-IN|access-date=2025-03-14}}</ref> |- | [[सनी देओल]] || [[हनुमान]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/sunny-deol-confirmed-as-hanuman-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-details-about-role-revealed-8756715.html|title=Sunny Deol CONFIRMED As Hanuman In Ranbir Kapoor Starrer Ramayana; Details About Role Revealed|date=27 जनवरी 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/sunny-deol-hanuman-standalone-film-in-nitesh-tiwari-ramayan-trilogy-2613915-2024-10-09|title=Sunny Deol's Hanuman to get standalone film in Ramayan trilogy - Exclusive|date=2024-10-09|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2024-10-09}}</ref> |- | [[यश (अभिनेता)|यश]] || [[रावण|रावण Lankapati]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/yash-confirms-he-is-playing-ravan-in-ranbir-kapoor-starrer-ramayana-toxic-set-to-get-new-release-date/article68785635.ece#:~:text=The%20magnum%20opus%20is%20directed%20by%20Nitesh%20Tiwari&text=Kannada%20superstar%20Yash%20has%20confirmed,and%20Sai%20Pallavi%20as%20Sita.|title=Yash confirms he is playing Ravan in Ranbir Kapoor starrer 'Ramayana'; 'Toxic' set to get new release date|date=23 अक्टूबर 2024|website=द हिन्दू|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> |- | [[अमिताभ बच्चन]] || [[जटायु]] || {{उद्धरण आवश्यक}} |- | [[लारा दत्ता]] || [[कैकेयी]] || <ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.zoomtventertainment.com/bollywood/arun-govil-as-dashrath-lara-dutta-as-kaikeyi-and-more-spotted-on-ranbir-kapoors-ramayana-sets-exclusive-pics-article-109041503|title=Arun Govil As Dashrath, Lara Dutta As Kaikeyi And More SPOTTED On Ranbir Kapoor's Ramayana Sets - Exclusive PICS|website=Zoom TV|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[अरुण गोविल]] || [[दशरथ]] || <ref name=":1" /> |- | [[:en:Indira Krishnan|इंदिरा कृष्णन]] || [[कौशल्या]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/indira-krishnan-showers-praise-on-ramayan-co-star-ranbir-kapoor-i-cant-see-another-actor-playing-ram/articleshow/114736761.cms|title=Indira Krishnan showers praise on 'Ramayan' co-star Ranbir Kapoor: 'I can't see another actor playing Ram'|date=अक्टूबर 29, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[कुणाल कपूर]] || [[इन्द्र|इंद्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kunal-kapoor-to-play-indra-dev-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/112230254.cms|title=Kunal Kapoor to play Indra Dev in Nitesh Tiwari's 'Ramayana'|date=अगस्त 2, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 27, 2024}}</ref> |- | [[काजल अग्रवाल]] || [[:en:Mandodari|मंदोदरी]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/kajal-aggarwal-cast-as-mandodari-in-yashs-upcoming-ramayana-adaptation/articleshow/121192838.cms|title=Yash's Ravana finds his Mandodari in Kajal Aggarwal|date=2025-05-16|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|language=en}}</ref> |- | [[रकुल प्रीत सिंह]] || [[शूर्पणखा|शूर्पनखा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-rakul-preet-singh-in-talks-to-come-on-board-nitesh-tiwaris-ramayana-to-play-shurpanakha-1277611|title=EXCLUSIVE: Rakul Preet Singh in talks to come on board Nitesh Tiwari's Ramayana; To play Shurpanakha|date=2024-02-10|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[विवेक ओबेरॉय]] || [[शूर्पणखा#विद्युतजिह्वा से विवाह|विद्युत्जिवा]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/vivek-oberoi-joins-nitesh-tiwaris-ramayana-take-a-look-at-full-cast-ws-l-9373870.html|title=Vivek Oberoi Joins Nitesh Tiwari’s Ramayana: Take A Look At Full Cast|website=न्यूज़18|access-date=7 जून 2025}}</ref> |- | [[:en:Adinath Kothare|आदिनाथ कोठारे]] || [[भरत (रामायण)|भरत]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/etimes-exclusive-this-actor-comes-on-board-for-nitesh-tiwari-ranbir-kapoors-ramayana-to-play-rams-beloved-brother-bharat/articleshow/108842263.cms|title=ETimes Exclusive! THIS actor comes on board for Nitesh Tiwari-Ranbir Kapoor's Ramayana; to play Ram's beloved brother Bharat|date=2024-03-28|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[शीबा चड्ढा]] || [[मंथरा]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/sheeba-chadha-to-play-the-role-of-manthara-in-nitesh-tiwaris-ramayana/articleshow/108950314.cms|title=Sheeba Chadha to play the role of Manthara in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-01|website=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-25}}</ref> |- | [[शिशिर शर्मा]] || [[वसिष्ठ]] || <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ranbir-kapoors-ramayana-co-star-shishir-sharma-calls-the-film-huge-and-larger-than-life-spills-the-beans-on-his-character-vasishtha/articleshow/111384095.cms|title=Ranbir Kapoor's 'Ramayana' co-star Shishir Sharma calls the film 'huge and larger-than-life'; spills the beans on his character Vasishtha|date=जून 30, 2024|website=टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=नवम्बर 26, 2024}}</ref> |- | [[:en:Ajinkya Deo|अजिंक्या देओ]] || [[विश्वामित्र]] || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-smiles-in-new-photo-from-ramayana-sets-poses-with-vishwamitra-check-here-8875502.html|title=Ranbir Kapoor Smiles In New Photo From Ramayana Sets, Poses With 'Vishwamitra' {{!}} Check Here|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2024-11-27}}</ref> |- | [[:en:Sonia Balani|सोनिया बलानी]] || [[उर्मिला (रामायण)|उर्मिला]] || <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/the-kerala-story-actress-sonia-balani-will-play-urmilas-character-in-nitesh-tiwaris-ramayana-exclusive/articleshow/110181471.cms|title='The Kerala Story' actress Sonia Balani will play Urmila's character in Nitesh Tiwari's Ramayana- Exclusive!|date=2024-05-16|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2024-11-27|issn=0971-8257}}</ref> |- | [[मोहित रैना]] || [[शिव]] जी || <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/bollywood/mohit-raina-to-return-as-mahadev-lord-shiva-in-ranbir-kapoors-ramayana-ws-l-9361070.html|title=Mohit Raina To Return As 'Mahadev' Lord Shiva In Ranbir Kapoor's Ramayana?|date=2025-05-31|website= बॉलीवुड न्यूज़|language=en|access-date=2025-05-31}}</ref> |- | कियारा सध || बालिका सीता || <ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/ramayana-exclusive-pandya-stores-kiara-sadh-to-essay-young-sita-aka-sai-pallavis-role-in-nitesh-tiwaris-directorial-1298369|title=EXCLUSIVE: THIS Pandya Store child actor to play young Sita in Nitesh Tiwari's Ramayana|date=2024-04-23|website=पिंकविला|language=en|access-date=2024-11-28}}</ref> |} {{Multiple image|image1=Nitesh Tiwari at the ‘Khidkiyaan’ movie festival launch (cropped).jpg|image2=Namit Malhotra.jpg|total_width=300|footer=''रामायण'' नमित मल्होत्रा के साथ [[नितेश तिवारी]] की पहली सहयोगात्मक फिल्म है।}} == उत्पादन == === उत्पत्ति === मई 2017 में, निर्माता अल्लू अरविंद, नमित मल्होत्रा और मधु मंतेना ने हिंदू संस्कृत महाकाव्य रामायण को एक लाइव-एक्शन फीचर फिल्म त्रयी के रूप में ढालने के लिए सहयोग की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पटकथा का विकास लगभग एक साल से चल रहा था। इस परियोजना को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उड़िया, सिंहली और अंग्रेजी भाषाओं में एक बहुभाषी प्रस्तुति के रूप में देखा गया, और इसे 3डी में शूट करने की योजना बनाई गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/telugu/movies/news/ramayana-to-be-made-into-a-movie-of-rs-500-crore-budget/articleshow/58611990.cms|title='Ramayana' to be made into a movie of Rs 500 crore budget|date=2017-05-10|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref>अल्लू अरविंद ने अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की कि वह रामायण को "सबसे शानदार तरीके से" बड़े पर्दे पर लाना चाहते हैं, जबकि उन्होंने इस महाकाव्य को त्रयी में ढालने की जिम्मेदारी को भी स्वीकार किया। नमित मल्होत्रा, जिनकी कंपनी प्राइम फोकस ने हॉलीवुड फिल्मों जैसे 'स्टार वार्स', 'ट्रांसफॉर्मर', 'एक्स-मेन: एपोकैलिप्स' और 'द मार्टियन' में विजुअल इफेक्ट्स का योगदान दिया था, उन्होंने इस त्रयी में भारतीय सिनेमा के लिए नए वैश्विक मानक स्थापित करने की क्षमता देखी।फरवरी 2018 में, मधु मंतेना ने बताया कि फिल्म श्रृंखला बनाने की प्रेरणा उन्हें प्रसिद्ध भारतीय कॉमिक बुक लेखक अनंत पई के जीवन और कार्य से मिली, जिन्होंने अमर चित्र कथा कॉमिक्स बनाई थी। उन्होंने कहा कि यह फिल्म श्रृंखला नई पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति को नवीनतम तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की मदद से "सभी संभावित ऑडियो विजुअल महिमा" में फिर से बताने का उनका सामूहिक प्रयास है।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-500-crore-film-mou-up-govt-5075106/|title=Makers of Rs 500 crore Ramayana film sign MoU with UP government|date=2018-02-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|title=MoUs worth Rs 4.28 lakh-crore signed on first day of UP Investors Summit 2018|date=2018-02-21|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20230330010105/https://www.hindustantimes.com/lucknow/up-investors-summit-in-inaugural-session-industry-leaders-pledge-over-rs-88-000-cr-investment/story-LQE3NDTWVnFRyI2PRlmIgK.html|archive-date=30 मार्च 2023|language=en-us|url-status=live}}</ref> पिछली व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त रामायण की रूपांतरण टेलीविजन श्रृंखलाओं, विशेष रूप से रामानंद सागर की 'रामायण' (1987-88) के रूप में थे, लेकिन इस बार निर्माता रामायण को बड़े पर्दे के लिए एक सिनेमाई तमाशे के रूप में लाना चाहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/baahubali-2-the-conclusion-ramayana-film-500-crore-976236-2017-05-10|title=Baahubali 2's success makes way for Rs 500-crore Ramayana film|date=2017-05-10|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thequint.com/entertainment/cinema/500-crore-ramayana-film-in-3-languages#read-more|title=Now Gear up for a Rs 500-Crore 3D 'Ramayana' on the Big Screen|last=Hingorani|first=Karishma|date=2017-05-10|website=द क्विंट|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> === विकास === जुलाई 2019 में, नीतेश तिवारी और रवि उद्यावर ने त्रयी के सह-निर्देशन के लिए हाथ मिलाया, जबकि श्रीधर राघवन को पटकथा लिखने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/ramayanas-trilingual-live-action-trilogy-to-be-helmed-by-dangal-director-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-6953121.html|title=Ramayana's trilingual live-action trilogy to be helmed by Dangal director Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar|date=2019-07-08|website=फर्स्टपोस्ट|language=en-us|access-date=2025-02-17}}</ref> नीतेश तिवारी ने 1987-88 की रामायण टेलीविजन श्रृंखला के बाद से विजुअल इफेक्ट्स में हुए महत्वपूर्ण उन्नयन को इस परियोजना को हाथ में लेने का एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि "हमारी सबसे पुरानी, या शुरुआती यादें (महाकाव्य की), अभी भी 30 साल पुरानी हैं। हमने वास्तव में रामायण को उस रूप में नहीं देखा है जिस रूप में इसे बताया जाना चाहिए।" तकनीकी संभावनाओं के अलावा, उन्हें टीम में शामिल होने के लिए कहानी ने भी प्रेरित किया, जिसमें उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में "शानदार विश्वास" था, और यह तथ्य कि उनके निर्माता इसे "बहुत दिलचस्प तरीके से" निष्पादित करने के लिए पूरी तरह से तैयार थे। उद्यावर ने भी बताया कि इस परियोजना में शामिल होने का उनका निर्णय अपने बच्चों के प्रति उसी जिम्मेदारी की भावना से प्रेरित था। उन्होंने याद किया कि जब उन्होंने अपने बेटे को बताया कि वह और उनकी टीम क्या कर रहे हैं, तो उनका बेटा यह सोचकर "पूरा दिन कूदता रहा" कि रावण और कुंभकर्ण कैसे दिखेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा रोमांच तब था जब उनके बेटे ने उनसे कहा कि "हनुमान सुपरमैन से ज्यादा कूल हैं।" तिवारी ने कहा कि महाकाव्य का आकर्षण उसके पात्रों के समूह में निहित है, विशेष रूप से राम के चरित्र में, "एक आदर्श नेता, पति, पिता और पुत्र"। वहीं, उद्यावर को लगा कि महाकाव्य का जादू उसके आकार बदलने वाले राक्षसों में है, जो उनके विचार में एक छोटे बच्चे को भी पसंद आएगा। तिवारी ने पुष्टि की कि फिल्मों में जो कुछ भी कहा और दिखाया जाएगा, उसमें प्रामाणिकता की मुहर होगी। उन्होंने कहा कि राम और रावण से परे, हर चरित्र—चाहे वह सीता, लक्ष्मण, या हनुमान हो—का कुछ न कुछ सार्थक संदेश है, जिससे रामायण को त्रयी में ढालना आवश्यक हो जाता है। निर्माण टीम ने फिल्मों के सेटिंग, वेशभूषा, कलाकारों और एक्शन के लिए संदर्भ के रूप में पूरे भारत के कलाकारों से जटिल चित्र बनवाए। इस परियोजना का उद्देश्य हिंदी, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती और पंजाबी सिनेमा के अभिनेताओं को शामिल करना था, जो एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था ताकि अखिल भारतीय और वैश्विक दर्शकों दोनों को आकर्षित किया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://mumbaimirror.indiatimes.com/entertainment/bollywood/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-reviving-ramayana-with-a-live-action-multilingual-trilogy/articleshow/70119460.cms|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar reviving Ramayana with a live-action, multilingual trilogy|author=Roshmila Bhattacharya|date=जुलाई 8, 2019|newspaper=Mumbai Mirror|access-date=2025-02-17|language=en}}</ref> फिल्म श्रृंखला को शुरू में 500 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट पर बनाने की बात थी। निर्माण टीम ने 2020 तक फिल्मांकन शुरू करने की योजना बनाई थी, जिसमें पहली किस्त 2021 में रिलीज होने वाली थी। फिल्म निर्माताओं का इरादा कहानी की निरंतरता बनाए रखने के लिए त्रयी के प्रत्येक भाग के बीच अपेक्षाकृत कम अंतर रखने का था।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/ramayana-live-action-nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-direct-5820177/|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to helm multilingual live-action version of Ramayana|date=2019-07-08|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/nitesh-tiwari-ravi-udyawar-to-bring-ramayana-to-life-at-a-rs-500-crore-budget/articleshow/70126241.cms?from=mdr|title=Nitesh Tiwari, Ravi Udyawar to bring 'Ramayana' to life at a Rs 500 crore budget|date=2019-07-08|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-02-17|issn=0013-0389}}</ref> === पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन) === ==== लेखन और दृश्य विकास ==== नवंबर 2019 में, तिवारी ने कहा कि राघवन पिछले तीन सालों से पटकथा लिख रहे थे, जिसमें कई विद्वानों और पंडितों का मार्गदर्शन था, जिन्हें शास्त्र का व्यापक ज्ञान था, ताकि महाकाव्य को समकालीन दर्शकों के लिए प्रासंगिक बनाया जा सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|title=I'm happy not following the formula of making a hit film: Nitesh Tiwari|date=2019-11-20|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20240725202209/https://www.hindustantimes.com/bollywood/i-m-happy-not-following-the-formula-of-making-a-hit-film-nitesh-tiwari/story-X7ojYtj4L7MBKe5PMoMleP.html|archive-date=25 जुलाई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अप्रैल 2020 में, उन्होंने कहा कि वे कहानी के संवेदनशील पहलुओं की सावधानीपूर्वक पहचान कर रहे थे, जिन्हें अछूता रहना चाहिए, ताकि उनसे जुड़ी संभावित सार्वजनिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, जबकि उन क्षेत्रों का निर्धारण भी किया जा रहा था जहां वे फिल्म के समग्र देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सीमित सिनेमाई स्वतंत्रता ले सकते थे।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/massive-responsibility-to-do-a-project-like-ramayana-nitesh-tiwari-6066033/|title=Massive responsibility to do a project like Ramayana: Nitesh Tiwari|date=2019-10-12|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-18}}</ref>तिवारी ने समझाया कि वह और उनकी टीम कहानी को इस तरह से प्रस्तुत करना चाहते थे ताकि उनके बच्चों जैसे युवा दर्शकों को, जो "एवेंजर्स के प्रशंसक" हैं, यह रोमांचक लगे, जबकि साथ ही उनकी सास जैसे पुराने दर्शकों का विश्वास भी बनाए रखा जा सके, ताकि उन्हें यह "इतना आकर्षक लगे कि वे कहें कि मैंने रामायण को इस रूप में नहीं देखा है"।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/challenging-to-make-ramayana-appealing-for-all-generations-nitesh-tiwari-6300240/|title=Challenging to make Ramayana appealing for all generations: Nitesh Tiwari|date=2020-03-05|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> उन्होंने फिल्म को तकनीकी रूप से भारी तैयारी वाली बताया, क्योंकि महाकाव्य के जादुई गुण, जैसे उसमें वर्णित बात करने वाले जानवर या मंत्रमुग्ध वन, उन्हें स्क्रीन पर एक ऐसी दुनिया को खूबसूरती से प्रस्तुत करने का अवसर देते थे,<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-on-ramayana-making-it-exciting-for-both-children-and-old-people-is-challenging-1652718-2020-03-05|title=Nitesh Tiwari on Ramayana: Making it exciting for both children and old people is challenging|date=2020-03-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जो उनके विचार में पहले कभी नहीं देखी गई थी।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/amid-the-lockdown-nitesh-tiwari-works-on-ramayanas-script-over-group-calls/articleshow/74919720.cms|title=Amid the lockdown, Nitesh Tiwari works on Ramayana's script over group calls|date=2020-03-31|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-02-17|issn=0971-8257}}</ref> जून 2021 में, मंतेना ने बताया कि वह और उनकी टीम रामायण को एक परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि "एक उद्देश्य, दुनिया को उसकी पूरी महिमा में रामायण बताने का उद्देश्य" के रूप में देख रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वह त्रयी को "दुनिया में किसी भी अन्य चीज़ की तरह अच्छी तरह से" बनाना चाहते थे, और बताया कि उनकी टीम "हर चीज़ के छोटे से छोटे विवरण" पर ध्यान दे रही थी। उन्होंने खुलासा किया कि वे वही प्रक्रिया अपना रहे थे जो जेम्स कैमरून ने अवतार के लिए इस्तेमाल की थी, और दुनिया भर के 200 से अधिक कलाकार दो साल से फिल्म पर काम कर रहे थे, जिनमें कुछ अकादमी पुरस्कार विजेता भी शामिल थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/bollywood/madhu-mantena-opens-up-on-ramayana-and-says-expect-the-biggest-cast-in-history-of-indian-cinema-693416|title=Madhu Mantena Opens Up On Ramayana And Says, 'Expect The Biggest Cast In History Of Indian Cinema'|last=Hymavati|first=Ravali|date=2021-06-30|website=द हंस इंडिया|language=en|access-date=2025-02-17}}</ref> जुलाई में, मंतेना ने त्रयी के लिए अपनी दृष्टि पर विस्तार से बताया, इसे वाल्मीकि के दृष्टिकोण से रामायण का एक रेखीय पुनर्कथन बताया, जिसमें महाकाव्य की उप-कहानियां भी शामिल थीं, जबकि "राक्षसों, असुरों, गरुड़ आदि जैसे शानदार प्राणियों से भरी एक गहन और सुंदर दुनिया" का वादा किया। सितंबर 2021 में, मंतेना ने कहा कि वे राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों के कार्यों पर विचार कर रहे थे, जिन्होंने उनके अनुसार महाकाव्य को "अपने सुंदर तरीकों से" व्याख्या किया था। उन्होंने कहा कि वे वाल्मीकि की रामायण और उसके वर्णनों का पालन कर रहे थे ताकि एक सटीक प्रस्तुति सुनिश्चित हो सके।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/celebrities/ramayana-trilogy-for-a-global-audience-but-rooted-in-india-says-producer-madhu-mantena-716208|title='Ramayana' trilogy for a global audience but rooted in India, says producer Madhu Mantena|last1=भसीन|first1=श्रिया|last2=|first2=|date=2021-07-02|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-03-15}}</ref> === कलाकार चयन === {{Multiple image|image1=Ranbir at Besharam launch.jpg|image2=Ravi Dubey.jpg|image3=Sai Pallavi at Mca-pre-release-event.jpg|image4=Sunny Deol at Dev's Anand's autobiography release.jpg|image5=Yash at the ‘KGF’ Press Meet In Chennai (cropped).jpg|total_width=500|direction=horizontal|align=right|footer=[[रणबीर कपूर]], [[रवि दुबे]], [[साई पल्लवी]], [[सनी देओल]] और [[यश (अभिनेता)|यश]], क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में}} जुलाई 2021 में, मधु ने कहा कि वह उस साल दिवाली तक कलाकारों की घोषणा करने वाले थे, जिसमें उन्होंने "भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कास्ट" का वादा किया, जिसमें प्रदर्शन के मामले में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता शामिल होंगे। उन्होंने राम, हनुमान, रावण, सीता और लक्ष्मण के पात्रों को "जीवन से बड़ा" बताते हुए जोर दिया कि वह देश भर के कलाकारों को कास्ट करेंगे। इस निर्णय का कारण बताते हुए, उन्होंने विस्तार से कहा कि "यह (रामायण) उत्तर और दक्षिण के बारे में नहीं है, यह देश को एकजुट करने के बारे में है। हम इसे भारत के रूप में कर रहे हैं।"<ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/entertainment/exclusives/exclusive-madhu-mantena-ramayana-nitesh-tiwari-expect-biggest-cast-history-indian-cinema-795001|title=EXCLUSIVE: Madhu Mantena on Ramayana with Nitesh Tiwari: Expect the biggest cast in history of Indian cinema|date=2021-06-30|website=पिंकविला|language=en|access-date=2025-04-27}}</ref> रणबीर कपूर, रवि दुबे, साई पल्लवी, सनी देओल और यश को क्रमशः राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण के रूप में चुना गया है। === चलचित्रण === फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी अप्रैल 2024 में शुरू हुई।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-ramayana-shoot-begins-first-video-of-grand-ayodhya-set-goes-viral-8840316.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Shoot Begins, FIRST Video of Grand Ayodhya Set Goes Viral|date=5 अप्रैल 2024|website=न्यूज़18|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> 5 अप्रैल को, फिल्म के सेट से तस्वीरें लीक हो गईं, जिसमें अरुण गोविल, लारा दत्ता और शीबा चड्ढा अपनी-अपनी भूमिकाओं में और नीतेश तिवारी फिल्म का निर्देशन करते हुए दिखाई दिए।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ranbir-kapoor-fans-angry-lara-dutta-arun-govil-photos-from-ramayana-sets-leaked-8840620.html|title=Ranbir Kapoor Fans ANGRY As Lara Dutta, Arun Govil's Photos From Ramayana Sets LEAKED|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-lara-dutta-and-arjun-govil-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5379317|title=Crazy Viral Pics Of Lara Dutta And Arun Govil From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> इसके बाद, निर्माताओं ने फिल्म के सेट पर एक सख्त नो-फोन पॉलिसी लागू की।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/nitesh-tiwari-no-phone-policy-ramayana-set-ranbir-kapoor-look-ram-2523698-2024-04-05|title=Exclusive: 'Ramayana' director Nitesh Tiwari imposes no-phone policy on set|date=2024-04-05|website=इंडिया टुडे|language=en|access-date=2025-02-19}}</ref> 27 अप्रैल को, फिल्म के सेट से फिर से तस्वीरें लीक हो गईं, इस बार रणबीर कपूर और साई पल्लवी अपनी-अपनी भूमिकाओं में दिखाई दिए, जिससे सोशल मीडिया पर यह अनुमान लगाया जाने लगा कि क्या तस्वीरें खुद निर्माताओं द्वारा प्रचार उत्पन्न करने और वेशभूषा पर सार्वजनिक राय जानने के लिए लीक की जा रही थीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/crazy-viral-pics-of-ranbir-kapoor-and-sai-pallavi-from-the-sets-of-nitesh-tiwaris-ramayana-5535127|title=Crazy Viral Pics Of Ranbir Kapoor And Sai Pallavi From The Sets Of Nitesh Tiwari's Ramayana|website=एनडीटीवी|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/magazines/panache/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavis-looks-get-leaked-fans-gush-about-regal-appearance/articleshow/109644786.cms?from=mdr&from=mdr|title='Ramayana': Ranbir Kapoor- Sai Pallavi's looks get leaked, fans gush about regal appearance|date=2024-04-27|work=द इकोनोमिक टाइम्स|access-date=2025-03-16|issn=0013-0389}}</ref> मई में, फिल्म का कार्य शीर्षक "गॉड पावर" बताया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|title=Ramayana's working title revealed, Ranbir to also shoot for 'Love And War'|last=Singh Rawat|first=Sudeep|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241109080145/https://www.business-standard.com/entertainment/ramayana-s-working-title-revealed-ranbir-to-also-shoot-for-love-and-war-124051700626_1.html|archive-date=9 नवंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana's working title revealed; makers tightens surveillance on set to avoid leaked pics|date=2024-05-17|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20240526194229/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-title-revealed-leaked-pics-avoid-makers-tightens-surveillance-on-set-101715910807771.html|archive-date=26 मई 2024|language=en-us|url-status=live}}</ref> अगस्त में, एक सोशल मीडिया वीडियो वायरल हुआ जिसमें प्रशंसित अमेरिकी आंदोलन कोच टेरी नोटरी थे, जिन्होंने पुष्टि की कि वह फिल्म श्रृंखला में एक्शन निर्देशक के रूप में काम कर रहे थे। फिल्मांकन नवंबर 2024 में पूरा होने की घोषणा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/avatar-avengers-endgame-veteran-terry-notary-working-on-ranbir-kapoors-ramayana-as-action-director-9528803/|title=Avatar, Avengers Endgame veteran Terry Notary working on Ranbir Kapoor's Ramayana as action director|date=2024-08-23|website=द इंडियन एक्सप्रेस|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/ramayana-avengers-endgame-stunt-coordinator-terry-notary-confirms-working-on-the-ranbir-kapoor-starrer-watch-video/articleshow/112740067.cms|title='Ramayana': Avengers Endgame stunt coordinator Terry Notary CONFIRMS working on the Ranbir Kapoor starrer - WATCH video|date=2024-08-23|work=द टाइम्स ऑफ़ इंडिया|access-date=2025-03-16|issn=0971-8257}}</ref> पार्ट 2 का फिल्मांकन 19 जनवरी 2025 को शुरू हुआ। मई 2025 में, यह बताया गया कि प्रशंसित हॉलीवुड स्टंट निर्देशक गाय नॉरिस, जिन्होंने पहले 'फ्यूरियोसा: ए मैड मैक्स सागा', 'मैड मैक्स: फ्यूरी रोड' और 'द सुसाइड स्क्वाड' जैसी फिल्मों पर काम किया था, को फिल्म के लिए एक्शन दृश्यों को कोरियोग्राफ करने के लिए जोड़ा गया था और वह यश के साथ मिलकर काम कर रहे थे।<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/yash-mad-max-guy-norris-ramayana-1236411803/|title=Yash Teams With ‘Mad Max’ Stunt Maestro Guy Norris for Epic ‘Ramayana’ Action Sequences (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-05-29|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-06-19}}</ref> जून 2025 में, यह बताया गया कि अकादमी पुरस्कार विजेता हॉलीवुड निर्माता चार्ल्स रोवेन, जो एटलस एंटरटेनमेंट के संस्थापक भी हैं, मल्होत्रा और यश के साथ फिल्म में निर्माता के रूप में भी शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbes.com/sites/sindhyavalloppillil/2025/06/17/ai-content-creation-is-the-foundation-of-dneg-ceo-namit-malhotras-disruption/|title=How Namit Malhotra Is Building the Future of AI Content Creation|last=Valloppillil|first=Sindhya|website=फोर्ब्स|language=en|access-date=2025-06-19}}</ref> === पश्च-निर्माण (पोस्ट-प्रोडक्शन) === बताया गया है कि फिल्म 600 दिनों तक पोस्ट-प्रोडक्शन में रहेगी, जिससे यह इतनी व्यापक पोस्ट-प्रोडक्शन समय-सीमा की आवश्यकता वाली कुछ वैश्विक फिल्मों में से एक बन जाएगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.siasat.com/sai-pallavi-ranbirs-ramayana-release-date-budget-more-3073419/|title=Sai Pallavi, Ranbir's Ramayana: Release date, budget & more|last=Mouli|first=Chandra|date=2024-08-04|website=द सियासत डैली|language=en|access-date=2025-03-14}}</ref> == संगीत == फिल्म के [[:en:Film score|पृष्ठभूमि]] [[:en:Soundtrack|साउंडट्रैक]] को [[:en:Hans Zimmer|हाँस ज़िमर]] द्वारा [[:en:Musical composition|संगीतबद्ध]] किया जा रहा है। कई [[:en:Hans Zimmer discography|प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों]] का संगीत तैयार करने के बाद, संगीतकार ज़िमर इस फिल्म से भारतीय सिनेमा में मूल स्कोर संगीतकार के रूप में पदार्पण कर रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoor-ramayana-hans-zimmer-india-debut-ar-rahman-report-sai-pallavi-yash-101712296514599.html|title=Ranbir Kapoor-starrer Ramayana to mark Hans Zimmer's debut in Bollywood with AR Rahman: Report|date=5 अप्रैल 2024|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=7 नवम्बर 2024}}</ref> फिल्म के [[:en:Songs|गानो]] की धुने [[ए. आर. रहमान]] द्वारा संगीतबद्ध की जा रही है और गानो के बोल [[कुमार विश्वास]] ने लिखे हैं। == विपणन (मार्केटिंग) == 6 नवंबर 2024 को, मल्होत्रा ने आधिकारिक तौर पर 'रामायण' की घोषणा एक पोस्टर के माध्यम से की, साथ ही दोनों फिल्मों की रिलीज की तारीखें भी बताईं।<ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|title=Ranbir Kapoor's Ramayana Part 1 and 2 officially announced: See first poster, check release date details|date=2024-11-06|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250312170029/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ranbir-kapoors-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-see-first-poster-check-release-date-details-101730869129007.html|archive-date=12 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/ranbir-kapoor-yash-and-sai-pallavis-ramayana-part-1-and-2-officially-announced-first-poster-out/article68835920.ece|title=Ranbir Kapoor, Yash and Sai Pallavi's 'Ramayana Part 1 and 2' officially announced; first poster out|last=|first=|date=2024-11-06|work=द हिन्दू|access-date=2025-03-16|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> मल्होत्रा ने बार-बार फिल्म को एक वैश्विक फिल्म के रूप में प्रचारित किया है, जिसमें एक भारतीय विषय को दुनिया के लिए प्रस्तुत किया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/movies/ramayanas-producer-namit-malhotra-says-its-massive-responsibility-to-present-the-film-at-global-stage-aa-9245773.html|title=Ramayana's Producer Namit Malhotra Says Its 'Massive Responsibility' To Present The Film At Global Stage|website=न्यूज़18|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|title=Ramayana producer Namit Malhotra wants Ranbir Kapoor film to be celebrated globally like Oppenheimer, Forrest Gump|date=2025-03-01|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=2025-03-16|archive-url=https://web.archive.org/web/20250302085950/https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-producer-namit-malhotra-wants-ranbir-kapoor-film-to-be-celebrated-like-oppenheimer-forrest-gump-sai-pallavi-101740730843828.html#:~:text=Namit%20says%20that%20the%20effort,don't%20like%20Hollywood%20films.|archive-date=2 मार्च 2025|language=en-us|url-status=live}}</ref> उन्होंने कई मौकों पर फिल्म के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने इसे 'ड्यून्स' या 'अवतार' जैसी दुनिया की सबसे बड़ी प्रस्तुतियों के "कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े होने की अपनी महत्वाकांक्षा व्यक्त की है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|title='I tell filmmakers that if you can dream it (storytelling), we can do it'|last=Kohli-Khandeka|first=Vanita|website=बिजनेस स्टैण्डर्ड|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20241202132258/https://www.business-standard.com/companies/interviews/i-tell-filmmakers-that-if-you-can-dream-it-storytelling-we-can-do-it-124072100468_1.html|archive-date=2 दिसंबर 2024|access-date=2025-03-16|url-status=live}}</ref> उन्होंने यह भी दावा किया है कि वह बजट या तकनीकी विशेषज्ञता में सीमाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाएंगे—जो कारक ऐतिहासिक रूप से बड़े पैमाने पर भारतीय प्रस्तुतियों को दृश्य रूप से ऊपर उठने से रोकते रहे हैं—जबकि आत्मविश्वास से कुछ "पहले कभी न देखे गए" दृश्यों का वादा किया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporterindia.com/features/interviews/namit-malhotra-the-ramayana-belongs-to-the-worldno-one-person-or-entity-owns-it|title=Namit Malhotra: 'The Ramayana' Belongs to The World—No One Person or Entity Owns It|website=द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया|language=en|access-date=2025-03-16}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ramayana-first-glimpse-ranbir-kapoor-yash-explode-on-screen-as-lord-ram-ravana-hollywood-level-vfx-wows-fans-101751526412324.html|title=Ramayana first glimpse: Ranbir Kapoor, Yash explode on screen as Lord Ram, Ravana; 'Hollywood-level' VFX wows fans|work=हिन्दुस्तान टाइम्स|access-date=3 जुलाई 2025}}</ref> == प्रदर्शन == फिल्म को 2026 में दिवाली पर सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ramayana-ranbir-kapoor-sai-pallavi-s-film-gets-release-date-bonus-new-poster-6955155|title=Ranbir Kapoor And Sai Pallavi's Ramayana Part 1 and 2 Get Official Release Dates|date=6 नवम्बर 2024|website=एनडीटीवी|access-date=30 अक्टूबर 2024}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:2026 की फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्में]] [[श्रेणी:हिंदी भाषा की फिल्में]] [[श्रेणी:हिंदी-भाषा फिल्म]] [[श्रेणी:रामायण]] [[श्रेणी:राम]] [[श्रेणी:हनुमान]] [[श्रेणी:रावण]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन एडवेंचर फ़िल्में]] [[श्रेणी:भारतीय एक्शन ड्रामा फ़िल्में]] [[श्रेणी:आगामी भारतीय फिल्में]] [[श्रेणी:दीपावली]] [[श्रेणी:परशुराम]] [[श्रेणी:इन्द्र]] [[श्रेणी:शिव]] [[श्रेणी:३डी फ़िल्म]] 39a2795zumjy1m1lm5lw3oqv1li9bew सदस्य वार्ता:Imran Rangwala Actor Producer & Director 3 1598814 6536707 6460504 2026-04-05T21:20:16Z Imran Rangwala 772202 /* https://m.imdb.com/name/nm12596772/ */ नया अनुभाग 6536707 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|realName=|name=Imran Rangwala Actor Producer & Director}} -- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 14:16, 31 जुलाई 2025 (UTC) == https://m.imdb.com/name/nm12596772/ == Imran Rangwala is known as an Actor Producer & Director [[सदस्य:Imran Rangwala|Imran Rangwala]] ([[सदस्य वार्ता:Imran Rangwala|वार्ता]]) 21:20, 5 अप्रैल 2026 (UTC) 725g7a43gel5zl611z9syv7uyggz628 सिमी चहल 0 1603323 6536952 6507563 2026-04-06T11:53:22Z ~2026-20280-34 918193 ज्ञानसन्दूक और भूमिका में अनुवाद सुधारा 6536952 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|1=अंग्रेज़ी|date=दिसम्बर 2025}} {{Infobox person | name = सिमी चहल | image = Simi Chahal.jpg | birth_date = 9 मई<ref>{{cite news |last1=वशिष्ट |first1=नेहा |date=9 मई 2019 |title=Birthday Special! Simi Chahal: Lesser known facts about the actress |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/punjabi/movies/news/birthday-special-simi-chahal-lesser-known-facts-about-the-actress/photostory/69246279.cms |access-date=10 मई 2019 |work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] |language=en}}</ref> | nationality = भारतीय | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–अबतक | known_for = ''बम्बुकाट''<br />''रब दा रेडियो''<br />''दाना पानी'' <br />''चल मेरा पुत्त''<br />''मास्टरनी'' }} '''सिमरप्रीत कौर "सिमी" चहल''' एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से पंजाबी फिल्मों में काम करती हैं। ==जीवन और करियर== चहल का जन्म [[अम्बाला]] में हुआ और वो सन् 2014 में पहली बार मनोरंजन उद्योग से जुड़ीं। शुरूआत में उन्होंने कुछ पंजाबी गानों में अभिनय किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/archive/gyan-zone/life-is-good-382610/|title=Life is good|website=द ट्रिब्यून|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> प्रतिभा स्काउट्स द्वारा खोजे जाने के बाद, उन्होंने पंकज बत्रा द्वारा निर्देशित २०१६ की फिल्म बंबूकाट के साथ पंजाबी फिल्म की शुरुआत की और एमी विर्क के साथ अभिनय किया जो सफल रही। उनका अगला उद्यम प्रियंका चोपड़ा के साथ था जहाँ उन्होंने एक फिल्म में अभिनय किया, जिसे उन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर पर्पल पेबल पिक्चर्स के तहत निर्मित किया था, जिसे अमरिंदर गिल के साथ सरवण कहा जाता था । चहल ने बंबूकाट में अपनी भूमिका के लिए २०९७ में सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार (पंजाबी) जीता ,<ref name=aad>{{cite news |title=Jio Filmfare Awards (Punjabi) 2017: Gurdas Maan to Diljit Dosanjh, here's list of winners |url=https://www.tribuneindia.com/news/archive/features/jio-filmfare-awards-punjabi-2017-gurdas-maan-to-diljit-dosanjh-here-s-list-of-winners-385598 |access-date=10 May 2022 |work=Tribune |date=1 April 2017 |language=en}}</ref><ref>{{Cite news|date=30 March 2017|url=https://www.filmfare.com/features/who-will-win-the-best-actor-in-a-leading-role-female-award-at-the-jio-filmfare-awards-punjabi-19668-1.html|title=Who will win the Best Actor In A Leading Role (Female) Award at the Jio Filmfare Awards (Punjabi)?|work=filmfare.com|access-date=16 April 2017|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20170417071350/http://www.filmfare.com/features/who-will-win-the-best-actor-in-a-leading-role-female-award-at-the-jio-filmfare-awards-punjabi-19668-1.html|archivedate=17 April 2017}}</ref> और, २०१८ में, पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री क्रिटिक्स पुरस्कार जीता।<ref name=sss>{{cite web|url=http://thepunjabicinema.com/ptc-punjabi-film-awards-2018-winners-list/|title=PTC Punjabi Film Awards 2018 Winners list - The Punjabi Cinema|date=30 March 2018|website=thepunjabicinema.com|access-date=2 April 2018|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20180402122710/http://thepunjabicinema.com/ptc-punjabi-film-awards-2018-winners-list/|archivedate=2 April 2018}}</ref> ==पुरस्कार और नामांकन== * पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कार २०१७ - सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री पुरस्कार जीता * फ़िल्मफ़ेयर २०१७ - सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री पुरस्कार जीता <ref name=aaa>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/most-desirable-women/simi-chahal/articleshow/61851668.cms|title=Simi Chahal|date=29 November 2017|work=The Times of India|access-date=31 March 2018|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20180331134630/https://timesofindia.indiatimes.com/most-desirable-women/simi-chahal/articleshow/61851668.cms|archivedate=31 March 2018}}</ref> * पीटीसी पंजाबी फिल्म पुरस्कार २०१८ - सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री क्रिटिक्स पुरस्कार जीता ==सन्दर्भ== <references /> == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|8324884}} * {{Instagram|simichahal9}} {{Authority control}} [[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री]] [[श्रेणी:पंजाबी अभिनेत्री]] [[श्रेणी:२१वीं सदी की भारतीय अभिनेत्रियाँ]] lgvbegucpr6zkp1g3d0uapfbmsw16af अश्विनी महाजन 0 1603952 6536899 6489161 2026-04-06T08:54:02Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536899 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | image = | name = DO अश्विनी महाजन | office = [[स्वदेशी जागरण मंच]] के राष्ट्रीय सह-संयोजक<ref>{{cite web|url=http://www.swadeshionline.in/|title=Swadeshi Online official site}}</ref> | predecessor1 = [[मुरलीधर राव]] | alma_mater = [[रामजस कॉलेज|रामजस कॉलेज, नयी दिल्ली]] (बीए)<br />[[दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स]](एम ए) | residence = [[नयी दिल्ली]], भारत | occupation = [[अर्थशास्त्री]], [[प्राध्यापक]] }} '''डॉ० अश्विनी महाजन''' [[स्वदेशी जागरण मंच]] के राष्ट्रीय सह-संयोजक हैं। यह संगठन [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] से संबद्ध है। == जीवनी == अश्विनी महाजन ने एक लेखक और स्तंभकार के रूप में काम किया। वह पीजीडीएवी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं।<ref>{{Cite web|url=http://du.ac.in/du/uploads/Notifications/26122014ELECTORALROLL-AC-EC_2.pdf|title=P.G.D.A.V. College (Day), New Delhi|website=University of Delhi|page=136|archive-url=https://web.archive.org/web/20180130204507/http://du.ac.in/du/uploads/Notifications/26122014ELECTORALROLL-AC-EC_2.pdf|archive-date=30 January 2018}}</ref> वे 2011 से ''जर्नल ऑफ कंटेम्पररी इंडियन पॉलिटी एंड इकोनॉमी'' के मुख्य संपादक हैं। महाजन पैसिफिक यूनिवर्सिटी, उदयपुर और मेवाड़ यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर और रिसर्च गाइड भी हैं। वे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर एक शोधकर्ता और कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं। उन्होंने डब्ल्यूटीओ के साथ एक मान्यता प्राप्त एनजीओ स्वदेशी जागरण फाउंडेशन के प्रतिनिधि के रूप में जिनेवा, बाली, नैरोबी और ब्यूनस आयर्स में आयोजित डब्ल्यूटीओ की चार मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में भाग लिया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.wto.org/english/thewto_e/minist_e/mc9_e/swadeshi_jagran.pdf|title=Dr Ashwani Mahajan from the Swadeshi Jagran Foundation wished to submit the following memorandum on behalf of people of India.|last=Mahajan|first=Ashwani|archive-url=https://web.archive.org/web/20231125142624/https://www.wto.org/english/thewto_e/minist_e/mc9_e/swadeshi_jagran.pdf|archive-date=25 November 2023}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.wto.org/english/thewto_e/minist_e/mc10_e/swadeshippmc10_e.pdf|title=Swadeshi Jagren Manch's call to negotiating parties and global leaders at WTO MC10 being held at Nairobi, Kenya|date=16 December 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20221118162722/https://www.wto.org/english/thewto_e/minist_e/mc10_e/swadeshippmc10_e.pdf|archive-date=18 November 2022}}</ref> == लेखक == अश्विनी महाजन [[भारतीय अर्थव्यवस्था|भारत की अर्थव्यवस्था]] पर लिखते रहते हैं। 2014 में, उन्होंने दत्त एंड सुंदरम की 'भारतीय अर्थव्यवस्था' के सह-लेखक थे। उन्होंने [[डेक्कन हेराल्ड]], [[द स्टेटसमैन|द स्टेट्समैन]], पायनियर, द एक्सेलसियर, [[द इकॉनोमिक टाइम्स|द इकोनॉमिक टाइम्स]], बिजनेस टुडे, ऑर्गनाइज़र, [[दैनिक जागरण]] (हिंदी), राजस्थान पत्रिका (हिंदी) और हिंदुस्तान (हिंदी) सहित विभिन्न राष्ट्रीय दैनिक और पत्रिकाओं में कई लेख प्रकाशित किए हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.thestatesman.com/opinion/wto-s-future-in-an-insular-world-1492032826.html|title=WTO's future in an insular world|date=12 April 2017|website=[[The Statesman (India)|The Statesman]]}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.indianet.nl/a030613.html|title=Should New Delhi turn away aid?|website=indianet.nl}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> उन्होंने इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली, मेनस्ट्रीम, इंडियन इकोनॉमिक और अल्मानैक सहित कई शोध लेख पत्रिकाएं भी प्रकाशित की हैं।<ref>{{Cite journal|date=5 June 2015|title=Making a Show: The Black Money Bill|url=http://www.epw.in/author/ashwani-mahajan|journal=Economic and Political Weekly|volume=50|issue=23}}</ref> === प्रकाशन === * ''दत्त और सुंदरम द्वारा लिखित भारतीय अर्थव्यवस्था'' में गौरव दत्त के साथ, (2014, संशोधित 2016, [[एस॰ चंद ग्रुप|एस. चंद समूह]] ISBN <ref>{{Cite web|url=https://www.schandpublishing.com/books/higher-education/economics/indian-economy/9789352531295/|title=Indian Economy By Gaurav Datt|website=schandpublishing.com}}</ref>{{ISBN|9789352531295}} * गौरव दत्त के साथ भारतीय अर्थव्यस्थ, (2015, एस. चंद पब्लिशिंग, हिंदी में ISBN <ref>{{Cite web|url=https://www.schandpublishing.com/books/higher-education/economics/bhartiya-arthvyavastha/9789385676444/|title=S.Chand and Company Limited}}</ref>{{ISBN|9789385676444}} == राजनीति == === नीतिगत हस्तक्षेप === स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक के रूप में उन्होंने आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन कराने में सफलता पायी है। उनके नीतिगत हस्तक्षेपों में भूमि अधिग्रहण पर विवादास्पद अध्यादेश को वापस लेना, जीएम फसलों की नीति के क्षेत्र परीक्षणों पर फिर से विचार करना, सरकार की एफडीआई नीति विशेष रूप से खुदरा व्यापार और ई-कॉमर्स शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.rediff.com/news/interview/you-cant-build-concrete-jungles-on-agricultural-land/20150820.htm|title='You can't build concrete jungles on agricultural land'}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.rediff.com/business/interview/fdi-drains-indias-resources/20160810.htm|title='FDI drains India's resources'}}</ref> === विकास पर विचार === वे वैश्वीकरण के प्रखर आलोचक हैं। उनका मानना है कि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पर केन्द्रित विकास-मॉडल भारत के अनुरूप नहीं है।<ref>{{Cite web|url=http://www.rediff.com/business/report/what-kind-of-growth-is-it-when-90-of-population-is-out-of-it/20171003.htm|title=What kind of growth is it when 90% of population is out of it?}}</ref> यह मॉडल कतार में अंतिम पुरुषों के बारे में बात करता है और रोजगार सृजन के साथ विकास को एकीकृत करने का पक्ष लेता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.dailyexcelsior.com/bring-equality-for-steady-growth/|title=Bring equality for steady growth|date=2 October 2013}}</ref> अश्विनी महाजन [[प्रत्यक्ष विदेशी निवेश]] के भी आलोचक रहे हैं। इसके अलावा वे उपयोग के लिये सुलभ चिकित्सीय खाद्य पदार्थों के उपयोग के भी विरोधी हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/magazine/story/we-want-a-white-paper-on-costs-and-benefits-of-fdi/293538|title="We Want A White Paper on Costs And Benefits of FDI"}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/newsscroll/sjm-wants-fresh-cooked-food-to-fight-malnutrition-in-kids/1130646|title=SJM wants fresh cooked food to fight malnutrition in kids}}</ref> वे आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों (जी एम) के कट्टर विरोधी हैं और भारत में नए जीएम बीजों की अनुमति के खिलाफ एक अभियान चला रहे हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/RSS-linked-group-brings-all-anti-GM-NGOs-together-on-one-platform-to-oppose-transgenic-mustard/articleshow/54612728.cms|title=RSS-linked group brings all anti-GM NGOs together on one platform to oppose transgenic mustard|date=30 September 2016|work=[[The Times of India]]}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.news18.com/news/india/swadeshi-jagran-manch-to-write-to-pm-modi-against-nod-given-to-gm-mustard-1399655.html|title=Swadeshi Jagran Manch to Write to PM Modi Against Nod to GM Mustard|date=12 May 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/agriculture/the-brakes-are-applied-on-the-bt-cotton-story/articleshow/62583116.cms|title=These two issues could put the brakes on the Bt cotton story|last=Seetharaman|first=G.|work=The Economic Times}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://thewire.in/161838/criticism-of-modis-economic-policies-within-the-sangh-parivar-can-be-both-stringent-and-wide-ranging/|title=Criticism of Modi's Economic Policies within the Sangh Parivar Can be Both Stringent and Wide-Ranging}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/economy/agriculture/gm-crops-government-should-set-up-an-independent-regulator-at-the-earliest/articleshow/51563953.cms|title=GM crops: Government should set up an independent regulator at the earliest|last=Seetharaman|first=G.|work=The Economic Times}}</ref> == संदर्भ == [[श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात (जीवित लोग)]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] axm89z3i44ptt5z7hfkoqg5ydiuy36e 2024 की हिंदी फिल्मों की सूची 0 1604955 6536746 6536299 2026-04-06T04:54:25Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536746 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 2k2t2k2ktr1q6qonayk9vwacd8f2cnz 6536759 6536746 2026-04-06T05:12:25Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536759 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] s5j2ijbkck0hlu5zdiyh4q2fm1t89jp 6536768 6536759 2026-04-06T05:21:57Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536768 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] aorxwntnx0ftflo4oehhkpqh3t1wv48 6536790 6536768 2026-04-06T05:50:33Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536790 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] neabhyjh15n7z7yqbvq1qr5tthp4pec 6536796 6536790 2026-04-06T06:07:27Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536796 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | | |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] lwlwlj2qkvf1nzrrzxjd65hze178lka 6536807 6536796 2026-04-06T06:22:12Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536807 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 9oc9lgd43xzp8h2egpo3qi5lg1dub01 6536811 6536807 2026-04-06T06:31:26Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536811 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] moetf9t20i4clr2v1d03n8wymuh67b6 6536815 6536811 2026-04-06T06:39:21Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536815 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] pqn7tddvtmyh77voe33pt8mbf6gylay 6536821 6536815 2026-04-06T06:46:44Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536821 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |- | | |वनवास |अनिल शर्मा |नाना पाटेकर, सिमरत कौर | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] ar7g4vxcvlsu68mag97xcnw9v96502y 6536827 6536821 2026-04-06T06:54:51Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536827 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |- | |20 |वनवास |अनिल शर्मा |नाना पाटेकर, सिमरत कौर | | |- | | |आउट हाउस |सुनील सुकटंकर |सुनील अभ्यंकर, मोहन अगुसहे | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 5bmx9id9xdi3zf4htlhk7foz7lja4t3 6536834 6536827 2026-04-06T07:02:01Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536834 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |- | |20 |वनवास |अनिल शर्मा |नाना पाटेकर, सिमरत कौर | | |- | | |आउट हाउस |सुनील सुकटंकर |सुनील अभ्यंकर, मोहन अगुसहे | | |- | |25 |बेबी जॉन |कालीस |वरुण धवन, जैकी श्रॉफफ | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] b154ql2fjqoavfe8fbins5gmcbx1hla 6536849 6536834 2026-04-06T07:11:12Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536849 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ | | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |- | |20 |वनवास |अनिल शर्मा |नाना पाटेकर, सिमरत कौर | | |- | | |आउट हाउस |सुनील सुकटंकर |सुनील अभ्यंकर, मोहन अगुसहे | | |- | |25 |बेबी जॉन |कालीस |वरुण धवन, जैकी श्रॉफफ | | |- | | |किसको था पता |राठा शिना |असहनूर कौर, अक्षय ओबेरॉय | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] qjbtfx4za3jxz54lmesgw9p54c5ivw3 6536864 6536849 2026-04-06T07:18:54Z MovieLoverFan 505761 /* जुलाई-सितम्बर */ Added details 6536864 wikitext text/x-wiki यह उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है जो 2024 में रिलीज़ हो चुकी है। == बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२४ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |''[[स्त्री 2|स्त्री २]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹874.58 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/stree-2-2/box-office/|title=Stree 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-08-15|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !2 |''[[भूल भुलैया 3]]'' | * टी - सीरीज फिल्म्स * सिने १ स्टूडियोज |₹423.85 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/bhool-bhulaiyaa-3/box-office/|title=Bhool Bhulaiyaa 3 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !3 |''[[सिंघम अगेन|सिंघम अगैन]]'' | * जिओ स्टूडियोज * रेलिएंस एंटरटेनमेंट * देवगन फिल्म्स |₹389.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/singham-again/box-office/|title=Singham Again Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-01|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !4 |''[[फाइटर]]'' | * वायाकोम 18 स्टूडियोज * मैट्रिक्स पिक्चर्स |₹344.46 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/fighter/box-office/|title=Fighter Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-01-25|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !5 |''शैतान'' | * जिओ स्टूडियोज * देवगन फिल्म्स * पैनोरमा स्टूडियोज |₹211.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/shaitaan/box-office/|title=Shaitaan Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-08|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !6 |''क्रू'' | * बालाजी मोशन पिक्चर्स * अनिल कपूर फिल्म्स |₹157.08 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/crew/box-office/|title=Crew Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-03-29|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2024 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-20}}</ref> |- !7 |''[[तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया]]'' | * जिओ स्टूडियोज * मेडोक फिल्म्स |₹133.64 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/teri-baaton-mein-aisa-uljha-jiya/box-office/|title=Teri Baaton Mein Aisa Uljha Jiya Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-02-09|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !8 |''मुन्जया'' | * मेडोक फिल्म्स |₹132.13 crore | |- !9 |''बेड न्यूज़'' | * Amazon Prime * धर्मा प्रोडक्शनस * Leo Media Collective |₹115.74 crore | |- !10 |''आर्टिकल 370'' | * जिओ स्टूडियोज * B62 Studios |₹110.57 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" |रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" |शीर्षक ! style="width:10.5%;" |निर्देशक ! style="width:30%;" |कलाकार !{{refh}} |- | rowspan="5" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''5''' | style="text-align:center;" |तौबा तेरा जलवा |आकाशआदित्य लामा |जतिन खुराना, [[अमीषा पटेल]], एंजेला क्रिसलिंजकी |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/ameesha-patel-jatin-khurana-angela-starrer-tauba-tera-jalwa-new-poster-release-date-out-101703666952163.html|title=Ameesha Patel, Jatin Khurana, Angela starrer 'Tauba Tera Jalwa' new poster, release date out|date=2023-12-27|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref>श्री राम प्रोडयोसन |- |मैं पापी हूँ |जय डोंगरा |अंकुर नय्यर |<ref>{{Citation|title=Main Paapi Hoon Movie: Showtimes, Review, Songs, Trailer, Posters, News & Videos {{!}} eTimes|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-details/main-paapi-hoon/movieshow/105063634.cms|access-date=2026-01-16}}</ref>तरी डॉट प्रोडुकसन |- | style="text-align: center;" |12 |मैरी क्रिसमस |श्रीराम राघवन |[[कैटरीना कैफ़|कैटरीना कैफ]], विजय सहेतुपती | |- | style="text-align: center;" |19 |मैं अटल हूँ |रवि जादव |पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |25 |फाइटर |सिद्धार्थ आनद |ह्रितिक रोशन, दीपिका पादुकोन | |- | rowspan="10" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |9 |तेरी बहो मैं ऐसा उलझा जिया |अमित जोशी, आराधना साह |शहीद कपूर, करिती सानों | |- |भक्शक |पुलकित |भूमि पडनेकर, संजय मिश्रा | |- |लतरानी |गुरविन्दर सिंघ, कौशिक गांगुली |जीतेन्द्र कुमार, जीशु सेनगुप्ता, जोंनि लीवर | |- |मिरग |तरुण शर्मा |सतीश कौशिक, अनूप सोनी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |16 |दशमी |शान्तनु अनंत ताम्बे |वर्धन पूरी, गौरव सरीन | |- |कुछ खट्टा हो जाये |जी अशोक |गुरु रंधावा, साई मांजरेकर | |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |23 |क्रैक |आदित्य दत्त |विद्युत जामवाल, नोरा फ़तेहि | |- |आर्टिकल 370 |आदित्य सुहास जाम्भाले |यामी गौतम, प्रियमणि | |- |ऑल इंडिया रैंक |वरुण ग्रोवर |बोधिसत्व शर्मा, समता सुदीक्षा | |- |छोटे नवाब |कुमुद चौधरी |अक्षय ओबेरॉय, नीरज सूद | |- | rowspan="14" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="5" style="text-align: center;" |1 |लापता लेडीज |किरण राव |रवि किशन, नीतांशी गोयल | |- |दंगे |बेजोय नाम्बीयार |ईहान भट्ट, निकिता दत्ता | |- |ऑपरेसन वल्न्टाइन |शक्ति परताप सिंग हुडा |वरुण तेज, मानुषी चिल्लर | |- |कागज 2 |वी के प्रकास |अनुपम खेर, नीना गुप्ता | |- |फ़ैरे फोलक |करन गोवर |रसिका दुग्गल, मकुल चड्डा | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |8 |शैतान |विकास बही |अजय देवगन,जयोथीका | |- |तेरा क्या होगा लवली |बलवीर सिंग जनजू |रनदीप हुड्डा, करन कुदरा | |- |अल्फा बीटा गामा |संकर श्री कुमार |नीसान, रीना अग्रवाल | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |15 |योद्धा |सागर आमरे, पुसकर ओझा |सिद्धार्थ महलोदरा,दिशा पाटनी | |- |बस्तर द नेक्सल स्टोरी |सुदीपतों सेन |अदाह शर्मा, शिल्पा शुक्ला | |- |मर्डर मुबारक |होमी अदाजनीय |सारा अली खान, पंकज त्रिपाठी | |- | style="text-align: center;" |21 |ए वतन मेरे वतन |कंनन अय्यर |सारा अली खान,आनंद तिवारी | |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |22 |मदगाओ एक्स्प्रेस |कुनाल खेमू |दिव्येंदु, प्रतीक गांधी | |- |स्वातंत्र्य वीर सावरकर |रणदीप हूडा |रणदीप हूडा, अंकित लोखण्डे | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''फेंकना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="15" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |5 | style="text-align:center;" |दुकान |सिद्धार्थ - गरिमा |मोनिका पँवार, म्रुणाल ठाकुर |वेवबेन्ड प्रोडकसंस | |- | style="text-align: center;" |11 | style="text-align: center;" |बड़े मियाँ छोटे मियाँ |अली अब्बास ज़फ़र |अक्षय कुमार , टाइगर श्रॉफ |पूजा एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैदान |अमित शर्मा |अजय देवगन , प्रियमणि |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |अमर सिंह चमकीला |इम्तियाज अली |दिलजीत दोसांझ , परिणीति चोपड़ा |नेटफ्लिक्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अमीना |कुमार राज |रेखा राणा , अनंत महादेवन |कुमार राज प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |गौरैया लाइव |गैब्रियल वत्स |आदा सिंह , रंधीर सिंह ठाकुर |रेयर फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |साइलेंस 2: द नाइट आउल बार शूटआउट |अबान भरुचा देओहन्स |मनोज बाजपेयी , प्राची देसाई |जी स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |19 | style="text-align: center;" |लव सेक्स और धोखा 2 |निम्रित कौर अहलुवालिया |तुषार कपूर , उर्फ़ी जावेद |बालाजी टेलीफ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |दो और दो प्यार |शिर्षा गुहा ठाकुरता |विद्या बालन , प्रतिक गांधी |एप्लॉज़ एंटरटेनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |काम चालू है |पलाश मुचाल |राजपाल यादव , जिया मानेक |बेसलाइन स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |अप्पू |प्रसेंजित गांगुली |अर्जुन बाजवा, रूपा भीमानी |अप्पू सीरीज | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव यू शंकर |राजीव एस. रूइया |श्रेयस तलपड़े,तनिषा मुखर्जी,अभिमन्यु सिंह |एसडी वर्ल्ड फ़िल्म प्रोडक्शन | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |द लिगेसी ऑफ जिनेश्वर |प्रदीप पी. जाधव, विवेक अय्यर |शुभम व्यास,सुरेन्द्र पाल |महावीर टॉकीज़, | |- | style="text-align: center;" |26 | style="text-align: center;" |रुसलान |करण बुटानी |आयुष शर्मा,सष्री श्रेया मिश्रा,जगपति बाबू |श्री सत्य साईं आर्ट्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं लड़ेगा |गौरव राणा |आकाश प्रताप सिंह |कथाकार फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | | | | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |10 | style="text-align:center;" |श्रीकांत |तुषार हिरानंदानी |राजकुमार राव, ज्योतिका, आलाया एफ |टी-सीरीज़ फ़िल्म्स, चॉक एन चीज़ फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |टिप्प्सी |दीपक तिजोरी |दीपक तिजोरी, नताशा सूरी |राजू चड्ढा वेव सिनेमाज़ | |- | rowspan="16" style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" |7 | style="text-align:center;" |मल्हार |विशाल कुम्भार |शरीब हाशमी अंजलि पाटिल |वी मोशन पिक्चर्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |बजरंग और अली |जयवीर |सचिन पारिख, गौरव शंकर |अटरअप फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ब्लैकआउट |देवांग शशिन भावसार |विक्रांत मैसी,मौनी रॉय, सुनील ग्रोवर |जियो स्टूडियोज़ 11:11 प्रोडक्शंस | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मुंज्या |आदित्य सरपोतदार |शरवरी,अभय वर्मा |मैडॉक फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फूली |अविनाश ध्यानी |अविनाश ध्यानी,सुरुचि सकलानी, रिया बलूनी |पद्मा सिद्धि फ़िल्म्स,ड्रीम स्काई क्रिएशन्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |चंदू चैंपियन |कबीर ख़ान |कार्तिक आर्यन |नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट, कबीर ख़ान फ़िल्म्स | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |मणिहार |संजीव कुमार राजपूत |बदरुल इस्लाम, पंकज बेरी |जय श्री मूवी | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |लव की अरेंज मैरिज |इशरत र खान |सनी सिंघ, अन्नू कपूर |भानुशाली स्टुडियोस लिमिटेड | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |इश्क़ विश्क रिबाउंड |निपुण धर्माधिकारी |रोहित सराफ़, जिब्रान खान |टिप्स इंदुसरतीस | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |महाराज |सिद्धारथ पी मलनोट्रा |जुनैड खान, मनोज जोशी |य आर ऐफ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |हमारे बारह |कमल चन्द्रा |अन्नू कपूर, मनोज जोशी |राधिका जी फिल्म | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |पुष्तैनी |विनोद रावत |हेमंत पांडे, शशि भूषण | | |- | style="text-align: center;" |21 | style="text-align: center;" |जहांगिर नेशनल यूनिवर्सिटी |विनय शर्मा |रश्मी देसाई, पीयूष मिश्रा |महाकाल मूवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ऋतु का राज |आनंद सूर्यपुर |राजेश कुमार, नारायनी शास्त्री |जियो स्टूडियोज़ | |- | style="text-align: center;" |28 | style="text-align: center;" |शर्मा जी कि बेटी |ताहिरा कश्यप खुराना |दिव्या दुत्ता, सैया खेर |अप्लॉज़ एंटेरटैनमेंट | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कूकी |प्रणब जे डेका |रीना रानी, राजेश तैलंग |जय विरात्र एंटेरटैनमेंट | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | rowspan="31" |जुलाई |5 |कील |निखिल नागेश भट्ट |लक्षवा, राघव जुले |धमा प्रोडक्टसन | |- |10 |वाइल्ड वाइल्ड पंजाब |सिमर प्रीत सिंघ |वरुण शर्मा, सनी सिंघ |टी - सीरीज फिल्म्स | |- | |सरफिरा |सुद्धा कॉंगरा |अक्षय कुमार, परेश रावल | | |- | |काकुद |अदित्या सर्पोटदार |रितेश देसमुख, साकीब सलीम | | |- |19 |बेड न्यूज |आनंद तिवारी |विकी कौशल, तृप्ति दिमारी | | |- | |एक्सीडेंट ऑफ कन्स्पिरसी गोधरा |एम के शिवाँस |रणवीर सहोरे, मनोज जोशी | | |- |26 |ब्लडी इश्क |विक्रम भट्ट |अविक गोर, वर्धन पूरी | | |- | |प्राइड |पंकज के आर विराट |ऐश्वर्या राज, आरिफ़ ज़ाकरिया | | |- |2 |औरों में कहाँ दम था |नीरज पांडे |अजय देवगन, तब्बू | | |- | |उलजन |सुधांशु सरिया |जानवी कपूर, रोहन माथाव | | |- | |आलिया बासु गायब है |प्रीति सिंघ |विनय पाठक, राइमा सेन | | |- | |फिर आई हस्सीन दिलरुबा |जयप्रद देसाई |सनी कौशल, विक्रांत मस्से | | |- |9 |घुड़छाड़ी |बीनॉय गांधी |संजय दुतत, रवीना टंडन | | |- | |घुसपालठिया |सूसी गणेशन |उर्वशी रौटेल, अक्षय ओबेरॉय | | |- |15 |खेल खेल मैं |मुदस्सार अज़ीज़ |अक्षय कुमार , वानी कपूर | | |- | |वेदा |निककही आडवाणी |जोन अब्राहम, अभिषेक बनर्जी | | |- | |स्त्री 2 |अमर कौशिक |श्रद्धा कपूर, राजकुमार | | |- |23 |तिकड़म |विवेक अंचलीय |अमित सियाल, अरिष्ट जैन | | |- | |ए वेडिंग स्टोरी |अबिनव परीक |मुक्ति मोहन, अक्षय आनंद | | |- | |पद गए पंगे |संतोष कुमार |राजेश शर्मा, फैसल मालिक | | |- | |विस्फोट |कूकी गुलाटी |प्रिया बापट, कैथ एलेन | | |- | |ध बकिंघम मुरदर्स |हँसल मेहता |करीना कपूर, रणवीर बरार | | |- |13 |सेक्टर -36 |आदिया निम्बलकर |विक्रांत मस्से, दीपक डॉब्रीयल | | |- | |बर्लिन |अतुल सभारवाल |राहुल बोस, कबीर बेदी | | |- |15 |अद्भुत |सबबीर खान |डायना पेन्टी, रोहन मेहरा | | |- | |कहा सुरू कहा खतम |सौरभ दसकुपट |धवनी भानुशाली, विकरम कॉकचर | | |- |20 |युद्धा |रवि वदयावर |रागव जुयाल, राम कपूर | | |- | |नशा जुर्म ओर गंगस्टर्स |राजकुमार पत्र |मुन्नी पंकज, राजकुमार पत्र | | |- | |जो तेरा है वो मेरा है |राज त्रिवेदी |परेश रावल, अमित सियाल | | |- |27 |लव, सितारा |वंदना कटारिया |राजीव सिद्धार्थ, ऋजुल राय | | |- | |बिन्नी एंड फॅमिली |संजय त्रिपाठी |पंकज कपूर, राजेश कुमार | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |4 |सी टी आर एल |विकमादित्य |अनन्या पांडे, विहान समता | | |- | | |अमर प्रेम कहानी |हार्दिक गज्जर |सनी सिंघ, आदित्य सील | | |- | | |ध सिगनेचर |गजेन्द्र आहिर |अनुपम खेर, रणवीर शोले | | |- | | |जिगरा |वसन बाला |अली भट्ट, वेअंग रैना | | |- | |11 |विकी विद्या का वो वाला विडिओ |राज शादिया |राज कुमार राव, तृप्ति दिमारी | | |- | |18 |आयुष्मती गीता मटिक पास |प्रदीप खैरवार |कक्षिका कपूर, अनुज कपूर | | |- | | |दो पट्टी |शशांक चतुर्वेदी |काजोल, प्राची शाह | | |- | | |बांदा सिंघ चौधरी |अभिषेक सक्सेना |अरशद वर्सी, महेर वीज | | |- | | |ध मिरांदा ब्रदर्स |संजय गुप्ता |हर्षवर्धन राणे, मीज़ान जाफरी | | |- | | |नवरस कथा कॉलेज |प्रवीण हिंगोनिया |शीब चद्दन, अलका अमीन | | |- | |1 |भूल भुलैया 3 |अनीस बाज़मी |कार्तिक आर्यन, विध्या बालन | | |- | | |सिंघम अगैन |रोहित शेट्टी |अजय देवगन, अक्षय कुमार | | |- | | |विजय 69 |अक्षय रॉय |अनुपम खेर, मिहिर आहूजा | | |- |नवम्बर |8 |एला |रोसन फेरणदेस |ईशा तलवार, सरण्या शर्मा | | |- | | |ख्वाबों का जमेला |डैनिश असलम |प्रतीक बब्बर, सयानी गुप्ता | | |- | | |ध साबरमती रिपोर्ट |धीरज शर्मा |रिद्धि डोंगर, राशि खनहा | | |- | |22 |नाम |अनीस बाज़मी |अजय देवगन, राहुल देव | | |- | | |आइ वॉन्ट टू टॉक |सहूजित सिरकर |अभिषेक बच्चन, जोहनी लीवर | | |- | |29 |सिकंदर का मुकद्दर |नीरज पांडे |जिमी शेरगिल, अविनाश तिवारी | | |- | |6 |अग्नि |राहुल ढोलकिया |प्रतीक गांधी, जितेन्द्र जोशी | | |- | |13 |ज़ीरो से रिस्टार्ट |विधु विनोद |मेधा शंकर, अनंत वी जोशी | | |- | | |दिस्पेच्च |कनू बही |मनोज बजपायी, शाहाना गोस्वामी | | |- | |20 |वनवास |अनिल शर्मा |नाना पाटेकर, सिमरत कौर | | |- | | |आउट हाउस |सुनील सुकटंकर |सुनील अभ्यंकर, मोहन अगुसहे | | |- | |25 |बेबी जॉन |कालीस |वरुण धवन, जैकी श्रॉफफ | | |- | | |किसको था पता |राठा शिना |असहनूर कौर, अक्षय ओबेरॉय | | |} == सन्दर्भ == [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 6v8s3yreqfh5om9161fkl9jyzppip6k 2025 की हिंदी फिल्मों की सूची 0 1604960 6536748 6536297 2026-04-06T04:58:14Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536748 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | | |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 302c9p8kw5qst9uan646eprybboetx3 6536763 6536748 2026-04-06T05:16:38Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536763 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 89k8oncnpra53ekobcpug3748i7v2wu 6536769 6536763 2026-04-06T05:24:32Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536769 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | | |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] j51qh39fnt4qffkn0obkeb9w8p7od75 6536791 6536769 2026-04-06T05:57:27Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536791 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 9141lw3riud1ywc7ai67k7aogjgn5x9 6536800 6536791 2026-04-06T06:11:54Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536800 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | | |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 5v1og1t8eyw22jvtvplyvrjjo69i55k 6536809 6536800 2026-04-06T06:27:35Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536809 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जटाधर |वेंकट कल्याण |सुधीर बाबू, दिव्य खोसला कुमार | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] l2rzvvmss9d72eo4hjkd43xk24w48rz 6536812 6536809 2026-04-06T06:34:12Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536812 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 7b09lgwdxa4vw6zqc7u1usygge0k9zz 6536818 6536812 2026-04-06T06:42:07Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536818 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] l4hrhoephorhmnn9li79iykz3we05xl 6536823 6536818 2026-04-06T06:50:14Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536823 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | |दे दे प्यार दे 2 |अंशुल शर्मा |राकुल प्रीत, अजय देवगन | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] 7oxb1n8agjg223eni16y6l5bcfjfk1b 6536828 6536823 2026-04-06T06:57:05Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536828 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | |दे दे प्यार दे 2 |अंशुल शर्मा |राकुल प्रीत, अजय देवगन | | |- | | |आग्रा |कनू बही |मोहित अगर्वल, रूहानी शर्मा | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] h696qg9pknl5vqsfecdlcbrm3d11v9e 6536838 6536828 2026-04-06T07:04:27Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536838 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | |दे दे प्यार दे 2 |अंशुल शर्मा |राकुल प्रीत, अजय देवगन | | |- | | |आग्रा |कनू बही |मोहित अगर्वल, रूहानी शर्मा | | |- | |14 |दिल्ली |देवेन्द्र मालवीय |बृजेन्द्र कला, समर जय सिंघ | | |- | | | | | | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] g1yp49bpmiwifvm8v0w9mc0r82kp49o 6536853 6536838 2026-04-06T07:13:25Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536853 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | |दे दे प्यार दे 2 |अंशुल शर्मा |राकुल प्रीत, अजय देवगन | | |- | | |आग्रा |कनू बही |मोहित अगर्वल, रूहानी शर्मा | | |- | |14 |दिल्ली |देवेन्द्र मालवीय |बृजेन्द्र कला, समर जय सिंघ | | |- | | |काल ट्रिगहोरी |नितिन वैद्य |अरबाज़ खान, राजेश शर्मा | | |- | | | | | | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] tghcs3fa849cc90dcdm7ay49ob9t9lv 6536867 6536853 2026-04-06T07:21:45Z MovieLoverFan 505761 /* अक्टूबर-दिसंबर */ Added details 6536867 wikitext text/x-wiki {{ख़राब अनुवाद|date=फ़रवरी 2026}} यह 2025 में रिलीज़ हो चुकी या होने वाली [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की सूची है ! == २०२५ हिन्दी फिल्मो का बॉक्स ऑफिस संकलन == {| class="wikitable sortable" |+२०२५ की अधिकतम कमी करनेवाली फिल्मे !Rank !Title !Production company !Worldwide gross !<abbr>Ref.</abbr> |- !1 |[[छावा]] |मेडोक फिल्म्स |₹797.34 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/chhaava/box-office/|title=Chhaava Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-02-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !2 |[[सैयारा]] |यश राज फिल्म्स |₹579.23 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/saiyaara/box-office/|title=Saiyaara Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-07-18|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !3 |[[वॉर 2|वॉर २]] |यश राज फिल्म्स |₹351 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/war-2/box-office/|title=War 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-08-14|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/war-2-worldwide-box-office-collection-day-14-hrithik-roshan-jr-ntr-film-reaches-350-cr-beats-adipurush-drishyam-2-101756352481335.html|title=War 2 worldwide box office collection day 14: Hrithik Roshan, Jr NTR film reaches ₹350 cr; beats Adipurush, Drishyam 2|date=2025-08-28|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref> |- !4 |''[[महा अवतार नरसिंह|महाव्तार नरसिम्हा]]'' |क्लिम प्रोडक्शन |₹300 - 325 crore | |- !5 |[[सितारे ज़मीन पर|सितारे जमीन पर]] |आमिर खान प्रोडक्शन |₹266.49 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/sitaare-zameen-par/box-office/|title=Sitaare Zameen Par Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-06-20|language=en|access-date=2026-01-02}}</ref> |- !6 |[[रेड 2 (फिल्म)|रेड २]] |टी - सीरीज फिल्म्स |₹243.06 crore |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/raid-2/box-office/|title=Raid 2 Box Office Collection {{!}} India {{!}} Day Wise {{!}} Box Office - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-05-01|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/box-office-collections/worldwide/|title=Worldwide Highest Grossing Bollywood Movies on 2025 - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- !7 |हाउसफूल ५ |नडियादवाला ग्रेंडसन एंटरटेनमेंट |₹242.80 - 248.80 crore | |} == जनवरी–मार्च == {| class="wikitable" |- style="background:#b0e0e6; text-align:center;" ! colspan="2" style="width:6%;" | रिलीज़ तिथि ! style="width:18%;" | शीर्षक ! style="width:10.5%;" | निर्देशक ! style="width:30%;" | कलाकार !'''स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस)''' ! {{refh}} |- | rowspan="12" style="text-align:center; background:plum; textcolor:#000;" |'''जनवरी''' | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''3''' | style="text-align:center;"| ''[[द रैबिट हाउस]]'' || वैभव कुलकर्णी || {{hlist|अमित रियान|करिश्मा|पद्मनाभ|गगन प्रदीप|प्रीति शर्मा|सुरेश कुंभार}} | || <ref>{{cite web |date=3 January 2025 |title=The Rabbit House |url=https://www.bollywoodhungama.com/movie/the-rabbit-house/critic-review/the-rabbit-house-movie-review/ |website=[[Bollywood Hungama]] |access-date=4 February 2025}}</ref> |- | rowspan="2" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''10''' | style="text-align:center;"| ''फतेह'' || सोनू सूद|| {{hlist|[[सोनू सूद]]|[[नसीरुद्दीन शाह]]|[[जैकलिन फर्नांडीस]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/sonu-sood-announces-release-date-directorial-fateh-arrive-cinemas-january-10-2025/ |title=Sonu Sood announces the release date of his directorial Fateh; to arrive in cinemas on January 10, 2025 |work=[[Bollywood Hungama]] |date=30 July 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मैच फिक्सिंग'' || केदार गायकवाड || {{hlist|[[विनीत कुमार सिंह]]|[[राज अर्जुन]]|[[शताफ़ फ़िगार]]|[[अनुजा साठे]]}} | || <ref>{{cite news |title=Vineet Kumar Singh-starrer Match Fixing gets new release date |url=https://www.cinemaexpress.com/hindi/news/2024/Dec/27/vineet-kumar-singh-starrer-match-fixing-gets-new-release-date |work=[[Cinema Express]] |date=1 December 2024}}</ref> |- | rowspan="4" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;"| ''इमरजेंसी'' || [[कंगना रनौत]]|| {{hlist|[[कंगना रनौत]]|[[अनुपम खेर]]|[[श्रेयस तलपड़े]]|[[महिमा चौधरी]]|[[मिलिंद सोमन]]|[[सतीश कौशिक]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.indiatvnews.com/entertainment/bollywood/kangana-ranaut-s-emergency-finally-gets-its-release-date-indira-gandhi-s-biopic-to-release-next-year-2024-11-18-962127 |title=Kangana Ranaut's 'Emergency' finally gets its release date |work=India TV |date=18 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''आज़ाद'' || [[अभिषेक कपूर]]|| {{hlist|[[अजय देवगन]]|[[डायना पेंटी]]|आमान देवगन|राशा थडानी|[[मोहित मलिक]]|[[पियूष मिश्रा]]}} | || <ref>{{Cite news |url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ajay-devgn-aaman-devgan-rasha-thadani-starrer-azaad-release-january-17-deets-inside/ |title=Azaad to release on January 17 |work=Bollywood Hungama |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''मिशन ग्रे हाउस'' || नौशाद सिद्दीकी || {{hlist|अबीयर ख़ान|पूजा शर्मा|[[राजेश शर्मा]]|[[किरण कुमार]]|[[निकहत ख़ान]]|[[कमलेश सावंत]]|[[रज़ा मुराद]]}} | || <ref>{{cite web |url=https://news.abplive.com/entertainment/movies/mission-grey-house-first-look-out-a-gripping-suspense-thriller-releasing-in-january-1735209 |title=Mission Grey House First Look Out |date=30 November 2024}}</ref> |- | style="text-align:center;"| ''संगी'' || सुमित कुलकर्नी || {{hlist|[[शरीब हाशमी]]|संजय बिश्नोई|[[गौरव मोरे]]|[[विद्या मालवड़े]]|श्यामराज पाटिल|मार्टिन जिशिल}} | || <ref>{{cite news |title=Sangee Movie Review |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/movie-reviews/sangee/amp_movie_review/117332496.cms |work=Times of India |date=17 January 2025}}</ref> |- | rowspan="3" style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''24''' | style="text-align:center;"| ''हिसाब बराबर'' || अश्विनी धीर || {{hlist|[[आर. माधवन]]|[[नील नितिन मुकेश]]|[[कीर्ति कुल्हारी]]|[[रश्मि देसाई]]}} | || <ref>{{Cite web |url=https://www.ottplay.com/news/hisaab-barabar-trailer-out-r-madhavan-looks-promising-as-he-unravels-banking-scam-in-upcoming-satirical-thriller/b44a969d6e857 |title=Hisaab Barabar Trailer Out}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्काइ फोर्स |संदीप केवलानी अभिषेक अनिल कपूर |[[अक्षय कुमार]], वीर पहारिया, [[सारा अली ख़ान|सारा अली खान]], निमरत कौर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/akshay-kumar-starrer-sky-force-release-january-24-2025-makers-drop-trailer-christmas-report/|title=Akshay Kumar starrer Sky Force to release on January 24, 2025, makers to drop trailer on Christmas: Report : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-10-19|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |स्वीट ड्रीम्स |विक्टर मुखर्जी |अमोल पराशर, मिथिला पलकर | |<ref>{{Cite web|url=https://www.ottplay.com/news/sweet-dreams-mithila-palkar-amol-parashar-tease-surreal-love-story-ott-release-date-out/f151e614e4554|title=Sweet Dreams announcement: Mithila Palkar and Amol Parashar tease a surreal love story; OTT release date out|website=OTTPlay|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | style="text-align: center;" |28 |ध स्टोरीटेलर |अनंत महादेवा |[[परेश रावल]], आदिल हुसैन, रेवती, तननिष्ठा चैटर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/amp/entertainment/disney-hotstar-to-stream-paresh-rawal-starrer-the-storyteller-from-january-28/cid/2077842|title=Paresh Rawal-starrer ‘The Storyteller' to premiere on Disney+ Hotstar on January 28}}</ref> |- | style="text-align: center;" |31 |देवा |रोशन एंड्रू |[[शाहिद कपूर]], [[पूजा हेगड़े]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/shahid-kapoor-pooja-hegde-starrer-deva-gets-preponed-release-january/|title=Shahid Kapoor – Pooja Hegde starrer Deva gets preponed; to release in January : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2024-11-27|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="13" style="text-align: center;" |फेब्रुअरी | rowspan="4" style="text-align: center;" |7 |लवयापा |अदवैत चन्दन |ख़ुशी कपूर, जुनैद खान | |<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/junaid-khan-khushi-kapoor-new-film-loveyapa-release-2025-2655780-2024-12-26|title=Junaid Khan and Khushi Kapoor's next titled Loveyapa, to release in 2025|last=Desk|first=India Today Entertainment|date=2024-12-26|website=India Today|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बेडएस रवि कुमार |कैथ गोम्स |[[हिमेश रेशमिया]], [[प्रभु देवा]] | |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/badass-ravikumar-trailer-unveiled-january-5-himesh-reshammiya-starrer-release-february-7-2025/|title=Badass Ravikumar trailer to be unveiled on January 5; Himesh Reshammiya starrer to release on February 7, 2025 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-01-03|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |मिसिस |आरती कदव |सैन्य मल्होत्रा, निशांत दहिया | |<ref>{{Cite web|url=https://theprint.in/feature/mrs-starring-sanya-malhotra-to-release-on-zee5-on-february-7/2463109/|title=‘Mrs’ starring Sanya Malhotra to release on ZEE5 on February 7}}</ref> |- |ध मेहता बॉयज |बोमन ईरानी |बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी | | |- | style="text-align: center;" |11 |बॉबी और ऋषि की लवस्टोरी |कुणाल कोहली |वर्धन पूरी, कावेरी कपूर |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |14 |छावा |लक्समी उठकर | | |- |धूम धाम |रिषभ सेठ |प्रतिक गाँधी, यामी गौतम |- | rowspan="2" style="text-align: center;" |21 |मेरे हस्बैंड की बीवी |मुदस्सर अज़ीज़ |अर्जुन कपूर, रकुल प्रीत सिंघ |- |कौशलजीस वर्सेस कौशल |सीमा देसाई |आशुतोष राणा, शीबा चढ़ा |- | rowspan="4" style="text-align: center;" |28 |शैला |सकी शाह |रोहित चौधरी, सारा खान |- |क्रेजी |गिरीश कोहली |सोहम शाह |- |सुपरबॉयस ऑफ़ मालेगाव |रीमा कागती |आदर्श गौरव, विनीत कुमार सिंघ |- |दिल दोस्ती और डॉगस |वाइराल शाह |नीना गुप्ता,शरद केलकर |- | rowspan="11" style="text-align: center;" |मार्च | rowspan="2" style="text-align: center;" |7 |नादाननीया |सुना गोतम |एबराइम अली खान,खुसी कपूर |- |रीवाज़ |मनोज साटी |अनीता राज, जाया प्रदा |- | rowspan="5" style="text-align: center;" |14 |द डिपलोमेट |शिवम नायर |जॉन इब्राहीम, सादीया खातीब |- |माय मेलबन |कबीर खान, रीमा दास ,ओनिर , इंमतीयाज अली |जेक रीयन, अरका दास |- |बी हैप्पी |रेमो डी सौजा |नोरा फतेही, नसर |- |इन गलियो मे |अविनाश दास |विवान शाह, जावेद जाफरी |- |आचारी बा |हार्दिक गुज्जर |नीना गुप्ता, कबीर बेदी | | |- | rowspan="3" style="text-align: center;" |21 |बाईदा |पुनीत शर्मा |मनीषा राय,शोबित सूजय |- |तुम को मेरी कसम |विक्रम भट्ट |अनुपम खेर, अदाह शर्मा |- |पिन्टू की पप्पी |शिव हरे |शुशान्त, जानया जोशी |- | style="text-align: center;" |30 |सिकन्दर |ऐ आर मुरगूँदाश |सलमान खान, काजल अगरवाल |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''प्रारंभिक''' ! style="width:18%;" |'''शीर्षक''' ! style="width:10.5%;" |'''निर्देशक''' ! style="width:30%;" |'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- | style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |जात |गोपीचन्द मलिनेनी |सनी देओल, रणदीप हूदा |मीथ्री मूवी मकर्स, पीपल मीडिया फैक्ट्री | |- | style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |11 | style="text-align:center;" |छोरी 2 |विशाल फुरिया |सोह अली खान, कुलदीप सरीन | | |- | style="text-align:center; background:#93CCEA; textcolor:#000;" |<big>जून</big> | style="text-align:center;background:#B0E0E6;" | | style="text-align:center;" |केसरी चैप्टर 2 |करन सिंघ त्यागी |अक्षय कुमार, अनन्या पंड्या | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |18 | style="text-align: center;" |लोगोउट |अमित गोलानी |बबली खान, निमिषा नायर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध सीक्रिट ऑफ देवकाली |नीरज चौहान |भूमिका गुरुङ, महेश मांजरेकर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ग्राउन्ड ज़ीरो |तेजस प्रभा विजय देओसकर |एमरान हास्मी, जोया हुसैन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |जेवल थीफ |कूकले गुलाटी रोबबले गरेवल |सैफ अली खान, निकिता दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |फुले |अनंत महादेवन |प्रतीक गांधी, पत्रलेखा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ओए भूतनी के |अजय कैलाश यादव |अशोक ठाकुर, निकिता शर्मा | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |रैड 2 |राज कुमार |अजय देवगन, वाणी कपूर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |1 | style="text-align: center;" |ध भूतनी |सिद्धांत सचदेव |संजय दुतत, मौनी रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |कोसतों |सेजल शाह |प्रिया बापट, किशोर कुमार जी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |ध नेट वर्कर |विकास कुमार |ऋषभ पाठक, निखट खान | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |16 | style="text-align: center;" |रोमियो एस 3 |गुड्डू धनाओ |ठाकुर अनूपसीग, पलक तिवारी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूल चूख माफ |करन शर्मा |राजकुमार राव, वामिक गबबी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |कपकपी |संगीथ सीवन |तुषार कपूर, जय ठक्कर | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |पुणे हाइवै |राहुल डा कुनहा -बुगस भार्गव |जिम सरभ, अमित साध | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |केसरी वीर |प्रिंस धीमान |सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |30 | style="text-align: center;" |चिड़िया |मेहरण अमरोही |विनय पाठक, अमृता सुभास | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |इंटेरोगटीऑन |अजय वर्मा राजा |मनु सिंघ, राजपाल यादव | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |स्टॉलें |करन तेजपाल |हरीश खन्ना, शुभम वर्धन | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |6 | style="text-align: center;" |हाउस फूल 5 |तरुण मंसूखानी |अक्षय कुमार, संजय दुत्ता | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |20 | style="text-align: center;" |सितारे जमीन पर |आर । एस प्रसंना |आमिर खान, गेनएलिया देशमुख | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |25 | style="text-align: center;" |डाटेकतिवे शेरडी |रवि छबरिया |डायना पेन्टी, बोमन ईरानी | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मा |विशाल फुरिया |काजोल, रोहित रॉय | | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |27 | style="text-align: center;" |वेल डन सी ए साहब |सर्वेश कुमार सिंग |ज्योति कपूर, निशमा सोनी | | |} == जुलाई-सितम्बर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''कलाकार''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |जुलाई | |मेट्रो .. इन दिनों |अनुराग बासु |सारा अली खान, नीना गुप्ता | | |- | |4 |कालीधर लापता |मधुमिता |अभिषेक बच्चन, दैविक भरगेला | | |- | | |अक्षरधाम :ऑपरेशन वज्र शक्ति |केन घोष |अक्षय खंना, विवेक दानिया | | |- | | |मालिक |पुलकित |राजकुमार राव, मानुषी चिल्लर | | |- | |11 |आँखों कि गुस्ताखिया |संतोष सिंघ |विक्रांत माससेर, शनाया कपूर | | |- | | |आप जेसया कोई |विवेक सोनी |आर माधवन, फातिमा सन शैकह | | |- | | |सैयारा |मोहित सूरी |आहान पांडे , अनीत पदड़े | | |- | | |तन्वी ध ग्रेट |अनुपम खेर |जैकी श्रॉफ, अरविद स्वामी | | |- | |18 |निकिता रॉय |कुसश सहिहा |अर्जुन रामपाल, परेश रावल | | |- | | |मुरदेरबाद |अर्नब चैटर्जी |शारीब हाशमी, सलोनी बतरा | | |- | | |संत तुकाराम |आदित्य ओम |संजय मिश्रा, अरुण गोविल | | |- | | |महावातार नरसिंह |आश्विन कुमार |ऐनमैटिड चरकटर्स | | |- | | |सो लॉंग वाईए |मन सिंघ |विक्रम कोछर, पंकज चोंधरी | | |- | |25 |सरजमीं |कयोजे ईरानी |काजोल, ईभरानीम खान | | |- | | |रस |अंगीथ जयराज |रिशि बिस्सा, राजीव कुमार | | |- | |1 |धडक 2 |शाज़िया इकबाल |सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति दिमर | | |- | | |सन ऑफ सरदार 2 |विजय कुमार अरोरा |अजय देवगन, मृणाल ठाकुर | | |- | | |अंदाज 2 |सुनील दर्शन |आयुष कुमार, अकाइशा | | |- | |8 |उदीपुर फिलेस |भरत श्रीनात |विजय राज, कमलेश सावंत | | |- | | |घिच पिच |अंकुर सिंगल |नितेश पांडे, कबीर नंदा | | |- | |14 |वर 2 |आयन मुकर्जी |हाइथिक रोशन, किअर अद्वाणी | | |- | | |तेहरान |अरुण गोपालन |जॉन अब्राहन, नीता बाजवा | | |- | | |परम सुंदरी |तुषार जलोट |नीरू बाजवा, जॉन अब्राहम | | |- | |29 |सॉन्ग्स ऑफ पैरडाइस |डैनिश रेनजू |सोनी राज़दान, जैन खान | | |- | | |बागी -4 |ए हर्षा |टाइगर श्रॉफफ, संजय दुतत | | |- | | |ध बेनगु फिलेस |विवेक मंडलेकर |अनुपम खेर, पुनीत इससर | | |- | |5 |इन्स्पेक्टर जेंडे |चिन्मय मंडलेकर |जिम सरभ, मनोज बजपायी | | |- | | |उफ्फ़ यह सियापा |जी अशोक |सोहम शाह, नॉर फतेही | | |- | | |हुमन्स इन ध लूप |अरण्या सहे |सोनल मधुशानकर, गीत गुहा | | |- | | |हीर एक्स्प्रेस |उमेस शुक्ला |दिविता जुनेजा, संजय मिश्रा | | |- | | |लव इन वीतहम |राहुल शान |शताणु महेश्वरी, अवनीत कौर | | |- | |12 |एक चतुर नार |उमेश शुक्ला |दिव्या खोसला, नील नितिन मुकेश | | |- | | |जुगनुमा : ध फैबल |राम रेड्डी |दीपक डब्रियाल, प्रियंका भासे | | |- | | |आबीर गुलाल |आरती एस बागड़ी |फवाद खान, वानी कपूर | | |- | | |मन्नू क्या करेगा |संजय त्रिपाठी |व्योम यादव, विनय पाठक | | |- | | |जोली ऐल ऐल बी -3 |सुभाष कपूर |अक्षय कुमार, हुमा कुरेशी | | |- | | |निशानची |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |- | | |अजेय : ध ऊंटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी |रवीन्द्र गौतम |अनंत जोशी, परेश रावल | | |- | |26 |होम बौंड़ |नीरज घेवन |ईशान खटतेर, विशाल जेठवा | | |- | | |तू मेरी पूरी कहानी |सहूरिता दास |शम्मी दुहां, आरहानं पटेल | | |} == अक्टूबर-दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''प्रारंभिक''' !'''शीर्षक''' !'''निर्देशक''' !'''ढालना''' !स्टूडियो (प्रोडक्शन हाउस) !संदर्भ। |- |ऑक्टोबर |2 |सनी संस्कारी कि तुलसी कुमारी |शशांक खैतन |वरुण धवन, जानवी कपूर | | |- | |10 |लॉर्ड कुरजों कि हवेली |अंशुमान जहा |अर्जुन माथुर, जोहा रहमान | | |- | | |कोन्टरल |सफ़दर अब्बास |ठाकुर अनूप सिंघ, आयेश कड़ुकर | | |- | | |भागवत : चैप्टर वन राक्षस |अक्षय शेरे |अरशद वर्सी, जितेन्द्र कुमार | | |- | |17 |गरीयतेर कलेश |आदित्य चंडीओक |एहसास छानना,सुप्रिया शुक्ला | | |- | | |विंग मन (ध यूनवर्सल आइरनी ऑफ लव) |अनुज गुलाटी |शशांक अरोरा, त्रिमला अधिकारी | | |- | |21 |ठमम |आदित्य सर्पोटदार |परेश रावल, आयुष्मान खुर्राना | | |- | | |एक दीवाने कि दीवनीयत |मिलाप जवेरी |हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा | | |- | |31 |ध ताज स्टोरी |तुषार आमिश गोयल |परेश रावल, जाकिर हूससड़ीं | | |- | | |सिंगगल सलमा |नचिकेत सामंत |हुमा कुरेशी,सनी सिंघ | | |- | |7 |हक |सुपां वर्मा |एमरान हास्मी, यमी गौतम | | |- | | |जस्सी वेड्स जस्सी |परन बावा |रहमत रैटैन, रणवीर शोरए | | |- | | |बारामुला |आदित्य सुहास |मानव कुल, भाषा सुंबाली | | |- | | |दे दे प्यार दे 2 |अंशुल शर्मा |राकुल प्रीत, अजय देवगन | | |- | | |आग्रा |कनू बही |मोहित अगर्वल, रूहानी शर्मा | | |- | |14 |दिल्ली |देवेन्द्र मालवीय |बृजेन्द्र कला, समर जय सिंघ | | |- | | |काल ट्रिगहोरी |नितिन वैद्य |अरबाज़ खान, राजेश शर्मा | | |- | | |निशानची 2 |अनुराग कश्यप |मोनिका पनवार, वेदिका पिन्टो | | |} == सन्दर्भ == <references /> [[श्रेणी:हिन्दी फ़िल्में वर्षानुसार]] qvu9o0c0v43asxysoekp6wtkc2eqcol 2026 की हिंदी फिल्मों की सूची 0 1604962 6536750 6532579 2026-04-06T05:03:56Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536750 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी | |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ | | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी | |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद | | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला | | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> n5zr198f2jsquny32x7ikr746tzai1n 6536764 6536750 2026-04-06T05:18:36Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536764 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ | | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी | |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद | | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला | | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> c8ejtdypu1h7es0g7tdgnvcchq4cmqu 6536786 6536764 2026-04-06T05:45:40Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च * addes detels 6536786 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी | |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद | | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला | | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> jghvbrwn6hjmr78017tgs4f8zh1ooe0 6536792 6536786 2026-04-06T06:00:31Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536792 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद | | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला | | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 6l51sd152c8ph9ynho8sju8kbylwt3d 6536806 6536792 2026-04-06T06:14:39Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536806 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला | | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> boj0xnwu14r06uoobkj2j7rv2jgy7og 6536810 6536806 2026-04-06T06:28:34Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536810 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे | | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> s2nultvx8ky4nl4p7bkf5j2ewuuvd48 6536814 6536810 2026-04-06T06:35:28Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536814 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर | | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 82ztx6v64hic0xm8vbbcoy8ncwxaimg 6536819 6536814 2026-04-06T06:43:47Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536819 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर | | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 5pwjfwggla8pituj49gnk24kzu2cl7g 6536824 6536819 2026-04-06T06:51:59Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536824 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर | | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> rc836l3winaogcbw7u6ot43tj03hlpf 6536831 6536824 2026-04-06T06:59:32Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536831 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर |जा स्टुडियोस , रंकोरप मेडिया | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | | | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 59oue5b3sxk2lpirpyjegfweplc1c1z 6536842 6536831 2026-04-06T07:06:52Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536842 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर |जा स्टुडियोस , रंकोरप मेडिया | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | |सन्शाइन पिक्चर्स | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त | | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> mhcoiwyt9mtejevkydhaq1mi9uqwmgr 6536859 6536842 2026-04-06T07:16:41Z MovieLoverFan 505761 /* जनवरी-मार्च */ Added details 6536859 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर |जा स्टुडियोस , रंकोरप मेडिया | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | |सन्शाइन पिक्चर्स | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त |बी 62 स्टूडियो, जिओ स्टुडियोस | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव | |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 4gz1pry9c1n38shiyq6tj2y25i9akp7 6536873 6536859 2026-04-06T07:23:31Z MovieLoverFan 505761 /* अप्रैल-जून */ Added details 6536873 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर |जा स्टुडियोस , रंकोरप मेडिया | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | |सन्शाइन पिक्चर्स | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त |बी 62 स्टूडियो, जिओ स्टुडियोस | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख | |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव |बालाजी मोटीऑनस पिक्चर्स |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> 61ceon524mjxp4tyhnvus9sdffpj6y6 6536937 6536873 2026-04-06T10:43:21Z MovieLoverFan 505761 /* अप्रैल-जून */ Added details 6536937 wikitext text/x-wiki <ref name="">  </ref>यह सूचि उन [[हिंदी फ़िल्मों|हिंदी फिल्मों]] की है जो 2026 में रिलीज़ होने वाली है! == जनवरी-मार्च == {| class="wikitable" ! colspan="2" |Opening !Title !Director !Cast !Studio (production house) !<abbr>Ref.</abbr> |- | rowspan="12" |'''जनवरी''' |1 |[[इक्कीस (फिल्म)|इक्कीस]] |श्रीराम राघवन |[[धर्मेन्द्र]], अगस्त्य नंदा, [[जयदीप अहलावत]], सिमर भाटिया |मदड़ोकक फिल्म्स, मैचबॉक्स पिक्चर्स |<ref>{{Cite web|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/ikkis-release-postponed-agastya-nanda-starrer-will-now-become-first-release-january-2026/|title=Ikkis release postponed: Agastya Nanda starrer will now become the first release of January 2026 : Bollywood News - Bollywood Hungama|last=Hungama|first=Bollywood|date=2025-12-17|language=en|access-date=2026-01-16}}</ref> |- |2 |[[आजाद भारत]] |रूपा अय्यर |[[श्रेयस तलपड़े|श्रेयश तलपड़े]], रूपा अय्यर, [[सुरेश ओबेरॉय]], इंदिरा तिवारी |जी स्टुडियोस, इंडिया क्लाससिक आर्ट्स, ट्रांसइंडिया मीडिया |<ref>{{Cite web|url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2025/Dec/02/kannadanews2025dec01roopa-iyers-hindi-film-azaad-bharat-locks-release-date|title=Roopa Iyer’s Hindi film Azaad Bharat locks release date|last=Sharadhaa|first=A.|date=2025-12-02|website=The New Indian Express|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- | rowspan="5" |'''16''' |''[[राहू केतु (फिल्म)|राहू केतु]]'' |विपुल विग |[[पुलकित सम्राट|पुलकित सम्राट,]] [[वरुण शर्मा]], शालिनी पांडे |जी स्टूडियोज, ब्लिव प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/rahu-ketu/ET00462933?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Rahu Ketu (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- |हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस |वीर दास , कवि शास्त्री |[[वीर दास]], मोना सिंघ, मिथिला पालकर, शारीब हाशमी |पी के एस फिल्म्स प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/happy-patel-announcement-aamir-khan-beats-up-vir-das-over-his-flop-spy-film-for-bringing-up-laal-singh-chaddha-101764740922383.html|title=Happy Patel announcement: Aamir Khan beats up Vir Das over his ‘flop’ spy film, for bringing up Laal Singh Chaddha|date=2025-12-03|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |बिहू अटैक |सुजाद इक़बाल खान |देव मनारिआ, [[अरबाज़ ख़ान|अरबाज़ खान]], राहुल देव | |<ref>{{Cite web|url=https://www.deccanchronicle.com/entertainment/dev-menaria-breaks-debut-norms-with-high-stakes-army-action-film-bihu-attack-1925584|title=Assam Takes Centre Stage as Dev Menaria Debuts with Action Drama Bihu Attack|last=Correspondent|first=D. C.|date=2025-12-22|website=www.deccanchronicle.com|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |वन टु चा चा चा |अभिषेक राज, रजनीश ठाकुर |ललित प्रभाकर, नायरा बेनर्जी |पेलूकीदार प्रोडक्शन |<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/business/bollywoods-new-comedy-storm-one-two-cha-cha-chaa-arrives-on-16th-january-2026/|title=Bollywoods New Comedy Storm--One Two Cha Cha Chaa Arrives on 16th January 2026|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-01-17}}</ref> |- |साफिया |बाबा अज़ीम |[[नसीरुद्दीन शाह|नसरुदीन शाह]], कंवलजीत सिंघ |आजममि पिक्चर्स | |- |'''23''' |''बॉर्डर २'' |अनुराग सिंह | * [[सनी देओल]] * [[वरुण धवन]] * [[अहान शेट्टी]] * दिलजीत दोसांझ * सोनम बाजवा * मेधा राणा |T-Series Films, J. P. Films |<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2024/film/news/varun-dhawan-sunny-deol-border-2-1236116099/|title=Varun Dhawan Joins Sunny Deol in Cast of Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2024-08-23|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/diljit-dosanjh-joins-sunny-deols-border-2-as-fauji-101725606527662.html|title=Diljit Dosanjh joins Border 2 after Varun Dhawan, fans say Sunny Deol is assembling desi 'Avengers’ for his movie|date=2024-09-06|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/border-2/ET00401449?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Border 2 (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/news/varun-dhawan-medha-rana-border-2-1236471483/|title=Varun Dhawan Joined by Medha Rana in Bollywood War Epic ‘Border 2’ (EXCLUSIVE)|last=Ramachandran|first=Naman|date=2025-07-28|website=Variety|language=en-US|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="4" |30 |गाँधी टॉक्स |किशोर पांडुरंग बेलकर |विजय सेतुपति, अदिति राव हैदरी |जी स्टूडियोज |<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/vijay-sethupathi-aditi-rao-hydari-starrer-gandhi-talks-gets-release-date/article70466889.ece|title=Vijay Sethupathi-starrer 'Gandhi Talks' gets release date|last=PTI|date=2026-01-03|work=The Hindu|access-date=2026-01-17|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> |- |''ह्यूमन कोकैने'' |सरीम मोमिन | *पुष्कर जोग * इशिता राज * सिद्धांत कपूर * जाकिर हुसैन | | |- |मायासभा |राही अनिल बारवे |जावीद जाफरी, मोहम्मद समद |ध थर्ड आई क्रेटिवे फिल्म्स | |- |[[मर्दानी 3]] |अभिराज मीनावाला |रानी मुखर्जी, जानकी बोनिवाला |यश राज फिल्म्स | |- | rowspan="8" |फेबुआरी | rowspan="3" |6 |वध 2 |जसपाल सिंघ संधु |संजय मिश्रा, नीना गुप्ता | | |- |भाभीजी घर पर है फन ऑन ध रन |शशांक बाली |आसिफ शैख़, शुभानजी अत्रे |जी सिनेमा | |- |''होंटेड 3डी - घोस्ट ऑफ़ ध पास्ट'' |[[विक्रम भट्ट]] | * Mahaakshay Chakraborty * चेतना पांडे |Anand Pandit Motion Pictures |<ref>{{Cite web|url=https://in.bookmyshow.com/movies/mumbai/haunted-3d-ghosts-of-the-past/ET00442151?utm_source=FBLIKE&fbrefresh=1|title=Haunted 3D: Ghosts of the Past (2026) - Movie {{!}} Reviews, Cast & Release Date in Mumbai|website=BookMyShow|language=en-IN|access-date=2025-11-21}}</ref> |- | rowspan="2" |13 |[[तू या में (Review)|तू या में]] |बिजॉय नम्बिआर |आदर्श गौरव, शान्या कपूर |कलर येलो प्रोडक्शन | |- |ओ रोमियो |विशाल भरद्वाज |शहीद कपूर, नाना पाटेकर |नादियादवाला ग्रैन्सन एंटेरटैनमेंट | |- |19 |वीर मुरारबाजी ध बेटल ऑफ़ पुरन्दर |अजय अनिरुद्ध |अंकित मोहन, सौरभ राज जैन | | |- |20 |[[दो दीवाने सहर में]] |रवि उद्यावर |सिद्धांत चतुर्वेदी, म्रुनाल ठाकुर |जा स्टुडियोस , रंकोरप मेडिया | |- |27 |बियॉन्ड ध करेला स्टोरी |कामख्या नारायण सिंघ | |सन्शाइन पिक्चर्स | |- | rowspan="4" |मार्च |4 |पति पत्नी और वो दो |मूदसर अज़ीज़ |सारा अली खान, वामिका गिबबी | | |- |13 |गबरू |शहसाक उदापुरकर |सनी देओल, सिमरन बग्गा | | |- | rowspan="2" |19 |डाइसोट: अ लव स्टोरी |सेनियल डीओ |अडवी सेस, मृणाल ठाकुर | | |- |[[धुरंधर: द रिवेंज]] |आदित्य धार |रणवीर सिंग, संजय दत्त |बी 62 स्टूडियो, जिओ स्टुडियोस | |} == अप्रैल-जून == {| class="wikitable" ! colspan="2" style="width:6%;" |'''Date''' ! style="width:18%;" |'''Title''' ! style="width:10.5%;" |'''Director''' ! style="width:30%;" |'''Cast''' !Studio (Production Company) |- | rowspan="3" style="text-align:center; background:plum;" |<big>अप्रैल</big> | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |10 | style="text-align:center;" |''चांद मेरा दिल'' |विवेक सोनी |लकस्या लालवानी, अनाया पांडे | |- | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |अनटाइटल्ड फ़िल्म | style="text-align: center;" |इम्तियाज़ अली |दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह,शरवरी |विंडो सीट फ़िल्म्स |- | style="text-align:center;background:#f1daf1;" |'''17''' | style="text-align:center;" |बेटल ऑफ गलवान |अपूर्व लखिया |सलमान खान, चित्रगंड शिंग | |- | rowspan="2" style="text-align:center; background:#7FFFD4; textcolor:#000;" |<big>मई</big> | style="text-align:center;background:#dbfff8;" |'''1''' | style="text-align:center;" |राज शिवाजी |रितेश देशमुख |रितेश देशमुख |जिओ स्टूडियो, मुंबई फिल्म कंपनी |- | style="text-align:center;background:#dbfff8;" | | style="text-align:center;" |एक दिन |सुनील पांडे |जुनेद खान, साइ पल्लवी | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |15 | style="text-align: center;" |विवान फोर्स थे फॉरेस्ट |अरुनभ कुमार |सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमना भाटिया | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |भूत बग़ला |प्रियदर्शन |अक्षय कुमार, राजपाल यादव |बालाजी मोटीऑनस पिक्चर्स |- | | |Haiwaan |Priyadarshan |Akshay Kumar Saif Ali Khan |Walt Disney Pictures |- | style="text-align: center;" |जून | style="text-align: center;" |5 | style="text-align: center;" |है जवानी तो इश्क होना चाहिए |डेविड धवन |वरुण धवन, पूजा हेगड़े | |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |12 | style="text-align: center;" |धमाल 4 |इंद्र कुमार |अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी |टी सीरीज़ फ़िल्म्स, पैनोरमा स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |31 | style="text-align: center;" |साइड हीरोज़ |संजय त्रिपाठी |अभिषेक बनर्जी , अपारशक्ति खुराना |महावीर जैन फ़िल्म्स |- | style="text-align: center;" |अगस्त | style="text-align: center;" |14 | style="text-align: center;" |नागज़िला |मृगदीप सिंह लांबा |कार्तिक आर्यन रवि किशन |धर्मा प्रोडक्शंस |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |लव & वार |संजय लीला भंसाली |रणबीर कपूर आलिया भट्ट |जियो स्टूडियोज़ |- | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" | | style="text-align: center;" |मैं भी अर्जुन: पर्व |डॉ. कृपेश ठक्कर |पर्व, वाचा, डॉ. कृपेश ठक्कर |कृप प्रोडक्शंस |} == अक्टूबर - दिसंबर == {| class="wikitable" ! colspan="2" |'''Date''' !'''Title''' !'''Director''' !'''Cast''' !Studio (Production Company) |- |अक्टूबर |2 |दृश्यम 3 |अभिषेक पाठक |अजय देवगन जैदीप अहलावत |स्टार स्टूडियो18 |- |नवंबर |6 |रामायण पार्ट 1 |नितेश तिवारी |रणबीर कपूर यश |प्राइम फोकस स्टूडियोज़ |- |दिसंबर |4 |Ranger |Jagan Shakti |Ajay Devgn |Devgn Films<ref>{{Cite web |date=19 February 2026 |title=Devgn Films - Good Co. - Star Studio18 - Jio Studios; Ranger Ajay Devgn Tamanaah Bhatia and Villain Prakash Raj starrer to release on December 4, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/devgn-films-good-co-star-studio18-jio-studios-ranger-ajay-devgn-tamanaah-bhatia-and-villain-prakash-raj-starrer-release-december-4-2026-announcement/|publisher=Bollywood Hungama|access-date=19 February 2026|archive-date=19 February 2026}}</ref> |- | |24 |शक्ति शालिनी |अजितपाल सिंह |अनीत पड्डा |मैडॉक फ़िल्म्स<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=23 February 2026 |title=Jio Studios - Maddock Films; Varun Dhawan and Shraddha Kapoor starrer Villain Role: Manoj Bajpayee Shakti Shalini to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/jio-studios-maddock-films-varun-dhawan-and-shraddha-kapoor-starrer-villain-role-manoj-bajpayee-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=23 February 2026|archive-date=23 February 2026}}</ref> |- | | |किंग |सिद्धार्थ आनंद |शाहरुख़ ख़ान सुहाना ख़ान |रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट |- | | |Mahabharat |Anukalp Goswami |Aamir Khan |T-Series Films<ref>{{Cite web |last=Adarsh |first=Taran |date=11 March 2026 |title=T-Series Films; Mahabharat Aamir Khan and Asin starrer other cast Manoj Pahwa Paresh Rawal Tiku Talsania Vijay Patkar Christmas to release on December 24, 2026; announcement|url=https://www.bollywoodhungama.com/news/bollywood/taran_adarsh/t-series-films-mahabharat-aamir-khan-and-asin-starrer-other-cast-manoj-pahwa-paresh-rawal-tiku-talsania-vijay-patkar-christmas-release-december-24-2026-announcement/|publisher=Facebook|access-date=11 March 2026|archive-date=11 March 2026}}</ref> of8q94tqwcxqk0hdgxfj6obmulv3hc7 अमांडा जेन जेनिंग्स 0 1604988 6536602 6515227 2026-04-05T14:34:31Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536602 wikitext text/x-wiki {{Infobox sportsperson | name = अमांडा जेन जेनिंग्स | image = XXXX15 - Amanda Reynolds - 3b - 2016 Team processing.jpg | headercolor = lightgreen | textcolor = yellow | caption = 2016 ऑस्ट्रेलियाई पैरालंपिक टीम का चित्र | full_name = | nickname = | nationality = {{AUS}} | club = | collegeteam = | birth_date ={{birth date and age|1971|10|7|df=yes}} | birth_place = | death_date = | death_place = | height = | weight = | sport = पैराकेनो | disability_class = | medaltemplates = {{Medal|Sport| पैराकेनोइंग}} {{MedalCountry| {{AUS}}}} {{Medal|Competition| [[पैरालंपिक खेल]]}} {{MedalSilver| [[2016 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक|2016 रियो डी जेनेरो]] | KL3 }} {{Medal|Competition| विश्व चैंपियनशिप}} {{MedalGold| 2015 मिलान | KL3}} {{MedalGold| 2017 राचिसे | KL3}} {{MedalSilver| 2016 डुइसबर्ग | KL3}} {{MedalSilver| 2018 मोंटेमोर-ओ-वेल्हो | KL3}} {{MedalBronze| 2014 मास्को | K-1 LTA}} }} '''अमांडा जेन "एजे" जेनिंग्स''' (पूर्व में रेनॉल्ड्स,<ref>{{Cite web |title=AJ Jennings |url=https://www.paralympic.org.au/athlete/aj-jennings/ |url-status=live |access-date=6 June 2021 |website=Paralympics Australia |archive-url=https://web.archive.org/web/20210606020752/https://www.paralympic.org.au/athlete/aj-jennings/ |archive-date=6 June 2021}}</ref> जन्म 7 अक्टूबर 1971)<ref name=auscanoe>{{cite web |title=Amanda Reynolds |url=http://www.canoe.org.au/?Page=27574&MenuID=High%5FPerformance%2F96%2F0%2CCanoe%5FSprint%2F75%2F7231%2CAthlete%5FProfiles%2F20984%2F0%2F%2CParcanoe%2F21569%2F0%2F0 |website=Australian Canoeing website |access-date=23 August 2014 |archive-date=3 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140903072032/http://www.canoe.org.au/?Page=27574&MenuID=High_Performance/96/0,Canoe_Sprint/75/7231,Athlete_Profiles/20984/0/,Parcanoe/21569/0/0 |url-status=dead }}</ref> एक ऑस्ट्रेलियाई [[पैराकेनोइस्ट]] और पैरा [[तीरंदाज]] हैं। उन्होंने आईसीएफ कैनो स्प्रिंट वर्ल्ड चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और 2016 रियो पैरालिंपिक में महिलाओं की 200 मीटर केएल3 स्पर्धा में रजत पदक जीता।<ref>{{cite web |title=World Champions headline first Australian Paralympic Canoe Team |url=https://www.paralympic.org.au/world-champions-headline-first-australian-paralympic-canoe-team/ |website=Australian Paralympic Committee News, 16 June 2016 |access-date=16 June 2016}}</ref><ref name="rio">{{cite web |title=Amanda Reynolds |url=https://www.rio2016.com/en/paralympics/athlete/amanda-reynolds |website=Rio Paralympics Official site |access-date=16 September 2016 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20160922225036/https://www.rio2016.com/en/paralympics/athlete/amanda-reynolds |archive-date=22 September 2016}}</ref> उन्होंने 2024 पेरिस पैरालिंपिक में तीरंदाजी में भाग लिया।<ref>{{Cite web |date=2024-06-21 |title=Governor-General Hosts Paralympic Archery Team Announcement {{!}} Paralympics Australia |url=https://www.paralympic.org.au/2024/06/governor-general-hosts-paralympic-archery-team-announcement/ |access-date=2024-06-24 |website=www.paralympic.org.au |language=en-AU}}</ref> ==व्यक्तिगत== जेनिंग्स का जन्म 7 अक्टूबर 1971 को हुआ था।<ref name=auscanoe/> अप्रैल 2012 में जेनिंग्स ने अपने दाहिने पैर के निचले हिस्से को काटने के लिए वैकल्पिक सर्जरी करवाई।<ref name=7News>{{cite news |last1=O'Sullivan |first1=Karen |title=Vic amputee chases Paralympic dream |url=https://au.news.yahoo.com/vic/a/23479048/vic-amputee-chases-paralympic-dream/ |access-date=23 August 2014 |work=7News Melbourne |date=13 May 2014}}</ref> घुटने के उखड़ने से उत्पन्न जटिलताओं के कारण जेनिंग्स को 20 वर्षों तक अवसाद, दीर्घकालिक दर्द और दवाओं की लत के साथ रहना पड़ा।<ref name=7News/> अंग-विच्छेदन के बाद के जीवन पर विचार करते हुए जेनिंग्स ने कहा: "हर किसी को अवसर मिलता है। बस आपको इसे स्वीकार करने का साहस रखना होगा।"<ref name=7News/> वह एक अश्व-खेल चिकित्सक हैं। जेनिंग्स का विवाह वेन से हुआ है और उनके दो बच्चे हैं।<ref name="ranges">{{cite news |last1=Bills |first1=Rebecca |title=Amanda Reynolds has been selected for the Australian Paraylmpic Team |url=http://rangestrader.starcommunity.com.au/mail/2014-04-07/national-champ |access-date=23 August 2014 |work=Rangers Trader |date=4 July 2014}}</ref> ==खेल करियर== ===कैनोइंग=== जेनिंग्स को वर्गीकृत KL3 पैराकैनोइस्ट के रूप में वर्गीकृत किया गया है। रेनॉल्ड्स का पैडलिंग करियर मरे मैराथन<ref name=auscanoe/> से शुरू हुआ और उन्होंने 2013 सेल टू सी डिसेबिलिटी कयाक चैलेंज में भाग लिया।<ref>{{cite news |title=Sale to Sea challenge conquered |url=http://www.gippslandtimes.com.au/story/1370997/sale-to-sea-challenge-conquered/ |access-date=23 August 2014 |work=Gippsland Times |date=18 March 2013 |archive-date=3 सितंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140903061003/http://www.gippslandtimes.com.au/story/1370997/sale-to-sea-challenge-conquered/ |url-status=dead }}</ref> 2014 में, उन्होंने राष्ट्रीय और ओशिनिया चैंपियनशिप में K1 200 मीटर, K1 500 मीटर और 1000 मीटर LTA स्पर्धाएँ जीतीं। विश्व चैंपियनशिप में अपने पहले प्रदर्शन में, उन्होंने [[मॉस्को]], [[रूस]] में आयोजित 2014 ICF कैनो स्प्रिंट विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं की K1 200 मीटर LTA स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। [[मिलान]], [[इटली]] में आयोजित 2015 ICF कैनो स्प्रिंट विश्व चैंपियनशिप में, उन्होंने महिलाओं की K-1 200 मीटर KL3 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।<ref name=acnews>{{cite web |title=Reynolds wina Australia's first gold at World Championships |url=http://canoe.org.au/2015/08/21/reynolds-wins-australias-first-gold-at-world-championships/ |website=Australian Canoeing News, 21 August 2015 |access-date=23 August 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150821062435/http://canoe.org.au/2015/08/21/reynolds-wins-australias-first-gold-at-world-championships/ |archive-date=21 August 2015 |url-status=dead |df=dmy-all}}</ref> 2016 आईसीएफ पैराकेनो विश्व चैंपियनशिप, डुइसबर्ग, [[जर्मनी]] में, उन्होंने महिलाओं की 200 मीटर केएल3 में रजत पदक जीता।<ref name="wc2016">{{cite web |title=McGrath snaps Swoboda's Worlds winning streak |url=https://www.paralympic.org/news/mcgrath-snaps-swoboda-s-worlds-winning-streak |website=International Paralympic Committee website |access-date=19 May 2016}}</ref> चैंपियनशिप से एक महीने पहले, उनका अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ था।<ref>{{cite web |title=Another Honour for Reynolds (AUS) |url=http://www.canoeicf.com/news/another-honour-reynolds-aus |website=International Canoe Federation website |access-date=19 May 2016}}</ref> उन्होंने [[2016 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक|200 मीटर KL3]] में रजत पदक जीता।<ref name=rio/> 2017 आईसीएफ कैनो स्प्रिंट विश्व चैंपियनशिप, रैसीस, [[चेक गणराज्य]] में, उन्होंने महिला केएल2 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीता।<ref>{{cite web |title=Golden day for Australia at Para-canoe World Championships |url=https://www.paralympic.org.au/golden-day-for-australia-at-para-canoe-world-championships/ |website=Australian Paralympic Committee News, 265 August 2017 |access-date=2 September 2017}}</ref> एक साल तक चोट से जूझने के बाद, रेनॉल्ड्स ने 2018 आईसीएफ कैनो स्प्रिंट वर्ल्ड चैंपियनशिप, मोंटेमोर-ओ-वेल्हो में महिलाओं की केएल3 200 मीटर में रजत पदक जीता।<ref>{{cite web |title=Silver Comeback For Amanda Reynolds |url=https://paddle.org.au/2018/08/24/silver-comeback-for-amanda-reynolds/ |website=Paddle Australia website |access-date=26 August 2018}}</ref> 2019 आईसीएफ कैनो स्प्रिंट विश्व चैंपियनशिप, सेजेड, [[हंगरी]] में, वह महिला KL3 200 मीटर में सातवें स्थान पर रहीं।<ref>{{Cite web |url=https://paddle.org.au/2019/08/26/australia-finishes-success-world-champs-with-more-tickets-to-tokyo/ |title=Australia Finishes Success World Champs With More Tickets To Tokyo |date=26 August 2019 |website=Paddle Australia website |access-date=26 August 2019}}</ref> [[2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक]] में, जेनिंग्स अपनी हीट में पांचवें और महिला केएल 3 सेमीफाइनल में आठवें स्थान पर रहीं और फाइनल में आगे नहीं बढ़ पाईं।<ref>{{cite web |date=5 June 2021 |title=Australia Names Experienced Para-Canoe Squad For Tokyo |url=https://www.paralympic.org.au/2021/06/australia-names-experienced-para-canoe-squad-for-tokyo/ |url-status=live |access-date=6 June 2021 |website=Paralympics Australia |archive-url=https://web.archive.org/web/20210605010240/https://www.paralympic.org.au/2021/06/australia-names-experienced-para-canoe-squad-for-tokyo/ |archive-date=5 June 2021}}</ref> जेनिंग्स ने विक्टोरियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट से छात्रवृत्ति प्राप्त की थी और मूल रूप से स्टीव वेघ और मार्क डगल द्वारा प्रशिक्षित थीं।<ref name=auscanoe/> 2015 में, वह राष्ट्रीय पैरा-कैनो हेड कोच एंड्रिया किंग के साथ मिलकर काम करने के लिए [[गोल्ड कोस्ट, क्वींसलैंड]] चली गईं।<ref name=bader/> उन्होंने अपनी नई स्प्रिंट कैनो का नाम "डगलस" या "डग" रखा है, जो उन दो लोगों के नाम पर है जिनसे उन्हें प्रेरणा मिली है - मुक्केबाज जेम्स 'बस्टर' डगलस और पायलट डगलस बेडर।<ref name="bader">{{cite web |title=Reynolds inspired by war-time pilot in quest for Paralympic selection |url=https://www.paralympic.org.au/reynolds-inspired-by-war-time-pilot-in-quest-for-paralympic-selection/ |website=Australian Paralympic Committee News, 11 February 2016 |access-date=11 February 2016}}</ref> ===तीरंदाजी=== जेनिंग्स ने 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक के बाद दो हिप रिप्लेसमेंट के बाद तीरंदाजी में कदम रखा।<ref>{{Cite web |title=AMANDA JANE JENNINGS |url=https://archery.org.au/amanda-jane-jennings/ |access-date=2024-06-24 |website=Archery Australia |language=en-AU}}</ref> उन्होंने अपने पुनर्वास के एक हिस्से के रूप में तीरंदाजी शुरू की। वह रिकर्व स्पर्धाओं में भाग लेती हैं। वह क्वींसलैंड के ब्रिस्बेन स्थित माउंट पेट्री बोमन की सदस्य हैं। [[2024 पेरिस पैरालिंपिक]] में, वह [[2024 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक में तीरंदाजी|महिला व्यक्तिगत रिकर्व ओपन]] में सोलहवें राउंड में हार गईं। उन्होंने [[2024 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक में तीरंदाजी - मिश्रित टीम रिकर्व|मिश्रित टीम रिकर्व]] में [[टेमन केंटन-स्मिथ]] के साथ जोड़ी बनाई, जहाँ वे सोलहवें राउंड में हार गईं। ==सम्मान== 2015 और 2016 में, उन्हें ऑस्ट्रेलियन कैनोइंग अवार्ड्स में पीपल्स चॉइस अवार्ड से सम्मानित किया गया।<ref>{{cite web |title=2015 Australian Canoeing Award Winners |url=http://canoe.org.au/2015/11/15/2015-australian-canoeing-award-winners/ |website=Australian Canoeing website |access-date=15 November 2015 |archive-date=17 November 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151117020012/http://canoe.org.au/2015/11/15/2015-australian-canoeing-award-winners/ |url-status=dead }}</ref><ref name="ac2016">{{cite web |title=2016 Australian Canoeing Award Winners |url=http://canoe.org.au/2016/11/14/2016-australian-canoeing-award-winners/ |website=Australian Canoeing website |access-date=15 November 2016 |archive-date=16 November 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161116105443/http://canoe.org.au/2016/11/14/2016-australian-canoeing-award-winners/ |url-status=dead }}</ref> ==संदर्भ== {{Reflist|30em}} ==बाहरी संबंध== * पैडल ऑस्ट्रेलिया पर [https://paddle.org.au/2014/04/30/amanda-reynolds/ अमांडा रेनॉल्ड्स] ([https://web.archive.org/web/20200328233800/https://canoe.org.au/2014/04/30/amanda-reynolds/ पुरालेख]) * {{IPC|amanda-reynolds|अमांडा रेनॉल्ड्स}} * [https://archery.org.au/amanda-jane-jennings/ तीरंदाज़ी ऑस्ट्रेलिया प्रोफ़ाइल] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1971 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:2024 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक]] [[श्रेणी:पैरा तीरंदाज]] [[श्रेणी:रिकर्व तीरंदाज]] [[श्रेणी:तीरंदाजी]] [[श्रेणी:ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी]] [[श्रेणी:ऑस्ट्रेलिया के लोग]] ta5fvvmrjtif8eb762eml4drgweblh0 अरसाम कुदरत ए खोदा 0 1605741 6536683 6505004 2026-04-05T18:17:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536683 wikitext text/x-wiki {{धार्मिक जीवनी ज्ञानसन्दूक|image=Arsafm Qudrat E Khoda.jpg|caption=प्रोफेसर डॉ. कुदरत ए खोदा 2025 में|native_name=আরসাম কুদরত এ খোদা|name=अरसाम कुदरत ए खोदा|birth_date={{birth date and age|1985|06|16|df=y}}|children=4|native_name_lang=bn|birth_place=154 आरामबाग, मोतीझील, [[ढाका]]|title=|nationality={{ubl|{{BAN}}}}|spouse=नादिया ए खोदा|website={{URL|qudratekhoda.net}}|religion=[[इस्लाम]]|predecessor=[[सैयद महबूब ए खोदा]]|other_name=क़दर ({{lang|ar|قدر}})|honorific-prefix=ईमाम|father=[[सैयद महबूब ए खोदा]]}} '''अरसाम कुदरत ए खोदा''' (जन्म 16 जून 1985) एक [[उलमा|इस्लामी विद्वान,]] [[वली|सूफी]], [[साहित्यकार|लेखक]] और धार्मिक नेता हैं। वह [[दीवानबाग शरीफ]] के निदेशक हैं,<ref>{{Cite web|url=https://dewanbagsharif.org/|title=Dewanbag Sharif - Sufi Emperor Hazrat Dewanbaghi (RA)|date=2024-10-15|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> एक सूफी संगठन जो दुनिया भर में काम करता है, जहां वह मुहम्मदी इस्लाम के सिद्धांतों को सिखाता है,<ref>{{Cite web|url=https://muhammadiislam.org/|title=Muhammadi Islam: Your Path to Authentic Peace & Spiritual Revival - Muhammadi Islam|date=2025-01-03|language=en|access-date=2025-12-17}}</ref> [[ध्यान (क्रिया)|ध्यान]] के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति और इस्लामी अनुष्ठानों के पालन पर जोर देता है।<ref>{{Cite journal|last=Qudrat E Khoda|first=Arsafm|title=Philosophy of Spiritual Meditation|url=https://www.researchgate.net/publication/380974770_Philosophy_of_Spiritual_Meditation|journal=Academic Journal on Arts & Humanities Education (AJAHE)|publisher=ResearchGate|access-date=2025-11-30}}</ref> वह एक धर्मार्थ और [[धार्मिक संगठन]] क़दर फ़ाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं।<ref>{{Cite web|url=https://qadr.foundation/about-us/|title=About – Qadr Foundation|website=qadr.foundation|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref>यह संगठन एक चैरिटेबल और धार्मिक संगठन है जो समाज कल्याण के काम करता है।<ref name=":2">{{Cite news|url=https://www.dhakapost.com/probash/392940|title=মালয়েশিয়ায় পবিত্র ঈদে মিলাদুন্নবী (সা.) পালিত|last=সৌরভ|first=এস এ|date=2025-09-07|work=ढाका पोस्ट|access-date=2025-12-08}}</ref><ref name=":3">{{Cite news|url=https://www.banglaedition.com/migration/2025/09/07/248476|title=মালয়েশিয়ায় ঈদে মিলাদুন্নবী (সা.) পালিত|date=2025-09-07|access-date=2025-12-08}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=https://janorob.com/islam/sufism/1077/|title=দেওয়ানবাগীর উত্তরসূরি কুদরত এ খোদা: জন্ম, শিক্ষা, কর্মজীবন, সামাজিক সেবা ও আন্তর্জাতিক সুফি কার্যক্রম|last=Hasan|first=Mehedi|date=2025-05-21|website=जनराब|language=en-US|access-date=2025-12-17|archive-date=28 दिसंबर 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20251228133436/https://janorob.com/islam/sufism/1077/|url-status=dead}}</ref><ref name=":1">{{Cite news|url=https://www.jaijaidin.news/details/10248/santir-barta-chriye-dhakay-bisw-aseke-rasul-smmeln-onushthit|title=শান্তির বার্তা ছড়িয়ে ঢাকায় বিশ্ব আশেকে রাসুল সম্মেলন অনুষ্ঠিত|date=2025-12-12|work=Jaijaidin|access-date=2025-12-12|archive-url=https://web.archive.org/web/20251212151259/https://www.jaijaidin.news/details/10248/santir-barta-chriye-dhakay-bisw-aseke-rasul-smmeln-onushthit|archive-date=2025-12-12}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और परिवार == कुदरत ए खोदा का जन्म 16 जून 1985 को [[ढाका]] के मोतीझील के 154 आरामबाग में एक प्रमुख धार्मिक परिवार में हुआ था। उनका जन्म 1405 हिजरी में [[रमज़ान|रमजान]] के पवित्र महीने के दौरान [[शब-ए-क़द्र|लैलत अल-कदर]] की रात को हुआ था। लैलत अल-कदर पर उनके जन्म के कारण, उन्हें आमतौर पर कदर उपनाम दिया जाता है। वे [[दीवानबाग शरीफ]] के संस्थापक [[सैयद महबूब ए खोदा]] और सैयदा हमीदा बेगम के पुत्र हैं। अपनी मां के माध्यम से, वह प्रसिद्ध [[सूफ़ीवाद|सूफी]] ''[[पीर (सूफ़ीवाद)|पीर]]'' सैयद अबुल फजल सुल्तान अहमद के पोते हैं जिन्हें चंद्रपुरी के नाम से भी जाना जाता है।<ref name=":0" /> वह [[दीवानबाग शरीफ|दीवानबाग शरीफ़]] केंद्रों के प्रबंधन कार्यों में प्रारंभिक आयु से ही सहभागी रहे। इसी अवधि में उन्हें सूफ़ी परंपरा और मुहम्मदी इस्लाम के सिद्धांतों से परिचित कराया गया। उनके नेतृत्व-संबंधी गुणों को देखते हुए, उनके माता-पिता ने उन्हें [[दीवानबाग शरीफ|दीवानबाग शरीफ़]] तथा मुहम्मदी इस्लाम से जुड़े नेतृत्व दायित्वों के लिए तैयार किया।<ref name=":0" /> == शिक्षा == अपनी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने बांग्लादेश के पीपुल्स यूनिवर्सिटी से इस्लामिक अध्ययन में [[विधि स्नातक|बी.]] ए. (सम्मान) की उपाधि प्राप्त की, जिसके बाद उसी संस्थान से [[विधि निष्णात|एम.]] ए. किया। और बाद में पीएचडी प्राप्त की [[आयरलैण्ड|आयरलैंड]] में इस्लामी धर्मशास्त्र पर।<ref name=":0" /> == करियर == अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, कुदरत ए खोदा ने बांग्लादेश के पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इस्लामिक अध्ययन विभाग में एक [[व्याख्याता]] के रूप में अपना शिक्षण जीवन शुरू किया। बाद में वह इस्लामिक अध्ययन विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में फेरस्ट इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में शामिल हो गए।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web|url=https://qudratekhoda.net/about/|title=About - Imam Dr. Qudrat E Khoda|date=2022-09-06|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> == धार्मिक नेतृत्व == इससे पहले, 2013 में, [[सैयद महबूब ए खोदा|सैयद]] [[सैयद महबूब ए खोदा|महबूब ए खोदा]] ने कुदरत ए खोदा को [[दीवानबाग शरीफ]] के मुद्दों का समन्वयक और समाधानकर्ता नियुक्त किया था। 28 दिसंबर 2020 को उनकी मृत्यु से पहले,<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/bengali/news-55463768|title=দেওয়ানবাগী পীর হিসাবে পরিচিত সৈয়দ মাহবুবের উত্থান যেভাবে|date=2020-12-28|work=[[बीबीसी]] बांग्ला|access-date=2025-12-10}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.thedailystar.net/city/news/syed-mahbub-e-khuda-dewanbagi-passes-away-2018453|title=Syed Mahbub-e-Khuda Dewanbagi passes away|date=2020-12-28|work=द डेली स्टार|access-date=2025-12-12}}</ref> महबूब-ए-खोदा ने उन्हें उसी तारीख को जारी एक औपचारिक ''ओसोथ'' (आध्यात्मिक वसीयत) के माध्यम से अपने आध्यात्मिक और संस्थागत उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया।<ref name=":1" /><ref>{{Cite web|url=https://dewanbagsharif.org/the-holy-osyoth-will/|title=The Holy Osyoth (Will) - Dewanbag Sharif|date=2022-04-18|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> इस नियुक्ति के बाद, कुदरत ए खोदा ने आधिकारिक तौर पर 2021 में दीवानबाग शरीफ की भूमिका ग्रहण की। वह वर्तमान में संस्था का नेतृत्व करते हैं और अपने पिता द्वारा स्थापित आध्यात्मिक वंश के अनुसार मुहम्मदी इस्लाम के अनुयायियों का मार्गदर्शन करना जारी रखते हैं।<ref name=":0" /><ref name=":1" /> == गतिविधियाँ == === दरबार शरीफ से जुड़ी गतिविधियाँ === कुदरत ए खोदा हर हफ़्ते प्रवचन देते हैं, जिन्हें बांग्लादेश और विदेश में दीवानबाग शरीफ़ के अलग-अलग सेंटर्स पर लाइव ब्रॉडकास्ट किया जाता है। उनके प्रवचन सूफ़ीवाद और इस्लामी शिक्षाओं से जुड़े विषयों पर फ़ोकस करते हैं, जिसमें खुद को शुद्ध करना, नैतिक चरित्र, अल्लाह के प्रति भक्ति, इंसानियत के लिए प्यार और समाज में लोगों की नैतिक ज़िम्मेदारियाँ शामिल हैं। आध्यात्मिक मार्गदर्शन के अलावा, उनके लेक्चर आज के सामाजिक मुद्दों पर भी बात करते हैं, जहाँ वे एकता, दया और शांतिपूर्ण साथ रहने पर ज़ोर देते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://qudratekhoda.net/teachings/|title=Imam Dr. Qudrat E Khoda’s Teachings {{!}} Tasawwuf & Ethics|date=2025-07-20|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> इसके अलावा, कुदरत ए खोदा दीवानबाग दरबार में कई तरह के धार्मिक और एजुकेशनल प्रोग्राम को ऑर्गनाइज़ करने और उनकी देखरेख करने में एक्टिव रूप से शामिल हैं। इन प्रोग्राम में वर्ल्ड अशाक-ए-रसूल कॉन्फ्रेंस,<ref name=":1" /><ref>{{Cite news|url=https://www.jugantor.com/country-news/777680|title=ত্রিশালে আশেকে রাসুল (সা.) সম্মেলন|date=2024-02-23|work=दैनिक युगांतर|access-date=2025-12-10}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.deshrupantor.com/492444/%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%86%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%95%E0%A7%87-%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%81%E0%A6%B2-%E0%A6%B8%E0%A6%BE.-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A7%8D%E0%A6%AE%E0%A7%87%E0%A6%B2%E0%A6%A8|title=ত্রিশালে বিশ্ব আশেকে রাসুল (সা.) সম্মেলন|date=2024-02-27|work=दैनिक देश रूपांतरण|access-date=2025-12-10}}</ref> ईद-ए-मिलादुन्नबी,<ref name=":2" /><ref name=":3" /><ref>{{Cite news|url=https://mzamin.com/news.php?news=178969|title=ঈদে মিলাদুন্নবী উপলক্ষ্যে বর্ণাঢ্য শোভাযাত্রা অনুষ্ঠিত|date=2025-09-07|work=मनबज़मीन|access-date=2025-12-12}}</ref> आशूरा, शब-ए-क़द्र और शब-ए-बारात के साथ-साथ मोहम्मदी इस्लाम की शिक्षाओं पर आधारित कई सेमिनार,<ref>{{Cite news|url=https://www.channelionline.com/the-holy-eid-miladunnabi-is-the-best-eid-of-all-creation-professor-dr-qudrat-is-god/|title=পবিত্র ঈদে মিলাদুন্নবি সৃষ্টিকূলের শ্রেষ্ঠ ঈদ: প্রফেসর ড. কুদরত এ খোদা|date=2025-08-31|work=चैनल I|access-date=2025-12-10}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.dailysokalersomoy.com/news/133654|title=পবিত্র ঈদে মিলাদুন্নবি (সা.) উপলক্ষ্যে আলোচনা সভা অনুষ্ঠিত|date=2025-08-28|work=दैनिक सुबह का समय|access-date=2025-12-10}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://mzamin.com/news.php?news=177468|title=পবিত্র ঈদে মিলাদুন্নবি উপলক্ষ্যে আলোচনা সভা অনুষ্ঠিত|date=2025-08-27|work=मनाबज़मीन|access-date=2025-12-10}}</ref> ट्रेनिंग सेशन (ता'लिम) और डिस्कशन फ़ोरम शामिल हैं। ये प्रोग्राम अलग-अलग इलाकों के फॉलोअर्स के बीच स्पिरिचुअल अवेयरनेस, मोरल डेवलपमेंट और एकता को बढ़ावा देते हैं। === सामाजिक और धर्मार्थ कार्य === 1994 में, केवल 9 साल की उम्र में, उन्होंने समाज सेवा संगठन ''<nowiki/>'इन्सानियत क्लब''' की स्थापना की। ओ अपन सङ्गठनक माध्यमसँ विभिन्न गतिविधिकेँ पूरा करैत छथि। वह [[दीवानबाग शरीफ]] के माध्यम से सामाजिक और धर्मार्थ गतिविधियों की देखरेख करते हैं, जिसमें खाद्य वितरण, [[आपदा तत्परता|आपदा राहत]] और शैक्षिक कार्यक्रम शामिल हैं।<ref name=":0" /> 2020 में, उन्होंने क़दर फ़ाउंडेशन की स्थापना की, जो एक [[लाभ निरपेक्ष संस्था|गैर-लाभकारी]] संस्था है जो इस्लामी सिद्धांतों में निहित मानवीय सहायता प्रदान करती है, जिसमें सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए भोजन, शीतकालीन राहत वितरण और बाढ़ प्रभावित समुदायों के लिए आपदा प्रतिक्रिया, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।<ref name=":2" /><ref name=":3" /><ref>{{Cite web|url=https://qadr.foundation/service/community-welfare/|title=Community Welfare: Nourishing Hope, Our Food Programs – Qadr Foundation|website=qadr.foundation|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://qadr.foundation/our-works/|title=Our Works – Qadr Foundation|website=qadr.foundation|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> === कार्य और पहल === सूफियों में एकता की कमी के कारण, सूफी समुदायों और संगठनों को कई बार ज़ुल्म, हमलों और तबाही का सामना करना पड़ा है।<ref>{{Cite news|url=https://dbcnews.tv/articles/%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B7%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A7%87-%E0%A6%AA%E0%A6%BF%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%96%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%B8%E0%A6%82%E0%A6%97%E0%A6%A0%E0%A6%A8-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%B8%E0%A7%81%E0%A6%AB%E0%A7%80-%E0%A6%B8%E0%A6%82%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A7%AA-%E0%A6%A6%E0%A6%AB%E0%A6%BE-%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%BF|title=মাজার দরবার রক্ষার্থে পির মাশায়েখদের সংগঠন বিশ্ব সুফী সংস্থার ৪ দফা দাবি|date=2025-01-23|work=डीबीसी न्यूज़|access-date=2025-12-10}}</ref> कुदरत ए खोदा एक संगठन के ज़रिए सूफी ग्रुप्स को एकजुट करने की कोशिशों में शामिल हो गया। 2024 में, उन्होंने वैश्विक सूफी संगठन की स्थापना की पहल में भाग लिया, जिसकी स्थापना दुनिया भर में सूफियों के बीच एकजुटता को बढ़ावा देने और सूफी समुदायों को लक्षित उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ वकालत करने के लिए की गई थी। इस संगठन के माध्यम से, वह सामूहिक कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और वैश्विक स्तर पर सूफियों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.newagebd.net/post/politics/256169/global-sufi-organisation-presents-4-point-demand|title=Global Sufi Organisation presents 4-point demand|date=2025-01-24|work=न्यू एज|access-date=2025-12-10}}</ref> वह वर्तमान में संगठन के एक उच्च कार्यकारी बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य करता है।<ref>{{Cite web|url=https://qudratekhoda.net/leadership/|title=Leadership of Imam Dr. Qudrat E Khoda|date=2025-07-20|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> == लेखन और प्रकाशन == कुदरत ए खोदा ने [[बंगाली भाषा|बंगाली]] और अंग्रेजी में [[सूफ़ीवाद|सूफीवाद]] और मुहम्मदी इस्लाम पर किताबें लिखी हैं। उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैंः === किताबें === * ''[[मुर्शिद]] की उपस्थिति में एक शिष्य के कर्तव्य'' (2012) बांग्लाः यह प्रकाशन शिष्यों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है (सूफी परंपरा में शिष्य-गुरु (मुर्शिद) संबंध पर ध्यान देने के साथ प्रमुख आध्यात्मिक प्रथाओं और शिष्टाचार को रेखांकित करता है।<ref name=":4">{{Cite web|url=https://qudratekhoda.net/publications/|title=Publications {{!}} Imam Dr. Qudrat E Khoda — Books & Writings|date=2025-07-20|language=en-US|access-date=2025-12-17}}</ref> * मुहम्मदी इस्लाम तालीम (2023) बंगाली<ref name=":4" /> * ''हज़रत महबूब ए खोदा दीवानबाजी'' (2025)<ref name=":4" /> * मुहम्मदी इस्लाम तालीम (बुकलेट) (2025): मुहम्मदी इस्लामी तालीम का एक संक्षिप्त संस्करण।<ref name=":4" /> === पत्रिकाएँ === * तसौफ़: अल्लाह के आदिम ज्ञान का विज्ञान (2019) दिव्य समझ, आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक चढ़ाई के लिए एक वैज्ञानिक मार्ग के रूप में [[सूफ़ीवाद|सूफीवाद]] की खोज करता है।<ref name=":4" /><ref>{{Cite journal|last=Qudrat E Khoda|first=Arsafm|date=5 April 2019|title=TASAUF: THE SCIENCE OF PRIMITIVE KNOWLEDGE OF ALLAH.|url=http://www.journalijar.com/article/27702/tasauf:-the-science-of-primitive-knowledge-of-allah/|journal=International Journal of Advanced Research (IJAR)|volume=4|pages=702:705|doi=10.21474/IJAR01/8874|issn=2320-5407|archive-url=https://web.archive.org/web/20251203155538/https://www.journalijar.com/article/27702/tasauf:-the-science-of-primitive-knowledge-of-allah/|archive-date=3 December 2025|access-date=2025-12-10}}</ref><ref>{{Cite journal|date=2019|title=TASAUF: THE SCIENCE OF PRIMITIVE KNOWLEDGE OF ALLAH.|url=https://www.academia.edu/39083462/TASAUF_THE_SCIENCE_OF_PRIMITIVE_KNOWLEDGE_OF_ALLAH|journal=International Journal of Advanced Research (IJAR)|publisher=Academia.edu|page=4|access-date=2025-12-10}}</ref> * ध्यान: सभी पूजाओं का मूल (2019) ध्यान की पूजा, हृदय शुद्धिकरण और ''नूर-ए-[[मुहम्मद]]'' (पैगंबर मुहम्मद का प्रकाश) की प्राप्ति की नींव के रूप में जांच करता है।<ref name=":4" /><ref>{{Cite journal|last=Qudrat E Khoda|first=Arsafm|date=April 2019|title=Meditation: The Root of All Worship|url=https://www.jetir.org/view?paper=JETIR1904I06|journal=JETIR Research Journal|publisher=IJ Publication|volume=6|pages=36:39|issn=2349-5162|archive-url=https://web.archive.org/web/20251203154435/https://www.jetir.org/view?paper=JETIR1904I06|archive-date=3 December 2025|access-date=2025-12-10}}</ref> == तस्वीर == <gallery> चित्र:View_of_World_Asheke_Rasul_(SM.)_Conference.jpg|विश्व अशाक-ए-रसूल (सा.) सम्मेलन, 2024 </gallery> == विवाद == उनके पिता और मुर्शिद, [[सैयद महबूब ए खोदा]] के निधन के बाद, [[दीवानबाग शरीफ]] समुदाय के भीतर आध्यात्मिक उत्तराधिकार को लेकर आंतरिक असहमति पैदा हो गई। महबूब ए खोदा ने कथित तौर पर कुदरत ए खोदा को एक औपचारिक ओसोथ (आध्यात्मिक इच्छा) के माध्यम से अपने आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया था,<ref name=":1" /> जिसमें उनके परिवार और अनुयायियों को उन्हें उस भूमिका में पहचानने का निर्देश दिया गया था। हालाँकि उनके [[सहोदर|भाई-बहन]] ने शुरू में इस पद को स्वीकार किया, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया और उनके नेतृत्व को पहचानना बंद कर दिया। इसके बाद, वे अलग हो गए और एक ही संस्थागत परंपरा के तहत विभिन्न दरबारों (आध्यात्मिक केंद्रों) से गतिविधियों का संचालन करना शुरू कर दिया।<ref name=":0" /> == यह भी देखें == * [[सैयद महबूब ए खोदा]] * [[दीवानबाग शरीफ]] == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी लिंक == * [https://qudratekhoda.net/ कुदरत ए खोदा] [[श्रेणी:सूफीवाद की विद्वान]] [[श्रेणी:बंगाली मुस्लिम]] [[श्रेणी:अरबी भाषा पाठ वाले लेख]] hxdtjkqtl2dvbqzccb5tnmfgaa7q58g समीरा इस्लाम 0 1607587 6536626 6518532 2026-04-05T15:44:31Z Mnjkhan 900134 /* यह भी देखें */ 6536626 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक वैज्ञानिक|name=समीरा इस्लाम|alma_mater=अलेक्जेंड्रिया विश्वविद्यालय|fields=औषध|workplaces=[[शाह अब्दुल अजीज़ विश्वविद्यालय]]}} '''समीरा इब्राहिम इस्लाम''' (अरबीः سميرة إسلام, रोमनः समिरा اسلام) एक [[सउदी अरब|सऊदी अरब]] की [[औषधशास्त्र|फार्माकोलॉजिस्ट]] हैं। वह किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्या किंग फहद मेडिकल रिसर्च सेंटर की ड्रग मॉनिटरिंग यूनिट की प्रमुख हैं। उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं के लिए औपचारिक विश्वविद्यालय शिक्षा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == इस्लाम का जन्म अल-हफुफ, अल-अहसा, सऊदी अरब में हुआ था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410|title=Who's Who in the Arab World 2007-2008|last=Publications|first=Publitec|date=2011-12-22|publisher=Walter de Gruyter|isbn=9783110930047|language=en}}</ref> उनकी माध्यमिक शिक्षा के बाद, इस्लाम को उनकी स्कूली शिक्षा पूरी करने के लिए [[मिस्र]] भेजा गया। उन्होंने शुरू में अलेक्जेंड्रिया विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल में दाखिला लिया, लेकिन एक साल बाद स्कूल ऑफ फार्मेसी में स्थानांतरित हो गईं।<ref>{{Cite news|url=http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|title=A '2030' from the '1970s' – Saudi pioneer sets the pace for progress|last=Roy|first=Chaitali B.|date=4 April 2018|work=Arab Times|access-date=5 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190405222926/http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|archive-date=5 April 2019}}</ref> यहाँ उन्होंने 1964 में फार्मेसी और फार्मास्युटिकल विज्ञान में बीएससी प्राप्त किया, इसके बाद 1966 में परास्नातक किया। इस्लाम ने फार्माकोलॉजी का अध्ययन जारी रखा, 1970 में पीएचडी अर्जित करने वाली पहली सऊदी महिला बनीं। == करियर == 1971 में, इस्लाम ने किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय में व्याख्यान देना शुरू किया। उन्हें 1973 में विश्वविद्यालय की मक्का और जेद्दा शाखाओं के बालिका वर्ग के लिए अकादमिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। उन्होंने सऊदी महिलाओं के लिए औपचारिक विश्वविद्यालय शिक्षा स्थापित करने के लिए काम किया। वह 1974 में चिकित्सा संकाय की उप-डीन बनीं 1983 में, उन्हें फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, जो ऐसा करने वाली सऊदी अरब की पहली व्यक्ति बनीं। इस्लाम को नर्सिंग पेशे के एक वकील के रूप में मान्यता दी गई है और 1976 में सऊदी अरब में नर्सिंग के पहले संकाय की स्थापना की गई है।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410|title=Who's Who in the Arab World 2007-2008|last=Publications|first=Publitec|date=2011-12-22|publisher=Walter de Gruyter|isbn=9783110930047|language=en}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFPublications2011">Publications, Publitec (2011-12-22). [https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410 ''Who's Who in the Arab World 2007-2008'']. Walter de Gruyter. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]]&nbsp;[[Special:BookSources/9783110930047|<bdi>9783110930047</bdi>]].</cite></ref><ref>{{Cite news|url=http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|title=A '2030' from the '1970s' – Saudi pioneer sets the pace for progress|last=Roy|first=Chaitali B.|date=4 April 2018|work=Arab Times|access-date=5 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190405222926/http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|archive-date=5 April 2019}}</ref> == रिसर्च == इस्लाम ने नशीली दवाओं के चयापचय की जांच की है क्योंकि यह सऊदी आबादी से संबंधित है।उन्होंने किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय में किंग फहद मेडिकल रिसर्च सेंटर की ड्रग मॉनिटरिंग यूनिट की स्थापना और नेतृत्व किया।इस्लाम अरब विज्ञान और प्रौद्योगिकी फाउंडेशन के बोर्ड में है।<ref name="AN">{{Cite news|url=http://www.arabnews.com/news/518791|title=Two Saudis among top 20 Muslim women scientists|date=1 February 2014|work=Arab News}}</ref> इस्लाम को सऊदी अरब पर दवा के प्रभाव और प्रभाव पर उनके शोध के लिए उत्कृष्टता का मक्का पुरस्कार मिला।<ref>{{Cite news|url=http://www.arabiyat.com/content/romooz/376.html|title=عربيات تستضيف العالمة السعودية البروفيسور سميرة إسلام|last=سلامة|first=رانية|date=1 May 2000|work=مجلة عربيات الدولية|language=ar}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात (जीवित लोग)]] dr61639rcwx4nnxa0gtovvaofoxknk1 6536627 6536626 2026-04-05T15:45:06Z Mnjkhan 900134 6536627 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक वैज्ञानिक|name=समीरा इस्लाम|alma_mater=अलेक्जेंड्रिया विश्वविद्यालय|fields=औषधि|workplaces=[[शाह अब्दुल अजीज़ विश्वविद्यालय]]}} '''समीरा इब्राहिम इस्लाम''' (अरबीः سميرة إسلام, रोमनः समिरा اسلام) एक [[सउदी अरब|सऊदी अरब]] की [[औषधशास्त्र|फार्माकोलॉजिस्ट]] हैं। वह किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्या किंग फहद मेडिकल रिसर्च सेंटर की ड्रग मॉनिटरिंग यूनिट की प्रमुख हैं। उन्होंने सऊदी अरब में महिलाओं के लिए औपचारिक विश्वविद्यालय शिक्षा प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == इस्लाम का जन्म अल-हफुफ, अल-अहसा, सऊदी अरब में हुआ था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410|title=Who's Who in the Arab World 2007-2008|last=Publications|first=Publitec|date=2011-12-22|publisher=Walter de Gruyter|isbn=9783110930047|language=en}}</ref> उनकी माध्यमिक शिक्षा के बाद, इस्लाम को उनकी स्कूली शिक्षा पूरी करने के लिए [[मिस्र]] भेजा गया। उन्होंने शुरू में अलेक्जेंड्रिया विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल में दाखिला लिया, लेकिन एक साल बाद स्कूल ऑफ फार्मेसी में स्थानांतरित हो गईं।<ref>{{Cite news|url=http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|title=A '2030' from the '1970s' – Saudi pioneer sets the pace for progress|last=Roy|first=Chaitali B.