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Pushkar Singh
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{{Infobox Language
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|nativename={{lang|sa|संस्कृतम्}}
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| foot_montage = (ऊपर) [[श्रीमद्भग्वद्गीता]] की १९वीं शताब्दी की एक पाण्डुलिपि<ref name="Mascaró2003">{{cite book |last=Mascaró|first=Juan|title=The Bhagavad Gita |url=https://books.google.com/books?id=UZEKghCNbVIC&pg=PT13|year=2003 |publisher=Penguin |isbn=978-0-14-044918-1 |pages=13 ff |quote=The Bhagawad Gita, an intensely spiritual work, that forms one of the cornerstones of the Hindu faith, and is also one of the masterpieces of Sanskrit poetry. (from the backcover)}}</ref> अनुमान है कि गीता की रचना ४०० ईसापूर्व से लेकर २०० ईसापूर्व में हुई थी।<ref>{{cite book |last=Besant |first=Annie (trans) |author-link=Annie Besant |title=The Bhagavad-gita; or, ''The Lord's Song'', with text in Devanagari, and English translation |url=https://en.wikisource.org/wiki/Bhagavad-Gita_(Besant_4th)/Discourse_1 |year=1922 |publisher=G. E. Natesan & Co. |location=Madras |quote=प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ २० ॥ <br /> Then, beholding the sons of Dhritarâshtra standing arrayed, and flight of missiles about to begin, ... the son of Pându, took up his bow,(20)<br /> हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते । अर्जुन उवाच । ...॥ २१ ॥ <br />And spake this word to Hrishîkesha, O Lord of Earth: Arjuna said: ...}}</ref><ref>{{cite book |last=Radhakrishnan |first=S. |author-link=Sarvepalli Radhakrishnan |title=The Bhagavadgītā: With an introductory essay, Sanskrit text, English translation, and notes |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113 |year=1948 |publisher=George Allen and Unwin Ltd. |location=London, UK |page=[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113/page/n83 86] |quote= ...'' pravyite Sastrasampate''<br /> ''dhanur udyamya pandavah'' (20) <br /> Then Arjuna, ... looked at the sons of Dhrtarastra drawn up in battle order; and as the flight of missiles (almost) started, he took up his bow.<br /> ''hystkesam tada vakyam''<br /> ''idam aha mahipate'' ... (21)<br /> And, O Lord of earth, he spoke this word to Hrsikesha (Krsna): ... }}</ref> (नीचे) [[कोलकाता|कलकता]] के संस्कृत कॉलेज के १७५वीं जयन्ती के अवसर पर भारत सरकार द्वारी जारी डाकटिकट। यह कॉलेज तीसरा सबसे पुराना कॉलेज है। १७९१ में स्थापित [[काशी संस्कृत कालेज]] सबसे पुराना महाविद्यालय है।
}}
| imagesize =
| imagecaption =
|region=[[भारत]], [[नेपाल]]
|speakers= १००४,१३५ (जनगणना के अनुसार।)<ref name="Census">{{cite web|url=http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement5.htm|title=Comparative speaker's strength of scheduled languages -1971, 1981, 1991 and 2001|work=Census of India, 2001|publisher=Office of the Registrar and Census Commissioner, भारत|accessdate=31 दिसम्बर 2009}}</ref>
|script=[[देवनागरी]] (वस्तुतः), अन्य [[ब्राह्मी]]–लिपि
|nation=भारतीय संविधान में अनुसूचित 22 भाषाओं में से एक।
|iso1=sa|iso2=san|iso3=san
|familycolor=Indo-European}}
'''संस्कृत''' (संस्कृत में : संस्कृतम्, {{IPA-sa|ˈsɐ̃skr̩tɐm}}) [[भारतीय उपमहाद्वीप]] की एक [[भाषा]] है। संस्कृत एक [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा]] है जो [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिंद-यूरोपीय भाषा]] परिवार की एक शाखा है।<ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/738404/the-old-vedic-language-had-its-origin-outside-the-subcontinent-but-not-sanskrit|title='The Old Vedic language had its origin outside the subcontinent. But not Sanskrit.'}}</ref> आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, [[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[बंगाली भाषा|बांग्ला]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[सिन्धी भाषा|सिन्धी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[नेपाली भाषा|नेपाली]], आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की [[रोमानी भाषा]] भी शामिल है। संस्कृत में [[वैदिक धर्म]] से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गए हैं। [[बौद्ध धर्म]] (विशेषकर महायान) तथा [[जैन धर्म|जैन मत]] के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर [[यज्ञ]] और [[पूजा]] संस्कृत में ही होती हैं।
संस्कृत का अर्थ है "''संस्कार की गयी'' " अर्थात "बदलाव की गयी", आधुनिक समय में संस्कृत भाषा [[देवनागरी]] लिपि में लिखी जाती है।
संस्कृत आमतौर पर कई पुरानी इंडो-आर्यन भाषाओं को जोड़ती है। इनमें से सबसे पुरातन ग्रंथ [[ऋग्वेद]] १,०२८ सूक्तों का एक संग्रह है जो १० मंडलों में विभाजित है। [[रामायण]] को सबसे प्राचीन महाकाव्य माना जाता है इसलिए इसे [[वाल्मीकि]] को '''आदिकवि''' भी कहा जाता है। जबकि महाभारत सबसे विस्तृत महाकाव्य है।
[[कालिदास]] के कई नाटक और महाकाव्य इसी भाषा में हैं। बुद्धचरितम् अश्वघोष ने संस्कृत में ही रचा।
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] की [[आठवीं अनुसूची]] में संस्कृत को भी सम्मिलित किया गया है। यह [[उत्तराखण्ड]] और [[हिमाचल प्रदेश]] की आधिकारिक [[राजभाषा]] है। [[आकाशवाणी]] और [[दूरदर्शन]] से संस्कृत में समाचार प्रसारित किए जाते हैं। कतिपय वर्षों से डी. डी. न्यूज (DD News) द्वारा '''वार्तावली''' नामक अर्धहोरावधि का संस्कृत-कार्यक्रम भी प्रसारित किया जा रहा है, जो हिन्दी चलचित्र गीतों के संस्कृतानुवाद, सरल-संस्कृत-शिक्षण, संस्कृत-वार्ता और महापुरुषों की संस्कृत जीवनवृत्तियों, सुभाषित-रत्नों आदि के कारण अनुदिन लोकप्रियता को प्राप्त हो रहा है।
== इतिहास ==
'''{{मुख्य|संस्कृत भाषा का इतिहास}}'''
[[चित्र:Global distribution of Sanskrit language presence, texts and inscriptions dated between 300 and 1800 CE.svg|right|thumb|350px|संस्कृत भाषा का वैश्विक विस्तृति : ३०० ईसापूर्व से लेकर १८०० ई तक की कालावधि में रचित संस्कृत ग्रन्थ एवं संस्कृत अभिलेखों की प्राप्ति के क्षेत्र]]
संस्कृत का इतिहास बहुत पुराना है। वर्तमान समय में प्राप्त सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ [[ॠग्वेद]] है जो कम से कम ढाई हजार ईसापूर्व की रचना है।
== व्याकरण ==
{{मुख्य|संस्कृत व्याकरण}}
{{मुख्य|संस्कृत का व्याकरण}}
संस्कृत भाषा का [[व्याकरण]] अत्यन्त परिमार्जित एवं [[विज्ञान|वैज्ञानिक]] है। बहुत प्राचीन काल से ही अनेक व्याकरणाचार्यों ने संस्कृत व्याकरण पर बहुत कुछ लिखा है। किन्तु [[पाणिनि]] का संस्कृत व्याकरण पर किया गया कार्य सबसे प्रसिद्ध है। उनका [[अष्टाध्यायी]] किसी भी भाषा के व्याकरण का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
संस्कृत में [[संज्ञा]], [[सर्वनाम]], [[विशेषण]] और [[क्रिया]] के कई तरह से शब्द-रूप बनाये जाते हैं, जो व्याकरणिक अर्थ प्रदान करते हैं। अधिकांश शब्द-रूप मूलशब्द के अन्त में प्रत्यय लगाकर बनाये जाते हैं। इस तरह ये कहा जा सकता है कि संस्कृत एक बहिर्मुखी-अन्त-श्लिष्टयोगात्मक भाषा है। संस्कृत के व्याकरण को वागीश शास्त्री ने वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया है।
== ध्वनि-तन्त्र और लिपि ==
संस्कृत भारत की कई लिपियों में लिखी जाती रही है, लेकिन आधुनिक युग में '''[[देवनागरी लिपि]]''' के साथ इसका विशेष संबंध है। देवनागरी लिपि वास्तव में संस्कृत के लिए ही बनी है, इसलिए इसमें हर एक चिह्न के लिए एक और केवल एक ही ध्वनि है। देवनागरी में १३ [[स्वर]] और ३३ [[व्यंजन]] हैं। देवनागरी से [[रोमन लिपि]] में [[लिप्यन्तरण]] के लिए दो पद्धतियाँ अधिक प्रचलित हैं : IAST और ITRANS. शून्य, एक या अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक [[अक्षर]] बनता है।
<center><br />'''संस्कृत, क्षेत्रीय लिपियों में लिखी जाती रही है।'''</center>
=== स्वर ===
ये स्वर संस्कृत के लिए दिए गए हैं। हिन्दी में इनके उच्चारण थोड़े भिन्न होते हैं।
{|align="center" border="2"
! '''वर्णाक्षर'''||'''“प” के साथ मात्रा'''||'''[[IPA]] उच्चारण'''||"प्" के साथ उच्चारण||'''[[IAST]] समतुल्य'''||'''[[अंग्रेज़ी]] समतुल्य''' || हिन्दी में वर्णन
|-align="center"
| अ||प||{{IPA|/ ə /}}||{{IPA|/ pə /}}||a||लघु या दीर्घ [[:en:Schwa|Schwa]]: जैसे ''a'', '''a'''bove या '''a'''go में||[[मध्य प्रसृत स्वर]]
|-align="center"
| आ||पा||{{IPA|/ α: /}}||{{IPA|/ pα: /}}||ā||दीर्घ [[:en:Open back unrounded vowel|Open back unrounded vowel]]: जैसे ''a'', f'''a'''ther में||दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर
|-align="center"
| इ||पि||{{IPA|/ i /}}||{{IPA|/ pi /}}||i|| लघु [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', b'''i'''t में||ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ई||पी||{{IPA|/ i: /}}||{{IPA|/ pi: /}}||ī||दीर्घ [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', mach'''i'''ne में||दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| उ||पु||{{IPA|/ u /}}||{{IPA|/ pu /}}||u|| लघु [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''u'', p'''u'''t में||ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ऊ||पू||{{IPA|/ u: /}}||{{IPA|/ pu: /}}||ū||दीर्घ [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''oo'', sch'''oo'''l में||दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ए||पे||{{IPA|/ e: /}}||{{IPA|/ pe: /}}||e||दीर्घ [[:en:close-mid front unrounded vowel|close-mid front unrounded vowel]]: जैसे ''a'' in g'''a'''me (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ऐ||पै||{{IPA|/ ai /}}||{{IPA|/ pai /}}||ai||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ei'', h'''ei'''ght में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
| ओ||पो||{{IPA|/ ο: /}}||{{IPA|/ pο: /}}||o||दीर्घ [[:en:close-mid back rounded vowel|close-mid back rounded vowel]]: जैसे ''o'', t'''o'''ne (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| औ||पौ||{{IPA|/ au /}}||{{IPA|/ pau /}}||au||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ou'', h'''ou'''se में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
|-
|}
संस्कृत में '''ऐ''' दो स्वरों का युग्म होता है और "अ-इ" या "आ-इ" की तरह बोला जाता है। इसी तरह '''औ''' "अ-उ" या "आ-उ" की तरह बोला जाता है।
इसके अलावा निम्नलिखित वर्ण भी स्वर माने जाते हैं :
* '''ऋ''' -- वर्तमान में, स्थानीय भाषाओं के प्रभाव से इसका अशुद्ध उच्चारण किया जाता है। आधुनिक हिन्दी में "रि" की तरह तथा मराठी में "रु" की तरह किया जाता है ।
* '''ॠ''' -- केवल संस्कृत में (दीर्घ ऋ)
* '''ऌ''' -- केवल संस्कृत में (syllabic retroflex l)
* '''अं''' -- न् , म् , ङ् , ञ् , ण् और ं के लिए या स्वर का नासिकीकरण करने के लिए
* '''अँ''' -- स्वर का नासिकीकरण करने के लिए (संस्कृत में नहीं उपयुक्त होता)
* '''अः''' -- अघोष "ह्" (निःश्वास) के लिए
=== '''व्यंजन''' ===
जब कोई स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर 'अ' माना जाता है। स्वर के न होने को [[हलन्त्]] अथवा [[विराम]] से दर्शाया जाता है। जैसे कि क् ख् ग् घ्।
{|border="2"
|align="center" colspan="6"|'''स्पर्श'''
|-
!align="center" rowspan="2"|
!align="center" colspan="2"|[[अघोष व्यंजन|अघोष]]
!align="center" colspan="2"|[[घोष व्यंजन|घोष]]
!align="center" rowspan="2"|[[नासिक्य]]
|-
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
|-align="center"
|[[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठ्य]]
|क {{IPA|/ kə /}}<br />k; अंग्रेजी: s'''k'''ip
|ख {{IPA|/ k<sup>h</sup>ə /}}<br />kh; अंग्रेजी: '''c'''at
|ग {{IPA|/ gə /}}<br />g; अंग्रेजी: '''g'''ame
|घ {{IPA|/ g<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />gh; महाप्राण /g/
|ङ {{IPA|/ ŋə /}}<br />n; अंग्रेजी: ri'''ng'''
|-align="center"
|[[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
|च {{IPA|/ cə / ''or'' / tʃə /}}<br />ch; अंग्रेजी: '''ch'''at
|छ {{IPA|/ c<sup>h</sup>ə / ''or'' /tʃ<sup>h</sup>ə/}}<br />chh; महाप्राण /c/
|ज {{IPA|/ ɟə / ''or'' / dʒə /}}<br />j; अंग्रेजी: '''j'''am
|झ {{IPA|/ ɟ<sup>ɦ</sup>ə / ''or'' / dʒ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />jh; महाप्राण {{IPA|/ɟ/}}
|ञ {{IPA|/ ɲə /}}<br />n; अंग्रेजी: fi'''n'''ch
|-align="center"
|[[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
|ट {{IPA|/ ʈə /}}<br />t; अमेरिकी अंग्रेजी:: hur'''t'''ing
|ठ {{IPA|/ ʈ<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/ʈ/}}
|ड {{IPA|/ ɖə /}}<br />d; अमेरिकी अंग्रेजी:: mur'''d'''er
|ढ {{IPA|/ ɖ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/ɖ/}}
|ण {{IPA|/ ɳə /}}<br />n; अमेरिकी अंग्रेज़ी:: hu'''n'''ter
|-align="center"
|[[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]
|त {{IPA|/ t̪ə /}}<br />t; स्पैनिश: '''t'''oma'''t'''e
|थ {{IPA|/ t̪<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/t̪/}}
|द {{IPA|/ d̪ə /}}<br />d; स्पैनिश: '''d'''on'''d'''e
|ध {{IPA|/ d̪<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/d̪/}}
|न {{IPA|/ nə /}}<br />n; अंग्रेज़ी: '''n'''ame
|-align="center"
|[[ओष्ठ्य व्यंजन|ओष्ठ्य]]
|प {{IPA|/ pə /}}<br />p; अंग्रेज़ी: s'''p'''in
|फ {{IPA|/ p<sup>h</sup>ə /}}<br />ph; अंग्रेज़ी: '''p'''it
|ब {{IPA|/ bə /}}<br />b; अंग्रेज़ी: '''b'''one
|भ {{IPA|/ b<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />bh; महाप्राण /b/
|म {{IPA|/ mə /}}<br />m; अंग्रेज़ी: '''m'''ine
|-
|}
{|border="2"
|align="center" colspan="5"|'''स्पर्शरहित'''
|-
!
![[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
![[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
![[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]/<br />[[वर्त्स्य व्यंजन|वर्त्स्य]]
![[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठोष्ठ्य]]/<br />[[काकल्य व्यंजन|काकल्य]]
|-align="center"
|[[अन्तस्थ]]
|य {{IPA|/ jə /}}<br />y; अंग्रेज़ी: '''y'''ou
|र {{IPA|/ rə /}}<br />r; स्कॉटिश अंग्रेज़ी: t'''r'''ip
|ल {{IPA|/ lə /}}<br />l; अंग्रेजी: '''l'''ove
|व {{IPA|/ ʋə /}}<br />v; अंग्रेजी: '''v'''ase
|-align="center"
|[[ऊष्म व्यंजन|ऊष्म]]/<br />[[संघर्षी व्यंजन|संघर्षी]]
|श {{IPA|/ ʃə /}}<br />sh; अंग्रेज़ी: '''sh'''ip
|ष {{IPA|/ ʂə /}}<br />shh; मूर्धन्य {{IPA|/ʃ/}}
|स {{IPA|/ sə /}}<br />s; अंग्रेज़ी: '''s'''ame
|ह {{IPA|/ ɦə / or / hə /}}<br />h; अंग्रेज़ी: be'''h'''ind
|-
|}
;टिप्पणी :
* इनमें से '''ळ''' (मूर्धन्य पार्विक अन्तस्थ) एक अतिरिक्त व्यंजन है जिसका प्रयोग हिन्दी में नहीं होता है। मराठी और वैदिक संस्कृत में इसका प्रयोग किया जाता है।
* संस्कृत में [[ष|'''ष''' का उच्चारण]] ऐसे होता था : जीभ की नोंक को मूर्धा (मुँह की छत) की ओर उठाकर '''श''' जैसी ध्वनि करना। शुक्ल [[यजुर्वेद]] की माध्यंदिनि शाखा में ''कुछ वाक्यों'' में '''ष''' का उच्चारण '''ख''' की तरह करना मान्य था।
== संस्कृत भाषा की विशेषताएँ ==
* (१) संस्कृत, विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक ([[वेद]]) की भाषा है। इसलिए इसे '''विश्व की प्रथम भाषा''' मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है।<ref>Sagarika Dutt (2006). India in a Globalized World. Manchester University Press. p. 36. ISBN 978-1-84779-607-3.</ref><ref>Gabriel J. Gomes (2012). Discovering World Religions. iUniverse. p. 54. ISBN 978-1-4697-1037-2.</ref>
* (२) इसकी '''सुस्पष्ट व्याकरण''' और '''वर्णमाला की वैज्ञानिकता''' के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।
* (३) सर्वाधिक महत्वपूर्ण '''साहित्य की धनी''' होने से इसकी महत्ता भी निर्विवाद है।
* (४) इसे '''देवभाषा''' माना जाता है।
* (५) संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि '''संस्कारित भाषा''' भी है, अतः इसका नाम संस्कृत है। केवल संस्कृत ही एकमात्र भाषा है जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर '''नहीं''' किया गया है।
*'''संस्कृत > सम् + सुट् + 'कृ करणे' + क्त, ('सम्पर्युपेभ्यः करोतौ भूषणे' इस सूत्र से 'भूषण' अर्थ में 'सुट्' या सकार का आगम/ 'भूते' इस सूत्र से भूतकाल(past) को द्योतित करने के लिए संज्ञा अर्थ में क्त-प्रत्यय /कृ-धातु 'करणे' या 'Doing' अर्थ में)''' अर्थात् विभूूूूषित, समलंकृत(well-decorated) या संस्कारयुक्त (well-cutured)।
*
*
*संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि [[पाणिनि]], महर्षि [[कात्यायन]] और योगशास्त्र के प्रणेता महर्षि [[पतंजलि]] हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।
* (६) '''शब्द-रूप''' - विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक या कुछ ही रूप होते हैं, जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 27 रूप होते हैं।
* (७) '''द्विवचन''' - सभी भाषाओं में '''एकवचन''' और '''बहुवचन''' होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है।
* (८) '''सन्धि''' - संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है [[संधि (व्याकरण)|सन्धि]]। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जा है ।
* (९) इसे '''[[कम्प्यूटर]] और [[कृत्रिम बुद्धि]]''' के लिए सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।
* (१०) शोध से ऐसा पाया गया है कि संस्कृत पढ़ने से '''स्मरण शक्ति''' बढ़ती है।<ref>[https://www.jansatta.com/international/sanskrit-effect-claim-dr-james-hartzell-scientific-american-journal-memorizing-vedic-mantras-increases-memory-power/548094/ अमेरिकी पत्रिका (साइंटिफिक अमेरिकन) का दावा- संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से बढ़ती है याददाश्त] (जनवरी २०१८)</ref>
* (११) संस्कृत वाक्यों में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है। इससे अर्थ का अनर्थ होने की बहुत कम या कोई भी सम्भावना नहीं होती। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं और क्रम बदलने पर भी सही अर्थ सुरक्षित रहता है। जैसे - '''अहं गृहं गच्छामि''' या '''गच्छामि गृहं अहम्''' दोनो ही ठीक हैं।
* (१२) संस्कृत विश्व की सर्वाधिक 'पूर्ण' (perfect) एवं तर्कसम्मत भाषा है।<ref>[https://ieeexplore.ieee.org/abstract/document/7724257/?reload=true Is Sanskrit the most suitable language for natural language processing?]</ref>
* (१३) संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं जो क्रमश: अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं। इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को [[गणित]], [[विज्ञान]] एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।
* (१४) संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरन्तर होती आ रही है। इसके कई लाख ग्रन्थों के पठन-पाठन और चिन्तन में भारतवर्ष के हजारों पुश्त तक के करोड़ों सर्वोत्तम मस्तिष्क दिन-रात लगे रहे हैं और आज भी लगे हुए हैं। पता नहीं कि संसार के किसी देश में इतने काल तक, इतनी दूरी तक व्याप्त, इतने उत्तम मस्तिष्क में विचरण करने वाली कोई भाषा है या नहीं। शायद नहीं है। दीर्घ कालखण्ड के बाद भी असंख्य प्राकृतिक तथा मानवीय आपदाओं (वैदेशिक आक्रमणों) को झेलते हुए आज भी '''३ करोड़''' से अधिक संस्कृत [[पाण्डुलिपि]]याँ विद्यमान हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पाण्डुलिपियों की सम्मिलित संख्या से भी १०० गुना अधिक है। निःसंदेह ही यह सम्पदा [[छापाखाना|छापाखाने]] के आविष्कार के पहले किसी भी संस्कृति द्वारा सृजित सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत है।<ref>[https://books.google.co.in/books?id=WdSR9OJ0kxYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Guide to OCR for Indic Scripts: Document Recognition and Retrieval] (edited by Venu Govindaraju, Srirangaraj Ranga Setlur)</ref>
* (१५) संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है एक संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, [[वसुधैव कुटुम्बकम्]] की भावना है।
== संस्कृत गिनती ==
{| class="wikitable"
|1. एकम्
|2. द्वे
|3. त्रीणि
|4. चत्वारि
|5. पञ्च
|6. षट्
|7. सप्त
|-
|8. अष्ट
|9. नव
|10. दश
|11. एकादश
|12. द्वादश
|13. त्रयोदश
|14. चतुर्दश
|-
|15. पंचदश
|16. षोडश
|17. सप्तदश
|18. अष्टादश
|19. एकोनविंशतिः
|20. विंशतिः
|
|}
== भारत और विश्व के लिए संस्कृत का महत्त्व ==
* संस्कृत कई भारतीय भाषाओं की जननी है। इनकी अधिकांश शब्दावली या तो संस्कृत से ली गई है या संस्कृत से प्रभावित है। पूरे भारत में संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन से भारतीय भाषाओं में अधिकाधिक एकरूपता आएगी जिससे भारतीय एकता बलवती होगी। यदि इच्छा-शक्ति हो तो संस्कृत को [[हिब्रू]] की भाँति पुनः प्रचलित भाषा भी बनाया जा सकता है।
* हिन्दू, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ संस्कृत में हैं।
* हिन्दुओं के सभी पूजा-पाठ और धार्मिक संस्कार की भाषा संस्कृत ही है।
* हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों के नाम भी संस्कृत पर आधारित होते हैं।
* भारतीय भाषाओं की [[तकनीकी शब्दावली]] भी संस्कृत से ही व्युत्पन्न की जाती है। [[भारतीय संविधान]] की धारा 343, धारा 348 (2) तथा 351 का सारांश यह है कि देवनागरी लिपि में लिखी और मूलत: संस्कृत से अपनी [[पारिभाषिक शब्दावली]] को लेने वाली हिन्दी [[राजभाषा]] है।
* संस्कृत, भारत को एकता के सूत्र में बाँधती है।
* संस्कृत का साहित्य अत्यन्त प्राचीन, विशाल और विविधतापूर्ण है। इसमें अध्यात्म, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान और साहित्य का खजाना है। इसके अध्ययन से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
* संस्कृत को कम्प्यूटर के लिए ([[कृत्रिम बुद्धि]] के लिए) सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।<ref>[https://medium.com/@dmitrypavluk/we-should-thank-sanskrit-for-the-21st-century-e771b6c12f14 We should thank Sanskrit for the 21st century]</ref>
==संस्कृत का अन्य भाषाओं पर प्रभाव==
संस्कृत भाषा के शब्द मूलत रूप से सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में हैं। सभी भारतीय भाषाओं में एकता की रक्षा संस्कृत के माध्यम से ही हो सकती है। [[मलयालम]], [[कन्नड]] और [[तेलुगु]] आदि दक्षिणात्य भाषाएं संस्कृत से बहुत प्रभावित हैं। यहाँ तक कि [[तमिल]] में भी संस्कृत के हजारों शब्द भरे पड़े हैं और मध्यकाल में संस्कृत का तमिल पर गहरा प्रभव पड़ा।<ref>[https://www.sas.upenn.edu/~vasur/Vasu_Renganathan_Trajectory_of_linguistic_changes_VIS_volume.pdf Tracing the Trajectory of Linguistic changes in Tamil: Mining the corpus of Tamil Texts]</ref>
विश्व की अनेकानेक भाषाओं पर संस्कृत ने गहरा प्रभाव डाला है।<ref>[https://www.thehindu.com/news/cities/mumbai/‘Sanskrit-has-had-profound-influence-on-world-languages’/article16689576.ece ‘Sanskrit has had profound influence on world languages’]</ref> संस्कृत भारोपीय भाषा परिवर में आती है और इस परिवार की भाषाओं से भी संस्कृत में बहुत सी समानता है। वैदिक संस्कृत और अवेस्ता (प्राचीन इरानी) में बहुत समानता है। भारत के पड़ोसी देशों की भाषाएँ [[सिंहल]], [[नेपाली]], [[म्यांमार भाषा]], [[थाई भाषा]], [[ख्मेर]]<ref>[https://www.softpowermag.com/sanskrits-influence-on-khmer/ Sanskrit’s Influence on Khmer]</ref> संस्कृत से प्रभावित हैं। बौद्ध धर्म का चीन ज्यों-ज्यों प्रसार हुआ वैसे वैसे पहली शताब्दी से दसवीं शताब्दी तक सैकड़ों संस्कृत ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ। इससे संस्कृत के हजरों शब्द चीनी भाषा में गए।<ref>{{Cite web |url=https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |title=Sanskrit had an influence on Chinese language |access-date=19 दिसंबर 2020 |archive-date=17 दिसंबर 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201217182406/https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |url-status=dead }}</ref> उत्तरी-पश्चिमी [[तिब्बत]] में तो अज से १००० वर्ष पहले तक संस्कृत की संस्कृति थी और वहाँ [[गान्धारी भाषा]] का प्रचलन था। <ref>[https://eurasiantimes.com/how-sanskrit-language-is-associated-with-the-tibetan-and-khotan-region/ How Sanskrit Language Is Associated With The Tibet and Xinjiang?]</ref>
<div align="center">
{| class="wikitable" width="60%" style="border:none;"
|+तत्सम-तद्भव-समान-शब्द
|-
!संस्कृत शब्द
![[हिन्दी]]
![[मलयालम]]
![[कन्नड]]
![[तेलुगु]]
![[ग्रीक]]
![[लैटिन]]
![[अंग्रेजी]]
![[जर्मन]]
![[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]
|-
! मातृ
|align="center"|माता
|align="center"|अम्मा
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|मातेर
|align="center"|मदर्
|align="center"|मुटेर
|मादर
|-
! पितृ/पितर
|align="center"|पिता
|align="center"|अच्चन्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|पातेर
|align="center"|फ़ाथर्
|align="center"|फ़ाटेर
|
|-
! दुहितृ
|align="center"|बेटी
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दाह्तर्
|align="center"|
|
|-
! भ्रातृ/भ्रातर
|align="center"| भाई
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|ब्रदर्
|align="center"|ब्रुडेर
|
|-
! पत्तनम्
|पत्तन
|align="center"|पट्टणम्
|
|
|
|
|टाउन
|align="center"|
|
|-
!वैधुर्यम्
|विधुर
|align="center"|वैडूर्यम्
|align="center"|वैडूर्यम्
|
|
|
|विजोवर्
|-
!सप्तन्
|align="center"|सात
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|सेप्तम्
|align="center"|सेव्हेन्
|align="center"|ज़ीबेन
|
|-
!अष्टौ
|align="center"|आठ
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|होक्तो
|align="center"|ओक्तो
|align="center"|ऐय्ट्
|align="center"|आख़्ट
|
|-
!नवन्
|align="center"|नौ
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|हेणेअ
|align="center"|नोवेम्
|align="center"|नायन्
|align="center"|नोएन
|
|-
! द्वारम्
|align="center"| द्वार
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दोर्
|align="center"|टोर
|
|-
!नालिकेरः
|align="center"| नारियल
|align="center"|नाळिकेरम्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|कोकोस्नुस्स
|
|-
! '''सम'''
|समान
|
|
|
|
|
|same
|
|
|-
!'''तात=पिता '''
|
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|Dad
|
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|-
!'''अहम्'''
|
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|I am
|
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|-
!'''स्मार्त'''
|
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|
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|Smart
|
|
|-
!'''पंडित'''
|पंडित/विशेषज्ञ
|
|
|
|
|
|Pundit
|
|
|}</div>
[[Image:IndoEuropeanTree.svg|center|thumb|600px|संस्कृत का [[प्राकृत]] भाषाओं से तथा [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|भारोपीय भाषाओं]] से सम्बन्ध]]
== संस्कृत साहित्य ==
{{मुख्य|संस्कृत साहित्य}}
देश, काल और विविधता की दृष्टि से संस्कृत साहित्य अत्यन्त विशाल है। इसे मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है- [[वैदिक साहित्य]] तथा शास्त्रीय साहित्य । आज से तीन-चार हजार वर्ष पहले रचित वैदिक साहित्य उपलब्ध होता है।
===संस्कृत ग्रन्थ===
{| class="wikitable" align=center style = " background: transparent; "
|+ परम्परानुसार संस्कृत साहित्य
|-style="text-align: center;"
! परम्परा
! संस्कृत ग्रन्थ, विधा श्रेणी
! उदाहरण
! सन्दर्भ
|-style="text-align: left;"
| rowspan="19"|हिन्दू
| धर्मग्रन्थ
| [[वेद]], [[उपनिषद]], [[आगम (हिन्दू)|आगम]], [[श्रीमद्भगवद्गीता|भागवद्गीता]]
|<ref>Jan Gonda (1975), Vedic literature (Saṃhitās and Brāhmaṇas), Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01603-5}}</ref><ref>Teun Goudriaan, Hindu Tantric and Śākta Literature, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-02091-1}}</ref>
|-
|भाषा, व्याकरण
|[[अष्टाध्यायी]], [[गणपाठ]], [[पदपाठ]], वार्त्तिक, [[महाभाष्य]], [[वाक्यपदीय]], फिट-सूत्र
|{{sfn|Dhanesh Jain|George Cardona|2007}}<ref>Hartmut Scharfe, A history of Indian literature. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>{{sfn|Keith|1996}}
|-
|सामान्य नियम एवं धार्मिक नियम
|धर्मसूत्र/धर्मशास्त्र,{{efn|ये विधि के ग्रन्थों के सामान्य नाम हैं।}} [[मनुस्मृति]]
|<ref>{{cite book |first1=J. |last1=Duncan |first2=M. |last2=Derrett |year=1978 |title=Dharmasastra and Juridical Literature: A history of Indian literature |editor-first=Jan |editor-last=Gonda |volume=4 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=3-447-01519-5}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 12}}
|-
|राजनीति, राजशास्त्र
|[[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |first=Patrick |last=Olivelle |title=King, Governance, and Law in Ancient India |url=https://archive.org/details/kinggovernancela0000kaua |date=31 January 2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |isbn=978-0-19-989182-5}}</ref>
|-
|कालगणना, गणित, तर्क
|[[कल्प (वेदाङ्ग)|कल्प]], [[ज्योतिष]], गणितशास्त्र, [[शुल्बसूत्र]], सिद्धान्त, [[आर्यभटीय]], दशगीतिकासूत्र, [[सिद्धान्तशिरोमणि]], [[गणितसारसङ्ग्रह]], [[बीजगणित (संस्कृत ग्रन्थ)|बीजगणितम्]] {{efn|an account of Indian algebra}}
|<ref>Kim Plofker (2009), ''[[Mathematics in India (book)|Mathematics in India]]'', Princeton University Press, {{ISBN|978-0-691-12067-6}}</ref><ref>{{cite book |first=David |last=Pingree |title=A Census of the Exact Sciences in Sanskrit |volume=1–5 |publisher=American Philosophical Society |isbn=978-0-87169-213-9}}</ref>
|-
|आयुर्विज्ञान, आयुर्वेद, स्वास्थ्य
|आयुर्वेद, [[सुश्रुतसंहिता]], [[चरकसंहिता]]
|<ref>{{cite book |first=M.S. |last=Valiathan |title=The Legacy of Caraka |url=https://archive.org/details/legacyofcaraka0000vali |year=2003 |publisher=Orient Blackswan |isbn=978-81-250-2505-4}}</ref><ref>{{cite book |first=Kenneth |last=Zysk |year= 1998|title=Medicine in the Veda |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-1401-1}}</ref>
|-
|कामशास्त्र
| [[कामसूत्र]], पञ्चसायक, रतिरहस्य, रतिमञ्जरी, अनङ्गरङ्ग, [[समयमातृका]]
|<ref>{{cite book |first=J.J. |last=Meyer |title=Sexual Life in Ancient India |date=22 February 2013 |volume=1 & 2 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-1-4826-1588-3}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 14}}
|-
|महाकाव्य
|[[रामायण]], [[महाभारत]]
|{{sfn|John L. Brockington|1998}}<ref>{{cite book |author=Sures Chandra Banerji |year=1989 |title=A Companion to Sanskrit Literature |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-0063-2 |pages=1–4, with a long list in Part II |url=https://books.google.com/books?id=JkOAEdIsdUsC |via=Google Books |quote=Spanning a period of over three thousand years; containing brief accounts of authors, works, characters, technical terms, geographical names, myths, [and] legends, [with] several appendices. }}</ref>
|-
|राजवंशीय काव्य
|[[रघुवंश]], [[कुमारसम्भव]]
|{{sfn|Keith|1996|§4}}
|-
|सुभाषित एवं शिक्षाप्रद साहित्य
|सुभाषित, नीतिशतक, बोधिचर्यावतार, शृंगार-ज्ञान-निर्णय, कलाविलास, चतुर्वर्गसङ्ग्रह, नीतिमञ्जरी, मुग्धोपदेश, सुभाषितरत्नसन्दोह, योगशास्त्र, शृंगार-वैराग्य-तरङ्गिणी
|<ref>{{cite book |first=Ludwik |last=Sternbach |year=1974 |title=Subhāṣita: Gnomic and didactic literature |url=https://archive.org/details/subhasitagnomicd0000ster |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01546-2}}</ref>
|-
|नाटक, नृत्य तथा अन्य कलाएँ
|[[नाट्यशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |url=https://archive.org/details/SanskritDrama-KeithA.Berriedale |title=The Sanskrit Drama |publisher=Oxford University Press |first=Keith A. |last=Berriedale |via=Archive.org}}</ref><ref>{{cite book |first1=Rachel |last1=Baumer |first2=James |last2=Brandon |year=1993 |title=Sanskrit Drama in Performance |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=81-208-0772-3}}</ref><ref>{{cite book |first=Mohan |last=Khokar |year=1981 |title=Traditions of Indian Classical Dance |publisher=Peter Owen Publishers |isbn=978-0-7206-0574-7}}</ref>
|-
|संगीत
|संगीतशास्त्र, [[संगीतरत्नाकर]], [[संगीत पारिजात]]
|<ref>{{cite book |first=E. |last=te Nijenhuis |author-link=Emmie te Nijenhuis |chapter=Musicological literature |series=A History of Indian Literature |volume=6 |title=Scientific and Technical Literature |id=Fasc. 1 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01831-9}}</ref><ref>Lewis Rowell, Music and Musical Thought in Early India, University of Chicago Press, {{ISBN|0-226-73033-6}}</ref>
|-
|काव्यशास्त्र
|काव्यशास्त्र
|<ref>Edwin Gerow, ''A history of Indian literature''. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>
|-
|मिथक
|पुराण
|<ref>Ludo Rocher (1986), ''The Puranas'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-02522-5}}</ref>
|-
|रहस्यमय अटकलें, दर्शन
|दर्शन, [[सांख्य]], [[योग दर्शन|योग]], [[न्याय दर्शन|न्याय]], [[वैशेषिक दर्शन|वैशेशिक]], [[मीमांसा]], [[वेदान्त]] [[वैष्णव]], [[शैव]], [[शाक्त]], [[स्मार्त]], आदि
|<ref>Karl Potter, ''The Encyclopedia of Indian Philosophies'', Volumes 1 through 27, Motilal Banarsidass, {{ISBN|81-208-0309-4}}</ref>
|-
| कृषि एवं भोजन
| कृषिशास्त्र, [[वृक्षायुर्वेद]]
| <ref>Gyula Wojtilla (2006), ''History of Kr̥ṣiśāstra'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-05306-8}}</ref>
|-
| डिजाइन, शिल्प, वास्तुशास्त्र
| शिल्पशास्त्र, [[समराङ्गणसूत्रधार]]
|<ref>{{cite book |first=P.K. |last=Acharya |year=1946 |url=https://archive.org/stream/encyclopaediaofh07achauoft#page/n9/mode/2up |title=An Encyclopedia of Hindu Architecture |publisher=Oxford University Press |volume=7}} Also see volumes 1–6.</ref><ref>[[Bruno Dagens]] (1995), Mayamata : An Indian Treatise on Housing Architecture and Iconography, {{ISBN|978-81-208-3525-2}}</ref>
|-
|मन्दिर, मूर्तिकला
|[[बृहत्संहिता]],
|<ref>Stella Kramrisch, ''Hindu Temple'', Vol. 1 and 2, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-81-208-0222-3}}</ref>
|-style="text-align: left;"
|-
|संस्कार
|[[गृह्यसूत्र]]
|<ref>Rajbali Pandey (2013), ''Hindu Saṁskāras: Socio-religious study of the Hindu sacraments'', 2nd Edition, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-8120803961}}</ref>
|-
| style="background: #ffad66;" |बौद्ध धर्म
| धर्मग्रन्थ, मठ-सम्बन्धी नियम
| [[त्रिपिटक]],{{efn|अधिकांश त्रिपिटक [[पालि]] भाषा में हैम किन्तु संस्कृत त्रिपितक ग्रन्थ भी प्राप्त हुए हैं।{{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}}} महायान सम्प्रदाय के ग्रन्थ, अन्य
| {{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}{{sfn|Eltschinger|2017}}{{sfn|Wayman|1965}}
|-style="text-align: left;"
| style="background: #ffad66;" |जैन धर्म
| धर्मशास्त्र, दर्शन
| [[तत्त्वार्थ सूत्र]], महापुराण एवं अन्य
| <ref>{{cite book |author=Paul Dundas |title=The Jains |url=https://books.google.com/books?id=X8iAAgAAQBAJ |year=2003 |publisher=Routledge |isbn=978-1-134-50165-6 |pages=68–76, 149, 307–310}}</ref><ref>{{cite book |author=Wendy Doniger |year=1993 |title=Purana Perennis: Reciprocity and transformation in Hindu and Jaina texts |url=https://books.google.com/books?id=-kZFzHCuiFAC |publisher=State University of New York Press |isbn=978-0-7914-1381-4 |pages=192–193}}</ref>
|}
इनके अतिरिक्त [[रसविद्या]], [[तंत्र साहित्य (भारतीय)|तंत्र साहित्य]], [[वैमानिक शास्त्र]] तथा अन्यान्य विषयों पर संस्कृत में ग्रन्थ रचे गये जिनमें से कुछ आज भी उपलब्ध हैं।
==शिक्षा एवं प्रचार-प्रसार==
[[चित्र:संस्कृत विभिन्न लिपियों में.png|"संस्कृतम्" शब्द विभिन्न लिपियों में लिखा हुआ।|200px|right]]
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] में संस्कृत आठवीं अनुसूची में सम्मिलित अन्य भाषाओं के साथ विराजमान है। [[त्रिभाषा सूत्र]] के अन्तर्गत संस्कृत भी आती है। [[हिन्दी]] एवं अन्य भारतीय भाषाओं की की [[वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग|वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली]] संस्कृत से निर्मित है।
[[भारत]] तथा अन्य देशों के कुछ संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची नीचे दी गयी है- (देखें, ''[[भारत स्थित संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची]]'')
{| class="wikitable"
|- style="background:#d3d3d3;"
! स्थापना वर्ष
! नाम
! स्थान
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1791
| align=left |[[सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वाराणसी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1876
| align=left |[[सद्विद्या पाठशाला]]
| align=left |[[मैसूर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1961
| align=left |[[कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[दरभंगा]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति]]
| align=left |[[तिरुपति]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1970
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1981
| align=left |[[श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[पुरी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1986
| align=left |[[नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नेपाल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1993
| align=left |[[श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[कालडी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1997
| align=left |[[कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नागपुर|रामटेक]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2001
| align=left |[[जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[जयपुर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2005
| align=left |[[श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वेरावल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2008
| align=left |[[महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[उज्जैन]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2011
| align=left |[[कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[बंगलुरु]]
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== यह भी देखिए ==
* [[वैदिक संस्कृत]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
* [[संस्कृत भाषा का इतिहास]]
* [[संस्कृत का पुनरुत्थान]]
'''संस्कृत के विकिपीडिया प्रकल्प'''
* [http://sa.wikipedia.org/ संस्कृत विकिपीडिया]
* [[wikt:संस्कृत|संस्कृत]] (संस्कृत विकोश:)
* [http://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D '''संस्कृत विकिस्रोतम्'''] (Sanskrit Wikisource)
* [http://sa.wikibooks.org/wiki/Main_Page '''संस्कृत विकि पुस्तकानि'''] (Sanskrit Wiki Books)
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.sanskrit.nic.in/hindiweb/index.htm राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081216021831/http://www.sanskrit.nic.in/ |date=16 दिसंबर 2008 }}
* [http://www.sanskrit.nic.in/Thesis_Modified/Thesis-E-H/H_f/myweb10/index.htm भारतीय विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर आधारित शोध प्रबन्धों की निर्देशिका] (राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान)
* [http://groups.google.com/group/samskrita संस्कृत गूगल समूह]
=== संस्कृत संसाधन ===
* [http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 हिन्दी-संस्कृत वार्तालाप पुस्तिका] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304224622/http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 |date=4 मार्च 2016 }} (केन्द्रीय हिन्दी संस्थान)
* [http://sanskrit.inria.fr/portal.html Links to Sanskrit resources]
* [http://www.sanskritweb.net/ Sankrit Web]
* [http://salrc.uchicago.edu/resources/fonts/available/sanskrit/ Sanskrit Fonts: South Asian Language and Resource Center - Sanskrit]
* [http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault Discover Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060507205151/http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault |date=7 मई 2006 }}
* [http://sanskritdocuments.org Sanskrit Documents]
* [http://sanskrit.safire.com/ Sanskrit Texts and Stotras]
* [http://www.omkarananda-ashram.org/Sanskrit/Itranslt.html Omkarananda Ashram's Sanskrit Page]
=== संस्कृत सामग्री ===
* [http://sanskritdocuments.org/ Sanskrit Documents]
*[https://sanskritslokas.info Sanskrit Slokas] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190527004913/https://sanskritslokas.info/ |date=27 मई 2019 }}
* [http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D सारस्वतसर्वस्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141202091841/http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D |date=2 दिसंबर 2014 }} (शब्दकोश, संस्कृत ग्रन्थों आदि का विशाल संग्रह)
* [http://sanskritvishvam.com/index.php संस्कृविश्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120619052439/http://sanskritvishvam.com/index.php |date=19 जून 2012 }}
* [http://sanskritworld.in/ Sanskrit World]
* [http://sanskrit.gde.to/all_sa/ संस्कृत के अनेकानेक ग्रन्थ, देवनागरी में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20031209030726/http://sanskrit.gde.to/all_sa/ |date=9 दिसंबर 2003 }}
* [http://indology.info/etexts/ Virtual e-Text Archive of Indic Texts] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071202233321/http://indology.info/etexts/ |date=2 दिसंबर 2007 }} (Indology page)
* [http://data.stonesutras.org/exist/apps/sarit/works/ SARIT] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150206032511/http://data.stonesutras.org/exist/apps/sarit/works/ |date=6 फ़रवरी 2015 }}
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{{भारत की भाषाएँ |state=autocollapse}}
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Pushkar Singh
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{{Infobox Language
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| foot_montage = (ऊपर) [[श्रीमद्भग्वद्गीता]] की १९वीं शताब्दी की एक पाण्डुलिपि<ref name="Mascaró2003">{{cite book |last=Mascaró|first=Juan|title=The Bhagavad Gita |url=https://books.google.com/books?id=UZEKghCNbVIC&pg=PT13|year=2003 |publisher=Penguin |isbn=978-0-14-044918-1 |pages=13 ff |quote=The Bhagawad Gita, an intensely spiritual work, that forms one of the cornerstones of the Hindu faith, and is also one of the masterpieces of Sanskrit poetry. (from the backcover)}}</ref> अनुमान है कि गीता की रचना ४०० ईसापूर्व से लेकर २०० ईसापूर्व में हुई थी।<ref>{{cite book |last=Besant |first=Annie (trans) |author-link=Annie Besant |title=The Bhagavad-gita; or, ''The Lord's Song'', with text in Devanagari, and English translation |url=https://en.wikisource.org/wiki/Bhagavad-Gita_(Besant_4th)/Discourse_1 |year=1922 |publisher=G. E. Natesan & Co. |location=Madras |quote=प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ २० ॥ <br /> Then, beholding the sons of Dhritarâshtra standing arrayed, and flight of missiles about to begin, ... the son of Pându, took up his bow,(20)<br /> हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते । अर्जुन उवाच । ...॥ २१ ॥ <br />And spake this word to Hrishîkesha, O Lord of Earth: Arjuna said: ...}}</ref><ref>{{cite book |last=Radhakrishnan |first=S. |author-link=Sarvepalli Radhakrishnan |title=The Bhagavadgītā: With an introductory essay, Sanskrit text, English translation, and notes |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113 |year=1948 |publisher=George Allen and Unwin Ltd. |location=London, UK |page=[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113/page/n83 86] |quote= ...'' pravyite Sastrasampate''<br /> ''dhanur udyamya pandavah'' (20) <br /> Then Arjuna, ... looked at the sons of Dhrtarastra drawn up in battle order; and as the flight of missiles (almost) started, he took up his bow.<br /> ''hystkesam tada vakyam''<br /> ''idam aha mahipate'' ... (21)<br /> And, O Lord of earth, he spoke this word to Hrsikesha (Krsna): ... }}</ref> (नीचे) [[कोलकाता|कलकता]] के संस्कृत कॉलेज के १७५वीं जयन्ती के अवसर पर भारत सरकार द्वारी जारी डाकटिकट। यह कॉलेज तीसरा सबसे पुराना कॉलेज है। १७९१ में स्थापित [[काशी संस्कृत कालेज]] सबसे पुराना महाविद्यालय है।
}}
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| imagecaption =
|region=[[भारत]], [[नेपाल]]
|speakers= १००४,१३५ (जनगणना के अनुसार।)<ref name="Census">{{cite web|url=http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement5.htm|title=Comparative speaker's strength of scheduled languages -1971, 1981, 1991 and 2001|work=Census of India, 2001|publisher=Office of the Registrar and Census Commissioner, भारत|accessdate=31 दिसम्बर 2009}}</ref>
|script=[[देवनागरी]] (वस्तुतः), अन्य [[ब्राह्मी]]–लिपि
|nation=भारतीय संविधान में अनुसूचित 22 भाषाओं में से एक।
|iso1=sa|iso2=san|iso3=san
|familycolor=Indo-European}}
'''संस्कृत''' (संस्कृत में : संस्कृतम्, {{IPA-sa|ˈsɐ̃skr̩tɐm}}) [[भारतीय उपमहाद्वीप]] की एक [[भाषा]] है। संस्कृत एक [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा]] है जो [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिंद-यूरोपीय भाषा]] परिवार की एक शाखा है।<ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/738404/the-old-vedic-language-had-its-origin-outside-the-subcontinent-but-not-sanskrit|title='The Old Vedic language had its origin outside the subcontinent. But not Sanskrit.'}}</ref> आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, [[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[बंगाली भाषा|बांग्ला]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[सिन्धी भाषा|सिन्धी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[नेपाली भाषा|नेपाली]], आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की [[रोमानी भाषा]] भी शामिल है। संस्कृत में [[वैदिक धर्म]] से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गए हैं। [[बौद्ध धर्म]] (विशेषकर महायान) तथा [[जैन धर्म|जैन मत]] के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर [[यज्ञ]] और [[पूजा]] संस्कृत में ही होती हैं।
संस्कृत का अर्थ है "''संस्कार की गयी'' " अर्थात "बदलाव की गयी", आधुनिक समय में संस्कृत भाषा [[देवनागरी]] लिपि में लिखी जाती है।
संस्कृत आमतौर पर कई पुरानी इंडो-आर्यन भाषाओं को जोड़ती है। इनमें से सबसे पुरातन ग्रंथ [[ऋग्वेद]] १,०२८ सूक्तों का एक संग्रह है जो १० मंडलों में विभाजित है। [[रामायण]] को सबसे प्राचीन महाकाव्य माना जाता है इसलिए [[वाल्मीकि]] को '''आदिकवि''' भी कहा जाता है। जबकि महाभारत विश्व का सबसे विस्तृत महाकाव्य है जो कि संस्कृत में ही है।
[[कालिदास]] के कई नाटक और महाकाव्य इसी भाषा में हैं। बुद्धचरितम् [[अश्वघोष]] ने संस्कृत में ही रचा। [[भास]], [[भारवि]], [[भवभूति]], [[माघ]] आदि ने अपनी रचनाएं इसी भाषा में की।
वेद वैदिक संस्कृत में रचित थे। हिंदू धर्म के उपनिषद्, स्मृतियां, पुराणादि संस्कृत में ही रचित हैं।
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] की [[आठवीं अनुसूची]] में संस्कृत को भी सम्मिलित किया गया है। यह [[उत्तराखण्ड]] और [[हिमाचल प्रदेश]] की आधिकारिक [[राजभाषा]] है। [[आकाशवाणी]] और [[दूरदर्शन]] से संस्कृत में समाचार प्रसारित किए जाते हैं। कतिपय वर्षों से डी. डी. न्यूज (DD News) द्वारा '''वार्तावली''' नामक अर्धहोरावधि का संस्कृत-कार्यक्रम भी प्रसारित किया जा रहा है, जो हिन्दी चलचित्र गीतों के संस्कृतानुवाद, सरल-संस्कृत-शिक्षण, संस्कृत-वार्ता और महापुरुषों की संस्कृत जीवनवृत्तियों, सुभाषित-रत्नों आदि के कारण अनुदिन लोकप्रियता को प्राप्त हो रहा है।
== इतिहास ==
'''{{मुख्य|संस्कृत भाषा का इतिहास}}'''
[[चित्र:Global distribution of Sanskrit language presence, texts and inscriptions dated between 300 and 1800 CE.svg|right|thumb|350px|संस्कृत भाषा का वैश्विक विस्तृति : ३०० ईसापूर्व से लेकर १८०० ई तक की कालावधि में रचित संस्कृत ग्रन्थ एवं संस्कृत अभिलेखों की प्राप्ति के क्षेत्र]]
संस्कृत का इतिहास बहुत पुराना है। वर्तमान समय में प्राप्त सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ [[ॠग्वेद]] है जो कम से कम ढाई हजार ईसापूर्व की रचना है।
== व्याकरण ==
{{मुख्य|संस्कृत व्याकरण}}
{{मुख्य|संस्कृत का व्याकरण}}
संस्कृत भाषा का [[व्याकरण]] अत्यन्त परिमार्जित एवं [[विज्ञान|वैज्ञानिक]] है। बहुत प्राचीन काल से ही अनेक व्याकरणाचार्यों ने संस्कृत व्याकरण पर बहुत कुछ लिखा है। किन्तु [[पाणिनि]] का संस्कृत व्याकरण पर किया गया कार्य सबसे प्रसिद्ध है। उनका [[अष्टाध्यायी]] किसी भी भाषा के व्याकरण का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
संस्कृत में [[संज्ञा]], [[सर्वनाम]], [[विशेषण]] और [[क्रिया]] के कई तरह से शब्द-रूप बनाये जाते हैं, जो व्याकरणिक अर्थ प्रदान करते हैं। अधिकांश शब्द-रूप मूलशब्द के अन्त में प्रत्यय लगाकर बनाये जाते हैं। इस तरह ये कहा जा सकता है कि संस्कृत एक बहिर्मुखी-अन्त-श्लिष्टयोगात्मक भाषा है। संस्कृत के व्याकरण को वागीश शास्त्री ने वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया है।
== ध्वनि-तन्त्र और लिपि ==
संस्कृत भारत की कई लिपियों में लिखी जाती रही है, लेकिन आधुनिक युग में '''[[देवनागरी लिपि]]''' के साथ इसका विशेष संबंध है। देवनागरी लिपि वास्तव में संस्कृत के लिए ही बनी है, इसलिए इसमें हर एक चिह्न के लिए एक और केवल एक ही ध्वनि है। देवनागरी में १३ [[स्वर]] और ३३ [[व्यंजन]] हैं। देवनागरी से [[रोमन लिपि]] में [[लिप्यन्तरण]] के लिए दो पद्धतियाँ अधिक प्रचलित हैं : IAST और ITRANS. शून्य, एक या अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक [[अक्षर]] बनता है।
<center><br />'''संस्कृत, क्षेत्रीय लिपियों में लिखी जाती रही है।'''</center>
=== स्वर ===
ये स्वर संस्कृत के लिए दिए गए हैं। हिन्दी में इनके उच्चारण थोड़े भिन्न होते हैं।
{|align="center" border="2"
! '''वर्णाक्षर'''||'''“प” के साथ मात्रा'''||'''[[IPA]] उच्चारण'''||"प्" के साथ उच्चारण||'''[[IAST]] समतुल्य'''||'''[[अंग्रेज़ी]] समतुल्य''' || हिन्दी में वर्णन
|-align="center"
| अ||प||{{IPA|/ ə /}}||{{IPA|/ pə /}}||a||लघु या दीर्घ [[:en:Schwa|Schwa]]: जैसे ''a'', '''a'''bove या '''a'''go में||[[मध्य प्रसृत स्वर]]
|-align="center"
| आ||पा||{{IPA|/ α: /}}||{{IPA|/ pα: /}}||ā||दीर्घ [[:en:Open back unrounded vowel|Open back unrounded vowel]]: जैसे ''a'', f'''a'''ther में||दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर
|-align="center"
| इ||पि||{{IPA|/ i /}}||{{IPA|/ pi /}}||i|| लघु [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', b'''i'''t में||ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ई||पी||{{IPA|/ i: /}}||{{IPA|/ pi: /}}||ī||दीर्घ [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', mach'''i'''ne में||दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| उ||पु||{{IPA|/ u /}}||{{IPA|/ pu /}}||u|| लघु [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''u'', p'''u'''t में||ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ऊ||पू||{{IPA|/ u: /}}||{{IPA|/ pu: /}}||ū||दीर्घ [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''oo'', sch'''oo'''l में||दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ए||पे||{{IPA|/ e: /}}||{{IPA|/ pe: /}}||e||दीर्घ [[:en:close-mid front unrounded vowel|close-mid front unrounded vowel]]: जैसे ''a'' in g'''a'''me (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ऐ||पै||{{IPA|/ ai /}}||{{IPA|/ pai /}}||ai||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ei'', h'''ei'''ght में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
| ओ||पो||{{IPA|/ ο: /}}||{{IPA|/ pο: /}}||o||दीर्घ [[:en:close-mid back rounded vowel|close-mid back rounded vowel]]: जैसे ''o'', t'''o'''ne (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| औ||पौ||{{IPA|/ au /}}||{{IPA|/ pau /}}||au||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ou'', h'''ou'''se में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
|-
|}
संस्कृत में '''ऐ''' दो स्वरों का युग्म होता है और "अ-इ" या "आ-इ" की तरह बोला जाता है। इसी तरह '''औ''' "अ-उ" या "आ-उ" की तरह बोला जाता है।
इसके अलावा निम्नलिखित वर्ण भी स्वर माने जाते हैं :
* '''ऋ''' -- वर्तमान में, स्थानीय भाषाओं के प्रभाव से इसका अशुद्ध उच्चारण किया जाता है। आधुनिक हिन्दी में "रि" की तरह तथा मराठी में "रु" की तरह किया जाता है ।
* '''ॠ''' -- केवल संस्कृत में (दीर्घ ऋ)
* '''ऌ''' -- केवल संस्कृत में (syllabic retroflex l)
* '''अं''' -- न् , म् , ङ् , ञ् , ण् और ं के लिए या स्वर का नासिकीकरण करने के लिए
* '''अँ''' -- स्वर का नासिकीकरण करने के लिए (संस्कृत में नहीं उपयुक्त होता)
* '''अः''' -- अघोष "ह्" (निःश्वास) के लिए
=== '''व्यंजन''' ===
जब कोई स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर 'अ' माना जाता है। स्वर के न होने को [[हलन्त्]] अथवा [[विराम]] से दर्शाया जाता है। जैसे कि क् ख् ग् घ्।
{|border="2"
|align="center" colspan="6"|'''स्पर्श'''
|-
!align="center" rowspan="2"|
!align="center" colspan="2"|[[अघोष व्यंजन|अघोष]]
!align="center" colspan="2"|[[घोष व्यंजन|घोष]]
!align="center" rowspan="2"|[[नासिक्य]]
|-
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
|-align="center"
|[[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठ्य]]
|क {{IPA|/ kə /}}<br />k; अंग्रेजी: s'''k'''ip
|ख {{IPA|/ k<sup>h</sup>ə /}}<br />kh; अंग्रेजी: '''c'''at
|ग {{IPA|/ gə /}}<br />g; अंग्रेजी: '''g'''ame
|घ {{IPA|/ g<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />gh; महाप्राण /g/
|ङ {{IPA|/ ŋə /}}<br />n; अंग्रेजी: ri'''ng'''
|-align="center"
|[[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
|च {{IPA|/ cə / ''or'' / tʃə /}}<br />ch; अंग्रेजी: '''ch'''at
|छ {{IPA|/ c<sup>h</sup>ə / ''or'' /tʃ<sup>h</sup>ə/}}<br />chh; महाप्राण /c/
|ज {{IPA|/ ɟə / ''or'' / dʒə /}}<br />j; अंग्रेजी: '''j'''am
|झ {{IPA|/ ɟ<sup>ɦ</sup>ə / ''or'' / dʒ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />jh; महाप्राण {{IPA|/ɟ/}}
|ञ {{IPA|/ ɲə /}}<br />n; अंग्रेजी: fi'''n'''ch
|-align="center"
|[[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
|ट {{IPA|/ ʈə /}}<br />t; अमेरिकी अंग्रेजी:: hur'''t'''ing
|ठ {{IPA|/ ʈ<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/ʈ/}}
|ड {{IPA|/ ɖə /}}<br />d; अमेरिकी अंग्रेजी:: mur'''d'''er
|ढ {{IPA|/ ɖ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/ɖ/}}
|ण {{IPA|/ ɳə /}}<br />n; अमेरिकी अंग्रेज़ी:: hu'''n'''ter
|-align="center"
|[[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]
|त {{IPA|/ t̪ə /}}<br />t; स्पैनिश: '''t'''oma'''t'''e
|थ {{IPA|/ t̪<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/t̪/}}
|द {{IPA|/ d̪ə /}}<br />d; स्पैनिश: '''d'''on'''d'''e
|ध {{IPA|/ d̪<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/d̪/}}
|न {{IPA|/ nə /}}<br />n; अंग्रेज़ी: '''n'''ame
|-align="center"
|[[ओष्ठ्य व्यंजन|ओष्ठ्य]]
|प {{IPA|/ pə /}}<br />p; अंग्रेज़ी: s'''p'''in
|फ {{IPA|/ p<sup>h</sup>ə /}}<br />ph; अंग्रेज़ी: '''p'''it
|ब {{IPA|/ bə /}}<br />b; अंग्रेज़ी: '''b'''one
|भ {{IPA|/ b<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />bh; महाप्राण /b/
|म {{IPA|/ mə /}}<br />m; अंग्रेज़ी: '''m'''ine
|-
|}
{|border="2"
|align="center" colspan="5"|'''स्पर्शरहित'''
|-
!
![[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
![[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
![[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]/<br />[[वर्त्स्य व्यंजन|वर्त्स्य]]
![[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठोष्ठ्य]]/<br />[[काकल्य व्यंजन|काकल्य]]
|-align="center"
|[[अन्तस्थ]]
|य {{IPA|/ jə /}}<br />y; अंग्रेज़ी: '''y'''ou
|र {{IPA|/ rə /}}<br />r; स्कॉटिश अंग्रेज़ी: t'''r'''ip
|ल {{IPA|/ lə /}}<br />l; अंग्रेजी: '''l'''ove
|व {{IPA|/ ʋə /}}<br />v; अंग्रेजी: '''v'''ase
|-align="center"
|[[ऊष्म व्यंजन|ऊष्म]]/<br />[[संघर्षी व्यंजन|संघर्षी]]
|श {{IPA|/ ʃə /}}<br />sh; अंग्रेज़ी: '''sh'''ip
|ष {{IPA|/ ʂə /}}<br />shh; मूर्धन्य {{IPA|/ʃ/}}
|स {{IPA|/ sə /}}<br />s; अंग्रेज़ी: '''s'''ame
|ह {{IPA|/ ɦə / or / hə /}}<br />h; अंग्रेज़ी: be'''h'''ind
|-
|}
;टिप्पणी :
* इनमें से '''ळ''' (मूर्धन्य पार्विक अन्तस्थ) एक अतिरिक्त व्यंजन है जिसका प्रयोग हिन्दी में नहीं होता है। मराठी और वैदिक संस्कृत में इसका प्रयोग किया जाता है।
* संस्कृत में [[ष|'''ष''' का उच्चारण]] ऐसे होता था : जीभ की नोंक को मूर्धा (मुँह की छत) की ओर उठाकर '''श''' जैसी ध्वनि करना। शुक्ल [[यजुर्वेद]] की माध्यंदिनि शाखा में ''कुछ वाक्यों'' में '''ष''' का उच्चारण '''ख''' की तरह करना मान्य था।
== संस्कृत भाषा की विशेषताएँ ==
* (१) संस्कृत, विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक ([[वेद]]) की भाषा है। इसलिए इसे '''विश्व की प्रथम भाषा''' मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है।<ref>Sagarika Dutt (2006). India in a Globalized World. Manchester University Press. p. 36. ISBN 978-1-84779-607-3.</ref><ref>Gabriel J. Gomes (2012). Discovering World Religions. iUniverse. p. 54. ISBN 978-1-4697-1037-2.</ref>
* (२) इसकी '''सुस्पष्ट व्याकरण''' और '''वर्णमाला की वैज्ञानिकता''' के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।
* (३) सर्वाधिक महत्वपूर्ण '''साहित्य की धनी''' होने से इसकी महत्ता भी निर्विवाद है।
* (४) इसे '''देवभाषा''' माना जाता है।
* (५) संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि '''संस्कारित भाषा''' भी है, अतः इसका नाम संस्कृत है। केवल संस्कृत ही एकमात्र भाषा है जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर '''नहीं''' किया गया है।
*'''संस्कृत > सम् + सुट् + 'कृ करणे' + क्त, ('सम्पर्युपेभ्यः करोतौ भूषणे' इस सूत्र से 'भूषण' अर्थ में 'सुट्' या सकार का आगम/ 'भूते' इस सूत्र से भूतकाल(past) को द्योतित करने के लिए संज्ञा अर्थ में क्त-प्रत्यय /कृ-धातु 'करणे' या 'Doing' अर्थ में)''' अर्थात् विभूूूूषित, समलंकृत(well-decorated) या संस्कारयुक्त (well-cutured)।
*
*
*संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि [[पाणिनि]], महर्षि [[कात्यायन]] और योगशास्त्र के प्रणेता महर्षि [[पतंजलि]] हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।
* (६) '''शब्द-रूप''' - विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक या कुछ ही रूप होते हैं, जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 27 रूप होते हैं।
* (७) '''द्विवचन''' - सभी भाषाओं में '''एकवचन''' और '''बहुवचन''' होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है।
* (८) '''सन्धि''' - संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है [[संधि (व्याकरण)|सन्धि]]। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जा है ।
* (९) इसे '''[[कम्प्यूटर]] और [[कृत्रिम बुद्धि]]''' के लिए सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।
* (१०) शोध से ऐसा पाया गया है कि संस्कृत पढ़ने से '''स्मरण शक्ति''' बढ़ती है।<ref>[https://www.jansatta.com/international/sanskrit-effect-claim-dr-james-hartzell-scientific-american-journal-memorizing-vedic-mantras-increases-memory-power/548094/ अमेरिकी पत्रिका (साइंटिफिक अमेरिकन) का दावा- संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से बढ़ती है याददाश्त] (जनवरी २०१८)</ref>
* (११) संस्कृत वाक्यों में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है। इससे अर्थ का अनर्थ होने की बहुत कम या कोई भी सम्भावना नहीं होती। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं और क्रम बदलने पर भी सही अर्थ सुरक्षित रहता है। जैसे - '''अहं गृहं गच्छामि''' या '''गच्छामि गृहं अहम्''' दोनो ही ठीक हैं।
* (१२) संस्कृत विश्व की सर्वाधिक 'पूर्ण' (perfect) एवं तर्कसम्मत भाषा है।<ref>[https://ieeexplore.ieee.org/abstract/document/7724257/?reload=true Is Sanskrit the most suitable language for natural language processing?]</ref>
* (१३) संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं जो क्रमश: अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं। इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को [[गणित]], [[विज्ञान]] एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।
* (१४) संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरन्तर होती आ रही है। इसके कई लाख ग्रन्थों के पठन-पाठन और चिन्तन में भारतवर्ष के हजारों पुश्त तक के करोड़ों सर्वोत्तम मस्तिष्क दिन-रात लगे रहे हैं और आज भी लगे हुए हैं। पता नहीं कि संसार के किसी देश में इतने काल तक, इतनी दूरी तक व्याप्त, इतने उत्तम मस्तिष्क में विचरण करने वाली कोई भाषा है या नहीं। शायद नहीं है। दीर्घ कालखण्ड के बाद भी असंख्य प्राकृतिक तथा मानवीय आपदाओं (वैदेशिक आक्रमणों) को झेलते हुए आज भी '''३ करोड़''' से अधिक संस्कृत [[पाण्डुलिपि]]याँ विद्यमान हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पाण्डुलिपियों की सम्मिलित संख्या से भी १०० गुना अधिक है। निःसंदेह ही यह सम्पदा [[छापाखाना|छापाखाने]] के आविष्कार के पहले किसी भी संस्कृति द्वारा सृजित सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत है।<ref>[https://books.google.co.in/books?id=WdSR9OJ0kxYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Guide to OCR for Indic Scripts: Document Recognition and Retrieval] (edited by Venu Govindaraju, Srirangaraj Ranga Setlur)</ref>
* (१५) संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है एक संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, [[वसुधैव कुटुम्बकम्]] की भावना है।
== संस्कृत गिनती ==
{| class="wikitable"
|1. एकम्
|2. द्वे
|3. त्रीणि
|4. चत्वारि
|5. पञ्च
|6. षट्
|7. सप्त
|-
|8. अष्ट
|9. नव
|10. दश
|11. एकादश
|12. द्वादश
|13. त्रयोदश
|14. चतुर्दश
|-
|15. पंचदश
|16. षोडश
|17. सप्तदश
|18. अष्टादश
|19. एकोनविंशतिः
|20. विंशतिः
|
|}
== भारत और विश्व के लिए संस्कृत का महत्त्व ==
* संस्कृत कई भारतीय भाषाओं की जननी है। इनकी अधिकांश शब्दावली या तो संस्कृत से ली गई है या संस्कृत से प्रभावित है। पूरे भारत में संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन से भारतीय भाषाओं में अधिकाधिक एकरूपता आएगी जिससे भारतीय एकता बलवती होगी। यदि इच्छा-शक्ति हो तो संस्कृत को [[हिब्रू]] की भाँति पुनः प्रचलित भाषा भी बनाया जा सकता है।
* हिन्दू, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ संस्कृत में हैं।
* हिन्दुओं के सभी पूजा-पाठ और धार्मिक संस्कार की भाषा संस्कृत ही है।
* हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों के नाम भी संस्कृत पर आधारित होते हैं।
* भारतीय भाषाओं की [[तकनीकी शब्दावली]] भी संस्कृत से ही व्युत्पन्न की जाती है। [[भारतीय संविधान]] की धारा 343, धारा 348 (2) तथा 351 का सारांश यह है कि देवनागरी लिपि में लिखी और मूलत: संस्कृत से अपनी [[पारिभाषिक शब्दावली]] को लेने वाली हिन्दी [[राजभाषा]] है।
* संस्कृत, भारत को एकता के सूत्र में बाँधती है।
* संस्कृत का साहित्य अत्यन्त प्राचीन, विशाल और विविधतापूर्ण है। इसमें अध्यात्म, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान और साहित्य का खजाना है। इसके अध्ययन से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
* संस्कृत को कम्प्यूटर के लिए ([[कृत्रिम बुद्धि]] के लिए) सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।<ref>[https://medium.com/@dmitrypavluk/we-should-thank-sanskrit-for-the-21st-century-e771b6c12f14 We should thank Sanskrit for the 21st century]</ref>
==संस्कृत का अन्य भाषाओं पर प्रभाव==
संस्कृत भाषा के शब्द मूलत रूप से सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में हैं। सभी भारतीय भाषाओं में एकता की रक्षा संस्कृत के माध्यम से ही हो सकती है। [[मलयालम]], [[कन्नड]] और [[तेलुगु]] आदि दक्षिणात्य भाषाएं संस्कृत से बहुत प्रभावित हैं। यहाँ तक कि [[तमिल]] में भी संस्कृत के हजारों शब्द भरे पड़े हैं और मध्यकाल में संस्कृत का तमिल पर गहरा प्रभव पड़ा।<ref>[https://www.sas.upenn.edu/~vasur/Vasu_Renganathan_Trajectory_of_linguistic_changes_VIS_volume.pdf Tracing the Trajectory of Linguistic changes in Tamil: Mining the corpus of Tamil Texts]</ref>
विश्व की अनेकानेक भाषाओं पर संस्कृत ने गहरा प्रभाव डाला है।<ref>[https://www.thehindu.com/news/cities/mumbai/‘Sanskrit-has-had-profound-influence-on-world-languages’/article16689576.ece ‘Sanskrit has had profound influence on world languages’]</ref> संस्कृत भारोपीय भाषा परिवर में आती है और इस परिवार की भाषाओं से भी संस्कृत में बहुत सी समानता है। वैदिक संस्कृत और अवेस्ता (प्राचीन इरानी) में बहुत समानता है। भारत के पड़ोसी देशों की भाषाएँ [[सिंहल]], [[नेपाली]], [[म्यांमार भाषा]], [[थाई भाषा]], [[ख्मेर]]<ref>[https://www.softpowermag.com/sanskrits-influence-on-khmer/ Sanskrit’s Influence on Khmer]</ref> संस्कृत से प्रभावित हैं। बौद्ध धर्म का चीन ज्यों-ज्यों प्रसार हुआ वैसे वैसे पहली शताब्दी से दसवीं शताब्दी तक सैकड़ों संस्कृत ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ। इससे संस्कृत के हजरों शब्द चीनी भाषा में गए।<ref>{{Cite web |url=https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |title=Sanskrit had an influence on Chinese language |access-date=19 दिसंबर 2020 |archive-date=17 दिसंबर 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201217182406/https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |url-status=dead }}</ref> उत्तरी-पश्चिमी [[तिब्बत]] में तो अज से १००० वर्ष पहले तक संस्कृत की संस्कृति थी और वहाँ [[गान्धारी भाषा]] का प्रचलन था। <ref>[https://eurasiantimes.com/how-sanskrit-language-is-associated-with-the-tibetan-and-khotan-region/ How Sanskrit Language Is Associated With The Tibet and Xinjiang?]</ref>
<div align="center">
{| class="wikitable" width="60%" style="border:none;"
|+तत्सम-तद्भव-समान-शब्द
|-
!संस्कृत शब्द
![[हिन्दी]]
![[मलयालम]]
![[कन्नड]]
![[तेलुगु]]
![[ग्रीक]]
![[लैटिन]]
![[अंग्रेजी]]
![[जर्मन]]
![[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]
|-
! मातृ
|align="center"|माता
|align="center"|अम्मा
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|मातेर
|align="center"|मदर्
|align="center"|मुटेर
|मादर
|-
! पितृ/पितर
|align="center"|पिता
|align="center"|अच्चन्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|पातेर
|align="center"|फ़ाथर्
|align="center"|फ़ाटेर
|
|-
! दुहितृ
|align="center"|बेटी
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दाह्तर्
|align="center"|
|
|-
! भ्रातृ/भ्रातर
|align="center"| भाई
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|ब्रदर्
|align="center"|ब्रुडेर
|
|-
! पत्तनम्
|पत्तन
|align="center"|पट्टणम्
|
|
|
|
|टाउन
|align="center"|
|
|-
!वैधुर्यम्
|विधुर
|align="center"|वैडूर्यम्
|align="center"|वैडूर्यम्
|
|
|
|विजोवर्
|-
!सप्तन्
|align="center"|सात
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|सेप्तम्
|align="center"|सेव्हेन्
|align="center"|ज़ीबेन
|
|-
!अष्टौ
|align="center"|आठ
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|होक्तो
|align="center"|ओक्तो
|align="center"|ऐय्ट्
|align="center"|आख़्ट
|
|-
!नवन्
|align="center"|नौ
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|हेणेअ
|align="center"|नोवेम्
|align="center"|नायन्
|align="center"|नोएन
|
|-
! द्वारम्
|align="center"| द्वार
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दोर्
|align="center"|टोर
|
|-
!नालिकेरः
|align="center"| नारियल
|align="center"|नाळिकेरम्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|कोकोस्नुस्स
|
|-
! '''सम'''
|समान
|
|
|
|
|
|same
|
|
|-
!'''तात=पिता '''
|
|
|
|
|
|
|Dad
|
|
|-
!'''अहम्'''
|
|
|
|
|
|
|I am
|
|
|-
!'''स्मार्त'''
|
|
|
|
|
|
|Smart
|
|
|-
!'''पंडित'''
|पंडित/विशेषज्ञ
|
|
|
|
|
|Pundit
|
|
|}</div>
[[Image:IndoEuropeanTree.svg|center|thumb|600px|संस्कृत का [[प्राकृत]] भाषाओं से तथा [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|भारोपीय भाषाओं]] से सम्बन्ध]]
== संस्कृत साहित्य ==
{{मुख्य|संस्कृत साहित्य}}
देश, काल और विविधता की दृष्टि से संस्कृत साहित्य अत्यन्त विशाल है। इसे मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है- [[वैदिक साहित्य]] तथा शास्त्रीय साहित्य । आज से तीन-चार हजार वर्ष पहले रचित वैदिक साहित्य उपलब्ध होता है।
===संस्कृत ग्रन्थ===
{| class="wikitable" align=center style = " background: transparent; "
|+ परम्परानुसार संस्कृत साहित्य
|-style="text-align: center;"
! परम्परा
! संस्कृत ग्रन्थ, विधा श्रेणी
! उदाहरण
! सन्दर्भ
|-style="text-align: left;"
| rowspan="19"|हिन्दू
| धर्मग्रन्थ
| [[वेद]], [[उपनिषद]], [[आगम (हिन्दू)|आगम]], [[श्रीमद्भगवद्गीता|भागवद्गीता]]
|<ref>Jan Gonda (1975), Vedic literature (Saṃhitās and Brāhmaṇas), Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01603-5}}</ref><ref>Teun Goudriaan, Hindu Tantric and Śākta Literature, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-02091-1}}</ref>
|-
|भाषा, व्याकरण
|[[अष्टाध्यायी]], [[गणपाठ]], [[पदपाठ]], वार्त्तिक, [[महाभाष्य]], [[वाक्यपदीय]], फिट-सूत्र
|{{sfn|Dhanesh Jain|George Cardona|2007}}<ref>Hartmut Scharfe, A history of Indian literature. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>{{sfn|Keith|1996}}
|-
|सामान्य नियम एवं धार्मिक नियम
|धर्मसूत्र/धर्मशास्त्र,{{efn|ये विधि के ग्रन्थों के सामान्य नाम हैं।}} [[मनुस्मृति]]
|<ref>{{cite book |first1=J. |last1=Duncan |first2=M. |last2=Derrett |year=1978 |title=Dharmasastra and Juridical Literature: A history of Indian literature |editor-first=Jan |editor-last=Gonda |volume=4 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=3-447-01519-5}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 12}}
|-
|राजनीति, राजशास्त्र
|[[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |first=Patrick |last=Olivelle |title=King, Governance, and Law in Ancient India |url=https://archive.org/details/kinggovernancela0000kaua |date=31 January 2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |isbn=978-0-19-989182-5}}</ref>
|-
|कालगणना, गणित, तर्क
|[[कल्प (वेदाङ्ग)|कल्प]], [[ज्योतिष]], गणितशास्त्र, [[शुल्बसूत्र]], सिद्धान्त, [[आर्यभटीय]], दशगीतिकासूत्र, [[सिद्धान्तशिरोमणि]], [[गणितसारसङ्ग्रह]], [[बीजगणित (संस्कृत ग्रन्थ)|बीजगणितम्]] {{efn|an account of Indian algebra}}
|<ref>Kim Plofker (2009), ''[[Mathematics in India (book)|Mathematics in India]]'', Princeton University Press, {{ISBN|978-0-691-12067-6}}</ref><ref>{{cite book |first=David |last=Pingree |title=A Census of the Exact Sciences in Sanskrit |volume=1–5 |publisher=American Philosophical Society |isbn=978-0-87169-213-9}}</ref>
|-
|आयुर्विज्ञान, आयुर्वेद, स्वास्थ्य
|आयुर्वेद, [[सुश्रुतसंहिता]], [[चरकसंहिता]]
|<ref>{{cite book |first=M.S. |last=Valiathan |title=The Legacy of Caraka |url=https://archive.org/details/legacyofcaraka0000vali |year=2003 |publisher=Orient Blackswan |isbn=978-81-250-2505-4}}</ref><ref>{{cite book |first=Kenneth |last=Zysk |year= 1998|title=Medicine in the Veda |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-1401-1}}</ref>
|-
|कामशास्त्र
| [[कामसूत्र]], पञ्चसायक, रतिरहस्य, रतिमञ्जरी, अनङ्गरङ्ग, [[समयमातृका]]
|<ref>{{cite book |first=J.J. |last=Meyer |title=Sexual Life in Ancient India |date=22 February 2013 |volume=1 & 2 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-1-4826-1588-3}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 14}}
|-
|महाकाव्य
|[[रामायण]], [[महाभारत]]
|{{sfn|John L. Brockington|1998}}<ref>{{cite book |author=Sures Chandra Banerji |year=1989 |title=A Companion to Sanskrit Literature |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-0063-2 |pages=1–4, with a long list in Part II |url=https://books.google.com/books?id=JkOAEdIsdUsC |via=Google Books |quote=Spanning a period of over three thousand years; containing brief accounts of authors, works, characters, technical terms, geographical names, myths, [and] legends, [with] several appendices. }}</ref>
|-
|राजवंशीय काव्य
|[[रघुवंश]], [[कुमारसम्भव]]
|{{sfn|Keith|1996|§4}}
|-
|सुभाषित एवं शिक्षाप्रद साहित्य
|सुभाषित, नीतिशतक, बोधिचर्यावतार, शृंगार-ज्ञान-निर्णय, कलाविलास, चतुर्वर्गसङ्ग्रह, नीतिमञ्जरी, मुग्धोपदेश, सुभाषितरत्नसन्दोह, योगशास्त्र, शृंगार-वैराग्य-तरङ्गिणी
|<ref>{{cite book |first=Ludwik |last=Sternbach |year=1974 |title=Subhāṣita: Gnomic and didactic literature |url=https://archive.org/details/subhasitagnomicd0000ster |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01546-2}}</ref>
|-
|नाटक, नृत्य तथा अन्य कलाएँ
|[[नाट्यशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |url=https://archive.org/details/SanskritDrama-KeithA.Berriedale |title=The Sanskrit Drama |publisher=Oxford University Press |first=Keith A. |last=Berriedale |via=Archive.org}}</ref><ref>{{cite book |first1=Rachel |last1=Baumer |first2=James |last2=Brandon |year=1993 |title=Sanskrit Drama in Performance |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=81-208-0772-3}}</ref><ref>{{cite book |first=Mohan |last=Khokar |year=1981 |title=Traditions of Indian Classical Dance |publisher=Peter Owen Publishers |isbn=978-0-7206-0574-7}}</ref>
|-
|संगीत
|संगीतशास्त्र, [[संगीतरत्नाकर]], [[संगीत पारिजात]]
|<ref>{{cite book |first=E. |last=te Nijenhuis |author-link=Emmie te Nijenhuis |chapter=Musicological literature |series=A History of Indian Literature |volume=6 |title=Scientific and Technical Literature |id=Fasc. 1 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01831-9}}</ref><ref>Lewis Rowell, Music and Musical Thought in Early India, University of Chicago Press, {{ISBN|0-226-73033-6}}</ref>
|-
|काव्यशास्त्र
|काव्यशास्त्र
|<ref>Edwin Gerow, ''A history of Indian literature''. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>
|-
|मिथक
|पुराण
|<ref>Ludo Rocher (1986), ''The Puranas'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-02522-5}}</ref>
|-
|रहस्यमय अटकलें, दर्शन
|दर्शन, [[सांख्य]], [[योग दर्शन|योग]], [[न्याय दर्शन|न्याय]], [[वैशेषिक दर्शन|वैशेशिक]], [[मीमांसा]], [[वेदान्त]] [[वैष्णव]], [[शैव]], [[शाक्त]], [[स्मार्त]], आदि
|<ref>Karl Potter, ''The Encyclopedia of Indian Philosophies'', Volumes 1 through 27, Motilal Banarsidass, {{ISBN|81-208-0309-4}}</ref>
|-
| कृषि एवं भोजन
| कृषिशास्त्र, [[वृक्षायुर्वेद]]
| <ref>Gyula Wojtilla (2006), ''History of Kr̥ṣiśāstra'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-05306-8}}</ref>
|-
| डिजाइन, शिल्प, वास्तुशास्त्र
| शिल्पशास्त्र, [[समराङ्गणसूत्रधार]]
|<ref>{{cite book |first=P.K. |last=Acharya |year=1946 |url=https://archive.org/stream/encyclopaediaofh07achauoft#page/n9/mode/2up |title=An Encyclopedia of Hindu Architecture |publisher=Oxford University Press |volume=7}} Also see volumes 1–6.</ref><ref>[[Bruno Dagens]] (1995), Mayamata : An Indian Treatise on Housing Architecture and Iconography, {{ISBN|978-81-208-3525-2}}</ref>
|-
|मन्दिर, मूर्तिकला
|[[बृहत्संहिता]],
|<ref>Stella Kramrisch, ''Hindu Temple'', Vol. 1 and 2, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-81-208-0222-3}}</ref>
|-style="text-align: left;"
|-
|संस्कार
|[[गृह्यसूत्र]]
|<ref>Rajbali Pandey (2013), ''Hindu Saṁskāras: Socio-religious study of the Hindu sacraments'', 2nd Edition, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-8120803961}}</ref>
|-
| style="background: #ffad66;" |बौद्ध धर्म
| धर्मग्रन्थ, मठ-सम्बन्धी नियम
| [[त्रिपिटक]],{{efn|अधिकांश त्रिपिटक [[पालि]] भाषा में हैम किन्तु संस्कृत त्रिपितक ग्रन्थ भी प्राप्त हुए हैं।{{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}}} महायान सम्प्रदाय के ग्रन्थ, अन्य
| {{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}{{sfn|Eltschinger|2017}}{{sfn|Wayman|1965}}
|-style="text-align: left;"
| style="background: #ffad66;" |जैन धर्म
| धर्मशास्त्र, दर्शन
| [[तत्त्वार्थ सूत्र]], महापुराण एवं अन्य
| <ref>{{cite book |author=Paul Dundas |title=The Jains |url=https://books.google.com/books?id=X8iAAgAAQBAJ |year=2003 |publisher=Routledge |isbn=978-1-134-50165-6 |pages=68–76, 149, 307–310}}</ref><ref>{{cite book |author=Wendy Doniger |year=1993 |title=Purana Perennis: Reciprocity and transformation in Hindu and Jaina texts |url=https://books.google.com/books?id=-kZFzHCuiFAC |publisher=State University of New York Press |isbn=978-0-7914-1381-4 |pages=192–193}}</ref>
|}
इनके अतिरिक्त [[रसविद्या]], [[तंत्र साहित्य (भारतीय)|तंत्र साहित्य]], [[वैमानिक शास्त्र]] तथा अन्यान्य विषयों पर संस्कृत में ग्रन्थ रचे गये जिनमें से कुछ आज भी उपलब्ध हैं।
==शिक्षा एवं प्रचार-प्रसार==
[[चित्र:संस्कृत विभिन्न लिपियों में.png|"संस्कृतम्" शब्द विभिन्न लिपियों में लिखा हुआ।|200px|right]]
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] में संस्कृत आठवीं अनुसूची में सम्मिलित अन्य भाषाओं के साथ विराजमान है। [[त्रिभाषा सूत्र]] के अन्तर्गत संस्कृत भी आती है। [[हिन्दी]] एवं अन्य भारतीय भाषाओं की की [[वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग|वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली]] संस्कृत से निर्मित है।
[[भारत]] तथा अन्य देशों के कुछ संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची नीचे दी गयी है- (देखें, ''[[भारत स्थित संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची]]'')
{| class="wikitable"
|- style="background:#d3d3d3;"
! स्थापना वर्ष
! नाम
! स्थान
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1791
| align=left |[[सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वाराणसी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1876
| align=left |[[सद्विद्या पाठशाला]]
| align=left |[[मैसूर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1961
| align=left |[[कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[दरभंगा]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति]]
| align=left |[[तिरुपति]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1970
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1981
| align=left |[[श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[पुरी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1986
| align=left |[[नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नेपाल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1993
| align=left |[[श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[कालडी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1997
| align=left |[[कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नागपुर|रामटेक]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2001
| align=left |[[जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[जयपुर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2005
| align=left |[[श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वेरावल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2008
| align=left |[[महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[उज्जैन]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2011
| align=left |[[कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[बंगलुरु]]
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== यह भी देखिए ==
* [[वैदिक संस्कृत]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
* [[संस्कृत भाषा का इतिहास]]
* [[संस्कृत का पुनरुत्थान]]
'''संस्कृत के विकिपीडिया प्रकल्प'''
* [http://sa.wikipedia.org/ संस्कृत विकिपीडिया]
* [[wikt:संस्कृत|संस्कृत]] (संस्कृत विकोश:)
* [http://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D '''संस्कृत विकिस्रोतम्'''] (Sanskrit Wikisource)
* [http://sa.wikibooks.org/wiki/Main_Page '''संस्कृत विकि पुस्तकानि'''] (Sanskrit Wiki Books)
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.sanskrit.nic.in/hindiweb/index.htm राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081216021831/http://www.sanskrit.nic.in/ |date=16 दिसंबर 2008 }}
* [http://www.sanskrit.nic.in/Thesis_Modified/Thesis-E-H/H_f/myweb10/index.htm भारतीय विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर आधारित शोध प्रबन्धों की निर्देशिका] (राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान)
* [http://groups.google.com/group/samskrita संस्कृत गूगल समूह]
=== संस्कृत संसाधन ===
* [http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 हिन्दी-संस्कृत वार्तालाप पुस्तिका] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304224622/http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 |date=4 मार्च 2016 }} (केन्द्रीय हिन्दी संस्थान)
* [http://sanskrit.inria.fr/portal.html Links to Sanskrit resources]
* [http://www.sanskritweb.net/ Sankrit Web]
* [http://salrc.uchicago.edu/resources/fonts/available/sanskrit/ Sanskrit Fonts: South Asian Language and Resource Center - Sanskrit]
* [http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault Discover Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060507205151/http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault |date=7 मई 2006 }}
* [http://sanskritdocuments.org Sanskrit Documents]
* [http://sanskrit.safire.com/ Sanskrit Texts and Stotras]
* [http://www.omkarananda-ashram.org/Sanskrit/Itranslt.html Omkarananda Ashram's Sanskrit Page]
=== संस्कृत सामग्री ===
* [http://sanskritdocuments.org/ Sanskrit Documents]
*[https://sanskritslokas.info Sanskrit Slokas] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190527004913/https://sanskritslokas.info/ |date=27 मई 2019 }}
* [http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D सारस्वतसर्वस्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141202091841/http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D |date=2 दिसंबर 2014 }} (शब्दकोश, संस्कृत ग्रन्थों आदि का विशाल संग्रह)
* [http://sanskritvishvam.com/index.php संस्कृविश्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120619052439/http://sanskritvishvam.com/index.php |date=19 जून 2012 }}
* [http://sanskritworld.in/ Sanskrit World]
* [http://sanskrit.gde.to/all_sa/ संस्कृत के अनेकानेक ग्रन्थ, देवनागरी में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20031209030726/http://sanskrit.gde.to/all_sa/ |date=9 दिसंबर 2003 }}
* [http://indology.info/etexts/ Virtual e-Text Archive of Indic Texts] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071202233321/http://indology.info/etexts/ |date=2 दिसंबर 2007 }} (Indology page)
* [http://data.stonesutras.org/exist/apps/sarit/works/ SARIT] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150206032511/http://data.stonesutras.org/exist/apps/sarit/works/ |date=6 फ़रवरी 2015 }}
* [http://is1.mum.edu/vedicreserve/ वैदिक साहित्य : महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080929114928/http://is1.mum.edu/vedicreserve/ |date=29 सितंबर 2008 }} - पी डी एफ़ प्रारूप, देवनागरी
* [http://www.granthamandira.com/index.php?show=home गौडीय ग्रन्थ-मन्दिर पर सहस्रों संस्कृत ग्रन्थ, बलराम इनकोडिंग में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20101127234535/http://www.granthamandira.com/index.php?show=home |date=27 नवंबर 2010 }}
* [http://www.sub.uni-goettingen.de/ebene_1/fiindolo/gretil.htm#Sanskrit GRETIL पर सहस्रों संस्कृत ग्रन्थ, अनेक स्रोतों से, अनेक इनकोडिंग में]
* [http://www.uwest.edu/sanskritcanon/devanagari_text.html संगणीकृतम बौद्ध संस्कृत त्रिपिटकम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080223140259/http://www.uwest.edu/sanskritcanon/devanagari_text.html |date=23 फ़रवरी 2008 }} (Digital Sanskrit Buddhistt Canon)
* [http://titus.uni-frankfurt.de/indexe.htm?/texte/texte2.htm#ind TITUS Indica] - Indic Texts
* [http://www.sacred-texts.com/hin/index.htm Internet Sacred Text Archive] - यहाँ बहुत से हिन्दू ग्रन्थ अंग्रेजी में अर्थ के साथ उपलब्ध हैं। कहीं-कहीं मूल संस्कृत पाठ भी उपलब्ध है।
* [http://claysanskritlibrary.org/ क्ले संस्कृत पुस्तकालय] संस्कृत साहित्य के प्रकाशक हैं; यहाँ पर भी बहुत सारी सामग्री डाउनलोड के लिये उपलब्ध है।
* [http://www.muktabodhalib.org/SECURE/digital_library_index.htm मुक्तबोध डिजिटल पुस्तकालय] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080913182110/http://www.muktabodhalib.org/SECURE/digital_library_index.htm |date=13 सितंबर 2008 }}
* [http://www.mantra.org.in/index.htm भारत विद्या] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090615005352/http://mantra.org.in/index.htm |date=15 जून 2009 }}
* [http://www.muktabodha.org/about.htm मुक्तबोध इंडोलोजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110725044937/http://www.muktabodha.org/about.htm |date=25 जुलाई 2011 }} (तंत्र एवं आगम साहित्य पर विशेष सामग्री)
* [http://www.asianclassics.org/ Asian Classic Input Project] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100710003036/http://www.asianclassics.org/ |date=10 जुलाई 2010 }}
* [http://kjc-fs-cluster.kjc.uni-heidelberg.de/dcs/index.php Digital Corpus of Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111026203248/http://kjc-fs-cluster.kjc.uni-heidelberg.de/dcs/index.php |date=26 अक्तूबर 2011 }} (a searchable collection of lemmatized Sanskrit texts)
=== शब्दकोश ===
* [http://www.andhrabharati.com/dictionary/sanskrit/ आंध्रभारती का संस्कृत कोश गपेषणम् ] : आनलाइन संस्कृत कोश शोधन ; कई कोशों में एकसाथ खोज ; देवनागरी, बंगला आदि कई भारतीय लिपियों में आउटपुट; कई प्रारूपों में इनपुट की सुविधा
* [http://books.google.co.in/books?id=bsSZ27z5fSYC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false '''संस्कृत-हिन्दी कोश''' (राज संस्करण)] (गूगल पुस्तक ; रचनाकार - वामन शिवराम आप्टे)
* [http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/monier/ Monier Williams Dictionary (2006 revision)] - इसमें संस्कृत शब्दों के अंग्रेजी अर्थ दिये गये हैं। शब्द इन्पुट Harvard-Kyoto, SLP1 या ITRANS में देने की सुविधा है।
* [http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/aequery/index.html आप्टे अंग्रेजी --> संस्कृत शब्दकोश] - इसमें परिणाम इच्छानुसार देवनागरी, iTrans, रोमन यूनिकोड आदि में प्राप्त किये जा सकते हैं।
* [http://sa.wiktionary.org/wiki/संक्षिप्त_संस्कृत-आंग्लभाषा_शब्दकोश संक्षिप्त संस्कृत-आंग्लभाषा शब्दकोश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120405022342/http://sa.wiktionary.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE_%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6 |date=5 अप्रैल 2012 }} (Concise Sanskrit-English Dictionary) - संस्कृत शब्द देवनागरी में लिखे हुए हैं। अर्थ अंग्रेजी में। लगभग १० हजार शब्द। डाउनलोड करके आफलाइन उपयोग के लिये उत्तम !
* [http://books.google.co.in/books?id=RdVwfC0Dl7wC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false The Student's English-Sanskrit Dictionary] (गूगल पुस्तक ; लेखक - Vaman Shivaram Apte)
* [http://ibiblio.org/sripedia/ebooks/mw/0000/ Monier-Williams Dictionary], printable
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* [http://sanskritdict.20m.com/sanskrit.htm Sanskrit Dictionary]
* [http://selfdiscoveryportal.com/cmSanskrit.htm Glossary of Sanskrit Terms]
* [http://atmajyoti.org/sw_glossary.asp A Brief Sanskrit Glossary] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080205201139/http://atmajyoti.org/sw_glossary.asp |date=5 फ़रवरी 2008 }} with the meanings of common Sanskrit spiritual terms. Recently updated.
==== डाउनलोड योग्य शब्दकोश ====
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=== संस्कृत विषयक लेख ===
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* [http://www.codewallah.com/diCrunch/diCrunch.php Diacritic Conversion - '''diCrunch'''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20091109045833/http://www.codewallah.com/diCrunch/diCrunch.php |date=9 नवंबर 2009 }} - Balaram / CSX / (X)HK / ITRANS / Shakti Mac / Unicode / Velthuis / X-Sanskrit / Bengali Unicode / Devanagari Unicode / Oriya Unicode आदि इनकोडिंग का परस्पर परिवर्तक
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=== संस्कृत जालस्थल ===
* [http://www.susanskrit.org/index.php?searchword=%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF&option=com_search&Itemid= सुसंस्कृतम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110919144205/http://www.susanskrit.org/index.php?searchword=%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF&option=com_search&Itemid= |date=19 सितंबर 2011 }}
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* [https://archive.today/20121205234515/sanskrit-jeevan.blogspot.com/2010/05/blog-post_7790.html संस्कृतं भारतस्य जीवनम्]
* [http://www.lalitaalaalitah.com/ ललितालालितः] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110202160429/http://www.lalitaalaalitah.com/ |date=2 फ़रवरी 2011 }}
{{भारत की भाषाएँ |state=autocollapse}}
{{प्राचीन एवं मध्य हिन्द-आर्य भाषाएँ}}
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Pushkar Singh
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स्रोत जोड़ा
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{{Infobox Language
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| foot_montage = (ऊपर) [[श्रीमद्भग्वद्गीता]] की १९वीं शताब्दी की एक पाण्डुलिपि<ref name="Mascaró2003">{{cite book |last=Mascaró|first=Juan|title=The Bhagavad Gita |url=https://books.google.com/books?id=UZEKghCNbVIC&pg=PT13|year=2003 |publisher=Penguin |isbn=978-0-14-044918-1 |pages=13 ff |quote=The Bhagawad Gita, an intensely spiritual work, that forms one of the cornerstones of the Hindu faith, and is also one of the masterpieces of Sanskrit poetry. (from the backcover)}}</ref> अनुमान है कि गीता की रचना ४०० ईसापूर्व से लेकर २०० ईसापूर्व में हुई थी।<ref>{{cite book |last=Besant |first=Annie (trans) |author-link=Annie Besant |title=The Bhagavad-gita; or, ''The Lord's Song'', with text in Devanagari, and English translation |url=https://en.wikisource.org/wiki/Bhagavad-Gita_(Besant_4th)/Discourse_1 |year=1922 |publisher=G. E. Natesan & Co. |location=Madras |quote=प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥ २० ॥ <br /> Then, beholding the sons of Dhritarâshtra standing arrayed, and flight of missiles about to begin, ... the son of Pându, took up his bow,(20)<br /> हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते । अर्जुन उवाच । ...॥ २१ ॥ <br />And spake this word to Hrishîkesha, O Lord of Earth: Arjuna said: ...}}</ref><ref>{{cite book |last=Radhakrishnan |first=S. |author-link=Sarvepalli Radhakrishnan |title=The Bhagavadgītā: With an introductory essay, Sanskrit text, English translation, and notes |url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113 |year=1948 |publisher=George Allen and Unwin Ltd. |location=London, UK |page=[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.191113/page/n83 86] |quote= ...'' pravyite Sastrasampate''<br /> ''dhanur udyamya pandavah'' (20) <br /> Then Arjuna, ... looked at the sons of Dhrtarastra drawn up in battle order; and as the flight of missiles (almost) started, he took up his bow.<br /> ''hystkesam tada vakyam''<br /> ''idam aha mahipate'' ... (21)<br /> And, O Lord of earth, he spoke this word to Hrsikesha (Krsna): ... }}</ref> (नीचे) [[कोलकाता|कलकता]] के संस्कृत कॉलेज के १७५वीं जयन्ती के अवसर पर भारत सरकार द्वारी जारी डाकटिकट। यह कॉलेज तीसरा सबसे पुराना कॉलेज है। १७९१ में स्थापित [[काशी संस्कृत कालेज]] सबसे पुराना महाविद्यालय है।
}}
| imagesize =
| imagecaption =
|region=[[भारत]], [[नेपाल]]
|speakers= १००४,१३५ (जनगणना के अनुसार।)<ref name="Census">{{cite web|url=http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/Statement5.htm|title=Comparative speaker's strength of scheduled languages -1971, 1981, 1991 and 2001|work=Census of India, 2001|publisher=Office of the Registrar and Census Commissioner, भारत|accessdate=31 दिसम्बर 2009}}</ref>
|script=[[देवनागरी]] (वस्तुतः), अन्य [[ब्राह्मी]]–लिपि
|nation=भारतीय संविधान में अनुसूचित 22 भाषाओं में से एक।
|iso1=sa|iso2=san|iso3=san
|familycolor=Indo-European}}
'''संस्कृत''' (संस्कृत में : संस्कृतम्, {{IPA-sa|ˈsɐ̃skr̩tɐm}}) [[भारतीय उपमहाद्वीप]] की एक [[भाषा]] है। संस्कृत एक [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा]] है जो [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|हिंद-यूरोपीय भाषा]] परिवार की एक शाखा है।<ref>{{cite web|url=https://scroll.in/article/738404/the-old-vedic-language-had-its-origin-outside-the-subcontinent-but-not-sanskrit|title='The Old Vedic language had its origin outside the subcontinent. But not Sanskrit.'}}</ref> आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, [[हिंदी भाषा|हिंदी]], [[बंगाली भाषा|बांग्ला]], [[मराठी भाषा|मराठी]], [[सिन्धी भाषा|सिन्धी]], [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]], [[नेपाली भाषा|नेपाली]], आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की [[रोमानी भाषा]] भी शामिल है। संस्कृत में [[वैदिक धर्म]] से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गए हैं। [[बौद्ध धर्म]] (विशेषकर महायान) तथा [[जैन धर्म|जैन मत]] के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर [[यज्ञ]] और [[पूजा]] संस्कृत में ही होती हैं।
संस्कृत का अर्थ है "''संस्कार की गयी'' " अर्थात "बदलाव की गयी", आधुनिक समय में संस्कृत भाषा [[देवनागरी]] लिपि में लिखी जाती है।
संस्कृत आमतौर पर कई पुरानी इंडो-आर्यन भाषाओं को जोड़ती है। इनमें से सबसे पुरातन ग्रंथ [[ऋग्वेद]] १,०२८ सूक्तों का एक संग्रह है जो १० मंडलों में विभाजित है। [[रामायण]] को सबसे प्राचीन महाकाव्य माना जाता है इसलिए [[वाल्मीकि]] को '''आदिकवि''' भी कहा जाता है। जबकि महाभारत विश्व का सबसे विस्तृत महाकाव्य है जो कि संस्कृत में ही है।
[[कालिदास]] के कई नाटक और महाकाव्य इसी भाषा में हैं। बुद्धचरितम् [[अश्वघोष]] ने संस्कृत में ही रचा। <ref>https://bharatdiscovery.org/india/अश्वघोष</ref>
[[भास]], [[भारवि]], [[भवभूति]], [[माघ]] आदि ने अपनी रचनाएं इसी भाषा में की।
वेद वैदिक संस्कृत में रचित थे। हिंदू धर्म के उपनिषद्, स्मृतियां, पुराणादि संस्कृत में ही रचित हैं।
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] की [[आठवीं अनुसूची]] में संस्कृत को भी सम्मिलित किया गया है। यह [[उत्तराखण्ड]] और [[हिमाचल प्रदेश]] की आधिकारिक [[राजभाषा]] है। [[आकाशवाणी]] और [[दूरदर्शन]] से संस्कृत में समाचार प्रसारित किए जाते हैं। कतिपय वर्षों से डी. डी. न्यूज (DD News) द्वारा '''वार्तावली''' नामक अर्धहोरावधि का संस्कृत-कार्यक्रम भी प्रसारित किया जा रहा है, जो हिन्दी चलचित्र गीतों के संस्कृतानुवाद, सरल-संस्कृत-शिक्षण, संस्कृत-वार्ता और महापुरुषों की संस्कृत जीवनवृत्तियों, सुभाषित-रत्नों आदि के कारण अनुदिन लोकप्रियता को प्राप्त हो रहा है।
== इतिहास ==
'''{{मुख्य|संस्कृत भाषा का इतिहास}}'''
[[चित्र:Global distribution of Sanskrit language presence, texts and inscriptions dated between 300 and 1800 CE.svg|right|thumb|350px|संस्कृत भाषा का वैश्विक विस्तृति : ३०० ईसापूर्व से लेकर १८०० ई तक की कालावधि में रचित संस्कृत ग्रन्थ एवं संस्कृत अभिलेखों की प्राप्ति के क्षेत्र]]
संस्कृत का इतिहास बहुत पुराना है। वर्तमान समय में प्राप्त सबसे प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ [[ॠग्वेद]] है जो कम से कम ढाई हजार ईसापूर्व की रचना है।
== व्याकरण ==
{{मुख्य|संस्कृत व्याकरण}}
{{मुख्य|संस्कृत का व्याकरण}}
संस्कृत भाषा का [[व्याकरण]] अत्यन्त परिमार्जित एवं [[विज्ञान|वैज्ञानिक]] है। बहुत प्राचीन काल से ही अनेक व्याकरणाचार्यों ने संस्कृत व्याकरण पर बहुत कुछ लिखा है। किन्तु [[पाणिनि]] का संस्कृत व्याकरण पर किया गया कार्य सबसे प्रसिद्ध है। उनका [[अष्टाध्यायी]] किसी भी भाषा के व्याकरण का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है।
संस्कृत में [[संज्ञा]], [[सर्वनाम]], [[विशेषण]] और [[क्रिया]] के कई तरह से शब्द-रूप बनाये जाते हैं, जो व्याकरणिक अर्थ प्रदान करते हैं। अधिकांश शब्द-रूप मूलशब्द के अन्त में प्रत्यय लगाकर बनाये जाते हैं। इस तरह ये कहा जा सकता है कि संस्कृत एक बहिर्मुखी-अन्त-श्लिष्टयोगात्मक भाषा है। संस्कृत के व्याकरण को वागीश शास्त्री ने वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया है।
== ध्वनि-तन्त्र और लिपि ==
संस्कृत भारत की कई लिपियों में लिखी जाती रही है, लेकिन आधुनिक युग में '''[[देवनागरी लिपि]]''' के साथ इसका विशेष संबंध है। देवनागरी लिपि वास्तव में संस्कृत के लिए ही बनी है, इसलिए इसमें हर एक चिह्न के लिए एक और केवल एक ही ध्वनि है। देवनागरी में १३ [[स्वर]] और ३३ [[व्यंजन]] हैं। देवनागरी से [[रोमन लिपि]] में [[लिप्यन्तरण]] के लिए दो पद्धतियाँ अधिक प्रचलित हैं : IAST और ITRANS. शून्य, एक या अधिक व्यंजनों और एक स्वर के मेल से एक [[अक्षर]] बनता है।
<center><br />'''संस्कृत, क्षेत्रीय लिपियों में लिखी जाती रही है।'''</center>
=== स्वर ===
ये स्वर संस्कृत के लिए दिए गए हैं। हिन्दी में इनके उच्चारण थोड़े भिन्न होते हैं।
{|align="center" border="2"
! '''वर्णाक्षर'''||'''“प” के साथ मात्रा'''||'''[[IPA]] उच्चारण'''||"प्" के साथ उच्चारण||'''[[IAST]] समतुल्य'''||'''[[अंग्रेज़ी]] समतुल्य''' || हिन्दी में वर्णन
|-align="center"
| अ||प||{{IPA|/ ə /}}||{{IPA|/ pə /}}||a||लघु या दीर्घ [[:en:Schwa|Schwa]]: जैसे ''a'', '''a'''bove या '''a'''go में||[[मध्य प्रसृत स्वर]]
|-align="center"
| आ||पा||{{IPA|/ α: /}}||{{IPA|/ pα: /}}||ā||दीर्घ [[:en:Open back unrounded vowel|Open back unrounded vowel]]: जैसे ''a'', f'''a'''ther में||दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर
|-align="center"
| इ||पि||{{IPA|/ i /}}||{{IPA|/ pi /}}||i|| लघु [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', b'''i'''t में||ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ई||पी||{{IPA|/ i: /}}||{{IPA|/ pi: /}}||ī||दीर्घ [[:en:close front unrounded vowel|close front unrounded vowel]]: जैसे ''i'', mach'''i'''ne में||दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| उ||पु||{{IPA|/ u /}}||{{IPA|/ pu /}}||u|| लघु [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''u'', p'''u'''t में||ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ऊ||पू||{{IPA|/ u: /}}||{{IPA|/ pu: /}}||ū||दीर्घ [[:en:close back rounded vowel|close back rounded vowel]]: जैसे ''oo'', sch'''oo'''l में||दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| ए||पे||{{IPA|/ e: /}}||{{IPA|/ pe: /}}||e||दीर्घ [[:en:close-mid front unrounded vowel|close-mid front unrounded vowel]]: जैसे ''a'' in g'''a'''me (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर
|-align="center"
| ऐ||पै||{{IPA|/ ai /}}||{{IPA|/ pai /}}||ai||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ei'', h'''ei'''ght में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
| ओ||पो||{{IPA|/ ο: /}}||{{IPA|/ pο: /}}||o||दीर्घ [[:en:close-mid back rounded vowel|close-mid back rounded vowel]]: जैसे ''o'', t'''o'''ne (संयुक्त स्वर नहीं) में||दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर
|-align="center"
| औ||पौ||{{IPA|/ au /}}||{{IPA|/ pau /}}||au||दीर्घ [[:en:diphthong|diphthong]]: जैसे ''ou'', h'''ou'''se में||दीर्घ द्विमात्रिक स्वर
|-align="center"
|-
|}
संस्कृत में '''ऐ''' दो स्वरों का युग्म होता है और "अ-इ" या "आ-इ" की तरह बोला जाता है। इसी तरह '''औ''' "अ-उ" या "आ-उ" की तरह बोला जाता है।
इसके अलावा निम्नलिखित वर्ण भी स्वर माने जाते हैं :
* '''ऋ''' -- वर्तमान में, स्थानीय भाषाओं के प्रभाव से इसका अशुद्ध उच्चारण किया जाता है। आधुनिक हिन्दी में "रि" की तरह तथा मराठी में "रु" की तरह किया जाता है ।
* '''ॠ''' -- केवल संस्कृत में (दीर्घ ऋ)
* '''ऌ''' -- केवल संस्कृत में (syllabic retroflex l)
* '''अं''' -- न् , म् , ङ् , ञ् , ण् और ं के लिए या स्वर का नासिकीकरण करने के लिए
* '''अँ''' -- स्वर का नासिकीकरण करने के लिए (संस्कृत में नहीं उपयुक्त होता)
* '''अः''' -- अघोष "ह्" (निःश्वास) के लिए
=== '''व्यंजन''' ===
जब कोई स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर 'अ' माना जाता है। स्वर के न होने को [[हलन्त्]] अथवा [[विराम]] से दर्शाया जाता है। जैसे कि क् ख् ग् घ्।
{|border="2"
|align="center" colspan="6"|'''स्पर्श'''
|-
!align="center" rowspan="2"|
!align="center" colspan="2"|[[अघोष व्यंजन|अघोष]]
!align="center" colspan="2"|[[घोष व्यंजन|घोष]]
!align="center" rowspan="2"|[[नासिक्य]]
|-
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
![[अल्पप्राण व्यंजन|अल्पप्राण]]
![[महाप्राण व्यंजन|महाप्राण]]
|-align="center"
|[[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठ्य]]
|क {{IPA|/ kə /}}<br />k; अंग्रेजी: s'''k'''ip
|ख {{IPA|/ k<sup>h</sup>ə /}}<br />kh; अंग्रेजी: '''c'''at
|ग {{IPA|/ gə /}}<br />g; अंग्रेजी: '''g'''ame
|घ {{IPA|/ g<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />gh; महाप्राण /g/
|ङ {{IPA|/ ŋə /}}<br />n; अंग्रेजी: ri'''ng'''
|-align="center"
|[[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
|च {{IPA|/ cə / ''or'' / tʃə /}}<br />ch; अंग्रेजी: '''ch'''at
|छ {{IPA|/ c<sup>h</sup>ə / ''or'' /tʃ<sup>h</sup>ə/}}<br />chh; महाप्राण /c/
|ज {{IPA|/ ɟə / ''or'' / dʒə /}}<br />j; अंग्रेजी: '''j'''am
|झ {{IPA|/ ɟ<sup>ɦ</sup>ə / ''or'' / dʒ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />jh; महाप्राण {{IPA|/ɟ/}}
|ञ {{IPA|/ ɲə /}}<br />n; अंग्रेजी: fi'''n'''ch
|-align="center"
|[[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
|ट {{IPA|/ ʈə /}}<br />t; अमेरिकी अंग्रेजी:: hur'''t'''ing
|ठ {{IPA|/ ʈ<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/ʈ/}}
|ड {{IPA|/ ɖə /}}<br />d; अमेरिकी अंग्रेजी:: mur'''d'''er
|ढ {{IPA|/ ɖ<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/ɖ/}}
|ण {{IPA|/ ɳə /}}<br />n; अमेरिकी अंग्रेज़ी:: hu'''n'''ter
|-align="center"
|[[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]
|त {{IPA|/ t̪ə /}}<br />t; स्पैनिश: '''t'''oma'''t'''e
|थ {{IPA|/ t̪<sup>h</sup>ə /}}<br />th; महाप्राण {{IPA|/t̪/}}
|द {{IPA|/ d̪ə /}}<br />d; स्पैनिश: '''d'''on'''d'''e
|ध {{IPA|/ d̪<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />dh; महाप्राण {{IPA|/d̪/}}
|न {{IPA|/ nə /}}<br />n; अंग्रेज़ी: '''n'''ame
|-align="center"
|[[ओष्ठ्य व्यंजन|ओष्ठ्य]]
|प {{IPA|/ pə /}}<br />p; अंग्रेज़ी: s'''p'''in
|फ {{IPA|/ p<sup>h</sup>ə /}}<br />ph; अंग्रेज़ी: '''p'''it
|ब {{IPA|/ bə /}}<br />b; अंग्रेज़ी: '''b'''one
|भ {{IPA|/ b<sup>ɦ</sup>ə /}}<br />bh; महाप्राण /b/
|म {{IPA|/ mə /}}<br />m; अंग्रेज़ी: '''m'''ine
|-
|}
{|border="2"
|align="center" colspan="5"|'''स्पर्शरहित'''
|-
!
![[तालव्य व्यंजन|तालव्य]]
![[मूर्धन्य व्यंजन|मूर्धन्य]]
![[दन्त्य व्यंजन|दन्त्य]]/<br />[[वर्त्स्य व्यंजन|वर्त्स्य]]
![[कण्ठ्य व्यंजन|कण्ठोष्ठ्य]]/<br />[[काकल्य व्यंजन|काकल्य]]
|-align="center"
|[[अन्तस्थ]]
|य {{IPA|/ jə /}}<br />y; अंग्रेज़ी: '''y'''ou
|र {{IPA|/ rə /}}<br />r; स्कॉटिश अंग्रेज़ी: t'''r'''ip
|ल {{IPA|/ lə /}}<br />l; अंग्रेजी: '''l'''ove
|व {{IPA|/ ʋə /}}<br />v; अंग्रेजी: '''v'''ase
|-align="center"
|[[ऊष्म व्यंजन|ऊष्म]]/<br />[[संघर्षी व्यंजन|संघर्षी]]
|श {{IPA|/ ʃə /}}<br />sh; अंग्रेज़ी: '''sh'''ip
|ष {{IPA|/ ʂə /}}<br />shh; मूर्धन्य {{IPA|/ʃ/}}
|स {{IPA|/ sə /}}<br />s; अंग्रेज़ी: '''s'''ame
|ह {{IPA|/ ɦə / or / hə /}}<br />h; अंग्रेज़ी: be'''h'''ind
|-
|}
;टिप्पणी :
* इनमें से '''ळ''' (मूर्धन्य पार्विक अन्तस्थ) एक अतिरिक्त व्यंजन है जिसका प्रयोग हिन्दी में नहीं होता है। मराठी और वैदिक संस्कृत में इसका प्रयोग किया जाता है।
* संस्कृत में [[ष|'''ष''' का उच्चारण]] ऐसे होता था : जीभ की नोंक को मूर्धा (मुँह की छत) की ओर उठाकर '''श''' जैसी ध्वनि करना। शुक्ल [[यजुर्वेद]] की माध्यंदिनि शाखा में ''कुछ वाक्यों'' में '''ष''' का उच्चारण '''ख''' की तरह करना मान्य था।
== संस्कृत भाषा की विशेषताएँ ==
* (१) संस्कृत, विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक ([[वेद]]) की भाषा है। इसलिए इसे '''विश्व की प्रथम भाषा''' मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है।<ref>Sagarika Dutt (2006). India in a Globalized World. Manchester University Press. p. 36. ISBN 978-1-84779-607-3.</ref><ref>Gabriel J. Gomes (2012). Discovering World Religions. iUniverse. p. 54. ISBN 978-1-4697-1037-2.</ref>
* (२) इसकी '''सुस्पष्ट व्याकरण''' और '''वर्णमाला की वैज्ञानिकता''' के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।
* (३) सर्वाधिक महत्वपूर्ण '''साहित्य की धनी''' होने से इसकी महत्ता भी निर्विवाद है।
* (४) इसे '''देवभाषा''' माना जाता है।
* (५) संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि '''संस्कारित भाषा''' भी है, अतः इसका नाम संस्कृत है। केवल संस्कृत ही एकमात्र भाषा है जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर '''नहीं''' किया गया है।
*'''संस्कृत > सम् + सुट् + 'कृ करणे' + क्त, ('सम्पर्युपेभ्यः करोतौ भूषणे' इस सूत्र से 'भूषण' अर्थ में 'सुट्' या सकार का आगम/ 'भूते' इस सूत्र से भूतकाल(past) को द्योतित करने के लिए संज्ञा अर्थ में क्त-प्रत्यय /कृ-धातु 'करणे' या 'Doing' अर्थ में)''' अर्थात् विभूूूूषित, समलंकृत(well-decorated) या संस्कारयुक्त (well-cutured)।
*
*
*संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि [[पाणिनि]], महर्षि [[कात्यायन]] और योगशास्त्र के प्रणेता महर्षि [[पतंजलि]] हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।
* (६) '''शब्द-रूप''' - विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक या कुछ ही रूप होते हैं, जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 27 रूप होते हैं।
* (७) '''द्विवचन''' - सभी भाषाओं में '''एकवचन''' और '''बहुवचन''' होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है।
* (८) '''सन्धि''' - संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है [[संधि (व्याकरण)|सन्धि]]। संस्कृत में जब दो अक्षर निकट आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जा है ।
* (९) इसे '''[[कम्प्यूटर]] और [[कृत्रिम बुद्धि]]''' के लिए सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।
* (१०) शोध से ऐसा पाया गया है कि संस्कृत पढ़ने से '''स्मरण शक्ति''' बढ़ती है।<ref>[https://www.jansatta.com/international/sanskrit-effect-claim-dr-james-hartzell-scientific-american-journal-memorizing-vedic-mantras-increases-memory-power/548094/ अमेरिकी पत्रिका (साइंटिफिक अमेरिकन) का दावा- संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से बढ़ती है याददाश्त] (जनवरी २०१८)</ref>
* (११) संस्कृत वाक्यों में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है। इससे अर्थ का अनर्थ होने की बहुत कम या कोई भी सम्भावना नहीं होती। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं और क्रम बदलने पर भी सही अर्थ सुरक्षित रहता है। जैसे - '''अहं गृहं गच्छामि''' या '''गच्छामि गृहं अहम्''' दोनो ही ठीक हैं।
* (१२) संस्कृत विश्व की सर्वाधिक 'पूर्ण' (perfect) एवं तर्कसम्मत भाषा है।<ref>[https://ieeexplore.ieee.org/abstract/document/7724257/?reload=true Is Sanskrit the most suitable language for natural language processing?]</ref>
* (१३) संस्कृत ही एक मात्र साधन हैं जो क्रमश: अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं। इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को [[गणित]], [[विज्ञान]] एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।
* (१४) संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरन्तर होती आ रही है। इसके कई लाख ग्रन्थों के पठन-पाठन और चिन्तन में भारतवर्ष के हजारों पुश्त तक के करोड़ों सर्वोत्तम मस्तिष्क दिन-रात लगे रहे हैं और आज भी लगे हुए हैं। पता नहीं कि संसार के किसी देश में इतने काल तक, इतनी दूरी तक व्याप्त, इतने उत्तम मस्तिष्क में विचरण करने वाली कोई भाषा है या नहीं। शायद नहीं है। दीर्घ कालखण्ड के बाद भी असंख्य प्राकृतिक तथा मानवीय आपदाओं (वैदेशिक आक्रमणों) को झेलते हुए आज भी '''३ करोड़''' से अधिक संस्कृत [[पाण्डुलिपि]]याँ विद्यमान हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पाण्डुलिपियों की सम्मिलित संख्या से भी १०० गुना अधिक है। निःसंदेह ही यह सम्पदा [[छापाखाना|छापाखाने]] के आविष्कार के पहले किसी भी संस्कृति द्वारा सृजित सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत है।<ref>[https://books.google.co.in/books?id=WdSR9OJ0kxYC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false Guide to OCR for Indic Scripts: Document Recognition and Retrieval] (edited by Venu Govindaraju, Srirangaraj Ranga Setlur)</ref>
* (१५) संस्कृत केवल एक मात्र भाषा नहीं है अपितु संस्कृत एक विचार है। संस्कृत एक संस्कृति है एक संस्कार है संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है, [[वसुधैव कुटुम्बकम्]] की भावना है।
== संस्कृत गिनती ==
{| class="wikitable"
|1. एकम्
|2. द्वे
|3. त्रीणि
|4. चत्वारि
|5. पञ्च
|6. षट्
|7. सप्त
|-
|8. अष्ट
|9. नव
|10. दश
|11. एकादश
|12. द्वादश
|13. त्रयोदश
|14. चतुर्दश
|-
|15. पंचदश
|16. षोडश
|17. सप्तदश
|18. अष्टादश
|19. एकोनविंशतिः
|20. विंशतिः
|
|}
== भारत और विश्व के लिए संस्कृत का महत्त्व ==
* संस्कृत कई भारतीय भाषाओं की जननी है। इनकी अधिकांश शब्दावली या तो संस्कृत से ली गई है या संस्कृत से प्रभावित है। पूरे भारत में संस्कृत के अध्ययन-अध्यापन से भारतीय भाषाओं में अधिकाधिक एकरूपता आएगी जिससे भारतीय एकता बलवती होगी। यदि इच्छा-शक्ति हो तो संस्कृत को [[हिब्रू]] की भाँति पुनः प्रचलित भाषा भी बनाया जा सकता है।
* हिन्दू, बौद्ध, जैन आदि धर्मों के प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ संस्कृत में हैं।
* हिन्दुओं के सभी पूजा-पाठ और धार्मिक संस्कार की भाषा संस्कृत ही है।
* हिन्दुओं, बौद्धों और जैनों के नाम भी संस्कृत पर आधारित होते हैं।
* भारतीय भाषाओं की [[तकनीकी शब्दावली]] भी संस्कृत से ही व्युत्पन्न की जाती है। [[भारतीय संविधान]] की धारा 343, धारा 348 (2) तथा 351 का सारांश यह है कि देवनागरी लिपि में लिखी और मूलत: संस्कृत से अपनी [[पारिभाषिक शब्दावली]] को लेने वाली हिन्दी [[राजभाषा]] है।
* संस्कृत, भारत को एकता के सूत्र में बाँधती है।
* संस्कृत का साहित्य अत्यन्त प्राचीन, विशाल और विविधतापूर्ण है। इसमें अध्यात्म, दर्शन, ज्ञान-विज्ञान और साहित्य का खजाना है। इसके अध्ययन से ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
* संस्कृत को कम्प्यूटर के लिए ([[कृत्रिम बुद्धि]] के लिए) सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।<ref>[https://medium.com/@dmitrypavluk/we-should-thank-sanskrit-for-the-21st-century-e771b6c12f14 We should thank Sanskrit for the 21st century]</ref>
==संस्कृत का अन्य भाषाओं पर प्रभाव==
संस्कृत भाषा के शब्द मूलत रूप से सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं में हैं। सभी भारतीय भाषाओं में एकता की रक्षा संस्कृत के माध्यम से ही हो सकती है। [[मलयालम]], [[कन्नड]] और [[तेलुगु]] आदि दक्षिणात्य भाषाएं संस्कृत से बहुत प्रभावित हैं। यहाँ तक कि [[तमिल]] में भी संस्कृत के हजारों शब्द भरे पड़े हैं और मध्यकाल में संस्कृत का तमिल पर गहरा प्रभव पड़ा।<ref>[https://www.sas.upenn.edu/~vasur/Vasu_Renganathan_Trajectory_of_linguistic_changes_VIS_volume.pdf Tracing the Trajectory of Linguistic changes in Tamil: Mining the corpus of Tamil Texts]</ref>
विश्व की अनेकानेक भाषाओं पर संस्कृत ने गहरा प्रभाव डाला है।<ref>[https://www.thehindu.com/news/cities/mumbai/‘Sanskrit-has-had-profound-influence-on-world-languages’/article16689576.ece ‘Sanskrit has had profound influence on world languages’]</ref> संस्कृत भारोपीय भाषा परिवर में आती है और इस परिवार की भाषाओं से भी संस्कृत में बहुत सी समानता है। वैदिक संस्कृत और अवेस्ता (प्राचीन इरानी) में बहुत समानता है। भारत के पड़ोसी देशों की भाषाएँ [[सिंहल]], [[नेपाली]], [[म्यांमार भाषा]], [[थाई भाषा]], [[ख्मेर]]<ref>[https://www.softpowermag.com/sanskrits-influence-on-khmer/ Sanskrit’s Influence on Khmer]</ref> संस्कृत से प्रभावित हैं। बौद्ध धर्म का चीन ज्यों-ज्यों प्रसार हुआ वैसे वैसे पहली शताब्दी से दसवीं शताब्दी तक सैकड़ों संस्कृत ग्रन्थों का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ। इससे संस्कृत के हजरों शब्द चीनी भाषा में गए।<ref>{{Cite web |url=https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |title=Sanskrit had an influence on Chinese language |access-date=19 दिसंबर 2020 |archive-date=17 दिसंबर 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201217182406/https://www.sundayguardianlive.com/opinion/sanskrit-influence-chinese-language |url-status=dead }}</ref> उत्तरी-पश्चिमी [[तिब्बत]] में तो अज से १००० वर्ष पहले तक संस्कृत की संस्कृति थी और वहाँ [[गान्धारी भाषा]] का प्रचलन था। <ref>[https://eurasiantimes.com/how-sanskrit-language-is-associated-with-the-tibetan-and-khotan-region/ How Sanskrit Language Is Associated With The Tibet and Xinjiang?]</ref>
<div align="center">
{| class="wikitable" width="60%" style="border:none;"
|+तत्सम-तद्भव-समान-शब्द
|-
!संस्कृत शब्द
![[हिन्दी]]
![[मलयालम]]
![[कन्नड]]
![[तेलुगु]]
![[ग्रीक]]
![[लैटिन]]
![[अंग्रेजी]]
![[जर्मन]]
![[फ़ारसी भाषा|फ़ारसी]]
|-
! मातृ
|align="center"|माता
|align="center"|अम्मा
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|मातेर
|align="center"|मदर्
|align="center"|मुटेर
|मादर
|-
! पितृ/पितर
|align="center"|पिता
|align="center"|अच्चन्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|पातेर
|align="center"|फ़ाथर्
|align="center"|फ़ाटेर
|
|-
! दुहितृ
|align="center"|बेटी
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दाह्तर्
|align="center"|
|
|-
! भ्रातृ/भ्रातर
|align="center"| भाई
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|ब्रदर्
|align="center"|ब्रुडेर
|
|-
! पत्तनम्
|पत्तन
|align="center"|पट्टणम्
|
|
|
|
|टाउन
|align="center"|
|
|-
!वैधुर्यम्
|विधुर
|align="center"|वैडूर्यम्
|align="center"|वैडूर्यम्
|
|
|
|विजोवर्
|-
!सप्तन्
|align="center"|सात
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|सेप्तम्
|align="center"|सेव्हेन्
|align="center"|ज़ीबेन
|
|-
!अष्टौ
|align="center"|आठ
|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|होक्तो
|align="center"|ओक्तो
|align="center"|ऐय्ट्
|align="center"|आख़्ट
|
|-
!नवन्
|align="center"|नौ
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|हेणेअ
|align="center"|नोवेम्
|align="center"|नायन्
|align="center"|नोएन
|
|-
! द्वारम्
|align="center"| द्वार
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|दोर्
|align="center"|टोर
|
|-
!नालिकेरः
|align="center"| नारियल
|align="center"|नाळिकेरम्
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|
|align="center"|कोकोस्नुस्स
|
|-
! '''सम'''
|समान
|
|
|
|
|
|same
|
|
|-
!'''तात=पिता '''
|
|
|
|
|
|
|Dad
|
|
|-
!'''अहम्'''
|
|
|
|
|
|
|I am
|
|
|-
!'''स्मार्त'''
|
|
|
|
|
|
|Smart
|
|
|-
!'''पंडित'''
|पंडित/विशेषज्ञ
|
|
|
|
|
|Pundit
|
|
|}</div>
[[Image:IndoEuropeanTree.svg|center|thumb|600px|संस्कृत का [[प्राकृत]] भाषाओं से तथा [[हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार|भारोपीय भाषाओं]] से सम्बन्ध]]
== संस्कृत साहित्य ==
{{मुख्य|संस्कृत साहित्य}}
देश, काल और विविधता की दृष्टि से संस्कृत साहित्य अत्यन्त विशाल है। इसे मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया जाता है- [[वैदिक साहित्य]] तथा शास्त्रीय साहित्य । आज से तीन-चार हजार वर्ष पहले रचित वैदिक साहित्य उपलब्ध होता है।
===संस्कृत ग्रन्थ===
{| class="wikitable" align=center style = " background: transparent; "
|+ परम्परानुसार संस्कृत साहित्य
|-style="text-align: center;"
! परम्परा
! संस्कृत ग्रन्थ, विधा श्रेणी
! उदाहरण
! सन्दर्भ
|-style="text-align: left;"
| rowspan="19"|हिन्दू
| धर्मग्रन्थ
| [[वेद]], [[उपनिषद]], [[आगम (हिन्दू)|आगम]], [[श्रीमद्भगवद्गीता|भागवद्गीता]]
|<ref>Jan Gonda (1975), Vedic literature (Saṃhitās and Brāhmaṇas), Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01603-5}}</ref><ref>Teun Goudriaan, Hindu Tantric and Śākta Literature, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-02091-1}}</ref>
|-
|भाषा, व्याकरण
|[[अष्टाध्यायी]], [[गणपाठ]], [[पदपाठ]], वार्त्तिक, [[महाभाष्य]], [[वाक्यपदीय]], फिट-सूत्र
|{{sfn|Dhanesh Jain|George Cardona|2007}}<ref>Hartmut Scharfe, A history of Indian literature. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>{{sfn|Keith|1996}}
|-
|सामान्य नियम एवं धार्मिक नियम
|धर्मसूत्र/धर्मशास्त्र,{{efn|ये विधि के ग्रन्थों के सामान्य नाम हैं।}} [[मनुस्मृति]]
|<ref>{{cite book |first1=J. |last1=Duncan |first2=M. |last2=Derrett |year=1978 |title=Dharmasastra and Juridical Literature: A history of Indian literature |editor-first=Jan |editor-last=Gonda |volume=4 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=3-447-01519-5}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 12}}
|-
|राजनीति, राजशास्त्र
|[[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |first=Patrick |last=Olivelle |title=King, Governance, and Law in Ancient India |url=https://archive.org/details/kinggovernancela0000kaua |date=31 January 2013 |publisher=[[Oxford University Press]] |isbn=978-0-19-989182-5}}</ref>
|-
|कालगणना, गणित, तर्क
|[[कल्प (वेदाङ्ग)|कल्प]], [[ज्योतिष]], गणितशास्त्र, [[शुल्बसूत्र]], सिद्धान्त, [[आर्यभटीय]], दशगीतिकासूत्र, [[सिद्धान्तशिरोमणि]], [[गणितसारसङ्ग्रह]], [[बीजगणित (संस्कृत ग्रन्थ)|बीजगणितम्]] {{efn|an account of Indian algebra}}
|<ref>Kim Plofker (2009), ''[[Mathematics in India (book)|Mathematics in India]]'', Princeton University Press, {{ISBN|978-0-691-12067-6}}</ref><ref>{{cite book |first=David |last=Pingree |title=A Census of the Exact Sciences in Sanskrit |volume=1–5 |publisher=American Philosophical Society |isbn=978-0-87169-213-9}}</ref>
|-
|आयुर्विज्ञान, आयुर्वेद, स्वास्थ्य
|आयुर्वेद, [[सुश्रुतसंहिता]], [[चरकसंहिता]]
|<ref>{{cite book |first=M.S. |last=Valiathan |title=The Legacy of Caraka |url=https://archive.org/details/legacyofcaraka0000vali |year=2003 |publisher=Orient Blackswan |isbn=978-81-250-2505-4}}</ref><ref>{{cite book |first=Kenneth |last=Zysk |year= 1998|title=Medicine in the Veda |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-1401-1}}</ref>
|-
|कामशास्त्र
| [[कामसूत्र]], पञ्चसायक, रतिरहस्य, रतिमञ्जरी, अनङ्गरङ्ग, [[समयमातृका]]
|<ref>{{cite book |first=J.J. |last=Meyer |title=Sexual Life in Ancient India |date=22 February 2013 |volume=1 & 2 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-1-4826-1588-3}}</ref>{{sfn|Keith|1996|loc=ch 14}}
|-
|महाकाव्य
|[[रामायण]], [[महाभारत]]
|{{sfn|John L. Brockington|1998}}<ref>{{cite book |author=Sures Chandra Banerji |year=1989 |title=A Companion to Sanskrit Literature |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=978-81-208-0063-2 |pages=1–4, with a long list in Part II |url=https://books.google.com/books?id=JkOAEdIsdUsC |via=Google Books |quote=Spanning a period of over three thousand years; containing brief accounts of authors, works, characters, technical terms, geographical names, myths, [and] legends, [with] several appendices. }}</ref>
|-
|राजवंशीय काव्य
|[[रघुवंश]], [[कुमारसम्भव]]
|{{sfn|Keith|1996|§4}}
|-
|सुभाषित एवं शिक्षाप्रद साहित्य
|सुभाषित, नीतिशतक, बोधिचर्यावतार, शृंगार-ज्ञान-निर्णय, कलाविलास, चतुर्वर्गसङ्ग्रह, नीतिमञ्जरी, मुग्धोपदेश, सुभाषितरत्नसन्दोह, योगशास्त्र, शृंगार-वैराग्य-तरङ्गिणी
|<ref>{{cite book |first=Ludwik |last=Sternbach |year=1974 |title=Subhāṣita: Gnomic and didactic literature |url=https://archive.org/details/subhasitagnomicd0000ster |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01546-2}}</ref>
|-
|नाटक, नृत्य तथा अन्य कलाएँ
|[[नाट्यशास्त्र]]
|<ref>{{cite book |url=https://archive.org/details/SanskritDrama-KeithA.Berriedale |title=The Sanskrit Drama |publisher=Oxford University Press |first=Keith A. |last=Berriedale |via=Archive.org}}</ref><ref>{{cite book |first1=Rachel |last1=Baumer |first2=James |last2=Brandon |year=1993 |title=Sanskrit Drama in Performance |publisher=Motilal Banarsidass |isbn=81-208-0772-3}}</ref><ref>{{cite book |first=Mohan |last=Khokar |year=1981 |title=Traditions of Indian Classical Dance |publisher=Peter Owen Publishers |isbn=978-0-7206-0574-7}}</ref>
|-
|संगीत
|संगीतशास्त्र, [[संगीतरत्नाकर]], [[संगीत पारिजात]]
|<ref>{{cite book |first=E. |last=te Nijenhuis |author-link=Emmie te Nijenhuis |chapter=Musicological literature |series=A History of Indian Literature |volume=6 |title=Scientific and Technical Literature |id=Fasc. 1 |publisher=Otto Harrassowitz Verlag |isbn=978-3-447-01831-9}}</ref><ref>Lewis Rowell, Music and Musical Thought in Early India, University of Chicago Press, {{ISBN|0-226-73033-6}}</ref>
|-
|काव्यशास्त्र
|काव्यशास्त्र
|<ref>Edwin Gerow, ''A history of Indian literature''. Vol. 5, Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|3-447-01722-8}}</ref>
|-
|मिथक
|पुराण
|<ref>Ludo Rocher (1986), ''The Puranas'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-02522-5}}</ref>
|-
|रहस्यमय अटकलें, दर्शन
|दर्शन, [[सांख्य]], [[योग दर्शन|योग]], [[न्याय दर्शन|न्याय]], [[वैशेषिक दर्शन|वैशेशिक]], [[मीमांसा]], [[वेदान्त]] [[वैष्णव]], [[शैव]], [[शाक्त]], [[स्मार्त]], आदि
|<ref>Karl Potter, ''The Encyclopedia of Indian Philosophies'', Volumes 1 through 27, Motilal Banarsidass, {{ISBN|81-208-0309-4}}</ref>
|-
| कृषि एवं भोजन
| कृषिशास्त्र, [[वृक्षायुर्वेद]]
| <ref>Gyula Wojtilla (2006), ''History of Kr̥ṣiśāstra'', Otto Harrassowitz Verlag, {{ISBN|978-3-447-05306-8}}</ref>
|-
| डिजाइन, शिल्प, वास्तुशास्त्र
| शिल्पशास्त्र, [[समराङ्गणसूत्रधार]]
|<ref>{{cite book |first=P.K. |last=Acharya |year=1946 |url=https://archive.org/stream/encyclopaediaofh07achauoft#page/n9/mode/2up |title=An Encyclopedia of Hindu Architecture |publisher=Oxford University Press |volume=7}} Also see volumes 1–6.</ref><ref>[[Bruno Dagens]] (1995), Mayamata : An Indian Treatise on Housing Architecture and Iconography, {{ISBN|978-81-208-3525-2}}</ref>
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|मन्दिर, मूर्तिकला
|[[बृहत्संहिता]],
|<ref>Stella Kramrisch, ''Hindu Temple'', Vol. 1 and 2, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-81-208-0222-3}}</ref>
|-style="text-align: left;"
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|संस्कार
|[[गृह्यसूत्र]]
|<ref>Rajbali Pandey (2013), ''Hindu Saṁskāras: Socio-religious study of the Hindu sacraments'', 2nd Edition, Motilal Banarsidass, {{ISBN|978-8120803961}}</ref>
|-
| style="background: #ffad66;" |बौद्ध धर्म
| धर्मग्रन्थ, मठ-सम्बन्धी नियम
| [[त्रिपिटक]],{{efn|अधिकांश त्रिपिटक [[पालि]] भाषा में हैम किन्तु संस्कृत त्रिपितक ग्रन्थ भी प्राप्त हुए हैं।{{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}}} महायान सम्प्रदाय के ग्रन्थ, अन्य
| {{sfn|Banerji|1989|pp=634–635 with the list in Appendix IX}}{{sfn|Eltschinger|2017}}{{sfn|Wayman|1965}}
|-style="text-align: left;"
| style="background: #ffad66;" |जैन धर्म
| धर्मशास्त्र, दर्शन
| [[तत्त्वार्थ सूत्र]], महापुराण एवं अन्य
| <ref>{{cite book |author=Paul Dundas |title=The Jains |url=https://books.google.com/books?id=X8iAAgAAQBAJ |year=2003 |publisher=Routledge |isbn=978-1-134-50165-6 |pages=68–76, 149, 307–310}}</ref><ref>{{cite book |author=Wendy Doniger |year=1993 |title=Purana Perennis: Reciprocity and transformation in Hindu and Jaina texts |url=https://books.google.com/books?id=-kZFzHCuiFAC |publisher=State University of New York Press |isbn=978-0-7914-1381-4 |pages=192–193}}</ref>
|}
इनके अतिरिक्त [[रसविद्या]], [[तंत्र साहित्य (भारतीय)|तंत्र साहित्य]], [[वैमानिक शास्त्र]] तथा अन्यान्य विषयों पर संस्कृत में ग्रन्थ रचे गये जिनमें से कुछ आज भी उपलब्ध हैं।
==शिक्षा एवं प्रचार-प्रसार==
[[चित्र:संस्कृत विभिन्न लिपियों में.png|"संस्कृतम्" शब्द विभिन्न लिपियों में लिखा हुआ।|200px|right]]
[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] में संस्कृत आठवीं अनुसूची में सम्मिलित अन्य भाषाओं के साथ विराजमान है। [[त्रिभाषा सूत्र]] के अन्तर्गत संस्कृत भी आती है। [[हिन्दी]] एवं अन्य भारतीय भाषाओं की की [[वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग|वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली]] संस्कृत से निर्मित है।
[[भारत]] तथा अन्य देशों के कुछ संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची नीचे दी गयी है- (देखें, ''[[भारत स्थित संस्कृत विश्वविद्यालयों की सूची]]'')
{| class="wikitable"
|- style="background:#d3d3d3;"
! स्थापना वर्ष
! नाम
! स्थान
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1791
| align=left |[[सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वाराणसी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1876
| align=left |[[सद्विद्या पाठशाला]]
| align=left |[[मैसूर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1961
| align=left |[[कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[दरभंगा]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति]]
| align=left |[[तिरुपति]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1962
| align=left |[[श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1970
| align=left |[[राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली]]
| align=left |[[नयी दिल्ली]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1981
| align=left |[[श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[पुरी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1986
| align=left |[[नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नेपाल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1993
| align=left |[[श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[कालडी]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |1997
| align=left |[[कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[नागपुर|रामटेक]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2001
| align=left |[[जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[जयपुर]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2005
| align=left |[[श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[वेरावल]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2008
| align=left |[[महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[उज्जैन]]
|- style="background:#e4e8ff;"
| align=left |2011
| align=left |[[कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय]]
| align=left |[[बंगलुरु]]
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== यह भी देखिए ==
* [[वैदिक संस्कृत]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
* [[संस्कृत भाषा का इतिहास]]
* [[संस्कृत का पुनरुत्थान]]
'''संस्कृत के विकिपीडिया प्रकल्प'''
* [http://sa.wikipedia.org/ संस्कृत विकिपीडिया]
* [[wikt:संस्कृत|संस्कृत]] (संस्कृत विकोश:)
* [http://sa.wikisource.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D '''संस्कृत विकिस्रोतम्'''] (Sanskrit Wikisource)
* [http://sa.wikibooks.org/wiki/Main_Page '''संस्कृत विकि पुस्तकानि'''] (Sanskrit Wiki Books)
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.sanskrit.nic.in/hindiweb/index.htm राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20081216021831/http://www.sanskrit.nic.in/ |date=16 दिसंबर 2008 }}
* [http://www.sanskrit.nic.in/Thesis_Modified/Thesis-E-H/H_f/myweb10/index.htm भारतीय विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर आधारित शोध प्रबन्धों की निर्देशिका] (राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान)
* [http://groups.google.com/group/samskrita संस्कृत गूगल समूह]
=== संस्कृत संसाधन ===
* [http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 हिन्दी-संस्कृत वार्तालाप पुस्तिका] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304224622/http://hindinideshalaya.nic.in/hindi/onlinebook/hindiSanskrit.asp?currentPage=2 |date=4 मार्च 2016 }} (केन्द्रीय हिन्दी संस्थान)
* [http://sanskrit.inria.fr/portal.html Links to Sanskrit resources]
* [http://www.sanskritweb.net/ Sankrit Web]
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* [http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault Discover Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060507205151/http://sanskrit.farfromreal.com/index.php?x=vault |date=7 मई 2006 }}
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* [http://sanskrit.safire.com/ Sanskrit Texts and Stotras]
* [http://www.omkarananda-ashram.org/Sanskrit/Itranslt.html Omkarananda Ashram's Sanskrit Page]
=== संस्कृत सामग्री ===
* [http://sanskritdocuments.org/ Sanskrit Documents]
*[https://sanskritslokas.info Sanskrit Slokas] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190527004913/https://sanskritslokas.info/ |date=27 मई 2019 }}
* [http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D सारस्वतसर्वस्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141202091841/http://shiva.iiit.ac.in/SabdaSaarasvataSarvasvam/index.php/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A4%AE%E0%A5%8D |date=2 दिसंबर 2014 }} (शब्दकोश, संस्कृत ग्रन्थों आदि का विशाल संग्रह)
* [http://sanskritvishvam.com/index.php संस्कृविश्वम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120619052439/http://sanskritvishvam.com/index.php |date=19 जून 2012 }}
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* [http://sanskrit.gde.to/all_sa/ संस्कृत के अनेकानेक ग्रन्थ, देवनागरी में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20031209030726/http://sanskrit.gde.to/all_sa/ |date=9 दिसंबर 2003 }}
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* [http://www.sacred-texts.com/hin/index.htm Internet Sacred Text Archive] - यहाँ बहुत से हिन्दू ग्रन्थ अंग्रेजी में अर्थ के साथ उपलब्ध हैं। कहीं-कहीं मूल संस्कृत पाठ भी उपलब्ध है।
* [http://claysanskritlibrary.org/ क्ले संस्कृत पुस्तकालय] संस्कृत साहित्य के प्रकाशक हैं; यहाँ पर भी बहुत सारी सामग्री डाउनलोड के लिये उपलब्ध है।
* [http://www.muktabodhalib.org/SECURE/digital_library_index.htm मुक्तबोध डिजिटल पुस्तकालय] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080913182110/http://www.muktabodhalib.org/SECURE/digital_library_index.htm |date=13 सितंबर 2008 }}
* [http://www.mantra.org.in/index.htm भारत विद्या] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090615005352/http://mantra.org.in/index.htm |date=15 जून 2009 }}
* [http://www.muktabodha.org/about.htm मुक्तबोध इंडोलोजिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110725044937/http://www.muktabodha.org/about.htm |date=25 जुलाई 2011 }} (तंत्र एवं आगम साहित्य पर विशेष सामग्री)
* [http://www.asianclassics.org/ Asian Classic Input Project] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100710003036/http://www.asianclassics.org/ |date=10 जुलाई 2010 }}
* [http://kjc-fs-cluster.kjc.uni-heidelberg.de/dcs/index.php Digital Corpus of Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111026203248/http://kjc-fs-cluster.kjc.uni-heidelberg.de/dcs/index.php |date=26 अक्तूबर 2011 }} (a searchable collection of lemmatized Sanskrit texts)
=== शब्दकोश ===
* [http://www.andhrabharati.com/dictionary/sanskrit/ आंध्रभारती का संस्कृत कोश गपेषणम् ] : आनलाइन संस्कृत कोश शोधन ; कई कोशों में एकसाथ खोज ; देवनागरी, बंगला आदि कई भारतीय लिपियों में आउटपुट; कई प्रारूपों में इनपुट की सुविधा
* [http://books.google.co.in/books?id=bsSZ27z5fSYC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false '''संस्कृत-हिन्दी कोश''' (राज संस्करण)] (गूगल पुस्तक ; रचनाकार - वामन शिवराम आप्टे)
* [http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/monier/ Monier Williams Dictionary (2006 revision)] - इसमें संस्कृत शब्दों के अंग्रेजी अर्थ दिये गये हैं। शब्द इन्पुट Harvard-Kyoto, SLP1 या ITRANS में देने की सुविधा है।
* [http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/aequery/index.html आप्टे अंग्रेजी --> संस्कृत शब्दकोश] - इसमें परिणाम इच्छानुसार देवनागरी, iTrans, रोमन यूनिकोड आदि में प्राप्त किये जा सकते हैं।
* [http://sa.wiktionary.org/wiki/संक्षिप्त_संस्कृत-आंग्लभाषा_शब्दकोश संक्षिप्त संस्कृत-आंग्लभाषा शब्दकोश] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120405022342/http://sa.wiktionary.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE_%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6 |date=5 अप्रैल 2012 }} (Concise Sanskrit-English Dictionary) - संस्कृत शब्द देवनागरी में लिखे हुए हैं। अर्थ अंग्रेजी में। लगभग १० हजार शब्द। डाउनलोड करके आफलाइन उपयोग के लिये उत्तम !
* [http://books.google.co.in/books?id=RdVwfC0Dl7wC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false The Student's English-Sanskrit Dictionary] (गूगल पुस्तक ; लेखक - Vaman Shivaram Apte)
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==== डाउनलोड योग्य शब्दकोश ====
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* [http://www.hindimedia.in/content/view/625/43/ संस्कृत - विज्ञान और कंप्यूटर की समर्थ भाषा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071104160045/http://www.hindimedia.in/content/view/625/43/ |date=4 नवंबर 2007 }}
* [http://www.aryasamaj.org/newsite/node/1683 सशक्त भाषा संस्कृत] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110703115731/http://www.aryasamaj.org/newsite/node/1683 |date=3 जुलाई 2011 }}
* [http://www.scribd.com/doc/14339015/The-wonder-that-is-Sanskrit The Wonder that is Sanskrit] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090717090723/http://www.scribd.com/doc/14339015/The-wonder-that-is-Sanskrit |date=17 जुलाई 2009 }}
* [http://www.thevedicfoundation.org/valuable_resources/Sanskrit-The_Mother_of_All_Languages_partI.htm Sanskrit: The Mother of All Languages], अत्यन्त ज्ञानवर्धक लेख, तीन भागों में।
* [http://www.hinduwisdom.info/Sanskrit.htm संस्कृत के बारे में महापुरुषों के विचार (अंग्रेजी में)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110817234057/http://hinduwisdom.info/Sanskrit.htm |date=17 अगस्त 2011 }}
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* [https://translate.google.com/?sl=sa&tl=en&text=%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2%20%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%83%0A%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%87%20%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A5%81%20%E0%A4%95%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A5%A4%0A%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A4%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A4%99%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%BD%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A5%A4%E0%A5%A42.47%E0%A5%A4%E0%A5%A4&op=translate संस्कृत अनुवाद] (गूगल ट्रान्स्लेट द्वारा)
* [http://www.codewallah.com/diCrunch/diCrunch.php Diacritic Conversion - '''diCrunch'''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20091109045833/http://www.codewallah.com/diCrunch/diCrunch.php |date=9 नवंबर 2009 }} - Balaram / CSX / (X)HK / ITRANS / Shakti Mac / Unicode / Velthuis / X-Sanskrit / Bengali Unicode / Devanagari Unicode / Oriya Unicode आदि इनकोडिंग का परस्पर परिवर्तक
* [http://iit.edu/~laksvij/language/sanskrit.html रोमन को यूनिकोड संस्कृत में लिप्यंतरित करने का उपकरण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090929113026/http://iit.edu/~laksvij/language/sanskrit.html |date=29 सितंबर 2009 }}
* [http://baraha.com/ '''बरह'''] - कम्प्यूटर पर संस्कृत लिखने एवं फाण्ट परिवर्तन का औजार
* [http://sanskrit.jnu.ac.in/index.jsp Computational Linguistics R&D at Special Centre for Sanskrit Studies, J.N.U.] - यहाँ अनेक भाषायी उपकरण उपलब्ध हैं।
* [http://sanskrit.sai.uni-heidelberg.de/ '''PaSSim''' — Paninian Sanskrit Simulator]
* [http://sanskrit.sai.uni-heidelberg.de/Chanda/HTML/ Sanskrit Verse Metre Recognizer] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130822075201/http://sanskrit.sai.uni-heidelberg.de/Chanda/HTML/ |date=22 अगस्त 2013 }}
* [http://www.taralabalu.org/panini/ '''गणकाष्टाध्यायी'''] - संस्कृत व्याकरण का साफ्टवेयर ([[पाणिनि]] के सूत्रों पर आधारित)
* [http://www.sktutilities.com/transliteratorAction.do Sanskrit Utilities] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110728055648/http://www.sktutilities.com/transliteratorAction.do |date=28 जुलाई 2011 }} - Online Transliterator Sanskrit Dictionary, Sandhi, Pratyahara-Decoder and Metric Analyzer
* [http://sanskrittools.ourtoolbar.com/ संस्कृतटूल्स] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100513160212/http://sanskrittools.ourtoolbar.com/ |date=13 मई 2010 }} - संस्कृत टूलबार
* [http://eng.lalitaalaalitah.com/medha/ '''मेधा'''] - संस्कृत की-बोर्ड (मेधा) [medhA - a Sanskrit keyboard for Windows, Linux and Mac OS X.]
* [http://www.sanskrit.uohyd.ac.in/scl/ '''संसाधनी'''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20121204033928/http://sanskrit.uohyd.ac.in/scl/ |date=4 दिसंबर 2012 }} (संस्कृत टेक्स्ट के विश्लेषण के औजार)
=== संस्कृत जालस्थल ===
* [http://www.susanskrit.org/index.php?searchword=%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF&option=com_search&Itemid= सुसंस्कृतम्] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110919144205/http://www.susanskrit.org/index.php?searchword=%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BF&option=com_search&Itemid= |date=19 सितंबर 2011 }}
* [http://sanskritam.ning.com/ संस्कृतम्]
* [http://groups.google.com/group/samskrita?hl=en संस्कृतम्] - संस्कृत के बारे में गूगल चर्चा समूह
* [https://archive.today/20121205234515/sanskrit-jeevan.blogspot.com/2010/05/blog-post_7790.html संस्कृतं भारतस्य जीवनम्]
* [http://www.lalitaalaalitah.com/ ललितालालितः] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110202160429/http://www.lalitaalaalitah.com/ |date=2 फ़रवरी 2011 }}
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wikitext
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{{/शीर्ष}}
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== Anthony Albanese के सही उच्चारण के संबंध में ==
विकिपीडिया के अंग्रेज़ी संस्कारण पर Albanese का उच्चारण "/ˌælbəˈniːzi/ ऐल-ब्अ-नी-ज़ी अथवा /ˈælbəniːz/ ऐल-ब्अ-नीज़" दिया गया है, अतः हिन्दी संस्करण पर भी उनका सही नाम का उच्चारण शामिल करें। स्रोत: https://en.wikipedia.org/wiki/Anthony_Albanese
== Derbyshire के सही उच्चारण के संबंध में ==
Derbyshire का सही उच्चारण "डर्बीशायर" न होकर "ˈdɑː(ɹ).bɪ.ʃə(ɹ) {ड्आ (र्).बि.श्अ(र्)} = "डार्बिशर" प्रतीत हो रहा है। स्रोत: https://en.wiktionary.org/wiki/Derbyshire
== Satyajit Rāy के सही वर्तनी ==
Satyajit Rāy को सत्यजित राय लिखा जाए। एक जगह पर "सत्यजीत" लिखा गया था, उसे "सत्यजित" लिखा जाए। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 13:59, 9 दिसम्बर 2025 (UTC)
:यह कहाँ लिखा है? कृपया लिंक भेज दें ताकि एडमिन आपका मामला देख सकें। [[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 19:31, 9 दिसम्बर 2025 (UTC)
::[[सत्यजित राय|https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF]]
::वाक्य प्रयोग: सत्यजीत राय (२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें २०वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 02:53, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
:::yes [[विशेष:योगदान/~2025-39710-56|~2025-39710-56]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-39710-56|talk]]) 07:26, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
::::तो तनिक इसे ठीक करें। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 07:36, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
:::::कर दिया। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:25, 15 दिसम्बर 2025 (UTC)
== लिंक जोडें ==
मैने इस पृष्ठ https://simple.wikipedia.org/wiki/Minority_appeasement_in_India को हिन्दी में अनुवाद किया है और हिंदी वाला पृष्ठ [[भारत में अल्पसंख्यकों की तुष्टीकरण]] पर पढा जा सकता है, अब कोई उन दोनों को लिंक कीजिए [[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 16:38, 11 दिसम्बर 2025 (UTC)
:मैने उसे स्वयं जोड दिया है -[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 20:41, 11 दिसम्बर 2025 (UTC)
== विकिपीडिया का 25वें जन्मदिन समारोह, 15 जनवरी ==
[[File:WP25 Anthem video - alternate cut.webm|300px|right|thumbtime=67]]
नमस्ते
विकिपीडिया के [https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:Wikipedia%2025%20Virtual%20Celebration 25वें जन्मदिन समारोह] में आपको आमंत्रित करना चाहता हूँ, जो [https://zonestamp.toolforge.org/1768492800 15 जनवरी को 16:00 UTC] पर हो रहा है।
यह एक घंटे भर का वर्चुअल इवेंट होगा जिसमें ट्रिविया, पुरस्कार, संगीत प्रदर्शन, नाटक रीडिंग, संपादकों पर स्पॉटलाइट और विशेष अतिथि शामिल होंगे। इसे Eventyay और विकिपीडिया के यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीम किया जाएगा। तारीख सेव करने और अपडेट पाने के लिए इवेंट के लिए रजिस्टर करें, और अगर आपके कोई सवाल हों तो मुझसे पूछें!
–[[सदस्य:RASharma (WMF)|RASharma (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:RASharma (WMF)|वार्ता]]) 10:20, 12 दिसम्बर 2025 (UTC)
== तुरन्त हस्तक्षेप अनुरोध ==
प्रिय साथी विकीमीडियन्स,
मैं आप सभी से अत्यंत आग्रह और गंभीरता के साथ तत्काल सहायता की अपील कर रहा हूँ, ताकि विकीमीडिया ब्लॉग टीम द्वारा की गई एक लंबे समय से चली आ रही अन्यायपूर्ण स्थिति को सुधारा जा सके।
2014 से 2020 के बीच, विकीमीडिया के कुछ स्टाफ सदस्यों के प्रतिकूल और हतोत्साहित करने वाले रवैये के बावजूद, मैंने भारत ( [https://diff.wikimedia.org/2017/04/12/ashish-bhatnagar/ आशीष भटनागर जी] का ब्लॉग इंटरव्यू, [https://diff.wikimedia.org/2015/03/03/hindi-wiki-sammelan/ प्रथम हिन्दी विकि सम्मेलन की रिपोर्ट], आदि), म्यांमार, कोरिया, तुर्की, चेक गणराज्य आदि देशों की विकीमीडिया समुदायों और विकीमीडियन्स का परिचयात्मक दस्तावेज़ीकरण (प्रोफाइलिंग) करने का कार्य किया।
मैंने स्वयं गहन शोध किया, प्रमुख और सक्रिय योगदानकर्ताओं की पहचान की, प्रश्नावलियाँ तैयार कीं, विस्तृत प्रोफाइल/साक्षात्कार लिखे और कुल मिलाकर 35 ब्लॉग पोस्ट तैयार कर प्रकाशित करवाईं।
दुर्भाग्यवश, विकीमीडिया ब्लॉग टीम के कम से कम दो सदस्य जबरन और अनुचित रूप से लगभग 10 ब्लॉग पोस्टों की लेखकता (Authorship) अपने नाम से दर्शा रहे हैं, जबकि उन लेखों का संपूर्ण शोध, लेखन और सामग्री मेरी ओर से की गई थी।
मैं आप सभी से विनम्र लेकिन सशक्त अनुरोध करता हूँ कि इस स्पष्ट अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाएँ और यहाँ [https://meta.wikimedia.org/wiki/Talk:Wikimedia_Blog#Credits मेरी अपील] के नीचे अपने विचार/टिप्पणियाँ दर्ज करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके और वास्तविक लेखक को उसका उचित श्रेय मिल सके।
आपका समर्थन न केवल मेरे लिए, बल्कि विकीमीडिया आंदोलन में पारदर्शिता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
आप सभी का अग्रिम धन्यवाद। [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 07:27, 27 दिसम्बर 2025 (UTC)
:बिना विश्वसनीय स्रोत के, किसी भी विकिपीडिया पेज पर कोई वाक्य नहीं जोड़ा जा सकता, इसलिए कृपया मुझे बताएं कि आप किन पृष्ठों की बात कर रहे हैं?[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 08:03, 13 जनवरी 2026 (UTC)
::बांग्ला जी, आपका और हिन्दी विकिपीडिया समुदाय का धन्यवाद। वैसे कुछ अन्य विकिपीडिया के सज्जन पुरुषों के हस्तक्षेप के कारण [https://meta.wikimedia.org/wiki/Talk:Diff_(blog)#Blogpost_Credits समस्या सुलझ चुकी है] । [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 21:32, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== Istanbul का सही उच्चारण ==
"इस्तांबुल" लिखने से यह होगा कि इसका उच्चारण "इस्ताम्बुल" हो जाएगा, क्योंकि त के बाद में "ब" है, जिसके बाद "म" है (प, फ, ब, भ, म)। इसलिए "इस्तान्बुल" ही सही है। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 16:10, 28 दिसम्बर 2025 (UTC)Dimple323
:@[[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] लेख के वार्ता पृष्ठ पर चर्चा करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 07:51, 7 जनवरी 2026 (UTC)
== ड्राफ्ट की समीक्षा और स्थानांतरण का अनुरोध ==
नमस्ते,
कृपया ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra की समीक्षा करें और यदि उपयुक्त हो तो इसे मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित करें।
ड्राफ्ट का लिंक:
https://hi.wikipedia.org/wiki/ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra
धन्यवाद। [[सदस्य:Supraconciencia|Supraconciencia]] ([[सदस्य वार्ता:Supraconciencia|वार्ता]]) 22:03, 8 जनवरी 2026 (UTC)
== अनुरोध ==
मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप इस चर्चा में अपनी टिप्पणियाँ जोड़ें: <nowiki>https://hi.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया</nowiki>: पृष्ठ_हटाने_हेतु_चर्चा/लेख/ भारत में अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण# भारत में अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण ।-[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 03:58, 11 जनवरी 2026 (UTC)
== हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप कार्यक्रम सूचना ==
सभी विकि साथियों को नववर्ष 2026 के लिए शुभकामनाएं। हम यूजर ग्रूप के जनवरी 2026 तक के कार्यों से संबंधित कुछ नए अपडेट साझा करना चाहते हैं:
:अक्तूबर तथा नवंबर 2025 में आयोजित संपादनोत्सव के परिणाम घोषित हो चुके हैं:
# [[w:hi:विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्तूबर 2025|विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्तूबर 2025]] - 2 अक्तूबर 2025 से 18 अक्तूबर 2025 तक हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
# [[S:hi:विकिस्रोत:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५|विकिस्रोत:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५]]- 1 नवंबर, 2025 से 14 नवंबर, 2025 तक हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
:जनवरी में नई दिल्ली में दो ऑफ लाइन बैठक/कार्यशाला का आयोजन हो रहा है:
# [[w:hi:विकिपीडिया:हिंदी ई-सामग्री के निर्माण में अनुवाद और विकिपीडिया की भूमिका|विकिपीडिया:हिंदी ई-सामग्री के निर्माण में अनुवाद और विकिपीडिया की भूमिका]] - 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्थानिक प्रशिक्षण और भागिदारी कार्यशाला।
# [[w:hi:विकिपीडिया:प्रबंधक बैठक/जनवरी 2026|प्रबंधक बैठक/जनवरी 2026]] - 16 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रबंधक बैठक।
: वर्ष 2026 के फरवरी तथा मार्च में दो गुणवत्ता बढ़ाने वाले संपादनोत्सव करने की योजना है:
# [[w:hi:विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/फरवरी 2026|विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/फरवरी 2026]] – फरवरी 2026 में हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
# [[S:hi:विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५|विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५]]- मार्च में हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।:इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए तथा इससे संबंधित कोई सुझाव देने के लिए सदस्यों का स्वागत है।
: 15 जनवरी को जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में शामिल होने को इच्छुक दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकिपीडियनों का स्वागत हैं। आप आयोजन पृष्ठ पर अपना पंजीयन कराकर इस कार्यशाला में शामिल हो सकते हैं।
:सादर- संपर्क सूत्र -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 18:49, 13 जनवरी 2026 (UTC)
==सहायता==
मैं जब भी किसी लेख में संपादित करती करती हूँ तो स्रोत संपादित की जगह संपादित करें आता है जिस कारण मैं ठीक से आडिट नहीं कर पाती हूँ कृपया मेरी इस समस्या में सहायता करें। [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 06:14, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] जी, आपको समस्या क्या आ रही है? वहाँ स्रोत सम्पादन और यथादृश्य समादिका (visual editor) के मध्य बदला जा सकता है। यदि आप स्रोत सम्पादन का उपयोग करना चाहें तो उचित बदलाव कर सकते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 06:19, 15 जनवरी 2026 (UTC)
::{{ping|संजीव कुमार}} लेकिन कहाँ और कैसे बदला जाएगा [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 06:21, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:::{{ping|संजीव कुमार}} जी कृपया मार्गदर्शन करें। 14:23, 16 जनवरी 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] जी वहाँ पर दाहिने ओर ऊपर एक पेन जैसा दिखने वाला बटन होता है जिसे क्लिक करके आप 'यथादृश्य' और 'स्रोत संपादक' में अदल बदल कर सकते हैं। आप कंप्यूटर पे हो तो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:32, 16 जनवरी 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी हो गया, धन्यवाद [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 07:44, 17 जनवरी 2026 (UTC)
== मसौदे की समीक्षा का अनुरोध ==
नमस्ते,
मैंने हाल ही में एक जीवित व्यक्ति की जीवनी का मसौदा तैयार किया है, जो स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है।
मुख्य नामस्थान में स्थानांतरण का अनुरोध पहले ही किया जा चुका है।
मसौदा यहाँ उपलब्ध है:
https://hi.wikipedia.org/wiki/ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra
यदि कोई अनुभवी संपादक इसकी समीक्षा कर सके, तो आभारी रहूँगा।
धन्यवाद। [[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] ([[सदस्य वार्ता:Pi1918|वार्ता]]) 10:03, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] मैंने इसे साफ़ प्रचार मानते हुए शीघ्र हटाने हेतु नामांकित किया है। वैसे भी हिंदी विकिपीडिया पर ड्राफ्ट जैसा कोई नामस्थान नहीं है। कृपया आगे से व्यक्तियों के प्रचारात्मक लेख बनाने से परहेज करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:45, 16 जनवरी 2026 (UTC)
::नमस्ते,
:: जानकारी देने के लिए धन्यवाद। मेरा उद्देश्य किसी भी प्रकार का प्रचार करना नहीं था। मैं आपके निर्णय का सम्मान करता हूँ और आगे से हिंदी विकिपीडिया की नीतियों के अनुसार ही योगदान करूँगा।
:: धन्यवाद। [[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] ([[सदस्य वार्ता:Pi1918|वार्ता]]) 17:53, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== नये लेख [[Draft:_सम्राट_कुमार_गुप्ता]] की समीक्षा हेतु अनुरोध ==
नमस्ते संपादकों,
मैंने सम्राट कुमार गुप्ता के बारे में एक लेख (Draft) तैयार किया है जिसमें 3 दशकों के पत्रकारिता और सामाजिक कार्यों के विश्वसनीय संदर्भ दिए गए हैं। कृपया इसकी समीक्षा करें और इसे मुख्य लेख के रूप में प्रकाशित करने में सहायता करें। लिंक: [[Draft:_सम्राट_कुमार_गुप्ता]] --
धन्यवाद [[सदस्य:Kumari Supriya|Kumari Supriya]] ([[सदस्य वार्ता:Kumari Supriya|वार्ता]]) 07:43, 16 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Kumari Supriya|Kumari Supriya]] मैंने इसे साफ़ प्रचार मानते हुए शीघ्र हटाने हेतु नामांकित किया है। वैसे भी हिंदी विकिपीडिया पर ड्राफ्ट जैसा कोई नामस्थान नहीं है। कृपया आगे से व्यक्तियों के प्रचारात्मक लेख बनाने से परहेज करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:46, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== Thank You for Last Year – Join Wiki Loves Ramadan 2026 ==
Dear Wikimedia communities,
We hope you are doing well, and we wish you a happy New Year.
''Last year, we captured light. This year, we’ll capture legacy.''
In 2025, communities around the world shared the glow of Ramadan nights and the warmth of collective iftars. In 2026, ''Wiki Loves Ramadan'' is expanding, bringing more stories, more cultures, and deeper global connections across Wikimedia projects.
We invite you to explore the ''Wiki Loves Ramadan 2026'' [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan 2026|Meta page]] to learn how you can participate and [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan 2026/Participating communities|sign up]] your community.
📷 ''Photo campaign on '' [[c:Special:MyLanguage/Commons:Wiki Loves Ramadan 2026|Wikimedia Commons]]
If you have questions about the project, please refer to the FAQs:
* [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan/FAQ/|Meta-Wiki]]
* [[c:Special:MyLanguage/Commons:Wiki Loves Ramadan/FAQ|Wikimedia Commons]]
''Early registration for updates is now open via the '''[[m:Special:RegisterForEvent/2710|Event page]]'''''
''Stay connected and receive updates:''
* [https://t.me/WikiLovesRamadan Telegram channel]
* [https://lists.wikimedia.org/postorius/lists/wikilovesramadan.lists.wikimedia.org/ Mailing list]
We look forward to collaborating with you and your community.
'''The Wiki Loves Ramadan 2026 Organizing Team''' 19:45, 16 जनवरी 2026 (UTC)
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== स्वागत सन्देश में चित्र ==
पूर्व चर्चा: [[विकिपीडिया:चौपाल/पुरालेख 63#स्वागत सन्देश में चित्र]]
[[साँचा:सहायता|स्वागत संदेश]] में अंकित किया गया चित्र मशीन द्वारा निर्मित किया गया है। मशीन द्वारा बनाई गई सामग्री इस ज्ञानकोष में मान्य नहीं है। इसलिए अनुरोध है कि जिस सदस्य ने यह चित्र स्थापित किया है, वही इसे हटा भी दे। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 09:32, 18 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, यह चित्र आपको कैसा लगता है? मुझे तो यह पुराने चित्र जैसा ही लग रहा है। इसलिए यदि आप दोनों को यह ठीक लगे, तो हम इसे उपयोग में ले सकते हैं।
:[[चित्र:Annapoorni (10641191125).jpg|120px|thumb|right|स्वागत!]] – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 16:13, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)
{{-}}
:: [[चित्र:Tableau_noir_dans_le_désert_du_Thar_(Rajasthan).jpg|240px|thumb|center|हिन्दी विकिपीडिया में आपका हार्दिक स्वागत है। इस ज्ञानकोश के विकास और विस्तार में आपके सहयोग की हमें प्रतीक्षा है।]] <center>--[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 18:03, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)</center>
:::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, ये आपको कैसे लग रहा है कि एआई से जनित चित्र ज्ञानकोशीय नहीं हो सकता? आजकल एआई से ज्ञानकोशीय एनिमेशन बनाये जाते हैं। यह तो बनाने वाले पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त चित्र ज्ञानकोशीय होने के लिए नहीं बल्कि स्वागत के रूप में जोड़ा गया है।
:::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, मुझे आपके सुझाव से कोई समस्या नहीं है और आप चाहें तो इसे जोड़ सकते हैं। हालांकि पिछली बार @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी का सुझाव था कि चित्र को हटा दिया जाये, अतः मुझे उनका सुझाव भी उचित ही लगा। लेकिन मैंने परम्परा के तौर पर नया चित्र जोड़ा था क्योंकि स्वागत सन्देश में बहुत बदलावों की आवश्यकता है।
:::@[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] जी, आपका सुझाव भी उचित है लेकिन इससे बेहतर चित्र हम कंप्यूटर पर निर्मित कर सकते हैं जो इससे बेहतर होंगे। इसके लिए चर्चा करना बेहतर होगा। स्वागत सन्देश बड़ा रखने के स्थान पर एक छोटी कड़ी दे सकते हैं जिसपर सभी सन्देशों को सूचीबद्ध किया जा सके। इससे उन सदस्यों को भी सुविधा रहेगी जो हिन्दी नहीं जानते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:34, 9 फ़रवरी 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]]@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]]@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] @[[सदस्य:Hindustanilanguage|Hindustanilanguage]] मेरा अब भी सुझाव है कि चित्र हटा दिया जाय। हालाँकि, अभी जो आपत्ति दर्ज़ की गई है, उसपे इतना ही कहूँगा कि यह चित्र 'ज्ञानकोश' का हिस्सा नहीं है। स्वागत संदेश में इस तरह के चित्र पर आपत्ति उचित नहीं प्रतीत हो रही।
::::संजीव जी जैसा कह रहे, पूरे स्वागत संदेश को पुनर्विचार एवं नये सिरे से बनाने की ज़रूरत है - लंबा काम है - मुझे कोई गुरेज़ नहीं इसमें भागीदारी करने में।
::::पर यह चित्र हटाने वाली बात चर्चा के योग्य भी नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 10:49, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
:::::{{ping|संजीव कुमार}}, एक महिला को हर किसी के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े किया जाना महिलाओं के आत्मसम्मान के लिहाज से कहीं न कहीं गरिमापूर्ण प्रतीत नही हो रहा है। इसलिए भी इस चित्र को हटा देना या किसी उपयुक्त चित्र से बदल देना चाहिए। बहुत से ज्ञानकोषों में बिस्किट का प्रयोग किया जाता है क्योंकि संपादन के लिए ऊर्जा चाहिए होती है, जो बिस्किट से मिलती है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 08:23, 8 मार्च 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] और @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी के विचारों से सहमत होते हुए कि स्वागत संदेश को नए सिरे से बनाने की आवश्यकता है, और @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी की आपत्तियों (एआई और गरिमा) को ध्यान में रखते हुए, मेरा सुझाव है कि हम विवादित चित्र के स्थान पर प्राकृतिक फूलों के चित्र का उपयोग किया जाएं। फूल स्वागत का एक गरिमापूर्ण, मानवीय और तटस्थ प्रतीक हैं।
::::::मैंने विकिमीडिया कॉमन्स से कुछ प्राकृतिक और सुंदर चित्रों का चयन किया है। कृपया नीचे दी गई गैलरी में देखकर बताएँ कि इनमें से कौन सा चित्र नए स्वागत संदेश के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा?
::::::File:Lotus 2013 sai.jpg|कमल '''यह चित्र मैने @[[सदस्य:SM7|SM7]] के सदस्य पृष्ठ पर देखा'''
::::::File:Red rose at Square of the Cathedral of Christ the Saviour.jpg|लाल गुलाब
::::::File:Combretum indicum(Rangoon creeper).jpg|मधुमालती (रंगून क्रीपर) '''यह मैने ही अपलोड किया'''
::::::File:(MHNT) Jasminum polyanthum – flowers and buds.jpg|चमेली
::::::File:Marigold 14.jpg|गेंदा
::::::File:Flower bouquet in Tarnowskie Góry, Silesian Voivodeship, Poland, December 2023.jpg|पुष्प गुच्छ
::::::File:Rose and carnation flower bouquet 01.jpg|गुलाब और कार्नेशन
::::::आप सभी वरिष्ठ साथियों की राय का स्वागत है। [[सदस्य :VIKRAM PRATAP7 | विक्रम प्रताप ]] 14:09, 9 मार्च 2026 (UTC)
:::::::@[[सदस्य:VIKRAM PRATAP7|VIKRAM PRATAP7]] जी, फूल लगवाने का कोई विशेष औचित्य? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:38, 9 मार्च 2026 (UTC)
::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, महोदय
:::::::: फूल लगवाने का मुख्य औचित्य केवल एक तटस्थ, विवाद-रहित और मानवीय स्वागत-प्रतीक प्रस्तुत करना है।
::::::::महोदय, भारत में फूलों से स्वागत करना सबसे आत्मीय और सहज माना जाता है।
::::::::प्राकृतिक फूल होने के कारण यह AI और गरिमा से जुड़े उन सभी विवादों से पूरी तरह मुक्त है, जो वर्तमान चित्र को लेकर उठे हैं।
::::::::मेरा उद्देश्य सिर्फ एक सकारात्मक चित्र लगाना है। यदि समुदाय को फूल के स्थान पर @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी का 'बिस्किट' वाला सुझाव या विकिपीडिया का लोगो अधिक उपयुक्त लगता है, तो मेरी उसमें भी पूर्ण सहमति है। प्रमुख उद्देश्य स्वागत संदेश को बेहतर बनाना है। [[सदस्य :VIKRAM PRATAP7 | विक्रम प्रताप ]] 16:47, 9 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::भारत में हाथ जोड़कर स्वागत किया जाता है। फूलों से स्वागत देवताओं का किया जाता है और आजकल लोगों ने चाटुकारिता के लिए इसे मनुष्यों पर लागू करना आरम्भ कर दिया है। चित्रों में प्राकृतिक फूल कैसे हो सकते हैं? वर्तमान चित्र को लेकर मैंने कोई विवाद नहीं देखा, बल्कि चित्र को हटाकर संबंधित सन्देश को पुनः लिखने पर यह चर्चा है। वर्तमान चित्र में क्या नकारात्मक दिखाई दे रहा है? क्या वो भारतीय संस्कृति से संबंधित नहीं है? (हालांकि ऐसा आवश्यक नहीं है)। अभी चर्चा इसपर चाहिए कि चित्र की आवश्यकता ही क्या है? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:43, 12 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी,महोदय
::::::::::मेरा उद्देश्य केवल उठे हुए विवाद के बीच एक विकल्प देना था। लेकिन मैं आपसे और @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी से पूरी तरह सहमत हूँ कि असली मुद्दा यह है कि स्वागत सन्देश में किसी भी चित्र की आवश्यकता है ही नहीं। पर @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] महोदय ने बिस्किट के चित्र का उदाहरण दिया था, जिसके लिए मैं पुष्पों का विकल्प दिया था|
::::::::::मेरी ओर से चित्र वाले विषय पर चर्चा यहीं समाप्त है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:59, 12 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::::सभी सदस्यो से विनम्र निवेदन है, की कृपया इस [[:File:AI Chatgpt generated Woman in Welcome pose.png|चित्र]] देखने का कष्ट करे, इसको स्वागत सन्देश में लगने के लिए उपयुक्त हो सकता है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 16:06, 12 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::::@[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] जी, चित्र को हटाने पर चर्चा चल रही है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:35, 14 मार्च 2026 (UTC).
:::::::::::::::{{Ping|संजीव कुमार}} जी, नमस्ते! चित्र को उपयोग में लिया जा चुका है,पहले चित्र उपयोग में न होने के कारण हटाने हेतु चर्चा के लिए नामांकित किया गया है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 16:50, 14 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::{{ping|संजीव कुमार}}, आपकी बात सही है कि भारत में हाथ जोड़कर स्वागत किया जाता है। परंतु, क्योंकि आप और यहां के अधिकतर प्रबंधक पुरुष हैं, और स्वागत करते हुए व्यक्ति का ही चित्र लगाना है तो उचित होगा कि किसी पुरुष का हाथ जोड़कर स्वागत करता हुआ चित्र लगाया जाए। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:28, 20 मार्च 2026 (UTC)
:{{od}} वर्तमान चर्चा के आधार पर चित्र हटा दिया गया है। भविष्य में चर्चा करके एक उपयुक्त चित्र जोड़ा जा सकता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 14:51, 18 मार्च 2026 (UTC)
== Feminism and Folklore 2026 starts soon ==
<div style="border:8px maroon ridge;padding:6px;">
[[File:Feminism and Folklore 2026 logo.svg|centre|550px|frameless]]
::<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
<div style="text-align: center; width: 100%;">''{{int:please-translate}}''</div>
;Invitation to Organize Feminism and Folklore 2026
Dear Wiki Community,
We are pleased to invite Wikimedia communities, affiliates, and independent contributors to organize the '''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026]]''' writing competition on your local Wikipedia.
The international campaign will run from '''1 February to 31 March 2026''' and aims to improve coverage of feminism, women’s histories, gender-related topics, and folk culture across Wikipedia projects.
;About the Campaign
'''Feminism and Folklore''' is a global writing initiative that complements the '''[[:c:Commons:Wiki Loves Folklore 2026|Wiki Loves Folklore]]''' photography competition. While Wiki Loves Folklore focuses on visual documentation, this writing campaign addresses the '''gender gap on Wikipedia''' by improving encyclopedic content related to folk culture and marginalized voices.
;What Can Participants Write About?
Communities can contribute by creating, expanding, or translating articles related to:
* Folk festivals, rituals, and celebrations
* Folk dances, music, and traditional performances
* Women and queer figures in folklore
* Women in mythology and oral traditions
* Women warriors, witches, and witch-hunting narratives
* Fairy tales, folk stories, and legends
* Folk games, sports, and cultural practices
Participants may work from curated article lists or generate new article suggestions using campaign tools.
;How to Sign Up as an Organizer
Organizers are requested to complete the following steps to register their community:
# Create a local project page on your wiki [[:m:Feminism and Folklore/Sample|(see sample)]]
# Set up the campaign using the '''CampWiz''' tool
# Prepare a local article list and clearly mention:
#* Campaign timeline
#* Local and international prizes
# Request a site notice from local administrators [[:mr:Template:SN-FNF|(see sample)]]
# Add your local project page and CampWiz link to the '''[[:m:Feminism and Folklore 2026/Project Page|Meta project page]]'''
;Campaign Tools
The Wiki Loves Folklore Tech Team has introduced tools to support organizers and participants:
* '''Article List Generator by Topic''' – Helps identify articles available on English Wikipedia but missing in your local language Wikipedia. The tool allows customized filters and provides downloadable article lists in CSV and wikitable formats.
* '''CampWiz''' – Enables communities to manage writing campaigns effectively, including jury-based evaluation. This will be the third year CampWiz is officially used for Feminism and Folklore.
Both tools are now available for use in the campaign. '''[https://tools.wikilovesfolklore.org/ Click here to access the tools]'''
;Learn More & Get Support
For detailed information about rules, timelines, and prizes, please visit the
'''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026 project page]]'''.
If you have any questions or need assistance, feel free to reach out via:
* '''[[:m:Talk:Feminism and Folklore 2026/Project Page|Meta talk page]]'''
* Email us using details on the contact page.
;Join Us
We look forward to your collaboration and coordination in making Feminism and Folklore 2026 a meaningful and impactful campaign for closing gender gaps and enriching folk culture content on Wikipedia.
Thank you and best wishes,
'''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026 International Team]]'''
----
''Stay connected:''
[[File:B&W Facebook icon.png|link=https://www.facebook.com/feminismandfolklore/|30x30px]]
[[File:B&W Twitter icon.png|link=https://twitter.com/wikifolklore|30x30px]]
</div></div>
== Invitation to Host Wiki Loves Folklore 2026 in Your Country ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
<div style="text-align: center; width: 100%;">''{{int:please-translate}}''</div>
[[File:Wiki Loves Folklore Logo.svg|right|150px|frameless]]
Hello everyone,
We are delighted to invite Wikimedia affiliates, user groups, and community organizations worldwide to participate in '''Wiki Loves Folklore 2026''', an international initiative dedicated to documenting and celebrating folk culture across the globe.
;About Wiki Loves Folklore
'''Wiki Loves Folklore''' is an annual international photography competition hosted on Wikimedia Commons. The campaign runs from '''1 February to 31 March 2026''' and encourages photographers, cultural enthusiasts, and community members to contribute photographs that highlight:
* Folk traditions and rituals
* Cultural festivals and celebrations
* Traditional attire and crafts
* Performing arts, music, and dance
* Everyday practices rooted in folk heritage
Through this campaign, we aim to preserve and promote diverse folk cultures and make them freely accessible to the world.
[[:c:Commons:Wiki_Loves_Folklore_2026|Project page on Wikimedia Commons]]
; Host a Local Edition
As we celebrate the '''eight edition''' of Wiki Loves Folklore, we warmly invite communities to organize a local edition in their country or region. Hosting a local campaign is a great opportunity to:
* Increase visibility of your region’s folk culture
* Engage new contributors in your community
* Enrich Wikimedia Commons with high-quality cultural content
'''[[:c:Commons:Wiki_Loves_Folklore_2026/Organize|Sign up to organize]]:'''
If your team prefers to organize the competition in ''either February or March only'', please feel free to let us know.
If you are unable to organize, we encourage you to share this opportunity with other interested groups or organizations in your region.
;Get in Touch
If you have any questions, need support, or would like to explore collaboration opportunities, please feel free to contact us via:
* The project Talk pages
* Email: '''support@wikilovesfolklore.org'''
We are also happy to connect via an online meeting if your team would like to discuss planning or coordination in more detail.
Warm regards,
'''The Wiki Loves Folklore International Team'''
</div>
[[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 13:21, 18 जनवरी 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Global_message_delivery/Wikipedia&oldid=29228188 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Tiven2240@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== सार्वभौमिक आचार संहिता और प्रवर्तन के दिशानिर्देशों की वार्षिक समीक्षा ==
<section begin="announcement-content" />
मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि सार्वभौमिक आचार संहिता और प्रवर्तन के दिशानिर्देशों की वार्षिक समीक्षा की अवधि शुरू हो चुकी है। आप 9 फरवरी 2026 तक बदलावों के सुझाव दे सकते हैं। यह वार्षिक समीक्षा के कई चरणों का पहला चरण है। [[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Annual review/2026|मेटा के UCoC पृष्ठ पर अधिक जानकारी पाएँ और जुड़ने के लिए वार्तालाप खोजें]]।
[[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Coordinating Committee|सार्वभौमिक आचार संहिता समन्वयन समिति]] (U4C) एक वैश्विक समिति है जो UCoC का साम्यिक और सुसंगत कार्यान्वयन करने को समर्पित है। यह वार्षिक समीक्षा U4C द्वारा योजित और लागू की गई है। अधिक जानकारी तथा U4C की ज़िम्मेदारियों के लिए [[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Coordinating Committee/Charter|आप U4C चार्टर की जाँच कर सकते हैं]]।
कृपया जहाँ भी उचित हो, अपने समुदाय के दूसरे सदस्यों के साथ यह जानकारी साझा करें।
-- U4C के साथ समन्वय में, [[m:User:Keegan (WMF)|Keegan (WMF)]] ([[m:User talk:Keegan (WMF)|वार्ता]])<section end="announcement-content" />
21:01, 19 जनवरी 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Global_message_delivery&oldid=29905753 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Keegan (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== हिंदी विकि सम्मेलन 2026 समुदाय सहभागिता सर्वे ==
:हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप इस वर्ष जुलाई में हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026 आयोजित करने की योजना बना रहा है। इससे संबंधित हिंदी विकिपीडियनों की रुचि तथा महत्वपूर्ण विषयों को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया जा रहा है। [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeWaqfyOlr9hS7Ef5eXg_Y4mPK8gj1cnzaIBAbQXbjM6KH4aw/viewform हिंदी विकि सम्मेलन 2026] भरकर हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026 आयोजित करने में सहयोगी बनें। -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 09:07, 31 जनवरी 2026 (UTC)
[[सदस्य:Vishal K Pandey|Vishal K Pandey]] ([[सदस्य वार्ता:Vishal K Pandey|वार्ता]]) 18:11, 26 जनवरी 2026 (UTC)
==गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड==
विकिडेटा में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का लोगो Guinness World Records logo.svg नाम से उपलब्ध है। इसका हिन्दी में उपयोग करना संभव बनाएं। अधिकार संपन्न लोग ऐसा कर सकते हैं।
'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 18:28, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
:[[गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:00, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
::समस्या सुलझाने के लिए आपका धन्यवाद - '''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 08:59, 6 फ़रवरी 2026 (UTC)
LimcaBookofRecords.jpg इस फाइल के बारे में भी विचार करें। धन्यवाद
'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 18:35, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
:[[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स]] [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:02, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
::आपको धन्यवाद- '''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 08:59, 6 फ़रवरी 2026 (UTC)
== शीर्षक परिवर्तन के लिए अनुरोध ==
Namaste, I would like the article title '''[[डी एन ए की नकल]]''' to be changed to '''डीएनए प्रतिकृति''', as this form is more accurate and is the one used in most scientific literature.
Sorry for writing in English and if this is not the right place to make the request. I have been on a long break from Wikipedia and have forgotten the proper procedure for requesting a title change.<b>[[User talk:Dineshswamiin|<span style="color: Green">Dinesh</span>]]</b> ([[User talk:Dineshswamiin|talk]]) 15:32, 3 फ़रवरी 2026 (UTC)
:नमस्ते, मैं चाहता हूँ कि लेख का शीर्षक [[डी एन ए की नकल]] बदलकर 'डीएनए प्रतिकृति' कर दिया जाए, क्योंकि यह रूप ज़्यादा सही है और ज़्यादातर वैज्ञानिक किताबों में इसी का इस्तेमाल होता है।-[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 18:54, 5 फ़रवरी 2026 (UTC)
== ''कंप्यूटिंग'' या ''अभिकलन'' ==
हिन्दी में कंप्यूटिंग को [[अभिकलन]] भी कहा जाता है। परंतु इसके बाद भी कुछ पृष्ठ के नाम [[मोबाइल कम्प्यूटिंग]] या [[क्लाउड कम्प्यूटिंग]] है।
प्रोग्रामिंग को [[क्रमानुदेशन]] कहा जाता है परंतु आधे से ज्यादा निबंध के शीर्षक में [[प्रोग्रामिंग भाषा]] लिखा गया है।
हमें निबंध के शीर्षक एक समान रखने चाहिए। जैसे सारे निबंध के शीर्षक में प्रोगामिंग के जगह क्रमानुदेशन लिखा रहेगा। अन्य नाम हम निबंध के मुख्य भाग में लिख सकते है या redirect कर सकते है। जैसे-
'''क्रमानुदेशन भाषा''', जिसे '''प्रोग्रामिंग भाषा''' भी कहते है..... [[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 11:16, 7 फ़रवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, नमस्ते! आप एक समाधान प्रस्तावित करें - उसपे चर्चा करके यह कार्य किया जा सकता है। आपका और सभी का स्वागत है इस एकरूपता लाने के प्रयास के लिए। सादर! --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:03, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
::[[मोबाइल कम्प्यूटिंग]] का नाम बदलकर [[मोबाइल अभिकलन]] कर देना चाहिए। [[क्लाउड कम्प्यूटिंग]] का [[क्लाउड अभिकलन]] तथा [[प्रोग्रामिंग भाषा]] का नाम [[क्रमानुदेशन भाषा]] कर देना चाहिए। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:40, 8 मार्च 2026 (UTC)
== हिन्दी विकिपीडिया से गायब हो चुके पुराने संपादक ==
तकरीबन 8 साल बाद मैं विगत कुछ दिनों से विकिपीडिया पर सक्रिय हूं। इस बीच देख रहा हूं कि यहां से वो तमाम लोग गायब हो चुके हैं जो एक समय में लगातार सक्रिय रहते थे। नए लेखों की गुणवत्ता स्तरीय थी। लेकिन इधर हिन्दी विकिपीडिया पर जो कुछ भी लिखा जा रहा है वो या तो आत्मप्रचार है या फिर नौसिखियों द्वारा लगातार किया जा रहा प्रयोग। आज मैंने लगभग 25 लोगों को अपनी ओर से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की जो एक जमाने में प्रबंधक रह चुके हैं और जिन्होंने विकिपीडिया पर काफी योगदान दिया है। लेकिन सबने यही कहा कि वो अब सक्रिय नहीं हैं। यह हिन्दी विकिपीडिया के लिए ठीक नहीं है। यद्यपि कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में विकिपीडिया और खासतौर पर अंग्रेजी से इतर भाषाओं में इस ज्ञानकोश की अब पहले जैसी आवश्यकता रह नहीं गई है। क्योंकि अब अंग्रेजी की सामग्री एक क्लिक पर किसी भी दूसरी भाषा में उपलब्ध है। फिर भी हिन्दी में लिखे गए मूल लेखों का महत्व तो हमेशा बना रहेगा। इसलिए विकिपीडिया संपादक समुदाय को एक बार फिर अपना तुच्छ अहंकार छोड़कर दूर जा चुके लोगों को दोबारा सक्रिय करना चाहिए। --'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 13:54, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:कलमकार|कलमकार]] सर ! आठ साल (हुये तो नहीं!) बाद आप का स्वागत - हमारी ओर से।
:कुछ उधार का अर्ज़ कर रहा (बुरा मत मानियेगा)
:''"ऐसा नहीं कि उन से ''(मतलब विकि से)'' मोहब्बत नहीं रही
:''जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही''
:''
:''सर में वो इंतिज़ार का सौदा नहीं रहा''
:''दिल पर वो धड़कनों की हुकूमत नहीं रही''"''
:यह हमारी स्थिति है।
:और जो चले गए उनकी स्थिति यह है कि
:''चेहरे को झुर्रियों ने भयानक बना दिया''
:''आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही'' --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:00, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
:कलमकार जी, ज्ञानकोष में सक्रियता के प्रति आपकी चिंता वाजिब है। मैंने यहां पर देखा है कि बहुत से सदस्यों द्वारा महनत से बनाए गए पृष्ठ कोई न कोई पैमाना बताकर शीघ्र हटाने के लिए नामांकित कर दिए जाते हैं, फिर कोई अन्य सदस्य उन्हें हटा भी देता है। शायद इससे हताश होकर बहुत से संपादक ज्ञानकोष को छोड़कर चले गए। बहुत से संपादकों के तो सदस्य पृष्ठ भी हटा दिए गए हैं। सम्पादकों की सक्रियता में कमी की एक वजह यह भी हो सकती है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 22:21, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, क्या आप कुछ ऐसे सदस्य पृष्ठों के उदाहरण दे सकते हैं जिन्हें हटाया गया था, और कुछ ऐसे पृष्ठ भी जिन्हें किसी गलत मानदंड के तहत शीघ्र हटाने के लिए नामांकित किया गया और बाद में हटा दिया गया? यदि आपकी चिंता जायज़ होगी, तो अवश्य ही कोई समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 10:54, 26 फ़रवरी 2026 (UTC)
:::DreamRimmer जी, हाल ही के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं, जहां प्रतीत होता है कि संपादकों द्वारा शिद्दत से बनाए गए कुछ पृष्ठों को हटा दिया गया:
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#why are you remove this article "सुमरत सिंह"]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#कृपया गोप्रेक्षेश्वर लेख की पुनः समीक्षा करें और कॉपीराइट उल्लंघन का टैग हटाने की कृपा करें]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#सहायता नोट]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#डॉ. विनोद कुमार पृष्ठ: शीघ्र हटाने नामांकन पर प्रतिक्रिया]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#अभिनव अरोड़ा के पृष्ठ हटाने के विषय में]]
:::हटाए गए पृष्ठों की सामग्री देखे बगैर मापदंड की सटीकता पर टिप्पणी करना संभव नही है परंतु बहुत से ऐसे पृष्ठ भी हटाए गए हैं, जहां संपादक लेख में संशोधन करने के लिए तैयार थे। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 07:56, 8 मार्च 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपको प्रचार सामग्री चाहिए या केवल विवाद खड़ा करना उद्देश्य रहा है? यदि आपको प्रचार सामग्री चाहिए तो बताइयेगा, ईमेल से भेज देता हूँ। बैठकर देखते और समझते रहियेगा। अन्यथा आपने मेरा वार्ता पृष्ठ यहाँ क्यों जोड़ा है पता नहीं। मैंने सभी सन्देशों का उत्तर भी दे रखा है। वर्तमान में भी [[विकिपीडिया:शीह|शीघ्र हटाने]] के लिए बहुत लेख नामांकित हैं। कृपया उनकी भी समीक्षा कर लेते समय रहते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:40, 18 मार्च 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपने ऊपर जिन चर्चाओं का उल्लेख किया है, उनसे संबंधित लेख मुझे किसी भी प्रकार से गलत मानदंड के अंतर्गत हटाए गए नहीं लगते। उन विषयों की उल्लेखनीयता और उपलब्ध सामग्री के आधार पर संजीव जी द्वारा लिया गया निर्णय बिल्कुल उचित था, और ऐसी स्थिति में मेरा निर्णय भी यही होता। आपने यह भी कहा कि ऐसे पृष्ठ हटाए गए जहाँ संपादक लेख में सुधार करने के लिए तैयार थे, परंतु सभी जानते हैं कि कोई अनुल्लेखनीय लेख केवल बार-बार संपादन या सुधार करने से उल्लेखनीय नहीं बन जाता। किसी विषय की उल्लेखनीयता तभी स्थापित होती है जब उसे विश्वसनीय स्रोतों में पर्याप्त स्थान मिले, और इसमें स्वाभाविक रूप से समय लगता है। शीघ्र हटाने की नीति इस विषय में पूरी तरह स्पष्ट है; यदि किसी लेख पर सही मानदंड के अनुसार टैग लगाया गया है, तो प्रबंधक उसे किसी भी समय हटा सकता है। यदि लेखक कोई टिप्पणी जोड़ता है, तो भी प्रबंधक उस टिप्पणी से संतुष्ट न होने पर लेख को बनाए रखने के लिए बाध्य नहीं होता। आपने यह भी कहा था कि सदस्यों के सदस्य पृष्ठ भी हटा दिए गए, लेकिन इसके समर्थन में आपने कोई लिंक प्रस्तुत नहीं किया। मेरा मानना है कि किसी भी सदस्य के कार्य पर प्रश्न तभी उठाया जाना चाहिए जब पर्याप्त प्रमाण हों; अन्यथा यह बिना प्रमाण के व्यक्तिगत आक्षेप और निराधार आरोप की श्रेणी में आता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 16:20, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::::{{ping|संजीव कुमार}}, जो आपकी नज़र में प्रचार हो, वह संभवतः दूसरों के लिए जानकारी हो सकती है।
:::::DreamRimmer जी, ऐसे भी बहुत से पृष्ठ देखें हैं, जहां अनेक विश्वसनीय स्रोत दिए गए थे, उन्हें भी अनुल्लेखनिय बता कर हटाया गया। उदाहरण के लिए:
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#सुमन कुमार घई]]।
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#राजेन्द्ररंजन चतुर्वेदी]]।
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/अप्रैल 2022#रचित यादव]]। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:41, 20 मार्च 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, समस्या यह ही है कि आप इसे मेरे या आपके नज़र से देख रहे हो। एकबार नज़र हटाकर देखियेगा। "सुमन कुमार घई" नामक लेख पर 15 वर्षों से बिना स्रोत की कुछ सामग्री लिखी थी और बाद में [[विशेष:योगदान/सुमन कुमार घई|इसी नाम के सदस्य]] ने सामग्री हटाकर साहित्य कुंज की कड़ी जोड़ दी। इसी तरह अन्य लेखों को भी या तो सम्बंधित व्यक्ति ने स्वयं (आपके अनुसार उनकी नज़रों में वो स्वयं बहुत उल्लेखनीय व्यक्ति हैं) ने बनाया या अपने किसी रिश्तेदार से बनवाया। यदि आप बिना किसी स्रोत के स्वयं को उल्लेखनीय मानने लग जाओ तो क्या वो उल्लेखनीय हो जायेगा? एकबार इंटरनेट पर उपरोक्त व्यक्तियों के बारे में खोजकर देखें कि इनकी उल्लेखनीयता क्या है? उनके प्रसिद्धि के क्षेत्र में उन्हें कौनसे पुरस्कार मिले हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:26, 25 मार्च 2026 (UTC)
:::::::@[[सदस्य: संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, उल्लेखनीयता का मापदंड इसलिए बनाया गया था, कि यदि एक ही विषय या नाम पर लेख बनाने के लिए एक से अधिक दावेदार आ जाते हैं, तो इस नाम से उस विषय या व्यक्ति का लेख बनेगा जो अधिक उल्लेखनीय होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि विकिपीडिया के संदर्भ में एक phrase कई बार सामने आता है, जिसमें लिखा होता है, "sum of all knowledge""। कहने का तात्पर्य यह है कि उल्लेखनीयता के नाम पर तब तक कोई पृष्ठ नही हटाना चाहिए, जब तक उस विषय या नाम पर लेख बनाने के लिए एक से अधिक असंबंधित संभावनाएं न हों। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 'रमेश सिंह' के नाम से उद्धरण सहित लेख बना रहा है तो वह लेख रहने देना चाहिए, जब तक कि कोई उससे भी अधिक उल्लेखनीय 'रमेश सिंह' नाम के व्यक्ति पर उद्धरण सहित लेख बनाने का दावेदार नहीं आ जाता। -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:25, 31 मार्च 2026 (UTC)
::::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, बहुत अच्छा अर्थ निकाला है आपने। साथ में अपने तर्क के पक्ष में कोई स्रोत भी दे दीजियेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:39, 31 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, [[:en:Wikipedia:Notability]] की भूमिका में लिखा है - ''Information on Wikipedia must be'' '''verifiable'''''... Wikipedia's'' '''concept of notability applies this basic standard''' ''to avoid indiscriminate inclusion of topics... Determining notability does not necessarily depend on things such as fame, importance, or popularity''. -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:53, 31 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपने इसके नीचे वाला भाग क्यों नहीं पढ़ा? यद्यपि वो उस विषय की स्वीकार्यता को बढ़ा सकते हैं जो नीचे बताए गए दिशानिर्देशों को पूरा करता हो। इसके बाद विस्तार से बहुत कुछ लिखा हुआ है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:04, 31 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::::उसके नीचे भी पढ़ा है, वहां लिखा है कि यदि कोई सामग्री एक नया लेख बनाने के लिए उल्लेखनीय नहीं है, तो उस सामग्री को किसी अन्य संबंधित पृष्ठ में विलय कर देना चाहिए। यह सही भी है यदि वह सामग्री स्रोत/संदर्भ युक्त है तो। ऐसा भी देखा गया है कि राष्ट्रपति इत्यादि से अनेक उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति पर बना लेख उल्लेखनीयता के नाम पर हटा दिया गया परन्तु उसमें दर्ज संदर्भित सामग्री कहीं और संजोई नहीं गई, न ही लेखक को उसे दर्ज करने के लिए किसी अन्य पृष्ठ की ओर निर्देशित किया गया। -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:16, 31 मार्च 2026 (UTC)
{{od|10}}@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने से व्यक्ति उल्लेखनीय कैसे हो गया? विभिन्न विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में [[दीक्षान्त समारोह]] के समय डिग्री वितरण राष्ट्रपति या राज्यपाल के हाथों से करवाया जाता है। आपके अनुसार वो सभी लोग उल्लेखनीय हो गये? सम्बंधित लोगों के नामों की सूची सम्बंधित संस्थान के आधिकारिक जालस्थल पर मिल जायेगा जिसे आप विश्वसनीय स्रोत कह सकते हो। राष्ट्रपति के हाथों से मिला पुरस्कार इतना उल्लेखनीय होना चाहिए जो सम्बंधित व्यक्ति को किसी विशिष्ट कार्य के लिए मिला हो और उस कार्य के कारण व्यक्ति उल्लेखनीय हुआ हो, तो उसे उल्लेखनीय माना जाता है, न कि केवल राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने से। ऐसे समारोह राष्ट्रपति भवन में हमेशा होते हैं और उनके समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में छपते हैं।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:08, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
: उदाहरण के लिए, क्या इस ([[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#राजेन्द्ररंजन चतुर्वेदी]]) पृष्ठ को हटाते समय, इसमें उपलब्ध संदर्भित जानकारी किसी अन्य पृष्ठ पर स्थानांतरित की गई? -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 01:49, 3 अप्रैल 2026 (UTC)
== हिंदी विकिपीडिया लेखों में “स्थानांतरण (Move)” विकल्प दिखाई नहीं दे रहा ==
नमस्ते,
मैं हिंदी विकिपीडिया पर लॉग-इन हूँ। मेरा खाता पुराना है और मैंने कई संपादन भी किए हैं, फिर भी मुझे किसी भी लेख में “स्थानांतरण (Move)” का विकल्प दिखाई नहीं दे रहा।
मैंने डेस्कटॉप मोड और अलग ब्राउज़र से भी कोशिश की है।
कृपया बताएं कि यह समस्या क्यों आ रही है और इसका समाधान क्या है।
धन्यवाद। {{unsigned|ROLEXMEENA}}
: अंग्रेजी ज्ञानकोष की तरह यहां भी 'Move' (पृष्ठ स्थानांतरण) का विकल्प होना चाहिए, ताकि संपादक अपने सदस्य स्थान में पृष्ठ बनाकर उसे मुख्य नाम स्थान में स्वयं स्थापित कर सकें। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 22:27, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
=="अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026" में भाग लें ==
हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप द्वारा [[अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस]] के अवसर पर विकिपीडिया एवं विकिस्रोत पर संपादनोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
# [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026|अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026]]—15 फ़रवरी 2026 से 21 फ़रवरी 2026 तक हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑनलाइन सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव।
# [[s:विकिस्रोत:मातृभाषा संवर्धन संपादनोत्सव/2026|अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026]]—21 फ़रवरी 2026 से 28 फ़रवरी 2026 तक हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑनलाइन गुणवत्ता संवर्द्धन प्रतियोगिता।
:इनमें भाग लेकर मुक्त हिंदी ई-सामग्री के विकास के अभियान में सहायक होने के लिए आपका स्वागत है। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 04:34, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
== प्रबंधक अधिकार हेतु निवेदन ==
मैंने [[विकिपीडिया:प्रबन्धन अधिकार हेतु निवेदन#DreamRimmer|यहाँ]] प्रबंधक व अन्तरफलक प्रबंधक अधिकार हेतु निवेदन किया है। आपकी टिप्पणियों का स्वागत है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 17:11, 15 फ़रवरी 2026 (UTC)
:प्रबंधन अधिकार मिलने पर बहुत बधाई। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:33, 8 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक कैसे बदले ==
महोदय मुझे बताए कि शीर्षक बीजाणुउद्भिद को कैसे बदलकर बीजाणुद्भिद करे हृदय से धन्यवाद [[सदस्य:VIKRAM PRATAP7|VIKRAM PRATAP7]] ([[सदस्य वार्ता:VIKRAM PRATAP7|वार्ता]]) 04:39, 18 फ़रवरी 2026 (UTC)
:प्रबंधकों को [[#हिंदी विकिपीडिया लेखों में “स्थानांतरण (Move)” विकल्प दिखाई नहीं दे रहा|कहा था]] कि 'पेज मूव' का ऑप्शन सभी के लिए चालू कर दिया जाए, परंतु अभी तक नहीं किया गया है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:31, 8 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, यह अधिकार प्रबन्धकों के पास नहीं है। बाकी आप तर्क एवं स्रोत के साथ लिखेंगे तो स्थानान्तरण कर दिया जाता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:42, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::परंतु यह विकल्प अंग्रेजी ज्ञानकोष पर कैसे उपलब्ध हुआ!? [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:45, 20 मार्च 2026 (UTC)
== Reference Previews – experiment ==
Hi, I’m Johannes from [[m:WMDE Technical Wishes|WMDE Technical Wishes]]. Sorry for writing in English, please support us by providing a translation! Our team is currently working on [[:m:WMDE Technical Wishes/References|improvements to references]], e.g. [[:m:WMDE Technical Wishes/Sub-referencing|Sub-referencing]]. In 2021 we developed [[:m:WMDE Technical Wishes/ReferencePreviews|Reference Previews]] in order to provide a MediaWiki feature to preview references when hovering over the footnote marker. Over the course of our current work we’ve noticed that using Reference Previews doesn’t seem to be intuitive for some readers and we would like to improve this.
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Problem ===
<div class="mw-collapsible-content">
In our usability tests, we repeatedly notice desktop readers – unaware of Reference Previews or how to use the feature – clicking on footnotes instead of hovering over them. Many are confused when they end up in the reference list and don’t know how to jump back to the text passage they were previously reading. Many readers seem unaware that both the ↑ arrow in the reference list and the <sup>a b</sup> (for re-used references) can be used to jump back. This makes jumping to the reference list rather unpleasant, especially in long articles.
</div>
</div>
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Assumption ===
<div class="mw-collapsible-content">
We assume that most readers do not want to jump to the reference list, but rather want to click on the footnote to open Reference Previews, which provide them with the reference information for the text passage they have just read. At the same time, we believe that some readers – e.g. those who want to delve deeper into a topic rather than just quickly researching a piece of information – are still interested in conveniently accessing the reference list.
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</div>
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=== Idea ===
<div class="mw-collapsible-content">
We would like to try adjustments to Reference Previews in order to best meet the needs of different readers. Specifically, we want to prevent readers from accidentally ending up in the individual reference list; jumping there should be a conscious decision.
When clicking on a footnote marker, we want to display Reference Previews instead of jumping to the reference list. The pop-up remains permanently visible until clicking on the "x" or anywhere outside the preview to close it. In addition Reference Previews will provide a link to jump to the reference in the reference list.
<gallery heights="275" widths="250">
File:Reference Previews mock-up – current version.png|Reference Previews – current version
File:Reference Previews mock-up – persistent-state.png|Proposed version when '''clicking on a footnote marker'''
</gallery>
When hovering over a footnote marker without clicking on it, we want to display a simplified version of Reference Previews – without the settings icon and the resulting empty space. When moving the mouse pointer over the pop-up, a note will appear indicating that you can click for further options. This will open the persistent version of Reference Previews with a link to allow users to jump to the reference in the reference list.
<gallery heights="275" widths="250">
File:Reference Previews mock-up – hover-state.png|Proposed version when '''hovering over the footnote marker'''
File:Reference Previews mock-up – hover-state and options.png|Proposed version when '''hovering over the Reference Preview'''
File:Reference Previews mock-up – persistent-state.png|Proposed (persistent) version when '''clicking on the hover preview'''
</gallery>
By improving the usability of Reference Previews, we also hope to mitigate the issue that reference lists with a large number of (reused) references (or [[:m:WMDE Technical Wishes/Sub-referencing|sub-references]]) can be confusing for some readers. In addition, the proposed version when hovering over a footnote marker is more compact than the current version.
</div>
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=== Experiment ===
<div class="mw-collapsible-content">
We would like to test the proposed changes in an [[:en:A/B testing|A/B test]] on several wikis. We want to measure how many readers click on a footnote marker and then proceed to jump to the reference list using the proposed version of Reference Previews compared to readers who receive the current version of Reference Previews. In addition, we will measure how many readers in both groups access the reference list via the table of contents. This will give us data-based insights into how many clicks on the footnote unintentionally open the reference list and how many readers only want to use Reference Previews.
We would like to run our experiment on the following Wikipedia language versions: de, pl, fr, sv, fa, hu, hi, my, tl, lv, fy, hr. 10% of readers will see our modified version of Reference Previews in order to obtain sufficient data. The experiment is expected to run for 1-2 weeks at the end of March. We'll restore the current version of Reference Previews for all readers until we have evaluated the experiment, discussed the results with the community, and decided on further steps.
</div>
</div>
We look forward to your feedback [[:m:Talk:WMDE Technical Wishes/References/Reference Previews|on our talk page]] – or just reply to this post! Once the experiment is ready to go, we will also provide a link that you can use to test the changes yourself. --[[सदस्य:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[सदस्य वार्ता:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]]) 12:22, 20 फ़रवरी 2026 (UTC)
:As indicated on our project page [https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=WMDE_Technical_Wishes/References/Reference_Previews&diff=prev&oldid=30215686], we will only test the proposed change when ''clicking'' on a footnote. Reference Previews will remain ''unchanged when hovering'' over a footnote marker. Reasons for this were concerns that the proposed transition from hover to persistent preview could be disruptive or at least feel unusual when interacting with reference content in the hover preview (e.g. when clicking on links). [[सदस्य:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[सदस्य वार्ता:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]]) 13:30, 9 मार्च 2026 (UTC)
==विकि लव्ज़ रमजान 2026==
<div style="border:8px maroon ridge;padding:6px;>
[[File:Wiki Loves Ramadan Logo Black hi.svg|Left|200px|frameless]]
प्रिय विकी समुदाय, आपको [[विकिपीडिया:विकि लव्ज़ रमजान 2026|विकी लव्ज रमज़ान 2026]] में भाग लेने के लिए विनम्रतापूर्वक आमंत्रित किया जाता है, जो कि विभिन्न क्षेत्रों से इस्लामी इतिहास और इस्लामी सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण करने के लिए विकिपीडिया, विकिवॉयज पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय लेख लेखन प्रतियोगिता है। यह प्रतियोगिता 20 फरवरी से 20 अप्रैल 2025 तक आयोजित की जायेगी अभी भाग लें और पुरस्कार के विजेता बने है। धन्यवाद
'''[[:m:Wiki Loves Ramadan 2026|विकी लव्स रमज़ान 2026 इंटरनेशनल टीम]]''' -'''[[User:J ansari|<span style="background:#5d9731; color:white;padding:1px;">जे. अंसारी</span>]] [[User talk:J ansari|<span style="background:#1049AB; color:white; padding:1px;">वार्ता</span>]]''' 15:51, 26 फ़रवरी 2026 (UTC)
</div>
== इस हफ्ते पेस्ट जाँच आ रही है ==
नमस्ते। [[mw:Special:MyLanguage/Help:Edit check#Paste_check|पेस्ट जाँच]] एक प्रकार की [[mw:Special:MyLanguage/Edit check|सम्पादन जाँच]] सुविधा है जो तब दिखाई देगी जब यथादृश्य सम्पादिका का प्रयोग कर रहा कोई नवागंतुक किसी लेख में लंबा पाठ पेस्ट करे, अगर प्रणाली द्वारा यह निर्धारित किया जाए कि वह सामग्री सम्पादक ने संभवतः स्वयं नहीं लिखी है।
इस सुविधा का यहाँ पर पिछले वर्ष परीक्षण किया गया था, और शोध के [[mw:Edit check/Paste Check#A/B_Experiment|परिणाम]] सकारात्मक थे: इस जाँच का सामना करने वाले सम्पादकों के द्वारा किए गए सम्पादनों में से पूर्ववत किए गए सम्पादनों की संख्या में नियंत्रण समूह की तुलना में 18% घटाव आया।
डिफ़ॉल्ट से पेस्ट जाँच उन सम्पादकों को दिखाई जाएगी जिन्होंने लोकल रूप से 100 या उससे कम सम्पादन किए हुए हों। यह [[{{#special:EditChecks}}]] के माध्यम से प्रबंधकों द्वारा बदला जा सकता है। जब इस आवश्यकता को पूरा करने वाला कोई सम्पादक कहीं और से कम-से-कम 50 कैरेक्टर्स लंबा पाठ पेस्ट करता है, पेस्ट जाँच उससे पूछेगी कि सामग्री उसने स्वयं लिखी है या फिर नहीं। [[mw:Special:MyLanguage/Edit check/Tags|सम्पादनों को टैग किया जाएगा]] ताकि अनुभवी सदस्य उन सम्पादनों का पता लगा पाएँ जहाँ पर पेस्ट जाँच दिखाई गई थी। अंतिम सम्पादन में कोई भी पेस्ट किया हुआ पाठ न होने के बावजूद भी टैग दृश्य होगा।
यह सुविधा इस हफ्ते के अंत तक ग्लोबल स्तर पर जारी की जाएगी। इसे परखने में सहायता करने के लिए आप सबका धन्यवाद। [[सदस्य:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:Quiddity (WMF)|वार्ता]]) 00:02, 3 मार्च 2026 (UTC)
== अली ख़ामेनेई ==
<nowiki>[[अली ख़ामेनेई]]</nowiki> को हिंदी में <nowiki>[[अली ख़मीने]]</nowiki> लिखा जाना चाहिए, कृपया इसे बदलिए। -[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 13:28, 3 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Baangla|Baangla]] जी, यह चर्चा [[वार्ता:अली ख़ामेनेई]] पृष्ठ पर होनी चाहिए। यदि आपको लगता है कि वर्तमान नाम सही नहीं है, तो आप [[साँचा:नाम बदले]] का प्रयोग करते हुए पृष्ठ को स्थानांतरित करने का अनुरोध कर सकते हैं। मेरी व्यक्तिगत राय में वर्तमान नाम सही है, क्योंकि [https://www.bbc.com/hindi/articles/c747xp3pke8o BBC], [https://www.aajtak.in/trending/photo/iran-supreme-leader-ali-khamenei-death-reaction-celebration-mourning-tstf-2484137-2026-03-02 Aaj Tak], [https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/bahraich-shia-community-ali-khamenei-death-mourning-ban-juloos-local18-10235065.html News18] और [https://ndtv.in/world-news/iran-us-tensions-live-updates-trump-ayotallah-khamenei-sanctions-military-buildup-explosions-nuclear-tensions-us-israel-iran-tension-live-11148367 NDTV] सहित कई मीडिया संस्थान भी “ख़ामेनेई” ही लिखते हैं और हिंदी उच्चारण के अनुसार भी यही नाम उचित प्रतीत होता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 13:49, 3 मार्च 2026 (UTC)
::: @[[सदस्य:Baangla|Baangla]] जी, फ़ारसी में नाम علی خامنهای लिखा जाता है। इसी आधार पर देवनागरी में इसका निकटतम लिप्यंतरण अली ख़ामेनेई होगा।
::: यहाँ خ ध्वनि के लिए “ख़” का प्रयोग किया जाता है और अंतिम –ई ध्वनि को दर्शाने के लिए “ई” आता है। इसलिए अली ख़ामेनेई फ़ारसी उच्चारण के सबसे क़रीब माना जा सकता है। --[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 01:29, 9 मार्च 2026 (UTC)
== Lua त्रुटि ==
जी, जब भी में [[मॉड्यूल:Designation/list]] नामक पृष्ठ को बनाने का प्रयास करता हूँ, मुझे यह संदेश मिलता है:
Lua error पंक्ति 1 पर: unexpected symbol near '{'.
मैं अंग्रेज़ी विकिपीडिया के स्रोत कोड का प्रयोग करता हूँ, फिर भी यह संदेश आता है। क्या इसका कोई उपाय है? [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 10:14, 12 मार्च 2026 (UTC)
:{{done}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 15:16, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] धन्यवाद ^^ [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 15:45, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] मैंने स्वतः परीक्षित अधिकार के लिए निवेदन भेजा है। यदि आप चाहते हैं तो कृपया अपना मत दें। फिर से धन्यवाद! :3 [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 16:26, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::समय-समय पर मेरा ध्यान आपके संपादनों पर जाता रहता है। हालाँकि मैंने आपके बनाए लेखों को ठीक से नहीं देखा है, लेकिन नामांकन में दिए गए लेखों में से [[रोलिन' (एयर रेड व्हीकल)]] देखा तो वह मुझे लगभग पूरा मशीनी अनुवाद लगा। इसी तरह दूसरे उदाहरण, जैसे [[तलत जाफ़री]] आदि, भी मुझे मशीनी अनुवाद जैसे लगे। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं इस विषय में आपकी कोई विशेष मदद कर पाऊँगा। बाकी अन्य सदस्य भी आपके नामांकन को देखकर अपने सुझाव दे सकते हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
== सदस्य पृष्ठ हटाने हेतु अनुरोध ==
नमस्ते प्रशासक महोदय, मैं 'Gahininath gutte' इस खाते का स्वामी हूँ। मैं अपना 'सदस्य वार्ता' पृष्ठ (User Talk Page) हटाना चाहता हूँ क्योंकि यह गूगल सर्च में मेरी निजी जानकारी दिखा रहा है। मैंने लॉगिन किया है, लेकिन सुरक्षा फ़िल्टर के कारण मैं स्वयं <nowiki>{{db-u1}}</nowiki> टैग नहीं लगा पा रहा हूँ। कृपया मेरी सहायता करें और इस पृष्ठ को हटा दें। धन्यवाद। [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 12:40, 12 मार्च 2026 (UTC)
:{{Ping|Gahininath gutte}} नमस्ते! हिंदी विकिपीडिया की नीतियों के अनुसार तभी हटाए जाते है, ज़ब उसपे अत्यधिक बर्बरता या निजी जानकारी और गाली गालोच हुआ हो, आमतौर पर सदस्य वार्ता नही हटाए जाते है,अगर आप सदस्य पृष्ठ की बात कर रहे है, तो आप 10 सकारात्मक संपादन करने के उपरांत सदस्य पृष्ठ को हटवाने ले लिए अनुरोध कर सकते है,या हटाने हेतु संबंधित साँचा लगा सकते है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 12:52, 12 मार्च 2026 (UTC)
::<blockquote>महोदय, जवाब के लिए धन्यवाद। मैं समझता हूँ कि वार्ता पृष्ठ हटाना नियमों के विरुद्ध है। लेकिन यह पृष्ठ गूगल सर्च में मेरा नाम और निजी संदर्भ दिखा रहा है, जिससे मुझे प्राइवेसी की समस्या हो रही है। अगर आप इसे हटा नहीं सकते, तो कृपया इस पृष्ठ पर '''<nowiki>__NOINDEX__</nowiki>''' टैग लगा दें ताकि यह गूगल सर्च इंजन में दिखाई न दे। साथ ही, कृपया इस पृष्ठ की पुरानी सामग्री (History) को भी छुपा दें। आपकी बहुत कृपा होगी।"</blockquote>
::[[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 13:03, 12 मार्च 2026 (UTC)
::"नमस्ते, मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। मैं विकिपीडिया पर अब सक्रिय नहीं रहना चाहता और अपनी निजता (Privacy) की सुरक्षा के लिए 'Right to Vanish' के तहत इस पृष्ठ को स्थायी रूप से (Permanently) हटाने का अनुरोध करता हूँ। इसमें मेरा वास्तविक नाम शामिल है जो गूगल सर्च में दिखाई दे रहा है और यह मेरी निजता का उल्लंघन है। मैं चाहता हूँ कि मेरे खाते से जुड़ी यह पहचान पूरी तरह से मिटा दी जाए। कृपया मेरी सहायता करें।" [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 13:06, 12 मार्च 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] जी, मैंने आपके वार्ता पृष्ठ का एक अवतरण हटा दिया है, जिसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी थी। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 14:56, 18 मार्च 2026 (UTC)
::::अभि भी मेरा नाम गुगल सर्च मैं दिख रहा है मुझे Wikipedia पर रहना ही नहीं कृपया यहा पर मेरा जो अकाउंट है उसे हटा दे पुरी तरह सें...
::::धन्यवाद...! [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 15:14, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::::इसके लिए आप [[विशेष:GlobalVanishRequest]] पर उपलब्ध फ़ॉर्म भर सकते हैं। कृपया अनुरोध करने से पहले फ़ॉर्म पर दिए गए निर्देशों को अवश्य पढ़ लें। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 15:19, 18 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक अनुवाद में मदद ==
[[:en:Embarrasingly parallel]] का शीर्षक अनुवाद में क्या होना चाहिए-
* [[एम्बैरसिंगली पैरेलल]] या
* [[अति-समानांतरीय]]
[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 13:13, 15 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, सम्भवतः आपके पास टाइपो हुआ है और आप [[:en:Embarrassingly_parallel|Embarrassingly parallel]] की बात कर रहे हो। parallel के लिए हिन्दी में समानांतर शब्द काम में लेते हैं और शब्दकोश नामक वेबसाइट पर इसका अनुवाद अव्यवस्थित समानांतर लिखा है। लेकिन मुझे तार्किक तौर पर कोई तुल्य शब्द याद नहीं आ रहा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, शब्दकोश नामक वेबसाइट पर एंबैरिसिंगली (Embarrassingly) का अनुवाद "शर्मनाक रूप से" लिखा है, लेकिन हम इसे कंप्यूटर विज्ञान या कोडिंग के संदर्भ में लिख रहे हैं तो क्या "सहज समानांतर" लिख सकते है? इसका मतलब यह है कि समानांतर करने में कोई विशेष दिमाग या मेहनत नहीं लगती। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 17:36, 19 मार्च 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, इस स्थिति में अंग्रेज़ी वाले का ही देवनागरी में उच्चारण लिख दीजिएगा। लेख की शुरूआत में शब्दशः अनुवाद लिख सकते हैं और भविष्य में विश्वसनीय स्रोत मिलने पर उचित स्थानान्तरण कर दिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:29, 25 मार्च 2026 (UTC)
== Request for Comment: VisualEditor automatic reference names ==
<div lang="en" dir="ltr">
Hi, I’m Johannes from [[:m:Wikimedia Deutschland|Wikimedia Deutschland]]’s [[:m:WMDE Technical Wishes|Technical Wishes team]]. Apologies for writing in English. {{Int:Please-translate}}! We are considering to work on [[:m:Community Wishlist/W17|Community Wishlist/W17: Improve VE references' automatic names and reuse]]. This has been a long-term issue for wikitext editors (see e.g. [[:en:WP:VisualEditor/Named references]]) which has been among the top-voted wishes in several [[:m:Community Wishlist Survey|Community Wishlist Surveys]], e.g. [[:m:Community Wishlist Survey 2017/Editing/VisualEditor: Allow editing of auto-generated references before adding them|2017]], [[:m:Community Wishlist Survey 2019/Citations/VisualEditor: Allow references to be named|2019]], [[:m:Community Wishlist Survey 2022/Editing/VisualEditor should use human-like names for references|2022]] or [[:m:Community Wishlist Survey 2023/Editing/VisualEditor should use proper names for references|2023]].
We would like your input on the [[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names#Proposed solutions|solutions]] proposed on our project page: '''[[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names]]'''. We are considering several options, which can be combined if desired by the community.
* Changing the default pattern for automatically generated reference names (currently <code>":n"</code>, e.g. <code>":0"</code>, <code>":1"</code>...) to use the [[:mw:Help:Reference Previews#Exposed reference types|reference type]] instead (e.g. <code>"book_reference-1"</code>).
* Providing a simple mechanism for communities to configure a different default name.
* Generating automatic reference names based on the [[:en:domain name|domain name]] (if it’s a web citation).
* Generating automatic reference names based on template parameters (e.g. "title" or "last"+"first") – defined by the community.
=== Feedback ===
[[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names|Visit our project page]] to read about our proposal in detail and share your thoughts [[:m:Talk:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names#Request for comment|on metawiki]].
'''Please note''': We will only implement a solution if there’s clear consensus among the global community. Our intention is not to build the perfect solution, but to find a simple and lean one that alleviates the pain caused by auto generated names. We are aware that some experienced VisualEditor users might prefer an option to manually change reference names in VisualEditor, but such a UX intervention is difficult to achieve across reference types and thus out of scope for our team, we can only improve the auto-naming mechanism.
We are happy about suggestions for improving certain details of the proposed solutions. Any other feedback and alternative proposals are also welcome – even though it’s out of scope for us, it might still be relevant for future work on this topic.
Please support us interpreting consensus by clearly indicating your opinion (e.g. by using support/neutral/oppose templates). We are aware of [[:en:WP:NOTVOTE]], but given that we are facilitating this discussion with users from different wikis, potentially commenting in their native language, clearly indicating your position helps us avoid misunderstandings.
Thank you for participating!</div> <bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[User talk:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]])</bdi> 11:15, 19 मार्च 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Johannes_Richter_(WMDE)/MassMessageRecipients&oldid=30281362 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Johannes Richter (WMDE)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== मार्च गतिविधि अपडेट ==
:हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप द्वारा मार्च 2026 में हुई गतिविधियाँ:
* 'हिंदी विकि सम्मेलन 2026' पर फाउंडेशन के साथ प्राथमिक स्तर की चर्चा पूरी हुई। अप्रैल तक इसपर निर्णय आने की संभावना है।
* गूगल के साथ साझेदारी संबंधी अपडेट फाउंडेशन तथा गूगल टीम के साथ पीपीटी बनाकर साझा किए गए। पिछले एक वर्ष के सभी कार्यक्रमों के (नए लेख, नए सदस्य, सांस्थानिक भागिदारी) आंकड़ों को संश्लिष्ट रूप में साझा किया गया।
* फरवरी में विकिपीडिया पर आयोजित [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026]] के सभी लेखों की जाँच पूरी हुई तथा पुरस्कार विजेता घोषित किए गए।
* फरवरी में विकिस्रोत पर आयोजित [[s:hi:विकिस्रोत:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/२०२६|विकिस्रोत:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/२०२६]] के सभी शोधित पृष्ठों की जाँच पूरी हुई तथा पुरस्कार विजेता घोषित किए गए।
* राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकि विभाग के साथ सांस्थानिक भागीदारी के प्रयास स्वरूप पहली प्रशिक्षण कार्यशाला 24 मार्च को आयोजित करना निश्चित हुआ।
* आइआइटी, जोधपुर के साथ सांस्थानिक भागीदारी की संभावना परखने के लिए 21 मार्च को जोधपुर में सामुदायिक बैठक निश्चित की गई। जोधपुर के कोई भी हिंदी विकिपीडियन इस अनौपचारिक संवाद बैठक में शामिल हो सकते हैं।
: हिंदी विकिपीडिया के अनुभवी सदस्यों द्वारा किसी भी स्थानीय या रास्ट्रीय स्तर के आयोजन प्रस्तावों का हम स्वागत करते हैं तथा सहयोग का भरोसा दिलाते हैं। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 23:49, 20 मार्च 2026 (UTC)
== अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले ==
नमस्ते , विकिपीडियन
[https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, और इनाम जीते।
तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:33, 23 मार्च 2026 (UTC)
== Deployment of Legal and Safety Contacts Link in the Footer of Your Wiki ==
[Please help translate this message]
Hello community, the Wikimedia Foundation has provided a [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contact_Information|single legal and safety contact page]], to be linked in the footer of your wiki, to ensure access to accurate legal information. This is a regulatory requirement. We have already rolled out links to English, German, Italian, Spanish and other wikis and we will deploy to your wiki soon. [[metawiki:Special:MyLanguage/Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contacts_FAQ|Please read more on the project page]] and leave any comments in this thread or on the [[metawiki:Talk:Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contacts_FAQ|talk page]]. –– [[सदस्य:STei (WMF)|STei (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:STei (WMF)|वार्ता]]) 13:21, 25 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक अनुवाद में मदद ==
मैं [[:en:Perpetual calendar]] को अनुवाद कर रहा हूं। इसका शीर्षक क्या मुझे [[परपेचुअल पंचांग]] रखना चाहिए ? इसका तत्सम क्या हो सकता है क्योंकि मुझे इसका कही हिन्दी में प्रयोग नही मिला। [[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 13:40, 25 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, आप की जानकारी के लिए कुछ सन्दर्भ [https://uptoword.com/en/perpetual-calendar-meaning-in-hindi?utm_source=chatgpt.com] [https://fj.voguetimebalfie.com/info/are-perpetual-calendar-watches-accurate-100990981.html] [https://www.google.co.th/books/edition/N%C4%ABh%C4%81rik%C4%81/t6hHAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&printsec=frontcover] [https://www.google.co.th/books/edition/Bhajpa_Ka_Abhyuday_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE_%E0%A4%95/Cet5EAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&pg=RA1-PA1970&printsec=frontcover] दिए गए है, इन के हिसाब से सतत पंचांग या स्थायी पंचांग लिखा जा सकता है। बाकि जैसी सभी की राय हो। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 08:32, 28 मार्च 2026 (UTC)
== विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ हेतु स्कॉलरशिप आवेदन अब प्रारम्भ हो चुके हैं ==
नमस्ते,
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ के लिए स्कॉलरशिप हेतु आवेदन अब प्रारम्भ हो चुके हैं । यह कॉन्फ्रेंस ४ से ६ सितंबर २०२६ तक कोच्चि, भारत में होगी ।
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत), दक्षिण एशिया के साथ और भी विकिमीडियन्स, सामुदायिक आयोजकों और योगदानकर्ताओं को एक साथ लाता है। यह जुड़ने, सीखने, अनुभव बाँटने करने और निःशुल्क ज्ञान के आंदोलन को सशक्त करने हेतु मिलजुलकर करने का एक स्थान है । 🙂
अगर आप विकिमीडिया परियोजनाओं में सक्रिय योगदानकर्ता हैं अथवा सामुदायिक कार्यक्रमों में सम्मिलित हैं, तो आपको स्कॉलरशिप के लिए आवेदन हेतु प्रोत्साहित किया जाता है । [[diffblog:2026/03/19/namukku-othukoodam-scholarships-now-open-for-wikiconference-india-2026/|विस्तृत घोषणा]] यहाँ है ।
आवेदन की अंतिम तिथि: १५ अप्रैल २०२६ रात ११:५९ बजे IST
आवेदन की लिंक: [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdA3rR9xX_k31dzJrjM5MTDNYNUIRcAB45S4TflsYCbGJNrzg/viewform आवेदन की लिंक]
अधिक जानकारी: [[metawiki:WikiConference_India_2026/Scholarship|मेटा पेज लिंक]]
कृपया इस घोषणा को अपने समुदाय में अन्य सदस्यों के साथ भी बाँटें ।
धन्यवाद !
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ की आयोजन टीम
-[[User:Gnoeee|<span style="color:#990000">❙❚❚</span><span style="color:#339966">❙❙</span><span style="color:#000"> जिनोय </span><span style="color:#006699">❚❙❚</span><span style="color:#339966">❙❙</span>]] [[User talk:Gnoeee|✉]] 21:00, 28 मार्च 2026 (UTC)
== Join the sixth Ukraine’s Cultural Diplomacy Month on Wikipedia! ==
<div lang="en" dir="ltr">
[[File:Ukraine’s Cultural Diplomacy Month on Wikipedia 2026.png|right|250px|thumb|link=https://meta.wikimedia.org/wiki/Ukraine%27s_Cultural_Diplomacy_Month_2026|Join our campaign!]]
{{int:please-translate}}
Dear Wikipedians!
[[:m:Special:MyLanguage/Wikimedia Ukraine|Wikimedia Ukraine]], in cooperation with the [[:en:Ministry of Foreign Affairs of Ukraine|MFA of Ukraine]] and [[:en:Ukrainian Institute|Ukrainian Institute]], has launched the sixth edition of writing challenge "'''[[:m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|Ukraine's Cultural Diplomacy Month]]'''", which lasts from '''1st April''' until '''30th April 2026'''.
The initiative aims to promote knowledge about Ukrainian culture abroad by creating and improving Wikipedia articles in multiple languages. This year marks the sixth edition of the campaign, which will focus on contemporary culture, making today’s artistic voices and practices more visible to international audiences.
🧩'''How to participate?'''
Choose an article from the suggested list → Write an article in your language, or improve an existing one according to the rules → Add your contribution to the contest page and calculate your points → Win prizes and receive a certificate of participation → Become a promoter of truthful knowledge about Ukraine.
🧩'''[[m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|Check our main page for more information]]'''.
'''If you are interested in coordinating long-term community engagement for the campaign and becoming a local ambassador, we would love to hear from you! Please let us know your interest.'''
If not, then we encourage you to translate the [[m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|landing page of the contest]] and [https://meta.wikimedia.org/wiki/Special:MessageGroupStats?group=Centralnotice-tgroup-UCDM2026banner&messages=&language=en&x=D banner] into your own language.
Also, we set up a [[:m:CentralNotice/Request/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|banner]] to notify users of the possibility to participate in this challenge!
[[:m:User:OlesiaLukaniuk (WMUA)|OlesiaLukaniuk (WMUA)]] ([[:m:User talk:OlesiaLukaniuk (WMUA)|talk]]) 04:35, 1 April 2026 (UTC)
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:OlesiaLukaniuk_(WMUA)/list_of_wikis&oldid=28552112 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:OlesiaLukaniuk (WMUA)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Action Required: Update templates/modules for electoral maps (Migrating from P1846 to P14226) ==
Hello everyone,
This is a notice regarding an ongoing data migration on Wikidata that may affect your election-related templates and Lua modules (such as <code>Module:Itemgroup/list</code>).
'''The Change:'''<br />
Currently, many templates pull electoral maps from Wikidata using the property [[:d:Property:P1846|P1846]], combined with the qualifier [[:d:Property:P180|P180]]: [[:d:Q19571328|Q19571328]].
We are migrating this data (across roughly 4,000 items) to a newly created, dedicated property: '''[[:d:Property:P14226|P14226]]'''.
'''What You Need To Do:'''<br />
To ensure your templates and infoboxes do not break or lose their maps, please update your local code to fetch data from [[:d:Property:P14226|P14226]] instead of the old [[:d:Property:P1846|P1846]] + [[:d:Property:P180|P180]] structure. A [[m:Wikidata/Property Migration: P1846 to P14226/List|list of pages]] was generated using Wikimedia Global Search.
'''Deadline:'''<br />
We are temporarily retaining the old data on [[:d:Property:P1846|P1846]] to allow for a smooth transition. However, to complete the data cleanup on Wikidata, the old [[:d:Property:P1846|P1846]] statements will be removed after '''May 1, 2026'''. Please update your modules and templates before this date to prevent any disruption to your wiki's election articles.
Let us know if you have any questions or need assistance with the query logic. Thank you for your help! [[User:ZI Jony|ZI Jony]] using [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 17:12, 3 अप्रैल 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Non-Technical_Village_Pumps_distribution_list&oldid=29941252 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:ZI Jony@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Wikimedia Foundation की वार्षिक योजना की चर्चाओं में शामिल होने का आमंत्रण ==
नमस्ते,
मैं आप सभी को '''साउथ एशिया ओपन कम्युनिटी कॉल''' के अप्रैल एडिशन में इनवाइट करना चाहता हूँ, जो विकिमीडिया फाउंडेशन की लीडरशिप के साथ उनके [https://meta.wikimedia.org/wiki/Wikimedia%20Foundation%20Annual%20Plan/2026-2027 एनुअल प्लान (2026-2027)] पर चर्चा करेगा।
फ़ाउंडेशन की [https://meta.wikimedia.org/wiki/Wikimedia%20Foundation%20Annual%20Plan वार्षिक योजना] एक उच्च-स्तरीय रोडमैप है, जिसमें यह बताया गया है कि संगठन आने वाले वर्ष में क्या हासिल करना चाहता है। इसमें न केवल फाउंडेशन के लक्ष्य, प्रगति और योजना शामिल है, बल्कि वैश्विक रुझानों का सारांश भी शामिल है जो हमारे मूवमेंट के वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करते हैं।
इसलिए, अगला '[https://meta.wikimedia.org/wiki/South%20Asia%20Open%20Community%20Call साउथ एशिया ओपन कम्युनिटी कॉल]' नीचे दी गई तारीखों/समय पर आयोजित कि जाएगी। कृपया इसे अपने कैलेंडर में नोट कर लें और [https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:South%20Asia%20Open%20Community%20Call,%20April%202026 यहाँ साइन अप करें।]
Platform: Google Meet
Date: 17th April, 2026
Time: 1930-2045 IST (1400-1515 UTC)
[https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:South%20Asia%20Open%20Community%20Call,%20April%202026 Registration Link]
'''नोट:''' सिर्फ़ रजिस्टर्ड लोगों को ही जॉइनिंग लिंक मिलेगा।
कॉल पर आपसे मिलने का इंतज़ार रहेगा,
--[[सदस्य:RASharma (WMF)|RASharma (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:RASharma (WMF)|वार्ता]]) 12:49, 6 अप्रैल 2026 (UTC)
== पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव ==
सभी सदस्य महोदय,
मैं समुदाय का ध्यान पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) से जुड़ी [[विकिपीडिया:चौपाल/पुरालेख_48#केवल_स्वतः_परीक्षित_सदस्यों_द्वारा_स्थानांतरण|2017 की एक पुरानी चर्चा (पुरालेख 48)]] और नीति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। उस समय अनुचित स्थानांतरणों को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया था कि केवल 'स्वतः परीक्षित' (Autopatrolled), रोलबैकर या प्रबंधक स्तर के सदस्य ही पृष्ठों का स्थानांतरण कर सकेंगे।
उस समय की चर्चा में और फैब्रिकेटर (Phabricator) पर एक अन्य विकल्प (विकल्प 2) का भी सुझाव दिया गया था, जिसका उल्लेख आदरणीय @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी ने किया था: '''"एक नया सुरक्षा स्तर बना कर बर्बरता के शिकार पन्नों को इस स्तर पर सुरक्षित करने का।"'''
मेरा प्रस्ताव है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हमें अब इस विकल्प (नया स्थानांतरण सुरक्षा स्तर) को लागू करना चाहिए। मेरी रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:
# '''सुरक्षित पृष्ठ:''' जिन पृष्ठों को अर्ध-सुरक्षा (Semi-protection) या पूर्ण सुरक्षा (Full protection) प्राप्त है या जो बर्बरता के प्रति अति-संवेदनशील हैं, उन्हें स्थानांतरित करने का अधिकार केवल 'स्वतः परीक्षित', रोलबैकर, पुनरीक्षक, प्रशासक या प्रबंधक स्तर के सदस्यों तक ही सीमित रहे।
# '''सामान्य पृष्ठ:''' जो पृष्ठ पूरी तरह से असुरक्षित और सामान्य हैं, उनका स्थानांतरण (नाम परिवर्तन) करने का अधिकार 'स्वतः स्थापित' (Autoconfirmed) सदस्यों को वापस दे दिया जाए (जैसा कि अंग्रेजी व अन्य विकिपीडिया परियोजनाओं पर होता है)।
'''इस बदलाव की आवश्यकता क्यों है (ठोस आँकड़े)?'''