|date=4 April 2018|work=Arab Times|access-date=5 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190405222926/http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|archive-date=5 April 2019}}</ref> यहाँ उन्होंने 1964 में फार्मेसी और फार्मास्युटिकल विज्ञान में बीएससी प्राप्त किया, इसके बाद 1966 में परास्नातक किया। इस्लाम ने फार्माकोलॉजी का अध्ययन जारी रखा, 1970 में पीएचडी अर्जित करने वाली पहली सऊदी महिला बनीं। == करियर == 1971 में, इस्लाम ने किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय में व्याख्यान देना शुरू किया। उन्हें 1973 में विश्वविद्यालय की मक्का और जेद्दा शाखाओं के बालिका वर्ग के लिए अकादमिक सलाहकार नियुक्त किया गया था। उन्होंने सऊदी महिलाओं के लिए औपचारिक विश्वविद्यालय शिक्षा स्थापित करने के लिए काम किया। वह 1974 में चिकित्सा संकाय की उप-डीन बनीं 1983 में, उन्हें फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, जो ऐसा करने वाली सऊदी अरब की पहली व्यक्ति बनीं। इस्लाम को नर्सिंग पेशे के एक वकील के रूप में मान्यता दी गई है और 1976 में सऊदी अरब में नर्सिंग के पहले संकाय की स्थापना की गई है।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410|title=Who's Who in the Arab World 2007-2008|last=Publications|first=Publitec|date=2011-12-22|publisher=Walter de Gruyter|isbn=9783110930047|language=en}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFPublications2011">Publications, Publitec (2011-12-22). [https://books.google.com/books?id=NHCQBAFMwawC&dq=professor+samira+islam&pg=PA410 ''Who's Who in the Arab World 2007-2008'']. Walter de Gruyter. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]]&nbsp;[[Special:BookSources/9783110930047|<bdi>9783110930047</bdi>]].</cite></ref><ref>{{Cite news|url=http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|title=A '2030' from the '1970s' – Saudi pioneer sets the pace for progress|last=Roy|first=Chaitali B.|date=4 April 2018|work=Arab Times|access-date=5 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190405222926/http://www.arabtimesonline.com/wp-content/uploads/pdf/2018/apr/04/15.pdf|archive-date=5 April 2019}}</ref> == रिसर्च == इस्लाम ने नशीली दवाओं के चयापचय की जांच की है क्योंकि यह सऊदी आबादी से संबंधित है।उन्होंने किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय में किंग फहद मेडिकल रिसर्च सेंटर की ड्रग मॉनिटरिंग यूनिट की स्थापना और नेतृत्व किया।इस्लाम अरब विज्ञान और प्रौद्योगिकी फाउंडेशन के बोर्ड में है।<ref name="AN">{{Cite news|url=http://www.arabnews.com/news/518791|title=Two Saudis among top 20 Muslim women scientists|date=1 February 2014|work=Arab News}}</ref> इस्लाम को सऊदी अरब पर दवा के प्रभाव और प्रभाव पर उनके शोध के लिए उत्कृष्टता का मक्का पुरस्कार मिला।<ref>{{Cite news|url=http://www.arabiyat.com/content/romooz/376.html|title=عربيات تستضيف العالمة السعودية البروفيسور سميرة إسلام|last=سلامة|first=رانية|date=1 May 2000|work=مجلة عربيات الدولية|language=ar}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात (जीवित लोग)]] 1eauyecxk281fl7yptp0bi68lrcft5a अमेरिकी अंग्रेज़ी 0 1607837 6536632 6520336 2026-04-05T16:03:08Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536632 wikitext text/x-wiki {{Expand English|American English}} {{Infobox language|name=अमेरिकी अंग्रेज़ी <br> {{langx|en|American English}}|region=[[संयुक्त राज्य अमेरिका]]|speakers=२४.७७ करोड़, संयुक्त राज्य अमेरिका में अंग्रेज़ी की समस्त उपभाषाएँ|date=२०२४|ref=<ref name="Explore Census Data">{{cite web |url=https://data.census.gov/table/ACSST1Y2024.S1601?q=language |title=S1601: Language Spoken at Home |author=U.S. Census Bureau |date=2025-09-14 |website=U.S. Census Bureau |access-date=2025-09-14}}</ref>|speakers2=|familycolor=हिन्द‑यूरोपीय|fam2=[[जर्मनिक भाषाएँ|जर्मनिक]]|fam3=[[पश्चिमी जर्मनिक भाषाएँ|पश्चिमी जर्मनिक]]|fam4=[[नार्थ सी जर्मनिक]]|fam5=[[अँग्लो‑फ़्रिसीय भाषाएँ|अँग्लो‑फ़्रिसीय]]|fam6=[[अँग्लिक भाषाएँ|अँग्लिक]]|fam7=[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]|fam8=[[उत्तरी अमेरिकी अंग्रेज़ी]]|ancestor=[[पुरानी अंग्रेज़ी]]|ancestor2=[[मध्यकालीन अंग्रेज़ी]]|ancestor3=[[प्रारम्भिक आधुनिक अंग्रेज़ी]]|ancestor4=[[आधुनिक अंग्रेज़ी]]|ancestor5=१७वीं शताब्दी की [[ब्रिटिश अंग्रेज़ी]]|ancestor6=१८वीं शताब्दी की [[ब्रिटिश अंग्रेज़ी]]|dia1=[[दक्षिणी अमेरिकी अंग्रेज़ी|दक्षिणी]]|dia2=[[अफ़्रीकी‑अमेरिकी वर्नाक्युलर अंग्रेज़ी|अफ़्रीकी‑अमेरिकी]]|dia3=[[पश्चिमी अमेरिकी अंग्रेज़ी|पश्चिमी]]|dia4=[[न्यू इंग्लैण्ड अंग्रेज़ी|न्यू इंग्लैण्ड]]|dia5=[[पश्चिमी पेनसिल्वेनिया अंग्रेज़ी|पश्चिमी पेनसिल्वेनिया]]|dia6=[[उत्तरी‑केन्द्रीय अमेरिकी अंग्रेज़ी|उत्तरी‑केन्द्रीय]]|dia7=[[न्यूयॉर्क नगर अंग्रेज़ी|न्यूयॉर्क नगर]]|dia8=[[मिडलैण्ड अमेरिकी अंग्रेज़ी|मिडलैण्ड]]|dia9=[[फ़िलाडेल्फ़िया अंग्रेज़ी|फ़िलाडेल्फ़िया]]|dia10=[[उत्तरी अमेरिकी अंग्रेज़ी|उत्तरी]]|dia11=[[अमेरिकी भारतीय अंग्रेज़ी|अमेरिकी भारतीय]]|dia12=[[पेनसिल्वेनिया डच अंग्रेज़ी|पेनसिल्वेनिया डच]]|dia13=[[काजुन अंग्रेज़ी|काजुन]]|dia14=[[चिकानो अंग्रेज़ी|चिकानो]]|dia15=[[मायामी उच्चारण|मायामी]]|dia16=[[न्यूयॉर्क लातीनी अंग्रेज़ी|न्यूयॉर्क लातीनी]]|dia17=[[कैलिफ़ोर्निया अंग्रेज़ी|कैलिफ़ोर्नियाई]]|nation=संयुक्त राज्य अमेरिका{{efn|संघीय शासन (''de facto''), ३२ अमेरिकी राज्य, पाँच अमेरिकी अधीन प्रदेश; विवरण हेतु देखें [[संयुक्त राज्य अमेरिका की भाषाएँ#राजकीय भाषाएँ|लेख]].}}|script={{Ubl | {{nowrap|[[रोमन लिपि|रोमन]] ([[अंग्रेज़ी वर्णमाला]])}} | [[यूनिफ़ाइड इंग्लिश ब्रेल]]<ref name=braille>{{cite web|url=http://www.brailleauthority.org/ueb.html|title=Unified English Braille (UEB)|author=<!--Staff writer(s); no by-line.-->|date=November 2, 2016|publisher=Braille Authority of North America (BANA)|access-date=January 2, 2017|archive-date=November 23, 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161123220211/http://www.brailleauthority.org/ueb.html}}</ref>}}|isoexception=उपभाषा|glotto=none|ietf={{wikidata|property|references|P305}}|notice=IPA|image=File:English USC2000 PHS.svg|imagealt=संयुक्त राज्य अमेरिका में अमेरिकी अंग्रेज़ी के भौगोलिक वितरण का मानचित्र।}} '''अमेरिकी अंग्रेज़ी''' ({{Langx|en|American English}}), जिसे कभी‑कभी '''संयुक्त राज्य अंग्रेज़ी''' ({{Langx|en|United States English}}) अथवा '''सं॰रा॰'''/'''यू॰एस्॰ अंग्रेज़ी''' ({{Langx|en|U.S. English}}) भी कहा जाता है, [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में प्रचलित अंग्रेज़ी भाषा की विविध उपभाषाओं का समष्टि रूप है। अंग्रेज़ी संयुक्त राज्य अमेरिका में सर्वाधिक प्रचलित भाषा है तथा ५० में से ३२ राज्यों में यह राजभाषा के रूप में मान्य है। यह शासन‑प्रशासन, शिक्षण‑प्रशिक्षण तथा वाणिज्य के क्षेत्र में समस्त ५० राज्यों, डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ कोलम्बिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के सभी अधीनस्थ प्रदेशों ([[पोर्टो रीको|प्यूर्टो रिको]] को छोड़कर) में प्रयुक्त सामान्य भाषा है। २०वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से अमेरिकी अंग्रेज़ी विश्व‑स्तर पर अंग्रेज़ी की सर्वाधिक प्रभावशाली रूपरेखा बन चुकी है।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://archive.org/details/thatswayitcrumbl0000enge|title=That's the Way It Crumbles: The American Conquest of English|last=Engel|first=Matthew|publisher=Profile Books|year=2017|isbn=978-1-78283-262-1|location=London|oclc=989790918|url-access=registration}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://www.economist.com/books-and-arts/2017/07/20/fears-of-british-englishs-disappearance-are-overblown|title=Fears of British English's disappearance are overblown|date=July 20, 2017|newspaper=The Economist|access-date=April 18, 2019|issn=0013-0613|url-access=subscription}}</ref><ref name="bbc">{{Cite web|url=http://www.bbc.com/culture/story/20150715-why-isnt-american-a-language|title=Why isn't 'American' a language?|last=Harbeck|first=James|date=July 15, 2015|publisher=BBC Culture|language=en-GB|access-date=April 18, 2019}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/846112/the-readers-editor-writes-why-is-american-english-becoming-part-of-everyday-usage-in-india|title=The Readers' Editor writes: Why Is American English Becoming Part of Everyday Usage in India?|last=Reddy|first=C Rammanohar|date=August 6, 2017|publisher=Scroll.in|language=en-US|access-date=April 18, 2019}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.hindustantimes.com/more-lifestyle/cookies-or-biscuits-data-shows-use-of-american-english-is-growing-the-world-over/story-0j23x5n3jYiF3cTDJm3R0O.html|title=Cookies or biscuits? Data shows use of American English is growing the world over|date=July 17, 2017|work=[[Hindustan Times]]|access-date=September 10, 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20240907151956/https://www.hindustantimes.com/more-lifestyle/cookies-or-biscuits-data-shows-use-of-american-english-is-growing-the-world-over/story-0j23x5n3jYiF3cTDJm3R0O.html|archive-date=2024-09-07|agency=[[The Guardian]]|url-status=live}}</ref><ref>{{cite journal|last1=Gonçalves|first1=Bruno|last2=Loureiro-Porto|first2=Lucía|last3=Ramasco|first3=José J.|last4=Sánchez|first4=David|date=May 25, 2018|title=Mapping the Americanization of English in Space and Time|journal=PLOS ONE|volume=13|issue=5|arxiv=1707.00781|bibcode=2018PLoSO..1397741G|doi=10.1371/journal.pone.0197741|pmc=5969760|pmid=29799872|doi-access=free|article-number=e0197741}}</ref> अमेरिकी अंग्रेज़ी की विविध उपभाषाओं में उच्चारण, शब्दावली, व्याकरण तथा विशेष रूप से वर्तनी के अनेक प्रकार सम्मिलित हैं, जो राष्ट्रव्यापी स्तर पर पर्याप्त रूप से एकरूप होते हुए भी विश्व के अन्य अंग्रेज़ी रूपों से भिन्न हैं। किसी भी अमेरिकी अथवा कनाडीय वक्ता का वह उच्चारण, जिसमें स्थानीय, जातीय अथवा सांस्कृतिक चिह्न स्पष्ट रूप से न दिखें, भाषाविज्ञान में जनरल अमेरिकन कहलाता है। यह उन क्षेत्रों में पाया जाने वाला अपेक्षाकृत समान उच्चारण‑पथ है, जो विशेष रूप से प्रसारण‑माध्यमों तथा उच्चशिक्षित वक्ताओं से सम्बद्ध माना जाता है। तथापि, ऐतिहासिक तथा वर्तमान भाषावैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं दर्शाते कि संयुक्त राज्य अमेरिका में एक ही “मुख्यधारा” का एकमात्र उच्चारण विद्यमान है। अमेरिकी अंग्रेज़ी का ध्वन्यात्मक स्वरूप निरन्तर परिवर्तित हो रहा है, कुछ स्थानीय उच्चारण लुप्त हो रहे हैं, किन्तु २०वीं शताब्दी में अनेक व्यापक क्षेत्रीय उच्चारण उभरकर सामने आए हैं।<ref name="PBS">{{cite web|url=https://www.pbs.org/speak/ahead/|title=''Do You Speak American?'': What Lies Ahead?|publisher=PBS|access-date=August 15, 2007}}</ref> == सन्दर्भ == {{Reflist}} == बाह्य कड़ियाँ == * [https://americanenglish.state.gov/'s अमेरिकी अंग्रेज़ी संसाधन]{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }} * [https://www.pbs.org/speak/ क्या आप अमेरिकी बोलते हैं] पीबीएस स्पेशल * संयुक्त राज्य अमेरिका का [http://www4.uwm.edu/FLL/linguistics/dialect/maps.html बोली सर्वेक्षण], बर्ट वॉक्स और अन्य, [[हार्वर्ड विश्वविद्यालय]] द्वारा। * [https://web.archive.org/web/20150713193617/http://us.english.uga.edu/cgi-bin/lapsite.fcgi/ भाषाई एटलस परियोजनाएँ] * [https://web.archive.org/web/20080821121056/http://classweb.gmu.edu/accent/ स्पीच एक्सेन्ट आर्काइव] * [http://dare.wisc.edu अमेरिकी क्षेत्रीय अंग्रेज़ी का शब्दकोश] * [http://aschmann.net/AmEng/ उच्चारण के आधार पर बोली मानचित्र] {{Navboxes|title=Articles related to American English|list={{Languages of the United States}} {{United States topics}} {{English dialects by continent}} {{English official language clickable map}}}} {{Authority control}} [[श्रेणी:अमेरिका]] [[श्रेणी:अंग्रेज़ी]] [[श्रेणी:भाषा]] [[श्रेणी:भाषा-विज्ञान]] [[श्रेणी:भाषा आधार]] av95bn9lof59d9vr2dlnd137cailbbu सदस्य वार्ता:AMAN KUMAR 3 1608220 6536861 6534585 2026-04-06T07:18:11Z AMAN KUMAR 911487 /* अनुरोध */ नया अनुभाग 6536861 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने 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प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 9zn254l8hh0b8125p0xratsljtp441h 6536863 6536861 2026-04-06T07:18:51Z /* Bhosdika */ नया अनुभाग 6536863 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) == Bhosdika == Ab Dobara mat hatana madarchod tere Up bihari Bhojpuri me jaa waha gand mara [[सदस्य:तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन|तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन]] ([[सदस्य वार्ता:तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन|वार्ता]]) 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) cqa8rf2inlvqdbladpntzv1spqddu1r 6536909 6536863 2026-04-06T09:30:51Z AMAN KUMAR 911487 /* अनुरोध */ उत्तर 6536909 wikitext text/x-wiki 6536920 6536909 2026-04-06T10:02:25Z संजीव कुमार 78022 /* अनुरोध */ उत्तर 6536920 wikitext text/x-wiki 6536921 6536920 2026-04-06T10:03:40Z संजीव कुमार 78022 असम्मानजनक शब्द हटाये 6536921 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] आप ये आवश्य देख लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::आप [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या|चर्चा पृष्ठ]] पर अपनी बात लिख चुके हो। अब सम्बंधित सदस्यों से [[विकिपीडिया:प्रतिबंध|सम्पादन युद्ध]] में न उलझें। इसपर निर्णय समय के साथ ले लिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 6 अप्रैल 2026 (UTC) o64wt0lqbfa8p6akbdzh5wtjvh4kp82 6536922 6536921 2026-04-06T10:05:29Z AMAN KUMAR 911487 /* अनुरोध */ उत्तर 6536922 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] आप ये आवश्य देख लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::आप [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या|चर्चा पृष्ठ]] पर अपनी बात लिख चुके हो। अब सम्बंधित सदस्यों से [[विकिपीडिया:प्रतिबंध|सम्पादन युद्ध]] में न उलझें। इसपर निर्णय समय के साथ ले लिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,मैने यह इसलिए बनाया था क्योंकि शायद एक ही सदस्य ने ये सभी खाते बनकर सम्पादन किए है क्योंकि हर एक सम्पादन में शब्द सीमा समान है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:05, 6 अप्रैल 2026 (UTC) eba6ud1i5pptu7kogokl4q0ilzxk1ot 6536923 6536922 2026-04-06T10:08:58Z संजीव कुमार 78022 /* अनुरोध */ उत्तर 6536923 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] आप ये आवश्य देख लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::आप [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या|चर्चा पृष्ठ]] पर अपनी बात लिख चुके हो। अब सम्बंधित सदस्यों से [[विकिपीडिया:प्रतिबंध|सम्पादन युद्ध]] में न उलझें। इसपर निर्णय समय के साथ ले लिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,मैने यह इसलिए बनाया था क्योंकि शायद एक ही सदस्य ने ये सभी खाते बनकर सम्पादन किए है क्योंकि हर एक सम्पादन में शब्द सीमा समान है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:05, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::::हाँ, मेरी नज़र इसपर है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:08, 6 अप्रैल 2026 (UTC) bejtofuo5mrxjiwcxoj3j5fnolys387 6536924 6536923 2026-04-06T10:10:28Z संजीव कुमार 78022 /* अनुरोध */ उत्तर 6536924 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] आप ये आवश्य देख लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::आप [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या|चर्चा पृष्ठ]] पर अपनी बात लिख चुके हो। अब सम्बंधित सदस्यों से [[विकिपीडिया:प्रतिबंध|सम्पादन युद्ध]] में न उलझें। इसपर निर्णय समय के साथ ले लिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,मैने यह इसलिए बनाया था क्योंकि शायद एक ही सदस्य ने ये सभी खाते बनकर सम्पादन किए है क्योंकि हर एक सम्पादन में शब्द सीमा समान है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:05, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::::हाँ, मेरी नज़र इसपर है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:08, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::::लेकिन मैं अब भी आपके [https://hi.wikipedia.org/s/vqh9 ऐसे योगदान] नहीं समझ पा रहा हूँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:10, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 61k6omdd62welgnnu2fokmmlmp0ydae 6536936 6536924 2026-04-06T10:41:48Z AMAN KUMAR 911487 /* अनुरोध */ उत्तर 6536936 wikitext text/x-wiki {{Archive box| * [[/पुरालेख 1]] }} == Topic About Wikimedia == we can entire access will be provide hindi langauge [[सदस्य:Pakistanyes|Pakistanyes]] ([[सदस्य वार्ता:Pakistanyes|वार्ता]]) 01:47, 23 मार्च 2026 (UTC) == अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले == नमस्ते , ‎विकिपीडियन [https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, भाग ले और इनाम जीते। ‎तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:41, 23 मार्च 2026 (UTC) == [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन == नमस्कार, [[:अबीगैल मॉरिस|अबीगैल मॉरिस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है। नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है: <center>विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है।</center> कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें। चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC) == अनावश्यक अनुवाद == मुझे नहीं पता कि आपको यह समझ नहीं आ रहा या मशीनी अनुवाद के चक्कर में ऐसा हो रहा है। आप गूगल पर पूरी सामग्री कॉपी-पेस्ट करके अनुवाद कर रहे हो जिसकी यहाँ अनुमति नहीं है। आप प्रतियोगिताओं में भाग ले सकते हैं लेकिन ऐसे अनुवाद करने पर आपको प्रतिबन्धित कर दिया जायेगा। आपके द्वारा निर्मित लेख [[दोहा अल मदानी]] में मैंने देखा कि आपने "नियंत्रण प्राधिकरण" नाम से साँचा जोड़ दिया। इसके अतिरिक्त आपने "जीवनी आधार" नाम से भी एक साँचा जोड़ा है। यदि ये मशीनी अनुवाद के परिणाम नहीं हैं तो आप इन साँचों का कारण स्पष्ट कर सकते हो? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:55, 29 मार्च 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :गलती हुई है, जिसको स्वीकार करने के साथ मैं इसमें सुधार कर रहा हूं| यह गलती प्रतियोगिता में भाग लेकर स्थान लाने की है| :वैसे, मैं आपको एक छोटा-सा सुझाव भी देना चाहता हूँ। महोदय, कृपया अपनी खाता सेटिंग में 'सदस्यों को ईमेल भेजें' (Email user) का विकल्प सक्षम (Enable) कर दें। पिछले दिनों जब मैं वैश्विक रूप से अवरोधित (Globally blocked) हो गया था, तो सम्पादन न कर पाने के कारण मैं अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ऐसे समय में ईमेल की सुविधा बहुत मददगार साबित होती है। :मेरी गलती में सुधार करने और मार्गदर्शन देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:19, 30 मार्च 2026 (UTC) ::जी, मुझे ईमेल की तुलना में विकिपीडिया पर सम्पर्क करना सरल है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:36, 30 मार्च 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, :::मैने आपके टैग के अनुसार कुछ में सम्पादन किया है, अभी किसी में भाषा का सम्पादन नहीं किया| :::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:39, 30 मार्च 2026 (UTC) == अनुरोध == @[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]],@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, [[पूर्ति आर्या]] पर 5 से 6 संपादक एक ही तरह का सम्पादन करने का प्रयास कर रहे है तथा यूजर नाम में अभद्रता दिखती है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:18, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] आप ये आवश्य देख लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::आप [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या|चर्चा पृष्ठ]] पर अपनी बात लिख चुके हो। अब सम्बंधित सदस्यों से [[विकिपीडिया:प्रतिबंध|सम्पादन युद्ध]] में न उलझें। इसपर निर्णय समय के साथ ले लिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:02, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,मैने यह इसलिए बनाया था क्योंकि शायद एक ही सदस्य ने ये सभी खाते बनकर सम्पादन किए है क्योंकि हर एक सम्पादन में शब्द सीमा समान है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:05, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::::हाँ, मेरी नज़र इसपर है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:08, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :::::लेकिन मैं अब भी आपके [https://hi.wikipedia.org/s/vqh9 ऐसे योगदान] नहीं समझ पा रहा हूँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:10, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, मुझे उन खातों को बर्बरता की चेतावनी देनी थी, लेकिन मुझसे भूलवश 'निजी टिप्पणी' वाला गलत चेतावनी साँचा चुना गया। आपके सुझाव के अनुसार अब मैं उन खातों के साथ सम्पादन युद्ध में नहीं उलझूंगा। मामले पर ध्यान देने के लिए ::::::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:41, 6 अप्रैल 2026 (UTC) ozb9hg7kooop42gak13ux3ezvzi8pi5 अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 0 1608791 6536887 6529893 2026-04-06T07:59:20Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536887 wikitext text/x-wiki {{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति |name= स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती |image=Avimukteshwaranand.jpg |caption= |native_name_lang = |birth_name=उमाशंकर पाण्डेय |birth_date=15 अगस्त,1969 ईस्वी |birth_place= |death_date= |nationality=भारतीय |other_names= |citizenship=<!-- use only when necessary per [[WP:INFONAT]] --> |education= |alma_mater= |occupation=[[ज्योतिर्मठ (जोशीमठ)]] के वर्तमान और 46वें शंकराचार्य (विवादित)<ref name="m101" /> |years_active= |known_for= |awards= |website=<!-- {{URL|example.com}} --> |signature= |footnotes= }} '''स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती'''<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/sc-stops-coronation-of-swami-avimukteshwaranand-saraswati-as-shankaracharya-of-jyotish-peeth/article66014458.ece|title=SC stops coronation of Swami Avimukteshwaranand Saraswati as Shankaracharya of Jyotish Peeth|last=PTI|date=2022-10-15|work=The Hindu|access-date=2026-02-21|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/sc-stops-coronation-of-swami-avimukteshwaranand-saraswati-as-shankaracharya-8210568/|title=SC stops coronation of Swami Avimukteshwaranand Saraswati as Shankaracharya of Jyotish Peeth|date=2022-10-15|website=The Indian Express|language=en|access-date=2026-02-21}}</ref>(जन्म: 1969; मूलनाम : उमाशंकर पाण्डेय) भारत के एक हिन्दू धर्मगुरु हैं। वे स्वयं को [[उत्तराखंड]] के [[जोशीमठ]] स्थित [[ज्योतिर्मठ (जोशीमठ)|ज्योतिर्मठ]] के वर्तमान और 46वें [[शंकराचार्य]] के रूप में प्रस्तुत करते हैं, किन्तु यह विवादित है एवं [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सर्वोच्च न्यायालय]] ने उनके शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक पर स्थगन आदेश दिया हुआ है।<ref name="m101">{{cite web |title=Swami Avimukteshwaranand News Live: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती क्या गिरफ्तार होंगे? जानिए केस से जुड़े सभी अपडेट |website=Navbharat Times |date=23 February 2026 |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/lucknow/swami-avimukteshwaranand-saraswati-news-today-live-up-court-pocso-case-up-police-latest-updates/liveblog/128702291.cms |language=hi |access-date=1 March 2026}}</ref><ref name="y820">{{cite web |last=ठाकुर |first=आलोक कुमार |title=राम मंदिर से लेकर माघ मेले तक... अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद कुछ नया नहीं, जान लीजिए कब-कब रहे कंट्रोवर्सी में |website=NDTV India |date=25 February 2026 |url=https://ndtv.in/india/shankaracharya-avimukteshwarananda-controversy-allahabad-high-court-on-sexual-harassment-of-minor-and-pocso-act-11135948 |language=hi |access-date=1 March 2026 }}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इसके अतिरिक्त [[काशी विद्वत परिषद]] तथा [[अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद]] ने भी उन्हें शंकराचार्य की मान्यता नहीं दी है।<ref>[https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/allahabad/nnouncement-of-new-shankaracharya-without-the-presence-of-sanyasi-akharas-is-contrary-to-tradition अखाड़ा परिषद ने ज्योतिष पीठ पर अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति को ठहराया अमान्य]</ref> ज्योतिर्मठ [[आदि शंकराचार्य]] द्वारा स्थापित ४ अद्वैत मठों में से एक है। उनके गुरु स्वामी [[स्वरूपानंद सरस्वती]], मठ के ४५वें शंकराचार्य, का सितंबर 2022 में निधन हो गया।<ref>{{Cite news |date=2022-09-13 |title=Uttarakhand: Swami Avimukteshwaranand new Jyotish Peethshankaracharya |work=The Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/dehradun/uttarakhand-swami-avimukteshwaranand-new-jyotish-peethshankaracharya/articleshow/94183259.cms |access-date=2023-06-03 |issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://m.economictimes.com/news/india/sc-stops-coronation-of-swami-avimukteshwaranand-saraswati-as-shankaracharya-of-jyotish-peeth/amp_articleshow/94881298.cms|title=SC stops coronation of Swami Avimukteshwaranand Saraswati as Shankaracharya of Jyotish Peeth - The Economic Times|website=m.economictimes.com|access-date=2026-02-21}}</ref> स्वरूपानंद सरस्वती का शंकराचार्य पद भी विवादग्रस्त था<ref>[https://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/varanasi/jyotish-peeth-connection-to-kashi-there-was-also-controversy-surrounding-avimukteshwaranand-guru-swaroopanand-becoming-shankaracharya/articleshow/126950803.cms अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के भी शंकराचार्य बनने पर विवाद था]</ref> ==प्रारंभिक जीवन और शिक्षा== जन्म 15 अगस्त 1969 को [[उत्तर प्रदेश]] के [[प्रतापगढ़ जिला|प्रतापगढ़ जिले]] के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था। संन्यास से पूर्व उनका नाम उमाशंकर पाण्डेय था। उन्होंने [[वाराणसी]] के [[संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय]] से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की है। संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्ययन के समय वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे।<ref name="m101" /><ref name="y820" /> == आरोप == फरवरी २०२६ के अन्तिम सप्ताह में उन पर दो बटुकों के [[यौन शोषण]] के गम्भीर आरोप लगाये थे जिस पर न्यायालय ने उन पर [[प्रथम सूचना रिपोर्ट]] दर्ज करके कार्वाई करने के निर्देश दिये हैं। दोनों बटुकों ने न्यायधीश के सामने अपने वक्तव्य दिये हैं और उन बटुकों की चिकित्सा रिपोर्ट भी करायी गयी है। इसके बाद [[इलाहाबाद उच्च न्यायालय]] अविमुक्तेश्वरानन्द की अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने कहा है कि आदेश सुनाए जाने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। साथ ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।<ref>[https://www.aajtak.in/uttar-pradesh/story/allahabad-hc-reserves-order-on-swami-avimukteshwaranand-anticipatory-bail-lclar-rptc-2481448-2026-02-27 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला]</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:हिन्दू गुरु]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1969 में जन्मे लोग]] k3i7y7vu581h6fetoepidr9o7s0f709 अभाज्य संख्या प्रमेय 0 1608823 6536588 6526213 2026-04-05T13:01:53Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536588 wikitext text/x-wiki {{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}} '''अभाज्य संख्या प्रमेय''' (Prime Number Theorem) संख्या सिद्धांत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण परिणाम है, जो अभाज्य संख्याओं के वितरण (distribution) के बारे में जानकारी देता है। अभाज्य संख्याएँ वे प्राकृतिक संख्याएँ हैं जो केवल 1 और स्वयं से ही विभाजित होती हैं, जैसे 2, 3, 5, 7, 11 आदि। यद्यपि ये संख्याएँ अनियमित रूप से दिखाई देती हैं, फिर भी उनके वितरण में एक गहरा गणितीय नियम छिपा हुआ है, जिसे अभाज्य संख्या प्रमेय व्यक्त करता है। इस प्रमेय का मुख्य कथन यह है कि यदि π(x) उन अभाज्य संख्याओं की संख्या को दर्शाता है जो x से कम या बराबर हैं, तो जब x बहुत बड़ा होता है, तब π(x) लगभग x / log x के बराबर होता है। यहाँ log x से आशय प्राकृतिक लघुगणक (natural logarithm) से है। सरल शब्दों में, जैसे-जैसे संख्याएँ बड़ी होती जाती हैं, अभाज्य संख्याएँ अपेक्षाकृत कम होती जाती हैं, और उनका घनत्व लगभग 1 / log x के अनुपात में घटता है। इस प्रमेय का प्रमाण 1896 में स्वतंत्र रूप से दो गणितज्ञों ने प्रस्तुत किया— जैक्स हैडामार्ड<ref name="Hadamard1896">{{citation|last=Hadamard|first=Jacques|title=Sur la distribution des zéros de la fonction ζ(s) et ses conséquences arithmétiques.|url=http://www.numdam.org/item/?id=BSMF_1896__24__199_1|journal=Bulletin de la Société Mathématique de France|volume=24|pages=199–220|year=1896|archive-url=https://web.archive.org/web/20240910153636/http://www.numdam.org/item/?id=BSMF_1896__24__199_1|publisher=Société Mathématique de France|archive-date=2024-09-10|author-link=Jacques Hadamard}}</ref> और चार्ल्स जीन डे ला वैली-पौसिन<ref name="de la Vallée Poussin1896">{{citation|last=de la Vallée Poussin|first=Charles-Jean|title=Recherches analytiques sur la théorie des nombres premiers.|url=http://sciences.amisbnf.org/fr/livre/recherches-analytiques-de-la-theorie-des-nombres-premiers|journal=Annales de la Société scientifique de Bruxelles|volume=20 B; 21 B|pages=183-256, 281-352, 363-397; 351-368|year=1896|publisher=Imprimeur de l'Académie Royale de Belgique|author-link=Charles Jean de la Vallée Poussin|access-date=26 फ़रवरी 2026|archive-date=26 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230326025352/http://sciences.amisbnf.org/fr/livre/recherches-analytiques-de-la-theorie-des-nombres-premiers|url-status=dead}}</ref>। दोनों ने जटिल विश्लेषण (complex analysis) और विशेष रूप से रीमान जीटा फलन के गुणों का उपयोग करके इस परिणाम को सिद्ध किया। इस संदर्भ में Bernhard Riemann का कार्य भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उनके द्वारा प्रस्तावित रीमान परिकल्पना अभाज्य संख्याओं के वितरण से गहराई से जुड़ी है। अभाज्य संख्या प्रमेय का महत्व केवल सैद्धांतिक गणित तक सीमित नहीं है। आधुनिक क्रिप्टोग्राफी, विशेषकर RSA एन्क्रिप्शन, बड़ी अभाज्य संख्याओं पर आधारित है। इसलिए अभाज्य संख्याओं के वितरण को समझना व्यावहारिक दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है। संक्षेप में, अभाज्य संख्या प्रमेय यह दर्शाता है कि यद्यपि अभाज्य संख्याएँ पहली दृष्टि में अव्यवस्थित प्रतीत होती हैं, परंतु उनके वितरण में एक गहरी और सुसंगत गणितीय संरचना विद्यमान है। यह प्रमेय संख्या सिद्धांत के विकास में एक मील का पत्थर माना जाता है और आज भी गणितीय अनुसंधान का महत्वपूर्ण विषय है। == सन्दर्भ == {{reflist}} [[श्रेणी:लघुगणक]] sklhszr325ukey6ljt8n4eu2s6wpbkc अल-मुहदार मस्जिद 0 1609024 6536704 6526195 2026-04-05T21:10:53Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536704 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building|building_name=अल-मुहदार मस्जिद|native_name={{transliteration|ar|Masjid Al-Muḥḍār}} ({{lang|ar|مَسْجِد ٱلْمُحْضَار}}) <br> {{transliteration|ar|Masjid Al-Miḥḍār}} ({{lang|ar|مَسْجِد ٱلْمِحْضَار}})|native_name_lang=ar|religious_affiliation=[[इस्लाम]]|image=13 Tarim (13) (cropped).jpg|caption=मस्जिद का एक चित्र|map_type=Yemen#Middle East#West Asia|map_relief=1|map_caption=यमन में स्थान|location=[[तरीम, यमन|तरीम]], [[हज़रामौत प्रान्त|हज़रामौत गवर्नरेट]], {{YEM}}|geo={{coord|16|3|16.28|N|48|59|54.16|E|display=inline,title}}|region=[[हज़रामौत]], [[दक्षिण अरब]]|functional_status=सक्रिय|website=|architect='अवाद सलमान 'अफीफ अल-तरीमी (मीनार)<ref name="Alapn 10-2014" />|architecture_type=[[मस्जिद]]|architecture_style=[[इस्लामी वास्तुकला|इस्लामी]]|year_completed=1914|construction_cost=|capacity=|dome_quantity=|dome_height_outer=|dome_dia_outer=|minaret_quantity=1|minaret_height={{Convert|53|m}}<ref name="Alapn 10-2014" /><ref name="YemenTimes 11-2005" /><ref name="Batuta 09-2013" />|materials=[[कच्ची ईंट]] (एडोब)|image_size=}} '''अल-मुहदार मस्जिद''' या '''अल-मिहदार मस्जिद''' [[यमन]] के हज़रामौत गवर्नरेट के प्राचीन शहर तरीम में स्थित ऐतिहासिक [[मस्जिद|मस्जिदों]] में से एक है। इसका नामकरण 15वीं सदी के दौरान शहर में रहने वाले एक [[मुस्लिम]] नेता उमर अल-मिहदार बिन अब्दुल-रहमान अल-सक़्क़ाफ़ ({{langx|ar|عُمَر ٱلْمِحْضَار بِن عَبْد ٱلرَّحْمَٰن ٱلسَّقَّاف|ʿUmar al-Miḥḍār bin ʿAbd Ar-Raḥmān As-Saqqāf}}) के नाम पर किया गया है।<ref name="YemenTimes 11-2005">{{cite news|url=http://www.yementimes.com/article.shtml?i=897&p=culture&a=1|title=Tarim ... the town of mosques and schools|date=November 2005|newspaper=[[Yemen Times]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20090416074943/http://www.yementimes.com/article.shtml?i=897&p=culture&a=1|archive-date=16 April 2009}}</ref><ref name="Batuta 09-2013">{{Cite web|url=https://www.batuta.com/5934/%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF-%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%AD%D8%B6%D8%A7%D8%B1|title=مسجد المحضار|archive-url=https://web.archive.org/web/20130901144206/http://www.batuta.com/5934/%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF-%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%AD%D8%B6%D8%A7%D8%B1/|archive-date=1 September 2013|access-date=27 July 2017|url-status=dead}}</ref> == वास्तुकला == इस इमारत की मुख्य विशेषता इसकी इस्लामी ज्यामितीय डिज़ाइन है। इसके लेआउट में एक खुला प्रांगण है जो चार गलियारों से घिरा हुआ है, जिनमें से सबसे बड़े गलियारे में क़िबला स्थित है। इसे ज्यामितीय, पुष्प और सुलेख रूपांकनों से सजे तीन उत्कृष्ट भित्तिचित्रों से सजाया गया है। क़िबला गलियारे के केंद्र में एक प्रतिष्ठित [[मीनार]] स्थित है, जो लगभग {{convert|50|m|ft|abbr=off}} ऊँची है और पृथ्वी पर सबसे ऊँची कच्ची ईंट संरचना है। यह चौकोर आकार की है और इसके अंदर शीर्ष तक जाने के लिए एक सीढ़ी मौजूद है। इसका निर्माण 1914 [[आम युग|ई.]] (1333 [[हिजरी]]) के आसपास किया गया था, और यह कच्ची ईंट से बनी है। इस मीनार को वास्तुकार 'अवाद सलमान 'अफीफ अल-तरीमी ({{langx|ar|عَوَض سَلْمَان عَفِيْف ٱلتَّرِيْمِي|ʿAwaḍ Salmān ʿAfīf At-Tarīmī}}) द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जिन्होंने इससे पहले भी मिट्टी की जालियों और गुंबदों के कई डिज़ाइन और निर्माण कार्य किए थे। इसका रखरखाव और पर्यवेक्षण अबू बक्र बिन शिहाब (मृत्यु 1345 हिजरी) द्वारा किया गया था। इसे तरीम शहर में आने वाले आगंतुकों और शोधकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प स्थलों और गंतव्यों में से एक माना जाता है।<ref name="Alapn 10-2014">{{cite news|url=http://www.alapn.com/ar/news.php?cat=11&id=34449|title=مسجد المحضار..منارة تناطح السحاب من "الطين" بتصميم أحد الشعراء|newspaper=Poetry News Agency|archive-url=https://web.archive.org/web/20141007122439/http://www.alapn.com/ar/news.php?cat=11&id=34449|archive-date=7 October 2014|language=ar}}</ref><ref name="Clezy 07-2012">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=O0qNW5q8mw8C&q=seiyun+palace&pg=PA272|title=Now in Remission: A Surgical Life|last=Clezy|first=Ken|date=July 2012|publisher=Wakefield Press|isbn=978-1-7430-5114-6}}</ref> === अल-अहक़ाफ़ पुस्तकालय === अल-अहक़ाफ़ पुस्तकालय मस्जिद भवन के भूतल पर स्थित है, जिसे तरीम और पड़ोसी शहरों में बड़ी संख्या में पांडुलिपियों को संरक्षित करने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बनाया गया था। वाडी हज़रामौत क्षेत्र में 10वीं शताब्दी से तरीम को एक विशिष्ट इस्लामी वैज्ञानिक केंद्र माना जाता रहा है।<ref name="Tarim at a Glance">{{cite news|url=http://www.yementimes.com/article.shtml?i=853&p=culture&a=1|title=Tarim at a Glance|last=Ba Udhan|first=H.|date=June 2005|newspaper=[[Yemen Times]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20090414203904/http://www.yementimes.com/article.shtml?i=853&p=culture&a=1|archive-date=14 April 2009}}</ref><ref name="Breton 06-1986">{{citation|last=Breton|first=J.|title=Manhattan in the Hadhramaut|date=June 1986|url=http://www.saudiaramcoworld.com/issue/198603/manhattan.in.the.hadramaut.htm|pages=22–27|archive-url=https://web.archive.org/web/20110708150923/http://www.saudiaramcoworld.com/issue/198603/manhattan.in.the.hadramaut.htm|publisher=[[Saudi Aramco World]]|access-date=3 May 2021|archive-date=8 July 2011|url-status=dead}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://archnet.org/sites/4920 Archnet.org: मस्जिद अल-मिहदार] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20240316061514/https://www.archnet.org/sites/4920 |date=16 मार्च 2024 }} * [https://mcid.mcah.columbia.edu/image/1819_yemen2008_almuhdhar_img_007 MCID: अल-मुहदार मस्जिद] 4j43lmbhge0f6eew6yb5nd5zvo8trhq अल-अहमदिया मस्जिद 0 1609037 6536700 6526250 2026-04-05T20:46:44Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 4 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536700 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building|name=अल-अहमदिया का मस्जिद-मदरसा|native_name={{lang|ar|جامع ومدرسة الأحمدية}}|native_name_lang=ara|religious_affiliation=[[सुन्नी इस्लाम]]|image=Al-Ahmadiya Mosque Dome.png|image_upright=1.4|alt=|caption=2023 में मस्जिद के गुंबद और मीनार|map_type=Iraq Baghdad|coordinates={{coords|33.34357|44.38584|format=dms|region:IQ_type:landmark|display=inline,title}}|map_size=250|map_alt=|map_relief=1|map_caption=[[बगदाद]] में मस्जिद का स्थान|location=[[अल-रुसाफ़ा, इराक|अल-रुसाफ़ा]], [[बगदाद]], [[बगदाद 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अधिक)}}|dome_height_outer=|dome_height_inner=|dome_dia_outer={{cvt|11|m}}|dome_dia_inner=|minaret_quantity=एक|minaret_height=|spire_quantity=|spire_height=|site_area={{cvt|2600|m2}}|temple_quantity=|monument_quantity=|shrine_quantity=|materials=|elevation_m=|inscriptions=|elevation_footnotes=|nrhp=|designated=|added=|refnum=|footnotes=|mapframe=yes}} '''अल-अहमदिया का मस्जिद-मदरसा''' ({{langx|ar|جامع ومدرسة الأحمدية}}), जिसे आमतौर पर '''अल-अहमदिया मस्जिद''' ({{langx|ar|جامع الأحمدية}}) या '''अल-मैदान मस्जिद''' ({{langx|ar|جامع الميدان}}) के रूप में भी जाना जाता है, [[इराक]] के बगदाद प्रान्त में [[बगदाद]] के अल-रुसाफ़ा जिले में स्थित एक [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]] [[मस्जिद]] और [[मदरसा]] है। यह मस्जिद अल-रुसाफ़ा के दक्षिणी भाग में अल-रशीद स्ट्रीट पर, और अल-मुरदिया मस्जिद के पास अल-मैदान स्क्वायर के पूर्व में स्थित है।<ref>{{cite book|title=Baghdad: City of Peace, City of Blood|author=Marozzi, Justin|date=May 29, 2014|publisher=Penguin UK|isbn=|page=}}</ref> == इतिहास == === निर्माण === इस मस्जिद का निर्माण 1796 में अल-मैदान में मामलुक शासक सुलेमान महान के नायब (उपाध्यक्ष) अहमद अल-कातखाधा द्वारा किया गया था। अहमद अल-कातखाधा के नाम पर ही मस्जिद का नाम "अल-अहमदिया" पड़ा। कथित तौर पर अहमद अल-कातखाधा ने मस्जिद के निर्माण के लिए अपने समय के सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरों और वास्तुकारों को बुलाया था और निर्माण कार्य पर काफी धन भी खर्च किया था। अहमद अल-कातखाधा की मृत्यु के बाद, उनके भाई अब्दुल्ला बेउ ने काम जारी रखा। बाद में उनके भाई द्वारा मदरसे के साथ-साथ [[मीनार]] भी जोड़ी गई। यह मस्जिद अल-खुलाफा मस्जिद के भी करीब है, जो अब्बासी युग की मस्जिद है।<ref name="Ar">{{cite web|url=https://archnet.org/sites/3852|title=Jami' al-Ahmadiyya|date=n.d.|work=ArchNet.org|access-date=January 4, 2018|archive-date=7 अगस्त 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250807010333/https://www.archnet.org/sites/3852|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.algardenia.com/2014-04-04-19-52-20/menouats/35233-2018-04-30-20-42-42.html|date=2018-04-30|website=www.algardenia.com|script-title=ar:الگاردينيا - مجلة ثقافية عامة - بغداد الرشيد مدينة الجوامع والمساجد / الحلقة الأولى|access-date=2023-07-02|lang=ar}}</ref><ref name=":2">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=RcsxDwAAQBAJ|last=فرنسيس|first=بشير يوسف|publisher=E-Kutub Ltd|isbn=978-1-78058-262-7|script-title=ar:موسوعة المدن والمواقع في العراق - الجزء الأول|lang=ar}}</ref> === बाद की घटनाएँ === इसके निर्माण के कुछ समय बाद ही, 1816 में अपनी बगदाद यात्रा के दौरान जेम्स सिल्क बकिंघम ने इस मस्जिद-मदरसे का दौरा किया। बकिंघम ने इसे "सुंदर गुंबद और मीनार" वाले स्थान के रूप में वर्णित किया और इसकी रंगीन टाइलों व चीनी मिट्टि के काम को देखकर चकित रह गए, लेकिन यह जानकर निराश हुए कि अंदर का हिस्सा साफ और अच्छी तरह से रोशनीदार होने के अलावा कुछ खास नहीं था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=bc8w1yxYggkC|title=Travels in Mesopotamia|last=Buckingham|first=James Silk|date=1827|publisher=H. Colburn|author-link=James Silk Buckingham|lang=en}}</ref> इस परिसर ने कई घटनाक्रम देखे हैं, जिनमें 1831 में अंतिम मामलुक शासक दाऊद पाशा द्वारा इमारत के अग्रभाग पर मौजूद लेखों और शिलालेखों का नवीनीकरण शामिल है। भव्य वज़ीर मिदहत पाशा के शासनकाल के दौरान, मदरसे के कमरों को ध्वस्त कर दिया गया था और इसके फर्श को सार्वजनिक सड़क में जोड़ दिया गया था। मेहराब प्रांगण के गुंबद के निचले हिस्से पर लिखे एक शिलालेख के आधार पर, प्रार्थना घर की इमारत का नवीनीकरण वर्ष 1893 में किया गया था।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://tableegh.imamali.net/index.php?id=1455|date=|website=tableegh.imamali.net|script-title=ar:جامع الأحمدية في بغداد - موقع قسم الشؤون الدينية - العتبة العلوية المقدسة|access-date=2023-06-08|lang=ar}}</ref> बगदाद के कई प्रसिद्ध विद्वानों ने इसके मदरसे में अध्ययन किया है, जिनमें शरिया न्यायाधीश और खगोल विज्ञान लेखक याह्या अल-वात्री शामिल हैं, जो प्रसिद्ध अल-वात्री परिवार के सदस्य थे। वे बाद में इसमें पढ़ाने लगे और फिर अल-खुलाफा मस्जिद में "अल-वात्री परिषद" नामक एक वैज्ञानिक सभा की स्थापना की।<ref>{{Cite web|url=https://ketabpedia.com/%D8%AA%D8%AD%D9%85%D9%8A%D9%84/%D8%A7%D9%84%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF%D9%8A%D9%88%D9%86-%D8%A3%D8%AE%D8%A8%D8%A7%D8%B1%D9%87%D9%85-%D9%88%D9%85%D8%AC%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%87%D9%85/|date=|script-title=ar:تحميل كتاب البغداديون أخبارهم ومجالسهم ل إبراهيم الدروبي pdf|access-date=2023-10-10|script-website=ar:كتاب بديا|lang=ar|archive-date=8 नवंबर 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20231108053857/https://ketabpedia.com/%D8%AA%D8%AD%D9%85%D9%8A%D9%84/%D8%A7%D9%84%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF%D9%8A%D9%88%D9%86-%D8%A3%D8%AE%D8%A8%D8%A7%D8%B1%D9%87%D9%85-%D9%88%D9%85%D8%AC%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%87%D9%85/|url-status=dead}}</ref> उनके बेटे महमूद अल-वात्री ने भी इसी मदरसे में पढ़ाई की थी। [[चित्र:The_Maidan_Mosque,_Baghdad,_1932.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|270x270पिक्सेल|1932 में मस्जिद-मदरसा।]] जब इराक राज्य ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तो राजा फैसल प्रथम ने आदेश दिया कि यह मस्जिद केवल शुक्रवार की नमाज़ के लिए आवंटित की जाए।<ref name=":0" /> सुन्नी एंडोमेंट ऑफिस के मंत्रिमंडल के सम्मेलन के आयोजन से पहले 2010 में मस्जिद का जीर्णोद्धार किया गया था।<ref>{{cite book|publisher=|location=|page=26|script-title=ar:دليل الجوامع والمساجد التراثية والأثرية''. ديوان الوقف السني في العراق''.|lang=ar}}</ref> 2019 में, लगातार बारिश, भूजल और उपेक्षा के कारण अल-अहमदिया मस्जिद-मदरसे का गुंबद ढह गया, जो बगदाद के आसपास की कई इमारतों के समान है जो राजनीतिक चोरी, उपेक्षा और राजनीतिक मतभेदों और तनावों के कारण पीड़ित हैं।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.aljazeera.net/culture/2019/5/18/%d8%a7%d9%84%d8%b9%d8%b1%d8%a7%d9%82-%d8%aa%d8%b1%d8%a7%d8%ab-%d8%a3%d8%a8%d9%86%d9%8a%d8%a9-%d8%a5%d9%87%d9%85%d8%a7%d9%84-%d8%ad%d8%b1%d9%88%d8%a8|date=|website=[[Al-Jazeera]]|script-title=ar:بين الإهمال والحروب.. أبنية العراق التراثية تتداعى|access-date=2023-07-02|lang=ar}}</ref> उसी वर्ष, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उनके विरासत महत्व को पहचाने जाने के बाद [[मुरजान मस्जिद]], अल-मुरदिया मस्जिद और [[उज़्बेक मस्जिद]] के साथ अल-अहमदिया मस्जिद-मदरसे के जीर्णोद्धार और पुनर्वास के लिए एक अभियान शुरू किया। बाद में उसी वर्ष मस्जिद-मदरसे का पुनर्निर्माण शुरू हुआ।<ref name=":1" /><ref>{{Cite web|url=http://sunniaffairs.gov.iq/ar/%d8%af%d9%8a%d9%88%d8%a7%d9%86-%d8%a7%d9%84%d9%88%d9%82%d9%81-%d8%a7%d9%84%d8%b3%d9%86%d9%8a-%d9%8a%d8%b7%d9%84%d9%82-%d8%ad%d9%85%d9%84%d8%a9-%d9%83%d8%a8%d8%b1%d9%89-%d9%84%d8%a7%d8%b9%d8%a7%d8%af|date=2019-01-23|script-title=ar:ديوان الوقف السني يطلق حملة كبرى لاعادة تأهيل وصيانة الجوامع الأثرية في بغداد|access-date=2023-07-02|script-website=ar:ديوان الوقف السني|trans-website=SunniAffairs.gov.iq|lang=ar|archive-date=2 जुलाई 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230702234212/http://sunniaffairs.gov.iq/ar/%D8%AF%D9%8A%D9%88%D8%A7%D9%86-%D8%A7%D9%84%D9%88%D9%82%D9%81-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D9%86%D9%8A-%D9%8A%D8%B7%D9%84%D9%82-%D8%AD%D9%85%D9%84%D8%A9-%D9%83%D8%A8%D8%B1%D9%89-%D9%84%D8%A7%D8%B9%D8%A7%D8%AF|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://sunniaffairs.gov.iq/ar/%d8%b6%d9%85%d9%86-%d8%ad%d9%85%d9%84%d8%aa%d9%87-%d9%84%d8%a5%d8%b9%d8%a7%d8%af%d8%a9-%d8%a5%d8%b9%d9%85%d8%a7%d8%b1-%d8%a8%d9%8a%d9%88%d8%aa-%d8%a7%d9%84%d9%84%d9%87-%d9%88%d8%aa%d8%a3%d9%87%d9%8a|date=2020-09-28|script-title=ar:ضمن حملته لإعادة إعمار بيوت الله وتأهيلها.. الدكتور سعد كمبش يتفقد عددا من المساجد في منطقة الميدان ببغداد|access-date=2023-07-03|script-website=ar:ديوان الوقف السني|trans-website=SunniAffairs.gov.iq|lang=ar|archive-date=17 जुलाई 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230717034235/http://sunniaffairs.gov.iq/ar/%D8%B6%D9%85%D9%86-%D8%AD%D9%85%D9%84%D8%AA%D9%87-%D9%84%D8%A5%D8%B9%D8%A7%D8%AF%D8%A9-%D8%A5%D8%B9%D9%85%D8%A7%D8%B1-%D8%A8%D9%8A%D9%88%D8%AA-%D8%A7%D9%84%D9%84%D9%87-%D9%88%D8%AA%D8%A3%D9%87%D9%8A|url-status=dead}}</ref> मस्जिद जनता के लिए खुली रहती है लेकिन प्रवेश केवल नमाज़ के समय ही खुला रहता है। == वास्तुकला == [[चित्र:Fonds_André_Raymond_(1925-2011)_-_Irak_-_Bagdad_-_Mosquée_al-Ahmadiyya_(MédiHAL_4893640).jpg|अंगूठाकार|1982 में मस्जिद परिसर में नवीनीकरण कार्य]] अल-अहमदिया का मस्जिद-मदरसा दो परिसरों से बना है, पहला गुंबदों वाली मुख्य मस्जिद है और इसके दक्षिणी भाग में दूसरी इमारत है जो एक दो मंजिला परिसर है जिसमें मदरसा स्थित है। दोनों इमारतों के बीच एक प्रांगण है; यह ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है जिनमें चार द्वार हैं जो इसके आसपास के क्षेत्रों की ओर जाते हैं। प्रांगण के दाईं ओर मुकर्नास के साथ एक ग्रीष्मकालीन मेहराब है। इस इमारत का क्षेत्रफल लगभग {{convert|2600|m2}} है। मस्जिद के अंदर, गलियारे के सामने एक चौड़ा मुसल्ला है। बाईं ओर, गर्मियों के लिए एक प्रार्थना स्थान है, जिसके ऊपर काशी टाइलों से बना एक ऊंचा गुंबद है और इसका व्यास {{convert|11|m}} है। गुंबद के दक्षिण में एक मीनार स्थित है। मस्जिद की दीवार पर [[क़ुरआन|क़ुरआनी]] आयतों के शिलालेख रंगे गए हैं, जिन्हें 1850 में सुलेखक सुफियान अल-वहबी द्वारा लिखा गया था, जिन्हें मस्जिद के प्रांगण में ही दफनाया गया है।<ref name="Ar" /> अल-अहमदिया का मस्जिद-मदरसा अपने गुंबद और इसकी लंबाई से विशिष्ट है जिसे तीन पट्टियों में विभाजित किया गया है। इसके मध्य भाग में खिड़कियाँ हैं, जिनमें से कुछ कांच वाली थीं और कुछ नहीं। गर्दन के ऊपर एक गुंबद है, जो दोहरे गुंबदों के प्रकार का है। भीतरी गुंबद को अर्धगोलाकार रूप में नीचा रखा गया था, जबकि बाहरी गुंबद को बल्बनुमा आकार में बनाया गया था, जो अपनी विशालता के लिए जाना जाता है। बगदाद की जलवायु के कारण, मस्जिद-मदरसे की दीवारें {{convert|2.5|m}} मोटी हैं; जो हैदर-खाना मस्जिद की दीवारों के समान हैं।<ref name=":0" /> ऊंची मीनार में बहुरंगी चीनी मिट्टी का काम है।<ref name=":2" /> यह एक अष्टकोणीय आधार पर स्थित है, हालांकि यह आधार केवल मस्जिद के पश्चिमी दृश्य से दिखाई देता है। मीनार में एक पसलीदार गुंबद शीर्ष के साथ ज्यामितीय आकार शामिल हैं।<ref name="Ar" /> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == {{Commons category-inline|Mosque-Madrasa of al-Ahmadiyya|Mosque-Madrasa of al-Ahmadiyya}} k7jvfvv52d371kgfv0oo7eb2w5fxvia अल-सराय मस्जिद 0 1609072 6536706 6526398 2026-04-05T21:17:02Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536706 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building|name=अल-सराय मस्जिद|native_name={{lang|ar|جامع السراي}}|native_name_lang=ara|religious_affiliation=[[सुन्नी इस्लाम]]|image=Al- Saray Mosque جامع السراي.jpg|image_upright=1.4|alt=|caption=2015 में मस्जिद|map_type=Iraq Baghdad|coordinates={{coords|33.3416332|44.3866187|region:IQ_type:landmark|format=dms|display=inline, title}}|map_size=250|map_alt=|map_relief=1|map_caption=[[बगदाद]] में स्थान|location=[[अल-रुसाफा, इराक|रुसाफा]], [[बगदाद]], [[बगदाद प्रान्त]]|locale=|deity=|rite=|tradition=|sect=|festival=|cercle=|country=[[इराक]]|administration=|consecration_year=|organisational_status=[[मस्जिद]] और [[मदरसा]]|functional_status=सक्रिय|heritage_designation=|leadership=|ownership=|governing_body=|bhattaraka=|patron=|website=|coordinates_footnotes=|architect=|architecture_type={{nowrap|[[मस्जिद वास्तुकला]]}}|architecture_style=[[अब्बासी 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रखी थी।<ref>{{cite book|author=Hudu, Mujid|publisher=|year=|isbn=|location=|page=356|script-title=ar:تذكرة الاولياء|lang=ar}}</ref><ref>{{cite book|author=Ruuf, Abdussalam|publisher=|year=1966|isbn=|location=|page=|script-title=ar:جريدة البلد البغدادية|lang=ar}}</ref> इस मस्जिद को "किंग गाज़ी मस्जिद" का उपनाम भी दिया गया था क्योंकि शाही युग के दौरान पुराने इराकी राजाओं ने यहीं नमाज़ अदा की थी।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://tableegh.imamali.net/index.php?id=1439|date=|website=tableegh.imamali.net|script-title=ar:جامع السراي - موقع قسم الشؤون الدينية - العتبة العلوية المقدسة|access-date=2023-08-28|lang=ar}}</ref> == इतिहास == इस मस्जिद को सबसे पहले अब्बासी खलीफा अल-नासिर के दृष्टिकोण के अनुसार "सूक अल-सुल्तान इलाके" नामक क्षेत्र में बनाया गया था जो बाब अल-सुल्तान (अब बाब अल-मुअज्जम कहा जाता है) के करीब था। इस्लामी इतिहासकार सिब्त इब्न अल-जौज़ी ने अपने लेखों में इस मस्जिद का उल्लेख किया है। खलीफा अल-नासिर की मृत्यु के बाद के वर्ष में, उनके बेटे, अल-ज़ाहिर, खलीफा के पद पर आसीन हुए और उन्होंने मस्जिद में एक पुस्तकालय का निर्माण कराया और साथ ही मस्जिद में कई [[क़ुरआन]] भी स्थानांतरित किए। बगदाद की मंगोल घेराबंदी के बाद भी मस्जिद ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखा और इसका प्रमाण इब्न अल-फुवाती की रचनाओं में पाया जा सकता है जहां उन्होंने उल्लेख किया है कि वे एक समय में इस मस्जिद के [[इमाम]] थे।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.almadasupplements.com//view.php?cat=2772|date=|website=www.almadasupplements.com|script-title=ar:تاريخ جامع السراي|archive-url=https://web.archive.org/web/20230828153418/https://www.almadasupplements.com//view.php?cat=2772|archive-date=August 28, 2023|access-date=2023-08-28|lang=ar|url-status=dead}}</ref> [[चित्र:Al-Sarai_mosque_in_Baghdad_1917-1919.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|[[प्रथम विश्व युद्ध]] के दौरान मस्जिद।]] बगदाद पर उस्मानी विजय के बाद, सुल्तान [[सुलेमान प्रथम|सुलेमान द मैग्निफिसेंट]] ने 1533 में मस्जिद का पुनर्निर्माण कराया। 1683 में, उस्मानी [[वज़ीर-ए-आज़म|भव्य वज़ीर]] इब्राहिम पाशा ने सैयद सुल्तान अली मस्जिद के साथ-साथ इस मस्जिद का दूसरा पुनर्निर्माण कराया। एक सदी बाद 1704 और 1723 के बीच, उस समय बगदाद के गवर्नर और इराक के मामलुक राज्य के संस्थापक, हसन पाशा ने मस्जिद को इसके वर्तमान विस्तृत रूप में पुनर्निर्मित किया और उनके सम्मान में इसका नाम "''नई हसन पाशा मस्जिद''" रखा गया।<ref name=":1" /><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=UB4uSVt3ulUC|title=Historic Cities of the Islamic World|last=Bosworth|first=Clifford Edmund|date=2007-01-01|publisher=BRILL|isbn=978-90-04-15388-2|language=en}}</ref> इस समय यह मस्जिद बगदादी सरकारी महल के ठीक सामने स्थित थी। यह अल-रुसाफा की सबसे प्रसिद्ध मस्जिदों में से एक थी और इसमें एक [[मदरसा]] के साथ-साथ पतले गुंबद और एक ऊँची मीनार शामिल थी।<ref>{{Cite web|url=https://ketabpedia.com/%D8%AA%D8%AD%D9%85%D9%8A%D9%84/%D8%AA%D8%A7%D8%B1%D9%8A%D8%AE-%D9%85%D8%B3%D8%A7%D8%AC%D8%AF-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF-%D9%88%D8%A2%D8%AB%D8%A7%D8%B1%D9%87%D8%A7/|date=|script-title=ar:تحميل كتاب تاريخ مساجد بغداد وآثارها ل محمود شكري الألوسي pdf|access-date=2023-08-28|script-website=ar:كتاب بديا|trans-website=ketabpedia.com|lang=ar|archive-date=28 मई 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230528120703/https://ketabpedia.com/%D8%AA%D8%AD%D9%85%D9%8A%D9%84/%D8%AA%D8%A7%D8%B1%D9%8A%D8%AE-%D9%85%D8%B3%D8%A7%D8%AC%D8%AF-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF-%D9%88%D8%A2%D8%AB%D8%A7%D8%B1%D9%87%D8%A7/|url-status=dead}}</ref> इराक राज्य की स्वतंत्रता के बाद, कई छोटे बदलाव और पुनर्निर्माण हुए, जिनमें इसके पीछे की गली में खुलने वाले इसके एक दरवाजे को बंद करना और इसमें मौजूद शिक्षण विभाग को समाप्त करना शामिल है।<ref name=":1" /> राजा फैसल प्रथम के युग के दौरान, यह मस्जिद शुक्रवार की नमाज़ का मुख्य केंद्र बन गई, जिसमें राजा ठेठ अरब कपड़ों में नमाज़ का नेतृत्व करते थे और फिर उसके बाद वहाँ के लोगों से बात करते थे और मिलते थे।<ref>{{Cite book|title=Faisal I of Iraq|last=Allawi|first=Ali|date=March 11, 2014|publisher=[[Yale University Press]]|isbn=9780300127324|location=New Haven|page=500|oclc=1158641331|author-link=Ali Allawi}}</ref> आज, यह मस्जिद अल-कुशला के पास स्थित है और मस्जिद को एक समय "किंग्स मस्जिद" कहा जाता था क्योंकि इराक के सभी राजाओं ने शाही युग के दौरान इसमें नमाज़ अदा की थी।<ref name=":0" /> 2024 में, ज़ुक़ाक़ अल-सराय में कई ऐतिहासिक इमारतों के साथ इस मस्जिद का नवीनीकरण और संरक्षण किया गया।<ref>{{Cite news|url=https://almaalomah.me/news/68156/local/%D8%A3%D9%85%D8%A7%D9%86%D8%A9-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF:-%D8%AA%D8%AD%D9%82%D9%8A%D9%82-%D9%86%D8%B3%D8%A8-%D8%A5%D9%86%D8%AC%D8%A7%D8%B2-%D9%85%D8%AA%D9%82%D8%AF%D9%85%D8%A9-%D8%A8%D9%85%D8%B4%D8%B1%D9%88%D8%B9-%D8%AA%D8%A3%D9%87%D9%8A%D9%84-%D9%85%D8%AD%D9%88%D8%B1-%D8%A7%D9%84%D8%B3%D8%B1%D8%A7%D9%8A|title=Baghdad Municipality: Achieving advanced completion rates in al-Sarai Axis Rehabilitation Project|date=21 June 2024|work=Al-Ma'lomah|access-date=}}</ref> == विवरण == [[चित्र:Gate_of_al-Sarai_Mosque.jpg|अंगूठाकार|277x277पिक्सेल|द्वार (गेट)।]] === लेआउट === यह मस्जिद उस्मानी काल के दौरान एक प्रशासनिक भवन, दार दीवानी अल-हुकुमिया के सामने स्थित है, जिसे अल-कुशला के एक हिस्से के रूप में भी जाना जाता है। उस्मानी युग के दौरान बगदाद के वज़ीर हसन पाशा ने अपने कार्यकाल के दौरान इस विस्तार परियोजना और कई नई सुविधाओं और विशेषताओं को जोड़ने की देखरेख की थी। इस दौरान, दस अतिरिक्त गुंबद, चार केंद्रीय खंभे (जिनमें कोई सजावट या शिलालेख नहीं था), और कशानी टाइलों वाली एक [[मीनार]] भी जोड़ी गई थी।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=32f_zQEACAAJ|publisher=|year=|isbn=|location=|pages=31–32|script-title=ar:تاريخ مساجد بغداد وآثارها] - تأليف السيد محمود شكري الآلوسي وتهذيب محمد بهجة الأثري - مطبعة دار السلام في بغداد|lang=ar}}</ref> मस्जिद का क्षेत्रफल लगभग {{convert|3000|m2}} है, और इसमें 300 नमाज़ी एक साथ आ सकते हैं।<ref name=":0" /> === आंतरिक भाग और द्वार === प्रांगण के भीतर, गर्मियों के समय के लिए एक मुसल्ला (प्रार्थना स्थल) है, और बाईं ओर सर्दियों के समय के लिए एक मुसल्ला है। मस्जिद के भीतर एक मदरसा भी है। मस्जिद में पांच द्वार हैं, जो सभी सामूहिक प्रार्थनाओं जैसे शुक्रवार की नमाज़ और [[ईद की नमाज़]] के लिए प्रार्थना स्थल की ओर ले जाते हैं।<ref>{{cite book|publisher=|year=|isbn=|location=|page=38|script-title=ar:كتاب دليل الجوامع والمساجد التراثية والأثرية - ديوان الوقف السني في العراق|lang=ar}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == {{commons category-inline|Al-Sarai Mosque}} 4rnjffjx9ssg5ys5l05ohuolpjbkymc अल-नाका मस्जिद 0 1609079 6536701 6526406 2026-04-05T21:00:47Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536701 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building|name=अल-नाका मस्जिद|native_name={{langx|ar|الجامع الناقة}}|native_name_lang=|religious_affiliation=[[इस्लाम]]|image=Naga Mosque Exterior Tripoli Libya.JPG|image_upright=|alt=|caption=|map_type=Libya Tripoli|coordinates={{coord|32.89536|13.17885|format=dms|type:landmark_region:LY|display=inline,title}}|map_size=|map_alt=|map_relief=yes|map_caption=[[त्रिपोली, लीबिया|त्रिपोली]] में मस्जिद का स्थान|location=[[त्रिपोली, लीबिया|त्रिपोली]], [[त्रिपोलिटानिया]]|locale=|deity=|rite=|tradition=|sect=|festival=|cercle=|sector=|municipality=|district=|territory=|prefecture=|state=|province=|region=|country=[[लीबिया]]|administration=|consecration_year=|organisational_status=[[मस्जिद]]|functional_status=सक्रिय|heritage_designation=|leadership=|ownership=|governing_body=|bhattaraka=|patron=|website=|coordinates_footnotes=|architect=|architecture_type={{nowrap|[[मस्जिद वास्तुकला]]}}|architecture_style=[[इस्लामी वास्तुकला|इस्लामी]]|founded_by=[[अल-मुइज़ ली-दीन अल्लाह|अल-मुइज़]]|creator=|funded_by=|general_contractor=|established=|groundbreaking=|year_completed={{ubl|{{nowrap|लगभग {{circa|10वीं शताब्दी}} {{small|(पहला अंकन)}}}}|1611 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West: North Africa and the Iberian Peninsula, 700-1800|last=Bloom|first=Jonathan M.|publisher=Yale University Press|year=2020|isbn=9780300218701|location=|pages=218–219|language=en}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=|title=Some Islamic Sites in Libya: Tripoli, Ajdabiyah and Ujlah|last=Warfelli|first=Muhammad|publisher=Department of Antiquities, Tripoli|year=1976|series=Art and Archeology Research Papers|pages=5–7|language=en|chapter=The Old City of Tripoli}}</ref> ऐसा माना जाता है कि यह त्रिपोली में इस्लामी काल का सबसे पुराना स्मारक है।<ref name=":16">{{Cite book|url=https://www.archnet.org/collections/126|title=Dictionary of Islamic Architecture|last=Petersen|first=Andrew|publisher=Routledge|year=1996|isbn=9781134613663|location=|pages=165–166|language=en|chapter=Libiya (Libyan Arab People's Socialist State)|access-date=27 फ़रवरी 2026|archive-date=29 मई 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250529214622/https://www.archnet.org/collections/126|url-status=dead}}</ref><ref name=":1" /> इसे संभवतः सबसे पहले 973 में फ़ातिमद खलीफा अल-मुइज़ के आदेश पर बनाया गया था, जो इफ़्रीकिया से [[मिस्र]] में फ़ातिमद दरबार को स्थानांतरित करने की अपनी यात्रा के दौरान इस समय के आसपास शहर में रुके थे।<ref name=":16" /><ref name=":2">{{Cite book|title=The City in the Islamic World|last=Micara|first=Ludovico|publisher=Brill|year=2008|isbn=978-90-474-4265-3|editor-last=Jayyusi|editor-first=Salma Khadra|volume=1|pages=390, 403|language=en|chapter=The Ottoman Tripoli: A Mediterranean Medina|editor-last2=Holod|editor-first2=Renata|editor-last3=Petruccioli|editor-first3=Attilio|editor-last4=Raymond|editor-first4=André|chapter-url=https://books.google.com/books?id=tO55DwAAQBAJ&dq=naqah+mosque+tripoli&pg=PA390}}</ref> मस्जिद से जुड़ी दो समान अप्रामाणिक कहानियाँ हैं जो इसके नाम ({{Transliteration|ar|al-Naqah}}, जिसका अर्थ "मादा [[ऊँट]]" है) को समझाने का दावा करती हैं। एक कहानी बताती है कि जब अम्र इब्न अल-आस ने 7वीं शताब्दी में उत्तरी अफ्रीका की मुस्लिम विजय के दौरान त्रिपोली पर कब्जा किया, तो शहर के लोगों ने उन्हें क्षमादान देने के लिए मनाने हेतु धन-दौलत से लदी एक मादा ऊंट की पेशकश की। उन्होंने इस उपहार को अस्वीकार कर दिया और इसके बजाय उन्हें इस धन से इस मस्जिद का निर्माण करने को कहा।<ref name=":1" /> दूसरा संस्करण कहता है कि यह फ़ातिमद खलीफा अल-मुइज़ थे जिन्होंने शहर के लोगों को उनके स्वागत में दिखाई गई उदारता के बदले सोने से लदी एक मादा ऊंट भेंट की थी। तब लोगों ने उस सोने का उपयोग मस्जिद के निर्माण के लिए किया था।<ref name=":1" /> 16वीं शताब्दी में त्रिपोली पर स्पेनिश कब्ज़े के दौरान मस्जिद बुरी तरह क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई थी।<ref name=":2" /> एक शिलालेख में दर्ज है कि इसका पुनर्निर्माण 1610-1611 (1019 [[हिजरी वर्ष|हिजरी]]) में<ref name=":0" /> उस्मानी काल के गवर्नर सफ़र डे द्वारा किया गया था।<ref name=":2" /> == वास्तुकला == [[चित्र:Naga_Mosque_Interior_Tripoli_Libya.JPG|बाएँ|अंगूठाकार|मस्जिद के [[हाइपोस्टाइल]] (hypostyle) आंतरिक भाग का दृश्य]] मस्जिद का लेआउट कुछ हद तक अनियमित है, जो इसके पूरे इतिहास में हुए कई संशोधनों का सुझाव देता है।<ref name=":16" /> फर्श की योजना लगभग आयताकार है: दक्षिण-पूर्वी दीवार (जो ''क़िबला'' या प्रार्थना की दिशा से मेल खाती है) {{cvt|44.24|m}} लंबी है, उत्तर-पूर्वी दीवार {{cvt|19.35|m}} लंबी है, दक्षिण-पश्चिमी दीवार लगभग {{cvt|20.3|m}} लंबी है, और उत्तर-पश्चिमी दीवार लगभग {{cvt|39.4|m}} लंबी है।<ref name=":1" /> मस्जिद के फर्श का स्तर अब वर्तमान शहर की सड़कों के स्तर से {{cvt|0.4|m}} नीचे है।<ref name=":1" /> इमारत को एक लगभग चौकोर प्रांगण वाले हिस्से और एक हाइपोस्टाइल (बहु-स्तंभों वाले) प्रार्थना कक्ष के बीच विभाजित किया गया है।<ref name=":1" /><ref name=":0" /> प्रार्थना कक्ष को स्तंभों की पंक्तियों द्वारा सात गलियारों में विभाजित किया गया है जो ''क़िबला'' (दक्षिण-पूर्व) दीवार के समानांतर चलते हैं। इस हिस्से में ''क़िबला'' दीवार का माप {{cvt|20.1|m}} है, जबकि इस हिस्से की उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी दीवारों में से प्रत्येक का माप {{cvt|18.1|m}} है।<ref name=":1" /> हॉल के 36 स्तंभों में संगमरमर और ग्रेनाइट के पुन: उपयोग किए गए [[प्राचीन रोम|रोमन]] और बीजान्टिन स्तंभ, साथ ही रोमन कैपिटल (स्तंभ शीर्ष) शामिल हैं।<ref name=":0" /><ref name=":1" /> हॉल के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर स्थित थोड़े छोटे गलियारे को छोड़कर, जो एक वॉल्ट से ढका है, हॉल का प्रत्येक गलियारा 7 गुंबदों से ढका है, जो कुल मिलाकर 42 गुंबद हैं।<ref name=":1" /> मस्जिद का ''मेहराब'' लगभग ''क़िबला'' दीवार के मध्य में है। इसका उन्मुखीकरण इसके ''क़िबला'' संरेखण को सही करने के उद्देश्य से किए गए बाद के जीर्णोद्धार के कारण शेष मस्जिद की तुलना में थोड़ा और पूर्व की ओर है। इसे एक फूल की छवि और ''[[शहादा]]'' ("अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। [[मुहम्मद]] अल्लाह के रसूल हैं।") बताते हुए एक अरबी शिलालेख से सजाया गया है। आज इसके बगल में एक लकड़ी का ''[[मिंबर]]'' खड़ा है। इसके पीछे एक मेहराबदार आले में एक पत्थर है जो संभवतः किसी पुराने ''मिंबर'' का हिस्सा रहा होगा।<ref name=":1" /> [[चित्र:2_Tripoli_En-Naga_mosque_(51791288947).jpg|अंगूठाकार|मस्जिद के प्रांगण के चारों ओर की गैलरी]] मस्जिद का प्रांगण चारों ओर से स्तंभों पर टिकी एक ढकी हुई गैलरी से घिरा है। ''क़िबला'' की ओर, गैलरी दो गलियारे जितनी गहरी है, जबकि अन्य तरफ यह केवल एक गलियारे जितनी है, जिनमें से प्रत्येक लगभग {{cvt|3|m}} चौड़ी है। दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की दो गैलरियों में सपाट छतें हैं जो हाल के जीर्णोद्धार की हैं, जबकि अन्य दो क्रॉस-वॉल्ट द्वारा ढकी हुई हैं।<ref name=":1" /> [[मीनार]], जो मस्जिद के बाहरी हिस्से से जुड़ी हुई है, एक घनाकार टॉवर है जिसका आधार {{cvt|5.6|m2|adj=on}} है।<ref name=":1" /> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == {{commons category-inline}} 2q8ynhdoa5cuet4tt7xcmzot4h2qtam अल-ओमारी ग्रैंड मस्जिद 0 1609133 6536621 6527002 2026-04-05T15:36:41Z Mnjkhan 900134 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:लेबनान]] जोड़ी 6536621 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building | name = अल-ओमारी ग्रैंड मस्जिद<br>Al-Omari Grand Mosque | native_name = {{langx|ar|المسجد العمري الكبير}} | native_name_lang = | image = المسجد العمري.jpg | image_upright = 1.4 | alt = | caption = The mosque in 2008 | map_type = Lebanon Beirut | map_size = | map_alt = | map_relief = yes | map_caption = Location of the mosque in [[Beirut]] | coordinates = {{coord|33.8976|N|35.5052|E|type:landmark_region:LB|format=dms|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | religious_affiliation = [[सुन्नी इस्लाम]] | locale = | location = सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट, बेरूत, | country = [[Lebanon]] | festival = <!-- or | festivals = --> | administration = | consecration_year = | status = {{ubl|[[रोमन मंदिर]]|[[बाइज़ेंटाइन बेसिलिका]]||[[मस्जिद]] {{small|(7वीं सदी.)}}||[[चर्च (12वीं सदी क्रूसेडर युग)]] {{small| 12वीं सदी क्रूसेडर युग)}}||{{nowrap|[[मस्जिद]] {{small| (13वीं सदी - 1291 से)}}}}}} | functional_status = सक्रिय | ownership = | governing_body = | leadership = | architect = यूसुफ हैदर {{small|(2004)}} | architecture_type = {{ubl| चर्च वास्तुकला|{{nowrap|मस्जिद वास्तुकला}}}} | architecture_style = प्राचीन रोमन वास्तुकला, प्राचीन रोमन वास्तुकला, मामलुक वास्तुकला | founded_by = | established = 1291 (एक इस्लामिक समुदाय के रूप में) | groundbreaking = 1113 (एक चर्च के रूप में) | year_completed = 1115 (एक चर्च के रूप में) 1291 (एक मस्जिद के रूप में) | date_demolished = <!-- or | date_destroyed = --> | facade_direction = | capacity = | length = | width = | width_nave = | interior_area = | height_max = | dome_quantity = तीन (अनुमान) | dome_height_outer = | dome_height_inner = | dome_dia_outer = | dome_dia_inner = | minaret_quantity = दो | minaret_height = | inscriptions = | materials = | elevation_m = <!-- or | elevation_ft = --> | nrhp = | footnotes = | website = }} '''अल-ओमारी ग्रैंड मस्जिद''' (अरबी: المسجد العمري الكبير), जिसे जामी अल-कबीर के नाम से जाना जाता है, एक सुन्नी इस्लाम मस्जिद है, जो [[लेबनान]] में [[बेरूत]] के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में है। यह इमारत एक पूजा स्थल रही है, जिसमें [[रोमन मंदिर]] के रूप में इसका मूल उपयोग शामिल है, और बाद में बीजान्टिन युग के दौरान एक रोमन चर्च के रूप में, इसे इस्लाम के दूसरे खलीफा, उमर बिन एल खत्ताब के शासनकाल के दौरान 635 ईस में फिर से बनाया गया और उनके सम्मान में इसका नाम रखा गया, इस मस्जिद को अंततः जीत लिया गया और क्रूसेडर चर्च में परिवर्तित कर दिया गया, इससे पहले कि बेरूत को मामलुक मिस्र द्वारा जीत लिया गया और इसे फिर से मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। ==इतिहास== अल-ओमारी ग्रैंड मस्जिद असल में एक रोमन मंदिर था, जो भगवान जुपिटर को समर्पित था। पुराने रोमन असर कुछ आर्किटेक्चरल चीज़ों में दिखता है, जिसमें बिल्डिंग के कॉलम और नींव शामिल हैं। <ref name=blog>{{cite web |author=Manasse, Jarred |url=https://www.encounterstravel.com/au/blog/al-omari-mosque |title=The History And Content Of The Grand Al-Omari Mosque In The City Of Beirut, Lebanon: Unveiling The Legacy Of A Great Mosque |work=Encounters Travel |date=16 September 2023 |access-date=5 December 2024 }}</ref> अल-ओमारी ग्रैंड मस्जिद का इंटीरियर बाइज़ेंटाइन युग के दौरान, बिल्डिंग को रोमन बेसिलिका बनाया गया था जिसमें मुश्किल मोज़ेक और बाइज़ेंटाइन स्टाइल के आर्किटेक्चरल चीज़ें थीं। 7वीं सदी CE में, बेसिलिका को मस्जिद में बदल दिया गया था। 12वीं सदी में बेरूत पर क्रूसेडर के कब्ज़े के दौरान, मस्जिद को सेंट जॉन के चर्च में बदल दिया गया था। टायर और टार्टस में ट्रिपल एप्स वाले ऐसे ही रोमनस्क्यू चर्च बनाए गए थे, जिनमें रोमन कॉलम और कैपिटल जैसे रिकवर किए गए मटीरियल का इस्तेमाल किया गया था। 1291 में, मामलुकों ने आखिरी क्रूसेडर राज्यों (1099–1291) से बेरूत पर कब्ज़ा कर लिया, और इस्लामी जीत के तहत चर्च को फिर से मस्जिद में बदल दिया गया। दूसरे खलीफ़ा के नाम पर इसका नाम बदलकर अल-ओमारी मस्जिद कर दिया गया, और इसे "जामी अल-कबीर", या ग्रेट मस्जिद के नाम से जाना जाने लगा। इसके मामलुक-स्टाइल एंट्रेंस और गुंबद और मीनारें 1350 में जोड़े गए थे, जो पुराने चर्च के बाइज़ेंटाइन स्टाइल के निशान दिखाते हैं। लेबनान के सिविल वॉर के दौरान बुरी तरह डैमेज हुई इस मस्जिद का रिनोवेशन 2004 में यूसुफ हैदर के डायरेक्शन में पूरा हुआ। ==सन्दर्भ== <references/> [[श्रेणी:लेबनान]] c2fkmdy6ptumn9lf76vwa5y3pwl5to3 अल-नूरी मस्जिद 0 1609214 6536619 6527284 2026-04-05T15:36:09Z Mnjkhan 900134 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:सीरिया में मस्जिदें]] जोड़ी 6536619 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building | name = अल-नूरी मस्जिद<br>Great Mosque of al-Nuri | native_name = {{lang|ar|ٱلْجَامِع ٱلنُّورِي ٱلْكَبِير}} | native_name_lang = ar | image = Interior - Al-Nuri Mosque - Hims, Syria.jpg | image_upright = 1.4 | alt = | caption = मस्जिद का आंतरिक भाग | religious_affiliation = [[सुन्नी इस्लाम]] | tradition = | sect = | district = | prefecture = | province = | region = | deity = | rite = | festival = <!-- or |festivals= --> | organisational_status = [[मस्जिद]]<!-- or |organizational_status= --> | ownership = | governing_body = | leadership = | bhattaraka = | patron = | consecration_year = | functional_status = सक्रिय | religious_features_label = | religious_features = | location = [[होम्स]] | locale = | municipality = | cercle = | state = | country = [[सीरिया]] | map_type = Syria | map_size = 250 | map_alt = | map_relief = 1 | map_caption = Location of the mosque in [[Syria]] | mapframe = yes<!-- see below for more mapframe parameters --> | grid_name = | grid_position = | sector = | territory = | administration = | coordinates = {{coord|34.7309|36.7146|display=inline,title|region:SY_type:landmark|format=dms}} | coordinates_footnotes = | heritage_designation = | architect = | architecture_type = मस्जिद | architecture_style = | founded_by = | creator = | funded_by = | general_contractor = | established = | groundbreaking = | year_completed = 1129 ईस्वी | construction_cost = | date_demolished = <!-- or |date_destroyed= --> | facade_direction = | capacity = | length = | width = | width_nave = | interior_area = | height_max = | dome_quantity = | dome_height_outer = | dome_height_inner = | dome_dia_outer = | dome_dia_inner = | minaret_quantity = | minaret_height = | spire_quantity = | spire_height = | site_area = | temple_quantity = | monument_quantity = | shrine_quantity = | inscriptions = | materials = | elevation_m = <!-- or |elevation_ft= --> | elevation_footnotes = | nrhp = | designated = | added = | refnum = | delisted1_date = | website = | module = <!-- for embedding other infobox templates --> | footnotes = }} '''अल-नूरी की बड़ी मस्जिद''' (अरबी: ٱلْجَامِع ٱلنُّورِي ٱلْكَبِير, रोमन: अल-जामी अन-नूरी अल-कबीर) जिसे अल-नूरी मस्जिद भी कहा जाता है, [[सीरिया]] के [[होम्स]] में एक मस्जिद है। यह शहर के ऐतिहासिक छत वाले सूक ("बाज़ार") के पास, ऐश-शौहादा स्ट्रीट पर स्थित है। ==इतिहास== शुरू में, [[रोमन साम्राज्य]] के तहत, ग्रेट मस्जिद शहर के मूर्तिपूजक सूर्य देवता ("एल-गबल") के मंदिर की जगह थी। इस मंदिर को एमेसा (होम्स) इलाके में मूर्तिपूजा के एक ज़रूरी सेंटर के तौर पर पहचान मिली और इसके एक पुजारी, एलागाबालस, रोम के सम्राट बने। ज़ेनोबिया पर अपनी जीत का श्रेय देवता को देने के बाद ऑरेलियन ने एल-गबल के मंदिर को श्रद्धांजलि दी थी। बाद में साम्राज्य के बाइज़ेंटाइन दौर के दौरान, थियोडोसियस I के राज में, मूर्तिपूजा पर ईसाई अत्याचार के हिस्से के तौर पर मंदिर को सेंट जॉन द बैपटिस्ट को समर्पित एक चर्च में बदल दिया गया था। शहर पर मुसलमानों के कब्ज़े के बाद, चर्च का एक-चौथाई या आधा हिस्सा होम्स की फ्राइडे मस्जिद (जमा मस्जिद) में बदल दिया गया। सदियों के इस्लामी शासन के दौरान शहर का दौरा करने वाले कई मुस्लिम भूगोलवेत्ताओं के अनुसार, मस्जिद के गेट के ऊपर चर्च की ओर मुंह करके सफेद पत्थर से बना एक ताबीज़ रखा हुआ था। इसमें एक आदमी की तस्वीर थी जिसका निचला शरीर बिच्छू का था, और स्थानीय परंपरा के अनुसार अगर किसी आदमी को बिच्छू ने काट लिया हो, तो उसे मिट्टी लेकर तस्वीर पर दबानी चाहिए, फिर मिट्टी को पानी में घोलकर पी लेना चाहिए। इसके बाद, डंक का दर्द बंद हो जाता था और वह जल्दी ठीक हो जाता था। अक्टूबर 968 में, नाइकेफोरोस II फोकास के नेतृत्व में बाइजेंटाइन लोगों ने, जिन्होंने होम्स शहर को लूटा था, कुछ समय के लिए इसे चर्च के रूप में फिर से बनाने में कामयाब रहे। 1154 में, मुस्लिम जियोग्राफर अल-इदरीसी ने लिखा कि यह मस्जिद "सीरिया के सभी शहरों में सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक" थी। ज़ेंगिद सुल्तान नूर अद-दीन के राज में, 1146 और 1174 के बीच, आज की ज़्यादातर बनावट बनाई गई थी और इसलिए इसका नाम "अल-नूरी" पड़ा। तब से सदियों में इस बड़ी मस्जिद में बहुत सारे बदलाव हुए हैं।<ref>{{Cite web |last=Altuntas |first=Leman |last2=Kayra |first2=Oguz |date=2026-02-23 |title=Greek Inscription Found in Great Mosque of Homs Reveals Lost Temple of the Sun of Emperor Elagabalus |url=https://arkeonews.net/greek-inscription-found-in-great-mosque-of-homs-reveals-lost-temple-of-the-sun-of-emperor-elagabalus/ |access-date=2026-02-24 |website=Arkeonews |language=English}}</ref><ref>{{Cite web |title=Mysterious Greek inscription reignites debate on whether a Syrian mosque stands atop Roman Emperor Elagabalus' Temple |url=https://phys.org/news/2026-02-mysterious-greek-inscription-reignites-debate.html}}</ref> ==सन्दर्भ== <references/> [[श्रेणी:सीरिया में मस्जिदें]] cdd13yle2sxltkub1ts4o4cckq5jdtz हमा की महान मस्जिद 0 1609234 6536617 6527530 2026-04-05T15:35:15Z Mnjkhan 900134 6536617 wikitext text/x-wiki mosques}} {{Infobox religious building | building_name = हमा की महान मस्जिद<br>Great Mosque of Hama | native_name = {{lang|ar|جَامِعُ حَمَاةَ الْكَبِيرُ}} | native_name_lang = ar | image = Hama Great Mosque 4541.jpg | caption = 2008 में पुनर्निर्मित मस्जिद | religious_affiliation = [[इसलाम]] | status = [[मस्जिद]]<br/>{{small|(8th century{{endash}}1982)}}<br/>{{small|(since 2001{{endash}} )}} | functional_status = Active | location = [[Hama]] | country = [[सीरिया]] | map_type = Syria | map_size = 250 | map_relief = 1 | map_caption = Location of the mosque in [[Syria]] | mapframe = yes | geo = {{coord|35|8|3|N|36|44|43|E|type:landmark_region:SY|display=inline,title}} | website = | architect = | architecture_type = {{nowrap|[[Islamic architecture]]}} | architecture_style = [[Umayyad architecture|Umayyad]] | year_completed = {{ubl|8th century [[Common Era|CE]] {{small|(first mosque)}}|2001 {{small|(reconstruction)}}}} | date_destroyed = {{nowrap|1982 {{small|(during the [[1982 Hama massacre|Hama massacre]])}}}} | construction_cost = | capacity = | dome_quantity = 5 | dome_height_outer = | dome_dia_outer = | minaret_quantity = 2 | minaret_height = }} '''हमा की बड़ी मस्जिद''' (अरबी: جَامِع حَمَاة ٱلْكَبِير, रोमन में: जामी हमात अल-कबीर), [[सीरिया]] के हमा में एक मस्जिद है। यह किले से लगभग 400 मीटर (1,300 फिट) पश्चिम में है। 8वीं सदी CE में बनी, यह 1982 के हमा हत्याकांड में काफी हद तक तबाह हो गई थी और बाद में इसे फिर से बनाया गया। इमारत का स्थल मूल रूप से एक रोमन मंदिर था जो तीसरी शताब्दी सीई का था। इसे बीजान्टिन साम्राज्य के युग के दौरान एक चर्च में परिवर्तित कर दिया गया था, संभवतः 6 वीं शताब्दी सीई में। इसे शुरुआती इस्लामी युग में एक मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया था, हालांकि इस रूपांतरण का विवरण और डेटिंग विद्वानों के बीच बहस का विषय रहा है। बाद में इसके विनाश से पहले, इमारत में रोमन या ईसाई बीजान्टिन युग से संबंधित कई पुन: उपयोग किए गए तत्व शामिल थे। 14वीं सदी के एक मुस्लिम इतिहासकार अबू अल-फ़िदा ने दावा किया था कि शहर पर विजय के ठीक बाद 636-37 ई. में खलीफ़ा उमर के समय में चर्च को मस्जिद में बदल दिया गया था, लेकिन आधुनिक विद्वानों ने इस तिथि निर्धारण पर संदेह व्यक्त किया है, क्योंकि यह अविश्वसनीय रूप से प्रारंभिक प्रतीत होता है। लोगों, जैसे कि बर्नार्ड ओ'केन, ने सुझाव दिया कि रूपांतरण उमय्यद काल (7वीं शताब्दी के अंत या 8वीं शताब्दी के प्रारंभ में) में हुआ था, जबकि मारिया गुइडेटी ने सुझाव दिया है कि यह 8वीं शताब्दी के अंत में अब्बासिद काल के शुरुआती समय में हो सकता है।.<ref name=":0">{{Cite book |last=Burns |first=Ross |url=https://books.google.com/books?id=SuQtAQAAIAAJ |title=Monuments of Syria: A Guide |publisher=Bloomsbury Academic |year=2009 |isbn=978-1-86064-244-9 |pages=164 |language=en |orig-date=1992}}</ref> ग्रेट मस्जिद में दो मीनारें हैं; एक प्रार्थना हॉल के पास एक चौकोर मीनार है और इसकी सतह पर एक लिखावट से पता चलता है कि यह 1124 ईस्वी की है, हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि इसका बेस उमय्यद मूल का है, जबकि दूसरे कहते हैं कि इसे 1153 ईस्वी में बनाया गया था। दूसरी मीनार आठ कोनों वाली है और इसे मामलुकों ने 1427 CE में बनवाया था। मुख्य उत्तरी आंगन के किनारे एक छोटा चौकोर आंगन है जिसमें 13वीं सदी के दो अय्यूबिद राजाओं की कब्रें हैं। 1982 में हमा में गृह संघर्ष के दौरान सीरियाई सरकार ने ऐतिहासिक पुराने शहर के अधिकांश हिस्से के साथ मस्जिद को लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। इसे बाद में सीरियाई सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा फिर से बनाया गया। 2001 तक, पुनर्निर्माण पूरा हो गया था। पुनर्निर्माण में ऐतिहासिक इमारत के डिज़ाइन का पालन किया गया, लेकिन पुनर्निर्मित मस्जिद के सभी विवरण मूल के अनुरूप नहीं हैं। ==सन्दर्भ== <references/> k6y90f5um5uvv7d5xz8hw4mhqddt5e6 6536618 6536617 2026-04-05T15:35:35Z Mnjkhan 900134 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:सीरिया में मस्जिदें]] जोड़ी 6536618 wikitext text/x-wiki mosques}} {{Infobox religious building | building_name = हमा की महान मस्जिद<br>Great Mosque of Hama | native_name = {{lang|ar|جَامِعُ حَمَاةَ الْكَبِيرُ}} | native_name_lang = ar | image = Hama Great Mosque 4541.jpg | caption = 2008 में पुनर्निर्मित मस्जिद | religious_affiliation = [[इसलाम]] | status = [[मस्जिद]]<br/>{{small|(8th century{{endash}}1982)}}<br/>{{small|(since 2001{{endash}} )}} | functional_status = Active | location = [[Hama]] | country = [[सीरिया]] | map_type = Syria | map_size = 250 | map_relief = 1 | map_caption = Location of the mosque in [[Syria]] | mapframe = yes | geo = {{coord|35|8|3|N|36|44|43|E|type:landmark_region:SY|display=inline,title}} | website = | architect = | architecture_type = {{nowrap|[[Islamic architecture]]}} | architecture_style = [[Umayyad architecture|Umayyad]] | year_completed = {{ubl|8th century [[Common Era|CE]] {{small|(first mosque)}}|2001 {{small|(reconstruction)}}}} | date_destroyed = {{nowrap|1982 {{small|(during the [[1982 Hama massacre|Hama massacre]])}}}} | construction_cost = | capacity = | dome_quantity = 5 | dome_height_outer = | dome_dia_outer = | minaret_quantity = 2 | minaret_height = }} '''हमा की बड़ी मस्जिद''' (अरबी: جَامِع حَمَاة ٱلْكَبِير, रोमन में: जामी हमात अल-कबीर), [[सीरिया]] के हमा में एक मस्जिद है। यह किले से लगभग 400 मीटर (1,300 फिट) पश्चिम में है। 8वीं सदी CE में बनी, यह 1982 के हमा हत्याकांड में काफी हद तक तबाह हो गई थी और बाद में इसे फिर से बनाया गया। इमारत का स्थल मूल रूप से एक रोमन मंदिर था जो तीसरी शताब्दी सीई का था। इसे बीजान्टिन साम्राज्य के युग के दौरान एक चर्च में परिवर्तित कर दिया गया था, संभवतः 6 वीं शताब्दी सीई में। इसे शुरुआती इस्लामी युग में एक मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया था, हालांकि इस रूपांतरण का विवरण और डेटिंग विद्वानों के बीच बहस का विषय रहा है। बाद में इसके विनाश से पहले, इमारत में रोमन या ईसाई बीजान्टिन युग से संबंधित कई पुन: उपयोग किए गए तत्व शामिल थे। 14वीं सदी के एक मुस्लिम इतिहासकार अबू अल-फ़िदा ने दावा किया था कि शहर पर विजय के ठीक बाद 636-37 ई. में खलीफ़ा उमर के समय में चर्च को मस्जिद में बदल दिया गया था, लेकिन आधुनिक विद्वानों ने इस तिथि निर्धारण पर संदेह व्यक्त किया है, क्योंकि यह अविश्वसनीय रूप से प्रारंभिक प्रतीत होता है। लोगों, जैसे कि बर्नार्ड ओ'केन, ने सुझाव दिया कि रूपांतरण उमय्यद काल (7वीं शताब्दी के अंत या 8वीं शताब्दी के प्रारंभ में) में हुआ था, जबकि मारिया गुइडेटी ने सुझाव दिया है कि यह 8वीं शताब्दी के अंत में अब्बासिद काल के शुरुआती समय में हो सकता है।.<ref name=":0">{{Cite book |last=Burns |first=Ross |url=https://books.google.com/books?id=SuQtAQAAIAAJ |title=Monuments of Syria: A Guide |publisher=Bloomsbury Academic |year=2009 |isbn=978-1-86064-244-9 |pages=164 |language=en |orig-date=1992}}</ref> ग्रेट मस्जिद में दो मीनारें हैं; एक प्रार्थना हॉल के पास एक चौकोर मीनार है और इसकी सतह पर एक लिखावट से पता चलता है कि यह 1124 ईस्वी की है, हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि इसका बेस उमय्यद मूल का है, जबकि दूसरे कहते हैं कि इसे 1153 ईस्वी में बनाया गया था। दूसरी मीनार आठ कोनों वाली है और इसे मामलुकों ने 1427 CE में बनवाया था। मुख्य उत्तरी आंगन के किनारे एक छोटा चौकोर आंगन है जिसमें 13वीं सदी के दो अय्यूबिद राजाओं की कब्रें हैं। 1982 में हमा में गृह संघर्ष के दौरान सीरियाई सरकार ने ऐतिहासिक पुराने शहर के अधिकांश हिस्से के साथ मस्जिद को लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। इसे बाद में सीरियाई सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा फिर से बनाया गया। 2001 तक, पुनर्निर्माण पूरा हो गया था। पुनर्निर्माण में ऐतिहासिक इमारत के डिज़ाइन का पालन किया गया, लेकिन पुनर्निर्मित मस्जिद के सभी विवरण मूल के अनुरूप नहीं हैं। ==सन्दर्भ== <references/> [[श्रेणी:सीरिया में मस्जिदें]] 501ndy59xfvdy2y8ttfo87bi8fn3ghu अयवार 0 1609242 6536668 6527787 2026-04-05T17:07:21Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536668 wikitext text/x-wiki {{Infobox Prepared Food|name=अयवार|image=File:Ajvar1 bright.jpg|image_size=250px|caption=|alternate_name=|country=|region=[[बाल्कन]]|creator=|course=|served=|main_ingredient=[[शिमला मिर्च]], [[तेल]], [[नमक]]|variations=|calories=|other=|veg=veg}}'''अयवार'''{{efn|{{langx|sh|ajvar, ајвар}}; {{langx|mk|ајвар}}, {{langx|bg|айвар}}}} मीठी [[शिमला मिर्च]] और [[बैंगन]] से बनी एक [[दक्षिण-पूर्वी यूरोप|दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय]] चटनी है।<ref>{{Cite web|url=https://www.thespruceeats.com/serbian-eggplant-pepper-spread-vegetarian-caviar-1137506|title=How to Make Serbian Vegetarian "Caviar" or Ajvar|website=The Spruce Eats|language=en|access-date=2020-10-25|archive-date=26 अक्तूबर 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20211026203744/https://www.thespruceeats.com/serbian-eggplant-pepper-spread-vegetarian-caviar-1137506|url-status=dead}}</ref> यह [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के बाद पूरे [[यूगोस्लाविया]] में लोकप्रिय बना। घर का अयवार भुनी हुई शिमला मिर्च से बनता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.seriouseats.com/recipes/2013/09/ajvar-serbian-roasted-red-pepper-sauce-recipe.html|title=Ajvar (Serbian Roasted Red Pepper Sauce) Recipe|website=www.seriouseats.com|language=en|access-date=2020-10-25}}</ref> शिमला मिर्च की मात्रा के अनुसार, यह मीठा, तीखा या बहुत गर्म हो सकता है। अयवार को डबलरोटी पर फैलाकर या सहभोजन के रूप में खाया जा सकता है। अयवार के कई प्रकार होते हैं। एक में टमाटर और बैंगन होते हैं तथा दूसरा शिमला मिर्च और [[ऑरिगेनो]] से बनता है। "घर का [[लेस्कोवात्स]] अयवार" और "मैसिडोनियाई अयवार" अपने ब्रांड के नाम की सुरक्षा के लिए [[विश्व बौद्धिक संपदा संगठन]] के साथ पंजीकृत हैं।<ref>{{cite news|url=https://www.hindustantimes.com/art-and-culture/how-this-traditional-balkan-red-pepper-spread-brings-the-neighbourhood-together/story-d8Rn4553E8xmEra7dYwNyN.html|title=How this traditional Balkan red pepper spread brings the neighbourhood together|newspaper=[[Hindustan Times]]|year=2017}}</ref> [[श्रेणी:अल्बानियाई खाना]] [[श्रेणी:बोस्नियाई खाना]] [[श्रेणी:बुल्गारियाई खाना]] [[श्रेणी:मिर्च पकवान]] [[श्रेणी:क्रोएशियाई खाना]] [[श्रेणी:बैंगन पकवान]] [[श्रेणी:कोसोवाई खाना]] [[श्रेणी:मैसिडोनियाई खाना]] [[श्रेणी:रोमानी खाना]] [[श्रेणी:सर्बियाई खाना]] == नाम और उद्भव == ''अयवार'' नाम [[उस्मानी तुर्की भाषा|उस्मानी तुर्की]] शब्द ''हावयार'' ({{Lang|ota|{{naskh|خاویار}}}}) से व्युत्पन्न है, जो [[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]] शब्द ''ख़ावयार'' ({{Lang|fa|{{unq|خاویار}}}}) से लिया गया था। [[कैवियार]] नाम भी इससे व्युत्पन्न है।<ref>{{Cite web|url=https://www.nisanyansozluk.com/?k=havyar&x=0&y=0|title=Nişanyan Sözlük - Türkçe Etimolojik Sözlük|website=Nişanyan Sözlük}}</ref><ref>Etimološki rečnik srpskog jezika I, 2003, s.v. ajvar</ref> 20वीं शताब्दी से पहले, [[डैन्यूब नदी]] पर कैवियार का स्थानीय उत्पादन होता था, क्योंकि [[स्टर्जन]] मछली [[काला सागर|काले सागर]] से [[बेलग्रेड]] तक तैरती थी।<ref>{{cite book|title=Pisces Serbiae|author=Josip Pančić|year=1860|page=33}}; {{cite book|title=Đerdapski ribolov|author=Mihailo Petrović|year=1941}}</ref> घर का अयवार, यानी कैवियार, बेलग्रेड में एक लोकप्रिय पकवान होता था,<ref>{{cite journal|year=1960|title=Belgrade through the ages|journal=Belgrade through the ages|volume=7|pages=61, 64}}; {{cite book|title=Beograd kroz vekove|author=Dušan J. Popović|year=1964|pages=93, 215, 241|author-link=Dušan J. Popović}}</ref> किन्तु दशक 1890 में श्रम विवादों हेतु उसका उत्पाद अस्थिर बना। इस कारण कैवियार की जगह रेस्तराँ में शिमला मिर्च सलाद को "लाल अयवार" या "सर्बियाई अयवार" के नाम से परोसा जाता था।<ref>{{cite book|title=Slouch hat|author=Malcolm Burr|year=1935|page=165}}; {{cite book|title=Introducing Yugoslavia|author=Lovett Fielding Edwards|year=1954|page=79}}</ref> == यह भी देखें == * [[ल्युतेनित्सा]] * [[ज़ाकुस्का]] * [[क्योपोलू]] * [[सालचा]] * [[लेचो]] * [[अचार]] == नोट == {{Notelist}} == संदर्भ == {{reflist}} je01a1910aubmgzxe3j8b1g3lb90e39 अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद 0 1609261 6536705 6527717 2026-04-05T21:13:04Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536705 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building|building_name=अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद <br />''Masjid Al-Wustho Mangkunegaran''|religious_affiliation=[[इस्लाम]]|image=Masjid Wustho MN sisi tenggara dengan minaret (DSC 0822).JPG|caption=|coordinates={{coord|-6.240770|106.999535|format=dms|display=title,inline}}|location=[[सुरकार्ता]], [[मध्य जावा]], इंडोनेशिया|tradition=[[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]]|website=|architect=|architecture_type=[[मस्जिद]]|architecture_style=[[जावानीस वास्तुकला]]|groundbreaking=1878|year_completed=1918|construction_cost=|capacity=10,000<ref>[https://simas.kemenag.go.id/profil/masjid/535 MASJID AL-BARKAH] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20241222193334/https://simas.kemenag.go.id/profil/masjid/535 |date=22 दिसंबर 2024 }}. ''Sistem Informasi Masjid''. Retrieved November 6, 2024.</ref>|dome_quantity=1|dome_height_outer=|dome_dia_outer=|minaret_quantity=1|minaret_height=}} '''अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद''' एक ऐतिहासिक मस्जिद है जो [[मध्य जावा]] के [[सुरकार्ता]] शहर में [[मंगकुनेगरान पैलेस]] के पश्चिम में स्थित है। यह मस्जिद सुरकार्ता की तीन सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद का उद्घाटन मंगकुनेगरान पैलेस की एक राज्य मस्जिद के रूप में किया गया था।{{sfn|Aroengbinang|2017}} == इतिहास == इस मस्जिद को पहले मंगकुनेगरान मस्जिद के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण 1878 में शुरू हुआ था और इमारत 1918 में पूरी हुई थी, जिसके कुछ हिस्सों का नवीनीकरण [[थॉमस कार्स्टन]] द्वारा किया गया था। मस्जिद के रखरखाव की जिम्मेदारी मंगकुनेगरान पैलेस के शाही दरबारियों द्वारा संभाली जाती थी। ''अल-वुस्तो'' नाम पहली बार 1949 में मंगकुनेगरान पैलेस के मुख्य तक्मीर इमाम रोसिदी द्वारा दिया गया था। ''अल-वुस्तो'' का अर्थ है "औसत", जो मंगकुनेगरान मस्जिद के औसत आकार को दर्शाता है, जो [[सुरकार्ता की महान मस्जिद]] जितना बड़ा नहीं है लेकिन केपतिहान मस्जिद जितना छोटा भी नहीं है। == वास्तुकला == [[चित्र:Masjid_Wustho_MN_maligen_(DSC_0829).JPG|बाएँ|अंगूठाकार|एक छोटी इमारत जहाँ खतना की रस्म निभाई जाती है]] सुरकार्ता की अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद मंगकुनेगरान पैलेस से लगभग {{convert|60|m|ft}} पश्चिम में स्थित है। यह मस्जिद धार्मिक इमारतों के लिए विशिष्ट [[इंडोनेशियाई इस्लामी वास्तुकला|जावानीस वास्तुकला]] में डिजाइन की गई है। जावानीस परंपरा की अधिकांश मस्जिदों की तरह, इसमें एक [[ताजुग]] शैली की छत है, जो एक पारंपरिक पिरामिडनुमा छत का रूप है और केवल धार्मिक इमारतों जैसे मस्जिदों या मंदिरों के लिए आरक्षित है। छत में तीन स्तर हैं और इसके शीर्ष पर एक मुस्ताका सजावट है। छत चार साका गुरु मुख्य स्तंभों और बारह सहायक स्तंभों पर टिकी है। साका गुरु के आधार पर अरबी सुलेख से सजावट की गई है।{{sfn|Aroengbinang|2017}} मस्जिद के मुख्य हॉल के पूर्व में एक छत वाला सामने का बरामदा या है, जो जावानीस मस्जिद की मुख्य विशेषताओं में से एक है। इस सेराम्बी में केंग कयाई दानस्वर नाम का एक बड़ा ड्रम है। मुख्य हॉल के दक्षिण में एक ढके हुए बरामदे के रूप में विस्तार किया गया है। इस ढके हुए बरामदे का उपयोग महिलाओं के लिए प्रार्थना कक्ष के रूप में किया जाता है।{{sfn|Aroengbinang|2017}} सुरकार्ता की महान मस्जिद के समान, इसके सामने के बरामदे में 'मार्किस' है, जो अरबी सुलेख से सजाया गया एक प्रकार का पोर्टल ढांचा है। यह पोर्टल इंडोनेशियाई प्राचीन [[पादुरक्सा]] रूप से प्रेरित है, जो एक धार्मिक इमारत परिसर में सबसे पवित्र स्थल को चिह्नित करने वाला द्वार होता है।{{sfn|Putu Dananjaya|2017}} अल-वुस्तो मंगकुनेगरान मस्जिद में {{convert|25|m|ft}} ऊंची एक अष्टकोणीय मीनार है। यह मीनार मुख्य इमारत के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस मीनार का निर्माण 1926 में किया गया था।{{sfn|Putu Dananjaya|2017}} मस्जिद परिसर में एक छोटी इमारत भी है जिसे के नाम से जाना जाता है। इस मालिगेन में [[खतना]] की रस्म निभाई जा सकती है। मालिगेन का निर्माण मूल रूप से मंगकुनेगरा पंचम द्वारा मंगकुनेगरा दरबार के शाही परिवार के खतना के लिए किया गया था। 20वीं सदी की शुरुआत में [[मंगकुनेगरा सप्तम]] के शासनकाल के दौरान, अंततः आम जनता को भी मालिगेन के अंदर खतना करने की अनुमति दी गई।{{sfn|Aroengbinang|2017}} == इन्हें भी देखें == * [[इंडोनेशिया में मस्जिदों की सूची]] ** [[सुरकार्ता की महान मस्जिद]] ** [[शेख जायद ग्रैंड मस्जिद, सोलो]] * [[इंडोनेशियाई इस्लामी वास्तुकला]] == संदर्भ == === उद्धरण === {{reflist|30em}} === स्रोत === {{refbegin|30em|indent=yes}} *{{cite web|url=https://www.thearoengbinangproject.com/masjid-al-wustho-mangkunegaran-solo/|title=Masjid Al Wustho Mangkunegaran Solo|last=Aroengbinang|first=Bambang|date=July 16, 2017|website=Aroengbinang Project|publisher=Aroengbinang|archive-url=https://web.archive.org/web/20171201032641/https://www.thearoengbinangproject.com/masjid-al-wustho-mangkunegaran-solo/|archive-date=December 1, 2017|access-date=November 27, 2017|quote=|url-status=dead}} *{{cite web|url=http://kebudayaan.kemdikbud.go.id/bpcbjateng/2017/06/19/masjid-al-wustho-masjid-kraton-puro-mangkunegaran/|title=Masjid Al-Wustho, Masjid Kraton Puro Mangkunegaran|author=Putu Dananjaya|date=June 19, 2017|website=Kementerian Pendidikan dan Kebudayaan - Direktorat Jenderal Kebudayaan|publisher=Balai Pelestarian Cagar Budaya Jawa Tengah, Direktorat Jenderal Kebudayaan Republik Indonesia|archive-url=https://web.archive.org/web/20171123163043/http://kebudayaan.kemdikbud.go.id/bpcbjateng/2017/06/19/masjid-al-wustho-masjid-kraton-puro-mangkunegaran/|archive-date=November 23, 2017|access-date=November 27, 2017|url-status=dead|df=mdy-all}} *{{cite encyclopedia|author=Sutrisno Sastro Utomo|dictionary=Kamus Lengkap Jawa-Indonesia|isbn=9789792117448|publisher=Kanisius|title=Maligen|year=2007}} {{refend}} k9m0jjbyg0he40g1swa5nzzti89g2zh अर्नाउदिजा मस्जिद 0 1609333 6536697 6528051 2026-04-05T20:20:12Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536697 wikitext text/x-wiki {{Infobox religious building | name = अर्नाउदिजा मस्जिद | native_name = {{lang|bs|Arnaudija džamija}} | native_name_lang = bs | image = Arnaudija Mosque .png | image_upright = | alt = | caption = 2021 में पुनर्निर्माण के दौरान मस्जिद का दृश्य | map_type = Bosnia and Herzegovina | map_size = 250px | map_alt = | map_relief = yes | map_caption = [[बोस्निया और हर्ज़ेगोविना]] में मस्जिद का स्थान | coordinates = {{Coord|44|46|11.8|N|17|10|54.4|E|region:BA-BIH_type:landmark|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | religious_affiliation = [[सुन्नी इस्लाम]] | locale = | location = [[बान्या लूका]], [[रेपब्लिका स्र्प्स्का]] | country = [[बोस्निया और हर्ज़ेगोविना]] | deity = | rite = | sect = | tradition = | festival = | cercle = | sector = | administration = | consecration_year = | organisational_status = [[मस्जिद]] {{bulleted list|(1595{{endash}}1993)|(2024{{endash}}वर्तमान)}} | functional_status = सक्रिय | heritage_designation = | ownership = | governing_body = | leadership = | bhattaraka = | patron = | religious_features_label = | religious_features = | architect = | architecture_type = मस्जिद | architecture_style = | founded_by = | creator = | funded_by = | general_contractor = | established = | groundbreaking = | year_completed = {{ubl|1595 (मूल)|2024 (पुनर्निर्मित)}} | construction_cost = | date_destroyed = 7 मई, 1993 ([[बोस्नियाई युद्ध]] के दौरान) | facade_direction = | capacity = | length = | width = | width_nave = | interior_area = | height_max = | dome_quantity = 1 | dome_height_outer = | dome_height_inner = | dome_dia_outer = | dome_dia_inner = | minaret_quantity = 1 | minaret_height = | spire_quantity = | spire_height = | site_area = | temple_quantity = | monument_quantity = | shrine_quantity = | inscriptions = | materials = | elevation_m = | elevation_footnotes = | nrhp = | designated = | added = | refnum = | module = {{Infobox historic site | embed = yes | designation1 = KONS | designation1_offname = अर्नाउदिजा मस्जिद | designation1_type = राष्ट्रीय स्मारक | designation1_criteria = | designation1_date = 7 जुलाई 2003 | designation1_partof = | designation1_number = }} | footnotes = | website = }} '''अर्नाउदिजा मस्जिद''' ({{langx|bs|Arnaudija džamija}}), [[बोस्निया और हर्ज़ेगोविना]] के [[बान्या लूका]] में स्थित एक विशाल [[मस्जिद]] है। यह मस्जिद 1993 में [[रेपब्लिका स्र्प्स्का की सेना]] द्वारा नष्ट कर दी गई थी, लेकिन इसे फिर से बनाया गया और 2024 में दोबारा खोला गया।<ref>{{cite web |url=http://www25.brinkster.com/bluka/dzamije.htm |title=Banja Luka u Snu |work=brinkster.com |lang=bs |archive-url=https://web.archive.org/web/20070120222809/http://www25.brinkster.com/bluka/dzamije.htm |archive-date=January 20, 2007 |date= |access-date=2006-12-04 }}</ref><ref name=":0">{{Cite news |last=Stojanovic |first=Milica |date=8 May 2024 |title=Landmark Bosnian War-Demolished Mosque Reopens in Republika Srpska |url=https://balkaninsight.com/2024/05/08/landmark-bosnian-war-demolished-mosque reopens-in-republika-srpska/ |access-date=10 May 2024 |work=[[Balkan Insight]]}}</ref> 2003 में, अर्नाउदिजा मस्जिद को [[बोस्निया और हर्ज़ेगोविना के राष्ट्रीय स्मारकों की सूची|राष्ट्रीय स्मारक]] के रूप में नामित किया गया था।<ref name="old.kons.gov.ba">{{cite web |title=Arnaudija mosque (site and remains of architectural ensemble) |url=http://old.kons.gov.ba/main.php?id_struct=50&lang=4&action=view&id=1837 |website=old.kons.gov.ba |publisher=Commission to preserve national monuments |access-date=20 June 2022 |location=Sarajevo |date=7 जुलाई 2003 |archive-date=7 जुलाई 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220707014457/http://old.kons.gov.ba/main.php?id_struct=50&lang=4&action=view&id=1837 |url-status=dead }}</ref> == इतिहास == इस मस्जिद का निर्माण 1595 में [[बोस्निया ईयालत]] के वित्त मंत्री हसन दफ़्तरदार के शासनकाल में हुआ था।<ref name=":0" /> बोस्नियाई युद्ध के दौरान 7 मई, 1993 को सर्ब मिलिशिया द्वारा विस्फोटकों के जरिए इस मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था। यह विध्वंस [[रेपब्लिका स्र्प्स्का]] के अधिकारियों द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें अर्नाउदिजा मस्जिद परिसर और [[फ़रहाद पाशा मस्जिद (बान्या लूका)|फ़रहादिया मस्जिद]] परिसर दोनों को नष्ट करना शामिल था। ये दोनों मस्जिदें एक-दूसरे से लगभग {{convert|800|m|ft}} की दूरी पर थीं और दोनों को एक ही रात में मात्र 15 मिनट के अंतराल पर नष्ट कर दिया गया था। बान्या लूका के सर्ब नेताओं में से एक, [[रादोस्लाव ब्रजानिन]] को गैर-सर्बों के [[जातीय संहार]] और मस्जिदों सहित मुसलमानों की संपत्तियों के विनाश को व्यवस्थित करने में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। रादोस्लाव ब्रजानिन को 32 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। अर्नाउदिजा मस्जिद का पुनर्निर्माण अप्रैल 2017 में शुरू हुआ और मई 2024 में इसे आधिकारिक तौर पर फिर से खोल दिया गया।<ref name=":0" /> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{commons category-inline}} d1y00zqqc6xe67y4w2zhewb0ywzc8y4 बुशरा अल-असद 0 1609460 6536615 6529640 2026-04-05T15:34:11Z Mnjkhan 900134 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:सीरिया]] जोड़ी 6536615 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | honorific_prefix = | honorific_suffix = | native_name = बुशरा अल-असद<br>بُشْرَى ٱلْأَسَدِ | native_name_lang = ar | image = Bushra al-Assad (3x4 cropped).jpg | image_size = | alt = Head shot of Bushra smiling | caption = बुशरा, {{circa|1993}} | birth_name = | birth_date = {{Birth date and 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spouse = {{marriage|[[असिफ शौकत]]|1995|2012|end= उनकी मृत्यु}} | partner = | children = 5 | mother = अनीसा मखलौफ | father = हाफ़िज़ अल-असद | family = [[[अल-असद परिवार]] | callsign = | awards = | signature = | signature_alt = | signature_size = | module = | module2 = | module3 = | module4 = | module5 = | module6 = | website = <!-- {{URL|Example.com}} --> | footnotes = }} '''बुशरा अल-असद''' (अरबी: بُشْرَى ٱلْأَسَدِ, रोमनकृत: बुशरा अल-ʾअसद; जन्म 24 अक्टूबर 1960)<ref name="eur-lex.europa.eu">{{cite web|title=Council Implementing Decision|url=http://eur-lex.europa.eu/LexUriServ/LexUriServ.do?uri=OJ:L:2012:087:0103:01:EN:HTML|publisher=Official Journal|accessdate=14 January 2013|date=24 March 2012}}</ref> [[हाफ़िज़ अल-असद]] की पहली संतान और इकलौती बेटी हैं, जो 1971 से 2000 तक सीरिया के राष्ट्रपति थे। वह सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति [[बशर अल-असद]] की बहन हैं। वह सीरियाई सशस्त्र बलों के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ और सीरियाई मिलिट्री इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख असफ़ शौकत की विधवा हैं, जो 18 जुलाई 2012 को दमिश्क बमबारी में मारे गए थे, जिसकी ज़िम्मेदारी सीरियाई विपक्षी विद्रोही समूहों के गठबंधन ने ली थी। सीरियाई गृहयुद्ध के परिणामस्वरूप, मार्च 2012 में उन्हें सीरियाई सरकार के उन लोगों की सूची में रखा गया था जो यूरोपीय संघ के आर्थिक प्रतिबंधों और यात्रा प्रतिबंधों के अधीन थे। 28 सितंबर 2012 को, यह बताया गया कि बुशरा अल-असद अपने पांच बच्चों के साथ संयुक्त अरब अमीरात में शरण लेने के लिए सीरिया से भाग गई थी। जनवरी 2013 में, बुशरा अल-असद अपनी माँ अनीसा मखलौफ के साथ दुबई में शामिल हो गईं। <ref>{{Cite web|url=https://www.chicagotribune.com/nation-world/ct-xpm-2012-09-27-sns-rt-us-syria-crisis-bushrabre88q1ls-20120927-story.html|title=Bashar al-Assad's widowed sister has left Syria for UAE: source|website=chicagotribune.com|date=27 September 2012 }}</ref>.<ref name=smh>{{cite news|title=Assad's mother leaves Syria|url=http://m.smh.com.au/world/assads-mother-leaves-syria-20130121-2d1ri.html|accessdate=21 January 2013|newspaper=The Sydney Morning Herald|date=21 January 2013}}</ref> ==सन्दर्भ== <references/> [[श्रेणी:सीरिया]] kejidmyw66n67kncaxrxrbprj3hxyzr अब्दुल्लाह बिन रवाहा 0 1609466 6536582 6528897 2026-04-05T12:39:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536582 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = अब्दुल्लाह बिन रवाहा | native_name = عبد الله بن رواحة | native_name_lang = ar | image = عبد الله بن رواحة.png | caption = अब्दुल्लाह बिन रवाहा का अरबी सुलेख (कैलीग्राफी) में नाम | birth_place = यथरिब (मदीना), अरब (वर्तमान [[सउदी अरब]]) | death_date = 629 ई. (8 हिजरी) | death_place = मुताह, सीरिया (वर्तमान [[जॉर्डन]]) | occupation = कवि, योद्धा, इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के सहाबी | religion = [[इस्लाम]] | known_for = 'अक़बा की दूसरी बैअत' में भागीदारी, इस्लामी कविताएं, और मुताह के युद्ध में सैन्य नेतृत्व }} '''अब्दुल्लाह बिन रवाहा''' ({{lang-ar|عبد الله بن رواحة}}; मृत्यु 629 ईस्वी) इस्लाम के प्रारंभिक इतिहास के एक प्रमुख व्यक्ति, पैगंबर [[मुहम्मद]] के प्रसिद्ध सहाबी (साथी) और एक विख्यात अरबी कवि थे। वे मदीना के अंसार (स्थानीय निवासी) समुदाय से थे और प्रतिष्ठित बनू खज़रज (Banu Khazraj) कबीले से संबंध रखते थे। इस्लाम के उदय के समय वे मदीना के उन गिने-चुने लोगों में से एक थे जो लिखना-पढ़ना जानते थे।<ref>{{cite book |last=Hassan |first=Muhammad Raji |year=2012 |title=Ensiklopedia Biografi Sahabat Nabi |publisher=Penerbit Zaman |location=Jakarta |isbn=978-979-024-295-1}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और इस्लाम में प्रवेश == अब्दुल्लाह बिन रवाहा मदीना के उन शुरुआती लोगों में से थे जिन्होंने इस्लाम स्वीकार किया था। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के अनुसार, वे उन 73 अंसारों में शामिल थे जिन्होंने मक्का की गुप्त यात्रा की थी और 'अक़बा की दूसरी बैअत' (The Second ‘Aqabah Pledge) में भाग लेकर पैगंबर मुहम्मद के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ ली थी।<ref>{{Cite web|url=http://www.sunnipath.com/Resources/PrintMedia/Books/B0033P0017.aspx|title=SunniPath Library - Books - Ar-Raheeq Al-Makhtum - The Second ‘Aqabah Pledge|website=www.sunnipath.com|access-date=2026-03-08}}</ref> इस ऐतिहासिक अवसर पर, पैगंबर ने मदीना के लोगों को इस्लाम की शिक्षा देने और उनका नेतृत्व करने के लिए 12 प्रतिनिधियों (नकीब) का चुनाव किया था, जिनमें से एक अब्दुल्लाह बिन रवाहा भी थे। == पैगंबर के कवि के रूप में भूमिका == अब्दुल्लाह बिन रवाहा एक अत्यंत कुशाग्र और प्रभावशाली कवि थे। मदीना में इस्लामी राज्य की स्थापना के बाद, उन्होंने अपनी कविता का उपयोग इस्लामी संदेशों के प्रसार, मुसलमानों का मनोबल बढ़ाने और विरोधियों के दावों का कड़ा उत्तर देने के लिए किया। उन्हें हस्सान बिन साबित (Hassan ibn Thabit) और काब बिन मालिक के साथ पैगंबर मुहम्मद के तीन प्रमुख कवियों में गिना जाता था। उनकी कविताओं में इस्लामी आस्था, आध्यात्मिक गहराई और कुरैश (मक्का के विरोधियों) के विरोध का मुखर वर्णन मिलता था। 7 हिजरी में जब मुसलमान शांतिपूर्ण 'उमरतुल कज़ा' (Umrah al-Qada) के लिए मक्का में प्रवेश कर रहे थे, तो अब्दुल्लाह बिन रवाहा पैगंबर के आगे-आगे चल रहे थे और पूरे उत्साह के साथ अपनी कविताएँ पढ़ रहे थे। == सैन्य अभियान == अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने इस्लाम के प्रारंभिक दौर के रक्षात्मक और प्रमुख युद्धों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने बद्र का युद्ध, उहुद का युद्ध, खंदक (अहज़ाब) और खैबर के अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया। खैबर की विजय के बाद, पैगंबर मुहम्मद ने उन्हें खैबर के खजूरों और फसलों की उपज का अनुमान लगाने (मूल्यांकन) के महत्वपूर्ण कार्य के लिए नियुक्त किया था, जिसे उन्होंने अत्यंत न्याय और ईमानदारी के साथ निभाया। == मुताह का युद्ध और शहादत == अब्दुल्लाह बिन रवाहा का सबसे महान और अंतिम सैन्य योगदान 629 ईस्वी (8 हिजरी) में लड़े गए 'मुताह के युद्ध' (Battle of Mu'tah) में सामने आया। इस अभियान के लिए पैगंबर मुहम्मद ने बाज़न्तीनी (Byzantine) और गस्सानिद (Ghassanid) साम्राज्य की विशाल सेना का सामना करने के लिए तीन कमांडरों को क्रमानुसार नियुक्त किया था: ज़ैद बिन हारिसा, जाफ़र इब्न अबी तालिब (जिन्हें जाफ़र अल-तय्यार भी कहा जाता है), और उनके बाद अब्दुल्लाह बिन रवाहा।<ref>{{Cite web|url=https://al-islam.org/jafar-al-tayyar-kamal-al-sayyid/jafar-al-tayyar|title=Jafar al-Tayyar|date=2013-01-21|website=al-islam.org|language=en|access-date=2026-03-08}}</ref> मुताह पहुँचने पर जब 3,000 मुस्लिम सैनिकों को यह पता चला कि उनके सामने बाज़न्तीनी साम्राज्य की एक लाख से अधिक की विशाल सेना है, तो वे कुछ समय के लिए रुक कर रणनीति पर विचार करने लगे। उस निर्णायक क्षण में, अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने सेना का मनोबल बढ़ाते हुए एक ऐतिहासिक भाषण दिया: {{quote|''"ऐ लोगों! तुम जिस चीज़ से कतरा रहे हो, वह वही शहादत है जिसकी तलाश में तुम यहाँ आए हो। हम दुश्मनों से हथियारों या संख्या के बल पर नहीं लड़ते, बल्कि हम उस धर्म के बल पर लड़ते हैं जिससे अल्लाह ने हमें सम्मानित किया है।"''}} युद्ध के दौरान जब पहले दो कमांडर (ज़ैद और जाफ़र) बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए, तो अब्दुल्लाह बिन रवाहा ने इस्लामी ध्वज संभाला। सामने निश्चित मृत्यु को देखकर जब एक क्षण के लिए उन्हें मानवीय झिझक महसूस हुई, तो उन्होंने अपने मनोबल को दृढ़ करने के लिए स्वयं को संबोधित करते हुए एक प्रसिद्ध कविता पढ़ी थी, जिसका अर्थ था: ''"ऐ मेरी आत्मा, मृत्यु तो अपरिहार्य है, इसलिए बेहतर है कि तुम शहीद हो जाओ।"''<ref>{{Cite web|url=http://www.islamic-council.org/lib/men/ABD-ALLAH-IBN-RAWAAHAH.html|title=Default Normal Template|website=www.islamic-council.org|access-date=2026-03-08|archive-date=30 जून 2006|archive-url=https://web.archive.org/web/20060630073952/http://www.islamic-council.org/lib/men/ABD-ALLAH-IBN-RAWAAHAH.html|url-status=dead}}</ref> अत्यंत बहादुरी से लड़ते हुए वे भी इस युद्ध में मारे गए। उनकी शहादत के बाद, खालिद बिन वलीद (Khalid ibn al-Walid) ने सेना की कमान संभाली और बचे हुए सैनिकों को सुरक्षित वापस निकाला। अब्दुल्लाह बिन रवाहा का नाम इस्लामी इतिहास में एक महान कवि, सच्चे आस्तिक और बहादुर कमांडर के रूप में सम्मान के साथ लिया जाता है। == सन्दर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.wikidata.org/wiki/Q1111126 विकिडाटा पर अब्दुल्लाह बिन रवाहा (Q1111126)] [[श्रेणी:सहाबा]] [[श्रेणी:अरबी भाषा के कवि]] [[श्रेणी:629 में निधन]] [[श्रेणी:मुताह के युद्ध में शामिल लोग]] [[श्रेणी:2026 विकि लव्ज़ रमजान प्रतियोगिता के लेख]] g9baz7hdw82hwekxu84s6ry4onl382l अलीकन ओन्लू 0 1609537 6536782 6529374 2026-04-06T05:41:40Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536782 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अलीकन ओन्लू | native_name = Alican Önlü | image = अलीकन ओन्लू.png | caption = | office = तुनजेली से संसद सदस्य (ग्रैंड नेशनल असेंबली) | term_start = 7 जून 2015 | term_end = 14 मई 2023 | birth_date = 1967 (आयु {{Age|1967|01|01}}) | birth_place = नाज़िमिये, तुनजेली प्रांत, [[तुर्की]] | nationality = तुर्की | party = पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) | occupation = राजनेता }} '''अलीकन ओन्लू''' ({{lang-tr|Alican Önlü}}; जन्म: 1967) एक कुर्द-अलेवी (Kurdish-Alevi) मूल के तुर्की राजनेता हैं, जो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) से जुड़े हुए हैं। वे 2015 से 2023 तक तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली (संसद) में तुनजेली (Tunceli) प्रांत के प्रतिनिधि के रूप में संसद सदस्य रहे हैं।<ref>{{Cite journal|last=Gunes|first=Cengiz|date=2020-05-24|title=Political Representation of Alevi Kurds in Turkey: Historical Trends and Main Transformations|url=https://www.kurdishstudies.net/journal/ks/article/view/522|journal=Kurdish Studies|volume=8|issue=1|pages=71–90|doi=10.33182/ks.v8i1.522|issn=2051-4891}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == अलीकन ओन्लू का जन्म 1967 में तुर्की के तुनजेली प्रांत के नाज़िमिये (Nazımiye) शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी हाई स्कूल तक की शिक्षा वहीं पूरी की। राजनीति में प्रवेश करने से पहले वे विभिन्न कुर्द समर्थक और वामपंथी राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे।<ref>{{Cite web|url=https://www.yeniakit.com.tr/biyografi/alican-onlu|title=Alican Önlü kimdir? - Yeni Akit|website=www.yeniakit.com.tr|language=tr|access-date=2026-03-10}}</ref> == राजनीतिक करियर == ओन्लू का राजनीतिक करियर मुख्य रूप से कुर्द समर्थक दलों के साथ जुड़ा रहा है। 1994 से 1996 के बीच, उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेसी पार्टी (HADEP) के प्रांतीय अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (DEHAP) की पार्टी असेंबली के सदस्य बने थे। 2009 के स्थानीय चुनावों में, उन्होंने डेमोक्रेटिक सोसाइटी पार्टी (DTP) की ओर से तुनजेली के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। 2014 के स्थानीय चुनावों में उन्हें तुनजेली नगर पालिका में उप-मेयर चुना गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.merip.org/2010/08/the-pkk-and-the-closure-of-turkeys-kurdish-opening/|title=The PKK and the Closure of Turkey's Kurdish Opening - MERIP|date=2010-08-05|website=Middle East Research and Information Project|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref> जून 2015 के संसदीय चुनावों में, उन्हें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) के उम्मीदवार के रूप में तुनजेली से संसद सदस्य (MP) चुना गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2015/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları Genel Seçim Sonuçları - 2015|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> उसी वर्ष नवंबर 2015 के मध्यावधि चुनावों में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2015-kasim/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları Genel Seçim Sonuçları - 2015|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> 2018 के आम चुनावों में भी वे तुनजेली से दोबारा संसद के लिए चुने गए थे ।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2018/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları - 2018 Genel Seçim Tunceli Oy Oranları {{!}} CANLI|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> == कानूनी विवाद और अभियोजन == तुर्की में कई अन्य HDP राजनेताओं की तरह, ओन्लू को भी गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सितंबर 2016 में, उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। मार्च 2017 में उन्हें एक अदालत में गवाही देने के लिए फिर से हिरासत में लिया गया था।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://bianet.org/haber/hdp-indictment-seeks-political-ban-for-687-members-including-demirtas-buldan-and-sancar-241005|title=HDP indictment seeks political ban for 687 members, including Demirtaş, Buldan and Sancar|website=bianet.org|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref> फ़रवरी 2019 में, एक तुर्की अदालत ने ओन्लू को आतंकवाद से संबंधित आरोपों ("आतंकवादी संगठन का प्रचार करने") के लिए सजा सुनाई गई थी ।<ref>{{Cite web|url=https://stockholmcf.org/2-pro-kurdish-hdp-deputies-sentenced-over-terrorism-charges-in-turkey/|title=2 pro-Kurdish HDP deputies sentenced by Turkish court on terrorism charges|last=SCF|date=2019-02-15|website=Stockholm Center for Freedom|language=en-US|access-date=2026-03-10}}</ref> सितंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील्स द्वारा इस सजा को बरकरार रखा गया हैं ।<ref>{{Cite web|url=https://bianet.org/haber/supreme-court-of-appeals-upholds-prison-sentences-of-3-hdp-mps-213474|title=Supreme Court of Appeals Upholds Prison Sentences of 3 HDP MPs|website=bianet.org|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref> मार्च 2021 में, तुर्की के एक राज्य अभियोजक ने संवैधानिक न्यायालय (Constitutional Court) के समक्ष एक अभियोग दायर किया, जिसमें ओन्लू सहित 687 HDP राजनेताओं पर पाँच साल के राजनीतिक प्रतिबंध (Political ban) की मांग की गई थी। अभियोजकों ने आरोप लगाया कि ये राजनेता पीकेके (PKK) के साथ वैचारिक रूप से जुड़े हुए थे।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web|url=https://www.duvarenglish.com/turkish-prosecutor-seeks-political-ban-on-687-pro-kurdish-politicians-news-56691|title=Turkish prosecutor seeks political ban on 687 pro-Kurdish politicians|last=English|first=Duvar|date=2021-03-18|website=Duvarenglish.com|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist|30em}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.wikidata.org/wiki/Q20476291 विकिडाटा पर अलीकन ओन्लू (Q20476291)] {{Authority control}} {{DEFAULTSORT:ओन्लू, अलीकन}} [[श्रेणी:1967 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:तुर्की के राजनेता]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली के सदस्य]] nq0qwxdmjqis5scfs8b5238wv9oa4zp बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी 0 1609590 6536599 6529802 2026-04-05T14:21:51Z Md. Muqtadir Fuad 863491 logo added 6536599 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | image = BUET LOGO.svg | caption = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का लोगो | image_upright = | other_name = बुएट | former_name = ढाका सर्वे स्कूल (1876-1908) <br>अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (1908-1947) <br>अहसानुल्लाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, [[ढाका विश्वविद्यालय]] (1947-1962)<br> पूर्व पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1962-1971) <br> बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1971-2001) | image_size = 160px | name = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी | established = 1876 (विश्वविद्यालय के रूप में: 1962) | type = [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय]] | chancellor = [[बांग्लादेश के राष्ट्रपति]] | vice_chancellor = [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|शीर्षक=बुएट के नए कुलपति|पहुंच-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20240912095843/https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> | doctoral = | city = [[ढाका]] | province = [[ढाका विभाग|ढाका]] | country = [[बांग्लादेश]] | students = लगभग 10,000 | undergrad = लगभग 5,000 | postgrad = | faculty = लगभग 600 | campus = शहर के केंद्र में, 83.9 एकड़ (33.95 हेक्टेयर) | nickname = बुएट (BUET) | affiliation = [[बांग्लादेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] | website = {{URL|https://www.buet.ac.bd/}} | logo = | footnotes = }} <!--{{Ranking Infobox | QS_W = 761-770 | QS_W_year = 2026 | QS_W_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय|संग्रह-तिथि=7 नवंबर 2015|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20151107033851/http://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology}}</ref> | THE_W = 1001-1200 | THE_W_year = 2024 | THE_W_ref = <ref name="THE">{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology - World University Rankings - THE|वेबसाइट=www.timeshighereducation.com|पहुंच-तिथि=28 नवंबर 2023|संग्रह-तिथि=25 नवंबर 2023|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20231125235248/https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref>| THE_Asia = 401-500 | THE_Asia_year = 2024 | THE_Asia_ref = <ref name="THE" />| QS_Asia = 158 | QS_Asia_year = 2026 | QS_Asia_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/asia-university-rankings/|शीर्षक=QS World University Rankings by Region 2026: Asia|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> }}--> '''बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी''' (संक्षेप में: '''बुएट''') [[बांग्लादेश]] का एक प्रमुख [[इंजीनियरिंग]]-संबंधित [[उच्च शिक्षा|उच्च शिक्षा संस्थान]] है। यह [[ढाका]] शहर के [[लालबाग थाना]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है।<ref>{{वेब उद्धरण | यूआरएल = http://www.buet.ac.bd/about.html | शीर्षक = बुएट का इतिहास | पहुंच-तिथि = 29 अप्रैल 2007 | संग्रह-यूआरएल = https://web.archive.org/web/20070402100421/http://www.buet.ac.bd/about.html | संग्रह-तिथि = 2 अप्रैल 2007 | यूआरएल-स्थिति=निष्क्रिय }}</ref> तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए 1876 में 'ढाका सर्वे स्कूल' के नाम से स्थापित इस स्कूल को बाद में [[ढाका विश्वविद्यालय]] के 'अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग' में बदल दिया गया था। 1962 में इसे तत्कालीन [[पूर्व पाकिस्तान]] के चौथे विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="इतिहास">{{समाचार उद्धरण|यूआरएल=https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|शीर्षक=बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट)|तिथि=10 अगस्त 2012|पहुंच-तिथि=2 फरवरी 2021|भाषा=bn|वेबसाइट=कालेर कंठो|संग्रह-तिथि=25 जून 2022|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20220625110452/https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == इतिहास == === प्रारंभिक चरण === [[File:Old building 1930.jpg|thumb|1930 में स्थापित बुएट का प्रशासनिक भवन]] बुएट की स्थापना 19वीं शताब्दी के अंत में सर्वेक्षकों के लिए एक सर्वेक्षण स्कूल के रूप में हुई थी। 1876 में तत्कालीन [[ब्रिटिश राज]] ने 'ढाका सर्वे स्कूल' नामक एक संस्थान शुरू किया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://doi.org/10.1080/03043797.2012.666515|শিরোনাম=Engineering education in Bangladesh – an indicator of economic development|শেষাংশ=Chowdhury|প্রথমাংশ=Harun|শেষাংশ২=Alam|প্রথমাংশ২=Firoz|তারিখ=2012-05-01|সাময়িকী=European Journal of Engineering Education|খণ্ড=37|সংখ্যা নং=2|পাতাসমূহ=217–228|ডিওআই=10.1080/03043797.2012.666515|issn=0304-3797}}</ref><ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|শিরোনাম=Celebrating 60 years of engineering education in Bangladesh (1947-2007)|তারিখ=৩১ ডিসেম্বর ২০০৭|সম্পাদক-শেষাংশ=Hafiz|সম্পাদক-প্রথমাংশ=Roxana|সম্পাদক-শেষাংশ২=Hoque|সম্পাদক-প্রথমাংশ২=Md. Mazharul|সাময়িকী=বুয়েট প্রকাশনা|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২৭ জুন ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220627055212/http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> इसका उद्देश्य उस समय के ब्रिटिश भारत के सरकारी कार्यों में भाग लेने वाले कर्मचारियों को [[तकनीकी शिक्षा]] प्रदान करना था। ढाका के तत्कालीन नवाब [[ख्वाजा अहसानुल्लाह]] इस विद्यालय में रुचि रखते थे और मुसलमानों की शिक्षा में प्रगति के लिए उन्होंने ढाका सर्वे स्कूल को इंजीनियरिंग स्कूल (वर्तमान में बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) में उन्नत करने की योजना को लागू करने के लिए 1 लाख 12 हजार रुपये देने का वादा किया था। उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो सका। उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नवाब सलीमुल्लाह ने 1902 में इस वादे को निभाया। उनके दान से बाद में यह एक पूर्ण इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में विकसित हुआ और उनकी मान्यता में 1908 में इस संस्थान का नाम बदलकर 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल' कर दिया गया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|শিরোনাম=HISTORICAL EDIFICES OF RAMNA: A PROSPECTIVE HERITAGE ROUTE IN URBAN DHAKA|শেষাংশ=Farzana|প্রথমাংশ=Mir|শেষাংশ২=Fahmida|প্রথমাংশ২=Nusrat|তারিখ=মে ২০১৯|সাময়িকী=Proceedings of the International Conference on Urban Form and Social Context: from Traditions to Newest Demands|প্রকাশক=Siberian Federal University|ভাষা=en|আইএসবিএন=978-5-7638-4127-5|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210822043859/http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल ने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]] और [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]] विभागों में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू किया। शुरुआत में स्कूल की गतिविधियाँ एक किराए के भवन में चलती थीं। 1906 में सरकारी पहल पर [[ढाका विश्वविद्यालय]] के शहीदुल्लाह हॉल के पास इसका अपना भवन बनाया गया। 1912 में इसे इसके वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। प्रारंभ में यह स्कूल [[ढाका कॉलेज]] से संबद्ध था। बाद में इसे लोक शिक्षा निदेशक के अधीन संचालित किया जाने लगा। मिस्टर एंडरसन इसके पहले प्रधानाचार्य (Principal) नियुक्त किए गए। इसके बाद 1932 में श्री बी. सी. गुप्ता और 1938 में श्री हकीम अली प्रधानाचार्य नियुक्त हुए।<ref name=":0">{{বই উদ্ধৃতি|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২|শেষাংশ=মামুন|প্রথমাংশ=মুনতাসীর|প্রকাশক=নেপালচন্দ্র ঘোষ|বছর= ডিসেম্বর ১৯৯৬|আইএসবিএন=|অবস্থান=সাহিত্যলোক, ৩২/৭ বিডন স্ট্রীট, কলিকাতা, ৭০০০০৬|পাতাসমূহ=সার্ভে স্কুল থেকে প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়, পৃষ্ঠা- ২১৮ থেকে ২১৪}}</ref><ref>Government of India, Dacca Survey School, <u>''Proceedings,''</u> Home Ed. - 144-146A, May-1904.</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২ - মুনতাসীর মামুন|ওয়েবসাইট=Scribd|ভাষা=en|সংগ্রহের-তারিখ=2018-11-10|আর্কাইভের-তারিখ=২০২০-০৮-১৯|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20200819204437/https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === द्वितीय विश्व युद्ध के बाद === [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद बंगाल के औद्योगिकीकरण के लिए तत्कालीन सरकार ने व्यापक योजनाएँ बनाईं। तब इस क्षेत्र में कुशल जनशक्ति की कमी देखी गई। तत्कालीन सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में 4 साल के डिग्री कोर्स के लिए ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने और स्कूल को तत्कालीन पलाशी बैरक में स्थानांतरित करके सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 4 साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 480 छात्रों के प्रवेश की सिफारिश की। मई 1947 में सरकार ने ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया और छात्रों के प्रवेश के लिए वर्तमान पश्चिम बंगाल के शिवपुर स्थित बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज और ढाका के अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई।<ref name=":0"/> === विभाजन के बाद === 1947 के विभाजन के परिणामस्वरूप अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल के कुछ ही शिक्षकों को छोड़कर बाकी सभी शिक्षक भारत चले गए और [[भारत]] से 5 शिक्षक इस स्कूल में शामिल हुए। अगस्त 1947 में इसे ढाका विश्वविद्यालय के तहत इंजीनियरिंग संकाय के रूप में 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज' में उन्नत किया गया।<ref name="ইতিহাস"/> श्री हकीम अली इसके प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। फरवरी 1948 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान सरकार ने इस कॉलेज को मंजूरी दी और इसने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]], [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]], [[केमिकल इंजीनियरिंग]], [[एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग]] और [[टेक्सटाइल इंजीनियरिंग]] विभागों में चार साल की बैचलर डिग्री और सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागों में तीन साल का डिप्लोमा देना शुरू किया। हालांकि, अंततः एग्रीकल्चर और टेक्सटाइल के स्थान पर मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग को शामिल किया गया। 1956 में कॉलेज में सेमेस्टर प्रणाली शुरू हुई और नया पाठ्यक्रम अनुमोदित किया गया। 1957 में डिग्री कोर्स में सीटों की संख्या 120 से बढ़ाकर 240 कर दी गई। 1958 में कॉलेज से डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिया गया। इस बीच, 1951 में टी. एच. मैथ्यूमैन और 1954 में डॉ. एम. ए. रशीद कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। इस दौरान 'एग्रीकल्चरल एंड मैकेनिकल कॉलेज ऑफ टेक्सास' (वर्तमान विश्वविद्यालय) और अहसानुल्लाह कॉलेज के बीच एक संयुक्त प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप वहां के प्रोफेसरों ने यहां आकर शिक्षण मानकों, प्रयोगशालाओं और पाठ्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए कुछ शिक्षकों को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए [[टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी|टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज]] भेजा गया। इस समय एशिया फाउंडेशन ने लाइब्रेरी को कुछ आवश्यक पुस्तकें दान कीं और 'रेंटल लाइब्रेरी' प्रणाली शुरू की गई। कॉलेज के समय छात्रों के लिए केवल दो छात्रावास थे: मेन हॉस्टल (वर्तमान डॉ. एम. ए. रशीद भवन) और साउथ हॉस्टल (वर्तमान नज़रुल इस्लाम हॉल)। === इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के रूप में === [[चित्र:Reg building.JPG|thumb|140px|left|डॉ. एम. ए. रशीद भवन]] पाकिस्तान काल के दौरान 1 जून 1962 को इसे एक पूर्ण इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में बदल दिया गया और इसका नाम 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (East Pakistan University of Engineering and Technology, या EPUET) रखा गया।<ref>{{Citation |last = পাবলো |first = ফুয়াদ |year = ২০২১ |title = পুয়েট, হতাশার মোড়, বিচ্ছেদ পয়েন্ট এবং অন্যান্য... |publisher = প্রথম আলো |publication-place = |page = |url = https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |access-date = February 26, 2025 |আর্কাইভের-তারিখ = মে ২, ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল = https://web.archive.org/web/20250502231055/https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |ইউআরএল-অবস্থা = কার্যকর }}</ref><ref>{{Citation | last = | first = | year = | title = Self-Portrayal | publisher = অফিসিয়াল ওয়েবসাইট | publication-place = | page = | url = https://www.buet.ac.bd/web/#/about/1 | access-date = February 26, 2025 | আর্কাইভের-তারিখ = আগস্ট ২, ২০২১ | আর্কাইভের-ইউআরএল = https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/about/1 | ইউআরএল-অবস্থা = কার্যকর }}</ref> तत्कालीन तकनीकी शिक्षा निदेशक डॉ. एम. ए. रशीद पहले कुलपति (Vice Chancellor) नियुक्त हुए। प्रोफेसर ए. एम. अहमद इंजीनियरिंग संकाय के पहले डीन नियुक्त हुए। प्रसिद्ध गणितज्ञ एम. ए. जब्बार पहले रजिस्ट्रार और मुमताज़ुद्दीन अहमद पहले कॉम्पट्र्रोलर नियुक्त हुए। डॉ. एम. ए. रशीद के कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय एक मजबूत नींव पर स्थापित हुआ। एक विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होने के बाद, छात्रों के लिए तीन नए आवासीय हॉल बनाए गए। प्रोफेसर कबीरउद्दीन अहमद पहले छात्र कल्याण निदेशक नियुक्त हुए। 1962 में ही [[आर्किटेक्चर]] और योजना संकाय के तहत आर्किटेक्चर विभाग का गठन किया गया, इस विभाग के लिए टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज के कुछ शिक्षक शामिल हुए। इस प्रकार इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के दो संकायों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर विभागों के साथ इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की यात्रा शुरू हुई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 1964 में सीटों की संख्या 240 से बढ़ाकर 360 कर दी गई। उसी वर्ष वर्तमान 7 मंजिला सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण शुरू हुआ। 1969-70 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 420 कर दी गई। इस समय आर्किटेक्चर और योजना संकाय में 'फिजिकल प्लानिंग' नामक एक नया विभाग शुरू किया गया, जो बाद में 'नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन' (Urban and Regional Planning) विभाग में बदल गया।<ref> {{Citation | last = আজম | first = আলী | year = 2019 | title = ইপুয়েট থেকে আজকের বুয়েট | publisher = সময়ের আলো | publication-place = | page = | url =https://www.shomoyeralo.com/news/68167 | access-date = February 26, 2025 }} </ref> === स्वतंत्रता के बाद === 1971 में बांग्लादेश के [[बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम|स्वतंत्रता संग्राम]] के बाद इसका नाम बदलकर 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="ইতিহাস"/> बाद में 2003 में इसे संक्षिप्त रूप में 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' के रूप में ही मान्यता दी गई।{{cn|date=14 जुलाई 2023}} == कुलपतियों की सूची == {| class="wikitable" |+ बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कुलपतियों की सूची ! क्र. सं. !! नाम !! कार्यकाल |- | 1 || [[एम ए रशीद]] || 1 जून 1962 – 16 मार्च 1970 |- | 2 || [[मोहम्मद अबू नासेर]] || 16 मार्च 1970 – 25 अप्रैल 1975 |- | 3 || [[वाहिदुद्दीन अहमद]] || 25 अप्रैल 1975 – 24 अप्रैल 1983 |- | 4 || [[अब्दुल मतीन पाटोवारी]] || 24 अप्रैल 1983 – 25 अप्रैल 1987 |- | 5 || [[मुशर्रफ हुसैन खान (अकादमिक)|मुशर्रफ हुसैन खान]] || 25 अप्रैल 1987 – 24 अप्रैल 1991 |- | 6 || [[मुहम्मद शाहजहाँ]] || 24 अप्रैल 1991 – 27 नवंबर 1996 |- | 7 || [[इकबाल महमूद]] || 27 नवंबर 1996 – 14 अक्टूबर 1998 |- | 8 || [[नूरुद्दीन अहमद]] || 14 अक्टूबर 1998 – 30 अगस्त 2002 |- | 9 || [[मोहम्मद अली मुर्तुजा]] || 30 अगस्त 2002 – 29 अगस्त 2006 |- | 10 || [[ए एम एम सफीउल्लाह]] || 30 अगस्त 2006 – 29 अगस्त 2010 |- | 11 || [[एस एम नजरूल इस्लाम]] || 30 अगस्त 2010 – 13 सितंबर 2014 |- | 12 || [[खालिदा एकराम]] || 14 सितंबर 2014 – 24 मई 2016 |- | 13 || [[सैफुल इस्लाम (अकादमिक)|सैफुल इस्लाम]] || 22 जून 2016 – 23 जून 2020 |- | 14 || [[सत्य प्रसाद मजुमदार]]<ref name="ভিসি২০২০">{{समाचार उद्धरण | शीर्षक=बुएट के नए कुलपति सत्य प्रसाद मजुमदार | लेखक=<!--स्टाफ लेखक--> | यूआरएल=https://banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | समाचार पत्र=बांग्लान्यूज24 | तिथि=25 जून 2020 | पहुंच-तिथि=25 जून 2020 | संग्रह-तिथि=26 जून 2020 | संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20200626012106/https://www.banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | यूआरएल-स्थिति=सक्रिय }}</ref> || 25 जून 2020 – 18 अगस्त 2024 |- | 15 || [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] || 12 सितंबर 2024 – वर्तमान |} == कैंपस == [[File:BUET main gate 3.jpg|right|thumb|बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का प्रवेश द्वार]] बुएट कैंपस [[ढाका]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है। [[बुएट]], [[ढाका विश्वविद्यालय]] और [[ढाका मेडिकल कॉलेज]] एक ही नवाब द्वारा दान की गई भूमि पर विकसित हुए हैं, इसलिए ये एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं। कैंपस के पश्चिमी हिस्से में ईईई (EEE), सीएससी (CSE) और बीएमई (BME) विभागों के लिए 12-मंजिला ईसीई (ECE) भवन बनाया गया है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=শিকদার শুভ|প্রথমাংশ=সৌমেন|তারিখ=১০ মে ২০২০|শিরোনাম=স্মৃতিতে বুয়েটের দিনগুলো|ইউআরএল=https://www.risingbd.com/campus-news/349647|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-24|ওয়েবসাইট=Risingbd Online Bangla News Portal|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০३-২৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250324123125/https://www.risingbd.com/campus-news/349647}}</ref> हालांकि, कैंपस के मुख्य भाग में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, यूआरपी (URP) भवनों के साथ-साथ डॉ. रशीद एकेडमिक भवन स्थित है। छात्रों के आवासीय हॉल शैक्षणिक भवनों से पैदल दूरी पर स्थित हैं। वर्तमान में कैंपस का क्षेत्रफल 76.85 एकड़ (311,000 वर्ग मीटर) है। == प्रवेश प्रक्रिया == === स्नातक === बुएट की स्नातक प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति द्वारा केंद्रीय रूप से संचालित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को [[बांग्लादेश]] की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है। बुएट में स्नातक स्तर पर प्रवेश, ग्रेड और परीक्षा के परिणामों के आधार पर निर्धारित किया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया में पाठ्येतर गतिविधियों (extracurricular activities) या वित्तीय आवश्यकताओं पर विचार नहीं किया जाता है। स्नातक प्रवेश परीक्षा एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी लिखित परीक्षा है। [[उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र|उच्च माध्यमिक स्तर]] (एचएससी) की शिक्षा पूरी करने के बाद, यदि कोई छात्र न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करता है, तो वह स्नातक प्रवेश के लिए आवेदन जमा कर सकता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-01-27|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েট ভর্তি পরীক্ষার আবেদন যেভাবে করবেন|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231358/https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|ইউআরएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> पहले केवल लिखित परीक्षा के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। वर्तमान में छात्रों का चयन दो चरणों में किया जाता है। प्रारंभिक रूप से, आवेदन की शर्तों के अनुसार न्यूनतम योग्य उम्मीदवारों के लिए एक प्रारंभिक छंटनी परीक्षा (preliminary screening test) आयोजित की जाती है। इस परीक्षा से चयनित छात्रों को मुख्य लिखित परीक्षा के माध्यम से प्रवेश का अवसर प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-12-01|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে ভর্তিতে আবেদন শুরু, পরীক্ষার নম্বর–আসন কত, দেখুন গুরুত্বপূর্ণ তারিখ ও সময়|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231221/https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> === स्नातकोत्तर === मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रमों में हर साल लगभग 1,000 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को साक्षात्कार (interview) और/या लिखित परीक्षा में भाग लेना होता है। विभिन्न विभागों और संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्रियाँ इस प्रकार हैं: एमएससी (मास्टर ऑफ साइंस), एमएससी इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग), एम. इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग), एमयूआरपी (मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग), एम.आर्क (मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर), एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) और पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी)। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और जल संसाधन विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजी डिप.) भी प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-07-11|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে মাস্টার্স, এমফিল ও পিএইচডি প্রোগ্রামে ভর্তি, আবেদন ফি ৫০৫ টাকা|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218234014/https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == संकाय और विभाग == [[चित्र:BUET EME Building.jpg|thumb|बुएट का एम.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) भवन]] [[चित्र:Civil Engineering Building of BUET seen from EME Building.JPG|thumb|सिविल इंजीनियरिंग भवन]] [[File:Ece buliding.jpg|thumb|बुएट ईसीई (ECE) भवन]] [[File:Architecture building .jpg|thumb|बुएट आर्किटेक्चर भवन]] बुएट में वर्तमान में 6 संकायों के अंतर्गत 18 विभाग हैं। === केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय === ==== केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का केमिकल इंजीनियरिंग विभाग [[दक्षिण एशिया]] के सबसे पुराने केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में से एक है। 1952 में यहाँ से पहले पांच केमिकल इंजीनियरिंग छात्रों ने स्नातक किया था। यह विभाग अब केमिकल इंजीनियरिंग में बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Our History: Department of Chemical Engineering|ইউআরএল=https://che.buet.ac.bd/our-history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में हर साल साठ और स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पंद्रह छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस विभाग के पाठ्यक्रम आधुनिक केमिकल इंजीनियरिंग शिक्षा की अवधारणाओं पर आधारित हैं, और देश की औद्योगिक आवश्यकताओं पर पर्याप्त जोर दिया जाता है। ==== मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करने वाला एकमात्र विभाग है। इसकी स्थापना 1952 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के रूप में हुई थी। विभाग का लक्ष्य मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करना और घरेलू कच्चे माल के उपयोग पर अनुसंधान के अवसर पैदा करना था।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|ওয়েবসাইট=Department of Materials and Metallurgical Engineering}}</ref> बाद में, सिरेमिक, पॉलिमर और कंपोजिट जैसे गैर-धात्विक सामग्रियों के महत्व को देखते हुए इस विभाग ने अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया। 18 मार्च 1997 को बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने इसका नाम बदलकर "मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग" (MME) कर दिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About us: MME BUET|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250304084732/https://mme.buet.ac.bd/about-us/}}</ref> वर्तमान में यह विभाग चार साल के स्नातक कार्यक्रम में हर साल 40 छात्रों को प्रवेश देता है और स्नातकोत्तर (मास्टर्स और पीएचडी) पाठ्यक्रम संचालित करता है। ==== नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) के इस विभाग का नाम 2022 में "ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग" से बदलकर "नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग" कर दिया गया। यह पर्यावरण, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्नातकों को तैयार करने का कार्य करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About the Department |ইউআরএল=https://nce.buet.ac.bd/about/ |ওয়েবসাইট=Department of Nanomaterials and Ceramic Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET)}}</ref> ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग बांग्लादेश में पेट्रोलियम और खनिज संसाधन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला पहला विश्वविद्यालय-स्तरीय कार्यक्रम है। वर्तमान में यह केवल स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। विभाग की स्थापना 1992 में बुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के सहयोग से की गई थी, जिसे कैनेडियन इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी (CIDA) द्वारा वित्तपोषित किया गया था। बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने 5 नवंबर 1990 को इसे मंजूरी दी और 1995 में शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू हुईं।<ref name=pmre/> यह विभाग दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों और संस्थानों के सहयोग से निरंतर उन्नत हो रहा है। इसके सहयोगियों में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU), USAID, CIDA और टेक्सास का 'सेंटर फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स' (CEE) शामिल हैं।<ref name=pmre>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About Us |ইউআরএল=https://pmre.buet.ac.bd/about-us |ওয়েবসাইট=Department of Petroleum and Mineral Resources Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering & Technology |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-তারিখ=১ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250301214820/http://pmre.buet.ac.bd/about-us |ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর }}</ref> === मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय === ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग यहाँ के सबसे पुराने और बड़े विभागों में से एक है। इसकी शुरुआत 1947 में तत्कालीन अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज में चार साल के स्नातक कार्यक्रम के रूप में हुई थी। अब तक इस विभाग से 4166 छात्रों ने बीएससी इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), 201 छात्रों ने एमएससी/एम.इंजीनियरिंग और 16 छात्रों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History {{!}} Department of Mechanical Engineering, BUET|ইউআরএল=https://me.buet.ac.bd/history|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=me.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-০৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250208091311/http://me.buet.ac.bd/history|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में तरल और तापीय ऊर्जा प्रणाली (fluid and thermal power systems), तापीय ऊर्जा का अन्य ऊर्जा में रूपांतरण, मशीनों और यांत्रिक प्रणालियों के डिजाइन और नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। ==== इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में 1981 में स्नातकोत्तर स्तर पर इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग (IPE) विभाग शुरू किया गया था। उस समय केवल स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता था। औद्योगिक क्षेत्र में प्रबंधन के कुशल इंजीनियर तैयार करने के लिए 1997 से इस विभाग ने स्नातक स्तर पर 20 छात्रों को प्रवेश देना शुरू किया। बाद में, विभिन्न उद्योगों में आईपे (IPE) स्नातकों की बढ़ती मांग के कारण छात्रों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई—पहले 30, फिर 2017-18 सत्र में 50 और 2020-21 सत्र में यह संख्या 120 तक पहुँच गई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About |ইউআরএল=https://ipe.buet.ac.bd/page/about |ওয়েবসাইট=Industrial and Production Engineering. |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫}}</ref> ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ने 1971 में अपनी यात्रा शुरू की थी। इस विभाग का अध्ययन जहाजों या तैरती हुई संरचनाओं के निर्माण से लेकर समुद्र से विभिन्न संसाधनों के दोहन की संभावनाओं तक फैला हुआ है। इस विभाग के स्नातक स्तर पर जहाजों की आकृति, शक्ति, स्थिरता, समुद्र में चलने की क्षमता, प्रतिरोध और संचालन, डिजाइन और परिचालन लागत के साथ-साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल इंजीनियरिंग और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विषय पढ़ाए जाते हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About NAME - Department of Naval Architecture and Marine Engineering, BUET|ইউআরএল=https://name.buet.ac.bd/about|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=name.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250214113408/https://name.buet.ac.bd/about|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === सिविल इंजीनियरिंग संकाय === ==== सिविल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में सिविल इंजीनियरिंग संकाय 1980 में शुरू हुआ था। यह देश में [[सिविल इंजीनियरिंग]] शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन के अवसर उपलब्ध हैं। हर साल इस विभाग में स्नातक स्तर पर 195 नए छात्र और स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 200 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=en-US|শিরোনাম=HOME|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২১-০৭-২৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210723230356/https://ce.buet.ac.bd/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> यहाँ स्ट्रक्चरल एनालिसिस, भूकंप इंजीनियरिंग और पर्यावरण इंजीनियरिंग पर शोध कार्य किया जाता है। सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण 1968 में हुआ था, 1992 में इसका विस्तार किया गया और 1996 में भवन की सातवीं मंजिल पूरी हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/history/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২০|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250420005317/https://ce.buet.ac.bd/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अप्रैल 2021 में बुएट अधिकारियों ने सिविल इंजीनियरिंग भवन का नाम दिवंगत राष्ट्रीय प्रोफेसर [[जामिलुर रजा चौधरी|डॉ. जामिलुर रजा चौधरी]] के नाम पर रखने का निर्णय लिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2021-04-20|ভাষা=bn|শিরোনাম=ড. জামিলুর রেজা চৌধুরীর নামে বুয়েটের পুরকৌশল ভবনের নামকরণ|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/%E0%A6%A1-%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%81%E0%A6%B0-%E0%A6%B0%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A6%BE-%E0%A6%9A%E0%A7%8C%E0%A6%A7%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%8C%E0%A6%B6%E0%A6%B2-%E0%A6%AD%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A6%A3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো}}</ref> बांग्लादेश में सिविल इंजीनियर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जैसे पुल और जलविद्युत केंद्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस विभाग का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचार और उत्कृष्टता प्राप्त करना है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Mission & Vision|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250115001034/https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग (जल संसाधन इंजीनियरिंग) विभाग की स्थापना 1974 में हुई थी।<ref name=":4">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=WRE {{!}} About Us|ইউআরএল=https://wre.buet.ac.bd/about-us.html|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=wre.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250302152817/http://wre.buet.ac.bd/about-us.html|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> 1980 में सिविल इंजीनियरिंग संकाय के गठन के समय यह इसके दो मुख्य विभागों में से एक बन गया। यह विभाग सिविल इंजीनियरिंग भवन की छठी मंजिल पर स्थित है। विभाग स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 150 स्नातक और 70 स्नातकोत्तर छात्र हैं। इसका लक्ष्य देश और क्षेत्र के जल और संबंधित संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम इंजीनियर तैयार करना है, जिसमें पेशेवर अभ्यास, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया जाता है।<ref name=":4" /> === इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय === ==== इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग ==== 1948 में स्थापित यह विभाग बांग्लादेश का सबसे पुराना [[इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग]] शिक्षा विभाग है।<ref name=":2">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About EEE {{!}} Department of EEE, BUET|ইউআরএল=https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=eee.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218185150/https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর}}</ref> समय के साथ निरंतर बदलावों के माध्यम से यह आज भी देश की इंजीनियरिंग शिक्षा के शीर्ष पर बना हुआ है। इस विभाग के छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स, संचार प्रणालियों, सिग्नल प्रोसेसिंग और बिजली प्रणालियों के मुख्य विषयों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों के बारे में पढ़ाया जाता है। यहाँ 43 पीएचडी-धारक शिक्षक हैं, जिन्होंने दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।<ref name=":2" /> चौथी औद्योगिक क्रांति की सहायक प्रौद्योगिकियों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम) के नवाचार और अनुसंधान में इस विभाग के शिक्षक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ==== कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग ==== यह विभाग 1984 में स्थापित किया गया था। बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में [[कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग]] शिक्षा का अग्रणी संस्थान है। यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाती है। पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखने के लिए इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसके अलावा, इस विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग में विशेष स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका विस्तार बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय और एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से किया जा रहा है। वर्तमान में यहाँ लगभग 700 स्नातक और 400 स्नातकोत्तर छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इस विभाग के कई पूर्व छात्र मिशिगन (एन आर्बर), कोलंबिया, टोरंटो, मोनाश जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं और [[गूगल]], [[माइक्रोसॉफ्ट]], [[एप्पल]], [[एनवीडिया]] जैसी शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं। कई छात्रों ने देश-विदेश में उद्यमी (entrepreneur) के रूप में भी काम शुरू किया है। विभाग में आईओटी (IoT) प्रयोगशाला, वायरलेस नेटवर्क प्रयोगशाला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और [[रोबोटिक्स]] प्रयोगशाला, और सैमसंग मशीन लर्निंग प्रयोगशाला<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Samsung R&D funded CSE BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312075801/https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of CSE, BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312105704/https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग जनवरी 2016 में 30 स्नातक छात्रों के साथ शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Head's Message|ইউআরএল=https://bme.buet.ac.bd/head-message/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=Biomedical Engineering {{!}} BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250428223446/https://bme.buet.ac.bd/head-message/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अब हर साल 50 स्नातक और 40 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।<ref name=":3" /> इस विभाग का उद्देश्य डिजाइन, विकास और अनुसंधान के माध्यम से देश की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करना और छात्रों को इस नए क्षेत्र में कुशल बनाना है। === आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय === ==== आर्किटेक्चर विभाग ==== [[File:Dept. of Architecture.jpg|thumb|आर्किटेक्चर भवन के ऊपर से लिया गया प्लिंथ का दृश्य]] बुएट का आर्किटेक्चर विभाग दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वास्तुकला शिक्षा के अग्रणी संस्थानों में से एक है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी। तत्कालीन 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (EPUET) में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में इसका विकास हुआ। अमेरिका की टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएस-एड (USAID) के तकनीकी सहयोग से पांच साल का बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत केवल एक विदेशी शिक्षक और पांच छात्रों के साथ हुई थी। बाद में और विदेशी शिक्षक जुड़े, और स्थानीय स्नातकों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।<ref name=":5">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of Architecture|ইউআরএল=https://arch.buet.ac.bd/department|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=arch.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250118033043/https://arch.buet.ac.bd/department|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> वर्षों के साथ छात्रों के प्रवेश की संख्या 5 से बढ़कर 55 हो गई है। यहाँ से ऐसे वास्तुकार (Architects) तैयार हो रहे हैं, जिन्होंने देश, क्षेत्र और दुनिया में नाम कमाया है। रिचर्ड ई. व्रूमैन, डैनियल सी. डनहम, लुई आई. कान, पॉल रूडोल्फ, स्टेनली टाइगरमैन, मज़हरुल इस्लाम और फजलुर रहमान खान जैसे प्रसिद्ध शिक्षकों के शुरुआती मार्गदर्शन ने इस सफलता की नींव रखी है।<ref name=":5" /> यहाँ के शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने 'आगा खान वास्तुकला पुरस्कार', 'दक्षिण एशियाई वास्तुकार वर्ष पुरस्कार' और 'बांग्लादेश वास्तुकार संस्थान डिजाइन पुरस्कार' जैसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=২০২৪-০৪-১৮|শিরোনাম=যে কারণে টাইমের প্রভাবশালীর তালিকায় মেরিনা তাবাশু‍্যম|ইউআরএল=https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=সকাল সন্ধ্যা|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503005903/https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=লেখা|তারিখ=2022-12-04|ভাষা=bn|শিরোনাম=ভবিষ্যতের স্থপতির পুরস্কার বুয়েট, চুয়েট, ইউএপির শিক্ষার্থীর|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৪-০৭-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20240714102140/https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=বিজ্ঞপ্তি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটের তরুণ স্থপতিদের পুরস্কৃত করল বার্জার|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503180846/https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=SAMAKAL|ভাষা=en|শিরোনাম=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|ইউআরএল=https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250505085306/https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग 1962 में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था। यह बांग्लादेश में नियोजन (Planning) से संबंधित सबसे पुराना और सबसे बड़ा डिग्री प्रोग्राम है। प्रारंभ में, आर्किटेक्चर विभाग के शिक्षक ही इसके पाठ्यक्रम पढ़ाते थे। बाद में, 1968 में दो स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के साथ दो साल का 'मास्टर ऑफ फिजिकल प्लानिंग' (MPP) कार्यक्रम शुरू हुआ। हालांकि, बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के कारण, छात्रों के पहले बैच ने 1972 में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की।<ref name=":6">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en|শিরোনাম=BUET:URP Website|ইউআরএল=https://urp.buet.ac.bd/Web/History|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=urp.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৬-০১-২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20260121105540/https://urp.buet.ac.bd/Web/History|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने विभिन्न तरीकों से इस विभाग की सहायता की, जिसमें विदेशों से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी शामिल थी। 1975 में MPP कार्यक्रम का नाम बदलकर 'मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (MURP) कर दिया गया। इसके बाद, 1978 और 1979 के MURP बैच बुएट-शेफील्ड सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिससे छात्रों को बुएट और यूके की शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संयुक्त डिग्री प्राप्त हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|প্রকাশনার-তারিখ=2017|শিরোনাম=Research on “Activities of Urban Development Directorate (UDD) since 1965”|ইউআরএল=https://udd.portal.gov.bd/sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর|ওয়েবসাইট=Urban Development Directorate (UDD)|উক্তি=BUET-Sheffield Joint Master’s Degree Program-An Approach to Physical Upgrading of a Low Income Community, Dhaka, Bangladesh,1979.|সংগ্রহের-তারিখ=২৬ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ আগস্ট ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220804201644/https://udd.portal.gov.bd//sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf}}</ref> बाद में 1995 में 'बैचलर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (BURP) और पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए गए।<ref name=":6" /> संकाय, विभाग और उनके अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या की सूची: {| class="prettytable" style="width:45em;" |- style="background-color:#E1D297;font-weight:bold" ! संकाय का नाम ! विभाग ! संक्षिप्त नाम ! प्रवेशित छात्रों की संख्या |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="4" | केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय | केमिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''Ch.E'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''MME'' | 60 |- style="background-color:#DADADA" | नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NCE'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''PMRE'' | - |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | विज्ञान संकाय | रसायन विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Chem'' | - |- style="background-color:#eef" | गणित विभाग | style="text-align:center;" | ''Math'' | - |- style="background-color:#eef" | भौतिक विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Phys'' | - |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="2" | सिविल इंजीनियरिंग संकाय | सिविल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''WRE'' | 30 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय | मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''ME'' | 180 |- style="background-color:#eef" | नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NAME'' | 55 |- style="background-color:#eef" | इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''IPE'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="3" | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''EEE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CSE'' | 180 |- style="background-color:#DADADA" | बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''BME'' | 50 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय | आर्किटेक्चर विभाग | style="text-align:center;" | ''Arch.'' | 60 |- style="background-color:#eef" | मानविकी विभाग | style="text-align:center;" | ''Hum'' | - |- style="background-color:#eef" | अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''URP'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="1" | कुल संकाय: 6 | colspan="2" | कुल विभाग: 18 | कुल प्रवेशित छात्र: 1305 |- |} == अनुसंधान == === अनुसंधान केंद्र और प्रयोगशालाएं === प्रयोगात्मक और व्यावहारिक अनुसंधान के साथ-साथ गणितीय विश्लेषण के लिए बुएट में 100 से अधिक उन्नत अनुसंधान केंद्र और विभागीय प्रयोगशालाएं हैं। इन सबका मुख्य केंद्र ‘रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग’ (RISE) है<ref>{{cite web |title=RISE-HOME |url=https://rise.buet.ac.bd/#/ |access-date=2026-03-04 |website=rise.buet.ac.bd}}</ref>, जो मुख्य रूप से आंतरिक अनुसंधान अनुदान, नवाचार कार्यक्रमों, उद्योग-संबद्ध भागीदारी और प्रकाशन प्रोत्साहन जैसे मामलों का समन्वय करता है। अन्य उल्लेखनीय केंद्रों में सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज (CES), सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (CERM), और अत्याधुनिक ‘जाइस’ (ZEISS) लैब से सुसज्जित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर (BEC) शामिल हैं।<ref>{{cite web |language=en |title=Buet opens biomedical research lab |url=https://www.thedailystar.net/health/news/buet-opens-biomedical-research-lab-3277881 |access-date=2026-03-04 |website=www.thedailystar.net}}</ref> इसके अलावा तकनीकी सेवाओं और परामर्श के लिए ‘ब्यूरो ऑफ रिसर्च, टेस्टिंग एंड कंसल्टेशन’ (BRTC) कार्यरत है। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (IWFM), इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (IRAB) और इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IESD) जैसे विशेष संस्थान भी सक्रिय हैं।<ref>{{cite web |title=BUET’s ICS testing lab gets IDCOL support |url=https://www.newagebd.net/post/mis/280462/buets-ics-testing-lab-gets-idcol-support |url-status=active |website=New Age}}</ref> ये केंद्र और लैब मुख्य रूप से चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों (जैसे: एआई, रोबोटिक्स, आईओटी), सतत ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और बायोमेडिकल क्षेत्र के अनुसंधान में नेतृत्व कर रहे हैं।<ref>{{cite web |date=2022-04-07 |language=en |title=Education ministry to pursue Buet’s mega plan to boost research |url=https://www.tbsnews.net/bangladesh/education/education-ministry-pursue-buets-mega-plan-boost-research-398818 |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === सम्मेलन === बुएट नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उच्च-स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन करता है। कुछ प्रमुख सम्मेलन इस प्रकार हैं: * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ICME):''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का एक फ्लैगशिप आयोजन है, जिसका 15वां संस्करण 2025 में आयोजित किया गया। * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग (ICECE):''' इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (EEE) विभाग द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक फ्लैगशिप सम्मेलन।<ref>{{cite web |title=ICECE - 2024 |url=https://icece.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-05 |website=icece.buet.ac.bd}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन केमिकल इंजीनियरिंग (ICChE):''' केमिकल इंजीनियरिंग विभाग का मुख्य सम्मेलन। * '''आईईईई (IEEE) इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेलीकम्युनिकेशंस एंड फोटोनिक्स (ICTP):''' 2025 में इस सम्मेलन का छठा संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।<ref>{{cite web |title=The 6th IEEE International Conference on Telecommunications and Photonics 2025 (ICTP 2025) Held at BUET |url=https://iict.buet.ac.bd/?p=3546 |access-date=2026-03-05 |website=IICT, BUET}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (ICWFM):''' जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक कार्यक्रम। * '''इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन सिविल इंजीनियरिंग (ISCEB):''' इसके अलावा GCSTMR सम्मेलन, एल्गोरिदम पर WALCOM और नेटवर्किंग एवं सुरक्षा पर NSysS जैसे वैश्विक कार्यक्रमों का आयोजन भी बुएट द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। === जर्नल === अनुसंधान परिणामों को व्यापक रूप से प्रसारित करने के उद्देश्य से बुएट कई सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) जर्नल प्रकाशित करता है: * '''जर्नल ऑफ आर्किटेक्चर:''' इस जर्नल का पूर्व नाम ‘प्रतिबेश’ (Protibesh) था। यह वास्तुकला विभाग का शोध जर्नल है, जो मुख्य रूप से वास्तुकला, पर्यावरण और सतत डिजाइन से संबंधित विषयों पर काम करता है।<ref>{{cite web |title=Journal of Architecture, BUET |url=https://ja.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-04 |website=ja.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Architecture |url=https://web251.secure-secure.co.uk/bja.arch.buet.ac.bd/index.php/bja |access-date=2026-03-04 |website=web251.secure-secure.co.uk}}</ref> * '''जर्नल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट्स:''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की आधुनिक प्रगति और अनुसंधान पर केंद्रित है।<ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.scimagojr.com/journalsearch.php?q=20980&tip=sid |access-date=2026-03-04 |website=www.scimagojr.com}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.jmerd.org/ |access-date=2026-03-04 |website=www.jmerd.org}}</ref><ref>{{cite journal |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://jmerd.me.buet.ac.bd/ |journal=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments}}</ref> * '''केमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च बुलेटिन:''' केमिकल इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों के अनुसंधान के लिए समर्पित यह जर्नल 'बांग्लाजोल' (BanglaJOL) के सहयोग से प्रकाशित होता है।<ref>{{cite web |title=Chemical Engineering Research Bulletin |url=https://www.banglajol.info/index.php/CERB |access-date=2026-03-04 |website=www.banglajol.info}}</ref> === प्रमुख नवाचार === बुएट ने कई व्यावहारिक और स्थानीय संदर्भ में प्रभावी नवाचार विकसित किए हैं, जिनमें से कई को पेटेंट, सरकारी मंजूरी और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है: * [[ऑक्सीजेट]] '''सीपैप वेंटिलेटर (2021):''' कोविड-19 संकट के दौरान बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ने इस किफायती और बिजली रहित नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का आविष्कार किया।<ref>{{cite web |language=bn |title=দেশীয় ভেন্টিলেটর ডিভাইস অক্সিজেট সিপ্যাপ |url=https://www.ittefaq.com.bd/263760/%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%80%E0%A7%9F-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A6%B0-%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%87%E0%A6%B8-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Ittefaq}}</ref> यह औषधि प्रशासन निदेशालय (DGDA) द्वारा अनुमोदित पहला बांग्लादेशी चिकित्सा उपकरण है।<ref>{{cite web |last=Channel24 |language=en |title=ঢাকা মেডিকেলে 'অক্সিজেট সিপ্যাপ ভেন্টিলেটরের' ক্লিনিক্যাল ট্রায়াল শুরু |url=https://www.channel24bd.tv/health/article/67696/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%AE%E0%A7%87%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%87%E0%A6%B2%E0%A7%87-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%9F%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%B6%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%81 |access-date=2026-03-04 |website=Channel 24}}</ref><ref>{{cite web |last=At-tahreek |first=Monthly |language=en |title=বিদ্যুৎ ছাড়াই ৬০ লিটার অক্সিজেন দিবে অক্সিজেট - |url=https://at-tahreek.com/ |access-date=2026-03-04 |website=Monthly At-tahreek}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/health/news/687347 |title=সীমিত ব্যবহারে অনুমোদন পেল বুয়েটের ‘অক্সিজেট’}}</ref> इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रशंसा प्राप्त की है।<ref>{{cite web |date=2021-11-07 |language=bn |title=বুয়েটের অক্সিজেট যেভাবে আন্তর্জাতিক মঞ্চে |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%95-%E0%A6%AE%E0%A6%9E%E0%A7%8D%E0%A6%9A%E0%A7%87 |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> साथ ही इसने ‘IMAGINE IF!’ ग्लोबल हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रतियोगिता में विश्व विजेता का खिताब जीता।<ref>{{cite web |last=Hasan |first=Taufiq |date=2021-12-30 |language=en-US |title=OxyJet wins two int'l competitions |url=https://bme.buet.ac.bd/2021/12/30/oxyjet-wins-two-intl-competitions/ |access-date=2026-03-04 |website=Biomedical Engineering | BUET}}</ref> * '''डेंगूड्रॉप्स (DengueDrops) और रैडअसिस्ट (RadAssist):''' डेंगू रोगी प्रबंधन और मेडिकल इमेजिंग के लिए एआई-संचालित मोबाइल ऐप और टेलीरेडियोलॉजी प्लेटफॉर्म।<ref>{{cite web |title=DengueDrops |url=https://mhealth.buet.ac.bd/DengueDropsInfo/ |access-date=2026-03-04 |website=mhealth.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=RadAssist Revolutionizing Radiology through AI |url=https://radassist.net/ |access-date=2026-03-04 |website=radassist.net}}</ref> * '''एनबी-केयर (NB-Care) प्लेटफॉर्म:''' एक स्मार्ट वर्टिकल एप्लिकेशन सिस्टम, जिसने मलेशिया इनोवेशन एंड डिजाइन प्रदर्शनी में ‘ITEX गोल्ड मेडल’ जीता।<ref>{{cite web |language=en-US |title=32nd International Invention, Innovation & Technology Exhibition (ITEX 2021) |url=https://www.akademisains.gov.my/ar21/32nd-international-invention-innovation-technology-exhibition-itex-2021/ |access-date=2026-03-04}}</ref> * '''सतत तकनीक:''' इसमें एसीआई डिजाइन का पुरस्कार विजेता कंक्रीट मिक्स, बायोमास से बायोक्रूड रूपांतरण और एमआईटी के साथ संयुक्त रूप से विकसित आर्सेनिक प्रदूषण मॉडलिंग टूल शामिल हैं। === अन्य उत्कृष्ट उपलब्धियाँ === * '''अनुसंधान अनुदान:''' हाल के वर्षों में बुएट ने बड़ी मात्रा में अनुसंधान निधि प्राप्त की है, जिसमें सीएसई (CSE) विभाग की पांच परियोजनाओं के लिए 9.24 करोड़ रुपये शामिल हैं। * '''अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता:''' बुएट के छात्रों ने IEEE SPS VIP Cup, AIChE चैलेंज, नासा स्पेस एप्स चैलेंज और यूरोपियन रोवर चैलेंज जैसे वैश्विक मंचों पर पुरस्कार जीते हैं।<ref>{{cite web |title=IEEE SPS Signal Processing Cup at ICASSP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/218 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=VIP Cup 2023 at ICIP 2023 |url=https://signalprocessingsociety.org/community-involvement/vip-cup-2023-icip-2023 |access-date=2026-03-05 |website=signalprocessingsociety.org}}</ref><ref>{{cite web |title=CHAMPION IEEE SPS VIP CUP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/215 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=2025 Johns Hopkins Healthcare Design Competition |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/219 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |last=Chowdhury |first=Ridoy Hasan |language=en-US |title=World First among 440 groups from 200 universities |url=https://bangladeshbarta.tv/archives/1361 |access-date=2026-03-05}}</ref> * '''सम्मान:''' बुएट के शिक्षकों और छात्रों ने IEEE R10 आउटस्टैंडिंग वॉलंटियर अवार्ड, आर्किटेक्चर में ARCASIA गोल्ड प्राइज और UNC वाटर एंड हेल्थ कॉन्फ्रेंस रिकग्निशन जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{cite web |date=2026-01-22 |language=en-US |title=R10 STUDENT BRANCH OF THE MONTH – BUET |url=https://newsletter.ieeer10.org/home_jan2021/r10-student-branch-of-the-month-bangladesh-university-of-engineering-technology/ |access-date=2026-03-05}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-10-06 |language=en-US |title=Result Announcement for 2025 IEEE Region 10 Award Recipients |url=https://www.ieeer10.org/2025/10/06/result-announcement-for-2025-ieee-region-10-award-recipients/ |access-date=2026-03-05 |website=IEEE}}</ref> * '''वैश्विक रैंकिंग:''' बुएट 'नेचर इंडेक्स' में बांग्लादेश के शीर्ष संस्थान के रूप में स्थान बनाए हुए है।<ref>{{cite web |date=2022-04-22 |language=bn |title=How BUET advanced in world rankings |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BF%E0%A6%82%E0%A7%9F%E0%A7%87-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%8F%E0%A6%97%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-03-05 |website=Prothomalo}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-12-10 |language=en |title=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |url=https://www.nature.com/nature-index/institution-outputs/Bangladesh/Bangladesh%20University%20of%20Engineering%20and%20Technology%20%28BUET%29/513906be34d6b65e6a0005c4 |access-date=2026-03-05 |website=Nature Index}}</ref><ref>{{cite news |url=https://thedailycampus.com/public-university/203159 |title=Top ten universities in international research |work=The Daily Campus}}</ref> === संस्थान === [[File:BUET-Japan Institute of Disaster Prevention and Urban Safety.jpg|thumb|बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी]] बुएट में वर्तमान में 8 संस्थान स्थापित हैं: * सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) * जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) * एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी संस्थान (IAT) * दुर्घटना अनुसंधान संस्थान (ARI) * बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी (BUET-JIDPUS) * परमाणु ऊर्जा इंजीनियरिंग संस्थान (INPE) * ऊर्जा एवं सतत विकास संस्थान (IESD) * रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन संस्थान (IRAB)<ref name="institute">{{cite web |title=Institutes of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |archive-date=August 2, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |url-status=active |publisher=BUET Official Website}}</ref> == निदेशालय, केंद्र और अन्य == * सलाहकार, विस्तार और अनुसंधान सेवा निदेशालय (DAERS) * छात्र कल्याण निदेशालय (DSW) * योजना और विकास निदेशालय (P&D) * सतत शिक्षा निदेशालय (DCE) * ऊर्जा अध्ययन केंद्र (CES) * पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन केंद्र (CERM) * बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र (BEC) * अनुसंधान, परीक्षण और परामर्श ब्यूरो (BRTC) * अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण नेटवर्क केंद्र (ITN) * शहरी सुरक्षा के लिए बांग्लादेश नेटवर्क कार्यालय (BNUS) == संगठन == === छात्र संगठन === अध्यादेश 1962 के अनुसार, बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सभी प्रकार की संगठनात्मक राजनीति प्रतिबंधित है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-18 |language=bn |title=বিদ্যমান আইনেই ছাত্ররাজনীতি নিষিদ্ধ |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6% weবি%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8-%E0%A6%86%E0%A6%87%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%87-%E0%A6%9B%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%80%E0%A6%A4%E0%A6%BF-%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%B7%E0%A6%BF%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%A7 |access-date=2025-03-13 |website=Daily Prothom Alo}}</ref> [[अबरार फहद हत्याकांड|अबरार फहद]] नामक विश्वविद्यालय के एक छात्र की बुएट छात्र लीग द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सैफुल इस्लाम ने कैंपस में सभी प्रकार की छात्र राजनीति और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार, कैंपस में शिक्षक राजनीति भी प्रतिबंधित है।<ref name=":1">{{cite web |url=https://www.bbc.com/bengali/news-50017329 |title=সংরক্ষণাগারভুক্ত অনুলিপি |access-date=January 19, 2020 |website=BBC Bengali}}</ref> === विज्ञान संगठन === * '''सत्येन बोस विज्ञान क्लब:''' 1994 में प्रसिद्ध [[सत्येंद्र नाथ बोस|भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस]] के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में 'सत्येन बोस विज्ञान क्लब' की यात्रा शुरू हुई।<ref>{{cite web |title=বুয়েটের সত্যেন বোস বিজ্ঞান ক্লাব |url=https://www.bonikbarta.com/home/news_description/356882/ |access-date=2025-04-03 |website=Bonik Barta}}</ref> इस क्लब का उद्देश्य बुएट के छात्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि जगाना और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। यह क्लब नियमित रूप से कार्यशालाएं, सेमिनार और व्याख्यान आयोजित करता है।<ref>{{cite web |language=bn |title=লাভেলো জাতীয় মহাকাশ উৎসব |url=https://www.banglanews24.com/print/715709 |access-date=2025-04-03 |website=banglanews24.com}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/national/news/871187 |title=জাতীয় পরিবেশ উৎসবের ঢাকা আঞ্চলিক বাছাই পর্ব অনুষ্ঠিত |work=Jago News |access-date=2025-04-03 |language=en-US}}</ref> * '''बुएट ऑटोमोबाइल क्लब:''' 4 अप्रैल 2017 को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मागलूब अल नूर की पहल पर इस क्लब की औपचारिक शुरुआत हुई।<ref>{{cite web |date=2017-04-05 |language=en |title=Buet launches automobile club |url=https://www.thedailystar.net/shift/buet-launches-automobile-club-1386637 |access-date=2025-12-19 |website=The Daily Star}}</ref><ref>{{cite web |last=Rahman |first=Saurin |date=2017-04-03 |language=en-US |title=BUET Automobile club inauguration |url=https://www.autorebellion.com/2017/04/buet-automobile-club-inauguration/ |access-date=2025-12-19 |website=Auto Rebellion}}</ref> क्लब का मुख्य उद्देश्य सैद्धांतिक इंजीनियरिंग ज्ञान और वास्तविक ऑटोमोबाइल उद्योग के बीच सेतु बनाना है। इस क्लब के तहत 'टीम ऑटोमेस्ट्रो' (Team AutoMaestro) नामक एक विशेषज्ञ टीम है, जिसने 2020 में भारत में आयोजित 'इंटरनेशनल गो-कार्ट चैंपियनशिप' में 9वां स्थान प्राप्त किया और अपने डिजाइन के लिए 'सर्वश्रेष्ठ नवाचार' का पुरस्कार जीता।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2020-11-29 |language=bn |title=উদ্ভাবনে সেরা বুয়েটের অটো মায়েস্ত্রো |url=https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%9F%E0%A7%8B-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B |access-date=2025-12-19 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट रोबोटिक्स सोसाइटी:''' यह बुएट के छात्रों द्वारा संचालित रोबोटिक्स क्लब है, जो छात्रों के बीच रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अभ्यास को बढ़ावा देता है।<ref>{{cite news |url=https://www.newagebd.net/post/campus-bites/290476/robo-carnival-held-at-buet |title=Robo Carnival held at BUET |work=New Age}}</ref><ref>{{cite web |date=2024-02-07 |language=en |title=BUET Robotics Society hosts Robo Carnival 2024 |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/buet-robotics-society-hosts-robo-carnival-2024-788678 |access-date=2026-02-19 |website=The Business Standard}}</ref> * '''टीम इंटरप्लेनेटर (Team Interplanetar):''' यह एक बहुविषयक [[रोबोटिक्स]] टीम है, जो 2011 में स्थापित हुई थी। यह टीम अंतर्राष्ट्रीय 'मार्स रोवर' प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही है।<ref>{{cite web |language=en-GB |title=Team Interplanetar - BUET Mars Rover Team (2025) |url=https://roverchallenge.eu/team/team-interplanetar-buet-mars-rover-team-2025/ |access-date=2026-02-19 |website=European Rover Challenge}}</ref> इन्होंने 'यूरोपियन रोवर चैलेंज' (ERC) में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।<ref>{{cite web |language=en |title=Team from BUET reaches finals of European Rover Challenge 2022 |url=https://www.thedailystar.net/tech-startup/news/team-buet-reaches-finals-european-rover-challenge-2022-3122366 |access-date=2026-02-19 |website=The Daily Star}}</ref> इनके 'निर्भीक' ड्रोन प्रोजेक्ट को मंगल ग्रह के लिए अभिनव गैस संपीड़न प्रणाली के लिए सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2021-05-30 |language=bn |title=মঙ্গলের জন্য ড্রোন উদ্ভাবনে সেরা বুয়েট |url=https://www.prothomalo.com/education/higher-education/%E0%A6%AE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%97%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF-%E0%A6%A1%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B%E0%A6%A8-%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-02-19 |website=Prothomalo}}</ref> * बुएट एनर्जी क्लब * बुएट न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्लब * बुएट साइबर सिक्योरिटी क्लब * बुएट इनोवेशन एंड डिजाइनिंग क्लब === कला और सांस्कृतिक संगठन === * '''आलोकवर्तिका:''' अक्टूबर 2016 में स्थापित यह एक मुक्त पुस्तकालय (Open Library) है। यहाँ से कोई भी बिना किसी पंजीकरण के पुस्तक ले सकता है, बशर्ते उसे पुस्तकालय में एक पुस्तक दान करनी हो।<ref>{{cite news |title=আলোকবর্তিকা: বুয়েটের একটি মুক্ত গ্রন্থাগার |url=http://bangla.fintechbd.com/2018/02/25/আলোকবর্তিকা-বুয়েটের-একট/ |date=February 25, 2018 |access-date=February 22, 2019 |work=Fintech}}</ref> * '''बुएट ड्रामा सोसाइटी:''' यह बुएट के प्रमुख सांस्कृतिक संगठनों में से एक है, जो नाट्य कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का काम करता है।<ref name="clubs" /> इन्होंने बंकिमचंद्र के 'कमलाकांतेर जबानबंदी' और अगाथा क्रिस्टी के 'द माउस ट्रैप' जैसे प्रसिद्ध नाटकों का मंचन किया है।<ref>{{cite web |title=Star Campus |url=https://archive.thedailystar.net/campus/2006/12/01/feature_BUET.htm |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Star Archive}}</ref><ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েট ড্রামা সোসাইটি মঞ্চে আনছে ‘দ্য মাউস ট্র্যাপ’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/iermh1wvrj |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट फिल्म सोसाइटी:''' यह फिल्म प्रेमी छात्रों का एक संगठन है जो स्वस्थ सिनेमाई चेतना विकसित करने और फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটে চলচ্চিত্র উৎসবে ‘আদিম’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/gmp25ivjdy |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''मूर्छना (Murchona):''' यह संगीत और वाद्ययंत्रों के विकास के लिए एक मंच है, जो वार्षिक सांस्कृतिक उत्सवों और संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-16 |language=bn |title=বাংলাদেশ প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়ের শাশ্বত সৌম্যর মূর্ছনা |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/মূর্ছনা |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट साहित्य संसद:''' यह रचनात्मक लेखन और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए काम करने वाला केंद्रीय संगठन है। * '''चारकोल - बुएट आर्टिस्ट्री सोसाइटी:''' यह स्केचिंग, सुलेख (Calligraphy) और शिल्प कला के अभ्यास को बढ़ावा देने वाला संगठन है। * '''कंठ्य (Kanthya):''' यह शुद्ध उच्चारण, सस्वर पाठ (Recitation) और प्रस्तुति कला (Presentation) के लिए समर्पित है। * '''ओरिगामी क्लब:''' यह कागज मोड़ने की कला के माध्यम से रचनात्मकता विकसित करने पर केंद्रित है। * '''बुएट फोटोग्राफिक सोसाइटी (BPS):''' यह फोटोग्राफी प्रेमियों का मंच है जो राष्ट्रीय फोटोग्राफी उत्सवों और कार्यशालाओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |date=2023-08-29 |language=en |title='Remembrance: 25 Years of BUET Photographic Society' |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/remembrance-25-years-buet-photographic-society-exhibition-showcases-extraordinary |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === अन्य संगठन === * '''पर्यावरण संगठन:''' एनवायरनमेंट वॉच (Environment Watch)। * '''खेल संगठन:''' बुएट चेस क्लब (Chess Club)। * '''मानवीय संगठन:''' [[बाधन]] (Badhan-BUET Zone), बुएट रोवर स्काउट। * '''करियर संगठन:''' बुएट करियर क्लब, बुएट डिबेटिंग क्लब, बुएट एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट क्लब। * '''बुएट मीडिया एंड कम्युनिकेशन क्लब:''' यह पहले 'बुएट पत्रकार संघ' के नाम से जाना जाता था, जिसे 2024 में भंग कर नए रूप में स्थापित किया गया। यह छात्रों के मीडिया और संचार कौशल को विकसित करने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটের ‘বিতর্কিত’ সাংবাদিক সমিতির কমিটি বিলুপ্ত |url=https://bangla.bdnews24.com/campus/y9cnpjmu62 |access-date=2026-03-07 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट ब्रेनिएक्स (BUET Brainiacs):''' यह क्विज और माइंड गेम्स के लिए लोकप्रिय क्लब है।<ref>{{cite web |last=নিউজ |first=সময় |language=bn |title=বুয়েট ব্রেইনিয়াক্সের ‘ন্যাশনাল কুইজ কম্পিটিশন’ |url=https://www.somoynews.tv/news/2023-08-24/XuCG6Dtu |access-date=2026-03-07 |website=Somoy News}}</ref> * '''बुएट सेल्फ डिफेंस क्लब:''' यह छात्रों को आत्मरक्षा (Karate & Judo) का प्रशिक्षण देता है। * '''हाउस ऑफ वॉलंटियर्स - बुएट:''' 2007 में एमआईटी (MIT) के बांग्लादेशी स्नातकों द्वारा शुरू किया गया, जिसकी पहली बांग्लादेशी शाखा 2009 में बुएट में शुरू हुई।<ref>{{cite web |date=2017-03-20 |language=en-US |title=Our Journey – House of Volunteers |url=https://houseofvolunteers.org/our-journey/ |access-date=2026-03-07}}</ref> <ref name="clubs">{{cite web |title=Clubs of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |publisher=BUET Official Website}}</ref> ==संदर्भ== <references /> 62hstn9io13miaasm3acfl8c9gnho1f 6536600 6536599 2026-04-05T14:23:48Z Md. Muqtadir Fuad 863491 category added 6536600 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | image = BUET LOGO.svg | caption = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का लोगो | image_upright = | other_name = बुएट | former_name = ढाका सर्वे स्कूल (1876-1908) <br>अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (1908-1947) <br>अहसानुल्लाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, [[ढाका विश्वविद्यालय]] (1947-1962)<br> पूर्व पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1962-1971) <br> बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1971-2001) | image_size = 160px | name = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी | established = 1876 (विश्वविद्यालय के रूप में: 1962) | type = [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय]] | chancellor = [[बांग्लादेश के राष्ट्रपति]] | vice_chancellor = [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|शीर्षक=बुएट के नए कुलपति|पहुंच-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20240912095843/https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> | doctoral = | city = [[ढाका]] | province = [[ढाका विभाग|ढाका]] | country = [[बांग्लादेश]] | students = लगभग 10,000 | undergrad = लगभग 5,000 | postgrad = | faculty = लगभग 600 | campus = शहर के केंद्र में, 83.9 एकड़ (33.95 हेक्टेयर) | nickname = बुएट (BUET) | affiliation = [[बांग्लादेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] | website = {{URL|https://www.buet.ac.bd/}} | logo = | footnotes = }} <!--{{Ranking Infobox | QS_W = 761-770 | QS_W_year = 2026 | QS_W_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय|संग्रह-तिथि=7 नवंबर 2015|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20151107033851/http://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology}}</ref> | THE_W = 1001-1200 | THE_W_year = 2024 | THE_W_ref = <ref name="THE">{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology - World University Rankings - THE|वेबसाइट=www.timeshighereducation.com|पहुंच-तिथि=28 नवंबर 2023|संग्रह-तिथि=25 नवंबर 2023|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20231125235248/https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref>| THE_Asia = 401-500 | THE_Asia_year = 2024 | THE_Asia_ref = <ref name="THE" />| QS_Asia = 158 | QS_Asia_year = 2026 | QS_Asia_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/asia-university-rankings/|शीर्षक=QS World University Rankings by Region 2026: Asia|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> }}--> '''बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी''' (संक्षेप में: '''बुएट''') [[बांग्लादेश]] का एक प्रमुख [[इंजीनियरिंग]]-संबंधित [[उच्च शिक्षा|उच्च शिक्षा संस्थान]] है। यह [[ढाका]] शहर के [[लालबाग थाना]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है।<ref>{{वेब उद्धरण | यूआरएल = http://www.buet.ac.bd/about.html | शीर्षक = बुएट का इतिहास | पहुंच-तिथि = 29 अप्रैल 2007 | संग्रह-यूआरएल = https://web.archive.org/web/20070402100421/http://www.buet.ac.bd/about.html | संग्रह-तिथि = 2 अप्रैल 2007 | यूआरएल-स्थिति=निष्क्रिय }}</ref> तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए 1876 में 'ढाका सर्वे स्कूल' के नाम से स्थापित इस स्कूल को बाद में [[ढाका विश्वविद्यालय]] के 'अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग' में बदल दिया गया था। 1962 में इसे तत्कालीन [[पूर्व पाकिस्तान]] के चौथे विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया। स्वतंत्रता के बाद इसका नाम 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="इतिहास">{{समाचार उद्धरण|यूआरएल=https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|शीर्षक=बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट)|तिथि=10 अगस्त 2012|पहुंच-तिथि=2 फरवरी 2021|भाषा=bn|वेबसाइट=कालेर कंठो|संग्रह-तिथि=25 जून 2022|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20220625110452/https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == इतिहास == === प्रारंभिक चरण === [[File:Old building 1930.jpg|thumb|1930 में स्थापित बुएट का प्रशासनिक भवन]] बुएट की स्थापना 19वीं शताब्दी के अंत में सर्वेक्षकों के लिए एक सर्वेक्षण स्कूल के रूप में हुई थी। 1876 में तत्कालीन [[ब्रिटिश राज]] ने 'ढाका सर्वे स्कूल' नामक एक संस्थान शुरू किया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://doi.org/10.1080/03043797.2012.666515|শিরোনাম=Engineering education in Bangladesh – an indicator of economic development|শেষাংশ=Chowdhury|প্রথমাংশ=Harun|শেষাংশ২=Alam|প্রথমাংশ২=Firoz|তারিখ=2012-05-01|সাময়িকী=European Journal of Engineering Education|খণ্ড=37|সংখ্যা নং=2|পাতাসমূহ=217–228|ডিওআই=10.1080/03043797.2012.666515|issn=0304-3797}}</ref><ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|শিরোনাম=Celebrating 60 years of engineering education in Bangladesh (1947-2007)|তারিখ=৩১ ডিসেম্বর ২০০৭|সম্পাদক-শেষাংশ=Hafiz|সম্পাদক-প্রথমাংশ=Roxana|সম্পাদক-শেষাংশ২=Hoque|সম্পাদক-প্রথমাংশ২=Md. Mazharul|সাময়িকী=বুয়েট প্রকাশনা|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২৭ জুন ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220627055212/http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> इसका उद्देश्य उस समय के ब्रिटिश भारत के सरकारी कार्यों में भाग लेने वाले कर्मचारियों को [[तकनीकी शिक्षा]] प्रदान करना था। ढाका के तत्कालीन नवाब [[ख्वाजा अहसानुल्लाह]] इस विद्यालय में रुचि रखते थे और मुसलमानों की शिक्षा में प्रगति के लिए उन्होंने ढाका सर्वे स्कूल को इंजीनियरिंग स्कूल (वर्तमान में बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) में उन्नत करने की योजना को लागू करने के लिए 1 लाख 12 हजार रुपये देने का वादा किया था। उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो सका। उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नवाब सलीमुल्लाह ने 1902 में इस वादे को निभाया। उनके दान से बाद में यह एक पूर्ण इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में विकसित हुआ और उनकी मान्यता में 1908 में इस संस्थान का नाम बदलकर 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल' कर दिया गया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|শিরোনাম=HISTORICAL EDIFICES OF RAMNA: A PROSPECTIVE HERITAGE ROUTE IN URBAN DHAKA|শেষাংশ=Farzana|প্রথমাংশ=Mir|শেষাংশ২=Fahmida|প্রথমাংশ২=Nusrat|তারিখ=মে ২০১৯|সাময়িকী=Proceedings of the International Conference on Urban Form and Social Context: from Traditions to Newest Demands|প্রকাশক=Siberian Federal University|ভাষা=en|আইএসবিএন=978-5-7638-4127-5|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210822043859/http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल ने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]] और [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]] विभागों में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू किया। शुरुआत में स्कूल की गतिविधियाँ एक किराए के भवन में चलती थीं। 1906 में सरकारी पहल पर [[ढाका विश्वविद्यालय]] के शहीदुल्लाह हॉल के पास इसका अपना भवन बनाया गया। 1912 में इसे इसके वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। प्रारंभ में यह स्कूल [[ढाका कॉलेज]] से संबद्ध था। बाद में इसे लोक शिक्षा निदेशक के अधीन संचालित किया जाने लगा। मिस्टर एंडरसन इसके पहले प्रधानाचार्य (Principal) नियुक्त किए गए। इसके बाद 1932 में श्री बी. सी. गुप्ता और 1938 में श्री हकीम अली प्रधानाचार्य नियुक्त हुए।<ref name=":0">{{বই উদ্ধৃতি|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২|শেষাংশ=মামুন|প্রথমাংশ=মুনতাসীর|প্রকাশক=নেপালচন্দ্র ঘোষ|বছর= ডিসেম্বর ১৯৯৬|আইএসবিএন=|অবস্থান=সাহিত্যলোক, ৩২/৭ বিডন স্ট্রীট, কলিকাতা, ৭০০০০৬|পাতাসমূহ=সার্ভে স্কুল থেকে প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়, পৃষ্ঠা- ২১৮ থেকে ২১৪}}</ref><ref>Government of India, Dacca Survey School, <u>''Proceedings,''</u> Home Ed. - 144-146A, May-1904.</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২ - মুনতাসীর মামুন|ওয়েবসাইট=Scribd|ভাষা=en|সংগ্রহের-তারিখ=2018-11-10|আর্কাইভের-তারিখ=২০২০-০৮-১৯|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20200819204437/https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === द्वितीय विश्व युद्ध के बाद === [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद बंगाल के औद्योगिकीकरण के लिए तत्कालीन सरकार ने व्यापक योजनाएँ बनाईं। तब इस क्षेत्र में कुशल जनशक्ति की कमी देखी गई। तत्कालीन सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में 4 साल के डिग्री कोर्स के लिए ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने और स्कूल को तत्कालीन पलाशी बैरक में स्थानांतरित करके सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 4 साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 480 छात्रों के प्रवेश की सिफारिश की। मई 1947 में सरकार ने ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया और छात्रों के प्रवेश के लिए वर्तमान पश्चिम बंगाल के शिवपुर स्थित बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज और ढाका के अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई।<ref name=":0"/> === विभाजन के बाद === 1947 के विभाजन के परिणामस्वरूप अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल के कुछ ही शिक्षकों को छोड़कर बाकी सभी शिक्षक भारत चले गए और [[भारत]] से 5 शिक्षक इस स्कूल में शामिल हुए। अगस्त 1947 में इसे ढाका विश्वविद्यालय के तहत इंजीनियरिंग संकाय के रूप में 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज' में उन्नत किया गया।<ref name="ইতিহাস"/> श्री हकीम अली इसके प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। फरवरी 1948 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान सरकार ने इस कॉलेज को मंजूरी दी और इसने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]], [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]], [[केमिकल इंजीनियरिंग]], [[एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग]] और [[टेक्सटाइल इंजीनियरिंग]] विभागों में चार साल की बैचलर डिग्री और सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागों में तीन साल का डिप्लोमा देना शुरू किया। हालांकि, अंततः एग्रीकल्चर और टेक्सटाइल के स्थान पर मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग को शामिल किया गया। 1956 में कॉलेज में सेमेस्टर प्रणाली शुरू हुई और नया पाठ्यक्रम अनुमोदित किया गया। 1957 में डिग्री कोर्स में सीटों की संख्या 120 से बढ़ाकर 240 कर दी गई। 1958 में कॉलेज से डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिया गया। इस बीच, 1951 में टी. एच. मैथ्यूमैन और 1954 में डॉ. एम. ए. रशीद कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। इस दौरान 'एग्रीकल्चरल एंड मैकेनिकल कॉलेज ऑफ टेक्सास' (वर्तमान विश्वविद्यालय) और अहसानुल्लाह कॉलेज के बीच एक संयुक्त प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप वहां के प्रोफेसरों ने यहां आकर शिक्षण मानकों, प्रयोगशालाओं और पाठ्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए कुछ शिक्षकों को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए [[टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी|टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज]] भेजा गया। इस समय एशिया फाउंडेशन ने लाइब्रेरी को कुछ आवश्यक पुस्तकें दान कीं और 'रेंटल लाइब्रेरी' प्रणाली शुरू की गई। कॉलेज के समय छात्रों के लिए केवल दो छात्रावास थे: मेन हॉस्टल (वर्तमान डॉ. एम. ए. रशीद भवन) और साउथ हॉस्टल (वर्तमान नज़रुल इस्लाम हॉल)। === इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के रूप में === [[चित्र:Reg building.JPG|thumb|140px|left|डॉ. एम. ए. रशीद भवन]] पाकिस्तान काल के दौरान 1 जून 1962 को इसे एक पूर्ण इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में बदल दिया गया और इसका नाम 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (East Pakistan University of Engineering and Technology, या EPUET) रखा गया।<ref>{{Citation |last = পাবলো |first = ফুয়াদ |year = ২০২১ |title = পুয়েট, হতাশার মোড়, বিচ্ছেদ পয়েন্ট এবং অন্যান্য... |publisher = প্রথম আলো |publication-place = |page = |url = https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |access-date = February 26, 2025 |আর্কাইভের-তারিখ = মে ২, ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল = 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प्रसिद्ध गणितज्ञ एम. ए. जब्बार पहले रजिस्ट्रार और मुमताज़ुद्दीन अहमद पहले कॉम्पट्र्रोलर नियुक्त हुए। डॉ. एम. ए. रशीद के कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय एक मजबूत नींव पर स्थापित हुआ। एक विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होने के बाद, छात्रों के लिए तीन नए आवासीय हॉल बनाए गए। प्रोफेसर कबीरउद्दीन अहमद पहले छात्र कल्याण निदेशक नियुक्त हुए। 1962 में ही [[आर्किटेक्चर]] और योजना संकाय के तहत आर्किटेक्चर विभाग का गठन किया गया, इस विभाग के लिए टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज के कुछ शिक्षक शामिल हुए। इस प्रकार इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के दो संकायों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर विभागों के साथ इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की यात्रा शुरू हुई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 1964 में सीटों की संख्या 240 से बढ़ाकर 360 कर दी गई। उसी वर्ष वर्तमान 7 मंजिला सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण शुरू हुआ। 1969-70 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 420 कर दी गई। इस समय आर्किटेक्चर और योजना संकाय में 'फिजिकल प्लानिंग' नामक एक नया विभाग शुरू किया गया, जो बाद में 'नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन' (Urban and Regional Planning) विभाग में बदल गया।<ref> {{Citation | last = আজম | first = আলী | year = 2019 | title = ইপুয়েট থেকে আজকের বুয়েট | publisher = সময়ের আলো | publication-place = | page = | url =https://www.shomoyeralo.com/news/68167 | access-date = February 26, 2025 }} </ref> === स्वतंत्रता के बाद === 1971 में बांग्लादेश के [[बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम|स्वतंत्रता संग्राम]] के बाद इसका नाम बदलकर 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="ইতিহাস"/> बाद में 2003 में इसे संक्षिप्त रूप में 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' के रूप में ही मान्यता दी गई।{{cn|date=14 जुलाई 2023}} == कुलपतियों की सूची == {| class="wikitable" |+ बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कुलपतियों की सूची ! क्र. सं. !! नाम !! कार्यकाल |- | 1 || [[एम ए रशीद]] || 1 जून 1962 – 16 मार्च 1970 |- | 2 || [[मोहम्मद अबू नासेर]] || 16 मार्च 1970 – 25 अप्रैल 1975 |- | 3 || [[वाहिदुद्दीन अहमद]] || 25 अप्रैल 1975 – 24 अप्रैल 1983 |- | 4 || [[अब्दुल मतीन पाटोवारी]] || 24 अप्रैल 1983 – 25 अप्रैल 1987 |- | 5 || [[मुशर्रफ हुसैन खान (अकादमिक)|मुशर्रफ हुसैन खान]] || 25 अप्रैल 1987 – 24 अप्रैल 1991 |- | 6 || [[मुहम्मद शाहजहाँ]] || 24 अप्रैल 1991 – 27 नवंबर 1996 |- | 7 || [[इकबाल महमूद]] || 27 नवंबर 1996 – 14 अक्टूबर 1998 |- | 8 || [[नूरुद्दीन अहमद]] || 14 अक्टूबर 1998 – 30 अगस्त 2002 |- | 9 || [[मोहम्मद अली मुर्तुजा]] || 30 अगस्त 2002 – 29 अगस्त 2006 |- | 10 || [[ए एम एम सफीउल्लाह]] || 30 अगस्त 2006 – 29 अगस्त 2010 |- | 11 || [[एस एम नजरूल इस्लाम]] || 30 अगस्त 2010 – 13 सितंबर 2014 |- | 12 || [[खालिदा एकराम]] || 14 सितंबर 2014 – 24 मई 2016 |- | 13 || [[सैफुल इस्लाम (अकादमिक)|सैफुल इस्लाम]] || 22 जून 2016 – 23 जून 2020 |- | 14 || [[सत्य प्रसाद मजुमदार]]<ref name="ভিসি২০২০">{{समाचार उद्धरण | शीर्षक=बुएट के नए कुलपति सत्य प्रसाद मजुमदार | लेखक=<!--स्टाफ लेखक--> | यूआरएल=https://banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | समाचार पत्र=बांग्लान्यूज24 | तिथि=25 जून 2020 | पहुंच-तिथि=25 जून 2020 | संग्रह-तिथि=26 जून 2020 | संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20200626012106/https://www.banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | यूआरएल-स्थिति=सक्रिय }}</ref> || 25 जून 2020 – 18 अगस्त 2024 |- | 15 || [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] || 12 सितंबर 2024 – वर्तमान |} == कैंपस == [[File:BUET main gate 3.jpg|right|thumb|बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का प्रवेश द्वार]] बुएट कैंपस [[ढाका]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है। [[बुएट]], [[ढाका विश्वविद्यालय]] और [[ढाका मेडिकल कॉलेज]] एक ही नवाब द्वारा दान की गई भूमि पर विकसित हुए हैं, इसलिए ये एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं। कैंपस के पश्चिमी हिस्से में ईईई (EEE), सीएससी (CSE) और बीएमई (BME) विभागों के लिए 12-मंजिला ईसीई (ECE) भवन बनाया गया है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=শিকদার শুভ|প্রথমাংশ=সৌমেন|তারিখ=১০ মে ২০২০|শিরোনাম=স্মৃতিতে বুয়েটের দিনগুলো|ইউআরএল=https://www.risingbd.com/campus-news/349647|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-24|ওয়েবসাইট=Risingbd Online Bangla News Portal|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০३-২৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250324123125/https://www.risingbd.com/campus-news/349647}}</ref> हालांकि, कैंपस के मुख्य भाग में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, यूआरपी (URP) भवनों के साथ-साथ डॉ. रशीद एकेडमिक भवन स्थित है। छात्रों के आवासीय हॉल शैक्षणिक भवनों से पैदल दूरी पर स्थित हैं। वर्तमान में कैंपस का क्षेत्रफल 76.85 एकड़ (311,000 वर्ग मीटर) है। == प्रवेश प्रक्रिया == === स्नातक === बुएट की स्नातक प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति द्वारा केंद्रीय रूप से संचालित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को [[बांग्लादेश]] की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है। बुएट में स्नातक स्तर पर प्रवेश, ग्रेड और परीक्षा के परिणामों के आधार पर निर्धारित किया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया में पाठ्येतर गतिविधियों (extracurricular activities) या वित्तीय आवश्यकताओं पर विचार नहीं किया जाता है। स्नातक प्रवेश परीक्षा एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी लिखित परीक्षा है। [[उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र|उच्च माध्यमिक स्तर]] (एचएससी) की शिक्षा पूरी करने के बाद, यदि कोई छात्र न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करता है, तो वह स्नातक प्रवेश के लिए आवेदन जमा कर सकता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-01-27|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েট ভর্তি পরীক্ষার আবেদন যেভাবে করবেন|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231358/https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|ইউআরएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> पहले केवल लिखित परीक्षा के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। वर्तमान में छात्रों का चयन दो चरणों में किया जाता है। प्रारंभिक रूप से, आवेदन की शर्तों के अनुसार न्यूनतम योग्य उम्मीदवारों के लिए एक प्रारंभिक छंटनी परीक्षा (preliminary screening test) आयोजित की जाती है। इस परीक्षा से चयनित छात्रों को मुख्य लिखित परीक्षा के माध्यम से प्रवेश का अवसर प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-12-01|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে ভর্তিতে আবেদন শুরু, পরীক্ষার নম্বর–আসন কত, দেখুন গুরুত্বপূর্ণ তারিখ ও সময়|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231221/https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> === स्नातकोत्तर === मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रमों में हर साल लगभग 1,000 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को साक्षात्कार (interview) और/या लिखित परीक्षा में भाग लेना होता है। विभिन्न विभागों और संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्रियाँ इस प्रकार हैं: एमएससी (मास्टर ऑफ साइंस), एमएससी इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग), एम. इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग), एमयूआरपी (मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग), एम.आर्क (मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर), एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) और पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी)। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और जल संसाधन विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजी डिप.) भी प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-07-11|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে মাস্টার্স, এমফিল ও পিএইচডি প্রোগ্রামে ভর্তি, আবেদন ফি ৫০৫ টাকা|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218234014/https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == संकाय और विभाग == [[चित्र:BUET EME Building.jpg|thumb|बुएट का एम.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) भवन]] [[चित्र:Civil Engineering Building of BUET seen from EME Building.JPG|thumb|सिविल इंजीनियरिंग भवन]] [[File:Ece buliding.jpg|thumb|बुएट ईसीई (ECE) भवन]] [[File:Architecture building .jpg|thumb|बुएट आर्किटेक्चर भवन]] बुएट में वर्तमान में 6 संकायों के अंतर्गत 18 विभाग हैं। === केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय === ==== केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का केमिकल इंजीनियरिंग विभाग [[दक्षिण एशिया]] के सबसे पुराने केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में से एक है। 1952 में यहाँ से पहले पांच केमिकल इंजीनियरिंग छात्रों ने स्नातक किया था। यह विभाग अब केमिकल इंजीनियरिंग में बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Our History: Department of Chemical Engineering|ইউআরএল=https://che.buet.ac.bd/our-history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में हर साल साठ और स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पंद्रह छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस विभाग के पाठ्यक्रम आधुनिक केमिकल इंजीनियरिंग शिक्षा की अवधारणाओं पर आधारित हैं, और देश की औद्योगिक आवश्यकताओं पर पर्याप्त जोर दिया जाता है। ==== मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करने वाला एकमात्र विभाग है। इसकी स्थापना 1952 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के रूप में हुई थी। विभाग का लक्ष्य मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करना और घरेलू कच्चे माल के उपयोग पर अनुसंधान के अवसर पैदा करना था।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|ওয়েবসাইট=Department of Materials and Metallurgical Engineering}}</ref> बाद में, सिरेमिक, पॉलिमर और कंपोजिट जैसे गैर-धात्विक सामग्रियों के महत्व को देखते हुए इस विभाग ने अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया। 18 मार्च 1997 को बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने इसका नाम बदलकर "मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग" (MME) कर दिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About us: MME BUET|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250304084732/https://mme.buet.ac.bd/about-us/}}</ref> वर्तमान में यह विभाग चार साल के स्नातक कार्यक्रम में हर साल 40 छात्रों को प्रवेश देता है और स्नातकोत्तर (मास्टर्स और पीएचडी) पाठ्यक्रम संचालित करता है। ==== नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) के इस विभाग का नाम 2022 में "ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग" से बदलकर "नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग" कर दिया गया। यह पर्यावरण, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्नातकों को तैयार करने का कार्य करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About the Department |ইউআরএল=https://nce.buet.ac.bd/about/ |ওয়েবসাইট=Department of Nanomaterials and Ceramic Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET)}}</ref> ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग बांग्लादेश में पेट्रोलियम और खनिज संसाधन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला पहला विश्वविद्यालय-स्तरीय कार्यक्रम है। वर्तमान में यह केवल स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। विभाग की स्थापना 1992 में बुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के सहयोग से की गई थी, जिसे कैनेडियन इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी (CIDA) द्वारा वित्तपोषित किया गया था। बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने 5 नवंबर 1990 को इसे मंजूरी दी और 1995 में शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू हुईं।<ref name=pmre/> यह विभाग दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों और संस्थानों के सहयोग से निरंतर उन्नत हो रहा है। इसके सहयोगियों में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU), USAID, CIDA और टेक्सास का 'सेंटर फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स' (CEE) शामिल हैं।<ref name=pmre>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About Us |ইউআরএল=https://pmre.buet.ac.bd/about-us |ওয়েবসাইট=Department of Petroleum and Mineral Resources Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering & Technology |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-তারিখ=১ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250301214820/http://pmre.buet.ac.bd/about-us |ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর }}</ref> === मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय === ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग यहाँ के सबसे पुराने और बड़े विभागों में से एक है। इसकी शुरुआत 1947 में तत्कालीन अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज में चार साल के स्नातक कार्यक्रम के रूप में हुई थी। अब तक इस विभाग से 4166 छात्रों ने बीएससी इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), 201 छात्रों ने एमएससी/एम.इंजीनियरिंग और 16 छात्रों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History {{!}} Department of Mechanical Engineering, BUET|ইউআরএল=https://me.buet.ac.bd/history|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=me.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-০৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250208091311/http://me.buet.ac.bd/history|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में तरल और तापीय ऊर्जा प्रणाली (fluid and thermal power systems), तापीय ऊर्जा का अन्य ऊर्जा में रूपांतरण, मशीनों और यांत्रिक प्रणालियों के डिजाइन और नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। ==== इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में 1981 में स्नातकोत्तर स्तर पर इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग (IPE) विभाग शुरू किया गया था। उस समय केवल स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता था। औद्योगिक क्षेत्र में प्रबंधन के कुशल इंजीनियर तैयार करने के लिए 1997 से इस विभाग ने स्नातक स्तर पर 20 छात्रों को प्रवेश देना शुरू किया। बाद में, विभिन्न उद्योगों में आईपे (IPE) स्नातकों की बढ़ती मांग के कारण छात्रों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई—पहले 30, फिर 2017-18 सत्र में 50 और 2020-21 सत्र में यह संख्या 120 तक पहुँच गई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About |ইউআরএল=https://ipe.buet.ac.bd/page/about |ওয়েবসাইট=Industrial and Production Engineering. |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫}}</ref> ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ने 1971 में अपनी यात्रा शुरू की थी। इस विभाग का अध्ययन जहाजों या तैरती हुई संरचनाओं के निर्माण से लेकर समुद्र से विभिन्न संसाधनों के दोहन की संभावनाओं तक फैला हुआ है। इस विभाग के स्नातक स्तर पर जहाजों की आकृति, शक्ति, स्थिरता, समुद्र में चलने की क्षमता, प्रतिरोध और संचालन, डिजाइन और परिचालन लागत के साथ-साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल इंजीनियरिंग और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विषय पढ़ाए जाते हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About NAME - Department of Naval Architecture and Marine Engineering, BUET|ইউআরএল=https://name.buet.ac.bd/about|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=name.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250214113408/https://name.buet.ac.bd/about|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === सिविल इंजीनियरिंग संकाय === ==== सिविल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में सिविल इंजीनियरिंग संकाय 1980 में शुरू हुआ था। यह देश में [[सिविल इंजीनियरिंग]] शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन के अवसर उपलब्ध हैं। हर साल इस विभाग में स्नातक स्तर पर 195 नए छात्र और स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 200 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=en-US|শিরোনাম=HOME|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২১-০৭-২৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210723230356/https://ce.buet.ac.bd/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> यहाँ स्ट्रक्चरल एनालिसिस, भूकंप इंजीनियरिंग और पर्यावरण इंजीनियरिंग पर शोध कार्य किया जाता है। सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण 1968 में हुआ था, 1992 में इसका विस्तार किया गया और 1996 में भवन की सातवीं मंजिल पूरी हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/history/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২০|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250420005317/https://ce.buet.ac.bd/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अप्रैल 2021 में बुएट अधिकारियों ने सिविल इंजीनियरिंग भवन का नाम दिवंगत राष्ट्रीय प्रोफेसर [[जामिलुर रजा चौधरी|डॉ. जामिलुर रजा चौधरी]] के नाम पर रखने का निर्णय लिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2021-04-20|ভাষা=bn|শিরোনাম=ড. জামিলুর রেজা চৌধুরীর নামে বুয়েটের পুরকৌশল ভবনের নামকরণ|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/%E0%A6%A1-%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%81%E0%A6%B0-%E0%A6%B0%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A6%BE-%E0%A6%9A%E0%A7%8C%E0%A6%A7%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%8C%E0%A6%B6%E0%A6%B2-%E0%A6%AD%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A6%A3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো}}</ref> बांग्लादेश में सिविल इंजीनियर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जैसे पुल और जलविद्युत केंद्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस विभाग का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचार और उत्कृष्टता प्राप्त करना है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Mission & Vision|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250115001034/https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग (जल संसाधन इंजीनियरिंग) विभाग की स्थापना 1974 में हुई थी।<ref name=":4">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=WRE {{!}} About Us|ইউআরএল=https://wre.buet.ac.bd/about-us.html|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=wre.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250302152817/http://wre.buet.ac.bd/about-us.html|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> 1980 में सिविल इंजीनियरिंग संकाय के गठन के समय यह इसके दो मुख्य विभागों में से एक बन गया। यह विभाग सिविल इंजीनियरिंग भवन की छठी मंजिल पर स्थित है। विभाग स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 150 स्नातक और 70 स्नातकोत्तर छात्र हैं। इसका लक्ष्य देश और क्षेत्र के जल और संबंधित संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम इंजीनियर तैयार करना है, जिसमें पेशेवर अभ्यास, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया जाता है।<ref name=":4" /> === इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय === ==== इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग ==== 1948 में स्थापित यह विभाग बांग्लादेश का सबसे पुराना [[इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग]] शिक्षा विभाग है।<ref name=":2">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About EEE {{!}} Department of EEE, BUET|ইউআরএল=https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=eee.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218185150/https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর}}</ref> समय के साथ निरंतर बदलावों के माध्यम से यह आज भी देश की इंजीनियरिंग शिक्षा के शीर्ष पर बना हुआ है। इस विभाग के छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स, संचार प्रणालियों, सिग्नल प्रोसेसिंग और बिजली प्रणालियों के मुख्य विषयों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों के बारे में पढ़ाया जाता है। यहाँ 43 पीएचडी-धारक शिक्षक हैं, जिन्होंने दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।<ref name=":2" /> चौथी औद्योगिक क्रांति की सहायक प्रौद्योगिकियों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम) के नवाचार और अनुसंधान में इस विभाग के शिक्षक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ==== कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग ==== यह विभाग 1984 में स्थापित किया गया था। बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में [[कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग]] शिक्षा का अग्रणी संस्थान है। यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाती है। पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखने के लिए इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसके अलावा, इस विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग में विशेष स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका विस्तार बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय और एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से किया जा रहा है। वर्तमान में यहाँ लगभग 700 स्नातक और 400 स्नातकोत्तर छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इस विभाग के कई पूर्व छात्र मिशिगन (एन आर्बर), कोलंबिया, टोरंटो, मोनाश जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं और [[गूगल]], [[माइक्रोसॉफ्ट]], [[एप्पल]], [[एनवीडिया]] जैसी शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं। कई छात्रों ने देश-विदेश में उद्यमी (entrepreneur) के रूप में भी काम शुरू किया है। विभाग में आईओटी (IoT) प्रयोगशाला, वायरलेस नेटवर्क प्रयोगशाला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और [[रोबोटिक्स]] प्रयोगशाला, और सैमसंग मशीन लर्निंग प्रयोगशाला<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Samsung R&D funded CSE BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312075801/https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of CSE, BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312105704/https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग जनवरी 2016 में 30 स्नातक छात्रों के साथ शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Head's Message|ইউআরএল=https://bme.buet.ac.bd/head-message/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=Biomedical Engineering {{!}} BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250428223446/https://bme.buet.ac.bd/head-message/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अब हर साल 50 स्नातक और 40 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।<ref name=":3" /> इस विभाग का उद्देश्य डिजाइन, विकास और अनुसंधान के माध्यम से देश की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करना और छात्रों को इस नए क्षेत्र में कुशल बनाना है। === आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय === ==== आर्किटेक्चर विभाग ==== [[File:Dept. of Architecture.jpg|thumb|आर्किटेक्चर भवन के ऊपर से लिया गया प्लिंथ का दृश्य]] बुएट का आर्किटेक्चर विभाग दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वास्तुकला शिक्षा के अग्रणी संस्थानों में से एक है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी। तत्कालीन 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (EPUET) में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में इसका विकास हुआ। अमेरिका की टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएस-एड (USAID) के तकनीकी सहयोग से पांच साल का बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत केवल एक विदेशी शिक्षक और पांच छात्रों के साथ हुई थी। बाद में और विदेशी शिक्षक जुड़े, और स्थानीय स्नातकों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।<ref name=":5">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of Architecture|ইউআরএল=https://arch.buet.ac.bd/department|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=arch.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250118033043/https://arch.buet.ac.bd/department|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> वर्षों के साथ छात्रों के प्रवेश की संख्या 5 से बढ़कर 55 हो गई है। यहाँ से ऐसे वास्तुकार (Architects) तैयार हो रहे हैं, जिन्होंने देश, क्षेत्र और दुनिया में नाम कमाया है। रिचर्ड ई. व्रूमैन, डैनियल सी. डनहम, लुई आई. कान, पॉल रूडोल्फ, स्टेनली टाइगरमैन, मज़हरुल इस्लाम और फजलुर रहमान खान जैसे प्रसिद्ध शिक्षकों के शुरुआती मार्गदर्शन ने इस सफलता की नींव रखी है।<ref name=":5" /> यहाँ के शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने 'आगा खान वास्तुकला पुरस्कार', 'दक्षिण एशियाई वास्तुकार वर्ष पुरस्कार' और 'बांग्लादेश वास्तुकार संस्थान डिजाइन पुरस्कार' जैसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=২০২৪-০৪-১৮|শিরোনাম=যে কারণে টাইমের প্রভাবশালীর তালিকায় মেরিনা তাবাশু‍্যম|ইউআরএল=https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=সকাল সন্ধ্যা|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503005903/https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=লেখা|তারিখ=2022-12-04|ভাষা=bn|শিরোনাম=ভবিষ্যতের স্থপতির পুরস্কার বুয়েট, চুয়েট, ইউএপির শিক্ষার্থীর|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৪-০৭-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20240714102140/https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=বিজ্ঞপ্তি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটের তরুণ স্থপতিদের পুরস্কৃত করল বার্জার|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503180846/https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=SAMAKAL|ভাষা=en|শিরোনাম=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|ইউআরএল=https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250505085306/https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग 1962 में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था। यह बांग्लादेश में नियोजन (Planning) से संबंधित सबसे पुराना और सबसे बड़ा डिग्री प्रोग्राम है। प्रारंभ में, आर्किटेक्चर विभाग के शिक्षक ही इसके पाठ्यक्रम पढ़ाते थे। बाद में, 1968 में दो स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के साथ दो साल का 'मास्टर ऑफ फिजिकल प्लानिंग' (MPP) कार्यक्रम शुरू हुआ। हालांकि, बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के कारण, छात्रों के पहले बैच ने 1972 में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की।<ref name=":6">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en|শিরোনাম=BUET:URP Website|ইউআরএল=https://urp.buet.ac.bd/Web/History|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=urp.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৬-০১-২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20260121105540/https://urp.buet.ac.bd/Web/History|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने विभिन्न तरीकों से इस विभाग की सहायता की, जिसमें विदेशों से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी शामिल थी। 1975 में MPP कार्यक्रम का नाम बदलकर 'मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (MURP) कर दिया गया। इसके बाद, 1978 और 1979 के MURP बैच बुएट-शेफील्ड सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिससे छात्रों को बुएट और यूके की शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संयुक्त डिग्री प्राप्त हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|প্রকাশনার-তারিখ=2017|শিরোনাম=Research on “Activities of Urban Development Directorate (UDD) since 1965”|ইউআরএল=https://udd.portal.gov.bd/sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর|ওয়েবসাইট=Urban Development Directorate (UDD)|উক্তি=BUET-Sheffield Joint Master’s Degree Program-An Approach to Physical Upgrading of a Low Income Community, Dhaka, Bangladesh,1979.|সংগ্রহের-তারিখ=২৬ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ আগস্ট ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220804201644/https://udd.portal.gov.bd//sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf}}</ref> बाद में 1995 में 'बैचलर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (BURP) और पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए गए।<ref name=":6" /> संकाय, विभाग और उनके अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या की सूची: {| class="prettytable" style="width:45em;" |- style="background-color:#E1D297;font-weight:bold" ! संकाय का नाम ! विभाग ! संक्षिप्त नाम ! प्रवेशित छात्रों की संख्या |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="4" | केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय | केमिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''Ch.E'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''MME'' | 60 |- style="background-color:#DADADA" | नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NCE'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''PMRE'' | - |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | विज्ञान संकाय | रसायन विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Chem'' | - |- style="background-color:#eef" | गणित विभाग | style="text-align:center;" | ''Math'' | - |- style="background-color:#eef" | भौतिक विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Phys'' | - |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="2" | सिविल इंजीनियरिंग संकाय | सिविल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''WRE'' | 30 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय | मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''ME'' | 180 |- style="background-color:#eef" | नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NAME'' | 55 |- style="background-color:#eef" | इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''IPE'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="3" | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''EEE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CSE'' | 180 |- style="background-color:#DADADA" | बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''BME'' | 50 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय | आर्किटेक्चर विभाग | style="text-align:center;" | ''Arch.'' | 60 |- style="background-color:#eef" | मानविकी विभाग | style="text-align:center;" | ''Hum'' | - |- style="background-color:#eef" | अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''URP'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="1" | कुल संकाय: 6 | colspan="2" | कुल विभाग: 18 | कुल प्रवेशित छात्र: 1305 |- |} == अनुसंधान == === अनुसंधान केंद्र और प्रयोगशालाएं === प्रयोगात्मक और व्यावहारिक अनुसंधान के साथ-साथ गणितीय विश्लेषण के लिए बुएट में 100 से अधिक उन्नत अनुसंधान केंद्र और विभागीय प्रयोगशालाएं हैं। इन सबका मुख्य केंद्र ‘रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग’ (RISE) है<ref>{{cite web |title=RISE-HOME |url=https://rise.buet.ac.bd/#/ |access-date=2026-03-04 |website=rise.buet.ac.bd}}</ref>, जो मुख्य रूप से आंतरिक अनुसंधान अनुदान, नवाचार कार्यक्रमों, उद्योग-संबद्ध भागीदारी और प्रकाशन प्रोत्साहन जैसे मामलों का समन्वय करता है। अन्य उल्लेखनीय केंद्रों में सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज (CES), सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (CERM), और अत्याधुनिक ‘जाइस’ (ZEISS) लैब से सुसज्जित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर (BEC) शामिल हैं।<ref>{{cite web |language=en |title=Buet opens biomedical research lab |url=https://www.thedailystar.net/health/news/buet-opens-biomedical-research-lab-3277881 |access-date=2026-03-04 |website=www.thedailystar.net}}</ref> इसके अलावा तकनीकी सेवाओं और परामर्श के लिए ‘ब्यूरो ऑफ रिसर्च, टेस्टिंग एंड कंसल्टेशन’ (BRTC) कार्यरत है। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (IWFM), इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (IRAB) और इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IESD) जैसे विशेष संस्थान भी सक्रिय हैं।<ref>{{cite web |title=BUET’s ICS testing lab gets IDCOL support |url=https://www.newagebd.net/post/mis/280462/buets-ics-testing-lab-gets-idcol-support |url-status=active |website=New Age}}</ref> ये केंद्र और लैब मुख्य रूप से चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों (जैसे: एआई, रोबोटिक्स, आईओटी), सतत ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और बायोमेडिकल क्षेत्र के अनुसंधान में नेतृत्व कर रहे हैं।<ref>{{cite web |date=2022-04-07 |language=en |title=Education ministry to pursue Buet’s mega plan to boost research |url=https://www.tbsnews.net/bangladesh/education/education-ministry-pursue-buets-mega-plan-boost-research-398818 |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === सम्मेलन === बुएट नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उच्च-स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन करता है। कुछ प्रमुख सम्मेलन इस प्रकार हैं: * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ICME):''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का एक फ्लैगशिप आयोजन है, जिसका 15वां संस्करण 2025 में आयोजित किया गया। * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग (ICECE):''' इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (EEE) विभाग द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक फ्लैगशिप सम्मेलन।<ref>{{cite web |title=ICECE - 2024 |url=https://icece.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-05 |website=icece.buet.ac.bd}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन केमिकल इंजीनियरिंग (ICChE):''' केमिकल इंजीनियरिंग विभाग का मुख्य सम्मेलन। * '''आईईईई (IEEE) इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेलीकम्युनिकेशंस एंड फोटोनिक्स (ICTP):''' 2025 में इस सम्मेलन का छठा संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।<ref>{{cite web |title=The 6th IEEE International Conference on Telecommunications and Photonics 2025 (ICTP 2025) Held at BUET |url=https://iict.buet.ac.bd/?p=3546 |access-date=2026-03-05 |website=IICT, BUET}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (ICWFM):''' जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक कार्यक्रम। * '''इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन सिविल इंजीनियरिंग (ISCEB):''' इसके अलावा GCSTMR सम्मेलन, एल्गोरिदम पर WALCOM और नेटवर्किंग एवं सुरक्षा पर NSysS जैसे वैश्विक कार्यक्रमों का आयोजन भी बुएट द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। === जर्नल === अनुसंधान परिणामों को व्यापक रूप से प्रसारित करने के उद्देश्य से बुएट कई सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) जर्नल प्रकाशित करता है: * '''जर्नल ऑफ आर्किटेक्चर:''' इस जर्नल का पूर्व नाम ‘प्रतिबेश’ (Protibesh) था। यह वास्तुकला विभाग का शोध जर्नल है, जो मुख्य रूप से वास्तुकला, पर्यावरण और सतत डिजाइन से संबंधित विषयों पर काम करता है।<ref>{{cite web |title=Journal of Architecture, BUET |url=https://ja.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-04 |website=ja.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Architecture |url=https://web251.secure-secure.co.uk/bja.arch.buet.ac.bd/index.php/bja |access-date=2026-03-04 |website=web251.secure-secure.co.uk}}</ref> * '''जर्नल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट्स:''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की आधुनिक प्रगति और अनुसंधान पर केंद्रित है।<ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.scimagojr.com/journalsearch.php?q=20980&tip=sid |access-date=2026-03-04 |website=www.scimagojr.com}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.jmerd.org/ |access-date=2026-03-04 |website=www.jmerd.org}}</ref><ref>{{cite journal |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://jmerd.me.buet.ac.bd/ |journal=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments}}</ref> * '''केमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च बुलेटिन:''' केमिकल इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों के अनुसंधान के लिए समर्पित यह जर्नल 'बांग्लाजोल' (BanglaJOL) के सहयोग से प्रकाशित होता है।<ref>{{cite web |title=Chemical Engineering Research Bulletin |url=https://www.banglajol.info/index.php/CERB |access-date=2026-03-04 |website=www.banglajol.info}}</ref> === प्रमुख नवाचार === बुएट ने कई व्यावहारिक और स्थानीय संदर्भ में प्रभावी नवाचार विकसित किए हैं, जिनमें से कई को पेटेंट, सरकारी मंजूरी और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है: * [[ऑक्सीजेट]] '''सीपैप वेंटिलेटर (2021):''' कोविड-19 संकट के दौरान बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ने इस किफायती और बिजली रहित नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का आविष्कार किया।<ref>{{cite web |language=bn |title=দেশীয় ভেন্টিলেটর ডিভাইস অক্সিজেট সিপ্যাপ |url=https://www.ittefaq.com.bd/263760/%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%80%E0%A7%9F-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A6%B0-%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%87%E0%A6%B8-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Ittefaq}}</ref> यह औषधि प्रशासन निदेशालय (DGDA) द्वारा अनुमोदित पहला बांग्लादेशी चिकित्सा उपकरण है।<ref>{{cite web |last=Channel24 |language=en |title=ঢাকা মেডিকেলে 'অক্সিজেট সিপ্যাপ ভেন্টিলেটরের' ক্লিনিক্যাল ট্রায়াল শুরু |url=https://www.channel24bd.tv/health/article/67696/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%AE%E0%A7%87%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%87%E0%A6%B2%E0%A7%87-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%9F%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%B6%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%81 |access-date=2026-03-04 |website=Channel 24}}</ref><ref>{{cite web |last=At-tahreek |first=Monthly |language=en |title=বিদ্যুৎ ছাড়াই ৬০ লিটার অক্সিজেন দিবে অক্সিজেট - |url=https://at-tahreek.com/ |access-date=2026-03-04 |website=Monthly At-tahreek}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/health/news/687347 |title=সীমিত ব্যবহারে অনুমোদন পেল বুয়েটের ‘অক্সিজেট’}}</ref> इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रशंसा प्राप्त की है।<ref>{{cite web |date=2021-11-07 |language=bn |title=বুয়েটের অক্সিজেট যেভাবে আন্তর্জাতিক মঞ্চে |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%95-%E0%A6%AE%E0%A6%9E%E0%A7%8D%E0%A6%9A%E0%A7%87 |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> साथ ही इसने ‘IMAGINE IF!’ ग्लोबल हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रतियोगिता में विश्व विजेता का खिताब जीता।<ref>{{cite web |last=Hasan |first=Taufiq |date=2021-12-30 |language=en-US |title=OxyJet wins two int'l competitions |url=https://bme.buet.ac.bd/2021/12/30/oxyjet-wins-two-intl-competitions/ |access-date=2026-03-04 |website=Biomedical Engineering | BUET}}</ref> * '''डेंगूड्रॉप्स (DengueDrops) और रैडअसिस्ट (RadAssist):''' डेंगू रोगी प्रबंधन और मेडिकल इमेजिंग के लिए एआई-संचालित मोबाइल ऐप और टेलीरेडियोलॉजी प्लेटफॉर्म।<ref>{{cite web |title=DengueDrops |url=https://mhealth.buet.ac.bd/DengueDropsInfo/ |access-date=2026-03-04 |website=mhealth.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=RadAssist Revolutionizing Radiology through AI |url=https://radassist.net/ |access-date=2026-03-04 |website=radassist.net}}</ref> * '''एनबी-केयर (NB-Care) प्लेटफॉर्म:''' एक स्मार्ट वर्टिकल एप्लिकेशन सिस्टम, जिसने मलेशिया इनोवेशन एंड डिजाइन प्रदर्शनी में ‘ITEX गोल्ड मेडल’ जीता।<ref>{{cite web |language=en-US |title=32nd International Invention, Innovation & Technology Exhibition (ITEX 2021) |url=https://www.akademisains.gov.my/ar21/32nd-international-invention-innovation-technology-exhibition-itex-2021/ |access-date=2026-03-04}}</ref> * '''सतत तकनीक:''' इसमें एसीआई डिजाइन का पुरस्कार विजेता कंक्रीट मिक्स, बायोमास से बायोक्रूड रूपांतरण और एमआईटी के साथ संयुक्त रूप से विकसित आर्सेनिक प्रदूषण मॉडलिंग टूल शामिल हैं। === अन्य उत्कृष्ट उपलब्धियाँ === * '''अनुसंधान अनुदान:''' हाल के वर्षों में बुएट ने बड़ी मात्रा में अनुसंधान निधि प्राप्त की है, जिसमें सीएसई (CSE) विभाग की पांच परियोजनाओं के लिए 9.24 करोड़ रुपये शामिल हैं। * '''अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता:''' बुएट के छात्रों ने IEEE SPS VIP Cup, AIChE चैलेंज, नासा स्पेस एप्स चैलेंज और यूरोपियन रोवर चैलेंज जैसे वैश्विक मंचों पर पुरस्कार जीते हैं।<ref>{{cite web |title=IEEE SPS Signal Processing Cup at ICASSP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/218 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=VIP Cup 2023 at ICIP 2023 |url=https://signalprocessingsociety.org/community-involvement/vip-cup-2023-icip-2023 |access-date=2026-03-05 |website=signalprocessingsociety.org}}</ref><ref>{{cite web |title=CHAMPION IEEE SPS VIP CUP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/215 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=2025 Johns Hopkins Healthcare Design Competition |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/219 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |last=Chowdhury |first=Ridoy Hasan |language=en-US |title=World First among 440 groups from 200 universities |url=https://bangladeshbarta.tv/archives/1361 |access-date=2026-03-05}}</ref> * '''सम्मान:''' बुएट के शिक्षकों और छात्रों ने IEEE R10 आउटस्टैंडिंग वॉलंटियर अवार्ड, आर्किटेक्चर में ARCASIA गोल्ड प्राइज और UNC वाटर एंड हेल्थ कॉन्फ्रेंस रिकग्निशन जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{cite web |date=2026-01-22 |language=en-US |title=R10 STUDENT BRANCH OF THE MONTH – BUET |url=https://newsletter.ieeer10.org/home_jan2021/r10-student-branch-of-the-month-bangladesh-university-of-engineering-technology/ |access-date=2026-03-05}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-10-06 |language=en-US |title=Result Announcement for 2025 IEEE Region 10 Award Recipients |url=https://www.ieeer10.org/2025/10/06/result-announcement-for-2025-ieee-region-10-award-recipients/ |access-date=2026-03-05 |website=IEEE}}</ref> * '''वैश्विक रैंकिंग:''' बुएट 'नेचर इंडेक्स' में बांग्लादेश के शीर्ष संस्थान के रूप में स्थान बनाए हुए है।<ref>{{cite web |date=2022-04-22 |language=bn |title=How BUET advanced in world rankings |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BF%E0%A6%82%E0%A7%9F%E0%A7%87-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%8F%E0%A6%97%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-03-05 |website=Prothomalo}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-12-10 |language=en |title=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |url=https://www.nature.com/nature-index/institution-outputs/Bangladesh/Bangladesh%20University%20of%20Engineering%20and%20Technology%20%28BUET%29/513906be34d6b65e6a0005c4 |access-date=2026-03-05 |website=Nature Index}}</ref><ref>{{cite news |url=https://thedailycampus.com/public-university/203159 |title=Top ten universities in international research |work=The Daily Campus}}</ref> === संस्थान === [[File:BUET-Japan Institute of Disaster Prevention and Urban Safety.jpg|thumb|बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी]] बुएट में वर्तमान में 8 संस्थान स्थापित हैं: * सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) * जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) * एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी संस्थान (IAT) * दुर्घटना अनुसंधान संस्थान (ARI) * बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी (BUET-JIDPUS) * परमाणु ऊर्जा इंजीनियरिंग संस्थान (INPE) * ऊर्जा एवं सतत विकास संस्थान (IESD) * रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन संस्थान (IRAB)<ref name="institute">{{cite web |title=Institutes of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |archive-date=August 2, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |url-status=active |publisher=BUET Official Website}}</ref> == निदेशालय, केंद्र और अन्य == * सलाहकार, विस्तार और अनुसंधान सेवा निदेशालय (DAERS) * छात्र कल्याण निदेशालय (DSW) * योजना और विकास निदेशालय (P&D) * सतत शिक्षा निदेशालय (DCE) * ऊर्जा अध्ययन केंद्र (CES) * पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन केंद्र (CERM) * बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र (BEC) * अनुसंधान, परीक्षण और परामर्श ब्यूरो (BRTC) * अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण नेटवर्क केंद्र (ITN) * शहरी सुरक्षा के लिए बांग्लादेश नेटवर्क कार्यालय (BNUS) == संगठन == === छात्र संगठन === अध्यादेश 1962 के अनुसार, बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सभी प्रकार की संगठनात्मक राजनीति प्रतिबंधित है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-18 |language=bn |title=বিদ্যমান আইনেই ছাত্ররাজনীতি নিষিদ্ধ |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6% weবি%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8-%E0%A6%86%E0%A6%87%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%87-%E0%A6%9B%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%80%E0%A6%A4%E0%A6%BF-%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%B7%E0%A6%BF%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%A7 |access-date=2025-03-13 |website=Daily Prothom Alo}}</ref> [[अबरार फहद हत्याकांड|अबरार फहद]] नामक विश्वविद्यालय के एक छात्र की बुएट छात्र लीग द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सैफुल इस्लाम ने कैंपस में सभी प्रकार की छात्र राजनीति और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार, कैंपस में शिक्षक राजनीति भी प्रतिबंधित है।<ref name=":1">{{cite web |url=https://www.bbc.com/bengali/news-50017329 |title=সংরক্ষণাগারভুক্ত অনুলিপি |access-date=January 19, 2020 |website=BBC Bengali}}</ref> === विज्ञान संगठन === * '''सत्येन बोस विज्ञान क्लब:''' 1994 में प्रसिद्ध [[सत्येंद्र नाथ बोस|भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस]] के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में 'सत्येन बोस विज्ञान क्लब' की यात्रा शुरू हुई।<ref>{{cite web |title=বুয়েটের সত্যেন বোস বিজ্ঞান ক্লাব |url=https://www.bonikbarta.com/home/news_description/356882/ |access-date=2025-04-03 |website=Bonik Barta}}</ref> इस क्लब का उद्देश्य बुएट के छात्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि जगाना और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। यह क्लब नियमित रूप से कार्यशालाएं, सेमिनार और व्याख्यान आयोजित करता है।<ref>{{cite web |language=bn |title=লাভেলো জাতীয় মহাকাশ উৎসব |url=https://www.banglanews24.com/print/715709 |access-date=2025-04-03 |website=banglanews24.com}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/national/news/871187 |title=জাতীয় পরিবেশ উৎসবের ঢাকা আঞ্চলিক বাছাই পর্ব অনুষ্ঠিত |work=Jago News |access-date=2025-04-03 |language=en-US}}</ref> * '''बुएट ऑटोमोबाइल क्लब:''' 4 अप्रैल 2017 को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मागलूब अल नूर की पहल पर इस क्लब की औपचारिक शुरुआत हुई।<ref>{{cite web |date=2017-04-05 |language=en |title=Buet launches automobile club |url=https://www.thedailystar.net/shift/buet-launches-automobile-club-1386637 |access-date=2025-12-19 |website=The Daily Star}}</ref><ref>{{cite web |last=Rahman |first=Saurin |date=2017-04-03 |language=en-US |title=BUET Automobile club inauguration |url=https://www.autorebellion.com/2017/04/buet-automobile-club-inauguration/ |access-date=2025-12-19 |website=Auto Rebellion}}</ref> क्लब का मुख्य उद्देश्य सैद्धांतिक इंजीनियरिंग ज्ञान और वास्तविक ऑटोमोबाइल उद्योग के बीच सेतु बनाना है। इस क्लब के तहत 'टीम ऑटोमेस्ट्रो' (Team AutoMaestro) नामक एक विशेषज्ञ टीम है, जिसने 2020 में भारत में आयोजित 'इंटरनेशनल गो-कार्ट चैंपियनशिप' में 9वां स्थान प्राप्त किया और अपने डिजाइन के लिए 'सर्वश्रेष्ठ नवाचार' का पुरस्कार जीता।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2020-11-29 |language=bn |title=উদ্ভাবনে সেরা বুয়েটের অটো মায়েস্ত্রো |url=https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%9F%E0%A7%8B-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B |access-date=2025-12-19 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट रोबोटिक्स सोसाइटी:''' यह बुएट के छात्रों द्वारा संचालित रोबोटिक्स क्लब है, जो छात्रों के बीच रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अभ्यास को बढ़ावा देता है।<ref>{{cite news |url=https://www.newagebd.net/post/campus-bites/290476/robo-carnival-held-at-buet |title=Robo Carnival held at BUET |work=New Age}}</ref><ref>{{cite web |date=2024-02-07 |language=en |title=BUET Robotics Society hosts Robo Carnival 2024 |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/buet-robotics-society-hosts-robo-carnival-2024-788678 |access-date=2026-02-19 |website=The Business Standard}}</ref> * '''टीम इंटरप्लेनेटर (Team Interplanetar):''' यह एक बहुविषयक [[रोबोटिक्स]] टीम है, जो 2011 में स्थापित हुई थी। यह टीम अंतर्राष्ट्रीय 'मार्स रोवर' प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही है।<ref>{{cite web |language=en-GB |title=Team Interplanetar - BUET Mars Rover Team (2025) |url=https://roverchallenge.eu/team/team-interplanetar-buet-mars-rover-team-2025/ |access-date=2026-02-19 |website=European Rover Challenge}}</ref> इन्होंने 'यूरोपियन रोवर चैलेंज' (ERC) में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।<ref>{{cite web |language=en |title=Team from BUET reaches finals of European Rover Challenge 2022 |url=https://www.thedailystar.net/tech-startup/news/team-buet-reaches-finals-european-rover-challenge-2022-3122366 |access-date=2026-02-19 |website=The Daily Star}}</ref> इनके 'निर्भीक' ड्रोन प्रोजेक्ट को मंगल ग्रह के लिए अभिनव गैस संपीड़न प्रणाली के लिए सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2021-05-30 |language=bn |title=মঙ্গলের জন্য ড্রোন উদ্ভাবনে সেরা বুয়েট |url=https://www.prothomalo.com/education/higher-education/%E0%A6%AE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%97%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF-%E0%A6%A1%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B%E0%A6%A8-%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-02-19 |website=Prothomalo}}</ref> * बुएट एनर्जी क्लब * बुएट न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्लब * बुएट साइबर सिक्योरिटी क्लब * बुएट इनोवेशन एंड डिजाइनिंग क्लब === कला और सांस्कृतिक संगठन === * '''आलोकवर्तिका:''' अक्टूबर 2016 में स्थापित यह एक मुक्त पुस्तकालय (Open Library) है। यहाँ से कोई भी बिना किसी पंजीकरण के पुस्तक ले सकता है, बशर्ते उसे पुस्तकालय में एक पुस्तक दान करनी हो।<ref>{{cite news |title=আলোকবর্তিকা: বুয়েটের একটি মুক্ত গ্রন্থাগার |url=http://bangla.fintechbd.com/2018/02/25/আলোকবর্তিকা-বুয়েটের-একট/ |date=February 25, 2018 |access-date=February 22, 2019 |work=Fintech}}</ref> * '''बुएट ड्रामा सोसाइटी:''' यह बुएट के प्रमुख सांस्कृतिक संगठनों में से एक है, जो नाट्य कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का काम करता है।<ref name="clubs" /> इन्होंने बंकिमचंद्र के 'कमलाकांतेर जबानबंदी' और अगाथा क्रिस्टी के 'द माउस ट्रैप' जैसे प्रसिद्ध नाटकों का मंचन किया है।<ref>{{cite web |title=Star Campus |url=https://archive.thedailystar.net/campus/2006/12/01/feature_BUET.htm |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Star Archive}}</ref><ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েট ড্রামা সোসাইটি মঞ্চে আনছে ‘দ্য মাউস ট্র্যাপ’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/iermh1wvrj |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट फिल्म सोसाइटी:''' यह फिल्म प्रेमी छात्रों का एक संगठन है जो स्वस्थ सिनेमाई चेतना विकसित करने और फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটে চলচ্চিত্র উৎসবে ‘আদিম’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/gmp25ivjdy |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''मूर्छना (Murchona):''' यह संगीत और वाद्ययंत्रों के विकास के लिए एक मंच है, जो वार्षिक सांस्कृतिक उत्सवों और संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-16 |language=bn |title=বাংলাদেশ প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়ের শাশ্বত সৌম্যর মূর্ছনা |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/মূর্ছনা |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट साहित्य संसद:''' यह रचनात्मक लेखन और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए काम करने वाला केंद्रीय संगठन है। * '''चारकोल - बुएट आर्टिस्ट्री सोसाइटी:''' यह स्केचिंग, सुलेख (Calligraphy) और शिल्प कला के अभ्यास को बढ़ावा देने वाला संगठन है। * '''कंठ्य (Kanthya):''' यह शुद्ध उच्चारण, सस्वर पाठ (Recitation) और प्रस्तुति कला (Presentation) के लिए समर्पित है। * '''ओरिगामी क्लब:''' यह कागज मोड़ने की कला के माध्यम से रचनात्मकता विकसित करने पर केंद्रित है। * '''बुएट फोटोग्राफिक सोसाइटी (BPS):''' यह फोटोग्राफी प्रेमियों का मंच है जो राष्ट्रीय फोटोग्राफी उत्सवों और कार्यशालाओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |date=2023-08-29 |language=en |title='Remembrance: 25 Years of BUET Photographic Society' |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/remembrance-25-years-buet-photographic-society-exhibition-showcases-extraordinary |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === अन्य संगठन === * '''पर्यावरण संगठन:''' एनवायरनमेंट वॉच (Environment Watch)। * '''खेल संगठन:''' बुएट चेस क्लब (Chess Club)। * '''मानवीय संगठन:''' [[बाधन]] (Badhan-BUET Zone), बुएट रोवर स्काउट। * '''करियर संगठन:''' बुएट करियर क्लब, बुएट डिबेटिंग क्लब, बुएट एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट क्लब। * '''बुएट मीडिया एंड कम्युनिकेशन क्लब:''' यह पहले 'बुएट पत्रकार संघ' के नाम से जाना जाता था, जिसे 2024 में भंग कर नए रूप में स्थापित किया गया। यह छात्रों के मीडिया और संचार कौशल को विकसित करने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটের ‘বিতর্কিত’ সাংবাদিক সমিতির কমিটি বিলুপ্ত |url=https://bangla.bdnews24.com/campus/y9cnpjmu62 |access-date=2026-03-07 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट ब्रेनिएक्स (BUET Brainiacs):''' यह क्विज और माइंड गेम्स के लिए लोकप्रिय क्लब है।<ref>{{cite web |last=নিউজ |first=সময় |language=bn |title=বুয়েট ব্রেইনিয়াক্সের ‘ন্যাশনাল কুইজ কম্পিটিশন’ |url=https://www.somoynews.tv/news/2023-08-24/XuCG6Dtu |access-date=2026-03-07 |website=Somoy News}}</ref> * '''बुएट सेल्फ डिफेंस क्लब:''' यह छात्रों को आत्मरक्षा (Karate & Judo) का प्रशिक्षण देता है। * '''हाउस ऑफ वॉलंटियर्स - बुएट:''' 2007 में एमआईटी (MIT) के बांग्लादेशी स्नातकों द्वारा शुरू किया गया, जिसकी पहली बांग्लादेशी शाखा 2009 में बुएट में शुरू हुई।<ref>{{cite web |date=2017-03-20 |language=en-US |title=Our Journey – House of Volunteers |url=https://houseofvolunteers.org/our-journey/ |access-date=2026-03-07}}</ref> <ref name="clubs">{{cite web |title=Clubs of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |publisher=BUET Official Website}}</ref> ==संदर्भ== <references /> [[Category:बांग्लादेश के विश्वविद्यालय]] [[Category:विश्वविद्यालय]] tf2bz20omojao0z2vb3v7jqcnrig5xu 6536616 6536600 2026-04-05T15:35:06Z अनुनाद सिंह 1634 6536616 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | image = BUET LOGO.svg | caption = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का लोगो | image_upright = | other_name = बुएट | former_name = ढाका सर्वे स्कूल (1876-1908) <br>अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (1908-1947) <br>अहसानुल्लाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, [[ढाका विश्वविद्यालय]] (1947-1962)<br> पूर्व पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1962-1971) <br> बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1971-2001) | image_size = 160px | name = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी | established = 1876 (विश्वविद्यालय के रूप में: 1962) | type = [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय]] | chancellor = [[बांग्लादेश के राष्ट्रपति]] | vice_chancellor = [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|शीर्षक=बुएट के नए कुलपति|पहुंच-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20240912095843/https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> | doctoral = | city = [[ढाका]] | province = [[ढाका विभाग|ढाका]] | country = [[बांग्लादेश]] | students = लगभग 10,000 | undergrad = लगभग 5,000 | postgrad = | faculty = लगभग 600 | campus = शहर के केंद्र में, 83.9 एकड़ (33.95 हेक्टेयर) | nickname = बुएट (BUET) | affiliation = [[बांग्लादेश विश्वविद्यालय अनुदान आयोग]] | website = {{URL|https://www.buet.ac.bd/}} | logo = | footnotes = }} <!--{{Ranking Infobox | QS_W = 761-770 | QS_W_year = 2026 | QS_W_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय|संग्रह-तिथि=7 नवंबर 2015|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20151107033851/http://www.topuniversities.com/universities/bangladesh-university-engineering-technology}}</ref> | THE_W = 1001-1200 | THE_W_year = 2024 | THE_W_ref = <ref name="THE">{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|शीर्षक=Bangladesh University of Engineering and Technology - World University Rankings - THE|वेबसाइट=www.timeshighereducation.com|पहुंच-तिथि=28 नवंबर 2023|संग्रह-तिथि=25 नवंबर 2023|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20231125235248/https://www.timeshighereducation.com/world-university-rankings/bangladesh-university-engineering-and-technology|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref>| THE_Asia = 401-500 | THE_Asia_year = 2024 | THE_Asia_ref = <ref name="THE" />| QS_Asia = 158 | QS_Asia_year = 2026 | QS_Asia_ref = <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://www.topuniversities.com/asia-university-rankings/|शीर्षक=QS World University Rankings by Region 2026: Asia|वेबसाइट=www.topuniversities.com|पहुंच-तिथि=1 अक्टूबर 2025|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> }}--> '''बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी''' (संक्षेप में: '''बुएट''') [[बांग्लादेश]] का एक प्रमुख [[इंजीनियरिंग]]-संबंधी [[उच्च शिक्षा|उच्च शिक्षा संस्थान]] है। यह [[ढाका]] शहर के [[लालबाग थाना]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है।<ref>{{वेब उद्धरण | यूआरएल = http://www.buet.ac.bd/about.html | शीर्षक = बुएट का इतिहास | पहुंच-तिथि = 29 अप्रैल 2007 | संग्रह-यूआरएल = https://web.archive.org/web/20070402100421/http://www.buet.ac.bd/about.html | संग्रह-तिथि = 2 अप्रैल 2007 | यूआरएल-स्थिति=निष्क्रिय }}</ref> तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए 1876 में 'ढाका सर्वे स्कूल' के नाम से इसकी स्थापना की गयी थी। बाद में इसका नाम 'अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग' कर दिया गया और यह [[ढाका विश्वविद्यालय]] से सम्बद्ध था। 1962 में इसे तत्कालीन [[पूर्वी पाकिस्तान]] का चौथा विश्वविद्यालय बना दिया गया।बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद इसका नाम 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' कर दिया गया।<ref name="इतिहास">{{समाचार उद्धरण|यूआरएल=https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|शीर्षक=बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट)|तिथि=10 अगस्त 2012|पहुंच-तिथि=2 फरवरी 2021|भाषा=bn|वेबसाइट=कालेर कंठो|संग्रह-तिथि=25 जून 2022|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20220625110452/https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == इतिहास == === प्रारंभिक चरण === [[File:Old building 1930.jpg|thumb|1930 में स्थापित बुएट का प्रशासनिक भवन]] बुएट की स्थापना 19वीं शताब्दी के अंत में सर्वेक्षकों के लिए एक सर्वेक्षण स्कूल के रूप में हुई थी। 1876 में तत्कालीन [[ब्रिटिश राज]] ने 'ढाका सर्वे स्कूल' नामक एक संस्थान शुरू किया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://doi.org/10.1080/03043797.2012.666515|শিরোনাম=Engineering education in Bangladesh – an indicator of economic development|শেষাংশ=Chowdhury|প্রথমাংশ=Harun|শেষাংশ২=Alam|প্রথমাংশ২=Firoz|তারিখ=2012-05-01|সাময়িকী=European Journal of Engineering Education|খণ্ড=37|সংখ্যা নং=2|পাতাসমূহ=217–228|ডিওআই=10.1080/03043797.2012.666515|issn=0304-3797}}</ref><ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|শিরোনাম=Celebrating 60 years of engineering education in Bangladesh (1947-2007)|তারিখ=৩১ ডিসেম্বর ২০০৭|সম্পাদক-শেষাংশ=Hafiz|সম্পাদক-প্রথমাংশ=Roxana|সম্পাদক-শেষাংশ২=Hoque|সম্পাদক-প্রথমাংশ২=Md. Mazharul|সাময়িকী=বুয়েট প্রকাশনা|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২৭ জুন ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220627055212/http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> इसका उद्देश्य उस समय के ब्रिटिश भारत के सरकारी कार्यों में भाग लेने वाले कर्मचारियों को [[तकनीकी शिक्षा]] प्रदान करना था। ढाका के तत्कालीन नवाब [[ख्वाजा अहसानुल्लाह]] इस विद्यालय में रुचि रखते थे और मुसलमानों की शिक्षा में प्रगति के लिए उन्होंने ढाका सर्वे स्कूल को इंजीनियरिंग स्कूल (वर्तमान में बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) में उन्नत करने की योजना को लागू करने के लिए 1 लाख 12 हजार रुपये देने का वादा किया था। उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो सका। उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नवाब सलीमुल्लाह ने 1902 में इस वादे को निभाया। उनके दान से बाद में यह एक पूर्ण इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में विकसित हुआ और उनकी मान्यता में 1908 में इस संस्थान का नाम बदलकर 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल' कर दिया गया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|শিরোনাম=HISTORICAL EDIFICES OF RAMNA: A PROSPECTIVE HERITAGE ROUTE IN URBAN DHAKA|শেষাংশ=Farzana|প্রথমাংশ=Mir|শেষাংশ২=Fahmida|প্রথমাংশ২=Nusrat|তারিখ=মে ২০১৯|সাময়িকী=Proceedings of the International Conference on Urban Form and Social Context: from Traditions to Newest Demands|প্রকাশক=Siberian Federal University|ভাষা=en|আইএসবিএন=978-5-7638-4127-5|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210822043859/http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल ने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]] और [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]] विभागों में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू किया। शुरुआत में स्कूल की गतिविधियाँ एक किराए के भवन में चलती थीं। 1906 में सरकारी पहल पर [[ढाका विश्वविद्यालय]] के शहीदुल्लाह हॉल के पास इसका अपना भवन बनाया गया। 1912 में इसे इसके वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। प्रारंभ में यह स्कूल [[ढाका कॉलेज]] से संबद्ध था। बाद में इसे लोक शिक्षा निदेशक के अधीन संचालित किया जाने लगा। मिस्टर एंडरसन इसके पहले प्रधानाचार्य (Principal) नियुक्त किए गए। इसके बाद 1932 में श्री बी. सी. गुप्ता और 1938 में श्री हकीम अली प्रधानाचार्य नियुक्त हुए।<ref name=":0">{{বই উদ্ধৃতি|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২|শেষাংশ=মামুন|প্রথমাংশ=মুনতাসীর|প্রকাশক=নেপালচন্দ্র ঘোষ|বছর= ডিসেম্বর ১৯৯৬|আইএসবিএন=|অবস্থান=সাহিত্যলোক, ৩২/৭ বিডন স্ট্রীট, কলিকাতা, ৭০০০০৬|পাতাসমূহ=সার্ভে স্কুল থেকে প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়, পৃষ্ঠা- ২১৮ থেকে ২১৪}}</ref><ref>Government of India, Dacca Survey School, <u>''Proceedings,''</u> Home Ed. - 144-146A, May-1904.</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২ - মুনতাসীর মামুন|ওয়েবসাইট=Scribd|ভাষা=en|সংগ্রহের-তারিখ=2018-11-10|আর্কাইভের-তারিখ=২০২০-০৮-১৯|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20200819204437/https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === द्वितीय विश्व युद्ध के बाद === [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद बंगाल के औद्योगिकीकरण के लिए तत्कालीन सरकार ने व्यापक योजनाएँ बनाईं। तब इस क्षेत्र में कुशल जनशक्ति की कमी देखी गई। तत्कालीन सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में 4 साल के डिग्री कोर्स के लिए ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने और स्कूल को तत्कालीन पलाशी बैरक में स्थानांतरित करके सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 4 साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 480 छात्रों के प्रवेश की सिफारिश की। मई 1947 में सरकार ने ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया और छात्रों के प्रवेश के लिए वर्तमान पश्चिम बंगाल के शिवपुर स्थित बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज और ढाका के अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई।<ref name=":0"/> === विभाजन के बाद === 1947 के विभाजन के परिणामस्वरूप अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल के कुछ ही शिक्षकों को छोड़कर बाकी सभी शिक्षक भारत चले गए और [[भारत]] से 5 शिक्षक इस स्कूल में शामिल हुए। अगस्त 1947 में इसे ढाका विश्वविद्यालय के तहत इंजीनियरिंग संकाय के रूप में 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज' में उन्नत किया गया।<ref name="ইতিহাস"/> श्री हकीम अली इसके प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। फरवरी 1948 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान सरकार ने इस कॉलेज को मंजूरी दी और इसने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]], [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]], [[केमिकल इंजीनियरिंग]], [[एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग]] और [[टेक्सटाइल इंजीनियरिंग]] विभागों में चार साल की बैचलर डिग्री और सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागों में तीन साल का डिप्लोमा देना शुरू किया। हालांकि, अंततः एग्रीकल्चर और टेक्सटाइल के स्थान पर मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग को शामिल किया गया। 1956 में कॉलेज में सेमेस्टर प्रणाली शुरू हुई और नया पाठ्यक्रम अनुमोदित किया गया। 1957 में डिग्री कोर्स में सीटों की संख्या 120 से बढ़ाकर 240 कर दी गई। 1958 में कॉलेज से डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिया गया। इस बीच, 1951 में टी. एच. मैथ्यूमैन और 1954 में डॉ. एम. ए. रशीद कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। इस दौरान 'एग्रीकल्चरल एंड मैकेनिकल कॉलेज ऑफ टेक्सास' (वर्तमान विश्वविद्यालय) और अहसानुल्लाह कॉलेज के बीच एक संयुक्त प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप वहां के प्रोफेसरों ने यहां आकर शिक्षण मानकों, प्रयोगशालाओं और पाठ्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए कुछ शिक्षकों को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए [[टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी|टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज]] भेजा गया। इस समय एशिया फाउंडेशन ने लाइब्रेरी को कुछ आवश्यक पुस्तकें दान कीं और 'रेंटल लाइब्रेरी' प्रणाली शुरू की गई। कॉलेज के समय छात्रों के लिए केवल दो छात्रावास थे: मेन हॉस्टल (वर्तमान डॉ. एम. ए. रशीद भवन) और साउथ हॉस्टल (वर्तमान नज़रुल इस्लाम हॉल)। === इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के रूप में === [[चित्र:Reg building.JPG|thumb|140px|left|डॉ. एम. ए. रशीद भवन]] पाकिस्तान काल के दौरान 1 जून 1962 को इसे एक पूर्ण इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में बदल दिया गया और इसका नाम 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (East Pakistan University of Engineering and Technology, या EPUET) रखा गया।<ref>{{Citation |last = পাবলো |first = ফুয়াদ |year = ২০২১ |title = পুয়েট, হতাশার মোড়, বিচ্ছেদ পয়েন্ট এবং অন্যান্য... |publisher = প্রথম আলো |publication-place = |page = |url = https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |access-date = February 26, 2025 |আর্কাইভের-তারিখ = মে ২, ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল = 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प्रसिद्ध गणितज्ञ एम. ए. जब्बार पहले रजिस्ट्रार और मुमताज़ुद्दीन अहमद पहले कॉम्पट्र्रोलर नियुक्त हुए। डॉ. एम. ए. रशीद के कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय एक मजबूत नींव पर स्थापित हुआ। एक विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होने के बाद, छात्रों के लिए तीन नए आवासीय हॉल बनाए गए। प्रोफेसर कबीरउद्दीन अहमद पहले छात्र कल्याण निदेशक नियुक्त हुए। 1962 में ही [[आर्किटेक्चर]] और योजना संकाय के तहत आर्किटेक्चर विभाग का गठन किया गया, इस विभाग के लिए टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज के कुछ शिक्षक शामिल हुए। इस प्रकार इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के दो संकायों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर विभागों के साथ इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की यात्रा शुरू हुई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 1964 में सीटों की संख्या 240 से बढ़ाकर 360 कर दी गई। उसी वर्ष वर्तमान 7 मंजिला सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण शुरू हुआ। 1969-70 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 420 कर दी गई। इस समय आर्किटेक्चर और योजना संकाय में 'फिजिकल प्लानिंग' नामक एक नया विभाग शुरू किया गया, जो बाद में 'नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन' (Urban and Regional Planning) विभाग में बदल गया।<ref> {{Citation | last = আজম | first = আলী | year = 2019 | title = ইপুয়েট থেকে আজকের বুয়েট | publisher = সময়ের আলো | publication-place = | page = | url =https://www.shomoyeralo.com/news/68167 | access-date = February 26, 2025 }} </ref> === स्वतंत्रता के बाद === 1971 में बांग्लादेश के [[बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम|स्वतंत्रता संग्राम]] के बाद इसका नाम बदलकर 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="ইতিহাস"/> बाद में 2003 में इसे संक्षिप्त रूप में 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' के रूप में ही मान्यता दी गई।{{cn|date=14 जुलाई 2023}} == कुलपतियों की सूची == {| class="wikitable" |+ बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कुलपतियों की सूची ! क्र. सं. !! नाम !! कार्यकाल |- | 1 || [[एम ए रशीद]] || 1 जून 1962 – 16 मार्च 1970 |- | 2 || [[मोहम्मद अबू नासेर]] || 16 मार्च 1970 – 25 अप्रैल 1975 |- | 3 || [[वाहिदुद्दीन अहमद]] || 25 अप्रैल 1975 – 24 अप्रैल 1983 |- | 4 || [[अब्दुल मतीन पाटोवारी]] || 24 अप्रैल 1983 – 25 अप्रैल 1987 |- | 5 || [[मुशर्रफ हुसैन खान (अकादमिक)|मुशर्रफ हुसैन खान]] || 25 अप्रैल 1987 – 24 अप्रैल 1991 |- | 6 || [[मुहम्मद शाहजहाँ]] || 24 अप्रैल 1991 – 27 नवंबर 1996 |- | 7 || [[इकबाल महमूद]] || 27 नवंबर 1996 – 14 अक्टूबर 1998 |- | 8 || [[नूरुद्दीन अहमद]] || 14 अक्टूबर 1998 – 30 अगस्त 2002 |- | 9 || [[मोहम्मद अली मुर्तुजा]] || 30 अगस्त 2002 – 29 अगस्त 2006 |- | 10 || [[ए एम एम सफीउल्लाह]] || 30 अगस्त 2006 – 29 अगस्त 2010 |- | 11 || [[एस एम नजरूल इस्लाम]] || 30 अगस्त 2010 – 13 सितंबर 2014 |- | 12 || [[खालिदा एकराम]] || 14 सितंबर 2014 – 24 मई 2016 |- | 13 || [[सैफुल इस्लाम (अकादमिक)|सैफुल इस्लाम]] || 22 जून 2016 – 23 जून 2020 |- | 14 || [[सत्य प्रसाद मजुमदार]]<ref name="ভিসি২০২০">{{समाचार उद्धरण | शीर्षक=बुएट के नए कुलपति सत्य प्रसाद मजुमदार | लेखक=<!--स्टाफ लेखक--> | यूआरएल=https://banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | समाचार पत्र=बांग्लान्यूज24 | तिथि=25 जून 2020 | पहुंच-तिथि=25 जून 2020 | संग्रह-तिथि=26 जून 2020 | संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20200626012106/https://www.banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | यूआरएल-स्थिति=सक्रिय }}</ref> || 25 जून 2020 – 18 अगस्त 2024 |- | 15 || [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] || 12 सितंबर 2024 – वर्तमान |} == कैंपस == [[File:BUET main gate 3.jpg|right|thumb|बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का प्रवेश द्वार]] बुएट कैंपस [[ढाका]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है। [[बुएट]], [[ढाका विश्वविद्यालय]] और [[ढाका मेडिकल कॉलेज]] एक ही नवाब द्वारा दान की गई भूमि पर विकसित हुए हैं, इसलिए ये एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं। कैंपस के पश्चिमी हिस्से में ईईई (EEE), सीएससी (CSE) और बीएमई (BME) विभागों के लिए 12-मंजिला ईसीई (ECE) भवन बनाया गया है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=শিকদার শুভ|প্রথমাংশ=সৌমেন|তারিখ=১০ মে ২০২০|শিরোনাম=স্মৃতিতে বুয়েটের দিনগুলো|ইউআরএল=https://www.risingbd.com/campus-news/349647|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-24|ওয়েবসাইট=Risingbd Online Bangla News Portal|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০३-২৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250324123125/https://www.risingbd.com/campus-news/349647}}</ref> हालांकि, कैंपस के मुख्य भाग में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, यूआरपी (URP) भवनों के साथ-साथ डॉ. रशीद एकेडमिक भवन स्थित है। छात्रों के आवासीय हॉल शैक्षणिक भवनों से पैदल दूरी पर स्थित हैं। वर्तमान में कैंपस का क्षेत्रफल 76.85 एकड़ (311,000 वर्ग मीटर) है। == प्रवेश प्रक्रिया == === स्नातक === बुएट की स्नातक प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति द्वारा केंद्रीय रूप से संचालित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को [[बांग्लादेश]] की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है। बुएट में स्नातक स्तर पर प्रवेश, ग्रेड और परीक्षा के परिणामों के आधार पर निर्धारित किया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया में पाठ्येतर गतिविधियों (extracurricular activities) या वित्तीय आवश्यकताओं पर विचार नहीं किया जाता है। स्नातक प्रवेश परीक्षा एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी लिखित परीक्षा है। [[उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र|उच्च माध्यमिक स्तर]] (एचएससी) की शिक्षा पूरी करने के बाद, यदि कोई छात्र न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करता है, तो वह स्नातक प्रवेश के लिए आवेदन जमा कर सकता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-01-27|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েট ভর্তি পরীক্ষার আবেদন যেভাবে করবেন|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231358/https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|ইউআরएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> पहले केवल लिखित परीक्षा के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। वर्तमान में छात्रों का चयन दो चरणों में किया जाता है। प्रारंभिक रूप से, आवेदन की शर्तों के अनुसार न्यूनतम योग्य उम्मीदवारों के लिए एक प्रारंभिक छंटनी परीक्षा (preliminary screening test) आयोजित की जाती है। इस परीक्षा से चयनित छात्रों को मुख्य लिखित परीक्षा के माध्यम से प्रवेश का अवसर प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-12-01|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে ভর্তিতে আবেদন শুরু, পরীক্ষার নম্বর–আসন কত, দেখুন গুরুত্বপূর্ণ তারিখ ও সময়|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231221/https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> === स्नातकोत्तर === मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रमों में हर साल लगभग 1,000 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को साक्षात्कार (interview) और/या लिखित परीक्षा में भाग लेना होता है। विभिन्न विभागों और संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्रियाँ इस प्रकार हैं: एमएससी (मास्टर ऑफ साइंस), एमएससी इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग), एम. इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग), एमयूआरपी (मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग), एम.आर्क (मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर), एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) और पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी)। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और जल संसाधन विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजी डिप.) भी प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-07-11|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে মাস্টার্স, এমফিল ও পিএইচডি প্রোগ্রামে ভর্তি, আবেদন ফি ৫০৫ টাকা|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218234014/https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == संकाय और विभाग == [[चित्र:BUET EME Building.jpg|thumb|बुएट का एम.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) भवन]] [[चित्र:Civil Engineering Building of BUET seen from EME Building.JPG|thumb|सिविल इंजीनियरिंग भवन]] [[File:Ece buliding.jpg|thumb|बुएट ईसीई (ECE) भवन]] [[File:Architecture building .jpg|thumb|बुएट आर्किटेक्चर भवन]] बुएट में वर्तमान में 6 संकायों के अंतर्गत 18 विभाग हैं। === केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय === ==== केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का केमिकल इंजीनियरिंग विभाग [[दक्षिण एशिया]] के सबसे पुराने केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में से एक है। 1952 में यहाँ से पहले पांच केमिकल इंजीनियरिंग छात्रों ने स्नातक किया था। यह विभाग अब केमिकल इंजीनियरिंग में बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Our History: Department of Chemical Engineering|ইউআরএল=https://che.buet.ac.bd/our-history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में हर साल साठ और स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पंद्रह छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस विभाग के पाठ्यक्रम आधुनिक केमिकल इंजीनियरिंग शिक्षा की अवधारणाओं पर आधारित हैं, और देश की औद्योगिक आवश्यकताओं पर पर्याप्त जोर दिया जाता है। ==== मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करने वाला एकमात्र विभाग है। इसकी स्थापना 1952 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के रूप में हुई थी। विभाग का लक्ष्य मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करना और घरेलू कच्चे माल के उपयोग पर अनुसंधान के अवसर पैदा करना था।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|ওয়েবসাইট=Department of Materials and Metallurgical Engineering}}</ref> बाद में, सिरेमिक, पॉलिमर और कंपोजिट जैसे गैर-धात्विक सामग्रियों के महत्व को देखते हुए इस विभाग ने अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया। 18 मार्च 1997 को बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने इसका नाम बदलकर "मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग" (MME) कर दिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About us: MME BUET|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250304084732/https://mme.buet.ac.bd/about-us/}}</ref> वर्तमान में यह विभाग चार साल के स्नातक कार्यक्रम में हर साल 40 छात्रों को प्रवेश देता है और स्नातकोत्तर (मास्टर्स और पीएचडी) पाठ्यक्रम संचालित करता है। ==== नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) के इस विभाग का नाम 2022 में "ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग" से बदलकर "नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग" कर दिया गया। यह पर्यावरण, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्नातकों को तैयार करने का कार्य करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About the Department |ইউআরএল=https://nce.buet.ac.bd/about/ |ওয়েবসাইট=Department of Nanomaterials and Ceramic Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET)}}</ref> ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग बांग्लादेश में पेट्रोलियम और खनिज संसाधन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला पहला विश्वविद्यालय-स्तरीय कार्यक्रम है। वर्तमान में यह केवल स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। विभाग की स्थापना 1992 में बुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के सहयोग से की गई थी, जिसे कैनेडियन इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी (CIDA) द्वारा वित्तपोषित किया गया था। बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने 5 नवंबर 1990 को इसे मंजूरी दी और 1995 में शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू हुईं।<ref name=pmre/> यह विभाग दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों और संस्थानों के सहयोग से निरंतर उन्नत हो रहा है। इसके सहयोगियों में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU), USAID, CIDA और टेक्सास का 'सेंटर फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स' (CEE) शामिल हैं।<ref name=pmre>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About Us |ইউআরএল=https://pmre.buet.ac.bd/about-us |ওয়েবসাইট=Department of Petroleum and Mineral Resources Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering & Technology |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-তারিখ=১ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250301214820/http://pmre.buet.ac.bd/about-us |ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর }}</ref> === मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय === ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग यहाँ के सबसे पुराने और बड़े विभागों में से एक है। इसकी शुरुआत 1947 में तत्कालीन अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज में चार साल के स्नातक कार्यक्रम के रूप में हुई थी। अब तक इस विभाग से 4166 छात्रों ने बीएससी इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), 201 छात्रों ने एमएससी/एम.इंजीनियरिंग और 16 छात्रों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History {{!}} Department of Mechanical Engineering, BUET|ইউআরএল=https://me.buet.ac.bd/history|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=me.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-০৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250208091311/http://me.buet.ac.bd/history|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में तरल और तापीय ऊर्जा प्रणाली (fluid and thermal power systems), तापीय ऊर्जा का अन्य ऊर्जा में रूपांतरण, मशीनों और यांत्रिक प्रणालियों के डिजाइन और नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। ==== इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में 1981 में स्नातकोत्तर स्तर पर इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग (IPE) विभाग शुरू किया गया था। उस समय केवल स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता था। औद्योगिक क्षेत्र में प्रबंधन के कुशल इंजीनियर तैयार करने के लिए 1997 से इस विभाग ने स्नातक स्तर पर 20 छात्रों को प्रवेश देना शुरू किया। बाद में, विभिन्न उद्योगों में आईपे (IPE) स्नातकों की बढ़ती मांग के कारण छात्रों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई—पहले 30, फिर 2017-18 सत्र में 50 और 2020-21 सत्र में यह संख्या 120 तक पहुँच गई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About |ইউআরএল=https://ipe.buet.ac.bd/page/about |ওয়েবসাইট=Industrial and Production Engineering. |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫}}</ref> ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ने 1971 में अपनी यात्रा शुरू की थी। इस विभाग का अध्ययन जहाजों या तैरती हुई संरचनाओं के निर्माण से लेकर समुद्र से विभिन्न संसाधनों के दोहन की संभावनाओं तक फैला हुआ है। इस विभाग के स्नातक स्तर पर जहाजों की आकृति, शक्ति, स्थिरता, समुद्र में चलने की क्षमता, प्रतिरोध और संचालन, डिजाइन और परिचालन लागत के साथ-साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल इंजीनियरिंग और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विषय पढ़ाए जाते हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About NAME - Department of Naval Architecture and Marine Engineering, BUET|ইউআরএল=https://name.buet.ac.bd/about|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=name.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250214113408/https://name.buet.ac.bd/about|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === सिविल इंजीनियरिंग संकाय === ==== सिविल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में सिविल इंजीनियरिंग संकाय 1980 में शुरू हुआ था। यह देश में [[सिविल इंजीनियरिंग]] शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन के अवसर उपलब्ध हैं। हर साल इस विभाग में स्नातक स्तर पर 195 नए छात्र और स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 200 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=en-US|শিরোনাম=HOME|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২১-০৭-২৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210723230356/https://ce.buet.ac.bd/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> यहाँ स्ट्रक्चरल एनालिसिस, भूकंप इंजीनियरिंग और पर्यावरण इंजीनियरिंग पर शोध कार्य किया जाता है। सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण 1968 में हुआ था, 1992 में इसका विस्तार किया गया और 1996 में भवन की सातवीं मंजिल पूरी हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/history/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২০|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250420005317/https://ce.buet.ac.bd/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अप्रैल 2021 में बुएट अधिकारियों ने सिविल इंजीनियरिंग भवन का नाम दिवंगत राष्ट्रीय प्रोफेसर [[जामिलुर रजा चौधरी|डॉ. जामिलुर रजा चौधरी]] के नाम पर रखने का निर्णय लिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2021-04-20|ভাষা=bn|শিরোনাম=ড. জামিলুর রেজা চৌধুরীর নামে বুয়েটের পুরকৌশল ভবনের নামকরণ|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/%E0%A6%A1-%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%81%E0%A6%B0-%E0%A6%B0%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A6%BE-%E0%A6%9A%E0%A7%8C%E0%A6%A7%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%8C%E0%A6%B6%E0%A6%B2-%E0%A6%AD%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A6%A3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো}}</ref> बांग्लादेश में सिविल इंजीनियर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जैसे पुल और जलविद्युत केंद्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस विभाग का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचार और उत्कृष्टता प्राप्त करना है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Mission & Vision|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250115001034/https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग (जल संसाधन इंजीनियरिंग) विभाग की स्थापना 1974 में हुई थी।<ref name=":4">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=WRE {{!}} About Us|ইউআরএল=https://wre.buet.ac.bd/about-us.html|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=wre.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250302152817/http://wre.buet.ac.bd/about-us.html|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> 1980 में सिविल इंजीनियरिंग संकाय के गठन के समय यह इसके दो मुख्य विभागों में से एक बन गया। यह विभाग सिविल इंजीनियरिंग भवन की छठी मंजिल पर स्थित है। विभाग स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 150 स्नातक और 70 स्नातकोत्तर छात्र हैं। इसका लक्ष्य देश और क्षेत्र के जल और संबंधित संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम इंजीनियर तैयार करना है, जिसमें पेशेवर अभ्यास, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया जाता है।<ref name=":4" /> === इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय === ==== इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग ==== 1948 में स्थापित यह विभाग बांग्लादेश का सबसे पुराना [[इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग]] शिक्षा विभाग है।<ref name=":2">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About EEE {{!}} Department of EEE, BUET|ইউআরএল=https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=eee.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218185150/https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর}}</ref> समय के साथ निरंतर बदलावों के माध्यम से यह आज भी देश की इंजीनियरिंग शिक्षा के शीर्ष पर बना हुआ है। इस विभाग के छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स, संचार प्रणालियों, सिग्नल प्रोसेसिंग और बिजली प्रणालियों के मुख्य विषयों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों के बारे में पढ़ाया जाता है। यहाँ 43 पीएचडी-धारक शिक्षक हैं, जिन्होंने दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।<ref name=":2" /> चौथी औद्योगिक क्रांति की सहायक प्रौद्योगिकियों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम) के नवाचार और अनुसंधान में इस विभाग के शिक्षक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ==== कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग ==== यह विभाग 1984 में स्थापित किया गया था। बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में [[कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग]] शिक्षा का अग्रणी संस्थान है। यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाती है। पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखने के लिए इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसके अलावा, इस विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग में विशेष स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका विस्तार बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय और एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से किया जा रहा है। वर्तमान में यहाँ लगभग 700 स्नातक और 400 स्नातकोत्तर छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इस विभाग के कई पूर्व छात्र मिशिगन (एन आर्बर), कोलंबिया, टोरंटो, मोनाश जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं और [[गूगल]], [[माइक्रोसॉफ्ट]], [[एप्पल]], [[एनवीडिया]] जैसी शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं। कई छात्रों ने देश-विदेश में उद्यमी (entrepreneur) के रूप में भी काम शुरू किया है। विभाग में आईओटी (IoT) प्रयोगशाला, वायरलेस नेटवर्क प्रयोगशाला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और [[रोबोटिक्स]] प्रयोगशाला, और सैमसंग मशीन लर्निंग प्रयोगशाला<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Samsung R&D funded CSE BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312075801/https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of CSE, BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312105704/https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग जनवरी 2016 में 30 स्नातक छात्रों के साथ शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Head's Message|ইউআরএল=https://bme.buet.ac.bd/head-message/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=Biomedical Engineering {{!}} BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250428223446/https://bme.buet.ac.bd/head-message/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अब हर साल 50 स्नातक और 40 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।