सक्रिय अधिकार-प्राप्त सदस्यों की भारी कमी के कारण, छोटे-छोटे और स्पष्ट स्थानांतरण कार्यों (जैसे वर्तनी सुधार) के लिए भी सक्रिय 'स्वतः स्थापित' सदस्यों को <code><nowiki>{{नाम बदलें}}</nowiki></code> का अनुरोध करना पड़ता है। इससे काम की गति धीमी होती है और प्रबंधकों पर भी अनावश्यक अनुरोधों का बोझ पड़ता है।
हाल ही में मैंने Quarry टूल के माध्यम से हिंदी विकिपीडिया के डेटाबेस का विश्लेषण किया (क्वेरी लिंक: [https://quarry.wmcloud.org/query/104224 Quarry Query: 104224])। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान में दर्जनों ऐसे अधिकार-प्राप्त सदस्य हैं, जिन्होंने पिछले कई महीनों या वर्षों से हिंदी विकिपीडिया पर एक भी संपादन नहीं किया है। आप नीचे दी गई तालिका का विस्तार करके स्वयं देख सकते हैं:
{| class="wikitable mw-collapsible mw-collapsed" style="text-align:center; width:80%;"
|+ अधिकार प्राप्त सदस्यों के अंतिम संपादन की सूची
! अधिकार (Group) !! सदस्य का नाम !! आखिरी संपादन (दिनांक)
|-
| autopatrolled || Naziah rizvi || 20-10-2016
|-
| autopatrolled || Somesh Tripathi || 05-10-2017
|-
| autopatrolled || Jeeteshvaishya || 22-10-2017
|-
| autopatrolled || रोहित रावत || 02-09-2018
|-
| autopatrolled || Salma Mahmoud || 23-10-2018
|-
| rollbacker || FR30799386 || 02-10-2019
|-
| autopatrolled || SGill (WMF) || 03-03-2020
|-
| autopatrolled || RacIndian || 21-08-2020
|-
| autopatrolled || Jaswant Singh4 || 25-09-2020
|-
| autopatrolled || Teacher1943 || 28-08-2021
|-
| autopatrolled || Navinsingh133 || 23-12-2021
|-
| rollbacker || Navinsingh133 || 23-12-2021
|-
| autopatrolled || Mala chaubey || 29-12-2021
|-
| autopatrolled || Navodian || 20-01-2022
|-
| autopatrolled || AbhiSuryawanshi || 08-06-2022
|-
| autopatrolled || Innocentbunny || 21-09-2022
|-
| autopatrolled || Biplab Anand || 22-10-2022
|-
| autopatrolled || सुनील मलेठिया || 08-01-2023
|-
| autopatrolled || Sushilmishra || 20-04-2023
|-
| autopatrolled || Gaurav561 || 01-05-2023
|-
| autopatrolled || Ahmed Nisar || 02-07-2023
|-
| autopatrolled || JamesJohn82 || 20-08-2023
|-
| autopatrolled || जैन || 02-11-2023
|-
| autopatrolled || Samee || 13-01-2024
|-
| autopatrolled || Dinesh smita || 15-04-2024
|-
| autopatrolled || सीमा1 || 15-04-2024
|-
| rollbacker || कन्हाई प्रसाद चौरसिया || 05-10-2024
|-
| autopatrolled || कन्हाई प्रसाद चौरसिया || 05-10-2024
|-
| autopatrolled || निधिलता तिवारी || 23-10-2024
|-
| rollbacker || निधिलता तिवारी || 23-10-2024
|-
| autopatrolled || Anamdas || 07-11-2024
|-
| autopatrolled || चक्रपाणी || 02-12-2024
|-
| autopatrolled || Charan Gill || 14-12-2024
|-
| autopatrolled || Satdeep Gill || 10-02-2025
|-
| autopatrolled || MKar || 23-03-2025
|-
| autopatrolled || ArmouredCyborg || 15-05-2025
|-
| rollbacker || ArmouredCyborg || 15-05-2025
|-
| rollbacker || स || 20-05-2025
|-
| autopatrolled || स || 20-05-2025
|-
| rollbacker || Stang || 26-05-2025
|-
| autopatrolled || AshokChakra || 29-05-2025
|-
| rollbacker || AshokChakra || 29-05-2025
|-
| rollbacker || PQR01 || 12-06-2025
|-
| autopatrolled || WhisperToMe || 26-06-2025
|-
| autopatrolled || Hunnjazal || 03-07-2025
|-
| autopatrolled || MGA73 || 13-07-2025
|-
| autopatrolled || Jayprakash12345 || 19-07-2025
|-
| rollbacker || Nilesh shukla || 21-07-2025
|-
| autopatrolled || Nilesh shukla || 21-07-2025
|-
| autopatrolled || Raju Babu || 03-08-2025
|-
| autopatrolled || Trikutdas || 06-10-2025
|-
| autopatrolled || Surenders25 || 29-10-2025
|-
| rollbacker || राजकुमार || 01-11-2025
|-
| rollbacker || Nadzik || 22-11-2025
|-
| autopatrolled || Srajaltiwari || 15-12-2025
|-
| autopatrolled || Buddhdeo Vibhakar || 22-12-2025
|-
| autopatrolled || आशीष भटनागर || 23-12-2025
|-
| autopatrolled || सौरभ तिवारी 05 || 15-01-2026
|-
| rollbacker || सौरभ तिवारी 05 || 15-01-2026
|-
| autopatrolled || कलमकार || 12-02-2026
|-
| autopatrolled || शीतल सिन्हा || 21-02-2026
|-
| rollbacker || रोहित साव27 || 22-02-2026
|-
| autopatrolled || रोहित साव27 || 22-02-2026
|-
| autopatrolled || नीलम || 09-03-2026
|-
| autopatrolled || Dr.jagdish || 10-03-2026
|-
| rollbacker || Chronos.Zx || 12-03-2026
|-
| rollbacker || Eihel || 13-03-2026
|-
| autopatrolled || Eihel || 13-03-2026
|-
| autopatrolled || Utcursch || 17-03-2026
|-
| rollbacker || J ansari || 24-03-2026
|-
| autopatrolled || J ansari || 24-03-2026
|-
| autopatrolled || Mahensingha || 27-03-2026
|-
| autopatrolled || 1997kB || 29-03-2026
|-
| rollbacker || 1997kB || 29-03-2026
|-
| rollbacker || Saroj || 31-03-2026
|-
| autopatrolled || Ziv || 01-04-2026
|-
| rollbacker || TypeInfo || 02-04-2026
|-
| sysop || संजीव कुमार || 07-04-2026
|-
| autopatrolled || Dharmadhyaksha || 07-04-2026
|-
| autopatrolled || CommonsDelinker || 08-04-2026
|-
| sysop || SM7 || 08-04-2026
|-
| sysop || अजीत कुमार तिवारी || 09-04-2026
|-
| sysop || अनिरुद्ध कुमार || 09-04-2026
|-
| autopatrolled || हिंदुस्थान वासी || 09-04-2026
|-
| rollbacker || हिंदुस्थान वासी || 09-04-2026
|-
| sysop || DreamRimmer || 09-04-2026
|-
| autopatrolled || अनुनाद सिंह || 09-04-2026
|-
| sysop || Sanjeev bot || 10-04-2026
|}
यदि हम यह नई तकनीकी व्यवस्था लागू करते हैं, तो सक्रिय सदस्यों को काम करने में सहूलियत मिलेगी, विकिपीडिया का विकास तेज़ी से होगा, और प्रबंधकों का कीमती समय बचेगा।
कृपया इस प्रस्ताव पर अपने बहुमूल्य विचार साझा करें ताकि हम इस सुधार को प्रबंधकों के माध्यम से लागू करवा सकें।
धन्यवाद। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:22, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
==आप सभी से विनम्र निवेदन है कि==
मेरे [[विकिपीडिया:स्वतः_परीक्षित_अधिकार_हेतु_निवेदन#चाहर_धर्मेंद्र|इस]] निवेदन के संबंध में आपके विचार मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कृपया अपना बहुमूल्य समय निकालकर इस पर अपना मत अवश्य साझा करें। आपके सुझाव और प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 11:34, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
== अनुरोध ==
नमस्कार! मैं आपसे [[मॉड्यूल:Lang/data]] पर एक संपादन करने का अनुरोध करता हूँ।
["hbo"] = "Biblical Hebrew" ===> ["hbo"] = "बाइबिली इब्रानी"
[[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 19:28, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
:{{done}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 08:56, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:44, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
==अंतिम कुछ दिन: विकि सम्मेलन भारत 2026 छात्रवृत्ति आवेदन==
प्रिय विकिमीडिया समुदाय सदस्य,
हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि '''[[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026|विकि सम्मेलन भारत 2026]]''' के लिए छात्रवृत्ति आवेदन वर्तमान में खुले हैं, और अंतिम तिथि अब बहुत निकट है।
विकि सम्मेलन भारत 2026 इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का चौथा संस्करण है, जो भारत और दक्षिण एशिया में इंडिक भाषाओं के विकिमीडिया प्रोजेक्ट्स तथा मुक्त ज्ञान आंदोलन से जुड़े विकिमीडियनों और हितधारकों को एक साथ लाता है। यह सम्मेलन 4–6 सितंबर 2026 को कोच्चि, केरल में आयोजित किया जाएगा।
* आप अधिक जानकारी और [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026/Scholarship|आवेदन फॉर्म Meta-Wiki पर उपलब्ध]] छात्रवृत्ति पृष्ठ पर प्राप्त कर सकते हैं।
* छात्रवृत्ति की अंतिम तिथि: 15 अप्रैल 2026, रात 11:59 बजे (IST)
अब जबकि केवल कुछ ही दिन शेष हैं, हम आपको आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं यदि आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है। साथ ही, कृपया इस अवसर को अपने समुदाय में साझा करें और अन्य लोगों को भी आवेदन करने के लिए प्रेरित करें।
अधिक जानकारी और नियमित अपडेट के लिए, कृपया सम्मेलन के Meta पृष्ठ पर जाएँ।
सादर,
<br>
विकि सम्मेलन भारत 2026 आयोजन टीम की ओर से
<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 23:38, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== फॉण्ट ==
हिन्दी विकिपीडिया पर पिछले कुछ दिनों से लैटिन लिपि के लिए जो फॉण्ट है, वे [[:hak:Hakkapedia|Hakkapedia]] एवं [[:nan:Pang-chān:Holopedia|Holopedia]] के फॉण्ट की तरह दिख रहा है। क्या default फॉण्ट को बदल दिया गया है? [[User:ङघिञ|<span style="color:orange;">'''ङघिञ'''</span>]] ([[User talk:ङघिञ|वार्ता]]) {{Font color|grey|११:२५, १२ अप्रैल २०२६ (IST)}}
c8zsacj5x9m5xfgjnjlxun2rxo5vfhg
6541541
6541521
2026-04-17T09:51:21Z
The Sorter
845290
/* अनुरोध 2 */ उत्तर
6541541
wikitext
text/x-wiki
{{/शीर्ष}}
<!-- इस लाइन को न हटायें। नए अनुभाग पृष्ठ पर सबसे नीचे बनायें। -->
== Anthony Albanese के सही उच्चारण के संबंध में ==
विकिपीडिया के अंग्रेज़ी संस्कारण पर Albanese का उच्चारण "/ˌælbəˈniːzi/ ऐल-ब्अ-नी-ज़ी अथवा /ˈælbəniːz/ ऐल-ब्अ-नीज़" दिया गया है, अतः हिन्दी संस्करण पर भी उनका सही नाम का उच्चारण शामिल करें। स्रोत: https://en.wikipedia.org/wiki/Anthony_Albanese
== Derbyshire के सही उच्चारण के संबंध में ==
Derbyshire का सही उच्चारण "डर्बीशायर" न होकर "ˈdɑː(ɹ).bɪ.ʃə(ɹ) {ड्आ (र्).बि.श्अ(र्)} = "डार्बिशर" प्रतीत हो रहा है। स्रोत: https://en.wiktionary.org/wiki/Derbyshire
== Satyajit Rāy के सही वर्तनी ==
Satyajit Rāy को सत्यजित राय लिखा जाए। एक जगह पर "सत्यजीत" लिखा गया था, उसे "सत्यजित" लिखा जाए। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 13:59, 9 दिसम्बर 2025 (UTC)
:यह कहाँ लिखा है? कृपया लिंक भेज दें ताकि एडमिन आपका मामला देख सकें। [[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 19:31, 9 दिसम्बर 2025 (UTC)
::[[सत्यजित राय|https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%A4_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF]]
::वाक्य प्रयोग: सत्यजीत राय (२ मई १९२१–२३ अप्रैल १९९२) एक भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें २०वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 02:53, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
:::yes [[विशेष:योगदान/~2025-39710-56|~2025-39710-56]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-39710-56|talk]]) 07:26, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
::::तो तनिक इसे ठीक करें। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 07:36, 10 दिसम्बर 2025 (UTC)
:::::कर दिया। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:25, 15 दिसम्बर 2025 (UTC)
== लिंक जोडें ==
मैने इस पृष्ठ https://simple.wikipedia.org/wiki/Minority_appeasement_in_India को हिन्दी में अनुवाद किया है और हिंदी वाला पृष्ठ [[भारत में अल्पसंख्यकों की तुष्टीकरण]] पर पढा जा सकता है, अब कोई उन दोनों को लिंक कीजिए [[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 16:38, 11 दिसम्बर 2025 (UTC)
:मैने उसे स्वयं जोड दिया है -[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 20:41, 11 दिसम्बर 2025 (UTC)
== विकिपीडिया का 25वें जन्मदिन समारोह, 15 जनवरी ==
[[File:WP25 Anthem video - alternate cut.webm|300px|right|thumbtime=67]]
नमस्ते
विकिपीडिया के [https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:Wikipedia%2025%20Virtual%20Celebration 25वें जन्मदिन समारोह] में आपको आमंत्रित करना चाहता हूँ, जो [https://zonestamp.toolforge.org/1768492800 15 जनवरी को 16:00 UTC] पर हो रहा है।
यह एक घंटे भर का वर्चुअल इवेंट होगा जिसमें ट्रिविया, पुरस्कार, संगीत प्रदर्शन, नाटक रीडिंग, संपादकों पर स्पॉटलाइट और विशेष अतिथि शामिल होंगे। इसे Eventyay और विकिपीडिया के यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीम किया जाएगा। तारीख सेव करने और अपडेट पाने के लिए इवेंट के लिए रजिस्टर करें, और अगर आपके कोई सवाल हों तो मुझसे पूछें!
–[[सदस्य:RASharma (WMF)|RASharma (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:RASharma (WMF)|वार्ता]]) 10:20, 12 दिसम्बर 2025 (UTC)
== तुरन्त हस्तक्षेप अनुरोध ==
प्रिय साथी विकीमीडियन्स,
मैं आप सभी से अत्यंत आग्रह और गंभीरता के साथ तत्काल सहायता की अपील कर रहा हूँ, ताकि विकीमीडिया ब्लॉग टीम द्वारा की गई एक लंबे समय से चली आ रही अन्यायपूर्ण स्थिति को सुधारा जा सके।
2014 से 2020 के बीच, विकीमीडिया के कुछ स्टाफ सदस्यों के प्रतिकूल और हतोत्साहित करने वाले रवैये के बावजूद, मैंने भारत ( [https://diff.wikimedia.org/2017/04/12/ashish-bhatnagar/ आशीष भटनागर जी] का ब्लॉग इंटरव्यू, [https://diff.wikimedia.org/2015/03/03/hindi-wiki-sammelan/ प्रथम हिन्दी विकि सम्मेलन की रिपोर्ट], आदि), म्यांमार, कोरिया, तुर्की, चेक गणराज्य आदि देशों की विकीमीडिया समुदायों और विकीमीडियन्स का परिचयात्मक दस्तावेज़ीकरण (प्रोफाइलिंग) करने का कार्य किया।
मैंने स्वयं गहन शोध किया, प्रमुख और सक्रिय योगदानकर्ताओं की पहचान की, प्रश्नावलियाँ तैयार कीं, विस्तृत प्रोफाइल/साक्षात्कार लिखे और कुल मिलाकर 35 ब्लॉग पोस्ट तैयार कर प्रकाशित करवाईं।
दुर्भाग्यवश, विकीमीडिया ब्लॉग टीम के कम से कम दो सदस्य जबरन और अनुचित रूप से लगभग 10 ब्लॉग पोस्टों की लेखकता (Authorship) अपने नाम से दर्शा रहे हैं, जबकि उन लेखों का संपूर्ण शोध, लेखन और सामग्री मेरी ओर से की गई थी।
मैं आप सभी से विनम्र लेकिन सशक्त अनुरोध करता हूँ कि इस स्पष्ट अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाएँ और यहाँ [https://meta.wikimedia.org/wiki/Talk:Wikimedia_Blog#Credits मेरी अपील] के नीचे अपने विचार/टिप्पणियाँ दर्ज करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके और वास्तविक लेखक को उसका उचित श्रेय मिल सके।
आपका समर्थन न केवल मेरे लिए, बल्कि विकीमीडिया आंदोलन में पारदर्शिता, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
आप सभी का अग्रिम धन्यवाद। [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 07:27, 27 दिसम्बर 2025 (UTC)
:बिना विश्वसनीय स्रोत के, किसी भी विकिपीडिया पेज पर कोई वाक्य नहीं जोड़ा जा सकता, इसलिए कृपया मुझे बताएं कि आप किन पृष्ठों की बात कर रहे हैं?[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 08:03, 13 जनवरी 2026 (UTC)
::बांग्ला जी, आपका और हिन्दी विकिपीडिया समुदाय का धन्यवाद। वैसे कुछ अन्य विकिपीडिया के सज्जन पुरुषों के हस्तक्षेप के कारण [https://meta.wikimedia.org/wiki/Talk:Diff_(blog)#Blogpost_Credits समस्या सुलझ चुकी है] । [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 21:32, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== Istanbul का सही उच्चारण ==
"इस्तांबुल" लिखने से यह होगा कि इसका उच्चारण "इस्ताम्बुल" हो जाएगा, क्योंकि त के बाद में "ब" है, जिसके बाद "म" है (प, फ, ब, भ, म)। इसलिए "इस्तान्बुल" ही सही है। [[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] ([[सदस्य वार्ता:Dimple323|वार्ता]]) 16:10, 28 दिसम्बर 2025 (UTC)Dimple323
:@[[सदस्य:Dimple323|Dimple323]] लेख के वार्ता पृष्ठ पर चर्चा करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 07:51, 7 जनवरी 2026 (UTC)
== ड्राफ्ट की समीक्षा और स्थानांतरण का अनुरोध ==
नमस्ते,
कृपया ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra की समीक्षा करें और यदि उपयुक्त हो तो इसे मुख्य नामस्थान में स्थानांतरित करें।
ड्राफ्ट का लिंक:
https://hi.wikipedia.org/wiki/ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra
धन्यवाद। [[सदस्य:Supraconciencia|Supraconciencia]] ([[सदस्य वार्ता:Supraconciencia|वार्ता]]) 22:03, 8 जनवरी 2026 (UTC)
== अनुरोध ==
मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि आप इस चर्चा में अपनी टिप्पणियाँ जोड़ें: <nowiki>https://hi.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया</nowiki>: पृष्ठ_हटाने_हेतु_चर्चा/लेख/ भारत में अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण# भारत में अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण ।-[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 03:58, 11 जनवरी 2026 (UTC)
== हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप कार्यक्रम सूचना ==
सभी विकि साथियों को नववर्ष 2026 के लिए शुभकामनाएं। हम यूजर ग्रूप के जनवरी 2026 तक के कार्यों से संबंधित कुछ नए अपडेट साझा करना चाहते हैं:
:अक्तूबर तथा नवंबर 2025 में आयोजित संपादनोत्सव के परिणाम घोषित हो चुके हैं:
# [[w:hi:विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्तूबर 2025|विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्तूबर 2025]] - 2 अक्तूबर 2025 से 18 अक्तूबर 2025 तक हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
# [[S:hi:विकिस्रोत:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५|विकिस्रोत:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५]]- 1 नवंबर, 2025 से 14 नवंबर, 2025 तक हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
:जनवरी में नई दिल्ली में दो ऑफ लाइन बैठक/कार्यशाला का आयोजन हो रहा है:
# [[w:hi:विकिपीडिया:हिंदी ई-सामग्री के निर्माण में अनुवाद और विकिपीडिया की भूमिका|विकिपीडिया:हिंदी ई-सामग्री के निर्माण में अनुवाद और विकिपीडिया की भूमिका]] - 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित सांस्थानिक प्रशिक्षण और भागिदारी कार्यशाला।
# [[w:hi:विकिपीडिया:प्रबंधक बैठक/जनवरी 2026|प्रबंधक बैठक/जनवरी 2026]] - 16 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रबंधक बैठक।
: वर्ष 2026 के फरवरी तथा मार्च में दो गुणवत्ता बढ़ाने वाले संपादनोत्सव करने की योजना है:
# [[w:hi:विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/फरवरी 2026|विकिपीडिया:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/फरवरी 2026]] – फरवरी 2026 में हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।
# [[S:hi:विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५|विकिस्रोत:गुणवत्ता संवर्द्धन संपादनोत्सव/नवंबर २०२५]]- मार्च में हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑन लाइन संपादनोत्सव।:इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए तथा इससे संबंधित कोई सुझाव देने के लिए सदस्यों का स्वागत है।
: 15 जनवरी को जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में शामिल होने को इच्छुक दिल्ली तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकिपीडियनों का स्वागत हैं। आप आयोजन पृष्ठ पर अपना पंजीयन कराकर इस कार्यशाला में शामिल हो सकते हैं।
:सादर- संपर्क सूत्र -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 18:49, 13 जनवरी 2026 (UTC)
==सहायता==
मैं जब भी किसी लेख में संपादित करती करती हूँ तो स्रोत संपादित की जगह संपादित करें आता है जिस कारण मैं ठीक से आडिट नहीं कर पाती हूँ कृपया मेरी इस समस्या में सहायता करें। [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 06:14, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] जी, आपको समस्या क्या आ रही है? वहाँ स्रोत सम्पादन और यथादृश्य समादिका (visual editor) के मध्य बदला जा सकता है। यदि आप स्रोत सम्पादन का उपयोग करना चाहें तो उचित बदलाव कर सकते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 06:19, 15 जनवरी 2026 (UTC)
::{{ping|संजीव कुमार}} लेकिन कहाँ और कैसे बदला जाएगा [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 06:21, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:::{{ping|संजीव कुमार}} जी कृपया मार्गदर्शन करें। 14:23, 16 जनवरी 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] जी वहाँ पर दाहिने ओर ऊपर एक पेन जैसा दिखने वाला बटन होता है जिसे क्लिक करके आप 'यथादृश्य' और 'स्रोत संपादक' में अदल बदल कर सकते हैं। आप कंप्यूटर पे हो तो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:32, 16 जनवरी 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] जी हो गया, धन्यवाद [[सदस्य:Mnjkhan|Mnjkhan]] ([[सदस्य वार्ता:Mnjkhan|वार्ता]]) 07:44, 17 जनवरी 2026 (UTC)
== मसौदे की समीक्षा का अनुरोध ==
नमस्ते,
मैंने हाल ही में एक जीवित व्यक्ति की जीवनी का मसौदा तैयार किया है, जो स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है।
मुख्य नामस्थान में स्थानांतरण का अनुरोध पहले ही किया जा चुका है।
मसौदा यहाँ उपलब्ध है:
https://hi.wikipedia.org/wiki/ड्राफ्ट:Manuel_Sans_Segarra
यदि कोई अनुभवी संपादक इसकी समीक्षा कर सके, तो आभारी रहूँगा।
धन्यवाद। [[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] ([[सदस्य वार्ता:Pi1918|वार्ता]]) 10:03, 15 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] मैंने इसे साफ़ प्रचार मानते हुए शीघ्र हटाने हेतु नामांकित किया है। वैसे भी हिंदी विकिपीडिया पर ड्राफ्ट जैसा कोई नामस्थान नहीं है। कृपया आगे से व्यक्तियों के प्रचारात्मक लेख बनाने से परहेज करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:45, 16 जनवरी 2026 (UTC)
::नमस्ते,
:: जानकारी देने के लिए धन्यवाद। मेरा उद्देश्य किसी भी प्रकार का प्रचार करना नहीं था। मैं आपके निर्णय का सम्मान करता हूँ और आगे से हिंदी विकिपीडिया की नीतियों के अनुसार ही योगदान करूँगा।
:: धन्यवाद। [[सदस्य:Pi1918|Pi1918]] ([[सदस्य वार्ता:Pi1918|वार्ता]]) 17:53, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== नये लेख [[Draft:_सम्राट_कुमार_गुप्ता]] की समीक्षा हेतु अनुरोध ==
नमस्ते संपादकों,
मैंने सम्राट कुमार गुप्ता के बारे में एक लेख (Draft) तैयार किया है जिसमें 3 दशकों के पत्रकारिता और सामाजिक कार्यों के विश्वसनीय संदर्भ दिए गए हैं। कृपया इसकी समीक्षा करें और इसे मुख्य लेख के रूप में प्रकाशित करने में सहायता करें। लिंक: [[Draft:_सम्राट_कुमार_गुप्ता]] --
धन्यवाद [[सदस्य:Kumari Supriya|Kumari Supriya]] ([[सदस्य वार्ता:Kumari Supriya|वार्ता]]) 07:43, 16 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Kumari Supriya|Kumari Supriya]] मैंने इसे साफ़ प्रचार मानते हुए शीघ्र हटाने हेतु नामांकित किया है। वैसे भी हिंदी विकिपीडिया पर ड्राफ्ट जैसा कोई नामस्थान नहीं है। कृपया आगे से व्यक्तियों के प्रचारात्मक लेख बनाने से परहेज करें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:46, 16 जनवरी 2026 (UTC)
== Thank You for Last Year – Join Wiki Loves Ramadan 2026 ==
Dear Wikimedia communities,
We hope you are doing well, and we wish you a happy New Year.
''Last year, we captured light. This year, we’ll capture legacy.''
In 2025, communities around the world shared the glow of Ramadan nights and the warmth of collective iftars. In 2026, ''Wiki Loves Ramadan'' is expanding, bringing more stories, more cultures, and deeper global connections across Wikimedia projects.
We invite you to explore the ''Wiki Loves Ramadan 2026'' [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan 2026|Meta page]] to learn how you can participate and [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan 2026/Participating communities|sign up]] your community.
📷 ''Photo campaign on '' [[c:Special:MyLanguage/Commons:Wiki Loves Ramadan 2026|Wikimedia Commons]]
If you have questions about the project, please refer to the FAQs:
* [[m:Special:MyLanguage/Wiki Loves Ramadan/FAQ/|Meta-Wiki]]
* [[c:Special:MyLanguage/Commons:Wiki Loves Ramadan/FAQ|Wikimedia Commons]]
''Early registration for updates is now open via the '''[[m:Special:RegisterForEvent/2710|Event page]]'''''
''Stay connected and receive updates:''
* [https://t.me/WikiLovesRamadan Telegram channel]
* [https://lists.wikimedia.org/postorius/lists/wikilovesramadan.lists.wikimedia.org/ Mailing list]
We look forward to collaborating with you and your community.
'''The Wiki Loves Ramadan 2026 Organizing Team''' 19:45, 16 जनवरी 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Non-Technical_Village_Pumps_distribution_list&oldid=29879549 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:ZI Jony@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== स्वागत सन्देश में चित्र ==
पूर्व चर्चा: [[विकिपीडिया:चौपाल/पुरालेख 63#स्वागत सन्देश में चित्र]]
[[साँचा:सहायता|स्वागत संदेश]] में अंकित किया गया चित्र मशीन द्वारा निर्मित किया गया है। मशीन द्वारा बनाई गई सामग्री इस ज्ञानकोष में मान्य नहीं है। इसलिए अनुरोध है कि जिस सदस्य ने यह चित्र स्थापित किया है, वही इसे हटा भी दे। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 09:32, 18 जनवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी, यह चित्र आपको कैसा लगता है? मुझे तो यह पुराने चित्र जैसा ही लग रहा है। इसलिए यदि आप दोनों को यह ठीक लगे, तो हम इसे उपयोग में ले सकते हैं।
:[[चित्र:Annapoorni (10641191125).jpg|120px|thumb|right|स्वागत!]] – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 16:13, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)
{{-}}
:: [[चित्र:Tableau_noir_dans_le_désert_du_Thar_(Rajasthan).jpg|240px|thumb|center|हिन्दी विकिपीडिया में आपका हार्दिक स्वागत है। इस ज्ञानकोश के विकास और विस्तार में आपके सहयोग की हमें प्रतीक्षा है।]] <center>--[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 18:03, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)</center>
:::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, ये आपको कैसे लग रहा है कि एआई से जनित चित्र ज्ञानकोशीय नहीं हो सकता? आजकल एआई से ज्ञानकोशीय एनिमेशन बनाये जाते हैं। यह तो बनाने वाले पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त चित्र ज्ञानकोशीय होने के लिए नहीं बल्कि स्वागत के रूप में जोड़ा गया है।
:::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] जी, मुझे आपके सुझाव से कोई समस्या नहीं है और आप चाहें तो इसे जोड़ सकते हैं। हालांकि पिछली बार @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी का सुझाव था कि चित्र को हटा दिया जाये, अतः मुझे उनका सुझाव भी उचित ही लगा। लेकिन मैंने परम्परा के तौर पर नया चित्र जोड़ा था क्योंकि स्वागत सन्देश में बहुत बदलावों की आवश्यकता है।
:::@[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] जी, आपका सुझाव भी उचित है लेकिन इससे बेहतर चित्र हम कंप्यूटर पर निर्मित कर सकते हैं जो इससे बेहतर होंगे। इसके लिए चर्चा करना बेहतर होगा। स्वागत सन्देश बड़ा रखने के स्थान पर एक छोटी कड़ी दे सकते हैं जिसपर सभी सन्देशों को सूचीबद्ध किया जा सके। इससे उन सदस्यों को भी सुविधा रहेगी जो हिन्दी नहीं जानते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:34, 9 फ़रवरी 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]]@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]]@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] @[[सदस्य:Hindustanilanguage|Hindustanilanguage]] मेरा अब भी सुझाव है कि चित्र हटा दिया जाय। हालाँकि, अभी जो आपत्ति दर्ज़ की गई है, उसपे इतना ही कहूँगा कि यह चित्र 'ज्ञानकोश' का हिस्सा नहीं है। स्वागत संदेश में इस तरह के चित्र पर आपत्ति उचित नहीं प्रतीत हो रही।
::::संजीव जी जैसा कह रहे, पूरे स्वागत संदेश को पुनर्विचार एवं नये सिरे से बनाने की ज़रूरत है - लंबा काम है - मुझे कोई गुरेज़ नहीं इसमें भागीदारी करने में।
::::पर यह चित्र हटाने वाली बात चर्चा के योग्य भी नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 10:49, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
:::::{{ping|संजीव कुमार}}, एक महिला को हर किसी के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े किया जाना महिलाओं के आत्मसम्मान के लिहाज से कहीं न कहीं गरिमापूर्ण प्रतीत नही हो रहा है। इसलिए भी इस चित्र को हटा देना या किसी उपयुक्त चित्र से बदल देना चाहिए। बहुत से ज्ञानकोषों में बिस्किट का प्रयोग किया जाता है क्योंकि संपादन के लिए ऊर्जा चाहिए होती है, जो बिस्किट से मिलती है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 08:23, 8 मार्च 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] और @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी के विचारों से सहमत होते हुए कि स्वागत संदेश को नए सिरे से बनाने की आवश्यकता है, और @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी की आपत्तियों (एआई और गरिमा) को ध्यान में रखते हुए, मेरा सुझाव है कि हम विवादित चित्र के स्थान पर प्राकृतिक फूलों के चित्र का उपयोग किया जाएं। फूल स्वागत का एक गरिमापूर्ण, मानवीय और तटस्थ प्रतीक हैं।
::::::मैंने विकिमीडिया कॉमन्स से कुछ प्राकृतिक और सुंदर चित्रों का चयन किया है। कृपया नीचे दी गई गैलरी में देखकर बताएँ कि इनमें से कौन सा चित्र नए स्वागत संदेश के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा?
::::::File:Lotus 2013 sai.jpg|कमल '''यह चित्र मैने @[[सदस्य:SM7|SM7]] के सदस्य पृष्ठ पर देखा'''
::::::File:Red rose at Square of the Cathedral of Christ the Saviour.jpg|लाल गुलाब
::::::File:Combretum indicum(Rangoon creeper).jpg|मधुमालती (रंगून क्रीपर) '''यह मैने ही अपलोड किया'''
::::::File:(MHNT) Jasminum polyanthum – flowers and buds.jpg|चमेली
::::::File:Marigold 14.jpg|गेंदा
::::::File:Flower bouquet in Tarnowskie Góry, Silesian Voivodeship, Poland, December 2023.jpg|पुष्प गुच्छ
::::::File:Rose and carnation flower bouquet 01.jpg|गुलाब और कार्नेशन
::::::आप सभी वरिष्ठ साथियों की राय का स्वागत है। [[सदस्य :VIKRAM PRATAP7 | विक्रम प्रताप ]] 14:09, 9 मार्च 2026 (UTC)
:::::::@[[सदस्य:VIKRAM PRATAP7|VIKRAM PRATAP7]] जी, फूल लगवाने का कोई विशेष औचित्य? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:38, 9 मार्च 2026 (UTC)
::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, महोदय
:::::::: फूल लगवाने का मुख्य औचित्य केवल एक तटस्थ, विवाद-रहित और मानवीय स्वागत-प्रतीक प्रस्तुत करना है।
::::::::महोदय, भारत में फूलों से स्वागत करना सबसे आत्मीय और सहज माना जाता है।
::::::::प्राकृतिक फूल होने के कारण यह AI और गरिमा से जुड़े उन सभी विवादों से पूरी तरह मुक्त है, जो वर्तमान चित्र को लेकर उठे हैं।
::::::::मेरा उद्देश्य सिर्फ एक सकारात्मक चित्र लगाना है। यदि समुदाय को फूल के स्थान पर @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी का 'बिस्किट' वाला सुझाव या विकिपीडिया का लोगो अधिक उपयुक्त लगता है, तो मेरी उसमें भी पूर्ण सहमति है। प्रमुख उद्देश्य स्वागत संदेश को बेहतर बनाना है। [[सदस्य :VIKRAM PRATAP7 | विक्रम प्रताप ]] 16:47, 9 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::भारत में हाथ जोड़कर स्वागत किया जाता है। फूलों से स्वागत देवताओं का किया जाता है और आजकल लोगों ने चाटुकारिता के लिए इसे मनुष्यों पर लागू करना आरम्भ कर दिया है। चित्रों में प्राकृतिक फूल कैसे हो सकते हैं? वर्तमान चित्र को लेकर मैंने कोई विवाद नहीं देखा, बल्कि चित्र को हटाकर संबंधित सन्देश को पुनः लिखने पर यह चर्चा है। वर्तमान चित्र में क्या नकारात्मक दिखाई दे रहा है? क्या वो भारतीय संस्कृति से संबंधित नहीं है? (हालांकि ऐसा आवश्यक नहीं है)। अभी चर्चा इसपर चाहिए कि चित्र की आवश्यकता ही क्या है? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:43, 12 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी,महोदय
::::::::::मेरा उद्देश्य केवल उठे हुए विवाद के बीच एक विकल्प देना था। लेकिन मैं आपसे और @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी से पूरी तरह सहमत हूँ कि असली मुद्दा यह है कि स्वागत सन्देश में किसी भी चित्र की आवश्यकता है ही नहीं। पर @[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] महोदय ने बिस्किट के चित्र का उदाहरण दिया था, जिसके लिए मैं पुष्पों का विकल्प दिया था|
::::::::::मेरी ओर से चित्र वाले विषय पर चर्चा यहीं समाप्त है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:59, 12 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::::सभी सदस्यो से विनम्र निवेदन है, की कृपया इस [[:File:AI Chatgpt generated Woman in Welcome pose.png|चित्र]] देखने का कष्ट करे, इसको स्वागत सन्देश में लगने के लिए उपयुक्त हो सकता है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 16:06, 12 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::::@[[सदस्य:Cptabhiimanyuseven|Cptabhiimanyuseven]] जी, चित्र को हटाने पर चर्चा चल रही है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:35, 14 मार्च 2026 (UTC).
:::::::::::::::{{Ping|संजीव कुमार}} जी, नमस्ते! चित्र को उपयोग में लिया जा चुका है,पहले चित्र उपयोग में न होने के कारण हटाने हेतु चर्चा के लिए नामांकित किया गया है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 16:50, 14 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::{{ping|संजीव कुमार}}, आपकी बात सही है कि भारत में हाथ जोड़कर स्वागत किया जाता है। परंतु, क्योंकि आप और यहां के अधिकतर प्रबंधक पुरुष हैं, और स्वागत करते हुए व्यक्ति का ही चित्र लगाना है तो उचित होगा कि किसी पुरुष का हाथ जोड़कर स्वागत करता हुआ चित्र लगाया जाए। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:28, 20 मार्च 2026 (UTC)
:{{od}} वर्तमान चर्चा के आधार पर चित्र हटा दिया गया है। भविष्य में चर्चा करके एक उपयुक्त चित्र जोड़ा जा सकता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 14:51, 18 मार्च 2026 (UTC)
== Feminism and Folklore 2026 starts soon ==
<div style="border:8px maroon ridge;padding:6px;">
[[File:Feminism and Folklore 2026 logo.svg|centre|550px|frameless]]
::<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
<div style="text-align: center; width: 100%;">''{{int:please-translate}}''</div>
;Invitation to Organize Feminism and Folklore 2026
Dear Wiki Community,
We are pleased to invite Wikimedia communities, affiliates, and independent contributors to organize the '''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026]]''' writing competition on your local Wikipedia.
The international campaign will run from '''1 February to 31 March 2026''' and aims to improve coverage of feminism, women’s histories, gender-related topics, and folk culture across Wikipedia projects.
;About the Campaign
'''Feminism and Folklore''' is a global writing initiative that complements the '''[[:c:Commons:Wiki Loves Folklore 2026|Wiki Loves Folklore]]''' photography competition. While Wiki Loves Folklore focuses on visual documentation, this writing campaign addresses the '''gender gap on Wikipedia''' by improving encyclopedic content related to folk culture and marginalized voices.
;What Can Participants Write About?
Communities can contribute by creating, expanding, or translating articles related to:
* Folk festivals, rituals, and celebrations
* Folk dances, music, and traditional performances
* Women and queer figures in folklore
* Women in mythology and oral traditions
* Women warriors, witches, and witch-hunting narratives
* Fairy tales, folk stories, and legends
* Folk games, sports, and cultural practices
Participants may work from curated article lists or generate new article suggestions using campaign tools.
;How to Sign Up as an Organizer
Organizers are requested to complete the following steps to register their community:
# Create a local project page on your wiki [[:m:Feminism and Folklore/Sample|(see sample)]]
# Set up the campaign using the '''CampWiz''' tool
# Prepare a local article list and clearly mention:
#* Campaign timeline
#* Local and international prizes
# Request a site notice from local administrators [[:mr:Template:SN-FNF|(see sample)]]
# Add your local project page and CampWiz link to the '''[[:m:Feminism and Folklore 2026/Project Page|Meta project page]]'''
;Campaign Tools
The Wiki Loves Folklore Tech Team has introduced tools to support organizers and participants:
* '''Article List Generator by Topic''' – Helps identify articles available on English Wikipedia but missing in your local language Wikipedia. The tool allows customized filters and provides downloadable article lists in CSV and wikitable formats.
* '''CampWiz''' – Enables communities to manage writing campaigns effectively, including jury-based evaluation. This will be the third year CampWiz is officially used for Feminism and Folklore.
Both tools are now available for use in the campaign. '''[https://tools.wikilovesfolklore.org/ Click here to access the tools]'''
;Learn More & Get Support
For detailed information about rules, timelines, and prizes, please visit the
'''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026 project page]]'''.
If you have any questions or need assistance, feel free to reach out via:
* '''[[:m:Talk:Feminism and Folklore 2026/Project Page|Meta talk page]]'''
* Email us using details on the contact page.
;Join Us
We look forward to your collaboration and coordination in making Feminism and Folklore 2026 a meaningful and impactful campaign for closing gender gaps and enriching folk culture content on Wikipedia.
Thank you and best wishes,
'''[[:m:Feminism and Folklore 2026|Feminism and Folklore 2026 International Team]]'''
----
''Stay connected:''
[[File:B&W Facebook icon.png|link=https://www.facebook.com/feminismandfolklore/|30x30px]]
[[File:B&W Twitter icon.png|link=https://twitter.com/wikifolklore|30x30px]]
</div></div>
== Invitation to Host Wiki Loves Folklore 2026 in Your Country ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
<div style="text-align: center; width: 100%;">''{{int:please-translate}}''</div>
[[File:Wiki Loves Folklore Logo.svg|right|150px|frameless]]
Hello everyone,
We are delighted to invite Wikimedia affiliates, user groups, and community organizations worldwide to participate in '''Wiki Loves Folklore 2026''', an international initiative dedicated to documenting and celebrating folk culture across the globe.
;About Wiki Loves Folklore
'''Wiki Loves Folklore''' is an annual international photography competition hosted on Wikimedia Commons. The campaign runs from '''1 February to 31 March 2026''' and encourages photographers, cultural enthusiasts, and community members to contribute photographs that highlight:
* Folk traditions and rituals
* Cultural festivals and celebrations
* Traditional attire and crafts
* Performing arts, music, and dance
* Everyday practices rooted in folk heritage
Through this campaign, we aim to preserve and promote diverse folk cultures and make them freely accessible to the world.
[[:c:Commons:Wiki_Loves_Folklore_2026|Project page on Wikimedia Commons]]
; Host a Local Edition
As we celebrate the '''eight edition''' of Wiki Loves Folklore, we warmly invite communities to organize a local edition in their country or region. Hosting a local campaign is a great opportunity to:
* Increase visibility of your region’s folk culture
* Engage new contributors in your community
* Enrich Wikimedia Commons with high-quality cultural content
'''[[:c:Commons:Wiki_Loves_Folklore_2026/Organize|Sign up to organize]]:'''
If your team prefers to organize the competition in ''either February or March only'', please feel free to let us know.
If you are unable to organize, we encourage you to share this opportunity with other interested groups or organizations in your region.
;Get in Touch
If you have any questions, need support, or would like to explore collaboration opportunities, please feel free to contact us via:
* The project Talk pages
* Email: '''support@wikilovesfolklore.org'''
We are also happy to connect via an online meeting if your team would like to discuss planning or coordination in more detail.
Warm regards,
'''The Wiki Loves Folklore International Team'''
</div>
[[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 13:21, 18 जनवरी 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Global_message_delivery/Wikipedia&oldid=29228188 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Tiven2240@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== सार्वभौमिक आचार संहिता और प्रवर्तन के दिशानिर्देशों की वार्षिक समीक्षा ==
<section begin="announcement-content" />
मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि सार्वभौमिक आचार संहिता और प्रवर्तन के दिशानिर्देशों की वार्षिक समीक्षा की अवधि शुरू हो चुकी है। आप 9 फरवरी 2026 तक बदलावों के सुझाव दे सकते हैं। यह वार्षिक समीक्षा के कई चरणों का पहला चरण है। [[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Annual review/2026|मेटा के UCoC पृष्ठ पर अधिक जानकारी पाएँ और जुड़ने के लिए वार्तालाप खोजें]]।
[[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Coordinating Committee|सार्वभौमिक आचार संहिता समन्वयन समिति]] (U4C) एक वैश्विक समिति है जो UCoC का साम्यिक और सुसंगत कार्यान्वयन करने को समर्पित है। यह वार्षिक समीक्षा U4C द्वारा योजित और लागू की गई है। अधिक जानकारी तथा U4C की ज़िम्मेदारियों के लिए [[m:Special:MyLanguage/Universal Code of Conduct/Coordinating Committee/Charter|आप U4C चार्टर की जाँच कर सकते हैं]]।
कृपया जहाँ भी उचित हो, अपने समुदाय के दूसरे सदस्यों के साथ यह जानकारी साझा करें।
-- U4C के साथ समन्वय में, [[m:User:Keegan (WMF)|Keegan (WMF)]] ([[m:User talk:Keegan (WMF)|वार्ता]])<section end="announcement-content" />
21:01, 19 जनवरी 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Global_message_delivery&oldid=29905753 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Keegan (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== हिंदी विकि सम्मेलन 2026 समुदाय सहभागिता सर्वे ==
:हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप इस वर्ष जुलाई में हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026 आयोजित करने की योजना बना रहा है। इससे संबंधित हिंदी विकिपीडियनों की रुचि तथा महत्वपूर्ण विषयों को समझने के लिए एक सर्वेक्षण किया जा रहा है। [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeWaqfyOlr9hS7Ef5eXg_Y4mPK8gj1cnzaIBAbQXbjM6KH4aw/viewform हिंदी विकि सम्मेलन 2026] भरकर हिंदी विकिपीडिया सम्मेलन 2026 आयोजित करने में सहयोगी बनें। -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 09:07, 31 जनवरी 2026 (UTC)
[[सदस्य:Vishal K Pandey|Vishal K Pandey]] ([[सदस्य वार्ता:Vishal K Pandey|वार्ता]]) 18:11, 26 जनवरी 2026 (UTC)
==गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड==
विकिडेटा में गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड का लोगो Guinness World Records logo.svg नाम से उपलब्ध है। इसका हिन्दी में उपयोग करना संभव बनाएं। अधिकार संपन्न लोग ऐसा कर सकते हैं।
'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 18:28, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
:[[गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स]] [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:00, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
::समस्या सुलझाने के लिए आपका धन्यवाद - '''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 08:59, 6 फ़रवरी 2026 (UTC)
LimcaBookofRecords.jpg इस फाइल के बारे में भी विचार करें। धन्यवाद
'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 18:35, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
:[[लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स]] [[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 20:02, 1 फ़रवरी 2026 (UTC)
::आपको धन्यवाद- '''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 08:59, 6 फ़रवरी 2026 (UTC)
== शीर्षक परिवर्तन के लिए अनुरोध ==
Namaste, I would like the article title '''[[डी एन ए की नकल]]''' to be changed to '''डीएनए प्रतिकृति''', as this form is more accurate and is the one used in most scientific literature.
Sorry for writing in English and if this is not the right place to make the request. I have been on a long break from Wikipedia and have forgotten the proper procedure for requesting a title change.<b>[[User talk:Dineshswamiin|<span style="color: Green">Dinesh</span>]]</b> ([[User talk:Dineshswamiin|talk]]) 15:32, 3 फ़रवरी 2026 (UTC)
:नमस्ते, मैं चाहता हूँ कि लेख का शीर्षक [[डी एन ए की नकल]] बदलकर 'डीएनए प्रतिकृति' कर दिया जाए, क्योंकि यह रूप ज़्यादा सही है और ज़्यादातर वैज्ञानिक किताबों में इसी का इस्तेमाल होता है।-[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 18:54, 5 फ़रवरी 2026 (UTC)
== ''कंप्यूटिंग'' या ''अभिकलन'' ==
हिन्दी में कंप्यूटिंग को [[अभिकलन]] भी कहा जाता है। परंतु इसके बाद भी कुछ पृष्ठ के नाम [[मोबाइल कम्प्यूटिंग]] या [[क्लाउड कम्प्यूटिंग]] है।
प्रोग्रामिंग को [[क्रमानुदेशन]] कहा जाता है परंतु आधे से ज्यादा निबंध के शीर्षक में [[प्रोग्रामिंग भाषा]] लिखा गया है।
हमें निबंध के शीर्षक एक समान रखने चाहिए। जैसे सारे निबंध के शीर्षक में प्रोगामिंग के जगह क्रमानुदेशन लिखा रहेगा। अन्य नाम हम निबंध के मुख्य भाग में लिख सकते है या redirect कर सकते है। जैसे-
'''क्रमानुदेशन भाषा''', जिसे '''प्रोग्रामिंग भाषा''' भी कहते है..... [[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 11:16, 7 फ़रवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, नमस्ते! आप एक समाधान प्रस्तावित करें - उसपे चर्चा करके यह कार्य किया जा सकता है। आपका और सभी का स्वागत है इस एकरूपता लाने के प्रयास के लिए। सादर! --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:03, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
::[[मोबाइल कम्प्यूटिंग]] का नाम बदलकर [[मोबाइल अभिकलन]] कर देना चाहिए। [[क्लाउड कम्प्यूटिंग]] का [[क्लाउड अभिकलन]] तथा [[प्रोग्रामिंग भाषा]] का नाम [[क्रमानुदेशन भाषा]] कर देना चाहिए। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:40, 8 मार्च 2026 (UTC)
== हिन्दी विकिपीडिया से गायब हो चुके पुराने संपादक ==
तकरीबन 8 साल बाद मैं विगत कुछ दिनों से विकिपीडिया पर सक्रिय हूं। इस बीच देख रहा हूं कि यहां से वो तमाम लोग गायब हो चुके हैं जो एक समय में लगातार सक्रिय रहते थे। नए लेखों की गुणवत्ता स्तरीय थी। लेकिन इधर हिन्दी विकिपीडिया पर जो कुछ भी लिखा जा रहा है वो या तो आत्मप्रचार है या फिर नौसिखियों द्वारा लगातार किया जा रहा प्रयोग। आज मैंने लगभग 25 लोगों को अपनी ओर से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की जो एक जमाने में प्रबंधक रह चुके हैं और जिन्होंने विकिपीडिया पर काफी योगदान दिया है। लेकिन सबने यही कहा कि वो अब सक्रिय नहीं हैं। यह हिन्दी विकिपीडिया के लिए ठीक नहीं है। यद्यपि कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में विकिपीडिया और खासतौर पर अंग्रेजी से इतर भाषाओं में इस ज्ञानकोश की अब पहले जैसी आवश्यकता रह नहीं गई है। क्योंकि अब अंग्रेजी की सामग्री एक क्लिक पर किसी भी दूसरी भाषा में उपलब्ध है। फिर भी हिन्दी में लिखे गए मूल लेखों का महत्व तो हमेशा बना रहेगा। इसलिए विकिपीडिया संपादक समुदाय को एक बार फिर अपना तुच्छ अहंकार छोड़कर दूर जा चुके लोगों को दोबारा सक्रिय करना चाहिए। --'''[[User:कलमकार|<span style="background: #f40444; color:white;padding:2px;">कलमकार</span>]] [[User talk:कलमकार|<span style="background: #1804f4; color:white; padding:2px;">वार्ता</span>]]''' 13:54, 8 फ़रवरी 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:कलमकार|कलमकार]] सर ! आठ साल (हुये तो नहीं!) बाद आप का स्वागत - हमारी ओर से।
:कुछ उधार का अर्ज़ कर रहा (बुरा मत मानियेगा)
:''"ऐसा नहीं कि उन से ''(मतलब विकि से)'' मोहब्बत नहीं रही
:''जज़्बात में वो पहली सी शिद्दत नहीं रही''
:''
:''सर में वो इंतिज़ार का सौदा नहीं रहा''
:''दिल पर वो धड़कनों की हुकूमत नहीं रही''"''
:यह हमारी स्थिति है।
:और जो चले गए उनकी स्थिति यह है कि
:''चेहरे को झुर्रियों ने भयानक बना दिया''
:''आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही'' --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 11:00, 10 फ़रवरी 2026 (UTC)
:कलमकार जी, ज्ञानकोष में सक्रियता के प्रति आपकी चिंता वाजिब है। मैंने यहां पर देखा है कि बहुत से सदस्यों द्वारा महनत से बनाए गए पृष्ठ कोई न कोई पैमाना बताकर शीघ्र हटाने के लिए नामांकित कर दिए जाते हैं, फिर कोई अन्य सदस्य उन्हें हटा भी देता है। शायद इससे हताश होकर बहुत से संपादक ज्ञानकोष को छोड़कर चले गए। बहुत से संपादकों के तो सदस्य पृष्ठ भी हटा दिए गए हैं। सम्पादकों की सक्रियता में कमी की एक वजह यह भी हो सकती है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 22:21, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, क्या आप कुछ ऐसे सदस्य पृष्ठों के उदाहरण दे सकते हैं जिन्हें हटाया गया था, और कुछ ऐसे पृष्ठ भी जिन्हें किसी गलत मानदंड के तहत शीघ्र हटाने के लिए नामांकित किया गया और बाद में हटा दिया गया? यदि आपकी चिंता जायज़ होगी, तो अवश्य ही कोई समाधान खोजने की कोशिश करेंगे। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 10:54, 26 फ़रवरी 2026 (UTC)
:::DreamRimmer जी, हाल ही के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं, जहां प्रतीत होता है कि संपादकों द्वारा शिद्दत से बनाए गए कुछ पृष्ठों को हटा दिया गया:
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#why are you remove this article "सुमरत सिंह"]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#कृपया गोप्रेक्षेश्वर लेख की पुनः समीक्षा करें और कॉपीराइट उल्लंघन का टैग हटाने की कृपा करें]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#सहायता नोट]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#डॉ. विनोद कुमार पृष्ठ: शीघ्र हटाने नामांकन पर प्रतिक्रिया]]
:::* [[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार#अभिनव अरोड़ा के पृष्ठ हटाने के विषय में]]
:::हटाए गए पृष्ठों की सामग्री देखे बगैर मापदंड की सटीकता पर टिप्पणी करना संभव नही है परंतु बहुत से ऐसे पृष्ठ भी हटाए गए हैं, जहां संपादक लेख में संशोधन करने के लिए तैयार थे। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 07:56, 8 मार्च 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपको प्रचार सामग्री चाहिए या केवल विवाद खड़ा करना उद्देश्य रहा है? यदि आपको प्रचार सामग्री चाहिए तो बताइयेगा, ईमेल से भेज देता हूँ। बैठकर देखते और समझते रहियेगा। अन्यथा आपने मेरा वार्ता पृष्ठ यहाँ क्यों जोड़ा है पता नहीं। मैंने सभी सन्देशों का उत्तर भी दे रखा है। वर्तमान में भी [[विकिपीडिया:शीह|शीघ्र हटाने]] के लिए बहुत लेख नामांकित हैं। कृपया उनकी भी समीक्षा कर लेते समय रहते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:40, 18 मार्च 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपने ऊपर जिन चर्चाओं का उल्लेख किया है, उनसे संबंधित लेख मुझे किसी भी प्रकार से गलत मानदंड के अंतर्गत हटाए गए नहीं लगते। उन विषयों की उल्लेखनीयता और उपलब्ध सामग्री के आधार पर संजीव जी द्वारा लिया गया निर्णय बिल्कुल उचित था, और ऐसी स्थिति में मेरा निर्णय भी यही होता। आपने यह भी कहा कि ऐसे पृष्ठ हटाए गए जहाँ संपादक लेख में सुधार करने के लिए तैयार थे, परंतु सभी जानते हैं कि कोई अनुल्लेखनीय लेख केवल बार-बार संपादन या सुधार करने से उल्लेखनीय नहीं बन जाता। किसी विषय की उल्लेखनीयता तभी स्थापित होती है जब उसे विश्वसनीय स्रोतों में पर्याप्त स्थान मिले, और इसमें स्वाभाविक रूप से समय लगता है। शीघ्र हटाने की नीति इस विषय में पूरी तरह स्पष्ट है; यदि किसी लेख पर सही मानदंड के अनुसार टैग लगाया गया है, तो प्रबंधक उसे किसी भी समय हटा सकता है। यदि लेखक कोई टिप्पणी जोड़ता है, तो भी प्रबंधक उस टिप्पणी से संतुष्ट न होने पर लेख को बनाए रखने के लिए बाध्य नहीं होता। आपने यह भी कहा था कि सदस्यों के सदस्य पृष्ठ भी हटा दिए गए, लेकिन इसके समर्थन में आपने कोई लिंक प्रस्तुत नहीं किया। मेरा मानना है कि किसी भी सदस्य के कार्य पर प्रश्न तभी उठाया जाना चाहिए जब पर्याप्त प्रमाण हों; अन्यथा यह बिना प्रमाण के व्यक्तिगत आक्षेप और निराधार आरोप की श्रेणी में आता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 16:20, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::::{{ping|संजीव कुमार}}, जो आपकी नज़र में प्रचार हो, वह संभवतः दूसरों के लिए जानकारी हो सकती है।
:::::DreamRimmer जी, ऐसे भी बहुत से पृष्ठ देखें हैं, जहां अनेक विश्वसनीय स्रोत दिए गए थे, उन्हें भी अनुल्लेखनिय बता कर हटाया गया। उदाहरण के लिए:
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#सुमन कुमार घई]]।
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#राजेन्द्ररंजन चतुर्वेदी]]।
:::::* [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/अप्रैल 2022#रचित यादव]]। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:41, 20 मार्च 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, समस्या यह ही है कि आप इसे मेरे या आपके नज़र से देख रहे हो। एकबार नज़र हटाकर देखियेगा। "सुमन कुमार घई" नामक लेख पर 15 वर्षों से बिना स्रोत की कुछ सामग्री लिखी थी और बाद में [[विशेष:योगदान/सुमन कुमार घई|इसी नाम के सदस्य]] ने सामग्री हटाकर साहित्य कुंज की कड़ी जोड़ दी। इसी तरह अन्य लेखों को भी या तो सम्बंधित व्यक्ति ने स्वयं (आपके अनुसार उनकी नज़रों में वो स्वयं बहुत उल्लेखनीय व्यक्ति हैं) ने बनाया या अपने किसी रिश्तेदार से बनवाया। यदि आप बिना किसी स्रोत के स्वयं को उल्लेखनीय मानने लग जाओ तो क्या वो उल्लेखनीय हो जायेगा? एकबार इंटरनेट पर उपरोक्त व्यक्तियों के बारे में खोजकर देखें कि इनकी उल्लेखनीयता क्या है? उनके प्रसिद्धि के क्षेत्र में उन्हें कौनसे पुरस्कार मिले हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:26, 25 मार्च 2026 (UTC)
:::::::@[[सदस्य: संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, उल्लेखनीयता का मापदंड इसलिए बनाया गया था, कि यदि एक ही विषय या नाम पर लेख बनाने के लिए एक से अधिक दावेदार आ जाते हैं, तो इस नाम से उस विषय या व्यक्ति का लेख बनेगा जो अधिक उल्लेखनीय होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि विकिपीडिया के संदर्भ में एक phrase कई बार सामने आता है, जिसमें लिखा होता है, "sum of all knowledge""। कहने का तात्पर्य यह है कि उल्लेखनीयता के नाम पर तब तक कोई पृष्ठ नही हटाना चाहिए, जब तक उस विषय या नाम पर लेख बनाने के लिए एक से अधिक असंबंधित संभावनाएं न हों। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति 'रमेश सिंह' के नाम से उद्धरण सहित लेख बना रहा है तो वह लेख रहने देना चाहिए, जब तक कि कोई उससे भी अधिक उल्लेखनीय 'रमेश सिंह' नाम के व्यक्ति पर उद्धरण सहित लेख बनाने का दावेदार नहीं आ जाता। -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:25, 31 मार्च 2026 (UTC)
::::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, बहुत अच्छा अर्थ निकाला है आपने। साथ में अपने तर्क के पक्ष में कोई स्रोत भी दे दीजियेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:39, 31 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, [[:en:Wikipedia:Notability]] की भूमिका में लिखा है - ''Information on Wikipedia must be'' '''verifiable'''''... Wikipedia's'' '''concept of notability applies this basic standard''' ''to avoid indiscriminate inclusion of topics... Determining notability does not necessarily depend on things such as fame, importance, or popularity''. -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 16:53, 31 मार्च 2026 (UTC)
::::::::::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, आपने इसके नीचे वाला भाग क्यों नहीं पढ़ा? यद्यपि वो उस विषय की स्वीकार्यता को बढ़ा सकते हैं जो नीचे बताए गए दिशानिर्देशों को पूरा करता हो। इसके बाद विस्तार से बहुत कुछ लिखा हुआ है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:04, 31 मार्च 2026 (UTC)
:::::::::::उसके नीचे भी पढ़ा है, वहां लिखा है कि यदि कोई सामग्री एक नया लेख बनाने के लिए उल्लेखनीय नहीं है, तो उस सामग्री को किसी अन्य संबंधित पृष्ठ में विलय कर देना चाहिए। यह सही भी है यदि वह सामग्री स्रोत/संदर्भ युक्त है तो। ऐसा भी देखा गया है कि राष्ट्रपति इत्यादि से अनेक उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति पर बना लेख उल्लेखनीयता के नाम पर हटा दिया गया परन्तु उसमें दर्ज संदर्भित सामग्री कहीं और संजोई नहीं गई, न ही लेखक को उसे दर्ज करने के लिए किसी अन्य पृष्ठ की ओर निर्देशित किया गया। -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:16, 31 मार्च 2026 (UTC)
{{od|10}}@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, राष्ट्रपति पुरस्कार मिलने से व्यक्ति उल्लेखनीय कैसे हो गया? विभिन्न विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों में [[दीक्षान्त समारोह]] के समय डिग्री वितरण राष्ट्रपति या राज्यपाल के हाथों से करवाया जाता है। आपके अनुसार वो सभी लोग उल्लेखनीय हो गये? सम्बंधित लोगों के नामों की सूची सम्बंधित संस्थान के आधिकारिक जालस्थल पर मिल जायेगा जिसे आप विश्वसनीय स्रोत कह सकते हो। राष्ट्रपति के हाथों से मिला पुरस्कार इतना उल्लेखनीय होना चाहिए जो सम्बंधित व्यक्ति को किसी विशिष्ट कार्य के लिए मिला हो और उस कार्य के कारण व्यक्ति उल्लेखनीय हुआ हो, तो उसे उल्लेखनीय माना जाता है, न कि केवल राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने से। ऐसे समारोह राष्ट्रपति भवन में हमेशा होते हैं और उनके समाचार प्रतिदिन समाचार पत्रों में छपते हैं।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:08, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
: उदाहरण के लिए, क्या इस ([[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/लॉग/जनवरी 2022#राजेन्द्ररंजन चतुर्वेदी]]) पृष्ठ को हटाते समय, इसमें उपलब्ध संदर्भित जानकारी किसी अन्य पृष्ठ पर स्थानांतरित की गई? -[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 01:49, 3 अप्रैल 2026 (UTC)
== हिंदी विकिपीडिया लेखों में “स्थानांतरण (Move)” विकल्प दिखाई नहीं दे रहा ==
नमस्ते,
मैं हिंदी विकिपीडिया पर लॉग-इन हूँ। मेरा खाता पुराना है और मैंने कई संपादन भी किए हैं, फिर भी मुझे किसी भी लेख में “स्थानांतरण (Move)” का विकल्प दिखाई नहीं दे रहा।
मैंने डेस्कटॉप मोड और अलग ब्राउज़र से भी कोशिश की है।
कृपया बताएं कि यह समस्या क्यों आ रही है और इसका समाधान क्या है।
धन्यवाद। {{unsigned|ROLEXMEENA}}
: अंग्रेजी ज्ञानकोष की तरह यहां भी 'Move' (पृष्ठ स्थानांतरण) का विकल्प होना चाहिए, ताकि संपादक अपने सदस्य स्थान में पृष्ठ बनाकर उसे मुख्य नाम स्थान में स्वयं स्थापित कर सकें। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 22:27, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
=="अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026" में भाग लें ==
हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप द्वारा [[अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस]] के अवसर पर विकिपीडिया एवं विकिस्रोत पर संपादनोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
# [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026|अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026]]—15 फ़रवरी 2026 से 21 फ़रवरी 2026 तक हिंदी विकिपीडिया पर आयोजित ऑनलाइन सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव।
# [[s:विकिस्रोत:मातृभाषा संवर्धन संपादनोत्सव/2026|अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव 2026]]—21 फ़रवरी 2026 से 28 फ़रवरी 2026 तक हिंदी विकिस्रोत पर आयोजित ऑनलाइन गुणवत्ता संवर्द्धन प्रतियोगिता।
:इनमें भाग लेकर मुक्त हिंदी ई-सामग्री के विकास के अभियान में सहायक होने के लिए आपका स्वागत है। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 04:34, 14 फ़रवरी 2026 (UTC)
== प्रबंधक अधिकार हेतु निवेदन ==
मैंने [[विकिपीडिया:प्रबन्धन अधिकार हेतु निवेदन#DreamRimmer|यहाँ]] प्रबंधक व अन्तरफलक प्रबंधक अधिकार हेतु निवेदन किया है। आपकी टिप्पणियों का स्वागत है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 17:11, 15 फ़रवरी 2026 (UTC)
:प्रबंधन अधिकार मिलने पर बहुत बधाई। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:33, 8 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक कैसे बदले ==
महोदय मुझे बताए कि शीर्षक बीजाणुउद्भिद को कैसे बदलकर बीजाणुद्भिद करे हृदय से धन्यवाद [[सदस्य:VIKRAM PRATAP7|VIKRAM PRATAP7]] ([[सदस्य वार्ता:VIKRAM PRATAP7|वार्ता]]) 04:39, 18 फ़रवरी 2026 (UTC)
:प्रबंधकों को [[#हिंदी विकिपीडिया लेखों में “स्थानांतरण (Move)” विकल्प दिखाई नहीं दे रहा|कहा था]] कि 'पेज मूव' का ऑप्शन सभी के लिए चालू कर दिया जाए, परंतु अभी तक नहीं किया गया है। [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 17:31, 8 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] जी, यह अधिकार प्रबन्धकों के पास नहीं है। बाकी आप तर्क एवं स्रोत के साथ लिखेंगे तो स्थानान्तरण कर दिया जाता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:42, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::परंतु यह विकल्प अंग्रेजी ज्ञानकोष पर कैसे उपलब्ध हुआ!? [[सदस्य:Pkrs1|Pkrs1]] ([[सदस्य वार्ता:Pkrs1|वार्ता]]) 18:45, 20 मार्च 2026 (UTC)
== Reference Previews – experiment ==
Hi, I’m Johannes from [[m:WMDE Technical Wishes|WMDE Technical Wishes]]. Sorry for writing in English, please support us by providing a translation! Our team is currently working on [[:m:WMDE Technical Wishes/References|improvements to references]], e.g. [[:m:WMDE Technical Wishes/Sub-referencing|Sub-referencing]]. In 2021 we developed [[:m:WMDE Technical Wishes/ReferencePreviews|Reference Previews]] in order to provide a MediaWiki feature to preview references when hovering over the footnote marker. Over the course of our current work we’ve noticed that using Reference Previews doesn’t seem to be intuitive for some readers and we would like to improve this.
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Problem ===
<div class="mw-collapsible-content">
In our usability tests, we repeatedly notice desktop readers – unaware of Reference Previews or how to use the feature – clicking on footnotes instead of hovering over them. Many are confused when they end up in the reference list and don’t know how to jump back to the text passage they were previously reading. Many readers seem unaware that both the ↑ arrow in the reference list and the <sup>a b</sup> (for re-used references) can be used to jump back. This makes jumping to the reference list rather unpleasant, especially in long articles.
</div>
</div>
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Assumption ===
<div class="mw-collapsible-content">
We assume that most readers do not want to jump to the reference list, but rather want to click on the footnote to open Reference Previews, which provide them with the reference information for the text passage they have just read. At the same time, we believe that some readers – e.g. those who want to delve deeper into a topic rather than just quickly researching a piece of information – are still interested in conveniently accessing the reference list.
</div>
</div>
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Idea ===
<div class="mw-collapsible-content">
We would like to try adjustments to Reference Previews in order to best meet the needs of different readers. Specifically, we want to prevent readers from accidentally ending up in the individual reference list; jumping there should be a conscious decision.
When clicking on a footnote marker, we want to display Reference Previews instead of jumping to the reference list. The pop-up remains permanently visible until clicking on the "x" or anywhere outside the preview to close it. In addition Reference Previews will provide a link to jump to the reference in the reference list.
<gallery heights="275" widths="250">
File:Reference Previews mock-up – current version.png|Reference Previews – current version
File:Reference Previews mock-up – persistent-state.png|Proposed version when '''clicking on a footnote marker'''
</gallery>
When hovering over a footnote marker without clicking on it, we want to display a simplified version of Reference Previews – without the settings icon and the resulting empty space. When moving the mouse pointer over the pop-up, a note will appear indicating that you can click for further options. This will open the persistent version of Reference Previews with a link to allow users to jump to the reference in the reference list.
<gallery heights="275" widths="250">
File:Reference Previews mock-up – hover-state.png|Proposed version when '''hovering over the footnote marker'''
File:Reference Previews mock-up – hover-state and options.png|Proposed version when '''hovering over the Reference Preview'''
File:Reference Previews mock-up – persistent-state.png|Proposed (persistent) version when '''clicking on the hover preview'''
</gallery>
By improving the usability of Reference Previews, we also hope to mitigate the issue that reference lists with a large number of (reused) references (or [[:m:WMDE Technical Wishes/Sub-referencing|sub-references]]) can be confusing for some readers. In addition, the proposed version when hovering over a footnote marker is more compact than the current version.
</div>
</div>
<div class="mw-collapsible mw-collapse">
=== Experiment ===
<div class="mw-collapsible-content">
We would like to test the proposed changes in an [[:en:A/B testing|A/B test]] on several wikis. We want to measure how many readers click on a footnote marker and then proceed to jump to the reference list using the proposed version of Reference Previews compared to readers who receive the current version of Reference Previews. In addition, we will measure how many readers in both groups access the reference list via the table of contents. This will give us data-based insights into how many clicks on the footnote unintentionally open the reference list and how many readers only want to use Reference Previews.
We would like to run our experiment on the following Wikipedia language versions: de, pl, fr, sv, fa, hu, hi, my, tl, lv, fy, hr. 10% of readers will see our modified version of Reference Previews in order to obtain sufficient data. The experiment is expected to run for 1-2 weeks at the end of March. We'll restore the current version of Reference Previews for all readers until we have evaluated the experiment, discussed the results with the community, and decided on further steps.
</div>
</div>
We look forward to your feedback [[:m:Talk:WMDE Technical Wishes/References/Reference Previews|on our talk page]] – or just reply to this post! Once the experiment is ready to go, we will also provide a link that you can use to test the changes yourself. --[[सदस्य:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[सदस्य वार्ता:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]]) 12:22, 20 फ़रवरी 2026 (UTC)
:As indicated on our project page [https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=WMDE_Technical_Wishes/References/Reference_Previews&diff=prev&oldid=30215686], we will only test the proposed change when ''clicking'' on a footnote. Reference Previews will remain ''unchanged when hovering'' over a footnote marker. Reasons for this were concerns that the proposed transition from hover to persistent preview could be disruptive or at least feel unusual when interacting with reference content in the hover preview (e.g. when clicking on links). [[सदस्य:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[सदस्य वार्ता:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]]) 13:30, 9 मार्च 2026 (UTC)
==विकि लव्ज़ रमजान 2026==
<div style="border:8px maroon ridge;padding:6px;>
[[File:Wiki Loves Ramadan Logo Black hi.svg|Left|200px|frameless]]
प्रिय विकी समुदाय, आपको [[विकिपीडिया:विकि लव्ज़ रमजान 2026|विकी लव्ज रमज़ान 2026]] में भाग लेने के लिए विनम्रतापूर्वक आमंत्रित किया जाता है, जो कि विभिन्न क्षेत्रों से इस्लामी इतिहास और इस्लामी सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेजीकरण करने के लिए विकिपीडिया, विकिवॉयज पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय लेख लेखन प्रतियोगिता है। यह प्रतियोगिता 20 फरवरी से 20 अप्रैल 2025 तक आयोजित की जायेगी अभी भाग लें और पुरस्कार के विजेता बने है। धन्यवाद
'''[[:m:Wiki Loves Ramadan 2026|विकी लव्स रमज़ान 2026 इंटरनेशनल टीम]]''' -'''[[User:J ansari|<span style="background:#5d9731; color:white;padding:1px;">जे. अंसारी</span>]] [[User talk:J ansari|<span style="background:#1049AB; color:white; padding:1px;">वार्ता</span>]]''' 15:51, 26 फ़रवरी 2026 (UTC)
</div>
== इस हफ्ते पेस्ट जाँच आ रही है ==
नमस्ते। [[mw:Special:MyLanguage/Help:Edit check#Paste_check|पेस्ट जाँच]] एक प्रकार की [[mw:Special:MyLanguage/Edit check|सम्पादन जाँच]] सुविधा है जो तब दिखाई देगी जब यथादृश्य सम्पादिका का प्रयोग कर रहा कोई नवागंतुक किसी लेख में लंबा पाठ पेस्ट करे, अगर प्रणाली द्वारा यह निर्धारित किया जाए कि वह सामग्री सम्पादक ने संभवतः स्वयं नहीं लिखी है।
इस सुविधा का यहाँ पर पिछले वर्ष परीक्षण किया गया था, और शोध के [[mw:Edit check/Paste Check#A/B_Experiment|परिणाम]] सकारात्मक थे: इस जाँच का सामना करने वाले सम्पादकों के द्वारा किए गए सम्पादनों में से पूर्ववत किए गए सम्पादनों की संख्या में नियंत्रण समूह की तुलना में 18% घटाव आया।
डिफ़ॉल्ट से पेस्ट जाँच उन सम्पादकों को दिखाई जाएगी जिन्होंने लोकल रूप से 100 या उससे कम सम्पादन किए हुए हों। यह [[{{#special:EditChecks}}]] के माध्यम से प्रबंधकों द्वारा बदला जा सकता है। जब इस आवश्यकता को पूरा करने वाला कोई सम्पादक कहीं और से कम-से-कम 50 कैरेक्टर्स लंबा पाठ पेस्ट करता है, पेस्ट जाँच उससे पूछेगी कि सामग्री उसने स्वयं लिखी है या फिर नहीं। [[mw:Special:MyLanguage/Edit check/Tags|सम्पादनों को टैग किया जाएगा]] ताकि अनुभवी सदस्य उन सम्पादनों का पता लगा पाएँ जहाँ पर पेस्ट जाँच दिखाई गई थी। अंतिम सम्पादन में कोई भी पेस्ट किया हुआ पाठ न होने के बावजूद भी टैग दृश्य होगा।
यह सुविधा इस हफ्ते के अंत तक ग्लोबल स्तर पर जारी की जाएगी। इसे परखने में सहायता करने के लिए आप सबका धन्यवाद। [[सदस्य:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:Quiddity (WMF)|वार्ता]]) 00:02, 3 मार्च 2026 (UTC)
== अली ख़ामेनेई ==
<nowiki>[[अली ख़ामेनेई]]</nowiki> को हिंदी में <nowiki>[[अली ख़मीने]]</nowiki> लिखा जाना चाहिए, कृपया इसे बदलिए। -[[सदस्य:Baangla|Baangla]] ([[सदस्य वार्ता:Baangla|वार्ता]]) 13:28, 3 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Baangla|Baangla]] जी, यह चर्चा [[वार्ता:अली ख़ामेनेई]] पृष्ठ पर होनी चाहिए। यदि आपको लगता है कि वर्तमान नाम सही नहीं है, तो आप [[साँचा:नाम बदले]] का प्रयोग करते हुए पृष्ठ को स्थानांतरित करने का अनुरोध कर सकते हैं। मेरी व्यक्तिगत राय में वर्तमान नाम सही है, क्योंकि [https://www.bbc.com/hindi/articles/c747xp3pke8o BBC], [https://www.aajtak.in/trending/photo/iran-supreme-leader-ali-khamenei-death-reaction-celebration-mourning-tstf-2484137-2026-03-02 Aaj Tak], [https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/bahraich-shia-community-ali-khamenei-death-mourning-ban-juloos-local18-10235065.html News18] और [https://ndtv.in/world-news/iran-us-tensions-live-updates-trump-ayotallah-khamenei-sanctions-military-buildup-explosions-nuclear-tensions-us-israel-iran-tension-live-11148367 NDTV] सहित कई मीडिया संस्थान भी “ख़ामेनेई” ही लिखते हैं और हिंदी उच्चारण के अनुसार भी यही नाम उचित प्रतीत होता है। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 13:49, 3 मार्च 2026 (UTC)
::: @[[सदस्य:Baangla|Baangla]] जी, फ़ारसी में नाम علی خامنهای लिखा जाता है। इसी आधार पर देवनागरी में इसका निकटतम लिप्यंतरण अली ख़ामेनेई होगा।
::: यहाँ خ ध्वनि के लिए “ख़” का प्रयोग किया जाता है और अंतिम –ई ध्वनि को दर्शाने के लिए “ई” आता है। इसलिए अली ख़ामेनेई फ़ारसी उच्चारण के सबसे क़रीब माना जा सकता है। --[[सदस्य:Hindustanilanguage|डॉ. मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 01:29, 9 मार्च 2026 (UTC)
== Lua त्रुटि ==
जी, जब भी में [[मॉड्यूल:Designation/list]] नामक पृष्ठ को बनाने का प्रयास करता हूँ, मुझे यह संदेश मिलता है:
Lua error पंक्ति 1 पर: unexpected symbol near '{'.
मैं अंग्रेज़ी विकिपीडिया के स्रोत कोड का प्रयोग करता हूँ, फिर भी यह संदेश आता है। क्या इसका कोई उपाय है? [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 10:14, 12 मार्च 2026 (UTC)
:{{done}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 15:16, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] धन्यवाद ^^ [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 15:45, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] मैंने स्वतः परीक्षित अधिकार के लिए निवेदन भेजा है। यदि आप चाहते हैं तो कृपया अपना मत दें। फिर से धन्यवाद! :3 [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 16:26, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::समय-समय पर मेरा ध्यान आपके संपादनों पर जाता रहता है। हालाँकि मैंने आपके बनाए लेखों को ठीक से नहीं देखा है, लेकिन नामांकन में दिए गए लेखों में से [[रोलिन' (एयर रेड व्हीकल)]] देखा तो वह मुझे लगभग पूरा मशीनी अनुवाद लगा। इसी तरह दूसरे उदाहरण, जैसे [[तलत जाफ़री]] आदि, भी मुझे मशीनी अनुवाद जैसे लगे। इसलिए मुझे नहीं लगता कि मैं इस विषय में आपकी कोई विशेष मदद कर पाऊँगा। बाकी अन्य सदस्य भी आपके नामांकन को देखकर अपने सुझाव दे सकते हैं। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
== सदस्य पृष्ठ हटाने हेतु अनुरोध ==
नमस्ते प्रशासक महोदय, मैं 'Gahininath gutte' इस खाते का स्वामी हूँ। मैं अपना 'सदस्य वार्ता' पृष्ठ (User Talk Page) हटाना चाहता हूँ क्योंकि यह गूगल सर्च में मेरी निजी जानकारी दिखा रहा है। मैंने लॉगिन किया है, लेकिन सुरक्षा फ़िल्टर के कारण मैं स्वयं <nowiki>{{db-u1}}</nowiki> टैग नहीं लगा पा रहा हूँ। कृपया मेरी सहायता करें और इस पृष्ठ को हटा दें। धन्यवाद। [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 12:40, 12 मार्च 2026 (UTC)
:{{Ping|Gahininath gutte}} नमस्ते! हिंदी विकिपीडिया की नीतियों के अनुसार तभी हटाए जाते है, ज़ब उसपे अत्यधिक बर्बरता या निजी जानकारी और गाली गालोच हुआ हो, आमतौर पर सदस्य वार्ता नही हटाए जाते है,अगर आप सदस्य पृष्ठ की बात कर रहे है, तो आप 10 सकारात्मक संपादन करने के उपरांत सदस्य पृष्ठ को हटवाने ले लिए अनुरोध कर सकते है,या हटाने हेतु संबंधित साँचा लगा सकते है। <span style="background:Brown;border:1px solid #FF00FF;border-radius:18px;padding:4px">[[User:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:black">Cptabhiimanyuseven</span>]]•[[User talk:Cptabhiimanyuseven|<span style="color:lightgrey">(@píng mє)</span>]]</span> 12:52, 12 मार्च 2026 (UTC)
::<blockquote>महोदय, जवाब के लिए धन्यवाद। मैं समझता हूँ कि वार्ता पृष्ठ हटाना नियमों के विरुद्ध है। लेकिन यह पृष्ठ गूगल सर्च में मेरा नाम और निजी संदर्भ दिखा रहा है, जिससे मुझे प्राइवेसी की समस्या हो रही है। अगर आप इसे हटा नहीं सकते, तो कृपया इस पृष्ठ पर '''<nowiki>__NOINDEX__</nowiki>''' टैग लगा दें ताकि यह गूगल सर्च इंजन में दिखाई न दे। साथ ही, कृपया इस पृष्ठ की पुरानी सामग्री (History) को भी छुपा दें। आपकी बहुत कृपा होगी।"</blockquote>
::[[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 13:03, 12 मार्च 2026 (UTC)
::"नमस्ते, मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। मैं विकिपीडिया पर अब सक्रिय नहीं रहना चाहता और अपनी निजता (Privacy) की सुरक्षा के लिए 'Right to Vanish' के तहत इस पृष्ठ को स्थायी रूप से (Permanently) हटाने का अनुरोध करता हूँ। इसमें मेरा वास्तविक नाम शामिल है जो गूगल सर्च में दिखाई दे रहा है और यह मेरी निजता का उल्लंघन है। मैं चाहता हूँ कि मेरे खाते से जुड़ी यह पहचान पूरी तरह से मिटा दी जाए। कृपया मेरी सहायता करें।" [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 13:06, 12 मार्च 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] जी, मैंने आपके वार्ता पृष्ठ का एक अवतरण हटा दिया है, जिसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी थी। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 14:56, 18 मार्च 2026 (UTC)
::::अभि भी मेरा नाम गुगल सर्च मैं दिख रहा है मुझे Wikipedia पर रहना ही नहीं कृपया यहा पर मेरा जो अकाउंट है उसे हटा दे पुरी तरह सें...
::::धन्यवाद...! [[सदस्य:Gahininath gutte|Gahininath gutte]] ([[सदस्य वार्ता:Gahininath gutte|वार्ता]]) 15:14, 18 मार्च 2026 (UTC)
:::::इसके लिए आप [[विशेष:GlobalVanishRequest]] पर उपलब्ध फ़ॉर्म भर सकते हैं। कृपया अनुरोध करने से पहले फ़ॉर्म पर दिए गए निर्देशों को अवश्य पढ़ लें। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 15:19, 18 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक अनुवाद में मदद ==
[[:en:Embarrasingly parallel]] का शीर्षक अनुवाद में क्या होना चाहिए-
* [[एम्बैरसिंगली पैरेलल]] या
* [[अति-समानांतरीय]]
[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 13:13, 15 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, सम्भवतः आपके पास टाइपो हुआ है और आप [[:en:Embarrassingly_parallel|Embarrassingly parallel]] की बात कर रहे हो। parallel के लिए हिन्दी में समानांतर शब्द काम में लेते हैं और शब्दकोश नामक वेबसाइट पर इसका अनुवाद अव्यवस्थित समानांतर लिखा है। लेकिन मुझे तार्किक तौर पर कोई तुल्य शब्द याद नहीं आ रहा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, शब्दकोश नामक वेबसाइट पर एंबैरिसिंगली (Embarrassingly) का अनुवाद "शर्मनाक रूप से" लिखा है, लेकिन हम इसे कंप्यूटर विज्ञान या कोडिंग के संदर्भ में लिख रहे हैं तो क्या "सहज समानांतर" लिख सकते है? इसका मतलब यह है कि समानांतर करने में कोई विशेष दिमाग या मेहनत नहीं लगती। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 17:36, 19 मार्च 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, इस स्थिति में अंग्रेज़ी वाले का ही देवनागरी में उच्चारण लिख दीजिएगा। लेख की शुरूआत में शब्दशः अनुवाद लिख सकते हैं और भविष्य में विश्वसनीय स्रोत मिलने पर उचित स्थानान्तरण कर दिया जायेगा। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:29, 25 मार्च 2026 (UTC)
== Request for Comment: VisualEditor automatic reference names ==
<div lang="en" dir="ltr">
Hi, I’m Johannes from [[:m:Wikimedia Deutschland|Wikimedia Deutschland]]’s [[:m:WMDE Technical Wishes|Technical Wishes team]]. Apologies for writing in English. {{Int:Please-translate}}! We are considering to work on [[:m:Community Wishlist/W17|Community Wishlist/W17: Improve VE references' automatic names and reuse]]. This has been a long-term issue for wikitext editors (see e.g. [[:en:WP:VisualEditor/Named references]]) which has been among the top-voted wishes in several [[:m:Community Wishlist Survey|Community Wishlist Surveys]], e.g. [[:m:Community Wishlist Survey 2017/Editing/VisualEditor: Allow editing of auto-generated references before adding them|2017]], [[:m:Community Wishlist Survey 2019/Citations/VisualEditor: Allow references to be named|2019]], [[:m:Community Wishlist Survey 2022/Editing/VisualEditor should use human-like names for references|2022]] or [[:m:Community Wishlist Survey 2023/Editing/VisualEditor should use proper names for references|2023]].
We would like your input on the [[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names#Proposed solutions|solutions]] proposed on our project page: '''[[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names]]'''. We are considering several options, which can be combined if desired by the community.
* Changing the default pattern for automatically generated reference names (currently <code>":n"</code>, e.g. <code>":0"</code>, <code>":1"</code>...) to use the [[:mw:Help:Reference Previews#Exposed reference types|reference type]] instead (e.g. <code>"book_reference-1"</code>).
* Providing a simple mechanism for communities to configure a different default name.
* Generating automatic reference names based on the [[:en:domain name|domain name]] (if it’s a web citation).
* Generating automatic reference names based on template parameters (e.g. "title" or "last"+"first") – defined by the community.
=== Feedback ===
[[:m:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names|Visit our project page]] to read about our proposal in detail and share your thoughts [[:m:Talk:WMDE Technical Wishes/References/VisualEditor automatic reference names#Request for comment|on metawiki]].
'''Please note''': We will only implement a solution if there’s clear consensus among the global community. Our intention is not to build the perfect solution, but to find a simple and lean one that alleviates the pain caused by auto generated names. We are aware that some experienced VisualEditor users might prefer an option to manually change reference names in VisualEditor, but such a UX intervention is difficult to achieve across reference types and thus out of scope for our team, we can only improve the auto-naming mechanism.
We are happy about suggestions for improving certain details of the proposed solutions. Any other feedback and alternative proposals are also welcome – even though it’s out of scope for us, it might still be relevant for future work on this topic.
Please support us interpreting consensus by clearly indicating your opinion (e.g. by using support/neutral/oppose templates). We are aware of [[:en:WP:NOTVOTE]], but given that we are facilitating this discussion with users from different wikis, potentially commenting in their native language, clearly indicating your position helps us avoid misunderstandings.
Thank you for participating!</div> <bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Johannes Richter (WMDE)|Johannes Richter (WMDE)]] ([[User talk:Johannes Richter (WMDE)|वार्ता]])</bdi> 11:15, 19 मार्च 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Johannes_Richter_(WMDE)/MassMessageRecipients&oldid=30281362 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Johannes Richter (WMDE)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== मार्च गतिविधि अपडेट ==
:हिंदी विकिमीडियन्स यूजर ग्रूप द्वारा मार्च 2026 में हुई गतिविधियाँ:
* 'हिंदी विकि सम्मेलन 2026' पर फाउंडेशन के साथ प्राथमिक स्तर की चर्चा पूरी हुई। अप्रैल तक इसपर निर्णय आने की संभावना है।
* गूगल के साथ साझेदारी संबंधी अपडेट फाउंडेशन तथा गूगल टीम के साथ पीपीटी बनाकर साझा किए गए। पिछले एक वर्ष के सभी कार्यक्रमों के (नए लेख, नए सदस्य, सांस्थानिक भागिदारी) आंकड़ों को संश्लिष्ट रूप में साझा किया गया।
* फरवरी में विकिपीडिया पर आयोजित [[विकिपीडिया:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/2026]] के सभी लेखों की जाँच पूरी हुई तथा पुरस्कार विजेता घोषित किए गए।
* फरवरी में विकिस्रोत पर आयोजित [[s:hi:विकिस्रोत:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/२०२६|विकिस्रोत:अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस संपादनोत्सव/२०२६]] के सभी शोधित पृष्ठों की जाँच पूरी हुई तथा पुरस्कार विजेता घोषित किए गए।
* राजस्थान विश्वविद्यालय के भौतिकि विभाग के साथ सांस्थानिक भागीदारी के प्रयास स्वरूप पहली प्रशिक्षण कार्यशाला 24 मार्च को आयोजित करना निश्चित हुआ।
* आइआइटी, जोधपुर के साथ सांस्थानिक भागीदारी की संभावना परखने के लिए 21 मार्च को जोधपुर में सामुदायिक बैठक निश्चित की गई। जोधपुर के कोई भी हिंदी विकिपीडियन इस अनौपचारिक संवाद बैठक में शामिल हो सकते हैं।
: हिंदी विकिपीडिया के अनुभवी सदस्यों द्वारा किसी भी स्थानीय या रास्ट्रीय स्तर के आयोजन प्रस्तावों का हम स्वागत करते हैं तथा सहयोग का भरोसा दिलाते हैं। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 23:49, 20 मार्च 2026 (UTC)
== अंगिका और मैथिली विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" मे भाग ले ==
नमस्ते , विकिपीडियन
[https://anp.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_आरू_लोकगाथा_अंगिका_२०२६ अंगिका] और [https://mai.wikipedia.org/wiki/विकिपीडिया:नारीवाद_एवं_लोककथा_२०२६ मैथिली] विकिपीडिया पर आयोजित "नारीवाद और लोककथा 2026" प्रतियोगिता चल रही है, और इनाम जीते।
तिथि: 23 मार्च - 31 मार्च 2026 (8 दिन शेष) [[सदस्य:Surajkumar9931|Surajkumar9931]] ([[सदस्य वार्ता:Surajkumar9931|वार्ता]]) 05:33, 23 मार्च 2026 (UTC)
== Deployment of Legal and Safety Contacts Link in the Footer of Your Wiki ==
[Please help translate this message]
Hello community, the Wikimedia Foundation has provided a [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contact_Information|single legal and safety contact page]], to be linked in the footer of your wiki, to ensure access to accurate legal information. This is a regulatory requirement. We have already rolled out links to English, German, Italian, Spanish and other wikis and we will deploy to your wiki soon. [[metawiki:Special:MyLanguage/Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contacts_FAQ|Please read more on the project page]] and leave any comments in this thread or on the [[metawiki:Talk:Wikimedia_Foundation_Legal_and_Safety_Contacts_FAQ|talk page]]. –– [[सदस्य:STei (WMF)|STei (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:STei (WMF)|वार्ता]]) 13:21, 25 मार्च 2026 (UTC)
== शीर्षक अनुवाद में मदद ==
मैं [[:en:Perpetual calendar]] को अनुवाद कर रहा हूं। इसका शीर्षक क्या मुझे [[परपेचुअल पंचांग]] रखना चाहिए ? इसका तत्सम क्या हो सकता है क्योंकि मुझे इसका कही हिन्दी में प्रयोग नही मिला। [[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] ([[सदस्य वार्ता:Sarangem|वार्ता]]) 13:40, 25 मार्च 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Sarangem|Sarangem]] जी, आप की जानकारी के लिए कुछ सन्दर्भ [https://uptoword.com/en/perpetual-calendar-meaning-in-hindi?utm_source=chatgpt.com] [https://fj.voguetimebalfie.com/info/are-perpetual-calendar-watches-accurate-100990981.html] [https://www.google.co.th/books/edition/N%C4%ABh%C4%81rik%C4%81/t6hHAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&printsec=frontcover] [https://www.google.co.th/books/edition/Bhajpa_Ka_Abhyuday_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE_%E0%A4%95/Cet5EAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0&pg=RA1-PA1970&printsec=frontcover] दिए गए है, इन के हिसाब से सतत पंचांग या स्थायी पंचांग लिखा जा सकता है। बाकि जैसी सभी की राय हो। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 08:32, 28 मार्च 2026 (UTC)
== विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ हेतु स्कॉलरशिप आवेदन अब प्रारम्भ हो चुके हैं ==
नमस्ते,
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ के लिए स्कॉलरशिप हेतु आवेदन अब प्रारम्भ हो चुके हैं । यह कॉन्फ्रेंस ४ से ६ सितंबर २०२६ तक कोच्चि, भारत में होगी ।
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत), दक्षिण एशिया के साथ और भी विकिमीडियन्स, सामुदायिक आयोजकों और योगदानकर्ताओं को एक साथ लाता है। यह जुड़ने, सीखने, अनुभव बाँटने करने और निःशुल्क ज्ञान के आंदोलन को सशक्त करने हेतु मिलजुलकर करने का एक स्थान है । 🙂
अगर आप विकिमीडिया परियोजनाओं में सक्रिय योगदानकर्ता हैं अथवा सामुदायिक कार्यक्रमों में सम्मिलित हैं, तो आपको स्कॉलरशिप के लिए आवेदन हेतु प्रोत्साहित किया जाता है । [[diffblog:2026/03/19/namukku-othukoodam-scholarships-now-open-for-wikiconference-india-2026/|विस्तृत घोषणा]] यहाँ है ।
आवेदन की अंतिम तिथि: १५ अप्रैल २०२६ रात ११:५९ बजे IST
आवेदन की लिंक: [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdA3rR9xX_k31dzJrjM5MTDNYNUIRcAB45S4TflsYCbGJNrzg/viewform आवेदन की लिंक]
अधिक जानकारी: [[metawiki:WikiConference_India_2026/Scholarship|मेटा पेज लिंक]]
कृपया इस घोषणा को अपने समुदाय में अन्य सदस्यों के साथ भी बाँटें ।
धन्यवाद !
विकीकॉन्फ्रेंस इंडिया (भारत) २०२६ की आयोजन टीम
-[[User:Gnoeee|<span style="color:#990000">❙❚❚</span><span style="color:#339966">❙❙</span><span style="color:#000"> जिनोय </span><span style="color:#006699">❚❙❚</span><span style="color:#339966">❙❙</span>]] [[User talk:Gnoeee|✉]] 21:00, 28 मार्च 2026 (UTC)
== Join the sixth Ukraine’s Cultural Diplomacy Month on Wikipedia! ==
<div lang="en" dir="ltr">
[[File:Ukraine’s Cultural Diplomacy Month on Wikipedia 2026.png|right|250px|thumb|link=https://meta.wikimedia.org/wiki/Ukraine%27s_Cultural_Diplomacy_Month_2026|Join our campaign!]]
{{int:please-translate}}
Dear Wikipedians!
[[:m:Special:MyLanguage/Wikimedia Ukraine|Wikimedia Ukraine]], in cooperation with the [[:en:Ministry of Foreign Affairs of Ukraine|MFA of Ukraine]] and [[:en:Ukrainian Institute|Ukrainian Institute]], has launched the sixth edition of writing challenge "'''[[:m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|Ukraine's Cultural Diplomacy Month]]'''", which lasts from '''1st April''' until '''30th April 2026'''.
The initiative aims to promote knowledge about Ukrainian culture abroad by creating and improving Wikipedia articles in multiple languages. This year marks the sixth edition of the campaign, which will focus on contemporary culture, making today’s artistic voices and practices more visible to international audiences.
🧩'''How to participate?'''
Choose an article from the suggested list → Write an article in your language, or improve an existing one according to the rules → Add your contribution to the contest page and calculate your points → Win prizes and receive a certificate of participation → Become a promoter of truthful knowledge about Ukraine.
🧩'''[[m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|Check our main page for more information]]'''.
'''If you are interested in coordinating long-term community engagement for the campaign and becoming a local ambassador, we would love to hear from you! Please let us know your interest.'''
If not, then we encourage you to translate the [[m:Special:MyLanguage/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|landing page of the contest]] and [https://meta.wikimedia.org/wiki/Special:MessageGroupStats?group=Centralnotice-tgroup-UCDM2026banner&messages=&language=en&x=D banner] into your own language.
Also, we set up a [[:m:CentralNotice/Request/Ukraine's Cultural Diplomacy Month 2026|banner]] to notify users of the possibility to participate in this challenge!
[[:m:User:OlesiaLukaniuk (WMUA)|OlesiaLukaniuk (WMUA)]] ([[:m:User talk:OlesiaLukaniuk (WMUA)|talk]]) 04:35, 1 April 2026 (UTC)
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:OlesiaLukaniuk_(WMUA)/list_of_wikis&oldid=28552112 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:OlesiaLukaniuk (WMUA)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Action Required: Update templates/modules for electoral maps (Migrating from P1846 to P14226) ==
Hello everyone,
This is a notice regarding an ongoing data migration on Wikidata that may affect your election-related templates and Lua modules (such as <code>Module:Itemgroup/list</code>).
'''The Change:'''<br />
Currently, many templates pull electoral maps from Wikidata using the property [[:d:Property:P1846|P1846]], combined with the qualifier [[:d:Property:P180|P180]]: [[:d:Q19571328|Q19571328]].
We are migrating this data (across roughly 4,000 items) to a newly created, dedicated property: '''[[:d:Property:P14226|P14226]]'''.
'''What You Need To Do:'''<br />
To ensure your templates and infoboxes do not break or lose their maps, please update your local code to fetch data from [[:d:Property:P14226|P14226]] instead of the old [[:d:Property:P1846|P1846]] + [[:d:Property:P180|P180]] structure. A [[m:Wikidata/Property Migration: P1846 to P14226/List|list of pages]] was generated using Wikimedia Global Search.
'''Deadline:'''<br />
We are temporarily retaining the old data on [[:d:Property:P1846|P1846]] to allow for a smooth transition. However, to complete the data cleanup on Wikidata, the old [[:d:Property:P1846|P1846]] statements will be removed after '''May 1, 2026'''. Please update your modules and templates before this date to prevent any disruption to your wiki's election articles.
Let us know if you have any questions or need assistance with the query logic. Thank you for your help! [[User:ZI Jony|ZI Jony]] using [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 17:12, 3 अप्रैल 2026 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Distribution_list/Non-Technical_Village_Pumps_distribution_list&oldid=29941252 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:ZI Jony@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Wikimedia Foundation की वार्षिक योजना की चर्चाओं में शामिल होने का आमंत्रण ==
नमस्ते,
मैं आप सभी को '''साउथ एशिया ओपन कम्युनिटी कॉल''' के अप्रैल एडिशन में इनवाइट करना चाहता हूँ, जो विकिमीडिया फाउंडेशन की लीडरशिप के साथ उनके [https://meta.wikimedia.org/wiki/Wikimedia%20Foundation%20Annual%20Plan/2026-2027 एनुअल प्लान (2026-2027)] पर चर्चा करेगा।
फ़ाउंडेशन की [https://meta.wikimedia.org/wiki/Wikimedia%20Foundation%20Annual%20Plan वार्षिक योजना] एक उच्च-स्तरीय रोडमैप है, जिसमें यह बताया गया है कि संगठन आने वाले वर्ष में क्या हासिल करना चाहता है। इसमें न केवल फाउंडेशन के लक्ष्य, प्रगति और योजना शामिल है, बल्कि वैश्विक रुझानों का सारांश भी शामिल है जो हमारे मूवमेंट के वर्तमान और भविष्य को प्रभावित करते हैं।
इसलिए, अगला '[https://meta.wikimedia.org/wiki/South%20Asia%20Open%20Community%20Call साउथ एशिया ओपन कम्युनिटी कॉल]' नीचे दी गई तारीखों/समय पर आयोजित कि जाएगी। कृपया इसे अपने कैलेंडर में नोट कर लें और [https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:South%20Asia%20Open%20Community%20Call,%20April%202026 यहाँ साइन अप करें।]
Platform: Google Meet
Date: 17th April, 2026
Time: 1930-2045 IST (1400-1515 UTC)
[https://meta.wikimedia.org/wiki/Event:South%20Asia%20Open%20Community%20Call,%20April%202026 Registration Link]
'''नोट:''' सिर्फ़ रजिस्टर्ड लोगों को ही जॉइनिंग लिंक मिलेगा।
कॉल पर आपसे मिलने का इंतज़ार रहेगा,
--[[सदस्य:RASharma (WMF)|RASharma (WMF)]] ([[सदस्य वार्ता:RASharma (WMF)|वार्ता]]) 12:49, 6 अप्रैल 2026 (UTC)
== पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव ==
सभी सदस्य महोदय,
मैं समुदाय का ध्यान पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) से जुड़ी [[विकिपीडिया:चौपाल/पुरालेख_48#केवल_स्वतः_परीक्षित_सदस्यों_द्वारा_स्थानांतरण|2017 की एक पुरानी चर्चा (पुरालेख 48)]] और नीति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। उस समय अनुचित स्थानांतरणों को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया था कि केवल 'स्वतः परीक्षित' (Autopatrolled), रोलबैकर या प्रबंधक स्तर के सदस्य ही पृष्ठों का स्थानांतरण कर सकेंगे।
उस समय की चर्चा में और फैब्रिकेटर (Phabricator) पर एक अन्य विकल्प (विकल्प 2) का भी सुझाव दिया गया था, जिसका उल्लेख आदरणीय @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी ने किया था: '''"एक नया सुरक्षा स्तर बना कर बर्बरता के शिकार पन्नों को इस स्तर पर सुरक्षित करने का।"'''
मेरा प्रस्ताव है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हमें अब इस विकल्प (नया स्थानांतरण सुरक्षा स्तर) को लागू करना चाहिए। मेरी रूपरेखा कुछ इस प्रकार है:
# '''सुरक्षित पृष्ठ:''' जिन पृष्ठों को अर्ध-सुरक्षा (Semi-protection) या पूर्ण सुरक्षा (Full protection) प्राप्त है या जो बर्बरता के प्रति अति-संवेदनशील हैं, उन्हें स्थानांतरित करने का अधिकार केवल 'स्वतः परीक्षित', रोलबैकर, पुनरीक्षक, प्रशासक या प्रबंधक स्तर के सदस्यों तक ही सीमित रहे।
# '''सामान्य पृष्ठ:''' जो पृष्ठ पूरी तरह से असुरक्षित और सामान्य हैं, उनका स्थानांतरण (नाम परिवर्तन) करने का अधिकार 'स्वतः स्थापित' (Autoconfirmed) सदस्यों को वापस दे दिया जाए (जैसा कि अंग्रेजी व अन्य विकिपीडिया परियोजनाओं पर होता है)।
'''इस बदलाव की आवश्यकता क्यों है (ठोस आँकड़े)?'''
सक्रिय अधिकार-प्राप्त सदस्यों की भारी कमी के कारण, छोटे-छोटे और स्पष्ट स्थानांतरण कार्यों (जैसे वर्तनी सुधार) के लिए भी सक्रिय 'स्वतः स्थापित' सदस्यों को <code><nowiki>{{नाम बदलें}}</nowiki></code> का अनुरोध करना पड़ता है। इससे काम की गति धीमी होती है और प्रबंधकों पर भी अनावश्यक अनुरोधों का बोझ पड़ता है।
हाल ही में मैंने Quarry टूल के माध्यम से हिंदी विकिपीडिया के डेटाबेस का विश्लेषण किया (क्वेरी लिंक: [https://quarry.wmcloud.org/query/104224 Quarry Query: 104224])। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान में दर्जनों ऐसे अधिकार-प्राप्त सदस्य हैं, जिन्होंने पिछले कई महीनों या वर्षों से हिंदी विकिपीडिया पर एक भी संपादन नहीं किया है। आप नीचे दी गई तालिका का विस्तार करके स्वयं देख सकते हैं:
{| class="wikitable mw-collapsible mw-collapsed" style="text-align:center; width:80%;"
|+ अधिकार प्राप्त सदस्यों के अंतिम संपादन की सूची
! अधिकार (Group) !! सदस्य का नाम !! आखिरी संपादन (दिनांक)
|-
| autopatrolled || Naziah rizvi || 20-10-2016
|-
| autopatrolled || Somesh Tripathi || 05-10-2017
|-
| autopatrolled || Jeeteshvaishya || 22-10-2017
|-
| autopatrolled || रोहित रावत || 02-09-2018
|-
| autopatrolled || Salma Mahmoud || 23-10-2018
|-
| rollbacker || FR30799386 || 02-10-2019
|-
| autopatrolled || SGill (WMF) || 03-03-2020
|-
| autopatrolled || RacIndian || 21-08-2020
|-
| autopatrolled || Jaswant Singh4 || 25-09-2020
|-
| autopatrolled || Teacher1943 || 28-08-2021
|-
| autopatrolled || Navinsingh133 || 23-12-2021
|-
| rollbacker || Navinsingh133 || 23-12-2021
|-
| autopatrolled || Mala chaubey || 29-12-2021
|-
| autopatrolled || Navodian || 20-01-2022
|-
| autopatrolled || AbhiSuryawanshi || 08-06-2022
|-
| autopatrolled || Innocentbunny || 21-09-2022
|-
| autopatrolled || Biplab Anand || 22-10-2022
|-
| autopatrolled || सुनील मलेठिया || 08-01-2023
|-
| autopatrolled || Sushilmishra || 20-04-2023
|-
| autopatrolled || Gaurav561 || 01-05-2023
|-
| autopatrolled || Ahmed Nisar || 02-07-2023
|-
| autopatrolled || JamesJohn82 || 20-08-2023
|-
| autopatrolled || जैन || 02-11-2023
|-
| autopatrolled || Samee || 13-01-2024
|-
| autopatrolled || Dinesh smita || 15-04-2024
|-
| autopatrolled || सीमा1 || 15-04-2024
|-
| rollbacker || कन्हाई प्रसाद चौरसिया || 05-10-2024
|-
| autopatrolled || कन्हाई प्रसाद चौरसिया || 05-10-2024
|-
| autopatrolled || निधिलता तिवारी || 23-10-2024
|-
| rollbacker || निधिलता तिवारी || 23-10-2024
|-
| autopatrolled || Anamdas || 07-11-2024
|-
| autopatrolled || चक्रपाणी || 02-12-2024
|-
| autopatrolled || Charan Gill || 14-12-2024
|-
| autopatrolled || Satdeep Gill || 10-02-2025
|-
| autopatrolled || MKar || 23-03-2025
|-
| autopatrolled || ArmouredCyborg || 15-05-2025
|-
| rollbacker || ArmouredCyborg || 15-05-2025
|-
| rollbacker || स || 20-05-2025
|-
| autopatrolled || स || 20-05-2025
|-
| rollbacker || Stang || 26-05-2025
|-
| autopatrolled || AshokChakra || 29-05-2025
|-
| rollbacker || AshokChakra || 29-05-2025
|-
| rollbacker || PQR01 || 12-06-2025
|-
| autopatrolled || WhisperToMe || 26-06-2025
|-
| autopatrolled || Hunnjazal || 03-07-2025
|-
| autopatrolled || MGA73 || 13-07-2025
|-
| autopatrolled || Jayprakash12345 || 19-07-2025
|-
| rollbacker || Nilesh shukla || 21-07-2025
|-
| autopatrolled || Nilesh shukla || 21-07-2025
|-
| autopatrolled || Raju Babu || 03-08-2025
|-
| autopatrolled || Trikutdas || 06-10-2025
|-
| autopatrolled || Surenders25 || 29-10-2025
|-
| rollbacker || राजकुमार || 01-11-2025
|-
| rollbacker || Nadzik || 22-11-2025
|-
| autopatrolled || Srajaltiwari || 15-12-2025
|-
| autopatrolled || Buddhdeo Vibhakar || 22-12-2025
|-
| autopatrolled || आशीष भटनागर || 23-12-2025
|-
| autopatrolled || सौरभ तिवारी 05 || 15-01-2026
|-
| rollbacker || सौरभ तिवारी 05 || 15-01-2026
|-
| autopatrolled || कलमकार || 12-02-2026
|-
| autopatrolled || शीतल सिन्हा || 21-02-2026
|-
| rollbacker || रोहित साव27 || 22-02-2026
|-
| autopatrolled || रोहित साव27 || 22-02-2026
|-
| autopatrolled || नीलम || 09-03-2026
|-
| autopatrolled || Dr.jagdish || 10-03-2026
|-
| rollbacker || Chronos.Zx || 12-03-2026
|-
| rollbacker || Eihel || 13-03-2026
|-
| autopatrolled || Eihel || 13-03-2026
|-
| autopatrolled || Utcursch || 17-03-2026
|-
| rollbacker || J ansari || 24-03-2026
|-
| autopatrolled || J ansari || 24-03-2026
|-
| autopatrolled || Mahensingha || 27-03-2026
|-
| autopatrolled || 1997kB || 29-03-2026
|-
| rollbacker || 1997kB || 29-03-2026
|-
| rollbacker || Saroj || 31-03-2026
|-
| autopatrolled || Ziv || 01-04-2026
|-
| rollbacker || TypeInfo || 02-04-2026
|-
| sysop || संजीव कुमार || 07-04-2026
|-
| autopatrolled || Dharmadhyaksha || 07-04-2026
|-
| autopatrolled || CommonsDelinker || 08-04-2026
|-
| sysop || SM7 || 08-04-2026
|-
| sysop || अजीत कुमार तिवारी || 09-04-2026
|-
| sysop || अनिरुद्ध कुमार || 09-04-2026
|-
| autopatrolled || हिंदुस्थान वासी || 09-04-2026
|-
| rollbacker || हिंदुस्थान वासी || 09-04-2026
|-
| sysop || DreamRimmer || 09-04-2026
|-
| autopatrolled || अनुनाद सिंह || 09-04-2026
|-
| sysop || Sanjeev bot || 10-04-2026
|}
यदि हम यह नई तकनीकी व्यवस्था लागू करते हैं, तो सक्रिय सदस्यों को काम करने में सहूलियत मिलेगी, विकिपीडिया का विकास तेज़ी से होगा, और प्रबंधकों का कीमती समय बचेगा।
कृपया इस प्रस्ताव पर अपने बहुमूल्य विचार साझा करें ताकि हम इस सुधार को प्रबंधकों के माध्यम से लागू करवा सकें।
धन्यवाद। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:22, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
==आप सभी से विनम्र निवेदन है कि==
मेरे [[विकिपीडिया:स्वतः_परीक्षित_अधिकार_हेतु_निवेदन#चाहर_धर्मेंद्र|इस]] निवेदन के संबंध में आपके विचार मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कृपया अपना बहुमूल्य समय निकालकर इस पर अपना मत अवश्य साझा करें। आपके सुझाव और प्रतिक्रिया मेरे लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 11:34, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
== अनुरोध ==
नमस्कार! मैं आपसे [[मॉड्यूल:Lang/data]] पर एक संपादन करने का अनुरोध करता हूँ।
["hbo"] = "Biblical Hebrew" ===> ["hbo"] = "बाइबिली इब्रानी"
[[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 19:28, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
:{{done}} – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 08:56, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] धन्यवाद! [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 09:51, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:44, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
==अंतिम कुछ दिन: विकि सम्मेलन भारत 2026 छात्रवृत्ति आवेदन==
प्रिय विकिमीडिया समुदाय सदस्य,
हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि '''[[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026|विकि सम्मेलन भारत 2026]]''' के लिए छात्रवृत्ति आवेदन वर्तमान में खुले हैं, और अंतिम तिथि अब बहुत निकट है।
विकि सम्मेलन भारत 2026 इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का चौथा संस्करण है, जो भारत और दक्षिण एशिया में इंडिक भाषाओं के विकिमीडिया प्रोजेक्ट्स तथा मुक्त ज्ञान आंदोलन से जुड़े विकिमीडियनों और हितधारकों को एक साथ लाता है। यह सम्मेलन 4–6 सितंबर 2026 को कोच्चि, केरल में आयोजित किया जाएगा।
* आप अधिक जानकारी और [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026/Scholarship|आवेदन फॉर्म Meta-Wiki पर उपलब्ध]] छात्रवृत्ति पृष्ठ पर प्राप्त कर सकते हैं।
* छात्रवृत्ति की अंतिम तिथि: 15 अप्रैल 2026, रात 11:59 बजे (IST)
अब जबकि केवल कुछ ही दिन शेष हैं, हम आपको आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं यदि आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है। साथ ही, कृपया इस अवसर को अपने समुदाय में साझा करें और अन्य लोगों को भी आवेदन करने के लिए प्रेरित करें।
अधिक जानकारी और नियमित अपडेट के लिए, कृपया सम्मेलन के Meta पृष्ठ पर जाएँ।
सादर,
<br>
विकि सम्मेलन भारत 2026 आयोजन टीम की ओर से
<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 23:38, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
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== फॉण्ट ==
हिन्दी विकिपीडिया पर पिछले कुछ दिनों से लैटिन लिपि के लिए जो फॉण्ट है, वे [[:hak:Hakkapedia|Hakkapedia]] एवं [[:nan:Pang-chān:Holopedia|Holopedia]] के फॉण्ट की तरह दिख रहा है। क्या default फॉण्ट को बदल दिया गया है? [[User:ङघिञ|<span style="color:orange;">'''ङघिञ'''</span>]] ([[User talk:ङघिञ|वार्ता]]) {{Font color|grey|११:२५, १२ अप्रैल २०२६ (IST)}}
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एड्स
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{{ऍचआइवी-सम्बंधित जानकारी}}
{{Infobox disease
| Name = उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (एड्स)
| Image = Red_Ribbon.svg
| Caption = लाल फीता: उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण का अंतर्राष्ट्रीय चिह्न
| Width = 120
| DiseasesDB = 5938
| ICD10 = {{ICD10|B|24||b|20}}
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}}
{| style="float: right; clear:right; margin: 0 0 0.5em 1em; padding: 0.5em; background: #fffff4; border: 1px solid #ddb; width: 250px; font-size:90%;"
|-
|उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण संबंधित लघुनाम<br />
'''AIDS''': उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण<br />
'''HIV''': [[एचआईवी|मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाण]]<br />
'''CD4+''': [[टी सहायक कोशिका|CD4+ टी सहायक कोशिकाएं]] <br />
'''CCR5''': [[CCR5|चेमोकिन (C-C मोटिफ़) रिसेप्टर ५]]<br />
'''CDC''': [[रोग रोकथाम एवं निवारण केंद्र]]<br />
'''WHO''': [[विश्व स्वास्थ्य संगठन]]<br />
'''PCP''': [[न्यूमोसिस्टिस निमोनिया]]<br />
'''TB''': [[तपेदिक]]<br />
'''MTCT''': मां-से-संतान प्रसार<br />
'''HAART''': [[एंटीरिट्रोवियल ड्रग|उच्च सक्रिय एंटीरिट्रोवियल चिकित्सा]]<br />
'''STI/STD''': [[यौन संक्रमित रोग|यौन प्रसारित संक्रमण]]/रोग
|}
'''उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण (एड्स)''' ([[अंग्रेज़ी]]:acquired immunodeficiency syndrome (aids)) [[मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु]] (मा॰प्र॰अ॰स॰) (एच॰आई॰वी) संक्रमण के बाद की स्थिति है, जिसमें मानव अपने प्राकृतिक प्रतिरक्षण क्षमता खो देता है। एड्स स्वयं कोई बीमारी नही है, पर एड्स से पीड़ित मानव शरीर संक्रामक बीमारियों, जो कि जीवाणु और विषाणु आदि से होती हैं, के प्रति अपनी प्राकृतिक प्रतिरोधी शक्ति खो बैठता है क्योंकि एच.आई.वी (वह वायरस जिससे कि एड्स होता है) रक्त में उपस्थित प्रतिरोधी पदार्थ लसीका-कोशो पर आक्रमण करता है। एड्स पीड़ित के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी [[ज़ुकाम|जुकाम]] से ले कर क्षय रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं। एच.आई.वी. संक्रमण को एड्स की स्थिति तक पहुंचने में ८ से १० वर्ष या इससे भी अधिक समय लग सकता है। एच.आई.वी से ग्रस्त व्यक्ति अनेक वर्षों तक बिना किसी विशेष लक्षणों के बिना रह सकते हैं।
एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है यानी कि यह एक महामारी है। एड्स के संक्रमण के तीन मुख्य कारण हैं - असुरक्षित यौन संबंधो, रक्त के आदान-प्रदान तथा माँ से शिशु में संक्रमण द्वारा। [https://web.archive.org/web/20070312184838/http://www.nacoonline.org/ राष्ट्रीय उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण नियंत्रण कार्यक्रम] और [https://web.archive.org/web/20130526040247/http://www.unaids.org/] संयुक्त राष्ट्रसंघ उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण] दोनों ही यह मानते हैं कि भारत में ८० से ८५ प्रतिशत संक्रमण असुरक्षित विषमलिंगी/विषमलैंगिक यौन संबंधों से फैल रहा है<ref>{{cite web| last = | title = भारत में एड्सः शतुरमुर्ग सा रवैया| publisher = निरंतर| date = 2006-08-01| url = http://www.nirantar.org/0806-cover-bharat-mein-aids| access-date = 25 दिसंबर 2009| archive-url = https://web.archive.org/web/20101009132816/http://www.nirantar.org/0806-cover-bharat-mein-aids| archive-date = 9 अक्तूबर 2010| url-status = dead}}</ref>। माना जाता है कि सबसे पहले इस रोग का विषाणु: एच.आई.वी, अफ्रीका के खास प्राजाति की बंदर में पाया गया और वहीं से ये पूरी दुनिया में फैला। अभी तक इसे लाइलाज माना जाता है लेकिन दुनिया भर में इसका इलाज पर शोधकार्य चल रहे हैं। १९८१ में एड्स की खोज से अब तक इससे लगभग ३० करोड़ लोग जान गंवा बैठे हैं।
== एड्स और एच॰आई॰वी॰ में अंतर ==
एच॰आई॰वी॰ एक अतिसूक्षम रोग विषाणु हैं जिसकी वजह से एड्स हो सकता है। एड्स स्वयं में कोई रोग नहीं है बल्कि एक संलक्षण है। यह मनुष्य की अन्य रोगों से लड़ने की नैसर्गिक प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता हैं। प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अवसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर फुफ्फुस प्रदाह, टीबी, क्षय रोग, कर्क रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं और मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है। यही कारण है की एड्स परीक्षण महत्वपूर्ण है। सिर्फ एड्स परीक्षण से ही निश्चित रूप से संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। एड्स एक तरह का संक्रामक यानी की एक से दुसरे को और दुसरे से तीसरे को होने वाली एक गंभीर बीमारी है। एड्स का पूरा नाम ‘एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम/उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण’ (''acquired immune deficiency syndrome)'' है और यह एक तरह के विषाणु जिसका नाम HIV (Human immunodeficiency virus) है, से फैलती है। अगर किसीको HIV है तो ये जरुरी नहीं की उसको एड्स भी है। HIV वायरस की वजह से एड्स होता है अगर समय रहते [[Www.aapkisuccess.com/hiv-aids-एड्स-के-लक्षण-aids-ke-lakshan/|<u>'''वायरस का इलाज़'''</u>]] कर दिया गया तो एड्स होने का खतरा कम हो जाता है।
== भारत में एड्स ==
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में हाल के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में लगभग 14-16 लाख लोग एचआईवी / एड्स से प्रभावित है<ref>{{Cite web |url=http://www.bmj.com/content/340/bmj.c621 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121020122033/http://www.bmj.com/content/340/bmj.c621 |archive-date=20 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>. हालांकि २००५ में मूल रूप से यह अनुमान लगाया गया था कि भारत में लगभग 55 लाख एचआईवी / एड्स से संक्रमित हो सकते थे। २००७ में और अधिक सटीक अनुमान भारत में एचआईवी / एड्स से प्रभावित लोगों कि संख्या को 25 लाख के आस-पास दर्शाती है। ये नए आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन और यू.एन.एड्स द्वारा समर्थित हैं<ref>{{Cite web |url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6276398.stm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=20 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121111130326/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6276398.stm |archive-date=11 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref>. संयुक्त राष्ट्र कि 2011 के एड्स रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों भारत में नए एचआईवी संक्रमणों की संख्या में 50% तक की गिरावट आई है<ref>www.hindustantimes.com/India-sees-50-decline-in-new-hiv-infections-un-report/Article1-680333.aspx</ref>.
'''भारत में एड्स से प्रभावित लोगों की बढ़ती संख्या के संभावित कारण'''
* आम जनता को एड्स के विषय में सही जानकारी न होना
* एड्स तथा यौन रोगों के विषयों को कलंकित समझा जाना
* शिक्षा में यौन शिक्षण व जागरूकता बढ़ाने वाले पाठ्यक्रम का अभाव
* कई धार्मिक संगठनों का [[गर्भ निरोधक]] के प्रयोग को अनुचित ठहराना आदि।
== एड्स के लक्षण ==
ई.वी से संक्रमित लोगों में लम्बे समय तक एड्स के कोई लक्षण नहीं दिखते। दीर्घ समय तक (3, 6 महीने या अधिक)
एच.आई.वी भी औषधिक परीक्षा में नहीं उभरते। अक्सर एच.आधिकांशतः एड्स के मरीज़ों को ज़ुकाम या विषाणु बुखार हो जाता है पर इससे एड्स होने की पहचान नहीं होती। एड्स के कुछ प्रारम्भिक लक्षण हैं:<ref>{{Cite web |url=http://www.paliganjtimes.com/2017/01/aids-kaise-pata-chalta-hai_20.html |title=पुरुषों में एचआईवी के लक्षण in Hindi |access-date=18 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180418141306/http://www.paliganjtimes.com/2017/01/aids-kaise-pata-chalta-hai_20.html |archive-date=18 अप्रैल 2018 |url-status=dead }}</ref>
*
*
* हैजाथकानबुखार
* सिरदर्द
* मतली व भोजन से अरुचि
* लसीकाओं में सूजन
ध्यान रहे कि ये समस्त लक्षण साधारण बुखार या अन्य सामान्य रोगों के भी हो सकते हैं। अतः एड्स की निश्चित रूप से पहचान केवल और केवल, औषधीय परीक्षण से ही की जा सकती है व की जानी चाहिये।
एचआईवी संक्रमण के तीन मुख्य चरण हैं: तीव्र संक्रमण, नैदानिक विलंबता एवं एड्स.
=== '''तीव्र संक्रमण''' ===
एचआईवी की प्रारंभिक अवधि जो कि उसके संक्रमण के बाद प्रारंभ होती है उसे तीव्र एच.आई.वी या प्राथमिक एच.आई.वी या तीव्र रेट्रोवायरल सिंड्रोम कहते हैं<ref>{{Cite book |last=Organization |first=World Health |url=https://web.archive.org/web/20081031053144/www.who.int/hiv/pub/guidelines/HIVstaging150307.pdf |title=WHO case definitions of HIV for surveillance and revised clinical staging and immunological classification of HIV-related disease in adults and children |date=2007-12-31 |publisher=World Health Organization |isbn=978-92-4-159562-9 |language=English|hdl=10665/43699}}</ref>.कई व्यक्तियों में २ से ४ सप्ताह में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी या मोनोंयुक्लिओसिस जैसी बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं और कुछ व्यक्तियों में ऐसे कोई विशेष लक्षण नहीं दिखते. ४०% से ९०% मामलों में इस बीमारी के लक्षण दिखने लगते हैं जिसमे सबसे प्रमुख लक्षण बुखार, बड़ी निविदा लिम्फ नोड्स, गले की सूजन, चक्कते, सिर दर्द या मुँह और जननांगों के घाव आदि हैं<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=-HRJOElZch8C&pg=PA25#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130927080955/http://books.google.ca/books?id=-HRJOElZch8C&pg=PA25#v=onepage&q&f=false |archive-date=27 सितंबर 2013 |url-status=live }}</ref>. चक्कते २०%-५०% मामलों में दिखते हैं<ref>{{Cite journal |last=Vogel |first=Martin |last2=Schwarze-Zander |first2=Carolynne |last3=Wasmuth |first3=Jan-Christian |last4=Spengler |first4=Ulrich |last5=Sauerbruch |first5=Tilman |last6=Rockstroh |first6=Jürgen Kurt |date=2010-07-19 |title=The Treatment of Patients With HIV |url=https://www.aerzteblatt.de/10.3238/arztebl.2010.0507 |journal=Deutsches Ärzteblatt international |doi=10.3238/arztebl.2010.0507 |issn=1866-0452 |pmc=2915483 |pmid=20703338}}</ref>. कुछ लोगों में इस स्तर पर अवसरवादी संक्रमण भी विकसित हो जाता है। कुछ लोगों में जठरांत्र कि बीमारियाँ जैसे उल्टी, मिचली या दस्त और कुछ में परिधीय न्यूरोपैथी के स्नायविक लक्षण और जुल्लैन बर्रे सिंड्रोम जैसी बीमारियों के लक्षण दिखते हैं। लक्षण कि अवधि आम तौर पर एक या दो सप्ताह होती है। अपने विशिष्ट लक्षण न दिखने के कारण लोग इन्हें अक्सर एचआईवी का संक्रमण नहीं मानते. कई सामान्य संक्रामक रोगों के लक्षण इस बीमारी में दिखने के कारण अक्सर डॉक्टर और हॉस्पिटल में भी इस बीमारी का गलत निदान कर देते हैं। इसलिए यदि किसी रोगी को बिना किसी वजह के बार बार बुखार आता हो तो उसका एचआईवी परीक्षण करा लिया जाना चाहिए क्योकि या एच.आई.वी. संक्रमण का एक लक्षण हो सकता है<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref>.
=== '''नैदानिक विलंबता''' ===
इस रोग के प्रारंभिक लक्षण के अगले चरण को नैदानिक विलंबता, स्पर्शोन्मुख एचआईवी या पुरानी एचआईवी कहते हैं<ref>{{Cite web |url=http://aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121014004849/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ |archive-date=14 अक्तूबर 2012 |url-status=dead }}</ref>. उपचार के बिना एचआईवी संक्रमण का दूसरा चरण ३ साल से २० साल तक रह सकता है (औसतन ८ साल)<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=WauaC7M0yGcC&pg=PA29#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130927080957/http://books.google.ca/books?id=WauaC7M0yGcC&pg=PA29#v=onepage&q&f=false |archive-date=27 सितंबर 2013 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=xmFBtyPGOQIC&pg=PA19#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130927080949/http://books.google.ca/books?id=xmFBtyPGOQIC&pg=PA19#v=onepage&q&f=false |archive-date=27 सितंबर 2013 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=M4q3AyDQIUYC&pg=PA273#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130927080953/http://books.google.ca/books?id=M4q3AyDQIUYC&pg=PA273#v=onepage&q&f=false |archive-date=27 सितंबर 2013 |url-status=live }}</ref>. आम तौर पर इस चरान में कुछ या कोई लक्षण नहीं दिखते है जबकि इस चरण के अंत के कई लोगों को बुखार, वजन घटना, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं और मांसपेशियों में दर्द अनुभव होता है<ref>{{Cite web |url=http://aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121014004849/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/just-diagnosed-with-hiv-aids/hiv-in-your-body/stages-of-hiv/ |archive-date=14 अक्तूबर 2012 |url-status=dead }}</ref>. लगभग ५०-७०% लोगों में ३-६ महीने के भीतर लासीका ग्रंथियों (जांघ कि बगल वाली लसीका ग्रंथियों के आलावा) में सूजन या विस्तार भी देखा जाता है<ref> Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 121</ref>. हालाँकि HIV-1 से संक्रमित अधिकतर व्यक्तियों में पता लगाने योग्य एक वायरल लोड होता है लेकिन इलाज के आभाव में वह अंततः बढ़ कर एड्स में बदल जाता है जबकि कुछ मामलो (लगभग ५%) में बिना एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एड्स कि चिकित्सा पद्यति) के CD4+ T-कोशिकाएं ५ साल से अधिक शरीर में बनी रहती हैं<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120718062920/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 |archive-date=18 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref>. जिन व्यक्तियों में इस प्रकार के मामले सामने आते है उन्हें एचआईवी नियंत्रक या लंबी अवधि वृधिविहीन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और जिन व्यक्तियों में बिना रेट्रोवायरल विरोधी चिकित्सा के वायरल लोड कम या नहीं पता लगाने योग्य स्तर तक बना रहता है उन्हें अभिजात वर्ग का नियंत्रक या अभिजात वर्ग का दमन करने वाला कहते हैं<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120718062920/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20350494 |archive-date=18 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref>.
=== '''एड्स''' ===
एड्स को दो प्रकार से परिभाषित किया गया है या तो जब CD4+ टी कोशिकाओं कि संख्या जब २०० कोशिकाएं प्रति μL से कम होती हैं या तो तब जबकि एचआईवी संक्रमण के कारण कोई रोग व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न हो जाता है<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref>. विशिष्ट उपचार के अभाव में एचआईवी से संक्रमित आधे लोगों के अन्दर दस साल में एड्स विकसित हो जाता है<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref>. सबसे आम प्रारंभिक स्थिति जो कि एड्स की उपस्थिति को इंगित करती है वो है न्युमोसाईतिस निमोनिया (40%), कमजोरी जैसे कि वजन घटना, मांसपेशियों में खिचाव, थकान, भूख में कमी इत्यादि (२०%) और सोफागेल कैंडिडिआसिस (ग्रास नली का संक्रमण) होती है। इसके आलावा आम लक्षण में [[श्वास नलिका]] में कई बार संक्रमण होना भी है<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref>.
अवसरवादी संक्रमण बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी के कारण हो सकते हैं जो कि आम तौर पर हमारे [[प्रतिरक्षा प्रणाली]] द्वारा नियंत्रित हो जाते हैं<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12594648 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120515112209/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12594648 |archive-date=15 मई 2012 |url-status=live }}</ref>. भिन्न भिन्न व्यक्तियों में भिन्न भिन्न प्रकार के संक्रमण होते है जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति के आस पास वातावरण में कौन से जीव या संक्रमण आम रूप से पाए जाते है<ref>Mandell, Bennett, and Dolan (2010). Chapter 118.</ref>. ये संक्रमण शरीर के हर अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21322514 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=27 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430184041/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21322514 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>.
== एच.आई.वी. का प्रसार ==
दुनिया भर में इस समय लगभग चार करोड़ 20 लाख लोग एच.आई.वी का शिकार हैं। इनमें से दो तिहाई [[सहारा]] से लगे अफ़्रीकी देशों में रहते हैं और उस क्षेत्र में भी जिन देशों में इसका [[संक्रमण]] सबसे ज़्यादा है वहाँ हर तीन में से एक वयस्क इसका शिकार है। दुनिया भर में लगभग 14,000 लोगों के प्रतिदिन इसका शिकार होने के साथ ही यह डर बन गया है कि ये बहुत जल्दी ही [[एशिया]] को भी पूरी तरह चपेट में ले लेगा। जब तक कारगर इलाज खोजा नहीं जाता, एड्स से बचना ही एड्स का सर्वोत्तम उपचार है।
''' एच.आई.वी. तीन मुख्य मार्गों से फैलता है'''
* मैथुन या सम्भोग द्वारा (गुदा, योनिक या मौखिक)
* शरीर के संक्रमित तरल पदार्थ या ऊतकों द्वारा (रक्त संक्रमण या संक्रमित सुइयों के आदान-प्रदान)
* माता से शीशु मे (गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान द्वारा)
मल, नाक स्रावों, लार, थूक, पसीना, आँसू, मूत्र, या उल्टी से एच. आई. वी. संक्रमित होने का खतरा तबतक नहीं होता जबतक कि ये एच. आई. वी संक्रमित रक्त के साथ दूषित न हो<ref>{{Cite journal |last=van der Kuyl |first=Antoinette C |last2=Cornelissen |first2=Marion |date=2007 |title=Identifying HIV-1 dual infections |url=http://retrovirology.biomedcentral.com/articles/10.1186/1742-4690-4-67 |journal=Retrovirology |volume=4 |issue=1 |pages=67 |doi=10.1186/1742-4690-4-67 |pmc=2045676 |pmid=17892568}}</ref>.
=== मैथुन या सम्भोग द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण ===
एचआईवी संक्रमण की सबसे ज्यादा विधा संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संपर्क के माध्यम से है। दुनिया भर में एच. आई. वी. प्रसार के मामलों के सबसे अधिक मामले विषमलैंगिक संपर्क (यानी विपरीत लिंग के लोगों के बीच यौन संपर्क जैसे कि पुरुष एवं स्त्री के बीच) के माध्यम से होते हैं। हालांकि, एच. आई. वी. प्रसार भिन्न भिन्न देशों में भिन्न भिन्न तरीकों से हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2009 तक<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref>, सबसे अधिक एच. आई. वी. प्रसार उन समलैंगिक पुरुषों में हुआ जो कि सभी नए मामलों की 64% आबादी के बराबर थी<ref>{{Cite web |url=http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130501102910/http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm |archive-date=1 मई 2013 |url-status=live }}</ref>.
असुरक्षित विषमलिंगी यौन संबंधो के मालमे में अनुमानतः प्रत्येक यौन सम्बन्ध में एचआईवी संक्रमण का जोखिम कम आय वाले देशों में उच्च आय वाले देशों कि तुलना से चार से दस गुना ज्यादा होता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121106143649/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 |archive-date=6 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref>. कम आय वाले देशों में संक्रमित महिला से पुरुष में संक्रमण का जोखिम ०.३८% है जबकि पुरुषों से महिला में संक्रमण का जोखिम ०.३०% है। उच्चा आय वाले देशो में यही जोखिम महिला से पुरुष में ०.०४% तथा पुरुष से महिला में ०.०८% है। गुदा सम्भोग द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का जोखिम विशेष रूप से ज्यादा होता है जो कि विषमलिंगी तथा समलिंगी दोनों प्रकार के यौन संबंधों में १.४-१.७% तक होता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121106143649/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19179227 |archive-date=6 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22819660 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430180139/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22819660 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. मुख मैथुन के द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का खतरा थोडा कम होता है लेकिन खत्म नहीं होता<ref>{{Cite journal |last=Yu |first=Mingke |last2=Vajdy |first2=Michael |date=2010-08 |title=Mucosal HIV transmission and vaccination strategies through oral compared with vaginal and rectal routes |url=http://www.tandfonline.com/doi/full/10.1517/14712598.2010.496776 |journal=Expert Opinion on Biological Therapy |language=en |volume=10 |issue=8 |pages=1181–1195 |doi=10.1517/14712598.2010.496776 |issn=1471-2598 |pmc=2904634 |pmid=20624114}}</ref>.
=== शरीर के संक्रमित तरल पदार्थ या ऊतकों द्वारा (रक्त संक्रमण या संक्रमित सुइयों के आदान-प्रदान) ===
एचआईवी के संक्रमण का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत रक्त और रक्त उत्पाद के द्वारा हैं<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref>. रक्त के द्वारा संक्रमण नशीली दवाओ के सेवन के दौरान सुइयों के साझा प्रयोग के द्वारा, संक्रमित सुई से चोट लगने पर, दूषित रक्त या रक्त उत्पाद के माध्यम से या उन मेडिकल सुइयों के माध्यम से जो एच. आई. वी. संक्रमित उपकरणों के साथ होते हैं। दवा के इंजेक्शन आपस में बाँट कर लगाने से इसके फ़ैलाने का जोखिम ०.६३-२.४% होता है, जोकि औसतन ०.८% होता है<ref>{{Cite journal |last=Baggaley |first=Rebecca F |last2=Boily |first2=Marie-Claude |last3=White |first3=Richard G |last4=Alary |first4=Michel |date=2006-04-04 |title=Risk of HIV-1 transmission for parenteral exposure and blood transfusion: a systematic review and meta-analysis |url=https://journals.lww.com/00002030-200604040-00003 |journal=AIDS |language=en |volume=20 |issue=6 |pages=805–812 |doi=10.1097/01.aids.0000218543.46963.6d |issn=0269-9370}}</ref>. एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की हुई सुई के माध्यम से एचआईवी होने का जोखिम 0.3% प्रतिशत होता है (३३३ में १) और श्लेष्मा झिल्ली के खून से संक्रमित होने का जोखिम ०.०९% होता है (१००० में १). संयुक्त राज्य अमेरिका में २००९ में १२% मामले ऐसे लोगों के आए हैं जो कि नसों में नशीली दवाओं का उपयोग करते थे<ref>{{Cite web |url=http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130501102910/http://www.cdc.gov/hiv/topics/surveillance/resources/factsheets/us_overview.htm |archive-date=1 मई 2013 |url-status=live }}</ref> और कुछ क्षेत्रों में नशीली दवाओं का सेवन करने वालों में से ८०% से ज्यादा लोग एचआईवी पोजिटिव मिले<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref>.
एच. आई. वी. संक्रमित रक्त का प्रयोग करने से संक्रमण का जोखिम ९३% तक होता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/16549963 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430194006/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/16549963 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. विकसित देशों में संक्रिमित रक्त से एचआईवी प्रसार का जोखिम बहुत ही कम है (५,००,००० बार में से १ बार से भी कम) क्योकि वह रक्त देने वाले व्यक्ति कि एच. आई. वी. जांच उसका रक्त लेने के पहले कि जाती है<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref>. ब्रिटेन में जोखिम औसतन पचास लाख में से १ से भी कम की है<ref>hospital.blood.co.uk/library/pdf/2011_Will_I_Need_English_v3.pdf</ref>. हालांकि, कम आय वाले देशों में रक्त का इस्तेमाल करने के पहले केवल आधे रक्त कि उचित रूप से जाँच होती है (२००८ के रिपोर्ट के अनुसार)<ref>UNAIDS 2011 pg. 60–70</ref>. यह अनुमान है कि इन क्षेत्रों में १५% एचआईवी संक्रमण का आधार रक्त या रक्त उत्पादों से होता है, जो कि वैश्विक संक्रमण का ५-१०% है<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.who.int/inf-pr-2000/en/pr2000-25.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050117092135/http://www.who.int/inf-pr-2000/en/pr2000-25.html |archive-date=17 जनवरी 2005 |url-status=live }}</ref>. उप सहारा अफ्रीका में एचआईवी के प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका असुरक्षित चिकित्सा सुइयां निभाते हैं। २००७ में इस क्षेत्र में संक्रमण (१२-१७%) का कारण असुरक्षित चिकित्सा सुइयां ही थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार चिकित्सा सुइयों के द्वारा एच. आई. वी. संक्रमण का जोखिम अफ्रीका में १.२% मामलों में होता है<ref>{{Cite journal |last=Reid |first=Savanna R |date=2009 |title=Injection drug use, unsafe medical injections, and HIV in Africa: a systematic review |url=http://harmreductionjournal.biomedcentral.com/articles/10.1186/1477-7517-6-24 |journal=Harm Reduction Journal |language=en |volume=6 |issue=1 |pages=24 |doi=10.1186/1477-7517-6-24 |issn=1477-7517 |pmc=2741434 |pmid=19715601}}</ref>. टैटू बनाने या बनवाने, खुरचने से भी सैद्धांतिक रूप संक्रमण का जोखिम बना रहता है लेकिन अभी तक किसी भी ऐसे मामले के पुष्टि नहीं हुई है। मच्छर या अन्य कीड़े कभी एचआईवी संचारित नहीं कर सकते हैं<ref>{{Cite web |url=http://www.rci.rutgers.edu/~insects/aids.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=30 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131206190442/http://www.rci.rutgers.edu/~insects/aids.htm |archive-date=6 दिसंबर 2013 |url-status=dead }}</ref>.
=== माँ से बच्चे में एच. आई. वी. संक्रमण ===
एचआईवी माँ से बच्चे को गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के दौरान और स्तनपान के दौरान प्रेषित हो सकता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/prevention/reduce-your-risk/fluids-of-transmission/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140625071311/http://www.aids.gov/hiv-aids-basics/prevention/reduce-your-risk/fluids-of-transmission/ |archive-date=25 जून 2014 |url-status=dead }}</ref>. एचआईवी दुनिया भर में फैलने का यह तीसरा सबसे आम कारण है<ref>{{Cite web |url=http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130730222154/http://books.google.ca/books?id=H4Sv9XY296oC&pg=PA745#v=onepage&q&f=false |archive-date=30 जुलाई 2013 |url-status=live }}</ref>. इलाज के आभाव में जन्म के पहले या जन्म के समय इसके संक्रमण का जोखिम २०% तक होता है और स्तनपान के द्वारा यही जोखिम ३५% तक होता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. वर्ष २००८ तक बच्चो में एचआईवी का संक्रमण ९०% मामलों में माँ के द्वारा हुआ। उचित उपचार होने पर माँ से बच्च्चे को होने वाले संक्रमण को कम कर के यह जोखिम ९०% से १% तक लाया जा सकता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430165414/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20954881 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. माँ को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान एंटीरेट्रोवाइरल दवा दे कर, वैकल्पिक शल्यक्रिया (आपरेशन) द्वारा प्रसव करके, नवजात शिशु को स्तनपान से न करा के तथा नवजात शिशु को भी एंटीरिट्रोवाइरल औषधियों कि खुराक देकर माँ से बच्चे में एच. आई. वी. का संक्रमण रोका जाता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12810858 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120515112751/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/12810858 |archive-date=15 मई 2012 |url-status=live }}</ref>. हलांकि इनमें से कई उपाय अभी भी विकासशील देशों में नहीं हैं। यदि भोजन चबाने के दौरान संक्रमित रक्त भोजन को दूषित कर देता है तो यह भी एच. आई. वी. संचरण का जोखिम पैदा कर सकता है<ref>{{Cite web |url=http://www.cdc.gov/hiv/topics/basic/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=31 अक्तूबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121013080351/http://www.cdc.gov/hiv/topics/basic/ |archive-date=13 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>.
== एड्स से बचने के उपाए ==
* अपने जीवनसाथी के प्रति वफादार रहें। एक से अधिक व्यक्ति से यौनसंबंध ना रखें।
* यौन संबंध ([[मैथुन]]) के समय [[कंडोम]] का सदैव प्रयोग करें।
* यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो अपने जीवनसाथी से इस बात का खुलासा अवश्य करें। बात छुपाये रखनें तथा इसी स्थिती में यौन संबंध जारी रखनें से आपका साथी भी संक्रमित हो सकता है और आपकी संतान पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है<ref>{{Cite web |url=https://www.mtatva.com/hi/disease-facts/aids-prevention-and-complications-in-hindi/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=22 दिसंबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171222111233/https://www.mtatva.com/hi/disease-facts/aids-prevention-and-complications-in-hindi/ |archive-date=22 दिसंबर 2017 |url-status=dead }}</ref>।
* यदि आप एच.आई.वी संक्रमित या एड्स ग्रसित हैं तो रक्तदान कभी ना करें।
* रक्त ग्रहण करने से पहले रक्त का एच.आई.वी परीक्षण कराने पर ज़ोर दें।
* यदि आप को एच.आई.वी संक्रमण होने का संदेह हो तो तुरंत अपना एच.आई.वी परीक्षण करा लें। उल्लेखनीय है कि अक्सर एच.आई.वी के कीटाणु, संक्रमण होने के 3 से 6 महीनों बाद भी, एच.आई.वी परीक्षण द्वारा पता नहीं लगाये जा पाते। अतः तीसरे और छठे महीने के बाद एच.आई.वी परीक्षण अवश्य दोहरायें।
=== '''यौन संपर्क''' ===
यौन संपर्क के दौरान कंडोम का लगातार इस्तेमाल एचआईवी संक्रमण के जोखिम को लगभग ८०% तक कम कर देता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348628 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430194244/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348628 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. जब जोड़ी में से एक साथी एचआईवी से संक्रमित है तब कंडोम का लगातार इस्तेमाल करने से असंक्रमित व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण होने कि संभावना प्रति वर्ष १% से कम हो जाती है<ref>{{Cite web |url=http://www.wpro.who.int/mediacentre/factsheets/fs_200308_Condoms/en/index.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018145513/http://www.wpro.who.int/mediacentre/factsheets/fs_200308_Condoms/en/index.html |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>. इन बातों के भी प्रमाण मिले है कि महिलाओं का कंडोम इस्तेमाल करना भी पुरूषों के कंडोम इस्तेमाल करने के सामान सुरक्षा प्रदान करता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348629 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430183736/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22348629 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. एक अध्ययन के अनुसार अफ्रीकी महिलाओं में सेक्स के तुरंत पहले तेनोफोविर नामक जेल का योनि पर इस्तेमाल करने से एच. आई. वी संक्रमण का जोखिम ४०% तक कम हुआ<ref>{{Cite journal |last=Celum |first=Connie |last2=Baeten |first2=Jared M. |date=2012-02 |title=Tenofovir-based pre-exposure prophylaxis for HIV prevention: evolving evidence |url=http://journals.lww.com/00001432-201202000-00009 |journal=Current Opinion in Infectious Diseases |language=en |volume=25 |issue=1 |pages=51–57 |doi=10.1097/QCO.0b013e32834ef5ef |issn=0951-7375|pmc=3266126|pmid=22156901}}</ref>. जबकि इसके विपरीत स्पेर्मिसईद नोंओक्स्य्नोल ९ (spermicide nonoxynol 9) सक्रमण के जोखिम को बढ़ा देते हैं क्योंकि योनि और गुदा में जलन बढ़ाना इसकी अपनी प्रवृत्ति है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20205637 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430185412/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20205637 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. उप सहारा अफ्रीका में सुन्नत विषमलैंगिक पुरुषों में एच.आई.वी संक्रमण के दर को ३८%-६६% मामलों में २४ महीनों तक कम कर देता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19370585 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121114195720/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19370585 |archive-date=14 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref>. इन अध्यनों के आधार पर वर्ष २००७ में विश्व स्वास्थ्य संगठन और यू.एन.एड्स ने महिला से पुरुष में एचआईवी संक्रमण से बचने का उपाय पुरुष खतना बताया था<ref>{{Cite web |url=http://www.who.int/mediacentre/news/releases/2007/pr10/en/index.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110126183014/http://www.who.int/mediacentre/news/releases/2007/pr10/en/index.html |archive-date=26 जनवरी 2011 |url-status=live }}</ref>. यधपि इससे पुरुष से महिला में संक्रमण को रोका जा सकता है यह विवादस्पद है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20622758 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120715181145/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20622758 |archive-date=15 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19849961 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130206185235/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19849961 |archive-date=6 फ़रवरी 2013 |url-status=live }}</ref> और पुरुष खतना विकसित देशों में कारगर होगा या नहीं एवं समलैंगिक पुरुषों में इसका कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं ये बात अभी अनिर्धारित है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20844437 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120715190109/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/20844437 |archive-date=15 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19935420 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120715190127/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19935420 |archive-date=15 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21678366 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120929061759/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21678366 |archive-date=29 सितंबर 2012 |url-status=live }}</ref>. कुछ विशेषज्ञों को डर है कि खतना पुरुषों के बीच असुरक्षा कि कम धारणा यौन जोखिम को बढ़ावा दे सकती है जो कि अपने निवारक प्रभाव को कम कर देती है<ref>{{Cite journal |last=Eaton |first=Lisa A. |last2=Kalichman |first2=Seth C. |date=2007-11 |title=Risk compensation in HIV prevention: Implications for vaccines, microbicides, and other biomedical HIV prevention technologies |url=http://link.springer.com/10.1007/s11904-007-0024-7 |journal=Current HIV/AIDS Reports |language=en |volume=4 |issue=4 |pages=165–172 |doi=10.1007/s11904-007-0024-7 |issn=1548-3568 |pmc=2937204 |pmid=18366947}}</ref>. जिन महिलाओं का मादा जननांग कट चुका होता है उनमें एचआईवी कि वृद्धि का जोखिम बढ़ जाता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19065392 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121116194756/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/19065392 |archive-date=16 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref>. यौन संयम को बताने वाले कार्यक्रम भी एचआईवी के बढते जोखिम प्रभावित करते नहीं दिखाई देते<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17943855 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130114051258/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/17943855 |archive-date=14 जनवरी 2013 |url-status=live }}</ref>. स्कूल में व्यापक रूप से यौन शिक्षा देने पर इसके व्यापकता में कमी आ सकती है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21251451 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430161754/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/21251451 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>. युवा लोगों का एक बड़ा समूह एचआईवी / एड्स के बारे में जानकारी होने के बावजूद भी इस प्रथा में संलग्न है कि वह खुद अपने को एचआईवी से संक्रमित होने के जोखिम को ये कम आँकता है<ref>{{Cite web |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/18724961 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 नवंबर 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130430160013/http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/18724961 |archive-date=30 अप्रैल 2013 |url-status=live }}</ref>.
== एड्स इन कारणों से नहीं फैलता ==
* एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति से हाथ मिलाने से
* एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति के साथ रहने से या उनके साथ खाना खाने से।
* एक ही बर्तन या रसोई में स्वस्थ और एचआईवी संक्रमित या एड्स ग्रसित व्यक्ति के खाना बनाने से।
== प्रारंभिक अवस्था में एड्स के लक्षण ==
* तेज़ी से अत्यधिक वजन घटना
* सूखी खांसी
* लगातार ज्वर या रात के समय अत्यधिक/असाधारण मात्रा में पसीने छूटना
* जंघाना, [[कक्षे]] और गर्दन में लम्बे समय तक सूजी हुई लसिकायें
* एक हफ्ते से अधिक समय तक दस्त होना। लम्बे समय तक गंभीर हैजा।
* फुफ्फुस प्रदाह
* चमड़ी के नीचे, मुँह, पलकों के नीचे या नाक में लाल, भूरे, गुलाबी या बैंगनी रंग के धब्बे।
* निरंतर भुलक्कड़पन,
== एड्स रोग का उपचार ==
औषधी विज्ञान में एड्स के इलाज पर निरंतर संशोधन जारी हैं। भारत, जापान, अमेरिका, यूरोपीय देश और अन्य देशों में इस के इलाज व इससे बचने के टीकों की खोज जारी है। हालांकी एड्स के मरीज़ों को इससे लड़ने और एड्स होने के बावजूद कुछ समय तक साधारण जीवन जीने में सक्षम हैं परंतु आगे चल कर ये खतरा पैदा कर सकता हैं। एड्स का इलाज के लिए शोध जारी है। हैं। आज यह भारत में एक महामारी का रूप हासिल कर चुका है। भारत में एड्स रोग की चिकित्सा महंगी है, एड्स की दवाईयों की कीमत आम आदमी की आर्थिक पहुँच के परे है। कुछ विरल मरीजों में सही चिकित्सा से 10-12 वर्ष तक एड्स के साथ जीना संभव पाया गया है, किंतु यह आम बात नही है।
ऐसी दवाईयाँ अब उपलब्ध हैं जिन्हें प्रति उत्त्क्रम-प्रतिलिपि-किण्वक विषाणु चिकित्सा [anti reverse transcript enzyme viral therapy or anti-retroviral therapy] दवाईयों के नाम से जाना जाता है। सिपला की ट्रायोम्यून जैसी यह दवाईयाँ महँगी हैं, प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 150000 रुपये होता है और ये हर जगह आसानी से भी नहीं मिलती। इनके सेवन से बीमारी थम जाती है पर समाप्त नहीं होती। अगर इन दवाओं को लेना रोक दिया जाये तो बीमारी फ़िर से बढ़ जाती है, इसलिए एक बार बीमारी होने के बाद इन्हें जीवन भर लेना पड़ता है। अगर दवा न ली जायें तो बीमारी के लक्षण बढ़ते जाते हैं और एड्स से ग्रस्त व्यक्तियों की मृत्यु हो जाती है।
एक अच्छी खबर यह है कि सिपला और हेटेरो जैसे प्रमुख भारतीय दवा निर्माता एच.आई.वी पीड़ितों के लिये शीघ्र ही पहली एक में तीन मिश्रित निधिक अंशगोलियाँ बनाने जा रहे हैं जो इलाज आसान बना सकेगा (सिपला इसे वाईराडे के नाम से पुकारेगा)। इन्हें आहार व औषध मंत्रि-मण्डल [FDA] से भी मंजूरी मिल गई है। इन दवाईयों पर प्रति व्यक्ति सालाना खर्च तकरीबन 1 लाख रुपये होगा, संबल यही है कि वैश्विक कीमत से यह 80-85 प्रतिशत सस्ती होंगी।
== एड्स ग्रस्त लोगों के प्रति व्यवहार ==
एड्स का एक बड़ा दुष्प्रभाव है कि समाज को भी संदेह और भय का रोग लग जाता है। यौन विषयों पर बात करना हमारे समाज में वर्जना का विषय रहा है। निःसंदेह शतुरमुर्ग की नाई इस संवेदनशील मसले पर रेत में सर गाड़े रख अनजान बने रहना कोई हल नहीं है। इस भयावह स्थिति से निपटने का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक बदलाव लाना भी है। एड्स पर प्रस्तावित विधेयक<ref>{{cite web| last = | title = Draft Law on HIV| publisher = Lawyers Collective| date = | url = http://www.lawyerscollective.org/^hiv/Draft_Law_On_HIV.asp| format = asp| access-date = 16 जून 2020| archive-url = https://web.archive.org/web/20070927235211/http://www.lawyerscollective.org/%5Ehiv/Draft_Law_On_HIV.asp| archive-date = 27 सितंबर 2007| url-status = dead}}</ref> को अगर भारतीय संसद कानून की शक्ल दे सके तो यह भारत ही नहीं विश्व के लिये भी एड्स के खिलाफ छिड़ी जंग में महती सामरिक कदम सिद्ध होगा।
== इन्हें भी देखें ==
* [[व्यभिचार]]
* [[कंडोम]]
* [[हाइपरहाइड्रोसिस]]
* [[मानवीय प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु]]
* [[कैंसर]]
* [https://gyaninformer.blogspot.com/2022/07/HIV-Kya-Hota-Hai-HIV-Hone-Ke-Kya-Karan-Hai.html HIV]
* [https://gyaninformer.blogspot.com/2022/07/what-is-aids-aids-kya-hota-hai.html AIDS]
* [https://answervk.com/aids-kya-hai-in-hindi/ शरीर में एच.आई.वी. कहाँ रहता है?] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20221225153605/https://answervk.com/aids-kya-hai-in-hindi/ |date=25 दिसंबर 2022 }}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|colwidth=30em}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20171204181042/https://www.youtube.com/watch?v=izwomieBwG0 How a Sick Chimp Led to a Global Pandemic: The Rise of HIV]
* [https://web.archive.org/web/20110530005929/http://www.brandbharat.com/hindi/women/aids.html यौन सम्भोग से संक्रमित इन्फैक्शन एच आई वी और एड्स]
*[[Http://readerschowk.com/ajab-gajab-history-of-hiv-in-hindi/|एड्स{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} का इतिहास- जानिए कब, कहां और कैसे अस्तित्व में आई यह बीमारी]]
*[https://gyaninformer.blogspot.com/2022/07/alcohol-use-Symptoms-prevented-abuse.html शराब का दुरुपयोग (Alcohol Abuse) - उपचार, लक्षण और कारण]
*[https://gyaninformer.blogspot.com/2022/07/HIV-Kya-Hota-Hai-HIV-Hone-Ke-Kya-Karan-Hai.html एचआईवी क्या होता है]
[[श्रेणी:यौन रोग]]
[[श्रेणी:ऍचआइवी-सम्बंधित जानकारी]]
[[श्रेणी:स्वास्थ्य आपदाएँ]]
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गया
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{{Infobox settlement
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[[चित्र:Mahabodhitemple.jpg|right|thumb|280px|बोधगया का महाबोधि मन्दिर]]
'''गया''' (Gaya) [[भारत]] के [[बिहार]] राज्य में स्थित एक नगर है। यह ज़िला मुख्यालय और बिहार राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। [[मगही]] भाषा यहां की क्षेत्रीय भाषा है। भारत के महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थलों मे से गया भी एक है, इसलिए यहां लाखों की संख्या में देशी/विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म|जैन]], तीनों धर्मों में इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है, जिसका उल्लेख [[रामायण]] और [[महाभारत]] में मिलता है। गया तीन ओर से छोटी व पथरीली पहाड़ियों से घिरा है, जिनके नाम रामशिला, प्रेतशिला और ब्रह्मयोनि हैं। नगर के पूर्व में [[फल्गू नदी]] बहती है।<ref name=":0">"[https://books.google.com/books?id=dSZ987-0Fb8C Bihar Tourism: Retrospect and Prospect]," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=MMmNVZ4mP98C Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar]," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810</ref>
== विवरण ==
वैदिक काल से धर्मारण्य क्षेत्र मे स्थापित नगरी है गया। [[वाराणसी]] की तरह गया की प्रसिद्धि मुख्य रूप से एक धार्मिक नगरी के रूप में है। [[पितृपक्ष]] के अवसर पर यहाँ लाखों श्रद्धालु [[पिंडदान]] के लिये जुटते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-9631.html|title=पितरों के लिए गया|website=Dainik Jagran|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302090528/https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-9631.html|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://m.bhaskar.com/article/religion-badikhabarein/8127/t/5249/DHA-DAR-pitra-paksha-2014-these-are-famous-8-pilgrimage-to-the-memorial-service-their-in-4741669-PHO.html?pg=2 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141208154101/http://m.bhaskar.com/article/religion-badikhabarein/8127/t/5249/DHA-DAR-pitra-paksha-2014-these-are-famous-8-pilgrimage-to-the-memorial-service-their-in-4741669-PHO.html?pg=2 |archive-date=8 दिसंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> गया सड़क, रेल और वायु मार्ग द्वारा पूरे भारत से जुड़ा है। नवनिर्मित [[गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] द्वारा यह [[थाइलैंड]] और श्रीलंका से भी सीधे जुड़ा हुआ है। गया से 13 किलोमीटर की दूरी पर [[बोधगया]] स्थित है जो [[बौद्ध]] तीर्थ स्थल है, जहां पीपल के वृक्ष के नीचे [[गौतम बुद्ध|भगवान बुद्ध]] को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उस वृक्ष को [[बोधि वृक्ष]] कहा जाता है
गया बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थानों में से एक है।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.mapsofindia.com/bihar/travel/|title=बिहार की यात्रा का नक्शा | बिहार की यात्रा - पर्यटन, गंतव्य, होटल, परिवहन|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302090642/https://hindi.mapsofindia.com/bihar/travel/|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=dead}}</ref> यह शहर खासकर [[हिन्दू]] तीर्थयात्रियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां का विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।<ref>{{Cite web|url=http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2012/gaya/gaya.htm|title=सुबोध कुमार नंदन का आलेख- महातीर्थ गया|website=www.abhivyakti-hindi.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190311204256/http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2012/gaya/gaya.htm|archive-date=11 मार्च 2019|url-status=dead}}</ref> पुराणों के अनुसार यहां धर्मशिला पर श्री हरि [[विष्णु]] का चरण कमल अंकित है, जिसके परिसर में इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। हिन्दू धर्म में इस मंदिर को अतिमहत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गया पितृदान के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है।
गया, मध्य बिहार का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो फल्गु नदी के तट पर स्थित है। यह बोधगया से 13 किलोमीटर उत्तर तथा राजधानी [[पटना]] से 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहां का मौसम मिलाजुला है। गर्मी के दिनों में यहां काफी गर्मी पड़ती है और ठंड के दिनों में औसत सर्दी होती है। मानसून का भी यहां के मौसम पर व्यापक असर होता है। लेकिन वर्षा ऋतु में यहां का दृश्य काफी रोचक होता है।
कहा जाता है कि [[गयासुर]] नामक दैत्य जो की श्री हरी विष्णु का परम भक्त था, उसने अपनी तपस्या से नारायण को प्रसन्न किया। जिससे भगवान ने उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा। परन्तु उन्होंने स्वयं के लिए कुछ ना मांगकर यह मांगा कि मेरे दर्शन से प्राणियों के पाप नष्ट हो जाएं और उन्हें वैकुंठ प्राप्त हो। इस वरदान के पश्चात पापियों को भी स्वर्ग की प्राप्ति होने लगी और ब्रम्हा की व्यवस्था बिगड़ने लगी। जिसके बाद भगवान विष्णु ने यज्ञ अनुष्ठान के लिए गयासुर का शरीर मांगा। धर्म कार्य के लिए गयासुर ने अपना शरीर तो समर्पित कर दिया परन्तु उसके शरीर में कम्पन के कारण यज्ञ कार्य में विघ्न उत्पन्न हो रहा था। तब उसके शरीर को स्थिर करने के लिए श्री हरि विष्णु ने अपना एक पैर उसके वक्षस्थल पर स्थापित किया। मान्यता है कि वही चरण कमल आज विष्णुपद वेदी के रूप में यहां उपलब्ध है। मुक्तिधाम के रूप में प्रसिद्ध गया (तीर्थ) को केवल गया न कह कर आदरपूर्वक 'गया जी' कहा जाता है।
== इतिहास ==
गया का उल्लेख महाकाव्य [[रामायण]] में भी मिलता है। गया [[मौर्य राजवंश|मौर्य काल]] में एक महत्वपूर्ण नगर था। खुदाई के दौरान [[सम्राट अशोक]] से संबंधित आदेश पत्र पाया गया है। मध्यकाल में बिहार मुगल सम्राटों के अधीन था।मुगलकाल के पतन के उपरांत गया पर अंग्रेजो ने राज किया। सन् 1787 ईस्वी में बुंदेलखंड के होल्कर वंश की महारानी [[अहिल्याबाई होल्कर|अहिल्याबाई]] ने विष्णुपद मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। मेगास्थनीज़ की इण्डिका, फाह्यान तथा ह्वेनसांग के यात्रा वर्णन में गया का एक समृद्ध धर्म क्षेत्र के रूप मे वर्णन है। करीब ५०० ई॰पू. में [[गौतम बुद्ध]] फल्गु नदी के पश्चिमी तट अवस्थित [[बोधि वृक्ष|बोधि पेड़]] के नीचे तपस्या करने बैठे। तीन दिन और रात के तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिस्के बाद से वे बुद्ध के नाम से जाने गए। इसके बाद उन्होंने वहां ७ हफ्ते अलग अलग जगहों पर ध्यान करते हुए बिताया और फिर [[सारनाथ]] जा कर धर्म का प्रचार शुरू किया। बुद्ध के अनुयायिओं ने बाद में उस जगह पर जाना शुरू किया जहां बुद्ध ने वैशाख महीने में पुर्णिमा के दिन ज्ञान की प्रप्ति की थी। धीरे धीरे ये जगह बोध्गया के नाम से जाना गया और ये दिन बुद्ध पुर्णिमा के नाम से जाना गया। got m g dq mi r de urqk
Bgg
लगभग 528 ई॰ पू. के वैशाख (अप्रैल-मई) महीने में कपिलवस्तु के राजकुमार गौतम ने सत्य की खोज में घर त्याग दिया। गौतम ज्ञान की खोज में निरंजना नदी के तट पर बसे एक छोटे से गांव उरुवेला आ गए। वह इसी गांव में एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान साधना करने लगे। एक दिन वह ध्यान में लीन थे कि गांव की ही एक लड़की सुजाता उनके लिए एक कटोरा खीर तथा शहद लेकर आई। इस भोजन को करने के बाद गौतम पुन: ध्यान में लीन हो गए। इसके कुछ दिनों बाद ही उनके अज्ञान का बादल छट गया और उन्हें ज्ञान की प्राप्ित हुई। अब वह राजकुमार सिद्धार्थ या तपस्वी गौतम नहीं थे बल्कि बुद्ध थे। बुद्ध जिसे सारी दुनिया को ज्ञान प्रदान करना था। ज्ञान प्राप्ित के बाद वे अगले सात सप्ताह तक उरुवेला के नजदीक ही रहे और चिंतन मनन किया। इसके बाद बुद्ध वाराणसी के निकट सारनाथ गए जहां उन्होंने अपने ज्ञान प्राप्ित की घोषणा की। बुद्ध कुछ महीने बाद उरुवेला लौट गए। यहां उनके पांच मित्र अपने अनुयायियों के साथ उनसे मिलने आए और उनसे दीक्षित होने की प्रार्थना की। इन लोगों को दीक्षित करने के बाद बुद्ध राजगीर चले गए। इसके बुद्ध के उरुवेला वापस लौटने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बाद उरुवेला का नाम इतिहास के पन्नों में खो जाता है। इसके बाद यह गांव सम्बोधि, वैजरसना या महाबोधि नामों से जाना जाने लगा। बोधगया शब्द का उल्लेख 18 वीं शताब्दी से मिलने लगता है।
विश्वास किया जाता है कि महाबोधि मंदिर में स्थापित बुद्ध की मूर्त्ति संबंध स्वयं बुद्ध से है। कहा जाता है कि जब इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा था तो इसमें बुद्ध की एक मूर्त्ति स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया था। लेकिन लंबे समय तक किसी ऐसे शिल्पकार को खोजा नहीं जा सका जो बुद्ध की आकर्षक मूर्त्ति बना सके। सहसा एक दिन एक व्यक्ित आया और उसे मूर्त्ति बनाने की इच्छा जाहिर की। लेकिन इसके लिए उसने कुछ शर्त्तें भी रखीं। उसकी शर्त्त थी कि उसे पत्थर का एक स्तम्भ तथा एक लैम्प दिया जाए। उसकी एक और शर्त्त यह भी थी इसके लिए उसे छ: महीने का समय दिया जाए तथा समय से पहले कोई मंदिर का दरवाजा न खोले। सभी शर्त्तें मान ली गई लेकिन व्यग्र गांववासियों ने तय समय से चार दिन पहले ही मंदिर के दरवाजे को खोल दिया। मंदिर के अंदर एक बहुत ही सुंदर मूर्त्ति थी जिसका हर अंग आकर्षक था सिवाय छाती के। मूर्त्ति का छाती वाला भाग अभी पूर्ण रूप से तराशा नहीं गया था। कुछ समय बाद एक बौद्ध भिक्षु मंदिर के अंदर रहने लगा। एक बार बुद्ध उसके सपने में आए और बोले कि उन्होंने ही मूर्त्ति का निर्माण किया था। बुद्ध की यह मूर्त्ति बौद्ध जगत में सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्राप्त मूर्त्ति है। नालन्दा और विक्रमशिला के मंदिरों में भी इसी मूर्त्ति की प्रतिकृति को स्थापित किया गया है।
बोधगया को बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। बुद्ध के समय में इसे उरुवेला के नाम से जाना जाता था, यह [[लीलाजन नदी]] के किनारे स्थित है। इस स्थल पर पहला मंदिर [[मौर्य साम्राज्य|मौर्य]] [[मौर्य राजाओं की सूची|सम्राट]] [[अशोक]] द्वारा बनवाया गया था।
महाबोधि विहार बोधगया (उरुवेला) में उस स्थान पर मुख्य बौद्ध मंदिर को संदर्भित करता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। विहार में प्रसिद्ध बोधि वृक्ष (फ़िकस रिलिजियोसा या पीपल का पेड़) और वज्रासन (हीरा सिंहासन) शामिल हैं। मूल मंदिर तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित रेलिंग वाले वृक्ष मंदिर (बोधि-घर) के रूप में मौजूद था। इसका सबसे पहला चित्रण भरहुत और साँची स्तूप की नक्काशियों पर मिलता है। सम्राट अशोक ने ध्यान आसन के सटीक स्थान को चिह्नित करने के लिए तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यहां रेलिंग के साथ एक लाल बलुआ पत्थर की संरचना बनवाई थी। बोधगया में पाए गए चीनी और बर्मी शिलालेख स्पष्ट रूप से बुद्धगया मंदिर को 84,000 मंदिरों में से एक मानते हैं, जिनके बारे में उन अभिलेखों में कहा गया है कि इसे राजा धर्मशोक(सम्राट अशोक) ने बनवाया था आगे विवरण है की जो जम्बूद्वीप के शासक, बुद्ध के निर्वाण के दो सौ अठारह वर्ष बाद पैदा हुवे।
== पवित्र स्थल ==
[[चित्र:Cave of sone bhander.JPG|right|thumb|280px|सोन भण्डार गुफा]]
=== विष्णुपद मंदिर ===
फल्गु नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित यह मंदिर पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु के पदचिन्हों पर किया गया है। यह मंदिर 30 मीटर ऊंचा है जिसमें आठ खंभे हैं। इन खंभों पर चांदी की परतें चढ़ाई हुई है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लंबे पांव के निशान हैं। इस मंदिर का 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने नवीकरण करवाया था। पितृपक्ष के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है।
===रामानुज मठ (भोरी)===
स्वामी धरणीधराचार्य स्थापित भोरी का वैष्णव मठ वैदिक शिक्षा तथा हिन्दू आस्था का प्रमुख केन्द्र है।
===बाबा सिद्धनाथ, बराबर===
बराबर पर्वत पर सिद्ध नाथ तथा दशनाम परंपरा के नागाओं के प्रमुख आस्था का केन्द्र है सिद्धनाथ मंदिर, पास में ही नारद लोमस आदि ऋषियों की गुफायें हैं। माना जाता है कि इन गुफाओं मे प्राचीन ऋषियों ने तप किया था।
विश्व भर में बराबर की गुफाएं उन कुछ गुफाओं में एक है जिन्हे पत्थरों को प्राकृतिक रूप से तराश कर बनाया गया है। बराबर पर्वत माला लगभग 1100 फुट ऊंची है जिसे आमतौर पर मगध का हिमालय भी कहा जाता है।
इन्ही पर्वत माला के बीच बाबा सिद्धनाथ मंदिर अवस्थित है जिसे वाणेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। बाबा सिद्धनाथ मंदिर मूल रूप से सिध्देश्वर नाथ मंदिर के रूप में विख्यात है जो विश्व के प्राचीनतम शिव मंदिरों में एक है।
इस मंदिर को [[महाभारत]] काल का माना जाता है जिसके बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण महान शिव भक्त वाणासुर द्वारा कराया गया था। वाणासुर मगध के राजा जरासंध के परम मित्र थे।<ref>{{Cite web|url=https://gayajidham.com/awesome-reading/baba-sidhnath-mandir-gaya/255|title=Baba Sidhnath Mandir}}</ref>
[[जामा मस्जिद, दिल्ली]] जो दिल्ली में है, वह अलग है। बोध गया मंदिर के पीछे जाम मस्जिद नामक एक मस्जिद है , [[बिहार]] की सबसे बडी [[मस्जिद]] यही है। यह तकरीबन २०० साल पुरानी है। इसमे हजारो लोग साथ [[नमाज]] अदा कर सकते हैं।
मुख्य नगर से १० कि॰मी॰ दूर गया पटना मार्ग पर स्थित एक पवित्र धर्मिक स्थल है। यहाँ नवी सदी हिजरी में चिशती अशरफि सिलसिले के प्रख्यात सूफी सन्त हजरत मखदूम सयद दर्वेश अशरफ ने खानकाह अशरफिया की स्थापना की थी। आज भी पूरे भारत से श्रदालू यहाँ दर्शन के लिये आते है। हर साल इस्लामी मास शाबान की १० तारीख को हजरत मखदूम सयद दर्वेश अशरफ का उर्स गया जी मनाया जाता है।<ref>http://www.mdashrafbitho.faithweb.com {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190607100729/http://mdashrafbitho.faithweb.com/ |date=7 जून 2019 }} बिथो शरीफ का जालस्थल</ref>
===बानाबर (बराबर) पहाड़ ===
गया से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर बेलागंज से 10 किलोमीटर पूरब में स्थित है| इसके ऊपर भगवान शिव का मन्दिर है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालू सावन के महीने में जल चढ़ते है। कहते हैं इस मन्दिर को बानासुर ने बनवाया था। पुनः सम्राट अशोक ने मरम्मत करवाया। इसके नीचे सतघरवा की गुफा है, जो प्राचीन स्थापत्य कला का नमूना है। इसके अतिरिक्त एक मार्ग गया से लगभग 30 किमी उत्तर मखदुमपुर से भी है। इस पर जाने हेतु पातालगंगा, हथियाबोर और बावनसीढ़ी तीन मार्ग है, जो क्रमशः दक्षिण, पश्चिम और उत्तर से है, पूरब में फलगू नदी है।
और गया से लगभग 25 किलोमीटर पूरब में टनकुप्पा प्रखंड में चोवार एक गाँव है जो की गया जिले में एक अलग ही बिशेषता रखता है!इस गाँव में एक प्राचीन शिव मंदिर है जो अपने आप में ही एक बहुत बड़ी महानता रखता है!इस मंदिर में भगवान शिव को चाहे जितना भी जल क्यों नहीं चढ़ाये पर आजतक इसका पता नहीं लग पाया है!और इसी गाँव में खुदाई में बहुत ही प्राचीन अष्टधातु की मूर्तियाँ और चाँदी के बहुतें सिक्के मिले है!इस गाँव में एक ताड़ का पेड़ भी है,जो की बहुत ही अद्भुत है। इस ताड़ के पेड़ की विशेषता यह है कि इस पेड़ में तिन डाल है जो की भगवान शिव की त्रिशूल की आकार का है,ये गाँव की शोभा बढ़ाता है जी हाँ ये चोवार गाँव की विशेषता है।
===प्राचीन एबं अद्भुत शिव मंदिर (चोवार गाँव)===
चोवार गया शहर से 35 किलोमीटर पूर्व में एक गाँव है चोवार जो की अपने आप में बहुत ही अद्भुत है इस गाँव में एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर है जहा सैकड़ो श्रद्धालु बाबा बालेश्वरनाथ के ऊपर जल चढाते है पर आजतक ये जल कहाँ जाता है कुछ पता नहीं चलता है इसके पीछे के कारण किसी को नहीं पता चला। लगभग हजारो सालों से ये चमत्कार की जाँच करने आये सैकड़ो बैज्ञानिको ने भी ये दाबा किया है कि ये भगवान शिव का चमत्कार है।इसी गाँव में कुछ सालों पहले सड़क निर्माण के दौरान यहाँ एक बहुत ही बड़ा घड़ा निकला जिसमे हजारो शुद्ध चाँदी के सिक्के निकले थे।आज भी इस गाँव से अष्टधातु की अनेको मूर्तियाँ शिव मंदिर में देखने को मिलता है। .
इस गाँव में एक अद्भूत ताड़ का पेड़ भी है जो इस चोवार गाँव की शोभा बढ़ाता है।इस ताड की खास बात ये है कि ताड का पेड़ भगवान के त्रिशुल के तरह त्रिशाखायुक्त है!दूर-दूर से लोग इस पेड़ को देखने के लिये आते हैं।
यहां काफी प्राचीन एक कुआं भी है जिसमे कुछ-कुछ घंटों (समय) के बाद पानी का रंग बदलता रहता है।
कुएं का पानी का रंग भिन्न भिन्न रंगो में परिवर्तित होते रहता है।
===कोटेश्ववरनाथ ===
यह अति प्राचीन शिव मन्दिर मोरहर-दरधा नदी के संगम किनारे मेन-मंझार गाँव में स्थित है। यहाँ हर वर्ष शिवरात्रि में मेला लगता है। यहाँ पहुँचने हेतु गया से लगभग ३० किमी उत्तर पटना-गया मार्ग पर स्थित मखदुमपुर से पाईबिगहा समसारा होते हुए जाना होता है। गया से पाईबिगहा के लिये सीधी बस सेवा उपलब्ध है। पाईबिगहा से इसकी दूरी लगभग २ किमी है।गया से टिकारी होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। किवदन्ती है कि प्राचीन काल में बाण पुत्री उषा ने यह मंदिर बनवाया था।किन्तु प्राप्त लिखित इतिहास तथा पुरातात्विक विश्लेषण से ये सिद्ध है कि ६ सदी में नाथ परंपरा के ३५वे सहजयानी सिद्ध बाबा कुचिया नाथ द्वारा स्थापित मठ है।इसलिए इसे कोचामठ या बुढवा महादेव भी कहते है।माना जाता है कि मेन के पाठक बाबा तथा मंझार के रामदेव बाबू को यहाँ भगवान शिव का साक्षात्कार हुआ था।वर्तमान समय मे मठ के जीर्णोद्धार का स्वप्नादेश भगवान शिव ने उन्ही रामदेव बाबू के पुत्र भोलानाथ शर्मा जी को किया , जातिभेद के वैमनस्य से क्रंदन कर रहे क्षेत्र मे शिव जी के प्रेरणा से सांस्कृतिक साहित्यिक एकता का प्रयत्न भोलानाथ शर्मा छ्त्रवली शर्मा नित्यानन्द शर्मा आदि ने प्रारंभ किया। सांस्कृतिक एकता की यात्रा ने मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ बृहद् सांस्कृतिक केंद्र के रुप मे इसे स्थापित किया ।[[https://web.archive.org/web/20190326134929/http://www.koteshwarnathdham.org/]]
=== सूर्य मंदिर ===
{{seealso|सूर्य मंदिर, गया}}
सूर्य मंदिर प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के 20 किलोमीटर उत्तर और रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूर स्थित है। भगवान सूर्य को समर्पित यह मंदिर सोन नदी के किनारे स्थित है। दिपावली के छ: दिन बाद बिहार के लोकप्रिय पर्व छठ के अवसर पर यहां तीर्थयात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है। इस अवसर पर यहां मेला भी लगता है।
=== ब्रह्मयोनि पहाड़ी ===
[[चित्र:Gayasisa1.jpg|right|thumb|280px|ब्रह्मयोनि पर्वत]]
इस पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने के लिए ४४० सीढ़ियों को पार करना होता है। इसके शिखर पर भगवान शिव का मंदिर है। यह मंदिर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे स्थित हैं जहां पिंडदान किया जाता है। इस स्थान का उल्लेख रामायण में भी किया गया है। दंतकथाओं पर विश्वास किया जाए तो पहले फल्गु नदी इस पहाड़ी के ऊपर से बहती थी। लेकिन देवी सीता के शाप के प्रभाव से अब यह नदी पहाड़ी के नीचे से बहती है। यह पहाड़ी हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र तीर्थस्थानों में से एक है। यह मारनपुर के निकट है।
ऊपर से दृश्य बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देने वाला है और एक मनोरम दृश्य प्रदान करता है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/brahmayoni-temple|title=Destinations in Gaya - Brahmayoni Temple|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240913080406/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/brahmayoni-temple|url-status=dead}}</ref>
=== मंगला गौरी ===
पहाड पर स्थित यह मंदिर मां शक्ति को समर्पित है। यह स्थान १८ महाशक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि जो भी यहां पूजा कराते हैं उनकी मन की इच्छा पूरी होती है।
इसी मन्दिर के परिवेश में मां काली, गणेश, हनुमान तथा भगवान शिव के भी मन्दिर स्थित हैं।
15वीं सदी में बना मंगला गौरी मंदिर, देवी सती को समर्पित उन 52 महाशक्तिपीठों में गिना जाता है जहां देवी सती के शरीर के अंग गिरे थे। पहाड़ी पे विराजमान माता को परोपकार की देवी माना जाता है। वर्षा-ऋतु में हर मंगलवार को यहां एक विशेष पूजा आयोजित की जाती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|title=Mangala-Gauri|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921161716/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|url-status=dead}}</ref>
इस मंदिर का वर्णन पद्म पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण, श्री देवी भगवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है। इस मंदिर परिसर में मां काली, गणपति, भगवान शिव और हनुमान के मंदिर भी हैं। मंगला गौरी मंदिर में नवरात्र के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने हेतु आते है जो यहाँ के दृश्य को मनोरम बनाती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|title=Destinations in Gaya - Mangla Gauri|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921161716/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|url-status=dead}}</ref>
'''<big>दुन्गेश्वरी गुफा मंदिर</big>'''
गया शहर से 11 km दुर दुन्गेश्वरी के शान पहाडियों के ऊपर बना हुआ है दुन्गेश्वरी का गुफ़ा मंदिर कहते हैं बद्ध जी ने गया में ज्ञान प्राप्ति से पूर्ण यहाँ कई साल बिताये थे. इस जगह को महाकाल की गुफाए भी कहा जाता है.
<sub>'''<big>मुचालिंदा सरोवर</big>'''</sub>
बोध गया के मोचारिम इलाके में बना हुआ है मुचालिंदा सरोवर, जिसका काफी पौराणिक महत्ब है. यहाँ पर सर्वर के बीचो बीच एक बद्ध जी की मूर्ति है. जिसको नाग के प्रतिमा ने ढका हुआ है. कहते है बद्ध जी को तूफ़ान से नाग देवता मुचालिंदा ने बचाया था जिसको ये प्रतिमा रुपान्द्रित करती है.
मुचलिंदा सरोवर, बोध गया में स्थित सबसे पावन जगहों में से एक है। यह वो स्थान जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद लगातार छठा सप्ताह ध्यान में बिताया था।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/muchalinda-sarovar|title=Destinations in Gaya - Muchalinda Sarovar|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213231621/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/muchalinda-sarovar|url-status=dead}}</ref>
'''<big>शाही भूटान मठ</big>'''
शाही भूटान मठ गया में बना एक बौद्ध मठ है. इस मठ का नाम भूटान मठ इसीलिए पड़ा क्युकि इसे भूटान के राजा ने बनवाया था. इस बौद्ध मठ के अन्दर दीवारों पर की गयी कलाकृतिया देखने लायक है. जिसके द्वारा बौद्ध धर्म के बारे में दर्शाया गया है.<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/life-and-style/travel/gaya-tourist-places-if-you-come-to-gaya-for-pind-daan-then-definitely-visit-these-places-pitru-paksha-2023-wat-thai-mahabodhi-temple-great-buddha-statue-sry|title=अगर पिंडदान के लिए गया आएं तो जरूर जाएं इन जगहों पर|work=प्रभात खबर|access-date=30 अप्रैल 2024}}</ref>
=== बराबर गुफा ===
यह गुफा गया से 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस गुफा तक पहुंचने के लिए 7 किलोमीटर पैदल और 10 किलोमीटर रिक्शा या तांगा से चलना होता है। यह गुफा बौद्ध धर्म के लिए महत्वपूर्ण है। यह बराबर और नागार्जुनी शृंखला के पहाड़ पर स्थित है। इस गुफा का निर्माण बराबर और नागार्जुनी पहाड़ी के बीच [[सम्राट अशोक]] और उनके पोते दशरथ के द्वारा की गई है। इस गुफा उल्लेख ई॰एम. फोस्टर की किताब 'ए पैसेज टू इंडिया' में भी किया गया है। इन गुफओं में से 7 गुफाएं भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरख में है।<ref>[https://www.outlooktraveller.com/experiences/heritage/lost-in-time-unveiling-the-ancient-barabar-caves-near-bodh-gaya?utm_source=pocket-newtab-en-intl Lost In Time: Unveiling The Ancient Barabar Caves Near Bodh Gaya]</ref>
जहानाबाद जिले में ये गुफाएं स्थित है और चट्टानों को काटकर बनायीं गयी सबसे पुराणी गुफाएं हैं। इनमें से अधिकाँश गुफाओं का सम्बन्ध मौर्या काल (३२२-१८५ ईसा पूर्व ) से है और कुछ में अशोक के शिलालेखों को देखा जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/jehanabad/barabar-caves|title=Barabar-Caves|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921162035/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/jehanabad/barabar-caves|url-status=dead}}</ref>
=== देवी मंदिर नेयाजीपुर, गया बिहार ===
नेयाजीपुर विख्यात शिक्षाविद् स्व. भवानी प्रसाद सिंह ,(उच्च विद्यालय सरता के संस्थापक प्रधानाचार्य) का गाँव है जो बहुत ही प्राचीन है। यह प्रेतशीला पर्वत की तलहट्टी में बसा है। नेयाजीपुर देवी मन्दिर का निर्माण प्राचीन काल में हुआ था। इसका निर्माण नियाजीपुर गया के मूल निवासी वत्स गोत्रीय सोनभद्रीय भूमिहार ब्राह्मणों द्वारा किया गया था। बाद में इसका पुनरुद्धार श्री राजदेव सिंह ने किया। उसके बाद कालान्तर में पुनः जीर्ण हो चुके देवी मन्दिर का जीर्णोद्धार वर्ष 2008 ई. में नेयाजीपुर निवासी भूमिहार ब्राह्मणों के सक्रिय सहयोग से संभव हुआ जिसमें देवी मन्दिर को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान किया गया।
इसका उद्घाटन एक बहुत बड़े यज्ञ से हुआ था| इस समय मंदिर की देखभाल ग्रामीणों की समिति के द्वारा की जाती है। इस मंदिर के परिसर में नियमित अन्तराल पर यज्ञानुष्ठान सम्पन्न होते रहता है। इस देवी मन्दिर में दिव्य और अलौकिक शक्ति बतायी जाती है। यहाँ श्रद्बालुओं की शुद्ध भाव से माँगी गयी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मन्दिर एक बड़े तालाब के किनारे गाँव के पूर्वी भाग में स्थित है जो इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देता है। सामान्य तौर पर इस प्रकार का तालाब भूमिहार ब्राह्मणों के गाँवों में भूमि अग्रहार का हिस्सा होता है।
=== बाबा जमुनेश्वर धाम ===
गया शहर से पास में ही दक्षिण बिहार विश्वविद्यालय के जाने वाली रोड SH 79 के पास में ही जमुने बसा हुआ है। यह पवित्र जमूने नदी के तट पर बसा हुआ है। यहां पर काफी पुराना शिव मंदिर हैं जो कहा जाता है की टेकारी नरेश गोपाल सरण के द्वारा निर्माण करवाया गया था। स्थानीय लोगो का मानना है की बाबा जमुनेश्वर का महिमा बहुत ही अपार है। महाशिवरात्रि और श्रवण में यह श्रद्धालु की काफी भीड़ जुटती है। पास में ही सूर्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है,जहा एक धाम बन गया है विवाह के लगन के समय यह विवाह और कार्यक्रम करने वालो को बहुत भीड़ होती है। छठ पूजा पर आप यहां अपने परिवार के साथ यहां के घाट पर जरूर पधारे आपको एक अपनापन का एहसास दिलाएगा बाबा जमुनेश्वर का ये धाम।
=== सूर्य मंदिर कुजापी ===
गया शहर में गया जंक्शन से पश्चिमी ओर करीब 3 किमी दूर कुजापी गांव में एक खूबसूरत और विशाल सूर्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कार्य सन 2012 ईस्वी में पूरा हुआ एवं इस मंदिर का उद्घाटन सन 2013 ईस्वी में एक विशाल महायज्ञ से हुआ जिसमें लगभग 4000 श्रद्धालु भक्तजनों ने कलश यात्रा में भाग लिया था। इस मंदिर का निर्माण कुजापी के तत्कालीन मुखिया श्री अभय कुशवाहा के द्वारा करवाया गया था जोकि टिकारी विधानसभा से विधायक भी रह चुके हैं।
इस मंदिर के ठीक सामने कृष्ण मंदिर है। इस मंदिर परिसर में एक विशाल सरोवर, मुंद्रा सरोवर का निर्माण करवाया गया है जिसमें प्रति वर्ष छठ के दिन श्रद्धालु भक्तजन अर्ध देते हैं।
=== ऐतिहासिक गांव ढीबर===
गया-रजौली रोड पर गया से 20 किमी दूर ढीबर नामक गांव है| यहां के गढ़ पे हजारो साल पुराना भगवान बुद्ध की अनेक मूर्तियाँ हैं|ये मूर्तियां खंडित हैं| यहां एक बहुत पुराना देवी मंदिर भी है यह मंदिर किसने और कब बनवाया यह कोई नहीं जानता | यहां बांसी नाला हॉल्ट नाम का एक रेलवे स्टेशन भी है जो यात्रा को आसान और तेज़ बनाता है।
===सूर्य मंदिर (पाई बिगहा)===
मखदुमपुर से ६ किमी दूर स्थित पाईबिगहा मोरहर किनारे बसा टिकारी राज्य का प्रमुख बाजार रहा है, हैमिल्टन बुचनन को यहाँ ई. पू. प्रथम सदी के प्राचीन शिव मंदिर के जीर्ण अवशेष मिले थे , बाजार के बीचोबीच उसी स्थान पर नया महादेव स्थान स्थापित है। पाईबिगहा मंझार रोड पर स्थित है एक प्राचीन सूर्य मंदिर जो जन आस्था का केन्द्र है।प्रति वर्ष छठपूजा मे मंदिर प्रांगण मे बडा मेला लगता है।दूर दूर से आकर लोग यहाँ छ्ठ पर्व मनाते हैं।माई जी नाम से सुविख्यत महिला भगवान् सूर्य की प्रमुख भक्त थी जिनके विषय मे कहा जाता है कि उन्हें इसी मंदिर प्रांगण में नारायण रुप मे सूर्य देव ने दर्शन दिया था।
===संत कारुदास मंदिर (कोरमत्थू)===
एक प्रसिद्ध कहावत है गया के राह कोरमत्थू। जी वही कोरमत्थु जहाँ जमुने किनारे भगवान राम ने गया जाते समय विश्राम किया था तथा एक शिवलिंग स्थापित की थी। वही शिवलिंग जिसकी खोज मे सिद्ध संप्रदाय के बाबा कारुदास हिमालय छोड कोरमत्थु के चैत्यवन आ पहुंचे। यहाँ प्राचीन शिवलिंग ठाकुरबाडी तथा कारूदास जी का मंदिर है। गया त्रिवेणी अखाडा से कोरमत्थु के लिए सीधी बस सेवा है । यहाँ से मंझार होते हुए बाबा कोटेश्वर नाथ धाम भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।
===माँ तारा मंदिर, केसपा===
प्राचीन इतिहास मे मगध मे प्रमुख रूप से चैत्य वन तथा सिद्ध वन दो प्रमुख क्षेत्र थे। चैत्य वन मे मोरहर तथा पुनपुन का क्षेत्र केसपा कहा जाता था । पूर्व में माँ तारा के मंदिर के समीप से पुनपुन का प्रवाह था , तथा मंझार के पूर्व से मोरहर का । अर्थात मंझार से लेकर केसपा तक का संपूर्ण क्षेत्र केसपा के नाम से जाना जाता था। इस चैत्य वन के काश्यलपा क्षेत्र में मेन मंझार का क्षेत्र मंदार वन के नाम से जाना जाता था जहाँ कुचियानाथ का मठ था। कुचिया नाथ से भी बहुत पहले गया कश्यप नाम के बौद्ध संत का मठ था माँ तारा पीठ। बुचनन ने इसे बौद्ध - हिन्दु दोनो संप्रदायों का प्रमुख स्थान माना है।[[https://www.google.com/search?ei=VCJlXaTsLYeb9QO8n5wY&q=maa+tara+kespa&oq=maa+tara+kespa&gs_l=mobile-gws-wiz-serp.3..0i22i30l2j0i22i10i30j0i22i30j33i160.4161.12863..13676...5.0..3.346.6593.0j8j19j1......0....1.......8..35i39i19j35i39j46i39i19j46j0j0i131j0i67j46i67j46i2i203i275j0i2i203j0i10i2i203j0i13j0i13i30.cyGkRrUHx1k#trex=m_t:lcl_akp,rc_f:nav,rc_ludocids:17683707207999465324,rc_q:Maa%2520Tara%2520Temple,ru_q:Maa%2520Tara%2520Temple]]
'''गया जिला''' मुख्यालय से लगभग 38 किमी और टिकारी से 13 किमी. उतर अवस्थित '''केसपा गांव''' में प्रसिद्ध '''मां तारा देवी का मंदिर''' स्थित है। यों तो यहाँ पूजा-अर्चना करने भक्तजन वर्ष भर आते हैं। परंतु आश्विन माह में शारदीय नवरात्र में '''मां तारा देवी''' की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।<ref>{{Cite web|url=https://gayamahanagar.com/maa-tara-devi-kespa-bihar/#google_vignette|title=Maa Tara Devi - Kespa -Bihar}}</ref>
===दुर्लभ पीपल वृक्ष ( मेन-मंझार)===
कोटेश्वरनाथ मंदिर से ३०० मीटर उत्तर में दुर्लभ प्रजाति का पीपल वृक्ष है।दूर देश से वैज्ञानिक इस पर शोध करने आते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह कौतुक का विषय है क्योंकि वृक्ष की सभी शाखाएँ दक्षिण के तरफ उपर से नीचे आ जमीन को छूती हैं (मानो भगवान शिव को प्रणाम कर रही हों )फिर ऊपर जाती है।
===बोधगया===
[[बोधगया]] बौद्ध धर्म की राजधानी है।जिस पीपल वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध सिद्धर्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ था वो बोधिवृक्ष बौद्ध आस्था का केन्द्र है।
===माँ काली मंदिर (बेलागंज)===
गुप्तकालीन काली मंदिर मगध क्षेत्र मे शाक्त परंपरा का प्रमुख धरोहर है।
===प्राचीन विष्णु मंदिर (घेजन)===
पाई बिगहा से २ किमी पश्चिम घेजन प्रमुख पुरातात्विक रुचि का केन्द्र है।यहाँ से प्राप्त भगवान् बुद्ध की २५० ई पू की भगवान् बुद्ध तथा भगवान विष्णु की प्रतिमा पटना संग्रहालय मे सुरक्षित है।यहाँ का मंदिर अति प्राचीन है, बेलगार ने इसे गुप्त कालीन बताया है।
===कोचेश्वरनाथ===
कोच स्थित कोचेश्वरनाथ मठ अति प्राचीन शैव आस्था का केंद्र है।[[https://web.archive.org/web/20141224180957/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/t/019pho000001003u00079000.html]]
===खेतेश्वर महादेव (मेन)===
मेन मंझार शैव परंपरा का जागृत स्थान है जहाँ प्रतिवर्ष छोटे बडे एक या एक से अधिक शिवलिंग स्वयम् प्रकट हो ही जाते हैं।इस पूरे क्षेत्र में छोटे बडे १२७ शिवलिंग हैं जो स्वयं प्रकट हुए हैं , जिनमें ११ प्रमुख हैं। इन ११ में कोटेश्वरनाथ खेतेश्वर महादेव तथा गौरी शंकर तीन अति प्रमुख हैं। खेतेश्वर महादेव मोरहर नदी के उफान और बाढ मे भी नही डूबता जबकि ये न तो ऊँचाई पर स्थित है न हीं इनका आकार बहुत बडा है। आस पास के सभी ऊँचे टीले डूब जाते हैं पर उन सब से काफी कम ऊँचाई का यह स्वयंभू शिवलिंग कभी नही डूबता।
===अक्षय वट===
प्रसिद्ध अक्षय वट विष्णु पाद मंदिर के पास के क्षेत्र में स्थित है। अक्षय वट को सीता देवी ने अमर होने का वरदान दिया था और कभी भी किसी भी मौसम में इसके पत्तों को नहीं बहाया जाता है।
===रामशिला पहाडी===
गया के दक्षिण-पूर्व की ओर स्थित रामशिला हिल को सबसे पवित्र स्थान माना जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि भगवान राम ने पहाड़ी पर ’पिंडा’ की पेशकश की थी।पहाड़ी का नाम भगवान राम से जुड़ा है। प्राचीन काल से संबंधित कई पत्थर की मूर्तियां पहाड़ी के आसपास और आसपास के स्थानों पर देखी जा सकती हैं, जो कि बहुत पहले के समय से कुछ पूर्व संरचनाओं या मंदिरों के अस्तित्व का सुझाव देती हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर जिसे रामेश्वरा या पातालेश्वर मंदिर कहा जाता है, मूल रूप से 1014 A.D में बनाया गया था, लेकिन सफल अवधि में कई बहाली और मरम्मत से गुजरा।मंदिर के सामने हिंदू भक्तों द्वारा अपने पूर्वजों के लिए पितृपक्ष के दौरान "पिंड" चढ़ाया जाता है।
===प्रेतशिला पहाडी===
रामशिला पहाड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी के नीचे ब्रह्म कुंड स्थित है।इस तालाब में स्नान करने के बाद लोग 'पिंड दान' के लिए जाते हैं।पहाड़ी की चोटी पर, इंदौर की रानी, अहिल्या बाई, ने 1787 में एक मंदिर बनाया था जिसे अहिल्या बाई मंदिर के नाम से जाना जाता था।यह मंदिर हमेशा अपनी अनूठी वास्तुकला और शानदार मूर्तियों के कारण पर्यटकों के लिए एक आकर्षण रहा है।
यह हिंदुओं के लिए एक सम्मानित स्थान है जहां वे पिंड दान (दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए किया जाने वाला एक धार्मिक अनुष्ठान) करते हैं। यह सदियों से चली आ रही एक परंपरा है और लोगों का मानना है की इस जगह पे पूजा करने के बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/pretshila|title=Destinations in Gaya - PretShila|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213215342/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/pretshila|url-status=dead}}</ref>
===सीताकुंड===
विष्णु पद मंदिर के विपरीत तरफ, सीता कुंड फल्गु नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है।उस स्थान को दर्शाते हुए एक छोटा सा मंदिर है जहाँ माता सीता ने अपने ससुर के लिए पिंडदान किया था।
सीता कुण्ड रामायण काल से जुड़ा है, और ऐसा मन जाता है की सीता माता ने अपने ससुर दशरथ जी का पिंड दान किया था। सीता कुण्ड एक छोटा सा मंदिर है जो विष्णुपद मंदिर से ठीक विपरीत दिशा में फल्गु नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/sita-kund|title=Destinations in Gaya - Sita Kund|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213224013/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/sita-kund|url-status=dead}}</ref>
===डूंगेश्वरी मंदिर / डुंगेश्वरी हिल===
माना जाता है कि गौतम सिद्धार्थ ने अंतिम आराधना के लिए बोधगया जाने से पहले 6 साल तक इस स्थान पर ध्यान किया था।बुद्ध के इस चरण को मनाने के लिए दो छोटे मंदिर बनाए गए हैं।कठोर तपस्या को याद करते हुए एक स्वर्ण क्षीण बुद्ध मूर्तिकला गुफा मंदिरों में से एक में और एक बड़ी (लगभग 6 'ऊंची) बुद्ध की प्रतिमा दूसरे में विहित है। गुफा मंदिर के अंदर एक हिंदू देवी देवता डुंगेश्वरी को भी रखा गया है।
===थाई मठ, बोधगया===
थाई मोनास्ट्री बोधगया का सबसे पुराना विदेशी मठ है।जो कि सजावटी रीगल थाई स्थापत्य शैली में निर्मित है।बाहरी और साथ ही आंतरिक की भव्यता बेहद विस्मयकारी है। मंदिर सामने आँगन में एक शांत पूल के ऊपर लाल और सुनहरे मणि की तरह दिखाई देता है।बुद्ध के जीवन को दर्शाती भित्ति चित्रों के साथ शानदार बुद्ध की मूर्ति और कुछ आधुनिक घटनाओं जैसे कि शैली में चित्रित पेड़ लगाने का महत्व पूरी तरह से अद्भुत है।यह बोधगया में महाबोधि मंदिर के बगल में स्थित है।घूमने का समय: सुबह 7:00 से दोपहर 12:00, दोपहर 02:00 से शाम 06:00 तक।
===धर्म चक्र===
200 क्विंटल लोहे से बना धर्म चक्र पर्यटको में चर्चा का विषय रहा है।कहा जाता है कि इस चक्र को घुमाने पर पापो से मुक्ती मिल जाती है।
'''गुरपासिनी'''
यह गया शहर से लगभग 40 किलोमीटर के दूरी पर है। यह भगवान विष्णु के चरण चिन्ह देखने को मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु वामनावतार में धरती की नाप कर रहे थे तब उनका एक पैर यहां स्थित पहाड़ी पर पड़ी थी । यहां भी लोग बहुत दूर से दर्शन करने के लिए आते है। यहां सावन मास में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। यहां नजदीक में गुरपा स्टेशन है। यहां का नजारा देखने बनता है।<ref name=":0" />
== जनसंख्या ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या:<ref>{{Cite web|url=http://gov.bih.nic.in/Profile/Districts/Gaya.htm|title=Bihar Districts: Gaya|website=gov.bih.nic.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190226074441/http://gov.bih.nic.in/Profile/Districts/Gaya.htm|archive-date=26 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref>
* शहरी क्षेत्र:- 3863888
* देहाती क्षेत्र:- 575495
* कुल:- 4379383
== गम्यता ==
=== हवाई मार्ग ===
बिहार एवं झारखण्ड के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा, [[गया विमानक्षेत्र]], है। अब झारखंड[देवघर] में भी हवाईअड्डा बन गया है।
=== रेल मार्ग ===
[[गया जन्कशन]] [[बिहार]] का दूसरा बड़ा [[रेलस्टेशन]] है। यह एक विशाल परिसर में स्थित है। इसमे ९ प्लेटफार्म है।
गया से [[पटना]], रांची,[[कोलकाता|धनबाद,कोलकाता]], [[पुरी]], [[बनारस]], [[चेन्नई]], [[मुम्बई]], [[नई दिल्ली]], [[नागपुर]], [[गुवाहाटी]], जयपुर, अजमेरशरीफ, हरिद्वार, ऋषिकेश, जम्मू-तवी आदि के लिए सीधी ट्रेनें है।
=== सड़क मार्ग ===
गया राजधानी पटना और राजगीर, रांची, धनबाद,बनारस आदि के लिए बसें जाती हैं। गया में दो बस स्टैंड हैं। दोनों स्टैंड फल्गु नदी के तट पर स्थित है। गांधी मैदान बस स्टैंड नदी के पश्चिमी किनार पर स्थित है। यहां से बोधगया के लिए नियमित तौर पर बसें जाती हैं।
== इंजीनियरिंग कॉलेज ==
* [[गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, गया]]
* [[बुद्धा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फल्गू नदी]]
* [[बोधगया]]
* [[गया विमानक्षेत्र]]
* [[गया ज़िला]]
* [[श्राद्ध]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20160418152222/http://www.pinddaangaya.in/hindi%20version%20website/index.php?pg=home पितृपक्ष] (गया एवं अन्य धार्मिक स्थलों के बारे में)
*[https://web.archive.org/web/20160420054224/http://bharatparytan.blogspot.in/2013/12/blog-post_19.html सोन भण्डार गुफा, राजगीर]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{गया जिला के प्रखण्ड}}
{{बिहार}}
[[श्रेणी:गया जिला]]
[[श्रेणी:बिहार के शहर]]
[[श्रेणी:गया ज़िले के नगर]]
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[[श्रेणी:बिहार में पर्यटन आकर्षण]]
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[[Special:Contributions/~2026-23738-02|~2026-23738-02]] ([[User talk:~2026-23738-02|talk]]) के संपादनों को हटाकर The Sorter (6541523) के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया: पूर्ण रूप से बकवास सामग्री।
6531696
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[[चित्र:Mahabodhitemple.jpg|right|thumb|280px|बोधगया का महाबोधि मन्दिर]]
'''गया''' (Gaya) [[भारत]] के [[बिहार]] राज्य में स्थित एक नगर है। यह ज़िला मुख्यालय और बिहार राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। [[मगही]] भाषा यहां की क्षेत्रीय भाषा है। भारत के महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थलों मे से गया भी एक है, इसलिए यहां लाखों की संख्या में देशी/विदेशी पर्यटक आते रहते हैं। [[हिन्दू धर्म|हिन्दू]], [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] और [[जैन धर्म|जैन]], तीनों धर्मों में इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है, जिसका उल्लेख [[रामायण]] और [[महाभारत]] में मिलता है। गया तीन ओर से छोटी व पथरीली पहाड़ियों से घिरा है, जिनके नाम रामशिला, प्रेतशिला और ब्रह्मयोनि हैं। नगर के पूर्व में [[फल्गू नदी]] बहती है।<ref name=":0">"[https://books.google.com/books?id=dSZ987-0Fb8C Bihar Tourism: Retrospect and Prospect]," Udai Prakash Sinha and Swargesh Kumar, Concept Publishing Company, 2012, ISBN 9788180697999</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=MMmNVZ4mP98C Revenue Administration in India: A Case Study of Bihar]," G. P. Singh, Mittal Publications, 1993, ISBN 9788170993810</ref>
== विवरण ==
वैदिक काल से धर्मारण्य क्षेत्र मे स्थापित नगरी है गया। [[वाराणसी]] की तरह गया की प्रसिद्धि मुख्य रूप से एक धार्मिक नगरी के रूप में है। [[पितृपक्ष]] के अवसर पर यहाँ लाखों श्रद्धालु [[पिंडदान]] के लिये जुटते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-9631.html|title=पितरों के लिए गया|website=Dainik Jagran|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302090528/https://www.jagran.com/spiritual/mukhye-dharmik-sthal-9631.html|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://m.bhaskar.com/article/religion-badikhabarein/8127/t/5249/DHA-DAR-pitra-paksha-2014-these-are-famous-8-pilgrimage-to-the-memorial-service-their-in-4741669-PHO.html?pg=2 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141208154101/http://m.bhaskar.com/article/religion-badikhabarein/8127/t/5249/DHA-DAR-pitra-paksha-2014-these-are-famous-8-pilgrimage-to-the-memorial-service-their-in-4741669-PHO.html?pg=2 |archive-date=8 दिसंबर 2014 |url-status=dead }}</ref> गया सड़क, रेल और वायु मार्ग द्वारा पूरे भारत से जुड़ा है। नवनिर्मित [[गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा]] द्वारा यह [[थाइलैंड]] और श्रीलंका से भी सीधे जुड़ा हुआ है। गया से 13 किलोमीटर की दूरी पर [[बोधगया]] स्थित है जो [[बौद्ध]] तीर्थ स्थल है, जहां पीपल के वृक्ष के नीचे [[गौतम बुद्ध|भगवान बुद्ध]] को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। उस वृक्ष को [[बोधि वृक्ष]] कहा जाता है
गया बिहार के महत्वपूर्ण तीर्थस्थानों में से एक है।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.mapsofindia.com/bihar/travel/|title=बिहार की यात्रा का नक्शा | बिहार की यात्रा - पर्यटन, गंतव्य, होटल, परिवहन|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302090642/https://hindi.mapsofindia.com/bihar/travel/|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=dead}}</ref> यह शहर खासकर [[हिन्दू]] तीर्थयात्रियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां का विष्णुपद मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।<ref>{{Cite web|url=http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2012/gaya/gaya.htm|title=सुबोध कुमार नंदन का आलेख- महातीर्थ गया|website=www.abhivyakti-hindi.org|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190311204256/http://www.abhivyakti-hindi.org/paryatan/2012/gaya/gaya.htm|archive-date=11 मार्च 2019|url-status=dead}}</ref> पुराणों के अनुसार यहां धर्मशिला पर श्री हरि [[विष्णु]] का चरण कमल अंकित है, जिसके परिसर में इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। हिन्दू धर्म में इस मंदिर को अतिमहत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। गया पितृदान के लिए भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करने से मृत व्यक्ति को बैकुण्ठ की प्राप्ति होती है।
गया, मध्य बिहार का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो फल्गु नदी के तट पर स्थित है। यह बोधगया से 13 किलोमीटर उत्तर तथा राजधानी [[पटना]] से 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहां का मौसम मिलाजुला है। गर्मी के दिनों में यहां काफी गर्मी पड़ती है और ठंड के दिनों में औसत सर्दी होती है। मानसून का भी यहां के मौसम पर व्यापक असर होता है। लेकिन वर्षा ऋतु में यहां का दृश्य काफी रोचक होता है।
कहा जाता है कि [[गयासुर]] नामक दैत्य जो की श्री हरी विष्णु का परम भक्त था, उसने अपनी तपस्या से नारायण को प्रसन्न किया। जिससे भगवान ने उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा। परन्तु उन्होंने स्वयं के लिए कुछ ना मांगकर यह मांगा कि मेरे दर्शन से प्राणियों के पाप नष्ट हो जाएं और उन्हें वैकुंठ प्राप्त हो। इस वरदान के पश्चात पापियों को भी स्वर्ग की प्राप्ति होने लगी और ब्रम्हा की व्यवस्था बिगड़ने लगी। जिसके बाद भगवान विष्णु ने यज्ञ अनुष्ठान के लिए गयासुर का शरीर मांगा। धर्म कार्य के लिए गयासुर ने अपना शरीर तो समर्पित कर दिया परन्तु उसके शरीर में कम्पन के कारण यज्ञ कार्य में विघ्न उत्पन्न हो रहा था। तब उसके शरीर को स्थिर करने के लिए श्री हरि विष्णु ने अपना एक पैर उसके वक्षस्थल पर स्थापित किया। मान्यता है कि वही चरण कमल आज विष्णुपद वेदी के रूप में यहां उपलब्ध है। मुक्तिधाम के रूप में प्रसिद्ध गया (तीर्थ) को केवल गया न कह कर आदरपूर्वक 'गया जी' कहा जाता है।
== इतिहास ==
गया का उल्लेख महाकाव्य [[रामायण]] में भी मिलता है। गया [[मौर्य राजवंश|मौर्य काल]] में एक महत्वपूर्ण नगर था। खुदाई के दौरान [[सम्राट अशोक]] से संबंधित आदेश पत्र पाया गया है। मध्यकाल में बिहार मुगल सम्राटों के अधीन था।मुगलकाल के पतन के उपरांत गया पर अंग्रेजो ने राज किया। सन् 1787 ईस्वी में बुंदेलखंड के होल्कर वंश की महारानी [[अहिल्याबाई होल्कर|अहिल्याबाई]] ने विष्णुपद मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था। मेगास्थनीज़ की इण्डिका, फाह्यान तथा ह्वेनसांग के यात्रा वर्णन में गया का एक समृद्ध धर्म क्षेत्र के रूप मे वर्णन है। करीब ५०० ई॰पू. में [[गौतम बुद्ध]] फल्गु नदी के पश्चिमी तट अवस्थित [[बोधि वृक्ष|बोधि पेड़]] के नीचे तपस्या करने बैठे। तीन दिन और रात के तपस्या के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिस्के बाद से वे बुद्ध के नाम से जाने गए। इसके बाद उन्होंने वहां ७ हफ्ते अलग अलग जगहों पर ध्यान करते हुए बिताया और फिर [[सारनाथ]] जा कर धर्म का प्रचार शुरू किया। बुद्ध के अनुयायिओं ने बाद में उस जगह पर जाना शुरू किया जहां बुद्ध ने वैशाख महीने में पुर्णिमा के दिन ज्ञान की प्रप्ति की थी। धीरे धीरे ये जगह बोध्गया के नाम से जाना गया और ये दिन बुद्ध पुर्णिमा के नाम से जाना गया।
लगभग 528 ई॰ पू. के वैशाख (अप्रैल-मई) महीने में कपिलवस्तु के राजकुमार गौतम ने सत्य की खोज में घर त्याग दिया। गौतम ज्ञान की खोज में निरंजना नदी के तट पर बसे एक छोटे से गांव उरुवेला आ गए। वह इसी गांव में एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान साधना करने लगे। एक दिन वह ध्यान में लीन थे कि गांव की ही एक लड़की सुजाता उनके लिए एक कटोरा खीर तथा शहद लेकर आई। इस भोजन को करने के बाद गौतम पुन: ध्यान में लीन हो गए। इसके कुछ दिनों बाद ही उनके अज्ञान का बादल छट गया और उन्हें ज्ञान की प्राप्ित हुई। अब वह राजकुमार सिद्धार्थ या तपस्वी गौतम नहीं थे बल्कि बुद्ध थे। बुद्ध जिसे सारी दुनिया को ज्ञान प्रदान करना था। ज्ञान प्राप्ित के बाद वे अगले सात सप्ताह तक उरुवेला के नजदीक ही रहे और चिंतन मनन किया। इसके बाद बुद्ध वाराणसी के निकट सारनाथ गए जहां उन्होंने अपने ज्ञान प्राप्ित की घोषणा की। बुद्ध कुछ महीने बाद उरुवेला लौट गए। यहां उनके पांच मित्र अपने अनुयायियों के साथ उनसे मिलने आए और उनसे दीक्षित होने की प्रार्थना की। इन लोगों को दीक्षित करने के बाद बुद्ध राजगीर चले गए। इसके बुद्ध के उरुवेला वापस लौटने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है। दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बाद उरुवेला का नाम इतिहास के पन्नों में खो जाता है। इसके बाद यह गांव सम्बोधि, वैजरसना या महाबोधि नामों से जाना जाने लगा। बोधगया शब्द का उल्लेख 18 वीं शताब्दी से मिलने लगता है।
विश्वास किया जाता है कि महाबोधि मंदिर में स्थापित बुद्ध की मूर्त्ति संबंध स्वयं बुद्ध से है। कहा जाता है कि जब इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा था तो इसमें बुद्ध की एक मूर्त्ति स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया था। लेकिन लंबे समय तक किसी ऐसे शिल्पकार को खोजा नहीं जा सका जो बुद्ध की आकर्षक मूर्त्ति बना सके। सहसा एक दिन एक व्यक्ित आया और उसे मूर्त्ति बनाने की इच्छा जाहिर की। लेकिन इसके लिए उसने कुछ शर्त्तें भी रखीं। उसकी शर्त्त थी कि उसे पत्थर का एक स्तम्भ तथा एक लैम्प दिया जाए। उसकी एक और शर्त्त यह भी थी इसके लिए उसे छ: महीने का समय दिया जाए तथा समय से पहले कोई मंदिर का दरवाजा न खोले। सभी शर्त्तें मान ली गई लेकिन व्यग्र गांववासियों ने तय समय से चार दिन पहले ही मंदिर के दरवाजे को खोल दिया। मंदिर के अंदर एक बहुत ही सुंदर मूर्त्ति थी जिसका हर अंग आकर्षक था सिवाय छाती के। मूर्त्ति का छाती वाला भाग अभी पूर्ण रूप से तराशा नहीं गया था। कुछ समय बाद एक बौद्ध भिक्षु मंदिर के अंदर रहने लगा। एक बार बुद्ध उसके सपने में आए और बोले कि उन्होंने ही मूर्त्ति का निर्माण किया था। बुद्ध की यह मूर्त्ति बौद्ध जगत में सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्राप्त मूर्त्ति है। नालन्दा और विक्रमशिला के मंदिरों में भी इसी मूर्त्ति की प्रतिकृति को स्थापित किया गया है।
बोधगया को बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। बुद्ध के समय में इसे उरुवेला के नाम से जाना जाता था, यह [[लीलाजन नदी]] के किनारे स्थित है। इस स्थल पर पहला मंदिर [[मौर्य साम्राज्य|मौर्य]] [[मौर्य राजाओं की सूची|सम्राट]] [[अशोक]] द्वारा बनवाया गया था।
महाबोधि विहार बोधगया (उरुवेला) में उस स्थान पर मुख्य बौद्ध मंदिर को संदर्भित करता है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। विहार में प्रसिद्ध बोधि वृक्ष (फ़िकस रिलिजियोसा या पीपल का पेड़) और वज्रासन (हीरा सिंहासन) शामिल हैं। मूल मंदिर तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट अशोक द्वारा निर्मित रेलिंग वाले वृक्ष मंदिर (बोधि-घर) के रूप में मौजूद था। इसका सबसे पहला चित्रण भरहुत और साँची स्तूप की नक्काशियों पर मिलता है। सम्राट अशोक ने ध्यान आसन के सटीक स्थान को चिह्नित करने के लिए तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में यहां रेलिंग के साथ एक लाल बलुआ पत्थर की संरचना बनवाई थी। बोधगया में पाए गए चीनी और बर्मी शिलालेख स्पष्ट रूप से बुद्धगया मंदिर को 84,000 मंदिरों में से एक मानते हैं, जिनके बारे में उन अभिलेखों में कहा गया है कि इसे राजा धर्मशोक(सम्राट अशोक) ने बनवाया था आगे विवरण है की जो जम्बूद्वीप के शासक, बुद्ध के निर्वाण के दो सौ अठारह वर्ष बाद पैदा हुवे।
== पवित्र स्थल ==
[[चित्र:Cave of sone bhander.JPG|right|thumb|280px|सोन भण्डार गुफा]]
=== विष्णुपद मंदिर ===
फल्गु नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित यह मंदिर पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भगवान विष्णु के पदचिन्हों पर किया गया है। यह मंदिर 30 मीटर ऊंचा है जिसमें आठ खंभे हैं। इन खंभों पर चांदी की परतें चढ़ाई हुई है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के 40 सेंटीमीटर लंबे पांव के निशान हैं। इस मंदिर का 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई ने नवीकरण करवाया था। पितृपक्ष के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है।
===रामानुज मठ (भोरी)===
स्वामी धरणीधराचार्य स्थापित भोरी का वैष्णव मठ वैदिक शिक्षा तथा हिन्दू आस्था का प्रमुख केन्द्र है।
===बाबा सिद्धनाथ, बराबर===
बराबर पर्वत पर सिद्ध नाथ तथा दशनाम परंपरा के नागाओं के प्रमुख आस्था का केन्द्र है सिद्धनाथ मंदिर, पास में ही नारद लोमस आदि ऋषियों की गुफायें हैं। माना जाता है कि इन गुफाओं मे प्राचीन ऋषियों ने तप किया था।
विश्व भर में बराबर की गुफाएं उन कुछ गुफाओं में एक है जिन्हे पत्थरों को प्राकृतिक रूप से तराश कर बनाया गया है। बराबर पर्वत माला लगभग 1100 फुट ऊंची है जिसे आमतौर पर मगध का हिमालय भी कहा जाता है।
इन्ही पर्वत माला के बीच बाबा सिद्धनाथ मंदिर अवस्थित है जिसे वाणेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। बाबा सिद्धनाथ मंदिर मूल रूप से सिध्देश्वर नाथ मंदिर के रूप में विख्यात है जो विश्व के प्राचीनतम शिव मंदिरों में एक है।
इस मंदिर को [[महाभारत]] काल का माना जाता है जिसके बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण महान शिव भक्त वाणासुर द्वारा कराया गया था। वाणासुर मगध के राजा जरासंध के परम मित्र थे।<ref>{{Cite web|url=https://gayajidham.com/awesome-reading/baba-sidhnath-mandir-gaya/255|title=Baba Sidhnath Mandir}}</ref>
[[जामा मस्जिद, दिल्ली]] जो दिल्ली में है, वह अलग है। बोध गया मंदिर के पीछे जाम मस्जिद नामक एक मस्जिद है , [[बिहार]] की सबसे बडी [[मस्जिद]] यही है। यह तकरीबन २०० साल पुरानी है। इसमे हजारो लोग साथ [[नमाज]] अदा कर सकते हैं।
मुख्य नगर से १० कि॰मी॰ दूर गया पटना मार्ग पर स्थित एक पवित्र धर्मिक स्थल है। यहाँ नवी सदी हिजरी में चिशती अशरफि सिलसिले के प्रख्यात सूफी सन्त हजरत मखदूम सयद दर्वेश अशरफ ने खानकाह अशरफिया की स्थापना की थी। आज भी पूरे भारत से श्रदालू यहाँ दर्शन के लिये आते है। हर साल इस्लामी मास शाबान की १० तारीख को हजरत मखदूम सयद दर्वेश अशरफ का उर्स गया जी मनाया जाता है।<ref>http://www.mdashrafbitho.faithweb.com {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190607100729/http://mdashrafbitho.faithweb.com/ |date=7 जून 2019 }} बिथो शरीफ का जालस्थल</ref>
===बानाबर (बराबर) पहाड़ ===
गया से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर बेलागंज से 10 किलोमीटर पूरब में स्थित है| इसके ऊपर भगवान शिव का मन्दिर है, जहाँ हर वर्ष हजारों श्रद्धालू सावन के महीने में जल चढ़ते है। कहते हैं इस मन्दिर को बानासुर ने बनवाया था। पुनः सम्राट अशोक ने मरम्मत करवाया। इसके नीचे सतघरवा की गुफा है, जो प्राचीन स्थापत्य कला का नमूना है। इसके अतिरिक्त एक मार्ग गया से लगभग 30 किमी उत्तर मखदुमपुर से भी है। इस पर जाने हेतु पातालगंगा, हथियाबोर और बावनसीढ़ी तीन मार्ग है, जो क्रमशः दक्षिण, पश्चिम और उत्तर से है, पूरब में फलगू नदी है।
और गया से लगभग 25 किलोमीटर पूरब में टनकुप्पा प्रखंड में चोवार एक गाँव है जो की गया जिले में एक अलग ही बिशेषता रखता है!इस गाँव में एक प्राचीन शिव मंदिर है जो अपने आप में ही एक बहुत बड़ी महानता रखता है!इस मंदिर में भगवान शिव को चाहे जितना भी जल क्यों नहीं चढ़ाये पर आजतक इसका पता नहीं लग पाया है!और इसी गाँव में खुदाई में बहुत ही प्राचीन अष्टधातु की मूर्तियाँ और चाँदी के बहुतें सिक्के मिले है!इस गाँव में एक ताड़ का पेड़ भी है,जो की बहुत ही अद्भुत है। इस ताड़ के पेड़ की विशेषता यह है कि इस पेड़ में तिन डाल है जो की भगवान शिव की त्रिशूल की आकार का है,ये गाँव की शोभा बढ़ाता है जी हाँ ये चोवार गाँव की विशेषता है।
===प्राचीन एबं अद्भुत शिव मंदिर (चोवार गाँव)===
चोवार गया शहर से 35 किलोमीटर पूर्व में एक गाँव है चोवार जो की अपने आप में बहुत ही अद्भुत है इस गाँव में एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर है जहा सैकड़ो श्रद्धालु बाबा बालेश्वरनाथ के ऊपर जल चढाते है पर आजतक ये जल कहाँ जाता है कुछ पता नहीं चलता है इसके पीछे के कारण किसी को नहीं पता चला। लगभग हजारो सालों से ये चमत्कार की जाँच करने आये सैकड़ो बैज्ञानिको ने भी ये दाबा किया है कि ये भगवान शिव का चमत्कार है।इसी गाँव में कुछ सालों पहले सड़क निर्माण के दौरान यहाँ एक बहुत ही बड़ा घड़ा निकला जिसमे हजारो शुद्ध चाँदी के सिक्के निकले थे।आज भी इस गाँव से अष्टधातु की अनेको मूर्तियाँ शिव मंदिर में देखने को मिलता है। .
इस गाँव में एक अद्भूत ताड़ का पेड़ भी है जो इस चोवार गाँव की शोभा बढ़ाता है।इस ताड की खास बात ये है कि ताड का पेड़ भगवान के त्रिशुल के तरह त्रिशाखायुक्त है!दूर-दूर से लोग इस पेड़ को देखने के लिये आते हैं।
यहां काफी प्राचीन एक कुआं भी है जिसमे कुछ-कुछ घंटों (समय) के बाद पानी का रंग बदलता रहता है।
कुएं का पानी का रंग भिन्न भिन्न रंगो में परिवर्तित होते रहता है।
===कोटेश्ववरनाथ ===
यह अति प्राचीन शिव मन्दिर मोरहर-दरधा नदी के संगम किनारे मेन-मंझार गाँव में स्थित है। यहाँ हर वर्ष शिवरात्रि में मेला लगता है। यहाँ पहुँचने हेतु गया से लगभग ३० किमी उत्तर पटना-गया मार्ग पर स्थित मखदुमपुर से पाईबिगहा समसारा होते हुए जाना होता है। गया से पाईबिगहा के लिये सीधी बस सेवा उपलब्ध है। पाईबिगहा से इसकी दूरी लगभग २ किमी है।गया से टिकारी होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। किवदन्ती है कि प्राचीन काल में बाण पुत्री उषा ने यह मंदिर बनवाया था।किन्तु प्राप्त लिखित इतिहास तथा पुरातात्विक विश्लेषण से ये सिद्ध है कि ६ सदी में नाथ परंपरा के ३५वे सहजयानी सिद्ध बाबा कुचिया नाथ द्वारा स्थापित मठ है।इसलिए इसे कोचामठ या बुढवा महादेव भी कहते है।माना जाता है कि मेन के पाठक बाबा तथा मंझार के रामदेव बाबू को यहाँ भगवान शिव का साक्षात्कार हुआ था।वर्तमान समय मे मठ के जीर्णोद्धार का स्वप्नादेश भगवान शिव ने उन्ही रामदेव बाबू के पुत्र भोलानाथ शर्मा जी को किया , जातिभेद के वैमनस्य से क्रंदन कर रहे क्षेत्र मे शिव जी के प्रेरणा से सांस्कृतिक साहित्यिक एकता का प्रयत्न भोलानाथ शर्मा छ्त्रवली शर्मा नित्यानन्द शर्मा आदि ने प्रारंभ किया। सांस्कृतिक एकता की यात्रा ने मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ बृहद् सांस्कृतिक केंद्र के रुप मे इसे स्थापित किया ।[[https://web.archive.org/web/20190326134929/http://www.koteshwarnathdham.org/]]
=== सूर्य मंदिर ===
{{seealso|सूर्य मंदिर, गया}}
सूर्य मंदिर प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के 20 किलोमीटर उत्तर और रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर दूर स्थित है। भगवान सूर्य को समर्पित यह मंदिर सोन नदी के किनारे स्थित है। दिपावली के छ: दिन बाद बिहार के लोकप्रिय पर्व छठ के अवसर पर यहां तीर्थयात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है। इस अवसर पर यहां मेला भी लगता है।
=== ब्रह्मयोनि पहाड़ी ===
[[चित्र:Gayasisa1.jpg|right|thumb|280px|ब्रह्मयोनि पर्वत]]
इस पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने के लिए ४४० सीढ़ियों को पार करना होता है। इसके शिखर पर भगवान शिव का मंदिर है। यह मंदिर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे स्थित हैं जहां पिंडदान किया जाता है। इस स्थान का उल्लेख रामायण में भी किया गया है। दंतकथाओं पर विश्वास किया जाए तो पहले फल्गु नदी इस पहाड़ी के ऊपर से बहती थी। लेकिन देवी सीता के शाप के प्रभाव से अब यह नदी पहाड़ी के नीचे से बहती है। यह पहाड़ी हिन्दुओं के लिए काफी पवित्र तीर्थस्थानों में से एक है। यह मारनपुर के निकट है।
ऊपर से दृश्य बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देने वाला है और एक मनोरम दृश्य प्रदान करता है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/brahmayoni-temple|title=Destinations in Gaya - Brahmayoni Temple|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240913080406/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/brahmayoni-temple|url-status=dead}}</ref>
=== मंगला गौरी ===
पहाड पर स्थित यह मंदिर मां शक्ति को समर्पित है। यह स्थान १८ महाशक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि जो भी यहां पूजा कराते हैं उनकी मन की इच्छा पूरी होती है।
इसी मन्दिर के परिवेश में मां काली, गणेश, हनुमान तथा भगवान शिव के भी मन्दिर स्थित हैं।
15वीं सदी में बना मंगला गौरी मंदिर, देवी सती को समर्पित उन 52 महाशक्तिपीठों में गिना जाता है जहां देवी सती के शरीर के अंग गिरे थे। पहाड़ी पे विराजमान माता को परोपकार की देवी माना जाता है। वर्षा-ऋतु में हर मंगलवार को यहां एक विशेष पूजा आयोजित की जाती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|title=Mangala-Gauri|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921161716/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|url-status=dead}}</ref>
इस मंदिर का वर्णन पद्म पुराण, वायु पुराण, अग्नि पुराण, श्री देवी भगवत पुराण और मार्कंडेय पुराण में भी मिलता है। इस मंदिर परिसर में मां काली, गणपति, भगवान शिव और हनुमान के मंदिर भी हैं। मंगला गौरी मंदिर में नवरात्र के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने हेतु आते है जो यहाँ के दृश्य को मनोरम बनाती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|title=Destinations in Gaya - Mangla Gauri|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921161716/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/mangala-gauri|url-status=dead}}</ref>
'''<big>दुन्गेश्वरी गुफा मंदिर</big>'''
गया शहर से 11 km दुर दुन्गेश्वरी के शान पहाडियों के ऊपर बना हुआ है दुन्गेश्वरी का गुफ़ा मंदिर कहते हैं बद्ध जी ने गया में ज्ञान प्राप्ति से पूर्ण यहाँ कई साल बिताये थे. इस जगह को महाकाल की गुफाए भी कहा जाता है.
<sub>'''<big>मुचालिंदा सरोवर</big>'''</sub>
बोध गया के मोचारिम इलाके में बना हुआ है मुचालिंदा सरोवर, जिसका काफी पौराणिक महत्ब है. यहाँ पर सर्वर के बीचो बीच एक बद्ध जी की मूर्ति है. जिसको नाग के प्रतिमा ने ढका हुआ है. कहते है बद्ध जी को तूफ़ान से नाग देवता मुचालिंदा ने बचाया था जिसको ये प्रतिमा रुपान्द्रित करती है.
मुचलिंदा सरोवर, बोध गया में स्थित सबसे पावन जगहों में से एक है। यह वो स्थान जहाँ भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद लगातार छठा सप्ताह ध्यान में बिताया था।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/muchalinda-sarovar|title=Destinations in Gaya - Muchalinda Sarovar|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213231621/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/muchalinda-sarovar|url-status=dead}}</ref>
'''<big>शाही भूटान मठ</big>'''
शाही भूटान मठ गया में बना एक बौद्ध मठ है. इस मठ का नाम भूटान मठ इसीलिए पड़ा क्युकि इसे भूटान के राजा ने बनवाया था. इस बौद्ध मठ के अन्दर दीवारों पर की गयी कलाकृतिया देखने लायक है. जिसके द्वारा बौद्ध धर्म के बारे में दर्शाया गया है.<ref>{{Cite news|url=https://www.prabhatkhabar.com/life-and-style/travel/gaya-tourist-places-if-you-come-to-gaya-for-pind-daan-then-definitely-visit-these-places-pitru-paksha-2023-wat-thai-mahabodhi-temple-great-buddha-statue-sry|title=अगर पिंडदान के लिए गया आएं तो जरूर जाएं इन जगहों पर|work=प्रभात खबर|access-date=30 अप्रैल 2024}}</ref>
=== बराबर गुफा ===
यह गुफा गया से 20 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस गुफा तक पहुंचने के लिए 7 किलोमीटर पैदल और 10 किलोमीटर रिक्शा या तांगा से चलना होता है। यह गुफा बौद्ध धर्म के लिए महत्वपूर्ण है। यह बराबर और नागार्जुनी शृंखला के पहाड़ पर स्थित है। इस गुफा का निर्माण बराबर और नागार्जुनी पहाड़ी के बीच [[सम्राट अशोक]] और उनके पोते दशरथ के द्वारा की गई है। इस गुफा उल्लेख ई॰एम. फोस्टर की किताब 'ए पैसेज टू इंडिया' में भी किया गया है। इन गुफओं में से 7 गुफाएं भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरख में है।<ref>[https://www.outlooktraveller.com/experiences/heritage/lost-in-time-unveiling-the-ancient-barabar-caves-near-bodh-gaya?utm_source=pocket-newtab-en-intl Lost In Time: Unveiling The Ancient Barabar Caves Near Bodh Gaya]</ref>
जहानाबाद जिले में ये गुफाएं स्थित है और चट्टानों को काटकर बनायीं गयी सबसे पुराणी गुफाएं हैं। इनमें से अधिकाँश गुफाओं का सम्बन्ध मौर्या काल (३२२-१८५ ईसा पूर्व ) से है और कुछ में अशोक के शिलालेखों को देखा जा सकता है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/jehanabad/barabar-caves|title=Barabar-Caves|access-date=21 सितंबर 2024|archive-date=21 सितंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240921162035/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/jehanabad/barabar-caves|url-status=dead}}</ref>
=== देवी मंदिर नेयाजीपुर, गया बिहार ===
नेयाजीपुर विख्यात शिक्षाविद् स्व. भवानी प्रसाद सिंह ,(उच्च विद्यालय सरता के संस्थापक प्रधानाचार्य) का गाँव है जो बहुत ही प्राचीन है। यह प्रेतशीला पर्वत की तलहट्टी में बसा है। नेयाजीपुर देवी मन्दिर का निर्माण प्राचीन काल में हुआ था। इसका निर्माण नियाजीपुर गया के मूल निवासी वत्स गोत्रीय सोनभद्रीय भूमिहार ब्राह्मणों द्वारा किया गया था। बाद में इसका पुनरुद्धार श्री राजदेव सिंह ने किया। उसके बाद कालान्तर में पुनः जीर्ण हो चुके देवी मन्दिर का जीर्णोद्धार वर्ष 2008 ई. में नेयाजीपुर निवासी भूमिहार ब्राह्मणों के सक्रिय सहयोग से संभव हुआ जिसमें देवी मन्दिर को दिव्य और भव्य स्वरूप प्रदान किया गया।
इसका उद्घाटन एक बहुत बड़े यज्ञ से हुआ था| इस समय मंदिर की देखभाल ग्रामीणों की समिति के द्वारा की जाती है। इस मंदिर के परिसर में नियमित अन्तराल पर यज्ञानुष्ठान सम्पन्न होते रहता है। इस देवी मन्दिर में दिव्य और अलौकिक शक्ति बतायी जाती है। यहाँ श्रद्बालुओं की शुद्ध भाव से माँगी गयी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मन्दिर एक बड़े तालाब के किनारे गाँव के पूर्वी भाग में स्थित है जो इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देता है। सामान्य तौर पर इस प्रकार का तालाब भूमिहार ब्राह्मणों के गाँवों में भूमि अग्रहार का हिस्सा होता है।
=== बाबा जमुनेश्वर धाम ===
गया शहर से पास में ही दक्षिण बिहार विश्वविद्यालय के जाने वाली रोड SH 79 के पास में ही जमुने बसा हुआ है। यह पवित्र जमूने नदी के तट पर बसा हुआ है। यहां पर काफी पुराना शिव मंदिर हैं जो कहा जाता है की टेकारी नरेश गोपाल सरण के द्वारा निर्माण करवाया गया था। स्थानीय लोगो का मानना है की बाबा जमुनेश्वर का महिमा बहुत ही अपार है। महाशिवरात्रि और श्रवण में यह श्रद्धालु की काफी भीड़ जुटती है। पास में ही सूर्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है,जहा एक धाम बन गया है विवाह के लगन के समय यह विवाह और कार्यक्रम करने वालो को बहुत भीड़ होती है। छठ पूजा पर आप यहां अपने परिवार के साथ यहां के घाट पर जरूर पधारे आपको एक अपनापन का एहसास दिलाएगा बाबा जमुनेश्वर का ये धाम।
=== सूर्य मंदिर कुजापी ===
गया शहर में गया जंक्शन से पश्चिमी ओर करीब 3 किमी दूर कुजापी गांव में एक खूबसूरत और विशाल सूर्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कार्य सन 2012 ईस्वी में पूरा हुआ एवं इस मंदिर का उद्घाटन सन 2013 ईस्वी में एक विशाल महायज्ञ से हुआ जिसमें लगभग 4000 श्रद्धालु भक्तजनों ने कलश यात्रा में भाग लिया था। इस मंदिर का निर्माण कुजापी के तत्कालीन मुखिया श्री अभय कुशवाहा के द्वारा करवाया गया था जोकि टिकारी विधानसभा से विधायक भी रह चुके हैं।
इस मंदिर के ठीक सामने कृष्ण मंदिर है। इस मंदिर परिसर में एक विशाल सरोवर, मुंद्रा सरोवर का निर्माण करवाया गया है जिसमें प्रति वर्ष छठ के दिन श्रद्धालु भक्तजन अर्ध देते हैं।
=== ऐतिहासिक गांव ढीबर===
गया-रजौली रोड पर गया से 20 किमी दूर ढीबर नामक गांव है| यहां के गढ़ पे हजारो साल पुराना भगवान बुद्ध की अनेक मूर्तियाँ हैं|ये मूर्तियां खंडित हैं| यहां एक बहुत पुराना देवी मंदिर भी है यह मंदिर किसने और कब बनवाया यह कोई नहीं जानता | यहां बांसी नाला हॉल्ट नाम का एक रेलवे स्टेशन भी है जो यात्रा को आसान और तेज़ बनाता है।
===सूर्य मंदिर (पाई बिगहा)===
मखदुमपुर से ६ किमी दूर स्थित पाईबिगहा मोरहर किनारे बसा टिकारी राज्य का प्रमुख बाजार रहा है, हैमिल्टन बुचनन को यहाँ ई. पू. प्रथम सदी के प्राचीन शिव मंदिर के जीर्ण अवशेष मिले थे , बाजार के बीचोबीच उसी स्थान पर नया महादेव स्थान स्थापित है। पाईबिगहा मंझार रोड पर स्थित है एक प्राचीन सूर्य मंदिर जो जन आस्था का केन्द्र है।प्रति वर्ष छठपूजा मे मंदिर प्रांगण मे बडा मेला लगता है।दूर दूर से आकर लोग यहाँ छ्ठ पर्व मनाते हैं।माई जी नाम से सुविख्यत महिला भगवान् सूर्य की प्रमुख भक्त थी जिनके विषय मे कहा जाता है कि उन्हें इसी मंदिर प्रांगण में नारायण रुप मे सूर्य देव ने दर्शन दिया था।
===संत कारुदास मंदिर (कोरमत्थू)===
एक प्रसिद्ध कहावत है गया के राह कोरमत्थू। जी वही कोरमत्थु जहाँ जमुने किनारे भगवान राम ने गया जाते समय विश्राम किया था तथा एक शिवलिंग स्थापित की थी। वही शिवलिंग जिसकी खोज मे सिद्ध संप्रदाय के बाबा कारुदास हिमालय छोड कोरमत्थु के चैत्यवन आ पहुंचे। यहाँ प्राचीन शिवलिंग ठाकुरबाडी तथा कारूदास जी का मंदिर है। गया त्रिवेणी अखाडा से कोरमत्थु के लिए सीधी बस सेवा है । यहाँ से मंझार होते हुए बाबा कोटेश्वर नाथ धाम भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।
===माँ तारा मंदिर, केसपा===
प्राचीन इतिहास मे मगध मे प्रमुख रूप से चैत्य वन तथा सिद्ध वन दो प्रमुख क्षेत्र थे। चैत्य वन मे मोरहर तथा पुनपुन का क्षेत्र केसपा कहा जाता था । पूर्व में माँ तारा के मंदिर के समीप से पुनपुन का प्रवाह था , तथा मंझार के पूर्व से मोरहर का । अर्थात मंझार से लेकर केसपा तक का संपूर्ण क्षेत्र केसपा के नाम से जाना जाता था। इस चैत्य वन के काश्यलपा क्षेत्र में मेन मंझार का क्षेत्र मंदार वन के नाम से जाना जाता था जहाँ कुचियानाथ का मठ था। कुचिया नाथ से भी बहुत पहले गया कश्यप नाम के बौद्ध संत का मठ था माँ तारा पीठ। बुचनन ने इसे बौद्ध - हिन्दु दोनो संप्रदायों का प्रमुख स्थान माना है।[[https://www.google.com/search?ei=VCJlXaTsLYeb9QO8n5wY&q=maa+tara+kespa&oq=maa+tara+kespa&gs_l=mobile-gws-wiz-serp.3..0i22i30l2j0i22i10i30j0i22i30j33i160.4161.12863..13676...5.0..3.346.6593.0j8j19j1......0....1.......8..35i39i19j35i39j46i39i19j46j0j0i131j0i67j46i67j46i2i203i275j0i2i203j0i10i2i203j0i13j0i13i30.cyGkRrUHx1k#trex=m_t:lcl_akp,rc_f:nav,rc_ludocids:17683707207999465324,rc_q:Maa%2520Tara%2520Temple,ru_q:Maa%2520Tara%2520Temple]]
'''गया जिला''' मुख्यालय से लगभग 38 किमी और टिकारी से 13 किमी. उतर अवस्थित '''केसपा गांव''' में प्रसिद्ध '''मां तारा देवी का मंदिर''' स्थित है। यों तो यहाँ पूजा-अर्चना करने भक्तजन वर्ष भर आते हैं। परंतु आश्विन माह में शारदीय नवरात्र में '''मां तारा देवी''' की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।<ref>{{Cite web|url=https://gayamahanagar.com/maa-tara-devi-kespa-bihar/#google_vignette|title=Maa Tara Devi - Kespa -Bihar}}</ref>
===दुर्लभ पीपल वृक्ष ( मेन-मंझार)===
कोटेश्वरनाथ मंदिर से ३०० मीटर उत्तर में दुर्लभ प्रजाति का पीपल वृक्ष है।दूर देश से वैज्ञानिक इस पर शोध करने आते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह कौतुक का विषय है क्योंकि वृक्ष की सभी शाखाएँ दक्षिण के तरफ उपर से नीचे आ जमीन को छूती हैं (मानो भगवान शिव को प्रणाम कर रही हों )फिर ऊपर जाती है।
===बोधगया===
[[बोधगया]] बौद्ध धर्म की राजधानी है।जिस पीपल वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध सिद्धर्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ था वो बोधिवृक्ष बौद्ध आस्था का केन्द्र है।
===माँ काली मंदिर (बेलागंज)===
गुप्तकालीन काली मंदिर मगध क्षेत्र मे शाक्त परंपरा का प्रमुख धरोहर है।
===प्राचीन विष्णु मंदिर (घेजन)===
पाई बिगहा से २ किमी पश्चिम घेजन प्रमुख पुरातात्विक रुचि का केन्द्र है।यहाँ से प्राप्त भगवान् बुद्ध की २५० ई पू की भगवान् बुद्ध तथा भगवान विष्णु की प्रतिमा पटना संग्रहालय मे सुरक्षित है।यहाँ का मंदिर अति प्राचीन है, बेलगार ने इसे गुप्त कालीन बताया है।
===कोचेश्वरनाथ===
कोच स्थित कोचेश्वरनाथ मठ अति प्राचीन शैव आस्था का केंद्र है।[[https://web.archive.org/web/20141224180957/http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/t/019pho000001003u00079000.html]]
===खेतेश्वर महादेव (मेन)===
मेन मंझार शैव परंपरा का जागृत स्थान है जहाँ प्रतिवर्ष छोटे बडे एक या एक से अधिक शिवलिंग स्वयम् प्रकट हो ही जाते हैं।इस पूरे क्षेत्र में छोटे बडे १२७ शिवलिंग हैं जो स्वयं प्रकट हुए हैं , जिनमें ११ प्रमुख हैं। इन ११ में कोटेश्वरनाथ खेतेश्वर महादेव तथा गौरी शंकर तीन अति प्रमुख हैं। खेतेश्वर महादेव मोरहर नदी के उफान और बाढ मे भी नही डूबता जबकि ये न तो ऊँचाई पर स्थित है न हीं इनका आकार बहुत बडा है। आस पास के सभी ऊँचे टीले डूब जाते हैं पर उन सब से काफी कम ऊँचाई का यह स्वयंभू शिवलिंग कभी नही डूबता।
===अक्षय वट===
प्रसिद्ध अक्षय वट विष्णु पाद मंदिर के पास के क्षेत्र में स्थित है। अक्षय वट को सीता देवी ने अमर होने का वरदान दिया था और कभी भी किसी भी मौसम में इसके पत्तों को नहीं बहाया जाता है।
===रामशिला पहाडी===
गया के दक्षिण-पूर्व की ओर स्थित रामशिला हिल को सबसे पवित्र स्थान माना जाता है क्योंकि यह माना जाता है कि भगवान राम ने पहाड़ी पर ’पिंडा’ की पेशकश की थी।पहाड़ी का नाम भगवान राम से जुड़ा है। प्राचीन काल से संबंधित कई पत्थर की मूर्तियां पहाड़ी के आसपास और आसपास के स्थानों पर देखी जा सकती हैं, जो कि बहुत पहले के समय से कुछ पूर्व संरचनाओं या मंदिरों के अस्तित्व का सुझाव देती हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर जिसे रामेश्वरा या पातालेश्वर मंदिर कहा जाता है, मूल रूप से 1014 A.D में बनाया गया था, लेकिन सफल अवधि में कई बहाली और मरम्मत से गुजरा।मंदिर के सामने हिंदू भक्तों द्वारा अपने पूर्वजों के लिए पितृपक्ष के दौरान "पिंड" चढ़ाया जाता है।
===प्रेतशिला पहाडी===
रामशिला पहाड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी के नीचे ब्रह्म कुंड स्थित है।इस तालाब में स्नान करने के बाद लोग 'पिंड दान' के लिए जाते हैं।पहाड़ी की चोटी पर, इंदौर की रानी, अहिल्या बाई, ने 1787 में एक मंदिर बनाया था जिसे अहिल्या बाई मंदिर के नाम से जाना जाता था।यह मंदिर हमेशा अपनी अनूठी वास्तुकला और शानदार मूर्तियों के कारण पर्यटकों के लिए एक आकर्षण रहा है।
यह हिंदुओं के लिए एक सम्मानित स्थान है जहां वे पिंड दान (दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए किया जाने वाला एक धार्मिक अनुष्ठान) करते हैं। यह सदियों से चली आ रही एक परंपरा है और लोगों का मानना है की इस जगह पे पूजा करने के बाद आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/pretshila|title=Destinations in Gaya - PretShila|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213215342/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/pretshila|url-status=dead}}</ref>
===सीताकुंड===
विष्णु पद मंदिर के विपरीत तरफ, सीता कुंड फल्गु नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है।उस स्थान को दर्शाते हुए एक छोटा सा मंदिर है जहाँ माता सीता ने अपने ससुर के लिए पिंडदान किया था।
सीता कुण्ड रामायण काल से जुड़ा है, और ऐसा मन जाता है की सीता माता ने अपने ससुर दशरथ जी का पिंड दान किया था। सीता कुण्ड एक छोटा सा मंदिर है जो विष्णुपद मंदिर से ठीक विपरीत दिशा में फल्गु नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है।<ref>{{Cite web|url=https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/sita-kund|title=Destinations in Gaya - Sita Kund|access-date=27 सितंबर 2024|archive-date=13 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250213224013/https://tourism.bihar.gov.in/hi/destinations/gaya/sita-kund|url-status=dead}}</ref>
===डूंगेश्वरी मंदिर / डुंगेश्वरी हिल===
माना जाता है कि गौतम सिद्धार्थ ने अंतिम आराधना के लिए बोधगया जाने से पहले 6 साल तक इस स्थान पर ध्यान किया था।बुद्ध के इस चरण को मनाने के लिए दो छोटे मंदिर बनाए गए हैं।कठोर तपस्या को याद करते हुए एक स्वर्ण क्षीण बुद्ध मूर्तिकला गुफा मंदिरों में से एक में और एक बड़ी (लगभग 6 'ऊंची) बुद्ध की प्रतिमा दूसरे में विहित है। गुफा मंदिर के अंदर एक हिंदू देवी देवता डुंगेश्वरी को भी रखा गया है।
===थाई मठ, बोधगया===
थाई मोनास्ट्री बोधगया का सबसे पुराना विदेशी मठ है।जो कि सजावटी रीगल थाई स्थापत्य शैली में निर्मित है।बाहरी और साथ ही आंतरिक की भव्यता बेहद विस्मयकारी है। मंदिर सामने आँगन में एक शांत पूल के ऊपर लाल और सुनहरे मणि की तरह दिखाई देता है।बुद्ध के जीवन को दर्शाती भित्ति चित्रों के साथ शानदार बुद्ध की मूर्ति और कुछ आधुनिक घटनाओं जैसे कि शैली में चित्रित पेड़ लगाने का महत्व पूरी तरह से अद्भुत है।यह बोधगया में महाबोधि मंदिर के बगल में स्थित है।घूमने का समय: सुबह 7:00 से दोपहर 12:00, दोपहर 02:00 से शाम 06:00 तक।
===धर्म चक्र===
200 क्विंटल लोहे से बना धर्म चक्र पर्यटको में चर्चा का विषय रहा है।कहा जाता है कि इस चक्र को घुमाने पर पापो से मुक्ती मिल जाती है।
'''गुरपासिनी'''
यह गया शहर से लगभग 40 किलोमीटर के दूरी पर है। यह भगवान विष्णु के चरण चिन्ह देखने को मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान विष्णु वामनावतार में धरती की नाप कर रहे थे तब उनका एक पैर यहां स्थित पहाड़ी पर पड़ी थी । यहां भी लोग बहुत दूर से दर्शन करने के लिए आते है। यहां सावन मास में बहुत ज्यादा भीड़ रहती है। यहां नजदीक में गुरपा स्टेशन है। यहां का नजारा देखने बनता है।<ref name=":0" />
== जनसंख्या ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या:<ref>{{Cite web|url=http://gov.bih.nic.in/Profile/Districts/Gaya.htm|title=Bihar Districts: Gaya|website=gov.bih.nic.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190226074441/http://gov.bih.nic.in/Profile/Districts/Gaya.htm|archive-date=26 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref>
* शहरी क्षेत्र:- 3863888
* देहाती क्षेत्र:- 575495
* कुल:- 4379383
== गम्यता ==
=== हवाई मार्ग ===
बिहार एवं झारखण्ड के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा, [[गया विमानक्षेत्र]], है। अब झारखंड[देवघर] में भी हवाईअड्डा बन गया है।
=== रेल मार्ग ===
[[गया जन्कशन]] [[बिहार]] का दूसरा बड़ा [[रेलस्टेशन]] है। यह एक विशाल परिसर में स्थित है। इसमे ९ प्लेटफार्म है।
गया से [[पटना]], रांची,[[कोलकाता|धनबाद,कोलकाता]], [[पुरी]], [[बनारस]], [[चेन्नई]], [[मुम्बई]], [[नई दिल्ली]], [[नागपुर]], [[गुवाहाटी]], जयपुर, अजमेरशरीफ, हरिद्वार, ऋषिकेश, जम्मू-तवी आदि के लिए सीधी ट्रेनें है।
=== सड़क मार्ग ===
गया राजधानी पटना और राजगीर, रांची, धनबाद,बनारस आदि के लिए बसें जाती हैं। गया में दो बस स्टैंड हैं। दोनों स्टैंड फल्गु नदी के तट पर स्थित है। गांधी मैदान बस स्टैंड नदी के पश्चिमी किनार पर स्थित है। यहां से बोधगया के लिए नियमित तौर पर बसें जाती हैं।
== इंजीनियरिंग कॉलेज ==
* [[गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, गया]]
* [[बुद्धा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फल्गू नदी]]
* [[बोधगया]]
* [[गया विमानक्षेत्र]]
* [[गया ज़िला]]
* [[श्राद्ध]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20160418152222/http://www.pinddaangaya.in/hindi%20version%20website/index.php?pg=home पितृपक्ष] (गया एवं अन्य धार्मिक स्थलों के बारे में)
*[https://web.archive.org/web/20160420054224/http://bharatparytan.blogspot.in/2013/12/blog-post_19.html सोन भण्डार गुफा, राजगीर]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{गया जिला के प्रखण्ड}}
{{बिहार}}
[[श्रेणी:गया जिला]]
[[श्रेणी:बिहार के शहर]]
[[श्रेणी:गया ज़िले के नगर]]
[[श्रेणी:गया|*]]
[[श्रेणी:बिहार में पर्यटन आकर्षण]]
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वार्ता:संस्कृत भाषा
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Pushkar Singh
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मेरे विचार से यहाँ जो कडियाँ जोडी गयीं हैं वे बहुत ही प्रासंगिक हैं। इसलिये इनका यहाँ रहना उचित है।
[[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ०३:५७, २७ सितंबर २००७ (UTC)
== स्थानान्तरण अनुरोध 22 अक्टूबर 2024 ==
{{नाम बदलें/dated|संस्कृत}}
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:@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] क्या तर्क, कारण या प्रमाण है ? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:27, 27 अक्टूबर 2024 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] सुव्यवस्था के लिए। [[हिन्दी]], [[अंग्रेजी]] आदि पृष्ठों पर भी भाषा नही लिखा है। [[सदस्य:Riteze|Riteze]] ([[सदस्य वार्ता:Riteze|वार्ता]]) 05:10, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
::::@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] मुझे नहीं लगता इससे कोई अव्यवस्था है या ऐसा कर देने से सुव्यवस्था आ जाएगी। बांग्ला, मराठी, मैथिली जैसी कई अन्य विकियों पर भी ऐसे नाम लिखा हुआ है।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 07:16, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] कोई तीसरा यूज़र यहां सुझाव दे तो उसके अनुसार निर्णय ले लीजिएगा। [[सदस्य:Riteze|Riteze]] ([[सदस्य वार्ता:Riteze|वार्ता]]) 08:12, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
::::::@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] जी, आपने [[अंग्रेजी]] नामक शीर्षक को खोलकर नहीं देखा। यह [[अंग्रेज़ी]] (नुक्ता वाला ज़) पर अनुप्रेषित है जो कि एक बहुविकल्पी पृष्ठ है। भाषा के लिए [[अंग्रेज़ी भाषा]] लेख है। हालांकि संस्कृत के बारे में यह तर्क दिया जा सकता है कि इस नाम से केवल भाषा की ही बात की जाती है। अन्य शब्द [[संस्कृत व्याकरण]], [[संस्कृत साहित्य]], [[भारतीय छन्दशास्त्र]], [[संस्कृत का पुनरुत्थान]], [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|संस्कृत धातु]], <s>[[संस्कृतीकरण]]</s> आदि के लिए अकेला संस्कृत शब्द सही नहीं है। [[हिन्दी]] पर भी संस्कृत की तरह का नियम ही लागू होता है। हिन्दी शब्द केवल भाषा के लिए है, इसमें भी व्याकरण, साहित्य या अन्य शब्द साथ में जोड़कर उन्हें व्यक्त किया जाता है। @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी: अतः लेख का शीर्षक केवल "संस्कृत" (सुझाव के अनुसार) रखा जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:47, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
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मुझे लगता है पृष्ठ को अर्द्धसुरक्षित कर देना चाहिए। पृष्ठ का इतिहास देखा जाए तो कई सदस्यों ने खाते या बिना खातों के असत्य या पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जानकारी सम्पादित की है।
विघटनकारी संपादनों से बचने के लिए यह उपाय शायद ठीक रहेगा। अन्य संपादकों और प्रबंधकों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी [[सदस्य:Pushkar Singh|Pushkar Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|वार्ता]]) 20:15, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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AMAN KUMAR
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{{वार्ता शीर्षक}}
मेरे विचार से यहाँ जो कडियाँ जोडी गयीं हैं वे बहुत ही प्रासंगिक हैं। इसलिये इनका यहाँ रहना उचित है।
[[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ०३:५७, २७ सितंबर २००७ (UTC)
== स्थानान्तरण अनुरोध 22 अक्टूबर 2024 ==
{{नाम बदलें/dated|संस्कृत}}
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:@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] क्या तर्क, कारण या प्रमाण है ? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:27, 27 अक्टूबर 2024 (UTC)
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::::::@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] जी, आपने [[अंग्रेजी]] नामक शीर्षक को खोलकर नहीं देखा। यह [[अंग्रेज़ी]] (नुक्ता वाला ज़) पर अनुप्रेषित है जो कि एक बहुविकल्पी पृष्ठ है। भाषा के लिए [[अंग्रेज़ी भाषा]] लेख है। हालांकि संस्कृत के बारे में यह तर्क दिया जा सकता है कि इस नाम से केवल भाषा की ही बात की जाती है। अन्य शब्द [[संस्कृत व्याकरण]], [[संस्कृत साहित्य]], [[भारतीय छन्दशास्त्र]], [[संस्कृत का पुनरुत्थान]], [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|संस्कृत धातु]], <s>[[संस्कृतीकरण]]</s> आदि के लिए अकेला संस्कृत शब्द सही नहीं है। [[हिन्दी]] पर भी संस्कृत की तरह का नियम ही लागू होता है। हिन्दी शब्द केवल भाषा के लिए है, इसमें भी व्याकरण, साहित्य या अन्य शब्द साथ में जोड़कर उन्हें व्यक्त किया जाता है। @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी: अतः लेख का शीर्षक केवल "संस्कृत" (सुझाव के अनुसार) रखा जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:47, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
:::::::{{समर्थन}} संजीव कुमार जी के तर्कों से पूर्णतः सहमत हूँ।@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, चूँकि यह चर्चा एक वर्ष से अधिक पुरानी है, कृपया सर्वसम्मति मानकर इसे 'संस्कृत' पर स्थानांतरित कर दें। --[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:46, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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== स्थानान्तरण अनुरोध 22 अक्टूबर 2024 ==
{{नाम बदलें/dated|संस्कृत}}
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:@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] क्या तर्क, कारण या प्रमाण है ? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:27, 27 अक्टूबर 2024 (UTC)
::@[[सदस्य:SM7|SM7]] सुव्यवस्था के लिए। [[हिन्दी]], [[अंग्रेजी]] आदि पृष्ठों पर भी भाषा नही लिखा है। [[सदस्य:Riteze|Riteze]] ([[सदस्य वार्ता:Riteze|वार्ता]]) 05:10, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
::::@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] मुझे नहीं लगता इससे कोई अव्यवस्था है या ऐसा कर देने से सुव्यवस्था आ जाएगी। बांग्ला, मराठी, मैथिली जैसी कई अन्य विकियों पर भी ऐसे नाम लिखा हुआ है।--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 07:16, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
:::::@[[सदस्य:SM7|SM7]] कोई तीसरा यूज़र यहां सुझाव दे तो उसके अनुसार निर्णय ले लीजिएगा। [[सदस्य:Riteze|Riteze]] ([[सदस्य वार्ता:Riteze|वार्ता]]) 08:12, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
::::::@[[सदस्य:Riteze|Riteze]] जी, आपने [[अंग्रेजी]] नामक शीर्षक को खोलकर नहीं देखा। यह [[अंग्रेज़ी]] (नुक्ता वाला ज़) पर अनुप्रेषित है जो कि एक बहुविकल्पी पृष्ठ है। भाषा के लिए [[अंग्रेज़ी भाषा]] लेख है। हालांकि संस्कृत के बारे में यह तर्क दिया जा सकता है कि इस नाम से केवल भाषा की ही बात की जाती है। अन्य शब्द [[संस्कृत व्याकरण]], [[संस्कृत साहित्य]], [[भारतीय छन्दशास्त्र]], [[संस्कृत का पुनरुत्थान]], [[धातु (संस्कृत के क्रिया शब्द)|संस्कृत धातु]], <s>[[संस्कृतीकरण]]</s> आदि के लिए अकेला संस्कृत शब्द सही नहीं है। [[हिन्दी]] पर भी संस्कृत की तरह का नियम ही लागू होता है। हिन्दी शब्द केवल भाषा के लिए है, इसमें भी व्याकरण, साहित्य या अन्य शब्द साथ में जोड़कर उन्हें व्यक्त किया जाता है। @[[सदस्य:SM7|SM7]] जी: अतः लेख का शीर्षक केवल "संस्कृत" (सुझाव के अनुसार) रखा जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:47, 28 अक्टूबर 2024 (UTC)
:::::::{{समर्थन}} संजीव कुमार जी के तर्कों से पूर्णतः सहमत हूँ।@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, चूँकि यह चर्चा एक वर्ष से अधिक पुरानी है, कृपया सर्वसम्मति मानकर इसे 'संस्कृत' पर स्थानांतरित कर दें। --[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:46, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
== पृष्ठ को सुरक्षित करना ==
मुझे लगता है पृष्ठ को अर्द्धसुरक्षित कर देना चाहिए। पृष्ठ का इतिहास देखा जाए तो कई सदस्यों ने खाते या बिना खातों के असत्य या पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जानकारी सम्पादित की है।
विघटनकारी संपादनों से बचने के लिए यह उपाय शायद ठीक रहेगा। अन्य संपादकों और प्रबंधकों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी [[सदस्य:Pushkar Singh|Pushkar Singh]] ([[सदस्य वार्ता:Pushkar Singh|वार्ता]]) 20:15, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:{{समर्थन}} अर्द्ध-सुरक्षित करने के लिए [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:49, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चार्वाक दर्शन
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
'''चार्वाक दर्शन''' एक प्राचीन भारतीय भौतिकवादी [[नास्तिक]] [[दर्शनशास्त्र|दर्शन]] है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.firstpost.com/politics/who-was-rishi-charvak-whom-narendra-modi-quoted-in-banaskantha-gujrat-4797.html|title=कौन थे चार्वाक ऋषि जिनका पीएम मोदी ने दिया हवाला|access-date=8 अक्तूबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171008231749/http://hindi.firstpost.com/politics/who-was-rishi-charvak-whom-narendra-modi-quoted-in-banaskantha-gujrat-4797.html|archive-date=8 अक्तूबर 2017|url-status=dead}}</ref> यह मात्र प्रत्यक्ष [[प्रमाण]] को मानता है तथा पारलौकिक सत्ताओं को यह सिद्धांत स्वीकार नहीं करता है।<ref>{{cite web|url=https://indianexpress.com/article/explained/govind-pansare-mm-kalburgi-gauri-lankesh-murder-5316465/|title=Indian rationalism, Charvaka to Narendra Dabholkar|access-date=22 अगस्त 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180822154123/https://indianexpress.com/article/explained/govind-pansare-mm-kalburgi-gauri-lankesh-murder-5316465/|archive-date=22 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> यह दर्शन वेदबाह्य भी कहा जाता है।
वेदबाह्य दर्शन छः हैं- चार्वाक, माध्यमिक, योगाचार, सौत्रान्तिक, वैभाषिक, और आर्हत (जैन)। इन सभी में वेद से असम्मत सिद्धान्तों का प्रतिपादन है।
[[अजित केशकंबली]] को चार्वाक के अग्रदूत के रूप में श्रेय दिया जाता है, जबकि बृहस्पति को आमतौर पर चार्वाक या लोकायत दर्शन के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। चार्वाक , बृहस्पति सूत्र (600 ईसा पूर्व) के अधिकांश प्राथमिक साहित्य गायब या खो गए हैं। इसकी शिक्षाओं को ऐतिहासिक माध्यमिक साहित्य से संकलित किया गया है जैसे कि शास्त्र, सूत्र, और भारतीय महाकाव्य कविता में और [[गौतम बुद्ध]] के संवाद और जैन साहित्य से। चार्वाक प्राचीन भारत के एक अनीश्वरवादी और नास्तिक तार्किक थे।<ref>{{cite web|url=http://www.livehindustan.com/news/guestcolumn/article1-followers-of-charvak-787800.html|title=चार्वाक के अनुयायी|access-date=8 अक्तूबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171008232121/http://www.livehindustan.com/news/guestcolumn/article1-followers-of-charvak-787800.html|archive-date=8 अक्तूबर 2017|url-status=dead}}</ref> ये नास्तिक मत के प्रवर्तक [[बृहस्पति]] के शिष्य माने जाते हैं। बृहस्पति और चार्वाक कब हुए इसका कुछ भी पता नहीं है। बृहस्पति को [[चाणक्य]] ने अपने [[अर्थशास्त्र (ग्रन्थ)|अर्थशास्त्र ग्रन्थ]] में अर्थशास्त्र का एक प्रधान आचार्य माना है।
चार्वाक दर्शन शब्द में 'चर्व' का अर्थ है - खाना । इस 'चर्व' पदसे ही 'खाने-पीने और मौज करने' का संदेश देने वाले इस दर्शन का नाम 'चार्वाक दर्शन' पड़ा है । 'गुणरत्न' ने इसकी व्याख्या इस प्रकार से की है- परमेश्वर, वेद, पुण्य-पाप, स्वर्ग-नरक, आत्मा, मुक्ति इत्यादि का जिसने 'चर्वण' (नामशेष) कर दिया है, वह 'चार्वाक दर्शन' है। इस मत के लोगों का लक्ष्य अपने मत की स्थापना की अपेक्षा दूसरे के मत का खण्डन के प्रति अधिक रहने से उनको 'वैतण्डिक' कहा गया है।
== परिचय ==
{{Unreferenced section}}
प्रचलित धारणा यही है कि चार्वाक शब्द की उत्पत्ति ‘चारु’+’वाक्’ (मीठी बोली बोलने वाले) से हुई है। चार्वाक सिद्धांतों के लिए बौद्ध पिटकों में ‘लोकायत’ शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसका मतलब ‘दर्शन की वह प्रणाली है जो जो इस लोक में विश्वास करती है और स्वर्ग, नरक अथवा मुक्ति की अवधारणा में विश्वास नहीं रखती’। चार्वाक या लोकायत दर्शन का ज़िक्र तो महाभारत में भी मिलता है लेकिन इसका कोई भी मूल ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है।
[[सर्वदर्शनसंग्रह]] में चार्वाक का मत दिया हुआ मिलता है। [[पद्म पुराण|पद्मपुराण]] में लिखा है कि असुरों को बहकाने के लिये बृहस्पति ने वेदविरुद्ध मत प्रकट किया था। नास्तिक मत के संबध में [[विष्णु पुराण|विष्णुपुराण]] में लिखा है कि जब धर्मबल से दैत्य बहुत प्रबल हुए तब देवताओं ने [[विष्णु]] के यहाँ पुकार की। विष्णु ने अपने शरीर से मायामोह नामक एक पुरुष उत्पन्न किया जिसने [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] तट पर दिगबंर रूप में जाकर तप करते हुए असुरों को बहकाकर धर्ममार्ग में भ्रष्ट किया। मायामोह ने असुरों को जो उपदेश किया वह सर्वदर्शनसंग्रह में दिए हुए चार्वाक मत के श्लोकों से बिलकुल मिलता है। [[लिङ्ग पुराण|लिंगपुराण]] में त्रिपुरविनाश के प्रसंग में भी शिवप्रेरित एक दिगंबर मुनि द्वारा असुरों के इसी प्रकार बहकाए जाने की कथा लिखी है जिसका लक्ष्य [[जैन धर्म|जैनों]] पर जान पड़ता है। [[वाल्मीकि रामायण]] अयोध्या कांड में महर्षि जावालि ने रामचंद्र को वनवास छोड़ अयोध्या लौट जाने के लिये जो उपदेश दिया है वह भी चार्वाक के मत से बिलकुल मिलता है। इन सब बातों से सिद्ध होता है कि निरीश्वरवादी मत बहुत प्राचीन है। सांख्य दर्शन, जो एक आस्तिक दर्शन हैं, वह भी निरीश्वरवादी मत हैं।
चार्वाक ईश्वर और परलोक नहीं मानते। परलोक न मानने के कारण ही इनके दर्शन को '''[[चार्वाक दर्शन|लोकायत]]''' भी कहते हैं। सर्वदर्शनसंग्रह में चार्वाक के मत से सुख ही इस जीवन का प्रधान लक्ष्य है [[सुखवाद]]। संसार में दुःख भी है, यह समझकर जो सुख नहीं भोगना चाहते, वे मूर्ख हैं। मछली में काँटे होते हैं तो क्या इससे कोई मछली ही न खाय ? चौपाए खेत पर जायँगे, इस डर से क्या कोई खेत ही न बोवे ? इत्यादि। चार्वाक आत्मा को पृथक् कोई पदार्थ नहीं मानते [[अनात्मवाद]]। उनके मत से जिस प्रकार गुड़, तंडुल आदि के संयोग से [[मदिरा|मद्य]] में मादकता उत्पन्न हो जाती है उसी प्रकार पृथ्वी, जल, तेज और वायु इन चार भूतों के संयोगविशेष से चेतनता उत्पन्न हो जाती है। इनके विश्लेषण या विनाश से 'मैं' अर्थात् चेतनता का भी नाश हो जाता है। इस चेतन शरीर के नाम के पीछे फिर पुनरागमन आदि नहीं होता। ईश्वर, परलोक आदि विषय अनुमान के आधार पर हैं जिनकी कोइ वस्तुगत अस्तित्व नही है।[[अनीश्वरवादी और इहलौकिकवादी]]।
पर चार्वाक दर्शन प्रत्यक्ष को ही एकमात्र प्रमाण मानते है लेकिन अनुमान को प्रमाण नहीं मानते। उनका तर्क है कि अनुमान व्याप्तिज्ञान पर आश्रित है। जो ज्ञान हमें बाहर इंद्रियों के द्वारा होता है उसे भूत और भविष्य तक बढ़ाकर ले जाने का नाम व्याप्तिज्ञान है, जो असंभव है। मन में यह ज्ञान प्रत्यक्ष होता है, यह कोई प्रमाण नहीं क्योंकि मन अपने अनुभव के लिये इंद्रियों पर ही आश्रित है। यदि कहो कि अनुमान के द्वारा व्याप्तिज्ञान होता है तो इतरेतराश्रय दोष आता है, क्योंकि व्याप्तिज्ञान को लेकर ही तो अनुमान को सिद्ध किया चाहते हो।चार्वाक का मत [[सर्वदर्शनसंग्रह]], [[सर्वदर्शनशिरोमणि]] और [[बार्हस्पत्य सूत्र|बृहस्पतिसूत्र]] में देखना चाहिए। [[नैषधीयचरित|नैषध]] के १७वें सर्ग में भी इस मत का विस्तृत उल्लेख है।
चार्वाक केवल प्रत्यक्षवादिता का समर्थन करता है, वह अनुमान आदि प्रमाणों को नहीं मानता है। उसके मत से पृथ्वी जल तेज और वायु ये चार ही तत्व है, जिनसे सब कुछ बना है। उसके मत में आकाश तत्व की स्थिति नहीं है, इन्ही चारों तत्वों के मेल से यह देह बनी है, इनके विशेष प्रकार के संयोजन मात्र से देह में चैतन्य उत्पन्न हो जाता है, जिसको लोग आत्मा कहते है। शरीर जब विनष्ट हो जाता है, तो चैतन्य भी खत्म हो जाता है [[देहात्मवाद]]। इस प्रकार से जीव इन भूतो से उत्पन्न होकर इन्ही भूतो के नष्ट होते ही समाप्त हो जाता है, आगे पीछे इसका कोई महत्व नहीं है। इसलिये जो चेतन में देह दिखाई देती है वही आत्मा का रूप है, देह से अतिरिक्त आत्मा होने का कोई प्रमाण ही नहीं मिलता है। चार्वाक के मत से स्त्री पुत्र और अपने कुटुम्बियों से मिलने और उनके द्वारा दिये जाने वाले सुख ही सुख कहलाते है। उनका आलिन्गन करना ही पुरुषार्थ है, संसार में खाना पीना और सुख से रहना चाहिये। इस दर्शन में कहा गया है, कि:-
: '' यावज्जीवेत सुखं जीवेद ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत, भस्मीभूतस्य देहस्य पुनरागमनं कुतः ॥
अर्थ है कि जब तक जीना चाहिये सुख से जीना चाहिये, अगर अपने पास साधन नहीं है, तो दूसरे से उधार लेकर मौज करना चाहिये, शमशान में शरीर के जलने के बाद शरीर को किसने वापस आते देखा है?
चार्वाक दर्शन के अनुसार पृथ्वी, जल, तेज तथा वायु ये चार ही तत्त्व सृष्टि के मूल कारण हैं। जिस प्रकार बौद्ध उसी प्रकार चार्वाक का भी मत है कि आकाश नामक कोई तत्त्व नहीं है। यह शून्य मात्र है। अपनी आणविक अवस्था से स्थूल अवस्था में आने पर उपर्युक्त चार तत्त्व ही बाह्य जगत, इन्द्रिय अथवा देह के रूप में दृष्ट होते हैं। आकाश की वस्त्वात्मक सत्ता न मानने के पीछे इनकी प्रमाण व्यवस्था कारण है। जिस प्रकार हम गन्ध, रस, रूप और स्पर्श का प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए उनके समवायियों का भी तत्तत इन्द्रियों के द्वारा प्रत्यक्ष करते हैं। आकाश तत्त्व का वैसा प्रत्यक्ष नहीं होता। अत: उनके मत में आकाश नामक तत्त्व है ही नहीं। चार महाभूतों का मूलकारण क्या है? इस प्रश्न का उत्तर चार्वाकों के पास नहीं है। यह विश्व अकस्मात भिन्न-भिन्न रूपों एवं भिन्न-भिन्न मात्राओं में मिलने वाले चार महाभूतों का संग्रह या संघट्ट मात्र है।
===आत्मा===
{{Unreferenced section}}
चार्वाकों के अनुसार चार महाभूतों से अतिरिक्त आत्मा नामक कोई अन्य पदार्थ नहीं है। चैतन्य आत्मा का गुण है। चूँकि आत्मा नामक कोई वस्तु है ही नहीं अत: चैतन्य शरीर का ही गुण या धर्म सिद्ध होता है। अर्थात यह शरीर ही आत्मा है। इसकी सिद्धि के तीन प्रकार है-
तर्क, अनुभव और आयुर्वेद शास्त्र।
तर्क से आत्मा की सिद्धि के लिये चार्वाक लोग कहते हैं कि शरीर के रहने पर चैतन्य रहता है और शरीर के न रहने पर चैतन्य नहीं रहता। इस अन्वय व्यतिरेक से शरीर ही चैतन्य का आधार अर्थात आत्मा सिद्ध होता है।
अनुभव 'मैं स्थूल हूँ', 'मैं दुर्बल हूँ', 'मैं गोरा हूँ', 'मैं निष्क्रिय हूँ' इत्यादि अनुभव हमें पग-पग पर होता है। स्थूलता दुर्बलता इत्यादि शरीर के धर्म हैं और 'मैं' भी वही है। अत: शरीर ही आत्मा है।
आयुर्वेद जिस प्रकार गुड, जौ, महुआ आदि को मिला देने से काल क्रम के अनुसार उस मिश्रण में मदशक्त उत्पन्न होती है, अथवा दही पीली मिट्टी और गोबर के परस्पर मिश्रण से उसमें बिच्छू पैदा हो जाता है अथवा पान, कत्था, सुपारी और चूना में लाल रंग न रहने पर भी उनके मिश्रण से मुँह में लालिमा उत्पन्न हो जाती है उसी प्रकार चतुर्भूतों के विशिष्ट सम्मिश्रण से चैतन्य उत्पन्न हो जाता है। किन्तु इन भूतों के विशिष्ट मात्रा में मिश्रण का कारण क्या है? इस प्रश्न का उत्तर चार्वाक के पास स्वभाववाद के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
ईश्वर-न्याय आदि शास्त्रों में ईश्वर की सिद्धि अनुमान या आप्त वचन से की जाती है। चूँकि चार्वाक प्रत्यक्ष और केवल प्रत्यक्ष प्रमाण को मानता है अत: उसके मत में प्रत्यक्ष दृश्यमान राजा ही ईश्वर हैं वह अपने राज्य का तथा उसमें रहने वाली प्रजा का नियन्ता होता है। अत: उसे ही ईश्वर मानना चाहिये।
===ज्ञान मीमांसा===
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प्रमेय अर्थात विषय का यथार्थ ज्ञान अर्थात प्रमा के लिये प्रमाण की आवश्यकता होती है। चार्वाक लोक केवल प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं। विषय तथा इन्द्रिय के सन्निकार्ष से उत्पन्न ज्ञान प्रत्यक्ष ज्ञान कहलाता है। हमारी इन्द्रियों के द्वारा प्रत्यक्ष दिखलायी पड़ने वाला संसार ही प्रमेय है। इसके अतिरिक्त अन्य पदार्थ असत है। आँख, कान, नाक, जिह्वा और त्वचा के द्वारा रूप शब्द गन्ध रस एवं स्पर्श का प्रत्यक्ष हम सबको होता है। जो वस्तु अनुभवगम्य नहीं होती उसके लिये किसी अन्य प्रमाण की आवश्यकता भी नहीं होती। बौद्ध, जैन नामक अवैदिक दर्शन तथा न्यायवैशेषिक आदि अर्द्धवैदिक दर्शन अनुमान को भी प्रमाण मानते हैं। उनका कहना है कि समस्त प्रमेय पदार्थों की सत्ता केवल प्रत्यक्ष प्रमाण से सिद्ध नहीं की जा सकती। परन्तु चार्वाक का कथन है कि अनुमान से केवल सम्भावना पैदा की जा सकती है। निश्चयात्मक ज्ञान प्रत्यक्ष से ही होता हैं। दूरस्थ हरे भरे वृक्षों को देखकर वहाँ पक्षियों का कोलाहल सुनकर, उधर से आने वाली हवा के ठण्डे झोके से हम वहाँ पानी की सम्भावना मानते हैं। जल की उपलब्धि वहाँ जाकर प्रत्यक्ष देखने से ही निश्चित होती है। अत: सम्भावना उत्पन्न करने तथा लोकव्यवहार चलाने के लिये अनुमान आवश्यक होता है किन्तु वह प्रमाण नहीं हो सकता। जिस व्याप्ति के आधार पर अनुमान प्रमाण की सत्ता मानी जाती है वह व्याप्ति के अतिरिक्त कुछ नहीं है। धूप के साथ अग्नि का, पुष्प के साथ गन्ध का होना स्वभाव है। सुख और धर्म का दु:ख और अधर्म का कार्यकारण भाव स्वाभाविक है। जैसे कोकिल के शब्द में मधुरता तथा कौवे के शब्द में कर्कशता स्वाभाविक है उसी प्रकार सर्वत्र समझना चाहिये।
जहाँ तक शब्द प्रमाण की बात है तो वह तो एक प्रकार से प्रत्यक्ष प्रमाण ही है। आप्त पुरुष के वचन हमको प्रत्यक्ष सुनायी देते हैं। उनको सुनने से अर्थ ज्ञान होता है। यह प्रत्यक्ष ही है। जहाँ तक वेदों का प्रश्न है उनके वाक्य अदृष्ट और अश्रुतपूर्ण विषयों का वर्णन करते हैं अत: उनकी विश्वसनीयता सन्दिग्ध है। साथ ही अधर्म आदि में अश्वलिंगग्रहण सदृश लज्जास्पद एवं मांसभक्षण सदृश घृणास्पद कार्य करने से तथा जर्भरी तुर्फरी आदि अर्थहीन शब्दों का प्रयोग करने से वेद अपनी अप्रामाणिकता स्वयं सिद्ध करते हैं।
===आचार मीमांसा===
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उपर्युक्त विवरण से यह स्पष्ट हो जाता है कि चार्वाक लोग इस प्रत्यक्ष दृश्यमान देह और जगत के अतिरिक्त किसी अन्य पदार्थ को स्वीकार नहीं करते। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष नामक पुरुषार्थचतुष्टय को वे लोग पुरुष अर्थात मनुष्य देह के लिये उपयोगी मानते हैं। उनकी दृष्टि में अर्थ और काम ही परम पुरुषार्थ है। धर्म नाम की वस्तु को मानना मूर्खता है क्योंकि जब इस संसार के अतिरिक्त कोई अन्य स्वर्ग आदि है ही नहीं तो धर्म के फल को स्वर्ग में भोगने की बात अनर्गल है। पाखण्डी धूर्त्तों के द्वारा कपोलकल्पित स्वर्ग का सुख भोगने के लिये यहाँ यज्ञ आदि करना धर्म नहीं है बल्कि उसमें की जाने वाली पशु हिंसा आदि के कारण वह अधर्म ही है तथा हवन आदि करना तत्त्द वस्तुओं का दुरुपयोग तथा व्यर्थ शरीर को कष्ट देना है इसलिये जो कार्य शरीर को सुख पहुँचाये उसी को करना चाहिये। जिसमें इन्द्रियों की तृप्ति हो मन आन्दित हो वही कार्य करना चाहिये। जिनसे इन्द्रियों की तृप्ति हो मन आनन्दित हो उन्हीं विषयों का सेवन करना चाहिये। शरीर इन्द्रिय मन को अनन्दाप्लावित करने में जो तत्त्व बाधक होते हैं उनको दूर करना, न करना, मार देना धर्म है। शारीरिक मानसिक कष्ट सहना, विषयानन्द से मन और शरीर को बलात विरत करना अधर्म है। तात्पर्य यह है कि आस्तिक वैदिक एवं यहाँ तक कि अर्धवैदिक दर्शनों में, पुराणों स्मृतियों में वर्णित आचार का पालन यदि शरीर सुख का साधक है तो उनका अनुसरण करना चाहिये और यदि वे उसके बाधक होते हैं तो उनका सर्वथा सर्वदा त्याग कर देना चाहिये।
===मोक्ष===
चार्वाकों की मोक्ष की कल्पना भी उनके तत्त्व मीमांसा एवं ज्ञान मीमांसा के प्रभाव से पूर्ण प्रभावित है। जब तक शरीर है तब तक मनुष्य नाना प्रकार के कष्ट सहता है। यही नरक है। इस कष्ट समूह से मुक्ति तब मिलती है जब देह चैतन्यरहित हो जाता है अर्थात मर जाता है। यह मरना ही मोक्ष है क्योंकि मृत शरीर को किसी भी कष्ट का अनुभव मर जाता है। यह मरना ही मोक्ष है क्योंकि मृत शरीर को किसी भी कष्ट का अनुभव नहीं होता। यद्यपि अन्य दर्शनों में आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए उसी के मुक्त होने की चर्चा की गयी है और मोक्ष का स्वरूप भिन्न-भिन्न दर्शनों में भिन्न-भिन्न है, तथापि चार्वाक उनकी मान्यता को प्रश्रय नहीं देते। वे न तो मोक्ष को नित्य मानते हुए सन्मात्र मानते हैं, न नित्य मानते हुए सत और चित स्वरूप मानते हैं न ही वे सच्चिदानन्द स्वरूप में उसकी स्थिति को ही मोक्ष स्वीकार करते हैं।
===चार्वाक लोकायत===
चार्वाक दर्शन वह दर्शन है जो जन सामान्य में स्वभावत: प्रिय है। जिस दर्शन के वाक्य चारु अर्थात रुचिकर हों वह चार्वाक दर्शन है। सभी शास्त्रीय गम्भीर विषयों का व्यावहारिक एवं लौकिक पूर्व पक्ष ही चार्वाक दर्शन है। सहज रूप में जो कुछ हम करते हैं वह सब कुछ चार्वाक दर्शन का आधार है। चार्वाक दर्शन जीवन के हर पक्ष को सहज दृष्टि से देखता है। जीवन के प्रति यह सहज दृष्टि ही चार्वाक दर्शन है। वास्तविकता तो यह है कि, विश्व का हर मानव जो जीवन जीता है वह चार्वाक दर्शन ही है।
ऐसे वाक्य और सिद्धान्त जो सबको रमणीय लगें लोक में आयत या विश्रुत आवश्य होंगे। सम्भवत: यही कारण है कि हम चार्वाक दर्शन को लोकायत दर्शन के नाम से भी जानते हैं। यह दर्शन बार्हस्पत्य दर्शन के नाम से भी विद्वानों में प्रसिद्ध है। इस नाम से यह प्रतीत होता है कि यह दर्शन बृहस्पति के द्वारा विरचित है।
===चार्वाक दर्शन के प्रणेता बृहस्पति===
बृहस्पति भारतीय समाज में देवताओं के गुरु के रूप में मान्य हैं। परन्तु भारतीय साहित्य में बृहस्पति एक नहीं हैं। चार्वाक दर्शन के प्रवर्तक आचार्य बृहस्पति कौन हैं, यह निर्णय कर पाना अत्यन्त कठिन कार्य है। आङिगरस एवं लौक्य रूप में दो बृहस्पतियों का समुल्लेख ऋग्वेद में प्राप्त होता है। अश्वघोष के अनुसार आङिगरस बृहस्पति राजशास्त्र के प्रणेता हैं। लौक्य बृहस्पति के मत में सत पदार्थ की उत्पत्ति असत से मानी जाती है। इसी प्रकार असत पदार्थ की उत्पत्ति सत से मानी गयी है। जड़ पदार्थों को ही असत कहा जाता है। चेतन पदार्थों को इस मान्यता के अनुसार सत कहा जाता हैं।
एक बृहस्पति का निर्देश महाभारत के वन पर्व में भी प्राप्त होता है। यह बृहस्पति शुक्र का स्वरूप धारण कर इन्द्र का सरंक्षण एवं दानवों का विनाश करने के उद्देश्य से अनात्मवाद या प्रपंच विज्ञान की संरचना करता है। इस प्रपंच विज्ञान के फलस्वरूप शुभ को अशुभ एवं अशुभ को शुभ मानते हुए दानव वेद एवं शास्त्रों की आलोचना एवं निन्दा में संलग्न हो जाते हैं।
अन्य प्रसंग में महाभारत में ही एक और बृहस्पति का वर्णन मिलता है जो शुक्राचार्य के साथ मिल कर प्रवंचनाशास्त्र की रचना करते हैं। विभिन्न शास्त्रों के आचार्यों की माने तो चार्वाक मत दर्शन की श्रेणी में नहीं माना जा सकता क्योंकि इस दर्शन में मात्र मधुर वचनों की आड़ में वंचना का ही कार्य किया गया है। यह बात और है कि यदि चार्वाक की सुनें तो वह भी विभिन्न शास्त्रज्ञों को वंचक ही घोषित करता है।
एक ऐसे बृहस्पति का तैत्तरीय ब्राह्मण ग्रन्थ में वर्णन मिलता है जो गायत्री देवी के मस्तक पर आघात करता है गायत्री देवी को पद्म पुराण के अनुसार समस्त वेदों का मूल माना गया है। इस दृष्टि से यह बृहस्पति वेद का विरोधी माना जा सकता है। सम्भवत: वेद का विरोध प्रति पद करने के कारण इस बृहस्पति को चार्वाक दर्शन का प्रणेता भी माना जाना युक्तियुक्त होगा।
विष्णु पुराण में भी बृहस्पति का प्रसंग प्राप्त होता है। बृहस्पति की इस मान्यता के अनुसार वैदिक कर्मकाण्ड बहुवित्त के व्यय एवं प्रयास से साध्य हे। विविध सुख के साधक ये वैदिक उपाय कुछ अर्थ लोलुप स्वार्थ केन्द्रित धूर्तों का ही विधान है।
तार्किक बृहस्पति का भी कहीं कहीं वर्णन मिलता है। ये बृहस्पति वेद के अनुगामी तो अवश्य हैं पर तर्कसम्मत अनुष्ठानों का ही समर्थन करते हैं। इनकी दृष्टि से तत्त्व निर्णय शास्त्र पर आधारित अवश्य होना चाहिए परन्तु यह शास्त्रीय अनुसन्धान तर्क पोषित होना नितान्त आवश्यक है। तर्क विरहित चिन्तन धर्म के निर्धारण में कभी भी सार्थक नहीं हो सकता है।
वात्स्यायन मुनि ने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ कामसूत्र में अर्थशास्त्र के रचयिता के रूप में बृहस्पति का उल्लेख किया है। बृहस्पति द्वारा विरचित अर्थशास्त्र के एक सूत्र के अनुसार शास्त्र के रूप में मात्र लोकायत को ही मान्यता दी गयी है। फलत: अर्थशास्त्र के प्रणेता बृहस्पति एवं लोकायत शास्त्र के प्रवर्त्तक में अन्तर कर पाना अत्यन्त दुरूह कार्य है। कुछ समालोचकों ने अर्थशास्त्र के एवं लोकायत शास्त्र के निर्माता को अभिन्न मानने के साथ-साथ कामसूत्रों के प्रणेता भी बृहस्पति ही हैं, यह माना है। यदि लौकिक इच्छाओं को पूर्ण करना ही चार्वाक दर्शन का उद्देश्य है तो कामशास्त्र के प्रवर्त्तक मुनि वात्स्यायन ही बृहस्पति हैं, यह मानना उपयुक्त ही है।
कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में लोकायत दर्शन का सहज प्रतिपादन किया है। इस प्रकार अर्थशास्त्र के रचनाकार कौटिल्य एवं लोकायत दर्शन के प्रणेता बृहस्पति एक ही हैं ऐसा माना जा सकता है।
कोषकार हेमचन्द्र के अनुसार अर्थशास्त्र, कामसूत्र, न्यायसूत्र-भाष्य, पंचतन्त्र एवं चाणक्य नीति के रचयिता एक ही है।
इतनी विवेचना के बाद जो बृहस्पति वैदिक वाङमय में विभिन्न प्रसंगों में चर्चित हैं उनके यथा क्रम नाम इस प्रकार स्पष्ट होते हैं।
: लौक्य बृहस्पति
: आंगिरस बृहस्पति
: देवगुरु बृहस्पति
: अर्थशास्त्र प्रवर्त्तक बृहस्पति
: कामसूत्र प्रवर्त्तक बृहस्पति
: वेदविनिन्दक बृहस्पति
: तार्किक बृहस्पति।
[[पद्म पुराण]] के सन्दर्भ में अंगिरा ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं। आंगिरस बृहस्पति अंगिरा के पुत्र एवं ब्रह्मा के पौत्र हैं। फलत: इनकी देवों में गणना होती है। इस प्रकार देव गुरु बृहस्पति एवं आंगिरस बृहस्पति में कोई भेद नहीं माना जा सकता। देवों की संरक्षा के लिए देवताओं के गुरु द्वारा असुरों को प्रदत्त उपदेश विभिन्न लोकों में आयत हो गया यह कथन देव गुरु बृहस्पति के सन्दर्भ में विश्वसनीय नहीं हो सकता। असुर अपने गुरु शुक्राचार्य के रहते देवगुरु के उपदेश को क्यों आदर देंगे? अत: देवगुरु से अतिरिक्त कोई चार्वाक दर्शन का प्रवर्त्तक होना अपेक्षित है।
कुछ समालोचकों ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि [[चार्वाक दर्शन|चार्वाक]] के गुरु बृहस्पति, स्वर्ग के स्वामी [[इन्द्र]] के आचार्य विश्वविख्यात बृहस्पति नहीं हैं। ये बृहस्पति किसी राजकुल के गुरु हैं। ऐतिहासिक दृष्टि से देंखे तो वसिष्ठ, विश्वामित्र, द्रोणाचार्य आदि का किसी राजकुल का गुरु होना इस मान्यता को आधार भी दे रहा है।
===चार्वाक के सिद्धान्त===
जिस प्रकार आस्तिक दर्शनों में शंकर दर्शन शिरोमणि के रूप में स्वीकृत है उसी प्रकार नास्तिक दर्शनों में सबसे उत्कृष्ट नास्तिक के रूप में शिरोमणि की तरह चार्वाक दर्शन की प्रतिष्ठा निर्विवाद है। नास्तिक शिरोमणि चार्वाक इसलिए भी माना जाता है कि वह विश्व में विश्वास के आधार पर किसी न किसी रूप में मान्य ईश्वर की अलौकिक सर्वमान्य सत्ता को सिरे से नकार देता है। इनके मतानुसार ईश्वर नाम की कोई वस्तु संसार में नहीं है। नास्तिक शिरोमणि चार्वाक जो कुछ बाहरी इन्द्रियों से दिखाई देता है अनुभूत होता है, उसी की सत्ता को स्वीकार करता है। यही कारण है कि चार्वाक के सिद्धान्त में प्रत्यक्ष प्रमाण को छोड़ कर कोई दूसरा प्रमाण नहीं माना गया है। जिस ईश्वर की कल्पना अन्य दर्शनों में की गई है उसकी सत्ता प्रत्यक्ष प्रमाण से सम्भव नहीं है। इनके मत से बीज से जो अंकुर का प्रादुर्भाव होता है उसमें ईश्वर की भूमिका को मानना अनावश्यक एवं उपहासास्पद ही है। अंकुर की उत्पत्ति तो मिट्टी एवं जल के संयोग से नितान्त स्वाभाविक एवं सहज प्रक्रिया से सर्वानुभव सिद्ध है। इस स्वभाविक कार्य को सम्पन्न करने के लिए किसी अदृष्ट कर्त्ता की स्वीकृति निरर्थक है।
ईश्वर को न मानने पर जीव सामान्य के शुभ एवं अशुभ कर्मों के फल की व्यवस्था कैसे सम्भव होगी? इस प्रश्न का समाधान करते हुए चार्वाक पूछता है कि किस कर्म फल की व्यवस्था अपेक्षित? संसार में दो प्रकार के कर्म देखे जाते हैं। एक लौकिक तथा दूसरा अलौकिक कर्म। क्या आप लौकिक कर्मों के फल की व्यवस्था के सम्बन्ध में चिन्तित हैं? यदि हाँ, तो यह चिन्ता अनावश्यक है। लौकिक कर्मों का फल विधान तो लोक में सर्व मान्य राजा या प्रशासक ही करता है। यह सर्वानुभव सिद्ध तथ्य, प्रत्यक्ष ही है। हम देखते हैं कि चौर्य कर्म आदि निषिद्ध कार्य करने वाले को उसके दुष्कर्म का समुचित फल, लोक सिद्ध राजा ही दण्ड के रूप में कारागार आदि में भेज कर देता है। इसी प्रकार किसी की प्राण रक्षा आदि शुभ कर्म करने वाले पुरुष को राजा ही पुरस्कार रूप में सुफल अर्थात धन धान्य एवं सम्मान से विभूषित कर देता है।
यदि आप अलौकिक कर्मों के फल की व्यवस्था के सन्दर्भ में सचिन्त हैं तो यह चिन्ता भी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि पारलौकिक फल की दृष्टि से विहित ये सभी यज्ञ, पूजा, पाठ तपस्या आदि वैदिक कर्म जन सामान्य को ठगने की दृष्टि से तथा अपनी आजीविका एवं उदर के भरण पोषण के लिए कुछ धूर्तों द्वारा कल्पित हुए हैं। वास्तव में अग्निहोत्र, तीन वेद, त्रिदण्ड का धारण तथा शरीर में जगह जगह भस्म का संलेप बुद्धि एवं पुरुषार्थ हीनता के ही परिचायक हैं। इन वैदिक कर्मों का फल आज तक किसी को भी दृष्टि गोचर नहीं हुआ है। यदि वैदिक कर्मों का कोई फल होता तो अवश्य किसी न किसी को इसका प्रत्यक्ष आज तक हुआ होता। अत: आज तक किसी को भी इन वैदिक या वर्णाश्रम-व्यवस्था से सम्बद्ध कर्मों का फल-स्वर्ग, मोक्ष, देवलोक गमन आदि प्रत्यक्ष अनुभूति नहीं है अत: ये समस्त वैदिक कर्म निष्फल ही हैं, यह स्वत: युक्ति पूर्वक सिद्ध हो जाता है।
===अदृष्ट एवं ईश्वर का निषेध===
यहाँ यदि आस्तिक दर्शन यह कहे कि परलोक स्वर्ग आदि को सिद्ध करने वाला व्यापार अदृष्ट या धर्म एवं अधर्म है जिससे स्वर्ग की सिद्धि होती है तो यह चार्वाक को स्वीकार्य नहीं है। अलौकिक अदृष्ट का खण्डन करते हुए चार्वाक स्वर्ग आदि परलोक के साधन में अदृष्ट की भूमिका को निरस्त करता है तथा इस प्रकार आस्तिक दर्शन के मूल पर ही कुठाराघात कर देता है। यही कारण है कि अदृष्ट के आधार पर सिद्ध होने वाले स्वर्ग आदि परलोक के निरसन के साथ ही इस अदृष्ट के नियामक या व्यवस्थापक के रूप में ईश्वर का भी निरास चार्वाक मत में अनायास ही हो जाता है।
===जीव एवं चैतन्य की अवधारणा===
चार्वाक मत में कोई जीव शरीर से भिन्न नहीं है। शरीर ही जीव या आत्मा है। फलत: शरीर का विनाश जब मृत्यु के उपरान्त दाह संस्कार होने के बाद हो जाता है तब जीव या जीवात्मा भी विनष्ट हो जाता है। शरीर में जो चार या पाँच महाभूतों का समवधान है, यह समवधान ही चैतन्य का कारण है। यह जीव मृत्यु के अनन्तर परलोक जाता है यह मान्यता भी, शरीर को ही चेतन या आत्मा स्वीकार करने से निराधार ही सिद्ध होती है। शास्त्रों में परिभाषित मोक्ष रूप परम पुरुषार्थ भी चार्वाक नहीं स्वीकार करता है। चेतन शरीर का नाश ही इस मत में मोक्ष है। धर्म एवं अधर्म के न होने से चार्वाक सिद्धान्त में धर्म-अधर्म या पुण्य-पाप को, कोई अदृश्य स्वर्ग एवं नरक आदि फल भी नहीं है यह अनायास ही सिद्ध हो जाता है।
===शरीरात्मवाद में स्मरण का उपपादन===
चार्वाक मत में शरीर को ही आत्मा मान लेने पर बाल्यावस्था में अनुभूत कन्दुक क्रीडा आदि का वृद्धावस्था या युवावस्था में स्मरण कैसे होता है? यह एक ज्वलन्त प्रश्न सहज ही उठ खड़ा होता है। यहाँ यह नहीं कहा जा सकता कि बाल्यावस्था का शरीर, वृद्धावस्था का शरीर एवं युवावस्था का शरीर एक ही है। यदि तीनों अवस्थाओं का शरीर एक ही होता तो इन तीनों अवस्थाओं के शरीरों में इतना बड़ा अन्तर नहीं होता। अन्तर से यह स्पष्ट सिद्ध होता है कि शरीर के अवयव जो मांस पिण्ड आदि हैं इनमें वृद्धि एवं ह्रास होता है। तथा इन ह्रास एवं वृद्धि के कारण ही बाल्यावस्था के शरीर का नाश एवं युवावस्था के शरीर की उत्पत्ति होती है यह भी सिद्ध होता है। यदि यह कहें कि युवावस्था के शरीर में यह वही शरीर है, यह व्यवहार होने के कारण शरीर को एक मान कर उपर्युक्त स्मरण को उत्पन्न किया जा सकता है, तो यह कथन भी युक्तियुक्त नहीं हो सकता। क्योंकि यह वही शरीर है यह प्रत्यभिज्ञान तो स्वरूप एवं आकृति की समानता के कारण होता है। फलत: दोनों अवस्थाओं के शरीरों को अभिन्न नहीं माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में पूर्व दर्शित बाल्य-काल के स्मरण को सम्पन्न करने के लिए चार्वाक बाल्यकाल के शरीर में उत्पन्न क्रीड़ा से जन्य संस्कार दूसरे युवा-काल के शरीर में अपने जैसे ही नये संस्कार पैदा कर देते हैं। इसी प्रकार युवावस्था के शरीर में विद्यमान संस्कार वृद्धावस्था के शरीर में अपने जैसे संस्कार उत्पन्न कर देते हैं। एतावता इन बाल्यावस्था के संस्कारों के उद्बोधन से चार्वाक मत में स्मरण बिना किसी बाधा के हो जाता है। अन्तत: चार्वाक दर्शन में शरीर ही आत्मा है यह सहज ही सिद्ध होता है।
यदि शरीर ही आत्मा है तो चार्वाक से यह पूछा जा सकता है कि 'मम शरीरम्' यह मेरा शरीर है, ऐसा लोकसिद्ध जो व्यवहार है वह कैसे उत्पन्न होगा? इस व्यवहार से तो यह प्रतीत हो रहा है कि शरीर अलग है एवं शरीर का स्वामी कोई और है, जो शरीर से भिन्न आत्मा ही है। इस प्रश्न का समाधान करते हुए चार्वाक कहता है कि जैसे दानव विशेष के सिर को ही राहू कहा गया है, फिर भी जन-सामान्य 'राहू का सिर' यह व्यवहार बड़े ही सहज रूप में करता है, उसी प्रकार शरीर के ही आत्मा होने पर भी 'मेरा शरीर' यह लोकसिद्ध व्यवहार उपपन्न हो जायेगा। चार्वाकों में कुछ चार्वाक इन्द्रियों को ही आत्मा मानने पर इन्द्रिय के नष्ट होने पर स्मरण की आपत्ति का निरास नहीं हो पाता है। किन्हीं चार्वाकों ने प्राण एवं मन को भी आत्मा के रूप में माना है।
शरीर ही आत्मा है यह सिद्ध करने के लिए चार्वाक इस वेद के सन्दर्भ को भी आस्तिकों के सन्तोष के लिए प्रस्तुत करता है। इस वेद वचन का तात्पर्य है कि 'विज्ञान से युक्त आत्मा इन भूतों से उत्पन्न हो कर अन्त में इन भूतों में ही विलीन हो जाता है। यह भूतों में शरीर स्वरूप आत्मा का विलय ही मृत्यु है।'
== इन्हें भी देखें ==
* [[अजित केशकंबली]]
* [[नास्तिकता]]
* [[नास्तिक दर्शन]]
* [[अज्ञेयवाद]]
* [[श्रमण परम्परा]]
* [[आजीविक]]
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20121215044704/http://books.google.co.in/books?id=RZJTZBvX1uMC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false लोकायत] (गूगल पुस्तक ; लेखक - देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय)
{{भारतीय दर्शन}}
[[श्रेणी:दर्शन]]
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
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2026-04-17T11:25:29Z
एस. विनायक मिश्रा
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wikitext
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{{Infobox Indian Political Party
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| membership = 5.5 करोड़<ref>{{cite news|url=https://theprint.in/india/southern-states-ahead-in-congress-membership-drive-telangana-unit-leads/892158/|title=Southern states ahead in Congress membership drive, Telangana unit leads|date=28 March 2022|website=ThePrint}}</ref><ref>{{cite web|website=ABP News|title=Congress' Digital Membership Drive Gains Focus With Boost in Participation, South Contributes Significantly|url=https://news.abplive.com/news/india/congress-digital-membership-drive-gains-focus-with-47-percent-men-42-percent-women-participation-significant-contribution-by-south-1521959|date=27 March 2022}}</ref>
| ideology = {{ublist<!--IMPORTANT: Do not change party ideology or position without bringing reliable sources to the Talk page and garnering consensus.-->|[[उदारतावाद]]{{refn|<ref>{{cite book|editor1=Emiliano Bosio|editor2=Yusef Waghid|url=https://books.google.com/books?id=Hb6ZEAAAQBAJ&pg=PA270|title=Global Citizenship Education in the Global South: Educators' Perceptions and Practices|date=31 October 2022|page=270|publisher=Brill|isbn=9789004521742}}</ref><ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield]|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9 }}</ref>}}|सामाजिक उदारवाद{{refn|<ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9}}</ref><ref name="NSGehlot1991">{{cite book|author=N. S. Gehlot|title=The Congress Party in India: Policies, Culture, Performance|url={{Google books|06HLD2_3Qj4C|page=PM177|keywords=|text=|plainurl=yes}}|year=1991|publisher=Deep & Deep Publications|isbn=978-81-7100-306-8|pages=150–200}}</ref><ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>}}|[[सामाजिक लोकतंत्र]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="Agarwal1989">{{cite book|year=1989|editor1-last=Agrawal|editor1-first=S. P.|editor2-last=Aggarwal|editor2-first=J. C.|title=Nehru on Social Issues|location=New Delhi|publisher= Concept Publishing|isbn=978-817022207-1}}</ref>}}|आर्थिक उदारवाद<ref>{{cite web|title=Political Parties|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref name=":5">{{Cite book|last=Mohan, Rakesh.|url=https://www.worldcat.org/oclc/1056070747|title=India Transformed : Twenty-Five Years of Economic Reforms|date=2018 |publisher=Brookings Institution Press|isbn=978-0-8157-3662-2|location=Washington, DC|pages=44–49|oclc=1056070747}}</ref>|[[धर्मनिरपेक्षता]]<ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>|[[नागरिक राष्ट्रवाद]]<ref name="J.Soper"/>}}
| international ={{nowrap|[[en:Progressive Alliance|प्रगतिशील गठबंधन]]}}<ref>{{cite web|url=http://progressive-alliance.info/participants/|title=Progressive Alliance Participants|work=Progressive Alliance|access-date=20 March 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150302142054/http://progressive-alliance.info/participants/|archive-date=2 March 2015|url-status=dead}}</ref><br>{{nowrap|[[समाजवादी इंटरनेशनल]]}}<ref>{{cite web|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticlePageID=931|title=Full Member Parties of Socialist International|work=Socialist International}}</ref><ref name="Sheffer1993">{{cite book|author=Gabriel Sheffer|title=Innovative Leaders in International Politics|url=https://books.google.com/books?id=__efKLSD3M0C&pg=PA202|access-date=30 January 2013|year=1993|publisher=SUNY Press|isbn=978-0-7914-1520-7|page=202}}</ref><ref>{{cite web|title=Meeting of the SI Council at the United Nations in Geneva|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticleID=2326|publisher=Socialist International}}</ref>
| colours = {{colorbox|#F37022|border=darkgray}} [[केसरिया|सैफ्रन]]<br>{{colorbox|#FFFFFF|border=darkgray}} [[सफ़ेद]]<br>{{colorbox|#0F823F|border=darkgray}} [[हरा]]<br>(आधिकारिक,<br>[[भारत का ध्वज|भारतीय राष्ट्रीय रंग]]){{efn|The Indian national colours of the Indian flag serve as the official visual identification of the Indian National Congress.}}
<br>{{Colorbox|{{party color|Indian National Congress}}|border=darkgray}} [[आसमानी नीला]]<br>(प्रथागत)
|position = <!-- महत्वपूर्ण। वार्ता पृष्ठ पर विश्वसनीय स्रोत लाए बिना और आम सहमति प्राप्त किए बिना पार्टी की विचारधारा या स्थिति में परिवर्तन न करें। -->{{nowrap|[[केन्द्रवाद]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="centrist">{{cite web|title=Political Parties – NCERT|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref>{{cite book|editor=Jean-Pierre Cabestan, Jacques deLisle|title=Inside India Today (Routledge Revivals)|url=https://books.google.com/books?id=heFSAQAAQBAJ&dq=Centrist+Indian+National+Congress&pg=PR10|date=2013 |publisher=Routledge|isbn=978-1-135-04823-5}}</ref>}}}}
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{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्श्वपट}}
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस''' (संक्षिप्त में, '''भा॰रा॰कां॰'''), सामान्यतः '''कांग्रेस पार्टी''' या बस '''कांग्रेस''' के नाम से जानी जाती है, यह भारत में एक [[राजनीतिक दल]] है। इसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी, यह एशिया और अफ्रीका में ब्रिटिश साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक [[राष्ट्रीयता|राष्ट्रीयता आंदोलन]] था।{{efn|"गैर-यूरोपीय साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक राष्ट्रीयता आंदोलन, और जिसने कई अन्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, वह भारतीय कांग्रेस थी।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001">{{citation|last=Marshall|first=P. J.|title=ब्रिटिश साम्राज्य का कैम्ब्रिज चित्रित इतिहास|url={{Google books|S2EXN8JTwAEC|page=PA179|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=179|year=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-00254-7}}</ref> 19वीं सदी के अंत से, और विशेष रूप से 1920 के बाद, [[महात्मा गांधी]] के नेतृत्व में, कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख नेता बन गई।<ref name="research">{{cite web|url=http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में जानकारी|website=open.ac.uk|publisher=Arts & Humanities Research council|access-date=29 July 2015|archive-date=22 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180922061005/http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|url-status=dead}}</ref> कांग्रेस ने [[यूनाइटेड किंगडम]] से भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद की,{{efn|"दक्षिण एशियाई पार्टियों में कई पोस्ट-कोलोनियल दुनिया में सबसे पुरानी पार्टियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रमुख 129 वर्ष पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है जिसने 1947 में भारत को स्वतंत्रता दिलाई।"<ref name="Chiriyankandath2016" />}}<ref name="Chiriyankandath2016">{{citation|last=Chiriyankandath|first=James|title=दक्षिण एशिया में पार्टियाँ और राजनीतिक परिवर्तन|url={{Google books|c4n7CwAAQBAJ|page=PA2|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=2|year=2016|publisher=Routledge|isbn=978-1-317-58620-3}}</ref>{{efn|"जिस संगठन ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस थी, जिसकी स्थापना 1885 में हुई।"<ref name="KopsteinLichbach2014" /> }}<ref name="KopsteinLichbach2014">{{citation|last1=Kopstein|first1=Jeffrey|title=तुलनात्मक राजनीति: एक बदलते वैश्विक आदेश में हित, पहचान और संस्थान|url={{Google books|L2jwAwAAQBAJ|page=PA344|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=344|year=2014|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-139-99138-4|last2=Lichbach|first2=Mark|last3=Hanson|first3=Stephen E.}}</ref> और ब्रिटिश साम्राज्य में अन्य विरोधी उपनिवेशवादी राष्ट्रीयता आंदोलनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।{{efn|"... विरोधी उपनिवेशवादी आंदोलन ... जो, ब्रिटिश साम्राज्य में कई अन्य राष्ट्रीयता आंदोलनों की तरह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से गहरा प्रभावित थे।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001" /> १९वीं सदी के आखिर में और शुरूआत से लेकर मध्य २०वीं सदी में, कांग्रेस [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केंद्रीय भागीदार बनी।
आईएनसी एक "[[बड़ी तम्बू]]" पार्टी है जिसे भारतीय राजनीतिक स्पेक्ट्रम के [[केंद्र]] पर स्थित माना गया है।<ref name="Barrington2009" /><ref name="centrist" /><ref name="British-Journal">{{cite journal|last1=Saez|first1=Lawrence|last2=Sinha|first2=Aseema|year=2010|title=राजनीतिक चक्र, राजनीतिक संस्थान और भारत में सार्वजनिक व्यय, 1980–2000|url=https://archive.org/details/sim_british-journal-of-political-science_2010-01_40_1/page/91|journal=British Journal of Political Science|volume=40|issue=1|pages=91–113|doi=10.1017/s0007123409990226|issn=0007-1234|s2cid=154767259}}</ref> पार्टी ने 1885 में [[मुंबई|बंबई]] में अपनी पहली बैठक आयोजित की जहाँ वोमेश चंद्र बनर्जी ने इसकी अध्यक्षता की।<ref>{{Cite web|url=https://inc.in/|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|website=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|access-date=2023-11-05}}</ref> 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस एक [[कैच-ऑल पार्टी|कैच-ऑल]] और [[धर्मनिरपेक्षता|धर्मनिरपेक्ष]] पार्टी के रूप में उभरी, जो अगले 50 वर्षों तक भारतीय राजनीति में हावी रही। पार्टी के पहले प्रधानमंत्री, [[पंडित जवाहरलाल नेहरू]], ने योजनाबंदी आयोग बनाकर, पांच वर्षीय योजनाएँ पेश करके, मिश्रित अर्थव्यवस्था को लागू करके और [[धर्मनिरपेक्ष राज्य]] स्थापित करके कांग्रेस का समर्थन किया। नेहरू की मृत्यु के बाद और [[लाल बहादुर शास्त्री]] की संक्षिप्त अवधि के बाद, [[इंदिरा गांधी]] पार्टी की नेता बन गईं। स्वतंत्रता के बाद से 17 आम चुनावों में, इसने सात बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और तीन बार सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व किया है, केंद्रीय सरकार का नेतृत्व 54 वर्षों से अधिक समय तक किया है। कांग्रेस पार्टी से छह प्रधानमंत्री रहे हैं, पहले [[जवाहरलाल नेहरू]] (1947–1964) और सबसे हाल के मनमोहन सिंह (2004–2014) हैं।
== इतिहास ==
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का इतिहास दो विभिन्न काल से गुज़रता हैं।
*भारतीय स्वतन्त्रता से पूर्व - जब यह पार्टी स्वतन्त्रता अभियान की संयुक्त संगठन थी।
*भारतीय स्वतन्त्रता के बाद - जब यह पार्टी [[भारतीय राजनीति]] में प्रमुख स्थान पर विद्यमान रही हैं।
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[[File:Indian National Congress Flag.svg|thumb|पार्टी का वर्तमान ध्वज]]
[[File:1931 Flag of India.svg|thumb|यह ध्वज 1931 में अपनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान [[आज़ाद हिंद|स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार]] द्वारा उपयोग किया गया]]
[[File:Marche sel.jpg|thumb|नमक सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ महात्मा गांधी]]
[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई, बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में इसका गठन किया गया। जब देश भर से आए 72 प्रतिनिधि [[मुंबई|बंबई]] में एकत्र हुए। प्रमुख प्रतिनिधियों में [[दादाभाई नौरोजी]],[[बदरुद्दीन तैयबजी]], [[फिरोज़शाह मेहता]], [[डब्ल्यू. सी. बनर्जी]], [[एस. रामास्वामी मुदलियार]],<ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=rzWKAAAAMAAJ&q=Rao+Bahadur+Savalai+Mudaliar |title=The Encyclopaedia of Indian National Congress: 1885–1890, The founding fathers |author=A. Moin Zaidi |year=1976 |page=609 |language=en }}</ref> [[एस. सुब्रमण्यम अय्यर]] तथा [[रोमेश चंद्र दत्त]] शामिल थे।
एक अंग्रेज़, [[एलन ऑक्टेवियन ह्यूम]], जो ब्रिटिश शासन के पूर्व सिविल सेवक थे, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
=== स्वतन्त्रता संग्राम ===
{{मुख्य|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम}}
====स्थापना और प्रारंभिक दिन (1885–1905)====
सेवानिवृत्त ब्रिटिश भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम ने शिक्षित भारतीयों के बीच नागरिक और राजनीतिक संवाद का मंच बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। [[1857 का भारतीय विद्रोह]] के बाद, भारत का नियंत्रण [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] से [[ब्रिटिश साम्राज्य]] में स्थानांतरित कर दिया गया। ब्रिटिश नियंत्रित भारत, जिसे [[ब्रिटिश राज]] या बस राज कहा जाता है, ने भारतीयों को अपने शासन का समर्थन करने के लिए और इसके औचित्य को प्रस्तुत करने के लिए काम किया, जो आमतौर पर ब्रिटिश संस्कृति और राजनीतिक सोच से अधिक परिचित और अनुकूल थे। विडंबना यह है कि कांग्रेस के बढ़ने और जीवित रहने के कुछ कारण, विशेष रूप से 19वीं सदी में ब्रिटिश प्रभुत्व के समय, ब्रिटिश अधिकारियों के संरक्षण और अंग्रेज़ी भाषा में शिक्षा प्राप्त भारतीयों और एंग्लो-भारतीयों के बढ़ते वर्ग के माध्यम से थे।
ह्यूम ने एक संगठन शुरू करने का प्रयास किया। उन्होंने [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] के चयनित पूर्व छात्रों से संपर्क करना शुरू किया। 1883 में एक पत्र में, उन्होंने लिखा कि, <blockquote>हर राष्ट्र को उसी तरह का शासन प्राप्त होता है जैसा वह योग्य होता है। यदि आप, चुने हुए लोग, राष्ट्र के सबसे शिक्षित लोग, व्यक्तिगत आराम और स्वार्थी उद्देश्यों को नकारते हुए, अपने और अपने देश के लिए अधिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक दृढ़ संघर्ष नहीं कर सकते, तो हम, आपके मित्र, गलत हैं और हमारे विरोधी सही हैं, फिर, वर्तमान में, सभी प्रगति की आशाएँ समाप्त हो जाती हैं[,] और भारत वास्तव में न तो बेहतर शासन की इच्छा करता है और न ही इसके योग्य है।<ref name="pattabhi1935">{{Citation | title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास | author=B. पट्टाभि सीतारामय्या | year=1935 | publisher=कांग्रेस की कार्य समिति | url=https://archive.org/details/TheHistoryOfTheIndianNationalCongress |page=12}}</ref></blockquote>
मई 1885 में, ह्यूम ने "भारतीय राष्ट्रीय संघ" बनाने के लिए [[उपाध्याक्ष#ब्रिटिश भारत|उपाध्याक्ष]] की स्वीकृति प्राप्त की, जो सरकार के साथ संबद्ध होगा और भारतीय जनमत को व्यक्त करने का मंच बनेगा। ह्यूम और एक समूह शिक्षित भारतीयों ने 12 अक्टूबर को एकत्र होकर "भारत के लोगों की ओर से ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के मतदाताओं के लिए एक अपील" प्रकाशित की, जिसमें ब्रिटिश मतदाताओं से [[1885 ब्रिटिश आम चुनाव]] में भारतीयों के प्रति सहानुभूति रखने वाले उम्मीदवारों का समर्थन करने का अनुरोध किया गया। इनमें अफगानिस्तान में ब्रिटिश अभियानों के वित्तपोषण के लिए भारत पर कर लगाने के विरोध और भारत में legislative सुधार का समर्थन शामिल था।<ref name="riddick2006">{{Citation | title=ब्रिटिश भारत का इतिहास: एक कालक्रम | author=जॉन एफ. रिडडिक | year=2006 | publisher=ग्रीनवुड पब्लिशिंग ग्रुप | isbn=0-313-32280-5 | url=https://books.google.com/books?id=Es6x4u_g19UC}}</ref> हालाँकि, यह अपील विफल रही, और इसे कई भारतीयों द्वारा "एक कठोर झटका, लेकिन एक सच्ची वास्तविकता के रूप में देखा गया कि उन्हें अपनी लड़ाइयाँ अकेले लड़नी होंगी।"<ref name="yasin1996">{{Citation | title=राष्ट्रीयता, कांग्रेस और पृथकतावाद का उदय | author=माधवी यासीन | year=1996 | publisher=राज पब्लिकेशंस | isbn=81-86208-05-4 | url=https://books.google.com/books?id=NiJuAAAAMAAJ}}</ref>
28 दिसंबर 1885 को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना गोपालदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में बंबई में हुई, जिसमें 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे। ह्यूम ने महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला, और [[वोमेश चंदर बनर्जी]] को अध्यक्ष चुना गया।<ref name="riddick2006" /> इसके अलावा, ह्यूम के साथ दो अतिरिक्त ब्रिटिश सदस्य (दोनों स्कॉटिश सिविल सेवक) संस्थापक समूह के सदस्य थे, [[विलियम वेडरबर्न]] और जस्टिस (बाद में, सर) [[सर जॉन जार्डिन, 1st बारोनेट|जॉन जार्डिन]]। अन्य सदस्य ज्यादातर [[बंबई प्रेसीडेंसी|बंबई]] और [[मद्रास प्रेसीडेंसी|मद्रास प्रेसीडेंसी]] के हिंदू थे।
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियाँ (1885–1905)'''
1885 और 1905 के बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी वार्षिक सत्रों में कई प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों के माध्यम से, कांग्रेस द्वारा किए गए विनम्र मांगों में नागरिक अधिकार, प्रशासनिक, संवैधानिक और आर्थिक नीतियाँ शामिल थीं। इन तरीकों पर पारित प्रस्तावों पर नजर डालने से यह पता चलता है कि कांग्रेस के कार्यक्रम किस दिशा में बढ़ रहे थे।
क) नागरिक अधिकार: कांग्रेस के नेताओं ने भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता, जुलूसों, बैठकों और इसी तरह के अन्य अधिकारों के आयोजन का महत्व समझा।
ख) प्रशासनिक: कांग्रेस के नेताओं ने सरकार से कुछ प्रशासनिक दुरुपयोगों को हटाने और जनकल्याण के उपायों को चलाने का आग्रह किया। उन्होंने सरकारी सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति पर जोर दिया। किसानों की राहत के लिए कृषि बैंकों की स्थापना के लिए विशेष प्रस्ताव दिए गए। कांग्रेस के नेताओं ने सरकार द्वारा लागू किए गए भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ भी विरोध की आवाज उठाई।
ग) संवैधानिक: संवैधानिक मामलों में प्रारंभिक कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई विनम्र मांगें थीं: विधायी परिषदों की शक्तियों को बढ़ाना; निर्वाचित भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करना। यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस द्वारा की गई उपरोक्त मांगों को कम महत्व दिया।
घ) आर्थिक: आर्थिक क्षेत्र में, कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों को दोषी ठहराया, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति की कीमतों में वृद्धि और अन्य आर्थिक समस्याएँ हुईं जो भारतीय लोगों को प्रभावित करती थीं। कांग्रेस ने देश और उसके लोगों के आर्थिक सुधार के लिए कुछ विशेष सुझाव भी पेश किए। इनमें आधुनिक उद्योग की स्थापना, सार्वजनिक सेवाओं का भारतीयकरण, आदि शामिल थे। कांग्रेस ने विशेष रूप से गरीब वर्ग के लाभ के लिए नमक कर को समाप्त करने की भी मांग की।
====आर्थिक नीति====
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आर्थिक नीतियाँ निम्नलिखित हैं:
* खुली बाजार अर्थव्यवस्था के लाभों को दोहराने के लिए आर्थिक नीतियों को फिर से स्थापित करना
* धन सृजन का समर्थन करना
* अमीरों, मध्यवर्ग और गरीबों के बीच असमानता को कम करना
* निजी और सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा संचालित विकास को तेज करना
====विदेश नीति====
[[भारत की स्वतंत्रता]] से पहले भी, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] ने स्पष्ट रूप से [[विदेश नीति]] के मुद्दों पर अपनी स्थिति व्यक्त की। [[रेजाउल करीम लस्कर]], जो [[भारतीय विदेश नीति]] के विद्वान और कांग्रेस के विचारक हैं, के शब्दों में, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के तुरंत बाद, इसने विदेशी मामलों पर अपने विचार व्यक्त करना शुरू कर दिया। 1885 में अपने पहले सत्र में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश भारतीय सरकार द्वारा ऊपरी बर्मा के अधिग्रहण की निंदा की।"<ref>{{cite book|last1=Laskar|first1=Rejaul Karim|title=भारत की विदेश नीति: एक परिचय|date=2013|publisher=पैरागॉन इंटरनेशनल पब्लिशर्स|location=नई दिल्ली|isbn=978-93-83154-06-7|page=5}}</ref>
====मुस्लिम प्रतिक्रिया====
कई मुस्लिम समुदाय के नेताओं, जैसे प्रमुख शिक्षाविद [[सैयद अहमद खान]], ने कांग्रेस को नकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि इसके सदस्य अधिकांशत: हिंदुओं द्वारा प्रभावी थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-Z9ODwAAQBAJ&pg=PT94|title=प्रागैतिहासिक प्राचीन भारत की खोज: कृष्ण और राधा|first=डॉ जगत के.|last=मोतवानी|date=22 फरवरी 2018|publisher=iUniverse|isbn=9781532037900|via=Google Books}}</ref> [[हिंदू]] समुदाय और धार्मिक नेताओं ने भी इसे नकारा, कांग्रेस को यूरोपीय सांस्कृतिक आक्रमण का समर्थक मानते हुए।<ref name="auto">{{Cite journal|url=http://www.jstor.org/stable/20078547|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्पत्ति पर: क्रॉस-कल्चरल सिंथेसिस का एक केस अध्ययन|author=हेन्स, डब्ल्यू. ट्रैविस|year=1993|journal=जर्नल ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री|volume=4|issue=1|pages=69–98|jstor=20078547|via=JSTOR}}</ref>
भारत के सामान्य लोग कांग्रेस के अस्तित्व के बारे में बहुत कम जानते थे या चिंतित थे, क्योंकि कांग्रेस ने गरीबी, स्वास्थ्य देखभाल की कमी, सामाजिक उत्पीड़न, और ब्रिटिश सरकार द्वारा लोगों की चिंताओं की भेदभावपूर्ण उपेक्षा के मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास नहीं किया। कांग्रेस जैसी संस्थाओं की धारणा एक विशिष्ट, शिक्षित और संपन्न लोगों की संस्था के रूप में थी।<ref name="auto"/>
====भारतीय राष्ट्रीयता का उदय====
[[File:1st INC1885.jpg|right|300px|thumb|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला सत्र, बंबई, 28-31 दिसंबर, 1885]] कांग्रेस के सदस्यों के बीच जो राष्ट्रीयता का पहला स्पर्श था, वह सरकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की इच्छा थी, कानून बनाने और भारत के प्रशासन के मुद्दों पर एक वोट प्राप्त करना। कांग्रेस के सदस्य खुद को वफादार मानते थे, लेकिन वे अपने देश के शासन में एक सक्रिय भूमिका चाहते थे, हालांकि साम्राज्य का हिस्सा रहकर।<ref name="auto1"/>
यह [[दादाभाई नौरोजी]] द्वारा व्यक्त किया गया, जिन्हें कई लोग सबसे बुजुर्ग भारतीय राज्य पुरुष मानते हैं। नौरोजी ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुनाव में सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा, और इसके पहले भारतीय सदस्य बन गए। उनके अभियान में युवा, महत्वाकांक्षी भारतीय छात्र कार्यकर्ताओं जैसे [[मुहम्मद अली जिन्ना]] का समर्थन मिला, जो नए भारतीय पीढ़ी की कल्पना को दर्शाता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-52829458|title=भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन जिसने ब्रिटेन के पहले एशियाई सांसद का पद ग्रहण किया|publisher=BBC News|date=4 जुलाई 2020}}</ref>
[[बाल गंगाधर तिलक]] पहले भारतीय राष्ट्रवादियों में से एक थे जिन्होंने ''[[स्वराज]]'' को राष्ट्र की नियति के रूप में अपनाया। तिलक ने ब्रिटिश उपनिवेशी शिक्षा प्रणाली का गहरा विरोध किया, जिसे उन्होंने भारत की संस्कृति, इतिहास और मूल्यों की अनदेखी और अपमानजनक माना। उन्होंने राष्ट्रवादियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इनकार और साधारण भारतीयों के लिए अपने देश के मामलों में किसी भी आवाज़ या भूमिका की कमी पर असंतोष व्यक्त किया। इसलिए, उन्होंने ''स्वराज'' को प्राकृतिक और एकमात्र समाधान माना: सभी ब्रिटिश चीजों का परित्याग, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक शोषण से बचाएगा और धीरे-धीरे भारत की स्वतंत्रता की ओर ले जाएगा। उन्हें [[बिपिन चंद्र पाल]] और [[लाला लाजपत राय]], [[आरोबिंदो घोष]], [[वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई]] जैसे उभरते जन नेता भी समर्थन करते थे। उनके नेतृत्व में, भारत के चार बड़े राज्य – मद्रास, बंबई, बंगाल, और पंजाब क्षेत्र ने लोगों की मांग और भारत के राष्ट्रवाद को आकार दिया।<ref name="auto1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=p2qFYxtq3GYC&pg=PA55|title=भारत के स्वतंत्रता सेनानी (चार खंडों में)|first=M. G.|last=अग्रवाल|date=31 जुलाई 2008|publisher=ज्ञान पब्लिशिंग हाउस|isbn=9788182054684|via=Google Books}}</ref>
संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।<ref>संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।</ref>
तिलक की गिरफ्तारी के साथ, भारतीय आक्रमण के सभी प्रयास ठप हो गए। कांग्रेस का लोगों में विश्वास कम हो गया। मुसलमानों ने 1906 में आल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन किया, कांग्रेस को भारतीय मुसलमानों के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त मानते हुए।<ref name="auto1"/>
===विश्व युद्ध I: आत्मा की लड़ाई===
[[File:Annie Besant.png|thumbnail|right|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाली यूरोपीय नेताओं में एनी बेसेंट सबसे प्रमुख थीं]]
जब ब्रिटिश सरकार ने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] को [[प्रथम विश्व युद्ध]] में उतारा, तो भारत में पहली बार इस स्तर की एक निर्णायक और राष्ट्रव्यापी राजनीतिक बहस शुरू हुई। राजनीतिक स्वतंत्रता की माँग करने वाली आवाज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/fyi/story/indian-soldiers-world-war-one-germany-british-army-1026848-2017-07-28|title=World War I: Role of Indian Army in Britain's victory over Germany|date=28 July 2017|website=India Today}}</ref>
1916 में [[लखनऊ]] अधिवेशन में विभाजित कांग्रेस पुनः एकजुट हुई। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसे [[बाल गंगाधर तिलक]] और [[मुहम्मद अली जिन्ना]] के प्रयासों से संभव बनाया गया।<ref>{{Cite news |url=https://scroll.in/article/968926/the-tilak-jinnah-pact-embodied-communal-harmony-that-is-much-needed-in-modern-day-india|title=The Tilak-Jinnah pact embodied communal harmony that is much needed in modern-day India|first=Sudheendra|last=Kulkarni|work=Scroll.in}}</ref>
तिलक ने अपने विचारों में पर्याप्त नरमी लाई और अब वे ब्रिटिश सरकार के साथ राजनीतिक संवाद के पक्षधर बन गए। उन्होंने युवा [[मुहम्मद अली जिन्ना]] और श्रीमती [[एनी बेसेंट]] के साथ मिलकर [[होम रूल आंदोलन]] की शुरुआत की, ताकि ''होम रूल''—अर्थात अपने ही देश के शासन में भारतीयों की भागीदारी—की माँग को आगे बढ़ाया जा सके। यह आगे चलकर ''[[स्वराज]]'' की अवधारणा का पूर्वरूप बना। ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर डोमिनियन दर्जे की माँग के लिए अखिल भारतीय होम रूल लीग का गठन किया गया।<ref name="auto2"/>
लेकिन इसी दौरान एक अन्य भारतीय नेता कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के लिए उभरने वाला था। [[मोहनदास गांधी]] एक वकील थे, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण क़ानूनों के विरुद्ध सफल संघर्ष का नेतृत्व किया था। 1915 में भारत लौटने के बाद, गांधी ने भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोगों के मूल्यों और जीवनशैली से प्रेरणा लेकर एक नए प्रकार की क्रांति की नींव रखी। उन्होंने अहिंसा और [[सविनय अवज्ञा]] की अवधारणा के साथ ''[[सत्याग्रह]]'' शब्द को गढ़ा।<ref>{{Cite news |url=https://www.deccanherald.com/opinion/the-making-of-gandhi-in-south-africa-and-after-852712.html|title=The making of Gandhi in South Africa and after|date=23 June 2020|work=Deccan Herald}}</ref>
=== चंपारण और खेड़ा ===
{{main|चंपारण सत्याग्रह|खेड़ा सत्याग्रह}}
[[File:Gandhiji and Sub-Inspector Qurban Ali in Champaran (1917).jpg|thumb|चंपारण (1917) में गांधीजी और उप-निरीक्षक कुर्बान अली<ref>{{Cite book |title=Select Documents On Mahatma Gandhi's Movement In Champaran 1916-17
|publisher=Government of Bihar |year=1963 |pages=Page No. 63}}</ref>|271x271px]]
मोहनदास करमचंद गांधी, जो आगे चलकर महात्मा गांधी के नाम से प्रसिद्ध हुए, ने चंपारण और खेड़ा में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सफलता प्राप्त की और भारत को स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी जीत दिलाई।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/gandhi-fought-the-british-with-weapons-of-truth-non-violence/article29577336.ece|title=Gandhi fought the British with weapons of truth, non-violence|newspaper=The Hindu|date=2 October 2019}}</ref> उस आंदोलन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। इससे भारतीयों का इस संगठन पर विश्वास बढ़ा और यह धारणा बनी कि ब्रिटिश शासन को कांग्रेस के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है। परिणामस्वरूप देश भर से लाखों युवा कांग्रेस की सदस्यता से जुड़ गए।{{citation needed|date=October 2015}}
=== आत्मा के लिए संघर्ष ===
राजनीतिक नेताओं का एक पूरा वर्ग गांधी के विचारों से असहमत था। [[बिपिन चंद्र पाल]], [[मुहम्मद अली जिन्ना]], [[एनी बेसेंट]] और [[बाल गंगाधर तिलक]] सभी ने सविनय अवज्ञा के विचार की आलोचना की। लेकिन गांधी को जनता और भारतीय राष्ट्रवादियों की एक नई पीढ़ी का व्यापक समर्थन प्राप्त था।<ref name="auto2">{{cite book | last=Singh | first=M.K. | title=Encyclopaedia of Indian War of Independence, 1857–1947: Birth of Indian National Congress : establishment of Indian National Congress | publisher=Anmol Publications| year=2009 | isbn=978-81-261-3745-9 | url=https://books.google.com/books?id=IlYwAQAAIAAJ}}</ref>
1918, 1919 और 1920 के दौरान हुए कई कांग्रेस अधिवेशनों में पुरानी और नई पीढ़ियों के बीच तीखी और ऐतिहासिक बहसें हुईं। इन बैठकों में गांधी और उनके युवा समर्थकों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रत्यक्ष संघर्ष के लिए जोश और ऊर्जा भर दी।<ref name="auto2"/> 1919 के [[जलियांवाला बाग हत्याकांड]] और पंजाब में हुए दंगों की त्रासदी के बाद भारतीयों का आक्रोश और भावनाएँ उग्र हो गईं।<ref>{{Cite news|last=Prakash|first=Gyan|date=2019-04-13|title=Opinion {{!}} The Massacre That Led to the End of the British Empire|language=en-US|work=The New York Times|url=https://www.nytimes.com/2019/04/13/opinion/1919-amrtisar-british-empire-india.html|access-date=2021-08-24|issn=0362-4331}}</ref>
जब मोहनदास करमचंद गांधी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, तो पार्टी की “आत्मा” के लिए चल रहा संघर्ष समाप्त हुआ और भारत की नियति की ओर जाने वाला एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ।<ref name="auto2"/>
लोकमान्य तिलक—जिन्हें गांधी ने ''आधुनिक भारत का पिता'' कहा था—का निधन 1920 में हुआ, जबकि [[गोपाल कृष्ण गोखले]] का देहांत चार वर्ष पहले ही हो चुका था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=i7yKAAAAMAAJ|title = Indian Political Parties|year = 1984|publisher = Meenakshi Prakashan}}</ref> [[मोतीलाल नेहरू]], [[लाला लाजपत राय]] और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गांधी का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि वे तिलक और गोखले की तरह जनता का नेतृत्व कर सकते हैं। इस प्रकार अब राष्ट्र को दिशा दिखाने की पूरी जिम्मेदारी गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर आ गई।
===महात्मा गांधी का युग===
गांधीजी ने 1919 से 1948 तक भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष पर राज किया। इसलिए इस अवधि को भारतीय इतिहास में गांधी युग कहा जाता है। इस समय, महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर प्रभुत्व बनाया, जो बदले में भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रिम मोर्चे पर थी।
गांधी ने 1915 में कांग्रेस में शामिल हुए और 1923 में इसे छोड़ दिया।
===विस्तार और पुनर्गठन===
विश्व युद्ध के कुछ वर्षों बाद, गांधी की चंपारण और खेड़ा में सफलताओं के कारण कांग्रेस काफी विस्तारित हुई। भारत के विभिन्न हिस्सों से पूरी नई पीढ़ी के नेताओं ने उभरना शुरू किया, जो गांधी के अनुयायी थे, जैसे [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[राजेंद्र प्रसाद]], [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], [[नरहरी पारिख]], [[महादेव देसाई]] – साथ ही गर्म खून वाले राष्ट्रवादी जो गांधी की सक्रिय नेतृत्व से जागरूक हुए – [[चित्तरंजन दास]], [[सुभाष चंद्र बोस]], [[एस. श्रीनिवास अयंगर]]।
गांधी ने कांग्रेस को एक शहरों में आधारित एलीट पार्टी से एक जन संगठन में बदल दिया: *सदस्यता शुल्क को काफी कम किया गया। *कांग्रेस ने भारत भर में राज्य इकाइयाँ स्थापित कीं – जिन्हें ''प्रदेश कांग्रेस समितियाँ'' कहा जाता था – जो भारत के राज्यों के भाषाई समूहों के आधार पर बनाई गईं। *जाति, जातीयता, धर्म और लिंग के आधार पर कांग्रेस में भेदभाव करने वाले सभी पुराने प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया – अखिल भारतीय एकता पर जोर दिया गया। *स्थानीय भाषाओं को कांग्रेस बैठकों में आधिकारिक उपयोग और सम्मान दिया गया – विशेषकर ''उर्दू'', जिसे गांधी ने ''हिंदुस्तानी'' नाम दिया था, जिसका उपयोग अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा अपनाया गया। *सभी स्तरों पर नेतृत्व पदों को चुनावों द्वारा भरा जाएगा, नियुक्तियों द्वारा नहीं। इस लोकतंत्र की शुरुआत ने पार्टी को पुनर्जीवित करने में मदद की, सामान्य सदस्यों को आवाज दी। *नेतृत्व के लिए पात्रता यह निर्धारित की जाएगी कि सदस्य ने कितना सामाजिक कार्य और सेवा की है, न कि उसकी दौलत या सामाजिक स्थिति।
====सामाजिक विकास====
1920 के दशक के दौरान, एम.के. गांधी ने कांग्रेस के हजारों स्वयंसेवकों को बड़े पैमाने पर संगठित कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि भारत में प्रमुख सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जा सके। कांग्रेस समितियों और गांधी के आश्रमों के नेटवर्क के मार्गदर्शन में, कांग्रेस ने निम्नलिखित समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया: *[[अछूतता]] और जाति भेदभाव *शराबखोरी *अस्वच्छता और स्वच्छता की कमी *स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा सहायता की कमी *[[पर्दा]] और महिलाओं का दमन *अक्षरता, राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों के आयोजन के साथ *गरीबी, [[खादी]] कपड़े और [[हस्तशिल्प]] उद्योगों के माध्यम से
गांधी के इस गहन कार्य ने भारतीय लोगों को खासतौर पर आश्रमों की स्थापना के माध्यम से प्रभावित किया, जिससे बाद में उन्हें ''महात्मा'', महान आत्मा, के रूप में सम्मानित किया गया।
===(1937–1942)===
[[File:Katni1.jpg|left|thumb|350px| [[कटनी]] में एक पुरानी इमारत जो [[स्वराज|भारत की स्वतंत्रता]] का स्मरण करती है, जिसमें [[नेहरू]], [[गांधी]] और [[सुभाष चंद्र बोस]] की मूर्तियाँ हैं]]
[[भारत सरकार अधिनियम 1935]] के तहत, कांग्रेस ने पहली बार [[भारतीय प्रांतीय चुनाव, 1937|1937 के प्रांतीय चुनावों]] में राजनीतिक शक्ति का अनुभव किया। इसने आठ में से ग्यारह प्रांतों में जबर्दस्त सफलता हासिल की। इसकी आंतरिक संगठनात्मक संरचना विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों और विचारधाराओं में खिल उठी। ध्यान पूर्ण स्वतंत्रता की एकमात्र भक्ति से थोड़ा बदल गया, और राष्ट्र के भविष्य की शासन की थ्योरी और उत्साह पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। हालांकि, जब वायसराय लॉर्ड लिंलिथगो ने बिना चुने गए प्रतिनिधियों से सलाह किए बिना भारत को [[द्वितीय विश्व युद्ध]] में युद्धरत घोषित किया, तो कांग्रेस की मंत्रिपरिषद ने इस्तीफा दे दिया।
[[सुभाष चंद्र बोस]] के कट्टर अनुयायी, जो समाजवाद और सक्रिय क्रांति में विश्वास करते थे, बोस के 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ ही पदानुक्रम में उभरे।
====परंपरावादी====
एक दृष्टिकोण के अनुसार, परंपरावादी दृष्टिकोण, हालांकि राजनीतिक अर्थ में नहीं, कांग्रेस के नेताओं जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी, पुरुषोत्तम दास टंडन, खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान और मौलाना आज़ाद द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो गांधी के सहयोगी और अनुयायी थे। उनके संगठनात्मक ताकत, जो सरकार के साथ संघर्षों का नेतृत्व करने के माध्यम से हासिल की गई, निस्संदेह थी और यह साबित हो गया जब 1939 के चुनावों में जीतने के बावजूद, बोस ने राष्ट्रीय नेताओं के बीच अपनी कमी के कारण कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि एक साल पहले, 1938 के चुनाव में, बोस को गांधी के समर्थन से चुना गया था। 1939 में इस बात पर मतभेद उत्पन्न हुए कि बोस को दूसरा कार्यकाल मिलना चाहिए या नहीं। जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें गांधी ने हमेशा बोस पर प्राथमिकता दी, पहले ही दूसरा कार्यकाल पा चुके थे। बोस के अपने मतभेद मुख्य रूप से अहिंसक और क्रांतिकारी तरीकों के बीच स्थान को लेकर थे। जब उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया, तो उन्होंने गांधी के नाम का उल्लेख किया और उन्हें राष्ट्रपिता कहा।
यह गलत होगा यह सुझाव देना कि所谓 परंपरावादी नेता केवल प्राचीन भारतीय, एशियाई या, मौलाना आज़ाद और खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के मामले में, इस्लामी सभ्यता से प्रेरणा लेते थे। उन्होंने, शिक्षा के क्षेत्र के शिक्षाविदों जैसे ज़ाकिर हुसैन और ई. डब्ल्यू. आर्यनायक के साथ, यह विश्वास किया कि शिक्षा इस तरीके से प्रदान की जानी चाहिए जिससे छात्र अपने हाथों से चीजें बना सकें और कौशल सीख सकें, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। इस प्रकार की शिक्षा कुछ क्षेत्रों में मिस्र में भी अपनाई गई। (देखें: रेगिनाल्ड रेनॉल्ड्स, Beware of Africans)। ज़ाकिर हुसैन कुछ यूरोपीय शिक्षाविदों से प्रेरित थे और गांधी के समर्थन से, इस दृष्टिकोण को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा पेश किए गए बुनियादी शिक्षा पद्धति के अनुरूप बनाने में सफल रहे। उन्होंने विश्वास किया कि भविष्य के राष्ट्र के लिए शिक्षा प्रणाली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय मॉडल को विशेष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। जबकि अधिकांश पश्चिमी प्रभावों और समाजवाद के सामाजिक-आर्थिक समानता के लाभों के प्रति खुले थे, वे किसी भी मॉडल द्वारा परिभाषित होने का विरोध करते थे।
===1942-1946===
कांग्रेस में अंतिम महत्वपूर्ण घटनाएँ स्वतंत्रता के अंतिम कदम और धर्मों के आधार पर देश के विभाजन से संबंधित थीं।
====भारत छोड़ो====
[[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], जो [[तमिल नाडु]] से प्रमुख नेता थे, ने ब्रिटिश युद्ध प्रयास का समर्थन करने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। यह 1942 में शुरू हुआ।
====भारतीय राष्ट्रीय सेना के मुकदमे====
1946 के [[INA मुकदमे]] के दौरान, कांग्रेस ने [[INA रक्षा समिति]] का गठन करने में मदद की, जिसने [[आज़ाद हिंद]] सरकार के सैनिकों के मामले को मजबूती से पेश किया। समिति ने INA के लिए कांग्रेस की रक्षा टीम के गठन की घोषणा की और इसमें उस समय के प्रसिद्ध वकील शामिल थे, जैसे [[भुलाभाई देसाई]], [[असफ अली]], और [[जवाहरलाल नेहरू]]। भारत छोड़ो बिल 8 अगस्त 1942 को पारित हुआ।
====रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह====
कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने शुरू में [[रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह]] के नाविकों का समर्थन किया। हालाँकि, उन्होंने महत्वपूर्ण क्षण पर समर्थन वापस ले लिया, क्योंकि विद्रोह विफल हो गया।
====भारत का विभाजन====
कांग्रेस के भीतर, विभाजन का विरोध [[खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान]], [[सैफुद्दीन किचलू]], [[डॉ. खान साहिब]] और उन कांग्रेसियों द्वारा किया गया जो उन प्रांतों से थे, जो अनिवार्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से बन गए। [[मौलाना आज़ाद]], एक भारतीय इस्लामिक विद्वान, ने सिद्धांत के स्तर पर विभाजन का विरोध किया, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व में बाधा नहीं डालना चाहते थे; उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ रहना पसंद किया।
===1947===
====संविधान====
संसद और संविधान की चर्चाओं में, कांग्रेस का दृष्टिकोण समावेशिता और उदारवाद से चिह्नित था। सरकार ने कुछ प्रमुख भारतीयों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया, जो राज के प्रति वफादार और उदार थे, और उन्होंने उन भारतीय सिविल सेवकों के प्रति कोई दंडात्मक नियंत्रण नहीं अपनाया जिन्होंने राज के शासन में सहायता की और राष्ट्रीय गतिविधियों को दबाया।
एक कांग्रेस-प्रभुत्व वाली सभा ने [[B.R. अंबेडकर]], जो कांग्रेस के एक कठोर आलोचक थे, को संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष चुना। [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]], एक [[हिंदू महासभा]] नेता, उद्योग मंत्री बने।
कांग्रेस ने अपनी मूलभूत वादों पर मजबूती से खड़े रहते हुए एक ऐसा संविधान प्रस्तुत किया जिसने अस्पृश्यता और जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त किया। प्राथमिक शिक्षा को एक अधिकार बनाया गया, और कांग्रेस सरकारों ने [[जमींदार]] प्रणाली को अवैध घोषित किया, न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की और हड़ताल करने और श्रमिक संघ बनाने का अधिकार दिया।<ref>{{Cite web |title=Shyama Prasad Mukherjee, the barrister who founded Bharatiya Janta Party |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/remembering-shyama-prasad-mukherjee-the-founder-of-bharatiya-jana-sangh-that-later-became-bharatiya-janta-party-1563356-2019-07-06 |access-date=2024-03-10 |website=India Today |language=en}}</ref>
'''काँग्रेस एक जन आंदोलन के रूप में'''
काँग्रेस में बहुत बड़ा बदलाव आया। चम्पारन एवं खेड़ा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन समर्थन से अपनी पहली सफलता मिली। १९१९ में [[जालियाँवाला बाग हत्याकांड]] के पश्चात गान्धी जी काँग्रेस के महासचिव बने। उनके मार्गदर्शन में काँग्रेस कुलीन वर्गीय संस्था से बदलकर एक जनसमुदाय संस्था बन गयी। तत्पश्चात् राष्ट्रीय नेताओं की एक नयी पीढ़ी आयी जिसमें [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[जवाहरलाल नेहरू]], डॉक्टर [[राजेन्द्र प्रसाद]], [[महादेव देसाई]] एवं [[सुभाष चंद्र बोस]] आदि शामिल थे। गाँधी के नेतृत्व में प्रदेश काँग्रेस कमेटियों का निर्माण हुआ, काँग्रेस में सभी पदों के लिये चुनाव की शुरुआत हुई एवं कार्यवाहियों के लिये भारतीय भाषाओं का प्रयोग शुरू हुआ। काँग्रेस ने कई प्रान्तों में सामाजिक समस्याओं को हटाने के प्रयत्न किये जिनमें छुआछूत, पर्दाप्रथा एवं मद्यपान आदि शामिल थे।<ref name="test5">{{Cite web|url=https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|title=Indian National Congress: A Select Bibliography|first1=Manikrao Hodlya|last1=Gavit|first2=Attar|last2=Chand|date=1 मार्च 1989|publisher=U.D.H. Publishing House|accessdate=1 मार्च 2019|via=Google Books|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024905/https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए काँग्रेस को धन की कमी का सामना करना पड़ता था। गाँधीजी ने एक करोड़ रुपये से अधिक का धन जमा किया और इसे [[बाल गंगाधर तिलक]]के स्मरणार्थ तिलक स्वराज कोष का नाम दिया। ४ आना का नाममात्र सदस्यता शुल्क भी शुरू किया गया था।<ref>{{cite web |url=http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |title=Headlines given in 'Bombay Chronicle' for his successful drive for the collection of one crore of rupees for The Tilak Swaraj Fund, 1921 |publisher=Bombay Chronicle |accessdate=५ मई २०१७ |archive-url=https://web.archive.org/web/20170226042810/http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |archive-date=26 फ़रवरी 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book|url= https://books.google.co.in/books?id=Z0ydNvMbPI0C&pg=PA24&dq=tilak+swaraj+fund&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi7x_j5r9_TAhXMvY8KHeInABkQ6AEIRzAH#v=onepage&q=tilak%20swaraj%20fund&f=false|title = What Congress & Gandhi Have done to the Untouchables |author=[[भीमराव आम्बेडकर]] |publisher= Gautam Book Center|year= १९४५ |isbn=9788187733997 |accessdate= ५ मई २०१७ |page= १९ | language = en |trans-title= काँग्रेस और गाँधी ने अछूतों के साथ क्या किया}}</ref>
=== स्वतन्त्र भारत ===
1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस भारत के मुख्य राजनैतिक दलों में से एक रही है। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमन्त्री रह चुके हैं। पंडित [[जवाहरलाल नेहरू]], [[लाल बहादुर शास्त्री]],पण्डित नेहरू की पुत्री [[इंदिरा गाँधी|इन्दिरा गाँधी]] एवं उनके नाती [[राजीव गाँधी|राजीव गाँधी]] इसी दल से थे। राजीव गाँधी के बाद सीताराम केसरी काँग्रेस के अध्यक्ष बने जिन्हे सोनिया गाँधी के समर्थकों ने नामंजूर कर दिया तथा सोनिया गाँधी को हाईकमान बनाया, राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी काँग्रेस की अध्यक्ष तथा यूपीए की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। [[कपिल सिब्बल]], काँग्रेस महासचिव [[दिग्विजय सिंह]], अहमद पटेल, [[राहुल गांधी]], [[प्रियंका गांधी]], राशिद अल्वी, [[राज बब्बर]], [[मनीष तिवारी]] आदि काँग्रेस के वरिष्ट नेता हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह|डॉ॰ मनमोहन सिंह]] भी काँग्रेस से ताल्लुक रखते हैं।
==कांग्रेस के अधिवेशन ==
स्वतंत्रता से पहले आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी ऐतिहासिक अधिवेशनों की सूची यहां दी गई है।
{| class="wikitable sortable" Manish. Kumar
! वर्ष !! स्थान !! अध्यक्ष !! टिप्पणी
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| 1885 || बॉम्बे ||व्योमेश चन्द्र बनर्जी || 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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| 1886 || कलकत्ता || [[दादाभाई नौरोजी]] || प्रतिनिधियों की संख्या बढकर 434 हो गई।
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| 1887 || मद्रास|| सैयद बद्रूद्दीन तैयबजी || प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष
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| 1888 || इलाहाबाद || जॉर्ज यूल || प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष
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| 1889 || मुंबई || सर विलियम वेदरबर्न || पहली बार महिला ने भाग लिया
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| 1890 || कलकत्ता || [[फिरोजशाह मेहता]] || स्नातक डिग्री प्राप्त महिला कादम्बिनी ने भाग लिया
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| 1891 || नागपुर || आनन्दचार्लु || भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम दिया • दादा भाई नारौजी
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| 1892 || प्रयागराज || व्योमेश चंद्र बनर्जी ||लंदन में आम चुनाव
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| 1893 || लाहौर || दादाभाई नौरोजी || Demand Of • civil service exam in india
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| 1894 || मद्रास || ए.वेब ||
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| 1895 || पुणे || [[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] ||
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| 1896 || कलकत्ता || एम.रहीमतुल्ला सयानी || पहली बार राष्ट्रीय गीत गाया गया था
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| 1897 || अमरावती || सी.शंकर नायर ||
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| 1898 || मद्रास || आनंद मोहन बोस ||
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| 1899 || लखनऊ || रोमेश चंद्र बोस ||
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| 1900 || लाहौर || एन.जी. चंदूनरकर ||
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| 1901 || कलकत्ता || ई.दिंशा वाचा || पहली बार गांधी जी ने भाग लिया
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| 1902 || अहमदाबाद || सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ||
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| 1903 || मद्रास || लालमोहन बोस ||
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| 1904 || मुंबई || सर हेनरी कॉटन || पहली बार मो. अली जिन्ना ने भाग लिया
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| 1905 || बनारस || [[गोपाल कृष्ण गोखले]] || बंग भंग आंदोलन का समर्थन
स्वदेशी आंदोलन को समर्थन मिला
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| 1906 || कलकत्ता || दादाभाई नौरोजी || 'स्वराज्य' शब्द का प्रथम बार प्रयोग अध्यक्ष द्वारा किया गया। मुस्लिम लीग की स्थापना
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| 1907 || सूरत || [[रास बिहारी घोष|रासबिहारी घोष]] || कांग्रेस का विभाजन
(नरम दल और गरम दल )
एवं सत्र की समाप्ति।
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| 1908 || मद्रास || रासबिहरी घोष || कांग्रेस के लिये एक संविधान।
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| 1909 || लाहौर || [[मदनमोहन मालवीय]] || पृथक निर्वाचिका का विरोध
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| 1910 ||प्रयागराज || सर विलियम वेदरबर्न ||
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| 1911 || कलकत्ता || बिसन नारायण धर || इस अधिवेशन मे पहली बार राष्ट्रगान गाया गया।
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| 1912 || पटना || आर.एन. मुधालकर || A O Hume - कांग्रेस का पिता घोशित किया गया
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| 1913 || कराची || सैयद मुहम्मद बहादुर ||
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| 1914 || मद्रास || भूपेन्द्रनाथ बोस ||
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| 1915 || मुंबई || सर एस.पी. सिन्हा || Lord Wellington भाग लिया (आगे चलकर vaceray भी बना)
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| 1916 || लखनऊ || ए.जी. मजुमदार || कांग्रेस में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और गरम दल और नरम दल का मिलन हुआ
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| 1917 || कलकता || [[एनी बेसेंट|श्रीमती एनी बेसेंट]] || प्रथम महिला अध्यक्ष(कांग्रेस ने तिरंगे झंडों को अपनाया )
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| 1918 || मुंबई || सैयद हसन इमाम ||
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| 1918 || दिल्ली || मदनमोहन मालवीय || नरमदल वालों जैसे एस.एन.बनर्जी का त्यागपत्र
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| 1919 || अमृतसर || [[मोतीलाल नेहरू]] || •जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध किया
•खिलाफत आंदोलन को समर्थन दिया
बाल गंगाधर तिलक आखिरी बार अधिवेशन में भाग लिए
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| 1920 || नागपुर || सी. विजय राघवाचार्य || आशायोग आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी ने किया
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| 1921 || अहमदाबाद || हकीम अजलम खान (कार्यकारी अध्यक्ष) || अध्यक्ष सी.आर.दास जेल में कैद
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| 1922 || गया || [[चित्तरंजन दास]] || स्वराज्य पार्टी का गठन
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| 1923 || दिल्ली || [[अबुल कलाम आज़ाद]] || सबसे कम उम्र के अध्यक्ष
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| 1923 || कोकोनाडा || मौलाना मुहम्मद अली ||
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| 1924 || बेलगांव || [[महात्मा गांधी]] || एकमात्रा अधिवेशन गांधी जी ने किया
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| 1925 || कानपुर || [[सरोजिनी नायडू]] || प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष
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| 1926 || गोहाटी || [[श्रीनिवास अयंगर]] ||
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| 1927 || मद्रास || एम.ए. अंसारी || साइमन कमीशन का विरोध किया गया और साइमन वापस जाओ का नारा दिया गया
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| 1928 || कलकत्ता || [[मोतीलाल नेहरू]] || प्रथम अखिल भारतीय युवा कांग्रेस
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| 1929 || लाहौर || जवाहरलाल नेहरू || पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव
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| 1930 || अधिवेशन नहीं हुआ || जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष बने रहे ||
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| 1931 || कराची || [[वल्लभ भाई पटेल]] || मूल अधिकारों तथा राष्ट्रीय आर्थिक नीति प्रस्ताव
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| 1932 || दिल्ली || आर.डी. अमृतलाल ||
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| 1933 || कलकत्ता || श्रीमती नलिनी सेनगुप्ता ||
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| 1934 || मुंबई || राजेन्द्र प्रसाद || कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन
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| 1935 || अधिवेशन नहीं हुआ || राजेन्द्र प्रसाद अध्यक्ष बने रहे ||
|-
| 1936 || लखनऊ || जवाहरलाल नेहरू || समाजवादी कांग्रेस का लक्ष्य
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| 1937 || फैजपुर || जवाहरलाल नेहरू || पहली बार गांव में सत्र हुआ।
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| 1938 || हरिपुरा || [[सुभाष चन्द्र बोस]] || राष्ट्रीय योजना समिति
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| 1939 || त्रिपुरी || सुभाष चंद्र बोस || बोस का त्यागपत्र, राजेन्द्र प्रसाद का अध्यक्ष बनना तथा बोस द्वारा [[फॉरवर्ड ब्लाक]] की स्थापना की गई। सुभाष चंद्र बोस पट्टाभि सीतारमैय्या को पराजित कर के अध्यक्ष बने थे।
|-
| 1940 || रामगढ || अबुल कलाम आजाद || भारत छोड़ो का प्रस्ताव दिया गया
|-
| 1941-45 || अधिवेशन नहीं हुआ || अबुल कलाम आजाद अध्यक्ष बने रहे। || द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण नही हुए
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| 1946 || मेरठ || [[जे॰ बी॰ कृपलानी|जीवटराम भगवानदास कृपलानी]] ||
|-
| 1947 || दिल्ली || [[राजेन्द्र प्रसाद]] ||
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! colspan="4" | कुल अधिवेशन = 61
|}
==राजनीतिक स्थिति और नीतियाँ==
===सामाजिक मामले===
कांग्रेस पार्टी सामाजिक समानता, [[स्वतंत्रता]], [[धर्मनिरपेक्षता]] और [[समान अवसर]] पर जोर देती है। इसकी राजनीतिक स्थिति सामान्यत: मध्य में मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से, पार्टी ने किसानों, श्रमिकों और [[महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005|महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम]] (MGNREGA) का प्रतिनिधित्व किया है। MGNREGA का उद्देश्य "ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसमें हर परिवार के वयस्क सदस्यों को अन-skilled मैनुअल काम करने के लिए 100 दिन की गारंटी वाली मजदूरी रोजगार प्रदान करना शामिल है।" MGNREGA का एक अन्य लक्ष्य टिकाऊ संपत्तियों (जैसे सड़कों, नहरों, तालाबों और कुंडों) का निर्माण करना है।<ref name="MGNREGA">{{cite web |title=National Rural Employment Guarantee Act, 2005 |url=https://rural.nic.in/sites/default/files/nrega/Library/Books/1_MGNREGA_Act.pdf |publisher=Ministry of Law and Justice |access-date=11 July 2021}}</ref>
कांग्रेस ने खुद को हिंदू समर्थक और अल्पसंख्यकों के रक्षक के रूप में पेश किया है। पार्टी महात्मा गांधी के सिद्धांत [[सर्व धर्म समभाव]] का समर्थन करती है, जिसे इसके सदस्य धर्मनिरपेक्षता के रूप में देखते हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य [[अमरिंदर सिंह]] ने कहा, "भारत सभी धर्मों का है, जो इसकी ताकत है, और कांग्रेस इसकी प्रिय धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को नष्ट नहीं होने देगी।"<ref name="Captain CM">{{cite news |title=Congress will safeguard secularism |url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/congress-will-safeguard-secularism/article27074338.ece |access-date=6 July 2021 |work=The Hindu |date=9 May 2019}}</ref>
9 नवंबर 1989 को राजीव गांधी ने विवादित [[राम जन्मभूमि]] स्थल के निकट शिलान्यास समारोह की अनुमति दी। इसके बाद उनकी सरकार को [[मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 1986]] को पारित करने के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसने सुप्रीम कोर्ट के [[शाह बानो]] मामले में निर्णय को निरस्त कर दिया। [[1984 के दंगे]] ने कांग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्षता पर नैतिक तर्क खोने पर मजबूर किया। भाजपा ने [[2002 के गुजरात दंगों]] के मामले में कांग्रेस पार्टी की नैतिकता पर सवाल उठाए।<ref name="ThePrint">{{cite news |last1=Vij |first1=Shivam |title=Reclaiming Indian pluralism will need annihilation of Congress party |url=https://theprint.in/opinion/reclaiming-indian-pluralism-will-need-annihilation-of-congress/485212/ |access-date=6 July 2021 |work=ThePrint |publisher=Shekhar Gupta |date=19 August 2020}}</ref>
कांग्रेस ने हिंदुत्व विचारधारा से खुद को दूर रखा है, हालांकि 2014 और 2019 के आम चुनावों में हार के बाद पार्टी ने अपने रुख को नरम किया है।<ref name="Hindutva">{{cite news |title='Rajiv Gandhi opened locks, called for Ram Rajya in 1985': Kamal Nath |url=https://www.timesnownews.com/india/article/rajiv-gandhi-opened-locks-called-for-ram-rajya-in-1985-kamal-nath/632586 |access-date=6 July 2021 |work=Times Now |date=6 August 2020}}</ref>
नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री पद के दौरान, [[पंचायती राज]] और [[नगर निगम (भारत)|नगर सरकार]] को संवैधानिक दर्जा मिला। संविधान में 73वीं और 74वीं संशोधन के साथ, एक नया अध्याय, भाग- IX, जोड़ा गया।<ref name="73rd">{{cite web |title=Panchayati Raj System in Independent India |url=http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |publisher=Department of Rural Development and Panchayats, Punjab |access-date=10 March 2022 |archive-date=1 फ़रवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220201062705/http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |url-status=dead }}</ref> राज्यों को पंचायती राज प्रणाली अपनाने में अपने भौगोलिक, राजनीतिक-प्रशासनिक और अन्य पहलुओं पर विचार करने की लचीलापन दी गई। पंचायतों और नगर निकायों में, स्थानीय स्वशासन में समावेशिता सुनिश्चित करने के प्रयास में, अनुसूचित जातियों/जनजातियों और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया।<ref name="Self Governance">{{cite web |title=Governance and Development |url=https://niti.gov.in/planningcommission.gov.in/docs/plans/mta/midterm/english-pdf/chapter-17.pdf |publisher=[[NITI Aayog]] |access-date=10 March 2022}}</ref>
स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस ने [[हिंदी]] को भारत की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने का समर्थन किया। नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के उस धड़े का नेतृत्व किया, जिसने हिंदी को भारतीय राष्ट्र की ''[[lingua franca]]'' के रूप में बढ़ावा दिया।<ref name="Lingua">{{cite journal |url=https://www.jstor.org/stable/43950462 |publisher=JSTOR |jstor=43950462 |access-date=5 July 2021|title=Jawaharlal Nehru and the Language Problem |last1=Agrawala |first1=S. K. |journal=Journal of the Indian Law Institute |year=1977 |volume=19 |issue=1 |pages=44–67 }}</ref> हालांकि, गैर-हिंदी भाषी भारतीय राज्यों, विशेष रूप से [[तमिलनाडु]], ने इसका विरोध किया और अंग्रेजी भाषा के निरंतर उपयोग की मांग की। लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कई प्रदर्शनों और दंगों का सामना करना पड़ा, जिसमें मद्रास [[Anti-Hindi agitations of Tamil Nadu|1965 का एंटी-हिंदी आंदोलन]] शामिल था।<ref name="Tamil protest">{{cite news |last1=Nair |first1=Chitralekha |title=A brief history of anti-Hindi imposition agitations in India |url=https://www.theweek.in/news/india/2019/06/07/brief-history-anti-hindi-imposition-agitations-india.html |access-date=5 July 2021 |work=The Week (Indian magazine) |publisher=Jacob Mathew |date=7 June 2019}}</ref> शास्त्री ने आंदोलनों से अपील की कि वे अपना आंदोलन वापस लें और आश्वासन दिया कि अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में तब तक उपयोग में लाया जाएगा जब तक गैर-हिंदी भाषी राज्य इसकी इच्छा करते रहें।<ref name="Assurance">{{cite news |last1=Madan |first1=Karuna |title=Anti-Hindi agitation: How it all began |url=https://gulfnews.com/world/asia/india/anti-hindi-agitation-how-it-all-began-1.2018146 |access-date=5 July 2021 |work=Gulf News |agency=Al Nisr Publishing |date=28 April 2017}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1967 में आधिकारिक भाषाओं के अधिनियम को संशोधित कर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के भावनाओं को शांत किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि अंग्रेजी का उपयोग तब तक जारी रह सकता है जब तक हर राज्य की विधानमंडल ने हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का प्रस्ताव पारित नहीं किया।<ref name="Language 1967">{{cite web |title=THE OFFICIAL LANGUAGES ACT, 1963 |url=https://rajbhasha.gov.in/en/official-languages-act-1963 |publisher=Department of Official Language, Government of India |access-date=10 March 2022}}</ref> यह दोनों हिंदी और अंग्रेजी के आधिकारिक भाषाओं के रूप में प्रयोग की गारंटी थी, जिससे भारत में द्विभाषिकता स्थापित हुई।<ref name="Language Act">{{cite web |title=Complete Text of the Official Languages Act |url=https://www.uottawa.ca/clmc/india-official-languages-act#:~:text=Bill%2019%20(1963)%20as%20amended%201967&text=An%20Act%20to%20provide%20for,certain%20communication%20purposes%20in%20HighCourts.&text=1)%20This%20Act%20may%20be,the%20Official%20Languages%20Act%2C%201963. |publisher=The University of Ottawa |access-date=10 March 2022}}</ref> इस कदम ने राज्यों में एंटी-हिंदी प्रदर्शनों और दंगों का अंत किया।
[[भारतीय दंड संहिता की धारा 377]], जो समलैंगिकता को अपराध मानती है; पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, "यौन संबंध व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और इसे व्यक्तियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।" पार्टी के प्रमुख सदस्य और पूर्व वित्त मंत्री [[पी. चिदंबरम]] ने कहा कि ''[[Navtej Singh Johar v. Union of India]]'' का निर्णय जल्दी से पलटा जाना चाहिए। 18 दिसंबर 2015 को, पार्टी के प्रमुख सदस्य शशि थरूर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को प्रतिस्थापित करने और सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त करने के लिए एक [[निजी सदस्य का बिल]] पेश किया। यह बिल पहले पठन में अस्वीकृत कर दिया गया। मार्च 2016 में, थरूर ने फिर से समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने के लिए निजी सदस्य का बिल पेश किया, लेकिन इसे दूसरी बार भी अस्वीकृत कर दिया गया।
आर्थिक नीतियाँ
{{See also|Economic liberalisation in India}} कांग्रेस-नेतृत्व वाले सरकारों की आर्थिक नीति का इतिहास दो चरणों में बाँटा जा सकता है। पहला चरण स्वतंत्रता से 1991 तक चला और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र पर बहुत जोर दिया गया।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/a-short-history-of-indian-economy-1947-2019-tryst-with-destiny-other-stories-1565801528109.html|title=A short history of Indian economy 1947–2019: Tryst with destiny & other stories|date=14 August 2019|newspaper=Mint}}</ref> दूसरा चरण 1991 में [[आर्थिक उदारीकरण|आर्थिक उदारीकरण]] के साथ शुरू हुआ। वर्तमान में, कांग्रेस एक मिश्रित अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है जिसमें निजी क्षेत्र और राज्य दोनों अर्थव्यवस्था को दिशा देते हैं, जो [[बाजार अर्थव्यवस्था|बाजार]] और [[योजित अर्थव्यवस्था|योजित अर्थव्यवस्थाओं]] के विशेषताओं को दर्शाता है। कांग्रेस आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण का समर्थन करती है—आयात को घरेलू उत्पाद से बदलने का और मानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण करना चाहिए ताकि विकास की गति बढ़ सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/nehrus-economic-philosophy/article18589548.ece|title=Nehru's economic philosophy|first=H.|last=Venkatasubbiah|newspaper=The Hindu|date=27 May 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/manmohan-singh-credits-jawarharlal-nehru-for-the-idea-of-mixed-economy/articleshow/45197661.cms|title=Manmohan Singh credits Jawarharlal Nehru for the 'idea of mixed economy'|newspaper=The Economic Times}}</ref>
[[File
Mukherjee - World Economic Forum Annual Meeting Davos 2009.jpg|thumb|left|alt=refer caption | तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] [[विश्व आर्थिक मंच|विश्व आर्थिक शिखर सम्मेलन]] 2009 में नई दिल्ली में]]
पहले चरण की शुरुआत में, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण पर आधारित नीतियों को लागू किया और एक [[मिश्रित अर्थव्यवस्था]] की वकालत की जहां सरकारी-नियंत्रित [[सार्वजनिक क्षेत्र]] निजी क्षेत्र के साथ सह-अस्तित्व में होगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और आधुनिकीकरण के लिए बुनियादी और भारी उद्योग की स्थापना को महत्वपूर्ण माना। इसलिए, सरकार ने निवेश को प्रमुख रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की उद्योगों—इस्पात, लौह, कोयला, और बिजली में निर्देशित किया, उनके विकास को सब्सिडी और संरक्षणवादी नीतियों के साथ बढ़ावा दिया। इस अवधि को [[लाइसेंस राज]], या परमिट राज कहा गया,<ref>Oxford English Dictionary, 2nd edition, 1989: from [[Sanskrit|Skr.]] ''rāj'': to reign, rule; cognate with [[Latin|L.]] ''rēx'', ''rēg-is'', [[Old Irish|OIr.]] ''rī'', ''rīg'' king (see RICH).</ref> जो कि 1947 से 1990 के बीच भारत में व्यवसाय स्थापित करने और चलाने के लिए आवश्यक लाइसेंस, नियम और accompanying [[red tape]] की विस्तृत प्रणाली थी।<ref>[http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm Street Hawking Promise Jobs in Future] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20080329023451/http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm |date=29 March 2008 }}, ''[[The Times of India]]'', 25 November 2001</ref> लाइसेंस राज ने नेहरू और उनके उत्तराधिकारियों की इच्छा का परिणाम था कि वे एक [[योजित अर्थव्यवस्था]] बनाना चाहते थे जहां अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं पर राज्य का नियंत्रण हो, और लाइसेंस केवल कुछ विशेष लोगों को दिए जाते थे। 80 सरकारी एजेंसियों को संतुष्ट करना आवश्यक था ताकि निजी कंपनियां कुछ उत्पादित कर सकें; और यदि लाइसेंस दिया जाता, तो सरकार उत्पादन को नियंत्रित करती।<ref name="bbcindia1998">{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/55427.stm|title=India: the economy|year=1998|publisher=BBC}}</ref> लाइसेंस राज प्रणाली इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी जारी रही। इसके अलावा, कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, इस्पात, कोयला और तेल का राष्ट्रीयकरण किया गया।<ref name="Rosser" /><ref name="Kapila1">{{Cite book | publisher=Academic Foundation| page=126|url={{Google books|de66PkzcfusC|page=PA126|plainurl=yes}} |isbn=978-8171881055| last1=Kapila| first1=Raj| last2=Kapila| first2=Uma| title=Understanding India's economic Reforms| year=2004}}</ref> राजीव गांधी के दौरान, व्यापार प्रणाली को कई आयात वस्तुओं पर शुल्क में कमी और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहनों के साथ उदार बनाया गया।<ref name="princeton.edu">{{cite journal |author1=Philippe Aghion|author2=Robin Burgess |author3=Stephen J. Redding|author4=Fabrizio Zilibotti |year=2008|url=http://www.princeton.edu/~reddings/pubpapers/ABRZ_AER_Sept2008.pdf|title=The Unequal Effects of Liberalization: Evidence from Dismantling the License Raj in India|journal=American Economic Review |volume=98|issue=4|pages=1397–1412|doi=10.1257/aer.98.4.1397|s2cid=966634 }}</ref> करों की दरों में कमी की गई और कंपनियों की संपत्ति पर प्रतिबंधों को ढीला किया गया।<ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19910615-in-an-india-known-for-thinking-small-rajiv-gandhi-generated-high-stakes-optimism-814461-1991-06-15|title=In an India known for thinking small, Rajiv Gandhi generated high-stakes optimism|first=Sudeep |last=Chakravarti|date=15 June 1991|website=India Today}}</ref>
1991 में, नए कांग्रेस सरकार ने, [[पी. वी. नरसिम्हा राव]] के नेतृत्व में, संभावित [[1991 भारत आर्थिक संकट|1991 आर्थिक संकट]] से बचने के लिए सुधारों की शुरुआत की।<ref name="Narasimha Rao was father of economic reform: Pranab" /><ref name="Ghosh">{{cite web|url=http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|archive-date=25 October 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131025042847/http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|title= India's Pathway through Financial Crisis|work=globaleconomicgovernance.org|first=Arunabha |last=Ghosh|publisher=Global Economic Governance Programme|access-date=2 March 2007}}</ref> ये सुधार [[नई आर्थिक नीति]] (NEP) या "1991 आर्थिक सुधार" या "एलपीजी सुधार" के रूप में जाने जाते हैं, जो विदेशी निवेश के लिए क्षेत्रों को खोलने, पूंजी बाजारों में सुधार, घरेलू व्यवसाय को [[डिरिसगुलेट|डिरिसगुलेट]] करने, और व्यापार प्रणाली में सुधार में सबसे आगे बढ़े। ये सुधार उस समय लागू किए गए जब भारत भुगतान संतुलन संकट, उच्च मुद्रास्फीति, कमज़ोर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs), और एक बड़ा वित्तीय घाटा का सामना कर रहा था।<ref name="LPG Rao">{{cite news |last1=Tiwari |first1=Brajesh Kumar |title=Dr Manmohan Singh: The Architect of India's Economic Reform |url=https://news.abplive.com/blog/dr-manmohan-singh-the-architect-of-india-s-economic-reform-1632067 |access-date=3 December 2023 |work=ABP News |agency=ABP Group |date=26 September 2023}}</ref> इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को समाजवादी मॉडल से बाजार अर्थव्यवस्था की ओर स्थानांतरित करना भी था।<ref name="Economy Reforms">{{cite news |last1=Chundawat |first1=Keshav Singh |title=Dr Manmohan Singh, the man who opened up Indian economy |url=https://www.cnbctv18.com/politics/pm-modi-extends-birthday-wishes-to-dr-manmohan-singh-the-man-who-opened-up-indian-economy-17886361.htm |access-date=3 December 2023 |work=CNBC TV18 |agency=Network18 Group |date=26 September 2023}}</ref> राव सरकार के लक्ष्यों में [[वित्तीय घाटा]] को कम करना, सार्वजनिक क्षेत्र का [[निजीकरण|निजीकरण]] करना, और अवसंरचना में निवेश बढ़ाना शामिल था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=ZbWF5hykvwYC&q=1991+economic+reforms+progressed+furthest+in+opening+up+areas+to+foreign+investment%2C+reforming+capital+markets%2C+deregulating+domestic+business%2C+and+reforming+the+trade+regime.&pg=PA65|title=Methodology And Perspectives of Business Studies|first=G.|last=Balachandran|date=28 July 2010|publisher=Ane Books India|isbn=9789380156682}}</ref> व्यापार सुधार और विदेशी निवेश के नियमों में बदलावों को पेश किया गया ताकि भारत को विदेशी व्यापार के लिए खोला जा सके जबकि बाहरी ऋण को स्थिर किया जा सके।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/narasimha-rao-s-bold-economic-reforms-helped-in-india-s-development-naidu-11609062633183.html|title=Narasimha Rao's bold economic reforms helped in India's development: Naidu|author=Staff Writer|date=27 December 2020|newspaper=Mint}}</ref> राव ने इस कार्य के लिए [[मनमोहन सिंह]] को चुना। सिंह, जो एक प्रशंसित अर्थशास्त्री और पूर्व [[भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर्स की सूची|भारतीय रिजर्व बैंक]] के गवर्नर थे, ने इन सुधारों को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/this-day-the-half-lion-saved-india-when-rao-and-manmohan-brought-economy-back-from-the-brink/articleshow/59738979.cms|title=This day the half-lion saved India: When Rao and Manmohan brought economy back from the brink|newspaper=The Economic Times}}</ref>
2004 में, मनमोहन सिंह ने कांग्रेस-नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 2009 में हुए आम चुनावों के बाद भी प्रधानमंत्री का पद बनाए रखा। सिंह सरकार ने बैंकों और वित्तीय क्षेत्रों में सुधार, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए नीतियों की शुरुआत की।<ref>{{cite news|title=Banking on reform|url=http://www.indianexpress.com/news/banking-on-reform/1059372/|access-date=14 June 2013|newspaper=The Indian Express}}</ref> इसके अतिरिक्त, किसानों के कर्ज़ में राहत देने वाली नीतियाँ भी लागू की गईं।<ref>{{cite web|title=Farmer Waiver Scheme- PM statement|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=39122|publisher=PIB|access-date=14 June 2013}}</ref>
2005 में, सिंह सरकार ने [[मूल्य वर्धित कर|मूल्य वर्धित कर (VAT)]] लागू किया, जिसने बिक्री कर को प्रतिस्थापित किया। भारत ने 2008 की वैश्विक आर्थिक संकट के सबसे बुरे प्रभावों का सामना करने में सफलता हासिल की।<ref>Mohan, R., 2008. Global financial crisis and key risks: impact on India and Asia. RBI Bulletin, pp.2003–2022.</ref><ref>{{cite news|title=Global inflation climbs to historic levels|url=https://www.nytimes.com/2008/02/12/business/worldbusiness/12iht-inflate.1.9963291.html|newspaper=The New York Times|author=Kevin Plumberg|author2=Steven C. Johnson|access-date=17 June 2011|date=2 November 2008}}</ref>
सिंह सरकार ने [[गोल्डन क्वाड्रिलैटरल]] को जारी रखा, जो [[अटल बिहारी वाजपेयी|वाजपेयी]] सरकार द्वारा शुरू किया गया भारतीय राजमार्ग आधुनिकीकरण कार्यक्रम था।<ref>{{cite web|title=Economic benefits of golden Quadilateral|date=4 May 2013 |url=http://businesstoday.intoday.in/story/economic-benefits-of-the-golden-quadrilateral-project/1/194321.html|publisher=Business today|access-date=14 June 2013}}</ref> तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] ने कई कर सुधार लागू किए, जिनमें [[फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स (भारत)|फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स]] और वस्तुओं के लेन-देन कर को समाप्त करना शामिल था।<ref>{{cite web|date=6 July 2009|title=Fringe benefit tax abolished|url=https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|access-date=31 August 2020|website=The Hindustan Times|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040931/https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|url-status=live}}</ref> उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान [[वस्तु एवं सेवा कर (भारत)|वस्तु एवं सेवा कर (GST)]] को भी लागू किया।<ref>{{Cite news|date=13 April 2017|title=President Pranab Mukherjee gives nod to four supporting Bills on GST|work=The Hindu|url=https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|access-date=31 August 2020|issn=0971-751X|archive-date=10 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200610130246/https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|url-status=live}}</ref>
उनके सुधारों को प्रमुख कॉर्पोरेट अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों द्वारा अच्छा प्रतिसाद मिला। हालाँकि, कुछ अर्थशास्त्रियों ने रेट्रोस्पेक्टिव कराधान की आलोचना की।<ref>{{cite web|date=27 October 2017|title=Manmohan & Sonia opposed retrospective tax: Pranab Mukherjee |url=https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040859/https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-date=1 September 2020|url-status=live|access-date=31 August 2020|website=ThePrint}}</ref>
मुखर्जी ने कई सामाजिक क्षेत्र योजनाओं के लिए फंडिंग बढ़ाने के साथ-साथ [[जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन]] (JNNURM) का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के लिए बजट में वृद्धि का समर्थन किया और [[राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम]] जैसे अवसंरचना कार्यक्रमों का विस्तार किया।<ref>{{cite web|title=More Funds for Infrastructure Development, Farmers|url=https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040912/https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|magazine=Outlook|location=New Delhi}}</ref> उनके कार्यकाल के दौरान बिजली कवरेज का भी विस्तार हुआ। मुखर्जी ने राजकोषीय विवेक के सिद्धांत की पुष्टि की, जबकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने उनके कार्यकाल के दौरान बढ़ते राजकोषीय घाटे के बारे में चिंता व्यक्त की, जो 1991 के बाद से सबसे ऊंचा था। उन्होंने यह भी घोषित किया कि सरकारी खर्च में वृद्धि केवल अस्थायी थी।<ref>{{Cite news|title=Big spender|newspaper=The Economist |issn=0013-0613|url=https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender |access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040901/https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender}}</ref>
===राष्ट्रीय रक्षा और गृह मामले===
[[File:The Prime Minister, Dr. Manmohan Singh and his wife, Smt. Gursharan Kaur during the Passing Out Parade at the Platinum Jubilee Course of Indian Military Academy, in Dehradun, on December 10, 2007.jpg|thumb|10 दिसंबर 2007 को IMA के प्लेटिनम जुबली कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान [[मनमोहन सिंह]] और उनकी पत्नी; विदेशी जेंटलमैन कैडेट्स के साथ।]]
भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही परमाणु क्षमताओं की दिशा में प्रयास किए हैं। नेहरू का मानना था कि परमाणु ऊर्जा देश को आगे बढ़ाने में मदद करेगी और इसके विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। इस दिशा में, उन्होंने ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका से सहायता प्राप्त करने की कोशिश की।<ref name="Vision">{{cite web |title=Indian Nuclear Program |url=https://www.atomicheritage.org/history/indian-nuclear-program |publisher=National Museum of Nuclear Science & History |access-date=7 July 2021}}</ref>
1958 में, भारत सरकार ने [[होमी जे. भाभा]] की मदद से तीन-चरणीय ऊर्जा उत्पादन योजना अपनाई, और [[भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र]] की स्थापना 1954 में की गई।<ref name="Perkovich2001">{{cite book|author=George Perkovich|title=India's Nuclear Bomb: The Impact on Global Proliferation|url=https://books.google.com/books?id=UDA9dUryS8EC&pg=PA22|year=2001|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23210-5|page=22}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1964 से [[चीन]] द्वारा निरंतर परमाणु परीक्षणों को देखा, जिसे उन्होंने भारत के लिए एक अस्तित्व संबंधी खतरा माना।<ref name="JSTOR">{{cite journal |last1=Couper |first1=Frank E. |title=Indian Party Conflict on the Issue of Atomic Weapons |journal=The Journal of Developing Areas |year=1969 |volume=3 |issue=2 |pages=191–206 |url=https://www.jstor.org/stable/4189559 |publisher=JSTOR |jstor=4189559 |access-date=7 July 2021}}</ref><ref name="LATimes1998">{{cite news |last1=Tempest |first1=Rone |title=India's Nuclear Tests Jolt Its Relations With China |url=https://www.latimes.com/archives/la-xpm-1998-jun-11-mn-58841-story.html |access-date=7 July 2021 |work=Los Angeles Times Communications LLC |date=11 June 1998}}</ref>
भारत ने 18 मई 1974 को राजस्थान के [[पोखरण]] में पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे [[ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा]] कहा गया।<ref name="First Test">{{cite news |last1=Nair |first1=Arun |title=Smiling Buddha: All You Need To Know About India's First Nuclear Test at Pokhran |url=https://www.ndtv.com/india-news/smiling-buddha-all-you-need-to-know-about-indias-first-nuclear-test-at-pokhran-2230645 |access-date=5 July 2021 |publisher=NDTV |date=18 May 2020}}</ref> भारत ने दावा किया कि परीक्षण "[[शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट|शांतिपूर्ण उद्देश्यों]]" के लिए था, हालाँकि इस परीक्षण की अन्य देशों द्वारा आलोचना की गई और अमेरिका और कनाडा ने भारत को सभी परमाणु सहायता रोक दी।<ref name="PNE">{{cite web |title=India's Nuclear Weapons Program Smiling Buddha: 1974 |url=https://nuclearweaponarchive.org/India/IndiaSmiling.html |publisher=The Nuclear Weapon Archive |access-date=5 July 2021}}</ref>
गंभीर अंतर्राष्ट्रीय आलोचना के बावजूद, यह परमाणु परीक्षण देश में लोकप्रिय रहा और इंदिरा गांधी की लोकप्रियता में तुरंत पुनरुद्धार हुआ, जो 1971 के युद्ध के बाद से काफी गिर चुकी थी।<ref name="Buddha">{{cite news |last1=Chaturvedi |first1=Amit |title=Smiling Buddha: How India successfully conducted first nuclear test in Pokhran |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/smiling-buddha-how-india-successfully-conducted-first-nuclear-test-in-pokhran-101621301524390.html |access-date=4 July 2021 |work=The Hindustan Times|agency=HT Media Ltd |date=18 May 2021}}</ref><ref name="Popularity">{{cite news |last1=Malhotra |first1=Inder |title=When the Buddha first smiled |url=https://indianexpress.com/article/opinion/columns/when-the-buddha-first-smiled/ |access-date=5 July 2021 |work=The Indian Express |date=15 May 2009}}</ref>
भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों को राज्यत्व में परिवर्तन का सफल प्रबंधन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान किया गया।<ref name="Statehood NE">{{cite news |last1=Karmakar |first1=Rahul |title=Renewed push for Statehood in the Northeast |url=https://www.thehindu.com/news/national/renewed-push-for-statehood-in-the-northeast/article25032429.ece |access-date=20 July 2021 |work=The Hindu |date=25 September 2018}}</ref> 1972 में, उनके प्रशासन ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया, जबकि उत्तर-पूर्वी सीमा एजेंसी को एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया।<ref>{{Cite news |url=https://www.nytimes.com/1972/01/23/archives/india-rearranges-northeast-region-3-states-and-2-territories.html|title=INDIA REARRANGES NORTHEAST REGION|newspaper=The New York Times|date=23 January 1972}}</ref><ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/arunachal-pradesh-309685-2016-02-20|title=Arunachal Pradesh became an Indian State today: Some interesting facts about the 'Land of the Dawn-Lit Mountains' |date=20 February 2017 |website=India Today}}</ref> इसके बाद, 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ।<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19780430-did-india-have-a-right-to-annex-sikkim-in-1975-818651-2015-02-18|title=Did India have a right to annex Sikkim in 1975?|first1=Sunil |last1=Sethi|date=18 February 2015 |website=India Today}}</ref> 1960 के अंत और 1970 के दशक में, गांधी ने पश्चिम बंगाल राज्य में नक्सलवादी उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना को भेजा। भारत में नक्सलवादी-माओवादी उग्रवाद को आपातकाल के दौरान पूरी तरह से कुचल दिया गया।<ref name="Naxalite">{{cite web |title=A historical introduction to Naxalism in India |url=https://www.efsas.org/publications/study-papers/an-introduction-to-naxalism-in-india/ |publisher=European Foundation for South Asian Studies |access-date=3 December 2023}}</ref>
मनमोहन सिंह के प्रशासन ने कश्मीर में क्षेत्र को स्थिर करने के लिए एक विशाल पुनर्निर्माण प्रयास शुरू किया और आतंकवाद विरोधी कानूनों को संशोधन के साथ मजबूत किया।<ref name="UAPA">{{cite web|title=The Unlawful Activities (Prevention) |url=http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|website=nic.in |publisher=National Informatics Centre|access-date=17 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161017053842/http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|archive-date=17 October 2016|url-status=dead}}</ref> प्रारंभिक सफलता के बाद, 2009 से कश्मीर में उग्रवादी घुसपैठ और आतंकवाद में वृद्धि हुई है। हालांकि, सिंह प्रशासन उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद को कम करने में सफल रहा।<ref name=Buzz7>[http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html Infiltration has not reduced in Kashmir, insurgency down in North East: Chidambaram] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20160107072045/http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html |date=7 January 2016 }}</ref> पंजाब के उग्रवाद के संदर्भ में, आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों (निवारण) अधिनियम (TADA) पारित किया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान से घुसपैठियों को समाप्त करना था। कानून ने राष्ट्रीय आतंकवादी और सामाजिक विघटनकारी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को व्यापक शक्तियाँ दीं। पुलिस को 24 घंटे के भीतर एक detenue को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की आवश्यकता नहीं थी। इस कानून की मानवाधिकार संगठनों द्वारा व्यापक आलोचना की गई। नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद, यूपीए सरकार ने आतंकवाद से लड़ने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) बनाई।<ref>{{cite web|author=TNN |url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |archive-url=https://web.archive.org/web/20121022154006/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |url-status=dead |archive-date=22 October 2012 |title=Finally, govt clears central terror agency, tougher laws |date=16 December 2008 |work=[[The Times of India]] |access-date=28 September 2013}}</ref> अद्वितीय पहचान प्राधिकरण भारत की स्थापना फरवरी 2009 में की गई ताकि प्रस्तावित बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान पत्र को लागू किया जा सके, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाना था।<ref>{{cite book |last1=K |first1=Watfa, Mohamed |title=E-Healthcare Systems and Wireless Communications: Current and Future Challenges: Current and Future Challenges |date=2011 |publisher=IGI Global |isbn=978-1-61350-124-5 |page=190 |url=https://books.google.com/books?id=kOaeBQAAQBAJ&q=The+Unique+Identification+Authority+of+India+was+established+in+February+2009+to+implement+the+proposed+Multipurpose+National+Identity+Card%2C+with+the+objective+of+increasing+national+security&pg=PA190 |access-date=6 June 2018}}</ref>
===शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा===
नेहरू के तहत कांग्रेस सरकार ने कई उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की, जिसमें [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] और [[राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] शामिल हैं। [[राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद]] (NCERT) 1961 में समाजों के पंजीकरण अधिनियम के तहत एक साहित्यिक, वैज्ञानिक और चैरिटेबल सोसाइटी के रूप में स्थापित की गई।<ref name="NCERT">{{cite web |title=NCERT Full form |url=https://www.vedantu.com/full-form/ncert-full-form |publisher=Vedantu |access-date=7 July 2021}}</ref> जवाहरलाल नेहरू ने अपने [[पाँच वर्षीय योजनाएँ|पाँच वर्षीय योजनाओं]] में भारत के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने की प्रतिबद्धता का outlines किया। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीत्व ने भारत में सार्वजनिक सूचना बुनियादी ढाँचे और नवाचार की शुरुआत की।<ref name="Rajiv Modern">{{cite news |last1=Shakti Shekhar |first1=Kumar |title=5 ways how Rajiv Gandhi changed India forever |url=https://www.indiatoday.in/india/story/5-ways-how-rajiv-gandhi-changed-india-forever-1318979-2018-08-20 |access-date=4 July 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=20 August 2018}}</ref> उनके सरकार ने पूरी तरह से असंबद्ध [[मदरबोर्ड]] के आयात की अनुमति दी, जिससे कंप्यूटर की कीमतें कम हुईं।<ref name="computer">{{cite web |last1=Singal |first1=Aastha |title=Rajiv Gandhi –The Father of Information Technology & Telecom Revolution of India |url=https://www.entrepreneur.com/article/338415 |website=entrepreneur.com/ |date=20 August 2019 |publisher=Entrepreneur India |access-date=4 July 2021}}</ref> हर जिले में [[नवोदय विद्यालय]] की स्थापना का विचार [[राष्ट्रीय शिक्षा नीति]] (NPE) का हिस्सा था।<ref name="NPE TOI">{{cite news |last1=Sharma |first1=Sanjay |title=National Education Policy 2020: All You Need to Know |url=https://timesofindia.indiatimes.com/home/education/news/national-education-policy-2020-all-you-need-to-know/articleshow/77239854.cms |access-date=24 July 2021 |work=The Times of India |date=30 July 2020}}</ref>
2005 में, कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की, जिसमें लगभग 500,000 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यरत थे। इसे अर्थशास्त्री [[जेफ्री सैक्स]] द्वारा सराहा गया।<ref name="timepoverty">{{cite news|title=The End of Poverty|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20050317031951/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|url-status=dead|archive-date=17 March 2005|first=Jeffrey D.|last=Sachs|date=6 March 2005|magazine=Time}}</ref> 2006 में, इसने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] (IITs), [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] (IIMs) और अन्य केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में [[अन्य पिछड़ा वर्ग]] के लिए 27 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रस्ताव लागू किया, जिसके कारण [[2006 भारतीय विरोध प्रदर्शन]] हुए।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/Students-cry-out-No-reservation-please/articleshow/1513316.cms |title=Students cry out: No reservation please |work=The Times of India |date=3 May 2006 |access-date=16 August 2018}}</ref> सिंह सरकार ने [[सर्व शिक्षा अभियान]] कार्यक्रम को भी जारी रखा, जिसमें मध्याह्न भोजन की व्यवस्था और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नई स्कूलों की स्थापना शामिल है, ताकि [[अनपढ़ता]] से लड़ सके।<ref>{{cite news|title=Direct SSA funds for school panels|url=http://www.deccanherald.com/content/338571/direct-ssa-funds-school-panels.html|access-date=14 June 2013|newspaper=Deccan Herald}}</ref> मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में आठ प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की गई।<ref>{{cite news|title=LS passes bill to provide IIT for eight states.|url=http://www.deccanherald.com/content/148456/ls-passes-bill-provide-iit.html|newspaper=Deccan Herald|access-date=14 June 2013}}</ref>
===विदेश नीति===
[[File:NATO vs. Warsaw Pact (1949-1990).svg|thumb|उत्तर गोलार्ध में ''संबद्ध देशों'': [[NATO]] नीले रंग में और [[वारसॉ संधि]] लाल रंग में।]]
[[File:Stevan Kragujevic, Tito, Naser, Nehru, Dolazak na Brione.jpg|thumb|right|alt=refer caption|[[गमाल अब्देल नासिर]], [[जवाहरलाल नेहरू]], और [[जोसेप ब्रोज टिटो]], [[गैर-आश्रित आंदोलन]] के अग्रदूत]]
[[शीत युद्ध]] के अधिकांश समय में, कांग्रेस ने [[गैर-आश्रित आंदोलन|गैर-आश्रित]] नीति का समर्थन किया, जिसमें भारत को पश्चिमी और पूर्वी ब्लॉकों दोनों के साथ संबंध स्थापित करने का आह्वान किया गया, लेकिन किसी भी ओर औपचारिक गठबंधन से बचने की सलाह दी गई।<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/jawaharlal-nehru-the-architect-of-indias-foreign-policy/articleshow/58767014.cms |title=गैर-आश्रित आंदोलन: जवाहरलाल नेहरू - भारत की विदेश नीति के वास्तुकार|work=The Times of India |date=20 मई 2017 |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति समर्थन ने पार्टी को 1971 में सोवियत संघ के साथ एक मित्रता संधि को समर्थन देने के लिए प्रेरित किया।<ref>{{cite web |url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/ChanakyaCode/the-indo-pak-war-1965-and-the-tashkent-agreement-role-of-external-powers/ |title=1965 का भारत-पाक युद्ध और ताशकंद समझौता: बाहरी शक्तियों की भूमिका |date=24 अक्टूबर 2015 |work=The Times of India |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> कांग्रेस ने पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गई विदेश नीति को जारी रखा, जिसमें [[भारत-पाकिस्तान संबंध|पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया]] और दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय विजिट का आदान-प्रदान शामिल है।<ref name=peace>{{cite news|title=Negotiation की स्थिति|url=http://www.firstpost.com/india/loc-violation-are-talks-enough-or-should-india-take-action-582121.html|access-date=18 अगस्त 2014|publisher=[[Firstpost]]|agency=[[Network 18]]|date=9 जनवरी 2013}}</ref> यूपीए सरकार ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ सीमा विवाद को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास किया।<ref name="Economist news">{{cite news|title=भारत के प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह, व्यापार और सीमा रक्षा के मामलों पर चर्चा करने के लिए बीजिंग में|url=https://www.economist.com/news/world-week/21588422-politics-week|access-date=18 अगस्त 2014|newspaper=[[The Economist]]|date=26 अक्टूबर 2013}}</ref><ref name=republic>{{cite news|title=भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजिंग का दौरा किया|url=http://www.china-briefing.com/news/2008/01/14/indian-prime-minister-manmohan-singh-visits-beijing.html|access-date=18 अगस्त 2014|work=China Briefing|agency=Dezan Shira & Associates|publisher=Business Intelligence|date=14 जनवरी 2008}}</ref>
[[अफगानिस्तान-भारत संबंध|अफगानिस्तान के साथ संबंध]] भी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय रहे हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|title=भारत-अफगानिस्तान संबंध|access-date=11 दिसंबर 2008|last=Bajoria|first=Jayshree|date=23 अक्टूबर 2008|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20081129231738/http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|archive-date=29 नवंबर 2008}}</ref> अफगान राष्ट्रपति [[हामिद करज़ई]] के अगस्त 2008 में नई दिल्ली दौरे के दौरान, मनमोहन सिंह ने अफगानिस्तान के लिए स्कूलों, स्वास्थ्य क्लिनिक, बुनियादी ढाँचा और रक्षा के विकास के लिए सहायता पैकेज बढ़ाया।<ref name=BBC2>{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/7540204.stm|title=भारत ने अफगानिस्तान के लिए अधिक सहायता की घोषणा की|date=4 अगस्त 2008|publisher=BBC News}}</ref> भारत अब अफगानिस्तान के लिए सबसे बड़े एकल सहायता दाताओं में से एक है।<ref name=BBC2 /> मध्य एशियाई देशों के साथ राजनीतिक, सुरक्षा, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए, भारत ने 2012 में [[कनेक्ट सेंट्रल एशिया]] नीति शुरू की। यह नीति [[कजाखस्तान]], [[किर्गिस्तान]], [[ताजिकिस्तान]], [[तुर्कमेनिस्तान]], और [[उज़्बेकिस्तान]] के साथ भारत के संबंधों को मजबूत और विस्तारित करने के उद्देश्य से है। [[पूर्व की ओर देखो नीति (भारत)|पूर्व की ओर देखो नीति]] 1992 में [[नरसिम्हा राव|नरसिम्हा राव]] द्वारा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए शुरू की गई, ताकि भारत की क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थिति को मजबूत किया जा सके और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के रणनीतिक प्रभाव का प्रतिरोध किया जा सके। इसके बाद, 1992 में राव ने इसराइल के साथ भारत के संबंधों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया, जो उनके विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान कुछ वर्षों तक गुप्त रूप से सक्रिय थे, और इसराइल को नई दिल्ली में एक दूतावास खोलने की अनुमति दी।<ref name="IsraelRao">{{cite news |title=भारत और इसराइल के बीच संबंधों का समय-रेखा |url=https://www.livemint.com/Politics/9zCAQDe5L5mKdtU21A6pkN/Narendra-Modi-in-Israel-A-timeline-of-Indias-ties-with-Isr.html |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=Mint |agency=HT Media |date=4 जुलाई 2017}}</ref> राव ने [[दलाई लामा]] से दूर रहने का निर्णय लिया ताकि बीजिंग की शंकाओं और चिंताओं को न बढ़ाया जा सके, और [[तेहरान]] के साथ सफल संपर्क बनाए।<ref name="Irish1996">{{cite news |last1=Bedi |first1=Rahul |title=दलाई लामा फिल्मों के लिए अनुमति अस्वीकृत |url=https://www.irishtimes.com/news/permission-for-dalai-lama-films-denied-1.41053 |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=The Irish Times |date=19 अप्रैल 1996}}</ref>
हालाँकि कांग्रेस की विदेश नीति का सिद्धांत सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखने का है, लेकिन यह हमेशा अफ्रीका-एशिया के देशों के प्रति विशेष झुकाव प्रदर्शित करती है। इसने [[Group of 77]] (1964), [[Group of 15]] (1990), [[Indian Ocean Rim Association]], और [[SAARC]] के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इंदिरा गांधी ने अफ्रीका में भारतीय एंटी-इंपीरियलिस्ट हितों को सोवियत संघ के हितों से मजबूती से जोड़ा। उन्होंने अफ्रीका में मुक्ति संघर्षों का खुलकर और उत्साहपूर्वक समर्थन किया।<ref name="MEAIndira">{{cite web |title=भारत – ज़ाम्बिया संबंध |url=https://mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/Zambia_Jan_2016.pdf |publisher=भारतीय विदेश मंत्रालय |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref> अप्रैल 2006 में, नई दिल्ली ने 15 अफ्रीकी राज्यों के नेताओं की उपस्थिति में एक भारत-आफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।
कांग्रेस पार्टी ने हथियारों की दौड़ का विरोध किया है और पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के निरस्त्रीकरण की वकालत की है।<ref name="IndiaToday2000">{{cite news |last1=Mitra |first1=Sumit |title=क्या भारत को और परमाणु परीक्षण करने चाहिए, इस पर कांग्रेस में विभाजन|url=https://www.indiatoday.in/magazine/nation/story/20000508-congress-divided-against-itself-on-whether-india-should-have-more-nuclear-tests-777525-2000-05-08 |access-date=7 जुलाई 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=8 मई 2000}}</ref> 2004 से 2014 के बीच सत्ता में रहते हुए, कांग्रेस ने [[भारत-यूएस संबंध|भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध]] पर काम किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जुलाई 2005 में अमेरिका का दौरा किया ताकि [[भारत-यूएस नागरिक परमाणु समझौता]] पर बातचीत की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति [[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश]] मार्च 2006 में भारत आए; इस दौरे के दौरान, एक परमाणु समझौता प्रस्तावित किया गया, जिसके तहत भारत को परमाणु ईंधन और प्रौद्योगिकी की पहुंच प्राप्त होती और इसके बदले में [[अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी|IAEA]] द्वारा इसके नागरिक [[परमाणु रिएक्टर]]ों का निरीक्षण किया जाता। दो वर्षों की बातचीत के बाद, IAEA, [[परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह]] और [[संयुक्त राज्य कांग्रेस]] से स्वीकृति मिलने के बाद, यह समझौता 10 अक्टूबर 2008 को हस्ताक्षरित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://english.peopledaily.com.cn/90001/90777/90852/6513319.html| title=यू.एस., भारत ने ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए|access-date=11 दिसंबर 2008|date=11 अक्टूबर 2008|work=People's Daily}}</ref> हालांकि, भारत ने [[परमाणु अप्रसार संधि]] (NPT) और [[व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि]] (CTBT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि वे भेदभावपूर्ण और साम्राज्यवादी प्रकृति के हैं।<ref name="NTI2019">{{cite web |title=भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम |url=https://www.nti.org/learn/countries/india/nuclear/ |publisher=The Nuclear Threat Initiative|access-date=7 जुलाई 2021}}</ref><ref name="Sipri2010">{{cite report |last1=Gopalaswamy |first1=Bharat |title=भारत और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि: हस्ताक्षर करें या न करें? |date=जनवरी 2010 |url=https://www.sipri.org/publications/sipri-policy-briefs/india-and-comprehensive-nuclear-test-ban-treaty-sign-or-not-sign |publisher=SIPRI |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref>
कांग्रेस की नीति जापान के साथ-साथ यूरोपीय संघ के देशों, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, और जर्मनी के साथ मित्रता संबंधों को विकसित करने की रही है।<ref name=conversation>{{cite web|last1=Haass|first1=Richard N.|title=प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ एक वार्तालाप|url=http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|date=23 नवंबर 2009|website=cfr.org|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|access-date=18 अगस्त 2014|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20140819083228/http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|archive-date=19 अगस्त 2014}}</ref> ईरान के साथ कूटनीतिक संबंध जारी रहे हैं, और [[ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन]] पर बातचीत हुई है।<ref name="Iran relations">{{cite web|title=शांति पाइपलाइन|url=http://www.thenational.ae/news/the-peace-pipeline|work=The National|location=अबू धाबी|date=28 मई 2009|access-date=18 अगस्त 2014}}</ref> कांग्रेस की नीति अन्य विकासशील देशों, विशेषकर ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के साथ संबंध सुधारने की भी रही है।<ref>{{cite web|title=भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंध|url=http://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/India-SouthAfrica_Relations.pdf|website=mea.gov.in|publisher=[[Ministry of External Affairs (India)|भारतीय विदेश मंत्रालय]], [[भारत सरकार]]|access-date=18 सितंबर 2014}}</ref>
== संरचना और संगठन ==
{{See also|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची|अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी|कांग्रेस कार्यसमिति}}
[[File:Stamp of India - 1985 - Colnect 167209 - Indian National Congress.jpeg|thumb|right|200px|कांग्रेस की शताब्दी के उपलक्ष्य में जारी डाक टिकट]]
वर्तमान में, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची|अध्यक्ष]] और [[अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी]] (एआईसीसी) का चुनाव वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य एवं ज़िला स्तरीय इकाइयों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश—या ''प्रदेश''—में एक [[प्रदेश कांग्रेस कमेटी]] (पीसीसी) होती है,<ref name="Committee">{{cite web |title=President of Pradesh Congress Committee |url=https://www.inc.in/en/pcc-presidents |publisher=INC web portal |access-date=26 May 2020 |archive-date=16 April 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200416160136/https://www.inc.in/en/pcc-presidents |url-status=dead }}</ref> जो पार्टी की राज्य-स्तरीय इकाई होती है और स्थानीय व राज्य स्तर पर राजनीतिक अभियानों का संचालन करती है तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के अभियानों में सहायता करती है।<ref>{{cite web |title=The Past And Future of the Indian National Congress |url=http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |website=[[द कारवां]] |access-date=6 June 2018 |date=March 2010 |via=[[रामचंद्र गुहा]] |archive-date=20 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180620095241/http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |url-status=dead }}</ref> प्रत्येक पीसीसी की 20 सदस्यों की एक कार्यसमिति होती है, जिनमें से अधिकांश की नियुक्ति पार्टी अध्यक्ष द्वारा की जाती है। राज्य पार्टी के नेता का चयन राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जाता है। राज्य विधानसभाओं के लिए चुने गए कांग्रेस विधायक विभिन्न राज्यों में कांग्रेस विधायक दल का गठन करते हैं; इनका अध्यक्ष सामान्यतः मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी का नामित उम्मीदवार होता है। पार्टी विभिन्न समितियों और विभागों में संगठित है तथा एक दैनिक समाचार पत्र ''[[नेशनल हेराल्ड (भारत)|नेशनल हेराल्ड]]'' प्रकाशित करती है।<ref name="Kumar1990">{{cite book|author=Kedar Nath Kumar|title=Political Parties in India, Their Ideology and Organisation|url={{Google books|x3pJ8t4rxIsC|page=PA41|plainurl=yes}}|date=1 January 1990|publisher=Mittal Publications|isbn=978-81-7099-205-9|pages=41–43}}</ref>
संरचना होने के बावजूद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 1972 के बाद कोई संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए।<ref>{{cite book|last1=Sanghvi|first1=Vijay|title=The Congress Indira to Sonia Gandhi|date=2006|publisher=Kalpaz Publications|location=Delhi|isbn=978-8178353401|page=128|url=https://books.google.com/books?id=npdqD_TXucQC|access-date=4 November 2016}}</ref> इसके बावजूद, 2004 में जब कांग्रेस पुनः सत्ता में आई, तो [[मनमोहन सिंह]] पार्टी अध्यक्ष न होते हुए भी प्रधानमंत्री बने—जो इस परंपरा के बाद पहली बार हुआ।<ref>{{Cite news |url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/rahul-gandhi-congress-president-gandhi-chief-1564307-2019-07-08|title=Goodbye, Rahul Gandhi?|website=India Today|agency=Living Media India Limited|date=8 July 2019|last=Deka|first=Kaushik|accessdate=22 May 2021}}</ref>
एआईसीसी, पीसीसी से भेजे गए प्रतिनिधियों से मिलकर बनती है।<ref name="Kumar1990" /> ये प्रतिनिधि [[कांग्रेस कार्यसमिति]] सहित विभिन्न कांग्रेस समितियों का चुनाव करते हैं, जिनमें वरिष्ठ पार्टी नेता और पदाधिकारी शामिल होते हैं। एआईसीसी सभी महत्वपूर्ण कार्यकारी और राजनीतिक निर्णय लेती है। 1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन के बाद से [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष]] प्रभावी रूप से पार्टी के राष्ट्रीय नेता, संगठन प्रमुख, कार्यसमिति प्रमुख, मुख्य प्रवक्ता और [[भारत के प्रधानमंत्री]] पद के लिए पार्टी की पसंद रहे हैं। संवैधानिक रूप से अध्यक्ष का चुनाव पीसीसी और एआईसीसी के सदस्यों द्वारा किया जाता है; हालांकि, कई बार कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा ही उम्मीदवार चुना गया है।<ref name="Kumar1990" />
[[File:NSUI National Convention INQUILAB 1.jpg|thumb|right|alt=कांग्रेस छात्र संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन| [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय अधिवेशन ‘इंक़िलाब-1’, जयपुर]]
कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) में लोकसभा और [[राज्यसभा]] के निर्वाचित सांसद शामिल होते हैं। प्रत्येक राज्य में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का एक नेता भी होता है। सीएलपी में उस राज्य के सभी कांग्रेस [[भारत के विधायक]] शामिल होते हैं। जिन राज्यों में कांग्रेस अकेले सरकार बनाती है, वहाँ सीएलपी नेता ही [[मुख्यमंत्री]] होता है। अन्य प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध संगठन इस प्रकार हैं:
* [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई), कांग्रेस का छात्र संगठन।
* [[भारतीय युवा कांग्रेस]], पार्टी का युवा संगठन।
* [[भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस]], श्रमिक संगठन।
* [[अखिल भारतीय महिला कांग्रेस]], पार्टी का महिला संगठन।
* [[किसान और खेत मजदूर कांग्रेस]], पार्टी का किसान प्रकोष्ठ।
* [[अखिल भारतीय प्रोफेशनल्स कांग्रेस]], कार्यरत पेशेवरों का संगठन।
* कांग्रेस [[सेवा दल]], पार्टी का स्वयंसेवी संगठन।<ref>{{cite web|url=http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|title=All India 2014 Results|website=Political Baba|access-date=26 May 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150527000402/http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|archive-date=27 May 2015|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|title=Lok Sabha Election 2014 Analysis, Infographics, Election 2014 Map, Election 2014 Charts|publisher=Firstpost|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924142920/http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|archive-date=24 September 2015}}</ref>
* अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग, जिसे अल्पसंख्यक कांग्रेस भी कहा जाता है, कांग्रेस पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ है। यह [[भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश|भारत के सभी राज्यों]] में ''प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग'' के माध्यम से कार्य करता है।<ref>{{cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/congress-minority-cell-opposes-quota-cut-36478|title=Congress minority cell opposes quota cut|website=Tribuneindia News Service|date=5 February 2020|access-date=6 February 2020}}</ref>
=== चुनाव चिह्न ===
[[File:Cow and Calf INC.svg|thumb|150px|alt=इंदिरा गांधी कांग्रेस का स्वीकृत चुनाव चिह्न| 1971–1977 के दौरान कांग्रेस (आर) पार्टी का चुनाव चिह्न]]
{{as of|2021}}, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] का [[चुनाव चिह्न]], जैसा कि [[भारत निर्वाचन आयोग]] द्वारा स्वीकृत है, सामने की ओर खुली हथेली वाला दाहिने हाथ का प्रतीक है, जिसमें उंगलियाँ आपस में जुड़ी होती हैं;<ref name=hand>{{cite news|title=A Short History of the Congress Hand|url=https://blogs.wsj.com/indiarealtime/2012/03/28/a-short-history-of-the-congress-hand/|access-date=27 June 2014|work=[[The Wall Street Journal]]|agency=[[Dow Jones & Company]]|publisher=[[News Corp (2013–present)|News Corp]]|date=28 March 2012}}</ref> इसे सामान्यतः तिरंगे झंडे के मध्य में प्रदर्शित किया जाता है। हाथ का यह चिह्न पहली बार इंदिरा गांधी द्वारा 1977 के चुनावों के बाद कांग्रेस (आर) से अलग होकर नई कांग्रेस (आई) के गठन के समय अपनाया गया था।<ref name="hand symbol">{{cite news|title=How Indira's Congress got its hand symbol|url=http://www.ndtv.com/article/lifestyle/how-indira-s-congress-got-its-hand-symbol-74104|access-date=27 June 2014|publisher=[[एनडीटीवी]]|date=22 December 2010}}</ref> हाथ शक्ति, ऊर्जा और एकता का प्रतीक है।
नेहरू के नेतृत्व में पार्टी का चुनाव चिह्न ‘जुए के साथ बैलों की जोड़ी’ था, जिसने उस समय की जनता—जो मुख्यतः किसान थी—के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित किया।<ref name=bullocks>{{cite news|title=Indian political party election symbols from 1951|url=http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20140407090702/http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|url-status=dead|archive-date=7 April 2014|access-date=27 June 2014|publisher=CNN-IBN|date=4 April 2014}}</ref>
1969 में कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक संघर्षों के कारण इंदिरा गांधी ने अलग होकर अपनी पार्टी बनाने का निर्णय लिया। कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों ने उनके नेतृत्व का समर्थन किया और नई पार्टी का नाम कांग्रेस (आर) रखा गया। 1971–1977 की अवधि के दौरान इंदिरा गांधी की [[कांग्रेस (आर)]] या कांग्रेस (रिक्विज़िशनिस्ट्स) का चुनाव चिह्न बछड़े के साथ गाय था।<ref name="Electoral Symbol">{{cite news |title=A tale of changing election symbols of Congress, BJP |url=https://timesofindia.indiatimes.com/elections/news/a-tale-of-congress-bjp-election-symbols/articleshow/68732103.cms |access-date=26 May 2020 |work=The Times of India |date=5 April 2019}}</ref><ref name="book"/>
लोकसभा में पार्टी के 153 सदस्यों में से 76 का समर्थन खो देने के बाद, इंदिरा गांधी की नई राजनीतिक इकाई कांग्रेस (आई) या कांग्रेस (इंदिरा) के रूप में विकसित हुई और उन्होंने हाथ (खुली हथेली) को चुनाव चिह्न के रूप में अपनाया।
=== वंशवाद ===
भारत की कई [[भारत के राजनीतिक दलों की सूची|राजनीतिक पार्टियों]] में वंशवाद अपेक्षाकृत सामान्य है, और कांग्रेस पार्टी भी इसका अपवाद नहीं है।<ref name="Denyer2014">{{cite book|author=Simon Denyer|title=Rogue Elephant: Harnessing the Power of India's Unruly Democracy|url=https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny|url-access=registration|date=24 June 2014|publisher=Bloomsbury USA|isbn=978-1-62040-608-3|pages=[https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny/page/115 115]–116}}</ref> [[नेहरू–गांधी परिवार]] के छह सदस्य पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं।<ref name="Gandhi presidents">{{cite news |last1=Radhakrishnan |first1=Sruthi |title=Presidents of Congress past: A look at the party's presidency since 1947 |url=https://www.thehindu.com/news/national/presidents-of-congress-past-a-look-at-the-partys-presidency-since-1947/article21639174.ece |access-date=26 May 2020 |work=The Hindu |date=14 December 2017}}</ref>
[[भारत में आपातकाल]] के दौरान पार्टी पर इंदिरा गांधी के परिवार का प्रभाव बढ़ गया, जिसमें उनके छोटे पुत्र [[संजय गांधी]] की प्रमुख भूमिका रही।<ref name="Tarlo2003">{{cite book|author=Emma Tarlo|title=Unsettling Memories: Narratives of the Emergency in Delhi|url=https://books.google.com/books?id=3IO1WB2H8UUC&pg=PR5|date=24 July 2003|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23122-1|pages=27–29}}</ref> इस अवधि को परिवार के प्रति चाटुकारिता और अधीनता से जोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी की हत्या के बाद [[राजीव गांधी]] का उत्तराधिकारी के रूप में चयन हुआ। बाद में राजीव गांधी की हत्या के पश्चात पार्टी ने [[सोनिया गांधी]] को उनका उत्तराधिकारी चुना, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।<ref name="Bose2013">{{cite book|author=Sumantra Bose|title=Transforming India|url={{Google books|reiwAAAAQBAJ|page=PP8|plainurl=yes}}|date=16 September 2013|publisher=Harvard University Press|isbn=978-0-674-72819-6|pages=28–29}}</ref>
1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन से लेकर 2022 तक, 1991 से 1998 के बीच की अवधि को छोड़कर, पार्टी अध्यक्ष उनके ही परिवार से रहा। लोकसभा के पिछले तीन चुनावों को मिलाकर देखें तो कांग्रेस के 37 प्रतिशत सांसदों के परिवार के सदस्य उनसे पहले राजनीति में सक्रिय रहे हैं।<ref name="Chandra2016">{{cite book|editor1=Kanchan Chandra|author1=Adam Ziegfeld|title=Democratic Dynasties: State, Party and Family in Contemporary Indian Politics|url={{Google books|tesIDAAAQBAJ|page=PR10|plainurl=yes}}|date=28 April 2016|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-12344-1|page=105}}</ref>
== काँग्रेस की नीतियों का विरोध ==
समय-समय पर विभिन्न नेताओं ने काँग्रेस की नीतियों का विरोध किया और उसे हटाने के लिये संघर्ष किया।<ref>{{Cite web |url=http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |title=30 rebels against the Nehru-Gandhi dynasty |access-date=16 अप्रैल 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190416041531/http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |archive-date=16 अप्रैल 2019 |url-status=dead }}</ref> इनमें [[राममनोहर लोहिया]] का नाम अग्रणी है जो [[जवाहरलाल नेहरू]] के कट्टर विरोधी थे। इसके अलावा [[जयप्रकाश नारायण]] ने [[इंदिरा गाँधी]] की सत्ता को उखाड़ फेंका और एक नया रूप दिया। [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] ने बोफोर्स दलाली काण्ड को लेकर [[राजीव गाँधी]] को सत्ता से हटा दिया।
=== लोहिया का 'काँग्रेस हटाओ' आन्दोलन ===
'''[[संयुक्त विधायक दल]]''' भी देखें
[[राम मनोहर लोहिया]] लोगों को आगाह करते आ रहे थे कि देश की हालत को सुधारने में काँग्रेस नाकाम रही है। काँग्रेस शासन नए समाज की रचना में सबसे बड़ा रोड़ा है। उसका सत्ता में बने रहना देश के लिये हितकर नहीं है। इसलिए लोहिया ने नारा दिया - "काँग्रेस हटाओ, देश बचाओ।"
1967 के आम चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन हुआ। देश के 9 राज्यों - [[पश्चिम बंगाल]], [[बिहार]], [[उड़ीसा]], [[मध्यप्रदेश]], [[तमिलनाडु]], [[केरल]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] में गैर काँग्रेसी सरकारें गठित हो गई। लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने।
=== जेपी आन्दोलन ===
{{मुख्य|सम्पूर्ण क्रांति}}
सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण ने इन्दिरा गान्धी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये [[सम्पूर्ण क्रांति|सम्पूर्ण क्रान्ति]] का नारा दिया। आन्दोलन को भारी जनसमर्थन मिला। इससे निपटने के लिये इन्दिरा गान्धी ने देश में [[आपातकाल|इमर्जेंसी]] लगा दी। विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इसका आम जनता में जमकर विरोध हुआ। [[जनता पार्टी]] की स्थापना हुई और सन् 1977 में काँग्रेस पार्टी बुरी तरह हारी। पुराने काँग्रेसी नेता [[मोरारजी देसाई]] के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी किन्तु [[चौधरी चरण सिंह]] की महत्वाकांक्षा के कारण वह सरकार अधिक दिनों तक न चल सकी।
=== भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन ===
{{मुख्य|बोफोर्स घोटाला}}
सन् 1987 में यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कम्पनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकायी थी। उस समय केन्द्र में काँग्रेस की सरकार थी और उसके प्रधानमन्त्री राजीव गान्धी थे। स्वीडन रेडियो ने सबसे पहले 1987 में इसका खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स काण्ड के नाम से जाना जाता हैं। इस खुलासे के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने [[सरकार]] के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन चलाया जिसके परिणाम स्वरूप [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] प्रधान मन्त्री बने।
=== 'कांग्रेस-मुक्त भारत' अभियान ===
जून २०१३ में [[गोवा]] में हुई [[भारतीय जनता पार्टी]] की कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री [[नरेंद्र मोदी]] को 2014 चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष घोषित कर दिया तब इस घोषणा के कुछ देर बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "वरिष्ठ नेताओं ने मुझमें विश्वास जताया है. हम कांग्रेस मुक्त भारत निर्माण बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे. आपके समर्थन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद।" फिर सन २०१९ में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि '[[महात्मा गांधी]] खुद कांग्रेस को खत्म करना चाह रहे थे। इसलिए कांग्रेस-मुक्त भारत मेरा नारा नहीं है, लेकिन मैं तो गांधी जी की इच्छा पूरी कर रहा हूं। श्रद्धांजलि के रूप में ये तो करना ही करना है, कितनी भी मिलावट कर लो बच नहीं सकते।'<ref>[https://hindi.oneindia.com/news/india/congress-mukt-bharat-was-mahatma-gandhi-s-idea-not-mine-narendra-modi-492321.html 'कांग्रेस मुक्त भारत' का आइडिया गांधीजी का था, मेरा नहीं : पीएम मोदी]</ref> बाद में उन्होंने 'कांग्रेस-मुक्त भारत' की उनकी अवधारणा को समझाते हुए कहा था कि कांग्रेस-मुक्त भारत का उनका नारा राजनीतिक रूप से मुख्य विपक्षी दल को समाप्त करने का नहीं, बल्कि देश को 'कांग्रेस संस्कृति' से छुटकारा दिलाने के लिए है।
एक दूसरा विचार यह भी है कि [[नन्दमूरि तारक रामाराव|एन टी रामाराव]] के राजनीतिक सिद्धांत में कांग्रेस-विरोधी विचाराधारा इस हद तक समाहित थी कि उन्हें ‘ कांग्रेस मुक्त भारत ’ के सिद्धांत का मूल प्रस्तावक कहा जा सकता है। यह बात पत्रकार रमेश कांदुला ने [[तेलुगु देशम पार्टी]] के संस्थापक के बारे में अपनी किताब ‘मैवरिक मसीहा : ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ एन टी रामा राव’ में लिखा है, ‘‘एनटीआर ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कांग्रेस के खिलाफ बिना समझौते के लड़ाई लड़ी।
==प्रधानमंत्रियों की सूची ==
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"| प्रधानमंत्री
! rowspan="2"| चित्र
! colspan="3"| '''कार्यकाल'''
'''<small>वर्ष एवं दिन में अवधि</small>'''
! rowspan="2" | सरकार
! rowspan="2" | लोक सभा
! rowspan="2" | निर्वाचन क्षेत्र
! rowspan="2" | राष्ट्राध्यक्ष
|-
!प्रारंभ
!समाप्ति
! अवधि
|-
| rowspan="4" |[[जवाहरलाल नेहरू]]
<small>(1889–1964)</small>
| rowspan="4" |[[File:Jawaharlal Nehru, 1947.jpg|80px]]
|15 अगस्त 1947
|15 अप्रैल 1952
| rowspan="4" |{{age in years and days|1947|08|15|1964|5|27}}
|[[प्रथम नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू १]]
| colspan="3" | [[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|-
|15 अप्रैल 1952
|4 अप्रैल 1957
|[[द्वितीय नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू २]]
| [[प्रथम लोक सभा]]
| rowspan="3" |[[फूलपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|फूलपुर]]
| rowspan="2" |[[राजेन्द्र प्रसाद]]
|-
|17 अप्रैल 1957
|2 अप्रैल 1962
|नेहरू ३
| [[द्वितीय लोक सभा]]
|-
|2 अप्रैल 1962
|27 मई 1964
|नेहरू ४
| rowspan="5" | [[तृतीय लोक सभा]]
| rowspan="5" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
| rowspan="2" | [[गुलज़ारीलाल नंदा]]
<small>(1898–1998)</small>
| rowspan="2" |[[File:Gulzarilal Nanda 1999 stamp of India.jpg|80px]]
|27 मई 1964
|9 जून 1964
| rowspan="2" |26 दिन
| नंदा १
| [[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|11 जनवरी 1966
|24 जनवरी 1966
|नंदा I २
|[[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|[[लाल बहादुर शास्त्री]]
<small>(1904–1966)</small>
|[[File:Lal Bahadur Shastri (cropped).jpg|80px]]
|9 जून 1964
|11 जनवरी 1966
|{{age in years and days|1964|6|9|1966|1|11}}
|शास्त्री
|[[इलाहाबाद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|इलाहाबाद]]
|-
| rowspan="4" |[[इंदिरा गांधी]]
<small>(1917–1984)</small>
| rowspan="4" |[[File:Indira Gandhi official portrait.png|80px]]
|24 जनवरी 1966
|13 मार्च 1967
| rowspan="4" |15 वर्ष, 350 दिन
|इंदिरा १
|[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, उत्तर प्रदेश]]
|-
|13 मार्च 1967
|18 मार्च 1971
|इंदिरा २
| [[चौथी लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[रायबरेली लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|रायबरेली]]
| rowspan="3" |[[ज़ाकिर हुसैन]]<br/>[[वी॰ वी॰ गिरि|वी. वी. गिरि]]<br/>''[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]''<br/>[[फखरुद्दीन अली अहमद]]<br/>[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]<br/>[[नीलम संजीव रेड्डी]]<br/>[[ज़ैल सिंह]]
|-
|18 मार्च 1971
|24 मार्च 1977
|इंदिरा ३
| [[पाँचवीं लोक सभा]]
|-
| 14 जनवरी 1980
| 31 अक्टूबर 1984
|इंदिरा ४
| rowspan="2" | [[सातवीं लोक सभा]]
|[[मेदक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|मेदक]]
|-
| rowspan ="2" |[[राजीव गांधी]]
<small>(1944–1991)</small>
| rowspan ="2" |[[File:RajivGandhi.jpg|frameless|100x100px]]
|31 अक्टूबर 1984
|31 दिसंबर 1984
| rowspan ="2" |{{age in years and days|1984|10|31|1989|12|2}}
|राजीव १
| rowspan="2" |[[अमेठी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|अमेठी]]
| rowspan="2" |[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|31 दिसंबर 1984
|2 दिसंबर 1989
|राजीव २
| [[आठवीं लोक सभा]]
|-
|[[पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव]]
<small>(1921–2004)</small>
|[[File:Visit of Narasimha Rao, Indian Minister for Foreign Affairs, to the CEC (cropped).jpg|80px]]
|21 जून 1991
|16 मई 1996
|{{age in years and days|1991|6|21|1996|5|16}}
|राव
| [[दसवीं लोक सभा]]
|[[नांदयाल लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|नांदयाल]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
| rowspan ="2" |[[मनमोहन सिंह]]
<small>(1932–2024)</small>
| rowspan ="2" |[[File:Prime Minister Dr. Manmohan Singh in March 2014.jpg|80px]]
|22 मई 2004
|26 मई 2009
| rowspan="2" |{{age in years and days|2004|5|22|2014|5|26}}
|सिंह १
| [[चौदहवीं लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, असम]]
| rowspan="2" |[[ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]<br/>[[प्रतिभा पाटिल]]<br/>[[प्रणब मुखर्जी]]
|-
|22 मई 2009
|26 मई 2014
|सिंह २
| [[पंद्रहवीं लोक सभा के सदस्यों की सूची|पंद्रहवीं लोक सभा]]
|}
==राष्ट्रपतियों की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[राष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं:-
#{{further|भारत के राष्ट्रपति}}
{| class="wikitable sortable" style="width:100%; text-align:center"
! rowspan="2" |चित्र
! rowspan="2" |नाम
{{small|{{nowrap|(जन्म–मृत्यु)}}}}
! rowspan="2" |गृह राज्य
! rowspan="2" |पूर्व पद
! colspan="3" |कार्यकाल
! rowspan="2" |शपथ दिलाने वाले
(मुख्य न्यायाधीश)
! rowspan="2" |चुनाव
! rowspan="2" |चुनाव मानचित्र
! rowspan="2" |[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
| rowspan="3" |[[File:Rajendra_Prasad_(Indian_President),_signed_image_for_Walter_Nash_(NZ_Prime_Minister),_1958_(16017609534).jpg|124x124px]]
| rowspan="3" |'''[[राजेन्द्र प्रसाद]]'''
{{small|(1884–1963)}}
| rowspan="3" |[[बिहार]]
| rowspan="3" |कृषि मंत्री
|26 जनवरी 1950
|13 मई 1952
| rowspan="3" |12 वर्ष, 107 दिन
|[[एच जे कनिया|एच. जे. कानिया]]
|1950
|
|{{Endash}}
|-
|13 मई 1952
|13 मई 1957
|[[एम पी शास्त्री|एम. पतंजलि शास्त्री]]
|1952
|[[File:1952_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
|13 मई 1957
|13 मई 1962
|[[एस आर दास|सुधी रंजन दास]]
|1957
|[[File:1957_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|-
|[[File:President_Fakhruddin_Ali_Ahmed.jpg|133x133px]]
|'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(1905–1977)}}
|[[दिल्ली]]
|कृषि मंत्री
|24 अगस्त 1974
|11 फरवरी 1977{{ref label|†|†|†}}
|2 वर्ष, 171 दिन
|[[ए एन रे|ए. एन. रे]]
|[[1974 भारतीय राष्ट्रपति चुनाव|1974]]
|[[File:1974_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[गोपाल स्वरूप पाठक]]
----[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]
|-
| style="background:wheat;" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| style="background:wheat;" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
|[[कर्नाटक]]
| style="background:wheat;" |[[कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की सूची|कर्नाटक के मुख्यमंत्री]]
| style="background:wheat;" |11 फरवरी 1977
| style="background:wheat;" |25 जुलाई 1977
| style="background:wheat;" |164 दिन
|-
|[[File:President_Giani_Zail_Singh_(cropped).jpg|134x134px]]
|'''[[ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(1916–1994)}}
|[[पंजाब]]
|[[पंजाब (भारत) के मुख्यमंत्रियों की सूची|पंजाब के मुख्यमंत्री]]
|25 जुलाई 1982
|25 जुलाई 1987
|5 वर्ष
|[[वाई वी चंद्रचूड़|वाई. वी. चंद्रचूड़]]
|1982
|[[File:1982_Indian_Presidential_Election.svg|50x50px]]
|[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
----[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
|'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
|[[तमिलनाडु]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
|25 जुलाई 1987
|25 जुलाई 1992
|5 वर्ष
|[[आर एस पाठक|रघुनंदन स्वरूप पाठक]]
|1987
|[[File:Indian_presidential_election,_1987.svg|50x50px]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
|[[File:Shanker_Dayal_Sharma.jpg|127x127px]]
|'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
|[[मध्य प्रदेश]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[महाराष्ट्र के राज्यपालों की सूची|महाराष्ट्र के राज्यपाल]]
|25 जुलाई 1992
|25 जुलाई 1997
|5 वर्ष
|[[एम एच कनिया|एम. एच. कानिया]]
|1992
|[[File:1992_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[के. आर. नारायणन]]
|-
|[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
|'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
|[[केरल]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|25 जुलाई 1997
|25 जुलाई 2002
|5 वर्ष
|[[जे एस वर्मा|जे. एस. वर्मा]]
|1997
|[[File:Indian_presidential_election,_1997.svg|59x59px]]
|[[कृष्ण कान्त|कृष्ण कांत]]
|-
|[[File:The_President_of_India,_Smt._Pratibha_Patil.jpg|140x140px]]
|'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(जन्म 1934)}}
|[[महाराष्ट्र]]
|[[राजस्थान के राज्यपालों की सूची|राजस्थान की राज्यपाल]]
|25 जुलाई 2007
|25 जुलाई 2012
|5 वर्ष
|[[के. जी. बालकृष्णन]]
|2007
|[[File:2007_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
|-
|[[File:Pranab_Mukherjee_Portrait_(cropped).jpg|129x129px]]
|'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(1935–2020)}}
|[[पश्चिम बंगाल]]
|[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
[[भारत के वित्त मंत्री|वित्त मंत्री]]
[[भारत के विदेश मंत्री|विदेश मंत्री]]
|25 जुलाई 2012
|25 जुलाई 2017
|5 वर्ष
|[[एस एच कापड़िया|एस. एच. कपाड़िया]]
|2012
|[[File:Indian_presidential_election_2012.svg|59x59px]]
|}
==उपराष्ट्रपतियो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[उपराष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं ।
{{further|भारत के उपराष्ट्रपति}}
{| class="wikitable" style="line-height:1.4em; text-align:center"
|+
!चित्र
!नाम
{{small|(जीवनकाल)}}
!गृह राज्य
! colspan="2" |कार्यकाल
{{small|वर्ष व दिन में अवधि}}
!निर्वाचन
!पूर्व पद
!राष्ट्रपति
{{small|(कार्यकाल)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| rowspan="3" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
| rowspan="3" |[[कर्नाटक]]
|{{small|31 अगस्त}}
1974
|{{small|31 अगस्त}}
1979
| rowspan="2" |[[1974 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1974]]
{{small|(78.7%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[मैसूर राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1958–1962)}}
* [[पुदुचेरी]] के उपराज्यपाल {{small|(1968–1972)}}
* [[ओडिशा]] के राज्यपाल {{small|(1972–1974)}}
!'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(24 अगस्त 1974–<br>11 फरवरी 1977)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1969|8|31|1974|8|31}}
! style="font-weight:normal" |'''''स्वयं'''''
(कार्यवाहक)
{{small|(11 फरवरी 1977–<br>25 जुलाई 1977)}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
मैसूर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल। 1974 में पाँचवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी [[निरल एनम होरो]] को पराजित किया। राष्ट्रपति [[फखरुद्दीन अली अहमद]] के निधन के पश्चात 11 फरवरी 1977 को कार्यवाहक राष्ट्रपति बने तथा जुलाई 1977 में [[नीलम संजीव रेड्डी]] के निर्वाचन तक इस पद पर रहे। 1979 में कार्यकाल पूर्ण होने पर उपराष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हुए।
! style="font-weight:normal" |'''[[नीलम संजीव रेड्डी]]'''
{{small|(25 जुलाई 1977–<br>25 जुलाई 1982)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
| rowspan="3" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
| rowspan="3" |[[तमिलनाडु]]
|{{small|31 अगस्त}}
1984
|{{small|24 जुलाई}}
1987{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1984 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1984]]
{{small|(71.05%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1952–1957)}}
* उद्योग, श्रम, सहकारिता मंत्री, [[मद्रास राज्य]] {{small|(1957–1967)}}
* [[भारत के वित्त मंत्री|केंद्रीय वित्त मंत्री]] {{small|(1980–1982)}}
* [[भारत के गृह मंत्री|केंद्रीय गृह मंत्री]] {{small|(1982)}}
* [[भारत के रक्षा मंत्री|केंद्रीय रक्षा मंत्री]] {{small|(1982–1984)}}
! rowspan="3" |'''[[ज़ैल सिंह|ज्ञानी ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(25 जुलाई 1982–<br>25 जुलाई 1987)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1984|8|31|1987|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1984 में [[बी. सी. कांबले]] को पराजित कर सातवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कूटनीतिक यात्राओं में राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व किया तथा प्रधानमंत्री [[राजीव गांधी]] और राष्ट्रपति [[ज़ैल सिंह]] के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 25 जुलाई 1987 को राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:Shri_Shankar_Dayal_Sharma.jpg|140x140px]]
| rowspan="3" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
| rowspan="3" |[[मध्य प्रदेश]]
|{{small|3 सितंबर}}
1987
|{{small|24 जुलाई}}
1992{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1987 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1987]]
{{small|(निर्विरोध)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[भोपाल राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1952–1956)}}
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के राष्ट्रीय अध्यक्ष {{small|(1972–1974)}}
* [[भारत के संचार मंत्री|केंद्रीय संचार मंत्री]] {{small|(1974–1977)}}
* [[आंध्र प्रदेश]] {{small|(1984–1985)}}, [[पंजाब]] {{small|(1985)}}, [[महाराष्ट्र]] {{small|(1985–1987)}} के राज्यपाल
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(25 जुलाई 1987–<br>25 जुलाई 1992)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1987|9|3|1992|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1987 में आठवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुए। 1992 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
| rowspan="3" |'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
| rowspan="3" |[[केरल]]
|{{small|21 अगस्त}}
1992
|{{small|24 जुलाई}}
1997{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1992 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1992]]
{{small|(99.86%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[थाईलैंड]] एवं [[तुर्की]] में भारत के राजदूत
* [[भारत के विदेश मंत्रालय]] में सचिव
* [[चीन]] एवं [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में राजदूत
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1984–1992)}}
* योजना, विदेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों में राज्य मंत्री
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(25 जुलाई 1992–<br>25 जुलाई 1997)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1992|8|21|1997|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक एवं केंद्रीय मंत्री। 1992 में नौवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए और [[जोगिंदर सिंह (राजनीतिज्ञ)|जोगिंदर सिंह]] को पराजित किया। भारत के पहले दलित उपराष्ट्रपति। 1997 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="6" |[[File:The_Vice_President_Shri_M._Hamid_Ansari_in_July_2016.jpg|134x134px]]
| rowspan="6" |'''[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]'''
{{small|(जन्म 1937)}}
| rowspan="6" |[[पश्चिम बंगाल]]
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2007
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |[[2007 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2007]]
{{small|(60.50%)}}
| rowspan="5" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[संयुक्त अरब अमीरात]] में राजदूत
* [[ऑस्ट्रेलिया]] में उच्चायुक्त
* [[अफगानिस्तान]], [[ईरान]], [[सऊदी अरब]] में राजदूत
* [[संयुक्त राष्ट्र]] में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
* [[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय]] के कुलपति
* [[राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग]] के अध्यक्ष
! style="font-weight:normal" |'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(25 जुलाई 2007–<br>25 जुलाई 2012)}}
|-
! rowspan="2" style="font-weight:normal" |'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(25 जुलाई 2012–<br>25 जुलाई 2017)}}
|-
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2017
| rowspan="3" |[[2012 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2012]]
{{small|(67.31%)}}
|-
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[राम नाथ कोविंद]]'''
{{small|(25 जुलाई 2017–<br>25 जुलाई 2022)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|2007|8|11|2017|8|11}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक। 2007 में बारहवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए तथा 2012 में पुनः निर्वाचित हुए। [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] के बाद पुनः निर्वाचित होने वाले पहले एवं सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उपराष्ट्रपति। 11 अगस्त 2017 को कार्यकाल पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए।
|}
==उपप्रधानमंत्रियो की सूची==
{{further|भारत के उपप्रधानमंत्री}}
{|class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
!rowspan=2|चित्र
!rowspan=2|नाम<br />{{small|(जन्म–मृत्यु)}}
!colspan=3 |कार्यकाल
!rowspan=2 |[[लोक सभा|लोक सभा]]<br />{{small|([[भारत में चुनाव|चुनाव]])}}
!rowspan=2|निर्वाचन क्षेत्र<br />{{small|(सदन)}}
!rowspan=2|[[भारत के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]]
! rowspan="2" |राष्ट्राध्यक्ष
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
|[[File:Sardar patel (cropped).jpg|100px]]
|'''[[वल्लभभाई पटेल]]'''<br /><small>(1875–1950)</small>
|15 अगस्त 1947
|15 दिसंबर 1950 ''<small>(मृत्यु)</small>''
|3 वर्ष, 122 दिन
|[[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|लागू नहीं
|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|''कोई नहीं''
|-
|[[File:Morarji Desai During his visit to the United States of America .jpg|100px]]
|'''[[मोरारजी देसाई]]'''<br /><small>(1896–1995)</small>
|13 मार्च 1967
|19 जुलाई 1969
|2 वर्ष, 128 दिन
|[[चौथी लोक सभा|4वीं]]<br /><small>([[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]])</small>
|[[सूरत लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|सूरत]]<br /><small>([[लोक सभा]])</small>
|[[इंदिरा गांधी]]
|[[ज़ाकिर हुसैन]]
|}
==लोकसभा अध्यक्षो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी को सत्ता मिलने के बाद, पार्टी ने विभिन्न राजनेता [[लोकसभा]] स्पीकर के रुप में निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं :-
# [[गणेश वासुदेव मावलंकर]] (1952 - 1956)
# [[अनन्त शयनम् अयंगार]] (1956 - 1962)
# [[सरदार हुकम सिंह]] (1962 - 1967)
# [[नीलम संजीव रेड्डी]] (1967 - 1969
# जी. एस. ढिल्लों (1969 - 1975)
# [[बलि राम भगत]] (1976 - 1977)
# [[मीरा कुमार]] (2009-2014)
== विपक्ष के नेता ==
* [[अधीर रंजन चौधरी|राहुल गांधी]] - [[लोकसभा]]
* [[मल्लिकार्जुन खड़गे]] - [[राज्यसभा]]
==आम चुनाव परिणाम ==
1952 में हुए [[भारतीय आम चुनाव, १९५१-१९५२|प्रथम संसदीय]] आम चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 479 में से 364 सीटें जीतीं, जो कुल लड़ी गयी सीटों का 76 प्रतिशत था।<ref name="India Today 2007">{{cite web | title=Congress led by Jawaharlal Nehru won the first general election in 1952 | website=India Today | date=2 July 2007 | url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/20070702-1952-first-lok-sabha-elections-748237-2007-07-01 | access-date=20 March 2024}}</ref> आईएनसी का कुल मतों में से वोट शेयर 45 प्रतिशत था।<ref name="Ganguly 2022">{{cite web | last=Ganguly | first=Siddharth | title=The Parties That Contested India's First General Election | website=The Wire | date=2 February 2022 | url=https://thewire.in/history/the-parties-that-contested-indias-first-general-election | access-date=20 March 2024}}</ref> [[भारतीय आम चुनाव, १९७१|1971 के आम चुनाव]] तक पार्टी का मतदान प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत पर बना रहा। हालांकि, [[भारतीय आम चुनाव, १९७७|1977 के आम चुनाव]] आईएनसी के लिए भारी पराजय लेकर आए। कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने अपनी सीटें खो दीं और पार्टी केवल 154 लोकसभा सीटें ही जीत सकी।<ref name="Analysisb">{{cite news |last1=Gupta |first1=Abhinav |title=Lok Sabha Poll Results: A vote-share and performance analysis of BJP vs Congress from 1996 to 2019 |url=https://english.newsnationtv.com/election/lok-sabha-election/lok-sabha-poll-results-a-vote-share-and-performance-analysis-of-bjp-vs-congress-from-1996-to-2019-225277.html |access-date=8 March 2022 |work=News Nation |agency=News Nation Network Pvt Ltd. |date=24 May 2019}}</ref>
इसके बाद आईएनसी ने [[भारतीय आम चुनाव, १९८०|1980 के आम चुनाव]] में सत्ता में वापसी की और कुल मतों के 42.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 353 सीटें जीतीं। कांग्रेस का वोट शेयर 1980 तक बढ़ता रहा और 1984/85 में रिकॉर्ड 48.1 प्रतिशत तक पहुँच गया। अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद [[राजीव गांधी]] ने [[1984 Indian general election|शीघ्र आम चुनाव]] कराने की सिफारिश की। आम चुनाव जनवरी 1985 में होने थे, लेकिन इसके बजाय दिसंबर 1984 में ही करा लिए गए। कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और 533 में से 415 सीटें हासिल कीं, जो स्वतंत्र भारत के लोकसभा चुनावों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बहुमत था।<ref name="Hindustan Times 2003">{{cite web | title=Chronology of Lok Sabha elections (1952–1999) | website=The Hindustan Times| date=13 October 2003 | url=https://www.hindustantimes.com/india/chronology-of-lok-sabha-elections-1952-1999/story-592mMFUB4HLQKlLyUamnjN.html | access-date=20 March 2024}}</ref> इस जीत में पार्टी को 49.1 प्रतिशत वोट मिले, जिससे कुल वोट शेयर बढ़कर 48.1 प्रतिशत हो गया। 1985 में [[पंजाब]] और [[असम]] में हुए चुनावों में कांग्रेस को 32.14 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।<ref name="Ganguly 2022"/>
नवंबर 1989 में 9वीं लोकसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए आम चुनाव आयोजित किए गए।<ref name="Anon">{{cite web | title=Statistical Report on General Elections, 1989 to the Ninth Lok Sabha| url=https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/89_Vol_II.pdf | access-date=20 March 2024}}</ref> इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा, हालांकि वह लोकसभा में सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी रही। 1989 के आम चुनावों में पार्टी का वोट शेयर घटकर 39.5 प्रतिशत रह गया। 13वीं लोकसभा का कार्यकाल अक्टूबर 2004 में समाप्त होना था, लेकिन [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]] (एनडीए) सरकार ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया। फरवरी में लोकसभा भंग कर दी गई और अप्रैल–मई 2004 में चुनाव कराए गए। [[सोनिया गांधी]] के नेतृत्व में आईएनसी अप्रत्याशित रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।<ref name="2004 Result">{{cite news |last1=Chakravarty |first1=Shubhodeep |title=INKredible India: The story of 2004 Lok Sabha election – All you need to know |url=https://zeenews.india.com/lok-sabha-general-elections-2019/inkredible-india-the-story-of-2004-lok-sabha-election-all-you-need-to-know-2204202.html |access-date=10 March 2022 |publisher=Zee News|agency=[[Essel Group]] |date=18 May 2019}}</ref> चुनावों के बाद कांग्रेस ने अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन]] (यूपीए) का गठन किया। यूपीए को [[बहुजन समाज पार्टी]], [[समाजवादी पार्टी]], केरल कांग्रेस और वाम मोर्चा से बाहरी समर्थन मिला, जिससे सरकार को आरामदायक बहुमत प्राप्त हुआ।<ref name="2004 Result"/> 1996 से 2009 के बीच हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने अपने वोट शेयर का लगभग 20 प्रतिशत खो दिया।<ref name="Analysis"/>
[[File:Seats Won by INC in Indian General Elections over the years.png|thumb|650px|center|वर्षों के दौरान भारतीय आम चुनावों में आईएनसी द्वारा जीती गई सीटें]]
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|-
! वर्ष
! विधायिका
! पार्टी नेता
! जीती गई सीटें
! सीटों में परिवर्तन
! मत प्रतिशत
! वोट स्विंग
! परिणाम
|-
|[[1934 भारतीय आम चुनाव|1934]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|5वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[भूलाभाई देसाई]]
|{{Composition bar|42|147|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 42
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|-
|[[1945 भारतीय आम चुनाव|1945]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|6वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[शरत्चन्द्र बोस]]
|{{Composition bar|59|102|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 17
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{partial|[[भारत की अंतरिम सरकार]] (1946–1947)}}
|-
|[[1951 भारतीय आम चुनाव|1951]]
|[[प्रथम लोक सभा|प्रथम लोकसभा]]
|rowspan=3|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|{{Composition bar|364|489|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 364
|44.99%
|{{n/a}}
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1957 भारतीय आम चुनाव|1957]]
|[[द्वितीय लोक सभा|द्वितीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|371|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 7
|47.78%
|{{increase}} 2.79%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1962 भारतीय आम चुनाव|1962]]
|[[तृतीय लोक सभा|तृतीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|361|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 10
|44.72%
|{{decrease}} 3.06%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]]
|[[चौथी लोक सभा|चतुर्थ लोकसभा]]
|rowspan=4|[[इंदिरा गांधी]]
|{{Composition bar|283|520|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 78
|40.78%
|{{decrease}} 2.94%
|{{yes|बहुमत (1967–69)}}
|-
|[[1971 भारतीय आम चुनाव|1971]]
|[[पाँचवीं लोक सभा|पंचम लोकसभा]]
|{{Composition bar|352|518|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 69
|43.68%
|{{increase}} 2.90%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1977 भारतीय आम चुनाव|1977]]
|[[छठी लोक सभा|षष्ठ लोकसभा]]
|{{Composition bar|153|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 199
|34.52%
|{{decrease}} 9.16%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1980 भारतीय आम चुनाव|1980]]
|[[सातवीं लोक सभा|सप्तम लोकसभा]]
|{{Composition bar|351|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 198
|42.69%
|{{increase}} 8.17%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1984 भारतीय आम चुनाव|1984]]
|[[आठवीं लोक सभा|अष्टम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[राजीव गांधी]]
|{{Composition bar|415|533|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 64
|49.01%
|{{increase}} 6.32%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1989 भारतीय आम चुनाव|1989]]
|[[नौंवीं लोक सभा|नवम लोकसभा]]
|{{Composition bar|197|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 218
|39.53%
|{{decrease}} 9.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1991 भारतीय आम चुनाव|1991]]
|[[दसवीं लोक सभा|दशम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[पी. वी. नरसिंह राव]]
|{{Composition bar|244|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 47
|35.66%
|{{decrease}} 3.87%
|{{yes2|अल्पमत}}
|-
|[[1996 भारतीय आम चुनाव|1996]]
|[[ग्यारहवीं लोक सभा|एकादश लोकसभा]]
|{{Composition bar|140|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 104
|28.80%
|{{decrease}} 7.46%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1998 भारतीय आम चुनाव|1998]]
|[[बारहवीं लोक सभा|द्वादश लोकसभा]]
|[[सीताराम केसरी]]
|{{Composition bar|141|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 1
|25.82%
|{{decrease}} 2.98%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1999 भारतीय आम चुनाव|1999]]
|[[तेरहवीं लोक सभा|त्रयोदश लोकसभा]]
|rowspan=2|[[सोनिया गांधी]]
|{{Composition bar|114|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 27
|28.30%
|{{increase}} 2.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[2004 भारतीय आम चुनाव|2004]]
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|[[2009 भारतीय आम चुनाव|2009]]
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|[[मनमोहन सिंह]]
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|[[2014 भारतीय आम चुनाव|2014]]
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|[[2019 भारतीय आम चुनाव|2019]]
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|[[2024 भारतीय आम चुनाव|2024]]
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|}
== इन्हें भी देखें==
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* [[कांग्रेस कार्यकारिणी समिति]]
* [[ऑल इंडिया महिला कांग्रेस]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास]]
* [[भारत में राजनीतिक दलों की सूची]]
* [[भारत की राजनीति]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची]]
{{div col end}}
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Wikiquote}}
{{Commons category|Indian National Congress}}
* {{official website}}
* [https://web.archive.org/web/20091125084548/http://www.aicc.org.in/new/hindi/home.php काँग्रेस का जालघर]
{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस}}
{{India topics}}
{{Authority control}}
{{भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम}}
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
[[श्रेणी:भारत के राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
[[श्रेणी:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]]
[[श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]]
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एस. विनायक मिश्रा
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wikitext
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{{Infobox Indian Political Party
| country = [[भारत]]
| party_name = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस<br/>Indian National Congress
| party_logo = [[File:Indian National Congress hand logo.svg|150px]]
| abbreviation = कांग्रेस, आईएनसी
| leader = [[राहुल गांधी]]
| chairman = [[मल्लिकार्जुन खड़गे]]
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| presidium = अखिल भारतीय काँग्रेस कमिटी
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| foundation = {{Start date and age|df=yes|p=y|1885|12|28}}
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| publication = {{ubl|काँग्रेस सन्देश|[[नेशनल हेराल्ड]]}}
| students = [[नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया]]
| youth = [[भारतीय युवा काँग्रेस]]
| women = [[ऑल इंडिया महिला कांग्रेस]]
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| ideology = {{ublist<!--IMPORTANT: Do not change party ideology or position without bringing reliable sources to the Talk page and garnering consensus.-->|[[उदारतावाद]]{{refn|<ref>{{cite book|editor1=Emiliano Bosio|editor2=Yusef Waghid|url=https://books.google.com/books?id=Hb6ZEAAAQBAJ&pg=PA270|title=Global Citizenship Education in the Global South: Educators' Perceptions and Practices|date=31 October 2022|page=270|publisher=Brill|isbn=9789004521742}}</ref><ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield]|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9 }}</ref>}}|सामाजिक उदारवाद{{refn|<ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9}}</ref><ref name="NSGehlot1991">{{cite book|author=N. S. Gehlot|title=The Congress Party in India: Policies, Culture, Performance|url={{Google books|06HLD2_3Qj4C|page=PM177|keywords=|text=|plainurl=yes}}|year=1991|publisher=Deep & Deep Publications|isbn=978-81-7100-306-8|pages=150–200}}</ref><ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>}}|[[सामाजिक लोकतंत्र]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="Agarwal1989">{{cite book|year=1989|editor1-last=Agrawal|editor1-first=S. P.|editor2-last=Aggarwal|editor2-first=J. C.|title=Nehru on Social Issues|location=New Delhi|publisher= Concept Publishing|isbn=978-817022207-1}}</ref>}}|आर्थिक उदारवाद<ref>{{cite web|title=Political Parties|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref name=":5">{{Cite book|last=Mohan, Rakesh.|url=https://www.worldcat.org/oclc/1056070747|title=India Transformed : Twenty-Five Years of Economic Reforms|date=2018 |publisher=Brookings Institution Press|isbn=978-0-8157-3662-2|location=Washington, DC|pages=44–49|oclc=1056070747}}</ref>|[[धर्मनिरपेक्षता]]<ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>|[[नागरिक राष्ट्रवाद]]<ref name="J.Soper"/>}}
| international ={{nowrap|[[en:Progressive Alliance|प्रगतिशील गठबंधन]]}}<ref>{{cite web|url=http://progressive-alliance.info/participants/|title=Progressive Alliance Participants|work=Progressive Alliance|access-date=20 March 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150302142054/http://progressive-alliance.info/participants/|archive-date=2 March 2015|url-status=dead}}</ref><br>{{nowrap|[[समाजवादी इंटरनेशनल]]}}<ref>{{cite web|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticlePageID=931|title=Full Member Parties of Socialist International|work=Socialist International}}</ref><ref name="Sheffer1993">{{cite book|author=Gabriel Sheffer|title=Innovative Leaders in International Politics|url=https://books.google.com/books?id=__efKLSD3M0C&pg=PA202|access-date=30 January 2013|year=1993|publisher=SUNY Press|isbn=978-0-7914-1520-7|page=202}}</ref><ref>{{cite web|title=Meeting of the SI Council at the United Nations in Geneva|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticleID=2326|publisher=Socialist International}}</ref>
| colours = {{colorbox|#F37022|border=darkgray}} [[केसरिया|सैफ्रन]]<br>{{colorbox|#FFFFFF|border=darkgray}} [[सफ़ेद]]<br>{{colorbox|#0F823F|border=darkgray}} [[हरा]]<br>(आधिकारिक,<br>[[भारत का ध्वज|भारतीय राष्ट्रीय रंग]]){{efn|The Indian national colours of the Indian flag serve as the official visual identification of the Indian National Congress.}}
<br>{{Colorbox|{{party color|Indian National Congress}}|border=darkgray}} [[आसमानी नीला]]<br>(प्रथागत)
|position = <!-- महत्वपूर्ण। वार्ता पृष्ठ पर विश्वसनीय स्रोत लाए बिना और आम सहमति प्राप्त किए बिना पार्टी की विचारधारा या स्थिति में परिवर्तन न करें। -->{{nowrap|[[केन्द्रवाद]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="centrist">{{cite web|title=Political Parties – NCERT|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref>{{cite book|editor=Jean-Pierre Cabestan, Jacques deLisle|title=Inside India Today (Routledge Revivals)|url=https://books.google.com/books?id=heFSAQAAQBAJ&dq=Centrist+Indian+National+Congress&pg=PR10|date=2013 |publisher=Routledge|isbn=978-1-135-04823-5}}</ref>}}}}
| eci = [[भारत के राजनीतिक दलों की सूची|राष्ट्रीय पार्टी]]
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{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्श्वपट}}
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस''' (संक्षिप्त में, '''भा॰रा॰कां॰'''), सामान्यतः '''कांग्रेस पार्टी''' या बस '''कांग्रेस''' के नाम से जानी जाती है, यह भारत में एक [[राजनीतिक दल]] है। इसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी, यह एशिया और अफ्रीका में ब्रिटिश साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक [[राष्ट्रीयता|राष्ट्रीयता आंदोलन]] था।{{efn|"गैर-यूरोपीय साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक राष्ट्रीयता आंदोलन, और जिसने कई अन्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, वह भारतीय कांग्रेस थी।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001">{{citation|last=Marshall|first=P. J.|title=ब्रिटिश साम्राज्य का कैम्ब्रिज चित्रित इतिहास|url={{Google books|S2EXN8JTwAEC|page=PA179|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=179|year=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-00254-7}}</ref> 19वीं सदी के अंत से, और विशेष रूप से 1920 के बाद, [[महात्मा गांधी]] के नेतृत्व में, कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख नेता बन गई।<ref name="research">{{cite web|url=http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में जानकारी|website=open.ac.uk|publisher=Arts & Humanities Research council|access-date=29 July 2015|archive-date=22 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180922061005/http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|url-status=dead}}</ref> कांग्रेस ने [[यूनाइटेड किंगडम]] से भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद की,{{efn|"दक्षिण एशियाई पार्टियों में कई पोस्ट-कोलोनियल दुनिया में सबसे पुरानी पार्टियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रमुख 129 वर्ष पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है जिसने 1947 में भारत को स्वतंत्रता दिलाई।"<ref name="Chiriyankandath2016" />}}<ref name="Chiriyankandath2016">{{citation|last=Chiriyankandath|first=James|title=दक्षिण एशिया में पार्टियाँ और राजनीतिक परिवर्तन|url={{Google books|c4n7CwAAQBAJ|page=PA2|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=2|year=2016|publisher=Routledge|isbn=978-1-317-58620-3}}</ref>{{efn|"जिस संगठन ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस थी, जिसकी स्थापना 1885 में हुई।"<ref name="KopsteinLichbach2014" /> }}<ref name="KopsteinLichbach2014">{{citation|last1=Kopstein|first1=Jeffrey|title=तुलनात्मक राजनीति: एक बदलते वैश्विक आदेश में हित, पहचान और संस्थान|url={{Google books|L2jwAwAAQBAJ|page=PA344|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=344|year=2014|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-139-99138-4|last2=Lichbach|first2=Mark|last3=Hanson|first3=Stephen E.}}</ref> और ब्रिटिश साम्राज्य में अन्य विरोधी उपनिवेशवादी राष्ट्रीयता आंदोलनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।{{efn|"... विरोधी उपनिवेशवादी आंदोलन ... जो, ब्रिटिश साम्राज्य में कई अन्य राष्ट्रीयता आंदोलनों की तरह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से गहरा प्रभावित थे।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001" /> १९वीं सदी के आखिर में और शुरूआत से लेकर मध्य २०वीं सदी में, कांग्रेस [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केंद्रीय भागीदार बनी।
आईएनसी एक "[[बड़ी तम्बू]]" पार्टी है जिसे भारतीय राजनीतिक स्पेक्ट्रम के [[केंद्र]] पर स्थित माना गया है।<ref name="Barrington2009" /><ref name="centrist" /><ref name="British-Journal">{{cite journal|last1=Saez|first1=Lawrence|last2=Sinha|first2=Aseema|year=2010|title=राजनीतिक चक्र, राजनीतिक संस्थान और भारत में सार्वजनिक व्यय, 1980–2000|url=https://archive.org/details/sim_british-journal-of-political-science_2010-01_40_1/page/91|journal=British Journal of Political Science|volume=40|issue=1|pages=91–113|doi=10.1017/s0007123409990226|issn=0007-1234|s2cid=154767259}}</ref> पार्टी ने 1885 में [[मुंबई|बंबई]] में अपनी पहली बैठक आयोजित की जहाँ वोमेश चंद्र बनर्जी ने इसकी अध्यक्षता की।<ref>{{Cite web|url=https://inc.in/|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|website=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|access-date=2023-11-05}}</ref> 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस एक [[कैच-ऑल पार्टी|कैच-ऑल]] और [[धर्मनिरपेक्षता|धर्मनिरपेक्ष]] पार्टी के रूप में उभरी, जो अगले 50 वर्षों तक भारतीय राजनीति में हावी रही। पार्टी के पहले प्रधानमंत्री, [[पंडित जवाहरलाल नेहरू]], ने योजनाबंदी आयोग बनाकर, पांच वर्षीय योजनाएँ पेश करके, मिश्रित अर्थव्यवस्था को लागू करके और [[धर्मनिरपेक्ष राज्य]] स्थापित करके कांग्रेस का समर्थन किया। नेहरू की मृत्यु के बाद और [[लाल बहादुर शास्त्री]] की संक्षिप्त अवधि के बाद, [[इंदिरा गांधी]] पार्टी की नेता बन गईं। स्वतंत्रता के बाद से 17 आम चुनावों में, इसने सात बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और तीन बार सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व किया है, केंद्रीय सरकार का नेतृत्व 54 वर्षों से अधिक समय तक किया है। कांग्रेस पार्टी से छह प्रधानमंत्री रहे हैं, पहले [[जवाहरलाल नेहरू]] (1947–1964) और सबसे हाल के मनमोहन सिंह (2004–2014) हैं।
== इतिहास ==
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का इतिहास दो विभिन्न काल से गुज़रता हैं।
*भारतीय स्वतन्त्रता से पूर्व - जब यह पार्टी स्वतन्त्रता अभियान की संयुक्त संगठन थी।
*भारतीय स्वतन्त्रता के बाद - जब यह पार्टी [[भारतीय राजनीति]] में प्रमुख स्थान पर विद्यमान रही हैं।
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[[File:Indian National Congress Flag.svg|thumb|पार्टी का वर्तमान ध्वज]]
[[File:1931 Flag of India.svg|thumb|यह ध्वज 1931 में अपनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान [[आज़ाद हिंद|स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार]] द्वारा उपयोग किया गया]]
[[File:Marche sel.jpg|thumb|नमक सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ महात्मा गांधी]]
[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई, बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में इसका गठन किया गया। जब देश भर से आए 72 प्रतिनिधि [[मुंबई|बंबई]] में एकत्र हुए। प्रमुख प्रतिनिधियों में [[दादाभाई नौरोजी]],[[बदरुद्दीन तैयबजी]], [[फिरोज़शाह मेहता]], [[डब्ल्यू. सी. बनर्जी]],[[एस. विनायक मिश्रा]], [[एस. रामास्वामी मुदलियार]],<ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=rzWKAAAAMAAJ&q=Rao+Bahadur+Savalai+Mudaliar |title=The Encyclopaedia of Indian National Congress: 1885–1890, The founding fathers |author=A. Moin Zaidi |year=1976 |page=609 |language=en }}</ref> [[एस. सुब्रमण्यम अय्यर]] तथा [[रोमेश चंद्र दत्त]] शामिल थे।
एक अंग्रेज़, [[एलन ऑक्टेवियन ह्यूम]], जो ब्रिटिश शासन के पूर्व सिविल सेवक थे, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
=== स्वतन्त्रता संग्राम ===
{{मुख्य|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम}}
====स्थापना और प्रारंभिक दिन (1885–1905)====
सेवानिवृत्त ब्रिटिश भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम ने शिक्षित भारतीयों के बीच नागरिक और राजनीतिक संवाद का मंच बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। [[1857 का भारतीय विद्रोह]] के बाद, भारत का नियंत्रण [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] से [[ब्रिटिश साम्राज्य]] में स्थानांतरित कर दिया गया। ब्रिटिश नियंत्रित भारत, जिसे [[ब्रिटिश राज]] या बस राज कहा जाता है, ने भारतीयों को अपने शासन का समर्थन करने के लिए और इसके औचित्य को प्रस्तुत करने के लिए काम किया, जो आमतौर पर ब्रिटिश संस्कृति और राजनीतिक सोच से अधिक परिचित और अनुकूल थे। विडंबना यह है कि कांग्रेस के बढ़ने और जीवित रहने के कुछ कारण, विशेष रूप से 19वीं सदी में ब्रिटिश प्रभुत्व के समय, ब्रिटिश अधिकारियों के संरक्षण और अंग्रेज़ी भाषा में शिक्षा प्राप्त भारतीयों और एंग्लो-भारतीयों के बढ़ते वर्ग के माध्यम से थे।
ह्यूम ने एक संगठन शुरू करने का प्रयास किया। उन्होंने [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] के चयनित पूर्व छात्रों से संपर्क करना शुरू किया। 1883 में एक पत्र में, उन्होंने लिखा कि, <blockquote>हर राष्ट्र को उसी तरह का शासन प्राप्त होता है जैसा वह योग्य होता है। यदि आप, चुने हुए लोग, राष्ट्र के सबसे शिक्षित लोग, व्यक्तिगत आराम और स्वार्थी उद्देश्यों को नकारते हुए, अपने और अपने देश के लिए अधिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक दृढ़ संघर्ष नहीं कर सकते, तो हम, आपके मित्र, गलत हैं और हमारे विरोधी सही हैं, फिर, वर्तमान में, सभी प्रगति की आशाएँ समाप्त हो जाती हैं[,] और भारत वास्तव में न तो बेहतर शासन की इच्छा करता है और न ही इसके योग्य है।<ref name="pattabhi1935">{{Citation | title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास | author=B. पट्टाभि सीतारामय्या | year=1935 | publisher=कांग्रेस की कार्य समिति | url=https://archive.org/details/TheHistoryOfTheIndianNationalCongress |page=12}}</ref></blockquote>
मई 1885 में, ह्यूम ने "भारतीय राष्ट्रीय संघ" बनाने के लिए [[उपाध्याक्ष#ब्रिटिश भारत|उपाध्याक्ष]] की स्वीकृति प्राप्त की, जो सरकार के साथ संबद्ध होगा और भारतीय जनमत को व्यक्त करने का मंच बनेगा। ह्यूम और एक समूह शिक्षित भारतीयों ने 12 अक्टूबर को एकत्र होकर "भारत के लोगों की ओर से ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के मतदाताओं के लिए एक अपील" प्रकाशित की, जिसमें ब्रिटिश मतदाताओं से [[1885 ब्रिटिश आम चुनाव]] में भारतीयों के प्रति सहानुभूति रखने वाले उम्मीदवारों का समर्थन करने का अनुरोध किया गया। इनमें अफगानिस्तान में ब्रिटिश अभियानों के वित्तपोषण के लिए भारत पर कर लगाने के विरोध और भारत में legislative सुधार का समर्थन शामिल था।<ref name="riddick2006">{{Citation | title=ब्रिटिश भारत का इतिहास: एक कालक्रम | author=जॉन एफ. रिडडिक | year=2006 | publisher=ग्रीनवुड पब्लिशिंग ग्रुप | isbn=0-313-32280-5 | url=https://books.google.com/books?id=Es6x4u_g19UC}}</ref> हालाँकि, यह अपील विफल रही, और इसे कई भारतीयों द्वारा "एक कठोर झटका, लेकिन एक सच्ची वास्तविकता के रूप में देखा गया कि उन्हें अपनी लड़ाइयाँ अकेले लड़नी होंगी।"<ref name="yasin1996">{{Citation | title=राष्ट्रीयता, कांग्रेस और पृथकतावाद का उदय | author=माधवी यासीन | year=1996 | publisher=राज पब्लिकेशंस | isbn=81-86208-05-4 | url=https://books.google.com/books?id=NiJuAAAAMAAJ}}</ref>
28 दिसंबर 1885 को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना गोपालदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में बंबई में हुई, जिसमें 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे। ह्यूम ने महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला, और [[वोमेश चंदर बनर्जी]] को अध्यक्ष चुना गया।<ref name="riddick2006" /> इसके अलावा, ह्यूम के साथ दो अतिरिक्त ब्रिटिश सदस्य (दोनों स्कॉटिश सिविल सेवक) संस्थापक समूह के सदस्य थे, [[विलियम वेडरबर्न]] और जस्टिस (बाद में, सर) [[सर जॉन जार्डिन, 1st बारोनेट|जॉन जार्डिन]]। अन्य सदस्य ज्यादातर [[बंबई प्रेसीडेंसी|बंबई]] और [[मद्रास प्रेसीडेंसी|मद्रास प्रेसीडेंसी]] के हिंदू थे।
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियाँ (1885–1905)'''
1885 और 1905 के बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी वार्षिक सत्रों में कई प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों के माध्यम से, कांग्रेस द्वारा किए गए विनम्र मांगों में नागरिक अधिकार, प्रशासनिक, संवैधानिक और आर्थिक नीतियाँ शामिल थीं। इन तरीकों पर पारित प्रस्तावों पर नजर डालने से यह पता चलता है कि कांग्रेस के कार्यक्रम किस दिशा में बढ़ रहे थे।
क) नागरिक अधिकार: कांग्रेस के नेताओं ने भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता, जुलूसों, बैठकों और इसी तरह के अन्य अधिकारों के आयोजन का महत्व समझा।
ख) प्रशासनिक: कांग्रेस के नेताओं ने सरकार से कुछ प्रशासनिक दुरुपयोगों को हटाने और जनकल्याण के उपायों को चलाने का आग्रह किया। उन्होंने सरकारी सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति पर जोर दिया। किसानों की राहत के लिए कृषि बैंकों की स्थापना के लिए विशेष प्रस्ताव दिए गए। कांग्रेस के नेताओं ने सरकार द्वारा लागू किए गए भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ भी विरोध की आवाज उठाई।
ग) संवैधानिक: संवैधानिक मामलों में प्रारंभिक कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई विनम्र मांगें थीं: विधायी परिषदों की शक्तियों को बढ़ाना; निर्वाचित भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करना। यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस द्वारा की गई उपरोक्त मांगों को कम महत्व दिया।
घ) आर्थिक: आर्थिक क्षेत्र में, कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों को दोषी ठहराया, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति की कीमतों में वृद्धि और अन्य आर्थिक समस्याएँ हुईं जो भारतीय लोगों को प्रभावित करती थीं। कांग्रेस ने देश और उसके लोगों के आर्थिक सुधार के लिए कुछ विशेष सुझाव भी पेश किए। इनमें आधुनिक उद्योग की स्थापना, सार्वजनिक सेवाओं का भारतीयकरण, आदि शामिल थे। कांग्रेस ने विशेष रूप से गरीब वर्ग के लाभ के लिए नमक कर को समाप्त करने की भी मांग की।
====आर्थिक नीति====
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आर्थिक नीतियाँ निम्नलिखित हैं:
* खुली बाजार अर्थव्यवस्था के लाभों को दोहराने के लिए आर्थिक नीतियों को फिर से स्थापित करना
* धन सृजन का समर्थन करना
* अमीरों, मध्यवर्ग और गरीबों के बीच असमानता को कम करना
* निजी और सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा संचालित विकास को तेज करना
====विदेश नीति====
[[भारत की स्वतंत्रता]] से पहले भी, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] ने स्पष्ट रूप से [[विदेश नीति]] के मुद्दों पर अपनी स्थिति व्यक्त की। [[रेजाउल करीम लस्कर]], जो [[भारतीय विदेश नीति]] के विद्वान और कांग्रेस के विचारक हैं, के शब्दों में, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के तुरंत बाद, इसने विदेशी मामलों पर अपने विचार व्यक्त करना शुरू कर दिया। 1885 में अपने पहले सत्र में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश भारतीय सरकार द्वारा ऊपरी बर्मा के अधिग्रहण की निंदा की।"<ref>{{cite book|last1=Laskar|first1=Rejaul Karim|title=भारत की विदेश नीति: एक परिचय|date=2013|publisher=पैरागॉन इंटरनेशनल पब्लिशर्स|location=नई दिल्ली|isbn=978-93-83154-06-7|page=5}}</ref>
====मुस्लिम प्रतिक्रिया====
कई मुस्लिम समुदाय के नेताओं, जैसे प्रमुख शिक्षाविद [[सैयद अहमद खान]], ने कांग्रेस को नकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि इसके सदस्य अधिकांशत: हिंदुओं द्वारा प्रभावी थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-Z9ODwAAQBAJ&pg=PT94|title=प्रागैतिहासिक प्राचीन भारत की खोज: कृष्ण और राधा|first=डॉ जगत के.|last=मोतवानी|date=22 फरवरी 2018|publisher=iUniverse|isbn=9781532037900|via=Google Books}}</ref> [[हिंदू]] समुदाय और धार्मिक नेताओं ने भी इसे नकारा, कांग्रेस को यूरोपीय सांस्कृतिक आक्रमण का समर्थक मानते हुए।<ref name="auto">{{Cite journal|url=http://www.jstor.org/stable/20078547|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्पत्ति पर: क्रॉस-कल्चरल सिंथेसिस का एक केस अध्ययन|author=हेन्स, डब्ल्यू. ट्रैविस|year=1993|journal=जर्नल ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री|volume=4|issue=1|pages=69–98|jstor=20078547|via=JSTOR}}</ref>
भारत के सामान्य लोग कांग्रेस के अस्तित्व के बारे में बहुत कम जानते थे या चिंतित थे, क्योंकि कांग्रेस ने गरीबी, स्वास्थ्य देखभाल की कमी, सामाजिक उत्पीड़न, और ब्रिटिश सरकार द्वारा लोगों की चिंताओं की भेदभावपूर्ण उपेक्षा के मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास नहीं किया। कांग्रेस जैसी संस्थाओं की धारणा एक विशिष्ट, शिक्षित और संपन्न लोगों की संस्था के रूप में थी।<ref name="auto"/>
====भारतीय राष्ट्रीयता का उदय====
[[File:1st INC1885.jpg|right|300px|thumb|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला सत्र, बंबई, 28-31 दिसंबर, 1885]] कांग्रेस के सदस्यों के बीच जो राष्ट्रीयता का पहला स्पर्श था, वह सरकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की इच्छा थी, कानून बनाने और भारत के प्रशासन के मुद्दों पर एक वोट प्राप्त करना। कांग्रेस के सदस्य खुद को वफादार मानते थे, लेकिन वे अपने देश के शासन में एक सक्रिय भूमिका चाहते थे, हालांकि साम्राज्य का हिस्सा रहकर।<ref name="auto1"/>
यह [[दादाभाई नौरोजी]] द्वारा व्यक्त किया गया, जिन्हें कई लोग सबसे बुजुर्ग भारतीय राज्य पुरुष मानते हैं। नौरोजी ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुनाव में सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा, और इसके पहले भारतीय सदस्य बन गए। उनके अभियान में युवा, महत्वाकांक्षी भारतीय छात्र कार्यकर्ताओं जैसे [[मुहम्मद अली जिन्ना]] का समर्थन मिला, जो नए भारतीय पीढ़ी की कल्पना को दर्शाता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-52829458|title=भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन जिसने ब्रिटेन के पहले एशियाई सांसद का पद ग्रहण किया|publisher=BBC News|date=4 जुलाई 2020}}</ref>
[[बाल गंगाधर तिलक]] पहले भारतीय राष्ट्रवादियों में से एक थे जिन्होंने ''[[स्वराज]]'' को राष्ट्र की नियति के रूप में अपनाया। तिलक ने ब्रिटिश उपनिवेशी शिक्षा प्रणाली का गहरा विरोध किया, जिसे उन्होंने भारत की संस्कृति, इतिहास और मूल्यों की अनदेखी और अपमानजनक माना। उन्होंने राष्ट्रवादियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इनकार और साधारण भारतीयों के लिए अपने देश के मामलों में किसी भी आवाज़ या भूमिका की कमी पर असंतोष व्यक्त किया। इसलिए, उन्होंने ''स्वराज'' को प्राकृतिक और एकमात्र समाधान माना: सभी ब्रिटिश चीजों का परित्याग, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक शोषण से बचाएगा और धीरे-धीरे भारत की स्वतंत्रता की ओर ले जाएगा। उन्हें [[बिपिन चंद्र पाल]] और [[लाला लाजपत राय]], [[आरोबिंदो घोष]], [[वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई]] जैसे उभरते जन नेता भी समर्थन करते थे। उनके नेतृत्व में, भारत के चार बड़े राज्य – मद्रास, बंबई, बंगाल, और पंजाब क्षेत्र ने लोगों की मांग और भारत के राष्ट्रवाद को आकार दिया।<ref name="auto1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=p2qFYxtq3GYC&pg=PA55|title=भारत के स्वतंत्रता सेनानी (चार खंडों में)|first=M. G.|last=अग्रवाल|date=31 जुलाई 2008|publisher=ज्ञान पब्लिशिंग हाउस|isbn=9788182054684|via=Google Books}}</ref>
संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।<ref>संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।</ref>
तिलक की गिरफ्तारी के साथ, भारतीय आक्रमण के सभी प्रयास ठप हो गए। कांग्रेस का लोगों में विश्वास कम हो गया। मुसलमानों ने 1906 में आल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन किया, कांग्रेस को भारतीय मुसलमानों के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त मानते हुए।<ref name="auto1"/>
===विश्व युद्ध I: आत्मा की लड़ाई===
[[File:Annie Besant.png|thumbnail|right|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाली यूरोपीय नेताओं में एनी बेसेंट सबसे प्रमुख थीं]]
जब ब्रिटिश सरकार ने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] को [[प्रथम विश्व युद्ध]] में उतारा, तो भारत में पहली बार इस स्तर की एक निर्णायक और राष्ट्रव्यापी राजनीतिक बहस शुरू हुई। राजनीतिक स्वतंत्रता की माँग करने वाली आवाज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/fyi/story/indian-soldiers-world-war-one-germany-british-army-1026848-2017-07-28|title=World War I: Role of Indian Army in Britain's victory over Germany|date=28 July 2017|website=India Today}}</ref>
1916 में [[लखनऊ]] अधिवेशन में विभाजित कांग्रेस पुनः एकजुट हुई। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसे [[बाल गंगाधर तिलक]] और [[मुहम्मद अली जिन्ना]] के प्रयासों से संभव बनाया गया।<ref>{{Cite news |url=https://scroll.in/article/968926/the-tilak-jinnah-pact-embodied-communal-harmony-that-is-much-needed-in-modern-day-india|title=The Tilak-Jinnah pact embodied communal harmony that is much needed in modern-day India|first=Sudheendra|last=Kulkarni|work=Scroll.in}}</ref>
तिलक ने अपने विचारों में पर्याप्त नरमी लाई और अब वे ब्रिटिश सरकार के साथ राजनीतिक संवाद के पक्षधर बन गए। उन्होंने युवा [[मुहम्मद अली जिन्ना]] और श्रीमती [[एनी बेसेंट]] के साथ मिलकर [[होम रूल आंदोलन]] की शुरुआत की, ताकि ''होम रूल''—अर्थात अपने ही देश के शासन में भारतीयों की भागीदारी—की माँग को आगे बढ़ाया जा सके। यह आगे चलकर ''[[स्वराज]]'' की अवधारणा का पूर्वरूप बना। ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर डोमिनियन दर्जे की माँग के लिए अखिल भारतीय होम रूल लीग का गठन किया गया।<ref name="auto2"/>
लेकिन इसी दौरान एक अन्य भारतीय नेता कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के लिए उभरने वाला था। [[मोहनदास गांधी]] एक वकील थे, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण क़ानूनों के विरुद्ध सफल संघर्ष का नेतृत्व किया था। 1915 में भारत लौटने के बाद, गांधी ने भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोगों के मूल्यों और जीवनशैली से प्रेरणा लेकर एक नए प्रकार की क्रांति की नींव रखी। उन्होंने अहिंसा और [[सविनय अवज्ञा]] की अवधारणा के साथ ''[[सत्याग्रह]]'' शब्द को गढ़ा।<ref>{{Cite news |url=https://www.deccanherald.com/opinion/the-making-of-gandhi-in-south-africa-and-after-852712.html|title=The making of Gandhi in South Africa and after|date=23 June 2020|work=Deccan Herald}}</ref>
=== चंपारण और खेड़ा ===
{{main|चंपारण सत्याग्रह|खेड़ा सत्याग्रह}}
[[File:Gandhiji and Sub-Inspector Qurban Ali in Champaran (1917).jpg|thumb|चंपारण (1917) में गांधीजी और उप-निरीक्षक कुर्बान अली<ref>{{Cite book |title=Select Documents On Mahatma Gandhi's Movement In Champaran 1916-17
|publisher=Government of Bihar |year=1963 |pages=Page No. 63}}</ref>|271x271px]]
मोहनदास करमचंद गांधी, जो आगे चलकर महात्मा गांधी के नाम से प्रसिद्ध हुए, ने चंपारण और खेड़ा में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सफलता प्राप्त की और भारत को स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी जीत दिलाई।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/gandhi-fought-the-british-with-weapons-of-truth-non-violence/article29577336.ece|title=Gandhi fought the British with weapons of truth, non-violence|newspaper=The Hindu|date=2 October 2019}}</ref> उस आंदोलन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। इससे भारतीयों का इस संगठन पर विश्वास बढ़ा और यह धारणा बनी कि ब्रिटिश शासन को कांग्रेस के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है। परिणामस्वरूप देश भर से लाखों युवा कांग्रेस की सदस्यता से जुड़ गए।{{citation needed|date=October 2015}}
=== आत्मा के लिए संघर्ष ===
राजनीतिक नेताओं का एक पूरा वर्ग गांधी के विचारों से असहमत था। [[बिपिन चंद्र पाल]], [[मुहम्मद अली जिन्ना]], [[एनी बेसेंट]] और [[बाल गंगाधर तिलक]] सभी ने सविनय अवज्ञा के विचार की आलोचना की। लेकिन गांधी को जनता और भारतीय राष्ट्रवादियों की एक नई पीढ़ी का व्यापक समर्थन प्राप्त था।<ref name="auto2">{{cite book | last=Singh | first=M.K. | title=Encyclopaedia of Indian War of Independence, 1857–1947: Birth of Indian National Congress : establishment of Indian National Congress | publisher=Anmol Publications| year=2009 | isbn=978-81-261-3745-9 | url=https://books.google.com/books?id=IlYwAQAAIAAJ}}</ref>
1918, 1919 और 1920 के दौरान हुए कई कांग्रेस अधिवेशनों में पुरानी और नई पीढ़ियों के बीच तीखी और ऐतिहासिक बहसें हुईं। इन बैठकों में गांधी और उनके युवा समर्थकों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रत्यक्ष संघर्ष के लिए जोश और ऊर्जा भर दी।<ref name="auto2"/> 1919 के [[जलियांवाला बाग हत्याकांड]] और पंजाब में हुए दंगों की त्रासदी के बाद भारतीयों का आक्रोश और भावनाएँ उग्र हो गईं।<ref>{{Cite news|last=Prakash|first=Gyan|date=2019-04-13|title=Opinion {{!}} The Massacre That Led to the End of the British Empire|language=en-US|work=The New York Times|url=https://www.nytimes.com/2019/04/13/opinion/1919-amrtisar-british-empire-india.html|access-date=2021-08-24|issn=0362-4331}}</ref>
जब मोहनदास करमचंद गांधी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, तो पार्टी की “आत्मा” के लिए चल रहा संघर्ष समाप्त हुआ और भारत की नियति की ओर जाने वाला एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ।<ref name="auto2"/>
लोकमान्य तिलक—जिन्हें गांधी ने ''आधुनिक भारत का पिता'' कहा था—का निधन 1920 में हुआ, जबकि [[गोपाल कृष्ण गोखले]] का देहांत चार वर्ष पहले ही हो चुका था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=i7yKAAAAMAAJ|title = Indian Political Parties|year = 1984|publisher = Meenakshi Prakashan}}</ref> [[मोतीलाल नेहरू]], [[लाला लाजपत राय]] और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गांधी का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि वे तिलक और गोखले की तरह जनता का नेतृत्व कर सकते हैं। इस प्रकार अब राष्ट्र को दिशा दिखाने की पूरी जिम्मेदारी गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर आ गई।
===महात्मा गांधी का युग===
गांधीजी ने 1919 से 1948 तक भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष पर राज किया। इसलिए इस अवधि को भारतीय इतिहास में गांधी युग कहा जाता है। इस समय, महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर प्रभुत्व बनाया, जो बदले में भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रिम मोर्चे पर थी।
गांधी ने 1915 में कांग्रेस में शामिल हुए और 1923 में इसे छोड़ दिया।
===विस्तार और पुनर्गठन===
विश्व युद्ध के कुछ वर्षों बाद, गांधी की चंपारण और खेड़ा में सफलताओं के कारण कांग्रेस काफी विस्तारित हुई। भारत के विभिन्न हिस्सों से पूरी नई पीढ़ी के नेताओं ने उभरना शुरू किया, जो गांधी के अनुयायी थे, जैसे [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[राजेंद्र प्रसाद]], [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], [[नरहरी पारिख]], [[महादेव देसाई]] – साथ ही गर्म खून वाले राष्ट्रवादी जो गांधी की सक्रिय नेतृत्व से जागरूक हुए – [[चित्तरंजन दास]], [[सुभाष चंद्र बोस]], [[एस. श्रीनिवास अयंगर]]।
गांधी ने कांग्रेस को एक शहरों में आधारित एलीट पार्टी से एक जन संगठन में बदल दिया: *सदस्यता शुल्क को काफी कम किया गया। *कांग्रेस ने भारत भर में राज्य इकाइयाँ स्थापित कीं – जिन्हें ''प्रदेश कांग्रेस समितियाँ'' कहा जाता था – जो भारत के राज्यों के भाषाई समूहों के आधार पर बनाई गईं। *जाति, जातीयता, धर्म और लिंग के आधार पर कांग्रेस में भेदभाव करने वाले सभी पुराने प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया – अखिल भारतीय एकता पर जोर दिया गया। *स्थानीय भाषाओं को कांग्रेस बैठकों में आधिकारिक उपयोग और सम्मान दिया गया – विशेषकर ''उर्दू'', जिसे गांधी ने ''हिंदुस्तानी'' नाम दिया था, जिसका उपयोग अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा अपनाया गया। *सभी स्तरों पर नेतृत्व पदों को चुनावों द्वारा भरा जाएगा, नियुक्तियों द्वारा नहीं। इस लोकतंत्र की शुरुआत ने पार्टी को पुनर्जीवित करने में मदद की, सामान्य सदस्यों को आवाज दी। *नेतृत्व के लिए पात्रता यह निर्धारित की जाएगी कि सदस्य ने कितना सामाजिक कार्य और सेवा की है, न कि उसकी दौलत या सामाजिक स्थिति।
====सामाजिक विकास====
1920 के दशक के दौरान, एम.के. गांधी ने कांग्रेस के हजारों स्वयंसेवकों को बड़े पैमाने पर संगठित कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि भारत में प्रमुख सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जा सके। कांग्रेस समितियों और गांधी के आश्रमों के नेटवर्क के मार्गदर्शन में, कांग्रेस ने निम्नलिखित समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया: *[[अछूतता]] और जाति भेदभाव *शराबखोरी *अस्वच्छता और स्वच्छता की कमी *स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा सहायता की कमी *[[पर्दा]] और महिलाओं का दमन *अक्षरता, राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों के आयोजन के साथ *गरीबी, [[खादी]] कपड़े और [[हस्तशिल्प]] उद्योगों के माध्यम से
गांधी के इस गहन कार्य ने भारतीय लोगों को खासतौर पर आश्रमों की स्थापना के माध्यम से प्रभावित किया, जिससे बाद में उन्हें ''महात्मा'', महान आत्मा, के रूप में सम्मानित किया गया।
===(1937–1942)===
[[File:Katni1.jpg|left|thumb|350px| [[कटनी]] में एक पुरानी इमारत जो [[स्वराज|भारत की स्वतंत्रता]] का स्मरण करती है, जिसमें [[नेहरू]], [[गांधी]] और [[सुभाष चंद्र बोस]] की मूर्तियाँ हैं]]
[[भारत सरकार अधिनियम 1935]] के तहत, कांग्रेस ने पहली बार [[भारतीय प्रांतीय चुनाव, 1937|1937 के प्रांतीय चुनावों]] में राजनीतिक शक्ति का अनुभव किया। इसने आठ में से ग्यारह प्रांतों में जबर्दस्त सफलता हासिल की। इसकी आंतरिक संगठनात्मक संरचना विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों और विचारधाराओं में खिल उठी। ध्यान पूर्ण स्वतंत्रता की एकमात्र भक्ति से थोड़ा बदल गया, और राष्ट्र के भविष्य की शासन की थ्योरी और उत्साह पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। हालांकि, जब वायसराय लॉर्ड लिंलिथगो ने बिना चुने गए प्रतिनिधियों से सलाह किए बिना भारत को [[द्वितीय विश्व युद्ध]] में युद्धरत घोषित किया, तो कांग्रेस की मंत्रिपरिषद ने इस्तीफा दे दिया।
[[सुभाष चंद्र बोस]] के कट्टर अनुयायी, जो समाजवाद और सक्रिय क्रांति में विश्वास करते थे, बोस के 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ ही पदानुक्रम में उभरे।
====परंपरावादी====
एक दृष्टिकोण के अनुसार, परंपरावादी दृष्टिकोण, हालांकि राजनीतिक अर्थ में नहीं, कांग्रेस के नेताओं जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी, पुरुषोत्तम दास टंडन, खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान और मौलाना आज़ाद द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो गांधी के सहयोगी और अनुयायी थे। उनके संगठनात्मक ताकत, जो सरकार के साथ संघर्षों का नेतृत्व करने के माध्यम से हासिल की गई, निस्संदेह थी और यह साबित हो गया जब 1939 के चुनावों में जीतने के बावजूद, बोस ने राष्ट्रीय नेताओं के बीच अपनी कमी के कारण कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि एक साल पहले, 1938 के चुनाव में, बोस को गांधी के समर्थन से चुना गया था। 1939 में इस बात पर मतभेद उत्पन्न हुए कि बोस को दूसरा कार्यकाल मिलना चाहिए या नहीं। जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें गांधी ने हमेशा बोस पर प्राथमिकता दी, पहले ही दूसरा कार्यकाल पा चुके थे। बोस के अपने मतभेद मुख्य रूप से अहिंसक और क्रांतिकारी तरीकों के बीच स्थान को लेकर थे। जब उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया, तो उन्होंने गांधी के नाम का उल्लेख किया और उन्हें राष्ट्रपिता कहा।
यह गलत होगा यह सुझाव देना कि所谓 परंपरावादी नेता केवल प्राचीन भारतीय, एशियाई या, मौलाना आज़ाद और खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के मामले में, इस्लामी सभ्यता से प्रेरणा लेते थे। उन्होंने, शिक्षा के क्षेत्र के शिक्षाविदों जैसे ज़ाकिर हुसैन और ई. डब्ल्यू. आर्यनायक के साथ, यह विश्वास किया कि शिक्षा इस तरीके से प्रदान की जानी चाहिए जिससे छात्र अपने हाथों से चीजें बना सकें और कौशल सीख सकें, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। इस प्रकार की शिक्षा कुछ क्षेत्रों में मिस्र में भी अपनाई गई। (देखें: रेगिनाल्ड रेनॉल्ड्स, Beware of Africans)। ज़ाकिर हुसैन कुछ यूरोपीय शिक्षाविदों से प्रेरित थे और गांधी के समर्थन से, इस दृष्टिकोण को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा पेश किए गए बुनियादी शिक्षा पद्धति के अनुरूप बनाने में सफल रहे। उन्होंने विश्वास किया कि भविष्य के राष्ट्र के लिए शिक्षा प्रणाली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय मॉडल को विशेष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। जबकि अधिकांश पश्चिमी प्रभावों और समाजवाद के सामाजिक-आर्थिक समानता के लाभों के प्रति खुले थे, वे किसी भी मॉडल द्वारा परिभाषित होने का विरोध करते थे।
===1942-1946===
कांग्रेस में अंतिम महत्वपूर्ण घटनाएँ स्वतंत्रता के अंतिम कदम और धर्मों के आधार पर देश के विभाजन से संबंधित थीं।
====भारत छोड़ो====
[[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], जो [[तमिल नाडु]] से प्रमुख नेता थे, ने ब्रिटिश युद्ध प्रयास का समर्थन करने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। यह 1942 में शुरू हुआ।
====भारतीय राष्ट्रीय सेना के मुकदमे====
1946 के [[INA मुकदमे]] के दौरान, कांग्रेस ने [[INA रक्षा समिति]] का गठन करने में मदद की, जिसने [[आज़ाद हिंद]] सरकार के सैनिकों के मामले को मजबूती से पेश किया। समिति ने INA के लिए कांग्रेस की रक्षा टीम के गठन की घोषणा की और इसमें उस समय के प्रसिद्ध वकील शामिल थे, जैसे [[भुलाभाई देसाई]], [[असफ अली]], और [[जवाहरलाल नेहरू]]। भारत छोड़ो बिल 8 अगस्त 1942 को पारित हुआ।
====रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह====
कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने शुरू में [[रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह]] के नाविकों का समर्थन किया। हालाँकि, उन्होंने महत्वपूर्ण क्षण पर समर्थन वापस ले लिया, क्योंकि विद्रोह विफल हो गया।
====भारत का विभाजन====
कांग्रेस के भीतर, विभाजन का विरोध [[खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान]], [[सैफुद्दीन किचलू]], [[डॉ. खान साहिब]] और उन कांग्रेसियों द्वारा किया गया जो उन प्रांतों से थे, जो अनिवार्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से बन गए। [[मौलाना आज़ाद]], एक भारतीय इस्लामिक विद्वान, ने सिद्धांत के स्तर पर विभाजन का विरोध किया, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व में बाधा नहीं डालना चाहते थे; उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ रहना पसंद किया।
===1947===
====संविधान====
संसद और संविधान की चर्चाओं में, कांग्रेस का दृष्टिकोण समावेशिता और उदारवाद से चिह्नित था। सरकार ने कुछ प्रमुख भारतीयों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया, जो राज के प्रति वफादार और उदार थे, और उन्होंने उन भारतीय सिविल सेवकों के प्रति कोई दंडात्मक नियंत्रण नहीं अपनाया जिन्होंने राज के शासन में सहायता की और राष्ट्रीय गतिविधियों को दबाया।
एक कांग्रेस-प्रभुत्व वाली सभा ने [[B.R. अंबेडकर]], जो कांग्रेस के एक कठोर आलोचक थे, को संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष चुना। [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]], एक [[हिंदू महासभा]] नेता, उद्योग मंत्री बने।
कांग्रेस ने अपनी मूलभूत वादों पर मजबूती से खड़े रहते हुए एक ऐसा संविधान प्रस्तुत किया जिसने अस्पृश्यता और जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त किया। प्राथमिक शिक्षा को एक अधिकार बनाया गया, और कांग्रेस सरकारों ने [[जमींदार]] प्रणाली को अवैध घोषित किया, न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की और हड़ताल करने और श्रमिक संघ बनाने का अधिकार दिया।<ref>{{Cite web |title=Shyama Prasad Mukherjee, the barrister who founded Bharatiya Janta Party |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/remembering-shyama-prasad-mukherjee-the-founder-of-bharatiya-jana-sangh-that-later-became-bharatiya-janta-party-1563356-2019-07-06 |access-date=2024-03-10 |website=India Today |language=en}}</ref>
'''काँग्रेस एक जन आंदोलन के रूप में'''
काँग्रेस में बहुत बड़ा बदलाव आया। चम्पारन एवं खेड़ा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन समर्थन से अपनी पहली सफलता मिली। १९१९ में [[जालियाँवाला बाग हत्याकांड]] के पश्चात गान्धी जी काँग्रेस के महासचिव बने। उनके मार्गदर्शन में काँग्रेस कुलीन वर्गीय संस्था से बदलकर एक जनसमुदाय संस्था बन गयी। तत्पश्चात् राष्ट्रीय नेताओं की एक नयी पीढ़ी आयी जिसमें [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[जवाहरलाल नेहरू]], डॉक्टर [[राजेन्द्र प्रसाद]], [[महादेव देसाई]] एवं [[सुभाष चंद्र बोस]] आदि शामिल थे। गाँधी के नेतृत्व में प्रदेश काँग्रेस कमेटियों का निर्माण हुआ, काँग्रेस में सभी पदों के लिये चुनाव की शुरुआत हुई एवं कार्यवाहियों के लिये भारतीय भाषाओं का प्रयोग शुरू हुआ। काँग्रेस ने कई प्रान्तों में सामाजिक समस्याओं को हटाने के प्रयत्न किये जिनमें छुआछूत, पर्दाप्रथा एवं मद्यपान आदि शामिल थे।<ref name="test5">{{Cite web|url=https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|title=Indian National Congress: A Select Bibliography|first1=Manikrao Hodlya|last1=Gavit|first2=Attar|last2=Chand|date=1 मार्च 1989|publisher=U.D.H. Publishing House|accessdate=1 मार्च 2019|via=Google Books|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024905/https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए काँग्रेस को धन की कमी का सामना करना पड़ता था। गाँधीजी ने एक करोड़ रुपये से अधिक का धन जमा किया और इसे [[बाल गंगाधर तिलक]]के स्मरणार्थ तिलक स्वराज कोष का नाम दिया। ४ आना का नाममात्र सदस्यता शुल्क भी शुरू किया गया था।<ref>{{cite web |url=http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |title=Headlines given in 'Bombay Chronicle' for his successful drive for the collection of one crore of rupees for The Tilak Swaraj Fund, 1921 |publisher=Bombay Chronicle |accessdate=५ मई २०१७ |archive-url=https://web.archive.org/web/20170226042810/http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |archive-date=26 फ़रवरी 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book|url= https://books.google.co.in/books?id=Z0ydNvMbPI0C&pg=PA24&dq=tilak+swaraj+fund&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi7x_j5r9_TAhXMvY8KHeInABkQ6AEIRzAH#v=onepage&q=tilak%20swaraj%20fund&f=false|title = What Congress & Gandhi Have done to the Untouchables |author=[[भीमराव आम्बेडकर]] |publisher= Gautam Book Center|year= १९४५ |isbn=9788187733997 |accessdate= ५ मई २०१७ |page= १९ | language = en |trans-title= काँग्रेस और गाँधी ने अछूतों के साथ क्या किया}}</ref>
=== स्वतन्त्र भारत ===
1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस भारत के मुख्य राजनैतिक दलों में से एक रही है। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमन्त्री रह चुके हैं। पंडित [[जवाहरलाल नेहरू]], [[लाल बहादुर शास्त्री]],पण्डित नेहरू की पुत्री [[इंदिरा गाँधी|इन्दिरा गाँधी]] एवं उनके नाती [[राजीव गाँधी|राजीव गाँधी]] इसी दल से थे। राजीव गाँधी के बाद सीताराम केसरी काँग्रेस के अध्यक्ष बने जिन्हे सोनिया गाँधी के समर्थकों ने नामंजूर कर दिया तथा सोनिया गाँधी को हाईकमान बनाया, राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी काँग्रेस की अध्यक्ष तथा यूपीए की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। [[कपिल सिब्बल]], काँग्रेस महासचिव [[दिग्विजय सिंह]], अहमद पटेल, [[राहुल गांधी]], [[प्रियंका गांधी]], राशिद अल्वी, [[राज बब्बर]], [[मनीष तिवारी]] आदि काँग्रेस के वरिष्ट नेता हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह|डॉ॰ मनमोहन सिंह]] भी काँग्रेस से ताल्लुक रखते हैं।
==कांग्रेस के अधिवेशन ==
स्वतंत्रता से पहले आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी ऐतिहासिक अधिवेशनों की सूची यहां दी गई है।
{| class="wikitable sortable" Manish. Kumar
! वर्ष !! स्थान !! अध्यक्ष !! टिप्पणी
|-
| 1885 || बॉम्बे ||व्योमेश चन्द्र बनर्जी || 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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| 1886 || कलकत्ता || [[दादाभाई नौरोजी]] || प्रतिनिधियों की संख्या बढकर 434 हो गई।
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| 1887 || मद्रास|| सैयद बद्रूद्दीन तैयबजी || प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष
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| 1888 || इलाहाबाद || जॉर्ज यूल || प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष
|-
| 1889 || मुंबई || सर विलियम वेदरबर्न || पहली बार महिला ने भाग लिया
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| 1890 || कलकत्ता || [[फिरोजशाह मेहता]] || स्नातक डिग्री प्राप्त महिला कादम्बिनी ने भाग लिया
|-
| 1891 || नागपुर || आनन्दचार्लु || भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम दिया • दादा भाई नारौजी
|-
| 1892 || प्रयागराज || व्योमेश चंद्र बनर्जी ||लंदन में आम चुनाव
|-
| 1893 || लाहौर || दादाभाई नौरोजी || Demand Of • civil service exam in india
|-
| 1894 || मद्रास || ए.वेब ||
|-
| 1895 || पुणे || [[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] ||
|-
| 1896 || कलकत्ता || एम.रहीमतुल्ला सयानी || पहली बार राष्ट्रीय गीत गाया गया था
|-
| 1897 || अमरावती || सी.शंकर नायर ||
|-
| 1898 || मद्रास || आनंद मोहन बोस ||
|-
| 1899 || लखनऊ || रोमेश चंद्र बोस ||
|-
| 1900 || लाहौर || एन.जी. चंदूनरकर ||
|-
| 1901 || कलकत्ता || ई.दिंशा वाचा || पहली बार गांधी जी ने भाग लिया
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| 1902 || अहमदाबाद || सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ||
|-
| 1903 || मद्रास || लालमोहन बोस ||
|-
| 1904 || मुंबई || सर हेनरी कॉटन || पहली बार मो. अली जिन्ना ने भाग लिया
|-
| 1905 || बनारस || [[गोपाल कृष्ण गोखले]] || बंग भंग आंदोलन का समर्थन
स्वदेशी आंदोलन को समर्थन मिला
|-
| 1906 || कलकत्ता || दादाभाई नौरोजी || 'स्वराज्य' शब्द का प्रथम बार प्रयोग अध्यक्ष द्वारा किया गया। मुस्लिम लीग की स्थापना
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| 1907 || सूरत || [[रास बिहारी घोष|रासबिहारी घोष]] || कांग्रेस का विभाजन
(नरम दल और गरम दल )
एवं सत्र की समाप्ति।
|-
| 1908 || मद्रास || रासबिहरी घोष || कांग्रेस के लिये एक संविधान।
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| 1909 || लाहौर || [[मदनमोहन मालवीय]] || पृथक निर्वाचिका का विरोध
|-
| 1910 ||प्रयागराज || सर विलियम वेदरबर्न ||
|-
| 1911 || कलकत्ता || बिसन नारायण धर || इस अधिवेशन मे पहली बार राष्ट्रगान गाया गया।
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| 1912 || पटना || आर.एन. मुधालकर || A O Hume - कांग्रेस का पिता घोशित किया गया
|-
| 1913 || कराची || सैयद मुहम्मद बहादुर ||
|-
| 1914 || मद्रास || भूपेन्द्रनाथ बोस ||
|-
| 1915 || मुंबई || सर एस.पी. सिन्हा || Lord Wellington भाग लिया (आगे चलकर vaceray भी बना)
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| 1916 || लखनऊ || ए.जी. मजुमदार || कांग्रेस में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और गरम दल और नरम दल का मिलन हुआ
|-
| 1917 || कलकता || [[एनी बेसेंट|श्रीमती एनी बेसेंट]] || प्रथम महिला अध्यक्ष(कांग्रेस ने तिरंगे झंडों को अपनाया )
|-
| 1918 || मुंबई || सैयद हसन इमाम ||
|-
| 1918 || दिल्ली || मदनमोहन मालवीय || नरमदल वालों जैसे एस.एन.बनर्जी का त्यागपत्र
|-
| 1919 || अमृतसर || [[मोतीलाल नेहरू]] || •जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध किया
•खिलाफत आंदोलन को समर्थन दिया
बाल गंगाधर तिलक आखिरी बार अधिवेशन में भाग लिए
|-
| 1920 || नागपुर || सी. विजय राघवाचार्य || आशायोग आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी ने किया
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| 1921 || अहमदाबाद || हकीम अजलम खान (कार्यकारी अध्यक्ष) || अध्यक्ष सी.आर.दास जेल में कैद
|-
| 1922 || गया || [[चित्तरंजन दास]] || स्वराज्य पार्टी का गठन
|-
| 1923 || दिल्ली || [[अबुल कलाम आज़ाद]] || सबसे कम उम्र के अध्यक्ष
|-
| 1923 || कोकोनाडा || मौलाना मुहम्मद अली ||
|-
| 1924 || बेलगांव || [[महात्मा गांधी]] || एकमात्रा अधिवेशन गांधी जी ने किया
|-
| 1925 || कानपुर || [[सरोजिनी नायडू]] || प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष
|-
| 1926 || गोहाटी || [[श्रीनिवास अयंगर]] ||
|-
| 1927 || मद्रास || एम.ए. अंसारी || साइमन कमीशन का विरोध किया गया और साइमन वापस जाओ का नारा दिया गया
|-
| 1928 || कलकत्ता || [[मोतीलाल नेहरू]] || प्रथम अखिल भारतीय युवा कांग्रेस
|-
| 1929 || लाहौर || जवाहरलाल नेहरू || पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव
|-
| 1930 || अधिवेशन नहीं हुआ || जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष बने रहे ||
|-
| 1931 || कराची || [[वल्लभ भाई पटेल]] || मूल अधिकारों तथा राष्ट्रीय आर्थिक नीति प्रस्ताव
|-
| 1932 || दिल्ली || आर.डी. अमृतलाल ||
|-
| 1933 || कलकत्ता || श्रीमती नलिनी सेनगुप्ता ||
|-
| 1934 || मुंबई || राजेन्द्र प्रसाद || कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन
|-
| 1935 || अधिवेशन नहीं हुआ || राजेन्द्र प्रसाद अध्यक्ष बने रहे ||
|-
| 1936 || लखनऊ || जवाहरलाल नेहरू || समाजवादी कांग्रेस का लक्ष्य
|-
| 1937 || फैजपुर || जवाहरलाल नेहरू || पहली बार गांव में सत्र हुआ।
|-
| 1938 || हरिपुरा || [[सुभाष चन्द्र बोस]] || राष्ट्रीय योजना समिति
|-
| 1939 || त्रिपुरी || सुभाष चंद्र बोस || बोस का त्यागपत्र, राजेन्द्र प्रसाद का अध्यक्ष बनना तथा बोस द्वारा [[फॉरवर्ड ब्लाक]] की स्थापना की गई। सुभाष चंद्र बोस पट्टाभि सीतारमैय्या को पराजित कर के अध्यक्ष बने थे।
|-
| 1940 || रामगढ || अबुल कलाम आजाद || भारत छोड़ो का प्रस्ताव दिया गया
|-
| 1941-45 || अधिवेशन नहीं हुआ || अबुल कलाम आजाद अध्यक्ष बने रहे। || द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण नही हुए
|-
| 1946 || मेरठ || [[जे॰ बी॰ कृपलानी|जीवटराम भगवानदास कृपलानी]] ||
|-
| 1947 || दिल्ली || [[राजेन्द्र प्रसाद]] ||
|-
! colspan="4" | कुल अधिवेशन = 61
|}
==राजनीतिक स्थिति और नीतियाँ==
===सामाजिक मामले===
कांग्रेस पार्टी सामाजिक समानता, [[स्वतंत्रता]], [[धर्मनिरपेक्षता]] और [[समान अवसर]] पर जोर देती है। इसकी राजनीतिक स्थिति सामान्यत: मध्य में मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से, पार्टी ने किसानों, श्रमिकों और [[महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005|महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम]] (MGNREGA) का प्रतिनिधित्व किया है। MGNREGA का उद्देश्य "ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसमें हर परिवार के वयस्क सदस्यों को अन-skilled मैनुअल काम करने के लिए 100 दिन की गारंटी वाली मजदूरी रोजगार प्रदान करना शामिल है।" MGNREGA का एक अन्य लक्ष्य टिकाऊ संपत्तियों (जैसे सड़कों, नहरों, तालाबों और कुंडों) का निर्माण करना है।<ref name="MGNREGA">{{cite web |title=National Rural Employment Guarantee Act, 2005 |url=https://rural.nic.in/sites/default/files/nrega/Library/Books/1_MGNREGA_Act.pdf |publisher=Ministry of Law and Justice |access-date=11 July 2021}}</ref>
कांग्रेस ने खुद को हिंदू समर्थक और अल्पसंख्यकों के रक्षक के रूप में पेश किया है। पार्टी महात्मा गांधी के सिद्धांत [[सर्व धर्म समभाव]] का समर्थन करती है, जिसे इसके सदस्य धर्मनिरपेक्षता के रूप में देखते हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य [[अमरिंदर सिंह]] ने कहा, "भारत सभी धर्मों का है, जो इसकी ताकत है, और कांग्रेस इसकी प्रिय धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को नष्ट नहीं होने देगी।"<ref name="Captain CM">{{cite news |title=Congress will safeguard secularism |url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/congress-will-safeguard-secularism/article27074338.ece |access-date=6 July 2021 |work=The Hindu |date=9 May 2019}}</ref>
9 नवंबर 1989 को राजीव गांधी ने विवादित [[राम जन्मभूमि]] स्थल के निकट शिलान्यास समारोह की अनुमति दी। इसके बाद उनकी सरकार को [[मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 1986]] को पारित करने के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसने सुप्रीम कोर्ट के [[शाह बानो]] मामले में निर्णय को निरस्त कर दिया। [[1984 के दंगे]] ने कांग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्षता पर नैतिक तर्क खोने पर मजबूर किया। भाजपा ने [[2002 के गुजरात दंगों]] के मामले में कांग्रेस पार्टी की नैतिकता पर सवाल उठाए।<ref name="ThePrint">{{cite news |last1=Vij |first1=Shivam |title=Reclaiming Indian pluralism will need annihilation of Congress party |url=https://theprint.in/opinion/reclaiming-indian-pluralism-will-need-annihilation-of-congress/485212/ |access-date=6 July 2021 |work=ThePrint |publisher=Shekhar Gupta |date=19 August 2020}}</ref>
कांग्रेस ने हिंदुत्व विचारधारा से खुद को दूर रखा है, हालांकि 2014 और 2019 के आम चुनावों में हार के बाद पार्टी ने अपने रुख को नरम किया है।<ref name="Hindutva">{{cite news |title='Rajiv Gandhi opened locks, called for Ram Rajya in 1985': Kamal Nath |url=https://www.timesnownews.com/india/article/rajiv-gandhi-opened-locks-called-for-ram-rajya-in-1985-kamal-nath/632586 |access-date=6 July 2021 |work=Times Now |date=6 August 2020}}</ref>
नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री पद के दौरान, [[पंचायती राज]] और [[नगर निगम (भारत)|नगर सरकार]] को संवैधानिक दर्जा मिला। संविधान में 73वीं और 74वीं संशोधन के साथ, एक नया अध्याय, भाग- IX, जोड़ा गया।<ref name="73rd">{{cite web |title=Panchayati Raj System in Independent India |url=http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |publisher=Department of Rural Development and Panchayats, Punjab |access-date=10 March 2022 |archive-date=1 फ़रवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220201062705/http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |url-status=dead }}</ref> राज्यों को पंचायती राज प्रणाली अपनाने में अपने भौगोलिक, राजनीतिक-प्रशासनिक और अन्य पहलुओं पर विचार करने की लचीलापन दी गई। पंचायतों और नगर निकायों में, स्थानीय स्वशासन में समावेशिता सुनिश्चित करने के प्रयास में, अनुसूचित जातियों/जनजातियों और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया।<ref name="Self Governance">{{cite web |title=Governance and Development |url=https://niti.gov.in/planningcommission.gov.in/docs/plans/mta/midterm/english-pdf/chapter-17.pdf |publisher=[[NITI Aayog]] |access-date=10 March 2022}}</ref>
स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस ने [[हिंदी]] को भारत की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने का समर्थन किया। नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के उस धड़े का नेतृत्व किया, जिसने हिंदी को भारतीय राष्ट्र की ''[[lingua franca]]'' के रूप में बढ़ावा दिया।<ref name="Lingua">{{cite journal |url=https://www.jstor.org/stable/43950462 |publisher=JSTOR |jstor=43950462 |access-date=5 July 2021|title=Jawaharlal Nehru and the Language Problem |last1=Agrawala |first1=S. K. |journal=Journal of the Indian Law Institute |year=1977 |volume=19 |issue=1 |pages=44–67 }}</ref> हालांकि, गैर-हिंदी भाषी भारतीय राज्यों, विशेष रूप से [[तमिलनाडु]], ने इसका विरोध किया और अंग्रेजी भाषा के निरंतर उपयोग की मांग की। लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कई प्रदर्शनों और दंगों का सामना करना पड़ा, जिसमें मद्रास [[Anti-Hindi agitations of Tamil Nadu|1965 का एंटी-हिंदी आंदोलन]] शामिल था।<ref name="Tamil protest">{{cite news |last1=Nair |first1=Chitralekha |title=A brief history of anti-Hindi imposition agitations in India |url=https://www.theweek.in/news/india/2019/06/07/brief-history-anti-hindi-imposition-agitations-india.html |access-date=5 July 2021 |work=The Week (Indian magazine) |publisher=Jacob Mathew |date=7 June 2019}}</ref> शास्त्री ने आंदोलनों से अपील की कि वे अपना आंदोलन वापस लें और आश्वासन दिया कि अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में तब तक उपयोग में लाया जाएगा जब तक गैर-हिंदी भाषी राज्य इसकी इच्छा करते रहें।<ref name="Assurance">{{cite news |last1=Madan |first1=Karuna |title=Anti-Hindi agitation: How it all began |url=https://gulfnews.com/world/asia/india/anti-hindi-agitation-how-it-all-began-1.2018146 |access-date=5 July 2021 |work=Gulf News |agency=Al Nisr Publishing |date=28 April 2017}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1967 में आधिकारिक भाषाओं के अधिनियम को संशोधित कर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के भावनाओं को शांत किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि अंग्रेजी का उपयोग तब तक जारी रह सकता है जब तक हर राज्य की विधानमंडल ने हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का प्रस्ताव पारित नहीं किया।<ref name="Language 1967">{{cite web |title=THE OFFICIAL LANGUAGES ACT, 1963 |url=https://rajbhasha.gov.in/en/official-languages-act-1963 |publisher=Department of Official Language, Government of India |access-date=10 March 2022}}</ref> यह दोनों हिंदी और अंग्रेजी के आधिकारिक भाषाओं के रूप में प्रयोग की गारंटी थी, जिससे भारत में द्विभाषिकता स्थापित हुई।<ref name="Language Act">{{cite web |title=Complete Text of the Official Languages Act |url=https://www.uottawa.ca/clmc/india-official-languages-act#:~:text=Bill%2019%20(1963)%20as%20amended%201967&text=An%20Act%20to%20provide%20for,certain%20communication%20purposes%20in%20HighCourts.&text=1)%20This%20Act%20may%20be,the%20Official%20Languages%20Act%2C%201963. |publisher=The University of Ottawa |access-date=10 March 2022}}</ref> इस कदम ने राज्यों में एंटी-हिंदी प्रदर्शनों और दंगों का अंत किया।
[[भारतीय दंड संहिता की धारा 377]], जो समलैंगिकता को अपराध मानती है; पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, "यौन संबंध व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और इसे व्यक्तियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।" पार्टी के प्रमुख सदस्य और पूर्व वित्त मंत्री [[पी. चिदंबरम]] ने कहा कि ''[[Navtej Singh Johar v. Union of India]]'' का निर्णय जल्दी से पलटा जाना चाहिए। 18 दिसंबर 2015 को, पार्टी के प्रमुख सदस्य शशि थरूर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को प्रतिस्थापित करने और सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त करने के लिए एक [[निजी सदस्य का बिल]] पेश किया। यह बिल पहले पठन में अस्वीकृत कर दिया गया। मार्च 2016 में, थरूर ने फिर से समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने के लिए निजी सदस्य का बिल पेश किया, लेकिन इसे दूसरी बार भी अस्वीकृत कर दिया गया।
आर्थिक नीतियाँ
{{See also|Economic liberalisation in India}} कांग्रेस-नेतृत्व वाले सरकारों की आर्थिक नीति का इतिहास दो चरणों में बाँटा जा सकता है। पहला चरण स्वतंत्रता से 1991 तक चला और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र पर बहुत जोर दिया गया।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/a-short-history-of-indian-economy-1947-2019-tryst-with-destiny-other-stories-1565801528109.html|title=A short history of Indian economy 1947–2019: Tryst with destiny & other stories|date=14 August 2019|newspaper=Mint}}</ref> दूसरा चरण 1991 में [[आर्थिक उदारीकरण|आर्थिक उदारीकरण]] के साथ शुरू हुआ। वर्तमान में, कांग्रेस एक मिश्रित अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है जिसमें निजी क्षेत्र और राज्य दोनों अर्थव्यवस्था को दिशा देते हैं, जो [[बाजार अर्थव्यवस्था|बाजार]] और [[योजित अर्थव्यवस्था|योजित अर्थव्यवस्थाओं]] के विशेषताओं को दर्शाता है। कांग्रेस आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण का समर्थन करती है—आयात को घरेलू उत्पाद से बदलने का और मानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण करना चाहिए ताकि विकास की गति बढ़ सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/nehrus-economic-philosophy/article18589548.ece|title=Nehru's economic philosophy|first=H.|last=Venkatasubbiah|newspaper=The Hindu|date=27 May 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/manmohan-singh-credits-jawarharlal-nehru-for-the-idea-of-mixed-economy/articleshow/45197661.cms|title=Manmohan Singh credits Jawarharlal Nehru for the 'idea of mixed economy'|newspaper=The Economic Times}}</ref>
[[File
Mukherjee - World Economic Forum Annual Meeting Davos 2009.jpg|thumb|left|alt=refer caption | तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] [[विश्व आर्थिक मंच|विश्व आर्थिक शिखर सम्मेलन]] 2009 में नई दिल्ली में]]
पहले चरण की शुरुआत में, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण पर आधारित नीतियों को लागू किया और एक [[मिश्रित अर्थव्यवस्था]] की वकालत की जहां सरकारी-नियंत्रित [[सार्वजनिक क्षेत्र]] निजी क्षेत्र के साथ सह-अस्तित्व में होगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और आधुनिकीकरण के लिए बुनियादी और भारी उद्योग की स्थापना को महत्वपूर्ण माना। इसलिए, सरकार ने निवेश को प्रमुख रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की उद्योगों—इस्पात, लौह, कोयला, और बिजली में निर्देशित किया, उनके विकास को सब्सिडी और संरक्षणवादी नीतियों के साथ बढ़ावा दिया। इस अवधि को [[लाइसेंस राज]], या परमिट राज कहा गया,<ref>Oxford English Dictionary, 2nd edition, 1989: from [[Sanskrit|Skr.]] ''rāj'': to reign, rule; cognate with [[Latin|L.]] ''rēx'', ''rēg-is'', [[Old Irish|OIr.]] ''rī'', ''rīg'' king (see RICH).</ref> जो कि 1947 से 1990 के बीच भारत में व्यवसाय स्थापित करने और चलाने के लिए आवश्यक लाइसेंस, नियम और accompanying [[red tape]] की विस्तृत प्रणाली थी।<ref>[http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm Street Hawking Promise Jobs in Future] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20080329023451/http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm |date=29 March 2008 }}, ''[[The Times of India]]'', 25 November 2001</ref> लाइसेंस राज ने नेहरू और उनके उत्तराधिकारियों की इच्छा का परिणाम था कि वे एक [[योजित अर्थव्यवस्था]] बनाना चाहते थे जहां अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं पर राज्य का नियंत्रण हो, और लाइसेंस केवल कुछ विशेष लोगों को दिए जाते थे। 80 सरकारी एजेंसियों को संतुष्ट करना आवश्यक था ताकि निजी कंपनियां कुछ उत्पादित कर सकें; और यदि लाइसेंस दिया जाता, तो सरकार उत्पादन को नियंत्रित करती।<ref name="bbcindia1998">{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/55427.stm|title=India: the economy|year=1998|publisher=BBC}}</ref> लाइसेंस राज प्रणाली इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी जारी रही। इसके अलावा, कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, इस्पात, कोयला और तेल का राष्ट्रीयकरण किया गया।<ref name="Rosser" /><ref name="Kapila1">{{Cite book | publisher=Academic Foundation| page=126|url={{Google books|de66PkzcfusC|page=PA126|plainurl=yes}} |isbn=978-8171881055| last1=Kapila| first1=Raj| last2=Kapila| first2=Uma| title=Understanding India's economic Reforms| year=2004}}</ref> राजीव गांधी के दौरान, व्यापार प्रणाली को कई आयात वस्तुओं पर शुल्क में कमी और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहनों के साथ उदार बनाया गया।<ref name="princeton.edu">{{cite journal |author1=Philippe Aghion|author2=Robin Burgess |author3=Stephen J. Redding|author4=Fabrizio Zilibotti |year=2008|url=http://www.princeton.edu/~reddings/pubpapers/ABRZ_AER_Sept2008.pdf|title=The Unequal Effects of Liberalization: Evidence from Dismantling the License Raj in India|journal=American Economic Review |volume=98|issue=4|pages=1397–1412|doi=10.1257/aer.98.4.1397|s2cid=966634 }}</ref> करों की दरों में कमी की गई और कंपनियों की संपत्ति पर प्रतिबंधों को ढीला किया गया।<ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19910615-in-an-india-known-for-thinking-small-rajiv-gandhi-generated-high-stakes-optimism-814461-1991-06-15|title=In an India known for thinking small, Rajiv Gandhi generated high-stakes optimism|first=Sudeep |last=Chakravarti|date=15 June 1991|website=India Today}}</ref>
1991 में, नए कांग्रेस सरकार ने, [[पी. वी. नरसिम्हा राव]] के नेतृत्व में, संभावित [[1991 भारत आर्थिक संकट|1991 आर्थिक संकट]] से बचने के लिए सुधारों की शुरुआत की।<ref name="Narasimha Rao was father of economic reform: Pranab" /><ref name="Ghosh">{{cite web|url=http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|archive-date=25 October 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131025042847/http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|title= India's Pathway through Financial Crisis|work=globaleconomicgovernance.org|first=Arunabha |last=Ghosh|publisher=Global Economic Governance Programme|access-date=2 March 2007}}</ref> ये सुधार [[नई आर्थिक नीति]] (NEP) या "1991 आर्थिक सुधार" या "एलपीजी सुधार" के रूप में जाने जाते हैं, जो विदेशी निवेश के लिए क्षेत्रों को खोलने, पूंजी बाजारों में सुधार, घरेलू व्यवसाय को [[डिरिसगुलेट|डिरिसगुलेट]] करने, और व्यापार प्रणाली में सुधार में सबसे आगे बढ़े। ये सुधार उस समय लागू किए गए जब भारत भुगतान संतुलन संकट, उच्च मुद्रास्फीति, कमज़ोर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs), और एक बड़ा वित्तीय घाटा का सामना कर रहा था।<ref name="LPG Rao">{{cite news |last1=Tiwari |first1=Brajesh Kumar |title=Dr Manmohan Singh: The Architect of India's Economic Reform |url=https://news.abplive.com/blog/dr-manmohan-singh-the-architect-of-india-s-economic-reform-1632067 |access-date=3 December 2023 |work=ABP News |agency=ABP Group |date=26 September 2023}}</ref> इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को समाजवादी मॉडल से बाजार अर्थव्यवस्था की ओर स्थानांतरित करना भी था।<ref name="Economy Reforms">{{cite news |last1=Chundawat |first1=Keshav Singh |title=Dr Manmohan Singh, the man who opened up Indian economy |url=https://www.cnbctv18.com/politics/pm-modi-extends-birthday-wishes-to-dr-manmohan-singh-the-man-who-opened-up-indian-economy-17886361.htm |access-date=3 December 2023 |work=CNBC TV18 |agency=Network18 Group |date=26 September 2023}}</ref> राव सरकार के लक्ष्यों में [[वित्तीय घाटा]] को कम करना, सार्वजनिक क्षेत्र का [[निजीकरण|निजीकरण]] करना, और अवसंरचना में निवेश बढ़ाना शामिल था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=ZbWF5hykvwYC&q=1991+economic+reforms+progressed+furthest+in+opening+up+areas+to+foreign+investment%2C+reforming+capital+markets%2C+deregulating+domestic+business%2C+and+reforming+the+trade+regime.&pg=PA65|title=Methodology And Perspectives of Business Studies|first=G.|last=Balachandran|date=28 July 2010|publisher=Ane Books India|isbn=9789380156682}}</ref> व्यापार सुधार और विदेशी निवेश के नियमों में बदलावों को पेश किया गया ताकि भारत को विदेशी व्यापार के लिए खोला जा सके जबकि बाहरी ऋण को स्थिर किया जा सके।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/narasimha-rao-s-bold-economic-reforms-helped-in-india-s-development-naidu-11609062633183.html|title=Narasimha Rao's bold economic reforms helped in India's development: Naidu|author=Staff Writer|date=27 December 2020|newspaper=Mint}}</ref> राव ने इस कार्य के लिए [[मनमोहन सिंह]] को चुना। सिंह, जो एक प्रशंसित अर्थशास्त्री और पूर्व [[भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर्स की सूची|भारतीय रिजर्व बैंक]] के गवर्नर थे, ने इन सुधारों को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/this-day-the-half-lion-saved-india-when-rao-and-manmohan-brought-economy-back-from-the-brink/articleshow/59738979.cms|title=This day the half-lion saved India: When Rao and Manmohan brought economy back from the brink|newspaper=The Economic Times}}</ref>
2004 में, मनमोहन सिंह ने कांग्रेस-नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 2009 में हुए आम चुनावों के बाद भी प्रधानमंत्री का पद बनाए रखा। सिंह सरकार ने बैंकों और वित्तीय क्षेत्रों में सुधार, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए नीतियों की शुरुआत की।<ref>{{cite news|title=Banking on reform|url=http://www.indianexpress.com/news/banking-on-reform/1059372/|access-date=14 June 2013|newspaper=The Indian Express}}</ref> इसके अतिरिक्त, किसानों के कर्ज़ में राहत देने वाली नीतियाँ भी लागू की गईं।<ref>{{cite web|title=Farmer Waiver Scheme- PM statement|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=39122|publisher=PIB|access-date=14 June 2013}}</ref>
2005 में, सिंह सरकार ने [[मूल्य वर्धित कर|मूल्य वर्धित कर (VAT)]] लागू किया, जिसने बिक्री कर को प्रतिस्थापित किया। भारत ने 2008 की वैश्विक आर्थिक संकट के सबसे बुरे प्रभावों का सामना करने में सफलता हासिल की।<ref>Mohan, R., 2008. Global financial crisis and key risks: impact on India and Asia. RBI Bulletin, pp.2003–2022.</ref><ref>{{cite news|title=Global inflation climbs to historic levels|url=https://www.nytimes.com/2008/02/12/business/worldbusiness/12iht-inflate.1.9963291.html|newspaper=The New York Times|author=Kevin Plumberg|author2=Steven C. Johnson|access-date=17 June 2011|date=2 November 2008}}</ref>