<ref name=":3" /> इस विभाग का उद्देश्य डिजाइन, विकास और अनुसंधान के माध्यम से देश की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करना और छात्रों को इस नए क्षेत्र में कुशल बनाना है। === आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय === ==== आर्किटेक्चर विभाग ==== [[File:Dept. of Architecture.jpg|thumb|आर्किटेक्चर भवन के ऊपर से लिया गया प्लिंथ का दृश्य]] बुएट का आर्किटेक्चर विभाग दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वास्तुकला शिक्षा के अग्रणी संस्थानों में से एक है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी। तत्कालीन 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (EPUET) में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में इसका विकास हुआ। अमेरिका की टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएस-एड (USAID) के तकनीकी सहयोग से पांच साल का बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत केवल एक विदेशी शिक्षक और पांच छात्रों के साथ हुई थी। बाद में और विदेशी शिक्षक जुड़े, और स्थानीय स्नातकों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।<ref name=":5">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of Architecture|ইউআরএল=https://arch.buet.ac.bd/department|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=arch.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250118033043/https://arch.buet.ac.bd/department|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> वर्षों के साथ छात्रों के प्रवेश की संख्या 5 से बढ़कर 55 हो गई है। यहाँ से ऐसे वास्तुकार (Architects) तैयार हो रहे हैं, जिन्होंने देश, क्षेत्र और दुनिया में नाम कमाया है। रिचर्ड ई. व्रूमैन, डैनियल सी. डनहम, लुई आई. कान, पॉल रूडोल्फ, स्टेनली टाइगरमैन, मज़हरुल इस्लाम और फजलुर रहमान खान जैसे प्रसिद्ध शिक्षकों के शुरुआती मार्गदर्शन ने इस सफलता की नींव रखी है।<ref name=":5" /> यहाँ के शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने 'आगा खान वास्तुकला पुरस्कार', 'दक्षिण एशियाई वास्तुकार वर्ष पुरस्कार' और 'बांग्लादेश वास्तुकार संस्थान डिजाइन पुरस्कार' जैसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=২০২৪-০৪-১৮|শিরোনাম=যে কারণে টাইমের প্রভাবশালীর তালিকায় মেরিনা তাবাশু‍্যম|ইউআরএল=https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=সকাল সন্ধ্যা|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503005903/https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=লেখা|তারিখ=2022-12-04|ভাষা=bn|শিরোনাম=ভবিষ্যতের স্থপতির পুরস্কার বুয়েট, চুয়েট, ইউএপির শিক্ষার্থীর|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৪-০৭-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20240714102140/https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=বিজ্ঞপ্তি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটের তরুণ স্থপতিদের পুরস্কৃত করল বার্জার|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503180846/https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=SAMAKAL|ভাষা=en|শিরোনাম=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|ইউআরএল=https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250505085306/https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग 1962 में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था। यह बांग्लादेश में नियोजन (Planning) से संबंधित सबसे पुराना और सबसे बड़ा डिग्री प्रोग्राम है। प्रारंभ में, आर्किटेक्चर विभाग के शिक्षक ही इसके पाठ्यक्रम पढ़ाते थे। बाद में, 1968 में दो स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के साथ दो साल का 'मास्टर ऑफ फिजिकल प्लानिंग' (MPP) कार्यक्रम शुरू हुआ। हालांकि, बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के कारण, छात्रों के पहले बैच ने 1972 में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की।<ref name=":6">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en|শিরোনাম=BUET:URP Website|ইউআরএল=https://urp.buet.ac.bd/Web/History|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=urp.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৬-০১-২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20260121105540/https://urp.buet.ac.bd/Web/History|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने विभिन्न तरीकों से इस विभाग की सहायता की, जिसमें विदेशों से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी शामिल थी। 1975 में MPP कार्यक्रम का नाम बदलकर 'मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (MURP) कर दिया गया। इसके बाद, 1978 और 1979 के MURP बैच बुएट-शेफील्ड सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिससे छात्रों को बुएट और यूके की शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संयुक्त डिग्री प्राप्त हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|প্রকাশনার-তারিখ=2017|শিরোনাম=Research on “Activities of Urban Development Directorate (UDD) since 1965”|ইউআরএল=https://udd.portal.gov.bd/sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর|ওয়েবসাইট=Urban Development Directorate (UDD)|উক্তি=BUET-Sheffield Joint Master’s Degree Program-An Approach to Physical Upgrading of a Low Income Community, Dhaka, Bangladesh,1979.|সংগ্রহের-তারিখ=২৬ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ আগস্ট ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220804201644/https://udd.portal.gov.bd//sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf}}</ref> बाद में 1995 में 'बैचलर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (BURP) और पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए गए।<ref name=":6" /> संकाय, विभाग और उनके अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या की सूची: {| class="prettytable" style="width:45em;" |- style="background-color:#E1D297;font-weight:bold" ! संकाय का नाम ! विभाग ! संक्षिप्त नाम ! प्रवेशित छात्रों की संख्या |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="4" | केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय | केमिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''Ch.E'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''MME'' | 60 |- style="background-color:#DADADA" | नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NCE'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''PMRE'' | - |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | विज्ञान संकाय | रसायन विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Chem'' | - |- style="background-color:#eef" | गणित विभाग | style="text-align:center;" | ''Math'' | - |- style="background-color:#eef" | भौतिक विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Phys'' | - |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="2" | सिविल इंजीनियरिंग संकाय | सिविल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''WRE'' | 30 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय | मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''ME'' | 180 |- style="background-color:#eef" | नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NAME'' | 55 |- style="background-color:#eef" | इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''IPE'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="3" | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''EEE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CSE'' | 180 |- style="background-color:#DADADA" | बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''BME'' | 50 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय | आर्किटेक्चर विभाग | style="text-align:center;" | ''Arch.'' | 60 |- style="background-color:#eef" | मानविकी विभाग | style="text-align:center;" | ''Hum'' | - |- style="background-color:#eef" | अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''URP'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="1" | कुल संकाय: 6 | colspan="2" | कुल विभाग: 18 | कुल प्रवेशित छात्र: 1305 |- |} == अनुसंधान == === अनुसंधान केंद्र और प्रयोगशालाएं === प्रयोगात्मक और व्यावहारिक अनुसंधान के साथ-साथ गणितीय विश्लेषण के लिए बुएट में 100 से अधिक उन्नत अनुसंधान केंद्र और विभागीय प्रयोगशालाएं हैं। इन सबका मुख्य केंद्र ‘रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग’ (RISE) है<ref>{{cite web |title=RISE-HOME |url=https://rise.buet.ac.bd/#/ |access-date=2026-03-04 |website=rise.buet.ac.bd}}</ref>, जो मुख्य रूप से आंतरिक अनुसंधान अनुदान, नवाचार कार्यक्रमों, उद्योग-संबद्ध भागीदारी और प्रकाशन प्रोत्साहन जैसे मामलों का समन्वय करता है। अन्य उल्लेखनीय केंद्रों में सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज (CES), सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (CERM), और अत्याधुनिक ‘जाइस’ (ZEISS) लैब से सुसज्जित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर (BEC) शामिल हैं।<ref>{{cite web |language=en |title=Buet opens biomedical research lab |url=https://www.thedailystar.net/health/news/buet-opens-biomedical-research-lab-3277881 |access-date=2026-03-04 |website=www.thedailystar.net}}</ref> इसके अलावा तकनीकी सेवाओं और परामर्श के लिए ‘ब्यूरो ऑफ रिसर्च, टेस्टिंग एंड कंसल्टेशन’ (BRTC) कार्यरत है। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (IWFM), इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (IRAB) और इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IESD) जैसे विशेष संस्थान भी सक्रिय हैं।<ref>{{cite web |title=BUET’s ICS testing lab gets IDCOL support |url=https://www.newagebd.net/post/mis/280462/buets-ics-testing-lab-gets-idcol-support |url-status=active |website=New Age}}</ref> ये केंद्र और लैब मुख्य रूप से चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों (जैसे: एआई, रोबोटिक्स, आईओटी), सतत ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और बायोमेडिकल क्षेत्र के अनुसंधान में नेतृत्व कर रहे हैं।<ref>{{cite web |date=2022-04-07 |language=en |title=Education ministry to pursue Buet’s mega plan to boost research |url=https://www.tbsnews.net/bangladesh/education/education-ministry-pursue-buets-mega-plan-boost-research-398818 |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === सम्मेलन === बुएट नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उच्च-स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन करता है। कुछ प्रमुख सम्मेलन इस प्रकार हैं: * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ICME):''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का एक फ्लैगशिप आयोजन है, जिसका 15वां संस्करण 2025 में आयोजित किया गया। * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग (ICECE):''' इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (EEE) विभाग द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक फ्लैगशिप सम्मेलन।<ref>{{cite web |title=ICECE - 2024 |url=https://icece.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-05 |website=icece.buet.ac.bd}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन केमिकल इंजीनियरिंग (ICChE):''' केमिकल इंजीनियरिंग विभाग का मुख्य सम्मेलन। * '''आईईईई (IEEE) इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेलीकम्युनिकेशंस एंड फोटोनिक्स (ICTP):''' 2025 में इस सम्मेलन का छठा संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।<ref>{{cite web |title=The 6th IEEE International Conference on Telecommunications and Photonics 2025 (ICTP 2025) Held at BUET |url=https://iict.buet.ac.bd/?p=3546 |access-date=2026-03-05 |website=IICT, BUET}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (ICWFM):''' जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक कार्यक्रम। * '''इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन सिविल इंजीनियरिंग (ISCEB):''' इसके अलावा GCSTMR सम्मेलन, एल्गोरिदम पर WALCOM और नेटवर्किंग एवं सुरक्षा पर NSysS जैसे वैश्विक कार्यक्रमों का आयोजन भी बुएट द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। === जर्नल === अनुसंधान परिणामों को व्यापक रूप से प्रसारित करने के उद्देश्य से बुएट कई सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) जर्नल प्रकाशित करता है: * '''जर्नल ऑफ आर्किटेक्चर:''' इस जर्नल का पूर्व नाम ‘प्रतिबेश’ (Protibesh) था। यह वास्तुकला विभाग का शोध जर्नल है, जो मुख्य रूप से वास्तुकला, पर्यावरण और सतत डिजाइन से संबंधित विषयों पर काम करता है।<ref>{{cite web |title=Journal of Architecture, BUET |url=https://ja.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-04 |website=ja.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Architecture |url=https://web251.secure-secure.co.uk/bja.arch.buet.ac.bd/index.php/bja |access-date=2026-03-04 |website=web251.secure-secure.co.uk}}</ref> * '''जर्नल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट्स:''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की आधुनिक प्रगति और अनुसंधान पर केंद्रित है।<ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.scimagojr.com/journalsearch.php?q=20980&tip=sid |access-date=2026-03-04 |website=www.scimagojr.com}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.jmerd.org/ |access-date=2026-03-04 |website=www.jmerd.org}}</ref><ref>{{cite journal |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://jmerd.me.buet.ac.bd/ |journal=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments}}</ref> * '''केमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च बुलेटिन:''' केमिकल इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों के अनुसंधान के लिए समर्पित यह जर्नल 'बांग्लाजोल' (BanglaJOL) के सहयोग से प्रकाशित होता है।<ref>{{cite web |title=Chemical Engineering Research Bulletin |url=https://www.banglajol.info/index.php/CERB |access-date=2026-03-04 |website=www.banglajol.info}}</ref> === प्रमुख नवाचार === बुएट ने कई व्यावहारिक और स्थानीय संदर्भ में प्रभावी नवाचार विकसित किए हैं, जिनमें से कई को पेटेंट, सरकारी मंजूरी और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है: * [[ऑक्सीजेट]] '''सीपैप वेंटिलेटर (2021):''' कोविड-19 संकट के दौरान बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ने इस किफायती और बिजली रहित नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का आविष्कार किया।<ref>{{cite web |language=bn |title=দেশীয় ভেন্টিলেটর ডিভাইস অক্সিজেট সিপ্যাপ |url=https://www.ittefaq.com.bd/263760/%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%80%E0%A7%9F-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A6%B0-%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%87%E0%A6%B8-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Ittefaq}}</ref> यह औषधि प्रशासन निदेशालय (DGDA) द्वारा अनुमोदित पहला बांग्लादेशी चिकित्सा उपकरण है।<ref>{{cite web |last=Channel24 |language=en |title=ঢাকা মেডিকেলে 'অক্সিজেট সিপ্যাপ ভেন্টিলেটরের' ক্লিনিক্যাল ট্রায়াল শুরু |url=https://www.channel24bd.tv/health/article/67696/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%AE%E0%A7%87%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%87%E0%A6%B2%E0%A7%87-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%9F%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%B6%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%81 |access-date=2026-03-04 |website=Channel 24}}</ref><ref>{{cite web |last=At-tahreek |first=Monthly |language=en |title=বিদ্যুৎ ছাড়াই ৬০ লিটার অক্সিজেন দিবে অক্সিজেট - |url=https://at-tahreek.com/ |access-date=2026-03-04 |website=Monthly At-tahreek}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/health/news/687347 |title=সীমিত ব্যবহারে অনুমোদন পেল বুয়েটের ‘অক্সিজেট’}}</ref> इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रशंसा प्राप्त की है।<ref>{{cite web |date=2021-11-07 |language=bn |title=বুয়েটের অক্সিজেট যেভাবে আন্তর্জাতিক মঞ্চে |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%95-%E0%A6%AE%E0%A6%9E%E0%A7%8D%E0%A6%9A%E0%A7%87 |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> साथ ही इसने ‘IMAGINE IF!’ ग्लोबल हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रतियोगिता में विश्व विजेता का खिताब जीता।<ref>{{cite web |last=Hasan |first=Taufiq |date=2021-12-30 |language=en-US |title=OxyJet wins two int'l competitions |url=https://bme.buet.ac.bd/2021/12/30/oxyjet-wins-two-intl-competitions/ |access-date=2026-03-04 |website=Biomedical Engineering | BUET}}</ref> * '''डेंगूड्रॉप्स (DengueDrops) और रैडअसिस्ट (RadAssist):''' डेंगू रोगी प्रबंधन और मेडिकल इमेजिंग के लिए एआई-संचालित मोबाइल ऐप और टेलीरेडियोलॉजी प्लेटफॉर्म।<ref>{{cite web |title=DengueDrops |url=https://mhealth.buet.ac.bd/DengueDropsInfo/ |access-date=2026-03-04 |website=mhealth.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=RadAssist Revolutionizing Radiology through AI |url=https://radassist.net/ |access-date=2026-03-04 |website=radassist.net}}</ref> * '''एनबी-केयर (NB-Care) प्लेटफॉर्म:''' एक स्मार्ट वर्टिकल एप्लिकेशन सिस्टम, जिसने मलेशिया इनोवेशन एंड डिजाइन प्रदर्शनी में ‘ITEX गोल्ड मेडल’ जीता।<ref>{{cite web |language=en-US |title=32nd International Invention, Innovation & Technology Exhibition (ITEX 2021) |url=https://www.akademisains.gov.my/ar21/32nd-international-invention-innovation-technology-exhibition-itex-2021/ |access-date=2026-03-04}}</ref> * '''सतत तकनीक:''' इसमें एसीआई डिजाइन का पुरस्कार विजेता कंक्रीट मिक्स, बायोमास से बायोक्रूड रूपांतरण और एमआईटी के साथ संयुक्त रूप से विकसित आर्सेनिक प्रदूषण मॉडलिंग टूल शामिल हैं। === अन्य उत्कृष्ट उपलब्धियाँ === * '''अनुसंधान अनुदान:''' हाल के वर्षों में बुएट ने बड़ी मात्रा में अनुसंधान निधि प्राप्त की है, जिसमें सीएसई (CSE) विभाग की पांच परियोजनाओं के लिए 9.24 करोड़ रुपये शामिल हैं। * '''अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता:''' बुएट के छात्रों ने IEEE SPS VIP Cup, AIChE चैलेंज, नासा स्पेस एप्स चैलेंज और यूरोपियन रोवर चैलेंज जैसे वैश्विक मंचों पर पुरस्कार जीते हैं।<ref>{{cite web |title=IEEE SPS Signal Processing Cup at ICASSP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/218 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=VIP Cup 2023 at ICIP 2023 |url=https://signalprocessingsociety.org/community-involvement/vip-cup-2023-icip-2023 |access-date=2026-03-05 |website=signalprocessingsociety.org}}</ref><ref>{{cite web |title=CHAMPION IEEE SPS VIP CUP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/215 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=2025 Johns Hopkins Healthcare Design Competition |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/219 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |last=Chowdhury |first=Ridoy Hasan |language=en-US |title=World First among 440 groups from 200 universities |url=https://bangladeshbarta.tv/archives/1361 |access-date=2026-03-05}}</ref> * '''सम्मान:''' बुएट के शिक्षकों और छात्रों ने IEEE R10 आउटस्टैंडिंग वॉलंटियर अवार्ड, आर्किटेक्चर में ARCASIA गोल्ड प्राइज और UNC वाटर एंड हेल्थ कॉन्फ्रेंस रिकग्निशन जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{cite web |date=2026-01-22 |language=en-US |title=R10 STUDENT BRANCH OF THE MONTH – BUET |url=https://newsletter.ieeer10.org/home_jan2021/r10-student-branch-of-the-month-bangladesh-university-of-engineering-technology/ |access-date=2026-03-05}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-10-06 |language=en-US |title=Result Announcement for 2025 IEEE Region 10 Award Recipients |url=https://www.ieeer10.org/2025/10/06/result-announcement-for-2025-ieee-region-10-award-recipients/ |access-date=2026-03-05 |website=IEEE}}</ref> * '''वैश्विक रैंकिंग:''' बुएट 'नेचर इंडेक्स' में बांग्लादेश के शीर्ष संस्थान के रूप में स्थान बनाए हुए है।<ref>{{cite web |date=2022-04-22 |language=bn |title=How BUET advanced in world rankings |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BF%E0%A6%82%E0%A7%9F%E0%A7%87-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%8F%E0%A6%97%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-03-05 |website=Prothomalo}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-12-10 |language=en |title=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |url=https://www.nature.com/nature-index/institution-outputs/Bangladesh/Bangladesh%20University%20of%20Engineering%20and%20Technology%20%28BUET%29/513906be34d6b65e6a0005c4 |access-date=2026-03-05 |website=Nature Index}}</ref><ref>{{cite news |url=https://thedailycampus.com/public-university/203159 |title=Top ten universities in international research |work=The Daily Campus}}</ref> === संस्थान === [[File:BUET-Japan Institute of Disaster Prevention and Urban Safety.jpg|thumb|बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी]] बुएट में वर्तमान में 8 संस्थान स्थापित हैं: * सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) * जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) * एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी संस्थान (IAT) * दुर्घटना अनुसंधान संस्थान (ARI) * बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी (BUET-JIDPUS) * परमाणु ऊर्जा इंजीनियरिंग संस्थान (INPE) * ऊर्जा एवं सतत विकास संस्थान (IESD) * रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन संस्थान (IRAB)<ref name="institute">{{cite web |title=Institutes of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |archive-date=August 2, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |url-status=active |publisher=BUET Official Website}}</ref> == निदेशालय, केंद्र और अन्य == * सलाहकार, विस्तार और अनुसंधान सेवा निदेशालय (DAERS) * छात्र कल्याण निदेशालय (DSW) * योजना और विकास निदेशालय (P&D) * सतत शिक्षा निदेशालय (DCE) * ऊर्जा अध्ययन केंद्र (CES) * पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन केंद्र (CERM) * बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र (BEC) * अनुसंधान, परीक्षण और परामर्श ब्यूरो (BRTC) * अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण नेटवर्क केंद्र (ITN) * शहरी सुरक्षा के लिए बांग्लादेश नेटवर्क कार्यालय (BNUS) == संगठन == === छात्र संगठन === अध्यादेश 1962 के अनुसार, बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सभी प्रकार की संगठनात्मक राजनीति प्रतिबंधित है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-18 |language=bn |title=বিদ্যমান আইনেই ছাত্ররাজনীতি নিষিদ্ধ |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6% weবি%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8-%E0%A6%86%E0%A6%87%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%87-%E0%A6%9B%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%80%E0%A6%A4%E0%A6%BF-%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%B7%E0%A6%BF%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%A7 |access-date=2025-03-13 |website=Daily Prothom Alo}}</ref> [[अबरार फहद हत्याकांड|अबरार फहद]] नामक विश्वविद्यालय के एक छात्र की बुएट छात्र लीग द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सैफुल इस्लाम ने कैंपस में सभी प्रकार की छात्र राजनीति और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार, कैंपस में शिक्षक राजनीति भी प्रतिबंधित है।<ref name=":1">{{cite web |url=https://www.bbc.com/bengali/news-50017329 |title=সংরক্ষণাগারভুক্ত অনুলিপি |access-date=January 19, 2020 |website=BBC Bengali}}</ref> === विज्ञान संगठन === * '''सत्येन बोस विज्ञान क्लब:''' 1994 में प्रसिद्ध [[सत्येंद्र नाथ बोस|भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस]] के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में 'सत्येन बोस विज्ञान क्लब' की यात्रा शुरू हुई।<ref>{{cite web |title=বুয়েটের সত্যেন বোস বিজ্ঞান ক্লাব |url=https://www.bonikbarta.com/home/news_description/356882/ |access-date=2025-04-03 |website=Bonik Barta}}</ref> इस क्लब का उद्देश्य बुएट के छात्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि जगाना और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। यह क्लब नियमित रूप से कार्यशालाएं, सेमिनार और व्याख्यान आयोजित करता है।<ref>{{cite web |language=bn |title=লাভেলো জাতীয় মহাকাশ উৎসব |url=https://www.banglanews24.com/print/715709 |access-date=2025-04-03 |website=banglanews24.com}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/national/news/871187 |title=জাতীয় পরিবেশ উৎসবের ঢাকা আঞ্চলিক বাছাই পর্ব অনুষ্ঠিত |work=Jago News |access-date=2025-04-03 |language=en-US}}</ref> * '''बुएट ऑटोमोबाइल क्लब:''' 4 अप्रैल 2017 को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मागलूब अल नूर की पहल पर इस क्लब की औपचारिक शुरुआत हुई।<ref>{{cite web |date=2017-04-05 |language=en |title=Buet launches automobile club |url=https://www.thedailystar.net/shift/buet-launches-automobile-club-1386637 |access-date=2025-12-19 |website=The Daily Star}}</ref><ref>{{cite web |last=Rahman |first=Saurin |date=2017-04-03 |language=en-US |title=BUET Automobile club inauguration |url=https://www.autorebellion.com/2017/04/buet-automobile-club-inauguration/ |access-date=2025-12-19 |website=Auto Rebellion}}</ref> क्लब का मुख्य उद्देश्य सैद्धांतिक इंजीनियरिंग ज्ञान और वास्तविक ऑटोमोबाइल उद्योग के बीच सेतु बनाना है। इस क्लब के तहत 'टीम ऑटोमेस्ट्रो' (Team AutoMaestro) नामक एक विशेषज्ञ टीम है, जिसने 2020 में भारत में आयोजित 'इंटरनेशनल गो-कार्ट चैंपियनशिप' में 9वां स्थान प्राप्त किया और अपने डिजाइन के लिए 'सर्वश्रेष्ठ नवाचार' का पुरस्कार जीता।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2020-11-29 |language=bn |title=উদ্ভাবনে সেরা বুয়েটের অটো মায়েস্ত্রো |url=https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%9F%E0%A7%8B-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B |access-date=2025-12-19 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट रोबोटिक्स सोसाइटी:''' यह बुएट के छात्रों द्वारा संचालित रोबोटिक्स क्लब है, जो छात्रों के बीच रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अभ्यास को बढ़ावा देता है।<ref>{{cite news |url=https://www.newagebd.net/post/campus-bites/290476/robo-carnival-held-at-buet |title=Robo Carnival held at BUET |work=New Age}}</ref><ref>{{cite web |date=2024-02-07 |language=en |title=BUET Robotics Society hosts Robo Carnival 2024 |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/buet-robotics-society-hosts-robo-carnival-2024-788678 |access-date=2026-02-19 |website=The Business Standard}}</ref> * '''टीम इंटरप्लेनेटर (Team Interplanetar):''' यह एक बहुविषयक [[रोबोटिक्स]] टीम है, जो 2011 में स्थापित हुई थी। यह टीम अंतर्राष्ट्रीय 'मार्स रोवर' प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही है।<ref>{{cite web |language=en-GB |title=Team Interplanetar - BUET Mars Rover Team (2025) |url=https://roverchallenge.eu/team/team-interplanetar-buet-mars-rover-team-2025/ |access-date=2026-02-19 |website=European Rover Challenge}}</ref> इन्होंने 'यूरोपियन रोवर चैलेंज' (ERC) में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।<ref>{{cite web |language=en |title=Team from BUET reaches finals of European Rover Challenge 2022 |url=https://www.thedailystar.net/tech-startup/news/team-buet-reaches-finals-european-rover-challenge-2022-3122366 |access-date=2026-02-19 |website=The Daily Star}}</ref> इनके 'निर्भीक' ड्रोन प्रोजेक्ट को मंगल ग्रह के लिए अभिनव गैस संपीड़न प्रणाली के लिए सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2021-05-30 |language=bn |title=মঙ্গলের জন্য ড্রোন উদ্ভাবনে সেরা বুয়েট |url=https://www.prothomalo.com/education/higher-education/%E0%A6%AE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%97%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF-%E0%A6%A1%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B%E0%A6%A8-%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-02-19 |website=Prothomalo}}</ref> * बुएट एनर्जी क्लब * बुएट न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्लब * बुएट साइबर सिक्योरिटी क्लब * बुएट इनोवेशन एंड डिजाइनिंग क्लब === कला और सांस्कृतिक संगठन === * '''आलोकवर्तिका:''' अक्टूबर 2016 में स्थापित यह एक मुक्त पुस्तकालय (Open Library) है। यहाँ से कोई भी बिना किसी पंजीकरण के पुस्तक ले सकता है, बशर्ते उसे पुस्तकालय में एक पुस्तक दान करनी हो।<ref>{{cite news |title=আলোকবর্তিকা: বুয়েটের একটি মুক্ত গ্রন্থাগার |url=http://bangla.fintechbd.com/2018/02/25/আলোকবর্তিকা-বুয়েটের-একট/ |date=February 25, 2018 |access-date=February 22, 2019 |work=Fintech}}</ref> * '''बुएट ड्रामा सोसाइटी:''' यह बुएट के प्रमुख सांस्कृतिक संगठनों में से एक है, जो नाट्य कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का काम करता है।<ref name="clubs" /> इन्होंने बंकिमचंद्र के 'कमलाकांतेर जबानबंदी' और अगाथा क्रिस्टी के 'द माउस ट्रैप' जैसे प्रसिद्ध नाटकों का मंचन किया है।<ref>{{cite web |title=Star Campus |url=https://archive.thedailystar.net/campus/2006/12/01/feature_BUET.htm |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Star Archive}}</ref><ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েট ড্রামা সোসাইটি মঞ্চে আনছে ‘দ্য মাউস ট্র্যাপ’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/iermh1wvrj |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट फिल्म सोसाइटी:''' यह फिल्म प्रेमी छात्रों का एक संगठन है जो स्वस्थ सिनेमाई चेतना विकसित करने और फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটে চলচ্চিত্র উৎসবে ‘আদিম’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/gmp25ivjdy |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''मूर्छना (Murchona):''' यह संगीत और वाद्ययंत्रों के विकास के लिए एक मंच है, जो वार्षिक सांस्कृतिक उत्सवों और संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-16 |language=bn |title=বাংলাদেশ প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়ের শাশ্বত সৌম্যর মূর্ছনা |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/মূর্ছনা |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट साहित्य संसद:''' यह रचनात्मक लेखन और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए काम करने वाला केंद्रीय संगठन है। * '''चारकोल - बुएट आर्टिस्ट्री सोसाइटी:''' यह स्केचिंग, सुलेख (Calligraphy) और शिल्प कला के अभ्यास को बढ़ावा देने वाला संगठन है। * '''कंठ्य (Kanthya):''' यह शुद्ध उच्चारण, सस्वर पाठ (Recitation) और प्रस्तुति कला (Presentation) के लिए समर्पित है। * '''ओरिगामी क्लब:''' यह कागज मोड़ने की कला के माध्यम से रचनात्मकता विकसित करने पर केंद्रित है। * '''बुएट फोटोग्राफिक सोसाइटी (BPS):''' यह फोटोग्राफी प्रेमियों का मंच है जो राष्ट्रीय फोटोग्राफी उत्सवों और कार्यशालाओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |date=2023-08-29 |language=en |title='Remembrance: 25 Years of BUET Photographic Society' |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/remembrance-25-years-buet-photographic-society-exhibition-showcases-extraordinary |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === अन्य संगठन === * '''पर्यावरण संगठन:''' एनवायरनमेंट वॉच (Environment Watch)। * '''खेल संगठन:''' बुएट चेस क्लब (Chess Club)। * '''मानवीय संगठन:''' [[बाधन]] (Badhan-BUET Zone), बुएट रोवर स्काउट। * '''करियर संगठन:''' बुएट करियर क्लब, बुएट डिबेटिंग क्लब, बुएट एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट क्लब। * '''बुएट मीडिया एंड कम्युनिकेशन क्लब:''' यह पहले 'बुएट पत्रकार संघ' के नाम से जाना जाता था, जिसे 2024 में भंग कर नए रूप में स्थापित किया गया। यह छात्रों के मीडिया और संचार कौशल को विकसित करने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটের ‘বিতর্কিত’ সাংবাদিক সমিতির কমিটি বিলুপ্ত |url=https://bangla.bdnews24.com/campus/y9cnpjmu62 |access-date=2026-03-07 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट ब्रेनिएक्स (BUET Brainiacs):''' यह क्विज और माइंड गेम्स के लिए लोकप्रिय क्लब है।<ref>{{cite web |last=নিউজ |first=সময় |language=bn |title=বুয়েট ব্রেইনিয়াক্সের ‘ন্যাশনাল কুইজ কম্পিটিশন’ |url=https://www.somoynews.tv/news/2023-08-24/XuCG6Dtu |access-date=2026-03-07 |website=Somoy News}}</ref> * '''बुएट सेल्फ डिफेंस क्लब:''' यह छात्रों को आत्मरक्षा (Karate & Judo) का प्रशिक्षण देता है। * '''हाउस ऑफ वॉलंटियर्स - बुएट:''' 2007 में एमआईटी (MIT) के बांग्लादेशी स्नातकों द्वारा शुरू किया गया, जिसकी पहली बांग्लादेशी शाखा 2009 में बुएट में शुरू हुई।<ref>{{cite web |date=2017-03-20 |language=en-US |title=Our Journey – House of Volunteers |url=https://houseofvolunteers.org/our-journey/ |access-date=2026-03-07}}</ref> <ref name="clubs">{{cite web |title=Clubs of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |publisher=BUET Official Website}}</ref> ==संदर्भ== <references /> [[Category:बांग्लादेश के विश्वविद्यालय]] [[Category:विश्वविद्यालय]] ojsquaqltwois0804hqjraylobhlpz2 6536620 6536616 2026-04-05T15:36:29Z अनुनाद सिंह 1634 6536620 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | image = BUET LOGO.svg | caption = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का लोगो | image_upright = | other_name = बुएट | former_name = ढाका सर्वे स्कूल (1876-1908) <br>अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग (1908-1947) <br>अहसानुल्लाह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, [[ढाका विश्वविद्यालय]] (1947-1962)<br> पूर्व पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1962-1971) <br> बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1971-2001) | image_size = 160px | name = बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी | established = 1876 (विश्वविद्यालय के रूप में: 1962) | type = [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय]] | chancellor = [[बांग्लादेश के राष्ट्रपति]] | vice_chancellor = [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] <ref>{{वेब उद्धरण|यूआरएल=https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|शीर्षक=बुएट के नए कुलपति|पहुंच-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-तिथि=12 सितंबर 2024|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20240912095843/https://thedailycampus.com/engineering-university/152890/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A7%81%E0%A6%A8-%E0%A6%AD%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A6%BF-%E0%A6%A1.-%E0%A6%8F-%E0%A6%AC%E0%A6%BF-%E0%A6%8F%E0%A6%AE-%E0%A6%AC%E0%A6%A6%E0%A6%B0%E0%A7%81%E0%A6%9C%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> | doctoral = | city = [[ढाका]] | province = [[ढाका विभाग|ढाका]] | country = [[बांग्लादेश]] | students = लगभग 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http://www.buet.ac.bd/about.html | शीर्षक = बुएट का इतिहास | पहुंच-तिथि = 29 अप्रैल 2007 | संग्रह-यूआरएल = https://web.archive.org/web/20070402100421/http://www.buet.ac.bd/about.html | संग्रह-तिथि = 2 अप्रैल 2007 | यूआरएल-स्थिति=निष्क्रिय }}</ref> तकनीकी शिक्षा के प्रसार के लिए 1876 में 'ढाका सर्वे स्कूल' के नाम से इसकी स्थापना की गयी थी। बाद में इसका नाम 'अहसानुल्लाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग' कर दिया गया और यह [[ढाका विश्वविद्यालय]] से सम्बद्ध था। 1962 में इसे तत्कालीन [[पूर्वी पाकिस्तान]] का चौथा विश्वविद्यालय बना दिया गया। बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद इसका नाम 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' कर दिया गया।<ref name="इतिहास">{{समाचार उद्धरण|यूआरएल=https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|शीर्षक=बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट)|तिथि=10 अगस्त 2012|पहुंच-तिथि=2 फरवरी 2021|भाषा=bn|वेबसाइट=कालेर कंठो|संग्रह-तिथि=25 जून 2022|संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20220625110452/https://www.kalerkantho.com/print-edition/tuntuntintin/2012/08/10/276902|यूआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == इतिहास == === प्रारंभिक चरण === [[File:Old building 1930.jpg|thumb|1930 में स्थापित बुएट का प्रशासनिक भवन]] बुएट की स्थापना 19वीं शताब्दी के अंत में सर्वेक्षकों के लिए एक सर्वेक्षण स्कूल के रूप में हुई थी। 1876 में तत्कालीन [[ब्रिटिश राज]] ने 'ढाका सर्वे स्कूल' नामक एक संस्थान शुरू किया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://doi.org/10.1080/03043797.2012.666515|শিরোনাম=Engineering education in Bangladesh – an indicator of economic development|শেষাংশ=Chowdhury|প্রথমাংশ=Harun|শেষাংশ২=Alam|প্রথমাংশ২=Firoz|তারিখ=2012-05-01|সাময়িকী=European Journal of Engineering Education|খণ্ড=37|সংখ্যা নং=2|পাতাসমূহ=217–228|ডিওআই=10.1080/03043797.2012.666515|issn=0304-3797}}</ref><ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|শিরোনাম=Celebrating 60 years of engineering education in Bangladesh (1947-2007)|তারিখ=৩১ ডিসেম্বর ২০০৭|সম্পাদক-শেষাংশ=Hafiz|সম্পাদক-প্রথমাংশ=Roxana|সম্পাদক-শেষাংশ২=Hoque|সম্পাদক-প্রথমাংশ২=Md. Mazharul|সাময়িকী=বুয়েট প্রকাশনা|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২৭ জুন ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220627055212/http://lib.buet.ac.bd:8080/xmlui/handle/123456789/47|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> इसका उद्देश्य उस समय के ब्रिटिश भारत के सरकारी कार्यों में भाग लेने वाले कर्मचारियों को [[तकनीकी शिक्षा]] प्रदान करना था। ढाका के तत्कालीन नवाब [[ख्वाजा अहसानुल्लाह]] इस विद्यालय में रुचि रखते थे और मुसलमानों की शिक्षा में प्रगति के लिए उन्होंने ढाका सर्वे स्कूल को इंजीनियरिंग स्कूल (वर्तमान में बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) में उन्नत करने की योजना को लागू करने के लिए 1 लाख 12 हजार रुपये देने का वादा किया था। उनके जीवनकाल में यह संभव नहीं हो सका। उनकी मृत्यु के बाद, उनके पुत्र नवाब सलीमुल्लाह ने 1902 में इस वादे को निभाया। उनके दान से बाद में यह एक पूर्ण इंजीनियरिंग स्कूल के रूप में विकसित हुआ और उनकी मान्यता में 1908 में इस संस्थान का नाम बदलकर 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल' कर दिया गया।<ref>{{सामয়িকী উদ্ধৃতি|ইউআরএল=http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|শিরোনাম=HISTORICAL EDIFICES OF RAMNA: A PROSPECTIVE HERITAGE ROUTE IN URBAN DHAKA|শেষাংশ=Farzana|প্রথমাংশ=Mir|শেষাংশ২=Fahmida|প্রথমাংশ২=Nusrat|তারিখ=মে ২০১৯|সাময়িকী=Proceedings of the International Conference on Urban Form and Social Context: from Traditions to Newest Demands|প্রকাশক=Siberian Federal University|ভাষা=en|আইএসবিএন=978-5-7638-4127-5|সংগ্রহের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-তারিখ=২২ আগস্ট ২০২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210822043859/http://elib.sfu-kras.ru/handle/2311/111684|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल ने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]] और [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]] विभागों में तीन साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू किया। शुरुआत में स्कूल की गतिविधियाँ एक किराए के भवन में चलती थीं। 1906 में सरकारी पहल पर [[ढाका विश्वविद्यालय]] के शहीदुल्लाह हॉल के पास इसका अपना भवन बनाया गया। 1912 में इसे इसके वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। प्रारंभ में यह स्कूल [[ढाका कॉलेज]] से संबद्ध था। बाद में इसे लोक शिक्षा निदेशक के अधीन संचालित किया जाने लगा। मिस्टर एंडरसन इसके पहले प्रधानाचार्य (Principal) नियुक्त किए गए। इसके बाद 1932 में श्री बी. सी. गुप्ता और 1938 में श्री हकीम अली प्रधानाचार्य नियुक्त हुए।<ref name=":0">{{বই উদ্ধৃতি|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২|শেষাংশ=মামুন|প্রথমাংশ=মুনতাসীর|প্রকাশক=নেপালচন্দ্র ঘোষ|বছর= ডিসেম্বর ১৯৯৬|আইএসবিএন=|অবস্থান=সাহিত্যলোক, ৩২/৭ বিডন স্ট্রীট, কলিকাতা, ৭০০০০৬|পাতাসমূহ=সার্ভে স্কুল থেকে প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়, পৃষ্ঠা- ২১৮ থেকে ২১৪}}</ref><ref>Government of India, Dacca Survey School, <u>''Proceedings,''</u> Home Ed. - 144-146A, May-1904.</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ইউআরএল=https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|শিরোনাম=ঢাকা সমগ্র ২ - মুনতাসীর মামুন|ওয়েবসাইট=Scribd|ভাষা=en|সংগ্রহের-তারিখ=2018-11-10|আর্কাইভের-তারিখ=২০২০-০৮-১৯|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20200819204437/https://www.scribd.com/document/173397280/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%97-%E0%A6%B0-%E0%A7%A8-%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%81%E0%A6%A8|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === द्वितीय विश्व युद्ध के बाद === [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद बंगाल के औद्योगिकीकरण के लिए तत्कालीन सरकार ने व्यापक योजनाएँ बनाईं। तब इस क्षेत्र में कुशल जनशक्ति की कमी देखी गई। तत्कालीन सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति ने मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में 4 साल के डिग्री कोर्स के लिए ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने और स्कूल को तत्कालीन पलाशी बैरक में स्थानांतरित करके सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 4 साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 480 छात्रों के प्रवेश की सिफारिश की। मई 1947 में सरकार ने ढाका में एक इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का निर्णय लिया और छात्रों के प्रवेश के लिए वर्तमान पश्चिम बंगाल के शिवपुर स्थित बंगाल इंजीनियरिंग कॉलेज और ढाका के अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल में परीक्षा आयोजित की गई।<ref name=":0"/> === विभाजन के बाद === 1947 के विभाजन के परिणामस्वरूप अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग स्कूल के कुछ ही शिक्षकों को छोड़कर बाकी सभी शिक्षक भारत चले गए और [[भारत]] से 5 शिक्षक इस स्कूल में शामिल हुए। अगस्त 1947 में इसे ढाका विश्वविद्यालय के तहत इंजीनियरिंग संकाय के रूप में 'अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज' में उन्नत किया गया।<ref name="ইতিহাস"/> श्री हकीम अली इसके प्रधानाचार्य नियुक्त हुए। फरवरी 1948 में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान सरकार ने इस कॉलेज को मंजूरी दी और इसने [[सिविल इंजीनियरिंग]], [[इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग]], [[मैकेनिकल इंजीनियरिंग]], [[केमिकल इंजीनियरिंग]], [[एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग]] और [[टेक्सटाइल इंजीनियरिंग]] विभागों में चार साल की बैचलर डिग्री और सिविल, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभागों में तीन साल का डिप्लोमा देना शुरू किया। हालांकि, अंततः एग्रीकल्चर और टेक्सटाइल के स्थान पर मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग को शामिल किया गया। 1956 में कॉलेज में सेमेस्टर प्रणाली शुरू हुई और नया पाठ्यक्रम अनुमोदित किया गया। 1957 में डिग्री कोर्स में सीटों की संख्या 120 से बढ़ाकर 240 कर दी गई। 1958 में कॉलेज से डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिया गया। इस बीच, 1951 में टी. एच. मैथ्यूमैन और 1954 में डॉ. एम. ए. रशीद कॉलेज के प्रधानाचार्य बने। इस दौरान 'एग्रीकल्चरल एंड मैकेनिकल कॉलेज ऑफ टेक्सास' (वर्तमान विश्वविद्यालय) और अहसानुल्लाह कॉलेज के बीच एक संयुक्त प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप वहां के प्रोफेसरों ने यहां आकर शिक्षण मानकों, प्रयोगशालाओं और पाठ्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षकों के कौशल विकास के लिए कुछ शिक्षकों को स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए [[टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी|टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज]] भेजा गया। इस समय एशिया फाउंडेशन ने लाइब्रेरी को कुछ आवश्यक पुस्तकें दान कीं और 'रेंटल लाइब्रेरी' प्रणाली शुरू की गई। कॉलेज के समय छात्रों के लिए केवल दो छात्रावास थे: मेन हॉस्टल (वर्तमान डॉ. एम. ए. रशीद भवन) और साउथ हॉस्टल (वर्तमान नज़रुल इस्लाम हॉल)। === इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के रूप में === [[चित्र:Reg building.JPG|thumb|140px|left|डॉ. एम. ए. रशीद भवन]] पाकिस्तान काल के दौरान 1 जून 1962 को इसे एक पूर्ण इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय में बदल दिया गया और इसका नाम 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (East Pakistan University of Engineering and Technology, या EPUET) रखा गया।<ref>{{Citation |last = পাবলো |first = ফুয়াদ |year = ২০২১ |title = পুয়েট, হতাশার মোড়, বিচ্ছেদ পয়েন্ট এবং অন্যান্য... |publisher = প্রথম আলো |publication-place = |page = |url = https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |access-date = February 26, 2025 |আর্কাইভের-তারিখ = মে ২, ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল = https://web.archive.org/web/20250502231055/https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B9%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B6%E0%A6%BE%E0%A6%B0-%E0%A6%AE%E0%A7%8B%E0%A7%9C-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87%E0%A6%A6-%E0%A6%AA%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F-%E0%A6%8F%E0%A6%AC%E0%A6%82-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF |ইউআরএল-অবস্থা = কার্যকর }}</ref><ref>{{Citation | last = | first = | year = | title = Self-Portrayal | publisher = অফিসিয়াল ওয়েবসাইট | publication-place = | page = | url = https://www.buet.ac.bd/web/#/about/1 | access-date = February 26, 2025 | আর্কাইভের-তারিখ = আগস্ট ২, ২০২১ | আর্কাইভের-ইউআরএল = https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/about/1 | ইউআরএল-অবস্থা = কার্যকর }}</ref> तत्कालीन तकनीकी शिक्षा निदेशक डॉ. एम. ए. रशीद पहले कुलपति (Vice Chancellor) नियुक्त हुए। प्रोफेसर ए. एम. अहमद इंजीनियरिंग संकाय के पहले डीन नियुक्त हुए। प्रसिद्ध गणितज्ञ एम. ए. जब्बार पहले रजिस्ट्रार और मुमताज़ुद्दीन अहमद पहले कॉम्पट्र्रोलर नियुक्त हुए। डॉ. एम. ए. रशीद के कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय एक मजबूत नींव पर स्थापित हुआ। एक विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित होने के बाद, छात्रों के लिए तीन नए आवासीय हॉल बनाए गए। प्रोफेसर कबीरउद्दीन अहमद पहले छात्र कल्याण निदेशक नियुक्त हुए। 1962 में ही [[आर्किटेक्चर]] और योजना संकाय के तहत आर्किटेक्चर विभाग का गठन किया गया, इस विभाग के लिए टेक्सास ए. एंड एम. कॉलेज के कुछ शिक्षक शामिल हुए। इस प्रकार इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर के दो संकायों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर विभागों के साथ इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय की यात्रा शुरू हुई। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 1964 में सीटों की संख्या 240 से बढ़ाकर 360 कर दी गई। उसी वर्ष वर्तमान 7 मंजिला सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण शुरू हुआ। 1969-70 में सीटों की संख्या बढ़ाकर 420 कर दी गई। इस समय आर्किटेक्चर और योजना संकाय में 'फिजिकल प्लानिंग' नामक एक नया विभाग शुरू किया गया, जो बाद में 'नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन' (Urban and Regional Planning) विभाग में बदल गया।<ref> {{Citation | last = আজম | first = আলী | year = 2019 | title = ইপুয়েট থেকে আজকের বুয়েট | publisher = সময়ের আলো | publication-place = | page = | url =https://www.shomoyeralo.com/news/68167 | access-date = February 26, 2025 }} </ref> === स्वतंत्रता के बाद === 1971 में बांग्लादेश के [[बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम|स्वतंत्रता संग्राम]] के बाद इसका नाम बदलकर 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' रखा गया।<ref name="ইতিহাস"/> बाद में 2003 में इसे संक्षिप्त रूप में 'बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' के रूप में ही मान्यता दी गई।{{cn|date=14 जुलाई 2023}} == कुलपतियों की सूची == {| class="wikitable" |+ बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कुलपतियों की सूची ! क्र. सं. !! नाम !! कार्यकाल |- | 1 || [[एम ए रशीद]] || 1 जून 1962 – 16 मार्च 1970 |- | 2 || [[मोहम्मद अबू नासेर]] || 16 मार्च 1970 – 25 अप्रैल 1975 |- | 3 || [[वाहिदुद्दीन अहमद]] || 25 अप्रैल 1975 – 24 अप्रैल 1983 |- | 4 || [[अब्दुल मतीन पाटोवारी]] || 24 अप्रैल 1983 – 25 अप्रैल 1987 |- | 5 || [[मुशर्रफ हुसैन खान (अकादमिक)|मुशर्रफ हुसैन खान]] || 25 अप्रैल 1987 – 24 अप्रैल 1991 |- | 6 || [[मुहम्मद शाहजहाँ]] || 24 अप्रैल 1991 – 27 नवंबर 1996 |- | 7 || [[इकबाल महमूद]] || 27 नवंबर 1996 – 14 अक्टूबर 1998 |- | 8 || [[नूरुद्दीन अहमद]] || 14 अक्टूबर 1998 – 30 अगस्त 2002 |- | 9 || [[मोहम्मद अली मुर्तुजा]] || 30 अगस्त 2002 – 29 अगस्त 2006 |- | 10 || [[ए एम एम सफीउल्लाह]] || 30 अगस्त 2006 – 29 अगस्त 2010 |- | 11 || [[एस एम नजरूल इस्लाम]] || 30 अगस्त 2010 – 13 सितंबर 2014 |- | 12 || [[खालिदा एकराम]] || 14 सितंबर 2014 – 24 मई 2016 |- | 13 || [[सैफुल इस्लाम (अकादमिक)|सैफुल इस्लाम]] || 22 जून 2016 – 23 जून 2020 |- | 14 || [[सत्य प्रसाद मजुमदार]]<ref name="ভিসি২০২০">{{समाचार उद्धरण | शीर्षक=बुएट के नए कुलपति सत्य प्रसाद मजुमदार | लेखक=<!--स्टाफ लेखक--> | यूआरएल=https://banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | समाचार पत्र=बांग्लान्यूज24 | तिथि=25 जून 2020 | पहुंच-तिथि=25 जून 2020 | संग्रह-तिथि=26 जून 2020 | संग्रह-यूआरएल=https://web.archive.org/web/20200626012106/https://www.banglanews24.com/national/news/bd/796252.details | यूआरएल-स्थिति=सक्रिय }}</ref> || 25 जून 2020 – 18 अगस्त 2024 |- | 15 || [[अबू बोरहान मोहम्मद बदरुज्जमां]] || 12 सितंबर 2024 – वर्तमान |} == कैंपस == [[File:BUET main gate 3.jpg|right|thumb|बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का प्रवेश द्वार]] बुएट कैंपस [[ढाका]] के पलाशी क्षेत्र में स्थित है। [[बुएट]], [[ढाका विश्वविद्यालय]] और [[ढाका मेडिकल कॉलेज]] एक ही नवाब द्वारा दान की गई भूमि पर विकसित हुए हैं, इसलिए ये एक-दूसरे के बगल में स्थित हैं। कैंपस के पश्चिमी हिस्से में ईईई (EEE), सीएससी (CSE) और बीएमई (BME) विभागों के लिए 12-मंजिला ईसीई (ECE) भवन बनाया गया है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=শিকদার শুভ|প্রথমাংশ=সৌমেন|তারিখ=১০ মে ২০২০|শিরোনাম=স্মৃতিতে বুয়েটের দিনগুলো|ইউআরএল=https://www.risingbd.com/campus-news/349647|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-24|ওয়েবসাইট=Risingbd Online Bangla News Portal|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০३-২৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250324123125/https://www.risingbd.com/campus-news/349647}}</ref> हालांकि, कैंपस के मुख्य भाग में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, यूआरपी (URP) भवनों के साथ-साथ डॉ. रशीद एकेडमिक भवन स्थित है। छात्रों के आवासीय हॉल शैक्षणिक भवनों से पैदल दूरी पर स्थित हैं। वर्तमान में कैंपस का क्षेत्रफल 76.85 एकड़ (311,000 वर्ग मीटर) है। == प्रवेश प्रक्रिया == === स्नातक === बुएट की स्नातक प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति द्वारा केंद्रीय रूप से संचालित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को [[बांग्लादेश]] की सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में से एक माना जाता है। बुएट में स्नातक स्तर पर प्रवेश, ग्रेड और परीक्षा के परिणामों के आधार पर निर्धारित किया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया में पाठ्येतर गतिविधियों (extracurricular activities) या वित्तीय आवश्यकताओं पर विचार नहीं किया जाता है। स्नातक प्रवेश परीक्षा एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी लिखित परीक्षा है। [[उच्च माध्यमिक प्रमाणपत्र|उच्च माध्यमिक स्तर]] (एचएससी) की शिक्षा पूरी करने के बाद, यदि कोई छात्र न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करता है, तो वह स्नातक प्रवेश के लिए आवेदन जमा कर सकता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-01-27|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েট ভর্তি পরীক্ষার আবেদন যেভাবে করবেন|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231358/https://www.prothomalo.com/education/admission/pb7pxpo5r1|ইউআরएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> पहले केवल लिखित परीक्षा के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिया जाता था, लेकिन वर्तमान में इस प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। वर्तमान में छात्रों का चयन दो चरणों में किया जाता है। प्रारंभिक रूप से, आवेदन की शर्तों के अनुसार न्यूनतम योग्य उम्मीदवारों के लिए एक प्रारंभिक छंटनी परीक्षा (preliminary screening test) आयोजित की जाती है। इस परीक्षा से चयनित छात्रों को मुख्य लिखित परीक्षा के माध्यम से प्रवेश का अवसर प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-12-01|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে ভর্তিতে আবেদন শুরু, পরীক্ষার নম্বর–আসন কত, দেখুন গুরুত্বপূর্ণ তারিখ ও সময়|ইউআরएल=https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250502231221/https://www.prothomalo.com/education/admission/7zp7d2yfo3|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> === स्नातकोत्तर === मास्टर्स और पीएचडी कार्यक्रमों में हर साल लगभग 1,000 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को साक्षात्कार (interview) और/या लिखित परीक्षा में भाग लेना होता है। विभिन्न विभागों और संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्रियाँ इस प्रकार हैं: एमएससी (मास्टर ऑफ साइंस), एमएससी इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ साइंस इन इंजीनियरिंग), एम. इंजीनियरिंग (मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग), एमयूआरपी (मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग), एम.आर्क (मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर), एम.फिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) और पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी)। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और जल संसाधन विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजी डिप.) भी प्रदान किया जाता है।<ref>{{वेब उद्धरण|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2024-07-11|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটে মাস্টার্স, এমফিল ও পিএইচডি প্রোগ্রামে ভর্তি, আবেদন ফি ৫০৫ টাকা|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218234014/https://www.prothomalo.com/education/admission/0lq3ouy0la|ইউआरएल-स्थिति=सक्रिय}}</ref> == संकाय और विभाग == [[चित्र:BUET EME Building.jpg|thumb|बुएट का एम.ई. (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) भवन]] [[चित्र:Civil Engineering Building of BUET seen from EME Building.JPG|thumb|सिविल इंजीनियरिंग भवन]] [[File:Ece buliding.jpg|thumb|बुएट ईसीई (ECE) भवन]] [[File:Architecture building .jpg|thumb|बुएट आर्किटेक्चर भवन]] बुएट में वर्तमान में 6 संकायों के अंतर्गत 18 विभाग हैं। === केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय === ==== केमिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का केमिकल इंजीनियरिंग विभाग [[दक्षिण एशिया]] के सबसे पुराने केमिकल इंजीनियरिंग विभागों में से एक है। 1952 में यहाँ से पहले पांच केमिकल इंजीनियरिंग छात्रों ने स्नातक किया था। यह विभाग अब केमिकल इंजीनियरिंग में बीएससी, एमएससी और पीएचडी की डिग्री प्रदान करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Our History: Department of Chemical Engineering|ইউআরএল=https://che.buet.ac.bd/our-history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में हर साल साठ और स्नातकोत्तर कार्यक्रम में पंद्रह छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस विभाग के पाठ्यक्रम आधुनिक केमिकल इंजीनियरिंग शिक्षा की अवधारणाओं पर आधारित हैं, और देश की औद्योगिक आवश्यकताओं पर पर्याप्त जोर दिया जाता है। ==== मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शिक्षा प्रदान करने वाला एकमात्र विभाग है। इसकी स्थापना 1952 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग के रूप में हुई थी। विभाग का लक्ष्य मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और संबंधित विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करना और घरेलू कच्चे माल के उपयोग पर अनुसंधान के अवसर पैदा करना था।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|ওয়েবসাইট=Department of Materials and Metallurgical Engineering}}</ref> बाद में, सिरेमिक, पॉलिमर और कंपोजिट जैसे गैर-धात्विक सामग्रियों के महत्व को देखते हुए इस विभाग ने अपने पाठ्यक्रम में बदलाव किया। 18 मार्च 1997 को बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने इसका नाम बदलकर "मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग" (MME) कर दिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About us: MME BUET|ইউআরএল=https://mme.buet.ac.bd/about-us/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250304084732/https://mme.buet.ac.bd/about-us/}}</ref> वर्तमान में यह विभाग चार साल के स्नातक कार्यक्रम में हर साल 40 छात्रों को प्रवेश देता है और स्नातकोत्तर (मास्टर्स और पीएचडी) पाठ्यक्रम संचालित करता है। ==== नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) के इस विभाग का नाम 2022 में "ग्लास एंड सिरेमिक इंजीनियरिंग" से बदलकर "नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग" कर दिया गया। यह पर्यावरण, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्नातकों को तैयार करने का कार्य करता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About the Department |ইউআরএল=https://nce.buet.ac.bd/about/ |ওয়েবসাইট=Department of Nanomaterials and Ceramic Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET)}}</ref> ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग ==== पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग बांग्लादेश में पेट्रोलियम और खनिज संसाधन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला पहला विश्वविद्यालय-स्तरीय कार्यक्रम है। वर्तमान में यह केवल स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। विभाग की स्थापना 1992 में बुएट और यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के सहयोग से की गई थी, जिसे कैनेडियन इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसी (CIDA) द्वारा वित्तपोषित किया गया था। बुएट की एकेडमिक काउंसिल ने 5 नवंबर 1990 को इसे मंजूरी दी और 1995 में शैक्षणिक गतिविधियाँ शुरू हुईं।<ref name=pmre/> यह विभाग दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों और संस्थानों के सहयोग से निरंतर उन्नत हो रहा है। इसके सहयोगियों में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU), USAID, CIDA और टेक्सास का 'सेंटर फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स' (CEE) शामिल हैं।<ref name=pmre>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About Us |ইউআরএল=https://pmre.buet.ac.bd/about-us |ওয়েবসাইট=Department of Petroleum and Mineral Resources Engineering |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering & Technology |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-তারিখ=১ মার্চ ২০২৫ |আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250301214820/http://pmre.buet.ac.bd/about-us |ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর }}</ref> === मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय === ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग यहाँ के सबसे पुराने और बड़े विभागों में से एक है। इसकी शुरुआत 1947 में तत्कालीन अहसानुल्लाह इंजीनियरिंग कॉलेज में चार साल के स्नातक कार्यक्रम के रूप में हुई थी। अब तक इस विभाग से 4166 छात्रों ने बीएससी इंजीनियरिंग (मैकेनिकल), 201 छात्रों ने एमएससी/एम.इंजीनियरिंग और 16 छात्रों ने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=History {{!}} Department of Mechanical Engineering, BUET|ইউআরএল=https://me.buet.ac.bd/history|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=me.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-০৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250208091311/http://me.buet.ac.bd/history|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> स्नातक कार्यक्रम में तरल और तापीय ऊर्जा प्रणाली (fluid and thermal power systems), तापीय ऊर्जा का अन्य ऊर्जा में रूपांतरण, मशीनों और यांत्रिक प्रणालियों के डिजाइन और नियंत्रण पर जोर दिया जाता है। ==== इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में 1981 में स्नातकोत्तर स्तर पर इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग (IPE) विभाग शुरू किया गया था। उस समय केवल स्नातकोत्तर स्तर पर छात्रों को प्रवेश दिया जाता था। औद्योगिक क्षेत्र में प्रबंधन के कुशल इंजीनियर तैयार करने के लिए 1997 से इस विभाग ने स्नातक स्तर पर 20 छात्रों को प्रवेश देना शुरू किया। बाद में, विभिन्न उद्योगों में आईपे (IPE) स्नातकों की बढ़ती मांग के कारण छात्रों की संख्या चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई गई—पहले 30, फिर 2017-18 सत्र में 50 और 2020-21 सत्र में यह संख्या 120 तक पहुँच गई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি |শিরোনাম=About |ইউআরএল=https://ipe.buet.ac.bd/page/about |ওয়েবসাইট=Industrial and Production Engineering. |প্রকাশক=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |সংগ্রহের-তারিখ=৪ মার্চ ২০২৫}}</ref> ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ==== नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग ने 1971 में अपनी यात्रा शुरू की थी। इस विभाग का अध्ययन जहाजों या तैरती हुई संरचनाओं के निर्माण से लेकर समुद्र से विभिन्न संसाधनों के दोहन की संभावनाओं तक फैला हुआ है। इस विभाग के स्नातक स्तर पर जहाजों की आकृति, शक्ति, स्थिरता, समुद्र में चलने की क्षमता, प्रतिरोध और संचालन, डिजाइन और परिचालन लागत के साथ-साथ मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल इंजीनियरिंग और धातु विज्ञान (Metallurgy) के विषय पढ़ाए जाते हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About NAME - Department of Naval Architecture and Marine Engineering, BUET|ইউআরএল=https://name.buet.ac.bd/about|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-06|ওয়েবসাইট=name.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250214113408/https://name.buet.ac.bd/about|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> === सिविल इंजीनियरिंग संकाय === ==== सिविल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) में सिविल इंजीनियरिंग संकाय 1980 में शुरू हुआ था। यह देश में [[सिविल इंजीनियरिंग]] शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में से एक है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर अध्ययन के अवसर उपलब्ध हैं। हर साल इस विभाग में स्नातक स्तर पर 195 नए छात्र और स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर 200 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=en-US|শিরোনাম=HOME|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২১-০৭-২৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20210723230356/https://ce.buet.ac.bd/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> यहाँ स्ट्रक्चरल एनालिसिस, भूकंप इंजीनियरिंग और पर्यावरण इंजीनियरिंग पर शोध कार्य किया जाता है। सिविल इंजीनियरिंग भवन का निर्माण 1968 में हुआ था, 1992 में इसका विस्तार किया गया और 1996 में भवन की सातवीं मंजिल पूरी हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=History|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/history/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২০|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250420005317/https://ce.buet.ac.bd/history/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अप्रैल 2021 में बुएट अधिकारियों ने सिविल इंजीनियरिंग भवन का नाम दिवंगत राष्ट्रीय प्रोफेसर [[जामिलुर रजा चौधरी|डॉ. जामिलुर रजा चौधरी]] के नाम पर रखने का निर्णय लिया।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=প্রতিবেদক|প্রথমাংশ=নিজস্ব|তারিখ=2021-04-20|ভাষা=bn|শিরোনাম=ড. জামিলুর রেজা চৌধুরীর নামে বুয়েটের পুরকৌশল ভবনের নামকরণ|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/%E0%A6%A1-%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%81%E0%A6%B0-%E0%A6%B0%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A6%BE-%E0%A6%9A%E0%A7%8C%E0%A6%A7%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A6%95%E0%A7%8C%E0%A6%B6%E0%A6%B2-%E0%A6%AD%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A8%E0%A6%BE%E0%A6%AE%E0%A6%95%E0%A6%B0%E0%A6%A3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো}}</ref> बांग्लादेश में सिविल इंजीनियर राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, जैसे पुल और जलविद्युत केंद्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस विभाग का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए नवाचार और उत्कृष्टता प्राप्त करना है।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Mission & Vision|ইউআরএল=https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=Department of Civil Engineering, BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250115001034/https://ce.buet.ac.bd/mission-vision/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग ==== वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग (जल संसाधन इंजीनियरिंग) विभाग की स्थापना 1974 में हुई थी।<ref name=":4">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=WRE {{!}} About Us|ইউআরএল=https://wre.buet.ac.bd/about-us.html|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=wre.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-০২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250302152817/http://wre.buet.ac.bd/about-us.html|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> 1980 में सिविल इंजीनियरिंग संकाय के गठन के समय यह इसके दो मुख्य विभागों में से एक बन गया। यह विभाग सिविल इंजीनियरिंग भवन की छठी मंजिल पर स्थित है। विभाग स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान करता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 150 स्नातक और 70 स्नातकोत्तर छात्र हैं। इसका लक्ष्य देश और क्षेत्र के जल और संबंधित संसाधनों के सतत विकास और प्रबंधन की बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम इंजीनियर तैयार करना है, जिसमें पेशेवर अभ्यास, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों और पर्यावरणीय पहलुओं पर विचार किया जाता है।<ref name=":4" /> === इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय === ==== इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग ==== 1948 में स्थापित यह विभाग बांग्लादेश का सबसे पुराना [[इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग]] शिक्षा विभाग है।<ref name=":2">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=About EEE {{!}} Department of EEE, BUET|ইউআরএল=https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=eee.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০২-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250218185150/https://eee.buet.ac.bd/about/about-eee|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর}}</ref> समय के साथ निरंतर बदलावों के माध्यम से यह आज भी देश की इंजीनियरिंग शिक्षा के शीर्ष पर बना हुआ है। इस विभाग के छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स, संचार प्रणालियों, सिग्नल प्रोसेसिंग और बिजली प्रणालियों के मुख्य विषयों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों के बारे में पढ़ाया जाता है। यहाँ 43 पीएचडी-धारक शिक्षक हैं, जिन्होंने दुनिया के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा प्राप्त की है।<ref name=":2" /> चौथी औद्योगिक क्रांति की सहायक प्रौद्योगिकियों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, एम्बेडेड सिस्टम) के नवाचार और अनुसंधान में इस विभाग के शिक्षक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। ==== कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग ==== यह विभाग 1984 में स्थापित किया गया था। बुएट का यह विभाग बांग्लादेश में [[कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग]] शिक्षा का अग्रणी संस्थान है। यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्री प्रदान की जाती है। पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखने के लिए इसे नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। इसके अलावा, इस विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कंप्यूटिंग में विशेष स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिनका विस्तार बांग्लादेश शिक्षा मंत्रालय और एशियाई विकास बैंक (ADB) की सहायता से किया जा रहा है। वर्तमान में यहाँ लगभग 700 स्नातक और 400 स्नातकोत्तर छात्र अध्ययन कर रहे हैं। इस विभाग के कई पूर्व छात्र मिशिगन (एन आर्बर), कोलंबिया, टोरंटो, मोनाश जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं और [[गूगल]], [[माइक्रोसॉफ्ट]], [[एप्पल]], [[एनवीडिया]] जैसी शीर्ष कंपनियों में कार्यरत हैं। कई छात्रों ने देश-विदेश में उद्यमी (entrepreneur) के रूप में भी काम शुरू किया है। विभाग में आईओटी (IoT) प्रयोगशाला, वायरलेस नेटवर्क प्रयोगशाला, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और [[रोबोटिक्स]] प्रयोगशाला, और सैमसंग मशीन लर्निंग प्रयोगशाला<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Samsung R&D funded CSE BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312075801/https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/168|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of CSE, BUET|ইউআরএল=https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=cse.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৩-১২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250312105704/https://cse.buet.ac.bd/home/aboutus|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ==== बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बुएट) का बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग जनवरी 2016 में 30 स्नातक छात्रों के साथ शुरू हुआ था।<ref name=":3">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en-US|শিরোনাম=Head's Message|ইউআরএল=https://bme.buet.ac.bd/head-message/|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-07|ওয়েবসাইট=Biomedical Engineering {{!}} BUET|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৪-২৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250428223446/https://bme.buet.ac.bd/head-message/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> अब हर साल 50 स्नातक और 40 स्नातकोत्तर छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है।<ref name=":3" /> इस विभाग का उद्देश्य डिजाइन, विकास और अनुसंधान के माध्यम से देश की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करना और छात्रों को इस नए क्षेत्र में कुशल बनाना है। === आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय === ==== आर्किटेक्चर विभाग ==== [[File:Dept. of Architecture.jpg|thumb|आर्किटेक्चर भवन के ऊपर से लिया गया प्लिंथ का दृश्य]] बुएट का आर्किटेक्चर विभाग दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में वास्तुकला शिक्षा के अग्रणी संस्थानों में से एक है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी। तत्कालीन 'ईस्ट पाकिस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी' (EPUET) में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में इसका विकास हुआ। अमेरिका की टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएस-एड (USAID) के तकनीकी सहयोग से पांच साल का बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसकी शुरुआत केवल एक विदेशी शिक्षक और पांच छात्रों के साथ हुई थी। बाद में और विदेशी शिक्षक जुड़े, और स्थानीय स्नातकों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया।<ref name=":5">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শিরোনাম=Department of Architecture|ইউআরএল=https://arch.buet.ac.bd/department|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=arch.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০১-১৮|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250118033043/https://arch.buet.ac.bd/department|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> वर्षों के साथ छात्रों के प्रवेश की संख्या 5 से बढ़कर 55 हो गई है। यहाँ से ऐसे वास्तुकार (Architects) तैयार हो रहे हैं, जिन्होंने देश, क्षेत्र और दुनिया में नाम कमाया है। रिचर्ड ई. व्रूमैन, डैनियल सी. डनहम, लुई आई. कान, पॉल रूडोल्फ, स्टेनली टाइगरमैन, मज़हरुल इस्लाम और फजलुर रहमान खान जैसे प्रसिद्ध शिक्षकों के शुरुआती मार्गदर्शन ने इस सफलता की नींव रखी है।<ref name=":5" /> यहाँ के शिक्षकों और पूर्व छात्रों ने 'आगा खान वास्तुकला पुरस्कार', 'दक्षिण एशियाई वास्तुकार वर्ष पुरस्कार' और 'बांग्लादेश वास्तुकार संस्थान डिजाइन पुरस्कार' जैसे राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|তারিখ=২০২৪-০৪-১৮|শিরোনাম=যে কারণে টাইমের প্রভাবশালীর তালিকায় মেরিনা তাবাশু‍্যম|ইউআরএল=https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=সকাল সন্ধ্যা|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503005903/https://www.shokalshondha.com/bangladeshi-architect-marina-in-time-100-influential-list/}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=লেখা|তারিখ=2022-12-04|ভাষা=bn|শিরোনাম=ভবিষ্যতের স্থপতির পুরস্কার বুয়েট, চুয়েট, ইউএপির শিক্ষার্থীর|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৪-০৭-১৪|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20240714102140/https://www.prothomalo.com/lifestyle/1fra5h6ewf|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=বিজ্ঞপ্তি|তারিখ=2024-03-03|ভাষা=bn|শিরোনাম=বুয়েটের তরুণ স্থপতিদের পুরস্কৃত করল বার্জার|ইউআরএল=https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=দৈনিক প্রথম আলো|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৩|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250503180846/https://www.prothomalo.com/bangladesh/upqp43boq3|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref><ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|শেষাংশ=SAMAKAL|ভাষা=en|শিরোনাম=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|ইউআরএল=https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-08|ওয়েবসাইট=তালিকায় বাংলাদেশের দুই স্থাপত্য|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৫-০৫-০৫|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20250505085306/https://samakal.com/index.php/feature/article/118946/%E0%A6%A4%E0%A6%BE%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A6%BE%E0%A7%9F-%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%A6%E0%A7%81%E0%A6%87-%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A5%E0%A6%BE%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%AF|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> ==== अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग ==== बुएट का यह विभाग 1962 में आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय के एक हिस्से के रूप में स्थापित किया गया था। यह बांग्लादेश में नियोजन (Planning) से संबंधित सबसे पुराना और सबसे बड़ा डिग्री प्रोग्राम है। प्रारंभ में, आर्किटेक्चर विभाग के शिक्षक ही इसके पाठ्यक्रम पढ़ाते थे। बाद में, 1968 में दो स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति के साथ दो साल का 'मास्टर ऑफ फिजिकल प्लानिंग' (MPP) कार्यक्रम शुरू हुआ। हालांकि, बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के कारण, छात्रों के पहले बैच ने 1972 में अपनी स्नातक की डिग्री प्राप्त की।<ref name=":6">{{ওয়েব উদ্ধৃতি|ভাষা=en|শিরোনাম=BUET:URP Website|ইউআরএল=https://urp.buet.ac.bd/Web/History|সংগ্রহের-তারিখ=2025-03-26|ওয়েবসাইট=urp.buet.ac.bd|আর্কাইভের-তারিখ=২০২৬-০১-২১|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20260121105540/https://urp.buet.ac.bd/Web/History|ইউআরএল-অবস্থা=কার্যকর}}</ref> संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने विभिन्न तरीकों से इस विभाग की सहायता की, जिसमें विदेशों से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था भी शामिल थी। 1975 में MPP कार्यक्रम का नाम बदलकर 'मास्टर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (MURP) कर दिया गया। इसके बाद, 1978 और 1979 के MURP बैच बुएट-शेफील्ड सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा बने, जिससे छात्रों को बुएट और यूके की शेफील्ड यूनिवर्सिटी से संयुक्त डिग्री प्राप्त हुई।<ref>{{ওয়েব উদ্ধৃতি|প্রকাশনার-তারিখ=2017|শিরোনাম=Research on “Activities of Urban Development Directorate (UDD) since 1965”|ইউআরএল=https://udd.portal.gov.bd/sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf|ইউআরএল-অবস্থা=অকার্যকর|ওয়েবসাইট=Urban Development Directorate (UDD)|উক্তি=BUET-Sheffield Joint Master’s Degree Program-An Approach to Physical Upgrading of a Low Income Community, Dhaka, Bangladesh,1979.|সংগ্রহের-তারিখ=২৬ মার্চ ২০২৫|আর্কাইভের-তারিখ=৪ আগস্ট ২০২২|আর্কাইভের-ইউআরএল=https://web.archive.org/web/20220804201644/https://udd.portal.gov.bd//sites/default/files/files/udd.portal.gov.bd/publications/f44d9fd4_69b1_4635_b99b_1caee4d500ae/Research.pdf}}</ref> बाद में 1995 में 'बैचलर ऑफ अर्बन एंड रीजनल प्लानिंग' (BURP) और पीएचडी कार्यक्रम शुरू किए गए।<ref name=":6" /> संकाय, विभाग और उनके अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या की सूची: {| class="prettytable" style="width:45em;" |- style="background-color:#E1D297;font-weight:bold" ! संकाय का नाम ! विभाग ! संक्षिप्त नाम ! प्रवेशित छात्रों की संख्या |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="4" | केमिकल एंड मैटेरियल्स इंजीनियरिंग संकाय | केमिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''Ch.E'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | मैटेरियल्स और मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''MME'' | 60 |- style="background-color:#DADADA" | नैनोमटीरियल्स और सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NCE'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | पेट्रोलियम और खनिज संसाधन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''PMRE'' | - |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | विज्ञान संकाय | रसायन विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Chem'' | - |- style="background-color:#eef" | गणित विभाग | style="text-align:center;" | ''Math'' | - |- style="background-color:#eef" | भौतिक विज्ञान विभाग | style="text-align:center;" | ''Phys'' | - |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="2" | सिविल इंजीनियरिंग संकाय | सिविल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | वॉटर रिसोर्स इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''WRE'' | 30 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय | मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''ME'' | 180 |- style="background-color:#eef" | नेवल आर्किटेक्चर और मरीन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''NAME'' | 55 |- style="background-color:#eef" | इंडस्ट्रियल और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''IPE'' | 120 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="3" | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग संकाय | इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''EEE'' | 195 |- style="background-color:#DADADA" | कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''CSE'' | 180 |- style="background-color:#DADADA" | बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''BME'' | 50 |- style="background-color:#eef" | rowspan="3" | आर्किटेक्चर और प्लानिंग संकाय | आर्किटेक्चर विभाग | style="text-align:center;" | ''Arch.'' | 60 |- style="background-color:#eef" | मानविकी विभाग | style="text-align:center;" | ''Hum'' | - |- style="background-color:#eef" | अर्बन और रीजनल प्लानिंग विभाग | style="text-align:center;" | ''URP'' | 30 |- style="background-color:#DADADA" | rowspan="1" | कुल संकाय: 6 | colspan="2" | कुल विभाग: 18 | कुल प्रवेशित छात्र: 1305 |- |} == अनुसंधान == === अनुसंधान केंद्र और प्रयोगशालाएं === प्रयोगात्मक और व्यावहारिक अनुसंधान के साथ-साथ गणितीय विश्लेषण के लिए बुएट में 100 से अधिक उन्नत अनुसंधान केंद्र और विभागीय प्रयोगशालाएं हैं। इन सबका मुख्य केंद्र ‘रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग’ (RISE) है<ref>{{cite web |title=RISE-HOME |url=https://rise.buet.ac.bd/#/ |access-date=2026-03-04 |website=rise.buet.ac.bd}}</ref>, जो मुख्य रूप से आंतरिक अनुसंधान अनुदान, नवाचार कार्यक्रमों, उद्योग-संबद्ध भागीदारी और प्रकाशन प्रोत्साहन जैसे मामलों का समन्वय करता है। अन्य उल्लेखनीय केंद्रों में सेंटर फॉर एनर्जी स्टडीज (CES), सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (CERM), और अत्याधुनिक ‘जाइस’ (ZEISS) लैब से सुसज्जित बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर (BEC) शामिल हैं।<ref>{{cite web |language=en |title=Buet opens biomedical research lab |url=https://www.thedailystar.net/health/news/buet-opens-biomedical-research-lab-3277881 |access-date=2026-03-04 |website=www.thedailystar.net}}</ref> इसके अलावा तकनीकी सेवाओं और परामर्श के लिए ‘ब्यूरो ऑफ रिसर्च, टेस्टिंग एंड कंसल्टेशन’ (BRTC) कार्यरत है। इसके साथ ही इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (IWFM), इंस्टीट्यूट ऑफ रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (IRAB) और इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (IESD) जैसे विशेष संस्थान भी सक्रिय हैं।<ref>{{cite web |title=BUET’s ICS testing lab gets IDCOL support |url=https://www.newagebd.net/post/mis/280462/buets-ics-testing-lab-gets-idcol-support |url-status=active |website=New Age}}</ref> ये केंद्र और लैब मुख्य रूप से चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों (जैसे: एआई, रोबोटिक्स, आईओटी), सतत ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और बायोमेडिकल क्षेत्र के अनुसंधान में नेतृत्व कर रहे हैं।<ref>{{cite web |date=2022-04-07 |language=en |title=Education ministry to pursue Buet’s mega plan to boost research |url=https://www.tbsnews.net/bangladesh/education/education-ministry-pursue-buets-mega-plan-boost-research-398818 |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === सम्मेलन === बुएट नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उच्च-स्तरीय सम्मेलनों का आयोजन करता है। कुछ प्रमुख सम्मेलन इस प्रकार हैं: * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मैकेनिकल इंजीनियरिंग (ICME):''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग का एक फ्लैगशिप आयोजन है, जिसका 15वां संस्करण 2025 में आयोजित किया गया। * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग (ICECE):''' इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग (EEE) विभाग द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक फ्लैगशिप सम्मेलन।<ref>{{cite web |title=ICECE - 2024 |url=https://icece.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-05 |website=icece.buet.ac.bd}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन केमिकल इंजीनियरिंग (ICChE):''' केमिकल इंजीनियरिंग विभाग का मुख्य सम्मेलन। * '''आईईईई (IEEE) इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन टेलीकम्युनिकेशंस एंड फोटोनिक्स (ICTP):''' 2025 में इस सम्मेलन का छठा संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।<ref>{{cite web |title=The 6th IEEE International Conference on Telecommunications and Photonics 2025 (ICTP 2025) Held at BUET |url=https://iict.buet.ac.bd/?p=3546 |access-date=2026-03-05 |website=IICT, BUET}}</ref> * '''इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन वॉटर एंड फ्लड मैनेजमेंट (ICWFM):''' जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) द्वारा आयोजित एक द्विवार्षिक कार्यक्रम। * '''इंटरनेशनल सिंपोजियम ऑन सिविल इंजीनियरिंग (ISCEB):''' इसके अलावा GCSTMR सम्मेलन, एल्गोरिदम पर WALCOM और नेटवर्किंग एवं सुरक्षा पर NSysS जैसे वैश्विक कार्यक्रमों का आयोजन भी बुएट द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। === जर्नल === अनुसंधान परिणामों को व्यापक रूप से प्रसारित करने के उद्देश्य से बुएट कई सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) जर्नल प्रकाशित करता है: * '''जर्नल ऑफ आर्किटेक्चर:''' इस जर्नल का पूर्व नाम ‘प्रतिबेश’ (Protibesh) था। यह वास्तुकला विभाग का शोध जर्नल है, जो मुख्य रूप से वास्तुकला, पर्यावरण और सतत डिजाइन से संबंधित विषयों पर काम करता है।<ref>{{cite web |title=Journal of Architecture, BUET |url=https://ja.buet.ac.bd/ |access-date=2026-03-04 |website=ja.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Architecture |url=https://web251.secure-secure.co.uk/bja.arch.buet.ac.bd/index.php/bja |access-date=2026-03-04 |website=web251.secure-secure.co.uk}}</ref> * '''जर्नल ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट्स:''' यह मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्षेत्र की आधुनिक प्रगति और अनुसंधान पर केंद्रित है।<ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.scimagojr.com/journalsearch.php?q=20980&tip=sid |access-date=2026-03-04 |website=www.scimagojr.com}}</ref><ref>{{cite web |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://www.jmerd.org/ |access-date=2026-03-04 |website=www.jmerd.org}}</ref><ref>{{cite journal |title=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments |url=https://jmerd.me.buet.ac.bd/ |journal=Journal of Mechanical Engineering Research and Developments}}</ref> * '''केमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च बुलेटिन:''' केमिकल इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों के अनुसंधान के लिए समर्पित यह जर्नल 'बांग्लाजोल' (BanglaJOL) के सहयोग से प्रकाशित होता है।<ref>{{cite web |title=Chemical Engineering Research Bulletin |url=https://www.banglajol.info/index.php/CERB |access-date=2026-03-04 |website=www.banglajol.info}}</ref> === प्रमुख नवाचार === बुएट ने कई व्यावहारिक और स्थानीय संदर्भ में प्रभावी नवाचार विकसित किए हैं, जिनमें से कई को पेटेंट, सरकारी मंजूरी और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिली है: * [[ऑक्सीजेट]] '''सीपैप वेंटिलेटर (2021):''' कोविड-19 संकट के दौरान बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग ने इस किफायती और बिजली रहित नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का आविष्कार किया।<ref>{{cite web |language=bn |title=দেশীয় ভেন্টিলেটর ডিভাইস অক্সিজেট সিপ্যাপ |url=https://www.ittefaq.com.bd/263760/%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%80%E0%A7%9F-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A6%B0-%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%87%E0%A6%B8-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Ittefaq}}</ref> यह औषधि प्रशासन निदेशालय (DGDA) द्वारा अनुमोदित पहला बांग्लादेशी चिकित्सा उपकरण है।<ref>{{cite web |last=Channel24 |language=en |title=ঢাকা মেডিকেলে 'অক্সিজেট সিপ্যাপ ভেন্টিলেটরের' ক্লিনিক্যাল ট্রায়াল শুরু |url=https://www.channel24bd.tv/health/article/67696/%E0%A6%A2%E0%A6%BE%E0%A6%95%E0%A6%BE-%E0%A6%AE%E0%A7%87%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%87%E0%A6%B2%E0%A7%87-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%AA%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%AA-%E0%A6%AD%E0%A7%87%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%9F%E0%A6%BF%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B2%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%9F%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A6%BE%E0%A6%B2-%E0%A6%B6%E0%A7%81%E0%A6%B0%E0%A7%81 |access-date=2026-03-04 |website=Channel 24}}</ref><ref>{{cite web |last=At-tahreek |first=Monthly |language=en |title=বিদ্যুৎ ছাড়াই ৬০ লিটার অক্সিজেন দিবে অক্সিজেট - |url=https://at-tahreek.com/ |access-date=2026-03-04 |website=Monthly At-tahreek}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/health/news/687347 |title=সীমিত ব্যবহারে অনুমোদন পেল বুয়েটের ‘অক্সিজেট’}}</ref> इसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में प्रशंसा प्राप्त की है।<ref>{{cite web |date=2021-11-07 |language=bn |title=বুয়েটের অক্সিজেট যেভাবে আন্তর্জাতিক মঞ্চে |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B8%E0%A6%BF%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%9F-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%9C%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%95-%E0%A6%AE%E0%A6%9E%E0%A7%8D%E0%A6%9A%E0%A7%87 |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> साथ ही इसने ‘IMAGINE IF!’ ग्लोबल हेल्थकेयर स्टार्टअप प्रतियोगिता में विश्व विजेता का खिताब जीता।<ref>{{cite web |last=Hasan |first=Taufiq |date=2021-12-30 |language=en-US |title=OxyJet wins two int'l competitions |url=https://bme.buet.ac.bd/2021/12/30/oxyjet-wins-two-intl-competitions/ |access-date=2026-03-04 |website=Biomedical Engineering | BUET}}</ref> * '''डेंगूड्रॉप्स (DengueDrops) और रैडअसिस्ट (RadAssist):''' डेंगू रोगी प्रबंधन और मेडिकल इमेजिंग के लिए एआई-संचालित मोबाइल ऐप और टेलीरेडियोलॉजी प्लेटफॉर्म।<ref>{{cite web |title=DengueDrops |url=https://mhealth.buet.ac.bd/DengueDropsInfo/ |access-date=2026-03-04 |website=mhealth.buet.ac.bd}}</ref><ref>{{cite web |title=RadAssist Revolutionizing Radiology through AI |url=https://radassist.net/ |access-date=2026-03-04 |website=radassist.net}}</ref> * '''एनबी-केयर (NB-Care) प्लेटफॉर्म:''' एक स्मार्ट वर्टिकल एप्लिकेशन सिस्टम, जिसने मलेशिया इनोवेशन एंड डिजाइन प्रदर्शनी में ‘ITEX गोल्ड मेडल’ जीता।<ref>{{cite web |language=en-US |title=32nd International Invention, Innovation & Technology Exhibition (ITEX 2021) |url=https://www.akademisains.gov.my/ar21/32nd-international-invention-innovation-technology-exhibition-itex-2021/ |access-date=2026-03-04}}</ref> * '''सतत तकनीक:''' इसमें एसीआई डिजाइन का पुरस्कार विजेता कंक्रीट मिक्स, बायोमास से बायोक्रूड रूपांतरण और एमआईटी के साथ संयुक्त रूप से विकसित आर्सेनिक प्रदूषण मॉडलिंग टूल शामिल हैं। === अन्य उत्कृष्ट उपलब्धियाँ === * '''अनुसंधान अनुदान:''' हाल के वर्षों में बुएट ने बड़ी मात्रा में अनुसंधान निधि प्राप्त की है, जिसमें सीएसई (CSE) विभाग की पांच परियोजनाओं के लिए 9.24 करोड़ रुपये शामिल हैं। * '''अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता:''' बुएट के छात्रों ने IEEE SPS VIP Cup, AIChE चैलेंज, नासा स्पेस एप्स चैलेंज और यूरोपियन रोवर चैलेंज जैसे वैश्विक मंचों पर पुरस्कार जीते हैं।<ref>{{cite web |title=IEEE SPS Signal Processing Cup at ICASSP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/218 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=VIP Cup 2023 at ICIP 2023 |url=https://signalprocessingsociety.org/community-involvement/vip-cup-2023-icip-2023 |access-date=2026-03-05 |website=signalprocessingsociety.org}}</ref><ref>{{cite web |title=CHAMPION IEEE SPS VIP CUP 2025 |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/215 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |title=2025 Johns Hopkins Healthcare Design Competition |url=https://cse.buet.ac.bd/home/news_detail/219 |access-date=2026-03-05 |website=Department of CSE, BUET}}</ref><ref>{{cite web |last=Chowdhury |first=Ridoy Hasan |language=en-US |title=World First among 440 groups from 200 universities |url=https://bangladeshbarta.tv/archives/1361 |access-date=2026-03-05}}</ref> * '''सम्मान:''' बुएट के शिक्षकों और छात्रों ने IEEE R10 आउटस्टैंडिंग वॉलंटियर अवार्ड, आर्किटेक्चर में ARCASIA गोल्ड प्राइज और UNC वाटर एंड हेल्थ कॉन्फ्रेंस रिकग्निशन जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए हैं।<ref>{{cite web |date=2026-01-22 |language=en-US |title=R10 STUDENT BRANCH OF THE MONTH – BUET |url=https://newsletter.ieeer10.org/home_jan2021/r10-student-branch-of-the-month-bangladesh-university-of-engineering-technology/ |access-date=2026-03-05}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-10-06 |language=en-US |title=Result Announcement for 2025 IEEE Region 10 Award Recipients |url=https://www.ieeer10.org/2025/10/06/result-announcement-for-2025-ieee-region-10-award-recipients/ |access-date=2026-03-05 |website=IEEE}}</ref> * '''वैश्विक रैंकिंग:''' बुएट 'नेचर इंडेक्स' में बांग्लादेश के शीर्ष संस्थान के रूप में स्थान बनाए हुए है।<ref>{{cite web |date=2022-04-22 |language=bn |title=How BUET advanced in world rankings |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%8D%E0%A6%AC-%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%BE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%95%E0%A6%BF%E0%A6%82%E0%A7%9F%E0%A7%87-%E0%A6%AF%E0%A7%87%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A7%87-%E0%A6%8F%E0%A6%97%E0%A6%BF%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-03-05 |website=Prothomalo}}</ref><ref>{{cite web |date=2025-12-10 |language=en |title=Bangladesh University of Engineering and Technology (BUET) |url=https://www.nature.com/nature-index/institution-outputs/Bangladesh/Bangladesh%20University%20of%20Engineering%20and%20Technology%20%28BUET%29/513906be34d6b65e6a0005c4 |access-date=2026-03-05 |website=Nature Index}}</ref><ref>{{cite news |url=https://thedailycampus.com/public-university/203159 |title=Top ten universities in international research |work=The Daily Campus}}</ref> === संस्थान === [[File:BUET-Japan Institute of Disaster Prevention and Urban Safety.jpg|thumb|बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी]] बुएट में वर्तमान में 8 संस्थान स्थापित हैं: * सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) * जल एवं बाढ़ प्रबंधन संस्थान (IWFM) * एप्रोप्रिएट टेक्नोलॉजी संस्थान (IAT) * दुर्घटना अनुसंधान संस्थान (ARI) * बुएट-जापान इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर प्रिवेंशन एंड अर्बन सेफ्टी (BUET-JIDPUS) * परमाणु ऊर्जा इंजीनियरिंग संस्थान (INPE) * ऊर्जा एवं सतत विकास संस्थान (IESD) * रोबोटिक्स एवं ऑटोमेशन संस्थान (IRAB)<ref name="institute">{{cite web |title=Institutes of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |archive-date=August 2, 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210802091227/https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |url-status=active |publisher=BUET Official Website}}</ref> == निदेशालय, केंद्र और अन्य == * सलाहकार, विस्तार और अनुसंधान सेवा निदेशालय (DAERS) * छात्र कल्याण निदेशालय (DSW) * योजना और विकास निदेशालय (P&D) * सतत शिक्षा निदेशालय (DCE) * ऊर्जा अध्ययन केंद्र (CES) * पर्यावरण और संसाधन प्रबंधन केंद्र (CERM) * बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र (BEC) * अनुसंधान, परीक्षण और परामर्श ब्यूरो (BRTC) * अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण नेटवर्क केंद्र (ITN) * शहरी सुरक्षा के लिए बांग्लादेश नेटवर्क कार्यालय (BNUS) == संगठन == === छात्र संगठन === अध्यादेश 1962 के अनुसार, बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में सभी प्रकार की संगठनात्मक राजनीति प्रतिबंधित है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-18 |language=bn |title=বিদ্যমান আইনেই ছাত্ররাজনীতি নিষিদ্ধ |url=https://www.prothomalo.com/opinion/column/%E0%A6%AC%E0%A6% weবি%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AF%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A8-%E0%A6%86%E0%A6%87%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%87-%E0%A6%9B%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%80%E0%A6%A4%E0%A6%BF-%E0%A6%A8%E0%A6%BF%E0%A6%B7%E0%A6%BF%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%A7 |access-date=2025-03-13 |website=Daily Prothom Alo}}</ref> [[अबरार फहद हत्याकांड|अबरार फहद]] नामक विश्वविद्यालय के एक छात्र की बुएट छात्र लीग द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने के बाद, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सैफुल इस्लाम ने कैंपस में सभी प्रकार की छात्र राजनीति और राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। विश्वविद्यालय अध्यादेश के अनुसार, कैंपस में शिक्षक राजनीति भी प्रतिबंधित है।<ref name=":1">{{cite web |url=https://www.bbc.com/bengali/news-50017329 |title=সংরক্ষণাগারভুক্ত অনুলিপি |access-date=January 19, 2020 |website=BBC Bengali}}</ref> === विज्ञान संगठन === * '''सत्येन बोस विज्ञान क्लब:''' 1994 में प्रसिद्ध [[सत्येंद्र नाथ बोस|भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस]] के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके सम्मान में 'सत्येन बोस विज्ञान क्लब' की यात्रा शुरू हुई।<ref>{{cite web |title=বুয়েটের সত্যেন বোস বিজ্ঞান ক্লাব |url=https://www.bonikbarta.com/home/news_description/356882/ |access-date=2025-04-03 |website=Bonik Barta}}</ref> इस क्लब का उद्देश्य बुएट के छात्रों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि जगाना और उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित करना है। यह क्लब नियमित रूप से कार्यशालाएं, सेमिनार और व्याख्यान आयोजित करता है।<ref>{{cite web |language=bn |title=লাভেলো জাতীয় মহাকাশ উৎসব |url=https://www.banglanews24.com/print/715709 |access-date=2025-04-03 |website=banglanews24.com}}</ref><ref>{{cite news |url=https://www.jagonews24.com/national/news/871187 |title=জাতীয় পরিবেশ উৎসবের ঢাকা আঞ্চলিক বাছাই পর্ব অনুষ্ঠিত |work=Jago News |access-date=2025-04-03 |language=en-US}}</ref> * '''बुएट ऑटोमोबाइल क्लब:''' 4 अप्रैल 2017 को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. मागलूब अल नूर की पहल पर इस क्लब की औपचारिक शुरुआत हुई।<ref>{{cite web |date=2017-04-05 |language=en |title=Buet launches automobile club |url=https://www.thedailystar.net/shift/buet-launches-automobile-club-1386637 |access-date=2025-12-19 |website=The Daily Star}}</ref><ref>{{cite web |last=Rahman |first=Saurin |date=2017-04-03 |language=en-US |title=BUET Automobile club inauguration |url=https://www.autorebellion.com/2017/04/buet-automobile-club-inauguration/ |access-date=2025-12-19 |website=Auto Rebellion}}</ref> क्लब का मुख्य उद्देश्य सैद्धांतिक इंजीनियरिंग ज्ञान और वास्तविक ऑटोमोबाइल उद्योग के बीच सेतु बनाना है। इस क्लब के तहत 'टीम ऑटोमेस्ट्रो' (Team AutoMaestro) नामक एक विशेषज्ञ टीम है, जिसने 2020 में भारत में आयोजित 'इंटरनेशनल गो-कार्ट चैंपियनशिप' में 9वां स्थान प्राप्त किया और अपने डिजाइन के लिए 'सर्वश्रेष्ठ नवाचार' का पुरस्कार जीता।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2020-11-29 |language=bn |title=উদ্ভাবনে সেরা বুয়েটের অটো মায়েস্ত্রো |url=https://www.prothomalo.com/lifestyle/%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%85%E0%A6%9F%E0%A7%8B-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B |access-date=2025-12-19 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट रोबोटिक्स सोसाइटी:''' यह बुएट के छात्रों द्वारा संचालित रोबोटिक्स क्लब है, जो छात्रों के बीच रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अभ्यास को बढ़ावा देता है।<ref>{{cite news |url=https://www.newagebd.net/post/campus-bites/290476/robo-carnival-held-at-buet |title=Robo Carnival held at BUET |work=New Age}}</ref><ref>{{cite web |date=2024-02-07 |language=en |title=BUET Robotics Society hosts Robo Carnival 2024 |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/buet-robotics-society-hosts-robo-carnival-2024-788678 |access-date=2026-02-19 |website=The Business Standard}}</ref> * '''टीम इंटरप्लेनेटर (Team Interplanetar):''' यह एक बहुविषयक [[रोबोटिक्स]] टीम है, जो 2011 में स्थापित हुई थी। यह टीम अंतर्राष्ट्रीय 'मार्स रोवर' प्रतियोगिताओं में भाग लेती रही है।<ref>{{cite web |language=en-GB |title=Team Interplanetar - BUET Mars Rover Team (2025) |url=https://roverchallenge.eu/team/team-interplanetar-buet-mars-rover-team-2025/ |access-date=2026-02-19 |website=European Rover Challenge}}</ref> इन्होंने 'यूरोपियन रोवर चैलेंज' (ERC) में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है।<ref>{{cite web |language=en |title=Team from BUET reaches finals of European Rover Challenge 2022 |url=https://www.thedailystar.net/tech-startup/news/team-buet-reaches-finals-european-rover-challenge-2022-3122366 |access-date=2026-02-19 |website=The Daily Star}}</ref> इनके 'निर्भीक' ड्रोन प्रोजेक्ट को मंगल ग्रह के लिए अभिनव गैस संपीड़न प्रणाली के लिए सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया है।<ref>{{cite web |last=আলিমুজ্জামান |date=2021-05-30 |language=bn |title=মঙ্গলের জন্য ড্রোন উদ্ভাবনে সেরা বুয়েট |url=https://www.prothomalo.com/education/higher-education/%E0%A6%AE%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%97%E0%A6%B2%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%9C%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%AF-%E0%A6%A1%E0%A7%8D%E0%A6%B0%E0%A7%8B%E0%A6%A8-%E0%A6%89%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%AD%E0%A6%BE%E0%A6%AC%E0%A6%A8%E0%A7%87-%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0%E0%A6%BE-%E0%A6%AC%E0%A7%81%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9F |access-date=2026-02-19 |website=Prothomalo}}</ref> * बुएट एनर्जी क्लब * बुएट न्यूक्लियर इंजीनियरिंग क्लब * बुएट साइबर सिक्योरिटी क्लब * बुएट इनोवेशन एंड डिजाइनिंग क्लब === कला और सांस्कृतिक संगठन === * '''आलोकवर्तिका:''' अक्टूबर 2016 में स्थापित यह एक मुक्त पुस्तकालय (Open Library) है। यहाँ से कोई भी बिना किसी पंजीकरण के पुस्तक ले सकता है, बशर्ते उसे पुस्तकालय में एक पुस्तक दान करनी हो।<ref>{{cite news |title=আলোকবর্তিকা: বুয়েটের একটি মুক্ত গ্রন্থাগার |url=http://bangla.fintechbd.com/2018/02/25/আলোকবর্তিকা-বুয়েটের-একট/ |date=February 25, 2018 |access-date=February 22, 2019 |work=Fintech}}</ref> * '''बुएट ड्रामा सोसाइटी:''' यह बुएट के प्रमुख सांस्कृतिक संगठनों में से एक है, जो नाट्य कला के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का काम करता है।<ref name="clubs" /> इन्होंने बंकिमचंद्र के 'कमलाकांतेर जबानबंदी' और अगाथा क्रिस्टी के 'द माउस ट्रैप' जैसे प्रसिद्ध नाटकों का मंचन किया है।<ref>{{cite web |title=Star Campus |url=https://archive.thedailystar.net/campus/2006/12/01/feature_BUET.htm |access-date=2026-03-04 |website=The Daily Star Archive}}</ref><ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েট ড্রামা সোসাইটি মঞ্চে আনছে ‘দ্য মাউস ট্র্যাপ’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/iermh1wvrj |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट फिल्म सोसाइटी:''' यह फिल्म प्रेमी छात्रों का एक संगठन है जो स्वस्थ सिनेमाई चेतना विकसित करने और फिल्म निर्माण के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটে চলচ্চিত্র উৎসবে ‘আদিম’ |url=https://bangla.bdnews24.com/glitz/gmp25ivjdy |access-date=2026-03-04 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''मूर्छना (Murchona):''' यह संगीत और वाद्ययंत्रों के विकास के लिए एक मंच है, जो वार्षिक सांस्कृतिक उत्सवों और संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |last=প্রতিবেদক |first=নিজস্ব |date=2019-10-16 |language=bn |title=বাংলাদেশ প্রকৌশল বিশ্ববিদ্যালয়ের শাশ্বত সৌম্যর মূর্ছনা |url=https://www.prothomalo.com/education/campus/মূর্ছনা |access-date=2026-03-04 |website=Prothomalo}}</ref> * '''बुएट साहित्य संसद:''' यह रचनात्मक लेखन और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए काम करने वाला केंद्रीय संगठन है। * '''चारकोल - बुएट आर्टिस्ट्री सोसाइटी:''' यह स्केचिंग, सुलेख (Calligraphy) और शिल्प कला के अभ्यास को बढ़ावा देने वाला संगठन है। * '''कंठ्य (Kanthya):''' यह शुद्ध उच्चारण, सस्वर पाठ (Recitation) और प्रस्तुति कला (Presentation) के लिए समर्पित है। * '''ओरिगामी क्लब:''' यह कागज मोड़ने की कला के माध्यम से रचनात्मकता विकसित करने पर केंद्रित है। * '''बुएट फोटोग्राफिक सोसाइटी (BPS):''' यह फोटोग्राफी प्रेमियों का मंच है जो राष्ट्रीय फोटोग्राफी उत्सवों और कार्यशालाओं का आयोजन करता है।<ref>{{cite web |date=2023-08-29 |language=en |title='Remembrance: 25 Years of BUET Photographic Society' |url=https://www.tbsnews.net/economy/corporates/remembrance-25-years-buet-photographic-society-exhibition-showcases-extraordinary |access-date=2026-03-04 |website=The Business Standard}}</ref> === अन्य संगठन === * '''पर्यावरण संगठन:''' एनवायरनमेंट वॉच (Environment Watch)। * '''खेल संगठन:''' बुएट चेस क्लब (Chess Club)। * '''मानवीय संगठन:''' [[बाधन]] (Badhan-BUET Zone), बुएट रोवर स्काउट। * '''करियर संगठन:''' बुएट करियर क्लब, बुएट डिबेटिंग क्लब, बुएट एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट क्लब। * '''बुएट मीडिया एंड कम्युनिकेशन क्लब:''' यह पहले 'बुएट पत्रकार संघ' के नाम से जाना जाता था, जिसे 2024 में भंग कर नए रूप में स्थापित किया गया। यह छात्रों के मीडिया और संचार कौशल को विकसित करने का कार्य करता है।<ref>{{cite web |last=bdnews24.com |language=bn |title=বুয়েটের ‘বিতর্কিত’ সাংবাদিক সমিতির কমিটি বিলুপ্ত |url=https://bangla.bdnews24.com/campus/y9cnpjmu62 |access-date=2026-03-07 |website=bdnews24.com}}</ref> * '''बुएट ब्रेनिएक्स (BUET Brainiacs):''' यह क्विज और माइंड गेम्स के लिए लोकप्रिय क्लब है।<ref>{{cite web |last=নিউজ |first=সময় |language=bn |title=বুয়েট ব্রেইনিয়াক্সের ‘ন্যাশনাল কুইজ কম্পিটিশন’ |url=https://www.somoynews.tv/news/2023-08-24/XuCG6Dtu |access-date=2026-03-07 |website=Somoy News}}</ref> * '''बुएट सेल्फ डिफेंस क्लब:''' यह छात्रों को आत्मरक्षा (Karate & Judo) का प्रशिक्षण देता है। * '''हाउस ऑफ वॉलंटियर्स - बुएट:''' 2007 में एमआईटी (MIT) के बांग्लादेशी स्नातकों द्वारा शुरू किया गया, जिसकी पहली बांग्लादेशी शाखा 2009 में बुएट में शुरू हुई।<ref>{{cite web |date=2017-03-20 |language=en-US |title=Our Journey – House of Volunteers |url=https://houseofvolunteers.org/our-journey/ |access-date=2026-03-07}}</ref> <ref name="clubs">{{cite web |title=Clubs of BUET |url=https://www.buet.ac.bd/web/#/campusLife/4 |access-date=February 26, 2025 |publisher=BUET Official Website}}</ref> ==संदर्भ== <references /> [[Category:बांग्लादेश के विश्वविद्यालय]] [[Category:विश्वविद्यालय]] omo07fwbhu1wwaafumx2p2wct88lks2 अली लारीजानी 0 1609787 6536779 6534340 2026-04-06T05:39:22Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536779 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Ali Larijani, 2021-01-12 (cropped).jpg|अंगूठाकार|अली लारीजानी 2021 में ]] '''अली अर्दशिर लारीजानी''' (3 जून 1958<ref>{{Cite web|url=https://ofac.treasury.gov/recent-actions/20260115|title=Iran-related Designations|date=15 जनवरी 2026|website=ऑफ़िस ऑफ़ फोरेन असेट्स कंट्रोल|publisher=यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ द ट्रेज़री|archive-url=https://web.archive.org/web/20260127042841/https://ofac.treasury.gov/recent-actions/20260115|archive-date=27 जनवरी 2026|access-date=17 मार्च 2026}}</ref> – 17 मार्च 2026<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/articles/cj98mkl4eepo|title=ईरान ने अली लारिजानी के मारे जाने की पुष्टि की, इस्लामिक गणराज्य की वैचारिक और सुरक्षा व्यवस्था के आर्किटेक्ट थे|date=2026-03-17|website=बीबीसी हिन्दी|language=hi|access-date=2026-03-18}}</ref>) ईरानी राजनीतिज्ञ, सैन्य अधिकारी और दार्शनिक था, जिसने 2025 से 2026 में अपनी हत्या तक सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में कार्य किया। इससे पहले उस ने 2005 से 2007 तक इस पद पर कार्य किया था। दिसंबर 2025 से अपनी हत्या तक वो व्यापक रूप से ईरान का ''वास्तविक'' नेता माना जाता था।<ref name="defacto">{{Cite web|url=https://www.theaustralian.com.au/subscribe/news/1/?sourceCode=TAWEB_MRE170_a_BIN&dest=https%3A%2F%2Fwww.theaustralian.com.au%2Fbusiness%2Fthe-wall-street-journal%2Fde-facto-wartime-leader-ali-larijani-steers-irans-defiant-response-to-us%2Fnews-story%2F94590da082ac796310224d35aff6e764&memtype=anonymous&mode=premium&v21=GROUPA-Segment-1-NOSCORE|title=Iran’s 'suave' de facto leader the real power behind Mojtaba|website=द ऑस्ट्रेलियन|url-access=subscription}}</ref><ref name="defacto2">{{Cite news|url=https://www.jpost.com/israel-news/defense-news/article-890225|title=IDF kills Iran's Ali Larijani, Basij commander in massive targeted strikes|last=बॉब|first=योनाह जेरेमी|date=17 मार्च 2026|work=द जेरुसलम पोस्ट|access-date=17 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260317094207/https://www.jpost.com/israel-news/defense-news/article-890225|archive-date=17 मार्च 2026|last2=स्टीन|first2=अमिचाई|url-status=bot: unknown}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://iran-hrm.com/2026/03/17/ali-larijani-a-key-security-figure-in-repression-and-the-survival-of-the-ruling-regime-in-iran/|title=Ali Larijani; A Key Security Figure in Repression and the Survival of the Ruling Regime in Iran|date=17 मार्च 2026|work=ईरान ह्यूमन राइट्स मोनिटर|access-date=17 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260318010607/https://iran-hrm.com/2026/03/17/ali-larijani-a-key-security-figure-in-repression-and-the-survival-of-the-ruling-regime-in-iran/|archive-date=18 मार्च 2026}}</ref> इराक के [[नजफ़|नजफ]] में जातीय मजानी मूल के लारीजानी परिवार में जन्मे, उस ने [[तेहरान विश्वविद्यालय]] में [[पाश्चात्य दर्शन|पश्चिमी दर्शन का]] अध्ययन किया। 1981 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) में शामिल होने के बाद वे इस्लामिक गणराज्य में प्रमुखता प्राप्त कर गए। लारीजानी 2008 से 2020 तक [[इस्लामी परामर्शक सभा (ईरान)|ईरान की संसद]] के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे 2020 से एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के सदस्य था, इससे पहले वे 1997 से 2008 तक इस पद पर रहे थे। उस ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी दाखिल की, लेकिन अंततः अयोग्य घोषित हुए थे। इससे पहले उन्होंने 2005 में चुनाव लड़ा था, लेकिन छठे स्थान पर रहे और 2021 में भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए थे।<ref>{{Cite news|url=https://www.reuters.com/world/middle-east/ali-larijani-reappointed-secretary-irans-top-security-body-2025-08-05/|title=Ali Larijani reappointed secretary of Iran's top security body|date=5 अगस्त 2025|work=रॉयटर्स|access-date=5 अगस्त 2025|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.theguardian.com/world/2008/may/28/iran.middleeast|title=Ahmadinejad rival elected as Iranian speaker|last=ओरला रायन|date=28 मई 2008|website=द गार्डियन}}</ref> लारीजानी [[ईरान का सर्वोच्च नेता|ईरान के सर्वोच्च नेता]] [[अली ख़ामेनेई|अली खामेनेई]] के परिषद में दो प्रतिनिधियों में से एक था, दूसरे [[हसन रूहानी]] था। सचिव के रूप में उस ने [[ईरान का परमाणु कार्यक्रम|ईरान के परमाणु कार्यक्रम]] सहित राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर शीर्ष वार्ताकार की भूमिका निभाई। वे सांस्कृतिक क्रांति की सर्वोच्च परिषद के सदस्य भी था। == हत्या == 16-17 मार्च 2026 की रात [[२०२६ इजरायल-अमेरिका का ईरान पर हमला|ईरान युद्ध]] के दौरान, लारीजानी इजरायली हवाई हमले का निशाना बने।<ref>{{Cite web|url=https://www.iranintl.com/en/202603174597|title=Israeli media say military targeted top security chief Larijani|date=17 मार्च 2026|website=ईरान इंटरनेशनल|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20260317143155/https://www.iranintl.com/en/202603174597|archive-date=17 मार्च 2026|access-date=17 मार्च 2026}}</ref> इजरायली रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा कि लारीजानी मारे गए।<ref>{{Cite web|url=https://www.iranintl.com/en/202603170025|title=Iran’s top security chief Larijani is dead, Israeli defence minister Katz says|date=17 मार्च 2026|website=ईरान इंटरनेशनल|language=en|access-date=17 मार्च 2026}}</ref> ईरान ने कुछ घंटों बाद पुष्टि की कि लारीजानी इस हमले में मारे गए।<ref>{{Cite news|url=https://www.aljazeera.com/news/2026/3/17/israel-says-it-has-killed-ali-larijani-irans-top-security-official|title=Iran confirms security chief Larijani, Basij commander Soleimani killed|date=17 मार्च 2026|work=अल जज़ीरा|access-date=17 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260318012545/https://www.aljazeera.com/news/2026/3/17/israel-says-it-has-killed-ali-larijani-irans-top-security-official|archive-date=18 मार्च 2026|publisher=}}</ref> उनके बेटे मोर्तेज़ा और उनके कार्यालय के प्रमुख अलीरेज़ा बायत भी इस हमले में मारे गए।<ref>{{Cite news|url=https://www.cbsnews.com/news/ali-larijani-iran-top-security-official-killed-war-strikes-israel/|title=Iran's top security official, Ali Larijani, was killed in an airstrike. Here's why his death is so significant.|last=रीयल्स|first=टकर|date=17 मार्च 2026|work=सीबीएस न्यूज़|access-date=17 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260317184332/https://www.cbsnews.com/news/ali-larijani-iran-top-security-official-killed-war-strikes-israel/|archive-date=17 मार्च 2026|publisher=|last2=तैयब|first2=इमितियाज़}}</ref> फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि पूर्वी तेहरान के बाहरी इलाके में अपनी बेटी से मिलने के दौरान अमेरिकी-इजरायली हमले में उनकी मौत हो गई।<ref>{{Cite news|url=https://www.reuters.com/world/middle-east/ali-larijani-irans-ultimate-backroom-powerbroker-dies-67-2026-03-17/|title=Ali Larijani, Iran's ultimate backroom powerbroker, killed in Israeli airstrike|date=17 मार्च 2026|work=रॉयटर्स|access-date=18 मार्च 2026}}</ref> उसी रात एक अलग इजरायली हवाई हमले में ईरान के आंतरिक बासिज मिलिशिया के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी भी मारा गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.aljazeera.com/news/2026/3/17/israel-claims-to-have-assassinated-commander-of-irans-basij-militia-unit|title=Iran’s Basij militia commander Gholamreza Soleimani killed: IRGC|date=17 मार्च 2026|work=अल जज़ीरा|access-date=18 मार्च 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260317095110/https://www.aljazeera.com/news/2026/3/17/israel-claims-to-have-assassinated-commander-of-irans-basij-militia-unit|archive-date=17 मार्च 2026}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[मसूद पेज़ेशकियान]] * [[महमूद अहमदीनेझ़ाद]] * [[मुजतबा ख़ामेनेई]] * [[अली ख़ामेनेई]] == सन्दर्भ == {{Reflist|30em}} [[श्रेणी:२०२६ में निधन]] [[श्रेणी:1958 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:ईरान के लोग]] [[श्रेणी:राजनितिज्ञ]] [[श्रेणी:ईरान के मारे गए राजनेता]] [[श्रेणी:2026 के ईरान युद्ध में मारे गए लोग]] [[श्रेणी:2026 के ईरान युद्ध के लोग]] [[श्रेणी:ईरान का इतिहास]] 5l740k3sp8snplyd14by0l7ipxew7pv सदस्य:AMAN KUMAR/शीह लॉग 2 1609848 6536721 6535573 2026-04-05T22:57:00Z AMAN KUMAR 911487 शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:कंपनी हवलदार मेजर]]. 6536721 wikitext text/x-wiki This is a log of all [[वि:शीह|speedy deletion]] nominations made by this user using [[WP:TW|Twinkle]]'s CSD module. If you no longer wish to keep this log, you can turn it off using the [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|preferences panel]], and nominate this page for speedy deletion under [[वि:शीह#U1|CSD U1]]. === मार्च 2026 === # [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC) # [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC) # [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC) # [[:1973 पेरिस ओपन - पुरुष एकल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: केवल ज्ञान संदूक उपस्थित }; सदस्य {{user|1=मनीष वशिष्ठ}} को सूचित किया गया 10:59, 20 मार्च 2026 (UTC) === अप्रैल 2026 === # [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC) # [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC) # [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC) # [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC) tomirgwf2keaqr3ibxwnxmy4ii1hi78 जीन लान्टर्नियर 0 1609891 6536713 6534391 2026-04-05T21:51:31Z AMAN KUMAR 911487 सुधार किया 6536713 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = जीन लान्टर्नियर | native_name = Jeanne Lanternier | birth_date = 20 नवंबर 1820 | birth_place = शैतले, जुरा, [[फ्रांस]] | death_date = 1855 | death_place = [[माराकेश]], [[मोरक्को]] | nationality = फ्रांसीसी | occupation = मोरक्को के सुल्तान की पत्नी | known_for = सुल्तान मुहम्मद चतुर्थ की पत्नी | spouse = सिदी मुहम्मद (भावी सुल्तान मुहम्मद चतुर्थ) | religion = [[इस्लाम]] (धर्म परिवर्तन के बाद) }} '''जीन लान्टर्नियर''' ({{lang-fr|Jeanne Lanternier}}; जन्म: 20 नवंबर 1820 – मृत्यु: 1855) एक [[फ़्रान्स|फ्रांसीसी]] महिला थीं। 1836 में [[अल्जीरिया]] में एक हमले के दौरान उन्हें बंदी बना लिया गया था, जिसके बाद उन्हें [[मोरक्को]] के सुल्तान के दरबार में भेंट किया गया। बाद में वे मोरक्को के भावी सुल्तान मुहम्मद चतुर्थ की पत्नी बनीं। उनका जीवन [[फ़्रान्स|फ्रांस]] और [[उत्तर अफ़्रीका|उत्तरी अफ्रीका]] के औपनिवेशिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=ZqdJAAAAMAAJ&q=sultane+francaise+au+Maroc+histoire+de+Jeanne+Lanternier&redir_esc=y|title=Le Maroc dans les lettres d'expression française|last=Lebel|first=Roland|date=1958|publisher=Éditions universitaires|language=fr}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और अल्जीरिया प्रवास == जीन लान्टर्नियर का जन्म 20 नवंबर 1820 को [[फ़्रान्स|फ्रांस]] के जुरा विभाग में स्थित शैतले (Chatelay) नामक गाँव में हुआ था।<ref>{{Cite book |last=Demoly |first=Rémy |title=Traits d’histoire de Chatelay |page=113-114 |language=fr}}</ref> उनका परिवार [[कृषि]] कार्यों से जुड़ा था। 1830 के दशक में जब [[फ़्रान्स|फ्रांस]] ने [[अल्जीरिया]] पर नियंत्रण स्थापित करना शुरू किया, तब फ्रांसीसी सरकार ने अपने नागरिकों को वहाँ बसने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी क्रम में जीन का परिवार भी अल्जीरिया के डेली इब्राहिम (Dely Ibrahim) क्षेत्र में एक कृषि उपनिवेशवादी के रूप में जाकर बस गया।<ref>{{Cite book |last=Belorgey |first=Jean-Michel |title=Transfuges: voyages, ruptures et métamorphoses : des Occidentaux en quête d'autres mondes |publisher=Autrement |year=2000 |isbn=978-2-7467-0033-8 |page=188 |language=fr |access-date=|url=https://books.google.co.in/books?id=3d0ZAQAAIAAJ&q=Jeanne+Lanternier,+ait+elle+aussi+sultane,+et,+cette+fois,+au+Maroc&redir_esc=y}}</ref> == अपहरण और दासता == वर्ष 1836 में फ्रांसीसी नियंत्रण का विरोध कर रहे स्थानीय अल्जीरियाई विद्रोहियों ने उनके गाँव पर हमला किया। इस संघर्ष में जीन के पिता की मृत्यु हो गई। जीन (जो उस समय 16 वर्ष की थीं), उनकी माँ और कुछ अन्य फ्रांसीसी महिलाओं को बंदी बना लिया गया।<ref>{{Cite book |last=Demoly |first=Rémy |title=Traits d’histoire de Chatelay |page=188 |language=fr}}</ref> इन बंदियों को अल्जीरियाई प्रतिरोध के नेता अमीर अब्द अल-कादिर (Abd el-Kader) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अब्द अल-कादिर उस समय मोरक्को के सुल्तान से कूटनीतिक समर्थन प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे। इसी उद्देश्य से, उन्होंने जीन और अन्य फ्रांसीसी बंदियों को मोरक्को के तत्कालीन सुल्तान अब्द अल-रहमान बिन हिशाम को भेंट स्वरूप सौंप दिया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=-qpsz_KvgFcC&q=et+celle+de+Jeanne+Lanternier,+la+petite+Bourguignonne+devenue&redir_esc=y|title=Études|date=1938|publisher=Assas Editions - Bayard Presse|language=fr}}</ref> == मोरक्को के शाही दरबार में == [[मोरक्को]] के सुल्तान अब्द अल-रहमान ने जीन को अपने पुत्र, राजकुमार सिदी मुहम्मद (भावी सुल्तान मुहम्मद चतुर्थ) के हरम में भेज दिया। हरम की परंपराओं के अनुसार जीन ने इस्लाम धर्म अपना लिया। फ्रांसीसी दस्तावेजों में उल्लेख है कि अपनी यूरोपीय पृष्ठभूमि के कारण वे राजकुमार के करीब आ गईं और उन्हें 'नीली आँखों वाली सुल्ताना' कहा जाने लगा।<ref>{{Cite web |title=La favorite du sultan du maroc |url=https://www.lanouvellerepublique.fr/vienne/la-favorite-du-sultan-du-maroc |website=lanouvellerepublique.fr |date=2011-07-24 |language=fr |access-date=2024-11-02}}</ref> वर्ष 1837 में राजकुमार ने आधिकारिक रूप से जीन से विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात जीन ने दो पुत्रों को जन्म दिया, जिससे दरबार में उनकी स्थिति और अधिक मजबूत हो गई।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=mL9JAQAAMAAJ&dq=Peu+apr%C3%A8s+la+d%C3%A9faite+de+Sidi+Mohammed+par+le+mar%C3%A9chal+Bugeau,+sur+les+bords+de+l'Isly,+Jeanne+mit+au+monde+un+fils.&pg=PA154&redir_esc=y|title=Revue Des Franȧis. Anně 5 No. 10-anně 10. No. 9. Oct. 1910-nov./dč. 1915|date=1912|language=fr}}</ref> == फ्रांस यात्रा और वापसी == 1855 में राजकुमार मुहम्मद ने जीन को अपने मूल परिवार से संपर्क करने और फ्रांस जाने की अनुमति दी। जीन ने पेरिस में आयोजित 1855 की 'यूनिवर्सल प्रदर्शनी' (Universal Exhibition) के दौरान फ्रांस की यात्रा की और अपने पैतृक गाँव शैतले तथा चिसे (Chissey) का दौरा भी किया।<ref>{{Cite book |last=Demoly |first=Rémy |title=Traits d’histoire de Chatelay |page=447-449 |language=fr}}</ref> यह यात्रा उनके लिए फ्रांस में पुनः बसने का अवसर थी, लेकिन मोरक्को के दरबार में अपनी स्थिति और अपने बच्चों के कारण उन्होंने वापस मोरक्को लौटने का निर्णय लिया। == हरम की राजनीति और मृत्यु == जीन के [[मोरक्को]] लौटने के कुछ समय बाद, 1855 में ही, शाही हरम की आंतरिक राजनीति के कारण उनकी हत्या कर दी गई। मोरक्को के हरम में उत्तराधिकार और सत्ता को लेकर अक्सर संघर्ष होते रहते थे। एक विदेशी मूल की महिला का राजकुमार के करीब होना दरबार के अन्य सदस्यों और रानियों के बीच असंतोष का कारण बना।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=-qpsz_KvgFcC&q=et+celle+de+Jeanne+Lanternier,+la+petite+Bourguignonne+devenue&redir_esc=y|title=Études|date=1938|publisher=Assas Editions - Bayard Presse|language=fr}}</ref> इसी राजनीतिक साज़िश के तहत, 1855 में जीन लान्टर्नियर और उनके दोनों पुत्रों को ज़हर दे दिया गया, जिससे माराकेश में उनकी मृत्यु हो गई। जीन को माराकेश के शाही महल के बगीचों में दफनाया गया। उनकी मृत्यु के चार वर्ष बाद, 1859 में उनके पति सिदी मुहम्मद, 'सुल्तान मुहम्मद चतुर्थ' के रूप में मोरक्को के सिंहासन पर बैठे।<ref>{{Cite book |last=Demoly |first=Rémy |title=Traits d’histoire de Chatelay |page=447-449 |language=fr}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[माज़ूज़ा मलिका]] == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.wikidata.org/wiki/Q131093242 विकिडाटा पर जीन लान्टर्नियर] [[श्रेणी:1820 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:1855 में निधन]] [[श्रेणी:फ्रांसीसी महिलाएं]] [[श्रेणी:मोरक्को का इतिहास]] [[श्रेणी:हत्या किए गए लोग]] ojk3goivyw78a2dkyvh6t7vxeszszvj आहू दरयाई 0 1609892 6536710 6534392 2026-04-05T21:33:01Z AMAN KUMAR 911487 सुधार किया 6536710 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = आहू दरयाई | native_name = آهو دریایی | native_name_lang = fa | birth_date = | birth_place = [[ईरान]] | nationality = ईरानी | occupation = विश्वविद्यालय की छात्रा | known_for = नवंबर 2024 में इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय में अनिवार्य हिजाब नियमों के संदर्भ में हुआ सार्वजनिक विरोध | education = इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय (विज्ञान और अनुसंधान शाखा, तेहरान) }} '''आहू दरयाई''' (फ़ारसी: آهو دریایی) एक ईरानी विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। नवंबर 2024 में, [[तेहरान]] स्थित 'इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय' (विज्ञान और अनुसंधान शाखा) के परिसर में अनिवार्य [[हिजाब]] कानूनों के संदर्भ में सुरक्षा गार्डों के साथ हुए विवाद के बाद, उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए और अंतर्वस्त्रों में सार्वजनिक रूप से चलीं। इस घटना और उसके बाद हुई उनकी गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय [[मीडिया (संचार)|मीडिया]] में व्यापक कवरेज मिली। गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक मनोरोग अस्पताल भेजा गया, और बाद में बिना किसी आरोप के रिहा कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/news/articles/cwy42vxd99po|title=Iranian woman detained over undressing is released without charge|date=2024-11-19|website=www.bbc.com|language=en-GB|access-date=2026-03-19}}</ref> == घटना की पृष्ठभूमि और विवरण == ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर इस्लामी ड्रेस कोड (हिजाब) का पालन करना अनिवार्य है। 2 नवंबर 2024 को, आहू दरयाई इस्लामिक आज़ाद विश्वविद्यालय के परिसर में थीं, जहाँ विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों ने उनके पहनावे को लेकर उन्हें रोका। मीडिया रिपोर्टों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ, जिसमें आहू के कपड़े फट गए।<ref>{{Cite web|url=https://www.iranintl.com/fa/202411025119|title=یک دختر دانشجو در دانشگاه علوم و تحقیقات تهران در اعتراض به برخورد حراست عریان شد|date=2024-11-02|website=www.iranintl.com|language=fa|access-date=2026-03-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/persian/articles/c4gz2mrn19no|title=«دختر علوم تحقیقات»؛ ماجرا چه بود؟‌|date=2024-11-02|website=BBC News فارسی|language=fa|access-date=2026-03-19}}</ref> इस घटना के बाद, आहू दरयाई ने अपने बाकी कपड़े उतार दिए और केवल [[अंतर्वस्त्र|अंतर्वस्त्रों]] में विश्वविद्यालय परिसर और उसके बाहर की सड़क पर चलने लगीं। घटना के प्रसारित हुए वीडियो में उन्हें परिसर में बैठे और फिर सड़क पर चलते हुए देखा जा सकता है। इसके कुछ ही समय बाद, सादे कपड़ों में आए सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक एक वाहन में बैठाया और हिरासत में ले लिया।<ref>{{Cite web|url=https://abcnews.com/International/woman-strips-underwear-iran-university-apparent-protest/story?id=115441108|title=Iran detains woman who stripped to her underwear at university in apparent protest|last=|first=|website=ABC News|language=en|access-date=2026-03-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://ir.voanews.com/a/iran-female-student-stipped-off-clothes-arrested-violently/7848931.html|title=بازداشت خشونت‌آمیز دانشجوی معترضی که برهنه شد|date=2024-11-02|website=صدای آمریکا|language=fa|access-date=2026-03-19}}</ref> == हिरासत और मनोरोग अस्पताल में स्थानांतरण == [[हिरासत]] में लिए जाने के बाद, ईरानी राज्य मीडिया और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बयान जारी किया कि छात्रा मनोवैज्ञानिक समस्याओं से ग्रस्त है। पुलिस स्टेशन ले जाने के बजाय, उन्हें सीधे एक मनोरोग अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://ir.voanews.com/a/iran-female-student-stipped-off-clothes-arrested/7849078.html|title=ماجرای «دخترعلوم و تحقیقات»؛ از گمانه‌زنی‌ها درباره نامش تا انتقال به بیمارستان روانی|date=2024-11-03|website=صدای آمریکا|language=fa|access-date=2026-03-19}}</ref> [[मानवाधिकार|मानवाधिकार संगठनों]] ने इस कदम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उल्लेख किया गया कि ईरान में पहले भी हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों को मानसिक रूप से अस्थिर घोषित करके मनोरोग सुविधाओं में भेजने के मामले सामने आए हैं। आलोचकों के अनुसार, इस प्रशासनिक रणनीति का उपयोग प्रदर्शनकारियों की विश्वसनीयता को कम करने के लिए किया जाता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.rferl.org/a/iran-court-controversy-diagnosing-hijab-protesters-mental-illness/32514690.html|title=Iranian Court Sparks Controversy By Diagnosing Hijab Protesters With Mental Illness|last=Maleki|first=Roya|date=2023-07-30|work=Radio Free Europe/Radio Liberty|access-date=2026-03-19|language=en}}</ref> == वैश्विक प्रतिक्रिया == इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई। [[सामाजिक मीडिया]] पर उपयोगकर्ताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उन्हें "विज्ञान और अनुसंधान की लड़की" (The Science and Research Girl) के रूप में संदर्भित किया। [[संयुक्त राष्ट्र]] के विशेष दूत ने इस मामले का संज्ञान लिया और ईरानी प्रशासन से उनकी स्थिति और स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मांगी।<ref>{{Cite news|url=https://www.radiofarda.com/a/woman-strips-off-clothes-at-iran-university-in-apparent-protest/33185103.html|title=گزارشگر سازمان ملل: موضوع دختر دانشگاه علوم را دنبال می‌کنم|last=فردا|first=رادیو|date=2024-11-03|work=رادیو فردا|access-date=2026-03-19|language=fa}}</ref> फ्रांस सहित यूरोप के कई शहरों में आहू दरयाई के समर्थन में रैलियां निकाली गईं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, सर्वस इंटरनेशनल और नेशनल सेक्युलर सोसाइटी जैसे संगठनों ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए ईरानी प्रशासन की आलोचना की। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इस घटना को ईरानी महिलाओं के विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई के एक प्रमुख मामले के रूप में रिपोर्ट किया।<ref>{{Cite web|url=https://parsi.euronews.com/2024/11/06/march-in-france-for-iranian-girl-detained-the-first-governments-reaction|title=تظاهرات در فرانسه برای «دختر علوم تحقیقات»؛ نخستین واکنش دولت ایران: در درمانگاه روانی است، نه زندان|website=euronews|language=fa-IR|access-date=2026-03-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.elle.fr/Societe/Edito/L-edito-de-ELLE-Ahou-Daryaei-apprenez-son-nom-4284614|title=L'édito de ELLE : Ahou Daryaei, apprenez son nom - Elle|date=2024-11-14|website=elle.fr|language=fr|access-date=2026-03-19}}</ref> == रिहाई == अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और मानवाधिकार संगठनों की अपीलों के बीच, 19 नवंबर 2024 को ईरानी न्यायपालिका के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि आहू दरयाई के खिलाफ कोई आपराधिक मामला या आरोप दर्ज नहीं किया गया है। अधिकारियों ने पुनः उनकी [[मानसिक स्वास्थ्य|मानसिक]] स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी देकर उनके परिवार को सौंप दिया गया है। 20 नवंबर 2024 को अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों ने पुष्टि की कि उन्हें रिहा कर दिया गया है।<ref>{{Cite web|url=https://english.alarabiya.net/News/middle-east/2024/11/19/iran-says-no-charges-against-student-who-stripped-to-underwear|title=Iran says no charges against student who stripped to underwear|date=2024-11-19|website=Al Arabiya English|language=en|access-date=2026-03-19}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.ibtimes.com/iran-releases-woman-who-stripped-protest-university-tehran-3751814|title=Iran Releases Woman Who Stripped In Protest At University In Tehran|last=carlastlouis|first=Carla St Louis|date=2024-11-19|website=International Business Times|language=en-US|access-date=2026-03-19}}</ref> == सन्दर्भ == {{टिप्पणीसूची}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.wikidata.org/wiki/Q130893075 विकिडाटा पर आहू दरयाई] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता]] [[श्रेणी:ईरान में महिला अधिकार]] [[श्रेणी:2024 की घटनाएँ]] gs6tbywhzzk36zp04yxgdqlmn0g2gjm माज़ूज़ा मलिका 0 1609930 6536711 6534410 2026-04-05T21:45:10Z AMAN KUMAR 911487 सुधार किया 6536711 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty | name = माज़ूज़ा मलिका | native_name = معزوزة مليكة | native_name_lang = ar | spouse = [[इस्माइल इब्न शरीफ|सुल्तान मौले इस्माइल]] | issue = सुल्तान अब्देलमालेक | house = अलावी राजवंश | religion = [[इस्लाम]] (सुन्नी) | country = [[मोरक्को]] }} '''माज़ूज़ा मलिका''' (अरबी: معزوزة مليكة) [[मोरक्को]] के अलावी राजवंश (Alouite dynasty) के सुल्तान [[इस्माइल इब्न शरीफ|मौले इस्माइल]] की एक पत्नी थीं। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनका उल्लेख मुख्य रूप से मोरक्को के सुल्तान अब्देलमालेक (अब्द अल-मालिक) की माता के रूप में मिलता है। अब्देलमालेक ने 1728 में कुछ समय के लिए मोरक्को पर शासन किया था। == शाही परिवार और पृष्ठभूमि == माज़ूज़ा मलिका 17वीं और 18वीं शताब्दी में मोरक्को के शाही दरबार से संबंधित थीं। उनका विवाह सुल्तान इस्माइल इब्न शरीफ से हुआ था, जिनका शासनकाल (1672–1727) मोरक्को के इतिहास में सैन्य और राजनीतिक परिवर्तनों का काल था। सुल्तान इस्माइल के शाही [[हरम]] में कई पत्नियाँ और उनके अनेक पुत्र थे। मोरक्को के ऐतिहासिक विवरणों में सामान्यतः केवल उन्हीं शाही महिलाओं का नाम प्रमुखता से मिलता है, जिनके पुत्रों ने उत्तराधिकार के संघर्ष में भाग लिया या जो सुल्तान बनने में सफल रहे। माज़ूज़ा मलिका का नाम उनके पुत्र अब्देलमालेक के राजनीतिक दावों के कारण शाही इतिहास में उल्लिखित है।<ref>{{Cite book |last=Ibn Zaydan |first=Abd al-Rahman |year=1993 |title=المنزع اللطيف في مفاخر المولى إسماعيل بن الشريف [Almanzie allatif fi mafakhir almawla 'iismaeil bin alsharif] |publisher=مطبعة "إديال" |location=Casablanca |pages=391–393 |language=ar|url=https://www.noor-book.com/%D9%83%D8%AA%D8%A7%D8%A8-%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%86%D8%B2%D8%B9-%D8%A7%D9%84%D9%84%D8%B7%D9%8A%D9%81-%D9%81%D9%8A-%D9%85%D9%81%D8%A7%D8%AE%D8%B1-%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%88%D9%84%D9%8A-%D8%A7%D8%B3%D9%85%D8%A7%D8%B9%D9%8A%D9%84-%D8%A7%D8%A8%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B4%D8%B1%D9%8A%D9%81-4098-pdf}}</ref> == उत्तराधिकार का संघर्ष == 1727 में सुल्तान मौले इस्माइल की मृत्यु के बाद, उनके पुत्रों के बीच सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष आरंभ हो गया। इस राजनीतिक अस्थिरता के दौरान शाही परिवार की महिलाओं, विशेष रूप से सुल्तानों की माताओं, ने अपने पुत्रों के पक्ष को मजबूत करने में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। माज़ूज़ा मलिका के पुत्र अब्देलमालेक ने अपने सौतेले भाइयों के विरुद्ध सत्ता का दावा किया और 1728 में कुछ समय के लिए सुल्तान का पद प्राप्त कर लिया। यद्यपि उनका यह शासनकाल बहुत छोटा था, लेकिन इस उत्तराधिकार युद्ध का मोरक्को की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा। वर्ष 1729 में [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटिश]] यात्री जॉन ब्रेथवेट (John Braithwaite) द्वारा प्रकाशित [[यात्रावृत्तांत|यात्रा वृत्तांत]] में सुल्तान इस्माइल की मृत्यु के बाद की राजनीतिक अस्थिरता और अब्देलमालेक से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख मिलता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=iJA_AAAAMAAJ&q=wife&redir_esc=y#v=snippet&q=wife&f=false|title=The History of the Revolutions in the Empire of Morocco: Upon the Death of the Late Emperor Muley Ishmael; Being a Most Exact Journal of what Happen'd in Those Parts in the Last and Part of the Present Year. With Observations Natural, Moral and Political, Relating to that Country and People|last=Braithwaite|first=John|date=1729|publisher=James and John Knapton, Arthur Bettesworth, Francis Fayram, John Osborn and Thomas Longman, and Charles Rivington|language=en}}</ref> == ऐतिहासिक स्रोत == माज़ूज़ा मलिका और उनके परिवार का विवरण अरबी और यूरोपीय ऐतिहासिक दस्तावेजों में उपलब्ध है। मोरक्को के इतिहासकार अब्द अल-रहमान इब्न ज़ायदान ने 18वीं सदी के शाही परिवार के दस्तावेजीकरण के अंतर्गत अपनी पुस्तक 'अल-मंज़ी अल-लतीफ' में उनका उल्लेख किया है।<ref>{{Cite book |last=Ibn Zaydan |first=Abd al-Rahman |year=1993 |title=Almanzie allatif fi mafakhir almawla 'iismaeil bin alsharif |publisher=مطبعة "إديال" |location=Casablanca |pages=391–393 |language=ar|url=https://www.noor-book.com/%D9%83%D8%AA%D8%A7%D8%A8-%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%86%D8%B2%D8%B9-%D8%A7%D9%84%D9%84%D8%B7%D9%8A%D9%81-%D9%81%D9%8A-%D9%85%D9%81%D8%A7%D8%AE%D8%B1-%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%88%D9%84%D9%8A-%D8%A7%D8%B3%D9%85%D8%A7%D8%B9%D9%8A%D9%84-%D8%A7%D8%A8%D9%86-%D8%A7%D9%84%D8%B4%D8%B1%D9%8A%D9%81-4098-pdf}}</ref> इसके अतिरिक्त, पश्चिमी अफ्रीका के ऐतिहासिक अध्ययन पर आधारित 1922 की एक फ्रांसीसी पत्रिका (Bulletin du Comité d'études historiques...) में भी अलावी राजवंश के इस कालखंड और शाही दरबार के राजनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में उनका नाम दर्ज है।<ref>{{Cite web|url=https://gallica.bnf.fr/ark:/12148/bpt6k122736p|title=Bulletin du Comité d'études historiques et scientifiques de l'Afrique occidentale française|last=texte|first=Comité d'études historiques et scientifiques de l'Afrique occidentale française Auteur du|last2=texte|first2=Afrique occidentale française Auteur du|date=1922|website=Gallica|language=FR|access-date=2026-03-20}}</ref> == इन्हें भी देखें == * [[जीन लान्टर्नियर]] == सन्दर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.wikidata.org/wiki/Q124646420 विकिडाटा पर माज़ूज़ा मलिका] [[श्रेणी:मोरक्को का इतिहास]] [[श्रेणी:अलावी राजवंश]] [[श्रेणी:मोरक्को की शाही पत्नियाँ]] [[श्रेणी:18वीं सदी की महिलाएँ]] clc3r4czowdqmb40pknqadc7cv641kx अब्देलहाफ़िद पैलेस 0 1609980 6536583 6532106 2026-04-05T12:44:28Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536583 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Morocco_Tangier_Palace_Italy.jpg|अंगूठाकार|रात में दक्षिणी भाग (फ़ासाद)]] [[चित्र:Solar_Hospital_Benchimol_2.jpg|अंगूठाकार|मुख्य प्रवेश द्वार के साथ महल का पार्श्व दृश्य]] '''अब्देलहाफ़िद पैलेस''' या '''मौले हाफ़िद पैलेस''' [[मोरक्को]] के टेंजेर के हसनाउना पड़ोस में 23, रुए मोहम्मद बेन एब्डेलौहाब में स्थित एक ऐतिहासिक संरचना है।<ref name="Solovyov">{{cite web|url=https://moroccotravelblog.com/2019/04/26/gallery-hopping-in-tangier-moroccos-literary-art-hub/|title=Gallery Hopping in Tangier, Morocco's Literary Art Hub|author=Marina Slovyov|date={{date|2019/04/26}}|website=Morocco Travel Blog}}</ref> इसे 1912-1913 में पूर्व सुल्तान अब्देलहाफ़िद के पदत्याग के बाद उनके मुख्य निवास के रूप में बनाया गया था, लेकिन इसका उपयोग उस उद्देश्य के लिए कभी नहीं किया गया। 1927 में, इसे इटली द्वारा खरीदा गया था और बाद में इसका नाम बदलकर '''पलाज़ो लिटोरियो''' कर दिया गया, जिसमें स्कूलों और एक अस्पताल सहित विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों की मेज़बानी की गई। 1943 में बाडोग्लियो सरकार ने इसका नाम बदलकर '''कासा डी'इटालिया''' (Casa d'Italia) कर दिया,{{R|Tamburini|p=419}} और कुछ साल बाद इसे '''पैलेस ऑफ द इटालियन इंस्टीट्यूशंस''' (इतालवी संस्थानों का महल) के रूप में जाना जाने लगा।{{R|Tamburini|p=428}} विभिन्न इतालवी-संबंधित गतिविधियों की मेज़बानी करने और 2000 के दशक की शुरुआत में पुनर्निर्मित होने के बावजूद, लंबे समय से इसका उपयोग कम ही किया गया है।<ref>{{cite web|url=https://editoriaraba.com/2013/07/17/le-delusioni-culturali-italiane-di-una-turista-italiana-a-tangeri/|title=Le delusioni culturali italiane di una turista (italiana) a Tangeri|author=Chiara Comito|date={{date|2013/07/17}}|website=editoriaraba}}{{Dead link|date=July 2025|bot=InternetArchiveBot|fix-attempted=yes}}</ref> == पृष्ठभूमि == जिस संपत्ति पर अब यह महल खड़ा है, वह पहले टेंजेर में बेल्जियम के दूतावास का स्थान था, जिसे 19वीं शताब्दी के अंत में बेल्जियम के पहले वाणिज्य दूत (कॉन्सल) अर्नेस्ट डोलिन द्वारा एक विशाल बगीचे के बीच स्थापित किया गया था। इसके बाद इसे स्थानीय यहूदी समुदाय के सदस्य अब्राहम सिकसू द्वारा खरीदा गया था, जिन्होंने डोलिन के लिए एक अनुवादक के रूप में काम किया था और बाद में वे स्वयं बेल्जियम के वाणिज्य दूत बन गए।<ref name="Garriga">{{citation|author=Jordi Mas Garriga|title=La transformación de la ciudad de Tánger durante el Periodo Diplomático (1777–1912) : Arquitectura y Urbanismo|url=https://www.tdx.cat/handle/10803/668965#page=1|year=2019|type=Ph.D. Thesis|publisher=Universitat Rovira i Virgili}}</ref>{{rp|250}} == अब्देलहाफ़िद का महल == अब्देलहाफ़िद द्वारा फेस की संधि (जिसने मोरक्को में फ्रांसीसी संरक्षण स्थापित किया) पर हस्ताक्षर करने के कुछ महीनों बाद, रेजिडेंट-जनरल ह्यूबर्ट लियौटी ने एक भारी पेंशन के बदले अगस्त 1912 में उनके पदत्याग पर बातचीत की।<ref>{{citation|author=Richard Pennell|title=Morocco: From Empire to Independence|date=2003|page=140|location=Oxford|publisher=Oneworld}}</ref> अब्देलहाफ़िद ने इसका एक हिस्सा टेंजेर में इस महल के लिए इस्तेमाल किया, जिसे वह अपने सेवानिवृत्ति के मुख्य निवास के रूप में चाहते थे।<ref>{{cite web|url=https://www.facebook.com/media/set/?set=a.1578508429098552.1073741831.1563790563903672&type=3|title=Moulay Hafid Palace|date={{date|2015/04/16}}|website=The Tangier Guide's albums}}</ref> उन्होंने अब्राहम सिकसू से बेल्जियम के दूतावास की संपत्ति हासिल की, और दूतावास भवन को ध्वस्त करवा दिया। नए महल को पेरिस-प्रशिक्षित वास्तुकार डिएगो जिमेनेज आर्मस्ट्रांग द्वारा डिज़ाइन किया गया था, जिन्होंने उसी समय के आसपास टेंजेर के प्रतिष्ठित ग्रान टीट्रो सर्वेंट्स को भी डिज़ाइन किया था,{{R|Garriga|p=388}} और इसे 1913 में [[प्रबलित कंक्रीट]] में कीमती पत्थरों और लकड़ी के काम में अलंकृत फिटिंग के साथ बनाया गया था।{{R|Tamburini|p=407}} हालाँकि, पूर्व सुल्तान इसमें कभी नहीं रहे। उन्होंने अपने पदत्याग के तुरंत बाद मोरक्को छोड़ दिया, कुछ समय तक फ्रांस में रहे और फिर पहले की योजना के अनुसार टेंजेर लौटने के बजाय स्पेन में निवास किया। [[प्रथम विश्व युद्ध]] के दौरान उनके जर्मन समर्थक संबंधों के कारण लियौटी ने 1918 में उनकी मोरक्कन संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया।<ref>{{cite conference|title=L'Allemagne et le Maroc pendant la Grande Guerre|author=Mustapha El Qadéry|book-title=Focus sur Tanger – Là où l’Afrique et l’Europe se rencontrent|editor=Dieter Haller and Steffen Wippel|publisher=Konrad-Adenauer-Stiftung|url=https://www.kas.de/c/document_library/get_file?uuid=bc83847c-a93f-39a7-9c6d-45e28e929559&groupId=252038|date=2016|page=33}}</ref> इसके बाद संरक्षण अधिकारियों ने टेंजेर महल को एक सरकारी नीलामी में बेच दिया, जिसे [[चार्जर्स]] समूह की पूर्ववर्ती इकाई, {{interlanguage link|निकोलस पैकेट|fr|Nicolas Paquet}} द्वारा स्थापित मार्सिले की पैकेट शिपिंग कंपनी ने जीत लिया। पैकेट ने बाद में इसे लगभग एक दशक तक अप्रयुक्त रखा।{{R|Tamburini|p=407}} इसके परिणामस्वरूप, महल अपने निर्माण के पूरा होने से लेकर 1927 में इसकी इतालवी खरीद तक लगातार खाली रहा।{{R|Tamburini|p=416}} == इतालवी संस्थान == फासीवादी इटली को टेंजेर प्रोटोकॉल में शामिल न किए जाने को लेकर शंकाएं थीं, जिस पर दिसंबर 1923 में फ्रांस, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे और जिसने टेंजेर अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र की स्थापना की थी। टेंजेर में इतालवी समुदाय छोटा और महत्वहीन था, जिसका मुख्य संगठन एक छोटा पब्लिक स्कूल था, जिसे इतालवी शिक्षिका एलिसा चिमेंटी द्वारा 1914 में शुरू की गई एक निजी पहल से 1919 में स्थापित किया गया था।{{R|Tamburini|p=398}}<ref name="Chimenti">{{cite web|url=https://www.madein.city/tanger/fr/stories/elisa-chimenti-au-service-de-l-education-6895/|title=Elisa Chimenti au service de l'éducation|author=Zineb Bennouna|date={{date|2011/07/04}}|website=Made in Tanger}}</ref> जब इटली 1926 में ज़ोन (अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र) में शामिल होने की ओर बढ़ा, तो उसने संपूर्ण [[उत्तरी अफ्रीका]] में इतालवी प्रभाव के व्यापक दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में टेंजेर में अपनी प्रोफ़ाइल बढ़ाने का प्रयास किया। जनवरी 1927 में, इतालवी सरकार के मुखौटे के रूप में कार्य करने वाले नेशनल एसोसिएशन फॉर सकर ऑफ इटालियन मिशनरीज ({{langx|it|Associazione Nazionale per Soccorrere i Missionari Italiani}}, ANSMI) ने पैकेट कंपनी से अब्देलहाफ़िद महल खरीदा। इतालवी मुख्य भूमि पर फासीवादी प्रथा के अनुरूप, इस संपत्ति को पलाज़ो लिटोरियो नाम दिया गया था। जल्द ही इसने कई शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ एक छोटे से अस्पताल की मेज़बानी की, और 1930 के दशक में इसमें एक रेडियोटेलीग्राफिक स्टेशन और एक छोटा डाकघर भी जोड़ा गया।