सिंह सरकार ने [[गोल्डन क्वाड्रिलैटरल]] को जारी रखा, जो [[अटल बिहारी वाजपेयी|वाजपेयी]] सरकार द्वारा शुरू किया गया भारतीय राजमार्ग आधुनिकीकरण कार्यक्रम था।<ref>{{cite web|title=Economic benefits of golden Quadilateral|date=4 May 2013 |url=http://businesstoday.intoday.in/story/economic-benefits-of-the-golden-quadrilateral-project/1/194321.html|publisher=Business today|access-date=14 June 2013}}</ref> तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] ने कई कर सुधार लागू किए, जिनमें [[फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स (भारत)|फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स]] और वस्तुओं के लेन-देन कर को समाप्त करना शामिल था।<ref>{{cite web|date=6 July 2009|title=Fringe benefit tax abolished|url=https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|access-date=31 August 2020|website=The Hindustan Times|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040931/https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|url-status=live}}</ref> उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान [[वस्तु एवं सेवा कर (भारत)|वस्तु एवं सेवा कर (GST)]] को भी लागू किया।<ref>{{Cite news|date=13 April 2017|title=President Pranab Mukherjee gives nod to four supporting Bills on GST|work=The Hindu|url=https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|access-date=31 August 2020|issn=0971-751X|archive-date=10 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200610130246/https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|url-status=live}}</ref>
उनके सुधारों को प्रमुख कॉर्पोरेट अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों द्वारा अच्छा प्रतिसाद मिला। हालाँकि, कुछ अर्थशास्त्रियों ने रेट्रोस्पेक्टिव कराधान की आलोचना की।<ref>{{cite web|date=27 October 2017|title=Manmohan & Sonia opposed retrospective tax: Pranab Mukherjee |url=https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040859/https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-date=1 September 2020|url-status=live|access-date=31 August 2020|website=ThePrint}}</ref>
मुखर्जी ने कई सामाजिक क्षेत्र योजनाओं के लिए फंडिंग बढ़ाने के साथ-साथ [[जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन]] (JNNURM) का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के लिए बजट में वृद्धि का समर्थन किया और [[राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम]] जैसे अवसंरचना कार्यक्रमों का विस्तार किया।<ref>{{cite web|title=More Funds for Infrastructure Development, Farmers|url=https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040912/https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|magazine=Outlook|location=New Delhi}}</ref> उनके कार्यकाल के दौरान बिजली कवरेज का भी विस्तार हुआ। मुखर्जी ने राजकोषीय विवेक के सिद्धांत की पुष्टि की, जबकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने उनके कार्यकाल के दौरान बढ़ते राजकोषीय घाटे के बारे में चिंता व्यक्त की, जो 1991 के बाद से सबसे ऊंचा था। उन्होंने यह भी घोषित किया कि सरकारी खर्च में वृद्धि केवल अस्थायी थी।<ref>{{Cite news|title=Big spender|newspaper=The Economist |issn=0013-0613|url=https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender |access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040901/https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender}}</ref>
===राष्ट्रीय रक्षा और गृह मामले===
[[File:The Prime Minister, Dr. Manmohan Singh and his wife, Smt. Gursharan Kaur during the Passing Out Parade at the Platinum Jubilee Course of Indian Military Academy, in Dehradun, on December 10, 2007.jpg|thumb|10 दिसंबर 2007 को IMA के प्लेटिनम जुबली कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान [[मनमोहन सिंह]] और उनकी पत्नी; विदेशी जेंटलमैन कैडेट्स के साथ।]]
भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही परमाणु क्षमताओं की दिशा में प्रयास किए हैं। नेहरू का मानना था कि परमाणु ऊर्जा देश को आगे बढ़ाने में मदद करेगी और इसके विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। इस दिशा में, उन्होंने ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका से सहायता प्राप्त करने की कोशिश की।<ref name="Vision">{{cite web |title=Indian Nuclear Program |url=https://www.atomicheritage.org/history/indian-nuclear-program |publisher=National Museum of Nuclear Science & History |access-date=7 July 2021}}</ref>
1958 में, भारत सरकार ने [[होमी जे. भाभा]] की मदद से तीन-चरणीय ऊर्जा उत्पादन योजना अपनाई, और [[भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र]] की स्थापना 1954 में की गई।<ref name="Perkovich2001">{{cite book|author=George Perkovich|title=India's Nuclear Bomb: The Impact on Global Proliferation|url=https://books.google.com/books?id=UDA9dUryS8EC&pg=PA22|year=2001|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23210-5|page=22}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1964 से [[चीन]] द्वारा निरंतर परमाणु परीक्षणों को देखा, जिसे उन्होंने भारत के लिए एक अस्तित्व संबंधी खतरा माना।<ref name="JSTOR">{{cite journal |last1=Couper |first1=Frank E. |title=Indian Party Conflict on the Issue of Atomic Weapons |journal=The Journal of Developing Areas |year=1969 |volume=3 |issue=2 |pages=191–206 |url=https://www.jstor.org/stable/4189559 |publisher=JSTOR |jstor=4189559 |access-date=7 July 2021}}</ref><ref name="LATimes1998">{{cite news |last1=Tempest |first1=Rone |title=India's Nuclear Tests Jolt Its Relations With China |url=https://www.latimes.com/archives/la-xpm-1998-jun-11-mn-58841-story.html |access-date=7 July 2021 |work=Los Angeles Times Communications LLC |date=11 June 1998}}</ref>
भारत ने 18 मई 1974 को राजस्थान के [[पोखरण]] में पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे [[ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा]] कहा गया।<ref name="First Test">{{cite news |last1=Nair |first1=Arun |title=Smiling Buddha: All You Need To Know About India's First Nuclear Test at Pokhran |url=https://www.ndtv.com/india-news/smiling-buddha-all-you-need-to-know-about-indias-first-nuclear-test-at-pokhran-2230645 |access-date=5 July 2021 |publisher=NDTV |date=18 May 2020}}</ref> भारत ने दावा किया कि परीक्षण "[[शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट|शांतिपूर्ण उद्देश्यों]]" के लिए था, हालाँकि इस परीक्षण की अन्य देशों द्वारा आलोचना की गई और अमेरिका और कनाडा ने भारत को सभी परमाणु सहायता रोक दी।<ref name="PNE">{{cite web |title=India's Nuclear Weapons Program Smiling Buddha: 1974 |url=https://nuclearweaponarchive.org/India/IndiaSmiling.html |publisher=The Nuclear Weapon Archive |access-date=5 July 2021}}</ref>
गंभीर अंतर्राष्ट्रीय आलोचना के बावजूद, यह परमाणु परीक्षण देश में लोकप्रिय रहा और इंदिरा गांधी की लोकप्रियता में तुरंत पुनरुद्धार हुआ, जो 1971 के युद्ध के बाद से काफी गिर चुकी थी।<ref name="Buddha">{{cite news |last1=Chaturvedi |first1=Amit |title=Smiling Buddha: How India successfully conducted first nuclear test in Pokhran |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/smiling-buddha-how-india-successfully-conducted-first-nuclear-test-in-pokhran-101621301524390.html |access-date=4 July 2021 |work=The Hindustan Times|agency=HT Media Ltd |date=18 May 2021}}</ref><ref name="Popularity">{{cite news |last1=Malhotra |first1=Inder |title=When the Buddha first smiled |url=https://indianexpress.com/article/opinion/columns/when-the-buddha-first-smiled/ |access-date=5 July 2021 |work=The Indian Express |date=15 May 2009}}</ref>
भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों को राज्यत्व में परिवर्तन का सफल प्रबंधन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान किया गया।<ref name="Statehood NE">{{cite news |last1=Karmakar |first1=Rahul |title=Renewed push for Statehood in the Northeast |url=https://www.thehindu.com/news/national/renewed-push-for-statehood-in-the-northeast/article25032429.ece |access-date=20 July 2021 |work=The Hindu |date=25 September 2018}}</ref> 1972 में, उनके प्रशासन ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया, जबकि उत्तर-पूर्वी सीमा एजेंसी को एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया।<ref>{{Cite news |url=https://www.nytimes.com/1972/01/23/archives/india-rearranges-northeast-region-3-states-and-2-territories.html|title=INDIA REARRANGES NORTHEAST REGION|newspaper=The New York Times|date=23 January 1972}}</ref><ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/arunachal-pradesh-309685-2016-02-20|title=Arunachal Pradesh became an Indian State today: Some interesting facts about the 'Land of the Dawn-Lit Mountains' |date=20 February 2017 |website=India Today}}</ref> इसके बाद, 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ।<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19780430-did-india-have-a-right-to-annex-sikkim-in-1975-818651-2015-02-18|title=Did India have a right to annex Sikkim in 1975?|first1=Sunil |last1=Sethi|date=18 February 2015 |website=India Today}}</ref> 1960 के अंत और 1970 के दशक में, गांधी ने पश्चिम बंगाल राज्य में नक्सलवादी उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना को भेजा। भारत में नक्सलवादी-माओवादी उग्रवाद को आपातकाल के दौरान पूरी तरह से कुचल दिया गया।<ref name="Naxalite">{{cite web |title=A historical introduction to Naxalism in India |url=https://www.efsas.org/publications/study-papers/an-introduction-to-naxalism-in-india/ |publisher=European Foundation for South Asian Studies |access-date=3 December 2023}}</ref>
मनमोहन सिंह के प्रशासन ने कश्मीर में क्षेत्र को स्थिर करने के लिए एक विशाल पुनर्निर्माण प्रयास शुरू किया और आतंकवाद विरोधी कानूनों को संशोधन के साथ मजबूत किया।<ref name="UAPA">{{cite web|title=The Unlawful Activities (Prevention) |url=http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|website=nic.in |publisher=National Informatics Centre|access-date=17 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161017053842/http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|archive-date=17 October 2016|url-status=dead}}</ref> प्रारंभिक सफलता के बाद, 2009 से कश्मीर में उग्रवादी घुसपैठ और आतंकवाद में वृद्धि हुई है। हालांकि, सिंह प्रशासन उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद को कम करने में सफल रहा।<ref name=Buzz7>[http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html Infiltration has not reduced in Kashmir, insurgency down in North East: Chidambaram] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20160107072045/http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html |date=7 January 2016 }}</ref> पंजाब के उग्रवाद के संदर्भ में, आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों (निवारण) अधिनियम (TADA) पारित किया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान से घुसपैठियों को समाप्त करना था। कानून ने राष्ट्रीय आतंकवादी और सामाजिक विघटनकारी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को व्यापक शक्तियाँ दीं। पुलिस को 24 घंटे के भीतर एक detenue को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की आवश्यकता नहीं थी। इस कानून की मानवाधिकार संगठनों द्वारा व्यापक आलोचना की गई। नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद, यूपीए सरकार ने आतंकवाद से लड़ने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) बनाई।<ref>{{cite web|author=TNN |url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |archive-url=https://web.archive.org/web/20121022154006/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |url-status=dead |archive-date=22 October 2012 |title=Finally, govt clears central terror agency, tougher laws |date=16 December 2008 |work=[[The Times of India]] |access-date=28 September 2013}}</ref> अद्वितीय पहचान प्राधिकरण भारत की स्थापना फरवरी 2009 में की गई ताकि प्रस्तावित बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान पत्र को लागू किया जा सके, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाना था।<ref>{{cite book |last1=K |first1=Watfa, Mohamed |title=E-Healthcare Systems and Wireless Communications: Current and Future Challenges: Current and Future Challenges |date=2011 |publisher=IGI Global |isbn=978-1-61350-124-5 |page=190 |url=https://books.google.com/books?id=kOaeBQAAQBAJ&q=The+Unique+Identification+Authority+of+India+was+established+in+February+2009+to+implement+the+proposed+Multipurpose+National+Identity+Card%2C+with+the+objective+of+increasing+national+security&pg=PA190 |access-date=6 June 2018}}</ref>
===शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा===
नेहरू के तहत कांग्रेस सरकार ने कई उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की, जिसमें [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] और [[राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] शामिल हैं। [[राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद]] (NCERT) 1961 में समाजों के पंजीकरण अधिनियम के तहत एक साहित्यिक, वैज्ञानिक और चैरिटेबल सोसाइटी के रूप में स्थापित की गई।<ref name="NCERT">{{cite web |title=NCERT Full form |url=https://www.vedantu.com/full-form/ncert-full-form |publisher=Vedantu |access-date=7 July 2021}}</ref> जवाहरलाल नेहरू ने अपने [[पाँच वर्षीय योजनाएँ|पाँच वर्षीय योजनाओं]] में भारत के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने की प्रतिबद्धता का outlines किया। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीत्व ने भारत में सार्वजनिक सूचना बुनियादी ढाँचे और नवाचार की शुरुआत की।<ref name="Rajiv Modern">{{cite news |last1=Shakti Shekhar |first1=Kumar |title=5 ways how Rajiv Gandhi changed India forever |url=https://www.indiatoday.in/india/story/5-ways-how-rajiv-gandhi-changed-india-forever-1318979-2018-08-20 |access-date=4 July 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=20 August 2018}}</ref> उनके सरकार ने पूरी तरह से असंबद्ध [[मदरबोर्ड]] के आयात की अनुमति दी, जिससे कंप्यूटर की कीमतें कम हुईं।<ref name="computer">{{cite web |last1=Singal |first1=Aastha |title=Rajiv Gandhi –The Father of Information Technology & Telecom Revolution of India |url=https://www.entrepreneur.com/article/338415 |website=entrepreneur.com/ |date=20 August 2019 |publisher=Entrepreneur India |access-date=4 July 2021}}</ref> हर जिले में [[नवोदय विद्यालय]] की स्थापना का विचार [[राष्ट्रीय शिक्षा नीति]] (NPE) का हिस्सा था।<ref name="NPE TOI">{{cite news |last1=Sharma |first1=Sanjay |title=National Education Policy 2020: All You Need to Know |url=https://timesofindia.indiatimes.com/home/education/news/national-education-policy-2020-all-you-need-to-know/articleshow/77239854.cms |access-date=24 July 2021 |work=The Times of India |date=30 July 2020}}</ref>
2005 में, कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की, जिसमें लगभग 500,000 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यरत थे। इसे अर्थशास्त्री [[जेफ्री सैक्स]] द्वारा सराहा गया।<ref name="timepoverty">{{cite news|title=The End of Poverty|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20050317031951/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|url-status=dead|archive-date=17 March 2005|first=Jeffrey D.|last=Sachs|date=6 March 2005|magazine=Time}}</ref> 2006 में, इसने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] (IITs), [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] (IIMs) और अन्य केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में [[अन्य पिछड़ा वर्ग]] के लिए 27 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रस्ताव लागू किया, जिसके कारण [[2006 भारतीय विरोध प्रदर्शन]] हुए।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/Students-cry-out-No-reservation-please/articleshow/1513316.cms |title=Students cry out: No reservation please |work=The Times of India |date=3 May 2006 |access-date=16 August 2018}}</ref> सिंह सरकार ने [[सर्व शिक्षा अभियान]] कार्यक्रम को भी जारी रखा, जिसमें मध्याह्न भोजन की व्यवस्था और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नई स्कूलों की स्थापना शामिल है, ताकि [[अनपढ़ता]] से लड़ सके।<ref>{{cite news|title=Direct SSA funds for school panels|url=http://www.deccanherald.com/content/338571/direct-ssa-funds-school-panels.html|access-date=14 June 2013|newspaper=Deccan Herald}}</ref> मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में आठ प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की गई।<ref>{{cite news|title=LS passes bill to provide IIT for eight states.|url=http://www.deccanherald.com/content/148456/ls-passes-bill-provide-iit.html|newspaper=Deccan Herald|access-date=14 June 2013}}</ref>
===विदेश नीति===
[[File:NATO vs. Warsaw Pact (1949-1990).svg|thumb|उत्तर गोलार्ध में ''संबद्ध देशों'': [[NATO]] नीले रंग में और [[वारसॉ संधि]] लाल रंग में।]]
[[File:Stevan Kragujevic, Tito, Naser, Nehru, Dolazak na Brione.jpg|thumb|right|alt=refer caption|[[गमाल अब्देल नासिर]], [[जवाहरलाल नेहरू]], और [[जोसेप ब्रोज टिटो]], [[गैर-आश्रित आंदोलन]] के अग्रदूत]]
[[शीत युद्ध]] के अधिकांश समय में, कांग्रेस ने [[गैर-आश्रित आंदोलन|गैर-आश्रित]] नीति का समर्थन किया, जिसमें भारत को पश्चिमी और पूर्वी ब्लॉकों दोनों के साथ संबंध स्थापित करने का आह्वान किया गया, लेकिन किसी भी ओर औपचारिक गठबंधन से बचने की सलाह दी गई।<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/jawaharlal-nehru-the-architect-of-indias-foreign-policy/articleshow/58767014.cms |title=गैर-आश्रित आंदोलन: जवाहरलाल नेहरू - भारत की विदेश नीति के वास्तुकार|work=The Times of India |date=20 मई 2017 |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति समर्थन ने पार्टी को 1971 में सोवियत संघ के साथ एक मित्रता संधि को समर्थन देने के लिए प्रेरित किया।<ref>{{cite web |url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/ChanakyaCode/the-indo-pak-war-1965-and-the-tashkent-agreement-role-of-external-powers/ |title=1965 का भारत-पाक युद्ध और ताशकंद समझौता: बाहरी शक्तियों की भूमिका |date=24 अक्टूबर 2015 |work=The Times of India |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> कांग्रेस ने पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गई विदेश नीति को जारी रखा, जिसमें [[भारत-पाकिस्तान संबंध|पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया]] और दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय विजिट का आदान-प्रदान शामिल है।<ref name=peace>{{cite news|title=Negotiation की स्थिति|url=http://www.firstpost.com/india/loc-violation-are-talks-enough-or-should-india-take-action-582121.html|access-date=18 अगस्त 2014|publisher=[[Firstpost]]|agency=[[Network 18]]|date=9 जनवरी 2013}}</ref> यूपीए सरकार ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ सीमा विवाद को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास किया।<ref name="Economist news">{{cite news|title=भारत के प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह, व्यापार और सीमा रक्षा के मामलों पर चर्चा करने के लिए बीजिंग में|url=https://www.economist.com/news/world-week/21588422-politics-week|access-date=18 अगस्त 2014|newspaper=[[The Economist]]|date=26 अक्टूबर 2013}}</ref><ref name=republic>{{cite news|title=भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजिंग का दौरा किया|url=http://www.china-briefing.com/news/2008/01/14/indian-prime-minister-manmohan-singh-visits-beijing.html|access-date=18 अगस्त 2014|work=China Briefing|agency=Dezan Shira & Associates|publisher=Business Intelligence|date=14 जनवरी 2008}}</ref>
[[अफगानिस्तान-भारत संबंध|अफगानिस्तान के साथ संबंध]] भी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय रहे हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|title=भारत-अफगानिस्तान संबंध|access-date=11 दिसंबर 2008|last=Bajoria|first=Jayshree|date=23 अक्टूबर 2008|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20081129231738/http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|archive-date=29 नवंबर 2008}}</ref> अफगान राष्ट्रपति [[हामिद करज़ई]] के अगस्त 2008 में नई दिल्ली दौरे के दौरान, मनमोहन सिंह ने अफगानिस्तान के लिए स्कूलों, स्वास्थ्य क्लिनिक, बुनियादी ढाँचा और रक्षा के विकास के लिए सहायता पैकेज बढ़ाया।<ref name=BBC2>{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/7540204.stm|title=भारत ने अफगानिस्तान के लिए अधिक सहायता की घोषणा की|date=4 अगस्त 2008|publisher=BBC News}}</ref> भारत अब अफगानिस्तान के लिए सबसे बड़े एकल सहायता दाताओं में से एक है।<ref name=BBC2 /> मध्य एशियाई देशों के साथ राजनीतिक, सुरक्षा, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए, भारत ने 2012 में [[कनेक्ट सेंट्रल एशिया]] नीति शुरू की। यह नीति [[कजाखस्तान]], [[किर्गिस्तान]], [[ताजिकिस्तान]], [[तुर्कमेनिस्तान]], और [[उज़्बेकिस्तान]] के साथ भारत के संबंधों को मजबूत और विस्तारित करने के उद्देश्य से है। [[पूर्व की ओर देखो नीति (भारत)|पूर्व की ओर देखो नीति]] 1992 में [[नरसिम्हा राव|नरसिम्हा राव]] द्वारा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए शुरू की गई, ताकि भारत की क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थिति को मजबूत किया जा सके और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के रणनीतिक प्रभाव का प्रतिरोध किया जा सके। इसके बाद, 1992 में राव ने इसराइल के साथ भारत के संबंधों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया, जो उनके विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान कुछ वर्षों तक गुप्त रूप से सक्रिय थे, और इसराइल को नई दिल्ली में एक दूतावास खोलने की अनुमति दी।<ref name="IsraelRao">{{cite news |title=भारत और इसराइल के बीच संबंधों का समय-रेखा |url=https://www.livemint.com/Politics/9zCAQDe5L5mKdtU21A6pkN/Narendra-Modi-in-Israel-A-timeline-of-Indias-ties-with-Isr.html |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=Mint |agency=HT Media |date=4 जुलाई 2017}}</ref> राव ने [[दलाई लामा]] से दूर रहने का निर्णय लिया ताकि बीजिंग की शंकाओं और चिंताओं को न बढ़ाया जा सके, और [[तेहरान]] के साथ सफल संपर्क बनाए।<ref name="Irish1996">{{cite news |last1=Bedi |first1=Rahul |title=दलाई लामा फिल्मों के लिए अनुमति अस्वीकृत |url=https://www.irishtimes.com/news/permission-for-dalai-lama-films-denied-1.41053 |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=The Irish Times |date=19 अप्रैल 1996}}</ref>
हालाँकि कांग्रेस की विदेश नीति का सिद्धांत सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखने का है, लेकिन यह हमेशा अफ्रीका-एशिया के देशों के प्रति विशेष झुकाव प्रदर्शित करती है। इसने [[Group of 77]] (1964), [[Group of 15]] (1990), [[Indian Ocean Rim Association]], और [[SAARC]] के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इंदिरा गांधी ने अफ्रीका में भारतीय एंटी-इंपीरियलिस्ट हितों को सोवियत संघ के हितों से मजबूती से जोड़ा। उन्होंने अफ्रीका में मुक्ति संघर्षों का खुलकर और उत्साहपूर्वक समर्थन किया।<ref name="MEAIndira">{{cite web |title=भारत – ज़ाम्बिया संबंध |url=https://mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/Zambia_Jan_2016.pdf |publisher=भारतीय विदेश मंत्रालय |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref> अप्रैल 2006 में, नई दिल्ली ने 15 अफ्रीकी राज्यों के नेताओं की उपस्थिति में एक भारत-आफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।
कांग्रेस पार्टी ने हथियारों की दौड़ का विरोध किया है और पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के निरस्त्रीकरण की वकालत की है।<ref name="IndiaToday2000">{{cite news |last1=Mitra |first1=Sumit |title=क्या भारत को और परमाणु परीक्षण करने चाहिए, इस पर कांग्रेस में विभाजन|url=https://www.indiatoday.in/magazine/nation/story/20000508-congress-divided-against-itself-on-whether-india-should-have-more-nuclear-tests-777525-2000-05-08 |access-date=7 जुलाई 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=8 मई 2000}}</ref> 2004 से 2014 के बीच सत्ता में रहते हुए, कांग्रेस ने [[भारत-यूएस संबंध|भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध]] पर काम किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जुलाई 2005 में अमेरिका का दौरा किया ताकि [[भारत-यूएस नागरिक परमाणु समझौता]] पर बातचीत की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति [[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश]] मार्च 2006 में भारत आए; इस दौरे के दौरान, एक परमाणु समझौता प्रस्तावित किया गया, जिसके तहत भारत को परमाणु ईंधन और प्रौद्योगिकी की पहुंच प्राप्त होती और इसके बदले में [[अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी|IAEA]] द्वारा इसके नागरिक [[परमाणु रिएक्टर]]ों का निरीक्षण किया जाता। दो वर्षों की बातचीत के बाद, IAEA, [[परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह]] और [[संयुक्त राज्य कांग्रेस]] से स्वीकृति मिलने के बाद, यह समझौता 10 अक्टूबर 2008 को हस्ताक्षरित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://english.peopledaily.com.cn/90001/90777/90852/6513319.html| title=यू.एस., भारत ने ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए|access-date=11 दिसंबर 2008|date=11 अक्टूबर 2008|work=People's Daily}}</ref> हालांकि, भारत ने [[परमाणु अप्रसार संधि]] (NPT) और [[व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि]] (CTBT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि वे भेदभावपूर्ण और साम्राज्यवादी प्रकृति के हैं।<ref name="NTI2019">{{cite web |title=भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम |url=https://www.nti.org/learn/countries/india/nuclear/ |publisher=The Nuclear Threat Initiative|access-date=7 जुलाई 2021}}</ref><ref name="Sipri2010">{{cite report |last1=Gopalaswamy |first1=Bharat |title=भारत और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि: हस्ताक्षर करें या न करें? |date=जनवरी 2010 |url=https://www.sipri.org/publications/sipri-policy-briefs/india-and-comprehensive-nuclear-test-ban-treaty-sign-or-not-sign |publisher=SIPRI |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref>
कांग्रेस की नीति जापान के साथ-साथ यूरोपीय संघ के देशों, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, और जर्मनी के साथ मित्रता संबंधों को विकसित करने की रही है।<ref name=conversation>{{cite web|last1=Haass|first1=Richard N.|title=प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ एक वार्तालाप|url=http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|date=23 नवंबर 2009|website=cfr.org|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|access-date=18 अगस्त 2014|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20140819083228/http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|archive-date=19 अगस्त 2014}}</ref> ईरान के साथ कूटनीतिक संबंध जारी रहे हैं, और [[ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन]] पर बातचीत हुई है।<ref name="Iran relations">{{cite web|title=शांति पाइपलाइन|url=http://www.thenational.ae/news/the-peace-pipeline|work=The National|location=अबू धाबी|date=28 मई 2009|access-date=18 अगस्त 2014}}</ref> कांग्रेस की नीति अन्य विकासशील देशों, विशेषकर ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के साथ संबंध सुधारने की भी रही है।<ref>{{cite web|title=भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंध|url=http://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/India-SouthAfrica_Relations.pdf|website=mea.gov.in|publisher=[[Ministry of External Affairs (India)|भारतीय विदेश मंत्रालय]], [[भारत सरकार]]|access-date=18 सितंबर 2014}}</ref>
== संरचना और संगठन ==
{{See also|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची|अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी|कांग्रेस कार्यसमिति}}
[[File:Stamp of India - 1985 - Colnect 167209 - Indian National Congress.jpeg|thumb|right|200px|कांग्रेस की शताब्दी के उपलक्ष्य में जारी डाक टिकट]]
वर्तमान में, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची|अध्यक्ष]] और [[अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी]] (एआईसीसी) का चुनाव वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य एवं ज़िला स्तरीय इकाइयों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश—या ''प्रदेश''—में एक [[प्रदेश कांग्रेस कमेटी]] (पीसीसी) होती है,<ref name="Committee">{{cite web |title=President of Pradesh Congress Committee |url=https://www.inc.in/en/pcc-presidents |publisher=INC web portal |access-date=26 May 2020 |archive-date=16 April 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200416160136/https://www.inc.in/en/pcc-presidents |url-status=dead }}</ref> जो पार्टी की राज्य-स्तरीय इकाई होती है और स्थानीय व राज्य स्तर पर राजनीतिक अभियानों का संचालन करती है तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के अभियानों में सहायता करती है।<ref>{{cite web |title=The Past And Future of the Indian National Congress |url=http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |website=[[द कारवां]] |access-date=6 June 2018 |date=March 2010 |via=[[रामचंद्र गुहा]] |archive-date=20 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180620095241/http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |url-status=dead }}</ref> प्रत्येक पीसीसी की 20 सदस्यों की एक कार्यसमिति होती है, जिनमें से अधिकांश की नियुक्ति पार्टी अध्यक्ष द्वारा की जाती है। राज्य पार्टी के नेता का चयन राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जाता है। राज्य विधानसभाओं के लिए चुने गए कांग्रेस विधायक विभिन्न राज्यों में कांग्रेस विधायक दल का गठन करते हैं; इनका अध्यक्ष सामान्यतः मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी का नामित उम्मीदवार होता है। पार्टी विभिन्न समितियों और विभागों में संगठित है तथा एक दैनिक समाचार पत्र ''[[नेशनल हेराल्ड (भारत)|नेशनल हेराल्ड]]'' प्रकाशित करती है।<ref name="Kumar1990">{{cite book|author=Kedar Nath Kumar|title=Political Parties in India, Their Ideology and Organisation|url={{Google books|x3pJ8t4rxIsC|page=PA41|plainurl=yes}}|date=1 January 1990|publisher=Mittal Publications|isbn=978-81-7099-205-9|pages=41–43}}</ref>
संरचना होने के बावजूद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 1972 के बाद कोई संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए।<ref>{{cite book|last1=Sanghvi|first1=Vijay|title=The Congress Indira to Sonia Gandhi|date=2006|publisher=Kalpaz Publications|location=Delhi|isbn=978-8178353401|page=128|url=https://books.google.com/books?id=npdqD_TXucQC|access-date=4 November 2016}}</ref> इसके बावजूद, 2004 में जब कांग्रेस पुनः सत्ता में आई, तो [[मनमोहन सिंह]] पार्टी अध्यक्ष न होते हुए भी प्रधानमंत्री बने—जो इस परंपरा के बाद पहली बार हुआ।<ref>{{Cite news |url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/rahul-gandhi-congress-president-gandhi-chief-1564307-2019-07-08|title=Goodbye, Rahul Gandhi?|website=India Today|agency=Living Media India Limited|date=8 July 2019|last=Deka|first=Kaushik|accessdate=22 May 2021}}</ref>
एआईसीसी, पीसीसी से भेजे गए प्रतिनिधियों से मिलकर बनती है।<ref name="Kumar1990" /> ये प्रतिनिधि [[कांग्रेस कार्यसमिति]] सहित विभिन्न कांग्रेस समितियों का चुनाव करते हैं, जिनमें वरिष्ठ पार्टी नेता और पदाधिकारी शामिल होते हैं। एआईसीसी सभी महत्वपूर्ण कार्यकारी और राजनीतिक निर्णय लेती है। 1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन के बाद से [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष]] प्रभावी रूप से पार्टी के राष्ट्रीय नेता, संगठन प्रमुख, कार्यसमिति प्रमुख, मुख्य प्रवक्ता और [[भारत के प्रधानमंत्री]] पद के लिए पार्टी की पसंद रहे हैं। संवैधानिक रूप से अध्यक्ष का चुनाव पीसीसी और एआईसीसी के सदस्यों द्वारा किया जाता है; हालांकि, कई बार कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा ही उम्मीदवार चुना गया है।<ref name="Kumar1990" />
[[File:NSUI National Convention INQUILAB 1.jpg|thumb|right|alt=कांग्रेस छात्र संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन| [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय अधिवेशन ‘इंक़िलाब-1’, जयपुर]]
कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) में लोकसभा और [[राज्यसभा]] के निर्वाचित सांसद शामिल होते हैं। प्रत्येक राज्य में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का एक नेता भी होता है। सीएलपी में उस राज्य के सभी कांग्रेस [[भारत के विधायक]] शामिल होते हैं। जिन राज्यों में कांग्रेस अकेले सरकार बनाती है, वहाँ सीएलपी नेता ही [[मुख्यमंत्री]] होता है। अन्य प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध संगठन इस प्रकार हैं:
* [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई), कांग्रेस का छात्र संगठन।
* [[भारतीय युवा कांग्रेस]], पार्टी का युवा संगठन।
* [[भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस]], श्रमिक संगठन।
* [[अखिल भारतीय महिला कांग्रेस]], पार्टी का महिला संगठन।
* [[किसान और खेत मजदूर कांग्रेस]], पार्टी का किसान प्रकोष्ठ।
* [[अखिल भारतीय प्रोफेशनल्स कांग्रेस]], कार्यरत पेशेवरों का संगठन।
* कांग्रेस [[सेवा दल]], पार्टी का स्वयंसेवी संगठन।<ref>{{cite web|url=http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|title=All India 2014 Results|website=Political Baba|access-date=26 May 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150527000402/http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|archive-date=27 May 2015|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|title=Lok Sabha Election 2014 Analysis, Infographics, Election 2014 Map, Election 2014 Charts|publisher=Firstpost|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924142920/http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|archive-date=24 September 2015}}</ref>
* अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग, जिसे अल्पसंख्यक कांग्रेस भी कहा जाता है, कांग्रेस पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ है। यह [[भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश|भारत के सभी राज्यों]] में ''प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग'' के माध्यम से कार्य करता है।<ref>{{cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/congress-minority-cell-opposes-quota-cut-36478|title=Congress minority cell opposes quota cut|website=Tribuneindia News Service|date=5 February 2020|access-date=6 February 2020}}</ref>
=== चुनाव चिह्न ===
[[File:Cow and Calf INC.svg|thumb|150px|alt=इंदिरा गांधी कांग्रेस का स्वीकृत चुनाव चिह्न| 1971–1977 के दौरान कांग्रेस (आर) पार्टी का चुनाव चिह्न]]
{{as of|2021}}, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] का [[चुनाव चिह्न]], जैसा कि [[भारत निर्वाचन आयोग]] द्वारा स्वीकृत है, सामने की ओर खुली हथेली वाला दाहिने हाथ का प्रतीक है, जिसमें उंगलियाँ आपस में जुड़ी होती हैं;<ref name=hand>{{cite news|title=A Short History of the Congress Hand|url=https://blogs.wsj.com/indiarealtime/2012/03/28/a-short-history-of-the-congress-hand/|access-date=27 June 2014|work=[[The Wall Street Journal]]|agency=[[Dow Jones & Company]]|publisher=[[News Corp (2013–present)|News Corp]]|date=28 March 2012}}</ref> इसे सामान्यतः तिरंगे झंडे के मध्य में प्रदर्शित किया जाता है। हाथ का यह चिह्न पहली बार इंदिरा गांधी द्वारा 1977 के चुनावों के बाद कांग्रेस (आर) से अलग होकर नई कांग्रेस (आई) के गठन के समय अपनाया गया था।<ref name="hand symbol">{{cite news|title=How Indira's Congress got its hand symbol|url=http://www.ndtv.com/article/lifestyle/how-indira-s-congress-got-its-hand-symbol-74104|access-date=27 June 2014|publisher=[[एनडीटीवी]]|date=22 December 2010}}</ref> हाथ शक्ति, ऊर्जा और एकता का प्रतीक है।
नेहरू के नेतृत्व में पार्टी का चुनाव चिह्न ‘जुए के साथ बैलों की जोड़ी’ था, जिसने उस समय की जनता—जो मुख्यतः किसान थी—के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित किया।<ref name=bullocks>{{cite news|title=Indian political party election symbols from 1951|url=http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20140407090702/http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|url-status=dead|archive-date=7 April 2014|access-date=27 June 2014|publisher=CNN-IBN|date=4 April 2014}}</ref>
1969 में कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक संघर्षों के कारण इंदिरा गांधी ने अलग होकर अपनी पार्टी बनाने का निर्णय लिया। कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों ने उनके नेतृत्व का समर्थन किया और नई पार्टी का नाम कांग्रेस (आर) रखा गया। 1971–1977 की अवधि के दौरान इंदिरा गांधी की [[कांग्रेस (आर)]] या कांग्रेस (रिक्विज़िशनिस्ट्स) का चुनाव चिह्न बछड़े के साथ गाय था।<ref name="Electoral Symbol">{{cite news |title=A tale of changing election symbols of Congress, BJP |url=https://timesofindia.indiatimes.com/elections/news/a-tale-of-congress-bjp-election-symbols/articleshow/68732103.cms |access-date=26 May 2020 |work=The Times of India |date=5 April 2019}}</ref><ref name="book"/>
लोकसभा में पार्टी के 153 सदस्यों में से 76 का समर्थन खो देने के बाद, इंदिरा गांधी की नई राजनीतिक इकाई कांग्रेस (आई) या कांग्रेस (इंदिरा) के रूप में विकसित हुई और उन्होंने हाथ (खुली हथेली) को चुनाव चिह्न के रूप में अपनाया।
=== वंशवाद ===
भारत की कई [[भारत के राजनीतिक दलों की सूची|राजनीतिक पार्टियों]] में वंशवाद अपेक्षाकृत सामान्य है, और कांग्रेस पार्टी भी इसका अपवाद नहीं है।<ref name="Denyer2014">{{cite book|author=Simon Denyer|title=Rogue Elephant: Harnessing the Power of India's Unruly Democracy|url=https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny|url-access=registration|date=24 June 2014|publisher=Bloomsbury USA|isbn=978-1-62040-608-3|pages=[https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny/page/115 115]–116}}</ref> [[नेहरू–गांधी परिवार]] के छह सदस्य पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं।<ref name="Gandhi presidents">{{cite news |last1=Radhakrishnan |first1=Sruthi |title=Presidents of Congress past: A look at the party's presidency since 1947 |url=https://www.thehindu.com/news/national/presidents-of-congress-past-a-look-at-the-partys-presidency-since-1947/article21639174.ece |access-date=26 May 2020 |work=The Hindu |date=14 December 2017}}</ref>
[[भारत में आपातकाल]] के दौरान पार्टी पर इंदिरा गांधी के परिवार का प्रभाव बढ़ गया, जिसमें उनके छोटे पुत्र [[संजय गांधी]] की प्रमुख भूमिका रही।<ref name="Tarlo2003">{{cite book|author=Emma Tarlo|title=Unsettling Memories: Narratives of the Emergency in Delhi|url=https://books.google.com/books?id=3IO1WB2H8UUC&pg=PR5|date=24 July 2003|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23122-1|pages=27–29}}</ref> इस अवधि को परिवार के प्रति चाटुकारिता और अधीनता से जोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी की हत्या के बाद [[राजीव गांधी]] का उत्तराधिकारी के रूप में चयन हुआ। बाद में राजीव गांधी की हत्या के पश्चात पार्टी ने [[सोनिया गांधी]] को उनका उत्तराधिकारी चुना, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।<ref name="Bose2013">{{cite book|author=Sumantra Bose|title=Transforming India|url={{Google books|reiwAAAAQBAJ|page=PP8|plainurl=yes}}|date=16 September 2013|publisher=Harvard University Press|isbn=978-0-674-72819-6|pages=28–29}}</ref>
1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन से लेकर 2022 तक, 1991 से 1998 के बीच की अवधि को छोड़कर, पार्टी अध्यक्ष उनके ही परिवार से रहा। लोकसभा के पिछले तीन चुनावों को मिलाकर देखें तो कांग्रेस के 37 प्रतिशत सांसदों के परिवार के सदस्य उनसे पहले राजनीति में सक्रिय रहे हैं।<ref name="Chandra2016">{{cite book|editor1=Kanchan Chandra|author1=Adam Ziegfeld|title=Democratic Dynasties: State, Party and Family in Contemporary Indian Politics|url={{Google books|tesIDAAAQBAJ|page=PR10|plainurl=yes}}|date=28 April 2016|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-12344-1|page=105}}</ref>
== काँग्रेस की नीतियों का विरोध ==
समय-समय पर विभिन्न नेताओं ने काँग्रेस की नीतियों का विरोध किया और उसे हटाने के लिये संघर्ष किया।<ref>{{Cite web |url=http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |title=30 rebels against the Nehru-Gandhi dynasty |access-date=16 अप्रैल 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190416041531/http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |archive-date=16 अप्रैल 2019 |url-status=dead }}</ref> इनमें [[राममनोहर लोहिया]] का नाम अग्रणी है जो [[जवाहरलाल नेहरू]] के कट्टर विरोधी थे। इसके अलावा [[जयप्रकाश नारायण]] ने [[इंदिरा गाँधी]] की सत्ता को उखाड़ फेंका और एक नया रूप दिया। [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] ने बोफोर्स दलाली काण्ड को लेकर [[राजीव गाँधी]] को सत्ता से हटा दिया।
=== लोहिया का 'काँग्रेस हटाओ' आन्दोलन ===
'''[[संयुक्त विधायक दल]]''' भी देखें
[[राम मनोहर लोहिया]] लोगों को आगाह करते आ रहे थे कि देश की हालत को सुधारने में काँग्रेस नाकाम रही है। काँग्रेस शासन नए समाज की रचना में सबसे बड़ा रोड़ा है। उसका सत्ता में बने रहना देश के लिये हितकर नहीं है। इसलिए लोहिया ने नारा दिया - "काँग्रेस हटाओ, देश बचाओ।"
1967 के आम चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन हुआ। देश के 9 राज्यों - [[पश्चिम बंगाल]], [[बिहार]], [[उड़ीसा]], [[मध्यप्रदेश]], [[तमिलनाडु]], [[केरल]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] में गैर काँग्रेसी सरकारें गठित हो गई। लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने।
=== जेपी आन्दोलन ===
{{मुख्य|सम्पूर्ण क्रांति}}
सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण ने इन्दिरा गान्धी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये [[सम्पूर्ण क्रांति|सम्पूर्ण क्रान्ति]] का नारा दिया। आन्दोलन को भारी जनसमर्थन मिला। इससे निपटने के लिये इन्दिरा गान्धी ने देश में [[आपातकाल|इमर्जेंसी]] लगा दी। विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इसका आम जनता में जमकर विरोध हुआ। [[जनता पार्टी]] की स्थापना हुई और सन् 1977 में काँग्रेस पार्टी बुरी तरह हारी। पुराने काँग्रेसी नेता [[मोरारजी देसाई]] के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी किन्तु [[चौधरी चरण सिंह]] की महत्वाकांक्षा के कारण वह सरकार अधिक दिनों तक न चल सकी।
=== भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन ===
{{मुख्य|बोफोर्स घोटाला}}
सन् 1987 में यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कम्पनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकायी थी। उस समय केन्द्र में काँग्रेस की सरकार थी और उसके प्रधानमन्त्री राजीव गान्धी थे। स्वीडन रेडियो ने सबसे पहले 1987 में इसका खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स काण्ड के नाम से जाना जाता हैं। इस खुलासे के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने [[सरकार]] के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन चलाया जिसके परिणाम स्वरूप [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] प्रधान मन्त्री बने।
=== 'कांग्रेस-मुक्त भारत' अभियान ===
जून २०१३ में [[गोवा]] में हुई [[भारतीय जनता पार्टी]] की कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री [[नरेंद्र मोदी]] को 2014 चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष घोषित कर दिया तब इस घोषणा के कुछ देर बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "वरिष्ठ नेताओं ने मुझमें विश्वास जताया है. हम कांग्रेस मुक्त भारत निर्माण बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे. आपके समर्थन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद।" फिर सन २०१९ में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि '[[महात्मा गांधी]] खुद कांग्रेस को खत्म करना चाह रहे थे। इसलिए कांग्रेस-मुक्त भारत मेरा नारा नहीं है, लेकिन मैं तो गांधी जी की इच्छा पूरी कर रहा हूं। श्रद्धांजलि के रूप में ये तो करना ही करना है, कितनी भी मिलावट कर लो बच नहीं सकते।'<ref>[https://hindi.oneindia.com/news/india/congress-mukt-bharat-was-mahatma-gandhi-s-idea-not-mine-narendra-modi-492321.html 'कांग्रेस मुक्त भारत' का आइडिया गांधीजी का था, मेरा नहीं : पीएम मोदी]</ref> बाद में उन्होंने 'कांग्रेस-मुक्त भारत' की उनकी अवधारणा को समझाते हुए कहा था कि कांग्रेस-मुक्त भारत का उनका नारा राजनीतिक रूप से मुख्य विपक्षी दल को समाप्त करने का नहीं, बल्कि देश को 'कांग्रेस संस्कृति' से छुटकारा दिलाने के लिए है।
एक दूसरा विचार यह भी है कि [[नन्दमूरि तारक रामाराव|एन टी रामाराव]] के राजनीतिक सिद्धांत में कांग्रेस-विरोधी विचाराधारा इस हद तक समाहित थी कि उन्हें ‘ कांग्रेस मुक्त भारत ’ के सिद्धांत का मूल प्रस्तावक कहा जा सकता है। यह बात पत्रकार रमेश कांदुला ने [[तेलुगु देशम पार्टी]] के संस्थापक के बारे में अपनी किताब ‘मैवरिक मसीहा : ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ एन टी रामा राव’ में लिखा है, ‘‘एनटीआर ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कांग्रेस के खिलाफ बिना समझौते के लड़ाई लड़ी।
==प्रधानमंत्रियों की सूची ==
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"| प्रधानमंत्री
! rowspan="2"| चित्र
! colspan="3"| '''कार्यकाल'''
'''<small>वर्ष एवं दिन में अवधि</small>'''
! rowspan="2" | सरकार
! rowspan="2" | लोक सभा
! rowspan="2" | निर्वाचन क्षेत्र
! rowspan="2" | राष्ट्राध्यक्ष
|-
!प्रारंभ
!समाप्ति
! अवधि
|-
| rowspan="4" |[[जवाहरलाल नेहरू]]
<small>(1889–1964)</small>
| rowspan="4" |[[File:Jawaharlal Nehru, 1947.jpg|80px]]
|15 अगस्त 1947
|15 अप्रैल 1952
| rowspan="4" |{{age in years and days|1947|08|15|1964|5|27}}
|[[प्रथम नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू १]]
| colspan="3" | [[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|-
|15 अप्रैल 1952
|4 अप्रैल 1957
|[[द्वितीय नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू २]]
| [[प्रथम लोक सभा]]
| rowspan="3" |[[फूलपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|फूलपुर]]
| rowspan="2" |[[राजेन्द्र प्रसाद]]
|-
|17 अप्रैल 1957
|2 अप्रैल 1962
|नेहरू ३
| [[द्वितीय लोक सभा]]
|-
|2 अप्रैल 1962
|27 मई 1964
|नेहरू ४
| rowspan="5" | [[तृतीय लोक सभा]]
| rowspan="5" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
| rowspan="2" | [[गुलज़ारीलाल नंदा]]
<small>(1898–1998)</small>
| rowspan="2" |[[File:Gulzarilal Nanda 1999 stamp of India.jpg|80px]]
|27 मई 1964
|9 जून 1964
| rowspan="2" |26 दिन
| नंदा १
| [[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|11 जनवरी 1966
|24 जनवरी 1966
|नंदा I २
|[[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|[[लाल बहादुर शास्त्री]]
<small>(1904–1966)</small>
|[[File:Lal Bahadur Shastri (cropped).jpg|80px]]
|9 जून 1964
|11 जनवरी 1966
|{{age in years and days|1964|6|9|1966|1|11}}
|शास्त्री
|[[इलाहाबाद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|इलाहाबाद]]
|-
| rowspan="4" |[[इंदिरा गांधी]]
<small>(1917–1984)</small>
| rowspan="4" |[[File:Indira Gandhi official portrait.png|80px]]
|24 जनवरी 1966
|13 मार्च 1967
| rowspan="4" |15 वर्ष, 350 दिन
|इंदिरा १
|[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, उत्तर प्रदेश]]
|-
|13 मार्च 1967
|18 मार्च 1971
|इंदिरा २
| [[चौथी लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[रायबरेली लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|रायबरेली]]
| rowspan="3" |[[ज़ाकिर हुसैन]]<br/>[[वी॰ वी॰ गिरि|वी. वी. गिरि]]<br/>''[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]''<br/>[[फखरुद्दीन अली अहमद]]<br/>[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]<br/>[[नीलम संजीव रेड्डी]]<br/>[[ज़ैल सिंह]]
|-
|18 मार्च 1971
|24 मार्च 1977
|इंदिरा ३
| [[पाँचवीं लोक सभा]]
|-
| 14 जनवरी 1980
| 31 अक्टूबर 1984
|इंदिरा ४
| rowspan="2" | [[सातवीं लोक सभा]]
|[[मेदक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|मेदक]]
|-
| rowspan ="2" |[[राजीव गांधी]]
<small>(1944–1991)</small>
| rowspan ="2" |[[File:RajivGandhi.jpg|frameless|100x100px]]
|31 अक्टूबर 1984
|31 दिसंबर 1984
| rowspan ="2" |{{age in years and days|1984|10|31|1989|12|2}}
|राजीव १
| rowspan="2" |[[अमेठी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|अमेठी]]
| rowspan="2" |[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|31 दिसंबर 1984
|2 दिसंबर 1989
|राजीव २
| [[आठवीं लोक सभा]]
|-
|[[पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव]]
<small>(1921–2004)</small>
|[[File:Visit of Narasimha Rao, Indian Minister for Foreign Affairs, to the CEC (cropped).jpg|80px]]
|21 जून 1991
|16 मई 1996
|{{age in years and days|1991|6|21|1996|5|16}}
|राव
| [[दसवीं लोक सभा]]
|[[नांदयाल लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|नांदयाल]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
| rowspan ="2" |[[मनमोहन सिंह]]
<small>(1932–2024)</small>
| rowspan ="2" |[[File:Prime Minister Dr. Manmohan Singh in March 2014.jpg|80px]]
|22 मई 2004
|26 मई 2009
| rowspan="2" |{{age in years and days|2004|5|22|2014|5|26}}
|सिंह १
| [[चौदहवीं लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, असम]]
| rowspan="2" |[[ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]<br/>[[प्रतिभा पाटिल]]<br/>[[प्रणब मुखर्जी]]
|-
|22 मई 2009
|26 मई 2014
|सिंह २
| [[पंद्रहवीं लोक सभा के सदस्यों की सूची|पंद्रहवीं लोक सभा]]
|}
==राष्ट्रपतियों की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[राष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं:-
#{{further|भारत के राष्ट्रपति}}
{| class="wikitable sortable" style="width:100%; text-align:center"
! rowspan="2" |चित्र
! rowspan="2" |नाम
{{small|{{nowrap|(जन्म–मृत्यु)}}}}
! rowspan="2" |गृह राज्य
! rowspan="2" |पूर्व पद
! colspan="3" |कार्यकाल
! rowspan="2" |शपथ दिलाने वाले
(मुख्य न्यायाधीश)
! rowspan="2" |चुनाव
! rowspan="2" |चुनाव मानचित्र
! rowspan="2" |[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
| rowspan="3" |[[File:Rajendra_Prasad_(Indian_President),_signed_image_for_Walter_Nash_(NZ_Prime_Minister),_1958_(16017609534).jpg|124x124px]]
| rowspan="3" |'''[[राजेन्द्र प्रसाद]]'''
{{small|(1884–1963)}}
| rowspan="3" |[[बिहार]]
| rowspan="3" |कृषि मंत्री
|26 जनवरी 1950
|13 मई 1952
| rowspan="3" |12 वर्ष, 107 दिन
|[[एच जे कनिया|एच. जे. कानिया]]
|1950
|
|{{Endash}}
|-
|13 मई 1952
|13 मई 1957
|[[एम पी शास्त्री|एम. पतंजलि शास्त्री]]
|1952
|[[File:1952_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
|13 मई 1957
|13 मई 1962
|[[एस आर दास|सुधी रंजन दास]]
|1957
|[[File:1957_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|-
|[[File:President_Fakhruddin_Ali_Ahmed.jpg|133x133px]]
|'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(1905–1977)}}
|[[दिल्ली]]
|कृषि मंत्री
|24 अगस्त 1974
|11 फरवरी 1977{{ref label|†|†|†}}
|2 वर्ष, 171 दिन
|[[ए एन रे|ए. एन. रे]]
|[[1974 भारतीय राष्ट्रपति चुनाव|1974]]
|[[File:1974_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[गोपाल स्वरूप पाठक]]
----[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]
|-
| style="background:wheat;" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| style="background:wheat;" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
|[[कर्नाटक]]
| style="background:wheat;" |[[कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की सूची|कर्नाटक के मुख्यमंत्री]]
| style="background:wheat;" |11 फरवरी 1977
| style="background:wheat;" |25 जुलाई 1977
| style="background:wheat;" |164 दिन
|-
|[[File:President_Giani_Zail_Singh_(cropped).jpg|134x134px]]
|'''[[ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(1916–1994)}}
|[[पंजाब]]
|[[पंजाब (भारत) के मुख्यमंत्रियों की सूची|पंजाब के मुख्यमंत्री]]
|25 जुलाई 1982
|25 जुलाई 1987
|5 वर्ष
|[[वाई वी चंद्रचूड़|वाई. वी. चंद्रचूड़]]
|1982
|[[File:1982_Indian_Presidential_Election.svg|50x50px]]
|[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
----[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
|'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
|[[तमिलनाडु]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
|25 जुलाई 1987
|25 जुलाई 1992
|5 वर्ष
|[[आर एस पाठक|रघुनंदन स्वरूप पाठक]]
|1987
|[[File:Indian_presidential_election,_1987.svg|50x50px]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
|[[File:Shanker_Dayal_Sharma.jpg|127x127px]]
|'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
|[[मध्य प्रदेश]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[महाराष्ट्र के राज्यपालों की सूची|महाराष्ट्र के राज्यपाल]]
|25 जुलाई 1992
|25 जुलाई 1997
|5 वर्ष
|[[एम एच कनिया|एम. एच. कानिया]]
|1992
|[[File:1992_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[के. आर. नारायणन]]
|-
|[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
|'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
|[[केरल]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|25 जुलाई 1997
|25 जुलाई 2002
|5 वर्ष
|[[जे एस वर्मा|जे. एस. वर्मा]]
|1997
|[[File:Indian_presidential_election,_1997.svg|59x59px]]
|[[कृष्ण कान्त|कृष्ण कांत]]
|-
|[[File:The_President_of_India,_Smt._Pratibha_Patil.jpg|140x140px]]
|'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(जन्म 1934)}}
|[[महाराष्ट्र]]
|[[राजस्थान के राज्यपालों की सूची|राजस्थान की राज्यपाल]]
|25 जुलाई 2007
|25 जुलाई 2012
|5 वर्ष
|[[के. जी. बालकृष्णन]]
|2007
|[[File:2007_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
|-
|[[File:Pranab_Mukherjee_Portrait_(cropped).jpg|129x129px]]
|'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(1935–2020)}}
|[[पश्चिम बंगाल]]
|[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
[[भारत के वित्त मंत्री|वित्त मंत्री]]
[[भारत के विदेश मंत्री|विदेश मंत्री]]
|25 जुलाई 2012
|25 जुलाई 2017
|5 वर्ष
|[[एस एच कापड़िया|एस. एच. कपाड़िया]]
|2012
|[[File:Indian_presidential_election_2012.svg|59x59px]]
|}
==उपराष्ट्रपतियो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[उपराष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं ।
{{further|भारत के उपराष्ट्रपति}}
{| class="wikitable" style="line-height:1.4em; text-align:center"
|+
!चित्र
!नाम
{{small|(जीवनकाल)}}
!गृह राज्य
! colspan="2" |कार्यकाल
{{small|वर्ष व दिन में अवधि}}
!निर्वाचन
!पूर्व पद
!राष्ट्रपति
{{small|(कार्यकाल)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| rowspan="3" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
| rowspan="3" |[[कर्नाटक]]
|{{small|31 अगस्त}}
1974
|{{small|31 अगस्त}}
1979
| rowspan="2" |[[1974 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1974]]
{{small|(78.7%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[मैसूर राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1958–1962)}}
* [[पुदुचेरी]] के उपराज्यपाल {{small|(1968–1972)}}
* [[ओडिशा]] के राज्यपाल {{small|(1972–1974)}}
!'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(24 अगस्त 1974–<br>11 फरवरी 1977)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1969|8|31|1974|8|31}}
! style="font-weight:normal" |'''''स्वयं'''''
(कार्यवाहक)
{{small|(11 फरवरी 1977–<br>25 जुलाई 1977)}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
मैसूर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल। 1974 में पाँचवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी [[निरल एनम होरो]] को पराजित किया। राष्ट्रपति [[फखरुद्दीन अली अहमद]] के निधन के पश्चात 11 फरवरी 1977 को कार्यवाहक राष्ट्रपति बने तथा जुलाई 1977 में [[नीलम संजीव रेड्डी]] के निर्वाचन तक इस पद पर रहे। 1979 में कार्यकाल पूर्ण होने पर उपराष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हुए।
! style="font-weight:normal" |'''[[नीलम संजीव रेड्डी]]'''
{{small|(25 जुलाई 1977–<br>25 जुलाई 1982)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
| rowspan="3" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
| rowspan="3" |[[तमिलनाडु]]
|{{small|31 अगस्त}}
1984
|{{small|24 जुलाई}}
1987{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1984 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1984]]
{{small|(71.05%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1952–1957)}}
* उद्योग, श्रम, सहकारिता मंत्री, [[मद्रास राज्य]] {{small|(1957–1967)}}
* [[भारत के वित्त मंत्री|केंद्रीय वित्त मंत्री]] {{small|(1980–1982)}}
* [[भारत के गृह मंत्री|केंद्रीय गृह मंत्री]] {{small|(1982)}}
* [[भारत के रक्षा मंत्री|केंद्रीय रक्षा मंत्री]] {{small|(1982–1984)}}
! rowspan="3" |'''[[ज़ैल सिंह|ज्ञानी ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(25 जुलाई 1982–<br>25 जुलाई 1987)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1984|8|31|1987|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1984 में [[बी. सी. कांबले]] को पराजित कर सातवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कूटनीतिक यात्राओं में राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व किया तथा प्रधानमंत्री [[राजीव गांधी]] और राष्ट्रपति [[ज़ैल सिंह]] के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 25 जुलाई 1987 को राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:Shri_Shankar_Dayal_Sharma.jpg|140x140px]]
| rowspan="3" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
| rowspan="3" |[[मध्य प्रदेश]]
|{{small|3 सितंबर}}
1987
|{{small|24 जुलाई}}
1992{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1987 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1987]]
{{small|(निर्विरोध)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[भोपाल राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1952–1956)}}
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के राष्ट्रीय अध्यक्ष {{small|(1972–1974)}}
* [[भारत के संचार मंत्री|केंद्रीय संचार मंत्री]] {{small|(1974–1977)}}
* [[आंध्र प्रदेश]] {{small|(1984–1985)}}, [[पंजाब]] {{small|(1985)}}, [[महाराष्ट्र]] {{small|(1985–1987)}} के राज्यपाल
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(25 जुलाई 1987–<br>25 जुलाई 1992)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1987|9|3|1992|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1987 में आठवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुए। 1992 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
| rowspan="3" |'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
| rowspan="3" |[[केरल]]
|{{small|21 अगस्त}}
1992
|{{small|24 जुलाई}}
1997{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1992 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1992]]
{{small|(99.86%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[थाईलैंड]] एवं [[तुर्की]] में भारत के राजदूत
* [[भारत के विदेश मंत्रालय]] में सचिव
* [[चीन]] एवं [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में राजदूत
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1984–1992)}}
* योजना, विदेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों में राज्य मंत्री
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(25 जुलाई 1992–<br>25 जुलाई 1997)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1992|8|21|1997|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक एवं केंद्रीय मंत्री। 1992 में नौवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए और [[जोगिंदर सिंह (राजनीतिज्ञ)|जोगिंदर सिंह]] को पराजित किया। भारत के पहले दलित उपराष्ट्रपति। 1997 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="6" |[[File:The_Vice_President_Shri_M._Hamid_Ansari_in_July_2016.jpg|134x134px]]
| rowspan="6" |'''[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]'''
{{small|(जन्म 1937)}}
| rowspan="6" |[[पश्चिम बंगाल]]
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2007
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |[[2007 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2007]]
{{small|(60.50%)}}
| rowspan="5" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[संयुक्त अरब अमीरात]] में राजदूत
* [[ऑस्ट्रेलिया]] में उच्चायुक्त
* [[अफगानिस्तान]], [[ईरान]], [[सऊदी अरब]] में राजदूत
* [[संयुक्त राष्ट्र]] में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
* [[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय]] के कुलपति
* [[राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग]] के अध्यक्ष
! style="font-weight:normal" |'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(25 जुलाई 2007–<br>25 जुलाई 2012)}}
|-
! rowspan="2" style="font-weight:normal" |'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(25 जुलाई 2012–<br>25 जुलाई 2017)}}
|-
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2017
| rowspan="3" |[[2012 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2012]]
{{small|(67.31%)}}
|-
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[राम नाथ कोविंद]]'''
{{small|(25 जुलाई 2017–<br>25 जुलाई 2022)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|2007|8|11|2017|8|11}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक। 2007 में बारहवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए तथा 2012 में पुनः निर्वाचित हुए। [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] के बाद पुनः निर्वाचित होने वाले पहले एवं सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उपराष्ट्रपति। 11 अगस्त 2017 को कार्यकाल पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए।
|}
==उपप्रधानमंत्रियो की सूची==
{{further|भारत के उपप्रधानमंत्री}}
{|class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
!rowspan=2|चित्र
!rowspan=2|नाम<br />{{small|(जन्म–मृत्यु)}}
!colspan=3 |कार्यकाल
!rowspan=2 |[[लोक सभा|लोक सभा]]<br />{{small|([[भारत में चुनाव|चुनाव]])}}
!rowspan=2|निर्वाचन क्षेत्र<br />{{small|(सदन)}}
!rowspan=2|[[भारत के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]]
! rowspan="2" |राष्ट्राध्यक्ष
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
|[[File:Sardar patel (cropped).jpg|100px]]
|'''[[वल्लभभाई पटेल]]'''<br /><small>(1875–1950)</small>
|15 अगस्त 1947
|15 दिसंबर 1950 ''<small>(मृत्यु)</small>''
|3 वर्ष, 122 दिन
|[[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|लागू नहीं
|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|''कोई नहीं''
|-
|[[File:Morarji Desai During his visit to the United States of America .jpg|100px]]
|'''[[मोरारजी देसाई]]'''<br /><small>(1896–1995)</small>
|13 मार्च 1967
|19 जुलाई 1969
|2 वर्ष, 128 दिन
|[[चौथी लोक सभा|4वीं]]<br /><small>([[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]])</small>
|[[सूरत लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|सूरत]]<br /><small>([[लोक सभा]])</small>
|[[इंदिरा गांधी]]
|[[ज़ाकिर हुसैन]]
|}
==लोकसभा अध्यक्षो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी को सत्ता मिलने के बाद, पार्टी ने विभिन्न राजनेता [[लोकसभा]] स्पीकर के रुप में निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं :-
# [[गणेश वासुदेव मावलंकर]] (1952 - 1956)
# [[अनन्त शयनम् अयंगार]] (1956 - 1962)
# [[सरदार हुकम सिंह]] (1962 - 1967)
# [[नीलम संजीव रेड्डी]] (1967 - 1969
# जी. एस. ढिल्लों (1969 - 1975)
# [[बलि राम भगत]] (1976 - 1977)
# [[मीरा कुमार]] (2009-2014)
== विपक्ष के नेता ==
* [[अधीर रंजन चौधरी|राहुल गांधी]] - [[लोकसभा]]
* [[मल्लिकार्जुन खड़गे]] - [[राज्यसभा]]
==आम चुनाव परिणाम ==
1952 में हुए [[भारतीय आम चुनाव, १९५१-१९५२|प्रथम संसदीय]] आम चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 479 में से 364 सीटें जीतीं, जो कुल लड़ी गयी सीटों का 76 प्रतिशत था।<ref name="India Today 2007">{{cite web | title=Congress led by Jawaharlal Nehru won the first general election in 1952 | website=India Today | date=2 July 2007 | url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/20070702-1952-first-lok-sabha-elections-748237-2007-07-01 | access-date=20 March 2024}}</ref> आईएनसी का कुल मतों में से वोट शेयर 45 प्रतिशत था।<ref name="Ganguly 2022">{{cite web | last=Ganguly | first=Siddharth | title=The Parties That Contested India's First General Election | website=The Wire | date=2 February 2022 | url=https://thewire.in/history/the-parties-that-contested-indias-first-general-election | access-date=20 March 2024}}</ref> [[भारतीय आम चुनाव, १९७१|1971 के आम चुनाव]] तक पार्टी का मतदान प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत पर बना रहा। हालांकि, [[भारतीय आम चुनाव, १९७७|1977 के आम चुनाव]] आईएनसी के लिए भारी पराजय लेकर आए। कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने अपनी सीटें खो दीं और पार्टी केवल 154 लोकसभा सीटें ही जीत सकी।<ref name="Analysisb">{{cite news |last1=Gupta |first1=Abhinav |title=Lok Sabha Poll Results: A vote-share and performance analysis of BJP vs Congress from 1996 to 2019 |url=https://english.newsnationtv.com/election/lok-sabha-election/lok-sabha-poll-results-a-vote-share-and-performance-analysis-of-bjp-vs-congress-from-1996-to-2019-225277.html |access-date=8 March 2022 |work=News Nation |agency=News Nation Network Pvt Ltd. |date=24 May 2019}}</ref>
इसके बाद आईएनसी ने [[भारतीय आम चुनाव, १९८०|1980 के आम चुनाव]] में सत्ता में वापसी की और कुल मतों के 42.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 353 सीटें जीतीं। कांग्रेस का वोट शेयर 1980 तक बढ़ता रहा और 1984/85 में रिकॉर्ड 48.1 प्रतिशत तक पहुँच गया। अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद [[राजीव गांधी]] ने [[1984 Indian general election|शीघ्र आम चुनाव]] कराने की सिफारिश की। आम चुनाव जनवरी 1985 में होने थे, लेकिन इसके बजाय दिसंबर 1984 में ही करा लिए गए। कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और 533 में से 415 सीटें हासिल कीं, जो स्वतंत्र भारत के लोकसभा चुनावों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बहुमत था।<ref name="Hindustan Times 2003">{{cite web | title=Chronology of Lok Sabha elections (1952–1999) | website=The Hindustan Times| date=13 October 2003 | url=https://www.hindustantimes.com/india/chronology-of-lok-sabha-elections-1952-1999/story-592mMFUB4HLQKlLyUamnjN.html | access-date=20 March 2024}}</ref> इस जीत में पार्टी को 49.1 प्रतिशत वोट मिले, जिससे कुल वोट शेयर बढ़कर 48.1 प्रतिशत हो गया। 1985 में [[पंजाब]] और [[असम]] में हुए चुनावों में कांग्रेस को 32.14 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।<ref name="Ganguly 2022"/>
नवंबर 1989 में 9वीं लोकसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए आम चुनाव आयोजित किए गए।<ref name="Anon">{{cite web | title=Statistical Report on General Elections, 1989 to the Ninth Lok Sabha| url=https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/89_Vol_II.pdf | access-date=20 March 2024}}</ref> इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा, हालांकि वह लोकसभा में सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी रही। 1989 के आम चुनावों में पार्टी का वोट शेयर घटकर 39.5 प्रतिशत रह गया। 13वीं लोकसभा का कार्यकाल अक्टूबर 2004 में समाप्त होना था, लेकिन [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]] (एनडीए) सरकार ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया। फरवरी में लोकसभा भंग कर दी गई और अप्रैल–मई 2004 में चुनाव कराए गए। [[सोनिया गांधी]] के नेतृत्व में आईएनसी अप्रत्याशित रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।<ref name="2004 Result">{{cite news |last1=Chakravarty |first1=Shubhodeep |title=INKredible India: The story of 2004 Lok Sabha election – All you need to know |url=https://zeenews.india.com/lok-sabha-general-elections-2019/inkredible-india-the-story-of-2004-lok-sabha-election-all-you-need-to-know-2204202.html |access-date=10 March 2022 |publisher=Zee News|agency=[[Essel Group]] |date=18 May 2019}}</ref> चुनावों के बाद कांग्रेस ने अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन]] (यूपीए) का गठन किया। यूपीए को [[बहुजन समाज पार्टी]], [[समाजवादी पार्टी]], केरल कांग्रेस और वाम मोर्चा से बाहरी समर्थन मिला, जिससे सरकार को आरामदायक बहुमत प्राप्त हुआ।<ref name="2004 Result"/> 1996 से 2009 के बीच हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने अपने वोट शेयर का लगभग 20 प्रतिशत खो दिया।<ref name="Analysis"/>
[[File:Seats Won by INC in Indian General Elections over the years.png|thumb|650px|center|वर्षों के दौरान भारतीय आम चुनावों में आईएनसी द्वारा जीती गई सीटें]]
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|-
! वर्ष
! विधायिका
! पार्टी नेता
! जीती गई सीटें
! सीटों में परिवर्तन
! मत प्रतिशत
! वोट स्विंग
! परिणाम
|-
|[[1934 भारतीय आम चुनाव|1934]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|5वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[भूलाभाई देसाई]]
|{{Composition bar|42|147|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 42
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|-
|[[1945 भारतीय आम चुनाव|1945]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|6वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[शरत्चन्द्र बोस]]
|{{Composition bar|59|102|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 17
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{partial|[[भारत की अंतरिम सरकार]] (1946–1947)}}
|-
|[[1951 भारतीय आम चुनाव|1951]]
|[[प्रथम लोक सभा|प्रथम लोकसभा]]
|rowspan=3|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|{{Composition bar|364|489|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 364
|44.99%
|{{n/a}}
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1957 भारतीय आम चुनाव|1957]]
|[[द्वितीय लोक सभा|द्वितीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|371|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 7
|47.78%
|{{increase}} 2.79%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1962 भारतीय आम चुनाव|1962]]
|[[तृतीय लोक सभा|तृतीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|361|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 10
|44.72%
|{{decrease}} 3.06%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]]
|[[चौथी लोक सभा|चतुर्थ लोकसभा]]
|rowspan=4|[[इंदिरा गांधी]]
|{{Composition bar|283|520|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 78
|40.78%
|{{decrease}} 2.94%
|{{yes|बहुमत (1967–69)}}
|-
|[[1971 भारतीय आम चुनाव|1971]]
|[[पाँचवीं लोक सभा|पंचम लोकसभा]]
|{{Composition bar|352|518|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 69
|43.68%
|{{increase}} 2.90%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1977 भारतीय आम चुनाव|1977]]
|[[छठी लोक सभा|षष्ठ लोकसभा]]
|{{Composition bar|153|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 199
|34.52%
|{{decrease}} 9.16%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1980 भारतीय आम चुनाव|1980]]
|[[सातवीं लोक सभा|सप्तम लोकसभा]]
|{{Composition bar|351|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 198
|42.69%
|{{increase}} 8.17%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1984 भारतीय आम चुनाव|1984]]
|[[आठवीं लोक सभा|अष्टम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[राजीव गांधी]]
|{{Composition bar|415|533|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 64
|49.01%
|{{increase}} 6.32%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1989 भारतीय आम चुनाव|1989]]
|[[नौंवीं लोक सभा|नवम लोकसभा]]
|{{Composition bar|197|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 218
|39.53%
|{{decrease}} 9.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1991 भारतीय आम चुनाव|1991]]
|[[दसवीं लोक सभा|दशम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[पी. वी. नरसिंह राव]]
|{{Composition bar|244|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 47
|35.66%
|{{decrease}} 3.87%
|{{yes2|अल्पमत}}
|-
|[[1996 भारतीय आम चुनाव|1996]]
|[[ग्यारहवीं लोक सभा|एकादश लोकसभा]]
|{{Composition bar|140|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 104
|28.80%
|{{decrease}} 7.46%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1998 भारतीय आम चुनाव|1998]]
|[[बारहवीं लोक सभा|द्वादश लोकसभा]]
|[[सीताराम केसरी]]
|{{Composition bar|141|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 1
|25.82%
|{{decrease}} 2.98%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1999 भारतीय आम चुनाव|1999]]
|[[तेरहवीं लोक सभा|त्रयोदश लोकसभा]]
|rowspan=2|[[सोनिया गांधी]]
|{{Composition bar|114|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 27
|28.30%
|{{increase}} 2.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[2004 भारतीय आम चुनाव|2004]]
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|[[2009 भारतीय आम चुनाव|2009]]
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|[[2014 भारतीय आम चुनाव|2014]]
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|[[2019 भारतीय आम चुनाव|2019]]
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|[[2024 भारतीय आम चुनाव|2024]]
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|}
== इन्हें भी देखें==
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* [[कांग्रेस कार्यकारिणी समिति]]
* [[ऑल इंडिया महिला कांग्रेस]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास]]
* [[भारत में राजनीतिक दलों की सूची]]
* [[भारत की राजनीति]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची]]
{{div col end}}
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Wikiquote}}
{{Commons category|Indian National Congress}}
* {{official website}}
* [https://web.archive.org/web/20091125084548/http://www.aicc.org.in/new/hindi/home.php काँग्रेस का जालघर]
{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस}}
{{India topics}}
{{Authority control}}
{{भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम}}
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
[[श्रेणी:भारत के राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
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एस. विनायक मिश्रा
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Indian Political Party
| country = [[भारत]]
| party_name = भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस<br/>Indian National Congress
| party_logo = [[File:Indian National Congress hand logo.svg|150px]]
| abbreviation = कांग्रेस, आईएनसी
| leader = [[राहुल गांधी]]
| chairman = [[मल्लिकार्जुन खड़गे]]
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| presidium = अखिल भारतीय काँग्रेस कमिटी
| founder = [[एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम]]
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| foundation = {{Start date and age|df=yes|p=y|1885|12|28}}
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| publication = {{ubl|काँग्रेस सन्देश|[[नेशनल हेराल्ड]]}}
| students = [[नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया]]
| youth = [[भारतीय युवा काँग्रेस]]
| women = [[ऑल इंडिया महिला कांग्रेस]]
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| ideology = {{ublist<!--IMPORTANT: Do not change party ideology or position without bringing reliable sources to the Talk page and garnering consensus.-->|[[उदारतावाद]]{{refn|<ref>{{cite book|editor1=Emiliano Bosio|editor2=Yusef Waghid|url=https://books.google.com/books?id=Hb6ZEAAAQBAJ&pg=PA270|title=Global Citizenship Education in the Global South: Educators' Perceptions and Practices|date=31 October 2022|page=270|publisher=Brill|isbn=9789004521742}}</ref><ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield]|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9 }}</ref>}}|सामाजिक उदारवाद{{refn|<ref name="Liberal1">{{cite book|last=DeSouza|first=Peter Ronald|date=2006|title=India's Political Parties Readings in Indian Government and Politics series|url=https://books.google.com/books?id=eeRhDwAAQBAJ&q=Indian+National+Congress+liberal+ideology|publisher=SAGE Publishing|page=420|isbn=978-9-352-80534-1}}</ref><ref name="Liberal2">{{cite book|last1=Rosow|first1=Stephen J.|last2=George|first2=Jim|date=2014|title=Globalization and Democracy|url=https://books.google.com/books?id=v3mVoAEACAAJ|publisher= Rowman & Littlefield|pages=91–96|isbn=978-1-442-21810-9}}</ref><ref name="NSGehlot1991">{{cite book|author=N. S. Gehlot|title=The Congress Party in India: Policies, Culture, Performance|url={{Google books|06HLD2_3Qj4C|page=PM177|keywords=|text=|plainurl=yes}}|year=1991|publisher=Deep & Deep Publications|isbn=978-81-7100-306-8|pages=150–200}}</ref><ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>}}|[[सामाजिक लोकतंत्र]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="Agarwal1989">{{cite book|year=1989|editor1-last=Agrawal|editor1-first=S. P.|editor2-last=Aggarwal|editor2-first=J. C.|title=Nehru on Social Issues|location=New Delhi|publisher= Concept Publishing|isbn=978-817022207-1}}</ref>}}|आर्थिक उदारवाद<ref>{{cite web|title=Political Parties|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref name=":5">{{Cite book|last=Mohan, Rakesh.|url=https://www.worldcat.org/oclc/1056070747|title=India Transformed : Twenty-Five Years of Economic Reforms|date=2018 |publisher=Brookings Institution Press|isbn=978-0-8157-3662-2|location=Washington, DC|pages=44–49|oclc=1056070747}}</ref>|[[धर्मनिरपेक्षता]]<ref name="J.Soper">{{cite book|last1=Soper|first1=J. Christopher|last2=Fetzer|first2=Joel S.|date=2018|title=Religion and Nationalism in Global Perspective|url=https://books.google.com/books?id=y7BoDwAAQBAJ |publisher=Cambridge University Press|pages=200–210|isbn=978-1-107-18943-0}}</ref>|[[नागरिक राष्ट्रवाद]]<ref name="J.Soper"/>}}
| international ={{nowrap|[[en:Progressive Alliance|प्रगतिशील गठबंधन]]}}<ref>{{cite web|url=http://progressive-alliance.info/participants/|title=Progressive Alliance Participants|work=Progressive Alliance|access-date=20 March 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20150302142054/http://progressive-alliance.info/participants/|archive-date=2 March 2015|url-status=dead}}</ref><br>{{nowrap|[[समाजवादी इंटरनेशनल]]}}<ref>{{cite web|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticlePageID=931|title=Full Member Parties of Socialist International|work=Socialist International}}</ref><ref name="Sheffer1993">{{cite book|author=Gabriel Sheffer|title=Innovative Leaders in International Politics|url=https://books.google.com/books?id=__efKLSD3M0C&pg=PA202|access-date=30 January 2013|year=1993|publisher=SUNY Press|isbn=978-0-7914-1520-7|page=202}}</ref><ref>{{cite web|title=Meeting of the SI Council at the United Nations in Geneva|url=http://www.socialistinternational.org/viewArticle.cfm?ArticleID=2326|publisher=Socialist International}}</ref>
| colours = {{colorbox|#F37022|border=darkgray}} [[केसरिया|सैफ्रन]]<br>{{colorbox|#FFFFFF|border=darkgray}} [[सफ़ेद]]<br>{{colorbox|#0F823F|border=darkgray}} [[हरा]]<br>(आधिकारिक,<br>[[भारत का ध्वज|भारतीय राष्ट्रीय रंग]]){{efn|The Indian national colours of the Indian flag serve as the official visual identification of the Indian National Congress.}}
<br>{{Colorbox|{{party color|Indian National Congress}}|border=darkgray}} [[आसमानी नीला]]<br>(प्रथागत)
|position = <!-- महत्वपूर्ण। वार्ता पृष्ठ पर विश्वसनीय स्रोत लाए बिना और आम सहमति प्राप्त किए बिना पार्टी की विचारधारा या स्थिति में परिवर्तन न करें। -->{{nowrap|[[केन्द्रवाद]]{{refn|<ref name="Barrington2009"/><ref name="centrist">{{cite web|title=Political Parties – NCERT|url=https://ncert.nic.in/textbook/pdf/jess406.pdf|publisher=National Council of Educational Research and Training|access-date=8 May 2021}}</ref><ref>{{cite book|editor=Jean-Pierre Cabestan, Jacques deLisle|title=Inside India Today (Routledge Revivals)|url=https://books.google.com/books?id=heFSAQAAQBAJ&dq=Centrist+Indian+National+Congress&pg=PR10|date=2013 |publisher=Routledge|isbn=978-1-135-04823-5}}</ref>}}}}
| eci = [[भारत के राजनीतिक दलों की सूची|राष्ट्रीय पार्टी]]
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{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्श्वपट}}
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस''' (संक्षिप्त में, '''भा॰रा॰कां॰'''), सामान्यतः '''कांग्रेस पार्टी''' या बस '''कांग्रेस''' के नाम से जानी जाती है, यह भारत में एक [[राजनीतिक दल]] है। इसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी, यह एशिया और अफ्रीका में ब्रिटिश साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक [[राष्ट्रीयता|राष्ट्रीयता आंदोलन]] था।{{efn|"गैर-यूरोपीय साम्राज्य में उभरने वाला पहला आधुनिक राष्ट्रीयता आंदोलन, और जिसने कई अन्य के लिए प्रेरणा का स्रोत बना, वह भारतीय कांग्रेस थी।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001">{{citation|last=Marshall|first=P. J.|title=ब्रिटिश साम्राज्य का कैम्ब्रिज चित्रित इतिहास|url={{Google books|S2EXN8JTwAEC|page=PA179|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=179|year=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-00254-7}}</ref> 19वीं सदी के अंत से, और विशेष रूप से 1920 के बाद, [[महात्मा गांधी]] के नेतृत्व में, कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख नेता बन गई।<ref name="research">{{cite web|url=http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बारे में जानकारी|website=open.ac.uk|publisher=Arts & Humanities Research council|access-date=29 July 2015|archive-date=22 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180922061005/http://www.open.ac.uk/researchprojects/makingbritain/content/indian-national-congress|url-status=dead}}</ref> कांग्रेस ने [[यूनाइटेड किंगडम]] से भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद की,{{efn|"दक्षिण एशियाई पार्टियों में कई पोस्ट-कोलोनियल दुनिया में सबसे पुरानी पार्टियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रमुख 129 वर्ष पुरानी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस है जिसने 1947 में भारत को स्वतंत्रता दिलाई।"<ref name="Chiriyankandath2016" />}}<ref name="Chiriyankandath2016">{{citation|last=Chiriyankandath|first=James|title=दक्षिण एशिया में पार्टियाँ और राजनीतिक परिवर्तन|url={{Google books|c4n7CwAAQBAJ|page=PA2|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=2|year=2016|publisher=Routledge|isbn=978-1-317-58620-3}}</ref>{{efn|"जिस संगठन ने भारत को स्वतंत्रता दिलाई, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस थी, जिसकी स्थापना 1885 में हुई।"<ref name="KopsteinLichbach2014" /> }}<ref name="KopsteinLichbach2014">{{citation|last1=Kopstein|first1=Jeffrey|title=तुलनात्मक राजनीति: एक बदलते वैश्विक आदेश में हित, पहचान और संस्थान|url={{Google books|L2jwAwAAQBAJ|page=PA344|keywords=|text=|plainurl=yes}}|page=344|year=2014|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-139-99138-4|last2=Lichbach|first2=Mark|last3=Hanson|first3=Stephen E.}}</ref> और ब्रिटिश साम्राज्य में अन्य विरोधी उपनिवेशवादी राष्ट्रीयता आंदोलनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।{{efn|"... विरोधी उपनिवेशवादी आंदोलन ... जो, ब्रिटिश साम्राज्य में कई अन्य राष्ट्रीयता आंदोलनों की तरह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से गहरा प्रभावित थे।"<ref name="Marshall2001" />}}<ref name="Marshall2001" /> १९वीं सदी के आखिर में और शुरूआत से लेकर मध्य २०वीं सदी में, कांग्रेस [[भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]] में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केंद्रीय भागीदार बनी।
आईएनसी एक "[[बड़ी तम्बू]]" पार्टी है जिसे भारतीय राजनीतिक स्पेक्ट्रम के [[केंद्र]] पर स्थित माना गया है।<ref name="Barrington2009" /><ref name="centrist" /><ref name="British-Journal">{{cite journal|last1=Saez|first1=Lawrence|last2=Sinha|first2=Aseema|year=2010|title=राजनीतिक चक्र, राजनीतिक संस्थान और भारत में सार्वजनिक व्यय, 1980–2000|url=https://archive.org/details/sim_british-journal-of-political-science_2010-01_40_1/page/91|journal=British Journal of Political Science|volume=40|issue=1|pages=91–113|doi=10.1017/s0007123409990226|issn=0007-1234|s2cid=154767259}}</ref> पार्टी ने 1885 में [[मुंबई|बंबई]] में अपनी पहली बैठक आयोजित की जहाँ वोमेश चंद्र बनर्जी ने इसकी अध्यक्षता की।<ref>{{Cite web|url=https://inc.in/|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|website=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|access-date=2023-11-05}}</ref> 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस एक [[कैच-ऑल पार्टी|कैच-ऑल]] और [[धर्मनिरपेक्षता|धर्मनिरपेक्ष]] पार्टी के रूप में उभरी, जो अगले 50 वर्षों तक भारतीय राजनीति में हावी रही। पार्टी के पहले प्रधानमंत्री, [[पंडित जवाहरलाल नेहरू]], ने योजनाबंदी आयोग बनाकर, पांच वर्षीय योजनाएँ पेश करके, मिश्रित अर्थव्यवस्था को लागू करके और [[धर्मनिरपेक्ष राज्य]] स्थापित करके कांग्रेस का समर्थन किया। नेहरू की मृत्यु के बाद और [[लाल बहादुर शास्त्री]] की संक्षिप्त अवधि के बाद, [[इंदिरा गांधी]] पार्टी की नेता बन गईं। स्वतंत्रता के बाद से 17 आम चुनावों में, इसने सात बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया है और तीन बार सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व किया है, केंद्रीय सरकार का नेतृत्व 54 वर्षों से अधिक समय तक किया है। कांग्रेस पार्टी से छह प्रधानमंत्री रहे हैं, पहले [[जवाहरलाल नेहरू]] (1947–1964) और सबसे हाल के मनमोहन सिंह (2004–2014) हैं।
== इतिहास ==
भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का इतिहास दो विभिन्न काल से गुज़रता हैं।
*भारतीय स्वतन्त्रता से पूर्व - जब यह पार्टी स्वतन्त्रता अभियान की संयुक्त संगठन थी।
*भारतीय स्वतन्त्रता के बाद - जब यह पार्टी [[भारतीय राजनीति]] में प्रमुख स्थान पर विद्यमान रही हैं।
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[[File:Indian National Congress Flag.svg|thumb|पार्टी का वर्तमान ध्वज]]
[[File:1931 Flag of India.svg|thumb|यह ध्वज 1931 में अपनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान [[आज़ाद हिंद|स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार]] द्वारा उपयोग किया गया]]
[[File:Marche sel.jpg|thumb|नमक सत्याग्रह के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ महात्मा गांधी]]
[[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई, बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय में इसका गठन किया गया। जब देश भर से आए 72 प्रतिनिधि [[मुंबई|बंबई]] में एकत्र हुए। प्रमुख प्रतिनिधियों में [[दादाभाई नौरोजी]],[[बदरुद्दीन तैयबजी]], [[फिरोज़शाह मेहता]], [[डब्ल्यू. सी. बनर्जी]],[[विनायक मिश्रा (भीम)]],[[मलखान(सुखाई]], [[मल्हूर मामा]],[[विदेशी]],[[माता प्रसाद]],[[मंगली]],[[एस. रामास्वामी मुदलियार]],<ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=rzWKAAAAMAAJ&q=Rao+Bahadur+Savalai+Mudaliar |title=The Encyclopaedia of Indian National Congress: 1885–1890, The founding fathers |author=A. Moin Zaidi |year=1976 |page=609 |language=en }}</ref> [[एस. सुब्रमण्यम अय्यर]] तथा [[रोमेश चंद्र दत्त]] शामिल थे।
एक अंग्रेज़, [[एलन ऑक्टेवियन ह्यूम]], जो ब्रिटिश शासन के पूर्व सिविल सेवक थे, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
=== स्वतन्त्रता संग्राम ===
{{मुख्य|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम}}
====स्थापना और प्रारंभिक दिन (1885–1905)====
सेवानिवृत्त ब्रिटिश भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम ने शिक्षित भारतीयों के बीच नागरिक और राजनीतिक संवाद का मंच बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की। [[1857 का भारतीय विद्रोह]] के बाद, भारत का नियंत्रण [[ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी|ईस्ट इंडिया कंपनी]] से [[ब्रिटिश साम्राज्य]] में स्थानांतरित कर दिया गया। ब्रिटिश नियंत्रित भारत, जिसे [[ब्रिटिश राज]] या बस राज कहा जाता है, ने भारतीयों को अपने शासन का समर्थन करने के लिए और इसके औचित्य को प्रस्तुत करने के लिए काम किया, जो आमतौर पर ब्रिटिश संस्कृति और राजनीतिक सोच से अधिक परिचित और अनुकूल थे। विडंबना यह है कि कांग्रेस के बढ़ने और जीवित रहने के कुछ कारण, विशेष रूप से 19वीं सदी में ब्रिटिश प्रभुत्व के समय, ब्रिटिश अधिकारियों के संरक्षण और अंग्रेज़ी भाषा में शिक्षा प्राप्त भारतीयों और एंग्लो-भारतीयों के बढ़ते वर्ग के माध्यम से थे।
ह्यूम ने एक संगठन शुरू करने का प्रयास किया। उन्होंने [[कलकत्ता विश्वविद्यालय]] के चयनित पूर्व छात्रों से संपर्क करना शुरू किया। 1883 में एक पत्र में, उन्होंने लिखा कि, <blockquote>हर राष्ट्र को उसी तरह का शासन प्राप्त होता है जैसा वह योग्य होता है। यदि आप, चुने हुए लोग, राष्ट्र के सबसे शिक्षित लोग, व्यक्तिगत आराम और स्वार्थी उद्देश्यों को नकारते हुए, अपने और अपने देश के लिए अधिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक दृढ़ संघर्ष नहीं कर सकते, तो हम, आपके मित्र, गलत हैं और हमारे विरोधी सही हैं, फिर, वर्तमान में, सभी प्रगति की आशाएँ समाप्त हो जाती हैं[,] और भारत वास्तव में न तो बेहतर शासन की इच्छा करता है और न ही इसके योग्य है।<ref name="pattabhi1935">{{Citation | title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास | author=B. पट्टाभि सीतारामय्या | year=1935 | publisher=कांग्रेस की कार्य समिति | url=https://archive.org/details/TheHistoryOfTheIndianNationalCongress |page=12}}</ref></blockquote>
मई 1885 में, ह्यूम ने "भारतीय राष्ट्रीय संघ" बनाने के लिए [[उपाध्याक्ष#ब्रिटिश भारत|उपाध्याक्ष]] की स्वीकृति प्राप्त की, जो सरकार के साथ संबद्ध होगा और भारतीय जनमत को व्यक्त करने का मंच बनेगा। ह्यूम और एक समूह शिक्षित भारतीयों ने 12 अक्टूबर को एकत्र होकर "भारत के लोगों की ओर से ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड के मतदाताओं के लिए एक अपील" प्रकाशित की, जिसमें ब्रिटिश मतदाताओं से [[1885 ब्रिटिश आम चुनाव]] में भारतीयों के प्रति सहानुभूति रखने वाले उम्मीदवारों का समर्थन करने का अनुरोध किया गया। इनमें अफगानिस्तान में ब्रिटिश अभियानों के वित्तपोषण के लिए भारत पर कर लगाने के विरोध और भारत में legislative सुधार का समर्थन शामिल था।<ref name="riddick2006">{{Citation | title=ब्रिटिश भारत का इतिहास: एक कालक्रम | author=जॉन एफ. रिडडिक | year=2006 | publisher=ग्रीनवुड पब्लिशिंग ग्रुप | isbn=0-313-32280-5 | url=https://books.google.com/books?id=Es6x4u_g19UC}}</ref> हालाँकि, यह अपील विफल रही, और इसे कई भारतीयों द्वारा "एक कठोर झटका, लेकिन एक सच्ची वास्तविकता के रूप में देखा गया कि उन्हें अपनी लड़ाइयाँ अकेले लड़नी होंगी।"<ref name="yasin1996">{{Citation | title=राष्ट्रीयता, कांग्रेस और पृथकतावाद का उदय | author=माधवी यासीन | year=1996 | publisher=राज पब्लिकेशंस | isbn=81-86208-05-4 | url=https://books.google.com/books?id=NiJuAAAAMAAJ}}</ref>
28 दिसंबर 1885 को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना गोपालदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में बंबई में हुई, जिसमें 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे। ह्यूम ने महासचिव के रूप में कार्यभार संभाला, और [[वोमेश चंदर बनर्जी]] को अध्यक्ष चुना गया।<ref name="riddick2006" /> इसके अलावा, ह्यूम के साथ दो अतिरिक्त ब्रिटिश सदस्य (दोनों स्कॉटिश सिविल सेवक) संस्थापक समूह के सदस्य थे, [[विलियम वेडरबर्न]] और जस्टिस (बाद में, सर) [[सर जॉन जार्डिन, 1st बारोनेट|जॉन जार्डिन]]। अन्य सदस्य ज्यादातर [[बंबई प्रेसीडेंसी|बंबई]] और [[मद्रास प्रेसीडेंसी|मद्रास प्रेसीडेंसी]] के हिंदू थे।
'''भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नीतियाँ (1885–1905)'''
1885 और 1905 के बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी वार्षिक सत्रों में कई प्रस्ताव पारित किए। इन प्रस्तावों के माध्यम से, कांग्रेस द्वारा किए गए विनम्र मांगों में नागरिक अधिकार, प्रशासनिक, संवैधानिक और आर्थिक नीतियाँ शामिल थीं। इन तरीकों पर पारित प्रस्तावों पर नजर डालने से यह पता चलता है कि कांग्रेस के कार्यक्रम किस दिशा में बढ़ रहे थे।
क) नागरिक अधिकार: कांग्रेस के नेताओं ने भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता, जुलूसों, बैठकों और इसी तरह के अन्य अधिकारों के आयोजन का महत्व समझा।
ख) प्रशासनिक: कांग्रेस के नेताओं ने सरकार से कुछ प्रशासनिक दुरुपयोगों को हटाने और जनकल्याण के उपायों को चलाने का आग्रह किया। उन्होंने सरकारी सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति पर जोर दिया। किसानों की राहत के लिए कृषि बैंकों की स्थापना के लिए विशेष प्रस्ताव दिए गए। कांग्रेस के नेताओं ने सरकार द्वारा लागू किए गए भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ भी विरोध की आवाज उठाई।
ग) संवैधानिक: संवैधानिक मामलों में प्रारंभिक कांग्रेस नेताओं द्वारा की गई विनम्र मांगें थीं: विधायी परिषदों की शक्तियों को बढ़ाना; निर्वाचित भारतीय प्रतिनिधियों को शामिल करना। यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस द्वारा की गई उपरोक्त मांगों को कम महत्व दिया।
घ) आर्थिक: आर्थिक क्षेत्र में, कांग्रेस ने ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों को दोषी ठहराया, जिसके परिणामस्वरूप संपत्ति की कीमतों में वृद्धि और अन्य आर्थिक समस्याएँ हुईं जो भारतीय लोगों को प्रभावित करती थीं। कांग्रेस ने देश और उसके लोगों के आर्थिक सुधार के लिए कुछ विशेष सुझाव भी पेश किए। इनमें आधुनिक उद्योग की स्थापना, सार्वजनिक सेवाओं का भारतीयकरण, आदि शामिल थे। कांग्रेस ने विशेष रूप से गरीब वर्ग के लाभ के लिए नमक कर को समाप्त करने की भी मांग की।
====आर्थिक नीति====
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की आर्थिक नीतियाँ निम्नलिखित हैं:
* खुली बाजार अर्थव्यवस्था के लाभों को दोहराने के लिए आर्थिक नीतियों को फिर से स्थापित करना
* धन सृजन का समर्थन करना
* अमीरों, मध्यवर्ग और गरीबों के बीच असमानता को कम करना
* निजी और सक्षम सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा संचालित विकास को तेज करना
====विदेश नीति====
[[भारत की स्वतंत्रता]] से पहले भी, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] ने स्पष्ट रूप से [[विदेश नीति]] के मुद्दों पर अपनी स्थिति व्यक्त की। [[रेजाउल करीम लस्कर]], जो [[भारतीय विदेश नीति]] के विद्वान और कांग्रेस के विचारक हैं, के शब्दों में, "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के तुरंत बाद, इसने विदेशी मामलों पर अपने विचार व्यक्त करना शुरू कर दिया। 1885 में अपने पहले सत्र में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ब्रिटिश भारतीय सरकार द्वारा ऊपरी बर्मा के अधिग्रहण की निंदा की।"<ref>{{cite book|last1=Laskar|first1=Rejaul Karim|title=भारत की विदेश नीति: एक परिचय|date=2013|publisher=पैरागॉन इंटरनेशनल पब्लिशर्स|location=नई दिल्ली|isbn=978-93-83154-06-7|page=5}}</ref>
====मुस्लिम प्रतिक्रिया====
कई मुस्लिम समुदाय के नेताओं, जैसे प्रमुख शिक्षाविद [[सैयद अहमद खान]], ने कांग्रेस को नकारात्मक रूप से देखा, क्योंकि इसके सदस्य अधिकांशत: हिंदुओं द्वारा प्रभावी थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-Z9ODwAAQBAJ&pg=PT94|title=प्रागैतिहासिक प्राचीन भारत की खोज: कृष्ण और राधा|first=डॉ जगत के.|last=मोतवानी|date=22 फरवरी 2018|publisher=iUniverse|isbn=9781532037900|via=Google Books}}</ref> [[हिंदू]] समुदाय और धार्मिक नेताओं ने भी इसे नकारा, कांग्रेस को यूरोपीय सांस्कृतिक आक्रमण का समर्थक मानते हुए।<ref name="auto">{{Cite journal|url=http://www.jstor.org/stable/20078547|title=भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उत्पत्ति पर: क्रॉस-कल्चरल सिंथेसिस का एक केस अध्ययन|author=हेन्स, डब्ल्यू. ट्रैविस|year=1993|journal=जर्नल ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री|volume=4|issue=1|pages=69–98|jstor=20078547|via=JSTOR}}</ref>
भारत के सामान्य लोग कांग्रेस के अस्तित्व के बारे में बहुत कम जानते थे या चिंतित थे, क्योंकि कांग्रेस ने गरीबी, स्वास्थ्य देखभाल की कमी, सामाजिक उत्पीड़न, और ब्रिटिश सरकार द्वारा लोगों की चिंताओं की भेदभावपूर्ण उपेक्षा के मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास नहीं किया। कांग्रेस जैसी संस्थाओं की धारणा एक विशिष्ट, शिक्षित और संपन्न लोगों की संस्था के रूप में थी।<ref name="auto"/>
====भारतीय राष्ट्रीयता का उदय====
[[File:1st INC1885.jpg|right|300px|thumb|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला सत्र, बंबई, 28-31 दिसंबर, 1885]] कांग्रेस के सदस्यों के बीच जो राष्ट्रीयता का पहला स्पर्श था, वह सरकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की इच्छा थी, कानून बनाने और भारत के प्रशासन के मुद्दों पर एक वोट प्राप्त करना। कांग्रेस के सदस्य खुद को वफादार मानते थे, लेकिन वे अपने देश के शासन में एक सक्रिय भूमिका चाहते थे, हालांकि साम्राज्य का हिस्सा रहकर।<ref name="auto1"/>
यह [[दादाभाई नौरोजी]] द्वारा व्यक्त किया गया, जिन्हें कई लोग सबसे बुजुर्ग भारतीय राज्य पुरुष मानते हैं। नौरोजी ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुनाव में सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा, और इसके पहले भारतीय सदस्य बन गए। उनके अभियान में युवा, महत्वाकांक्षी भारतीय छात्र कार्यकर्ताओं जैसे [[मुहम्मद अली जिन्ना]] का समर्थन मिला, जो नए भारतीय पीढ़ी की कल्पना को दर्शाता है।<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-52829458|title=भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन जिसने ब्रिटेन के पहले एशियाई सांसद का पद ग्रहण किया|publisher=BBC News|date=4 जुलाई 2020}}</ref>
[[बाल गंगाधर तिलक]] पहले भारतीय राष्ट्रवादियों में से एक थे जिन्होंने ''[[स्वराज]]'' को राष्ट्र की नियति के रूप में अपनाया। तिलक ने ब्रिटिश उपनिवेशी शिक्षा प्रणाली का गहरा विरोध किया, जिसे उन्होंने भारत की संस्कृति, इतिहास और मूल्यों की अनदेखी और अपमानजनक माना। उन्होंने राष्ट्रवादियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इनकार और साधारण भारतीयों के लिए अपने देश के मामलों में किसी भी आवाज़ या भूमिका की कमी पर असंतोष व्यक्त किया। इसलिए, उन्होंने ''स्वराज'' को प्राकृतिक और एकमात्र समाधान माना: सभी ब्रिटिश चीजों का परित्याग, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को आर्थिक शोषण से बचाएगा और धीरे-धीरे भारत की स्वतंत्रता की ओर ले जाएगा। उन्हें [[बिपिन चंद्र पाल]] और [[लाला लाजपत राय]], [[आरोबिंदो घोष]], [[वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई]] जैसे उभरते जन नेता भी समर्थन करते थे। उनके नेतृत्व में, भारत के चार बड़े राज्य – मद्रास, बंबई, बंगाल, और पंजाब क्षेत्र ने लोगों की मांग और भारत के राष्ट्रवाद को आकार दिया।<ref name="auto1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=p2qFYxtq3GYC&pg=PA55|title=भारत के स्वतंत्रता सेनानी (चार खंडों में)|first=M. G.|last=अग्रवाल|date=31 जुलाई 2008|publisher=ज्ञान पब्लिशिंग हाउस|isbn=9788182054684|via=Google Books}}</ref>
संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।<ref>संModerate, जो [[गोपाल कृष्ण गोखले]], [[फिरोज़शाह मेहता]], और दादाभाई नौरोजी द्वारा नेतृत्व किए जाते थे, ने वार्ता और राजनीतिक संवाद की मांग को बनाए रखा। गोखले ने तिलक की आलोचना की कि उन्होंने हिंसा और अराजकता के कृत्यों को बढ़ावा दिया। 1906 की कांग्रेस में सार्वजनिक सदस्यता नहीं थी, और इसलिए तिलक और उनके समर्थकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।</ref>
तिलक की गिरफ्तारी के साथ, भारतीय आक्रमण के सभी प्रयास ठप हो गए। कांग्रेस का लोगों में विश्वास कम हो गया। मुसलमानों ने 1906 में आल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन किया, कांग्रेस को भारतीय मुसलमानों के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त मानते हुए।<ref name="auto1"/>
===विश्व युद्ध I: आत्मा की लड़ाई===
[[File:Annie Besant.png|thumbnail|right|भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने वाली यूरोपीय नेताओं में एनी बेसेंट सबसे प्रमुख थीं]]
जब ब्रिटिश सरकार ने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] को [[प्रथम विश्व युद्ध]] में उतारा, तो भारत में पहली बार इस स्तर की एक निर्णायक और राष्ट्रव्यापी राजनीतिक बहस शुरू हुई। राजनीतिक स्वतंत्रता की माँग करने वाली आवाज़ों की संख्या तेज़ी से बढ़ने लगी।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/fyi/story/indian-soldiers-world-war-one-germany-british-army-1026848-2017-07-28|title=World War I: Role of Indian Army in Britain's victory over Germany|date=28 July 2017|website=India Today}}</ref>
1916 में [[लखनऊ]] अधिवेशन में विभाजित कांग्रेस पुनः एकजुट हुई। यह एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसे [[बाल गंगाधर तिलक]] और [[मुहम्मद अली जिन्ना]] के प्रयासों से संभव बनाया गया।<ref>{{Cite news |url=https://scroll.in/article/968926/the-tilak-jinnah-pact-embodied-communal-harmony-that-is-much-needed-in-modern-day-india|title=The Tilak-Jinnah pact embodied communal harmony that is much needed in modern-day India|first=Sudheendra|last=Kulkarni|work=Scroll.in}}</ref>
तिलक ने अपने विचारों में पर्याप्त नरमी लाई और अब वे ब्रिटिश सरकार के साथ राजनीतिक संवाद के पक्षधर बन गए। उन्होंने युवा [[मुहम्मद अली जिन्ना]] और श्रीमती [[एनी बेसेंट]] के साथ मिलकर [[होम रूल आंदोलन]] की शुरुआत की, ताकि ''होम रूल''—अर्थात अपने ही देश के शासन में भारतीयों की भागीदारी—की माँग को आगे बढ़ाया जा सके। यह आगे चलकर ''[[स्वराज]]'' की अवधारणा का पूर्वरूप बना। ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर डोमिनियन दर्जे की माँग के लिए अखिल भारतीय होम रूल लीग का गठन किया गया।<ref name="auto2"/>
लेकिन इसी दौरान एक अन्य भारतीय नेता कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के लिए उभरने वाला था। [[मोहनदास गांधी]] एक वकील थे, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ हो रहे भेदभावपूर्ण क़ानूनों के विरुद्ध सफल संघर्ष का नेतृत्व किया था। 1915 में भारत लौटने के बाद, गांधी ने भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोगों के मूल्यों और जीवनशैली से प्रेरणा लेकर एक नए प्रकार की क्रांति की नींव रखी। उन्होंने अहिंसा और [[सविनय अवज्ञा]] की अवधारणा के साथ ''[[सत्याग्रह]]'' शब्द को गढ़ा।<ref>{{Cite news |url=https://www.deccanherald.com/opinion/the-making-of-gandhi-in-south-africa-and-after-852712.html|title=The making of Gandhi in South Africa and after|date=23 June 2020|work=Deccan Herald}}</ref>
=== चंपारण और खेड़ा ===
{{main|चंपारण सत्याग्रह|खेड़ा सत्याग्रह}}
[[File:Gandhiji and Sub-Inspector Qurban Ali in Champaran (1917).jpg|thumb|चंपारण (1917) में गांधीजी और उप-निरीक्षक कुर्बान अली<ref>{{Cite book |title=Select Documents On Mahatma Gandhi's Movement In Champaran 1916-17
|publisher=Government of Bihar |year=1963 |pages=Page No. 63}}</ref>|271x271px]]
मोहनदास करमचंद गांधी, जो आगे चलकर महात्मा गांधी के नाम से प्रसिद्ध हुए, ने चंपारण और खेड़ा में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सफलता प्राप्त की और भारत को स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी जीत दिलाई।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/gandhi-fought-the-british-with-weapons-of-truth-non-violence/article29577336.ece|title=Gandhi fought the British with weapons of truth, non-violence|newspaper=The Hindu|date=2 October 2019}}</ref> उस आंदोलन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। इससे भारतीयों का इस संगठन पर विश्वास बढ़ा और यह धारणा बनी कि ब्रिटिश शासन को कांग्रेस के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है। परिणामस्वरूप देश भर से लाखों युवा कांग्रेस की सदस्यता से जुड़ गए।{{citation needed|date=October 2015}}
=== आत्मा के लिए संघर्ष ===
राजनीतिक नेताओं का एक पूरा वर्ग गांधी के विचारों से असहमत था। [[बिपिन चंद्र पाल]], [[मुहम्मद अली जिन्ना]], [[एनी बेसेंट]] और [[बाल गंगाधर तिलक]] सभी ने सविनय अवज्ञा के विचार की आलोचना की। लेकिन गांधी को जनता और भारतीय राष्ट्रवादियों की एक नई पीढ़ी का व्यापक समर्थन प्राप्त था।<ref name="auto2">{{cite book | last=Singh | first=M.K. | title=Encyclopaedia of Indian War of Independence, 1857–1947: Birth of Indian National Congress : establishment of Indian National Congress | publisher=Anmol Publications| year=2009 | isbn=978-81-261-3745-9 | url=https://books.google.com/books?id=IlYwAQAAIAAJ}}</ref>
1918, 1919 और 1920 के दौरान हुए कई कांग्रेस अधिवेशनों में पुरानी और नई पीढ़ियों के बीच तीखी और ऐतिहासिक बहसें हुईं। इन बैठकों में गांधी और उनके युवा समर्थकों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रत्यक्ष संघर्ष के लिए जोश और ऊर्जा भर दी।<ref name="auto2"/> 1919 के [[जलियांवाला बाग हत्याकांड]] और पंजाब में हुए दंगों की त्रासदी के बाद भारतीयों का आक्रोश और भावनाएँ उग्र हो गईं।<ref>{{Cite news|last=Prakash|first=Gyan|date=2019-04-13|title=Opinion {{!}} The Massacre That Led to the End of the British Empire|language=en-US|work=The New York Times|url=https://www.nytimes.com/2019/04/13/opinion/1919-amrtisar-british-empire-india.html|access-date=2021-08-24|issn=0362-4331}}</ref>
जब मोहनदास करमचंद गांधी को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया, तो पार्टी की “आत्मा” के लिए चल रहा संघर्ष समाप्त हुआ और भारत की नियति की ओर जाने वाला एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ।<ref name="auto2"/>
लोकमान्य तिलक—जिन्हें गांधी ने ''आधुनिक भारत का पिता'' कहा था—का निधन 1920 में हुआ, जबकि [[गोपाल कृष्ण गोखले]] का देहांत चार वर्ष पहले ही हो चुका था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=i7yKAAAAMAAJ|title = Indian Political Parties|year = 1984|publisher = Meenakshi Prakashan}}</ref> [[मोतीलाल नेहरू]], [[लाला लाजपत राय]] और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गांधी का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि वे तिलक और गोखले की तरह जनता का नेतृत्व कर सकते हैं। इस प्रकार अब राष्ट्र को दिशा दिखाने की पूरी जिम्मेदारी गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस पर आ गई।
===महात्मा गांधी का युग===
गांधीजी ने 1919 से 1948 तक भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष पर राज किया। इसलिए इस अवधि को भारतीय इतिहास में गांधी युग कहा जाता है। इस समय, महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर प्रभुत्व बनाया, जो बदले में भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रिम मोर्चे पर थी।
गांधी ने 1915 में कांग्रेस में शामिल हुए और 1923 में इसे छोड़ दिया।
===विस्तार और पुनर्गठन===
विश्व युद्ध के कुछ वर्षों बाद, गांधी की चंपारण और खेड़ा में सफलताओं के कारण कांग्रेस काफी विस्तारित हुई। भारत के विभिन्न हिस्सों से पूरी नई पीढ़ी के नेताओं ने उभरना शुरू किया, जो गांधी के अनुयायी थे, जैसे [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[राजेंद्र प्रसाद]], [[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], [[नरहरी पारिख]], [[महादेव देसाई]] – साथ ही गर्म खून वाले राष्ट्रवादी जो गांधी की सक्रिय नेतृत्व से जागरूक हुए – [[चित्तरंजन दास]], [[सुभाष चंद्र बोस]], [[एस. श्रीनिवास अयंगर]]।
गांधी ने कांग्रेस को एक शहरों में आधारित एलीट पार्टी से एक जन संगठन में बदल दिया: *सदस्यता शुल्क को काफी कम किया गया। *कांग्रेस ने भारत भर में राज्य इकाइयाँ स्थापित कीं – जिन्हें ''प्रदेश कांग्रेस समितियाँ'' कहा जाता था – जो भारत के राज्यों के भाषाई समूहों के आधार पर बनाई गईं। *जाति, जातीयता, धर्म और लिंग के आधार पर कांग्रेस में भेदभाव करने वाले सभी पुराने प्रथाओं को समाप्त कर दिया गया – अखिल भारतीय एकता पर जोर दिया गया। *स्थानीय भाषाओं को कांग्रेस बैठकों में आधिकारिक उपयोग और सम्मान दिया गया – विशेषकर ''उर्दू'', जिसे गांधी ने ''हिंदुस्तानी'' नाम दिया था, जिसका उपयोग अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा अपनाया गया। *सभी स्तरों पर नेतृत्व पदों को चुनावों द्वारा भरा जाएगा, नियुक्तियों द्वारा नहीं। इस लोकतंत्र की शुरुआत ने पार्टी को पुनर्जीवित करने में मदद की, सामान्य सदस्यों को आवाज दी। *नेतृत्व के लिए पात्रता यह निर्धारित की जाएगी कि सदस्य ने कितना सामाजिक कार्य और सेवा की है, न कि उसकी दौलत या सामाजिक स्थिति।
====सामाजिक विकास====
1920 के दशक के दौरान, एम.के. गांधी ने कांग्रेस के हजारों स्वयंसेवकों को बड़े पैमाने पर संगठित कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि भारत में प्रमुख सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जा सके। कांग्रेस समितियों और गांधी के आश्रमों के नेटवर्क के मार्गदर्शन में, कांग्रेस ने निम्नलिखित समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया: *[[अछूतता]] और जाति भेदभाव *शराबखोरी *अस्वच्छता और स्वच्छता की कमी *स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा सहायता की कमी *[[पर्दा]] और महिलाओं का दमन *अक्षरता, राष्ट्रीय स्कूलों और कॉलेजों के आयोजन के साथ *गरीबी, [[खादी]] कपड़े और [[हस्तशिल्प]] उद्योगों के माध्यम से
गांधी के इस गहन कार्य ने भारतीय लोगों को खासतौर पर आश्रमों की स्थापना के माध्यम से प्रभावित किया, जिससे बाद में उन्हें ''महात्मा'', महान आत्मा, के रूप में सम्मानित किया गया।
===(1937–1942)===
[[File:Katni1.jpg|left|thumb|350px| [[कटनी]] में एक पुरानी इमारत जो [[स्वराज|भारत की स्वतंत्रता]] का स्मरण करती है, जिसमें [[नेहरू]], [[गांधी]] और [[सुभाष चंद्र बोस]] की मूर्तियाँ हैं]]
[[भारत सरकार अधिनियम 1935]] के तहत, कांग्रेस ने पहली बार [[भारतीय प्रांतीय चुनाव, 1937|1937 के प्रांतीय चुनावों]] में राजनीतिक शक्ति का अनुभव किया। इसने आठ में से ग्यारह प्रांतों में जबर्दस्त सफलता हासिल की। इसकी आंतरिक संगठनात्मक संरचना विभिन्न राजनीतिक दृष्टिकोणों और विचारधाराओं में खिल उठी। ध्यान पूर्ण स्वतंत्रता की एकमात्र भक्ति से थोड़ा बदल गया, और राष्ट्र के भविष्य की शासन की थ्योरी और उत्साह पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। हालांकि, जब वायसराय लॉर्ड लिंलिथगो ने बिना चुने गए प्रतिनिधियों से सलाह किए बिना भारत को [[द्वितीय विश्व युद्ध]] में युद्धरत घोषित किया, तो कांग्रेस की मंत्रिपरिषद ने इस्तीफा दे दिया।
[[सुभाष चंद्र बोस]] के कट्टर अनुयायी, जो समाजवाद और सक्रिय क्रांति में विश्वास करते थे, बोस के 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के साथ ही पदानुक्रम में उभरे।
====परंपरावादी====
एक दृष्टिकोण के अनुसार, परंपरावादी दृष्टिकोण, हालांकि राजनीतिक अर्थ में नहीं, कांग्रेस के नेताओं जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी, पुरुषोत्तम दास टंडन, खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान और मौलाना आज़ाद द्वारा प्रस्तुत किया गया, जो गांधी के सहयोगी और अनुयायी थे। उनके संगठनात्मक ताकत, जो सरकार के साथ संघर्षों का नेतृत्व करने के माध्यम से हासिल की गई, निस्संदेह थी और यह साबित हो गया जब 1939 के चुनावों में जीतने के बावजूद, बोस ने राष्ट्रीय नेताओं के बीच अपनी कमी के कारण कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि एक साल पहले, 1938 के चुनाव में, बोस को गांधी के समर्थन से चुना गया था। 1939 में इस बात पर मतभेद उत्पन्न हुए कि बोस को दूसरा कार्यकाल मिलना चाहिए या नहीं। जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें गांधी ने हमेशा बोस पर प्राथमिकता दी, पहले ही दूसरा कार्यकाल पा चुके थे। बोस के अपने मतभेद मुख्य रूप से अहिंसक और क्रांतिकारी तरीकों के बीच स्थान को लेकर थे। जब उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया, तो उन्होंने गांधी के नाम का उल्लेख किया और उन्हें राष्ट्रपिता कहा।
यह गलत होगा यह सुझाव देना कि所谓 परंपरावादी नेता केवल प्राचीन भारतीय, एशियाई या, मौलाना आज़ाद और खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान के मामले में, इस्लामी सभ्यता से प्रेरणा लेते थे। उन्होंने, शिक्षा के क्षेत्र के शिक्षाविदों जैसे ज़ाकिर हुसैन और ई. डब्ल्यू. आर्यनायक के साथ, यह विश्वास किया कि शिक्षा इस तरीके से प्रदान की जानी चाहिए जिससे छात्र अपने हाथों से चीजें बना सकें और कौशल सीख सकें, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। इस प्रकार की शिक्षा कुछ क्षेत्रों में मिस्र में भी अपनाई गई। (देखें: रेगिनाल्ड रेनॉल्ड्स, Beware of Africans)। ज़ाकिर हुसैन कुछ यूरोपीय शिक्षाविदों से प्रेरित थे और गांधी के समर्थन से, इस दृष्टिकोण को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन द्वारा पेश किए गए बुनियादी शिक्षा पद्धति के अनुरूप बनाने में सफल रहे। उन्होंने विश्वास किया कि भविष्य के राष्ट्र के लिए शिक्षा प्रणाली, अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय मॉडल को विशेष स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए। जबकि अधिकांश पश्चिमी प्रभावों और समाजवाद के सामाजिक-आर्थिक समानता के लाभों के प्रति खुले थे, वे किसी भी मॉडल द्वारा परिभाषित होने का विरोध करते थे।
===1942-1946===
कांग्रेस में अंतिम महत्वपूर्ण घटनाएँ स्वतंत्रता के अंतिम कदम और धर्मों के आधार पर देश के विभाजन से संबंधित थीं।
====भारत छोड़ो====
[[चक्रवर्ती राजगोपालाचारी]], जो [[तमिल नाडु]] से प्रमुख नेता थे, ने ब्रिटिश युद्ध प्रयास का समर्थन करने के लिए कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। यह 1942 में शुरू हुआ।
====भारतीय राष्ट्रीय सेना के मुकदमे====
1946 के [[INA मुकदमे]] के दौरान, कांग्रेस ने [[INA रक्षा समिति]] का गठन करने में मदद की, जिसने [[आज़ाद हिंद]] सरकार के सैनिकों के मामले को मजबूती से पेश किया। समिति ने INA के लिए कांग्रेस की रक्षा टीम के गठन की घोषणा की और इसमें उस समय के प्रसिद्ध वकील शामिल थे, जैसे [[भुलाभाई देसाई]], [[असफ अली]], और [[जवाहरलाल नेहरू]]। भारत छोड़ो बिल 8 अगस्त 1942 को पारित हुआ।
====रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह====
कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने शुरू में [[रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह]] के नाविकों का समर्थन किया। हालाँकि, उन्होंने महत्वपूर्ण क्षण पर समर्थन वापस ले लिया, क्योंकि विद्रोह विफल हो गया।
====भारत का विभाजन====
कांग्रेस के भीतर, विभाजन का विरोध [[खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान]], [[सैफुद्दीन किचलू]], [[डॉ. खान साहिब]] और उन कांग्रेसियों द्वारा किया गया जो उन प्रांतों से थे, जो अनिवार्य रूप से पाकिस्तान के हिस्से बन गए। [[मौलाना आज़ाद]], एक भारतीय इस्लामिक विद्वान, ने सिद्धांत के स्तर पर विभाजन का विरोध किया, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व में बाधा नहीं डालना चाहते थे; उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ रहना पसंद किया।
===1947===
====संविधान====
संसद और संविधान की चर्चाओं में, कांग्रेस का दृष्टिकोण समावेशिता और उदारवाद से चिह्नित था। सरकार ने कुछ प्रमुख भारतीयों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया, जो राज के प्रति वफादार और उदार थे, और उन्होंने उन भारतीय सिविल सेवकों के प्रति कोई दंडात्मक नियंत्रण नहीं अपनाया जिन्होंने राज के शासन में सहायता की और राष्ट्रीय गतिविधियों को दबाया।
एक कांग्रेस-प्रभुत्व वाली सभा ने [[B.R. अंबेडकर]], जो कांग्रेस के एक कठोर आलोचक थे, को संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष चुना। [[श्यामा प्रसाद मुखर्जी]], एक [[हिंदू महासभा]] नेता, उद्योग मंत्री बने।
कांग्रेस ने अपनी मूलभूत वादों पर मजबूती से खड़े रहते हुए एक ऐसा संविधान प्रस्तुत किया जिसने अस्पृश्यता और जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्त किया। प्राथमिक शिक्षा को एक अधिकार बनाया गया, और कांग्रेस सरकारों ने [[जमींदार]] प्रणाली को अवैध घोषित किया, न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की और हड़ताल करने और श्रमिक संघ बनाने का अधिकार दिया।<ref>{{Cite web |title=Shyama Prasad Mukherjee, the barrister who founded Bharatiya Janta Party |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/remembering-shyama-prasad-mukherjee-the-founder-of-bharatiya-jana-sangh-that-later-became-bharatiya-janta-party-1563356-2019-07-06 |access-date=2024-03-10 |website=India Today |language=en}}</ref>
'''काँग्रेस एक जन आंदोलन के रूप में'''
काँग्रेस में बहुत बड़ा बदलाव आया। चम्पारन एवं खेड़ा में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन समर्थन से अपनी पहली सफलता मिली। १९१९ में [[जालियाँवाला बाग हत्याकांड]] के पश्चात गान्धी जी काँग्रेस के महासचिव बने। उनके मार्गदर्शन में काँग्रेस कुलीन वर्गीय संस्था से बदलकर एक जनसमुदाय संस्था बन गयी। तत्पश्चात् राष्ट्रीय नेताओं की एक नयी पीढ़ी आयी जिसमें [[सरदार वल्लभभाई पटेल]], [[जवाहरलाल नेहरू]], डॉक्टर [[राजेन्द्र प्रसाद]], [[महादेव देसाई]] एवं [[सुभाष चंद्र बोस]] आदि शामिल थे। गाँधी के नेतृत्व में प्रदेश काँग्रेस कमेटियों का निर्माण हुआ, काँग्रेस में सभी पदों के लिये चुनाव की शुरुआत हुई एवं कार्यवाहियों के लिये भारतीय भाषाओं का प्रयोग शुरू हुआ। काँग्रेस ने कई प्रान्तों में सामाजिक समस्याओं को हटाने के प्रयत्न किये जिनमें छुआछूत, पर्दाप्रथा एवं मद्यपान आदि शामिल थे।<ref name="test5">{{Cite web|url=https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|title=Indian National Congress: A Select Bibliography|first1=Manikrao Hodlya|last1=Gavit|first2=Attar|last2=Chand|date=1 मार्च 1989|publisher=U.D.H. Publishing House|accessdate=1 मार्च 2019|via=Google Books|archive-url=https://web.archive.org/web/20190302024905/https://books.google.co.in/books?id=LdvfAAAAMAAJ&hl=en|archive-date=2 मार्च 2019|url-status=live}}</ref>
राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए काँग्रेस को धन की कमी का सामना करना पड़ता था। गाँधीजी ने एक करोड़ रुपये से अधिक का धन जमा किया और इसे [[बाल गंगाधर तिलक]]के स्मरणार्थ तिलक स्वराज कोष का नाम दिया। ४ आना का नाममात्र सदस्यता शुल्क भी शुरू किया गया था।<ref>{{cite web |url=http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |title=Headlines given in 'Bombay Chronicle' for his successful drive for the collection of one crore of rupees for The Tilak Swaraj Fund, 1921 |publisher=Bombay Chronicle |accessdate=५ मई २०१७ |archive-url=https://web.archive.org/web/20170226042810/http://www.mkgandhi-sarvodaya.org/gphotgallery/1915-1932/pages/b1.htm |archive-date=26 फ़रवरी 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book|url= https://books.google.co.in/books?id=Z0ydNvMbPI0C&pg=PA24&dq=tilak+swaraj+fund&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi7x_j5r9_TAhXMvY8KHeInABkQ6AEIRzAH#v=onepage&q=tilak%20swaraj%20fund&f=false|title = What Congress & Gandhi Have done to the Untouchables |author=[[भीमराव आम्बेडकर]] |publisher= Gautam Book Center|year= १९४५ |isbn=9788187733997 |accessdate= ५ मई २०१७ |page= १९ | language = en |trans-title= काँग्रेस और गाँधी ने अछूतों के साथ क्या किया}}</ref>
=== स्वतन्त्र भारत ===
1947 में भारत की स्वतन्त्रता के बाद से भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस भारत के मुख्य राजनैतिक दलों में से एक रही है। इस दल के कई प्रमुख नेता भारत के प्रधानमन्त्री रह चुके हैं। पंडित [[जवाहरलाल नेहरू]], [[लाल बहादुर शास्त्री]],पण्डित नेहरू की पुत्री [[इंदिरा गाँधी|इन्दिरा गाँधी]] एवं उनके नाती [[राजीव गाँधी|राजीव गाँधी]] इसी दल से थे। राजीव गाँधी के बाद सीताराम केसरी काँग्रेस के अध्यक्ष बने जिन्हे सोनिया गाँधी के समर्थकों ने नामंजूर कर दिया तथा सोनिया गाँधी को हाईकमान बनाया, राजीव गाँधी की पत्नी सोनिया गाँधी काँग्रेस की अध्यक्ष तथा यूपीए की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं। [[कपिल सिब्बल]], काँग्रेस महासचिव [[दिग्विजय सिंह]], अहमद पटेल, [[राहुल गांधी]], [[प्रियंका गांधी]], राशिद अल्वी, [[राज बब्बर]], [[मनीष तिवारी]] आदि काँग्रेस के वरिष्ट नेता हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह|डॉ॰ मनमोहन सिंह]] भी काँग्रेस से ताल्लुक रखते हैं।
==कांग्रेस के अधिवेशन ==
स्वतंत्रता से पहले आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी ऐतिहासिक अधिवेशनों की सूची यहां दी गई है।
{| class="wikitable sortable" Manish. Kumar
! वर्ष !! स्थान !! अध्यक्ष !! टिप्पणी
|-
| 1885 || बॉम्बे ||व्योमेश चन्द्र बनर्जी || 72 प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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| 1886 || कलकत्ता || [[दादाभाई नौरोजी]] || प्रतिनिधियों की संख्या बढकर 434 हो गई।
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| 1887 || मद्रास|| सैयद बद्रूद्दीन तैयबजी || प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष
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| 1888 || इलाहाबाद || जॉर्ज यूल || प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष
|-
| 1889 || मुंबई || सर विलियम वेदरबर्न || पहली बार महिला ने भाग लिया
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| 1890 || कलकत्ता || [[फिरोजशाह मेहता]] || स्नातक डिग्री प्राप्त महिला कादम्बिनी ने भाग लिया
|-
| 1891 || नागपुर || आनन्दचार्लु || भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का नाम दिया • दादा भाई नारौजी
|-
| 1892 || प्रयागराज || व्योमेश चंद्र बनर्जी ||लंदन में आम चुनाव
|-
| 1893 || लाहौर || दादाभाई नौरोजी || Demand Of • civil service exam in india
|-
| 1894 || मद्रास || ए.वेब ||
|-
| 1895 || पुणे || [[सुरेन्द्रनाथ बनर्जी]] ||
|-
| 1896 || कलकत्ता || एम.रहीमतुल्ला सयानी || पहली बार राष्ट्रीय गीत गाया गया था
|-
| 1897 || अमरावती || सी.शंकर नायर ||
|-
| 1898 || मद्रास || आनंद मोहन बोस ||
|-
| 1899 || लखनऊ || रोमेश चंद्र बोस ||
|-
| 1900 || लाहौर || एन.जी. चंदूनरकर ||
|-
| 1901 || कलकत्ता || ई.दिंशा वाचा || पहली बार गांधी जी ने भाग लिया
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| 1902 || अहमदाबाद || सुरेन्द्रनाथ बनर्जी ||
|-
| 1903 || मद्रास || लालमोहन बोस ||
|-
| 1904 || मुंबई || सर हेनरी कॉटन || पहली बार मो. अली जिन्ना ने भाग लिया
|-
| 1905 || बनारस || [[गोपाल कृष्ण गोखले]] || बंग भंग आंदोलन का समर्थन
स्वदेशी आंदोलन को समर्थन मिला
|-
| 1906 || कलकत्ता || दादाभाई नौरोजी || 'स्वराज्य' शब्द का प्रथम बार प्रयोग अध्यक्ष द्वारा किया गया। मुस्लिम लीग की स्थापना
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| 1907 || सूरत || [[रास बिहारी घोष|रासबिहारी घोष]] || कांग्रेस का विभाजन
(नरम दल और गरम दल )
एवं सत्र की समाप्ति।
|-
| 1908 || मद्रास || रासबिहरी घोष || कांग्रेस के लिये एक संविधान।
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| 1909 || लाहौर || [[मदनमोहन मालवीय]] || पृथक निर्वाचिका का विरोध
|-
| 1910 ||प्रयागराज || सर विलियम वेदरबर्न ||
|-
| 1911 || कलकत्ता || बिसन नारायण धर || इस अधिवेशन मे पहली बार राष्ट्रगान गाया गया।
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| 1912 || पटना || आर.एन. मुधालकर || A O Hume - कांग्रेस का पिता घोशित किया गया
|-
| 1913 || कराची || सैयद मुहम्मद बहादुर ||
|-
| 1914 || मद्रास || भूपेन्द्रनाथ बोस ||
|-
| 1915 || मुंबई || सर एस.पी. सिन्हा || Lord Wellington भाग लिया (आगे चलकर vaceray भी बना)
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| 1916 || लखनऊ || ए.जी. मजुमदार || कांग्रेस में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई और गरम दल और नरम दल का मिलन हुआ
|-
| 1917 || कलकता || [[एनी बेसेंट|श्रीमती एनी बेसेंट]] || प्रथम महिला अध्यक्ष(कांग्रेस ने तिरंगे झंडों को अपनाया )
|-
| 1918 || मुंबई || सैयद हसन इमाम ||
|-
| 1918 || दिल्ली || मदनमोहन मालवीय || नरमदल वालों जैसे एस.एन.बनर्जी का त्यागपत्र
|-
| 1919 || अमृतसर || [[मोतीलाल नेहरू]] || •जलियांवाला बाग हत्याकांड का विरोध किया
•खिलाफत आंदोलन को समर्थन दिया
बाल गंगाधर तिलक आखिरी बार अधिवेशन में भाग लिए
|-
| 1920 || नागपुर || सी. विजय राघवाचार्य || आशायोग आंदोलन का नेतृत्व गांधी जी ने किया
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| 1921 || अहमदाबाद || हकीम अजलम खान (कार्यकारी अध्यक्ष) || अध्यक्ष सी.आर.दास जेल में कैद
|-
| 1922 || गया || [[चित्तरंजन दास]] || स्वराज्य पार्टी का गठन
|-
| 1923 || दिल्ली || [[अबुल कलाम आज़ाद]] || सबसे कम उम्र के अध्यक्ष
|-
| 1923 || कोकोनाडा || मौलाना मुहम्मद अली ||
|-
| 1924 || बेलगांव || [[महात्मा गांधी]] || एकमात्रा अधिवेशन गांधी जी ने किया
|-
| 1925 || कानपुर || [[सरोजिनी नायडू]] || प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष
|-
| 1926 || गोहाटी || [[श्रीनिवास अयंगर]] ||
|-
| 1927 || मद्रास || एम.ए. अंसारी || साइमन कमीशन का विरोध किया गया और साइमन वापस जाओ का नारा दिया गया
|-
| 1928 || कलकत्ता || [[मोतीलाल नेहरू]] || प्रथम अखिल भारतीय युवा कांग्रेस
|-
| 1929 || लाहौर || जवाहरलाल नेहरू || पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव
|-
| 1930 || अधिवेशन नहीं हुआ || जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष बने रहे ||
|-
| 1931 || कराची || [[वल्लभ भाई पटेल]] || मूल अधिकारों तथा राष्ट्रीय आर्थिक नीति प्रस्ताव
|-
| 1932 || दिल्ली || आर.डी. अमृतलाल ||
|-
| 1933 || कलकत्ता || श्रीमती नलिनी सेनगुप्ता ||
|-
| 1934 || मुंबई || राजेन्द्र प्रसाद || कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन
|-
| 1935 || अधिवेशन नहीं हुआ || राजेन्द्र प्रसाद अध्यक्ष बने रहे ||
|-
| 1936 || लखनऊ || जवाहरलाल नेहरू || समाजवादी कांग्रेस का लक्ष्य
|-
| 1937 || फैजपुर || जवाहरलाल नेहरू || पहली बार गांव में सत्र हुआ।
|-
| 1938 || हरिपुरा || [[सुभाष चन्द्र बोस]] || राष्ट्रीय योजना समिति
|-
| 1939 || त्रिपुरी || सुभाष चंद्र बोस || बोस का त्यागपत्र, राजेन्द्र प्रसाद का अध्यक्ष बनना तथा बोस द्वारा [[फॉरवर्ड ब्लाक]] की स्थापना की गई। सुभाष चंद्र बोस पट्टाभि सीतारमैय्या को पराजित कर के अध्यक्ष बने थे।
|-
| 1940 || रामगढ || अबुल कलाम आजाद || भारत छोड़ो का प्रस्ताव दिया गया
|-
| 1941-45 || अधिवेशन नहीं हुआ || अबुल कलाम आजाद अध्यक्ष बने रहे। || द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण नही हुए
|-
| 1946 || मेरठ || [[जे॰ बी॰ कृपलानी|जीवटराम भगवानदास कृपलानी]] ||
|-
| 1947 || दिल्ली || [[राजेन्द्र प्रसाद]] ||
|-
! colspan="4" | कुल अधिवेशन = 61
|}
==राजनीतिक स्थिति और नीतियाँ==
===सामाजिक मामले===
कांग्रेस पार्टी सामाजिक समानता, [[स्वतंत्रता]], [[धर्मनिरपेक्षता]] और [[समान अवसर]] पर जोर देती है। इसकी राजनीतिक स्थिति सामान्यत: मध्य में मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से, पार्टी ने किसानों, श्रमिकों और [[महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005|महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम]] (MGNREGA) का प्रतिनिधित्व किया है। MGNREGA का उद्देश्य "ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना है, जिसमें हर परिवार के वयस्क सदस्यों को अन-skilled मैनुअल काम करने के लिए 100 दिन की गारंटी वाली मजदूरी रोजगार प्रदान करना शामिल है।" MGNREGA का एक अन्य लक्ष्य टिकाऊ संपत्तियों (जैसे सड़कों, नहरों, तालाबों और कुंडों) का निर्माण करना है।<ref name="MGNREGA">{{cite web |title=National Rural Employment Guarantee Act, 2005 |url=https://rural.nic.in/sites/default/files/nrega/Library/Books/1_MGNREGA_Act.pdf |publisher=Ministry of Law and Justice |access-date=11 July 2021}}</ref>
कांग्रेस ने खुद को हिंदू समर्थक और अल्पसंख्यकों के रक्षक के रूप में पेश किया है। पार्टी महात्मा गांधी के सिद्धांत [[सर्व धर्म समभाव]] का समर्थन करती है, जिसे इसके सदस्य धर्मनिरपेक्षता के रूप में देखते हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य [[अमरिंदर सिंह]] ने कहा, "भारत सभी धर्मों का है, जो इसकी ताकत है, और कांग्रेस इसकी प्रिय धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को नष्ट नहीं होने देगी।"<ref name="Captain CM">{{cite news |title=Congress will safeguard secularism |url=https://www.thehindu.com/news/national/other-states/congress-will-safeguard-secularism/article27074338.ece |access-date=6 July 2021 |work=The Hindu |date=9 May 2019}}</ref>
9 नवंबर 1989 को राजीव गांधी ने विवादित [[राम जन्मभूमि]] स्थल के निकट शिलान्यास समारोह की अनुमति दी। इसके बाद उनकी सरकार को [[मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों की सुरक्षा) अधिनियम 1986]] को पारित करने के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिसने सुप्रीम कोर्ट के [[शाह बानो]] मामले में निर्णय को निरस्त कर दिया। [[1984 के दंगे]] ने कांग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्षता पर नैतिक तर्क खोने पर मजबूर किया। भाजपा ने [[2002 के गुजरात दंगों]] के मामले में कांग्रेस पार्टी की नैतिकता पर सवाल उठाए।<ref name="ThePrint">{{cite news |last1=Vij |first1=Shivam |title=Reclaiming Indian pluralism will need annihilation of Congress party |url=https://theprint.in/opinion/reclaiming-indian-pluralism-will-need-annihilation-of-congress/485212/ |access-date=6 July 2021 |work=ThePrint |publisher=Shekhar Gupta |date=19 August 2020}}</ref>
कांग्रेस ने हिंदुत्व विचारधारा से खुद को दूर रखा है, हालांकि 2014 और 2019 के आम चुनावों में हार के बाद पार्टी ने अपने रुख को नरम किया है।<ref name="Hindutva">{{cite news |title='Rajiv Gandhi opened locks, called for Ram Rajya in 1985': Kamal Nath |url=https://www.timesnownews.com/india/article/rajiv-gandhi-opened-locks-called-for-ram-rajya-in-1985-kamal-nath/632586 |access-date=6 July 2021 |work=Times Now |date=6 August 2020}}</ref>
नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री पद के दौरान, [[पंचायती राज]] और [[नगर निगम (भारत)|नगर सरकार]] को संवैधानिक दर्जा मिला। संविधान में 73वीं और 74वीं संशोधन के साथ, एक नया अध्याय, भाग- IX, जोड़ा गया।<ref name="73rd">{{cite web |title=Panchayati Raj System in Independent India |url=http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |publisher=Department of Rural Development and Panchayats, Punjab |access-date=10 March 2022 |archive-date=1 फ़रवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220201062705/http://www.pbrdp.gov.in/documents/6205745/98348119/Panchayati%20Raj%20System%20in%20Independent%20India.pdf |url-status=dead }}</ref> राज्यों को पंचायती राज प्रणाली अपनाने में अपने भौगोलिक, राजनीतिक-प्रशासनिक और अन्य पहलुओं पर विचार करने की लचीलापन दी गई। पंचायतों और नगर निकायों में, स्थानीय स्वशासन में समावेशिता सुनिश्चित करने के प्रयास में, अनुसूचित जातियों/जनजातियों और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया।<ref name="Self Governance">{{cite web |title=Governance and Development |url=https://niti.gov.in/planningcommission.gov.in/docs/plans/mta/midterm/english-pdf/chapter-17.pdf |publisher=[[NITI Aayog]] |access-date=10 March 2022}}</ref>
स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस ने [[हिंदी]] को भारत की एकमात्र राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने का समर्थन किया। नेहरू ने कांग्रेस पार्टी के उस धड़े का नेतृत्व किया, जिसने हिंदी को भारतीय राष्ट्र की ''[[lingua franca]]'' के रूप में बढ़ावा दिया।<ref name="Lingua">{{cite journal |url=https://www.jstor.org/stable/43950462 |publisher=JSTOR |jstor=43950462 |access-date=5 July 2021|title=Jawaharlal Nehru and the Language Problem |last1=Agrawala |first1=S. K. |journal=Journal of the Indian Law Institute |year=1977 |volume=19 |issue=1 |pages=44–67 }}</ref> हालांकि, गैर-हिंदी भाषी भारतीय राज्यों, विशेष रूप से [[तमिलनाडु]], ने इसका विरोध किया और अंग्रेजी भाषा के निरंतर उपयोग की मांग की। लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कई प्रदर्शनों और दंगों का सामना करना पड़ा, जिसमें मद्रास [[Anti-Hindi agitations of Tamil Nadu|1965 का एंटी-हिंदी आंदोलन]] शामिल था।<ref name="Tamil protest">{{cite news |last1=Nair |first1=Chitralekha |title=A brief history of anti-Hindi imposition agitations in India |url=https://www.theweek.in/news/india/2019/06/07/brief-history-anti-hindi-imposition-agitations-india.html |access-date=5 July 2021 |work=The Week (Indian magazine) |publisher=Jacob Mathew |date=7 June 2019}}</ref> शास्त्री ने आंदोलनों से अपील की कि वे अपना आंदोलन वापस लें और आश्वासन दिया कि अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में तब तक उपयोग में लाया जाएगा जब तक गैर-हिंदी भाषी राज्य इसकी इच्छा करते रहें।<ref name="Assurance">{{cite news |last1=Madan |first1=Karuna |title=Anti-Hindi agitation: How it all began |url=https://gulfnews.com/world/asia/india/anti-hindi-agitation-how-it-all-began-1.2018146 |access-date=5 July 2021 |work=Gulf News |agency=Al Nisr Publishing |date=28 April 2017}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1967 में आधिकारिक भाषाओं के अधिनियम को संशोधित कर गैर-हिंदी भाषी राज्यों के भावनाओं को शांत किया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि अंग्रेजी का उपयोग तब तक जारी रह सकता है जब तक हर राज्य की विधानमंडल ने हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने का प्रस्ताव पारित नहीं किया।<ref name="Language 1967">{{cite web |title=THE OFFICIAL LANGUAGES ACT, 1963 |url=https://rajbhasha.gov.in/en/official-languages-act-1963 |publisher=Department of Official Language, Government of India |access-date=10 March 2022}}</ref> यह दोनों हिंदी और अंग्रेजी के आधिकारिक भाषाओं के रूप में प्रयोग की गारंटी थी, जिससे भारत में द्विभाषिकता स्थापित हुई।<ref name="Language Act">{{cite web |title=Complete Text of the Official Languages Act |url=https://www.uottawa.ca/clmc/india-official-languages-act#:~:text=Bill%2019%20(1963)%20as%20amended%201967&text=An%20Act%20to%20provide%20for,certain%20communication%20purposes%20in%20HighCourts.&text=1)%20This%20Act%20may%20be,the%20Official%20Languages%20Act%2C%201963. |publisher=The University of Ottawa |access-date=10 March 2022}}</ref> इस कदम ने राज्यों में एंटी-हिंदी प्रदर्शनों और दंगों का अंत किया।
[[भारतीय दंड संहिता की धारा 377]], जो समलैंगिकता को अपराध मानती है; पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, "यौन संबंध व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है और इसे व्यक्तियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।" पार्टी के प्रमुख सदस्य और पूर्व वित्त मंत्री [[पी. चिदंबरम]] ने कहा कि ''[[Navtej Singh Johar v. Union of India]]'' का निर्णय जल्दी से पलटा जाना चाहिए। 18 दिसंबर 2015 को, पार्टी के प्रमुख सदस्य शशि थरूर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को प्रतिस्थापित करने और सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त करने के लिए एक [[निजी सदस्य का बिल]] पेश किया। यह बिल पहले पठन में अस्वीकृत कर दिया गया। मार्च 2016 में, थरूर ने फिर से समलैंगिकता को अपराधमुक्त करने के लिए निजी सदस्य का बिल पेश किया, लेकिन इसे दूसरी बार भी अस्वीकृत कर दिया गया।
आर्थिक नीतियाँ
{{See also|Economic liberalisation in India}} कांग्रेस-नेतृत्व वाले सरकारों की आर्थिक नीति का इतिहास दो चरणों में बाँटा जा सकता है। पहला चरण स्वतंत्रता से 1991 तक चला और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र पर बहुत जोर दिया गया।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/a-short-history-of-indian-economy-1947-2019-tryst-with-destiny-other-stories-1565801528109.html|title=A short history of Indian economy 1947–2019: Tryst with destiny & other stories|date=14 August 2019|newspaper=Mint}}</ref> दूसरा चरण 1991 में [[आर्थिक उदारीकरण|आर्थिक उदारीकरण]] के साथ शुरू हुआ। वर्तमान में, कांग्रेस एक मिश्रित अर्थव्यवस्था का समर्थन करती है जिसमें निजी क्षेत्र और राज्य दोनों अर्थव्यवस्था को दिशा देते हैं, जो [[बाजार अर्थव्यवस्था|बाजार]] और [[योजित अर्थव्यवस्था|योजित अर्थव्यवस्थाओं]] के विशेषताओं को दर्शाता है। कांग्रेस आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण का समर्थन करती है—आयात को घरेलू उत्पाद से बदलने का और मानती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारीकरण करना चाहिए ताकि विकास की गति बढ़ सके।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/opinion/op-ed/nehrus-economic-philosophy/article18589548.ece|title=Nehru's economic philosophy|first=H.|last=Venkatasubbiah|newspaper=The Hindu|date=27 May 2017}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/manmohan-singh-credits-jawarharlal-nehru-for-the-idea-of-mixed-economy/articleshow/45197661.cms|title=Manmohan Singh credits Jawarharlal Nehru for the 'idea of mixed economy'|newspaper=The Economic Times}}</ref>
[[File
Mukherjee - World Economic Forum Annual Meeting Davos 2009.jpg|thumb|left|alt=refer caption | तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] [[विश्व आर्थिक मंच|विश्व आर्थिक शिखर सम्मेलन]] 2009 में नई दिल्ली में]]
पहले चरण की शुरुआत में, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण पर आधारित नीतियों को लागू किया और एक [[मिश्रित अर्थव्यवस्था]] की वकालत की जहां सरकारी-नियंत्रित [[सार्वजनिक क्षेत्र]] निजी क्षेत्र के साथ सह-अस्तित्व में होगा। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास और आधुनिकीकरण के लिए बुनियादी और भारी उद्योग की स्थापना को महत्वपूर्ण माना। इसलिए, सरकार ने निवेश को प्रमुख रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र की उद्योगों—इस्पात, लौह, कोयला, और बिजली में निर्देशित किया, उनके विकास को सब्सिडी और संरक्षणवादी नीतियों के साथ बढ़ावा दिया। इस अवधि को [[लाइसेंस राज]], या परमिट राज कहा गया,<ref>Oxford English Dictionary, 2nd edition, 1989: from [[Sanskrit|Skr.]] ''rāj'': to reign, rule; cognate with [[Latin|L.]] ''rēx'', ''rēg-is'', [[Old Irish|OIr.]] ''rī'', ''rīg'' king (see RICH).</ref> जो कि 1947 से 1990 के बीच भारत में व्यवसाय स्थापित करने और चलाने के लिए आवश्यक लाइसेंस, नियम और accompanying [[red tape]] की विस्तृत प्रणाली थी।<ref>[http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm Street Hawking Promise Jobs in Future] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20080329023451/http://www.swaminomics.org/articles/20011125_streethawking.htm |date=29 March 2008 }}, ''[[The Times of India]]'', 25 November 2001</ref> लाइसेंस राज ने नेहरू और उनके उत्तराधिकारियों की इच्छा का परिणाम था कि वे एक [[योजित अर्थव्यवस्था]] बनाना चाहते थे जहां अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं पर राज्य का नियंत्रण हो, और लाइसेंस केवल कुछ विशेष लोगों को दिए जाते थे। 80 सरकारी एजेंसियों को संतुष्ट करना आवश्यक था ताकि निजी कंपनियां कुछ उत्पादित कर सकें; और यदि लाइसेंस दिया जाता, तो सरकार उत्पादन को नियंत्रित करती।<ref name="bbcindia1998">{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/55427.stm|title=India: the economy|year=1998|publisher=BBC}}</ref> लाइसेंस राज प्रणाली इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी जारी रही। इसके अलावा, कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, इस्पात, कोयला और तेल का राष्ट्रीयकरण किया गया।<ref name="Rosser" /><ref name="Kapila1">{{Cite book | publisher=Academic Foundation| page=126|url={{Google books|de66PkzcfusC|page=PA126|plainurl=yes}} |isbn=978-8171881055| last1=Kapila| first1=Raj| last2=Kapila| first2=Uma| title=Understanding India's economic Reforms| year=2004}}</ref> राजीव गांधी के दौरान, व्यापार प्रणाली को कई आयात वस्तुओं पर शुल्क में कमी और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहनों के साथ उदार बनाया गया।<ref name="princeton.edu">{{cite journal |author1=Philippe Aghion|author2=Robin Burgess |author3=Stephen J. Redding|author4=Fabrizio Zilibotti |year=2008|url=http://www.princeton.edu/~reddings/pubpapers/ABRZ_AER_Sept2008.pdf|title=The Unequal Effects of Liberalization: Evidence from Dismantling the License Raj in India|journal=American Economic Review |volume=98|issue=4|pages=1397–1412|doi=10.1257/aer.98.4.1397|s2cid=966634 }}</ref> करों की दरों में कमी की गई और कंपनियों की संपत्ति पर प्रतिबंधों को ढीला किया गया।<ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19910615-in-an-india-known-for-thinking-small-rajiv-gandhi-generated-high-stakes-optimism-814461-1991-06-15|title=In an India known for thinking small, Rajiv Gandhi generated high-stakes optimism|first=Sudeep |last=Chakravarti|date=15 June 1991|website=India Today}}</ref>
1991 में, नए कांग्रेस सरकार ने, [[पी. वी. नरसिम्हा राव]] के नेतृत्व में, संभावित [[1991 भारत आर्थिक संकट|1991 आर्थिक संकट]] से बचने के लिए सुधारों की शुरुआत की।<ref name="Narasimha Rao was father of economic reform: Pranab" /><ref name="Ghosh">{{cite web|url=http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|archive-date=25 October 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131025042847/http://www.globaleconomicgovernance.org/wp-content/uploads/ghosh-pathways_india.pdf|title= India's Pathway through Financial Crisis|work=globaleconomicgovernance.org|first=Arunabha |last=Ghosh|publisher=Global Economic Governance Programme|access-date=2 March 2007}}</ref> ये सुधार [[नई आर्थिक नीति]] (NEP) या "1991 आर्थिक सुधार" या "एलपीजी सुधार" के रूप में जाने जाते हैं, जो विदेशी निवेश के लिए क्षेत्रों को खोलने, पूंजी बाजारों में सुधार, घरेलू व्यवसाय को [[डिरिसगुलेट|डिरिसगुलेट]] करने, और व्यापार प्रणाली में सुधार में सबसे आगे बढ़े। ये सुधार उस समय लागू किए गए जब भारत भुगतान संतुलन संकट, उच्च मुद्रास्फीति, कमज़ोर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs), और एक बड़ा वित्तीय घाटा का सामना कर रहा था।<ref name="LPG Rao">{{cite news |last1=Tiwari |first1=Brajesh Kumar |title=Dr Manmohan Singh: The Architect of India's Economic Reform |url=https://news.abplive.com/blog/dr-manmohan-singh-the-architect-of-india-s-economic-reform-1632067 |access-date=3 December 2023 |work=ABP News |agency=ABP Group |date=26 September 2023}}</ref> इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को समाजवादी मॉडल से बाजार अर्थव्यवस्था की ओर स्थानांतरित करना भी था।<ref name="Economy Reforms">{{cite news |last1=Chundawat |first1=Keshav Singh |title=Dr Manmohan Singh, the man who opened up Indian economy |url=https://www.cnbctv18.com/politics/pm-modi-extends-birthday-wishes-to-dr-manmohan-singh-the-man-who-opened-up-indian-economy-17886361.htm |access-date=3 December 2023 |work=CNBC TV18 |agency=Network18 Group |date=26 September 2023}}</ref> राव सरकार के लक्ष्यों में [[वित्तीय घाटा]] को कम करना, सार्वजनिक क्षेत्र का [[निजीकरण|निजीकरण]] करना, और अवसंरचना में निवेश बढ़ाना शामिल था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=ZbWF5hykvwYC&q=1991+economic+reforms+progressed+furthest+in+opening+up+areas+to+foreign+investment%2C+reforming+capital+markets%2C+deregulating+domestic+business%2C+and+reforming+the+trade+regime.&pg=PA65|title=Methodology And Perspectives of Business Studies|first=G.|last=Balachandran|date=28 July 2010|publisher=Ane Books India|isbn=9789380156682}}</ref> व्यापार सुधार और विदेशी निवेश के नियमों में बदलावों को पेश किया गया ताकि भारत को विदेशी व्यापार के लिए खोला जा सके जबकि बाहरी ऋण को स्थिर किया जा सके।<ref>{{cite web|url=https://www.livemint.com/news/india/narasimha-rao-s-bold-economic-reforms-helped-in-india-s-development-naidu-11609062633183.html|title=Narasimha Rao's bold economic reforms helped in India's development: Naidu|author=Staff Writer|date=27 December 2020|newspaper=Mint}}</ref> राव ने इस कार्य के लिए [[मनमोहन सिंह]] को चुना। सिंह, जो एक प्रशंसित अर्थशास्त्री और पूर्व [[भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर्स की सूची|भारतीय रिजर्व बैंक]] के गवर्नर थे, ने इन सुधारों को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/this-day-the-half-lion-saved-india-when-rao-and-manmohan-brought-economy-back-from-the-brink/articleshow/59738979.cms|title=This day the half-lion saved India: When Rao and Manmohan brought economy back from the brink|newspaper=The Economic Times}}</ref>
2004 में, मनमोहन सिंह ने कांग्रेस-नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उन्होंने 2009 में हुए आम चुनावों के बाद भी प्रधानमंत्री का पद बनाए रखा। सिंह सरकार ने बैंकों और वित्तीय क्षेत्रों में सुधार, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए नीतियों की शुरुआत की।<ref>{{cite news|title=Banking on reform|url=http://www.indianexpress.com/news/banking-on-reform/1059372/|access-date=14 June 2013|newspaper=The Indian Express}}</ref> इसके अतिरिक्त, किसानों के कर्ज़ में राहत देने वाली नीतियाँ भी लागू की गईं।<ref>{{cite web|title=Farmer Waiver Scheme- PM statement|url=http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=39122|publisher=PIB|access-date=14 June 2013}}</ref>
2005 में, सिंह सरकार ने [[मूल्य वर्धित कर|मूल्य वर्धित कर (VAT)]] लागू किया, जिसने बिक्री कर को प्रतिस्थापित किया। भारत ने 2008 की वैश्विक आर्थिक संकट के सबसे बुरे प्रभावों का सामना करने में सफलता हासिल की।<ref>Mohan, R., 2008. Global financial crisis and key risks: impact on India and Asia. RBI Bulletin, pp.2003–2022.</ref><ref>{{cite news|title=Global inflation climbs to historic levels|url=https://www.nytimes.com/2008/02/12/business/worldbusiness/12iht-inflate.1.9963291.html|newspaper=The New York Times|author=Kevin Plumberg|author2=Steven C. Johnson|access-date=17 June 2011|date=2 November 2008}}</ref>
सिंह सरकार ने [[गोल्डन क्वाड्रिलैटरल]] को जारी रखा, जो [[अटल बिहारी वाजपेयी|वाजपेयी]] सरकार द्वारा शुरू किया गया भारतीय राजमार्ग आधुनिकीकरण कार्यक्रम था।<ref>{{cite web|title=Economic benefits of golden Quadilateral|date=4 May 2013 |url=http://businesstoday.intoday.in/story/economic-benefits-of-the-golden-quadrilateral-project/1/194321.html|publisher=Business today|access-date=14 June 2013}}</ref> तब के वित्त मंत्री [[प्रणब मुखर्जी]] ने कई कर सुधार लागू किए, जिनमें [[फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स (भारत)|फ्रिंज बेनेफिट्स टैक्स]] और वस्तुओं के लेन-देन कर को समाप्त करना शामिल था।<ref>{{cite web|date=6 July 2009|title=Fringe benefit tax abolished|url=https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|access-date=31 August 2020|website=The Hindustan Times|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040931/https://www.hindustantimes.com/business/fringe-benefit-tax-abolished/story-w54pPgAH9TN3SE9ze9fdiI.html|url-status=live}}</ref> उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान [[वस्तु एवं सेवा कर (भारत)|वस्तु एवं सेवा कर (GST)]] को भी लागू किया।<ref>{{Cite news|date=13 April 2017|title=President Pranab Mukherjee gives nod to four supporting Bills on GST|work=The Hindu|url=https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|access-date=31 August 2020|issn=0971-751X|archive-date=10 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200610130246/https://www.thehindu.com/news/national/president-pranab-mukherjee-gives-nod-to-four-supporting-legislations-on-gst/article17982848.ece|url-status=live}}</ref>
उनके सुधारों को प्रमुख कॉर्पोरेट अधिकारियों और अर्थशास्त्रियों द्वारा अच्छा प्रतिसाद मिला। हालाँकि, कुछ अर्थशास्त्रियों ने रेट्रोस्पेक्टिव कराधान की आलोचना की।<ref>{{cite web|date=27 October 2017|title=Manmohan & Sonia opposed retrospective tax: Pranab Mukherjee |url=https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040859/https://theprint.in/pageturner/excerpt/retrospective-tax-pranab-mukherjee/13673/|archive-date=1 September 2020|url-status=live|access-date=31 August 2020|website=ThePrint}}</ref>
मुखर्जी ने कई सामाजिक क्षेत्र योजनाओं के लिए फंडिंग बढ़ाने के साथ-साथ [[जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन]] (JNNURM) का समर्थन किया। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में सुधार के लिए बजट में वृद्धि का समर्थन किया और [[राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम]] जैसे अवसंरचना कार्यक्रमों का विस्तार किया।<ref>{{cite web|title=More Funds for Infrastructure Development, Farmers|url=https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040912/https://www.outlookindia.com/newswire/story/more-funds-for-infrastructure-development-farmers/662289|magazine=Outlook|location=New Delhi}}</ref> उनके कार्यकाल के दौरान बिजली कवरेज का भी विस्तार हुआ। मुखर्जी ने राजकोषीय विवेक के सिद्धांत की पुष्टि की, जबकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने उनके कार्यकाल के दौरान बढ़ते राजकोषीय घाटे के बारे में चिंता व्यक्त की, जो 1991 के बाद से सबसे ऊंचा था। उन्होंने यह भी घोषित किया कि सरकारी खर्च में वृद्धि केवल अस्थायी थी।<ref>{{Cite news|title=Big spender|newspaper=The Economist |issn=0013-0613|url=https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender |access-date=1 September 2020|url-status=live|archive-date=1 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200901040901/https://www.economist.com/news/2009/07/07/big-spender}}</ref>
===राष्ट्रीय रक्षा और गृह मामले===
[[File:The Prime Minister, Dr. Manmohan Singh and his wife, Smt. Gursharan Kaur during the Passing Out Parade at the Platinum Jubilee Course of Indian Military Academy, in Dehradun, on December 10, 2007.jpg|thumb|10 दिसंबर 2007 को IMA के प्लेटिनम जुबली कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान [[मनमोहन सिंह]] और उनकी पत्नी; विदेशी जेंटलमैन कैडेट्स के साथ।]]
भारत ने स्वतंत्रता के बाद से ही परमाणु क्षमताओं की दिशा में प्रयास किए हैं। नेहरू का मानना था कि परमाणु ऊर्जा देश को आगे बढ़ाने में मदद करेगी और इसके विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी। इस दिशा में, उन्होंने ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका से सहायता प्राप्त करने की कोशिश की।<ref name="Vision">{{cite web |title=Indian Nuclear Program |url=https://www.atomicheritage.org/history/indian-nuclear-program |publisher=National Museum of Nuclear Science & History |access-date=7 July 2021}}</ref>
1958 में, भारत सरकार ने [[होमी जे. भाभा]] की मदद से तीन-चरणीय ऊर्जा उत्पादन योजना अपनाई, और [[भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र]] की स्थापना 1954 में की गई।<ref name="Perkovich2001">{{cite book|author=George Perkovich|title=India's Nuclear Bomb: The Impact on Global Proliferation|url=https://books.google.com/books?id=UDA9dUryS8EC&pg=PA22|year=2001|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23210-5|page=22}}</ref> इंदिरा गांधी ने 1964 से [[चीन]] द्वारा निरंतर परमाणु परीक्षणों को देखा, जिसे उन्होंने भारत के लिए एक अस्तित्व संबंधी खतरा माना।<ref name="JSTOR">{{cite journal |last1=Couper |first1=Frank E. |title=Indian Party Conflict on the Issue of Atomic Weapons |journal=The Journal of Developing Areas |year=1969 |volume=3 |issue=2 |pages=191–206 |url=https://www.jstor.org/stable/4189559 |publisher=JSTOR |jstor=4189559 |access-date=7 July 2021}}</ref><ref name="LATimes1998">{{cite news |last1=Tempest |first1=Rone |title=India's Nuclear Tests Jolt Its Relations With China |url=https://www.latimes.com/archives/la-xpm-1998-jun-11-mn-58841-story.html |access-date=7 July 2021 |work=Los Angeles Times Communications LLC |date=11 June 1998}}</ref>
भारत ने 18 मई 1974 को राजस्थान के [[पोखरण]] में पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे [[ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा]] कहा गया।<ref name="First Test">{{cite news |last1=Nair |first1=Arun |title=Smiling Buddha: All You Need To Know About India's First Nuclear Test at Pokhran |url=https://www.ndtv.com/india-news/smiling-buddha-all-you-need-to-know-about-indias-first-nuclear-test-at-pokhran-2230645 |access-date=5 July 2021 |publisher=NDTV |date=18 May 2020}}</ref> भारत ने दावा किया कि परीक्षण "[[शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट|शांतिपूर्ण उद्देश्यों]]" के लिए था, हालाँकि इस परीक्षण की अन्य देशों द्वारा आलोचना की गई और अमेरिका और कनाडा ने भारत को सभी परमाणु सहायता रोक दी।<ref name="PNE">{{cite web |title=India's Nuclear Weapons Program Smiling Buddha: 1974 |url=https://nuclearweaponarchive.org/India/IndiaSmiling.html |publisher=The Nuclear Weapon Archive |access-date=5 July 2021}}</ref>
गंभीर अंतर्राष्ट्रीय आलोचना के बावजूद, यह परमाणु परीक्षण देश में लोकप्रिय रहा और इंदिरा गांधी की लोकप्रियता में तुरंत पुनरुद्धार हुआ, जो 1971 के युद्ध के बाद से काफी गिर चुकी थी।<ref name="Buddha">{{cite news |last1=Chaturvedi |first1=Amit |title=Smiling Buddha: How India successfully conducted first nuclear test in Pokhran |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/smiling-buddha-how-india-successfully-conducted-first-nuclear-test-in-pokhran-101621301524390.html |access-date=4 July 2021 |work=The Hindustan Times|agency=HT Media Ltd |date=18 May 2021}}</ref><ref name="Popularity">{{cite news |last1=Malhotra |first1=Inder |title=When the Buddha first smiled |url=https://indianexpress.com/article/opinion/columns/when-the-buddha-first-smiled/ |access-date=5 July 2021 |work=The Indian Express |date=15 May 2009}}</ref>
भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्सों को राज्यत्व में परिवर्तन का सफल प्रबंधन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान किया गया।<ref name="Statehood NE">{{cite news |last1=Karmakar |first1=Rahul |title=Renewed push for Statehood in the Northeast |url=https://www.thehindu.com/news/national/renewed-push-for-statehood-in-the-northeast/article25032429.ece |access-date=20 July 2021 |work=The Hindu |date=25 September 2018}}</ref> 1972 में, उनके प्रशासन ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया, जबकि उत्तर-पूर्वी सीमा एजेंसी को एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया।<ref>{{Cite news |url=https://www.nytimes.com/1972/01/23/archives/india-rearranges-northeast-region-3-states-and-2-territories.html|title=INDIA REARRANGES NORTHEAST REGION|newspaper=The New York Times|date=23 January 1972}}</ref><ref>{{cite web |url=https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/arunachal-pradesh-309685-2016-02-20|title=Arunachal Pradesh became an Indian State today: Some interesting facts about the 'Land of the Dawn-Lit Mountains' |date=20 February 2017 |website=India Today}}</ref> इसके बाद, 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हुआ।<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/19780430-did-india-have-a-right-to-annex-sikkim-in-1975-818651-2015-02-18|title=Did India have a right to annex Sikkim in 1975?|first1=Sunil |last1=Sethi|date=18 February 2015 |website=India Today}}</ref> 1960 के अंत और 1970 के दशक में, गांधी ने पश्चिम बंगाल राज्य में नक्सलवादी उग्रवादियों के खिलाफ भारतीय सेना को भेजा। भारत में नक्सलवादी-माओवादी उग्रवाद को आपातकाल के दौरान पूरी तरह से कुचल दिया गया।<ref name="Naxalite">{{cite web |title=A historical introduction to Naxalism in India |url=https://www.efsas.org/publications/study-papers/an-introduction-to-naxalism-in-india/ |publisher=European Foundation for South Asian Studies |access-date=3 December 2023}}</ref>
मनमोहन सिंह के प्रशासन ने कश्मीर में क्षेत्र को स्थिर करने के लिए एक विशाल पुनर्निर्माण प्रयास शुरू किया और आतंकवाद विरोधी कानूनों को संशोधन के साथ मजबूत किया।<ref name="UAPA">{{cite web|title=The Unlawful Activities (Prevention) |url=http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|website=nic.in |publisher=National Informatics Centre|access-date=17 August 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20161017053842/http://mha.nic.in/hindi/sites/upload_files/mhahindi/files/pdf/UAPA-1967.pdf|archive-date=17 October 2016|url-status=dead}}</ref> प्रारंभिक सफलता के बाद, 2009 से कश्मीर में उग्रवादी घुसपैठ और आतंकवाद में वृद्धि हुई है। हालांकि, सिंह प्रशासन उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद को कम करने में सफल रहा।<ref name=Buzz7>[http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html Infiltration has not reduced in Kashmir, insurgency down in North East: Chidambaram] {{webarchive |url=https://web.archive.org/web/20160107072045/http://buzz7.com/news/infiltration-has-not-reduced-in-kashmir-insurgency-down-in-north-east-chidambaram.html |date=7 January 2016 }}</ref> पंजाब के उग्रवाद के संदर्भ में, आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों (निवारण) अधिनियम (TADA) पारित किया गया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान से घुसपैठियों को समाप्त करना था। कानून ने राष्ट्रीय आतंकवादी और सामाजिक विघटनकारी गतिविधियों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को व्यापक शक्तियाँ दीं। पुलिस को 24 घंटे के भीतर एक detenue को न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की आवश्यकता नहीं थी। इस कानून की मानवाधिकार संगठनों द्वारा व्यापक आलोचना की गई। नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद, यूपीए सरकार ने आतंकवाद से लड़ने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) बनाई।<ref>{{cite web|author=TNN |url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |archive-url=https://web.archive.org/web/20121022154006/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2008-12-16/india/27904311_1_special-anti-terror-law-nia-terror-related |url-status=dead |archive-date=22 October 2012 |title=Finally, govt clears central terror agency, tougher laws |date=16 December 2008 |work=[[The Times of India]] |access-date=28 September 2013}}</ref> अद्वितीय पहचान प्राधिकरण भारत की स्थापना फरवरी 2009 में की गई ताकि प्रस्तावित बहुउद्देशीय राष्ट्रीय पहचान पत्र को लागू किया जा सके, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाना था।<ref>{{cite book |last1=K |first1=Watfa, Mohamed |title=E-Healthcare Systems and Wireless Communications: Current and Future Challenges: Current and Future Challenges |date=2011 |publisher=IGI Global |isbn=978-1-61350-124-5 |page=190 |url=https://books.google.com/books?id=kOaeBQAAQBAJ&q=The+Unique+Identification+Authority+of+India+was+established+in+February+2009+to+implement+the+proposed+Multipurpose+National+Identity+Card%2C+with+the+objective+of+increasing+national+security&pg=PA190 |access-date=6 June 2018}}</ref>
===शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा===
नेहरू के तहत कांग्रेस सरकार ने कई उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की, जिसमें [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]], [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]], [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] और [[राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] शामिल हैं। [[राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद]] (NCERT) 1961 में समाजों के पंजीकरण अधिनियम के तहत एक साहित्यिक, वैज्ञानिक और चैरिटेबल सोसाइटी के रूप में स्थापित की गई।<ref name="NCERT">{{cite web |title=NCERT Full form |url=https://www.vedantu.com/full-form/ncert-full-form |publisher=Vedantu |access-date=7 July 2021}}</ref> जवाहरलाल नेहरू ने अपने [[पाँच वर्षीय योजनाएँ|पाँच वर्षीय योजनाओं]] में भारत के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने की प्रतिबद्धता का outlines किया। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रीत्व ने भारत में सार्वजनिक सूचना बुनियादी ढाँचे और नवाचार की शुरुआत की।<ref name="Rajiv Modern">{{cite news |last1=Shakti Shekhar |first1=Kumar |title=5 ways how Rajiv Gandhi changed India forever |url=https://www.indiatoday.in/india/story/5-ways-how-rajiv-gandhi-changed-india-forever-1318979-2018-08-20 |access-date=4 July 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=20 August 2018}}</ref> उनके सरकार ने पूरी तरह से असंबद्ध [[मदरबोर्ड]] के आयात की अनुमति दी, जिससे कंप्यूटर की कीमतें कम हुईं।<ref name="computer">{{cite web |last1=Singal |first1=Aastha |title=Rajiv Gandhi –The Father of Information Technology & Telecom Revolution of India |url=https://www.entrepreneur.com/article/338415 |website=entrepreneur.com/ |date=20 August 2019 |publisher=Entrepreneur India |access-date=4 July 2021}}</ref> हर जिले में [[नवोदय विद्यालय]] की स्थापना का विचार [[राष्ट्रीय शिक्षा नीति]] (NPE) का हिस्सा था।<ref name="NPE TOI">{{cite news |last1=Sharma |first1=Sanjay |title=National Education Policy 2020: All You Need to Know |url=https://timesofindia.indiatimes.com/home/education/news/national-education-policy-2020-all-you-need-to-know/articleshow/77239854.cms |access-date=24 July 2021 |work=The Times of India |date=30 July 2020}}</ref>
2005 में, कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत की, जिसमें लगभग 500,000 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्यरत थे। इसे अर्थशास्त्री [[जेफ्री सैक्स]] द्वारा सराहा गया।<ref name="timepoverty">{{cite news|title=The End of Poverty|url=http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20050317031951/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1034738,00.html|url-status=dead|archive-date=17 March 2005|first=Jeffrey D.|last=Sachs|date=6 March 2005|magazine=Time}}</ref> 2006 में, इसने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान]] (IITs), [[भारतीय प्रबंधन संस्थान]] (IIMs) और अन्य केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में [[अन्य पिछड़ा वर्ग]] के लिए 27 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रस्ताव लागू किया, जिसके कारण [[2006 भारतीय विरोध प्रदर्शन]] हुए।<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/Students-cry-out-No-reservation-please/articleshow/1513316.cms |title=Students cry out: No reservation please |work=The Times of India |date=3 May 2006 |access-date=16 August 2018}}</ref> सिंह सरकार ने [[सर्व शिक्षा अभियान]] कार्यक्रम को भी जारी रखा, जिसमें मध्याह्न भोजन की व्यवस्था और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नई स्कूलों की स्थापना शामिल है, ताकि [[अनपढ़ता]] से लड़ सके।<ref>{{cite news|title=Direct SSA funds for school panels|url=http://www.deccanherald.com/content/338571/direct-ssa-funds-school-panels.html|access-date=14 June 2013|newspaper=Deccan Herald}}</ref> मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व के दौरान, आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में आठ प्रौद्योगिकी संस्थानों की स्थापना की गई।<ref>{{cite news|title=LS passes bill to provide IIT for eight states.|url=http://www.deccanherald.com/content/148456/ls-passes-bill-provide-iit.html|newspaper=Deccan Herald|access-date=14 June 2013}}</ref>
===विदेश नीति===
[[File:NATO vs. Warsaw Pact (1949-1990).svg|thumb|उत्तर गोलार्ध में ''संबद्ध देशों'': [[NATO]] नीले रंग में और [[वारसॉ संधि]] लाल रंग में।]]
[[File:Stevan Kragujevic, Tito, Naser, Nehru, Dolazak na Brione.jpg|thumb|right|alt=refer caption|[[गमाल अब्देल नासिर]], [[जवाहरलाल नेहरू]], और [[जोसेप ब्रोज टिटो]], [[गैर-आश्रित आंदोलन]] के अग्रदूत]]
[[शीत युद्ध]] के अधिकांश समय में, कांग्रेस ने [[गैर-आश्रित आंदोलन|गैर-आश्रित]] नीति का समर्थन किया, जिसमें भारत को पश्चिमी और पूर्वी ब्लॉकों दोनों के साथ संबंध स्थापित करने का आह्वान किया गया, लेकिन किसी भी ओर औपचारिक गठबंधन से बचने की सलाह दी गई।<ref>{{cite web |url=https://timesofindia.indiatimes.com/india/jawaharlal-nehru-the-architect-of-indias-foreign-policy/articleshow/58767014.cms |title=गैर-आश्रित आंदोलन: जवाहरलाल नेहरू - भारत की विदेश नीति के वास्तुकार|work=The Times of India |date=20 मई 2017 |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> अमेरिका के पाकिस्तान के प्रति समर्थन ने पार्टी को 1971 में सोवियत संघ के साथ एक मित्रता संधि को समर्थन देने के लिए प्रेरित किया।<ref>{{cite web |url=https://blogs.timesofindia.indiatimes.com/ChanakyaCode/the-indo-pak-war-1965-and-the-tashkent-agreement-role-of-external-powers/ |title=1965 का भारत-पाक युद्ध और ताशकंद समझौता: बाहरी शक्तियों की भूमिका |date=24 अक्टूबर 2015 |work=The Times of India |access-date=16 अगस्त 2018}}</ref> कांग्रेस ने पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा शुरू की गई विदेश नीति को जारी रखा, जिसमें [[भारत-पाकिस्तान संबंध|पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया]] और दोनों देशों के नेताओं के बीच उच्च-स्तरीय विजिट का आदान-प्रदान शामिल है।<ref name=peace>{{cite news|title=Negotiation की स्थिति|url=http://www.firstpost.com/india/loc-violation-are-talks-enough-or-should-india-take-action-582121.html|access-date=18 अगस्त 2014|publisher=[[Firstpost]]|agency=[[Network 18]]|date=9 जनवरी 2013}}</ref> यूपीए सरकार ने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ सीमा विवाद को बातचीत के माध्यम से समाप्त करने का प्रयास किया।<ref name="Economist news">{{cite news|title=भारत के प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह, व्यापार और सीमा रक्षा के मामलों पर चर्चा करने के लिए बीजिंग में|url=https://www.economist.com/news/world-week/21588422-politics-week|access-date=18 अगस्त 2014|newspaper=[[The Economist]]|date=26 अक्टूबर 2013}}</ref><ref name=republic>{{cite news|title=भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजिंग का दौरा किया|url=http://www.china-briefing.com/news/2008/01/14/indian-prime-minister-manmohan-singh-visits-beijing.html|access-date=18 अगस्त 2014|work=China Briefing|agency=Dezan Shira & Associates|publisher=Business Intelligence|date=14 जनवरी 2008}}</ref>
[[अफगानिस्तान-भारत संबंध|अफगानिस्तान के साथ संबंध]] भी कांग्रेस के लिए चिंता का विषय रहे हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|title=भारत-अफगानिस्तान संबंध|access-date=11 दिसंबर 2008|last=Bajoria|first=Jayshree|date=23 अक्टूबर 2008|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20081129231738/http://www.cfr.org/publication/17474/indiaafghanistan_relations.html|archive-date=29 नवंबर 2008}}</ref> अफगान राष्ट्रपति [[हामिद करज़ई]] के अगस्त 2008 में नई दिल्ली दौरे के दौरान, मनमोहन सिंह ने अफगानिस्तान के लिए स्कूलों, स्वास्थ्य क्लिनिक, बुनियादी ढाँचा और रक्षा के विकास के लिए सहायता पैकेज बढ़ाया।<ref name=BBC2>{{cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/7540204.stm|title=भारत ने अफगानिस्तान के लिए अधिक सहायता की घोषणा की|date=4 अगस्त 2008|publisher=BBC News}}</ref> भारत अब अफगानिस्तान के लिए सबसे बड़े एकल सहायता दाताओं में से एक है।<ref name=BBC2 /> मध्य एशियाई देशों के साथ राजनीतिक, सुरक्षा, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए, भारत ने 2012 में [[कनेक्ट सेंट्रल एशिया]] नीति शुरू की। यह नीति [[कजाखस्तान]], [[किर्गिस्तान]], [[ताजिकिस्तान]], [[तुर्कमेनिस्तान]], और [[उज़्बेकिस्तान]] के साथ भारत के संबंधों को मजबूत और विस्तारित करने के उद्देश्य से है। [[पूर्व की ओर देखो नीति (भारत)|पूर्व की ओर देखो नीति]] 1992 में [[नरसिम्हा राव|नरसिम्हा राव]] द्वारा दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए शुरू की गई, ताकि भारत की क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थिति को मजबूत किया जा सके और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के रणनीतिक प्रभाव का प्रतिरोध किया जा सके। इसके बाद, 1992 में राव ने इसराइल के साथ भारत के संबंधों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया, जो उनके विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान कुछ वर्षों तक गुप्त रूप से सक्रिय थे, और इसराइल को नई दिल्ली में एक दूतावास खोलने की अनुमति दी।<ref name="IsraelRao">{{cite news |title=भारत और इसराइल के बीच संबंधों का समय-रेखा |url=https://www.livemint.com/Politics/9zCAQDe5L5mKdtU21A6pkN/Narendra-Modi-in-Israel-A-timeline-of-Indias-ties-with-Isr.html |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=Mint |agency=HT Media |date=4 जुलाई 2017}}</ref> राव ने [[दलाई लामा]] से दूर रहने का निर्णय लिया ताकि बीजिंग की शंकाओं और चिंताओं को न बढ़ाया जा सके, और [[तेहरान]] के साथ सफल संपर्क बनाए।<ref name="Irish1996">{{cite news |last1=Bedi |first1=Rahul |title=दलाई लामा फिल्मों के लिए अनुमति अस्वीकृत |url=https://www.irishtimes.com/news/permission-for-dalai-lama-films-denied-1.41053 |access-date=2 अगस्त 2021 |newspaper=The Irish Times |date=19 अप्रैल 1996}}</ref>
हालाँकि कांग्रेस की विदेश नीति का सिद्धांत सभी देशों के साथ मित्रता बनाए रखने का है, लेकिन यह हमेशा अफ्रीका-एशिया के देशों के प्रति विशेष झुकाव प्रदर्शित करती है। इसने [[Group of 77]] (1964), [[Group of 15]] (1990), [[Indian Ocean Rim Association]], और [[SAARC]] के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इंदिरा गांधी ने अफ्रीका में भारतीय एंटी-इंपीरियलिस्ट हितों को सोवियत संघ के हितों से मजबूती से जोड़ा। उन्होंने अफ्रीका में मुक्ति संघर्षों का खुलकर और उत्साहपूर्वक समर्थन किया।<ref name="MEAIndira">{{cite web |title=भारत – ज़ाम्बिया संबंध |url=https://mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/Zambia_Jan_2016.pdf |publisher=भारतीय विदेश मंत्रालय |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref> अप्रैल 2006 में, नई दिल्ली ने 15 अफ्रीकी राज्यों के नेताओं की उपस्थिति में एक भारत-आफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन किया।
कांग्रेस पार्टी ने हथियारों की दौड़ का विरोध किया है और पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के निरस्त्रीकरण की वकालत की है।<ref name="IndiaToday2000">{{cite news |last1=Mitra |first1=Sumit |title=क्या भारत को और परमाणु परीक्षण करने चाहिए, इस पर कांग्रेस में विभाजन|url=https://www.indiatoday.in/magazine/nation/story/20000508-congress-divided-against-itself-on-whether-india-should-have-more-nuclear-tests-777525-2000-05-08 |access-date=7 जुलाई 2021 |work=India Today |agency=Living Media Pvt. Ltd. |date=8 मई 2000}}</ref> 2004 से 2014 के बीच सत्ता में रहते हुए, कांग्रेस ने [[भारत-यूएस संबंध|भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संबंध]] पर काम किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जुलाई 2005 में अमेरिका का दौरा किया ताकि [[भारत-यूएस नागरिक परमाणु समझौता]] पर बातचीत की जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति [[जॉर्ज डब्ल्यू. बुश]] मार्च 2006 में भारत आए; इस दौरे के दौरान, एक परमाणु समझौता प्रस्तावित किया गया, जिसके तहत भारत को परमाणु ईंधन और प्रौद्योगिकी की पहुंच प्राप्त होती और इसके बदले में [[अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी|IAEA]] द्वारा इसके नागरिक [[परमाणु रिएक्टर]]ों का निरीक्षण किया जाता। दो वर्षों की बातचीत के बाद, IAEA, [[परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह]] और [[संयुक्त राज्य कांग्रेस]] से स्वीकृति मिलने के बाद, यह समझौता 10 अक्टूबर 2008 को हस्ताक्षरित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://english.peopledaily.com.cn/90001/90777/90852/6513319.html| title=यू.एस., भारत ने ऐतिहासिक नागरिक परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए|access-date=11 दिसंबर 2008|date=11 अक्टूबर 2008|work=People's Daily}}</ref> हालांकि, भारत ने [[परमाणु अप्रसार संधि]] (NPT) और [[व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि]] (CTBT) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि वे भेदभावपूर्ण और साम्राज्यवादी प्रकृति के हैं।<ref name="NTI2019">{{cite web |title=भारतीय परमाणु हथियार कार्यक्रम |url=https://www.nti.org/learn/countries/india/nuclear/ |publisher=The Nuclear Threat Initiative|access-date=7 जुलाई 2021}}</ref><ref name="Sipri2010">{{cite report |last1=Gopalaswamy |first1=Bharat |title=भारत और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि: हस्ताक्षर करें या न करें? |date=जनवरी 2010 |url=https://www.sipri.org/publications/sipri-policy-briefs/india-and-comprehensive-nuclear-test-ban-treaty-sign-or-not-sign |publisher=SIPRI |access-date=7 जुलाई 2021}}</ref>
कांग्रेस की नीति जापान के साथ-साथ यूरोपीय संघ के देशों, जैसे कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, और जर्मनी के साथ मित्रता संबंधों को विकसित करने की रही है।<ref name=conversation>{{cite web|last1=Haass|first1=Richard N.|title=प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ एक वार्तालाप|url=http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|date=23 नवंबर 2009|website=cfr.org|publisher=[[Council on Foreign Relations]]|access-date=18 अगस्त 2014|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20140819083228/http://www.cfr.org/india/conversation-prime-minister-dr-manmohan-singh/p20840|archive-date=19 अगस्त 2014}}</ref> ईरान के साथ कूटनीतिक संबंध जारी रहे हैं, और [[ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन]] पर बातचीत हुई है।<ref name="Iran relations">{{cite web|title=शांति पाइपलाइन|url=http://www.thenational.ae/news/the-peace-pipeline|work=The National|location=अबू धाबी|date=28 मई 2009|access-date=18 अगस्त 2014}}</ref> कांग्रेस की नीति अन्य विकासशील देशों, विशेषकर ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के साथ संबंध सुधारने की भी रही है।<ref>{{cite web|title=भारत-दक्षिण अफ्रीका संबंध|url=http://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/India-SouthAfrica_Relations.pdf|website=mea.gov.in|publisher=[[Ministry of External Affairs (India)|भारतीय विदेश मंत्रालय]], [[भारत सरकार]]|access-date=18 सितंबर 2014}}</ref>
== संरचना और संगठन ==
{{See also|भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची|अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी|कांग्रेस कार्यसमिति}}
[[File:Stamp of India - 1985 - Colnect 167209 - Indian National Congress.jpeg|thumb|right|200px|कांग्रेस की शताब्दी के उपलक्ष्य में जारी डाक टिकट]]
वर्तमान में, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची|अध्यक्ष]] और [[अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी]] (एआईसीसी) का चुनाव वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य एवं ज़िला स्तरीय इकाइयों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश—या ''प्रदेश''—में एक [[प्रदेश कांग्रेस कमेटी]] (पीसीसी) होती है,<ref name="Committee">{{cite web |title=President of Pradesh Congress Committee |url=https://www.inc.in/en/pcc-presidents |publisher=INC web portal |access-date=26 May 2020 |archive-date=16 April 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200416160136/https://www.inc.in/en/pcc-presidents |url-status=dead }}</ref> जो पार्टी की राज्य-स्तरीय इकाई होती है और स्थानीय व राज्य स्तर पर राजनीतिक अभियानों का संचालन करती है तथा संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के अभियानों में सहायता करती है।<ref>{{cite web |title=The Past And Future of the Indian National Congress |url=http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |website=[[द कारवां]] |access-date=6 June 2018 |date=March 2010 |via=[[रामचंद्र गुहा]] |archive-date=20 जून 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180620095241/http://ramachandraguha.in/archives/the-past-and-future-of-the-indian-national-congresscaravan.html |url-status=dead }}</ref> प्रत्येक पीसीसी की 20 सदस्यों की एक कार्यसमिति होती है, जिनमें से अधिकांश की नियुक्ति पार्टी अध्यक्ष द्वारा की जाती है। राज्य पार्टी के नेता का चयन राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जाता है। राज्य विधानसभाओं के लिए चुने गए कांग्रेस विधायक विभिन्न राज्यों में कांग्रेस विधायक दल का गठन करते हैं; इनका अध्यक्ष सामान्यतः मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी का नामित उम्मीदवार होता है। पार्टी विभिन्न समितियों और विभागों में संगठित है तथा एक दैनिक समाचार पत्र ''[[नेशनल हेराल्ड (भारत)|नेशनल हेराल्ड]]'' प्रकाशित करती है।<ref name="Kumar1990">{{cite book|author=Kedar Nath Kumar|title=Political Parties in India, Their Ideology and Organisation|url={{Google books|x3pJ8t4rxIsC|page=PA41|plainurl=yes}}|date=1 January 1990|publisher=Mittal Publications|isbn=978-81-7099-205-9|pages=41–43}}</ref>
संरचना होने के बावजूद, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 1972 के बाद कोई संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए।<ref>{{cite book|last1=Sanghvi|first1=Vijay|title=The Congress Indira to Sonia Gandhi|date=2006|publisher=Kalpaz Publications|location=Delhi|isbn=978-8178353401|page=128|url=https://books.google.com/books?id=npdqD_TXucQC|access-date=4 November 2016}}</ref> इसके बावजूद, 2004 में जब कांग्रेस पुनः सत्ता में आई, तो [[मनमोहन सिंह]] पार्टी अध्यक्ष न होते हुए भी प्रधानमंत्री बने—जो इस परंपरा के बाद पहली बार हुआ।<ref>{{Cite news |url=https://www.indiatoday.in/india-today-insight/story/rahul-gandhi-congress-president-gandhi-chief-1564307-2019-07-08|title=Goodbye, Rahul Gandhi?|website=India Today|agency=Living Media India Limited|date=8 July 2019|last=Deka|first=Kaushik|accessdate=22 May 2021}}</ref>
एआईसीसी, पीसीसी से भेजे गए प्रतिनिधियों से मिलकर बनती है।<ref name="Kumar1990" /> ये प्रतिनिधि [[कांग्रेस कार्यसमिति]] सहित विभिन्न कांग्रेस समितियों का चुनाव करते हैं, जिनमें वरिष्ठ पार्टी नेता और पदाधिकारी शामिल होते हैं। एआईसीसी सभी महत्वपूर्ण कार्यकारी और राजनीतिक निर्णय लेती है। 1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन के बाद से [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष]] प्रभावी रूप से पार्टी के राष्ट्रीय नेता, संगठन प्रमुख, कार्यसमिति प्रमुख, मुख्य प्रवक्ता और [[भारत के प्रधानमंत्री]] पद के लिए पार्टी की पसंद रहे हैं। संवैधानिक रूप से अध्यक्ष का चुनाव पीसीसी और एआईसीसी के सदस्यों द्वारा किया जाता है; हालांकि, कई बार कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा ही उम्मीदवार चुना गया है।<ref name="Kumar1990" />
[[File:NSUI National Convention INQUILAB 1.jpg|thumb|right|alt=कांग्रेस छात्र संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन| [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई) का राष्ट्रीय अधिवेशन ‘इंक़िलाब-1’, जयपुर]]
कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) में लोकसभा और [[राज्यसभा]] के निर्वाचित सांसद शामिल होते हैं। प्रत्येक राज्य में कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) का एक नेता भी होता है। सीएलपी में उस राज्य के सभी कांग्रेस [[भारत के विधायक]] शामिल होते हैं। जिन राज्यों में कांग्रेस अकेले सरकार बनाती है, वहाँ सीएलपी नेता ही [[मुख्यमंत्री]] होता है। अन्य प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध संगठन इस प्रकार हैं:
* [[राष्ट्रीय छात्र संघ भारत]] (एनएसयूआई), कांग्रेस का छात्र संगठन।
* [[भारतीय युवा कांग्रेस]], पार्टी का युवा संगठन।
* [[भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस]], श्रमिक संगठन।
* [[अखिल भारतीय महिला कांग्रेस]], पार्टी का महिला संगठन।
* [[किसान और खेत मजदूर कांग्रेस]], पार्टी का किसान प्रकोष्ठ।
* [[अखिल भारतीय प्रोफेशनल्स कांग्रेस]], कार्यरत पेशेवरों का संगठन।
* कांग्रेस [[सेवा दल]], पार्टी का स्वयंसेवी संगठन।<ref>{{cite web|url=http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|title=All India 2014 Results|website=Political Baba|access-date=26 May 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150527000402/http://www.politicalbaba.com/election-2014/all-india-2014-results-partywise/|archive-date=27 May 2015|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|title=Lok Sabha Election 2014 Analysis, Infographics, Election 2014 Map, Election 2014 Charts|publisher=Firstpost|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924142920/http://www.firstpost.com/lok-sabha-election-2014/data|archive-date=24 September 2015}}</ref>
* अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग, जिसे अल्पसंख्यक कांग्रेस भी कहा जाता है, कांग्रेस पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ है। यह [[भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेश|भारत के सभी राज्यों]] में ''प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग'' के माध्यम से कार्य करता है।<ref>{{cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/congress-minority-cell-opposes-quota-cut-36478|title=Congress minority cell opposes quota cut|website=Tribuneindia News Service|date=5 February 2020|access-date=6 February 2020}}</ref>
=== चुनाव चिह्न ===
[[File:Cow and Calf INC.svg|thumb|150px|alt=इंदिरा गांधी कांग्रेस का स्वीकृत चुनाव चिह्न| 1971–1977 के दौरान कांग्रेस (आर) पार्टी का चुनाव चिह्न]]
{{as of|2021}}, [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] का [[चुनाव चिह्न]], जैसा कि [[भारत निर्वाचन आयोग]] द्वारा स्वीकृत है, सामने की ओर खुली हथेली वाला दाहिने हाथ का प्रतीक है, जिसमें उंगलियाँ आपस में जुड़ी होती हैं;<ref name=hand>{{cite news|title=A Short History of the Congress Hand|url=https://blogs.wsj.com/indiarealtime/2012/03/28/a-short-history-of-the-congress-hand/|access-date=27 June 2014|work=[[The Wall Street Journal]]|agency=[[Dow Jones & Company]]|publisher=[[News Corp (2013–present)|News Corp]]|date=28 March 2012}}</ref> इसे सामान्यतः तिरंगे झंडे के मध्य में प्रदर्शित किया जाता है। हाथ का यह चिह्न पहली बार इंदिरा गांधी द्वारा 1977 के चुनावों के बाद कांग्रेस (आर) से अलग होकर नई कांग्रेस (आई) के गठन के समय अपनाया गया था।<ref name="hand symbol">{{cite news|title=How Indira's Congress got its hand symbol|url=http://www.ndtv.com/article/lifestyle/how-indira-s-congress-got-its-hand-symbol-74104|access-date=27 June 2014|publisher=[[एनडीटीवी]]|date=22 December 2010}}</ref> हाथ शक्ति, ऊर्जा और एकता का प्रतीक है।
नेहरू के नेतृत्व में पार्टी का चुनाव चिह्न ‘जुए के साथ बैलों की जोड़ी’ था, जिसने उस समय की जनता—जो मुख्यतः किसान थी—के साथ गहरा जुड़ाव स्थापित किया।<ref name=bullocks>{{cite news|title=Indian political party election symbols from 1951|url=http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20140407090702/http://ibnlive.in.com/news/indian-political-party-election-symbols-from-1951-when-congress-had-bullocks-and-the-hand-was-forward-blocs/462504-81.html|url-status=dead|archive-date=7 April 2014|access-date=27 June 2014|publisher=CNN-IBN|date=4 April 2014}}</ref>
1969 में कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक संघर्षों के कारण इंदिरा गांधी ने अलग होकर अपनी पार्टी बनाने का निर्णय लिया। कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों ने उनके नेतृत्व का समर्थन किया और नई पार्टी का नाम कांग्रेस (आर) रखा गया। 1971–1977 की अवधि के दौरान इंदिरा गांधी की [[कांग्रेस (आर)]] या कांग्रेस (रिक्विज़िशनिस्ट्स) का चुनाव चिह्न बछड़े के साथ गाय था।<ref name="Electoral Symbol">{{cite news |title=A tale of changing election symbols of Congress, BJP |url=https://timesofindia.indiatimes.com/elections/news/a-tale-of-congress-bjp-election-symbols/articleshow/68732103.cms |access-date=26 May 2020 |work=The Times of India |date=5 April 2019}}</ref><ref name="book"/>
लोकसभा में पार्टी के 153 सदस्यों में से 76 का समर्थन खो देने के बाद, इंदिरा गांधी की नई राजनीतिक इकाई कांग्रेस (आई) या कांग्रेस (इंदिरा) के रूप में विकसित हुई और उन्होंने हाथ (खुली हथेली) को चुनाव चिह्न के रूप में अपनाया।
=== वंशवाद ===
भारत की कई [[भारत के राजनीतिक दलों की सूची|राजनीतिक पार्टियों]] में वंशवाद अपेक्षाकृत सामान्य है, और कांग्रेस पार्टी भी इसका अपवाद नहीं है।<ref name="Denyer2014">{{cite book|author=Simon Denyer|title=Rogue Elephant: Harnessing the Power of India's Unruly Democracy|url=https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny|url-access=registration|date=24 June 2014|publisher=Bloomsbury USA|isbn=978-1-62040-608-3|pages=[https://archive.org/details/rogueelephanthar0000deny/page/115 115]–116}}</ref> [[नेहरू–गांधी परिवार]] के छह सदस्य पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं।<ref name="Gandhi presidents">{{cite news |last1=Radhakrishnan |first1=Sruthi |title=Presidents of Congress past: A look at the party's presidency since 1947 |url=https://www.thehindu.com/news/national/presidents-of-congress-past-a-look-at-the-partys-presidency-since-1947/article21639174.ece |access-date=26 May 2020 |work=The Hindu |date=14 December 2017}}</ref>
[[भारत में आपातकाल]] के दौरान पार्टी पर इंदिरा गांधी के परिवार का प्रभाव बढ़ गया, जिसमें उनके छोटे पुत्र [[संजय गांधी]] की प्रमुख भूमिका रही।<ref name="Tarlo2003">{{cite book|author=Emma Tarlo|title=Unsettling Memories: Narratives of the Emergency in Delhi|url=https://books.google.com/books?id=3IO1WB2H8UUC&pg=PR5|date=24 July 2003|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-23122-1|pages=27–29}}</ref> इस अवधि को परिवार के प्रति चाटुकारिता और अधीनता से जोड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा गांधी की हत्या के बाद [[राजीव गांधी]] का उत्तराधिकारी के रूप में चयन हुआ। बाद में राजीव गांधी की हत्या के पश्चात पार्टी ने [[सोनिया गांधी]] को उनका उत्तराधिकारी चुना, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया।<ref name="Bose2013">{{cite book|author=Sumantra Bose|title=Transforming India|url={{Google books|reiwAAAAQBAJ|page=PP8|plainurl=yes}}|date=16 September 2013|publisher=Harvard University Press|isbn=978-0-674-72819-6|pages=28–29}}</ref>
1978 में इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस (आई) के गठन से लेकर 2022 तक, 1991 से 1998 के बीच की अवधि को छोड़कर, पार्टी अध्यक्ष उनके ही परिवार से रहा। लोकसभा के पिछले तीन चुनावों को मिलाकर देखें तो कांग्रेस के 37 प्रतिशत सांसदों के परिवार के सदस्य उनसे पहले राजनीति में सक्रिय रहे हैं।<ref name="Chandra2016">{{cite book|editor1=Kanchan Chandra|author1=Adam Ziegfeld|title=Democratic Dynasties: State, Party and Family in Contemporary Indian Politics|url={{Google books|tesIDAAAQBAJ|page=PR10|plainurl=yes}}|date=28 April 2016|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-12344-1|page=105}}</ref>
== काँग्रेस की नीतियों का विरोध ==
समय-समय पर विभिन्न नेताओं ने काँग्रेस की नीतियों का विरोध किया और उसे हटाने के लिये संघर्ष किया।<ref>{{Cite web |url=http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |title=30 rebels against the Nehru-Gandhi dynasty |access-date=16 अप्रैल 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190416041531/http://www.sify.com/news/30-rebels-against-the-nehru-gandhi-dynasty-imagegallery-2-features-nliivnffegesi.html |archive-date=16 अप्रैल 2019 |url-status=dead }}</ref> इनमें [[राममनोहर लोहिया]] का नाम अग्रणी है जो [[जवाहरलाल नेहरू]] के कट्टर विरोधी थे। इसके अलावा [[जयप्रकाश नारायण]] ने [[इंदिरा गाँधी]] की सत्ता को उखाड़ फेंका और एक नया रूप दिया। [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] ने बोफोर्स दलाली काण्ड को लेकर [[राजीव गाँधी]] को सत्ता से हटा दिया।
=== लोहिया का 'काँग्रेस हटाओ' आन्दोलन ===
'''[[संयुक्त विधायक दल]]''' भी देखें
[[राम मनोहर लोहिया]] लोगों को आगाह करते आ रहे थे कि देश की हालत को सुधारने में काँग्रेस नाकाम रही है। काँग्रेस शासन नए समाज की रचना में सबसे बड़ा रोड़ा है। उसका सत्ता में बने रहना देश के लिये हितकर नहीं है। इसलिए लोहिया ने नारा दिया - "काँग्रेस हटाओ, देश बचाओ।"
1967 के आम चुनाव में एक बड़ा परिवर्तन हुआ। देश के 9 राज्यों - [[पश्चिम बंगाल]], [[बिहार]], [[उड़ीसा]], [[मध्यप्रदेश]], [[तमिलनाडु]], [[केरल]], [[हरियाणा]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] और [[उत्तर प्रदेश]] में गैर काँग्रेसी सरकारें गठित हो गई। लोहिया इस परिवर्तन के प्रणेता और सूत्रधार बने।
=== जेपी आन्दोलन ===
{{मुख्य|सम्पूर्ण क्रांति}}
सन् 1974 में जयप्रकाश नारायण ने इन्दिरा गान्धी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये [[सम्पूर्ण क्रांति|सम्पूर्ण क्रान्ति]] का नारा दिया। आन्दोलन को भारी जनसमर्थन मिला। इससे निपटने के लिये इन्दिरा गान्धी ने देश में [[आपातकाल|इमर्जेंसी]] लगा दी। विरोधी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इसका आम जनता में जमकर विरोध हुआ। [[जनता पार्टी]] की स्थापना हुई और सन् 1977 में काँग्रेस पार्टी बुरी तरह हारी। पुराने काँग्रेसी नेता [[मोरारजी देसाई]] के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी किन्तु [[चौधरी चरण सिंह]] की महत्वाकांक्षा के कारण वह सरकार अधिक दिनों तक न चल सकी।
=== भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन ===
{{मुख्य|बोफोर्स घोटाला}}
सन् 1987 में यह बात सामने आयी थी कि स्वीडन की हथियार कम्पनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिये 80 लाख डालर की दलाली चुकायी थी। उस समय केन्द्र में काँग्रेस की सरकार थी और उसके प्रधानमन्त्री राजीव गान्धी थे। स्वीडन रेडियो ने सबसे पहले 1987 में इसका खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स काण्ड के नाम से जाना जाता हैं। इस खुलासे के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने [[सरकार]] के खिलाफ भ्रष्टाचार-विरोधी आन्दोलन चलाया जिसके परिणाम स्वरूप [[विश्वनाथ प्रताप सिंह]] प्रधान मन्त्री बने।
=== 'कांग्रेस-मुक्त भारत' अभियान ===
जून २०१३ में [[गोवा]] में हुई [[भारतीय जनता पार्टी]] की कार्यकारिणी में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री [[नरेंद्र मोदी]] को 2014 चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष घोषित कर दिया तब इस घोषणा के कुछ देर बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "वरिष्ठ नेताओं ने मुझमें विश्वास जताया है. हम कांग्रेस मुक्त भारत निर्माण बनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे. आपके समर्थन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद।" फिर सन २०१९ में नरेन्द्र मोदी ने कहा कि '[[महात्मा गांधी]] खुद कांग्रेस को खत्म करना चाह रहे थे। इसलिए कांग्रेस-मुक्त भारत मेरा नारा नहीं है, लेकिन मैं तो गांधी जी की इच्छा पूरी कर रहा हूं। श्रद्धांजलि के रूप में ये तो करना ही करना है, कितनी भी मिलावट कर लो बच नहीं सकते।'<ref>[https://hindi.oneindia.com/news/india/congress-mukt-bharat-was-mahatma-gandhi-s-idea-not-mine-narendra-modi-492321.html 'कांग्रेस मुक्त भारत' का आइडिया गांधीजी का था, मेरा नहीं : पीएम मोदी]</ref> बाद में उन्होंने 'कांग्रेस-मुक्त भारत' की उनकी अवधारणा को समझाते हुए कहा था कि कांग्रेस-मुक्त भारत का उनका नारा राजनीतिक रूप से मुख्य विपक्षी दल को समाप्त करने का नहीं, बल्कि देश को 'कांग्रेस संस्कृति' से छुटकारा दिलाने के लिए है।
एक दूसरा विचार यह भी है कि [[नन्दमूरि तारक रामाराव|एन टी रामाराव]] के राजनीतिक सिद्धांत में कांग्रेस-विरोधी विचाराधारा इस हद तक समाहित थी कि उन्हें ‘ कांग्रेस मुक्त भारत ’ के सिद्धांत का मूल प्रस्तावक कहा जा सकता है। यह बात पत्रकार रमेश कांदुला ने [[तेलुगु देशम पार्टी]] के संस्थापक के बारे में अपनी किताब ‘मैवरिक मसीहा : ए पॉलिटिकल बायोग्राफी ऑफ एन टी रामा राव’ में लिखा है, ‘‘एनटीआर ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कांग्रेस के खिलाफ बिना समझौते के लड़ाई लड़ी।
==प्रधानमंत्रियों की सूची ==
{| class="wikitable sortable" style="text-align: center;"
|-
! rowspan="2"| प्रधानमंत्री
! rowspan="2"| चित्र
! colspan="3"| '''कार्यकाल'''
'''<small>वर्ष एवं दिन में अवधि</small>'''
! rowspan="2" | सरकार
! rowspan="2" | लोक सभा
! rowspan="2" | निर्वाचन क्षेत्र
! rowspan="2" | राष्ट्राध्यक्ष
|-
!प्रारंभ
!समाप्ति
! अवधि
|-
| rowspan="4" |[[जवाहरलाल नेहरू]]
<small>(1889–1964)</small>
| rowspan="4" |[[File:Jawaharlal Nehru, 1947.jpg|80px]]
|15 अगस्त 1947
|15 अप्रैल 1952
| rowspan="4" |{{age in years and days|1947|08|15|1964|5|27}}
|[[प्रथम नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू १]]
| colspan="3" | [[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|-
|15 अप्रैल 1952
|4 अप्रैल 1957
|[[द्वितीय नेहरू मंत्रिमंडल|नेहरू २]]
| [[प्रथम लोक सभा]]
| rowspan="3" |[[फूलपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|फूलपुर]]
| rowspan="2" |[[राजेन्द्र प्रसाद]]
|-
|17 अप्रैल 1957
|2 अप्रैल 1962
|नेहरू ३
| [[द्वितीय लोक सभा]]
|-
|2 अप्रैल 1962
|27 मई 1964
|नेहरू ४
| rowspan="5" | [[तृतीय लोक सभा]]
| rowspan="5" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
| rowspan="2" | [[गुलज़ारीलाल नंदा]]
<small>(1898–1998)</small>
| rowspan="2" |[[File:Gulzarilal Nanda 1999 stamp of India.jpg|80px]]
|27 मई 1964
|9 जून 1964
| rowspan="2" |26 दिन
| नंदा १
| [[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|11 जनवरी 1966
|24 जनवरी 1966
|नंदा I २
|[[साबरकंठा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|साबरकांठा]]
|-
|[[लाल बहादुर शास्त्री]]
<small>(1904–1966)</small>
|[[File:Lal Bahadur Shastri (cropped).jpg|80px]]
|9 जून 1964
|11 जनवरी 1966
|{{age in years and days|1964|6|9|1966|1|11}}
|शास्त्री
|[[इलाहाबाद लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|इलाहाबाद]]
|-
| rowspan="4" |[[इंदिरा गांधी]]
<small>(1917–1984)</small>
| rowspan="4" |[[File:Indira Gandhi official portrait.png|80px]]
|24 जनवरी 1966
|13 मार्च 1967
| rowspan="4" |15 वर्ष, 350 दिन
|इंदिरा १
|[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, उत्तर प्रदेश]]
|-
|13 मार्च 1967
|18 मार्च 1971
|इंदिरा २
| [[चौथी लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[रायबरेली लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|रायबरेली]]
| rowspan="3" |[[ज़ाकिर हुसैन]]<br/>[[वी॰ वी॰ गिरि|वी. वी. गिरि]]<br/>''[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]''<br/>[[फखरुद्दीन अली अहमद]]<br/>[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]<br/>[[नीलम संजीव रेड्डी]]<br/>[[ज़ैल सिंह]]
|-
|18 मार्च 1971
|24 मार्च 1977
|इंदिरा ३
| [[पाँचवीं लोक सभा]]
|-
| 14 जनवरी 1980
| 31 अक्टूबर 1984
|इंदिरा ४
| rowspan="2" | [[सातवीं लोक सभा]]
|[[मेदक लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|मेदक]]
|-
| rowspan ="2" |[[राजीव गांधी]]
<small>(1944–1991)</small>
| rowspan ="2" |[[File:RajivGandhi.jpg|frameless|100x100px]]
|31 अक्टूबर 1984
|31 दिसंबर 1984
| rowspan ="2" |{{age in years and days|1984|10|31|1989|12|2}}
|राजीव १
| rowspan="2" |[[अमेठी लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|अमेठी]]
| rowspan="2" |[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|31 दिसंबर 1984
|2 दिसंबर 1989
|राजीव २
| [[आठवीं लोक सभा]]
|-
|[[पी॰ वी॰ नरसिम्हा राव]]
<small>(1921–2004)</small>
|[[File:Visit of Narasimha Rao, Indian Minister for Foreign Affairs, to the CEC (cropped).jpg|80px]]
|21 जून 1991
|16 मई 1996
|{{age in years and days|1991|6|21|1996|5|16}}
|राव
| [[दसवीं लोक सभा]]
|[[नांदयाल लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|नांदयाल]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
| rowspan ="2" |[[मनमोहन सिंह]]
<small>(1932–2024)</small>
| rowspan ="2" |[[File:Prime Minister Dr. Manmohan Singh in March 2014.jpg|80px]]
|22 मई 2004
|26 मई 2009
| rowspan="2" |{{age in years and days|2004|5|22|2014|5|26}}
|सिंह १
| [[चौदहवीं लोक सभा]]
| rowspan ="2" |[[सांसद, राज्य सभा|राज्य सभा सांसद, असम]]
| rowspan="2" |[[ए. पी. जे. अब्दुल कलाम]]<br/>[[प्रतिभा पाटिल]]<br/>[[प्रणब मुखर्जी]]
|-
|22 मई 2009
|26 मई 2014
|सिंह २
| [[पंद्रहवीं लोक सभा के सदस्यों की सूची|पंद्रहवीं लोक सभा]]
|}
==राष्ट्रपतियों की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[राष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं:-
#{{further|भारत के राष्ट्रपति}}
{| class="wikitable sortable" style="width:100%; text-align:center"
! rowspan="2" |चित्र
! rowspan="2" |नाम
{{small|{{nowrap|(जन्म–मृत्यु)}}}}
! rowspan="2" |गृह राज्य
! rowspan="2" |पूर्व पद
! colspan="3" |कार्यकाल
! rowspan="2" |शपथ दिलाने वाले
(मुख्य न्यायाधीश)
! rowspan="2" |चुनाव
! rowspan="2" |चुनाव मानचित्र
! rowspan="2" |[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
| rowspan="3" |[[File:Rajendra_Prasad_(Indian_President),_signed_image_for_Walter_Nash_(NZ_Prime_Minister),_1958_(16017609534).jpg|124x124px]]
| rowspan="3" |'''[[राजेन्द्र प्रसाद]]'''
{{small|(1884–1963)}}
| rowspan="3" |[[बिहार]]
| rowspan="3" |कृषि मंत्री
|26 जनवरी 1950
|13 मई 1952
| rowspan="3" |12 वर्ष, 107 दिन
|[[एच जे कनिया|एच. जे. कानिया]]
|1950
|
|{{Endash}}
|-
|13 मई 1952
|13 मई 1957
|[[एम पी शास्त्री|एम. पतंजलि शास्त्री]]
|1952
|[[File:1952_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]]
|-
|13 मई 1957
|13 मई 1962
|[[एस आर दास|सुधी रंजन दास]]
|1957
|[[File:1957_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|-
|[[File:President_Fakhruddin_Ali_Ahmed.jpg|133x133px]]
|'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(1905–1977)}}
|[[दिल्ली]]
|कृषि मंत्री
|24 अगस्त 1974
|11 फरवरी 1977{{ref label|†|†|†}}
|2 वर्ष, 171 दिन
|[[ए एन रे|ए. एन. रे]]
|[[1974 भारतीय राष्ट्रपति चुनाव|1974]]
|[[File:1974_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[गोपाल स्वरूप पाठक]]
----[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]
|-
| style="background:wheat;" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| style="background:wheat;" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
|[[कर्नाटक]]
| style="background:wheat;" |[[कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों की सूची|कर्नाटक के मुख्यमंत्री]]
| style="background:wheat;" |11 फरवरी 1977
| style="background:wheat;" |25 जुलाई 1977
| style="background:wheat;" |164 दिन
|-
|[[File:President_Giani_Zail_Singh_(cropped).jpg|134x134px]]
|'''[[ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(1916–1994)}}
|[[पंजाब]]
|[[पंजाब (भारत) के मुख्यमंत्रियों की सूची|पंजाब के मुख्यमंत्री]]
|25 जुलाई 1982
|25 जुलाई 1987
|5 वर्ष
|[[वाई वी चंद्रचूड़|वाई. वी. चंद्रचूड़]]
|1982
|[[File:1982_Indian_Presidential_Election.svg|50x50px]]
|[[मुहम्मद हिदायतुल्लाह]]
----[[रामास्वामी वेंकटरमण]]
|-
|[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
|'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
|[[तमिलनाडु]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
|25 जुलाई 1987
|25 जुलाई 1992
|5 वर्ष
|[[आर एस पाठक|रघुनंदन स्वरूप पाठक]]
|1987
|[[File:Indian_presidential_election,_1987.svg|50x50px]]
|[[शंकर दयाल शर्मा]]
|-
|[[File:Shanker_Dayal_Sharma.jpg|127x127px]]
|'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
|[[मध्य प्रदेश]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
[[महाराष्ट्र के राज्यपालों की सूची|महाराष्ट्र के राज्यपाल]]
|25 जुलाई 1992
|25 जुलाई 1997
|5 वर्ष
|[[एम एच कनिया|एम. एच. कानिया]]
|1992
|[[File:1992_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
|[[के. आर. नारायणन]]
|-
|[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
|'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
|[[केरल]]
|[[भारत के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
|25 जुलाई 1997
|25 जुलाई 2002
|5 वर्ष
|[[जे एस वर्मा|जे. एस. वर्मा]]
|1997
|[[File:Indian_presidential_election,_1997.svg|59x59px]]
|[[कृष्ण कान्त|कृष्ण कांत]]
|-
|[[File:The_President_of_India,_Smt._Pratibha_Patil.jpg|140x140px]]
|'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(जन्म 1934)}}
|[[महाराष्ट्र]]
|[[राजस्थान के राज्यपालों की सूची|राजस्थान की राज्यपाल]]
|25 जुलाई 2007
|25 जुलाई 2012
|5 वर्ष
|[[के. जी. बालकृष्णन]]
|2007
|[[File:2007_Indian_Presidential_Election.svg|59x59px]]
| rowspan="2" |[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]
|-
|[[File:Pranab_Mukherjee_Portrait_(cropped).jpg|129x129px]]
|'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(1935–2020)}}
|[[पश्चिम बंगाल]]
|[[भारत के रक्षा मंत्री|रक्षा मंत्री]]
[[भारत के वित्त मंत्री|वित्त मंत्री]]
[[भारत के विदेश मंत्री|विदेश मंत्री]]
|25 जुलाई 2012
|25 जुलाई 2017
|5 वर्ष
|[[एस एच कापड़िया|एस. एच. कपाड़िया]]
|2012
|[[File:Indian_presidential_election_2012.svg|59x59px]]
|}
==उपराष्ट्रपतियो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी से संबंधित विभिन्न राजनेता [[उपराष्ट्रपति]] पद के लिए निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं ।
{{further|भारत के उपराष्ट्रपति}}
{| class="wikitable" style="line-height:1.4em; text-align:center"
|+
!चित्र
!नाम
{{small|(जीवनकाल)}}
!गृह राज्य
! colspan="2" |कार्यकाल
{{small|वर्ष व दिन में अवधि}}
!निर्वाचन
!पूर्व पद
!राष्ट्रपति
{{small|(कार्यकाल)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Basappa_Danappa_Jatti,_5th_Vice_President_of_India.jpg|125x125px]]
| rowspan="3" |'''[[बासप्पा दनप्पा जत्ती|बी. डी. जट्टी]]'''
{{small|(1912–2002)}}
| rowspan="3" |[[कर्नाटक]]
|{{small|31 अगस्त}}
1974
|{{small|31 अगस्त}}
1979
| rowspan="2" |[[1974 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1974]]
{{small|(78.7%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[मैसूर राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1958–1962)}}
* [[पुदुचेरी]] के उपराज्यपाल {{small|(1968–1972)}}
* [[ओडिशा]] के राज्यपाल {{small|(1972–1974)}}
!'''[[फखरुद्दीन अली अहमद]]'''
{{small|(24 अगस्त 1974–<br>11 फरवरी 1977)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1969|8|31|1974|8|31}}
! style="font-weight:normal" |'''''स्वयं'''''
(कार्यवाहक)
{{small|(11 फरवरी 1977–<br>25 जुलाई 1977)}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
मैसूर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल। 1974 में पाँचवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी [[निरल एनम होरो]] को पराजित किया। राष्ट्रपति [[फखरुद्दीन अली अहमद]] के निधन के पश्चात 11 फरवरी 1977 को कार्यवाहक राष्ट्रपति बने तथा जुलाई 1977 में [[नीलम संजीव रेड्डी]] के निर्वाचन तक इस पद पर रहे। 1979 में कार्यकाल पूर्ण होने पर उपराष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त हुए।
! style="font-weight:normal" |'''[[नीलम संजीव रेड्डी]]'''
{{small|(25 जुलाई 1977–<br>25 जुलाई 1982)}}
|-
| rowspan="3" |[[File:Ramaswamy_Venkataraman_(2012_stamp_of_India)_(cropped).jpg|122x122px]]
| rowspan="3" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(1910–2009)}}
| rowspan="3" |[[तमिलनाडु]]
|{{small|31 अगस्त}}
1984
|{{small|24 जुलाई}}
1987{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1984 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1984]]
{{small|(71.05%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1952–1957)}}
* उद्योग, श्रम, सहकारिता मंत्री, [[मद्रास राज्य]] {{small|(1957–1967)}}
* [[भारत के वित्त मंत्री|केंद्रीय वित्त मंत्री]] {{small|(1980–1982)}}
* [[भारत के गृह मंत्री|केंद्रीय गृह मंत्री]] {{small|(1982)}}
* [[भारत के रक्षा मंत्री|केंद्रीय रक्षा मंत्री]] {{small|(1982–1984)}}
! rowspan="3" |'''[[ज़ैल सिंह|ज्ञानी ज़ैल सिंह]]'''
{{small|(25 जुलाई 1982–<br>25 जुलाई 1987)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1984|8|31|1987|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1984 में [[बी. सी. कांबले]] को पराजित कर सातवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने कूटनीतिक यात्राओं में राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व किया तथा प्रधानमंत्री [[राजीव गांधी]] और राष्ट्रपति [[ज़ैल सिंह]] के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 25 जुलाई 1987 को राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:Shri_Shankar_Dayal_Sharma.jpg|140x140px]]
| rowspan="3" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(1918–1999)}}
| rowspan="3" |[[मध्य प्रदेश]]
|{{small|3 सितंबर}}
1987
|{{small|24 जुलाई}}
1992{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1987 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1987]]
{{small|(निर्विरोध)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[भोपाल राज्य]] के मुख्यमंत्री {{small|(1952–1956)}}
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के राष्ट्रीय अध्यक्ष {{small|(1972–1974)}}
* [[भारत के संचार मंत्री|केंद्रीय संचार मंत्री]] {{small|(1974–1977)}}
* [[आंध्र प्रदेश]] {{small|(1984–1985)}}, [[पंजाब]] {{small|(1985)}}, [[महाराष्ट्र]] {{small|(1985–1987)}} के राज्यपाल
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[रामास्वामी वेंकटरमण]]'''
{{small|(25 जुलाई 1987–<br>25 जुलाई 1992)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1987|9|3|1992|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व केंद्रीय मंत्री। 1987 में आठवें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हुए। 1992 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="3" |[[File:President_Clinton_with_Indian_president_K._R._Narayanan_(cropped).jpg|137x137px]]
| rowspan="3" |'''[[के. आर. नारायणन]]'''
{{small|(1920–2005)}}
| rowspan="3" |[[केरल]]
|{{small|21 अगस्त}}
1992
|{{small|24 जुलाई}}
1997{{ref label|RES|RES|RES}}
| rowspan="2" |[[1992 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|1992]]
{{small|(99.86%)}}
| rowspan="2" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[थाईलैंड]] एवं [[तुर्की]] में भारत के राजदूत
* [[भारत के विदेश मंत्रालय]] में सचिव
* [[चीन]] एवं [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में राजदूत
* [[लोक सभा]] सदस्य {{small|(1984–1992)}}
* योजना, विदेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों में राज्य मंत्री
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[शंकर दयाल शर्मा]]'''
{{small|(25 जुलाई 1992–<br>25 जुलाई 1997)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|1992|8|21|1997|7|24}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक एवं केंद्रीय मंत्री। 1992 में नौवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए और [[जोगिंदर सिंह (राजनीतिज्ञ)|जोगिंदर सिंह]] को पराजित किया। भारत के पहले दलित उपराष्ट्रपति। 1997 में राष्ट्रपति निर्वाचित होने पर उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दिया।
|-
| rowspan="6" |[[File:The_Vice_President_Shri_M._Hamid_Ansari_in_July_2016.jpg|134x134px]]
| rowspan="6" |'''[[मोहम्मद हामिद अंसारी]]'''
{{small|(जन्म 1937)}}
| rowspan="6" |[[पश्चिम बंगाल]]
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2007
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |[[2007 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2007]]
{{small|(60.50%)}}
| rowspan="5" style="text-align:left; background:#eaecf0; font-size:95%" |
* [[संयुक्त अरब अमीरात]] में राजदूत
* [[ऑस्ट्रेलिया]] में उच्चायुक्त
* [[अफगानिस्तान]], [[ईरान]], [[सऊदी अरब]] में राजदूत
* [[संयुक्त राष्ट्र]] में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
* [[अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय]] के कुलपति
* [[राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग]] के अध्यक्ष
! style="font-weight:normal" |'''[[प्रतिभा पाटिल]]'''
{{small|(25 जुलाई 2007–<br>25 जुलाई 2012)}}
|-
! rowspan="2" style="font-weight:normal" |'''[[प्रणब मुखर्जी]]'''
{{small|(25 जुलाई 2012–<br>25 जुलाई 2017)}}
|-
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2012
| rowspan="2" |{{small|11 अगस्त}}
2017
| rowspan="3" |[[2012 भारतीय उपराष्ट्रपति चुनाव|2012]]
{{small|(67.31%)}}
|-
! rowspan="3" style="font-weight:normal" |'''[[राम नाथ कोविंद]]'''
{{small|(25 जुलाई 2017–<br>25 जुलाई 2022)}}
|-
! colspan="2" style="font-size:90%; font-weight:normal" |{{age in years and days|2007|8|11|2017|8|11}}
|-
| colspan="4" style="text-align:left; font-size:95%" |
पूर्व राजनयिक। 2007 में बारहवें उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए तथा 2012 में पुनः निर्वाचित हुए। [[सर्वपल्ली राधाकृष्णन]] के बाद पुनः निर्वाचित होने वाले पहले एवं सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उपराष्ट्रपति। 11 अगस्त 2017 को कार्यकाल पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए।
|}
==उपप्रधानमंत्रियो की सूची==
{{further|भारत के उपप्रधानमंत्री}}
{|class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
!rowspan=2|चित्र
!rowspan=2|नाम<br />{{small|(जन्म–मृत्यु)}}
!colspan=3 |कार्यकाल
!rowspan=2 |[[लोक सभा|लोक सभा]]<br />{{small|([[भारत में चुनाव|चुनाव]])}}
!rowspan=2|निर्वाचन क्षेत्र<br />{{small|(सदन)}}
!rowspan=2|[[भारत के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]]
! rowspan="2" |राष्ट्राध्यक्ष
|-
!पदभार ग्रहण
!पदत्याग
!कार्यकाल अवधि
|-
|[[File:Sardar patel (cropped).jpg|100px]]
|'''[[वल्लभभाई पटेल]]'''<br /><small>(1875–1950)</small>
|15 अगस्त 1947
|15 दिसंबर 1950 ''<small>(मृत्यु)</small>''
|3 वर्ष, 122 दिन
|[[भारत की संविधान सभा|संविधान सभा]]
|लागू नहीं
|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|''कोई नहीं''
|-
|[[File:Morarji Desai During his visit to the United States of America .jpg|100px]]
|'''[[मोरारजी देसाई]]'''<br /><small>(1896–1995)</small>
|13 मार्च 1967
|19 जुलाई 1969
|2 वर्ष, 128 दिन
|[[चौथी लोक सभा|4वीं]]<br /><small>([[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]])</small>
|[[सूरत लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|सूरत]]<br /><small>([[लोक सभा]])</small>
|[[इंदिरा गांधी]]
|[[ज़ाकिर हुसैन]]
|}
==लोकसभा अध्यक्षो की सूची==
[[कांग्रेस]] पार्टी को सत्ता मिलने के बाद, पार्टी ने विभिन्न राजनेता [[लोकसभा]] स्पीकर के रुप में निर्वाचित हुए, जिनके नाम एवं कार्यकाल निम्न प्रकार हैं :-
# [[गणेश वासुदेव मावलंकर]] (1952 - 1956)
# [[अनन्त शयनम् अयंगार]] (1956 - 1962)
# [[सरदार हुकम सिंह]] (1962 - 1967)
# [[नीलम संजीव रेड्डी]] (1967 - 1969
# जी. एस. ढिल्लों (1969 - 1975)
# [[बलि राम भगत]] (1976 - 1977)
# [[मीरा कुमार]] (2009-2014)
== विपक्ष के नेता ==
* [[अधीर रंजन चौधरी|राहुल गांधी]] - [[लोकसभा]]
* [[मल्लिकार्जुन खड़गे]] - [[राज्यसभा]]
==आम चुनाव परिणाम ==
1952 में हुए [[भारतीय आम चुनाव, १९५१-१९५२|प्रथम संसदीय]] आम चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) ने 479 में से 364 सीटें जीतीं, जो कुल लड़ी गयी सीटों का 76 प्रतिशत था।<ref name="India Today 2007">{{cite web | title=Congress led by Jawaharlal Nehru won the first general election in 1952 | website=India Today | date=2 July 2007 | url=https://www.indiatoday.in/magazine/cover-story/story/20070702-1952-first-lok-sabha-elections-748237-2007-07-01 | access-date=20 March 2024}}</ref> आईएनसी का कुल मतों में से वोट शेयर 45 प्रतिशत था।<ref name="Ganguly 2022">{{cite web | last=Ganguly | first=Siddharth | title=The Parties That Contested India's First General Election | website=The Wire | date=2 February 2022 | url=https://thewire.in/history/the-parties-that-contested-indias-first-general-election | access-date=20 March 2024}}</ref> [[भारतीय आम चुनाव, १९७१|1971 के आम चुनाव]] तक पार्टी का मतदान प्रतिशत लगभग 40 प्रतिशत पर बना रहा। हालांकि, [[भारतीय आम चुनाव, १९७७|1977 के आम चुनाव]] आईएनसी के लिए भारी पराजय लेकर आए। कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने अपनी सीटें खो दीं और पार्टी केवल 154 लोकसभा सीटें ही जीत सकी।<ref name="Analysisb">{{cite news |last1=Gupta |first1=Abhinav |title=Lok Sabha Poll Results: A vote-share and performance analysis of BJP vs Congress from 1996 to 2019 |url=https://english.newsnationtv.com/election/lok-sabha-election/lok-sabha-poll-results-a-vote-share-and-performance-analysis-of-bjp-vs-congress-from-1996-to-2019-225277.html |access-date=8 March 2022 |work=News Nation |agency=News Nation Network Pvt Ltd. |date=24 May 2019}}</ref>
इसके बाद आईएनसी ने [[भारतीय आम चुनाव, १९८०|1980 के आम चुनाव]] में सत्ता में वापसी की और कुल मतों के 42.7 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 353 सीटें जीतीं। कांग्रेस का वोट शेयर 1980 तक बढ़ता रहा और 1984/85 में रिकॉर्ड 48.1 प्रतिशत तक पहुँच गया। अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद [[राजीव गांधी]] ने [[1984 Indian general election|शीघ्र आम चुनाव]] कराने की सिफारिश की। आम चुनाव जनवरी 1985 में होने थे, लेकिन इसके बजाय दिसंबर 1984 में ही करा लिए गए। कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और 533 में से 415 सीटें हासिल कीं, जो स्वतंत्र भारत के लोकसभा चुनावों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बहुमत था।<ref name="Hindustan Times 2003">{{cite web | title=Chronology of Lok Sabha elections (1952–1999) | website=The Hindustan Times| date=13 October 2003 | url=https://www.hindustantimes.com/india/chronology-of-lok-sabha-elections-1952-1999/story-592mMFUB4HLQKlLyUamnjN.html | access-date=20 March 2024}}</ref> इस जीत में पार्टी को 49.1 प्रतिशत वोट मिले, जिससे कुल वोट शेयर बढ़कर 48.1 प्रतिशत हो गया। 1985 में [[पंजाब]] और [[असम]] में हुए चुनावों में कांग्रेस को 32.14 प्रतिशत मत प्राप्त हुए।<ref name="Ganguly 2022"/>
नवंबर 1989 में 9वीं लोकसभा के सदस्यों के चुनाव के लिए आम चुनाव आयोजित किए गए।<ref name="Anon">{{cite web | title=Statistical Report on General Elections, 1989 to the Ninth Lok Sabha| url=https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/89_Vol_II.pdf | access-date=20 March 2024}}</ref> इन चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन खराब रहा, हालांकि वह लोकसभा में सबसे बड़ी एकल पार्टी बनी रही। 1989 के आम चुनावों में पार्टी का वोट शेयर घटकर 39.5 प्रतिशत रह गया। 13वीं लोकसभा का कार्यकाल अक्टूबर 2004 में समाप्त होना था, लेकिन [[राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन]] (एनडीए) सरकार ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया। फरवरी में लोकसभा भंग कर दी गई और अप्रैल–मई 2004 में चुनाव कराए गए। [[सोनिया गांधी]] के नेतृत्व में आईएनसी अप्रत्याशित रूप से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।<ref name="2004 Result">{{cite news |last1=Chakravarty |first1=Shubhodeep |title=INKredible India: The story of 2004 Lok Sabha election – All you need to know |url=https://zeenews.india.com/lok-sabha-general-elections-2019/inkredible-india-the-story-of-2004-lok-sabha-election-all-you-need-to-know-2204202.html |access-date=10 March 2022 |publisher=Zee News|agency=[[Essel Group]] |date=18 May 2019}}</ref> चुनावों के बाद कांग्रेस ने अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर [[संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन]] (यूपीए) का गठन किया। यूपीए को [[बहुजन समाज पार्टी]], [[समाजवादी पार्टी]], केरल कांग्रेस और वाम मोर्चा से बाहरी समर्थन मिला, जिससे सरकार को आरामदायक बहुमत प्राप्त हुआ।<ref name="2004 Result"/> 1996 से 2009 के बीच हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने अपने वोट शेयर का लगभग 20 प्रतिशत खो दिया।<ref name="Analysis"/>
[[File:Seats Won by INC in Indian General Elections over the years.png|thumb|650px|center|वर्षों के दौरान भारतीय आम चुनावों में आईएनसी द्वारा जीती गई सीटें]]
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|-
! वर्ष
! विधायिका
! पार्टी नेता
! जीती गई सीटें
! सीटों में परिवर्तन
! मत प्रतिशत
! वोट स्विंग
! परिणाम
|-
|[[1934 भारतीय आम चुनाव|1934]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|5वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[भूलाभाई देसाई]]
|{{Composition bar|42|147|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 42
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|-
|[[1945 भारतीय आम चुनाव|1945]]
|[[केन्द्रीय विधान सभा|6वीं केंद्रीय विधान सभा]]
|[[शरत्चन्द्र बोस]]
|{{Composition bar|59|102|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 17
|{{n/a}}
|{{n/a}}
|{{partial|[[भारत की अंतरिम सरकार]] (1946–1947)}}
|-
|[[1951 भारतीय आम चुनाव|1951]]
|[[प्रथम लोक सभा|प्रथम लोकसभा]]
|rowspan=3|[[जवाहरलाल नेहरू]]
|{{Composition bar|364|489|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 364
|44.99%
|{{n/a}}
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1957 भारतीय आम चुनाव|1957]]
|[[द्वितीय लोक सभा|द्वितीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|371|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 7
|47.78%
|{{increase}} 2.79%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1962 भारतीय आम चुनाव|1962]]
|[[तृतीय लोक सभा|तृतीय लोकसभा]]
|{{Composition bar|361|494|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 10
|44.72%
|{{decrease}} 3.06%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1967 भारतीय आम चुनाव|1967]]
|[[चौथी लोक सभा|चतुर्थ लोकसभा]]
|rowspan=4|[[इंदिरा गांधी]]
|{{Composition bar|283|520|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 78
|40.78%
|{{decrease}} 2.94%
|{{yes|बहुमत (1967–69)}}
|-
|[[1971 भारतीय आम चुनाव|1971]]
|[[पाँचवीं लोक सभा|पंचम लोकसभा]]
|{{Composition bar|352|518|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 69
|43.68%
|{{increase}} 2.90%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1977 भारतीय आम चुनाव|1977]]
|[[छठी लोक सभा|षष्ठ लोकसभा]]
|{{Composition bar|153|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 199
|34.52%
|{{decrease}} 9.16%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1980 भारतीय आम चुनाव|1980]]
|[[सातवीं लोक सभा|सप्तम लोकसभा]]
|{{Composition bar|351|542|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 198
|42.69%
|{{increase}} 8.17%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1984 भारतीय आम चुनाव|1984]]
|[[आठवीं लोक सभा|अष्टम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[राजीव गांधी]]
|{{Composition bar|415|533|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 64
|49.01%
|{{increase}} 6.32%
|{{yes|बहुमत}}
|-
|[[1989 भारतीय आम चुनाव|1989]]
|[[नौंवीं लोक सभा|नवम लोकसभा]]
|{{Composition bar|197|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 218
|39.53%
|{{decrease}} 9.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1991 भारतीय आम चुनाव|1991]]
|[[दसवीं लोक सभा|दशम लोकसभा]]
|rowspan=2|[[पी. वी. नरसिंह राव]]
|{{Composition bar|244|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 47
|35.66%
|{{decrease}} 3.87%
|{{yes2|अल्पमत}}
|-
|[[1996 भारतीय आम चुनाव|1996]]
|[[ग्यारहवीं लोक सभा|एकादश लोकसभा]]
|{{Composition bar|140|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 104
|28.80%
|{{decrease}} 7.46%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1998 भारतीय आम चुनाव|1998]]
|[[बारहवीं लोक सभा|द्वादश लोकसभा]]
|[[सीताराम केसरी]]
|{{Composition bar|141|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{increase}} 1
|25.82%
|{{decrease}} 2.98%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[1999 भारतीय आम चुनाव|1999]]
|[[तेरहवीं लोक सभा|त्रयोदश लोकसभा]]
|rowspan=2|[[सोनिया गांधी]]
|{{Composition bar|114|545|{{party color|Indian National Congress}}}}
|{{decrease}} 27
|28.30%
|{{increase}} 2.48%
|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|-
|[[2004 भारतीय आम चुनाव|2004]]
|[[चौदहवीं लोकसभा|चतुर्दश लोकसभा]]
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|{{yes2|गठबंधन}}
|-
|[[2009 भारतीय आम चुनाव|2009]]
|[[पंद्रहवीं लोकसभा]]
|[[मनमोहन सिंह]]
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|-
|[[2014 भारतीय आम चुनाव|2014]]
|[[सोलहवीं लोकसभा]]
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|19.3%
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|-
|[[2019 भारतीय आम चुनाव|2019]]
|[[सत्रहवीं लोकसभा]]
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|{{no|विपक्ष}}
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|[[2024 भारतीय आम चुनाव|2024]]
|[[अठारहवीं लोक सभा|अठारहवीं लोकसभा]]
|[[मल्लिकार्जुन खड़गे]]
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|{{no2|आधिकारिक विपक्ष}}
|}
== इन्हें भी देखें==
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* [[कांग्रेस कार्यकारिणी समिति]]
* [[ऑल इंडिया महिला कांग्रेस]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास]]
* [[भारत में राजनीतिक दलों की सूची]]
* [[भारत की राजनीति]]
* [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्षों की सूची]]
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== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
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{{भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस}}
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{{भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम}}
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
[[श्रेणी:भारत के राजनीतिक दल|काँग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय]]
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[[श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]]
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समस्तीपुर जिला
0
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2026-04-17T04:27:42Z
Arjun Prasad Singh Prabhat
920765
/* शिक्षा */ कड़ियाँ लगाई
6541450
wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
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|Year = 2011
|Density = 1465
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|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
|Assembly =
|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
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Arjun Prasad Singh Prabhat
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/* पर्यटन स्थल */ कड़ियाँ लगाई
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wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
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|Year = 2011
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|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
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|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
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}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
*'''नर नारायण आश्रम घटहाटोल'''' पतसिया,मोहिउद्दीन नगर।
यह महान संत अनंत विभूषित नर नारायण ब्रह्मचारी जी का आश्रम है जो बहुत ही प्राचीन है। यह गंगा के उत्तरी छोर पर अवस्थित एक दर्शनीय स्थल है जहां देश विदेश के भक्त दर्शन करने आते हैं।
* '''धर्मपुर दुर्गा मंदिर''' मोहिउद्दीन नगर।
यह जिले का प्राचीनतम दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां शारदीय नवरात्रा और बासंती नवरात्रा के समय धूमधाम से पूजा अर्चना होती है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
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2026-04-17T04:47:45Z
Arjun Prasad Singh Prabhat
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/* यातायात सुविधाएँ */ कड़ियाँ लगाई
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wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
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}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
*'''नर नारायण आश्रम घटहाटोल'''' पतसिया,मोहिउद्दीन नगर।
यह महान संत अनंत विभूषित नर नारायण ब्रह्मचारी जी का आश्रम है जो बहुत ही प्राचीन है। यह गंगा के उत्तरी छोर पर अवस्थित एक दर्शनीय स्थल है जहां देश विदेश के भक्त दर्शन करने आते हैं।
* '''धर्मपुर दुर्गा मंदिर''' मोहिउद्दीन नगर।
यह जिले का प्राचीनतम दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां शारदीय नवरात्रा और बासंती नवरात्रा के समय धूमधाम से पूजा अर्चना होती है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
'''जल मार्ग'''
उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने के लिए जल मार्ग का भी प्रयोग होता है। जब मोकामा और पटना में पुल नहीं बने थे उस समय नाव ही एक मात्र साधन थे। आज भी पतसिया ( घटहाटोल) - नवादा घाट, और सुल्तानपुर - उमानाथ घाटों के बीच मोटर चालित नावों का संचालन होता है।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
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6541453
2026-04-17T04:52:41Z
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|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]]और बाया नदियां बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
*'''नर नारायण आश्रम घटहाटोल'''' पतसिया,मोहिउद्दीन नगर।
यह महान संत अनंत विभूषित नर नारायण ब्रह्मचारी जी का आश्रम है जो बहुत ही प्राचीन है। यह गंगा के उत्तरी छोर पर अवस्थित एक दर्शनीय स्थल है जहां देश विदेश के भक्त दर्शन करने आते हैं।
* '''धर्मपुर दुर्गा मंदिर''' मोहिउद्दीन नगर।
यह जिले का प्राचीनतम दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां शारदीय नवरात्रा और बासंती नवरात्रा के समय धूमधाम से पूजा अर्चना होती है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
'''जल मार्ग'''
उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने के लिए जल मार्ग का भी प्रयोग होता है। जब मोकामा और पटना में पुल नहीं बने थे उस समय नाव ही एक मात्र साधन थे। आज भी पतसिया ( घटहाटोल) - नवादा घाट, और सुल्तानपुर - उमानाथ घाटों के बीच मोटर चालित नावों का संचालन होता है।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
n1ow5b6i4jmgd6eax4w31jcyekolk0v
6541462
6541457
2026-04-17T05:01:51Z
Arjun Prasad Singh Prabhat
920765
/* जनसांख्यिकी */ कड़ियाँ लगाई
6541462
wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
|Urban =
|Year = 2011
|Density = 1465
|Literacy = 63.81 %
|SexRatio = 909
|Tehsils =
|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
|Assembly =
|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]]और बाया नदियां बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर , पंडित राम रक्षा झा , सच्चिदानंद स्वामी ( नैया बाबा ) नर नारायण ब्रह्मचारी आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।आरसी प्रसाद सिंह ,डॉ0 हरिवंश तरुण, पोद्दार रामावतार अरुण, नरेश कुमार विकल, विद्याभूषण मिश्र मयंक
युगल, राजमणि राय मणि, महाकवि रामावतार अनुरागी ,द्वारिका राय सुबोध , डॉ 0 ब्रह्मदेव कार्यी,अर्जुन प्रसाद सिंह प्रभात,हरि नारायण सिंह हरि, ईश्वर करुण, अश्विनी आलोकआदि साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
*'''नर नारायण आश्रम घटहाटोल'''' पतसिया,मोहिउद्दीन नगर।
यह महान संत अनंत विभूषित नर नारायण ब्रह्मचारी जी का आश्रम है जो बहुत ही प्राचीन है। यह गंगा के उत्तरी छोर पर अवस्थित एक दर्शनीय स्थल है जहां देश विदेश के भक्त दर्शन करने आते हैं।
* '''धर्मपुर दुर्गा मंदिर''' मोहिउद्दीन नगर।
यह जिले का प्राचीनतम दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां शारदीय नवरात्रा और बासंती नवरात्रा के समय धूमधाम से पूजा अर्चना होती है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
'''जल मार्ग'''
उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने के लिए जल मार्ग का भी प्रयोग होता है। जब मोकामा और पटना में पुल नहीं बने थे उस समय नाव ही एक मात्र साधन थे। आज भी पतसिया ( घटहाटोल) - नवादा घाट, और सुल्तानपुर - उमानाथ घाटों के बीच मोटर चालित नावों का संचालन होता है।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
bwwd4uo5eo4wk4sx44vk785founp9z3
6541463
6541462
2026-04-17T05:11:53Z
Arjun Prasad Singh Prabhat
920765
/* जनसांख्यिकी */ कड़ियाँ लगाई
6541463
wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
|Urban =
|Year = 2011
|Density = 1465
|Literacy = 63.81 %
|SexRatio = 909
|Tehsils =
|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
|Assembly =
|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]]और बाया नदियां बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर , पंडित राम रक्षा झा , सच्चिदानंद स्वामी ( नैया बाबा ) नर नारायण ब्रह्मचारी आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष),सत्यनारायण तिवारी, दरबारी सिंह,कपिलदेव सिंह( पूर्व विधायक), अनुग्रह नारायण सिंह( पूर्व विधायक एवं शिक्षा राज्यमंत्री ) राणा गंगेश्वर प्रसाद सिंह ( पूर्व विधायक एवं विधान पार्षद)सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक), राजेश कुमार सिंह ( बी जे पी विधायक )
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।आरसी प्रसाद सिंह ,डॉ0 हरिवंश तरुण, पोद्दार रामावतार अरुण, नरेश कुमार विकल, विद्याभूषण मिश्र मयंक
युगल, राजमणि राय मणि, महाकवि रामावतार अनुरागी ,द्वारिका राय सुबोध , डॉ 0 ब्रह्मदेव कार्यी,अर्जुन प्रसाद सिंह प्रभात,हरि नारायण सिंह हरि, ईश्वर करुण, अश्विनी आलोकआदि साहित्य के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
-------------------------------------
अनुदानित इंटरमीडिएट महाविद्यालय
j
*डॉo जगन्नाथ मिश्र तपेश्वर सिंह अनुग्रह नारायण सिंह इंटर कॉलेज, सुल्तानपुर, मोहिउद्दीन नगर।
* बी0 एस 0 कॉलेज, करुआ
* एस 0एस 0 कॉलेज, हवासपुर
* आरती जगदीश महिला महाविद्यालय,पटोरी
* के 0एस 0आर0 कॉलेज, सरायरंजन
* जे 0जे 0एस 0कॉलेज, बेलामेघ
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
*'''नर नारायण आश्रम घटहाटोल'''' पतसिया,मोहिउद्दीन नगर।
यह महान संत अनंत विभूषित नर नारायण ब्रह्मचारी जी का आश्रम है जो बहुत ही प्राचीन है। यह गंगा के उत्तरी छोर पर अवस्थित एक दर्शनीय स्थल है जहां देश विदेश के भक्त दर्शन करने आते हैं।
* '''धर्मपुर दुर्गा मंदिर''' मोहिउद्दीन नगर।
यह जिले का प्राचीनतम दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां शारदीय नवरात्रा और बासंती नवरात्रा के समय धूमधाम से पूजा अर्चना होती है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
'''जल मार्ग'''
उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने के लिए जल मार्ग का भी प्रयोग होता है। जब मोकामा और पटना में पुल नहीं बने थे उस समय नाव ही एक मात्र साधन थे। आज भी पतसिया ( घटहाटोल) - नवादा घाट, और सुल्तानपुर - उमानाथ घाटों के बीच मोटर चालित नावों का संचालन होता है।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
qljoothp49171vijh2a77gzg49e6dxm
6541467
6541463
2026-04-17T05:29:44Z
AMAN KUMAR
911487
[[विशेष:योगदान/DreamRimmer|DreamRimmer]] ([[सदस्य वार्ता:DreamRimmer|वार्ता]]) के अवतरण 6498879 पर पुनर्स्थापित : प्रचार को हटाया
6541467
wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
|Urban =
|Year = 2011
|Density = 1465
|Literacy = 63.81 %
|SexRatio = 909
|Tehsils =
|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
|Assembly =
|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर ''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले है। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]]
]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। ये उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है। समस्तीपुर को मिथिला का 'प्रवेशद्वार' भी कहा जाता है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत है। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला है। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमान पाठ शुरू करने केलिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती है।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में, जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर,मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ है।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
===महत्वपूर्ण व्यक्तित्व===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]] चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभन्गा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुरज
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोषड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
== पर्यटन स्थल ==
'''बन्दा''' : बन्दा समस्तीपुर जिला का सबसे अच्छा और विद्वानों का स्थल माना जाता है। बन्दा में एक विशाल मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका नाम मानस मंदिर बन्दा है।।। बन्दा के नेता कहलाने वाले राधा कांत राय , राम प्रताप राय , विश्व्नाथ राय , नागेंद्र राय। बन्दा वासी की कोई भी समस्या हो वो अपनी समस्या गाँव के साथ बांटते है।। राधे राधे।। यहाँ की अमृत वाणी है।।।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर का सबसे महत्वपूर्ण शहर में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होके गुजरती है एवं पटना से हाजीपुर मोरवा होते हुए राजमार्ग है जो ताजपुर को जोड़ती है इसके अलावा गढ़िया पूसा मार्ग जो की भारत के पहले कृषि विश्वविद्यालय को जाता है ताजपुर से गुजरता है। मुख्यमंत्री ने ताजपुर - बख्तियारपुर 6 लेन सड़क मार्ग की घोषणा की जो उत्तर बिहार का पटना से यातायात सुगम करेगा जिसका निर्माण प्रगति में है। ताजपुर में अभी सीमेंट फैक्ट्री का निर्माण भी हो रहा है जो की लगभग पूरा हो गया है और 2024 से उत्पादन कार्य शुरू होने की संभावना है।
ताजपुर में क्रमश DR.L.K.V.D COLLEGE, जल जीवन हरियाली पार्क , विभिन्न बेहतरीन स्थापत्य एवं शिल्प कला के धनी मंदिर, मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद और उसकी जमा मस्जिद आदि घूमने लायक जगह है।
ताजपुर का दुर्गा पूजा और रावण दहन जिले में अतिप्रसिद्ध है। उसके अलावा रामनवमी जुलूस,बजरंग जुलूस और मोहर्रम का ताजिया जुलूस मनमोहक और अति आनन्द देने वाला होता है।
इन सबके अलावा ताजपुर बाजार और यहां की होटल, रेस्त्रा, मॉल, रेस्टुरेंट और दुकानों की चकाचौंध शाम के वक्त देखते ही बनती है।
हालांकि ताजपुर कुछ मामलों में शासन द्वारा अपेक्षित है जैसे की ताजपुर की दशकों पुरानी मांग की ताजपुर में एक उच्च स्तर का रेलवे स्टेशन हो आजतक पूरा नहीं किया गया। ताजपुर अंग्रेजी हुकूमत के काल में अनुमंडल था और आज इसका स्तर प्रखंड का है इसे अनुमंडल बनाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।
ताजपुर का पुरानी बाजार लगभग 1000 साल पहले से ताजपुर कहलाता था हालांकि आज ये ताजपुर का छोटा भाग है और ताजपुर काफी विस्तृत हो के आस पास के छोटे गांव इलाका को खुद में समा चुका है।
*'''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था और ये आज भी कृषि क्षेत्र में क्रांति करता रहता है।
राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा एक घूमने लायक और ज्ञान बढाने वाला स्थान है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर, ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी, प्रखंड खानपुर, जिला समस्तीपुर, बिहार। यह बाबा का स्थान समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पुर्व दिशा मे स्थित हैं। इसी पंचायत मे मसिना कोठी हैं जो अंग्रेज के समय का कोठी हैं यहाँ पर उस समय मैं नील की खेती करवाते थे लेकिन देश आजाद होने के बाद यहाँ पर अब मक्के की खेती एवं अन्य फसल का अनुसन्धान केंद्र बन गया हैं यहाँ के द्वारा तैयार किया हुआ बीज दूर दूर तक पहुचाया जाता हैं। इसके निकट के गाँव भोरेजयराम हैं जिसकी खेती करने का जमीन २२ सो एकर के आस पास हैं जहा मक्के की खेती की जाती है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण बछौली मुरियारो के स्वर्गीय धोली महतो ने अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने के बाद कराया था। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा , श्री गणेश मंदिर भी है। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये भी काफी प्रसिद्ध है। इस मन्दिर का उल्लेख होली के समय आकाशवाणी से प्रसारित गानो मे भी होता है। स्थानीय लोगों में इस मंदिर की बड़ी प्रतिष्ठा है और लोगों में ऐसा विश्वास है कि यहाँ पूजा करने से मनोवांछित फल मिलता है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखी जिनपर अनगिनत संस्थानों में शोध चल रहा है। दुर्भाग्य से यह महत्वपूर्ण स्थल सरकार की उपेक्षा का शिकार है।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।<ref>[http://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur |date=28 मार्च 2019 }} अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर</ref>
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। यहाँ के स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने यहाँ रात्रि विश्राम भी किया था। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
*'''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड मे स्थित [[मोहम्मद पुर कोआरी]] एक एेतिहासिक गाँव है। इस गाँव मे मस्जिदो की सुन्दरता देखते ही बनती है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका भव्य महल बिभूतिपुर में मौजूद है। जगेश्वरी देवी नरहन स्टेट के वैद्य भाव मिश्र की बेटी थी।
*'''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड मे स्थित यह कस्बा अपने एेतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''' में खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा यहाँ शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही [[महिला]] [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] हिंदू और मुस्लिम द्वारा एक साथ पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित यह एक कस्बा है जहाँ का मुहरर्म तथा दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसा गाँव धमौन में बना है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''', खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय का महत्वपूर्ण पूजा स्थल है।
*'''शाहपुर बघौनी''':ताजपुर प्रखंड मे स्थित एक सुन्दर सा गाँव है। इस गाँव मे 12 मनमोहक मस्जिदे है। [[शाहपुर बघौनी]] के मस्जिदो की सुन्दरता मन मोह लेती है|
* '''माँ सती का मंदिर''' : धोवगामा स्थित 500 वर्ष पुराना मंदिर।
* '''रंजितपुर-माँ वैष्णवी मंदिर"' यह समस्तीपुर से १५ किलो मीटर पूरब रंजितपुर गांव में यह मंदिर स्थित है। यहाँ चैती नवरात्रि में माता रानी की पूजा एवं भव्य मेला का आयोजन किया जाता हैं, यहां की मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से पूजते है उनके हरेक मनोकामना पूर्ण होती है!
*'''किशनपुर बैकुंठ''' - यह समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के अंतर्गत बसंतपुर रमणी पंचायत का एक संतोषजनक शिक्षित गाँव, और यहाँ दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर है जिसके बारे में लोककथा यह है कि एक बार एक व्यक्ति जहर खाये एक व्यक्ति को उसके परिजनों ने यहाँ लाया तो उसके स्वास्थ्य में सुधार आने लगा।
*'''माँ काली शक्तिपीठ''' भी यहाँ दर्शन योग्य है जिसका स्थापना सन 1964 में किया गया था।
*'''अख्तियार पुर(चन्दौली)''': पुसा प्रखंड मे स्थित है। यहा मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है,तथा हिन्दु मुस्लिम सभी मिलके ताजिया निकालते है।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के [नक्शे] का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती है। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध है। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
{{बिहार के जिले}}
[[श्रेणी:समस्तीपुर जिला|*]]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
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6541468
6541467
2026-04-17T05:39:26Z
AMAN KUMAR
911487
अंधविश्वास और प्रचार को हटाया
6541468
wikitext
text/x-wiki
{{India Districts
|Name = समस्तीपुर
|State = बिहार
|Division = दरभंगा
|HQ = समस्तीपुर
|Map = Bihar district location map Samastipur.svg
|Area = 2904
|Rain =
|Population = 4,254,782
|Urban =
|Year = 2011
|Density = 1465
|Literacy = 63.81 %
|SexRatio = 909
|Tehsils =
|LokSabha = [[समस्तीपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|समस्तीपुर]], [[उजियारपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|उजियारपुर]]
|Assembly =
|Highways = [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]], [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग १०३]]
|Website = http://samastipur.bih.nic.in/
}}
'''समस्तीपुर''' [[भारत]] गणराज्य के [[बिहार]] प्रान्त में [[दरभंगा]] प्रमंडल स्थित एक शहर एवं [[ज़िला|जिला]] है। इसका मुख्यालय [[समस्तीपुर]] है। समस्तीपुर के उत्तर में [[दरभंगा]], दक्षिण में [[गंगा नदी]] और [[पटना]] जिला, पश्चिम में [[मुजफ्फरपुर]] एवं [[वैशाली]], तथा पूर्व में [[बेगूसराय]] एवं [[खगड़िया]] जिले हैं। यहाँ शिक्षा का माध्यम [[हिन्दी|हिंदी]], [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] है लेकिन बोल-चाल में [[मैथिली]], [[मगही]] बोली जाती है। इसे मिथिला का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह उपजाऊ कृषि प्रदेश है। समस्तीपुर [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का मंडल भी है।
== नामकरण ==
समस्तीपुर का परंपरागत नाम '''सरैसा''' है। इसका वर्तमान नाम मध्यकाल में [[बंगाल]] एवं उत्तरी बिहार के शासक हाजी शम्सुद्दीन इलियास (१३४५-१३५८ ईस्वी) के नाम पर पड़ा है। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्राचीन नाम सोमवती था जो बदलकर सोम वस्तीपुर फिर समवस्तीपुर और समस्तीपुर हो गया।
== इतिहास ==
समस्तीपुर राजा [[जनक]] के [[मिथिला]] प्रदेश का अंग रहा है। विदेह राज्य का अन्त होने पर यह [[लिच्छवी]] गणराज्य का अंग बना। इसके पश्चात यह [[मगध महाजनपद|मगध]] के [[मौर्य राजवंश|मौर्य]], [[शुंग]], [[कण्व]] और [[गुप्ता|गुप्त]] शासकों के महान साम्राज्य का हिस्सा रहा। [[ह्वेन त्सांग|ह्वेनसांग]] के विवरणों से यह पता चलता है कि यह प्रदेश [[हर्षवर्धन]] के साम्राज्य के अंतर्गत था। १३ वीं सदी में पश्चिम [[बंगाल]] के मुसलमान शासक [[हाजी शम्सुद्दीन इलियास]] के समय [[मिथिला]] एवं [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] क्षेत्रों का बँटवारा हो गया। उत्तरी भाग सुगौना के [[ओइनवार वंश|ओईनवार राजा]] (1325-1525 ईस्वी) के कब्जे में था जबकि दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग [[शम्सुद्दीन इलियास]] के अधीन रहा। समस्तीपुर का नाम भी हाजी शम्सुद्दीन के नाम पर पड़ा है। शायद [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] और [[मुसलमान]] शासकों के बीच बँटा होने के कारण ही आज समस्तीपुर का सांप्रदायिक चरित्र समरसतापूर्ण है।
[[ओइनवार वंश|ओईनवार राजाओं]] को कला, संस्कृति और साहित्य का बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। शिवसिंह के पिता देवसिंह ने लहेरियासराय के पास देवकुली की स्थापना की थी। शिवसिंह के बाद यहाँ पद्मसिंह, हरिसिंह, नरसिंहदेव, धीरसिंह, भैरवसिंह, रामभद्र, लक्ष्मीनाथ, कामसनारायण राजा हुए। शिवसिंह तथा भैरवसिंह द्वारा जारी किए गए सोने एवं चाँदी के सिक्के यहाँ के इतिहास ज्ञान का अच्छा स्रोत हैं। अंग्रेजी राज कायम होने पर सन १८६५ में [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]] मंडल के अधीन समस्तीपुर अनुमंडल बनाया गया। [[बिहार]] राज्य जिला पुनर्गठन आयोग के रिपोर्ट के आधार पर इसे [[दरभंगा]] प्रमंडल के अंतर्गत १४ नवम्बर १९७२ को जिला बना दिया गया। अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध हुए स्वतंत्रता आंदोलन में समस्तीपुर के क्रांतिकारियों ने महती भूमिका निभायी थी। यहाँ से [[कर्पूरी ठाकुर]] बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के प्रथम सांसद स्व. सत्यनारायण सिन्हा लगातार चार बार सांसद रहे और कई बार कैबिनेट मंत्री भी रहे, साथ ही जब इंदिरा गांधी राज्यसभा की सदस्य थीं तो इन्होंने लोकसभा के नेता सदन का कार्यभार भी संभाला। अपने राजनीति के अंतिम चरण में ये मध्यप्रदेश के राज्यपाल के पद पर भी रहे। आकाशवाणी पर रामचरितमानस पाठ शुरू करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में इनका कार्यकाल सदा याद किया जाएगा।
== भूगोल ==
समस्तीपुर २५.९० उत्तरी अक्षांश एवं ८६.०८ पूर्वी देशांतर पर अवस्थित है। सारा जिला उपजाऊ मैदानी क्षेत्र है किंतु हिमालय से निकलकर बहनेवाली नदियाँ बरसात के दिनों में बाढ़ लाती हैं।
'''नदियाँ''' : समस्तीपुर जिले के मध्य से [[बूढ़ी गण्डक]], उत्तर में [[बागमती]] नदी एवं दक्षिणी तट पर [[गंगा नदी|गंगा]] बहती है। इसके अलावा यहाँ से बांया भाग में जमुआरी, नून, बागमती की दूसरी शाखा और शान्ति नदी भी बहती है जो बरसात के दिनों में उग्र रूप धारण कर लेती है।
'''प्रशासनिक विभाजन''': यह जिला ४ तहसीलों (अनुमंडल), २० प्रखंडों, ३८० पंचायतों तथा १२४८ राजस्व गाँवों में बँटा है।
'''अनुमंडल'''- [[दलसिंहसराय]], [[पटोरी (समस्तीपुर)|शाहपुर पटोरी]], [[रोसड़ा|रोसड़ा]], समस्तीपुर सदर<br />
'''प्रखंड'''- दलसिंहसराय, उजियारपुर, विद्यापतिनगर, पटोरी, मोहनपुर, मोहिउद्दीनगर, रोसड़ा, हसनपुर, बिथान, सिंघिया, विभूतीपुर, [[शिवाजीनगर प्रखण्ड (समस्तीपुर)|शिवाजीनगर]], समस्तीपुर, कल्याणपुर, वारिसनगर, खानपुर, पूसा, ताजपुर, मोरवा, सरायरंजन
== जनसांख्यिकी ==
2011 की जनगणना के अनुसार इस जिले की जनसंख्या 4,261,566 है जिसमें पुरुष की आबादी 2,230,003 एवं 2,031,563 स्त्रियाँ हैं।<ref name=":0">[http://samastipur.bih.nic.in/] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ |date=21 जुलाई 2011 }} समस्तीपुर एक नजर में</ref> १८·५२% जनसंख्या अनुसूचित जाति की तथा ०·१% जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है। मानव विकास सूचिकांक काफी नीचे है जिसकी पुष्टि इन आँकड़ो से होती है:-
* साक्षरता: ४५·१३% (पुरुष-५७·५९%, स्त्री- ३१·६७%)
* जनसंख्या वृद्धि दरः २·५२% (वार्षिक)
* स्त्री-पुरुष अनुपातः ९२८ प्रति १०००<ref name=":0" />
* घनत्वः ११६९ प्रति वर्ग किलोमीटर
=== महत्वपूर्ण व्यक्तित्व ===
* '''दार्शनिक''' : [[गदाधर पंडित]], शंकर, [[वाचस्पति मिश्र]], [[उदयनाचार्य]], अमर्त्यकार, अमियकर आदि।
* '''स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ''' : पंडित यमुना कर्जी (किसान नेता [[सहजानन्द सरस्वती|स्वामी सहजानन्द सरस्वती]] के सहयोगी), [[सत्य नारायण सिन्हा]] (पूर्व राज्यपाल एवं चार बार लोक सभा सदस्य), [[कर्पूरी ठाकुर]] (दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]]), [[बलि राम भगत|बलिराम भगत]] (पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं [[लोक सभा|लोकसभा]] अध्यक्ष), [[गया प्रसाद शर्मा]] (स्वतंत्रता संग्राम में ११ बार जेल गये), [[रामविलास पासवान]] ([[हाजीपुर]] से चार बार [[लोक सभा|लोकसभा]] सदस्य एवं [[लोक जनशक्ति पार्टी]] के अध्यक्ष), सैय्यद शाहनवाज हुसैन ([[भारतीय जनता पार्टी]] नेता एवं सांसद), रामनाथ ठाकुर (कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं विधायक)।
* '''साहित्यकार एवं कलाकार''' : महान मैथिली कवि [[विद्यापति]], बिहारकोकिला मैथिली गायिका [[शारदा सिन्हा]], चंद्रकांता उपन्यास के लेखक श्री देवकीनंदन खत्री समस्तीपुर पूसा के हैं।
== शिक्षा ==
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त [[डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा|राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय]]<ref>{{Cite web |url=http://www.pusavarsity.org.in/ |title=राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जालपृष्ठ |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ |archive-date=4 नवंबर 2006 |url-status=dead }}</ref> समस्तीपुर जिले में पूसा नामक स्थान पर है, इसके अलावा कोई अन्य उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा संस्थान यहाँ नहीं है। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति संतोषजनक है। २००१ की जनगणना के अनुसार जिले में साक्षरता दर<ref>{{Cite web |url=http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |title=बिहार मे साक्षरता दर |access-date=9 सितंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080524094302/http://gov.bih.nic.in/Profile/CensusStats-03.htm |archive-date=24 मई 2008 |url-status=dead }}</ref> ४५.६७% (पुरुष: ५७.८३, स्त्री: ३२.६९) है। समस्तीपुर तथा पूसा में केन्द्रीय विद्यालय तथा बिरौली में [[जवाहर नवोदय विद्यालय]] स्थित है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के अंतर्गत जिले में निम्नलिखित अंगीभूत स्नातक महाविद्यालय हैं:
* आचार्य नरेन्द्रदेव महाविद्यालय शाहपुर पटोरी
* बलिराम भगत महाविद्यालय समस्तीपुर
* समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर
* महिला महाविद्यालय समस्तीपुर
* आर एन ए आर कॉलेज समस्तीपुर
* डा लोहिया कर्पूरी विशेश्वरदास महाविद्यालय ताजपुर
* डी बी के एन महाविद्यालय नरहन
* आर बी कॉलेज दलसिंहसराय
* जी एम आर डी कॉलेज मोहनपुर
* आर बी एस कॉलेज मोहिउद्दीननगर
* उमा पांडे कॉलेज पूसा
* यू आर कॉलेज रोसड़ा
* सिंघिया कॉलेज सिंघिया
== पर्यटन स्थल ==
* '''बन्दा''': यह समस्तीपुर जिले का एक गाँव है, जहाँ एक विशाल 'मानस मंदिर' का निर्माण किया जा रहा है।
* '''ताजपुर:''' ताजपुर आर्थिक और सामाजिक रूप से समस्तीपुर के महत्वपूर्ण शहरों में से एक है। मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 28 ताजपुर से होकर गुजरता है। यहाँ कई प्रसिद्ध मंदिर और ऐतिहासिक 'मदरसा अजाजिया साल्फिया रहीमाबाद' स्थित हैं। यह क्षेत्र अपने स्थानीय उत्सवों और व्यापारिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
* '''पूसा:''' पूसा में भारत का पहला कृषि विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र अंग्रेजी हुकूमत द्वारा स्थापित किया गया था। राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा यहाँ का एक प्रमुख ज्ञान और अनुसंधान केंद्र है।
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा नदी|गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा नदी|गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। यह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।
* '''बाबा हरिहरनाथ महादेव मंदिर''': यह मंदिर समस्तीपुर से 18 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में खानपुर प्रखंड के ग्राम हरिहरपुर खेढ़ी में स्थित है। यह स्थान बूढी गंडक नदी के तटबंध किनारे स्थित है। इस मंदिर परिसर में बजरंगबली, माँ दुर्गा और श्री गणेश के मंदिर भी हैं। यह मंदिर अपने शिवरात्री महोत्सव के लिये काफी प्रसिद्ध है।
* '''करियनः''' महामहिषी कुमारिलभट्ट के शिष्य महान दार्शनिक उदयनाचार्य का जन्म ९८४ ईस्वी में शिवाजीनगर प्रखंड के करियन गाँव में हुआ था। उदयनाचार्य ने न्याय, दर्शन एवं तर्क के क्षेत्र में लक्षमणमाला, न्यायकुशमांजिली, आत्मतत्वविवेक, किरणावली आदि पुस्तकें लिखीं।<ref>[http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120323154810/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/bihar/4_4_5447251_1.html |date=23 मार्च 2012 }} उदयनाचार्य की जन्मभूमि पर जागरण समाचार</ref>
* '''मालीनगर:''' यहाँ १८४४ में बना शिवमंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। मालीनगर [[हिंदी साहित्य]] के महान साहित्यकार [[बाबू देवकी नन्दन खत्री]] एवं शिक्षाविद राम सूरत ठाकुर की जन्म स्थली भी है।
* '''मंगलगढ:''' यह स्थान हसनपुर से १४ किलोमीटर दूर है जहाँ प्राचीन किले का अवशेष है। स्थानीय शासक मंगलदेव के निमंत्रण पर [[गौतम बुद्ध|महात्मा बुद्ध]] संघ प्रचार के लिए यहाँ आए थे। जिस स्थान पर बुद्ध ने अपना उपदेश दिया था वह बुद्धपुरा कहलाता था, जो अब अपभ्रंश होकर दूधपुरा हो गया है।
* '''मोहम्मद पुर कोआरी''': पुसा प्रखंड में स्थित यह एक ऐतिहासिक गाँव है, जो अपनी मस्जिदों की वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
* '''जगेश्वरस्थान''' (बिभूतिपुर): नरहन रेलवे स्टेशन से १५ किलोमीटर की दूरी पर बिभूतिपुर में जगेश्वरीदेवी का बनवाया शिव मंदिर है। अंग्रेजों के समय का नरहन एक रजवाड़ा था जिसका महल बिभूतिपुर में मौजूद है।
* '''रहीमाबाद''': ताजपुर प्रखंड में स्थित यह कस्बा अपने ऐतिहासिक [[मदरसा अजीजीया सलफ़ीया]] के लिए विख्यात है।
* '''मोरवा अंचल''': यहाँ खुदनेस्वर महादेव मंदिर की स्थापना एक [[मुस्लिम]] द्वारा शिवलिंग मिलने पर की गयी थी। मंदिर के साथ ही एक [[मुस्लिम संत]] की [[मजार]] है, जो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा पूजित है।
* '''मुसरीघरारी:''' [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 28]] पर स्थित इस कस्बे में मुहर्रम तथा दुर्गा पूजा का आयोजन प्रमुखता से होता है।
* '''संत दरियासाहेब का आश्रम:''' बिहार के सूफी संत दरिया साहेब का आश्रम जिले के दक्षिणी सीमा पर गंगा तट पर बसे गाँव धमौन में है। यहाँ निरंजन स्वामी का मंदिर भी है।
* '''थानेश्वर शिवमंदिर''': खाटू-श्याम मंदिर एवं कालीपीठ समस्तीपुर जिला मुख्यालय के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं।
* '''शाहपुर बघौनी''': ताजपुर प्रखंड में स्थित इस गाँव में कई ऐतिहासिक और मनमोहक मस्जिदें हैं।
* '''माँ सती का मंदिर''': धोवगामा स्थित यह लगभग 500 वर्ष पुराना मंदिर है।
* '''रंजितपुर माँ वैष्णवी मंदिर''': समस्तीपुर से १५ किलोमीटर पूर्व रंजितपुर गांव में स्थित इस मंदिर में चैती नवरात्रि में माता की पूजा एवं मेले का आयोजन किया जाता है।
* '''किशनपुर बैकुंठ''': समस्तीपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर वारिसनगर प्रखंड के इस गाँव में दर्शनयोग्य श्री बाबा बैकुंठनाथ महादेव मंदिर स्थित है।
* '''अख्तियार पुर (चन्दौली)''': पुसा प्रखंड में स्थित इस स्थान पर मुहर्रम का भव्य आयोजन होता है, जिसमें हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर भाग लेते हैं।
== यातायात सुविधाएँ ==
; सड़क मार्ग
समस्तीपुर [[बिहार]] के सभी मुख्य शहरों से राजमार्गों द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से वर्तमान में दो राष्ट्रीय राजमार्ग तथा तीन राजकीय राजमार्ग गुजरते हैं। [[मुजफ्फरपुर]], [[मोतिहारी]] होते हुए [[लखनऊ]] तक जानेवाली [[राष्ट्रीय राजमार्ग २८ (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग २८]] है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग १०३ (भारत, पुराना संख्यांक)|राष्ट्रीय राजमार्ग 103]] जिले को चकलालशाही, जन्दाहा, [[चकसिकन्दर]] होते हुए [[वैशाली]] जिले के मुख्यालय [[हाजीपुर]] से जोड़ता है। हाजीपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर महात्मा गाँधी सेतु से होकर राजधानी [[पटना]] जाया जाता है। जिले में राजकीय राजमार्ग संख्या ४९, ५० तथा ५५ की कुल लंबाई ८७ किलोमीटर है।
; रेल मार्ग
समस्तीपुर [[भारतीय रेल]] के नक्शे का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। यह [[पूर्वमध्य रेलवे|पूर्व मध्य रेलवे]] का एक मंडल है। दिल्ली-गुवाहाटी रूट पर स्थित रेल लाईनें एक ओर शहर को [[मुजफ्फरपुर]],[[हाजीपुर]], [[छपड़ा]] होते हुए [[दिल्ली]] से और दूसरी ओर [[बरौनी]], [[कटिहार]] होते हुए [[गुवाहाटी]] से जोड़ती हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ से [[मुम्बई]], [[चेन्नई]], [[कोलकाता]], [[अहमदाबाद]], [[जम्मू]], [[अमृतसर]], [[गुवाहाटी]] तथा देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों के लिए सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
; वायु मार्ग
समस्तीपुर का निकटस्थ हवाई अड्डा 30 किलोमीटर दूर [[दरभंगा]] में स्थित है। [[बाबा विद्यापति हवाई अड्डा]] दरभंगा (IATA कोड- DBR) से अंतर्देशीय तथा सीमित अन्तर्राष्ट्रीय उड़ाने उपलब्ध हैं। [[भारतीय|इंडियन]], किंगफिशर, जेट एयर, स्पाइस जेट तथा इंडिगो की उडानें [[दिल्ली]], [[कोलकाता]] और [[राँची]] के लिए उपलब्ध हैं।
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110721163321/http://samastipur.bih.nic.in/ समस्तीपुर जिला का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20190328120047/https://en.wikipedia.org/wiki/Samastipur अंग्रेजी विकिपीडिया पर समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ पथ निर्माण विभाग (बिहार सरकार) का आधिकारिक बेवजाल]<br />
* [https://web.archive.org/web/20181226083012/http://brb.lnmu.in/ बीआरबी कॉलेज समस्तीपुर]<br />
* [https://web.archive.org/web/20061104005944/http://www.pusavarsity.org.in/ पूसा कृषि विश्वविद्यालय का आधिकारिक बेवजाल]
==इन्हें भी देखें==
* [[समस्तीपुर]]
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[मिर्ज़ापुर]] [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[मिर्ज़ापुर]]
* [[विंध्याचल|विंध्याचल]]
* [[विंध्याचल मंडल]]
* [[उत्तर प्रदेश]]
* [[उत्तर प्रदेश के ज़िले|उत्तर प्रदेश के जिले]]
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[मिर्ज़ापुर]] [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[मिर्ज़ापुर]] [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[मिर्ज़ापुर]]
* [[विंध्याचल|विंध्याचल]]
* [[विंध्याचल मंडल]]
* [[उत्तर प्रदेश]]
* [[उत्तर प्रदेश के ज़िले|उत्तर प्रदेश के जिले]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{उत्तर प्रदेश के मंडल और जिले}}
{{मिर्जापुर जिला}}
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के जिले]]
[[श्रेणी:मिर्ज़ापुर ज़िला|*]]
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वार्ता:अज़रबाइजान
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AMAN KUMAR
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* [http://www.azlink.info Azerbaijan Links]
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== स्थानान्तरण अनुरोध 7 मई 2025 ==
{{नाम बदलें/dated|आज़र्बैजान}}
[[:अज़रबाइजान]] → {{no redirect|आज़र्बैजान}} – यह मुख्य या मानक नाम है, जो उच्चारण के तौर पर मूल नाम के समान है। [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 10:32, 7 मई 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] जी, मैंने तो अज़रबैजान सबसे अधिक सुना है। ([https://www.bbc.com/hindi/international-62910910 बीबीसी हिन्दी]) <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:22, 11 मई 2025 (UTC)
::{{समर्थन}} अज़रबैजान [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:10, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==नाम सही नहीं है==
इस लेख का सही नाम "अज़रबैजान" है नाकी "आज़र्बैजान"। इस नाम का सीधे-२ अंग्रेज़ी से जो नाम बन पड़ा है वह रख दिया गया है, यह नाम गलत है कृपया इसे सही किया जाए। [[सदस्य वार्ता:Rohitrrrrr|रोहित रावत]] ०९:५७, १३ जून २००९ (UTC)
==नाम शीघ्र बदला जाए==
कृपया संपादक इस लेख का नाम शीघ्रातिशीघ्र बदलें। धन्यवाद [[सदस्य वार्ता:Rohitrrrrr|रोहित रावत]] १३:५९, १४ जून २००९ (UTC)
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गाय
0
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6541270
6538239
2026-04-16T13:03:44Z
Rakesh Kumar Veterinarian
812506
दुधारू नस्लें: इन नस्लों को मुख्य रूप से उनके उच्च दुग्ध उत्पादन के लिए पाला जाता है। उदाहरण - साहीवाल, रेड सिंधी, गिर , थारपारकर आदि)। भारवाही नस्लें (कर्मठ): इन नस्लों को मुख्य रूप से भार ढोने और कृषि कार्यों के लिए पाला जाता है। उदाहरण- नागौरी, मालवी , खिलाड़ी,अमृत महल, पोंगनूर। द्विप्रयोजनी नस्लें (सर्वांगी): ये नस्लें दूध उत्पादन और कृषि कार्य (जैसे हल चलाना, बोझा ढोना) दोनों के लिए समान उपयुक्त होती हैं। उदाहरण - हरियाना, कांकरेज,ओंगोल, डागी , देवनी, डयोनि आदि।
6541270
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Cow charity.JPG|right|thumb|300px|भारत में गोपालन को एक पवित्र कार्य माना जाता है।]]
'''गाय''' (Cow) एक महत्त्वपूर्ण पालतू पशु है, जो संसार के लगभग सभी हिस्सों में पाई जाती है। यह उत्तम गुणवत्ता वाले [[दूध]] का प्रमुख स्रोत है। [[भारत]] में [[वैदिक सभ्यता|वैदिक काल]] से ही गाय का गहरा सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक महत्व रहा है। प्राचीन काल में गाय का उपयोग विनिमय (लेन-देन) के माध्यम के रूप में भी होता था, और किसी व्यक्ति की समृद्धि का आकलन उसके पास मौजूद गायों की संख्या से किया जाता था।<ref>{{Cite news|url=https://www.britannica.com/topic/sanctity-of-the-cow|title=Sanctity of the cow {{!}} Hinduism, Religious Significance & Cultural Impact {{!}} Britannica|work=Encyclopedia Britannica|access-date=2026-04-10|language=en}}</ref>
हिन्दू धर्म में गाय को 'माता' (गौमाता) का दर्जा प्राप्त है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके नर बछड़े (बैल) बड़े होकर गाड़ी खींचने और खेतों की जुताई करने जैसे कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
== प्रजनन और शारीरिक चक्र ==
* '''प्रजनन काल:''' वर्षभर।
* '''मद चक्र (Heat period):''' गाय में हर 21 दिन में [[मद चक्र]] आता है (ब्याने के 30 से 60 दिन बाद)।
* '''मदकाल की अवधि:''' 12 से 36 घंटे तक।
* '''गर्भकाल:''' गाय का गर्भकाल लगभग 283 से 290 दिनों का होता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.icar.org.in/en/product/22|title=Handbook of Animal Husbandry {{!}} ICAR|website=www.icar.org.in|access-date=2026-04-10}}</ref>
== भारतीय गाय की विशेषताएँ ==
भारतीय गायों (ज़ेबू / Zebu / Bos indicus) की दो प्रमुख शारीरिक विशेषताएँ होती हैं:<ref>{{Cite web|url=https://www.fao.org/4/t0582e/T0582E02.htm|title=Strategies for sustainable animal agriculture in developing countries|website=www.fao.org|access-date=2026-04-10}}</ref>
1. पीठ पर एक स्पष्ट और सुन्दर कूबड़ (Hump)।
2. गर्दन के नीचे लटकती हुई त्वचा, जिसे गलकंबल (Dewlap) कहा जाता है।
[[भारत]] में गाय की 30 से अधिक मान्यता प्राप्त नस्लें हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.nddb.coop/hi/services/animalbreeding/geneticimprovement/breeds|title=नस्लें {{!}} nddb.coop|website=www.nddb.coop|access-date=2026-04-10}}</ref> उपयोगिता के आधार पर भारतीय गायों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
* '''दुधारू नस्लें:''' इन नस्लों को मुख्य रूप से उनके '''उच्च दुग्ध उत्पादन''' के लिए पाला जाता है। उदाहरण - साहीवाल, रेड सिंधी, [[गीर गाय|गिर]] , थारपारकर आदि)।
* '''भारवाही नस्लें (कर्मठ):''' इन नस्लों को मुख्य रूप से '''भार ढोने और कृषि कार्यों''' के लिए पाला जाता है। उदाहरण- नागौरी, मालवी , खिलाड़ी,अमृत महल, पोंगनूर।
* '''द्विप्रयोजनी नस्लें (सर्वांगी):''' ये नस्लें '''दूध उत्पादन''' और '''कृषि कार्य''' (जैसे हल चलाना, बोझा ढोना) दोनों के लिए समान उपयुक्त होती हैं। उदाहरण - हरियाना, कांकरेज,ओंगोल, डागी , देवनी, डयोनि आदि। <ref>{{Cite web|url=https://www.therajasthanexpress.com/zebu-bos-indicus-vs-bos-taurus-comparison/|title=Zebu Vs. Bos Taurus: Heat Tolerance, Beef & A2 Milk Benefits {{!}} The Rajasthan Express|date=2025-10-31|language=en-US|access-date=2026-04-16}}</ref>
<gallery>
चित्र:Индия. Горбатая корова.JPG
चित्र:Индия. Цапля и корова.JPG
चित्र:Cow in Mathura.jpg
चित्र:NeloreCattle.jpg|नेल्लोर गाय
</gallery>
=== भारत की कुछ प्रमुख नस्लें ===
* '''साहीवाल:''' मुख्य रूप से [[पंजाब]], [[राजस्थान]] और [[पाकिस्तान]] के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली यह [[भारत]] की बेहतरीन दुधारू नस्लों में से एक है। इसके दूध में [[वसा]] (Fat) की अच्छी मात्रा होती है।
* '''सिंधी:''' मूल रूप से सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) के कोहिस्तान क्षेत्र की यह नस्ल बादामी या गेहुँए रंग की होती है। इनमें विभिन्न जलवायु परिस्थितियों को सहने और रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है।
* '''काँकरेज:''' यह सर्वांगी नस्ल [[गुजरात]] के [[कच्छ जिला|कच्छ]], [[काठियावाड़]] और [[राजस्थान]] के सांचोर क्षेत्र (जहाँ इसे 'सांचोरी गाय' भी कहते हैं) में पाई जाती है। ये अपनी अनोखी 'सवाई चाल' के लिए जानी जाती हैं।
* '''मालवी:''' [[मध्य प्रदेश]] के मालवा क्षेत्र की इस नस्ल के बछड़े बेहद मजबूत होते हैं, जो कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
* '''नागौरी:''' [[राजस्थान]] के [[जोधपुर]] और [[नागौर]] के आस-पास पाई जाने वाली इस नस्ल के बैल भारवाहन और खेती के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।
* '''थारपारकर:''' [[राजस्थान]] ([[जैसलमेर]], [[जोधपुर]], [[बीकानेर]]) और सिंध के रेगिस्तानी क्षेत्रों की यह नस्ल कम चारे और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा दूध देने के लिए जानी जाती है।
* '''हरियाना:''' [[रोहतक]], [[हिसार]], [[सिरसा]] और [[गुरुग्राम]] (गुडगाँव) क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह एक बेहतरीन द्विप्रयोजनी नस्ल है। इनका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का भूरा होता है।
* '''गीर (गिर):''' [[गुजरात]] के गीर जंगलों की मूल निवासी यह गाय भारत की सबसे उत्कृष्ट दुधारू नस्लों में गिनी जाती है।
* '''राठी:''' राजस्थान के [[बीकानेर]] और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में मिलने वाली यह नस्ल अलग-अलग तरह की जलवायु में खुद को आसानी से ढाल लेती है।
== विदेशी नस्ल की गाएँ ==
विदेशी नस्ल की गाएँ (Bos taurus), जैसे कि जर्सी (Jersey) और होल्स्टीन-फ्रीज़ियन (Holstein Friesian), यूरोपीय और अमेरिकी मूल की हैं। ये मुख्य रूप से अपने अत्यधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। चूँकि इनका विशुद्ध रूप से भारतीय जलवायु में पालन करना मुश्किल होता है, इसलिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अक्सर भारतीय नस्लों के साथ इनका संकरण (Crossbreeding) कराया जाता है। भारतीय गायों (Bos indicus) की तुलना में इन विदेशी नस्लों की पीठ एकदम सपाट होती है और इनमें कूबड़ (Hump) का अभाव होता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.sciencedirect.com/topics/biochemistry-genetics-and-molecular-biology/taurine-cattle|title=Taurine Cattle - an overview {{!}} ScienceDirect Topics|website=www.sciencedirect.com|access-date=2026-04-10}}</ref>
== वैश्विक स्तर पर गायों की आबादी ==
पूरी दुनिया में डेयरी और मांस उद्योग के लिए गोवंश का बड़े पैमाने पर पालन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आँकड़ों के अनुसार, भारत, ब्राज़ील और चीन दुनिया के सबसे बड़े गोवंश आबादी वाले देश हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.fao.org/faostat/en/#data/QCL|title=FAOSTAT|website=www.fao.org|access-date=2026-04-10}}</ref>
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|+ प्रमुख देशों में गोवंश की आबादी (2009 के अनुमानित आँकड़े)
|-
! रैंक !! देश / क्षेत्र !! गायों की कुल संख्या !! संख्या (करोड़ में)
|-
| 1 || align="left" | [[भारत]] || 281,700,000 || 28.17
|-
| 2 || align="left" | [[ब्राज़ील]] || 187,087,000 || 18.70
|-
| 3 || align="left" | [[चीन]] || 139,721,000 || 13.97
|-
| 4 || align="left" | [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] || 96,669,000 || 9.66
|-
| 5 || align="left" | [[यूरोपीय संघ]] || 87,650,000 || 8.76
|-
| 6 || align="left" | [[अर्जेंटीना]] || 51,062,000 || 5.10
|-
| 7 || align="left" | [[ऑस्ट्रेलिया]] || 29,202,000 || 2.92
|}
== हिन्दू धर्म में महत्व ==
हिन्दू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। [[भागवत पुराण]] व अन्य हिन्दू ग्रंथों के अनुसार, [[समुद्र मन्थन]] के समय दिव्य '''[[कामधेनु]]''' की उत्पत्ति हुई थी। हिन्दू मान्यताओं में यह विश्वास किया जाता है कि गाय के भीतर 33 कोटि (प्रकार) के देवी-देवताओं का वास होता है। हिन्दू संस्कारों और यज्ञों में गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से निर्मित '''[[पंचगव्य]]''' का विशेष आध्यात्मिक और औषधीय महत्व है। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन हिन्दू धर्म में गो-पूजन का पर्व [[गोपाष्टमी]] के रूप में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books/about/Sacred_cows_sacred_places.html?id=-JXX-k034nwC&redir_esc=y|title=Sacred Cows, Sacred Places: Origins and Survivals of Animal Homes in India|last=Lodrick|first=Deryck O.|date=1981|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-04109-7|pages=15-25|language=en}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[पंचगव्य]]
* [[गोमूत्र]]
* [[कामधेनु]]
* [[पशुपालन]]
* [[गीर गाय]]
* [[हरियाणा गाय]]
*
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.dahd.nic.in/ भारत सरकार - पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग]
* [https://www.nddb.coop/ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की आधिकारिक वेबसाइट]
[[श्रेणी:गोवंश]]
[[श्रेणी:स्तनधारी]]
[[श्रेणी:भारत के पशु]]
[[श्रेणी:गाय|*]]
[[श्रेणी:पालतू जानवर]]
oe7fh06dmz473jm2hgw4i2sba6k1grc
6541308
6541270
2026-04-16T14:29:37Z
AMAN KUMAR
911487
[[विशेष:योगदान/Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar Veterinarian]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: स्व प्रकाशित संदर्भ जोड़ा
6541308
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Cow charity.JPG|right|thumb|300px|भारत में गोपालन को एक पवित्र कार्य माना जाता है।]]
'''गाय''' (Cow) एक महत्त्वपूर्ण पालतू पशु है, जो संसार के लगभग सभी हिस्सों में पाई जाती है। यह उत्तम गुणवत्ता वाले [[दूध]] का प्रमुख स्रोत है। [[भारत]] में [[वैदिक सभ्यता|वैदिक काल]] से ही गाय का गहरा सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक महत्व रहा है। प्राचीन काल में गाय का उपयोग विनिमय (लेन-देन) के माध्यम के रूप में भी होता था, और किसी व्यक्ति की समृद्धि का आकलन उसके पास मौजूद गायों की संख्या से किया जाता था।<ref>{{Cite news|url=https://www.britannica.com/topic/sanctity-of-the-cow|title=Sanctity of the cow {{!}} Hinduism, Religious Significance & Cultural Impact {{!}} Britannica|work=Encyclopedia Britannica|access-date=2026-04-10|language=en}}</ref>
हिन्दू धर्म में गाय को 'माता' (गौमाता) का दर्जा प्राप्त है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके नर बछड़े (बैल) बड़े होकर गाड़ी खींचने और खेतों की जुताई करने जैसे कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
== प्रजनन और शारीरिक चक्र ==
* '''प्रजनन काल:''' वर्षभर।
* '''मद चक्र (Heat period):''' गाय में हर 21 दिन में [[मद चक्र]] आता है (ब्याने के 30 से 60 दिन बाद)।
* '''मदकाल की अवधि:''' 12 से 36 घंटे तक।
* '''गर्भकाल:''' गाय का गर्भकाल लगभग 283 से 290 दिनों का होता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.icar.org.in/en/product/22|title=Handbook of Animal Husbandry {{!}} ICAR|website=www.icar.org.in|access-date=2026-04-10}}</ref>
== भारतीय गाय की विशेषताएँ ==
भारतीय गायों (ज़ेबू / Zebu / Bos indicus) की दो प्रमुख शारीरिक विशेषताएँ होती हैं:<ref>{{Cite web|url=https://www.fao.org/4/t0582e/T0582E02.htm|title=Strategies for sustainable animal agriculture in developing countries|website=www.fao.org|access-date=2026-04-10}}</ref>
1. पीठ पर एक स्पष्ट और सुन्दर कूबड़ (Hump)।
2. गर्दन के नीचे लटकती हुई त्वचा, जिसे गलकंबल (Dewlap) कहा जाता है।
[[भारत]] में गाय की 30 से अधिक मान्यता प्राप्त नस्लें हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.nddb.coop/hi/services/animalbreeding/geneticimprovement/breeds|title=नस्लें {{!}} nddb.coop|website=www.nddb.coop|access-date=2026-04-10}}</ref> उपयोगिता के आधार पर भारतीय गायों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
* '''दुधारू नस्लें:''' जो प्रचुर मात्रा में दूध देती हैं (जैसे- साहीवाल, सिंधी, गिर)।
* '''भारवाही नस्लें (कर्मठ):''' जो दूध कम देती हैं, लेकिन इनके बछड़े कृषि और बोझा ढोने के काम में उत्कृष्ट होते हैं (जैसे- नागौरी, मालवी)।
* '''द्विप्रयोजनी नस्लें (सर्वांगी):''' जो अच्छा दूध भी देती हैं और इनके बैल खेती के लिए भी मजबूत होते हैं (जैसे- हरियाना, कांकरेज, थारपारकर)।
<gallery>
चित्र:Индия. Горбатая корова.JPG
चित्र:Индия. Цапля и корова.JPG
चित्र:Cow in Mathura.jpg
चित्र:NeloreCattle.jpg|नेल्लोर गाय
</gallery>
=== भारत की कुछ प्रमुख नस्लें ===
* '''साहीवाल:''' मुख्य रूप से [[पंजाब]], [[राजस्थान]] और [[पाकिस्तान]] के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली यह [[भारत]] की बेहतरीन दुधारू नस्लों में से एक है। इसके दूध में [[वसा]] (Fat) की अच्छी मात्रा होती है।
* '''सिंधी:''' मूल रूप से सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) के कोहिस्तान क्षेत्र की यह नस्ल बादामी या गेहुँए रंग की होती है। इनमें विभिन्न जलवायु परिस्थितियों को सहने और रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है।
* '''काँकरेज:''' यह सर्वांगी नस्ल [[गुजरात]] के [[कच्छ जिला|कच्छ]], [[काठियावाड़]] और [[राजस्थान]] के सांचोर क्षेत्र (जहाँ इसे 'सांचोरी गाय' भी कहते हैं) में पाई जाती है। ये अपनी अनोखी 'सवाई चाल' के लिए जानी जाती हैं।
* '''मालवी:''' [[मध्य प्रदेश]] के मालवा क्षेत्र की इस नस्ल के बछड़े बेहद मजबूत होते हैं, जो कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
* '''नागौरी:''' [[राजस्थान]] के [[जोधपुर]] और [[नागौर]] के आस-पास पाई जाने वाली इस नस्ल के बैल भारवाहन और खेती के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।
* '''थारपारकर:''' [[राजस्थान]] ([[जैसलमेर]], [[जोधपुर]], [[बीकानेर]]) और सिंध के रेगिस्तानी क्षेत्रों की यह नस्ल कम चारे और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा दूध देने के लिए जानी जाती है।
* '''हरियाना:''' [[रोहतक]], [[हिसार]], [[सिरसा]] और [[गुरुग्राम]] (गुडगाँव) क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह एक बेहतरीन द्विप्रयोजनी नस्ल है। इनका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का भूरा होता है।
* '''गीर (गिर):''' [[गुजरात]] के गीर जंगलों की मूल निवासी यह गाय भारत की सबसे उत्कृष्ट दुधारू नस्लों में गिनी जाती है।
* '''राठी:''' राजस्थान के [[बीकानेर]] और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में मिलने वाली यह नस्ल अलग-अलग तरह की जलवायु में खुद को आसानी से ढाल लेती है।
== विदेशी नस्ल की गाएँ ==
विदेशी नस्ल की गाएँ (Bos taurus), जैसे कि जर्सी (Jersey) और होल्स्टीन-फ्रीज़ियन (Holstein Friesian), यूरोपीय और अमेरिकी मूल की हैं। ये मुख्य रूप से अपने अत्यधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। चूँकि इनका विशुद्ध रूप से भारतीय जलवायु में पालन करना मुश्किल होता है, इसलिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अक्सर भारतीय नस्लों के साथ इनका संकरण (Crossbreeding) कराया जाता है। भारतीय गायों (Bos indicus) की तुलना में इन विदेशी नस्लों की पीठ एकदम सपाट होती है और इनमें कूबड़ (Hump) का अभाव होता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.sciencedirect.com/topics/biochemistry-genetics-and-molecular-biology/taurine-cattle|title=Taurine Cattle - an overview {{!}} ScienceDirect Topics|website=www.sciencedirect.com|access-date=2026-04-10}}</ref>
== वैश्विक स्तर पर गायों की आबादी ==
पूरी दुनिया में डेयरी और मांस उद्योग के लिए गोवंश का बड़े पैमाने पर पालन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आँकड़ों के अनुसार, भारत, ब्राज़ील और चीन दुनिया के सबसे बड़े गोवंश आबादी वाले देश हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.fao.org/faostat/en/#data/QCL|title=FAOSTAT|website=www.fao.org|access-date=2026-04-10}}</ref>
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|+ प्रमुख देशों में गोवंश की आबादी (2009 के अनुमानित आँकड़े)
|-
! रैंक !! देश / क्षेत्र !! गायों की कुल संख्या !! संख्या (करोड़ में)
|-
| 1 || align="left" | [[भारत]] || 281,700,000 || 28.17
|-
| 2 || align="left" | [[ब्राज़ील]] || 187,087,000 || 18.70
|-
| 3 || align="left" | [[चीन]] || 139,721,000 || 13.97
|-
| 4 || align="left" | [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] || 96,669,000 || 9.66
|-
| 5 || align="left" | [[यूरोपीय संघ]] || 87,650,000 || 8.76
|-
| 6 || align="left" | [[अर्जेंटीना]] || 51,062,000 || 5.10
|-
| 7 || align="left" | [[ऑस्ट्रेलिया]] || 29,202,000 || 2.92
|}
== हिन्दू धर्म में महत्व ==
हिन्दू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। [[भागवत पुराण]] व अन्य हिन्दू ग्रंथों के अनुसार, [[समुद्र मन्थन]] के समय दिव्य '''[[कामधेनु]]''' की उत्पत्ति हुई थी। हिन्दू मान्यताओं में यह विश्वास किया जाता है कि गाय के भीतर 33 कोटि (प्रकार) के देवी-देवताओं का वास होता है। हिन्दू संस्कारों और यज्ञों में गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से निर्मित '''[[पंचगव्य]]''' का विशेष आध्यात्मिक और औषधीय महत्व है। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन हिन्दू धर्म में गो-पूजन का पर्व [[गोपाष्टमी]] के रूप में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books/about/Sacred_cows_sacred_places.html?id=-JXX-k034nwC&redir_esc=y|title=Sacred Cows, Sacred Places: Origins and Survivals of Animal Homes in India|last=Lodrick|first=Deryck O.|date=1981|publisher=University of California Press|isbn=978-0-520-04109-7|pages=15-25|language=en}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[पंचगव्य]]
* [[गोमूत्र]]
* [[कामधेनु]]
* [[पशुपालन]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [http://www.dahd.nic.in/ भारत सरकार - पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग]
* [https://www.nddb.coop/ राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की आधिकारिक वेबसाइट]
[[श्रेणी:गोवंश]]
[[श्रेणी:स्तनधारी]]
[[श्रेणी:भारत के पशु]]
[[श्रेणी:गाय|*]]
[[श्रेणी:पालतू जानवर]]
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गणेश
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text/x-wiki
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{{Infobox deity
|Name =श्रीगणेश |deity_of=सुख,समृद्धि, विद्या, बुद्धि, सफलता, मंगलता के ईश्वर, अमंगलता ओर विघ्नों के विनाशक, प्रथम पूज्य भगवान|image=
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*ॐ वक्रतुंडाय विद्महे एकदंताय धिमहि तन्नो दंती प्रचोद्यात ।{{!}}
*वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः निर्विघ्नं कुरु में देव सर्वे कार्येषुसर्वदा: ।।|god_of=बुद्धि के देवता|siblings=भगवान [[कार्तिकेय]] (बड़े भाई) , भगवान [[अय्यपा]] (बड़े भाई) , देवी [[अशोकसुन्दरी]] (बड़ी बहन) , देवी [[ज्योति]] (बड़ी बहन) और [[मनसा देवी]] (बड़ी बहन)|father=भगवान [[शिव]]|mother=देवी [[पार्वती]]|day=बुधवार, मंगलवार|Devanagari=गणेश|Tamil_script=கணேஷ்|Tamil_transliteration=Kaṇēś|Kannada_script=ಗಣೇಶ|Kannada_transliteration=Gaṇēśa|Sanskrit_transliteration=गणेशः|caption=[[बशोली]] लघुचित्र, संवत् १७८७ (लगभग सन् १७३०)। [[राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली]]|Why=हम गणेश जी को क्यों भगवान माने?}}
'''गणेश '''जिनको '''गणपति''' एवं '''विनायक''' भी कहते है, [[हिंदू धर्म|हिन्दू धर्म]] के सबसे लोकप्रिय तथा सर्वाधिक पूजे जाने वाले देवता है। वे भगवान [[शिव]] तथा [[पार्वती]] के पुत्र है तथा कैलाशलोक उनका निवासस्थान है। गणेशजी विघ्नों के विनाशक तथा सुख, समृद्धि,बुद्धि,विद्या, सफलता,शांति और मोक्षदाता भगवान है।
भारतीय संस्कृति में हर कार्य गणेशपूजा के बिना अधूरा है। अभ्यास,व्यापार,विवाह,पूजा आदि सभी शुभ कार्यों तथा अवसरों के आरंभ में सर्वप्रथम गणेशजी की ही पूजा करने का प्रावधान होने के कारण उन्हें प्रथमपूज्य देवता भी कहते है। [[रिद्धि]] (बुद्धि) और [[सिद्धि]] गणेशजी की शाश्वत संगिनी हैं। गणेशजी के शुभ तथा लाभ नमक दो पुत्र भी है।
== गणेशजी के अवतार ==
[[गणेश पुराण]] के अनुसार, श्रीगणेशने चार युगों में चार अवतार लिए। [[हिंदू धर्म|हिन्दू धर्म]] में चार युग सत्य (या कृत युग), त्रेता, द्वापर और [[कलियुग]] हैं, जो वर्तमान युग है। सतयुग में, गणेश महोत्कट के रूप में प्रकट हुए; द्वापर युग में वे मयूरेश्वर के रूप में प्रकट हुए; त्रेता युग में वे गजानन के रूप में अवतार लिया, और कलियुग में वे [[धूम्रकेतु]] के रूप में प्रकट होंगे।
*महोत्कट (सतयुग)
सत्य युग में गणेश कश्यप और अदितिके पुत्र महोत्कट के रूप में अवतार लेते हैं। महोत्कट को विनायक के नाम से जाना जाता है।
इस रूप में गणेश दस भुजाओं वाले हैं और [[सिंह]] पर सवार हैं। वे दानवों देवान्तक, नरान्तक और धूम्राक्ष द्वारा किए गए अधर्म का नाश करने के लिए अवतरित हुए हैं।
*मयूरेश्वरी (त्रेतायुग)
त्रेता युग में गणेश मयूरेश्वर के रूप में अवतरित हुए। वे [[शिव]] और [[सती]] के पुत्र हैं। इस रूप में गणेश जी की छह भुजाएँ हैं और वे [[मोर]] पर सवार हैं। इस अवतार का उद्देश्य सिंधु राक्षस का विनाश करना था।
*गजानन (द्वापर युग)
द्वापर युग में गणेश जी गजानन के रूप में अवतरित हुए। वे शिव के पुत्र हैं। इस रूप में उनकी चार भुजाएँ थीं और वे [[मूषक]] की सवारी करते थे। पृथ्वी पर उत्पात मचाने वाले राक्षस सिंधुर का गजानन ने वध किया था। वर्तमान समयमें गणेशजी के इसी रूप को पूजा जाता हैं।
*धूम्रकेतु(कलियुग)
धूम्रवर्ण भी कहा जाता है, हिन्दू भगवान गणेश का अवतार है जो कलियुग के अंत में प्रकट होगा। गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में गणेश के इस अवतार का उल्लेख है जो [[विष्णु]] के [[कल्कि]] अवतार से अद्भुत समानता रखता है। गणेश का यह अंतिम अवतार अभी होना बाकी है।
गणेश पुराण में कहा गया है कि वह अभिमानसुर नामक राक्षस का विनाश करने के लिए प्रकट होंगे। प्रतीकात्मक रूप से, यह राक्षस मनुष्यों में अहंकार और आसक्ति का प्रतीक है।
ऐसा माना जाता है कि यह गणेश जी का एक उग्र रूप है और वे नीले घोड़े पर सवार होंगे। इस रूप में वे कलियुग का अंत करेंगे और सृष्टि के अगले चक्र के लिए ब्रह्मांड को मुक्त करेंगे।
अतिरिक्त जानकारी:
धूम्रकेतु, जिसे धूम्रवर्ण भी कहा जाता है, हिन्दू देवता गणेश का एक महत्वपूर्ण, किन्तु कम प्रसिद्ध अवतार है। इस अवतार का उल्लेख गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में मिलता है और भविष्यवाणी की गई है कि यह वर्तमान कलियुग के अंत में प्रकट होगा। धूम्रकेतु की अवधारणा विष्णु के कल्कि अवतार से अद्भुत समानता रखती है, जिनके बारे में भी भविष्यवाणी की गई है कि वे कलियुग के अंत में धर्म की पुनर्स्थापना के लिए प्रकट होंगे।
आधुनिक समय की प्रासंगिकता
समकालीन समय में, धूम्रकेतु का विचार प्रतीकात्मक महत्व रखता है क्योंकि यह धर्म और समाज को ग्रसित करने वाले दुर्गुणों, जैसे अहंकार, लोभ और आसक्ति, के बीच चल रहे संघर्ष को दर्शाता है। अंधकार युग के अंत में धूम्रकेतु को एक शोधक के रूप में दर्शाना हिन्दू ब्रह्मांड विज्ञान में समय की चक्रीय प्रकृति और अंततः बुराई पर अच्छाई की विजय की याद दिलाता है। इस अवतार को अक्सर दिव्य ऊर्जा की परिवर्तनकारी शक्ति के रूपक के रूप में देखा जाता है जो दुनिया से नकारात्मकता को दूर करेगी और सत्य एवं सदाचार के एक नए युग का सूत्रपात करेगी।
== गणेशजीका स्वरूप ==
===गणेश जी का मस्तक===
उन्हें गजानन इसलिए कहा गया कि उनके सिर को भगवान [[शिव|शंकर]] ने काट दिया था। बाद में उनके धड़ पर हाथी का सिर लगा कर उन्हें पुन: जीवित किया गया। यह भी कहा जाता है कि [[शनि (ज्योतिष)|शनिदेव]] जब बाल गणेश को देखने गए तो उनकी दृष्टि से उनका मस्तक भस्म हो गया था बाद में विष्णुजी ने एक हाथी का सिर उनके धड़ पर लगाकर उन्हें पुनर्जिवित कर दिया था।
===अग्रपूजक कैसे बने===
एक बार देवताओं में धरती की परिक्रमा की प्रतियोगिता हुई जिसमें जो सबसे पहले परिक्रमा करके आ जाता उसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता। प्रतियोगिता प्रारंभ हुई परंतु गणेश जी का वाहन तो मूषक था तब उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और उन्होंने अपने माता पिता शिव एवं पार्वती की ही परिक्रमा कर ली। ऐसा करके उन्होंने संपूर्ण [[ब्रह्माण्ड]] की ही परिक्रमा कर ली। तब सभी देवों की सर्वसम्मति और ब्रह्माजी की अनुशंसा से उन्हें अग्रपूजक माना गया। इसके पीछे और भी कथाएं हैं। पंच देवोपासना में भगवान गणपति मुख्य हैं।
===गणेशजी की पसंद===
उनका प्रिय भोग [[मोदक|मोदक लड्डू]], प्रिय पुष्प लाल रंग के फूल, प्रिय वस्तु [[दूब घास|दुर्वा]] (दूब), प्रिय वृक्ष [[खेजड़ी|शमी-पत्र]], केल, केला आदि हैं। केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर [[कपूर]] जलाकर उनकी पूजा और आरती की जाती है। उनको मोदक का लड्डू अर्पित किया जाता है। उन्हें रक्तवर्ण के पुष्प विशेष प्रिय हैं।
*''' गणेशजी का स्वरूप'''
जल तत्व के अधिपति, बुधवार और चतुर्थी के स्वामी और केतु एवं बुध के ग्रहाधिपति गणेश जी के प्रभु अस्त्र पाश और [[अंकुश]] है। वे मूषक वाहन पर सवार रहते हैं। वे एकदन्त और चतुर्बाहु हैं। अपने चारों हाथों में वे क्रमश: पाश, अंकुश, मोदक पात्र तथा वरमुद्रा धारण करते हैं। वे रक्तवर्ण, लम्बोदर, शूर्पकर्ण तथा पीतवस्त्रधारी हैं। वे रक्त चंदन धारण करते हैं।
भगवान गणेशजी का सतयुग में वाहन [[सिंह (पशु)|सिंह]] है और उनकी भुजाएं 10 हैं तथा नाम विनायक। श्री गणेशजी का त्रेतायुग में वाहन [[मोर|मयूर]] है इसीलिए उनको मयूरेश्वर कहा गया है। उनकी भुजाएं 6 हैं और रंग श्वेत। द्वापरयुग में उनका वाहन मूषक है और उनकी भुजाएं 4 हैं। इस युग में वे गजानन नाम से प्रसिद्ध हैं और उनका वर्ण लाल है। कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है और वर्ण धूम्रवर्ण है। इनकी 2 भुजाएं हैं और इस युग में उनका नाम धूम्रकेतु है।
===गणेशजी के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग===
मस्तक प्रसंग, पृथ्वी प्रदक्षिणा प्रसंग, मूषक (गजमुख) वाहन प्राप्ति प्रसंग, गणेश विवाह प्रसंग, संतोषी माता उत्पत्ति प्रसंग, विष्णु विवाह में उन्हें नहीं बुलाने का प्रसंग, असुर (देवतान्तक, सिंधु दैत्य, सिंदुरासुर, मत्सरासुर, मदासुर, मोहासुर, कामासुर, लोभासुर, क्रोधासुर, ममासुर, अहंतासुर) वध प्रसंग, महाभारत लेखन प्रसंग आदि। उन्होंने अपने भाई कार्तिकेय के साथ कई युद्धों में लड़ाई की थी।
===गणेश ग्रंथ===
गणेश का गाणपतेय संप्रदाय है। उनके ग्रंथों में गणेश पुराण, गणेश चालीसा, गणेश स्तुति, श्रीगणेश सहस्रनामावली, गणेशजी की आरती, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणपति अथर्वशीर्ष, गणेशकवच, संतान गणपति स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र आदि।
=== शारीरिक संरचना ===
[[File:Ganesh Statue Mandsour India.jpg|thumb|[[मंदसौर]] से प्राप्त प्रतिमा]]
[[चित्र:Ganesh1.jpg|thumb|right|200px|चतुर्भुज गणेश]]
गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग [[अवतार]] लिया। उनकी शारीरिक संरचना में भी विशिष्ट व गहरा अर्थ निहित है। शिवमानस पूजा में श्री गणेश को प्रणव ([[ॐ]]) कहा गया है। इस एकाक्षर ब्रह्म में ऊपर वाला भाग गणेश का मस्तक, नीचे का भाग उदर, चंद्रबिंदु लड्डू और मात्रा सूँड है।
चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता की प्रतीक उनकी चार भुजाएँ हैं। वे ''लंबोदर'' हैं क्योंकि समस्त चराचर सृष्टि उनके उदर में विचरती है। बड़े कान अधिक ग्राह्यशक्ति व छोटी-पैनी आँखें सूक्ष्म-तीक्ष्ण दृष्टि की सूचक हैं। उनकी लंबी नाक (सूंड) महाबुद्धित्व का प्रतीक है।
===गणेश जी के प्रतीक और उनका महत्व===
गणेशजी का बड़ा पेट उदारता और संपूर्ण स्वीकार को दर्शाता है। गणेशजी का ऊपर उठा हुआ हाथ रक्षा का प्रतीक है – अर्थात, ‘घबराओ मत, मैं तुम्हारे साथ हूं’ और उनका झुका हुआ हाथ, जिसमें हथेली बाहर की ओर है,उसका अर्थ है, अनंत दान, और साथ ही आगे झुकने का निमंत्रण देना – यह प्रतीक है कि हम सब एक दिन इसी मिट्टी में मिल जायेंगे। गणेशजी एकदंत हैं, जिसका अर्थ है एकाग्रता।
वे अपने हाथ में जो भी लिए हुए हैं, उन सबका भी अर्थ है। वे अपने एक हाथ में अंकुश लिए हुए हैं, जिसका अर्थ है जागृत होना और एक हाथ में पाश लिए हुए हैं जिसका अर्थ है नियंत्रण। जागृति के साथ, बहुत सी ऊर्जा उत्पन्न होती है और बिना किसी नियंत्रण के उससे व्याकुलता हो सकती है। गणेशजी, हाथी के सिर वाले भगवान, भला क्यों एक चूहे जैसे छोटे से वाहन पर चलते हैं? क्या यह बहुत अजीब नहीं है! फिर से, इसका एक गहरा रहस्य है। एक चूहा उन रस्सियों को काट कर अलग कर देता है जो हमें बांधती हैं। चूहा उस मन्त्र के समान है जो अज्ञान की अनन्य परतों को पूरी तरह काट सकता है और उस परम ज्ञान को प्रत्यक्ष कर सकता है जिसके भगवान गणेश प्रतीक हैं।
हमारे प्राचीन ऋषि इतने गहन बुद्धिशाली थे कि उन्होंने दिव्यता को शब्दों के बजाय इन प्रतीकों के रूप में दर्शाया, क्योंकि शब्द तो समय के साथ बदल जाते हैं लेकिन प्रतीक कभी नहीं बदलते। तो जब भी हम उस सर्वव्यापी का ध्यान करें, हमें इन गहरे प्रतीकों को अपने मन में रखना चाहिए, जैसे हाथी के सिर वाले भगवान, और उसी समय यह भी याद रखें कि गणेशजी हमारे भीतर ही हैं। यही वह ज्ञान है जिसके साथ हमें गणेश चतुर्थी मनानी चाहिए।
=== भगवान गणेश जी के जन्म की कहानी===
हम सभी उस कथा को जानते हैं, कि कैसे गणेश जी हाथी के सिर वाले भगवान बने। जब पार्वती शिव के साथ उत्सव क्रीड़ा कर रहीं थीं, तब उन पर थोड़ा मैल लग गया। जब उन्हें इस बात की अनुभूति हुई, तब उन्होंने अपने शरीर से उस मैल को निकाल दिया और उससे एक बालक बना दिया। फिर उन्होंने उस बालक को कहा कि जब तक वे स्नान कर रहीं हैं, वह वहीं पहरा दे।
जब शिवजी वापिस लौटे, तो उस बालक ने उन्हें पहचाना नहीं और उनका रास्ता रोका। तब भगवान शिव ने उस बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया और अंदर चले गए।
यह देखकर पार्वती बहुत हैरान रह गयीं। उन्होंने शिवजी को समझाया कि वह बालक तो उनका पुत्र था, और उन्होंने भगवान शिव से विनती करी कि वे किसी भी कीमत पर उसके प्राण बचाएं।
तब भगवान शिव ने अपने सहायकों को आज्ञा दी कि वे जाएं और कहीं से भी कोई ऐसा मस्तक लेकर आएं जो उत्तर दिशा की ओर मुहँ करके सो रहा हो। तब शिवजी के सहायक एक हाथी का सिर लेकर आए, जिसे शिवजी ने उस बालक के धड़ से जोड़ दिया और इस तरह भगवान गणेश का जन्म हुआ।
===गणेश जी की कहानी में विचार के तथ्य===
====पार्वती जी के शरीर पर मैल क्यों था?====
पार्वती प्रसन्न ऊर्जा का प्रतीक हैं। उनके मैले होने का अर्थ है कि कोई भी उत्सव राजसिक हो सकता है, उसमें आसक्ति हो सकती है और आपको, आपके केन्द्र से हिला सकता है। मैल अज्ञान का प्रतीक है, और भगवान शिव सर्वोच्च सरलता, शान्ति और ज्ञान के प्रतीक हैं।
क्या भगवान शिव, जो शान्ति के प्रतीक थे, इतने गुस्से वाले थे कि उन्होंने अपने ही पुत्र का सिर धड़ से अलग कर दिया!
====भगवान गणेश के धड़ पर हाथी का सिर क्यों?====
तो जब गणेशजी ने भगवान शिव का मार्ग रोका, इसका अर्थ हुआ कि अज्ञान, जो कि मस्तिष्क का गुण है, वह ज्ञान को नहीं पहचानता, तब ज्ञान को अज्ञान से जीतना ही चाहिए। इसी बात को दर्शाने के लिए शिवजी ने गणेशजी के सिर को काट दिया था।
===हाथी का ही सिर क्यों?===
हाथी ‘ज्ञान शक्ति’ और ‘कर्म शक्ति’, दोनों का ही प्रतीक है। एक हाथी के मुख्य गुण होते हैं – बुद्धि और सहजता। एक हाथी का विशालकाय सिर बुद्धि और ज्ञान का सूचक है। हाथी कभी भी अवरोधों से बचकर नहीं निकलते, न ही वे उनसे रुकते हैं। वे केवल उन्हें अपने मार्ग से हटा देते हैं और आगे बढ़ते हैं – यह सहजता का प्रतीक है। इसलिए, जब हम भगवान गणेश की पूजा करते हैं, तो हमारे भीतर ये सभी गुण जागृत हो जाते हैं, और हम ये गुण ले लेते हैं।
==गणेश के सभी 32 रूप==
गणेश शुभारंभ की बुद्धि देते हैं और काम को पूरा करने की शक्ति भी। वे बाधाएं मिटाकर अभय देते हैं और सही- गलत का भेद बताकर न्याय भी करते हैं। गणेश के इन रूपों में उनके प्रथम पूज्य होने का कारण छिपा है।
भगवान गणेश वास्तव में प्रकृति की शक्तियों का विराट रूप हैं। मुद्गल और गणेश पुराण में विघ्नहर्ता गणेशजी के 32 मंगलकारी रूप बताए गए हैं। इनमें वे बाल रूप में हैं, तो किशोरों वाली ऊर्जा भी उनमें मौजूद है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश की शक्ति उनमें समाहित है, तो वे सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा का रूप भी हैं। वे पेड़, पौधे, फल, पुष्प के रूप में सारी प्रकृति खुद में समेटे हैं। वे योगी भी हैं और नर्तक भी।
नंजनगुड शिव मंदिर में गणेश के 32 रूप विराजित
कर्नाटक में मैसूर के पास नंजनगुड शिव मंदिर में भगवान गणेश के सभी 32 रूप मौजूद हैं। इस मंदिर में देवी-देवताओं की 100 से अधिक प्रतिमाएं विभिन्न रूपों में हैं। इस मंदिर की गिनती कर्नाटक के सबसे बड़े मंदिरों में होती है। तस्वीर भगवान गणेश के पंचमुख रूप की मूर्ति की है। यहां उन्हें कदरीमुख गणपति कहा जाता है।
'''1. श्री बाल गणपति -''' यह भगवान गणेश का बाल रूप है। यह धरती पर बड़ी मात्रा में उपलब्ध संसाधनों का और भूमि की उर्वरता का प्रतीक है। उनके चारों हाथों में एक-एक फल है- आम, केला, गन्ना और कटहल। गणेश चतुर्थी पर भगवान के इस रूप की पूजा भी की जाती है।
'''प्रेरणा''' यह रूप संकट में भी बाल सुलभ सहजता की प्रेरणा प्रेरणा देता है। इंसान की आगे बढ़ने की क्षमता दर्शाता है।
'''2. तरुण गणपति -''' यह गणेशजी का किशोर रूप है। उनका शरीर लाल रंग में चमकता है। इस रूप में उनकी 8 भुजाएं हैं। उनके हाथों में फलों के साथ-साथ मोदक और [[अस्त्र-शस्त्र]] भी हैं। यह रूप आंतरिक प्रसन्नता देता है। यह युवावस्था की ऊर्जा का प्रतीक है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणपति अपनी पूरी क्षमता से काम करने और उपलब्धियों के लिए संघर्ष की प्रेरणा देते हैं।
'''3. भक्त गणपति -''' इस रूप में वे श्वेतवर्ण हैं। उनका रंग [[पूर्णिमा]] के चांद की तरह चमकीला है। आमतौर पर फसल के मौसम में किसान
उनके इस रूप की पूजा करते हैं। यह रूप भक्तों को सुकून देता है। उनके चार हाथ हैं, जिनमें फूल और फल हैं।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणपति इंसान के चार पुरुषार्थ- [[धर्म]], [[अर्थ]], [[काम]] और [[मोक्ष]] का प्रतिनिधित्व करते हैं।
'''4. वीर गणपति -''' यह गणेशजी का योद्धा रूप है। इस रूप में उनके 16 हाथ हैं। उनके हाथों में गदा, चक्र, तलवार, अंकुश सहित कई अस्त्र हैं। इस रूप में गणेश युद्ध कला में पारंगत बनाते हैं। इस रूप की उनकी पूजा साहस पैदा करती है। हार न मानने के लिए प्रेरित करती है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गजानन बुराई और अज्ञानता पर विजय पाने के लिए पूरी क्षमता से लड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
'''5. शक्ति गणपति -''' इस रूप में उनके चार हाथ हैं। एक हाथ से वे सभी भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हैं। उनके अन्य हाथों में अस्त्र-शस्त्र भी हैं और माला भी। इस रूप में उनकी शक्ति भी साथ हैं। वे सभी भक्तों को शक्तिशाली बनने का आशीर्वाद देते हुए ‘[[अभय मुद्रा]]’ में हैं।
'''प्रेरणा -''' गणेश जी का यह रूप इस बात प्रतीक है कि इंसान के भीतर शक्ति पुंज है, जिसका उसे इस्तेमाल करना है।
'''6. द्विज गणपति -''' इस रूप में उनके दो गुण अहम हैं- ज्ञान और संपत्ति। इन दो को पाने के लिए गणपति के इस रूप को पूजा जाता है।
उनके चार मुख हैं। वे चार हाथों वाले हैं। इनमें [[कमंडल]], [[रुद्राक्ष]], [[छड़ी]] और [[ताड़पत्र]] में शास्त्र लिए हुए हैं।
'''प्रेरणा -''' द्विज इसलिए हैं क्योंकिवे ब्रह्मा की तरह दो बार जन्मे हैं। उनके चार हाथ चार वेदों की शिक्षाओं का प्रतीक हैं।
'''7. सिद्धि गणपति''' - इस रूप में गणेशजी पीतवर्ण हैं। उनके चार हाथ हैं। वे बुद्धि और सफलता के प्रतीक हैं। इस रूप में वे आराम की मुद्रा में बैठे हैं। अपनी सूंड में मोदक लिए हैं। मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धि विनायक मंदिर में गणेशजी का यही स्वरूप विराजित है।
'''प्रेरणा -''' भगवान गणेश का यह रूप किसी भी काम को दक्षता से करने की प्रेरणा देता है। यह सिद्धि पाने का प्रतीक है।
'''8. उच्छिष्ट गणपति -''' इस रूप में गणेश नीलवर्ण हैं। वे धान्य के देवता हैं। यह रूप मोक्ष भी देता है और ऐश्वर्य भी। एक हाथ में वे एक वाद्य यंत्र लिए विराजित हैं। उनकी शक्ति साथ में पैरों पर विराजित हैं। गणेशजी के इस रूप का एक मंदिर तमिलनाडु में है।
'''प्रेरणा -''' यह रूप ऐश्वर्य और मोक्ष में संतुलन का प्रतीक है। वे कामना और धर्म में संतुलन के लिए प्रेरित करते हैं।
'''9. विघ्न गणपति -''' इस रूप में गणेशजी का रंग स्वर्ण के समान है। उनके आठ हाथ हैं। वे बाधाओं को दूर करने वाले भगवान हैं। इस रूप में वे भगवान विष्णु के समान दिखाई देते हैं। उनके हाथों में शंख और चक्र हैं। वे कई तरह के आभूषण भी पहने हुए हैं।
'''प्रेरणा -''' यह रूप सकारात्मक पक्ष देखने की प्रेरणा देता है। यह नकारात्मक प्रभाव और विचारों को भी दूर करता है।
'''10. क्षिप्र गणपति -''' इस रूप में गणेश जी रक्तवर्ण हैं। उनके चार हाथ हैं। वे आसानी से प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूरी करते हैं। उनके चार हाथों में से एक में कल्पवृक्ष की शाखा है। अपनी सूंड में वे एक कलश लिए हैं, जिसमें रत्न हैं।
'''प्रेरणा -''' यह रूप कामनाओं की पूर्ति का प्रतीक है। कल्पवृक्ष इच्छाएं पूरी करता है और कलश समृद्धि देता है।
'''11. हेरम्ब गणपति -''' पांच सिरों वाले हेरम्ब गणेश दुर्बलों के रक्षक हैं। यह उनका विलक्षण रूप है। इस रूप में वे शेर पर सवार हैं। उनके दस हाथ हैं, जिनमें वे फरसा, फंदा, मनका, माला, फल, छड़ी और मोदक लिए हुए हैं। उनके सिर पर मुकुट है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणेश कमजोर को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देते हैं। वे डर पर विजय पाने की प्रेरणा बनते हैं।
'''12. लक्ष्मी गणपति -''' इस रूप में गणेशजी बुद्धि और सिद्धि के साथ हैं। उनके आठ हाथ हैं। उनका एक हाथ अभय मुद्रा में है, जो सभी को सिद्धि और बुद्धि दे रहा है। उनके एक हाथ में तोता बैठा है। तमिलनाडु के पलानी में गणेशजी के इस रूप का मंदिर है।
'''प्रेरणा -''' गणेशजी इस रूप में उपलब्धियां और किसी काम में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं।
'''13. महागणपति -''' रक्तवर्णहैं और भगवान शिव की तरह उनके तीन नेत्र हैं। उनके दस हाथ हैं और उनकी शक्ति उनके साथ विराजित हैं। भगवान गणेश के इस रूप का एक मंदिर द्वारका में है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने यहां गणेश आराधना की थी।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में महागणपति दसों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे भ्रम से बचाते हैं।
'''14.विजय गणपति -''' इस रूप में वे अपने मूषक पर सवार हैं, जिसका आकार सामान्य से बड़ा दिखाया गया है। महाराष्ट्र में पुणे के अष्टविनायक मंदिर में भगवान का यह रूप मौजूद है। मान्यता है कि भगवान के इस रूप की पूजा से तुरंत राहत मिलती है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणपति विजय पाने और संतुलन कायम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
'''15. नृत्त गणपति -''' इस रूप में गणेशजी कल्पवृक्ष के नीचे नृत्य करते दिखाए गए हैं। वे प्रसन्न मुद्रा में हैं। उनके चार हाथ हैं। एक हाथ में युद्ध का अस्त्र परशु भी है। उनके इस रूप का तमिलनाडु के कोडुमुदी में अरुलमिगु मगुदेश्वरर मंदिर है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप का पूजन ललित कलाओं में सफलता दिलाता है। वे कलाओं में प्रयोग के लिए प्रेरित करते हैं।
'''16. उर्ध्व गणपति -''' इस रूप में उनके आठ हाथ हैं। उनकी शक्ति साथ में विराजित हैं, जिन्हें उन्होंने एक हाथ से थाम रखा है। एक हाथ में टूटा हुआ दांत है। बाकी हाथों में कमल पुष्प सहित प्राकृतिक सम्पदाएं हैं। वे तांत्रिक मुद्रा में विराजित हैं।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणेशजी की आराधना भक्त को अपनी स्थिति से ऊपर उठने के लिए प्रेरित करती है।
'''17. एकाक्षर गणपति -''' इस रूप में गणेशजी के तीन नेत्र हैं और मस्तक पर भगवान शिव के समान चंद्रमा विराजित है। मान्यता है कि इस रूप की पूजा से मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण में मदद मिलती है। गणपति के इस रूप का मंदिर कनार्टक के हम्पी में है।
'''प्रेरणा -''' एकाक्षर गणपति का बीज मंत्र है ‘गं’ है। यह हर तरह के शुभारंभ का प्रतीक है।
'''18. वर गणपति -''' गणपति का यह रूप वरदान देने के लिए जाना जाता है। अपनी सूंड में वे रत्न कुंभ थामे हुए हैं। वे सफलता और समृद्धि का वरदान देते हैं। कर्नाटक के बेलगाम में रेणुका येलम्मा मंदिर में भगवान का यह रूप विराजित है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में उनके साथ विराजित देवी के हाथों में विजय पताका है। वे विजयी होने के वरदान का प्रतीक हैं।
'''19. त्र्यक्षर गणपति -''' यह भगवान गणेश का ओम रूप है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश समाहित हैं। यानी वे सृष्टि के निर्माता, पालनहार और संहारक भी हैं। कर्नाटक के नारसीपुरा में गणेश के इस रूप का मंदिर है, जिसे तिरुमाकुदालु मंदिर के नाम से जाना जाता है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में उनकी आराधना आध्यात्मिक ज्ञान देती है। यह रूप स्वयं को पहचानने के लिए प्रेरित करता है।
'''20. क्षिप्रप्रसाद गणपति -''' इस रूप में गणेश इच्छाओं को शीघ्रता से पूरा करते हैं और उतनी ही तेजी से गलतियों की सजा भी देते हैं। वे पवित्र घास से बने सिंहासन पर बैठे हैं। तमिलनाडु के कराईकुडी और मैसूर में भगवान के इस रूप का मंदिर है।
'''प्रेरणा -''' गणेश जी का यह रूप सभी की शांित और समृद्धि के लिए काम करने की प्रेरणा देता है।
'''21. हरिद्रा गणपति -''' इस रूप में गणेशजी हल्दी से बने हैं और राजसिंहासन पर बैठे हैं। इस रूप के पूजन से इच्छाएं पूरी होती हैं। कर्नाटक में श्रंगेरी में रिष्यश्रंग मंदिर में गणेशजी का यह रूप विराजित है। माना जाता है कि हल्दी से बने गणेश रखने से व्यापार में फायदा होता है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणेश प्रकृति और उसमें मौजूद निरोग रहने की शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
'''22. एकदंत गणपति -''' इस रूप में गणेशजी का पेट अन्य रूपों के मुकाबले बड़ा है। वे अपने भीतर ब्रह्मांड समाए हुए हैं। वे रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटाते हैं और जड़ता को दूर करते हैं। इस रूप का पूजन पूरे देश में व्यापक रूप से होता है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणेश अपनी कमियों पर ध्यान देने और खूबियों को निखारने के लिए प्रेरित करते हैं।
'''23. सृष्टि गणपति -''' गणेशजी का यह रूप प्रकृति की तमाम शक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। उनका यह रूप ब्रह्मा के समान ही है। यहां वे एक बड़े मूषक पर सवार दिखाई देते हैं। तमिलनाडु के कुंभकोणम में अरुलमिगु स्वामीनाथन मंदिर में उनका यह रूप विराजित है।
'''प्रेरणा -''' यह रूप सही-गलत और अच्छे-बुरे में फर्क करने की प्रेरणा समझ देता है। इस रूप में गणेश निर्माण के प्रेरणा देते हैं।
'''24. उद्दंड गणपति -''' इस रूप में गणेश न्याय की स्थापना करते हैं। यह उनका उग्र रूप है, जिसके 12 हाथ हैं। उनकी शक्ति उनके साथ विराजित हैं। इस रूप में गणेश का देश में कहीं और मंदिर नहीं है। चमाराजनगर और नंजनगुड में गणपति के 32 रूपों की प्रतिमा मौजूद है।
'''प्रेरणा -''' गणेशजी का यह रूप सांसारिक मोह छोड़ने और बंधनों से मुक्त होने के लिए प्रेरित करता है।
'''25. ऋणमोचन गणपति -''' गणेशजी का यह रूप अपराधबोध और कर्ज से मुक्ति देता है। यह रूप भक्तों को मोक्ष भी देता है। वे श्वेतवर्ण हैं और उनके चार हाथ हैं। इनमें से एक हाथ में मीठा चावल है। इस रूप का मंदिर तिरुवनंतपुरम में है।
'''प्रेरणा -''' इस रूप में गणेशजी परिवार, पिता और गुरू के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए प्रेरित करते हैं।
'''26. ढुण्ढि गणपति -''' रक्तवर्ण गणेशजी के इस रूप में उनके हाथ में रुद्राक्ष की माला है। रुद्राक्ष उनके पिता शिव का प्रतीक माना जाता है। यानी इस रूप में वे पिता के संस्कारों को लिए विराजित हैं। उनके एक हाथ में लाल रंग का रत्न-पात्र भी है।
'''प्रेरणा -''' गणेशजी का यह रूप आध्यात्मिक विचारों के लिए प्रेरित करता है। जीवन को स्वच्छ बनाता है।
'''27. द्विमुख गणपति -''' गणेशजी के इस स्वरूप में उनके दो मुख हैं, जो सभी दिशाओं में देखने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों मुखों में वे सूंड ऊपर उठाए हैं। इस रूप में उनके शरीर के रंग में नीले और हरे का मिश्रण है। उनके चार हाथ हैं।
'''प्रेरणा -''' यह रूप दुनिया और व्यक्ति के आंतरिक और बाहरी, दोनों रूपों को देखने के लिए प्रेरित करता है।
'''28. त्रिमुख गणपति -''' इस रूप में गणेशजी के तीन मुख और छह हाथ हैं। दाएं और बाएं तरफ के मुख की सूंड ऊपर उठी हुई है। वे स्वर्ण कमल पर विराजित हैं। उनका एक हाथ रक्षा की मुद्रा और दूसरा वरदान की मुद्रा में है। इस रूप में उनके एक हाथ में अमृत-कुंभ है।
'''प्रेरणा -''' गणेश जी का यह रूप भूत, वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखकर कर्म करने के लिए प्रेरित करता है।
'''29. सिंह गणपति''' - इस रूप में गणेशजी शेर के रूप में विराजमान हैं। उनका मुख भी शेरों के समान है, साथ ही उनकी सूंड भी है। उनके आठ हाथ हैं। इनमें से एक हाथ वरद मुद्रा में है, तो दूसरा अभय मुद्रा में है।
'''प्रेरणा -''' गणेश जी का यह रूप निडरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो शक्ति और समृद्धि देता है।
'''30. योग गणपति -''' इस रूप में भगवान गणेश एक योगी की तरह दिखाई देते हैं। वे मंत्र जाप कर रहे हैं। उनके पैर योगिक मुद्रा में है। मान्यता है कि इस रूप की पूजा अच्छा स्वास्थ्य देती है और मन को प्रसन्न बनाती है। उनके इस रूप का रंग सुबह के सूर्य के समान है।
'''प्रेरणा -''' भगवान गणेश का रूप अपने भीतर छिपी शक्तियों को पहचानने के लिए प्रेरित करता है।
'''31. दुर्गा गणपति -''' भगवान गणेश का यह रूप अजेय है। वे शक्तिशाली हैं और हमेशा अंधकार पर विजय प्राप्त करते हैं। यहां वे अदृश्य देवी दुर्गा के रूप में हंै। इस रूप में वे लाल वस्त्र धारण करते हैं। यह रंग ऊर्जा का प्रतीक है। उनके हाथ में धनुष है।
'''प्रेरणा -''' भगवान गणेश का यह रूप विजय मार्ग में आने वाली बाधाओं को हटाने के लिए प्रेरित करता है।
'''32.संकष्टहरण गणपति -''' इस रूप मेंगणेश डर और दुख को दूर करते हैं। मान्यता है कि इनकी आराधना संकट के समय बल देती है। उनके साथ उनकी शक्ति भी मौजूद है। शक्ति के हाथ में भी कमल पुष्प है। गणेशजी का एक हाथ वरद मुद्रा में है।
'''प्रेरणा -''' यह रूप इस बात का प्रतीक है कि हर काम में संकट आएंगे, लेकिन उन्हें हटाने की शक्ति इंसान में है।
== गणेशजी का प्रागट्य==
प्राचीन समय में सुमेरू पर्वत पर सौभरि ऋषि का अत्यंत मनोरम आश्रम था। उनकी अत्यंत रूपवती और पतिव्रता पत्नी का नाम मनोमयी था। एक दिन ऋषि लकड़ी लेने के लिए वन में गए और मनोमयी गृह-कार्य में लग गई। उसी समय एक दुष्ट कौंच नामक गंधर्व वहाँ आया और उसने अनुपम लावण्यवती मनोमयी को देखा तो व्याकुल हो गया।
कौंच ने ऋषि-पत्नी का हाथ पकड़ लिया। रोती और काँपती हुई ऋषि पत्नी उससे दया की भीख माँगने लगी। उसी समय सौभरि ऋषि आ गए। उन्होंने गंधर्व को श्राप देते हुए कहा 'तूने चोर की तरह मेरी सहधर्मिणी का हाथ पकड़ा है, इस कारण तू मूषक होकर धरती के नीचे और चोरी करके अपना पेट भरेगा।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/religion/jeevan-mantra/news/the-story-of-ganesh-chaturthi-vrat-ganesh-ji-and-chandra-dev-katha-ganesh-chaturthi-on-12-march-126949046.html|title=गणेश चतुर्थी व्रत की कथा जुड़ी है चंद्रदेव से, इस दिन चंद्र दर्शन करने की है परंपरा|date=2020-03-11|website=Dainik Bhaskar|language=hi|access-date=2020-08-02}}</ref>
काँपते हुए गंधर्व ने मुनि से प्रार्थना की-'दयालु मुनि, अविवेक के कारण मैंने आपकी पत्नी के हाथ का स्पर्श किया था। मुझे क्षमा कर दें। ऋषि ने कहा मेरा श्राप व्यर्थ नहीं होगा, तथापि द्वापर में महर्षि पराशर के यहाँ गणपति देव गजमुख पुत्र रूप में प्रकट होंगे (हर युग में गणेशजी ने अलग-अलग अवतार लिए) तब तू उनका डिंक नामक वाहन बन जाएगा, जिससे देवगण भी तुम्हारा सम्मान करने लगेंगे। सारे विश्व तब तुझें श्रीडिंकजी कहकर वंदन करेंगे।
*जन्म समय
भाद्रपद की चतुर्थी को मध्यान्ह के समय। जन्म समय माथुर ब्राह्मणों के इतिहास अनुसार अनुमानत: 9938 विक्रम संवत पूर्व भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न के समय हुआ था। पौराणिक मत के अनुसार सतुयग में हुआ था।
'''''गणेश''''' को जन्म न देते हुए माता [[पार्वती]] ने उनके शरीर की रचना की। उस समय उनका मुख सामान्य था। माता पार्वती के स्नानागार में गणेश की रचना के बाद माता ने उनको घर की पहरेदारी करने का आदेश दिया। माता ने कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं तब तक के लिये गणेश किसी को भी घर में प्रवेश न करने दे। तभी द्वार पर भगवान [[शिव|शंकर]] आए और बोले "पुत्र यह मेरा घर है मुझे प्रवेश करने दो।" गणेशजी ने भगवान शिव का मार्ग रोका, इसका अर्थ हुआ कि अज्ञान, जो कि मस्तिष्क का गुण है, वह ज्ञान को नहीं पहचानता, तब ज्ञान को अज्ञान से जीतना ही चाहिए। इसी बात को दर्शाने के लिए शिवजी ने गणेशजी के सिर को काट दिया था।
गणेश को भूमि में निर्जीव पड़ा देख माता पार्वती व्याकुल हो उठीं। तब शिव को उनकी त्रुटि का बोध हुआ और उन्होंने गणेश के धड़ पर हाथी का सर लगा दिया, ओर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया। हाथी ‘ज्ञान शक्ति’ और ‘कर्म शक्ति’, दोनों का ही प्रतीक है। एक हाथी के मुख्य गुण होते हैं – बुद्धि और सहजता। एक हाथी का विशालकाय सिर बुद्धि और ज्ञान का सूचक है। इस प्रकार गणेशजी को नया रूप मिला।
गणेशजी के पराक्रम से प्रसन्न होकर देवताओं ने उन्हें बहुत से वरदान दिए ! भगवान विष्णु उन्हें ''' प्रथमपूज्य देव ''' होने का वरदान दिया, उनकी कृपा के बिना कोई जीव मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता। लक्ष्मीजी ने उन्हें समृद्धि के स्वामी होने का वरदान दिया। प्रजापति ब्रह्मा ने उन्हें युद्ध में अजेय होने का वरदान दिया।
गणेशजी को सिन्दूर और दूब चढ़ाने से विशेष फल मिलता है। इसके अतिरिक्त उन्हें गुड़ के मोदक और बूंदी के लड्डू , शामी वृक्ष के पत्ते तथा सुपारी भी प्रिय है। गणेश जी को लाल धोती तथा हरा वस्त्र चढ़ाने का भी विधान है।
== गणेशजी का विवाह ==
शास्त्रों के अनुसार गणेश जी का विवाह भी हुआ था इनकी दो पत्नियां हैं<ref name=":0">{{Cite web|url=https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/photo/why-did-ganeshji-had-two-wives-twice-know-how-riddhi-and-siddhi-became-his-wife-65665/|title=जानिए क्यों हुए थे गणेशजी के दो विवाह और रिद्धि सिद्धि कैसे बनीं उनकी पत्नी|last=नवभारतटाइम्स.कॉम|date=2019-08-29|website=नवभारत टाइम्स|language=hi-IN|access-date=2020-08-04}}</ref> जिनका नाम रिद्धि और सिद्धि है तथा इनसे गणेश जी को दो पुत्र और एक पुत्री हैं जिनका नाम शुभ और लाभ नाम बताया जाता है,<ref name=":0" /> यही कारण है कि शुभ और लाभ ये दो शब्द आपको अक्सर उनकी मूर्ति के साथ दिखाई देते हैं तथा ये सभी जन्म और मृत्यु में आते है, गणेश जी की पूजा करने से केवल सिद्धियाँ प्राप्त होती है लेकिन इनकी भक्ति से पूर्ण मोक्ष संभव नहीं है। गणेश जी के इन दो पुत्रों के अलावा एक पुत्री भी हैं वे [[संतोषी माता]] के नाम से विख्यात हैं।
== गणेशजी की उपासना ==
[[चित्र:Manjangan.jpg|right|thumb|300px|[[इंडोनेशिया|इण्डोनेशिया]] के [[बाली|बाली द्वीप]] में समुद्र तट पर स्थित एक गणेश मन्दिर]]
गणेशजी के अनेक नाम हैं लेकिन ये 12 नाम प्रमुख हैं-
सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन।
उपरोक्त द्वादश नाम नारद पुराण में पहली बार गणेश के द्वादश नामवलि में आया है।
* पिता- भगवान [[शिव|शंकर]]
* माता- भगवती [[पार्वती]]
* भाई- श्री [[कार्तिकेय|कार्तिकेय]], [[अय्यप्पा]] (बड़े भाई)
*बहन- [[अशोकसुन्दरी]] , [[मनसा देवी]] , देवी [[ज्योति]] ( बड़ी बहन )
* पत्नी- दो (१) [[ऋद्धि]] (२) [[सिद्धि]] (दक्षिण भारतीय संस्कृति में गणेशजी ब्रह्मचारी रूप में दर्शाये गये हैं)
* पुत्र- दो 1. शुभ 2. लाभ
*पुत्री - [[संतोषी माता]]
* प्रिय भोग (मिष्ठान्न)- मोदक, लड्डू
* प्रिय पुष्प- लाल रंग के
* प्रिय वस्तु- दुर्वा (दूब), शमी-पत्र
* अधिपति- जल तत्व के
* मुख्य अस्त्र - [[परशु]] , रस्सी
* वाहन - [[मूषक]]
* प्रिय वस्त्र - हरा और लाल
===भगवान गणेश के 108 नाम===
1. बालगणपति : सबसे प्रिय बालक
2. भालचन्द्र : जिसके मस्तक पर चंद्रमा हो
3. बुद्धिनाथ : बुद्धि के भगवान
4. धूम्रवर्ण : धुंए को उड़ाने वाले
5. एकाक्षर : एकल अक्षर
6. एकदन्त: एक दांत वाले
7. गजकर्ण : हाथी की तरह आंखों वाले
8. गजानन: हाथी के मुख वाले भगवान
9. गजवक्र : हाथी की सूंड वाले
10. गजवक्त्र: हाथी की तरह मुंह है
11. गणाध्यक्ष : सभी जनों के मालिक
12. गणपति : सभी गणों के मालिक
13. गौरीसुत : माता गौरी के बेटे
14. लम्बकर्ण : बड़े कान वाले देव
15. लम्बोदर : बड़े पेट वाले
16. महाबल : अत्यधिक बलशाली
17. महागणपति : देवादिदेव
18. महेश्वर: सारे ब्रह्मांड के भगवान
19. मंगलमूर्ति : सभी शुभ कार्यों के देव
20. मूषकवाहन : जिनका सारथी मूषक है
21. निदीश्वरम : धन और निधि के दाता
22. प्रथमेश्वर : सब के बीच प्रथम आने वाले
23. शूपकर्ण : बड़े कान वाले देव
24. शुभम : सभी शुभ कार्यों के प्रभु
25. सिद्धिदाता: इच्छाओं और अवसरों के स्वामी
26. सिद्दिविनायक : सफलता के स्वामी
27. सुरेश्वरम : देवों के देव।
28. वक्रतुण्ड : घुमावदार सूंड वाले
29. अखूरथ : जिसका सारथी मूषक है
30. अलम्पता : अनन्त देव।
31. अमित : अतुलनीय प्रभु
32. अनन्तचिदरुपम : अनंत और व्यक्ति चेतना वाले
33. अवनीश : पूरे विश्व के प्रभु
34. अविघ्न : बाधाएं हरने वाले।
35. भीम : विशाल
36. भूपति : धरती के मालिक
37. भुवनपति: देवों के देव।
38. बुद्धिप्रिय : ज्ञान के दाता
39. बुद्धिविधाता : बुद्धि के मालिक
40. चतुर्भुज: चार भुजाओं वाले
41. देवादेव : सभी भगवान में सर्वोपरि
42. देवांतकनाशकारी: बुराइयों और असुरों के विनाशक
43. देवव्रत : सबकी तपस्या स्वीकार करने वाले
44. देवेन्द्राशिक : सभी देवताओं की रक्षा करने वाले
45. धार्मिक : दान देने वाले
46. दूर्जा : अपराजित देव
47. द्वैमातुर : दो माताओं वाले
48. एकदंष्ट्र: एक दांत वाले
49. ईशानपुत्र : भगवान शिव के बेटे
50. गदाधर : जिनका हथियार गदा है
51. गणाध्यक्षिण : सभी पिंडों के नेता
52. गुणिन: सभी गुणों के ज्ञानी
53. हरिद्र : स्वर्ण के रंग वाले
54. हेरम्ब : मां का प्रिय पुत्र
55. कपिल : पीले भूरे रंग वाले
56. कवीश : कवियों के स्वामी
57. कीर्ति : यश के स्वामी
58. कृपाकर : कृपा करने वाले
59. कृष्णपिंगाश : पीली भूरी आंख वाले
60. क्षेमंकरी : माफी प्रदान करने वाला
61. क्षिप्रा : आराधना के योग्य
62. मनोमय : दिल जीतने वाले
63. मृत्युंजय : मौत को हराने वाले
64. मूढ़ाकरम : जिनमें खुशी का वास होता है
65. मुक्तिदायी : शाश्वत आनंद के दाता
66. नादप्रतिष्ठित : जिन्हें संगीत से प्यार हो
67. नमस्थेतु : सभी बुराइयों पर विजय प्राप्त करने वाले
68. नन्दन: भगवान शिव के पुत्र
69. सिद्धांथ: सफलता और उपलब्धियों के गुरु
70. पीताम्बर : पीले वस्त्र धारण करने वाले
71. प्रमोद : आनंद 72. पुरुष : अद्भुत व्यक्तित्व
73. रक्त : लाल रंग के शरीर वाले
74. रुद्रप्रिय : भगवान शिव के चहेते
75. सर्वदेवात्मन : सभी स्वर्गीय प्रसाद के स्वीकर्ता
76) सर्वसिद्धांत : कौशल और बुद्धि के दाता
77. सर्वात्मन : ब्रह्मांड की रक्षा करने वाले
78. ओमकार : ओम के आकार वाले
79. शशिवर्णम : जिनका रंग चंद्रमा को भाता हो
80. शुभगुणकानन : जो सभी गुणों के गुरु हैं
81. श्वेता : जो सफेद रंग के रूप में शुद्ध हैं
82. सिद्धिप्रिय : इच्छापूर्ति वाले
83. स्कन्दपूर्वज : भगवान कार्तिकेय के भाई
84. सुमुख : शुभ मुख वाले
85. स्वरूप : सौंदर्य के प्रेमी
86. तरुण : जिनकी कोई आयु न हो
87. उद्दण्ड : शरारती
88. उमापुत्र : पार्वती के पुत्र
89. वरगणपति : अवसरों के स्वामी
90. वरप्रद : इच्छाओं और अवसरों के अनुदाता
91. वरदविनायक: सफलता के स्वामी
92. वीरगणपति : वीर प्रभु
93. विद्यावारिधि : बुद्धि के देव
94. विघ्नहर : बाधाओं को दूर करने वाले
95. विघ्नहत्र्ता: विघ्न हरने वाले
96. विघ्नविनाशन : बाधाओं का अंत करने वाले
97. विघ्नराज : सभी बाधाओं के मालिक
98. विघ्नराजेन्द्र : सभी बाधाओं के भगवान
99. विघ्नविनाशाय : बाधाओं का नाश करने वाले
100. विघ्नेश्वर : बाधाओं के हरने वाले भगवान
101. विकट : अत्यंत विशाल
102. विनायक : सब के भगवान
103. विश्वमुख : ब्रह्मांड के गुरु
104. विश्वराजा : संसार के स्वामी
105. यज्ञकाय : सभी बलि को स्वीकार करने वाले
106. यशस्कर : प्रसिद्धि और भाग्य के स्वामी
107. यशस्विन : सबसे प्यारे और लोकप्रिय देव
108. योगाधिप : ध्यान के प्रभु
=== प्रिय वस्तुएं ===
* [[सिन्दूर]] - सिंधु नामक दैत्य का वध श्री गणेश जी ने किया था उसके शरीर के रक्त को उन्होंने अपने शरीर पर लेप की तरह लगाया तभी से गणेश को सिन्दूर चढ़ाया जाता है।
* दूर्वा अथवा [[दूब घास|दूब]] - अनलासुर नामक दानव को निगलने के बाद श्री गणेश के पेट में बहुत जलन होने लगी। सभी उपचारों के बाद भी वे ठीक नहीं हुए जिसके बाद [[कश्यप]] मुनि ने उन्हें २१ गाठें बनाकर दूर्वा खाने को दी उसके बाद से ही गणेश जी ने दूर्वा को अपनी प्रिय वस्तु बना लिया।
* लाल धोती और हरा वस्त्र
* [[शमी]] पत्र
* [[लड्डू]]
* [[गुड़]] के [[मोदक]]
* [[केसर]] [[दूध]]
* [[केला]]
== गणेशजी की प्रार्थनाएं==
'''श्री गणेश आरती'''
{| class="wikitable"
|'''जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।'''
'''माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।'''
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
|-
|एकदंत, दयावंत, चार भुजाधारी।
मस्तक सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी।
पान चढ़ें, फूल चढ़ें और चढ़ें मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा।
|-
|'''जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।'''
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
|-
|अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।।
दीनन की लाज राखो, शम्भु-सुत वारी। कामना को पूरा करो, जग बलिहारी।।
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
|-
|'''जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।'''
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ।।
|}
===गणेश चालीसा===
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला ।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।
चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।
गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।
मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।
अति शुची पावन मंगलकारी ॥
एक समय गिरिराज कुमारी ।
पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥ 10 ॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।
तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।
बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।
पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।
पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।
लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।
नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा ।
देखन भी आये शनि राजा ॥ 20 ॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।
बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।
उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।
शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।
बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।
सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।
शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।
काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो ।
प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥ 30 ॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
चले षडानन, भरमि भुलाई ।
रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।
शेष सहसमुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।
करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।
अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥ 38 ॥
॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा,
पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान ॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो,मंगल मूर्ती गणेश ॥
== दीर्घा ==
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चित्र:मोदक नैवैद्यIMG 0376.JPG
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चित्र:The sculpture of lord Ganesh during ganes festival in India 2013-08-04 17-21.jpg
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== इन्हें भी देखें ==
* [[गणेश चतुर्थी]]
*[[गणेश पुराण]]
*[[ गणपत्य संप्रदाय ]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भगवान् श्रीगणेश}}
[[श्रेणी:गणेश]]
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चाँदी
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2026-04-17T11:17:25Z
AMAN KUMAR
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लेख विस्तार किया अतिरिक्त चित्र हटाए तथा संदर्भ जोड़े हिंदी अनुवाद कियान
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| title = चाँदी (Silver)
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| image = [[चित्र:SilverUSGOV.jpg|250px|चाँदी का प्राकृतिक टुकड़ा]]
| label1 = प्रतीक
| data1 = Ag
| label2 = परमाणु क्रमांक
| data2 = 47
| label3 = रासायनिक शृंखला
| data3 = [[संक्रमण धातु]]
| label4 = परमाणु द्रव्यमान
| data4 = 107.868
}}
'''चाँदी''' (Silver) एक अत्यंत चमकीली, श्वेत और बहुमूल्य [[धातु]] है। इसका [[परमाणु क्रमांक]] 47 तथा परमाणु द्रव्यमान 107.868 है। रसायन विज्ञान की आवर्त सारणी में इसे 'Ag'<ref>लैटिन शब्द 'Argentum' से</ref> प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है। यह एक तन्य और आघातवर्ध्य धातु है, अतः इसका उपयोग प्राचीन काल से ही आभूषण, सिक्के और बर्तन बनाने में होता आ रहा है।<ref>{{Cite news|url=https://www.britannica.com/science/silver|title=Silver {{!}} Facts, Properties, & Uses {{!}} Britannica|work=Encyclopedia Britannica|access-date=2026-04-17|language=en}}</ref>
इसका परमाण्विक इलेक्ट्रॉन विन्यास 1s<sup>2</sup> 2s<sup>2</sup> 2p<sup>6</sup> 3s<sup>2</sup> 3p<sup>6</sup> 3d<sup>10</sup> 4s<sup>2</sup> 4p<sup>6</sup> 4d<sup>10</sup> 5s<sup>1</sup> है। सभी धातुओं की तुलना में चाँदी सर्वाधिक [[चालक (भौतिकी)|विद्युतचालक]] और ऊष्माचालक है। अपनी इसी उत्कृष्ट चालकता के कारण इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सौर पैनलों में किया जाता है। चाँदी सामान्यतः ऑक्सीजन के प्रति अक्रिय होती है, लेकिन वायुमंडल में उपस्थित [[हाइड्रोजन सल्फाइड]] (H<sub>2</sub>S) के साथ अभिक्रिया करने पर इसके ऊपर सिल्वर सल्फाइड (Ag<sub>2</sub>S) की एक काली परत जम जाती है, जिसे मलिनता या जंग लगना कहते हैं।<ref>{{Cite book|title=Chemistry: Textbook for Class XII|publisher=NCERT|year=2022|chapter=The d- and f- Block Elements|language=en}}</ref>
== प्राप्ति और उपयोग ==
प्रकृति में चाँदी स्वतंत्र (देशी चाँदी) और संयुक्त, दोनों रूपों में पाई जाती है। इसके मुख्य अयस्कों में अर्जेंटाइट (Ag<sub>2</sub>S) और हॉर्न सिल्वर (AgCl) प्रमुख हैं। इसके महत्वपूर्ण उपयोग निम्नलिखित हैं:<ref>{{Cite web|url=https://www.usgs.gov/centers/national-minerals-information-center/silver-statistics-and-information|title=Silver Statistics and Information|website=USGS|language=en|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''आभूषण और मुद्रा:''' इसके मूल्य और चमक के कारण इसका उपयोग आभूषणों और सिक्कों के निर्माण में होता है।
* '''इलेक्ट्रॉनिक्स:''' उच्च विद्युत चालकता के कारण सर्किट बोर्ड और स्विच बनाने में।
* '''चिकित्सा:''' चाँदी के आयनों में उत्कृष्ट रोगाणुरोधी गुण होते हैं, इसलिए इसका उपयोग जल शोधन और घाव की पट्टियों में किया जाता है।
== सन्दर्भ ==
<references />
{{संक्षिप्त आवर्त सारणी}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:चाँदी]]
[[श्रेणी:संक्रमण धातु]]
[[श्रेणी:रासायनिक तत्व]]
[[श्रेणी:कीमती धातुएँ]]
2c2nxmi3sdq3kadnnwbarw6l7src7pa
शान्ति
0
18807
6541533
6536898
2026-04-17T09:16:41Z
DreamRimmer
651050
clean up ([[:en:User:DreamRimmer/DR Editor|DR]])
6541533
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Peace dove.svg|thumb|शान्तिवादी कपोत]]
'''शान्ति''' शत्रुता और हिंसा के अभाव में सामाजिक मैत्री और सद्भाव की अवधारणा है। एक सामाजिक अर्थ में, शान्ति का अर्थ साधारणतः संघर्ष (जैसे युद्ध) की कमी और व्यक्तियों या समूहों के बीच हिंसा के भय से मुक्ति के लिए किया जाता है। पूरे इतिहास में, नेताओं ने एक प्रकार का व्यवहार संयम स्थापित करने के लिए शान्ति निर्माण और कूटनीति का उपयोग किया है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार के समझौतों या शान्ति सन्धियों के माध्यम से क्षेत्रीय शान्ति या आर्थिक विकास की स्थापना हुई है। इस प्रकार के व्यवहारिक संयम के परिणामस्वरूप अक्सर कम संघर्ष, अधिक आर्थिक अन्तःक्रियाशीलता और परिणामस्वरूप पर्याप्त समृद्धि होती है।
मनोवैज्ञानिक शान्ति (जैसे शांतिपूर्ण सोच और भावनाएँ) शायद कम अच्छी तरह से परिभाषित है, फिर भी अक्सर "व्यवहारिक शान्ति" स्थापित करने के लिए एक आवश्यक अग्रदूत साबित होती है। शान्तिपूर्ण व्यवहार कभी-कभी "शान्तिपूर्ण आन्तरिक स्वभाव" का परिणाम होता है। कुछ लोगों ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि शान्ति की शुरुआत आन्तरिक शान्ति की एक निश्चित गुणवत्ता के साथ की जा सकती है जो दैनिक जीवन की अनिश्चितताओं पर निर्भर नहीं करती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.goodreads.com/quotes/11559-world-peace-must-develop-from-inner-peace-peace-is-not|title=A quote by Dalai Lama XIV|website=www.goodreads.com|access-date=2023-02-02}}</ref> अपने और दूसरों के लिए इस तरह के "शान्तिपूर्ण आन्तरिक स्वभाव" का अधिग्रहण अन्यथा प्रतीत होने वाले अपूरणीय प्रतिस्पर्धी हितों को हल करने में योगदान कर सकता है। शान्ति उत्तेजना की स्थिति नहीं है यद्यपि उत्साहित होने पर हम सुखी होते हैं, लेकिन शान्ति तब होती है जब हमारा मन शान्त और सन्तुष्ट होता है।
==सन्दर्भ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:शान्ति]]
{{आधार}}
jju15ia883s6h4g5ajklwoo9zdk1nin
भारत का संविधान
0
19296
6541358
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2026-04-16T17:02:02Z
आदेश यादव
640970
/* महत्वपूर्ण अनुच्छेद */
6541358
wikitext
text/x-wiki
{{Constitution of India| President Swearing-in (2017/2019}}
[[File:Indian constitution in Rashtrapati Bhavan Museum.jpg|thumb|[[राष्ट्रपति भवन संग्रहालय]] में रखी गई संविधान की प्रति।]]
'''भारत का संविधान''', [[भारत]] का सर्वोच्च [[विधि|विधान]] है जो [[संविधान सभा]] द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के [[संविधान दिवस (भारत)|संविधान दिवस]] के रूप में घोषित किया गया है। जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में [[गणतंत्र दिवस (भारत)|गणतन्त्र दिवस]] के रूप में मनाया जाता है।<ref>{{cite web|title=Preface, The constitution of India|url=http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/coi_preface.pdf|publisher=भारत सरकार|accessdate=5 फरवरी 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150331033925/http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/coi_preface.pdf|archive-date=31 मार्च 2015|url-status=live}}</ref><ref name="law_min_intro">{{cite web|url=http://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html|title=Introduction to Constitution of India|date=29 जुलाई 2008|publisher=भारत का विधि एवं न्याय मंत्रालय|archive-url=https://web.archive.org/web/20141022161409/http://indiacode.nic.in/coiweb/introd.htm|archive-date=22 अक्तूबर 2014|accessdate=2008-10-14|url-status=live}}</ref>
<ref name="Hari Das">{{cite book | last = दास | first = हरि | title = Political System of India | publisher=अनमोल प्रकाशन |page=120 | year = 2002 | isbn = 81-7488-690-7 }}</ref> <ref>{{cite news|title=The Constitution of India: Role of Dr. B.R. Ambedkar |url=http://www.freepressjournal.in/the-constitution-of-india-role-of-dr-b-r-ambedkar/ |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150402153753/http://www.freepressjournal.in/the-constitution-of-india-role-of-dr-b-r-ambedkar/ |archivedate=2 April 2015 }}</ref><ref name=":2">{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/kids/Celebrate-the-supreme-law/article14011992.ece|title=Celebrate the supreme law|last=कृतिका|first=आर.|date=21 जनवरी 2016|work=[[द हिन्दू]]|access-date=24 जुलाई 2018|issn=0971-751X|oclc=13119119|archive-url=https://web.archive.org/web/20161221074638/http://www.thehindu.com/features/kids/Celebrate-the-supreme-law/article14011992.ece|archive-date=21 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>
भारत के संविधान का मूल आधार भारत सरकार अधिनियम १९३५(1935) को माना जाता है।<ref>{{Cite news|title=Important Sources of the Indian Constitution|url=https://www.drishtiias.com/gs-special/gs-special-polity/important-sources-of-the-indian-constitution|access-date=5 जुलाई 2018 }}</ref> भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतान्त्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है।<ref name="longest">{{cite book | last = पाइली | first = एम.वी. | title = India's Constitution | publisher=एस. चंद एंड कंपनी|page=3 | year = 1997 | isbn = 81-219-0403-X }}</ref>
== संविधान सभा ==
''{{मुख्य|भारतीय संविधान सभा}}''
[[File:Dr. Babasaheb Ambedkar, chairman of the Drafting Committee, presenting the final draft of the Indian Constitution to Dr Rajendra Prasad on 25 November, 1949.jpg|thumb|right|300px|संविधान सभा के अध्यक्ष [[डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद]] को [[भारतीय संविधान]] सौंपते हुए [[बाबा साहेब अंबेडकर|डॉ॰ बी आर अम्बेडकर]], 26 नवम्बर 1949]]
[[File:Jawaharlal Nehru signing Indian Constitution.jpg|right|300px|thumbnail|[[जवाहरलाल नेहरू]] संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए]]
भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में निर्वाचन हुए थे। संविधान सभा की पहली बैठक दिसम्बर 1946 को हुई थी। इसके तत्काल बाद देश दो भागों - [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] में बँट गया था। संविधान सभा भी दो हिस्सो में बँट गई - भारत की संविधान सभा और पाकिस्तान की संविधान सभा।
भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] थे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 में अपना काम पूरा कर लिया और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। इसी दिन कि याद में भारत में हर वर्ष 26 जनवरी को [[गणतंत्र दिवस]] के रूप में मनाते हैं। भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में '''''2 वर्ष, 11 माह, 18''''' '''''दिन''''' का समय लगा था।
== संक्षिप्त परिचय ==
भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 470 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान में [[भारत सरकार|सरकार]] के संसदीय स्वरूप की व्यवस्था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त [[संघवाद|संघीय]] है। केन्द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख [[भारतीय राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]] है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्द्रीय [[संसद]] की परिषद् में राष्ट्रपति तथा दो सदन है जिन्हें राज्यों की पर [[प्रधानमन्त्री]] होगा, राष्ट्रपति इस मन्त्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेगा। इस प्रकार वास्तविक कार्यकारी शक्ति मन्त्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] है जो वर्तमान में [[नरेन्द्र मोदी]] हैं।<ref>{{Cite web |url=http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110511104514/http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |archive-date=11 मई 2011 |url-status=live }}</ref> मन्त्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येक राज्य में एक [[विधानसभा]] है। [[उत्तर प्रदेश]], [[बिहार]], [[महाराष्ट्र]], [[कर्नाटक]],[[आन्ध्रप्रदेश]] और [[तेलंगाना]] में एक ऊपरी सदन है जिसे [[विधानपरिषद]] कहा जाता है। [[राज्यपाल]] राज्य का प्रमुख है। प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा तथा राज्य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मन्त्रिपरिषद, जिसका प्रमुख [[मुख्यमन्त्री]] है, [[राज्यपाल]] को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज्य की मन्त्रिपरिषद से राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। तथा इसी अनुसूची में सरकारों द्वारा शुल्क एवं कर लगाने के अधिकारों का उल्लेख है। इसके अंतर्गत तीन सूचियां हैं। संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्य क्षेत्र कहा जाता है।
=== भारतीय संविधान के भाग ===
भारतीय संविधान 22 भागों में विभजित है तथा इसमे 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियाँ हैं।
{|class='wikitable'
|-
! भाग !! विषय !! अनुच्छेद
|-
| भाग 1 || [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|संघ और उसके क्षेत्र]] || (अनुच्छेद 1-4)
|-
| भाग 2 || [[भारतीय राष्ट्रिकता विधि|नागरिकता]] || (अनुच्छेद 5-11)
|-
| भाग 3 || [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#मूल अधिकार|मूलभूत अधिकार]] || (अनुच्छेद 12 - 35)
|-
| भाग 4|| [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत|राज्य के नीति निदेशक तत्त्व]] || (अनुच्छेद 36 - 51)
|-
| भाग 4A || [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#मौलिक कर्तव्य|मूल कर्तव्य]] || (अनुच्छेद 51A)
|-
| भाग 5 || संघ || (अनुच्छेद 52-151)
|-
| भाग 6 || राज्य || (अनुच्छेद 152 -237)
|-
| भाग 7 || संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित||(अनु़चछेद 238)
|-
| भाग 8 || संघ राज्य क्षेत्र || (अनुच्छेद 239-242)
|-
| भाग 9 || पंचायत || (अनुच्छेद 243- 243O)
|-
| भाग 9A || नगरपालिकाएँ || (अनुच्छेद 243P - 243ZG)
|-
| भाग 10 || अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र || (अनुच्छेद 244 - 244A)
|-
| भाग 11 || संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध || (अनुच्छेद 245 - 263)
|-
| भाग 12 || वित्त, [[सम्पत्ति]], संविदाएँ और वाद || (अनुच्छेद 264 -300A)
|-
| भाग 13 || भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम || (अनुच्छेद 301 - 307)
|-
| भाग 14 || संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ || (अनुच्छेद 308 -323)
|-
| भाग 14A || अधिकरण || (अनुच्छेद 323A - 323B)
|-
| भाग 15 || निर्वाचन || (अनुच्छेद 324 -329A)
|-
| भाग 16 || कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबन्ध सम्बन्ध || (अनुच्छेद 330- 342)
|-
| भाग 17 || राजभाषा || (अनुच्छेद 343- 351)
|-
| भाग 18 || आपात उपबन्ध || (अनुच्छेद 352 - 360)
|-
| भाग 19 || प्रकीर्ण || (अनुच्छेद 361 -367)
|-
| भाग 20 || संविधान के संशोधन || अनुच्छेद - 368
|-
| भाग 21 || अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध || (अनुच्छेद 369 - 392)
|-
| भाग 22 || संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन || (अनुच्छेद 393 - 395)
|}
== इतिहास ==
'''{{मुख्य|भारतीय संविधान का इतिहास}}'''
[[द्वितीय विश्वयुद्ध]] की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में [[ब्रिटेन]] ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक [[कैबिनेट मिशन]] भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। १५ अगस्त १९४७ को भारत के स्वतन्त्र हो जाने के पश्चात [[संविधान सभा]] की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य ९ दिसम्बर १९४७ से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। [[जवाहरलाल नेहरू]], डॉ [[भीमराव अम्बेडकर]], डॉ [[राजेन्द्र प्रसाद]], सरदार [[वल्लभ भाई पटेल]], मौलाना [[अबुल कलाम आजाद]] आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। इस संविधान सभा ने २ वर्ष, ११ माह, १८ दिन में कुल ११४ दिन चर्चा की। संविधान सभा में कुल १२ अधिवेशन किए तथा अंतिम दिन २८४ सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किया और संविधान बनने में १६६ दिन बैठक की गई इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। भारत के संविधान के निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,26 नवम्बर 1949 को सविधान सभा ने पारित किया और इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।इस सविधान में सर्वाधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है। इस में लगभग 250 अनुच्छेद इस अधिनियम से लिये गए हैं।
==भारतीय संविधान की संरचना==
यह वर्तमान समय में भारतीय संविधान के निम्नलिखित भाग हैं-<ref>{{Cite web |url=http://india.gov.in/hi/my-government/constitution-india/constitution-india-full-text |title=भारत का संविधान (पूर्ण पाठ) |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151225090409/http://india.gov.in/hi/my-government/constitution-india/constitution-india-full-text |archive-date=25 दिसंबर 2015 |url-status=dead }}</ref>
* ''एक [[भारतीय संविधान की उद्देशिका|उद्देशिका]],
* ''470 अनुच्छेदों से युक्त 25 भाग''
* ''12 अनुसूचियाँ,
* ''5 अनुलग्नक (appendices)
* ''105 [[भारतीय संविधान के संशोधन अधिनियम|संशोधन]]।
(अब तक 127 संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाये गये हैं जिनमें से 105 संविधान संशोधन विधेयक पारित होकर संविधान संशोधन अधिनियम का रूप ले चुके हैं। 124वां संविधान संशोधन विधेयक 9 जनवरी 2019 को संसद में #अनुच्छेद_368 【संवैधानिक संशोधन】के विशेष बहुमत से पास हुआ, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शैक्षणिक संस्थाओं म
8 अगस्त 2016 को संसद ने वस्तु और सेवा कर (GST) पारित कर 101वाँ संविधान संशोधन किया।)
=== अनुसूचियाँ ===
भारत के मूल संविधान में मूलतः आठ अनुसूचियाँ थीं परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान में '''बारह अनुसूचियाँ''' हैं। संविधान में नौवीं अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन 1951, 10वीं अनुसूची 52वें संविधान संशोधन 1985, 11वीं अनुसूची 73वें संविधान संशोधन 1992 एवं बाहरवीं अनुसूची 74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा सम्मिलित किया गया।
'''पहली अनुसूची''' - (अनुच्छेद 1 तथा 4) - राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र का वर्णन।
'''दूसरी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 59(3), 65(3), 75(6),97, 125,148(3), 158(3),164(5),186 तथा 221] - मुख्य पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते <ref>{{वेब सन्दर्भ|title=दूसरी अनुसूची|url=https://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/constitution/SECOND-SCHEDULE.pdf|accessdate=10 फरवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160118183134/http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/constitution/SECOND-SCHEDULE.pdf|archive-date=18 जनवरी 2016|url-status=dead}}</ref>
:* भाग-क : राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन-भत्ते,
:* भाग-ख : लोकसभा तथा विधानसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, राज्यसभा तथा विधान परिषद् के सभापति तथा उपसभापति के वेतन-भत्ते,
:* भाग-ग : उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते,
:* भाग-घ : भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के वेतन-भत्ते।
'''तीसरी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 75(4),99, 124(6),148(2), 164(3),188 और 219] - विधायिका के सदस्य, मंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीशों आदि के लिए शपथ लिए जानेवाले प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए हैं।
'''चौथी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 4(1),80(2)] - राज्यसभा में स्थानों का आबंटन राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों से।
'''पाँचवी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 244(1)] - अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जन-जातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित उपबंध।
'''छठी अनुसूची'''- [अनुच्छेद 244(2), 275(1)] - [[असम]], [[मेघालय]], [[त्रिपुरा]] और [[मिजोरम]] राज्यों के [[जनजाति]] क्षेत्रों के प्रशासन के विषय में उपबंध।
'''[[सातवीं अनुसूची (भारत का संविधान)|सातवीं अनुसूची]]''' - [अनुच्छेद 246] - विषयों के वितरण से संबंधित सूची-1 संघ सूची, सूची-2 राज्य सूची, सूची-3 समवर्ती सूची।
'''[[आठवीं अनुसूची (भारत का संविधान)|आठवीं अनुसूची]]''' - [अनुच्छेद 344(1), 351] - भाषाएँ - 22 भाषाओं का उल्लेख।
'''नवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 31 ख ] - कुछ भूमि सुधार संबंधी अधिनियमों का विधिमान्य करण।पहला संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई ।
'''दसवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 102(2), 191(2)] - दल परिवर्तन संबंधी उपबंध तथा परिवर्तन के आधार पर 52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई ।
'''ग्यारहवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 243 छ ] - पंचायती राज/ जिला पंचायत से सम्बन्धित यह अनुसूची संविधान में 73वें संवैधानिक संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई।
'''बारहवीं अनुसूची''' - इसमे नगरपालिका का वर्णन किया गया हैं ; यह अनुसूची संविधान में 74वें संवैधानिक संशोधन (1993) द्वारा जोड़ी गई।
== आधारभूत विशेषताएँ ==
संविधान प्रारूप समिति तथा [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने भारतीय संविधान को [[संघवाद|संघात्मक संविधान]] माना है, परन्तु विद्वानों में मतभेद है। अमेरीकी विद्वान इस को '[[छद्म-संघात्मक-संविधान]]' कहते हैं, हालांकि पूर्वी संविधानवेत्ता कहते हैं कि अमेरिकी संविधान ही एकमात्र संघात्मक संविधान नहीं हो सकता। संविधान का संघात्मक होना उसमें निहित संघात्मक लक्षणों पर निर्भर करता है, किन्तु माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पूर्ण संघात्मक माना है।
भारतीय संविधान के प्रस्तावना के अनुसार भारत एक '''सम्प्रुभतासम्पन्न''', '''समाजवादी''', '''पंथनिरपेक्ष''', '''लोकतांत्रिक''', '''गणराज्य''' है।
=== सम्प्रभुता ===
'''सम्प्रभुता''' शब्द का अर्थ है सर्वोच्च या स्वतन्त्र होना। [[भारत]] किसी भी विदेशी और आन्तरिक शक्ति के नियन्त्रण से पूर्णतः मुक्त '''सम्प्रभुतासम्पन्न''' राष्ट्र है। यह सीधे लोगों द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है।
=== समाजवादी ===
{{main|समाजवाद}}
'''समाजवादी''' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है। [[जाति]], [[रंग]], [[नस्ल]], [[लिंग]], [[धर्म]] या [[भाषा]] के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है। सरकार केवल कुछ लोगों के हाथों में धन जमा होने से रोकेगी तथा सभी नागरिकों को एक अच्छा जीवन स्तर प्रदान करने का प्रयत्न करेगी।
[[भारत]] ने एक मिश्रित फल का भाग है आर्थिक मॉडल को अपनाया है। सरकार ने समाजवाद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई कानूनों जैसे अस्पृश्यता उन्मूलन, जमींदारी अधिनियम, समान वेतन अधिनियम और बाल श्रम निषेध अधिनियम आदि बनाया है।
=== पन्थनिरपेक्ष ===
{{main|पन्थनिरपेक्षता}}
'''पन्थनिरपेक्ष''' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह सभी पन्थों की समानता और पान्थिक सहिष्णुता सुनिश्चित करता है। [[भारत]] का कोई आधिकारिक पन्थ नहीं है। यह ना तो किसी पन्थ को बढ़ावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है। यह सभी पन्थों का सम्मान करता है व एक समान व्यवहार करता है। हर व्यक्ति को अपने पसन्द के किसी भी पन्थ का उपासना, पालन और प्रचार का अधिकार है। सभी नागरिकों, चाहे उनकी पान्थिक मान्यता कुछ भी हो कानून की दृष्टि में बराबर होते हैं। सरकारी या सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों में कोई पान्थिक अनुदेश लागू नहीं होता।
=== लोकतान्त्रिक ===
{{main|लोकतन्त्र}}
[[भारत]] एक स्वतन्त्र देश है, किसी भी स्थान से मत देने की स्वतन्त्रता, संसद में अनुसूचित सामाजिक समूहों और अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट सीटें आरक्षित की गई है। स्थानीय निकाय चुनाव में महिला उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती है। सभी चुनावों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का एक विधेयक लम्बित है। हालांकि इसकी क्रियान्वयन कैसे होगा, यह निश्चित नहीं हैं। [[भारतीय चुनाव आयोग|भारत का निर्वाचन आयोग]] एक स्वतन्त्र संस्था है और यह स्वतन्त्र और निष्पक्ष निर्वाचन करने के लिए सदैव तत्पर है।
राजशाही, जिसमें राज्य के प्रमुख वंशानुगत आधार पर जीवनभर या पदत्याग करने तक के लिए नियुक्त किया जाता है, के विपरीत एक गणतान्त्रिक राष्ट्र का प्रमुख एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है। [[भारत]] के [[राष्ट्रपति]] पाँच वर्ष की अवधि के लिए एक चुनावी कॉलेज द्वारा चुने जाते हैं।
=== शक्ति विभाजन ===
यह भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों में विभाजित होती हैं। दोनों सत्ताएँ एक-दूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं।
शक्ति विभाजन का राजनैतिक अर्थ है कि विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका अपनी -२ शक्तियों समेत एक दूसरे से पृथक (अलग) और अनधीन होंगी।<ref>"[https://www.britannica.com/topic/separation-of-powers separation of powers]" ''Britannica''. Separation of powers, division of the legislative, executive, and judicial functions of government among separate and independent bodies.</ref>
=== संविधान की सर्वोच्चता ===
संविधान के उपबंध संघ तथा राज्य सरकारों पर समान रूप से बाध्यकारी होते हैं। केन्द्र तथा राज्य शक्ति विभाजित करने वाले अनुच्छेद निम्न दिए गए हैं:
# अनुच्छेद 54,55,73,162,241।
# भाग -5 [[सर्वोच्च न्यायालय]], [[उच्च न्यायालय]] राज्य तथा केन्द्र के मध्य वैधानिक संबंध।
# अनुच्छेद 7 के अंतर्गत कोई भी सूची।
# राज्यो का संसद में प्रतिनिधित्व।
# संविधान में संशोधन की शक्ति अनु 368इन सभी अनुच्छेदो में संसद अकेले संशोधन नहीं ला सकती है उसे राज्यों की सहमति भी चाहिए।
अन्य अनुच्छेद शक्ति विभाजन से सम्बन्धित नहीं हैं:
# लिखित संविधान अनिवार्य रूप से लिखित रूप में होगा क्योंकि उसमें शक्ति विभाजन का स्पष्ट वर्णन आवश्यक है। अतः संघ में लिखित संविधान अवश्य होगा।
# '''संविधान की कठोरता''' इसका अर्थ है संविधान संशोधन में राज्य केन्द्र दोनो भाग लेंगे।
# '''न्यायालयों की अधिकारिता'''- इसका अर्थ है कि केन्द्र-राज्य कानून की व्याख्या हेतु एक निष्पक्ष तथा स्वतंत्र सत्ता पर निर्भर करेंगे।
विधि द्वारा स्थापित:
# न्यायालय ही संघ-राज्य शक्तियो के विभाजन का पर्यवेक्षण करेंगे।
# न्यायालय संविधान के अंतिम व्याख्याकर्ता होंगे भारत में यह सत्ता सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
ये पांच शर्ते किसी संविधान को संघात्मक बनाने हेतु अनिवार्य हैं। भारत में ये पांचों लक्षण संविधान में मौजूद हैं अतः यह संघात्मक है। परंतु भारतीय संविधान में कुछ विभेदकारी विशेषताएँ भी हैं:
=== भारतीय संविधान में कुछ विभेदकारी विशेषताएँ भी हैं ===
*1. यह संघ राज्यों के परस्पर समझौते से नहीं बना है
*2. राज्य अपना पृथक संविधान नहीं रख सकते है, केवल एक ही संविधान केन्द्र तथा राज्य दोनो पर लागू होता है
*3. भारत में द्वैध नागरिकता नहीं है। केवल भारतीय नागरिकता है
*4. भारतीय संविधान में आपातकाल लागू करने के उपबन्ध है [352 अनुच्छेद] के लागू होने पर राज्य-केन्द्र शक्ति पृथक्करण समाप्त हो जायेगा तथा वह एकात्मक संविधान बन जायेगा। इस स्थिति में केन्द्र-राज्यों पर पूर्ण सम्प्रभु हो जाता है
*5. राज्यों का नाम, क्षेत्र तथा सीमा केन्द्र कभी भी परिवर्तित कर सकता है [बिना राज्यों की सहमति से] [अनुच्छेद 3] अत: राज्य भारतीय संघ के अनिवार्य घटक नहीं हैं। केन्द्र संघ को पुर्ननिर्मित कर सकती है
*6. संविधान की 7वीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं [संघीय सरकार|संघीय], [राज्य सूची|राज्य], तथा [समवर्ती सूची|समवर्ती]। इनके विषयों का वितरण केन्द्र के पक्ष में है।
:*6.1 संघीय सूची में सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय हैं
:*6.2 इस सूची पर केवल संसद का अधिकार है
:*6.3 राज्य सूची के विषय कम महत्वपूर्ण हैं, 5 विशेष परिस्थितियों में राज्य सूची पर संसद विधि निर्माण कर सकती है किंतु किसी एक भी परिस्थिति में राज्य, केन्द्र हेतु विधि निर्माण नहीं कर सकते-
::*क1. अनु 249—राज्य सभा यह प्रस्ताव पारित कर दे कि राष्ट्र हित हेतु यह आवश्यक है [2/3 बहुमत से] किंतु यह बन्धन मात्र 1 वर्ष हेतु लागू होता है
::*क2. अनु 250— राष्ट्र आपातकाल लागू होने पर संसद को राज्य सूची के विषयों पर विधि निर्माण का अधिकार स्वत: मिल जाता है
::*क3. अनु 252—दो या अधिक राज्यों की विधायिका प्रस्ताव पास कर राज्य सभा को यह अधिकार दे सकती है [केवल संबंधित राज्यों पर]
::*क4. अनु 253--- अंतराष्ट्रीय समझौते के अनुपालन के लिए संसद राज्य सूची विषय पर विधि निर्माण कर सकती है
::*क5. अनु 356—जब किसी राज्य में [राष्ट्रपति शासन] लागू होता है, उस स्थिति में संसद उस राज्य हेतु विधि निर्माण कर सकती है
*7. अनुच्छेद 155 – राज्यपालों की नियुक्ति पूर्णत: केन्द्र की इच्छा से होती है इस प्रकार केन्द्र राज्यों पर नियंत्रण रख सकता है
*8. अनु 360 – वित्तीय आपातकाल की दशा में राज्यों के वित्त पर भी केन्द्र का नियंत्रण हो जाता है। इस दशा में केन्द्र राज्यों को धन व्यय करने हेतु निर्देश दे सकता है
*9. प्रशासनिक निर्देश [अनु 256-257] -केन्द्र राज्यों को राज्यों की संचार व्यवस्था किस प्रकार लागू की जाये, के बारे में निर्देश दे सकता है, ये निर्देश किसी भी समय दिये जा सकते है, राज्य इनका पालन करने हेतु बाध्य है। यदि राज्य इन निर्देशों का पालन न करे तो राज्य में संवैधानिक तंत्र असफल होने का अनुमान लगाया जा सकता है
*10. अनु 312 में अखिल भारतीय सेवाओं का प्रावधान है ये सेवक नियुक्ति, प्रशिक्षण, अनुशासनात्मक क्षेत्रों में पूर्णतः: केन्द्र के अधीन है जबकि ये सेवा राज्यों में देते है राज्य सरकारों का इन पर कोई नियंत्रण नहीं है
*11. एकीकृत न्यायपालिका
*12. राज्यों की कार्यपालिक शक्तियाँ संघीय कार्यपालिक शक्तियों पर प्रभावी नहीं हो सकती है।
== संविधान की प्रस्तावना ==
[[File:Constitution of India.jpg|thumb|right|250px|४२वें संशोधन से पूर्व भारत के संविधान की प्रस्तावना]]
{{main|भारतीय संविधान की उद्देशिका}}
संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के नाम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह ''''हम भारत के लोग'''' - इस वाक्य से प्रारम्भ होती है। केहर सिंह बनाम भारत संघ के वाद में कहा गया था कि संविधान सभा भारतीय जनता का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करती अत: संविधान विधि की विशेष अनुकृपा प्राप्त नहीं कर सकता, परंतु न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए संविधान को सर्वोपरि माना है जिस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।
'''संविधान की प्रस्तावना: '''
: ''हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी , पंथनिरपेक्ष,लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को'' :
: ''सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा ''
: ''उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए ''
: ''दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा ''
: ''इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।''
संविधान की प्रस्तावना 13 दिसम्बर 1946 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा सविधान सभा में प्रस्तुत की गयी प्रस्तावना को आमुख भी कहते हैं।
* के एम मुंशी ने प्रस्तावना को 'राजनीतिक कुण्डली' नाम दिया है
* 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद, पंथनिरपेक्ष व अखण्डता शब्द जोड़े गए।
== संविधान भाग 3 व 4 : मूलभूत अधिकार व नीति निर्देशक तत्त्व ==
{{main|नीति निर्देशक तत्त्व }}
भाग 3 तथा 4 मिलकर 'संविधान की आत्मा तथा चेतना' कहलाते है क्योंकि किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के लिए मौलिक अधिकार तथा नीति-निर्देश देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीति निर्देशक तत्त्व जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्त्व हैं। सर्वप्रथम ये [[आयरलैंड]] के संविधान में लागू किये गये थे। ये वे तत्त्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए हैं। इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। भारतीय संविधान के इस भाग में नीति निर्देशक तत्वों का रूपाकार निश्चित किया गया है, मौलिक अधिकार तथा नीति निर्देशक तत्त्व में भेद बताया गया है और नीति निदेशक तत्वों के महत्त्व को समझाया गया है।
== भाग 4 क : मूल कर्तव्य ==
मूल कर्तव्य, मूल सविधान में नहीं थे, 42 वें संविधान संशोधन में मूल कर्तव्य (10) जोड़े गये है। ये [[रूस]] से प्रेरित होकर जोड़े गये तथा संविधान के भाग 4(क) के अनुच्छेद 51 - अ में रखे गये हैं। वर्तमान में ये 11 हैं।11 वाँ मूल कर्तव्य 86 वें संविधान संशोधन में जोड़ा गया।
'''51 क. मूल कर्तव्य'''- भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह-
*(क) संविधान का पालन करे और उस के आदर्शों, संस्थाओं, [[भारत का ध्वज|राष्ट्रध्वज]] राष्ट्रगीत और [[राष्ट्रगान]] का आदर करे ;
*(ख) स्वतन्त्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उन का पालन करे;
*(ग) भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे;
*(घ) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे;
*(ङ) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है;
*(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझे और उस का परिरक्षण करे;
*(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की, जिस के अन्तर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उस का संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखे;
*(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे;
*(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे;
*(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिस से राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले;
*(ट) यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करे।
==संशोधन==
{{main|भारतीय संविधान के संशोधन}}
भारतीय संविधान का संशोधन भारत के संविधान में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है। एक संशोधन के प्रस्ताव की शुरुआत संसद में होती है जहाँ इसे एक बिल के रूप में पेश किया जाता है। भारतीय संविधान में अब तक 105 बार संशोधन किया जा चुका है जबकि संविधान संशोधन के लिए अब तक 127 बिल लाए जा चुके हैं।
==इन्हें भी देखें==
#[[संविधान दिवस (भारत)]]
#[[भारतीय संविधान का इतिहास]]
#[[भारतीय संविधान सभा]]
#[[संघवाद]] (फेड्रलिज़्म)
#[[संविधानवाद]]
#[[भारतीय दण्ड संहिता]]
#[[गणतंत्र दिवस]]
==महत्वपूर्ण अनुच्छेद==
*अनुच्छेद 1 :- भारत राज्यों का संघ होगा।
*अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
*अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन।
*अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूची व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
*अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारम्भ पर नागरिकता
*अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
*अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता।
*अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
*अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का न
*अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
*अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
*अनुच्छेद 12 :- राज्य की परिभाषा
*अनुच्छेद 13 :- मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियाँ
*अनुच्छेद 14 :- विधि के समक्ष समानता
*अनुच्छेद 15 :- धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक।
*अनुच्छेद 16 :- लोक नियोजन में अवसर की समानता
*अनुच्छेद 17 :- अस्पृश्यता का अन्त
*अनुच्छेद 18 :- उपाधियों का अन्त
*अनुच्छेद 19 :- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
*अनुच्छेद 19 क :- सूचना का अधिकार
*अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
*अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतन्त्रता का संरक्षण
*अनुच्छेद 21 क :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार, निजता का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ही आता है।
*अनुच्छेद 22 :– कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से संरक्षण
*अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार, बेगारी एवं बलात श्रम पर प्रतिबंध
*अनुच्छेद 24 :- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खान या किसी खतरनाक उद्योग में कार्य नही कराया जा सकता है।
*अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
*अनुच्छेद 26 :-धार्मिक कार्यों के प्रबन्ध की स्वतन्त्रता
*अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
*अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
*अनुच्छेद 32 :-संवैधानिक उपचारों का अधिकार (संविधान की आत्मा)
*अनुच्छेद 39 क :- सभी के लिए समान न्याय एवं निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
*अनुच्छेद 40 :- ग्राम पंचायतों का संगठन
*अनुच्छेद 44 :- समान नागरिक संहिता
*अनुच्छेद 48 :- कृषि और पशुपालन संगठन
*अनुच्छेद 48 क :- पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
*अनुच्छेद 49 :- राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण
*अनुच्छेद 50 :- कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
*अनुच्छेद 51 :- अन्तरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
*अनुच्छेद 51 क :- मूल कर्तव्य
*अनुच्छेद 52 :- भारत का राष्ट्रपति
*अनुच्छेद 53 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति
*अनुच्छेद 54 :- राष्ट्रपति का निर्वाचन
*अनुच्छेद 55 :- राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रणाली
*अनुच्छेद 56 :- राष्ट्रपति की पदावधि
*अनुच्छेद 57 :- पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
*अनुच्छेद 58 :- राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए आहर्ताए
*अनुच्छेद 60 :- राष्ट्रपति की शपथ
*अनुच्छेद 61 :- राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
*अनुच्छेद 63 :- भारत का उप-राष्ट्रपति
*अनुच्छेद 64 :- उप-राष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
*अनुच्छेद 65 :- राष्ट्रपति के पद की रिक्त पर उप-राष्ट्रपति के कार्य
*अनुच्छेद 66 :- उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
*अनुच्छेद 67 :- उप-राष्ट्रपति की पदावधि
*अनुच्छेद 68 :- उप-राष्ट्रपति के पद की रिक्त पद भरने के लिए निर्वाचन
*अनुच्छेद 69 :- उप-राष्ट्रपति द्वारा शपथ
*अनुच्छेद 70 :- अन्य आकस्मिकता में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन
*अनुच्छेद 71. :- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन सम्बन्धित विषय
*अनुच्छेद 72 :-क्षमादान की शक्ति
*अनुच्छेद 73 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
*अनुच्छेद 74 :- राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मन्त्रिपरिषद
*अनुच्छेद 75 :- मन्त्रियों के बारे में उपबन्ध
*अनुच्छेद 76 :- भारत का महान्यायवादी
*अनुच्छेद 77 :- भारत सरकार के कार्य का संचालन
*अनुच्छेद 78 :- राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमन्त्री के कर्तव्य
*अनुच्छेद 79 :- संसद् का गठन
*अनुच्छेद 80 :- राज्य सभा की सरंचना
*अनुच्छेद 81 :- लोकसभा की संरचना
*अनुच्छेद 83 :- संसद् के सदनो की अवधि
*अनुच्छेद 84 :-संसद् के सदस्यों के लिए अहर्ता
*अनुच्छेद 85 :- संसद् का सत्र सत्रावसान और विघटन
*अनुच्छेद 87 :- राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
*अनुच्छेद 88 :- मंत्रियों की शक्तियां
*अनुच्छेद 89 :- राज्य सभा का सभापति और उपसभापति
*अनुच्छेद 90 :- उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना
*अनुच्छेद 91 :- सभापति के पद के कतर्व्ययों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यिक्त की शक्ति
*अनुच्छेद 92 :- जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना
*अनुच्छेद 93 :- लोक सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
*अनुच्छेद 94 :- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पद त्याग और पद से हटाया जाना
*अनुच्छेद 95 :- अध्यक्ष के पद के कतर्व्ययों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप म कायर् करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यिक्त की शक्ति
*अनुच्छेद 96 :- जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना
*अनुच्छेद 97 :- सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
*अनुच्छेद 98 :- संसद् का सचिवालय
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html?m=1 भारतीय संविधान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210628115603/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html?m=1 |date=28 जून 2021 }} (हिन्दी में )
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html Article 1 to 395 in Hindi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210624195540/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html |date=24 जून 2021 }}
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html संविधान के संशोधन 2021 तक] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210624195540/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html |date=24 जून 2021 }}
{{भारत सरकार}}
{{भारतीय विधि}}
[[श्रेणी:विधि]]
[[श्रेणी:संविधान]]
[[श्रेणी:भारत]]
[[श्रेणी:भारत के ऐतिहासिक दस्तावेज़]]
[[श्रेणी:भारत का विधिक इतिहास]]
[[श्रेणी:भारत का संविधान]]
[[श्रेणी:भीमराव आंबेडकर]]
n6808v1fre6lqaoc5g0fqa55wxe45ap
6541360
6541358
2026-04-16T17:04:34Z
आदेश यादव
640970
/* महत्वपूर्ण अनुच्छेद */
6541360
wikitext
text/x-wiki
{{Constitution of India| President Swearing-in (2017/2019}}
[[File:Indian constitution in Rashtrapati Bhavan Museum.jpg|thumb|[[राष्ट्रपति भवन संग्रहालय]] में रखी गई संविधान की प्रति।]]
'''भारत का संविधान''', [[भारत]] का सर्वोच्च [[विधि|विधान]] है जो [[संविधान सभा]] द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के [[संविधान दिवस (भारत)|संविधान दिवस]] के रूप में घोषित किया गया है। जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में [[गणतंत्र दिवस (भारत)|गणतन्त्र दिवस]] के रूप में मनाया जाता है।<ref>{{cite web|title=Preface, The constitution of India|url=http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/coi_preface.pdf|publisher=भारत सरकार|accessdate=5 फरवरी 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150331033925/http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/coi_preface.pdf|archive-date=31 मार्च 2015|url-status=live}}</ref><ref name="law_min_intro">{{cite web|url=http://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html|title=Introduction to Constitution of India|date=29 जुलाई 2008|publisher=भारत का विधि एवं न्याय मंत्रालय|archive-url=https://web.archive.org/web/20141022161409/http://indiacode.nic.in/coiweb/introd.htm|archive-date=22 अक्तूबर 2014|accessdate=2008-10-14|url-status=live}}</ref>
<ref name="Hari Das">{{cite book | last = दास | first = हरि | title = Political System of India | publisher=अनमोल प्रकाशन |page=120 | year = 2002 | isbn = 81-7488-690-7 }}</ref> <ref>{{cite news|title=The Constitution of India: Role of Dr. B.R. Ambedkar |url=http://www.freepressjournal.in/the-constitution-of-india-role-of-dr-b-r-ambedkar/ |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150402153753/http://www.freepressjournal.in/the-constitution-of-india-role-of-dr-b-r-ambedkar/ |archivedate=2 April 2015 }}</ref><ref name=":2">{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/kids/Celebrate-the-supreme-law/article14011992.ece|title=Celebrate the supreme law|last=कृतिका|first=आर.|date=21 जनवरी 2016|work=[[द हिन्दू]]|access-date=24 जुलाई 2018|issn=0971-751X|oclc=13119119|archive-url=https://web.archive.org/web/20161221074638/http://www.thehindu.com/features/kids/Celebrate-the-supreme-law/article14011992.ece|archive-date=21 दिसंबर 2016|url-status=live}}</ref>
भारत के संविधान का मूल आधार भारत सरकार अधिनियम १९३५(1935) को माना जाता है।<ref>{{Cite news|title=Important Sources of the Indian Constitution|url=https://www.drishtiias.com/gs-special/gs-special-polity/important-sources-of-the-indian-constitution|access-date=5 जुलाई 2018 }}</ref> भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतान्त्रिक देश का सबसे लम्बा लिखित संविधान है।<ref name="longest">{{cite book | last = पाइली | first = एम.वी. | title = India's Constitution | publisher=एस. चंद एंड कंपनी|page=3 | year = 1997 | isbn = 81-219-0403-X }}</ref>
== संविधान सभा ==
''{{मुख्य|भारतीय संविधान सभा}}''
[[File:Dr. Babasaheb Ambedkar, chairman of the Drafting Committee, presenting the final draft of the Indian Constitution to Dr Rajendra Prasad on 25 November, 1949.jpg|thumb|right|300px|संविधान सभा के अध्यक्ष [[डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद]] को [[भारतीय संविधान]] सौंपते हुए [[बाबा साहेब अंबेडकर|डॉ॰ बी आर अम्बेडकर]], 26 नवम्बर 1949]]
[[File:Jawaharlal Nehru signing Indian Constitution.jpg|right|300px|thumbnail|[[जवाहरलाल नेहरू]] संविधान पर हस्ताक्षर करते हुए]]
भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में निर्वाचन हुए थे। संविधान सभा की पहली बैठक दिसम्बर 1946 को हुई थी। इसके तत्काल बाद देश दो भागों - [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] में बँट गया था। संविधान सभा भी दो हिस्सो में बँट गई - भारत की संविधान सभा और पाकिस्तान की संविधान सभा।
भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष [[राजेन्द्र प्रसाद|डॉ. राजेन्द्र प्रसाद]] थे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 में अपना काम पूरा कर लिया और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। इसी दिन कि याद में भारत में हर वर्ष 26 जनवरी को [[गणतंत्र दिवस]] के रूप में मनाते हैं। भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में '''''2 वर्ष, 11 माह, 18''''' '''''दिन''''' का समय लगा था।
== संक्षिप्त परिचय ==
भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 470 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान में [[भारत सरकार|सरकार]] के संसदीय स्वरूप की व्यवस्था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त [[संघवाद|संघीय]] है। केन्द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख [[भारतीय राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]] है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्द्रीय [[संसद]] की परिषद् में राष्ट्रपति तथा दो सदन है जिन्हें राज्यों की पर [[प्रधानमन्त्री]] होगा, राष्ट्रपति इस मन्त्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्पादन करेगा। इस प्रकार वास्तविक कार्यकारी शक्ति मन्त्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] है जो वर्तमान में [[नरेन्द्र मोदी]] हैं।<ref>{{Cite web |url=http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110511104514/http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |archive-date=11 मई 2011 |url-status=live }}</ref> मन्त्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्येक राज्य में एक [[विधानसभा]] है। [[उत्तर प्रदेश]], [[बिहार]], [[महाराष्ट्र]], [[कर्नाटक]],[[आन्ध्रप्रदेश]] और [[तेलंगाना]] में एक ऊपरी सदन है जिसे [[विधानपरिषद]] कहा जाता है। [[राज्यपाल]] राज्य का प्रमुख है। प्रत्येक राज्य का एक राज्यपाल होगा तथा राज्य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मन्त्रिपरिषद, जिसका प्रमुख [[मुख्यमन्त्री]] है, [[राज्यपाल]] को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्पादन में सलाह देती है। राज्य की मन्त्रिपरिषद से राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। तथा इसी अनुसूची में सरकारों द्वारा शुल्क एवं कर लगाने के अधिकारों का उल्लेख है। इसके अंतर्गत तीन सूचियां हैं। संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची। अवशिष्ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्य क्षेत्र कहा जाता है।
=== भारतीय संविधान के भाग ===
भारतीय संविधान 22 भागों में विभजित है तथा इसमे 395 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियाँ हैं।
{|class='wikitable'
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! भाग !! विषय !! अनुच्छेद
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| भाग 1 || [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|संघ और उसके क्षेत्र]] || (अनुच्छेद 1-4)
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| भाग 2 || [[भारतीय राष्ट्रिकता विधि|नागरिकता]] || (अनुच्छेद 5-11)
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| भाग 3 || [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#मूल अधिकार|मूलभूत अधिकार]] || (अनुच्छेद 12 - 35)
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| भाग 4|| [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत|राज्य के नीति निदेशक तत्त्व]] || (अनुच्छेद 36 - 51)
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| भाग 4A || [[भारत के मूल अधिकार, निदेशक तत्त्व और मूल कर्तव्य#मौलिक कर्तव्य|मूल कर्तव्य]] || (अनुच्छेद 51A)
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| भाग 5 || संघ || (अनुच्छेद 52-151)
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| भाग 6 || राज्य || (अनुच्छेद 152 -237)
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| भाग 7 || संविधान (सातवाँ संशोधन) अधिनियम, 1956 द्वारा निरसित||(अनु़चछेद 238)
|-
| भाग 8 || संघ राज्य क्षेत्र || (अनुच्छेद 239-242)
|-
| भाग 9 || पंचायत || (अनुच्छेद 243- 243O)
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| भाग 9A || नगरपालिकाएँ || (अनुच्छेद 243P - 243ZG)
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| भाग 10 || अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र || (अनुच्छेद 244 - 244A)
|-
| भाग 11 || संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध || (अनुच्छेद 245 - 263)
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| भाग 12 || वित्त, [[सम्पत्ति]], संविदाएँ और वाद || (अनुच्छेद 264 -300A)
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| भाग 13 || भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम || (अनुच्छेद 301 - 307)
|-
| भाग 14 || संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ || (अनुच्छेद 308 -323)
|-
| भाग 14A || अधिकरण || (अनुच्छेद 323A - 323B)
|-
| भाग 15 || निर्वाचन || (अनुच्छेद 324 -329A)
|-
| भाग 16 || कुछ वर्गों के लिए विशेष उपबन्ध सम्बन्ध || (अनुच्छेद 330- 342)
|-
| भाग 17 || राजभाषा || (अनुच्छेद 343- 351)
|-
| भाग 18 || आपात उपबन्ध || (अनुच्छेद 352 - 360)
|-
| भाग 19 || प्रकीर्ण || (अनुच्छेद 361 -367)
|-
| भाग 20 || संविधान के संशोधन || अनुच्छेद - 368
|-
| भाग 21 || अस्थाई संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध || (अनुच्छेद 369 - 392)
|-
| भाग 22 || संक्षिप्त नाम, प्रारम्भ, हिन्दी में प्राधिकृत पाठ और निरसन || (अनुच्छेद 393 - 395)
|}
== इतिहास ==
'''{{मुख्य|भारतीय संविधान का इतिहास}}'''
[[द्वितीय विश्वयुद्ध]] की समाप्ति के बाद जुलाई 1945 में [[ब्रिटेन]] ने भारत संबन्धी अपनी नई नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक [[कैबिनेट मिशन]] भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। १५ अगस्त १९४७ को भारत के स्वतन्त्र हो जाने के पश्चात [[संविधान सभा]] की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य ९ दिसम्बर १९४७ से आरम्भ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। [[जवाहरलाल नेहरू]], डॉ [[भीमराव अम्बेडकर]], डॉ [[राजेन्द्र प्रसाद]], सरदार [[वल्लभ भाई पटेल]], मौलाना [[अबुल कलाम आजाद]] आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। इस संविधान सभा ने २ वर्ष, ११ माह, १८ दिन में कुल ११४ दिन चर्चा की। संविधान सभा में कुल १२ अधिवेशन किए तथा अंतिम दिन २८४ सदस्यों ने इस पर हस्ताक्षर किया और संविधान बनने में १६६ दिन बैठक की गई इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। भारत के संविधान के निर्माण में संविधान सभा के सभी 389 सदस्यो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,26 नवम्बर 1949 को सविधान सभा ने पारित किया और इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।इस सविधान में सर्वाधिक प्रभाव भारत शासन अधिनियम 1935 का है। इस में लगभग 250 अनुच्छेद इस अधिनियम से लिये गए हैं।
==भारतीय संविधान की संरचना==
यह वर्तमान समय में भारतीय संविधान के निम्नलिखित भाग हैं-<ref>{{Cite web |url=http://india.gov.in/hi/my-government/constitution-india/constitution-india-full-text |title=भारत का संविधान (पूर्ण पाठ) |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151225090409/http://india.gov.in/hi/my-government/constitution-india/constitution-india-full-text |archive-date=25 दिसंबर 2015 |url-status=dead }}</ref>
* ''एक [[भारतीय संविधान की उद्देशिका|उद्देशिका]],
* ''470 अनुच्छेदों से युक्त 25 भाग''
* ''12 अनुसूचियाँ,
* ''5 अनुलग्नक (appendices)
* ''105 [[भारतीय संविधान के संशोधन अधिनियम|संशोधन]]।
(अब तक 127 संविधान संशोधन विधेयक संसद में लाये गये हैं जिनमें से 105 संविधान संशोधन विधेयक पारित होकर संविधान संशोधन अधिनियम का रूप ले चुके हैं। 124वां संविधान संशोधन विधेयक 9 जनवरी 2019 को संसद में #अनुच्छेद_368 【संवैधानिक संशोधन】के विशेष बहुमत से पास हुआ, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शैक्षणिक संस्थाओं म
8 अगस्त 2016 को संसद ने वस्तु और सेवा कर (GST) पारित कर 101वाँ संविधान संशोधन किया।)
=== अनुसूचियाँ ===
भारत के मूल संविधान में मूलतः आठ अनुसूचियाँ थीं परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान में '''बारह अनुसूचियाँ''' हैं। संविधान में नौवीं अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन 1951, 10वीं अनुसूची 52वें संविधान संशोधन 1985, 11वीं अनुसूची 73वें संविधान संशोधन 1992 एवं बाहरवीं अनुसूची 74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा सम्मिलित किया गया।
'''पहली अनुसूची''' - (अनुच्छेद 1 तथा 4) - राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र का वर्णन।
'''दूसरी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 59(3), 65(3), 75(6),97, 125,148(3), 158(3),164(5),186 तथा 221] - मुख्य पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते <ref>{{वेब सन्दर्भ|title=दूसरी अनुसूची|url=https://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/constitution/SECOND-SCHEDULE.pdf|accessdate=10 फरवरी 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160118183134/http://india.gov.in/sites/upload_files/npi/files/constitution/SECOND-SCHEDULE.pdf|archive-date=18 जनवरी 2016|url-status=dead}}</ref>
:* भाग-क : राष्ट्रपति और राज्यपाल के वेतन-भत्ते,
:* भाग-ख : लोकसभा तथा विधानसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, राज्यसभा तथा विधान परिषद् के सभापति तथा उपसभापति के वेतन-भत्ते,
:* भाग-ग : उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन-भत्ते,
:* भाग-घ : भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक के वेतन-भत्ते।
'''तीसरी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 75(4),99, 124(6),148(2), 164(3),188 और 219] - विधायिका के सदस्य, मंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, न्यायाधीशों आदि के लिए शपथ लिए जानेवाले प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए हैं।
'''चौथी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 4(1),80(2)] - राज्यसभा में स्थानों का आबंटन राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों से।
'''पाँचवी अनुसूची''' - [अनुच्छेद 244(1)] - अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जन-जातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित उपबंध।
'''छठी अनुसूची'''- [अनुच्छेद 244(2), 275(1)] - [[असम]], [[मेघालय]], [[त्रिपुरा]] और [[मिजोरम]] राज्यों के [[जनजाति]] क्षेत्रों के प्रशासन के विषय में उपबंध।
'''[[सातवीं अनुसूची (भारत का संविधान)|सातवीं अनुसूची]]''' - [अनुच्छेद 246] - विषयों के वितरण से संबंधित सूची-1 संघ सूची, सूची-2 राज्य सूची, सूची-3 समवर्ती सूची।
'''[[आठवीं अनुसूची (भारत का संविधान)|आठवीं अनुसूची]]''' - [अनुच्छेद 344(1), 351] - भाषाएँ - 22 भाषाओं का उल्लेख।
'''नवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 31 ख ] - कुछ भूमि सुधार संबंधी अधिनियमों का विधिमान्य करण।पहला संविधान संशोधन (1951) द्वारा जोड़ी गई ।
'''दसवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 102(2), 191(2)] - दल परिवर्तन संबंधी उपबंध तथा परिवर्तन के आधार पर 52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई ।
'''ग्यारहवीं अनुसूची''' - [अनुच्छेद 243 छ ] - पंचायती राज/ जिला पंचायत से सम्बन्धित यह अनुसूची संविधान में 73वें संवैधानिक संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई।
'''बारहवीं अनुसूची''' - इसमे नगरपालिका का वर्णन किया गया हैं ; यह अनुसूची संविधान में 74वें संवैधानिक संशोधन (1993) द्वारा जोड़ी गई।
== आधारभूत विशेषताएँ ==
संविधान प्रारूप समिति तथा [[सर्वोच्च न्यायालय]] ने भारतीय संविधान को [[संघवाद|संघात्मक संविधान]] माना है, परन्तु विद्वानों में मतभेद है। अमेरीकी विद्वान इस को '[[छद्म-संघात्मक-संविधान]]' कहते हैं, हालांकि पूर्वी संविधानवेत्ता कहते हैं कि अमेरिकी संविधान ही एकमात्र संघात्मक संविधान नहीं हो सकता। संविधान का संघात्मक होना उसमें निहित संघात्मक लक्षणों पर निर्भर करता है, किन्तु माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पूर्ण संघात्मक माना है।
भारतीय संविधान के प्रस्तावना के अनुसार भारत एक '''सम्प्रुभतासम्पन्न''', '''समाजवादी''', '''पंथनिरपेक्ष''', '''लोकतांत्रिक''', '''गणराज्य''' है।
=== सम्प्रभुता ===
'''सम्प्रभुता''' शब्द का अर्थ है सर्वोच्च या स्वतन्त्र होना। [[भारत]] किसी भी विदेशी और आन्तरिक शक्ति के नियन्त्रण से पूर्णतः मुक्त '''सम्प्रभुतासम्पन्न''' राष्ट्र है। यह सीधे लोगों द्वारा चुने गए एक मुक्त सरकार द्वारा शासित है तथा यही सरकार कानून बनाकर लोगों पर शासन करती है।
=== समाजवादी ===
{{main|समाजवाद}}
'''समाजवादी''' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह अपने सभी नागरिकों के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करता है। [[जाति]], [[रंग]], [[नस्ल]], [[लिंग]], [[धर्म]] या [[भाषा]] के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबर का दर्जा और अवसर देता है। सरकार केवल कुछ लोगों के हाथों में धन जमा होने से रोकेगी तथा सभी नागरिकों को एक अच्छा जीवन स्तर प्रदान करने का प्रयत्न करेगी।
[[भारत]] ने एक मिश्रित फल का भाग है आर्थिक मॉडल को अपनाया है। सरकार ने समाजवाद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कई कानूनों जैसे अस्पृश्यता उन्मूलन, जमींदारी अधिनियम, समान वेतन अधिनियम और बाल श्रम निषेध अधिनियम आदि बनाया है।
=== पन्थनिरपेक्ष ===
{{main|पन्थनिरपेक्षता}}
'''पन्थनिरपेक्ष''' शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया। यह सभी पन्थों की समानता और पान्थिक सहिष्णुता सुनिश्चित करता है। [[भारत]] का कोई आधिकारिक पन्थ नहीं है। यह ना तो किसी पन्थ को बढ़ावा देता है, ना ही किसी से भेदभाव करता है। यह सभी पन्थों का सम्मान करता है व एक समान व्यवहार करता है। हर व्यक्ति को अपने पसन्द के किसी भी पन्थ का उपासना, पालन और प्रचार का अधिकार है। सभी नागरिकों, चाहे उनकी पान्थिक मान्यता कुछ भी हो कानून की दृष्टि में बराबर होते हैं। सरकारी या सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूलों में कोई पान्थिक अनुदेश लागू नहीं होता।
=== लोकतान्त्रिक ===
{{main|लोकतन्त्र}}
[[भारत]] एक स्वतन्त्र देश है, किसी भी स्थान से मत देने की स्वतन्त्रता, संसद में अनुसूचित सामाजिक समूहों और अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट सीटें आरक्षित की गई है। स्थानीय निकाय चुनाव में महिला उम्मीदवारों के लिए एक निश्चित अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती है। सभी चुनावों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का एक विधेयक लम्बित है। हालांकि इसकी क्रियान्वयन कैसे होगा, यह निश्चित नहीं हैं। [[भारतीय चुनाव आयोग|भारत का निर्वाचन आयोग]] एक स्वतन्त्र संस्था है और यह स्वतन्त्र और निष्पक्ष निर्वाचन करने के लिए सदैव तत्पर है।
राजशाही, जिसमें राज्य के प्रमुख वंशानुगत आधार पर जीवनभर या पदत्याग करने तक के लिए नियुक्त किया जाता है, के विपरीत एक गणतान्त्रिक राष्ट्र का प्रमुख एक निश्चित अवधि के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित होता है। [[भारत]] के [[राष्ट्रपति]] पाँच वर्ष की अवधि के लिए एक चुनावी कॉलेज द्वारा चुने जाते हैं।
=== शक्ति विभाजन ===
यह भारतीय संविधान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्षण है, राज्य की शक्तियां केंद्रीय तथा राज्य सरकारों में विभाजित होती हैं। दोनों सत्ताएँ एक-दूसरे के अधीन नहीं होती है, वे संविधान से उत्पन्न तथा नियंत्रित होती हैं।
शक्ति विभाजन का राजनैतिक अर्थ है कि विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका अपनी -२ शक्तियों समेत एक दूसरे से पृथक (अलग) और अनधीन होंगी।<ref>"[https://www.britannica.com/topic/separation-of-powers separation of powers]" ''Britannica''. Separation of powers, division of the legislative, executive, and judicial functions of government among separate and independent bodies.</ref>
=== संविधान की सर्वोच्चता ===
संविधान के उपबंध संघ तथा राज्य सरकारों पर समान रूप से बाध्यकारी होते हैं। केन्द्र तथा राज्य शक्ति विभाजित करने वाले अनुच्छेद निम्न दिए गए हैं:
# अनुच्छेद 54,55,73,162,241।
# भाग -5 [[सर्वोच्च न्यायालय]], [[उच्च न्यायालय]] राज्य तथा केन्द्र के मध्य वैधानिक संबंध।
# अनुच्छेद 7 के अंतर्गत कोई भी सूची।
# राज्यो का संसद में प्रतिनिधित्व।
# संविधान में संशोधन की शक्ति अनु 368इन सभी अनुच्छेदो में संसद अकेले संशोधन नहीं ला सकती है उसे राज्यों की सहमति भी चाहिए।
अन्य अनुच्छेद शक्ति विभाजन से सम्बन्धित नहीं हैं:
# लिखित संविधान अनिवार्य रूप से लिखित रूप में होगा क्योंकि उसमें शक्ति विभाजन का स्पष्ट वर्णन आवश्यक है। अतः संघ में लिखित संविधान अवश्य होगा।
# '''संविधान की कठोरता''' इसका अर्थ है संविधान संशोधन में राज्य केन्द्र दोनो भाग लेंगे।
# '''न्यायालयों की अधिकारिता'''- इसका अर्थ है कि केन्द्र-राज्य कानून की व्याख्या हेतु एक निष्पक्ष तथा स्वतंत्र सत्ता पर निर्भर करेंगे।
विधि द्वारा स्थापित:
# न्यायालय ही संघ-राज्य शक्तियो के विभाजन का पर्यवेक्षण करेंगे।
# न्यायालय संविधान के अंतिम व्याख्याकर्ता होंगे भारत में यह सत्ता सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
ये पांच शर्ते किसी संविधान को संघात्मक बनाने हेतु अनिवार्य हैं। भारत में ये पांचों लक्षण संविधान में मौजूद हैं अतः यह संघात्मक है। परंतु भारतीय संविधान में कुछ विभेदकारी विशेषताएँ भी हैं:
=== भारतीय संविधान में कुछ विभेदकारी विशेषताएँ भी हैं ===
*1. यह संघ राज्यों के परस्पर समझौते से नहीं बना है
*2. राज्य अपना पृथक संविधान नहीं रख सकते है, केवल एक ही संविधान केन्द्र तथा राज्य दोनो पर लागू होता है
*3. भारत में द्वैध नागरिकता नहीं है। केवल भारतीय नागरिकता है
*4. भारतीय संविधान में आपातकाल लागू करने के उपबन्ध है [352 अनुच्छेद] के लागू होने पर राज्य-केन्द्र शक्ति पृथक्करण समाप्त हो जायेगा तथा वह एकात्मक संविधान बन जायेगा। इस स्थिति में केन्द्र-राज्यों पर पूर्ण सम्प्रभु हो जाता है
*5. राज्यों का नाम, क्षेत्र तथा सीमा केन्द्र कभी भी परिवर्तित कर सकता है [बिना राज्यों की सहमति से] [अनुच्छेद 3] अत: राज्य भारतीय संघ के अनिवार्य घटक नहीं हैं। केन्द्र संघ को पुर्ननिर्मित कर सकती है
*6. संविधान की 7वीं अनुसूची में तीन सूचियाँ हैं [संघीय सरकार|संघीय], [राज्य सूची|राज्य], तथा [समवर्ती सूची|समवर्ती]। इनके विषयों का वितरण केन्द्र के पक्ष में है।
:*6.1 संघीय सूची में सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय हैं
:*6.2 इस सूची पर केवल संसद का अधिकार है
:*6.3 राज्य सूची के विषय कम महत्वपूर्ण हैं, 5 विशेष परिस्थितियों में राज्य सूची पर संसद विधि निर्माण कर सकती है किंतु किसी एक भी परिस्थिति में राज्य, केन्द्र हेतु विधि निर्माण नहीं कर सकते-
::*क1. अनु 249—राज्य सभा यह प्रस्ताव पारित कर दे कि राष्ट्र हित हेतु यह आवश्यक है [2/3 बहुमत से] किंतु यह बन्धन मात्र 1 वर्ष हेतु लागू होता है
::*क2. अनु 250— राष्ट्र आपातकाल लागू होने पर संसद को राज्य सूची के विषयों पर विधि निर्माण का अधिकार स्वत: मिल जाता है
::*क3. अनु 252—दो या अधिक राज्यों की विधायिका प्रस्ताव पास कर राज्य सभा को यह अधिकार दे सकती है [केवल संबंधित राज्यों पर]
::*क4. अनु 253--- अंतराष्ट्रीय समझौते के अनुपालन के लिए संसद राज्य सूची विषय पर विधि निर्माण कर सकती है
::*क5. अनु 356—जब किसी राज्य में [राष्ट्रपति शासन] लागू होता है, उस स्थिति में संसद उस राज्य हेतु विधि निर्माण कर सकती है
*7. अनुच्छेद 155 – राज्यपालों की नियुक्ति पूर्णत: केन्द्र की इच्छा से होती है इस प्रकार केन्द्र राज्यों पर नियंत्रण रख सकता है
*8. अनु 360 – वित्तीय आपातकाल की दशा में राज्यों के वित्त पर भी केन्द्र का नियंत्रण हो जाता है। इस दशा में केन्द्र राज्यों को धन व्यय करने हेतु निर्देश दे सकता है
*9. प्रशासनिक निर्देश [अनु 256-257] -केन्द्र राज्यों को राज्यों की संचार व्यवस्था किस प्रकार लागू की जाये, के बारे में निर्देश दे सकता है, ये निर्देश किसी भी समय दिये जा सकते है, राज्य इनका पालन करने हेतु बाध्य है। यदि राज्य इन निर्देशों का पालन न करे तो राज्य में संवैधानिक तंत्र असफल होने का अनुमान लगाया जा सकता है
*10. अनु 312 में अखिल भारतीय सेवाओं का प्रावधान है ये सेवक नियुक्ति, प्रशिक्षण, अनुशासनात्मक क्षेत्रों में पूर्णतः: केन्द्र के अधीन है जबकि ये सेवा राज्यों में देते है राज्य सरकारों का इन पर कोई नियंत्रण नहीं है
*11. एकीकृत न्यायपालिका
*12. राज्यों की कार्यपालिक शक्तियाँ संघीय कार्यपालिक शक्तियों पर प्रभावी नहीं हो सकती है।
== संविधान की प्रस्तावना ==
[[File:Constitution of India.jpg|thumb|right|250px|४२वें संशोधन से पूर्व भारत के संविधान की प्रस्तावना]]
{{main|भारतीय संविधान की उद्देशिका}}
संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के नाम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह ''''हम भारत के लोग'''' - इस वाक्य से प्रारम्भ होती है। केहर सिंह बनाम भारत संघ के वाद में कहा गया था कि संविधान सभा भारतीय जनता का सीधा प्रतिनिधित्व नहीं करती अत: संविधान विधि की विशेष अनुकृपा प्राप्त नहीं कर सकता, परंतु न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए संविधान को सर्वोपरि माना है जिस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है।
'''संविधान की प्रस्तावना: '''
: ''हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी , पंथनिरपेक्ष,लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को'' :
: ''सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा ''
: ''उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए ''
: ''दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा ''
: ''इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।''
संविधान की प्रस्तावना 13 दिसम्बर 1946 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा सविधान सभा में प्रस्तुत की गयी प्रस्तावना को आमुख भी कहते हैं।
* के एम मुंशी ने प्रस्तावना को 'राजनीतिक कुण्डली' नाम दिया है
* 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद, पंथनिरपेक्ष व अखण्डता शब्द जोड़े गए।
== संविधान भाग 3 व 4 : मूलभूत अधिकार व नीति निर्देशक तत्त्व ==
{{main|नीति निर्देशक तत्त्व }}
भाग 3 तथा 4 मिलकर 'संविधान की आत्मा तथा चेतना' कहलाते है क्योंकि किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के लिए मौलिक अधिकार तथा नीति-निर्देश देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीति निर्देशक तत्त्व जनतांत्रिक संवैधानिक विकास के नवीनतम तत्त्व हैं। सर्वप्रथम ये [[आयरलैंड]] के संविधान में लागू किये गये थे। ये वे तत्त्व है जो संविधान के विकास के साथ ही विकसित हुए हैं। इन तत्वों का कार्य एक जनकल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। भारतीय संविधान के इस भाग में नीति निर्देशक तत्वों का रूपाकार निश्चित किया गया है, मौलिक अधिकार तथा नीति निर्देशक तत्त्व में भेद बताया गया है और नीति निदेशक तत्वों के महत्त्व को समझाया गया है।
== भाग 4 क : मूल कर्तव्य ==
मूल कर्तव्य, मूल सविधान में नहीं थे, 42 वें संविधान संशोधन में मूल कर्तव्य (10) जोड़े गये है। ये [[रूस]] से प्रेरित होकर जोड़े गये तथा संविधान के भाग 4(क) के अनुच्छेद 51 - अ में रखे गये हैं। वर्तमान में ये 11 हैं।11 वाँ मूल कर्तव्य 86 वें संविधान संशोधन में जोड़ा गया।
'''51 क. मूल कर्तव्य'''- भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह-
*(क) संविधान का पालन करे और उस के आदर्शों, संस्थाओं, [[भारत का ध्वज|राष्ट्रध्वज]] राष्ट्रगीत और [[राष्ट्रगान]] का आदर करे ;
*(ख) स्वतन्त्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उन का पालन करे;
*(ग) भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे;
*(घ) देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे;
*(ङ) भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है;
*(च) हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवशाली परम्परा का महत्त्व समझे और उस का परिरक्षण करे;
*(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की, जिस के अन्तर्गत वन, झील नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उस का संवर्धन करे तथा प्राणि मात्र के प्रति दयाभाव रखे;
*(ज) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे;
*(झ) सार्वजनिक सम्पत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे;
*(ञ) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिस से राष्ट्र निरन्तर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले;
*(ट) यदि माता-पिता या संरक्षक है, छह वर्ष से चौदह वर्ष तक की आयु वाले अपने, यथास्थिति, बालक या प्रतिपाल्य के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करे।
==संशोधन==
{{main|भारतीय संविधान के संशोधन}}
भारतीय संविधान का संशोधन भारत के संविधान में परिवर्तन करने की प्रक्रिया है। एक संशोधन के प्रस्ताव की शुरुआत संसद में होती है जहाँ इसे एक बिल के रूप में पेश किया जाता है। भारतीय संविधान में अब तक 105 बार संशोधन किया जा चुका है जबकि संविधान संशोधन के लिए अब तक 127 बिल लाए जा चुके हैं।
==इन्हें भी देखें==
#[[संविधान दिवस (भारत)]]
#[[भारतीय संविधान का इतिहास]]
#[[भारतीय संविधान सभा]]
#[[संघवाद]] (फेड्रलिज़्म)
#[[संविधानवाद]]
#[[भारतीय दण्ड संहिता]]
#[[गणतंत्र दिवस]]
==महत्वपूर्ण अनुच्छेद==
*अनुच्छेद 1 :- भारत राज्यों का संघ होगा।
*अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
*अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन।
*अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूची व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
*अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारम्भ पर नागरिकता
*अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
*अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता।
*अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
*अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का न
*अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
*अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
*अनुच्छेद 12 :- राज्य की परिभाषा
*अनुच्छेद 13 :- मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियाँ
*अनुच्छेद 14 :- विधि के समक्ष समानता
*अनुच्छेद 15 :- धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक।
*अनुच्छेद 16 :- लोक नियोजन में अवसर की समानता
*अनुच्छेद 17 :- अस्पृश्यता का अन्त
*अनुच्छेद 18 :- उपाधियों का अन्त
*अनुच्छेद 19 :- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
*अनुच्छेद 19 क :- सूचना का अधिकार
*अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
*अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतन्त्रता का संरक्षण
*अनुच्छेद 21 क :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार, निजता का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ही आता है।
*अनुच्छेद 22 :– कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से संरक्षण
*अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार, बेगारी एवं बलात श्रम पर प्रतिबंध
*अनुच्छेद 24 :- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खान या किसी खतरनाक उद्योग में कार्य नही कराया जा सकता है।
*अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
*अनुच्छेद 26 :-धार्मिक कार्यों के प्रबन्ध की स्वतन्त्रता
*अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
*अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
*अनुच्छेद 32 :-संवैधानिक उपचारों का अधिकार (संविधान की आत्मा)
*अनुच्छेद 39 क :- सभी के लिए समान न्याय एवं निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
*अनुच्छेद 40 :- ग्राम पंचायतों का संगठन
*अनुच्छेद 44 :- समान नागरिक संहिता
*अनुच्छेद 48 :- कृषि और पशुपालन संगठन
*अनुच्छेद 48 क :- पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
*अनुच्छेद 49 :- राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण
*अनुच्छेद 50 :- कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
*अनुच्छेद 51 :- अन्तरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
*अनुच्छेद 51 क :- मूल कर्तव्य
*अनुच्छेद 52 :- भारत का राष्ट्रपति
*अनुच्छेद 53 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति
*अनुच्छेद 54 :- राष्ट्रपति का निर्वाचन
*अनुच्छेद 55 :- राष्ट्रपति के निर्वाचन प्रणाली
*अनुच्छेद 56 :- राष्ट्रपति की पदावधि
*अनुच्छेद 57 :- पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
*अनुच्छेद 58 :- राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए आहर्ताए
*अनुच्छेद 60 :- राष्ट्रपति की शपथ
*अनुच्छेद 61 :- राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
*अनुच्छेद 63 :- भारत का उप-राष्ट्रपति
*अनुच्छेद 64 :- उप-राष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
*अनुच्छेद 65 :- राष्ट्रपति के पद की रिक्त पर उप-राष्ट्रपति के कार्य
*अनुच्छेद 66 :- उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
*अनुच्छेद 67 :- उप-राष्ट्रपति की पदावधि
*अनुच्छेद 68 :- उप-राष्ट्रपति के पद की रिक्त पद भरने के लिए निर्वाचन
*अनुच्छेद 69 :- उप-राष्ट्रपति द्वारा शपथ
*अनुच्छेद 70 :- अन्य आकस्मिकता में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन
*अनुच्छेद 71. :- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन सम्बन्धित विषय
*अनुच्छेद 72 :-क्षमादान की शक्ति
*अनुच्छेद 73 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
*अनुच्छेद 74 :- राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मन्त्रिपरिषद
*अनुच्छेद 75 :- मन्त्रियों के बारे में उपबन्ध
*अनुच्छेद 76 :- भारत का महान्यायवादी
*अनुच्छेद 77 :- भारत सरकार के कार्य का संचालन
*अनुच्छेद 78 :- राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमन्त्री के कर्तव्य
*अनुच्छेद 79 :- संसद् का गठन
*अनुच्छेद 80 :- राज्य सभा की सरंचना
*अनुच्छेद 81 :- लोकसभा की संरचना
*अनुच्छेद 83 :- संसद् के सदनो की अवधि
*अनुच्छेद 84 :-संसद् के सदस्यों के लिए अहर्ता
*अनुच्छेद 85 :- संसद् का सत्र सत्रावसान और विघटन
*अनुच्छेद 87 :- राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
*अनुच्छेद 88 :- मंत्रियों की शक्तियां
*अनुच्छेद 89 :- राज्य सभा का सभापति और उपसभापति
*अनुच्छेद 90 :- उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना
*अनुच्छेद 91 :- सभापति के पद के कतर्व्ययों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यिक्त की शक्ति
*अनुच्छेद 92 :- जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना
*अनुच्छेद 93 :- लोक सभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
*अनुच्छेद 94 :- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पद त्याग और पद से हटाया जाना
*अनुच्छेद 95 :- अध्यक्ष के पद के कतर्व्ययों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप म कायर् करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यिक्त की शक्ति
*अनुच्छेद 96 :- जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है तब उसका पीठासीन न होना
*अनुच्छेद 97 :- सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
*अनुच्छेद 98 :- संसद् का सचिवालय
*अनुच्छेद 99 :- सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
*अनुच्छेद 100 :- सदनों में मतदान, रिक्तताओं के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति तथा गणपूर्ति
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html?m=1 भारतीय संविधान] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210628115603/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html?m=1 |date=28 जून 2021 }} (हिन्दी में )
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html Article 1 to 395 in Hindi] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210624195540/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html |date=24 जून 2021 }}
*[https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html संविधान के संशोधन 2021 तक] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210624195540/https://www.inbais.com/2021/02/article-1-to-395-in-hindi.html |date=24 जून 2021 }}
{{भारत सरकार}}
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जातक कथाएँ
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[[चित्र:Bhutanese painted thanka of the Jataka Tales, 18th-19th Century, Phajoding Gonpa, Thimphu, Bhutan.jpg|300px|thumb|right|जातक कथाओं पर आधारित भूटानी चित्रकला (१८वीं-१९वीं शताब्दी)]]
'''जातक''' या '''जातक पालि''' या '''जातक कथाएं''' [[बौद्ध ग्रंथ]] [[त्रिपिटक]] का [[सुत्तपिटक]] अंतर्गत [[खुद्दकनिकाय]] का १०वां भाग है। इन कथाओं में [[गौतम बुद्ध|भगवान बुद्ध]] की कथायें हैं। जो मान्यता है कि खुद गौतमबुद्ध जी के द्वारा कहे गए है, हालांकि की कुछ विद्वानों का मानना है कि कुछ जातक कथाएँ, गौतमबुद्ध के निर्वाण के बाद उनके शिष्यों द्वारा कही गयी है। विश्व की प्राचीनतम लिखित कहानियाँ जातक कथाएँ हैं जिसमें लगभग 600 कहानियाँ संग्रह की गयी है। यह ईसवी संवत से 300 वर्ष पूर्व की घटना है। इन कथाओं में मनोरंजन के माध्यम से [[नीति]] और [[धर्म]] को समझाने का प्रयास किया गया है।
जातक [[खुद्दकनिकाय|खुद्दक निकाय]] mushak seth ki kathaदसवाँ प्रसिद्ध ग्रन्थ है। जातक को वस्तुतः ग्रन्थ न कहकर ग्रन्थ समूह ही कहना अधिक उपयुक्त होगा। उसका कोई-कोई कथानक पूरे ग्रन्थ के रूप में है और कहीं-कहीं उसकी कहानियों का रूप संक्षिप्त महाकाव्य-सा है। जातक शब्द जन धातु से बना है। इसका अर्थ है भूत अथवा भाव। ‘जन्’ धातु में ‘क्त’ प्रत्यय जोड़कर यह शब्द निर्मित होता है। धातु को भूत अर्थ में प्रयुक्त करते हुए जब अर्थ किया जाता है तो जातभूत कथा एवं रूप बनता है। भाव अर्थ में प्रयुक्त करने पर जात-जनि-जनन-जन्म अर्थ बनता है। इस तरह ‘जातक’ शब्द का अ र्थ है, ‘जात’ अर्थात् जन्म-सम्बन्धीं। ‘जातक’ भगवान बुद्ध के पूर्व जन्म सम्बन्धी कथाएँ है। बुद्धत्व प्राप्त कर लेने की अवस्था से पूर्व भगवान् बुद्ध बोधिसत्व कहलाते हैं। वे उस समय बुद्धत्व के लिए उम्मीदवार होते हैं और दान, शील, मैत्री, सत्य आदि दस पारमिताओं अथवा परिपूर्णताओं का अभ्यास करते हैं। भूत-दया के लिए वे अपने प्राणों का अनेक बार बलिदान करते हैं। इस प्रकार वे बुद्धत्व की योग्यता का सम्पादन करते हैं। बोधिसत्व शब्द का अर्थ ही है बोधि के लिए उद्योगशील प्राणी। बोधि के लिए है सत्व (सार) जिसका ऐसा अर्थ भी कुछ विद्वानों ने किया है। [[पालि भाषा|पालि]] सुत्तों में हम अनेक बार पढ़ते हैं, ‘‘सम्बोधि प्राप्त होने से पहले, बुद्ध न होने के समय, जब मैं बोधिसत्व ही था‘‘ आदि। अतः बोधिसत्व से स्पष्ट तात्पर्य ज्ञान, सत्य दया आदि का अभ्यास करने वाले उस साधक से है जिसका आगे चलकर बुद्ध होना निश्चित है। भगवान बुद्ध भी न केवल अपने अन्तिम जन्म में बुद्धत्व-प्राप्ति की अवस्था से पूर्व बोधिसत्व रहे थे, बल्कि अपने अनेक पूर्व जन्मों में भी बोधिसत्व की चर्या का उन्होंने पालन किया था। जातक की कथाएँ भगवान् बुद्ध के इन विभिन्न पूर्वजन्मों से जबकि वे बोधिसत्व रहे थे , सम्बन्धित हैं। अधिकतर कहानियों में वे प्रधान पात्र के रूप में चित्रित है। कहानी के वे स्वयं नायक है। कहीं-कहीं उनका स्थान एक साधारण पात्र के रूप में गौण है और कहीं-कहीं वे एक दर्शक के रूप में भी चित्रित किये गये हैं। प्रायः प्रत्येक कहानी का आरम्भ इस प्रकार होता है-‘‘एक समय राजा ब्रह्मदत्त के वाराणसी में राज्य करते समय (अतीते वाराणसिंय बह्मदत्ते रज्ज कारेन्ते) बोधिसत्व कुरंग मृग की योनि से उत्पन्न हुए अथवा ... सिन्धु पार के घोड़ों के कुल में उत्पन्न हुए अथवा ..... बोधिसत्व ब्रह्मदत्त के अमात्य थे अथवा ..बोधिसत्व गोह की योनि सें उत्पन्न हुए आदि, आदि।
जातक की कहानियों में से कुछ का नामकरण तो जातक में आई हुई गाथा के पहले शब्दों से हुआ है, यथा-अपष्णक जातक; किसी का प्रधान पात्र के अनुसार, यथा वण्णुपथ जातक; किसी का उन जन्मों के अनुसार जो बोधिसत्व ने ग्रहण किये यथा, निग्रेध मिग जातक, मच्छ जातक, आदि।
नोट- मूलतः जातक कथाएँ बौद्ध कालीन भाषा (पाली भाषा) से अनुवादित है जिसके कुछ शब्द संस्कृत भाषा से मेल खाते है, अतः अनुवाद का अर्थ विभिन्न भी हो सकता है
==जातकों की संख्या एवं रचनाकाल==
सभी जातक कथाएं [[गौतम बुद्ध|गौतमबुद्ध]] के द्वारा कही गयी है, जातक [[गौतम बुद्ध|बुद्ध]] समयकालीन है, जातकों की निश्चित संख्या कितनी है, इसका निर्णय करना बड़ा कठिन है। लंका, बर्मा और सिआम में प्रचलित परम्परा के अनुसार जातक 550 हैं। समन्तपासादिका की निदान कथा में भी जातकों की संख्या इतनी ही बताई गई है। ‘‘पण्णासा धकनि पंचसतानि जातकंति वेदितब्बं।‘‘ अट्ठसालिनी की निदान कथा में भी -पण्णासाधिकानि पंचजातकसतानि‘‘ है। संख्या मोटे तौर पर ही निश्चित की गई है। जातक के वर्तमान रूप में 547 जातक कहनियाँ पाई जाती हैं। पर यह संख्या भी केवल ऊपरी है। जातकट्ठवण्णनाकार ने विषयवस्तु की दृष्टि से इन्हें पाँच वर्गों में विभाजित किया है-
*1. '''पच्चुपन्नवत्थु''' - बुद्ध की वर्तमान कथाओं का संग्रह है।
*2. '''अतीतवत्थु''' - इसमें अतीत की कथाँए संगृहीत है।
*3. '''गाथा'''
*4. '''वैय्याकरण''' - गाथाएँ व्याख्यायित की गई है।
*5. '''समोधन''' - इसमें अतीतवत्थु के पात्रों का बुद्ध के जीवनकाल के पात्रों से सम्बन्ध बताया गया है।
जातक की कई कहानियाँ अल्प रूपान्तर के साथ दो जगह भी पाई जाती है या एक दूसरे में समाविष्ट भी कर दी गई हैं, और इसी प्रकार कई जातक कथाएँ सुत्त-पिटक, विनय-पिटक, तथा अन्य पालि ग्रन्थों में तो पाई जाती है, किन्तु जातक के वर्तमान रूप में संगृहीत नहीं है। अतः जातकों की संख्या में काफी कमी की भी और बृद्धि की भी सम्भावना है। उदाहरणतः मुनिक जातक(30) और सालूक जातक(286) की कथावस्तु एक ही सी है, किन्तु केवल भिन्न-भिन्न नामों से वह दो जगह आई है। इसके विपरीत ‘मुनिक जातक’ नाम के दो जातक होते हुए उनकी भी कथा भिन्न-भिन्न है।
यही बात मच्छ जातक नाम से दो जातक की भी है। कही-कहीं दो स्वतन्त्र जातकों को मिलाकर एक तीसरे जातक का निर्माण कर दिया गया है। उदाहरण के लिए पंचपंडित जातक(508) और दकरक्खस जातक(517) ये दोनों जातक महाउमग्ग जातक(546) में अन्तर्भावित हैं। जो कथाएँ जातक-कथा के रूप में अन्यत्र पाई जाती हैं, किन्तु ‘जातक’ में संगृहीत नहीं है, उनका भी कुछ उल्लेख कर देना आवश्यक होगा। मज्झिम निकाय का घटिकार- सुत्त या घटीकार सुत्त (2/4/1) एक ऐसी ही जातक कहानी है, जो ‘जातक’ में नहीं मिलती। इसी प्रकार दीर्घनिकाय का महागोविन्द सुत्त(2/6) जो स्वयं जातक की निदान कथा में भी ‘महागोविन्द जातक’ के नाम से निर्दिष्ट हुआ है, जातक के अन्दर नहीं पाया जाता है। इसी प्रकार धम्मपदट्ठकथा और मिलिन्द पंह में भी कुछ ऐसी जातक-कथाएँ उद्धृत की गई हैं, जो जातक में संगृहीत नहीं है।
अतः कुछ जातक निश्चित रूप से कितने है इसका ठीक निर्णय नहीं हो सकता। जब जातकों की संख्या के सम्बन्ध में विचार करते हैं तो जातक से हमारा तात्पर्य एक विशेष शीर्षक वाली कहानी से होता है, जिसमें बोधिसत्व के जीवन-सम्बन्धी कि सी घटना का वर्णन हो, फिर चाहे उस एक जातक में कितनी ही अवान्तर कथाएँ क्यों न गूँथ दी गई हों। यदि कुल कहानियाँ गिनी जाय तो जातक में करीब तीन हजार कहानियाँ पाई जाती हैं। वास्तव में जातकों का संकलन सुत्त-पिटक और विनय-पिटक के आधार पर किया गया है। सुत्त -पिटक में अनेक ऐसी कथाएँ है जिनका उपयोग वहाँ उपदेश देने के लिए किया गया है। किन्तु बोधिसत्व का उल्लेख उसमें नहीं है। यह काम बाद में करके प्रत्येक कहानी को जातक का रूप दे दिया गया है। तित्तिर जातक(37) और दीघित कोसल जातक(371) का निमार्ण इसी प्रकार विनय-पिटक के क्रमशः चुल्लवग्ग और महावग्ग से किया गया है। मणिकंठ जातक(253) भी विनय-पिटक पर ही आधारित है। इसी प्रकार दीर्घ-निकाय के कूटदन्त सुत्त(1/5) और महासुदस्सन सुत्त(2/4) तथा मज्झिम निकाय के मखादेव सुत्त(2/4/3) भी पूरे अर्थों में जातक हैं। कम से कम 13 जातकां की खोज विद्वानों ने सुत्त पिटक और विनय-पिटक में की हैं। यद्यपि राजकथा चोर-कथा एवं इसी प्रकार की भय, युद्ध, ग्राम, निगम, नगर, जनपद, स्त्री, पनघट, भूत-प्रेत आदि सम्बन्धी कथाओं को तिरश्चीन (व्यर्थ की, अधम) कथाएँ कहकर भिक्षु संघ में हेयता की दृष्टि से देखा जाता था। फिर भी उपदेश के लिए कथाओं का उपयोग भिक्षु लोग कुछ-न-कुछ मात्रा मेंं करते ही थे। स्वयं भगवान ने भी उपमाओं और दृष्टान्तों के द्वारा धर्म का उपदेश दिया है। बौद्ध संस्कृत ग्रन्थ सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र के द्वितीय परिवर्त (उपाय कौशल्य-परिवर्त) में भी कहा गया है कि बुद्ध अनेक दृष्टान्तों से (दृष्टान्तशतेहि) तथा जातक(पूर्वजन्म सम्बन्धी कथाओं) के द्वारा सब प्राणियों के कल्याणार्थ उपदेश करते हैं। बुद्ध के अलावा अन्य भारतीय सन्त भी उपनिषदों के काल से लेकर रामकृष्ण परमहंस के समय तक आख्यायिकाओं और दृष्टान्तों के सहारे धर्मोंपदेश करते रहे हैं। इसी प्रवृत्ति के आधार पर जातककथाओं का विकास हुआ है। जन समाज में प्रचलित कथाओं को भी कही-कहीं ले लिया गया है, किन्तु उन्हें एक नया नैतिक रूप दे दिया गया है, जो [[बौद्ध धर्म]] की एक विशेषता है। अतः सभी जातक कथाओं पर बौद्ध धर्म की पूरी छाप है। पूर्व परम्परा से चले आते हुए लोक-आख्यानों का आधार उनमें हो सकता है, पर उनका सम्पूर्ण ढाँचा बौद्ध धर्म के नैतिक आदर्श के अनुकूल है। बुद्ध वचनों का वर्गीकरण नौ अंगों के रूप में किया गया है, जिनके नाम हैं-
: 1. सुत्त 2. गेय 3. वेय्याकरण 4. गाथा 5. उदान 6. इतिक्तुक 7. जातक 8. अब्भुतधम्म और 9. वेदल्ल।
* '''सुत्त''' (सूत्र) का अर्थ है सामान्यतः बुद्ध उपदेश। दीर्घ-निकाय सुत्त निपात आदि में गद्य में रखे हुए भगवान बुद्ध के उपदेश सुत्त हैं।
* '''गेय्य''' (गेय)- पद्य मिश्रित अंश (सगाथकं) गे य्य कहलाते हैं। ‘‘सब्बं पि सगाथक सुत्तं गेय्यं वेदितब्बं।’’
* '''वैय्याकरण''' (व्याकरण, विवरण, विवेचन) वह व्याख्यापरक साहित्य है, जो अभिधम्म-पिटक तथा अन्य ऐसे ही अंशों में सन्निहीत है।
* पद्य में रचित अंग '''गाथा''' (पालि श्लोक) कहलाते हैं, यथा धम्मपद आदि की गाथाएँ।
* '''उदान''' का अर्थ है बुद्ध मुख से निकले हुए भावमय प्रीति-उद्गार या ऊर्ध्व वचन। ये उद्गार सौमनस्य की अवस्था में बुद्ध मुख से निकली हुई ज्ञानमयिक गाथाओं के रूप में है। ‘‘सोमनस्संनाणमयिक गाथापटि संयुत्ता।‘‘
* '''इतिवुत्तक''' का अर्थ है- ‘ऐसा कहा गया या ऐसा तथागत ने कहा।' ‘‘वुत्त हेतं भगवता‘‘ से आरम्भ होने वाले बुद्ध वचन इतिवुत्तक है।
* '''जातक''' का अर्थ है- (बुद्ध के पूर्व) जन्म सम्बन्धी कथाएँ। ये जातक में संगृहीत है और कुछ अन्यत्र भी त्रिपिटक में पाई जाती है।
* '''अब्भुत-धम्म''' (अद्भुत धर्म) वे सुत्त हैं, जो अद्भुत वस्तुओं या योग सम्बन्धी विभूतियों का निरूपण करते हैं। [[अंगुत्तरनिकाय|अंगुत्तर निकाय]] के ‘‘चत्तारों में भिक्खवे अच्छ रिया अब्भुत धम्मा आनन्दे‘‘ जैसे अंश ‘अब्भुतधम्म’ है।
* '''वेदल्ल''' वे उपदेश हैं जो प्रश्न और उत्तर के रूप में लिखे गये हैं, जिनमें आध्यात्मिक प्रसन्नता और सन्तोष प्राप्त कर के प्रश्न पूछे जायँ। ‘‘सब्बे पि वेदं च तुटिठं च लुद्धा पुचिछतसुत्तन्ता वेदल्लं ति वेदितब्बा।‘‘ चुल्ल वेदल्ल सुत्तन्त महा वेदल्ल सुत्तन्त, सम्मादिट्ठि सुत्तन्त, सक्कपंह सुत्तन्त आदि इसके उदाहरण है।
बुद्ध वचनों का यह नौ प्रकार का विभाजन उनके शैली स्वरूपों या नमूनों की दृष्टि से ही है, ग्रन्थों की दृष्टि से नहीं। इतने प्रकार के बुद्ध उपदेश होते थे, यही इस वर्गीकरण का अभिप्राय है। बुद्ध वचनों का नौ अंगों में विभाजन जिनमें जातक की संख्या सातवीं है, अत्यन्त प्राचीन है। अतः जातक कथाएँ सर्वांश में पालि-साहित्य के महत्वपूर्ण एवं आवश्यक अंग हैं। उनकी संख्या के विषय में अनिश्चितता विशेषतः उनके समय-समय पर सुत्त पिटक और विनय-पिटक तथा अन्य श्रोतों से संकलन के कारण और स्वयं पालि पिटक के नाना वर्गीकरणों और उनके परस्पर संमिश्रण के कारण उत्पन्न हुई है। चुल्ल निद्देस में हमें केवल 500 जातकों का (पंच जातक सतानि) का उल्लेख मिलता है। चीनी यात्री फाह्यान ने पाँचवी शताब्दी ईसवी में 500 जातकों के चित्र लंका में अंकित हुए देखे थे। द्वितीय तृतीय शताब्दी ईस्वी पूर्व के भरहुत और साँची के स्तूपों में जातकों के चित्र अंकित मिले हैं। जिनमें से कम से कम 27 या 29 जातकों के चित्रों की पहचान रायस डेविड्स ने की थी। तब से कुछ अन्य जातक कहानियों की पहचान भी इन स्तूपों की पाषाण-वेष्टनियों पर की जा चुकी हैं। ये सब तथ्य जातक की प्राचीनता और उसके विकास के सूचक हैं।
स्थविरवादी पालि साहित्य के समान संस्कृत बौद्ध धर्म के ग्रन्थों में भी जातक कथाएँ पाई जाती हैं। पालि के नवांग बुद्ध वचन की तरह यहाँ द्वाद श अंग धर्मप्रवचन माने गये हैं। इन दोनों ही जगह जातक एक अंग या धर्म-प्रवचन के भाग के रूप में विद्यमान है। बौद्ध संस्कृत ग्रन्थ जातकमाला में जो आर्यशूर की रचना बताई जाती है 34 जातक कथाएँ मिलती है। आर्यशूर को लामा, तारनाथ ने अश्वघोष का ही दूसरा नाम बताया है परन्तु यह ठीक नहीं जान पड़ता है। सम्भवतः वे चतुर्थ शताब्दी ईसवी के कवि थे। लोकोत्तरवादियों के प्रसिद्ध ग्रन्थ महावस्तु में जो 200 ई0 पूर्व से 400 ई0 तक के बीच के काल में लिखी गई, करीब 80 जातक कथाएँ मिलती है। इसमें से कुछ पालि जातक के समान हैं और कु छ ऐसी भी हैं, जो पालि जातक में नहीं पाई जाती।
रायस डेविड्स का कथन है कि जातक का संकलन और प्रणयन मध्य देश में प्राचीन जनकथाओं के आधार पर हुआ। विण्टरनित्ज ने भी प्रायः इसी मत का प्रतिपादन किया है। अधिकांश जातक बुद्धकालिन है। साँची और भरहुत के स् तूपों की पाषाण-वेष्टनियों पर उनके दृश्यों का अंकित होना उनके पूर्व अशोककालीन होने का पर्याप्त साक्ष्य देता है। जातक के काल और कर्तृत्व के सम्बन्ध में अधिक प्रकाश उसके साहित्यिक रूप और विशेषताओं के विवेचन से पड़ेगा। प्रत्येक जातक कथा पाँच भागों में विभक्त है।
: 1 . पंचुप्पन्नवत्थु 2 . अतीतवत्थु 3 . गाथा 4 . वेय्याकरण या अत्यवण्णना और 5 . समोधन।
पंचुप्पन्नवत्थु का अर्थ है वर्तमान काल की घटना या कथा। बुद्ध के जीवन काल में जो घटना घटी वह पच्चुप्पन्नवत्थु है। उस घटना ने भगवान को किसी पूर्वजन्म के वृत् त को कहने का अवसर दिया। यह पूर्वजन्म का वृत्त ही अतीतवत्थु है। प्रत्येक जातक का कथा की दृष्टि सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाग यह अतीतवत्थु ही है। इसी के अनुकूल पच्चप्पन्नवत्थु कहीं-कहीं गढ़ ली गई प्रतीत होती है। अतीतवत्थु के बाद एक या अनेक गाथाएँ आती हैं। इनका सम्बन्ध वैसे तो अतीतवत्थु से ही होता है, किन्तु कहीं-कहीं पच्चप्पन्नवत्थु से भी होता है। गाथाएँ जातक के प्राचीनतम अंश हैं। वास्तव में गाथाएँ ही जातक हैं। पच्चुप्पन्नवत्थु आदि पाँच भागों से समन्वित जातक तो वास्तव में जातकट्ठवण्णना या जातक में वेय्याकरण या अत्थव ण्णना आती है। इसमें गाथाओं की व्याख्या और उनका शब्दार्थ होता है। सबसे अन्त में समोधन(समवधान) आता है, जिसमें अतीतवत्थु के पात्रों का बुद्ध के जीवन काल के पात्रों के साथ सम्बन्ध मिलाया जाता है, यथा उस समय अटारी पर से शिकार खेलने वाला शिकारी अब का देव दत्त था और कुरूंग मृग तो मैं था ही, आदि आदि।
जातक मेंं बुद्ध के पूर्व जन्मों की कथाएँ संगृहीत है जबकि उन्होंने [[बोधिसत्व]] के रूप में विभिन्न पारमिताएँ पूरी कीं और बुद्धत्व के लिए योग्यता सम्पादित की। सुत्त-पिटक के प्रथम चार निकायों में बुद्ध के ऐतिहासिक रूप की ही प्रतिष्ठा है। बाद में जातक में (तथा बुद्धवंस और चरिया-पिटक में) उनके ऐतिहासिक जीवन को पूर्व की कथाओं से सम्बद्ध कर दिया पाते हैं। जातकट्ठकथा की निदान कथा में बुद्ध जीवन के तीन निदान बताये गये हैं, दूरे निदान में अत्यन्त दूर अतीत की बुद्ध जीवन की कथा है, ऐसा माना जाता है कि अत्यन्त सुदूर अतीत में बुद्ध सुमेध तपस्वी बनकर उत्पन्न हुए थे। उस समय उन्होंने दीपंकर बुद्ध में बड़ी निष्ठा दिखाई जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने उन्हें आगे चलकर बुद्ध होने का आशीर्वाद दिया। अनेक जन्मों तक विभिन्न शरीर धारण करते हुए सुमे ध तपस्वी की साधना चलती रही। अन्त में वेस्सन्तर राजा के रूप में शरीर त्याग कर वे तुषित लोक में गये। सुमेध तपस्वी के रूप से लेकर तुषित लोक में जाने तक की बुद्ध की यह साधना कथा दूर निदान के अन्तर्गत है। 547 जातक कथाएँ अपण्णक जातक से लेकर वेस्सन्तर जातक तक बुद्ध जीवनी के इस दूरे निदान से ही सम्बन्धित है। इन कथाओं से यहाँ तात्पर्य है इनमें वर्णित अतीतवत्थु। इनका सम्बन्ध बुद्ध की जीवन-कथा के दूरे निदान से है अर्थात् ये बहुत दूर अतीत की कथाएँ हैं। लुम्बिनी वन में जन्म लेने के समय से लेकर बोधि-प्राप्ति तक की कथा अविदूरे निदान से सम्बन्धित है। अर्थात वह इतने दूर अतीत की नहीं है। बोधि प्राप्ति से लेकर निर्वाण प्राप्ति तक की बुद्ध जीवनी सन्तिके निदान के अन्तर्गत है। अर्थात वह समीप की है। जातक की पच्चुप्पन्नवत्थु में इसके कुछ अंश प्रस्तावना रूप में आते हैं। जातक की कहानियों में अतीतवत्थ में बुद्ध जीवनी के दूरे निदान के अन्दर समाविष्ट उनके पूर्व जन्मों की कहानियाँ आती है। ऐतिहासिक बुद्ध के जीवन की किसी घटना का उल्लेख कर इन दूरे निदान की कथाओं के कहने के लिए अवकाश निकाल लिया गया है। जो हो वास्तव में जातक का निर्माण करती है।
प्रत्येक जातक के पाँच अंगों के उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि जातक गद्य-पद्य मिश्रित रचनाएँ हैं। गाथा (पद्य) भाग जातक का प्राचीनतम भाग माना जाता है। त्रिपिटक के अन्तर्भूत इस गाथा भाग को ही मानना अधिक उपयुक्त होगा। शेष सब [[अट्टकथा|अट्ठकथा]] है। परन्तु जातक-कथाओं की प्रकृति ऐसी है कि मूल को व्याख्या से अलग कर देने पर कुछ भी समझ में नहीं आ सकता। केवल गाथाएँ कहानी का निर्माण नहीं करती। उनके ऊपर जब वर्तमान और अतीत की घटनाओं को ढाँचा चढ़ाया जाता है तभी कथावस्तु का निर्माण होता है। अतः पूरे जातक में उपर्युक्त पाँच अवयवों का हाना आवश्यक है जिसमें गाथा-भाग को छोड़कर शेष सब उसकी व्याख्या है बाद का जोड़ा हुआ है। फिर भी सुविधा के लिए और ऐतिहासिक दृष्टि से गलत ढंग पर हम उसकों जातक कह देते हैं। वास्तव में 547 जातक कथाओं के संग्रह को जो उपर्युक्त पाँच अंगों से समन्वित है, हमें जातक न कहकर जातकट्ठवण्णना (जातक के अर्थ की व्याख्या) या जातकटठकथा ही कहना चाहिए। फॉसबाल और कॉवल ने जिसका क्रमशः रोमन लिपि में और अंग्रेजी में सम्पादन और अनुवाद किया है या हिन्दी में भदन्त आनन्द कौसल्यायन ने ‘जातक’ शीर्षक से 6 भागों में अनुवा द किया है, वह वास्तव में जातक न होकर जातक की व्याख्या है। जातक कथाएँ तो मूल रूप में केवल गाथाएँ है, शेष भाग उसकी व्याख्या है।
गाथा और जातक के शेष भाग का कालक्रम आदि की दृष्टि से क्या पारस्परिक सम्बन्ध है यह प्रश्न सामने आता है। अटठ्कथा में गाथा-भाग को अभिसम्बुद्ध गाथा या भगवान् बुद्ध द्वारा भाषित गाथाएँ कहा गया है। वे बुद्धवचन हैं। अतः वे तिपिटक के अंगभूत थी और उनकों वहाँ से संकलित कर उनके ऊपर कथाओं का ढाँचा प्रस्तुत किया गया है। सम्पूर्ण जातक ग्रन्थ की विषयवस्तु का जिस आधार पर वर्गीकरण हुआ है, उससे भी यही स्पष्ट है कि गाथा-भाग, या जिसे पिण्टरनित्ज आदि विद्वानों ने गाथा-जातक कहा है, वहीं उसका मूलाधार है। जातक ग्रन्थ का वर्गीकरण विषय-वस्तु के आधार पर न होकर गाथाओं की संख्या के आधार पर हुआ है। थेर-थेरी गाथाओं के समान वह भी निपातों में विभक्त है। जातक में 22 निपात हैं। पहले निपात में 150 ऐसी कथाएँ है जिनमें एक की एक गाथा पाई जाती है। दूसरे निपात में भी 150 जातक कथाएँ है किन्तु यहाँ प्रत्येक कथा में दो-दो गाथाएँ पाई जाती हैं। इसी प्रकार तीसरे और चौथे निपात में पचास-पचास कथाएँ है और गाथाओं की संख्या क्रमशः तीन-तीन और चार-चार है। आगे भी तेरहवें निपात तक प्रायः यही क्रम चलता है। चौदहवें निपात का नाम पकिण्णक निपात है। इस निपात में गाथाओं की संख्या नियमानुसार 14 न होकर विविध है। इसलिए इसका नाम पकिण्णक (प्रकीर्णक) रख दिया गया है। इस निपात में कुछ कथाओं में 10 गाथाएँ भी पाई जाती है और कुछ में 47 तक भी पाई जाती है। आगे के निपातों में गाथाओं की संख्या निरन्तर बढ़ती गई है। पन्द्रहवें निपात का शीर्षक है वीस निपात, सोलहवें का तिंस निपात, सत्रहवें का चत्तालीस निपात, अट्ठारहवें का पण्णास निपात ,उन्नीसवें का सठ्ठि निपात, बीसवें का सत्ततिनिपात और इक्कीसवें का असीतिनिपात। बाइसें निपात में केवल दस जातक कथाएँ है किन्तु प्रत्येक में गाथाओं की संख्या सौ से भी ऊपर है। अन्तिक जातक (वेस्सन्तर जातक) में तो गाथाओं की संख्या सात सौ से भी ऊपर है।
इन सबसे यह निष्कर्ष निकलता है कि जातक कथाओं की आधार गाथाएँ ही है। स्वयं अनेक जातक कथाओं के वेय्याकरण भाग में पालि और अट्ठकथा के बीच भेद दिखाया गया है, जैसे कि पलि सुत्तों की अन्य अनेक अट्ठकथाओं तथा विसुद्धिमग्गों आदि ग्रन्थों में भी। जहाँ तक जातक के वेय्याकरण भाग से सम्बन्ध है, वहाँ पालि का अर्थ तिपिटक गत गाथा ही हो सकता है। भाषा के साक्ष्य से भी गाथा भाग अधिक प्राचीनता का द्योतक है अपेक्षाकृत गद्य भाग के। पिण्टरनित्ज ने कहा है जातक की सम्पूर्ण गाथाओं को तिपिटक का मूल अंश नहीं माना जा सकता है। उनमें भी पूर्वापर भेद है। स्वयं जातक के वर्गीकरण से ही यह स्पष्ट है। चौदहवें निपात (पकिण्णक निपात) में प्रत्येक जातक कथा की गाथाओं की संख्या नियमानुसार 14 न होकर कही-कहीं बहुत अधिक है। इसी प्रकार बीसवें निपात (सत्तति निपात) में उसकी दो जातक कथाओं की संख्या सत्तर-सत्तर न होकर क्रमशः 92 और 93 है। इस सबसे यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जातक का गाथाओं अथवा गाथा जातक की मूल संख्या निपात के शीर्षक की संख्या के अनुकूल ही होगी। और बाद में उसका संवर्द्धन किया गया है। अतः कुछ गाथा एँ अधिक प्राचीन है और कुछ अपेक्षाकृत कम प्राचीन है। इसी प्रकार गद्य भाग भी कुछ अत्यन्त प्राचीनता के लक्षण लिए हुए है और कुछ अपेक्षाकृत अर्वाचीन है। किसी-किसी जातक में गद्य और गाथा भाग में साम्य भी नहीं दिखाई पड़ता और कही-कहीं शैली में भी बड़ी विभिन्नता है। इस सबसे जातक के संकलनात्मक रूप और उसके भाषारूप की विविधता पर प्रकाश पड़ता है जिसमें कई रचयिताओं या संकलनकर्ताओं और कई शताब्दियों का योग रहा है।
जातक की गाथाओं की प्राचीनता तो निर्विवाद है ही, उसका अधिकांश गद्य भाग भी अत्यन्त प्राचीन है। [[भरहुत]] और [[साँची का स्तूप|साँची]] के स्तूपों की पाषाण वेष्टनियों पर जो चित्र अंकित है वे जातक के गद्य भाग से ही सम्बन्धित हैं। अतः जातक का अधिकांश गद्य-भाग जो प्राचीन है, तृतीय, द्वितीय शताब्दी ईसवी पूर्व में इतना लोकप्रिय तो होना हीं चाहिए कि उसे शिल्प कला का आधार बनाया जा सके। अतः सामान्यतः हम जातक को बुद्धकालीन [[भारत]]<nowiki/>ीय समाज और संस्कृति का प्रतीक मान सकते हैं। उसमें कुछ लक्षण और अवस्थाओं के चित्रण प्राग-बुद्धकालीन भारत के भी हैं और कुछ बुद्ध के काल के बाद के भी है। जहाँ तक गाथाओं की व्याख्या और उनके शब्दार्थ का सम्ब न्ध है, वह सम्भवतः जातक का सब से अधिक अर्वाचीन अंश है। इस अंश के लेखक आचार्य बुद्ध घोष माने जाते है। ‘गन्धवंस’ के अनुसार आचार्य [[बुद्धघोष]] ने ही ‘जातकट्ठण्णना’ की रचना की, किन्तु यह सन्दिग्ध है। भाषाशैली की भिन्नता दिखाते हुए और कुछ अन्य निषेधात्मक कारण देते हुए डॉ॰ टी. डब्ल्यू रायस डेविड्स ने बुद्धघोष को जातकट्ठवण्णना का रचयिता या संकलनकर्ता नहीं माना है। स्वयं जातकट्ठकथा के उपोद्घात में लेखक ने अपना परिचय देते हुए कहा है ‘‘ ....शान्तचित्त पण्डित बुद्धमित्त भिक्षु बुद्धदेव के कहने से ........ व्याख्या करूँगा। महिशासक सम्प्रदाय महाविहार की परम्परा से भिन्न एक बौद्ध सम्प्रदाय था। बुद्धघोष ने जितनी अट्ठकथाएँ लिखी है, शुद्ध महाविहारवासी भिक्षुओं की उपदेश विधि पर आधारित हैं। अतः जातकट्ठकथा के लेखक को आचार्य [[बुद्धघोष]] से मिलाना ठीक नहीं। सम्भवतः यह कोई अन्य सिंहली भिक्षु थे, जिनका काल पाँचवीं शताब्दी ईसवी माना जा सकता है।
==कुछ जातकों का संक्षिप्त परिचय==
जातक-कथाएँ भगवान बुद्ध के पूर्वजन्मों से सम्बन्धित हैं। बोधिसत्व की चर्याओं का उनमें वर्णन है। अतः वे सभी प्रायः उपदेशात्मक है। परन्तु उनका साहित्यिक रूप भी निखरा हुआ है। उपदेशात्मक होते हुए भी वे पूरे अर्थों में कलात्मक है। जातक के आदि में निदान-कथा (उपोद्घात) है, जिसमे भगवान् बुद्ध के पहले 24 बुद्धों के विवरण के साथ-साथ भगवान गौतम बुद्ध की जीवनी लेतवन विहार के दान की स्वीकृति तक दी गई है। कुछ जातक कथाओं का सारांश तथा उनकी विषय-वस्तु का रूप निम्नलिखित इस प्रकार स्पष्ट है।
'''अपण्णक जातक''' व्यापार के लिए जाते हुए दो बनजारों की कथा है। एक दैत्यों के हाथ मारा गया, दूसरा बुद्धिमान होने के कारण अपने पाँच सौ साथियों सहित सकुशल घर लौट आया।
'''कण्डिन जातक''' (कण्डि जातक-13) कामुकता के कारण एक मृग शिकारी के हाथों मारा गया।
'''मखादेव जातक''' (9) - सिर के सफेद बाल देखकर राजा सिंहासन छोड़ कर वन चला गया।
सम्मोदमान जातक (33) - एक मत बटेरों का चिड़ीमार कुछ न बिगाड सका, परन्तु जब उनमें फूट पड़ गई तो सभी चिड़िमार के जाल में फँस गये।
तित्तिर जातक (37)-बन्दर, हाथी और तित्तिर ने आपस में विचार कर निश्चय किया कि जो ज्येष्ठ हो उसका आदर करना चाहिए।
बक जातक (9)-बगुले ने मछलियों को धोखा दे देकर एक-एक को ले जाकर मार खाया। अंत में वह एक केकड़े के हाथ से मारा गया।
कण्ह जातक (29)-एक बैल ने अपनी बु़ढ़ या माँ को जिसने उसे पाला था, मजदूरी से कमाकर हक हजार कार्षापण ला कर दिये।
वेकुक जातक (43) - तपस्वी ने साँप के बच्चे को पाला जिसने उसे डँस कर मार डाला।
रोहिणी जातक (45)-रोहिणी नामक दासी ने अपनी माता के सिर की मक्खियाँ हटाने के लिए जाकर माता को मार डाला।
वानरिन्द जातक (57)-मगरमच्छ अपनी स्त्री के कहने से वानर का हृदय चाहता था। वानर अपनी चतुरता से बच निकला।
कुद्दाल जातक (70)-कुद्दाल पंडित कुद्दाल के मोह में पड़कर छह बार गृहस्थ और प्रव्रजित हुआ।
सीलवनागराज जातक (72)-वन में रास्ता भूले हुए एक आदमी की हाथी ने जान बचाई।
खरस्सर जातक (79)-गाँव का मुखिया चोरों से मिलकर गाँव लुटवाता था।
नामसिद्धि जातक (97)-पापक नामक विद्यार्थी एक अच्छे नाम की तलाश में बहुत घूमा। अन्त में यह समझकर कि नाम केवल बुलाने के लिए होता है वह लौट आया।
अकालरावी जातक (119)-असमय शोर मचाने वाला मुर्गा विद्यार्थियों द्वारा मार डाला गया।
विळारवत जातक (128)- धर्म का ढोंग कर गीदड़ चूहों को खाता था।
गोध जातक (141)-गोह की गिरगिट के साथ मित्रता उसके कुल विनाश का कारण हुई।
विरोजन जातक (143)-गीदड़ ने शेर की नकल करके पराक्रम दिखाना चाहा। हाथी ने उसे पाँव से रौंद कर उस पर लीद कर दी।
गुण जातक (157)-दलदल में फसे सिंह को सियार ने बाहर निकाला।
मक्कट जातक (173)-बन्दर तपस्वी का वेश बना कर आया।
आदिच्चुपट्ठान जातक (175)-बन्दर ने सूर्य की पूजा करने का ढोंग बनाया।
कच्छप जातक (178)-जन्मभूमि के मोह के कारण कछुए की जान गई।
गिरिदत्त जातक(184) -शिक्षक के लँगड़ा होने के कारण घोड़ा लँगड़ा कर चलने लगा।
सीहचम्म जातक (189)-सिंह की खाल पहनकर गधा खेत चरता रहा, किन्तु बोलने पर मारा गया।
महापिंगल जातक (240)-राजा मर गया फिर भी द्वारपाल को भय था कि अत्याचारी राजा यमराज के पास से कहीं लौट न आवे।
आरामदूसक जातक (46 तथा 28)-बन्दरों ने पौधों को उखाड़ कर उनकी जड़ें नाप-नाप पर पानी सींचा।
कुटिदूसक जातक (321)-बन्दर ने बये के सदुपदेश को सुन कर उसका घोसलां नोच डाला।
बावेरू जातक (339)-बावेरू राष्ट्र में कौआ सौ कार्षापण में और मोर एक हजार कार्षापण में बिका।
वानर जातक (342)-मगरमच्छनी ने बन्दर का हृदय-मांस खाना चाहा।
सन्धिभेद जातक - गीदड़ ने चुगली कर सिंह और बैल को परस्पर लड़वा दिया आदि आदि।
==कथावस्तु एवं शैली==
जातक कथाओं का रूप लोक-साहित्य का है। उसमें पशु-पक्षियों आदि की कथाएँ भी है और मनुष्यों की भी है। जातकों के कथानक विविध प्रकार के हैं। [[विण्टरनित्ज]] ने मुख्यतः सात भागों मेंं उनका वर्गीकरण किया है-
*1. व्यावहारिक नीति-सम्बन्धी कथाएँ
*2. पशुओं की कथाएँ
*3. हास्य और विनोद से पूर्ण कथाएँ
*4. रोमांचकारी लम्बी कथाएँ या उपन्यास
*5. नैतिक वर्णन
*6. कथन मात्र, और
*7. धार्मिक कथाएँ
वर्णन की शैलियाँ भी भिन्न-भिन्न है। विण्टरनित्ज ने इनका वर्गीकरण पाँच भागों में इस प्रकार किया है।
*1. गद्यात्मक वर्णन
*2. आख्यान, जिसके दो रूप हैं-
:* (अ) संवादात्मक, और
:* (आ) वर्णन और संवादों का सम्मिश्रित रूप।
*3. अपेक्षाकृत लम्बे विवरण-जिनका आदि गद्य से होता है, किन्तु बाद में जिनमें गाथाएँ भी पाई जाती है।
*4. किसी विषय पर कथित वचनों का संग्रह
*5. [[महाकाव्य]] या [[खण्डकाव्य]] के रूप में वर्णन।
वानरिन्द जातक(57) विलारवत जातक(128) , सीहचम्म जातक(189), सुंसुमार जातक(208), और सन्धिभेद जातक(349) आदि। जातक कथाएँ पशु-कथाएँ है। ये कथाएँ अत्यधिक महत्वपूर्ण है। विशेषतः इन्हीं कथाओं का गमन विदेशों में हुआ है। व्यंग्य का पुट भी यहाँ अपने काव्यात्मक रूप से दृष्टिगोचर होता है। प्रायः पशुओं की तुलना में मनुष्यों को हीन दिखाया गया है। एक विशेष बात यह है कि व्यंग्य किसी व्यक्ति पर न कर सम्पूर्ण जाति पर किया गया है।
एक बन्दर कुछ दिनों के लिए मनुष्यों के बीच आकर रहा। बाद में अपने साथियों के पास जाता है। साथी पूछते है-‘‘मनुष्यों के समाज में रहे है। उनका बर्ताव जानते हैं। हमें भी कहें। हम उसे सुनना चाहते हैं।‘‘ मनुष्यों की करनी मुझसे मत पूछो। कहे, हम सुनना चाहते हैं। बन्दर ने कहना शुरू किया,‘‘ हिरण्य मेरा! सोना मेरा! यही रात दिन वे चिल्लाते है। घर में दो लोग रहते हैं। एक को मूँछ नहीं होती। उसके लम्बे केश होते है, वेणी होती है और कानों में छेद होते हैं। उसे बहुत धन से खरीदा जाता है। वह सब जनों को कष्ट देता है।‘‘ बन्दर कह ही रहा था कि उसके साथियों ने कान बन्द कर लिए‘‘ मत कहें मत कहें‘‘। इस प्रकार के मधुर और अनूठे व्यंग्य के अनेकों चित्र जातक में मिलेगें। विशेषतः मनुष्य के अहंकार के मिथ्यापन के सम्बन्ध में मर्मस्पर्शी व्यंग्य। महापिंगल जातक(240) में, ब्राह्मणों की लोभवृत्ति के सम्बन्ध में सिगाल जातक(113) में एक अति बुद्धिमान तपस्वी के सम्बन्ध में, अवारिय जातक (376)में है। सब्बदाठ नामक श्रृंगाल सम्बन्धी हास्य और विनोद भी बड़ा मधुर है (सब्बदाठ जातक 241) और इसी प्रकार मक्खी हटाने के प्रयत्न में दासी का मूसल से अपनी माता को मार देना (रोहिणी जातक 45) और बन्दरों का पौधों का उखाड़ कर पानी देना भी मधुर विनोद से भरे हुए हैं।
इसी प्रकार रोमांच के रूप में महाउम्मग्ग जातक (546) आदि नाटकीय आख्यान के रूप में छदन्त जातक (514) आदि, एक ही विषय पर कहे हुए कथनों के संकलन के रूप में कुणाल जातक (536) आदि, संक्षिप्त नाटक के रूप में उम्मदन्ती जातक (527) आदि, नीतिपरक कथाओं के रूप में गुण जातक (157) आदि, पूरे महाकाव्य के रूप में पेस्सन्तर जातक (547) आदि एवं ऐतिहासिक संवादों के रूप में संकिच्च जातक (530) और महानारदकस्सप जातक (544) आदि। अनेक प्रकार के वर्णनात्मक आख्यान जातक में भरे पड़े हैं, जिनकी साहित्यिक विशेषताओं का उल्लेख यहाँ अत्यन्त संक्षिप्त रूप में भी नहीं किया जा सकता।
==साहित्य और सभ्यता के इतिहास में जातक का स्थान==
बुद्धकालीन भारत के समाज, धर्म, राजनीति, भूगोल, लौकिक विश्वास, आर्थिक एवं व्यापारिक अवस्था एवं सर्वाधिक जीवन की पूरी सामग्री हमें जातक में मिलती है। जातक केवल लोक-कथाओं का प्राचीनतम संग्रह भर नहीं हैं। बौद्ध साहित्य में तो उसका स्थान सर्वमान्य है ही। स्थविरवाद के समान महायान में भी उसकी प्रभूत महत्ता है, यद्यपि उसके रूप के सम्बन्ध में कुछ थोड़ा बहुत परिवर्तन है। बौद्ध साहित्य के समान समग्र भारतीय-साहित्य में और इतना ही नहीं, समग्र विश्व-साहित्य में जातक का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसी प्रकार भारतीय सभ्यता के एक युग का ही वह निदर्शक नहीं है, बल्कि उसके प्रसार की एक अद्भूत गाथा भी जातक में समाये हुए हैं। विशेषतः भारतीय इतिहास में जातक के स्थान को कोई दूसरा ग्रन्थ नहीं ले सकता। बुद्धकालीन भारत के सामाजिक आर्थिक, राजनैतिक जीवन को जानने के लिए जातक एक उत्तम साधन हैं। चूँकि उसकी सूचना प्रासंगिक रूप से ही दी गई है इसलिए वह और भी अधिक प्रामाणिक हैं और महत्वपूर्ण भी। जातक के आधार पर यहाँ बुद्धकालीन भारत का संक्षिप्ततम विवरण भी नहीं दिया जा सकता। जातक की निदान-कथा में हम तत्कालीन भारतीय भूगोल सम्बन्धी महत्वपूर्ण सूचना पाते हैं। जातक में कहा गया है कि जम्बुदीप (भारत) का विस्तार दस हजार योजन है। [[मध्य प्रदेश]] की सीमाओं का उल्लेख वहाँ इस प्रकार किया गया है,‘‘मध्य देश की पूर्व दिशा में कजंगला नामक कस्बा है, उसके बाद बड़े शाल के वन है औ र फिर आगे सीमान्त देश। पूर्व-दक्षिण में सललवती नामक नदी है उसके आगे सीमान्त देश। दक्षिण-दिशा में सेतकण्णिक नामक कस्बा है, उसके आगे सीमान्त देश। पश्चिम दिशा में थूण नामक ब्राह्मण ग्राम है, उसके बाद सीमान्त देश। उत्तर दिशा में उशीरध्वज नामक पर्वत है, उसके बाद सीमान्त देश।‘‘
यह वर्णन यहाँ विनय-पिटक से लिया गया है और बुद्ध कालीन मध्य देश की सीमाओं का प्रामाणिक परिचायक माना जाता है। जातक के इसी भाग में नेरंजना अनोमा आदि नदियों, पाण्डव पर्वत, वैभार गिरि गयासीस आदि पर्वतों उरूवेला, कपिलवस्तु, वाराणसी, रा जगृह, लुम्बिनी, वैशाली, श्रावस्ती आदि नगरों और स्थानों एवं उत्कल देश (उड़ीसा) का तथा यष्टिवन (लटिठवन) आदि वनों का उल्लेख मिलता है। सम्पूर्ण कोसल और मगध का तो उसके ग्रामों, नगरों, नदियों, और पर्वतों के सहित वह पूरा वर्णन उपस्थित करता है। सोलह महाजनपदों- अंग, मगध, काशी, कोसल, वज्जि, मल्ल, चेदि, वत्स, कुरू, पांचाल, मच्छ (मत्स्य),सूरसेन (शूरसेन), अस्सक (अश्मक), अवन्ती, गन्धार और कम्बोज का विस्तृत वर्णन हमें असम्पादन जातक में मिलता है।<ref>अंगुत्तर निकाय पृष्ठ संख्या-129 (सोलह महाजपदों का नाम) पालि साहित्य का इतिहास भरत सिंह उपाध्याय</ref>
महासुतसोम जातक (537) में कुरू देश का विस्तार 300 योजन बताया गया है। इसी प्रकार धूमकारि जातक (413) तथा दस ब्राह्मण जातक (415) में कहा गया है कि युधिष्ठिर गोत्र के राजा का उस समय वहाँ राज्य था। कुरु देश की राजधानी इन्द्रप्रस्थ का विस्तार सात योजन महासुतसोम जातक (537) तथा विधुर पण्डित जातक (545) में दिया गया है। धनंजय कोरव्य और सुतसोम आदि कुरू-राजाओं के नाम कुरूधम्म जातक (276), धूमकारि जातक (413), सम्भव जातक (515) और विधुर पंडित जातक (545) में आते है। उत्तर पंचाल के लिए कुरू और पंचाल वंशों में झगड़ा चलता रहा, इसकी सूचना हम चम्पेय्य जातक (506) तथा अन्य अनेक जातकों मेंं पाते हैं। कभी वह कुरू राष्ट्र में सम्मिलित हो जाता था (सोमनस्स जातक 415) और कभी कम्पिल्ल राष्ट्र में भी, जिसका साक्ष्य ब्रह्मदत्त जातक (323), चयद्दिस जातक (513) और गण्डतिन्दु जातक (520) में विद्यमान है। पंचाल राज दुर्मख निमि का समकालिक था, इसकी सूचना हमें कुम्भकार जातक में मिलती है। अस्सक (अश्मक) राष्ट्र की राजधानी पोतन या पोतलि का उल्लेख हमें चुल्लकालिंग जातक (301)में मिलता है। मिथिला का विस्तार सुरूचि जातक (489) और गन्धार जातक (406) में सात योजन बताया गया है। महाजनक जातक (539) में मिथिला का बड़ा सुन्दर वर्णन उपलब्ध होता है जिसकी तुलना महाभारत 3.206.6-9 से की जाती है। सागल नगर का वर्णन कालिंगबोधि जातक (479) और कुस जातक (531) में है। काशी राज्य के विस्तार का वण र्न धजविदेह जातक (391) में है। उसकी राजधानी वाराणसी के केतुमती, सुरून्धन, सुदस्सन, ब्रह्मवड्ढन, पुप्फवती, रम्मनगर और मोलिनी आदि नाम थे। ऐसा साक्ष्य अनेक जातकों में मिलता है। तण्डुलनालि जातक (5) में वाराणसी के प्राकार का वर्णन है। तेलपत्त जातक (96) और सुसीम जातक (163) में वाराणसी से तक्षशिला की दूरी 2000 योजन बताई गई है। कुम्भकार जातक (408) में गन्धार के राजा नग्गजि या नग्नजित् का वर्णन है। कुस जातक (531) में मल्लराष्ट्र और उसकी राजधानी कुसावती या कुसिनारा का वर्णन है। चम्पेय्य जातक (506) में अंग और मगध के संघर्ष का वर्णन है। इसी प्रकार रूक्खधम्म जातक और फन्दन जातक में शाक्य और कोलियों के रोहिणी नदी के पानी को लेकर झगड़े का वर्णन है। वत्स राज्य और उसके अधीन भग्ग् राज्य की सूचना धोनसाख जातक (353) में मिलती है। इन्द्रिय जातक में सुरट्ठ अवन्ती, दक्षिणापथ, दंडकवन कुम्भवति नगर आदि का वर्णन है। संरभग जातक में सुरट्ठ देश का वर्णन है।
सालित्तक जातक और कुरूधम्म जातक से हमें पता चलता है कि अचिरवती नदी श्रावस्ती में होकर बहती थी। सरभंग जातक में गोदावरी नदी का भी उल्लेख है और उसे कविट्ठ वन के समीप बताया ग या है। गन्धार जातक में कश्मीर गन्धार का उल्लेख है। कण्ह जातक में संकस्स (संकाश्य) का उल्लेख है। चम्पेय्य जातक से हमें सूचना मिलती है कि चम्पा नदी अंग और मगध जनपदों की सीमा पर होकर बहती थी। गंगमाल जातक में गन्धमादन पर्वत का उल्लेख है। बिम्बिसार सम्बन्धी महत् वपूर्ण सूचना जातकों में भरी पड़ी है। महाकोसल की राजकुमारी कोसलादेवी के साथ उसके विवाह का वर्णन और काशी गाँव की प्राप्ति का उल्लेख हरितमात जातक (239) और बड्ढकि सूकर जातक(283) में है। मगध और कोसल के संघर्षों का और अन्त में उनकी एकता का उल्लेख बड्ढकिसूकर जातक, कुम्मासपिंड जातक, तच्छसूकर जातक और भद्दसाल जातक आदि अनेक जातकों में है। इस प्रकार बुद्धकालीन राजाओं राज्यों, प्रदेशों, जातियों, ग्रामों, नगरों, नदियों, पर्वतों आदि का पूरा विवरण हमें जातकों में मिलता है। तिलमुट्ठि जातक (252) में ह में तक्षशिला विश्वविद्यालय का एक उत्तम चित्र मिलता है। संखपाल जातक (524) और दरीमुख जातक (378) में मगध के राजकुमारों के तक्षशिला में शिक्षार्थ जाने का उल्लेख है। तक्षशिला में शिक्षा के विधान, पाठ्यक्रम, अध्ययन विषय, उनके व्यावहारिक और सैद्धान्तिक पक्ष, निवास भोजन, नियन्त्रण आदि के विषय में पूरी जानकारी हमें जातकों में मिलती है। वाराणसी राजगृह, मिथिला, उज्जयिनी श्रावस्ती, कौशाम्बी तक्षशिला आदि प्रसिद्ध नगरों को मिलाने वाले मार्गों का तथा स्थानीय व्यापार का पूरा विवरण हमें जातकों में मिलता है। काशी से चेदि जाने वाली सड़क का उल्लेख वेदब्भ जातक (48)में है। क्या-क्या पेशे उस समय लोगों में प्रचलित थे, कला और दस्तकारी की क्या अवस्था थी तथा व्यवसाय किस प्रकार होता था, इसके अनेक चित्र हमें जातकों में मिलते हैं। बावेरू जातक (339) और सुसन्धि जातक (360) से हमें पता लगता है कि भारतीय व्यापार विदेशों से भी होता था और भारतीय व्यापारी सुवर्णभूमि (बरमा से मलाया तक का प्रदेश) तक व्यापार के लिए जाते थे। भरूकच्छ उस समय एक प्रसिद्ध बन्दरगाह था। सुसन्धि जातक में हमें इसका उल्लेख मिलता है।
जल के मार्गों का भी जातकों में स्पष्ट उल्लेख है। लौकिक विश्वासों आदि के बारे में देवधम्म जातक (6) और नलपान जातक (20) आदि में समाज में स्त्रियों के स्थान के सम्बन्ध में अण्डभूत जातक (62) आदि में दासों आदि की अवस्था के सम्बन्ध में कटाहक जातक (125) आदि में, सुरापान आि द के सम्बन्ध में सुरापान जातक (81) आदि में, यज्ञ में जीव हिंसा के सम्बन्ध में दुम्मेध जातक (50) आदि में, व्यापारिक संघों और डाकुओं के भय आदि के सम्बन्ध में खुरप्प जातक (265) और तत्कालीन शिल्पकला आदि के विषय में महाउम्मग्ग जातक (546) आदि में प्रभूत सामग्री भरी पड़ी है, जिसका यहाँ विवरण देना अत्यन्त कठिन है। जिस समय का जातक में चित्रण है, उसमें वर्ण व्यवस्था प्र्रचलित थी। ब्राह्मणों का समाज में उच्च स्थान था। ब्राह्मण और क्षत्रिय ये दो वर्ण उच्च माने जाते थे। दासों की प्रथा प्रचलित थी, उनके साथ दुर्व्यवहार के भी उदाहरण मिलते हैं, दास क्रीत भी होते थे, और पितृक्रमागत भी होते थे। विशेष अवस्थाओं में दास मुक्त भी कर दिये जाते थे। बुद्ध काल में जाति पेशे की सूचक नहीं थी। जातक कहानियों से पता चलता है कि किसी भी समय एक पेशे को छोड़कर कोई व्यक्ति दूसरा पेशा कर सकता था और इसमें उसकी जाति बाधक नहीं होती थी। विवाह-सम्बन्ध प्रायः समान जातियों और कुलों (सामाजिक कुल) में अच्छे माने जाते थे। उत्सवों में पुरुषों के साथ स्त्रियाँ भी सम्मिलित होती थीं अनेक प्रकार के उत्सव बुद्ध काल में होते रहते थे और उ नमें मांस मछली के भोजन के साथ-साथ सुरापान भी चलता था। स्त्रियों के सदाचार को अक्सर जातक की कहानियों में संशय की दृष्टि से देखा गया है। कहा गया है कि सत्य का होना उनमें सुदुर्लभ ही है। ‘‘सच्च तेसं सुदुल्लभं‘‘ परन्तु भार्या के रूप में स्त्री की प्रशंसा की गइ र् है और उसे परम सखा बताया गया है, ‘‘भरिया नाम परमा सखा‘‘।
शिल्पों का समाज में आदर था। वेश्याओं के प्रभूत वर्णन जातक में मिलते है, इस समय यह प्रथा विद्यमान थी। इसी प्रकार द्यूत का व्यसन भी प्रचलित था। विधुर पंडित जातक में हम धनंजय कोरव्य को जुआ खेलते देखते है। शासन में रिश्वत चलती थी। कणवेर जातक में हम एक कोतवाल को रिश्वत लेते देखते हैं। शकुनों में और फलित ज्योतिष में लोगों का विश्वास था। छींक आने को अपशकुन मानते थे और जब कोई छींकता था तो उससे लोग कहते थे ‘जियो’ या ‘चिंरजीव होओ’। सत्य क्रिया (सच्च किरिया) में लोगों का विश्वास था। मूगपक्ख जातक में हम देखते है कि काशिराज की रानी ने सत्य क्रिया के बल से सन्तान प्राप्त की। इसी प्रकार बट्टक जातक में कहा है कि एक बटेर के बच्चे ने अपने सत्य क्रिया बल से वृक्ष में लगी आग को बुझा दि या। वयः प्राप्त कुमारिकाओं को अपना वर खोजने की स्वतन्त्रता थी, ऐसा अम्ब जातक से पता चलता है। संकिच्च जातक में पत्नी को धनक्कीता कहा गया है। इससे पता चलता है कि कुछ विशेष अवस्थाओं में पति को कन्या के पिता को धन भी देना पड़ता था। उदय जातक से भी ऐसा ही मालूम पड़ता है।
जहाँ तक धार्मिक अवस्था का सम्बन्ध है, एक प्रकार का लोक-धर्म प्रचलित था। लोग यक्षों, वृक्षों, नागों, गरुड़ों और नदियों की पूजा करते थे। एक स्त्री को जो अपने पति से विछुड़ गई है, हम भागीरथी गंगा की स्तुति करते और उसकी शरण में जाते देखते हैं। परन्तु इससे यह निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं कि एक प्रकार का भाग वत् धर्म लोगों में प्रचलित था। गोकुलदास दे ने इस बात को दिखाने का बड़ा प्रयास किया है, कि धर्म का जो स्वरूप जातककालीन समाज में हम देखते हैं उसमें भागवत धर्म के तत्व विद्यमान हैं। जातककालीन समाज में एक प्रकार का लोकधर्म प्रचलित था। जिसमें साधारण जन-समाज के विश्वास और उसकी विभिन्न लौकिक और आध्यात्मिक आवश्यकताएँ समतल पर प्रतिबिम्बित थी। अर्थात पूजा, वन्दना, दान, देवताओं की शरणागति आदि की भावनाएँ प्रधान थी। जातक वस्तुतः प्राचीन भारतीय सामाजिक जीवन सम्बन्धी सूचनाओं का अगाध भण्डार ही हैं और उनका समग्रतया अध्ययन पालि साहित्य के इतिहास लेखक के लिए सम्भव नहीं है। यह अनेक महाग्रन्थों का विषय है।
बौद्ध धर्म के सभी सम्प्रदायों में जातक का महत्व सुप्रतिष्ठित है। महायान और हीनयान को वह एक प्रकार से जोड़ने वाली कड़ी है, क्योंकि महायान का बोधिसत्व आदर्श यहाँ अपने बीज-रूप में विद्यमान है। दूसरी-तीसरी शताब्दी ईसवी पूर्व के साँची और भरहुत के स्तूपों में जातक के अनेक दृश्य अंकित है। मिलिन्दपंहां में अनेक जातक कथाओं को उद्धृत किया गया है। अमरावती स्तूप द्वितीय शताब्दी ईसवी में उसके चित्र अंकित है। पाँचवी शताब्दी में लंका में उसके 500 दृश्य अंकित किये जा चुके थे। अजन्ता की चित्रकारी में भी महिस जातक (278) अंकित है। बोध गया में भी उसके अनेक चित्र अंकित है। जावा के बोरोबदूर स्तूप 9वीं शताब्दी ईसवी में बरमा के पगान नगर में स्थित पेगोडाओं (13 वीं शताब्दी ईसवी) में और सिआम में सुखोदय नामक प्राचीन नगर में जातक के अनेक दृश्य चित्रित मिले हैं। अतः जातक का महत्व भारत में ही नहीं, भारत के बाहर भी स्थविरवाद बौद्ध धर्म में ही नहीं बौद्ध धर्म के अन्य अनेक रूपों में भी प्रतिष्ठित है।
कालक्रम की दृष्टि से वैदिक साहित्य की [[शुनःशेप]] की कथा यम-यमी संवाद, पुरूरवा उर्वशी संवाद आदि कथानक ही बुद्ध पूर्व काल के हो सकते है। छान्दोग्य और बृहदारण्यक आदि कुछ उपनिष्दों की आख्यायिकाएँ भी बुद्ध पूर्व काल की मानी जा सकती है, और इसी प्रकार ऐतरेय और शतपथ ब्राह्मण के कुछ आख्यान भी बुद्ध पूर्व काल की माने जा सकते हैं। इनका भी जातकों से और सामान्यतः पालि सहित्य से घनिष्ठ सम्बन्ध है। तेविज्ज सुत्त में अट्टक, वामक, वामदेव, विश्वामित्र, यमदग्नि, अिं र्घैंरा, भारद्वाज, वशिष्ठ, काश्यप और भृगु इन दस मन्त्रकर्ता ऋषियों के नामों के साथ-साथ ऐतरेय ब्राह्मण, तैति्तरीय ब्राह्मण, छान्दोग्य ब्राह्मण और छन्दावा ब्राह्मण का भी उल्लेख हुआ है। मज्झिम निकाय के अस्सलायन सुत्तन्त के आश्वालायन ब्राह्मण को प्रश्न उपनिषद के आश्वलायन से मिलाया गया है। मज्झिम निकाय के आश्वालायन श्रावस्ती निवासी है और वेद-वेदा र्घैं में पार र्घैं त है। इसी प्रकार प्रश्न उपनिषद के आश्वालयन भी वेद वेदा र्घैं के महापंडित है और कौसल्य (कोसल निवासी) है। जातकों में भी वैदिक साहित्य के साथ निकट सम्पर्क के अनेक लक्षण पाये जाते है। उद्दालक जातक (487)में उद्दालक के तक्षशिला जाने और वहाँ एक लोक विश्रुत आचार्य की सूचना पाने का उल्लेख है। इसी प्रकार सेतुकेतु जातक में उद्दालक के पुत्र श्वेतुकेतु का कलाओं की शिक्षा प्राप्त करने के लिए तक्षशिला जाने का उल्लेख है। शतपथ ब्राह्मण के उद्दालक को हम उत्तरापथ में भ्रमण करते हुए देखते है। अतः इससे यह निष्कर्ष निकालना असंगत नहीं है कि जातकों के उद्दालक और श्वेतुकेतु ब्राह्मण ग्रन्थों और उपनिषदों के इन नामों के व्यक्तियों से भिन्न नहीं है। जर्मन विद्वान लूडर्स ने सेतुकेतु जातक(377) में आने वाली गाथाओं को वैदिक आख्यान और महाकाव्य युगीन काव्य को मिलाने वाली कड़ी कहा है, जो समुचित ही है। इसी प्रकार सिंहली विद्वान मललसेकर का कहना है कि जातक का सम्बन्ध भारतीय साहित्य की उस आख्यान-विधा से है, जिससे उत्तरकालीन महाकाव्यों का विकास हुआ है। रामायण और महाभारत के साथ जातक की तुलना करते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इन दोनों ग्रन्थों के सभी अंश बुद्ध पूर्व युग के नहीं है। रामायण के वर्तमान रूप में 2400 श्लोक पाये जाते हैं। रामायण में कहा भी गया है ‘चतुर्विंश सहस्राणि श्लोकानाम उक्त वान् ऋषिः। किन्तु बौद्ध महाविभाषा-शास्त्र (कात्यायनी पुत्र के ज्ञान प्रस्थान शास्त्र की व्याख्या) से सिद्ध है कि द्वितीय शताब्दी ईसवी में भी रामायण में केवल 12,000 श्लोक थे। रामायण 2-109-34 में बुद्ध तथागत का उल्लेख मिलता है। इसी प्रकार शक, यवन आदि के साथ संघर्ष का वर्णन है। किष्किन्धा काण्ड में सुग्रीव के द्वारा कुरू मद्र और हिमालय के बीच में यवनों औ र शकों के देश और नगरों को स्थित बताया गया है।
इससे सिद्ध है कि जिस समय में अंश लिखे गये थे, ग्रीक और सिथियन लोग पंजाब के कुछ प्रदेशों पर अपना आधिपत्य जमा चुके थे। अतः रामायण के काफी अंश महाराज बिम्बिसार या बुद्ध के काल के बाद लिखे गये। महा भारत में इसी प्रकार एडूकों (बौद्ध मन्दिरों) का स्पष्ट उल्लेख है। बौद्ध विशेषण चातुर्महाराजिक भी वहाँ आया है। रोमक (रोमन) लोगों का भी वर्णन है। इसी प्रकार सिथियन और ग्रीक आदि लोगों का भी वर्णन है। आदि पर्व में महाराज अशोक को महासुर कहा गया है और महावीर्योऽपराजितः के रूप में उसकी प्रशंसा की गई है। शान्ति पर्व में विष्णुगुप्त कौटिल्य (द्वितीय शताब्दी ईसवीं पूर्व) के शिष्य कामन्दक का भी अर्थविद्या के आचार्य के रूप में उल्लेख है। इस प्रकार अनेक प्रमाणों के आधार पर सिद्ध है कि महाभारत के वर्तमान रूप का काफी अंश बुद्ध अशोक और कौटिल्य विष्णुगुप्त के बाद के युग का है। जातक की अनेक गाथाओं और रामायण के श्लोकों में अद्भुत समानता है। दसरथ जातक (461) और देवधम्म जातक (6) में हमें प्रायः राम-कथा की पूरी रूपरेखा मिलती है। जयद्दिस जातक (513) में राम का दण्डकारण्य जाना दिखाया गया है। इसी प्रकार साम जातक(540) की सदृशता रामायण 2. 63-25 से है और विण्टरनित्ज के मत में जातक का वर्णन अधिक सरल और प्रारम्भिक है। वेस्सन्तर जातक के प्रकृति वर्णन का साम्य इसी प्रकार वाल्मीकि के प्रकृति वर्णन से है और इस जातक की कथा के साथ राम की कथा में भी काफी सदृशता है। महाभारत के साथ जातक की तुलना अनेक विद्वानों ने की है। उनके निष्कर्षों को यहाँ संक्षिप्ततम रूप में भी रखना वास्तव में बड़ा कठिन है। महाजनक जातक (539) के जनक उपनिषदों और महाभारत के ही ब्राह्मज्ञानी जनक है। मिथिला के प्रासादों को जलते देखकर जनक ने कहा था मिथिलायां प्रदीप्तायां न में दह्यति किंचन। ठीक उनका यही कथन हमें महाजनक जातक (539) में भी मिलता है तथा कुम्भकार जातक (408) और सोणक जातक(529) में भी मिलता है। अतः दोनों व्यक्ति एक है।
इसी प्रकार ऋष्यशृर्घैं की पूरी कथा नकिनिका जातक(526) में है। युधिष्ठिर (युधिट्ठिल) और विदुर (विधूर) का संवाद दस ब्राह्मण जातक (495) में है। कुणाल जातक (536) में कृष्ण और द्रौपदी की कथा है। इसी प्रकार घट जातक(355) में कृष्ण द्वारा कंस-वध और द्वारका बसाने का पूरा वर्णन है। महाकण्ह जातक(469) निमि जातक(541) और महानारदकस्सप जातक(544) में राजा उशीनर और उसके पुत्र शिवि का वर्णन है। सिवि जातक (449) में भी राजा शिवि की दान पारमिता का वर्णन है, अपनी आँखों को दे देने के रूप में। अतः कहानी मूलतः बौद्ध है, इसमें सन्देह नहीं है। महाभारत में 100 ब्राह्मदत्तों का उल्लेख है। सम्भवतः ब्रह्मदत्त किसी एक राजा का नाम न होकर राजाओं का सामान्य विशेषण था, जिसे 100 राजाओं ने धारण किया। दुम्मेध जातक(50) में भी राजा और उसके कुमार दोनों का नाम ब्रह्मदत्त बताया गया है। इसी प्रकार गंगमाल जातक(421) में कहा गया है कि ब्रह्मदत्त कुल का नाम है। सुसीम जातक(411), कुम्मासपिण्ड जातक(415), अट्ठान जातक(425), लोमासकस्सप जातक(433) आदि जातकों की भी, यही स्थिति है। अतः जातकों में आये हुए ब्रह्मदत्त केवल एक समय के पर्याय नहीं है। उनमें कुछ न कुछ ऐतिहासिकता भी अवश्य है।
रामायण और महाभारत के अतिरिक्त पतंजलि के महाभाष्य में भी जातक गाथाएँ उल्लिखित हैं। प्राचीन जन साहित्य में और बाद के कथा-साहित्य पर भी उसका प्रभाव उपलक्षित है। प्रथम शताब्दी ईसवी में गुणाढ्य ने पैशाची प्राकृत में अपनी वड्डकहा (बृहत्कथा) लिखी जो अाज अप्राप्त है। परन्तु सोमदेव ने जो स्वयं बौद्ध थे, ग्यारहवीं -बारहवीं शताब्दी में अपना कथासरित्सागर बृहत्कथा के आधार पर ही लिखा और उसमें अनेक कहानियों के मूल श्रोत भी जातक में दिखाई पड़ते है। इसी प्रकार हितोपदेश में भी अनेक कहानियाँ जातक कथाओं प र आधारित दिखाई जा सकती हैं। भारतीय लोक-साहित्य में भी अनेक जातक-कहानियों को अदृश्य रूप से खोजा जा सकता है। ऐसी कहानियाँ भारत के प्रत्येक प्रान्त में प्रचलित हैं। उदाहरणतः-‘‘सीख वाकूँ दीजिए, जाकूँ सीख सुहाइ। सीख न दीजै बानरा, बया कौ घर जाई‘‘ के रूप में बन्दर और बया की कहानी भारत के सब प्रदेशों में विदित है। बन्दर और बया की यह कहानी कूटिदूसक जातक (321) की कहानी है। इसी प्रकार कई अनेक कहानियों को मनोरंजकपूर्ण ढंग से खोजा जा सकता है।
जिस प्रकार जातक कथाएँ समुद्र मार्ग से लंका, बर्मा, सिआम, जावा, सुमात्रा हिन्द-चीन आदि दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों को गई और वहाँ स्थापत्य कला आदि में चित्रित की गई उसी प्रकार स्थल मार्ग से हिन्दुकुश और हिमालय को पार कर पश्चिमी देशों तक उनके पहुँचने की कथा बड़ी लम्बी और मनोहर है। पिछले पचास-साठ वर्षों की ऐतिहासिक गवेषणाओं से यह पर्याप्त रूप से सिद्ध हो चुका है कि बुद्ध पूर्व काल में भी विदेशों के साथ भारत के व्यापारिक सम्पर्क थे। बावेरू जातक और सुसन्धि जातक में विदेशों के साथ भारत के व्यापारिक सम्पर्क के सम्बन्धों की पर्याप्त झलक दिखायी देती है। द्वितीय शताब्दी ईसवीं से ही अलसन्द जिसे अलक्षेन्द्र (अलेक्जेण्डर) ने बसाया था, पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का मिलन केन्द्र हो गया था। वस्तुतः पश्चिम में भारतीय साहित्य और विशेषतः जातक कहानियों की पहुँच अरब और उनके बाद ग्रीक लोगों के माध्यम से हुई। पंचतन्त्र में अनेक जातक-कहानियाँ विद्यमान है, यह तथ्य सर्वविदित है। छठीं शताब्दी ईसवीं में पंचतन्त्र का अनुवाद पहलवी भाषा में किया गया। आठवीं शताब्दी में कलेला दमना शीर्षक से उसका अनुवाद अरबी में किया गया। ‘ कलेला दमना’ शब्द ‘कर्कट’ और ‘दमनक’ के अरबी रूपान्तर हैं। पन्द्रहवीं शताब्दी में पंचतंत्र के अरबी अनुवाद का जर्मन भाषा में अनुवाद ,फिर धीरे-धीरे सभी यूरोपीय भाषाओं में उसका रूपान्तर हो गया। वास्तव में सीधे रूप से भी जातक ने विदेशी साहित्य को प्रभावित किया है और उसकी कथा भी अत्यन्त प्राचीन है।
ग्रीक साहित्य में ई्सप की कहानियाँ प्रसिद्ध है। फ्रैंच, जर्मन और अंग्रेज विद्वानों की खोज से सिद्ध है कि ईसप एक ग्रीक थे। ईसप की कहानियों का यूरोपीय साहित्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा है और विद्वानों के द्वारा यह दिखा दिया गया है कि ईसप की अधिकांश कहानियों का आधार जातक है।
सीहचम्म जातक (189) की कथा अति प्रसिद्ध है जो ईसप की कहानियों में भी पाई जाती है। सिंह की खाल ओढ़े हुए गधा इन दोनों जगह ही दिखाई पड़ता है। डॉ0 टी0 डब्ल्यू0 रायस डेविड्स का मत है कि शेक्सपियर ने अपने नाटक किंग जोन्ह में इस कथा की ओर संकेत किया है- अंक-2, दृश्य-1 तथा अंक 3 दृश्य 1 में। इसी प्रकार अलिफ लैला की कहानियों से भी जातक की समानताएँ है। समुग्ग जातक (436) का सीधा सम्बन्ध अलिफ लैला की एक कहानी से दिखाया गया है। कृतज्ञ पशु और अकृतज्ञ मनुष्यों की कहानियाँ जो सच्चं किर जातक (73) तक्कारिय जातक (481) आैर महाकवि जातक (516) में मिलती है। यूरोप की अनेक भाषाओं के कथा-साहित्य में बिखरी पड़ी है। इसी प्रकार अकृतज्ञ पत्नी की कहानी भी है, जो चूलपदुम जातक (193) मेंं आई है, प्रायः सारे यूरोप के कथा साहित्य में व्याप्त है। कच्छप जातक (215) की कहानी ग्रीक, लैटिन, अरबी, फारसी और अनेक यूरोपीय भाषाओं के साहित्य में पाई जाती है ऐसा रायस डेविड्स का कथन है। इसी प्रकार जम्बुखादक जातक (294) की कहानी है। पनीर के टुकड़े को लेकर गीदड़ और कौए की कहानी के रूप में यह यूरोप भर के बालकों को विदित है। महोसध जातक, दधिवाहन जातक और राजोवाद जातक की कहानियाँ भी इसी प्रकार यूरोपीय साहित्य में थोड़े बहुत रूपान्तर से पाई जाती है। अन्य अनेक कहानियों की भी तुलना विद्वानों ने जातक से की हैं। आठवीं शताब्दी में अरबों ने यूरोप पर आक्रमण किया। [[स्पेन]] और इटली आदि को उन्होंने रौंद डाला। उन्हीं के साथ जातक कहानियाँ भी इन देशों में गईं और उन्होंने धीरे-धीरे सारे यूरोपीय साहित्य को प्रभावित किया। फ्रांस के मध्यकालीन साहित्य में पशु पक्षी सम्बन्धी कहानियों की अधिकता है। फ्रेंच विद्वानों ने उन पर जातक के प्रभाव को स्वीकार किया है।बायबिल और विशेषतः सन्त जोन्ह के सुसमाचार की अनेक कहानियों और उपमाओं की तुलना पालि, त्रिपिटक और विशेषतः जातक के इस सम्बन्धी विवरणों से विद्वानों ने की है। ईसाई धर्म पर बौद्ध धर्म का पर्याप्त प्रभाव पड़ा है। इस प्रभाव में अन्य अनेक तत्वों के अति रिक्त जातक का भी काफी सहयोग रहा है। इ्र्रसाई सन्त प्लेसीडस की तुलना निग्रोधमिग जातक (12) की कथा से की गई है। यद्यपि विण्टरनित्ज ने उसमें अधिक साम्य नहीं पाया है। पर सब से अधिक साम्य मध्ययुग की रचना बरलाम एण्ड जोसफत का जातक के बोधिसत्व से है। इस रचना में जो मू लतः छठीं या सातवीं शताब्दी ईसवी में पहलवी में लिखी गई थी। भगवान बुद्ध की जीवनी एक ईसाई सन्त के परिधान में वर्णित की गई है। बाद में इस रचना के अनुवाद अरब, सीरिया इटली और यूरोप की अन्य भाषाओं मेंं हुए। ग्रीक भाषा में इस रचना का अनुवाद आठवीं शताब्दी में अरब के खलीफा अलमंसूर के समकालिक एक ईसाई सन्त ने, जिसका नाम दमिश्क का सन्त जोन्ह (सेण्ट जोन्ह आव दमस्कस 676-749 ई0) था किया। ग्रीक से इस रचना का लैटिन में अनुवाद हुआ और फिर यूरोप की अन्य भाषाओं में अनुवाद हुआ। करीब 80 संस्करण इस रचना के यूरोप अफ्रीका और पश्चिमी एशिया की भाषाओं में हुए है। इस रचना में जोसफत बोधिसत्व के रूप में है और बरलाम उनके गुरु हैं। बुद्ध के जन्म की कथा बृद्ध, रोगी, मृत और प्रव्रजित को उनके द्वारा देखना और संन्यास लेना, ये सब तथ्य बुद्धचरित की शैली में यहाँ वर्णित है। बुद्ध के जन्म पर की गई भविष्यवाणी का भी वर्णन और पिता के द्वारा पुत्र को महल के अन्दर रखने का भी, ताकि यह संसार का दुःख न देख सके। जोसफत शब्द अरबी युदस्तफ का रूपान्तर है, जो स्वयं संस्कृत बोधिसत्व का अरबी अनुवाद है। बोधिसत्व शब्द पहले बोसत बना और फिर जोसफत या जोसफ। ईसाई धर्म में सन्त जोसफत को (जिनका न केवल नाम बल्कि पूरा जीवन बोधिसत्व बुद्ध का जीवन है) ईसाई सन्त के रूप में स्वीकार किया गया है। पोप सिक्सटस पंचम (1585-90) ने अपने 27 दिसम्बर सन् 1585 के आदेश में जोसफत और बरलाम को ईसाई सन्तों के रूप में स्वीकार किया है।
इस प्रकार ईसाई परिधान में मध्यकालीन यूरोप बोधिसत्व बुद्ध को पूजता रहा। मध्ययुगीन ईसाई यूरोप पर बौद्ध धर्म के प्रभाव का यह प्रतीक है। यह एक बड़ी अद्भुत किन्तु ऐतिहासिक रूप से सत्य बात है। डॉ0 टी0 डब्ल्यू0 रायस डेविड्स ने शेक्सपियर के मर्चेण्ट ऑव वेनिस में तीन डिबियों तथा आधसेर मांस के वर्णन में तथा एज यू लाइक इट में बहुमूल्य रत्नों के विवरण में जातक के प्रभाव को ढूँढ निकाला है एवं स्लेवोनिक जाति के साहित्य में तथा प्रायः सभी पूर्वी यूरोप के साहित्य में जातक के प्रभाव की विद्यमानता दिखाई है। भिक्षु शीलभद्र ने पर्याप्त उदाहरण देकर सिद्ध किया है कि निमि जातक (541) ही चौदहवीं शताब्दी के इटालियन कवि दाँते की प्रसिद्ध रचना का आधार है। जर्मन विद्वान बेनफे ने जातक को विश्व को कथा साहित्य का उद्गम कहा है जो तथ्यों के प्रकाश में अतिशयोक्ति नहीं कहा जा सकता है।
इस प्रकार भारतीय साहित्य और संस्कृति के साथ विश्व के साहित्य और सभ्यता के इतिहास में जातक का स्थान महत्वपूर्ण है।
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20070927015513/http://tdil.mit.gov.in/CoilNet/IGNCA/jatak.htm बुद्ध की कहानियाँ] - यहाँ जातक की १०३ कथायें हिन्दी में और अंग्रेज़ी अनुवाद में दी गयी हैं।
* [https://web.archive.org/web/20070929150800/http://www.sacred-texts.com/bud/j1/index.htm Jataka - Volumes I and II of E. B. Cowell 1895 3 volume (6 book) edition.]