<ref name="Tamburini">{{citation|author=Francesco Tamburini|title=Le Istituzioni Italiane di Tangeri (1926-1956)|date=2006|url=https://www.jstor.org/stable/40761867|journal=[[Africa: Rivista trimestrale di studi e documentazione|Africa: Rivista trimestrale di studi e documentazione dell'Istituto italiano per l'Africa e l'Oriente]]|volume=61:3/4|pages=396–434|publisher=Istituto Italiano per l'Africa e l'Oriente (IsIAO)|jstor=40761867}}</ref> 1939-1940 में संपत्ति के पश्चिमी हिस्से में फ्रांसिस्कन भिक्षुओं के लिए [[असीसी के फ्रांसिस|संत फ्रांसिस]] को समर्पित एक कैथोलिक चर्च बनाया गया था,<ref>{{cite web|url=http://www.babelfan.ma/tous-les-lieux/details/0/344/palais-des-institutions-italiennes.html|title=Palais des institutions Italiennes|website=BabelFan.ma|archive-url=https://web.archive.org/web/20230108014658/http://www.babelfan.ma/tous-les-lieux/details/0/344/palais-des-institutions-italiennes.html|archive-date=2023-01-08|access-date=2023-01-07|url-status=dead}}</ref> जिसने 1927 में बने एक छोटे चैपल की जगह ली।<ref>{{cite web|url=https://www.archnet.org/sites/9073|title=Chiesa di San Francesco d'Assisi - Tangier, Morocco|website=Archnet}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> इसके निर्माण ने अन्य राष्ट्रीय समुदायों को अपने स्वयं के चर्च बनाने के लिए प्रेरित किया, अर्थात् [[टेंजेर का फ्रांसीसी चर्च]] (1953 में समर्पित) और स्पेनिश चर्च जो शहर का कैथेड्रल बन गया (1961 में समर्पित)।<ref name="Darias">{{citation|author=Alberto Darias Príncipe|title=La arquitectura al servicio del poder: la Catedral de Tánger como catarsis de las frustraciones coloniales españolas|date=2014|url=https://www.redalyc.org/pdf/2744/274430195004.pdf|journal=Anuario de Estudios Atlánticos|volume=60|pages=765–816}}</ref> जबकि लड़कों और लड़कियों के लिए परिसर के बोर्डिंग स्कूल [[द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद बंद कर दिए गए थे, अन्य स्कूल 1987 में बंद होने तक सक्रिय रहे। अस्पताल युद्ध के बाद की उथल-पुथल से भी बच गया और हाल ही में इसका प्रबंधन फ्रांसिस्कन ननों द्वारा किया गया है, जो अभी भी ANSMI के तत्त्वावधान में है।<ref>{{cite web|url=https://www.elisachimenti.org/palais_aujourd'ui.html|title=Le Palais des Institutions Italiennes - Aujourd'hui|website=Fondazione Elisa Chimenti}}</ref> महल के अन्य हालिया रहने वालों में दांते अलीघिएरी सोसाइटी और {{lang|it|कासा डी'इटालिया (Casa d'Italia)}} रेस्तरां शामिल हैं।<ref>{{cite web|url=https://conscasablanca.esteri.it/consolato_casablanca/it/la_comunicazione/palazzo_istituzioni_italiane_tangeri#:~:text=Il%20Palazzo%20propriamente%20detto%20costituisce,le%20gallerie%20ad%20archi%2C%20l|title=Il Palazzo delle Istituzioni Italiane di Tangeri|website=Consolato Generale d'Italia Casablanca}}</ref> अस्पताल के अलावा महल के अन्य हिस्सों का प्रबंधन करने के लिए 2010 में एक फाउंडेशन का गठन किया गया था, और इसका नाम एलिसा चिमेंटी के नाम पर रखा गया, जिन्होंने 1914 में पहले इतालवी स्कूल की स्थापना की थी।<ref name="Chimenti" /> हाल के वर्षों में महल ने टेंजेर अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेला, मेडिटेरेनियन नाइट्स फेस्टिवल और [[टैनजैज़]] (Tanjazz) संगीत समारोह जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेज़बानी की है।<ref name="Solovyov" /> == टिप्पणियाँ == {{reflist}}{{coord|35.78557|-5.82153|type:landmark_region:MA|format=dms|display=title}} 8h371v7d0uvau0eoi1knk3wzvbp7xyb अब्दुल क़ादिर हसन बरजा 0 1609988 6536567 6532115 2026-04-05T12:10:13Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536567 wikitext text/x-wiki {{Infobox person|name=अब्दुल क़ादिर हसन बरजा|image=|alt=|caption=|native_name=|birth_name=|birth_date={{Birth date and age|df=y|1944|08|10}}|birth_place=[[तालिवांग]], [[सुम्बावा]], [[डच ईस्ट इंडीज पर जापानी कब्ज़ा|जापानी कब्जे वाले डच ईस्ट इंडीज]]|death_date=|death_place=|alma_mater=[[पोंडोक मॉडर्न दारुस्सलाम गोटोर]]|occupation=मौलवी|years_active=1970–वर्तमान|known_for=[[खिलाफतुल मुस्लिमीन]] के [[खलीफा]]|title=|spouse=|children=|parents=|website=}}'''अब्दुल क़ादिर हसन बरजा''' (जन्म 10 अगस्त 1944) एक इंडोनेशियाई मौलवी और खिलाफतुल मुस्लिमीन के संस्थापक और खलीफा हैं।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://nasional.sindonews.com/read/791483/13/profil-abdul-qadir-hasan-baraja-dari-bom-borobudur-hingga-khilafatul-muslimin-1654607196?showpage=all|title=Profil Abdul Qadir Hasan Baraja, dari Bom Borobudur hingga Khilafatul Muslimin|website=SINDOnews.com|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref> वह एक पूर्व दारुल इस्लाम कार्यकर्ता और कोमांडो जिहाद के लड़ाके हैं, जो 1970 के दशक के अंत से 1980 के दशक तक सक्रिय थे।<ref name=":0" /> == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == बरजा ने 1970 से कुछ समय पहले पोंडोक मॉडर्न दारुस्सलाम गोटोर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी।<ref name=":0" /> पिछली रिपोर्टों में बताया गया था कि स्नातक होने के बाद उन्होंने अपने सहयोगी और गोटोर के पूर्व छात्र अबू बकर बासीर द्वारा स्थापित नग्रुकी इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया था।<ref name=":0" /> हालाँकि, नग्रुकी स्कूल ने इस रिपोर्ट का खंडन किया और स्पष्ट किया कि एक और व्यक्ति अब्दुल्ला बरजा थे, जो इस मामले से संबंधित थे, न कि अब्दुल क़ादिर हसन बरजा। अब्दुल्ला बरजा, अब्दुल क़ादिर हसन बरजा के रिश्तेदार नहीं थे और अब्दुल्ला की 2007 में ही मृत्यु हो चुकी थी।<ref>{{Cite web|url=https://surakarta.suara.com/read/2022/06/08/142251/ponpes-al-mukmin-ngruki-bantah-abdul-qadir-hasan-baraja-salah-satu-pendiri-pondok-bersama-abu-bakar-baasyir|title=Ponpes Al Mukmin Ngruki Bantah Abdul Qadir Hasan Baraja Salah Satu Pendiri Pondok Bersama Abu Bakar Ba'asyir|date=2022-06-08|website=suara.com|language=id|access-date=2022-06-13}}</ref> 1970 में किसी समय, दारुल इस्लाम विद्रोह की हार के आठ साल बाद, बरजा दारुल इस्लाम में शामिल हो गए।<ref name=":3">{{Cite web|url=https://www.merdeka.com/peristiwa/sepak-terjang-abdul-qadir-baraja-pemimpin-khilafatul-muslimin.html|title=Sepak Terjang Abdul Qadir Baraja, Pemimpin Khilafatul Muslimin|date=2022-06-05|website=merdeka.com|language=en|access-date=2022-06-13}}</ref> बाद में वह लैम्पुंग चले गए और 1970 के दशक में दारुल इस्लाम लैम्पुंग शाखा की स्थापना की।<ref name=":3" /> == आतंकवादी गतिविधियों का इतिहास == बरजा को आतंकवाद के आरोप में दो बार जेल भेजा जा चुका था। पहली बार 1979 में वर्मन टेरर (दारुल इस्लाम का एक सशस्त्र आतंकी कृत्य) में शामिल होने के लिए, और 1985 में 1985 बोरोबुदुर बम विस्फोट के बाद।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.cnnindonesia.com/nasional/20220607090507-12-805722/abdul-qadir-baraja-pendiri-khilafatul-muslimin-hingga-bom-borobudur|title=Abdul Qadir Baraja: Pendiri Khilafatul Muslimin hingga Bom Borobudur|date=2022-06-07|website=CNN Indonesia|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref> 1979 में वर्मन टेरर के समय, उन्होंने अडा जेलानी सेल के हिस्से के रूप में वर्मन टेरर नेटवर्क में भूमिका निभाई, जो लैम्पुंग में संचालित होती थी और आतंकवाद को वित्तीय सहायता प्रदान करती थी।<ref name=":1" /> 1985 में, वह बोरोबुदुर बम विस्फोट में शामिल थे, जिसमें बोरोबुदुर के 9 स्तूप क्षतिग्रस्त हो गए थे।<ref name=":2">{{Cite web|url=https://nasional.sindonews.com/read/792259/13/rekam-jejak-abdul-qadir-baraja-ditahan-kasus-terorisme-hingga-dirikan-majelis-mujahidin-1654679192|title=Rekam Jejak Abdul Qadir Baraja: Ditahan Kasus Terorisme hingga Dirikan Majelis Mujahidin|website=SINDOnews.com|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref> == इंडोनेशियाई मुजाहिदीन परिषद के सह-संस्थापक == वर्ष 2000 में जब इंडोनेशियाई मुजाहिदीन परिषद की स्थापना हुई, तब बरजा भी इसके सह-संस्थापकों में से एक थे।<ref name=":2" /> वह 5-7 अगस्त 2000 को आयोजित प्रथम मुजाहिदीन कांग्रेस के दौरान इंडोनेशियाई मुजाहिदीन परिषद के पहले 36-सदस्यीय 'अहलुल हल्ली वल 'अक़दी' (Ahlul Halli wal 'Aqdi) बोर्ड के सदस्यों में से एक थे, जिसने बासीर को इंडोनेशियाई मुजाहिदीन परिषद के राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया।<ref>{{Cite book|url=https://simlitbangdiklat.kemenag.go.id/simlitbang/spdata/upload/dokumen-penelitian/14836694687.pdf|title=GERAKAN SOSIAL KEAGAMAAN MAJELIS MUJAHIDIN DALAM KEHIDUPAN KEBANGSAAN|last=Rosidin|publisher=BALAI PENELITIAN DAN PENGEMBANGAN AGAMA SEMARANG KEMENTERIAN AGAMA|year=2016|location=Semarang|language=id|access-date=21 मार्च 2026|archive-date=20 फ़रवरी 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230220045246/https://simlitbangdiklat.kemenag.go.id/simlitbang/spdata/upload/dokumen-penelitian/14836694687.pdf|url-status=dead}}</ref> == खिलाफतुल मुस्लिमीन और खिलाफतुल मुस्लिमीन के खलीफा == खिलाफतुल मुस्लिमीन की स्थापना बरजा द्वारा 1977 में किसी समय की गई थी,<ref>{{Cite web|url=https://news.detik.com/berita/d-6117233/rekam-jejak-pimpinan-khilafatul-muslimin-ikut-dirikan-majelis-mujahidin|title=Rekam Jejak Pimpinan Khilafatul Muslimin, Ikut Dirikan Majelis Mujahidin|last=Hanafi|first=M.|website=detiknews|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref> लेकिन औपचारिक रूप से एक जन संगठन के रूप में इसकी स्थापना 18 जुलाई 1997 को हुई थी।<ref>{{Cite web|url=https://populis.id/read22855/mengenal-organisasi-khilafatul-muslimin-beda-dengan-hti-tidak-bertujuan-dirikan-negara-islam|title=Mengenal Organisasi Khilafatul Muslimin: Beda dengan HTI, Tidak Bertujuan Dirikan Negara Islam|last=Populis|website=Populis|language=id|access-date=2022-06-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://islami.co/konvoi-motor-promosi-khilafah-ini-sejarah-khilafatul-muslimin-dan-latar-belakang-pendiriannya/|title=Konvoi Motor Promosi Khilafah, Ini Sejarah Khilafatul Muslimin dan Latar Belakang Pendiriannya|date=2022-06-01|website=Islami[dot]co|language=en-US|access-date=2022-06-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://koran.tempo.co/read/berita-utama/474241/rekam-jejak-pendiri-khilafatul-muslimin-abdul-qadir-hasan-baraja|title=Jejak Kelam Hasan Baraja|last=Paraqbueq|first=Rusman|date=2022-06-06|website=Koran Tempo|language=id|access-date=2022-06-13}}</ref> बरजा ने दावा किया कि, खिलाफतुल मुस्लिमीन के अस्तित्व के पहले तीन वर्षों के दौरान, संगठन में खलीफा का पद नहीं था। बाद में 2000 में [[योग्याकार्ता]] में खिलाफतुल मुस्लिमीन कांग्रेस के बाद खलीफा का पद स्थापित किया गया।<ref name=":4">{{Cite web|url=https://www.medcom.id/nasional/daerah/8kovE8db-abdul-qadir-hasan-baraja-ungkap-sejarah-khilafatul-muslimin|title=Abdul Qadir Hasan Baraja Ungkap Sejarah Khilafatul Muslimin|last=|first=|date=2022-06-08|website=medcom.id|language=id|access-date=2022-06-13}}</ref> == 2022 की गिरफ्तारी == 2022 के खिलाफत काफिले के बाद, [[इंडोनेशियाई राष्ट्रीय पुलिस]] ने बाद में काफिले के लिए जिम्मेदार खिलाफतुल मुस्लिमीन के प्रत्येक सदस्य की तलाश शुरू कर दी। [[खिलाफत]] को बढ़ावा देने और राज्य की विचारधारा पंचशील को इस्लामी खिलाफत से बदलने के प्रयास में शामिल होने के कारण बरजा को 7 जून 2022 को लैम्पुंग में पकड़ लिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.cnnindonesia.com/nasional/20220607074258-12-805692/petinggi-khilafatul-muslimin-abdul-qadir-baraja-ditangkap-di-lampung|title=Petinggi Khilafatul Muslimin Abdul Qadir Baraja Ditangkap di Lampung|date=2022-06-07|website=CNN Indonesia|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.cnnindonesia.com/nasional/20220607170738-12-805968/polisi-baraja-ditangkap-karena-tawarkan-khilafah-gantikan-pancasila|title=Polisi: Baraja Ditangkap karena Tawarkan Khilafah Gantikan Pancasila|date=2022-06-07|website=CNN Indonesia|language=id-ID|access-date=2022-06-13}}</ref> 24 जनवरी 2023 को बरजा को 10 साल जेल की सजा सुनाई गई और 50 मिलियन [[इंडोनेशियाई रुपिया|रुपिया]] का जुर्माना लगाया गया। अदालत के फैसले से उनके संगठन को भी गैरकानूनी घोषित कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.cnnindonesia.com/nasional/20230126081519-12-904985/pemimpin-khilafatul-muslimin-abdul-qadir-baraja-divonis-10-tahun-bui|title=Pemimpin Khilafatul Muslimin Abdul Qadir Baraja Divonis 10 Tahun Bui|website=nasional|language=id-ID|access-date=2023-02-10}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.harakatuna.com/vonis-khilafatul-muslimin-dan-pemberantasan-organisasi-lintas-radikal.html|title=Vonis Khilafatul Muslimin dan Pemberantasan Organisasi Lintas-Radikal|last=Khoiri|first=Ahmad|date=2023-02-03|website=Harakatuna.com|language=en-US|access-date=2023-02-10}}</ref> == संदर्भ == <references /> 0gr2mlg3o0epupzairv9njr78j3u3lb अरमांडो बुकेले कट्टन 0 1609989 6536680 6532116 2026-04-05T17:50:12Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536680 wikitext text/x-wiki {{Infobox person|name=अरमांडो बुकेले कट्टन|image=|alt=|caption=|birth_date={{birth date|1944|12|16|df=y}}|birth_place=[[सैन साल्वाडोर]], अल सल्वाडोर|death_date={{death date and age|2015|11|30|1944|12|16|df=y}}|death_place=सैन साल्वाडोर, अल सल्वाडोर|occupation=[[व्यवसायी]]|alma_mater=[[अल सल्वाडोर विश्वविद्यालय]]|children=10, जिनमें [[नायब बुकेले|नायब]], [[करीम बुकेले|करीम]], [[युसेफ बुकेले|युसेफ]], [[इब्राजिम बुकेले|इब्राजिम]], और [[यामिल बुकेले|यामिल]] शामिल हैं<ref>{{cite web|url=https://elfaro.net/es/202006/el_salvador/24512/El-clan-Bukele-que-gobierna-con-Nayib.htm|title=El Clan Bukele que Gobierna con Nayib|trans-title=नायब के साथ शासन करने वाला बुकेले कबीला|date=7 June 2020|access-date=13 July 2022|work=[[El Faro (digital newspaper)|El Faro]]|first1=Jimmy|last1=Alvarado|first2=Gabriel|last2=Labrador|first3=Sergio|last3=Arauz}}</ref>|known_for=|awards=}}'''अरमांडो बुकेले कट्टन''' (16 दिसंबर 1944 – 30 नवंबर 2015) फ़िलिस्तीनी मूल के एक सल्वाडोरन व्यवसायी, मुस्लिम धार्मिक नेता और अल सल्वाडोर के वर्तमान राष्ट्रपति नायब बुकेले के पिता थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.laprensagrafica.com/elsalvador/Fallece-Armando-Bukele-padre-del-alcalde-Nayib-Bukele-20151130-0118.html|title=Fallece Armando Bukele, padre del alcalde Nayib Bukele|date=30 November 2015|website=[[La Prensa Gráfica]]|access-date=21 January 2026}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == अरमांडो बुकेले कट्टन का जन्म 16 दिसंबर 1944 को सैन साल्वाडोर में हुआ था, वे हम्बर्टो बुकेले सलमान और विक्टोरिया कट्टन डी बुकेले के पुत्र थे।<ref>{{Cite web|url=https://ancestors.familysearch.org/es/LYWM-82G/armando-bukele-kattan-1944-2015|title=Armando Bukele Kattán (1944–2015)|website=FamilySearch|access-date=21 January 2026}}</ref> उनके माता-पिता यरूशलेम का मुतासरिफ़ेट, [[उस्मानी साम्राज्य]] के [[बेथलहम]] से फ़िलिस्तीनी ईसाई थे, जो 20वीं सदी की शुरुआत में एक प्रवासन की लहर के हिस्से के रूप में अल सल्वाडोर चले गए थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.timesofisrael.com/his-dad-was-an-imam-his-wife-has-jewish-roots-meet-el-salvadors-new-leader/|title=His Dad was an Imam, Meet El Salvador's New Leader|last=Ahren|first=Raphael|date=7 February 2019|website=[[The Times of Israel]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20190627001613/https://www.timesofisrael.com/his-dad-was-an-imam-his-wife-has-jewish-roots-meet-el-salvadors-new-leader/|archive-date=27 June 2019|access-date=16 February 2020|url-status=live}}</ref> उन्होंने अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई लाइसियो साल्वाडोरेनो से पूरी की। == शिक्षा == 1967 में, बुकेले ने अल सल्वाडोर विश्वविद्यालय से औद्योगिक रसायन विज्ञान के डॉक्टर के रूप में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।<ref>{{Cite web|url=https://www.lapagina.com.sv/nacionales/biblioteca-nacional-encuentra-la-tesis-universitaria-de-don-armando-bukele-padre-del-presidente-de-la-republica/|title=Biblioteca Nacional encuentra la tesis universitaria de don Armando Bukele, padre del presidente de la República|date=November 14, 2020}}</ref> == उद्यमी == बुकेले कट्टन ने कपड़ा उद्योग, वाणिज्य, फार्मास्यूटिकल्स, विज्ञापन और मीडिया को समर्पित कंपनियों की स्थापना की। वह किवानिस क्लब के परोपकारी प्रयासों से भी जुड़े थे, जो एक सामुदायिक सेवा संस्थान है जो उद्यमियों और पेशेवरों को एक साथ लाता है।<ref>{{Cite web|url=http://ultimahora.sv/conmemoran-primer-aniversario-del-fallecimiento-de-don-armando-bukele/|title=Conmemoran primer aniversario del fallecimiento de Don Armando Bukele|date=November 30, 2016|website=ultimahora.sv}}</ref> == धार्मिक नेता और प्रभाव == बुकेले ने 1980 के दशक में ईसाई धर्म से इस्लाम अपना लिया था और अपने जीवनकाल में पांच [[मस्जिद|मस्जिदों]] की स्थापना की, जिसमें 1992 में अल सल्वाडोर की पहली मस्जिद भी शामिल है।<ref>{{Cite web|url=http://elpais.com.sv/inauguran-mezquita-en-santa-ana/|title=Inauguran mezquita en Santa Ana &#124; Periódico EL Pais}}</ref> उन्होंने सल्वाडोरन इस्लामिक कम्युनिटी के [[इमाम]] के रूप में कार्य किया और लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के लिए इस्लामी संगठन का हिस्सा थे। उनका अपने बेटे, नायब बुकेले पर महत्वपूर्ण प्रभाव था, जिन्होंने अक्सर एक गुरु के रूप में अपने पिता की भूमिका और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/mundo/articles/cz7k1r4knwwo|title=3 cosas que quizá no sabías de la vida de Nayib Bukele (y cómo transformó su imagen como mediático y polémico presidente de El Salvador)|date=31 May 2024|website=[[BBC Mundo]]|access-date=21 January 2026}}</ref> == मृत्यु == 30 नवंबर 2015 को बुकेले का निधन हो गया। उनकी मृत्यु की पांचवीं बरसी पर, राष्ट्रपति नायब बुकेले ने उनकी स्मृति को सम्मानित किया, और बताया कि उनके मार्गदर्शन की कितनी कमी खली।<ref>{{Cite web|url=https://diariolahuella.com/presidente-nayib-bukele-parece-metira-que-hace-5-anos-te-fuiste-papa/|title=Presidente Nayib Bukele: "Parece mentira que hace 5 años te fuiste, papá"|date=30 November 2020|website=Diario La Huella|access-date=21 January 2026}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> == प्रकाशित कृतियाँ == * ''इस्लाम का एबीसी'' * ''भौतिकी में अवधारणाओं को स्पष्ट करना'' <ref>{{Cite book|url=http://sb.ues.edu.sv/cgi-bin/koha/opac-detail.pl?biblionumber=22590|title=Clarifying concepts in Physics|last=Bukele Kattán|first=Armando|date=2012|publisher=Imprenta Nacional|isbn=978-99961-0-149-6|edition=Primera edición|location=San Salvador, El Salvador}}</ref> 2017 में, मरणोपरांत पुस्तक ''बिंदु की सटीक सापेक्षता'' (The precise relativity of the point) प्रकाशित हुई थी। यह उनके ट्विटर अकाउंट और उनके कार्यक्रम ''अवधारणाओं को स्पष्ट करना'' पर एकत्र किए गए बुकेले के विचारों का एक व्यापक संकलन है। == संदर्भ == {{reflist}} 2fj3222i7f8qkm9lvnahx0jhnllqaa7 अब्दुल्लाखान मदरसा 0 1610123 6536581 6532406 2026-04-05T12:36:15Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 2 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536581 wikitext text/x-wiki {{Infobox building|name=अब्दुल्लाखान मदरसा|native_name=Abdullaxon madrasasi|image=Abdullaxon madrasasi 2.jpg|image_size=250px|caption=अब्दुल्ला खान मदरसे का मुख्य अग्रभाग|coordinates={{coord|39.7748|64.4049|type:landmark_region:UZ|display=inline,title}}|status=राज्य संपत्ति। बुखारा क्षेत्र के सांस्कृतिक विरासत विभाग के अधीन<ref name="Lex">{{Cite web|url=https://lex.uz/ru/docs/4543266|title=Моддий маданий मेरोसनिंग...|website=Lex.uz|access-date=2020-09-22}}</ref>|building_type=मदरसा|architectural_style=[[मध्य एशियाई वास्तुकला]]|address=खोजा गुंजारी एमएफवाई, मिर्दोस्तम स्ट्रीट|location_city=[[बुखारा क्षेत्र]]|location_country=[[उज़बेकिस्तान]]|construction_start_date=1588|construction_stop_date=1590|owner=[[अब्दुल्ला खान द्वितीय]]|material=पकी हुई ईंटें|floor_count=2 मंजिल}}'''अब्दुल्लाखान मदरसा''' उज़बेकिस्तान के [[बुखारा]] में 'कोशमदरसा' समूह के उत्तर में स्थित एक वास्तुशिल्प स्मारक है। यह [[मदरसा]], जो उज़बेक शासक अब्दुल्ला द्वितीय की वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण है, 16वीं शताब्दी में बुखारा की वास्तुकला की सभी रचनात्मक उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है। == इतिहास == इस मदरसे के वास्तुकार अज्ञात हैं, और इसका निर्माण अब्दुल्ला द्वितीय द्वारा कराया गया था। निर्माण कार्य 1587-1588 में शुरू हुआ और 1589-1590 में समाप्त हुआ। == स्थान == यह मदरसा बुखारा में कोशमदरसा समूह के उत्तरी भाग में, मोदारिखान मदरसा के विपरीत स्थित है। यह और मोदारिखान मदरसा मिलकर कोशमदरसा का वास्तुशिल्प समूह बनाते हैं। [[मध्य एशिया]] की वास्तुकला में, "कोश" शब्द का उपयोग दो इमारतों के एक जोड़े के लिए किया जाता है जिनके अग्रभाग एक-दूसरे के सामने होते हैं, और "कोश मदरसा" का उपयोग दो मदरसों के लिए किया जाता है। == वास्तुकला == मदरसे की बाहरी दीवारों पर पश्चिमी और उत्तरी अग्रभागों पर बड़े पेशरव हैं। दक्षिणी तरफ, जो एक स्नानघर से जुड़ा था, मुख्य दीवार से कोई उभार ध्यान देने योग्य नहीं है। अब्दुल्ला खान मदरसे की मस्जिद में हर दिन पांच समय की और जुमे की नमाज अदा की जाती थी।{{sfn|Abduxoliqov|2013|p=494}}। [[चित्र:Abdullaxon_madrasasi_devori_qulashi_002.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल|अब्दुल्लाखान मदरसे की ढही हुई पिछली दीवार। 29 जुलाई, 2021]] इसकी संरचना सामान्य मदरसों से काफी अलग है। दो मंजिला कमरे प्रांगण को घेरे हुए हैं। दोनों तरफ एक गैलरी और एक ऊंचा बरामदा है। प्रवेश द्वार आंतरिक कमरों और बैठक कक्ष की ओर ले जाते हैं। मदरसे का बड़ा हिस्सा दक्षिण की ओर है। पंखों और [[मुकर्नास]] को लाख की सजावट से सजाया गया है। द्वार से गुजरते ही दोनों ओर बड़े कमरों - कक्षा और मस्जिद में प्रवेश होता है। दरवाजे के चौखट की शैली का एक अनूठा उदाहरण लकड़ी के छोटे टुकड़ों से बनाया गया है।{{sfn|Abduxoliqov|2013|p=494}} प्रांगण की संरचना "चोराइवोन" पद्धति में की गई है जिसमें एक पंक्ति में ऊंचे अग्रभाग स्थित हैं। मदरसे के कोनों में जटिल ऐतिहासिक संबंध बनाए गए हैं, जिनमें प्रार्थना कक्ष शामिल हैं। पश्चिमी भाग में एक विस्तृत गुंबद वाला कमरा है। यह दो मंजिला कोठरियों से घिरा हुआ है। मुख्य अग्रभाग को छोड़कर मदरसे के सभी बाहरी अग्रभागों को उठाया गया है और पकी हुई ईंटों से सजाया गया है। मुख्य पूर्वी अग्रभाग के बीच में एक गहरा मेहराब है। प्रवेश द्वार के ऊपर एक पुस्तकालय है। प्रवेश द्वार के अग्रभाग पर कभी शिलालेखों की एक पट्टी थी, जिस पर [[कुरान]] की आयतें सफेद अक्षरों में लिखी गई थीं।{{sfn|Abduxoliqov|2013|p=494}} == जीर्णोद्धार == इन वर्षों में, अब्दुल्ला खान मदरसे का व्यापक नवीनीकरण हुआ, जो मुख्य रूप से मदरसे के सामने के हिस्से पर केंद्रित था। बुखारा की स्थापना की 2500वीं वर्षगांठ के कारण बड़े पैमाने पर बहाली का काम भी किया गया था। जीर्णोद्धार कार्य के दौरान, दोनों मदरसों के केंद्र के मैदानों को नीचे किया गया था।{{sfn|Abduxoliqov|2013|p=494}} == विनाश == 29-30 जुलाई, 2021 की रात को अब्दुल्ला खान मदरसे की पिछली दीवार का एक हिस्सा ढह गया।<ref>{{Cite web|url=https://bugun.uz/2021/08/03/buxoroda-abdullaxon-madrasasi-devori-qulab-tushdi--video|title=बुखारा में "अब्दुल्ला खान" मदरसे की दीवार ढह गई - वीडियो|website=Bugun.uz|access-date=2021-08-03|archive-date=11 अगस्त 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210811070841/https://bugun.uz/2021/08/03/buxoroda-abdullaxon-madrasasi-devori-qulab-tushdi--video|url-status=dead}}</ref> सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के अधिकारियों ने स्थिति का अध्ययन किया और उनके अनुमान के अनुसार, इमारत की पूरी मरम्मत के लिए छह अरब सोम की आवश्यकता है। बुखारा क्षेत्रीय अभियोजक कार्यालय ने मामले की जांच की और आपराधिक मामला दर्ज किया।<ref>{{Cite web|url=https://bugun.uz/2021/08/06/buxorodagi-abdullaxon-madrasasining-devori-qulab-tushgani-boyicha-djinoyat-ishi-qozgatildi|title=बुखारा में "अब्दुल्ला खान" मदरसे की दीवार गिरने के संबंध में आपराधिक मामला शुरू|website=Bugun.uz|access-date=2021-08-06|archive-date=11 अगस्त 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210811070839/https://bugun.uz/2021/08/06/buxorodagi-abdullaxon-madrasasining-devori-qulab-tushgani-boyicha-djinoyat-ishi-qozgatildi|url-status=dead}}</ref> == गैलरी == {{Wide image|Abdullaxon madrasasi.jpg|1500px|{{center|अब्दुल्लाखान मदरसा}}|90%|center}} == संदर्भ == {{Reflist}} == साहित्य == {{commons category}} * Pugachenkova G. A., Rempel L. I., Vidayushiyesya pamyatniki arxitekturi Oʻzbekistana, T., 1958. * {{cite book|title=Oʻzbekiston obidalaridagi bitiklar: Buxoro|date=2013|publisher=Uzbekistan Today|isbn=978-9943-4510-5-6|location=[[ताशकंद]]|pages=494-560|ref={{harvid|Abduxoliqov|2013}}}} ifztm3vp9c9as1pkl3mdh8k3ydhan03 अल-मरकज़ुल इस्लामी अस-सलाफ़ी 0 1610130 6536702 6532415 2026-04-05T21:06:50Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536702 wikitext text/x-wiki {{Infobox school|name=अल-मरकज़ुल इस्लामी अस-सलाफ़ी|native_name=আল-মারকাযুল ইসলামী আস-সালাফী|motto=इक़ामतुल दीन अला मनहज अल-सलफ़|motto_translation=इस्लाम को नेक पूर्वजों के मनहज पर स्थापित करना|location=नावदापाड़ा, सपुरा, [[राजशाही]]|country=[[बांग्लादेश]]|coordinates={{Coord|24.4092|N|88.6096|E|region:BD_type:edu|display=inline,title}}|established=1981|founder=[[मुहम्मद असदुल्ला अल-ग़ालिब]]|type=गैर-सरकारी|school_board=[[बांग्लादेश मदरसा शिक्षा बोर्ड]]|district=[[राजशाही]]|grades=प्राथमिक से उच्च माध्यमिक (इब्तेदायी-आलिम)|chairman=[[मुहम्मद असदुल्ला अल-ग़ालिब]]|principal=नूरुल इस्लाम (कार्यवाहक)|enrollment=3600+|faculty=110+|campus_type=शहरी|campus_size=7 एकड़|website={{URL|amis.edu.bd}}}}'''अल-मरकज़ुल इस्लामी अस-सलाफ़ी''' (अरबी: المركز الإسلامي السلفي) बांग्लादेश में एक असाधारण इस्लामी शैक्षणिक संस्थान है, जो मनहज सलफ़ पर आधारित है और एक अद्वितीय पाठ्यक्रम एवं उच्च मानकों के साथ अहलेहदीस आंदोलन बांग्लादेश द्वारा संचालित है। यह बांग्लादेश के पूर्वी संभाग के [[राजशाही]] के नावदापाड़ा में स्थित है और देश भर के अन्य शहरों में भी इसकी कुछ शाखाएँ हैं। <ref>* {{cite web|url=http://www.rajshahi.gov.bd/node/714821|website=Rajshahi District|language=bn|script-title=bn:শাহ মখদুম থানার শিক্ষা প্রতিষ্ঠানের তালিকা}} * {{cite web|url=http://www.nawdaparamadrasa.ahlehadeethbd.org/|website=nawdaparamadrasa.ahlehadeethbd.org|script-title=bn:ভর্তি ফরম (ছাত্র শাখা)|access-date=22 मार्च 2026|archive-date=17 फ़रवरी 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130217043417/http://www.nawdaparamadrasa.ahlehadeethbd.org/|url-status=dead}} * {{cite news|url=https://www.thedailystar.net/news-detail-101319|title=Madrasa shut over militancy|date=13 August 2009|newspaper=The Daily Star}}</ref> == इतिहास == अल-मरकज़ुल इस्लामी अस-सलाफ़ी की स्थापना 1981 में [[राजशाही]] के नावदापाड़ा, सपुरा में स्थानीय धार्मिक नेताओं द्वारा एक हिफ़्ज़ मदरसे के रूप में की गई थी। बाद में 1991 में इसे पुनर्गठित किया गया और इसका नाम बदलकर अल-मरकज़ुल इस्लामी अस-सलाफ़ी कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://ijlter.org/index.php/ijlter/article/viewFile/10351/pdf|title=ISLAMIC EDUCATION IN BANGLADESH Tradition, Trends, and Trajectories|last1=Ahmad|first1=Mumtaz|access-date=2026-02-22}}</ref> == प्रशासन == इस मदरसे की स्थापना मुहम्मद असदुल्ला अल-ग़ालिब द्वारा की गई थी और इसका प्रबंधन अहलेहदीस आंदोलन बांग्लादेश के शिक्षा विभाग और हदीस फाउंडेशन शिक्षा बोर्ड द्वारा किया जाता है। अपनी स्थापना के बाद से, तीन प्रसिद्ध इस्लामी विद्वानों ने इसके प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया है। * अब्दुस समद सलाफ़ी (1991–2008)<ref>{{cite press release|url=http://www.dailysonardesh.com/DetailsNews.php?Id=7791|script-title=bn:রাজশাহীতে আহ্লেহাদীস জামাআত ও ছাত্র সমাজের জাতীয় তাবলিগী ইজতেমা|website=dailysonardesh.com|date=3 February 2013}}</ref> * अब्दुर रज्ज़ाक बिन यूसुफ (2009-2014)<ref>* {{cite news|date=20 April 2012|work=Daily Patradoot|script-title=bn:বুধহাটায় আহলে হাদীছ আন্দোলনের সম্মেলন আজ}} * {{cite news|date=11 September 2012|work=The Daily Mathabhanga|script-title=bn:আল্লাহর অহির আলোকে সমাজ ও দেশ গড়ে তুলতে হবে -মাও. রাযযাক বিন ইউসুফ}}</ref> * अब्दुल खालिक सलाफ़ी (2014–2021) * नूरुल इस्लाम (2021–वर्तमान, कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में) == संदर्भ == {{Reflist}} jsuladgfh2qmbkj6giemnjrlu5ztx6z अमीरा ख़ातून 0 1610177 6536610 6532496 2026-04-05T15:18:28Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536610 wikitext text/x-wiki {{Infobox royalty|name=अमीरा ख़ातून|succession=अब्बासी खलीफा की पत्नी|reign=1124 – 1130 के दशक|reign-type=कार्यकाल|spouse=[[अल-मुस्तर्शिद]] <br>{{small|(1135 में उनकी मृत्यु तक)}}|full name=ख़ातून बिन्त अहमद संजर|father=[[अहमद संजर]]|birth_date=1110 के दशक|birth_place=[[मर्व]], सेलजुक सल्तनत|death_date=1130 के दशक|death_place=[[बगदाद]]/मर्व|house=[[सेलजुक राजवंश|सेलजुक]]|religion=[[सुन्नी इस्लाम]]}} '''अमीरा ख़ातून'''<ref>{{Cite thesis|title=Orta Asya Türk-İslâm devletlerinde evlilikler ve evlilik gelenekleri|url=https://acikbilim.yok.gov.tr/handle/20.500.12812/441011|publisher=Sosyal Bilimler Enstitüsü|date=2019-10-18|degree=masterThesis|language=tr|first=Alime|last=Okumuş Güney|access-date=22 मार्च 2026|archivedate=13 जनवरी 2024|archiveurl=https://web.archive.org/web/20240113035338/https://acikbilim.yok.gov.tr/handle/20.500.12812/441011}}</ref> ({{langx|fa|امیره خاتون}}) एक सेलजुक राजकुमारी, सुल्तान अहमद संजर की बेटी और [[अब्बासी राजवंश|अब्बासी]] खलीफा अल-मुस्तर्शिद की मुख्य पत्नी थी। == पृष्ठभूमि == अमीरा ख़ातून सेलजुक राजवंश से संबंधित थी, जिसने खलीफा के नाम पर 'सल्तनत' के रूप में पूर्वी इस्लामी दुनिया पर शासन किया था। उनके पिता सेलजुक सुल्तान मालिक शाह प्रथम के पुत्र थे{{sfn|Lambton|1988|p=35}} और उनकी माँ ताजुद्दीन सफ़रिय्या ख़ातून थीं।{{sfn|Massignon|1982|p=162}}{{sfn|Safi|2006|p=67}} उनके चाचा सुल्तान मुहम्मद प्रथम तापर थे। == जीवन == अमीरा ख़ातून सेलजुक साम्राज्य के सुल्तान अहमद संजर की पुत्री थी। अमीरा ख़ातून का जन्म 1110 के दशक में खुरासान में हुआ था। उनके जन्म की सही तारीख अज्ञात है। अमीरा ख़ातून ने अपना बचपन अपनी बहन के साथ [[मर्व]] में बिताया। उनके पिता के शासनकाल के दौरान उनकी सभी बहनों<ref name="Lambton 1988">{{cite book|title=Continuity and Change in Medieval Persia|last=Lambton|first=A.K.S.|publisher=Bibliotheca Persica|year=1988|isbn=978-0-88706-133-2|series=Bibliotheca Persica|pages=259–60, 268}}</ref> का विवाह महत्वपूर्ण सेलजुक हस्तियों से हुआ था। उनका विवाह 1124 में अब्बासी खलीफा अल-मुस्तर्शिद<ref name="Lambton 1988" /> से हुआ था।<ref name="TDV İslam Ansiklopedisi">{{cite web|url=https://islamansiklopedisi.org.tr/sencer|title=SENCER|website=TDV İslam Ansiklopedisi|language=tr|access-date=2021-08-30}}</ref> अल-मुस्तर्शिद बि'ल्लाह के साथ उनके विवाह के कारण उन्हें ''मुस्तर्शिदी ख़ातून'' के नाम से भी जाना जाने लगा। उन्होंने सेलजुक हरम छोड़ दिया और खलीफा के हरम में प्रवेश किया और खलीफा की मुख्य व एकमात्र पत्नी बन गईं। हरम में एकांत जीवन व्यतीत करने के कारण उनके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। उनके पति अपने सरकारी मामलों में व्यस्त थे। उनका उनके चचेरे भाई और बहनोई (उनकी बहन गौहर ख़ातून के पति) [[ग़ियाथ अद-दीन मसूद]] के साथ राजनीतिक मतभेद भी था। उनके पति अल-मुस्तर्शिद ने सेलजुक सुल्तान मसूद के खिलाफ एक सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसे स्वयं खलीफा द्वारा जनवरी 1133 में बगदाद में उपाधि प्रदान की गई थी। प्रतिद्वंद्वी सेनाएं हमदान के पास मिलीं। खलीफा को उनकी सेना ने छोड़ दिया, उन्हें बंदी बना लिया गया और इस वादे पर क्षमा कर दिया गया कि वे अपने महल को नहीं छोड़ेंगे। हालांकि, सुल्तान की अनुपस्थिति में खलीफा के तंबू में वे कुरान पढ़ते हुए [[हत्या|असाध्य अवस्था]] में पाए गए। माना जाता है कि यह हत्या शिया [[हशशिन|हत्यारों के संप्रदाय]] के एक दूत द्वारा की गई थी, जिनका खलीफा और सुन्नी मुस्लिम नेताओं के प्रति कोई लगाव नहीं था। संभवतः उनकी मृत्यु उनके पति से पहले या उनके पति की मृत्यु के कुछ वर्षों बाद हुई थी। == संदर्भ == {{reflist}} == स्रोत == * Lambton, A.K.S. (1988). Continuity and Change in Medieval Persia. Bibliotheca Persica. Bibliotheca Persica. pp. 259–60, 268. ISBN 978-0-88706-133-2. * {{cite book|title=The Passion of al-Hallaj, Mystic and Martyr of Islam|last=Massignon|first=Louis|publisher=Princeton University Press|year=1982|volume=2|translator-last=Mason|translator-first=Herbert}} * {{cite book|title=The Politics of Knowledge in Premodern Islam: Negotiating Ideology and Religious Inquiry|last=Safi|first=Omid|publisher=University of North Carolina Press|year=2006}} gsnvkr5usnu0w25e31h8ja1isc8m65v असद ज़ैदी 0 1610196 6536901 6532524 2026-04-06T09:11:25Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536901 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer | name = असद ज़ैदी | birth_date = {{birth date|1954|08|31|df=y}} | birth_place = [[करौली]], राजस्थान, भारत | occupation = कवि, संपादक, अनुवादक, प्रकाशक, साहित्यिक आलोचक | nationality = भारतीय | spouse = नलिनी तनेजा | alma_mater = [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]] }} '''असद ज़ैदी''' (जन्म 31 अगस्त 1954) एक भारतीय कवि, संपादक, अनुवादक, प्रकाशक और साहित्यिक आलोचक हैं। वे 1980 के दशक की शुरुआत से ही एक प्रसिद्ध [[हिंदी]] कवि रहे हैं।<ref>{{Cite web|url=https://pothi.org/en/author/asad-zaidi/|title=असद ज़ैदी की प्रसिद्ध कृतियॉं : Pothi.org|access-date=2023-07-21}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Khosla|first=Navjot|date=2020|title=Maps of the Impossible...|journal=Sanglap: Journal of Literary and Cultural Inquiry|volume=7|issue=1|pages=156–159}}</ref> == जीवनी और कार्य == ज़ैदी का जन्म राजस्थान के [[करौली]] में हुआ था। वे पहली बार 1974 में [[दिल्ली]] आए, जहाँ वे तब से मुख्य रूप से रह रहे हैं। 1970 के दशक के मध्य से 1980 के दशक के मध्य तक, उन्होंने [[जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय]] (JNU) में अध्ययन किया। ज़ैदी का विवाह इतिहासकार नलिनी तनेजा से हुआ है। === कविता की स्वीकार्यता === ज़ैदी के पहले कविता संग्रह 'बहने और अन्य कविताएँ' (1980) ने उन्हें समकालीन हिंदी कविता में एक 'विशिष्ट स्वर' के रूप में स्थापित किया। 1981 में, हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 'संस्कृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। ज़ैदी का कविता संग्रह 'सामान की तलाश' (2008) काफी चर्चा में रहा और इसे बहुत आलोचनात्मक प्रशंसा मिली।<ref name=":3">{{Cite web|url=https://hindustannewshub.com/india-news/asad-zaidis-poems-that-created-a-stir-in-the-world-of-hindi-literature/|title=Asad Zaidi's poems that created a stir in the world of Hindi literature|date=17 June 2023}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> प्रसिद्ध कवि [[मंगलेश डबराल]] ने इस पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए लिखा: "हमारी राजनीति में सांप्रदायिक फासीवाद का उदय और समाज का सांप्रदायिककरण एक नागरिक के रूप में असद ज़ैदी की मुख्य काव्य चिंता है... असद जिस भाषा में यह करते हैं वह हिंदी-उर्दू के बीच एक नया आंदोलन है, जो हमारी काव्य भाषा को समृद्ध करने का एक ठोस प्रयास है।"<ref name=":3" /> 2018 में, आफ्ताब हुसैन ने ज़ैदी को 1947 के विभाजन के बाद हिंदी साहित्य में मुस्लिम रचनाकारों की सामान्य कमी के बीच 'एक शक्तिशाली अपवाद' बताया।<ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.thenews.com.pk/tns/detail/565092-romance-urdu-india|title=Romance of Urdu in India|last=Hussain|first=Aftab}}</ref> === अन्य कार्य === दिल्ली में, ज़ैदी 'थ्री एसेज कलेक्टिव' नाम से एक स्वतंत्र प्रकाशन गृह चलाते हैं। वे 'जलसा' के संपादक भी हैं, जो हिंदी में नए लेखन और अनुवादों का एक वार्षिक साहित्यिक संकलन है। ज़ैदी हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं के ज्ञाता हैं। उन्होंने अंग्रेजी के माध्यम से कई यूरोपीय, लैटिन अमेरिकी और चीनी कवियों के कार्यों का हिंदी और उर्दू में अनुवाद किया है। उन्होंने उर्दू कविता का हिंदी में और हिंदी कविता का अंग्रेजी में भी अनुवाद किया है। इसके अलावा, ज़ैदी एक साहित्यिक आलोचक के रूप में भी जाने जाते हैं। == चयनित ग्रंथ सूची == === लेखक के रूप में === * ''बहने और अन्य कविताएँ'' (1980) * ''कविता का जीवन'' (1988) * ''सामान की तलाश: कविताएँ 1989-2007'' (2008) * ''सारे शाम: असद ज़ैदी के तीन कविता संग्रह'' (2014 - एक खंड जिसमें उपरोक्त तीनों पुस्तकें शामिल हैं) === संपादक के रूप में === * ''रघुवीर सहाय'' (विष्णु नागर और असद ज़ैदी (सं.), 1994) * ''अपनी ज़बान: सांप्रदायिकता विरोधी कविताओं का संग्रह'' (विष्णु नागर और असद ज़ैदी (सं.), 1994) * ''आज का पाठ: समकालीन हिंदी कहानी का एक चयन'' (असद ज़ैदी और विष्णु नागर (सं.), 1994) * ''यह ऐसा समय है: समकालीन हिंदी कविता का एक चयन'' (असद ज़ैदी और विष्णु नागर (सं.), 1994) * ''दस बरस: हिंदी कविता अयोध्या के बाद'' (असद ज़ैदी (सं.), 2003) == संदर्भ == {{reflist}} {{Authority control}} tjmo2icio52lztcdupld5ya3vujs3ut अब्दुल लतीफ़ खान 0 1610268 6536577 6532725 2026-04-05T12:21:56Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 3 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536577 wikitext text/x-wiki {{Infobox person|name=अब्दुल लतीफ़ खान|birth_date=27 मार्च 1927|birth_place=गोहद (जिला भिंड), [[मध्य प्रदेश]], भारत|death_date=23 अप्रैल 2003 (आयु 74)|death_place=[[भोपाल]], [[मध्य प्रदेश]], भारत|occupation=शास्त्रीय संगीतकार, वादक|known for=[[सारंगी]] वादन|children=उस्ताद अनवर हुसैन, उस्ताद नफीस अहमद खान, अब्दुल रशीद खान, अब्दुल शफीक खान, फारूख लतीफ खान (प्रसिद्ध सारंगी वादक), फौजिया खान और रजिया खान। उनके पोते सरवर हुसैन और परपोते अमान हुसैन भी सारंगी वादक हैं।|parents=उस्ताद छोटे खान, रौसिया बेगम|awards=2002 में [[पद्म श्री]]<br/>1990 में [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]]}}'''अब्दुल लतीफ़ खान''' (1927 – 2003) एक भारतीय शास्त्रीय संगीतकार और वादक थे,<ref name="Sarangi">{{cite web|url=http://sarangi.info/sarangi/alk/|title=Abdul Latif Khan (Sarangi player)|date=2015|publisher=Sarangi.info website|access-date=23 मार्च 2026|archive-date=28 जनवरी 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220128023724/https://sarangi.info/sarangi/alk/|url-status=dead}}</ref> जो [[सारंगी]] बजाने में अपनी दक्षता के लिए जाने जाते थे। सारंगी [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] का एक प्रमुख तार वाद्य यंत्र है।<ref name="Swarganga Music Foundation">{{cite web|url=http://www.swarganga.org/artist_details.php?id=314|title=Profile of Abdul Latif Khan|date=2015|publisher=SwarGanga Music Foundation website}}</ref><ref name="TheHindu">{{cite news|url=https://www.thehindu.com/entertainment/music/story-of-the-sarangi/article23602589.ece|title=Story of the sarangi|author=Jyoti Nair|date=19 April 2018|newspaper=The Hindu newspaper}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और करियर == उनका जन्म [[मध्य प्रदेश]] के [[ग्वालियर]] में संगीतकारों के एक परिवार में हुआ था। उन्होंने संगीत की शिक्षा अपने दादा हैदर खान, पिता छोटे खान, और परिवार के अन्य सदस्यों जैसे उदय खान और हद्दु खान से [[ख्याल]] [[घराना]] शैली में प्राप्त की। उन्होंने [[सितार]], [[संतूर]] और [[तबला]] जैसे वाद्यों में महारत हासिल की।<ref name="Swarganga Music Foundation" /> बाद में, उन्होंने बड़े गुलाम साबिर खान से [[सारंगी]] सीखी।<ref name="Swarganga Music Foundation" /><ref>[http://www.sarangi.net/sarangi-players-a-e/11-with-videos/11-abdul-latif-khan Profile of Abdul Latif Khan on sarangi.net website]</ref> अब्दुल लतीफ़ खान ने भोपाल सारंगी मेला जैसे कई संगीत समारोहों में प्रदर्शन किया था और वे [[आकाशवाणी]], [[भोपाल]] में एक स्टाफ कलाकार रहे थे।<ref name="Swarganga Music Foundation" /><ref name="TheHindu" /> उन्होंने [[बड़े गुलाम अली खान]], [[अमीर खान]], [[हीराबाई बरोदेकर]], नज़ाकत और सलामत अली खान, [[कुमार गंधर्व]], [[मल्लिकार्जुन मंसूर]] और [[किशोरी अमोनकर]] जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ संगतकार के रूप में प्रदर्शन किया था।<ref name="Swarganga Music Foundation" /> == पुरस्कार और मान्यता == * 1990 में [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]] प्राप्तकर्ता।<ref name="Swarganga Music Foundation" /><ref name="Sangeet">{{cite web|url=http://www.sangeetnatak.gov.in/sna/awardeeslist.htm|title=Sangeet Natak Akademi Awards list|website=Sangeet Natak Akademi website|access-date=2 January 2022}}</ref> * अब्दुल लतीफ़ खान को [[भारत सरकार]] द्वारा 2002 में चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान [[पद्म श्री]] से सम्मानित किया गया था।<ref name="Padma Awards">{{cite web|url=http://mha.nic.in/sites/upload_files/mha/files/LST-PDAWD-2013.pdf|title=Padma Awards Directory (1954 - 2013)|date=14 August 2013|publisher=Ministry of Home Affairs (Public Section)|access-date=23 मार्च 2026|archive-date=19 अक्तूबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171019215108/http://mha.nic.in/sites/upload_files/mha/files/LST-PDAWD-2013.pdf|url-status=dead}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{cite web|url=http://sarangi.info/sarangi/alk/|title=सारंगी वादन|publisher=Sarangi.info|access-date=23 मार्च 2026|archive-date=28 जनवरी 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220128023724/https://sarangi.info/sarangi/alk/|url-status=dead}} 1rpdm6yx789oe2zwxf0so7cdf43wm19 अब्दुल राशिद खान 0 1610269 6536576 6532726 2026-04-05T12:21:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536576 wikitext text/x-wiki {{Infobox musical artist | name = अब्दुल राशिद खान | image = Ustad A R Khan.jpg | caption = अब्दुल राशिद खान | alias = रसन पिया | birth_date = {{birth date|df=y|1908|8|19}} | origin = [[उत्तर प्रदेश]], भारत | death_date = {{death date and age|df=y|2016|2|18|1908|8|19}} | death_place = [[कोलकाता]], [[पश्चिम बंगाल]], [[भारत]] | genre = [[हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत]] | occupation = गायक, आईटीसी संगीत रिसर्च एकेडमी (कोलकाता) में निवासी गुरु | years_active = 1973–2016 }} उस्ताद '''अब्दुल राशिद खान''' (19 अगस्त 1908 – 18 फरवरी 2016) हिन्दुस्तानी संगीत के एक भारतीय गायक थे।<ref>{{cite web|url=http://indiatoday.intoday.in/site/Story/9156/The+tapestry+of+tradition.html?complete=1|title=The Tapestry of Tradition|author=S. Sahaya Ranjit|date=2 June 2008|website=India Today|access-date=23 मार्च 2026|archive-date=5 दिसंबर 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20101205162631/http://indiatoday.intoday.in/site/Story/9156/The+tapestry+of+tradition.html?complete=1|url-status=dead}}</ref> [[ख्याल]] के अलावा, उन्होंने [[ध्रुपद]], [[धमार]] और [[ठुमरी]] का भी प्रदर्शन किया।<ref name="IndianExpress">{{cite web|url=http://www.indianexpress.com/news/the-centennial-man/699766/|title=The centennial man (Abdul Rashid Khan)|date=20 October 2010|website=The Indian Express}}</ref> 2020 तक, वे [[पद्म पुरस्कार]] से सम्मानित होने वाले सबसे वृद्ध व्यक्ति हैं। == प्रारंभिक जीवन == अब्दुल राशिद खान का जन्म संगीतकारों के एक परिवार में हुआ था, जिनका संबंध बहराम खान से था, जो पारंपरिक [[ग्वालियर घराना|ग्वालियर घराने]] की [[गायकी]] के गायक थे। उन्होंने अपना प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने पिता के बड़े भाई बड़े यूसुफ खान और अपने पिता छोटे यूसुफ खान से प्राप्त किया।<ref name="outlook">{{cite news|url=http://www.outlookindia.com/article.aspx?283769|title=Ragas For Late Winter|date=11 February 2013|newspaper=Outlook}}</ref> इसके बाद उनके परिवार के बुजुर्गों जैसे चांद खान, बरखुदार खान और मेहताब खान से व्यापक संगीत प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिन्होंने उन्हें ग्वालियर गायकी सिखाई। उन्होंने अपनी कलात्मक संवेदनशीलता के अनुरूप इस शैली को और विकसित किया। वे सोलहवीं शताब्दी के दौरान [[अकबर]] के दरबार के नवरत्नों में से एक और प्रसिद्ध गायक [[तुलसीदास|तानसेन]] के वंशज थे।<ref name="IndianExpress" /> == करियर == अब्दुल राशिद खान की पारंपरिक रचनाएँ [[बीबीसी]] और इराक रेडियो द्वारा रिकॉर्ड की गई हैं। [[उत्तर प्रदेश]] [[संगीत नाटक अकादमी]] (लखनऊ) और आईटीसी संगीत रिसर्च एकेडमी (कोलकाता) जैसे संगठनों ने उनकी कई रचनाओं को रिकॉर्ड और संरक्षित किया है। कई दशकों तक, वे [[आकाशवाणी]] और [[दूरदर्शन]] लखनऊ पर नियमित रूप से प्रदर्शन करते रहे। खान ने पूरे भारत में सादरंग सम्मेलन, गोदरेज सम्मेलन, लखनऊ महोत्सव, डोवर लेन सम्मेलन, आईटीसी संगीत सम्मेलन और [[प्रयाग संगीत समिति]] संगीत सम्मेलन जैसे कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सम्मेलनों में भाग लिया। उन्हें आलोचकों, साथी कलाकारों और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी (1981), [[बनारस हिंदू विश्वविद्यालय]] (1993), पूर्वी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और प्रेस क्लब कोलकाता जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया। अब्दुल राशिद खान ने अपने जीवनकाल में 2000 से अधिक रचनाएँ कीं और वे "रसन पिया" उपनाम से एक विपुल लेखक और कवि भी थे। उनके द्वारा गाई गई कई बंदिशें उनकी अपनी रचनाएँ थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई छात्रों को प्रशिक्षित किया और कोलकाता की [[आईटीसी संगीत रिसर्च एकेडमी]] में एक "गुरु" के रूप में प्रतिष्ठित हुए।<ref name="IBTN9">{{cite web|url=http://ibtn9.com/2016/02/ustad-abdul-rashid-khans-tragic-demise/|title=Ustad Abdul Rashid Khan's Tragic Demise – IBTN9|author=Ustad Abdul Rashid Khan's Tragic Demise|date=18 February 2016|website=IBTN9.com}}</ref> == मृत्यु == अब्दुल राशिद खान का 18 फरवरी 2016 को 107 वर्ष की आयु में निधन हो गया। एक उत्कृष्ट संगीतकार होने के साथ-साथ, वे एक धर्मनिष्ठ मुसलमान थे और हर सुबह नमाज़ पढ़ते और कुरान का पाठ करते थे।<ref name="IBTN9" /> == पुरस्कार और मान्यता == * आईटीसी संगीत रिसर्च एकेडमी अवार्ड (1994)<ref name="Bhuwalka Award 2010">{{cite web|url=http://www.itcsra.org/sra_news_views/sra_news_views_links/awards.html|title=Bhuwalka Award 2010|publisher=ITC Sangeet Research Academy}}</ref> * [[संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार]] (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.sangeetnatak.org/sna/awardeeslist.htm|title=Sangeet Natak Akademi: List of Akademi Awardees|website=Sageet Natak Akademi}}</ref> * काशी स्वर गंगा पुरस्कार (2003) * रस सागर (उपाधि) पुरस्कार (2004) * भुवल्का पुरस्कार (2010) * [[पद्म भूषण]] (2012) – पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सबसे वृद्ध व्यक्ति।<ref name="FirstPost">{{cite news|url=http://www.firstpost.com/living/at-105-abdul-rashid-khan-becomes-oldest-person-to-get-padma-shri-602670.html|title=At 105, Abdul Rashid Khan becomes oldest person to get Padma Shri|date=25 January 2013|newspaper=First Post}}</ref> * दिल्ली सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2013)। वे आकाशवाणी ऑडिशन कमेटी (नई दिल्ली) के सदस्य थे और उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2015 में "बंग विभूषण" की प्रतिष्ठित उपाधि सहित कई सम्मानों से नवाजा गया था।<ref name="Bhuwalka Award 2010" /> == संदर्भ == {{Reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [http://rasanpiya.com उस्ताद अब्दुल राशिद खान पर वृत्तचित्र] {{Authority control}} huh62bvb6rvyntwb0xz4vdglpprlcwy अमजद उल्लाह खान 0 1610272 6536595 6532729 2026-04-05T13:44:16Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536595 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | name = अमजद उल्लाह खान | birth_date = {{birth year and age|1972}} | birth_place = [[हैदराबाद, आंध्र प्रदेश|हैदराबाद]] | residence = [[चंचलगुड़ा]], हैदराबाद | office = प्रवक्ता, एमबीटी | predecessor = [[मजीद उल्लाह खान फरहत]] | party = [[मजलिस बचाओ तहरीक]] | father = स्वर्गीय अमान उल्लाह खान | children = अफ़ान उल्लाह खान }} {{Infobox officeholder | office = पूर्व कॉर्पोरेटर, 35 [[आजमपुरा]] डिवीजन (GHMC) | constituency = 35 आजमपुरा (GHMC) | successor = मोहिउद्दीन अबरार (AIMIM) }} '''अमजद उल्लाह खान''' (जन्म 23 सितंबर 1972) पूर्व कॉर्पोरेटर (35 आजमपुरा डिवीजन, GHMC) और [[हैदराबाद]], तेलंगाना में स्थित मजलिस बचाओ तहरीक (एमबीटी) के प्रवक्ता हैं।<ref>{{cite web|url=http://muslimmirror.com/eng/mbt-leader-amjed-ullah-khan-visits-injured-at-hyderabad-hospital/|title=Muslim Mirror » MBT leader Amjed Ullah Khan visits injured at Hyderabad hospital|date=21 February 2013|work=Muslim Mirror|access-date=23 मार्च 2026|archive-date=18 नवंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151118143249/http://muslimmirror.com/eng/mbt-leader-amjed-ullah-khan-visits-injured-at-hyderabad-hospital/|url-status=dead}}</ref> वे अपने विचारों और [[ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन]] (AIMIM) के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में चर्चा में रहते हैं।<ref>{{cite web|url=http://twocircles.net/2014mar10/mbt_offers_fig_leaf_owaisi_brothers_mim.html#.Vi_-aPmrTIU|title=MBT offers fig leaf to Owaisi brothers of MIM|date=10 March 2014|work=twocircles.net}}</ref> == पृष्ठभूमि == खान 5 बार के विधायक रहे अमानुल्लाह खान के पुत्र हैं। वे तब चर्चा में आए जब उन्होंने टीआरआर कॉलेज में एक [[मुस्लिम]] लड़की के अपहरण और बलात्कार के मामले में हस्तक्षेप किया। जब पुलिस ने इस अपराध के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, तो खान ने पुलिस और आरोपी के खिलाफ एक आंदोलन का नेतृत्व किया। हजारों युवाओं के साथ मिलकर किए गए इस विरोध ने पुलिस पर भारी दबाव बनाया।<ref>{{cite web|url=http://www.siasat.com/news/mbt-represents-student-rape-case-apshrc-480909/|title=MBT Represents Student Rape Case to APSHRC|date=17 September 2013|work=The Siasat Daily}}</ref> एक अन्य मामले में, उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री [[नरेन्द्र मोदी]] से सऊदी अरब की सुमेषी जेल में फंसे 450 भारतीयों को वापस लाने का आग्रह किया था।<ref>{{cite web|url=https://www.businessworld.in/article/Social-activist-Amjad-ullah-Khan-urges-Centre-for-early-repatriation-of-450-Indians-trapped-in-Saudi-jail/15-09-2020-320877/|title=Amjad Ullah Khan urges Centre for early repatriation of 450 Indians trapped in Saudi jail|website=BW Businessworld}}</ref> == प्रजादरबार == वे अपने 'प्रजादरबार' कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं,<ref>{{cite news|url=https://www.awazthevoice.in/india-news/amjadullah-s-night-durbar-helps-needy-get-crowdfunds-6562.html|title=Amjadullah's night durbar helps needy get crowdfunds|last1=Mustufa|first1=Abu|work=www.awazthevoice.in}}</ref> जो जाति, पंथ या धर्म की परवाह किए बिना जरूरतमंदों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में मदद करता है।<ref>{{cite news|url=https://www.siasat.com/amjadullah-khan-khalid-speaks-on-various-issues-at-meeting-in-nizamabad-2170449/|title=Amjadullah Khan Khalid speaks on various issues at meeting in Nizamabad|date=28 July 2021|work=The Siasat Daily}}</ref> == मजलिस बचाओ तहरीक == एमबीटी की स्थापना राजनीतिज्ञ मोहम्मद अमानुल्लाह खान ने एआईएमआईएम से अलग होने के बाद की थी। अमानुल्लाह खान, जो तत्कालीन एआईएमआईएम अध्यक्ष सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी के भरोसेमंद सहयोगी थे, ने [[बाबरी मस्जिद]] के विध्वंस के दौरान एआईएमआईएम द्वारा अपनाए गए कमजोर रुख के विरोध में निलंबित होने के बाद 1993 में एमबीटी (मजलिस बचाओ तहरीक) का गठन किया। बाद में, उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर एक अभियान शुरू किया। उनके द्वारा उठाए गए अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों में पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार शामिल थे।<ref>{{cite web|url=http://www.siasat.com/news/women-feeling-unsafe-hyderabad-mbt-823427/|title=Women feeling unsafe in Hyderabad: MBT|date=27 August 2015|work=The Siasat Daily}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://www.youtube.com/@amjedmbt यूट्यूब पर अमजद उल्लाह] 8pot134edfj18tgn97771lff9hs1gku अब्बास सद्रीवाला 0 1610433 6536584 6533220 2026-04-05T12:48:18Z InternetArchiveBot 500600 Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5 6536584 wikitext text/x-wiki '''अब्बास सद्रीवाला''' ({{langx|hi|अब्बास सद्रीवाला}}; जन्म 1948, [[बंबई]], अब [[मुंबई]], [[भारत]]) [[फोर्ट लॉडरडेल]] स्थित 'वायरलेस लॉजिक्स' (Wireless Logix) समूह की सात कंपनियों के अध्यक्ष और सीईओ हैं, जो वाई-फाई तकनीक प्रदान करती हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.india-inc.in/Abbas-Sadriwala.html |title=:: इंडिया इंक :: |accessdate=2009-03-08 |archive-date=2 मार्च 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090302113847/http://www.india-inc.in/Abbas-Sadriwala.html |url-status=dead }}</ref> == इतिहास == सद्रीवाला स्वयं [[मेवाड़ी]] मूल के हैं। उनके पिता [[राजस्थान]] के [[मेवाड़]] क्षेत्र के [[बड़ी सादड़ी]] गाँव के रहने वाले थे (इसीलिए उनका नाम सद्रीवाला पड़ा), जहाँ से वे एक निर्धन किशोर के रूप में [[मुंबई]] चले गए थे। रबर उत्पादों की एक कंपनी में कई वर्षों तक काम करने के बाद, उन्होंने अपनी खुद की रबर फर्म स्थापित की, जो अंततः 'रबर इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' बन गई। 1970 के दशक तक यह भारत के सबसे बड़े रबर उत्पाद निर्माताओं में से एक थी। 1966 में अपने पिता के असामयिक निधन के बाद सद्रीवाला को 18 वर्ष की आयु में पारिवारिक रबर व्यवसाय की कमान संभालनी पड़ी।<ref name="zimmerman"/> लेकिन वे एक पायलट बनना चाहते थे और अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 1973 में [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] जाने का विकल्प चुना, और पारिवारिक संपत्ति अपने तीन भाई-बहनों के लिए छोड़ दी। सद्रीवाला ने अमेरिका में अपने जीवन की शुरुआत शून्य से की और खुद के पायलट प्रशिक्षण का खर्च उठाने के लिए कई छोटी-मोटी नौकरियाँ कीं। वे याद करते हुए कहते हैं, "जब मैं यहाँ पहुँचा, तो मेरी जेब में बहुत कम पैसे थे।" 1976 में, उन्होंने एक कमर्शियल पायलट के रूप में योग्यता प्राप्त की और पायलट प्रशिक्षक बनने के लिए आगे का प्रशिक्षण लिया। 1978 और 1984 के बीच, उन्होंने दक्षिण [[फ्लोरिडा]] में विमान उड़ाना सिखाया। तकनीक के प्रति हमेशा उत्साही रहने वाले सद्रीवाला ने 1990 में विमानन उद्योग को विशेष उद्देश्य वाले कंप्यूटरों की आपूर्ति करने का अवसर देखा और 'एडीएस (एप्लिकेशन डिजाइन्ड सिस्टम्स) एसोसिएट्स' नामक कंपनी शुरू की। तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी बाजार में जब विशेष कंप्यूटरों की प्रासंगिकता कम हो गई, तो उन्होंने पेजर व्यवसाय में कदम रखा और पेजर क्रिस्टल बनाने के लिए 'पेजको इंटरनेशनल' (Pageco International) नामक एक अत्यधिक लाभदायक कंपनी बनाई। जैसे-जैसे सेल फोन ने पेजर की जगह ली, अब्बास वाई-फाई तकनीक की ओर बढ़ गए। अनुसंधान और विकास (R&D) में अपनी रुचि को जारी रखते हुए, सद्रीवाला वर्तमान में 'लिक्विगार्ड टेक्नोलॉजीज इंक' (Liquiguard Technolologies, Inc.) के सीईओ हैं, जो रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए कोटिंग्स (परत) विकसित करने वाली एक निर्माता कंपनी है। == व्यक्तिगत जीवन == सद्रीवाला अपनी पत्नी डेबोरा और बेटों अब्बास और अलेक्जेंडर के साथ फोर्ट लॉडरडेल में रहते हैं।<ref name="zimmerman">Zimmerman, Christine. [http://www.kioskmarketplace.com/article.php?id=13272&prc=344&page=118 "Who's who: Abbas Sadriwalla"] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20061105020837/http://www.kioskmarketplace.com/article.php?id=13272&prc=344&page=118 |date=5 November 2006 }}, 14 January 2004.</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * [https://web.archive.org/web/20090302113847/http://www.india-inc.in/Abbas-Sadriwala.html इंडिया इंक पर अब्बास सद्रीवाला की जीवनी] {{DEFAULTSORT:सद्रीवाला, अब्बास}} [[श्रेणी:1948 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय प्रवासी]] [[श्रेणी:भारतीय मुस्लिम]] [[श्रेणी:फोर्ट लॉडरडेल, फ्लोरिडा के व्यवसायी]] [[श्रेणी:मुंबई के व्यवसायी]] [[श्रेणी:वाणिज्यिक विमान चालक]] 0nscl0r943uk04hbsnffphnvmfux84o जीते जी इलाहाबाद 0 1610583 6536722 6534157 2026-04-05T23:06:19Z AMAN KUMAR 911487 केवल संदर्भ जोड़े 6536722 wikitext text/x-wiki '''जीते जी इलाहबाद''' यह संस्मरण ममता कालिया के द्वारा रचित है<ref>{{Cite news|url=https://www.bhaskar.com/g/local/uttar-pradesh/prayagraj/news/dr-dhananjay-chopra-discusses-old-allahabad-book-137476124.html|title=इलाहाबाद की गलियों से निकली साहित्य की खुशबू: ममता कालिया की ‘जीते जी इलाहाबाद’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार - Prayagraj (Allahabad) News|date=2026-03-19|work=Dainik Bhaskar|access-date=2026-04-05|language=hi}}</ref>, इसमें इलाहाबाद वर्तमान प्रयागराज के सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत के बारे में वर्णन किया गया है | वर्ष 2025 में ममता कालिया जी को इस कृति के लिए '''साहित्य अकादमी पुरुस्कार''' से सम्मनित किया गया |<ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/news/india/writer-mamta-kalia-reactions-after-winning-sahitya-kala-akademi-award-for-her-memoir-jeete-jee-allahabad-3102422|title='जीते जी इलाहाबाद' के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार तो ममता कालिया का आया रिएक्शन? जानें क्य|last=लाइव|first=एबीपी|date=2026-03-16|website=ABP News|language=hi|access-date=2026-04-05}}</ref> == संदर्भ == tdod5plfk0rakzhygzv8g8yxrlqughs झपूर्झा म्यूझियम 0 1610669 6536915 6535101 2026-04-06T09:48:08Z OABWIKI 908092 व्याकरण से संबंधित बदलाव किए है 6536915 wikitext text/x-wiki [[File:झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय,पुणे.jpg|thumb|झपूर्झा म्युझियम,पुणे|234x234पिक्सेल]] '''झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय (झपूर्झा म्यूझियम)''' हे [[पुणे]] शहर के पास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के आगे कुड़जे गावं में स्थित है। <ref name=":0">https://www.financialexpress.com/life/lifestyle-punes-zapurza-museum-celebrating-a-collectors-unique-journey-of-art-culture-2533145/</ref> आधुनिक मराठी काव्य के जनक [https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A4 केशवसूत] इनके [https://balbharatikavita.blogspot.com/2014/04/blog-post_15.html झपूर्झा] इस कविता के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया है। ==विशेषताएं== [[चित्र:Mr. Ajit Gadgil showcasing the Zapurza museum colletion.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|311x311पिक्सेल|महात्मा गांधीजी की फायबर ग्लास से बनी प्रतीमा के बारे में जानकारी देते हुए अजित गाडगील, संस्थापक झपूर्झा]] यह संग्रहालय [https://indianexpress.com/article/cities/pune/postcards-from-past-gadgils-golden-memories-simple-designs-pune-shops-8933000/ अजित गाडगील] द्वारा संकलित की गई विभिन्न प्राचीन वस्तुओं, समकालीन चित्रों और छायाचित्रों का दर्शन कराता है। इस संग्रहालय में दस कला दीर्घाएँ (आर्ट गैलरी) हैं। इन दीर्घाओं में रखी गई वस्तुएँ या चित्र समय-समय पर बदलते रहते हैं, ताकि आने वाले दर्शकों को हर बार नई जानकारी प्राप्त हो सके। अपनी विरासत लोगों विशेष रूप से बच्चो को समझ में आए इसलिए यहाँपर विभिन्न प्रकार के एक्झिबिशनों का आयोजन किया जाता है। ==आर्ट गैलरी== [[चित्र:Silver jar with high relief - Zapurza, Pune.jpg|अंगूठाकार|243x243पिक्सेल|चांदी का अँटिक कलश]] इस संग्रहालय में कुल 10 कला दीर्घाएँ हैं। चित्रकला विभाग में राजा रवि वर्मा की चित्रकृतियाँ प्रदर्शित हैं। साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर, बद्री नारायण, अतुल डोडिया, के. लक्ष्मा गौड़ जैसे विभिन्न चित्रकारों की जलरंग चित्रकृतियाँ और रेखाचित्रें भी यहाँ देखने को मिलती हैं। बी. प्रभा जैसे शिल्पकारों द्वारा निर्मित मूर्तियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं। वस्त्र दीर्घा में मुख्यतः पैठणी साड़ी के 18वीं और 19वीं शताब्दी के विशिष्ट नमूने तथा पितांबर वस्त्र प्रकार के नमूने रखे गए हैं। यहाँ प्राचीन सिक्के, पुराने दीपक, विभिन्न आभूषण, सोने-चाँदी के गहने और पानदान जैसी कलाकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं। स्वतंत्रता-पूर्व काल की माचिस के डिब्बियाँ, टिन के विभिन्न आकारों और चित्रों वाले डिब्बे, ग्रामोफोन, रेलवे स्टेशन पर उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग प्रकार के लालटेन जैसी पुरानी और नई वस्तुओं का भी प्रदर्शन किया गया है। चूँकि यह उपक्रम पु.ना. गाडगील एंड सन्स का है, इसलिए सोने से आभूषण बनाने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। साथ ही, विभिन्न प्रकार के पेड़, पत्ते और फूलों से झपूर्झा का परिसर सजाया गया है। ==अन्य उपक्रम== [[चित्र:Open amphitheatre of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|अंगूठाकार|252x252पिक्सेल|खुला एम्फीथिएटर]] [https://timesofindia.indiatimes.com/city/pune/museum-of-art-and-culture-comes-up-near-khadakwasla-backwaters/articleshow/91628299.cms झपूर्झा संग्रहालय] में विभिन्न विषयों से संबंधित कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। यहाँ पर फिल्म, नाटक, संगीत आदि विषयों के कार्यक्रम नियमित रूप से होते हैं। इसके लिए 200 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक सभागार है। लगभग 600 दर्शक बैठ सकें ऐसा एक खुला एम्फीथिएटर भी यहाँ मौजूद है। हस्तकला, नृत्य, कुम्हारकला जैसे विषयों का प्रशिक्षण देने वाली छोटी कार्यशालाएँ भी यहाँ आयोजित की जाती हैं, जिनका लाभ नागरिक उठाते हैं। ==आर्ट गैलरी== [[चित्र:Gallery 9 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|386x386px|झपूर्झा गैलरी 9]] [[चित्र:झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय वस्रदालनातील पितांबर विषयक प्रदर्शन.jpg|केंद्र|अंगूठाकार|363x363पिक्सेल|झपूर्झा वस्त्र दालन]] [[चित्र:Interior view of Gallery 8 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|319x319px|झपूर्झा गैलरी 8]] [[चित्र:Entrance to Gallery 8 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|केंद्र|अंगूठाकार|300x300px]] == संदर्भ == [https://www.hindustantimes.com/cities/pune-news/zapurza-pune-s-new-art-point-to-be-inaugurated-on-thursday-101652814828121.html <references /> [https://indianexpress.com/article/cities/pune/pune-jewellers-collection-zapurza-art-culture-museum-7924025.html <references /> [https://www.indianjeweller.in/Indian-Jewellery-News/13647/pn-gadgil-sons-launch-zapurza-art-culture-museum.html <references /> [https://divyamarathi.bhaskar.com/local/maharashtra/aurangabad/news/heritage-to-modern-art-to-be-unveiled-on-may-19-at-the-zapurza-museum-129820351.html.html <references /> pnq37099kqhybav2aczke8v37o9224z 6536919 6536915 2026-04-06T09:59:49Z ᱤᱧ ᱢᱟᱛᱟᱞ 718779 6536919 wikitext text/x-wiki [[File:झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय,पुणे.jpg|thumb|झपूर्झा म्युझियम,पुणे|234x234पिक्सेल]] '''झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय (झपूर्झा म्यूझियम)''' हे [[पुणे]] शहर के पास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के आगे कुड़जे गावं में स्थित है। <ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.financialexpress.com/life/lifestyle-punes-zapurza-museum-celebrating-a-collectors-unique-journey-of-art-culture-2533145/|title=Pune’s Zapurza Museum: Celebrating a collector’s unique journey of art & culture|date=2022-05-22|website=The Financial Express|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> आधुनिक मराठी काव्य के जनक [https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A4 केशवसूत] इनके [https://balbharatikavita.blogspot.com/2014/04/blog-post_15.html झपूर्झा] इस कविता के नाम पर इस संग्रहालय का नाम रखा गया है। ==विशेषताएं== [[चित्र:Mr. Ajit Gadgil showcasing the Zapurza museum colletion.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|311x311पिक्सेल|महात्मा गांधीजी की फायबर ग्लास से बनी प्रतीमा के बारे में जानकारी देते हुए अजित गाडगील, संस्थापक झपूर्झा]] यह संग्रहालय [https://indianexpress.com/article/cities/pune/postcards-from-past-gadgils-golden-memories-simple-designs-pune-shops-8933000/ अजित गाडगील] द्वारा संकलित की गई विभिन्न प्राचीन वस्तुओं, समकालीन चित्रों और छायाचित्रों का दर्शन कराता है। इस संग्रहालय में दस कला दीर्घाएँ (आर्ट गैलरी) हैं। इन दीर्घाओं में रखी गई वस्तुएँ या चित्र समय-समय पर बदलते रहते हैं, ताकि आने वाले दर्शकों को हर बार नई जानकारी प्राप्त हो सके। अपनी विरासत लोगों विशेष रूप से बच्चो को समझ में आए इसलिए यहाँपर विभिन्न प्रकार के एक्झिबिशनों का आयोजन किया जाता है। ==आर्ट गैलरी== [[चित्र:Silver jar with high relief - Zapurza, Pune.jpg|अंगूठाकार|243x243पिक्सेल|चांदी का अँटिक कलश]] इस संग्रहालय में कुल 10 कला दीर्घाएँ हैं। चित्रकला विभाग में राजा रवि वर्मा की चित्रकृतियाँ प्रदर्शित हैं। साथ ही रवींद्रनाथ टैगोर, बद्री नारायण, अतुल डोडिया, के. लक्ष्मा गौड़ जैसे विभिन्न चित्रकारों की जलरंग चित्रकृतियाँ और रेखाचित्रें भी यहाँ देखने को मिलती हैं। बी. प्रभा जैसे शिल्पकारों द्वारा निर्मित मूर्तियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं। वस्त्र दीर्घा में मुख्यतः पैठणी साड़ी के 18वीं और 19वीं शताब्दी के विशिष्ट नमूने तथा पितांबर वस्त्र प्रकार के नमूने रखे गए हैं। यहाँ प्राचीन सिक्के, पुराने दीपक, विभिन्न आभूषण, सोने-चाँदी के गहने और पानदान जैसी कलाकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं। स्वतंत्रता-पूर्व काल की माचिस के डिब्बियाँ, टिन के विभिन्न आकारों और चित्रों वाले डिब्बे, ग्रामोफोन, रेलवे स्टेशन पर उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग प्रकार के लालटेन जैसी पुरानी और नई वस्तुओं का भी प्रदर्शन किया गया है। चूँकि यह उपक्रम पु.ना. गाडगील एंड सन्स का है, इसलिए सोने से आभूषण बनाने की प्रक्रिया को छायाचित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। साथ ही, विभिन्न प्रकार के पेड़, पत्ते और फूलों से झपूर्झा का परिसर सजाया गया है। ==अन्य उपक्रम== [[चित्र:Open amphitheatre of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|अंगूठाकार|252x252पिक्सेल|खुला एम्फीथिएटर]] [https://timesofindia.indiatimes.com/city/pune/museum-of-art-and-culture-comes-up-near-khadakwasla-backwaters/articleshow/91628299.cms झपूर्झा संग्रहालय] में विभिन्न विषयों से संबंधित कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं। यहाँ पर फिल्म, नाटक, संगीत आदि विषयों के कार्यक्रम नियमित रूप से होते हैं। इसके लिए 200 लोगों की बैठने की क्षमता वाला एक सभागार है। लगभग 600 दर्शक बैठ सकें ऐसा एक खुला एम्फीथिएटर भी यहाँ मौजूद है। हस्तकला, नृत्य, कुम्हारकला जैसे विषयों का प्रशिक्षण देने वाली छोटी कार्यशालाएँ भी यहाँ आयोजित की जाती हैं, जिनका लाभ नागरिक उठाते हैं। ==आर्ट गैलरी== [[चित्र:Gallery 9 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|386x386px|झपूर्झा गैलरी 9]] [[चित्र:झपूर्झा कला आणि संस्कृती संग्रहालय वस्रदालनातील पितांबर विषयक प्रदर्शन.jpg|केंद्र|अंगूठाकार|363x363पिक्सेल|झपूर्झा वस्त्र दालन]] [[चित्र:Interior view of Gallery 8 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|319x319px|झपूर्झा गैलरी 8]] [[चित्र:Entrance to Gallery 8 of Zapurza Museum of Art & Culture.jpg|केंद्र|अंगूठाकार|300x300px]] == संदर्भ == [https://www.hindustantimes.com/cities/pune-news/zapurza-pune-s-new-art-point-to-be-inaugurated-on-thursday-101652814828121.html <references /> [https://indianexpress.com/article/cities/pune/pune-jewellers-collection-zapurza-art-culture-museum-7924025.html <references /> [https://www.indianjeweller.in/Indian-Jewellery-News/13647/pn-gadgil-sons-launch-zapurza-art-culture-museum.html <references /> [https://divyamarathi.bhaskar.com/local/maharashtra/aurangabad/news/heritage-to-modern-art-to-be-unveiled-on-may-19-at-the-zapurza-museum-129820351.html.html <references /> tfffpa4zw078azz99bb5fwh5haoxxhe विकिपीडिया:आँकड़े/2026/अप्रैल 4 1610671 6536572 6536248 2026-04-05T12:14:18Z NeechalBOT 98381 statistics 6536572 wikitext text/x-wiki <!--- stats starts--->{{सदस्य:Neechalkaran/statnotice}}{| class="wikitable sortable" style="width:90%" |- ! 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Павло́ Архи́пович Загребе́льний ; 25 अगस्त 1924 - 3 फरवरी 2009)<ref>{{Cite web|url=http://en.for-ua.com/news/2009/02/03/162019.html|title=Outstanding Ukrainian writer Pavlo Zagrebelnyi died - ForUm|website=en.for-ua.com|access-date=2026-04-02}}</ref> एक [[सोवियत संघ|सोवियत]] और [[युक्रेन|यूक्रेनी]] [[उपन्यासकार]] थे। ==जीवनी== उन्होंने 1941 में माध्यमिक विद्यालय से [[स्नातक]] की उपाधि प्राप्त की। उसी वर्ष, जब [[जर्मनी]] ने [[सोवियत संघ]] पर [[आक्रमण]] किया, तो वह लाल सेना में भर्ती हुए, कीव की लड़ाई में भाग लिया और गंभीर रूप से घायल हो गए।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://bsanna-news.ukrinform.ua/bsanna-image.php?id=828_N252202_b.jpg&lang=en|title=- BSANNA NEWS|last=2007|first=Constantine Vesna,|website=bsanna-news.ukrinform.ua|access-date=2026-04-02}}</ref> ठीक होने के बाद, उन्हें पुनः सेवा में भेज दिया गया और अगस्त 1942 में उन्हें एक और गंभीर चोट लगी। उस समय उन्हें बंदी बना लिया गया और फरवरी 1945 तक वे नाज़ी युद्धबंदी शिविर में रहे। रिहाई के बाद, उन्होंने पश्चिम जर्मनी में सोवियत सैन्य मिशन के लिए काम किया, फिर एक सामूहिक फार्म में [[पत्रकार]] के रूप में कार्य किया। 1951 में, उन्होंने डेनेप्रोपेत्रोव्स्क स्टेट यूनिवर्सिटी में [[भाषाविज्ञान|भाषा विज्ञान]] का अध्ययन शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कई संपादकीय पदों पर कार्य किया; विशेष रूप से विचीज़ना पत्रिका के उप-प्रधान संपादक के रूप में। वे 1961 से 1963 तक लिटरेचर्ना उक्रेयिना के प्रधान संपादक रहे। इसी दौरान उन्होंने उपन्यास लिखना शुरू किया।<ref name=":0" /> 1973 से 1986 तक, उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रीय लेखक संघ में कई पदों पर कार्य किया और अंततः प्रथम सचिव बन गए, हालांकि कवि बोरिस ओलिनिक ने उन्हें इस पद से वंचित करने का प्रयास किया था।<ref>{{Cite web|url=https://photo.unian.net/theme/11294-viktor-yushchenko-vzyav-uchast-u-ceremoniji-proshchannya-z-pavlom-zagrebelnim.html|title=Виктор Ющенко принял участие в церемонии прощания с Павлом Загребельным - УНИАН|website=photo.unian.net|language=ru|access-date=2026-04-02}}</ref> उन्हें 1974 में शेवचेंको राष्ट्रीय पुरस्कार और 1980 में सोवियत संघ का राज्य पुरस्कार प्राप्त हुआ। 25 अगस्त 2004 को उन्हें उनके कार्यों के लिए यूक्रेन के हीरो पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://photo.unian.net/theme/11294-viktor-yushchenko-vzyav-uchast-u-ceremoniji-proshchannya-z-pavlom-zagrebelnim.html|title=Виктор Ющенко принял участие в церемонии прощания с Павлом Загребельным - УНИАН|website=photo.unian.net|language=ru|access-date=2026-04-02}}</ref> उनका एक प्रसिद्ध उपन्यास है रोक्सोलाना (1980), जो गैलिसिया की एक रूथेनियन लड़की अनास्तासिया लिसोव्स्का के जीवन पर आधारित है, जो सुल्तान सुलेमान द मैग्निफिसेंट की [[पत्नी]] बनी और सोलहवीं शताब्दी के ओटोमन साम्राज्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 5 फरवरी 2009 को राष्ट्रपति विक्टर युशचेंको ने ज़ाहरेबेलनी को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। [[File:Байково кладбище Загребельный.jpg|thumb|270x270px|[[बेकोव कब्रिस्तान]] में पावलो ज़हरेबेलनी का मकबरा]] दिसंबर 2022 में [[कीव]] में निकोले रायव्स्की स्ट्रीट का नाम बदलकर पावलो ज़ाहरेबेलनी स्ट्रीट कर दिया गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.pravda.com.ua/news/2022/12/08/7379893/|title=У Києві дерусифікували ще 32 вулиці, включно з бульваром Дружби Народів|website=Українська правда|language=uk|access-date=2026-04-02}}</ref> ज़ाहरेबेलनी की पुस्तकों का 23 भाषाओं में [[अनुवाद]] हो चुका है। ==ग्रंथसूची== ज़हरेबेलनी की रचनाओं में निम्नलिखित उपन्यास और कहानियां शामिल हैं: *"अनंतकाल के बारे में चिंतन" (1957) *"यूरोप-45" (1958) *"गर्मी" (1960) *"पश्चिमी यूरोप" (1961) *"भविष्य के लिए एक दिन" (1964) *"फुसफुसाहट" (1966) *"दयालु शैतान" (1967) *"आश्चर्य" (1968) *"अनंतकाल के बिंदु से" (1970) *"आइए प्रेम करें" (1971) *"पहला पुल" (1972) *"कीव में मृत्यु" (1973) *"झागदार घास" (1974) *"यूप्रैक्सिया" (1975) *"शेर का दिल" (1978) *"एक्सेलरेशन" (1978) *"क्लैरिनेट्स ऑफ टेंडरनेस" (1978) *"रोक्सोलाना" (1980) *"आई एम बोहदान" (1983) *"सदर्न कम्फर्ट" (1984) *"एक्सपल्शन फ्रॉम ईडन" (1985) *"द सिक्स्थ डे" (1985) *"ट्रेसलेस लुकास" (1989) *"नेकेड सोल" (1992) *"एंजल फ्लेश" (1993) *"थाउजेंड-ईयर-ओल्ड निकोलाई" (1994) *"ऐशेज ऑफ ड्रीम्स" (1995) *"द लॉन्ग ड्रीम्स वैली" (1995) *"हीट हेज़" (1995) *"स्पेशल सिक्योरिटी ज़ोन" (1999) *"जूलिया" (2000) ==बाहरी कड़ियाँ== * [http://www.sovlit.net/bios/zagrebelny.html Encyclopedia of Soviet Writers] ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} {{Authority control}} [[श्रेणी:1924 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:2009 में हुई मौतें]] [[श्रेणी:20वीं सदी के स्विस उपन्यासकार]] [[श्रेणी:20वीं सदी के यूक्रेनी राजनेता]] [[श्रेणी:सोवियत संघ]] avvdizps00ahfn6zqx2w6p3ga5i1yq9 कंपनी हवलदार मेजर 0 1610709 6536720 6535421 2026-04-05T22:56:58Z AMAN KUMAR 911487 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]]) 6536720 wikitext text/x-wiki {{db-test}} bum bum bholey iy7463d3iwe9pajdpa34wyf9utoky0p विनित्सिया नरसंहार 0 1610740 6536623 6535801 2026-04-05T15:38:48Z Mnjkhan 900134 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:सोवियत संघ]] जोड़ी 6536623 wikitext text/x-wiki {{Infobox civilian attack | title = विनित्सिया नरसंहार | partof = महान शुद्धिकरण का एक हिस्सा | image = Vinnycia16.jpg | alt = People of Vinnytsia looking for their relatives among exhumed bodies | caption = | map = Winnyzja-Ukraine-Map.png | map_caption = | location = [[विनित्सिया]], यूक्रेनी एसएसआर, सोवियत संघ | coordinates = {{coord|49.14|28.29|region:UA_type:city_source:GNI-enwiki|format=dms|display=it}} | target = राजनीतिक कैदी, जातीय पोल्स | date = 1937–1938 | time = | timezone = | type = संक्षिप्त निष्पादन | fatalities = 9,000 से अधिक{{Sfn|Causarano|2004|p=510}} | injuries = | perps = एनकेवीडी | motive = }} '''विनित्सिया नरसंहार''' 1937–1938 के दौरान स्टालिन का [[महान शुद्धिकरण]] के समय [[सोवियत संघ| सोवियत]] गुप्त पुलिस (एनकेवीडी) द्वारा किया गया एक व्यापक सामूहिक हत्याकांड था। यह घटना [[विनित्सिया]], यूक्रेन में घटित हुई, जहाँ 9,000 से अधिक लोगों को राजनीतिक दमन के तहत मार दिया गया। इन सामूहिक कब्रों का पता 1943 में [[नाज़ी जर्मनी]] द्वारा यूक्रेन पर कब्जे के दौरान लगाया गया।<ref name="Dzerkalo">वैलेरी वासिलिव, यूरी शापोवाल, "Stages of «Great Terror»: The Vinnytsia Tragedy", ''ज़ेरकालो नेडेली'', No. 31 (406), अगस्त 17–23, 2002, ([http://www.zn.ua/3000/3150/35760/ in Russian] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071128161455/http://www.zn.ua/3000/3150/35760/ |date=2007-11-28 }}, [http://www.dt.ua/3000/3150/35760/ in Ukrainian] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090518004957/http://www.dt.ua/3000/3150/35760/ |date=2009-05-18 }})</ref> इस स्थल की प्रारंभिक जांच अंतर्राष्ट्रीय कैटिन आयोग ने की, जो उसी समय कैटिन नरसंहार से संबंधित सामूहिक कब्रों की जांच भी कर रहा था। 1943 में जर्मनों द्वारा पहचाने गए 679 मृतकों में कुछ रूसी नागरिक तथा 28 पोलिश नागरिक भी शामिल थे। नाज़ी शासन ने इस घटना का उपयोग अपने प्रचार में [[सोवियत संघ]] के कम्युनिस्ट शासन को क्रूर और दमनकारी सिद्ध करने के लिए किया। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} ==साहित्य== * {{cite book |last=कौसरानो | first=पिएत्रो|url=https://books.google.com/books?id=IjM2OWtki3oC&pg=PA510 |title=Le XXe siècle des guerres |publisher=एडिशन डे ल'एटेलियर | year= 2004 |isbn=2708237624 |page=510 }} * इगोर कामेनेत्स्की. The Tragedy of Vinnytsia: Materials on Stalin's Policy of Extermination in Ukraine/1936-1938, यूक्रेनी ऐतिहासिक संघ (1991) {{ISBN|978-0-685-37560-0}} * सैंडुल, II, एपी स्टेपोवी, एसओ पिधैनी. The Black Deeds Of The Kremlin: A White Book. Ukrainian Association of Victims of Russian Communist Terror. टोरंटो. 1953 * इज़राइल चार्नी, विलियम एस. पार्सन्स और सैमुअल टोटेन. Century of Genocide: Critical Essays and Eyewitness Accounts. Routledge. न्यूयॉर्क, लंदन. {{ISBN|0-415-94429-5}} * ड्रैगन, एंथोनी. Vinnytsia: A Forgotten Holocaust. Jersey City, NJ: Svoboda Press, Ukrainian National Association 1986, ऑक्टावो, 52 pp. * Crime of Moscow in Vynnytsia. Ukrainian Publication of the Ukrainian American Youth Association, Inc. New York. 1951 * Вінниця - Злочин Без Кари. Воскресіння. Київ. 1994 * Вінницький злочин // Енциклопедія українознавства.: [В 10 т.]. - Перевид. в Україні. - Київ., 1993. - Т.1. - С.282 * {{cite book |author=वेनर, आमिर |title=Making sense of war: the Second World War and the fate of the Bolshevik Revolution |publisher=प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस |location=प्रिंसटन, न्यू जर्सी |year=2001 |isbn=0-691-05702-8 }} * {{Cite journal|last=पेपरनो|first=इरिना|year=2001|url=https://www.jstor.org/stable/10.1525/rep.2001.75.1.89|title=Exhuming the Bodies of Soviet Terror|journal=रिप्रेजेंटेशन्स|volume=75|issue=1| pages=89–118|doi=10.1525/rep.2001.75.1.89|jstor=10.1525/rep.2001.75.1.89|url-access=subscription}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category}} [[श्रेणी:सोवियत संघ]] nv1hjbwjgm9kzv6kabix9hqkgqgs7jc पूर्ति आर्या 0 1610792 6536822 6536497 2026-04-06T06:49:39Z ~2026-21035-86 919015 [[Special:Contributions/SM7|SM7]] ([[User talk:SM7|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536495|6536495]] को पूर्ववत किया 6536822 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या Poorti Arya | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active= 2014–वर्तमान | image =File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive- Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|website=|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} oo468o417uoswo639uiv9kgxjtw66xe 6536825 6536822 2026-04-06T06:53:07Z लघु सुधार: प्रारूप, वर्तनी, विराम चिह्न और संदर्भ स्वरूप ठीक किए गए; कोई सामग्री परिवर्तन नहीं 6536825 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 9s8ao8hgiatyqp19frgs0kbh7x4xtd4 6536829 6536825 2026-04-06T06:57:50Z ~2026-21092-77 919017 Update Infobox 6536829 wikitext text/x-wiki {{Infobox person|name=पूर्ति आर्या (Poorti Arya)|image=File:Poorti Arya's official portal.jpg|caption=पूर्ति आर्या|birth_date=21 जुलाई|birth_place=[[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत|occupation=अभिनेत्री, मॉडल|years_active=2014–वर्तमान|known_for=''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]''|education=नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT)|alma_mater=NIFT|notable_works=टेलीविजन और फ़िल्में}} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} q6hdex1enx585alqivq4pexd8vu378o 6536833 6536829 2026-04-06T07:00:40Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/~2026-21092-77|~2026-21092-77]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-21092-77|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन MutherFck Asilveringके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536833 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 9s8ao8hgiatyqp19frgs0kbh7x4xtd4 6536835 6536833 2026-04-06T07:02:46Z AMAN KUMAR 911487 SM7 के सम्पादन को पूर्ववत किया क्योंकि अस्थाई सदस्य दे सांचा हटा दिया था 6536835 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536839 6536835 2026-04-06T07:05:33Z Vertical Series 919018 लेख का पुनर्लेखन: भाषा, संरचना और व्याकरण में सुधार 6536839 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 6hw6rfgix53oqc8bdoxqvljmnpw3nny 6536840 6536839 2026-04-06T07:06:11Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/Vertical Series|Vertical Series]] ([[सदस्य वार्ता:Vertical Series|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536840 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536844 6536840 2026-04-06T07:07:58Z व्याकरण में सुधार 919022 , संरचना और व्याकरण में सुधार 6536844 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} fzv1vw3isxudzznn5w182wfr89qz064 6536845 6536844 2026-04-06T07:08:16Z व्याकरण में सुधार 919022 Fix 6536845 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536846 6536845 2026-04-06T07:08:25Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/व्याकरण में सुधार|व्याकरण में सुधार]] ([[सदस्य वार्ता:व्याकरण में सुधार|वार्ता]]) द्वारा 2 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किये गये 6536846 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536850 6536846 2026-04-06T07:11:23Z अमन मदारचूड 919023 [[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536846|6536846]] को पूर्ववत किया 6536850 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536852 6536850 2026-04-06T07:12:36Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536852 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536860 6536852 2026-04-06T07:17:54Z तेरी बहन को प्रेग्नेंट करो मादरचोद अमन 6536860 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536862 6536860 2026-04-06T07:18:50Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन|तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन]] ([[सदस्य वार्ता:तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536862 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536866 6536862 2026-04-06T07:21:25Z अमन मदारचूड 919023 [[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536862|6536862]] को पूर्ववत किया 6536866 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536868 6536866 2026-04-06T07:21:46Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536868 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536869 6536868 2026-04-06T07:22:18Z अमन मदारचूड 919023 [[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536868|6536868]] को पूर्ववत किया 6536869 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536872 6536869 2026-04-06T07:23:23Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536872 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536876 6536872 2026-04-06T07:24:43Z अमन मदारचूड 919023 [[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536872|6536872]] को पूर्ववत किया 6536876 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536877 6536876 2026-04-06T07:25:02Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536877 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 6536878 6536877 2026-04-06T07:25:47Z अमन मदारचूड 919023 [[Special:Contributions/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[User talk:AMAN KUMAR|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6536877|6536877]] को पूर्ववत किया 6536878 wikitext text/x-wiki {{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg | caption = पूर्ति आर्या | birth_date = 21 जुलाई | birth_place = [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | known_for = ''[[इंटरनेट वाला लव]]'', ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'', ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' | education = नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) | alma_mater = NIFT | notable_works = टेलीविजन और फ़िल्में }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने कार्य के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों और फ़िल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं। == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे धारावाहिकों में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फ़िल्मों के अतिरिक्त, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianewengland.com/jalebi-an-old-fashioned-sweet-tale-of-romance/|title=Jalebi: An old-fashioned sweet tale of romance|date=2026-04-11|website=INDIA New England News|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर के अतिरिक्त मॉडलिंग और विज्ञापन अभियानों में भी कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न ब्रांड्स के लिए प्रिंट शूट्स और टेलीविजन विज्ञापनों में भाग लिया है, जिससे उन्हें मनोरंजन उद्योग में पहचान मिली।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> इसके अलावा, वह डिजिटल कंटेंट और वेब-आधारित परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाई हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} 63nz9r5a19l5lqxa49kpjx1diynywq2 6536881 6536878 2026-04-06T07:33:30Z AMAN KUMAR 911487 [[विशेष:योगदान/अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया 6536881 wikitext text/x-wiki {{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] संदिग्ध। संभवतः प्रचार हेतु निर्मित पृष्ठ।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या}}{{Infobox person | name = पूर्ति आर्या (Poorti Arya) | occupation = अभिनेत्री, मॉडल | years_active = 2014–वर्तमान | image = File:Poorti Arya's official portal.jpg }} '''पूर्ति आर्या''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] और [[मॉडल (व्यक्ति)|मॉडल]] हैं, जो हिंदी टेलीविजन और फ़िल्म उद्योग में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टीवी धारावाहिकों और फिल्मों दोनों में काम किया है और अपने विविध अभिनय के लिए पहचानी जाती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://mynation.asianetnews.com/biography/poorti-arya-biography-iwh-s5ca5t|title=Poorti Arya’s Biography|website=mynation.asianetnews.com|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == प्रारंभिक जीवन == पूर्ति आर्या का जन्म 21 जुलाई को [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], भारत में हुआ था। उन्होंने फैशन में अपनी शिक्षा प्राप्त की और बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से स्नातक किया। मनोरंजन उद्योग में आने से पहले, उन्होंने एक मॉडल के रूप में कार्य किया और विभिन्न प्रिंट तथा टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दीं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-poorti-arya-on-playing-khushi-in-the-upcoming-show-her-journey-is-about-facing-adversities-head-on/articleshow/117889810.cms|title=Exclusive - Poorti Arya on playing ‘Khushi’|work=The Times of India|access-date=2026-04-04}}</ref> == करियर == पूर्ति आर्या ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत टेलीविजन से की और ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' से डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' और ''लाइफ सही है'' जैसे शो में काम किया, जहाँ उन्हें सहायक भूमिकाओं के लिए पहचान मिली। बाद में वह ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' जैसे लोकप्रिय धारावाहिक में ‘ट्विंकल’ की भूमिका में नजर आईं। उन्होंने ''क्राइम पेट्रोल'' और ''प्यार तूने क्या किया'' जैसे एपिसोडिक शो में भी विभिन्न किरदार निभाए हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/poorti-arya-of-bade-acche-lagte-hain-2-took-a-break-from-acting-for-her-health/articleshow/99513716.cms|title=Poorti Arya of 'Bade Acche Lagte Hain 2' took a break from acting for her health|date=2023-04-15|work=The Times of India|access-date=2026-04-04|issn=0971-8257}}</ref> साल 2018 में, उन्होंने फ़िल्म ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' से बॉलीवुड में डेब्यू किया, जिसमें उन्होंने ‘रेनू’ की भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web|url=https://www.thehansindia.com/cinema/i-got-related-to-the-characters-youthful-energy-in-hai-taubba-chapter-2-says-poorti-arya-687420|title=Poorti Arya interview|website=The Hans India|access-date=2026-04-04}}</ref> टेलीविजन और फिल्मों के अलावा, पूर्ति आर्या कई विज्ञापन अभियानों और डिजिटल कंटेंट परियोजनाओं का भी हिस्सा रही हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.filmibeat.com/television/shows/2025/know-more-about-poorti-arya-who-will-be-seen-in-ekta-kapoors-new-show-439951.html|title=Know More About Poorti Arya Who Will Be Seen in Ekta Kapoor's New Show!|last=Bhatia|first=Nikhil|date=2025-01-23|language=en|access-date=2026-04-04}}</ref> == फिल्मोग्राफी == === फ़िल्में === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2018 || ''[[जलेबी (फ़िल्म)|जलेबी]]'' || रेनू || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2022–2023 || ''[[राज़ महल - डाकिनी का रहस्य|राआज़ महल: डाकिनी का रहस्य]]'' || पूर्ति || टीवी/वेब सीरीज़ |} === टेलीविजन === {| class="wikitable" !वर्ष !! शो !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |2014 || ''[[सिंहासन बत्तीसी]]'' || – || टीवी धारावाहिक |- |2016 || ''लाइफ सही है'' || – || वेब सीरीज़; निर्माता: [[लव रंजन]] |- |2018 || ''[[इंटरनेट वाला लव]]'' || तनीषा सिंह || 155 एपिसोड |- |2019 || ''साइज़ मैटर्स'' || करिश्मा || (क्रेडिट: आर्या पूर्ति) |- |2020–2021 || ''क्राइम पेट्रोल'' || दीपिका / सुमन शर्मा || 7 एपिसोड |- |2021 || ''[[बड़े अच्छे लगते हैं २]]'' || ट्विंकल || (शूटिंग वर्ष) |- |2023 || ''क्राइम पेट्रोल: 48 आवर्स'' || शीटल अवस्थी / हंसिका गोयल / रीमा पाटिल || 3 एपिसोड |- |2024 || ''क्राइम पेट्रोल: सिटी क्राइम्स'' || अमिता नाटक || 1 एपिसोड |- |2025 || ''प्यार की राहें'' || खुशी || 1 एपिसोड |- |– || ''प्यार तूने क्या किया'' || – || एपिसोडिक भूमिका |} === आगामी परियोजनाएँ === {| class="wikitable" !वर्ष !! शीर्षक !! भूमिका !! टिप्पणियाँ |- |आगामी || ''रिहाई'' || नेहा प्रजापति || पोस्ट-प्रोडक्शन (शॉर्ट फ़िल्म) |} == अन्य कार्य == पूर्ति आर्या ने कई विज्ञापनों और प्रिंट शूट्स में भी काम किया है। == संदर्भ == {{reflist}} == बाहरी कड़ियाँ == * {{IMDb name|10114255|Poorti Arya}} reh3e15scafl9ohfneo14g2t54fuqx3 यूक्रेन की संस्कृति 0 1610793 6536946 6536453 2026-04-06T10:59:06Z Surajkumar9931 853179 6536946 wikitext text/x-wiki {{Image frame|content={{multiple image | border = infobox | total_width = 300 | image_style = border:1; | perrow = 2 | image1 = Лавра.jpg | image2 = Okean elzy moscow 11-02-2012 nazipov2.jpg | image3 = Cernauti Residentia 04.jpg | image4 = Uruk-hai borscht.png | image5 = Національний музей історії України у Другій світовій війні 01.jpg | image6 = 1840 - Kobzar - page 3 - page 1 (Title) -.jpg | image7 = Pysanka.png | image8 = Duke ric.jpg | image9 = Independence Square in Kyiv.png | image10 = Vyshyvanka.png }}|width=300|align=right|caption=ऊपर से, बाएँ से दाएँ: 1. कीव पेचेर्स्क लावरा , 2. ओकेन एल्ज़ी कॉन्सर्ट, 3. चेर्नित्सि विश्वविद्यालय , 4. [[बोर्श]] , 5. मदर यूक्रेन की मूर्ति , 6. कोबज़ार , 7. वेलिकडेन पर पिसंका , 8. ओडेसा में ड्यूक रिशेल्यू स्मारक , 9. कीव में इंडिपेंडेंस स्क्वायर , 10. वैश्यवांका}}<!-- "none" is a legitimate description when the title is already adequate; see [[WP:SDNONE]] --> '''यूक्रेन की संस्कृति''' सहस्राब्दियों में विकसित हुए भौतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का समृद्ध समुच्चय है, जिसकी जड़ें प्रागैतिहासिक [[नवपाषाण युग| नवपाषाण]] परंपराओं और [[यूरेशियाई स्तेपी |स्टेपी]] संस्कृति से लेकर मध्ययुगीन [[कीवयाई रूस |कीवन रूस]] की उन्नत सभ्यता तक फैली हुई हैं। यह राज्य, जिसका केंद्र [[कीव]] था, साक्षरता, धार्मिक अनुष्ठानों और चर्च वास्तुकला का एक प्रमुख केंद्र बना।<ref>{{Cite web |title=Kiev: 1,500 years of culture |url=https://courier.unesco.org/en/articles/kiev-1500-years-culture|website=यूनेस्को कूरियर|date=1 अप्रैल 1982}}</ref> समय के साथ, यूक्रेनी संस्कृति स्थानीय लोक परंपराओं और बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों के निरंतर आदान-प्रदान से रूपांतरित होती रही, जिससे इसमें विविधता और गहराई दोनों का समावेश हुआ।<ref>{{Cite web |date=2025-09-19 |title=Ukraine, Moldova, and Romania Seek UNESCO World Heritage Status for Trypillia Culture |url=https://united24media.com/latest-news/ukraine-moldova-and-romania-seek-unesco-world-heritage-status-for-trypillia-culture-11771 |access-date=2026-02-28 |website=यूनाइटेड24 मीडिया |language=en |archive-date=2025-12-12 |archive-url=https://web.archive.org/web/20251212044952/https://united24media.com/latest-news/ukraine-moldova-and-romania-seek-unesco-world-heritage-status-for-trypillia-culture-11771 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Centre |first=UNESCO World Heritage |title=Kyiv&#x3a; Saint-Sophia Cathedral and Related Monastic Buildings, Kyiv-Pechersk Lavra |url=https://whc.unesco.org/en/list/527/ |access-date=2026-02-28 |website=यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र |language=en |archive-date=2021-05-12 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210512015925/http://whc.unesco.org/en/list/527/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal |last=किओसाक |first=दिमित्रो |last2=बोडियन |first2=सर्गिउ |last3=कोटोवा |first3=नादिया |last4=सज़िदत |first4=सोंके |last5=टिनर |first5=विली |date= अगस्त 2024 |title=The chronology of the Early Trypillian expansion |url=https://www.cambridge.org/core/product/identifier/S0033822224000882/type/journal_article |journal=रेडियोकार्बन|language=en |volume=66 |issue=4 |pages=650–663 |doi=10.1017/RDC.2024.88 |issn=0033-8222|doi-access=free }}</ref><ref>{{Cite news |title=Trypillya culture {{!}} Neolithic, Ukraine, Eneolithic {{!}} Britannica |url=https://www.britannica.com/topic/Trypillya-culture |archive-url=https://web.archive.org/web/20250802180533/https://www.britannica.com/topic/Trypillya-culture |archive-date=2025-08-02 |access-date=2026-02-28 |work=एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका |language=en |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal |last=निकितिन |first=एलेक्सी जी. |last2=पोटेखिना |first2=इन्ना |last3=रोहलैंड |first3=नादिन |last4=मल्लिक |first4=स्वपन |last5=रीच |first5=डेविड |last6=लिली |first6=मैल्कम |date=2017-02-24 |editor-last=कैपेली |editor-first=क्रिस्टियन |title=Mitochondrial DNA analysis of eneolithic trypillians from Ukraine reveals neolithic farming genetic roots |url=https://dx.plos.org/10.1371/journal.pone.0172952 |journal=पीएलओएस वन |language=en |volume=12 |issue=2 |article-number=e0172952 |doi=10.1371/journal.pone.0172952 |doi-access=free|issn=1932-6203 |pmc=5325568 |pmid=28235025}}</ref><ref>{{Cite web |title=A Unique Blend: How Ukraine Shaped Its Own Baroque Vision |url=https://ukraineworld.org/en/articles/basics/ukraine-baroque-vision |access-date=2026-02-28 |website=ukraineworld.org |language=en}}</ref><ref>{{Cite journal |last=अरिग्नन |first=जीन-पियरे |date=2014-04-03 |title=Christian Raffensperger, Reimagining Europe, Kievan Rus' in the Medieval World , Cambridge (Mass.), Londres, Harvard University Press, 2012, 330 p. |journal= रेव्यू हिस्टोरिक |volume=670 |issue=2 |pages=385e–395e |doi=10.3917/rhis.142.0385e |issn=0035-3264}}</ref><ref>{{Cite journal |last=वर्थ |first=डीन एस. |date=1995 |title=The Hagiography of Kievan Rus'. Trans. Paul Hollingsworth. Harvard Library of Early Ukrainian Literature, vol. 2. Cambridge: Harvard University Press, 1992. xcvi, 267 pp. $25.00, hard bound; $17.00, paper. |journal=स्लाविक रिव्यू|volume=54 |issue=2 |pages=529–531 |doi=10.2307/2501707 |issn=0037-6779}}</ref> यूक्रेनी समाज में पारिवारिक और धार्मिक जीवन आज भी महत्वपूर्ण सामाजिक स्तंभ बने हुए हैं।<ref>{{Cite journal |last=पोटवोर्स्की |first=गैबोर |date=2018-12-15 |title=State Aid in the Visegrad Countries: Similarities and Differences |journal=सिद्धांत, कार्यप्रणाली, अभ्यास |volume=14 |issue=2 |pages=57–70 |doi=10.18096/tmp.2018.02.05 |issn=2415-9883|doi-access=free }}</ref> पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियाँ—जैसे कढ़ाईदार परिधान (विश्यावंका), सजावटी अंडे ((पिसांकी)), लोकगीत, नृत्य तथा मौखिक कथाएँ (काज़्का)—सामुदायिक पहचान और उत्सवों का अभिन्न अंग हैं। ये लोक परंपराएँ न केवल दैनिक जीवन में जीवित हैं, बल्कि इन्होंने साहित्य, संगीत और दृश्य कलाओं को भी गहराई से प्रभावित किया है। समग्रतः, यूक्रेनी संस्कृति एक जीवंत और गतिशील परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोते हुए निरंतर विकसित होती रही है। यह संस्कृति एक ओर जहाँ संग्रहालयों और संरक्षित धरोहरों में संरक्षित है, वहीं दूसरी ओर समकालीन समाज में जीवित प्रथाओं के रूप में भी विद्यमान है, जो क्षेत्रीय विविधताओं और राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण दोनों को प्रेरित करती है।<ref>{{Cite web |title=Kyivan Rus' |url=https://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CK%5CY%5CKyivanRushDA.htm#:~:text=Varangian%20%20mercenaries%20and%20killed,and%20cultural%20cohesion%20of%20Rus%E2%80%99 |access-date=2026-02-28 |website=www.encyclopediaofukraine.com |archive-date=2023-05-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230528165919/https://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CK%5CY%5CKyivanRushDA.htm#:~:text=Varangian%20%20mercenaries%20and%20killed,and%20cultural%20cohesion%20of%20Rus%E2%80%99 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Art |url=https://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CA%5CR%5CArt.htm#:~:text=in%20the%20Neolithic%20Period%20,,produced%20gold%20jewelry |access-date=2026-02-28 |website=www.encyclopediaofukraine.com}}</ref> बाद की शताब्दियों में यूक्रेन की संस्कृति ने विभिन्न प्रतिस्पर्धी राज्यों और साम्राज्यों के प्रभावों को आत्मसात करते हुए उन्हें अपनी विशिष्ट पहचान के अनुरूप रूपांतरित किया, साथ ही अपनी क्षेत्रीय परंपराओं को भी सुरक्षित रखा। [[पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल]],<ref>{{Cite web |title=Poland |url=https://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CP%5CO%5CPoland.htm#:~:text=times,%20also%20had%20an%20impact,Polish%20culture%20left%20its%20mark |access-date=2026-02-28 |website=www.encyclopediaofukraine.com |archive-date=2026-02-02 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260202071757/https://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CP%5CO%5CPoland.htm#:~:text=times,%20also%20had%20an%20impact,Polish%20culture%20left%20its%20mark |url-status=live }}</ref> [[ऑस्ट्रिया-हंगरी |ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य]],<ref name=":0">{{Cite web |last=Centre |first=UNESCO World Heritage |title=L&#x27;viv &ndash; the Ensemble of the Historic Centre |url=https://whc.unesco.org/en/list/865/ |access-date=2026-02-28 |website=यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र |language=en |archive-date=2021-05-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210516173840/https://whc.unesco.org/en/list/865/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Centre |first=UNESCO World Heritage |title=Residence of Bukovinian and Dalmatian Metropolitans |url=https://whc.unesco.org/en/list/1330/ |access-date=2026-02-28 |website=यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र |language=en |archive-date=2021-05-19 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210519121113/https://whc.unesco.org/en/list/1330 |url-status=live }}</ref> [[रूसी साम्राज्य]] तथा बाद में [[सोवियत संघ]] के साथ निरंतर संपर्क ने यूक्रेन के राजनीतिक संस्थानों, शिक्षा प्रणाली, धार्मिक जीवन और कलात्मक अभिव्यक्तियों को गहराई से प्रभावित किया। इसी के समानांतर, [[ल्वीव]], [[ओडेसा]] और [[ख़ारकिव |खार्किव]] जैसे प्रमुख शहरी केंद्र व्यापार, प्रकाशन, विद्वत्ता और कला के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में विकसित हुए।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web |title=On the Border of East and West: Searching for Icons in Lviv |url=https://imagejournal.org/article/on-the-border-of-east/ |access-date=2026-02-28 |website=इमेज जर्नल |language=en-US |archive-date=2020-07-15 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200715171751/https://imagejournal.org/article/on-the-border-of-east/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Centre |first=UNESCO World Heritage |title=The Historic Centre of Odesa |url=https://whc.unesco.org/en/list/1703/ |access-date=2026-02-28 |website=यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र |language=en |archive-date=2023-01-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230125231606/https://whc.unesco.org/en/list/1703/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Hromadas |url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CH%5CR%5CHromadas.htm |archive-url=https://web.archive.org/web/20151227030724/http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CH%5CR%5CHromadas.htm |archive-date=2015-12-27 |access-date=2026-02-28 |website=www.encyclopediaofukraine.com |language=en}}</ref><ref>{{Cite news |title=Kharkiv {{!}} History, Map, & Population {{!}} Britannica |url=https://www.britannica.com/place/Kharkiv-Ukraine |archive-url=https://web.archive.org/web/20260130134002/https://www.britannica.com/place/Kharkiv-Ukraine |archive-date=2026-01-30 |access-date=2026-02-28 |work=एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका |language=en |url-status=live }}</ref> इस बहुस्तरीय ऐतिहासिक अनुभव ने यूक्रेन को एक समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत प्रदान की, जिसने साहित्य, दर्शन, कला, संगीत, विज्ञान और सिनेमा के क्षेत्रों में अनेक प्रभावशाली व्यक्तित्वों को जन्म दिया। इनमें तारास शेवचेंको विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनकी रचनाओं ने आधुनिक यूक्रेनी साहित्यिक भाषा और राष्ट्रीय चेतना को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।<ref>{{Cite web |title=ГАЛЕРЕЯ ВИДАТНИХ ОСОБИСТОСТЕЙ |url=https://knu.ua/ua/geninf/osobystosti/shevchenko/ |access-date=2026-02-28 |website=knu.ua}}</ref><ref>{{Cite book |last=जैतसेव|first=पावलो |url=https://www.jstor.org/stable/10.3138/j.ctvfp65bv |title=Taras Shevchenko: A Life |date=1988 |publisher=टोरंटो विश्वविद्यालय प्रेस|isbn=978-1-4875-7328-7 |doi=10.3138/j.ctvfp65bv |archive-date=2019-05-21 |access-date=2026-02-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190521013038/https://www.jstor.org/stable/10.3138/j.ctvfp65bv |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal |last=फ्रेंको |first=इवान |date=1924 |title=Taras Shevchenko |url=https://www.jstor.org/stable/4201823 |journal=द स्लावोनिक रिव्यू . |volume=3 |issue=7 |pages=110–116 |issn=1471-7816}}</ref><ref>{{Cite web |title=A Note on a Note in Taras Shevchenko's Haidamaky |url=https://www.husj.harvard.edu/articles/a-note-on-a-note-in-taras-shevchenkos-haidamaky |archive-url=https://web.archive.org/web/20250630162139/https://www.husj.harvard.edu/articles/a-note-on-a-note-in-taras-shevchenkos-haidamaky |archive-date=2025-06-30 |access-date=2026-02-28 |website=हार्वर्ड यूक्रेनी अध्ययन |language=en |url-status=live }}</ref> इसी प्रकार इवान फ्रेंको, लेस्या उक्रेन्का और [[ह्रीहोरी स्कोवोरोडा]] ने साहित्य और दर्शन को नई दिशा दी।<ref>{{Cite web |title=About Hryhorii Skovoroda - Skovoroda Online Concordance |url=https://www.artsrn.ualberta.ca/skovoroda/aboutSkovoroda.php |access-date=2026-02-28 |website=www.artsrn.ualberta.ca}}</ref><ref>{{Cite web |title=Hryhorii Skovoroda Museum |url=https://ui.org.ua/en/postcard/hryhorii-skovoroda-museum-en/ |access-date=2026-02-28 |website=यूक्रेनी संस्थान|language=en-GB |archive-date=2023-05-04 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230504173642/https://ui.org.ua/en/postcard/hryhorii-skovoroda-museum-en/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Hryhorii Skovoroda |url=https://artsandculture.google.com/story/hryhorii-skovoroda/AQVhfeSID1u7HA |access-date=2026-02-28 |website=गूगल कला एवं संस्कृति |language=en}}</ref> दृश्य कलाओं के क्षेत्र में काज़िमिर मालेविच<ref>{{Cite web |date=2025-04-03 |title=The Ukrainian Sky is Dark Like Nowhere in Russia: Malevich's Artistic Expression of Ukrainianness {{!}} Ukrainian Research Institute |url=https://www.huri.harvard.edu/news/2025/04/ukrainian-sky-dark-nowhere-russia-malevichs-artistic-expression-ukrainianness |access-date=2026-02-28 |website=www.huri.harvard.edu |language=en}}</ref><ref>{{Cite book |last=श्कांड्रिज |first=मिरोस्लाव |url=https://www.jstor.org/stable/j.ctv1zjg820 |title=Avant-Garde Art in Ukraine, 1910–1930: Contested Memory |date=2018 |publisher=अकादमिक अध्ययन प्रेस|isbn=978-1-61811-975-9}}</ref><ref>{{Cite web |title=Kazimir Malevich {{!}} Artnet |url=http://www.artnet.com/artists/kazimir-malevich-2/|access-date=2026-02-28 |website= आर्टनेट}}</ref><ref name="auto1">{{Cite web |title=Key Things to Know about Ukrainian Avant-Garde Art of the Early 20th Century |url=https://ukraineworld.org/en/articles/infowatch/ukrainian-avant-garde |access-date=2026-02-28 |website=ukraineworld.org |language=en |archive-date=2025-02-12 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250212143330/https://www.ukraineworld.org/en/articles/infowatch/ukrainian-avant-garde |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Kazimir Malevich - Monoskop |url=https://monoskop.org/Kazimir_Malevich |access-date=2026-02-28 |website=monoskop.org |language=en |archive-date=2026-03-10 |archive-url=https://web.archive.org/web/20260310114315/https://monoskop.org/Kazimir_Malevich |url-status=live }}</ref> और ऑलेक्ज़ेंड्रा एकस्टर<ref name="auto1"/><ref>{{Cite web |date=2021-09-13 |title=Георгій Коваленко. «Олександра Екстер» - Kontur |url=https://kontur.media/ekster/ |access-date=2026-02-28 |language=uk}}</ref><ref>{{Cite web |title=Oleksandra Ekster |url=https://artsandculture.google.com/story/oleksandra-ekster/ZAVhUK4-GonbvQ |access-date=2026-02-28 |website=गूगल कला एवं संस्कृति|language=en}}</ref><ref name="auto2">{{Cite web |date=2023-06-20 |title=Ukrainian Painters: Oleksandra Ekster |url=https://eclecticlight.co/2023/06/20/ukrainian-painters-oleksandra-ekster/ |access-date=2026-02-28 |website=द इलेक्टिक लाइट कंपनी|language=en}}</ref><ref name="auto2"/> जैसे कलाकारों ने आधुनिकतावादी आंदोलनों को समृद्ध किया, जबकि सिनेमा में अलेक्जेंडर डोवज़ेन्को<ref>{{Cite journal |last=लिबर|first=जॉर्ज ओ। |date=2001 |title=Adapting to the Stalinist Order: Alexander Dovzhenko's Psychological Journey, 1933-1953 |url=https://www.jstor.org/stable/826408 |journal=यूरोप-एशिया अध्ययन |volume=53 |issue=7 |pages=1097–1116 |issn=0966-8136 |archive-date=2020-03-25 |access-date=2026-02-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200325234825/https://www.jstor.org/stable/826408 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal |last=चेर्नेत्स्की |first=विटाली |date=2004 |title=Review of ALEXANDER DOVZHENKO: A LIFE IN SOVIET FILM |url=https://www.jstor.org/stable/41036895 |journal=हार्वर्ड यूक्रेनी अध्ययन |volume=27 |issue=1/4 |pages=416–418 |issn=0363-5570}}</ref><ref>{{Cite web |title=Subversions in Dovzhenko's Earth |url=https://www.husj.harvard.edu/articles/subversions-in-dovzhenkos-earth |archive-url=https://web.archive.org/web/20250701090418/https://www.husj.harvard.edu/articles/subversions-in-dovzhenkos-earth |archive-date=2025-07-01 |access-date=2026-02-28 |website=हार्वर्ड यूक्रेनी अध्ययन |language=en |url-status=live }}</ref> ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वलोडिमिर वर्नाडस्की,<ref>{{Cite journal |last=लेविट |first=जॉर्जी एस. |journal=गोटिंगेन यूनिवर्सिटी प्रेस|last2=प्रोतासोव |first2=अलेक्जेंडर ए. |date=2023 |title=Vladimir Vernadsky's "Copernican Turn" |url=https://univerlag.uni-goettingen.de/handle/3/eissn-2512-5923_annals27.3 |language=en |doi=10.17875/gup2023-2484|doi-access=free }}</ref><ref>{{Citation |title=Vernadsky, vladimir ivanovich (1863-1945) |work=SpringerReference |url=https://doi.org/10.1007/springerreference_29779 |access-date=2026-02-28 |place=Berlin/Heidelberg |publisher=Springer-Verlag}}</ref><ref>{{Cite journal |last=वर्नाडस्की, V. I. |journal=Дружба народов |number=3 |date=1990|orig-date=1915|publisher=यूएसएसआर एकेडमी ऑफ साइंसेज (f. 518, op. 1, d. 220Б). |title=Украинский вопрос и русское общество}}</ref> इगोर सिकोरस्की,<ref>{{Cite encyclopedia |title=Igor Sikorsky |encyclopedia=एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका |url=https://www.britannica.com/biography/Igor-Sikorsky |archive-url=https://web.archive.org/web/20260218014920/https://www.britannica.com/biography/Igor-Sikorsky |archive-date=2026-02-18 |access-date=2026-02-28 |language=en |url-status=live }}</ref> और सर्गेई कोरोलेव जैसे महान नवप्रवर्तकों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गहरा प्रभाव डाला।<ref>{{Cite web |title=Газета «Бульвар Гордона» {{!}} Дочь знаменитого Генерального конструктора Сергея Королева Наталия: "Я не могла понять, как отец променял мою умную, красивую маму на другую женщину" |url=http://www.bulvar.com.ua/arch/2006/15/443bcc9e1eab4/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20140116114242/http://www.bulvar.com.ua/arch/2006/15/443bcc9e1eab4/ |archive-date=2014-01-16 |access-date=2026-02-28 |website=www.bulvar.com.ua}}</ref><ref>{{Cite web |date=2023-01-18 |title=Moscow Tries to Diminish a Soviet Space Hero – Because He's From Ukraine |url=https://www.voanews.com/a/fact-check-moscow-tries-to-diminish-a-soviet-space-hero-because-hes-from-ukraine/6924071.html |access-date=2026-02-28 |website=वॉयस ऑफ अमेरिका|language=en |archive-date=2025-03-28 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250328205737/https://www.voanews.com/a/fact-check-moscow-tries-to-diminish-a-soviet-space-hero-because-hes-from-ukraine/6924071.html |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |title=Sergei Pavlovich Korolev {{!}} Igor Sikorsky Kyiv Polytechnic Institute |url=https://kpi.ua/en/about-korolyov |access-date=2026-02-28 |website=kpi.ua |archive-date=2025-12-15 |archive-url=https://web.archive.org/web/20251215015836/https://kpi.ua/en/about-korolyov |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal |last=प्रसाद |first=एम.वाई.एस. |last2=मूर्ति |first2=केआर श्रीधर |date=1999 |title='Soviet rockets must conquer space' – Contributions of S. P. Korolev to the Soviet space research |jstor=24101342 |journal=करंट साइंस |volume=76 |issue=1 |pages=99–102 |issn=0011-3891}}</ref> इस प्रकार, विभिन्न ऐतिहासिक प्रभावों और आंतरिक सांस्कृतिक निरंतरता के संगम ने यूक्रेन की संस्कृति को एक विशिष्ट, बहुआयामी और विश्व-प्रभावी स्वरूप प्रदान किया है। ==सन्दर्भ== {{reflist}} [[श्रेणी:यूरोपीय संस्कृति]] c30cokf3s1qxjgpvrmhznlerqkm2u7f कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय 0 1610817 6536604 6536484 2026-04-05T14:45:39Z चाहर धर्मेंद्र 703114 6536604 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | name = कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय | latin_name =ए केडेमिया कियोविएंसिस मोहिलीआना | native_name = नेशनल यूनिवर्सिटी "कीव-मोहिला एकेडमी"<br>स्टेट हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन "NaUKMA" | image_name = | image_size = | motto = ''टेम्पस फुगिट, एकेडेमिया सेम्पिटर्ना'' {{small|([[लातिन भाषा|लैटिन]])}} | mottoeng = ''समय बीतता है, लेकिन अकादमी शाश्वत है।'' | established = {{hlist|1615 किजोव्स्का स्ज़कोला ब्रैका के रूप में|1632 कोलेजियम किजोस्को-मोहिलांस्की के रूप में|1658 अकादेमिया मोहिलांस्का डब्ल्यू किजोवी के रूप में|1819 कीव आध्यात्मिक अकादमी के रूप में|1991 राष्ट्रीय विश्वविद्यालय "कीव-मोहिला अकादमी"<ref name="LawReest">{{cite web |title=Decree of Verkhovna Rada of Ukraine about the revival of Kyiv-Mohyla Academy | work=Законодавство України |url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |access-date=16 अगस्त 2007 |language=uk |archive-date=5 फरवरी 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120205224421/http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |url-status=live }}</ref>}} |founder=पेट्रो मोहिला | type = राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय|राज्य प्रायोजित]], [[अनुसंधान विश्वविद्यालय|अनुसंधान]] | president = सेरही क्विट | faculty = 180<ref name="govinfo">{{cite web |title=Information about NaUKMA from the Ministry of Education and Science |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20080628091451/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |archive-date=28 जून 2008 |url-status=dead}}</ref> | students = {{circa|4000}}<ref name="Studstats">{{cite web |title=NaUKMA student statistics in 2006/2007 |url=http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20130616044319/http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |archive-date=16 जून 2013 |url-status=dead}}</ref> | colors = नीला और सफेद {{color box|#0033A1}} {{color box|#FFFFFF}} | former_names = {{hlist|कीव ब्रदरहुड स्कूल (1615–1632)|कॉलेजियम किजोवेन्से मोहिलेअनम (1632–1658)|एकेडेमिया कियोविएंसिस मोहिलेआना (1658–1819)|कीव थियोलॉजिकल एकेडमी (1819–1918)|नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ "कीव-मोहिला एकेडमी" (1991 से)}} | city = [[कीव]] | country = [[यूक्रेन]] | coordinates = {{Coord|50|27|52|N|30|31|11|E|type:edu_region:UA|display=inline,title}} | campus = शहरी, {{cvt|20|acre|ha}} | academic_affiliations = यूरोपीय विश्वविद्यालय संघ ( ईयूए ) |affiliations = यूक्रेन का शिक्षा एवं विज्ञान मंत्रालय | website = {{URL|http://www.ukma.edu.ua/|Ukma.edu.ua}} | module = |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Києво-Могилянської Академії (ансамбль Братського монастиря)}} (''कीव-मोहिला अकादमी (ब्रदरहुड मठ का समूह) की इमारतों का परिसर'') |designation1_type = इतिहास |designation1_number = 260025-Н}} '''कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय''' (संक्षेप: NaUKMA; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य |यूक्रेनी]]: Національний університет «Києво-Могилянська академія», НаУКМА), जिसे बोलचाल में “मोहिलियांका” के नाम से भी जाना जाता है, यूक्रेन का एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय |राज्य-प्रायोजित]] [[शोध विश्वविद्यालय |अनुसंधान विश्वविद्यालय]] है, जो [[कीव]] के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित है।<ref name="Accreditation">{{cite web |title=Information on the higher educational institution or affiliate |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |access-date=25 नवंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080103140204/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |archive-date=3 जनवरी 2008 |url-status=dead}}</ref> यह विश्वविद्यालय उच्च शैक्षणिक मानकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध है। NaUKMA में शिक्षा [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य| यूक्रेनी]] और [[अंग्रेज़ी भाषा |अंग्रेज़ी]] दोनों भाषाओं में द्विभाषिक रूप से प्रदान की जाती है,<ref name="EngCourses">{{Cite web |title=National University Kyiv-Mohyla Academy - INTERNATIONAL OFFICE |url=https://dfc.ukma.edu.ua/coming-to-naukma/courses-taught-in-english |access-date=2023-02-25 |website=dfc.ukma.edu.ua}}</ref> जिससे यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी आकर्षक बनता है। यह यूक्रेन के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में से एक है, जिनके डिप्लोमा को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।<ref name="UkrUnMarch2010">{{cite web |url=http://www.kyivpost.com/news/nation/detail/63027/ |title=Kyiv Post. Independence. Community. Trust - Ukraine - Education problems deeper than language |access-date=2 अप्रैल 2010 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20100403023409/http://www.kyivpost.com/news/nation/detail/63027/ |archive-date=3 अप्रैल 2010}}</ref> विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है और यूरोपीय विश्वविद्यालय संघ जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के साथ जुड़ा हुआ है।<ref name="Collab">{{Cite web |title=National University Kyiv-Mohyla Academy - INTERNATIONAL OFFICE |url=https://dfc.ukma.edu.ua/news/180 |access-date=2023-02-25 |website=dfc.ukma.edu.ua}}</ref><ref name="Collab2">{{cite web |title=NaUKMA – Partners: Education. Science |url=http://www.ukma.kiev.ua/eng_site/en/proj_part/part/education/index.php |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20090827163644/http://www.ukma.kiev.ua/eng_site/en/proj_part/part/education/index.php |archive-date=27 अगस्त 2009 |access-date=17 फरवरी 2008}}</ref><ref name="EUA">{{cite web |title=European University Association |url=http://www.eua.be/index.php?id=72 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927043444/http://www.eua.be/index.php?id=72 |archive-date=27 सितंबर 2007 |access-date=29 सितंबर 2007}}</ref> लगभग 4000 छात्रों के साथ, NaUKMA यूक्रेन के सबसे छोटे विश्वविद्यालयों में से एक है, किंतु इसका शैक्षणिक प्रभाव और प्रतिष्ठा अत्यंत व्यापक है। यह संस्थान अपनी गुणवत्ता-आधारित शिक्षा, शोध-उन्मुख वातावरण और वैश्विक दृष्टिकोण के कारण विशेष स्थान रखता है। कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का नाम उसके ऐतिहासिक पूर्ववर्ती कीव-मोहिला अकादमी से लिया गया है, जिसकी स्थापना 1615 में हुई थी और जो 1819 तक सक्रिय रही। वर्तमान विश्वविद्यालय कीव के प्राचीन पोडिल क्षेत्र में उसी ऐतिहासिक अकादमी के परिसर में स्थित है। आधुनिक रूप में इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1991 में हुई, जबकि शिक्षण कार्य 1992 में प्रारंभ हुआ। कीव-मोहिला अकादमी के पूर्व छात्रों ने 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूक्रेन और [[रूस]] के बौद्धिक तथा धार्मिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके प्रमुख पूर्व छात्रों में इवान माज़ेपा, जो एक प्रभावशाली हेतमैन थे, तथा ग्रिगोरी स्कोवोरोडा, जो एक विख्यात दार्शनिक थे, विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अकादमी के रेक्टरों में से एक थियोफ़ान प्रोकोपोविच ने [[पीटर महान |पीटर द ग्रेट]] द्वारा [[रूसी पारम्परिक ईसाई |रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च]] में किए गए सुधारों को विस्तार से प्रतिपादित किया और उनके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।<ref name="Kamenskii">ए. कामेन्स्की. The Russian Empire in the Eighteenth Century: Searching for a Place in the World. Published 1997 एम.ई. शार्प {{ISBN|1-56324-574-4}}</ref><ref name="Kortschmaryk">{{cite book |author=कोर्टश्मरीक, फ्रैंक बी. |title=The Kievan Academy and Its Role in the Organization of Russia at the Turn of the Seventeenth Century |location=New York |publisher=शेवचेंको वैज्ञानिक सोसायटी |year=1976}}</ref> यह विश्वविद्यालय अपनी [[पश्चिमीकरण | पश्चिमी समर्थक]] विचारधारा के लिए भी जाना जाता है और ऑरेंज क्रांति के दौरान यह आंदोलनकारियों के एक प्रमुख मुख्यालय के रूप में भी कार्यरत रहा।<ref name=UkrUnMarch2010/> ==सन्दर्भ== 9abmdodb26j7p1z7l08385smrrhxand 6536605 6536604 2026-04-05T14:47:03Z चाहर धर्मेंद्र 703114 6536605 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | name = कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय | latin_name =ए केडेमिया कियोविएंसिस मोहिलीआना | native_name = नेशनल यूनिवर्सिटी "कीव-मोहिला एकेडमी"<br>स्टेट हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन "NaUKMA" | image_name = | image_size = | motto = ''टेम्पस फुगिट, एकेडेमिया सेम्पिटर्ना'' {{small|([[लातिन भाषा|लैटिन]])}} | mottoeng = ''समय बीतता है, लेकिन अकादमी शाश्वत है।'' | established = {{hlist|1615 किजोव्स्का स्ज़कोला ब्रैका के रूप में|1632 कोलेजियम किजोस्को-मोहिलांस्की के रूप में|1658 अकादेमिया मोहिलांस्का डब्ल्यू किजोवी के रूप में|1819 कीव आध्यात्मिक अकादमी के रूप में|1991 राष्ट्रीय विश्वविद्यालय "कीव-मोहिला अकादमी"<ref name="LawReest">{{cite web |title=Decree of Verkhovna Rada of Ukraine about the revival of Kyiv-Mohyla Academy | work=Законодавство України |url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |access-date=16 अगस्त 2007 |language=uk |archive-date=5 फरवरी 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120205224421/http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |url-status=live }}</ref>}} |founder=पेट्रो मोहिला | type = राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय|राज्य प्रायोजित]], [[अनुसंधान विश्वविद्यालय|अनुसंधान]] | president = सेरही क्विट | faculty = 180<ref name="govinfo">{{cite web |title=Information about NaUKMA from the Ministry of Education and Science |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20080628091451/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |archive-date=28 जून 2008 |url-status=dead}}</ref> | students = {{circa|4000}}<ref name="Studstats">{{cite web |title=NaUKMA student statistics in 2006/2007 |url=http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20130616044319/http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |archive-date=16 जून 2013 |url-status=dead}}</ref> | colors = नीला और सफेद {{color box|#0033A1}} {{color box|#FFFFFF}} | former_names = {{hlist|कीव ब्रदरहुड स्कूल (1615–1632)|कॉलेजियम किजोवेन्से मोहिलेअनम (1632–1658)|एकेडेमिया कियोविएंसिस मोहिलेआना (1658–1819)|कीव थियोलॉजिकल एकेडमी (1819–1918)|नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ "कीव-मोहिला एकेडमी" (1991 से)}} | city = [[कीव]] | country = [[यूक्रेन]] | coordinates = {{Coord|50|27|52|N|30|31|11|E|type:edu_region:UA|display=inline,title}} | campus = शहरी, {{cvt|20|acre|ha}} | academic_affiliations = यूरोपीय विश्वविद्यालय संघ ( ईयूए ) |affiliations = यूक्रेन का शिक्षा एवं विज्ञान मंत्रालय | website = {{URL|http://www.ukma.edu.ua/|Ukma.edu.ua}} | module = |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Києво-Могилянської Академії (ансамбль Братського монастиря)}} (''कीव-मोहिला अकादमी (ब्रदरहुड मठ का समूह) की इमारतों का परिसर'') |designation1_type = इतिहास |designation1_number = 260025-Н}} '''कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय''' (संक्षेप: NaUKMA; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य |यूक्रेनी]]: Національний університет «Києво-Могилянська академія», НаУКМА), जिसे बोलचाल में “मोहिलियांका” के नाम से भी जाना जाता है, यूक्रेन का एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय |राज्य-प्रायोजित]] [[शोध विश्वविद्यालय |अनुसंधान विश्वविद्यालय]] है, जो [[कीव]] के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित है।<ref name="Accreditation">{{cite web |title=Information on the higher educational institution or affiliate |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |access-date=25 नवंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080103140204/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |archive-date=3 जनवरी 2008 |url-status=dead}}</ref> यह विश्वविद्यालय उच्च शैक्षणिक मानकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध है। NaUKMA में शिक्षा [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य| यूक्रेनी]] और [[अंग्रेज़ी भाषा |अंग्रेज़ी]] दोनों भाषाओं में द्विभाषिक रूप से प्रदान की जाती है,<ref name="EngCourses">{{Cite web |title=National University Kyiv-Mohyla Academy - INTERNATIONAL OFFICE |url=https://dfc.ukma.edu.ua/coming-to-naukma/courses-taught-in-english |access-date=2023-02-25 |website=dfc.ukma.edu.ua}}</ref> जिससे यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी आकर्षक बनता है। यह यूक्रेन के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में से एक है, जिनके डिप्लोमा को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।<ref name="UkrUnMarch2010">{{cite web |url=http://www.kyivpost.com/news/nation/detail/63027/ |title=Kyiv Post. Independence. Community. Trust - Ukraine - Education problems deeper than language |access-date=2 अप्रैल 2010 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20100403023409/http://www.kyivpost.com/news/nation/detail/63027/ |archive-date=3 अप्रैल 2010}}</ref> विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है और यूरोपीय विश्वविद्यालय संघ जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के साथ जुड़ा हुआ है।<ref name="Collab">{{Cite web |title=National University Kyiv-Mohyla Academy - INTERNATIONAL OFFICE |url=https://dfc.ukma.edu.ua/news/180 |access-date=2023-02-25 |website=dfc.ukma.edu.ua}}</ref><ref name="Collab2">{{cite web |title=NaUKMA – Partners: Education. 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The Russian Empire in the Eighteenth Century: Searching for a Place in the World. Published 1997 एम.ई. शार्प {{ISBN|1-56324-574-4}}</ref><ref name="Kortschmaryk">{{cite book |author=कोर्टश्मरीक, फ्रैंक बी. |title=The Kievan Academy and Its Role in the Organization of Russia at the Turn of the Seventeenth Century |location=New York |publisher=शेवचेंको वैज्ञानिक सोसायटी |year=1976}}</ref> यह विश्वविद्यालय अपनी [[पश्चिमीकरण | पश्चिमी समर्थक]] विचारधारा के लिए भी जाना जाता है और ऑरेंज क्रांति के दौरान यह आंदोलनकारियों के एक प्रमुख मुख्यालय के रूप में भी कार्यरत रहा।<ref name=UkrUnMarch2010/> ==सन्दर्भ== 1llmo4gi7qevrnghr0sjpzewz4lo6jx 6536656 6536605 2026-04-05T16:43:07Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सन्दर्भ + जानकारी 6536656 wikitext text/x-wiki {{Infobox university | name = कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय | latin_name =ए केडेमिया कियोविएंसिस मोहिलीआना | native_name = नेशनल यूनिवर्सिटी "कीव-मोहिला एकेडमी"<br>स्टेट हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन "NaUKMA" | image_name = | image_size = | motto = ''टेम्पस फुगिट, एकेडेमिया सेम्पिटर्ना'' {{small|([[लातिन भाषा|लैटिन]])}} | mottoeng = ''समय बीतता है, लेकिन अकादमी शाश्वत है।'' | established = {{hlist|1615 किजोव्स्का स्ज़कोला ब्रैका के रूप में|1632 कोलेजियम किजोस्को-मोहिलांस्की के रूप में|1658 अकादेमिया मोहिलांस्का डब्ल्यू किजोवी के रूप में|1819 कीव आध्यात्मिक अकादमी के रूप में|1991 राष्ट्रीय विश्वविद्यालय "कीव-मोहिला अकादमी"<ref name="LawReest">{{cite web |title=Decree of Verkhovna Rada of Ukraine about the revival of Kyiv-Mohyla Academy | work=Законодавство України |url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |access-date=16 अगस्त 2007 |language=uk |archive-date=5 फरवरी 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120205224421/http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1570-12 |url-status=live }}</ref>}} |founder=पेट्रो मोहिला | type = राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय|राज्य प्रायोजित]], [[अनुसंधान विश्वविद्यालय|अनुसंधान]] | president = सेरही क्विट | faculty = 180<ref name="govinfo">{{cite web |title=Information about NaUKMA from the Ministry of Education and Science |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20080628091451/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.ukr&p_lang=ukr |archive-date=28 जून 2008 |url-status=dead}}</ref> | students = {{circa|4000}}<ref name="Studstats">{{cite web |title=NaUKMA student statistics in 2006/2007 |url=http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |access-date=16 नवंबर 2007 |language=uk |archive-url=https://web.archive.org/web/20130616044319/http://www.kmfoundation.com/?p=2_2_Publications_in_Ukrainian&lan=ua&alan=ua&id=164&a=students_naukma_work |archive-date=16 जून 2013 |url-status=dead}}</ref> | colors = नीला और सफेद {{color box|#0033A1}} {{color box|#FFFFFF}} | former_names = {{hlist|कीव ब्रदरहुड स्कूल (1615–1632)|कॉलेजियम किजोवेन्से मोहिलेअनम (1632–1658)|एकेडेमिया कियोविएंसिस मोहिलेआना (1658–1819)|कीव थियोलॉजिकल एकेडमी (1819–1918)|नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ "कीव-मोहिला एकेडमी" (1991 से)}} | city = [[कीव]] | country = [[यूक्रेन]] | coordinates = {{Coord|50|27|52|N|30|31|11|E|type:edu_region:UA|display=inline,title}} | campus = शहरी, {{cvt|20|acre|ha}} | academic_affiliations = यूरोपीय विश्वविद्यालय संघ ( ईयूए ) |affiliations = यूक्रेन का शिक्षा एवं विज्ञान मंत्रालय | website = {{URL|http://www.ukma.edu.ua/|Ukma.edu.ua}} | module = |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Києво-Могилянської Академії (ансамбль Братського монастиря)}} (''कीव-मोहिला अकादमी (ब्रदरहुड मठ का समूह) की इमारतों का परिसर'') |designation1_type = इतिहास |designation1_number = 260025-Н}} '''कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय''' (संक्षेप: NaUKMA; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य |यूक्रेनी]]: Національний університет «Києво-Могилянська академія», НаУКМА), जिसे बोलचाल में “मोहिलियांका” के नाम से भी जाना जाता है, यूक्रेन का एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय, [[सार्वजनिक विश्वविद्यालय |राज्य-प्रायोजित]] [[शोध विश्वविद्यालय |अनुसंधान विश्वविद्यालय]] है, जो [[कीव]] के ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित है।<ref name="Accreditation">{{cite web |title=Information on the higher educational institution or affiliate |url=http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |access-date=25 नवंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080103140204/http://www.education.gov.ua/pls/edu/educ.institution.show?p_id=202&p_back_link=educ.hei.eng&p_lang=eng |archive-date=3 जनवरी 2008 |url-status=dead}}</ref> यह विश्वविद्यालय उच्च शैक्षणिक मानकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध है। NaUKMA में शिक्षा [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य| यूक्रेनी]] और [[अंग्रेज़ी भाषा |अंग्रेज़ी]] दोनों भाषाओं में द्विभाषिक रूप से प्रदान की जाती है,<ref name="EngCourses">{{Cite web |title=National University Kyiv-Mohyla Academy - INTERNATIONAL OFFICE |url=https://dfc.ukma.edu.ua/coming-to-naukma/courses-taught-in-english |access-date=2023-02-25 |website=dfc.ukma.edu.ua}}</ref> जिससे यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी आकर्षक बनता है। यह यूक्रेन के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में से एक है, जिनके डिप्लोमा को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है।<ref name="UkrUnMarch2010">{{cite web |url=http://www.kyivpost.com/news/nation/detail/63027/ |title=Kyiv Post. 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Science |url=http://www.ukma.kiev.ua/eng_site/en/proj_part/part/education/index.php |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20090827163644/http://www.ukma.kiev.ua/eng_site/en/proj_part/part/education/index.php |archive-date=27 अगस्त 2009 |access-date=17 फरवरी 2008}}</ref><ref name="EUA">{{cite web |title=European University Association |url=http://www.eua.be/index.php?id=72 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927043444/http://www.eua.be/index.php?id=72 |archive-date=27 सितंबर 2007 |access-date=29 सितंबर 2007}}</ref> लगभग 4000 छात्रों के साथ, NaUKMA यूक्रेन के सबसे छोटे विश्वविद्यालयों में से एक है, किंतु इसका शैक्षणिक प्रभाव और प्रतिष्ठा अत्यंत व्यापक है। यह संस्थान अपनी गुणवत्ता-आधारित शिक्षा, शोध-उन्मुख वातावरण और वैश्विक दृष्टिकोण के कारण विशेष स्थान रखता है। कीव-मोहिला अकादमी का राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का नाम उसके ऐतिहासिक पूर्ववर्ती कीव-मोहिला अकादमी से लिया गया है, जिसकी स्थापना 1615 में हुई थी और जो 1819 तक सक्रिय रही। वर्तमान विश्वविद्यालय कीव के प्राचीन पोडिल क्षेत्र में उसी ऐतिहासिक अकादमी के परिसर में स्थित है। आधुनिक रूप में इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1991 में हुई, जबकि शिक्षण कार्य 1992 में प्रारंभ हुआ। कीव-मोहिला अकादमी के पूर्व छात्रों ने 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूक्रेन और [[रूस]] के बौद्धिक तथा धार्मिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके प्रमुख पूर्व छात्रों में इवान माज़ेपा, जो एक प्रभावशाली हेतमैन थे, तथा ग्रिगोरी स्कोवोरोडा, जो एक विख्यात दार्शनिक थे, विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अकादमी के रेक्टरों में से एक थियोफ़ान प्रोकोपोविच ने [[पीटर महान |पीटर द ग्रेट]] द्वारा [[रूसी पारम्परिक ईसाई |रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च]] में किए गए सुधारों को विस्तार से प्रतिपादित किया और उनके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।<ref name="Kamenskii">ए. कामेन्स्की. The Russian Empire in the Eighteenth Century: Searching for a Place in the World. Published 1997 एम.ई. शार्प {{ISBN|1-56324-574-4}}</ref><ref name="Kortschmaryk">{{cite book |author=कोर्टश्मरीक, फ्रैंक बी. |title=The Kievan Academy and Its Role in the Organization of Russia at the Turn of the Seventeenth Century |location=New York |publisher=शेवचेंको वैज्ञानिक सोसायटी |year=1976}}</ref> यह विश्वविद्यालय अपनी [[पश्चिमीकरण | पश्चिमी समर्थक]] विचारधारा के लिए भी जाना जाता है और ऑरेंज क्रांति के दौरान यह आंदोलनकारियों के एक प्रमुख मुख्यालय के रूप में भी कार्यरत रहा।<ref name=UkrUnMarch2010/> ==कीव मोहिला अकादमी के अध्यक्ष== {{colbegin|colwidth=25em}} ===कीव ब्रदरहुड स्कूल के रेक्टर (1615-1632)=== *जॉब बोरेत्स्की (1615-1619) *मेलेतियस स्मोट्रिट्स्की (1619-1620) *कैसियन साकोविच (1620-1624) *स्पिरिडॉन सोबोल (1626-1628) *खोमा (टॉमाज़) येवलेविच (1628-1632) *तारासियस ज़ेम्का (1632) ===कीव कॉलेजियम के रेक्टर (1632-1658)=== *यशायाह ट्रोफिमोविच-कोज़लोवस्की (1632-1638) *सोफ्रोनिअस पोचास्की (1638-1640) *लियोन्टियस ब्रोंकेविच (1640) *इग्नाटियस ओक्सेनोविच-स्टारुशिच (1640-1642) *जोसेफ़ कोनोनोविच-होर्बात्स्की (1642-1645) *इनोसेंट गीसेल (1645-1650) *लाजर बारानोविच (1650-1651) *मेलेतियस डिज़िक (1655-1657) *जोसेफ मेशचेरिन (1657) ===कीव मोहिला अकादमी के रेक्टर (1658-1817)=== *जोआनीसियस गैलियाटोव्स्की (1658-1662) *मेलेतियस डिज़िक (1662-1665) *बारलाम यासिंस्की (1665-1672) *सिल्वेस्टर होलोवचिच (1672-1684) *जेज़ेकिएल फिलिपोविच (1684-1685) *थियोडोसियस हुहुरेविच (1685-1688) *जोआसफ क्रोकोव्स्की (1689-1690) *पचोमियस पोडलुज़की (1690-1691) *सिरिल फिलिमनोविच (1691-1692) *जोआसफ क्रोकोव्स्की (1693-1697) *प्रोकोपियस कलाचिन्स्की (1697-1701) *गेदोन ओडोर्स्की (1701-1704) *इनोसेंट पोपोव्स्की (1704-1707) *क्रिस्टोफ़र चार्नुत्स्की (1707-1710) *थियोफैन प्रोकोपोविच (1711-1716) *सिल्वेस्टर पिनोव्स्की (1717-1722) *जोसेफ वोल्चांस्की (1722-1727) *हिलारियन लेवित्स्की (1727-1731) *एम्ब्रोसियस डबनेविच (1731-1735) *सिल्वेस्टर डुमनित्स्की (1737-1740) *सिल्वेस्टर कुलियाब्का (1740-1745) *सिल्वेस्टर लिआस्कोरोन्स्की (1746-1751) *जॉर्ज कोनिस्की (1751-1755) *मनसियाह मक्सिमोविच (1755-1758) *डेविड नाशचिंस्की (1758-1761) *सैमुअल मायस्लावस्की (1761-1768) *तारासियस वर्बिट्स्की (1768-1774) *निकोडिमस पैनक्रैटिएव (1774) *कैसियन लेख्नित्स्की (1775-1784) *बारलाम मायस्लावस्की (1784-1791) *हिरोनिमस ब्लोन्स्की (1791-1795) *थियोफिलाक्ट स्लोनेत्स्की (1795-1803) *इरीनियस फाल्कोव्स्की (1803-1804) *जोआसिंथ लोहानोव्स्की (1804-1813) *जोआसफ मोखोव (1814-1817) ===कीव थियोलॉजिकल अकादमी के रेक्टर (1819-1917)=== *मूसा एंटिपोव-बोगदानोव (1819-1823) *मेलेटियस लियोन्टोविक (1824-1826) *सिरिल कुनित्स्की (1827-1828) *प्लेटोन बेरेज़िन (1828) *स्मारागड क्रिज़ानिव्स्की (1829-1830) *इनोसेंट बोरिसोव (1830-1839) *जेरेमिया सोलोवियोव (1839-1841) *डेमेट्रियस मुरेटोव (1841-1850) *एंटोनियस एम्फाइटिएत्रोव (1851-1858) *इज़राइल लुकिन (1858-1859) *जोआनिसियस रुडनेव (1859-1860) *फिलारेट फिलारेटोव (1860-1877) *माइकल लुज़िन (1877-1883) *सिल्वेस्टर मालेवांस्की (1883-1898) *डेमेट्रियस कोवलनीत्स्की (1898-1902) *प्लेटोन रोज़डेस्टवेन्स्की (1902-1907) *थियोडोसियस ओल्तार्ज़ेव्स्की (1907-1910) *इनोसेंट यास्त्रेबोव (1910-1914) *बेसिल बोहदाशेव्स्की (1914-1917) ===राष्ट्रीय विश्वविद्यालय "कीव मोहिला अकादमी" के अध्यक्ष (1992 से)=== *व्याचेस्लाव ब्रियुखोवेट्स्की (1992-2007) *सेरही क्विट (2007-2014) *एंड्री मेलेशेविच (2014-2019) *सेरही क्विट (2022 से) {{colend}} ==सन्दर्भ== {{Reflist|30em}} ==अग्रिम पठन== *{{cite book |author=सिडोरेन्को, अलेक्जेंडर |title=The Kievan Academy in the Seventeenth Century |location=ओटावा |publisher= ओटावा विश्वविद्यालय प्रेस |year=1977 |isbn=0-7766-0901-7}} *{{cite book |author=कोर्टश्मरिक, फ्रैंक बी. |title=The Kievan Academy and Its Role in the Organization of Russia at the Turn of the Seventeenth Century |location=न्यूयॉर्क |publisher=शेवचेंको वैज्ञानिक सोसायटी|year=1976}} *[https://web.archive.org/web/20110703104746/http://140.247.132.248/huri/pdf/hus_volumes/vVIII_n1_2june1984.pdf Omeljan Pritsak and Ihor Sevcenko, eds. "The Kyiv Mohyla Academy (Commemorating the 350th Anniversary of Its Founding, 1632–1982)." ''Harvard Ukrainian Studies''. vol. VIII, no. 1/2. Cambridge, MA, 1985.] *एस.एम. होराक. "The Kiev Academy. A Bridge to Europe in the 17th century". ''East European Quarterly'', vol. 2, 2, 1968. *वी. ब्रियुखोवेट्स्की "National University of Kyiv-Mohyla Academy: symbol of the rebirth of Ukraine". ''यूक्रेनी साप्ताहिक'', रविवार, 22 नवंबर 1998. *[http://www.wumag.kiev.ua/index2.php?param=pgs20061/46 Interview with Vyacheslav Bryukhovetsky, president of Kyiv Mohyla Academy. ''Welcome to Ukraine'', 1, 2006]. *[http://www.wumag.kiev.ua/wumag_old/archiv/1_2000/univer.htm O. Ilchenko. "The Once and Future University Kyiv Mohyla Academy, the First Educational Establishment in Eastern Europe". ''Welcome to Ukraine'', 1, 2000]. *[http://www.wumag.kiev.ua/wumag_old/archiv/3_99/academy.htm "Vivat Academia", ''Welcome to Ukraine'', 3, 1999]. *एस. मखुन "'Kyiv-Mohyla Academy' National University of Ukraine: Citadel of European Spirit and Ukrainian Enlightenment". ''द डे'' , 22 अक्टूबर 2002. *[http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\K\Y\KyivanMohylaAcademy.htm Kyivan Mohyla Academy] in the यूक्रेन का विश्वकोश. *[https://www.ukma.edu.ua/eng/index.php/about-us/history History of Kyiv-Mohyla Academy]. *[[:uk:Національний університет «Києво-Могилянська академія»|Additional literature in the Ukrainian version of this article]]. {{in lang|uk}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{commons category|National University of "Kyiv-Mohyla Academy"}} *[https://www.ukma.edu.ua/eng/ NaUKMA homepage] *[https://www.ukma.edu.ua/eng/index.php/ukma-contacts/campus NaUKMA campus map] *[https://wikimapia.org/2855/ Wikimapia] – Satellite view of NaUKMA *[https://dfc.ukma.edu.ua/coming-to-naukma/international-students Admissions to NaUKMA for international applicants] *[https://dfc.ukma.edu.ua/ NaUKMA International Office] *[https://media.ukma.edu.ua/ NaUKMA photo gallery] *[http://www.kmfoundation.com/ Kyiv Mohyla Foundation of America] *[https://www.ukma.edu.ua/index.php/about-us/sogodennya/media-halereia/category/1-arkhitekturni-pamyatki Architecture and photographs of Kyiv Mohyla Academy campus] {{in lang|uk}} d8mo343vzeszaxavs257wf9ajq5u6o4 महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय बीकानेर 0 1610818 6536596 6536496 2026-04-05T13:49:45Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सन्दर्भ 6536596 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Maharani Sudarshan Prasad Kumariji Sahiba of Bikaner.jpg|right|thumb|300px|महारानी सुदर्शन प्रसाद कंवरजी साहिबा]] '''महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय''' [[राजस्थान]] के [[बीकानेर]]<ref>{{cite book |author=दिल्ली (भारत). नगर निगम |title=Naī Dillī Pālikā samācāra |url=https://www.google.co.th/books/edition/Na%C4%AB_Dill%C4%AB_P%C4%81lik%C4%81_sam%C4%81c%C4%81ra/Pvpm6m2N_eYC?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF+%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B0&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF+%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B0&printsec=frontcover|publisher=Naī Dillī Nagara Pālikā. |year= 1991}}</ref> शहर में स्थित एक प्रमुख महिला शिक्षण संस्थान है जो विशेष रूप से बालिकाओं की उच्च शिक्षा को समर्पित है। यह महाविद्यालय अपने ऐतिहासिक महत्व, शैक्षणिक उपलब्धियों और महिला सशक्तिकरण में योगदान के लिए जाना जाता है। == स्थापना एवं इतिहास == महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय की स्थापना वर्ष '''1946''' में सर [[सादुल सिंह]] द्वारा की गई थी,<ref>{{Cite web |title=Government Maharani Sudershan College For Women - Bikaner|url=https://educationexclusive.com/government-maharani-sudershan-college-for-women-bikaner|access-date=2023-02-25 |website=शिक्षा अनन्य |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20260405132235/https://educationexclusive.com/government-maharani-sudershan-college-for-women-bikaner|archive-date=5 अप्रैल 2026}}</ref> जो बीकानेर रियासत के अंतिम शासक थे। उन्होंने इस संस्थान का नाम अपनी धर्मपत्नी महारानी सुदर्शन प्रसाद कंवरजी साहिबा के नाम पर रखा। उस समय (1950 के दशक में) जब समाज में बालिका शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था, तब राजपरिवार ने इसकी आवश्यकता को समझते हुए लड़कियों के लिए एक अलग उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना की। यह पहल उस दौर में अत्यंत प्रगतिशील और दूरदर्शी मानी जाती है।