* [https://web.archive.org/web/20070929103131/http://www.sacred-texts.com/bud/jt/index.htm Jataka Tales - by Ellen C. Babbitt 1912]
* [https://web.archive.org/web/20190408094102/http://www.jatakkatha.com/ Jataka Tales - English Animation]
* [https://web.archive.org/web/20080714111655/http://web.ukonline.co.uk/buddhism/jataka.htm Jataka Stories - Small selection]
* [https://web.archive.org/web/20070607011401/http://ignca.nic.in/jatak.htm "The Illustrated Jataka & Other Stories of the Buddha" by Dr C. B. Varma - Illustrated, English]
==सन्दर्भ==
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== बांके चमार पृष्ठ को सुरक्षित करने का विचार ==
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::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय एक बार सोचे रोलबैक अधिकार हेतु
:: केवल आग्रह है [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:30, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
:::मैंने पहले ही अपना मत व्यक्त कर दिया है और निर्णय अन्य प्रबंधकों पर छोड़ दिया है। आप अच्छा काम कर रहे हैं, उसे जारी रखें। मेरा निवेदन है कि हर जगह पिंग करके एक ही प्रश्न बार-बार न पूछें। – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 05:40, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
== सदस्य ~2026-22212-57 द्वारा बार बार अपमानजनक सम्पादन करना ==
नमस्ते प्रबंधकों, @[[सदस्य:~2026-22212-57|~2026-22212-57]] चेतावनी के पश्चात् भी अपमानजनक सम्पादन कर रहा है, इनकी ip को अवरोधित करने का नामांकन करता हूं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:03, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, यह फिर अपमानजनक सम्पादन कर रहें है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:07, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
::{{done}} अवरोधित – [[User:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF">'''Dream'''Rimmer</span>]] [[User talk:DreamRimmer|<span style="color:#5A4FCF;">■</span>]] 05:28, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] नए सदस्य @~2026-22503-37 ने हाल ही में [[बिहार]], [[नीतीश कुमार]] पृष्ठ पर कुछ अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री जोड़ी है। मैंने 'संपादन युद्ध' (Edit War) की स्थिति से बचने के लिए इसे स्वयं पूर्ववत (Revert) नहीं किया है। कृपया आप इस संपादन की जाँच करें और सदस्य के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई करें। धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:40, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, सदस्य@[[सदस्य:~2026-22457-40|~2026-22457-40]] को हमेशा के लिए अवरोधित करें, मैने इन्हें 2 चेतावनी दी है तथा मैने [[पूर्ति आर्या]],[[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/पूर्ति आर्या]] पर एक एक पूर्ववत किया है| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:59, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
== Ajaysingh Mer Rajput ko पूर्ण अवरोध ==
@[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, @[[सदस्य:Ajaysingh Mer Rajput ko|Ajaysingh Mer Rajput ko]] जी अवरोधित होने के पश्चात् भी अपने सदस्य वार्ता पृष्ठ प्रचार जोड़ रहें है, मेरा अनुरोध है कि उन्हें उनके वार्ता पृष्ठ को संपादित करने से भी अवरोधित करें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:23, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
ssmmvewfxeo3uxne4o6ttecplns9af7
रेड आर्मी गुट
0
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6541292
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2026-04-16T13:58:36Z
Citexji
915668
मेरे को विश्वसनीय स्रोत नहीं मिले, जोड़ने में मदद करें।
6541292
wikitext
text/x-wiki
{{Short description|जर्मनी का वामपंथी उग्रवादी संगठन}}
'''रेड आर्मी गुट''' (अंग्रेज़ी: ''Red Army Faction'', संक्षेप: RAF), जिसे बाडर–माइनहोफ समूह (Baader–Meinhof Group) भी कहा जाता है, पश्चिम जर्मनी का एक वामपंथी उग्रवादी संगठन था, जिसकी स्थापना 1970 में हुई थी।
== स्थापना ==
इस संगठन की स्थापना 1970 में एंड्रियास बाडर, उल्रिके माइनहोफ और गुडरुन एन्सलिन जैसे सदस्यों द्वारा की गई थी। यह समूह पूंजीवाद और पश्चिमी राजनीतिक व्यवस्था के विरोध में सक्रिय था।
== विचारधारा ==
रेड आर्मी गुट मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा से प्रभावित था और स्वयं को साम्राज्यवाद के विरोध में संघर्षरत संगठन मानता था। इसे एक शहरी गुरिल्ला आंदोलन के रूप में भी वर्णित किया गया है।
== गतिविधियाँ ==
1970 और 1980 के दशक में इस संगठन ने बम विस्फोट, अपहरण और हत्या जैसी हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया। 1977 की घटनाएँ, जिन्हें "जर्मन शरद ऋतु" कहा जाता है, इसकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल हैं।
== अंत ==
1998 में रेड आर्मी गुट ने स्वयं को औपचारिक रूप से भंग करने की घोषणा की।
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:उग्रवादी संगठन]]
[[श्रेणी:जर्मनी के संगठन]]
[[श्रेणी:1970 में स्थापित संगठन]]
[[श्रेणी:1998 में समाप्त संगठन]]
nofr038gb7pz4qfvhpbz30c0fmkwpy9
पश्चिमी चम्पारण जिला
0
30007
6541361
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2026-04-16T17:23:33Z
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Gateway of Champaran yani Pachhami Champaran aur purbi Champaran dono ke milakar 1972 se pahle ek sirf Champaran hua krta tha aur gandi ji jab pahli bar aaye the champaran me to usi Champaran ke gate se swagat karte laya gaya tha
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Indian Jurisdiction
| नगर का नाम = पश्चिमी चंपारण
| प्रकार = जिला
| latd = 26.81
| longd= 84.50
| प्रदेश = बिहार
| जिला = पश्चिमी चंपारण
| शासक पद = [[जिलाधीश]]
| शासक का नाम = कुन्दन कुमार
| शासक पद 2 = [[सांसद]]
| शासक का नाम 2 = सुनील कुमार (वाल्मीकिनगर) एवं डा· संजय जयसवाल (बेतिया)
| ऊँचाई = 65
| जनगणना का वर्ष = 2001
| जनगणना स्तर =
| जनसंख्या = 39,35,042
| घनत्व = 753
| क्षेत्रफल =5228
| दूरभाष कोड = 91 (06254)
| पिनकोड = 845 xxx
| वाहन रेजिस्ट्रेशन कोड = BR
| unlocode =
| वेबसाइट = http://westchamparan.bih.nic.in
| skyline = Kesariya.jpg
| skyline_caption = केसरिया बौद्ध स्तूप
| टिप्पणियाँ =
}}
'''चंपारण''' [[बिहार]] के [[तिरहुत]] प्रमंडल के अंतर्गत [[भोजपुरी]] भाषी [[जिला]] है। [[हिमालय]] के तराई प्रदेश में बसा यह ऐतिहासिक जिला जल एवं वनसंपदा से पूर्ण है। चंपारण का नाम चंपा + अरण्य से बना है जिसका अर्थ होता है- चम्पा के पेड़ों से आच्छादित जंगल। [[बेतिया]] जिले का मुख्यालय शहर हैं। बिहार का यह जिला अपनी भौगोलिक विशेषताओं और इतिहास के लिए विशिष्ट स्थान रखता है। [[महात्मा गाँधी]] ने पूर्वी चंपारण से अंग्रेजों के खिलाफ नील आंदोलन से सत्याग्रह की मशाल जलायी थी। पूर्वी चम्पारण जिले में गेटवे ऑफ़ चम्पारन मेहसी को कहा जाता है जो की 1972 से पहले पच्छिमी चम्पारण का हिस्सा हुआ करता था
== इतिहास ==
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पश्चिमी चंपारण एवं [[पूर्वी चंपारण]] एक है। चंपारण का बाल्मिकीनगर देवी [[सीता]] की शरणस्थली होने से अति पवित्र है वहीं दूसरी ओर [[गाँधीजी]] का प्रथम सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास का अमूल्य पन्ना है। राजा [[जनक]] के समय यह [[मिथिला]] प्रदेश का अंग था जो बाद में छठी सदी ईसापूर्व में [[वज्जि]] के साम्राज्य का हिस्सा बन गया। [[अजातशत्रु]] के द्वारा वज्जि को जीते जाने के बाद यह [[मौर्य वंश]], [[कण्व वंश]], [[शुंग वंश]], [[कुषाण वंश]] तथा [[गुप्त वंश]] के अधीन रहा। सन ७५० से ११५५ के बीच [[पाल वंश]] का चंपारण पर शासन रहा। इसके बाद चंपारण कर्णाट वंश के अधीन हो गया। बाद में सन १२१३ से १२२७ ईस्वी के बीच बंगाल के गयासुद्दीन एवाज ने नरसिंह देव को हराकर मुस्लिम शासन स्थापित की। मुसलमानों के अधीन होने पर तथा उसके बाद भी यहाँ स्थानीय क्षत्रपों का सीधा शासन रहा।
मुग़ल काल के बाद के चंपारण का इतिहास बेतिया राज का उदय एवं अस्त से जुड़ा है। बादशाह [[शाहजहाँ]] के समय उज्जैन सिंह और गज सिंह ने बेतिया राज की नींव डाली। मुगलों के कमजोर होने पर बेतिया राज महत्वपूर्ण बन गया और शानो-शौकत के लिए अच्छी ख्याति अर्जित की। १७६३ ईस्वी में यहाँ के राजा धुरुम सिंह के समय बेतिया राज अंग्रेजों के अधीन काम करने लगा। इसके अंतिम राजा हरेन्द्र किशोर सिंह के कोई पुत्र न होने से १८९७ में इसका नियंत्रण न्यायिक संरक्षण में चलने लगा जो अबतक कायम है। हरेन्द्र किशोर सिंह की दूसरी रानी जानकी कुँवर के अनुरोध पर १९१० में बेतिया महल की मरम्मत करायी गयी थी। बेतिया राज की शान का प्रतीक यह महल आज यह शहर के मध्य में इसके गौरव का प्रतीक बनकर खड़ा है।
[[उत्तर प्रदेश]] और [[नेपाल]] की सीमा से लगा यह क्षेत्र भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान काफी सक्रिय रहा है। [[स्वतंत्रता आन्दोलन]] के समय चंपारण के ही एक रैयत श्री [[राजकुमार शुक्ल]] के आमंत्रण पर महात्मा गाँधी अप्रैल १९१७ में [[मोतिहारी]] आए और नील की खेती से त्रस्त किसानों को उनका अधिकार दिलाया। अंग्रेजों के समय १८६६ में [[चंपारण]] को स्वतंत्र इकाई बनाया था। प्रशासनिक सुविधा के लिए १९७२ में इसका विभाजन कर [[पूर्वी चंपारण]] और पश्चिमी चंपारण बना दिए गया।
== भूगोल ==
पश्चिमी चम्पारण के उत्तर में [[नेपाल]] तथा दक्षिण में [[गोपालगंज]] जिला स्थित है। इसके पूर्व में [[पूर्वी चंपारण]] है जबकि पश्चिम में इसकी सीमा [[उत्तर प्रदेश]] के [[पडरौना]] तथा [[देवरिया]] जिला से लगती है। जिले का क्षेत्रफल 5228 वर्ग किलोमीटर है जो बिहार के जिलों में प्रथम है। जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा बगहा-१, बगहा-२, गौनहा, मैनाटांड, रामनगर तथा सिकटा प्रखंड के ३५ किलोमीटर तक उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व में नेपाल के साथ लगती है।
; धरातलीय संरचना:
[[हिमालय]] की तलहठी में बसे पश्चिमी चम्पारण की धरातलीय बनावट में कई अंतर स्पष्ट दिखाई देते हैं। सबसे उत्तरी हिस्सा सोमेश्वर एवं दून श्रेणी है जहाँ की मिट्टी में शैल-संरचना का अभाव है और सिंचाई वाले स्थान पर भूमि कृषियोग्य है। यह [[सोमेश्वर]] श्रेणी से सटा [[तराई क्षेत्र]] है जो थारू जनजाति का निवास स्थल है। हिमालय के गिरिपाद क्षेत्र से रिसकर भूमिगत हुए जल के कारण तराई क्षेत्र को यथेष्ट आर्द्रता उपलब्ध है इसलिए यहाँ दलदली मिट्टी का विस्तार है। तराई प्रदेश से हटने पर समतल और उपजाऊ क्षेत्र मिलता है जिसे सिकरहना नदी (छोटी गंडक) दो भागों में बाँटती है। उत्तरी भाग में भारी गठन वाली कंकरीली पुरानी जलोढ मिट्टी पाई जाती है जबकि दक्षिण हिस्सा चूनायुक्त अभिनव जलोढ मिट्टी से निर्मित है और गन्ने की खेती के लिए अघिक उपयुक्त है। उत्तरी भाग में हिमालय से उतरने वाली कई छोटी नदियाँ सिकरहना में मिलती है। दक्षिणी भाग अपेक्षाकृत ऊँचा है लेकिन यहाँ बड़े-बड़े चौर भी मिलते है। सदावाही [[गंडक]], [[सिकरहना]] एवं [[मसान]] के अलावे पंचानद, मनोर, भापसा, कपन आदि यहाँ की बरसाती नदियाँ है।
; वनस्पति एवं वन्यजीवः
बिहार के कुल वन्य क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम चंपारण में है। [[बिहार]] का एकमात्र बाघ अभयारण्य ८८० वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले [[बाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान]] में स्थित है और [[नेपाल]] के चितवन नेशनल पार्क से सटा है। बेतिया से ८० किलोमीटर तथा पटना से २९५ किलोमीटर दूर स्थित इस वन्य जीव अभयारण्य में संरक्षित बाघ के अलावे काला हिरण, साँभर, चीतल, भालू, भेड़िया, तेंदुआ, नीलगाय, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, अजगर जैसे वन्य जीव पाए जाते हैं। राजकीय चितवन नेशनल पार्क से कभी कभी एकसिंगी गैंडा और जंगली भैंसा भी आ जाते हैं। इस वनक्षेत्र में साल, सीसम, सेमल, सागवान, जामुन, महुआ, तून, खैर, बेंत आदि महत्वपूर्ण लकड़ियाँ पाई जाती है।
; कृषि:
[[गंडक]] एवं [[सिकरहना]] और इसकी सहायक नदियों के मैदान में होने से पश्चिमी चम्पारण जिला की मिट्टी उपजाऊ है। यहाँ के लोगों के जीवन का मुख्य आधार कृषि और गृह उद्योग है। उत्तम कोटि के बासमती चावल तथा गन्ने के उत्पादन में जिले को ख्याति प्राप्त है। भदई एवं अगहनी धान के अलावे गेहूँ, मक्का, खेसारी, तिलहन भी यहाँ की प्रमुख फसलों में शामिल है। तिरहुत नहर, त्रिवेनी नहर तथा दोन नहर पश्चिमी चंपारण तथा आसपास के जिले में सिंचाई का प्रमुख साधन है।
; जलवायु:
अपने पड़ोसी जिलों की तुलना में पश्चिमी चंपारण की जलवायु शीतल एवं आर्द्र है। हिमालय से आनेवाली ठंडी हवाओं के कारण यहाँ सर्दी अधिक होती है। गर्मी में तापमान ४३<sup>०</sup> सेंटीग्रेड तक पहुँच जाता है। जून के अंत में मॉनसूनी वर्षा आरंभ हो जाती है। तराई क्षेत्र में सालाना १४० मिमी से अधिक वर्षा होती है। उत्तरी भाग में होनेवाली तीव्र वर्षा कई बार आवागमन में अवरोध का कारण बनता है।
; प्रशासनिक विभाजनः
* अनुमंडलः 1. बेतिया 2. बगहा 3.नरकटियागंज
* प्रखंडः गौनहा, चनपटिया, जोगापट्टी, ठकराहा, नरकटियागंज, नौतन, पिपरासी, बगहा-१, बगहा-२, बेतिया, बैरिया, भितहा, मधुबनी, मझौलिया, मैनाटांड, रामनगर, लौरिया, सिकटा
* पंचायतों की संख्या: 315
* गाँवों की संख्या: 1483
== महत्वपूर्ण व्यक्तित्व ==
* [[राजकुमार शुक्ल]]
* प्रजापति मिश्र
* शेख गुलाब
* [[केदार पाण्डेय]]
* [[तारकेश्वर नाथ तिवारी]]
* [[श्यामाकांत तिवारी]]
* मनोज वाजपेयी
* राघव शरण पांडेय
* रामधनी यादव पहलवान।
* प्रकाश झा
* कविवर गोपाल सिंह नेपाली
* असित नाथ तिवारी
== व्यापार एवं उद्योग ==
नेपाल से सड़क मार्ग द्वारा चावल, लकड़ी, मसाले का आयात होता है जबकि यहाँ से कपड़ा, पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। जिले तथा पड़ोस क नेपाल में वनों का विस्तार होने से लकड़ियों का व्यापार होता है। उत्तम किस्म की लकड़ियों के अलावे बेतिया के आसपास बेंत मिलते हैं जो फर्नीचर बनाने के काम आता है। बगहा, बेतिया, चनपटिया एवं नरकटियागंज व्यापार के अच्छे केंद्र है। जिले में कृषि आधारित उद्योग ही प्रमुख है। मझौलिया, बगहा, हरिनगर तथा नरकटियागंज में चीनी मिल हैं। कुटीर उद्योगों में रस्सी, चटाई तथा गुड़ बनाने का काम होता है।
== जनसांख्यिकी ==
* जनसंख्या- ३०,४३,०४४
* घनत्व- ५५३/१०००
* साक्षरता- ३९·६३%
== शिक्षा एवं संस्कृति ==
* प्राथमिक विद्यालय- १३४०
* मध्य विद्यालय- २८४
* उच्च विद्यालय- ६८
* डिग्री महाविद्यालय- ३
* औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र- १
== पर्यटन स्थल ==
; बाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान एवं बाघ अभयारण्य:
लगभग ८८० वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला बिहार का एक मात्र [[राष्ट्रीय उद्यान]] [[नेपाल]] के राजकीय [[चितवन नेशनल पार्क]] से सटा है। बेतिया से ८० किलोमीटर दूर बाल्मिकीनगर के इस राष्ट्रीय उद्यान का भीतरी ३३५ वर्ग किलोमीटर हिस्से को १९९० में देश का १८ वाँ बाघ अभयारण्य बनाया गया। हिरण, चीतल, साँभर, तेंदुआ, नीलगाय, जंगली बिल्ली जैसे जंगली पशुओं के अलावे चितवन नेशनल पार्क से एकसिंगी गैडा और जंगली भैंसा भी उद्यान में दिखाई देते है।
; बाल्मिकीनगर आश्रम और गंडक परियोजना:
वाल्मिकीनगर राष्ट्रीय उद्यान के एक छोड़ पर [[महर्षि बाल्मिकी]] का वह आश्रम है जहाँ [[राम]] के त्यागे जाने के बाद देवी [[सीता]] ने आश्रय लिया था। [[सीता]] ने यहीं अपने 'लव' और 'कुश' दो पुत्रों को जन्म दिया था। महर्षि वाल्मिकी ने हिंदू महाकाव्य [[रामायण]] की रचना भी यहीं की थी। आश्रम के मनोरम परिवेश के पास ही [[गंडक नदी]] पर बनी बहुद्देशीय परियोजना है जहाँ १५ मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और यहाँ से निकाली गयी नहरें चंपारण के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई की जाती है। गंडक बैराज के आसपास का शांत परिवेश चित्ताकर्षक है। बेतिया राज के द्वारा बनवाया गया शिव-पार्वती मंदिर भी दर्शनीय है।
; त्रिवेणी संगम तथा बावनगढी:
एक ओर [[नेपाल]] का त्रिवेणी गाँव तथा दूसरी ओर [[चंपारण]] का भैंसालोटन गाँव के बीच नेपाल की सीमा पर बाल्मिकीनगर से ५ किलोमीटर की दूरी पर त्रिवेणी संगम है। यहाँ [[गंडक]] के साथ पंचनद तथा सोनहा नदी का मिलन होता है। [[श्रीमदभागवत पुराण]] के अनुसार [[विष्णु]] के प्रिय भक्त 'गज' और 'ग्राह' की लड़ाई इसी स्थल से शुरु हुई थी जिसका अंत [[हाजीपुर]] के निकट कोनहारा घाट पर हुआ था। हरिहरक्षेत्र की तरह प्रत्येक वर्ष माघ संक्रांति को यहाँ मेला लगता है। त्रिवेणी से ८ किलोमीटर दूर बगहा-२ प्रखंड के दरवाबारी गाँव के पास बावनगढी किले का खंडहर मौजूद है। पास ही तिरेपन बाजार है। इस प्राचीन किले के पुरातात्विक महत्व के बारे में तथ्यपूर्ण जानकारी का अभाव है।
; भिखना ठोढी:
जिले के उत्तर में गौनहा प्रखंड स्थित भिखना ठोढी नरकटियागंज-भिखना ठोढी रेलखंड का अंतिम स्टेशन है। नेपाल की सीमा पर बसा यह छोटी सी जगह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए चर्चित है। जाड़े के दिनों में यहाँ से [[हिमालय]] की हिमाच्छादित धवल चोटियाँ एवं [[अन्नपूर्णा श्रेणी]] साफ दिखाई देता है। यहाँ के शांत एवं मनोहारी परिवेश का आनंद इंगलैंड के राजा जॉर्ज पंचम ने भी लिया था। ब्रिटिस कालीन पुराने बंगले के अलावे यहाँ ठहरने की कई जगहें है।
; भितहरवा आश्रम एवं रामपुरवा का अशोक स्तंभ:
गौनहा प्रखंड के भितहरवा गाँव के एक छोटे से घर में ठहरकर [[महात्मा गाँधी]] ने [[चंपारण सत्याग्रह]] की शुरुआत की थी। उस घर को आज भितहरवा आश्रम कहा जाता है। स्वतंत्रता के मूल्यों का आदर करने वालों के लिए यह जगह तीर्थ समान है। आश्रम से कुछ ही दूरी पर रामपुरवा में [[सम्राट अशोक]] द्वारा बनवाए गए दो स्तंभ है जो शीर्षरहित है। इन स्तंभों के ऊपर बने सिंह वाले शीर्ष को [[कोलकाता]] संग्रहालय में तथा वृषभ (सांढ) शीर्ष को दिल्ली के [[राष्ट्रीय संग्रहालय]] में रखा गया है।
; नन्दनगढ, चानकीगढ एवं लौरिया का अशोक स्तंभ:
लौरिया प्रखंड के नन्दऩगढ तथा नरकटियागंज प्रखंड के चानकी गढ में [[नंद वंश]] तथा चाणक्य के द्वारा बनवाए गए महलों के अवशेष हैं जो अब टीलेनुमा दिखाई देते हैं। नन्दनगढ के टीले को [[भगवान बुद्ध]] के अस्थि अवशेष पर बना स्तूप भी कहा जाता है। नन्दनगढ से एक किलोमीटर दूर लौरिया में २३०० वर्ष पुराना सिंह के शीर्ष वाला [[अशोक स्तंभ]] है। ३५ फीट ऊँचे इस स्तंभ का आधार ३५ इंच एवं शीर्ष २२ इंच है। इस विशाल स्तंभ की कलाकृति एवं बेहतरीन पॉलिस मौर्य काल के मूर्तिकारों की शानदार कलाकारी का नमूना है।
; अन्य स्थलः
* सुमेश्वर का किला: रामनगर प्रखंड में समुद्र तल से 2,884 फीट की ऊँचाई पर सोमेश्वर की पहाड़ी की खड़ी ढलान पर बना सुमेश्वर का किला अब खंडहर बन चुका है। नेपाल की सीमा पर बना यह किला अब खंडहर मात्र है लेकिन अंतेपुरवासियों की पानी की जरुरतों के लिए पत्थर काट कर बनाया गया कुंड देखा जा सकता है। किले के शीर्ष से आसपास की उपत्यकाएं एवं नेपाल स्थित घाटी और् पर्वत श्रेणियों का विहंगम दृश्य दृष्टिगोचर है। [[हिमालय]] के प्रसिद्ध [[धौलागिरि]], [[गोसाईंनाथ]] एवं [[गौरीशंकर]] के धवल शिखरों को साफ देखा जा सकता है।
* वृंदावन: बेतिया से १० किलोमीटर दूर इस स्थान पर १९३७ में ऑल इंडिया गाँधी सेवा संघ का वार्षिक सम्मेलन हुआ था। इसमें [[गाँधीजी]] सहित [[राजेन्द्र प्रसाद]] और [[जे बी कृपलानी]] ने हिस्सा लिया था। अपने शिक्षा संबंधी विचारों पर गाँधीजी द्वारा उस समय स्थापित एक बेसिक स्कूल अब भी चल रहा है।
* सरैयां मान (पक्षी विहार): बेतिया से ६ किलोमीटर दूर सरैयां के शांत परिवेश में प्राकृतिक झील बना है। यह पक्षियों की कई प्रजातियों का प्रवास स्थल भी है। झील के किनारे लगे जामुन के पेड़ों से गिरनेवाले फल के कारण इसका पानी पाचक माना जाता है। यह स्थान लोगों के लिए पिकनिक स्थल एवं पक्षी-विहार है।
== आवागमन ==
;सड़क मार्गः
[[बेतिया]], बगहा, नरकटियागंज, रक्सौल आदि से [[पटना]], [[मोतिहारी]], [[मुजफ्फरपुर]] आदि के लिए बसों की अच्छी सुविधा है। [[राष्ट्रीय राजमार्ग 28B,178A,139C]] प्रमुख सड़क है जो बेतिया होते हुए कुशीनगर तथा पटना को जाती है। राजकीय राजमार्ग 54 तथा 64 की कुल लंबाई 154 किलोमीटर है। कुल क्षेत्रफल के हिसाब से जिले में अच्छी सड़कों का अभाव अब नहीं है। राज्य की राजधानी [[पटना]] से [[बेतिया]] की दूरी २१० किमी है।
; रेल मार्गः
पश्चिम चंपारण में रेलमार्ग की शुरुआत सन १८८८ में हुई थी जब बेतिया को मुजफ्फरपुर से जोड़ा गया। बाद में इसे नेपाल सीमा पर भिखना ठोढी तक बढाया गया। वहीं एक दूसरा रेलमार्ग नरकटियागंज से रक्सौल होते हुए बैरगनिया तक जाती है। [[पूर्व मध्य रेलवे]] के अंतर्गत आनेवाले इस रेलखंड की जिले में कुल लंबाई २२० किलोमीटर है। [[गंडक नदी]] पर छितौनी में पुल बन जाने के बाद यहाँ का मुख्य रेलमार्ग गोरखपुर होते हुए राजधानी [[दिल्ली]] सहित देश के महत्वपूर्ण नगरों से जुड़ गया। जिले का प्रमुख रेलवे स्टेशन [[बेतिया]], रक्सौल तथा नरकटियागंज है।
; हवाई मार्गः
निकटतम हवाई अड्डा ३ किलोमीटर दूर महारानी जानकी हवाई अड्डा, २१० किलोमीटर दूर [[पटना हवाई अड्डा ]] पटना में है जहाँ से [[दिल्ली]], [[कोलकाता]], [[राँची]], [[मुम्बई]] आदि के लिए कई विमान कंपनियाँ अपनी सेवा देती हैं। जिले की सीमा पर [[नेपाल]] के बीरगंज स्थित हवाई अडडा से [[काठमांडू]] के लिए नियमित विमान सेवा उपलब्ध है।
== सन्दर्भ ==
1. [https://web.archive.org/web/20140427093603/http://westchamparan.bih.nic.in/html/profile.htm पश्चिम चंपारण जिले का परिचय] <br /> 2. [https://web.archive.org/web/20110105090841/http://en.wikipedia.org/wiki/Districts_of_Bihar बिहार के जिले]<br /> 3. [https://web.archive.org/web/20101202193343/http://hallosushant.blogspot.com/2009/06/valmiki-tiger-reserve-and-national-park.html बाल्मिकीनगर बाघ अभयारण्य संबधित जानकारी]
== बाहरी कड़ियाँ ==
1. [https://web.archive.org/web/20140427093603/http://westchamparan.bih.nic.in/html/profile.htm पश्चिम चंपारण जिले का आधिकारिक बेवजाल] <br />2. [https://web.archive.org/web/20090913061328/http://www.rcd.bih.nic.in/ बिहार में सड़कमार्ग]<br />3. [https://web.archive.org/web/20140424100941/http://jnvwchamparan.bih.nic.in/ जवाहर नवोदय विद्यालय की बेवसाईट]<br />4[https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar/champaran-west .पश्चिमी चम्पारण जिले का ब्रेकिंग न्यूज़]
5.[https://www.prabhatkhabar.com/state/bihar बिहार का समाचार]
[[श्रेणी:बिहार के जिले]]
[[श्रेणी:पश्चिमी चम्पारण जिला|*]]
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मैक मोहन
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'''मैक मोहन ''' (२४ अप्रैल १९३८ – १० मई २०१०) [[हिन्दी]] फ़िल्मों के एक [[अभिनेता]] थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0595909/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170216150501/http://www.imdb.com/name/nm0595909/ |archive-date=16 फ़रवरी 2017 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=Share on Twitter |url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Sambha-Mac-Mohan-of-Sholay-fame-dies/articleshow/5914387.cms |title='Sambha' Mac Mohan of 'Sholay' fame dies - Times of India |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date=2010-05-10 |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121106153206/http://timesofindia.indiatimes.com/India/Sambha-Mac-Mohan-of-Sholay-fame-dies/articleshow/5914387.cms |archive-date=6 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.merinews.com/article/actor-mac-mohan-cricketer-who-became-sambha-in-sholay/15884493.shtml |title=Actor Mac Mohan: Cricketer who became Sambha in Sholay |publisher=Merinews.com |date=2013-04-23 |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170517041609/http://www.merinews.com/article/actor-mac-mohan-cricketer-who-became-sambha-in-sholay/15884493.shtml |archive-date=17 मई 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://thesindhuworld.com/mac-mohan/ |title=Mac Mohan : Biography: Sambha of Sholey : Mohan Makhijani: Famous Sindhi Actor |publisher=The Sindhu World |date= |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170428223839/http://thesindhuworld.com/mac-mohan/ |archive-date=28 अप्रैल 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/national/Actor-Mac-Mohan-passes-away/article16299865.ece |title=Actor Mac Mohan passes away |publisher=The Hindu |date= |accessdate=2017-05-07}}</ref>
मैक मोहन एक विलेन के किरदार के लिए जाने जाते हैं मैक मोहन [[रवीना टंडन]] के मामा है।{{cn}}
==जीवन kuch khas nhi h uske jeevan me ==
== प्रमुख फिल्में==
{| class="wikitable" style="width:95%; font-size:95%;"
|- style="background:#ccc; text-align:center;"
! वर्ष !! फ़िल्म !! चरित्र !! टिप्पणी
|-
|[[:श्रेणी:1986 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1986]] || [[शर्त (1986 फ़िल्म)|शर्त]] || जब्बार, फोटोग्राफर ||
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|[[:श्रेणी:1980 में बनी हिन्दी फ़िल्म|1980]] || [[मोर्चा (1980 फ़िल्म)|मोर्चा]] || ||
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== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:२०१० में निधन]]
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AMAN KUMAR
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'''मैक मोहन ''' (२४ अप्रैल १९३८ – १० मई २०१०) [[हिन्दी]] फ़िल्मों के एक [[अभिनेता]] थे।<ref>{{Cite web |url=http://www.imdb.com/name/nm0595909/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170216150501/http://www.imdb.com/name/nm0595909/ |archive-date=16 फ़रवरी 2017 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=Share on Twitter |url=http://timesofindia.indiatimes.com/india/Sambha-Mac-Mohan-of-Sholay-fame-dies/articleshow/5914387.cms |title='Sambha' Mac Mohan of 'Sholay' fame dies - Times of India |publisher=Timesofindia.indiatimes.com |date=2010-05-10 |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121106153206/http://timesofindia.indiatimes.com/India/Sambha-Mac-Mohan-of-Sholay-fame-dies/articleshow/5914387.cms |archive-date=6 नवंबर 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.merinews.com/article/actor-mac-mohan-cricketer-who-became-sambha-in-sholay/15884493.shtml |title=Actor Mac Mohan: Cricketer who became Sambha in Sholay |publisher=Merinews.com |date=2013-04-23 |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170517041609/http://www.merinews.com/article/actor-mac-mohan-cricketer-who-became-sambha-in-sholay/15884493.shtml |archive-date=17 मई 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://thesindhuworld.com/mac-mohan/ |title=Mac Mohan : Biography: Sambha of Sholey : Mohan Makhijani: Famous Sindhi Actor |publisher=The Sindhu World |date= |accessdate=2017-05-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170428223839/http://thesindhuworld.com/mac-mohan/ |archive-date=28 अप्रैल 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/national/Actor-Mac-Mohan-passes-away/article16299865.ece |title=Actor Mac Mohan passes away |publisher=The Hindu |date= |accessdate=2017-05-07}}</ref>
मैक मोहन एक विलेन के किरदार के लिए जाने जाते हैं मैक मोहन [[रवीना टंडन]] के मामा है।{{cn}}
==जीवन==
== प्रमुख फिल्में==
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|- style="background:#ccc; text-align:center;"
! वर्ष !! फ़िल्म !! चरित्र !! टिप्पणी
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== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:२०१० में निधन]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेता]]
[[श्रेणी:1938 में जन्मे लोग]]
{{जीवनचरित-आधार}}
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विकिपीडिया:निषेध नियमावली
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विकिपीडिया एक मुक्त विश्वकोश है जिसे कोई भी सम्पादित कर सकता है। परन्तु विकिपीडिया में सदस्यों को निषेधित किया जा सकता है। निषेधित सदस्य विकिपीडिया को पढ़ और प्रयोग कर सकते हैं परन्तु यहाँ पर सम्पादन नहीं कर सकते। यदि कोई सदस्य निम्नलिखित कार्य में संलग्न हों तो उन्हे सम्पादन करने से निषेधित किया जा सकता है।
==शिष्टता उल्लंघन==
*दूसरे सदस्यों को बदनाम करना
*दूसरे सदस्यों को धमकी देना
*दूसरे सदस्यों को गाली देना
==अतिवाद संरक्षण==
*किसी लेख का केवल एक पक्ष लिख कर दूसरे पक्ष को, चेतावनी के बावजूद, बिना कारण, बारम्बार मिटाना और अपने पक्ष पर जोर देना।
==बर्बरता एवं उत्त्पात==
*चेतावनी के बावजूद किसी लेख के खण्ड को बिना कारण मिटाना अथवा असंबन्धित अनुच्छेद रख देना।
*चेतावनी के बावजूद विकिपीडिया को विज्ञापन हेतु, [[ब्लॉग]] की तरह अथवा व्यक्तिगत भावना आदि रखने का माध्यम बनाना।
*लेखों में कचरा अथवा अश्लील सामग्री भरना
*अन्य भाषा में लेख बनाना अथवा अन्य भाषा की लेख सामग्री भरना
==अय्यारी==
*चेतावनी मिलने के वाबजूद अपना एक अय्यार खाता बनाकर विकि नीतियों का उल्लंघन करना
==विशेषाधिकार उल्लँघन==
*किसी भी प्रबंधक अथवा कोई भी विशेषाधिकार रखने वाले सदस्यों का अपने अधिकार का दुरुपयोग अथवा विकि नीतियों का उल्लंघन करने पर उन्हें उनके अधिकारो सहित ब्लाक किया जा सकता है।
==सदस्य नियम==
ब्लाक करते समय
*किसी भी नये सदस्य को १ बार या २ बार अवश्य चेतावनी दें
*अनामक सदस्यों पर बिना किसी चेतावनी के प्रतिबंध लगाये
*विशेषाधिकार रखने वाले सदस्यों को कम से कम ३ बार चेतावनी अवश्य दें
[[श्रेणी:विकिनीतियाँ]]
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==शिष्टता उल्लंघन==
*दूसरे सदस्यों को बदनाम करना
*दूसरे सदस्यों को धमकी देना
*दूसरे सदस्यों को गाली देना
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*किसी लेख का केवल एक पक्ष लिख कर दूसरे पक्ष को, चेतावनी के बावजूद, बिना कारण, बारम्बार मिटाना और अपने पक्ष पर ज़ोर देना।
==बर्बरता एवं उत्त्पात==
*चेतावनी के बावजूद किसी लेख के खण्ड को बिना कारण मिटाना अथवा असंबन्धित अनुच्छेद रख देना।
*चेतावनी के बावजूद विकिपीडिया को विज्ञापन हेतु, [[ब्लॉग]] की तरह अथवा व्यक्तिगत भावना आदि रखने का माध्यम बनाना।
*लेखों में कचरा अथवा अश्लील सामग्री भरना
*अन्य भाषा में लेख बनाना अथवा अन्य भाषा की लेख सामग्री भरना
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*चेतावनी मिलने के वाबजूद अपना एक अय्यार खाता बनाकर विकि नीतियों का उल्लंघन करना
==विशेषाधिकार उल्लँघन==
*किसी भी प्रबंधक अथवा कोई भी विशेषाधिकार रखने वाले सदस्यों का अपने अधिकार का दुरुपयोग अथवा विकि नीतियों का उल्लंघन करने पर उन्हें उनके अधिकारो सहित ब्लाक किया जा सकता है।
==सदस्य नियम==
ब्लाक करते समय
*किसी भी नये सदस्य को १ बार या २ बार अवश्य चेतावनी दें
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[[श्रेणी:विकिनीतियाँ]]
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==शिष्टता उल्लंघन==
*दूसरे सदस्यों को बदनाम करना
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*दूसरे सदस्यों को गाली देना
==अतिवाद संरक्षण==
*किसी लेख का केवल एक पक्ष लिख कर दूसरे पक्ष को, चेतावनी के बावजूद, बिना कारण, बारम्बार मिटाना और अपने पक्ष पर ज़ोर देना।
==बर्बरता एवं उत्त्पात==
*चेतावनी के बावजूद किसी लेख के खण्ड को बिना कारण मिटाना अथवा असंबन्धित अनुच्छेद रख देना।
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*चेतावनी मिलने के वाबजूद अपना एक अय्यार खाता बनाकर विकि नीतियों का उल्लंघन करना
==विशेषाधिकार उल्लंघन==
*किसी भी प्रबंधक अथवा कोई भी विशेषाधिकार रखने वाले सदस्यों का अपने अधिकार का दुरुपयोग अथवा विकि नीतियों का उल्लंघन करने पर उन्हें उनके अधिकारों सहित ब्लॉक(अवरोधित) किया जा सकता है।
==सदस्य नियम==
ब्लाक करते समय
*किसी भी नये सदस्य को १ बार या २ बार अवश्य चेतावनी दें
*अनामक सदस्यों पर बिना किसी चेतावनी के प्रतिबंध लगाये
*विशेषाधिकार रखने वाले सदस्यों को कम से कम ३ बार चेतावनी अवश्य दें
[[श्रेणी:विकिनीतियाँ]]
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विकिपीडिया एक मुक्त विश्वकोश है जिसे कोई भी सम्पादित कर सकता है। परन्तु विकिपीडिया में सदस्यों को निषेधित किया जा सकता है। निषेधित सदस्य विकिपीडिया को पढ़ और प्रयोग कर सकते हैं परन्तु यहाँ पर सम्पादन नहीं कर सकते। यदि कोई सदस्य निम्नलिखित कार्य में संलग्न हों तो उन्हे सम्पादन करने से निषेधित किया जा सकता है।
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==सदस्य नियम==
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*किसी भी नये सदस्य को १ बार या २ बार अवश्य चेतावनी दें।
*अनामक सदस्यों पर बिना किसी चेतावनी के प्रतिबंध लगाएं।
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[[श्रेणी:विकिनीतियाँ]]
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सामजिक पूंजी
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"सामजिक" → "सामाजिक" किया गया है मुख्य 2 बदलाव किया गया है, इसका टाइटल भी गलत है उसे भी सुधार की जरूरत है।
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text/x-wiki
{{Multiple issues|
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{{स्रोतहीन|date=जुलाई 2023}}
}}
सामाजिक पूंजी, [[समाजशास्त्र]] में विकसित की गयी एक नवीन अवधारणा है जिसके अनुसार सामाजिक सम्बन्ध भी [[उत्पादकता]] को बढाते है जैसे कालेज शिक्षा और नवाचार किसी की उत्पादकता बढ़ा देते है वैसे ही अनेक समूहों की सदस्यता और संपर्क भी उसकी उत्पादकता को बढ़ा देते है। यही कारण है की समाज में आज सामाजिक नेटवर्किंग का इतना महत्त्व बढ़ गया है, [[ऑर्कुट|ऑरकुट]] जैसे [[वेबसाइट]] के प्रचार के पीछे यह एक महत्वपूर्ण कारण है।
सामाजिक पूंजी का तात्पर्य उन संबंधों, मूल्य मान्यताओं, और नेटवर्क्स से है जो किसी समाज या समुदाय में एकता, सहयोग और सहयोग को बढ़ावा देते हैं। सामाजिक पूंजी में विश्वास, मानदंड, और आपसी संबंध आते हैं जो लोगों को एक-दूसरे के साथ जोड़ते हैं और उनके बीच के संबंधों को मजबूत करते हैं। यह आर्थिक पूंजी या भौतिक संसाधनों की तरह नहीं होती, बल्कि यह किसी समाज में सदस्यों के बीच आपसी संबंधों और सामूहिक सहयोग की भावना पर आधारित होती है।
=== सामाजिक पूंजी के मुख्य घटक ===
# '''नेटवर्क्स (Networks):''' समाज के सदस्यों के बीच आपसी संबंधों और जुड़ाव का एक जाल, जो सहयोग, संचार और विश्वास की भावना को मजबूत करता है। मजबूत नेटवर्क्स समाज में अवसरों और संसाधनों के आदान-प्रदान को आसान बनाते हैं।
# '''विश्वास (Trust):''' सामाजिक पूंजी का सबसे महत्वपूर्ण आधार। जब लोग एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं, तो वे न केवल सहयोग करते हैं बल्कि जोखिम उठाने और साझा जिम्मेदारियों को निभाने के लिए भी तैयार रहते हैं।
# '''साझा मूल्य और मानदंड (Shared Values and Norms):''' यह वे नियम और अपेक्षाएँ हैं जो समाज के सदस्यों को एकजुट करते हैं और समान व्यवहार के लिए प्रेरित करते हैं। साझा मूल्य समाज में अनुशासन और सामूहिक पहचान को बढ़ावा देते हैं।
# '''पारस्परिक सहयोग (Reciprocity):''' यह वह भावना है कि यदि कोई व्यक्ति आज किसी की मदद करता है, तो भविष्य में बदले में उसे भी मदद मिलेगी। यह सहयोग की निरंतरता को सुनिश्चित करता है।
# '''सामाजिक सहभागिता (Civic Participation):''' समाज के सदस्य जब स्वेच्छा से सामुदायिक गतिविधियों, संगठनों और संस्थाओं में भाग लेते हैं, तो यह सामाजिक पूंजी को मजबूत करता है।
# '''संस्थागत समर्थन (Institutional Support):''' स्थानीय संस्थाएँ और संगठन जब निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से काम करते हैं, तो समाज में विश्वास और सहयोग की नींव और गहरी हो जाती है।
सामाजिक पूंजी किसी भी समाज की समृद्धि और स्थिरता के लिए आवश्यक होती है। यह केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
[[श्रेणी:समाज]]
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बांके जिला
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सोमेंद्र प्रजापति
6541251
wikitext
text/x-wiki
बांके जिला ([[नेपाली भाषा|नेपाली]]: बांके जिल्ला) के बारे में, [[भेरी अंचल|प्रांत संख्या 5]] का एक हिस्सा, नेपाल के 77 जिलों में से एक है। जिला मध्य-पश्चिमी नेपाल में नेपालगंज के साथ स्थित है और इसका जिला मुख्यालय एक क्षेत्र है। 2,337 किमी 2 (902 वर्ग मील) और 2001 में 385,840 की जनसंख्या थी और 2011 में 491,313 बांके जिले में तीन मुख्य शहर हैं: [[नेपालगंज]], [[कोहलपुर]] और खजुराहर [[नेपाल]] के [[भेरी अंचल|भेरी प्रान्त]] का जिला। [[भारत]] का सीमावर्ती जिला है। यह जिला भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बहराईच जिले से मिलता है इस जिले मे २ वॉटर पार्क है। {{Infobox settlement
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[[विशेष:योगदान/~2026-23456-22|~2026-23456-22]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-23456-22|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: उल्लेखनीय नहीं
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text/x-wiki
बांके जिला ([[नेपाली भाषा|नेपाली]]: बांके जिल्ला) के बारे में, [[भेरी अंचल|प्रांत संख्या 5]] का एक हिस्सा, नेपाल के 77 जिलों में से एक है। जिला मध्य-पश्चिमी नेपाल में नेपालगंज के साथ स्थित है और इसका जिला मुख्यालय एक क्षेत्र है। 2,337 किमी 2 (902 वर्ग मील) और 2001 में 385,840 की जनसंख्या थी और 2011 में 491,313 बांके जिले में तीन मुख्य शहर हैं: [[नेपालगंज]], [[कोहलपुर]] और खजुराहर [[नेपाल]] के [[भेरी अंचल|भेरी प्रान्त]] का जिला। [[भारत]] का सीमावर्ती जिला है। {{Infobox settlement
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text/x-wiki
'''इक्ष्वाकु वंश''' प्राचीन वैदिक [[भारत]] के शासकों का एक वंश है। इनकी उत्पत्ति राजा इक्ष्वाकु जिनको जैन लोग [[ऋषभदेव]] भगवान के नाम से जाने जाते है उनके प्रथम आहार [[गन्ना|ईख]] के रस के मिलने से हुई थी इक्ष्वाकु वंश की स्थापना ।आदिनाथ भगवान के जैन दीक्षा लेने के बाद आहार के लिए कोई नही जानता था ऐसे मैं राजा सोम श्रेयांश को पूर्व भाव से आहार विधि याद आई चुकी जैन साधु की आहार विधि पूर्ण शुद्ध होती है जिससे कठिनाई होती है छह माह के बाद राजा सोम श्रेयांश को यह विधि याद आने पर भगवान आदिनाथ को आहार जो कराया वो प्रथम आहार ईख का था इससे प्रभावित होकर भगवान आदिनाथ के पुत्र [[भरत चक्रवर्ती]] ने ही '''इक्ष्वाकु कुल की स्थापना आदिनाथ से ही मानी,'''
आदिनाथ या [[ऋषभदेव]] प्राचीन [[कोशल]] देश जिसे विनीता नगरी भी कहा जाता है के राजा थे और इनकी राजधानी [[अयोध्या]] थी। [[रामायण]] और [[महाभारत]] में इन दोनों वंशों के अनेक प्रसिद्ध शासकों का उल्लेख मिलता है। श्रीराम इस वंश में जन्मे और [[बौद्ध धर्म]] में भी इक्ष्वाकु वंश का बहुत महत्त्व है। सभी [[तीर्थंकर|जैन तीर्थंकर]] [[ऋषभदेव]] से प्रारंभ होकर इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए थे ऋषभदेव ही इस वंश के जनक है। [[बुद्धवंश]] के अनुसार शाक्यमुनि [[गौतम बुद्ध]] शाक्य कोलिय, ओक्काक के कुल में जन्मे थे जो संस्कृत के 'इक्ष्वाकु' का ही [[पालि]] रूप है। इक्ष्वाकु वंश को रघुवंश कहा जाता है जिसके वंशज [[रघुवंशी]] है जो मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश और राजस्थान में मुख्यता पाए जाते है
== शासकों की सूची ==
[[ब्रह्मा]] जी के 10 मानस पुत्रों में से एक [[मरीचि]] जो की जैन मान्यता अनुसार आदिनाथ के प्रपौत्र और भरत के पुत्र हैं। [[इक्ष्वाकु]] को भगवान ऋषभदेव भी कहा जाता है। भगवान ऋषभदेव [[आदिनाथ]] के पुत्र [[भरत]] के नाम पर भारत का नाम पड़ा ये आदिनाथ के बाद इक्ष्वाकु वंश में प्रथम चक्रवर्ती भी माने जाते है।
यहाँ से सनातन सतयुग आरम्भ होता हैं।
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1- ब्रह्मा जी के पुत्र [[मरीचि]]
2- मरीचि के पुत्र [[कश्यप]]
3- कश्यप के पुत्र [[विवस्वान]] या [[सूर्य]]
4- विवस्वान के पुत्र वैवस्वत [[मनु]] – जिनसे [[सूर्यवंश]] का आरम्भ हुआ।
5- वैवस्वत के पुत्र [[नाभाग]]
6- [[नाभाग]]
7- [[अम्बरीष]]
8- विरुप
9- पृषदश्व
10- रथीतर
11- इक्ष्वाकु कोलिय' – ये परम प्रतापी राजा थे, इनसे इस वंश का एक नाम इक्ष्वाकु कोलिय नागवंशी
वंश' हुआ। (दूसरी जगह इनके पिता वैवस्वत मनु भी वताये जाते हैं )
*12- कुक्षि
*13- विकुक्षि
*14- पुरन्जय
*15- अनरण्य प्रथम
*16- [[पृथु]]
*17- विश्वरन्धि
*18- [[चंद्र]]
*19- [[युवनाश्व]]
*20- वृहदश्व
*21- धुन्धमार
*22- [[दृढाश्व]]
*23- [[हर्यश्व]]
*24- [[निकुम्भ]]
*25- वर्हणाश्व
*26- कृशाष्व
*27- सेनजित
*28- युवनाश्व द्वितीय
=== यहाँ से [[त्रेतायुग]] आरम्भ होता हैं। ===
*29- [[मान्धातृ|मान्धाता]] ''सूर्यवंशी क्षत्रिय कोलिय (कोली) के इष्टदेव भगवान श्री मान्धाता महाराजा हैं। राजा मान्धाता ने पूरी पृथ्वी पर शासन किया, इसी कारण से मांधाता को पृथ्वीपति के नाम से जाना जाता हैं।''
*30- [[पुरुकुत्स]]
*31- [[त्रसदस्यु]]
*32- [[अनरण्य]]
*33- [[हर्यश्व]]
*34- [[अरुण]]
*35- निबंधन
*36- सत्यवृत ([[त्रिशंकु]])
*37- सत्यवादी [[राजा हरिश्चन्द्र]]
*38- रोहिताश
*39- चम्प
*40- [[वसुदेव]]
*41- [[विजय]]
*42- भसक
*43- [[वृक]]
*44- बाहुक
*45- [[सगर]]
*46- अमंजस
*47- [[अंशुमान]]
*48- दिलीप प्रथम
*49- [[भगीरथ]] – ''जो [[गंगा नदी|गंगा]] को धरती पर लाये।''
*50- [[श्रुत]]
*51- नाभ
*52- सिन्धुदीप
*53- अयुतायुष
*54- [[ऋतुपर्ण]]
*55- [[सर्वकाम]]
*56- [[सुदास]]
*57- सौदास
*58- [[अश्मक]]
*59- [[मूलक]]
*60- सतरथ
*61- एडविड
*62- विश्वसह
*63- [[खटवाँग]]
*64- [[दिलीप]] (दीर्घवाहु)
*65- '''[[रघु]]''' – ''ये सूर्यवंश के सवसे प्रतापी राजा थे।''
*66- [[अज]]
*67- [[दशरथ]]
*68- '''[[राम]]''' ([[लक्ष्मण]], [[भरत]], [[शत्रुघ्न]])
*69- [[कुश]]
=== यहाँ से [[द्वापर युग]] शुरु होता है। ===
*70- [[अतिथि]]
*71- [[निषध]]
*72- [[नल-दमयन्ती|नल]]
*73- [[नभ]]
*74- [[पुण्डरीक]]
*75- क्षेमधन्मा
*76- [[देवानीक]]
*77- अनीह
*78- परियात्र
*79- [[बल]]
*80- [[उक्थ]]
*81- वज्रना
*82- खगण
*83- व्युतिताष्व
*84- विश्वसह
*85- [[हिरण्याभ]]
*86- [[पुष्य]]
*87- ध्रुवसंधि
*88- [[सुदर्शन]]
*89- [[अग्निवर्ण]]
*90- [[शीघ्र]]
*91- [[मरु]]
*92- प्रश्रुत
*93- सुसंधि
*94- [[अमर्ष]]
*95- महस्वान
*96- विश्वबाहु
*97- प्रसेनजक
*98- [[तक्षक]]
*99- [[बृहद्बल|वृहद्वल]]
*100- वृहत्रछत्
=== यहाँ से [[कलियुग]] आरम्भ होता हैं। ===
*101- उरुक्रीय (या गुरुक्षेत्र)
*102- वत्सव्यूह
*103- प्रतियोविमा
*104- [[भानु]]
*105- दिवाकर (या दिवाक)
*106- वीर सहदेव
*107- बृहदश्व II
*108- भानुराठ (या भानुमान)
*109- प्रतिमाव
*110- सुप्रिक
*111- मरुदेव
*112- सूर्यक्षेत्र
*113- [[पुष्कर]] (या किन्नरा)
*114- अंतरीक्ष
*115- सुवर्णा (या सुताप)
*116- [[सुमित्रा]] (या अमितराजित)
*117- ब्रुहदराज (ओक्काका)
*118- [[बरही]] (ओक्कामुखा)
*119- कृतांजय (सिविसमंजया)
*120- रणजय्या (सिहसारा)
* [[संजय]] ([[महाकोशल]] या जयसेना)
*121- [[शाक्य]] (सिहानू:शाक्य वंश के संस्थापक)
*122- [[शुद्धोधन]]
*123- [[गौतम बुद्ध|सिद्धार्थ]], गौतम बुद्ध
*124- [[राहुल]] शाक्य ही फिर मौर्य बन गये शाक्यों के नरसंघार के बाद
*125- प्रसेनजीत
*126- कुशद्रका (या [[कुंतल]])
*127- रानाक (या कुलका)
*128- [[सुरथ]]
*129- सुमित्र
राजा सुमित्र एक क्रूर राजा था अंतिम शासक सूर्यवंश थे, जिन्हें 362 ईसा पूर्व में [[मगध]] के शक्तिशाली सम्राट महापद्म नंद ने हराया था। महापद्मनंद ने राजपुतों कर संहार किया इसलिए इन्हे २ परशुराम कहा जाता है राजा सुमित्रा इसके पश्चात वह [[बिहार]] में स्थित रोहतास चले गये थे और आगे चलकर उन्होंने कुर्मवंशी अवधिया कुर्मी की स्थापना की और कुर्मी कहलाएं <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=oLU8DwAAQBAJ&pg=PT14&dq=king+sumitra+mahapadma+nanda&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiBw9jBo9TXAhVMuI8KHeDkAsYQuwUISjAG#v=onepage&q=king%20sumitra%20mahapadma%20nanda&f=false|title=The Valmiki Ramayana, Volume 3}}</ref><ref>Misra, V.S. (2007). ''Ancient Indian Dynasties'', Mumbai: Bharatiya Vidya Bhavan, {{ISBN|81-7276-413-8}}, pp.283-8, 384</ref><ref>History Of Ancient India {{ISBN|81-269-0616-2}} vol II [https://books.google.com/books?id=rrh4tY3v2A4C&pg=PA389&dq=surya+dynasty&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiR_crvmJTjAhWv7nMBHc-9DvYQ6AEIKjAA#v=onepage&q=surya%20dynasty&f=false]</ref>
[[श्रेणी:प्राचीन भारत]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[सूर्यवंश]]
* [[चंद्रवंश]]
* [[सनातन धर्म]]
* [[भारत का इतिहास]]
* [[हिन्दू साम्राज्यों और राजवंशों की सूची]]
== सन्दर्भ ==
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भेड़
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AMAN KUMAR
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[[चित्र:Lleyn sheep.jpg|right|thumb|200px|भेड़]]
[[चित्र:Ovejas en Patagonia - Argentina.jpg|right|thumb|350px|अर्जेंटीना में भेड़ों के झुंड]]
'''भेड़''' एक प्रकार का [[पालतू पशु]] है। इसे [[मांस]], [[ऊन]] और [[दूध]] के लिए पाला जाता है। भारतवर्ष में क़रीब 40 नस्ल की भेड़ पाई जाती है। मादा भेड़ को '''भेड़''' या भेड़ी कहते हैं और नर भेड़ को '''मेंढा''' या भेड़ा।
== भेड़ पालन ==
{{मुख्य|भेड़ पालन}}
भेड़ का मनुष्य से सम्बन्ध आदि काल से है तथा भेड़ पालन एक प्राचीन व्यवसाय है। भेड़ पालक भेड़ से ऊन तथा मांस तो प्राप्त करता ही है, भेड़ की खाद भूमि को भी अधिक ऊपजाऊ बनाती है। भेड़ कृषि अयोग्य भूमि में चरती है, कई खरपतवार आदि अनावश्यक घासों का उपयोग करती है तथा उंचाई पर स्थित चरागाह जोकि अन्य पशुओं के अयोग्य है, उसका उपयोग करती है। भेड़ पालक भेड़ों से प्रति वर्ष मेमने प्राप्त करते है।
==चित्र==
<gallery>
Ovejas en Patagonia - Argentina.jpg
Flock of sheep.jpg
Ovis orientalis aries 'Skudde' (aka).jpg
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[[श्रेणी:पालतू पशु]]
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[[चित्र:Lleyn sheep.jpg|right|thumb|200px|भेड़]]
[[चित्र:Ovejas en Patagonia - Argentina.jpg|right|thumb|350px|अर्जेंटीना में भेड़ों के झुंड]]
'''भेड़''' एक प्रकार का [[पालतू पशु]] है। इसे [[मांस]], [[ऊन]] और [[दूध]] के लिए पाला जाता है। भारतवर्ष में क़रीब 40 नस्ल की भेड़ पाई जाती है। मादा भेड़ को '''भेड़''' या भेड़ी कहते हैं और नर भेड़ को '''मेंढा''' या भेड़ा।
== भेड़ पालन ==
{{मुख्य|भेड़ पालन}}
भेड़ का मनुष्य से सम्बन्ध आदि काल से है तथा भेड़ पालन एक प्राचीन व्यवसाय है। भेड़ पालक भेड़ से ऊन तथा मांस तो प्राप्त करता ही है, भेड़ की खाद भूमि को भी अधिक ऊपजाऊ बनाती है। भेड़ कृषि अयोग्य भूमि में चरती है, कई खरपतवार आदि अनावश्यक घासों का उपयोग करती है तथा उंचाई पर स्थित चरागाह जोकि अन्य पशुओं के अयोग्य है, उसका उपयोग करती है। भेड़ पालक भेड़ों से प्रति वर्ष मेमने प्राप्त करते है।
==चित्र==
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[[श्रेणी:पालतू पशु]]
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कामख्या रेलवे स्टेशन
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Pinakpani
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text/x-wiki
'''कामख्या रेलवे स्टेशन''' [[भारतीय रेल]] का एक रेलवे स्टेशन है। यह [[गुवाहाटी]] शहर में स्थित है। इसकी ऊंचाई 55 मी. है।
[[File:Kamakhya Junction railway station in Kamakhya, Asam 19.jpg|thumb|कामख्या रेलवे स्टेशन]]
== देखें ==
[https://web.archive.org/web/20100104195847/http://hindi.indiarailinfo.com/station/map/547 यहां]
{{बरौनी-गुवाहाटी लाइन}}
{{भारतीय रेल}}{{*}}
[[श्रेणी:असम में रेलवे स्टेशन]]
[[श्रेणी:गुवाहाटी]]
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बिहार सरकार
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बिहार का मुख्यमंत्री बदल चुका है
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== सरकार एवं प्रशासन ==
=== बिहार सरकार ===
बिहार राज्य [[भारत|भारतीय गणराज्य]] के संघीय ढाँचे में [[द्विसदनपद्धति|द्विसदनीय व्यवस्था]] के अन्तर्गत आता है। राज्य का संवैधानिक मुखिया [[राज्यपाल]] है लेकिन वास्तविक सत्ता [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमंत्री]] और '''[[मंत्रीपरिषद]]''' के हाथ में होता है।<ref>{{cite web|title=article 155, Constitution of India|url=https://legislative.gov.in/sites/default/files/COI_1.pdf}}</ref> [[विधान सभा|विधानसभा]] में चुनकर आनेवाले विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री का चुनाव पाँच वर्षों के लिए किया जाता है जबकि राज्यपाल की नियुक्ति भारत के [[राष्ट्रपति]] के द्वारा की जाती है। प्रत्यक्ष चुनाव में बहुमत प्राप्त करनेवाले राजनीतिक दल अथवा गठबंधन के आधार पर सरकार बनाए जाते हैं। उच्च सदन या [[विधान परिषद]] के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष ढंग से ६ वर्षों के लिए होता है।
=== प्रशासनिक व्यवस्था ===
प्रशासनिक सुविधा के लिए बिहार राज्य को 9 [[प्रमंडल]] तथा 38 [[मंडल]] (जिला) में बाँटा गया है। जिलों को क्रमश: 101 अनुमंडलों, 534 प्रखंडों, 8,471 पंचायतों, 45,103 गाँवों में बाँटा गया है। राज्य का [[मुख्य सचिव]] नौकरशाही का प्रमुख होता है जिसे श्रेणीक्रम में आयुक्त, जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी या अंचलाधिकारी तथा इनके साथ जुड़े अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण रिपोर्ट करते हैं। पंचायत तथा गाँवों का कामकाज़ सीधेतौर पर चुनाव कराकर मुखिया, सरपंच तथा वार्ड सदस्यों के अधीन संचालित किया जाता है।
[[पटना प्रमंडल|पटना]], [[तिरहुत प्रमंडल|तिरहुत]], [[सारण प्रमंडल|सारण]], [[दरभंगा प्रमंडल|दरभंगा]], [[कोशी प्रमंडल|कोशी]], [[पूर्णिया प्रमंडल|पूर्णिया]], [[भागलपुर प्रमंडल|भागलपुर]], [[मुंगेर प्रमंडल|मुंगेर]] तथा [[मगध प्रमंडल]] के अन्तर्गत आनेवाले जिले इस प्रकार हैं:
{{main|बिहार के जिले}}
* [[अररिया जिला]]
* [[अरवल जिला]]
* [[औरंगाबाद, बिहार|औरंगाबाद जिला]]
* [[कैमूर जिला|कैमुर जिला]]
* [[कटिहार जिला]]
* [[किशनगंज जिला]]
* [[खगड़िया जिला]]
* [[गया जिला]]
* [[गोपालगंज जिला]]
* [[जमुई जिला]]
* [[जहानाबाद जिला]]
* [[दरभंगा जिला]]
* [[नवादा जिला]]
* [[नालंदा जिला]]
* [[चंपारण ज़िला|पश्चिम चंपारण जिला]]
* [[पूर्णिया जिला|पूर्णियां जिला]]
* [[पूर्वी चम्पारण जिला|पूर्वी चंपारण जिला]]
* [[बक्सर जिला]]
* [[बाँका जिला]]
* [[बेगूसराय जिला]]
* [[भागलपुर जिला]]
* [[भोजपुर|भोजपुर जिला]]
* [[मधेपुरा जिला]]
* [[मधुबनी जिला]]
* [[मुंगेर जिला]]
* [[मुजफ्फरपुर जिला]]
* [[रोहतास जिला|रोहतास]]
* [[लखीसराय जिला]]
* [[वैशाली जिला]]
* [[सहरसा जिला]]
* [[समस्तीपुर जिला]]
* [[सारन जिला]]
* [[सीतामढ़ी जिला|सीतामढी जिला]]
* [[सीवान जिला]]
* [[सुपौल जिला]]
* [[शिवहर जिला]]
* [[शेखपुरा जिला]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|25em}}
[[श्रेणी:बिहार की राजनीति]]
[[श्रेणी:बिहार]]
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हिन्दी से सम्बन्धित प्रथम
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2026-04-16T13:21:31Z
~2026-23524-31
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wikitext
text/x-wiki
यहाँ पर [[हिन्दी]] से सम्बन्धित सबसे पहले साहित्यकारों, पुस्तकों, स्थानों आदि के नाम दिये गये हैं।
हिन्दी का प्रथम डिजिटल खण्डकाव्य - विप्र सुदामा : लेखक - अशर्फी लाल मिश्र
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{|class='wikitable'
|-
| हिन्दी का प्रथम [[कवि]] || हिन्दी साहित्य का आरम्भ कुछ विद्वान् [[चंदबरदाई]] ([[पृथ्वीराज रासो]]) से मानते हैं; तो कुछ [[शालिभद्र सूरि]] (भरतेश्वर बाहुबली रास), [[सरहप्पा]] दोहाकोष), [[गोरखनाथ]], [[स्वयम्भू]] से।<ref>{{Cite web |url=http://www.hinditech.in/journal/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE.aspx?cid=4 |title=हिन्दी का आदि-वैयाकरण कौन? |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180925160816/http://www.hinditech.in/journal/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE.aspx?cid=4 |archive-date=25 सितंबर 2018 |url-status=dead }}</ref> [[राहुल सांकृत्यायन]] ने हिंदी का प्रथम कवि जैन साहित्य के रचयिता [[सरह|सरहपा]] को माना है जिनका जन्मकाल ८वीं सती माना जाता है |
| हिन्दी का अध्यापन आरम्भ करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय || [[कोलकाता विश्वविद्यालय]] (फोर्ट विलियम् कॉलेज)
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| भारत में पहली बार हिन्दी में एम॰ए॰ की पढ़ाई || [[कोलकाता विश्वविद्यालय]] में कुलपति [[आशुतोष मुखोपाध्याय|सर आशुतोष मुखर्जी]] ने १९१९ में शुरू करवाई थी।
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| हिन्दी में प्रथम डी॰लिट्॰ || [[डा. पीतांम्बरदत्त बड़थ्वाल]] (१९३९ में [[बाबू श्याम सुंदर दास|बाबू शयामसुन्दर दास]] के निर्देशन में अंग्रेजी में लिखे उनके [[शोध प्रबन्ध]] 'द निर्गुण स्कूल ऑफ हिन्दी पोयट्री' पर [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] ने उन्हें डी॰लिट॰ की उपाधि प्रदान की।)<ref>{{Cite web |url=https://kadamtaal.com/2016/12/14/dr-pitambar-dutt-barthwal/ |title=डा. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल : हिन्दी के प्रथम डी.लिट्. |access-date=21 जुलाई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180721134206/https://kadamtaal.com/2016/12/14/dr-pitambar-dutt-barthwal/ |archive-date=21 जुलाई 2018 |url-status=dead }}</ref>
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| हिन्दी माध्यम में प्रस्तुत हिन्दी की प्रथम शोध कृति || [[फादर कामिल बुल्के]] कृत 'रामकथा : उत्पत्ति और विकास' (१९४९ ई.)
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| हिन्दी के प्रथम एम॰ए॰ || नलिनी मोहन सान्याल (जो बांग्लाभाषी थे।)
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| [[विज्ञान]] में [[शोधप्रबंध]] हिन्दी में देने वाले प्रथम विद्यार्थी || [[मुरली मनोहर जोशी]]
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| [[अन्तरराष्ट्रीय संबन्ध]] पर अपना [[शोधप्रबन्ध]] लिखने वाले प्रथम व्यक्ति || [[वेद प्रताप वैदिक]]
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| हिन्दी में बी.टेक. का [[परियोजना|प्रोजेक्ट रिपोर्ट]] प्रस्तुत करने वाले प्रथम विद्यार्थी || श्याम रुद्र पाठक (सन् १९८५)
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| डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की शोधप्रबन्ध पहली बार हिन्दी में प्रस्तुत करने वाले || डॉ० मुनीश्वर गुप्त (सन् १९८७)
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| हिन्दी माध्यम से एल-एल०एम० उत्तीर्ण करने वाला देश का प्रथम विद्यार्थी || चन्द्रशेखर उपाध्याय
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| [[प्रबंधन]] क्षेत्र में हिन्दी माध्यम से प्रथम [[शोध-प्रबंध]] के लेखक || भानु प्रताप सिंह (पत्रकार) । विषय था, ''उत्तर प्रदेश प्रशासन में मानव संसाधन की उन्नत प्रवत्तियों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन- आगरा मंडल के संदर्भ में''
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| हिन्दी का पहला इंजीनियर कवि || मदन वात्स्यायन
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| हिन्दी में निर्णय देने वाले पहले न्यायाधीश || न्यायमूर्ति श्री [[प्रेम शंकर गुप्त]]
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| सेन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में हिन्दी के प्रथम वक्ता || [[नारायण प्रसाद सिंह]] (सारण-दरभंगा ; १९२६)
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| [[लोकसभा]] में सबसे पहले हिन्दी में सम्बोधन || [[सीकर]] से [[रामराज्य परिषद]] के सांसद एन एल शर्मा। उन्होने पहली लोकसभा की बैठक के प्रथम सत्र के दूसरे दिन 15 मई 1952 को हिन्दी में संबोधन किया था।
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| हिन्दी में [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] में भाषण देने वाला प्रथम राजनयिक || [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
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| हिन्दी का प्रथम महाकवि || [[चन्दबरदाई]]
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| हिन्दी का प्रथम [[महाकाव्य]] || [[पृथ्वीराजरासो]]
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| हिन्दी का प्रथम ग्रंथ || [[पउमचरिउ]] (स्वयंभू द्वारा रचित)
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| हिन्दी का पहला समाचार पत्र (सप्ताहिक) || [[उदन्त मार्तण्ड]] (३० मई, १८२६ ई. को कलकत्ता से जुगलकिशोर शुक्ल द्वारा)
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| हिन्दी का प्रथम दैनिक समाचार पत्र || समाचार सुधावर्षण (कोलकाता से, [[श्यामसुन्दर सेन]] स्वारा सन १८५४ में
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| हिन्दी की प्रथम पर्यावरण पत्रिका || [[पर्यावरण डाइजेस्ट]] ( संपादक - डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित )
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| हिन्दी-आन्दोलन || हिन्दीभाषी प्रदेशों में सबसे पहले [[बिहार]] प्रदेश में सन् 1835 में हिन्दी आंदोलन शुरू हुआ था। इस अनवरत प्रयास के फलस्वरूप सन् 1875 में बिहार में कचहरियों और स्कूलों में हिन्दी प्रतिष्ठित हुई।
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| समीक्षामूलक हिन्दी का प्रथम मासिक || साहित्य संदेश (आगरा, सन् 1936 से 1942 तक)
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| हिन्दी का प्रथम [[आत्मचरित]] || [[अर्धकथानक]] (कृतिकार हैं, जैन कवि [[बनारसीदास|बनारसीदास (कवि)]] (वि॰सं॰ १६४३-१७००))
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| हिन्दी का प्रथम [[व्याकरण]] || 'उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण' ([[दामोदर पण्डित]])
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| हिन्दी व्याकरण के [[पाणिनी]] || [[किशोरीदास वाजपेयी]]
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| हिन्दी का प्रथम मानक [[शब्दकोश]] || [[हिन्दी शब्दसागर]]
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| हिन्दी का प्रथम विश्वकोश || [[हिन्दी विश्वकोश]]
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| हिन्दी की प्रथम आधुनिक कविता || 'स्वप्न' ([[महेश नारायण]] द्वारा रचित)<ref>{{Cite web |url=http://www.jankipul.com/2011/04/blog-post_29.html |title=क्या ‘स्वप्न’ हिन्दी की पहली आधुनिक कविता है? |access-date=31 अक्तूबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131101213244/http://www.jankipul.com/2011/04/blog-post_29.html |archive-date=1 नवंबर 2013 |url-status=dead }}</ref>
|-
| मुक्तछन्द का पहला हिन्दी कवि || [[महेश नारायण]]<ref>[http://www.abhivyakti-hindi.org/itihas/2011/mahesh_narayan.htm मुक्तछंद के प्रथम कवि महेश नारायण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131102215422/http://www.abhivyakti-hindi.org/itihas/2011/mahesh_narayan.htm |date=2 नवंबर 2013 }} (अभिव्यक्ति)</ref>
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| हिन्दी की प्रथम [[कहानी]] || हिन्दी की सर्वप्रथम कहानी कौन सी है, इस विषय में विद्वानों में जो मतभेद शुरू हुआ था वह आज भी जैसे का तैसा बना हुआ है। हिन्दी की सर्वप्रथम कहानी समझी जाने वाली कड़ी के अर्न्तगत [[किशोरी लाल गोस्वामी]] की 'इन्दुमती' (सन् 1900),[[राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद]] की 'राजा भोज का सपना' (19 वीं सदी का उत्तरार्द्ध), [[माधवराव सप्रे]] की 'एक टोकरी भर मिट्टी' (सन् 1901), [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]] की 'ग्यारह वर्ष का समय' (सन् 1903) और बंग महिला की 'दुलाई वाली' (सन् 1907) नामक कहानियाँ आती हैं। परन्तु माधवराव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी‘को प्रथम कहानी माना जाता है।
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| हिन्दी का प्रथम लघुकथाकार ||
|-[[भारतेंदु हरिश्चंद्र]]की 'अंगहीन धनी' तथा 'अद्भुत संवाद'(1875 में प्रकाशित पुस्तक 'परिहासिनी' में) 'परिहासिनी' को कथात्मक गद्य की पहली प्रकाशित पुस्तक माना जा सकता है।
<ref>[https://wwwlaghukatha-varta.blogspot.com/2009/01/blog-post.html]
| हिन्दी का प्रथम [[उपन्यास]] || '[[देवरानी जेठानी की कहानी]]' (लेखक - [[पंडित गौरीदत्त]] ; सन् १८७०)। [[श्रद्धाराम फिल्लौरी]] की [[भाग्यवती उपन्यास|भाग्यवती]] और [[लाला श्रीनिवास दास]] की [[परीक्षा गुरू]] को भी हिन्दी के प्रथम उपन्यस होने का श्रेय दिया जाता है।
|-
| हिन्दी का प्रथम विज्ञान गल्प || ‘आश्चर्यवृतान्त’ ([[अंबिकादत्त व्यास]] ; 1884-1888)
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| हिन्दी का प्रथम नाटक || [[नहुष]] (गोपालचंद्र, १८४१)
|-
| हिन्दी का प्रथम काव्य-नाटक || ‘एक घूँट’ ([[जयशंकर प्रसाद]] ; 1915 ई.)
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| हिन्दी के प्रथम [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] विजेता || [[माखनलाल चतुर्वेदी]] (१९५५ में [[हिमतरंगिनी]] के लिए)
|-
| हिन्दी का प्रथम [[ज्ञानपीठ|ज्ञानपीठ पुरस्कार]] विजेता || [[सुमित्रानंदन पंत]] (१९६८)(चिदम्बरा के लिये प्राप्त हुआ)
|-
| हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास || [[भक्तमाल]] / [[इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐन्दूई ऐन्दूस्तानी]] (अर्थात "हिन्दुई और हिन्दुस्तानी साहित्य का इतिहास", लेखक [[गार्सा-द-तासी]])
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| हिन्दी में प्रथम जीवनी || भक्तमाल (१५८५ ई० [[नाभादास]])
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| हिन्दी कविता के प्रथम इतिहासग्रन्थ के रचयिता || [[शिवसिंह सेंगर]] ; (रचना - ''शिवसिंह सरोज'')
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम व्यवस्थित इतिहासकार || [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]]
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| हिन्दी का प्रथम चलचित्र (मूवी) || [[सत्य हरिश्चन्द्र]]
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| हिन्दी की पहली बोलती फिल्म (टाकी) || [[आलम आरा]]
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| [[देवनागरी]] के प्रथम प्रचारक || [[गौरीदत्त]]
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| हिन्दी की प्रथम अन्तरजाल पत्रिका || भारत-दर्शन (न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित)
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| हिन्दी का प्रथम [[चिट्ठा]] (ब्लॉग) || "[https://web.archive.org/web/20191008122338/http://hindi.blogspot.com/ हिन्दी]" चिट्ठे 2002 अकटूबर में विनय और आलोक ने हिन्दी (इस में अंग्रेज़ी लेख भी लिखे जाते हैं) लेख लिखने शुरू करे, 21 अप्रैल 2003 में सिर्फ हिन्दी का प्रथम चिट्ठा बना "[https://web.archive.org/web/20190330121514/http://9211.blogspot.com/ नौ दो ग्यारह]", जो अब [https://web.archive.org/web/20100124220343/http://devanaagarii.net/hi/alok/blog/ यहाँ है] (संगणकों के हिन्दीकरण से सम्बन्धित [[बंगलोर]] निवासी आलोक का चिट्ठा)
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| हिन्दी का प्रथम [[चिट्ठा]]-संकलक || [[चिट्ठाविश्व]] (सन् २००४ के आरम्भ में बनाया गया था)
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| अन्तरजाल पर हिन्दी का प्रथम समाचारपत्र || [https://web.archive.org/web/20090815120730/http://hindimilap.com/ हिन्दी मिलाप] / [[वेबदुनिया]]
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| हिन्दी का पहला समान्तर कोश बनाने का श्रेय || [[अरविन्द कुमार]] व उनकी पत्नी कुसुम
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम राष्ट्रगीत के रचयिता || पं. गिरिधर शर्मा ’नवरत्न‘
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| हिन्दी का प्रथम अर्थशास्त्रीय ग्रंथ || "संपत्तिशास्त्र" (महावीर प्रसाद द्विवेदी)
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| हिन्दी के प्रथम [[बालसाहित्य]]कार || [[श्रीधर पाठक]] (1860 - 1928)
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| हिन्दी की प्रथम वैज्ञानिक पत्रिका || सन् १९१३ से प्रकाशित [[विज्ञान (हिन्दी पत्रिका)|'''विज्ञान''']] ([[विज्ञान परिषद् प्रयाग]] द्वारा प्रकाशित)
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| छपाई के लिए नागरी टाइपों का निर्माण करने वाला प्रथम व्यक्ति || चार्ल्स विल्किन्स (1750-1836 ई.)
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| सबसे पहली टाइप-आधारित देवनागरी प्रिंटिंग || 1796 में गिलक्रिस्त (John Borthwick Gilchrist) की 'Grammar of the Hindoostanee Language', Calcutta ; Dick Plukker
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| [[खड़ीबोली]] के गद्य की प्रथम पुस्तक || [[लल्लू लाल]] जी की [[प्रेम सागर]] (हिन्दी में भागवत का दशम् स्कन्ध) ; हिन्दी गद्य साहित्य का सूत्रपात करनेवाले चार महानुभाव कहे जाते हैं- मुंशी सदासुख लाल, लल्लू लाल और सदल मिश्र। ये चारों सं. 1860 के आसपास वर्तमान थे।
|-
| हिन्दी की [[पारिभाषिक शब्दावली|वैज्ञानिक शब्दावली]] || १८१० ई. में [[लल्लू लाल]] जी द्वारा संग्रहीत ३५०० शब्दों की सूची जिसमें हिन्दी की वैज्ञानिक शब्दावली को [[फ़ारसी]] और [[अंग्रेज़ी]] प्रतिरूपों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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| हिन्दी की प्रथम विज्ञान-विषयक पुस्तक || १८४७ में स्कूल बुक्स सोसाइटी, [[आगरा]] ने 'रसायन प्रकाश प्रश्नोत्तर' का प्रकाशन किया।
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| 'एशिया का जागरण' विषय पर हिन्दी कविता || सन् 1901 में [[राधाकृष्ण मित्र]] ने हिन्दी में एशिया के जागरण पर एक कविता लिखी थी। शायद वह किसी भी भाषा में 'एशिया के जागरण' की कल्पना पर पहली कविता है।
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| हिन्दी का प्रथम संगीत-ग्रन्थ || [[मानकुतूहल]] ([[ग्वालियर]] के राजा [[मानसिंह तोमर]] द्वारा रचित, १५वीं शती)
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| हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा और प्रामाणिक व्याकरण || [[कामताप्रसाद गुरु]] द्वारा रचित "हिन्दी व्याकरण" का प्रकाशन सर्वप्रथम नागरीप्रचारिणी सभा, काशी में अपनी लेखमाला में सं. १९७४ से सं. १९७६ विक्रमी के बीच किया और जो सं. १९७७ (१९२० ई.) में पहली बार सभा से पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हुआ।
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| प्रथम [[विश्व हिन्दी सम्मेलन]] || १९७५ में [[नागपुर]] में
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम महाकाव्य || [[पृथ्वीराज रासो]]
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| [[खड़ी बोली]] का प्रथम महाकाव्य || [[प्रियप्रवास]] ([[अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध']] द्वारा रचित)
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| खड़ी बोली की प्रथम गद्य रचना || [[गोरा बादल की कथा]]([[कवि जटमल]])
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| हिन्दी के सर्वप्रथम गीतकार || [[विद्यापति]]
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| हिन्दी की आदि कवयित्री || [[मीराबाई]]
|-
| हिन्दी की प्रथम कहानी लेखिका || [[बंग महिला]] ( राजेन्द्र बाला घोष)
|-
| काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रथम हिन्दी विभागाध्यक्ष || [[श्यामसुन्दर दास]]
|-
| हिन्दी के प्रथम कोशकार/शब्दकोशकार || अमीर खुसरो ('खलिक-ए-बारी'- द्विभाषी फारसी-हिन्दवी कोश)
|-
| हिन्दी माध्यम से सम्पूर्ण शिक्षा देने वाली देश की पहली संस्था || [[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय]], [[हरिद्वार]]
|-
| हिन्दी का प्रथम अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय || [[महात्मा गान्धी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय|महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)]]
|-
| ब्रजभाषा गद्य की प्रथम रचना || शृंगाररसमण्डन ([[गोसाईं विट्ठलनाथ]])
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| हिन्दी का प्रथम अभिनीत नाटक || जानकी मंगल ([[शीतला प्रसाद खत्री]])
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180721191832/https://www.hindisahityadarpan.in/2017/04/gk-about-hindi-100-question-answers.html हिन्दी में सर्वप्रथम : 100- प्रश्न और उनके उत्तर]
[[श्रेणी:हिन्दी]]
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6541304
6541278
2026-04-16T14:13:59Z
AMAN KUMAR
911487
[[विशेष:योगदान/~2026-23524-31|~2026-23524-31]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-23524-31|वार्ता]]) द्वारा किया गया1 संपादन प्रत्यावर्तित किया गया: प्रचार
6541304
wikitext
text/x-wiki
यहाँ पर [[हिन्दी]] से सम्बन्धित सबसे पहले साहित्यकारों, पुस्तकों, स्थानों आदि के नाम दिये गये हैं।
<nowiki><ref></nowiki>[https://wwwlaghukatha-varta.blogspot.com/2009/01/blog-post.html]
{|class='wikitable'
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| हिन्दी का प्रथम [[कवि]] || हिन्दी साहित्य का आरम्भ कुछ विद्वान् [[चंदबरदाई]] ([[पृथ्वीराज रासो]]) से मानते हैं; तो कुछ [[शालिभद्र सूरि]] (भरतेश्वर बाहुबली रास), [[सरहप्पा]] दोहाकोष), [[गोरखनाथ]], [[स्वयम्भू]] से।<ref>{{Cite web |url=http://www.hinditech.in/journal/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE.aspx?cid=4 |title=हिन्दी का आदि-वैयाकरण कौन? |access-date=15 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180925160816/http://www.hinditech.in/journal/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8---%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE.aspx?cid=4 |archive-date=25 सितंबर 2018 |url-status=dead }}</ref> [[राहुल सांकृत्यायन]] ने हिंदी का प्रथम कवि जैन साहित्य के रचयिता [[सरह|सरहपा]] को माना है जिनका जन्मकाल ८वीं सती माना जाता है |
| हिन्दी का अध्यापन आरम्भ करने वाला प्रथम विश्वविद्यालय || [[कोलकाता विश्वविद्यालय]] (फोर्ट विलियम् कॉलेज)
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| भारत में पहली बार हिन्दी में एम॰ए॰ की पढ़ाई || [[कोलकाता विश्वविद्यालय]] में कुलपति [[आशुतोष मुखोपाध्याय|सर आशुतोष मुखर्जी]] ने १९१९ में शुरू करवाई थी।
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| हिन्दी में प्रथम डी॰लिट्॰ || [[डा. पीतांम्बरदत्त बड़थ्वाल]] (१९३९ में [[बाबू श्याम सुंदर दास|बाबू शयामसुन्दर दास]] के निर्देशन में अंग्रेजी में लिखे उनके [[शोध प्रबन्ध]] 'द निर्गुण स्कूल ऑफ हिन्दी पोयट्री' पर [[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय]] ने उन्हें डी॰लिट॰ की उपाधि प्रदान की।)<ref>{{Cite web |url=https://kadamtaal.com/2016/12/14/dr-pitambar-dutt-barthwal/ |title=डा. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल : हिन्दी के प्रथम डी.लिट्. |access-date=21 जुलाई 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180721134206/https://kadamtaal.com/2016/12/14/dr-pitambar-dutt-barthwal/ |archive-date=21 जुलाई 2018 |url-status=dead }}</ref>
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| हिन्दी माध्यम में प्रस्तुत हिन्दी की प्रथम शोध कृति || [[फादर कामिल बुल्के]] कृत 'रामकथा : उत्पत्ति और विकास' (१९४९ ई.)
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| हिन्दी के प्रथम एम॰ए॰ || नलिनी मोहन सान्याल (जो बांग्लाभाषी थे।)
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| [[विज्ञान]] में [[शोधप्रबंध]] हिन्दी में देने वाले प्रथम विद्यार्थी || [[मुरली मनोहर जोशी]]
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| [[अन्तरराष्ट्रीय संबन्ध]] पर अपना [[शोधप्रबन्ध]] लिखने वाले प्रथम व्यक्ति || [[वेद प्रताप वैदिक]]
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| हिन्दी में बी.टेक. का [[परियोजना|प्रोजेक्ट रिपोर्ट]] प्रस्तुत करने वाले प्रथम विद्यार्थी || श्याम रुद्र पाठक (सन् १९८५)
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| डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की शोधप्रबन्ध पहली बार हिन्दी में प्रस्तुत करने वाले || डॉ० मुनीश्वर गुप्त (सन् १९८७)
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| हिन्दी माध्यम से एल-एल०एम० उत्तीर्ण करने वाला देश का प्रथम विद्यार्थी || चन्द्रशेखर उपाध्याय
|-
| [[प्रबंधन]] क्षेत्र में हिन्दी माध्यम से प्रथम [[शोध-प्रबंध]] के लेखक || भानु प्रताप सिंह (पत्रकार) । विषय था, ''उत्तर प्रदेश प्रशासन में मानव संसाधन की उन्नत प्रवत्तियों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन- आगरा मंडल के संदर्भ में''
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| हिन्दी का पहला इंजीनियर कवि || मदन वात्स्यायन
|-
| हिन्दी में निर्णय देने वाले पहले न्यायाधीश || न्यायमूर्ति श्री [[प्रेम शंकर गुप्त]]
|-
| सेन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में हिन्दी के प्रथम वक्ता || [[नारायण प्रसाद सिंह]] (सारण-दरभंगा ; १९२६)
|-
| [[लोकसभा]] में सबसे पहले हिन्दी में सम्बोधन || [[सीकर]] से [[रामराज्य परिषद]] के सांसद एन एल शर्मा। उन्होने पहली लोकसभा की बैठक के प्रथम सत्र के दूसरे दिन 15 मई 1952 को हिन्दी में संबोधन किया था।
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| हिन्दी में [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] में भाषण देने वाला प्रथम राजनयिक || [[अटल बिहारी वाजपेयी]]
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| हिन्दी का प्रथम महाकवि || [[चन्दबरदाई]]
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| हिन्दी का प्रथम [[महाकाव्य]] || [[पृथ्वीराजरासो]]
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| हिन्दी का प्रथम ग्रंथ || [[पउमचरिउ]] (स्वयंभू द्वारा रचित)
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| हिन्दी का पहला समाचार पत्र (सप्ताहिक) || [[उदन्त मार्तण्ड]] (३० मई, १८२६ ई. को कलकत्ता से जुगलकिशोर शुक्ल द्वारा)
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| हिन्दी का प्रथम दैनिक समाचार पत्र || समाचार सुधावर्षण (कोलकाता से, [[श्यामसुन्दर सेन]] स्वारा सन १८५४ में
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| हिन्दी की प्रथम पर्यावरण पत्रिका || [[पर्यावरण डाइजेस्ट]] ( संपादक - डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित )
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| हिन्दी-आन्दोलन || हिन्दीभाषी प्रदेशों में सबसे पहले [[बिहार]] प्रदेश में सन् 1835 में हिन्दी आंदोलन शुरू हुआ था। इस अनवरत प्रयास के फलस्वरूप सन् 1875 में बिहार में कचहरियों और स्कूलों में हिन्दी प्रतिष्ठित हुई।
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| समीक्षामूलक हिन्दी का प्रथम मासिक || साहित्य संदेश (आगरा, सन् 1936 से 1942 तक)
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| हिन्दी का प्रथम [[आत्मचरित]] || [[अर्धकथानक]] (कृतिकार हैं, जैन कवि [[बनारसीदास|बनारसीदास (कवि)]] (वि॰सं॰ १६४३-१७००))
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| हिन्दी का प्रथम [[व्याकरण]] || 'उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण' ([[दामोदर पण्डित]])
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| हिन्दी व्याकरण के [[पाणिनी]] || [[किशोरीदास वाजपेयी]]
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| हिन्दी का प्रथम मानक [[शब्दकोश]] || [[हिन्दी शब्दसागर]]
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| हिन्दी का प्रथम विश्वकोश || [[हिन्दी विश्वकोश]]
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| हिन्दी की प्रथम आधुनिक कविता || 'स्वप्न' ([[महेश नारायण]] द्वारा रचित)<ref>{{Cite web |url=http://www.jankipul.com/2011/04/blog-post_29.html |title=क्या ‘स्वप्न’ हिन्दी की पहली आधुनिक कविता है? |access-date=31 अक्तूबर 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131101213244/http://www.jankipul.com/2011/04/blog-post_29.html |archive-date=1 नवंबर 2013 |url-status=dead }}</ref>
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| मुक्तछन्द का पहला हिन्दी कवि || [[महेश नारायण]]<ref>[http://www.abhivyakti-hindi.org/itihas/2011/mahesh_narayan.htm मुक्तछंद के प्रथम कवि महेश नारायण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131102215422/http://www.abhivyakti-hindi.org/itihas/2011/mahesh_narayan.htm |date=2 नवंबर 2013 }} (अभिव्यक्ति)</ref>
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| हिन्दी की प्रथम [[कहानी]] || हिन्दी की सर्वप्रथम कहानी कौन सी है, इस विषय में विद्वानों में जो मतभेद शुरू हुआ था वह आज भी जैसे का तैसा बना हुआ है। हिन्दी की सर्वप्रथम कहानी समझी जाने वाली कड़ी के अर्न्तगत [[किशोरी लाल गोस्वामी]] की 'इन्दुमती' (सन् 1900),[[राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद]] की 'राजा भोज का सपना' (19 वीं सदी का उत्तरार्द्ध), [[माधवराव सप्रे]] की 'एक टोकरी भर मिट्टी' (सन् 1901), [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]] की 'ग्यारह वर्ष का समय' (सन् 1903) और बंग महिला की 'दुलाई वाली' (सन् 1907) नामक कहानियाँ आती हैं। परन्तु माधवराव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी‘को प्रथम कहानी माना जाता है।
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| हिन्दी का प्रथम लघुकथाकार ||
|-[[भारतेंदु हरिश्चंद्र]]की 'अंगहीन धनी' तथा 'अद्भुत संवाद'(1875 में प्रकाशित पुस्तक 'परिहासिनी' में) 'परिहासिनी' को कथात्मक गद्य की पहली प्रकाशित पुस्तक माना जा सकता है।
<ref>[https://wwwlaghukatha-varta.blogspot.com/2009/01/blog-post.html]
| हिन्दी का प्रथम [[उपन्यास]] || '[[देवरानी जेठानी की कहानी]]' (लेखक - [[पंडित गौरीदत्त]] ; सन् १८७०)। [[श्रद्धाराम फिल्लौरी]] की [[भाग्यवती उपन्यास|भाग्यवती]] और [[लाला श्रीनिवास दास]] की [[परीक्षा गुरू]] को भी हिन्दी के प्रथम उपन्यस होने का श्रेय दिया जाता है।
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| हिन्दी का प्रथम विज्ञान गल्प || ‘आश्चर्यवृतान्त’ ([[अंबिकादत्त व्यास]] ; 1884-1888)
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| हिन्दी का प्रथम नाटक || [[नहुष]] (गोपालचंद्र, १८४१)
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| हिन्दी का प्रथम काव्य-नाटक || ‘एक घूँट’ ([[जयशंकर प्रसाद]] ; 1915 ई.)
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| हिन्दी के प्रथम [[साहित्य अकादमी पुरस्कार]] विजेता || [[माखनलाल चतुर्वेदी]] (१९५५ में [[हिमतरंगिनी]] के लिए)
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| हिन्दी का प्रथम [[ज्ञानपीठ|ज्ञानपीठ पुरस्कार]] विजेता || [[सुमित्रानंदन पंत]] (१९६८)(चिदम्बरा के लिये प्राप्त हुआ)
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम इतिहास || [[भक्तमाल]] / [[इस्त्वार द ल लितरेत्यूर ऐन्दूई ऐन्दूस्तानी]] (अर्थात "हिन्दुई और हिन्दुस्तानी साहित्य का इतिहास", लेखक [[गार्सा-द-तासी]])
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| हिन्दी में प्रथम जीवनी || भक्तमाल (१५८५ ई० [[नाभादास]])
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| हिन्दी कविता के प्रथम इतिहासग्रन्थ के रचयिता || [[शिवसिंह सेंगर]] ; (रचना - ''शिवसिंह सरोज'')
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम व्यवस्थित इतिहासकार || [[आचार्य रामचंद्र शुक्ल]]
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| हिन्दी का प्रथम चलचित्र (मूवी) || [[सत्य हरिश्चन्द्र]]
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| हिन्दी की पहली बोलती फिल्म (टाकी) || [[आलम आरा]]
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| [[देवनागरी]] के प्रथम प्रचारक || [[गौरीदत्त]]
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| हिन्दी की प्रथम अन्तरजाल पत्रिका || भारत-दर्शन (न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित)
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| हिन्दी का प्रथम [[चिट्ठा]] (ब्लॉग) || "[https://web.archive.org/web/20191008122338/http://hindi.blogspot.com/ हिन्दी]" चिट्ठे 2002 अकटूबर में विनय और आलोक ने हिन्दी (इस में अंग्रेज़ी लेख भी लिखे जाते हैं) लेख लिखने शुरू करे, 21 अप्रैल 2003 में सिर्फ हिन्दी का प्रथम चिट्ठा बना "[https://web.archive.org/web/20190330121514/http://9211.blogspot.com/ नौ दो ग्यारह]", जो अब [https://web.archive.org/web/20100124220343/http://devanaagarii.net/hi/alok/blog/ यहाँ है] (संगणकों के हिन्दीकरण से सम्बन्धित [[बंगलोर]] निवासी आलोक का चिट्ठा)
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| हिन्दी का प्रथम [[चिट्ठा]]-संकलक || [[चिट्ठाविश्व]] (सन् २००४ के आरम्भ में बनाया गया था)
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| अन्तरजाल पर हिन्दी का प्रथम समाचारपत्र || [https://web.archive.org/web/20090815120730/http://hindimilap.com/ हिन्दी मिलाप] / [[वेबदुनिया]]
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| हिन्दी का पहला समान्तर कोश बनाने का श्रेय || [[अरविन्द कुमार]] व उनकी पत्नी कुसुम
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम राष्ट्रगीत के रचयिता || पं. गिरिधर शर्मा ’नवरत्न‘
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| हिन्दी का प्रथम अर्थशास्त्रीय ग्रंथ || "संपत्तिशास्त्र" (महावीर प्रसाद द्विवेदी)
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| हिन्दी के प्रथम [[बालसाहित्य]]कार || [[श्रीधर पाठक]] (1860 - 1928)
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| हिन्दी की प्रथम वैज्ञानिक पत्रिका || सन् १९१३ से प्रकाशित [[विज्ञान (हिन्दी पत्रिका)|'''विज्ञान''']] ([[विज्ञान परिषद् प्रयाग]] द्वारा प्रकाशित)
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| छपाई के लिए नागरी टाइपों का निर्माण करने वाला प्रथम व्यक्ति || चार्ल्स विल्किन्स (1750-1836 ई.)
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| सबसे पहली टाइप-आधारित देवनागरी प्रिंटिंग || 1796 में गिलक्रिस्त (John Borthwick Gilchrist) की 'Grammar of the Hindoostanee Language', Calcutta ; Dick Plukker
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| [[खड़ीबोली]] के गद्य की प्रथम पुस्तक || [[लल्लू लाल]] जी की [[प्रेम सागर]] (हिन्दी में भागवत का दशम् स्कन्ध) ; हिन्दी गद्य साहित्य का सूत्रपात करनेवाले चार महानुभाव कहे जाते हैं- मुंशी सदासुख लाल, लल्लू लाल और सदल मिश्र। ये चारों सं. 1860 के आसपास वर्तमान थे।
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| हिन्दी की [[पारिभाषिक शब्दावली|वैज्ञानिक शब्दावली]] || १८१० ई. में [[लल्लू लाल]] जी द्वारा संग्रहीत ३५०० शब्दों की सूची जिसमें हिन्दी की वैज्ञानिक शब्दावली को [[फ़ारसी]] और [[अंग्रेज़ी]] प्रतिरूपों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
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| हिन्दी की प्रथम विज्ञान-विषयक पुस्तक || १८४७ में स्कूल बुक्स सोसाइटी, [[आगरा]] ने 'रसायन प्रकाश प्रश्नोत्तर' का प्रकाशन किया।
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| 'एशिया का जागरण' विषय पर हिन्दी कविता || सन् 1901 में [[राधाकृष्ण मित्र]] ने हिन्दी में एशिया के जागरण पर एक कविता लिखी थी। शायद वह किसी भी भाषा में 'एशिया के जागरण' की कल्पना पर पहली कविता है।
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| हिन्दी का प्रथम संगीत-ग्रन्थ || [[मानकुतूहल]] ([[ग्वालियर]] के राजा [[मानसिंह तोमर]] द्वारा रचित, १५वीं शती)
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| हिन्दी भाषा का सबसे बड़ा और प्रामाणिक व्याकरण || [[कामताप्रसाद गुरु]] द्वारा रचित "हिन्दी व्याकरण" का प्रकाशन सर्वप्रथम नागरीप्रचारिणी सभा, काशी में अपनी लेखमाला में सं. १९७४ से सं. १९७६ विक्रमी के बीच किया और जो सं. १९७७ (१९२० ई.) में पहली बार सभा से पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हुआ।
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| प्रथम [[विश्व हिन्दी सम्मेलन]] || १९७५ में [[नागपुर]] में
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| हिन्दी साहित्य का प्रथम महाकाव्य || [[पृथ्वीराज रासो]]
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| [[खड़ी बोली]] का प्रथम महाकाव्य || [[प्रियप्रवास]] ([[अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध']] द्वारा रचित)
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| खड़ी बोली की प्रथम गद्य रचना || [[गोरा बादल की कथा]]([[कवि जटमल]])
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| हिन्दी के सर्वप्रथम गीतकार || [[विद्यापति]]
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| हिन्दी की आदि कवयित्री || [[मीराबाई]]
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| हिन्दी की प्रथम कहानी लेखिका || [[बंग महिला]] ( राजेन्द्र बाला घोष)
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| काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रथम हिन्दी विभागाध्यक्ष || [[श्यामसुन्दर दास]]
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| हिन्दी के प्रथम कोशकार/शब्दकोशकार || अमीर खुसरो ('खलिक-ए-बारी'- द्विभाषी फारसी-हिन्दवी कोश)
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| हिन्दी माध्यम से सम्पूर्ण शिक्षा देने वाली देश की पहली संस्था || [[गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय]], [[हरिद्वार]]
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| हिन्दी का प्रथम अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय || [[महात्मा गान्धी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय|महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)]]
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| ब्रजभाषा गद्य की प्रथम रचना || शृंगाररसमण्डन ([[गोसाईं विट्ठलनाथ]])
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| हिन्दी का प्रथम अभिनीत नाटक || जानकी मंगल ([[शीतला प्रसाद खत्री]])
|}
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20180721191832/https://www.hindisahityadarpan.in/2017/04/gk-about-hindi-100-question-answers.html हिन्दी में सर्वप्रथम : 100- प्रश्न और उनके उत्तर]
[[श्रेणी:हिन्दी]]
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गाजर का हलवा
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{{Infobox Prepared Food
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'''गाजर का हलवा''' एक [[भारतीय खाना|भारतीय व्यञ्जन]] है। ये एक गाजर की मिठाई है। यह मिठाई एक विशिष्ट मात्रा में पानी, दूध, कसा हुआ गाजर और चीनी एक बर्तन में रखकर और फिर उसे नियमित रूप से हिलाते हुए पकाया जाता है। यह अक्सर बादाम और पिस्ता के टुकड़ो से सजाकर परोसा जाता है। हलवे में डाली जाने वाली काजु, बादाम, पिस्ता और अन्य चीजें पहले घी में तली जाती हैं। फिर वो सब तली हुई चीजें हलवे में ऊपर से डालकर सजाई जाती है।<ref>[https://www.thekitchn.com/carrot-halwa-211251?recip_id=2181239 Recipe: Carrot Halwa]</ref><ref>{{cite book | title=Classic Punjabi vegetarian and Grain Cooking | author=Julie Sahni | year=1985 | publisher=HarperCollins | isbn=0-688-04995-8 | page=512 | url=https://books.google.com/books?id=OppwQgAACAAJ&q=gajar+halwa}}</ref><ref>{{cite web|publisher=NDTV Cooks|title=Gajar Ka Gajrela|url=http://cooks.ndtv.com/recipe/show/gajjar-ka-gajrela-232876|access-date=23 August 2012}}</ref>
भारत में सभी त्योहारों के दौरान इस मिठाई को पारंपरिक रूप से खाया जाता है, मुख्यतः दीवाली, होली, ईद अल-फितर और रक्षा बंधन के अवसर पर गाजर का हलवा बनाया और खाया जाता है। यह मिठाई सर्दियों के दौरान गर्म गर्मही परोसी जाती है।
त्योहार के समय बहुत से लोग अपने थाली में शाकाहारी व्यंजन के साथ-साथ मिठाइयां भी पसंद करते हैं। गाजर का हलवा पूरे भारत में एक लोकप्रिय मिठाई है और प्रायः सभी त्योहारों में परोसी जाती है। ये पकवान वयस्कों के साथ-साथ बच्चों में भी लोकप्रिय है।
'''सामग्री और बनाने की विधि '''
'''प्रथम चरण '''
गाजर का हलवा बनाने के लिए मध्यम आकार की लाल-लाल गाजर लीजिये और उन्हें साफ़ पानी से धोकर अच्छी तरह छील लीजिये और अब छिले हुए गाजर एक बार फिर अच्छी तरह धोकर साफ़ कर लें ताकि किसी प्रकार की किसकिसाहट या मिट्टी न रह जाये। अब उनको कद्दू कस कर लीजिये।
'''द्वितीय चरण '''
अब कढ़ाई में 1 बड़ा चम्मच देशी घी डालकर गर्म कीजिये और गर्म हो जाने पर उसमें कद्दू कस की हुयी गाजर को डालकर गाजर के मुलायम होने तक भून लीजिये। भूनें हुए गाजर में ऊपर टेबल में बताये गए दूध (500g) को डाल दीजिये। अब गाजर के गलने तक और दूध के सूख कर खोवा बनने तक इसे चलाते रहिये।
'''तृतीया चरण'''
अब दूसरी तरफ एक फ्राइंग पैन में 2 बड़े चम्मच देशी घी डाल कर उसमें कटे हुए काजू, बादाम और केसर को डालकर थोड़ा फ्राई कर लें और उतारते समय किशमिश डाल लें। अब इस तड़के को गाजर के हलवे में डालकर अच्छी तरह मिला लीजिए।
'''चतुर्थ चरण'''
अब इसमें चीनी (250g) डालकर इसे चीनी के अच्छी तरह मिल जाने तक चलाते रहिये। जब हलवे का पानी पूरी तरह सूख जाये तब इसमें एक चुटकी नमक डाल लीजिये क्योंकि नमक किसी भी मिठाई में मिले हुए मेवे, इलायची और केसर के स्वाद को और भी बढ़ा देता है और अब इसमें इलायची पाउडर तथा 1 बड़े चम्मच देशी घी को डालकर 4-5 मिनट तक कम आँच पर पका लीजिये।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:गाजर के पकवान]]
[[श्रेणी:भारतीय मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:उत्तर भारतीय खाना]]
[[श्रेणी:पाकिस्तानी मिठाइयाँ]]
[[श्रेणी:पंजाबी खाना]]
[[श्रेणी:हलवा]]
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== स्थानान्तरण अनुरोध 17 जनवरी 2025 ==
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[[चित्र:PharmacistsMortar.svg|अंगूठाकार|औषधनिर्माण का मूसल]]
[[चिकित्सा]] में प्रयुक्त द्रव्यों के ज्ञान को '''औषधनिर्माण''', '''भेषज विज्ञान, भेषजी''' अथवा '''फ़ार्मेसी''' ([[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]: Pharmacy) कहते है। इसके अंतर्गत औषधों का ज्ञान तथा उनका संयोजन ही नहीं वरन् उनकी पहचान, संरक्षण, निर्माण, विश्लेषण तथा प्रमापण भी है। नई औषधों का आविष्कार तथा संश्लेषण भेषज (फ़ार्मेसी) के प्रमुख कार्य हैं। औषधनिर्माण उस स्थान को भी कहते हैं जहाँ औषधयोजन तथा विक्रय होता है।
जब तक भेषजीय प्रविधियाँ सुगम थीं तब तक भेषज विज्ञान चिकित्सा का ही अंग था। परंतु औषधों की संख्या तथा प्रकारों के बढ़ने तथा उनकी निर्माणविधियों के क्रमश: जटिल होते जाने से भेषज विज्ञान के अलग विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ी।
औषधनिर्माण नैदानिक स्वास्थ्य विज्ञान है जो चिकित्सा विज्ञान को [[रसायन विज्ञान]] से जोड़ता है और यह दवाओं और औषधि की खोज, उत्पादन, निपटान, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग और नियंत्रण से प्रभारित है। औषधनिर्माण के अभ्यास के लिए दवाओं, उनकी क्रिया का तंत्र, दुष्प्रभाव, अंतःक्रिया, गतिशीलता और विषाक्तता पर उत्कृष्ट ज्ञान की आवश्यकता होती है। साथ ही, इसे उपचार के ज्ञान और रोग प्रक्रिया की समझ की आवश्यकता होती है। फार्मासिस्टों की कुछ विशिष्टताओं, जैसे कि नैदानिक फार्मासिस्टों को अन्य कौशलों की आवश्यकता होती है, उदाहरण के लिए भौतिक और प्रयोगशाला डेटा के अधिग्रहण और मूल्यांकन के बारे में ज्ञान।<ref>{{cite book| url=https://books.google.com/books?id=9Jp7DwAAQBAJ&pg=PA1|title=क्लिनिकल फार्मेसी शिक्षा, अभ्यास और अनुसंधान | date = November 2018 }}</ref>
औषधनिर्माण अभ्यास के दायरे में अधिक पारंपरिक भूमिकाएँ शामिल हैं जैसे कि दवाओं का संयोजन और वितरण, और इसमें स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित अधिक आधुनिक सेवाएँ भी शामिल हैं, जिसमे सुरक्षा और प्रभावकारिता के लिए दवाओं की समीक्षा करना और दवा की जानकारी प्रदान करना शामिल है।
==पेशेवर==
विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनिया भर में कम से कम २.६ मिलियन फार्मासिस्ट और अन्य फार्मास्युटिकल कर्मी हैं।<ref>विश्व स्वास्थ्य संगठन. [https://www.who.int/whosis/whostat/2011/en/index.html ''विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकी 2011''] – तालिका 6: स्वास्थ्य कार्यबल, बुनियादी ढांचा और आवश्यक दवाएं। जिनेवा, 2011
. Accessed 21 July 2011.</ref>
==शिक्षा की आवश्यकताएँ==
राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार के अनुसार स्कूली शिक्षा की विभिन्न आवश्यकताएँ हैं जहां छात्र अभ्यास करना चाहता है।
==संयुक्त राज्य अमेरिका==
संयुक्त राज्य अमेरिका में, सामान्य फार्मासिस्ट डॉक्टर ऑफ औषधनिर्माण डिग्री (फार्म.डी.) प्राप्त करेंगे। फार्म.डी. कम से कम छह वर्षों में पूरा किया जा सकता है, जिसमें दो वर्ष की प्री-औषधनिर्माण कक्षाएं और चार वर्ष का व्यावसायिक अध्ययन शामिल है। <ref>{{Cite web|url=https://learn.org/articles/Pharmacist_Certification_and_Course_Requirements_FAQs.html|title=फार्मासिस्ट प्रमाणन और पाठ्यक्रम आवश्यकताएँ |date=2013–2018|website=Learn.org|access-date=6 April 2018}}</ref> औषधनिर्माण स्कूल से स्नातक होने के बाद, यह सुझाव दिया जाता है कि छात्र एक या दो वर्ष की रेसीडेंसी पूरा करें, जो स्वतंत्र रूप से सामान्यीकृत या विशेष फार्मासिस्ट बनने से पहले छात्र के लिए मूल्यवान अनुभव प्रदान करता है।
==अभ्यास क्षेत्रों==
सामुदायिक फार्मेसियों, अस्पतालों, क्लीनिकों, विस्तारित देखभाल सुविधाओं, मनोरोग अस्पतालों और नियामक एजेंसियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में फार्मासिस्ट अभ्यास करते हैं। फार्मासिस्ट स्वयं के पास चिकित्सा विशेषता में विशेषज्ञता हो सकती है।
==अंतरजाल औषधनिर्माण==
एक ऑनलाइन औषधनिर्माण, इंटरनेट औषधनिर्माण, या मेल-ऑर्डर औषधनिर्माण एक ऐसी औषधनिर्माण है जो इंटरनेट पर काम करती है और ग्राहकों को मेल, शिपिंग कंपनियों या ऑनलाइन औषधनिर्माण वेब पोर्टल्स के माध्यम से ऑर्डर भेजती है। <ref>{{Cite web|url=https://www.lovelocal.in/india/mumbai/c/pharmacies|title=मेडिकल स्टोर नियर मि|website=lovelocal.in|access-date=11 August 2021|archive-date=12 जुलाई 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210712082840/https://www.lovelocal.in/india/mumbai/c/pharmacies|url-status=dead}}</ref>
वर्ष २००० के बाद से, दुनिया भर में इंटरनेट फार्मेसियों की बढ़ती संख्या स्थापित की गई है। इनमें से कई औषधनिर्माण सामुदायिक फार्मेसियों के समान हैं, और वास्तव में, उनमें से कई वास्तव में ईंट-और-पत्थर की सामुदायिक औषधनिर्माण द्वारा संचालित हैं जो ग्राहकों को ऑनलाइन और जो उनके स्टोर में आते है उन सबको सेवा प्रदान करती हैं । प्राथमिक अंतर वह तरीका है जिसके द्वारा दवाओं का अनुरोध किया जाता है और प्राप्त किया जाता है। कुछ ग्राहक सामुदायिक दवा की दुकान में जाने के बजाय इसे एक अधिक सुविधाजनक और निजी तरीका मानते हैं, जहां कोई अन्य ग्राहक उनके द्वारा ली जाने वाली दवाओं के बारे में सुन सकता है। इंटरनेट फार्मेसियों (ऑनलाइन औषधनिर्माण के रूप में भी जाना जाता है) को कुछ रोगियों को उनके चिकित्सकों द्वारा अनुशंसित किया जाता है यदि उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना हैं।
कनाडा दर्जनों लाइसेंस प्राप्त इंटरनेट औषधनिर्माण का घर है, जिनमें से कई अपनी कम-लागत वाली दवाओं को यू.एस. उपभोक्ताओं को बेचते हैं (अन्यथा जिन्हें दुनिया की उच्चतम दवा कीमतों में से एक का भुगतान करना होगा)। <ref>{{cite journal|last1=Shane|first1=RR|title=स्वास्थ्य देखभाल अनिवार्यताओं और साक्ष्यों को व्यवहार में लाना: "इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ार्मेसी" रिपोर्ट.|journal=अमेरिकन जर्नल ऑफ़ हेल्थ-सिस्टम फ़ार्मेसी|date=15 August 2012|volume=69|issue=16|pages=1373–83|pmid=22855102|doi=10.2146/ajhp120292|url=https://semanticscholar.org/paper/2c9513a7af2c0f022c1e482bb22fc0cd7a3eb197}}</ref> हाल के वर्षों में, अमेरिका में (और उच्च दवा लागत वाले अन्य देशों में) कई उपभोक्ताओं ने [[भारत]], इज़राइल और यूके में लाइसेंस प्राप्त इंटरनेट औषधनिर्माण की प्राथमिकता देते है, जिनकी कीमतें अक्सर कनाडा से भी कम होती हैं।
== वर्गीकरण ==
अध्ययन के लिए भेषज विज्ञान दो भागों में बाँटा जा सकता है - सैद्धांतिक भेषजी (theoretical pharmacy) तथा क्रियात्मक भेषजी (practical pharmacy)
'''सैद्धांतिक भेषज विज्ञान''' के अंतर्गत [[भौतिकी]], [[रसायन]], [[गणित]] और [[सांख्यिक विश्लेषण]] तथा [[वनस्पति विज्ञान]], [[प्राणिशास्त्र]], [[वनौषध परिचय]], [[औषध-प्रभाव-विज्ञान]], [[सूक्ष्म-जीव-विज्ञान]] तथा [[जैविकीय प्रमापण]] का भी ज्ञान आता है। साथ ही, इसमें भाषाज्ञान, भेषज संबंधी कानून, औषधनिर्माण, [[प्राथमिक चिकित्सा]] और [[सामाजिक स्वास्थ्य]] इत्यादि भी सम्मिलित हैं।
'''क्रियात्मक भेषज विज्ञान''', [[विज्ञान]] की वह शाखा है जिसमें भेषज के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में लाने के हेतु प्रयुक्त विधियों तथा निर्माण क्रियाओं का ज्ञान आता है। इसके अंतर्गत औषध संयोजन तथा भेषजीय द्रव्यों का निर्माण भी है।
क्रियात्मक भेषज विज्ञान के अध्ययन में छात्र को घोल, चूर्ण, कैपसूल, मलहल, गोलियाँ, लेप, वर्ती (सपोज़िटरी), टिकियाँ, इंजेक्शन आदि बनाना सीखना पड़ता है। साधारण उपकरणों से लेकर जटिल यंत्रों तक के प्रयोग की विधि विद्यार्थी को सीखनी पड़ती है। औषधों की सूची का संकलन तथा उनके गुण, प्रभाव आदि और निर्माणविधि का वर्णन जिस ग्रंथ में किया गया है उसको [[मान्य औषधकोश|औषधकोष]] (फ़ारमेकोपिया) कहते हैं। कितने ही राष्ट्र मिलकर अथवा एक राष्ट्र स्वत: भी अपना औषधकोष विशेषज्ञों की समिति द्वारा प्रकाशित करवाता है जिसमें चिकित्सोपयोगी पदार्थो की सूची, उनकी निर्माणविधि, नाप तौल आदि दी रहती है। समय-समय पर इसको दोहराया जाता और प्रयोगानुसार औषधों को घटाया बढ़ाया जाता है। एक अंतरराष्ट्रीय फ़ारमेकोपिया भी बनती है। यह प्रथम बार सन् 1951 में [[विश्व स्वास्थ्य संगठन]] (डब्लू. एच.ओ.) द्वारा प्रकाशित हुई थी। इससे सब राष्ट्रों की फ़ारमेकोपियो का एकीकरण किया गया है।
पहली भारतीय फ़ारमेकोपिया (आई.पी.) सन् 1955 में संकलित हुई। फ़ारमेकोपिया के अतिरिक्त कई देशों में अन्य प्रामाणिक पुस्तकें भी हैं। अमरीका में एक नैशनल पत्रावली (नैशनल फ़ारमुलरी) और एक न्यू ऐंड ऑफ़िशियल रेमेडीज़ नाम की पुस्तक है। इसी प्रकार की पुस्तकें अन्य राष्ट्रों ने भी तैयार की हैं।
== औषधनिर्माण क्रियाएँ ==
अस्पतालों तथा औषधशालाओं में प्रयुक्त क्रियाओं में से कुछ ये हैं :
'''निस्सादन''' (लेविगेशन) औषध को जल के साथ घोटकर सुखा लेना तथा उसका महीन चूर्ण तैयार करना।
'''प्रोद्धावन''' (इल्यूशन) किसी अघुलनशील चूर्ण को पानी में मिलाकर भारी भाग को बैठ जाने देते हैं। फिर ऊपर के द्रव को निथार लेते हैं। ऐसा कई बार करने पर ऐसा द्रव मिल जाता है जिसमें वांछित महीन चूर्ण निलंबित रहता है।
'''मृदुभावन''' (मैसिरेशन) औषध के मोटे चूर्ण को किसी द्रव में भिगोकर समय-समय पर पात्र को हिलाते रहते हैं। अंत में परिणामी घोल को निकाल लेते हैं। इस प्रकार प्राप्त घोल को सत्व या टिंक्चर कहते हैं।
'''च्यवन''' (परकोलेशन) किसी औषध के ऊपर कोई विलायक डालकर उसका विलेय भाग निकाल लेने को च्यवन कहते हैं। यह क्रिया एक शंक्वाकार पात्र में की जाती है तथा ऊपर विलायक छोड़कर नीचे के छिद्र से विलयन बूँद-बूँद करके इकट्ठा कर लिया जाता है। अनेक सत्व तथा टिंक्चर इसी प्रकार बनते हैं।
'''प्रमापण क्रिया''' (स्टैंडर्डाइज़िंग) फ़ार्माकोपिया का आदेश है कि कुछ निमित्त ओषधियाँ प्रमापित की जाएँ, अर्थात यह देखा जाए कि उनमें उनकी प्रमुख औषधि एक निर्धारित अनुपात में अवश्य विद्यमान रहे।
'''जैविकीय प्रमाणन''' (बायोलॉजिकल स्टैंडर्डाइज़ेशन) यदि कोई औषधि रसायनविशेष हो तो ओषधि को रासायनिक विधियों द्वारा प्रमापित किया जा सकता है। परंतु कुछ ओषधियों की माप घटा बढ़ाकर जीवित प्राणी पर उसके प्रभाव की न्यूनाधिकता से ही उसका प्रमापण संभव है; उदाहरणार्थ हारमोन, हीपेरिन, पेनिसिलिन आदि। ऐसे प्रमापण को जैविकीय प्रमापण कहते हैं।
== भेषज पदार्थों का वर्गीकरण ==
साधारणत: प्रयुक्त भैषज पदार्थो का वर्गीकरण निम्नलिखित है :
'''वारि''' (ऐक्वी) ये प्राय: सौरभिक तेलों को जल के साथ हिलाकर बनते हैं; [[स्रवित जल]] (distilled water) भी इसी सूची में है।
'''क्रीम''' त्वचा पर लगानेवाली ओषधि को क्रीम कहते हैं।
'''पायस''' (इमलशन) यदि दो न मिल सकनेवाले द्रव्यों को इस प्रकार मिश्रित कर दिया जाता है कि वे पर्याप्त समय तक अलग नहीं होते ता पायस प्राप्त होता है। उदाहरणार्थ, मछली के तेल का पायस
'''सार''' (एक्स्ट्रैक्ट) वनस्पति या अन्य पदार्थ से किसी विलायक द्वारा विलेय भाग निकालकर उसे गाढ़ा कर लेते या सुखा लेते हैं। इस तरह तरल अथवा शुष्क निस्सार बन जाता है।
'''अंत:क्षेप''' (इंजेक्शन) त्वचा के नीचे, पेशी में या नस में सुई द्वारा प्रवेश करने योग्य ओषधि को इंजेक्शन कहते हैं।
'''मृदय''' (लिनिमेंट) ये तैलीय या मद्यसारयुक्त लेप हैं जो त्वचा पर रगड़े जाते हैं।
'''विलयन''' (लिकर) प्राय: जल में या मद्यसार में किसी रसायनविशेष के घोल को लिकर कहते हैं।
'''अवनेग''' (लोशन) किसी ओषधि को जल के साथ मिलाकर किसी अंगविशेष को धोने के लिए या पट्टी भिगोकर रखने के लिए बनाई गई ओषधि को लोशन कहते हैं।
'''गोली''' (पिल) एक या कई ओषधियाँ मिलाकर गोली के रूप में बना दी जाती हैं तथा निगलने के लिए दी जाती है। दु:स्वाद छिपाने के लिए प्राय: इन पर शर्करादि का लेप कर दिया जाता है।
'''मिश्रण''' (मिक्स्चर) कई ओषधियों को जल अथवा अन्य किसी पेय में मिलाकर नियमित मात्रा में पिलाने के लिए बनी ओषधि को मिक्सचर कहते हैं।
'''चूर्ण (पाउडर)''' यह एक ओषधि अथवा कई ओषधियों का चूर्ण होता है।
'''प्रासव (स्पिरिट)''' यह सौरभिक तैलों अथवा अन्य किसी द्रव का मद्यसार में घोल होता है।
'''वर्ती (सपोज़िटरी)''' किसी नरम पदार्थ से छोटी पेंसिल के समान बनी वस्तु है, जिसमें ओषधि मिली रहती है तथा जो गुदाद्वार या योनि में प्रविष्ट करा दी जाती है।
'''टिकिया (टैब्लेट)''' ये प्राय: मशीन से बनती हैं तथा इनमें एक या कई ओषधियाँ होती हैं।
'''निष्कर्ष (टिंक्चर)''' जैसा पहले लिखा जा चुका है, यह वनस्पति पदार्थो के ऊपर कोई विलायक (प्राय: मद्यसार) छोड़कर बनाई जाती है। घुलनशील तत्व इस प्रकार विलायक में आ जाते हैं।
'''मलहम (अंग्वेंट)''' ये वैसलीन आदि में किसी ओषधि को फेंटकर बनाए जाते हैं तथा त्वचा पर लगाने के काम आते हैं।
==अष्टवर्ग औषधि==
'''अष्टवर्ग औषधि''' आयुर्वेद में वर्णित आठ प्रमुख औषधीय वनस्पतियों का एक समूह है, जिन्हें पारंपरिक रूप से बलवर्धक और पुनरुत्थान (रसायन) गुणों के लिए जाना जाता है। इस समूह में जीवक–ऋषभक, काकोली–क्षीरकाकोली, मेदा–महामेदा तथा रिद्धि–वृद्धि जैसे चार जोड़े शामिल होते हैं।<ref name="charak">{{cite book |title=Charaka Samhita |publisher=Chaukhamba Orientalia}}</ref><ref name="bhav">{{cite book |title=Bhavaprakasha |publisher=Chaukhamba Bharati Academy}}</ref>
अष्टवर्ग औषधियों का उपयोग विभिन्न रसायन औषधियों और टॉनिक के निर्माण में किया जाता है। इनका उपयोग विशेष रूप से शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, कमजोरी दूर करने और दीर्घायु के लिए किया जाता रहा है।<ref name="bhav" />
अष्टवर्ग की औषधियों का उल्लेख प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है, जहाँ इन्हें विशेष रूप से रसायन चिकित्सा में उपयोगी बताया गया है। इन औषधियों का उपयोग शरीर की शक्ति बढ़ाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार के लिए किया जाता है।<ref name="charak" />
आधुनिक शोध और आयुर्वेदिक साहित्य में यह भी उल्लेख किया गया है कि अष्टवर्ग की कई वनस्पतियाँ हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती हैं और इनमें जैव सक्रिय तत्व (bioactive compounds) मौजूद होते हैं, जो औषधीय गुण प्रदान करते हैं।<ref>{{cite book |title=Medicinal Plants of India |publisher=Indian Council of Medical Research}}</ref>
=== घटक ===
अष्टवर्ग में निम्नलिखित आठ औषधीय पौधे सम्मिलित माने जाते हैं:
* जीवक (''Malaxis acuminata'')
* ऋषभक (''Malaxis muscifera'')
* काकोली (''Roscoea purpurea'')
* क्षीरकाकोली (''Lilium polyphyllum'')
* मेदा (''Polygonatum cirrhifolium'')
* महामेदा (''Polygonatum verticillatum'')
* रिद्धि (''Habenaria intermedia'')
* वृद्धि (''Habenaria edgeworthii'')
== इन्हें भी देखें ==
* [[मान्य औषधकोश]]
* [[द्रव्यगुण शास्त्र]] (AYURVEDA PHARMACOLOGY)
* [[भैषज्य कल्पना]]
* [[रसशास्त्र]]
* [[भेषज-चिकित्साविज्ञान]] (pharmacotherapeutics)
* [[विश्लेषण भेषजी]] (analytical pharmacy)
* [[जैव फार्मेसी|जैव औषधनिर्माण]] (biological pharmacy)
* [[सामुदायिक फार्मेसी|सामुदायिक औषधनिर्माण]] (community pharmacy)
* [[दंत भेषजी]] (dental pharmacy)
* [[नैतिक भेषजी]] (ethical pharmacy)
* [[सामान्य भेषजी]] (general pharmacy)
* [[अस्पताल फार्मेसी|अस्पताल औषधनिर्माण]] (hospital pharmacy)
* [[विनिर्माण भेषजी]] (manufacturing pharmacy)
* [[मध्यकालीन भेषजी]] (medieval pharmacy)
* [[मान्य फार्मेसी|मान्य औषधनिर्माण]] (official pharmacy)
* [[भौतिक भेषजी]] (physicial pharmacy)
* [[व्यावसायिक फार्मेसी|व्यावसायिक औषधनिर्माण]] (professional pharmacy)
* [[विकिरण भेषजी]] (radio pharmacy)
* [[फुटकरविक्रय फार्मेसी|फुटकरविक्रय औषधनिर्माण]] (retail pharmacy)
== बाहरी कड़ियाँ ==
<references/>
==अन्य==
* [https://web.archive.org/web/20190107233529/https://books.google.co.in/books?id=2HyC4-GJ50YC#v=onepage&q&f=false Indigenous Drugs Of India] (Google book By Chopra R N, I.C. Chopra)
* [https://web.archive.org/web/20051102083751/http://www.ubka.uni-karlsruhe.de/pharm/pharmaziegeschichte/index-e.html Navigator History of Pharmacy] Collection of internet resources related to the history of pharmacy.
* [https://web.archive.org/web/20060629002724/http://www.rpsgb.org.uk/members/museum/mussheet.htm RPSGB Museum Information Sheets] Illustrated information sheets on objects in the history of pharmacy.
* [https://web.archive.org/web/20120210025434/http://home.swipnet.se/PharmHist/Lankar/lankar_en.html History of Pharmacy Web Pages] Perbo's History of Pharmacy Web Pages.
* [https://web.archive.org/web/20190718085803/http://drugstoremuseum.com/ Soderlund Pharmacy Museum] - Information about the history of the American Drugstore
* [https://web.archive.org/web/20100206131403/http://www.lloydlibrary.org/ The Lloyd Library] Library of botanical, medical, pharmaceutical, and scientific books and periodicals, and works of allied sciences
* [https://web.archive.org/web/20190904023509/https://aihp.org/ American Institute of the History of Pharmacy] American Institute of the History of Pharmacy—resources in the history of pharmacy
* [https://web.archive.org/web/20191014162853/https://www.fip.org/] International Pharmaceutical Federation (FIP). Federation representing national associations of pharmacists and pharmaceutical scientists. Information and resources relating to pharmacy education, practice, science and policy.
* [https://web.archive.org/web/20091022051226/http://www.pharmacy.org/ The Virtual Library of Pharmacy] - Extensive index of pharmacy-related resources, including information on careers in pharmacy, pharmacy schools, pharmaceutical companies, associations and conferences.
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अनिरुद्ध कुमार
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[[चित्र:Buestenhalter-2.jpg|right|thumb|150px|ब्रेसियर का आगे का भाग]]
[[चित्र:Buestenhalter-1.jpg|right|thumb|150px|ब्रेसियर का पीछे का भाग]]
'''ब्रेजियर''' ('ब्रा' नाम से प्रसिद्ध) बालिकाओं एवं स्त्रियों का वस्त्र है जो स्तनों को ढ़कने, उन्हें अवलम्बन देने एवं उभारने का काम करता है। इसे हिन्दी में चोली और [[बंगाली भाषा|बांग्ला]] में वक्षबंधनी कहते हैं।
== बाहरी वस्त्र के रूप में ब्रा ==
स्पोर्ट्स ब्रा का आविष्कार 1975 में ग्लैमराइज फाउंडेशन द्वारा "फ्री स्विंग टेनिस ब्रा" के साथ किया गया था। महिलाओं ने उन्हें अगले 25 वर्षों तक अन्य कपड़ों के नीचे पहना। लेकिन 10 जुलाई 1999 को, ब्रांडी चैस्टेन ने 1999 फीफा महिला विश्व कप फाइनल के अंतिम गेम में संयुक्त राज्य अमेरिका को चीन पर जीत दिलाने के लिए पेनल्टी शूटआउट में पांचवां किक लगाया। उत्सव में, उसने अपनी स्पोर्ट्स ब्रा को उजागर करते हुए अनायास ही अपनी जर्सी उतार दी। उनके इस कृत्य को कुछ लोगों द्वारा एक ऐतिहासिक घटना के रूप में माना जाता है जिसने केवल स्पोर्ट्स ब्रा पहनने को बढ़ावा दिया।
मैडोना 1980 के दशक के अंत में अपनी ब्रा की पट्टियां दिखाने वाली पहली महिलाओं में से एक थीं।1990 के दशक की शुरुआत से ऐसे कपड़े पहनना फैशन बन गया था जिनमें ब्रा की पट्टियाँ दिखाई देती थीं।
==विभिन्न प्रकार==
<gallery>
File:Modern bra plunge.jpg|Plunge
File:Modern bra fullcup.jpg|Full-cup
File:Modern bra bandeau.jpg|Balconette
File: Shutter bra.png|1950s style "Shutter" bra
</gallery>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20090707114604/http://www.bbc.co.uk/hindi/science/story/2008/04/080414_bra_size.shtml चोली के आकार से उलझनें...]
* [https://web.archive.org/web/20090430033824/http://www.nytimes.com/2004/02/13/opinion/13SEIG.html?ex=1392094800&en=3ccbbda0c86fb91f&ei=5007&partner=USERLAND Seigel, Jessica. The Cups Runneth Over. NY Times February 13, 2004]
* [https://web.archive.org/web/20091019001731/http://news.bbc.co.uk/2/hi/health/7136248.stm 'Intelligent bra' battles bounce. 10 दिसम्बर 2007]
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[[:चूतड़]] → {{no redirect|कूल्हा}} – जो पढ़ने में भी सही लगता है <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 21:03, 24 नवम्बर 2025 (UTC)
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::हालांकि hip के लिए कूल्हा शब्द काम में लिया जाता है अतः मुझे नितम्ब शब्द Buttocks के लिए अधिक उचित लग रहा है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:53, 25 जनवरी 2026 (UTC)
:::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]]
:::{{समर्थन}} [[नितम्ब]] परंतु यह पहले से उपलब्ध है, इसका विलय भी किया जा सकता है क्योंकि वह भी छोटा लेख हैं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:06, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}{{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म| name = Before Sunset |
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'''''बिफोर सनसेट'' ''' 2004 की एक अमेरिकी फिल्म और'' [[बिफोर सनराइज]]'' (1995) की अगली कड़ी है। अपने पूर्ववर्ती फिल्म की तरह, इसका निर्देशन रिचर्ड लिंकलेटर द्वारा किया गया। हालांकि, अब लिंकलेटर स्क्रीनप्ले का श्रेय इस फिल्म के दो कलाकारों, एथन हॉक और जूली डैल्पी को भी देते है। लिंकलेटर ''बिफोर सनराइज'' के मूल स्क्रीन लेखक कीम क्रीजन को भी कहानी के लिए श्रेय देते हैं।
यह फिल्म ''बिफोर सनराइज'' से कहानी को वहां से चुनती है जहां एक अमेरिकी युवक एक फ्रांसीसी युवती से ट्रेन में मिलता है और [[वियना]] में वे एक पूरी रात बिताते हैं। ''बिफोर सनसेट'' में नौ साल बाद उनके रास्ते आपस में टकराते हैं। ऐसा ठीक समय पर होता है क्योंकि वे [[पैरिस|पेरिस]] में एक दोपहर साथ-साथ बिताते हैं।
सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित स्क्रीनप्ले के लिए पटकथा का [[अकेडेमी पुरस्कार|अकादमी अवार्ड]] एकत्र करने के साथ ही यह फिल्म व्यापारिक और आलोचनात्मक दोनों रूपों में सफल थी।
== कथानक का सारांश ==
''बिफोर सनराइज'' की घटना को हुए नौ साल बीत चुके हैं, जब जेसी (हॉक) और सेलिन (डेप्ली) वियना में मिले थे। इस अंतराल में सेलिन के साथ बिताए समय से प्रेरित होकर जेसी ने एक उपन्यास'' दिस टाइम'' लिख दिया है और पुस्तक अमेरिका की बेस्टसेलर हो चुकी है। [[यूरोप]] में बिक्री को बढ़ावा देने के लिए जेसी बुक टूर करता है। दौरे का अंतिम पड़ाव पेरिस है और जैसी शेक्सपियर एवं कंपनी नामक पुस्तक की दुकान पर पाठ कर रहा है। जैसे ही जेसी दर्शकों के साथ बात करता है, उसको और सेलिन को फ्लैश बैक में वियना में दिखाया जाता है; नौ वर्ष बीत जाने के बावजूद एक साथ की रात की स्मृतियां उसके जेहन में मौजूद हैं। जेसी का साक्षात्कार लेते हुए किताब की दुकान में तीन पत्रकार मौजूद हैं, एक रूमानी खयाल का है जो यह विश्वास करता है कि किताब के मुख्य पात्र फिर से मिलेंगे, एक इर्ष्यालु है जो यह विश्वास करता है कि वे नहीं मिलेंगे और तीसरा जो यह चाहते हुए कि वे दुबारा मिलेंगे, संदेह में है कि क्या वे ऐसा कर सकेंगे. दर्शकों से बात करते हुए उसकी आंखें खिड़की की ओर चली जाती हैं और वह मुश्किल से विश्वास कर सकता है: सेलिन उसे देखकर मुस्करा रही है।
प्रस्तुति के खत्म होते ही किताब की दुकान का मैनेजर उसे याद दिलाता है कि उसे हवाई जहाज पकड़नी है और लगभग एक घंटे में उसे हवाई अड्डे के लिए निकलना चाहिए और जैसा कि ''बिफोर सनराइज'' में हुआ था, उसी तरह जेसी और सेलिन का पुनर्मिलन समय के हाथों मजबूर हो जाता है। पहले फिल्म की तरह ही पात्रों को साथ के थोड़े समय का ही सबसे अच्छा उपयोग करने के लिए बाध्य किया जाता है, उनके बातचीत को आसान बनाते हुए ताकि वे अधिक करीब हो सकें, प्राय:काम, राजनीति और अन्य के थीम के साथ, जुनून को बढ़ाते हुए, एक दुसरे के बीच के उनके प्यार को पकड़ते हुए, ठीक उसी तरह कि उनके साथ होने का समय व्यतीत हो रहा है।
अपनी बातचीत के प्रारंभ में, वे इस विषय को उठाते हैं कि पहली मुलाकात के छ: महीने बाद ही मिलने का वादा कर के भी वे क्यों नहीं मिले. ऐसा लगता है कि वादे के मुताबिक जेसी वियना लौटा था, लेकिन सेलिन नहीं लौटी थी, क्योंकि उनके मिलने की तय तारीख के पहले ही उसकी दादी का देहांत हो गया। क्योंकि जेसी और सेलिन ने एक-दूसरे के पते नहीं लिए थे, एक-दूसरे को संपर्क करने का कोई रास्ता नहीं था, फलस्वरूप उनका संपर्क टूट गया।
बात करते हुए दोनों अपनी पहली मुलाकात के बाद हुई घटनाओं का जिक्र करते हैं। दोनों अब अपने तीस की के पूर्वार्द्ध में हैं। जेसी अब शादीसुदा है और उसका एक बेटा है। सेलिन पर्यावरण की पक्षसमर्थक बन गयी है, इस समय अमेरिका में रहती है और उसका एक पुरूष मित्र है, जो फोटो पत्रकार है। उनकी बात के दौरान यह स्पष्ट हो जाता है कि दोनों अपने जीवन के बदलते विस्तार से असंतुष्ट हैं। जेसी बताता है कि केवल अपने बेटे के प्यार की वजह से ही वह अपनी पत्नी के साथ रहता है। सेलिन कहती है कि वह अपने प्रेमी से बहुत मिल नहीं पाती क्योंकि वह अक्सर काम पर रहता है।
पेरिस में घुमते हुए कैफे, बगीचे, बैट्यु माउच और पेरिस में ठहरने के दौरान जैसी द्वारा ली गई भाड़े की कार के साथ ही विभिन्न जगहों पर उनकी बात होती है। एक-दूसरे के लिए उनकी पुरानी भावनाएं धीरे धीरे दुबारा जाग रही हैं, पहली मुलाकात को खो देने के तनाव और पछतावे के साथ, क्योंकि वे महसूस करते हैं कि दूसरी कोई भी चीज उनके जीवन में वियना में बिताई गई उस रात के साथ जम नहीं पाई. जेसी अंततः स्वीकार करता है कि यह किताब उसने एक दिन सेलिन से मिल पाने की दुराशा में लिखी है। वह जवाब देती है कि यह पुस्तक उसके दुखद स्मृतियों को दुबारा वापस ले कर आई है। एक बिंदु पर, भाड़े के कार में, एक तनाव वाले क्षण में, जब जेसी अपने प्रेम विहीन और कामहीन विवाह की बात स्वीकार कर रहा होता है, सेलिन जेसी को स्पर्श करने के लिए अपना हाथ बढ़ाती है लेकिन वापस खींच लेती है, क्योंकि वह उसकी ओर मुड़ जाता है।
समापन दृश्य में, सेलिन और जेसी सेलिन के अपार्टमेंट में पहुंचते है। जेसी जान चुका था कि सेलिन गिटार बजाती है और उसे अपने लिए वॉल्ट्ज् गाना बजाने के लिए उकसाता है। वाल्ट्ज (डैल्पी द्वारा लिखित) गीत के माध्यम से उनके क्षणिक मिलन की बात उजागर होती है।
उसके बाद जेसी स्टेरिओ सिस्टम पर नीना सिमोन सीडी बजाता है। सेलिन "जस्ट इन टाइम" गीत पर अपने आप नाचने लगती है और जेसी देखता रहता है। चूंकि सेलिन साइमन का नकल करती है, जेसी से बुदबुदाते हुए कहती है, "बेबी ...तुम अपनी जहाज मिस करने वाले हो." जैसे ही कैमरा धीरे-धीरे नीचे घुमता है, जेसी अपनी शादी की अंगुठी के साथ घबराहट और बेचैनी में मुस्कुराता है और अनेकार्थी ढंग से जवाब देता है," मैं जानता हूं,"यह अनुमान दर्शकों पर छोड़ते हुए कि वह रह जाता है या चला जाता है, ठीक उन तीन पत्रकारों की तरह जिनलोगों ने फिल्म की शुरूआत में जेसी से साक्षात्कार लिया था।
== कलाकार ==
* जेसी के रूप में एथन हॉक
* सेलिन के रूप में जूली डैल्पी
* किताबों की दुकान के मैनेजर के रूप में वेरनॉन डॉबचेफ
* पत्रकार #1 के रूप में लेमुइन टॉरेस
* पत्रकार #2 के रूप में रोडोल्फे पाउली
* वेट्रेस के रूप में मैरिअने प्लास्टिंग
* फिलिप के रूप में डायबोलो
* नाव परिचर के रूप में डेनिस इवरैड
* ग्रिल पर आदमी के रूप में अल्बर्ट डैल्पी
* आंगन में औरत के रूप में मैरी पिल्लेट
== निर्माण (प्रोडक्शन) ==
लगभग यूएस $2 मिलियन के साथ फिल्म को 15 दिनों में फिल्माया गया था।<ref name="Marshall">{{cite news | url=http://www.telegraph.co.uk/arts/main.jhtml?xml=/arts/2004/07/19/bfhawk18.xml | title=Love that goes with the flow | publisher=''Telegraph'' | author=Lee Marshall | date=2004-07-19 | accessdate=2007-08-11 | location=London }}{{Dead link|date=जुलाई 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> हॉक ने फिल्म बनाने के कारण पर टिप्पणी की:
{{cquote|It's not like anybody was begging us to make a second film. We obviously did it because we wanted to.<ref>{{cite news | url=http://film.guardian.co.uk/interview/interviewpages/0, 1241288,00.html | title=Forget me not | publisher=''द गार्डियन'' | author=Geoffrey Macnab | date=2005-10-08 | accessdate=2007-08-10 | location=London }}{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref></blockquote>}}
इस फिल्म को ट्रैंकिंग शॉट के लिए स्थिर कैमरा और 11 मिनट में स्थिर कैमरा जितना लंबा टेक लेता है, उसका उपयोग करने के कारण इस फिल्म को दर्ज किया गया।<ref name="Marshall">{{cite news | url=http://www.telegraph.co.uk/arts/main.jhtml?xml=/arts/2004/07/19/bfhawk18.xml | title=Love that goes with the flow | publisher=''Telegraph'' | author=Lee Marshall | date=2004-07-19 | accessdate=2007-08-11 | location=London}}</ref> यह भी उल्लेखनीय है कि फिल्म वास्तविक समय में घटित होती है, अर्थात् कहानी में व्यतीत समय फिल्म का भी रन टाइम है। इसके अलावा, अगली कड़ी ''बिफोर सनराइज'' के नौ वर्ष बाद रिलीज की गई, पहली फिल्म की घटना से समय की वही मात्रा कथानक में भी व्यतीत हो चुकी है।
हॉक ने इस श्रृंखला में आगे की फिल्मों की संभावना का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही बढ़िया होगा कि उनके संबंधों के आगे का सिलसिला विकसित किया जाए.<ref>{{cite news | url=http://books.guardian.co.uk/departments/generalfiction/story/0, 1503574,00.html | title=The last word | publisher=''द गार्डियन'' | author=James Wood | date=2005-06-11 | accessdate=2007-08-10 | location=London }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> यह फिल्म हॉक का उमा थर्मन से तलाक होने के परिणाम स्वरूप प्रकट हुई और कुछ टिप्पणीकार हॉक के अपने जीवन के साथ फिल्म के जेसी के चरित्र की तुलना करते हैं।<ref>{{cite news | url=http://www.guardian.co.uk/film/2005/oct/08/features.fiction | title=Another sunrise | publisher=''द गार्डियन'' | author=Dan Halpern | date=2005-10-08 | accessdate=2009-12-28 | location=London | archive-url=https://web.archive.org/web/20090511015118/http://www.guardian.co.uk/film/2005/oct/08/features.fiction | archive-date=11 मई 2009 | url-status=live }}</ref> अतिरिक्त टिप्पणियों में उल्लेख किया गया है कि हॉक और डेप्ली दोनों के अपने जीवन के तत्व पटकथा में निगमित किये गये हैं,<ref>{{cite news | url=http://www.telegraph.co.uk/arts/main.jhtml;jsessionid=UDDNPETQG4EXLQFIQMFCFGGAVCBQYIV0?xml=/arts/2004/07/09/bflink09.xml | title=Keeping the dream alive | publisher=''Telegraph'' | author=S.F. Said | date=2004-07-09 | accessdate=2007-08-11 | location=London | archive-url=https://web.archive.org/web/20081206102842/http://www.telegraph.co.uk/arts/main.jhtml | archive-date=6 दिसंबर 2008 | url-status=live }}</ref><ref name="Marshall"/> जैसे कि यह तथ्य है कि डेल्पी बहुत वर्षों से न्यूयार्क शहर में रहते थे। डेल्पी ने इस फिल्म में दो फ़ीचर्ड गीत भी लिखे. एक तिहाई में फिल्म की ध्वनि और क्लोजिंग क्रेडिट शामिल हैं।
== रिलीज़ ==
''बिफोर सनसेट'' का प्रीमियर फरवरी 2004 को बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में किया गया और इसे जुलाई 2, 2004, को संयुक्त राज्य अमेरिका में एक सीमित रिलीज प्राप्त हुआ।
=== बॉक्स ऑफिस ===
अपने उदघाटन सप्ताहांत में, फिल्म ने संयुक्त राज्य अमेरिका के 20 थिएटरों में $219,425 कमाए, जिसका प्रति थियेटर औसत $10,971 था। थियेटर में चलने के दौरान, फिल्म ने संयुक्त राज्य अमेरिका में $ 5.8 लाख और दुनिया भर में करीब 16 करोड़ डॉलर की कमाई की.<ref name="bom">{{cite web | url=http://www.boxofficemojo.com/movies/?id=beforesunset.htm | title=Before Sunset (2004) | publisher=''[[बॉक्स ऑफ़िस मोजो]]'' | accessdate=2009-12-28 | archive-url=https://web.archive.org/web/20091126152733/http://boxofficemojo.com/movies/?id=beforesunset.htm | archive-date=26 नवंबर 2009 | url-status=live }}</ref>
=== आलोचनात्मक स्वागत ===
''बिफोर सनसेट'' का आलोचकों ने सकारात्मक स्वागत किया। 155 रिव्यू पर आधारित रौटेन टोमैटोज पर 95% सकारात्मक रेटिंग धारण करती है,<ref>{{cite web |url=http://www.rottentomatoes.com/m/before_sunset/ |title=Before Sunset Movie Reviews, Pictures - Rotten Tomatoes |accessdate=2010-03-23 |publisher=[[रॉटेन टमेटोज़]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20101021232423/http://www.rottentomatoes.com/m/before_sunset/ |archive-date=21 अक्तूबर 2010 |url-status=live }}</ref> और मुख्य प्रकाशनों के 39 रिव्यू पर आधारित मेटाक्रिटिक द्वारा इसे 100 में 90 का भारी औसत स्कोर प्रदान किया गया है।<ref>{{cite web|url=http://www.metacritic.com/film/titles/beforesunset|title=Before Sunset reviews at Metacritic.com|accessdate=2009-11-19|publisher=[[Metacritic]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20090831163422/http://www.metacritic.com/film/titles/beforesunset/|archive-date=31 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref> यह 28 आलोचकों के 2004 के सबसे अच्छी फिल्मों के टॉप 10 सूची में भी दिखी.<ref>{{cite web |url=http://www.metacritic.com/film/awards/2004/toptens.shtml |title=Metacritic: 2004 Film Critic Top Ten Lists |accessdate=2009-11-19 |publisher=[[Metacritic]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20080527234801/http://www.metacritic.com/film/awards/2004/toptens.shtml |archive-date=27 मई 2008 |url-status=live }}</ref> इस फिल्म को एक 2008 ''अंपायर'' पोल के द्वारा हमेशा से महान रही 110वीं फिल्म के रूप में स्थापित किया गया।<ref>{{cite web|url=http://www.empireonline.com/500/77.asp|title=Empire Features - 500 Greatest Movies of All Time|accessdate=2010-01-25|publisher=''[[Empire (magazine)|Empire]]''|archive-url=https://web.archive.org/web/20121015212510/http://www.empireonline.com/500/77.asp|archive-date=15 अक्तूबर 2012|url-status=live}}</ref>
मूल फिल्म के साथ इसकी तुलना करते हुए फिल्म आलोचक रोजर एबर्ट ने लिखा,"''बिफोर सनराइज'' अच्छे संवाद के सम्मोहन का उल्लेखनीय उत्सव था। लेकिन ''बिफोर सनसेट'' बेहतर है, शायद इसलिए कि चरित्र पुराने और बुद्धिमान हैं, शायद इसलिए क्योंकि उनके पास खोने (या पाने) के लिए ज्यादा है और शायद इसलिए क्योंकि हॉक और डेल्पी ने स्वयं ही संवाद लिखे हैं।<ref>{{cite web|url=http://rogerebert.suntimes.com/apps/pbcs.dll/article?AID=/20040702/REVIEWS/407020312/1023|title=Before Sunset :: rogerebert.com :: Reviews|accessdate=2009-12-28|publisher=''[[Chicago Sun-Times]]''|archive-url=https://web.archive.org/web/20130127105544/http://rogerebert.suntimes.com/apps/pbcs.dll/article?AID=%2F20040702%2FREVIEWS%2F407020312%2F1023|archive-date=27 जनवरी 2013|url-status=live}}</ref> ''लॉस एंजिल्स टाइम्स'' के मानोह्ला डरगिस ने "पहली की तुलना में कला का गंभीर और वास्तविक कार्य" के रूप में इसकी सराहना की और निर्देशक लिंकलेटर को एक ऐसी फिल्म बनाने के लिए सराहना की जो " सबसे अच्छी अमेरिकी सिनेमा का भरोसा दिलाती है।"<ref>{{cite web|url=http://www.calendarlive.com/movies/reviews/cl-et-dargis2jul02-04,2,1313132.story|title='Before Sunset' - Movie Review|accessdate=2009-12-28|publisher=''[[लॉस एंजिल्स टाइम्स]]''|archive-url=https://web.archive.org/web/20080523190447/http://www.calendarlive.com/movies/reviews/cl-et-dargis2jul02-04%2C2%2C1313132.story|archive-date=23 मई 2008|url-status=dead}}</ref>
अभिनय की समीक्षा करते हुए, ''रॉलिंग स्टोन'' के पीटर ट्रांवर्स ने अवलोकन किया, "हॉक और डेल्पी, बोले और नहीं बोले गए शब्दों में कला और आलोचना की बारीकी प्राप्त करते हैं। अभिनेता दमकते हैं।"<ref>{{cite web|url=http://www.rollingstone.com/reviews/movie/6184936/review/6184989/before_sunset|title=Before Sunset : Review : Rolling Stone|accessdate=2009-12-28|publisher=''[[Rolling Stone]]''|archive-url=https://web.archive.org/web/20081204090048/http://www.rollingstone.com/reviews/movie/6184936/review/6184989/before_sunset|archive-date=4 दिसंबर 2008|url-status=live}}</ref> ''द ऑवजर्वर'' के फिलिप फ्रेंच ने लिखा, "हॉक और डेल्पी दोनों उत्कृष्ट रहे हैं और उनके प्रदर्शन में असली गहराई है। इस बार भी वे ''रिचर्ड लिंकलेटर'' की फिल्म में एक कार्यात्मक रचना के रूप में प्रकट होने से ज्यादा काम कर रहे हैं। वे अब इनके साथ लेखन का श्रेय भी ग्रहण कर रहे हैं और पिछले दशक के अपने अधिक अनुभवों को चरित्र में डाल रहे हैं जो उन्होंने प्राप्त किए हैं या उनसे प्राप्त करवाया गया है।<ref>{{cite news | url=http://www.guardian.co.uk/theobserver/2004/jul/25/features.review37 | title=Brief re-encounter | accessdate=2009-12-28 | publisher=''[[The Observer]]'' | location=London | first=Philip | last=French | date=2004-07-25 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090417225604/http://www.guardian.co.uk/theobserver/2004/jul/25/features.review37 | archive-date=17 अप्रैल 2009 | url-status=live }}</ref>
स्क्रिप्ट की खूबियों पर ध्यान देते हुए ''[[न्यू यॉर्क टाइम्स|द न्यूयॉर्क टाइम्स]]'' के ए.ओ. स्कॉट ने जो उल्लेख किया, वह था " कभी-कभा पागल कर देने वाला" लेकिन "सम्मोहित करने वाला, संक्षेप में स्क्रिन लेखन के आम अनिवार्यता के लिए इसके लापरवाह उदासीनता के कारण." उन्होंने आगे विस्तार से कहा, "क्या वे बस यह नहीं कह सकते कि वे क्या चाहते है? आप कह सकते हैं? आखिरकार, भाषा, केवल आशय और अर्थ के बारे में नहीं होती. यह संपर्क की एक माध्यम है, लेकिन यह परिहार, गलत दिशा निर्देश, आत्म-रक्षा और सीधा भ्रम का भी माध्यम है, जिनमें से सभी इस फिल्म की थीम हैं, जो एक ऐसे सत्य को पकड़ते हैं जो शायद ही किसी किताब या किसी फिल्म में चिन्हित हुआ है।<ref>{{cite news |url=http://www.nytimes.com/2004/07/02/movies/film-review-reunited-still-talking-still-uneasy.html?pagewanted=1 |title=FILM REVIEW: Reunited, Still Talking, Still Uneasy |accessdate=2009-12-28 |publisher=''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स]]'' |first=A. O. |last=Scott |date=2004-07-02 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140910200128/http://www.nytimes.com/2004/07/02/movies/film-review-reunited-still-talking-still-uneasy.html?pagewanted=1 |archive-date=10 सितंबर 2014 |url-status=live }}</ref>
=== पुरस्कार और नामांकन ===
;पुरस्कार
* 2004 में बॉस्टन सोसाईटी ऑफ़ फिल्म क्रिटिक्स अवार्ड - सर्वश्रेष्ठ फिल्म (दूसरा स्थान)
;नामांकन
* 2004 में 77th अकैडमी अवार्ड्स - रिचर्ड लिंकलेटर, एथेन हॉक, जूली डेल्पी और किम क्रिज़न के लिए सर्वश्रेष्ठ लेखन (रूपांतरित पटकथा).
* 2004 मेंइंडीपेंडेंट स्पिरिट अवार्ड - रिचर्ड लिंकलेटर, एथेन हॉक और जूली डेल्पी के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा
* 2005 में रायटर्स गिल्ड ऑफ़ अमेरिका अवार्ड - रिचर्ड लिंकलेटर, एथेन हॉक, जूली डेल्पी और किम क्रिज़न के लिए सर्वश्रेष्ठ रूपांतरित पटकथा।
* 2004 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल - गोल्डेन बियर
* 2004 में गौथम अवार्ड्स - सर्वश्रेष्ठ फिल्म
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{wikiquote}}
* {{official|http://www.beforesunset.com/}}
* {{imdb title|id=0381681|title=Before Sunset}}
* [https://web.archive.org/web/20080127234101/http://movies.groups.yahoo.com/group/sunriseandsunset/ बिफोर संराइज़/सनसेट याहू ग्रूप]
* ''लॉस एंजेलिस टाइम्स'' द्वारा [https://web.archive.org/web/20100307145719/http://articles.latimes.com/2004/jun/20/entertainment/ca-verini20 रिचर्ड लिंकलेटर, एथेन हॉक और जूली डेल्पी] के साथ एक मुलाकात
{{Richard Linklater}}
[[श्रेणी:2004 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:अमेरिकी रोमांटिक नाट्य फिल्में]]
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विकिपीडिया:Twinkle
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Pushkar Singh
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text/x-wiki
{{for|Twinkle preferences panel|विकिपीडिया:Twinkle/Preferences}}
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[[Image:Police man Twinkle Head.svg|100px|right|Mr. Twinkly]]
{{tool warning}}
'''Twinkle''' ट्विंकल मूल रूप से अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर बनाया गया एक जावास्क्रिप्ट उपकरण है जो विकिपीडिया पर रखरखाव के कार्यों में सहायता करता है। इसका प्रयोग केवल पंजीकृत सदस्यों द्वारा किया जा सकता है। यह कई सुविधाएँ उपलब्ध कराता है, जिसमें सदस्यों को संदेश देना, बर्बरता के कार्यों को एक बटन में वापिस लेना, पृष्ठों को हटाने के लिये नामांकित करना, और भी बहुत कुछ शामिल है।
Twinkle मूल रूप से [[:en:User:AzaToth|AzaToth]] द्वारा बनाया गया है और इसकी उत्पत्ति में [[:en:User:Aaron Schulz|Aaron Schulz]] की स्क्रिप्टों का भी हाथ है।
अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर [[:en:User:Ioeth|Ioeth]] द्वारा बनाया गया Friendly नामक गैजेट भी Twinkle का भाग है।
{{TOCleft}}
<!-- Need a smaller (no surrounding page) screenshot to be updated
[[Image:TwinkleARV - AIV.png|thumb|620px|Screenshot of Twinkle]] -->
{{-}}
<div style="border: 1px green solid; background: #efe; padding: 5px 10px">
== मूल जानकारी ==
;शुरुआत{{anchor|Installation}}: Twinkle सक्षम करने के लिये आप [[विशेष:वरीयताएँ#mw-prefsection-gadgets|अपनी वरीयताओं के उपकरण टैब]] में से Twinkle को चुनें और उसमें नीचे दिये <code>सहेजें</code> बटन को क्लिक करें। इसके पश्चात अपने ब्राउज़र की कैश मेमोरी अवश्य खाली करें।
;Twinkle को अपनी इच्छा अनुसार परिवर्तित करना: Twinkle में अपनी इच्छा अनुसार परिवर्तन करने के लिये [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|Twinkle preferences panel]] देखें। परिवर्तन करने के पश्चात उस पृष्ठ के नीचे <code>बदलाव सहेजें</code> पर अवश्य क्लिक करें। इसके बाद अपने ब्राउज़र की कैश मेमोरी अवश्य खाली करें।
;सहायता लेना: Twinkle के बारे में [[WP:TW/DOC|दस्तावेज़ पृष्ठ]] पर जानकारी है। यदि उस पृष्ठ पर आपको अपने प्रश्न का उत्तर ना मिले तो [[विवा:Twinkle|वार्ता पृष्ठ]] पर पूछें, अथवा [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर पूछें।
;बग जानकारी देना अथवा फ़ीचरों का अनुरोध करना: Twinkle को हिन्दी विकिपीडिया के अनुरूप बनाने का काम जारी है, और Twinkle के कुछ भाग पूरी तरह ठीक से काम नहीं करते हैं। यदि आप बग की जानकारी देना चाहते हैं अथवा फ़ीचर का अनुरोध करना चाहते हैं तो [[विवा:Twinkle|वार्ता पृष्ठ]] का प्रयोग करें, अथवा चौपाल पर बताएँ। आप चाहें तो इसकी जानकारी [https://github.com/Siddhartha-Ghai/twinkle गिटहब] पर दे सकते हैं (आपको गिटहब अकाउंट की आवश्यकता होगी)।
;ध्यान दें: Twinkle [[इन्टरनेट एक्सप्लोरर]] वर्ज़न 8 या उससे पहले में नहीं काम करता है। यदि आप विन्डोज़ विस्टा या विन्डोज़ 7 का प्रयोग करते हैं तो आप इन्टरनेट एक्सप्लोरर 9 तक अपडेट कर सकते हैं, जिसमें Twinkle काम करेगा। Twinkle अन्य नए ब्राउज़रों में काम करना चाहिये।
</div>
== प्रयोग जानकारी ==
{{main|वि:Twinkle/doc}}
ट्विंकल का प्रयोग करने से पहले उसकी [[वि:Twinkle/doc|प्रयोग जानकारी]] अवश्य पढ़ें Twinkle के द्वारा किये जा सकने वाले कार्यों के बारे में जानने हेतु। Twinkle को अपनी पसंद अनुसार बदलने के कई विकल्प हैं जिनकी जानकारी उपयोक्ता के काम आएगी।
== दुरुपयोग ==
हमेशा याद रखें कि '''आपके द्वारा Twinkle के प्रयोग से किये सभी कार्यों के लिये आप पूर्णतया ज़िम्मेदार हैं।''' Twinkle के प्रयोग से पहले कृपया [[:श्र:विकिनीतियाँ|विकिपीडिया की नीतियों एवं दिशानिर्देशों]] से अच्छी तरह वाक़िफ़ हो लें। इसके गलत प्रयोग के परिणामस्वरूप सदस्यों को इसके प्रयोग से रोका जा सकता है, और यदि सदस्य विकिपीडिया पर बाधा खड़ी करने के लिये इसका प्रयोग करे तो [[वि:निषेध नियमावली|निषेध नियमावली]] के अनुसार सदस्य को अवरोधित भी किया जा सकता है।
== Twinkle अन्य विकियों पर ==
Twinkle अंग्रेज़ी और हिन्दी विकिपीडिया के अतिरिक्त चीनी एवं बंगाली विकिपीडिया में भी प्रयोग में लाया जाता है।
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[[श्रेणी:ट्विंकल उपयोगकर्ता साँचा]]
== यूजरबॉक्स ==
ट्विंकल उपयोगकर्ता इनमें से किसी भी उपयोगकर्ता बॉक्स को अपने उपयोगकर्ता पृष्ठ पर जोड़ सकते हैं।
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साले नीच वामपंथी कुत्ते
== हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ "राजकुमार वर्मा" को नही हटाना चाहिए था। ==
मै हिंदी विकिपीडिया का ३ साल से सक्रिय सदस्य हूं और संपादन कार्य कर रहा हूं। मैने एक हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ " राजकुमार वर्मा" बनाया था जिसमें किसी भी प्रकार का प्रचार कार्य नहीं था, और जब पृष्ठ को हटाने के लिए नामांकित किया गया तब उसके प्रति स्पष्ट जवाब भी दिया गया था कि पृष्ठ को क्यों नहीं हटाना चाहिए, फिर भी आपने पृष्ठ को हटा ही दिया।
आपको अधिकार मिले हैं तो उसका दुरुपयोग न करें , मेरे द्वारा निर्मित पृष्ठ में किसी भी प्रकार की प्रचार संबंधी लेख या सामग्री नहीं है।
अतः मेरे पृष्ठ को पुनः वापस लाएं।। [[सदस्य:धनंजय अहीर|धनंजय अहीर]] ([[सदस्य वार्ता:धनंजय अहीर|वार्ता]]) 16:58, 7 मार्च 2025 (UTC)धनंजय अहीर
== महाराज जी ==
नमस्ते SM7, पिछले कई सालों से आप अपने अधिकार का हिंदी विकिपीडिया पर दुरूपयोग कर रहे हैं। जिसका बिल्कुल सही उधारन है प्रेमानंद महाराज जी। कोशिश तो आपने बहुत की इसे ([[प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज]]) डिलीट करने की, लेकिन महाराज जी का चमत्कार देखिए, उनके किसी चाहने वाले ने बना ही दिया। और आप कुछ भी ना कर पाये । और ना कर पायेंगे । [[विशेष:योगदान/~2025-128983|~2025-128983]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-128983|talk]]) 16:02, 4 जुलाई 2025 (UTC)
== हम अस्थायी खातों के साथ आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेंगे ==
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उत्पाद सुरक्षा एवं अखंडता टीम अस्थायी खातों के संबंध में आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेगी। इस सर्वेक्षण में आपकी भागीदारी हमें यह समझने में सहयता करने में बेहद मूल्यवान होगी कि अस्थायी खाते कितनी अच्छी तरह कार्य कर रहे हैं और हम आगे क्या सुधार कर सकते हैं। इसे पूरा होने में ५ मिनट से अधिक समय नहींं लगना चाहिए।
इस सर्वेक्षण की गोपनीयता नीति [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Survey:Temporary_Accounts_Second_Pilot_Feedback_Privacy_Statement|इस लिंक पर देखी जा सकती है]]। इस सर्वेक्षण को पूरा करके, आप गोपनीयता नीति में निर्धारित शर्तों से सहमत होते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे संपर्क करें, तो कृपया हमें अपना विकि उपयोगकर्ता नाम बताएँ।
'''<big>[https://wikimedia.qualtrics.com/jfe/form/SV_emJJxsotBxVpS18?Q_Language=HI सर्वेक्षण में भाग लें]</big>'''.
धन्यवाद!<section end="body" />
<bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]]</bdi> 00:44, 21 अगस्त 2025 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Quiddity_(WMF)/sandbox4&oldid=29158797 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Quiddity (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== soc ==
I would like to bring to your attention that [[:en:User:Krishnarthiindia|User:Krishnarthiindia]], previously blocked on English Wikipedia as a sockpuppet of ''MediaTribe'', is currently active on Hindi Wikipedia and creating multiple promotional pages.
🔗 [[सदस्य:Krishnarthiindia|User page on Hindi Wikipedia]]
I raised this issue with Hindi Wikipedia administrator सदस्य:संजीव कुमार, but his response suggests that the matter is being overlooked. Our discussion is here:
🔗 Talk page discussion
As an example, the article on ''Yohan Poonawalla'' has been repeatedly deleted on English Wikipedia due to COI and promotional issues:
* EN: [[:en:Yohan_Poonawalla|Yohan Poonawalla (deleted multiple times)]]
* HI: योहान पूनावाला
This demonstrates a clear case of cross-wiki paid/COI editing.
Further evidence of promotional editing by this user includes:
* ''Abhay Singh (Jamshedpur politician)'' (created and later deleted)
* ''Anshuman Bhagat''
* ''Yohan Poonawalla''
* ''Ajay Mehgi'' ([https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%8B%E0%A4%A4%E0%A5%81_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80 ऋतु मेंगी])
Given the user’s established connection to ''MediaTribe'' and a pattern of COI and promotional activity across projects, I kindly request an investigation into their activities on Hindi Wikipedia. [[सदस्य:The BO57!|The BO57!]] ([[सदस्य वार्ता:The BO57!|वार्ता]]) 15:46, 25 सितंबर 2025 (UTC)
== अभिनेता गौरव देवासी का पेज बनाने के सन्दर्भ में ==
अभिनेता गौरव देवासी जो की राजस्थान राज्य में अभिनेता हे और गूगल पर बहुत आर्टिकल उपलब्ध हे.आपसे अनुरोध हे की इनका पेज बनाया जाये [[विशेष:योगदान/~2025-49619-4|~2025-49619-4]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-49619-4|talk]]) 10:16, 3 अक्टूबर 2025 (UTC)
== सदस्य:Vedic Art द्वारा बन रहे LLM आधारित पेजों पर चिंता ==
'''मैं एडमिन्स का ध्यान इस बात पर लाना चाहता हूँ कि सदस्य:Vedic_Art लगातार ऐसे पेज बना रहे हैं जो देखने में AI या LLM से तैयार लगते हैं। इन पेजों में न स्रोत होते हैं, न ढंग की जानकारी, और कई जगह गलतियाँ भी हैं।'''
'''साथ ही ये यूज़र “सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव अक्टूबर 2025” वाले पेज-निर्माण कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं। अगर ऐसे कार्यक्रमों में AI से बने पेज भेजे जाते हैं, तो हिंदी विकिपीडिया की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा।'''
'''मेरी मुख्य बातेँ:'''
* '''विकिपीडिया का मकसद भरोसेमंद और सत्यापित जानकारी देना है, न कि AI से बना कंटेंट डालना।'''
* '''AI के पेज अक्सर बिना स्रोतोँ वाले, गलत या गढ़ी हुई बातें रखते हैं।'''
* '''गूगल पर विकिपीडिया की रैंकिंग ऊँची होती है, अगर झूठी या AI से बनी जानकारी जाएगी तो लोग गलतफ़हमी में पड़ेंगे।'''
* '''अगर गलत जानकारी फैलती है, तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?'''
'''मेरी विनती है कि:'''
* '''सदस्य:Vedic_Art के हाल के पेजों की जाँच हो।'''
* '''जो पेज सत्यापित नहीं हैं, उन पर कार्रवाई हो।'''
* '''साफ किया जाए कि ऐसे AI-जनित पेजों की अनुमति है या नहीं।'''
* '''क्या ऐसे यूज़र्स को प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए?'''
'''क्या एडमिन लोग इस तरह की गतिविधियों को स्वीकार करते हैं? इस पर साफ राय जरूरी है।'''
'''धन्यवाद,'''
'''WeSeeAllButNot''' [[सदस्य:WeSeeAllButNot|WeSeeAllButNot]] ([[सदस्य वार्ता:WeSeeAllButNot|वार्ता]]) 17:48, 5 अक्टूबर 2025 (UTC)
== Requested Page Moves ==
To align with the original title name:
* Move [[द बैड्स ऑफ बॉलीवुड]] → [[द बा***ड्स ऑफ़ बॉलीवुड]]
** Reason: The current title contains an incorrect word ("बैड्स", "ऑफ"). The proposed title reflects the accurate and original english title name.
To correct spelling errors:
* Move [[गौरी खान]] → [[गौरी ख़ान]]
** Reason: The current title misspells "ख़ान" as "खान".
* Move [[फराह खान]] → [[फ़राह ख़ान]]
** Reason: The current title misspells both "फ़राह" (as "फराह") and "ख़ान" (as "खान").
* Move [[बॉलीवुड हँगामा]] → [[बॉलीवुड हंगामा]]
** Reason: The current title uses an incorrect spelling ("हँगामा"). The proposed title corrects it to the standard spelling "हंगामा".
For consistency and commonly accepted spelling:
* Move [[इण्डिया टुडे]] → [[इंडिया टुडे]]
* Move [[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] → [[द टाइम्स ऑफ़ इंडिया]]
** Reason: The current title uses an outdated spelling ("इण्डिया"). The proposed title updates it to the standard and widely used spelling "इंडिया" for consistency.
[[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 02:05, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:Anoopspeaks|Anoopspeaks]] कृपया संबंधित पृष्ठों के वार्ता पन्नों पर साँचा:नाम बदलें के प्रयोग द्वारा लिखें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
::जी, किया [[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 08:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
==युद्ध हाथी पृष्ठ हटाने के संबंध में==
नमस्ते SM7 जी। मैंने कल रात में एक पृष्ठ बनाया था [[युद्ध हाथी]] नाम से हालांकि लेख में अभी बहुत काम बाकी था जिसे मैं आज पूरा करने वाला था परंतु आज जब मैंने अपना लेख देखा तो वह आपके द्वारा हटाया जा चुका है। कृपया हटाने का कारण बताएं? धन्यवाद --[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 12:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य: रोहित साव27|रोहित जी]], लेख आईपी द्वारा बनाया गया था और लेख में केवल एक वाक्य लिखा हुआ था - "इनका इस्तेमाल युद्ध के लिए होता।" जिसे सदस्य:MathXplore द्वारा परीक्षण पृष्ठ के रूप में शीह नामांकित किया गया था और मैंने इसी मापदंड के तहत हटाया है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:21, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
::माफी चाहूंगा SM7 जी शायद मेरी ग़लती है क्योंकि कल रात को मैं इस लेख पर काम कर रहा था और करते-करते सो गया था। शायद मैंने सेव नहीं किया होगा। मुझे लगा कि मैंने सेव किया होगा। माफी चाहूंगा शायद मेरी तरफ से ही गलती हुई है। आपका धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 18:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
== अस्थायी खातों को सूचना भेजना ==
नमस्ते SM7 जी, मैंने देखा है कि ट्विंकल से किसी लेख को शीह-नामांकित करने पर वो सम्बंधित खातों को सूचना सन्देश भेजता है। आईपी (मोबाइल) पतों से बने खाते को ये सन्देश नहीं भेजे जाते हैं लेकिन वर्तमान में हिन्दी विकिपीडिया पर ऐसे खातों को अस्थायी खातों से बदला जा चुका है और ये टिल्डे (~) से आरम्भ होते हैं। इन अस्थायी खातों पर सन्देश जा रहे हैं। मुझे लगता है कि इन खातों को भी डिफॉल्ट रूप से सन्देश भेजना बंद कर देना चाहिए। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:52, 20 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं समय मिलते ही इसे देखता हूँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 13:27, 21 अक्टूबर 2025 (UTC)
== 2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल ==
नमस्ते SM7 जी, [[2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल]] नामक लेख को पिछले माह @[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] जी ने [[वि:शीह#व2|परीक्षण पाठ]] के रूप में नामांकित किया। उनका ये कैसा रौलबैक था, ये तो वो ही बता सकते हैं (अपेक्षा करता हूँ कि वो इसके बारे में बतायेंगे) लेकिन आपने भी बिना इतिहास देखे लेख को हटा दिया। सम्भवतः ये परीक्षण पाठ तो नहीं था और [[:d:Q209222|विकिडाटा आयटम]] से भी जुड़ा हुआ था जहाँ 29 अन्य भाषायें भी सूचीबद्ध हैं। अतः मुझे लगता है यह परीक्षण पाठ के रूप में नहीं हटाना चाहिए था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:09, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, बिना देखे तो नहीं हटाया - यह वैसे ही लिखा हुआ था कि - "अमुक फलाने की लिखी पुस्तक है" और 2009 से बस यही पाठ था। विकिडेटा से जुड़े होने के बावज़ूद यह परीक्षण ही लगा भले उल्लेखनीय हो। आगे आप निर्णय ले सकते हैं कि इसे वापस स्थापित करना है या नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:20, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::मेरे पास कोई उल्लेखनीय स्रोत नहीं है लेकिन निम्नलिखित सामग्री के साथ रखा जा सकता है:
:::'''2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल''' (Dichlorophenoxyacetic acid) एक [[कार्बनिक यौगिक]] है जिसका रासायनिक सूत्र {{chem|C|8|H|6|Cl|2|O|3}} है। इसे अक्सर इसके [[ISO|आईएसओ]] सामान्य नाम '''2,4-डी''' कहा जाता है। यह प्रणालीगत [[शाकनाशक]] है जो अधिकतर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को नष्ट करने का काम करता है लेकिन [[खाद्यान्न]], [[घास|दूब]] और [[घासभूमि]] जैसे पौधे इससे अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
:::2,4-डी दुनिया के सबसे पुराने और सबसे व्यापक रूप से उपलब्ध शाकनाशी रसायनों में से एक है जो सन् 1945 से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है। वर्तमान में कई रासायनिक कंपनियों द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है क्योंकि इसका पेटेंट बहुत पहले समाप्त हो चुका है। यह कई व्यावसायिक लॉन शाकनाशी मिश्रणों में पाया जाता है और अनाज की फसलों, चरागाहों और बागों में खरपतवारनाशक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। 1,500 से ज़्यादा शाकनाशी उत्पादों में सक्रिय घटक के रूप में 2,4-डी होता है।
::आवश्यक हो तो उपरोक्त सामग्री के साथ स्रोतहीन का टैग रख सकते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:03, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, वो तो [[1,4-डाइमिथाइलबेंजिन]] टाइप के लेख भी एक लाइन के साथ स्रोतहीन का टैग लगा के रखे हुए ही हैं। मेरी कोई हार्दिक इच्छा नहीं। यदि कोई इसे परीक्षण कह के शीह कर दे तो मैं इसे भी हटा ही दूँगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:21, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::::मेरी भी ऐसी कोई इच्छा नहीं है लेकिन इस तरह के 10 हज़ार पृष्ठ [[विशेष:छोटे_पृष्ठ|यहाँ]] सूचीबद्ध हैं। आप बार-बार मुझे परीक्षण पृष्ठ कहने पर डांट चुके हो, लेकिन अब आप भी उसी के साथ जुड़े हो। इन सभी को यदि हटाना है तो [[वि:हहेच|हटाने हेतु चर्चा]] करके हटाया जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:08, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप उल्टा कह रहे हैं। जैसा कि आप ख़ुद बता रहे - ''आप'' बार-बार ऐसे पृष्ठ परीक्षण कह के नामांकित कर चुके हैं और देख-देख के और हटा-हटा के जब मैंने एक ऐसा ही पृष्ठ किसी दूसरे के नामांकन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हटा ही दिया तो, अब, आप कह रहे कि वो परीक्षण नहीं था। तो आप ही बताइये कि मैं कहाँ स्टैंड लूँ? मुझे नहीं पता कि हहेच में रखा जाय तो इन्हें हटाने पे ही सहमति बनेगी या नहीं; यह पहले से प्रेडिक्शन करना मुश्किल है। एक ही तरीका बचता है कि शीह-परीक्षण की नियमावली को शब्दशः अनुसरित करें 'स्फद्घ्झा स्झाज्घ' जैसे कुछ लिखा हो केवल तभी उसे परीक्षण मान के हटायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:23, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::वो अर्थहीन सामग्री में आता है। परीक्षण में वो लेख भी शामिल होते हैं जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन जाते हैं। 15 वर्ष पुराने लेख को इस श्रेणी में कैसे रख सकते हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:07, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] यानी आप तैयार हैं कि केवल उन्हीं लेखों को परीक्षण के मापदंड के तहत नामांकित किया जाए जो - "जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन..." गए हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:17, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::::मैं तो सदैव ही तैयार था लेकिन जब चर्चायें बिना किसी चर्चा के वर्षों तक चलने लगी और शीह में भी महिनों का समय लगने लगा तब मैं ऐसे हटाने लगा था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 11:52, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
== नए साल की शुभकामनाएँ ==
<div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;">
'''SM7 जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!'''
यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए।
[[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]]
हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद।
[[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:15, 1 जनवरी 2026 (UTC)
</div>
:@[[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपको भी नववर्ष अत्यंत मंगलमय हो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:24, 2 जनवरी 2026 (UTC)
== विशेष: कार्यक्रम आयोजक अधिकार ==
नमस्ते [[सदस्य:SM7|SM7]], आप मुझे कार्यक्रम आयोजक के अधिकार के आवेदन दर्ज करने के लिए पृष्ठ बताने के कृपा करे | [[सदस्य:Dev Jadiya|Dev Jadiya]] ([[सदस्य वार्ता:Dev Jadiya|वार्ता]]) 09:08, 18 मार्च 2026 (UTC)
== जांच ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
@[[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] के अभी के कुछ संपादनों को जांच लें <br>
धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:48, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
:किसी से पूछने से पहले इंग्लिश विकिपीडिया पर ज़रूर जाएँ अथवा समाचार पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन करें| [[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] ([[सदस्य वार्ता:Ankit231132|वार्ता]]) 14:36, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
== एक सदस्य को अवरोधित करने का नामांकन ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, @[[सदस्य:~2026-19373-86|~2026-19373-86]] को बहुत बार चेतावनी दे चुका हूं पर अपमानजनक सम्पादन कर रहे है, कृपया आप इस पर संज्ञान लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:16, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
== मदद ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
सदस्य @[[सदस्य:~2026-21206-80|~2026-21206-80]] बार बार प्रचार सम्पादन कर रहा है| केवल इनके लिए ही नहीं बल्कि और भी सदस्यों के लिए बताए [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:06, 6 अप्रैल 2026 (UTC)
== व7 के अंतर्गत हटाए गए लेख के पुनर्विचार हेतु अनुरोध ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, मैं आपको [[कमलेश कमल]] लेख के संबंध में लिख रहा हूँ जिसे आपने [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व7|व7]] के अंतर्गत हटाया था।
जब लेख को शीघ्र हटाने के लिए चिह्नित किया गया, तब मैंने तुरंत उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए। मैंने पूरे लेख में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें प्रचारात्मक और प्रशंसात्मक भाषा हटाना, सामग्री को निष्पक्ष दृष्टिकोण (neutral point of view) में दोबारा लिखना, और इसे अधिक विश्वकोशीय बनाने के लिए विस्तार करना शामिल था।
मेरा मानना है कि संशोधित संस्करण अब प्रचारात्मक नहीं था, या कम से कम इतना नहीं कि उसे व7 के अंतर्गत हटाया जाए। मैंने इन परिवर्तनों का उल्लेख लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी किया था।
मेरी समझ के अनुसार, व7 उन पृष्ठों पर लागू होता है जो पूरी तरह से प्रचारात्मक होते हैं और जिनमें सुधार की संभावना नहीं होती। किए गए सुधारों को देखते हुए, आपसे निवेदन है कि कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें।
साथ ही, यदि कोई अन्य कमी या समस्या शेष हो, तो कृपया उसे बताने का कष्ट करें ताकि मैं सामग्री में और सुधार कर सकूँ। [[सदस्य:BBBhagwati|BBBhagwati]] ([[सदस्य वार्ता:BBBhagwati|वार्ता]]) 16:41, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:29, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== पिण्डार या पिण्डर नदी ==
नमस्ते SM7 जी, मैं आज [[पिण्डार नदी]] नामक लेख पर देख रहा हूँ कि आपने इसके समकक्ष भोजपुरी लेख निर्मित किया। वहाँ आपने शीर्षक में "पिण्डार" के स्थान पर "पिंडर" रखा। इस हिसाब से यहाँ भी "पिण्डर नदी" या "पिंडर नदी" होना चाहिए। यदि आपको सही लगता है तो यह स्थानान्तरण कर देना चाहिए। मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:36, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, अब जांचा तो कुछ उदाहरण मिले
:*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
:* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
:* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
:इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:56, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] हाँ, इसके नाम में ड पर आ की मात्रा नहीं है। मैं इस नदी का पानी भी पी चुका हूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं कि मैं आधा ण हटाऊँ। यह विवादास्पद बदलाव लेख के वार्ता पन्ने पे चर्चा के बाद पर्याप्त समर्थन से किया जाय तो बेहतर होगा। सादर। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:37, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::जी, चर्चा के बिना मैं स्थानान्तरित कर सकता हूँ। बाकी आप चाहो तो चर्चा भी आरम्भ कर सकते हैं। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने जो स्रोत दिये हैं उनमें पिंडर और पिंडार दोनों लिखे हैं। इसके अतिरिक्त दृष्टि आईएएस वाला स्रोत विश्वसनीय नहीं है जबकि समाचार वाले भी एकरूप नहीं होने के कारण उचित नहीं माने जा सकते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:41, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::कृपया {{tlx|virusbox}} को भी देखें। इसे आपने बहुत पहले आयात किया था लेकिन सम्बंधित मोड्यूल का आयात नहीं किया गया। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने {{tlx|विषाणु}} क्यों निर्मित किया है, मुझे इसका कोई कारण समझ में नहीं आया। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:45, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::नमस्ते SM7 जी, @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप स्थानान्तरित कर सकते है। खोजने पर काफ़ी विश्वसनीय स्रोत है, जिन में '''पिंडर नदी''' ही लिखा है। [https://www.google.co.th/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/2026_27_UKPSV_UKSSSC_Special_General_Stu/YOS4EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA132&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/Aao_Karen_Himalaya_Mein_Trekking/qfVzBQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA95&printsec=frontcover] <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:55, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,
:::::नदी के नाम पर उचित मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। वर्तनी के संबंध में आपका निर्णय मुझे पूरी तरह स्वीकार है, कृपया आप ही इसे उपयुक्त नाम पर स्थानांतरित कर दें।
:::::'''<code><nowiki>{{विषाणु}}</nowiki></code>''' साँचे के निर्माण का कारण केवल तकनीकी था। पुराना <code><nowiki>{{virusbox}}</nowiki></code> साँचा संबंधित मॉड्यूल्स के अभाव में काम नहीं कर रहा था और लेखों में कोडिंग की त्रुटियाँ (error) दिखा रहा था। मुझे जटिल मॉड्यूल आयात करने की जानकारी नहीं थी, इसलिए लेखों को त्रुटिमुक्त करने के लिए मैंने सीधे स्वदेशी '''<code><nowiki>{{ज्ञानसंदूक}}</nowiki></code>''' ढाँचे का उपयोग करके यह नया साँचा बनाया, जिसे किसी बाहरी मॉड्यूल की आवश्यकता ही नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:58, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
==जिज्ञासा==
नमस्कार! SM7 जी, लेख हटाने हेतु चल रही चर्चाओं के संबंध में एक जिज्ञासा है। सामान्यतः ऐसी चर्चाओं की एक निर्धारित समयसीमा होती है, किन्तु देखा गया है कि [[:श्रेणी:लेख हटाने हेतु वर्तमान चर्चाएँ|कई चर्चाएँ लंबे समय तक बिना किसी निष्कर्ष]] के लंबित रहती हैं। कुछ लेखों पर हुई चर्चाओं का अभी तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है कि उन्हें रखा जाना है या हटाया जाना है।
* जिज्ञासा ये है की सामान्यतः इन चर्चाओं के निष्कर्ष तक पहुँचने की समय-सीमा क्या निर्धारित होती है तथा किन परिस्थितियों में इनका परिणाम घोषित किया जाता है।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:56, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, यह इस बात पे निर्भर है कि चर्चा में भागीदार लोग कितने हैं और उनके मतों के आधार पर स्पष्ट राय क्या निकल कर आई है। अंग्रेजी की तरह यहाँ पर समय सीमा या रीलिस्ट करने जैसा कुछ नहीं है। ऐसी चर्चाओं में सदस्यों की कम भागीदारी हिंदी विकिपीडिया की एक बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति नाम बदलाव या कुछ अन्य चीजों को लेकर भी है जहाँ काम इसलिए लंबित रहता है क्योंकि चर्चा में भाग लेने वाले लोग नहीं हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:34, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
ae5hpsmxop32h17wg1juyzj9hksj54j
6541368
6541365
2026-04-16T18:53:38Z
SM7
89247
/* पिण्डार या पिण्डर नदी */ उत्तर
6541368
wikitext
text/x-wiki
<!-- Please do NOT delete this line. Thanks! -->{{/header}}
<!-- कृपया इस लाइन और ऊपर की लाइन को को न हटायें, धन्यवाद !-->
साले नीच वामपंथी कुत्ते
== हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ "राजकुमार वर्मा" को नही हटाना चाहिए था। ==
मै हिंदी विकिपीडिया का ३ साल से सक्रिय सदस्य हूं और संपादन कार्य कर रहा हूं। मैने एक हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ " राजकुमार वर्मा" बनाया था जिसमें किसी भी प्रकार का प्रचार कार्य नहीं था, और जब पृष्ठ को हटाने के लिए नामांकित किया गया तब उसके प्रति स्पष्ट जवाब भी दिया गया था कि पृष्ठ को क्यों नहीं हटाना चाहिए, फिर भी आपने पृष्ठ को हटा ही दिया।
आपको अधिकार मिले हैं तो उसका दुरुपयोग न करें , मेरे द्वारा निर्मित पृष्ठ में किसी भी प्रकार की प्रचार संबंधी लेख या सामग्री नहीं है।
अतः मेरे पृष्ठ को पुनः वापस लाएं।। [[सदस्य:धनंजय अहीर|धनंजय अहीर]] ([[सदस्य वार्ता:धनंजय अहीर|वार्ता]]) 16:58, 7 मार्च 2025 (UTC)धनंजय अहीर
== महाराज जी ==
नमस्ते SM7, पिछले कई सालों से आप अपने अधिकार का हिंदी विकिपीडिया पर दुरूपयोग कर रहे हैं। जिसका बिल्कुल सही उधारन है प्रेमानंद महाराज जी। कोशिश तो आपने बहुत की इसे ([[प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज]]) डिलीट करने की, लेकिन महाराज जी का चमत्कार देखिए, उनके किसी चाहने वाले ने बना ही दिया। और आप कुछ भी ना कर पाये । और ना कर पायेंगे । [[विशेष:योगदान/~2025-128983|~2025-128983]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-128983|talk]]) 16:02, 4 जुलाई 2025 (UTC)
== हम अस्थायी खातों के साथ आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेंगे ==
<section begin="body" />
उत्पाद सुरक्षा एवं अखंडता टीम अस्थायी खातों के संबंध में आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेगी। इस सर्वेक्षण में आपकी भागीदारी हमें यह समझने में सहयता करने में बेहद मूल्यवान होगी कि अस्थायी खाते कितनी अच्छी तरह कार्य कर रहे हैं और हम आगे क्या सुधार कर सकते हैं। इसे पूरा होने में ५ मिनट से अधिक समय नहींं लगना चाहिए।
इस सर्वेक्षण की गोपनीयता नीति [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Survey:Temporary_Accounts_Second_Pilot_Feedback_Privacy_Statement|इस लिंक पर देखी जा सकती है]]। इस सर्वेक्षण को पूरा करके, आप गोपनीयता नीति में निर्धारित शर्तों से सहमत होते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे संपर्क करें, तो कृपया हमें अपना विकि उपयोगकर्ता नाम बताएँ।
'''<big>[https://wikimedia.qualtrics.com/jfe/form/SV_emJJxsotBxVpS18?Q_Language=HI सर्वेक्षण में भाग लें]</big>'''.
धन्यवाद!<section end="body" />
<bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]]</bdi> 00:44, 21 अगस्त 2025 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Quiddity_(WMF)/sandbox4&oldid=29158797 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Quiddity (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== soc ==
I would like to bring to your attention that [[:en:User:Krishnarthiindia|User:Krishnarthiindia]], previously blocked on English Wikipedia as a sockpuppet of ''MediaTribe'', is currently active on Hindi Wikipedia and creating multiple promotional pages.
🔗 [[सदस्य:Krishnarthiindia|User page on Hindi Wikipedia]]
I raised this issue with Hindi Wikipedia administrator सदस्य:संजीव कुमार, but his response suggests that the matter is being overlooked. Our discussion is here:
🔗 Talk page discussion
As an example, the article on ''Yohan Poonawalla'' has been repeatedly deleted on English Wikipedia due to COI and promotional issues:
* EN: [[:en:Yohan_Poonawalla|Yohan Poonawalla (deleted multiple times)]]
* HI: योहान पूनावाला
This demonstrates a clear case of cross-wiki paid/COI editing.
Further evidence of promotional editing by this user includes:
* ''Abhay Singh (Jamshedpur politician)'' (created and later deleted)
* ''Anshuman Bhagat''
* ''Yohan Poonawalla''
* ''Ajay Mehgi'' ([https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%8B%E0%A4%A4%E0%A5%81_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80 ऋतु मेंगी])
Given the user’s established connection to ''MediaTribe'' and a pattern of COI and promotional activity across projects, I kindly request an investigation into their activities on Hindi Wikipedia. [[सदस्य:The BO57!|The BO57!]] ([[सदस्य वार्ता:The BO57!|वार्ता]]) 15:46, 25 सितंबर 2025 (UTC)
== अभिनेता गौरव देवासी का पेज बनाने के सन्दर्भ में ==
अभिनेता गौरव देवासी जो की राजस्थान राज्य में अभिनेता हे और गूगल पर बहुत आर्टिकल उपलब्ध हे.आपसे अनुरोध हे की इनका पेज बनाया जाये [[विशेष:योगदान/~2025-49619-4|~2025-49619-4]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-49619-4|talk]]) 10:16, 3 अक्टूबर 2025 (UTC)
== सदस्य:Vedic Art द्वारा बन रहे LLM आधारित पेजों पर चिंता ==
'''मैं एडमिन्स का ध्यान इस बात पर लाना चाहता हूँ कि सदस्य:Vedic_Art लगातार ऐसे पेज बना रहे हैं जो देखने में AI या LLM से तैयार लगते हैं। इन पेजों में न स्रोत होते हैं, न ढंग की जानकारी, और कई जगह गलतियाँ भी हैं।'''
'''साथ ही ये यूज़र “सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव अक्टूबर 2025” वाले पेज-निर्माण कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं। अगर ऐसे कार्यक्रमों में AI से बने पेज भेजे जाते हैं, तो हिंदी विकिपीडिया की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा।'''
'''मेरी मुख्य बातेँ:'''
* '''विकिपीडिया का मकसद भरोसेमंद और सत्यापित जानकारी देना है, न कि AI से बना कंटेंट डालना।'''
* '''AI के पेज अक्सर बिना स्रोतोँ वाले, गलत या गढ़ी हुई बातें रखते हैं।'''
* '''गूगल पर विकिपीडिया की रैंकिंग ऊँची होती है, अगर झूठी या AI से बनी जानकारी जाएगी तो लोग गलतफ़हमी में पड़ेंगे।'''
* '''अगर गलत जानकारी फैलती है, तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?'''
'''मेरी विनती है कि:'''
* '''सदस्य:Vedic_Art के हाल के पेजों की जाँच हो।'''
* '''जो पेज सत्यापित नहीं हैं, उन पर कार्रवाई हो।'''
* '''साफ किया जाए कि ऐसे AI-जनित पेजों की अनुमति है या नहीं।'''
* '''क्या ऐसे यूज़र्स को प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए?'''
'''क्या एडमिन लोग इस तरह की गतिविधियों को स्वीकार करते हैं? इस पर साफ राय जरूरी है।'''
'''धन्यवाद,'''
'''WeSeeAllButNot''' [[सदस्य:WeSeeAllButNot|WeSeeAllButNot]] ([[सदस्य वार्ता:WeSeeAllButNot|वार्ता]]) 17:48, 5 अक्टूबर 2025 (UTC)
== Requested Page Moves ==
To align with the original title name:
* Move [[द बैड्स ऑफ बॉलीवुड]] → [[द बा***ड्स ऑफ़ बॉलीवुड]]
** Reason: The current title contains an incorrect word ("बैड्स", "ऑफ"). The proposed title reflects the accurate and original english title name.
To correct spelling errors:
* Move [[गौरी खान]] → [[गौरी ख़ान]]
** Reason: The current title misspells "ख़ान" as "खान".
* Move [[फराह खान]] → [[फ़राह ख़ान]]
** Reason: The current title misspells both "फ़राह" (as "फराह") and "ख़ान" (as "खान").
* Move [[बॉलीवुड हँगामा]] → [[बॉलीवुड हंगामा]]
** Reason: The current title uses an incorrect spelling ("हँगामा"). The proposed title corrects it to the standard spelling "हंगामा".
For consistency and commonly accepted spelling:
* Move [[इण्डिया टुडे]] → [[इंडिया टुडे]]
* Move [[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] → [[द टाइम्स ऑफ़ इंडिया]]
** Reason: The current title uses an outdated spelling ("इण्डिया"). The proposed title updates it to the standard and widely used spelling "इंडिया" for consistency.
[[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 02:05, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:Anoopspeaks|Anoopspeaks]] कृपया संबंधित पृष्ठों के वार्ता पन्नों पर साँचा:नाम बदलें के प्रयोग द्वारा लिखें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
::जी, किया [[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 08:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
==युद्ध हाथी पृष्ठ हटाने के संबंध में==
नमस्ते SM7 जी। मैंने कल रात में एक पृष्ठ बनाया था [[युद्ध हाथी]] नाम से हालांकि लेख में अभी बहुत काम बाकी था जिसे मैं आज पूरा करने वाला था परंतु आज जब मैंने अपना लेख देखा तो वह आपके द्वारा हटाया जा चुका है। कृपया हटाने का कारण बताएं? धन्यवाद --[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 12:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य: रोहित साव27|रोहित जी]], लेख आईपी द्वारा बनाया गया था और लेख में केवल एक वाक्य लिखा हुआ था - "इनका इस्तेमाल युद्ध के लिए होता।" जिसे सदस्य:MathXplore द्वारा परीक्षण पृष्ठ के रूप में शीह नामांकित किया गया था और मैंने इसी मापदंड के तहत हटाया है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:21, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
::माफी चाहूंगा SM7 जी शायद मेरी ग़लती है क्योंकि कल रात को मैं इस लेख पर काम कर रहा था और करते-करते सो गया था। शायद मैंने सेव नहीं किया होगा। मुझे लगा कि मैंने सेव किया होगा। माफी चाहूंगा शायद मेरी तरफ से ही गलती हुई है। आपका धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 18:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
== अस्थायी खातों को सूचना भेजना ==
नमस्ते SM7 जी, मैंने देखा है कि ट्विंकल से किसी लेख को शीह-नामांकित करने पर वो सम्बंधित खातों को सूचना सन्देश भेजता है। आईपी (मोबाइल) पतों से बने खाते को ये सन्देश नहीं भेजे जाते हैं लेकिन वर्तमान में हिन्दी विकिपीडिया पर ऐसे खातों को अस्थायी खातों से बदला जा चुका है और ये टिल्डे (~) से आरम्भ होते हैं। इन अस्थायी खातों पर सन्देश जा रहे हैं। मुझे लगता है कि इन खातों को भी डिफॉल्ट रूप से सन्देश भेजना बंद कर देना चाहिए। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:52, 20 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं समय मिलते ही इसे देखता हूँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 13:27, 21 अक्टूबर 2025 (UTC)
== 2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल ==
नमस्ते SM7 जी, [[2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल]] नामक लेख को पिछले माह @[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] जी ने [[वि:शीह#व2|परीक्षण पाठ]] के रूप में नामांकित किया। उनका ये कैसा रौलबैक था, ये तो वो ही बता सकते हैं (अपेक्षा करता हूँ कि वो इसके बारे में बतायेंगे) लेकिन आपने भी बिना इतिहास देखे लेख को हटा दिया। सम्भवतः ये परीक्षण पाठ तो नहीं था और [[:d:Q209222|विकिडाटा आयटम]] से भी जुड़ा हुआ था जहाँ 29 अन्य भाषायें भी सूचीबद्ध हैं। अतः मुझे लगता है यह परीक्षण पाठ के रूप में नहीं हटाना चाहिए था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:09, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, बिना देखे तो नहीं हटाया - यह वैसे ही लिखा हुआ था कि - "अमुक फलाने की लिखी पुस्तक है" और 2009 से बस यही पाठ था। विकिडेटा से जुड़े होने के बावज़ूद यह परीक्षण ही लगा भले उल्लेखनीय हो। आगे आप निर्णय ले सकते हैं कि इसे वापस स्थापित करना है या नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:20, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::मेरे पास कोई उल्लेखनीय स्रोत नहीं है लेकिन निम्नलिखित सामग्री के साथ रखा जा सकता है:
:::'''2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल''' (Dichlorophenoxyacetic acid) एक [[कार्बनिक यौगिक]] है जिसका रासायनिक सूत्र {{chem|C|8|H|6|Cl|2|O|3}} है। इसे अक्सर इसके [[ISO|आईएसओ]] सामान्य नाम '''2,4-डी''' कहा जाता है। यह प्रणालीगत [[शाकनाशक]] है जो अधिकतर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को नष्ट करने का काम करता है लेकिन [[खाद्यान्न]], [[घास|दूब]] और [[घासभूमि]] जैसे पौधे इससे अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
:::2,4-डी दुनिया के सबसे पुराने और सबसे व्यापक रूप से उपलब्ध शाकनाशी रसायनों में से एक है जो सन् 1945 से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है। वर्तमान में कई रासायनिक कंपनियों द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है क्योंकि इसका पेटेंट बहुत पहले समाप्त हो चुका है। यह कई व्यावसायिक लॉन शाकनाशी मिश्रणों में पाया जाता है और अनाज की फसलों, चरागाहों और बागों में खरपतवारनाशक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। 1,500 से ज़्यादा शाकनाशी उत्पादों में सक्रिय घटक के रूप में 2,4-डी होता है।
::आवश्यक हो तो उपरोक्त सामग्री के साथ स्रोतहीन का टैग रख सकते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:03, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, वो तो [[1,4-डाइमिथाइलबेंजिन]] टाइप के लेख भी एक लाइन के साथ स्रोतहीन का टैग लगा के रखे हुए ही हैं। मेरी कोई हार्दिक इच्छा नहीं। यदि कोई इसे परीक्षण कह के शीह कर दे तो मैं इसे भी हटा ही दूँगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:21, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::::मेरी भी ऐसी कोई इच्छा नहीं है लेकिन इस तरह के 10 हज़ार पृष्ठ [[विशेष:छोटे_पृष्ठ|यहाँ]] सूचीबद्ध हैं। आप बार-बार मुझे परीक्षण पृष्ठ कहने पर डांट चुके हो, लेकिन अब आप भी उसी के साथ जुड़े हो। इन सभी को यदि हटाना है तो [[वि:हहेच|हटाने हेतु चर्चा]] करके हटाया जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:08, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप उल्टा कह रहे हैं। जैसा कि आप ख़ुद बता रहे - ''आप'' बार-बार ऐसे पृष्ठ परीक्षण कह के नामांकित कर चुके हैं और देख-देख के और हटा-हटा के जब मैंने एक ऐसा ही पृष्ठ किसी दूसरे के नामांकन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हटा ही दिया तो, अब, आप कह रहे कि वो परीक्षण नहीं था। तो आप ही बताइये कि मैं कहाँ स्टैंड लूँ? मुझे नहीं पता कि हहेच में रखा जाय तो इन्हें हटाने पे ही सहमति बनेगी या नहीं; यह पहले से प्रेडिक्शन करना मुश्किल है। एक ही तरीका बचता है कि शीह-परीक्षण की नियमावली को शब्दशः अनुसरित करें 'स्फद्घ्झा स्झाज्घ' जैसे कुछ लिखा हो केवल तभी उसे परीक्षण मान के हटायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:23, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::वो अर्थहीन सामग्री में आता है। परीक्षण में वो लेख भी शामिल होते हैं जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन जाते हैं। 15 वर्ष पुराने लेख को इस श्रेणी में कैसे रख सकते हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:07, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] यानी आप तैयार हैं कि केवल उन्हीं लेखों को परीक्षण के मापदंड के तहत नामांकित किया जाए जो - "जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन..." गए हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:17, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::::मैं तो सदैव ही तैयार था लेकिन जब चर्चायें बिना किसी चर्चा के वर्षों तक चलने लगी और शीह में भी महिनों का समय लगने लगा तब मैं ऐसे हटाने लगा था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 11:52, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
== नए साल की शुभकामनाएँ ==
<div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;">
'''SM7 जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!'''
यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए।
[[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]]
हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद।
[[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:15, 1 जनवरी 2026 (UTC)
</div>
:@[[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपको भी नववर्ष अत्यंत मंगलमय हो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:24, 2 जनवरी 2026 (UTC)
== विशेष: कार्यक्रम आयोजक अधिकार ==
नमस्ते [[सदस्य:SM7|SM7]], आप मुझे कार्यक्रम आयोजक के अधिकार के आवेदन दर्ज करने के लिए पृष्ठ बताने के कृपा करे | [[सदस्य:Dev Jadiya|Dev Jadiya]] ([[सदस्य वार्ता:Dev Jadiya|वार्ता]]) 09:08, 18 मार्च 2026 (UTC)
== जांच ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
@[[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] के अभी के कुछ संपादनों को जांच लें <br>
धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:48, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
:किसी से पूछने से पहले इंग्लिश विकिपीडिया पर ज़रूर जाएँ अथवा समाचार पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन करें| [[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] ([[सदस्य वार्ता:Ankit231132|वार्ता]]) 14:36, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
== एक सदस्य को अवरोधित करने का नामांकन ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, @[[सदस्य:~2026-19373-86|~2026-19373-86]] को बहुत बार चेतावनी दे चुका हूं पर अपमानजनक सम्पादन कर रहे है, कृपया आप इस पर संज्ञान लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:16, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
== मदद ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
सदस्य @[[सदस्य:~2026-21206-80|~2026-21206-80]] बार बार प्रचार सम्पादन कर रहा है| केवल इनके लिए ही नहीं बल्कि और भी सदस्यों के लिए बताए [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:06, 6 अप्रैल 2026 (UTC)
== व7 के अंतर्गत हटाए गए लेख के पुनर्विचार हेतु अनुरोध ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, मैं आपको [[कमलेश कमल]] लेख के संबंध में लिख रहा हूँ जिसे आपने [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व7|व7]] के अंतर्गत हटाया था।
जब लेख को शीघ्र हटाने के लिए चिह्नित किया गया, तब मैंने तुरंत उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए। मैंने पूरे लेख में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें प्रचारात्मक और प्रशंसात्मक भाषा हटाना, सामग्री को निष्पक्ष दृष्टिकोण (neutral point of view) में दोबारा लिखना, और इसे अधिक विश्वकोशीय बनाने के लिए विस्तार करना शामिल था।
मेरा मानना है कि संशोधित संस्करण अब प्रचारात्मक नहीं था, या कम से कम इतना नहीं कि उसे व7 के अंतर्गत हटाया जाए। मैंने इन परिवर्तनों का उल्लेख लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी किया था।
मेरी समझ के अनुसार, व7 उन पृष्ठों पर लागू होता है जो पूरी तरह से प्रचारात्मक होते हैं और जिनमें सुधार की संभावना नहीं होती। किए गए सुधारों को देखते हुए, आपसे निवेदन है कि कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें।
साथ ही, यदि कोई अन्य कमी या समस्या शेष हो, तो कृपया उसे बताने का कष्ट करें ताकि मैं सामग्री में और सुधार कर सकूँ। [[सदस्य:BBBhagwati|BBBhagwati]] ([[सदस्य वार्ता:BBBhagwati|वार्ता]]) 16:41, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:29, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== पिण्डार या पिण्डर नदी ==
नमस्ते SM7 जी, मैं आज [[पिण्डार नदी]] नामक लेख पर देख रहा हूँ कि आपने इसके समकक्ष भोजपुरी लेख निर्मित किया। वहाँ आपने शीर्षक में "पिण्डार" के स्थान पर "पिंडर" रखा। इस हिसाब से यहाँ भी "पिण्डर नदी" या "पिंडर नदी" होना चाहिए। यदि आपको सही लगता है तो यह स्थानान्तरण कर देना चाहिए। मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:36, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, अब जांचा तो कुछ उदाहरण मिले
:*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
:* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
:* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
:इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:56, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] हाँ, इसके नाम में ड पर आ की मात्रा नहीं है। मैं इस नदी का पानी भी पी चुका हूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं कि मैं आधा ण हटाऊँ। यह विवादास्पद बदलाव लेख के वार्ता पन्ने पे चर्चा के बाद पर्याप्त समर्थन से किया जाय तो बेहतर होगा। सादर। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:37, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::जी, चर्चा के बिना मैं स्थानान्तरित कर सकता हूँ। बाकी आप चाहो तो चर्चा भी आरम्भ कर सकते हैं। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने जो स्रोत दिये हैं उनमें पिंडर और पिंडार दोनों लिखे हैं। इसके अतिरिक्त दृष्टि आईएएस वाला स्रोत विश्वसनीय नहीं है जबकि समाचार वाले भी एकरूप नहीं होने के कारण उचित नहीं माने जा सकते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:41, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::कृपया {{tlx|virusbox}} को भी देखें। इसे आपने बहुत पहले आयात किया था लेकिन सम्बंधित मोड्यूल का आयात नहीं किया गया। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने {{tlx|विषाणु}} क्यों निर्मित किया है, मुझे इसका कोई कारण समझ में नहीं आया। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:45, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::नमस्ते SM7 जी, @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप स्थानान्तरित कर सकते है। खोजने पर काफ़ी विश्वसनीय स्रोत है, जिन में '''पिंडर नदी''' ही लिखा है। [https://www.google.co.th/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/2026_27_UKPSV_UKSSSC_Special_General_Stu/YOS4EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA132&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/Aao_Karen_Himalaya_Mein_Trekking/qfVzBQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA95&printsec=frontcover] <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:55, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,
:::::नदी के नाम पर उचित मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। वर्तनी के संबंध में आपका निर्णय मुझे पूरी तरह स्वीकार है, कृपया आप ही इसे उपयुक्त नाम पर स्थानांतरित कर दें।
:::::'''<code><nowiki>{{विषाणु}}</nowiki></code>''' साँचे के निर्माण का कारण केवल तकनीकी था। पुराना <code><nowiki>{{virusbox}}</nowiki></code> साँचा संबंधित मॉड्यूल्स के अभाव में काम नहीं कर रहा था और लेखों में कोडिंग की त्रुटियाँ (error) दिखा रहा था। मुझे जटिल मॉड्यूल आयात करने की जानकारी नहीं थी, इसलिए लेखों को त्रुटिमुक्त करने के लिए मैंने सीधे स्वदेशी '''<code><nowiki>{{ज्ञानसंदूक}}</nowiki></code>''' ढाँचे का उपयोग करके यह नया साँचा बनाया, जिसे किसी बाहरी मॉड्यूल की आवश्यकता ही नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:58, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं मूल साँचे को और मॉड्यूल को अद्यतन कर दूंगा। वैसे यह मुझे भी समझ में नहीं आया कि जब यह बिना मॉड्यूल के काम नहीं कर रहा तो मैंने यह काम अधूरा क्यों छोड़ा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:53, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==जिज्ञासा==
नमस्कार! SM7 जी, लेख हटाने हेतु चल रही चर्चाओं के संबंध में एक जिज्ञासा है। सामान्यतः ऐसी चर्चाओं की एक निर्धारित समयसीमा होती है, किन्तु देखा गया है कि [[:श्रेणी:लेख हटाने हेतु वर्तमान चर्चाएँ|कई चर्चाएँ लंबे समय तक बिना किसी निष्कर्ष]] के लंबित रहती हैं। कुछ लेखों पर हुई चर्चाओं का अभी तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है कि उन्हें रखा जाना है या हटाया जाना है।
* जिज्ञासा ये है की सामान्यतः इन चर्चाओं के निष्कर्ष तक पहुँचने की समय-सीमा क्या निर्धारित होती है तथा किन परिस्थितियों में इनका परिणाम घोषित किया जाता है।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:56, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, यह इस बात पे निर्भर है कि चर्चा में भागीदार लोग कितने हैं और उनके मतों के आधार पर स्पष्ट राय क्या निकल कर आई है। अंग्रेजी की तरह यहाँ पर समय सीमा या रीलिस्ट करने जैसा कुछ नहीं है। ऐसी चर्चाओं में सदस्यों की कम भागीदारी हिंदी विकिपीडिया की एक बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति नाम बदलाव या कुछ अन्य चीजों को लेकर भी है जहाँ काम इसलिए लंबित रहता है क्योंकि चर्चा में भाग लेने वाले लोग नहीं हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:34, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
s5zn577vg3e9nfog6ibw8syhhtk1au3
6541369
6541368
2026-04-16T19:00:51Z
AMAN KUMAR
911487
/* सुझाव दें */ नया अनुभाग
6541369
wikitext
text/x-wiki
<!-- Please do NOT delete this line. Thanks! -->{{/header}}
<!-- कृपया इस लाइन और ऊपर की लाइन को को न हटायें, धन्यवाद !-->
साले नीच वामपंथी कुत्ते
== हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ "राजकुमार वर्मा" को नही हटाना चाहिए था। ==
मै हिंदी विकिपीडिया का ३ साल से सक्रिय सदस्य हूं और संपादन कार्य कर रहा हूं। मैने एक हिंदी विकिपीडिया पृष्ठ " राजकुमार वर्मा" बनाया था जिसमें किसी भी प्रकार का प्रचार कार्य नहीं था, और जब पृष्ठ को हटाने के लिए नामांकित किया गया तब उसके प्रति स्पष्ट जवाब भी दिया गया था कि पृष्ठ को क्यों नहीं हटाना चाहिए, फिर भी आपने पृष्ठ को हटा ही दिया।
आपको अधिकार मिले हैं तो उसका दुरुपयोग न करें , मेरे द्वारा निर्मित पृष्ठ में किसी भी प्रकार की प्रचार संबंधी लेख या सामग्री नहीं है।
अतः मेरे पृष्ठ को पुनः वापस लाएं।। [[सदस्य:धनंजय अहीर|धनंजय अहीर]] ([[सदस्य वार्ता:धनंजय अहीर|वार्ता]]) 16:58, 7 मार्च 2025 (UTC)धनंजय अहीर
== महाराज जी ==
नमस्ते SM7, पिछले कई सालों से आप अपने अधिकार का हिंदी विकिपीडिया पर दुरूपयोग कर रहे हैं। जिसका बिल्कुल सही उधारन है प्रेमानंद महाराज जी। कोशिश तो आपने बहुत की इसे ([[प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज]]) डिलीट करने की, लेकिन महाराज जी का चमत्कार देखिए, उनके किसी चाहने वाले ने बना ही दिया। और आप कुछ भी ना कर पाये । और ना कर पायेंगे । [[विशेष:योगदान/~2025-128983|~2025-128983]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-128983|talk]]) 16:02, 4 जुलाई 2025 (UTC)
== हम अस्थायी खातों के साथ आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेंगे ==
<section begin="body" />
उत्पाद सुरक्षा एवं अखंडता टीम अस्थायी खातों के संबंध में आपके अनुभवों के बारे में जानना चाहेगी। इस सर्वेक्षण में आपकी भागीदारी हमें यह समझने में सहयता करने में बेहद मूल्यवान होगी कि अस्थायी खाते कितनी अच्छी तरह कार्य कर रहे हैं और हम आगे क्या सुधार कर सकते हैं। इसे पूरा होने में ५ मिनट से अधिक समय नहींं लगना चाहिए।
इस सर्वेक्षण की गोपनीयता नीति [[foundation:Special:MyLanguage/Legal:Survey:Temporary_Accounts_Second_Pilot_Feedback_Privacy_Statement|इस लिंक पर देखी जा सकती है]]। इस सर्वेक्षण को पूरा करके, आप गोपनीयता नीति में निर्धारित शर्तों से सहमत होते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि हम आपसे संपर्क करें, तो कृपया हमें अपना विकि उपयोगकर्ता नाम बताएँ।
'''<big>[https://wikimedia.qualtrics.com/jfe/form/SV_emJJxsotBxVpS18?Q_Language=HI सर्वेक्षण में भाग लें]</big>'''.
धन्यवाद!<section end="body" />
<bdi lang="en" dir="ltr">[[User:Quiddity (WMF)|Quiddity (WMF)]]</bdi> 00:44, 21 अगस्त 2025 (UTC)
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Quiddity_(WMF)/sandbox4&oldid=29158797 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Quiddity (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== soc ==
I would like to bring to your attention that [[:en:User:Krishnarthiindia|User:Krishnarthiindia]], previously blocked on English Wikipedia as a sockpuppet of ''MediaTribe'', is currently active on Hindi Wikipedia and creating multiple promotional pages.
🔗 [[सदस्य:Krishnarthiindia|User page on Hindi Wikipedia]]
I raised this issue with Hindi Wikipedia administrator सदस्य:संजीव कुमार, but his response suggests that the matter is being overlooked. Our discussion is here:
🔗 Talk page discussion
As an example, the article on ''Yohan Poonawalla'' has been repeatedly deleted on English Wikipedia due to COI and promotional issues:
* EN: [[:en:Yohan_Poonawalla|Yohan Poonawalla (deleted multiple times)]]
* HI: योहान पूनावाला
This demonstrates a clear case of cross-wiki paid/COI editing.
Further evidence of promotional editing by this user includes:
* ''Abhay Singh (Jamshedpur politician)'' (created and later deleted)
* ''Anshuman Bhagat''
* ''Yohan Poonawalla''
* ''Ajay Mehgi'' ([https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%8B%E0%A4%A4%E0%A5%81_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80 ऋतु मेंगी])
Given the user’s established connection to ''MediaTribe'' and a pattern of COI and promotional activity across projects, I kindly request an investigation into their activities on Hindi Wikipedia. [[सदस्य:The BO57!|The BO57!]] ([[सदस्य वार्ता:The BO57!|वार्ता]]) 15:46, 25 सितंबर 2025 (UTC)
== अभिनेता गौरव देवासी का पेज बनाने के सन्दर्भ में ==
अभिनेता गौरव देवासी जो की राजस्थान राज्य में अभिनेता हे और गूगल पर बहुत आर्टिकल उपलब्ध हे.आपसे अनुरोध हे की इनका पेज बनाया जाये [[विशेष:योगदान/~2025-49619-4|~2025-49619-4]] ([[सदस्य वार्ता:~2025-49619-4|talk]]) 10:16, 3 अक्टूबर 2025 (UTC)
== सदस्य:Vedic Art द्वारा बन रहे LLM आधारित पेजों पर चिंता ==
'''मैं एडमिन्स का ध्यान इस बात पर लाना चाहता हूँ कि सदस्य:Vedic_Art लगातार ऐसे पेज बना रहे हैं जो देखने में AI या LLM से तैयार लगते हैं। इन पेजों में न स्रोत होते हैं, न ढंग की जानकारी, और कई जगह गलतियाँ भी हैं।'''
'''साथ ही ये यूज़र “सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव अक्टूबर 2025” वाले पेज-निर्माण कार्यक्रम में भी हिस्सा ले रहे हैं। अगर ऐसे कार्यक्रमों में AI से बने पेज भेजे जाते हैं, तो हिंदी विकिपीडिया की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ेगा।'''
'''मेरी मुख्य बातेँ:'''
* '''विकिपीडिया का मकसद भरोसेमंद और सत्यापित जानकारी देना है, न कि AI से बना कंटेंट डालना।'''
* '''AI के पेज अक्सर बिना स्रोतोँ वाले, गलत या गढ़ी हुई बातें रखते हैं।'''
* '''गूगल पर विकिपीडिया की रैंकिंग ऊँची होती है, अगर झूठी या AI से बनी जानकारी जाएगी तो लोग गलतफ़हमी में पड़ेंगे।'''
* '''अगर गलत जानकारी फैलती है, तो उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?'''
'''मेरी विनती है कि:'''
* '''सदस्य:Vedic_Art के हाल के पेजों की जाँच हो।'''
* '''जो पेज सत्यापित नहीं हैं, उन पर कार्रवाई हो।'''
* '''साफ किया जाए कि ऐसे AI-जनित पेजों की अनुमति है या नहीं।'''
* '''क्या ऐसे यूज़र्स को प्रतियोगिता में भाग लेना चाहिए?'''
'''क्या एडमिन लोग इस तरह की गतिविधियों को स्वीकार करते हैं? इस पर साफ राय जरूरी है।'''
'''धन्यवाद,'''
'''WeSeeAllButNot''' [[सदस्य:WeSeeAllButNot|WeSeeAllButNot]] ([[सदस्य वार्ता:WeSeeAllButNot|वार्ता]]) 17:48, 5 अक्टूबर 2025 (UTC)
== Requested Page Moves ==
To align with the original title name:
* Move [[द बैड्स ऑफ बॉलीवुड]] → [[द बा***ड्स ऑफ़ बॉलीवुड]]
** Reason: The current title contains an incorrect word ("बैड्स", "ऑफ"). The proposed title reflects the accurate and original english title name.
To correct spelling errors:
* Move [[गौरी खान]] → [[गौरी ख़ान]]
** Reason: The current title misspells "ख़ान" as "खान".
* Move [[फराह खान]] → [[फ़राह ख़ान]]
** Reason: The current title misspells both "फ़राह" (as "फराह") and "ख़ान" (as "खान").
* Move [[बॉलीवुड हँगामा]] → [[बॉलीवुड हंगामा]]
** Reason: The current title uses an incorrect spelling ("हँगामा"). The proposed title corrects it to the standard spelling "हंगामा".
For consistency and commonly accepted spelling:
* Move [[इण्डिया टुडे]] → [[इंडिया टुडे]]
* Move [[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]] → [[द टाइम्स ऑफ़ इंडिया]]
** Reason: The current title uses an outdated spelling ("इण्डिया"). The proposed title updates it to the standard and widely used spelling "इंडिया" for consistency.
[[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 02:05, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:Anoopspeaks|Anoopspeaks]] कृपया संबंधित पृष्ठों के वार्ता पन्नों पर साँचा:नाम बदलें के प्रयोग द्वारा लिखें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
::जी, किया [[सदस्य:Anoopspeaks|अनूप भाटिया]] ([[सदस्य वार्ता:Anoopspeaks|वार्ता]]) 08:04, 7 अक्टूबर 2025 (UTC)
==युद्ध हाथी पृष्ठ हटाने के संबंध में==
नमस्ते SM7 जी। मैंने कल रात में एक पृष्ठ बनाया था [[युद्ध हाथी]] नाम से हालांकि लेख में अभी बहुत काम बाकी था जिसे मैं आज पूरा करने वाला था परंतु आज जब मैंने अपना लेख देखा तो वह आपके द्वारा हटाया जा चुका है। कृपया हटाने का कारण बताएं? धन्यवाद --[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 12:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य: रोहित साव27|रोहित जी]], लेख आईपी द्वारा बनाया गया था और लेख में केवल एक वाक्य लिखा हुआ था - "इनका इस्तेमाल युद्ध के लिए होता।" जिसे सदस्य:MathXplore द्वारा परीक्षण पृष्ठ के रूप में शीह नामांकित किया गया था और मैंने इसी मापदंड के तहत हटाया है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 15:21, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
::माफी चाहूंगा SM7 जी शायद मेरी ग़लती है क्योंकि कल रात को मैं इस लेख पर काम कर रहा था और करते-करते सो गया था। शायद मैंने सेव नहीं किया होगा। मुझे लगा कि मैंने सेव किया होगा। माफी चाहूंगा शायद मेरी तरफ से ही गलती हुई है। आपका धन्यवाद।--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 18:39, 13 अक्टूबर 2025 (UTC)
== अस्थायी खातों को सूचना भेजना ==
नमस्ते SM7 जी, मैंने देखा है कि ट्विंकल से किसी लेख को शीह-नामांकित करने पर वो सम्बंधित खातों को सूचना सन्देश भेजता है। आईपी (मोबाइल) पतों से बने खाते को ये सन्देश नहीं भेजे जाते हैं लेकिन वर्तमान में हिन्दी विकिपीडिया पर ऐसे खातों को अस्थायी खातों से बदला जा चुका है और ये टिल्डे (~) से आरम्भ होते हैं। इन अस्थायी खातों पर सन्देश जा रहे हैं। मुझे लगता है कि इन खातों को भी डिफॉल्ट रूप से सन्देश भेजना बंद कर देना चाहिए। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:52, 20 अक्टूबर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं समय मिलते ही इसे देखता हूँ। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 13:27, 21 अक्टूबर 2025 (UTC)
== 2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल ==
नमस्ते SM7 जी, [[2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल]] नामक लेख को पिछले माह @[[सदस्य:TypeInfo|TypeInfo]] जी ने [[वि:शीह#व2|परीक्षण पाठ]] के रूप में नामांकित किया। उनका ये कैसा रौलबैक था, ये तो वो ही बता सकते हैं (अपेक्षा करता हूँ कि वो इसके बारे में बतायेंगे) लेकिन आपने भी बिना इतिहास देखे लेख को हटा दिया। सम्भवतः ये परीक्षण पाठ तो नहीं था और [[:d:Q209222|विकिडाटा आयटम]] से भी जुड़ा हुआ था जहाँ 29 अन्य भाषायें भी सूचीबद्ध हैं। अतः मुझे लगता है यह परीक्षण पाठ के रूप में नहीं हटाना चाहिए था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:09, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, बिना देखे तो नहीं हटाया - यह वैसे ही लिखा हुआ था कि - "अमुक फलाने की लिखी पुस्तक है" और 2009 से बस यही पाठ था। विकिडेटा से जुड़े होने के बावज़ूद यह परीक्षण ही लगा भले उल्लेखनीय हो। आगे आप निर्णय ले सकते हैं कि इसे वापस स्थापित करना है या नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:20, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::मेरे पास कोई उल्लेखनीय स्रोत नहीं है लेकिन निम्नलिखित सामग्री के साथ रखा जा सकता है:
:::'''2,4-डाइक्लोरोफिनॉक्सीएसिटिक अम्ल''' (Dichlorophenoxyacetic acid) एक [[कार्बनिक यौगिक]] है जिसका रासायनिक सूत्र {{chem|C|8|H|6|Cl|2|O|3}} है। इसे अक्सर इसके [[ISO|आईएसओ]] सामान्य नाम '''2,4-डी''' कहा जाता है। यह प्रणालीगत [[शाकनाशक]] है जो अधिकतर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार को नष्ट करने का काम करता है लेकिन [[खाद्यान्न]], [[घास|दूब]] और [[घासभूमि]] जैसे पौधे इससे अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
:::2,4-डी दुनिया के सबसे पुराने और सबसे व्यापक रूप से उपलब्ध शाकनाशी रसायनों में से एक है जो सन् 1945 से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है। वर्तमान में कई रासायनिक कंपनियों द्वारा इसका उत्पादन किया जाता है क्योंकि इसका पेटेंट बहुत पहले समाप्त हो चुका है। यह कई व्यावसायिक लॉन शाकनाशी मिश्रणों में पाया जाता है और अनाज की फसलों, चरागाहों और बागों में खरपतवारनाशक के रूप में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। 1,500 से ज़्यादा शाकनाशी उत्पादों में सक्रिय घटक के रूप में 2,4-डी होता है।
::आवश्यक हो तो उपरोक्त सामग्री के साथ स्रोतहीन का टैग रख सकते हैं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:03, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
:::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, वो तो [[1,4-डाइमिथाइलबेंजिन]] टाइप के लेख भी एक लाइन के साथ स्रोतहीन का टैग लगा के रखे हुए ही हैं। मेरी कोई हार्दिक इच्छा नहीं। यदि कोई इसे परीक्षण कह के शीह कर दे तो मैं इसे भी हटा ही दूँगा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:21, 12 नवम्बर 2025 (UTC)
::::मेरी भी ऐसी कोई इच्छा नहीं है लेकिन इस तरह के 10 हज़ार पृष्ठ [[विशेष:छोटे_पृष्ठ|यहाँ]] सूचीबद्ध हैं। आप बार-बार मुझे परीक्षण पृष्ठ कहने पर डांट चुके हो, लेकिन अब आप भी उसी के साथ जुड़े हो। इन सभी को यदि हटाना है तो [[वि:हहेच|हटाने हेतु चर्चा]] करके हटाया जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 04:08, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप उल्टा कह रहे हैं। जैसा कि आप ख़ुद बता रहे - ''आप'' बार-बार ऐसे पृष्ठ परीक्षण कह के नामांकित कर चुके हैं और देख-देख के और हटा-हटा के जब मैंने एक ऐसा ही पृष्ठ किसी दूसरे के नामांकन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हटा ही दिया तो, अब, आप कह रहे कि वो परीक्षण नहीं था। तो आप ही बताइये कि मैं कहाँ स्टैंड लूँ? मुझे नहीं पता कि हहेच में रखा जाय तो इन्हें हटाने पे ही सहमति बनेगी या नहीं; यह पहले से प्रेडिक्शन करना मुश्किल है। एक ही तरीका बचता है कि शीह-परीक्षण की नियमावली को शब्दशः अनुसरित करें 'स्फद्घ्झा स्झाज्घ' जैसे कुछ लिखा हो केवल तभी उसे परीक्षण मान के हटायें। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 04:23, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::वो अर्थहीन सामग्री में आता है। परीक्षण में वो लेख भी शामिल होते हैं जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन जाते हैं। 15 वर्ष पुराने लेख को इस श्रेणी में कैसे रख सकते हैं? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:07, 13 नवम्बर 2025 (UTC)
:::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] यानी आप तैयार हैं कि केवल उन्हीं लेखों को परीक्षण के मापदंड के तहत नामांकित किया जाए जो - "जो अनजाने में प्रयोगपृष्ठ की तरह बना हो या फिर किसी कड़ी पर क्लिक करने के बाद किसी नये सदस्य या अस्थायी खातों से अज्ञानतावश बन..." गए हैं? --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:17, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
::::::::मैं तो सदैव ही तैयार था लेकिन जब चर्चायें बिना किसी चर्चा के वर्षों तक चलने लगी और शीह में भी महिनों का समय लगने लगा तब मैं ऐसे हटाने लगा था। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 11:52, 14 नवम्बर 2025 (UTC)
== नए साल की शुभकामनाएँ ==
<div style="background:#E8F5E9; padding:10px; border:1px solid #81C784; border-radius:6px;">
'''SM7 जी, नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएँ!'''
यह नया साल आपके और आपके परिवार के लिए अच्छा स्वास्थ्य, सफलता और सुख-समृद्धि लेकर आए।
[[File:Everlasting Fireworks looped.gif|left|x173px]]
हिंदी विकिपीडिया पर आपके योगदान के लिए धन्यवाद।
[[सदस्य:Chronos.Zx|<span style="color:blue; font-weight:bold;">क्रोनोस.Zx</span>]] ([[सदस्य वार्ता:Chronos.Zx|वार्ता]]) 13:15, 1 जनवरी 2026 (UTC)
</div>
:@[[सदस्य:Chronos.Zx|Chronos.Zx]] जी, बहुत-बहुत धन्यवाद। आपको भी नववर्ष अत्यंत मंगलमय हो। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:24, 2 जनवरी 2026 (UTC)
== विशेष: कार्यक्रम आयोजक अधिकार ==
नमस्ते [[सदस्य:SM7|SM7]], आप मुझे कार्यक्रम आयोजक के अधिकार के आवेदन दर्ज करने के लिए पृष्ठ बताने के कृपा करे | [[सदस्य:Dev Jadiya|Dev Jadiya]] ([[सदस्य वार्ता:Dev Jadiya|वार्ता]]) 09:08, 18 मार्च 2026 (UTC)
== जांच ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
@[[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] के अभी के कुछ संपादनों को जांच लें <br>
धन्यवाद, [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:48, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
:किसी से पूछने से पहले इंग्लिश विकिपीडिया पर ज़रूर जाएँ अथवा समाचार पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन करें| [[सदस्य:Ankit231132|Ankit231132]] ([[सदस्य वार्ता:Ankit231132|वार्ता]]) 14:36, 1 अप्रैल 2026 (UTC)
== एक सदस्य को अवरोधित करने का नामांकन ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, @[[सदस्य:~2026-19373-86|~2026-19373-86]] को बहुत बार चेतावनी दे चुका हूं पर अपमानजनक सम्पादन कर रहे है, कृपया आप इस पर संज्ञान लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:16, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
== मदद ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय,
सदस्य @[[सदस्य:~2026-21206-80|~2026-21206-80]] बार बार प्रचार सम्पादन कर रहा है| केवल इनके लिए ही नहीं बल्कि और भी सदस्यों के लिए बताए [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 15:06, 6 अप्रैल 2026 (UTC)
== व7 के अंतर्गत हटाए गए लेख के पुनर्विचार हेतु अनुरोध ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय, मैं आपको [[कमलेश कमल]] लेख के संबंध में लिख रहा हूँ जिसे आपने [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व7|व7]] के अंतर्गत हटाया था।
जब लेख को शीघ्र हटाने के लिए चिह्नित किया गया, तब मैंने तुरंत उठाई गई आपत्तियों को दूर करने के लिए आवश्यक बदलाव किए। मैंने पूरे लेख में महत्वपूर्ण सुधार किए, जिसमें प्रचारात्मक और प्रशंसात्मक भाषा हटाना, सामग्री को निष्पक्ष दृष्टिकोण (neutral point of view) में दोबारा लिखना, और इसे अधिक विश्वकोशीय बनाने के लिए विस्तार करना शामिल था।
मेरा मानना है कि संशोधित संस्करण अब प्रचारात्मक नहीं था, या कम से कम इतना नहीं कि उसे व7 के अंतर्गत हटाया जाए। मैंने इन परिवर्तनों का उल्लेख लेख के वार्ता पृष्ठ पर भी किया था।
मेरी समझ के अनुसार, व7 उन पृष्ठों पर लागू होता है जो पूरी तरह से प्रचारात्मक होते हैं और जिनमें सुधार की संभावना नहीं होती। किए गए सुधारों को देखते हुए, आपसे निवेदन है कि कृपया लेख को पुनर्स्थापित करने पर विचार करें।
साथ ही, यदि कोई अन्य कमी या समस्या शेष हो, तो कृपया उसे बताने का कष्ट करें ताकि मैं सामग्री में और सुधार कर सकूँ। [[सदस्य:BBBhagwati|BBBhagwati]] ([[सदस्य वार्ता:BBBhagwati|वार्ता]]) 16:41, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
== रोलबैक अधिकार के नामांकन पर आपके विचार/मत हेतु ==
<div style="background-color: #FFF9E6; padding: 15px; border: 1px solid #DAA520; border-radius: 8px; margin-top: 10px;">
नमस्ते, आशा है आप सकुशल होंगे।
मैं पिछले कुछ समय से हिंदी विकिपीडिया पर सक्रिय रूप से गश्त कर रहा हूँ और हाल के बदलावों में स्पष्ट बर्बरता को हटाने का प्रयास कर रहा हूँ। अपने इस कार्य को और अधिक सुचारू बनाने के लिए, मैंने स्वयं को '''रोलबैक अधिकार''' के लिए नामांकित किया है।
चूँकि आप हिंदी विकिपीडिया के एक अनुभवी सदस्य हैं, इसलिए मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि कृपया मेरे हालिया योगदानों की समीक्षा करें और अपना बहुमूल्य मत या सुझाव प्रदान करें। आपका समर्थन और मार्गदर्शन मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक होगा।
'''नामांकन यहाँ देखें:''' [[विकिपीडिया:रोलबैकर्स अधिकार हेतु निवेदन#AMAN KUMAR|मेरे नामांकन पर अपना मत दें]]
सहयोग के लिए अग्रिम धन्यवाद!
सादर,<br>
[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:29, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
</div>
== पिण्डार या पिण्डर नदी ==
नमस्ते SM7 जी, मैं आज [[पिण्डार नदी]] नामक लेख पर देख रहा हूँ कि आपने इसके समकक्ष भोजपुरी लेख निर्मित किया। वहाँ आपने शीर्षक में "पिण्डार" के स्थान पर "पिंडर" रखा। इस हिसाब से यहाँ भी "पिण्डर नदी" या "पिंडर नदी" होना चाहिए। यदि आपको सही लगता है तो यह स्थानान्तरण कर देना चाहिए। मुझे इसकी सही जानकारी नहीं है।<span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 18:36, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, अब जांचा तो कुछ उदाहरण मिले
:*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
:* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
:* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
:इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 18:56, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] हाँ, इसके नाम में ड पर आ की मात्रा नहीं है। मैं इस नदी का पानी भी पी चुका हूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं कि मैं आधा ण हटाऊँ। यह विवादास्पद बदलाव लेख के वार्ता पन्ने पे चर्चा के बाद पर्याप्त समर्थन से किया जाय तो बेहतर होगा। सादर। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 08:37, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::जी, चर्चा के बिना मैं स्थानान्तरित कर सकता हूँ। बाकी आप चाहो तो चर्चा भी आरम्भ कर सकते हैं। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपने जो स्रोत दिये हैं उनमें पिंडर और पिंडार दोनों लिखे हैं। इसके अतिरिक्त दृष्टि आईएएस वाला स्रोत विश्वसनीय नहीं है जबकि समाचार वाले भी एकरूप नहीं होने के कारण उचित नहीं माने जा सकते। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:41, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::कृपया {{tlx|virusbox}} को भी देखें। इसे आपने बहुत पहले आयात किया था लेकिन सम्बंधित मोड्यूल का आयात नहीं किया गया। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी ने {{tlx|विषाणु}} क्यों निर्मित किया है, मुझे इसका कोई कारण समझ में नहीं आया। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:45, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::नमस्ते SM7 जी, @[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, आप स्थानान्तरित कर सकते है। खोजने पर काफ़ी विश्वसनीय स्रोत है, जिन में '''पिंडर नदी''' ही लिखा है। [https://www.google.co.th/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/2026_27_UKPSV_UKSSSC_Special_General_Stu/YOS4EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA132&printsec=frontcover], [https://www.google.co.th/books/edition/Aao_Karen_Himalaya_Mein_Trekking/qfVzBQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0+%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA95&printsec=frontcover] <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:55, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय,
:::::नदी के नाम पर उचित मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। वर्तनी के संबंध में आपका निर्णय मुझे पूरी तरह स्वीकार है, कृपया आप ही इसे उपयुक्त नाम पर स्थानांतरित कर दें।
:::::'''<code><nowiki>{{विषाणु}}</nowiki></code>''' साँचे के निर्माण का कारण केवल तकनीकी था। पुराना <code><nowiki>{{virusbox}}</nowiki></code> साँचा संबंधित मॉड्यूल्स के अभाव में काम नहीं कर रहा था और लेखों में कोडिंग की त्रुटियाँ (error) दिखा रहा था। मुझे जटिल मॉड्यूल आयात करने की जानकारी नहीं थी, इसलिए लेखों को त्रुटिमुक्त करने के लिए मैंने सीधे स्वदेशी '''<code><nowiki>{{ज्ञानसंदूक}}</nowiki></code>''' ढाँचे का उपयोग करके यह नया साँचा बनाया, जिसे किसी बाहरी मॉड्यूल की आवश्यकता ही नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 13:58, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::::::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, मैं मूल साँचे को और मॉड्यूल को अद्यतन कर दूंगा। वैसे यह मुझे भी समझ में नहीं आया कि जब यह बिना मॉड्यूल के काम नहीं कर रहा तो मैंने यह काम अधूरा क्यों छोड़ा। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:53, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
==जिज्ञासा==
नमस्कार! SM7 जी, लेख हटाने हेतु चल रही चर्चाओं के संबंध में एक जिज्ञासा है। सामान्यतः ऐसी चर्चाओं की एक निर्धारित समयसीमा होती है, किन्तु देखा गया है कि [[:श्रेणी:लेख हटाने हेतु वर्तमान चर्चाएँ|कई चर्चाएँ लंबे समय तक बिना किसी निष्कर्ष]] के लंबित रहती हैं। कुछ लेखों पर हुई चर्चाओं का अभी तक कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया है कि उन्हें रखा जाना है या हटाया जाना है।
* जिज्ञासा ये है की सामान्यतः इन चर्चाओं के निष्कर्ष तक पहुँचने की समय-सीमा क्या निर्धारित होती है तथा किन परिस्थितियों में इनका परिणाम घोषित किया जाता है।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:56, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, यह इस बात पे निर्भर है कि चर्चा में भागीदार लोग कितने हैं और उनके मतों के आधार पर स्पष्ट राय क्या निकल कर आई है। अंग्रेजी की तरह यहाँ पर समय सीमा या रीलिस्ट करने जैसा कुछ नहीं है। ऐसी चर्चाओं में सदस्यों की कम भागीदारी हिंदी विकिपीडिया की एक बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति नाम बदलाव या कुछ अन्य चीजों को लेकर भी है जहाँ काम इसलिए लंबित रहता है क्योंकि चर्चा में भाग लेने वाले लोग नहीं हैं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:34, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
== सुझाव दें ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] महोदय मैने [[विकिपीडिया:चौपाल|चौपाल]] पर एक प्रस्ताव रखा है
[[विकिपीडिया:चौपाल#पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव|पृष्ठ स्थानांतरण (Page Move) अधिकार और नए सुरक्षा स्तर पर पुनर्विचार हेतु प्रस्ताव]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:00, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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दुग्ध ज्वर
0
532263
6541320
6524777
2026-04-16T14:41:44Z
AMAN KUMAR
911487
स्व-प्रकाशित,अप्रमाणित और संदर्भ तथा व्याकरण को सुधारा
6541320
wikitext
text/x-wiki
'''मिल्क फीवर''' गाय-भैंसों में ब्यांत (बच्चा देने) के आस-पास होने वाली एक उपापचीय बीमारी है।<ref>{{Cite web|url=https://www.msdvetmanual.com/metabolic-disorders/parturient-paresis-in-ruminants/parturient-paresis-in-cows|title=Parturient Paresis in Cows - Metabolic Disorders|website=एमएसडी वेटरिनरी मैनुअल|language=en|access-date=2026-01-15}}</ref> इसे हिंदी में '''दुग्ध ज्वर''' और चिकित्सकीय भाषा में '''हाइपोकैल्सीमिया''' कहा जाता है। मिल्क फीवर एक [[गैर संचारी रोग|असंक्रामक रोग]] है जो [[शरीर]] पोषक तत्व की कमी से होता है। यह [[रक्त]] में कैल्शियम की कमी के कारण होती है और विशेष रूप से उच्च [[दुग्ध उत्पादन|दूध उत्पादन]] वाली गायों को प्रभावित करती है। ब्यांत के बाद दूध उतारू होने पर, दूध के साथ अचानक बड़ी मात्रा में कैल्शियम निकल जाता है, जिसकी पूर्ति शरीर तुरंत नहीं कर पाता। इस स्थिति में पशु के शारीरिक तंत्र पर गहरा असर पड़ता है और यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
मिल्क फीवर एक ऐसी बीमारी है जो केवल मादा पशुओं में पाई जाती है, क्योंकि दूध का उत्पादन वही करती हैं, जबकि नर पशुओं में यह रोग नहीं होता। यह रोग शरीर में [[कैल्सियम|कैल्शियम]] की कमी, जिसे हाइपोकैल्सीमिया कहा जाता है, के कारण होता है।
== उपापचयी रोग ==
उपापचयी रोग वे बीमारियाँ हैं जो शरीर में [[पोषक तत्व|पोषक तत्त्वों]] की कमी, असंतुलन या चयापचय (Metabolism) की गड़बड़ी के कारण होती हैं। ये रोग खासकर उन पशुओं में अधिक देखे जाते हैं जिनकी ऊर्जा आवश्यकता ज्यादा होती है, जैसे अधिक दूध देने वाले, गर्भवती या हाल ही में बच्चे देने वाले पशु।
ये रोग संक्रामक नहीं होते, यानी एक पशु से दूसरे पशु में नहीं फैलते। अधिकतर मामलों में इनका संबंध उत्पादन प्रणाली से होता है, इसलिए इन्हें “प्रोडक्शन डिज़ीज़” भी कहा जाता है। जब दूध उत्पादन अधिक होता है, तब शरीर पर पोषण और खनिजों की मांग बढ़ जाती है। यदि आहार [[सन्तुलित आहार|संतुलित]] न हो तो शरीर में असंतुलन पैदा हो जाता है और रोग की स्थिति बनती है।
== दुग्ध ज्वर रोग के लक्षण ==
इस स्थिति में [[पशु]] को [[बुखार]] नहीं होता, लेकिन शरीर में शिथिल पक्षाघात आ जाता है, [[मांसपेशियाँ]] कमजोर हो जाती हैं, रक्त का संचार धीमा हो जाता है और हृदय की गति भी कम हो जाती है। मिल्क फीवर का एक खास और पहचानने योग्य लक्षण यह है कि गाय अपनी [[गर्दन]] को मोड़कर पेट यानी फ्लैंक की ओर करके बैठ जाती है। यह बीमारी आमतौर पर ब्याने के बाद 72 घंटे के भीतर दिखाई देती है, हालांकि कुछ मामलों में ब्याने से 2–3 दिन पहले भी इसके लक्षण नजर आ सकते हैं। जब गाय कोलोस्ट्रम यानी पहला [[दूध]] देने लगती है, तब शरीर से कैल्शियम बहुत अधिक मात्रा में दूध के साथ बाहर निकल जाता है, जबकि [[आँतों|आंतों]] और [[हड्डियों]] से कैल्शियम का अवशोषण उतनी तेजी से नहीं हो पाता, जिससे शरीर में असंतुलन पैदा हो जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.agritech.tnau.ac.in/expert_system/cattlebuffalo/parturient.html|title=Metabolic diseases of Cattle and Buffalo|website=www.agritech.tnau.ac.in|access-date=2026-01-16}}</ref>
== गाय-भैंसों मे दुग्ध रोग होने की संभावना ==
यह रोग [[देशी गायों]] की तुलना में विदेशी नस्ल की गायों में अधिक देखा जाता है, विशेष रूप से जर्सी और [[होल्स्टीन फ़्रीज़ियन|होलस्टीन फ्रिज़ियन]] नस्लों में। गायों में यह बीमारी भैंसों की अपेक्षा अधिक होती है और सामान्यतः तीसरे ब्यांत के आसपास इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है, जबकि भैंसों में चौथे ब्यांत और विदेशी गायों में पाँचवे ब्यांत के समय यह रोग अधिक देखने को मिलता है, क्योंकि इसी समय दुग्ध उत्पादन अपने चरम पर होता है। [[कुतिया]] में इसी तरह की स्थिति को एक्लेम्पसिया कहा जाता है।
== शरीर मे कैल्शियम की सामान्य मात्रा ==
सामान्य अवस्था में गाय के शरीर में [[कैल्सियम|कैल्शियम]] और [[फास्फोरस|फॉस्फोरस]] का अनुपात 2:1 होता है और रक्त में कैल्शियम की मात्रा 8 से 12 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर तथा फॉस्फोरस की मात्रा 4 से 8 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीलीटर होती है, लेकिन मिल्क फीवर की स्थिति में रक्त में कैल्शियम का स्तर घटकर लगभग 5 मिलीग्राम तक रह जाता है, जिससे शरीर में तीव्र कैल्शियम की कमी हो जाती है। इस कमी के मुख्य कारणों में कोलोस्ट्रम के माध्यम से अत्यधिक कैल्शियम का निकल जाना, ग्रामीण क्षेत्रों में बछड़े को खीस पिलाने के बाद बचा हुआ कोलोस्ट्रम मानव उपयोग के लिए निकाल लेना, तथा [[गर्भावस्था]] के दौरान मिनरल मिश्रण या संतुलित आहार की कमी शामिल हैं।
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:पशुरोग]]
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भानगढ़ दुर्ग
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text/x-wiki
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{{ज्ञानसन्दूक सैन्य निर्माण
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[[Image:BhangarhFort2.jpg|right|thumb|300px|भानगढ़ दुर्ग]]
'''भानगढ़ दुर्ग ( कुशवाह क्षत्रियों की विरासत )''' [[भारत]] के [[राजस्थान]] में स्थित १७वीं शताब्दी में निर्मित एक [[दुर्ग]] है।<ref name=haunt>{{Cite news|url=http://zeenews.india.com/slideshow/top-10-most-haunted-places-in-india_39.html|title=Bhangarh Fort, Rajasthan|accessdate=21 July 2013|publisher=Zee News|archive-url=https://web.archive.org/web/20130717061846/http://zeenews.india.com/slideshow/top-10-most-haunted-places-in-india_39.html|archive-date=17 जुलाई 2013|url-status=live}}</ref> इसे [[मान सिंह प्रथम]] कुशवाह ने अपने छोटे भाई माधो सिंह कुशवाह प्रथम के लिए बनवाया था। इस दुर्ग का नाम भान सिंह कुशवाहा के नाम पर है जो माधो सिंह कुशवाहा के पितामह थे।
इस दुर्ग की सीमा के बाहर एक नया गाँव बसा है जिसमें लगभग २०० घर और जनसंख्या १३०० है। यह दुर्ग और इसका अहाता अच्छी तरह संरक्षित है।{{Sfn|Singh|2010|p=188}}<ref name=Census2001>{{cite web | url=https://www.travelpraise.com/bhangarh-fort/ | title='''One night in Bhangarh (English)''' | accessdate=21 July 2018 | publisher=travelpraise | archive-url=https://web.archive.org/web/20190824175727/http://www.travelpraise.com/bhangarh-fort/ | archive-date=24 अगस्त 2019 | url-status=dead }}</ref>
इस किले की देख रेख [[भारत सरकार]] द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा इस क्षेत्र में सूर्यास्त के बाद किसी भी व्यक्ति के रूकने की अनुमति नहीं है।
भानगढ़ दुर्ग काकनवाड़ी के पठार पर स्थित है।
== परिचय ==
[[Image:Haunted-bhangarh-fort-rajasthan.jpg|right|thumb|300px|भानगढ़ दुर्ग का बाहरी भाग]]
भानगढ़ किला सत्रहवीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस किले का निर्माण मान सिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने करावाया था। राजा माधो सिंह उस समय अकबर के सेना में जनरल के पद पर तैनात थे। उस समय भानगड़ की जनसंख्या तकरीबन 10,000 थी। भानगढ़ अल्वार जिले में स्थित एक शानदार किला है जो कि बहुत ही विशाल आकार में तैयार किया गया है।
चारो तरफ से पहाड़ों से घिरे इस किले में बेहतरीन शिल्पकलाओ का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा इस किले में भगवान शिव, हनुमान आदी के बेहतरीन और अति प्राचिन मंदिर विध्यमान है। इस किले में कुल पांच द्वार हैं और साथ साथ एक मुख्य दीवार है। इस किले में दृण और मजबूत पत्थरों का प्रयोग किया गया है जो अति प्राचिन काल से अपने यथा स्थिती में पड़े हुये हैं।
फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जाती है। किले के चारों तरफ [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण]] (एएसआई) की टीम मौजूद रहती हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा सूर्यास्त के बाद इस क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के रूकने की मनाही है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें==
*[[भानगढ़]]
== बाहरी कड़ियाँ==
*[https://jodhpurnationaluniversity.com/bhangarh-fort-images-story-history-in-hindi/amp/ भानगढ़ का किला]
{{भारत के किले}}
[[श्रेणी:राजस्थान में दुर्ग]]
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किम जोंग उन
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হানিফ আলী
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श्रेणी
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text/x-wiki
{{Infobox officeholder
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}}
'''किम जोंग उन''' ({{Lang-ko|김정은}}, {{IPA-ko|kim.dzɔŋ.ɯn}}; जन्म 8 जनवरी 1984) [[उत्तर कोरिया|उत्तरी कोरिया]] के सर्वोच्च नेता हैं। वे [[किम जोंग-इल|किम जोंग इल]] (1941–2011) के पुत्र हैं। और किम सुंग (1912–1994) के पोते है। इसने 28 दिसम्बर 2011 को अपने आपको तानाशाह बना लिया और उसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी।
==प्रारंभिक जीवन और शिक्षा==
किम के प्रारंभिक जीवन से जुड़ी सभी जानकारी केवल उत्तर कोरिया के तानाशाह द्वारा या फिर उन लोगों के द्वारा ही मिली है, जिन्होंने उसे विदेशों में देखा हैं। जैसे कि स्विट्ज़रलैंड के विद्यालय में किम के द्वारा पढ़ने की घटना। उत्तर कोरिया के विभाग वाले किम के जन्म की तारीख 8 जनवरी 1982 है, बताते हैं। जबकि दक्षिण कोरिया का आधिकारिक विभाग इसे और बाद में है बोलता है। डेनिस रॉडमन ने कहा कि उसका जन्म 8 जनवरी 1984 को हुआ था और वे किम से सितम्बर 2013 को मिले थे। यह अपने तीन भाइयों में से दूसरा है।<ref name="Lee2012">{{cite news |title=Kim Jong-un’s sister is having a ball |url=http://koreajoongangdaily.joins.com/news/article/article.aspx?aid=2957573 |archive-date=16 अक्तूबर 2015 |work=Korea JoongAng Daily |date=8 August 2012 |last1=Lee |first1=Young-jong |last2=Kim |first2=Hee-jin |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20151016211015/http://koreajoongangdaily.joins.com/news/article/article.aspx?aid=2957573 |access-date=2 अप्रैल 2016 }}</ref>
जापानी समाचार-पत्र में सबसे पहले प्रकाशित हुए एक सूचना के अनुसार किम ने स्विट्ज़रलैंड के ही एक विद्यालय में पढ़ाई की थी। वह उस विद्यालय में "चोल-पक" या "पक-चोल" नाम से 1993 से लेकर 1998 तक था।<ref>{{cite news |url=http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2009/06/01/AR2009060103750.html |work=The Washington Post |author=Blaine Harden |title=Son Named Heir to North Korea's Kim Studied in Switzerland, Reportedly Loves NBA |date=3 June 2009 |access-date=2 अप्रैल 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171224014448/http://www.washingtonpost.com/wp-dyn/content/article/2009/06/01/AR2009060103750.html |archive-date=24 दिसंबर 2017 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/northkorea/7810203/Rare-photos-of-Kim-Jong-ils-youngest-son-Kim-Jong-un-released.html |location=London |work=The Daily Telegraph |author=Peter Foster |title=Rare photos of Kim Jong-il's youngest son, Kim Jong-un, released |date=8 June 2010 |access-date=2 अप्रैल 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100611052037/http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/asia/northkorea/7810203/Rare-photos-of-Kim-Jong-ils-youngest-son-Kim-Jong-un-released.html |archive-date=11 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite news |url=http://www.thesun.co.uk/sol/homepage/features/3245311/School-days-struggles-of-the-dictators-son-Kim-Jong-un.html |location=London |work=The Sun |first1=Allan |last1=Hall |title=Dim JongUn |date=25 November 2010 |access-date=2 अप्रैल 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101202063836/http://www.thesun.co.uk/sol/homepage/features/3245311/School-days-struggles-of-the-dictators-son-Kim-Jong-un.html |archive-date=2 दिसंबर 2010 |url-status=live }}</ref> जो एक शर्मीले लड़के व बास्केटबाल प्रेमी के रूप में वहाँ पढ़ाई कर रहा था।<ref name="Guardian2009">{{cite news |url=http://www.theguardian.com/world/2009/jun/02/kim-jong-il-names-son-successor |title=North Korean leader Kim Jong‑il ‘names youngest son as successor’ |agency=Associated Press |work=The Guardian |location=London |issn=0261-3077 |date=2 June 2009 |archive-date=16 अक्तूबर 2015 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20151016211014/http://www.theguardian.com/world/2009/jun/02/kim-jong-il-names-son-successor |access-date=2 अप्रैल 2016 }}</ref><ref name="Henckel2009">{{cite news |url=http://www.welt.de/welt_print/article3985896/Kim-Jong-un-und-sein-Unterricht-bei-den-Schweizern.html |title=Kim Jong-un und sein Unterricht bei den Schweizern |work=Die Welt |issn=0173-8437 |location=Berlin |first=Elisalex |last=Henckel |date=24 June 2009 |language=de |archive-date=27 जुलाई 2015 |url-status=live |archive-url=https://web.archive.org/web/20150727053343/http://www.welt.de/welt_print/article3985896/Kim-Jong-un-und-sein-Unterricht-bei-den-Schweizern.html |access-date=2 अप्रैल 2016 }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ<ref>{{Cite web|url=https://www.thewhyculture.com/people/kim-jong-un|title=Biography About Kim Jong-un|last=|first=|date=|website=|archive-url=https://web.archive.org/web/20190513190059/https://www.thewhyculture.com/people/kim-jong-un|archive-date=13 मई 2019|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref>==
[[श्रेणी:उत्तरी कोरिया के राजनेता]]
[[श्रेणी:1983 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:तानाशाह]]
<references />
[[श्रेणी:उत्तरी कोरिया के लोग]]
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डेरियन कैलेंडर
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Harshdda
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== वर्ष लंबाई और मध्यनिवेश ==
कैलेंडर का निर्माण किया है जिसमें से बुनियादी समय अवधि मंगल ग्रह का निवासी सौर दिन (कभी कभी एक प कहा जाता है) और उष्णकटिबंधीय वर्ष से थोड़ा अलग है जो मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष, कर रहे हैं . प स्थलीय सौर दिन की तुलना में 35.244 सेकंड अब 39 मिनट है और मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष लंबाई में 668.5907 SOLS है। बुनियादी मध्यनिवेश सूत्र इसलिए प्रत्येक ग्रह का निवासी दशक तक छह 669 सोल साल और चार 668 सोल साल का आवंटन. (वे गैर छलांग साल की तुलना में आम हैं, भले ही अब भी छलांग साल कहा जाता है) के पूर्व अजीब (2 द्वारा समान रूप से विभाज्य नहीं) में या फिर 10 से समान रूप से विभाज्य हैं, दस साल प्रति 6686 SOLS उत्पादन (668.6 SOLS प्रति या तो कर रहे हैं कि साल के हैं साल) .
डेरियन कैलेंडर के बाद चलना 100 आम साल से साल विभाज्य बनाया है, लेकिन 500 प्रवास छलांग साल से विभाज्य साल . यह 12,000 मंगल ग्रह का निवासी प्रति वर्ष के बारे में केवल एक सोल के एक त्रुटि में परिणाम है।
== '''कैलेंडर लेआउट''' ==
वर्ष 24 महीनों में बांटा गया है। प्रत्येक तिमाही में पहले 5 महीनों में 28 SOLS है। यह अपने अंतिम प के रूप में छलांग प होता है जब यह एक लीप वर्ष का अंतिम महीना है, जब तक अंतिम माह केवल 27 SOLS है।
कैलेंडर एक सात प सप्ताह रखता है, लेकिन सप्ताह प्रत्येक माह की शुरुआत में अपनी पहली प से आरंभ होता है। एक माह 27 SOLS है, तो इस [[सप्ताह]] के अंतिम प लोप हो जाती है। इस सफ़ाई के लिए आंशिक रूप से है। यह भी 28 पृथ्वी दिन 27 +1 / 4 का निवासी SOLS के बराबर है कि याद किया जाना चाहिए, हालांकि, स्थलीय सप्ताह की औसत लंबाई के करीब मंगल ग्रह का निवासी सप्ताह की औसत लंबाई बनाने के रूप में युक्तिसंगत नहीं है और 27 5 / किया जा सकता है 6 मंगल ग्रह का निवासी SOLS .
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Vrishika के अंतिम दिन हर साल में नहीं होती है कि एक अंतनिविष्टि दिन है।
== वर्ष के शुरू ==
मंगल ग्रह का निवासी साल ग्रह के उत्तरी गोलार्द्ध में विषुव अंकन वसंत के पास शुरुआत के रूप में व्यवहार किया जाता है। मंगल ग्रह वर्तमान में पृथ्वी के समान एक अक्षीय झुकाव है, ताकि धरती के साथ तुलना में सूर्य के बारे में 'मंगल की कक्षा का अधिक से अधिक सनक उनके महत्व दृढ़ता से दक्षिणी गोलार्द्ध में परिलक्षित और छिपा हुआ है इसका मतलब है कि हालांकि मंगल ग्रह का निवासी मौसम, प्रत्यक्ष कर रहे हैं उत्तरी गोलार्द्ध में . डेरियन कैलेंडर की सबसे परिष्कृत गणना कई हजार वर्षों में मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष की लंबाई में मामूली वृद्धि के लिए भत्ता बनाने के मुद्दे पर विस्तार . (विवरण के लिंक नीचे उद्धृत देखने के लिए) ये एक अधिक जटिल मध्यनिवेश सूत्र लिख.
== युग ==
गानगाले मूल रूप से पहले पूरी तरह से सफल अमेरिकी नरम लैंडिंग मंगल ग्रह के लिए मिशन और पहले 1971 में सोवियत मंगल ग्रह 3 लैंडिंग की अनदेखी के रूप में अमेरिकन वाइकिंग कार्यक्रम की मान्यता में कैलेंडर के युग के रूप में देर से 1975 के लिए चुना है। 2002 में वह पहली बार मंगल ग्रह की टाइको ब्राहे की टिप्पणियों के जोहान्स केपलर उपयोग ग्रहों की गति के नियमों को स्पष्ट, और यह भी एक दूरबीन के साथ मंगल ग्रह का गैलिलियो गैलीली की पहली टिप्पणियों के लिए की मान्यता में 1609 में जो पीटर कोकह, ने सुझाव दिया दूरबीन युग, अपनाया . दूरबीन युग का चयन नकारात्मक तिथियों में चला जा रहा है पिछले 400 वर्षों में मंगल ग्रह के कई दूरबीन टिप्पणियों की समस्या से बचा जाता है।
== नामकरण ==
डेरियन कैलेंडर का सुझाव विविधताओं अलग नामकरण सप्ताह के दिनों के लिए स्कीमेता और साल के महीने का उपयोग करने वाले वर्ल्ड वाइड वेब पर जाना लाजिमी है। 24 महीनों के नाम प्रावधिक प्रत्यावर्तन में राशि चक्र और उनके संस्कृत समकक्ष के तारामंडल के लैटिन नाम के रूप में गानगाले द्वारा चुने गए हैं। पृथ्वी सहित - सप्ताह के 7 SOLS, इसी तरह, प्रावधिक सूर्य, चंद्रमा और मंगल ग्रह से देखा के रूप में 5 प्रतिभाशाली ग्रहों के नाम पर रखा गया . डेरियन डीफ्रोस्ट कैलेंडर, उदाहरण के लिए, माह आदेश और मौसम को पत्र चुनाव और नाम लंबाई संबंधित पैटर्न के बाहर का निवासी महीने के लिए नया नाम बनाता है। 2001 में मंगल ग्रह समय समूह द्वारा तैयार काल्पनिक कैलेंडर, नामकरण संशोधन के लिए अतिरिक्त सुझाव दिया है।
== मारतिाना कैलेंडर ==
2002 में गानगाले एक दोहरा पैटर्न में महीने और सप्ताह के SOLS समाधान करना और सप्ताह के दिनों को छोड़ करने की आवश्यकता को हटा कि डेरियन कैलेंडर का एक संस्करण तैयार कर लिया . मारतिाना संस्करण में, एक दिया तिमाही में सभी महीनों सप्ताह के उसी प पर शुरू हो, लेकिन प्रत्येक माह शुरू होता है कि सोल के बगल में एक चौथाई से पाली.
निम्न तालिका तिमाही में प्रत्येक माह शुरू होता है जिस पर सप्ताह के प से पता चलता है। पहली तिमाही का निवासी दक्षिणी गोलार्द्ध में मंगल ग्रह का निवासी उत्तरी गोलार्द्ध और शरद ऋतु में वसंत से मेल खाती है।
{| class="wikitable"
!
! First quarter
! Second quarter
! Third quarter
! Last quarter
|-
! Even-numbered years
| Sol Solis
| Sol Saturni
| Sol Veneris
| Sol Jovis
|-
! Odd-numbered years
| Sol Mercurii
| Sol Martis
| Sol Lunae
| Sol Solis
|}
छलांग प मूल डेरियन कैलेंडर में के रूप में करीब गिने साल के अंत में होता है। अजीब गिने साल के आखिरी महीने में 28 SOLS होता है, अगले वर्ष भी महीनों तक सप्ताह के SOLS के रिश्ते को दोहराता है जिस पर एक दो साल के चक्र में जिसके परिणामस्वरूप, सोल सोलिस पर शुरू होता है। हर दसवें साल में जोड़ा जाता है कि प epagomenal है (सप्ताह के हिस्से के रूप में गिना नहीं), इस प्रकार सप्ताह के SOLS की दो साल की रोटेशन बाधित नहीं है। Martiana योजना छह SOLS को सप्ताह में प्रति वर्ष तीन से चार गुना छोटा करने के लिए डेरियन कैलेंडर की जरूरत से बचा जाता है। नुकसान डेरियन कैलेंडर महीने के महीने से repeatable है जबकि योजना, सप्ताह और महीने के SOLS मिलान के लिए एक दो साल के चक्र में यह परिणाम है।
== अन्य डेरियन कैलेंडर ==
कब, यूरोपा, गेनीमेड, और कैलिस्टो : 1998 में गानगाले 1610 में गैलीलियो द्वारा की खोज बृहस्पति के चार गलीली चन्द्रमाओं पर उपयोग के लिए डेरियन कैलेंडर अनुकूलित . 2003 में उन्होंने टाइटन के लिए कैलेंडर का एक संस्करण बनाया .
== मंगल ग्रह का निवासी इतिहास में महत्वपूर्ण तारीखों ==
{| class="wikitable"
! Event
! Gregorian Date
! [[सार्व निर्देशांकित काल|UTC]] [[Spacecraft Event Time|SCET]]
! Darian Date
! [[Timekeeping on Mars|Mars Julian Sol]]
! [[Timekeeping on Mars|Mars Sol Date]]
! [[Timekeeping on Mars|Airy Mean Time]]
|-
| [[Mariner 4]] flyby || 15 जुलाई 1965 || 1:00:57 || 26 Taurus 189 || 126668 || 32539 || 23:25
|-
| [[Mariner 6]] flyby || 31 जुलाई 1969 || 5:19:07 || 15 Cancer 191 || 128106 ||33977 || 15:10
|-
| [[Mariner 7]] flyby || 5 अगस्त 1969 || 5:00:49 || 20 Cancer 191 || 128111 || 33982 || 11:29
|-
| [[Mariner 9]] entered orbit || 13 नवम्बर 1971 || 18:00 || 20 Kanya 192 || 128919 || 34790 || 19:19
|-
| [[Mars 2]] entered orbit || 27 नवम्बर 1971 || || 6 Libra 192* || 128933* || 34804 ||
|-
| [[Mars 3]] contact lost 15 seconds after landing || 2 दिसम्बर 1971 || 13:52 || 11 Libra 192 || 128938 || 34809 || 3:06
|-
| [[Mars 2]] contact lost || 22 Aug 1972 || || 16 Kumbha 193* || 129194* || 35065* ||
|-
| [[Mariner 9]] contact lost || 27 अक्टूबर 1972 || || 26 Mina 193* || 129259* || 35130* ||
|-
| [[Mars 4]] failed to enter orbit || 10 फ़रवरी 1974 || || 10 Sagittarius 194* || 129717* || 35588* ||
|-
| [[Mars 5]] entered orbit || 12 फ़रवरी 1974 || 15:45 || 12 Sagittarius 194 || 129719 || 35590 || 17:18
|-
| [[Mars 5]] contact lost || 7 मार्च 1974 || || 6 Dhanus 194* || 129741* || 35612* ||
|-
| [[Mars 7]] lander missed Mars || 9 मार्च 1974 || || 8 Dhanus 194* || 129743* || 35614* ||
|-
| [[Mars 6]] landing, contact lost after 224 seconds || 12 मार्च 1974 || 9:11:05 || 11 Dhanus 194 || 129746 || 35617 || 16:56
|-
| [[Viking 1]] entered orbit || 19 जून 1976 || || 12 Pisces 195* || 130554: || 36425* ||
|-
| [[Viking 1]] landing || 20 जुलाई 1976 || 11:53 || 14 Mina 195 || 130584 || 36455 || 18:40
|-
| [[Viking 2]] entered orbit || 7 अगस्त 1976 || || 4 Aries 195* || 130602* || 36473* ||
|-
| [[Viking 2]] landing || 3 सितंबर 1976 || 22:58 || 3 Mesha 195 || 130629 || 36500 || 0:34
|-
| [[Viking 2]] Orbiter contact lost || 25 जुलाई 1978 || || 5 Mesha 196* || 131300* || 37171* ||
|-
| [[Viking 2]] Lander contact lost || 11 अप्रैल 1980 || || 2 Mina 197 || 131909 || 37780 ||
|-
| [[Viking 1]] Orbiter contact lost || 17 अगस्त 1980 || || 14 Rishabha 197 || 132033 || 37904 ||
|-
| [[Viking 1]] Lander contact lost || 11 नवम्बर 1982 || || 1 Leo 198 || 132828 || 38699 ||
|-
| [[Phobos 2]] entered orbit || 29 जनवरी 1989 || || 11 Vrishika 201* || 135038* || 40909* ||
|-
| [[Phobos 2]] contact lost || 27 मार्च 1989 || || 10 Dhanus 202* || 135093* || 40964* ||
|-
| [[Mars Pathfinder]] landing || 4 जुलाई 1997 || 16:57 || 26 Taurus 206 || 138034 || 43905 || 4:41
|-
| [[Mars Pathfinder]] rover Sojourner contact lost || 27 सितंबर 1997 || 10:23 || 25 Mithuna 206 || 138116 || 43987 || 15:43
|-
| [[Mars Global Surveyor]] entered orbit || 11 सितंबर 1997 || 1:17:00 || 9 Mithuna 206 || 138100 || 43971 || 17:08
|-
| [[Mars Climate Orbiter]] destroyed entering atmosphere || 23 सितंबर 1999 || 9:05 || 8 Karka 207 || 138823 || 44694 || 4:16
|-
| [[Mars Polar Lander]] impact || 3 दिसम्बर 1999|| 20:15 || 21 Simha 207 || 138892 || 44763 || 17:32
|-
| [[2001 Mars Odyssey]] entered orbit || 24 अक्टूबर 2001 || 2:18:00 || 24 Simha 208 || 139564 || 45435 || 12:21
|-
| [[Nozomi (spacecraft)|Nozomi]] failed to enter orbit || 14 दिसम्बर 2003 || || 6 Tula 209* || 140325* || 46196* ||
|-
| [[Mars Express]] entered orbit || 25 दिसम्बर 2003 || 3:00 || 16 Tula 209 || 140335 || 46206 || 8:27
|-
| [[Beagle 2]] lander impact || 25 दिसम्बर 2003 || 3:54:00 || 16 Tula 209 || 140335 || 46206 || 9:20
|-
| MER-A [[Spirit (rover)|Spirit]] landing || 4 जनवरी 2004 || 4:35 || 26 Tula 209 || 140345 || 46216 || 3:35
|-
| MER-B [[Opportunity (rover)|Opportunity]] landing || 25 जनवरी 2004 || 5:05 || 18 Scorpius 209 || 140365 || 46236 || 14:35
|-
| [[Mars Reconnaissance Orbiter]] entered orbit || 10 मार्च 2006 || 21:24 || 20 Dhanus 211 || 141120 || 46991 || 12:48
|-
| [[Phoenix (spacecraft)|Phoenix]] landing || 25 मई 2008 || 23:54 || 25 Kumbha 212 || 141906 || 47777 || 1:02
|-
| [[Phoenix (spacecraft)|Phoenix]] contact lost || 28 अक्टूबर 2008 || || 9 Rishabha 212 || 142057 || 47928 ||
|-
| MER-A [[Spirit (rover)|Spirit]] contact lost || 22 मार्च 2010 || || 4 Kumbha 213 || 142553 || 48424 ||
|-
| MSL [[Curiosity (rover)|Curiosity]] landing || 6 अगस्त 2012 || 5:17 || 13 Rishhaba 214 || 143398 || 49269 || 5:50
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[Astronomy on Mars]]
* [[Timekeeping on Mars]]
==Notes==
{{reflist}}
==References==
{{refbegin|33em}}
* Gangale, Thomas. (1986-06-01). "Martian Standard Time". ''Journal of the British Interplanetary Society.'' Vol. 39, No. 6, p. 282-288
* Gangale, Thomas. (1997-02-01). "Mare Chronium: A Brief History of Martian Time". American Astronautical Society. AAS 90-287.
* ''The Case for Mars IV: The International Exploration of Mars.'' Ed. Thomas R. Meyer. San Diego, California. Univelt, Incorporated.
* Gangale, Thomas. (1999-07-01). "The Darian Calendar". Mars Society. MAR 98-095. ''Proceedings of the Founding Convention of the Mars Society.'' Volume III. Ed. Robert M. Zubrin, Maggie Zubrin. San Diego, California. Univelt, Incorporated. 13-Aug-1998.
* Gangale, Thomas, and Dudley-Rowley, Marilyn. (2004-07-01). "The Architecture of Time: Design Implications for Extended Space Missions" Society of Automotive Engineers. SAE 2004-01-2533. ''SAE Transactions: Journal of Aerospace.''
* Gangale, Thomas, and Dudley-Rowley, Marilyn. (2005-12-01). "Issues and Options for a Martian Calendar". ''Planetary and Space Science.'' Vol. 53, pp. 1483–1495.
* Gangale, Thomas. (2006-07-01). "The Architecture of Time, Part 2: The Darian System for Mars." Society of Automotive Engineers. SAE 2006-01-2249.
* Sakers, Don. (2004-01-01). The Sf Book of Days, pp. 7, 19, 31, 53, 81, 103, 113, 123, 135, 145-149. Speed-Of-C Productions.
* Smith, Arthur E. (1989-01-01). Mars: The next step, p. 7. Taylor & Francis
{{refend}}
== External links ==
{{portal bar|Mars}}
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'''डेरियन [[कैलेंडर]]''' - मंगल ग्रह पर मानव बसने की स्थिति में समय गणना के लिए प्रस्तावित प्रणाली है। यह 1985 में वायुअंतरिक्ष अभियंता और राजनीतिक वैज्ञानिक थॉमस गानगाले द्वारा बनाई गई और नामित की गई।
== वर्ष लंबाई और मध्यनिवेश ==
कैलेंडर का निर्माण किया है जिसमें से बुनियादी समय अवधि मंगल ग्रह का निवासी सौर दिन (कभी कभी एक प कहा जाता है) और उष्णकटिबंधीय वर्ष से थोड़ा अलग है जो मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष, कर रहे हैं . प स्थलीय सौर दिन की तुलना में 35.244 सेकंड अब 39 मिनट है और मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष लंबाई में 668.5907 SOLS है। बुनियादी मध्यनिवेश सूत्र इसलिए प्रत्येक ग्रह का निवासी दशक तक छह 669 सोल साल और चार 668 सोल साल का आवंटन. (वे गैर छलांग साल की तुलना में आम हैं, भले ही अब भी छलांग साल कहा जाता है) के पूर्व अजीब (2 द्वारा समान रूप से विभाज्य नहीं) में या फिर 10 से समान रूप से विभाज्य हैं, दस साल प्रति 6686 SOLS उत्पादन (668.6 SOLS प्रति या तो कर रहे हैं कि साल के हैं साल) .
डेरियन कैलेंडर के बाद चलना 100 आम साल से साल विभाज्य बनाया है, लेकिन 500 प्रवास छलांग साल से विभाज्य साल . यह 12,000 मंगल ग्रह का निवासी प्रति वर्ष के बारे में केवल एक सोल के एक त्रुटि में परिणाम है।
== '''कैलेंडर लेआउट''' ==
वर्ष 24 महीनों में बांटा गया है। प्रत्येक तिमाही में पहले 5 महीनों में 28 SOLS है। यह अपने अंतिम प के रूप में छलांग प होता है जब यह एक लीप वर्ष का अंतिम महीना है, जब तक अंतिम माह केवल 27 SOLS है।
कैलेंडर एक सात प सप्ताह रखता है, लेकिन सप्ताह प्रत्येक माह की शुरुआत में अपनी पहली प से आरंभ होता है। एक माह 27 SOLS है, तो इस [[सप्ताह]] के अंतिम प लोप हो जाती है। इस सफ़ाई के लिए आंशिक रूप से है। यह भी 28 पृथ्वी दिन 27 +1 / 4 का निवासी SOLS के बराबर है कि याद किया जाना चाहिए, हालांकि, स्थलीय सप्ताह की औसत लंबाई के करीब मंगल ग्रह का निवासी सप्ताह की औसत लंबाई बनाने के रूप में युक्तिसंगत नहीं है और 27 5 / किया जा सकता है 6 मंगल ग्रह का निवासी SOLS .
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Vrishika के अंतिम दिन हर साल में नहीं होती है कि एक अंतनिविष्टि दिन है।
== वर्ष के शुरू ==
मंगल ग्रह का निवासी साल ग्रह के उत्तरी गोलार्द्ध में विषुव अंकन वसंत के पास शुरुआत के रूप में व्यवहार किया जाता है। मंगल ग्रह वर्तमान में पृथ्वी के समान एक अक्षीय झुकाव है, ताकि धरती के साथ तुलना में सूर्य के बारे में 'मंगल की कक्षा का अधिक से अधिक सनक उनके महत्व दृढ़ता से दक्षिणी गोलार्द्ध में परिलक्षित और छिपा हुआ है इसका मतलब है कि हालांकि मंगल ग्रह का निवासी मौसम, प्रत्यक्ष कर रहे हैं उत्तरी गोलार्द्ध में . डेरियन कैलेंडर की सबसे परिष्कृत गणना कई हजार वर्षों में मंगल ग्रह का निवासी वसंत विषुव वर्ष की लंबाई में मामूली वृद्धि के लिए भत्ता बनाने के मुद्दे पर विस्तार . (विवरण के लिंक नीचे उद्धृत देखने के लिए) ये एक अधिक जटिल मध्यनिवेश सूत्र लिख.
== युग ==
गानगाले मूल रूप से पहले पूरी तरह से सफल अमेरिकी नरम लैंडिंग मंगल ग्रह के लिए मिशन और पहले 1971 में सोवियत मंगल ग्रह 3 लैंडिंग की अनदेखी के रूप में अमेरिकन वाइकिंग कार्यक्रम की मान्यता में कैलेंडर के युग के रूप में देर से 1975 के लिए चुना है। 2002 में वह पहली बार मंगल ग्रह की टाइको ब्राहे की टिप्पणियों के जोहान्स केपलर उपयोग ग्रहों की गति के नियमों को स्पष्ट, और यह भी एक दूरबीन के साथ मंगल ग्रह का गैलिलियो गैलीली की पहली टिप्पणियों के लिए की मान्यता में 1609 में जो पीटर कोकह, ने सुझाव दिया दूरबीन युग, अपनाया . दूरबीन युग का चयन नकारात्मक तिथियों में चला जा रहा है पिछले 400 वर्षों में मंगल ग्रह के कई दूरबीन टिप्पणियों की समस्या से बचा जाता है।
== नामकरण ==
डेरियन कैलेंडर का सुझाव विविधताओं अलग नामकरण सप्ताह के दिनों के लिए स्कीमेता और साल के महीने का उपयोग करने वाले वर्ल्ड वाइड वेब पर जाना लाजिमी है। 24 महीनों के नाम प्रावधिक प्रत्यावर्तन में राशि चक्र और उनके संस्कृत समकक्ष के तारामंडल के लैटिन नाम के रूप में गानगाले द्वारा चुने गए हैं। पृथ्वी सहित - सप्ताह के 7 SOLS, इसी तरह, प्रावधिक सूर्य, चंद्रमा और मंगल ग्रह से देखा के रूप में 5 प्रतिभाशाली ग्रहों के नाम पर रखा गया . डेरियन डीफ्रोस्ट कैलेंडर, उदाहरण के लिए, माह आदेश और मौसम को पत्र चुनाव और नाम लंबाई संबंधित पैटर्न के बाहर का निवासी महीने के लिए नया नाम बनाता है। 2001 में मंगल ग्रह समय समूह द्वारा तैयार काल्पनिक कैलेंडर, नामकरण संशोधन के लिए अतिरिक्त सुझाव दिया है।
== मारतिाना कैलेंडर ==
2002 में गानगाले एक दोहरा पैटर्न में महीने और सप्ताह के SOLS समाधान करना और सप्ताह के दिनों को छोड़ करने की आवश्यकता को हटा कि डेरियन कैलेंडर का एक संस्करण तैयार कर लिया . मारतिाना संस्करण में, एक दिया तिमाही में सभी महीनों सप्ताह के उसी प पर शुरू हो, लेकिन प्रत्येक माह शुरू होता है कि सोल के बगल में एक चौथाई से पाली.
निम्न तालिका तिमाही में प्रत्येक माह शुरू होता है जिस पर सप्ताह के प से पता चलता है। पहली तिमाही का निवासी दक्षिणी गोलार्द्ध में मंगल ग्रह का निवासी उत्तरी गोलार्द्ध और शरद ऋतु में वसंत से मेल खाती है।
{| class="wikitable"
!
! First quarter
! Second quarter
! Third quarter
! Last quarter
|-
! Even-numbered years
| Sol Solis
| Sol Saturni
| Sol Veneris
| Sol Jovis
|-
! Odd-numbered years
| Sol Mercurii
| Sol Martis
| Sol Lunae
| Sol Solis
|}
छलांग प मूल डेरियन कैलेंडर में के रूप में करीब गिने साल के अंत में होता है। अजीब गिने साल के आखिरी महीने में 28 SOLS होता है, अगले वर्ष भी महीनों तक सप्ताह के SOLS के रिश्ते को दोहराता है जिस पर एक दो साल के चक्र में जिसके परिणामस्वरूप, सोल सोलिस पर शुरू होता है। हर दसवें साल में जोड़ा जाता है कि प epagomenal है (सप्ताह के हिस्से के रूप में गिना नहीं), इस प्रकार सप्ताह के SOLS की दो साल की रोटेशन बाधित नहीं है। Martiana योजना छह SOLS को सप्ताह में प्रति वर्ष तीन से चार गुना छोटा करने के लिए डेरियन कैलेंडर की जरूरत से बचा जाता है। नुकसान डेरियन कैलेंडर महीने के महीने से repeatable है जबकि योजना, सप्ताह और महीने के SOLS मिलान के लिए एक दो साल के चक्र में यह परिणाम है।
== अन्य डेरियन कैलेंडर ==
कब, यूरोपा, गेनीमेड, और कैलिस्टो : 1998 में गानगाले 1610 में गैलीलियो द्वारा की खोज बृहस्पति के चार गलीली चन्द्रमाओं पर उपयोग के लिए डेरियन कैलेंडर अनुकूलित . 2003 में उन्होंने टाइटन के लिए कैलेंडर का एक संस्करण बनाया .
== मंगल ग्रह का निवासी इतिहास में महत्वपूर्ण तारीखों ==
{| class="wikitable"
! Event
! Gregorian Date
! [[सार्व निर्देशांकित काल|UTC]] [[Spacecraft Event Time|SCET]]
! Darian Date
! [[Timekeeping on Mars|Mars Julian Sol]]
! [[Timekeeping on Mars|Mars Sol Date]]
! [[Timekeeping on Mars|Airy Mean Time]]
|-
| [[Mariner 4]] flyby || 15 जुलाई 1965 || 1:00:57 || 26 Taurus 189 || 126668 || 32539 || 23:25
|-
| [[Mariner 6]] flyby || 31 जुलाई 1969 || 5:19:07 || 15 Cancer 191 || 128106 ||33977 || 15:10
|-
| [[Mariner 7]] flyby || 5 अगस्त 1969 || 5:00:49 || 20 Cancer 191 || 128111 || 33982 || 11:29
|-
| [[Mariner 9]] entered orbit || 13 नवम्बर 1971 || 18:00 || 20 Kanya 192 || 128919 || 34790 || 19:19
|-
| [[Mars 2]] entered orbit || 27 नवम्बर 1971 || || 6 Libra 192* || 128933* || 34804 ||
|-
| [[Mars 3]] contact lost 15 seconds after landing || 2 दिसम्बर 1971 || 13:52 || 11 Libra 192 || 128938 || 34809 || 3:06
|-
| [[Mars 2]] contact lost || 22 Aug 1972 || || 16 Kumbha 193* || 129194* || 35065* ||
|-
| [[Mariner 9]] contact lost || 27 अक्टूबर 1972 || || 26 Mina 193* || 129259* || 35130* ||
|-
| [[Mars 4]] failed to enter orbit || 10 फ़रवरी 1974 || || 10 Sagittarius 194* || 129717* || 35588* ||
|-
| [[Mars 5]] entered orbit || 12 फ़रवरी 1974 || 15:45 || 12 Sagittarius 194 || 129719 || 35590 || 17:18
|-
| [[Mars 5]] contact lost || 7 मार्च 1974 || || 6 Dhanus 194* || 129741* || 35612* ||
|-
| [[Mars 7]] lander missed Mars || 9 मार्च 1974 || || 8 Dhanus 194* || 129743* || 35614* ||
|-
| [[Mars 6]] landing, contact lost after 224 seconds || 12 मार्च 1974 || 9:11:05 || 11 Dhanus 194 || 129746 || 35617 || 16:56
|-
| [[Viking 1]] entered orbit || 19 जून 1976 || || 12 Pisces 195* || 130554: || 36425* ||
|-
| [[Viking 1]] landing || 20 जुलाई 1976 || 11:53 || 14 Mina 195 || 130584 || 36455 || 18:40
|-
| [[Viking 2]] entered orbit || 7 अगस्त 1976 || || 4 Aries 195* || 130602* || 36473* ||
|-
| [[Viking 2]] landing || 3 सितंबर 1976 || 22:58 || 3 Mesha 195 || 130629 || 36500 || 0:34
|-
| [[Viking 2]] Orbiter contact lost || 25 जुलाई 1978 || || 5 Mesha 196* || 131300* || 37171* ||
|-
| [[Viking 2]] Lander contact lost || 11 अप्रैल 1980 || || 2 Mina 197 || 131909 || 37780 ||
|-
| [[Viking 1]] Orbiter contact lost || 17 अगस्त 1980 || || 14 Rishabha 197 || 132033 || 37904 ||
|-
| [[Viking 1]] Lander contact lost || 11 नवम्बर 1982 || || 1 Leo 198 || 132828 || 38699 ||
|-
| [[Phobos 2]] entered orbit || 29 जनवरी 1989 || || 11 Vrishika 201* || 135038* || 40909* ||
|-
| [[Phobos 2]] contact lost || 27 मार्च 1989 || || 10 Dhanus 202* || 135093* || 40964* ||
|-
| [[Mars Pathfinder]] landing || 4 जुलाई 1997 || 16:57 || 26 Taurus 206 || 138034 || 43905 || 4:41
|-
| [[Mars Pathfinder]] rover Sojourner contact lost || 27 सितंबर 1997 || 10:23 || 25 Mithuna 206 || 138116 || 43987 || 15:43
|-
| [[Mars Global Surveyor]] entered orbit || 11 सितंबर 1997 || 1:17:00 || 9 Mithuna 206 || 138100 || 43971 || 17:08
|-
| [[Mars Climate Orbiter]] destroyed entering atmosphere || 23 सितंबर 1999 || 9:05 || 8 Karka 207 || 138823 || 44694 || 4:16
|-
| [[Mars Polar Lander]] impact || 3 दिसम्बर 1999|| 20:15 || 21 Simha 207 || 138892 || 44763 || 17:32
|-
| [[2001 Mars Odyssey]] entered orbit || 24 अक्टूबर 2001 || 2:18:00 || 24 Simha 208 || 139564 || 45435 || 12:21
|-
| [[Nozomi (spacecraft)|Nozomi]] failed to enter orbit || 14 दिसम्बर 2003 || || 6 Tula 209* || 140325* || 46196* ||
|-
| [[Mars Express]] entered orbit || 25 दिसम्बर 2003 || 3:00 || 16 Tula 209 || 140335 || 46206 || 8:27
|-
| [[Beagle 2]] lander impact || 25 दिसम्बर 2003 || 3:54:00 || 16 Tula 209 || 140335 || 46206 || 9:20
|-
| MER-A [[Spirit (rover)|Spirit]] landing || 4 जनवरी 2004 || 4:35 || 26 Tula 209 || 140345 || 46216 || 3:35
|-
| MER-B [[Opportunity (rover)|Opportunity]] landing || 25 जनवरी 2004 || 5:05 || 18 Scorpius 209 || 140365 || 46236 || 14:35
|-
| [[Mars Reconnaissance Orbiter]] entered orbit || 10 मार्च 2006 || 21:24 || 20 Dhanus 211 || 141120 || 46991 || 12:48
|-
| [[Phoenix (spacecraft)|Phoenix]] landing || 25 मई 2008 || 23:54 || 25 Kumbha 212 || 141906 || 47777 || 1:02
|-
| [[Phoenix (spacecraft)|Phoenix]] contact lost || 28 अक्टूबर 2008 || || 9 Rishabha 212 || 142057 || 47928 ||
|-
| MER-A [[Spirit (rover)|Spirit]] contact lost || 22 मार्च 2010 || || 4 Kumbha 213 || 142553 || 48424 ||
|-
| MSL [[Curiosity (rover)|Curiosity]] landing || 6 अगस्त 2012 || 5:17 || 13 Rishhaba 214 || 143398 || 49269 || 5:50
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[Astronomy on Mars]]
* [[Timekeeping on Mars]]
==Notes==
{{reflist}}
==References==
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* Gangale, Thomas. (1986-06-01). "Martian Standard Time". ''Journal of the British Interplanetary Society.'' Vol. 39, No. 6, p. 282-288
* Gangale, Thomas. (1997-02-01). "Mare Chronium: A Brief History of Martian Time". American Astronautical Society. AAS 90-287.
* ''The Case for Mars IV: The International Exploration of Mars.'' Ed. Thomas R. Meyer. San Diego, California. Univelt, Incorporated.
* Gangale, Thomas. (1999-07-01). "The Darian Calendar". Mars Society. MAR 98-095. ''Proceedings of the Founding Convention of the Mars Society.'' Volume III. Ed. Robert M. Zubrin, Maggie Zubrin. San Diego, California. Univelt, Incorporated. 13-Aug-1998.
* Gangale, Thomas, and Dudley-Rowley, Marilyn. (2004-07-01). "The Architecture of Time: Design Implications for Extended Space Missions" Society of Automotive Engineers. SAE 2004-01-2533. ''SAE Transactions: Journal of Aerospace.''
* Gangale, Thomas, and Dudley-Rowley, Marilyn. (2005-12-01). "Issues and Options for a Martian Calendar". ''Planetary and Space Science.'' Vol. 53, pp. 1483–1495.
* Gangale, Thomas. (2006-07-01). "The Architecture of Time, Part 2: The Darian System for Mars." Society of Automotive Engineers. SAE 2006-01-2249.
* Sakers, Don. (2004-01-01). The Sf Book of Days, pp. 7, 19, 31, 53, 81, 103, 113, 123, 135, 145-149. Speed-Of-C Productions.
* Smith, Arthur E. (1989-01-01). Mars: The next step, p. 7. Taylor & Francis
{{refend}}
== External links ==
{{portal bar|Mars}}
* [https://web.archive.org/web/20130501035323/http://pweb.jps.net/~tgangale/mars/mst/darian.htm Thomas Gangale's website, starting at Darian calendar]
{{Calendars}}
{{Mars}}
{{DEFAULTSORT:Darian Calendar}}
[[श्रेणी:1985 works]]
[[श्रेणी:Mars]]
[[श्रेणी:Proposed calendars]]
[[श्रेणी:Specific calendars]]
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कीर्तिवर्धन सिंह
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एस. विनायक मिश्रा
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{{Infobox officeholder
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}}
'''कीर्तिवर्धन सिंह''' [[भारत]] की [[सोलहवीं लोक सभा|सोलहवीं लोकसभा]], [[सत्रहवीं लोक सभा|सत्रहवीं लोकसभा]] व [[भारतीय आम चुनाव, 2024|अट्ठारहवीं लोकसभा]] के लगातार तीसरी बार [[१७वीं लोक सभा के सदस्यों की सूची|सांसद]] हैं। [[भारतीय आम चुनाव, 2024|2024 के चुनावों]] में वे उत्तर प्रदेश की [[गोंडा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|गोंडा]] सीट से [[भारतीय जनता पार्टी]] के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.oneindia.com/gonda-lok-sabha-election-result-475/|title=गोंडा लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 लाइव: गोंडा सांसद, निर्वाचन क्षेत्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची - Oneindia Hindi|website=hindi.oneindia.com|language=hi|access-date=24 January 2021}}</ref>
<ref>{{Cite web|url=https://khabar.ndtv.com/elections/lok-sabha-election-candidates-list-2019/kirti-vardhan-singh-alias-raja-bhaiya-24059-1|title=Kirti Vardhan Singh Alias Raja Bhaiya News: जानिए कीर्ति वर्धन सिंह उर्फ राजा भैया के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के बारे मैं - NDTV India|website=khabar.ndtv.com|access-date=24 January 2021}}</ref> कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान [[नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्रित्व|एनडीए]] (मोदी 3.0) में [https://igod.gov.in/organization/H84zv3QBGZk0jujBKgGW केंद्रीय राज्यमंत्री वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन] व [[विदेश राज्यमंत्री, भारत सरकार|केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री]] के रूप में कार्यरत हैं,
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20141006112328/http://india.gov.in/hi/my-government/indian-parliament/lok-sabha भारत के राष्ट्रीय पोर्टल पर सांसदों के बारे में संक्षिप्त जानकारी]
[[श्रेणी:१७वीं लोक सभा के सदस्य]]
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एस. विनायक मिश्रा
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/* सन्दर्भ */ https://www.mea.gov.in/index.htm
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'''कीर्तिवर्धन सिंह''' [[भारत]] की [[सोलहवीं लोक सभा|सोलहवीं लोकसभा]], [[सत्रहवीं लोक सभा|सत्रहवीं लोकसभा]] व [[भारतीय आम चुनाव, 2024|अट्ठारहवीं लोकसभा]] के लगातार तीसरी बार [[१७वीं लोक सभा के सदस्यों की सूची|सांसद]] हैं। [[भारतीय आम चुनाव, 2024|2024 के चुनावों]] में वे उत्तर प्रदेश की [[गोंडा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र|गोंडा]] सीट से [[भारतीय जनता पार्टी]] के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए।<ref>{{Cite web|url=https://hindi.oneindia.com/gonda-lok-sabha-election-result-475/|title=गोंडा लोकसभा चुनाव परिणाम 2019 लाइव: गोंडा सांसद, निर्वाचन क्षेत्र का विवरण, उम्मीदवारों की सूची - Oneindia Hindi|website=hindi.oneindia.com|language=hi|access-date=24 January 2021}}</ref>
<ref>{{Cite web|url=https://khabar.ndtv.com/elections/lok-sabha-election-candidates-list-2019/kirti-vardhan-singh-alias-raja-bhaiya-24059-1|title=Kirti Vardhan Singh Alias Raja Bhaiya News: जानिए कीर्ति वर्धन सिंह उर्फ राजा भैया के लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के बारे मैं - NDTV India|website=khabar.ndtv.com|access-date=24 January 2021}}</ref> कीर्तिवर्धन सिंह वर्तमान [[नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्रित्व|एनडीए]] (मोदी 3.0) में [https://igod.gov.in/organization/H84zv3QBGZk0jujBKgGW केंद्रीय राज्यमंत्री वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन] व [[विदेश राज्यमंत्री, भारत सरकार|केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री]] के रूप में कार्यरत हैं,
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
He was a Member of 12th Lok Sabha (1998-1999), 14th Lok Sabha (2004-2009),{{आधार}}https://www.mea.gov.in/index.htm
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20141006112328/http://india.gov.in/hi/my-government/indian-parliament/lok-sabha भारत के राष्ट्रीय पोर्टल पर सांसदों के बारे में संक्षिप्त जानकारी]
[[श्रेणी:१७वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के सांसद]]
[[श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के सांसद]]
[[श्रेणी:1966 में जन्मे लोग]]
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कोगोल्लुदो का संता मारिया गिरजाघर
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'''कोगोल्लुदो का सन्ता मारिया गिरजाघर''' (स्पेनी: ''Iglesia de Santa María'') [[स्पेन]] के कोगोल्लुदो (Cogolludo) नगर में स्थित एक गिरजाघर है। इसे वर्ष 1996 में ''बिएन दे इंतेरेस कल्चरल'' (Bien de Interés Cultural) के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, जो स्पेन में सांस्कृतिक धरोहर की एक श्रेणी है।<ref name="bic">{{Bien de Interés Cultural}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20141027220614/http://books.google.co.in/books?id=g_7pLuUELZUC&pg=PA51&dq=churches+in+spain&hl=en&sa=X&ei=E4tOVNOxCIPu8gXh7IC4Bw&redir_esc=y#v=onepage&q=churches%20in%20spain&f=false Spain By Zoran Pavlovic, Reuel R. Hanks, Charles F. Gritzner]
* [https://web.archive.org/web/20141027212732/http://books.google.co.in/books?id=yZ05AAAAcAAJ&pg=PA525&dq=churches+in+spain&hl=en&sa=X&ei=E4tOVNOxCIPu8gXh7IC4Bw&redir_esc=y#v=onepage&q=churches%20in%20spain&f=false Some Account of Gothic Architecture in SpainBy George Edmund Street]
* [https://web.archive.org/web/20141027202627/http://books.google.co.in/books?id=nK0YSgAACAAJ&dq=churches+in+spain&hl=en&sa=X&ei=8YtOVNPTH8HamAWL9ICIBA&redir_esc=y Romanesque Churches of Spain: A Traveller's Guide Including the Earlier Churches of AD 600-1000 Giles de la Mare, 2010 - Architecture, Romanesque - 390 pages]
* [https://web.archive.org/web/20141028024933/http://books.google.co.in/books?id=7GL8A9vsp2wC&pg=PA123&dq=churches+in+spain&hl=en&sa=X&ei=8YtOVNPTH8HamAWL9ICIBA&redir_esc=y#v=onepage&q=churches%20in%20spain&f=false A Hand-Book for Travellers in Spain, and Readers at Home: Describing the ...By Richard Ford]
* [https://web.archive.org/web/20141028002511/http://books.google.co.in/books?id=GeMY4BGzNiMC&pg=PA95&dq=churches+in+spain&hl=en&sa=X&ei=8YtOVNPTH8HamAWL9ICIBA&redir_esc=y#v=onepage&q=churches%20in%20spain&f=false The Rough Guide to Spain]
[[श्रेणी:स्पेन के गिरजाघर]]
[[श्रेणी:स्पेन के स्मारक]]
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सदस्य वार्ता:Gopalsabu
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2026-04-17T11:36:08Z
Gopalsabu
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/* एक ही विषय पर दो लेख */ उत्तर
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{{साँचा:सहायता|realName=|name=Gopalsabu}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 05:55, 7 जनवरी 2015 (UTC)
== एक ही विषय पर दो लेख ==
नमस्कार Gopal sabu जी !
आप जिस साबुदाना नामक लेख में सुधार और विस्तार कर रहे है उसे बनाने से पहले आपने शायद देखा नहीं इसी विषय पर एक लेख पहले से मौजूद है। आपको उसमें सुधार करना चाहिए। आप अपने बनाए लेख की सामग्री पुराने लेख में डाल दें फिर दोनों का इतिहास भी एकसाथ विलय कर दिया जाएगा। और अगर हो सके तो कुछ सन्दर्भ अवश्य दें। धन्यवाद और शुभकामनायें!--[[सदस्य:सत्यम् मिश्र|सत्यम् मिश्र]] ([[सदस्य वार्ता:सत्यम् मिश्र|वार्ता]]) 07:06, 9 जनवरी 2015 (UTC)
:नमस्कार श्री सत्यम मिश्र जी ॥ आपके सुझाव से मैं पूर्णत: सहमत हूँ, किंतु मुझे साबुदाना विषय पर पूर्ववर्ती कोइ लेख नहीं मिला, अत: मैनें अपने लेख में सुधार और विस्तार किया था । यदि कोइ पूर्ववर्ती लेख उस विषय में पहले से मौजूद है तो मेरे लेख की सामग्री उसमें डाल के विलय किया जा सकता है । कृपया मार्गदर्शन करें । सादर धन्यवाद ! --गोपाल साबु गोपालसाबु 11:36, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
== 2021 Wikimedia Foundation Board elections: Eligibility requirements for voters ==
Greetings,
The eligibility requirements for voters to participate in the 2021 Board of Trustees elections have been published. You can check the requirements on [[:m:Wikimedia_Foundation_elections/2021#Eligibility_requirements_for_voters|this page]].
You can also verify your eligibility using the [https://meta.toolforge.org/accounteligibility/56 AccountEligiblity tool].
[[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 16:30, 30 जून 2021 (UTC)
<small>''Note: You are receiving this message as part of outreach efforts to create awareness among the voters.''</small>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:KCVelaga_(WMF)/Targets/Temp&oldid=21669859 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:KCVelaga (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
h9rb9h1acfa3qn0rq76eg7nzdimi0i8
कोराँव
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Mnjkhan
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[[विशेष:योगदान/~2026-23510-67|~2026-23510-67]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-23510-67|वार्ता]]) द्वारा 2 संपादन 2405:204:1200:E720:68F7:E5A8:2C22:8ABCके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किये गये
6541252
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{{Infobox settlement
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}}
'''कोराँव''' (Koraon) [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य के [[प्रयागराज ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह इसी नाम की [[तहसील]] में स्थित है, जो ज़िले की आठ तहसीलों में से एक है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC Uttar Pradesh in Statistics]," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|date=23 अप्रैल 2017}}," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975</ref>
== विवरण ==
कोराँव नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्र मिलकर बना हुआ है। प्रयागराज से मिर्ज़ापुर मार्ग (लगभग दूरी 47 किलोमीटर) स्थित मेजारोड चौराहे से तथा मेजारोड रेलवे स्टेशन से 32 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
== ब्लॉक ==
कोरांव तहसील गोला इसी नाम का ब्लॉक है।
== जनसांख्यिकी ==
जनगणना 2001 के अनुसार पूरी कोराँव तहसील की जनसंख्या (नगरीय) 12142 तथा ग्रामीण 286982 थी। जिसमे से 53% पुरुष और 47% महिलाएँ सम्मिलित थी।
== यातायात ==
कोरांव केवल सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है। यहाँ से [[राष्ट्रीय राजमार्ग 135सी (भारत)|राष्ट्रीय राजमार्ग 135सी]] निकलता है। निजी बसें प्रत्येक 20 मिनट में [[इलाहाबाद|प्रयागराज]] के लिये उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग [[NH76E]] से जुडा़ है।मिर्ज़ापुर से दूरी 68 किमी या 42 मील जिसको तय करने में लगभग 2 घण्टे का समय लगता है। प्रयागराज से 64 किमी या 33 मील जिसको तय करने में 01:15 घण्टे का समय लगता है। सड़क मार्ग से यह [[मिर्ज़ापुर]] और पड़ोसी तहसील [[मेजा]] को जोडता है।
== दर्शनीय स्थल ==
कोरावं बौद्ध काल और मौर्य काल मे एक प्रसिद्ध और एक विकाशित नगर रहा होगा क्योंकि कोरावं के विभिन्न जगहों से मिल रहे मौर्य काल के असोक स्तम्भ के अवशेष और बुद्ध की मूर्तिया इस बात की प्रामाणिकता सिद्ध करती है और कोरावं के एरिया डिजाइन और एरिया के तालाबों के बनने और उनके एरिया डिजाइन भी इस बात की प्रमाण है | और अब फिर से कोरावं मे लोगों के द्वारा बड़े पैमाने पर बौद्ध महोत्सव कराए जाते है जिससे कोरावं अपनी खोई हुई इतिहास फिर से प्राप्त करने के ओर अग्रसर है | कोरावं मुख्य बाजार, माहुली पियरी, मझीगवा हटवार, रतयोरा, लेडियारी, आदि जगहों पर बौद्ध महोत्सव बड़े ही धूमधाम से होता है |
* इस तहसील के अंतर्गत लोगों को देखने के लिए भोगन के प्रसिद्ध हनुमान जी, बघोल के हनुमान जी, कालिकन की माँ काली एवम् पथरताल के हनुमान जी हैं।
* इस तहसील के अंतर्गत कुछ पहाड़ी क्षेत्र भी जहां जाकर आनन्द प्राप्त किया जा सकता है, जैसे- बड़ोखर ,देवघाट, महुली एवम् तहसील के पश्चिम में कोहड़ार की पहाड़ी इलाका।
* प्रत्येक वर्ष यहां के कई जगहों पर दशहरे पर क्षेत्रीय मेले का आयोजन होता है जिसमे महुआव में पूस का मेल, कोरांव में दशहरे का मेला एवम् कई गांवों में रामलीला का आयोजन जैसे नथऊपुर( नवयुवक रामलीला कमेटी नथऊपुर सिकरो# 'संचालक' - रामनरेशओझा)" , डिहिया में दुर्गा मंदिर के पास, लेंडियारी, बडोखर,भगेसर् में होता है
वहीं डिहिया गांव में दुर्गा मंदिर के पास भव्य रामलीला, होली मिलन समारोह व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शानदार आयोजन होता है।
* कोरांव तहसील के महुली बाजार में. काली माता का मंदिर है। यहां लगभग सौ साल से रामलीला का आयोजन होता है। ( माता काली रामलीला कमेटी महुली बाजार #संचालक श्री उमा शंकर पांडेय )और ठीक पहाड़ियों में बाबा रंग नाथ धाम है। यह बहुत ही रमणीक और बहुत ही सुंदर स्थान है। आप सब यहां आकर इस पर्यटन स्थल का लुत्फ उठा सकते हैं और भोले बाबा का दर्शन कर सकते हैं। और निवेदन है कि कोरांव के इतिहास में इसको भी जोड़ा जाए. धन्यवाद
*
महुली गांव तीन तरफ से पहाड़ से घिरा है पूर्व में रमगड़वा व इटहा पहाड़ है इन दोनो के बीच में मुरलिया पहाड़ चोटी है और दक्षिण की ओर 3 से 5 किलो मीटर पर पहाड़ है और पश्चिम की तरफ 7 से 8 किलो मीटर पर है उत्तर की तरफ ही पहाड़ नही है लेकिन उत्तर की बेलन नदी बहती जिसमे पूरे साल भर पानी रहा है । महुली में सेवटी नदी बहती जो तीन तरह से दक्षिण से पश्चिम से उतर की ओर बहती है और पूर्व की ओर पहाड़ के नजदीक बेलन नदी में मिल जाती है Sanjay computer ki report
== इन्हें भी देखें ==
* [[प्रयागराज ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:प्रयागराज ज़िला]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर]]
[[श्रेणी:प्रयागराज ज़िले के नगर]]
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फोटोग्राफर
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[[File:Douglas Osheroff photographing along CA-1 May 2011 003.jpg|thumb|एक छायाचित्रकार]]
'''छायाचित्रकार''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Photographer'') वह व्यक्ति होता है जो [[फ़ोटोग्राफ़ी]] के माध्यम से चित्र (तस्वीरें) के द्वारा क्लिक अथवा खींचता है। है।<ref>{{cite web |url=https://www.lexico.com/definition/photographer |title=Definition of photographer |website=Lexico |archive-url=https://web.archive.org/web/20200322083637/https://www.lexico.com/definition/photographer |archive-date=22 मार्च 2020}}</ref>
छायाचित्रकार विभिन्न प्रकार की [[फ़ोटोग्राफ़ी]] में विशेषज्ञता रख सकते हैं, जैसे कि प्रकृति, परिदृश्य, शहरी जीवन, [[फोटो जर्नलिज़्म|फोटो पत्रकारिता]] और पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी।<ref>{{cite web |url=https://www.britannica.com/art/photography |title=Photography |website=Encyclopaedia Britannica}}</ref>
छायाचित्रण का उपयोग कला, [[पत्रकारिता]], [[विज्ञान]], [[विज्ञापन]] और [[दस्तावेज़ीकरण|दस्तावेजीकरण]] सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। आधुनिक समय में [[डिजिटल प्रौद्योगिकी]] के विकास के साथ फ़ोटोग्राफ़ी के तरीकों और उपयोग में व्यापक परिवर्तन आया है।<ref>{{Cite web|url=https://nytlicensing.com/latest/marketing/what-is-photojournalism/|title=What Is Photojournalism and Why Is It Important?|website=NYTLicensing|access-date=2026-04-16}}</ref>
== प्रकार ==
* प्रकृति फ़ोटोग्राफ़ी
* परिदृश्य फ़ोटोग्राफ़ी
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
* पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी
* स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:व्यवसाय]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
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[[File:Douglas Osheroff photographing along CA-1 May 2011 003.jpg|thumb|एक छायाचित्रकार]]
'''छायाचित्रकार''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Photographer'') वह व्यक्ति होता है जो [[फ़ोटोग्राफ़ी]] के माध्यम से चित्र (तस्वीरें) के द्वारा क्लिक अथवा खींचता है। है।<ref>{{cite web |url=https://www.lexico.com/definition/photographer |title=Definition of photographer |website=Lexico |archive-url=https://web.archive.org/web/20200322083637/https://www.lexico.com/definition/photographer |archive-date=22 मार्च 2020}}</ref>
छायाचित्रकार विभिन्न प्रकार की [[फ़ोटोग्राफ़ी]] में विशेषज्ञता रख सकते हैं, जैसे कि प्रकृति, परिदृश्य, शहरी जीवन, [[फोटो जर्नलिज़्म|फोटो पत्रकारिता]] और पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी।<ref>{{cite web |url=https://www.britannica.com/art/photography |title=Photography |website=Encyclopaedia Britannica}}</ref>
छायाचित्रण का उपयोग कला, [[पत्रकारिता]], [[विज्ञान]], [[विज्ञापन]] और [[दस्तावेज़ीकरण|दस्तावेजीकरण]] सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। आधुनिक समय में [[डिजिटल प्रौद्योगिकी]] के विकास के साथ फ़ोटोग्राफ़ी के तरीकों और उपयोग में व्यापक परिवर्तन आया है।<ref>{{Cite web|url=https://nytlicensing.com/latest/marketing/what-is-photojournalism/|title=What Is Photojournalism and Why Is It Important?|website=NYTLicensing|access-date=2026-04-16}}</ref>
== प्रकार ==
* प्रकृति फ़ोटोग्राफ़ी
* परिदृश्य फ़ोटोग्राफ़ी
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
* [[पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:व्यवसाय]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
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[[File:Douglas Osheroff photographing along CA-1 May 2011 003.jpg|thumb|एक छायाचित्रकार]]
'''छायाचित्रकार''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Photographer'') वह व्यक्ति होता है जो [[फ़ोटोग्राफ़ी]] के माध्यम से चित्र (तस्वीरें) के द्वारा क्लिक अथवा खींचता है। है।<ref>{{cite web |url=https://www.lexico.com/definition/photographer |title=Definition of photographer |website=Lexico |archive-url=https://web.archive.org/web/20200322083637/https://www.lexico.com/definition/photographer |archive-date=22 मार्च 2020}}</ref>
छायाचित्रकार विभिन्न प्रकार की [[फ़ोटोग्राफ़ी]] में विशेषज्ञता रख सकते हैं, जैसे कि प्रकृति, परिदृश्य, शहरी जीवन, [[फोटो जर्नलिज़्म|फोटो पत्रकारिता]] और पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी।<ref>{{cite web |url=https://www.britannica.com/art/photography |title=Photography |website=Encyclopaedia Britannica}}</ref>
छायाचित्रण का उपयोग कला, [[पत्रकारिता]], [[विज्ञान]], [[विज्ञापन]] और [[दस्तावेज़ीकरण|दस्तावेजीकरण]] सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है। आधुनिक समय में [[डिजिटल प्रौद्योगिकी]] के विकास के साथ फ़ोटोग्राफ़ी के तरीकों और उपयोग में व्यापक परिवर्तन आया है।<ref>{{Cite web|url=https://nytlicensing.com/latest/marketing/what-is-photojournalism/|title=What Is Photojournalism and Why Is It Important?|website=NYTLicensing|access-date=2026-04-16}}</ref>
== प्रकार ==
* [[प्राकृतिक छायाचित्रण]]
* परिदृश्य फ़ोटोग्राफ़ी
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
* [[पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:व्यवसाय]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:फोटोग्राफी]]
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अबू हनीफ़ा
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text/x-wiki
{{Infobox scholar
|notability = [[इसलामी विद्वान]]
|era = इस्लामी स्वर्ण युग
|image = Abu Hanifa Name.png
|caption = नौमान इब्न साबित इब्न ज़ूता इब्न मर्ज़ुबान ([[इस्लामी अक्षरांकन|इसलामी अक्षरांकन]])
|name = अबू हनीफ़ा
|title = इमाम ए आज़म
|birth_date = सितम्बर 5, 702 (80 [[हिजरी]])<br />[[पर्वान]], [[File:Umayyad Flag.svg|border|23px]] [[उमय्यद ख़िलाफ़त]]
|death_date = {{death date and age|772|6|14|702|9|5}} (150 हिजरी)<br />[[बग़दाद]], [[File:Black flag.svg|border|23px]] [[ख़िलाफ़त ए अब्बासिया|अब्बासी ख़िलाफ़त]]
|ethnicity = [[पर्शियन]]<ref>Mohsen Zakeri (1995), ''Sasanid soldiers in early Muslim society: the origins of 'Ayyārān and Futuwwa'', p.293 [http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180319001813/http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509 |date=19 मार्च 2018 }}</ref><ref name=Cambridge/><ref name=Cyril/>
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}}
'''नोमान इब्न साइत इब्न ज़ौता इब्न मरज़ुबान''' (फारसी : ابوحنیفه, अरबी : نعمان بن ثابت بن زوطا بن مرزبان), जो अबू हनीफ़ा (हनीफ़ा के पिता) के नाम से मशहूर हैं और इन्हें इसी नाम से भी जाना जाता है (जन्म : 699 ई. मृत्यु 767 ई / 80-150 हिजरी साल),<ref>{{Cite web |url=http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |title=''ABŪ ḤANĪFA'', Encyclopædia Iranica |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304002815/http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref> अबू हनीफ़ा सुन्नी "हनफ़ी मसलक" (हनफ़ी स्कूल) इसलामी न्यायशास्त्र के संस्थापक थे। यह एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे। ज़ैदी शिया मुसलमानों में इन्हें प्रसिद्ध विद्वान के रूप में माना जाता है। <ref><cite class="citation book" contenteditable="false">Abu Bakr al-Jassas al-Razi. </cite></ref> <nowiki>'''</nowiki> उन्हें अक्सर "महान इमाम" (ألإمام الأعظم, अल इमाम अल आज़म) कहा और माना जाता है। <ref name="Cambridge">S. H. Nasr (1975), "The religious sciences", in R.N. Frye, ''The Cambridge History of Iran'', Volume 4, Cambridge University Press. pg 474: "Abū Ḥanīfah, who is often called the "grand imam"(al-Imam al-'Azam) was Persian</ref>
== जीवनी ==
=== बचपन ===
अबू हनीफा [[इराक़|इराक]] के शहर [[कूफ़ा]] में पैदा हुए थे। वे खलीफ़ा उमय्यद खलीफा अब्द अल मलिक इब्न मरवान के समकालीन थे। <ref>Josef W. Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', 1 edition, (Routledge: 2005), p.5</ref><ref>Hisham M. Ramadan, ''Understanding Islamic Law: From Classical to Contemporary'', (AltaMira Press: 2006), p.26</ref> उनके पिता, थबित बिन ज़ूता एक व्यापारी थे, जो मूल रूप से काबुल, अफगानिस्तान से थे।
=== यौवन और मृत्यु ===
[[चित्र:Abu_Hanifa_Mosque,_2008.jpg|thumb|अबू हनीफ़ा मस्जिद, [[बग़दाद]], [[इराक़]]]]
खलीफ़ा [[अल-मनसूर]] 763 ई. में मुस्लिम दुनिया के खलीफ़ा थे। इन की राजधानी इराक़ का शहर बागदाद था। मुख्य न्यायाधीश स्वर्गवासी होने के कारण वह पद खाली हुआ, उसे भरती करने के लिये, खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को इस पद के लिये पेशकश की, लैकिन अबू हनीफ़ा स्वतंत्र रहना पसंद करते थे, इस लिये इस प्रस्ताव और पेशकश को ठुकरा दिया। इस पद को अरबी भाशा में "क़ादि-उल-क़ुज़्ज़ात" कहते हैं। इस पद पर उनके छात्र अबू यूसुफ नियुक्त किया गया।
खलीफ़ा अल-मनसूर और दीगर लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि, अबू हनीफ़ा इस पद को इनकार किया। चूं कि, अबू हनीफा इस क़ाबिल थे, और उनहें क़ाबिल समझा गया, इसी लिये उन्हें पेशकश की गयी, जिस को अबू हनीफ़ा ने खुद को क़ाबिल न बताते हुवे ठुकरा दिया। इस बात पर खलीफ़ा ने कहा कि तुम झूठ बोल रहे हो। तब अबू हनीफ़ा ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे झूठे को ऐसे ऊंचे पद की पेश कश नहीं करना चाहिये। इस बात पर नाराज़ खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को गिरफ़्तार कर जैल में बंद करवा दिया। कुछ महीनों बाद अबू हनीफ़ा जेल ही में मर गये।
शाह इस्माइल की सफ़वी साम्राज्य 1508 ई. में अबू हनीफा और अब्दुल कादिर गिलानी की क़बरों को सरकार द्वारा नष्ट कर दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |title=Encyclopedia of the Ottoman Empire |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160119151508/https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |archive-date=19 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref> 1533 में, तुर्क साम्राज्य ने इराक और अबू हनीफा और अन्य सुन्नी स्थलों के मक़बरों का पुनर्निर्माण किया।<ref>[https://books.google.com/books?id=Xd422lS6ezgC&pg=PA95&lpg=PA95&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=hZR3iDt0fv&sig=UdZDakp2nwFdDD7GOyzEsyaD1g8&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CBkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false History of the Ottoman Empire and modern Turkey]</ref>
== पीढ़ियों की स्तिथि ==
यह भी माना जाता है कि अबू हनीफ़ा ताबईन जो [[सहाबा]] के बाद के दौर के थे, में से थे। सहाबा, [[मुहम्मद]] साहब के एसे अनुयाइयो को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल मे ।[[मुहम्मद]] साहब (स.अ.व) के साथ रहे या कम से कम एक बार उनसे मिले।<ref name="masud">{{Cite web |url=http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |title=Imām-ul-A’zam Abū Ḥanīfah, The Theologian |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170804014954/http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |archive-date=4 अगस्त 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304053426/http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm |date=4 मार्च 2016 }} last accessed 8 June 2011</ref> कुछ और का कहना है कि अबू हनीफ़ा ने करीब छः सहाबियों को देखा है। कम <ref name="masud"/>
== अल्लाह का डर और नमाज़ ==
अबू हनीफ़ा ने चालीस साल तक इशा के वुज़ू से फज़र की नमाज़ पढ़ी ओर वह रात भर क़ुरआन पढ़ा करते थे।<ref>http://islamicworld.in/abu-nahifa-rehmatullah-aleh-13452/{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== सहिष्णुता का प्रचार ==
अबू हनीफ़ा के विचारों के अनुसार मुस्लिम शासकों को गैर-मुस्लिम प्रजा के साथ भी बराबरी का व्यव्हार करना चाहिए। किसी भी निर्दोष मुसलमान की हत्या की तरह निर्दोष गैर-मुस्लिम के हत्यारे को भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए। वे ईश-निन्दा (blasphemy) के आरोपियों को, विशेष रूप से गैर-मुस्लिम व्यक्तियों के मृत्यु के विरुद्ध थे तथा अन्य अन्य इमामों की तुलना में धर्मत्याग करने वाले मुसलमानों को मृत्यु दंड देने के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं। सामान्य रूप से अन्य धर्म पंथ की तुलना में हनफ़ी अनुयायी अति शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं जिसके लिए अबू हनीफ़ा की शिक्षाओं का बड़ा दख़ल है।
== स्वागत ==
[[चित्र:Madhhab_Map3.png|right|thumb|300x300px|दुनिया का मेप। हनफ़ी (हरा रंग) सुन्नी पंथ को दर्शाया गया। मुख्य रूप से तुर्की, उत्तर मध्यप्राच्य, ईजिप्ट, भारत उपखंड।]]
== रचनायें और संकलन ==
* ''किताब उल-आसार'' - उल्लेखन इमाम मुहम्मद अल-शैबानिएए - संकलन जुम्ला 70,000 [[हदीस]]
* ''किताबुल आसार'' - उल्लेखन इमाम अबू यूसुफ़
* ''आलिम व मुताल्लिम'' - (गुरू और शिष्य) या (विद्वान और विद्यार्थी)
* ''मुसनद इमाम उल आज़म'' (हदीसों का संकलन)
* ''किताबुल राद अलल क़ादिरिय्या''
== उद्धरण ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20181002205307/http://lostislamichistory.com/the-life-of-imam-abu-hanifa/ अबू हनीफा की जीवनी ]
* [https://web.archive.org/web/20111118012441/http://www.renaissance.com.pk/feletfor96.html इमाम अबू हनीफ़ा] - जमील अहमद
* [https://web.archive.org/web/20120426000635/http://marifah.net/articles/wasiyya-abuhanifa.pdf अबू हनीफा की वसीयत] अंग्रेज़ी में अनुवाद शैख़ इमाम ताहिर महमूद अल-किणी
* [https://web.archive.org/web/20160303205929/http://www.rehmani.net/library/Imam-e-Azam/index.php अबू हनीफ़ा पर किताब]
* [https://web.archive.org/web/20160303191047/http://muslim-canada.org/hanifah.htm अबू हनीफ़ा की जीवनी]
* [https://web.archive.org/web/20101220213736/http://muslimheritage.com/day_life/default.cfm?oldpage=3&ArticleID=463 मुस्लिम विरासत पर अबू हनीफ़ा]
* [https://web.archive.org/web/20160203143707/http://www.livingislam.org/ahanifa_e.html इमाम अबू हनीफा] - शैख़ G F हददाद
* [https://web.archive.org/web/20150627075848/http://www.asiaplus.tj/en/news/16/46434.html अबू हनीफा और मुस्लिम देश - ताजीकिस्तान के अध्यक्ष के लेख]
* [https://web.archive.org/web/20160124165124/http://www.inter-islam.org/Biographies/4imam.htm अबू हनीफा के चंद गुरु और शिष्य]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लामी न्याय शास्त्र]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:इस्लामी नेता]]
[[श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]]
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text/x-wiki
{{Infobox scholar
|notability = [[इसलामी विद्वान]]
|era = इस्लामी स्वर्ण युग
|image = Abu Hanifa Name.png
|caption = नौमान इब्न साबित इब्न ज़ूता इब्न मर्ज़ुबान ([[इस्लामी अक्षरांकन|इसलामी अक्षरांकन]])
|name = अबू हनीफ़ा
|title = इमाम ए आज़म
|birth_date = सितम्बर 5, 702 (80 [[हिजरी]])<br />[[पर्वान]], [[File:Umayyad Flag.svg|border|23px]] [[उमय्यद ख़िलाफ़त]]
|death_date = {{death date and age|772|6|14|702|9|5}} (150 हिजरी)<br />[[बग़दाद]], [[File:Black flag.svg|border|23px]] [[ख़िलाफ़त ए अब्बासिया|अब्बासी ख़िलाफ़त]]
|ethnicity = [[पर्शियन]]<ref>Mohsen Zakeri (1995), ''Sasanid soldiers in early Muslim society: the origins of 'Ayyārān and Futuwwa'', p.293 [http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180319001813/http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509 |date=19 मार्च 2018 }}</ref><ref name=Cambridge/><ref name=Cyril/>
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|main_interests = [[फ़िक़्ह|न्याय शास्त्र]]
|notable_ideas = इस्तिहसान
|works = ''किताबुल-असर''<br />''फ़िक़ः अल-अकबर''{{Dubious|date=February 2013}}
|influences = [[हम्माद इब्न अबी सुलैमान]], [[अता इब्न अबी राबह]], [[ज़ैद इब्न अली]], [[जाफ़र अल-सादिक़]], इत्यादी ताबईन
|influenced = [[मालिक इब्न अनस]], [[मुहम्मद इब्द इद्रीस अल शाफ़ी]], [[मुहम्मद अल-शैबानी]], [[अबू यूसुफ़]], [[अल तहावी]], [[अहमद सरहिन्दी]], शाह वलीउल्लाह, जाफ़र इब्न औन, उबैदुल्लाह इब्न मूसा
}}
'''नोमान इब्न साइत इब्न ज़ौता इब्न मरज़ुबान''' (फारसी : ابوحنیفه, अरबी : نعمان بن ثابت بن زوطا بن مرزبان), जो अबू हनीफ़ा (हनीफ़ा के पिता) के नाम से मशहूर हैं और इन्हें इसी नाम से भी जाना जाता है (जन्म : 699 ई. मृत्यु 767 ई / 80-150 हिजरी साल),<ref>{{Cite web |url=http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |title=''ABŪ ḤANĪFA'', Encyclopædia Iranica |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304002815/http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref> अबू हनीफ़ा सुन्नी "हनफ़ी मसलक" (हनफ़ी स्कूल) इसलामी न्यायशास्त्र के संस्थापक थे। यह एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे। ज़ैदी शिया मुसलमानों में इन्हें प्रसिद्ध विद्वान के रूप में माना जाता है। <ref><cite class="citation book" contenteditable="false">Abu Bakr al-Jassas al-Razi. </cite></ref> <nowiki>'''</nowiki> उन्हें अक्सर "महान इमाम" (ألإمام الأعظم, अल इमाम अल आज़म) कहा और माना जाता है। <ref name="Cambridge">S. H. Nasr (1975), "The religious sciences", in R.N. Frye, ''The Cambridge History of Iran'', Volume 4, Cambridge University Press. pg 474: "Abū Ḥanīfah, who is often called the "grand imam"(al-Imam al-'Azam) was Persian</ref>
== जीवनी ==
=== बचपन ===
अबू हनीफा [[इराक़|इराक]] के शहर [[कूफ़ा]] में पैदा हुए थे। वे खलीफ़ा उमय्यद खलीफा अब्द अल मलिक इब्न मरवान के समकालीन थे। <ref>Josef W. Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', 1 edition, (Routledge: 2005), p.5</ref><ref>Hisham M. Ramadan, ''Understanding Islamic Law: From Classical to Contemporary'', (AltaMira Press: 2006), p.26</ref> उनके पिता, थबित बिन ज़ूता एक व्यापारी थे, जो मूल रूप से काबुल, अफगानिस्तान से थे।
=== यौवन और मृत्यु ===
[[चित्र:Abu_Hanifa_Mosque,_2008.jpg|thumb|अबू हनीफ़ा मस्जिद, [[बग़दाद]], [[इराक़]]]]
खलीफ़ा [[अल-मनसूर]] 763 ई. में मुस्लिम दुनिया के खलीफ़ा थे। इन की राजधानी इराक़ का शहर बागदाद था। मुख्य न्यायाधीश स्वर्गवासी होने के कारण वह पद खाली हुआ, उसे भरती करने के लिये, खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को इस पद के लिये पेशकश की, लैकिन अबू हनीफ़ा स्वतंत्र रहना पसंद करते थे, इस लिये इस प्रस्ताव और पेशकश को ठुकरा दिया। इस पद को अरबी भाशा में "क़ादि-उल-क़ुज़्ज़ात" कहते हैं। इस पद पर उनके छात्र अबू यूसुफ नियुक्त किया गया।
खलीफ़ा अल-मनसूर और दीगर लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि, अबू हनीफ़ा इस पद को इनकार किया। चूं कि, अबू हनीफा इस क़ाबिल थे, और उनहें क़ाबिल समझा गया, इसी लिये उन्हें पेशकश की गयी, जिस को अबू हनीफ़ा ने खुद को क़ाबिल न बताते हुवे ठुकरा दिया। इस बात पर खलीफ़ा ने कहा कि तुम झूठ बोल रहे हो। तब अबू हनीफ़ा ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे झूठे को ऐसे ऊंचे पद की पेश कश नहीं करना चाहिये। इस बात पर नाराज़ खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को गिरफ़्तार कर जैल में बंद करवा दिया। कुछ महीनों बाद अबू हनीफ़ा जेल ही में मर गये।
शाह इस्माइल की सफ़वी साम्राज्य 1508 ई. में अबू हनीफा और अब्दुल कादिर गिलानी की क़बरों को सरकार द्वारा नष्ट कर दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |title=Encyclopedia of the Ottoman Empire |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160119151508/https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |archive-date=19 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref> 1533 में, तुर्क साम्राज्य ने इराक और अबू हनीफा और अन्य सुन्नी स्थलों के मक़बरों का पुनर्निर्माण किया।<ref>[https://books.google.com/books?id=Xd422lS6ezgC&pg=PA95&lpg=PA95&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=hZR3iDt0fv&sig=UdZDakp2nwFdDD7GOyzEsyaD1g8&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CBkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false History of the Ottoman Empire and modern Turkey]</ref>
== पीढ़ियों की स्तिथि ==
यह भी माना जाता है कि अबू हनीफ़ा ताबईन जो [[सहाबा]] के बाद के दौर के थे, में से थे। सहाबा, [[मुहम्मद]] साहब के एसे अनुयाइयो को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल मे [[मुहम्मद]] साहब (स.अ.व) के साथ रहे या कम से कम एक बार उनसे मिले।<ref name="masud">{{Cite web |url=http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |title=Imām-ul-A’zam Abū Ḥanīfah, The Theologian |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170804014954/http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |archive-date=4 अगस्त 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304053426/http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm |date=4 मार्च 2016 }} last accessed 8 June 2011</ref> कुछ और का कहना है कि अबू हनीफ़ा ने करीब छः सहाबियों को देखा है। कम <ref name="masud"/>
== अल्लाह का डर और नमाज़ ==
अबू हनीफ़ा ने चालीस साल तक इशा के वुज़ू से फज़र की नमाज़ पढ़ी ओर वह रात भर क़ुरआन पढ़ा करते थे।<ref>http://islamicworld.in/abu-nahifa-rehmatullah-aleh-13452/{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== सहिष्णुता का प्रचार ==
अबू हनीफ़ा के विचारों के अनुसार मुस्लिम शासकों को गैर-मुस्लिम प्रजा के साथ भी बराबरी का व्यव्हार करना चाहिए। किसी भी निर्दोष मुसलमान की हत्या की तरह निर्दोष गैर-मुस्लिम के हत्यारे को भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए। वे ईश-निन्दा (blasphemy) के आरोपियों को, विशेष रूप से गैर-मुस्लिम व्यक्तियों के मृत्यु के विरुद्ध थे तथा अन्य अन्य इमामों की तुलना में धर्मत्याग करने वाले मुसलमानों को मृत्यु दंड देने के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं। सामान्य रूप से अन्य धर्म पंथ की तुलना में हनफ़ी अनुयायी अति शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं जिसके लिए अबू हनीफ़ा की शिक्षाओं का बड़ा दख़ल है।
== स्वागत ==
[[चित्र:Madhhab_Map3.png|right|thumb|300x300px|दुनिया का मेप। हनफ़ी (हरा रंग) सुन्नी पंथ को दर्शाया गया। मुख्य रूप से तुर्की, उत्तर मध्यप्राच्य, ईजिप्ट, भारत उपखंड।]]
== रचनायें और संकलन ==
* ''किताब उल-आसार'' - उल्लेखन इमाम मुहम्मद अल-शैबानिएए - संकलन जुम्ला 70,000 [[हदीस]]
* ''किताबुल आसार'' - उल्लेखन इमाम अबू यूसुफ़
* ''आलिम व मुताल्लिम'' - (गुरू और शिष्य) या (विद्वान और विद्यार्थी)
* ''मुसनद इमाम उल आज़म'' (हदीसों का संकलन)
* ''किताबुल राद अलल क़ादिरिय्या''
== उद्धरण ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20181002205307/http://lostislamichistory.com/the-life-of-imam-abu-hanifa/ अबू हनीफा की जीवनी ]
* [https://web.archive.org/web/20111118012441/http://www.renaissance.com.pk/feletfor96.html इमाम अबू हनीफ़ा] - जमील अहमद
* [https://web.archive.org/web/20120426000635/http://marifah.net/articles/wasiyya-abuhanifa.pdf अबू हनीफा की वसीयत] अंग्रेज़ी में अनुवाद शैख़ इमाम ताहिर महमूद अल-किणी
* [https://web.archive.org/web/20160303205929/http://www.rehmani.net/library/Imam-e-Azam/index.php अबू हनीफ़ा पर किताब]
* [https://web.archive.org/web/20160303191047/http://muslim-canada.org/hanifah.htm अबू हनीफ़ा की जीवनी]
* [https://web.archive.org/web/20101220213736/http://muslimheritage.com/day_life/default.cfm?oldpage=3&ArticleID=463 मुस्लिम विरासत पर अबू हनीफ़ा]
* [https://web.archive.org/web/20160203143707/http://www.livingislam.org/ahanifa_e.html इमाम अबू हनीफा] - शैख़ G F हददाद
* [https://web.archive.org/web/20150627075848/http://www.asiaplus.tj/en/news/16/46434.html अबू हनीफा और मुस्लिम देश - ताजीकिस्तान के अध्यक्ष के लेख]
* [https://web.archive.org/web/20160124165124/http://www.inter-islam.org/Biographies/4imam.htm अबू हनीफा के चंद गुरु और शिष्य]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लामी न्याय शास्त्र]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:इस्लामी नेता]]
[[श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]]
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wikitext
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{{Infobox scholar
|notability = [[इसलामी विद्वान]]
|era = इस्लामी स्वर्ण युग
|image = Abu Hanifa Name.png
|caption = नौमान इब्न साबित इब्न ज़ूता इब्न मर्ज़ुबान ([[इस्लामी अक्षरांकन|इसलामी अक्षरांकन]])
|name = अबू हनीफ़ा
|title = इमाम ए आज़म
|birth_date = सितम्बर 5, 702 (80 [[हिजरी]])<br />[[पर्वान]], [[File:Umayyad Flag.svg|border|23px]] [[उमय्यद ख़िलाफ़त]]
|death_date = {{death date and age|772|6|14|702|9|5}} (150 हिजरी)<br />[[बग़दाद]], [[File:Black flag.svg|border|23px]] [[ख़िलाफ़त ए अब्बासिया|अब्बासी ख़िलाफ़त]]
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|Maddhab = [[सुन्नह]]
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}}
'''नोमान इब्न साइत इब्न ज़ौता इब्न मरज़ुबान''' (फारसी : ابوحنیفه, अरबी : نعمان بن ثابت بن زوطا بن مرزبان), जो अबू हनीफ़ा (हनीफ़ा के पिता) के नाम से मशहूर हैं और इन्हें इसी नाम से भी जाना जाता है (जन्म : 699 ई. मृत्यु 767 ई / 80-150 हिजरी साल),<ref>{{Cite web |url=http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |title=''ABŪ ḤANĪFA'', Encyclopædia Iranica |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304002815/http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref> अबू हनीफ़ा सुन्नी "हनफ़ी मसलक" (हनफ़ी स्कूल) इसलामी न्यायशास्त्र के संस्थापक थे। यह एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे। ज़ैदी शिया मुसलमानों में इन्हें प्रसिद्ध विद्वान के रूप में माना जाता है। <ref><cite class="citation book" contenteditable="false">Abu Bakr al-Jassas al-Razi. </cite></ref> <nowiki>'''</nowiki> उन्हें अक्सर "महान इमाम" (ألإمام الأعظم, अल इमाम अल आज़म) कहा और माना जाता है। <ref name="Cambridge">S. H. Nasr (1975), "The religious sciences", in R.N. Frye, ''The Cambridge History of Iran'', Volume 4, Cambridge University Press. pg 474: "Abū Ḥanīfah, who is often called the "grand imam"(al-Imam al-'Azam) was Persian</ref>
== जीवनी ==
=== बचपन ===
अबू हनीफा [[इराक़|इराक]] के शहर [[कूफ़ा]] में पैदा हुए थे। वे खलीफ़ा उमय्यद खलीफा अब्द अल मलिक इब्न मरवान के समकालीन थे। <ref>Josef W. Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', 1 edition, (Routledge: 2005), p.5</ref><ref>Hisham M. Ramadan, ''Understanding Islamic Law: From Classical to Contemporary'', (AltaMira Press: 2006), p.26</ref> उनके पिता, थबित बिन ज़ूता एक व्यापारी थे, जो मूल रूप से काबुल, अफगानिस्तान से थे।
=== यौवन और मृत्यु ===
[[चित्र:Abu_Hanifa_Mosque,_2008.jpg|thumb|अबू हनीफ़ा मस्जिद, [[बग़दाद]], [[इराक़]]]]
खलीफ़ा [[अल-मनसूर]] 763 ई. में मुस्लिम दुनिया के खलीफ़ा थे। इन की राजधानी इराक़ का शहर बागदाद था। मुख्य न्यायाधीश स्वर्गवासी होने के कारण वह पद खाली हुआ, उसे भरती करने के लिये, खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को इस पद के लिये पेशकश की, लैकिन अबू हनीफ़ा स्वतंत्र रहना पसंद करते थे, इस लिये इस प्रस्ताव और पेशकश को ठुकरा दिया। इस पद को अरबी भाशा में "क़ादि-उल-क़ुज़्ज़ात" कहते हैं। इस पद पर उनके छात्र अबू यूसुफ नियुक्त किया गया।
खलीफ़ा अल-मनसूर और दीगर लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि, अबू हनीफ़ा इस पद को इनकार किया। चूं कि, अबू हनीफा इस क़ाबिल थे, और उनहें क़ाबिल समझा गया, इसी लिये उन्हें पेशकश की गयी, जिस को अबू हनीफ़ा ने खुद को क़ाबिल न बताते हुवे ठुकरा दिया। इस बात पर खलीफ़ा ने कहा कि तुम झूठ बोल रहे हो। तब अबू हनीफ़ा ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे झूठे को ऐसे ऊंचे पद की पेश कश नहीं करना चाहिये। इस बात पर नाराज़ खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को गिरफ़्तार कर जैल में बंद करवा दिया। कुछ महीनों बाद अबू हनीफ़ा जेल ही में मर गये।
शाह इस्माइल की सफ़वी साम्राज्य 1508 ई. में अबू हनीफा और अब्दुल कादिर गिलानी की क़बरों को सरकार द्वारा नष्ट कर दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |title=Encyclopedia of the Ottoman Empire |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160119151508/https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |archive-date=19 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref> 1533 में, तुर्क साम्राज्य ने इराक और अबू हनीफा और अन्य सुन्नी स्थलों के मक़बरों का पुनर्निर्माण किया।<ref>[https://books.google.com/books?id=Xd422lS6ezgC&pg=PA95&lpg=PA95&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=hZR3iDt0fv&sig=UdZDakp2nwFdDD7GOyzEsyaD1g8&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CBkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false History of the Ottoman Empire and modern Turkey]</ref>
== पीढ़ियों की स्तिथि ==
यह भी माना जाता है कि अबू हनीफ़ा ताबईन जो [[सहाबा]] के बाद के दौर के थे, में से थे। सहाबा, [[मुहम्मद]] साहब के एसे अनुयाइयो को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल मे [[मुहम्मद]] साहब (स.अ.व) के साथ रहे या कम से कम एक बार उनसे मिले।<ref name="masud">{{Cite web |url=http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |title=Imām-ul-A’zam Abū Ḥanīfah, The Theologian |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170804014954/http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |archive-date=4 अगस्त 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304053426/http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm |date=4 मार्च 2016 }} last accessed 8 June 2011</ref> कुछ और का कहना है कि अबू हनीफ़ा ने करीब छः सहाबियों को देखा है। <ref name="masud"/>
== अल्लाह का डर और नमाज़ ==
अबू हनीफ़ा ने चालीस साल तक इशा के वुज़ू से फज़र की नमाज़ पढ़ी ओर वह रात भर क़ुरआन पढ़ा करते थे।<ref>http://islamicworld.in/abu-nahifa-rehmatullah-aleh-13452/{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== सहिष्णुता का प्रचार ==
अबू हनीफ़ा के विचारों के अनुसार मुस्लिम शासकों को गैर-मुस्लिम प्रजा के साथ भी बराबरी का व्यव्हार करना चाहिए। किसी भी निर्दोष मुसलमान की हत्या की तरह निर्दोष गैर-मुस्लिम के हत्यारे को भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए। वे ईश-निन्दा (blasphemy) के आरोपियों को, विशेष रूप से गैर-मुस्लिम व्यक्तियों के मृत्यु के विरुद्ध थे तथा अन्य अन्य इमामों की तुलना में धर्मत्याग करने वाले मुसलमानों को मृत्यु दंड देने के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं। सामान्य रूप से अन्य धर्म पंथ की तुलना में हनफ़ी अनुयायी अति शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं जिसके लिए अबू हनीफ़ा की शिक्षाओं का बड़ा दख़ल है।
== स्वागत ==
[[चित्र:Madhhab_Map3.png|right|thumb|300x300px|दुनिया का मेप। हनफ़ी (हरा रंग) सुन्नी पंथ को दर्शाया गया। मुख्य रूप से तुर्की, उत्तर मध्यप्राच्य, ईजिप्ट, भारत उपखंड।]]
== रचनायें और संकलन ==
* ''किताब उल-आसार'' - उल्लेखन इमाम मुहम्मद अल-शैबानिएए - संकलन जुम्ला 70,000 [[हदीस]]
* ''किताबुल आसार'' - उल्लेखन इमाम अबू यूसुफ़
* ''आलिम व मुताल्लिम'' - (गुरू और शिष्य) या (विद्वान और विद्यार्थी)
* ''मुसनद इमाम उल आज़म'' (हदीसों का संकलन)
* ''किताबुल राद अलल क़ादिरिय्या''
== उद्धरण ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20181002205307/http://lostislamichistory.com/the-life-of-imam-abu-hanifa/ अबू हनीफा की जीवनी ]
* [https://web.archive.org/web/20111118012441/http://www.renaissance.com.pk/feletfor96.html इमाम अबू हनीफ़ा] - जमील अहमद
* [https://web.archive.org/web/20120426000635/http://marifah.net/articles/wasiyya-abuhanifa.pdf अबू हनीफा की वसीयत] अंग्रेज़ी में अनुवाद शैख़ इमाम ताहिर महमूद अल-किणी
* [https://web.archive.org/web/20160303205929/http://www.rehmani.net/library/Imam-e-Azam/index.php अबू हनीफ़ा पर किताब]
* [https://web.archive.org/web/20160303191047/http://muslim-canada.org/hanifah.htm अबू हनीफ़ा की जीवनी]
* [https://web.archive.org/web/20101220213736/http://muslimheritage.com/day_life/default.cfm?oldpage=3&ArticleID=463 मुस्लिम विरासत पर अबू हनीफ़ा]
* [https://web.archive.org/web/20160203143707/http://www.livingislam.org/ahanifa_e.html इमाम अबू हनीफा] - शैख़ G F हददाद
* [https://web.archive.org/web/20150627075848/http://www.asiaplus.tj/en/news/16/46434.html अबू हनीफा और मुस्लिम देश - ताजीकिस्तान के अध्यक्ष के लेख]
* [https://web.archive.org/web/20160124165124/http://www.inter-islam.org/Biographies/4imam.htm अबू हनीफा के चंद गुरु और शिष्य]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लामी न्याय शास्त्र]]
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[[श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]]
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wikitext
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{{Infobox scholar
|notability = [[इसलामी विद्वान]]
|era = इस्लामी स्वर्ण युग
|image = Abu Hanifa Name.png
|caption = नौमान इब्न साबित इब्न ज़ूता इब्न मर्ज़ुबान ([[इस्लामी अक्षरांकन|इसलामी अक्षरांकन]])
|name = अबू हनीफ़ा
|title = इमाम ए आज़म
|birth_date = सितम्बर 5, 702 (80 [[हिजरी]])<br />[[पर्वान]], [[File:Umayyad Flag.svg|border|23px]] [[उमय्यद ख़िलाफ़त]]
|death_date = {{death date and age|772|6|14|702|9|5}} (150 हिजरी)<br />[[बग़दाद]], [[File:Black flag.svg|border|23px]] [[ख़िलाफ़त ए अब्बासिया|अब्बासी ख़िलाफ़त]]
|ethnicity = [[पर्शियन]]<ref>Mohsen Zakeri (1995), ''Sasanid soldiers in early Muslim society: the origins of 'Ayyārān and Futuwwa'', p.293 [http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180319001813/http://www.google.com/#sclient=psy&hl=en&tbm=bks&source=hp&q=abu+hanifa++mohsen+zakeri&aq=f&aqi=&aql=f&oq=&pbx=1&bav=on.2,or.r_gc.r_pw.&fp=4fc9e0155db2ec99&biw=1024&bih=509 |date=19 मार्च 2018 }}</ref><ref name=Cambridge/><ref name=Cyril/>
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|main_interests = [[फ़िक़्ह|न्याय शास्त्र]]
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|influences = [[हम्माद इब्न अबी सुलैमान]], [[अता इब्न अबी राबह]], [[ज़ैद इब्न अली]], [[जाफ़र अल-सादिक़]], इत्यादी ताबईन
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}}
'''नोमान इब्न साइत इब्न ज़ौता इब्न मरज़ुबान''' (फारसी : ابوحنیفه, अरबी : نعمان بن ثابت بن زوطا بن مرزبان), जो अबू हनीफ़ा (हनीफ़ा के पिता) के नाम से मशहूर हैं और इन्हें इसी नाम से भी जाना जाता है (जन्म : 699 ई. मृत्यु 767 ई / 80-150 हिजरी साल),<ref>{{Cite web |url=http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |title=''ABŪ ḤANĪFA'', Encyclopædia Iranica |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304002815/http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref> अबू हनीफ़ा सुन्नी "हनफ़ी मसलक" (हनफ़ी स्कूल) इसलामी न्यायशास्त्र के संस्थापक थे। यह एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे। ज़ैदी शिया मुसलमानों में इन्हें प्रसिद्ध विद्वान के रूप में माना जाता है। <ref><cite class="citation book" contenteditable="false">Abu Bakr al-Jassas al-Razi. </cite></ref> <nowiki>'''</nowiki> उन्हें अक्सर "महान इमाम" (ألإمام الأعظم, अल इमाम अल आज़म) कहा और माना जाता है। <ref name="Cambridge">S. H. Nasr (1975), "The religious sciences", in R.N. Frye, ''The Cambridge History of Iran'', Volume 4, Cambridge University Press. pg 474: "Abū Ḥanīfah, who is often called the "grand imam"(al-Imam al-'Azam) was Persian</ref>
== जीवनी ==
=== बचपन ===
अबू हनीफा [[इराक़|इराक]] के शहर [[कूफ़ा]] में पैदा हुए थे। वे खलीफ़ा उमय्यद खलीफा अब्द अल मलिक इब्न मरवान के समकालीन थे। <ref>Josef W. Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', 1 edition, (Routledge: 2005), p.5</ref><ref>Hisham M. Ramadan, ''Understanding Islamic Law: From Classical to Contemporary'', (AltaMira Press: 2006), p.26</ref> उनके पिता, थबित बिन ज़ूता एक व्यापारी थे, जो मूल रूप से काबुल, अफगानिस्तान से थे।
=== यौवन और मृत्यु ===
[[चित्र:Abu_Hanifa_Mosque,_2008.jpg|thumb|अबू हनीफ़ा मस्जिद, [[बग़दाद]], [[इराक़]]]]
खलीफ़ा [[अल-मनसूर]] 763 ई. में मुस्लिम दुनिया के खलीफ़ा थे। इन की राजधानी इराक़ का शहर बागदाद था। मुख्य न्यायाधीश स्वर्गवासी होने के कारण वह पद खाली हुआ, उसे भरती करने के लिये, खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को इस पद के लिये पेशकश की, लैकिन अबू हनीफ़ा स्वतंत्र रहना पसंद करते थे, इस लिये इस प्रस्ताव और पेशकश को ठुकरा दिया। इस पद को अरबी भाशा में "क़ादि-उल-क़ुज़्ज़ात" कहते हैं। इस पद पर उनके छात्र अबू यूसुफ नियुक्त किया गया।
खलीफ़ा अल-मनसूर और दीगर लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि, अबू हनीफ़ा इस पद को इनकार किया। चूं कि, अबू हनीफा इस क़ाबिल थे, और उनहें क़ाबिल समझा गया, इसी लिये उन्हें पेशकश की गयी, जिस को अबू हनीफ़ा ने खुद को क़ाबिल न बताते हुवे ठुकरा दिया। इस बात पर खलीफ़ा ने कहा कि तुम झूठ बोल रहे हो। तब अबू हनीफ़ा ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे झूठे को ऐसे ऊंचे पद की पेश कश नहीं करना चाहिये। इस बात पर नाराज़ खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को गिरफ़्तार कर जैल में बंद करवा दिया। कुछ महीनों बाद अबू हनीफ़ा जेल ही में मर गये।
शाह इस्माइल की सफ़वी साम्राज्य 1508 ई. में अबू हनीफा और अब्दुल कादिर गिलानी की क़बरों को सरकार द्वारा नष्ट कर दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |title=Encyclopedia of the Ottoman Empire |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160119151508/https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |archive-date=19 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref> 1533 में, तुर्क साम्राज्य ने इराक और अबू हनीफा और अन्य सुन्नी स्थलों के मक़बरों का पुनर्निर्माण किया।<ref>[https://books.google.com/books?id=Xd422lS6ezgC&pg=PA95&lpg=PA95&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=hZR3iDt0fv&sig=UdZDakp2nwFdDD7GOyzEsyaD1g8&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CBkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false History of the Ottoman Empire and modern Turkey]</ref>
== पीढ़ियों की स्तिथि ==
यह भी माना जाता है कि अबू हनीफ़ा ताबईन जो [[सहाबा]] के बाद के दौर के थे, में से थे। सहाबा, [[मुहम्मद]] साहब के एसे अनुयाइयो को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल मे [[मुहम्मद]] साहब (P.B.U.H) के साथ रहे या कम से कम एक बार उनसे मिले।<ref name="masud">{{Cite web |url=http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |title=Imām-ul-A’zam Abū Ḥanīfah, The Theologian |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170804014954/http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |archive-date=4 अगस्त 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304053426/http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm |date=4 मार्च 2016 }} last accessed 8 June 2011</ref> कुछ और का कहना है कि अबू हनीफ़ा ने करीब छः सहाबियों को देखा है। <ref name="masud"/>
== अल्लाह का डर और नमाज़ ==
अबू हनीफ़ा ने चालीस साल तक इशा के वुज़ू से फज़र की नमाज़ पढ़ी ओर वह रात भर क़ुरआन पढ़ा करते थे।<ref>http://islamicworld.in/abu-nahifa-rehmatullah-aleh-13452/{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== सहिष्णुता का प्रचार ==
अबू हनीफ़ा के विचारों के अनुसार मुस्लिम शासकों को गैर-मुस्लिम प्रजा के साथ भी बराबरी का व्यव्हार करना चाहिए। किसी भी निर्दोष मुसलमान की हत्या की तरह निर्दोष गैर-मुस्लिम के हत्यारे को भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए। वे ईश-निन्दा (blasphemy) के आरोपियों को, विशेष रूप से गैर-मुस्लिम व्यक्तियों के मृत्यु के विरुद्ध थे तथा अन्य अन्य इमामों की तुलना में धर्मत्याग करने वाले मुसलमानों को मृत्यु दंड देने के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं। सामान्य रूप से अन्य धर्म पंथ की तुलना में हनफ़ी अनुयायी अति शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं जिसके लिए अबू हनीफ़ा की शिक्षाओं का बड़ा दख़ल है।
== स्वागत ==
[[चित्र:Madhhab_Map3.png|right|thumb|300x300px|दुनिया का मेप। हनफ़ी (हरा रंग) सुन्नी पंथ को दर्शाया गया। मुख्य रूप से तुर्की, उत्तर मध्यप्राच्य, ईजिप्ट, भारत उपखंड।]]
== रचनायें और संकलन ==
* ''किताब उल-आसार'' - उल्लेखन इमाम मुहम्मद अल-शैबानिएए - संकलन जुम्ला 70,000 [[हदीस]]
* ''किताबुल आसार'' - उल्लेखन इमाम अबू यूसुफ़
* ''आलिम व मुताल्लिम'' - (गुरू और शिष्य) या (विद्वान और विद्यार्थी)
* ''मुसनद इमाम उल आज़म'' (हदीसों का संकलन)
* ''किताबुल राद अलल क़ादिरिय्या''
== उद्धरण ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20181002205307/http://lostislamichistory.com/the-life-of-imam-abu-hanifa/ अबू हनीफा की जीवनी ]
* [https://web.archive.org/web/20111118012441/http://www.renaissance.com.pk/feletfor96.html इमाम अबू हनीफ़ा] - जमील अहमद
* [https://web.archive.org/web/20120426000635/http://marifah.net/articles/wasiyya-abuhanifa.pdf अबू हनीफा की वसीयत] अंग्रेज़ी में अनुवाद शैख़ इमाम ताहिर महमूद अल-किणी
* [https://web.archive.org/web/20160303205929/http://www.rehmani.net/library/Imam-e-Azam/index.php अबू हनीफ़ा पर किताब]
* [https://web.archive.org/web/20160303191047/http://muslim-canada.org/hanifah.htm अबू हनीफ़ा की जीवनी]
* [https://web.archive.org/web/20101220213736/http://muslimheritage.com/day_life/default.cfm?oldpage=3&ArticleID=463 मुस्लिम विरासत पर अबू हनीफ़ा]
* [https://web.archive.org/web/20160203143707/http://www.livingislam.org/ahanifa_e.html इमाम अबू हनीफा] - शैख़ G F हददाद
* [https://web.archive.org/web/20150627075848/http://www.asiaplus.tj/en/news/16/46434.html अबू हनीफा और मुस्लिम देश - ताजीकिस्तान के अध्यक्ष के लेख]
* [https://web.archive.org/web/20160124165124/http://www.inter-islam.org/Biographies/4imam.htm अबू हनीफा के चंद गुरु और शिष्य]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लामी न्याय शास्त्र]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:इस्लामी नेता]]
[[श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]]
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Mnjkhan
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[[विशेष:योगदान/~2026-23441-49|~2026-23441-49]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-23441-49|वार्ता]]) द्वारा अच्छी नीयत से किये गये बदलाव प्रत्यावर्तित किये गये
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{{Infobox scholar
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}}
'''नोमान इब्न साइत इब्न ज़ौता इब्न मरज़ुबान''' (फारसी : ابوحنیفه, अरबी : نعمان بن ثابت بن زوطا بن مرزبان), जो अबू हनीफ़ा (हनीफ़ा के पिता) के नाम से मशहूर हैं और इन्हें इसी नाम से भी जाना जाता है (जन्म : 699 ई. मृत्यु 767 ई / 80-150 हिजरी साल),<ref>{{Cite web |url=http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |title=''ABŪ ḤANĪFA'', Encyclopædia Iranica |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304002815/http://www.iranicaonline.org/articles/abu-hanifa-noman-b |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref> अबू हनीफ़ा सुन्नी "हनफ़ी मसलक" (हनफ़ी स्कूल) इसलामी न्यायशास्त्र के संस्थापक थे। यह एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान थे। ज़ैदी शिया मुसलमानों में इन्हें प्रसिद्ध विद्वान के रूप में माना जाता है। <ref><cite class="citation book" contenteditable="false">Abu Bakr al-Jassas al-Razi. </cite></ref> <nowiki>'''</nowiki> उन्हें अक्सर "महान इमाम" (ألإمام الأعظم, अल इमाम अल आज़म) कहा और माना जाता है। <ref name="Cambridge">S. H. Nasr (1975), "The religious sciences", in R.N. Frye, ''The Cambridge History of Iran'', Volume 4, Cambridge University Press. pg 474: "Abū Ḥanīfah, who is often called the "grand imam"(al-Imam al-'Azam) was Persian</ref>
== जीवनी ==
=== बचपन ===
अबू हनीफा [[इराक़|इराक]] के शहर [[कूफ़ा]] में पैदा हुए थे। वे खलीफ़ा उमय्यद खलीफा अब्द अल मलिक इब्न मरवान के समकालीन थे। <ref>Josef W. Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', 1 edition, (Routledge: 2005), p.5</ref><ref>Hisham M. Ramadan, ''Understanding Islamic Law: From Classical to Contemporary'', (AltaMira Press: 2006), p.26</ref> उनके पिता, थबित बिन ज़ूता एक व्यापारी थे, जो मूल रूप से काबुल, अफगानिस्तान से थे।
=== यौवन और मृत्यु ===
[[चित्र:Abu_Hanifa_Mosque,_2008.jpg|thumb|अबू हनीफ़ा मस्जिद, [[बग़दाद]], [[इराक़]]]]
खलीफ़ा [[अल-मनसूर]] 763 ई. में मुस्लिम दुनिया के खलीफ़ा थे। इन की राजधानी इराक़ का शहर बागदाद था। मुख्य न्यायाधीश स्वर्गवासी होने के कारण वह पद खाली हुआ, उसे भरती करने के लिये, खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को इस पद के लिये पेशकश की, लैकिन अबू हनीफ़ा स्वतंत्र रहना पसंद करते थे, इस लिये इस प्रस्ताव और पेशकश को ठुकरा दिया। इस पद को अरबी भाशा में "क़ादि-उल-क़ुज़्ज़ात" कहते हैं। इस पद पर उनके छात्र अबू यूसुफ नियुक्त किया गया।
खलीफ़ा अल-मनसूर और दीगर लोगों को यह बात अच्छी नहीं लगी कि, अबू हनीफ़ा इस पद को इनकार किया। चूं कि, अबू हनीफा इस क़ाबिल थे, और उनहें क़ाबिल समझा गया, इसी लिये उन्हें पेशकश की गयी, जिस को अबू हनीफ़ा ने खुद को क़ाबिल न बताते हुवे ठुकरा दिया। इस बात पर खलीफ़ा ने कहा कि तुम झूठ बोल रहे हो। तब अबू हनीफ़ा ने कहा कि अगर वह झूठ बोल रहे हैं तो ऐसे झूठे को ऐसे ऊंचे पद की पेश कश नहीं करना चाहिये। इस बात पर नाराज़ खलीफ़ा ने अबू हनीफ़ा को गिरफ़्तार कर जैल में बंद करवा दिया। कुछ महीनों बाद अबू हनीफ़ा जेल ही में मर गये।
शाह इस्माइल की सफ़वी साम्राज्य 1508 ई. में अबू हनीफा और अब्दुल कादिर गिलानी की क़बरों को सरकार द्वारा नष्ट कर दिया गया। <ref>{{Cite web |url=https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |title=Encyclopedia of the Ottoman Empire |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160119151508/https://books.google.com/books?id=QjzYdCxumFcC&pg=PA71&lpg=PA71&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=PdV5MaKFs9&sig=0UhW6VaXCVVo0jFhkItxRPp_yC4&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=4&ved=0CCUQ6AEwAw#v=onepage&q=hanifa%20tomb%20destroyed%20safavids&f=false |archive-date=19 जनवरी 2016 |url-status=live }}</ref> 1533 में, तुर्क साम्राज्य ने इराक और अबू हनीफा और अन्य सुन्नी स्थलों के मक़बरों का पुनर्निर्माण किया।<ref>[https://books.google.com/books?id=Xd422lS6ezgC&pg=PA95&lpg=PA95&dq=hanifa+tomb+destroyed+safavids&source=bl&ots=hZR3iDt0fv&sig=UdZDakp2nwFdDD7GOyzEsyaD1g8&hl=en&ei=5gCuTeLqKIjagAfx6ITsCw&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=1&ved=0CBkQ6AEwAA#v=onepage&q&f=false History of the Ottoman Empire and modern Turkey]</ref>
== पीढ़ियों की स्तिथि ==
यह भी माना जाता है कि अबू हनीफ़ा ताबईन जो [[सहाबा]] के बाद के दौर के थे, में से थे। सहाबा, [[मुहम्मद]] साहब के अनुयाईयों को कहा जाता है।.<ref name="masud">{{Cite web |url=http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |title=Imām-ul-A’zam Abū Ḥanīfah, The Theologian |access-date=3 फ़रवरी 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170804014954/http://www.masud.co.uk/ISLAM/misc/abu_hanifa.htm |archive-date=4 अगस्त 2017 |url-status=dead }}</ref><ref>http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304053426/http://www.islamicinformationcentre.co.uk/alsunna7.htm |date=4 मार्च 2016 }} last accessed 8 June 2011</ref> कुछ और का कहना है कि अबू हनीफ़ा ने करीब छः सहाबियों को देखा है। कम <ref name="masud"/>
== अल्लाह का डर और नमाज़ ==
अबू हनीफ़ा ने चालीस साल तक इशा के वुज़ू से फज़र की नमाज़ पढ़ी ओर वह रात भर क़ुरआन पढ़ा करते थे।<ref>http://islamicworld.in/abu-nahifa-rehmatullah-aleh-13452/{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== सहिष्णुता का प्रचार ==
अबू हनीफ़ा के विचारों के अनुसार मुस्लिम शासकों को गैर-मुस्लिम प्रजा के साथ भी बराबरी का व्यव्हार करना चाहिए। किसी भी निर्दोष मुसलमान की हत्या की तरह निर्दोष गैर-मुस्लिम के हत्यारे को भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए। वे ईश-निन्दा (blasphemy) के आरोपियों को, विशेष रूप से गैर-मुस्लिम व्यक्तियों के मृत्यु के विरुद्ध थे तथा अन्य अन्य इमामों की तुलना में धर्मत्याग करने वाले मुसलमानों को मृत्यु दंड देने के पक्ष में नहीं थे, हालांकि इतिहास में ऐसी कई घटनाएँ हो चुकी हैं। सामान्य रूप से अन्य धर्म पंथ की तुलना में हनफ़ी अनुयायी अति शांति प्रिय स्वभाव के होते हैं जिसके लिए अबू हनीफ़ा की शिक्षाओं का बड़ा दख़ल है।
== स्वागत ==
[[चित्र:Madhhab_Map3.png|right|thumb|300x300px|दुनिया का मेप। हनफ़ी (हरा रंग) सुन्नी पंथ को दर्शाया गया। मुख्य रूप से तुर्की, उत्तर मध्यप्राच्य, ईजिप्ट, भारत उपखंड।]]
== रचनायें और संकलन ==
* ''किताब उल-आसार'' - उल्लेखन इमाम मुहम्मद अल-शैबानिएए - संकलन जुम्ला 70,000 [[हदीस]]
* ''किताबुल आसार'' - उल्लेखन इमाम अबू यूसुफ़
* ''आलिम व मुताल्लिम'' - (गुरू और शिष्य) या (विद्वान और विद्यार्थी)
* ''मुसनद इमाम उल आज़म'' (हदीसों का संकलन)
* ''किताबुल राद अलल क़ादिरिय्या''
== उद्धरण ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20181002205307/http://lostislamichistory.com/the-life-of-imam-abu-hanifa/ अबू हनीफा की जीवनी ]
* [https://web.archive.org/web/20111118012441/http://www.renaissance.com.pk/feletfor96.html इमाम अबू हनीफ़ा] - जमील अहमद
* [https://web.archive.org/web/20120426000635/http://marifah.net/articles/wasiyya-abuhanifa.pdf अबू हनीफा की वसीयत] अंग्रेज़ी में अनुवाद शैख़ इमाम ताहिर महमूद अल-किणी
* [https://web.archive.org/web/20160303205929/http://www.rehmani.net/library/Imam-e-Azam/index.php अबू हनीफ़ा पर किताब]
* [https://web.archive.org/web/20160303191047/http://muslim-canada.org/hanifah.htm अबू हनीफ़ा की जीवनी]
* [https://web.archive.org/web/20101220213736/http://muslimheritage.com/day_life/default.cfm?oldpage=3&ArticleID=463 मुस्लिम विरासत पर अबू हनीफ़ा]
* [https://web.archive.org/web/20160203143707/http://www.livingislam.org/ahanifa_e.html इमाम अबू हनीफा] - शैख़ G F हददाद
* [https://web.archive.org/web/20150627075848/http://www.asiaplus.tj/en/news/16/46434.html अबू हनीफा और मुस्लिम देश - ताजीकिस्तान के अध्यक्ष के लेख]
* [https://web.archive.org/web/20160124165124/http://www.inter-islam.org/Biographies/4imam.htm अबू हनीफा के चंद गुरु और शिष्य]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लामी न्याय शास्त्र]]
[[श्रेणी:फ़िक़ह]]
[[श्रेणी:इस्लामी नेता]]
[[श्रेणी:इस्लाम के मुस्लिम विद्वान]]
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सोवियत संघ का विघटन
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[[चित्र:USSR Map timeline.gif|right|thumb|600px|[[सोवियत संघ]] के विघटन को दिखाने वाला चल-मानचित्र]]
[[सोवियत संघ]], २६ दिसम्बर १९९१ को विघटित घोषित हुआ। इस घोषणा में सोवियत संघ के भूतपूर्व गणतन्त्रों को स्वतन्त्रत मान लिया गया। विघटन के पूर्व [[मिखाइल गोर्बाचेव|मिखाइल गोर्वाचेव]] , सोवियत संघ के राष्ट्रपति थे। विघटन की घोषणा के एक दिन पूर्व उन्होने पदत्याग दिया था। विघटन की इस प्रक्रिया आरम्भ आम तौर पर गोर्वाचेव के सत्ता ग्रहण करने के साथ जोड़ा जाता है। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। सोवियत संघ के निपात के अनेक बुनियादी एवं ऐतिहासिक कारण हैं जो सतही नजर डालने पर नहीं दिखते।
== पृष्ठभूमि ==
[[चित्र:Soviet Union Administrative Divisions 1989.jpg|right|thumb|500px|१९८९ में सोवियत संघ से निकले विभिन्न भाग]]
1917 में [[रूसी क्रांति|बोल्शेविक क्रांति]] ने सोवियत संघ नामक एक नए [[साम्यवाद|साम्यवादी]] राज्य को जन्म दिया। इसी के साथ सोवियत संघ ने आरंभ में ही स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक व्यवस्था और साम्यवादी संगठन समाजवादी विचारधारा पर आश्रित होगे तथा साम्यवादी मार्क्सवादी विश्व दर्शन ही राष्ट्रहित को परिभाषित करने की एक मात्र कसौटी होगा। यह स्वाभाविक था कि इस क्रांतिकारी साम्यवादी राज्य को [[पूंजीवाद|पूँजीवादी]] पश्चिमी राज्यों ने अपना जन्मजात शत्रु समझा।
1920 एवं 30 के दशक में [[व्लादिमीर लेनिन|लेनिन]] की मृत्यु के बाद [[जोसेफ़ स्टालिन|स्टालिन]] ने अपने को सर्वोच्च नेता के रूप में स्थापित किया और उस देश में साम्यवादी पार्टी की [[तानाशाही]] स्थापित हो गई। स्टालिन ने अपने विरोधियों का बर्बरता से उन्मूलन व दमन किया। इस कारण सोवियत संघ की पहचान जनतंत्र का हनन करने वाले एक राज्य के रूप में होने लगी। आगे स्टालिन की मृत्यु के बाद भी [[खुश्चेव]] तथा [[ब्रेजनेव]] के शासन में तानाशाही प्रवृत्तियाँ मौजूद रही। नागरिक स्वतंत्रता, प्रशासन, विदेश यात्रा आदि पर प्रतिबंध जारी रहे। एक तरीके से लोक भावना पर "लोहे के पर्दे" (iron curtain) डाल दिए गए थे।
'सर्वहारा के अधिनायकत्व' का अर्थ ही थी कि सत्ता सर्वहारा वर्ग के हाथ में हो। मेहनतकश जनता के बुनियादी अधिकारों की गारंटी तथा राज्य की नीतियों के निर्माण में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना ही समाजवादी प्रजातंत्र का सारतत्व था। सोवियत यूनियन ने इस प्रजातंत्र की स्थापना का प्रयास नहीं किया। जिसके फलस्वरूप “सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व” सर्वहारा वर्ग पर राज्य व पार्टी में शीर्ष स्थानों पर आसीन नेताओं के अधिनायकत्व में बदल गया। जनता राज्य तथा व्यवस्था के प्रति उदासीन हो गई। उसकी उदासीनता एवं आक्रोश इस सीमा तक पहुँच गई, कि जब व्यवस्था का अंत किया गया तो उसके बचाव में जनता के किसी भी हिस्से से एक स्वर भी नहीं फूटा।
[[रूस]] न केवल भौगोलिक दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा राज्य था बल्कि उसकी आबादी अद्भुत विविधता झलकाने वाली बहुराष्ट्रीय थी। रूसी जारों ने इस विस्तृत साम्राज्य को केन्द्रीय प्रशासन के अधीन करने का कोई प्रयत्न नहीं किया किन्तु सोवियत साम्यवादी पार्टी ने केन्द्रीयकरण करने का प्रयास किया और यह जातीय विविधता सोवियत संघ की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए खतरा बनी रही। सोवियत साम्यवादी पार्टी इस उलझी गुत्थी का समाधन ढूँढने में असमर्थ रही। [[शीतयुद्ध|शीत युद्ध]] के वर्षों में पश्चिमी शक्तियों का दुष्प्रचार इस चुनौती को विस्फोटक बनाता रहा।
सोवियत साम्राज्य ने जिन पूर्वी देशों को अपने प्रभाव में लाया था, जैसे- [[हंगरी]], [[पोलैंड|पोलैण्ड]], [[चेकोस्लोवाकिया]], [[रोमानिया|रूमानिया]], आदि उन सभी जगहों में स्वाधीनता की ललक सोवियत साम्राज्य के लिए चिंता का विषय बना रहा।
सोवियत संघ की साम्यवादी पार्टी ने आर्थिक विकास का और सामाजिक पुनर्सरचना का जो विकल्प सामने रखा था वह बहुत सफल सिद्ध नहीं हुआ। [[लियोन त्रोत्स्की|ट्राटस्की]] जैसे आलोचकों ने तो बहुत पहले ही स्टालिन की नीति को समाजवाद से विश्वासघात के रूप में प्रचारित किया था और आगे खु्रश्चेव ने भी स्टालिन और स्टालिन वाद की निंदा की। इसी खु्रश्चेव के शासन काल में [[माओ से-तुंग|माओवादी]] [[चीन]] ने भी यह लांछन लगाना शुरू कर दिया कि सोवियत संघ साम्यवादी क्रांतिकारी राज्य नहीं रह गया बल्कि सुधारवादी, प्रतिगामी, अवसरवादी समझौतापरस्त ताकत बन चुका है। इस तरह सोवियत नेतृत्व अपने सहयोगी दूसरे साम्यवादी देशों का विश्वास गँवा चुका था। अपने राष्ट्रहित को सामूहिक, राष्ट्रीय, क्रांतिकारी हितों पर तरजीह देने वाला नजर आने लगा था। सोवियत-चीन विवाद हो या [[पूर्वी यूरोप]] के साम्यवादी देशों में असंतोष, इन सबका नतीजा सोवियत साम्यवादियों को कमजोर करने वाला ही सिद्ध हुआ।
सोवियत यूनियन के विघटन के लिए वहाँ की साम्यवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी एक सीमा तक उत्तरदायी रहा। सोवियत संघ में पार्टी तथा राज्य के बीच कोई भेद न रहने के कारण पार्टी तथा राज्य का नेतृत्व उन्हीं के हाथों में था। यह पार्टी नेतृत्व अपने सुविधाभोगी जीवन, भाई-भतीजावाद और भ्रष्ट आचरण के लिए बदनाम हो गया था। फलतः सोवियत नेता जनता के लिए अपने आदर्श रूप को खो चुके थे।
== आर्थिक संकट ==
जहाँ तक [[आर्थिक विकास]] का प्रश्न है, भले ही सैनिक और सामरिक क्षेत्र में सोवियत उपलब्धियाँ अमेरिकनों के बराबर तथा कभी-कभार उनसे बढ़कर नजर आती रही किन्तु इस उपलब्धि ने सोवियत संघ के आर्थिक वृद्धि दर को बहुत कम कर दिया था। वस्तुतः अंतरित अनुसंधान की प्रतिस्पर्धा, शस्त्र-निर्माण पर बेतहाशा खर्च तथा अपनी प्रभुता बनाए रखने के लिए अन्य देशों की आंतरिक समस्याओं में हस्तक्षेप (अफगानिस्तान, फिलिस्तीन) करने से सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी। इतना ही नहीं पूर्वी यूरोप में जो समाजवादी राज्य स्थापित हो गए थे, उन्हें आर्थिक व सैनिक तथा राजनैतिक मदद करना भी सोवियत यूनियन की नैतिक जिम्मेदारी थी। साथ ही नवस्वतंत्र देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना भी उसकी नीति रही, ताकि वे अमेरिकी खेमे में जाने से बचे रहे। इन सब कारणों से सोवियत संघ की आर्थिक दशा पतनोन्मुख हुई।
सोवियत संघ के 1970-85 की अवधि में वृद्धि दर में 10% की गिरावट हुई। यंत्रों तथा साजोसमान के निर्यात का अंश घटता गया। कृषि उत्पादन, औद्योगिक उत्पादन में कमी आई। फलतः उपभोक्ता वस्तुओं के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें लगने लगीं, नागरिकों के जीवन स्तर में गिरावट आई। इस तरह आम उपभोक्ता के लिए अभाव ही आम बात थी।
शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी प्रचार का जोर यह प्रमाणित करने में रहा कि उत्पादन और वितरण दोनों ही मामलों में साम्यवादी प्रणाली पूरी तरह असफल हुई है। अभाव के इस माहौल में उपभोक्ताओं के बढे़ असंतोष के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अभाव में और मानवधिकारों के उल्लंघन ने सोवियत व्यवस्था को और कष्टदायी बना दिया था।
अमेरिका के साथ [[परमाणु निर्मित अस्त्र-शस्त्रों]] में बराबरी की महत्वाकांक्षा ने सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था पर कमरतोड़ बोझ डाल दिया। राष्ट्रपति रीगन के समय घोषित [[स्टार वार्स परियोजना]] को प्रभावहीन बनाने के लिए सोवियत संघ को अपने रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि करनी पड़ी। इसी समय [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] में सोवियत संघ ने सैनिक हस्तक्षेप किया। इस हस्तक्षेप ने न केवल उस पर आर्थिक बोझ डाला बल्कि अलोकप्रिय भी बनाया। इससे सोवियत संघ अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में बिल्कुल अकेला सा पड़ा गया।
इसी समय पूर्वी यूरोप में साम्यवादी सोवियत साम्राज्य को चुनौती देने वाली परिवर्तनकामी हलचल शुरू हो गई। पोलैण्ड में “[[सॉलिडेटरी]]” नामक सैनिक संगठन अपने देश की साम्यवादी पार्टी से टकराने के लिए जुझारू तेवर दिखला रहा था और [[रोमानिया]] में [[चेचेस्क्यू]] के भ्रष्ट शासन को समर्थन देना कठिन होता जा रहा था। मिखाईल गोर्बाच्योब ने इन पिरिस्थतियों में संत्ता संभाली।
==गोर्बाच्योव एवं उसकी नीतियाँ==
[[चित्र:Mikhail Gorbachev 1987.jpg|right|thumb|300px|मिखाइल गोर्वाचेव]]
11 मार्च 1985 को गोर्बाच्योव ने सोवियत संघ का नेतृत्व ग्रहण किया और इसी के साथ सोवियत साम्यवादी इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हुआ। गोर्बाच्योव ने रूस की आर्थिक दशा में सुधार हेतु तथा साम्यवाद को सकारात्मक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए अपनी विशिष्ट नीतियों की घोषण की जिसे उस्कोरेनी (त्वरण) पेरेस्त्रोइका (पुनर्गठन) और ग्लास्नोस्त (खुलापन) के नाम से जाना जाता है।<ref name="m446">{{cite web | title=Gorbachev and Perestroika | website=Short History | url=https://history.state.gov/departmenthistory/short-history/gorbachev | ref={{sfnref|Short History}} | access-date=16 April 2026}}</ref>
गोर्बाच्योव का उद्देश्य इन अवधारणाओं के माध्यम से सोवियत व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाना था। उसकी कोशिश साम्यवाद में नवीन परिवर्तन लाकर आधार प्रदान करने की था। इसी कारण उसके द्वारा लाए परिवर्तनों को दूसरी सोवियत क्रांति के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
===उस्कोरेनी ===
गोर्बाच्योव के अनुसार तत्कालीन सोवियत अर्थव्यवस्था घटिया वस्तुओं, अकुशलता तथा प्रतिद्वंद्विता के अभाव से ग्रसित है। लोगों के सामने प्रस्तुत की जाने वाली वस्तुओं व सेवाओं तथा उनके द्वारा माँग की जाने वाली वस्तुओं व सेवाओं में अंतर था। इस तरह यह माना गया कि उस्कोरेनी (त्वरण) अर्थव्यवस्था के ढाँचे को इस प्रकार परिवर्तिन करेगा कि लोगों की आवश्यकताओं की संतुष्टि अधिक गतिशील, कुशल व समाजोन्मुख हो। इसके तहत् अधिक संसाधनों के इस्तेमाल की अपेक्षा कार्यकुशलता में वृद्धि कर उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की बात की गई।
=== पेरस्त्रोइका ===
पेरेस्त्रोइका का अर्थ है- पुनर्गठन या पुनर्सरचना इसके माध्यम से समाज मेें ऐसे सुधार लाने का संकल्प लिया जिससे पुरानी कठोरताओं का अंत करके मनुष्य के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त्र किया जा सके। इस प्रकार यह एक नए समाज की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया थी। पेरेस्त्रोइका के अंतर्गत निम्नलिखित बाते शामिल है-
(१) सामाजिक-आर्थिक प्रगति में तेजी लाना।
(२) समाज का व्यापक लोकतंत्रीकरण करना।
(३) लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण करना।
(४) व्यक्ति का नैतिक व आध्यात्मिक विकास करना।
(५) समाज की विकृतियों का पर्दाफाश करना।
इस तरह पेरेस्त्रोइका का उद्देश्य एक ऐसे समाज का विस्तार करना था जहाँ मानव की गरिमा और गौरव केन्द्र में हो, मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हो।
गोर्बाच्योव ने पेरेस्त्रोइका के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में सुधार, लीज एवं कॉण्टे्रक्ट के माध्यम से निजी खेती को प्रोत्साहन दिया। कृषि में सहकारी संगठन को सामूहिक संगठन की तुलना में अधिक महत्व दिया क्योंकि इसमें व्यक्ति की काम करने की प्रेरणा बनी रहती है। इसी प्रकार उपभोक्ता उद्योगोंं का विकास किया गया, मजदूरी वेतन को उत्पादकता से जोड़ा गया तथा कार्य कुशल श्रमिकों को अधिक वेतन तथा सुविधाएँ प्रदान की गई। इसी तरह प्रौद्योगिकी एवं निवेश संबंधी नीति में परिवर्तन लाकर अर्थव्यवस्था के गहन संरचनात्मक पुनर्गठन का प्रयास किया। अर्थव्यवस्था को गतिहीनता से निकालकर सुदृढ़ एवं तीव्र विकास के पथ पर चलाने की कोशिश की।
पेरेस्त्रोइका के माध्यम से गोर्बाच्योव सोवियत संघ को नए समाज की ओर ले जाना चाहते थे। इस नए समाज का पुननिर्माण वह लेनिन की विचारधारा के आधार पर करना चाहते थे। इन नीतियों का यथास्थितिवादियों द्वारा व्यापक विरोध किया गया।
===ग्लास्नोस्त===
{{मुख्य|ग्लास्नोस्त}}
ग्लास्नोस्त का अर्थ है- 'खुलापन'। ग्लास्नोस्त के तहत खुली बहस को प्रोत्साहन दिया गया जिससे लोकतंत्र की शक्तियाँ सुदृढ हो। गोर्बाच्योव ने इस बात पर बल दिया कि ग्लास्नोस्त का विस्तार सभी कार्याें में नियोजन और प्रशासन में किया जाए तथा देश में प्रादेशिक, आर्थिक, जातीय, युवा वर्ग संबंधी, परिवेश संबंधी सामाजिक व अन्य समस्याओं पर खुली बहस की जाए ताकि लोगों की सही वह सुनिश्चित राय का पता चल सके। गोर्बाच्योव ने कहा भी कि हमें ग्लास्नोस्त की उसी प्रकार आवश्यकता है जैसे हवा का। ग्लास्नोस्त के माध्यम से समाजवाद को लोकतंत्र की राह पर चलना था। वस्तुतः पेरेस्त्रोइका की व्यापक अवधारणा के तहत जिस सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रूपांतरण की बात की गई और एक ऐसे समाज की पुनर्सरचना का प्रयास किया गया जिसमें लोगों की भागेदारी इस रूपांतरण में हो, उसके लिए जरूरी था ग्लास्नोसत अर्थात खुलापन। इसी कारण यह कहा गया कि बिना ग्लास्नोत के पेरेस्त्रोइका नहीं और लोकतंत्र नहीं। ग्लास्नोस्त की प्रक्रिया वस्तुतः चुनौती भरी थी क्योंकि बंधे समाज को खुले में रहने की आदत नहीं थी।
;गोर्बाच्योव की नीतियों का परिणामः
1. ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोंइका शब्द ही नहीं बल्कि परिवर्तन के प्रतीक बन गए। सोवियत समाज के हर मोड़ पर परिवर्तन आने लगा,राजनैतिक कैदियों को रिहा का दिया गया।
2. देश में खुली बहस होने लगी। बहुदलीय चुनाव का नया अनुभव सोवियत जनता को प्राप्त हुआ।
3. सोवियत नागरिकों को विदेश यात्रा एवं नागरिक आव्रजनों की छूट मिली।
4. विदेश नीति में परिवर्तन लाया गया और शीत युद्ध के स्थान पर तनाव शैथिल्य को महत्व दिया गया।
5. सुधार कार्यक्रमों द्वारा सोवियत समाज को कठोर अनुशासन तथा लौह आवरण की नीति से मुक्ति मिली।
6. इस खुली बहस का सोवियत संघ में दुरूपयोग भी हुआ लोग इसके माध्यम से गुटबाजी और संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति में लग गए। इसी दौरान गणराज्यों ने अधिक स्वायत्तता की माँग रखी। जिनकों मिलाकर सोवियत संघ बना था। कुछ गणराज्य तो पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहते थे।
7. जनतांत्रिक तत्वों तथा कट्टरपंथी साम्यवादियों के बीच रस्साकशी में प्रशासन निष्क्रिय हो गया। अलगाववाद हिंसात्मक रूप में भड़क उठा, सोवियत संघ अराजकता की कगार तक पहुँच गया। अगस्त 1991में कुछ कम्युनिस्ट नेताओं ने तख्ता पलटने का असफल प्रयास किया। फलतः सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया तेज हो गई। और अंततः वह बिखर गया। गोर्बाच्योव ने त्यागपत्र दे दिया। और सोवियत संघ के स्थान पर 15 स्वतंत्र गणराज्य का दिसम्बर 1991 में जन्म हुआ।
== सोवियत संघ के विघटन में गोर्बाच्योव की भूमिका ==
जहाँ तक गोर्बाच्योव और उनकी नीतियों के फलस्वरूप सोवियत संघ के विद्यटन का संबंध है तो यह कहा जा सकता है उसकी नीतियों ने सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया को पूरा किया।उसकी नीति के कारण सोवियत संघ की केन्द्रीय सत्ता कमजोर हो गई, फलस्वरूप सोवियत संघ में केन्द्र के विरूद्ध संघर्ष करने वाली शक्तियों के हौसले बढ़ते गए। गोर्बाच्योव की तथाकथित जनतांत्रिक नीतियों ने गणराज्यों के सोवियत संघ से अलग होने को मान्यता दे दी। फलस्वरूप देखते ही देखते एक के बाद एक करके सोवियत संघ के गणराज्य स्वतंत्र हो गए और सोवियत संघ का विघटन हो गया। यह गोर्बाच्योव की नीतियों का ही परिणाम था कि सोवियत साम्यवादी दल की शक्ति में निरंतर ह्रास होता गया। फलतः सोवियत संघ की एकता के सूत्र में बाँधने वाले सबसे बडे सम्पर्क सूत्र की शक्ति ही घटती गई। इसका परिणाम था साम्यवाद-विरोधी शक्तियों का सिर उठाना। अमेरिका और पाश्चात्य देशों का भी सोवियत संघ को तोड़नेवाली इन शक्तियों को समर्थन प्राप्त था। परिणामस्वरूप ये शक्तियाँ सोवियत संघ की एकता को खोखली करती गई। गोर्बाच्योव ने पूर्वी यूरोप में भी साम्यवाद के दुर्ग को ढहने से रोकने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया, उल्टे उसकी नीतियों के कारण पूर्वी यूरोप में साम्यवाद विरोधी शक्तियाँ हावी होती गई। चेकोस्लोवाकिया, रोमानिया, हंगरी, पूर्वी जर्मनी मेेें साम्यवाद का पतन हो गया और यह पतन ने सोवियत संघ के महाशक्ति की छवि को समाप्त कर दिया।
यह कहना आसान है कि सोवियत संघ का पतन और अवसान की जिम्मेदारी सिर्फ़ गोर्बाच्योव की है। ऐसा करना किसी एक व्यक्ति को ऐतिहासिक प्रवृत्तियों से महत्वपूर्ण समझने की भूल करना होगा। गोर्बाच्योव तो इन ऐतिहासिक प्रवृत्तियों को प्रतिबिम्बित करने वाले दर्पण मात्र थे जो खुद टूट-कर बिखर गए। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन के बीज उसकी स्थापना के साथ ही बो दिए गए थे। समाजवादी व्यवस्था को जीवित रखने के लिए यह आवश्यक था कि देश में समाजवादी मनुष्य व संस्कृति को पैदा किया जाए, सोवियत व्यवस्था ऐसा करने में विफल रही। स्टालिन के शासन काल में लगभग दो दशकों तक सोवियत संघ की एकता केन्द्र सरकार की निर्मम बल प्रयोग वाले अनुशासन से ही बरकरार रही थी। देश के विभिन्न हिस्सों को साम्यवाद की रक्षा के लिए राष्ट्रहित में या अंतर्राष्ट्रीय भाईचारे के बहाने कुर्बानी देने के लिए मजबूर होना पड़ता था ऐसा नहीं था कि असंतोष या आक्रोश पैदा ही नहीं होते थे सिर्फ़ दमनकारी नीतियों के कारण इनकी मुखर अभिव्यक्ति कठिन थी। गोर्बाच्योव की उदार नीतियों ने इस आक्रोश को व्यक्त करने की मार्ग उपलब्ध कराया।
== सोवियत संघ के विघटन का प्रभाव ==
[[चित्र:EasternBloc BasicMembersOnly.svg|right|thumb|300px|'पूर्वी ब्लॉक' के देश]]
* सोवियत संघ के विघटन ने विश्व राजनीतिक परिदृश्य को परिवर्तित कर दिया। महाशक्ति के रूप में सोवियत संघ का अवसान हो गया और अब एकमात्र महाशक्ति के रूप में अमेरिका रह गया और विश्व का स्वरूप एकधु्रवीय (unipolar)हो गया। अमेरिका का पूरी दुनिया पर वर्चस्व स्थापित हो गया।
* सोवियत संघ के विखंडन से शीतयुद्ध की स्वतः समाप्ति हुई।
* पूर्वी यूरोपीय देशों में साम्यवाद का अवसान हुआ और बहुदलीय लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना हुई।
* सोवियत विघटन से तृतीय विश्व के देशों को गंभीर आघात का सामना करना पड़ा क्योंकि इन देशों को सोवियत संघ से आर्थिक, सैनिक व तकनीकी सहायता प्राप्त होती थी। अब विघटित गणराज्यों में इतनी क्षमता नहीं रहीं कि वे सहायता कर सके। इसी संदर्भ में तृतीय विश्व को [[नव उपनिवेशवाद]] के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
* विश्व में बाजार अर्थव्यवस्था को बल मिला कि लम्बे समय तक दमन और नागरिक स्वतंत्रता का अपहरण कर शासन नहीं चलाया जा सकता। इस तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा मिला।
== सन्दर्भ ==
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==इन्हें भी देखें==
*[[सोवियत संघ]]
*[[रूस]]
*[[साम्यवाद]]
*[[साम्यवाद का पतन]]
[[श्रेणी:रूस का इतिहास]]
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[[चित्र:USSR Map timeline.gif|right|thumb|600px|[[सोवियत संघ]] के विघटन को दिखाने वाला चल-मानचित्र]]
[[सोवियत संघ]], २६ दिसम्बर १९९१ को विघटित घोषित हुआ। इस घोषणा में सोवियत संघ के भूतपूर्व गणतन्त्रों को स्वतन्त्रत मान लिया गया। विघटन के पूर्व [[मिखाइल गोर्बाचेव|मिखाइल गोर्वाचेव]] , सोवियत संघ के राष्ट्रपति थे। विघटन की घोषणा के एक दिन पूर्व उन्होने पदत्याग दिया था। विघटन की इस प्रक्रिया आरम्भ आम तौर पर गोर्वाचेव के सत्ता ग्रहण करने के साथ जोड़ा जाता है। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया बहुत पहले शुरू हो चुकी थी। सोवियत संघ के निपात के अनेक बुनियादी एवं ऐतिहासिक कारण हैं जो सतही नजर डालने पर नहीं दिखते।
== पृष्ठभूमि ==
[[चित्र:Soviet Union Administrative Divisions 1989.jpg|right|thumb|500px|१९८९ में सोवियत संघ से निकले विभिन्न भाग]]
1917 में [[रूसी क्रांति|बोल्शेविक क्रांति]] ने सोवियत संघ नामक एक नए [[साम्यवाद|साम्यवादी]] राज्य को जन्म दिया। इसी के साथ सोवियत संघ ने आरंभ में ही स्पष्ट कर दिया कि राजनीतिक व्यवस्था और साम्यवादी संगठन समाजवादी विचारधारा पर आश्रित होगे तथा साम्यवादी मार्क्सवादी विश्व दर्शन ही राष्ट्रहित को परिभाषित करने की एक मात्र कसौटी होगा। यह स्वाभाविक था कि इस क्रांतिकारी साम्यवादी राज्य को [[पूंजीवाद|पूँजीवादी]] पश्चिमी राज्यों ने अपना जन्मजात शत्रु समझा।
1920 एवं 30 के दशक में [[व्लादिमीर लेनिन|लेनिन]] की मृत्यु के बाद [[जोसेफ़ स्टालिन|स्टालिन]] ने अपने को सर्वोच्च नेता के रूप में स्थापित किया और उस देश में साम्यवादी पार्टी की [[तानाशाही]] स्थापित हो गई। स्टालिन ने अपने विरोधियों का बर्बरता से उन्मूलन व दमन किया। इस कारण सोवियत संघ की पहचान जनतंत्र का हनन करने वाले एक राज्य के रूप में होने लगी। आगे स्टालिन की मृत्यु के बाद भी [[खुश्चेव]] तथा [[ब्रेजनेव]] के शासन में तानाशाही प्रवृत्तियाँ मौजूद रही। नागरिक स्वतंत्रता, प्रशासन, विदेश यात्रा आदि पर प्रतिबंध जारी रहे। एक तरीके से लोक भावना पर "लोहे के पर्दे" (iron curtain) डाल दिए गए थे।
'सर्वहारा के अधिनायकत्व' का अर्थ ही थी कि सत्ता सर्वहारा वर्ग के हाथ में हो। मेहनतकश जनता के बुनियादी अधिकारों की गारंटी तथा राज्य की नीतियों के निर्माण में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करना ही समाजवादी प्रजातंत्र का सारतत्व था। सोवियत यूनियन ने इस प्रजातंत्र की स्थापना का प्रयास नहीं किया। जिसके फलस्वरूप “सर्वहारा वर्ग का अधिनायकत्व” सर्वहारा वर्ग पर राज्य व पार्टी में शीर्ष स्थानों पर आसीन नेताओं के अधिनायकत्व में बदल गया। जनता राज्य तथा व्यवस्था के प्रति उदासीन हो गई। उसकी उदासीनता एवं आक्रोश इस सीमा तक पहुँच गई, कि जब व्यवस्था का अंत किया गया तो उसके बचाव में जनता के किसी भी हिस्से से एक स्वर भी नहीं फूटा।
[[रूस]] न केवल भौगोलिक दृष्टि से दुनिया का सबसे बड़ा राज्य था बल्कि उसकी आबादी अद्भुत विविधता झलकाने वाली बहुराष्ट्रीय थी। रूसी जारों ने इस विस्तृत साम्राज्य को केन्द्रीय प्रशासन के अधीन करने का कोई प्रयत्न नहीं किया किन्तु सोवियत साम्यवादी पार्टी ने केन्द्रीयकरण करने का प्रयास किया और यह जातीय विविधता सोवियत संघ की राष्ट्रीय एकता और अखण्डता के लिए खतरा बनी रही। सोवियत साम्यवादी पार्टी इस उलझी गुत्थी का समाधन ढूँढने में असमर्थ रही। [[शीतयुद्ध|शीत युद्ध]] के वर्षों में पश्चिमी शक्तियों का दुष्प्रचार इस चुनौती को विस्फोटक बनाता रहा।
सोवियत साम्राज्य ने जिन पूर्वी देशों को अपने प्रभाव में लाया था, जैसे- [[हंगरी]], [[पोलैंड|पोलैण्ड]], [[चेकोस्लोवाकिया]], [[रोमानिया|रूमानिया]], आदि उन सभी जगहों में स्वाधीनता की ललक सोवियत साम्राज्य के लिए चिंता का विषय बना रहा।
सोवियत संघ की साम्यवादी पार्टी ने आर्थिक विकास का और सामाजिक पुनर्सरचना का जो विकल्प सामने रखा था वह बहुत सफल सिद्ध नहीं हुआ। [[लियोन त्रोत्स्की|ट्राटस्की]] जैसे आलोचकों ने तो बहुत पहले ही स्टालिन की नीति को समाजवाद से विश्वासघात के रूप में प्रचारित किया था और आगे खु्रश्चेव ने भी स्टालिन और स्टालिन वाद की निंदा की। इसी खु्रश्चेव के शासन काल में [[माओ से-तुंग|माओवादी]] [[चीन]] ने भी यह लांछन लगाना शुरू कर दिया कि सोवियत संघ साम्यवादी क्रांतिकारी राज्य नहीं रह गया बल्कि सुधारवादी, प्रतिगामी, अवसरवादी समझौतापरस्त ताकत बन चुका है। इस तरह सोवियत नेतृत्व अपने सहयोगी दूसरे साम्यवादी देशों का विश्वास गँवा चुका था। अपने राष्ट्रहित को सामूहिक, राष्ट्रीय, क्रांतिकारी हितों पर तरजीह देने वाला नजर आने लगा था। सोवियत-चीन विवाद हो या [[पूर्वी यूरोप]] के साम्यवादी देशों में असंतोष, इन सबका नतीजा सोवियत साम्यवादियों को कमजोर करने वाला ही सिद्ध हुआ।
सोवियत यूनियन के विघटन के लिए वहाँ की साम्यवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी एक सीमा तक उत्तरदायी रहा। सोवियत संघ में पार्टी तथा राज्य के बीच कोई भेद न रहने के कारण पार्टी तथा राज्य का नेतृत्व उन्हीं के हाथों में था। यह पार्टी नेतृत्व अपने सुविधाभोगी जीवन, भाई-भतीजावाद और भ्रष्ट आचरण के लिए बदनाम हो गया था। फलतः सोवियत नेता जनता के लिए अपने आदर्श रूप को खो चुके थे।
== आर्थिक संकट ==
जहाँ तक [[आर्थिक विकास]] का प्रश्न है, भले ही सैनिक और सामरिक क्षेत्र में सोवियत उपलब्धियाँ अमेरिकनों के बराबर तथा कभी-कभार उनसे बढ़कर नजर आती रही किन्तु इस उपलब्धि ने सोवियत संघ के आर्थिक वृद्धि दर को बहुत कम कर दिया था। वस्तुतः अंतरित अनुसंधान की प्रतिस्पर्धा, शस्त्र-निर्माण पर बेतहाशा खर्च तथा अपनी प्रभुता बनाए रखने के लिए अन्य देशों की आंतरिक समस्याओं में हस्तक्षेप (अफगानिस्तान, फिलिस्तीन) करने से सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी। इतना ही नहीं पूर्वी यूरोप में जो समाजवादी राज्य स्थापित हो गए थे, उन्हें आर्थिक व सैनिक तथा राजनैतिक मदद करना भी सोवियत यूनियन की नैतिक जिम्मेदारी थी। साथ ही नवस्वतंत्र देशों की अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना भी उसकी नीति रही, ताकि वे अमेरिकी खेमे में जाने से बचे रहे। इन सब कारणों से सोवियत संघ की आर्थिक दशा पतनोन्मुख हुई।
सोवियत संघ के 1970-85 की अवधि में वृद्धि दर में 10% की गिरावट हुई। यंत्रों तथा साजोसमान के निर्यात का अंश घटता गया। कृषि उत्पादन, औद्योगिक उत्पादन में कमी आई। फलतः उपभोक्ता वस्तुओं के लिए लम्बी-लम्बी लाइनें लगने लगीं, नागरिकों के जीवन स्तर में गिरावट आई। इस तरह आम उपभोक्ता के लिए अभाव ही आम बात थी।
शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी प्रचार का जोर यह प्रमाणित करने में रहा कि उत्पादन और वितरण दोनों ही मामलों में साम्यवादी प्रणाली पूरी तरह असफल हुई है। अभाव के इस माहौल में उपभोक्ताओं के बढे़ असंतोष के साथ-साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अभाव में और मानवधिकारों के उल्लंघन ने सोवियत व्यवस्था को और कष्टदायी बना दिया था।
अमेरिका के साथ [[परमाणु निर्मित अस्त्र-शस्त्रों]] में बराबरी की महत्वाकांक्षा ने सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था पर कमरतोड़ बोझ डाल दिया। राष्ट्रपति रीगन के समय घोषित [[स्टार वार्स परियोजना]] को प्रभावहीन बनाने के लिए सोवियत संघ को अपने रक्षा बजट में बेतहाशा वृद्धि करनी पड़ी। इसी समय [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] में सोवियत संघ ने सैनिक हस्तक्षेप किया। इस हस्तक्षेप ने न केवल उस पर आर्थिक बोझ डाला बल्कि अलोकप्रिय भी बनाया। इससे सोवियत संघ अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में बिल्कुल अकेला सा पड़ा गया।
इसी समय पूर्वी यूरोप में साम्यवादी सोवियत साम्राज्य को चुनौती देने वाली परिवर्तनकामी हलचल शुरू हो गई। पोलैण्ड में “[[सॉलिडेटरी]]” नामक सैनिक संगठन अपने देश की साम्यवादी पार्टी से टकराने के लिए जुझारू तेवर दिखला रहा था और [[रोमानिया]] में [[चेचेस्क्यू]] के भ्रष्ट शासन को समर्थन देना कठिन होता जा रहा था। मिखाईल गोर्बाच्योब ने इन पिरिस्थतियों में संत्ता संभाली।
==गोर्बाच्योव एवं उसकी नीतियाँ==
[[चित्र:Mikhail Gorbachev 1987.jpg|right|thumb|300px|मिखाइल गोर्वाचेव]]
11 मार्च 1985 को गोर्बाच्योव ने सोवियत संघ का नेतृत्व ग्रहण किया और इसी के साथ सोवियत साम्यवादी इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हुआ। गोर्बाच्योव ने रूस की आर्थिक दशा में सुधार हेतु तथा साम्यवाद को सकारात्मक दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए अपनी विशिष्ट नीतियों की घोषण की जिसे उस्कोरेनी (त्वरण) पेरेस्त्रोइका (पुनर्गठन) और ग्लास्नोस्त (खुलापन) के नाम से जाना जाता है।<ref name="m446">{{cite web | title=Gorbachev and Perestroika | website=Short History | url=https://history.state.gov/departmenthistory/short-history/gorbachev | ref={{sfnref|Short History}} | access-date=16 April 2026}}</ref>
गोर्बाच्योव का उद्देश्य इन अवधारणाओं के माध्यम से सोवियत व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाना था। उसकी कोशिश साम्यवाद में नवीन परिवर्तन लाकर आधार प्रदान करने की था। इसी कारण उसके द्वारा लाए परिवर्तनों को दूसरी सोवियत क्रांति के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
===उस्कोरेनी ===
गोर्बाच्योव के अनुसार तत्कालीन सोवियत अर्थव्यवस्था घटिया वस्तुओं, अकुशलता तथा प्रतिद्वंद्विता के अभाव से ग्रसित है। लोगों के सामने प्रस्तुत की जाने वाली वस्तुओं व सेवाओं तथा उनके द्वारा माँग की जाने वाली वस्तुओं व सेवाओं में अंतर था। इस तरह यह माना गया कि उस्कोरेनी (त्वरण) अर्थव्यवस्था के ढाँचे को इस प्रकार परिवर्तिन करेगा कि लोगों की आवश्यकताओं की संतुष्टि अधिक गतिशील, कुशल व समाजोन्मुख हो। इसके तहत् अधिक संसाधनों के इस्तेमाल की अपेक्षा कार्यकुशलता में वृद्धि कर उत्पादन बढ़ाने पर जोर देने की बात की गई।
=== पेरस्त्रोइका ===
पेरेस्त्रोइका का अर्थ है- पुनर्गठन या पुनर्सरचना इसके माध्यम से समाज मेें ऐसे सुधार लाने का संकल्प लिया जिससे पुरानी कठोरताओं का अंत करके मनुष्य के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व आत्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त्र किया जा सके।<ref name="m521">{{cite web | title=Google Books | website=Google | url=https://www.google.co.in/books/edition/Samyavad_Ko_Chunotiya_lkE_okn_dks_pqukSf/y6c2KYkSpVsC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%87%E0%A4%95%E0%A4%BE&pg=PA76&printsec=frontcover | ref={{sfnref|Google}} | access-date=16 April 2026}}</ref> इस प्रकार यह एक नए समाज की ओर अग्रसर होने की प्रक्रिया थी। पेरेस्त्रोइका के अंतर्गत निम्नलिखित बाते शामिल है-
(१) सामाजिक-आर्थिक प्रगति में तेजी लाना।
(२) समाज का व्यापक लोकतंत्रीकरण करना।
(३) लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण करना।
(४) व्यक्ति का नैतिक व आध्यात्मिक विकास करना।
(५) समाज की विकृतियों का पर्दाफाश करना।
इस तरह पेरेस्त्रोइका का उद्देश्य एक ऐसे समाज का विस्तार करना था जहाँ मानव की गरिमा और गौरव केन्द्र में हो, मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा हो।
गोर्बाच्योव ने पेरेस्त्रोइका के अंतर्गत कृषि क्षेत्र में सुधार, लीज एवं कॉण्टे्रक्ट के माध्यम से निजी खेती को प्रोत्साहन दिया। कृषि में सहकारी संगठन को सामूहिक संगठन की तुलना में अधिक महत्व दिया क्योंकि इसमें व्यक्ति की काम करने की प्रेरणा बनी रहती है। इसी प्रकार उपभोक्ता उद्योगोंं का विकास किया गया, मजदूरी वेतन को उत्पादकता से जोड़ा गया तथा कार्य कुशल श्रमिकों को अधिक वेतन तथा सुविधाएँ प्रदान की गई। इसी तरह प्रौद्योगिकी एवं निवेश संबंधी नीति में परिवर्तन लाकर अर्थव्यवस्था के गहन संरचनात्मक पुनर्गठन का प्रयास किया। अर्थव्यवस्था को गतिहीनता से निकालकर सुदृढ़ एवं तीव्र विकास के पथ पर चलाने की कोशिश की।
पेरेस्त्रोइका के माध्यम से गोर्बाच्योव सोवियत संघ को नए समाज की ओर ले जाना चाहते थे। इस नए समाज का पुननिर्माण वह लेनिन की विचारधारा के आधार पर करना चाहते थे। इन नीतियों का यथास्थितिवादियों द्वारा व्यापक विरोध किया गया।
===ग्लास्नोस्त===
{{मुख्य|ग्लास्नोस्त}}
ग्लास्नोस्त का अर्थ है- 'खुलापन'। ग्लास्नोस्त के तहत खुली बहस को प्रोत्साहन दिया गया जिससे लोकतंत्र की शक्तियाँ सुदृढ हो। गोर्बाच्योव ने इस बात पर बल दिया कि ग्लास्नोस्त का विस्तार सभी कार्याें में नियोजन और प्रशासन में किया जाए तथा देश में प्रादेशिक, आर्थिक, जातीय, युवा वर्ग संबंधी, परिवेश संबंधी सामाजिक व अन्य समस्याओं पर खुली बहस की जाए ताकि लोगों की सही वह सुनिश्चित राय का पता चल सके। गोर्बाच्योव ने कहा भी कि हमें ग्लास्नोस्त की उसी प्रकार आवश्यकता है जैसे हवा का। ग्लास्नोस्त के माध्यम से समाजवाद को लोकतंत्र की राह पर चलना था। वस्तुतः पेरेस्त्रोइका की व्यापक अवधारणा के तहत जिस सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक रूपांतरण की बात की गई और एक ऐसे समाज की पुनर्सरचना का प्रयास किया गया जिसमें लोगों की भागेदारी इस रूपांतरण में हो, उसके लिए जरूरी था ग्लास्नोसत अर्थात खुलापन। इसी कारण यह कहा गया कि बिना ग्लास्नोत के पेरेस्त्रोइका नहीं और लोकतंत्र नहीं। ग्लास्नोस्त की प्रक्रिया वस्तुतः चुनौती भरी थी क्योंकि बंधे समाज को खुले में रहने की आदत नहीं थी।
;गोर्बाच्योव की नीतियों का परिणामः
1. ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोंइका शब्द ही नहीं बल्कि परिवर्तन के प्रतीक बन गए। सोवियत समाज के हर मोड़ पर परिवर्तन आने लगा,राजनैतिक कैदियों को रिहा का दिया गया।
2. देश में खुली बहस होने लगी। बहुदलीय चुनाव का नया अनुभव सोवियत जनता को प्राप्त हुआ।
3. सोवियत नागरिकों को विदेश यात्रा एवं नागरिक आव्रजनों की छूट मिली।
4. विदेश नीति में परिवर्तन लाया गया और शीत युद्ध के स्थान पर तनाव शैथिल्य को महत्व दिया गया।
5. सुधार कार्यक्रमों द्वारा सोवियत समाज को कठोर अनुशासन तथा लौह आवरण की नीति से मुक्ति मिली।
6. इस खुली बहस का सोवियत संघ में दुरूपयोग भी हुआ लोग इसके माध्यम से गुटबाजी और संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति में लग गए। इसी दौरान गणराज्यों ने अधिक स्वायत्तता की माँग रखी। जिनकों मिलाकर सोवियत संघ बना था। कुछ गणराज्य तो पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहते थे।
7. जनतांत्रिक तत्वों तथा कट्टरपंथी साम्यवादियों के बीच रस्साकशी में प्रशासन निष्क्रिय हो गया। अलगाववाद हिंसात्मक रूप में भड़क उठा, सोवियत संघ अराजकता की कगार तक पहुँच गया। अगस्त 1991में कुछ कम्युनिस्ट नेताओं ने तख्ता पलटने का असफल प्रयास किया। फलतः सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया तेज हो गई। और अंततः वह बिखर गया। गोर्बाच्योव ने त्यागपत्र दे दिया। और सोवियत संघ के स्थान पर 15 स्वतंत्र गणराज्य का दिसम्बर 1991 में जन्म हुआ।
== सोवियत संघ के विघटन में गोर्बाच्योव की भूमिका ==
जहाँ तक गोर्बाच्योव और उनकी नीतियों के फलस्वरूप सोवियत संघ के विद्यटन का संबंध है तो यह कहा जा सकता है उसकी नीतियों ने सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया को पूरा किया।उसकी नीति के कारण सोवियत संघ की केन्द्रीय सत्ता कमजोर हो गई, फलस्वरूप सोवियत संघ में केन्द्र के विरूद्ध संघर्ष करने वाली शक्तियों के हौसले बढ़ते गए। गोर्बाच्योव की तथाकथित जनतांत्रिक नीतियों ने गणराज्यों के सोवियत संघ से अलग होने को मान्यता दे दी। फलस्वरूप देखते ही देखते एक के बाद एक करके सोवियत संघ के गणराज्य स्वतंत्र हो गए और सोवियत संघ का विघटन हो गया। यह गोर्बाच्योव की नीतियों का ही परिणाम था कि सोवियत साम्यवादी दल की शक्ति में निरंतर ह्रास होता गया। फलतः सोवियत संघ की एकता के सूत्र में बाँधने वाले सबसे बडे सम्पर्क सूत्र की शक्ति ही घटती गई। इसका परिणाम था साम्यवाद-विरोधी शक्तियों का सिर उठाना। अमेरिका और पाश्चात्य देशों का भी सोवियत संघ को तोड़नेवाली इन शक्तियों को समर्थन प्राप्त था। परिणामस्वरूप ये शक्तियाँ सोवियत संघ की एकता को खोखली करती गई। गोर्बाच्योव ने पूर्वी यूरोप में भी साम्यवाद के दुर्ग को ढहने से रोकने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया, उल्टे उसकी नीतियों के कारण पूर्वी यूरोप में साम्यवाद विरोधी शक्तियाँ हावी होती गई। चेकोस्लोवाकिया, रोमानिया, हंगरी, पूर्वी जर्मनी मेेें साम्यवाद का पतन हो गया और यह पतन ने सोवियत संघ के महाशक्ति की छवि को समाप्त कर दिया।
यह कहना आसान है कि सोवियत संघ का पतन और अवसान की जिम्मेदारी सिर्फ़ गोर्बाच्योव की है। ऐसा करना किसी एक व्यक्ति को ऐतिहासिक प्रवृत्तियों से महत्वपूर्ण समझने की भूल करना होगा। गोर्बाच्योव तो इन ऐतिहासिक प्रवृत्तियों को प्रतिबिम्बित करने वाले दर्पण मात्र थे जो खुद टूट-कर बिखर गए। वास्तव में सोवियत संघ के विघटन के बीज उसकी स्थापना के साथ ही बो दिए गए थे। समाजवादी व्यवस्था को जीवित रखने के लिए यह आवश्यक था कि देश में समाजवादी मनुष्य व संस्कृति को पैदा किया जाए, सोवियत व्यवस्था ऐसा करने में विफल रही। स्टालिन के शासन काल में लगभग दो दशकों तक सोवियत संघ की एकता केन्द्र सरकार की निर्मम बल प्रयोग वाले अनुशासन से ही बरकरार रही थी। देश के विभिन्न हिस्सों को साम्यवाद की रक्षा के लिए राष्ट्रहित में या अंतर्राष्ट्रीय भाईचारे के बहाने कुर्बानी देने के लिए मजबूर होना पड़ता था ऐसा नहीं था कि असंतोष या आक्रोश पैदा ही नहीं होते थे सिर्फ़ दमनकारी नीतियों के कारण इनकी मुखर अभिव्यक्ति कठिन थी। गोर्बाच्योव की उदार नीतियों ने इस आक्रोश को व्यक्त करने की मार्ग उपलब्ध कराया।
== सोवियत संघ के विघटन का प्रभाव ==
[[चित्र:EasternBloc BasicMembersOnly.svg|right|thumb|300px|'पूर्वी ब्लॉक' के देश]]
* सोवियत संघ के विघटन ने विश्व राजनीतिक परिदृश्य को परिवर्तित कर दिया। महाशक्ति के रूप में सोवियत संघ का अवसान हो गया और अब एकमात्र महाशक्ति के रूप में अमेरिका रह गया और विश्व का स्वरूप एकधु्रवीय (unipolar)हो गया। अमेरिका का पूरी दुनिया पर वर्चस्व स्थापित हो गया।
* सोवियत संघ के विखंडन से शीतयुद्ध की स्वतः समाप्ति हुई।
* पूर्वी यूरोपीय देशों में साम्यवाद का अवसान हुआ और बहुदलीय लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की स्थापना हुई।
* सोवियत विघटन से तृतीय विश्व के देशों को गंभीर आघात का सामना करना पड़ा क्योंकि इन देशों को सोवियत संघ से आर्थिक, सैनिक व तकनीकी सहायता प्राप्त होती थी। अब विघटित गणराज्यों में इतनी क्षमता नहीं रहीं कि वे सहायता कर सके। इसी संदर्भ में तृतीय विश्व को [[नव उपनिवेशवाद]] के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
* विश्व में बाजार अर्थव्यवस्था को बल मिला कि लम्बे समय तक दमन और नागरिक स्वतंत्रता का अपहरण कर शासन नहीं चलाया जा सकता। इस तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ावा मिला।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
==इन्हें भी देखें==
*[[सोवियत संघ]]
*[[रूस]]
*[[साम्यवाद]]
*[[साम्यवाद का पतन]]
[[श्रेणी:रूस का इतिहास]]
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हाफिज़ मुहम्मद सईद
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''' हाफ़िज़ मोहम्मद सईद ''' ({{lang-ur| حافِظ مُحَمّد سَعِید}} ; [[देवनागरीकृत]] :'' हाफ़िज़ मोहम्मद सईद '' ) (जन्म: 10 मार्च 1950) आतंकी संगठन [[लश्कर-ए-तैयबा]] का संस्थापक और वर्तमान में [[जमात-उद-दावा]] से सम्बन्धित है। यह भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। [[मुम्बई 26/11 हमले|मुम्बई के 26/11 आक्रमण]] में इसके हाथ होने की बात सामने आयी थी जिसमें छह [[अमेरिका|अमेरिकी]] नागरिक समेत 193 लोग मारे गये थे। उस आक्रमण के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था।
अमेरिकी सरकार की ‘रिवाडर्स फ़ॉर जस्टिस’ कार्यक्रम की वेबसाइट पर बताया गया कि हाफिज़ सईद प्रतिबन्धित संगठन जमात-उद-दावा का प्रमुख और चरमपन्थी गुट लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है।<ref>[http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html जानिये आखिर कौन है हाफिज सईद] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160923043942/http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html |date=23 सितंबर 2016 }} - [[हिन्दुस्तान (अख़बार)|हिन्दुस्तान]] - 4 अप्रैल 2012</ref>
अमेरिका द्वारा जारी, दुनिया में 'आंतकवाद के लिये उत्तरदायी' लोगों की सूची में हाफ़िज़ सईद का भी नाम है। 2012 से इसके ऊपर अमेरिका ने 10 अरब अमेरिकी डॉलर की धनराशि का इनाम घोषित कर रखा है।
<ref name = jagran>[http://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html आइये जानते हैं आखिर कौन है हाफिज सईद !] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181204061448/https://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html |date=4 दिसंबर 2018 }} - [[दैनिक जागरण]] - 31 अगस्त 2015</ref>
==पृष्ठभूमि==
हाफ़िज़ सईद का जन्म [[पाकिस्तान]] के [[पंजाब (पाकिस्तान)|पंजाब प्रान्त]] के सरगोधा में हुआ था। सईद अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक रहा है। यह जमात-उद-दावा का संस्थापक है। यह एक कथित चरमपन्थी इस्लामी संगठन है जिसका मकसद भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना है। हाफिज ने यह संगठन तब बनाया था जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।
11 सितम्बर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने भी लश्कर पर प्रतिबन्ध लगा दिया। उसके बाद हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा का नया नाम जमात-उद-दावा रखा, हालाँकि हाफ़िज़ सईद इस बात से इन्कार करता है कि जमात-उद-दावा का लश्कर से कोई सम्बन्ध है। [[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद]] ने मुम्बई आतंकी हमलों के बाद दिसम्बर 2008 में जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था। मुम्बई हमलों के बाद सईद पर अन्तरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तान ने छह महीने से कम समय तक नजरबन्द रखा था। [[लाहौर हाईकोर्ट]] के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था।
हाफ़िज़ सईद ने [[अफगानिस्तान]] में [[जिहाद]] का प्रचार करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 1985 में [[जमात-उद-दावा-वल-इरशाद]] की स्थापना की और लश्कर-ए-तैयबा उसकी शाखा बनी। 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफ़गानिस्तान से निकल गए तो हाफ़िज़ सईद ने अपने मिशन को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया।
भारत सरकार 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकी हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदारी मानती है। भारतीय संसद पर हमले की कड़ी भी इसी गुट से जुड़ती है। मुम्बई आतंकी हमलों में उसकी भूमिका को लेकर भारत ने सईद के खिलाफ [[इंटरपोल|इण्टरपोल]] रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है, वहीं अमेरिका ने इसे विशेष निगरानी सूची में रखा है।<ref name = jagran/>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सय्यद अली शाह गिलानी]]
* [[कश्मीर विवाद]]
* [[जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014]]
* [[फैंटम (2015 फिल्म)]]
*[[2016 कश्मीर अशांति]]
==सन्दर्भ==
{{संसूची}}
[[श्रेणी:पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1950 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:लाहौर के लोग]]
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}}
''' 12 ba... Ki au..... ''' ({{lang-ur| حافِظ مُحَمّد سَعِید}} ; [[देवनागरीकृत]] :'' हाफ़िज़ मोहम्मद सईद '' ) (जन्म: 10 मार्च 1950) आतंकी संगठन [[लश्कर-ए-तैयबा]] का संस्थापक और वर्तमान में [[जमात-उद-दावा]] से सम्बन्धित है। यह भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। [[मुम्बई 26/11 हमले|मुम्बई के 26/11 आक्रमण]] में इसके हाथ होने की बात सामने आयी थी जिसमें छह [[अमेरिका|अमेरिकी]] नागरिक समेत 193 लोग मारे गये थे। उस आक्रमण के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था।
अमेरिकी सरकार की ‘रिवाडर्स फ़ॉर जस्टिस’ कार्यक्रम की वेबसाइट पर बताया गया कि हाफिज़ सईद प्रतिबन्धित संगठन जमात-उद-दावा का प्रमुख और चरमपन्थी गुट लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है।<ref>[http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html जानिये आखिर कौन है हाफिज सईद] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160923043942/http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html |date=23 सितंबर 2016 }} - [[हिन्दुस्तान (अख़बार)|हिन्दुस्तान]] - 4 अप्रैल 2012</ref>
अमेरिका द्वारा जारी, दुनिया में 'आंतकवाद के लिये उत्तरदायी' लोगों की सूची में हाफ़िज़ सईद का भी नाम है। 2012 से इसके ऊपर अमेरिका ने 10 अरब अमेरिकी डॉलर की धनराशि का इनाम घोषित कर रखा है।
<ref name = jagran>[http://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html आइये जानते हैं आखिर कौन है हाफिज सईद !] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181204061448/https://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html |date=4 दिसंबर 2018 }} - [[दैनिक जागरण]] - 31 अगस्त 2015</ref>
==पृष्ठभूमि==
हाफ़िज़ सईद का जन्म [[पाकिस्तान]] के [[पंजाब (पाकिस्तान)|पंजाब प्रान्त]] के सरगोधा में हुआ था। सईद अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक रहा है। यह जमात-उद-दावा का संस्थापक है। यह एक कथित चरमपन्थी इस्लामी संगठन है जिसका मकसद भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना है। हाफिज ने यह संगठन तब बनाया था जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।
11 सितम्बर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने भी लश्कर पर प्रतिबन्ध लगा दिया। उसके बाद हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा का नया नाम जमात-उद-दावा रखा, हालाँकि हाफ़िज़ सईद इस बात से इन्कार करता है कि जमात-उद-दावा का लश्कर से कोई सम्बन्ध है। [[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद]] ने मुम्बई आतंकी हमलों के बाद दिसम्बर 2008 में जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था। मुम्बई हमलों के बाद सईद पर अन्तरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तान ने छह महीने से कम समय तक नजरबन्द रखा था। [[लाहौर हाईकोर्ट]] के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था।
हाफ़िज़ सईद ने [[अफगानिस्तान]] में [[जिहाद]] का प्रचार करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 1985 में [[जमात-उद-दावा-वल-इरशाद]] की स्थापना की और लश्कर-ए-तैयबा उसकी शाखा बनी। 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफ़गानिस्तान से निकल गए तो हाफ़िज़ सईद ने अपने मिशन को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया।
भारत सरकार 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकी हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदारी मानती है। भारतीय संसद पर हमले की कड़ी भी इसी गुट से जुड़ती है। मुम्बई आतंकी हमलों में उसकी भूमिका को लेकर भारत ने सईद के खिलाफ [[इंटरपोल|इण्टरपोल]] रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है, वहीं अमेरिका ने इसे विशेष निगरानी सूची में रखा है।<ref name = jagran/>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सय्यद अली शाह गिलानी]]
* [[कश्मीर विवाद]]
* [[जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014]]
* [[फैंटम (2015 फिल्म)]]
*[[2016 कश्मीर अशांति]]
==सन्दर्भ==
{{संसूची}}
[[श्रेणी:पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
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AMAN KUMAR
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}}
''' हाफ़िज़ मोहम्मद सईद ''' ({{lang-ur| حافِظ مُحَمّد سَعِید}} ; [[देवनागरीकृत]] :'' हाफ़िज़ मोहम्मद सईद '' ) (जन्म: 10 मार्च 1950) आतंकी संगठन [[लश्कर-ए-तैयबा]] का संस्थापक और वर्तमान में [[जमात-उद-दावा]] से सम्बन्धित है। यह भारत की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची में शामिल है। [[मुम्बई 26/11 हमले|मुम्बई के 26/11 आक्रमण]] में इसके हाथ होने की बात सामने आयी थी जिसमें छह [[अमेरिका|अमेरिकी]] नागरिक समेत 193 लोग मारे गये थे। उस आक्रमण के बाद भारत ने पाकिस्तान से उसे सौंपने को कहा था।
अमेरिकी सरकार की ‘रिवाडर्स फ़ॉर जस्टिस’ कार्यक्रम की वेबसाइट पर बताया गया कि हाफिज़ सईद प्रतिबन्धित संगठन जमात-उद-दावा का प्रमुख और चरमपन्थी गुट लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है।<ref>[http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html जानिये आखिर कौन है हाफिज सईद] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160923043942/http://m.livehindustan.com/news/article/article1-america-pakistani-government-jamat-ud-dava-lashker-e-tayba-hafiz-saied-mumbai-terriost-attack-accused-226659.html |date=23 सितंबर 2016 }} - [[हिन्दुस्तान (अख़बार)|हिन्दुस्तान]] - 4 अप्रैल 2012</ref>
अमेरिका द्वारा जारी, दुनिया में 'आंतकवाद के लिये उत्तरदायी' लोगों की सूची में हाफ़िज़ सईद का भी नाम है। 2012 से इसके ऊपर अमेरिका ने 10 अरब अमेरिकी डॉलर की धनराशि का इनाम घोषित कर रखा है।
<ref name = jagran>[http://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html आइये जानते हैं आखिर कौन है हाफिज सईद !] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20181204061448/https://m.jagran.com/news/national-know-about-hafiz-saeed-12814630.html |date=4 दिसंबर 2018 }} - [[दैनिक जागरण]] - 31 अगस्त 2015</ref>
==पृष्ठभूमि==
हाफ़िज़ सईद का जन्म [[पाकिस्तान]] के [[पंजाब (पाकिस्तान)|पंजाब प्रान्त]] के सरगोधा में हुआ था। सईद अरबी और इंजीनियरिंग का पूर्व प्राध्यापक रहा है। यह जमात-उद-दावा का संस्थापक है। यह एक कथित चरमपन्थी इस्लामी संगठन है जिसका मकसद भारत के कुछ हिस्सों और पाकिस्तान में इस्लामी शासन स्थापित करना है। हाफिज ने यह संगठन तब बनाया था जब पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।
11 सितम्बर 2001 में अमेरिका पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। वर्ष 2002 में पाकिस्तानी सरकार ने भी लश्कर पर प्रतिबन्ध लगा दिया। उसके बाद हाफिज सईद ने लश्कर-ए-तैयबा का नया नाम जमात-उद-दावा रखा, हालाँकि हाफ़िज़ सईद इस बात से इन्कार करता है कि जमात-उद-दावा का लश्कर से कोई सम्बन्ध है। [[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद]] ने मुम्बई आतंकी हमलों के बाद दिसम्बर 2008 में जमात-उत-दावा को आतंकी संगठन घोषित किया था। मुम्बई हमलों के बाद सईद पर अन्तरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तान ने छह महीने से कम समय तक नजरबन्द रखा था। [[लाहौर हाईकोर्ट]] के आदेश के बाद उसे 2009 में रिहा कर दिया गया था।
हाफ़िज़ सईद ने [[अफगानिस्तान]] में [[जिहाद]] का प्रचार करने और लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए 1985 में [[जमात-उद-दावा-वल-इरशाद]] की स्थापना की और लश्कर-ए-तैयबा उसकी शाखा बनी। 1990 के बाद जब सोवियत सैनिक अफ़गानिस्तान से निकल गए तो हाफ़िज़ सईद ने अपने मिशन को कश्मीर की तरफ मोड़ दिया।
भारत सरकार 2003, 2005 और 2008 में हुए आतंकी हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा को जिम्मेदारी मानती है। भारतीय संसद पर हमले की कड़ी भी इसी गुट से जुड़ती है। मुम्बई आतंकी हमलों में उसकी भूमिका को लेकर भारत ने सईद के खिलाफ [[इंटरपोल|इण्टरपोल]] रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है, वहीं अमेरिका ने इसे विशेष निगरानी सूची में रखा है।<ref name = jagran/>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सय्यद अली शाह गिलानी]]
* [[कश्मीर विवाद]]
* [[जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014]]
* [[फैंटम (2015 फिल्म)]]
*[[2016 कश्मीर अशांति]]
==सन्दर्भ==
{{संसूची}}
[[श्रेणी:पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1950 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:लाहौर के लोग]]
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* [[भारतीय संविधान सभा]]
* [[संविधान पीठ (भारत)]]
* [[संघ सूची]]
* [[राज्य सूची]]
* [[समवर्ती सूची]]
* [[आधारभूत लक्षण का सिद्धान्त]]
* [[समान नागरिक संहिता]]
}}
}}<noinclude>
[[श्रेणी:भारत का संविधान|τ]]
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पुत्ताण्डु
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पुत्ताण्डु के उद्भव और महत्व के विषय में अन्य जानकारी जोड़ी गयी है।
6541433
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Holiday
|holiday_name = पुत्ताण्डु<br>तमिल नव वर्ष
|image = A colorful Puthandu welcome to Sinhala and Tamil New Year in Sri Lanka.jpg
|caption = पुत्ताण्डु के लिए तमिल नव वर्ष की सजावट
|observedby = तमिल लोग|[[भारत]], श्रीलंका, मॉरीशस, सिंगापुर में तमिल हिन्दू<ref name="Melton2011p633"/>
|date = तमिल कालदर्शक में चित्तेराय का पहला दिन
|celebrations = दावत देना, उपहार भेजना, दूसरों के घरों और मंदिरों में जाना
|longtype = धार्मिक, सामाजिक
|type = हिन्दू
|significance = तमिल नव वर्ष
|date2017 = शुक्रवार, 14 अप्रैल<ref>[http://www.tn.gov.in/holiday/2017 Holiday Calendar 2017] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170702205251/http://www.tn.gov.in/holiday/2017 |date=2 जुलाई 2017 }}, Government of Tamil Nadu</ref>
|relatedto = Vaisakhi, Vishu (Kerala), Thingyan|Burmese New Year, Cambodian New Year, Songkran (Lao)|Lao New Year, Vishu|Malayali New Year, Pana Sankranti|Odia New Year, Sinhalese New Year|Sri Lankan New Year, Songkran (Thailand)|Thai New Year
}}
'''पुत्ताण्डु''' (तमिल: புத்தாண்டு), जिसे पुथुरूषम या तमिल नव वर्ष भी कहा जाता है, [[तमिल]] कैलेंडर पर वर्ष का पहला दिन है। <ref name="Melton2011p633"/> तमिल तारीख को तमिल महीने चिधिराई के पहले दिन के रूप में, लन्नीसरोल हिंदू कैलेंडर के सौर चक्र के साथ स्थापित किया गया है। इसलिए यह हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के 14 अप्रैल या उसके आस पास ही मनाया जाता हैं। <ref name="Melton2011p633"/> यह दिन हिंदुओं के द्वारा पारंपरिक तौर पर नए साल के रूप में मनाया जाता है, लेकिन इसके नाम अलग अलग होते हैं जिसे केरल में विशु एवं मध्य और उत्तर भारत में वैसाखी जैसे अन्य नामों से जाना जाता है। <ref name="Melton2011p633"/>
इस दिन, तमिल लोग "पुट्टू वतुत्काका!" कहकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं जो हिंदी के "नया साल मुबारक हो" के बराबर है। <ref>{{cite book|author=William D. Crump|title=Encyclopedia of New Year's Holidays Worldwide|url=https://books.google.com/books?id=cDTfCwAAQBAJ&pg=PA220|year=2014|publisher=McFarland|isbn=978-0-7864-9545-0|page=220|access-date=28 जून 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170331125215/https://books.google.com/books?id=cDTfCwAAQBAJ&pg=PA220|archive-date=31 मार्च 2017|url-status=live}}</ref> इस दिन ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं एवं लोग अपने घर-द्वार की साफ सफाई करते हैं। एक थाली भी सजाते हैं जिसमे [[फल]]ों, [[पुष्प|फूलों]] और अन्य शुभ वस्तुएं राखी जाती हैं।
पुत्ताण्डु तमिलनाडु और पोंडिचेरी के बाहर रहने वाले तमिल हिंदुओं के द्वारा भी मनाया जाता है, जैसे श्रीलंका, [[मलेशिया]], [[सिंगापुर]], रीयूनियन, [[मॉरिशस|मॉरीशस]] और अन्य देशों में भी जहाँ तमिल लोग प्रवासी के तौर पर रहते हैं। <ref name="Melton2011p633">{{cite book|author=J. Gordon Melton|title=Religious Celebrations: An Encyclopedia of Holidays, Festivals, Solemn Observances, and Spiritual Commemorations|url=https://books.google.com/books?id=lD_2J7W_2hQC&pg=PA633|year=2011|publisher=ABC-CLIO|isbn=978-1-59884-206-7|page=633|access-date=28 जून 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170331123838/https://books.google.com/books?id=lD_2J7W_2hQC&pg=PA633|archive-date=31 मार्च 2017|url-status=live}}</ref>
इस दिन, तमिल लोग एक-दूसरे को "Puttāṇṭu vāḻttukaḷ!" ({{lang|ta| புத்தாண்டு வாழ்த்துகள்}}) या "Iṉiya puttāṇṭu nalvāḻttukaḷ!" ({{lang|ta|இனிய புத்தாண்டு நல்வாழ்த்துகள்}}) कहकर अभिवादन करते हैं, जिसका अर्थ "नव वर्ष की शुभकामनाएं" के समान है।<ref>{{cite book|author=William D. Crump|title=Encyclopedia of New Year's Holidays Worldwide |url=https://books.google.com/books?id=cDTfCwAAQBAJ&pg=PA220 |year=2014|publisher=McFarland|isbn=978-0-7864-9545-0|page=220}}</ref>
यह दिन पारिवारिक समय के रूप में मनाया जाता है। घरों में लोग घर की सफाई करते हैं, फलों, फूलों और शुभ वस्तुओं के साथ एक थाली तैयार करते हैं, परिवार के [[Puja (Hinduism)|पूजा]] वेदी को प्रज्वलित करते हैं और अपने स्थानीय मंदिरों में जाते हैं। लोग नए कपड़े पहनते हैं और बच्चे बड़ों के पास जाकर उनका सम्मान करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं, फिर परिवार एक साथ बैठकर शाकाहारी भोजन करता है।<ref>{{cite book|author=Samuel S. Dhoraisingam|title=Peranakan Indians of Singapore and Melaka |url=https://books.google.com/books?id=QHwcAgAAQBAJ |year=2006|publisher=Institute of Southeast Asian Studies|isbn=978-981-230-346-2|page=38}}</ref><math display="block"></math>
पुत्ताण्डु [[तमिल लोग]] द्वारा [[तमिलनाडु]] और [[पुदुचेरी]] में, तथा [[श्रीलंका]], [[मलेशिया]], [[सिंगापुर]], [[मॉरीशस]] और [[रियूनियन]] में मनाया जाता है। तमिल प्रवासी समुदाय<ref name="Melton2011p633">{{cite book|author=J. Gordon Melton|title=Religious Celebrations: An Encyclopedia of Holidays, Festivals, Solemn Observances, and Spiritual Commemorations |url=https://books.google.com/books?id=lD_2J7W_2hQC&pg=PA633|year=2011|publisher=ABC-CLIO|isbn=978-1-59884-206-7|page=633}}</ref><ref name=reevesp113>{{cite book|author=Peter Reeves|title=The Encyclopedia of the Sri Lankan Diaspora|url=https://books.google.com/books?id=4N5UAgAAQBAJ |year=2014|publisher=Editions Didier Millet|isbn=978-981-4260-83-1|page=113}}, Quote: "The key festivals celebrated by Sri Lankan Tamils in Canada include Thai Pongal (harvest festival) in January, Puthuvarusham (Tamil/New Year) in April, and Deepavali (Festival of Lights) in October/November."</ref> इसे [[म्यांमार]], [[दक्षिण अफ्रीका]], [[यूनाइटेड किंगडम]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]], [[कनाडा]] और [[ऑस्ट्रेलिया]] जैसे देशों में भी मनाता है।
==उद्गभव और महत्व==
[[File:A food treats arrangement for Puthandu (Vaisakhi) Tamil New Year.jpg|thumb|left|पुत्ताण्डु के लिए पारंपरिक उत्सव व्यंजनों की सजावट।]]
तमिल नव वर्ष वसंत विषुव के बाद होता है एवं आम तौर पर ग्रेगोरी कैलेंडर के 14 अप्रैल को होता है। <ref name="Melton2011p633"/> यह दिन पारंपरिक तौर पर तमिल कैलेंडर के पहले दिन के तौर पर मनाया जाता है और तमिलनाडु और श्रीलंका दोनों जगहों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश होता है। इसी दिन [[असम]], पश्चिम बंगाल, केरल, [[मणिपुर]], त्रिपुरा, [[बिहार]], ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, [[राजस्थान]] में कई हिंदुओं और साथ ही नेपाल में हिंदुओं द्वारा पारंपरिक नए साल के रूप में मनाया जाता है। बांग्लादेश। श्रीलंका, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, थाईलैंड के कई बौद्ध समुदाय एवं श्रीलंका का सिंहली समुदाय भी इस दिन को अपने नए साल के रूप में उसी दिन भी मनाता हैं,<ref name=reevesp113>{{cite book|author=Peter Reeves|title=The Encyclopedia of the Sri Lankan Diaspora|url=https://books.google.com/books?id=4N5UAgAAQBAJ|year=2014|publisher=Editions Didier Millet|isbn=978-981-4260-83-1|page=113|access-date=28 जून 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20160520031624/https://books.google.com/books?id=4N5UAgAAQBAJ|archive-date=20 मई 2016|url-status=live}}, Quote: "The key festivals celebrated by Sri Lankan Tamils in Canada include Thai Pongal (harvest festival) in January, Puthuvarusham (Tamil/Hindu New Year) in April, and Deepavali (Festival of Lights) in October/November."</ref>
प्रारंभिक तमिल साहित्य में अप्रैल नववर्ष के कई संदर्भ मिलते हैं। नक्कीरर, [[संगम काल]] के लेखक और ''[[नेडुनलवाडई]]'' के रचयिता, ने लिखा कि सूर्य मेष/चित्रई से होकर राशि चक्र के 11 क्रमिक चिन्हों से गुजरता है।<ref>JV Chelliah: Pattupattu: Ten Tamil Idylls. Tamil Verses with English Translation. Thanjavur: Tamil University, 1985 – Lines 160 to 162 of the Neṭunalvāṭai</ref><ref>Kamil Zvelabil dates the Neṭunalvāṭai to between the 2nd and 4th century CE – Kamil Zvelebil: The Smile of Murugan on Tamil Literature of South India. E.J. Brill, Leiden, Netherlands, 1973 – page 41-42</ref>
==समारोह==
तमिल लोग पुत्ताण्डु को पारंपरिक हिंदू नया साल के रूप में मनाते हैं, जिसे पुथुरूषम भी कहा जाता है,। यह तमिल सौर कैलेंडर का पहला महीना चित्राई का महीना है और पुत्ताण्डु आमतौर पर 14 अप्रैल को ही पड़ता है। दक्षिणी [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] के कुछ हिस्सों में, त्योहार को चित्तारीय विशु कहा जाता है। घर के प्रवेश द्वार पर इस दिन सभी लोग बहुत ही आकर्षक [[रंगोली]] बनाकर नए वर्ष का स्वागत करते है।
==विवाद==
जब २००८ में जब द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (द्रमुक) की तमिलनाडु में सरकार थी तब उन्होंने घोषित किया था कि तमिल नए साल को तमिल थाई महीने के पहले दिन ((14 जनवरी) [[पोंगल]] के फसल त्योहार के साथ मनाया जाएगा। 29 जनवरी 2008 को डीएमके विधानसभा सदस्यों और तमिलनाडु सरकार द्वारा तमिलनाडु नया साल (घोषणा बिल 2008) राज्य कानून के रूप में अधिनियमित किया गया था। <ref>{{cite web |url=http://www.tn.gov.in/tnassembly/Governors_address_Jan2008_2.htm |title=Bill on new Tamil New Year Day is passed unanimously |publisher=Tn.gov.in |accessdate=18 October 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111028094334/http://www.tn.gov.in/tnassembly/Governors_address_Jan2008_2.htm |archive-date=28 अक्तूबर 2011 |url-status=live }}</ref> डीएमके की बहुमत वाली सरकार का यह कानून बाद में 23 अगस्त 2011 को एआईएडीएमके की बहुमत वाली सरकार ने तमिलनाडु विधानसभा में एक अलग कानून बनाकर रद्द कर दिया गया। हालाकि तमिलनाडु के कई लोगों ने DMK सरकार के कानून को नजरअंदाज कर दिया था जो त्योहार की तारीख को बदलने से सम्बंधित था, और अप्रैल के मध्य में ही अपने पारंपरिक पुत्ताण्डु नए साल के त्यौहार को मनाते रहे।
==संबंधित त्यौहार==
पुत्ताण्डु का त्यौहार अन्य जगहों पर मनाया जाता है लेकिन इनके नाम अलग है जो हैं:
#[[केरल]] में [[विषु|विशु]]
#[[आन्ध्र प्रदेश|आंध्र प्रदेश]] एवं तेलंगाना में उगाडी
#मध्य और [[उत्तर भारत|उत्तरी भारत]] में वैसाखी
#[[ओडिशा]] में [[विष्णु]] संक्रांति
#[[असम]] में रोंगली बीहु
== इन्हें भी देखें ==
*[[तमिल]]
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:त्योहार]]
[[श्रेणी:तमिल]]
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मीरजापुर मंडल
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2026-04-16T13:16:58Z
EmausBot
26590
बॉट: [[विंध्याचल मंडल]] को दोहरे पुननिर्देशित ठीक किया।
6541276
wikitext
text/x-wiki
#पुनर्प्रेषित [[विंध्याचल मंडल]]
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विकिपीडिया:प्रयोगस्थल
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AMAN KUMAR
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[[विशेष:योगदान/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[सदस्य वार्ता:AMAN KUMAR|वार्ता]]) के अवतरण 6541166 पर पुनर्स्थापित : प्रयोगस्थल खाली किया।
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text/x-wiki
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DreamRimmer
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key_to_lower() avoids the metatable trap and sets all keys in the subtables to lowercase. Many language codes
have multiple associated names; Module:lang is only concerned with the first name so key_to_lower() only fetches
the first name.
]]
local function key_to_lower (module, src_type)
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local source_t = (('var_sup' == src_type) and require (module)) or mw.loadData (module); -- fetch data from this module; require() avoids metatable trap for variant data
if 'var_sup' == src_type then
for k, v in pairs (source_t) do
out[k:lower()] = v; -- for variant and suppressed everything is needed
end
elseif 'lang' == src_type and source_t.active then -- for ~/iana_languages (active)
for k, v in pairs (source_t.active) do
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else -- here for all other sources
for k, v in pairs (source_t) do
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end
end
return out;
end
local lang_name_table_t = {
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--[[--------------------------< I 1 8 N M E D I A W I K I O V E R R I D E >--------------------------------
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li: IANA: Limburgan MW: Limburgish
or: IANA: Oriya MW: Odia
os: IANA: Ossetian MW: Ossetic
"pa: IANA: Panjabi MW: Punjabi
"ps: IANA: Pushto MW: Pashto
"to: IANA: Tonga MW: Tongan
"ug: IANA: Uighur MW: Uyghur
use the override table to override language names that are incorrect for your project
To see the list of names that MediaWiki has for your language, enter this in the Debug colsole:
=mw.dumpObject (mw.language.fetchLanguageNames ('<tag>', 'all'))
(replacing <tag> with the language tag for your language)
Use of the MediaWiki language names lists is enabled when media_wiki_override_enable is set to boolean true.
]]
local media_wiki_override_enable = false; -- set to true to override IANA names with MediaWiki names; always false at en.wiki
-- caveat lector: the list of MediaWiki language names for your language may not be complete or may not exist at all
if true == media_wiki_override_enable then
local mw_languages_by_tag_t = mw.language.fetchLanguageNames (this_wiki_lang_tag, 'all'); -- get a table of language tag/name pairs known to MediaWiki
for tag, name in pairs (mw_languages_by_tag_t) do -- loop through each tag/name pair in the MediaWiki list
if lang_name_table_t.lang[tag] then -- if the tag is in the main list
lang_name_table_t.lang[tag] = name; -- overwrite exisiting name with the name from MediaWiki
end
end
end
--[[--------------------------< O V E R R I D E >--------------------------------------------------------------
Language codes and names in this table override the BCP47 names in lang_name_table.
indexes in this table shall always be lower case
]]
local override = {
------------------------------< I S O _ 6 3 9 - 1 >------------------------------------------------------------
["ab"] = "अब्खाज़", -- to match hi.wiki article name
["ca-valencia"] = "वैलेंसियाई",
["cu"] = "चर्च स्लावोनी", -- 2nd IANA name;
["de-at"] = "ऑस्ट्रियाई जर्मन", -- these code-region and code-variant tags to match en.wiki article names
["de-ch"] = "स्विस मानक जर्मन",
["en-au"] = "ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेज़ी",
["en-ca"] = "कनाडाई अंग्रेज़ी",
["en-emodeng"] = "प्रारंभिक आधुनिक अंग्रेज़ी",
["en-gb"] = "ब्रिटिश अंग्रेज़ी",
["en-ie"] = "आयरिश अंग्रेज़ी",
["en-in"] = "भारतीय अंग्रेज़ी",
["en-nz"] = "न्यूजीलैण्ड अंग्रेज़ी",
["en-us"] = "अमेरिकन अंग्रेज़ी",
["en-za"] = "दक्षिण अफ़्रीकी अंग्रेज़ी",
["fr-ca"] = "क्यूबेक फ़्रांसीसी",
["fr-gallo"] = "गैलो",
["fy"] = "पश्चिमी फ़्रिसियाई", -- Western Frisian
["mo"] = "मॉल्डोवाई", -- Moldavian (deprecated code); to match hi.wiki article title
["nl-be"] = "फ्लेमिश", -- match MediaWiki
["oc-gascon"] = "गैसकॉन",
["oc-provenc"] = "प्रोवेन्सल",
["ps"] = "पश्तो", -- Pushto
["pt-br"] = "ब्राज़ीलियाई पुर्तगाली", -- match MediaWiki
["ro-md"] = "मॉल्डोवाई", -- 'not deprecated' form
["ro-cyrl-md"] = "मॉल्डोवाई", -- 'not deprecated' form
["tw-asante"] = "असांटे ट्वी",
["ug"] = "उइगुर", -- 2nd IANA name; to match hi.wiki article name
-- these ISO 639-1 language-name overrides imported from Module:Language/data/wp_languages (since deleted)
--<begin do-not-edit except to comment out>--
["av"] = "अवार", -- Avaric
["bo"] = "मानक तिब्बती", -- Tibetan
["el"] = "यूनानी", -- Modern Greek
-- ["en-SA"] = "South African English", -- English; नहीं; SA दक्षिण अफ़्रीका के लिए नहीं है बल्कि यह सऊदी अरब के लिए है; ZA दक्षिण अफ़्रीका है
["ff"] = "फ़ुला ", -- Fulah
["ht"] = "हाइतीयाई क्रियोल", -- Haitian
["hz"] = "ओत्जीहेरेरो", -- Herero
["ii"] = "यी", -- Sichuan Yi
["ki"] = "गिकुयु", -- Kikuyu
["kl"] = "ग्रीनलैंडिक", -- Kalaallisut
["ky"] = "किर्गिज़", -- Kirghiz
["lg"] = "लुगांडा", -- Ganda
["li"] = "लिम्बर्गिश", -- Limburgan
["mi"] = "माओरी", -- Maori
["na"] = "नाउरुई", -- Nauru
["nb"] = "बुकमॉल", -- Norwegian Bokmål
["nd"] = "ज़िम्बाब्वेई न्देबेले", -- North Ndebele
["nn"] = "निनोर्स्क", -- Norwegian Nynorsk
["nr"] = "दक्षिणी न्देबेले", -- South Ndebele
["ny"] = "चिचेवा", -- Nyanja
["oj"] = "ओजिब्वे", -- Ojibwa
["or"] = "ओड़िया", -- Oriya
["pa"] = "पंजाबी", -- Panjabi
["rn"] = "किरुण्डी", -- Rundi
["sl"] = "स्लोवेन", -- Slovenian
["ss"] = "स्वाज़ी", -- Swati
["st"] = "सिसोथो", -- Southern Sotho
["to"] = "टोंगन", -- Tonga
--<end do-not-edit except to comment out>--
------------------------------< I S O _ 6 3 9 - 2, - 3, - 5 >----------------------------------------------
["alv"] = "Atlantic–Congo languages", -- to match en.wiki article title (endash)
["arc"] = "Imperial Aramaic (700-300 BCE)", -- Official Aramaic (700-300 BCE), Imperial Aramaic (700-300 BCE); to match en.wiki article title uses ISO639-2 'preferred' name
["art"] = "constructed", -- to match en.wiki article; lowercase for category name
["ast-es"] = "Leonese", -- ast in IANA is Asturian; Leonese is a dialect
["bea"] = "Dane-zaa", -- Beaver; to match en.wiki article title
["bha"] = "Bhariati", -- Bharia; to match en.wiki article title
["bhd"] = "Bhadarwahi", -- Bhadrawahi; to match en.wiki article title
["bla"] = "Blackfoot", -- Siksika; to match en.wiki article title
["blc"] = "Nuxalk", -- Bella Coola; to match en.wiki article title
["bua"] = "Buryat", -- Buriat; this is a macro language; these four use wp preferred transliteration;
["bxm"] = "Mongolian Buryat", -- Mongolia Buriat; these three all redirect to Buryat
["bxr"] = "Russian Buryat", -- Russia Buriat;
["bxu"] = "Chinese Buryat", -- China Buriat;
["byr"] = "Yipma", -- Baruya, Yipma
["clm"] = "Klallam", -- Clallam; to match en.wiki article title
["egy"] = "Ancient Egyptian", -- Egyptian (Ancient); distinguish from contemporary arz: Egyptian Arabic
["ems"] = "Alutiiq", -- Pacific Gulf Yupik; to match en.wiki article title
["esx"] = "Eskimo–Aleut languages", -- to match en.wiki article title (endash)
["frr"] = "North Frisian", -- Northern Frisian
["frs"] = "East Frisian Low Saxon", -- Eastern Frisian
["gsw-fr"] = "Alsatian", -- match MediaWiki
["haa"] = "Hän", -- Han; to match en.wiki article title
["hei"] = "Heiltsuk–Oowekyala", -- Heiltsuk; to match en.wiki article title
["hmx"] = "Hmong–Mien languages", -- to match en.wiki article title (endash)
["ilo"] = "Ilocano", -- Iloko; to match en.wiki article title
["jam"] = "Jamaican Patois", -- Jamaican Creole English
["lij-mc"] = "Monégasque", -- Ligurian as spoken in Monaco; this one for proper tool tip; also in <article_name> table
["luo"] = "Dholuo", -- IANA (primary) /ISO 639-3: Luo (Kenya and Tanzania); IANA (secondary): Dholuo
["mhr"] = "Meadow Mari", -- Eastern Mari
["mid"] = "Modern Mandaic", -- Mandaic
['mis'] = "uncoded", -- Uncoded languages; capitalization; special scope, not collective scope;
["mkh"] = "Mon–Khmer languages", -- to match en.wiki article title (endash)
["mla"] = "Tamambo", -- Malo
['mte'] = "Mono-Alu", -- Mono (Solomon Islands)
['mul'] = "multiple", -- Multiple languages; capitalization; special scope, not collective scope;
["nan-tw"] = "Taiwanese Hokkien", -- make room for IANA / 639-3 nan Min Nan Chinese; match en.wiki article title
["new"] = "Newar", -- Newari, Nepal Bhasa; to match en,wiki article title
["ngf"] = "Trans–New Guinea languages", -- to match en.wiki article title (endash)
["nic"] = "Niger–Congo languages", -- Niger-Kordofanian languages; to match en,wiki article title
["nrf"] = "Norman", -- not quite a collective - IANA name: Jèrriais + Guernésiais; categorizes to Norman-language text
["nrf-gg"] = "Guernésiais", -- match MediaWiki
["nrf-je"] = "Jèrriais", -- match MediaWiki
["nzi"] = "Nzema", -- Nzima; to match en.wiki article title
["oma"] = "Omaha–Ponca", -- to match en.wiki article title (endash)
["orv"] = "Old East Slavic", -- Old Russian
["pfl"] = "Palatine German", -- Pfaelzisch; to match en.wiki article
["pie"] = "Piro Pueblo", -- Piro; to match en.wiki article
["pms"] = "Piedmontese", -- Piemontese; to match en.wiki article title
["pnb"] = "Punjabi (Western)", -- Western Panjabi; dab added to override import from ~/wp languages and distinguish pnb from pa in reverse look up tag_from_name()
['qwm'] = "Cuman", -- Kuman (Russia); to match en.wiki article name
["rop"] = "Australian Kriol", -- Kriol; en.wiki article is a dab; point to correct en.wiki article
["sco-ulster"] = "Ulster Scots",
["sdo"] = "Bukar–Sadong", -- Bukar-Sadung Bidayuh; to match en.wiki article title
["smp"] = "Samaritan Hebrew", -- to match en.wiki article title
["stq"] = "Saterland Frisian", -- Saterfriesisch
["und"] = "undetermined", -- capitalization to match existing category
["wrg"] = "Warrongo", -- Warungu
["xal-ru"] = "Kalmyk", -- to match en.wiki article title
["xgf"] = "Tongva", -- ISO 639-3 is Gabrielino-Fernandeño
["yuf"] = "Havasupai–Hualapai", -- Havasupai-Walapai-Yavapai; to match en.wiki article title
["zkt"] = "Khitan", -- Kitan; to match en.wiki article title
["zxx"] = "no linguistic content", -- capitalization
-- these ISO 639-2, -3 language-name overrides imported from Module:Language/data/wp_languages (since deleted)
--<begin do-not-edit except to comment out>--
["ace"] = "आचेही", -- Achinese
["aec"] = "Sa'idi Arabic", -- Saidi Arabic
["akl"] = "Aklan", -- Aklanon
["alt"] = "Altay", -- Southern Altai
["apm"] = "Mescalero-Chiricahua", -- Mescalero-Chiricahua Apache
["bal"] = "बलोच", -- Baluchi
-- ["bcl"] = "Central Bicolano", -- Central Bikol
["bin"] = "Edo", -- Bini
["bpy"] = "Bishnupriya Manipuri", -- Bishnupriya
["chg"] = "चग़ताई", -- Chagatai
["ckb"] = "Sorani Kurdish", -- Central Kurdish
["cnu"] = "Shenwa", -- Chenoua
["coc"] = "Cocopah", -- Cocopa
["diq"] = "Zazaki", -- Dimli
["fit"] = "Meänkieli", -- Tornedalen Finnish
["fkv"] = "Kven", -- Kven Finnish
["frk"] = "Old Frankish", -- Frankish
["gez"] = "Ge'ez", -- Geez
["gju"] = "Gujari", -- Gujari
["gsw"] = "Alemannic German", -- Swiss German
["gul"] = "Gullah", -- Sea Island Creole English
["hak"] = "Hakka", -- Hakka Chinese
["hbo"] = "बाइबिली इब्रानी", -- Ancient Hebrew
["hnd"] = "Hindko", -- Southern Hindko
-- ["ikt"] = "Inuvialuk", -- Inuinnaqtun
["kaa"] = "Karakalpak", -- Kara-Kalpak
["khb"] = "Tai Lü", -- Lü
["kmr"] = "Kurmanji Kurdish", -- Northern Kurdish
["kpo"] = "Kposo", -- Ikposo
["krj"] = "Kinaray-a", -- Kinaray-A
-- ["ktz"] = "Juǀ'hoan", -- Juǀʼhoan
["lez"] = "Lezgian", -- Lezghian
["liv"] = "Livonian", -- Liv
["lng"] = "Lombardic", -- Langobardic
["mia"] = "Miami-Illinois", -- Miami
["miq"] = "Miskito", -- Mískito
["mix"] = "Mixtec", -- Mixtepec Mixtec
["mni"] = "मणिपुरी", -- Manipuri
["mrj"] = "Hill Mari", -- Western Mari
["mww"] = "White Hmong", -- Hmong Daw
["nds-nl"] = "Dutch Low Saxon", -- Low German
-- ["new"] = "Nepal Bhasa", -- Newari
["nso"] = "Northern Sotho", -- Pedi
-- ["nwc"] = "Classical Nepal Bhasa", -- Classical Newari, Classical Nepal Bhasa, Old Newari
["ood"] = "O'odham", -- Tohono O'odham
["otk"] = "Old Turkic", -- Old Turkish
["pal"] = "मध्य फ़ारसी", -- Pahlavi
["pam"] = "Kapampangan", -- Pampanga
["phr"] = "पोठोहारी", -- Pahari-Potwari
["pka"] = "जैन प्राकृत", -- Ardhamāgadhī Prākrit
-- ["pnb"] = "Punjabi", -- Western Panjabi
["psu"] = "शौरसेनी", -- Sauraseni Prākrit
["rap"] = "Rapa Nui", -- Rapanui
["rar"] = "Cook Islands Māori", -- Rarotongan
["rmu"] = "Scandoromani", -- Tavringer Romani
["rom"] = "रोमानी", -- Romany
["rup"] = "Aromanian", -- Macedo-Romanian
["ryu"] = "Okinawan", -- Central Okinawan
["sdc"] = "Sassarese", -- Sassarese Sardinian
["sdn"] = "Gallurese", -- Gallurese Sardinian
["shp"] = "Shipibo", -- Shipibo-Conibo
["src"] = "Logudorese", -- Logudorese Sardinian
["sro"] = "Campidanese", -- Campidanese Sardinian
["tkl"] = "Tokelauan", -- Tokelau
["tvl"] = "तुवालुयाई", -- Tuvalu
["tyv"] = "Tuvan", -- Tuvinian
["vls"] = "West Flemish", -- Vlaams
["wep"] = "Westphalian", -- Westphalien
["xal"] = "Oirat", -- Kalmyk
["xcl"] = "Old Armenian", -- Classical Armenian
["yua"] = "Yucatec Maya", -- Yucateco
--<end do-not-edit except to comment out>--
------------------------------< P R I V A T E _ U S E _ T A G S >----------------------------------------------
["akk-x-latbabyl"] = "Late Babylonian Akkadian",
["akk-x-midassyr"] = "Middle Assyrian Akkadian",
["akk-x-midbabyl"] = "Middle Babylonian Akkadian",
["akk-x-neoassyr"] = "Neo-Assyrian Akkadian",
["akk-x-neobabyl"] = "Neo-Babylonian Akkadian",
["akk-x-old"] = "Old Akkadian",
["akk-x-oldassyr"] = "Old Assyrian Akkadian",
["akk-x-oldbabyl"] = "Old Babylonian Akkadian",
["alg-x-proto"] = "Proto-Algonquian", -- alg in IANA is Algonquian languages
["ca-x-old"] = "Old Catalan",
["cel-x-combrit"] = "Common Brittonic", -- cel in IANA is Celtic languages
["cel-x-proto"] = "Proto-Celtic",
["egy-x-demotic"] = "Demotic Egyptian",
["egy-x-late"] = "Late Egyptian",
["egy-x-middle"] = "Middle Egyptian",
["egy-x-old"] = "Old Egyptian",
["gem-x-proto"] = "Proto-Germanic", -- gem in IANA is Germanic languages
["gmw-x-ecg"] = "East Central German",
["grc-x-aeolic"] = "Aeolic Greek", -- these grc-x-... codes are preferred alternates to the non-standard catchall code grc-gre
["grc-x-arcadcyp"] = "Arcadocypriot Greek",
["grc-x-attic"] = "Attic Greek",
["grc-x-biblical"] = "Biblical Greek",
["grc-x-byzant"] = "Byzantine Greek",
["grc-x-classic"] = "Classical Greek",
["grc-x-doric"] = "Doric Greek",
["grc-x-hellen"] = "Hellenistic Greek",
["grc-x-ionic"] = "Ionic Greek",
["grc-x-koine"] = "Koinē Greek",
["grc-x-medieval"] = "मध्यकालीन यूनानी",
["grc-x-patris"] = "Patristic Greek",
["grk-x-proto"] = "Proto-Greek", -- grk in IANA is Greek languages
["iir-x-proto"] = "Proto-Indo-Iranian", -- iir in IANA is Indo-Iranian Languages
["inc-x-mitanni"] = "Mitanni-Aryan", -- inc in IANA is Indic languages
["inc-x-proto"] = "Proto-Indo-Aryan",
["ine-x-anatolia"] = "Anatolian languages",
["ine-x-proto"] = "Proto-Indo-European",
["ira-x-proto"] = "Proto-Iranian", -- ira in IANA is Iranian languages
["itc-x-proto"] = "Proto-Italic", -- itc in IANA is Italic languages
["ksh-x-colog"] = "Colognian", -- en.wiki article is Colognian; ksh (Kölsch) redirects there
["la-x-medieval"] = "Medieval Latin",
["la-x-new"] = "New Latin",
["lmo-x-berg"] = "Bergamasque", -- lmo in IANA is Lombard; Bergamasque is a dialect
["lmo-x-cremish"] = "Cremish", -- lmo in IANA is Lombard; Cremish is a dialect
["lmo-x-milanese"] = "Milanese", -- lmo in IANA is Lombard; Milanese is a dialect
["mis-x-ripuar"] = "Ripuarian", -- replaces improper use of ksh in wp_languages
["prg-x-old"] = "Old Prussian",
["sem-x-ammonite"] = "Ammonite",
["sem-x-aramaic"] = "Aramaic",
["sem-x-canaan"] = "Canaanite languages",
["sem-x-dumaitic"] = "Dumaitic",
["sem-x-egurage"] = "Eastern Gurage",
["sem-x-hatran"] = "Hatran Aramaic",
["sem-x-oldsoara"] = "Old South Arabian",
["sem-x-palmyren"] = "Palmyrene Aramaic",
["sem-x-proto"] = "Proto-Semitic",
["sem-x-taymanit"] = "Taymanitic",
["sla-x-proto"] = "Proto-Slavic", -- sla in IANA is Slavic languages
["yuf-x-hav"] = "Havasupai", -- IANA name for these three is Havasupai-Walapai-Yavapai
["yuf-x-wal"] = "Walapai",
["yuf-x-yav"] = "Yavapai",
["xsc-x-pontic"] = "Pontic Scythian", -- xsc in IANA is Scythian
["xsc-x-saka"] = "Saka",
["xsc-x-sarmat"] = "Sarmatian",
}
--[[--------------------------< A R T I C L E _ L I N K >------------------------------------------------------
for those rare occasions when article titles don't fit with the normal '<language name> language', this table
maps language code to article title. Use of this table should be avoided and the use of redirects preferred as
that is the long-standing method of handling article names that don't fit with the normal pattern
]]
local article_name = {
['kue'] = "Kuman language (New Guinea)", -- Kuman (Papua New Guinea); to avoid Kuman dab page
["lij-mc"] = "Monégasque dialect", -- Ligurian as spoken in Monaco
['mbo'] = "Mbo language (Cameroon)", -- Mbo (Cameroon)
['mnh'] = "Mono language (Congo)", -- Mono (Democratic Republic of Congo); see Template_talk:Lang#Mono_languages
['mnr'] = "Mono language (California)", -- Mono (USA)
['mru'] = "Mono language (Cameroon)", -- Mono (Cameroon)
["snq"] = "Sangu language (Gabon)", -- Sangu (Gabon)
["toi"] = "Tonga language (Zambia and Zimbabwe)", -- Tonga (Zambia and Zimbabwe); to avoid Tonga language dab page
["vwa"] = "Awa language (China)", -- Awa (China); to avoid Awa dab page
["xlg"] = "Ligurian language (ancient)", -- see Template_talk:Lang#Ligurian_dab
["zmw"] = "Mbo language (Congo)", -- Mbo (Democratic Republic of Congo)
}
--[=[-------------------------< R T L _ S C R I P T S >--------------------------------------------------------
ISO 15924 scripts that are written right-to-left. Data in this table taken from [[ISO 15924#List of codes]]
last update to this list: 2017-12-24
]=]
local rtl_scripts = {
'adlm', 'arab', 'aran', 'armi', 'avst', 'cprt', 'egyd', 'egyh', 'hatr', 'hebr',
'hung', 'inds', 'khar', 'lydi', 'mand', 'mani', 'mend', 'merc', 'mero', 'narb',
'nbat', 'nkoo', 'orkh', 'palm', 'phli', 'phlp', 'phlv', 'phnx', 'prti', 'rohg',
'samr', 'sarb', 'sogd', 'sogo', 'syrc', 'syre', 'syrj', 'syrn', 'thaa', 'wole',
};
--[[--------------------------< T R A N S L I T _ T I T L E S >------------------------------------------------
This is a table of tables of transliteration standards and the language codes or language scripts that apply to
those standards. This table is used to create the tool-tip text associated with the transliterated text displayed
by some of the {{lang-??}} templates.
These tables are more-or-less copied directly from {{transl}}. The standard 'NO_STD' is a construct to allow for
the cases when no |std= parameter value is provided.
]]
local translit_title_table = {
['ahl'] = {
['default'] = 'Academy of the Hebrew Language transliteration',
},
['ala'] = {
['default'] = 'American Library Association – Library of Congress transliteration',
},
['ala-lc'] = {
['default'] = 'American Library Association – Library of Congress transliteration',
},
['batr'] = {
['default'] = 'Bikdash Arabic Transliteration Rules',
},
['bgn/pcgn'] = {
['default'] = 'Board on Geographic Names / Permanent Committee on Geographical Names transliteration',
},
['din'] = {
['ar'] = 'DIN 31635 Arabic',
['fa'] = 'DIN 31635 Arabic',
['ku'] = 'DIN 31635 Arabic',
['ps'] = 'DIN 31635 Arabic',
['tg'] = 'DIN 31635 Arabic',
['ug'] = 'DIN 31635 Arabic',
['ur'] = 'DIN 31635 Arabic',
['arab'] = 'DIN 31635 Arabic',
['default'] = 'DIN transliteration',
},
['eae'] = {
['default'] = 'Encyclopaedia Aethiopica transliteration',
},
['hepburn'] = {
['default'] = 'Hepburn transliteration',
},
['hunterian'] = {
['default'] = 'Hunterian transliteration',
},
['iast'] = {
['default'] = 'International Alphabet of Sanskrit transliteration',
},
['iso'] = { -- when a transliteration standard is supplied
['ab'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['ba'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['be'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['bg'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['kk'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['ky'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['mn'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['ru'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['tg'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['uk'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['bua'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['sah'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['tut'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['xal'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['cyrl'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['cyrs'] = 'ISO 9 Cyrillic',
['ar'] = 'ISO 233 Arabic',
['ku'] = 'ISO 233 Arabic',
['ps'] = 'ISO 233 Arabic',
['ug'] = 'ISO 233 Arabic',
['ur'] = 'ISO 233 Arabic',
['arab'] = 'ISO 233 Arabic',
['he'] = 'ISO 259 Hebrew',
['yi'] = 'ISO 259 Hebrew',
['hebr'] = 'ISO 259 Hebrew',
['el'] = 'ISO 843 Greek',
['grc'] = 'ISO 843 Greek',
['ja'] = 'ISO 3602 Japanese',
['hira'] = 'ISO 3602 Japanese',
['hrkt'] = 'ISO 3602 Japanese',
['jpan'] = 'ISO 3602 Japanese',
['kana'] = 'ISO 3602 Japanese',
['zh'] = 'ISO 7098 Chinese',
['chi'] = 'ISO 7098 Chinese',
['cmn'] = 'ISO 7098 Chinese',
['zho'] = 'ISO 7098 Chinese',
-- ['han'] = 'ISO 7098 Chinese', -- unicode alias of Hani? doesn't belong here? should be Hani?