<ref>{{Cite web |title=History|url=https://hte.rajasthan.gov.in/college/ggcbikaner/history|access-date=8 जून 2017 |website=rajasthan.gov.in|url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20251118194453/https://hte.rajasthan.gov.in/college/ggcbikaner/history|archive-date=18 नवंबर 2025}}</ref> == शैक्षणिक विकास == महाविद्यालय ने समय के साथ निरंतर प्रगति की है: * '''1946''' – इंटर कॉलेज के रूप में स्थापना * '''1956''' – कला संकाय (B.A.) की शुरुआत * '''1957''' – विज्ञान संकाय (B.Sc.) प्रारंभ * '''1980''' – तीन वर्षीय पाठ्यक्रम प्रणाली लागू * '''1981''' – वाणिज्य संकाय (B.Com.) की शुरुआत == स्नातकोत्तर एवं विशेष पाठ्यक्रम == महाविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए: * '''1992-93''' – स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम प्रारंभ ** अंग्रेजी ** अर्थशास्त्र ** राजनीति विज्ञान * '''1999''' – लोक प्रशासन में PG * '''2012''' – गृह विज्ञान में PG इसके अतिरिक्त, 1990 में '''Garments Production and Export Management (GPEM)''' जैसे दुर्लभ पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई, जो रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। == कौशल विकास एवं रोजगार उन्मुख पहल == महाविद्यालय ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए: * '''2001''' – ICICI Bank एवं राजस्थान सरकार के बीच समझौता (MOU) * '''2005-06''' – BPO एवं Spoken English कोर्स * '''2007''' – राजस्थान मिशन ऑफ लिवलीहुड (RMOL) के अंतर्गत रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण * '''2013-14''' – वाणिज्य छात्रों के लिए CAT कोर्स == आधुनिक पहल एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम == * '''2017''' – IGNOU के विभिन्न पाठ्यक्रम शुरू * '''2017 से''' – स्कूटी वितरण योजना के लिए नोडल कॉलेज * '''2019''' – Rotary Club Adhya के सहयोग से 60 दिवसीय स्किल डेवलपमेंट कैंप ** फैशन डिजाइनिंग एवं सिलाई प्रशिक्षण ** जरूरतमंद छात्राओं को 50 सिलाई मशीनें वितरित * '''Rotary Club Midtown''' के साथ 3 वर्षों का MOU – प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन == कोविड-19 के दौरान पहल == '''2020''' में कोविड-19 महामारी के दौरान महाविद्यालय ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया: * STTS Infotech Pvt. Ltd. के सहयोग से ** 1 माह का ऑनलाइन इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स ** 10 दिन का पर्सनैलिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम == मान्यता एवं उपलब्धियाँ == * महाविद्यालय को NAAC द्वारा '''‘B’ ग्रेड''' प्राप्त है * यह बीकानेर जिले का '''सबसे बड़ा महिला महाविद्यालय''' बन चुका है * राज्य सरकार द्वारा इसे '''Model College एवं Center for Excellence''' के रूप में चयनित किया गया == विशेषताएँ == * महिला शिक्षा को समर्पित ऐतिहासिक संस्थान * पारंपरिक एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वय * रोजगार एवं कौशल विकास पर विशेष ध्यान * समाज में महिला सशक्तिकरण का प्रमुख केंद्र ==सन्दर्भ== p7zic7vz7l6291hhc8eem2mygguwxby 6536597 6536596 2026-04-05T13:57:26Z चाहर धर्मेंद्र 703114 श्रेणी 6536597 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Maharani Sudarshan Prasad Kumariji Sahiba of Bikaner.jpg|right|thumb|300px|महारानी सुदर्शन प्रसाद कंवरजी साहिबा]] '''महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय''' [[राजस्थान]] के [[बीकानेर]]<ref>{{cite book |author=दिल्ली (भारत). नगर निगम |title=Naī Dillī Pālikā samācāra |url=https://www.google.co.th/books/edition/Na%C4%AB_Dill%C4%AB_P%C4%81lik%C4%81_sam%C4%81c%C4%81ra/Pvpm6m2N_eYC?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF+%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B0&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE+%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF+%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B0&printsec=frontcover|publisher=Naī Dillī Nagara Pālikā. |year= 1991}}</ref> शहर में स्थित एक प्रमुख महिला शिक्षण संस्थान है जो विशेष रूप से बालिकाओं की उच्च शिक्षा को समर्पित है। यह महाविद्यालय अपने ऐतिहासिक महत्व, शैक्षणिक उपलब्धियों और महिला सशक्तिकरण में योगदान के लिए जाना जाता है। == स्थापना एवं इतिहास == महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय की स्थापना वर्ष '''1946''' में सर [[सादुल सिंह]] द्वारा की गई थी,<ref>{{Cite web |title=Government Maharani Sudershan College For Women - Bikaner|url=https://educationexclusive.com/government-maharani-sudershan-college-for-women-bikaner|access-date=2023-02-25 |website=शिक्षा अनन्य |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20260405132235/https://educationexclusive.com/government-maharani-sudershan-college-for-women-bikaner|archive-date=5 अप्रैल 2026}}</ref> जो बीकानेर रियासत के अंतिम शासक थे। उन्होंने इस संस्थान का नाम अपनी धर्मपत्नी महारानी सुदर्शन प्रसाद कंवरजी साहिबा के नाम पर रखा। उस समय (1950 के दशक में) जब समाज में बालिका शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाता था, तब राजपरिवार ने इसकी आवश्यकता को समझते हुए लड़कियों के लिए एक अलग उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना की। यह पहल उस दौर में अत्यंत प्रगतिशील और दूरदर्शी मानी जाती है।<ref>{{Cite web |title=History|url=https://hte.rajasthan.gov.in/college/ggcbikaner/history|access-date=8 जून 2017 |website=rajasthan.gov.in|url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20251118194453/https://hte.rajasthan.gov.in/college/ggcbikaner/history|archive-date=18 नवंबर 2025}}</ref> == शैक्षणिक विकास == महाविद्यालय ने समय के साथ निरंतर प्रगति की है: * '''1946''' – इंटर कॉलेज के रूप में स्थापना * '''1956''' – कला संकाय (B.A.) की शुरुआत * '''1957''' – विज्ञान संकाय (B.Sc.) प्रारंभ * '''1980''' – तीन वर्षीय पाठ्यक्रम प्रणाली लागू * '''1981''' – वाणिज्य संकाय (B.Com.) की शुरुआत == स्नातकोत्तर एवं विशेष पाठ्यक्रम == महाविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए: * '''1992-93''' – स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम प्रारंभ ** अंग्रेजी ** अर्थशास्त्र ** राजनीति विज्ञान * '''1999''' – लोक प्रशासन में PG * '''2012''' – गृह विज्ञान में PG इसके अतिरिक्त, 1990 में '''Garments Production and Export Management (GPEM)''' जैसे दुर्लभ पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई, जो रोजगारोन्मुखी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। == कौशल विकास एवं रोजगार उन्मुख पहल == महाविद्यालय ने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए: * '''2001''' – ICICI Bank एवं राजस्थान सरकार के बीच समझौता (MOU) * '''2005-06''' – BPO एवं Spoken English कोर्स * '''2007''' – राजस्थान मिशन ऑफ लिवलीहुड (RMOL) के अंतर्गत रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण * '''2013-14''' – वाणिज्य छात्रों के लिए CAT कोर्स == आधुनिक पहल एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम == * '''2017''' – IGNOU के विभिन्न पाठ्यक्रम शुरू * '''2017 से''' – स्कूटी वितरण योजना के लिए नोडल कॉलेज * '''2019''' – Rotary Club Adhya के सहयोग से 60 दिवसीय स्किल डेवलपमेंट कैंप ** फैशन डिजाइनिंग एवं सिलाई प्रशिक्षण ** जरूरतमंद छात्राओं को 50 सिलाई मशीनें वितरित * '''Rotary Club Midtown''' के साथ 3 वर्षों का MOU – प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन == कोविड-19 के दौरान पहल == '''2020''' में कोविड-19 महामारी के दौरान महाविद्यालय ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा दिया: * STTS Infotech Pvt. 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[[नेता]], [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP)]] | constituency = [[विधानसभा क्षेत्र सिवाना]] | party = [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी]] | nationality = [[भारतीय]] | birth_date = {{birth date and age|1979|8|16|df=y}} | birth_place = कमठाई, [[सिणधरी]], [[राजस्थान]] }} '''मगाराम राम बेनीवाल''' (जन्म: 16 अगस्त 1979) एक [[भारतीय]] राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान सिवाना से रालोपा प्रभारी है। [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी]] के राजनेता हैं। मगाराम बेनीवाल 2018 से हनुमान बेनीवाल के भरोसेमंद सिपाही है। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 व 2023 में सिवाना में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मजबूत करने का काम किया। सिवाना से RLP ने चुनाव भी लड़ा लेकिन दोनों ही बार भाजपा के [[हमीर सिंह भायल]] से चुनाव हार गए। वर्ष 2025 में पार्टी में सक्रियता को देखते हुए इनको राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सिवाना प्रभारी बनाया गया। यह एक बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सिणधरी ब्लॉक अध्यक्ष भी चुने गए। == सन्दर्भ == <ref>{{Cite web |url=https://adnewslive24.com/magaram-beniwal-dev-darshan-yatra-adnews247/ |title=मगाराम बेनीवाल की देव दर्शन यात्रा |website=AD News Live |access-date=2026-04-05}}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://adnewslive24.com/magaram-beniwal-viratra-mata-yatra/ |title=देव दर्शन यात्रा से जुड़ी खबर |website=AD News Live |access-date=2026-04-05}}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://dainik.bhaskar.com/xY9dOLD600b |title=दैनिक भास्कर वेबसाइट |website=Dainik Bhaskar |access-date=2026-04-05}}</ref> {{reflist}} == External links == * [https://dainik.bhaskar.com/xY9dOLD600b दैनिक भास्कर आधिकारिक वेबसाइट] 3a3fx125z8fy7iwy20v2bfyz742fwyx 6536607 6536585 2026-04-05T14:51:17Z Actore anil nain 918296 external link 6536607 wikitext text/x-wiki {{db-promo|help=off}} {{Infobox officeholder | name = मगाराम बेनिवाल | image = Magarambeniwal.jpg | office = [[नेता]], [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP)]] | constituency = [[विधानसभा क्षेत्र सिवाना]] | party = [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी]] | nationality = [[भारतीय]] | birth_date = {{birth date and age|1979|8|16|df=y}} | birth_place = कमठाई, [[सिणधरी]], [[राजस्थान]] }} '''मगाराम राम बेनीवाल''' (जन्म: 16 अगस्त 1979) एक [[भारतीय]] राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान सिवाना से रालोपा प्रभारी है। [[राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी]] के राजनेता हैं। मगाराम बेनीवाल 2018 से हनुमान बेनीवाल के भरोसेमंद सिपाही है। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 व 2023 में सिवाना में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मजबूत करने का काम किया। सिवाना से RLP ने चुनाव भी लड़ा लेकिन दोनों ही बार भाजपा के [[हमीर सिंह भायल]] से चुनाव हार गए। वर्ष 2025 में पार्टी में सक्रियता को देखते हुए इनको राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सिवाना प्रभारी बनाया गया। यह एक बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से सिणधरी ब्लॉक अध्यक्ष भी चुने गए। == सन्दर्भ == <ref>{{Cite web |url=https://adnewslive24.com/magaram-beniwal-dev-darshan-yatra-adnews247/ |title=मगाराम बेनीवाल की देव दर्शन यात्रा |website=AD News Live |access-date=2026-04-05}}</ref> <ref>{{Cite web |url=https://dainik.bhaskar.com/xY9dOLD600b |title=दैनिक भास्कर वेबसाइट |website=Dainik Bhaskar |access-date=2026-04-05}}</ref> {{reflist}} == External links == * Magaram Beniwal की Balotra में लूणी नदी बचाने बेनीवाल स्टाइल में चेतावनी Political Panchayat News Video <ref>{{Citation|last=Political Panchayat|title=Hanuman Beniwal के नेता Magaram Beniwal की Balotra में लूणी नदी बचाने बेनीवाल स्टाइल में चेतावनी|date=2025-12-29|url=https://www.youtube.com/watch?v=svg1BA09fQQ|access-date=2026-04-05}}</ref> * लूणी नदी बचाओ अभियान को लेकर सिणधरी उपखंड अधिकारी को ज्ञापन<ref>{{Citation|last=AD News Live|title=बेनीवाल के नेतृत्व में लूणी नदी बचाओ अभियान को लेकर सिणधरी उपखंड अधिकारी को ज्ञापन...|date=2025-12-29|url=https://www.youtube.com/watch?v=sGBodM8dUhQ|access-date=2026-04-05}}</ref> 4jse0j2s302oghnmogqb3sbgakocx43 यांत्रिक अनुवाद का इतिहास 0 1610825 6536628 6536551 2026-04-05T15:49:49Z अनुनाद सिंह 1634 /* 2000 का दशक */ 6536628 wikitext text/x-wiki '''तांत्रिक अनुवाद''' पर शोध [[1930 का दशक|१९३०]] और [[1940 का दशक|१९४०]] के बीच शुरू हुआ था। == आरम्भिक शोध == [[सूचना विज्ञान]] के क्षेत्र में पहली उल्लेखनीय प्रगति [[1946]] में प्रसिद्ध [[ENIAC]] कंप्यूटर के साथ हुई। अग्रणी शोधकर्ताओं में रॉकफेलर फाउंडेशन के [[वारेन वीवर]] (Warren Weaver) का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उन्होंने ही इस विषय को प्रचारित किया और इसे लागू करने के वैज्ञानिक तरीकों ([[कूटलेखन]] की तकनीकों का उपयोग, [[क्लाउड शैनन]] के प्रमेयों का अनुप्रयोग और सांख्यिकी की उपयोगिता) को आगे बढ़ाया। साथ ही, उन्होंने मानव भाषा के अंतर्निहित तर्क और सार्वभौमिक विशेषताओं का लाभ उठाने की संभावना पर भी जोर दिया। उस समय एक विश्व युद्ध समाप्त हो रहा था, जिसने वैज्ञानिक स्तर पर गुप्त संदेशों को डिकोड करने के लिए संगणन के वैज्ञानिक विधियों के विकास को बढ़ावा मिला। कहते हैं कि वीवर ने कहा था: ''"जब मैं रूसी में लिखा कोई लेख देखता हूँ, तो मैं खुद से कहता हूँ कि यह अंग्रेजी में ही लिखा है, बस यह विशेष प्रतीकों के माध्यम से कोडित है। चलिए इसे अभी डिकोड करते हैं!"'' (बै्र और फीजेनबौम द्वारा उद्धृत, 1981)। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उस समय कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग तकनीकें बहुत आरंभिक स्थिति में थीं == शोध में प्रगति == [[1951]] में [[मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान]] (MIT) ने अपने विशेषज्ञों में से एक, [[येहोशुआ बार-हिल्लेल]] (Yehoshua Bar-Hillel) को विशेष रूप से यांत्रिक अनुवाद पर काम करने के लिए नियुक्त किया। एक वर्ष के बाद, यांत्रिक अनुवाद पर पहला [[संगोष्ठी]] आयोजित की गई जिसमें नियंत्रित भाषा, उप-भाषाएं, वाक्यविन्यास (syntax) की आवश्यकता, या मानवीय हस्तक्षेप के बिना काम करने की संभावना जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मशीनी अनुवादक का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन [[1954]] में [[जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय]] में किया गया था, जिसमें [[IBM]] के सहयोग और शोधकर्ता [[लियों दोस्तर्त]] (Leon Dostert) की भागीदारी थी। इसमें बहुत सावधानी से [[रूसी भाषा]] के 48 वाक्यों को चुना गया और 250 शब्दों की शब्दावली और 6 व्याकरणिक नियमों के माध्यम से [[अंग्रेजी]] में अनुवाद किया गया। इस प्रयोग की सफलता प्रभावशाली रही और इसके बाद अमेरिका में रूसी, [[फ्रेंच]] और [[जर्मन]] से अनुवाद के लिए महत्वपूर्ण बजट आवंटित किए गए (मुख्य रूप से रक्षा मंत्रालय द्वारा) । यह शुरुआती उत्साह का क्षण था जिसने "पूर्णतः स्वचालित उच्च गुणवत्ता अनुवाद" के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। उस दशक के अग्रणी विकासों में जॉर्जटाउन और टेक्सास विश्वविद्यालयों के कार्यों पर जोर दिया जाना चाहिए, जहाँ आज भी उपयोग किए जाने वाले दो प्रणालियों—"SYSTRAN" और "METAL"—की नींव रखी गई थी। == ALPAC रिपोर्ट == इतने बड़े शुरुआती निवेश के बावजूद, अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे थे। बार-हिलले ने 1960 में FAHQT के विचार पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मानव अनुवाद के बराबर परिणाम प्राप्त करने के लिए अभी भी अर्थगत (semantic) और व्यावहारिक (pragmatic) ज्ञान की आवश्यकता है जिसे प्राप्त करना वर्तमान में असंभव है। अतः उन्होंने कम महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने की सलाह दी। 1964 में "नेशनल रिसर्च काउंसिल" ने MT की स्थिति का आकलन करने के लिए ALPAC ("Automatic Language Processing Advisory Committee") नामक एक समिति का गठन किया। दो साल बाद [[ALPAC]] रिपोर्ट में प्रकाशित परिणामों के गंभीर परिणाम हुए: "...सामान्य वैज्ञानिक ग्रंथों के लिए मशीनी अनुवाद प्राप्त नहीं किया गया है, और निकट भविष्य में इसके प्राप्त होने की संभावना नहीं दिखती है।" इन परिणामों के कारण फंडिंग में भारी कटौती हुई, जिसने सचमुच अमेरिका में इस शोध को लगभग समाप्त कर दिया। बहरहाल, यह वह समय था जब सैद्धांतिक स्तर पर बड़ी प्रगति हुई। नोआम चॉम्स्की ने 1957 में अपने कार्य "Syntactic Structures" के साथ भाषाओं के विश्लेषण में क्रांति ला दी थी। कंप्यूटर विज्ञान के संदर्भ में, उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग डेटा और भाषा संरचनाओं (ALGOL, LISP) के नए डिजाइनों ने एल्गोरिदम और मॉड्यूल कार्यप्रणाली के विकास को जन्म दिया, जो इस विषय के विकास में मौलिक थे। == 1970-1980 का दशक == ALPAC रिपोर्ट ने अमेरिका में MT को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन कनाडा और यूरोप में इसका खास असर नहीं पड़ा। 1976 में TAUM समूह ("Traduction Automatique de l'Université de Montréal") के शोधकर्ताओं ने "MÉTÉO" प्रणाली पेश की, जो मौसम विज्ञान की रिपोर्टों का अंग्रेजी से फ्रेंच में अनुवाद करती थी। यह प्रणाली अपने अनुप्रयोग और डिजाइन की उपयुक्तता के कारण ऐतिहासिक बन गई। उसी वर्ष, यूरोपीय संघ (EU) ने अपने विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों में अनुवाद की भारी मांग को पूरा करने के लिए MT का उपयोग करने का निर्णय लिया। आयोग ने SYSTRAN विकसित किया और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसे ढालने के लिए लाइसेंस खरीदे। बाद में, यूरोप में शोध को बढ़ावा देने और अनुवाद की गुणवत्ता सुधारने के विचार के साथ, आयोग ने स्वयं "EUROTRA" नामक एक महत्वाकांक्षी परियोजना को वित्तपोषित किया। अस्सी के दशक के दौरान प्रतीकात्मक तरीकों (symbolic methods) का विकास हुआ और वाक्यविन्यास तथा अर्थ विज्ञान के स्तर पर शोध में काफी सक्रियता रही। हालांकि, सैद्धांतिक प्रगति अभी भी पूर्ण परिणामों तक नहीं पहुंच पा रही थी। == 1990 का दशक == निस्संदेह 1991 में यूरोपीय संघ द्वारा आदेशित डैंजिन (Danzin) रिपोर्ट के परिणामों से जुड़ी यूरोप में MT से संबंधित दो बुरी खबरें आईं। संस्थागत स्तर पर, EU ने EUROTRA के लिए वित्तपोषण बंद करने का फैसला किया; कंपनियों की ओर से, PHILIPS ने अचानक "ROSETTA" परियोजना को समाप्त कर दिया, जो विशेषज्ञों के बीच सबसे प्रतिष्ठित परियोजनाओं में से एक थी। उसी समय, जापान में भी पिछले वर्षों के भारी निवेश के बाद बजट नीति में सावधानी बरती जाने लगी। इस गिरावट के माहौल में, बाजार में 'अनुवाद सहायता' (aided translation) का एक उत्पाद सामने आया, जिसका डिजाइन पिछले प्रणालियों से बिल्कुल अलग था। ये अनुवाद स्मृति (translation memory) प्रबंधन कार्यक्रम थे। सबसे पहले IBM ("Translation Manager") ने इसे पेश किया और बाद में जर्मन कंपनियों TRADOS ("Translator's Workbench") और STAR ("TRANSIT"), तथा स्पेनिश कंपनी ATRIL ("DÉJÀ-VU") ने इसे जनता के लिए जारी किया। उस काल का एक अन्य उल्लेखनीय पहलू इंटरनेट का विकास और अनुवाद के दृष्टिकोण का "स्थानीयकरण" (localization) की ओर बदलाव था। == 2000 का दशक == [[चित्र:Smt arkitektura.png|thumb|400x400px|सांख्यिकीय मशीनी अनुवाद (SMT) की संरचना]] आज हम एक नए चरण की शुरुआत में हैं। कंपनियों और बाजारों के वैश्वीकरण के साथ उत्पादों और सेवाओं का "स्थानीय" अनुकूलन आवश्यक हो गया है। अतीत की बाधाओं को पार करते हुए, कई तकनीकों को हाइब्रिड आर्किटेक्चर में शामिल किया जा रहा है, जहाँ अनुवाद को सूचना के एक जटिल चक्र के स्तर के रूप में समझा जाता है। इन सभी विकासों का मुख्य आधार इंटरनेट है, जिसके प्रभावों का हम अभी पूरी तरह आकलन नहीं कर सकते, लेकिन ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि बौद्धिक संपदा और भाषाई संसाधनों के उपयोग के अधिकारों को कैसे स्पष्ट किया जाता है। == 2010 का दशक == न्यूरल प्रतिमान (Neural paradigm) के आने से 2017 के बाद से प्रमुख भाषाओं के बीच मशीनी अनुवादकों में भारी सुधार देखा गया। == हिन्दी अनुवाद == <gallery mode="packed-hover" heights="160"> चित्र:Itzultzaile neuronala EJ.png|सरकार का न्यूरल अनुवादक चित्र:Batua eus.png| चित्र:Itzultzailea eus.png| </gallery> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == इन्हें भी देखें == * [[न्यूरल मशीनी अनुवाद]] * [[स्वचालित अनुवाद]] * [[उदाहरण आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[नियम आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[सांख्यिकीय मशीनी अनुवाद]] == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:सूचना प्रौद्योगिकी]] [[श्रेणी:अनुवाद]] [[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]] [[श्रेणी:भाषा]] gf2y17dgiq6ousw515dlyxozdx4bbho 6536629 6536628 2026-04-05T15:53:38Z अनुनाद सिंह 1634 /* 2000 का दशक */ 6536629 wikitext text/x-wiki '''तांत्रिक अनुवाद''' पर शोध [[1930 का दशक|१९३०]] और [[1940 का दशक|१९४०]] के बीच शुरू हुआ था। == आरम्भिक शोध == [[सूचना विज्ञान]] के क्षेत्र में पहली उल्लेखनीय प्रगति [[1946]] में प्रसिद्ध [[ENIAC]] कंप्यूटर के साथ हुई। अग्रणी शोधकर्ताओं में रॉकफेलर फाउंडेशन के [[वारेन वीवर]] (Warren Weaver) का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उन्होंने ही इस विषय को प्रचारित किया और इसे लागू करने के वैज्ञानिक तरीकों ([[कूटलेखन]] की तकनीकों का उपयोग, [[क्लाउड शैनन]] के प्रमेयों का अनुप्रयोग और सांख्यिकी की उपयोगिता) को आगे बढ़ाया। साथ ही, उन्होंने मानव भाषा के अंतर्निहित तर्क और सार्वभौमिक विशेषताओं का लाभ उठाने की संभावना पर भी जोर दिया। उस समय एक विश्व युद्ध समाप्त हो रहा था, जिसने वैज्ञानिक स्तर पर गुप्त संदेशों को डिकोड करने के लिए संगणन के वैज्ञानिक विधियों के विकास को बढ़ावा मिला। कहते हैं कि वीवर ने कहा था: ''"जब मैं रूसी में लिखा कोई लेख देखता हूँ, तो मैं खुद से कहता हूँ कि यह अंग्रेजी में ही लिखा है, बस यह विशेष प्रतीकों के माध्यम से कोडित है। चलिए इसे अभी डिकोड करते हैं!"'' (बै्र और फीजेनबौम द्वारा उद्धृत, 1981)। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उस समय कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग तकनीकें बहुत आरंभिक स्थिति में थीं == शोध में प्रगति == [[1951]] में [[मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान]] (MIT) ने अपने विशेषज्ञों में से एक, [[येहोशुआ बार-हिल्लेल]] (Yehoshua Bar-Hillel) को विशेष रूप से यांत्रिक अनुवाद पर काम करने के लिए नियुक्त किया। एक वर्ष के बाद, यांत्रिक अनुवाद पर पहला [[संगोष्ठी]] आयोजित की गई जिसमें नियंत्रित भाषा, उप-भाषाएं, वाक्यविन्यास (syntax) की आवश्यकता, या मानवीय हस्तक्षेप के बिना काम करने की संभावना जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मशीनी अनुवादक का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन [[1954]] में [[जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय]] में किया गया था, जिसमें [[IBM]] के सहयोग और शोधकर्ता [[लियों दोस्तर्त]] (Leon Dostert) की भागीदारी थी। इसमें बहुत सावधानी से [[रूसी भाषा]] के 48 वाक्यों को चुना गया और 250 शब्दों की शब्दावली और 6 व्याकरणिक नियमों के माध्यम से [[अंग्रेजी]] में अनुवाद किया गया। इस प्रयोग की सफलता प्रभावशाली रही और इसके बाद अमेरिका में रूसी, [[फ्रेंच]] और [[जर्मन]] से अनुवाद के लिए महत्वपूर्ण बजट आवंटित किए गए (मुख्य रूप से रक्षा मंत्रालय द्वारा) । यह शुरुआती उत्साह का क्षण था जिसने "पूर्णतः स्वचालित उच्च गुणवत्ता अनुवाद" के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। उस दशक के अग्रणी विकासों में जॉर्जटाउन और टेक्सास विश्वविद्यालयों के कार्यों पर जोर दिया जाना चाहिए, जहाँ आज भी उपयोग किए जाने वाले दो प्रणालियों—"SYSTRAN" और "METAL"—की नींव रखी गई थी। == ALPAC रिपोर्ट == इतने बड़े शुरुआती निवेश के बावजूद, अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे थे। बार-हिलले ने 1960 में FAHQT के विचार पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मानव अनुवाद के बराबर परिणाम प्राप्त करने के लिए अभी भी अर्थगत (semantic) और व्यावहारिक (pragmatic) ज्ञान की आवश्यकता है जिसे प्राप्त करना वर्तमान में असंभव है। अतः उन्होंने कम महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने की सलाह दी। 1964 में "नेशनल रिसर्च काउंसिल" ने MT की स्थिति का आकलन करने के लिए ALPAC ("Automatic Language Processing Advisory Committee") नामक एक समिति का गठन किया। दो साल बाद [[ALPAC]] रिपोर्ट में प्रकाशित परिणामों के गंभीर परिणाम हुए: "...सामान्य वैज्ञानिक ग्रंथों के लिए मशीनी अनुवाद प्राप्त नहीं किया गया है, और निकट भविष्य में इसके प्राप्त होने की संभावना नहीं दिखती है।" इन परिणामों के कारण फंडिंग में भारी कटौती हुई, जिसने सचमुच अमेरिका में इस शोध को लगभग समाप्त कर दिया। बहरहाल, यह वह समय था जब सैद्धांतिक स्तर पर बड़ी प्रगति हुई। नोआम चॉम्स्की ने 1957 में अपने कार्य "Syntactic Structures" के साथ भाषाओं के विश्लेषण में क्रांति ला दी थी। कंप्यूटर विज्ञान के संदर्भ में, उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग डेटा और भाषा संरचनाओं (ALGOL, LISP) के नए डिजाइनों ने एल्गोरिदम और मॉड्यूल कार्यप्रणाली के विकास को जन्म दिया, जो इस विषय के विकास में मौलिक थे। == 1970-1980 का दशक == ALPAC रिपोर्ट ने अमेरिका में MT को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन कनाडा और यूरोप में इसका खास असर नहीं पड़ा। 1976 में TAUM समूह ("Traduction Automatique de l'Université de Montréal") के शोधकर्ताओं ने "MÉTÉO" प्रणाली पेश की, जो मौसम विज्ञान की रिपोर्टों का अंग्रेजी से फ्रेंच में अनुवाद करती थी। यह प्रणाली अपने अनुप्रयोग और डिजाइन की उपयुक्तता के कारण ऐतिहासिक बन गई। उसी वर्ष, यूरोपीय संघ (EU) ने अपने विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों में अनुवाद की भारी मांग को पूरा करने के लिए MT का उपयोग करने का निर्णय लिया। आयोग ने SYSTRAN विकसित किया और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसे ढालने के लिए लाइसेंस खरीदे। बाद में, यूरोप में शोध को बढ़ावा देने और अनुवाद की गुणवत्ता सुधारने के विचार के साथ, आयोग ने स्वयं "EUROTRA" नामक एक महत्वाकांक्षी परियोजना को वित्तपोषित किया। अस्सी के दशक के दौरान प्रतीकात्मक तरीकों (symbolic methods) का विकास हुआ और वाक्यविन्यास तथा अर्थ विज्ञान के स्तर पर शोध में काफी सक्रियता रही। हालांकि, सैद्धांतिक प्रगति अभी भी पूर्ण परिणामों तक नहीं पहुंच पा रही थी। == 1990 का दशक == निस्संदेह 1991 में यूरोपीय संघ द्वारा आदेशित डैंजिन (Danzin) रिपोर्ट के परिणामों से जुड़ी यूरोप में MT से संबंधित दो बुरी खबरें आईं। संस्थागत स्तर पर, EU ने EUROTRA के लिए वित्तपोषण बंद करने का फैसला किया; कंपनियों की ओर से, PHILIPS ने अचानक "ROSETTA" परियोजना को समाप्त कर दिया, जो विशेषज्ञों के बीच सबसे प्रतिष्ठित परियोजनाओं में से एक थी। उसी समय, जापान में भी पिछले वर्षों के भारी निवेश के बाद बजट नीति में सावधानी बरती जाने लगी। इस गिरावट के माहौल में, बाजार में 'अनुवाद सहायता' (aided translation) का एक उत्पाद सामने आया, जिसका डिजाइन पिछले प्रणालियों से बिल्कुल अलग था। ये अनुवाद स्मृति (translation memory) प्रबंधन कार्यक्रम थे। सबसे पहले IBM ("Translation Manager") ने इसे पेश किया और बाद में जर्मन कंपनियों TRADOS ("Translator's Workbench") और STAR ("TRANSIT"), तथा स्पेनिश कंपनी ATRIL ("DÉJÀ-VU") ने इसे जनता के लिए जारी किया। उस काल का एक अन्य उल्लेखनीय पहलू इंटरनेट का विकास और अनुवाद के दृष्टिकोण का "स्थानीयकरण" (localization) की ओर बदलाव था। == 2000 का दशक == आज हम एक नए चरण की शुरुआत में हैं। कंपनियों और बाजारों के वैश्वीकरण के साथ उत्पादों और सेवाओं का "स्थानीय" अनुकूलन आवश्यक हो गया है। अतीत की बाधाओं को पार करते हुए, कई तकनीकों को हाइब्रिड आर्किटेक्चर में शामिल किया जा रहा है, जहाँ अनुवाद को सूचना के एक जटिल चक्र के स्तर के रूप में समझा जाता है। इन सभी विकासों का मुख्य आधार इंटरनेट है, जिसके प्रभावों का हम अभी पूरी तरह आकलन नहीं कर सकते, लेकिन ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि बौद्धिक संपदा और भाषाई संसाधनों के उपयोग के अधिकारों को कैसे स्पष्ट किया जाता है। == 2010 का दशक == न्यूरल प्रतिमान (Neural paradigm) के आने से 2017 के बाद से प्रमुख भाषाओं के बीच मशीनी अनुवादकों में भारी सुधार देखा गया। == हिन्दी अनुवाद == <gallery mode="packed-hover" heights="160"> चित्र:Itzultzaile neuronala EJ.png|सरकार का न्यूरल अनुवादक चित्र:Batua eus.png| चित्र:Itzultzailea eus.png| </gallery> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == इन्हें भी देखें == * [[न्यूरल मशीनी अनुवाद]] * [[स्वचालित अनुवाद]] * [[उदाहरण आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[नियम आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[सांख्यिकीय मशीनी अनुवाद]] == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:सूचना प्रौद्योगिकी]] [[श्रेणी:अनुवाद]] [[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]] [[श्रेणी:भाषा]] 6l2echkuwg78h5k5v20e7upxwo8pqxi 6536654 6536629 2026-04-05T16:27:33Z अनुनाद सिंह 1634 /* इन्हें भी देखें */ 6536654 wikitext text/x-wiki '''तांत्रिक अनुवाद''' पर शोध [[1930 का दशक|१९३०]] और [[1940 का दशक|१९४०]] के बीच शुरू हुआ था। == आरम्भिक शोध == [[सूचना विज्ञान]] के क्षेत्र में पहली उल्लेखनीय प्रगति [[1946]] में प्रसिद्ध [[ENIAC]] कंप्यूटर के साथ हुई। अग्रणी शोधकर्ताओं में रॉकफेलर फाउंडेशन के [[वारेन वीवर]] (Warren Weaver) का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। उन्होंने ही इस विषय को प्रचारित किया और इसे लागू करने के वैज्ञानिक तरीकों ([[कूटलेखन]] की तकनीकों का उपयोग, [[क्लाउड शैनन]] के प्रमेयों का अनुप्रयोग और सांख्यिकी की उपयोगिता) को आगे बढ़ाया। साथ ही, उन्होंने मानव भाषा के अंतर्निहित तर्क और सार्वभौमिक विशेषताओं का लाभ उठाने की संभावना पर भी जोर दिया। उस समय एक विश्व युद्ध समाप्त हो रहा था, जिसने वैज्ञानिक स्तर पर गुप्त संदेशों को डिकोड करने के लिए संगणन के वैज्ञानिक विधियों के विकास को बढ़ावा मिला। कहते हैं कि वीवर ने कहा था: ''"जब मैं रूसी में लिखा कोई लेख देखता हूँ, तो मैं खुद से कहता हूँ कि यह अंग्रेजी में ही लिखा है, बस यह विशेष प्रतीकों के माध्यम से कोडित है। चलिए इसे अभी डिकोड करते हैं!"'' (बै्र और फीजेनबौम द्वारा उद्धृत, 1981)। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उस समय कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग तकनीकें बहुत आरंभिक स्थिति में थीं == शोध में प्रगति == [[1951]] में [[मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान]] (MIT) ने अपने विशेषज्ञों में से एक, [[येहोशुआ बार-हिल्लेल]] (Yehoshua Bar-Hillel) को विशेष रूप से यांत्रिक अनुवाद पर काम करने के लिए नियुक्त किया। एक वर्ष के बाद, यांत्रिक अनुवाद पर पहला [[संगोष्ठी]] आयोजित की गई जिसमें नियंत्रित भाषा, उप-भाषाएं, वाक्यविन्यास (syntax) की आवश्यकता, या मानवीय हस्तक्षेप के बिना काम करने की संभावना जैसे विषयों पर चर्चा हुई। मशीनी अनुवादक का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन [[1954]] में [[जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय]] में किया गया था, जिसमें [[IBM]] के सहयोग और शोधकर्ता [[लियों दोस्तर्त]] (Leon Dostert) की भागीदारी थी। इसमें बहुत सावधानी से [[रूसी भाषा]] के 48 वाक्यों को चुना गया और 250 शब्दों की शब्दावली और 6 व्याकरणिक नियमों के माध्यम से [[अंग्रेजी]] में अनुवाद किया गया। इस प्रयोग की सफलता प्रभावशाली रही और इसके बाद अमेरिका में रूसी, [[फ्रेंच]] और [[जर्मन]] से अनुवाद के लिए महत्वपूर्ण बजट आवंटित किए गए (मुख्य रूप से रक्षा मंत्रालय द्वारा) । यह शुरुआती उत्साह का क्षण था जिसने "पूर्णतः स्वचालित उच्च गुणवत्ता अनुवाद" के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए। उस दशक के अग्रणी विकासों में जॉर्जटाउन और टेक्सास विश्वविद्यालयों के कार्यों पर जोर दिया जाना चाहिए, जहाँ आज भी उपयोग किए जाने वाले दो प्रणालियों—"SYSTRAN" और "METAL"—की नींव रखी गई थी। == ALPAC रिपोर्ट == इतने बड़े शुरुआती निवेश के बावजूद, अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे थे। बार-हिलले ने 1960 में FAHQT के विचार पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि मानव अनुवाद के बराबर परिणाम प्राप्त करने के लिए अभी भी अर्थगत (semantic) और व्यावहारिक (pragmatic) ज्ञान की आवश्यकता है जिसे प्राप्त करना वर्तमान में असंभव है। अतः उन्होंने कम महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने की सलाह दी। 1964 में "नेशनल रिसर्च काउंसिल" ने MT की स्थिति का आकलन करने के लिए ALPAC ("Automatic Language Processing Advisory Committee") नामक एक समिति का गठन किया। दो साल बाद [[ALPAC]] रिपोर्ट में प्रकाशित परिणामों के गंभीर परिणाम हुए: "...सामान्य वैज्ञानिक ग्रंथों के लिए मशीनी अनुवाद प्राप्त नहीं किया गया है, और निकट भविष्य में इसके प्राप्त होने की संभावना नहीं दिखती है।" इन परिणामों के कारण फंडिंग में भारी कटौती हुई, जिसने सचमुच अमेरिका में इस शोध को लगभग समाप्त कर दिया। बहरहाल, यह वह समय था जब सैद्धांतिक स्तर पर बड़ी प्रगति हुई। नोआम चॉम्स्की ने 1957 में अपने कार्य "Syntactic Structures" के साथ भाषाओं के विश्लेषण में क्रांति ला दी थी। कंप्यूटर विज्ञान के संदर्भ में, उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग डेटा और भाषा संरचनाओं (ALGOL, LISP) के नए डिजाइनों ने एल्गोरिदम और मॉड्यूल कार्यप्रणाली के विकास को जन्म दिया, जो इस विषय के विकास में मौलिक थे। == 1970-1980 का दशक == ALPAC रिपोर्ट ने अमेरिका में MT को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन कनाडा और यूरोप में इसका खास असर नहीं पड़ा। 1976 में TAUM समूह ("Traduction Automatique de l'Université de Montréal") के शोधकर्ताओं ने "MÉTÉO" प्रणाली पेश की, जो मौसम विज्ञान की रिपोर्टों का अंग्रेजी से फ्रेंच में अनुवाद करती थी। यह प्रणाली अपने अनुप्रयोग और डिजाइन की उपयुक्तता के कारण ऐतिहासिक बन गई। उसी वर्ष, यूरोपीय संघ (EU) ने अपने विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों में अनुवाद की भारी मांग को पूरा करने के लिए MT का उपयोग करने का निर्णय लिया। आयोग ने SYSTRAN विकसित किया और अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसे ढालने के लिए लाइसेंस खरीदे। बाद में, यूरोप में शोध को बढ़ावा देने और अनुवाद की गुणवत्ता सुधारने के विचार के साथ, आयोग ने स्वयं "EUROTRA" नामक एक महत्वाकांक्षी परियोजना को वित्तपोषित किया। अस्सी के दशक के दौरान प्रतीकात्मक तरीकों (symbolic methods) का विकास हुआ और वाक्यविन्यास तथा अर्थ विज्ञान के स्तर पर शोध में काफी सक्रियता रही। हालांकि, सैद्धांतिक प्रगति अभी भी पूर्ण परिणामों तक नहीं पहुंच पा रही थी। == 1990 का दशक == निस्संदेह 1991 में यूरोपीय संघ द्वारा आदेशित डैंजिन (Danzin) रिपोर्ट के परिणामों से जुड़ी यूरोप में MT से संबंधित दो बुरी खबरें आईं। संस्थागत स्तर पर, EU ने EUROTRA के लिए वित्तपोषण बंद करने का फैसला किया; कंपनियों की ओर से, PHILIPS ने अचानक "ROSETTA" परियोजना को समाप्त कर दिया, जो विशेषज्ञों के बीच सबसे प्रतिष्ठित परियोजनाओं में से एक थी। उसी समय, जापान में भी पिछले वर्षों के भारी निवेश के बाद बजट नीति में सावधानी बरती जाने लगी। इस गिरावट के माहौल में, बाजार में 'अनुवाद सहायता' (aided translation) का एक उत्पाद सामने आया, जिसका डिजाइन पिछले प्रणालियों से बिल्कुल अलग था। ये अनुवाद स्मृति (translation memory) प्रबंधन कार्यक्रम थे। सबसे पहले IBM ("Translation Manager") ने इसे पेश किया और बाद में जर्मन कंपनियों TRADOS ("Translator's Workbench") और STAR ("TRANSIT"), तथा स्पेनिश कंपनी ATRIL ("DÉJÀ-VU") ने इसे जनता के लिए जारी किया। उस काल का एक अन्य उल्लेखनीय पहलू इंटरनेट का विकास और अनुवाद के दृष्टिकोण का "स्थानीयकरण" (localization) की ओर बदलाव था। == 2000 का दशक == आज हम एक नए चरण की शुरुआत में हैं। कंपनियों और बाजारों के वैश्वीकरण के साथ उत्पादों और सेवाओं का "स्थानीय" अनुकूलन आवश्यक हो गया है। अतीत की बाधाओं को पार करते हुए, कई तकनीकों को हाइब्रिड आर्किटेक्चर में शामिल किया जा रहा है, जहाँ अनुवाद को सूचना के एक जटिल चक्र के स्तर के रूप में समझा जाता है। इन सभी विकासों का मुख्य आधार इंटरनेट है, जिसके प्रभावों का हम अभी पूरी तरह आकलन नहीं कर सकते, लेकिन ये काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेंगे कि बौद्धिक संपदा और भाषाई संसाधनों के उपयोग के अधिकारों को कैसे स्पष्ट किया जाता है। == 2010 का दशक == न्यूरल प्रतिमान (Neural paradigm) के आने से 2017 के बाद से प्रमुख भाषाओं के बीच मशीनी अनुवादकों में भारी सुधार देखा गया। == हिन्दी अनुवाद == <gallery mode="packed-hover" heights="160"> चित्र:Itzultzaile neuronala EJ.png|सरकार का न्यूरल अनुवादक चित्र:Batua eus.png| चित्र:Itzultzailea eus.png| </gallery> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} == इन्हें भी देखें == * [[अनुवाद]] * [[न्यूरल मशीनी अनुवाद]] * [[स्वचालित अनुवाद]] * [[उदाहरण आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[नियम आधारित मशीनी अनुवाद]] * [[सांख्यिकीय मशीनी अनुवाद]] == बाहरी कड़ियाँ == [[श्रेणी:सूचना प्रौद्योगिकी]] [[श्रेणी:अनुवाद]] [[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]] [[श्रेणी:भाषा]] 60e216b3d1zj36azwfhn8fm5zlj6tg5 सदस्य वार्ता:MrZaimon1122 3 1610826 6536574 2026-04-05T12:14:49Z Ternarius 514430 Ternarius ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:MrZaimon1122]] को [[सदस्य वार्ता:Zaifox]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/MrZaimon1122|MrZaimon1122]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Zaifox|Zaifox]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 6536574 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:Zaifox]] t77x68pu1xsbb1p0xm8actk7zxlqxme सदस्य वार्ता:Actore anil nain 3 1610827 6536586 2026-04-05T12:57:23Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सूचना: [[:मगाराम बेनीवाल]] को शीघ्र हटाने का नामांकन 6536586 wikitext text/x-wiki == [[:मगाराम बेनीवाल|मगाराम बेनीवाल]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:मगाराम बेनीवाल|मगाराम बेनीवाल]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center> इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा। यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 12:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC) 8d8xl7opw81nsvrzwxmo6k2g2l11j8u 6536592 6536586 2026-04-05T13:22:53Z Actore anil nain 918296 /* मगाराम बेनीवाल पृष्ठ को शीघ्र हटाने का नामांकन */ उत्तर 6536592 wikitext text/x-wiki == [[:मगाराम बेनीवाल|मगाराम बेनीवाल]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन == [[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]] नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:मगाराम बेनीवाल|मगाराम बेनीवाल]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के&nbsp;अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center> इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा। यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें। यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 12:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC) :जी क्या हुआ [[सदस्य:Actore anil nain|Actore anil nain]] ([[सदस्य वार्ता:Actore anil nain|वार्ता]]) 13:22, 5 अप्रैल 2026 (UTC) 7l87ece0kvyen2nxxankg94bdzeyysd वार्ता:मगाराम बेनीवाल 1 1610828 6536594 2026-04-05T13:29:08Z Actore anil nain 918296 /* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ नया अनुभाग 6536594 wikitext text/x-wiki == शीघ्र हटाने पर चर्चा == इस लेख को साफ़ प्रचार होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यह कोई प्रचार नहीं है ये सिवाना के rlp के कद्दावर नेता है) --[[सदस्य:Actore anil nain|Actore anil nain]] ([[सदस्य वार्ता:Actore anil nain|वार्ता]]) 13:29, 5 अप्रैल 2026 (UTC) ghl1na8gdd8tfzc7lmkmpbq48yp1296 चित्र:BUET LOGO.svg 6 1610829 6536598 2026-04-05T14:21:04Z Md. Muqtadir Fuad 863491 6536598 wikitext text/x-wiki phoiac9h4m842xq45sp7s6u21eteeq1 बाइडू मैप्स 0 1610830 6536633 2026-04-05T16:04:47Z Mnjkhan 900134 नया पृष्ठ: बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इ... 6536633 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं। 0mryes142a9ajiwss1jxu5u1yuz7f5e 6536635 6536633 2026-04-05T16:06:30Z Mnjkhan 900134 6536635 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> klb9zon10ih34w1dm9b6gxiao1jccg8 6536636 6536635 2026-04-05T16:07:00Z Mnjkhan 900134 6536636 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> ==सन्दर्भ== gk9gdo3c0erdm5d811xw9c016xhobiq 6536637 6536636 2026-04-05T16:09:12Z Mnjkhan 900134 6536637 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], मकाऊ और ताइवान के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, Baidu Maps कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है।[उद्धरण आवश्यक] ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। Baidu, NavInfo, MapKing, Here, LocalKing और OpenStreetMap द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== n1ikefci862rj23k54hijhqjq8z5aad 6536639 6536637 2026-04-05T16:13:22Z Mnjkhan 900134 6536639 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], मकाऊ और ताइवान के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, Baidu Maps कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, नैवइन्फो, मैपकिंग, हियर, लोकलकिंग और OpenStreetMap द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== anr6ezm4gu9nkv75ejru5qkq9j50k98 6536640 6536639 2026-04-05T16:14:28Z Mnjkhan 900134 6536640 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], मकाऊ और ताइवान के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, नैवइन्फो, मैपकिंग, हियर, लोकलकिंग और OpenStreetMap द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== d1fj2fogkvu496cufhsh7s9dwiwuujr 6536655 6536640 2026-04-05T16:42:58Z Hindustanilanguage 39545 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] जोड़ी 6536655 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], मकाऊ और ताइवान के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, नैवइन्फो, मैपकिंग, हियर, लोकलकिंग और OpenStreetMap द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] cxjcnwos46w4h3ivw0cx3b8ev657d2t 6536657 6536655 2026-04-05T16:44:54Z Hindustanilanguage 39545 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] जोड़ी 6536657 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], मकाऊ और ताइवान के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, नैवइन्फो, मैपकिंग, हियर, लोकलकिंग और OpenStreetMap द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] n1ffisyaob6h0av1jgbfcaqnr9wu1yx 6536658 6536657 2026-04-05T16:51:12Z Hindustanilanguage 39545 wikify 6536658 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], [[मकाऊ]] और [[ताइवान]] के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, [[नैवइन्फो]], [[मैपकिंग]], [[हियर]], [[लोकलकिंग]] और [[ओपनस्ट्रीटमैप]] (OpenStreetMap) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] 3yc6bhrvhv4bvqmev2mup2b0gee916c 6536673 6536658 2026-04-05T17:15:03Z Mnjkhan 900134 6536673 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], [[मकाऊ]] और [[ताइवान]] के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, [[नैवइन्फो]], [[मैपकिंग]], [[हियर]], [[लोकलकिंग]] और [[ओपनस्ट्रीटमैप]] (ओपन स्ट्रीट मैं मैप) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] rfhswpkur99agy9h56tmj5tndojysmw 6536684 6536673 2026-04-05T18:31:48Z Mnjkhan 900134 6536684 wikitext text/x-wiki बाइडू मैप्स द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], [[मकाऊ]] और [[ताइवान]] के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, [[नैवइन्फो]], [[मैपकिंग]], [[हियर]], [[लोकलकिंग]] और [[ओपनस्ट्रीटमैप]] (ओपन स्ट्रीट मैप) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] osuc5l129a3cvfdtpe2clcvcikh8nhh 6536685 6536684 2026-04-05T18:33:11Z Mnjkhan 900134 6536685 wikitext text/x-wiki '''बाइडू मैप्स''' द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese 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Mnjkhan 900134 6536686 wikitext text/x-wiki {{Infobox website | name = बाइडू मैप्स<br>Baidu Maps | native_name = 百度地图 | logo = | screenshot = Baidu_map_for_Shanghai,_China,_using_the_Sim_City_style.png | caption = Screenshot of the ''[[SimCity]]''-like style that Baidu Maps offers for the city of Shanghai, China. | url = {{URL|https://map.baidu.com/|बाइडू मैप्स}} | commercial = Yes | type = [[वेब मैपिंग]] | key_people = | language = चीनी | registration = कोई नहीं | owner = [[Baidu]] | launch_date = {{start date and age|2005}} | current_status = सक्रिय | revenue = }} '''बाइडू मैप्स''' द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], [[मकाऊ]] और [[ताइवान]] के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, [[नैवइन्फो]], [[मैपकिंग]], [[हियर]], [[लोकलकिंग]] और [[ओपनस्ट्रीटमैप]] (ओपन स्ट्रीट मैप) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] mnawyn5xe72f60364sy3dw99p2zblbs 6536687 6536686 2026-04-05T18:36:54Z Mnjkhan 900134 6536687 wikitext text/x-wiki {{Infobox website | name = बाइडू मैप्स<br>Baidu Maps | native_name = 百度地图 | logo = | screenshot = Baidu_map_for_Shanghai,_China,_using_the_Sim_City_style.png | caption = | url = {{URL|https://map.baidu.com/|बाइडू मैप्स}} | commercial = Yes | type = [[वेब मैपिंग]] | key_people = | language = चीनी | registration = कोई नहीं | owner = [[Baidu]] | launch_date = {{start date and age|2005}} | current_status = सक्रिय | revenue = }} '''बाइडू मैप्स''' द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese 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Mnjkhan 900134 6536688 wikitext text/x-wiki {{Infobox website | name = बाइडू मैप्स<br>Baidu Maps | native_name = 百度地图 | logo = | screenshot = Baidu_map_for_Shanghai,_China,_using_the_Sim_City_style.png | caption = | url = {{URL|https://map.baidu.com/|बाइडू मैप्स}} | commercial = हाँ  | type = [[वेब मैपिंग]] | key_people = | language = चीनी | registration = कोई नहीं | owner = [[Baidu]] | launch_date = {{start date and age|2005}} | current_status = सक्रिय | revenue = }} '''बाइडू मैप्स''' द्वारा प्रदान की जाने वाली एक डेस्कटॉप और मोबाइल वेब मैपिंग सेवा एप्लिकेशन और तकनीक है। यह सैटेलाइट इमेज, सड़क के नक्शे, स्ट्रीट व्यू (जिसे "Panorama" – zh:百度全景 कहा जाता है) और इनडोर व्यू के नज़ारे उपलब्ध कराती है, साथ ही इसमें पैदल, कार से या सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने के लिए रूट प्लानर जैसे फ़ंक्शन भी शामिल हैं। इसके एंड्रॉयड और आईओएस एप्लिकेशन उपलब्ध हैं।<ref>{{cite web|title=Indoor view of Chinese restaurant|url=http://map.baidu.com/#panoid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&panotype=inter&heading=161.9316813553592&pitch=-7.380378484300118&l=4&tn=B_NORMAL_MAP&sc=0&newmap=1&shareurl=1&pid=0800030000140531153905833IN&iid=d3ed1e688c1aaf46d2f49e55&psp=%7B%22PanoIndoorPoiModule%22%3A%7B%22uid%22%3A%228741d637411abe0bcbe33c54%22%7D%7D|publisher=Baidu Maps|access-date=5 April 2015}}</ref> केवल चीनी भाषा में उपलब्ध है और 2016 से पहले, यह केवल मुख्य भूमि [[चीन]], [[हांगकांग]], [[मकाऊ]] और [[ताइवान]] के नक्शे उपलब्ध कराता था, जबकि बाकी दुनिया अनखजी हुई लगती थी। वर्तमान में, बाइडू मैप्स कई अन्य देशों के नक्शे भी उपलब्ध कराता है। ऐसी खबरें थीं कि 2016 के अंत तक 150 से अधिक देशों को इसमें शामिल कर लिया जाएगा। बाइडू, [[नैवइन्फो]], [[मैपकिंग]], [[हियर]], [[लोकलकिंग]] और [[ओपनस्ट्रीटमैप]] (ओपन स्ट्रीट मैप) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे के डेटा का उपयोग करता है। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:मोबाइल एप्प]] [[श्रेणी:चीन की कंपनियाँ]] gefnqpt78zvium5bxqq7ntskig3aosu यू आर द यूनिवर्स 0 1610831 6536642 2026-04-05T16:15:07Z चाहर धर्मेंद्र 703114 पावलो ओस्ट्रिकोव की 2024 की फिल्म 6536642 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|df=y}} | runtime = 101 मिनट | country = {{Plainlist| * यूक्रेन * बेल्जियम }} | language = {{Plainlist| * यूक्रेनी * फ्रेंच }} | budget = | gross = }} '''यू आर द यूनिवर्स''' (यूक्रेनी: Ти — Космос) वर्ष 2024 में निर्मित एक यूक्रेनी-बेल्जियन विज्ञान-कथा एवं [[प्रेमकहानी फ़िल्म| रोमांस 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अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] f7i5t86iq2zcj4m4d6g7eut09fe4ysu 6536644 6536643 2026-04-05T16:16:38Z चाहर धर्मेंद्र 703114 पात्रवर्ग 6536644 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|df=y}} | runtime = 101 मिनट | country = {{Plainlist| * यूक्रेन * बेल्जियम }} | language = {{Plainlist| * यूक्रेनी * फ्रेंच }} | budget = | gross = }} '''यू आर द यूनिवर्स''' (यूक्रेनी: Ти — Космос) वर्ष 2024 में निर्मित एक यूक्रेनी-बेल्जियन विज्ञान-कथा एवं [[प्रेमकहानी फ़िल्म| रोमांस फिल्म]] है। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन पावलो ओस्ट्रिकोव ने किया है, और यह उनकी निर्देशन के क्षेत्र में पहली फीचर फिल्म है, जो उनके रचनात्मक दृष्टिकोण और सिनेमाई संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को प्रतिष्ठित टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में संपन्न हुआ, जहाँ इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और समीक्षकों से सराहना प्राप्त हुई। इसके पश्चात, फिल्म को यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया, जिससे यह व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँची और अपनी विशिष्ट विषयवस्तु तथा भावनात्मक प्रस्तुति के लिए ध्यान आकर्षित करने में सफल रही। ==कथानक== एक यूक्रेनी अंतरिक्ष यात्री के इर्द-गिर्द घूमता है, जो एक परमाणु अपशिष्ट निपटान कंपनी के मिशन पर अंतरिक्ष में कार्यरत होता है। अपने मिशन के दौरान उसे यह भयावह सत्य ज्ञात होता है कि पृथ्वी का विनाश हो चुका है। इस विनाशकारी घटना के बाद वह स्वयं को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] istltlpgzhm9q9pvobz2zfoi3ngg0dy 6536645 6536644 2026-04-05T16:17:21Z चाहर धर्मेंद्र 703114 निर्माण और फिल्मांकन 6536645 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|df=y}} | runtime = 101 मिनट | country = {{Plainlist| * यूक्रेन * बेल्जियम }} | language = {{Plainlist| * यूक्रेनी * फ्रेंच }} | budget = | gross = }} '''यू आर द यूनिवर्स''' (यूक्रेनी: Ти — Космос) वर्ष 2024 में निर्मित एक यूक्रेनी-बेल्जियन विज्ञान-कथा एवं [[प्रेमकहानी फ़िल्म| रोमांस फिल्म]] है। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन पावलो ओस्ट्रिकोव ने किया है, और यह उनकी निर्देशन के क्षेत्र में पहली फीचर फिल्म है, जो उनके रचनात्मक दृष्टिकोण और सिनेमाई संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को प्रतिष्ठित टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में संपन्न हुआ, जहाँ इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और समीक्षकों से सराहना प्राप्त हुई। इसके पश्चात, फिल्म को यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया, जिससे यह व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँची और अपनी विशिष्ट विषयवस्तु तथा भावनात्मक प्रस्तुति के लिए ध्यान आकर्षित करने में सफल रही। ==कथानक== एक यूक्रेनी अंतरिक्ष यात्री के इर्द-गिर्द घूमता है, जो एक परमाणु अपशिष्ट निपटान कंपनी के मिशन पर अंतरिक्ष में कार्यरत होता है। अपने मिशन के दौरान उसे यह भयावह सत्य ज्ञात होता है कि पृथ्वी का विनाश हो चुका है। इस विनाशकारी घटना के बाद वह स्वयं को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति प्रदान की।<ref name="babel-2024-09">{{cite web |last=गुसीव |first=ग्लिब |title=Ukrainian director Pavlo Ostrikov shot the film "U are the universe" 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2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया डेपिकर को शामिल किया गया। पश्चात् दोनों के अभिनय को संयोजित कर एक सुसंगत और प्रभावशाली चरित्र प्रस्तुत किया गया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /><ref name="scienceandfilm-2024-10">{{cite web |last=एपस्टीन |first=सोनिया शेचेत |title=Director Interview: Pavlo Ostrikov on U Are the Universe |url=https://scienceandfilm.org/articles/3654/director-interview-pavlo-ostrikov-on-u-are-the-universe |website=विज्ञान और फिल्म |publisher=म्यूज़ियम ऑफ़ द मूविंग इमेज|date=11 अक्टूबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> निर्माण प्रक्रिया के दौरान कास्ट और क्रू के कई सदस्य, जिनमें मुख्य अभिनेता, रोबोट मैक्सिम के वॉइस अभिनेता तथा निर्माता भी शामिल थे, यूक्रेन के सशस्त्र बल में सेवा दे रहे थे।<ref name="scienceandfilm-2024-10" /> यह परिस्थिति फिल्म निर्माण के लिए असाधारण और चुनौतीपूर्ण रही। इसी दौरान फिल्म के प्रैक्टिकल इफेक्ट्स विशेषज्ञ अलेक्जेंडर सुवोरोव युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए,<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> जो इस परियोजना के लिए एक गहरा और भावनात्मक आघात था। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] py2l8hqbc4lyvj00xn1zf7zxgms2zfs 6536646 6536645 2026-04-05T16:17:57Z चाहर धर्मेंद्र 703114 पोस्ट-प्रोडक्शन 6536646 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|df=y}} | runtime = 101 मिनट | country = {{Plainlist| * यूक्रेन * बेल्जियम }} | language = {{Plainlist| * यूक्रेनी * फ्रेंच }} | budget = | gross = }} '''यू आर द यूनिवर्स''' (यूक्रेनी: Ти — Космос) वर्ष 2024 में निर्मित एक यूक्रेनी-बेल्जियन विज्ञान-कथा एवं [[प्रेमकहानी फ़िल्म| रोमांस फिल्म]] है। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन पावलो ओस्ट्रिकोव ने किया है, और यह उनकी निर्देशन के क्षेत्र में पहली फीचर फिल्म है, जो उनके रचनात्मक दृष्टिकोण और सिनेमाई संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को प्रतिष्ठित टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में संपन्न हुआ, जहाँ इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और समीक्षकों से सराहना प्राप्त हुई। इसके पश्चात, फिल्म को यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया, जिससे यह व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँची और अपनी विशिष्ट विषयवस्तु तथा भावनात्मक प्रस्तुति के लिए ध्यान आकर्षित करने में सफल रही। ==कथानक== एक यूक्रेनी अंतरिक्ष यात्री के इर्द-गिर्द घूमता है, जो एक परमाणु अपशिष्ट निपटान कंपनी के मिशन पर अंतरिक्ष में कार्यरत होता है। अपने मिशन के दौरान उसे यह भयावह सत्य ज्ञात होता है कि पृथ्वी का विनाश हो चुका है। इस विनाशकारी घटना के बाद वह स्वयं को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति प्रदान की।<ref name="babel-2024-09">{{cite web |last=गुसीव |first=ग्लिब |title=Ukrainian director Pavlo Ostrikov shot the film "U are the universe" 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2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया 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==पोस्ट-प्रोडक्शन== फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी दिसंबर 2022 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण कार्य अभी शेष था, विशेषकर कंप्यूटर-जनित दृश्य प्रभावों (CGI) के क्षेत्र में, जो फिल्म की विज्ञान-कथा की वास्तविकता और दृश्यात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक थे।<ref name="cineuropa-filming-2022-12">{{cite web |last=सेरेब्रियाकोवा |first=नतालिया |date=6 December 2022 |title=Filming wraps for the first Ukrainian sci-fi film, U Are the Universe |url=https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20221206115350/https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |archive-date=2022-12-06 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा }}</ref> अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन और विशेष प्रभावों के लिए निर्माण दल ने यूक्रेनी दृश्य प्रभाव कंपनी मैजिक रूम के साथ सहयोग किया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> इसके माध्यम से अंतरिक्षीय वातावरण और तकनीकी दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी और दृश्यात्मक रूप से सशक्त बनाया गया। फिल्म का साउंडट्रैक 1970 और 1980 के दशक के यूक्रेनी पॉप संगीत पर आधारित था, जिसका उद्देश्य "यूक्रेनी अंतरिक्ष" की विशिष्ट ध्वनि विकसित करना और दर्शकों को भावनात्मक रूप से उस समय और स्थान से जोड़ना था।<ref name="cineuropa-filming-2022-12" /> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] azn4byjcq9mwm8ag58cjj4mfuvgy2ih 6536647 6536646 2026-04-05T16:18:28Z चाहर धर्मेंद्र 703114 प्रदर्शन और रिलीज़ 6536647 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | 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इर्द-गिर्द घूमता है, जो एक परमाणु अपशिष्ट निपटान कंपनी के मिशन पर अंतरिक्ष में कार्यरत होता है। अपने मिशन के दौरान उसे यह भयावह सत्य ज्ञात होता है कि पृथ्वी का विनाश हो चुका है। इस विनाशकारी घटना के बाद वह स्वयं को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति प्रदान की।<ref name="babel-2024-09">{{cite web |last=गुसीव |first=ग्लिब |title=Ukrainian director Pavlo Ostrikov shot the film "U are the universe" |url=https://babel.ua/en/texts/111077-director-pavlo-ostrikov-showed-his-debut-film-at-the-toronto-festival-one-of-the-most-prestigious-in-the-world-he-went-to-this-for-seven-years-despite-the-pandemic-and-the-war-here-is-his-subjective-s |website=Babel |date=30 सितंबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> यू आर द यूनिवर्स के निर्माण के दौरान निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव ने फिल्म का प्रस्ताव यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी को प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें वर्ष 2020 में अतिरिक्त निवेश प्राप्त हुआ। इसके पश्चात मुख्य भूमिकाओं के लिए वलोडिमिर क्रावचुक सहित एक फ्रांसीसी अभिनेत्री का चयन किया गया। फिल्मांकन को दो चरणों में विभाजित किया गया था—पहले चरण में अपेक्षाकृत सरल आंतरिक दृश्यों का चित्रण किया गया, जबकि दूसरे चरण में अंतरिक्ष से संबंधित जटिल बाहरी दृश्यों की शूटिंग की योजना बनाई गई, जिनमें अभिनेताओं को केबलों के सहारे निलंबित कर विशेष प्रभाव उत्पन्न करना आवश्यक था। पहला चरण जनवरी 2022 के प्रारंभ में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। हालाँकि, दूसरे चरण की शुरुआत से पूर्व ही फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया डेपिकर को शामिल किया गया। पश्चात् दोनों के अभिनय को संयोजित कर एक सुसंगत और प्रभावशाली चरित्र प्रस्तुत किया गया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /><ref name="scienceandfilm-2024-10">{{cite web |last=एपस्टीन |first=सोनिया शेचेत |title=Director Interview: Pavlo Ostrikov on U Are the Universe |url=https://scienceandfilm.org/articles/3654/director-interview-pavlo-ostrikov-on-u-are-the-universe |website=विज्ञान और फिल्म |publisher=म्यूज़ियम ऑफ़ द मूविंग इमेज|date=11 अक्टूबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> निर्माण प्रक्रिया के दौरान कास्ट और क्रू के कई सदस्य, जिनमें मुख्य अभिनेता, रोबोट मैक्सिम के वॉइस अभिनेता तथा निर्माता भी शामिल थे, यूक्रेन के सशस्त्र बल में सेवा दे रहे थे।<ref name="scienceandfilm-2024-10" /> यह परिस्थिति फिल्म निर्माण के लिए असाधारण और चुनौतीपूर्ण रही। इसी दौरान फिल्म के प्रैक्टिकल इफेक्ट्स विशेषज्ञ अलेक्जेंडर सुवोरोव युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए,<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> जो इस परियोजना के लिए एक गहरा और भावनात्मक आघात था। ==पोस्ट-प्रोडक्शन== फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी दिसंबर 2022 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण कार्य अभी शेष था, विशेषकर कंप्यूटर-जनित दृश्य प्रभावों (CGI) के क्षेत्र में, जो फिल्म की विज्ञान-कथा की वास्तविकता और दृश्यात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक थे।<ref name="cineuropa-filming-2022-12">{{cite web |last=सेरेब्रियाकोवा |first=नतालिया |date=6 December 2022 |title=Filming wraps for the first Ukrainian sci-fi film, U Are the Universe |url=https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20221206115350/https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |archive-date=2022-12-06 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा }}</ref> अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन और विशेष प्रभावों के लिए निर्माण दल ने यूक्रेनी दृश्य प्रभाव कंपनी मैजिक रूम के साथ सहयोग किया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> इसके माध्यम से अंतरिक्षीय वातावरण और तकनीकी दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी और दृश्यात्मक रूप से सशक्त बनाया गया। फिल्म का साउंडट्रैक 1970 और 1980 के दशक के यूक्रेनी पॉप संगीत पर आधारित था, जिसका उद्देश्य "यूक्रेनी अंतरिक्ष" की विशिष्ट ध्वनि विकसित करना और दर्शकों को भावनात्मक रूप से उस समय और स्थान से जोड़ना था।<ref name="cineuropa-filming-2022-12" /> ==प्रदर्शन और रिलीज़== [[File:Ти - космос. TIFF 2024.jpg|thumb|टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्म ' यू आर द यूनिवर्स' के प्रीमियर पर फिल्म के कलाकार और क्रू मौजूद थे।l]] यू आर द यूनिवर्स का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ।<ref>{{Cite web |title=U Are the Universe |url=https://www.tiff.net/events/u-are-the-universe |access-date=2026-03-26 |website=टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल}}</ref> इसके बाद इसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया, जिनमें 2024 का फैंटास्टिक फेस्ट, 57वां सिटजेस फिल्म फेस्टिवल, 2024 का रेवेलेशन पर्थ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2025 का सिएटल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं। फिल्म को घरेलू दर्शकों के लिए यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया,<ref>{{Cite web |title=Trailer released for Ukrainian sci-fi film U Are the Universe |url=https://english.nv.ua/life/ukrainian-sci-fi-film-u-are-the-universe-premieres-november-20-50516422.html |access-date=2026-03-26 |website=द न्यू वॉइस ऑफ यूक्रेन}}</ref> जहाँ इसे इसकी अद्वितीय विषयवस्तु और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए सराहा गया। ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] rliwkdsfvdnwcc0kat6klc35mkl0wyn 6536648 6536647 2026-04-05T16:19:02Z चाहर धर्मेंद्र 703114 समीक्षा 6536648 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव|df=y}} | runtime = 101 मिनट | country = {{Plainlist| * यूक्रेन * बेल्जियम }} | language = {{Plainlist| * यूक्रेनी * फ्रेंच }} | budget 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को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति प्रदान की।<ref name="babel-2024-09">{{cite web |last=गुसीव |first=ग्लिब |title=Ukrainian director Pavlo Ostrikov shot the film "U are the universe" 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2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया डेपिकर को शामिल किया गया। पश्चात् दोनों के अभिनय को संयोजित कर एक सुसंगत और प्रभावशाली चरित्र प्रस्तुत किया गया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /><ref name="scienceandfilm-2024-10">{{cite web |last=एपस्टीन |first=सोनिया शेचेत |title=Director Interview: Pavlo Ostrikov on U Are the Universe |url=https://scienceandfilm.org/articles/3654/director-interview-pavlo-ostrikov-on-u-are-the-universe |website=विज्ञान और फिल्म |publisher=म्यूज़ियम ऑफ़ द मूविंग इमेज|date=11 अक्टूबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> निर्माण प्रक्रिया के दौरान कास्ट और क्रू के कई सदस्य, जिनमें मुख्य अभिनेता, रोबोट मैक्सिम के वॉइस अभिनेता तथा निर्माता भी शामिल थे, यूक्रेन के सशस्त्र बल में सेवा दे रहे थे।<ref name="scienceandfilm-2024-10" /> यह परिस्थिति फिल्म निर्माण के लिए असाधारण और चुनौतीपूर्ण रही। इसी दौरान फिल्म के प्रैक्टिकल इफेक्ट्स विशेषज्ञ अलेक्जेंडर सुवोरोव युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए,<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> जो इस परियोजना के लिए एक गहरा और भावनात्मक आघात था। ==पोस्ट-प्रोडक्शन== फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी दिसंबर 2022 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण कार्य अभी शेष था, विशेषकर कंप्यूटर-जनित दृश्य प्रभावों (CGI) के क्षेत्र में, जो फिल्म की विज्ञान-कथा की वास्तविकता और दृश्यात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक थे।<ref name="cineuropa-filming-2022-12">{{cite web |last=सेरेब्रियाकोवा |first=नतालिया |date=6 December 2022 |title=Filming wraps for the first Ukrainian sci-fi film, U Are the Universe |url=https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20221206115350/https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |archive-date=2022-12-06 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा }}</ref> अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन और विशेष प्रभावों के लिए निर्माण दल ने यूक्रेनी दृश्य प्रभाव कंपनी मैजिक रूम के साथ सहयोग किया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> इसके माध्यम से अंतरिक्षीय वातावरण और तकनीकी दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी और दृश्यात्मक रूप से सशक्त बनाया 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TIFF 2024.jpg|thumb|टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्म ' यू आर द यूनिवर्स' के प्रीमियर पर फिल्म के कलाकार और क्रू मौजूद थे।l]] यू आर द यूनिवर्स का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ।<ref>{{Cite web |title=U Are the Universe |url=https://www.tiff.net/events/u-are-the-universe |access-date=2026-03-26 |website=टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल}}</ref> इसके बाद इसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया, जिनमें 2024 का फैंटास्टिक फेस्ट, 57वां सिटजेस फिल्म फेस्टिवल, 2024 का रेवेलेशन पर्थ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2025 का सिएटल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं। फिल्म को घरेलू दर्शकों के लिए यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया,<ref>{{Cite web |title=Trailer released for Ukrainian sci-fi film U Are the Universe |url=https://english.nv.ua/life/ukrainian-sci-fi-film-u-are-the-universe-premieres-november-20-50516422.html |access-date=2026-03-26 |website=द न्यू वॉइस ऑफ यूक्रेन}}</ref> जहाँ इसे इसकी अद्वितीय विषयवस्तु और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए सराहा गया। ==स्वागत== ===समीक्षा=== RogerEbert.com के लिए ब्रायन टैलेरिको ने लिखा है कि फिल्म अप्रत्याशित संबंधों और अपनी मानवता को बचाने के अंतिम प्रयासों की कहानी है। उन्होंने टिप्पणी की कि फिल्म कभी-कभी दोहराव वाली प्रतीत होती है, फिर भी यह आश्चर्यजनक रूप से अच्छी तरह से बनाई गई है। इसके माध्यम से दर्शकों को एंड्री के अंतरिक्ष में अर्थ की खोज का अनुभव होता है, और लेखक ने सवाल उठाया कि क्या हम सभी ऐसा नहीं कर रहे।<ref>{{Cite web |last=टैलेरिको |first=ब्रायन |date= सितंबर 22, 2024 |title=Fantastic Fest 2024: U Are the Universe, Planet B, The Rule of Jenny Pen |url=https://www.rogerebert.com/festivals/fantastic-fest-2024-u-are-the-universe-planet-b-the-rule-of-jenny-pen |access-date=2026-03-26 |website=रोजरएबर्ट डॉट कॉम}}</ref> वैरायटी के मुर्तदा एल्फैडल ने वलोडिमिर क्रावचुक के अभिनय की प्रशंसा करते हुए लिखा कि फिल्म की ताकत काफी हद तक उनके प्रदर्शन की बदौलत है। उन्होंने बताया कि क्रावचुक अनोखे अंदाज में मनमोहक और आकर्षक हैं। एक आम आदमी की तरह दिखते हुए भी उनमें इतनी चुंबकीय क्षमता है कि छोटी-छोटी और कभी-कभी बेतुकी हरकतें भी दर्शकों के लिए मनोरंजक बन जाती हैं। उनके अभिनय को उन्होंने मंत्रमुग्ध कर देने वाला बताया।<ref>{{Cite web |last=एल्फाडल |first=मुर्तदा |date= सितंबर 23, 2024 |title='U Are the Universe' Review: A Lonely Astronaut and a Disembodied Voice Begin a Sparkling Romance After the Apocalypse |url=https://variety.com/2024/film/reviews/u-are-the-universe-review-fantastic-fest-tiff-1236152666/ |access-date=2026-03-26 |website= वैरायटी}}</ref> [[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]] में नम्रता जोशी ने फिल्म की सकारात्मक समीक्षा करते हुए लिखा कि एक अंतरिक्ष फंतासी के रूप में यह फिल्म घोर निराशा में पाए जाने वाले प्रेम की कहानी है। उन्होंने कहा कि भावनाओं की यही सार्वभौमिकता फिल्म को प्रभावशाली बनाती है और इसे आम, भव्य विज्ञान कथा रोमांचों से अलग करती है। यह कभी अतिभावुक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे दिल को छूने वाली बनती है और अंत में दर्शकों पर गहरा मार्मिक प्रभाव छोड़ती है।<ref>{{Cite web |last=जोशी |first=नम्रता |date= सितंबर 24, 2024 |title=Cinema Without Borders: U are the Universe — Love and loneliness |url=https://www.cinemaexpress.com/international/features/2024/Sep/24/cinema-without-borders-u-are-the-universe-love-and-loneliness |access-date=2026-03-26 |website=सिनेमा एक्सप्रेस |publisher=[[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] 8iz497wimo4g0pbta284mxi8qx2tvfb 6536650 6536648 2026-04-05T16:19:34Z चाहर धर्मेंद्र 703114 पुरस्कार 6536650 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला 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में सफल रही। ==कथानक== एक यूक्रेनी अंतरिक्ष यात्री के इर्द-गिर्द घूमता है, जो एक परमाणु अपशिष्ट निपटान कंपनी के मिशन पर अंतरिक्ष में कार्यरत होता है। अपने मिशन के दौरान उसे यह भयावह सत्य ज्ञात होता है कि पृथ्वी का विनाश हो चुका है। इस विनाशकारी घटना के बाद वह स्वयं को मानव जाति का अंतिम जीवित सदस्य मानने लगता है, जिससे उसके भीतर गहन एकाकीपन और निराशा का भाव उत्पन्न होता है। हालाँकि, उसकी यह धारणा तब बदल जाती है जब उसे शनि ग्रह के निकट स्थित एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री से संदेश प्राप्त होता है। इस अप्रत्याशित संपर्क से उसके भीतर आशा का संचार होता है और वह उससे मिलने के उद्देश्य से एक साहसिक अंतरिक्ष यात्रा पर निकलने का निर्णय करता है। यह यात्रा न केवल भौतिक दूरी को पार करने का प्रयास है, बल्कि मानवीय संबंध, आशा और अस्तित्व के अर्थ की खोज का भी प्रतीक बन जाती है। ==पात्रवर्ग== प्रमुख पात्रों का चित्रण सशक्त और प्रभावशाली कलाकारों द्वारा किया गया है। वलोडिमिर क्रावचुक ने एंड्री मेलनीक की भूमिका निभाई है, जो कहानी के केंद्रीय चरित्र के रूप में उभरते हैं। लियोनिड पोपाडको ने मैक्सिम के पात्र को जीवंत बनाया है, जबकि डारिया प्लाहटी ने कैथरीन के रूप में विशेष उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एलेक्सिया डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति प्रदान की।<ref name="babel-2024-09">{{cite web |last=गुसीव |first=ग्लिब |title=Ukrainian director Pavlo Ostrikov shot the film "U are the universe" |url=https://babel.ua/en/texts/111077-director-pavlo-ostrikov-showed-his-debut-film-at-the-toronto-festival-one-of-the-most-prestigious-in-the-world-he-went-to-this-for-seven-years-despite-the-pandemic-and-the-war-here-is-his-subjective-s |website=Babel |date=30 सितंबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> यू आर द यूनिवर्स के निर्माण के दौरान निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव ने फिल्म का प्रस्ताव यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी को प्रस्तुत किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें वर्ष 2020 में अतिरिक्त निवेश प्राप्त हुआ। इसके पश्चात मुख्य भूमिकाओं के लिए वलोडिमिर क्रावचुक सहित एक फ्रांसीसी अभिनेत्री का चयन किया गया। फिल्मांकन को दो चरणों में विभाजित किया गया था—पहले चरण में अपेक्षाकृत सरल आंतरिक दृश्यों का चित्रण किया गया, जबकि दूसरे चरण में अंतरिक्ष से संबंधित जटिल बाहरी दृश्यों की शूटिंग की योजना बनाई गई, जिनमें अभिनेताओं को केबलों के सहारे निलंबित कर विशेष प्रभाव उत्पन्न करना आवश्यक था। पहला चरण जनवरी 2022 के प्रारंभ में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। हालाँकि, दूसरे चरण की शुरुआत से पूर्व ही फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया डेपिकर को शामिल किया गया। पश्चात् दोनों के अभिनय को संयोजित कर एक सुसंगत और प्रभावशाली चरित्र प्रस्तुत किया गया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /><ref name="scienceandfilm-2024-10">{{cite web |last=एपस्टीन |first=सोनिया शेचेत |title=Director Interview: Pavlo Ostrikov on U Are the Universe |url=https://scienceandfilm.org/articles/3654/director-interview-pavlo-ostrikov-on-u-are-the-universe |website=विज्ञान और फिल्म |publisher=म्यूज़ियम ऑफ़ द मूविंग इमेज|date=11 अक्टूबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> निर्माण प्रक्रिया के दौरान कास्ट और क्रू के कई सदस्य, जिनमें मुख्य अभिनेता, रोबोट मैक्सिम के वॉइस अभिनेता तथा निर्माता भी शामिल थे, यूक्रेन के सशस्त्र बल में सेवा दे रहे थे।<ref name="scienceandfilm-2024-10" /> यह परिस्थिति फिल्म निर्माण के लिए असाधारण और चुनौतीपूर्ण रही। इसी दौरान फिल्म के प्रैक्टिकल इफेक्ट्स विशेषज्ञ अलेक्जेंडर सुवोरोव युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए,<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> जो इस परियोजना के लिए एक गहरा और भावनात्मक आघात था। ==पोस्ट-प्रोडक्शन== फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी दिसंबर 2022 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण कार्य अभी शेष था, विशेषकर कंप्यूटर-जनित दृश्य प्रभावों (CGI) के क्षेत्र में, जो फिल्म की विज्ञान-कथा की वास्तविकता और दृश्यात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक थे।<ref name="cineuropa-filming-2022-12">{{cite web |last=सेरेब्रियाकोवा |first=नतालिया |date=6 December 2022 |title=Filming wraps for the first Ukrainian sci-fi film, U Are the Universe |url=https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20221206115350/https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |archive-date=2022-12-06 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा }}</ref> अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन और विशेष प्रभावों के लिए निर्माण दल ने यूक्रेनी दृश्य प्रभाव कंपनी मैजिक रूम के साथ सहयोग किया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> इसके माध्यम से अंतरिक्षीय वातावरण और तकनीकी दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी और दृश्यात्मक रूप से सशक्त बनाया गया। फिल्म का साउंडट्रैक 1970 और 1980 के दशक के यूक्रेनी पॉप संगीत पर आधारित था, जिसका उद्देश्य "यूक्रेनी अंतरिक्ष" की विशिष्ट ध्वनि विकसित करना और दर्शकों को भावनात्मक रूप से उस समय और स्थान से जोड़ना था।<ref name="cineuropa-filming-2022-12" /> ==प्रदर्शन और रिलीज़== [[File:Ти - космос. TIFF 2024.jpg|thumb|टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्म ' यू आर द यूनिवर्स' के प्रीमियर पर फिल्म के कलाकार और क्रू मौजूद थे।l]] यू आर द यूनिवर्स का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ।<ref>{{Cite web |title=U Are the Universe |url=https://www.tiff.net/events/u-are-the-universe |access-date=2026-03-26 |website=टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल}}</ref> इसके बाद इसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया, जिनमें 2024 का फैंटास्टिक फेस्ट, 57वां सिटजेस फिल्म फेस्टिवल, 2024 का रेवेलेशन पर्थ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2025 का सिएटल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं। फिल्म को घरेलू दर्शकों के लिए यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया,<ref>{{Cite web |title=Trailer released for Ukrainian sci-fi film U Are the Universe |url=https://english.nv.ua/life/ukrainian-sci-fi-film-u-are-the-universe-premieres-november-20-50516422.html |access-date=2026-03-26 |website=द न्यू वॉइस ऑफ यूक्रेन}}</ref> जहाँ इसे इसकी अद्वितीय विषयवस्तु और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए सराहा गया। ==स्वागत== ===समीक्षा=== RogerEbert.com के लिए ब्रायन टैलेरिको ने लिखा है कि फिल्म अप्रत्याशित संबंधों और अपनी मानवता को बचाने के अंतिम प्रयासों की कहानी है। उन्होंने टिप्पणी की कि फिल्म कभी-कभी दोहराव वाली प्रतीत होती है, फिर भी यह आश्चर्यजनक रूप से अच्छी तरह से बनाई गई है। इसके माध्यम से दर्शकों को एंड्री के अंतरिक्ष में अर्थ की खोज का अनुभव होता है, और लेखक ने सवाल उठाया कि क्या हम सभी ऐसा नहीं कर रहे।<ref>{{Cite web |last=टैलेरिको |first=ब्रायन |date= सितंबर 22, 2024 |title=Fantastic Fest 2024: U Are the Universe, Planet B, The Rule of Jenny Pen |url=https://www.rogerebert.com/festivals/fantastic-fest-2024-u-are-the-universe-planet-b-the-rule-of-jenny-pen |access-date=2026-03-26 |website=रोजरएबर्ट डॉट कॉम}}</ref> वैरायटी के मुर्तदा एल्फैडल ने वलोडिमिर क्रावचुक के अभिनय की प्रशंसा करते हुए लिखा कि फिल्म की ताकत काफी हद तक उनके प्रदर्शन की बदौलत है। उन्होंने बताया कि क्रावचुक अनोखे अंदाज में मनमोहक और आकर्षक हैं। एक आम आदमी की तरह दिखते हुए भी उनमें इतनी चुंबकीय क्षमता है कि छोटी-छोटी और कभी-कभी बेतुकी हरकतें भी दर्शकों के लिए मनोरंजक बन जाती हैं। उनके अभिनय को उन्होंने मंत्रमुग्ध कर देने वाला बताया।<ref>{{Cite web |last=एल्फाडल |first=मुर्तदा |date= सितंबर 23, 2024 |title='U Are the Universe' Review: A Lonely Astronaut and a Disembodied Voice Begin a Sparkling Romance After the Apocalypse |url=https://variety.com/2024/film/reviews/u-are-the-universe-review-fantastic-fest-tiff-1236152666/ |access-date=2026-03-26 |website= वैरायटी}}</ref> [[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]] में नम्रता जोशी ने फिल्म की सकारात्मक समीक्षा करते हुए लिखा कि एक अंतरिक्ष फंतासी के रूप में यह फिल्म घोर निराशा में पाए जाने वाले प्रेम की कहानी है। उन्होंने कहा कि भावनाओं की यही सार्वभौमिकता फिल्म को प्रभावशाली बनाती है और इसे आम, भव्य विज्ञान कथा रोमांचों से अलग करती है। यह कभी अतिभावुक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे दिल को छूने वाली बनती है और अंत में दर्शकों पर गहरा मार्मिक प्रभाव छोड़ती है।<ref>{{Cite web |last=जोशी |first=नम्रता |date= सितंबर 24, 2024 |title=Cinema Without Borders: U are the Universe — Love and loneliness |url=https://www.cinemaexpress.com/international/features/2024/Sep/24/cinema-without-borders-u-are-the-universe-love-and-loneliness |access-date=2026-03-26 |website=सिनेमा एक्सप्रेस |publisher=[[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref> ===पुरस्कार=== यू आर द यूनिवर्स ने 2024 में अपने अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के दौरान कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते। इसे स्ट्रासबर्ग यूरोपियन फैंटास्टिक फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म के लिए गोल्डन ऑक्टोपस और सिल्वर मेलिएस पुरस्कार प्राप्त हुए।<ref>{{Cite web |last=कोवलेंको |first=अन्ना |date=2024-09-29 |title=Ukrainian film wins top award at Strasbourg Film Festival |url=https://www.pravda.com.ua/eng/news/2024/09/29/7477347/ |access-date=2026-03-26 |website=यूक्रेनस्का प्रावदा}}</ref> इसके अलावा, फिल्म को 2024 में आयोजित ट्राइस्ट साइंस+फिक्शन फेस्टिवल में एस्टेरॉयड पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web |last=अनस्वर्थ |first=मार्टिन |date= नवंबर 4, 2024 |title=Trieste Science+Fiction Festival Winners Announced |url=https://www.starburstmagazine.com/trieste-sciencefiction-festival-winners-announced/ |access-date=2026-03-26 |website=स्टारबर्स्ट (पत्रिका)}}</ref> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] d0znq737haqbzx8ciq3veokalyxyjo9 6536651 6536650 2026-04-05T16:21:09Z चाहर धर्मेंद्र 703114 6536651 wikitext text/x-wiki {{Infobox film | name = तुम ही ब्रह्मांड हो | native_name = {{Infobox name module | language = Ukrainian | title = Ти — Космос | nolink = yes }} | image = | caption = | director = पावलो ओस्ट्रिकोव | writer = पावलो ओस्ट्रिकोव | producer = | starring = {{Plainlist| * वलोडिमिर क्रावचुक * लियोनिड पोपाडको * दारिया प्लाहती * एलेक्सिया डेपिकर }} | cinematography = निकिता कुज़मेंको | editing = इवान बन्निकोव | music = मिकिता मोइसेयेव | studio = {{Plainlist| * फोरफिल्म्स * स्टेनोला प्रोडक्शंस * यूक्रेनी राज्य फिल्म एजेंसी }} | distributor = | released = {{Film date|2024|9|7| टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय 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डेपिकर ने कैथरीन के पात्र को अपनी आवाज़ दी है, जिससे चरित्र को भावनात्मक गहराई प्राप्त होती है। ==निर्माण और फिल्मांकन== यू आर द यूनिवर्स की अवधारणा उस समय विकसित हुई जब निर्देशक पावलो ओस्ट्रिकोव कीव स्थित नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी में विधि के छात्र थे। वर्ष 2011 में उन्होंने “कॉस्मोस” शीर्षक से एक लघु नाटक लिखा और उसका मंचन किया,<ref name="babel-2024-09" /> जिसमें पृथ्वी के विनाश के बाद अंतरिक्ष में जीवित बचे अंतिम व्यक्ति की कथा प्रस्तुत की गई थी। यही विचार आगे चलकर इस फिल्म की मूल प्रेरणा बना। स्नातक उपरांत फिल्म निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद ओस्ट्रिकोव ने इस विषय पर पुनर्विचार किया और वर्ष 2015 में फिल्म का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया। प्रारंभिक चरण में लगभग 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुमानित बजट के कारण उन्हें वित्तीय संसाधन जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, वर्ष 2017 में [[यूक्रेनी फिल्म अकादमी]] के एक पुरस्कार समारोह के दौरान उनकी भेंट निर्माता वलोडिमिर यात्सेन्को से हुई, जिन्होंने इस परियोजना में रुचि व्यक्त की और अंततः इसे आगे बढ़ाने के लिए सहमति 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प्रभाव उत्पन्न करना आवश्यक था। पहला चरण जनवरी 2022 के प्रारंभ में सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। हालाँकि, दूसरे चरण की शुरुआत से पूर्व ही फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण आरंभ हो गया, जिससे फिल्मांकन प्रक्रिया बाधित हो गई। इस अस्थिर परिस्थिति के कारण महिला मुख्य भूमिका निभाने वाली फ्रांसीसी अभिनेत्री ने सुरक्षा कारणों से कीव आने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा।<ref name="babel-2024-09" /><ref name="cineuropa-interview-2024-09">{{cite web |last=कुडलास |first=मार्टिन |date=10 सितंबर 2024 |title=Pavlo Ostrikov • Director of ''U Are the Universe'' |url=https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20240910135152/https://cineuropa.org/en/interview/466971/ |archive-date=2024-09-10 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा}}</ref> यू आर द यूनिवर्स की शूटिंग वर्ष 2022 की शरद ऋतु में पुनः आरंभ की गई। कास्टिंग से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए निर्माण दल ने अभिनव दृष्टिकोण अपनाया—किरदार के शारीरिक प्रदर्शन के लिए डारिया प्लाहटी को चुना गया, जबकि उसी पात्र की फ्रांसीसी आवाज़ प्रदान करने हेतु बेल्जियम की अभिनेत्री एलेक्सिया डेपिकर को शामिल किया गया। पश्चात् दोनों के अभिनय को संयोजित कर एक सुसंगत और प्रभावशाली चरित्र प्रस्तुत किया गया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /><ref name="scienceandfilm-2024-10">{{cite web |last=एपस्टीन |first=सोनिया शेचेत |title=Director Interview: Pavlo Ostrikov on U Are the Universe |url=https://scienceandfilm.org/articles/3654/director-interview-pavlo-ostrikov-on-u-are-the-universe |website=विज्ञान और फिल्म |publisher=म्यूज़ियम ऑफ़ द मूविंग इमेज|date=11 अक्टूबर 2024 |access-date=24 मार्च 2026}}</ref> निर्माण प्रक्रिया के दौरान कास्ट और क्रू के कई सदस्य, जिनमें मुख्य अभिनेता, रोबोट मैक्सिम के वॉइस अभिनेता तथा निर्माता भी शामिल थे, यूक्रेन के सशस्त्र बल में सेवा दे रहे थे।<ref name="scienceandfilm-2024-10" /> यह परिस्थिति फिल्म निर्माण के लिए असाधारण और चुनौतीपूर्ण रही। इसी दौरान फिल्म के प्रैक्टिकल इफेक्ट्स विशेषज्ञ अलेक्जेंडर सुवोरोव युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए,<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> जो इस परियोजना के लिए एक गहरा और भावनात्मक आघात था। ==पोस्ट-प्रोडक्शन== फिल्म की मुख्य फोटोग्राफी दिसंबर 2022 तक सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली गई थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन का महत्वपूर्ण कार्य अभी शेष था, विशेषकर कंप्यूटर-जनित दृश्य प्रभावों (CGI) के क्षेत्र में, जो फिल्म की विज्ञान-कथा की वास्तविकता और दृश्यात्मक प्रभाव को मजबूत करने के लिए आवश्यक थे।<ref name="cineuropa-filming-2022-12">{{cite web |last=सेरेब्रियाकोवा |first=नतालिया |date=6 December 2022 |title=Filming wraps for the first Ukrainian sci-fi film, U Are the Universe |url=https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20221206115350/https://cineuropa.org/en/newsdetail/435775/ |archive-date=2022-12-06 |access-date=24 मार्च 2026 |website=सिनेयूरोपा }}</ref> अंतरिक्ष यान के डिज़ाइन और विशेष प्रभावों के लिए निर्माण दल ने यूक्रेनी दृश्य प्रभाव कंपनी मैजिक रूम के साथ सहयोग किया।<ref name="cineuropa-interview-2024-09" /> इसके माध्यम से अंतरिक्षीय वातावरण और तकनीकी दृश्यों को यथासंभव यथार्थवादी और दृश्यात्मक रूप से सशक्त बनाया गया। फिल्म का साउंडट्रैक 1970 और 1980 के दशक के यूक्रेनी पॉप संगीत पर आधारित था, जिसका उद्देश्य "यूक्रेनी अंतरिक्ष" की विशिष्ट ध्वनि विकसित करना और दर्शकों को भावनात्मक रूप से उस समय और स्थान से जोड़ना था।<ref name="cineuropa-filming-2022-12" /> ==प्रदर्शन और रिलीज़== [[File:Ти - космос. TIFF 2024.jpg|thumb|टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्म ' यू आर द यूनिवर्स' के प्रीमियर पर फिल्म के कलाकार और क्रू मौजूद थे।l]] यू आर द यूनिवर्स का विश्व प्रीमियर 7 सितंबर 2024 को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ।<ref>{{Cite web |title=U Are the Universe |url=https://www.tiff.net/events/u-are-the-universe |access-date=2026-03-26 |website=टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल}}</ref> इसके बाद इसे कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया, जिनमें 2024 का फैंटास्टिक फेस्ट, 57वां सिटजेस फिल्म फेस्टिवल, 2024 का रेवेलेशन पर्थ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और 2025 का सिएटल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं। फिल्म को घरेलू दर्शकों के लिए यूक्रेन में 20 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया,<ref>{{Cite web |title=Trailer released for Ukrainian sci-fi film U Are the Universe |url=https://english.nv.ua/life/ukrainian-sci-fi-film-u-are-the-universe-premieres-november-20-50516422.html |access-date=2026-03-26 |website=द न्यू वॉइस ऑफ यूक्रेन}}</ref> जहाँ इसे इसकी अद्वितीय विषयवस्तु और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए सराहा गया। ==स्वागत== ===समीक्षा=== RogerEbert.com के लिए ब्रायन टैलेरिको ने लिखा है कि फिल्म अप्रत्याशित संबंधों और अपनी मानवता को बचाने के अंतिम प्रयासों की कहानी है। उन्होंने टिप्पणी की कि फिल्म कभी-कभी दोहराव वाली प्रतीत होती है, फिर भी यह आश्चर्यजनक रूप से अच्छी तरह से बनाई गई है। इसके माध्यम से दर्शकों को एंड्री के अंतरिक्ष में अर्थ की खोज का अनुभव होता है, और लेखक ने सवाल उठाया कि क्या हम सभी ऐसा नहीं कर रहे।<ref>{{Cite web |last=टैलेरिको |first=ब्रायन |date= सितंबर 22, 2024 |title=Fantastic Fest 2024: U Are the Universe, Planet B, The Rule of Jenny Pen |url=https://www.rogerebert.com/festivals/fantastic-fest-2024-u-are-the-universe-planet-b-the-rule-of-jenny-pen |access-date=2026-03-26 |website=रोजरएबर्ट डॉट कॉम}}</ref> वैरायटी के मुर्तदा एल्फैडल ने वलोडिमिर क्रावचुक के अभिनय की प्रशंसा करते हुए लिखा कि फिल्म की ताकत काफी हद तक उनके प्रदर्शन की बदौलत है। उन्होंने बताया कि क्रावचुक अनोखे अंदाज में मनमोहक और आकर्षक हैं। एक आम आदमी की तरह दिखते हुए भी उनमें इतनी चुंबकीय क्षमता है कि छोटी-छोटी और कभी-कभी बेतुकी हरकतें भी दर्शकों के लिए मनोरंजक बन जाती हैं। उनके अभिनय को उन्होंने मंत्रमुग्ध कर देने वाला बताया।<ref>{{Cite web |last=एल्फाडल |first=मुर्तदा |date= सितंबर 23, 2024 |title='U Are the Universe' Review: A Lonely Astronaut and a Disembodied Voice Begin a Sparkling Romance After the Apocalypse |url=https://variety.com/2024/film/reviews/u-are-the-universe-review-fantastic-fest-tiff-1236152666/ |access-date=2026-03-26 |website= वैरायटी}}</ref> [[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]] में नम्रता जोशी ने फिल्म की सकारात्मक समीक्षा करते हुए लिखा कि एक अंतरिक्ष फंतासी के रूप में यह फिल्म घोर निराशा में पाए जाने वाले प्रेम की कहानी है। उन्होंने कहा कि भावनाओं की यही सार्वभौमिकता फिल्म को प्रभावशाली बनाती है और इसे आम, भव्य विज्ञान कथा रोमांचों से अलग करती है। यह कभी अतिभावुक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे दिल को छूने वाली बनती है और अंत में दर्शकों पर गहरा मार्मिक प्रभाव छोड़ती है।<ref>{{Cite web |last=जोशी |first=नम्रता |date= सितंबर 24, 2024 |title=Cinema Without Borders: U are the Universe — Love and loneliness |url=https://www.cinemaexpress.com/international/features/2024/Sep/24/cinema-without-borders-u-are-the-universe-love-and-loneliness |access-date=2026-03-26 |website=सिनेमा एक्सप्रेस |publisher=[[द न्यू इंडियन एक्सप्रेस]]}}</ref> ===पुरस्कार=== यू आर द यूनिवर्स ने 2024 में अपने अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन के दौरान कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते। इसे स्ट्रासबर्ग यूरोपियन फैंटास्टिक फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फिल्म के लिए गोल्डन ऑक्टोपस और सिल्वर मेलिएस पुरस्कार प्राप्त हुए।<ref>{{Cite web |last=कोवलेंको |first=अन्ना |date=2024-09-29 |title=Ukrainian film wins top award at Strasbourg Film Festival |url=https://www.pravda.com.ua/eng/news/2024/09/29/7477347/ |access-date=2026-03-26 |website=यूक्रेनस्का प्रावदा}}</ref> इसके अलावा, फिल्म को 2024 में आयोजित ट्राइस्ट साइंस+फिक्शन फेस्टिवल में एस्टेरॉयड पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web |last=अनस्वर्थ |first=मार्टिन |date= नवंबर 4, 2024 |title=Trieste Science+Fiction Festival Winners Announced |url=https://www.starburstmagazine.com/trieste-sciencefiction-festival-winners-announced/ |access-date=2026-03-26 |website=स्टारबर्स्ट (पत्रिका)}}</ref> ==सन्दर्भ== {{Reflist}} ==बाहरी कड़ियाँ== * {{IMDb title}} [[श्रेणी:2024 की फ़िल्में]] 8brki9nyt6hnf06izjg9vpwzut0xnxc बेनीपट्टी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, बिहार 0 1610832 6536649 2026-04-05T16:19:11Z ~2026-20946-69 918937 नया पृष्ठ: बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र क्या वर्तमानविधायक कमलेश कुमार मिश्रा 6536649 wikitext text/x-wiki बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र क्या वर्तमानविधायक कमलेश कुमार मिश्रा 6zpyrzv4qukve2hbw91mycwqu4xlz6m 6536659 6536649 2026-04-05T16:51:58Z चाहर धर्मेंद्र 703114 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]]) 6536659 wikitext text/x-wiki {{db-test|help=off}} बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र क्या वर्तमानविधायक कमलेश कुमार मिश्रा dwq73m6s96ie8er0su98rchk61la9cj 6536669 6536659 2026-04-05T17:07:35Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सन्दर्भ + जानकारी 6536669 wikitext text/x-wiki {{Infobox Indian constituency |name = बेनीपट्टी |type= SLA | map_image = 32-Benipatti constituency.svg | map_caption = | map_alt = |mla = विनोद नारायण झा <!--Name of the current MLA. Leave blank for former constituencies--> |party = {{Party index link|भारतीय जनता पार्टी}} |alliance = [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन|एनडीए]] | latest_election_year = [[बिहार विधानसभा चुनाव, 2025|2025]] |region = |state = [[बिहार]] |district = [[मधुबनी जिला|मधुबनी]] |division = | loksabha_cons = |constituency_no = [[List of constituencies of the Bihar Legislative Assembly|-]] |established = 1951 | electors = 290,195 | reservation = None |abolished = <!-- year abolished --> }} '''बेनीपट्टी''' [[भारत]] के [[बिहार]] [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|राज्य]] के [[मधुबनी जिला|मधुबनी जिले]] का एक [[विधानसभा]] क्षेत्र है। ==अवलोकन== बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र, संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश, 2008 (संख्या 32) के अनुसार निर्धारित किया गया है। यह विधानसभा क्षेत्र कलुआही [[सामुदायिक विकास खंड]] और बेनीपट्टी सीडी ब्लॉक की विभिन्न ग्राम पंचायतों से मिलकर बना है। बेनीपट्टी ब्लॉक में शामिल ग्राम पंचायतें हैं: बिशुनपुर, बसैठा, बेहटा, बनकटा, पाली, परसौना, धगजरा, बरहामपुरा, अकौर, नगवास, नावकरही, चतरा, परखौली टिकुली, अनरेर साउथ, अनरेर नॉर्थ, पारौल, परजुआर डीह, ढांगा, मुरेठ, नागदह बलैन, कपसिया, बर्री, शाहपुर, मेघबेन, बेनीपट्टी, गांगुली और कटैया।<ref name=commission>{{cite web|url = http://eci.nic.in/eci_main/CurrentElections/CONSOLIDATED_ORDER%20_ECI%20.pdf |title = Schedule – XIII of Constituencies Order, 2008 of Delimitation of Parliamentary and Assembly constituencies Order, 2008 of the Election Commission of India|work= Schedule VI Bihar, Part A – Assembly constituencies, Part B – Parliamentary constituencies |access-date = 2011-01-10 }}</ref> इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण समुदाय का मतदाता दबदबा है, जिसके कारण यहाँ अधिकांश विधायक ब्राह्मण समुदाय से ही निर्वाचित होते हैं। बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र, [[मधुबनी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र]] (संख्या 6) का हिस्सा भी है।<ref name=commission/> ==सन्दर्भ== 9nuufke6hsy6nptqbl6wg63zzp0oxhh अरबी अनुवाद आन्दोलन 0 1610833 6536660 2026-04-05T16:54:04Z अनुनाद सिंह 1634 "[[:en:Special:Redirect/revision/1335917614|Graeco-Arabic translation movement]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया 6536660 wikitext text/x-wiki '''अरबी अनुवाद आंदोलन''' [[बग़दाद|बगदाद]] में ८वीं शताब्दी के मध्य से १०वीं शताब्दी के अंत तक चला एक बड़ा, अच्छी तरह से वित्त पोषित और निरंतर प्रयास था जिसमें गैर-मजहबी ग्रंथों का अरबी भाषा में अनुवाद किया गया।<ref name=":02">{{Cite book|url=https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta|title=Greek Thought, Arabic Culture: The Graeco-Arabic Translation Movement in Baghdad and Early Abbasid Society (2nd-4th/8th-10th centuries)|last=Gutas|first=Dimitri|publisher=Routledge|year=1998|pages=[https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta/page/n19 1]–26|url-access=limited}}</ref> <ref name=":02" /> इस आन्दोलन के अन्तर्गत मुख्यतः युनानी भाषा के ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद किया गया। इसके अलावा कुछ मात्रा में [[मध्य फ़ारसी भाषा|पहलवी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[सीरियाई भाषा|सीरियाई]] भाषा के ग्रंथों का भी अरबी में अनुवाद किया गया था। [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] fk7arnoqdz328pzpgns8z0hg29hh3yg 6536661 6536660 2026-04-05T16:56:16Z अनुनाद सिंह 1634 6536661 wikitext text/x-wiki '''अरबी अनुवाद आन्दोलन''' [[बग़दाद|बगदाद]] में ८वीं शताब्दी के मध्य से १०वीं शताब्दी के अंत तक चला एक बड़ा, अच्छी तरह से वित्त पोषित और निरंतर प्रयास था जिसमें गैर-मजहबी ग्रंथों का [[अरबी भाषा]] में [[अनुवाद]] किया गया।<ref name=":02">{{Cite book|url=https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta|title=Greek Thought, Arabic Culture: The Graeco-Arabic Translation Movement in Baghdad and Early Abbasid Society (2nd-4th/8th-10th centuries)|last=Gutas|first=Dimitri|publisher=Routledge|year=1998|pages=[https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta/page/n19 1]–26|url-access=limited}}</ref> <ref name=":02" /> इस आन्दोलन के अन्तर्गत मुख्यतः [[यूनानी भाषा|युनानी भाषा]] के ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद किया गया। युनानी के अलावा कुछ मात्रा में [[मध्य फ़ारसी भाषा|पहलवी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[सीरियाई भाषा|सीरियाई]] भाषा के ग्रंथों का भी अरबी में अनुवाद किया गया था। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} ==इन्हें भी देखें== *[[अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] jtl0olqrqm2zsbjgpm3vuh77mwcaawp 6536662 6536661 2026-04-05T16:57:08Z अनुनाद सिंह 1634 6536662 wikitext text/x-wiki '''अरबी अनुवाद आन्दोलन''' [[बग़दाद|बगदाद]] में ८वीं शताब्दी के मध्य से १०वीं शताब्दी के अंत तक चला एक बड़ा, अच्छी तरह से वित्तपोषित और निरंतर प्रयास था जिसमें अनेक भाषाओं के गैर-मजहबी ग्रंथों का [[अरबी भाषा]] में [[अनुवाद]] किया गया।<ref name=":02">{{Cite book|url=https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta|title=Greek Thought, Arabic Culture: The Graeco-Arabic Translation Movement in Baghdad and Early Abbasid Society (2nd-4th/8th-10th centuries)|last=Gutas|first=Dimitri|publisher=Routledge|year=1998|pages=[https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta/page/n19 1]–26|url-access=limited}}</ref> <ref name=":02" /> इस आन्दोलन के अन्तर्गत मुख्यतः [[यूनानी भाषा|युनानी भाषा]] के ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद किया गया। युनानी के अलावा कुछ मात्रा में [[मध्य फ़ारसी भाषा|पहलवी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[सीरियाई भाषा|सीरियाई]] भाषा के ग्रंथों का भी अरबी में अनुवाद किया गया था। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} ==इन्हें भी देखें== *[[अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] 3gxm25l7zu7xlr91ez1wqbdkgi2ha9e 6536663 6536662 2026-04-05T16:58:11Z अनुनाद सिंह 1634 6536663 wikitext text/x-wiki '''अरबी अनुवाद आन्दोलन''' [[बग़दाद|बगदाद]] में ८वीं शताब्दी के मध्य से १०वीं शताब्दी के अंत तक चला एक बड़ा, अच्छी तरह से वित्तपोषित और निरंतर प्रयास था जिसमें अनेक भाषाओं के गैर-मजहबी ग्रंथों का [[अरबी भाषा]] में [[अनुवाद]] किया गया।<ref name=":02">{{Cite book|url=https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta|title=Greek Thought, Arabic Culture: The Graeco-Arabic Translation Movement in Baghdad and Early Abbasid Society (2nd-4th/8th-10th 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book|url=https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta|title=Greek Thought, Arabic Culture: The Graeco-Arabic Translation Movement in Baghdad and Early Abbasid Society (2nd-4th/8th-10th centuries)|last=Gutas|first=Dimitri|publisher=Routledge|year=1998|pages=[https://archive.org/details/greekthoughtarab00guta/page/n19 1]–26|url-access=limited}}</ref> <ref name=":02" /> इस आन्दोलन के अन्तर्गत मुख्यतः [[यूनानी भाषा|युनानी भाषा]] के ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद किया गया किन्तु युनानी के अलावा कुछ मात्रा में [[मध्य फ़ारसी भाषा|पहलवी]], [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] और [[सीरियाई भाषा|सीरियाई]] भाषा के ग्रंथों का भी अरबी में अनुवाद किया गया था। इस अनुवाद आन्दोलन से उपजे अरबी भाषा के ग्रन्थों का १२वीं शताब्दी के बाद [[लैटिन]] भाषा में अनुवाद किया जाने लगा। इस प्रकार यूनान, भारत एवं अन्य देशों का ज्ञान यूरोप में प्रसारित होने लगा। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} ==इन्हें भी देखें== *[[अनुवाद]] *[[यांत्रिक अनुवाद]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] 8ynwy5kyfndb5m7zfd54lwqswq20qm8 सदस्य:AMAN KUMAR/प्रयोगपृष्ठ 2 1610834 6536692 2026-04-05T19:55:46Z AMAN KUMAR 911487 + 6536692 wikitext text/x-wiki {{Infobox|child={{{child|}}} | bodyclass = vcard | bodystyle = border-spacing:2px; | abovestyle = background-color:{{Infobox religious building/color|{{{religious_affiliation}}}}} | headerstyle= background-color:{{Infobox religious building/color|{{{religious_affiliation}}}}} | titleclass = fn org | above = {{if empty|{{{name|}}}|{{{building_name|}}}|{{PAGENAMEBASE}}}} | subheader = {{#if:{{{native_name|}}}|<div class="nickname" {{#if:{{{native_name_lang|}}}|lang="{{{native_name_lang}}}"}}>{{{native_name}}}</div>}} | image = {{#invoke:InfoboxImage |InfoboxImage |image={{#invoke:Wikidata|getValue|P18|{{{image|FETCH_WIKIDATA}}}}} |upright={{{image_upright|}}} |alt={{{alt|}}} }} | caption = {{{caption|}}} | header1 = 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किया गया 6536695 wikitext text/x-wiki {{Slavic mythology}} [[चित्र:Iwan_Nikolajewitsch_Kramskoj_002.jpg|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|इवान क्राम्स्कोई, ''रुसाल्काएँ'' (१८७१) ]] स्लाव लोककथाओं में, '''रुसाल्का''' ({{भाषा-रूसी|русалка}}, {{भाषा-पोलिश|rusalka}}) एक महिला प्राणी है जो अक्सर मानव जाति के प्रति दुर्भावनापूर्ण होती है और उसे अक्सर पानी से संबंधित किया जाता है। [[यूरोप]] के अन्य हिस्सों में इसके समकक्ष हैं, जैसे कि फ्रेंच मेलुसिन और जर्मनिक निक्सी लोककथाकारों ने इकाई के लिए विभिन्न प्रकार की उत्पत्ति का प्रस्ताव दिया है, जिसमें वे मूल रूप से स्लाव मूर्तिपूजा से उत्पन्न हो सकते हैं, जहां उन्हें परोपकारी आत्माओं के रूप में देखा जा सकता है। रुसाल्काएँ आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में विभिन्न प्रकार के मीडिया में दिखाई देती है, विशेष रूप से स्लाव भाषा बोलने वाले देशों में, जहां वे अक्सर [[जलपरी]] की अवधारणा से मिलते-जुलते हैं। उत्तर रूस में रुसाल्का को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे कि वोद्यानीत्सा<ref name="mifolog">{{Cite web|url=http://mifolog.ru/mythology/item/f00/s04/e0004002/index.shtml|title=Русалки (купалки, водяницы, лоскотухи)|website=Mythological encyclopedia|language=ru|trans-title=Rusalki (kupalki, vodyanitsy, loskotukhi)}}</ref> या वोद्यानीखा<ref name="Gudkova E.">{{Cite web|url=https://www.culture.ru/s/vopros/rusalki/|title=Как в русском фольклоре появились русалки?|website=Culture.RF|language=ru|trans-title=How did rusalki appear in Russian folklore}}</ref> ({{Langx|ru|водяница, водяниха}}; अर्थात ''पानी वाली'' या ''पानी की कन्या''), कुपाल्का<ref name="mifolog" /> ({{भाषा-रूसी|купалка}}; अर्थात ''नहाने वाली''), शुतोवका<ref name="Gudkova E." /> ({{भाषा-रूसी|шутовка}}; अर्थात ''मज़ाक करने वाली'') और लोस्कोतुखा<ref name="mifolog" /> या श्चेकोतुखा<ref name="Gudkova E." /> ({{भाषा-रूसी|лоскотуха, щекотуха}}; अर्थात ''गुदगुदी करने वाली'')। यूक्रेन में रुसाल्का को मावका ({{Lang-uk|''мавка''}}) कहते थे। ये नाम २०वीं सदी तक प्रचलित थे, जिसके बाद औपचारिक रूप से अधिकतर लोगों ने रुसाल्का नाम को स्वीकार कर लिया।<ref name="Gudkova E." /> == व्युत्पत्ति == ''रुसाल्का'' शब्द "रुसालिया" ({{langx|ru|рѹсалиѩ|links=yes|label=गिरजाघरी स्लाविक|italic=yes}}, {{langx|orv|русалиꙗ|label=पुराना पूर्व स्लाव|italic=yes}} {{Lang-bg|рussaлия}}) से निकला है, जो बाइज़ेंटाइन यूनानी "रोउसालिया" ({{भाषा-यूनानी|ῥουσάλια}}) के माध्यम से स्लाव भाषाओं में प्रवेश किया।<ref name="endemicgreekrousalia">{{Cite web|url=http://greek_greek.enacademic.com/150108/%CF%81%CE%BF%CF%85%CF%83%CE%AC%CE%BB%CE%B9%CE%B1|title=ρουσάλια|website=Enacademic.com – Greek Dictionary|language=el|trans-title=rousalia}}</ref> लंबे समय से चली आ रही, संभवतः पूर्व-ईसाई, वार्षिक परंपराओं के परिणामस्वरूप वर्ष का वह समय आत्माओं (नावकी, मावकी) के साथ जुड़ा हुआ था, जिसे बाद में छुट्टी के लिए नामित किया गया था।<ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CR%5CO%5CRosalia.htm|title=Rosalia|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=2020-09-08}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages\R\U\RusalkaIT.htm|title=Rusalka|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=2020-09-08}}</ref>{{Sfn|Fasmer|1987|p=520}}{{Sfn|Chernykh|1999|p=128}}{{Sfn|Levkievskaya|2000|p=234}} == उत्पत्ति और रूप == [[चित्र:Witold_Pruszkowski_-_Water_Nymphs_-_MNK_II-a-5_-_National_Museum_Kraków.jpg|अंगूठाकार|वितोल्द प्रुश्कोव्स्की की ''रुसाल्काएँ'', १८७७]] व्लादिमीर प्रोप के अनुसार मूल ''रुसाल्का'' [[पेगन|मूर्तिपूजक]] स्लाव लोगों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक उपनाम था जिन्होंने उन्हें प्रजनन क्षमता से जोड़ा और १९वीं शताब्दी से पहले रुसाल्काओं को बुराई नहीं माना। वे वसंत ऋतु में पानी से बाहर निकलकर खेतों में जीवनदायक नमी पहुँचाने के लिए आती थीं और इस तरह फसलों को पोषित करने में मदद करती थीं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-s36xYcqG1EC&pg=PA78|title=Russian Folk Belief|last=Linda J. Ivanits|date=15 February 1989|publisher=M.E. Sharpe|isbn=978-0-7656-3088-9|pages=78–81|access-date=12 July 2015}}</ref><ref name="Barber2013">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=abHEnOiPAmsC|title=The Dancing Goddesses: Folklore, Archaeology, and the Origins of European Dance|last=Elizabeth Wayland Barber|date=11 February 2013|publisher=W. W. Norton|isbn=978-0-393-08921-9|page=18|author-link=Elizabeth Wayland Barber|access-date=12 July 2015}}</ref> १९वीं सदी के संस्करणों में रुसाल्काएँ एक शांत, खतरनाक प्राणी थीं जो मरने के बाद अशुद्ध [[आत्मा|आत्माएँ]] बन गईं। दिमित्री ज़ेलेनिन के अनुसार युवा [[महिला|महिलाएँ]] जिन्होंने या तो एक दुखी [[शादी]] के कारण डूबकर [[आत्महत्या]] कर ली (उन्हें अपने प्रेमियों द्वारा अपमानित किया गया होगा या उनके बहुत बड़े पतियों द्वारा [[दुर्व्यवहार]] और परेशान किया गया होगा) या जो उनकी इच्छा के खिलाफ हिंसक रूप से डूब गईं (विशेष रूप से अवांछित बच्चों के साथ [[गर्भावस्था|गर्भवती]] होने के बाद) ।<ref name="Ivanits">Zelenin, D.K, cited in {{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-s36xYcqG1EC&pg=PA76|title=Russian Folk Belief|last=Ivanits, Linda J.|publisher=M.E. Sharpe|year=1992|isbn=978-0765630889|page=76}}</ref> हालाँकि प्रारंभिक स्लाव विद्या से पता चलता है कि सभी रुसाल्काओं की घटनाओं को पानी के कारण होने वाली मृत्यु से नहीं जोड़ा गया था।<ref name="Barber2013">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=abHEnOiPAmsC|title=The Dancing Goddesses: Folklore, Archaeology, and the Origins of European Dance|last=Elizabeth Wayland Barber|date=11 February 2013|publisher=W. W. Norton|isbn=978-0-393-08921-9|page=18|author-link=Elizabeth Wayland Barber|access-date=12 July 2015}}</ref> अधिकांश कहानियों में यह बताया गया है कि एक युवती की [[आत्मा]] जो नदी या झील के पास मर गई थी, उस [[जल मार्ग|जलमार्ग]] पर वापस आ जाती है। यह मृत्युपूर्व रुसाल्का हमेशा दुष्ट नहीं होती हैं, और अगर उनकी मौत का [[बदला]] लिया जाता है तो उन्हें शांति से मरने दिया जाएगा। हालाँकि उनका मुख्य उद्देश्य युवा पुरुषों को, उनके रूप या उनकी आवाज़ से आकर्षित करके, उक्त जलमार्ग की गहराई में ले जाना है, जहाँ वह अपने लंबे बालों से उनके पैरों को उलझा देती हैं और उन्हें डुबो देती हैं।{{उद्धरण आवश्यक}} उसका शरीर तुरंत बहुत फिसलन भरा हो जाता है और पीड़ित को सतह तक पहुँचने के लिए अपने शरीर से चिपकने नहीं देता। वह तब तक इंतजार करती जब तक कि पीड़ित डूब न जाए, या, कुछ अवसरों पर, उन्हें गुदगुदी करके मार देती, जैसा कि वह हँसती थी।<ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages\R\U\RusalkaIT.htm|title=Rusalka|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=12 July 2015}}</ref> कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि रुसाल्काएँ उन पुरुषों के स्वाद के अनुरूप अपना रूप बदल सकती हैं, जिनके साथ वे आकर्षित होने वाली हैं,{{उद्धरण आवश्यक}} हालाँकि रुसाल्का को आम तौर पर सार्वभौमिक सुंदरता का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है, इसलिए स्लाव संस्कृति में इसे अत्यधिक भयभीत करने वाला तथा सम्मान देने वाला माना जाता है। अधिकांश मान्यताओं में रुसाल्काओं के हमेशा ढीले बाल होते हैं, जिन्हें अविवाहित महिलाओं की स्लाविक परंपराओं से जोड़ा जा सकता है, जिनके बिना बालों वाले या ढीले बालों वाले बाल होते हैं जो एक बार शादी करने के बाद, कसकर ब्रेडेड होते हैं और एक हेडड्रेस के नीचे पहने जाते हैं।<ref>{{Cite journal|last=Rappoport|first=Phillippa|date=1999|title=If It Dries Out, It's No Good: Women, Hair and Rusalki Beliefs|url=https://journals.ku.edu/folklorica/article/download/3689/3532|journal=SEEFA Journal|issue=IV|page=59}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Dynda|first=Jiří|author-link=Jiří Dynda|date=2017|title=Rusalki: Anthropology of time, death, and sexuality in Slavic folklore*|url=https://ojs.zrc-sazu.si/sms/article/view/6662|journal=Studia Mythologica Slavic|volume=20|pages=83–109|doi=10.3986/sms.v20i0.6662|access-date=7 January 2023|doi-access=free}}</ref> व्लादिमीर दाल की व्याख्यात्मक शब्दकोष के अनुसार "खोदीत, काक रुसाल्का" ({{langx|ru|Ходит, как русалка|4=एक रुसाल्का की तरह चलती है}}) अभिव्यक्ति को गंदे बाल वाली लड़कियों पर लागू किया जाता है। रुसाल्का के बाल गोरे, काले, हरे या पूरी तरह से हरे हो सकते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IO_qBgAAQBAJ&q=Rusalka+northern+russia&pg=PR64|title=Russian Folk Belief|last=Ivanits|first=Linda J.|date=4 March 2015|publisher=Routledge|isbn=9781317460398|language=en}}</ref> == विविधताएँ == [[चित्र:Rusalka_Bilibin.jpg|अंगूठाकार|इवान बिलिबिन द्वारा ''रुसाल्का'', 1934]] जबकि लोककथाओं में अक्सर कहा जाता है कि रुसाल्काएँ पूरी तरह से पानी से बाहर नहीं खड़े हो सकते थे, कुछ काल्पनिक कृतियों में रुसाल्काओं के बारे में बताया गया है जो [[पेड़|पेड़ों]] पर चढ़ सकती थीं और [[संगीत|गा]] सकती थीं, केवल डूबे हुए [[पैर|पैरों]] के साथ [[घाट]] पर बैठ सकते थे और अपने बालों को कंघी कर सकते थे, या यहाँ तक ​​कि मैदान में अन्य रुसाल्काओं के साथ घेरा बनाकर [[नृत्य]] में शामिल हो सकते थे। ऐसी कहानियों की एक खास विशेषता इस तथ्य के इर्द-गिर्द घूमती है कि यह व्यवहार वर्ष की केवल कुछ अवधियों तक ही सीमित होगा, आमतौर पर [[ग्रीष्म ऋतु|गर्मियों]] में। === क्षेत्र-विशिष्ट === रुसाल्काओं से संबंधित विशिष्टताएँ अलग-अलग क्षेत्रों के बीच भिन्न थीं। अधिकांश कहानियों में वे पुरुषों के बिना रहती थीं। [[युक्रेन|यूक्रेन]] की कहानियों में उन्हें अक्सर [[पानी]] से जोड़ा जाता था। [[बेलारूस]] में वे [[जंगल]] और [[खेत|खेतों]] से जुड़ी हुई थीं। उन्हें आमतौर पर सुंदर नग्न महिलाओं के रूप में चित्रित किया जाता था, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उन्हें डरावनी और बालों से भरा होने के रूप में चित्रित किया जाता था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=fVQz3I4FCWUC&pg=PA29|title=Mother Russia: The Feminine Myth in Russian Culture|last=Joanna Hubbs|date=22 September 1993|publisher=Indiana University Press|isbn=978-0-253-11578-2|page=29|access-date=12 July 2015}}</ref> कहा जाता था कि वे पुरुषों को गुदगुदी कर मार देती थीं। कुछ रूसी मान्यताओं के अनुसार रुसाल्काएँ हरे बालों और लंबी बाहों वाली बहुत पीली छोटी लड़कियों की तरह दिखती थी। अन्य मान्यताओं में उन्हें हल्के भूरे बालों वाली नग्न लड़कियों के रूप में वर्णित किया गया था। [[पोलैंड]] और [[चेक गणराज्य]] में पानी रुसाल्काएँ छोटे और गोरे बालों वाली थीं जबकि जंगली रुसाल्काएँ अधिक [[वयस्क]] दिखती थीं और उनके काले बाल थे। लेकिन दोनों ही मामलों में यदि कोई उन्हें करीब से देखता है, तो उनके बाल हरे हो जाते हैं, और चेहरे विकृत हो जाते हैं।<ref>{{Cite book|title=Gry i zabawy różnych stanów w kraju całym...|last=Gołębiowski|first=Łukasz|year=1831|pages=279–280|trans-title=Games and Plays of Various Estates...}}</ref> वे अपने पीड़ितों को [[गुदगुदी]] करके मार डालतीं या उन्हें एक [[उन्माद|उन्मादी]] नृत्य में भाग लेने के लिए मजबूर करती थीं।<ref>{{Cite book|title=Encyklopedja Powszechna|year=1866|location=Warsaw|pages=531–532}}</ref> पोलिश लोककथाओं में रुसाल्का शब्द बोगिंका, डीज़ोवोज़ोना और विभिन्न अन्य प्राणियों को भी संबोधित कर सकता है।<ref>{{Cite book|title=Religia Słowian i jej upadek, w.VI-XII|last=Łowmiański|first=Henryk|year=1986|pages=227|trans-title=The Religion of the Slavs and its Decline from the Sixth to the Twelfth Centuries}}</ref> == रुसाल्का सप्ताह == {{Slavic mythology}}माना जाता है कि जून की शुरुआत में ''रुसाल्का नेदेल्या'' ({{langx|ru|Русальная неделя|4=रुसाल्का सप्ताह|links=सिरिलिक|label=सिरिलिक}}) के दौरान रुसाल्काएँ सबसे खतरनाक थीं। माना जाता था कि इस समय रात में [[भूर्ज]] और विलो के पेड़ों की [[शाखा|शाखाओं]] पर झूलने के लिए वे पानी से बाहर आती हैं। इस सप्ताह के दौरान तैरना सख्ती से मना किया जाता था, ऐसा न हो कि जलपरियाँ एक तैराक को नदी के तल तक घसीट लें। रुसलनाया के उत्सव की एक आम विशेषता सप्ताह के अंत में रुसाल्काओं का अनुष्ठान निर्वासन या दफन था, जो 1930 के दशक तक रूस, बेलारूस और यूक्रेन में मनोरंजन के रूप में बना रहा। == जानी-मानी रुसाल्काएँ == * '''दाना।''' रूसी लोककथा में उल्लिखित एक वोदानित्सा। उसकी दुष्ट सौतेली माँ को उसकी सुंदरता से जलन होती थी। एक बार वे पानी की मिल के पास तैरने गए, और सौतेली माँ ने दाना को डुबो दिया। दाना का एक दूल्हा था, एक जवान क्नियाज़ वह अपनी दिवंगत दुल्हन के लिए तरसता था, और अक्सर उसकी मृत्यु के स्थान पर आता था। एक दिन वह देर रात तक रहा और देखा कि कितनी सुंदर लड़कियाँ मिल के पहियों पर कूदने लगीं, हंसने लगीं और अपने लंबे हरे बालों को सफेद कंघी से जोड़ रही थीं। दान को उनके बीच देखकर, नियाज़ उसके पास दौड़ा, लेकिन रुसाल्का पहले ही पानी में कूद चुका था। नियाज़ उसके पीछे कूद गया, लेकिन उसके बालों में उलझ गया, पानी के नीचे महल में गिर गया। दाना ने उसे कहा कि अगर वह वापस आना चाहता है तो जल्द से जल्द बाहर निकल जाए, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी और वह मर जाएगा। दूल्हे ने जवाब दिया कि वह उसके बिना नहीं रह सकता और कहीं नहीं जाएगा। दाना ने उसे चूमा, जिसके बाद वह उस नदी का जल राजा बन गया।<ref name="folktale">{{Cite web|url=https://sites.google.com/site/russkieskazki/home/russkie/dana-i-knaz|title=Дана и Князь|website=Encyclopedia of Russian Fairy Tale|language=ru|trans-title=Dana and the Knyaz}}</ref><ref name="Vodyanitsa">{{Cite web|url=https://teremok.in/Mifologija/slav_predanija/vodjanitsa.htm|title=Водяница|date=12 April 2019|website=Теремок|language=ru|trans-title=Vodyanitsa}}</ref> * '''कोस्त्रोमा।''' एक वसंत-गर्मी अनुष्ठान चरित्र, साथ ही रुसाल्का और मावका से जुड़ी एक प्रजनन देवी। मिथक के अनुसार, जब उन्हें पता चला कि उनका नवविवाहित पति कुपालो उनका भाई है, तो उन्होंने खुद को एक झील में डुबो दिया। उसने उससे मिलने वाले हर आदमी को पानी के रसातल में लुभाया। बाद में, देवताओं ने रुसाल्का पर दया की, और उसे और कुपालो को एक ही फूल में बदल दिया। * '''मरीना।''' पुरानी सिम्बर्स्क किंवदंती की एक युवा विधवा, जिसने इवान कुरचावी के प्यार से खुद को [[वोल्गा नदी|वोल्गा]] नदी में डुबो दिया और एक रुसाल्का बन गई। कहा जाता था कि जब वह तैरती थी तो वह हंस का रूप ले पाती थी। उन्हें वोल्नोक नामक एक वोडायनॉय के साथ नावों को पलटते हुए भी देखा गया था। मरीना अक्सर किनारे पर बैठती थी, दुख से अपने प्रेमी के घर को देखती थी, जिसने दूसरी लड़की से शादी की थी। नतीजतन, वह इवान को आकर्षित करने और उसे पानी के नीचे ले जाने में कामयाब रही, जहां वे खुशी से रहने लगे।<ref>{{Cite book|url={{Google books|xWZaBAAAQBAJ|plainurl=yes}}|title=Evil Dead and Pledged Dead|last=Dmitriy Zelenin|date=2014|publisher=Aegitas|isbn=9785000644188|pages=|language=ru}}</ref><ref>{{Cite book|url={{Google books|AuVtUW4JlecC|plainurl=yes}}|title=Myths and Legends of the Slavs|last=Artiomov Vladislav Vladimirovich|date=2012|publisher=OLMA Media Group|isbn=9785373046572|pages=210|language=ru}}</ref> * '''मोर्याना।''' समुद्री वोडयानित्सा और मोर्स्कॉय ज़ार की बेटी। उन्हें आमतौर पर एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर, अक्सर समुद्र के फोम की तरह दिखने वाले विखरते बालों वाली बहुत लंबी लड़की के रूप में वर्णित किया जाता था। अधिकांश समय वह मछली का रूप लेते हुए पानी में गहराई तक तैरती थी और केवल शाम को ही किनारे पर आती थी। उन्हें समुद्री हवाओं की शासक भी माना जाता था। वह अच्छी या बुरी हो सकती है, पहले मामले में तूफानों को समाप्त करती है और दूसरे में उन्हें पैदा करती है। कभी-कभी सामान्य रूप से वोडायनिट्सी की समुद्री प्रजातियों का नाम उनके नाम पर रखा जाता था। == रुसाल्काओं के आधुनिक चित्रण == आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में रुसाल्काओं के प्रतिनिधित्व के बारे में लोककथाकार नाताली कोनोनेंको कहतीं हैं, "वर्तमान में प्रमुख उसे एक [[जलपरी]] की तरह प्रस्तुत किया जाता है, बस उसे मछली की पूंछ के बजाय पैर होते हैं...रुसाल्का का एक मोहक या बहकाने वाली महिला के रूप में वर्तमान दृष्टिकोण शायद लिखित साहित्य से प्रभावित था। अतीत में उसकी छवि अधिक जटिल थी और वह सामोदीवा की तरह प्रकृति की आत्मा से अधिक निकटता से मिलती-जुलती थी, जो केवल पानी के पास ही नहीं, बल्कि खेतों, जंगलों और पहाड़ों में भी पाई जाती थी।" === रुसाल्काओं की विशेषता वाले उल्लेखनीय कार्यों की सूची === * १८२९ - ''रुसाल्का'', ओरेस्त सोमोव की एक लघुकथा * १८३१ - ''रुसाल्का'', [[मिखाइल लर्मोन्टोव|मिखाइल लेर्मोंतोव]] की एक कविता। * १८५६ - ''रुसाल्का'', आलेक्सांदर दार्गोमिझस्की द्वारा एक ओपेरा। * १८९५ - ''रुसाल्का'', हेनरी दूपार्क द्वारा एक अधूरा ओपेरा। * १९०१ - ''रुसाल्का'', आंतोनीन द्वोराक द्वारा एक ओपेरा। * १९०२ - रूस के युद्धपोत रुसाल्का के डूबने की वर्षगांठ के अवसर पर [[ताल्लिन]] में रुसाल्का स्मृति का निर्माण किया गया। कांस्य मूर्तिकला में एक परी को अपने रूढ़िवादी क्रॉस को जहाज के मलबे की ओर इंगित करते हुए दर्शाया गया है। * १९०८ - ''सु अनासी'' ({{Lang|tt-cyrl|Су Анасыя|italic=yes}}, अर्थात जल माँ), रूसी अनुवाद में वोद्यानाया, [[तातार लोग|तातार]] कवि जबदुल्लाह तुचाय की एक कविता। * १९३० - अपनी कविता रुस केन निश्त ओंतश्लोफन वेर्न ([[यिद्दी भाषा|यिद्दी]]: {{Lang|yi|רוס קען נישט אָנטשלאָפֿן ווערן|rtl=yes|italic=yes}}, अर्थात ''रूस के लोगों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता'') में यिद्दी कवि इत्सिक मांगर ने २०वीं शताब्दी की शुरुआत में रूस में [[बाइबिल]] की रूथ की फिर से कल्पना की। नाओमी के जाने से एक रात पहले रूथ ने फैसला किया कि अगर उसकी सास उसे अपने साथ नहीं ले जाती है, तो वह खुद को नदी में फेंक देगी और एक रुसाल्का बन जाएगी। * १९४३ - मिखाइल लेर्मोंतोव के गाथागीत पर आधारित निकोलाई मेद्तनर का तीसरा पियानो कॉन्सर्टो। * १९७९ - पॉल एंडरसन द्वारा ''द मर्मान्स चिल्ड्रन'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Merman's Children''}}, अर्थात ''जलमानुष के बच्चे'') में मुख्य पात्रों में से एक के प्रेमी के रूप में एक रुसाल्का था। * १९८९- ''रुसाल्का'', एक काल्पनिक उपन्यास (कैरोलिन जेनिस चेरिह द्वारा उपन्यासों की रुसाल्का त्रयी का हिस्सा), इवेश्का नामक एक रुसाल्का के इर्द-गिर्द घूमता है। * १९९० - गाय गेवरियल काय द्वारा टिगाना, जिसमें रिसेल्का, अलौकिक प्राणी, जो भविष्य का सुझाव देता है, रुसाल्का से प्रेरित है। * १९९१ - स्टीफन गैलेग़र का द बोट हाउस ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Boat House''}}), एक उपन्यास जिसमें एक रुसाल्का अपनी मातृभूमि से भाग जाती है और अंग्रेजी झीलों में बसने का प्रयास करती है. * १९९३ - आंद्रे सापकोव्स्की द्वारा ''[[द विचर (धारावाहिक)|द विचर]]'' नामक एक पोलिश उपन्यास शृंखला की ''आखिरी इच्छा'', जिसमें गेराल्ट का संक्षिप्त रूप से मानना है कि उन्हें एक रुसाल्का का सामना करना पड़ा है जो एक शापित आदमी के प्यार में पड़ गया है, हालांकि, रुसाल्का एक ब्रुक्सा निकली। * १९९३ - ''क्वेस्ट फॉर ग्लोरीः शैडोज़ ऑफ़ डार्कनेस (''{{Lang-en|''Quest for Glory: Shadows of Darkness''}}'')'', जो स्लाव पौराणिक कथाओं पर आधारित है, में एक रुसाल्का पलादीन चरित्र है जिसके पास उसकी हत्या का बदला लेने और उसे मृत्यु के बाद के जीवन में आगे बढ़ने का विकल्प है। * १९९६ - ''रुसाल्का'', आलेक्सांद्र पेत्रोव द्वारा निर्देशित एक लघु फिल्म और उनकी पेंट-ऑन-ग्लास एनीमेशन तकनीक का उपयोग करके एनिमेटेड। * १९९६ - कैटलिन रेबेका किरनान की एक लघु कहानी "टू दिस वॉटर ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''To This Water''}}, अर्थात ''इस पानी तक'', जॉन्सटाउन, पेनसिल्वेनिया १८८९) "। * १९९९-२०१५ - अमेरिकी कंप्यूटर गेम श्रृंखला हीरोज़ ऑफ माइट एंड मैजिक ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Heroes of Might and Magic''}}) के कुछ स्लाविक स्थानीयकरणों में विभिन्न संस्थाओं का नाम रुसाल्का के नाम पर रखा गया है। श्रृंखला के तीसरे, पांचवें और सातवें खेलों के पोलिश स्थानीयकरणों के साथ-साथ माइट और मैजिक VII में, "स्प्रिट्स" का नाम बदलकर "रुसाल्का" कर दिया गया है, जबकि तीसरे, चौथे, छठे और सातवें खेल के रूसी स्थानीयकरणों में, साथ ही माइट ऐंड मैजिक टेन में "जलपरियों" का नाम फिर से "रुसालका" कर दिया जाता है। * २००४ - ओमुत", रुसाल्काओं के बारे में रूसी लोक गीतों पर आधारित एथनिका म्यूजिक प्रोजेक्ट द्वारा एक अवधारणा एथनो-एंबिएंट-डब एल्बम। * २००५ - ''द रुसाल्का साइकिलः सॉन्ग्स बिटवीन द वर्ल्ड्स'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Rusalka Cycle: Songs Between the Worlds''}}' अर्थात ''रुसाल्का चक्र: शृष्टियों के बीच के गीत'') कैलिफोर्निया स्थित महिलाओं के मुखर समूह किटका द्वारा एक प्रदर्शन टुकड़ा और सीडी है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kitka.org/shop/the-rusalka-cycle-songs-between-the-worlds-cd|title=The Rusalka Cycle – Songs Between the Worlds}}</ref> * २००६ - "अर्चिन्स, वाइल स्विमिंग", ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Urchins, While Swimming''}}) कैथरीन मोर्गन वैलेंट की एक लघु कहानी, जो क्लार्क्सवर्ल्ड पत्रिका में प्रकाशित हुई। * २००६ - ट्रेडिंग कार्ड गेम मैजिकः द गैदरिंग ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Magic: The Gathering''}}) में जीवों का एक चक्र जिसे रुसाल्का कहा जाता है, गिल्डपैक्ट विस्तार में मुद्रित किया गया है। * २००८ - वीडियो गेम कासलवेनिया: ऑर्डर ऑफ एक्लेसिया (''Castlevania: order of Ecclesia'') में, एक रुसाल्का पाँचवें मालिक के रूप में दिखाई देता है, जिसे एक जलीय राक्षस के रूप में दिखाया गया है। * २०१० - रुसाल्का क्रोएशियाई ब्लैक/लोक धातु बैंड स्त्रीबोग के एक गीत का नाम है। * २०१२ - रुसाल्का निन्टेंडो ३डीएस वीडियो गेम ''ब्रेवली डिफ़ॉल्ट'' में लड़े गए एक पानी अप्सरा जैसे बॉस का नाम है। * २०१३ - रुसाल्काओं एक्शन रोल-प्लेइंग [[वीडियो खेल|वीडियो गेम]] ''द इनक्रेडिबल एडवेंचर्स ऑफ फ्वान हेलसिंग'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Incredible Adventures of Van Helsing''}}) में राक्षसों के रूप में दिखाई दिए। * २०१३ - क्रिस्टोफर बुएह्लमान के ''द नेक्रोमैंसर हाउस'' में, नायक का एक शक्तिशाली रुसाल्का के साथ लंबे समय से संबंध है जो रूसी जादूगरों के खिलाफ युद्ध शुरू करता है और सहायता करता है। * २०१५ - रुसाल्का वीडियो गेम ''एक्सिओम वर्ज'' में कई प्राणियों का नाम है। इन-गेम डायलॉग में, एक रुसाल्का इस पदनाम का अनुवाद "पानी की मशीन" के रूप में करता है। * २०१६ - ''द बुक ऑफ स्पेक्यूलेशनः ए नॉवेल'', एरिका स्वाइलर की पहली उपन्यास, जिसमें यात्रा सर्कस में रुसाल्का पात्रों को दिखाया गया है। * २०१७ - रुसाल्का पिक्चर्स, एक ब्रिटिश स्वतंत्र फीचर फिल्म निर्माण कंपनी। * २०१७ -कैथरीन आर्डेन के पहले उपन्यास ''भालू और कोयल'' में नायक, वास्या, एक झील में रहने वाले एक रुसाल्का से दोस्ती करती है। * २०१८ - डॉन निग्रो का नाटक "रुसाल्का" लिदिया नाम की एक लड़की से उसके दोस्त के लापता होने के बारे में पूछताछ के बारे में है जो एक रुसाल्का थी। * २०१८ - ''द मरमेडः लेक ऑफ द डेड'', एक रूसाल्का के बारे में एक डरावनी फिल्म है जो एक आदमी के प्यार में पड़ जाती है और उस पर अभिशाप डालती है। * २०१८ - रुसाल्काओं ने ''द सरफेस ब्रेक्स'' में अभिनय किया, लुईस ओ 'नील का एक जवान वयस्क उपन्यास और [[हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन|हांस क्रिश्चियन एंडरसन]] की १८५७ की कहानी "[[द लिटिल मर्मेड|द लिटल मरमेड]]" की एक रीटेलिंग। * २०१८ - द डिसेंबरिस्ट्स एल्बम ''आई विल बी योर गर्ल'' पर "रुसाल्का, रुसाल्का/वाइल्ड रश" गीत के पहले भाग में, गीत के बोल एक रुसाल्का द्वारा पानी में लुभाने का वर्णन करते हैं। इसके अतिरिक्त, एल्बम बॉक्स सेट में बैंड के खेल इलिमत के लिए एक रुसाल्का लुमेनरी कार्ड है। * २०१९ - केट क्विन के उपन्यास ''द हंट्रेस'' में पूरे कथानक में रुसाल्काओं का विभिन्न तरीकों से उपयोग किया गया है। * २०२१ - रुज़ाल्का ({{Lang-da|RUZALKA}}), [[कोपेनहेगन]] स्थित [[कोरियोग्राफर]] थ्येरज़ा बालाय का एक कोरियोग्राफिक टुकड़ा। * २०२३ - यूक्रेनी इलेक्ट्रो-लोक बैंड गो_आ का गीत ''रुसाल्कोचकि'' ({{Lang-uk|''Русалочки''}}) रुसाल्काओं के साथ उनके जंगल में वापस जाने के एक अनुष्ठान से प्रेरित है। * २०२३ - चीनी वीडियो गेम ''भविष्य में वापसी: १९९९'' ({{भाषा-चीनी|c=''重返未来: 1999''|p=}}) में खेल में खेलने योग्य पात्रों में से एक विला नाम का एक रुसाल्का है (चरित्र २०२४ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किया गया है) । * २०२४ - आंतोनीन दवोझाक का ओपेरा ''रुसाल्का'' [[एडम सैंडलर]] अभिनीत फिल्म स्पेसमैन में स्टारशिप पर खेल रहा है। उनका चरित्र (याकूब प्रोचाज़का) बाद में अपनी पत्नी को एक रुसाल्का के रूप में कल्पना करता है। * २०२४ - रुसाल्काओं को द्वितीय विश्व युद्ध में यूक्रेन में स्थापित एक लघु कहानी में संदर्भित किया गया है, जिसे पीटर वाइज द्वारा "द लेक दैट नेवर फ्रीज" कहा जाता है। यह डिस्टर्बिंग द वाटर में दिखाई देता है, जो मछली, मछली पकड़ने और मछली पकड़ने के स्थानों के आसपास की मूल भूत कहानियों का संग्रह है।<ref> Wise, Peter (2024). Wafting Lines Press {{ISBN|978-1-0687155-1-8}}</ref> {{Slavic mythology}} == References == {{Reflist}} <references responsive="1"></references> == स्रोत == * हिल्टन, एलिसन। ''रूसी लोक कला''. इंडियाना यूनिवर्सिटी प्रेस, 1995.  {{ISBN|0-253-32753-9}}ISBN [[Special:BookSources/0-253-32753-9|0-253-32753-9]].&nbsp; * डी.के. ज़ेलीन। रूस के वैज्ञानिकों ने रूस के लोगों को एक दूसरे से अलग करने की सलाह दी है। Moskva: अंत में. 1995. == आगे पढ़ें == * {{Cite encyclopedia|last=Chernykh|first=P. Ya.|encyclopedia=Historical and etymological dictionary of the modern Russian language|date=1999|location=Moscow|publisher=Русский язык}} * {{Cite encyclopedia|last=Fasmer|first=M.|encyclopedia=Etymological dictionary of the Russian language|date=1987|location=Moscow|publisher=Progress}} * {{Cite book|last=Levkievskaya|first=E. E.|date=2000|publisher=Astrel|isbn=5-271-00676-X|location=Moscow|script-title=ru:Мифы русского народа|trans-title=Myths of the Russian People}} == बाहरी लिंक == * {{Commons category inline}} {{Reflist}} <references responsive="1"></references> mc1izgncqjp3aye3morq3okip9l9zlx 6536696 6536695 2026-04-05T20:08:54Z Pur 0 0 484428 6536696 wikitext text/x-wiki [[चित्र:Iwan_Nikolajewitsch_Kramskoj_002.jpg|अंगूठाकार|300x300पिक्सेल|इवान क्राम्स्कोई, ''रुसाल्काएँ'' (१८७१) ]] स्लाव लोककथाओं में '''रुसाल्का''' ({{भाषा-रूसी|русалка}}, {{भाषा-पोलिश|rusalka}}) एक महिला प्राणी है जो अक्सर मानव जाति के प्रति दुर्भावनापूर्ण होती है और उसे अक्सर पानी से संबंधित किया जाता है। [[यूरोप]] के अन्य हिस्सों में इसके समकक्ष हैं, जैसे कि फ्रेंच मेलुसिन और जर्मनिक निक्सी लोककथाकारों ने इकाई के लिए विभिन्न प्रकार की उत्पत्ति का प्रस्ताव दिया है, जिसमें वे मूल रूप से स्लाव मूर्तिपूजा से उत्पन्न हो सकते हैं, जहां उन्हें परोपकारी आत्माओं के रूप में देखा जा सकता है। रुसाल्काएँ आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में विभिन्न प्रकार के मीडिया में दिखाई देती है, विशेष रूप से स्लाव भाषा बोलने वाले देशों में जहां वे अक्सर [[जलपरी]] की अवधारणा से मिलते-जुलते हैं। उत्तर रूस में रुसाल्का को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे कि वोद्यानीत्सा<ref name="mifolog">{{Cite web|url=http://mifolog.ru/mythology/item/f00/s04/e0004002/index.shtml|title=Русалки (купалки, водяницы, лоскотухи)|website=Mythological encyclopedia|language=ru|trans-title=Rusalki (kupalki, vodyanitsy, loskotukhi)}}</ref> या वोद्यानीखा<ref name="Gudkova E.">{{Cite web|url=https://www.culture.ru/s/vopros/rusalki/|title=Как в русском фольклоре появились русалки?|website=Culture.RF|language=ru|trans-title=How did rusalki appear in Russian folklore}}</ref> ({{Langx|ru|водяница, водяниха}}; अर्थात ''पानी वाली'' या ''पानी की कन्या''), कुपाल्का<ref name="mifolog" /> ({{भाषा-रूसी|купалка}}; अर्थात ''नहाने वाली''), शुतोवका<ref name="Gudkova E." /> ({{भाषा-रूसी|шутовка}}; अर्थात ''मज़ाक करने वाली'') और लोस्कोतुखा<ref name="mifolog" /> या श्चेकोतुखा<ref name="Gudkova E." /> ({{भाषा-रूसी|лоскотуха, щекотуха}}; अर्थात ''गुदगुदी करने वाली'')। यूक्रेन में रुसाल्का को मावका ({{Lang-uk|''мавка''}}) कहते थे। ये नाम २०वीं सदी तक प्रचलित थे, जिसके बाद औपचारिक रूप से अधिकतर लोगों ने रुसाल्का नाम को स्वीकार कर लिया।<ref name="Gudkova E." /> == व्युत्पत्ति == ''रुसाल्का'' शब्द "रुसालिया" ({{langx|ru|рѹсалиѩ|links=yes|label=गिरजाघरी स्लाविक|italic=yes}}, {{langx|orv|русалиꙗ|label=पुराना पूर्व स्लाव|italic=yes}} {{Lang-bg|рussaлия}}) से निकला है, जो बाइज़ेंटाइन यूनानी "रोउसालिया" ({{भाषा-यूनानी|ῥουσάλια}}) के माध्यम से स्लाव भाषाओं में प्रवेश किया।<ref name="endemicgreekrousalia">{{Cite web|url=http://greek_greek.enacademic.com/150108/%CF%81%CE%BF%CF%85%CF%83%CE%AC%CE%BB%CE%B9%CE%B1|title=ρουσάλια|website=Enacademic.com – Greek Dictionary|language=el|trans-title=rousalia}}</ref> लंबे समय से चली आ रही, संभवतः पूर्व-ईसाई, वार्षिक परंपराओं के परिणामस्वरूप वर्ष का वह समय आत्माओं (नावकी, मावकी) के साथ जुड़ा हुआ था, जिसे बाद में छुट्टी के लिए नामित किया गया था।<ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages%5CR%5CO%5CRosalia.htm|title=Rosalia|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=2020-09-08}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages\R\U\RusalkaIT.htm|title=Rusalka|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=2020-09-08}}</ref>{{Sfn|Fasmer|1987|p=520}}{{Sfn|Chernykh|1999|p=128}}{{Sfn|Levkievskaya|2000|p=234}} == उत्पत्ति और रूप == [[चित्र:Witold_Pruszkowski_-_Water_Nymphs_-_MNK_II-a-5_-_National_Museum_Kraków.jpg|अंगूठाकार|वितोल्द प्रुश्कोव्स्की की ''रुसाल्काएँ'', १८७७]] व्लादिमीर प्रोप के अनुसार मूल ''रुसाल्का'' [[पेगन|मूर्तिपूजक]] स्लाव लोगों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक उपनाम था जिन्होंने उन्हें प्रजनन क्षमता से जोड़ा और १९वीं शताब्दी से पहले रुसाल्काओं को बुराई नहीं माना। वे वसंत ऋतु में पानी से बाहर निकलकर खेतों में जीवनदायक नमी पहुँचाने के लिए आती थीं और इस तरह फसलों को पोषित करने में मदद करती थीं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-s36xYcqG1EC&pg=PA78|title=Russian Folk Belief|last=Linda J. Ivanits|date=15 February 1989|publisher=M.E. Sharpe|isbn=978-0-7656-3088-9|pages=78–81|access-date=12 July 2015}}</ref><ref name="Barber2013">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=abHEnOiPAmsC|title=The Dancing Goddesses: Folklore, Archaeology, and the Origins of European Dance|last=Elizabeth Wayland Barber|date=11 February 2013|publisher=W. W. Norton|isbn=978-0-393-08921-9|page=18|author-link=Elizabeth Wayland Barber|access-date=12 July 2015}}</ref> १९वीं सदी के संस्करणों में रुसाल्काएँ एक शांत, खतरनाक प्राणी थीं जो मरने के बाद अशुद्ध [[आत्मा|आत्माएँ]] बन गईं। दिमित्री ज़ेलेनिन के अनुसार युवा [[महिला|महिलाएँ]] जिन्होंने या तो एक दुखी [[शादी]] के कारण डूबकर [[आत्महत्या]] कर ली (उन्हें अपने प्रेमियों द्वारा अपमानित किया गया होगा या उनके बहुत बड़े पतियों द्वारा [[दुर्व्यवहार]] और परेशान किया गया होगा) या जो उनकी इच्छा के खिलाफ हिंसक रूप से डूब गईं (विशेष रूप से अवांछित बच्चों के साथ [[गर्भावस्था|गर्भवती]] होने के बाद) ।<ref name="Ivanits">Zelenin, D.K, cited in {{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-s36xYcqG1EC&pg=PA76|title=Russian Folk Belief|last=Ivanits, Linda J.|publisher=M.E. Sharpe|year=1992|isbn=978-0765630889|page=76}}</ref> हालाँकि प्रारंभिक स्लाव विद्या से पता चलता है कि सभी रुसाल्काओं की घटनाओं को पानी के कारण होने वाली मृत्यु से नहीं जोड़ा गया था।<ref name="Barber2013">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=abHEnOiPAmsC|title=The Dancing Goddesses: Folklore, Archaeology, and the Origins of European Dance|last=Elizabeth Wayland Barber|date=11 February 2013|publisher=W. W. Norton|isbn=978-0-393-08921-9|page=18|author-link=Elizabeth Wayland Barber|access-date=12 July 2015}}</ref> अधिकांश कहानियों में यह बताया गया है कि एक युवती की [[आत्मा]] जो नदी या झील के पास मर गई थी, उस [[जल मार्ग|जलमार्ग]] पर वापस आ जाती है। यह मृत्युपूर्व रुसाल्का हमेशा दुष्ट नहीं होती हैं, और अगर उनकी मौत का [[बदला]] लिया जाता है तो उन्हें शांति से मरने दिया जाएगा। हालाँकि उनका मुख्य उद्देश्य युवा पुरुषों को, उनके रूप या उनकी आवाज़ से आकर्षित करके, उक्त जलमार्ग की गहराई में ले जाना है, जहाँ वह अपने लंबे बालों से उनके पैरों को उलझा देती हैं और उन्हें डुबो देती हैं।{{उद्धरण आवश्यक}} उसका शरीर तुरंत बहुत फिसलन भरा हो जाता है और पीड़ित को सतह तक पहुँचने के लिए अपने शरीर से चिपकने नहीं देता। वह तब तक इंतजार करती जब तक कि पीड़ित डूब न जाए, या, कुछ अवसरों पर, उन्हें गुदगुदी करके मार देती, जैसा कि वह हँसती थी।<ref>{{Cite web|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?linkpath=pages\R\U\RusalkaIT.htm|title=Rusalka|website=Internet [[Encyclopedia of Ukraine]], Canadian Institute of Ukrainian Studies|publisher=[[University of Toronto Press]]|access-date=12 July 2015}}</ref> कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि रुसाल्काएँ उन पुरुषों के स्वाद के अनुरूप अपना रूप बदल सकती हैं, जिनके साथ वे आकर्षित होने वाली हैं,{{उद्धरण आवश्यक}} हालाँकि रुसाल्का को आम तौर पर सार्वभौमिक सुंदरता का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है, इसलिए स्लाव संस्कृति में इसे अत्यधिक भयभीत करने वाला तथा सम्मान देने वाला माना जाता है। अधिकांश मान्यताओं में रुसाल्काओं के हमेशा ढीले बाल होते हैं, जिन्हें अविवाहित महिलाओं की स्लाविक परंपराओं से जोड़ा जा सकता है, जिनके बिना बालों वाले या ढीले बालों वाले बाल होते हैं जो एक बार शादी करने के बाद, कसकर ब्रेडेड होते हैं और एक हेडड्रेस के नीचे पहने जाते हैं।<ref>{{Cite journal|last=Rappoport|first=Phillippa|date=1999|title=If It Dries Out, It's No Good: Women, Hair and Rusalki Beliefs|url=https://journals.ku.edu/folklorica/article/download/3689/3532|journal=SEEFA Journal|issue=IV|page=59}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Dynda|first=Jiří|author-link=Jiří Dynda|date=2017|title=Rusalki: Anthropology of time, death, and sexuality in Slavic folklore*|url=https://ojs.zrc-sazu.si/sms/article/view/6662|journal=Studia Mythologica Slavic|volume=20|pages=83–109|doi=10.3986/sms.v20i0.6662|access-date=7 January 2023|doi-access=free}}</ref> व्लादिमीर दाल की व्याख्यात्मक शब्दकोष के अनुसार "खोदीत, काक रुसाल्का" ({{langx|ru|Ходит, как русалка|4=एक रुसाल्का की तरह चलती है}}) अभिव्यक्ति को गंदे बाल वाली लड़कियों पर लागू किया जाता है। रुसाल्का के बाल गोरे, काले, हरे या पूरी तरह से हरे हो सकते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IO_qBgAAQBAJ&q=Rusalka+northern+russia&pg=PR64|title=Russian Folk Belief|last=Ivanits|first=Linda J.|date=4 March 2015|publisher=Routledge|isbn=9781317460398|language=en}}</ref> == विविधताएँ == [[चित्र:Rusalka_Bilibin.jpg|अंगूठाकार|इवान बिलिबिन द्वारा ''रुसाल्का'', 1934]] जबकि लोककथाओं में अक्सर कहा जाता है कि रुसाल्काएँ पूरी तरह से पानी से बाहर नहीं खड़े हो सकते थे, कुछ काल्पनिक कृतियों में रुसाल्काओं के बारे में बताया गया है जो [[पेड़|पेड़ों]] पर चढ़ सकती थीं और [[संगीत|गा]] सकती थीं, केवल डूबे हुए [[पैर|पैरों]] के साथ [[घाट]] पर बैठ सकते थे और अपने बालों को कंघी कर सकते थे, या यहाँ तक ​​कि मैदान में अन्य रुसाल्काओं के साथ घेरा बनाकर [[नृत्य]] में शामिल हो सकते थे। ऐसी कहानियों की एक खास विशेषता इस तथ्य के इर्द-गिर्द घूमती है कि यह व्यवहार वर्ष की केवल कुछ अवधियों तक ही सीमित होगा, आमतौर पर [[ग्रीष्म ऋतु|गर्मियों]] में। === क्षेत्र-विशिष्ट === रुसाल्काओं से संबंधित विशिष्टताएँ अलग-अलग क्षेत्रों के बीच भिन्न थीं। अधिकांश कहानियों में वे पुरुषों के बिना रहती थीं। [[युक्रेन|यूक्रेन]] की कहानियों में उन्हें अक्सर [[पानी]] से जोड़ा जाता था। [[बेलारूस]] में वे [[जंगल]] और [[खेत|खेतों]] से जुड़ी हुई थीं। उन्हें आमतौर पर सुंदर नग्न महिलाओं के रूप में चित्रित किया जाता था, लेकिन कुछ क्षेत्रों में उन्हें डरावनी और बालों से भरा होने के रूप में चित्रित किया जाता था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=fVQz3I4FCWUC&pg=PA29|title=Mother Russia: The Feminine Myth in Russian Culture|last=Joanna Hubbs|date=22 September 1993|publisher=Indiana University Press|isbn=978-0-253-11578-2|page=29|access-date=12 July 2015}}</ref> कहा जाता था कि वे पुरुषों को गुदगुदी कर मार देती थीं। कुछ रूसी मान्यताओं के अनुसार रुसाल्काएँ हरे बालों और लंबी बाहों वाली बहुत पीली छोटी लड़कियों की तरह दिखती थी। अन्य मान्यताओं में उन्हें हल्के भूरे बालों वाली नग्न लड़कियों के रूप में वर्णित किया गया था। [[पोलैंड]] और [[चेक गणराज्य]] में पानी रुसाल्काएँ छोटे और गोरे बालों वाली थीं जबकि जंगली रुसाल्काएँ अधिक [[वयस्क]] दिखती थीं और उनके काले बाल थे। लेकिन दोनों ही मामलों में यदि कोई उन्हें करीब से देखता है, तो उनके बाल हरे हो जाते हैं, और चेहरे विकृत हो जाते हैं।<ref>{{Cite book|title=Gry i zabawy różnych stanów w kraju całym...|last=Gołębiowski|first=Łukasz|year=1831|pages=279–280|trans-title=Games and Plays of Various Estates...}}</ref> वे अपने पीड़ितों को [[गुदगुदी]] करके मार डालतीं या उन्हें एक [[उन्माद|उन्मादी]] नृत्य में भाग लेने के लिए मजबूर करती थीं।<ref>{{Cite book|title=Encyklopedja Powszechna|year=1866|location=Warsaw|pages=531–532}}</ref> पोलिश लोककथाओं में रुसाल्का शब्द बोगिंका, डीज़ोवोज़ोना और विभिन्न अन्य प्राणियों को भी संबोधित कर सकता है।<ref>{{Cite book|title=Religia Słowian i jej upadek, w.VI-XII|last=Łowmiański|first=Henryk|year=1986|pages=227|trans-title=The Religion of the Slavs and its Decline from the Sixth to the Twelfth Centuries}}</ref> == रुसाल्का सप्ताह == {{Slavic mythology}}माना जाता है कि जून की शुरुआत में ''रुसाल्का नेदेल्या'' ({{langx|ru|Русальная неделя|4=रुसाल्का सप्ताह|links=सिरिलिक|label=सिरिलिक}}) के दौरान रुसाल्काएँ सबसे खतरनाक थीं। माना जाता था कि इस समय रात में [[भूर्ज]] और विलो के पेड़ों की [[शाखा|शाखाओं]] पर झूलने के लिए वे पानी से बाहर आती हैं। इस सप्ताह के दौरान तैरना सख्ती से मना किया जाता था, ऐसा न हो कि जलपरियाँ एक तैराक को नदी के तल तक घसीट लें। रुसलनाया के उत्सव की एक आम विशेषता सप्ताह के अंत में रुसाल्काओं का अनुष्ठान निर्वासन या दफन था, जो 1930 के दशक तक रूस, बेलारूस और यूक्रेन में मनोरंजन के रूप में बना रहा। == जानी-मानी रुसाल्काएँ == * '''दाना।''' रूसी लोककथा में उल्लिखित एक वोदानित्सा। उसकी दुष्ट सौतेली माँ को उसकी सुंदरता से जलन होती थी। एक बार वे पानी की मिल के पास तैरने गए, और सौतेली माँ ने दाना को डुबो दिया। दाना का एक दूल्हा था, एक जवान क्नियाज़ वह अपनी दिवंगत दुल्हन के लिए तरसता था, और अक्सर उसकी मृत्यु के स्थान पर आता था। एक दिन वह देर रात तक रहा और देखा कि कितनी सुंदर लड़कियाँ मिल के पहियों पर कूदने लगीं, हंसने लगीं और अपने लंबे हरे बालों को सफेद कंघी से जोड़ रही थीं। दान को उनके बीच देखकर, नियाज़ उसके पास दौड़ा, लेकिन रुसाल्का पहले ही पानी में कूद चुका था। नियाज़ उसके पीछे कूद गया, लेकिन उसके बालों में उलझ गया, पानी के नीचे महल में गिर गया। दाना ने उसे कहा कि अगर वह वापस आना चाहता है तो जल्द से जल्द बाहर निकल जाए, अन्यथा बहुत देर हो जाएगी और वह मर जाएगा। दूल्हे ने जवाब दिया कि वह उसके बिना नहीं रह सकता और कहीं नहीं जाएगा। दाना ने उसे चूमा, जिसके बाद वह उस नदी का जल राजा बन गया।<ref name="folktale">{{Cite web|url=https://sites.google.com/site/russkieskazki/home/russkie/dana-i-knaz|title=Дана и Князь|website=Encyclopedia of Russian Fairy Tale|language=ru|trans-title=Dana and the Knyaz}}</ref><ref name="Vodyanitsa">{{Cite web|url=https://teremok.in/Mifologija/slav_predanija/vodjanitsa.htm|title=Водяница|date=12 April 2019|website=Теремок|language=ru|trans-title=Vodyanitsa}}</ref> * '''कोस्त्रोमा।''' एक वसंत-गर्मी अनुष्ठान चरित्र, साथ ही रुसाल्का और मावका से जुड़ी एक प्रजनन देवी। मिथक के अनुसार, जब उन्हें पता चला कि उनका नवविवाहित पति कुपालो उनका भाई है, तो उन्होंने खुद को एक झील में डुबो दिया। उसने उससे मिलने वाले हर आदमी को पानी के रसातल में लुभाया। बाद में देवताओं ने रुसाल्का पर दया की, और उसे और कुपालो को एक ही फूल में बदल दिया। * '''मरीना।''' पुरानी सिम्बर्स्क किंवदंती की एक युवा विधवा, जिसने इवान कुरचावी के प्यार से खुद को [[वोल्गा नदी|वोल्गा]] नदी में डुबो दिया और एक रुसाल्का बन गई। कहा जाता था कि जब वह तैरती थी तो वह हंस का रूप ले पाती थी। उन्हें वोल्नोक नामक एक वोडायनॉय के साथ नावों को पलटते हुए भी देखा गया था। मरीना अक्सर किनारे पर बैठती थी, दुख से अपने प्रेमी के घर को देखती थी, जिसने दूसरी लड़की से शादी की थी। नतीजतन, वह इवान को आकर्षित करने और उसे पानी के नीचे ले जाने में कामयाब रही, जहां वे खुशी से रहने लगे।<ref>{{Cite book|url={{Google books|xWZaBAAAQBAJ|plainurl=yes}}|title=Evil Dead and Pledged Dead|last=Dmitriy Zelenin|date=2014|publisher=Aegitas|isbn=9785000644188|pages=|language=ru}}</ref><ref>{{Cite book|url={{Google books|AuVtUW4JlecC|plainurl=yes}}|title=Myths and Legends of the Slavs|last=Artiomov Vladislav Vladimirovich|date=2012|publisher=OLMA Media Group|isbn=9785373046572|pages=210|language=ru}}</ref> * '''मोर्याना।''' समुद्री वोडयानित्सा और मोर्स्कॉय ज़ार की बेटी। उन्हें आमतौर पर एक अविश्वसनीय रूप से सुंदर, अक्सर समुद्र के फोम की तरह दिखने वाले विखरते बालों वाली बहुत लंबी लड़की के रूप में वर्णित किया जाता था। अधिकांश समय वह मछली का रूप लेते हुए पानी में गहराई तक तैरती थी और केवल शाम को ही किनारे पर आती थी। उन्हें समुद्री हवाओं की शासक भी माना जाता था। वह अच्छी या बुरी हो सकती है, पहले मामले में तूफानों को समाप्त करती है और दूसरे में उन्हें पैदा करती है। कभी-कभी सामान्य रूप से वोडायनिट्सी की समुद्री प्रजातियों का नाम उनके नाम पर रखा जाता था। == रुसाल्काओं के आधुनिक चित्रण == आधुनिक लोकप्रिय संस्कृति में रुसाल्काओं के प्रतिनिधित्व के बारे में लोककथाकार नाताली कोनोनेंको कहतीं हैं, "वर्तमान में प्रमुख उसे एक [[जलपरी]] की तरह प्रस्तुत किया जाता है, बस उसे मछली की पूंछ के बजाय पैर होते हैं...रुसाल्का का एक मोहक या बहकाने वाली महिला के रूप में वर्तमान दृष्टिकोण शायद लिखित साहित्य से प्रभावित था। अतीत में उसकी छवि अधिक जटिल थी और वह सामोदीवा की तरह प्रकृति की आत्मा से अधिक निकटता से मिलती-जुलती थी, जो केवल पानी के पास ही नहीं, बल्कि खेतों, जंगलों और पहाड़ों में भी पाई जाती थी।" === रुसाल्काओं की विशेषता वाले उल्लेखनीय कार्यों की सूची === * १८२९ - ''रुसाल्का'', ओरेस्त सोमोव की एक लघुकथा * १८३१ - ''रुसाल्का'', [[मिखाइल लर्मोन्टोव|मिखाइल लेर्मोंतोव]] की एक कविता। * १८५६ - ''रुसाल्का'', आलेक्सांदर दार्गोमिझस्की द्वारा एक ओपेरा। * १८९५ - ''रुसाल्का'', हेनरी दूपार्क द्वारा एक अधूरा ओपेरा। * १९०१ - ''रुसाल्का'', आंतोनीन द्वोराक द्वारा एक ओपेरा। * १९०२ - रूस के युद्धपोत रुसाल्का के डूबने की वर्षगांठ के अवसर पर [[ताल्लिन]] में रुसाल्का स्मृति का निर्माण किया गया। कांस्य मूर्तिकला में एक परी को अपने रूढ़िवादी क्रॉस को जहाज के मलबे की ओर इंगित करते हुए दर्शाया गया है। * १९०८ - ''सु अनासी'' ({{Lang|tt-cyrl|Су Анасыя|italic=yes}}, अर्थात जल माँ), रूसी अनुवाद में वोद्यानाया, [[तातार लोग|तातार]] कवि जबदुल्लाह तुचाय की एक कविता। * १९३० - अपनी कविता रुस केन निश्त ओंतश्लोफन वेर्न ([[यिद्दी भाषा|यिद्दी]]: {{Lang|yi|רוס קען נישט אָנטשלאָפֿן ווערן|rtl=yes|italic=yes}}, अर्थात ''रूस के लोगों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता'') में यिद्दी कवि इत्सिक मांगर ने २०वीं शताब्दी की शुरुआत में रूस में [[बाइबिल]] की रूथ की फिर से कल्पना की। नाओमी के जाने से एक रात पहले रूथ ने फैसला किया कि अगर उसकी सास उसे अपने साथ नहीं ले जाती है, तो वह खुद को नदी में फेंक देगी और एक रुसाल्का बन जाएगी। * १९४३ - मिखाइल लेर्मोंतोव के गाथागीत पर आधारित निकोलाई मेद्तनर का तीसरा पियानो कॉन्सर्टो। * १९७९ - पॉल एंडरसन द्वारा ''द मर्मान्स चिल्ड्रन'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Merman's Children''}}, अर्थात ''जलमानुष के बच्चे'') में मुख्य पात्रों में से एक के प्रेमी के रूप में एक रुसाल्का था। * १९८९- ''रुसाल्का'', एक काल्पनिक उपन्यास (कैरोलिन जेनिस चेरिह द्वारा उपन्यासों की रुसाल्का त्रयी का हिस्सा), इवेश्का नामक एक रुसाल्का के इर्द-गिर्द घूमता है। * १९९० - गाय गेवरियल काय द्वारा टिगाना, जिसमें रिसेल्का, अलौकिक प्राणी, जो भविष्य का सुझाव देता है, रुसाल्का से प्रेरित है। * १९९१ - स्टीफन गैलेग़र का द बोट हाउस ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Boat House''}}), एक उपन्यास जिसमें एक रुसाल्का अपनी मातृभूमि से भाग जाती है और अंग्रेजी झीलों में बसने का प्रयास करती है. * १९९३ - आंद्रे सापकोव्स्की द्वारा ''[[द विचर (धारावाहिक)|द विचर]]'' नामक एक पोलिश उपन्यास शृंखला की ''आखिरी इच्छा'', जिसमें गेराल्ट का संक्षिप्त रूप से मानना है कि उन्हें एक रुसाल्का का सामना करना पड़ा है जो एक शापित आदमी के प्यार में पड़ गया है, हालांकि, रुसाल्का एक ब्रुक्सा निकली। * १९९३ - ''क्वेस्ट फॉर ग्लोरीः शैडोज़ ऑफ़ डार्कनेस (''{{Lang-en|''Quest for Glory: Shadows of Darkness''}}'')'', जो स्लाव पौराणिक कथाओं पर आधारित है, में एक रुसाल्का पलादीन चरित्र है जिसके पास उसकी हत्या का बदला लेने और उसे मृत्यु के बाद के जीवन में आगे बढ़ने का विकल्प है। * १९९६ - ''रुसाल्का'', आलेक्सांद्र पेत्रोव द्वारा निर्देशित एक लघु फिल्म और उनकी पेंट-ऑन-ग्लास एनीमेशन तकनीक का उपयोग करके एनिमेटेड। * १९९६ - कैटलिन रेबेका किरनान की एक लघु कहानी "टू दिस वॉटर ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''To This Water''}}, अर्थात ''इस पानी तक'', जॉन्सटाउन, पेनसिल्वेनिया १८८९) "। * १९९९-२०१५ - अमेरिकी कंप्यूटर गेम श्रृंखला हीरोज़ ऑफ माइट एंड मैजिक ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Heroes of Might and Magic''}}) के कुछ स्लाविक स्थानीयकरणों में विभिन्न संस्थाओं का नाम रुसाल्का के नाम पर रखा गया है। श्रृंखला के तीसरे, पांचवें और सातवें खेलों के पोलिश स्थानीयकरणों के साथ-साथ माइट और मैजिक VII में "स्प्रिट्स" का नाम बदलकर "रुसाल्का" कर दिया गया है, जबकि तीसरे, चौथे, छठे और सातवें खेल के रूसी स्थानीयकरणों में साथ ही माइट ऐंड मैजिक टेन में "जलपरियों" का नाम फिर से "रुसालका" कर दिया जाता है। * २००४ - ओमुत", रुसाल्काओं के बारे में रूसी लोक गीतों पर आधारित एथनिका म्यूजिक प्रोजेक्ट द्वारा एक अवधारणा एथनो-एंबिएंट-डब एल्बम। * २००५ - ''द रुसाल्का साइकिलः सॉन्ग्स बिटवीन द वर्ल्ड्स'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Rusalka Cycle: Songs Between the Worlds''}}' अर्थात ''रुसाल्का चक्र: शृष्टियों के बीच के गीत'') कैलिफोर्निया स्थित महिलाओं के मुखर समूह किटका द्वारा एक प्रदर्शन टुकड़ा और सीडी है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kitka.org/shop/the-rusalka-cycle-songs-between-the-worlds-cd|title=The Rusalka Cycle – Songs Between the Worlds}}</ref> * २००६ - "अर्चिन्स, वाइल स्विमिंग", ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Urchins, While Swimming''}}) कैथरीन मोर्गन वैलेंट की एक लघु कहानी, जो क्लार्क्सवर्ल्ड पत्रिका में प्रकाशित हुई। * २००६ - ट्रेडिंग कार्ड गेम मैजिकः द गैदरिंग ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''Magic: The Gathering''}}) में जीवों का एक चक्र जिसे रुसाल्का कहा जाता है, गिल्डपैक्ट विस्तार में मुद्रित किया गया है। * २००८ - वीडियो गेम कासलवेनिया: ऑर्डर ऑफ एक्लेसिया (''Castlevania: order of Ecclesia'') में एक रुसाल्का पाँचवें मालिक के रूप में दिखाई देता है, जिसे एक जलीय राक्षस के रूप में दिखाया गया है। * २०१० - रुसाल्का क्रोएशियाई ब्लैक/लोक धातु बैंड स्त्रीबोग के एक गीत का नाम है। * २०१२ - रुसाल्का निन्टेंडो ३डीएस वीडियो गेम ''ब्रेवली डिफ़ॉल्ट'' में लड़े गए एक पानी अप्सरा जैसे बॉस का नाम है। * २०१३ - रुसाल्काओं एक्शन रोल-प्लेइंग [[वीडियो खेल|वीडियो गेम]] ''द इनक्रेडिबल एडवेंचर्स ऑफ फ्वान हेलसिंग'' ({{भाषा-अंग्रेज़ी|''The Incredible Adventures of Van Helsing''}}) में राक्षसों के रूप में दिखाई दिए। * २०१३ - क्रिस्टोफर बुएह्लमान के ''द नेक्रोमैंसर हाउस'' में नायक का एक शक्तिशाली रुसाल्का के साथ लंबे समय से संबंध है जो रूसी जादूगरों के खिलाफ युद्ध शुरू करता है और सहायता करता है। * २०१५ - रुसाल्का वीडियो गेम ''एक्सिओम वर्ज'' में कई प्राणियों का नाम है। इन-गेम डायलॉग में एक रुसाल्का इस पदनाम का अनुवाद "पानी की मशीन" के रूप में करता है। * २०१६ - ''द बुक ऑफ स्पेक्यूलेशनः ए नॉवेल'', एरिका स्वाइलर की पहली उपन्यास, जिसमें यात्रा सर्कस में रुसाल्का पात्रों को दिखाया गया है। * २०१७ - रुसाल्का पिक्चर्स, एक ब्रिटिश स्वतंत्र फीचर फिल्म निर्माण कंपनी। * २०१७ -कैथरीन आर्डेन के पहले उपन्यास ''भालू और कोयल'' में नायक, वास्या, एक झील में रहने वाले एक रुसाल्का से दोस्ती करती है। * २०१८ - डॉन निग्रो का नाटक "रुसाल्का" लिदिया नाम की एक लड़की से उसके दोस्त के लापता होने के बारे में पूछताछ के बारे में है जो एक रुसाल्का थी। * २०१८ - ''द मरमेडः लेक ऑफ द डेड'', एक रूसाल्का के बारे में एक डरावनी फिल्म है जो एक आदमी के प्यार में पड़ जाती है और उस पर अभिशाप डालती है। * २०१८ - रुसाल्काओं ने ''द सरफेस ब्रेक्स'' में अभिनय किया, लुईस ओ 'नील का एक जवान वयस्क उपन्यास और [[हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन|हांस क्रिश्चियन एंडरसन]] की १८५७ की कहानी "[[द लिटिल मर्मेड|द लिटल मरमेड]]" की एक रीटेलिंग। * २०१८ - द डिसेंबरिस्ट्स एल्बम ''आई विल बी योर गर्ल'' पर "रुसाल्का, रुसाल्का/वाइल्ड रश" गीत के पहले भाग में गीत के बोल एक रुसाल्का द्वारा पानी में लुभाने का वर्णन करते हैं। इसके अतिरिक्त, एल्बम बॉक्स सेट में बैंड के खेल इलिमत के लिए एक रुसाल्का लुमेनरी कार्ड है। * २०१९ - केट क्विन के उपन्यास ''द हंट्रेस'' में पूरे कथानक में रुसाल्काओं का विभिन्न तरीकों से उपयोग किया गया है। * २०२१ - रुज़ाल्का ({{Lang-da|RUZALKA}}), [[कोपेनहेगन]] स्थित [[कोरियोग्राफर]] थ्येरज़ा बालाय का एक कोरियोग्राफिक टुकड़ा। * २०२३ - यूक्रेनी इलेक्ट्रो-लोक बैंड गो_आ का गीत ''रुसाल्कोचकि'' ({{Lang-uk|''Русалочки''}}) रुसाल्काओं के साथ उनके जंगल में वापस जाने के एक अनुष्ठान से प्रेरित है। * २०२३ - चीनी वीडियो गेम ''भविष्य में वापसी: १९९९'' ({{भाषा-चीनी|c=''重返未来: 1999''|p=}}) में खेल में खेलने योग्य पात्रों में से एक विला नाम का एक रुसाल्का है (चरित्र २०२४ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किया गया है) । * २०२४ - आंतोनीन दवोझाक का ओपेरा ''रुसाल्का'' [[एडम सैंडलर]] अभिनीत फिल्म स्पेसमैन में स्टारशिप पर खेल रहा है। उनका चरित्र (याकूब प्रोचाज़का) बाद में अपनी पत्नी को एक रुसाल्का के रूप में कल्पना करता है। * २०२४ - रुसाल्काओं को द्वितीय विश्व युद्ध में यूक्रेन में स्थापित एक लघु कहानी में संदर्भित किया गया है, जिसे पीटर वाइज द्वारा "द लेक दैट नेवर फ्रीज" कहा जाता है। यह डिस्टर्बिंग द वाटर में दिखाई देता है, जो मछली, मछली पकड़ने और मछली पकड़ने के स्थानों के आसपास की मूल भूत कहानियों का संग्रह है।<ref> Wise, Peter (2024). Wafting Lines Press {{ISBN|978-1-0687155-1-8}}</ref> {{Slavic mythology}} == References == {{Reflist}} <references responsive="1"></references> == स्रोत == * हिल्टन, एलिसन। ''रूसी लोक कला''. इंडियाना यूनिवर्सिटी प्रेस, 1995. {{ISBN|0-253-32753-9}}ISBN [[Special:BookSources/0-253-32753-9|0-253-32753-9]].&nbsp; * डी.के. ज़ेलीन। रूस के वैज्ञानिकों ने रूस के लोगों को एक दूसरे से अलग करने की सलाह दी है। Moskva: अंत में. 1995. == आगे पढ़ें == * {{Cite encyclopedia|last=Chernykh|first=P. Ya.|encyclopedia=Historical and etymological dictionary of the modern Russian language|date=1999|location=Moscow|publisher=Русский язык}} * {{Cite encyclopedia|last=Fasmer|first=M.|encyclopedia=Etymological dictionary of the Russian language|date=1987|location=Moscow|publisher=Progress}} * {{Cite book|last=Levkievskaya|first=E. E.|date=2000|publisher=Astrel|isbn=5-271-00676-X|location=Moscow|script-title=ru:Мифы русского народа|trans-title=Myths of the Russian People}} == बाहरी लिंक == * {{Commons category inline}} {{Reflist}} <references responsive="1"></references> g2cql3r3mymgycjkqcg7zsnyxnud5fs ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख 0 1610836 6536698 2026-04-05T20:26:51Z Pur 0 0 484428 "[[:en:Special:Redirect/revision/1280523485|Llanfairpwllgwyngyll]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया 6536698 wikitext text/x-wiki {{Infobox UK place|country={{flag|वेल्स}}|official_name=ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख|coordinates={{coord|53.2232|-4.2008|display=inline,title}}|label_position=top|community_wales=ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्ल<ref>{{Cite web |url=http://www.llanfairpwll.org/community-council/ |title=Llanfairpwllgwyngyll Community Council Members |website=Llanfairpwll.org |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20190207015655/http://www.llanfairpwll.org/community-council/ |archive-date=7 February 2019}}</ref><ref>{{cite web |url=http://data.ordnancesurvey.co.uk/doc/7000000000020857 |title=Llanfair Pwllgwyngyll |website=[[Ordnance Survey]]}}</ref>|unitary_wales=एंगलसे टापू|lieutenancy_wales=ग्विनेड|constituency_westminster=इनिस मोन|constituency_welsh_assembly=इनिस मोन|post_town=ल्लानवायरपुलग्विंगिल|postcode_district=LL61|postcode_area=LL|dial_code=०१२४८|os_grid_reference=SH528716|population=२,९००|population_ref=(२०२१ आँकड़े)|static_image_name=Llanfair Pwllgwyngyll roofscape (1) - geograph.org.uk - 1058331.jpg|static_image_caption=एंगलसे के स्तंभ की मार्क्वेस से नज़ारा|local_name=Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch}} '''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख''' ({{Lang-cy|Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysyliogogogoch}}) [[वेल्स]] के एंगलसे द्वीप पर एक गाँव और समुदाय है। यह मेनाई जलडमरूमध्य पर ब्रिटानिया ब्रिज के बगल में स्थित है। २०११ की जनगणना में जनसंख्या ३,१०७ थी<ref>{{Cite web|url=https://www.citypopulation.de/php/uk-wales.php?cityid=W37000291|title=Llanfairpwllgwyngyll in Isle of Anglesey (Wales / Cymru)|website=CityPopulation.de|access-date=10 April 2019}}</ref> जिनमें से ७१% [[वेल्श भाषा|वेल्श]] बोल सकते थे।<ref>{{Cite web|url=http://www.neighbourhood.statistics.gov.uk/dissemination/LeadTableView.do?a=7&b=11125869&c=LL61+5AL&d=16&e=61&g=6488709&i=1001x1003x1032x1004&o=362&m=0&r=0&s=1431978170244&enc=1&dsFamilyId=2501|title=Community population and percentage of Welsh speakers|website=Neighbourhood Statistics|archive-url=https://web.archive.org/web/20160410031447/http://www.neighbourhood.statistics.gov.uk/dissemination/LeadTableView.do?a=7&b=11125869&c=LL61+5AL&d=16&e=61&g=6488709&i=1001x1003x1032x1004&o=362&m=0&r=0&s=1431978170244&enc=1&dsFamilyId=2501|archive-date=10 April 2016|access-date=18 May 2015}}</ref> २०२१ में जनसंख्या घटकर २,९०० हो गई (निकटतम १०० तक)।<ref>{{Cite web|url=https://www.ons.gov.uk/visualisations/customprofiles/draw/|title=Build a custom area profile - Census 2021, ONS|website=www.ons.gov.uk|language=en|access-date=2024-03-20}}</ref> जनसंख्या की दृष्टि से यह एंगलसे की छठी सबसे बड़ी बस्ती है। ''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख'' समुदाय के नाम का एक लंबा रूप है, जिसका प्रयोग कुछ संदर्भों में किया जाता है। १८ अक्षरों में विभाजित ५८ अक्षरों के साथ इस छोटे से शहर को [[यूरोप]] में सबसे लंबा नाम और दुनिया में दूसरा सबसे लंबा एक-शब्द वाला स्थान नाम माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.businessinsider.com/welsh-town-has-the-longest-name-in-europe-2015-9|title=Here's the story behind the 58-letter town name in Wales that everyone is talking about|last=Hoeller|first=Sophie-Claire|date=12 September 2015|website=[[Business Insider]]|access-date=18 September 2016}}</ref><ref name="hume">{{Cite journal|last=Hume|first=Rev. A.|date=1849|title=Philosophy of Geographical Names|url=https://archive.org/details/proceedingsoflit00lite/page/n57/mode/2up|journal=Proceedings of the Literary and Philosophical Society of Liverpool|page=44|access-date=25 February 2020}}</ref> == इतिहास == [[चित्र:Marquess_of_Anglesey's_Column_-_geograph.org.uk_-_786189.jpg|बाएँ|अंगूठाकार| थॉमस हैरिसन द्वारा डिजाइन किया गया मार्क्वेस ऑफ़ एंग्लेसी का स्तंभ, [[वाटरलू का युद्ध|वाटरलू के युद्ध]] में हेनरी पेजेट, प्रथम मार्क्वेस ऑफ़ एंग्लेसी की वीरता का जश्न मनाता है। {{Convert|27|m}} ऊंचा यह टॉवर एंग्लिसी और मेनाई स्ट्रेट का दृश्य प्रस्तुत करता है।]] यह क्षेत्र [[नवपाषाण युग]] (४०००-२००० ई.पू.) से बसा हुआ है, तथा इसके प्रारंभिक इतिहास में [[जीविका कृषि|निर्वाह कृषि]] और [[मत्स्याखेट|मछली पकड़ना]] सबसे आम व्यवसाय थे। उस समय एंग्लेसी द्वीप तक केवल मेनाई जलडमरूमध्य के पार नाव द्वारा ही पहुंचा जा सकता था। इस अवधि से एक बड़े पैमाने पर नष्ट, ढह गया डोलमेन पैरिश में पाया जा सकता है, जो वर्तमान गिरजाघर के उत्तर में टाय मावर में स्थित है; प्रारंभिक आयुध सर्वेक्षण मानचित्र साइट पर एक लंबा केयर्न दिखाते हैं।<ref name="rcahmw">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=d0nwILR1UQEC&pg=PA73|title=An Inventory of the Ancient Monuments in Anglesey, Volume 2|date=1960|publisher=[[Royal Commission on the Ancient and Historical Monuments of Wales]]|location=Aberystwyth|page=73|orig-year=1937}}</ref> एक पहाड़ी किले के संभावित अवशेष, एक खंडित बैंक और खाई के साथ, क्रेग वाई डीडिनास नामक एक चट्टान पर दर्ज किए गए थे।<ref name="rcahmw2">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=d0nwILR1UQEC&pg=PA74|title=An Inventory of the Ancient Monuments in Anglesey, Volume 2|date=1960|publisher=Royal Commission on the Ancient and Historical Monuments of Wales|location=Aberystwyth|page=74|orig-year=1937}}</ref> इस क्षेत्र पर कुछ समय के लिए गायुस सुएतोनियुस पाउलिनुस के नेतृत्व में रोमनों द्वारा आक्रमण किया गया और कब्जा कर लिया गया, फिर बोदिका के खिलाफ सेना को मजबूत करने के लिए इसे अस्थायी रूप से छोड़ दिया गया, और फिर रोमन ब्रिटेन के अंत तक इसे अपने कब्जे में रखा गया। रोमन सेनाओं की वापसी के साथ यह क्षेत्र प्रारंभिक [[मध्ययुग|मध्ययुगीन]] ग्वेनेड साम्राज्य के नियंत्रण में आ गया। ७वीं शताब्दी से इस क्षेत्र में संभवतः एक छोटा ईसाई धार्मिक स्थल, शायद एक मठवासी कक्ष रहा है।<ref name="ciw">{{Cite web|url=https://parish.churchinwales.org.uk/b235/church-life-en/history-of-st-marys-llanfairpwll/|title=History of St Mary's Llanfairpwll|last=Jones|first=Geraint I. L.|date=2006|website=[[The Church in Wales]]|access-date=25 February 2020}}</ref> बाद के मध्ययुगीन काल के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि प्वेलग्विन्गिल की बस्ती के किरायेदारों, जैसा कि तब जाना जाता था, ने सामंती व्यवस्था के तहत बांगोर के बिशप से कुल ९ बोवेट्स ज़मीन का स्वामित्व किया था।<ref name="longley">{{Cite book|title=Medieval settlement on Anglesey: an assessment of the potential for fieldwork|last=Longley|first=David|publisher=[[Gwynedd Archaeological Trust]]|location=[[Bangor, Gwynedd]]}}</ref> मध्ययुगीन काल के दौरान एक गिरजाघर का निर्माण किया गया था और संभवतः नॉर्मन प्रभाव के तहत [[मरियम (ईसा मसीह की माँ)|मैरी]] को समर्पित किया गया था: इमारत, जिसे बाद में ध्वस्त कर दिया गया और एक विक्टोरियन युग के गिरजाघर द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, एक अर्ध-वृत्ताकार एप्स होने के कारण असामान्य था, एक विशेषता जो आमतौर पर कैथेड्रल से जुड़ी होती है।<ref name="hp">{{Cite web|url=http://historypoints.org/index.php?page=st-mary-s-church-llanfairpwll|title=St Mary's Church, Llanfairpwll|website=History Points|access-date=23 November 2018}}</ref> धार्मिक गतिविधियों के बावजूद बस्ती की ग्रामीण प्रकृति के कारण १५६३ में पैरिश की जनसंख्या केवल ८० के आसपास थी। अधिकांश भूमि को उक्सब्रिज के अर्लडोम में शामिल कर लिया गया, जो बाद में एंग्लिसी का मार्क्विसेट बन गया, और बाड़ों के अधीन था। उदाहरण के लिए १८४४ में ललनफेयरप्वेल में ९२% भूमि का स्वामित्व केवल तीन व्यक्तियों के पास था। १८०१ तक पैरिश की जनसंख्या ३८५ तक पहुंच गई। १८२६ में थॉमस टेलफोर्ड द्वारा मेनाई सस्पेंशन ब्रिज के निर्माण के द्वारा एंग्लिसी को शेष वेल्स से जोड़ा गया, तथा १८५० में ब्रिटानिया ब्रिज और व्यस्त नॉर्थ वेल्स कोस्ट रेलवे लाइन के निर्माण के द्वारा इसे [[लंदन]] से जोड़ा गया, जिसने शेष ग्रेट ब्रिटेन को होलीहेड के नौका बंदरगाह से जोड़ा। पुराना गाँव, जिसे ''पेंत्रे उखाफ'' ({{Lang|cy|Pentre Uchaf}}, अर्थात "ऊपरी गाँव") के नाम से जाना जाता है, रेलवे स्टेशन के आसपास नए विकास से जुड़ गया। इस नए इलाके को अब पेंत्रे इसाफ ({{Lang|cy|Pentre Isaf}}, अर्थात "निचला गाँव") के नाम से जाना जाता है। महिला संस्थान की पहली बैठक १९१५ में ललनफेयरपवेल में हुई और यह आंदोलन (जो कनाडा में शुरू हुआ) फिर [[ब्रिटिश आइल्स|ब्रिटिश द्वीपों]] के बाकी हिस्सों में फैल गया। <ref>{{Cite web|url=http://www.llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch.co.uk/history.php|title=Llanfairpwll - History of the village|website={{shy|Llanfair|pwllgwyngyll|gogery|chwyrn|drobwll|llan|tysilio|gogo|goch}}.co.uk|access-date=16 May 2018}}</ref> == स्थान का नाम और स्थलाकृति == मध्ययुगीन बस्ती का मूल नाम, जिसकी सीमाओं के भीतर वर्तमान गाँव स्थित है, ''पुल्लग्विंगिल्ल'' था, जिसका अर्थ है "सफेद हेज़ल का पूल"।<ref name="bdd">{{Cite book|title=Bangor diocesan directory, for the year 1866|last=Davies|first=James|date=1866|publisher=R. I. Jones|location=[[Tremadog|Tremadoc]]|page=8}}</ref><ref>{{Cite encyclopedia|location=[[Llangefni]]}}</ref> प्वेल्ग्विन्गिल पैरिश बनाने वाली दो टाउनशिप में से एक थी, दूसरी ट्रेफोरियन थी; इसका नाम सबसे पहले {{Lang|cy|'Piwllgunyl'}} के रूप में दर्ज किया गया था नॉर्विच के बिशप के लिए १२५० के दशक में आयोजित एक गिरजाघर संबंधी मूल्यांकन में।<ref name="lunt">{{Cite book|title=The Valuation of Norwich|date=1926|publisher=[[Clarendon Press]]|editor-last=Lunt|editor-first=William E.|location=Oxford|page=788}}</ref> पैरिश का नाम ''ल्लानवायर य पुल्लग्विंगिल्ल'' के रूप में दर्ज किया गया था (''ल्लानवायर'' का अर्थ है "[संत] मैरी गिरजाघर"; ''य'' का अर्थ है "का") का उल्लेख १६वीं शताब्दी के मध्य में लेलैंड के ''यात्रा कार्यक्रम'' में मिलता है। टाउनशिप का नाम गिरजाघर के नाम के साथ जोड़ने से पैरिश को वेल्स में मैरी को समर्पित कई अन्य स्थलों से अलग पहचान मिल गई होगी। ऐसा माना जाता है कि इस नाम के लंबे संस्करण का प्रयोग पहली बार १९वीं शताब्दी में गाँव को एक वाणिज्यिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास में किया गया था। नाम का लंबा रूप [[यूनाइटेड किंगडम]] में सबसे लंबा स्थान नाम है और दुनिया में सबसे लंबे नामों में से एक है जिसमें ५८ अक्षर हैं (५१ "अक्षर" क्योंकि " ch " और " ll " डिग्राफ हैं, और [[वेल्श भाषा]] में उन्हें एकल अक्षर के रूप में माना जाता है)। गाँव पर अभी भी ''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्ल'' अंकित है, आयुध सर्वेक्षण मानचित्रों पर ''ल्लानवायर पुल्लग्विंगिल्ल'' के रूप में चिह्नित और रेलवे स्टेशन का आधिकारिक नाम''ल्लानवायरपुल्ल'' है, स्थानीय निवासियों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक फॉर्म। इसका नाम भी छोटा करके {{Lang|cy|Llanfair PG}} कर दिया गया है, जो इसे वेल्स के अन्य स्थानों से अलग करने के लिए पर्याप्त है जिन्हें ''ल्लानवायर'' (जिसका अर्थ है "[संत] मैरी गिरजाघर") कहा जाता है। === १९वीं सदी का नाम परिवर्तन === {{wide image|Llanfair PG.png|800px|एक पट्टिका जो गाँव का नाम और उसका अंग्रेज़ी में अनुवाद दिखा रहा है}} [[चित्र:Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch.JPG|दाएँ|अंगूठाकार| जेम्स प्रिंगल वीवर्स की दुकान का नाम अंग्रेजी अनुवाद के साथ]] [[चित्र:Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch_stationbord.JPG|अंगूठाकार| रेलवे स्टेशन पर लगा साइनबोर्ड [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] बोलने वालों के लिए सही उच्चारण का अनुमान देता है।]] [[चित्र:Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch_Postmark.jpg|दाएँ|अंगूठाकार| गाँव से पोस्टमार्क]] [[चित्र:Llanfair_Church.jpg|अंगूठाकार| संत मेरी गिरजाघर]] माना जाता है कि यह लंबा नाम १८६९ में स्टेशन को ब्रिटेन के किसी भी रेलवे स्टेशन का सबसे लंबा नाम देने के लिए एक प्रारंभिक प्रचार स्टंट के रूप में गढ़ा गया था।<ref name="waew">{{Cite book|title=[[Encyclopaedia of Wales|The Welsh Academy Encyclopedia of Wales]]|date=2008|publisher=[[University of Wales Press]]|isbn=978-0-70831-953-6|editor-last=Davies|editor-first=John|editor-link=John Davies (historian)|location=Cardiff|page=487|editor-last2=Jenkins|editor-first2=Nigel|editor-link2=Nigel Jenkins|editor-last3=Baines|editor-first3=Menna}}</ref> सर जॉन मॉरिस-जोन्स के अनुसार यह नाम एक स्थानीय दर्जी द्वारा बनाया गया था, जिसका नाम उन्होंने किसी को नहीं बताया, जिससे यह रहस्य उसके साथ ही खत्म हो गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Np_H_j3hXUEC&pg=PA318|title=The Companion Guide to Wales|last=Barnes|first=David|date=21 March 2005|publisher=Companion Guides|isbn=978-1-90063-943-9|via=[[Google Books]]}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.historyextra.com/period/pronounced-how/|title=Pronounced how?|last=Byrne|first=Eugene|date=22 July 2011|website=History Extra|archive-url=https://web.archive.org/web/20190321113414/https://www.historyextra.com/period/pronounced-how/|archive-date=21 March 2019}}</ref> नाम का यह रूप मेनाई जलडमरूमध्य में स्वेलीज़ के नाम से जाने जाने वाले भँवर और पास के द्वीप पर स्थित संत टायसिलियो के छोटे चैपल का संदर्भ जोड़ता है।<ref name="mcdonald100">{{Cite book|title=The Guinness Book of British Place Names|last=McDonald|first=Fred|last2=Cresswell|first2=Julia|date=1993|publisher=Guinness Publications|isbn=978-0-85112-576-3|location=Enfield, Middlesex|page=100}}</ref> अंतिम {{Lang|cy|-gogogoch}} ("लाल गुफा") को {{Lang|cy|Llandysiliogogo|italic=no}} के कार्डिगनशायर पैरिश से प्रेरित होकर बनाया गया माना जाता है, किसी स्थानीय विशेषता के बजाय। <ref name="owen63">{{Cite book|title=The Place-Names of Wales|last=Owen|first=Hywel Wyn|date=2015|publisher=University of Wales Press|isbn=978-1-78316-164-5|edition=Revised and expanded|location=Cardiff|page=63}}</ref> शाब्दिक रूप से अनुवादित, नाम के लंबे रूप का अर्थ है: "[संत] मैरी (''ल्लानवाय'' का गिरजाघर) [का] [[तालाब]] (पुल्ल)<ref name="davies">{{Cite book|title=Flintshire Place-names|last=Davies|first=Ellis|date=1959|publisher=University of Wales Press|location=Cardiff|page=141|author-link=Ellis Davies (priest)}}</ref>{{Efn|{{lang|cy|pwll}} - "pool, pond, pit"}} सफेद हेज़ल ({{Lang|cy|gwyn gyll}} का) के पास [शाब्दिक अर्थ "के खिलाफ"] (गो गेर) भयंकर भँवर (''इ क्विर्न द्रोबुल्ल'') [और] गिरजाघर ऑफ [संत] ''ल्लानतिसिलियो'' लाल गुफा (गोगोगोख)। विभिन्न तत्वों का कभी-कभी अलग-अलग अनुवाद किया गया है, उदाहरण के लिए "हेज़ेल पेड़ों के बीच सफेद पूल"<ref name="walesnm">{{Cite book|title=Wales: A National Magazine|date=1912|editor-last=Edwards|editor-first=J. Hugh|volume=II|issue=1}}</ref> या "संत टायसिलियो द रेड की गुफा"।<ref name="hpl">{{Cite journal|last=Pryce|first=Thomas|date=1900|title=History of the Parish of Llandysilio|journal=[[Collections Historical & Archaeological relating to Montgomeryshire]]|volume=XXXI}}</ref> नाम के लंबे संस्करण का वास्तविक उद्गमकर्ता और तिथि कम निश्चित है, हालांकि: दावा किए गए नाम परिवर्तन से कुछ साल पहले प्रकाशित एक गिरजाघर निर्देशिका ने {{Lang|cy|{{shy|Llanfair|pwll|gwyn|gyll|goger|bwll|tysilio|gogo}}}} के थोड़े अलग रूप में "पूर्ण" पैरिश नाम दिया है। {{Lang|cy|{{shy|Llanfair|pwll|gwyn|gyll|goger|bwll|tysilio|gogo}}}} ("संत मैरी गिरजाघर, संत ''तिसिलियो गोगो'' के पूल के सामने सफेद हेज़ल के पूल का" [तिसिलियो गुफा का]"),<ref name="bdd">{{Cite book|title=Bangor diocesan directory, for the year 1866|last=Davies|first=James|date=1866|publisher=R. I. Jones|location=[[Tremadog|Tremadoc]]|page=8}}</ref> जबकि ''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानडिसिलियोगोगो'' १८४९ में प्लेसनामों पर प्रकाशित एक पेपर में दिखाई देता है, इसके लेखक ने नोट किया कि स्थानीय लोगों द्वारा "नाम को आम तौर पर संक्षिप्त कर दिया गया था"।<ref name="hume">{{Cite journal|last=Hume|first=Rev. A.|date=1849|title=Philosophy of Geographical Names|url=https://archive.org/details/proceedingsoflit00lite/page/n57/mode/2up|journal=Proceedings of the Literary and Philosophical Society of Liverpool|page=44|access-date=25 February 2020}}</ref> जबकि स्वेलीज़ के संबंध में यह जोड़ केवल १८६० के दशक में किया गया माना जाता है, १९ वीं सदी की शुरुआत में गाइडबुक ने पहले से ही ''पुल्लग्विंगिल्ल'' तत्व की व्युत्पत्ति का सुझाव दिया था स्वेलिज़ के संदर्भ में पुल्ल, ग्विन और गिल्ल ("उदास उग्र पूल") से।<ref name="nicholson76">{{Cite book|url=https://archive.org/details/cambriantravelle01nich/page/n53/mode/1up|title=The Cambrian Traveller's Guide|last=Nicholson|first=George|date=1813|publisher=Longman, Hurst, Rees, Orme & Brown|location=London|page=75}}</ref> === पर्यटन एवं आकर्षण === कुछ हज़ार स्थानीय निवासी प्रति वर्ष लगभग २ लाख आगंतुकों का स्वागत करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://rove.me/to/wales/llanfairpwllgwyngyll|title=Llanfairpwllgwyngyll|website=Rove.me|access-date=10 April 2019}}</ref> सबसे लोकप्रिय आकर्षण ललनफेयरपवेल रेलवे स्टेशन है, जिस पर गाँव का पूरा नाम अंकित है। क्षेत्र के अन्य दर्शनीय स्थलों में एंग्लेसी सी चिड़ियाघर, ब्रायन सेलि डुडु ब्यूरियल चैंबर, संत टायसिलियो गिरजाघर और प्लास कैडनेंट हिडन गार्डन शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.tripadvisor.com/Attractions-g1925973-Activities-Llanfairpwllgwyngyll_Anglesey_North_Wales_Wales.html|title=Things to Do in Llanfairpwllgwyngyll|website=[[TripAdvisor]]|access-date=10 April 2019}}</ref> === विज्ञान के क्षेत्र में === २०२० में गाँव के पल्ली में एकत्रित मिट्टी से पृथक [[जीवाणु|बैक्टीरिया]] की एक नई प्रजाति को ''मायक्सोकोकस'' जीनस में रखा गया और इसका नाम ''मायक्सोकोकस ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोखेंसिस'' ({{Lang-la|Myxococcus Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogochensis}}) रखा गया।<ref name="ChambersEtAl2020">{{Cite journal|last=Chambers|first=James|last2=Sparks|first2=Natalie|last3=Sydney|first3=Natashia|last4=Livingstone|first4=Paul G.|last5=Cookson|first5=Alan R.|last6=Whitworth|first6=David E.|date=2020|title=Comparative genomics and pan-genomics of the Myxococcaceae, including a description of five novel species: ''Myxococcus eversor'' sp. nov., ''Myxococcus {{shy|llanfair|pwllgwyngyll|gogery|chwyrn|drobwll|llan|tysilio|gogo|goch|ensis}}'' sp. nov., ''Myxococcus vastator'' sp. nov., ''Pyxidicoccus caerfyrddinensis'' sp. nov. and ''Pyxidicoccus trucidator'' sp. nov|journal=Genome Biology and Evolution|volume=evaa212|issue=12|pages=2289–2302|doi=10.1093/gbe/evaa212|issn=1759-6653|pmc=7846144|pmid=33022031|doi-access=free}}</ref> === लोकप्रिय संस्कृति में === १९५७ में ''यू बेट योर लाइफ'' कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति के दौरान वेल्श विद्वान जॉन ह्यूजेस ने मेजबान ग्रूचो मार्क्स के अपने जन्मस्थान के स्थान के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर शहर का उल्लेख करके दिया था। १९६६ में स्टीफन सोंडाइम द्वारा लिखित गीत " द बॉय फ्रॉम... " में गायिका ने ताकारेम्बो ला तुम्बे डेल फ्यूगो सांता मालिपास ज़ाटेकास ला जुंटा डेल सोल वाई क्रूज़ (काल्पनिक) द्वीप के एक लड़के के प्रति अपने एकतरफा प्यार का विवरण दिया है। अंतिम पद्य में यह गीत शामिल है: "कल वह रवाना होगा/वह वेल्स जा रहा है/ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख में रहने के लिए" (गीत की आखिरी पंक्ति बस एक उपदेश है, "ओच!")।<ref>{{Cite book|title=Showtunes: the Songs, Shows, and Careers of Broadway's Major Composers|last=Suskin|first=Steven|date=9 March 2010|publisher=Oxford University Press, USA|isbn=978-0-19-531407-6|edition=4th Revised and expanded|page=266}}</ref> गीत का हास्य उस गायक के उस प्रयास से उत्पन्न होता है, जो बार-बार स्थानों के भारी नामों को गाने के बाद अपनी सांस को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। १९६८ की फिल्म ''बारबेरेला'' में डिल्डानो ने प्रस्ताव दिया कि मीटिंग का पासवर्ड "ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख" है। यह नाम ''[[गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स|गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]]'' में प्रकाशित क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड में आने वाले सबसे लंबे शब्द के रूप में दर्ज किया गया था, जिसका प्रयोग संकलक रोजर स्क्वायर्स ने १९७९ में किया था। सुराग था "खिलखिलाता ट्रोल क्लैंसी, लैरी, बिली और पैगी का पीछा करता है जो चीखते हैं, गलत तरीके से वेल्स में एक जगह को परेशान करते हैं (५८)", जहां अंतिम पांच शब्दों को छोड़कर बाकी सभी ने एक अनाग्राम बनाया।<ref>{{Cite web|url=http://fifteensquared.net/2010/08/30/guardian-25102-rufus/#comments|title=Blog Archive » Guardian 25,102 / Rufus|date=30 August 2010|website=Fifteensquared.net|access-date=28 May 2013}}</ref> १९८० के दशक में गाँव का नाम अमेरिकी क्विज़ शो ''<nowiki/>'एले ऑफ द सेंचुरी''' में एक प्रश्न का विषय था। मेजबान जिम पेरी ने बाद में गाँव का नाम अंकित एक विशाल क्यू कार्ड दिखाया, उन्होंने नाम के प्रत्येक भाग का अर्थ समझाया और फिर मजाक करते हुए कहा "और इसका उच्चारण...ठीक उसी तरह है जैसा आप सोच रहे हैं!"{{उद्धरण आवश्यक|date=February 2023}} १९९५ में वेल्श बैंड सुपर फ़री एनिमल्स ने अपना पहला ईपी, ''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख (अंतरिक्ष में)'' रिलीज़ किया।<ref>{{Cite web|url=http://www.45cat.com/record/ankst057|title={{shy|Llanfair|pwll|gwyn|gyll|goger|y|chwyrn|drobwl|lan|tysilio|gogo|goch|yny|gofod}} (In Space) E.P.|website=45cat|access-date=14 October 2019}}</ref> २००२ में गाँव की वेबसाइट को इंटरनेट पर सबसे लंबे यूआरएल के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.brandextract.com/Insights/Resources-Presentations/The-Story-Behind-the-Longest-URL-in-the-World/|title=The Story Behind the Longest URL in the World {{!}} BE Insights|website=BrandExtract|language=en|access-date=2022-10-30}}</ref> कंप्यूटर गेम ''सिविलाइज़ेशन ५,'' ''ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्ल'' नामक शहर रखने वाले खिलाड़ियों को "सबसे लंबा नाम" स्टीम उपलब्धि प्रदान करता है।<ref>{{Cite web|url=http://steamcommunity.com/stats/CivV/achievements/|title=Sid Meier's Civilization V: Global Achievements|website=[[Steam (service)|Steam]]|access-date=25 February 2020}}</ref> सितंबर २०१५ में ''चैनल ४ न्यूज़'' के मौसम विज्ञानी लियाम डटन अपनी एक मौसम रिपोर्ट में शहर का नाम सटीक उच्चारण करने के बाद दुनिया भर में वायरल हो गए।<ref>{{Cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=fHxO0UdpoxM|title=Liam Dutton nails pronouncing Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch|date=9 September 2015|website=YouTube|access-date=4 July 2024}}</ref> २०२४ में [[वॉक्सवैगन|वोक्सवैगन ने]] इनबिल्ट नेविगेशन सिस्टम के [[कृत्रिम बुद्धि|एआई]] और [[श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर|स्पीच रिकग्निशन]] के कार्यों को दिखाने के लिए एक [[टीवी विज्ञापन]] में गाँव के कठिन नाम का उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया। == जलवायु == इस गाँव में शीतोष्ण समुद्री जलवायु (कोपेन ''सीएफबी''; त्रेवर्था ''दो'') है, जिसमें हल्की गर्मियां और ठंडी, गीली सर्दियाँ होती हैं।{{मौसम सन्दूक|location=ल्लानवायरपुल्लग्विंगिल्लगोगेरिक्विर्नद्रोबुल्लल्लानतिसिलियोगोगोगोख, 1961–1990, Altitude: 15 metres above mean sea level|metric first=Y|single line=Y|unit rain days=1.0 mm|Jan rain days=15.6|Feb rain days=11.2|Mar rain days=13.0|Apr rain days=10.4|May rain days=10.9|Jun rain days=10.3|Jul rain days=9.4|Aug rain days=11.7|Sep rain days=12.3|Oct rain days=15.0|Nov rain days=15.7|Dec rain days=15.1|source=मौसम विभाग कार्यालय<ref name=metoffice/>|date=August 2015}}{{बन्धु प्रकल्प|wikt=Llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch|s=no|n=no|v=no|b=no|q=no}} == उल्लेखनीय लोग == * विल्फ्रेड मिटफोर्ड डेविस (१८९५-१९६६) वेल्श कलाकार और प्रकाशक थे, उन्होंने शहर में स्कूल की शिक्षा प्राप्त की थी। * सर जॉन "किफ़िन" विलियम्स, केबीई, आरए (१९१८-२००६) वेल्श परिदृश्य चित्रकार, पल्लफ़ानोग्ल, लैनफ़ेयरपवेल में रहते थे। * लेडी रोज़ मैकलारेन (१९१९-२००५) कुलीन महिला, एंग्लेसी के छठे मार्केस की चौथी बेटी, प्लास न्यूयड में रहती थीं * जॉन लासारस विलियम्स (१९२४-२००४), जिन्हें जॉन एल के नाम से जाना जाता था, एक वेल्श राष्ट्रवादी कार्यकर्ता थे। * नाओमी वाट्स (जन्म १९६८), अंग्रेजी अभिनेत्री और फिल्म निर्माता, बचपन में इस शहर में रहती थीं। * वेल्श अभिनेता [[टेरॉन एगर्टन]] (जन्म १९८९) ने इसी कस्बे में स्कूल में शिक्षा प्राप्त की थी। * सिओभान ओवेन (जन्म १९९३), ललनफेयरप्वेल के सोप्रानो और वीणा वादक, जो अब एडिलेड में रहते हैं, दो वर्ष की आयु में प्रवास कर गए थे। * एलिन फ़्लूर (जन्म १९८४), वेल्श गायक-गीतकार, टेलीविज़न और रेडियो प्रस्तोता। == यह भी देखें == * [[उत्तरी पहाड़ी, न्यूज़ीलैण्ड]] {{Anglesey}}{{Communities of Anglesey}} == बाहरी संबंध == {{Authority control}} * {{Official website|http://www.llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch.co.uk}} Listed in the २००२ ''[[गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स|Guinness Book of Records]]'' as the world's longest valid [[अंतरजाल|Internet]] [[डोमेन नाम|domain name]] * {{Cite web|url=http://www.jlb2011.co.uk/wales/sounds/llanfairpg.htm|title=Origins and meaning of {{shy|Llanfair|pwllgwyngyll|gogery|chwyrn|drobwll|llan|tysilio|gogo|goch}}|last=Ball|first=John|website=Sounds of Wales}} * {{Cite web|url=https://www.flickr.com/photos/tags/llanfairpwllgwyngyllgogerychwyrndrobwllllantysiliogogogoch|title=All Photos Tagged {{shy|llanfair|pwllgwyngyll|gogery|chwyrn|drobwll|llan|tysilio|gogo|goch}}|website=[[Flickr]]}} * {{Cite web|url=https://www.geograph.org.uk/search.php?i=3568738|title=Photos of Llanfair PG and surrounding area|website=[[Geograph]]}} * [https://www.youtube.com/watch?v=fHxO0UdpoxM&ab_channel=CityNewsToronto Newscaster pronouncing the full name] {{Anglesey}}{{Communities of Anglesey}} {{Authority control}} [[श्रेणी:वेल्श भाषा पाठ वाले लेख]] [[श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] 2wsghpilct4040vzvkcs7aoblstmh1f संदर्भ दीर्घवृत्तज 0 1610837 6536703 2026-04-05T21:10:02Z AMAN KUMAR 911487 नया लेख जोड़ा 6536703 wikitext text/x-wiki {{Infobox | title = संदर्भ दीर्घवृत्तज | image = [[चित्र:OblateSpheroid.PNG|250px|लघ्वक्ष गोलाभ]] | caption = लघ्वक्ष गोलाभ (Oblate spheroid) | label1 = मुख्य विषय | data1 = [[भूगणित]] (Geodesy) | label2 = प्रकार | data2 = घूर्णन दीर्घवृत्तज (Ellipsoid of revolution)<br/>गणितीय मॉडल (Mathematical model) | label3 = प्रमुख उपयोग | data3 = [[स्थानिक संदर्भ प्रणाली]]<br/>[[भौगोलिक निर्देशांक प्रणाली]] | label4 = विकिडाटा | data4 = [https://www.wikidata.org/wiki/Q1335878 Q1335878] }} [[भूगणित]] (Geodesy) में, '''संदर्भ दीर्घवृत्तज''' गणितीय रूप से परिभाषित एक ऐसी सतह है जो [[जिओइड|भूआभ (Geoid)]] का सन्निकटन (अनुमानित गणितीय रूप) प्रस्तुत करती है। भूआभ, किसी आदर्श और चिकने गोले के विपरीत, पृथ्वी या किसी अन्य ग्रहीय पिंड का अधिक यथार्थ लेकिन अनियमित आकार है। यह आकार ग्रहीय पिंड के [[ग्रहीय क्रोड|आंतरिक भाग]] की संरचना और घनत्व में भिन्नता के कारण [[गुरुत्वाकर्षण]] में होने वाले उतार-चढ़ाव, तथा घूर्णन करने वाले पिंडों में [[अपकेंद्री बल]] के कारण उत्पन्न होने वाले ध्रुवीय चपटेपन को ध्यान में रखता है।<ref>{{Cite web|url=https://oceanservice.noaa.gov/facts/earth-round.html|title=Is the Earth round?|website=oceanservice.noaa.gov|language=en|access-date=2026-04-05}}</ref><ref>{{cite book |last=Torge |first=Wolfgang |title=Geodesy |year=2001 |publisher=Walter de Gruyter |isbn=978-3-11-017072-6 |pages=2-5 |language=en}}</ref> अपनी गणितीय सरलता के कारण, संदर्भ दीर्घवृत्तज का उपयोग एक मानक सतह के रूप में किया जाता है। इसी सतह को आधार मानकर [[भूगणितीय नेटवर्क]] की गणनाएँ की जाती हैं तथा किसी बिंदु के निर्देशांक जैसे कि [[अक्षांश]], [[देशांतर]], और [[ऊंचाई|तुंगता (Elevation)]] को परिभाषित किया जाता है। मानकीकरण और भौगोलिक (स्थानिक) अनुप्रयोगों के संदर्भ में, ''भूगणितीय संदर्भ दीर्घवृत्तज'' वह गणितीय मॉडल है जिसका उपयोग [[स्थानिक संदर्भ प्रणाली]] या भूगणितीय डेटम की परिभाषाओं में मूल आधार के रूप में किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://support.esri.com/en-us/gis-dictionary/reference-ellipsoid|title=Reference Ellipsoid Definition {{!}} GIS Dictionary|website=support.esri.com|language=en-us|access-date=2026-04-05}}</ref> == सन्दर्भ == {{reflist}} 09yijaxps5e627wex9gvhg7w5i24ecg सदस्य वार्ता:VISHWANATH KUMAR THAKUR 3 1610838 6536723 2026-04-06T00:00:28Z Sanjeev bot 127039 स्वागत संदेश जोड़ा 6536723 wikitext text/x-wiki {{साँचा:सहायता|name=VISHWANATH KUMAR THAKUR}} -- [[सदस्य:Sanjeev 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"[[Special:CentralAuth/Bridgetowisdom|Bridgetowisdom]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ 6536728 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:Bridgetowisdom]] 0eokwp1ln3dqo4drjq9ye3mdqe7ubiw सदस्य वार्ता:~2026-21077-67 3 1610842 6536767 2026-04-06T05:21:46Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: मानहानिकार सामग्री जोड़ना [[:चौहरमल]] पर. 6536767 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है! [[:चौहरमल]] पर [[Special:Contributions/&#126;2026-21077-67|आपके हाल के कुछ संपादन]] मानहानिकारक या संभवतः [[:en:Wikipedia:Libel|अपमानजनक]] प्रतीत होने के कारण पूर्ववत कर दिए गए हैं। इस ज्ञानकोश पर योगदान देने के बारे में अधिक जानने के लिए आप [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। धन्यवाद।<!-- Template:uw-defamatory1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:21, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 2mrnof61rvm7zpzu95v78mmjpe8m8qz श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग 14 1610843 6536774 2026-04-06T05:32:55Z चाहर धर्मेंद्र 703114 नया पृष्ठ: [[श्रेणी:देशानुसार दुर्ग]] 6536774 wikitext text/x-wiki [[श्रेणी:देशानुसार दुर्ग]] 6x8aj4pup4b7wsi71vkkizxufnxiyd6 खोतिन दुर्ग 0 1610844 6536778 2026-04-06T05:38:39Z चाहर धर्मेंद्र 703114 दुर्ग 6536778 wikitext text/x-wiki {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी नियोजन, इतिहास, पुरातत्व, स्मारकीय कला |designation1_number = 240081-Н}} | website = https://khotynska-fortecya.cv.ua/index-en | footnotes = }} '''खोतिन दुर्ग''' ( यूक्रेनी : Хотинська фортеця ; पोलिश : twierdza w Chocimiu ; तुर्की : Hotin Kalesi ; रोमानियाई : Cetatea Hotinului), जिसे खोतिन दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण-पश्चिमी यूक्रेन के चेर्नित्सी ओब्लास्ट के खोतिन नगर में डेनिस्टर नदी के दाहिने तट पर स्थित एक भव्य एवं ऐतिहासिक किला परिसर है। यह किला उत्तरी बेस्सारबिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में अवस्थित है, जो कभी रोमानिया का हिस्सा रहा था, किंतु मोलोटोव–रिबेंट्रोप संधि के परिणामस्वरूप 1940 में सोवियत संघ द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह किला एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग, कामियानेट्स-पोडिल्स्की किला, के निकट स्थित है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। वर्तमान पत्थर से निर्मित खोतिन किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] 56zll5vlrcpud1deacx2k93kyoizxu5 6536780 6536778 2026-04-06T05:39:50Z चाहर धर्मेंद्र 703114 टैग {{[[साँचा:काम जारी|काम जारी]]}} लेख में जोड़ा जा रहा ([[वि:ट्विंकल|ट्विंकल]]) 6536780 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी नियोजन, इतिहास, पुरातत्व, स्मारकीय कला |designation1_number = 240081-Н}} | website = https://khotynska-fortecya.cv.ua/index-en | footnotes = }} '''खोतिन दुर्ग''' ( यूक्रेनी : Хотинська фортеця ; पोलिश : twierdza w Chocimiu ; तुर्की : Hotin Kalesi ; रोमानियाई : Cetatea Hotinului), जिसे खोतिन दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण-पश्चिमी यूक्रेन के चेर्नित्सी ओब्लास्ट के खोतिन नगर में डेनिस्टर नदी के दाहिने तट पर स्थित एक भव्य एवं ऐतिहासिक किला परिसर है। यह किला उत्तरी बेस्सारबिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में अवस्थित है, जो कभी रोमानिया का हिस्सा रहा था, किंतु मोलोटोव–रिबेंट्रोप संधि के परिणामस्वरूप 1940 में सोवियत संघ द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह किला एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग, कामियानेट्स-पोडिल्स्की किला, के निकट स्थित है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। वर्तमान पत्थर से निर्मित खोतिन किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] ezna6mayfh6nc5cx3rky4bdh8ema84i 6536781 6536780 2026-04-06T05:40:40Z चाहर धर्मेंद्र 703114 रूस के गढ़ के रूप में 6536781 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी नियोजन, इतिहास, पुरातत्व, स्मारकीय कला |designation1_number = 240081-Н}} | website = https://khotynska-fortecya.cv.ua/index-en | footnotes = }} '''खोतिन दुर्ग''' ( यूक्रेनी : Хотинська фортеця ; पोलिश : twierdza w Chocimiu ; तुर्की : Hotin Kalesi ; रोमानियाई : Cetatea Hotinului), जिसे खोतिन दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण-पश्चिमी यूक्रेन के चेर्नित्सी ओब्लास्ट के खोतिन नगर में डेनिस्टर नदी के दाहिने तट पर स्थित एक भव्य एवं ऐतिहासिक किला परिसर है। यह किला उत्तरी बेस्सारबिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में अवस्थित है, जो कभी रोमानिया का हिस्सा रहा था, किंतु मोलोटोव–रिबेंट्रोप संधि के परिणामस्वरूप 1940 में सोवियत संघ द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह किला एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग, कामियानेट्स-पोडिल्स्की किला, के निकट स्थित है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। वर्तमान पत्थर से निर्मित खोतिन किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन किला न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह किला डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह किला तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] 6zjj9v7tyrivupxlbsoeddj99qg4ban 6536783 6536781 2026-04-06T05:43:53Z चाहर धर्मेंद्र 703114 पुनर्निर्माण और किलेबंदी 6536783 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी नियोजन, इतिहास, पुरातत्व, स्मारकीय कला |designation1_number = 240081-Н}} | website = https://khotynska-fortecya.cv.ua/index-en | footnotes = }} '''खोतिन दुर्ग''' ( यूक्रेनी : Хотинська фортеця ; पोलिश : twierdza w Chocimiu ; तुर्की : Hotin Kalesi ; रोमानियाई : Cetatea Hotinului), जिसे खोतिन दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण-पश्चिमी यूक्रेन के चेर्नित्सी ओब्लास्ट के खोतिन नगर में डेनिस्टर नदी के दाहिने तट पर स्थित एक भव्य एवं ऐतिहासिक किला परिसर है। यह किला उत्तरी बेस्सारबिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में अवस्थित है, जो कभी रोमानिया का हिस्सा रहा था, किंतु मोलोटोव–रिबेंट्रोप संधि के परिणामस्वरूप 1940 में सोवियत संघ द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह किला एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग, कामियानेट्स-पोडिल्स्की किला, के निकट स्थित है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। वर्तमान पत्थर से निर्मित खोतिन किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन किला न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह किला डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह किला तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह किला मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह किला मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] cywtddejpomtf561lih9z0fyn7aju7h 6536784 6536783 2026-04-06T05:44:42Z चाहर धर्मेंद्र 703114 17वीं से 19वीं शताब्दी तक 6536784 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = 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विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन किला न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह किला डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह किला तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह किला मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह किला मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन किला एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किला उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन किला पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में किला पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन किला पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार किला तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन किला स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] dc27lpv87reqoncn4sbttiq8uy4fwfo 6536785 6536784 2026-04-06T05:45:24Z चाहर धर्मेंद्र 703114 20वीं और 21वीं शताब्दी 6536785 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन किला | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = किला | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = 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विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह किला अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह किला अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन किला न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह किला डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह किला तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह किला मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह किला मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन किला विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन किला एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किला उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन किला पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में किला पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन किला पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार किला तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन किला स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला किला]] प्रथम विश्व युद्ध और रूसी गृहयुद्ध ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में रूस के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। पेरिस शांति सम्मेलन के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन किला और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे मूर्तिकार आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, यूक्रेन के मंत्रिपरिषद ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] d5y0b7z4k57c7t5syvjfp0dy7zvdn2y 6536787 6536785 2026-04-06T05:47:41Z चाहर धर्मेंद्र 703114 फिल्मों में खोतिन दुर्ग 6536787 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = 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महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] प्रथम विश्व युद्ध और रूसी गृहयुद्ध ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में रूस के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। पेरिस शांति सम्मेलन के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे मूर्तिकार आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, यूक्रेन के मंत्रिपरिषद ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न फ्रांसीसी और अंग्रेजी महलों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] ja3yhlsrdwpmbh96701t9jetenzlmm1 6536788 6536787 2026-04-06T05:48:26Z चाहर धर्मेंद्र 703114 दंतकथाएँ 6536788 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी 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सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] प्रथम विश्व युद्ध और रूसी गृहयुद्ध ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में रूस के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। पेरिस शांति सम्मेलन के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे मूर्तिकार आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, यूक्रेन के मंत्रिपरिषद ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न फ्रांसीसी और अंग्रेजी महलों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==दंतकथाएँ== खोतिन दुर्ग के सैकड़ों वर्षों के इतिहास के साथ अनेक किंवदंतियाँ भी जुड़ी हुई हैं, जो इसकी रहस्यमयी और भव्य छवि को और भी रोचक बनाती हैं। इनमें से कुछ लोकप्रिय किंवदंतियाँ किले की दीवार पर स्थित बड़े काले धब्बे की उत्पत्ति से संबंधित हैं। एक किंवदंती के अनुसार, यह काला धब्बा उन खोतिन विद्रोहियों के आँसुओं से बना था, जिन्होंने ओटोमन तुर्कों के विरुद्ध विद्रोह किया और जिन्हें किले के अंदर मार दिया गया। एक अन्य किंवदंती यह बताती है कि यह धब्बा ओक्साना नामक एक लड़की के आँसुओं से उत्पन्न हुआ, जिसे तुर्कों ने किले की दीवारों में जिंदा दफना दिया था।<ref>[http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html Khotyn Fortress] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081209082037/http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html |date=2008-12-09 }} — Newspaper article from ''शेपेतिव्स्की विस्तनिक'' {{in lang|uk}}, Accessed 16 जुलाई 2008.</ref> ये दंतकथाएँ न केवल खोतिन किले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इसकी रोमांचक और रहस्यमयी छवि को भी जीवंत बनाए रखती हैं, जो आज भी आगंतुकों और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है। ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] hp1wpygcw5cebzf6nn1d96q5t61s4y6 6536789 6536788 2026-04-06T05:49:02Z चाहर धर्मेंद्र 703114 कला में खोतिन 6536789 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, 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विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब व्लादिमीर महान ने इसे दक्षिण-पश्चिमी कीवन रूस की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो स्कैंडिनेविया और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] प्रथम विश्व युद्ध और रूसी गृहयुद्ध ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में रूस के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। पेरिस शांति सम्मेलन के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे मूर्तिकार आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, यूक्रेन के मंत्रिपरिषद ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न फ्रांसीसी और अंग्रेजी महलों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==दंतकथाएँ== खोतिन दुर्ग के सैकड़ों वर्षों के इतिहास के साथ अनेक किंवदंतियाँ भी जुड़ी हुई हैं, जो इसकी रहस्यमयी और भव्य छवि को और भी रोचक बनाती हैं। इनमें से कुछ लोकप्रिय किंवदंतियाँ किले की दीवार पर स्थित बड़े काले धब्बे की उत्पत्ति से संबंधित हैं। एक किंवदंती के अनुसार, यह काला धब्बा उन खोतिन विद्रोहियों के आँसुओं से बना था, जिन्होंने ओटोमन तुर्कों के विरुद्ध विद्रोह किया और जिन्हें किले के अंदर मार दिया गया। एक अन्य किंवदंती यह बताती है कि यह धब्बा ओक्साना नामक एक लड़की के आँसुओं से उत्पन्न हुआ, जिसे तुर्कों ने किले की दीवारों में जिंदा दफना दिया था।<ref>[http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html Khotyn Fortress] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081209082037/http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html |date=2008-12-09 }} — Newspaper article from ''शेपेतिव्स्की विस्तनिक'' {{in lang|uk}}, Accessed 16 जुलाई 2008.</ref> ये दंतकथाएँ न केवल खोतिन किले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इसकी रोमांचक और रहस्यमयी छवि को भी जीवंत बनाए रखती हैं, जो आज भी आगंतुकों और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है। ==कला में खोतिन== <gallery> File:Battle of Khotyn 1673.PNG|खोतिन का युद्ध, 1673 File:Józef Brandt, Bitwa pod Chocimiem.jpg|खोतिन का युद्ध, 1673 File:John III Sobieski in battle of Khotyn 1673.PNG|1673 में खोतिन की लड़ाई में जॉन तृतीय सोबिस्की File:Battle of Chocim 1621.PNG|चोसिम की लड़ाई, 1621. जोसेफ ब्रांट। File:Rokowania pod Chocimiem (438047) (cropped).jpg|चोकिम संधि, 1621. फ़्रांसिसज़ेक स्मगलविक्ज़, 1785। File:Chodkiewicz wife2.JPG|खोतिन युद्ध से पूर्व विदाई, 1621 File:Chodkiewicz death.JPG|चोडकीविच की मृत्यु File:Rubens Prince Władysław Vasa.jpg|प्रिंस व्लाडिसलाव वासा (1624) File:Anonymous Stanisław Lubomirski in the camp.jpg|शिविर में स्टैनिस्लाव लुबोमिर्स्की (1647) File:Apoteoza Zygmunta III Wazy (65208861).jpg|खोतिन युद्ध के बाद अपोतेओज़ा ज़िग्मुंटा III </gallery> ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] aaqxy566r3udzcxuo7tq6onotf4dasz 6536841 6536789 2026-04-06T07:06:39Z चाहर धर्मेंद्र 703114 विकि कड़ियाँ 6536841 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, 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प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब [[व्लादिमीर द ग्रेट| व्लादिमीर महान]] ने इसे दक्षिण-पश्चिमी [[कीवयाई रूस |कीवन रूस]] की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो [[स्कैण्डिनेवियाई देश |स्कैंडिनेविया]] और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए काला सागर तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह गैलिसिया-वोलहिनिया साम्राज्य का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण जेनोइस लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख निवास के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने मेहमेद द्वितीय के नेतृत्व में आई तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, ओटोमन साम्राज्य का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ जनीसेरी (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में तुर्कों ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने उस्मान द्वितीय की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, रूसी, जॉर्जियाई और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] प्रथम विश्व युद्ध और रूसी गृहयुद्ध ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में रूस के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। पेरिस शांति सम्मेलन के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे मूर्तिकार आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, यूक्रेन के मंत्रिपरिषद ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न फ्रांसीसी और अंग्रेजी महलों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==दंतकथाएँ== खोतिन दुर्ग के सैकड़ों वर्षों के इतिहास के साथ अनेक किंवदंतियाँ भी जुड़ी हुई हैं, जो इसकी रहस्यमयी और भव्य छवि को और भी रोचक बनाती हैं। इनमें से कुछ लोकप्रिय किंवदंतियाँ किले की दीवार पर स्थित बड़े काले धब्बे की उत्पत्ति से संबंधित हैं। एक किंवदंती के अनुसार, यह काला धब्बा उन खोतिन विद्रोहियों के आँसुओं से बना था, जिन्होंने ओटोमन तुर्कों के विरुद्ध विद्रोह किया और जिन्हें किले के अंदर मार दिया गया। एक अन्य किंवदंती यह बताती है कि यह धब्बा ओक्साना नामक एक लड़की के आँसुओं से उत्पन्न हुआ, जिसे तुर्कों ने किले की दीवारों में जिंदा दफना दिया था।<ref>[http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html Khotyn Fortress] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081209082037/http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html |date=2008-12-09 }} — Newspaper article from ''शेपेतिव्स्की विस्तनिक'' {{in lang|uk}}, Accessed 16 जुलाई 2008.</ref> ये दंतकथाएँ न केवल खोतिन किले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इसकी रोमांचक और रहस्यमयी छवि को भी जीवंत बनाए रखती हैं, जो आज भी आगंतुकों और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है। ==कला में खोतिन== <gallery> File:Battle of Khotyn 1673.PNG|खोतिन का युद्ध, 1673 File:Józef Brandt, Bitwa pod Chocimiem.jpg|खोतिन का युद्ध, 1673 File:John III Sobieski in battle of Khotyn 1673.PNG|1673 में खोतिन की लड़ाई में जॉन तृतीय सोबिस्की File:Battle of Chocim 1621.PNG|चोसिम की लड़ाई, 1621. जोसेफ ब्रांट। File:Rokowania pod Chocimiem (438047) (cropped).jpg|चोकिम संधि, 1621. फ़्रांसिसज़ेक स्मगलविक्ज़, 1785। File:Chodkiewicz wife2.JPG|खोतिन युद्ध से पूर्व विदाई, 1621 File:Chodkiewicz death.JPG|चोडकीविच की मृत्यु File:Rubens Prince Władysław Vasa.jpg|प्रिंस व्लाडिसलाव वासा (1624) File:Anonymous Stanisław Lubomirski in the camp.jpg|शिविर में स्टैनिस्लाव लुबोमिर्स्की (1647) File:Apoteoza Zygmunta III Wazy (65208861).jpg|खोतिन युद्ध के बाद अपोतेओज़ा ज़िग्मुंटा III </gallery> ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] 9b07s2nlln2s5d804z8ti9biz9rurks 6536904 6536841 2026-04-06T09:23:56Z चाहर धर्मेंद्र 703114 विकि कड़ियाँ 6536904 wikitext text/x-wiki {{काम जारी|date=अप्रैल 2026}} {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, 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प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब [[व्लादिमीर द ग्रेट| व्लादिमीर महान]] ने इसे दक्षिण-पश्चिमी [[कीवयाई रूस |कीवन रूस]] की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो [[स्कैण्डिनेवियाई देश |स्कैंडिनेविया]] और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए [[काला सागर]] तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह [[गैलिशिया-वोल्हिनिया साम्राज्य]] का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण [[जेनोआ गणराज्य |जेनोइस]] लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख [[मकान |निवास]] के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने [[महमद द्वितीय]] के नेतृत्व में आई [[उस्मानी साम्राज्य |तुर्की सेना]] के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, [[उस्मानी साम्राज्य |ओटोमन साम्राज्य]] का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ [[जाँनिसारी]] (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में [[उस्मानी साम्राज्य| तुर्कों]] ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में [[पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल]] की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने [[उस्मान द्वितीय]] की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, [[रूसी लोग |रूसी]], [[जॉर्जियाई]] और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] [[प्रथम विश्व युद्ध]] और [[रूसी गृहयुद्ध]] ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में [[रूसी सोवियत संघात्मक समाजवादी गणराज्य |रूस]] के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। [[पेरिस शांति सम्मेलन]] के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे [[मूर्ति कला| मूर्तिकार]] आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, [[पर्यटन]] और [[संस्कृति |सांस्कृतिक]] केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, [[युक्रेन की सरकार|यूक्रेन के मंत्रिपरिषद]] ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न [[फ़्रान्स| फ्रांसीसी]] और [[इंग्लैण्ड |अंग्रेजी]] [[गढ़ |महलों]] का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==दंतकथाएँ== खोतिन दुर्ग के सैकड़ों वर्षों के इतिहास के साथ अनेक [[आख्यान| किंवदंतियाँ]] भी जुड़ी हुई हैं, जो इसकी रहस्यमयी और भव्य छवि को और भी रोचक बनाती हैं। इनमें से कुछ लोकप्रिय किंवदंतियाँ किले की दीवार पर स्थित बड़े काले धब्बे की उत्पत्ति से संबंधित हैं। एक किंवदंती के अनुसार, यह काला धब्बा उन खोतिन विद्रोहियों के आँसुओं से बना था, जिन्होंने ओटोमन तुर्कों के विरुद्ध विद्रोह किया और जिन्हें किले के अंदर मार दिया गया। एक अन्य किंवदंती यह बताती है कि यह धब्बा ओक्साना नामक एक लड़की के आँसुओं से उत्पन्न हुआ, जिसे तुर्कों ने किले की दीवारों में जिंदा दफना दिया था।<ref>[http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html Khotyn Fortress] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081209082037/http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html |date=2008-12-09 }} — Newspaper article from ''शेपेतिव्स्की विस्तनिक'' {{in lang|uk}}, Accessed 16 जुलाई 2008.</ref> ये दंतकथाएँ न केवल खोतिन किले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इसकी रोमांचक और रहस्यमयी छवि को भी जीवंत बनाए रखती हैं, जो आज भी आगंतुकों और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है। ==कला में खोतिन== <gallery> File:Battle of Khotyn 1673.PNG|खोतिन का युद्ध, 1673 File:Józef Brandt, Bitwa pod Chocimiem.jpg|खोतिन का युद्ध, 1673 File:John III Sobieski in battle of Khotyn 1673.PNG|1673 में खोतिन की लड़ाई में जॉन तृतीय सोबिस्की File:Battle of Chocim 1621.PNG|चोसिम की लड़ाई, 1621. जोसेफ ब्रांट। File:Rokowania pod Chocimiem (438047) (cropped).jpg|चोकिम संधि, 1621. फ़्रांसिसज़ेक स्मगलविक्ज़, 1785। File:Chodkiewicz wife2.JPG|खोतिन युद्ध से पूर्व विदाई, 1621 File:Chodkiewicz death.JPG|चोडकीविच की मृत्यु File:Rubens Prince Władysław Vasa.jpg|प्रिंस व्लाडिसलाव वासा (1624) File:Anonymous Stanisław Lubomirski in the camp.jpg|शिविर में स्टैनिस्लाव लुबोमिर्स्की (1647) File:Apoteoza Zygmunta III Wazy (65208861).jpg|खोतिन युद्ध के बाद अपोतेओज़ा ज़िग्मुंटा III </gallery> ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] 7jnzep7hu5k3n6m2ixnrzkwai9sk25g 6536905 6536904 2026-04-06T09:24:56Z चाहर धर्मेंद्र 703114 काम पुरा 6536905 wikitext text/x-wiki {{Infobox military installation | name = खोतिन दुर्ग | ensign = | ensign_size = | native_name = Хотинська фортеця | type = दुर्ग | image = 73-250-0001 Khotyn Fortress RB 18.jpg | caption = खोतिन किले के प्रवेश द्वार का दृश्य | image_map = | map_caption = | pushpin_map = | pushpin_relief = | pushpin_map_caption = | coordinates = {{coord|48|31|19|N|26|29|54|E|display=inline,title}} | coordinates_footnotes = | partof = | location = डनिस्ट्रोव्स्की रायोन, चेर्निवत्सी ओब्लास्ट | nearest_town = | country = [[यूक्रेन]] | ownership = | operator = | open_to_public = | site_area = | built = किले | module = {{Infobox historic site |embed = yes |designation1 = UKRAINE NATIONAL |designation1_offname = {{Lang|uk|Комплекс споруд Хотинської фортеці}} (''खोतिन किले का भवन परिसर'') |designation1_type = वास्तुकला, शहरी नियोजन, इतिहास, पुरातत्व, स्मारकीय कला |designation1_number = 240081-Н}} | website = https://khotynska-fortecya.cv.ua/index-en | footnotes = }} '''खोतिन दुर्ग''' ([[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य |यूक्रेनी]] : Хотинська фортеця ; [[पोलिश भाषा| पोलिश]] : twierdza w Chocimiu ; [[तुर्की भाषा| तुर्की]] : Hotin Kalesi ; [[रोमानियाई भाषा |रोमानियाई]] : Cetatea Hotinului), जिसे खोतिन दुर्ग के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण-पश्चिमी [[यूक्रेन]] के चेर्नित्सी ओब्लास्ट के खोतिन नगर में डेनिस्टर नदी के दाहिने तट पर स्थित एक भव्य एवं ऐतिहासिक दुर्ग परिसर है। यह दुर्ग उत्तरी बेस्सारबिया के ऐतिहासिक क्षेत्र में अवस्थित है, जो कभी रोमानिया का हिस्सा रहा था, किंतु मोलोटोव–रिबेंट्रोप संधि के परिणामस्वरूप 1940 में सोवियत संघ द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण यह दुर्ग एक अन्य प्रसिद्ध दुर्ग, कामियानेट्स-पोडिल्स्की दुर्ग, के निकट स्थित है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। वर्तमान पत्थर से निर्मित खोतिन किले का निर्माण 14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रारंभ हुआ, जब यह क्षेत्र मोल्डाविया के अधीन था। समय-समय पर इस किले में महत्वपूर्ण विस्तार और सुदृढ़ीकरण किए गए, विशेषतः मोल्डाविया के प्रतिष्ठित शासकों अलेक्जेंडर द गुड और स्टीफन द ग्रेट के शासनकाल में, क्रमशः 1380 और 1460 के दशकों में। इन शासकों के प्रयासों से किले को न केवल स्थापत्य दृष्टि से सुदृढ़ बनाया गया, बल्कि इसे एक प्रभावशाली सैन्य दुर्ग के रूप में भी विकसित किया गया। आज यह दुर्ग अपनी भव्य संरचना, समृद्ध इतिहास और सामरिक महत्ता के कारण यूक्रेन के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में गिना जाता है। ==इतिहास== ===रूस के गढ़ के रूप में=== खोतिन किले का प्रारंभिक इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है, जब [[व्लादिमीर द ग्रेट| व्लादिमीर महान]] ने इसे दक्षिण-पश्चिमी [[कीवयाई रूस |कीवन रूस]] की सीमाओं की रक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती किलेबंदी के रूप में स्थापित कराया। उस समय उन्होंने वर्तमान बुकोविना क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, और इसी रणनीतिक उद्देश्य से इस किले का निर्माण कराया गया। प्रारंभिक संरचना को बाद में एक सुदृढ़ गढ़ के रूप में पुनर्निर्मित किया गया, जिससे इसकी सामरिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गई। यह दुर्ग अत्यंत महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था, जो [[स्कैण्डिनेवियाई देश |स्कैंडिनेविया]] और कीव को पोनीज़िया (निचले मैदान) तथा पोडोलिया से होते हुए [[काला सागर]] तट पर स्थित जेनोइस और ग्रीक उपनिवेशों तक जोड़ते थे। ये मार्ग आगे मोल्डाविया और वालाचिया के माध्यम से विस्तृत होते हुए प्रसिद्ध वरंगियन से यूनानियों तक व्यापार मार्ग का हिस्सा बनते थे। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग न केवल एक सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक प्रमुख केंद्र रहा।<ref name=":0">{{Cite web|title=Khotyn Fortress|url=https://www.worldhistory.org/Khotyn_Fortress/|access-date=2022-02-04|website=विश्व इतिहास विश्वकोश।|language=en}}</ref> यह दुर्ग डनिस्टर नदी के ऊँचे दाहिने तट तथा घाटी द्वारा निर्मित पथरीले भूभाग पर स्थित था, जो प्राकृतिक रूप से इसकी रक्षा को सुदृढ़ बनाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह केवल लकड़ी की दीवारों और साधारण सुरक्षा व्यवस्थाओं से युक्त मिट्टी का एक विशाल टीला था, जिसका मुख्य उद्देश्य नदी के पार स्थित खोतिन बस्ती की सुरक्षा करना था। बाद में निर्मित पहली पत्थर की संरचना अपेक्षाकृत छोटी थी और वही स्थान आज की उत्तरी मीनार के रूप में विकसित हुआ है। समय के साथ इस किले का अनेक बार पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया; विभिन्न विजेताओं ने इसे क्षति पहुँचाई, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनः सुदृढ़ीकरण भी किया गया, जिससे इसकी संरचना क्रमशः अधिक प्रभावशाली और सुदृढ़ होती गई। 11वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक यह दुर्ग तेरेबोवलिया की रियासत के अधीन था। 12वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1140 के दशक में, इसे हलिच की रियासत में सम्मिलित कर लिया गया, और 1199 तक यह [[गैलिशिया-वोल्हिनिया साम्राज्य]] का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न मध्यकालीन शक्तियों के अधीन रहते हुए लगातार राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा।<ref>{{Cite web|title=History Khotyn fortress|url=https://khotynska-fortecya.cv.ua/istoriya-khotynskoyi-fortetsi-en|access-date=2022-02-04|website=khotynska-fortecya.cv.ua}}</ref> ===पुनर्निर्माण और किलेबंदी=== [[Image:Chocim stronghold.jpg|thumb|left|250px|किले की दीवारों का मनोरम दृश्य]] 1250 से 1264 के बीच डैनिलो और उनके पुत्र लेव ने खोतिन किले का व्यापक पुनर्निर्माण कराया। इस दौरान किले की सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए इसकी परिधि के चारों ओर लगभग आधा मीटर मोटी पत्थर की दीवार निर्मित की गई तथा 6 मीटर चौड़ी खाई खोदी गई। साथ ही, किले के उत्तरी भाग में नए सैन्य भवनों का निर्माण भी किया गया, जिससे इसकी रक्षात्मक क्षमता और अधिक सशक्त हो गई। 13वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस किले का पुनर्निर्माण [[जेनोआ गणराज्य |जेनोइस]] लोगों द्वारा किया गया,<ref name=":0" /> जो उस समय काला सागर क्षेत्र में सक्रिय व्यापारिक शक्ति थे। 14वीं शताब्दी के मध्य, अर्थात 1340 के दशक में, ड्रैगोज़ ने, जो हंगरी साम्राज्य के जागीरदार थे, इस किले पर अधिकार कर लिया। 1375 के पश्चात यह दुर्ग मोल्डाविया रियासत में सम्मिलित हो गया। इसके बाद सिकंदर महान और विशेष रूप से स्टीफन महान के शासनकाल में किले का व्यापक जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया, जिससे यह अपने वर्तमान भव्य स्वरूप में विकसित हुआ। इस पुनर्निर्माण के अंतर्गत पुराने किले को पूर्णतः पत्थर से पुनर्निर्मित किया गया तथा इसकी संरचना को काफी विस्तृत किया गया। 5 से 6 मीटर चौड़ी और लगभग 40 मीटर ऊँची नई दीवारों का निर्माण किया गया, साथ ही तीन नई मीनारें जोड़ी गईं। किले के प्रांगण को लगभग 10 मीटर ऊँचा उठाया गया और उसे राजपरिवार तथा सैनिकों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया गया। इसके अतिरिक्त, गहरे तहखानों का उपयोग सैनिक बैरकों के रूप में किया जाने लगा। इस प्रकार किए गए निर्माण और सुधारों ने खोतिन किले की वर्तमान संरचना की नींव रखी। 14वीं से 16वीं शताब्दी के मध्य तक यह दुर्ग मोल्डावियाई राजकुमारों के प्रमुख [[मकान |निवास]] के रूप में भी प्रयुक्त होता रहा। 1476 में खोतिन किले की चौकी ने [[महमद द्वितीय]] के नेतृत्व में आई [[उस्मानी साम्राज्य |तुर्की सेना]] के विरुद्ध सफलतापूर्वक रक्षा की, जो इस किले की सामरिक सुदृढ़ता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक मोल्डाविया, [[उस्मानी साम्राज्य |ओटोमन साम्राज्य]] का एक अधीन रियासत बन गया। इसके परिणामस्वरूप किले में मोल्डावियाई सैनिकों के साथ-साथ [[जाँनिसारी]] (तुर्की विशेष सैनिक) की एक टुकड़ी भी तैनात की गई। इसी काल में [[उस्मानी साम्राज्य| तुर्कों]] ने किले का विस्तार और सुदृढ़ीकरण किया, जिससे इसकी रक्षा-व्यवस्था और अधिक प्रभावशाली हो गई। 1538 में जान टार्नोव्स्की के नेतृत्व में [[पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल]] की सेनाओं ने खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। इस आक्रमण के दौरान किले की दीवारों को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके परिणामस्वरूप तीन मीनारें तथा पश्चिमी दीवार का एक भाग नष्ट हो गया। बाद में 1540 से 1544 के बीच किले का पुनः जीर्णोद्धार किया गया। 1563 में दिमित्रो विश्नेवेत्स्की ने लगभग पाँच सौ ज़ापोरोज़ियन कोसैक सैनिकों के साथ किले पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया और कुछ समय तक इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखा। इस प्रकार, खोतिन दुर्ग विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और इसकी सामरिक महत्ता निरंतर बनी रही। ===17वीं से 19वीं शताब्दी तक=== [[Image:Flag of Khotyn.png|thumb|200px|खोतिन किले को खोतिन के शहर के ध्वज पर दर्शाया गया है।]] 1600 में सिमियन मोविला ने अपने भाई इरेमिया मोविला के साथ खोतिन किले में शरण ली।<ref>{{cite encyclopedia|url=http://www.encyclopediaofukraine.com/display.asp?AddButton=pages\M\O\MohylaPetro.htm|title=Mohyla, Petro|access-date=2008-07-12|last=ओह्लोब्लिन|first=ऑलेक्ज़ेंडर|encyclopedia= यूक्रेन का विश्वकोश }}</ref> दोनों भाइयों ने पोलिश समर्थन के साथ माइकल द ब्रेव के विरुद्ध वंशवादी संघर्ष में भाग लिया, जो मोल्डाविया और वालाचिया की संयुक्त सेनाओं का नेतृत्व करते हुए किले पर अधिकार करने का प्रयास कर रहा था। इस संघर्ष ने किले की राजनीतिक और सैन्य महत्ता को एक बार फिर स्पष्ट किया। 1611 में स्टीफन टोम्सा द्वितीय ने ओटोमन साम्राज्य के समर्थन से मोल्डाविया की सत्ता प्राप्त की और 1615 में अपने पदच्युत होने तक खोतिन किले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। इसके पश्चात 1615 में पोलिश सेना ने किले पर पुनः अधिकार कर लिया, किंतु 1617 में इसे फिर से ओटोमन साम्राज्य को सौंप दिया गया। 1620 में पोलिश सेना ने एक बार फिर खोतिन नगर और किले पर कब्जा कर लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दुर्ग निरंतर विभिन्न शक्तियों के बीच संघर्ष का केंद्र बना रहा और उसकी सामरिक तथा राजनीतिक महत्ता समय के साथ बनी रही। सितंबर से अक्टूबर 1621 के बीच खोतिन दुर्ग एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना, जब जान कैरोल चोडकीविच और पेट्रो साहिदाचनी के नेतृत्व में पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल की सेना ने [[उस्मान द्वितीय]] की विशाल तुर्की सेना के विरुद्ध सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया। लगभग 50,000 सैनिकों वाली राष्ट्रमंडल सेना ने अद्भुत साहस और रणनीति का परिचय देते हुए लगभग 100,000 सैनिकों की ओटोमन सेना को रोक दिया। यह संघर्ष खोतिन की लड़ाई (1621) के नाम से प्रसिद्ध है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को निर्णायक रूप से प्रभावित किया। इस संघर्ष के उपरांत 8 अक्टूबर 1621 को खोतिन शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रमंडल की ओर ओटोमन साम्राज्य की बढ़त रुक गई। इस संधि ने डेनिस्टर नदी को, जो मोल्डाविया रियासत की सीमा थी, राष्ट्रमंडल और ओटोमन साम्राज्य के बीच आधिकारिक सीमा के रूप में स्थापित किया। परिणामस्वरूप, खोतिन किले को ओटोमन साम्राज्य के अधीनस्थ के रूप में पुनः मोल्डाविया को सौंप दिया गया,<ref>{{cite web|url=http://www.wilanow-palac.art.pl/index.php?enc=87|title=Chocim, 1621|access-date=2008-07-12|last=पोधोरोडेकी|first=लेसज़ेक|year=1971|publisher=मुज़ेउम पलाक डब्ल्यू वलियानोवी |language=pl}}</ref> जिससे यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक संतुलन का केंद्र बन गया। हेतमान बोहदान खमेलनित्स्की ने प्रारंभ में मोल्डाविया और वलाकिया की रियासतों के साथ गठबंधन स्थापित किया, जिसके पश्चात 1650 के वसंत में उन्होंने कुछ समय के लिए खोतिन किले पर अधिकार कर लिया। यह घटना उस समय की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाती है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने-अपने हितों के लिए निरंतर संघर्षरत थीं। 1653 में डेनिस्टर नदी के बाएँ तट पर लड़े गए ज़्वानेट्स का युद्ध के दौरान, खोतिन से तुर्कों की एक टुकड़ी ने मोल्डावियाई सेनाओं के साथ मिलकर युद्ध में भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दुर्ग उस समय भी सामरिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ था। नवंबर 1673 में खोतिन दुर्ग पुनः एक निर्णायक संघर्ष का केंद्र बना, जब यह तुर्कों के नियंत्रण से बाहर हो गया। इसके पश्चात जान सोबिएस्की ने पोलिश-कोसैक संयुक्त सेना के साथ किले पर अधिकार करने के लिए अभियान प्रारंभ किया।<ref>{{cite book|title=History of cities and villages of the Ukrainian SSR|year=1971|location=[[कीव]]|url=http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|access-date=2008-02-11|archive-date=2008-05-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20080530050135/http://www.tovtry.km.ua/ua/history/kp/kp030.html|url-status=dead}}</ref> [[File:Осада Хотина 1788.jpg|thumb|खोतिन की ऑस्ट्रो-रूसी घेराबंदी , 1788]] अगस्त 1674 की शुरुआत में, तुर्की सेना ने खोतिन किले पर पुनः अधिकार कर लिया। इसके पश्चात तत्कालीन पोलिश राजा जान सोबिएस्की ने 1684 में दुर्ग पुनः प्राप्त किया और इसे अपने नियंत्रण में रखा। 1699 में कार्लोविट्ज़ शांति संधि के परिणामस्वरूप किले को पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल से मोल्डाविया को हस्तांतरित कर दिया गया।<ref>{{cite web |url=http://turizm.lib.ru/s/sergej_h/hotin.shtml|title=Khotyn Ancient and Modern|access-date=2008-07-12|last=ख्वोरोस्टेंको |first=सर्गेई|year=2005|publisher=turizm.lib.ru|language=ru}}</ref> 1711 में तुर्कों ने खोतिन पर फिर से कब्जा कर लिया और इसके बाद 1712 से 1718 तक छह वर्षों के विस्तृत पुनर्निर्माण कार्य के दौरान किले को मजबूती प्रदान की। इस पुनर्निर्माण के पश्चात खोतिन दुर्ग पूर्वी यूरोप में ओटोमन साम्राज्य का सबसे प्रमुख और मजबूत रक्षा गढ़ बन गया, जिसने क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया। 1739 में, रूसियों ने स्टावुचानी (आज का स्टावसिएन) के युद्ध में तुर्कों को पराजित किया, जिसमें यूक्रेनी, [[रूसी लोग |रूसी]], [[जॉर्जियाई]] और मोल्डावियाई सैनिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसी अवसर पर खोतिन किले को घेर लिया गया, और तुर्की सेना के कमांडर इलियास कोलसेग ने रूसी कमांडर बुरखार्ड क्रिस्टोफ वॉन मुनिच के समक्ष किले को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद 1769 और 1788 में रूसियों ने किले पर पुनः आक्रमण किए, जो प्रत्येक बार सफल रहे, लेकिन शांति संधियों के अनुसार दुर्ग तुर्कों को वापस कर दिया गया। अंततः रूस-तुर्की युद्ध (1806–1812) के उपरांत खोतिन दुर्ग स्थायी रूप से रूस के अधीन आ गया और बेस्सारबिया का एक महत्वपूर्ण जिला केंद्र बन गया। हालांकि, तुर्कों के पीछे हटने के दौरान किले को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। 1826 में खोतिन शहर को एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया। 1832 में किले के भीतर स्थित क्षेत्र में सेंट अलेक्जेंडर नेवस्की का नया चर्च निर्मित किया गया। 1856 में रूस सरकार ने खोतिन किले को सैन्य इकाई का दर्जा देना समाप्त कर दिया, जिससे इसका सैन्य महत्व समाप्त हुआ और यह ऐतिहासिक स्मारक के रूप में विकसित हुआ। ===20वीं और 21वीं शताब्दी=== [[File:Хотинська фортеця в місячну ніч.jpg|thumb|उत्तर दिशा से दिखाई देने वाला दुर्ग]] [[प्रथम विश्व युद्ध]] और [[रूसी गृहयुद्ध]] ने खोतिन के लोगों पर अत्यधिक विपत्ति और कठिनाइयाँ लाईं। जनवरी 1918 में, मोल्दोवन लोकतांत्रिक गणराज्य ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की और मार्च में रोमानिया के साथ एकजुट हो गया। जनवरी 1919 में [[रूसी सोवियत संघात्मक समाजवादी गणराज्य |रूस]] के बोल्शेविकों द्वारा रोमानिया-विरोधी विद्रोह छेड़ा गया। इस विद्रोह के दौरान खोतिन डायरेक्टोरेट ने क्षेत्र के सौ से अधिक गांवों में सत्ता स्थापित कर ली और इसके संचालन की जिम्मेदारी वाई.आई. वोलोशेंको-मार्डार्येव के पास थी। विद्रोह केवल दस दिनों तक चला और 1 फरवरी को रोमानियाई सैनिक खोतिन में प्रवेश कर गए। [[पेरिस शांति सम्मेलन]] के बाद खोतिन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोमानिया के हिस्से के रूप में मान्यता दी गई, और इसके पश्चात यह 22 वर्षों तक रोमानिया का हिस्सा बना रहा। इस अवधि में खोतिन दुर्ग और नगर, होतिन काउंटी का प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्यरत रहे।<ref name="Klymenko">{{cite web |url=http://serg-klymenko.narod.ru/Other_World/Ukraine.PivdenZahid_4.htm|title=On the southwest of Kiev, July 2004. Fourth day: Chernivsti -> Khotyn -> Kamianets-Podilskyi -> Chornokozyntsi -> Chernivsti|access-date=2008-07-16|last=क्लिमेंको|first=सर्गी|date= जुलाई 2004|work=serg-klymenko.narod.ru|language=uk}}</ref> 28 जून 1940 को सोवियत संघ ने बेस्सारबिया और उत्तरी बुकोविना पर कब्जा कर लिया। मॉस्को के आदेशानुसार, खोतिन शहर सहित बेस्सारबिया के उत्तरी भाग को यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य में शामिल कर लिया गया। 6 जुलाई 1941 को नाज़ी जर्मन और रोमानियाई सेनाओं ने खोतिन पर पुनः विजय प्राप्त की और इसे बुकोविना प्रांत के हिस्से के रूप में रोमानिया को वापस सौंप दिया। 1944 की गर्मियों में, लाल सेना ने इस क्षेत्र पर पुनः कब्जा कर लिया, जिससे यह फिर से यूक्रेन का हिस्सा बन गया। सितंबर 1991 में, खोतिन की लड़ाई की 370वीं वर्षगांठ के अवसर पर यूक्रेनी हेतमान पेट्रो साहिदाचनी के सम्मान में एक स्मारक स्थापित किया गया, जिसे [[मूर्ति कला| मूर्तिकार]] आई. हमाल ने डिजाइन किया था।<ref name="Klymenko" /> वर्तमान में, खोतिन चेर्नित्सी ओब्लास्ट के सबसे बड़े और प्रमुख शहरों में से एक है और यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक, [[पर्यटन]] और [[संस्कृति |सांस्कृतिक]] केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से, [[युक्रेन की सरकार|यूक्रेन के मंत्रिपरिषद]] ने 2000 में खोतिन किले को राज्य ऐतिहासिक और स्थापत्य रिजर्व घोषित किया। <ref>{{Cite web |type=[[युक्रेन की सरकार|मंत्रिपरिषद का फरमान ]]|number=1539|title=About the governmental historical-architectural reserve "Khotyn Fortress"|url=http://zakon1.rada.gov.ua/cgi-bin/laws/main.cgi?nreg=1539-2000-%D0%BF|date=2000-10-12|archive-date=4 मार्च 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304055749/http://zakon1.rada.gov.ua/laws/show/1539-2000-%D0%BF|url-status=dead}}</ref>सितंबर 2002 में, इस प्राचीन शहर ने अपनी 1,000वीं वर्षगांठ भव्य रूप से मनाई,<ref name="Klymenko" /> जो इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। {{wide image|WLM - 2020 - Хотинська фортеця - 01.jpg|773px|जुलाई 2016 में शाम के उजाले में किले का विहंगम दृश्य।}} {{wide image|Fortress of Chocim (Khotyn).jpg|773px|खोतिन किले को ड्रोन से अद्वितीय दृश्य दिखाई देता है।}} ==फिल्मों में खोतिन दुर्ग == [[Image:Khotyn fortress 5.jpg|thumb|काले धब्बे का नज़दीकी दृश्य]] खोतिन किले ने अपनी भव्य और ऐतिहासिक संरचना के कारण कई प्रसिद्ध साहसिक फिल्मों की शूटिंग का स्थल प्रदान किया है। इनमें द वाइपर (1965), ज़खार बर्किट (1971), द एरोस ऑफ रॉबिन हुड (1975), ओल्ड फोर्ट्रेस (1976), डी'आर्टगन एंड थ्री मस्केटियर्स (1978), द बैलाड ऑफ द वैलेंट नाइट इवानहो (1983), द ब्लैक एरो (1985)<ref name="Klymenko"/> और तारास बुलबा (2009)<ref>{{cite web|url=http://www.castles.com.ua/khotyn.html|title=Khotyn - Chocim|access-date=2008-07-12|work=Castles.com.ua}}</ref> शामिल हैं। इन फिल्मों में खोतिन किले ने अक्सर ला रोशेल सहित विभिन्न [[फ़्रान्स| फ्रांसीसी]] और [[इंग्लैण्ड |अंग्रेजी]] [[गढ़ |महलों]] का प्रतिनिधित्व किया, जिससे इसकी ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्ता का प्रदर्शन होता है। किले की भव्य दीवारें, मीनारें और प्रांगण फिल्म निर्माताओं को मध्ययुगीन और सामरिक दृश्यों के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, जिससे इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित किया गया है। ==दंतकथाएँ== खोतिन दुर्ग के सैकड़ों वर्षों के इतिहास के साथ अनेक [[आख्यान| किंवदंतियाँ]] भी जुड़ी हुई हैं, जो इसकी रहस्यमयी और भव्य छवि को और भी रोचक बनाती हैं। इनमें से कुछ लोकप्रिय किंवदंतियाँ किले की दीवार पर स्थित बड़े काले धब्बे की उत्पत्ति से संबंधित हैं। एक किंवदंती के अनुसार, यह काला धब्बा उन खोतिन विद्रोहियों के आँसुओं से बना था, जिन्होंने ओटोमन तुर्कों के विरुद्ध विद्रोह किया और जिन्हें किले के अंदर मार दिया गया। एक अन्य किंवदंती यह बताती है कि यह धब्बा ओक्साना नामक एक लड़की के आँसुओं से उत्पन्न हुआ, जिसे तुर्कों ने किले की दीवारों में जिंदा दफना दिया था।<ref>[http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html Khotyn Fortress] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081209082037/http://www.shepetivka.org.ua/2007/10/31/khotinska_fortecja.html |date=2008-12-09 }} — Newspaper article from ''शेपेतिव्स्की विस्तनिक'' {{in lang|uk}}, Accessed 16 जुलाई 2008.</ref> ये दंतकथाएँ न केवल खोतिन किले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि इसकी रोमांचक और रहस्यमयी छवि को भी जीवंत बनाए रखती हैं, जो आज भी आगंतुकों और इतिहासप्रेमियों को आकर्षित करती है। ==कला में खोतिन== <gallery> File:Battle of Khotyn 1673.PNG|खोतिन का युद्ध, 1673 File:Józef Brandt, Bitwa pod Chocimiem.jpg|खोतिन का युद्ध, 1673 File:John III Sobieski in battle of Khotyn 1673.PNG|1673 में खोतिन की लड़ाई में जॉन तृतीय सोबिस्की File:Battle of Chocim 1621.PNG|चोसिम की लड़ाई, 1621. जोसेफ ब्रांट। File:Rokowania pod Chocimiem (438047) (cropped).jpg|चोकिम संधि, 1621. फ़्रांसिसज़ेक स्मगलविक्ज़, 1785। File:Chodkiewicz wife2.JPG|खोतिन युद्ध से पूर्व विदाई, 1621 File:Chodkiewicz death.JPG|चोडकीविच की मृत्यु File:Rubens Prince Władysław Vasa.jpg|प्रिंस व्लाडिसलाव वासा (1624) File:Anonymous Stanisław Lubomirski in the camp.jpg|शिविर में स्टैनिस्लाव लुबोमिर्स्की (1647) File:Apoteoza Zygmunta III Wazy (65208861).jpg|खोतिन युद्ध के बाद अपोतेओज़ा ज़िग्मुंटा III </gallery> ==सन्दर्भ== {{reflist|33em}} ==बाहरी कड़ियाँ== {{Commons category|Khotyn Fortress}} * [https://web.archive.org/web/20060116124011/http://www.molddata.md/Cultura/cetat/cthotin.html Cetatea Hotin] — Moldata.com {{in lang|ro}} * [https://web.archive.org/web/20110812061037/http://batioha.livejournal.com/38538.html Pictures of Khotyn Fortress on LiveJournal] {{in lang|ru}} * [https://www.youtube.com/watch?v=mm-nUNTmGWQ Video "Khotyn Fortress, aerial survey (4k Ultra HD)"] * [https://www.youtube.com/watch?v=hXJPVDhc7zs Khotyn Fortress screened from a drone]. [[श्रेणी:यूक्रेन में दुर्ग]] r9l3bkm4ikz5092cob292hvw6zgzocr श्रेणी:अंग्रेजी क्रिकेट सीजन 14 1610845 6536795 2026-04-06T06:07:27Z अनिरुद्ध कुमार 18906 श्रेणी बनायी 6536795 wikitext text/x-wiki यह 1962 अंग्रेजी क्रिकेट सीजन से संबंधित पृष्ठों की श्रेणी है। 3ls2yav8gelz5161in8b631qzpbgaa4 6536797 6536795 2026-04-06T06:07:51Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:क्रिकेट प्रतियोगितायें]] जोड़ी 6536797 wikitext text/x-wiki यह 1962 अंग्रेजी क्रिकेट सीजन से संबंधित पृष्ठों की श्रेणी है। [[श्रेणी:क्रिकेट प्रतियोगितायें]] r4wq5ruy42j232h5gizrx837piyvqob 6536798 6536797 2026-04-06T06:08:10Z अनिरुद्ध कुमार 18906 [[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:इंग्लैंड]] जोड़ी 6536798 wikitext text/x-wiki यह 1962 अंग्रेजी क्रिकेट सीजन से संबंधित पृष्ठों की श्रेणी है। [[श्रेणी:क्रिकेट प्रतियोगितायें]] [[श्रेणी:इंग्लैंड]] r9g52ulkd3rf8pw4hjx389mftty3tbh सदस्य वार्ता:Vertical Series 3 1610846 6536843 2026-04-06T07:06:59Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: {{हहेच}} साँचे हटाना [[:पूर्ति आर्या]] पर. 6536843 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। कृपया लेख के शीर्ष से [[साँचा:हहेच लेख|हटाने हेतु नामांकन की सूचना]] व [[वि:हहेच|हटाने हेतु चर्चा पृष्ठ]] से अन्य सदस्यों की टिप्पणियाँ न हटायें , जैसा की आपने [[:पूर्ति आर्या]] पर किया। इससे आम सहमति बनाने की प्रक्रिया को हानि पहुँचती है। अगर आप किसी लेख के हटाये जाने के विरोध में अपना विचार रखना चाहते हैं, तो कृपया ऐसा उचित चर्चा पृष्ठ पर करें। धन्यवाद।<!-- Template:uw-afd1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:06, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 3rz3a8ek44md6eufywwl8panr7gxm0t सदस्य वार्ता:व्याकरण में सुधार 3 1610847 6536847 2026-04-06T07:09:49Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: अरचनात्मक संपादन [[:पूर्ति आर्या]] पर. 6536847 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/व्याकरण में सुधार|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]], जैसे कि आपने किया है [[:पूर्ति आर्या]] पर, सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:09, 6 अप्रैल 2026 (UTC) mkb8pzrfzmeetorg65eijkk5o9j7k9f जेबी कृपलानी 0 1610848 6536848 2026-04-06T07:10:06Z अनुनाद सिंह 1634 [[जे॰ बी॰ कृपलानी]] को अनुप्रेषित 6536848 wikitext text/x-wiki #पुनर्प्रेषित [[जे॰ बी॰ कृपलानी]] 3f4yp0i0fl5dlp096nnqhxedqwakqcq सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड 3 1610849 6536851 2026-04-06T07:12:21Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: अरचनात्मक संपादन. 6536851 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/अमन मदारचूड|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]] सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:12, 6 अप्रैल 2026 (UTC) l84vzlrdjfu8rm6v4nt11mt739cg85m 6536871 6536851 2026-04-06T07:22:29Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: अरचनात्मक संपादन [[:पूर्ति आर्या]] पर. 6536871 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/अमन मदारचूड|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]] सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:12, 6 अप्रैल 2026 (UTC) [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/अमन मदारचूड|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]], जैसे कि आपने किया है [[:पूर्ति आर्या]] पर, सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:22, 6 अप्रैल 2026 (UTC) sena4q9kwfgdt2slg76foss216c53y5 6536874 6536871 2026-04-06T07:23:51Z अमन मदारचूड 919023 /* अप्रैल 2026 */ उत्तर 6536874 wikitext text/x-wiki 6536879 6536874 2026-04-06T07:30:22Z AMAN KUMAR 911487 सावधानी बरतें: अरचनात्मक संपादन [[:पूर्ति आर्या]] पर. 6536879 wikitext text/x-wiki 6536908 6536879 2026-04-06T09:29:34Z संजीव कुमार 78022 असम्मानजनक शब्द हटाये 6536908 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/अमन मदारचूड|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]] सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:12, 6 अप्रैल 2026 (UTC) [[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/अमन मदारचूड|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]], जैसे कि आपने किया है [[:पूर्ति आर्या]] पर, सकारात्मक नहीं दिखता व प्रत्यावर्तित या हटा दिया गया है। अगर आप कोई परीक्षण संपादन करना चाहते हैं तो कृपया [[WP:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें, और इस ज्ञानकोश पे रचनात्मक योगदान करने के बारे में अधिक जानने के लिए [[विकिपीडिया:स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पढ़ें, धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:22, 6 अप्रैल 2026 (UTC) :[[सदस्य:अमन मदारचूड|अमन मदारचूड]] ([[सदस्य वार्ता:अमन मदारचूड|वार्ता]]) 07:23, 6 अप्रैल 2026 (UTC) [[File:Information orange.svg|25px|alt=Information icon]] कृपया विकिपीडिया पर अरचनात्मक संपादन करने से बचें, जैसा कि आपने [[:पूर्ति आर्या]] पर किया है। आपके संपादन [[विकिपीडिया:बर्बरता|बर्बरता]] प्रतीत होते हैं और [[सहायता:प्रत्यावर्तन|पूर्ववत]] कर दिए गए, या हटा दिए गए हैं। अगर आप परीक्षण करना चाहते हैं, तो कृपया [[विकिपीडिया:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का प्रयोग करें। [[विकिपीडिया:प्रबन्धक|प्रबन्धक]] बार-बार बर्बरता करने वाले सदस्यों को [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|अवरोधित]] करने की क्षमता रखते हैं। धन्यवाद।<!-- Template:uw-vandalism2 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:30, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 8r4owfaiom5mg1f7cpwx1jxg0wejkwz सदस्य वार्ता:तेरी बह प्रेग्नेंट मादरचोद अमन 3 1610850 6536865 2026-04-06T07:20:00Z AMAN KUMAR 911487 सामान्य टिप्पणी: किसी संपादक को लक्ष्य करते हुये निजी हमला [[:पूर्ति आर्या]] पर. 6536865 wikitext text/x-wiki == अप्रैल 2026 == [[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। सभी का इस विश्वकोश पर सकारात्मक योगदान देने हेतु स्वागत है, परन्तु ध्यान रखें कि किसी भी सदस्य पर कोई [[विकिपीडिया:निजी टिप्पणियाँ एवं आक्षेप|निजी टिप्पणी अथवा आक्षेप]] ना करें, जैसा कि आपने [[:पूर्ति आर्या]] पर किया। कृपया सदस्यों के सम्पादानों पर टिप्पणी करें, सदस्यों पर नहीं। इस विश्वकोश में सहयोग देने के सम्बन्ध में अधिक जानकारी हेतु [[विकिपीडिया:नवागन्तुकों का स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। आपका अपनी लेख पर सभ्य रूप से टिप्पणी करने के लिए स्वागत है। धन्यवाद।<!-- Template:uw-npa1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:20, 6 अप्रैल 2026 (UTC) d6k1vxjj0hoevihzh1br29rqent55t5 6536933 6536865 2026-04-06T10:35:19Z Cptabhiimanyuseven 858857 शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#स2|शीह स2]]) 6536933 wikitext text/x-wiki {{db-nouser}} == अप्रैल 2026 == [[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पर आपका स्वागत है। सभी का इस विश्वकोश पर सकारात्मक योगदान देने हेतु स्वागत है, परन्तु ध्यान रखें कि किसी भी सदस्य पर कोई [[विकिपीडिया:निजी टिप्पणियाँ एवं आक्षेप|निजी टिप्पणी अथवा आक्षेप]] ना करें, जैसा कि आपने [[:पूर्ति आर्या]] पर किया। कृपया सदस्यों के सम्पादानों पर टिप्पणी करें, सदस्यों पर नहीं। इस विश्वकोश में सहयोग देने के सम्बन्ध में अधिक जानकारी हेतु [[विकिपीडिया:नवागन्तुकों का स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] देखें। आपका अपनी लेख पर सभ्य रूप से टिप्पणी करने के लिए स्वागत है। धन्यवाद।<!-- Template:uw-npa1 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:20, 6 अप्रैल 2026 (UTC) i3a9oaip17c4czf4bhzkckzadtwtgx9 अलवी मुसलमान 0 1610851 6536883 2026-04-06T07:51:26Z अनुनाद सिंह 1634 "[[:en:Special:Redirect/revision/1345866399|Alevism]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया 6536883 wikitext text/x-wiki अलवी मुसलमान इस्लाम का एक सम्प्रदाय है जिसे क़िज़िलबाशिज़्म के नाम से भी जाना जाता है। यह एक समन्वयात्मक और [[रहस्यवाद|रहस्यवादी]] परंपरा है जिसे हाजी बेक्ताश वेली ने चलाया ।<ref>{{Cite web|url=https://www.rudaw.net/kurmanci/kurdistan/1801202311|title=Banga Pîrên Elewiyên Dêrsimê; 'Li zimanê xwe xwedî derbikevin'|website=[[Rudaw]]|access-date=2025-02-08}}</ref>{{Efn|"Qizilbashism" is generally disliked among Alevis due to being considered a derogatory exonym}}<ref name="Syncrétismes">{{Cite book|title=Syncrétismes et hérésies dans l'Orient seljoukide et ottoman (XIVe-XVIIIe siècles): actes du colloque du collège de France, octobre 2001|last=Veinstein|first=Gilles|date=2005|publisher=Peeters|isbn=9782877238359|location=Paris ; Dudley, MA|pages=90}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Mete|first=Levent|date=2019|title=Buyruk und al Jafr Das Esoterische Wissen Alis|trans-title=Buyruk and al Jafr The esoteric knowledge of Ali|url=https://abked.de/index.php/abked/article/download/236/215/|journal=Alevilik-Bektaşilik Araştırmaları Dergisi: Forschungszeitschrift über das Alevitentum und das Bektaschitentum|language=de|volume=19|pages=313–350|access-date=2024-01-09}}</ref><ref name="abked.de3">{{Cite journal|last=Kiriakidis|first=Andreas|date=December 2011|title=Comparison Between Bektasi Mistisism And Greek Orthodox Monasticism|url=https://abked.de/index.php/abked/article/view/159|publisher=Journal of Alevism-Bektashism Studies|issue=4|pages=126–147|doi=10.24082/abked.2011.04.004|access-date=27 November 2025|doi-access=free}}</ref><ref name="kulturportali.gov.tr">{{Cite web|url=https://www.kulturportali.gov.tr/turkiye/tunceli/kulturatlasi/alevilik|title=Alevilik|website=kulturportali.gov.tr|publisher=Ministry of Culture and Tourism|access-date=27 November 2025}}</ref> आम तौर पर यह माना जाता है कि यह ट्वेल्वर [[शिया इस्लाम|शिया धर्म]] के [[सूफ़ीवाद|सूफी]] सम्प्रदाय के समान है। [[श्रेणी:तुर्की में धर्म]] [[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]] [[श्रेणी:अरबी भाषा पाठ वाले लेख]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] tr5guo4p43cu0l37q9nnutoyg75yczb 6536885 6536883 2026-04-06T07:54:15Z अनुनाद सिंह 1634 6536885 wikitext text/x-wiki '''अलवी मुसलमान''' [[इस्लाम]] का एक [[सम्प्रदाय]] है जिसे क़िज़िलबाशिज़्म के नाम से भी जाना जाता है। यह एक समन्वयात्मक और [[रहस्यवाद|रहस्यवादी]] परंपरा है जिसे [[हाजी बेक्ताश वेली]] ने चलाया ।<ref>{{Cite web|url=https://www.rudaw.net/kurmanci/kurdistan/1801202311|title=Banga Pîrên Elewiyên Dêrsimê; 'Li zimanê xwe xwedî derbikevin'|website=[[Rudaw]]|access-date=2025-02-08}}</ref>{{Efn|"Qizilbashism" is generally disliked among Alevis due to being considered a derogatory exonym}}<ref name="Syncrétismes">{{Cite book|title=Syncrétismes et hérésies dans l'Orient seljoukide et ottoman (XIVe-XVIIIe siècles): actes du colloque du collège de France, octobre 2001|last=Veinstein|first=Gilles|date=2005|publisher=Peeters|isbn=9782877238359|location=Paris ; Dudley, MA|pages=90}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Mete|first=Levent|date=2019|title=Buyruk und al Jafr Das Esoterische Wissen Alis|trans-title=Buyruk and al Jafr The esoteric knowledge of Ali|url=https://abked.de/index.php/abked/article/download/236/215/|journal=Alevilik-Bektaşilik Araştırmaları Dergisi: Forschungszeitschrift über das Alevitentum und das Bektaschitentum|language=de|volume=19|pages=313–350|access-date=2024-01-09}}</ref><ref name="abked.de3">{{Cite journal|last=Kiriakidis|first=Andreas|date=December 2011|title=Comparison Between Bektasi Mistisism And Greek Orthodox Monasticism|url=https://abked.de/index.php/abked/article/view/159|publisher=Journal of Alevism-Bektashism Studies|issue=4|pages=126–147|doi=10.24082/abked.2011.04.004|access-date=27 November 2025|doi-access=free}}</ref><ref name="kulturportali.gov.tr">{{Cite web|url=https://www.kulturportali.gov.tr/turkiye/tunceli/kulturatlasi/alevilik|title=Alevilik|website=kulturportali.gov.tr|publisher=Ministry of Culture and Tourism|access-date=27 November 2025}}</ref> आम तौर पर यह माना जाता है कि यह ट्वेल्वर [[शिया इस्लाम|शिया धर्म]] के [[सूफ़ीवाद|सूफी]] सम्प्रदाय के समान है। "अलवी" सम्प्रदाय को "नुसैरिया نصيريون‎" भी कहा जाता है। यह नाम शियाओं के 11 वें इमाम हसन अल अस्करी इब्ने नुसैर के नाम से लिया गया, जिनका जन्म सन 873 में हुआ था। अलवी अधिकांश सीरिया, लेबनान, इराक और कुछ पाकिस्तान में भी हैं। इनकी कुल संख्या एक करोड़ पैंतीस लाख है। सीरिया का राष्ट्रपति "हाफिज अल असद" भी अलवी है, जो सन 1970 में राष्ट्रपति बना था। कुछ लोग अलवियों को शिया कहते हैं, लेकिन यह सुन्नी और शिया से बिलकुल अलग और विपरीत विचार रखते हैं। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:तुर्की में धर्म]] [[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]] [[श्रेणी:अरबी भाषा पाठ वाले लेख]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] krtofcm2hkmpfnn00vnulnkp43kd6z1 6536925 6536885 2026-04-06T10:18:02Z संजीव कुमार 78022 प्रारूपी सुधार 6536925 wikitext text/x-wiki '''अलवी मुसलमान''' [[इस्लाम]] का एक [[सम्प्रदाय]] है जिसे '''क़िज़िलबाशिज़्म''' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक समन्वयात्मक और [[रहस्यवाद|रहस्यवादी]] परंपरा है जिसे [[हाजी बेक्ताश वेली]] ने चलाया।<ref>{{Cite web|url=https://www.rudaw.net/kurmanci/kurdistan/1801202311|title=Banga Pîrên Elewiyên Dêrsimê; 'Li zimanê xwe xwedî derbikevin'|website=रुदाव मीडिया नेटवर्क|access-date=2025-02-08|language=ku}}</ref>{{Efn|"क़िज़िलबाशिज़्म" शब्द आमतौर पर अलेवियों के बीच नापसंद किया जाता है क्योंकि इसे एक अपमानजनक बाहरी नाम माना जाता है।}}<ref name="Syncrétismes">{{Cite book|title=Syncrétismes et hérésies dans l'Orient seljoukide et ottoman (XIVe-XVIIIe siècles): actes du colloque du collège de France, octobre 2001|last=Veinstein|first=Gilles|date=2005|publisher=Peeters|isbn=9782877238359|location=Paris ; Dudley, MA|pages=90}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Mete|first=Levent|date=2019|title=Buyruk und al Jafr Das Esoterische Wissen Alis|trans-title=Buyruk and al Jafr The esoteric knowledge of Ali|url=https://abked.de/index.php/abked/article/download/236/215/|journal=Alevilik-Bektaşilik Araştırmaları Dergisi: Forschungszeitschrift über das Alevitentum und das Bektaschitentum|language=de|volume=19|pages=313–350|access-date=2024-01-09}}</ref><ref name="abked.de3">{{Cite journal|last=किरियाकिड्स|first=एंड्रियास|date=दिसम्बर 2011|title=Comparison Between Bektasi Mistisism And Greek Orthodox Monasticism|url=https://abked.de/index.php/abked/article/view/159|publisher=|issue=4|pages=126–147|doi=10.24082/abked.2011.04.004|access-date=27 नवम्बर 2025|doi-access=free|journal=जर्नल ऑफ़ अलेविज़्म-बेक्ताशिज़्म स्टडीज़}}</ref><ref name="kulturportali.gov.tr">{{Cite web|url=https://www.kulturportali.gov.tr/turkiye/tunceli/kulturatlasi/alevilik|title=Alevilik|website=kulturportali.gov.tr|publisher=Ministry of Culture and Tourism|access-date=27 नवम्बर 2025}}</ref> आम तौर पर यह माना जाता है कि यह ट्वेल्वर [[शिया इस्लाम|शिया धर्म]] के [[सूफ़ीवाद|सूफी]] सम्प्रदाय के समान है। "अलवी" सम्प्रदाय को "नुसैरिया نصيريون‎" भी कहा जाता है। यह नाम शियाओं के 11 वें इमाम हसन अल अस्करी इब्ने नुसैर के नाम से लिया गया, जिनका जन्म सन 873 में हुआ था। अलवी अधिकांश सीरिया, लेबनान, इराक और कुछ पाकिस्तान में भी हैं। इनकी कुल संख्या एक करोड़ पैंतीस लाख है। सीरिया का राष्ट्रपति "हाफिज अल असद" भी अलवी है, जो सन 1970 में राष्ट्रपति बना था। कुछ लोग अलवियों को शिया कहते हैं, लेकिन यह सुन्नी और शिया से बिलकुल अलग और विपरीत विचार रखते हैं। == टिप्पणी == {{notelist}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:तुर्की में धर्म]] [[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]] [[श्रेणी:अरबी भाषा पाठ वाले लेख]] [[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]] n1pbuyg9vtqzegwo3th77futn2qdvct वास्युकिवका के टोरेडोर 0 1610852 6536902 2026-04-06T09:15:56Z Surajkumar9931 853179 नया पृष्ठ: {{Infobox book | image = | name = वास्युकिवका के टोरेडोर | title_orig = Тореадори з Васюківки | author = [[विशेवोल्ड नेस्ताइको]] | genre = [[उपन्यास]] | language = [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]] | published = 1972 | media_type = | pages = | series = | followed_by = | isbn = }} '''वास्युकिव्... 6536902 wikitext text/x-wiki {{Infobox book | image = | name = वास्युकिवका के टोरेडोर | title_orig = Тореадори з Васюківки | author = [[विशेवोल्ड नेस्ताइको]] | genre = [[उपन्यास]] | language = [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]] | published = 1972 | media_type = | pages = | series = | followed_by = | isbn = }} '''वास्युकिव्का के तोरेडोर''' ([[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Тореадори з Васюківки) यूक्रेनी [[लेखक]] वेसेवोलॉड नेस्टायको द्वारा 1963 और 1970 के बीच लिखा गया एक हास्यप्रद तीन भागों वाला बाल [[उपन्यास]] है। यह पुस्तक [[समकालीन]] यूक्रेनी [[साहित्य]] में सबसे प्रमुख बाल [[उपन्यास|उपन्यासों]] में से एक मानी जाती है और इसका 20 से अधिक [[भाषा|भाषाओं]] में [[अनुवाद]] किया गया है। ==प्लॉट== उपन्यास में तीन एपिसोड शामिल हैं (अलग-अलग कहानियों के रूप में प्रकाशित): "द एडवेंचर्स ऑफ रॉबिन्सन कुकुरुज़ो" (यूक्रेनी: «Пригоди Робінзона Кукурузо»), "द स्ट्रेंजर फ्रॉम अपार्टमेंट थर्टीन" (यूक्रेनी: «Незнайомець із тринадцятої квартири») और "द सीक्रेट ऑफ़ द थ्री अननोन्स" (यूक्रेनी: «Таємниця трьох प्रत्येक एपिसोड की अपनी एक [[कहानी|तार्किक कहानी]] है, जो मुख्य पात्रों के माध्यम से ही अन्य एपिसोड से जुड़ी हुई है।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://tyzhden.ua/Publication/3752|title=Пригоди та книжки Всеволода Нестайка|website=tyzhden.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> पुस्तक के मुख्य पात्र वास्युकिवका गाँव के यूक्रेनी स्कूली छात्र पाव्लुशा ज़ावगोरोडनी (प्रारंभिक संस्करणों में क्रिवोरोत्को) और यावा (इवान) रेन हैं। बहादुर यावा और शांत और समझदार पाव्लुशा विश्व भर में प्रसिद्धि पाने की सच्ची इच्छा से एकजुट हैं।<ref name=":0" /> इसे प्राप्त करने के लिए, त्रयी के दौरान वे टोरेडोर बनने, अपने [[गाँव]] में विदेशी जासूसों को पकड़ने, कीव पर विजय प्राप्त करने और कई अन्य साहसिक कारनामों का प्रयास करते हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश सच्ची मित्रता, आत्म-बलिदान और जरूरतमंदों की मदद करने की तत्परता है।<ref name=":1">{{Citation|title=Toreadors from Vasyukivka (1965) {{!}} MUBI|url=https://mubi.com/en/us/films/toreadors-from-vasyukivka|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> ==इतिहास== लेखक के अनुसार: “मेरे उपन्यासों के डिज़ाइनर, [[कलाकार]] वासिल एवदोकिमेंको ने मुझे एक बार कुछ छात्रों की कहानी सुनाई थी जो एक खेत में खो गए थे और गाँव के एक खंभे पर लगे रेडियो के बजने पर ही बाहर निकल पाए।<ref name=":0" /> इसी से प्रेरित होकर मैंने कहानी 'खेत में रोमांच' लिखी, जिसमें यावा और पावलुशा, जो 'वास्युकिवका के तोरेडोर' त्रयी के मुख्य पात्र हैं, पहली बार दिखाई दिए।” त्रयी की पहली कहानी 1964 में प्रकाशित हुई थी और पूरा उपन्यास 1972 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ। [[सोवियत संघ]] के पतन के बाद, पुस्तक का एक नया संस्करण प्रकाशित हुआ, जिसमें लेखक ने सोवियत विचारधारा के आवरण को हटा दिया, कुछ पुराने विवरण जो आधुनिक पाठक के लिए समझ से परे हैं, उन्हें हटा दिया और नई कहानियाँ जोड़ दीं।<ref name=":1" /> पुस्तक का 20 से अधिक भाषाओं में [[अनुवाद]] हो चुका है और यह यूक्रेन के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा है।<ref name=":1" /> ==फिल्म रूपांतरण== 1965 में, खार्किव [[दूरदर्शन|टेलीविजन]] स्टूडियो ने पुस्तक के पहले एपिसोड पर आधारित इसी नाम की फिल्म बनाई। यह फिल्म रूपांतरण न केवल सोवियत संघ में, बल्कि विदेशी फिल्म समारोहों में भी सफल रहा।<ref name=":1" /> इस रूपांतरण को कई पुरस्कार मिले: म्यूनिख में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (1968) में ग्रैंड प्राइज, [[ऑस्ट्रिया]] में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्य पुरस्कार और अलेक्जेंड्रिया ([[ऑस्ट्रेलिया]]) में अंतर्राष्ट्रीय समारोह (1969) में मुख्य पुरस्कार। 2024 में एक नए फिल्म रूपांतरण की घोषणा की गई।<ref>{{Cite web|url=https://espreso.tv/kultura-v-ukraini-ekranizuyut-knigu-toreadori-z-vasyukivki-vsevoloda-nestayka|title=В Україні екранізують "Тореадори з Васюківки" Всеволода Нестайка|website=espreso.tv|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:सोवियत उपन्यास]] [[श्रेणी:1972 के उपन्यास]] [[श्रेणी:20वीं सदी के यूक्रेनी उपन्यास]] 4farlt98xjxdlcvk1iicrws6cjyfne6 6536912 6536902 2026-04-06T09:38:16Z चाहर धर्मेंद्र 703114 सुधार 6536912 wikitext text/x-wiki {{Infobox book | image = | name = वास्युकिवका के टोरेडोर | title_orig = Тореадори з Васюківки | author = विशेवोल्ड नेस्ताइको | genre = [[उपन्यास]] | language = [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]] | published = 1972 | media_type = | pages = | series = | followed_by = | isbn = }} '''वास्युकिव्का के तोरेडोर''' ([[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Тореадори з Васюківки) प्रसिद्ध यूक्रेनी [[लेखक]] वसेवोलॉड नेस्टायको द्वारा 1963 से 1970 के बीच रचित एक अत्यंत लोकप्रिय और हास्यप्रद तीन-भागीय बाल [[उपन्यास]] है। यह कृति [[समकालीन]] यूक्रेनी [[साहित्य]] में बाल साहित्य की सर्वाधिक उल्लेखनीय रचनाओं में गिनी जाती है। इस उपन्यास की विशेषता इसकी रोचक कथा, जीवंत पात्र और बाल-सुलभ हास्य है, जो पाठकों को मनोरंजन के साथ-साथ संवेदनात्मक अनुभव भी प्रदान करता है। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका अनुवाद 20 से अधिक [[भाषा|भाषाओं]] में किया जा चुका है, जिससे यह विश्वभर के पाठकों तक पहुँची और व्यापक सराहना प्राप्त की। ==प्लॉट== उपन्यास में तीन एपिसोड शामिल हैं (अलग-अलग कहानियों के रूप में प्रकाशित): "द एडवेंचर्स ऑफ रॉबिन्सन कुकुरुज़ो" (यूक्रेनी: «Пригоди Робінзона Кукурузо»), "द स्ट्रेंजर फ्रॉम अपार्टमेंट थर्टीन" (यूक्रेनी: «Незнайомець із тринадцятої квартири») और "द सीक्रेट ऑफ़ द थ्री अननोन्स" (यूक्रेनी: «Таємниця трьох प्रत्येक एपिसोड की अपनी एक [[कहानी|तार्किक कहानी]] है, जो मुख्य पात्रों के माध्यम से ही अन्य एपिसोड से जुड़ी हुई है।<ref name=":0">{{Cite web|url=http://tyzhden.ua/Publication/3752|title=Пригоди та книжки Всеволода Нестайка|website=tyzhden.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> पुस्तक के मुख्य पात्र वास्युकिवका गाँव के यूक्रेनी स्कूली छात्र पाव्लुशा ज़ावगोरोडनी (प्रारंभिक संस्करणों में क्रिवोरोत्को) और यावा (इवान) रेन हैं। बहादुर यावा और शांत और समझदार पाव्लुशा विश्व भर में प्रसिद्धि पाने की सच्ची इच्छा से एकजुट हैं।<ref name=":0" /> इसे प्राप्त करने के लिए, त्रयी के दौरान वे टोरेडोर बनने, अपने [[गाँव]] में विदेशी जासूसों को पकड़ने, कीव पर विजय प्राप्त करने और कई अन्य साहसिक कारनामों का प्रयास करते हैं। पुस्तक का मुख्य संदेश सच्ची मित्रता, आत्म-बलिदान और जरूरतमंदों की मदद करने की तत्परता है।<ref name=":1">{{Citation|title=Toreadors from Vasyukivka (1965) {{!}} MUBI|url=https://mubi.com/en/us/films/toreadors-from-vasyukivka|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> ==इतिहास== लेखक के अनुसार: “मेरे उपन्यासों के डिज़ाइनर, [[कलाकार]] वासिल एवदोकिमेंको ने मुझे एक बार कुछ छात्रों की कहानी सुनाई थी जो एक खेत में खो गए थे और गाँव के एक खंभे पर लगे रेडियो के बजने पर ही बाहर निकल पाए।<ref name=":0" /> इसी से प्रेरित होकर मैंने कहानी 'खेत में रोमांच' लिखी, जिसमें यावा और पावलुशा, जो 'वास्युकिवका के तोरेडोर' त्रयी के मुख्य पात्र हैं, पहली बार दिखाई दिए।” त्रयी की पहली कहानी 1964 में प्रकाशित हुई थी और पूरा उपन्यास 1972 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ। [[सोवियत संघ]] के पतन के बाद, पुस्तक का एक नया संस्करण प्रकाशित हुआ, जिसमें लेखक ने सोवियत विचारधारा के आवरण को हटा दिया, कुछ पुराने विवरण जो आधुनिक पाठक के लिए समझ से परे हैं, उन्हें हटा दिया और नई कहानियाँ जोड़ दीं।<ref name=":1" /> पुस्तक का 20 से अधिक भाषाओं में [[अनुवाद]] हो चुका है और यह यूक्रेन के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा है।<ref name=":1" /> ==फिल्म रूपांतरण== 1965 में, खार्किव [[दूरदर्शन|टेलीविजन]] स्टूडियो ने पुस्तक के पहले एपिसोड पर आधारित इसी नाम की फिल्म बनाई। यह फिल्म रूपांतरण न केवल सोवियत संघ में, बल्कि विदेशी फिल्म समारोहों में भी सफल रहा।<ref name=":1" /> इस रूपांतरण को कई पुरस्कार मिले: म्यूनिख में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह (1968) में ग्रैंड प्राइज, [[ऑस्ट्रिया]] में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्य पुरस्कार और अलेक्जेंड्रिया ([[ऑस्ट्रेलिया]]) में अंतर्राष्ट्रीय समारोह (1969) में मुख्य पुरस्कार। 2024 में एक नए फिल्म रूपांतरण की घोषणा की गई।<ref>{{Cite web|url=https://espreso.tv/kultura-v-ukraini-ekranizuyut-knigu-toreadori-z-vasyukivki-vsevoloda-nestayka|title=В Україні екранізують "Тореадори з Васюківки" Всеволода Нестайка|website=espreso.tv|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:सोवियत उपन्यास]] [[श्रेणी:1972 के उपन्यास]] [[श्रेणी:20वीं सदी के यूक्रेनी उपन्यास]] b9m22e9dk3yeij4qglho25u5eel8m6y अंतर्राष्ट्रीयवाद या रूसीकरण? 0 1610853 6536910 2026-04-06T09:31:41Z Surajkumar9931 853179 नया पृष्ठ: {{Infobox book | author = [[इवान ज़िउबा]] | pub_date = 1968 | image = }} '''अंतर्राष्ट्रीयवाद या रूसीकरण?''' ([[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: «Інтернаціоналізм чи русифікація?») यूक्रेनी लेखक और सामाजिक कार्यक... 6536910 wikitext text/x-wiki {{Infobox book | author = [[इवान ज़िउबा]] | pub_date = 1968 | image = }} '''अंतर्राष्ट्रीयवाद या रूसीकरण?''' ([[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: «Інтернаціоналізм чи русифікація?») यूक्रेनी लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता इवान ज़ियुबा की एक [[पुस्तक]] है। यह पुस्तक 1965 के अंत में यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव पेट्रो शेलेस्ट को भेजे गए एक पत्र के पूरक के रूप में लिखी गई थी, जिसमें उस वर्ष [[गिरफ़्तारी|गिरफ्तार]] किए गए कई यूक्रेनी [[लेखक|लेखकों]] का बचाव किया गया था। यह पुस्तक 1968 में ग्रेट ब्रिटेन में प्रकाशित हुई थी।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Toma|first=Peter A.|date=1969|title=Review of Internationalism or Russification?|url=https://www.jstor.org/stable/446162|journal=The Western Political Quarterly|volume=22|issue=1|pages=203–205|doi=10.2307/446162|issn=0043-4078}}</ref><ref name=":1">{{Cite journal|last=Sheehy|first=Ann|date=1969|title=Review of Beyond the Urals: Economic Developments in Soviet Asia; The Formation of the Soviet Central Asian Republics: A Study in Soviet Nationalities Policy, 1917-1936; Internationalism or Russification? A Study in the Soviet Nationalities Problem|url=https://www.jstor.org/stable/2612670|journal=International Affairs (Royal Institute of International Affairs 1944-)|volume=45|issue=1|pages=152–153|doi=10.2307/2612670|issn=0020-5850}}</ref> ==सारांश== इन घटनाओं के प्रभाव में लिखी गई अपनी कृति 'अंतर्राष्ट्रीयवाद या रूसीकरण?' में, ज़ियुबा ने [[मार्क्सवाद|मार्क्सवादी]] दृष्टिकोण से यूक्रेन में सोवियत संघ की राष्ट्रीय और सांस्कृतिक नीति का विश्लेषण किया है।<ref name=":0" /> [[लेखक]] ने अपना काम यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के प्रथम सचिव पेट्रो शेलेस्ट और यूक्रेनी एसएसआर सरकार के प्रमुख [[वलोडिमिर शेरबिट्स्की]] को भेजा, और इसका रूसी अनुवाद सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएसयू) के नेतृत्व को भेजा। "अंतर्राष्ट्रीयतावाद या रूसीकरण?" में, जिउबा ने तर्क दिया कि [[जोसेफ़ स्टालिन|जोसेफ स्टालिन]] के शासनकाल के दौरान सीपीएसयू रूसी [[राष्ट्रवाद]] की ओर अग्रसर हो गई थी। लेखक ने अपने तर्क को मुख्य रूप से [[व्लादिमीर लेनिन]] की रचनाओं और 1920 के दशक के पार्टी दस्तावेजों के उद्धरणों पर आधारित किया। उनका मानना ​​था कि सीपीएसयू की रूसीकरण नीति, विशेष रूप से [[युक्रेन|यूक्रेन]] में, यूक्रेनी जनता और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के मूलभूत हितों के विपरीत है। तदनुसार, उन्होंने तर्क दिया कि समाधान लेनिन के राष्ट्रीय नीति और कोरेनिज़त्सिया के सिद्धांतों पर लौटने में निहित है।<ref name=":1" /> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} {{Authority control}} [[श्रेणी:यूक्रेन में साम्यवाद]] [[श्रेणी:यूक्रेन के बारे में इतिहास की पुस्तकें]] [[श्रेणी:सोवियत संघ के बारे में इतिहास की पुस्तकें]] [[श्रेणी:यूक्रेनी गैर-काल्पनिक पुस्तकें]] knjw5oroqte1abft334q8gp43e5isy8 वार्ता:अरबी अनुवाद आन्दोलन 1 1610854 6536914 2026-04-06T09:44:53Z Umarkairanvi 13754 /* स्थानान्तरण अनुरोध 6 अप्रैल 2026 */ नया अनुभाग 6536914 wikitext text/x-wiki == स्थानान्तरण अनुरोध 6 अप्रैल 2026 == {{नाम बदलें/dated|यूनानी-अरबी अनुवाद आंदोलन}} [[:अरबी अनुवाद आन्दोलन]] → {{no redirect|यूनानी-अरबी अनुवाद आंदोलन}} – मोहदय, यह पेज इंग्लिश विकि पर [[:en:Graeco-Arabic translation movement]] और उर्दू में [[:ur:یونانی-عربی ترجمہ تحریک]](यूनानी-अरबी तर्जुमा तहरीक) नाम से है... में समझता हूँ इस पेज को अलग रखा जाये और अगर उनसे (Graeco) जोड़ना है तो नाम की समीक्षा होनी चाहिए.... आशा है विचार किया जायेगा ...स्नेह बनाये रखें... 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 09:44, 6 अप्रैल 2026 (UTC) 📚 [[सदस्य:Umarkairanvi|M. Umar kairanvi]] ([[सदस्य वार्ता:Umarkairanvi|वार्ता]]) 09:44, 6 अप्रैल 2026 (UTC) pll3wrlk4fzt4g7h6e62ssd55l8w203 ह्रीहोरी स्कोवोरोडा 0 1610855 6536916 2026-04-06T09:53:38Z Surajkumar9931 853179 नया पृष्ठ: {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], रूस का साम... 6536916 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref>"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. 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Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं। {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] t1yl695lmmhqtpgx02mdaijs1mxwgxp 6536926 6536916 2026-04-06T10:18:08Z Surajkumar9931 853179 6536926 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref name=":0">"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. Obrazovanye. Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं।<ref name=":0" /> ==जीवन== [[File:Григорий Сковорода.jpg|thumb|स्कोवरोडा का चित्र, उनके हस्ताक्षर सहित; उनका पहला नाम सिरिलिक लिपि में (संक्षिप्त रूप में) लिखा है और उनका अंतिम नाम ग्रीक अक्षर सिग्मा (Σ) द्वारा दर्शाया गया है।]] स्कोवोरोडा का जन्म 1722 में रूसी साम्राज्य (आधुनिक पोल्टावा ओब्लास्ट, यूक्रेन) के कोसैक हेटमानेते (1708 में कोसैक हेटमानेते का क्षेत्र कीव गवर्नरेट में समाहित कर लिया गया था, हालांकि कोसैक हेटमानेते का विघटन नहीं हुआ था) के लुबनी रेजिमेंट के चोर्नुखी गांव में एक छोटे यूक्रेनी पंजीकृत कोसैक परिवार में हुआ था। उनकी माता, पेलागेया स्टेपनोवना शांग-गिरय, शाहिन गिरय से सीधे संबंधित थीं और आंशिक रूप से क्रीमियन तातार वंश की थीं। उन्होंने कीव-मोहिला अकादमी में अध्ययन किया (1734-1741, 1744-1745, 1751-1753) लेकिन स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की। 1741 में, 19 वर्ष की आयु में, अपने चाचा इग्नाटी पोल्तावत्सेव के कारण उन्हें कीव से मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में शाही गायन मंडली में गाने के लिए भेजा गया, और वे 1744 में कीव लौट आए। उन्होंने 1745 से 1750 तक हंगरी राज्य में समय बिताया और माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने यूरोप के अन्य हिस्सों की भी यात्रा की। 1750 में वे कीव लौट आए। 1750 से 1751 तक, उन्होंने पेरेयास्लाव में काव्यशास्त्र पढ़ाया। 1753 से 1759 तक, अधिकांश समय स्कोवोरोडा कोवराई में एक जमींदार के परिवार में शिक्षक रहे। 1759 से 1769 तक, कुछ अंतरालों के साथ, उन्होंने खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम भी कहा जाता है) में कविता, वाक्यविन्यास, ग्रीक और नैतिकता जैसे विषय पढ़ाए। 1769 में नैतिकता पर उनके पाठ्यक्रम पर हुए हमले के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। मध्य यूरोप में स्कोवोरोडा की यात्राएँ उनके बौद्धिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। 1745 के अंत में, कीव-मोहिला अकादमी में अपने दार्शनिक अध्ययन को पूरा करने के बाद, वे मेजर जनरल फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के नेतृत्व में "शाही दरबार के लिए शराब की खरीद हेतु टोकाज आयोग" में शामिल हो गए। विश्नेव्स्की ट्रांसिल्वेनिया के एक सर्ब थे जो 1715 से रूसी सेवा में थे। विदेश में अपने वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने प्रेसबर्ग (आधुनिक ब्रातिस्लावा), ओफेन (बुडा), वियना और अन्य शहरों का दौरा किया और स्थानीय विद्वानों के साथ बातचीत की। जनवरी 1749 में विश्नेव्स्की की मृत्यु और उनके पुत्र गैवरिल को उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद, स्कोवोरोडा यूक्रेन लौट आए और 10 अक्टूबर 1750 को कीव पहुंचे। 1750 में बिशप निकोदिम स्क्रेबनित्स्की ने स्कोवोरोडा को नवस्थापित पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ही महीनों में, उनकी शिक्षण विधियों और स्थापित पद्धति का पालन न करने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, स्क्रेबनित्स्की ने उन्हें 1751 में बर्खास्त कर दिया। इस विवाद के बाद, स्कोवोरोडा ने कीव-मोहिला अकादमी में जॉर्ज (कोनिस्की) द्वारा पढ़ाए जाने वाले धर्मशास्त्र में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की, लेकिन स्नातक होने के लिए आवश्यक चार वर्षों में से दो वर्ष पूरे होने के बाद ही उन्होंने संकाय छोड़ दिया। 1753 की गर्मियों में, कीव के मेट्रोपॉलिटन (ऑर्थोडॉक्स चर्च के वरिष्ठ धर्माधिकारी) की सिफारिश पर, उन्होंने कोसैक कुलीन स्टेपन तोमारा (1719-1794) के बड़े बेटे वासिली (1746-1819) के शिक्षक के रूप में कावराई पेरेयास्लाव रेजिमेंट में स्थित पारिवारिक जागीर में सेवा शुरू की। वे लगभग छह वर्षों तक तोमारा के घर में रहे, इस दौरान उन्होंने कविताएँ लिखना शुरू किया, जिनमें उनके संग्रह 'दिव्य गीतों का उद्यान' के लिए कई रचनाएँ शामिल हैं। 1755 की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए मॉस्को और ट्रिनिटी-सेर्गियस लावरा की यात्रा की, जहाँ उन्होंने लावरा सेमिनरी में अध्यापन पद को अस्वीकार कर दिया। स्कोवोरोडा ने 1759 की गर्मियों में कावराई छोड़ दिया, जब वासिली तमारा ज़मोस्क और फिर वियना में विदेश में अध्ययन करने के लिए चले गए। 1759 की गर्मियों में, स्कोवोरोडा ने बेलगोरोड और ओबोइयन के बिशप जोआसाफ मिटकेविच का निमंत्रण स्वीकार कर खार्कोव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए स्वीकार किया - जो उस समय के सबसे उन्नत स्लोबोडा-यूक्रेनी शिक्षण संस्थानों में से एक था, और प्राकृतिक विज्ञान और आधुनिक भाषाओं पर जोर देने के कारण कीव-मोहिला अकादमी से अलग था। मिटकेविच द्वारा उन्हें मठवासी प्रतिज्ञा लेने के लिए दबाव डालने के प्रयासों को अस्वीकार करने के बाद, उन्होंने 1760 की गर्मियों में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया। स्कोवोरोडा सितंबर 1762 में सिंटेक्स और ग्रीक पढ़ाने के लिए कॉलेजियम लौट आए। उनकी यह वापसी काफी हद तक युवा छात्र मिखाइल कोवालेन्स्की से हुई मुलाकात से प्रेरित थी, जो आगे चलकर उनके सबसे करीबी शिष्य, पहले जीवनीकार और उनकी मृत्यु के बाद सेंट पीटर्सबर्ग में स्कोवोरोडा की पांडुलिपियों के पहले प्रकाशन के सूत्रधार बने। उनके चारों ओर समर्पित छात्रों का एक समूह बन गया, लेकिन नव नियुक्त बिशप, पोर्फिरी क्राइस्की की बढ़ती शत्रुता का सामना करते हुए, स्कोवोरोडा ने नैतिक भ्रष्टाचार और विधर्म के आरोपों के बीच जुलाई 1764 में दूसरी बार कॉलेजियम छोड़ दिया। कई वर्षों तक बिना किसी औपचारिक पद के रहने के बाद, स्लोबोडा यूक्रेन के गवर्नर येवदोकिम शेर्बिनिन ने स्कोवोरोडा को कॉलेजियम में नव स्थापित कुलीन वर्ग के लिए "पूरक कक्षाओं" में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से 'ईसाई नैतिकता का द्वार' नामक ग्रंथ की रचना की और 1768 में कैटेकिज़्म पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, नव नियुक्त बिशप सैमुइल मिसलाव्स्की - जो कीव-मोहिला अकादमी में स्कोवोरोडा के पूर्व सहपाठी थे - ने एक गैर-पुजारी विद्वान द्वारा कैटेकिज़्म पढ़ाने पर आपत्ति जताई और स्कोवोरोडा के ग्रंथ के कुछ हिस्सों की आलोचना की। स्कोवोरोडा ने अप्रैल 1769 में स्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कोई संस्थागत पद ग्रहण नहीं किया। खार्कोव कॉलेजियम से अंतिम विदाई के बाद, स्कोवोरोडा ने घुमंतू दार्शनिक का जीवन अपना लिया। वे शुरुआत में खार्कोव के पास हुज़्विन्स्की जंगल में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में बस गए, जहाँ उन्होंने दार्शनिक दंतकथाएँ (जिन्हें बाद में खार्कोव दंतकथाएँ के रूप में संकलित किया गया, जो यूक्रेनी साहित्य में दंतकथाओं का पहला संग्रह है) और दार्शनिक संवादों की रचना शुरू की, जिनमें नार्सिसस और 'अस्खान की पुस्तक' नामक सिम्फनी शामिल हैं। 1770 से, वे अक्सर गुसिंका के एक जमींदार अलेक्सी सोशाल्स्की के साथ रहते थे, और 1772 में उन्होंने ओस्त्रोगोज़्स्क में सेवानिवृत्त कर्नल स्टेपन तेवियाशोव की जागीर में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने छह दार्शनिक संवादों की रचना की। इन वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने स्लोबोडा यूक्रेन में व्यापक यात्रा की, खार्कोव, बाबई, बाल्की, इज़ियम, कुप्यांस्क, अख्तिरका और अन्य शहरों का दौरा किया, और पादरियों, छोटे कुलीन वर्ग और शिक्षित आम लोगों के बीच अपने प्रशंसकों का एक दायरा बनाया। उन्होंने मिखाइल कोवालेन्स्की के साथ जीवन भर पत्राचार किया, जिन्होंने बाद में उनकी मूलभूत जीवनी लिखी। अपने अंतिम वर्ष में, स्कोवोरोडा यूक्रेन के स्लोबोडा से पैदल चलकर ओर्योल के पास कोवालेन्स्की से मिलने गए, उन्हें अपनी सभी रचनाएँ सौंपीं और स्लोबोडा, यूक्रेन लौट आए। स्कोवोरोडा धार्मिक संगीत के रचयिता के रूप में भी जाने जाते थे, साथ ही उन्होंने अपने स्वयं के लिखे गीतों पर आधारित कई गीत भी रचे। इनमें से कई गीत यूक्रेनी लोक संगीत का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई दार्शनिक गीत, जिन्हें स्कोवोरोड्स्की भजन (स्कोवोरोडियन भजन) के नाम से जाना जाता है, अक्सर दृष्टिहीन लोक संगीतकारों, जिन्हें कोबज़ार कहा जाता है, के संगीत संग्रह में पाए जाते थे। उन्हें बांसुरी, तोरबान और कोबज़ा वादक के रूप में भी जाना जाता था। अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने यूक्रेन के स्लोबोडा में पैदल यात्रा की, जहाँ वे विभिन्न मित्रों के साथ रहे, जिनमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे। वे एक जगह पर ज़्यादा देर तक नहीं ठहरना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने एकांतवासी जीवन और अध्ययन में अपना जीवन व्यतीत किया। यह अंतिम काल उनके महान दार्शनिक कार्यों का समय था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी पिछली सबसे बड़ी उपलब्धि, यानी चर्च स्लावोनिक भाषा, ग्रीक और लैटिन में कविता और साहित्य लेखन जारी रखा। उन्होंने लैटिन से रूसी में कई रचनाओं का अनुवाद भी किया। अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले वे अपने एक सबसे करीबी मित्र के घर गए और उन्हें बताया कि वे स्थायी रूप से यहीं रहने आए हैं। वे हर दिन फावड़ा लेकर घर से निकलते थे, और ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने तीन दिन अपनी ही कब्र खोदने में बिताए। तीसरे दिन उन्होंने खाना खाया, उठे और कहा, "मेरा समय आ गया है।" वे अगले कमरे में गए, लेट गए और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी समाधि पर निम्नलिखित शिलालेख अंकित करने का अनुरोध किया: संसार ने मुझे अपने वश में करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ। उनकी मृत्यु 9 नवंबर 1794 को पैन-इवानोव्का नामक गांव में हुई (जिसे आज स्कोवोरोडिनोव्का, बोहोदुखिव रायन, खार्किव ओब्लास्ट के नाम से जाना जाता है)। ==भाषा== स्कोवोराडा ने अपनी रचनाएँ जिस भाषा में लिखीं, उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं। वे अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा यूक्रेनी बोलते थे; उनके शिष्य और जीवनीकार मिखाइल कोवालेन्स्की लिखते हैं कि स्कोवोराडा "अपनी मातृभाषा से प्रेम करते थे और शायद ही कभी किसी विदेशी भाषा में बोलने का आग्रह करते थे।" हालाँकि, लैटिन और ग्रीक में लिखी गई रचनाओं को छोड़कर, स्कोवोराडा ने चर्च स्लावोनिक, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं के मिश्रण में लिखा। उन्होंने लैटिन, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कुछ तत्वों को भी एकीकृत किया, जिनमें पश्चिमी यूरोपीय शब्दों का महत्वपूर्ण समावेश है। स्लाविक भाषाविद् जॉर्ज शेवेलोव उनकी भाषा का वर्णन करते हुए (बाइबल के उद्धरणों और अनेक काव्य प्रयोगों को छोड़कर) कहते हैं कि यह "रूसी भाषा वैसी ही थी जैसी उस समय ज़ारकीव और स्लोबोज़ानशचिना (स्लोबोडा यूक्रेन) में शिक्षित जमींदारों और उच्च वर्ग द्वारा बोली जाती थी।" यह रूसी भाषा का एक ऐसा रूप था जो "यूक्रेनी आधार पर विकसित हुआ", जिसमें कई यूक्रेनी शब्द थे और जो मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की रूसी भाषा से भिन्न थी। शेवेलोव लिखते हैं कि इसी भाषाई आधार पर स्कोवोरोडा ने एक बहुत ही विशिष्ट मुहावरा विकसित किया जो उनकी मूल बोलचाल की भाषा के समतुल्य नहीं था। 1923 में प्रकाशित स्कोवोरोडा की भाषा के अपने अध्ययन में, भाषाविद् पेट्रो बुज़ुक दार्शनिक के मुहावरे को मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी की लिखित रूसी भाषा पर आधारित बताते हैं, हालांकि इसमें यूक्रेनी, पोलिश और प्राचीन चर्च स्लावोनिक के रूप भी शामिल हैं। साहित्य विद्वान लियोनिद उश्कालोव का कहना है कि स्कोवोरोडा की भाषा एक "मिश्रित भाषा" है जो खार्किव के 18वीं शताब्दी के यूक्रेनी लेखकों की रूसी भाषा से बहुत भिन्न है। वे लिखते हैं कि स्कोवोरोडा के पास अपनी 'लेखन भाषा' को यूक्रेनी मानने के कारण थे। (कुछ मौकों पर, स्कोवोरोडा ने अपनी रचनाओं की भाषा को "सामान्य बोली", "स्थानीय बोली" या "छोटी रूसी" कहा; उस समय 'छोटी रूसी' शब्द यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्र को संदर्भित करता था।) इसमें समानांतर यूक्रेनी और रूसी शब्द तथा मिश्रित रूसी-यूक्रेनी शब्द रूप शामिल हैं। विटाली पेरेड्रिएन्को के अनुसार, स्कोवोरोडा के काव्य संग्रह 'सद बोजेस्तवेन्नीख पेस्नेई' (दिव्य गीतों का उद्यान) में 84% शब्द रूप शब्दावली और शब्द निर्माण के संदर्भ में नई यूक्रेनी साहित्यिक भाषा से मेल खाते हैं। उनके दार्शनिक संवादों में रूसी भाषा का प्रतिशत कुछ कम पाया गया (उदाहरण के लिए, उनके 'नारकिस' में 73.6%)। भाषाविज्ञानी लिडिया ह्नाटियुक के अनुसार, यद्यपि कुछ आधुनिक यूक्रेनी पाठक स्कोवोरोडा की भाषा को रूसी मानते हैं, स्कोवोरोडा की अधिकांश दार्शनिक रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी बोली में लिखी गई हैं, जबकि उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्राचीन यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में हैं; हालाँकि, वह कहती हैं कि इन दोनों बोलियों के बीच की सीमा "बहुत ही अनिश्चित" है। स्कोवोरोडा अपनी भाषा की विशिष्टता से अवगत प्रतीत होते थे और उन्होंने इसकी आलोचनाओं का बचाव किया। बाद के कई लेखकों ने स्कोवोरोडा की भाषा की आलोचना की। उनकी असामान्य भाषा का श्रेय उनकी शिक्षा या उस समय की परिस्थितियों के प्रभाव को दिया गया; वहीं दूसरी ओर, उन पर "पिछड़ेपन" और समकालीन समस्याओं को समझने में असमर्थता का आरोप लगाया गया। यूक्रेनी लेखक इवान नेचुय-लेवित्स्की ने स्कोवोरोडा की मिश्रित भाषा को "अजीब, विविध और आम तौर पर अस्पष्ट" बताया। यूक्रेनी कवि तारास शेवचेंको ने लिखा कि स्कोवोरोडा "जनता के कवि भी होते यदि लैटिन और बाद में रूसी भाषा ने उन्हें विचलित न किया होता।" 1901 में, रूसी उपन्यासकार ग्रिगोरी डेनिलव्स्की ने लिखा कि स्कोवोरोडा "एक भारी, अस्पष्ट और अजीब भाषा में लिखते थे... जो किसी सेमिनार के छात्र के योग्य, भद्दी और अक्सर अस्पष्ट" थी। 1830 के दशक में, जब खार्किव में रोमांटिक लेखकों का एक समूह स्कोवोरोडा की रचनाओं के प्रकाशन की तैयारी कर रहा था, तो उन्होंने पाठकों को डराने से बचने के लिए उनकी रचनाओं का रूसी में अनुवाद करने पर विचार किया। शेवेलोव के अनुसार, स्कोवोरोडा की शैलीगत पसंद जानबूझकर की गई थी, न कि उनकी कमज़ोर शिक्षा का परिणाम; उनके द्वारा प्रस्तुत "उच्च बारोक" शैली ने साहित्य में बोलचाल की भाषा की नकल करने का प्रयास नहीं किया। शेवेलोव लिखते हैं कि बाद के पाठकों को उनकी भाषा "मृत" सी लगी, क्योंकि स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों की रूसी भाषा तब तक मानक रूसी के लगभग समान हो चुकी थी और अधिक धर्मनिरपेक्ष हो गई थी। स्कोवोरोडा लैटिन भाषा में पारंगत थे, जो उनके दाखिले के दौरान कीव-मोहिला अकादमी में शिक्षा का माध्यम थी। उन्होंने लैटिन में कई छोटी कविताएँ लिखीं, जिनमें दंतकथाएँ भी शामिल हैं। शेवेलोव के अनुसार, ये लैटिन कविताएँ मुख्य रूप से "प्रयोगों के रूप में और/या शैक्षणिक उद्देश्य से" लिखी गई थीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं। उनके स्लाविक लेखन में भी लैटिन, ग्रीक और कभी-कभी हिब्रू या अन्य भाषाओं के शब्द, वाक्यांश और उद्धरण मिलते हैं। उन्हें जर्मन का अच्छा ज्ञान था और जाहिर तौर पर उन्हें कुछ फ्रेंच भी आती थी। ==रचनाएँ== चर्च के अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण स्कोवोरोदा की रचनाएँ उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकीं। ग्रिहोरी स्कोवोरोदा ने कई भाषाओं, विशेष रूप से लैटिन, ग्रीक और जर्मन में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे जर्मन में धार्मिक साहित्य पढ़ सकते थे और जर्मन धर्मनिष्ठा से प्रभावित थे। दार्शनिक और धार्मिक अध्ययन की भावना में पले-बढ़े, वे चर्च के विद्वतावाद और ऑर्थोडॉक्स चर्च के आध्यात्मिक प्रभुत्व के विरोधी बन गए। उन्होंने लिखा, "हमारा राज्य हमारे भीतर है, और ईश्वर को जानने के लिए, आपको स्वयं को जानना होगा... लोगों को ईश्वर को स्वयं के समान जानना चाहिए, इतना कि वे उन्हें संसार में देख सकें... ईश्वर में विश्वास का अर्थ उनके अस्तित्व में विश्वास करना और इसलिए उनके प्रति समर्पित होना और उनके नियमों के अनुसार जीवन जीना नहीं है... जीवन की पवित्रता लोगों के प्रति भलाई करने में निहित है।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि "सभी कार्य ईश्वर द्वारा आशीर्वादित हैं", और व्यक्ति को अपने लिए 'अनुकूल कार्य' (स्रोदना प्रात्सिया) की खोज करनी चाहिए। जब ​​लोग अपने कर्तव्य को त्यागकर धन या प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, तो वे और समाज दोनों दुखी हो जाते हैं। उनकी रचना "नार्सिसिस या स्वयं को जानो" रूसी साम्राज्य में सन् 1798 में प्रकाशित हुई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। सन् 1806 में अलेक्जेंडर लाबज़िन के संपादन में "ज़ायोन व्येस्तनिक" पत्रिका ने उनकी कुछ और रचनाएँ प्रकाशित कीं। फिर सन् 1837-1839 में मॉस्को में उनकी कुछ रचनाएँ उनके नाम से प्रकाशित हुईं, और सन् 1861 में उनकी रचनाओं का पहला लगभग संपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुआ। दार्शनिक की मृत्यु की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर, खार्किव (खार्कोव) में, दिमित्री बागले (1918 के बाद दिमित्रो बहाली के नाम से भी जाने जाते हैं) द्वारा संपादित खार्कोव हिस्टोरिको-फिलोलॉजिकल सोसाइटी के प्रसिद्ध सातवें खंड (1894) का प्रकाशन हुआ, जिसमें स्कोवोरोडा की अधिकांश रचनाएँ शामिल थीं। इसमें उनकी 16 रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिनमें से नौ पहली बार प्रकाशित हुईं। साथ ही, उनकी जीवनी और उनकी कुछ कविताएँ भी प्रकाशित हुईं। स्कोवरोडा की सभी ज्ञात रचनाओं का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह 2011 में लियोनिद उश्कालोव द्वारा प्रकाशित किया गया था। ===कार्यों की सूची=== *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी एस. दंतकथाएँ और सूत्र। अनुवाद, जीवनी और विश्लेषण डैन बी. चॉपिक द्वारा (न्यूयॉर्क: पीटर लैंग, 1990) समीक्षा: वलोडिमिर टी. ज़ायला, यूक्रेनी क्वार्टरली, 50 (1994): 303-304। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगरी), पिज़्ने बनाम सोबी लुडिनु। एम. काशुबा द्वारा वासिल वोइतोविच के परिचय के साथ अनुवादित (एल'विव: एस$विट, 1995) चयनित कार्य (मूल: यूक्रेनी भाषा)। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगोरी), ट्वोरी: वी ड्वोख तोमाख, प्राक्कथन ओ मायशानिच द्वारा, मुख्य संपादक ओमेलियन प्रित्सक (कीव: ओबेरेही, 1994) (मूल: यूक्रेनी भाषा, अन्य भाषाओं से अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "जीवन की सच्ची खुशी के बारे में पांच यात्रियों के बीच बातचीत" (जॉर्ज एल. क्लाइन द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "प्राचीन दुनिया के बारे में बातचीत"। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), लियोनिद उश्कालोव द्वारा संपादित। "ग्रिगोरी स्कोवोरोडा: कार्यों का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह", (2011)। ==शिक्षण== स्कोवोरोडा के प्रमुख कार्यों में से एक शिक्षण भी था। औपचारिक रूप से उन्होंने पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाया (1750-1751 के दौरान) और खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम और लैटिन में: कॉलेजियम चारकोविएन्सिस या ज़ाचारपोलिस कॉलेजियम भी कहा जाता है) में काव्यशास्त्र, वाक्यविन्यास, ग्रीक और धर्मशिक्षा का अध्यापन किया (1759-1760, 1761-1764, 1768-1769 के दौरान)। 1751 में उनका पेरेयास्लाव कॉलेजियम के अध्यक्ष बिशप से विवाद हो गया, जिन्होंने स्कोवोरोडा के शिक्षण के नए तरीकों को विचित्र और काव्यशास्त्र के पूर्व पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ असंगत माना। युवा स्कोवोरोडा, अपने विषय पर पूर्ण महारत और छंदशास्त्र के नियमों की सटीकता, स्पष्टता और व्यापकता पर आश्वस्त थे। उन्होंने बिशप के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया और मध्यस्थता की मांग करते हुए कहा कि "अलिया रेस सेप्ट्रम, आलिया प्लेक्ट्रम" [पादरी का राजदंड एक चीज है, लेकिन बांसुरी दूसरी]। बिशप ने स्कोवोरोडा के इस रवैये को अहंकारपूर्ण समझा और परिणामस्वरूप उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। खार्कोव कॉलेजियम में अध्यापन का पहला वर्ष स्कोवोरोडा के लिए सफल रहा। उनके व्याख्यानों और शिक्षण शैली ने छात्रों, सहकर्मियों और वरिष्ठों का ध्यान आकर्षित किया। स्कोवोरोडा वासिली तोमारा (1740-1813) के निजी शिक्षक भी थे (1753-1754 और 1755-1758 के दौरान) और उनके जीवनीकार माइकल कोवालिंस्की (या कोवालेन्स्की, 1745-1807) के आजीवन मित्र और मार्गदर्शक भी थे (1761-1769 के दौरान)। संभवतः वे फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के पुत्र गैब्रियल विश्नेव्स्की (1716-1752) के भी निजी शिक्षक थे (1745-1749 के दौरान)। फ्योदोर विश्नेव्स्की के कारण ही स्कोवोरोडा ने मध्य यूरोप, विशेष रूप से हंगरी और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। अपने शिक्षण में स्कोवोरोडा का उद्देश्य छात्रों की रुचियों और क्षमताओं को खोजना था और वे ऐसे व्याख्यान और पठन सामग्री तैयार करते थे जो उन्हें पूर्ण रूप से विकसित कर सकें। स्कोवोरोदा के जीवनीकार कोवालिंस्की ने इस दृष्टिकोण का वर्णन इस प्रकार किया है: "स्कोवोरोदा ने युवा शिष्य वासिली तोमारा को पढ़ाना शुरू करते समय उनके हृदय पर अधिक ध्यान दिया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को समझते हुए, उन्होंने केवल उनकी प्रकृति को ही विकसित करने में मदद करने का प्रयास किया। उन्होंने कोमल और सौम्य मार्गदर्शन दिया, जिसे बालक को पता भी नहीं चला, क्योंकि स्कोवोरोदा ने विशेष ध्यान रखा कि युवा मन पर भारी ज्ञान का बोझ न पड़े। इस तरह बालक स्कोवोरोदा से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ गया।" उनका शिक्षण केवल अकादमिक जगत या निजी मित्रों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक "घुमक्कड़" के रूप में उन्होंने उन अनेक लोगों को सार्वजनिक रूप से शिक्षा दी जो उनकी ओर आकर्षित हुए। रूसी दर्शन के पहले ज्ञात इतिहासकार, आर्चीमैंड्राइट गैवरिल (वासिली वोस्क्रेसेन्स्की, 1795-1868) ने शिक्षण में स्कोवोरोडा के सुकरात जैसे गुणों का शानदार वर्णन किया है: "सुकरात और स्कोवोरोडा दोनों ने ही ऊपर से जनता के शिक्षक बनने का आह्वान महसूस किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए वे उस शब्द के व्यक्तिगत और उच्च अर्थ में सार्वजनिक शिक्षक बन गए। ... स्कोवोरोडा भी सुकरात की तरह समय या स्थान से बंधे नहीं थे, वे चौराहों पर, बाजारों में, कब्रिस्तान के पास, चर्च के बरामदों के नीचे, छुट्टियों के दौरान, जब उनके तीखे शब्द एक मदहोश इच्छा को व्यक्त करते थे - और फसल कटाई के कठिन दिनों में, जब बिना बारिश के पसीना धरती पर बहता था, तब भी शिक्षा देते थे।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि आत्म-परीक्षण से ही व्यक्ति को अपने सच्चे उद्देश्य का पता चलता है। यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन का प्रयोग करते हुए स्कोवोरोदा सलाह देते हैं, "स्वयं को जानो।" उन्होंने एक सुस्थापित विचार प्रस्तुत किया कि जन्मजात, स्वाभाविक कार्य में संलग्न व्यक्ति को वास्तव में संतुष्टिदायक और सुखी जीवन प्राप्त होता है। युवाओं की शिक्षा स्कोवोरोदा के वृद्धावस्था तक उनके ध्यान का केंद्र रही। 1787 में, अपनी मृत्यु से सात वर्ष पूर्व, स्कोवोरोदा ने शिक्षा विषय पर दो निबंध लिखे, "महान सारस" (मूल: Благодарный Еродій, Blagorodnyj Erodiy) और "गरीब लार्क" (मूल: Убогій Жаворонокъ, Ubogiy Zhavoronok), जिनमें उन्होंने अपने विचारों का प्रतिपादन किया। स्कोवोरोडा के व्यापक प्रभाव को उन प्रसिद्ध लेखकों द्वारा दर्शाया गया है जिन्होंने उनकी शिक्षाओं की सराहना की: व्लादिमीर सोलोवियोव, लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की, आंद्रेई बेली, तारास शेवचेंको और इवान फ्रेंको। ==श्रद्धांजलि== [[File:USSR stamp G.Skovoroda 1972 4k.jpg|thumb|एच. स्कोवोरोडा के चित्र सहित [[रूस के डाक टिकट और डाक इतिहास|सोवियत डाक टिकट]] (1972)]] [[File:500 Ukrainian hryvnia in 2015 Obverse.jpg|thumb|₴500 बैंकनोट पर स्कोवोरोडा।]] 15 सितंबर 2006 को, यूक्रेन में प्रचलन में दूसरे सबसे बड़े नोट, ₴500 के नोट पर स्कोवोरोडा का चित्र अंकित किया गया। 1946 में स्थापित ग्रिगोरी स्कोवोरोडा दर्शनशास्त्र संस्थान, यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1991 तक यूक्रेनी सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी) के तत्वावधान में संचालित होता है। यूक्रेन के खार्किव प्रांत के स्कोवोरोडिनिवका गाँव में ग्रिगोरी स्कोवोरोडा साहित्यिक स्मारक संग्रहालय स्थित था। यह संग्रहालय 18वीं शताब्दी की एक इमारत में, उस संपत्ति पर संचालित हो रहा था जहाँ स्कोवोरोडा को दफनाया गया था। 6-7 मई 2022 की रात को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण रूसी मिसाइल हमले में यह इमारत नष्ट हो गई। मिसाइल इमारत की छत के नीचे से गुजरी और आग लग गई। आग ने पूरे संग्रहालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। परिणामस्वरूप, स्कोवोरोडा राष्ट्रीय संग्रहालय ऐतिहासिक इमारत सहित नष्ट हो गया। संग्रहालय का संग्रह सुरक्षित रहा क्योंकि रूसी हमले की आशंका में इसे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इमारत में स्थित स्कोवोरोडा की प्रतिमा नष्ट हुई इमारत के मलबे के बीच खड़ी रही। <gallery class="center" mode="packed-hover"> Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling on 6 May 2022 (01).jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 02.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 04.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 05.jpg </gallery> 2 दिसंबर 2022 को, स्कोवोरोडा के जन्म की 300वीं वर्षगांठ पर, वाशिंगटन, डी.सी. में यूक्रेन हाउस के पास उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थापित किया गया। इसे 1992 में अमेरिकी मूर्तिकार मार्क रोड्स ने बनाया था, जो स्कोवोरोडा के विचारों से प्रेरित थे। [[File:Skovoroda Monument.jpg|thumb|वाशिंगटन डी.सी. में यूक्रेन हाउस के बाहर स्थित स्कोवोरोडा स्मारक। मूर्तिकार: [[मार्क रोड्स (कलाकार)|मार्क रोड्स]]]] ==लोकप्रिय संस्कृति में== स्कोवोरोडा की कविताओं पर आधारित निम्नलिखित पॉप गीत लिखे गए: *सोन्याचना माशिना द्वारा "पटाश्को" (2019) *कुर्स वालुत द्वारा "कुर्स वालुत" (2020) 26 जनवरी 2024 को खार्किव नगर परिषद ने खार्किव की पुश्किंस्का स्ट्रीट का नाम बदलकर ग्रिगोरी स्कोवोरोडा स्ट्रीट कर दिया। यह 23 जनवरी 2024 को खार्किव पर हुए रूसी बम हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे सहित 9 लोग मारे गए थे। विशेष रूप से शाम के समय, केंद्रीय पुश्किंस्का स्ट्रीट पर हमला हुआ था। {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] 50p3bo88s075t6fqhsef2i5msnkvrt8 6536927 6536926 2026-04-06T10:27:08Z Surajkumar9931 853179 6536927 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref name=":0">"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. Obrazovanye. Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं।<ref name=":0" /> ==जीवन== [[File:Григорий Сковорода.jpg|thumb|स्कोवरोडा का चित्र, उनके हस्ताक्षर सहित; उनका पहला नाम सिरिलिक लिपि में (संक्षिप्त रूप में) लिखा है और उनका अंतिम नाम ग्रीक अक्षर सिग्मा (Σ) द्वारा दर्शाया गया है।]] स्कोवोरोडा का जन्म 1722 में [[रूसी साम्राज्य]] (आधुनिक पोल्टावा ओब्लास्ट, यूक्रेन) के कोसैक हेटमानेते (1708 में कोसैक हेटमानेते का क्षेत्र कीव गवर्नरेट में समाहित कर लिया गया था, हालांकि कोसैक हेटमानेते का विघटन नहीं हुआ था)<ref>{{Cite web|url=https://www.hist.msu.ru/ER/Etext/gub1708.htm|title=Указ об учреждении губерний 1708 г.|website=www.hist.msu.ru|access-date=2026-04-06}}</ref> के लुबनी रेजिमेंट के चोर्नुखी गांव में एक छोटे यूक्रेनी पंजीकृत कोसैक परिवार में हुआ था। उनकी माता, पेलागेया स्टेपनोवना शांग-गिरय, शाहिन गिरय से सीधे संबंधित थीं और आंशिक रूप से क्रीमियन तातार वंश की थीं। उन्होंने कीव-मोहिला अकादमी में अध्ययन किया (1734-1741, 1744-1745, 1751-1753) लेकिन स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की।<ref>Kazarin, V.; Novikova, M. (2014). "Ukrainskii kontekst tvorchestva M. Iu. Lermontova" Украинский контекст творчества М. Ю. Лермонтова [The Ukrainian context of M. Yu. Lermontov's work]. Voprosy russkoi literatury (in Russian) (28): 13.</ref> 1741 में, 19 वर्ष की आयु में, अपने चाचा इग्नाटी पोल्तावत्सेव के कारण उन्हें कीव से मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में शाही गायन मंडली में गाने के लिए भेजा गया, और वे 1744 में कीव लौट आए। उन्होंने 1745 से 1750 तक हंगरी राज्य में समय बिताया और माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने यूरोप के अन्य हिस्सों की भी यात्रा की। 1750 में वे कीव लौट आए। 1750 से 1751 तक, उन्होंने पेरेयास्लाव में काव्यशास्त्र पढ़ाया। 1753 से 1759 तक, अधिकांश समय स्कोवोरोडा कोवराई में एक जमींदार के परिवार में शिक्षक रहे। 1759 से 1769 तक, कुछ अंतरालों के साथ, उन्होंने खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम भी कहा जाता है) में कविता, वाक्यविन्यास, ग्रीक और नैतिकता जैसे विषय पढ़ाए। 1769 में नैतिकता पर उनके पाठ्यक्रम पर हुए हमले के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। मध्य यूरोप में स्कोवोरोडा की यात्राएँ उनके बौद्धिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। 1745 के अंत में, कीव-मोहिला अकादमी में अपने दार्शनिक अध्ययन को पूरा करने के बाद, वे मेजर जनरल फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के नेतृत्व में "शाही दरबार के लिए शराब की खरीद हेतु टोकाज आयोग" में शामिल हो गए। विश्नेव्स्की ट्रांसिल्वेनिया के एक सर्ब थे जो 1715 से रूसी सेवा में थे। विदेश में अपने वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने प्रेसबर्ग (आधुनिक ब्रातिस्लावा), ओफेन (बुडा), [[वियना]] और अन्य शहरों का दौरा किया और स्थानीय विद्वानों के साथ बातचीत की। जनवरी 1749 में विश्नेव्स्की की मृत्यु और उनके पुत्र गैवरिल को उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद, स्कोवोरोडा यूक्रेन लौट आए और 10 अक्टूबर 1750 को कीव पहुंचे। 1750 में बिशप निकोदिम स्क्रेबनित्स्की ने स्कोवोरोडा को नवस्थापित पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ही महीनों में, उनकी शिक्षण विधियों और स्थापित पद्धति का पालन न करने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, स्क्रेबनित्स्की ने उन्हें 1751 में बर्खास्त कर दिया। इस विवाद के बाद, स्कोवोरोडा ने कीव-मोहिला अकादमी में जॉर्ज (कोनिस्की) द्वारा पढ़ाए जाने वाले धर्मशास्त्र में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की, लेकिन स्नातक होने के लिए आवश्यक चार वर्षों में से दो वर्ष पूरे होने के बाद ही उन्होंने संकाय छोड़ दिया। 1753 की गर्मियों में, कीव के मेट्रोपॉलिटन (ऑर्थोडॉक्स चर्च के वरिष्ठ धर्माधिकारी) की सिफारिश पर, उन्होंने कोसैक कुलीन स्टेपन तोमारा (1719-1794) के बड़े बेटे वासिली (1746-1819) के शिक्षक के रूप में कावराई पेरेयास्लाव रेजिमेंट में स्थित पारिवारिक जागीर में सेवा शुरू की। वे लगभग छह वर्षों तक तोमारा के घर में रहे, इस दौरान उन्होंने कविताएँ लिखना शुरू किया, जिनमें उनके संग्रह 'दिव्य गीतों का उद्यान' के लिए कई रचनाएँ शामिल हैं। 1755 की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए मॉस्को और ट्रिनिटी-सेर्गियस लावरा की यात्रा की, जहाँ उन्होंने लावरा सेमिनरी में अध्यापन पद को अस्वीकार कर दिया। स्कोवोरोडा ने 1759 की गर्मियों में कावराई छोड़ दिया, जब वासिली तमारा ज़मोस्क और फिर वियना में विदेश में अध्ययन करने के लिए चले गए। 1759 की गर्मियों में, स्कोवोरोडा ने बेलगोरोड और ओबोइयन के बिशप जोआसाफ मिटकेविच का निमंत्रण स्वीकार कर खार्कोव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए स्वीकार किया - जो उस समय के सबसे उन्नत स्लोबोडा-यूक्रेनी शिक्षण संस्थानों में से एक था, और प्राकृतिक विज्ञान और आधुनिक भाषाओं पर जोर देने के कारण कीव-मोहिला अकादमी से अलग था। मिटकेविच द्वारा उन्हें मठवासी प्रतिज्ञा लेने के लिए दबाव डालने के प्रयासों को अस्वीकार करने के बाद, उन्होंने 1760 की गर्मियों में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया। स्कोवोरोडा सितंबर 1762 में सिंटेक्स और ग्रीक पढ़ाने के लिए कॉलेजियम लौट आए। उनकी यह वापसी काफी हद तक युवा छात्र मिखाइल कोवालेन्स्की से हुई मुलाकात से प्रेरित थी, जो आगे चलकर उनके सबसे करीबी शिष्य, पहले जीवनीकार और उनकी मृत्यु के बाद सेंट पीटर्सबर्ग में स्कोवोरोडा की पांडुलिपियों के पहले प्रकाशन के सूत्रधार बने। उनके चारों ओर समर्पित छात्रों का एक समूह बन गया, लेकिन नव नियुक्त बिशप, पोर्फिरी क्राइस्की की बढ़ती शत्रुता का सामना करते हुए, स्कोवोरोडा ने नैतिक भ्रष्टाचार और विधर्म के आरोपों के बीच जुलाई 1764 में दूसरी बार कॉलेजियम छोड़ दिया। कई वर्षों तक बिना किसी औपचारिक पद के रहने के बाद, स्लोबोडा यूक्रेन के गवर्नर येवदोकिम शेर्बिनिन ने स्कोवोरोडा को कॉलेजियम में नव स्थापित कुलीन वर्ग के लिए "पूरक कक्षाओं" में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से 'ईसाई नैतिकता का द्वार' नामक ग्रंथ की रचना की और 1768 में कैटेकिज़्म पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, नव नियुक्त बिशप सैमुइल मिसलाव्स्की - जो कीव-मोहिला अकादमी में स्कोवोरोडा के पूर्व सहपाठी थे - ने एक गैर-पुजारी विद्वान द्वारा कैटेकिज़्म पढ़ाने पर आपत्ति जताई और स्कोवोरोडा के ग्रंथ के कुछ हिस्सों की आलोचना की। स्कोवोरोडा ने अप्रैल 1769 में स्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कोई संस्थागत पद ग्रहण नहीं किया। खार्कोव कॉलेजियम से अंतिम विदाई के बाद, स्कोवोरोडा ने घुमंतू दार्शनिक का जीवन अपना लिया। वे शुरुआत में खार्कोव के पास हुज़्विन्स्की जंगल में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में बस गए, जहाँ उन्होंने दार्शनिक दंतकथाएँ (जिन्हें बाद में खार्कोव दंतकथाएँ के रूप में संकलित किया गया, जो यूक्रेनी साहित्य में दंतकथाओं का पहला संग्रह है) और दार्शनिक संवादों की रचना शुरू की, जिनमें नार्सिसस और 'अस्खान की पुस्तक' नामक सिम्फनी शामिल हैं। 1770 से, वे अक्सर गुसिंका के एक जमींदार अलेक्सी सोशाल्स्की के साथ रहते थे, और 1772 में उन्होंने ओस्त्रोगोज़्स्क में सेवानिवृत्त कर्नल स्टेपन तेवियाशोव की जागीर में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने छह दार्शनिक संवादों की रचना की। इन वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने स्लोबोडा [[युक्रेन|यूक्रेन]] में व्यापक यात्रा की, खार्कोव, बाबई, बाल्की, इज़ियम, कुप्यांस्क, अख्तिरका और अन्य शहरों का दौरा किया, और पादरियों, छोटे कुलीन वर्ग और शिक्षित आम लोगों के बीच अपने प्रशंसकों का एक दायरा बनाया। उन्होंने मिखाइल कोवालेन्स्की के साथ जीवन भर पत्राचार किया, जिन्होंने बाद में उनकी मूलभूत जीवनी लिखी। अपने अंतिम वर्ष में, स्कोवोरोडा यूक्रेन के स्लोबोडा से पैदल चलकर ओर्योल के पास कोवालेन्स्की से मिलने गए, उन्हें अपनी सभी रचनाएँ सौंपीं और स्लोबोडा, यूक्रेन लौट आए। स्कोवोरोडा धार्मिक संगीत के रचयिता के रूप में भी जाने जाते थे, साथ ही उन्होंने अपने स्वयं के लिखे गीतों पर आधारित कई गीत भी रचे। इनमें से कई गीत यूक्रेनी लोक संगीत का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई दार्शनिक गीत, जिन्हें स्कोवोरोड्स्की भजन (स्कोवोरोडियन भजन) के नाम से जाना जाता है, अक्सर दृष्टिहीन लोक संगीतकारों, जिन्हें कोबज़ार कहा जाता है, के संगीत संग्रह में पाए जाते थे। उन्हें बांसुरी, तोरबान और कोबज़ा वादक के रूप में भी जाना जाता था। अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने यूक्रेन के स्लोबोडा में पैदल यात्रा की, जहाँ वे विभिन्न मित्रों के साथ रहे, जिनमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे। वे एक जगह पर ज़्यादा देर तक नहीं ठहरना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने एकांतवासी जीवन और अध्ययन में अपना जीवन व्यतीत किया। यह अंतिम काल उनके महान [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] कार्यों का समय था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी पिछली सबसे बड़ी उपलब्धि, यानी चर्च स्लावोनिक भाषा, ग्रीक और लैटिन में कविता और साहित्य लेखन जारी रखा। उन्होंने लैटिन से रूसी में कई रचनाओं का अनुवाद भी किया। अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले वे अपने एक सबसे करीबी मित्र के घर गए और उन्हें बताया कि वे स्थायी रूप से यहीं रहने आए हैं। वे हर दिन फावड़ा लेकर घर से निकलते थे, और ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने तीन दिन अपनी ही [[क़ब्र|कब्र]] खोदने में बिताए। तीसरे दिन उन्होंने खाना खाया, उठे और कहा, "मेरा समय आ गया है।"<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> वे अगले कमरे में गए, लेट गए और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी समाधि पर निम्नलिखित शिलालेख अंकित करने का अनुरोध किया: "संसार ने मुझे अपने वश में करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ।" उनकी [[मृत्यु]] 9 नवंबर 1794 को पैन-इवानोव्का नामक गांव में हुई (जिसे आज स्कोवोरोडिनोव्का, बोहोदुखिव रायन, खार्किव ओब्लास्ट के नाम से जाना जाता है)।<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> ==भाषा== स्कोवोराडा ने अपनी रचनाएँ जिस भाषा में लिखीं, उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं। वे अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा यूक्रेनी बोलते थे; उनके शिष्य और जीवनीकार मिखाइल कोवालेन्स्की लिखते हैं कि स्कोवोराडा "अपनी मातृभाषा से प्रेम करते थे और शायद ही कभी किसी विदेशी भाषा में बोलने का आग्रह करते थे।" हालाँकि, लैटिन और ग्रीक में लिखी गई रचनाओं को छोड़कर, स्कोवोराडा ने चर्च स्लावोनिक, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं के मिश्रण में लिखा। उन्होंने लैटिन, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कुछ तत्वों को भी एकीकृत किया, जिनमें पश्चिमी यूरोपीय शब्दों का महत्वपूर्ण समावेश है। स्लाविक भाषाविद् जॉर्ज शेवेलोव उनकी भाषा का वर्णन करते हुए (बाइबल के उद्धरणों और अनेक काव्य प्रयोगों को छोड़कर) कहते हैं कि यह "रूसी भाषा वैसी ही थी जैसी उस समय ज़ारकीव और स्लोबोज़ानशचिना (स्लोबोडा यूक्रेन) में शिक्षित जमींदारों और उच्च वर्ग द्वारा बोली जाती थी।" यह रूसी भाषा का एक ऐसा रूप था जो "यूक्रेनी आधार पर विकसित हुआ", जिसमें कई यूक्रेनी शब्द थे और जो मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की रूसी भाषा से भिन्न थी। शेवेलोव लिखते हैं कि इसी भाषाई आधार पर स्कोवोरोडा ने एक बहुत ही विशिष्ट मुहावरा विकसित किया जो उनकी मूल बोलचाल की भाषा के समतुल्य नहीं था। 1923 में प्रकाशित स्कोवोरोडा की भाषा के अपने अध्ययन में, भाषाविद् पेट्रो बुज़ुक दार्शनिक के मुहावरे को मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी की लिखित रूसी भाषा पर आधारित बताते हैं, हालांकि इसमें यूक्रेनी, पोलिश और प्राचीन चर्च स्लावोनिक के रूप भी शामिल हैं। साहित्य विद्वान लियोनिद उश्कालोव का कहना है कि स्कोवोरोडा की भाषा एक "मिश्रित भाषा" है जो खार्किव के 18वीं शताब्दी के यूक्रेनी लेखकों की रूसी भाषा से बहुत भिन्न है। वे लिखते हैं कि स्कोवोरोडा के पास अपनी 'लेखन भाषा' को यूक्रेनी मानने के कारण थे। (कुछ मौकों पर, स्कोवोरोडा ने अपनी रचनाओं की भाषा को "सामान्य बोली", "स्थानीय बोली" या "छोटी रूसी" कहा; उस समय 'छोटी रूसी' शब्द यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्र को संदर्भित करता था।) इसमें समानांतर यूक्रेनी और रूसी शब्द तथा मिश्रित रूसी-यूक्रेनी शब्द रूप शामिल हैं। विटाली पेरेड्रिएन्को के अनुसार, स्कोवोरोडा के काव्य संग्रह 'सद बोजेस्तवेन्नीख पेस्नेई' (दिव्य गीतों का उद्यान) में 84% शब्द रूप शब्दावली और शब्द निर्माण के संदर्भ में नई यूक्रेनी साहित्यिक भाषा से मेल खाते हैं। उनके दार्शनिक संवादों में रूसी भाषा का प्रतिशत कुछ कम पाया गया (उदाहरण के लिए, उनके 'नारकिस' में 73.6%)। भाषाविज्ञानी लिडिया ह्नाटियुक के अनुसार, यद्यपि कुछ आधुनिक यूक्रेनी पाठक स्कोवोरोडा की भाषा को रूसी मानते हैं, स्कोवोरोडा की अधिकांश दार्शनिक रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी बोली में लिखी गई हैं, जबकि उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्राचीन यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में हैं; हालाँकि, वह कहती हैं कि इन दोनों बोलियों के बीच की सीमा "बहुत ही अनिश्चित" है। स्कोवोरोडा अपनी भाषा की विशिष्टता से अवगत प्रतीत होते थे और उन्होंने इसकी आलोचनाओं का बचाव किया। बाद के कई लेखकों ने स्कोवोरोडा की भाषा की आलोचना की। उनकी असामान्य भाषा का श्रेय उनकी शिक्षा या उस समय की परिस्थितियों के प्रभाव को दिया गया; वहीं दूसरी ओर, उन पर "पिछड़ेपन" और समकालीन समस्याओं को समझने में असमर्थता का आरोप लगाया गया। यूक्रेनी लेखक इवान नेचुय-लेवित्स्की ने स्कोवोरोडा की मिश्रित भाषा को "अजीब, विविध और आम तौर पर अस्पष्ट" बताया। यूक्रेनी कवि तारास शेवचेंको ने लिखा कि स्कोवोरोडा "जनता के कवि भी होते यदि लैटिन और बाद में रूसी भाषा ने उन्हें विचलित न किया होता।" 1901 में, रूसी उपन्यासकार ग्रिगोरी डेनिलव्स्की ने लिखा कि स्कोवोरोडा "एक भारी, अस्पष्ट और अजीब भाषा में लिखते थे... जो किसी सेमिनार के छात्र के योग्य, भद्दी और अक्सर अस्पष्ट" थी। 1830 के दशक में, जब खार्किव में रोमांटिक लेखकों का एक समूह स्कोवोरोडा की रचनाओं के प्रकाशन की तैयारी कर रहा था, तो उन्होंने पाठकों को डराने से बचने के लिए उनकी रचनाओं का रूसी में अनुवाद करने पर विचार किया। शेवेलोव के अनुसार, स्कोवोरोडा की शैलीगत पसंद जानबूझकर की गई थी, न कि उनकी कमज़ोर शिक्षा का परिणाम; उनके द्वारा प्रस्तुत "उच्च बारोक" शैली ने साहित्य में बोलचाल की भाषा की नकल करने का प्रयास नहीं किया। शेवेलोव लिखते हैं कि बाद के पाठकों को उनकी भाषा "मृत" सी लगी, क्योंकि स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों की रूसी भाषा तब तक मानक रूसी के लगभग समान हो चुकी थी और अधिक धर्मनिरपेक्ष हो गई थी। स्कोवोरोडा लैटिन भाषा में पारंगत थे, जो उनके दाखिले के दौरान कीव-मोहिला अकादमी में शिक्षा का माध्यम थी। उन्होंने लैटिन में कई छोटी कविताएँ लिखीं, जिनमें दंतकथाएँ भी शामिल हैं। शेवेलोव के अनुसार, ये लैटिन कविताएँ मुख्य रूप से "प्रयोगों के रूप में और/या शैक्षणिक उद्देश्य से" लिखी गई थीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं। उनके स्लाविक लेखन में भी लैटिन, ग्रीक और कभी-कभी हिब्रू या अन्य भाषाओं के शब्द, वाक्यांश और उद्धरण मिलते हैं। उन्हें जर्मन का अच्छा ज्ञान था और जाहिर तौर पर उन्हें कुछ फ्रेंच भी आती थी। ==रचनाएँ== चर्च के अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण स्कोवोरोदा की रचनाएँ उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकीं। ग्रिहोरी स्कोवोरोदा ने कई भाषाओं, विशेष रूप से लैटिन, ग्रीक और जर्मन में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे जर्मन में धार्मिक साहित्य पढ़ सकते थे और जर्मन धर्मनिष्ठा से प्रभावित थे। दार्शनिक और धार्मिक अध्ययन की भावना में पले-बढ़े, वे चर्च के विद्वतावाद और ऑर्थोडॉक्स चर्च के आध्यात्मिक प्रभुत्व के विरोधी बन गए। उन्होंने लिखा, "हमारा राज्य हमारे भीतर है, और ईश्वर को जानने के लिए, आपको स्वयं को जानना होगा... लोगों को ईश्वर को स्वयं के समान जानना चाहिए, इतना कि वे उन्हें संसार में देख सकें... ईश्वर में विश्वास का अर्थ उनके अस्तित्व में विश्वास करना और इसलिए उनके प्रति समर्पित होना और उनके नियमों के अनुसार जीवन जीना नहीं है... जीवन की पवित्रता लोगों के प्रति भलाई करने में निहित है।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि "सभी कार्य ईश्वर द्वारा आशीर्वादित हैं", और व्यक्ति को अपने लिए 'अनुकूल कार्य' (स्रोदना प्रात्सिया) की खोज करनी चाहिए। जब ​​लोग अपने कर्तव्य को त्यागकर धन या प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, तो वे और समाज दोनों दुखी हो जाते हैं। उनकी रचना "नार्सिसिस या स्वयं को जानो" रूसी साम्राज्य में सन् 1798 में प्रकाशित हुई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। सन् 1806 में अलेक्जेंडर लाबज़िन के संपादन में "ज़ायोन व्येस्तनिक" पत्रिका ने उनकी कुछ और रचनाएँ प्रकाशित कीं। फिर सन् 1837-1839 में मॉस्को में उनकी कुछ रचनाएँ उनके नाम से प्रकाशित हुईं, और सन् 1861 में उनकी रचनाओं का पहला लगभग संपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुआ। दार्शनिक की मृत्यु की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर, खार्किव (खार्कोव) में, दिमित्री बागले (1918 के बाद दिमित्रो बहाली के नाम से भी जाने जाते हैं) द्वारा संपादित खार्कोव हिस्टोरिको-फिलोलॉजिकल सोसाइटी के प्रसिद्ध सातवें खंड (1894) का प्रकाशन हुआ, जिसमें स्कोवोरोडा की अधिकांश रचनाएँ शामिल थीं। इसमें उनकी 16 रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिनमें से नौ पहली बार प्रकाशित हुईं। साथ ही, उनकी जीवनी और उनकी कुछ कविताएँ भी प्रकाशित हुईं। स्कोवरोडा की सभी ज्ञात रचनाओं का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह 2011 में लियोनिद उश्कालोव द्वारा प्रकाशित किया गया था। ===कार्यों की सूची=== *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी एस. दंतकथाएँ और सूत्र। अनुवाद, जीवनी और विश्लेषण डैन बी. चॉपिक द्वारा (न्यूयॉर्क: पीटर लैंग, 1990) समीक्षा: वलोडिमिर टी. ज़ायला, यूक्रेनी क्वार्टरली, 50 (1994): 303-304। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगरी), पिज़्ने बनाम सोबी लुडिनु। एम. काशुबा द्वारा वासिल वोइतोविच के परिचय के साथ अनुवादित (एल'विव: एस$विट, 1995) चयनित कार्य (मूल: यूक्रेनी भाषा)। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगोरी), ट्वोरी: वी ड्वोख तोमाख, प्राक्कथन ओ मायशानिच द्वारा, मुख्य संपादक ओमेलियन प्रित्सक (कीव: ओबेरेही, 1994) (मूल: यूक्रेनी भाषा, अन्य भाषाओं से अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "जीवन की सच्ची खुशी के बारे में पांच यात्रियों के बीच बातचीत" (जॉर्ज एल. क्लाइन द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "प्राचीन दुनिया के बारे में बातचीत"। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), लियोनिद उश्कालोव द्वारा संपादित। "ग्रिगोरी स्कोवोरोडा: कार्यों का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह", (2011)। ==शिक्षण== स्कोवोरोडा के प्रमुख कार्यों में से एक शिक्षण भी था। औपचारिक रूप से उन्होंने पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाया (1750-1751 के दौरान) और खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम और लैटिन में: कॉलेजियम चारकोविएन्सिस या ज़ाचारपोलिस कॉलेजियम भी कहा जाता है) में काव्यशास्त्र, वाक्यविन्यास, ग्रीक और धर्मशिक्षा का अध्यापन किया (1759-1760, 1761-1764, 1768-1769 के दौरान)। 1751 में उनका पेरेयास्लाव कॉलेजियम के अध्यक्ष बिशप से विवाद हो गया, जिन्होंने स्कोवोरोडा के शिक्षण के नए तरीकों को विचित्र और काव्यशास्त्र के पूर्व पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ असंगत माना। युवा स्कोवोरोडा, अपने विषय पर पूर्ण महारत और छंदशास्त्र के नियमों की सटीकता, स्पष्टता और व्यापकता पर आश्वस्त थे। उन्होंने बिशप के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया और मध्यस्थता की मांग करते हुए कहा कि "अलिया रेस सेप्ट्रम, आलिया प्लेक्ट्रम" [पादरी का राजदंड एक चीज है, लेकिन बांसुरी दूसरी]। बिशप ने स्कोवोरोडा के इस रवैये को अहंकारपूर्ण समझा और परिणामस्वरूप उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। खार्कोव कॉलेजियम में अध्यापन का पहला वर्ष स्कोवोरोडा के लिए सफल रहा। उनके व्याख्यानों और शिक्षण शैली ने छात्रों, सहकर्मियों और वरिष्ठों का ध्यान आकर्षित किया। स्कोवोरोडा वासिली तोमारा (1740-1813) के निजी शिक्षक भी थे (1753-1754 और 1755-1758 के दौरान) और उनके जीवनीकार माइकल कोवालिंस्की (या कोवालेन्स्की, 1745-1807) के आजीवन मित्र और मार्गदर्शक भी थे (1761-1769 के दौरान)। संभवतः वे फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के पुत्र गैब्रियल विश्नेव्स्की (1716-1752) के भी निजी शिक्षक थे (1745-1749 के दौरान)। फ्योदोर विश्नेव्स्की के कारण ही स्कोवोरोडा ने मध्य यूरोप, विशेष रूप से हंगरी और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। अपने शिक्षण में स्कोवोरोडा का उद्देश्य छात्रों की रुचियों और क्षमताओं को खोजना था और वे ऐसे व्याख्यान और पठन सामग्री तैयार करते थे जो उन्हें पूर्ण रूप से विकसित कर सकें। स्कोवोरोदा के जीवनीकार कोवालिंस्की ने इस दृष्टिकोण का वर्णन इस प्रकार किया है: "स्कोवोरोदा ने युवा शिष्य वासिली तोमारा को पढ़ाना शुरू करते समय उनके हृदय पर अधिक ध्यान दिया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को समझते हुए, उन्होंने केवल उनकी प्रकृति को ही विकसित करने में मदद करने का प्रयास किया। उन्होंने कोमल और सौम्य मार्गदर्शन दिया, जिसे बालक को पता भी नहीं चला, क्योंकि स्कोवोरोदा ने विशेष ध्यान रखा कि युवा मन पर भारी ज्ञान का बोझ न पड़े। इस तरह बालक स्कोवोरोदा से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ गया।" उनका शिक्षण केवल अकादमिक जगत या निजी मित्रों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक "घुमक्कड़" के रूप में उन्होंने उन अनेक लोगों को सार्वजनिक रूप से शिक्षा दी जो उनकी ओर आकर्षित हुए। रूसी दर्शन के पहले ज्ञात इतिहासकार, आर्चीमैंड्राइट गैवरिल (वासिली वोस्क्रेसेन्स्की, 1795-1868) ने शिक्षण में स्कोवोरोडा के सुकरात जैसे गुणों का शानदार वर्णन किया है: "सुकरात और स्कोवोरोडा दोनों ने ही ऊपर से जनता के शिक्षक बनने का आह्वान महसूस किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए वे उस शब्द के व्यक्तिगत और उच्च अर्थ में सार्वजनिक शिक्षक बन गए। ... स्कोवोरोडा भी सुकरात की तरह समय या स्थान से बंधे नहीं थे, वे चौराहों पर, बाजारों में, कब्रिस्तान के पास, चर्च के बरामदों के नीचे, छुट्टियों के दौरान, जब उनके तीखे शब्द एक मदहोश इच्छा को व्यक्त करते थे - और फसल कटाई के कठिन दिनों में, जब बिना बारिश के पसीना धरती पर बहता था, तब भी शिक्षा देते थे।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि आत्म-परीक्षण से ही व्यक्ति को अपने सच्चे उद्देश्य का पता चलता है। यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन का प्रयोग करते हुए स्कोवोरोदा सलाह देते हैं, "स्वयं को जानो।" उन्होंने एक सुस्थापित विचार प्रस्तुत किया कि जन्मजात, स्वाभाविक कार्य में संलग्न व्यक्ति को वास्तव में संतुष्टिदायक और सुखी जीवन प्राप्त होता है। युवाओं की शिक्षा स्कोवोरोदा के वृद्धावस्था तक उनके ध्यान का केंद्र रही। 1787 में, अपनी मृत्यु से सात वर्ष पूर्व, स्कोवोरोदा ने शिक्षा विषय पर दो निबंध लिखे, "महान सारस" (मूल: Благодарный Еродій, Blagorodnyj Erodiy) और "गरीब लार्क" (मूल: Убогій Жаворонокъ, Ubogiy Zhavoronok), जिनमें उन्होंने अपने विचारों का प्रतिपादन किया। स्कोवोरोडा के व्यापक प्रभाव को उन प्रसिद्ध लेखकों द्वारा दर्शाया गया है जिन्होंने उनकी शिक्षाओं की सराहना की: व्लादिमीर सोलोवियोव, लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की, आंद्रेई बेली, तारास शेवचेंको और इवान फ्रेंको। ==श्रद्धांजलि== [[File:USSR stamp G.Skovoroda 1972 4k.jpg|thumb|एच. स्कोवोरोडा के चित्र सहित [[रूस के डाक टिकट और डाक इतिहास|सोवियत डाक टिकट]] (1972)]] [[File:500 Ukrainian hryvnia in 2015 Obverse.jpg|thumb|₴500 बैंकनोट पर स्कोवोरोडा।]] 15 सितंबर 2006 को, यूक्रेन में प्रचलन में दूसरे सबसे बड़े नोट, ₴500 के नोट पर स्कोवोरोडा का चित्र अंकित किया गया। 1946 में स्थापित ग्रिगोरी स्कोवोरोडा दर्शनशास्त्र संस्थान, यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1991 तक यूक्रेनी सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी) के तत्वावधान में संचालित होता है। यूक्रेन के खार्किव प्रांत के स्कोवोरोडिनिवका गाँव में ग्रिगोरी स्कोवोरोडा साहित्यिक स्मारक संग्रहालय स्थित था। यह संग्रहालय 18वीं शताब्दी की एक इमारत में, उस संपत्ति पर संचालित हो रहा था जहाँ स्कोवोरोडा को दफनाया गया था। 6-7 मई 2022 की रात को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण रूसी मिसाइल हमले में यह इमारत नष्ट हो गई। मिसाइल इमारत की छत के नीचे से गुजरी और आग लग गई। आग ने पूरे संग्रहालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। परिणामस्वरूप, स्कोवोरोडा राष्ट्रीय संग्रहालय ऐतिहासिक इमारत सहित नष्ट हो गया। संग्रहालय का संग्रह सुरक्षित रहा क्योंकि रूसी हमले की आशंका में इसे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इमारत में स्थित स्कोवोरोडा की प्रतिमा नष्ट हुई इमारत के मलबे के बीच खड़ी रही। <gallery class="center" mode="packed-hover"> Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling on 6 May 2022 (01).jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 02.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 04.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 05.jpg </gallery> 2 दिसंबर 2022 को, स्कोवोरोडा के जन्म की 300वीं वर्षगांठ पर, वाशिंगटन, डी.सी. में यूक्रेन हाउस के पास उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थापित किया गया। इसे 1992 में अमेरिकी मूर्तिकार मार्क रोड्स ने बनाया था, जो स्कोवोरोडा के विचारों से प्रेरित थे। [[File:Skovoroda Monument.jpg|thumb|वाशिंगटन डी.सी. में यूक्रेन हाउस के बाहर स्थित स्कोवोरोडा स्मारक। मूर्तिकार: [[मार्क रोड्स (कलाकार)|मार्क रोड्स]]]] ==लोकप्रिय संस्कृति में== स्कोवोरोडा की कविताओं पर आधारित निम्नलिखित पॉप गीत लिखे गए: *सोन्याचना माशिना द्वारा "पटाश्को" (2019) *कुर्स वालुत द्वारा "कुर्स वालुत" (2020) 26 जनवरी 2024 को खार्किव नगर परिषद ने खार्किव की पुश्किंस्का स्ट्रीट का नाम बदलकर ग्रिगोरी स्कोवोरोडा स्ट्रीट कर दिया। यह 23 जनवरी 2024 को खार्किव पर हुए रूसी बम हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे सहित 9 लोग मारे गए थे। विशेष रूप से शाम के समय, केंद्रीय पुश्किंस्का स्ट्रीट पर हमला हुआ था। {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] k944ldmch7grrxb6xe72a1ppovaxhhx 6536932 6536927 2026-04-06T10:34:55Z Surajkumar9931 853179 /* भाषा */ 6536932 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref name=":0">"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. Obrazovanye. Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं।<ref name=":0" /> ==जीवन== [[File:Григорий Сковорода.jpg|thumb|स्कोवरोडा का चित्र, उनके हस्ताक्षर सहित; उनका पहला नाम सिरिलिक लिपि में (संक्षिप्त रूप में) लिखा है और उनका अंतिम नाम ग्रीक अक्षर सिग्मा (Σ) द्वारा दर्शाया गया है।]] स्कोवोरोडा का जन्म 1722 में [[रूसी साम्राज्य]] (आधुनिक पोल्टावा ओब्लास्ट, यूक्रेन) के कोसैक हेटमानेते (1708 में कोसैक हेटमानेते का क्षेत्र कीव गवर्नरेट में समाहित कर लिया गया था, हालांकि कोसैक हेटमानेते का विघटन नहीं हुआ था)<ref>{{Cite web|url=https://www.hist.msu.ru/ER/Etext/gub1708.htm|title=Указ об учреждении губерний 1708 г.|website=www.hist.msu.ru|access-date=2026-04-06}}</ref> के लुबनी रेजिमेंट के चोर्नुखी गांव में एक छोटे यूक्रेनी पंजीकृत कोसैक परिवार में हुआ था। उनकी माता, पेलागेया स्टेपनोवना शांग-गिरय, शाहिन गिरय से सीधे संबंधित थीं और आंशिक रूप से क्रीमियन तातार वंश की थीं। उन्होंने कीव-मोहिला अकादमी में अध्ययन किया (1734-1741, 1744-1745, 1751-1753) लेकिन स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की।<ref>Kazarin, V.; Novikova, M. (2014). "Ukrainskii kontekst tvorchestva M. Iu. Lermontova" Украинский контекст творчества М. Ю. Лермонтова [The Ukrainian context of M. Yu. Lermontov's work]. Voprosy russkoi literatury (in Russian) (28): 13.</ref> 1741 में, 19 वर्ष की आयु में, अपने चाचा इग्नाटी पोल्तावत्सेव के कारण उन्हें कीव से मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में शाही गायन मंडली में गाने के लिए भेजा गया, और वे 1744 में कीव लौट आए। उन्होंने 1745 से 1750 तक हंगरी राज्य में समय बिताया और माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने यूरोप के अन्य हिस्सों की भी यात्रा की। 1750 में वे कीव लौट आए। 1750 से 1751 तक, उन्होंने पेरेयास्लाव में काव्यशास्त्र पढ़ाया। 1753 से 1759 तक, अधिकांश समय स्कोवोरोडा कोवराई में एक जमींदार के परिवार में शिक्षक रहे। 1759 से 1769 तक, कुछ अंतरालों के साथ, उन्होंने खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम भी कहा जाता है) में कविता, वाक्यविन्यास, ग्रीक और नैतिकता जैसे विषय पढ़ाए। 1769 में नैतिकता पर उनके पाठ्यक्रम पर हुए हमले के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। मध्य यूरोप में स्कोवोरोडा की यात्राएँ उनके बौद्धिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। 1745 के अंत में, कीव-मोहिला अकादमी में अपने दार्शनिक अध्ययन को पूरा करने के बाद, वे मेजर जनरल फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के नेतृत्व में "शाही दरबार के लिए शराब की खरीद हेतु टोकाज आयोग" में शामिल हो गए। विश्नेव्स्की ट्रांसिल्वेनिया के एक सर्ब थे जो 1715 से रूसी सेवा में थे। विदेश में अपने वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने प्रेसबर्ग (आधुनिक ब्रातिस्लावा), ओफेन (बुडा), [[वियना]] और अन्य शहरों का दौरा किया और स्थानीय विद्वानों के साथ बातचीत की। जनवरी 1749 में विश्नेव्स्की की मृत्यु और उनके पुत्र गैवरिल को उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद, स्कोवोरोडा यूक्रेन लौट आए और 10 अक्टूबर 1750 को कीव पहुंचे। 1750 में बिशप निकोदिम स्क्रेबनित्स्की ने स्कोवोरोडा को नवस्थापित पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ही महीनों में, उनकी शिक्षण विधियों और स्थापित पद्धति का पालन न करने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, स्क्रेबनित्स्की ने उन्हें 1751 में बर्खास्त कर दिया। इस विवाद के बाद, स्कोवोरोडा ने कीव-मोहिला अकादमी में जॉर्ज (कोनिस्की) द्वारा पढ़ाए जाने वाले धर्मशास्त्र में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की, लेकिन स्नातक होने के लिए आवश्यक चार वर्षों में से दो वर्ष पूरे होने के बाद ही उन्होंने संकाय छोड़ दिया। 1753 की गर्मियों में, कीव के मेट्रोपॉलिटन (ऑर्थोडॉक्स चर्च के वरिष्ठ धर्माधिकारी) की सिफारिश पर, उन्होंने कोसैक कुलीन स्टेपन तोमारा (1719-1794) के बड़े बेटे वासिली (1746-1819) के शिक्षक के रूप में कावराई पेरेयास्लाव रेजिमेंट में स्थित पारिवारिक जागीर में सेवा शुरू की। वे लगभग छह वर्षों तक तोमारा के घर में रहे, इस दौरान उन्होंने कविताएँ लिखना शुरू किया, जिनमें उनके संग्रह 'दिव्य गीतों का उद्यान' के लिए कई रचनाएँ शामिल हैं। 1755 की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए मॉस्को और ट्रिनिटी-सेर्गियस लावरा की यात्रा की, जहाँ उन्होंने लावरा सेमिनरी में अध्यापन पद को अस्वीकार कर दिया। स्कोवोरोडा ने 1759 की गर्मियों में कावराई छोड़ दिया, जब वासिली तमारा ज़मोस्क और फिर वियना में विदेश में अध्ययन करने के लिए चले गए। 1759 की गर्मियों में, स्कोवोरोडा ने बेलगोरोड और ओबोइयन के बिशप जोआसाफ मिटकेविच का निमंत्रण स्वीकार कर खार्कोव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए स्वीकार किया - जो उस समय के सबसे उन्नत स्लोबोडा-यूक्रेनी शिक्षण संस्थानों में से एक था, और प्राकृतिक विज्ञान और आधुनिक भाषाओं पर जोर देने के कारण कीव-मोहिला अकादमी से अलग था। मिटकेविच द्वारा उन्हें मठवासी प्रतिज्ञा लेने के लिए दबाव डालने के प्रयासों को अस्वीकार करने के बाद, उन्होंने 1760 की गर्मियों में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया। स्कोवोरोडा सितंबर 1762 में सिंटेक्स और ग्रीक पढ़ाने के लिए कॉलेजियम लौट आए। उनकी यह वापसी काफी हद तक युवा छात्र मिखाइल कोवालेन्स्की से हुई मुलाकात से प्रेरित थी, जो आगे चलकर उनके सबसे करीबी शिष्य, पहले जीवनीकार और उनकी मृत्यु के बाद सेंट पीटर्सबर्ग में स्कोवोरोडा की पांडुलिपियों के पहले प्रकाशन के सूत्रधार बने। उनके चारों ओर समर्पित छात्रों का एक समूह बन गया, लेकिन नव नियुक्त बिशप, पोर्फिरी क्राइस्की की बढ़ती शत्रुता का सामना करते हुए, स्कोवोरोडा ने नैतिक भ्रष्टाचार और विधर्म के आरोपों के बीच जुलाई 1764 में दूसरी बार कॉलेजियम छोड़ दिया। कई वर्षों तक बिना किसी औपचारिक पद के रहने के बाद, स्लोबोडा यूक्रेन के गवर्नर येवदोकिम शेर्बिनिन ने स्कोवोरोडा को कॉलेजियम में नव स्थापित कुलीन वर्ग के लिए "पूरक कक्षाओं" में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से 'ईसाई नैतिकता का द्वार' नामक ग्रंथ की रचना की और 1768 में कैटेकिज़्म पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, नव नियुक्त बिशप सैमुइल मिसलाव्स्की - जो कीव-मोहिला अकादमी में स्कोवोरोडा के पूर्व सहपाठी थे - ने एक गैर-पुजारी विद्वान द्वारा कैटेकिज़्म पढ़ाने पर आपत्ति जताई और स्कोवोरोडा के ग्रंथ के कुछ हिस्सों की आलोचना की। स्कोवोरोडा ने अप्रैल 1769 में स्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कोई संस्थागत पद ग्रहण नहीं किया। खार्कोव कॉलेजियम से अंतिम विदाई के बाद, स्कोवोरोडा ने घुमंतू दार्शनिक का जीवन अपना लिया। वे शुरुआत में खार्कोव के पास हुज़्विन्स्की जंगल में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में बस गए, जहाँ उन्होंने दार्शनिक दंतकथाएँ (जिन्हें बाद में खार्कोव दंतकथाएँ के रूप में संकलित किया गया, जो यूक्रेनी साहित्य में दंतकथाओं का पहला संग्रह है) और दार्शनिक संवादों की रचना शुरू की, जिनमें नार्सिसस और 'अस्खान की पुस्तक' नामक सिम्फनी शामिल हैं। 1770 से, वे अक्सर गुसिंका के एक जमींदार अलेक्सी सोशाल्स्की के साथ रहते थे, और 1772 में उन्होंने ओस्त्रोगोज़्स्क में सेवानिवृत्त कर्नल स्टेपन तेवियाशोव की जागीर में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने छह दार्शनिक संवादों की रचना की। इन वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने स्लोबोडा [[युक्रेन|यूक्रेन]] में व्यापक यात्रा की, खार्कोव, बाबई, बाल्की, इज़ियम, कुप्यांस्क, अख्तिरका और अन्य शहरों का दौरा किया, और पादरियों, छोटे कुलीन वर्ग और शिक्षित आम लोगों के बीच अपने प्रशंसकों का एक दायरा बनाया। उन्होंने मिखाइल कोवालेन्स्की के साथ जीवन भर पत्राचार किया, जिन्होंने बाद में उनकी मूलभूत जीवनी लिखी। अपने अंतिम वर्ष में, स्कोवोरोडा यूक्रेन के स्लोबोडा से पैदल चलकर ओर्योल के पास कोवालेन्स्की से मिलने गए, उन्हें अपनी सभी रचनाएँ सौंपीं और स्लोबोडा, यूक्रेन लौट आए। स्कोवोरोडा धार्मिक संगीत के रचयिता के रूप में भी जाने जाते थे, साथ ही उन्होंने अपने स्वयं के लिखे गीतों पर आधारित कई गीत भी रचे। इनमें से कई गीत यूक्रेनी लोक संगीत का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई दार्शनिक गीत, जिन्हें स्कोवोरोड्स्की भजन (स्कोवोरोडियन भजन) के नाम से जाना जाता है, अक्सर दृष्टिहीन लोक संगीतकारों, जिन्हें कोबज़ार कहा जाता है, के संगीत संग्रह में पाए जाते थे। उन्हें बांसुरी, तोरबान और कोबज़ा वादक के रूप में भी जाना जाता था। अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने यूक्रेन के स्लोबोडा में पैदल यात्रा की, जहाँ वे विभिन्न मित्रों के साथ रहे, जिनमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे। वे एक जगह पर ज़्यादा देर तक नहीं ठहरना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने एकांतवासी जीवन और अध्ययन में अपना जीवन व्यतीत किया। यह अंतिम काल उनके महान [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] कार्यों का समय था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी पिछली सबसे बड़ी उपलब्धि, यानी चर्च स्लावोनिक भाषा, ग्रीक और लैटिन में कविता और साहित्य लेखन जारी रखा। उन्होंने लैटिन से रूसी में कई रचनाओं का अनुवाद भी किया। अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले वे अपने एक सबसे करीबी मित्र के घर गए और उन्हें बताया कि वे स्थायी रूप से यहीं रहने आए हैं। वे हर दिन फावड़ा लेकर घर से निकलते थे, और ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने तीन दिन अपनी ही [[क़ब्र|कब्र]] खोदने में बिताए। तीसरे दिन उन्होंने खाना खाया, उठे और कहा, "मेरा समय आ गया है।"<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> वे अगले कमरे में गए, लेट गए और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी समाधि पर निम्नलिखित शिलालेख अंकित करने का अनुरोध किया: "संसार ने मुझे अपने वश में करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ।" उनकी [[मृत्यु]] 9 नवंबर 1794 को पैन-इवानोव्का नामक गांव में हुई (जिसे आज स्कोवोरोडिनोव्का, बोहोदुखिव रायन, खार्किव ओब्लास्ट के नाम से जाना जाता है)।<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> ==भाषा== स्कोवोराडा ने अपनी रचनाएँ जिस भाषा में लिखीं, उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं।<ref name=":1">Skovoroda, Hryhorii (2011). Ushkalov, Leonid (ed.). Povna akademichna zbirka tvoriv Повна академічна збірка творів [Complete academic collection of works] (in Ukrainian) (1st ed.). Kharkiv: Maidan. pp. 30–31. ISBN 978-966-372-330-3. </ref> वे अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा यूक्रेनी बोलते थे; उनके शिष्य और जीवनीकार मिखाइल कोवालेन्स्की लिखते हैं कि स्कोवोराडा "अपनी मातृभाषा से प्रेम करते थे और शायद ही कभी किसी विदेशी भाषा में बोलने का आग्रह करते थे।" हालाँकि, लैटिन और ग्रीक में लिखी गई रचनाओं को छोड़कर, स्कोवोराडा ने चर्च स्लावोनिक, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं के मिश्रण में लिखा। उन्होंने लैटिन, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कुछ तत्वों को भी एकीकृत किया, जिनमें पश्चिमी यूरोपीय शब्दों का महत्वपूर्ण समावेश है। स्लाविक भाषाविद् जॉर्ज शेवेलोव उनकी भाषा का वर्णन करते हुए (बाइबल के उद्धरणों और अनेक काव्य प्रयोगों को छोड़कर) कहते हैं कि यह "रूसी भाषा वैसी ही थी जैसी उस समय ज़ारकीव और स्लोबोज़ानशचिना (स्लोबोडा यूक्रेन) में शिक्षित जमींदारों और उच्च वर्ग द्वारा बोली जाती थी।" यह रूसी भाषा का एक ऐसा रूप था जो "यूक्रेनी आधार पर विकसित हुआ"<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref>, जिसमें कई यूक्रेनी शब्द थे और जो मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की रूसी भाषा से भिन्न थी। शेवेलोव लिखते हैं कि इसी भाषाई आधार पर स्कोवोरोडा ने एक बहुत ही विशिष्ट मुहावरा विकसित किया जो उनकी मूल बोलचाल की भाषा के समतुल्य नहीं था।<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> 1923 में प्रकाशित स्कोवोरोडा की भाषा के अपने अध्ययन में, भाषाविद् पेट्रो बुज़ुक दार्शनिक के मुहावरे को मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी की लिखित रूसी भाषा पर आधारित बताते हैं, हालांकि इसमें यूक्रेनी, पोलिश और प्राचीन चर्च स्लावोनिक के रूप भी शामिल हैं।<ref>https://odnb.odessa.ua/rarities/item/240</ref> साहित्य विद्वान लियोनिद उश्कालोव का कहना है कि स्कोवोरोडा की भाषा एक "मिश्रित भाषा" है जो खार्किव के 18वीं शताब्दी के यूक्रेनी लेखकों की रूसी भाषा से बहुत भिन्न है। वे लिखते हैं कि स्कोवोरोडा के पास अपनी 'लेखन भाषा' को यूक्रेनी मानने के कारण थे। (कुछ मौकों पर, स्कोवोरोडा ने अपनी रचनाओं की भाषा को "सामान्य बोली", "स्थानीय बोली" या "छोटी रूसी" कहा; उस समय 'छोटी रूसी' शब्द यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्र को संदर्भित करता था।) इसमें समानांतर यूक्रेनी और रूसी शब्द तथा मिश्रित रूसी-यूक्रेनी शब्द रूप शामिल हैं। विटाली पेरेड्रिएन्को के अनुसार, स्कोवोरोडा के काव्य संग्रह 'सद बोजेस्तवेन्नीख पेस्नेई' (दिव्य गीतों का उद्यान) में 84% शब्द रूप शब्दावली और शब्द निर्माण के संदर्भ में नई यूक्रेनी साहित्यिक भाषा से मेल खाते हैं। उनके दार्शनिक संवादों में रूसी भाषा का प्रतिशत कुछ कम पाया गया (उदाहरण के लिए, उनके 'नारकिस' में 73.6%)। भाषाविज्ञानी लिडिया ह्नाटियुक के अनुसार, यद्यपि कुछ आधुनिक यूक्रेनी पाठक स्कोवोरोडा की भाषा को रूसी मानते हैं, स्कोवोरोडा की अधिकांश दार्शनिक रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी बोली में लिखी गई हैं, जबकि उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्राचीन यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में हैं; हालाँकि, वह कहती हैं कि इन दोनों बोलियों के बीच की सीमा "बहुत ही अनिश्चित" है।<ref>{{Cite web|url=https://umoloda.kyiv.ua/number/3662/164/151922|title=Не цураймося свого! Якою мовою насправді писав Григорій Сковорода|website=umoloda.kyiv.ua|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> स्कोवोरोडा अपनी भाषा की विशिष्टता से अवगत प्रतीत होते थे और उन्होंने इसकी आलोचनाओं का बचाव किया। बाद के कई लेखकों ने स्कोवोरोडा की भाषा की आलोचना की। उनकी असामान्य भाषा का श्रेय उनकी शिक्षा या उस समय की परिस्थितियों के प्रभाव को दिया गया; वहीं दूसरी ओर, उन पर "पिछड़ेपन" और समकालीन समस्याओं को समझने में असमर्थता का आरोप लगाया गया। यूक्रेनी लेखक इवान नेचुय-लेवित्स्की ने स्कोवोरोडा की मिश्रित भाषा को "अजीब, विविध और आम तौर पर अस्पष्ट" बताया। यूक्रेनी कवि तारास शेवचेंको ने लिखा कि स्कोवोरोडा "जनता के कवि भी होते यदि लैटिन और बाद में रूसी भाषा ने उन्हें विचलित न किया होता।" 1901 में, रूसी उपन्यासकार ग्रिगोरी डेनिलव्स्की ने लिखा कि स्कोवोरोडा "एक भारी, अस्पष्ट और अजीब भाषा में लिखते थे... जो किसी सेमिनार के छात्र के योग्य, भद्दी और अक्सर अस्पष्ट" थी। <ref name=":2" />1830 के दशक में, जब खार्किव में रोमांटिक लेखकों का एक समूह स्कोवोरोडा की रचनाओं के प्रकाशन की तैयारी कर रहा था, तो उन्होंने पाठकों को डराने से बचने के लिए उनकी रचनाओं का रूसी में अनुवाद करने पर विचार किया। शेवेलोव के अनुसार, स्कोवोरोडा की शैलीगत पसंद जानबूझकर की गई थी, न कि उनकी कमज़ोर शिक्षा का परिणाम; उनके द्वारा प्रस्तुत "उच्च बारोक" शैली ने साहित्य में बोलचाल की भाषा की नकल करने का प्रयास नहीं किया। शेवेलोव लिखते हैं कि बाद के पाठकों को उनकी भाषा "मृत" सी लगी, क्योंकि स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों की रूसी भाषा तब तक मानक रूसी के लगभग समान हो चुकी थी और अधिक धर्मनिरपेक्ष हो गई थी।<ref name=":1" /> स्कोवोरोडा लैटिन भाषा में पारंगत थे, जो उनके दाखिले के दौरान कीव-मोहिला अकादमी में शिक्षा का माध्यम थी। उन्होंने लैटिन में कई छोटी कविताएँ लिखीं, जिनमें दंतकथाएँ भी शामिल हैं। शेवेलोव के अनुसार, ये लैटिन कविताएँ मुख्य रूप से "प्रयोगों के रूप में और/या शैक्षणिक उद्देश्य से" लिखी गई थीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं। उनके स्लाविक लेखन में भी लैटिन, ग्रीक और कभी-कभी हिब्रू या अन्य भाषाओं के शब्द, वाक्यांश और उद्धरण मिलते हैं। उन्हें जर्मन का अच्छा ज्ञान था और जाहिर तौर पर उन्हें कुछ फ्रेंच भी आती थी।<ref name=":2">Black, Karen L. (1994). "The Poetry of Skovoroda". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 141. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> ==रचनाएँ== चर्च के अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण स्कोवोरोदा की रचनाएँ उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकीं। ग्रिहोरी स्कोवोरोदा ने कई भाषाओं, विशेष रूप से लैटिन, ग्रीक और जर्मन में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे जर्मन में धार्मिक साहित्य पढ़ सकते थे और जर्मन धर्मनिष्ठा से प्रभावित थे। दार्शनिक और धार्मिक अध्ययन की भावना में पले-बढ़े, वे चर्च के विद्वतावाद और ऑर्थोडॉक्स चर्च के आध्यात्मिक प्रभुत्व के विरोधी बन गए। उन्होंने लिखा, "हमारा राज्य हमारे भीतर है, और ईश्वर को जानने के लिए, आपको स्वयं को जानना होगा... लोगों को ईश्वर को स्वयं के समान जानना चाहिए, इतना कि वे उन्हें संसार में देख सकें... ईश्वर में विश्वास का अर्थ उनके अस्तित्व में विश्वास करना और इसलिए उनके प्रति समर्पित होना और उनके नियमों के अनुसार जीवन जीना नहीं है... जीवन की पवित्रता लोगों के प्रति भलाई करने में निहित है।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि "सभी कार्य ईश्वर द्वारा आशीर्वादित हैं", और व्यक्ति को अपने लिए 'अनुकूल कार्य' (स्रोदना प्रात्सिया) की खोज करनी चाहिए। जब ​​लोग अपने कर्तव्य को त्यागकर धन या प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, तो वे और समाज दोनों दुखी हो जाते हैं। उनकी रचना "नार्सिसिस या स्वयं को जानो" रूसी साम्राज्य में सन् 1798 में प्रकाशित हुई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। सन् 1806 में अलेक्जेंडर लाबज़िन के संपादन में "ज़ायोन व्येस्तनिक" पत्रिका ने उनकी कुछ और रचनाएँ प्रकाशित कीं। फिर सन् 1837-1839 में मॉस्को में उनकी कुछ रचनाएँ उनके नाम से प्रकाशित हुईं, और सन् 1861 में उनकी रचनाओं का पहला लगभग संपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुआ। दार्शनिक की मृत्यु की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर, खार्किव (खार्कोव) में, दिमित्री बागले (1918 के बाद दिमित्रो बहाली के नाम से भी जाने जाते हैं) द्वारा संपादित खार्कोव हिस्टोरिको-फिलोलॉजिकल सोसाइटी के प्रसिद्ध सातवें खंड (1894) का प्रकाशन हुआ, जिसमें स्कोवोरोडा की अधिकांश रचनाएँ शामिल थीं। इसमें उनकी 16 रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिनमें से नौ पहली बार प्रकाशित हुईं। साथ ही, उनकी जीवनी और उनकी कुछ कविताएँ भी प्रकाशित हुईं। स्कोवरोडा की सभी ज्ञात रचनाओं का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह 2011 में लियोनिद उश्कालोव द्वारा प्रकाशित किया गया था। ===कार्यों की सूची=== *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी एस. दंतकथाएँ और सूत्र। अनुवाद, जीवनी और विश्लेषण डैन बी. चॉपिक द्वारा (न्यूयॉर्क: पीटर लैंग, 1990) समीक्षा: वलोडिमिर टी. ज़ायला, यूक्रेनी क्वार्टरली, 50 (1994): 303-304। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगरी), पिज़्ने बनाम सोबी लुडिनु। एम. काशुबा द्वारा वासिल वोइतोविच के परिचय के साथ अनुवादित (एल'विव: एस$विट, 1995) चयनित कार्य (मूल: यूक्रेनी भाषा)। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगोरी), ट्वोरी: वी ड्वोख तोमाख, प्राक्कथन ओ मायशानिच द्वारा, मुख्य संपादक ओमेलियन प्रित्सक (कीव: ओबेरेही, 1994) (मूल: यूक्रेनी भाषा, अन्य भाषाओं से अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "जीवन की सच्ची खुशी के बारे में पांच यात्रियों के बीच बातचीत" (जॉर्ज एल. क्लाइन द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "प्राचीन दुनिया के बारे में बातचीत"। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), लियोनिद उश्कालोव द्वारा संपादित। "ग्रिगोरी स्कोवोरोडा: कार्यों का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह", (2011)। ==शिक्षण== स्कोवोरोडा के प्रमुख कार्यों में से एक शिक्षण भी था। औपचारिक रूप से उन्होंने पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाया (1750-1751 के दौरान) और खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम और लैटिन में: कॉलेजियम चारकोविएन्सिस या ज़ाचारपोलिस कॉलेजियम भी कहा जाता है) में काव्यशास्त्र, वाक्यविन्यास, ग्रीक और धर्मशिक्षा का अध्यापन किया (1759-1760, 1761-1764, 1768-1769 के दौरान)। 1751 में उनका पेरेयास्लाव कॉलेजियम के अध्यक्ष बिशप से विवाद हो गया, जिन्होंने स्कोवोरोडा के शिक्षण के नए तरीकों को विचित्र और काव्यशास्त्र के पूर्व पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ असंगत माना। युवा स्कोवोरोडा, अपने विषय पर पूर्ण महारत और छंदशास्त्र के नियमों की सटीकता, स्पष्टता और व्यापकता पर आश्वस्त थे। उन्होंने बिशप के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया और मध्यस्थता की मांग करते हुए कहा कि "अलिया रेस सेप्ट्रम, आलिया प्लेक्ट्रम" [पादरी का राजदंड एक चीज है, लेकिन बांसुरी दूसरी]। बिशप ने स्कोवोरोडा के इस रवैये को अहंकारपूर्ण समझा और परिणामस्वरूप उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। खार्कोव कॉलेजियम में अध्यापन का पहला वर्ष स्कोवोरोडा के लिए सफल रहा। उनके व्याख्यानों और शिक्षण शैली ने छात्रों, सहकर्मियों और वरिष्ठों का ध्यान आकर्षित किया। स्कोवोरोडा वासिली तोमारा (1740-1813) के निजी शिक्षक भी थे (1753-1754 और 1755-1758 के दौरान) और उनके जीवनीकार माइकल कोवालिंस्की (या कोवालेन्स्की, 1745-1807) के आजीवन मित्र और मार्गदर्शक भी थे (1761-1769 के दौरान)। संभवतः वे फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के पुत्र गैब्रियल विश्नेव्स्की (1716-1752) के भी निजी शिक्षक थे (1745-1749 के दौरान)। फ्योदोर विश्नेव्स्की के कारण ही स्कोवोरोडा ने मध्य यूरोप, विशेष रूप से हंगरी और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। अपने शिक्षण में स्कोवोरोडा का उद्देश्य छात्रों की रुचियों और क्षमताओं को खोजना था और वे ऐसे व्याख्यान और पठन सामग्री तैयार करते थे जो उन्हें पूर्ण रूप से विकसित कर सकें। स्कोवोरोदा के जीवनीकार कोवालिंस्की ने इस दृष्टिकोण का वर्णन इस प्रकार किया है: "स्कोवोरोदा ने युवा शिष्य वासिली तोमारा को पढ़ाना शुरू करते समय उनके हृदय पर अधिक ध्यान दिया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को समझते हुए, उन्होंने केवल उनकी प्रकृति को ही विकसित करने में मदद करने का प्रयास किया। उन्होंने कोमल और सौम्य मार्गदर्शन दिया, जिसे बालक को पता भी नहीं चला, क्योंकि स्कोवोरोदा ने विशेष ध्यान रखा कि युवा मन पर भारी ज्ञान का बोझ न पड़े। इस तरह बालक स्कोवोरोदा से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ गया।" उनका शिक्षण केवल अकादमिक जगत या निजी मित्रों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक "घुमक्कड़" के रूप में उन्होंने उन अनेक लोगों को सार्वजनिक रूप से शिक्षा दी जो उनकी ओर आकर्षित हुए। रूसी दर्शन के पहले ज्ञात इतिहासकार, आर्चीमैंड्राइट गैवरिल (वासिली वोस्क्रेसेन्स्की, 1795-1868) ने शिक्षण में स्कोवोरोडा के सुकरात जैसे गुणों का शानदार वर्णन किया है: "सुकरात और स्कोवोरोडा दोनों ने ही ऊपर से जनता के शिक्षक बनने का आह्वान महसूस किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए वे उस शब्द के व्यक्तिगत और उच्च अर्थ में सार्वजनिक शिक्षक बन गए। ... स्कोवोरोडा भी सुकरात की तरह समय या स्थान से बंधे नहीं थे, वे चौराहों पर, बाजारों में, कब्रिस्तान के पास, चर्च के बरामदों के नीचे, छुट्टियों के दौरान, जब उनके तीखे शब्द एक मदहोश इच्छा को व्यक्त करते थे - और फसल कटाई के कठिन दिनों में, जब बिना बारिश के पसीना धरती पर बहता था, तब भी शिक्षा देते थे।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि आत्म-परीक्षण से ही व्यक्ति को अपने सच्चे उद्देश्य का पता चलता है। यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन का प्रयोग करते हुए स्कोवोरोदा सलाह देते हैं, "स्वयं को जानो।" उन्होंने एक सुस्थापित विचार प्रस्तुत किया कि जन्मजात, स्वाभाविक कार्य में संलग्न व्यक्ति को वास्तव में संतुष्टिदायक और सुखी जीवन प्राप्त होता है। युवाओं की शिक्षा स्कोवोरोदा के वृद्धावस्था तक उनके ध्यान का केंद्र रही। 1787 में, अपनी मृत्यु से सात वर्ष पूर्व, स्कोवोरोदा ने शिक्षा विषय पर दो निबंध लिखे, "महान सारस" (मूल: Благодарный Еродій, Blagorodnyj Erodiy) और "गरीब लार्क" (मूल: Убогій Жаворонокъ, Ubogiy Zhavoronok), जिनमें उन्होंने अपने विचारों का प्रतिपादन किया। स्कोवोरोडा के व्यापक प्रभाव को उन प्रसिद्ध लेखकों द्वारा दर्शाया गया है जिन्होंने उनकी शिक्षाओं की सराहना की: व्लादिमीर सोलोवियोव, लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की, आंद्रेई बेली, तारास शेवचेंको और इवान फ्रेंको। ==श्रद्धांजलि== [[File:USSR stamp G.Skovoroda 1972 4k.jpg|thumb|एच. स्कोवोरोडा के चित्र सहित [[रूस के डाक टिकट और डाक इतिहास|सोवियत डाक टिकट]] (1972)]] [[File:500 Ukrainian hryvnia in 2015 Obverse.jpg|thumb|₴500 बैंकनोट पर स्कोवोरोडा।]] 15 सितंबर 2006 को, यूक्रेन में प्रचलन में दूसरे सबसे बड़े नोट, ₴500 के नोट पर स्कोवोरोडा का चित्र अंकित किया गया। 1946 में स्थापित ग्रिगोरी स्कोवोरोडा दर्शनशास्त्र संस्थान, यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1991 तक यूक्रेनी सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी) के तत्वावधान में संचालित होता है। यूक्रेन के खार्किव प्रांत के स्कोवोरोडिनिवका गाँव में ग्रिगोरी स्कोवोरोडा साहित्यिक स्मारक संग्रहालय स्थित था। यह संग्रहालय 18वीं शताब्दी की एक इमारत में, उस संपत्ति पर संचालित हो रहा था जहाँ स्कोवोरोडा को दफनाया गया था। 6-7 मई 2022 की रात को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण रूसी मिसाइल हमले में यह इमारत नष्ट हो गई। मिसाइल इमारत की छत के नीचे से गुजरी और आग लग गई। आग ने पूरे संग्रहालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। परिणामस्वरूप, स्कोवोरोडा राष्ट्रीय संग्रहालय ऐतिहासिक इमारत सहित नष्ट हो गया। संग्रहालय का संग्रह सुरक्षित रहा क्योंकि रूसी हमले की आशंका में इसे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इमारत में स्थित स्कोवोरोडा की प्रतिमा नष्ट हुई इमारत के मलबे के बीच खड़ी रही। <gallery class="center" mode="packed-hover"> Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling on 6 May 2022 (01).jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 02.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 04.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 05.jpg </gallery> 2 दिसंबर 2022 को, स्कोवोरोडा के जन्म की 300वीं वर्षगांठ पर, वाशिंगटन, डी.सी. में यूक्रेन हाउस के पास उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थापित किया गया। इसे 1992 में अमेरिकी मूर्तिकार मार्क रोड्स ने बनाया था, जो स्कोवोरोडा के विचारों से प्रेरित थे। [[File:Skovoroda Monument.jpg|thumb|वाशिंगटन डी.सी. में यूक्रेन हाउस के बाहर स्थित स्कोवोरोडा स्मारक। मूर्तिकार: [[मार्क रोड्स (कलाकार)|मार्क रोड्स]]]] ==लोकप्रिय संस्कृति में== स्कोवोरोडा की कविताओं पर आधारित निम्नलिखित पॉप गीत लिखे गए: *सोन्याचना माशिना द्वारा "पटाश्को" (2019) *कुर्स वालुत द्वारा "कुर्स वालुत" (2020) 26 जनवरी 2024 को खार्किव नगर परिषद ने खार्किव की पुश्किंस्का स्ट्रीट का नाम बदलकर ग्रिगोरी स्कोवोरोडा स्ट्रीट कर दिया। यह 23 जनवरी 2024 को खार्किव पर हुए रूसी बम हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे सहित 9 लोग मारे गए थे। विशेष रूप से शाम के समय, केंद्रीय पुश्किंस्का स्ट्रीट पर हमला हुआ था। {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] 4rvteqgfspxrsjvc6umakpur52017ju 6536938 6536932 2026-04-06T10:45:10Z Surajkumar9931 853179 6536938 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref name=":0">"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. Obrazovanye. Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं।<ref name=":0" /> ==जीवन== [[File:Григорий Сковорода.jpg|thumb|स्कोवरोडा का चित्र, उनके हस्ताक्षर सहित; उनका पहला नाम सिरिलिक लिपि में (संक्षिप्त रूप में) लिखा है और उनका अंतिम नाम ग्रीक अक्षर सिग्मा (Σ) द्वारा दर्शाया गया है।]] स्कोवोरोडा का जन्म 1722 में [[रूसी साम्राज्य]] (आधुनिक पोल्टावा ओब्लास्ट, यूक्रेन) के कोसैक हेटमानेते (1708 में कोसैक हेटमानेते का क्षेत्र कीव गवर्नरेट में समाहित कर लिया गया था, हालांकि कोसैक हेटमानेते का विघटन नहीं हुआ था)<ref>{{Cite web|url=https://www.hist.msu.ru/ER/Etext/gub1708.htm|title=Указ об учреждении губерний 1708 г.|website=www.hist.msu.ru|access-date=2026-04-06}}</ref> के लुबनी रेजिमेंट के चोर्नुखी गांव में एक छोटे यूक्रेनी पंजीकृत कोसैक परिवार में हुआ था। उनकी माता, पेलागेया स्टेपनोवना शांग-गिरय, शाहिन गिरय से सीधे संबंधित थीं और आंशिक रूप से क्रीमियन तातार वंश की थीं। उन्होंने कीव-मोहिला अकादमी में अध्ययन किया (1734-1741, 1744-1745, 1751-1753) लेकिन स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की।<ref>Kazarin, V.; Novikova, M. (2014). "Ukrainskii kontekst tvorchestva M. Iu. Lermontova" Украинский контекст творчества М. Ю. Лермонтова [The Ukrainian context of M. Yu. Lermontov's work]. Voprosy russkoi literatury (in Russian) (28): 13.</ref> 1741 में, 19 वर्ष की आयु में, अपने चाचा इग्नाटी पोल्तावत्सेव के कारण उन्हें कीव से मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में शाही गायन मंडली में गाने के लिए भेजा गया, और वे 1744 में कीव लौट आए। उन्होंने 1745 से 1750 तक हंगरी राज्य में समय बिताया और माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने यूरोप के अन्य हिस्सों की भी यात्रा की। 1750 में वे कीव लौट आए। 1750 से 1751 तक, उन्होंने पेरेयास्लाव में काव्यशास्त्र पढ़ाया। 1753 से 1759 तक, अधिकांश समय स्कोवोरोडा कोवराई में एक जमींदार के परिवार में शिक्षक रहे। 1759 से 1769 तक, कुछ अंतरालों के साथ, उन्होंने खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम भी कहा जाता है) में कविता, वाक्यविन्यास, ग्रीक और नैतिकता जैसे विषय पढ़ाए। 1769 में नैतिकता पर उनके पाठ्यक्रम पर हुए हमले के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। मध्य यूरोप में स्कोवोरोडा की यात्राएँ उनके बौद्धिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। 1745 के अंत में, कीव-मोहिला अकादमी में अपने दार्शनिक अध्ययन को पूरा करने के बाद, वे मेजर जनरल फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के नेतृत्व में "शाही दरबार के लिए शराब की खरीद हेतु टोकाज आयोग" में शामिल हो गए। विश्नेव्स्की ट्रांसिल्वेनिया के एक सर्ब थे जो 1715 से रूसी सेवा में थे। विदेश में अपने वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने प्रेसबर्ग (आधुनिक ब्रातिस्लावा), ओफेन (बुडा), [[वियना]] और अन्य शहरों का दौरा किया और स्थानीय विद्वानों के साथ बातचीत की। जनवरी 1749 में विश्नेव्स्की की मृत्यु और उनके पुत्र गैवरिल को उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद, स्कोवोरोडा यूक्रेन लौट आए और 10 अक्टूबर 1750 को कीव पहुंचे। 1750 में बिशप निकोदिम स्क्रेबनित्स्की ने स्कोवोरोडा को नवस्थापित पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ही महीनों में, उनकी शिक्षण विधियों और स्थापित पद्धति का पालन न करने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, स्क्रेबनित्स्की ने उन्हें 1751 में बर्खास्त कर दिया। इस विवाद के बाद, स्कोवोरोडा ने कीव-मोहिला अकादमी में जॉर्ज (कोनिस्की) द्वारा पढ़ाए जाने वाले धर्मशास्त्र में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की, लेकिन स्नातक होने के लिए आवश्यक चार वर्षों में से दो वर्ष पूरे होने के बाद ही उन्होंने संकाय छोड़ दिया। 1753 की गर्मियों में, कीव के मेट्रोपॉलिटन (ऑर्थोडॉक्स चर्च के वरिष्ठ धर्माधिकारी) की सिफारिश पर, उन्होंने कोसैक कुलीन स्टेपन तोमारा (1719-1794) के बड़े बेटे वासिली (1746-1819) के शिक्षक के रूप में कावराई पेरेयास्लाव रेजिमेंट में स्थित पारिवारिक जागीर में सेवा शुरू की। वे लगभग छह वर्षों तक तोमारा के घर में रहे, इस दौरान उन्होंने कविताएँ लिखना शुरू किया, जिनमें उनके संग्रह 'दिव्य गीतों का उद्यान' के लिए कई रचनाएँ शामिल हैं। 1755 की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए मॉस्को और ट्रिनिटी-सेर्गियस लावरा की यात्रा की, जहाँ उन्होंने लावरा सेमिनरी में अध्यापन पद को अस्वीकार कर दिया। स्कोवोरोडा ने 1759 की गर्मियों में कावराई छोड़ दिया, जब वासिली तमारा ज़मोस्क और फिर वियना में विदेश में अध्ययन करने के लिए चले गए। 1759 की गर्मियों में, स्कोवोरोडा ने बेलगोरोड और ओबोइयन के बिशप जोआसाफ मिटकेविच का निमंत्रण स्वीकार कर खार्कोव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए स्वीकार किया - जो उस समय के सबसे उन्नत स्लोबोडा-यूक्रेनी शिक्षण संस्थानों में से एक था, और प्राकृतिक विज्ञान और आधुनिक भाषाओं पर जोर देने के कारण कीव-मोहिला अकादमी से अलग था। मिटकेविच द्वारा उन्हें मठवासी प्रतिज्ञा लेने के लिए दबाव डालने के प्रयासों को अस्वीकार करने के बाद, उन्होंने 1760 की गर्मियों में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया। स्कोवोरोडा सितंबर 1762 में सिंटेक्स और ग्रीक पढ़ाने के लिए कॉलेजियम लौट आए। उनकी यह वापसी काफी हद तक युवा छात्र मिखाइल कोवालेन्स्की से हुई मुलाकात से प्रेरित थी, जो आगे चलकर उनके सबसे करीबी शिष्य, पहले जीवनीकार और उनकी मृत्यु के बाद सेंट पीटर्सबर्ग में स्कोवोरोडा की पांडुलिपियों के पहले प्रकाशन के सूत्रधार बने। उनके चारों ओर समर्पित छात्रों का एक समूह बन गया, लेकिन नव नियुक्त बिशप, पोर्फिरी क्राइस्की की बढ़ती शत्रुता का सामना करते हुए, स्कोवोरोडा ने नैतिक भ्रष्टाचार और विधर्म के आरोपों के बीच जुलाई 1764 में दूसरी बार कॉलेजियम छोड़ दिया। कई वर्षों तक बिना किसी औपचारिक पद के रहने के बाद, स्लोबोडा यूक्रेन के गवर्नर येवदोकिम शेर्बिनिन ने स्कोवोरोडा को कॉलेजियम में नव स्थापित कुलीन वर्ग के लिए "पूरक कक्षाओं" में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से 'ईसाई नैतिकता का द्वार' नामक ग्रंथ की रचना की और 1768 में कैटेकिज़्म पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, नव नियुक्त बिशप सैमुइल मिसलाव्स्की - जो कीव-मोहिला अकादमी में स्कोवोरोडा के पूर्व सहपाठी थे - ने एक गैर-पुजारी विद्वान द्वारा कैटेकिज़्म पढ़ाने पर आपत्ति जताई और स्कोवोरोडा के ग्रंथ के कुछ हिस्सों की आलोचना की। स्कोवोरोडा ने अप्रैल 1769 में स्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कोई संस्थागत पद ग्रहण नहीं किया। खार्कोव कॉलेजियम से अंतिम विदाई के बाद, स्कोवोरोडा ने घुमंतू दार्शनिक का जीवन अपना लिया। वे शुरुआत में खार्कोव के पास हुज़्विन्स्की जंगल में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में बस गए, जहाँ उन्होंने दार्शनिक दंतकथाएँ (जिन्हें बाद में खार्कोव दंतकथाएँ के रूप में संकलित किया गया, जो यूक्रेनी साहित्य में दंतकथाओं का पहला संग्रह है) और दार्शनिक संवादों की रचना शुरू की, जिनमें नार्सिसस और 'अस्खान की पुस्तक' नामक सिम्फनी शामिल हैं। 1770 से, वे अक्सर गुसिंका के एक जमींदार अलेक्सी सोशाल्स्की के साथ रहते थे, और 1772 में उन्होंने ओस्त्रोगोज़्स्क में सेवानिवृत्त कर्नल स्टेपन तेवियाशोव की जागीर में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने छह दार्शनिक संवादों की रचना की। इन वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने स्लोबोडा [[युक्रेन|यूक्रेन]] में व्यापक यात्रा की, खार्कोव, बाबई, बाल्की, इज़ियम, कुप्यांस्क, अख्तिरका और अन्य शहरों का दौरा किया, और पादरियों, छोटे कुलीन वर्ग और शिक्षित आम लोगों के बीच अपने प्रशंसकों का एक दायरा बनाया। उन्होंने मिखाइल कोवालेन्स्की के साथ जीवन भर पत्राचार किया, जिन्होंने बाद में उनकी मूलभूत जीवनी लिखी। अपने अंतिम वर्ष में, स्कोवोरोडा यूक्रेन के स्लोबोडा से पैदल चलकर ओर्योल के पास कोवालेन्स्की से मिलने गए, उन्हें अपनी सभी रचनाएँ सौंपीं और स्लोबोडा, यूक्रेन लौट आए। स्कोवोरोडा धार्मिक संगीत के रचयिता के रूप में भी जाने जाते थे, साथ ही उन्होंने अपने स्वयं के लिखे गीतों पर आधारित कई गीत भी रचे। इनमें से कई गीत यूक्रेनी लोक संगीत का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई दार्शनिक गीत, जिन्हें स्कोवोरोड्स्की भजन (स्कोवोरोडियन भजन) के नाम से जाना जाता है, अक्सर दृष्टिहीन लोक संगीतकारों, जिन्हें कोबज़ार कहा जाता है, के संगीत संग्रह में पाए जाते थे। उन्हें बांसुरी, तोरबान और कोबज़ा वादक के रूप में भी जाना जाता था। अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने यूक्रेन के स्लोबोडा में पैदल यात्रा की, जहाँ वे विभिन्न मित्रों के साथ रहे, जिनमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे। वे एक जगह पर ज़्यादा देर तक नहीं ठहरना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने एकांतवासी जीवन और अध्ययन में अपना जीवन व्यतीत किया। यह अंतिम काल उनके महान [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] कार्यों का समय था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी पिछली सबसे बड़ी उपलब्धि, यानी चर्च स्लावोनिक भाषा, ग्रीक और लैटिन में कविता और साहित्य लेखन जारी रखा। उन्होंने लैटिन से रूसी में कई रचनाओं का अनुवाद भी किया। अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले वे अपने एक सबसे करीबी मित्र के घर गए और उन्हें बताया कि वे स्थायी रूप से यहीं रहने आए हैं। वे हर दिन फावड़ा लेकर घर से निकलते थे, और ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने तीन दिन अपनी ही [[क़ब्र|कब्र]] खोदने में बिताए। तीसरे दिन उन्होंने खाना खाया, उठे और कहा, "मेरा समय आ गया है।"<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> वे अगले कमरे में गए, लेट गए और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी समाधि पर निम्नलिखित शिलालेख अंकित करने का अनुरोध किया: "संसार ने मुझे अपने वश में करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ।" उनकी [[मृत्यु]] 9 नवंबर 1794 को पैन-इवानोव्का नामक गांव में हुई (जिसे आज स्कोवोरोडिनोव्का, बोहोदुखिव रायन, खार्किव ओब्लास्ट के नाम से जाना जाता है)।<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> ==भाषा== स्कोवोराडा ने अपनी रचनाएँ जिस भाषा में लिखीं, उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं।<ref name=":1">Skovoroda, Hryhorii (2011). Ushkalov, Leonid (ed.). Povna akademichna zbirka tvoriv Повна академічна збірка творів [Complete academic collection of works] (in Ukrainian) (1st ed.). Kharkiv: Maidan. pp. 30–31. ISBN 978-966-372-330-3. </ref> वे अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा यूक्रेनी बोलते थे; उनके शिष्य और जीवनीकार मिखाइल कोवालेन्स्की लिखते हैं कि स्कोवोराडा "अपनी मातृभाषा से प्रेम करते थे और शायद ही कभी किसी विदेशी भाषा में बोलने का आग्रह करते थे।" हालाँकि, लैटिन और ग्रीक में लिखी गई रचनाओं को छोड़कर, स्कोवोराडा ने चर्च स्लावोनिक, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं के मिश्रण में लिखा। उन्होंने लैटिन, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कुछ तत्वों को भी एकीकृत किया, जिनमें पश्चिमी यूरोपीय शब्दों का महत्वपूर्ण समावेश है। स्लाविक भाषाविद् जॉर्ज शेवेलोव उनकी भाषा का वर्णन करते हुए (बाइबल के उद्धरणों और अनेक काव्य प्रयोगों को छोड़कर) कहते हैं कि यह "रूसी भाषा वैसी ही थी जैसी उस समय ज़ारकीव और स्लोबोज़ानशचिना (स्लोबोडा यूक्रेन) में शिक्षित जमींदारों और उच्च वर्ग द्वारा बोली जाती थी।" यह रूसी भाषा का एक ऐसा रूप था जो "यूक्रेनी आधार पर विकसित हुआ"<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref>, जिसमें कई यूक्रेनी शब्द थे और जो मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की रूसी भाषा से भिन्न थी। शेवेलोव लिखते हैं कि इसी भाषाई आधार पर स्कोवोरोडा ने एक बहुत ही विशिष्ट मुहावरा विकसित किया जो उनकी मूल बोलचाल की भाषा के समतुल्य नहीं था।<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> 1923 में प्रकाशित स्कोवोरोडा की भाषा के अपने अध्ययन में, भाषाविद् पेट्रो बुज़ुक दार्शनिक के मुहावरे को मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी की लिखित रूसी भाषा पर आधारित बताते हैं, हालांकि इसमें यूक्रेनी, पोलिश और प्राचीन चर्च स्लावोनिक के रूप भी शामिल हैं।<ref>https://odnb.odessa.ua/rarities/item/240</ref> साहित्य विद्वान लियोनिद उश्कालोव का कहना है कि स्कोवोरोडा की भाषा एक "मिश्रित भाषा" है जो खार्किव के 18वीं शताब्दी के यूक्रेनी लेखकों की रूसी भाषा से बहुत भिन्न है। वे लिखते हैं कि स्कोवोरोडा के पास अपनी 'लेखन भाषा' को यूक्रेनी मानने के कारण थे। (कुछ मौकों पर, स्कोवोरोडा ने अपनी रचनाओं की भाषा को "सामान्य बोली", "स्थानीय बोली" या "छोटी रूसी" कहा; उस समय 'छोटी रूसी' शब्द यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्र को संदर्भित करता था।) इसमें समानांतर यूक्रेनी और रूसी शब्द तथा मिश्रित रूसी-यूक्रेनी शब्द रूप शामिल हैं। विटाली पेरेड्रिएन्को के अनुसार, स्कोवोरोडा के काव्य संग्रह 'सद बोजेस्तवेन्नीख पेस्नेई' (दिव्य गीतों का उद्यान) में 84% शब्द रूप शब्दावली और शब्द निर्माण के संदर्भ में नई यूक्रेनी साहित्यिक भाषा से मेल खाते हैं। उनके दार्शनिक संवादों में रूसी भाषा का प्रतिशत कुछ कम पाया गया (उदाहरण के लिए, उनके 'नारकिस' में 73.6%)। भाषाविज्ञानी लिडिया ह्नाटियुक के अनुसार, यद्यपि कुछ आधुनिक यूक्रेनी पाठक स्कोवोरोडा की भाषा को रूसी मानते हैं, स्कोवोरोडा की अधिकांश दार्शनिक रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी बोली में लिखी गई हैं, जबकि उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्राचीन यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में हैं; हालाँकि, वह कहती हैं कि इन दोनों बोलियों के बीच की सीमा "बहुत ही अनिश्चित" है।<ref>{{Cite web|url=https://umoloda.kyiv.ua/number/3662/164/151922|title=Не цураймося свого! Якою мовою насправді писав Григорій Сковорода|website=umoloda.kyiv.ua|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> स्कोवोरोडा अपनी भाषा की विशिष्टता से अवगत प्रतीत होते थे और उन्होंने इसकी आलोचनाओं का बचाव किया। बाद के कई लेखकों ने स्कोवोरोडा की भाषा की आलोचना की। उनकी असामान्य भाषा का श्रेय उनकी शिक्षा या उस समय की परिस्थितियों के प्रभाव को दिया गया; वहीं दूसरी ओर, उन पर "पिछड़ेपन" और समकालीन समस्याओं को समझने में असमर्थता का आरोप लगाया गया। यूक्रेनी लेखक इवान नेचुय-लेवित्स्की ने स्कोवोरोडा की मिश्रित भाषा को "अजीब, विविध और आम तौर पर अस्पष्ट" बताया। यूक्रेनी कवि तारास शेवचेंको ने लिखा कि स्कोवोरोडा "जनता के कवि भी होते यदि लैटिन और बाद में रूसी भाषा ने उन्हें विचलित न किया होता।" 1901 में, रूसी उपन्यासकार ग्रिगोरी डेनिलव्स्की ने लिखा कि स्कोवोरोडा "एक भारी, अस्पष्ट और अजीब भाषा में लिखते थे... जो किसी सेमिनार के छात्र के योग्य, भद्दी और अक्सर अस्पष्ट" थी। <ref name=":2" />1830 के दशक में, जब खार्किव में रोमांटिक लेखकों का एक समूह स्कोवोरोडा की रचनाओं के प्रकाशन की तैयारी कर रहा था, तो उन्होंने पाठकों को डराने से बचने के लिए उनकी रचनाओं का रूसी में अनुवाद करने पर विचार किया। शेवेलोव के अनुसार, स्कोवोरोडा की शैलीगत पसंद जानबूझकर की गई थी, न कि उनकी कमज़ोर शिक्षा का परिणाम; उनके द्वारा प्रस्तुत "उच्च बारोक" शैली ने साहित्य में बोलचाल की भाषा की नकल करने का प्रयास नहीं किया। शेवेलोव लिखते हैं कि बाद के पाठकों को उनकी भाषा "मृत" सी लगी, क्योंकि स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों की रूसी भाषा तब तक मानक रूसी के लगभग समान हो चुकी थी और अधिक धर्मनिरपेक्ष हो गई थी।<ref name=":1" /> स्कोवोरोडा लैटिन भाषा में पारंगत थे, जो उनके दाखिले के दौरान कीव-मोहिला अकादमी में शिक्षा का माध्यम थी। उन्होंने लैटिन में कई छोटी कविताएँ लिखीं, जिनमें दंतकथाएँ भी शामिल हैं। शेवेलोव के अनुसार, ये लैटिन कविताएँ मुख्य रूप से "प्रयोगों के रूप में और/या शैक्षणिक उद्देश्य से" लिखी गई थीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं। उनके स्लाविक लेखन में भी लैटिन, ग्रीक और कभी-कभी हिब्रू या अन्य भाषाओं के शब्द, वाक्यांश और उद्धरण मिलते हैं। उन्हें जर्मन का अच्छा ज्ञान था और जाहिर तौर पर उन्हें कुछ फ्रेंच भी आती थी।<ref name=":2">Black, Karen L. (1994). "The Poetry of Skovoroda". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 141. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> ==रचनाएँ== चर्च के अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण स्कोवोरोदा की रचनाएँ उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकीं। ग्रिहोरी स्कोवोरोदा ने कई भाषाओं, विशेष रूप से लैटिन, ग्रीक और जर्मन में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे जर्मन में धार्मिक साहित्य पढ़ सकते थे और जर्मन धर्मनिष्ठा से प्रभावित थे। दार्शनिक और धार्मिक अध्ययन की भावना में पले-बढ़े, वे चर्च के विद्वतावाद और ऑर्थोडॉक्स चर्च के आध्यात्मिक प्रभुत्व के विरोधी बन गए। उन्होंने लिखा, "हमारा राज्य हमारे भीतर है, और ईश्वर को जानने के लिए, आपको स्वयं को जानना होगा... लोगों को ईश्वर को स्वयं के समान जानना चाहिए, इतना कि वे उन्हें संसार में देख सकें... ईश्वर में विश्वास का अर्थ उनके अस्तित्व में विश्वास करना और इसलिए उनके प्रति समर्पित होना और उनके नियमों के अनुसार जीवन जीना नहीं है... जीवन की पवित्रता लोगों के प्रति भलाई करने में निहित है।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि "सभी कार्य ईश्वर द्वारा आशीर्वादित हैं", और व्यक्ति को अपने लिए 'अनुकूल कार्य' (स्रोदना प्रात्सिया) की खोज करनी चाहिए। जब ​​लोग अपने कर्तव्य को त्यागकर धन या प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, तो वे और समाज दोनों दुखी हो जाते हैं। उनकी रचना "नार्सिसिस या स्वयं को जानो" रूसी साम्राज्य में सन् 1798 में प्रकाशित हुई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। सन् 1806 में अलेक्जेंडर लाबज़िन के संपादन में "ज़ायोन व्येस्तनिक" पत्रिका ने उनकी कुछ और रचनाएँ प्रकाशित कीं। फिर सन् 1837-1839 में मॉस्को में उनकी कुछ रचनाएँ उनके नाम से प्रकाशित हुईं, और सन् 1861 में उनकी रचनाओं का पहला लगभग संपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुआ। दार्शनिक की मृत्यु की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर, खार्किव (खार्कोव) में, दिमित्री बागले (1918 के बाद दिमित्रो बहाली के नाम से भी जाने जाते हैं) द्वारा संपादित खार्कोव हिस्टोरिको-फिलोलॉजिकल सोसाइटी के प्रसिद्ध सातवें खंड (1894) का प्रकाशन हुआ, जिसमें स्कोवोरोडा की अधिकांश रचनाएँ शामिल थीं।<ref>Ushkalov, Leonid; et al. (2002). Dva stolittia skovorodiiany: bibliohrafichnyĭ dovidnyk Два століття сковородіяни: бібліографічний довідник [Two Centuries of Skovorodiana: Bibliographical Guide] (in Ukrainian and English). Kharkiv: Acta. ISBN 966-7021-58-0. </ref> इसमें उनकी 16 रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिनमें से नौ पहली बार प्रकाशित हुईं। साथ ही, उनकी जीवनी और उनकी कुछ कविताएँ भी प्रकाशित हुईं। स्कोवरोडा की सभी ज्ञात रचनाओं का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह 2011 में लियोनिद उश्कालोव द्वारा प्रकाशित किया गया था। ===कार्यों की सूची=== *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी एस. दंतकथाएँ और सूत्र। अनुवाद, जीवनी और विश्लेषण डैन बी. चॉपिक द्वारा (न्यूयॉर्क: पीटर लैंग, 1990) समीक्षा: वलोडिमिर टी. ज़ायला, यूक्रेनी क्वार्टरली, 50 (1994): 303-304। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगरी), पिज़्ने बनाम सोबी लुडिनु। एम. काशुबा द्वारा वासिल वोइतोविच के परिचय के साथ अनुवादित (एल'विव: एस$विट, 1995) चयनित कार्य (मूल: यूक्रेनी भाषा)। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगोरी), ट्वोरी: वी ड्वोख तोमाख, प्राक्कथन ओ मायशानिच द्वारा, मुख्य संपादक ओमेलियन प्रित्सक (कीव: ओबेरेही, 1994) (मूल: यूक्रेनी भाषा, अन्य भाषाओं से अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "जीवन की सच्ची खुशी के बारे में पांच यात्रियों के बीच बातचीत" (जॉर्ज एल. क्लाइन द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "प्राचीन दुनिया के बारे में बातचीत"। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), लियोनिद उश्कालोव द्वारा संपादित। "ग्रिगोरी स्कोवोरोडा: कार्यों का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह", (2011)। ==शिक्षण== स्कोवोरोडा के प्रमुख कार्यों में से एक शिक्षण भी था।<ref>Grigory Savvich Skovoroda, Full collection of works, (Garden of Divine Songs), v. 2, in Teaching Thought, Kyiv 1973. </ref> औपचारिक रूप से उन्होंने पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाया (1750-1751 के दौरान) और खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम और लैटिन में: कॉलेजियम चारकोविएन्सिस या ज़ाचारपोलिस कॉलेजियम भी कहा जाता है) में काव्यशास्त्र, वाक्यविन्यास, ग्रीक और धर्मशिक्षा का अध्यापन किया (1759-1760, 1761-1764, 1768-1769 के दौरान)।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990</ref> <ref>Daniel H. Shubin; Grigori Skovoroda (1 August 2012). Skovoroda: The World Tried to Catch Me but Could Not. Lulu.com. p. 1. ISBN 978-0-9662757-3-5. Retrieved 24 November 2015</ref> 1751 में उनका पेरेयास्लाव कॉलेजियम के अध्यक्ष बिशप से विवाद हो गया, जिन्होंने स्कोवोरोडा के शिक्षण के नए तरीकों को विचित्र और काव्यशास्त्र के पूर्व पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ असंगत माना। युवा स्कोवोरोडा, अपने विषय पर पूर्ण महारत और छंदशास्त्र के नियमों की सटीकता, स्पष्टता और व्यापकता पर आश्वस्त थे। उन्होंने बिशप के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया और मध्यस्थता की मांग करते हुए कहा कि "अलिया रेस सेप्ट्रम, आलिया प्लेक्ट्रम" [पादरी का राजदंड एक चीज है, लेकिन बांसुरी दूसरी]। बिशप ने स्कोवोरोडा के इस रवैये को अहंकारपूर्ण समझा और परिणामस्वरूप उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 37-38. </ref> <ref>Григорій Сковорода, Повне зібрання творів, (М. Ковалинський, 'Жизнь Григория Сковородьі'), т. 2 В-во Наукова Думка, Київ 1973</ref> खार्कोव कॉलेजियम में अध्यापन का पहला वर्ष स्कोवोरोडा के लिए सफल रहा। उनके व्याख्यानों और शिक्षण शैली ने छात्रों, सहकर्मियों और वरिष्ठों का ध्यान आकर्षित किया। स्कोवोरोडा वासिली तोमारा (1740-1813) के निजी शिक्षक भी थे (1753-1754 और 1755-1758 के दौरान) और उनके जीवनीकार माइकल कोवालिंस्की (या कोवालेन्स्की, 1745-1807) के आजीवन मित्र और मार्गदर्शक भी थे (1761-1769 के दौरान)। संभवतः वे फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के पुत्र गैब्रियल विश्नेव्स्की (1716-1752) के भी निजी शिक्षक थे (1745-1749 के दौरान)। फ्योदोर विश्नेव्स्की के कारण ही स्कोवोरोडा ने मध्य यूरोप, विशेष रूप से हंगरी और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 41.</ref> अपने शिक्षण में स्कोवोरोडा का उद्देश्य छात्रों की रुचियों और क्षमताओं को खोजना था और वे ऐसे व्याख्यान और पठन सामग्री तैयार करते थे जो उन्हें पूर्ण रूप से विकसित कर सकें।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 42. </ref> स्कोवोरोदा के जीवनीकार कोवालिंस्की ने इस दृष्टिकोण का वर्णन इस प्रकार किया है: "स्कोवोरोदा ने युवा शिष्य वासिली तोमारा को पढ़ाना शुरू करते समय उनके हृदय पर अधिक ध्यान दिया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को समझते हुए, उन्होंने केवल उनकी प्रकृति को ही विकसित करने में मदद करने का प्रयास किया। उन्होंने कोमल और सौम्य मार्गदर्शन दिया, जिसे बालक को पता भी नहीं चला, क्योंकि स्कोवोरोदा ने विशेष ध्यान रखा कि युवा मन पर भारी ज्ञान का बोझ न पड़े। इस तरह बालक स्कोवोरोदा से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ गया।" उनका शिक्षण केवल अकादमिक जगत या निजी मित्रों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक "घुमक्कड़" के रूप में उन्होंने उन अनेक लोगों को सार्वजनिक रूप से शिक्षा दी जो उनकी ओर आकर्षित हुए। रूसी दर्शन के पहले ज्ञात इतिहासकार, आर्चीमैंड्राइट गैवरिल (वासिली वोस्क्रेसेन्स्की, 1795-1868) ने शिक्षण में स्कोवोरोडा के सुकरात जैसे गुणों का शानदार वर्णन किया है: "सुकरात और स्कोवोरोडा दोनों ने ही ऊपर से जनता के शिक्षक बनने का आह्वान महसूस किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए वे उस शब्द के व्यक्तिगत और उच्च अर्थ में सार्वजनिक शिक्षक बन गए। ... स्कोवोरोडा भी सुकरात की तरह समय या स्थान से बंधे नहीं थे, वे चौराहों पर, बाजारों में, कब्रिस्तान के पास, चर्च के बरामदों के नीचे, छुट्टियों के दौरान, जब उनके तीखे शब्द एक मदहोश इच्छा को व्यक्त करते थे - और फसल कटाई के कठिन दिनों में, जब बिना बारिश के पसीना धरती पर बहता था, तब भी शिक्षा देते थे।"<ref>Григорій Сковорода, Повне зібрання творів, (М. Ковалинський, 'Жизнь Григория Сковородьі'), т. 2 В-во Наукова Думка, Київ 1973 </ref> <ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 42. </ref> स्कोवोरोदा ने सिखाया कि आत्म-परीक्षण से ही व्यक्ति को अपने सच्चे उद्देश्य का पता चलता है। यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन का प्रयोग करते हुए स्कोवोरोदा सलाह देते हैं, "स्वयं को जानो।" उन्होंने एक सुस्थापित विचार प्रस्तुत किया कि जन्मजात, स्वाभाविक कार्य में संलग्न व्यक्ति को वास्तव में संतुष्टिदायक और सुखी जीवन प्राप्त होता है।<ref>Archimandrite Gavriil, Istoria filosofii (History of Philosophy), Kazan', 1837. Vol. VI, pp. 60-61 </ref> <ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 57. </ref> युवाओं की शिक्षा स्कोवोरोदा के वृद्धावस्था तक उनके ध्यान का केंद्र रही। 1787 में, अपनी मृत्यु से सात वर्ष पूर्व, स्कोवोरोदा ने शिक्षा विषय पर दो निबंध लिखे, "महान सारस" (मूल: Благодарный Еродій, Blagorodnyj Erodiy) और "गरीब लार्क" (मूल: Убогій Жаворонокъ, Ubogiy Zhavoronok), जिनमें उन्होंने अपने विचारों का प्रतिपादन किया।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 43 </ref> स्कोवोरोडा के व्यापक प्रभाव को उन प्रसिद्ध लेखकों द्वारा दर्शाया गया है जिन्होंने उनकी शिक्षाओं की सराहना की: व्लादिमीर सोलोवियोव, लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की, आंद्रेई बेली, तारास शेवचेंको और इवान फ्रेंको।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990 </ref> ==श्रद्धांजलि== [[File:USSR stamp G.Skovoroda 1972 4k.jpg|thumb|एच. स्कोवोरोडा के चित्र सहित [[रूस के डाक टिकट और डाक इतिहास|सोवियत डाक टिकट]] (1972)]] [[File:500 Ukrainian hryvnia in 2015 Obverse.jpg|thumb|₴500 बैंकनोट पर स्कोवोरोडा।]] 15 सितंबर 2006 को, यूक्रेन में प्रचलन में दूसरे सबसे बड़े नोट, ₴500 के नोट पर स्कोवोरोडा का चित्र अंकित किया गया। 1946 में स्थापित ग्रिगोरी स्कोवोरोडा दर्शनशास्त्र संस्थान, यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1991 तक यूक्रेनी सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी) के तत्वावधान में संचालित होता है। यूक्रेन के खार्किव प्रांत के स्कोवोरोडिनिवका गाँव में ग्रिगोरी स्कोवोरोडा साहित्यिक स्मारक संग्रहालय स्थित था। यह संग्रहालय 18वीं शताब्दी की एक इमारत में, उस संपत्ति पर संचालित हो रहा था जहाँ स्कोवोरोडा को दफनाया गया था। 6-7 मई 2022 की रात को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण रूसी मिसाइल हमले में यह इमारत नष्ट हो गई। मिसाइल इमारत की छत के नीचे से गुजरी और आग लग गई। आग ने पूरे संग्रहालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। परिणामस्वरूप, स्कोवोरोडा राष्ट्रीय संग्रहालय ऐतिहासिक इमारत सहित नष्ट हो गया। संग्रहालय का संग्रह सुरक्षित रहा क्योंकि रूसी हमले की आशंका में इसे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इमारत में स्थित स्कोवोरोडा की प्रतिमा नष्ट हुई इमारत के मलबे के बीच खड़ी रही। <gallery class="center" mode="packed-hover"> Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling on 6 May 2022 (01).jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 02.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 04.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 05.jpg </gallery> 2 दिसंबर 2022 को, स्कोवोरोडा के जन्म की 300वीं वर्षगांठ पर, वाशिंगटन, डी.सी. में यूक्रेन हाउस के पास उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थापित किया गया। इसे 1992 में अमेरिकी मूर्तिकार मार्क रोड्स ने बनाया था, जो स्कोवोरोडा के विचारों से प्रेरित थे। [[File:Skovoroda Monument.jpg|thumb|वाशिंगटन डी.सी. में यूक्रेन हाउस के बाहर स्थित स्कोवोरोडा स्मारक। मूर्तिकार: [[मार्क रोड्स (कलाकार)|मार्क रोड्स]]]] ==लोकप्रिय संस्कृति में== स्कोवोरोडा की कविताओं पर आधारित निम्नलिखित पॉप गीत लिखे गए: *सोन्याचना माशिना द्वारा "पटाश्को" (2019) *कुर्स वालुत द्वारा "कुर्स वालुत" (2020) 26 जनवरी 2024 को खार्किव नगर परिषद ने खार्किव की पुश्किंस्का स्ट्रीट का नाम बदलकर ग्रिगोरी स्कोवोरोडा स्ट्रीट कर दिया। यह 23 जनवरी 2024 को खार्किव पर हुए रूसी बम हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे सहित 9 लोग मारे गए थे। विशेष रूप से शाम के समय, केंद्रीय पुश्किंस्का स्ट्रीट पर हमला हुआ था। {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] b7mas68ij0koawpfm4cqv42tpsza2qc 6536943 6536938 2026-04-06T10:51:15Z Surajkumar9931 853179 6536943 wikitext text/x-wiki {{Infobox writer <!-- for more information see [[:Template:Infobox writer/doc]] --> | name = ह्रीहोरी स्कोवोरोडा | image = Hryhoriy Skovoroda.jpg | caption = | pseudonym = | birth_date = 3 दिसंबर 1722 | birth_place = चेर्नुखी, [[लुबनी रेजिमेंट]], [[कोसैक हेटमानाटे]], [[रूस का साम्राज्य]] (अब [[चोर्नुखी]], [[यूक्रेन]]) | death_date = 9 नवंबर 1794 (उम्र 71 वर्ष) | death_place = पैन-इवानोवका, [[खार्कोव प्रांत]], रूस का साम्राज्य (अब [[स्कोवोरोडिनिव्का]], [[खार्किव ओब्लास्ट]], यूक्रेन) | occupation = {{hlist|लेखक|संगीतकार|अध्यापक}} | language = [[लैटिन]], [[प्राचीन यूनान| यूनानी]]; चर्च स्लावोनिक का मिश्रण, [[यूक्रेनियाई भाषा|यूक्रेनी]], and [[रूसी भाषा|रूसी]] | alma_mater = | period = | genre = | subject = | movement = | spouse = | partner = | children = | relatives = | signature = | website = }} '''ह्रीहोरी स्कोवोरोडा''', ग्रेगरी स्कोवोरोडा या ग्रिगोरी स्कोवोरोडा ([[लातिन भाषा|लैटिन]]: ग्रेगोरियस स्कोवोरोडा; [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]]: Григорій Савич Сковорода, ह्रीहोरी सविच स्कोवोरोडा; [[रूसी भाषा|रूसी]]: Григо́рий Са́вич Сковорода́, ग्रिगोरी सविविच स्कोवोरोडा; 3 दिसंबर 1722 - 9 नवंबर 1794), यूक्रेनी कोसैक मूल के एक [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] थे जो [[रूसी साम्राज्य]] में रहते थे और काम करते थे। वह एक [[कवि]], [[शिक्षक]] और [[संगीत|धार्मिक संगीत]] के संगीतकार थे। अपने [[समकालीन|समकालीनों]] और आने वाली पीढ़ियों पर उनके व्यापक प्रभाव और उनकी [[जीवनशैली (समाजविज्ञान)|जीवनशैली]] को सर्वत्र सुकरात के समान माना जाता था, और उन्हें अक्सर "सुकरात" कहा जाता था। स्कोवोरोडा, जिनकी [[मातृभाषा]] यूक्रेनी थी, ने अपने ग्रंथ तीन भाषाओं के मिश्रण में लिखे: चर्च स्लावोनिक, यूक्रेनी और रूसी, जिनमें लैटिन और ग्रीक के कुछ तत्व और बड़ी संख्या में [[पश्चिमी यूरोप|पश्चिमी यूरोपीय]] शब्द शामिल थे। उनकी विशिष्ट शैली को विकसित करने वाली आधार भाषा को परिभाषित करने के संबंध में विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक [[विद्वान]] ने इस आधार भाषा को खार्किव और आसपास के स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों द्वारा बोली जाने वाली रूसी भाषा के रूप में पहचाना है; रूसी के इस संस्करण में कई यूक्रेनी शब्द शामिल थे। एक अन्य मत के अनुसार, उन्होंने अपनी कुछ रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी शैली में और अन्य पुरानी यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में लिखीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं।<ref>https://academic.oup.com/ahr/article-abstract/78/2/464/146538?login=false</ref> <ref name=":0">"Ukrainskii Sokrat" [The Ukrainian Socrates]. Obrazovanye. Vol. 9. 1897. pp. 129–134.</ref> उन्होंने [[कीव]] (वर्तमान में कीव, [[युक्रेन|यूक्रेन]]) में स्थित एकेडेमिया मोहिलियाना में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एक घुमंतू विचारक-भिखारी का जीवन व्यतीत किया। उनके ग्रंथों और संवादों में बाइबिल संबंधी समस्याएं प्लेटो और स्टोइक दार्शनिकों द्वारा पहले से विश्लेषित समस्याओं से मिलती-जुलती हैं। स्कोवोरोडा की पहली पुस्तक उनकी मृत्यु के बाद 1798 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुई थी। स्कोवोरोडा की संपूर्ण रचनाएँ पहली बार 1861 में सेंट पीटर्सबर्ग में प्रकाशित हुईं। इस संस्करण से पहले उनकी कई रचनाएँ केवल [[पाण्डुलिपि|पांडुलिपि]] रूप में ही मौजूद थीं।<ref name=":0" /> ==जीवन== [[File:Григорий Сковорода.jpg|thumb|स्कोवरोडा का चित्र, उनके हस्ताक्षर सहित; उनका पहला नाम सिरिलिक लिपि में (संक्षिप्त रूप में) लिखा है और उनका अंतिम नाम ग्रीक अक्षर सिग्मा (Σ) द्वारा दर्शाया गया है।]] स्कोवोरोडा का जन्म 1722 में [[रूसी साम्राज्य]] (आधुनिक पोल्टावा ओब्लास्ट, यूक्रेन) के कोसैक हेटमानेते (1708 में कोसैक हेटमानेते का क्षेत्र कीव गवर्नरेट में समाहित कर लिया गया था, हालांकि कोसैक हेटमानेते का विघटन नहीं हुआ था)<ref>{{Cite web|url=https://www.hist.msu.ru/ER/Etext/gub1708.htm|title=Указ об учреждении губерний 1708 г.|website=www.hist.msu.ru|access-date=2026-04-06}}</ref> के लुबनी रेजिमेंट के चोर्नुखी गांव में एक छोटे यूक्रेनी पंजीकृत कोसैक परिवार में हुआ था। उनकी माता, पेलागेया स्टेपनोवना शांग-गिरय, शाहिन गिरय से सीधे संबंधित थीं और आंशिक रूप से क्रीमियन तातार वंश की थीं। उन्होंने कीव-मोहिला अकादमी में अध्ययन किया (1734-1741, 1744-1745, 1751-1753) लेकिन स्नातक की उपाधि प्राप्त नहीं की।<ref>Kazarin, V.; Novikova, M. (2014). "Ukrainskii kontekst tvorchestva M. Iu. Lermontova" Украинский контекст творчества М. Ю. Лермонтова [The Ukrainian context of M. Yu. Lermontov's work]. Voprosy russkoi literatury (in Russian) (28): 13.</ref> 1741 में, 19 वर्ष की आयु में, अपने चाचा इग्नाटी पोल्तावत्सेव के कारण उन्हें कीव से मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में शाही गायन मंडली में गाने के लिए भेजा गया, और वे 1744 में कीव लौट आए। उन्होंने 1745 से 1750 तक हंगरी राज्य में समय बिताया और माना जाता है कि इस दौरान उन्होंने यूरोप के अन्य हिस्सों की भी यात्रा की। 1750 में वे कीव लौट आए। 1750 से 1751 तक, उन्होंने पेरेयास्लाव में काव्यशास्त्र पढ़ाया। 1753 से 1759 तक, अधिकांश समय स्कोवोरोडा कोवराई में एक जमींदार के परिवार में शिक्षक रहे। 1759 से 1769 तक, कुछ अंतरालों के साथ, उन्होंने खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम भी कहा जाता है) में कविता, वाक्यविन्यास, ग्रीक और नैतिकता जैसे विषय पढ़ाए। 1769 में नैतिकता पर उनके पाठ्यक्रम पर हुए हमले के बाद उन्होंने अध्यापन छोड़ दिया। मध्य यूरोप में स्कोवोरोडा की यात्राएँ उनके बौद्धिक जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करती हैं। 1745 के अंत में, कीव-मोहिला अकादमी में अपने दार्शनिक अध्ययन को पूरा करने के बाद, वे मेजर जनरल फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के नेतृत्व में "शाही दरबार के लिए शराब की खरीद हेतु टोकाज आयोग" में शामिल हो गए। विश्नेव्स्की ट्रांसिल्वेनिया के एक सर्ब थे जो 1715 से रूसी सेवा में थे। विदेश में अपने वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने प्रेसबर्ग (आधुनिक ब्रातिस्लावा), ओफेन (बुडा), [[वियना]] और अन्य शहरों का दौरा किया और स्थानीय विद्वानों के साथ बातचीत की। जनवरी 1749 में विश्नेव्स्की की मृत्यु और उनके पुत्र गैवरिल को उत्तराधिकारी नियुक्त किए जाने के बाद, स्कोवोरोडा यूक्रेन लौट आए और 10 अक्टूबर 1750 को कीव पहुंचे। 1750 में बिशप निकोदिम स्क्रेबनित्स्की ने स्कोवोरोडा को नवस्थापित पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। कुछ ही महीनों में, उनकी शिक्षण विधियों और स्थापित पद्धति का पालन न करने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया। परिणामस्वरूप, स्क्रेबनित्स्की ने उन्हें 1751 में बर्खास्त कर दिया। इस विवाद के बाद, स्कोवोरोडा ने कीव-मोहिला अकादमी में जॉर्ज (कोनिस्की) द्वारा पढ़ाए जाने वाले धर्मशास्त्र में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की, लेकिन स्नातक होने के लिए आवश्यक चार वर्षों में से दो वर्ष पूरे होने के बाद ही उन्होंने संकाय छोड़ दिया। 1753 की गर्मियों में, कीव के मेट्रोपॉलिटन (ऑर्थोडॉक्स चर्च के वरिष्ठ धर्माधिकारी) की सिफारिश पर, उन्होंने कोसैक कुलीन स्टेपन तोमारा (1719-1794) के बड़े बेटे वासिली (1746-1819) के शिक्षक के रूप में कावराई पेरेयास्लाव रेजिमेंट में स्थित पारिवारिक जागीर में सेवा शुरू की। वे लगभग छह वर्षों तक तोमारा के घर में रहे, इस दौरान उन्होंने कविताएँ लिखना शुरू किया, जिनमें उनके संग्रह 'दिव्य गीतों का उद्यान' के लिए कई रचनाएँ शामिल हैं। 1755 की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए मॉस्को और ट्रिनिटी-सेर्गियस लावरा की यात्रा की, जहाँ उन्होंने लावरा सेमिनरी में अध्यापन पद को अस्वीकार कर दिया। स्कोवोरोडा ने 1759 की गर्मियों में कावराई छोड़ दिया, जब वासिली तमारा ज़मोस्क और फिर वियना में विदेश में अध्ययन करने के लिए चले गए। 1759 की गर्मियों में, स्कोवोरोडा ने बेलगोरोड और ओबोइयन के बिशप जोआसाफ मिटकेविच का निमंत्रण स्वीकार कर खार्कोव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाने के लिए स्वीकार किया - जो उस समय के सबसे उन्नत स्लोबोडा-यूक्रेनी शिक्षण संस्थानों में से एक था, और प्राकृतिक विज्ञान और आधुनिक भाषाओं पर जोर देने के कारण कीव-मोहिला अकादमी से अलग था। मिटकेविच द्वारा उन्हें मठवासी प्रतिज्ञा लेने के लिए दबाव डालने के प्रयासों को अस्वीकार करने के बाद, उन्होंने 1760 की गर्मियों में कुछ समय के लिए पद छोड़ दिया। स्कोवोरोडा सितंबर 1762 में सिंटेक्स और ग्रीक पढ़ाने के लिए कॉलेजियम लौट आए। उनकी यह वापसी काफी हद तक युवा छात्र मिखाइल कोवालेन्स्की से हुई मुलाकात से प्रेरित थी, जो आगे चलकर उनके सबसे करीबी शिष्य, पहले जीवनीकार और उनकी मृत्यु के बाद सेंट पीटर्सबर्ग में स्कोवोरोडा की पांडुलिपियों के पहले प्रकाशन के सूत्रधार बने। उनके चारों ओर समर्पित छात्रों का एक समूह बन गया, लेकिन नव नियुक्त बिशप, पोर्फिरी क्राइस्की की बढ़ती शत्रुता का सामना करते हुए, स्कोवोरोडा ने नैतिक भ्रष्टाचार और विधर्म के आरोपों के बीच जुलाई 1764 में दूसरी बार कॉलेजियम छोड़ दिया। कई वर्षों तक बिना किसी औपचारिक पद के रहने के बाद, स्लोबोडा यूक्रेन के गवर्नर येवदोकिम शेर्बिनिन ने स्कोवोरोडा को कॉलेजियम में नव स्थापित कुलीन वर्ग के लिए "पूरक कक्षाओं" में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से 'ईसाई नैतिकता का द्वार' नामक ग्रंथ की रचना की और 1768 में कैटेकिज़्म पढ़ाना शुरू किया। हालांकि, नव नियुक्त बिशप सैमुइल मिसलाव्स्की - जो कीव-मोहिला अकादमी में स्कोवोरोडा के पूर्व सहपाठी थे - ने एक गैर-पुजारी विद्वान द्वारा कैटेकिज़्म पढ़ाने पर आपत्ति जताई और स्कोवोरोडा के ग्रंथ के कुछ हिस्सों की आलोचना की। स्कोवोरोडा ने अप्रैल 1769 में स्थायी रूप से इस्तीफा दे दिया और फिर कभी कोई संस्थागत पद ग्रहण नहीं किया। खार्कोव कॉलेजियम से अंतिम विदाई के बाद, स्कोवोरोडा ने घुमंतू दार्शनिक का जीवन अपना लिया। वे शुरुआत में खार्कोव के पास हुज़्विन्स्की जंगल में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में बस गए, जहाँ उन्होंने दार्शनिक दंतकथाएँ (जिन्हें बाद में खार्कोव दंतकथाएँ के रूप में संकलित किया गया, जो यूक्रेनी साहित्य में दंतकथाओं का पहला संग्रह है) और दार्शनिक संवादों की रचना शुरू की, जिनमें नार्सिसस और 'अस्खान की पुस्तक' नामक सिम्फनी शामिल हैं। 1770 से, वे अक्सर गुसिंका के एक जमींदार अलेक्सी सोशाल्स्की के साथ रहते थे, और 1772 में उन्होंने ओस्त्रोगोज़्स्क में सेवानिवृत्त कर्नल स्टेपन तेवियाशोव की जागीर में कई महीने बिताए, जहाँ उन्होंने छह दार्शनिक संवादों की रचना की। इन वर्षों के दौरान, स्कोवोरोडा ने स्लोबोडा [[युक्रेन|यूक्रेन]] में व्यापक यात्रा की, खार्कोव, बाबई, बाल्की, इज़ियम, कुप्यांस्क, अख्तिरका और अन्य शहरों का दौरा किया, और पादरियों, छोटे कुलीन वर्ग और शिक्षित आम लोगों के बीच अपने प्रशंसकों का एक दायरा बनाया। उन्होंने मिखाइल कोवालेन्स्की के साथ जीवन भर पत्राचार किया, जिन्होंने बाद में उनकी मूलभूत जीवनी लिखी। अपने अंतिम वर्ष में, स्कोवोरोडा यूक्रेन के स्लोबोडा से पैदल चलकर ओर्योल के पास कोवालेन्स्की से मिलने गए, उन्हें अपनी सभी रचनाएँ सौंपीं और स्लोबोडा, यूक्रेन लौट आए। स्कोवोरोडा धार्मिक संगीत के रचयिता के रूप में भी जाने जाते थे, साथ ही उन्होंने अपने स्वयं के लिखे गीतों पर आधारित कई गीत भी रचे। इनमें से कई गीत यूक्रेनी लोक संगीत का हिस्सा बन चुके हैं। उनके कई दार्शनिक गीत, जिन्हें स्कोवोरोड्स्की भजन (स्कोवोरोडियन भजन) के नाम से जाना जाता है, अक्सर दृष्टिहीन लोक संगीतकारों, जिन्हें कोबज़ार कहा जाता है, के संगीत संग्रह में पाए जाते थे। उन्हें बांसुरी, तोरबान और कोबज़ा वादक के रूप में भी जाना जाता था। अपने जीवन के अंतिम दौर में उन्होंने यूक्रेन के स्लोबोडा में पैदल यात्रा की, जहाँ वे विभिन्न मित्रों के साथ रहे, जिनमें अमीर और गरीब दोनों शामिल थे। वे एक जगह पर ज़्यादा देर तक नहीं ठहरना चाहते थे। इस दौरान उन्होंने एकांतवासी जीवन और अध्ययन में अपना जीवन व्यतीत किया। यह अंतिम काल उनके महान [[दर्शनशास्त्र|दार्शनिक]] कार्यों का समय था। इस दौरान भी उन्होंने अपनी पिछली सबसे बड़ी उपलब्धि, यानी चर्च स्लावोनिक भाषा, ग्रीक और लैटिन में कविता और साहित्य लेखन जारी रखा। उन्होंने लैटिन से रूसी में कई रचनाओं का अनुवाद भी किया। अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले वे अपने एक सबसे करीबी मित्र के घर गए और उन्हें बताया कि वे स्थायी रूप से यहीं रहने आए हैं। वे हर दिन फावड़ा लेकर घर से निकलते थे, और ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने तीन दिन अपनी ही [[क़ब्र|कब्र]] खोदने में बिताए। तीसरे दिन उन्होंने खाना खाया, उठे और कहा, "मेरा समय आ गया है।"<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> वे अगले कमरे में गए, लेट गए और उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी समाधि पर निम्नलिखित शिलालेख अंकित करने का अनुरोध किया: "संसार ने मुझे अपने वश में करने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुआ।" उनकी [[मृत्यु]] 9 नवंबर 1794 को पैन-इवानोव्का नामक गांव में हुई (जिसे आज स्कोवोरोडिनोव्का, बोहोदुखिव रायन, खार्किव ओब्लास्ट के नाम से जाना जाता है)।<ref>{{Cite web|url=https://chtyvo.org.ua/authors/Nizhenets_Anastasia/G_S_Skovoroda_Memorable_places_in_the_Kharkiv_Region/|title=Завершення проєкту Чтиво|website=chtyvo.org.ua|access-date=2026-04-06}}</ref> ==भाषा== स्कोवोराडा ने अपनी रचनाएँ जिस भाषा में लिखीं, उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं।<ref name=":1">Skovoroda, Hryhorii (2011). Ushkalov, Leonid (ed.). Povna akademichna zbirka tvoriv Повна академічна збірка творів [Complete academic collection of works] (in Ukrainian) (1st ed.). Kharkiv: Maidan. pp. 30–31. ISBN 978-966-372-330-3. </ref> वे अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा यूक्रेनी बोलते थे; उनके शिष्य और जीवनीकार मिखाइल कोवालेन्स्की लिखते हैं कि स्कोवोराडा "अपनी मातृभाषा से प्रेम करते थे और शायद ही कभी किसी विदेशी भाषा में बोलने का आग्रह करते थे।" हालाँकि, लैटिन और ग्रीक में लिखी गई रचनाओं को छोड़कर, स्कोवोराडा ने चर्च स्लावोनिक, रूसी और यूक्रेनी भाषाओं के मिश्रण में लिखा। उन्होंने लैटिन, ग्रीक और अन्य भाषाओं के कुछ तत्वों को भी एकीकृत किया, जिनमें पश्चिमी यूरोपीय शब्दों का महत्वपूर्ण समावेश है। स्लाविक भाषाविद् जॉर्ज शेवेलोव उनकी भाषा का वर्णन करते हुए (बाइबल के उद्धरणों और अनेक काव्य प्रयोगों को छोड़कर) कहते हैं कि यह "रूसी भाषा वैसी ही थी जैसी उस समय ज़ारकीव और स्लोबोज़ानशचिना (स्लोबोडा यूक्रेन) में शिक्षित जमींदारों और उच्च वर्ग द्वारा बोली जाती थी।" यह रूसी भाषा का एक ऐसा रूप था जो "यूक्रेनी आधार पर विकसित हुआ"<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref>, जिसमें कई यूक्रेनी शब्द थे और जो मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग की रूसी भाषा से भिन्न थी। शेवेलोव लिखते हैं कि इसी भाषाई आधार पर स्कोवोरोडा ने एक बहुत ही विशिष्ट मुहावरा विकसित किया जो उनकी मूल बोलचाल की भाषा के समतुल्य नहीं था।<ref>Shevelov, George Y. (1994). "Prolegomena to Studies of Skovoroda's Language and Style". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 93. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> 1923 में प्रकाशित स्कोवोरोडा की भाषा के अपने अध्ययन में, भाषाविद् पेट्रो बुज़ुक दार्शनिक के मुहावरे को मुख्य रूप से 18वीं शताब्दी की लिखित रूसी भाषा पर आधारित बताते हैं, हालांकि इसमें यूक्रेनी, पोलिश और प्राचीन चर्च स्लावोनिक के रूप भी शामिल हैं।<ref>https://odnb.odessa.ua/rarities/item/240</ref> साहित्य विद्वान लियोनिद उश्कालोव का कहना है कि स्कोवोरोडा की भाषा एक "मिश्रित भाषा" है जो खार्किव के 18वीं शताब्दी के यूक्रेनी लेखकों की रूसी भाषा से बहुत भिन्न है। वे लिखते हैं कि स्कोवोरोडा के पास अपनी 'लेखन भाषा' को यूक्रेनी मानने के कारण थे। (कुछ मौकों पर, स्कोवोरोडा ने अपनी रचनाओं की भाषा को "सामान्य बोली", "स्थानीय बोली" या "छोटी रूसी" कहा; उस समय 'छोटी रूसी' शब्द यूक्रेन के अधिकांश क्षेत्र को संदर्भित करता था।) इसमें समानांतर यूक्रेनी और रूसी शब्द तथा मिश्रित रूसी-यूक्रेनी शब्द रूप शामिल हैं। विटाली पेरेड्रिएन्को के अनुसार, स्कोवोरोडा के काव्य संग्रह 'सद बोजेस्तवेन्नीख पेस्नेई' (दिव्य गीतों का उद्यान) में 84% शब्द रूप शब्दावली और शब्द निर्माण के संदर्भ में नई यूक्रेनी साहित्यिक भाषा से मेल खाते हैं। उनके दार्शनिक संवादों में रूसी भाषा का प्रतिशत कुछ कम पाया गया (उदाहरण के लिए, उनके 'नारकिस' में 73.6%)। भाषाविज्ञानी लिडिया ह्नाटियुक के अनुसार, यद्यपि कुछ आधुनिक यूक्रेनी पाठक स्कोवोरोडा की भाषा को रूसी मानते हैं, स्कोवोरोडा की अधिकांश दार्शनिक रचनाएँ चर्च स्लावोनिक की यूक्रेनी बोली में लिखी गई हैं, जबकि उनकी कविताएँ और कहानियाँ प्राचीन यूक्रेनी साहित्यिक भाषा में हैं; हालाँकि, वह कहती हैं कि इन दोनों बोलियों के बीच की सीमा "बहुत ही अनिश्चित" है।<ref>{{Cite web|url=https://umoloda.kyiv.ua/number/3662/164/151922|title=Не цураймося свого! Якою мовою насправді писав Григорій Сковорода|website=umoloda.kyiv.ua|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> स्कोवोरोडा अपनी भाषा की विशिष्टता से अवगत प्रतीत होते थे और उन्होंने इसकी आलोचनाओं का बचाव किया। बाद के कई लेखकों ने स्कोवोरोडा की भाषा की आलोचना की। उनकी असामान्य भाषा का श्रेय उनकी शिक्षा या उस समय की परिस्थितियों के प्रभाव को दिया गया; वहीं दूसरी ओर, उन पर "पिछड़ेपन" और समकालीन समस्याओं को समझने में असमर्थता का आरोप लगाया गया। यूक्रेनी लेखक इवान नेचुय-लेवित्स्की ने स्कोवोरोडा की मिश्रित भाषा को "अजीब, विविध और आम तौर पर अस्पष्ट" बताया। यूक्रेनी कवि तारास शेवचेंको ने लिखा कि स्कोवोरोडा "जनता के कवि भी होते यदि लैटिन और बाद में रूसी भाषा ने उन्हें विचलित न किया होता।" 1901 में, रूसी उपन्यासकार ग्रिगोरी डेनिलव्स्की ने लिखा कि स्कोवोरोडा "एक भारी, अस्पष्ट और अजीब भाषा में लिखते थे... जो किसी सेमिनार के छात्र के योग्य, भद्दी और अक्सर अस्पष्ट" थी। <ref name=":2" />1830 के दशक में, जब खार्किव में रोमांटिक लेखकों का एक समूह स्कोवोरोडा की रचनाओं के प्रकाशन की तैयारी कर रहा था, तो उन्होंने पाठकों को डराने से बचने के लिए उनकी रचनाओं का रूसी में अनुवाद करने पर विचार किया। शेवेलोव के अनुसार, स्कोवोरोडा की शैलीगत पसंद जानबूझकर की गई थी, न कि उनकी कमज़ोर शिक्षा का परिणाम; उनके द्वारा प्रस्तुत "उच्च बारोक" शैली ने साहित्य में बोलचाल की भाषा की नकल करने का प्रयास नहीं किया। शेवेलोव लिखते हैं कि बाद के पाठकों को उनकी भाषा "मृत" सी लगी, क्योंकि स्लोबोडा यूक्रेन क्षेत्र के उच्च वर्गों की रूसी भाषा तब तक मानक रूसी के लगभग समान हो चुकी थी और अधिक धर्मनिरपेक्ष हो गई थी।<ref name=":1" /> स्कोवोरोडा लैटिन भाषा में पारंगत थे, जो उनके दाखिले के दौरान कीव-मोहिला अकादमी में शिक्षा का माध्यम थी। उन्होंने लैटिन में कई छोटी कविताएँ लिखीं, जिनमें दंतकथाएँ भी शामिल हैं। शेवेलोव के अनुसार, ये लैटिन कविताएँ मुख्य रूप से "प्रयोगों के रूप में और/या शैक्षणिक उद्देश्य से" लिखी गई थीं। उनके बचे हुए अधिकांश पत्र लैटिन और ग्रीक में लिखे गए हैं। उनके स्लाविक लेखन में भी लैटिन, ग्रीक और कभी-कभी हिब्रू या अन्य भाषाओं के शब्द, वाक्यांश और उद्धरण मिलते हैं। उन्हें जर्मन का अच्छा ज्ञान था और जाहिर तौर पर उन्हें कुछ फ्रेंच भी आती थी।<ref name=":2">Black, Karen L. (1994). "The Poetry of Skovoroda". In Marshall, Richard H.; Bird, Thomas E. (eds.). Hryhorij Savyč Skovoroda: An Anthology of Critical Articles. Edmonton: Canadian Institute of Ukrainian Studies Press. p. 141. ISBN 978-1-895571-03-5.</ref> ==रचनाएँ== चर्च के अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण स्कोवोरोदा की रचनाएँ उनके जीवनकाल में प्रकाशित नहीं हो सकीं। ग्रिहोरी स्कोवोरोदा ने कई भाषाओं, विशेष रूप से लैटिन, ग्रीक और जर्मन में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। वे जर्मन में धार्मिक साहित्य पढ़ सकते थे और जर्मन धर्मनिष्ठा से प्रभावित थे। दार्शनिक और धार्मिक अध्ययन की भावना में पले-बढ़े, वे चर्च के विद्वतावाद और ऑर्थोडॉक्स चर्च के आध्यात्मिक प्रभुत्व के विरोधी बन गए। उन्होंने लिखा, "हमारा राज्य हमारे भीतर है, और ईश्वर को जानने के लिए, आपको स्वयं को जानना होगा... लोगों को ईश्वर को स्वयं के समान जानना चाहिए, इतना कि वे उन्हें संसार में देख सकें... ईश्वर में विश्वास का अर्थ उनके अस्तित्व में विश्वास करना और इसलिए उनके प्रति समर्पित होना और उनके नियमों के अनुसार जीवन जीना नहीं है... जीवन की पवित्रता लोगों के प्रति भलाई करने में निहित है।" स्कोवोरोदा ने सिखाया कि "सभी कार्य ईश्वर द्वारा आशीर्वादित हैं", और व्यक्ति को अपने लिए 'अनुकूल कार्य' (स्रोदना प्रात्सिया) की खोज करनी चाहिए। जब ​​लोग अपने कर्तव्य को त्यागकर धन या प्रतिष्ठा के पीछे भागते हैं, तो वे और समाज दोनों दुखी हो जाते हैं। उनकी रचना "नार्सिसिस या स्वयं को जानो" रूसी साम्राज्य में सन् 1798 में प्रकाशित हुई, लेकिन उसमें उनका नाम शामिल नहीं था। सन् 1806 में अलेक्जेंडर लाबज़िन के संपादन में "ज़ायोन व्येस्तनिक" पत्रिका ने उनकी कुछ और रचनाएँ प्रकाशित कीं। फिर सन् 1837-1839 में मॉस्को में उनकी कुछ रचनाएँ उनके नाम से प्रकाशित हुईं, और सन् 1861 में उनकी रचनाओं का पहला लगभग संपूर्ण संग्रह प्रकाशित हुआ। दार्शनिक की मृत्यु की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर, खार्किव (खार्कोव) में, दिमित्री बागले (1918 के बाद दिमित्रो बहाली के नाम से भी जाने जाते हैं) द्वारा संपादित खार्कोव हिस्टोरिको-फिलोलॉजिकल सोसाइटी के प्रसिद्ध सातवें खंड (1894) का प्रकाशन हुआ, जिसमें स्कोवोरोडा की अधिकांश रचनाएँ शामिल थीं।<ref>Ushkalov, Leonid; et al. (2002). Dva stolittia skovorodiiany: bibliohrafichnyĭ dovidnyk Два століття сковородіяни: бібліографічний довідник [Two Centuries of Skovorodiana: Bibliographical Guide] (in Ukrainian and English). Kharkiv: Acta. ISBN 966-7021-58-0. </ref> इसमें उनकी 16 रचनाएँ प्रकाशित हुईं, जिनमें से नौ पहली बार प्रकाशित हुईं। साथ ही, उनकी जीवनी और उनकी कुछ कविताएँ भी प्रकाशित हुईं। स्कोवरोडा की सभी ज्ञात रचनाओं का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह 2011 में लियोनिद उश्कालोव द्वारा प्रकाशित किया गया था। ===कार्यों की सूची=== *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी एस. दंतकथाएँ और सूत्र। अनुवाद, जीवनी और विश्लेषण डैन बी. चॉपिक द्वारा (न्यूयॉर्क: पीटर लैंग, 1990) समीक्षा: वलोडिमिर टी. ज़ायला, यूक्रेनी क्वार्टरली, 50 (1994): 303-304। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगरी), पिज़्ने बनाम सोबी लुडिनु। एम. काशुबा द्वारा वासिल वोइतोविच के परिचय के साथ अनुवादित (एल'विव: एस$विट, 1995) चयनित कार्य (मूल: यूक्रेनी भाषा)। *स्कोवोरोडा, ह्रीहोरी (ग्रेगोरी), ट्वोरी: वी ड्वोख तोमाख, प्राक्कथन ओ मायशानिच द्वारा, मुख्य संपादक ओमेलियन प्रित्सक (कीव: ओबेरेही, 1994) (मूल: यूक्रेनी भाषा, अन्य भाषाओं से अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "जीवन की सच्ची खुशी के बारे में पांच यात्रियों के बीच बातचीत" (जॉर्ज एल. क्लाइन द्वारा अंग्रेजी में अनुवादित)। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), "प्राचीन दुनिया के बारे में बातचीत"। *स्कोवोरोडा, ग्रिगोरी (ग्रेगरी), लियोनिद उश्कालोव द्वारा संपादित। "ग्रिगोरी स्कोवोरोडा: कार्यों का एक संपूर्ण अकादमिक संग्रह", (2011)। ==शिक्षण== स्कोवोरोडा के प्रमुख कार्यों में से एक शिक्षण भी था।<ref>Grigory Savvich Skovoroda, Full collection of works, (Garden of Divine Songs), v. 2, in Teaching Thought, Kyiv 1973. </ref> औपचारिक रूप से उन्होंने पेरेयास्लाव कॉलेजियम में काव्यशास्त्र पढ़ाया (1750-1751 के दौरान) और खार्कोव कॉलेजियम (जिसे खार्किव कॉलेजियम और लैटिन में: कॉलेजियम चारकोविएन्सिस या ज़ाचारपोलिस कॉलेजियम भी कहा जाता है) में काव्यशास्त्र, वाक्यविन्यास, ग्रीक और धर्मशिक्षा का अध्यापन किया (1759-1760, 1761-1764, 1768-1769 के दौरान)।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990</ref> <ref>Daniel H. Shubin; Grigori Skovoroda (1 August 2012). Skovoroda: The World Tried to Catch Me but Could Not. Lulu.com. p. 1. ISBN 978-0-9662757-3-5. Retrieved 24 November 2015</ref> 1751 में उनका पेरेयास्लाव कॉलेजियम के अध्यक्ष बिशप से विवाद हो गया, जिन्होंने स्कोवोरोडा के शिक्षण के नए तरीकों को विचित्र और काव्यशास्त्र के पूर्व पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ असंगत माना। युवा स्कोवोरोडा, अपने विषय पर पूर्ण महारत और छंदशास्त्र के नियमों की सटीकता, स्पष्टता और व्यापकता पर आश्वस्त थे। उन्होंने बिशप के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया और मध्यस्थता की मांग करते हुए कहा कि "अलिया रेस सेप्ट्रम, आलिया प्लेक्ट्रम" [पादरी का राजदंड एक चीज है, लेकिन बांसुरी दूसरी]। बिशप ने स्कोवोरोडा के इस रवैये को अहंकारपूर्ण समझा और परिणामस्वरूप उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 37-38. </ref> <ref>Григорій Сковорода, Повне зібрання творів, (М. Ковалинський, 'Жизнь Григория Сковородьі'), т. 2 В-во Наукова Думка, Київ 1973</ref> खार्कोव कॉलेजियम में अध्यापन का पहला वर्ष स्कोवोरोडा के लिए सफल रहा। उनके व्याख्यानों और शिक्षण शैली ने छात्रों, सहकर्मियों और वरिष्ठों का ध्यान आकर्षित किया। स्कोवोरोडा वासिली तोमारा (1740-1813) के निजी शिक्षक भी थे (1753-1754 और 1755-1758 के दौरान) और उनके जीवनीकार माइकल कोवालिंस्की (या कोवालेन्स्की, 1745-1807) के आजीवन मित्र और मार्गदर्शक भी थे (1761-1769 के दौरान)। संभवतः वे फ्योदोर विश्नेव्स्की (1682-1749) के पुत्र गैब्रियल विश्नेव्स्की (1716-1752) के भी निजी शिक्षक थे (1745-1749 के दौरान)। फ्योदोर विश्नेव्स्की के कारण ही स्कोवोरोडा ने मध्य यूरोप, विशेष रूप से हंगरी और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 41.</ref> अपने शिक्षण में स्कोवोरोडा का उद्देश्य छात्रों की रुचियों और क्षमताओं को खोजना था और वे ऐसे व्याख्यान और पठन सामग्री तैयार करते थे जो उन्हें पूर्ण रूप से विकसित कर सकें।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 42. </ref> स्कोवोरोदा के जीवनीकार कोवालिंस्की ने इस दृष्टिकोण का वर्णन इस प्रकार किया है: "स्कोवोरोदा ने युवा शिष्य वासिली तोमारा को पढ़ाना शुरू करते समय उनके हृदय पर अधिक ध्यान दिया और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को समझते हुए, उन्होंने केवल उनकी प्रकृति को ही विकसित करने में मदद करने का प्रयास किया। उन्होंने कोमल और सौम्य मार्गदर्शन दिया, जिसे बालक को पता भी नहीं चला, क्योंकि स्कोवोरोदा ने विशेष ध्यान रखा कि युवा मन पर भारी ज्ञान का बोझ न पड़े। इस तरह बालक स्कोवोरोदा से प्रेम और विश्वास के साथ जुड़ गया।" उनका शिक्षण केवल अकादमिक जगत या निजी मित्रों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक "घुमक्कड़" के रूप में उन्होंने उन अनेक लोगों को सार्वजनिक रूप से शिक्षा दी जो उनकी ओर आकर्षित हुए। रूसी दर्शन के पहले ज्ञात इतिहासकार, आर्चीमैंड्राइट गैवरिल (वासिली वोस्क्रेसेन्स्की, 1795-1868) ने शिक्षण में स्कोवोरोडा के सुकरात जैसे गुणों का शानदार वर्णन किया है: "सुकरात और स्कोवोरोडा दोनों ने ही ऊपर से जनता के शिक्षक बनने का आह्वान महसूस किया और इस आह्वान को स्वीकार करते हुए वे उस शब्द के व्यक्तिगत और उच्च अर्थ में सार्वजनिक शिक्षक बन गए। ... स्कोवोरोडा भी सुकरात की तरह समय या स्थान से बंधे नहीं थे, वे चौराहों पर, बाजारों में, कब्रिस्तान के पास, चर्च के बरामदों के नीचे, छुट्टियों के दौरान, जब उनके तीखे शब्द एक मदहोश इच्छा को व्यक्त करते थे - और फसल कटाई के कठिन दिनों में, जब बिना बारिश के पसीना धरती पर बहता था, तब भी शिक्षा देते थे।"<ref>Григорій Сковорода, Повне зібрання творів, (М. Ковалинський, 'Жизнь Григория Сковородьі'), т. 2 В-во Наукова Думка, Київ 1973 </ref> <ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 42. </ref> स्कोवोरोदा ने सिखाया कि आत्म-परीक्षण से ही व्यक्ति को अपने सच्चे उद्देश्य का पता चलता है। यूनानी दार्शनिक सुकरात के प्रसिद्ध कथन का प्रयोग करते हुए स्कोवोरोदा सलाह देते हैं, "स्वयं को जानो।" उन्होंने एक सुस्थापित विचार प्रस्तुत किया कि जन्मजात, स्वाभाविक कार्य में संलग्न व्यक्ति को वास्तव में संतुष्टिदायक और सुखी जीवन प्राप्त होता है।<ref>Archimandrite Gavriil, Istoria filosofii (History of Philosophy), Kazan', 1837. Vol. VI, pp. 60-61 </ref> <ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 57. </ref> युवाओं की शिक्षा स्कोवोरोदा के वृद्धावस्था तक उनके ध्यान का केंद्र रही। 1787 में, अपनी मृत्यु से सात वर्ष पूर्व, स्कोवोरोदा ने शिक्षा विषय पर दो निबंध लिखे, "महान सारस" (मूल: Благодарный Еродій, Blagorodnyj Erodiy) और "गरीब लार्क" (मूल: Убогій Жаворонокъ, Ubogiy Zhavoronok), जिनमें उन्होंने अपने विचारों का प्रतिपादन किया।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990, pg 43 </ref> स्कोवोरोडा के व्यापक प्रभाव को उन प्रसिद्ध लेखकों द्वारा दर्शाया गया है जिन्होंने उनकी शिक्षाओं की सराहना की: व्लादिमीर सोलोवियोव, लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की, आंद्रेई बेली, तारास शेवचेंको और इवान फ्रेंको।<ref>Skovoroda, Gregory S. Fables and Aphorisms. Translation, biography, and analysis by Dan B. Chopyk, New York: Peter Lang, 1990 </ref> ==श्रद्धांजलि== [[File:USSR stamp G.Skovoroda 1972 4k.jpg|thumb|एच. स्कोवोरोडा के चित्र सहित [[रूस के डाक टिकट और डाक इतिहास|सोवियत डाक टिकट]] (1972)]] [[File:500 Ukrainian hryvnia in 2015 Obverse.jpg|thumb|₴500 बैंकनोट पर स्कोवोरोडा।]] 15 सितंबर 2006 को, यूक्रेन में प्रचलन में दूसरे सबसे बड़े नोट, ₴500 के नोट पर स्कोवोरोडा का चित्र अंकित किया गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=RV2HDwAAQBAJ&dq=%D0%B3%D1%80%D0%B8%D0%B3%D0%BE%D1%80%D0%B8%D0%B9+%D1%81%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%80%D0%BE%D0%B4%D0%B0+500+%D0%B3%D1%80%D0%B8%D0%B2%D0%B5%D0%BD&pg=PR157&redir_esc=y|title=Украина и соседи. Историческая политика 1980–2010-х|last=Касьянов|first=Георгий|date=2019-02-11|publisher=Новое литературное обозрение|isbn=978-5-4448-1068-2|language=ru}}</ref> 1946 में स्थापित ग्रिगोरी स्कोवोरोडा दर्शनशास्त्र संस्थान, यूक्रेन की राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (1991 तक यूक्रेनी सोवियत संघ की विज्ञान अकादमी) के तत्वावधान में संचालित होता है। यूक्रेन के खार्किव प्रांत के स्कोवोरोडिनिवका गाँव में ग्रिगोरी स्कोवोरोडा साहित्यिक स्मारक संग्रहालय स्थित था। यह संग्रहालय 18वीं शताब्दी की एक इमारत में, उस संपत्ति पर संचालित हो रहा था जहाँ स्कोवोरोडा को दफनाया गया था। 6-7 मई 2022 की रात को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण रूसी मिसाइल हमले में यह इमारत नष्ट हो गई। मिसाइल इमारत की छत के नीचे से गुजरी और आग लग गई।<ref>{{Cite web|url=https://www.pravda.com.ua/eng/news/2022/05/07/7344584/|title=Kharkiv region: Russians destroy Skovoroda Museum with missile strike, one injured|website=Ukrainska Pravda|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> आग ने पूरे संग्रहालय परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। परिणामस्वरूप, स्कोवोरोडा राष्ट्रीय संग्रहालय ऐतिहासिक इमारत सहित नष्ट हो गया। संग्रहालय का संग्रह सुरक्षित रहा क्योंकि रूसी हमले की आशंका में इसे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इमारत में स्थित स्कोवोरोडा की प्रतिमा नष्ट हुई इमारत के मलबे के बीच खड़ी रही। <gallery class="center" mode="packed-hover"> Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling on 6 May 2022 (01).jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 02.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 04.jpg Museum of Hryhoriy Skovoroda after Russian shelling (2022-05-07) 05.jpg </gallery> 2 दिसंबर 2022 को, स्कोवोरोडा के जन्म की 300वीं वर्षगांठ पर, वाशिंगटन, डी.सी. में यूक्रेन हाउस के पास उनकी स्मृति में एक स्मारक स्थापित किया गया।<ref>{{Cite web|url=https://uinp.gov.ua/pres-centr/novyny/pamyatnyk-grygoriyu-skovorodi-vidkryly-u-vashyngtoni|title=Пам’ятник Григорію Сковороді відкрили у Вашингтоні|last=УІНП|date=2022-12-06|website=УІНП|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> इसे 1992 में अमेरिकी मूर्तिकार मार्क रोड्स ने बनाया था, जो स्कोवोरोडा के विचारों से प्रेरित थे। [[File:Skovoroda Monument.jpg|thumb|वाशिंगटन डी.सी. में यूक्रेन हाउस के बाहर स्थित स्कोवोरोडा स्मारक। मूर्तिकार: [[मार्क रोड्स (कलाकार)|मार्क रोड्स]]]] ==लोकप्रिय संस्कृति में== स्कोवोरोडा की कविताओं पर आधारित निम्नलिखित पॉप गीत लिखे गए: *सोन्याचना माशिना द्वारा "पटाश्को" (2019) *कुर्स वालुत द्वारा "कुर्स वालुत" (2020) 26 जनवरी 2024 को खार्किव नगर परिषद ने खार्किव की पुश्किंस्का स्ट्रीट का नाम बदलकर ग्रिगोरी स्कोवोरोडा स्ट्रीट कर दिया।<ref>{{Cite web|url=https://www.pravda.com.ua/news/2024/01/26/7439015/|title=Пушкінська у Харкові стала вулицею Григорія Сковороди|website=Українська правда|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> यह 23 जनवरी 2024 को खार्किव पर हुए रूसी बम हमले के जवाब में किया गया था, जिसमें 4 वर्षीय बच्चे सहित 9 लोग मारे गए थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.pravda.com.ua/news/2024/01/24/7438732/|title=Мер Харкова після російського обстрілу вперше запропонував перейменувати вулицю Пушкінську|website=Українська правда|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> विशेष रूप से शाम के समय, केंद्रीय पुश्किंस्का स्ट्रीट पर हमला हुआ था।<ref>{{Cite web|url=https://www.pravda.com.ua/news/2024/01/24/7438732/|title=Мер Харкова після російського обстрілу вперше запропонував перейменувати вулицю Пушкінську|website=Українська правда|language=uk|access-date=2026-04-06}}</ref> {{Commons category|Hryhoriy Skovoroda}} {{Authority control|state=collapsed}} ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:पोल्टावा ओब्लास्ट के लोग]] [[श्रेणी:कीव गवर्नरेट के लोग (1708-1764)]] [[श्रेणी:कोसैक हेटमानाटे के लोग]] [[श्रेणी:पूर्वी ऑर्थोडॉक्स रहस्यवादी]] [[श्रेणी:ज्ञानोदय के दार्शनिक]] 6jfh10iq39jywys3ehapjujx5jrm6e7 रॉबिन महातो 0 1610856 6536928 2026-04-06T10:32:21Z Pustam.EGR 535233 "[[:ne:Special:Redirect/revision/1349921|रबिन महतो]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया 6536928 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | honorific_prefix = [[माननीय]] | name = रबिन महतो | native_name = | image = | caption = | birth_date = {{Birth date and age|df=y|1988|02|03}}<ref name="Rabin">{{Cite web |title=Rabin Mahato |url=https://election.ekantipur.com/profile/1142?lng=eng |access-date=2026-03-27 |website=Ekantipur Election 2082 |language=ne}}</ref> | birth_place = [[कविलासी नगरपालिका|कविलासी]], [[सर्लाही जिल्ला|सर्लाही]], [[मधेश प्रदेश ]] | death_date = | death_place = | occupation = राजनीतिज्ञ | profession = | party = {{color box|{{party color|Rastriya Swatantra Party}}}} [[राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी]] | spouse = | children = | parents = राम पुकार महतो सुडी (बुवा) | signature = | education = | alma_mater = | awards = | website = | footnotes = | source = <!--- Position held ---> | office = [[प्रतिनिधि सभा (नेपाल)|प्रतिनिधि सभा सदस्य]] | term_start = 26 मार्च 2026 | term_end = | constituency1 = [[सर्लाही २ (निर्वाचन क्षेत्र)|सर्लाही २]] | 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र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> और पार्टी से सरलाही 2 निर्वाचन क्षेत्र से [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|प्रतिनिधि सभा चुनाव, 2082]] लड़ने के लिए टिकट प्राप्त किया। [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2005 के आम चुनाव]] में, उन्होंने सरलाही 2 से कुल 42,512 वोटों से जीत हासिल की। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) के पूर्व मंत्री और सांसद महिंद्र राय यादव और राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के पूर्व मंत्री राजेंद्र महतो को हराया। <ref>{{Cite web|url=[https://risingnepaldaily.com/news/76747](https://risingnepaldaily.com/news/76747)|title=Mahato of RSP wins Sarlahi-2|date=2026-03-07|website=GorakhaPatra|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite 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माध्यमिक शिक्षा पूरी कर ली है। <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2082]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|लोक - सभा]] | सरलाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी|राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी]] | 42,512 | महिंद्रा राय यादव | style="background-color:{{party color|Nepali Communist Party}}" | | नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी | 8,523 |निर्वाचित |} स्रोत: <ref>{{Cite web|url=https://election.ekantipur.com/pradesh-2/district-sarlahi/constituency-2?lng=eng|title=Sarlahi-2 : Province 2 - Nepal Election Latest Updates and Result for Federal Parliament|date=2026-03-07|website=Ekantipur Election 2082|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1988 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:नेपाली हिंदू]] 386tt9194dyqbo5hxm3yx0dtmx2eon5 6536929 6536928 2026-04-06T10:33:15Z Pustam.EGR 535233 /* चुनाव इतिहास */ 6536929 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | honorific_prefix = [[माननीय]] | name = रबिन महतो | native_name = | image = | caption = | birth_date = {{Birth date and age|df=y|1988|02|03}}<ref name="Rabin">{{Cite web |title=Rabin Mahato |url=https://election.ekantipur.com/profile/1142?lng=eng |access-date=2026-03-27 |website=Ekantipur Election 2082 |language=ne}}</ref> | birth_place = [[कविलासी नगरपालिका|कविलासी]], [[सर्लाही जिल्ला|सर्लाही]], [[मधेश प्रदेश ]] | death_date = | death_place = | occupation = राजनीतिज्ञ | profession = | party = {{color box|{{party color|Rastriya Swatantra Party}}}} [[राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी]] | spouse = | children = | parents = राम पुकार महतो सुडी (बुवा) | signature = | education = | alma_mater = | awards = | website = | footnotes = | source = <!--- Position held ---> | office = [[प्रतिनिधि सभा (नेपाल)|प्रतिनिधि सभा सदस्य]] | term_start = 26 मार्च 2026 | term_end = | constituency1 = [[सर्लाही २ (निर्वाचन क्षेत्र)|सर्लाही २]] | predecessor = [[महिन्द्र राय यादव]] | successor = }} '''रबिन महतो''' (जन्म 26 मार्च 2026) एक नेपाली राजनीतिज्ञ 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Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> और पार्टी से सरलाही 2 निर्वाचन क्षेत्र से [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|प्रतिनिधि सभा चुनाव, 2082]] लड़ने के लिए टिकट प्राप्त किया। [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2005 के आम चुनाव]] में, उन्होंने सरलाही 2 से कुल 42,512 वोटों से जीत हासिल की। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) के पूर्व मंत्री और सांसद महिंद्र राय यादव और राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के पूर्व मंत्री राजेंद्र महतो को हराया। <ref>{{Cite web|url=[https://risingnepaldaily.com/news/76747](https://risingnepaldaily.com/news/76747)|title=Mahato of RSP wins Sarlahi-2|date=2026-03-07|website=GorakhaPatra|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=[https://thehimalayantimes.com/nepal-votes/rsp-sweeps-all-four-constituencies-of-sarlahi-district](https://thehimalayantimes.com/nepal-votes/rsp-sweeps-all-four-constituencies-of-sarlahi-district)|title=RSP sweeps all 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web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ 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| birth_date = {{Birth date and age|df=y|1988|02|03}}<ref name="Rabin">{{Cite web |title=Rabin Mahato |url=https://election.ekantipur.com/profile/1142?lng=eng |access-date=2026-03-27 |website=Ekantipur Election 2082 |language=ne}}</ref> | birth_place = [[कविलासी नगरपालिका|कविलासी]], [[सर्लाही जिल्ला|सर्लाही]], [[मधेश प्रदेश ]] | death_date = | death_place = | occupation = राजनीतिज्ञ | profession = | party = {{color box|{{party color|Rastriya Swatantra Party}}}} [[राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी]] | spouse = | children = | parents = राम पुकार महतो सुडी (बुवा) | signature = | education = | alma_mater = | awards = | website = | footnotes = | source = <!--- Position held ---> | office = [[प्रतिनिधि सभा (नेपाल)|प्रतिनिधि सभा सदस्य]] | term_start = 26 मार्च 2026 | term_end = | constituency1 = [[सर्लाही २ (निर्वाचन क्षेत्र)|सर्लाही २]] | predecessor = [[महिन्द्र राय यादव]] | successor = }} '''रबिन महतो''' (जन्म 26 मार्च 2026) एक नेपाली राजनीतिज्ञ हैं और वर्तमान में [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] से 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र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2082]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|लोक - सभा]] | सरलाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी|राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी]] | 42,512 | महिंद्रा राय यादव | 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रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == महतो का जन्म 3 फ़रवरी 1988 को कविलासी नगरपालिका, [[सर्लाही जिला|सरलाही जिले]] में हुआ था । उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी कर ली है । <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2082]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|लोक - सभा]] | सरलाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी|राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी]] | 42,512 | महिंद्रा राय यादव | style="background-color:{{party color|Nepal Communist Party}}" | | नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी | 8,523 |निर्वाचित |} स्रोत: <ref>{{Cite web|url=https://election.ekantipur.com/pradesh-2/district-sarlahi/constituency-2?lng=eng|title=Sarlahi-2 : Province 2 - Nepal Election Latest Updates and Result for Federal Parliament|date=2026-03-07|website=Ekantipur Election 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| footnotes = | source = <!--- Position held ---> | office = [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा सदस्य]] | term_start = 26 मार्च 2026 | term_end = | constituency1 = [[सर्लाही 2 (निर्वाचन क्षेत्र)|सर्लाही 2]] | predecessor = [[महिन्द्र राय यादव]] | successor = }} '''रबिन महतो''' (जन्म 3 फ़रवरी 1988) एक नेपाली राजनीतिज्ञ हैं और वर्तमान में [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] से निर्वाचित [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] के सदस्य हैं । <ref>{{Cite web|url=[https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html](https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html)|title=RSP’s Rabin Mahato defeats NCP’s Yadav in Sarlahi-2 by 33,989 votes|date=2026-03-07|website=MyRepublica|language=English|access-date=2026-03-27}}</ref> उन्होंने 2026 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> और पार्टी से सर्लाही 2 निर्वाचन क्षेत्र से [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|प्रतिनिधि सभा चुनाव, 2026]] लड़ने के लिए टिकट प्राप्त किया । [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2026 के आम चुनाव]] में, उन्होंने सर्लाही 2 से कुल 42,512 वोटों से जीत हासिल की । उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) के पूर्व मंत्री और सांसद महिंद्र राय यादव और राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के पूर्व मंत्री राजेंद्र महतो को हराया । <ref>{{Cite web|url=[https://risingnepaldaily.com/news/76747](https://risingnepaldaily.com/news/76747)|title=Mahato of RSP wins 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का जन्म 3 फ़रवरी 1988 को कविलासी नगरपालिका, [[सर्लाही जिला|सरलाही जिले]] में हुआ था । उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी कर ली है । <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2082]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] | सर्लाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी|राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी]] | 42,512 | महिंद्रा राय यादव | style="background-color:{{party color|Nepal Communist Party}}" | | नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी | 8,523 |निर्वाचित |} स्रोत: <ref>{{Cite web|url=https://election.ekantipur.com/pradesh-2/district-sarlahi/constituency-2?lng=eng|title=Sarlahi-2 : Province 2 - Nepal Election Latest Updates and Result for Federal Parliament|date=2026-03-07|website=Ekantipur Election 2082|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1988 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:नेपाली हिंदू]] 2myctzmlmj57p6tjla8xxi3gmkyla27 6536940 6536939 2026-04-06T10:47:47Z Pustam.EGR 535233 /* चुनाव 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स्वतंत्र पार्टी]] से निर्वाचित [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] के सदस्य हैं । <ref>{{Cite web|url=[https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html](https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html)|title=RSP’s Rabin Mahato defeats NCP’s Yadav in Sarlahi-2 by 33,989 votes|date=2026-03-07|website=MyRepublica|language=English|access-date=2026-03-27}}</ref> उन्होंने 2026 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary 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web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2026]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] | सर्लाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] | 42,512 | महिंद्रा राय यादव | style="background-color:{{party color|Nepal Communist Party}}" | | नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी | 8,523 |निर्वाचित |} स्रोत: <ref>{{Cite web|url=https://election.ekantipur.com/pradesh-2/district-sarlahi/constituency-2?lng=eng|title=Sarlahi-2 : Province 2 - Nepal Election Latest Updates and Result for Federal Parliament|date=2026-03-07|website=Ekantipur Election 2082|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1988 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:नेपाली हिंदू]] 5jpl9t1h5vifl3h7ys86jtfkz5f2w99 6536942 6536941 2026-04-06T10:48:44Z Pustam.EGR 535233 /* चुनाव इतिहास */ 6536942 wikitext text/x-wiki {{Infobox officeholder | honorific_prefix = [[माननीय]] | name = रबिन महतो | native_name = | image = | caption = | birth_date = {{Birth date and age|df=y|1988|02|03}}<ref name="Rabin">{{Cite web |title=Rabin Mahato |url=https://election.ekantipur.com/profile/1142?lng=eng |access-date=2026-03-27 |website=Ekantipur Election 2082 |language=ne}}</ref> | birth_place = [[कविलासी]], [[सर्लाही जिला|सर्लाही]], [[मधेश प्रदेश ]] | death_date = | death_place = | occupation = राजनीतिज्ञ | profession = | party = {{color box|{{party color|Rastriya Swatantra Party}}}} [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] | spouse = | children = | parents = राम पुकार महतो सुडी (बुवा) | signature = | education = | alma_mater = | awards = | website = | footnotes = | source = <!--- Position held ---> | office = [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा सदस्य]] | term_start = 26 मार्च 2026 | term_end = | constituency1 = [[सर्लाही 2 (निर्वाचन क्षेत्र)|सर्लाही 2]] | predecessor = [[महिन्द्र राय यादव]] | successor = }} '''रबिन महतो''' (जन्म 3 फ़रवरी 1988) एक नेपाली राजनीतिज्ञ हैं और वर्तमान में [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] से निर्वाचित [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] के सदस्य हैं । <ref>{{Cite web|url=[https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html](https://myrepublica.nagariknetwork.com/news/rsps-rabin-mahato-defeats-ncps-yadav-in-sarlahi-2-by-33989-votes-41-52.html)|title=RSP’s Rabin Mahato defeats NCP’s Yadav in Sarlahi-2 by 33,989 votes|date=2026-03-07|website=MyRepublica|language=English|access-date=2026-03-27}}</ref> उन्होंने 2026 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया <ref name="bio">{{Cite web|url=[https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html](https://ekantipur.com/politics/2026/03/10/rabins-parliamentary-journey-defeats-rajendra-and-mahinder-02-12.html)|title=राजेन्द्र र महिन्द्रलाई हराउँदै रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> और पार्टी से सर्लाही 2 निर्वाचन क्षेत्र से [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|प्रतिनिधि सभा चुनाव, 2026]] लड़ने के लिए टिकट प्राप्त किया । [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2026 के आम चुनाव]] में, उन्होंने सर्लाही 2 से कुल 42,512 वोटों से जीत हासिल की । उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी केंद्र) के पूर्व मंत्री और सांसद महिंद्र राय यादव और राष्ट्रीय मुक्ति पार्टी के पूर्व मंत्री राजेंद्र महतो को हराया । <ref>{{Cite web|url=[https://risingnepaldaily.com/news/76747](https://risingnepaldaily.com/news/76747)|title=Mahato of RSP wins Sarlahi-2|date=2026-03-07|website=GorakhaPatra|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=[https://thehimalayantimes.com/nepal-votes/rsp-sweeps-all-four-constituencies-of-sarlahi-district](https://thehimalayantimes.com/nepal-votes/rsp-sweeps-all-four-constituencies-of-sarlahi-district)|title=RSP sweeps all four constituencies of Sarlahi district|last=Sah|first=Bal Krishna|date=March 8, 2026|website=The Himalayan 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रविनको संसदीय यात्रा|last=Thakur|first=Om Prakash|website=Ekantipur|language=ne|trans-title=Rabin's parliamentary journey started by defeating Rajendra and Mahindra|access-date=2026-03-27}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.nepalnews.com/2026/03/07/sarlahi-2-rabin-mahato-of-rsvp-elected-defeating-two-veteran-leaders/|title=सर्लाही २ : दुई दिग्गज नेतालाई पराजित गर्दै रास्वपाका रविन महतो निर्वाचित|date=2026-03-07|website=नेपाल न्युज|language=ne|trans-title=Sarlahi 2: Rabin Mahato of RSP elected, defeating two veteran leaders|access-date=2026-03-27}}</ref> == चुनाव इतिहास == {| class="wikitable" !चुनाव ! घर ! निर्वाचन क्षेत्र ! colspan="2" | दल ! वोट ! प्रतिद्वंद्वी ! colspan="2" | दल ! वोट ! परिणाम |- | [[२०२६ नेपाली आम चुनाव|2026]] | [[नेपाल की प्रतिनिधि सभा|प्रतिनिधि सभा]] | सर्लाही 2 | style="background-color:{{party color|Rastriya Swatantra Party}}" | | [[राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी]] | 42,512 | महिंद्र राय यादव | style="background-color:{{party color|Nepal Communist Party}}" | | नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी | 8,523 |निर्वाचित |} स्रोत: <ref>{{Cite web|url=https://election.ekantipur.com/pradesh-2/district-sarlahi/constituency-2?lng=eng|title=Sarlahi-2 : Province 2 - Nepal Election Latest Updates and Result for Federal Parliament|date=2026-03-07|website=Ekantipur Election 2082|language=en|access-date=2026-03-27}}</ref> == संदर्भ == {{Reflist}} [[श्रेणी:जीवित लोग]] [[श्रेणी:1988 में जन्मे लोग]] [[श्रेणी:नेपाली हिंदू]] i04p97j6aksjorqy2869ic2vpxvojbw वासिल ओव्सिएन्को 0 1610857 6536947 2026-04-06T11:18:14Z Surajkumar9931 853179 नया पृष्ठ: {{Infobox criminal | name = वासिल ओव्सिएन्को | native_name = {{nobold|Василь Овсієнко}} | native_name_lang = uk | image = Пресконференція фільму Заборонений 07.jpg | caption = 2019 में ओव्सिएन्को | birth_date = {{birth date|1949|5|8|df=y}} | birth_place = {{ill|दांव, ज़ाइटॉम... 6536947 wikitext text/x-wiki {{Infobox criminal | name = वासिल ओव्सिएन्को | native_name = {{nobold|Василь Овсієнко}} | native_name_lang = uk | image = Пресконференція фільму Заборонений 07.jpg | caption = 2019 में ओव्सिएन्को | birth_date = {{birth date|1949|5|8|df=y}} | birth_place = {{ill|दांव, ज़ाइटॉमिर रायोन, ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट |lt=लेनिन|uk|Ставки (Радомишльська міська громада)}}, [[ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट]], सोवियत संघ (अब यूक्रेन) | death_date = {{death date and age|2023|6|19|1949|8|8|df=y}} | death_place = [[कीव]], यूक्रेन | alma_mater = [[तारास शेवचेंको राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, कीव|कीव राज्य विश्वविद्यालय]] | organization = [[यूक्रेनी हेलसिंकी समूह]] | movement = [[सोवियत असंतुष्टों]] | criminal_charge = {{plainlist| * [[सोवियत विरोधी आंदोलन]] (1973, 1981) * गिरफ्तारी का विरोध करना (1977) }} | conviction_penalty = {{plainlist| * चार साल की कैद (1973) * तीन साल की कैद (1977) * दस साल की कैद, पांच साल का आंतरिक निर्वासन (1981) }} }} '''वासिल वासिलियोविच ओव्सिएन्को''' (यूक्रेनी: Васи́ль Васи́льович Овсіє́нко; 8 अप्रैल 1949 – 19 जून 2023) एक यूक्रेनी लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सोवियत संघ के असंतुष्ट थे। उन्होंने यूक्रेनी हेलसिंकी समूह के सदस्य के रूप में काम किया और खार्किव मानवाधिकार संरक्षण समूह की स्थापना की। ==प्रारंभिक जीवन और करियर== वासिल वासिलियोविच ओव्सिएन्को का जन्म 8 अप्रैल 1949 को सोवियत संघ के यूक्रेनी समाजवादी गणराज्य के लेनिनो (वर्तमान में स्टावकी) गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। वे अपने परिवार में नौवें और सबसे छोटे जीवित बच्चे थे। उनके पिता ने दो साल की शिक्षा प्राप्त की थी, जबकि उनकी माता निरक्षर थीं और औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाई थीं।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://museum.khpg.org//en/1415368826|title=Ovsiyenko Vasyl Vasyliovych|website=Dissident movement in Ukraine|access-date=2026-04-06}}</ref> उनका ननिहाल पोलिश श्लाच्टा के सदस्यों से संबंधित था। कम उम्र से ही ओवसिएन्को साहित्य से मोहित हो गए और कविताएँ लिखने लगे। उनकी कुछ रचनाएँ स्थानीय समाचार पत्र 'स्टार ऑफ पोलेसिया' में प्रकाशित हुईं।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://meduza.io/en/feature/2023/02/01/an-especially-dangerous-criminal|title=‘An especially dangerous criminal’ The story of Vasyl Ovsienko, who spent more than 13 years in Soviet prisons for using the Ukrainian language|website=Meduza|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> ओवसिएन्को का पहला संपर्क नृवंशविज्ञानी वासिल स्कुरतिव्स्की से 1960 के दशक के मध्य में हुआ और उन्हीं के माध्यम से उन्हें सिक्सटीयर्स राजनीतिक आंदोलन से परिचित कराया गया। 1965 में कीव स्टेट यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान की पढ़ाई के दौरान उन्हें वासिल सिमोनेंको के सामिज़दत से भी परिचय हुआ। उन्होंने छात्र के रूप में और बाद के रूप में ताशान गाँव में सामिज़दत के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।<ref name=":0" /> ==पहली गिरफ्तारी== 1972-1973 के यूक्रेनी शुद्धिकरण की शुरुआत के साथ, सिक्सटीयर के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और सुधारवादी पेट्रो शेलेस्ट को यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव पद से हटा दिया गया। ओव्सिएन्को ने वासिल लिसोवी और येवगेन प्रोनिउक के साथ गुप्त प्रकाशन जारी रखा। प्रोनिउक और लिसोवी दोनों को 1972 की गर्मियों में गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि ओव्सिएन्को को 5 मार्च 1973 को गिरफ्तार किया गया। दंडात्मक मनोरोग की धमकी के तहत, ओव्सिएन्को ने उन व्यक्तियों के नाम बता दिए जिन्हें उन्होंने गुप्त प्रकाशन दिए थे। उन्हें चार साल की कैद की सजा सुनाई गई।<ref name=":0" /> अपनी पहली सजा (जो उन्होंने मोर्दोविया में बिताई) के दौरान, ओव्सिएन्को अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ घुलमिल गए और अपनी सजा के एक साल के भीतर ही भूख हड़ताल और जेल हड़तालों में भाग लेना शुरू कर दिया। वह 9 फरवरी 1977 को जेल से रिहा हुए, ज़ाइटॉमिर में लिसोवी से मिले और एक महीने बाद लेनिनो लौट आए। लेनिनो लौटने के बाद, ओव्सिएन्को ने एक अस्थायी रेडियो एंटीना बनाया और उसका उपयोग रेडियो लिबर्टी की यूक्रेनी भाषा सेवा से प्रसारण प्राप्त करने के लिए किया। रेडियो लिबर्टी के एक प्रसारण में यूक्रेनी हेलसिंकी समूह की स्थापना के बारे में सुनने के बाद, ओव्सिएन्को ने यह खबर अपने करीबी दोस्तों को बताई। उन्होंने फिर से गुप्त प्रकाशन शुरू किया, इस बार उन्होंने वासिल स्टुस की कविताएँ प्रकाशित कीं।<ref name=":1" /> ==दूसरी गिरफ्तारी== ओव्सिएन्को को उसी वर्ष नवंबर में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया, जिसमें एक अधिकारी का अपमान करना और अपनी जैकेट से दो बटन फाड़ना शामिल था, और उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई। 1977 में उनकी गिरफ्तारी यूक्रेनी हेलसिंकी समूह की कार्यकर्ताओं ओक्साना मेश्को और ओल्हा बेबीच (कैद कार्यकर्ता सेरही बेबीच की बहन) से मुलाकात के बाद हुई थी, और मेश्को और बेबीच दोनों को भी मुलाकात के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।<ref name=":1" /> एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बाद में 1982 में तर्क दिया कि ओव्सिएन्को के खिलाफ आरोप झूठे थे। ओव्सिएन्को ने अपनी दूसरी सजा यूक्रेन के ज़ाइटॉमिर और ज़ापोरिज़िया ओब्लास्ट की जेलों में काटी। जेल में रहते हुए, वह 1978 में यूक्रेनी हेलसिंकी ग्रुप में शामिल हो गए। ==तीसरी गिरफ्तारी== रिहाई से छह महीने पहले उन्हें एक बार फिर दोषी ठहराया गया, इस बार होलोडोमोर पर खुलेआम चर्चा करने के लिए सोवियत विरोधी आंदोलन के आरोपों में। उन्हें अस्वच्छ और भीड़भाड़ वाली पर्म-36 श्रम कॉलोनी में रखा गया। पर्म-36 में उन्हें दिम्शित्स-कुज़नेत्सोव अपहरण कांड में संलिप्तता के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के साथ कैद किया गया था। सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा प्रचारित पेरेस्त्रोइका सुधारों के तहत, ओव्सिएन्को को, पर्म-36 के अन्य सभी राजनीतिक कैदियों के साथ, 8 दिसंबर 1987 को पर्म-35 जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। ओव्सिएन्को से क्षमादान के आधार बताते हुए एक बयान लिखने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने (कई अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ) यह मानते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। बयान देने से इनकार करने के बावजूद, उन्हें एक साल बाद क्षमादान दे दिया गया और वे रिहा होने वाले अंतिम पाँच लोगों में शामिल थे (मिकोला होर्बल, इवान कैंडीबा, एम. अलेक्सेयेव और एन टार्टो के साथ)। 21 अगस्त 1988 को ओव्सिएन्को पर्म से कीव के लिए विमान में सवार हुए। उन्हें मूल रूप से लुक्यानिवस्का जेल भेजा जाना था, लेकिन इसके बजाय उन्हें केजीबी मुख्यालय में कैद कर लिया गया। एक दिन बाद, उन्हें रिहा कर दिया गया और ज़ाइटॉमिर लौटने की अनुमति दी गई, जहाँ से वे लेनिनो पहुँचे। एक साल बाद वे पर्म-36 लौट आए ताकि वासिल स्टस, यूरी लिटविन और ओलेक्सा तिखी के पुनर्दाह संस्कार में भाग ले सकें, जिनकी जेल में सजा के दौरान मृत्यु हो गई थी। ==बाद का जीवन और मृत्यु== रिहाई के बाद, ओव्सिएन्को यूक्रेन में मानवाधिकारों के क्षेत्र में सक्रिय रहे। 1988 में यूक्रेनी हेलसिंकी समूह को कानूनी मान्यता मिलने के बाद, उन्हें ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट में समूह की शाखा का प्रमुख नियुक्त किया गया। हालांकि, वे अपने पैतृक गांव में हेलसिंकी समूह या यूक्रेन के जन आंदोलन की शाखा स्थापित करने में असफल रहे। 1994 में उनके समर्थकों ने उनके लिए एक अपार्टमेंट खरीदा और मिखाइलो होरिन और जॉन कोलास्की ने उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने सैंडरमोख और सोलोवेट्स्की द्वीपों के लिए अभियान आयोजित किए, जहां महान शुद्धिकरण के दौरान सामूहिक नरसंहार हुए थे। 2000 के दशक की शुरुआत में, येवगेन ज़खारोव के साथ मिलकर, ओव्सिएन्को ने पूर्वी ब्लॉक के असंतुष्टों का चार खंडों वाला एक संकलन लिखा, जिसमें लगभग 200 यूक्रेनी राजनीतिक कैदी भी शामिल थे। ओव्सिएन्को का निधन 19 जुलाई 2023 को हुआ। फरवरी 2024 में कीव में बेलगोरोड स्ट्रीट का नाम बदलकर वासिल ओव्सिएन्को स्ट्रीट कर दिया गया। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1949 जन्म]] [[श्रेणी:2023 मृत्यु]] [[श्रेणी:20वीं सदी के यूक्रेनी लेखक]] [[श्रेणी:21वीं सदी के यूक्रेनी लेखक]] [[श्रेणी:यूक्रेनी भूख हड़ताल करने वाले]] nhsaspbvi7dzdbt9s0c25t2ttl24ss4 6536949 6536947 2026-04-06T11:24:15Z Surajkumar9931 853179 6536949 wikitext text/x-wiki {{Infobox criminal | name = वासिल ओव्सिएन्को | native_name = {{nobold|Василь Овсієнко}} | native_name_lang = uk | image = Пресконференція фільму Заборонений 07.jpg | caption = 2019 में ओव्सिएन्को | birth_date = {{birth date|1949|5|8|df=y}} | birth_place = {{ill|दांव, ज़ाइटॉमिर रायोन, ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट |lt=लेनिन|uk|Ставки (Радомишльська міська громада)}}, [[ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट]], सोवियत संघ (अब यूक्रेन) | death_date = {{death date and age|2023|6|19|1949|8|8|df=y}} | death_place = [[कीव]], यूक्रेन | alma_mater = [[तारास शेवचेंको राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, कीव|कीव राज्य विश्वविद्यालय]] | organization = [[यूक्रेनी हेलसिंकी समूह]] | movement = [[सोवियत असंतुष्टों]] | criminal_charge = {{plainlist| * [[सोवियत विरोधी आंदोलन]] (1973, 1981) * गिरफ्तारी का विरोध करना (1977) }} | conviction_penalty = {{plainlist| * चार साल की कैद (1973) * तीन साल की कैद (1977) * दस साल की कैद, पांच साल का आंतरिक निर्वासन (1981) }} }} '''वासिल वासिलियोविच ओव्सिएन्को''' (यूक्रेनी: Васи́ль Васи́льович Овсіє́нко; 8 अप्रैल 1949 – 19 जून 2023) एक [[यूक्रेनी भाषा एवं साहित्य|यूक्रेनी]] [[लेखक]], [[मानवाधिकार]] कार्यकर्ता और [[सोवियत संघ]] के असंतुष्ट थे। उन्होंने यूक्रेनी हेलसिंकी समूह के सदस्य के रूप में काम किया और खार्किव मानवाधिकार संरक्षण समूह की स्थापना की। ==प्रारंभिक जीवन और करियर== वासिल वासिलियोविच ओव्सिएन्को का जन्म 8 अप्रैल 1949 को [[सोवियत संघ]] के यूक्रेनी समाजवादी गणराज्य के लेनिनो (वर्तमान में स्टावकी) गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। वे अपने परिवार में नौवें और सबसे छोटे जीवित बच्चे थे। उनके पिता ने दो साल की [[शिक्षा]] प्राप्त की थी, जबकि उनकी माता निरक्षर थीं और औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाई थीं।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://museum.khpg.org//en/1415368826|title=Ovsiyenko Vasyl Vasyliovych|website=Dissident movement in Ukraine|access-date=2026-04-06}}</ref> उनका ननिहाल पोलिश श्लाच्टा के सदस्यों से संबंधित था। कम उम्र से ही ओवसिएन्को साहित्य से मोहित हो गए और कविताएँ लिखने लगे। उनकी कुछ रचनाएँ स्थानीय समाचार पत्र 'स्टार ऑफ पोलेसिया' में प्रकाशित हुईं।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://meduza.io/en/feature/2023/02/01/an-especially-dangerous-criminal|title=‘An especially dangerous criminal’ The story of Vasyl Ovsienko, who spent more than 13 years in Soviet prisons for using the Ukrainian language|website=Meduza|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> ओवसिएन्को का पहला संपर्क नृवंशविज्ञानी वासिल स्कुरतिव्स्की से 1960 के दशक के मध्य में हुआ और उन्हीं के माध्यम से उन्हें सिक्सटीयर्स राजनीतिक आंदोलन से परिचित कराया गया। 1965 में कीव स्टेट यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान की पढ़ाई के दौरान उन्हें वासिल सिमोनेंको के सामिज़दत से भी परिचय हुआ। उन्होंने छात्र के रूप में और बाद के रूप में ताशान गाँव में सामिज़दत के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।<ref name=":0" /> ==पहली गिरफ्तारी== 1972-1973 के यूक्रेनी शुद्धिकरण की शुरुआत के साथ, सिक्सटीयर के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया और सुधारवादी पेट्रो शेलेस्ट को यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव पद से हटा दिया गया। ओव्सिएन्को ने वासिल लिसोवी और येवगेन प्रोनिउक के साथ गुप्त प्रकाशन जारी रखा। प्रोनिउक और लिसोवी दोनों को 1972 की गर्मियों में [[गिरफ़्तारी|गिरफ्तार]] कर लिया गया, जबकि ओव्सिएन्को को 5 मार्च 1973 को गिरफ्तार किया गया। दंडात्मक मनोरोग की धमकी के तहत, ओव्सिएन्को ने उन व्यक्तियों के नाम बता दिए जिन्हें उन्होंने गुप्त प्रकाशन दिए थे। उन्हें चार साल की कैद की सजा सुनाई गई।<ref name=":0" /> अपनी पहली सजा (जो उन्होंने मोर्दोविया में बिताई) के दौरान, ओव्सिएन्को अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ घुलमिल गए और अपनी सजा के एक साल के भीतर ही भूख हड़ताल और जेल हड़तालों में भाग लेना शुरू कर दिया। वह 9 फरवरी 1977 को जेल से रिहा हुए, ज़ाइटॉमिर में लिसोवी से मिले और एक महीने बाद लेनिनो लौट आए। लेनिनो लौटने के बाद, ओव्सिएन्को ने एक अस्थायी रेडियो एंटीना बनाया और उसका उपयोग रेडियो लिबर्टी की यूक्रेनी भाषा सेवा से प्रसारण प्राप्त करने के लिए किया। रेडियो लिबर्टी के एक प्रसारण में यूक्रेनी हेलसिंकी समूह की स्थापना के बारे में सुनने के बाद, ओव्सिएन्को ने यह खबर अपने करीबी दोस्तों को बताई। उन्होंने फिर से गुप्त प्रकाशन शुरू किया, इस बार उन्होंने वासिल स्टुस की कविताएँ प्रकाशित कीं।<ref name=":1" /> ==दूसरी गिरफ्तारी== ओव्सिएन्को को उसी वर्ष नवंबर में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर गिरफ्तारी का विरोध करने का आरोप लगाया गया, जिसमें एक अधिकारी का अपमान करना और अपनी जैकेट से दो बटन फाड़ना शामिल था, और उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई। 1977 में उनकी गिरफ्तारी यूक्रेनी हेलसिंकी समूह की कार्यकर्ताओं ओक्साना मेश्को और ओल्हा बेबीच (कैद कार्यकर्ता सेरही बेबीच की बहन) से मुलाकात के बाद हुई थी, और मेश्को और बेबीच दोनों को भी मुलाकात के तुरंत बाद गिरफ्तार कर लिया गया था।<ref name=":1" /> एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बाद में 1982 में तर्क दिया कि ओव्सिएन्को के खिलाफ आरोप झूठे थे। ओव्सिएन्को ने अपनी दूसरी सजा यूक्रेन के ज़ाइटॉमिर और ज़ापोरिज़िया ओब्लास्ट की जेलों में काटी। जेल में रहते हुए, वह 1978 में यूक्रेनी हेलसिंकी ग्रुप में शामिल हो गए। ==तीसरी गिरफ्तारी== रिहाई से छह महीने पहले उन्हें एक बार फिर दोषी ठहराया गया, इस बार होलोडोमोर पर खुलेआम चर्चा करने के लिए सोवियत विरोधी आंदोलन के आरोपों में। उन्हें अस्वच्छ और भीड़भाड़ वाली पर्म-36 श्रम कॉलोनी में रखा गया। पर्म-36 में उन्हें दिम्शित्स-कुज़नेत्सोव अपहरण कांड में संलिप्तता के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के साथ कैद किया गया था।<ref name=":2">{{Cite web|url=https://holodomormuseum.org.ua/en/news/dissident-and-soviet-political-prisoner-vasyl-ovsienko-passed-away/|title=Dissident and Soviet political prisoner Vasyl Ovsienko passed away|website=National Museum of the Holodomor-Genocide|language=en|access-date=2026-04-06}}</ref> सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा प्रचारित पेरेस्त्रोइका सुधारों के तहत, ओव्सिएन्को को, पर्म-36 के अन्य सभी राजनीतिक कैदियों के साथ, 8 दिसंबर 1987 को पर्म-35 जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।<ref name=":0" /> ओव्सिएन्को से क्षमादान के आधार बताते हुए एक बयान लिखने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने (कई अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ) यह मानते हुए इनकार कर दिया कि उन्हें गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था। बयान देने से इनकार करने के बावजूद, उन्हें एक साल बाद क्षमादान दे दिया गया और वे रिहा होने वाले अंतिम पाँच लोगों में शामिल थे (मिकोला होर्बल, इवान कैंडीबा, एम. अलेक्सेयेव और एन टार्टो के साथ)।<ref name=":2" /> 21 अगस्त 1988 को ओव्सिएन्को पर्म से कीव के लिए विमान में सवार हुए। उन्हें मूल रूप से लुक्यानिवस्का जेल भेजा जाना था, लेकिन इसके बजाय उन्हें केजीबी मुख्यालय में कैद कर लिया गया।<ref name=":2" /> एक दिन बाद, उन्हें रिहा कर दिया गया और ज़ाइटॉमिर लौटने की अनुमति दी गई, जहाँ से वे लेनिनो पहुँचे। एक साल बाद वे पर्म-36 लौट आए ताकि वासिल स्टस, यूरी लिटविन और ओलेक्सा तिखी के पुनर्दाह संस्कार में भाग ले सकें, जिनकी जेल में सजा के दौरान मृत्यु हो गई थी। ==बाद का जीवन और मृत्यु== रिहाई के बाद, ओव्सिएन्को यूक्रेन में मानवाधिकारों के क्षेत्र में सक्रिय रहे। 1988 में यूक्रेनी हेलसिंकी समूह को कानूनी मान्यता मिलने के बाद, उन्हें ज़ाइटॉमिर ओब्लास्ट में समूह की शाखा का प्रमुख नियुक्त किया गया। हालांकि, वे अपने पैतृक गांव में हेलसिंकी समूह या यूक्रेन के जन आंदोलन की शाखा स्थापित करने में असफल रहे। 1994 में उनके समर्थकों ने उनके लिए एक अपार्टमेंट खरीदा और मिखाइलो होरिन और जॉन कोलास्की ने उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने सैंडरमोख और सोलोवेट्स्की द्वीपों के लिए अभियान आयोजित किए, जहां महान शुद्धिकरण के दौरान सामूहिक नरसंहार हुए थे। 2000 के दशक की शुरुआत में, येवगेन ज़खारोव के साथ मिलकर, ओव्सिएन्को ने पूर्वी ब्लॉक के असंतुष्टों का चार खंडों वाला एक संकलन लिखा, जिसमें लगभग 200 यूक्रेनी राजनीतिक कैदी भी शामिल थे।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/ukrainian/news-63971479|title=Помер Василь Овсієнко: політв'язень, що все життя збирав докази репресій СРСР проти українських дисидентів|work=BBC News Україна|access-date=2026-04-06|language=uk}}</ref> ओव्सिएन्को का [[मृत्यु|निधन]] 19 जुलाई 2023 को हुआ। फरवरी 2024 में कीव में बेलगोरोड स्ट्रीट का नाम बदलकर वासिल ओव्सिएन्को स्ट्रीट कर दिया गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/ukrainian/news-63971479|title=Помер Василь Овсієнко: політв'язень, що все життя збирав докази репресій СРСР проти українських дисидентів|work=BBC News Україна|access-date=2026-04-06|language=uk}}</ref> ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} [[श्रेणी:1949 जन्म]] [[श्रेणी:2023 मृत्यु]] [[श्रेणी:20वीं सदी के यूक्रेनी लेखक]] [[श्रेणी:21वीं सदी के यूक्रेनी लेखक]] [[श्रेणी:यूक्रेनी भूख हड़ताल करने वाले]] je034mhte8ktausiilw6d0yhqrllq8a