['hans'] = 'ISO 7098 Chinese',
['hant'] = 'ISO 7098 Chinese',
['ka'] = 'ISO 9984 Georgian',
['kat'] = 'ISO 9984 Georgian',
['arm'] = 'ISO 9985 Armenian',
['hy'] = 'ISO 9985 Armenian',
['th'] = 'ISO 11940 Thai',
['tha'] = 'ISO 11940 Thai',
['ko'] = 'ISO 11941 Korean',
['kor'] = 'ISO 11941 Korean',
['awa'] = 'ISO 15919 Indic',
['bho'] = 'ISO 15919 Indic',
['bn'] = 'ISO 15919 Indic',
['bra'] = 'ISO 15919 Indic',
['doi'] = 'ISO 15919 Indic',
['dra'] = 'ISO 15919 Indic',
['gon'] = 'ISO 15919 Indic',
['gu'] = 'ISO 15919 Indic',
['hi'] = 'ISO 15919 Indic',
['hno'] = 'ISO 15919 Indic',
['inc'] = 'ISO 15919 Indic',
['kn'] = 'ISO 15919 Indic',
['kok'] = 'ISO 15919 Indic',
['ks'] = 'ISO 15919 Indic',
['mag'] = 'ISO 15919 Indic',
['mai'] = 'ISO 15919 Indic',
['ml'] = 'ISO 15919 Indic',
['mr'] = 'ISO 15919 Indic',
['ne'] = 'ISO 15919 Indic',
['new'] = 'ISO 15919 Indic',
['or'] = 'ISO 15919 Indic',
['pa'] = 'ISO 15919 Indic',
['pnb'] = 'ISO 15919 Indic',
['raj'] = 'ISO 15919 Indic',
['sa'] = 'ISO 15919 Indic',
['sat'] = 'ISO 15919 Indic',
['sd'] = 'ISO 15919 Indic',
['si'] = 'ISO 15919 Indic',
['skr'] = 'ISO 15919 Indic',
['ta'] = 'ISO 15919 Indic',
['tcy'] = 'ISO 15919 Indic',
['te'] = 'ISO 15919 Indic',
['beng'] = 'ISO 15919 Indic',
['brah'] = 'ISO 15919 Indic',
['deva'] = 'ISO 15919 Indic',
['gujr'] = 'ISO 15919 Indic',
['guru'] = 'ISO 15919 Indic',
['knda'] = 'ISO 15919 Indic',
['mlym'] = 'ISO 15919 Indic',
['orya'] = 'ISO 15919 Indic',
['sinh'] = 'ISO 15919 Indic',
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need for the clutter.
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नोएडा मेट्रो
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'''नोएडा मेट्रो''' ({{Langx|en|Noida Metro|italic=no}}) [[भारत]] का एक [[त्वरित परिवहन]] सिस्टम है,<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/gurgaon/metro-lines-cover-only-3-of-gurugram/articleshow/70905439.cms|title=Metro lines cover only 3% of Gurugram|access-date=3 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190831131021/https://timesofindia.indiatimes.com/city/gurgaon/metro-lines-cover-only-3-of-gurugram/articleshow/70905439.cms|archive-date=31 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> जो कि [[उत्तर प्रदेश]] राज्य के [[नोएडा]] और [[ग्रेटर नोएडा]] को जोड़ता है। इस मेट्रो नेटवर्क में कुल २१ स्टेशनों वाली एक लाइन है (जिसे [[एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|एक्वा लाइन]] कहा जाता है), जिसकी कुल लंबाई २९.७ किलोमीटर (१८.५ मील) है। सिस्टम में स्टैंडर्ड-गेज पटरियों का उपयोग करते हुए ग्रेड और एलिवेटेड स्टेशनों का मिश्रण है। सेवाएं रोजाना ५-१० मिनट के बीच बदलती रहती हैं।
लाइन का निर्माण २ चरणों में किया गया है। फेज-१ (डेल्टा-१ से सेक्टर ५१ तक) एवं फेज-२ (सेक्टर-७१ से नॉलेज पार्क-पंचम तक) २०१९ के मध्य में शुरू होकर २०२१ तक पूरा हो गया <ref>{{cite web |title=Noida extension to get metro soon - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/noida-extension-to-get-metro-soon/articleshow/66948947.cms |website=The Times of India |accessdate=6 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181206063319/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/noida-extension-to-get-metro-soon/articleshow/66948947.cms |archive-date=6 दिसंबर 2018 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |title=UP government approves 15-km Metro link between Noida Sec 71 and Greater Noida |url=https://www.hindustantimes.com/noida/up-government-approves-15-km-metro-link-between-noida-sec-71-and-greater-noida/story-9c5RxsjKgF9fICGTvD1VbO.html |website=Hindustan Times |accessdate=6 December 2018 |language=en |date=5 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181205150324/https://www.hindustantimes.com/noida/up-government-approves-15-km-metro-link-between-noida-sec-71-and-greater-noida/story-9c5RxsjKgF9fICGTvD1VbO.html |archive-date=5 दिसंबर 2018 |url-status=live }}</ref> अगस्त २०१८ में फेज-१ पर ट्रायल रन शुरू हुआ, और इसे १५ जनवरी २०१९ को आम जनता के लिए खोल दिया गया है।<ref>{{cite web |title=Aqua Line ready for launch, nod awaited from UP - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/aqua-line-ready-for-launch-nod-awaited-from-state/articleshow/67201102.cms |website=The Times of India |accessdate=22 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190109033533/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/aqua-line-ready-for-launch-nod-awaited-from-state/articleshow/67201102.cms |archive-date=9 जनवरी 2019 |url-status=live }}</ref>
उत्तर प्रदेश राज्य के स्वामित्व वाली '''नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन''' इस मेट्रो सिस्टम का निर्माता और मालिक है।<ref>{{cite web |title=After 1 year, NMRC to operate Aqua Line - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |website=The Times of India |accessdate=29 September 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181001033236/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |archive-date=1 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> पहले वर्ष में इस लाइन पर मेट्रो का संचालन [[दिल्ली मेट्रो रेल|डीएमआरसी]] द्वारा किया जाएगा।<ref>{{cite web |title=For 1 year, DMRC to operate Aqua Line - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |website=The Times of India |accessdate=29 September 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181001033236/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |archive-date=1 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> लाइन [[नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन]] पर [[दिल्ली मेट्रो रेल|दिल्ली मेट्रो]] से जुड़ती है।
वर्ष 2009 में नोएडा में मेट्रो सेवा शुरू हुई। मेट्रो की मदद से, नोएडा में रहने वाले व्यक्ति कनॉट प्लेस, द्वारका उप-शहर और नई दिल्ली से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, ऑपरेशन में एक और मेट्रो लिंक है, जो नोएडा को ग्रेटर नोएडा, जीएनआईडीए कार्यालय और सेक्टर 51 से जोड़ेगा<ref>{{Cite web|url=https://guestpostblogging.com/everything-you-need-to-know-about-the-noida-planned-city-in-india/|title=Metro services began in Noida in the year 2009|last=|first=|date=2020-02-06|website=|language=en-US|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-10-09}}</ref>।
==नेटवर्क==
[[File:Rapid Transit Map of Delhi.jpg|thumb|right|नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन दिल्ली रेल नेटवर्क का हिस्सा]]
=== चरण 1 ===
{{main|एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|नोएडा मेट्रो स्टेशनों की सूची}}
संचालित 29.7 किलोमीटर (18.5 मील) एक्वा लाइन में 21 स्टेशन हैं।<ref name="noidametrorail.com">{{cite web|title=STATIONS BETWEEN NOIDA-GREATER NOIDA|url=http://noidametrorail.com/?page_id=29|website=noidametrorail.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20160326040441/http://noidametrorail.com/?page_id=29|archive-date=26 March 2016|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/noida-metro-projects-still-offtrack/article6262485.ece|title=Noida Metro Projects Still Off-Track|author=Damini Nath|date=30 July 2014|newspaper=The Hindu}}</ref> यह लाइन नोएडा सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर सेक्टर 50, 76, 101, 81, एनएसईजेड, 83, 137, 142, 143, 144, 145, 146, 147 और 148 से होकर गुजरती है; इसके बाद यह ग्रेटर नोएडा में प्रवेश करती है और डिपो स्टेशन पर समाप्त होने से पहले पार्क-II, परी चौक, अल्फा-1, डेल्टा-1 और जीएनआईडीए कार्यालय से गुजरती है।
पूरा मार्ग एलिवेटेड ट्रैक पर है।<ref>{{cite web|url=http://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|title=Metro rail link between Noida and Greater Noida to be completed by 2017|date=2 May 2014|work=India TV News|access-date=27 दिसंबर 2024|archive-date=27 दिसंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241227122617/https://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|url-status=dead}}</ref> सभी स्टेशनों पर प्लैटफ़ॉर्म स्क्रीन डोर लगे हैं। एनएमआरसी के अनुसार, इस कॉरिडोर को 5,503 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। इस लाइन पर नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के साथ एक इंटरचेंज स्टेशन है।<ref>{{cite web |url=http://www.delhimetrorail.com/Phase-III_documetnt/pdf/61PH-III_DMRC_-Model.pdf |title=Metro Network Phase I, II, III & NCR |publisher=[[Delhi Metro Rail Corporation]] Ltd (DMRC) |date=February 2015 |access-date=2015-06-28}}</ref>
[[File:Noida Metro Map.svg|center|500px|thumb]]
{|class="wikitable" style="text-align: center;" width="100%"
|-
! style="background:#{{rail color|Noida Metro|Aqua}};" colspan="9" |'''[[एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|एक्वा लाइन]]'''
|-
! rowspan="2" |#
! colspan="2" |नाम
! rowspan="2" |(मीटर में) लंबाई
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! rowspan="2" |प्रारंभ
! rowspan="2" |जुड़ाव
! rowspan="2" |नक्शा
|-
!हिन्दी
!अंग्रेज़ी
|-
|-
|1||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 51}}'''||'''Noida Sector 51'''||0.000||0.000||25 जनवरी 2019||{{color box|#{{rail color|Delhi Metro|Blue}}; font-size:100%|[[Blue Line (Delhi Metro)|<span style="color:white;">'''ब्लू लाइन'''</span>]]|}}||उभरा हुआ
|-
|2||'''{{stl|Noida Metro|रेनबो}}'''||'''Rainbow / Noida Sector 50'''||1041.5||1041.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|3||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 76}}'''||'''Noida SEctor 76'''||2095.0||1053.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|4||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 101}}'''||'''Soida Sector 101'''||3105.2||1010.2||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|5||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 81}}'''||'''Noida Sector 81'''||4228.9||1123.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|6||'''{{stl|Noida Metro|एनएसईज़ेड}}'''||'''NSEZ'''||5153.3||924.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|7||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 83}}'''||'''Noida Sector 83'''||7130||1976.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|8||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 137}}'''||'''Noida Sector 137'''||8279.4||1149.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|9||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 142}}'''||'''Noida Sector 142'''||9631.1||1351.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|10||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 143}}'''||'''Noida Secotr 143'''||11279.1||1648.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|11||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 144}}'''||'''Noida Sector 144'''||12500.6||1221.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|12||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 145}}'''||'''Noida Sector 145'''||13852.8||1352.2||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|13||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 146}}'''||'''Noida Sector 146'''||15084.1||1231.3||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|14||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 147}}'''||'''Noida Sector 147'''||16617.1||1533.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|15||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 148}}'''||'''Noida Sector 148'''|| || ||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|16||'''{{stl|Noida Metro|नॉलेज पार्क 2}}'''||'''Knowledge Park II'''||19910.6||3293.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|17||'''{{stl|Noida Metro|परी चौक}}'''||'''Pari Chowk'''||22239||2328.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|18||'''{{stl|Noida Metro|अल्फा 1}}'''||'''ALPHA 1'''||24010.8||921.8||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|19||'''{{stl|Noida Metro|डेल्टा 1}}'''||'''DELTA 1'''||25096.7||1085.9||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|20||'''{{stl|Noida Metro|जीएनआईडीए कार्यालय}}'''||'''GNIDA Office'''||26182.6||1855.8||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|21||'''{{stl|Noida Metro|डिपो स्टेशन}}'''|| '''Depot (or Depot Station)'''||27881.4||1699.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|-
|}
=== चरण 2 ===
अगले चरण के प्रस्तावित मेट्रो रूट इस प्रकार हैं<ref>{{Cite web|url=https://nmrcnoida.com/PassengerInformation/RouteMap|title=Welcome to Noida Metro Rail Corporation Ltd.|website=nmrcnoida.com|access-date=2024-12-27}}</ref> -
* नोएडा सेक्टर 51 से नॉलेज पार्क 5
* नोएडा सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन
* ग्रेटर नोएडा से नोएडा एयरपोर्ट
* बल्लभगढ़ से नोएडा एयरपोर्ट
==इन्हें भी देखें==
* [[दिल्ली मेट्रो]]
* [[रैपिड मेट्रो गुरुग्राम]]
* [[लखनऊ मेट्रो]]
* [[बंगलुरु मेट्रो]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20190819145052/http://www.nmrcnoida.com/ Noida – Greater Noida Metro Rail]
* [https://nmrcnoida.com/PassengerInformation/RouteMap Current and Proposed Maps for Noida Metro - NMRC]]
{{Noida Metro}}
[[श्रेणी:मेट्रो रेल]]
[[श्रेणी:नोएडा]]
[[श्रेणी:नोएडा मेट्रो]]
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text/x-wiki
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| imagesize = 150px
}}
'''नोएडा मेट्रो''' ({{Langx|en|Noida Metro|italic=no}}) [[भारत]] का एक [[त्वरित परिवहन]] सिस्टम है,<ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/gurgaon/metro-lines-cover-only-3-of-gurugram/articleshow/70905439.cms|title=Metro lines cover only 3% of Gurugram|access-date=3 सितंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190831131021/https://timesofindia.indiatimes.com/city/gurgaon/metro-lines-cover-only-3-of-gurugram/articleshow/70905439.cms|archive-date=31 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref> जो कि [[उत्तर प्रदेश]] राज्य के [[नोएडा]] और [[ग्रेटर नोएडा]] को जोड़ता है। इस मेट्रो नेटवर्क में कुल २१ स्टेशनों वाली एक लाइन है (जिसे [[एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|एक्वा लाइन]] कहा जाता है), जिसकी कुल लंबाई २९.७ किलोमीटर (१८.५ मील) है। सिस्टम में स्टैंडर्ड-गेज पटरियों का उपयोग करते हुए ग्रेड और एलिवेटेड स्टेशनों का मिश्रण है। सेवाएं रोजाना ५-१० मिनट के बीच बदलती रहती हैं।
लाइन का निर्माण २ चरणों में किया गया है। फेज-१ (डेल्टा-१ से सेक्टर ५१ तक) एवं फेज-२ (सेक्टर-७१ से नॉलेज पार्क-पंचम तक) २०१९ के मध्य में शुरू होकर २०२१ तक पूरा हो गया <ref>{{cite web |title=Noida extension to get metro soon - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/noida-extension-to-get-metro-soon/articleshow/66948947.cms |website=The Times of India |accessdate=6 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181206063319/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/noida-extension-to-get-metro-soon/articleshow/66948947.cms |archive-date=6 दिसंबर 2018 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |title=UP government approves 15-km Metro link between Noida Sec 71 and Greater Noida |url=https://www.hindustantimes.com/noida/up-government-approves-15-km-metro-link-between-noida-sec-71-and-greater-noida/story-9c5RxsjKgF9fICGTvD1VbO.html |website=Hindustan Times |accessdate=6 December 2018 |language=en |date=5 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181205150324/https://www.hindustantimes.com/noida/up-government-approves-15-km-metro-link-between-noida-sec-71-and-greater-noida/story-9c5RxsjKgF9fICGTvD1VbO.html |archive-date=5 दिसंबर 2018 |url-status=live }}</ref> अगस्त २०१८ में फेज-१ पर ट्रायल रन शुरू हुआ, और इसे १५ जनवरी २०१९ को आम जनता के लिए खोल दिया गया है।<ref>{{cite web |title=Aqua Line ready for launch, nod awaited from UP - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/aqua-line-ready-for-launch-nod-awaited-from-state/articleshow/67201102.cms |website=The Times of India |accessdate=22 December 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190109033533/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/aqua-line-ready-for-launch-nod-awaited-from-state/articleshow/67201102.cms |archive-date=9 जनवरी 2019 |url-status=live }}</ref>
उत्तर प्रदेश राज्य के स्वामित्व वाली '''नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन''' इस मेट्रो सिस्टम का निर्माता और मालिक है।<ref>{{cite web |title=After 1 year, NMRC to operate Aqua Line - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |website=The Times of India |accessdate=29 September 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181001033236/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |archive-date=1 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> पहले वर्ष में इस लाइन पर मेट्रो का संचालन [[दिल्ली मेट्रो रेल|डीएमआरसी]] द्वारा किया जाएगा।<ref>{{cite web |title=For 1 year, DMRC to operate Aqua Line - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |website=The Times of India |accessdate=29 September 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181001033236/https://timesofindia.indiatimes.com/city/noida/for-1-yr-dmrc-to-operate-aqua-line/articleshow/65957058.cms |archive-date=1 अक्तूबर 2018 |url-status=live }}</ref> लाइन [[नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन]] पर [[दिल्ली मेट्रो रेल|दिल्ली मेट्रो]] से जुड़ती है।
वर्ष 2009 में नोएडा में मेट्रो सेवा शुरू हुई। मेट्रो की मदद से, नोएडा में रहने वाले व्यक्ति कनॉट प्लेस, द्वारका उप-शहर और नई दिल्ली से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, ऑपरेशन में एक और मेट्रो लिंक है, जो नोएडा को ग्रेटर नोएडा, जीएनआईडीए कार्यालय और सेक्टर 51 से जोड़ेगा<ref>{{Cite web|url=https://guestpostblogging.com/everything-you-need-to-know-about-the-noida-planned-city-in-india/|title=Metro services began in Noida in the year 2009|last=|first=|date=2020-02-06|website=|language=en-US|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-10-09}}</ref>।
==नेटवर्क==
[[File:Rapid Transit Map of Delhi.jpg|thumb|right|नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन दिल्ली रेल नेटवर्क का हिस्सा]]
=== चरण 1 ===
{{main|एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|नोएडा मेट्रो स्टेशनों की सूची}}
संचालित 29.7 किलोमीटर (18.5 मील) एक्वा लाइन में 21 स्टेशन हैं।<ref name="noidametrorail.com">{{cite web|title=STATIONS BETWEEN NOIDA-GREATER NOIDA|url=http://noidametrorail.com/?page_id=29|website=noidametrorail.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20160326040441/http://noidametrorail.com/?page_id=29|archive-date=26 March 2016|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/noida-metro-projects-still-offtrack/article6262485.ece|title=Noida Metro Projects Still Off-Track|author=Damini Nath|date=30 July 2014|newspaper=The Hindu}}</ref> यह लाइन नोएडा सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन से शुरू होकर सेक्टर 50, 76, 101, 81, एनएसईजेड, 83, 137, 142, 143, 144, 145, 146, 147 और 148 से होकर गुजरती है; इसके बाद यह ग्रेटर नोएडा में प्रवेश करती है और डिपो स्टेशन पर समाप्त होने से पहले पार्क-II, परी चौक, अल्फा-1, डेल्टा-1 और जीएनआईडीए कार्यालय से गुजरती है।
पूरा मार्ग एलिवेटेड ट्रैक पर है।<ref>{{cite web|url=http://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|title=Metro rail link between Noida and Greater Noida to be completed by 2017|date=2 May 2014|work=India TV News|access-date=27 दिसंबर 2024|archive-date=27 दिसंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241227122617/https://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|url-status=dead}}</ref> सभी स्टेशनों पर प्लैटफ़ॉर्म स्क्रीन डोर लगे हैं। एनएमआरसी के अनुसार, इस कॉरिडोर को 5,503 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। इस लाइन पर नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के साथ एक इंटरचेंज स्टेशन है।<ref>{{cite web |url=http://www.delhimetrorail.com/Phase-III_documetnt/pdf/61PH-III_DMRC_-Model.pdf |title=Metro Network Phase I, II, III & NCR |publisher=[[Delhi Metro Rail Corporation]] Ltd (DMRC) |date=February 2015 |access-date=2015-06-28}}</ref>
[[File:Noida Metro Map.svg|center|500px|thumb]]
{|class="wikitable" style="text-align: center;" width="100%"
|-
! style="background:#{{rail color|Noida Metro|Aqua}};" colspan="9" |'''[[एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)|एक्वा लाइन]]'''
|-
! rowspan="2" |#
! colspan="2" |नाम
! rowspan="2" |(मीटर में) लंबाई
! rowspan="2" |(मीटर में) अंतर-स्टेशन दूरी
! rowspan="2" |प्रारंभ
! rowspan="2" |जुड़ाव
! rowspan="2" |नक्शा
|-
!हिन्दी
!अंग्रेज़ी
|-
|-
|1||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 51}}'''||'''Noida Sector 51'''||0.000||0.000||25 जनवरी 2019||{{rcb|Delhi Metro|Blue|croute}}||उभरा हुआ
|-
|2||'''{{stl|Noida Metro|रेनबो}}'''||'''Rainbow / Noida Sector 50'''||1041.5||1041.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|3||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 76}}'''||'''Noida SEctor 76'''||2095.0||1053.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|4||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 101}}'''||'''Soida Sector 101'''||3105.2||1010.2||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|5||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 81}}'''||'''Noida Sector 81'''||4228.9||1123.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|6||'''{{stl|Noida Metro|एनएसईज़ेड}}'''||'''NSEZ'''||5153.3||924.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|7||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 83}}'''||'''Noida Sector 83'''||7130||1976.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|8||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 137}}'''||'''Noida Sector 137'''||8279.4||1149.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|9||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 142}}'''||'''Noida Sector 142'''||9631.1||1351.7||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|10||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 143}}'''||'''Noida Secotr 143'''||11279.1||1648.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|11||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 144}}'''||'''Noida Sector 144'''||12500.6||1221.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|12||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 145}}'''||'''Noida Sector 145'''||13852.8||1352.2||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|13||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 146}}'''||'''Noida Sector 146'''||15084.1||1231.3||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|14||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 147}}'''||'''Noida Sector 147'''||16617.1||1533.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|15||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 148}}'''||'''Noida Sector 148'''|| || ||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|16||'''{{stl|Noida Metro|नॉलेज पार्क 2}}'''||'''Knowledge Park II'''||19910.6||3293.5||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|17||'''{{stl|Noida Metro|परी चौक}}'''||'''Pari Chowk'''||22239||2328.4||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|18||'''{{stl|Noida Metro|अल्फा 1}}'''||'''ALPHA 1'''||24010.8||921.8||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|19||'''{{stl|Noida Metro|डेल्टा 1}}'''||'''DELTA 1'''||25096.7||1085.9||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|20||'''{{stl|Noida Metro|जीएनआईडीए कार्यालय}}'''||'''GNIDA Office'''||26182.6||1855.8||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|21||'''{{stl|Noida Metro|डिपो स्टेशन}}'''|| '''Depot (or Depot Station)'''||27881.4||1699.0||25 जनवरी 2019||कोई नहीं||उभरा हुआ
|-
|-
|}
=== चरण 2 ===
अगले चरण के प्रस्तावित मेट्रो रूट इस प्रकार हैं<ref>{{Cite web|url=https://nmrcnoida.com/PassengerInformation/RouteMap|title=Welcome to Noida Metro Rail Corporation Ltd.|website=nmrcnoida.com|access-date=2024-12-27}}</ref> -
* नोएडा सेक्टर 51 से नॉलेज पार्क 5
* नोएडा सेक्टर 142 से बॉटनिकल गार्डन
* ग्रेटर नोएडा से नोएडा एयरपोर्ट
* बल्लभगढ़ से नोएडा एयरपोर्ट
==इन्हें भी देखें==
* [[दिल्ली मेट्रो]]
* [[रैपिड मेट्रो गुरुग्राम]]
* [[लखनऊ मेट्रो]]
* [[बंगलुरु मेट्रो]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20190819145052/http://www.nmrcnoida.com/ Noida – Greater Noida Metro Rail]
* [https://nmrcnoida.com/PassengerInformation/RouteMap Current and Proposed Maps for Noida Metro - NMRC]]
{{Noida Metro}}
[[श्रेणी:मेट्रो रेल]]
[[श्रेणी:नोएडा]]
[[श्रेणी:नोएडा मेट्रो]]
1wydlgopjvqzn8wymlsoq7y8d6067b5
सम्राट चौधरी
0
1010383
6541557
6540818
2026-04-17T10:33:34Z
~2026-23654-22
920807
यह एक छोटा सा बदलाव है इसमें शपथ की तारीख दी गई है
6541557
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox officeholder
| image = File:Nitish Kumar, Samrat Chaudhary and Vijay Sinha boarding on Patna Metro (cropped).jpg
| office = बिहार के मुख्यमंत्री
| order = 23वें
| term_start = 15 अप्रैल 2026
| term_end =
| predecessor = [[नीतीश कुमार]]
| successor =
| office1 = उप मुख्यमंत्री, [[बिहार]]
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| term_start1 = 28 जनवरी 2024
| term_end1 = 14 अप्रैल 2026
| 1blankname1 = [[बिहार के मुख्यमंत्रियों की सूची|मुख्यमंत्री]]
| 1namedata1 = [[नीतीश कुमार]]
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| office8 = विधायक, [[बिहार विधान परिषद]]
| term_start8 = 29 जून 2020
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| constituency10 = [[तारापुर]]
| term_start11 = 24 नवम्बर 2010
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| successor12 = रामानंद प्रसाद सिंह
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}}
'''सम्राट चौधरी '''<ref>{{Cite web |title=Home - Show Member Personal Details |url=https://vidhanparishad.bihar.gov.in/profile/77 |access-date=2025-10-03 |website=vidhanparishad.bihar.gov.in}}</ref> (जन्म 16 नवंबर 1968), जिन्हें उनके उपनाम राकेश कुमार से भी जाना जाता है , एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान में 2024 से विजय कुमार सिन्हा के साथ नीतीश कुमार के अधीन बिहार के 8वें उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे, अब मुख्यमंत्री चुन गए हैं, इन्होंने 15 अप्रैल 2026 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली<ref>{{Cite web|url=https://gyanok.com/state/bihar/who-is-samrat-chaudhary-bihar-new-cm-bjp-news/|title=Bihar New CM: कौन हैं सम्राट चौधरी? जिन्हें बीजेपी ने सौंपी बिहार की कमान, विधायक दल की बैठक में हुआ बड़ा फैसला - gyanok.com|date=2026-04-14|language=en-US|access-date=2026-04-17}}</ref>। वे 2025 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने जाने से पहले भारतीय जनता पार्टी से बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। वे मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 तक भाजपा बिहार राज्य इकाई के पार्टी अध्यक्ष रहे हैं। <ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|title=Mayukh, Samrat Choudhary BJP candidates for Bihar MLC polls|website=India Today|date=24 June 2020 |accessdate=15 November 2020|archive-date=14 October 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201014013022/https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|title=बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 9 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, JDU-RJD का दिखा दबदबा|website=newsnationtv|date=29 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201115202848/https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|accessdate=15 November 2020|archive-date=15 November 2020|quote=The JDU's winning in Bihar Legislative Council are Dr. Kumud Verma, Professor Ghulam and Bhisam Sahni. While RJD to Mo Farooq, Rambali Singh and Sunil Kumar Singh have been made MLCs. On the other hand, Sanjay Prakash and Samrat Chaudhary from BJP have secured MLC seat while Sameer Kumar Singh from Congress has got a place in Bihar Legislative Council. }}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|title=NDA Candidates File Nomination Papers For Council Elections In Bihar|website=NDTV|accessdate=15 November 2020|archive-date=6 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200906215845/https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|url-status=live}}</ref>
वे राष्ट्रीय जनता दल सरकार में विधान सभा के और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। चौधरी बिहार राज्य के लिए भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में 2019 में अपना पहला कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2020 में एमएलसी के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं ।2022 में, उन्हें बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया । 2024 में, उन्हें माल और सेवा कर दर युक्तिकरण पैनल पर मंत्रियों के समूह का संयोजक भी बनाया गया। वह बिहार सरकार में वर्तमान मुख्यमंत्री हैं ।
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय राजनीति]]
tcs78d6nv45lfucmrh0m30azjuj0xly
सदस्य वार्ता:Technical Arpit Porwal Ji
3
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6539913
2026-04-17T11:58:53Z
DreamRimmer
651050
[[विशेष:योगदान/अजीत कुमार तिवारी|अजीत कुमार तिवारी]] के अवतरण 5290319 पर पुनर्स्थापित : अस्वीकृत; वैध संपादन इतिहास वाले वार्ता पृष्ठों को सामान्यतः हटाया नहीं जाता है
6541583
wikitext
text/x-wiki
== [[:सदस्य:Education guruji upmsp|सदस्य:Education guruji upmsp]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:सदस्य:Education guruji upmsp|सदस्य:Education guruji upmsp]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#स3|मापदंड स3]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#स3|स3]]{{*}} वेब होस्ट के रूप में विकिपीडिया का स्पष्ट दुरुपयोग'''</center>
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==मुंशी प्रेमचंद विकिपीडिया के संदर्भ में==
{{PAGENAME}} जी, क्या आपने [[प्रेमचंद]] लेख नहीं देखा है अब तक? यह लेख आप किस उद्देश्य से बना रहे हैं? --[[User:अजीत कुमार तिवारी|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''अजीत कुमार तिवारी'''</span>]]<sup>[[User talk:अजीत कुमार तिवारी|<span style="color:green"> '''बातचीत'''</span>]]</sup> 14:01, 20 अगस्त 2021 (UTC)
rbkgyt1w9x6b0h4hu7t3po4bbszwvib
वीडियो होस्टिंग सेवा
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2026-04-17T09:11:36Z
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[[Special:Contributions/~2026-23199-71|~2026-23199-71]] ([[User talk:~2026-23199-71|Talk]]) के संपादनों को हटाकर [[User:Bara Zeroun|Bara Zeroun]] के आखिरी अवतरण को पूर्ववत किया
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text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=मार्च 2025}}
'''ऑनलाइन वीडियो प्लेटफॉर्म''' (offline video platform; '''ओवीपी'''), जस्ट '''वीडियो होस्टिंग सेवा''' द्वारा प्रदत वो सुविधा है जिसमें उपयोगकर्त्ता को [[अंतरजाल|इंटरनेट]] पर [[वीडियो]] सामग्री को अपलोड करने, संरक्षित करने और पुनः चलाने की अनुमति देता है।
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:वीडियो]]
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स्लो कुकर
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Manish Khouriwal
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संरचना और संदर्भों का सुधार
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[[चित्र:Crock pot parts.jpg|right|thumb|300px|स्लो कुकर के भाग]]
'''स्लो कुकर''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Slow cooker''), जिसे आमतौर पर ''क्रॉक पॉट'' (Crock-Pot) भी कहा जाता है, एक [[विद्युत उपकरण]] है जिसका उपयोग भोजन को अपेक्षाकृत कम तापमान पर लंबे समय तक पकाने के लिए किया जाता है।<ref>{{cite web |title=Slow cookers and food safety |url=https://www.fsis.usda.gov/food-safety/safe-food-handling-and-preparation/food-safety-basics/slow-cookers-and-food-safety |website=USDA |access-date=2026-04-17}}</ref>
यह उपकरण विशेष रूप से स्ट्यू, सूप और धीमी आँच पर पकने वाले व्यंजनों के लिए उपयोगी होता है। स्लो कुकर में खाना धीरे-धीरे पकता है, जिससे भोजन का स्वाद और पोषण बेहतर तरीके से बना रहता है।<ref>{{cite web |title=Slow Cooker Basics |url=https://www.nhs.uk/live-well/eat-well/how-to-use-a-slow-cooker/ |website=NHS |access-date=2026-04-17}}</ref>
== संरचना ==
स्लो कुकर सामान्यतः दो मुख्य भागों से बना होता है:
* एक आंतरिक बर्तन (आमतौर पर चीनी मिट्टी या धातु का)
* एक बाहरी विद्युत आवरण, जिसमें हीटिंग एलिमेंट (heating element) लगा होता है
जब उपकरण को बिजली से जोड़ा जाता है, तो बाहरी भाग में स्थित हीटिंग एलिमेंट गर्मी उत्पन्न करता है, जो आंतरिक बर्तन तक पहुँचती है और भोजन को समान रूप से पकाती है।
== कार्यप्रणाली ==
स्लो कुकर कम तापमान (लगभग 70°C से 95°C) पर लंबे समय तक भोजन पकाने के सिद्धांत पर कार्य करता है। इस प्रक्रिया में भोजन धीरे-धीरे नरम होता है और स्वाद अच्छी तरह विकसित होता है।<ref>{{cite web |title=What is a slow cooker? |url=https://www.bbcgoodfood.com/howto/guide/what-slow-cooker |website=BBC Good Food |access-date=2026-04-17}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:विद्युत उपकरण]]
[[श्रेणी:रसोई उपकरण]]
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डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय
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अरावली पर्वतमाला का पारिस्थितिक और पर्यावरणीय महत्वः
डॉ0 इन्दु शेखर उपाध्याय
पूर्व प्राचार्य
सन्त तुलसीदास पी0जी0 कालेज
कादीपुर,सुलतानपुर।
अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और पर्यावरणीय ढाल है, जो थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, दिल्ली-एनसीआर के लिए “हरे फेफड़ों“ का काम करती है, और धूल भरी आंधियों को नियंत्रित करती है, जिससे वायु गुणवत्ता बेहतर होती है। यह जैव विविधता का खजाना है, कई नदियों (जैसे बनास, साहिबी) का स्रोत है, और भूजल पुनर्भरण में मदद करती है, जिससे स्थानीय जलवायु और जल सुरक्षा बनी रहती है। अरावली पर्वतमाला सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत के पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के लिए एक ’जीवन-समर्थन प्रणाली’ है, जिसका संरक्षण पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पारिस्थितिक, पर्यावरणीय एवं जैव विविधता में योगदानः अरावली पर्वत थार रेगिस्तान के फैलाव के विपरीत एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है। ये भूजल पुनर्भरण, स्थानीय मौसम की स्थितियों को भी नियंत्रित करती हैं और एनसीआर को हरित फेफड़ों की तरह सेवाएं प्रदान करती हैं। यहाँ वार्षिक वर्षा 500-700 मिमी होती है, अरावली शृंखला प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र के रूप में कार्य करती है और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के जल निकासी क्षेत्रों को अलग करती है। अरावली परिदृश्य शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और आर्द्रभूमि का समर्थन करता है, जिसमें सहारा, प्रायद्वीपीय जैव विविधता का अनोखा मिश्रण पाया जाता है। यहाँ 22 वन्यजीव अभयारण्य और तीन बाघ अभयारण्य हैं तथा यह बाघ, तेंदुआ, भारतीय भेड़िया, स्लॉथ बियर तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिये आवास प्रदान करता है। कृषि, आजीविका और पशुपालनः अरावली क्षेत्र में कृषि वर्षा-निर्भर और जीविकोपार्जन-आधारित है, जिसमें बाज़रा, मक्का, गेहूँ, सरसों तथा दलहन उगाई जाती हैं। वहीं बड़े पैमाने पर पशुपालन और वन संसाधनों पर निर्भरता ग्रामीण आजीविकाओं के लिये पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।आर्थिक और खनिज महत्त्वः अरावली क्षेत्र खनिजों में समृद्ध है, जिसमें 70 से अधिक वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान खनिज शामिल हैं, जैसे जिंक, सीसा, चाँदी, टंगस्टन, संगमरमर और ग्रेनाइट। खनन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि के रूप में उभरा है, विशेषकर राजस्थान में, जो इस शृंखला का लगभग 80þ हिस्सा रखता है। अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण अरावली बेल्ट में गुरुग्राम, फरीदाबाद, जयपुर, अलवर और अजमेर जैसे प्रमुख औद्योगिक तथा शहरी केंद्र स्थित हैं।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्वः अरावली शृंखला में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जैसे चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ किले स्थित हैं।यह पुष्कर, अजमेर शरीफ, माउंट आबू और रानकपुर जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों का भी क्षेत्र है। यह ’भारत की प्राकृतिक हरी दीवार’ है, जो थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है। अरावली पर्वतमाला के बिना, राजस्थान और हरियाणा बहुत ज़्यादा सूखे होते। यह मानसूनी हवाओं को प्रभावित करती है और बारिश बढ़ाती है। अरावली पर्वतमाला से कई सदाबाही नदियाँ प्रवाहित होती हैं। मुख्य नदी बनास जो चंबल में बहती है,साबरमती - पश्चिम दिशा में बहने वाली एक बड़ी नदी है,लूणी नदी - कच्छ के रण में बहती है जबकि साहिबी नदी - यमुना नदी में जाकर मिलती है। ये नदियां स्थानीय सिंचाई, पेयजल और जीविका पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहाँ पर्याप्त खनिज पाए जाते हैं-राजस्थान में खेतड़ी की तांबा खदानें,जावर में जस्ता और सीसा की खदानें, मकराना एवं आबू में संगमरमर एवं ग्रेनाइट की खदाने आदि विशेष महत्व पूर्ण हैं। खनन से राजस्व तो प्राप्त हुआ है, लेकिन इसके कारण वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और भूमि का क्षरण हुआ है।
वर्तमान संकट(विवाद) : यहाँ वर्षा कम हो रही है। सरकार अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट चला रही है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि यहाँ के जंगलों को बचाना और उनका विस्तार करना बहुत ज़रूरी है। माइनिंग को कंट्रोल करना भी ज़रूरी है। पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और विज्ञान में इसका योगदान बहुत ज़्यादा है। हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए। अगर अरावली रेंज गायब हो गयी तो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को रेगिस्तान बनने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। अरावली की पहड़ियां इस वक्त पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच फंसी हुई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी है, जिसके बाद अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षरण के मुद्दे फिर से सुर्खियों में हैं। अरावली विवाद की जड़ें 1990 के दशक तक जाती हैं, जब अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की शिकायतें बढ़ीं। यह पर्वतमाला करीब 692 किलोमीटर लंबी है, जो गुजरात से दिल्ली तक फैली है। राजस्थान में इसका बड़ा हिस्सा है, जहां संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य खनिज प्रचुर हैं। लेकिन इन खनिजों के खनन से पहाड़ियां गायब हो रही हैं, जल स्तर गिर रहा है और वन्यजीवों का आवास नष्ट हो रहा है। पर्यावरणवादियों का कहना है कि नई परिभाषा से 90 प्रतिशत अरावली खनन के लिए खुल जाएगी, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी होगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, सरकारी नीतियों और पर्यावरणविदोंं की याचिकाओं के बीच फंसे इस मामले का पूरा कालक्रम पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करता है।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा से वंचित सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के मार्ग प्रशस्ति करती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है। वस्तुतः अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है एक तरफ सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण व इसे हरित बनाये रखने के उद्देश्य से बजट 2025-26 में, 250 करोड़ रुपये राशि की ’हरित अरावली विकास परियोजना शुरू करने की घोषणा करी गई थी। दूसरी तरफ उसी अरावली पर्वतमाला को अब खनन के लिए सौंपा जा रहा है। ये विडंबना नहीं है तो क्या है? अरावली वह प्राकृतिक दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा लू और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में प्रवेश करने से रोकती है। इस दीवार को कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। कुल मिलाकर, अरावली और खेजड़ी दोनों पर हो रहा यह हमला विकास नहीं, बल्कि विनाश की राजनीति है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि यहां अनियंत्रित खनन “देश की पारिस्थितिकी के लिए एक बड़ा खतरा“ है और इनकी सुरक्षा के लिए समान मानदंड निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसलिए, पारिस्थितिक स्थिरता, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के लिए इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली की एकसमान परिभाषा को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशें स्वीकार करते हुए कहा कि अब केवल 100 मीटर या उससे अधिक स्थानीय ऊंचाई वाले भूभाग को ही ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाएगा। साथ ही, 500 मीटर की दूरी के अंदर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां होने पर उन्हें ‘अरावली रेंज’ की श्रेणी में रखा जाएगा। इनके सहायक ढलान और आसपास के क्षेत्र भी संरक्षित रहेंगे। इस फैसले में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्रों के लिए नई खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक सतत खनन की व्यापक योजना तैयार नहीं हो जाती।
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'''ब्लैक जनवरी''' ({{lang-az|Qara Yanvar}}), जिसे '''ब्लैक सैटरडे'''' या ''जनवरी नरसंहार''' के नाम से भी जाना जाता है, एक [[विकट: नरसंहार' था |नरसंहार]] [[सोवियत]] [[लाल सेना]] और [[केजीबी]] [[गुप्त पुलिस|गुप्त पुलिस एजेंसी]] [[शांति]] द्वारा [[अज़रबैजानी लोग|अज़रबैजानी]] [ [विरोध]]अज़रबैजान के लोग [[स्वतंत्रता]] [[विकट:आंदोलन|आंदोलन]]। यह [[बाकू]], [[अज़रबैजान सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक]] में 19-20 जनवरी 1990 को [[सोवियत संघ के विघटन | सोवियत संघ के अंतिम वर्षों]] के दौरान हुआ था। जब लाल सेना और केजीबी ने प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी। परिणामस्वरूप, अज़रबैजान सोवियत संघ का हिस्सा बने रहने के लिए पूरी तरह से [[विक्ट: विरोध | विरोध]] बन गए और [[अज़रबैजान]] की स्वतंत्रता की योजना बनाना शुरू कर दिया। यह दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के अंत के साथ हुआ।
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{{हहेच लेख| कारण=[[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] नहीं।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सहकार भारती}}[[चित्र:Sahkar.jpg|अंगूठाकार|
{| class="wikitable"
!संक्षेपाक्षर
|सहकार भारती
|-
!स्थापना
|11 जनवरी 1978 ([[गणेश चतुर्थी]]
|-
!संस्थापक
|[[लक्ष्मणराव इनामदार]]
|-
!प्रकार
|स्वयंसेवी, निःस्वार्थ राष्ट्रभक्ति
|-
!वैधानिक स्थिति
|सक्रिय
|-
!उद्देश्य
|[[भारतीय राष्ट्रवाद]]
|-
!मुख्यालय
|[[मुम्बई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]
|-
!आदर्श वाक्य
|बिना संस्कार नहीं सहकार, बिना सहकार नहीं उद्धार
|-
!सेवित क्षेत्र
|[[भारत]]
|-
!विधि
|समूह चर्चा, बैठकों और अभ्यास के माध्यम से शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण
|-
!सदस्यता
|10-15 लाख(739 जनपद)
|-
!आधिकारिक भाषा
|[[संस्कृत भाषा|संस्कृत]], [[हिन्दी]]
|-
!अध्यक्ष
|डॉ उदय जोशी
|-
!संगठन मंत्री
|[https://sahakarbharati.org/2021/02/13/organising-secretary-shri-sanjay-pachpor/] [[संजय पाचपोर]]
|-
!संबद्धता
|[[संघ परिवार]]
|-
![[ध्येय वक्तव्य|ध्येय]]
|"आत्मनिर्भरता एवं आर्थिक स्वावलम्बन"<ref>{{cite web |title=सहकार भारती कार्यकर्ताओं से मिले राष्ट्रीय अधिकारी |url=https://www.livehindustan.com/jharkhand/lohardaga/story-national-officials-met-sahakar-bharati-workers-6306964.html |accessdate=20 अप्रैल 2022}}</ref><ref>{{cite web |title=लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही सहकारी भारती |url=https://www.amarujala.com/dehradun/sahakar-bharati-is-making-people-self-reliant-vikas-nagar-news-drn3674363189 |accessdate=12 जनवरी 2021}}</ref>
|-
!जालस्थल
|https://sahakarbharati.org/
|}
]]
'''सहकार भारती''' [[सहकार|सहकारिता]] के क्षेत्र में सक्रिय एक प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की संस्था है, जिसे [[राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ]] का आनुषंगिक संगठन माना जाता है। यह एक पंजीकृत [[अशासकीय संस्था]] है, जिसका उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से समाज में आर्थिक सुदृढ़ता और जनकल्याण को बढ़ावा देना है।
इस संस्था की स्थापना सन् 1978 में [[गणेश चतुर्थी]] के पावन अवसर पर [[पुणे]] में की गई थी।<ref>{{cite book |last1=संजीव |first1=उनियाल |title=RSS Ka Rahasya |publisher=बीएफसी प्रकाशन |url=https://www.google.co.in/books/edition/RSS_Ka_Rahasya/-r1PEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80&pg=PA124&printsec=frontcover |accessdate=19 नवंबर 2021}}</ref> उसी वर्ष 11 जनवरी को [[मुम्बई]] में इसे औपचारिक रूप से एक सामाजिक संस्था के रूप में स्थापित किया गया, जिसका मूल उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को अधिक सशक्त, संगठित और जनहितकारी स्वरूप प्रदान करना था।
सहकार भारती के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय [[माधवराव गोडबोले]] थे,<ref>{{cite web |title=स्वर्गीय श्री माधवराव उर्फ अन्नासाहेब गोडबोले |url=http://www.sahakarbharati.org/madhavraogodbole.htm |accessdate=9 नवंबर 2011 |archive-date=9 नवंबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111109191446/http://www.sahakarbharati.org/madhavraogodbole.htm |url-status=bot: unknown }}</ref> जिन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने सन् 1935 में [[सांगली]] में जनता सहकारी बैंक की स्थापना कर इस क्षेत्र में एक सुदृढ़ आधार निर्मित किया। संस्था के संस्थापक सदस्यों में सतीश मराठे का भी महत्वपूर्ण स्थान है, जो सहकारिता के अध्ययन और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष अनुसंधान संस्था के संस्थापक निदेशक के रूप में भी कार्यरत रहे हैं।<ref>{{cite web |title=श्री सतीश काशीनाथ मराठे |url=https://rbi.org.in/scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=3552 |accessdate=17 जून 2013}}</ref>
सहकार भारती का मूल ध्येय उत्पादक, वितरक और उपभोक्ता के बीच संतुलित एवं समन्वित संबंध स्थापित करना है,<ref>{{cite book |last1=डॉ. हरिश्चंद्र |first1=बर्थवाल |title=R.S.S. Ek Parichay |publisher=सुरुचि प्रकाशन |url=https://www.google.co.in/books/edition/R_S_S_Ek_Parichay/Iis5DwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80&pg=PA41&printsec=frontcover}}</ref> जिससे सहकारिता के माध्यम से आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके। यह संस्था न केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है, बल्कि सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करने का एक सशक्त प्रयास है।
* सहकार भारती का मूलमंत्र - '''बिना संस्कार नहीं सहकार'''<ref>{{cite book |last1=महेश |first1=शर्मा दत्त |title=1000 Sangh Prashnottari |publisher=प्रभात प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड |url=https://www.google.co.in/books/edition/1000_Sangh_Prashnottari/xlVQDwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80&pg=PT118&printsec=frontcover |accessdate=2 जनवरी 2020}}</ref>
अभी सहकार भारती का 18 कार्यकर्ताओं का एक केन्द्रीय दल है जिसमें 5 पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं। सभी 18 कार्यकर्ता देश में प्रवास करते हैं। सहकार-भारती की 5 मासिक पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं- [[अहमदाबाद|अमदाबाद]] से 'सहकार चेतना', [[पुणे]] से 'सहकार सुगंध' एवं [[ग्वालियर]] से 'सहकार श्री' "आर्थिक स्वालम्बन" और "स्मारिका" लखनऊ से प्रकाशित।<ref>{{cite web |title=लखनऊ में होगा सहकार भारती का राष्ट्रीय सम्मेलन, तैयारियां जारी |url=https://www.swadeshnews.in/state/uttar-pradesh/sahkar-bharti-national-meet-will-held-in-lucknow-765473 |accessdate=4 अगस्त 2021}}</ref> वर्तमान में सहकार भारती भारत के कुल 739 जनपदों में सक्रिय रूप के कार्य कर रही है।
[[चित्र:Sahkarbharti.jpg|अंगूठाकार|सहकर भारती का 7वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन]]
== उद्देश्य ==
सहकार भारती का मुख्य उद्देश्य जनता की आर्थिक सेवा द्वारा समाज का आर्थिक उत्थान करने वाली सहकारिता को शुद्ध करना एवं मजबूत बनाना है<ref>{{cite web |title=सहकारिता के विकास में सहकार भारती का योगदान महत्वपूर्ण |url=https://legendnews.in/sahakar-bharti-has-an-important-contribution-in-the-development-of-cooperatives-uday-joshi/ |accessdate=3 मार्च 2021 |archive-date=3 मार्च 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210303104952/http://legendnews.in/sahakar-bharti-has-an-important-contribution-in-the-development-of-cooperatives-uday-joshi/ |url-status=dead }}</ref>- जैसे सहकारिता में आए हुए दोषों को दूर करना, सहकारी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित एवं संस्कारित करना, सहकारिता का जनसाधारण में प्रचार व प्रसार करना, परिसंवाद, परिचर्चा, सम्मेलन, प्रशिक्षण वर्ग इत्यादि कार्यक्रमों द्वारा जन प्रबोधन करना, सहकारिता का साहित्य छापना, सहकारिता की समस्याओं को सुलझाने हेतु मार्गदर्शन करना, आदर्श सहकारी संस्थाएं आरम्भ करना, चलाना एवं बढ़ाना, समाजसेवी आदर्श सहकारिता-कार्यकर्ताओं को सम्मानित व संगठित करना तथा सहकारिता को समाजोपयोगी बनाना इत्यादि सहकार भारती के अन्य उद्देश्य एवं कार्य हैं।<ref>{{cite web |title=सहकार भारती की गतिविधियाँ |url=https://sahakarbharati.org/2021/02/05/activities-of-sahakar-bharati/ |accessdate=5 फरवरी 2021 |archive-date=28 जनवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220128185513/https://sahakarbharati.org/2021/02/05/activities-of-sahakar-bharati/ |url-status=dead }}</ref>
== पृठभूमि एवं इतिहास ==
[[भारत]] में [[सहकार]]िता १८९४ से आरम्भ हुई, ऐसा कहा जाता है। कारण तब [[वड़ोदरा|वडोदरा]] में प्रथम सहकारी संस्था गठित हुई। भारत के स्वाधीन होने के बाद भारत की सरकार ने सहकारिता को एक जनोपयोगी कार्य समझकर इसे बढ़ाने में पर्याप्त रुचि ली। आर्थिक मदद देकर इसे खूब प्रोत्साहित किया। परिणामस्वरूप सहकारिता का प्रचार गांव-गांव तक हो गया। आज देश में साढ़े छह लाख सहकारी संस्थाएं हैं, जिनसे इक्कीस करोड़ लोग जुड़े हैं। विश्व की सहकारिता का एक चौथाई भाग भारत में विभिन्न सहकारी संस्थाओं से जुड़ा हुआ है। सहकारिता की विभिन्न विधाएं भी देश में आरम्भ हो गईं। साख, गृह निर्माण, उपभोक्ता भंडार, यातायात, मुद्रण, मछुआरे, कर्मचारी, जुलाहे, क्रय-विक्रय, चीनी उद्योग, वस्त्र-उद्योग, बैंक इत्यादि सभी क्षेत्रों में सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं।
सरकारी उत्साह एवं प्रोत्साहन के कारण धीरे-धीरे सहकारी संस्थाएं सरकार-निर्भर हो गईं। ग्रेवाल समिति ने अपनी रपट में कहा था कि भारत में सहकारिता आन्दोलन पूर्णतः असफल हो गया है। रपट में आगे कहा गया कि इस आन्दोलन को सफल जरूर बनाना चाहिए, क्योंकि सहकारिता द्वारा ही सामान्य व्यक्ति का आर्थिक उत्थान सम्भव है। ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ कार्यकर्ताओं ने मिलकर सहकार भारती की स्थापना की।
'''<big>राष्ट्रीय पदाधिकारी</big>'''
{| class="wikitable"
|संरक्षक
|[https://sahakarbharati.org/2021/02/13/national-president-shri-ramesh-vaidya/ रमेश वैद्य] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220128185435/https://sahakarbharati.org/2021/02/13/national-president-shri-ramesh-vaidya/ |date=28 जनवरी 2022 }}
|कर्नाटक
|-
|राष्ट्रीय अध्यक्ष
|[[डॉ उदय वासुदेव जोशी]]
|मुंबई
|-
|राष्ट्रीय महामंत्री
|दीपक चौरसिया
|विहार
|-
|राष्ट्रीय संगठन मंत्री
|संजय पाचपोर
|मुंबई
|}
{| class="wikitable"
|राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
|सतीश मेढी
|महाराष्ट्र
|-
|राष्ट्रीय कार्यालय प्रमुख
|लक्ष्मण पात्र
|उत्तर प्रदेश
|-
|राष्ट्रीय सह कार्यालय प्रमुख (मुंबई)
|एडवोकेट गोविन्द झारीकर
|महाराष्ट्र
|-
|राष्ट्रीय सह कार्यालय प्रमुख (दिल्ली)
|हर्षद धर्माधिकारी
|दिल्ली
|-
|
|
|
|}
'''<big>राष्ट्रीय उपाध्यक्ष</big>'''
{| class="wikitable"
|राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
|प्रशांत बजर बरुआ
|आसम
|-
|राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
|केशव हरोदिया
|झारखंड
|-
|राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
|कृष्णा रेड्डी
|कर्नाटक
|}
'''<big>राष्ट्रीय मंत्री</big>'''
{| class="wikitable"
|राष्ट्रीय मंत्री
|एडवोकेट सुनील गुप्ता
|दिल्ली
|-
|राष्ट्रीय मंत्री
|
|
|-
|राष्ट्रीय मंत्री
|नन्दिनी राय
|बंगाल
|-
|राष्ट्रीय मंत्री
|अशोक तेकाम
|मध्य प्रदेश
|}
'''<big>राष्ट्रीय संपर्क/आईटी प्रकोष्ठ/सोशल मीडिया प्रकोष्ठ</big>'''
{| class="wikitable"
|राष्ट्रीय संपर्क प्रमुख
|दिलीप दादा पाटिल
|महाराष्ट्र
|-
|राष्ट्रीय आईटी प्रकोष्ठ प्रमुख
| दिलीप टिकेन
|महाराष्ट्र
|-
|राष्ट्रीय प्रमुख सोशल मीडिया प्रकोष्ठ
|कुलदीप कृष्ण पाण्डेय
|उत्तर प्रदेश
|-
|राष्ट्रीय सह प्रमुख सोशल मीडिया प्रकोष्ठ
|अंकेश मिश्र
|बिहार
|}
==इन्हें भी देखें==
*[[लक्ष्मणराव इनामदार]] -- सहकार भारती के संस्थापक
*[[सहकारिता]]
*[[सहकारिता का इतिहास]]
*[[भारत में सहकारिता आन्दोलन]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.sahakarbharati.org/ अखिल भारतीय सहकार भारती]
* [https://www.bhaskar.com/JHA-JAMS-OMC-MAT-latest-jamshedpur-news-023003-2787795-NOR.html/ सहकार भारती के सहयोग से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही सरकार- कृषि मंत्री]
* [https://www.jagran.com/uttarakhand/chamoli-sahakar-bharati-will-create-selfemployment-opportunities-through-group-22559898.html समूह के जरिये स्वरोजगार के अवसर पैदा करेगा सहकार भारती]
* [https://vskbharat.com/%E0%A4%AD%E0%A5%8B%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE/ भोपाल में सहकार भारती ने मनाया स्थापना दिवस]
* [https://bachpanexpress.com/states/--810139 सहकार भारती की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक केरल स्थित त्रिश्शूर के भागवत ग्राम में रविवार को संपन्न हुई]
{{संघ परिवार}}
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:भारत में सहकार]]
dw957t1zq85hxuf6pcen7fbyouaskx7
भारतीय क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा 2022
0
1379134
6541421
6214377
2026-04-17T02:58:41Z
अनिरुद्ध कुमार
18906
अनिरुद्ध कुमार ने अनुप्रेषण छोड़े बिना पृष्ठ [[2022 में आयरलैंड में भारतीय क्रिकेट टीम]] को [[भारतीय क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा 2022]] पर स्थानांतरित किया: सही नाम
6214377
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = 2022 में आयरलैंड में भारतीय क्रिकेट टीम
| team1_image = Cricket Ireland flag.svg
| team1_name = आयरलैंड
| team2_image = Flag of India.svg
| team2_name = भारत
| from_date = 26
| to_date = 28 जून 2022
| team1_captain = [[एंड्रयू बालबर्नी]]
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| team1_twenty20s_most_wickets = [[क्रेग यंग (क्रिकेटर)|क्रेग यंग]] (4)
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}}
[[भारत क्रिकेट टीम]] दो टी20 अंतरराष्ट्रीय (टी 20) मैच खेलने के लिए जून 2022 में [[आयरलैंड]] का दौरा करने वाली है। 1 मार्च 2022 को क्रिकेट आयरलैंड ने कार्यक्रम की घोषणा की। 15 जून 2022 को, आयरलैंड ने दो मैचों की शृंखला के लिए अपनी टीम का नाम दिया। बाद में उसी दिन, भारत ने भी मैचों के लिए अपनी टीम की पुष्टि की, जिसमें [[हार्दिक पांड्या]] को उनके कप्तान के रूप में नामित किया गया।
पहले टी20T में बारिश के कारण दो घंटे से अधिक की देरी हुई, इससे पहले मैच को प्रति पक्ष बारह ओवर तक कम कर दिया गया था। प्रत्येक पक्ष ने एक पदार्पण किया, जिसमें कॉनर ओलफर्ट ने आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, और उमरान मलिक ने भारत के लिए अपना पहला मैच खेला। आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपने बारह ओवरों में 108/4 का स्कोर बनाया, जिसमें हैरी टेक्टर ने नाबाद 64 रन बनाए। जवाब में भारत ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 9.2 ओवर में सात विकेट से मैच जीत लिया। दूसरे T20I में, भारत ने 225/7 का स्कोर बनाया, जिसमें आयरलैंड ने 221/5 का स्कोर बनाया। इसलिए भारत ने यह मैच चार रन से जीत लिया और सीरीज 2-0 से जीत ली।
==टीमें==
{| class="wikitable" style="text-align:center; margin:auto"
|-
!colspan=2|T20Is
|-
!{{cr|IRE}}
!{{cr|IND}}
|- style="vertical-align:top"
|
* [[एंड्रयू बालबर्नी]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[मार्क अडायर]]
* [[कर्टिस कैंपर]]
* [[गैरेथ डेलानी]]
* [[जॉर्ज डॉकरेल]]
* [[स्टीफन डोहेनी]]
* [[जोश लिटिल]]
* [[एंडी मैकब्राइन]]
* [[बैरी मैकार्थी]]
* [[कॉनर ओल्फर्ट]]
* [[पॉल स्टर्लिंग]]
* [[हैरी टेक्टर]]
* [[लोर्कन टकर]]
* [[क्रेग यंग (क्रिकेटर)|क्रेग यंग]]
|
* [[हार्दिक पंड्या]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[भुवनेश्वर कुमार]] ([[captain (cricket)#Vice-captain|उप कप्तान]])
* [[रवि बिश्नोई]]
* [[युजवेंद्र चहल]]
* [[रुतुराज गायकवाड़]]
* [[दीपक हूडा]]
* [[वेंकटेश अय्यर]]
* [[दिनेश कार्तिक]] ([[wicket-keeper|विकेट कीपर]])
* [[आवेश खान]]
* [[ईशान किशन]]
* [[उमरान मलिक]]
* [[अक्षर पटेल]]
* [[हर्शल पटेल]]
* [[संजू सैमसन]]
* [[अर्शदीप सिंह (क्रिकेटर)|अर्शदीप सिंह]]
* [[राहुल त्रिपाठी]]
* [[सूर्यकुमार यादव]]
|}
==टी20 सीरीज==
===1st T20I===
{{Single-innings cricket match
| date = 26 जून 2022
| time = 16:30
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|IRE}}
| team2 = {{cr|IND}}
| score1 = 108/4 (12 ओवर)
| runs1 = [[हैरी टेक्टर]] 64* (33)
| wickets1 = [[युजवेंद्र चहल]] 1/11 (3 ओवर)
| score2 = 111/3 (9.2 ओवर)
| runs2 = [[दीपक हूडा]] 47* (29)
| wickets2 = [[क्रेग यंग]] 2/18 (2 ओवर)
| result = भारत 7 विकेट से जीता
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1303307.html Scorecard]
| venue = [[मलाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड|द विलेज]], [[मलाहाइड]]
| umpires = [[मार्क हॉथोर्न]] (आयरलैंड) और [[पॉल रेनॉल्ड्स]] (आयरलैंड)
| motm = [[युजवेंद्र चहल]] (भारत)
| toss = भारत ने टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण के लिए चुना।
| rain = बारिश के कारण मैच को प्रति पक्ष 12 ओवर का कर दिया गया था।
| notes = [[कोनोर ओलफर्ट]] (आयरलैंड) और [[उमरान मलिक]] (भारत) दोनों ने अपने टी20ई डेब्यू किए।
* [[हार्दिक पांड्या]] ने पहली बार T20 में भारत की कप्तानी की।
}}
===2nd T20I===
{{Single-innings cricket match
| date = 28 जून 2022
| time = 16:30
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|IRE}}
| team2 = {{cr|IND}}
| score1 = 225/7 (20 ओवर)
| runs1 = [[दीपक हूडा]] 104 (57)
| wickets1 = [[मार्क अडायर]] 3/42 (4 ओवर)
| score2 = 221/5 (20 ओवर)
| runs2 = [[एंड्रयू बालबर्नी]] 60 (37)
| wickets2 = [[रवि बिश्नोई]] 1/41 (4 ओवर)
| result = भारत 4 रन से जीता|
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1303308.html Scorecard]
| venue = [[मलाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड|द विलेज]], [[मलाहाइड]]
| umpires = [[रोलैंड ब्लैक]] (आयरलैंड) और जेरेथ मैकक्रीडी (आयरलैंड)
| motm = [[दीपक हूडा]] (भारत)
| toss = भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
| rain =
| notes = [[दीपक हूडा]] (भारत) ने टी20ई में अपना पहला शतक बनाया।
* [[संजू सैमसन]] और [[दीपक हूडा]] ने T20I में दूसरे विकेट के लिए सबसे अधिक साझेदारी और T20I में 176 रनों के साथ भारत के लिए किसी भी विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी का नया रिकॉर्ड बनाया।
}}
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6541422
6541421
2026-04-17T02:59:56Z
अनिरुद्ध कुमार
18906
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:भारतीय क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा]] जोड़ी
6541422
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = 2022 में आयरलैंड में भारतीय क्रिकेट टीम
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}}
[[भारत क्रिकेट टीम]] दो टी20 अंतरराष्ट्रीय (टी 20) मैच खेलने के लिए जून 2022 में [[आयरलैंड]] का दौरा करने वाली है। 1 मार्च 2022 को क्रिकेट आयरलैंड ने कार्यक्रम की घोषणा की। 15 जून 2022 को, आयरलैंड ने दो मैचों की शृंखला के लिए अपनी टीम का नाम दिया। बाद में उसी दिन, भारत ने भी मैचों के लिए अपनी टीम की पुष्टि की, जिसमें [[हार्दिक पांड्या]] को उनके कप्तान के रूप में नामित किया गया।
पहले टी20T में बारिश के कारण दो घंटे से अधिक की देरी हुई, इससे पहले मैच को प्रति पक्ष बारह ओवर तक कम कर दिया गया था। प्रत्येक पक्ष ने एक पदार्पण किया, जिसमें कॉनर ओलफर्ट ने आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, और उमरान मलिक ने भारत के लिए अपना पहला मैच खेला। आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपने बारह ओवरों में 108/4 का स्कोर बनाया, जिसमें हैरी टेक्टर ने नाबाद 64 रन बनाए। जवाब में भारत ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 9.2 ओवर में सात विकेट से मैच जीत लिया। दूसरे T20I में, भारत ने 225/7 का स्कोर बनाया, जिसमें आयरलैंड ने 221/5 का स्कोर बनाया। इसलिए भारत ने यह मैच चार रन से जीत लिया और सीरीज 2-0 से जीत ली।
==टीमें==
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|
* [[एंड्रयू बालबर्नी]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[मार्क अडायर]]
* [[कर्टिस कैंपर]]
* [[गैरेथ डेलानी]]
* [[जॉर्ज डॉकरेल]]
* [[स्टीफन डोहेनी]]
* [[जोश लिटिल]]
* [[एंडी मैकब्राइन]]
* [[बैरी मैकार्थी]]
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* [[पॉल स्टर्लिंग]]
* [[हैरी टेक्टर]]
* [[लोर्कन टकर]]
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|
* [[हार्दिक पंड्या]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[भुवनेश्वर कुमार]] ([[captain (cricket)#Vice-captain|उप कप्तान]])
* [[रवि बिश्नोई]]
* [[युजवेंद्र चहल]]
* [[रुतुराज गायकवाड़]]
* [[दीपक हूडा]]
* [[वेंकटेश अय्यर]]
* [[दिनेश कार्तिक]] ([[wicket-keeper|विकेट कीपर]])
* [[आवेश खान]]
* [[ईशान किशन]]
* [[उमरान मलिक]]
* [[अक्षर पटेल]]
* [[हर्शल पटेल]]
* [[संजू सैमसन]]
* [[अर्शदीप सिंह (क्रिकेटर)|अर्शदीप सिंह]]
* [[राहुल त्रिपाठी]]
* [[सूर्यकुमार यादव]]
|}
==टी20 सीरीज==
===1st T20I===
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| date = 26 जून 2022
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| score1 = 108/4 (12 ओवर)
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* [[हार्दिक पांड्या]] ने पहली बार T20 में भारत की कप्तानी की।
}}
===2nd T20I===
{{Single-innings cricket match
| date = 28 जून 2022
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| score1 = 225/7 (20 ओवर)
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| score2 = 221/5 (20 ओवर)
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| notes = [[दीपक हूडा]] (भारत) ने टी20ई में अपना पहला शतक बनाया।
* [[संजू सैमसन]] और [[दीपक हूडा]] ने T20I में दूसरे विकेट के लिए सबसे अधिक साझेदारी और T20I में 176 रनों के साथ भारत के लिए किसी भी विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी का नया रिकॉर्ड बनाया।
}}
[[श्रेणी:भारतीय क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा]]
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6541422
2026-04-17T03:01:02Z
अनिरुद्ध कुमार
18906
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:२०२२ में क्रिकेट]] जोड़ी
6541423
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox cricket tour
| series_name = 2022 में आयरलैंड में भारतीय क्रिकेट टीम
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}}
[[भारत क्रिकेट टीम]] दो टी20 अंतरराष्ट्रीय (टी 20) मैच खेलने के लिए जून 2022 में [[आयरलैंड]] का दौरा करने वाली है। 1 मार्च 2022 को क्रिकेट आयरलैंड ने कार्यक्रम की घोषणा की। 15 जून 2022 को, आयरलैंड ने दो मैचों की शृंखला के लिए अपनी टीम का नाम दिया। बाद में उसी दिन, भारत ने भी मैचों के लिए अपनी टीम की पुष्टि की, जिसमें [[हार्दिक पांड्या]] को उनके कप्तान के रूप में नामित किया गया।
पहले टी20T में बारिश के कारण दो घंटे से अधिक की देरी हुई, इससे पहले मैच को प्रति पक्ष बारह ओवर तक कम कर दिया गया था। प्रत्येक पक्ष ने एक पदार्पण किया, जिसमें कॉनर ओलफर्ट ने आयरलैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया, और उमरान मलिक ने भारत के लिए अपना पहला मैच खेला। आयरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपने बारह ओवरों में 108/4 का स्कोर बनाया, जिसमें हैरी टेक्टर ने नाबाद 64 रन बनाए। जवाब में भारत ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 9.2 ओवर में सात विकेट से मैच जीत लिया। दूसरे T20I में, भारत ने 225/7 का स्कोर बनाया, जिसमें आयरलैंड ने 221/5 का स्कोर बनाया। इसलिए भारत ने यह मैच चार रन से जीत लिया और सीरीज 2-0 से जीत ली।
==टीमें==
{| class="wikitable" style="text-align:center; margin:auto"
|-
!colspan=2|T20Is
|-
!{{cr|IRE}}
!{{cr|IND}}
|- style="vertical-align:top"
|
* [[एंड्रयू बालबर्नी]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[मार्क अडायर]]
* [[कर्टिस कैंपर]]
* [[गैरेथ डेलानी]]
* [[जॉर्ज डॉकरेल]]
* [[स्टीफन डोहेनी]]
* [[जोश लिटिल]]
* [[एंडी मैकब्राइन]]
* [[बैरी मैकार्थी]]
* [[कॉनर ओल्फर्ट]]
* [[पॉल स्टर्लिंग]]
* [[हैरी टेक्टर]]
* [[लोर्कन टकर]]
* [[क्रेग यंग (क्रिकेटर)|क्रेग यंग]]
|
* [[हार्दिक पंड्या]] ([[captain (cricket)|कप्तान]])
* [[भुवनेश्वर कुमार]] ([[captain (cricket)#Vice-captain|उप कप्तान]])
* [[रवि बिश्नोई]]
* [[युजवेंद्र चहल]]
* [[रुतुराज गायकवाड़]]
* [[दीपक हूडा]]
* [[वेंकटेश अय्यर]]
* [[दिनेश कार्तिक]] ([[wicket-keeper|विकेट कीपर]])
* [[आवेश खान]]
* [[ईशान किशन]]
* [[उमरान मलिक]]
* [[अक्षर पटेल]]
* [[हर्शल पटेल]]
* [[संजू सैमसन]]
* [[अर्शदीप सिंह (क्रिकेटर)|अर्शदीप सिंह]]
* [[राहुल त्रिपाठी]]
* [[सूर्यकुमार यादव]]
|}
==टी20 सीरीज==
===1st T20I===
{{Single-innings cricket match
| date = 26 जून 2022
| time = 16:30
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|IRE}}
| team2 = {{cr|IND}}
| score1 = 108/4 (12 ओवर)
| runs1 = [[हैरी टेक्टर]] 64* (33)
| wickets1 = [[युजवेंद्र चहल]] 1/11 (3 ओवर)
| score2 = 111/3 (9.2 ओवर)
| runs2 = [[दीपक हूडा]] 47* (29)
| wickets2 = [[क्रेग यंग]] 2/18 (2 ओवर)
| result = भारत 7 विकेट से जीता
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1303307.html Scorecard]
| venue = [[मलाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड|द विलेज]], [[मलाहाइड]]
| umpires = [[मार्क हॉथोर्न]] (आयरलैंड) और [[पॉल रेनॉल्ड्स]] (आयरलैंड)
| motm = [[युजवेंद्र चहल]] (भारत)
| toss = भारत ने टॉस जीतकर क्षेत्ररक्षण के लिए चुना।
| rain = बारिश के कारण मैच को प्रति पक्ष 12 ओवर का कर दिया गया था।
| notes = [[कोनोर ओलफर्ट]] (आयरलैंड) और [[उमरान मलिक]] (भारत) दोनों ने अपने टी20ई डेब्यू किए।
* [[हार्दिक पांड्या]] ने पहली बार T20 में भारत की कप्तानी की।
}}
===2nd T20I===
{{Single-innings cricket match
| date = 28 जून 2022
| time = 16:30
| daynight =
| team1 = {{cr-rt|IRE}}
| team2 = {{cr|IND}}
| score1 = 225/7 (20 ओवर)
| runs1 = [[दीपक हूडा]] 104 (57)
| wickets1 = [[मार्क अडायर]] 3/42 (4 ओवर)
| score2 = 221/5 (20 ओवर)
| runs2 = [[एंड्रयू बालबर्नी]] 60 (37)
| wickets2 = [[रवि बिश्नोई]] 1/41 (4 ओवर)
| result = भारत 4 रन से जीता|
| report = [https://www.espncricinfo.com/ci/engine/match/1303308.html Scorecard]
| venue = [[मलाहाइड क्रिकेट क्लब ग्राउंड|द विलेज]], [[मलाहाइड]]
| umpires = [[रोलैंड ब्लैक]] (आयरलैंड) और जेरेथ मैकक्रीडी (आयरलैंड)
| motm = [[दीपक हूडा]] (भारत)
| toss = भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
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| notes = [[दीपक हूडा]] (भारत) ने टी20ई में अपना पहला शतक बनाया।
* [[संजू सैमसन]] और [[दीपक हूडा]] ने T20I में दूसरे विकेट के लिए सबसे अधिक साझेदारी और T20I में 176 रनों के साथ भारत के लिए किसी भी विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी का नया रिकॉर्ड बनाया।
}}
[[श्रेणी:भारतीय क्रिकेट टीम का आयरलैंड दौरा]]
[[श्रेणी:२०२२ में क्रिकेट]]
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पवई, विदिशा
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'''पवई''' (Pawai) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[विदिशा ज़िले]] में स्थित एक गाँव है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref>
पवई गांव जो पहले पवई जागीर के नाम से जाना जाता था बाद में पवई जागीर का नाम पवई कुरवाई हो गया पवई गांव सक्सेना परिवार के द्वारा बसाया गया था सबसे पहले करीब 1600 ईस्वी में श्री पवैया राय सक्सेना जी ने इस गाव को बसाया और उन्हीं के नाम पर इस गाव का नाम पवई हो गया सन 1731 में टीकाराम जी के पूर्वजों द्वारा करवाई नवाब इज्जत खान से हुए युद्ध में राणो जी सिंधिया साथ दिया था इस युद्ध के बाद इज्जत खान कहीं दूर कुरवाई नगर से भाग गया था उसके बाद उसने राणों जी सिंधिया से समझौता कर लिया , रानू जी सधिया ने युद्ध से पहले उनकी सेना ने एक रात इस पवई गांव में गुजारी थी सारी सेना नरेन नदी के किनारे डेरा डालकर रुकी इस युद्ध में सारे हिंदुओं ने राणों जी सिंधिया का साथ दिया और कुरवाई नबाब की हार हुई उसके बाद कुरवाई नबाब ने सिंधिया जी से समझौता किया कुरवाई हजारों लाखों रुपए लगान कर वसूली की गई, फिर प्रत्येक वर्ष की लगान कर वसूली कुरवाई नबाब से पवई आती थी फिर ये सामग्री विदिशा मुंशी प्रयाग दास जी के पास से होते हुए उज्जैन तक पहुंचती थी ये सिलसिला सन 1731 से 1811 तक रहा उसके बाद सिंधिया जी ने अपनी राजधानी ग्वालियर बना ली, कुरवाई नबाब इज्जत खान ने पानीपत युद्ध में अब्दाली का साथ दिया था इसके बाद मराठाओं माहिद जी सिंधिया ने इज्जत खान को उसके दो भाई और बेटो को पकड़ा जिनमें से इज्जत खान और उसके दोनों भाइयों की उल्टा लटकाकर खूब पिटाई लगाई गई जब ये अधमरे हो गए तो नरेन नदी के किनारे इन पर जंगली कुत्ते छोड़ दिए और जंगली कुत्तों ने इज्जत खान समेत तीन भाइयों को मार डाला इज्जत खान के बेटो हुर्मठ खान को मराठा महिद जी सिंधिया अपने साथ ले गए, वही पानीपत की लड़ाई में शहीद हुए वीर शिरोमणि श्री छोटे मुरब्बी लाल जी सक्सेना का चबूतरा माहिद जी सिंधिया ने बनवाया, बाद में गाव में वीर शिरोमणि श्री टीकाराम सक्सेना जी पवई दरबार का जन्म हुआ जिन्होंने कुरवाई नबाब मोहम्मद नजफ खान को मारकर अपने माता पिता और भाई की मौत का बदला लिया था, और दिलेर खान का वंश खत्म कर दिया था, उसके बाद नजफ खान के नाती मोनावर अली खान को मारकर कुरवाई नबाबो को वंश खत्म करने के करीब पहुँच गए थे, फिर कुरवाई नबाब याकूब खान को भोपाल में अपने सैनिको से घोड़े से गिरवाकर कुरवाई नबाब को जड़ से खत्म करने के करीब पहुँच गए थे, पवई गांव कभी पवई जागीर कहलाता था जहां के दरबार में कुरवाई नबाब को अपनी गर्दन झुका कर सारी बातें मानना पड़ती थीं जहां 1731 से 1933 तक दरबार सजता रहा कुरवाई नबाब को सर झुका कर सारी बातें मानना पड़ती थीं आज उस पवई गांव का नाम पवई कुरवाई हो गया
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:विदिशा ज़िला]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के गाँव]]
[[श्रेणी:विदिशा ज़िले के गाँव]]
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AMAN KUMAR
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[[विशेष:योगदान/संजीव कुमार|संजीव कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:संजीव कुमार|वार्ता]]) के अवतरण 6415603 पर पुनर्स्थापित : Spam
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'''पवई''' (Pawai) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[विदिशा ज़िले]] में स्थित एक गाँव है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[विदिशा ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:विदिशा ज़िला]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के गाँव]]
[[श्रेणी:विदिशा ज़िले के गाँव]]
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चंदर सिंह राही
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चंदर सिंह राही|birth_name=गौरी रावत भैंचो |birth_date=28 March 1942|birth_place=गिवाली, [[पौड़ी गढ़वाल]] [[उत्तराखंड]]|death_date=10 जनवरी 2016|death_place=[[नई दिल्ली]], [[भारत]]|known_for=भारतीय लोक संगीत, उत्तराखंड लोक संगीत, गढ़वाली लोक संगीत; शायरी}}
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
'''चंदर सिंह राही''' (जन्म '''चंदर सिंह नेगी''', 28 मार्च 1942 - 10 जनवरी 2016) [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]], भारत के एक प्रमुख लोक गायक, गीतकार, संगीतकार, कवि, कथाकार और सांस्कृतिक संरक्षक थे।
उत्तराखंड के संगीत और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी भक्ति की मान्यता में, उन्हें "उत्तराखंड लोक संगीत के [[भीष्म|भीष्म पितामह]] " के रूप में वर्णित किया गया है। <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/metroplus/some-lonely-peaks-for-chander-singh-rahi/article6092837.ece|title=Some lonely peaks for Chander Singh Rahi|last=Rajan|first=Anjana|date=2014-06-08|work=The Hindu|access-date=2018-09-11|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
राही का जन्म चंदर सिंह नेगी से दिलबर सिंह नेगी और सुंदरा देवी के घर मौददस्युन के एक गिवाली गांव में हुआ था। <ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/friday-review/Voice-of-a-people/article13999541.ece|title=Voice of a people|last=Rajan|first=Anjana|date=2016-01-14|work=The Hindu|access-date=2018-09-10|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> वह उत्तराखंड के [[गढ़वाल मण्डल|गढ़वाल]] में [[पौड़ी गढ़वाल जिला|पौड़ी]] की नायर घाटी के एक मामूली ''घड़ियाल'' परिवार से थे। <ref name=":6">{{Cite news|url=http://www.nainitalsamachar.com/an-interview-with-chandra-singh-rahi/|title='सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति'|last=नेगी|first=लक्ष्मण सिंह|date=2009-11-05|work=नैनीताल समाचार|access-date=2018-09-11|language=en-US|archive-date=21 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250221173619/http://www.nainitalsamachar.com/an-interview-with-chandra-singh-rahi/|url-status=dead}}</ref> राही और उनके भाई, देव राज रंगीला, <ref>{{Citation|last=Chugler Bagot|title=कलजुगी नारद किशना बगोट का हास्य ब्यंग (interview rakesh bhardwaj 2 )|date=2016-08-03|url=https://www.youtube.com/watch?v=qsU3YxM3NY8|access-date=2018-09-13}}</ref> ने ''पहाड़ी'' (पहाड़ियों से उत्पन्न) संगीत की परंपरा अपने पिता से सीखी, जो उत्तराखंड के ''[[जागर]]'' संगीत के गायक थे।
राही ने ''पहाड़ी'' संगीत की नींव सीखी, जिसमें सदियों पुराने पारंपरिक गीत, संगीत वाद्ययंत्र और [[हिमालय]] के संगीत से जुड़ी सांस्कृतिक प्रथाएं शामिल हैं, जीवन के शुरुआती दिनों में। एक बच्चे के रूप में, वह अपने पिता के साथ ठाकुली (थाकुली )
, डमरू(डोंर) और हुरुकी (हुडकी, हुडकु) सहित पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों पर गए। <ref name=":6"/> राही ने अपने वयस्क जीवन में केशव अनुरागी और उनके गुरु बचन सिंह के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखा। <ref name=":0"/>
== संगीत कैरियर ==
राही ने अपने गायन करियर की शुरुआत [[आकाशवाणी|ऑल इंडिया रेडियो]] (AIR) दिल्ली स्टेशन पर 13 मार्च 1963 को सेना के जवानों के लिए एक कार्यक्रम में "पर वीणा की" गीत के साथ की थी। <ref name=":6"/> <ref name=":1">{{Citation|last=mahendra negi|title=chander singh rahi|date=2014-01-15|url=https://www.youtube.com/watch?v=ppF69X3BfVY|access-date=2018-09-10}}</ref> उन्होंने 1972 में आकाशवाणी लखनऊ के लिए गाना शुरू किया। <ref name=":6" /> उन्होंने 1970 के दशक में उत्तराखंड में लोकप्रियता हासिल करना जारी रखा, जब उनके गाने आकाशवाणी [[नजीबाबाद]] स्टेशन से प्रसारित किए गए, और 1980 के दशक के बाद से, जब उनके गाने [[दूरदर्शन (चैनल)|दूरदर्शन]] पर प्रसारित किए गए। रेडियो पर सुनाई देने वाली वह पहली गढ़वाली आवाज थी। <ref name=":5">{{Cite news|url=http://www.newspost.live/en/rakesh-bhardwaj-if-music-be-the-food-of-love-play-on/|title=Rakesh Bhardwaj: If Music be the food of love, play on|date=2018-04-25|work=News Post|access-date=2018-09-10|language=en-US}}</ref> 1966 में, राही ने अपने गुरु, गढ़वाली कवि कन्हैयालाल डांडरियाल के लिए अपने प्रसिद्ध गीत (गीत) "दिल को उमाल" (दिल का बहना) की रचना की, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने उन्हें ''राही'' (यात्री) दिया था। <ref name=":0"/>
राही ने [[गढ़वाली भाषा|गढ़वाली]] और [[कुमाऊँनी भाषा|कुमाऊँनी]] भाषाओं में 550 से अधिक गीत गाए। उनका काम 140 से अधिक ऑडियो कैसेट पर उपलब्ध था। उन्होंने पूरे भारत में 1,500 से अधिक शो में लाइव प्रदर्शन किया। <ref name=":6"/> उनके कुछ प्रसिद्ध गीतों में फवा बाघा रे, "सर्ग तारा जूनयाली रात को सुनालो", "फ्योनलादिया, देख हिल्मा चंडी कू बताना", "चैता की चैतवाली", "भाना हो रंगीला भाना", "सतपुली का सेना मेरी बाउ सुरिला" शामिल हैं।, "टाइल धारू बोला मधुली", "टेरे चदरी छुटगये पिचने", और "सौली घुरा घुर"। उनका पहला रिकॉर्ड किया गया एल्बम, ''सौली घुरा घुर'', एक व्यावसायिक हिट था। <ref name=":2">{{Citation|last=Himalayan News|title=छ्वीं-बथा- वीरेंद्र नेगी दिवंगत लोकगायक चंद्रसिंह राही के ज्येष्ठ पुत्र {{!}}{{!}} Virendra Negi Singer|date=2016-03-30|url=https://www.youtube.com/watch?v=KOu8D3Sn5-w|access-date=2018-09-10}}</ref>
राही एक गीतकार और कवि भी थे। उनके कविता संग्रहों में ''दिल को उमाल'' (1966), ''ढाई'' (1980), ''रामछोल'' (1981) और ''गीत गंगा'' (2010) शामिल हैं। राही ने मोनोग्राफ भी लिखे और बैले के लिए संगीत तैयार किया।
राही को एकमात्र ऐसा व्यक्ति माना जाता था जो उत्तराखंड के सभी लोक वाद्ययंत्रों को बजा सकता था, जिसमें ढोल दमौ (ड्रम), शहनाई, दौर, थाली और हुरुकी शामिल थे। <ref>{{Cite web|url=http://www.ulpnet.com/2016/01/14/legendary-uttarakhand-folksinger-chandra-singh-rahi-passes-away/|title=Legendary Uttarakhand Folksinger Chandra Singh Rahi Passes Away|website=The Unlikely Partners Network|language=en-US|access-date=2018-09-10|archive-date=25 सितंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200925054117/https://www.ulpnet.com/2016/01/14/legendary-uttarakhand-folksinger-chandra-singh-rahi-passes-away/|url-status=dead}}</ref> उन्हें ''पहाड़ी'' संगीत के लिए अद्वितीय ताल अनुक्रमों (बीट पैटर्न) का भी ज्ञान था और वे इन तत्वों को अपनी संगीत प्रस्तुतियों में शामिल करेंगे।
राही ने "खुदर गीत", "संस्कार गीत", "बरहाई", "पनवाड़ा", "मेला गीत", "झौरा, पांडवानी", "चौनफला" सहित उत्तराखंड के विभिन्न लोक रूपों को शामिल करते हुए 2,500 से अधिक पुराने पारंपरिक गीतों को एकत्र और क्यूरेट किया। "," थड़िया ", और " [[जागर]] "। उनकी पुस्तक, ''ए कॉम्प्रिहेंसिव स्टडी ऑफ द सॉन्ग्स, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स, एंड डांस ऑफ द सेंट्रल हिमालय'', को उत्तरांचल साहित्य, संस्कृति और कला परिषद द्वारा प्रकाशित किया जाना था। <ref name=":3">{{Cite web|url=http://uttarakhandnews.blogspot.com/2006/12/folk-singers-need-better-deal-in-hill.html|title=Folk singers need better deal in hill society: Chander Singh 'Rahi'|language=en|access-date=2018-09-10}}</ref> वे उत्तराखंड के लोक वाद्ययंत्रों के भी शौकीन थे।
== व्यक्तिगत जीवन ==
राही ने दिल्ली में अपने शुरुआती दिनों के दौरान जीवनयापन के लिए बांसुरी बेची, जिसके लिए वह 1957 में अपने मूल गढ़वाल से चले गए थे। एक स्थिर आजीविका के लिए उनकी तलाश आखिरकार सफलतापूर्वक समाप्त हो गई जब उन्हें दूरसंचार विभाग के साथ सरकारी नौकरी मिल गई। राही 40 साल तक दिल्ली के शकरपुर मोहल्ले में किराए के मकान में रहा। उनके परिवार द्वारा बताया गया एक किस्सा यह है कि राही ने घर में निवेश करने के बजाय उत्तराखंडी लोक संगीत को रिकॉर्ड करने के लिए थोड़े से पैसे का निवेश करना चुना। <ref name=":0"/>
राही का 73 वर्ष की आयु में 10 जनवरी 2016 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। <ref name=":4">{{Cite news|url=https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|title=Folk singer Chandra Singh Rahi passes away|last=Pioneer|first=The|work=The Pioneer|access-date=2018-09-10|language=en|archive-date=9 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909221906/https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|url-status=dead}}</ref> उनके परिवार में पत्नी सुधा नेगी, चार बेटे (वीरेंद्र नेगी, महेंद्र नेगी, सतीश नेगी और राकेश भारद्वाज) और एक बेटी (निधि ठाकुर) हैं। <ref name=":2"/> उनका पूरा परिवार संगीत के क्षेत्र में शामिल है, जिसमें गायन, रचना, संगीत वाद्ययंत्र बजाना, उत्पादन और संगीत की दिशा शामिल है। कहा जाता है कि राही ने अपने सबसे बड़े बेटे वीरेंद्र नेगी को अपनी शिक्षा दी थी, जिन्होंने बचपन से ही अपने पिता के साथ संगीतकार और गायक के रूप में काम किया था। <ref name=":2" /> राही के सबसे छोटे बेटे, राकेश भारद्वाज, भारतीय रॉक-पॉप बैंड [[युफ़ोरिया|यूफोरिया]] में एक लयबद्ध, ने राही के लोकप्रिय उत्तराखंडी गीतों को अपनी संगीत कंपनी [https://www.youtube.com/channel/UCdlf3osFqQcMJSSgjVHGvbg पहाड़ी सोल] के माध्यम से ऑनलाइन रीमेक और रिलीज़ करके अपने दिवंगत पिता की विरासत को श्रद्धांजलि दी। <ref name=":5"/>
== श्रद्धांजलि, विरासत, और प्रभाव ==
राही को उनकी कला और बड़े पैमाने पर समुदाय के लिए जीने के लिए याद किया जाता है। <ref name=":0"/>
वह एक समग्र रूप से प्रतिभाशाली कलाकार थे, जो उत्तराखंड के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र गा सकते थे, लिख सकते थे, लिख सकते थे और बजा सकते थे। <ref name=":0"/> उन्हें अपने शिल्प की पेचीदगियों और महत्व की भी उत्कृष्ट समझ थी। अपनी रचनात्मक गतिविधियों के अलावा, राही को उत्तराखंड के संगीत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का गहरा शौक था। उन्हें उत्तराखंड की संगीत संस्कृति के ज्ञान का खजाना माना जाता था, जिस पर उन्होंने लगातार शोध किया, प्रतिनिधित्व किया और अपने श्रोताओं को समझाया। राही जौनसार से लेकर जौहर घाटी तक पूरे उत्तराखंड की लोककथाओं के ज्ञान के लिए जाने जाते थे। <ref>{{Cite web|url=http://www.merapahad.com/chandra-singh-rahi/|title=चन्द्र सिंह राही: उत्तराखण्ड की एक सांस्कृतिक थाती|website=www.merapahad.com|language=en-US|access-date=2018-09-12|archive-date=12 अक्तूबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221012113619/http://www.merapahad.com/chandra-singh-rahi/|url-status=dead}}</ref>
वह प्रामाणिक ''पहाड़ी'' संगीत प्रस्तुत करने में एक दृढ़ विश्वास रखते थे, और अपने बाद के वर्षों में उन्होंने भारतीय लोक संगीत के "बॉलीवुडकरण" और "वीसीडी संस्कृति" के साथ अपनी निराशा को खुले तौर पर व्यक्त किया। <ref name=":3"/> <ref name=":1"/> राही अपने वक्ताओं के मन में गढ़वाली, जौनसारी, भोटिया और कुमाऊँनी जैसी भाषाओं की प्रतिष्ठा के नुकसान से भी बहुत पीड़ित थे, जिसने उन्हें उत्तराखंड की अनूठी ''पहाड़ी'' संस्कृति की धीमी मृत्यु का संकेत दिया। <ref name=":6"/> वह उत्तराखण्ड राज्य सरकारों की सांस्कृतिक नीति की कमी के भी आलोचक थे। <ref name=":6" /> वह उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर पलायन से चिंतित थे, जिसे उन्होंने अपने 1980 के दशक के गीत "अपनी थी मा तू लौट के आइजा" के माध्यम से संबोधित करने की कोशिश की थी। <ref>{{Cite web|url=http://www.devbhoomimedia.com/the-song-was-sung-on-the-migration-of-late-chandra-singh-rahi-released/|title=स्वर्गीय चंद्र सिंह राही के पलायन पर गाये गीत का हुआ विमोचन - Dev Bhoomi Media|website=www.devbhoomimedia.com|access-date=2018-09-11}}</ref> राही का मानना था कि लोक संगीत के संरक्षण से उत्तराखंड की भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण में मदद मिलेगी। <ref name=":3" />
राही ने देश भर में, विशेष रूप से गढ़वाली और कुमाऊँनी के छात्रों को, पारंपरिक लोक रूपों और उनके द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली संस्कृति के बारे में अपने ज्ञान को लोकप्रिय बनाने और साझा करने के लिए प्रदर्शन व्याख्यान देना जारी रखा। <ref name=":3"/>
{{Quote box|quote="Rahi ji's demise has created an irreplaceable void in the music and culture horizon of Uttarakhand. He was almost singlehandedly responsible for restoring and curating hundreds of centuries old folk songs of the hill state."
- Veteran Garhwali folk singer Narendra Singh Negi|source=''Hindustan Times'', Lucknow{{full citation needed|date=March 2019}}}}
यह बताया गया है कि [[जागर]] गायक और [[पद्म श्री]] के प्राप्तकर्ता, प्रीतम भारतवान ने उनके निधन पर चंद्र सिंह राही की विरासत को याद करते हुए कहा था कि राही को एक अनूठी बजने वाली मधुर आवाज मिली थी जो उनके श्रोताओं पर जादू कर देगी। <ref>{{Cite news|url=https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|title=Folk singer Chandra Singh Rahi passes away|last=Daily|first=Pioneer|date=12 January 2016|access-date=31 March 2020|publisher=Daily Pioneer|agency=PNS|archive-date=9 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909221906/https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|url-status=dead}}</ref>
राही के गाने आज भी उत्तराखंड के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। उनके तीन प्रसिद्ध गीत - "फ्योनलाडिया" (2016), पारंपरिक अंचारी जागर, " ''चैता'' की चैतवाली" (2018) और "फवा बागा रे" (2019) - लोकप्रिय गढ़वाली / कुमाऊंनी गायक किशन महिपाल, अमित सागर और द्वारा कवर किए गए थे। क्रमशः पप्पू कार्की। "चैता की चैतवाली" का नया संस्करण YouTube पर पांच मिलियन व्यू तक पहुंचने वाला पहला उत्तराखंडी गीत बन गया। <ref>{{Cite news|url=http://www.doonwire.com/category/news/chaita-ki-chaitwal-becomes-the-most-popular-garhwali-song-on-youtube-18010301|title=Chaita Ki Chaitwal Becomes the Most Popular Garhwali Song on Youtube|date=2018-01-03|work=DoonWire|access-date=2018-09-10|language=en-US}}</ref>
2015 में, [[संगीत नाटक अकादमी]] (संगीत, नृत्य और नाटक के लिए राष्ट्रीय अकादमी) ने अकादमी की अभिलेखीय फिल्मों और वीडियो रिकॉर्डिंग की वार्षिक स्क्रीनिंग, अपनी संचार श्रृंखला में "चंद्र सिंह राही एंड पार्टी द्वारा गढ़वाल के लोक संगीत की स्क्रीनिंग" प्रस्तुत की। <ref>{{Cite web|url=https://indiaculture.nic.in/sangeet-natak-akademi-invites-you-screening-folk-music-garhwal-chandra-singh-rahi-party-14-march-4pm|title=Sangeet Natak Akademi invites you to the screening of Folk Music of Garhwal by Chandra Singh Rahi & Party 14 March 4pm|archive-url=https://web.archive.org/web/20150318081107/http://indiaculture.nic.in/sangeet-natak-akademi-invites-you-screening-folk-music-garhwal-chandra-singh-rahi-party-14-march-4pm|archive-date=18 March 2015|access-date=12 September 2018}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.delhievents.com/2015/01/sangeet-natak-akademi-presents_26.html|title=Sangeet Natak Akademi presents Screening of "Folk Music of Garhwal by Chandra Singh Rahi & Party" as part of Sanchayan - Screening of archival films & video recordings at Meghdoot Theatre, Rabindra Bhavan, 35, Ferozeshah Road > 4pm to 5pm on 14th March 2015|date=2015-03-14|work=Delhi Events|access-date=2018-09-12}}</ref>
राही की संगीत यात्रा के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लेखिका चारु तिवारी ने ''लोक का चित्र'' नामक पुस्तक लिखी है। <ref>{{Cite news|url=http://www.nainitalsamachar.com/lok-ka-yeh-kaisa-samman-hai/|title=लोक का यह कैसा सम्मान है ?|last=करगेती|first=चन्द्रशेखर|date=2016-02-07|work=नैनीताल समाचार|access-date=2018-09-12|language=en-US|archive-date=8 नवंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191108003522/http://www.nainitalsamachar.com/lok-ka-yeh-kaisa-samman-hai/|url-status=dead}}</ref>
राही की पुण्यतिथि पर हर साल, उनके परिवार और प्रशंसक दिल्ली में एक स्मरण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिसमें उनके संगीत प्रदर्शनों की सूची उनके परिवार के सदस्यों और उत्तराखंड के लोकप्रिय गायकों द्वारा प्रस्तुत की जाती है। <ref>{{Cite web|url=https://www.facebook.com/rahigharana/|title=Rahi Gharana|website=www.facebook.com|language=en|access-date=2018-09-11}}</ref> उनके बच्चे और पोते "राही [[घराना-संगीत|घराना]] " के तहत राही के संगीत और सांस्कृतिक वंश और शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं <ref>{{Cite web|url=https://www.navodayatimes.in/news/national/chandra-singh-rahis-wife-reaches-uttrakhand-for-a-function/69735/|title=लोक परम्परा संस्कृति में राही का सराहनीय योगदान, उत्तराखंड पहुंची पत्नी ने कहा...|website=www.navodayatimes.in|language=hi|access-date=2018-09-12}}</ref>
== पुरस्कार और मान्यता ==
* मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला सम्मान <ref name=":6"/>
* डॉ. शिवानंद नौटियाल स्मृति पुरस्कार <ref name=":6" />
* ''गढ़ भारती'', गढ़वाल सभा सम्मान पत्र (1995) <ref name=":6" />
* मोनाल संस्था, लखनऊ सम्मान पत्र <ref name=":6" />
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:उत्तराखण्ड की संस्कृति]]
[[श्रेणी:२०१६ में निधन]]
[[श्रेणी:1942 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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/* प्रारंभिक जीवन */
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चंदर सिंह राही|birth_name=गौरी रावत भैंचो |birth_date=28 March 1942|birth_place=गिवाली, [[पौड़ी गढ़वाल]] [[उत्तराखंड]]|death_date=10 जनवरी 2016|death_place=[[नई दिल्ली]], [[भारत]]|known_for=भारतीय लोक संगीत, उत्तराखंड लोक संगीत, गढ़वाली लोक संगीत; शायरी}}
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'''चंदर सिंह राही''' (जन्म '''चंदर सिंह नेगी''', 28 मार्च 1942 - 10 जनवरी 2016) [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]], भारत के एक प्रमुख लोक गायक, गीतकार, संगीतकार, कवि, कथाकार और सांस्कृतिक संरक्षक थे।
उत्तराखंड के संगीत और संस्कृति के प्रति उनकी गहरी भक्ति की मान्यता में, उन्हें "उत्तराखंड लोक संगीत के [[भीष्म|भीष्म पितामह]] " के रूप में वर्णित किया गया है। <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/metroplus/some-lonely-peaks-for-chander-singh-rahi/article6092837.ece|title=Some lonely peaks for Chander Singh Rahi|last=Rajan|first=Anjana|date=2014-06-08|work=The Hindu|access-date=2018-09-11|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
राही का जन्म चंदर सिंह नेगी से दिलबर सिंह नेगी और सुंदरा देवी के घर मौददस्युन के एक गिवाली गांव में हुआ था। <ref name=":0">{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/features/friday-review/Voice-of-a-people/article13999541.ece|title=Voice of a people|last=Rajan|first=Anjana|date=2016-01-14|work=The Hindu|access-date=2018-09-10|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> वह उत्तराखंड के [[गढ़वाल मण्डल|गढ़वाल]] में [[पौड़ी गढ़वाल जिला|पौड़ी]] की नायर घाटी के एक मामूली ''घड़ियाल'' परिवार से थे। <ref name=":6">{{Cite news|url=http://www.nainitalsamachar.com/an-interview-with-chandra-singh-rahi/|title='सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति'|last=नेगी|first=लक्ष्मण सिंह|date=2009-11-05|work=नैनीताल समाचार|access-date=2018-09-11|language=en-US|archive-date=21 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250221173619/http://www.nainitalsamachar.com/an-interview-with-chandra-singh-rahi/|url-status=dead}}</ref> राही और उनके भाई, देव राज रंगीला, <ref>{{Citation|last=Chugler Bagot|title=कलजुगी नारद किशना बगोट का हास्य ब्यंग (interview rakesh bhardwaj 2 )|date=2016-08-03|url=https://www.youtube.com/watch?v=qsU3YxM3NY8|access-date=2018-09-13}}</ref> ने ''पहाड़ी'' (पहाड़ियों से उत्पन्न) संगीत की परंपरा अपने पिता से सीखी, जो उत्तराखंड के ''[[जागर]]'' संगीत के गायक थे।
राही ने ''पहाड़ी'' संगीत की नींव सीखी, जिसमें सदियों पुराने पारंपरिक गीत, संगीत वाद्ययंत्र और [[हिमालय]] के संगीत से जुड़ी सांस्कृतिक प्रथाएं शामिल हैं, जीवन के शुरुआती दिनों में। एक बच्चे के रूप में, वह अपने पिता के साथ ठाकुली (थकुली )
, डमरू(डोंर) और हुरुकी (हुडकी, हुडकु) सहित पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों पर गए। <ref name=":6"/> राही ने अपने वयस्क जीवन में केशव अनुरागी और उनके गुरु बचन सिंह के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत सीखा। <ref name=":0"/>
== संगीत कैरियर ==
राही ने अपने गायन करियर की शुरुआत [[आकाशवाणी|ऑल इंडिया रेडियो]] (AIR) दिल्ली स्टेशन पर 13 मार्च 1963 को सेना के जवानों के लिए एक कार्यक्रम में "पर वीणा की" गीत के साथ की थी। <ref name=":6"/> <ref name=":1">{{Citation|last=mahendra negi|title=chander singh rahi|date=2014-01-15|url=https://www.youtube.com/watch?v=ppF69X3BfVY|access-date=2018-09-10}}</ref> उन्होंने 1972 में आकाशवाणी लखनऊ के लिए गाना शुरू किया। <ref name=":6" /> उन्होंने 1970 के दशक में उत्तराखंड में लोकप्रियता हासिल करना जारी रखा, जब उनके गाने आकाशवाणी [[नजीबाबाद]] स्टेशन से प्रसारित किए गए, और 1980 के दशक के बाद से, जब उनके गाने [[दूरदर्शन (चैनल)|दूरदर्शन]] पर प्रसारित किए गए। रेडियो पर सुनाई देने वाली वह पहली गढ़वाली आवाज थी। <ref name=":5">{{Cite news|url=http://www.newspost.live/en/rakesh-bhardwaj-if-music-be-the-food-of-love-play-on/|title=Rakesh Bhardwaj: If Music be the food of love, play on|date=2018-04-25|work=News Post|access-date=2018-09-10|language=en-US}}</ref> 1966 में, राही ने अपने गुरु, गढ़वाली कवि कन्हैयालाल डांडरियाल के लिए अपने प्रसिद्ध गीत (गीत) "दिल को उमाल" (दिल का बहना) की रचना की, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने उन्हें ''राही'' (यात्री) दिया था। <ref name=":0"/>
राही ने [[गढ़वाली भाषा|गढ़वाली]] और [[कुमाऊँनी भाषा|कुमाऊँनी]] भाषाओं में 550 से अधिक गीत गाए। उनका काम 140 से अधिक ऑडियो कैसेट पर उपलब्ध था। उन्होंने पूरे भारत में 1,500 से अधिक शो में लाइव प्रदर्शन किया। <ref name=":6"/> उनके कुछ प्रसिद्ध गीतों में फवा बाघा रे, "सर्ग तारा जूनयाली रात को सुनालो", "फ्योनलादिया, देख हिल्मा चंडी कू बताना", "चैता की चैतवाली", "भाना हो रंगीला भाना", "सतपुली का सेना मेरी बाउ सुरिला" शामिल हैं।, "टाइल धारू बोला मधुली", "टेरे चदरी छुटगये पिचने", और "सौली घुरा घुर"। उनका पहला रिकॉर्ड किया गया एल्बम, ''सौली घुरा घुर'', एक व्यावसायिक हिट था। <ref name=":2">{{Citation|last=Himalayan News|title=छ्वीं-बथा- वीरेंद्र नेगी दिवंगत लोकगायक चंद्रसिंह राही के ज्येष्ठ पुत्र {{!}}{{!}} Virendra Negi Singer|date=2016-03-30|url=https://www.youtube.com/watch?v=KOu8D3Sn5-w|access-date=2018-09-10}}</ref>
राही एक गीतकार और कवि भी थे। उनके कविता संग्रहों में ''दिल को उमाल'' (1966), ''ढाई'' (1980), ''रामछोल'' (1981) और ''गीत गंगा'' (2010) शामिल हैं। राही ने मोनोग्राफ भी लिखे और बैले के लिए संगीत तैयार किया।
राही को एकमात्र ऐसा व्यक्ति माना जाता था जो उत्तराखंड के सभी लोक वाद्ययंत्रों को बजा सकता था, जिसमें ढोल दमौ (ड्रम), शहनाई, दौर, थाली और हुरुकी शामिल थे। <ref>{{Cite web|url=http://www.ulpnet.com/2016/01/14/legendary-uttarakhand-folksinger-chandra-singh-rahi-passes-away/|title=Legendary Uttarakhand Folksinger Chandra Singh Rahi Passes Away|website=The Unlikely Partners Network|language=en-US|access-date=2018-09-10|archive-date=25 सितंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200925054117/https://www.ulpnet.com/2016/01/14/legendary-uttarakhand-folksinger-chandra-singh-rahi-passes-away/|url-status=dead}}</ref> उन्हें ''पहाड़ी'' संगीत के लिए अद्वितीय ताल अनुक्रमों (बीट पैटर्न) का भी ज्ञान था और वे इन तत्वों को अपनी संगीत प्रस्तुतियों में शामिल करेंगे।
राही ने "खुदर गीत", "संस्कार गीत", "बरहाई", "पनवाड़ा", "मेला गीत", "झौरा, पांडवानी", "चौनफला" सहित उत्तराखंड के विभिन्न लोक रूपों को शामिल करते हुए 2,500 से अधिक पुराने पारंपरिक गीतों को एकत्र और क्यूरेट किया। "," थड़िया ", और " [[जागर]] "। उनकी पुस्तक, ''ए कॉम्प्रिहेंसिव स्टडी ऑफ द सॉन्ग्स, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स, एंड डांस ऑफ द सेंट्रल हिमालय'', को उत्तरांचल साहित्य, संस्कृति और कला परिषद द्वारा प्रकाशित किया जाना था। <ref name=":3">{{Cite web|url=http://uttarakhandnews.blogspot.com/2006/12/folk-singers-need-better-deal-in-hill.html|title=Folk singers need better deal in hill society: Chander Singh 'Rahi'|language=en|access-date=2018-09-10}}</ref> वे उत्तराखंड के लोक वाद्ययंत्रों के भी शौकीन थे।
== व्यक्तिगत जीवन ==
राही ने दिल्ली में अपने शुरुआती दिनों के दौरान जीवनयापन के लिए बांसुरी बेची, जिसके लिए वह 1957 में अपने मूल गढ़वाल से चले गए थे। एक स्थिर आजीविका के लिए उनकी तलाश आखिरकार सफलतापूर्वक समाप्त हो गई जब उन्हें दूरसंचार विभाग के साथ सरकारी नौकरी मिल गई। राही 40 साल तक दिल्ली के शकरपुर मोहल्ले में किराए के मकान में रहा। उनके परिवार द्वारा बताया गया एक किस्सा यह है कि राही ने घर में निवेश करने के बजाय उत्तराखंडी लोक संगीत को रिकॉर्ड करने के लिए थोड़े से पैसे का निवेश करना चुना। <ref name=":0"/>
राही का 73 वर्ष की आयु में 10 जनवरी 2016 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में निधन हो गया। <ref name=":4">{{Cite news|url=https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|title=Folk singer Chandra Singh Rahi passes away|last=Pioneer|first=The|work=The Pioneer|access-date=2018-09-10|language=en|archive-date=9 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909221906/https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|url-status=dead}}</ref> उनके परिवार में पत्नी सुधा नेगी, चार बेटे (वीरेंद्र नेगी, महेंद्र नेगी, सतीश नेगी और राकेश भारद्वाज) और एक बेटी (निधि ठाकुर) हैं। <ref name=":2"/> उनका पूरा परिवार संगीत के क्षेत्र में शामिल है, जिसमें गायन, रचना, संगीत वाद्ययंत्र बजाना, उत्पादन और संगीत की दिशा शामिल है। कहा जाता है कि राही ने अपने सबसे बड़े बेटे वीरेंद्र नेगी को अपनी शिक्षा दी थी, जिन्होंने बचपन से ही अपने पिता के साथ संगीतकार और गायक के रूप में काम किया था। <ref name=":2" /> राही के सबसे छोटे बेटे, राकेश भारद्वाज, भारतीय रॉक-पॉप बैंड [[युफ़ोरिया|यूफोरिया]] में एक लयबद्ध, ने राही के लोकप्रिय उत्तराखंडी गीतों को अपनी संगीत कंपनी [https://www.youtube.com/channel/UCdlf3osFqQcMJSSgjVHGvbg पहाड़ी सोल] के माध्यम से ऑनलाइन रीमेक और रिलीज़ करके अपने दिवंगत पिता की विरासत को श्रद्धांजलि दी। <ref name=":5"/>
== श्रद्धांजलि, विरासत, और प्रभाव ==
राही को उनकी कला और बड़े पैमाने पर समुदाय के लिए जीने के लिए याद किया जाता है। <ref name=":0"/>
वह एक समग्र रूप से प्रतिभाशाली कलाकार थे, जो उत्तराखंड के कई दुर्लभ वाद्ययंत्र गा सकते थे, लिख सकते थे, लिख सकते थे और बजा सकते थे। <ref name=":0"/> उन्हें अपने शिल्प की पेचीदगियों और महत्व की भी उत्कृष्ट समझ थी। अपनी रचनात्मक गतिविधियों के अलावा, राही को उत्तराखंड के संगीत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का गहरा शौक था। उन्हें उत्तराखंड की संगीत संस्कृति के ज्ञान का खजाना माना जाता था, जिस पर उन्होंने लगातार शोध किया, प्रतिनिधित्व किया और अपने श्रोताओं को समझाया। राही जौनसार से लेकर जौहर घाटी तक पूरे उत्तराखंड की लोककथाओं के ज्ञान के लिए जाने जाते थे। <ref>{{Cite web|url=http://www.merapahad.com/chandra-singh-rahi/|title=चन्द्र सिंह राही: उत्तराखण्ड की एक सांस्कृतिक थाती|website=www.merapahad.com|language=en-US|access-date=2018-09-12|archive-date=12 अक्तूबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221012113619/http://www.merapahad.com/chandra-singh-rahi/|url-status=dead}}</ref>
वह प्रामाणिक ''पहाड़ी'' संगीत प्रस्तुत करने में एक दृढ़ विश्वास रखते थे, और अपने बाद के वर्षों में उन्होंने भारतीय लोक संगीत के "बॉलीवुडकरण" और "वीसीडी संस्कृति" के साथ अपनी निराशा को खुले तौर पर व्यक्त किया। <ref name=":3"/> <ref name=":1"/> राही अपने वक्ताओं के मन में गढ़वाली, जौनसारी, भोटिया और कुमाऊँनी जैसी भाषाओं की प्रतिष्ठा के नुकसान से भी बहुत पीड़ित थे, जिसने उन्हें उत्तराखंड की अनूठी ''पहाड़ी'' संस्कृति की धीमी मृत्यु का संकेत दिया। <ref name=":6"/> वह उत्तराखण्ड राज्य सरकारों की सांस्कृतिक नीति की कमी के भी आलोचक थे। <ref name=":6" /> वह उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर पलायन से चिंतित थे, जिसे उन्होंने अपने 1980 के दशक के गीत "अपनी थी मा तू लौट के आइजा" के माध्यम से संबोधित करने की कोशिश की थी। <ref>{{Cite web|url=http://www.devbhoomimedia.com/the-song-was-sung-on-the-migration-of-late-chandra-singh-rahi-released/|title=स्वर्गीय चंद्र सिंह राही के पलायन पर गाये गीत का हुआ विमोचन - Dev Bhoomi Media|website=www.devbhoomimedia.com|access-date=2018-09-11}}</ref> राही का मानना था कि लोक संगीत के संरक्षण से उत्तराखंड की भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण में मदद मिलेगी। <ref name=":3" />
राही ने देश भर में, विशेष रूप से गढ़वाली और कुमाऊँनी के छात्रों को, पारंपरिक लोक रूपों और उनके द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली संस्कृति के बारे में अपने ज्ञान को लोकप्रिय बनाने और साझा करने के लिए प्रदर्शन व्याख्यान देना जारी रखा। <ref name=":3"/>
{{Quote box|quote="Rahi ji's demise has created an irreplaceable void in the music and culture horizon of Uttarakhand. He was almost singlehandedly responsible for restoring and curating hundreds of centuries old folk songs of the hill state."
- Veteran Garhwali folk singer Narendra Singh Negi|source=''Hindustan Times'', Lucknow{{full citation needed|date=March 2019}}}}
यह बताया गया है कि [[जागर]] गायक और [[पद्म श्री]] के प्राप्तकर्ता, प्रीतम भारतवान ने उनके निधन पर चंद्र सिंह राही की विरासत को याद करते हुए कहा था कि राही को एक अनूठी बजने वाली मधुर आवाज मिली थी जो उनके श्रोताओं पर जादू कर देगी। <ref>{{Cite news|url=https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|title=Folk singer Chandra Singh Rahi passes away|last=Daily|first=Pioneer|date=12 January 2016|access-date=31 March 2020|publisher=Daily Pioneer|agency=PNS|archive-date=9 सितंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180909221906/https://www.dailypioneer.com/2016/state-editions/folk-singer-chandra-singh-rahi-passes-away.html|url-status=dead}}</ref>
राही के गाने आज भी उत्तराखंड के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। उनके तीन प्रसिद्ध गीत - "फ्योनलाडिया" (2016), पारंपरिक अंचारी जागर, " ''चैता'' की चैतवाली" (2018) और "फवा बागा रे" (2019) - लोकप्रिय गढ़वाली / कुमाऊंनी गायक किशन महिपाल, अमित सागर और द्वारा कवर किए गए थे। क्रमशः पप्पू कार्की। "चैता की चैतवाली" का नया संस्करण YouTube पर पांच मिलियन व्यू तक पहुंचने वाला पहला उत्तराखंडी गीत बन गया। <ref>{{Cite news|url=http://www.doonwire.com/category/news/chaita-ki-chaitwal-becomes-the-most-popular-garhwali-song-on-youtube-18010301|title=Chaita Ki Chaitwal Becomes the Most Popular Garhwali Song on Youtube|date=2018-01-03|work=DoonWire|access-date=2018-09-10|language=en-US}}</ref>
2015 में, [[संगीत नाटक अकादमी]] (संगीत, नृत्य और नाटक के लिए राष्ट्रीय अकादमी) ने अकादमी की अभिलेखीय फिल्मों और वीडियो रिकॉर्डिंग की वार्षिक स्क्रीनिंग, अपनी संचार श्रृंखला में "चंद्र सिंह राही एंड पार्टी द्वारा गढ़वाल के लोक संगीत की स्क्रीनिंग" प्रस्तुत की। <ref>{{Cite web|url=https://indiaculture.nic.in/sangeet-natak-akademi-invites-you-screening-folk-music-garhwal-chandra-singh-rahi-party-14-march-4pm|title=Sangeet Natak Akademi invites you to the screening of Folk Music of Garhwal by Chandra Singh Rahi & Party 14 March 4pm|archive-url=https://web.archive.org/web/20150318081107/http://indiaculture.nic.in/sangeet-natak-akademi-invites-you-screening-folk-music-garhwal-chandra-singh-rahi-party-14-march-4pm|archive-date=18 March 2015|access-date=12 September 2018}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.delhievents.com/2015/01/sangeet-natak-akademi-presents_26.html|title=Sangeet Natak Akademi presents Screening of "Folk Music of Garhwal by Chandra Singh Rahi & Party" as part of Sanchayan - Screening of archival films & video recordings at Meghdoot Theatre, Rabindra Bhavan, 35, Ferozeshah Road > 4pm to 5pm on 14th March 2015|date=2015-03-14|work=Delhi Events|access-date=2018-09-12}}</ref>
राही की संगीत यात्रा के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लेखिका चारु तिवारी ने ''लोक का चित्र'' नामक पुस्तक लिखी है। <ref>{{Cite news|url=http://www.nainitalsamachar.com/lok-ka-yeh-kaisa-samman-hai/|title=लोक का यह कैसा सम्मान है ?|last=करगेती|first=चन्द्रशेखर|date=2016-02-07|work=नैनीताल समाचार|access-date=2018-09-12|language=en-US|archive-date=8 नवंबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20191108003522/http://www.nainitalsamachar.com/lok-ka-yeh-kaisa-samman-hai/|url-status=dead}}</ref>
राही की पुण्यतिथि पर हर साल, उनके परिवार और प्रशंसक दिल्ली में एक स्मरण कार्यक्रम आयोजित करते हैं, जिसमें उनके संगीत प्रदर्शनों की सूची उनके परिवार के सदस्यों और उत्तराखंड के लोकप्रिय गायकों द्वारा प्रस्तुत की जाती है। <ref>{{Cite web|url=https://www.facebook.com/rahigharana/|title=Rahi Gharana|website=www.facebook.com|language=en|access-date=2018-09-11}}</ref> उनके बच्चे और पोते "राही [[घराना-संगीत|घराना]] " के तहत राही के संगीत और सांस्कृतिक वंश और शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं <ref>{{Cite web|url=https://www.navodayatimes.in/news/national/chandra-singh-rahis-wife-reaches-uttrakhand-for-a-function/69735/|title=लोक परम्परा संस्कृति में राही का सराहनीय योगदान, उत्तराखंड पहुंची पत्नी ने कहा...|website=www.navodayatimes.in|language=hi|access-date=2018-09-12}}</ref>
== पुरस्कार और मान्यता ==
* मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला सम्मान <ref name=":6"/>
* डॉ. शिवानंद नौटियाल स्मृति पुरस्कार <ref name=":6" />
* ''गढ़ भारती'', गढ़वाल सभा सम्मान पत्र (1995) <ref name=":6" />
* मोनाल संस्था, लखनऊ सम्मान पत्र <ref name=":6" />
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:उत्तराखण्ड की संस्कृति]]
[[श्रेणी:२०१६ में निधन]]
[[श्रेणी:1942 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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सदस्य वार्ता:Manish Khouriwal
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AMAN KUMAR
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{{साँचा:सहायता|realName=|name=Manish Khouriwal}}
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:@[[सदस्य:Manish Khouriwal|Manish Khouriwal]]<nowiki> महोदय विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख में अपने विचार के अंत में ~~~~ लगा दें, जिससे आपके हस्ताक्षर हो जाएंगे </nowiki> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 11:05, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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तोमा प्रेरित
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{{Infobox saint|honorific_prefix=[[संत]]|name=तोमा प्रेरित|image=File:Rubens apostel thomas.jpg|caption=पीटर पॉल रूबेन्स द्वारा ''संत तोमा'' (१६११ के आसपास)|birth_date=पहली सदी ईस्वी|death_date=७२ ईस्वी|feast_day=*३ जुलाई: लैटिन गिरजाघर, उदारवादी कैथ्लिक गिरजाघर, एंग्लिकन समुदाय, मलंकार रूढ़िवादी गिरजाघर, मलंकार मार संत थोमा कैथ्लिक गिरजाघर, सीरों-मलंकार कैथ्लिक गिरजाघर, आस्तिक पूर्वी गिरजाघर, सीरियक कैथ्लिक गिरजाघर<ref name="latin mass soc" />
*२१ दिसंबर: कुछ एंग्लिकन समुदाय, मोज़ारबिक हिस्पानिक गिरजाघर, परंपरागत कैथोलिकवाद
*२६ पाशोन और ईस्टर के बाद का रविवाद (तोमा ईस्टर): कॉपटिक ईसाई<ref name="st-takla.org" />
*६ अक्टूबर और ईस्टर के बाद का रविवार (तोमा ईस्टर): पूर्वी रूढ़िवादी|venerated_in=सभी ईसाई सूबे जो संतों को पूजते हैं, खासकर संत तोमा ईसाई|imagesize=|birth_place=पाँसद, गॅलिली, जूडिया, [[रोमन साम्राज्य]]{{sfn|Fahlbusch|Bromiley|Lochman|Mbiti|2008|p=285}}|death_place=[[सेंट थॉमस माउंट]], [[मयलापुर]], [[चेन्नई]], [[चोल साम्राज्य]]|titles=प्रेरित, प्रचारक, ईसाई शहीद|beatified_date=|beatified_place=|beatified_by=|canonized_date=मंडलीपूर्व|canonized_place=|canonized_by=|attributes=जुड़वा, ईसा के बगल में अपनी उँगली डालना, [[कमल]], [[भाला]] (उसकी ईसाई शहादत का माध्यम), बढ़ई का वर्ग (उनका पेशा, एक वास्तुकार)|patronage=[[वास्तुकार]], [[भारत]] में ईसाइयों के लिए (संत तोमा ईसाई और मद्रास-मयलापुर सूबा समेत), [[तमिल नाडु]], [[श्रीलंका]] और पुला, [[क्रोएशिया]]|major_shrine=संत तोमा का बासीलीक, [[मयलापुर]], [[चेन्नई]], [[तमिल नाडु]], [[भारत]]
<br />संत तोमा का बासीलीक, ओरतोना, [[इटली]]|suppressed_date=|issues=}}'''तोमा प्रेरित''' ([[आरामाईक]]: 𐡀𐡌𐡅𐡕𐡌, [[इब्रानी भाषा|इब्रानी]]: ''תוֹמא הקדוש'', ''तोमा हकादोश'' अर्थात तोमा पवित्र या ''תוֹמָא שליחא,'' ''तोमा श्लीखा'' अर्थात तोमा संदेशक, [[यूनानी भाषा|यूनानी]]: ''Δίδυμος'', ''डिडिमोस'' अर्थात जुड़वा) जो तोमा नाम से भी जाने जाते हैं, [[नया नियम|नए नियम]] के अनुसार [[यीशु]] के बारह प्रेरितों में से एक थे। तोमा को आमतौर पर "शक्की तोमा" के रूप में जाना जाता है क्योंकि उन्होंने शुरू में यीशु मसीह के पुनरुत्थान पर संदेह किया था जब उन्हें इसके बारे में बताया गया था (जैसा कि याहया के सुसमाचार में संबंधित है); बाद में उन्होंने सूली पर चढ़ने से बचे हुए घावों को देखकर अपना विश्वास कबूल किया।
[[चित्र:Thomas_the_Apostle._Detail_of_the_mosaic_in_the_Basilica_of_San_Vitale._Ravena,_Italy.jpg|अंगूठाकार| तोमा प्रेरित, सैन विटाले, [[रवेना|रेवेना]], ६ वीं शताब्दी के बेसिलिका में मोज़ेक का विवरण]]
[[भारत]] में आधुनिक [[केरल]] के संत तोमा ईसाइयों के पारंपरिक खातों के अनुसार संत तोमा ने सुसमाचार का प्रचार करने के लिए [[रोमन साम्राज्य|रोमन साम्राज्य के]] बाहर यात्रा की, तमिलकम तक यात्रा की जो दक्षिण [[भारत]] में है,{{Sfn|Fahlbusch|Bromiley|Lochman|Mbiti|2008|p=285}}{{Sfn|Slapak|1995|p=27}}{{Sfn|Medlycott|1905|p=}}{{Sfn|Puthiakunnel|1973|p=}} और ५२ ईस्वी में तमिलकम (आज के उत्तर परावुर और [[केरल]] राज्य, [[भारत]] में कोडुंगलूर) के मुज़िरिस पहुँचे।{{Sfn|Johnson|Zacharia|2016}}{{Sfn|Fahlbusch|Bromiley|Lochman|Mbiti|2008|p=285}} १२५८ में कुछ अवशेष [[आब्रुत्सो|अब्रूज़ो]] में ओरतोना लाए गए इटली जहाँ वे संत तोमा प्रेरित के गिरजाघर में आयोजित किए गए हैं। उन्हें [[ईसाई धर्म|ईसाई]] अनुयायियों के बीच भारत का [[संरक्षक संत]] माना जाता है,{{Sfn|Medlycott|1905|p=|loc=Ch. IV}} और ३ जुलाई को संत तोमा का पर्व भारतीय ईसाई दिवस के रूप में मनाया जाता है।<ref name="Carvalho2021">{{Cite web|url=http://www.asianews.it/news-en/First-Indian-Christian-Day-on-3-July-53526.html|title=First Indian Christian Day on 3 July|last=Carvalho|first=Nirmala|date=29 June 2021|publisher=[[AsiaNews]]|language=English|access-date=4 July 2021}}</ref><ref name="Kumar2021">{{Cite web|url=https://www.christianpost.com/news/christians-observe-first-indian-christian-day-feast-of-saint-thomas.html|title=India: Christians celebrate first Indian Christian Day, feast of St. Thomas|last=Kumar|first=Anugrah|date=4 July 2021|publisher=[[The Christian Post]]|language=English|access-date=4 July 2021}}</ref> ''तोमा'' नाम भारतीय उपमहाद्वीप के संत तोमा ईसाइयों के बीच काफी लोकप्रिय है।
भारत के अलावा, [[मध्य पूर्व]] और दक्षिणी एशिया में कई गिरजाघरों ने अपनी ऐतिहासिक परंपराओं में प्रेरित तोमा का उल्लेख उन गिरजाघरों को स्थापित करने वाले पहले इंजीलवादी के रूप में किया है, पूर्व के असीरियन गिरजाघर,<ref>{{Cite web|url=https://bethkokheh.assyrianchurch.org/articles/235|title=Socotra: The Mysterious Island of the Assyrian Church of the East|last=Journal|first=Church of Beth Kokheh|date=2016-04-11|website=Church of Beth Kokheh Journal|language=en-AU|access-date=2022-10-04}}</ref> श्रीलंका के शुरुआती गिरजाघर।<ref>{{Cite web|url=https://www.scoop.co.nz/stories/WO1309/S00362/sri-lanka-a-brief-history-of-christianity.htm|title=SRI LANKA: a brief history of Christianity|last=Monday|last2=September 2013|first2=23|website=Scoop News|access-date=2022-10-04|last3=Commission|first3=11:30 am Article: Asian Human Rights}}</ref>
== जॉन का सुसमाचार ==
तोमा पहले जॉन के सुसमाचार में बोलते हैं। यूहन्ना ११:१६ में जब हाल ही में लाजर की मृत्यु हुई है, और प्रेरित यहूदिया वापस नहीं जाना चाहते हैं, तो तोमा कहते हैं: "आओ, हम भी चलें, कि हम उनके साथ मरें।"{{Efn|All three occasions are discussed in detail by Dr. Mathew Vallanickal, "Faith and Character of Apostle Thomas" in ''The St. Thomas Christian Encyclopaedia of India'', Vol. II, Trichur, 1973, p. 2}}
तोमा यूहन्ना १४:५ में फिर से बोलते हैं। वहाँ, [[यीशु]] ने अभी-अभी बताया था कि वह अपने अनुयायियों के लिए एक स्वर्गीय घर तैयार करने जा रहा था, और कि एक दिन वे वहाँ उनके साथ मिल जाएँगे। तोमा ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की, "हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहाँ जाता है; और हम कैसे मार्ग जान सकते हैं?"
यूहन्ना २०:२४-२९ बताता है कि जब तोमा ने सुना कि यीशु मरे हुओं में से जी उठे हैं और दूसरे प्रेरितों को दिखाई दिए, "सिवाय इसके कि मैं उनके हाथों पर कीलों के निशान देखूँ, और कीलों के छेद में अपनी उँगली डालकर उनके पंजर में अपना हाथ डाल दूँ, तो मैं प्रतीति न करूंगा। लेकिन जब यीशु बाद में प्रकट हुआ और उन्होंने थोमा को अपने घावों को छूने और उसे देखने के लिए आमंत्रित किया, तो थोमा ने यह कहते हुए अपना विश्वास दिखाया, "हे मेरे प्रभु और मेरे परमेश्वर"। यीशु ने तब कहा, "तोमा, क्योंकि तुमने मुझे देखा है, तुमने विश्वास किया है: धन्य हैं वे जिन्होंने देखा नहीं है, और फिर भी विश्वास किया है।"
== नाम और व्युत्पत्ति ==
नए नियम में प्रेरित के लिए दिया गया ''तोमा'' (कोइन यूनानी : ''Θωμᾶς'') नाम [[आरामाईक|अरामाईक]] תְּאוֹמָא<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=lXdpAAAAcAAJ&dq=%22%D7%AA%D6%B0%D7%90%D7%95%D6%B9%D7%9E%D6%B8%D7%90%22&pg=PA614|title=Lexicon Chaldaicum et Syriacum;: quo voces omnes tam primitivæ quàm derivativae, quotquot in sacrorum Vet. Testamenti librorum Targumim seu paraphrasibus Chaldaicis, Onkeli in Mosen, Jonathanis in Prophetas, & aliorum authorum in hagiographa: item in Targum Hierosolymitano, Jonathane altero in legem, & Targum secundo in librum Esther: denique in Novi Testamenti translatione Syriaca reperiuntur, accuratè et methodicè dispositae, & fideliter explicatae, copiosè absoluteq́[ue] describuntur|last=Buxtorf|first=Johann|date=1622|publisher=Ex officina Ludovici Regis.|language=la}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://holylanguage.com/peshitta/John/John20.html|title=על-פי יוחנן כ|website=holylanguage.com|access-date=2022-05-06}}{{Dead link|date=जून 2023 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> से लिया गया है जिसका अर्थ है "जुड़वां" और [[इब्रानी भाषा|इब्रानी]] ''תְּאוֹם'' से संबंधित। यूनानी में जुड़वाँ के लिए समतुल्य शब्द जिसका प्रयोग न्यू टेस्टामेंट में भी किया जाता है, ''Δίδυμος'' ''डिडिमोस'' है।
=== अन्य नाम ===
''तोमा के गॉस्पेल'' की नाग हम्मादी प्रति शुरू होती है: "ये गुप्त बातें हैं जो जीवित यीशु ने कही थीं और डिडिमस जुडास तोमा, ने दर्ज की थीं।" प्रारंभिक सीरियाई परंपराएँ भी प्रेरित का पूरा नाम यहूदा तोमा के रूप में बताती हैं।{{Efn|"... Judas Thomas, as he is called [in the ''Acta Thomae''] and elsewhere in Syriac tradition ...". {{harvnb|Thurston|1913}}}} कुछ लोगों ने ''तोमा के अधिनियमों'' में देखा है (तीसरी शताब्दी की शुरुआत में पूर्वी सीरिया में लिखा गया था, या शायद दूसरी शताब्दी के पहले छमाही के रूप में) जेम्स के पुत्र प्रेरित यहूदा के साथ तोमा की पहचान जिसे अंग्रेजी में जूड के नाम से जाना जाता है। हालाँकि, अधिनियमों का पहला वाक्य प्रेरित तोमा और याकूब के पुत्र प्रेरित यहूदा को अलग करने में सुसमाचार और प्रेरितों के अधिनियमों का अनुसरण करता है। अन्य जैसे जेम्स ताबोर, उसे मार्क द्वारा वर्णित यीशु के भाई जूड के रूप में पहचानते हैं। तोमा द कंटेंडर की पुस्तक में जो नाग हम्मादी पुस्तकालय का हिस्सा है, उन्हें कथित तौर पर यीशु का जुड़वा कहा जाता है: "अब, चूंकि यह कहा गया है कि आप मेरे जुड़वां और सच्चे साथी हैं, अपने आप को जांचें ..."{{Sfn|Thomas the Apostle|n.d.}}
''शक्की तोमा'' एक संशयवादी है जो प्रत्यक्ष व्यक्तिगत अनुभव के बिना विश्वास करने से इनकार करता है - प्रेरित तोमा के जॉन के चित्रण के सुसमाचार का एक संदर्भ जिसने जॉन के खाते में पुनर्जीवित [[यीशु]] को विश्वास करने से इनकार कर दिया था कि वह दस अन्य लोगों को दिखाई दिया था। जब तक वह यीशु के सूली पर चढ़ने के घावों को देख और महसूस नहीं कर सकता था।
=== पर्व के दिन ===
९वीं शताब्दी में जब संत तोमा का पर्व रोमन कैलेंडर में जोड़ा गया था, तो इसे २१ दिसंबर को सौंपा गया था। ''संत जेरोम की शहादत ने'' ३ जुलाई को प्रेरित का उल्लेख किया जिस तारीख को १९६९ में रोमन उत्सव को स्थानांतरित कर दिया गया था, ताकि यह अब आगमन के प्रमुख उत्सव के दिनों में हस्तक्षेप न करे।{{Sfn|Catholic Church|1969|p=96}} परंपरावादी रोमन कैथोलिक (जो १९६० या उससे पहले के सामान्य रोमन कैलेंडर का पालन करते हैं) और कई [[एंग्लिकनवाद|एंग्लिकन]] (एपिस्कोपल गिरजाघर के सदस्यों के साथ-साथ [[इंग्लैंड का कलीसिया|इंग्लैंड के गिरजाघर]] और [[लूथरवाद|लूथरन गिरजाघर]] के सदस्यों सहित जो १६६२ के द बुक ऑफ कॉमन प्रेयर के संस्करण के अनुसार पूजा करते हैं), अभी भी २१ दिसंबर को उनका पर्व मनाते हैं। हालांकि अधिकांश आधुनिक साहित्यिक कैलेंडर (इंग्लैंड के गिरजाघर के सामान्य पूजा कैलेंडर सहित) ३ जुलाई को पसंद करते हैं, तोमा को [[इंग्लैंड का कलीसिया|इंग्लैंड के गिरजाघर]] में एक उत्सव के साथ याद किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.churchofengland.org/prayer-and-worship/worship-texts-and-resources/common-worship/churchs-year/calendar|title=The Calendar|website=The Church of England|language=en|access-date=2021-03-27}}</ref>
पूर्वी रूढ़िवादी निम्नलिखित दिनों में तोमा की पूजा करते हैं:
* जून २० - प्रेरित एंड्रयू, तोमा और ल्यूक के अवशेषों के अनुवाद का स्मरणोत्सव; पैगंबर एलीशा; और शहीद लाजर।<ref>{{Cite web|url=https://orthochristian.com/calendar/20170620.html|title=June 20, 2017. + Orthodox Calendar|website=orthochristian.com|archive-url=https://web.archive.org/web/20180317231958/http://orthochristian.com/calendar/20170620.html|archive-date=March 17, 2018|access-date=2023-04-29}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://apostoliki-diakonia.gr/gr_main/eortologio/eortologio.asp?file=jun/20.htm|title=Αποστολική Διακονία της Εκκλησίας της Ελλάδος|website=apostoliki-diakonia.gr|archive-url=https://web.archive.org/web/20180317102719/http://www.apostoliki-diakonia.gr/gr_main/eortologio/eortologio.asp?file=jun/20.htm|archive-date=March 17, 2018|access-date=2023-04-29}}</ref>
* ३० जून - बारह प्रेरित।<ref>{{Cite web|url=https://www.oca.org/saints/lives/2021/06/30/101711-synaxis-of-the-holy-glorious-and-all-praised-twelve-apostles|title=Synaxis of the Holy, Glorious and All-Praised Twelve Apostles|website=www.oca.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20230418222037/https://www.oca.org/saints/lives/2021/06/30/101711-synaxis-of-the-holy-glorious-and-all-praised-twelve-apostles|archive-date=18 April 2023|access-date=2023-04-29}}</ref>
* ६ अक्टूबर - प्राथमिक पर्व दिवस।<ref>{{Cite web|url=https://www.oca.org/saints/lives/2021/10/06/102885-holy-glorious-apostle-thomas|title=Holy, Glorious Apostle Thomas|website=www.oca.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20210309163942/https://www.oca.org/saints/lives/2021/10/06/102885-holy-glorious-apostle-thomas|archive-date=9 March 2021|access-date=2023-04-29}}</ref>
* ईस्टर के बाद का पहला रविवार - तोमा का रविवार जो स्मरण करता है कि जब तोमा के पुनर्जीवित मसीह के बारे में संदेह को मसीह के पक्ष को छूने से हटा दिया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.oca.org/saints/lives/2022/05/01/34-antipascha-saint-thomas-sunday|title=Antipascha: Saint Thomas Sunday|website=www.oca.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20230429220839/https://www.oca.org/saints/lives/2022/05/01/34-antipascha-saint-thomas-sunday|archive-date=April 29, 2023|access-date=2023-04-29}}</ref>
तोमा थियोटोकोस (भगवान की माँ) के "अरेबियन" (या "अरापेट") चिह्न से भी जुड़े हुए हैं जिसे ६ सितंबर को स्मरण किया जाता है।
मलंकारा ऑर्थोडॉक्स गिरजाघर तीन दिन, ३ जुलाई (एडेसा के अवशेष के अनुवाद की याद में), १८ दिसंबर (जिस दिन उन्हें भाला मारा गया था), और २१ दिसंबर (जब उनकी मृत्यु हुई) पर उनकी दावत मनाता है।<ref>{{Cite web|url=https://malankaraorthodoxchurch.in/|title=The Malankara Orthodox Syrian Church|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20160630183554/http://www.malankaraorthodoxchurch.in/|archive-date=30 June 2016|access-date=2022-10-23}}</ref>
== बाद का इतिहास और परंपराएं ==
४९४ में पोप गेलैसियस I द्वारा विधर्मी घोषित ''मैरी की पासिंग'', अरिमथिया के जोसेफ को जिम्मेदार ठहराया गया था।{{Sfn|Lewis|1927|p=}}{{Sfn|Robinson|1926|p=33}} दस्तावेज़ में कहा गया है कि तोमा स्वर्ग में मैरी की धारणा का एकमात्र गवाह था। उसकी मृत्यु का गवाह बनने के लिए अन्य प्रेरितों को चमत्कारिक रूप से यरूशलेम ले जाया गया। तोमा को भारत में छोड़ दिया गया था, लेकिन उनके पहले दफन के बाद उसे उसकी कब्र पर ले जाया गया जहाँ उन्होंने उसकी शारीरिक स्थिति को स्वर्ग में देखा जहाँ से उन्होंने अपनी करधनी गिरा दी। तोमा की शंकाओं की कहानी के विपरीत अन्य प्रेरितों को तोमा की कहानी पर तब तक संदेह है जब तक कि वे खाली कब्र और पेटी को नहीं देखते। गर्डल की तोमा की प्राप्ति को आमतौर पर मध्यकालीन और पूर्व- काउंसिल ऑफ ट्रेंट पुनर्जागरण कला में दर्शाया गया है।<ref>[http://vidimus.org/issues/issue-17/ "St Thomas Receiving the Virgin Mary’s Girdle at her Assumption"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131230234204/http://vidimus.org/issues/issue-17/|date=30 December 2013}}, ''Dimus,'' no. 17 (April 2008)</ref>{{Sfn|Norman|1993|pp=1–42}}
=== भारत में उद्देश्य ===
[[चित्र:Postal_stamp_of_St_Thomas.jpg|दाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| [[भारतीय डाक|भारत के डाक विभाग ने]] देश के लिए उनके उद्देश्य की याद में एक डाक टिकट निकाला।]]
[[चित्र:Silk_route.jpg|बाएँ|अंगूठाकार| प्राचीन [[रेशम मार्ग|सिल्क रोड]] और [[मसाला व्यापार|स्पाइस रूट]] का मानचित्र]]
भारत के संत तोमा ईसाइयों के पारंपरिक खातों के अनुसार प्रेरित तोमा ५२ ईस्वी में केरल तट पर मुज़िरिस (क्रांगानोर) में उतरे और ७२ ईस्वी में [[चेन्नई|मद्रास]] के पास [[मयलापुर|मायलापुर]] में शहीद हुए।{{Sfn|Johnson|Zacharia|2016}}{{Sfn|Fahlbusch|Bromiley|Lochman|Mbiti|2008|p=285}}{{Sfn|Slapak|1995|p=27}} १३४१ में बड़े पैमाने पर बाढ़ से बंदरगाह नष्ट हो गया था जिसने तटों को फिर से बनाया। माना जाता है कि संत तोमा ईसाई परंपरा के अनुसार उन्होंने केरल में सात गिरजाघरों (समुदायों) की स्थापना की थी। ये गिरजाघर कोडुंगल्लुर, पलयूर, कोट्टाकवु (पारावुर), कोक्कमंगलम, निरानम, निलक्कल (चायल), [[कोल्लम]] और थिरुविथमकोड में हैं।<ref name="ppn">[http://www.payyappilly.org/history History] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150704231759/http://www.payyappilly.org/history/|date=4 July 2015}}, Payyappilly Palakkappilly Nasrani family</ref> तोमा ने कई परिवारों को बपतिस्मा दिया।{{Sfn|Mani|2016|p=14}} कई परिवार दावा करते हैं कि उनकी उत्पत्ति लगभग उतनी ही पुरानी है जितनी कि ये, और धार्मिक इतिहासकार रॉबर्ट एरिक फ्राइकेनबर्ग नोट करते हैं कि: "इस तरह की स्थानीय परंपराओं से जो भी संदिग्ध ऐतिहासिकता जुड़ी हो, उनकी महान पुरातनता के बारे में थोड़ा संदेह हो सकता है या लोकप्रिय कल्पना में उनकी महान अपील।"{{Sfn|Frykenberg|2008|pp=101–102}}
{{Quote|यह काले लोगों की भूमि थी, जिसे उन्हें सफेद वस्त्र में बपतिस्मा देकर भेजा गया था। उनकी आभारी सुबह ने भारत के दर्दनाक अंधेरे को दूर कर दिया। भारत को एक भिखारी बनाना उनका उद्देश्य था। इतना बड़ा खजाना पाकर व्यापारी धन्य है। एडेसा इस प्रकार भारत का सबसे बड़ा मोती प्राप्त करके धन्य शहर बन गया। तोमा भारत में चमत्कार करते हैं, और एडेसा में तोमा लोगों को बपतिस्मा देने के लिए नियत है, जो विकृत और अंधेरे में डूबे हुए हैं, और वह भी भारत की भूमि में।|संत इफरम के गीत, लामी द्वारा संपादित}}
एफ़्रेम द सीरियन, [[सीरियाई ईसाई|सीरियाई ईसाई धर्म]] के एक डॉक्टर, अपने "कारमिना निसिबिना" के बयालीसवें में लिखते हैं कि प्रेरित को भारत में मौत के घाट उतार दिया गया था, और उनके अवशेषों को बाद में एडेसा में दफन कर दिया गया था जिसे एक अनाम व्यापारी द्वारा वहाँ लाया गया था।{{Sfn|Medlycott|1905|p=157}}
[[चित्र:Tomb_of_St._Thomas_in_India.JPG|बाएँ|अंगूठाकार|200x200पिक्सेल| [[मयलापुर|मायलापुर]], भारत में संत तोमा प्रेरित का मकबरा]]
यूसेबिस के रिकॉर्ड के अनुसार तोमा और बार्थोलोम्यू को [[पार्थिया]] और उत्तर-पश्चिम भारत में नियुक्त किया गया था।{{Sfn|Medlycott|1905|pp=18–71}}{{Sfn|James|1924|pp=364–436}}{{Sfn|Medlycott|1905|pp=1–17, 213–297}}{{Sfn|Farquhar|1926|p=30}}{{Sfn|Smith|1914|p=235}}{{Sfn|Brown|1956|pp=49–59}} ''डिडास्कलिया'' (तीसरी शताब्दी के अंत से दिनांकित) में कहा गया है, "भारत और सभी देशों ने इसे मानने वाले, यहाँ तक कि सबसे दूर के समुद्रों तक...जूडस तोमा से अपोस्टोलिक अध्यादेश प्राप्त किए जो दुनिया में एक मार्गदर्शक और शासक थे। गिरजाघर जो उन्होंने बनाया था।"
माना जाता है कि पारंपरिक खातों के अनुसार माना जाता है कि तोमा ने उत्तर-पश्चिम भारत छोड़ दिया था जब एक हमले की धमकी दी गई थी और [[मालाबार सागरतट|मालाबार तट]] पर जहाज द्वारा यात्रा की गई थी, संभवतः दक्षिण-पूर्व [[अरबी प्रायद्वीप|अरब]] और सोकोट्रा एन मार्ग का दौरा किया था, और मुज़िरिस के पूर्व समृद्ध बंदरगाह पर उतरा था (आधुनिक [[उत्तर परवूर|उत्तर परावुर)]] और [[कोडुंगलूर|कोडुंगल्लूर]]) (५० ईस्वी के आसपास) एक यहूदी व्यापारी एबनेस/हब्बन (स्कोनफील्ड, १९८४,१२५) के साथ।<ref name="ppn"/>{{Better source|date=June 2022}} है कि वहाँ से उन्होंने पूरे मालाबार तट पर सुसमाचार का प्रचार किया। उन्होंने जिन विभिन्न गिरजाघरों की स्थापना की, वे मुख्य रूप से [[पेरियार नदी]] और उसकी सहायक नदियों और तट के किनारे स्थित थे जहाँ यहूदी उपनिवेश थे। अपोस्टोलिक रिवाज के अनुसार तोमा ने शिक्षकों और नेताओं या बुजुर्गों को नियुक्त किया जिन्हें मलंकारा गिरजाघर का सबसे पहला मंत्रालय बताया गया था।{{उद्धरण आवश्यक|date=June 2022}}
== मृत्यु ==
[[चित्र:Peter_Paul_Rubens_-_Martyrdom_of_St_Thomas.jpg|अंगूठाकार| [[राष्ट्रीय चित्रशाला प्राग|राष्ट्रीय चित्रकला प्राग]] में [[पीटर पाल रूबेंस|पीटर पॉल रूबेन्स]] द्वारा ''संत तोमा की शहादत'', १६३६-१६३८]]
[[चित्र:Chennai,_basilica_di_san_tommaso_apostolo,_museo,_reliquiario_dell'osso_di_s._tommaso_e_della_lancia_che_lo_uccise,_02.jpg|अंगूठाकार| [[चेन्नई]], भारत में संत तोमा को मारने वाले भाले का अवशेष]]
सीरियाई ईसाई परंपरा के अनुसार ३ जुलाई ७२ ई. में [[चेन्नई|चेन्नई के]] [[सेंट थॉमस माउंट|संत तोमा माउंट]] में तोमा को एक भाले से मार दिया गया था, और उनके शरीर को मायलापुर में दफ़नाया गया था। लैटिन गिरजाघर परंपरा २१ दिसंबर को उनकी मृत्यु की तिथि के रूप में रखती है।{{Sfn|Farmer|2011|p=418}} एप्रैम सीरियाई कहते हैं कि प्रेरित भारत में मारे गए थे, और उनके अवशेषों को तब एडेसा ले जाया गया था। यह उनकी मृत्यु का सबसे पहला ज्ञात रिकॉर्ड है।{{Sfn|Marco Polo|1920|p=117}}
१६वीं सदी की शुरुआत के [[दुआर्ते बरबोसा|बारबोसा]] के अभिलेखों से पता चलता है कि उस समय मकबरे का रखरखाव एक मुसलमान द्वारा किया जाता था जो वहाँ एक जलता दीपक रखता था।{{Sfn|Hunter|1886|p=237}} संत तोमा कैथेड्रल बासिलिका, [[चेन्नई]], [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]], [[भारत]] वर्तमान में मकबरे पर स्थित है जिसे पहली बार १६वीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा बनाया गया था, और १९वीं शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था।{{Sfn|Neill|2004|p=29}} [[सेंट थॉमस माउंट|संत तोमा माउंट]] कम से कम १६वीं शताब्दी से मुसलमानों और ईसाइयों के लिए एक पूजनीय स्थल रहा है।{{Sfn|Hunter|1886|p=31}}
=== चीन की संभावित यात्रा ===
तोमा की चीन की कथित यात्रा का उल्लेख भारत में संत तोमा ईसाइयों की पुस्तकों और गिरजाघर परंपराओं में किया गया है{{Sfn|Bays|2011|p=|loc=Ch. 1}} जो एक भाग के लिए ५२ ईस्वी में तोमा प्रेरित द्वारा प्रचारित प्रारंभिक ईसाइयों के वंशज होने का दावा करते हैं। उदाहरण के लिए यह मलयालम गाथागीत ''थोमा रामबन पट्टू'' (मलयालम: ''തോമസ് രംഗഭം പട്ടു'', अर्थात देव तोमा का गीत) में पाया जाता है जिसकी सबसे पुरानी पांडुलिपि १७वीं शताब्दी की है। स्रोत स्पष्ट रूप से तोमा के भारत आने, फिर चीन और वापस भारत आने के बारे में बताते हैं जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।{{Sfn|Bays|2011|p=|loc=Ch. 1}}
अन्य अनुप्रमाणित स्रोतों में तोमा को चीन का प्रेरित बनाने की परंपरा "ईसाई धर्म के कानून" (फ़िक़ह अल-नारानिया) में पाई जाती है,{{Sfn|Hoenerbach|Spies|1956|p=}} इब्न अल-य्यिब (नेस्टोरियन धर्मशास्त्री और चिकित्सक जिनकी मृत्यु हो गई) द्वारा न्यायिक साहित्य का संकलन १०४३ में [[बग़दाद|बगदाद]] में)। बाद में अब्दिशो बार बेरिका (निसिबिस और अर्मेनिया के महानगर, १३१८ में मृत्यु हो गई) के नोमोकैनन में और चाल्डियन गिरजाघर{{Sfn|Gilman|Klimkeit|2016|p=}} की संक्षिप्तता में लिखा है:
{{Blockquote|text=१. संत तोमा के माध्यम से भारत से मूर्तिपूजा की त्रुटि समाप्त हो गई।
२. संत तोमा के माध्यम से चीनी और इथियोपियाई सच्चाई में परिवर्तित हो गए।
३. संत तोमा के माध्यम से उन्होंने बपतिस्मा और पुत्र गोद लेने के संस्कार को स्वीकार किया।
४. संत तोमा के माध्यम से उन्होंने पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा में विश्वास किया और उन्हें स्वीकार किया।
५. संत तोमा के माध्यम से उन्होंने एक ईश्वर के स्वीकृत विश्वास को संरक्षित रखा।
६. संत तोमा के माध्यम से पूरे भारत में जीवनदायी वैभव का उदय हुआ।
७. संत तोमा के माध्यम से स्वर्ग के राज्य ने उड़ान भरी और '''चीन''' पर चढ़ गया।|author=चीन इल्लुसत्रता में अथानासिउस कर्षर द्वारा अनुवादित (१६६७)|title=''Office of St. Thomas for the Second Nocturn''|source=मलाबार के संत तोमा के गिरजाघर का गाज़ा, चलदेयन ब्रीवीएरी}}
अपने नवजात रूप में यह परंपरा सबसे पहले ज़ुक्निन क्रॉनिकल (७७५ ईस्वी) में पाई जाती है और हो सकता है कि इसकी शुरुआत [[सासानी साम्राज्य|सासैनियन]] काल के अंत में हुई हो।{{Sfn|Tubach|1995|pp=397–430}}{{Sfn|Takahashi|2011}} शायद यह तीसरी शताब्दी के छद्मलेखन के रूप में उत्पन्न हुआ था जहाँ तोमा ने मागी ([[मत्ती का सुसमाचार|मैथ्यू के सुसमाचार]] में) को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया होगा, क्योंकि वे शिर (सेरेस की भूमि, [[तारिम द्रोणी|तारिम बेसिन]] की भूमि) में रहते थे। पुरातनता में कई लोगों के लिए दुनिया का सबसे पूर्वी समुद्र)।{{Sfn|Andrade|2018|pp=58–59}} इसके अतिरिक्त, सिक्का के अर्नोबियस की गवाही जो ३०० ईस्वी के तुरंत बाद सक्रिय है, का कहना है कि ईसाई संदेश भारत में और फारसियों, मेडियनों और पार्थियनों (सेरेस के साथ) के बीच आ गया था।{{Sfn|Arnobius of Sicca|1949|p=125}}
=== इंडोनेशिया की संभावित यात्रा ===
कर्ट ई. कोच के अनुसार तोमा प्रेरित ने संभवतः भारतीय व्यापारियों के साथ भारत के माध्यम से [[इंडोनेशिया]] की यात्रा की।{{Sfn|Koch|1972|p=}}
=== परागुआयन किंवदंती ===
[[पैराग्वे]] की गुआरानी जनजातियों द्वारा बरकरार रखी गई प्राचीन मौखिक परंपरा का दावा है कि प्रेरित तोमा पैराग्वे में थे और उन्हें उपदेश दिया।
{{Quote|हमारे कॉलेज की संपत्ति में, जिसे पैराग्वे कहा जाता है, और असम्पसीन से बीस लीग दूर है। यह जगह एक तरफ एक सुखद मैदान में फैली हुई है, जिसमें मवेशियों की एक विशाल मात्रा के लिए चारागाह है; दूसरी ओर, जहाँ यह दक्षिण की ओर देखता है, यह पहाड़ियों और चट्टानों से घिरा हुआ है; जिनमें से एक में तीन बड़े पत्थरों के एक क्रॉस का दौरा किया जाता है, और संत तोमा की खातिर मूल निवासियों द्वारा बड़ी श्रद्धा से आयोजित किया जाता है; क्योंकि वे मानते हैं, और दृढ़ता से बनाए रखते हैं, कि प्रेरित, इन पत्थरों पर एक कुर्सी के रूप में बैठे थे, पूर्व में इकट्ठे भारतीयों को उपदेश देते थे।}}
पैराग्वे में डोब्रिज़ोफ़र के आगमन से लगभग १५० साल पहले, एक अन्य जेसुइट उद्देश्यरी, एफजे एंटोनियो रुइज़ डी मोंटोया ने पैराग्वेयन जनजातियों से समान मौखिक परंपराओं को याद किया। उन्होंने लिखा है:
{{Quote|...परागुएयन जनजातियों की यह बहुत ही विचित्र परंपरा है। उनका दावा है कि एक बहुत ही पवित्र व्यक्ति (स्वयं तोमा प्रेरित), जिन्हें वे "पाई थोम" कहते हैं, उनके बीच रहते थे और उन्हें पवित्र सत्य का उपदेश देते थे, भटकते थे और अपनी पीठ पर एक लकड़ी का क्रॉस रखते थे।}}
इस विषय के बारे में किया गया एकमात्र रिकॉर्ड किया गया शोध पैराग्वे की स्वतंत्रता के बाद जोस गैस्पर रोड्रिग्ज डी फ्रांसिया के शासनकाल के दौरान हुआ था। इसका उल्लेख फ्रांज विस्नर वॉन मॉर्गनस्टर्न द्वारा किया गया है जो एक ऑस्ट्रो-हंगरी के इंजीनियर हैं जिन्होंने परागुआयन युद्ध से पहले और परागुआयन सेनाओं में सेवा की थी। वॉन मॉर्गनस्टर्न के अनुसार कुछ परागुआयन खनिकों ने कैगुआज़ू विभाग में कुछ पहाड़ियों के पास काम करते हुए कुछ पत्थर पाए जिनमें प्राचीन अक्षरों को उकेरा गया था। [[तानाशाह]] फ्रांसिया ने अपने बेहतरीन विशेषज्ञों को उन पत्थरों का निरीक्षण करने के लिए भेजा, और उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि उन पत्थरों में उकेरे गए अक्षर [[इब्रानी भाषा|इब्रानी]] जैसे प्रतीक थे, लेकिन वे उनका अनुवाद नहीं कर सके और न ही उन अक्षरों को तराशने की सही तारीख का पता लगा सके।{{Sfn|von Morgenstern|1998|p=198}} आगे कोई रिकॉर्डेड जाँच मौजूद नहीं है, और विस्नर के अनुसार लोगों का मानना था कि पत्र तोमा प्रेरित द्वारा परंपरा का पालन करते हुए बनाए गए थे।
=== अवशेष ===
[[चित्र:ShrineOfSaintThomasAtMeliapore18thCentury.jpg|अंगूठाकार| [[मयलापुर|मायलापुर]] में संत तोमा का श्राइन, १८वीं सदी का प्रिंट]]
[[चित्र:Ortona_-Reliquary_chest_of_Saint_Thomas-_2006_by-RaBoe_02.jpg|अंगूठाकार| ओरतोना के कैथेड्रल में तोमा के अवशेष]]
==== मायलापुर ====
पारंपरिक खातों का कहना है कि प्रेरित तोमा ने न केवल केरल में बल्कि दक्षिणी भारत के अन्य हिस्सों में भी प्रचार किया - और कुछ अवशेष अभी भी [[भारत]] में [[चेन्नई]] शहर के मध्य भाग में मायलापुर पड़ोस में सैन थोम बेसिलिका में रखे गए हैं।{{Sfn|Muthiah|2014|p=}} [[मार्को पोलो]], [[वेनिस गणराज्य|विनीशियन]] यात्री और ''डिस्क्रिप्शन ऑफ़ द वर्ल्ड के लेखक'' जिन्हें लोकप्रिय रूप से ''इल मिलिओन के नाम से जाना जाता है,'' ने १२८८ और १२९२ में दक्षिण भारत का दौरा किया था। पहली तारीख को खारिज कर दिया गया है क्योंकि वह उस समय चीन में था, लेकिन दूसरी तारीख को आम तौर पर स्वीकार किया जाता है।{{Sfn|Muthiah|2014|p=}}
==== एडेसा ====
परंपरा के अनुसार २३२ ईस्वी में प्रेरित तोमा के अवशेषों का बड़ा हिस्सा एक भारतीय राजा द्वारा भेजा गया था और मायलापुर से एडेसा, [[मेसोपोटामिया]] शहर में लाया गया था जिस अवसर पर उनके सिरिएक ''अधिनियम'' लिखे गए थे।
भारतीय राजा को सिरिएक स्रोतों में "मजदाई", यूनानी और लैटिन स्रोतों में क्रमशः "मजदेओस" और "मिस्डियस" के रूप में नामित किया गया है जो वासुदेव प्रथम के कुषाण सिक्के पर "बाजदेव" से जुड़ा है, "एम" के बीच संक्रमण और "बी" भारतीय नामों के लिए शास्त्रीय स्रोतों में एक वर्तमान है।{{Sfn|Bussagli|1965|p=255}} शहीद वैज्ञानिक रब्बन स्लिबा ने भारतीय राजा, उनके परिवार और संत तोमा दोनों को एक विशेष दिन समर्पित किया:
{{Quote|''Coronatio Thomae apostoli et Misdeus rex Indiae, Johannes eus filius huisque mater Tertia'' (भारत के मिसदेउस राजा संत तोमा का राज्याभिषेक, अपने बेटे याहवह और माँ तर्षिय के साथ)}}
चौथी शताब्दी में उनके दफन स्थान पर बने शहादत ने तीर्थयात्रियों को एडेसा में लाया। ३८० के दशक में एगेरिया ने अपनी यात्रा का वर्णन एक पत्र में किया जो उन्होंने घर पर अपने ननों के समुदाय को भेजा था (''इटिनेरिया एगेरिया''):<ref>{{Cite web|url=http://digital.library.upenn.edu/women/egeria/pilgrimage/pilgrimage.html|title=The Pilgrimage of S. Silvia of Aquitania to the Holy Places|archive-url=https://web.archive.org/web/20150115010548/http://digital.library.upenn.edu/women/egeria/pilgrimage/pilgrimage.html|archive-date=15 January 2015|access-date=10 May 2015}}</ref><blockquote>हम अपने परमेश्वर मसीह के नाम पर एडेसा पहुँच, और, हमारे आगमन पर, हमने सीधे संत तोमा के गिरजाघर और स्मारक की मरम्मत की। वहाँ, प्रथा के अनुसार प्रार्थनाएँ की जाती थीं और अन्य चीज़ें जो पवित्र स्थानों में प्रथागत थीं, की जाती थीं; हम स्वयं संत तोमा के विषय में भी कुछ बातें पढ़ते हैं। वहाँ का कलीसिया बहुत ही महान, बहुत सुंदर और नए निर्माण का है, परमेश्वर का घर बनने के योग्य है, और जैसा कि बहुत कुछ था जिसे मैं देखना चाहता था, मेरे लिए वहाँ तीन दिन रहना आवश्यक था।</blockquote>साइरस के थियोडोरेट के अनुसार संत तोमा की हड्डियों को एडेसा के बिशप साइरस I द्वारा २२ अगस्त ३९४ को शहर के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित एक गिरजाघर में एडेसा के बाहर शहीदी से स्थानांतरित किया गया था।{{Sfn|Harvey|2005|p=124}}
४४१ में ''मैजिस्टर मिलिटम प्रति ओरिएंटम'' एनाटोलियस ने अवशेषों को धारण करने के लिए एक चांदी का ताबूत दान किया।{{Sfn|Segal|2005|pp=174–176, 250}}
५२२ ईस्वी में कॉसमस इंडिकोप्लेस्ट्स (जिसे एलेक्जेंड्रियन कहा जाता है) ने मालाबार तट का दौरा किया। वह पहला यात्री है जिसने अपनी पुस्तक ''क्रिश्चियन टोपोग्राफी में मालाबार में सीरियाई ईसाइयों का उल्लेख किया है।'' उन्होंने उल्लेख किया है कि "कल्लियाना" (कोल्लम) शहर में एक बिशप थे जिन्हें फारस में पवित्र किया गया था।{{Sfn|Sadasivan|2000|p=410}}
११४४ में [[जंगी साम्राज्य|ज़ेंगिड्स]] द्वारा शहर पर कब्जा कर लिया गया था और मंदिर नष्ट हो गया था।{{Sfn|Segal|2005|pp=174–176, 250}}
[[चित्र:Cattedrale-di-San-Tommaso-al-crepuscolo.jpg|अंगूठाकार| संत तोमा की ऑर्टन की बेसिलिका]]
संत तोमा के प्रतिष्ठित अवशेष एडेसा में तब तक बने रहे जब तक कि उन्हें १२५८ में खियोस में स्थानांतरित नहीं कर दिया गया।{{Sfn|Thurston|1913}} अवशेषों के कुछ हिस्से को बाद में फिर से स्थानांतरित कर दिया गया था, और अब इटली के ओरतोना में संत तोमा प्रेरित के कैथेड्रल में रखा गया है। हालांकि, तोमा की खोपड़ी यूनानी द्वीप पटमोस पर संत जॉन थियोलॉजियन के मठ में कहा जाता है।{{Sfn|Sanidopoulos|2010}}
१२५८ में ओरतोना की तीन गलियाँ खियोस द्वीप पर पहुँचीं जिसका नेतृत्व जनरल लियोन एकियाउली कर रहे थे। खियोस को वह द्वीप माना जाता था जहाँ तोमा को भारत में उनकी मृत्यु के बाद दफनाया गया था। एक हिस्सा पेलोपोनिस और ईजियन द्वीपों के आसपास लड़ा, दूसरा तत्कालीन सीरियाई तट पर समुद्र में डूब गया। ओर्टन की तीन गलियाँ युद्ध के दूसरे मोर्चे पर चली गईं और खियोस द्वीप पर पहुँच गईं।
यह कहानी ओर्टोना की १६वीं शताब्दी के चिकित्सक और लेखक गियाम्बतीस्ता दे लेक्टिस द्वारा प्रदान की गई है। लूटपाट के बाद नवारका ओरतोना लियोन खियोस द्वीप के मुख्य गिरजाघर में प्रार्थना करने गया और रोशनी से सजी और देदीप्यमान एक चैपल की ओर आकर्षित हुआ। एक बुजुर्ग पुजारी ने एक दुभाषिया के माध्यम से उन्हें सूचित किया कि उस वाक्पटुता में संत तोमा प्रेरित के शरीर की वंदना की गई थी। असामान्य मिठास से भरी लियोन गहरी प्रार्थना में जुटी। उस क्षण एक हल्के हाथ ने दो बार उसे करीब आने के लिए आमंत्रित किया। नवार्का लियोन ने बाहर पहुँचकर समाधि के पत्थर के सबसे बड़े छेद से एक हड्डी ली जिस पर यूनानी अक्षरों को उकेरा गया था और एक प्रभामंडल में कमर से ऊपर एक बिशप को दर्शाया गया था। वह उस बात की पुष्टि था जो उन्होंने पुराने याजक को कही थी और कि आप वास्तव में प्रेरित के शरीर की उपस्थिति में हैं। वह गैली पर वापस चला गया और साथी रग्गिएरो ग्रोग्नो के साथ अगली रात के लिए चोरी की योजना बनाई। उन्होंने भारी समाधि का पत्थर उठा लिया और अंतर्निहित अवशेषों को देखा। बर्फ-सफेद कपड़ों में लिपटे उन्हें एक लकड़ी के बक्से में रखा गया (१५६६ की लूटपाट के लिए ओर्टोना में संग्रहीत) और उन्हें गैली पर सवार कर दिया। लियोन, फिर, अन्य साथियों के साथ, वह फिर से गिरजाघर में लौटा, समाधि का पत्थर लिया और उसे ले गया। केवल चिनार्डो एडमिरल को कीमती माल के बारे में पता था, मुस्लिम विश्वास के सभी नाविकों को अन्य जहाजों पर ले जाया गया और उसे ओर्टोना के लिए मार्ग लेने का आदेश दिया।
[[चित्र:Ortona_-San_Tommaso_-_Portal-_2006_by-RaBoe_01.jpg|बाएँ|अंगूठाकार| ओरतोना का पोर्टल, संत तोमा बेसिलिका]]
वह ६ सितंबर १२५८ को ऑर्टन के बंदरगाह पर उतरा। डे लेक्टिस की कहानी के अनुसार उन्हें ओरतोना गिरजाघर के लिए जिम्मेदार मठाधीश जैकोपो को सूचित किया गया था जो सभी लोगों द्वारा महसूस किए गए और साझा किए गए आतिथ्य के लिए पूर्ण प्रावधान का अनुमान लगाते हैं। तब से प्रेरित का शरीर और कब्र का पत्थर बासीलीक की तहखाना में संरक्षित है। १२५९ में जॉन पीकॉक अनुबंध के तहत अदालत द्वारा बारी में लिखा गया एक चर्मपत्र, डायोकेसन लाइब्रेरी में ओरतोना में संरक्षित पांच गवाहों की उपस्थिति, उस घटना की सत्यता की पुष्टि करते हुए, रिपोर्ट की गई जैसा कि उल्लेख किया गया है, गियाम्बतीस्ता दे लेक्टिस, चिकित्सक और लेखक ओरतोना द्वारा १६वीं शताब्दी का।
अवशेषों ने १५६६ की सार्केन लूटपाट और दिसंबर १९४३ के अंत में लड़ी गई ओरतोना की लड़ाई में नाजियों के विनाश दोनों का विरोध किया। बासीलीक को उड़ा दिया गया क्योंकि घंटाघर को सैन विटो चिएटिनो से समुद्र के रास्ते आने वाले सहयोगियों द्वारा एक खोज बिंदु माना जाता था। अवशेष, संत तोमा के खजाने के साथ जर्मनों द्वारा बेचे जाने का इरादा था, लेकिन भिक्षुओं ने उन्हें घंटी टॉवर के अंदर उलझा दिया जो अर्ध-बर्बाद गिरजाघर का एकमात्र जीवित हिस्सा था।
[[चित्र:Ortona_-San_Tommaso-_2006_by-RaBoe_03.jpg|अंगूठाकार| ओर्टोना बेसिलिका के क्रिप्ट में लाया गया तोमा का मूल खियोस का मकबरा]]
प्रेरित के अवशेषों के साथ खियोस से ओर्टोना लाया गया तोमा का मकबरा, वर्तमान में वेदी के पीछे संत तोमा बेसिलिका के क्रिप्ट में संरक्षित है। इसके बजाय हड्डियों से युक्त कलश को वेदी के नीचे रखा जाता है। यह एक नकली ताबूत का आवरण है, प्रारंभिक ईसाई दुनिया में काफी व्यापक दफन रूप, कम महंगी सामग्री की कब्र के शीर्ष के रूप में। पट्टिका में एक शिलालेख और एक आधार-राहत है जो कई तरह से सिरो-मेसोपोटामिया को संदर्भित करता है। कब्र पर तोमा प्रेरित को यूनानी अक्षरों में पढ़ा जा सकता है, अभिव्यक्ति 'ओसीओस तोमा, संत तोमा। यह पैलेओग्राफिक और लेक्सिकल के दृष्टिकोण से तीसरी-पांचवीं शताब्दी तक दिनांकित किया जा सकता है, एक समय जब ओएसियोस शब्द अभी भी उस पवित्र में अगिओस के पर्याय के रूप में प्रयोग किया जाता है, वह वह है जो भगवान की कृपा में है और इसमें डाला गया है गिरजाघर: दो शब्दावली, इसलिए ईसाइयों को इंगित करती हैं। संत तोमा की पट्टिका के विशेष मामले में ओसियोस शब्द आसानी से सिरिएक ''मार'' (भगवान) शब्द का अनुवाद हो सकता है जिसका श्रेय प्राचीन दुनिया में दिया जाता है, लेकिन वर्तमान समय में भी, बिशप बनने के लिए एक संत है।
==== इराक ====
१९६४ में [[मोसुल]], [[इराक़|इराक]] में संत तोमा के गिरजाघर में बहाली के काम के दौरान संत तोमा की उंगलियों की हड्डियों की खोज की गई थी,<ref>{{Cite news|url=http://www.syrian-orthodox.com/readnews.php?id=530|last=<!--Staff writer(s); no by-line.-->|work=Syrian Orthodox Patriarchate|access-date=18 May 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20170623164839/http://syrian-orthodox.com/readnews.php?id=530|archive-date=23 June 2017|language=ar|script-title=ar:من الأرشيف: اكتشاف ذخيرة الرسول توما بيد مطران الموصل مار سويريوس زكا عيواص}}</ref> और मोसुल के पतन तक वहाँ रखे गए थे जिसके बाद अवशेषों को १७ जून २०१४ में संत मताई के मठ में स्थानांतरित कर दिया गया था।{{Sfn|Arraf|2018}}
== उत्तराधिकार ==
संत तोमा ईसाइयों की परंपरा के अनुसार संत तोमा प्रेरित ने भारत में अपना सिंहासन स्थापित किया और चेरा राजकुमार मार केप्पा को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया।<ref>Ramban Pattu lines:17–24</ref>
== ऐतिहासिक संदर्भ ==
[[चित्र:By_the_command_of_an_Indian_King_he_was_thrust_through_with_Lances.jpg|अंगूठाकार| एक भारतीय राजा की आज्ञा से उसे भाले से उड़ा दिया गया]]
३२५ की पहली सार्वभौम परिषद के तुरंत बाद सदियों के दौरान लिखे गए कई प्रारंभिक ईसाई लेखन तोमा के उद्देश्य का उल्लेख करते हैं।
''ट्रांज़िटस मारिया ने'' प्रत्येक प्रेरितों का वर्णन किया है कि मरियम की धारणा के दौरान अस्थायी रूप से स्वर्ग में ले जाया जा रहा है।
=== तोमा के अधिनियम ===
मुख्य स्रोत तोमा के एपोक्रिफ़ल अधिनियम हैं जिन्हें कभी-कभी इसके पूर्ण नाम ''द एक्ट्स ऑफ़ जूडस तोमा के'' नाम से पुकारा जाता है जो लगभग १८०-२३० ईस्वी में लिखा गया था। इन्हें आम तौर पर विभिन्न ईसाई धर्मों द्वारा मनगढ़ंत, या यहाँ तक कि विधर्मी माना जाता है। दो शताब्दियाँ जो प्रेरित के जीवन और इस कार्य की रिकॉर्डिंग के बीच व्यतीत हुईं, उनकी प्रामाणिकता पर संदेह करती हैं।
राजा, मिस्डियस (या मिजदेओस), तब क्रोधित हो गया जब तोमा ने रानी टर्टिया, राजा के बेटे जुज़ेन्स, भाभी राजकुमारी मायगडोनिया और उनके दोस्त मार्किया को परिवर्तित कर दिया। मिस्डियस तोमा को शहर के बाहर ले गया और चार सैनिकों को उसे पास की पहाड़ी पर ले जाने का आदेश दिया जहाँ सैनिकों ने तोमा को मार डाला और उसे मार डाला। तोमा की मृत्यु के बाद साइफोरस को मजदाई के जीवित धर्मान्तरित लोगों द्वारा पहला प्रेस्बिटेर चुना गया जबकि जुज़ेन्स पहले उपयाजक थे। (नाम मिसदेउस, तर्षिय, जुज़नेस, सीफोरस, मार्किया और मिगडोनीया (मायगडोनिया, [[मेसोपोटामिया]] का एक प्रांत) यूनानी वंश या सांस्कृतिक प्रभावों का सुझाव दे सकता है। यूनानी व्यापारी लंबे समय से मुजिरिस में आते रहे हैं। उत्तरी भारत में यूनानी राज्य और [[सिकंदर|सिकंदर महान]] द्वारा स्थापित बैक्ट्रिया जागीरदार थे इंडो-पार्थियन।{{Sfn|Mookerji|1966|p=28}}
[[चित्र:Caravaggio incredulity.jpg|अंगूठाकार|335x335पिक्सेल| कारवागियो द्वारा ''संत तोमा की अविश्वसनीयता'']]
== प्रेरितों का सिद्धांत ==
प्रेरितों का सिद्धांत जैसा कि कुरेटों १८६४ में परिलक्षित हुआ प्रमाणित करता है कि तोमा ने भारत से ईसाई सिद्धांत लिखा था।
{{Quote|भारत और इसके अपने सभी देश, और इसकी सीमा से लगे हुए, यहाँ तक कि सुदूर समुद्र तक जूडस तोमा से प्रेरित का पुरोहितत्व प्राप्त किया, जो चर्च में गाइड और शासक था जिसे उसने वहाँ बनाया और सेवा की। अश्शूरियों और मादियों का पूरा फारस, और बाबुल के आस-पास के देशों का...यहाँ तक कि भारतीयों की सीमाओं तक और यहां तक कि गोग और मागोग के देश तक" कहा जाता है कि एगैयस के चेले एग्गियस से प्रेरितों का हाथ मिला है। एडेसा की.}}
=== ऑरिजन ===
ईसाई दार्शनिक ऑरिजन ने अलेक्जेंड्रिया और फिर कैसरिया में बड़े प्रशंसा के साथ पढ़ाया। वह पहले ज्ञात लेखक हैं जिन्होंने प्रेरितों द्वारा बहुत से कास्टिंग को रिकॉर्ड किया है। ऑरिजन का मूल कार्य खो गया है, लेकिन पार्थिया के तोमा से गिरने के बारे में उनका बयान यूसेबियस द्वारा संरक्षित किया गया है। "उत्पत्ति पर अपनी टिप्पणी के तीसरे अध्याय में ऑरिजन कहते हैं कि, परंपरा के अनुसार तोमा को श्रम का आवंटित क्षेत्र पार्थिया था"।{{Sfn|Perumalil|1971|pp=50–51}}{{Sfn|Farquhar|1926|pp=30–31}}
=== युस्बियास ===
ऑरिजन को उद्धृत करते हुए, कैसरिया के यूसेबियस कहते हैं: "जब पवित्र प्रेरित और हमारे उद्धारकर्ता के शिष्य पूरी दुनिया में बिखरे हुए थे, तोमा, इसलिए परंपरा ने इसे अपने हिस्से पार्थिया के रूप में प्राप्त किया..." "यहूदा जिसे यहूदा भी कहा जाता है तोमा" की एडेसा (उरफा) के राजा एगर की कथा में एक भूमिका है जिसने उदगम के बाद एडेसा में उपदेश देने के लिए थडदेयस को भेजा था। एफ़्रेम द सीरियन भी इस किंवदंती को याद करता है।
=== एप्रैम द सीरियन ===
एफ़्रेम द सीरियन द्वारा रचित कई भक्तिमय भजन एडेसन गिरजाघर के तोमा के भारतीय धर्मत्यागी के प्रति दृढ़ विश्वास के साक्षी हैं। वहाँ शैतान तोमा की बात करता है "जिस प्रेरित को मैंने भारत में मारा"। इसके अलावा, "व्यापारी हड्डियों को लाया" एडेसा को।
{{Quote|संत तोमा की स्तुति करते हुए एक और भजन पढ़ता है "व्यापारी द्वारा लाई गई हड्डियाँ"। "भारत की अपनी कई यात्राओं में / और उसके बाद उनकी वापसी पर / सभी धन / जो उन्होंने वहाँ पाया / उनकी आँखों में गंदगी उन्होंने आपकी पवित्र हड्डियों की तुलना में प्रतिष्ठा की"। अभी तक एक अन्य भजन एफ़्रेम में तोमा के मिशन के बारे में बात की गई है: "पृथ्वी बलिदान के धुएं से रोशन हो गई है", "लोगों की भूमि अंधेरे में गिर गई", "एक दागी भूमि तोमा ने शुद्ध की है"; तोमा द्वारा "भारत की अंधेरी रात" "रोशनी से भर गई" थी।}}
=== नाजियानज़स का ग्रेगरी ===
[[चित्र:Thomas_the_Apostle_mosaic.jpg|अंगूठाकार|175x175पिक्सेल| प्रेरित तोमा का प्राचीन मोज़ेक]]
नाजियानज़स के ग्रेगरी का जन्म ३३० ईस्वी में हुआ था जिसे उनके मित्र कैसरिया के बेसिल ने एक बिशप के रूप में प्रतिष्ठित किया था ; ३७२ में उनके पिता, नाज़ियानज़स के बिशप ने उन्हें अपना प्रभार साझा करने के लिए प्रेरित किया। ३७९ में [[क़ुस्तुंतुनिया|कांस्टेंटिनोपल]] के लोगों ने उन्हें अपना बिशप कहा। [[पूर्वी रूढ़िवादी कलीसिया|पूर्वी रूढ़िवादी गिरजाघर]] द्वारा, उन्हें सशक्त रूप से "धर्मशास्त्री" कहा जाता है। "क्या? क्या प्रेरित उन बहुत सी जातियों और देशों में अजनबी नहीं थे जिन पर वे फैले हुए थे? … पीटर वास्तव में यहूदिया से संबंधित हो सकता है, लेकिन अन्यजातियों के साथ पॉल, अखाया के साथ ल्यूक, एपिरस के साथ एंड्रयू, इफिसुस के साथ जॉन, भारत के साथ तोमा, इटली के साथ मार्क क्या था?
=== मिलान के एम्ब्रोस ===
मिलान के एम्ब्रोस यूनानी और लैटिन क्लासिक्स से पूरी तरह परिचित थे और उन्हें भारत और भारतीयों के बारे में अच्छी जानकारी थी। वह कई बार भारत, [[हिन्द महासागर|हिंद महासागर]], गंगा नदी आदि के जिम्नोसोफिस्टों की बात करता है। "यह हमारे प्रभु यीशु के कहने के अनुसार प्रेरितों को बिना देरी के भेजे जाने की बात स्वीकार करता है ... यहाँ तक कि उन राज्यों को भी जो ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों से बंद थे, उनके लिए सुलभ हो गए जैसे कि भारत तोमा, फारस से मैथ्यू तक..." {{Better source|date=July 2019}}
=== टूर्स के ग्रेगरी ===
टूर्स के ग्रेगरी की गवाही (मृत्यु ५९४): "तोमा प्रेरित, उनकी शहादत की कथा के अनुसार भारत में पीड़ित होने के लिए कहा गया है। उनके पवित्र अवशेषों (कॉर्पस) को लंबे समय के अंतराल के बाद सीरिया के एडेसा शहर में ले जाया गया और वहाँ दखल दिया गया। भारत के उस हिस्से में जहाँ उन्होंने पहली बार विश्राम किया था, एक मठ और आकर्षक आयामों का एक गिरजाघर है जिसे विस्तृत रूप से सजाया और डिजाइन किया गया है। यह थियोडोर जो उस स्थान पर था, ने हमें बताया।"{{Sfn|Medlycott|1905|p=71}}
== लेखन ==
{{Quote|Let none read the gospel according to Thomas, for it is the work, not of one of the twelve apostles, but of one of [[Mani (prophet)|Mani]]'s three wicked disciples.|[[Cyril of Jerusalem]], ''Catechesis'' V (4th century)}}
ईसाई युग की पहली दो शताब्दियों में कई लेखन परिचालित किए गए थे। यह अब स्पष्ट नहीं है कि तोमा को सिद्धांत के लिए एक अधिकार के रूप में क्यों देखा गया था, हालांकि यह विश्वास ग्नोस्टिक समूहों में ''पिस्टिस सोफिया'' के रूप में प्रलेखित है। उस ज्ञानवादी कार्य में मरियम मगदलीनी (शिष्यों में से एक) कहती है:
{{Quote|अब, हे मेरे प्रभु, सुन, कि मैं खुलकर बातें करूँ, क्योंकि तूने हम से कहा है, कि जिसके सुनने के कान हों, वह सुन ले। उस शब्द के बारे में जो आपने फिलिप से कहा था: "तू और तोमा और मत्ता ये तीन हैं जिन्हें यह दिया गया है ... प्रकाश के राज्य के हर शब्द को लिखने के लिए, और उनकी गवाही देने के लिए"; अब सुन कि मैं इन वचनों का अर्थ बताती हूँ। यह वह है जो आपकी प्रकाश-शक्ति ने एक बार मूसा के माध्यम से भविष्यवाणी की थी: "दो और तीन गवाहों के माध्यम से सब कुछ स्थापित किया जाएगा। तीन गवाह फिलिप और तोमा और मत्ता हैं"|''पिस्टिस सोफिया'' १:४३}}
इस कथन के पीछे एक प्रारंभिक, गैर-ज्ञानवादी परंपरा हो सकती है जो अन्य विहित तीनों के ऊपर, अपने [[आरामाईक|अरामी]] रूप में [[मत्ती का सुसमाचार|मैथ्यू के सुसमाचार]] की प्रधानता पर जोर देती है।
''तोमा के अधिनियमों'' के अलावा ''तोमा की एक व्यापक रूप से परिचालित शैशवकालीन सुसमाचार'' था जो संभवतः बाद की दूसरी शताब्दी में लिखा गया था, और शायद [[सीरिया]] में भी जो यीशु के लड़कपन की चमत्कारी घटनाओं और कौतुक से संबंधित है। यह वह दस्तावेज है जो पहली बार उन बारह गौरैयों की परिचित कथा बताता है जिसे यीशु ने पांच साल की उम्र में सब्त के दिन मिट्टी से बनाया था जिसने पंख लगा लिया और उड़ गई। इस काम की सबसे पहली पांडुलिपि [[सीरियाई भाषा|सिरिएक]] में ६वीं सदी की है। इस सुसमाचार का उल्लेख सबसे पहले इरेनायस ने किया था; रॉन कैमरून कहते हैं: "अपने उद्धरण में इरेनियस पहले एक गैर-प्रामाणिक कहानी को उद्धृत करता है जो यीशु के बचपन के बारे में प्रसारित होती है और फिर सीधे लूका के सुसमाचार की शैशव कथा से एक अंश को उद्धृत करने के लिए आगे बढ़ती है। चूंकि तोमा की इन्फेंसी गॉस्पेल इन दोनों कहानियों को एक-दूसरे के सापेक्ष निकटता में रिकॉर्ड करती है, इसलिए यह संभव है कि इरेनायस द्वारा उद्धृत एपोक्रिफ़ल लेखन वास्तव में जिसे अब तोमा के इन्फेंसी गॉस्पेल के रूप में जाना जाता है। पांडुलिपि परंपरा की जटिलताओं के कारण, हालांकि, इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि तोमा के शिशु सुसमाचार की कहानियाँ कब लिखी जाने लगीं।"
इन दस्तावेजों के आधुनिक समय में सबसे अच्छी तरह से जाना जाने वाला "कथन" दस्तावेज है जिसे तोमा का सुसमाचार कहा जा रहा है, एक गैर-विहित कार्य जिसकी तिथि विवादित है। शुरुआती पंक्ति का दावा है कि यह "डिडिमोस जुडास तोमा" का काम है - जिसकी पहचान अज्ञात है। यह काम १९४५ में चेनोबोस्कियन मठ के स्थल के पास नाग हम्मादी के मिस्र के गांव में एक [[कॉप्टिक भाषा|कॉप्टिक]] अनुवाद में खोजा गया था। एक बार कॉप्टिक पाठ प्रकाशित होने के बाद विद्वानों ने माना कि १८९० के दशक में ऑक्सीरहिन्चस में पाए गए [[पपाइरस|पपीरस]] के टुकड़ों से पहले के यूनानी अनुवाद को प्रकाशित किया गया था।
== संत तोमा क्रॉस ==
[[चित्र:Nasrani_cross.jpg|अंगूठाकार| संत तोमा क्रिश्चियन क्रॉस]]
१६ वीं शताब्दी के काम में ''जोर्नाडा'', एंटोनियो गौविया ''संत तोमा क्रॉस के'' नाम से जाने वाले अलंकृत क्रॉस के बारे में लिखते हैं। इसे नसरानी मेनोराह,{{Sfn|Collins|2007|p=119}} फ़ारसी क्रॉस, या मार थोमा स्लीवा के नाम से भी जाना जाता है।{{Sfn|Antony|2019}} इन क्रॉसों को परंपरा के अनुसार ६वीं शताब्दी से माना जाता है और केरल, मायलापुर और गोवा में कई गिरजाघरों में पाए जाते हैं। संत तोमा क्रॉस के रूप में इस प्रकार के क्रॉस को संदर्भित करने के लिए ''जोर्नाडा'' सबसे पुराना ज्ञात लिखित दस्तावेज है। गौविया क्रांगानोर में क्रॉस की वंदना के बारे में भी लिखते हैं, क्रॉस को "ईसाईयों के क्रॉस" के रूप में संदर्भित करते हैं।
नसरानी प्रतीक की कई व्याख्याएँ हैं। ईसाई यहूदी परंपरा पर आधारित व्याख्या यह मानती है कि इसका डिजाइन यहूदी मेनोराह पर आधारित था जो इब्रानियों का एक प्राचीन प्रतीक है जिसमें सात शाखित लैंप स्टैंड (कैंडलब्रा) होते हैं।{{Sfn|Collins|2007|p=119}} स्थानीय संस्कृति पर आधारित व्याख्या में कहा गया है कि यीशु के चित्र के बिना क्रॉस और "हर्षितता" के प्रतीक फूलों वाली भुजाओं के साथ पॉल प्रेरित के पुनरुत्थान धर्मशास्त्र की ओर इशारा करता है; शीर्ष पर पवित्र आत्मा यीशु मसीह के पुनरुत्थान में पवित्र आत्मा की भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। बौद्ध धर्म के प्रतीक कमल और उस पर क्रॉस से पता चलता है कि बुद्ध की भूमि में ईसाई धर्म की स्थापना हुई थी। तीन चरण कलवारी और नाले, क्रॉस से बहने वाले अनुग्रह के चैनल को इंगित करते हैं।{{Sfn|Thadikatt|2004|p=114}}
== इस्लाम में ==
[[ईसा इब्न मरियम|यीशु]] के शिष्यों के [[क़ुरआन|कुरानिक]] खाते में उनके नाम, संख्या या उनके जीवन के किसी भी विस्तृत विवरण को शामिल नहीं किया गया है। मुस्लिम [[तात्पर्य निरूपण|व्याख्या]], हालांकि, [[नया नियम|न्यू टेस्टामेंट]] सूची के साथ अधिक या कम सहमत हैं और कहते हैं कि शिष्यों में पीटर, फिलिप, तोमा, बार्थोलोम्यू, मैथ्यू, एंड्रयू जेम्स जूड जॉन जेम्स, अलफियस के बेटे और साइमन द ज़ीलोट शामिल थे।{{Sfn|Noegel|Wheeler|2002|p=86}}
== प्रमुख तीर्थ ==
=== सैंथोम गिरजाघर ===
[[चित्र:SANTHOME_CATHEDRAL.jpg|अंगूठाकार| सैन थोम गिरजाघर, १५२३ में बनाया गया।]]
सैंथोम गिरजाघर को [[भारत|भारत के]] [[चेन्नई]] में स्थित संत तोमा का मकबरा कहा जाता है।<ref>[https://www.indiastudychannel.com/resources/143635-Santhome-Basilica-in-Chennai-A-Historical-Pilgrimage.aspx Santhome Basilica in Chennai — A historical pilgrimage] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210830073622/https://www.indiastudychannel.com/resources/143635-Santhome-Basilica-in-Chennai-A-Historical-Pilgrimage.aspx|date=30 August 2021}} ''indiastudychannel.com''. </ref> इसे १५२३ में पुर्तगाली उद्देश्यरियों ने बनवाया था। यह एक राष्ट्रीय तीर्थस्थल, बेसिलिका और कैथेड्रल है। यह ईसाइयों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थल और संत तोमा का एक प्रमुख तीर्थस्थल है।
== यह सभी देखें ==
* [[मलंकारा रूढ़िवादी सीरियाई गिरजा|मलंकारा ऑर्थोडॉक्स सीरियन गिरजाघर]]
* [[साओ टोमे]]
== संदर्भ ==
=== टिप्पणियाँ ===
{{Notelist}}
=== उद्धरण ===
{{Reflist}} {{Apostles}}{{New Testament people}}{{Coptic saints}}{{Authority control}}
[[श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात]]
[[श्रेणी:72 में निधन]]
[[श्रेणी:सीएस1 जर्मन-भाषा स्रोत (de)]]
[[श्रेणी:वेबग्रंथागार साँचा वेबैक कड़ियाँ]]
[[श्रेणी:All accuracy disputes]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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{{Infobox Writing system|name=Braille Bahasa Inggris|type=[[Alfabet]]|typedesc=([[aksara|nonlinear]])|time=1902|languages=Bahasa Inggris|fam1=[[Tulisan malam]]|fam2=[[Braille 1829|Braille awal]]|fam3=[[Braille bahasa Prancis]]|children=[[Braille internasional yang disatukan]]<br>[[Braille bahasa Inggris yang disatukan]]<br>[[Braille bahasa Irlandia]]|creator=|unicode=[https://www.unicode.org/charts/PDF/U2800.pdf U+2800 to U+283F]|iso15924=|sample=English braille sample.jpg}}'''अंग्रेजी ब्रेल''', जिसे ''ग्रेड 2 ब्रेल'' के रूप में भी जाना जाता है, <ref>"Braille bahasa Inggris" biasanya merujuk kepada tingkat 2. Braille tingkat 1 yang lebih mendasar dan hanya digunakan oleh pelajar, ditetapkan sebagai "Braille bahasa Inggris tingkat 1" (Braille yang melalui pembelajaran jarak jauh).</ref> [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेजी]] लिखने के लिए प्रयुक्त [[ब्रेल पद्धति|ब्रेल वर्णमाला]] है। ब्रेल में 250 या अधिक अक्षर ( फोनोग्राम ), संख्याएं, विराम चिह्न, आकृति चिह्न, संकुचन और संक्षिप्त रूप ( [[शब्द-चिह्न|लॉगोग्राम]] ) होते हैं। कुछ अंग्रेजी ब्रेल वर्ण, जैसे {{bc2|⠡}} {{angle bracket|ch}} , <ref>''{{angle bracket|Angle brackets}}'' akan digunakan untuk menunjukkan transkripsi huruf braille ke dalam abjad Latin.</ref> एक से अधिक मुद्रित अक्षरों के अनुरूप होते हैं।
== सन्दर्भ ==
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'''ब्रिटिश सांकेतिक भाषा''' ( '''बीएसएल''' ) [[यूनाइटेड किंगडम]] में उपयोग की जाने वाली [[सांकेतिक भाषा|एक सांकेतिक भाषा]] है और ग्रेट ब्रिटेन में [[Budaya tuli|बधिर]] समुदाय में पहली या पसंदीदा भाषा है। 2011 स्कॉटिश मेंटल काउंट में 'घर पर ब्रिटिश सांकेतिक भाषा का उपयोग' करने वाले लोगों के प्रतिशत के आधार पर, [[Perhimpunan Orang Tuli Britania|ब्रिटिश सोसाइटी ऑफ द डेफ ने]] अनुमान लगाया कि यूके में 151,000 बीएसएल उपयोगकर्ता थे, जिनमें से 87,000 बधिर थे। <ref>{{Cite web|url=http://signlanguageweek.org.uk/bsl-statistics|title=BSL Statistics|date=2016-03-06|website=Sign Language Week|language=en-GB|archive-url=https://web.archive.org/web/20210415125725/http://signlanguageweek.org.uk/bsl-statistics|archive-date=2021-04-15|dead-url=yes|access-date=2021-05-17}}</ref> इसके विपरीत, 2011 में इंग्लैंड और वेल्स मानसिक आकलन में, [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]] और [[वेल्स]] में रहने वाले 15,000 लोगों ने अपनी प्राथमिक भाषा के रूप में BSL का उपयोग करने की सूचना दी। <ref>[http://www.ons.gov.uk/ons/dcp171778_297002.pdf 2011 Census: Quick Statistics for England and Wales, March 2011], Accessed 17 February 2013.</ref> जो लोग बधिर नहीं हैं, वे बधिरों के लिए हियरिंग पार्टनर, साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर या ब्रिटिश बधिर समुदाय के साथ अन्य लिंक के उत्पाद के रूप में भी बीएसएल का उपयोग कर सकते हैं। यह भाषा स्थान का लाभ उठाती है और इसमें हाथों, शरीर, चेहरे और सिर की गति शामिल होती है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:यूनाइटेड किंगडम की भाषाएँ]]
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रोगान कला
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text/x-wiki
[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 2.jpg|अंगूठाकार|रोगन पेंटिंग में श्री तिरुपति बालाजी]]
रोगान कला गुजरात<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pwZUAAAAMAAJ&redir_esc=y|title=The Glory of Indian Handicrafts|last=Chattopadhyaya|first=Kamaladevi|date=1976|publisher=Indian Book Company|page=34|language=en}}</ref> में प्रचलित कपड़ा छपाई की एक कला है, इस कला में, उबले हुए अरंडी के तेल या अलसी के तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट को स्टाइलस का उपयोग करके कपड़े पर रखा जाता है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 4.jpg|अंगूठाकार|कल्पवृक्ष]]
इस तेल आधारित कला को कपड़े पर लगाने की प्रक्रिया गुजरात के माधापर गांव में शुरू हुई। हालांकि नाम रोगन (और कुछ पारंपरिक डिजाइन) भारतीय संस्कृति में एक उत्पत्ति का सुझाव देते हैं, इसे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं। रोगान कला शुरू में गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर प्रचलित थी। रंगे हुए कपड़े ज्यादातर जातियों की महिलाओं द्वारा खरीदे जाते थे जो अपनी शादियों के लिए कपड़े सजाना चाहती थीं। इसलिए यह एक मौसमी कला थी, जिसमें ज्यादातर काम उन महीनों में होता था जब ज्यादातर शादियां होती थीं। शेष वर्ष के दौरान, कारीगर कृषि जैसे अन्य प्रकार के काम पर स्विच करेंगे। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सस्ते और मशीन-निर्मित वस्त्रों के उदय के साथ, रोगान कला किए गए उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक महंगे हो गए, और कई कलाकारों ने अन्य व्यवसायों की ओर रुख किया।
== पुनरुत्थान ==
20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में, रोगान कला,<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/videos/gujarat-election-2022-see-the-art-of-rogan-art-in-kutch-amid-elections-rogan-painting-4974645.html|title=Gujarat Election 2022: चुनाव के बीच कच्छ में देखिए रोगन आर्ट की कला {{!}} Rogan painting|date=2022-11-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-06-17}}</ref> विशेष रूप से पेंटिंग में नए सिरे से रुचि लाने के लिए कई कारक एक साथ आए। सबसे पहले, 2001 के गुजरात भूकंप के बाद, जब अधिकांश क्षेत्र तबाह हो गया था, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था, नई सड़कों का निर्माण हुआ था, और इस क्षेत्र में उड़ानों की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण पर्यटन में वृद्धि हुई थी। दूसरा, स्थानीय सहकारी समितियों और गैर-लाभकारी समूहों ने स्थानीय कारीगरों, जिनमें रोगान कलाकार भी शामिल हैं, को शहरी सेटिंग्स और ऑनलाइन बिक्री करके अपने बाजार को बढ़ाने में मदद की। तीसरा, कई कारीगरों ने अपने शिल्प के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिससे उनके काम की प्रतिष्ठा बढ़ी। 2014 में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी व्हाइट हाउस का दौरा किया, तो उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को कच्छ कलाकार द्वारा चित्रित दो रोगान कला भेंट की।
गुजरात के कारीगरों<ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/kutchh/youth-creates-wall-pieces-of-gods-and-godesses-through-rogan-art-in-kutch-kdg-local18-1281961.html|title=Kutch: દેવી-દેવતાના આવા ચિત્રો તમે ક્યારેય નહીં જોયા હોય! જુઓ VIDEO|date=2022-11-11|website=News18 Gujarati|language=gu|access-date=2023-06-17}}</ref> ने पर्यटकों को लुभाने के लिए समकालीन उत्पाद, लहंगा, पर्स, बैग, कुशन कवर, टेबल क्लॉथ, वॉल हैंगिंग, पिलो कवर और रोगान कला साड़ियां पेश की हैं। जीवन का वृक्ष एक प्रमुख मूल भाव बना हुआ है। आशीष कंसारा रोगान कलाकार ने देवी देवता और हिंदू भगवान के चित्र बनाये, जोकि रोगान कला में दुर्लभ है. आशीष कंसारा और उनकी धर्मपत्नी कोमल कंसारा माधापर भुज रोगान कला करते है. 2020 में COVID-19 महामारी के बाद, कच्छ आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
[[चित्र:Rogan art by ashish kansara from Madhapar.jpg|अंगूठाकार|भुज के रोगान कलाकार]]
== रोगन छपाई की प्रक्रिया ==
अरंडी के तेल को लगभग 8 घंटे तक उबालने और वनस्पति रंग मिलाने से रोगान कला पेंट तैयार होता है जिससे रंग गाढ़ा और चमकदार होता है। जिस कपड़े पर पेंट या प्रिंट किया जाता है, वह आमतौर पर गहरे रंग का होता है, जिससे गहरे रंग अलग दिखाई देते हैं। रोगान कला फ्रीहैंड द्वारा तैयार की जाती है, एक लोहे की रोड से पेंट के धागे की तरह अनुगामी द्वारा अक्सर, आधे डिजाइन को पेंट किया जाता है, फिर कपड़े को आधे में मोड़ा जाता है, कपड़े के दूसरे आधे हिस्से में एक दर्पण छवि को स्थानांतरित किया जाता है।
== सन्दर्भ सूची ==
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[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 2.jpg|अंगूठाकार|रोगन पेंटिंग में श्री तिरुपति बालाजी]]{{Infobox Artist|name=आशीष कंसारा|image=Ashish kansara.jpg|imagesize=245px|caption=आशीष कंसारा|birthdate={{birth date|df=yes|1975|11|17}}|location=[[माधापर]], [[कच्छ]], India|field=[[Rogan Painting]]}}
रोगान कला गुजरात<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pwZUAAAAMAAJ&redir_esc=y|title=The Glory of Indian Handicrafts|last=Chattopadhyaya|first=Kamaladevi|date=1976|publisher=Indian Book Company|page=34|language=en}}</ref> में प्रचलित कपड़ा छपाई की एक कला है, इस कला में, उबले हुए अरंडी के तेल या अलसी के तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट को स्टाइलस का उपयोग करके कपड़े पर रखा जाता है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 4.jpg|अंगूठाकार|कल्पवृक्ष]]
इस तेल आधारित कला को कपड़े पर लगाने की प्रक्रिया गुजरात के माधापर गांव में शुरू हुई। हालांकि नाम रोगन (और कुछ पारंपरिक डिजाइन) भारतीय संस्कृति में एक उत्पत्ति का सुझाव देते हैं, इसे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं। रोगान कला शुरू में गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर प्रचलित थी। रंगे हुए कपड़े ज्यादातर जातियों की महिलाओं द्वारा खरीदे जाते थे जो अपनी शादियों के लिए कपड़े सजाना चाहती थीं। इसलिए यह एक मौसमी कला थी, जिसमें ज्यादातर काम उन महीनों में होता था जब ज्यादातर शादियां होती थीं। शेष वर्ष के दौरान, कारीगर कृषि जैसे अन्य प्रकार के काम पर स्विच करेंगे। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सस्ते और मशीन-निर्मित वस्त्रों के उदय के साथ, रोगान कला किए गए उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक महंगे हो गए, और कई कलाकारों ने अन्य व्यवसायों की ओर रुख किया।
== पुनरुत्थान ==
20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में, रोगान कला,<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/videos/gujarat-election-2022-see-the-art-of-rogan-art-in-kutch-amid-elections-rogan-painting-4974645.html|title=Gujarat Election 2022: चुनाव के बीच कच्छ में देखिए रोगन आर्ट की कला {{!}} Rogan painting|date=2022-11-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-06-17}}</ref> विशेष रूप से पेंटिंग में नए सिरे से रुचि लाने के लिए कई कारक एक साथ आए। सबसे पहले, 2001 के गुजरात भूकंप के बाद, जब अधिकांश क्षेत्र तबाह हो गया था, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था, नई सड़कों का निर्माण हुआ था, और इस क्षेत्र में उड़ानों की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण पर्यटन में वृद्धि हुई थी। दूसरा, स्थानीय सहकारी समितियों और गैर-लाभकारी समूहों ने स्थानीय कारीगरों, जिनमें रोगान कलाकार भी शामिल हैं, को शहरी सेटिंग्स और ऑनलाइन बिक्री करके अपने बाजार को बढ़ाने में मदद की। तीसरा, कई कारीगरों ने अपने शिल्प के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिससे उनके काम की प्रतिष्ठा बढ़ी। 2014 में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी व्हाइट हाउस का दौरा किया, तो उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को कच्छ कलाकार द्वारा चित्रित दो रोगान कला भेंट की।
गुजरात के कारीगरों<ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/kutchh/youth-creates-wall-pieces-of-gods-and-godesses-through-rogan-art-in-kutch-kdg-local18-1281961.html|title=Kutch: દેવી-દેવતાના આવા ચિત્રો તમે ક્યારેય નહીં જોયા હોય! જુઓ VIDEO|date=2022-11-11|website=News18 Gujarati|language=gu|access-date=2023-06-17}}</ref> ने पर्यटकों को लुभाने के लिए समकालीन उत्पाद, लहंगा, पर्स, बैग, कुशन कवर, टेबल क्लॉथ, वॉल हैंगिंग, पिलो कवर और रोगान कला साड़ियां पेश की हैं। जीवन का वृक्ष एक प्रमुख मूल भाव बना हुआ है। आशीष कंसारा रोगान कलाकार ने देवी देवता और हिंदू भगवान के चित्र बनाये, जोकि रोगान कला में दुर्लभ है. आशीष कंसारा और उनकी धर्मपत्नी कोमल कंसारा माधापर भुज रोगान कला करते है. 2020 में COVID-19 महामारी के बाद, कच्छ आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
[[चित्र:Rogan art by ashish kansara from Madhapar.jpg|अंगूठाकार|भुज के रोगान कलाकार]]
== रोगन छपाई की प्रक्रिया ==
अरंडी के तेल को लगभग 8 घंटे तक उबालने और वनस्पति रंग मिलाने से रोगान कला पेंट तैयार होता है जिससे रंग गाढ़ा और चमकदार होता है। जिस कपड़े पर पेंट या प्रिंट किया जाता है, वह आमतौर पर गहरे रंग का होता है, जिससे गहरे रंग अलग दिखाई देते हैं। रोगान कला फ्रीहैंड द्वारा तैयार की जाती है, एक लोहे की रोड से पेंट के धागे की तरह अनुगामी द्वारा अक्सर, आधे डिजाइन को पेंट किया जाता है, फिर कपड़े को आधे में मोड़ा जाता है, कपड़े के दूसरे आधे हिस्से में एक दर्पण छवि को स्थानांतरित किया जाता है।
== सन्दर्भ सूची ==
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[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 2.jpg|अंगूठाकार|रोगन पेंटिंग में श्री तिरुपति बालाजी]]{{Infobox Artist|name=आशीष कंसारा|image=Ashish kansara.jpg|imagesize=245px|caption=आशीष कंसारा|birthdate={{birth date|df=yes|1975|11|17}}|location=[[माधापर]], [[कच्छ]], India|field=[[रोगान कला]]}}
रोगान कला गुजरात<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pwZUAAAAMAAJ&redir_esc=y|title=The Glory of Indian Handicrafts|last=Chattopadhyaya|first=Kamaladevi|date=1976|publisher=Indian Book Company|page=34|language=en}}</ref> में प्रचलित कपड़ा छपाई की एक कला है, इस कला में, उबले हुए अरंडी के तेल या अलसी के तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट को स्टाइलस का उपयोग करके कपड़े पर रखा जाता है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 4.jpg|अंगूठाकार|कल्पवृक्ष]]
इस तेल आधारित कला को कपड़े पर लगाने की प्रक्रिया गुजरात के माधापर गांव में शुरू हुई। हालांकि नाम रोगन (और कुछ पारंपरिक डिजाइन) भारतीय संस्कृति में एक उत्पत्ति का सुझाव देते हैं, इसे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं। रोगान कला शुरू में गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर प्रचलित थी। रंगे हुए कपड़े ज्यादातर जातियों की महिलाओं द्वारा खरीदे जाते थे जो अपनी शादियों के लिए कपड़े सजाना चाहती थीं। इसलिए यह एक मौसमी कला थी, जिसमें ज्यादातर काम उन महीनों में होता था जब ज्यादातर शादियां होती थीं। शेष वर्ष के दौरान, कारीगर कृषि जैसे अन्य प्रकार के काम पर स्विच करेंगे। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सस्ते और मशीन-निर्मित वस्त्रों के उदय के साथ, रोगान कला किए गए उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक महंगे हो गए, और कई कलाकारों ने अन्य व्यवसायों की ओर रुख किया।
== पुनरुत्थान ==
20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में, रोगान कला,<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/videos/gujarat-election-2022-see-the-art-of-rogan-art-in-kutch-amid-elections-rogan-painting-4974645.html|title=Gujarat Election 2022: चुनाव के बीच कच्छ में देखिए रोगन आर्ट की कला {{!}} Rogan painting|date=2022-11-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-06-17}}</ref> विशेष रूप से पेंटिंग में नए सिरे से रुचि लाने के लिए कई कारक एक साथ आए। सबसे पहले, 2001 के गुजरात भूकंप के बाद, जब अधिकांश क्षेत्र तबाह हो गया था, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था, नई सड़कों का निर्माण हुआ था, और इस क्षेत्र में उड़ानों की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण पर्यटन में वृद्धि हुई थी। दूसरा, स्थानीय सहकारी समितियों और गैर-लाभकारी समूहों ने स्थानीय कारीगरों, जिनमें रोगान कलाकार भी शामिल हैं, को शहरी सेटिंग्स और ऑनलाइन बिक्री करके अपने बाजार को बढ़ाने में मदद की। तीसरा, कई कारीगरों ने अपने शिल्प के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिससे उनके काम की प्रतिष्ठा बढ़ी। 2014 में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी व्हाइट हाउस का दौरा किया, तो उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को कच्छ कलाकार द्वारा चित्रित दो रोगान कला भेंट की।
गुजरात के कारीगरों<ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/kutchh/youth-creates-wall-pieces-of-gods-and-godesses-through-rogan-art-in-kutch-kdg-local18-1281961.html|title=Kutch: દેવી-દેવતાના આવા ચિત્રો તમે ક્યારેય નહીં જોયા હોય! જુઓ VIDEO|date=2022-11-11|website=News18 Gujarati|language=gu|access-date=2023-06-17}}</ref> ने पर्यटकों को लुभाने के लिए समकालीन उत्पाद, लहंगा, पर्स, बैग, कुशन कवर, टेबल क्लॉथ, वॉल हैंगिंग, पिलो कवर और रोगान कला साड़ियां पेश की हैं। जीवन का वृक्ष एक प्रमुख मूल भाव बना हुआ है। आशीष कंसारा रोगान कलाकार ने देवी देवता और हिंदू भगवान के चित्र बनाये, जोकि रोगान कला में दुर्लभ है. आशीष कंसारा और उनकी धर्मपत्नी कोमल कंसारा माधापर भुज रोगान कला करते है. 2020 में COVID-19 महामारी के बाद, कच्छ आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
[[चित्र:Rogan art by ashish kansara from Madhapar.jpg|अंगूठाकार|भुज के रोगान कलाकार]]
== रोगन छपाई की प्रक्रिया ==
अरंडी के तेल को लगभग 8 घंटे तक उबालने और वनस्पति रंग मिलाने से रोगान कला पेंट तैयार होता है जिससे रंग गाढ़ा और चमकदार होता है। जिस कपड़े पर पेंट या प्रिंट किया जाता है, वह आमतौर पर गहरे रंग का होता है, जिससे गहरे रंग अलग दिखाई देते हैं। रोगान कला फ्रीहैंड द्वारा तैयार की जाती है, एक लोहे की रोड से पेंट के धागे की तरह अनुगामी द्वारा अक्सर, आधे डिजाइन को पेंट किया जाता है, फिर कपड़े को आधे में मोड़ा जाता है, कपड़े के दूसरे आधे हिस्से में एक दर्पण छवि को स्थानांतरित किया जाता है।
== सन्दर्भ सूची ==
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[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 2.jpg|अंगूठाकार|रोगन पेंटिंग में श्री तिरुपति बालाजी]]{{Infobox Artist|name=आशीष कंसारा|image=Ashish kansara.jpg|imagesize=245px|caption=आशीष कंसारा|birthdate={{birth date|df=yes|1975|11|17}}|location=[[माधापर]], [[कच्छ]], [[गुजरात]], India|field=[[रोगान कला]]}}
रोगान कला गुजरात<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pwZUAAAAMAAJ&redir_esc=y|title=The Glory of Indian Handicrafts|last=Chattopadhyaya|first=Kamaladevi|date=1976|publisher=Indian Book Company|page=34|language=en}}</ref> में प्रचलित कपड़ा छपाई की एक कला है, इस कला में, उबले हुए अरंडी के तेल या अलसी के तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट को स्टाइलस का उपयोग करके कपड़े पर रखा जाता है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Ashish shantilal kansara rogan art 4.jpg|अंगूठाकार|कल्पवृक्ष]]
इस तेल आधारित कला को कपड़े पर लगाने की प्रक्रिया गुजरात के माधापर गांव में शुरू हुई। हालांकि नाम रोगन (और कुछ पारंपरिक डिजाइन) भारतीय संस्कृति में एक उत्पत्ति का सुझाव देते हैं, इसे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं। रोगान कला शुरू में गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर प्रचलित थी। रंगे हुए कपड़े ज्यादातर जातियों की महिलाओं द्वारा खरीदे जाते थे जो अपनी शादियों के लिए कपड़े सजाना चाहती थीं। इसलिए यह एक मौसमी कला थी, जिसमें ज्यादातर काम उन महीनों में होता था जब ज्यादातर शादियां होती थीं। शेष वर्ष के दौरान, कारीगर कृषि जैसे अन्य प्रकार के काम पर स्विच करेंगे। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सस्ते और मशीन-निर्मित वस्त्रों के उदय के साथ, रोगान कला किए गए उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक महंगे हो गए, और कई कलाकारों ने अन्य व्यवसायों की ओर रुख किया।
== पुनरुत्थान ==
20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में, रोगान कला,<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/videos/gujarat-election-2022-see-the-art-of-rogan-art-in-kutch-amid-elections-rogan-painting-4974645.html|title=Gujarat Election 2022: चुनाव के बीच कच्छ में देखिए रोगन आर्ट की कला {{!}} Rogan painting|date=2022-11-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-06-17}}</ref> विशेष रूप से पेंटिंग में नए सिरे से रुचि लाने के लिए कई कारक एक साथ आए। सबसे पहले, 2001 के गुजरात भूकंप के बाद, जब अधिकांश क्षेत्र तबाह हो गया था, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था, नई सड़कों का निर्माण हुआ था, और इस क्षेत्र में उड़ानों की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण पर्यटन में वृद्धि हुई थी। दूसरा, स्थानीय सहकारी समितियों और गैर-लाभकारी समूहों ने स्थानीय कारीगरों, जिनमें रोगान कलाकार भी शामिल हैं, को शहरी सेटिंग्स और ऑनलाइन बिक्री करके अपने बाजार को बढ़ाने में मदद की। तीसरा, कई कारीगरों ने अपने शिल्प के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिससे उनके काम की प्रतिष्ठा बढ़ी। 2014 में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी व्हाइट हाउस का दौरा किया, तो उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को कच्छ कलाकार द्वारा चित्रित दो रोगान कला भेंट की।
गुजरात के कारीगरों<ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/kutchh/youth-creates-wall-pieces-of-gods-and-godesses-through-rogan-art-in-kutch-kdg-local18-1281961.html|title=Kutch: દેવી-દેવતાના આવા ચિત્રો તમે ક્યારેય નહીં જોયા હોય! જુઓ VIDEO|date=2022-11-11|website=News18 Gujarati|language=gu|access-date=2023-06-17}}</ref> ने पर्यटकों को लुभाने के लिए समकालीन उत्पाद, लहंगा, पर्स, बैग, कुशन कवर, टेबल क्लॉथ, वॉल हैंगिंग, पिलो कवर और रोगान कला साड़ियां पेश की हैं। जीवन का वृक्ष एक प्रमुख मूल भाव बना हुआ है। आशीष कंसारा रोगान कलाकार ने देवी देवता और हिंदू भगवान के चित्र बनाये, जोकि रोगान कला में दुर्लभ है. आशीष कंसारा और उनकी धर्मपत्नी कोमल कंसारा माधापर भुज रोगान कला करते है. 2020 में COVID-19 महामारी के बाद, कच्छ आने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
[[चित्र:Rogan art by ashish kansara from Madhapar.jpg|अंगूठाकार|भुज के रोगान कलाकार]]
== रोगन छपाई की प्रक्रिया ==
अरंडी के तेल को लगभग 8 घंटे तक उबालने और वनस्पति रंग मिलाने से रोगान कला पेंट तैयार होता है जिससे रंग गाढ़ा और चमकदार होता है। जिस कपड़े पर पेंट या प्रिंट किया जाता है, वह आमतौर पर गहरे रंग का होता है, जिससे गहरे रंग अलग दिखाई देते हैं। रोगान कला फ्रीहैंड द्वारा तैयार की जाती है, एक लोहे की रोड से पेंट के धागे की तरह अनुगामी द्वारा अक्सर, आधे डिजाइन को पेंट किया जाता है, फिर कपड़े को आधे में मोड़ा जाता है, कपड़े के दूसरे आधे हिस्से में एक दर्पण छवि को स्थानांतरित किया जाता है।
== सन्दर्भ सूची ==
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AMAN KUMAR
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छद्म प्रचार को हटाया
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रोगान कला गुजरात<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=pwZUAAAAMAAJ&redir_esc=y|title=The Glory of Indian Handicrafts|last=Chattopadhyaya|first=Kamaladevi|date=1976|publisher=Indian Book Company|page=34|language=en}}</ref> में प्रचलित कपड़ा छपाई की एक कला है, इस कला में, उबले हुए अरंडी के तेल या अलसी के तेल और वनस्पति रंगों से बने पेंट को स्टाइलस का उपयोग करके कपड़े पर रखा जाता है।
== इतिहास ==
इस तेल आधारित कला को कपड़े पर लगाने की प्रक्रिया गुजरात के माधापर गांव में शुरू हुई। हालांकि नाम रोगन (और कुछ पारंपरिक डिजाइन) भारतीय संस्कृति में एक उत्पत्ति का सुझाव देते हैं, इसे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं हैं। रोगान कला शुरू में गुजरात क्षेत्र के कई स्थानों पर प्रचलित थी। रंगे हुए कपड़े ज्यादातर जातियों की महिलाओं द्वारा खरीदे जाते थे जो अपनी शादियों के लिए कपड़े सजाना चाहती थीं। इसलिए यह एक मौसमी कला थी, जिसमें ज्यादातर काम उन महीनों में होता था जब ज्यादातर शादियां होती थीं। शेष वर्ष के दौरान, कारीगर कृषि जैसे अन्य प्रकार के काम पर स्विच करेंगे। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में सस्ते और मशीन-निर्मित वस्त्रों के उदय के साथ, रोगान कला किए गए उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक महंगे हो गए, और कई कलाकारों ने अन्य व्यवसायों की ओर रुख किया।
== पुनरुत्थान ==
20 वीं सदी के अंत और 21 वीं सदी की शुरुआत में, रोगान कला,<ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/videos/gujarat-election-2022-see-the-art-of-rogan-art-in-kutch-amid-elections-rogan-painting-4974645.html|title=Gujarat Election 2022: चुनाव के बीच कच्छ में देखिए रोगन आर्ट की कला {{!}} Rogan painting|date=2022-11-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2023-06-17}}</ref> विशेष रूप से पेंटिंग में नए सिरे से रुचि लाने के लिए कई कारक एक साथ आए। सबसे पहले, 2001 के गुजरात भूकंप के बाद, जब अधिकांश क्षेत्र तबाह हो गया था, पानी और बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ था, नई सड़कों का निर्माण हुआ था, और इस क्षेत्र में उड़ानों की संख्या में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण पर्यटन में वृद्धि हुई थी। दूसरा, स्थानीय सहकारी समितियों और गैर-लाभकारी समूहों ने स्थानीय कारीगरों, जिनमें रोगान कलाकार भी शामिल हैं, को शहरी सेटिंग्स और ऑनलाइन बिक्री करके अपने बाजार को बढ़ाने में मदद की। तीसरा, कई कारीगरों ने अपने शिल्प के लिए राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिससे उनके काम की प्रतिष्ठा बढ़ी। 2014 में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी व्हाइट हाउस का दौरा किया, तो उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को कच्छ कलाकार द्वारा चित्रित दो रोगान कला भेंट की।
गुजरात के कारीगरों<ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/kutchh/youth-creates-wall-pieces-of-gods-and-godesses-through-rogan-art-in-kutch-kdg-local18-1281961.html|title=Kutch: દેવી-દેવતાના આવા ચિત્રો તમે ક્યારેય નહીં જોયા હોય! જુઓ VIDEO|date=2022-11-11|website=News18 Gujarati|language=gu|access-date=2023-06-17}}</ref> ने पर्यटकों को लुभाने के लिए समकालीन उत्पाद, लहंगा, पर्स, बैग, कुशन कवर, टेबल क्लॉथ, वॉल हैंगिंग, पिलो कवर और रोगान कला साड़ियां पेश की हैं। जीवन का वृक्ष एक प्रमुख मूल भाव बना हुआ है।
== रोगन छपाई की प्रक्रिया ==
अरंडी के तेल को लगभग 8 घंटे तक उबालने और वनस्पति रंग मिलाने से रोगान कला पेंट तैयार होता है जिससे रंग गाढ़ा और चमकदार होता है। जिस कपड़े पर पेंट या प्रिंट किया जाता है, वह आमतौर पर गहरे रंग का होता है, जिससे गहरे रंग अलग दिखाई देते हैं। रोगान कला फ्रीहैंड द्वारा तैयार की जाती है, एक लोहे की रोड से पेंट के धागे की तरह अनुगामी द्वारा अक्सर, आधे डिजाइन को पेंट किया जाता है, फिर कपड़े को आधे में मोड़ा जाता है, कपड़े के दूसरे आधे हिस्से में एक दर्पण छवि को स्थानांतरित किया जाता है।
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'''वन यूआई''' एंड्रॉइड 9 "पाई" और ऊपर और [[विण्डोज़ 11|विंडोज 11]] और ऊपर चलने वाले [[माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़|विंडोज]] उपकरणों पर चलने वाले [[एंड्रॉइड (प्रचालन तंत्र)|एंड्रॉइड]] डिवाइसों के लिए [[सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स]] द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर ओवरले है। सैमसंग एक्सपीरियंस यूएक्स और टचविज़ की जगह, सॉफ्टवेयर को [[स्मार्टफ़ोन|स्मार्टफोन का]] उपयोग करना आसान और अधिक आकर्षक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सैमसंग के डेवलपर कॉन्फ्रेंस 2019 <ref>{{Cite web|url=https://news.samsung.com/global/sdc18-recap-5-factors-that-made-sdc18-an-event-to-remember/|title=SDC18 Recap: 5 Factors That Made SDC18 an Event to Remember|website=Samsung Newsroom|language=en|access-date=2020-07-17}}</ref> में गैलेक्सी एस10 सीरीज, गैलेक्सी बड्स और गैलेक्सी फोल्ड के साथ वन यूआई पेश किया गया था। इसके अलावा, वन यूआई [[तिज़ेन|टिज़ेन]] स्मार्टवॉच और उनके वियर ओएस प्लेटफॉर्म के लिए एक सॉफ्टवेयर लेयर भी है, जिसे सैमसंग ने गूगल के साथ मिलकर विकसित किया है।
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:एंड्रॉइड (ऑपरेटिंग सिस्टम) सॉफ्टवेयर]]
ate2bw345dpl5lvukuztk7ozxqyd9az
यूट्यूब शॉर्ट्स
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[[File:Youtube shorts icon.svg|thumb|100px]]
'''यूट्यूब शॉर्ट्स''' [[यूट्यूब]] द्वारा पेश किया गया एक शॉर्ट-फॉर्म वीडियो शेयरिंग ''प्लेटफॉर्म'' है। प्लेटफ़ॉर्म YouTube की मुख्य सेवा की तरह ही उपयोगकर्ता सामग्री को होस्ट करता है, लेकिन वीडियो कट को 60 सेकंड तक सीमित करता है। लॉन्चिंग के बाद से, YouTube शॉर्ट्स को 5 ट्रिलियन से अधिक बार देखा गया है। [[वायरलेस उर्जा हस्तांतरण|कॉमेडी शॉर्ट वीडियो यूट्यूब]]<ref>{{Cite web|url=https://variety.com/2022/digital/news/youtube-shorts-5-trillion-views-shopping-branded-content-1235162043/|title=YouTube Shorts Tops 5 Trillion Views to Date, Platform to Test Shopping and Branded Content for TikTok-Style Videos|last=Spangler|first=Todd|date=25 January 2022|website=Variety}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{Official website|https://www.youtube.com/shorts/}}
[[श्रेणी:यूट्यूब]]
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मुल्क (टीवी श्रृंखला)
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व्याकरण और संरचना में सुधार करते हुए सामग्री को अधिक स्पष्ट एवं विश्वकोशीय शैली में अद्यतन किया गया।
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text/x-wiki
'''''मुल्क''''' एक भारतीय टेलीविजन नाटक श्रृंखला है, जो [[भारत का विभाजन]] की पृष्ठभूमि पर आधारित है।<ref>{{Cite news|url=http://www.thehindubusinessline.in/2003/01/04/stories/2003010402250600.htm|title=TV channels to air serials based on militancy in J&K|date=4 January 2003|work=The Hindu Business Line|access-date=18 June 2012}}</ref>
यह श्रृंखला [[लाहौर]] के निकट [[शेखूपुरा]] (वर्तमान [[पंजाब (पाकिस्तान)|पंजाब प्रांत]], पाकिस्तान) में रहने वाले [[हिन्दू]], [[मुसलमान]] और [[सिख]] पृष्ठभूमि के तीन मित्रों के जीवन तथा विभाजन के बाद उनके संबंधों पर पड़े प्रभाव को चित्रित करती है।<ref>{{Cite news|url=http://www.indianexpress.com/oldStory/16941/|title=Patriots on the prowl|date=20 January 2003|work=The Indian Express|access-date=18 June 2012}}</ref>
इसका प्रथम प्रसारण 2003 में [[गणतन्त्र दिवस (भारत)|गणतंत्र दिवस]] के अवसर पर [[ज़ी टीवी]] पर किया गया था।<ref>{{Cite news|url=http://www.indiantelevision.com/headlines/y2k3/jan/jan157.htm|title=Zee conducts Republic Day drive around 'Mulk'|date=28 January 2003|work=Indiantelevision.com|access-date=18 June 2012}}</ref> बाद में इसका प्रसारण [[दूरदर्शन]] नेटवर्क पर भी किया गया।{{उद्धरण आवश्यक|date=April 2026}}
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारतीय ऐतिहासिक टेलीविजन श्रृंखला]]
[[श्रेणी:ज़ी टीवी के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
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기나ㅏㄴ
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기나ㅏㄴ ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:Dukefanzone]] को [[सदस्य वार्ता:Andrew3884]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Dukefanzone|Dukefanzone]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Andrew3884|Andrew3884]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ
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-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 06:13, 20 जनवरी 2024 (UTC)
== [[:उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान|उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट उल्लंघन नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 02:58, 16 मार्च 2024 (UTC)
== [[:धूम्रपान निषेध दिवस|धूम्रपान निषेध दिवस]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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:धूम्रपान निषेध दिवस पर लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 03:01, 16 मार्च 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव परिणाम ==
बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है।</span>
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]]
प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र/कूपन प्राप्त करने के लिए 15 मई 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdy_dDBC9v1DalhCY-eVB4-wGzVT1qC3OoFXAjBgCeu9KsdPg/viewform प्रतिभागी सूचना प्रपत्र] भरकर जमा करें। सूचना प्रपत्र भर लेने तथा प्रमाण-पत्र मिलने की सूचना इस संदेश के उत्तर के रूप में अवश्य दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 16:40, 6 मई 2024 (UTC)
:प्रिय अनिरुद्ध कुमार जी,
:मेरे द्वारा प्रतिभागी सुचना प्रपत्र भर दिया गया है।
:धन्यवाद ! [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 07:32, 7 मई 2024 (UTC)
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नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
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कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:47, 8 जुलाई 2024 (UTC)
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नमस्कार, [[:डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
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== नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी ==
आपने प्रतियोगिता में [[:en:Nandamuri Balakrishna filmography]] लेख का चुनाव किया है और तुल्य हिन्दी शीर्षक "नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी" दिया है। उचित शीर्षक "नंदमुरी बालकृष्ण की फ़िल्में" होगा। अतः लेख निर्मित करने से पहले यह ठीक कर लें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:28, 19 जुलाई 2024 (UTC)
{{subst:db-notice-multiple|1=नंदमुरी बालकृष्ण फिल्मोग्राफी|2=ल1|3=ल5}} <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:23, 24 जुलाई 2024 (UTC)
== [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
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== [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:18, 24 अगस्त 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून २०२४]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है। पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 14 सितंबर 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdWVzDKMKixXn6K3U3B6vM1_CR8nx64sKCUn304IAf9mBPPSQ/viewform पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी जरूर दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 11:31, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:प्रिय, '''अनिरुद्ध कुमार''' जी मैंने पुरस्कार सुचना प्रपत्र भर दिया है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 13:14, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी मुझे अभी तक विकिपीडिया संपादन उत्सव जून 2024 की पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 12:03, 20 अक्टूबर 2024 (UTC)
== ओगोल गाय ==
आपने अभी एक लेख बनाया है जिसका शीर्षक "ओगोल गाय" है। उसमें दिये गये सन्दर्भ में आपने Ongole cattle लिख रखा है। मुझे उच्चारण ओंगल (ओ के साथ अनुस्वार) या ओंगोल जैसा लग रहा है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:24, 2 अक्टूबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप एक बार संदर्भ में दिए हुए लेख को गूगल ट्रांसलेट कर पढ़िए। मेरे अनुसार "ओंगोल " शब्द सही है। बाकि आप को जो अच्छा लगे वो सही है। मुझे कोई आपत्ति नहीं।
:'''धन्यवाद जी!''' [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 11:53, 3 अक्टूबर 2024 (UTC)
::गूगल अनुवाद गलत हो सकता है। कृपया उसके अनुसार अनुवाद न करें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:11, 5 अक्टूबर 2024 (UTC)
== [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:28, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध, अलग से लेख की आवश्यकता नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:31, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध, अलग से लेख की आवश्यकता नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:38, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप जो निर्णय लेंगे वो सही है। [[विशेष:योगदान/2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0]] ([[सदस्य वार्ता:2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|वार्ता]]) 13:04, 1 दिसम्बर 2024 (UTC)
== Invitation to Participate in the Wikimedia SAARC Conference Community Engagement Survey ==
Dear Community Members,
I hope this message finds you well. Please excuse the use of English; we encourage translations into your local languages to ensure inclusivity.
We are conducting a Community Engagement Survey to assess the sentiments, needs, and interests of South Asian Wikimedia communities in organizing the inaugural Wikimedia SAARC Regional Conference, proposed to be held in Kathmandu, Nepal.
This initiative aims to bring together participants from eight nations to collaborate towards shared goals. Your insights will play a vital role in shaping the event's focus, identifying priorities, and guiding the strategic planning for this landmark conference.
Survey Link: https://forms.gle/en8qSuCvaSxQVD7K6
We kindly request you to dedicate a few moments to complete the survey. Your feedback will significantly contribute to ensuring this conference addresses the community's needs and aspirations.
Deadline to Submit the Survey: 20 January 2025
Your participation is crucial in shaping the future of the Wikimedia SAARC community and fostering regional collaboration. Thank you for your time and valuable input.
Warm regards,<br>
[[:m:User:Biplab Anand|Biplab Anand]]
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Biplab_Anand/lists&oldid=28078122 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Biplab Anand@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Thank you for being a medical contributors! ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
{| style="background-color: #fdffe7; border: 1px solid #fceb92;"
|rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[File:Wiki Project Med Foundation logo.svg|130px]]
|style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" |'''The 2024 Cure Award'''
|-
| style="vertical-align: middle; padding: 3px;" |In 2024 you '''[[mdwiki:WikiProjectMed:WikiProject_Medicine/Stats/Top_medical_editors_2024_(all)|were one of the top medical editors in your language]]'''. Thank you from [[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med]] for helping bring free, complete, accurate, up-to-date health information to the public. We really appreciate you and the vital work you do!
Wiki Project Med Foundation is a [[meta:Wikimedia_thematic_organizations|thematic organization]] whose mission is to improve our health content. '''[[meta:Wiki_Project_Med#People_interested|Consider joining for 2025]]''', there are no associated costs.
Additionally one of our primary efforts revolves around translating health content. We invite you to '''[https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/index.php try our new workflow]''' if you have not already. Our dashboard automatically [https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/leaderboard.php collects statistics] of your efforts and we are working on [https://mdwiki.toolforge.org/fixwikirefs.php tools to automatically improve formating].
|}
Thanks again :-) -- [[mdwiki:User:Doc_James|<span style="color:#0000f1">'''Doc James'''</span>]] along with the rest of the team at '''[[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med Foundation]]''' 06:24, 26 जनवरी 2025 (UTC)
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/Top_Other_Language_Editors_2024&oldid=28172893 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Doc James@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:29, 27 फ़रवरी 2025 (UTC)
== [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:34, 27 फ़रवरी 2025 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजकों की तरफ से धन्यवाद एवं बधाई। पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए 20 जनवरी 2026 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSddj_4DywI-lZ0ko_Fj2X1JqWh71cNUaij1nmL63RGx_yOITg/viewform?usp=header पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 18:12, 13 जनवरी 2026 (UTC)
:प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] की पुरस्कार राशि अमेजन कूपन के रूप में आपके ई-मेल पर भेज दी गई है। यह ई-मेल “हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप sent you an Amazon Pay Gift Card!” शीर्षक से भेजा गया है। कूपन नहीं मिलने की स्थिति में अपने ई-मेल के स्पैम मेल को जाँच लें तथा हमें सूचित करें। -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 17:31, 29 जनवरी 2026 (UTC)
::जी सर मुझे पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है । [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 06:36, 30 जनवरी 2026 (UTC)
== अप्रैल 2026 ==
[[File:Nuvola apps important.svg|25px|alt=|link=]] कृपया [[विकिपीडिया:विघटनकारी सम्पादन|विघटनकारी संपादन]] करना बंद करें। अगर आप विकिपीडिया पर [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देना, विज्ञापन या प्रचार सामग्री जोड़ना]] जारी रखते हैं, जैसा कि आपने [[:गाय]] पर किया है, तो आपको [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|संपादन करने से अवरोधित]] किया जा सकता है। [[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert3 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert3 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:32, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
qxejs2ti6pn21o8s1jqvivowptotl7t
6541353
6541309
2026-04-16T16:32:30Z
Rakesh Kumar Veterinarian
812506
/* अप्रैल 2026 */ उत्तर
6541353
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Rakesh Kumar Veterinarian}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 06:13, 20 जनवरी 2024 (UTC)
== [[:उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान|उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान|उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 05:52, 29 जनवरी 2024 (UTC)
== [[:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस|राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस|राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|मापदंड व6]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|व6]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन'''</center>
इस मापदंड में वे सभी पृष्ठ आते हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे पृष्ठ भी आते हैं जिनपर डाली गई सामग्री का कॉपीराइट स्वयं उसी सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> [[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 20:39, 15 मार्च 2024 (UTC)
:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट उल्लंघन नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 02:58, 16 मार्च 2024 (UTC)
== [[:धूम्रपान निषेध दिवस|धूम्रपान निषेध दिवस]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:धूम्रपान निषेध दिवस|धूम्रपान निषेध दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|मापदंड व6]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|व6]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन'''</center>
इस मापदंड में वे सभी पृष्ठ आते हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे पृष्ठ भी आते हैं जिनपर डाली गई सामग्री का कॉपीराइट स्वयं उसी सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है।
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:धूम्रपान निषेध दिवस पर लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 03:01, 16 मार्च 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव परिणाम ==
बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है।</span>
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]]
प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र/कूपन प्राप्त करने के लिए 15 मई 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdy_dDBC9v1DalhCY-eVB4-wGzVT1qC3OoFXAjBgCeu9KsdPg/viewform प्रतिभागी सूचना प्रपत्र] भरकर जमा करें। सूचना प्रपत्र भर लेने तथा प्रमाण-पत्र मिलने की सूचना इस संदेश के उत्तर के रूप में अवश्य दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 16:40, 6 मई 2024 (UTC)
:प्रिय अनिरुद्ध कुमार जी,
:मेरे द्वारा प्रतिभागी सुचना प्रपत्र भर दिया गया है।
:धन्यवाद ! [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 07:32, 7 मई 2024 (UTC)
== [[:"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं है।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:47, 8 जुलाई 2024 (UTC)
== [[:डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं है।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:49, 8 जुलाई 2024 (UTC)
== नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी ==
आपने प्रतियोगिता में [[:en:Nandamuri Balakrishna filmography]] लेख का चुनाव किया है और तुल्य हिन्दी शीर्षक "नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी" दिया है। उचित शीर्षक "नंदमुरी बालकृष्ण की फ़िल्में" होगा। अतः लेख निर्मित करने से पहले यह ठीक कर लें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:28, 19 जुलाई 2024 (UTC)
{{subst:db-notice-multiple|1=नंदमुरी बालकृष्ण फिल्मोग्राफी|2=ल1|3=ल5}} <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:23, 24 जुलाई 2024 (UTC)
== [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:54, 11 अगस्त 2024 (UTC)
== [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:18, 24 अगस्त 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून २०२४]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है। पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 14 सितंबर 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdWVzDKMKixXn6K3U3B6vM1_CR8nx64sKCUn304IAf9mBPPSQ/viewform पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी जरूर दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 11:31, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:प्रिय, '''अनिरुद्ध कुमार''' जी मैंने पुरस्कार सुचना प्रपत्र भर दिया है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 13:14, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी मुझे अभी तक विकिपीडिया संपादन उत्सव जून 2024 की पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 12:03, 20 अक्टूबर 2024 (UTC)
== ओगोल गाय ==
आपने अभी एक लेख बनाया है जिसका शीर्षक "ओगोल गाय" है। उसमें दिये गये सन्दर्भ में आपने Ongole cattle लिख रखा है। मुझे उच्चारण ओंगल (ओ के साथ अनुस्वार) या ओंगोल जैसा लग रहा है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:24, 2 अक्टूबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप एक बार संदर्भ में दिए हुए लेख को गूगल ट्रांसलेट कर पढ़िए। मेरे अनुसार "ओंगोल " शब्द सही है। बाकि आप को जो अच्छा लगे वो सही है। मुझे कोई आपत्ति नहीं।
:'''धन्यवाद जी!''' [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 11:53, 3 अक्टूबर 2024 (UTC)
::गूगल अनुवाद गलत हो सकता है। कृपया उसके अनुसार अनुवाद न करें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:11, 5 अक्टूबर 2024 (UTC)
== [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:28, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध, अलग से लेख की आवश्यकता नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:31, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध, अलग से लेख की आवश्यकता नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:38, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप जो निर्णय लेंगे वो सही है। [[विशेष:योगदान/2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0]] ([[सदस्य वार्ता:2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|वार्ता]]) 13:04, 1 दिसम्बर 2024 (UTC)
== Invitation to Participate in the Wikimedia SAARC Conference Community Engagement Survey ==
Dear Community Members,
I hope this message finds you well. Please excuse the use of English; we encourage translations into your local languages to ensure inclusivity.
We are conducting a Community Engagement Survey to assess the sentiments, needs, and interests of South Asian Wikimedia communities in organizing the inaugural Wikimedia SAARC Regional Conference, proposed to be held in Kathmandu, Nepal.
This initiative aims to bring together participants from eight nations to collaborate towards shared goals. Your insights will play a vital role in shaping the event's focus, identifying priorities, and guiding the strategic planning for this landmark conference.
Survey Link: https://forms.gle/en8qSuCvaSxQVD7K6
We kindly request you to dedicate a few moments to complete the survey. Your feedback will significantly contribute to ensuring this conference addresses the community's needs and aspirations.
Deadline to Submit the Survey: 20 January 2025
Your participation is crucial in shaping the future of the Wikimedia SAARC community and fostering regional collaboration. Thank you for your time and valuable input.
Warm regards,<br>
[[:m:User:Biplab Anand|Biplab Anand]]
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Biplab_Anand/lists&oldid=28078122 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Biplab Anand@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Thank you for being a medical contributors! ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
{| style="background-color: #fdffe7; border: 1px solid #fceb92;"
|rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[File:Wiki Project Med Foundation logo.svg|130px]]
|style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" |'''The 2024 Cure Award'''
|-
| style="vertical-align: middle; padding: 3px;" |In 2024 you '''[[mdwiki:WikiProjectMed:WikiProject_Medicine/Stats/Top_medical_editors_2024_(all)|were one of the top medical editors in your language]]'''. Thank you from [[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med]] for helping bring free, complete, accurate, up-to-date health information to the public. We really appreciate you and the vital work you do!
Wiki Project Med Foundation is a [[meta:Wikimedia_thematic_organizations|thematic organization]] whose mission is to improve our health content. '''[[meta:Wiki_Project_Med#People_interested|Consider joining for 2025]]''', there are no associated costs.
Additionally one of our primary efforts revolves around translating health content. We invite you to '''[https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/index.php try our new workflow]''' if you have not already. Our dashboard automatically [https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/leaderboard.php collects statistics] of your efforts and we are working on [https://mdwiki.toolforge.org/fixwikirefs.php tools to automatically improve formating].
|}
Thanks again :-) -- [[mdwiki:User:Doc_James|<span style="color:#0000f1">'''Doc James'''</span>]] along with the rest of the team at '''[[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med Foundation]]''' 06:24, 26 जनवरी 2025 (UTC)
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/Top_Other_Language_Editors_2024&oldid=28172893 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Doc James@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:29, 27 फ़रवरी 2025 (UTC)
== [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:34, 27 फ़रवरी 2025 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजकों की तरफ से धन्यवाद एवं बधाई। पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए 20 जनवरी 2026 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSddj_4DywI-lZ0ko_Fj2X1JqWh71cNUaij1nmL63RGx_yOITg/viewform?usp=header पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 18:12, 13 जनवरी 2026 (UTC)
:प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] की पुरस्कार राशि अमेजन कूपन के रूप में आपके ई-मेल पर भेज दी गई है। यह ई-मेल “हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप sent you an Amazon Pay Gift Card!” शीर्षक से भेजा गया है। कूपन नहीं मिलने की स्थिति में अपने ई-मेल के स्पैम मेल को जाँच लें तथा हमें सूचित करें। -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 17:31, 29 जनवरी 2026 (UTC)
::जी सर मुझे पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है । [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 06:36, 30 जनवरी 2026 (UTC)
== अप्रैल 2026 ==
[[File:Nuvola apps important.svg|25px|alt=|link=]] कृपया [[विकिपीडिया:विघटनकारी सम्पादन|विघटनकारी संपादन]] करना बंद करें। अगर आप विकिपीडिया पर [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देना, विज्ञापन या प्रचार सामग्री जोड़ना]] जारी रखते हैं, जैसा कि आपने [[:गाय]] पर किया है, तो आपको [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|संपादन करने से अवरोधित]] किया जा सकता है। [[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert3 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert3 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:32, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्कार जी,
:मैं '''“गाय”''' लेख के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूँ। मेरे द्वारा पहले किए गए संपादन में यह देखा गया कि गाय के प्रजनन से जुड़े कई तथ्य गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। <u>विशेष रूप से यह कहना कि गाय में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) करना “पाप” है — यह किस दृष्टिकोण से सही ठहराया जा सकता है?</u>
:वास्तविकता यह है कि राजस्थान का पशुपालन विभाग तथा सरकारी पशुपालन केंद्र स्वयं कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देते हैं। यह एक वैज्ञानिक और स्वीकृत विधि है, जिसका उद्देश्य नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है। ऐसे में इसे “पाप” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
:<u>दूसरा, आपके संपादन में थारपारकर गाय को “ड्यूल पर्पस ब्रीड (Dual Purpose Breed )” बताया गया है, जबकि वैज्ञानिक रूप से थारपारकर एक प्रमुख दुग्ध (milch) नस्ल है और राजस्थान की उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों में से एक मानी जाती है, जैसा कि पशु चिकित्सा साहित्य में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।</u>
:आपने “self-promoting” की बात कही, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं स्वयं राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग में Livestock Inspector के पद पर कार्यरत हूँ। जब मैंने विकिपीडिया पर कुछ अवास्तविक और गलत जानकारी देखी, तो स्वाभाविक रूप से मुझे आपत्ति हुई।
:विकिपीडिया पर योगदान देने में मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है। यदि आपको ऐसा लगता है कि मेरे योगदान उचित नहीं हैं, तो मैं आज ही विकिपीडिया से हमेशा के लिए अलग होने को तैयार हूँ।
:मेरा उद्देश्य केवल सही और वैज्ञानिक जानकारी को साझा करना है।
:धन्यवाद।
:'''Rakesh Kumar Veterinarian''' [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 16:32, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
d0lrekjjiqunimt5cynz2z0tiyfggtq
6541359
6541353
2026-04-16T17:03:05Z
AMAN KUMAR
911487
/* अप्रैल 2026 */ उत्तर
6541359
wikitext
text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Rakesh Kumar Veterinarian}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 06:13, 20 जनवरी 2024 (UTC)
== [[:उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान|उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान|उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 05:52, 29 जनवरी 2024 (UTC)
== [[:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस|राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस|राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|मापदंड व6]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|व6]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन'''</center>
इस मापदंड में वे सभी पृष्ठ आते हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे पृष्ठ भी आते हैं जिनपर डाली गई सामग्री का कॉपीराइट स्वयं उसी सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> [[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 20:39, 15 मार्च 2024 (UTC)
:राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट उल्लंघन नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 02:58, 16 मार्च 2024 (UTC)
== [[:धूम्रपान निषेध दिवस|धूम्रपान निषेध दिवस]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:धूम्रपान निषेध दिवस|धूम्रपान निषेध दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|मापदंड व6]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व6|व6]]{{*}} साफ़ कॉपीराइट उल्लंघन'''</center>
इस मापदंड में वे सभी पृष्ठ आते हैं जो साफ़ तौर पर कॉपीराइट उल्लंघन हैं और जिनके इतिहास में उल्लंघन से मुक्त कोई भी अवतरण नहीं है। इसमें वे पृष्ठ भी आते हैं जिनपर डाली गई सामग्री का कॉपीराइट स्वयं उसी सदस्य के पास है और सदस्य ने उसका पहला प्रकाशन किसी मुक्त लाइसेंस के अंतर्गत नहीं किया है।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> [[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 20:58, 15 मार्च 2024 (UTC)
:धूम्रपान निषेध दिवस पर लेख मेरे द्वारा लिखा गया इसमें किसी भी प्रकार का कॉपीराइट नहीं है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 03:01, 16 मार्च 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव परिणाम ==
बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है।</span>
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]]
प्रतिभागिता प्रमाण-पत्र/कूपन प्राप्त करने के लिए 15 मई 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdy_dDBC9v1DalhCY-eVB4-wGzVT1qC3OoFXAjBgCeu9KsdPg/viewform प्रतिभागी सूचना प्रपत्र] भरकर जमा करें। सूचना प्रपत्र भर लेने तथा प्रमाण-पत्र मिलने की सूचना इस संदेश के उत्तर के रूप में अवश्य दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 16:40, 6 मई 2024 (UTC)
:प्रिय अनिरुद्ध कुमार जी,
:मेरे द्वारा प्रतिभागी सुचना प्रपत्र भर दिया गया है।
:धन्यवाद ! [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 07:32, 7 मई 2024 (UTC)
== [[:"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/"सदा तनसीक" संयुक्त सैन्य अभ्यास]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं है।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:47, 8 जुलाई 2024 (UTC)
== [[:डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/डेजर्ट नाइट सयुंक्त सैन्य अभ्यास]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं है।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 17:49, 8 जुलाई 2024 (UTC)
== नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी ==
आपने प्रतियोगिता में [[:en:Nandamuri Balakrishna filmography]] लेख का चुनाव किया है और तुल्य हिन्दी शीर्षक "नंदामुरी बालाकृष्ण फिल्मोग्राफी" दिया है। उचित शीर्षक "नंदमुरी बालकृष्ण की फ़िल्में" होगा। अतः लेख निर्मित करने से पहले यह ठीक कर लें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 12:28, 19 जुलाई 2024 (UTC)
{{subst:db-notice-multiple|1=नंदमुरी बालकृष्ण फिल्मोग्राफी|2=ल1|3=ल5}} <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:23, 24 जुलाई 2024 (UTC)
== [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:ऐक्सीअल स्केलिटन|ऐक्सीअल स्केलिटन]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख पर लिखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 08:54, 11 अगस्त 2024 (UTC)
== [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भारत ऊर्जा सप्ताह|भारत ऊर्जा सप्ताह]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:18, 24 अगस्त 2024 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून 2024|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/जून २०२४]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजक मंडल आपका धन्यवाद करता है। पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए 14 सितंबर 2024 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdWVzDKMKixXn6K3U3B6vM1_CR8nx64sKCUn304IAf9mBPPSQ/viewform पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी जरूर दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 11:31, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:प्रिय, '''अनिरुद्ध कुमार''' जी मैंने पुरस्कार सुचना प्रपत्र भर दिया है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 13:14, 7 सितंबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] जी मुझे अभी तक विकिपीडिया संपादन उत्सव जून 2024 की पुरस्कार राशि तथा प्रतिभागिता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 12:03, 20 अक्टूबर 2024 (UTC)
== ओगोल गाय ==
आपने अभी एक लेख बनाया है जिसका शीर्षक "ओगोल गाय" है। उसमें दिये गये सन्दर्भ में आपने Ongole cattle लिख रखा है। मुझे उच्चारण ओंगल (ओ के साथ अनुस्वार) या ओंगोल जैसा लग रहा है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:24, 2 अक्टूबर 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप एक बार संदर्भ में दिए हुए लेख को गूगल ट्रांसलेट कर पढ़िए। मेरे अनुसार "ओंगोल " शब्द सही है। बाकि आप को जो अच्छा लगे वो सही है। मुझे कोई आपत्ति नहीं।
:'''धन्यवाद जी!''' [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 11:53, 3 अक्टूबर 2024 (UTC)
::गूगल अनुवाद गलत हो सकता है। कृपया उसके अनुसार अनुवाद न करें। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:11, 5 अक्टूबर 2024 (UTC)
== [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:28, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध, अलग से लेख की आवश्यकता नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 10:31, 30 नवम्बर 2024 (UTC)
== [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
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:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी आप जो निर्णय लेंगे वो सही है। [[विशेष:योगदान/2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0]] ([[सदस्य वार्ता:2409:40D4:1004:950C:8000:0:0:0|वार्ता]]) 13:04, 1 दिसम्बर 2024 (UTC)
== Invitation to Participate in the Wikimedia SAARC Conference Community Engagement Survey ==
Dear Community Members,
I hope this message finds you well. Please excuse the use of English; we encourage translations into your local languages to ensure inclusivity.
We are conducting a Community Engagement Survey to assess the sentiments, needs, and interests of South Asian Wikimedia communities in organizing the inaugural Wikimedia SAARC Regional Conference, proposed to be held in Kathmandu, Nepal.
This initiative aims to bring together participants from eight nations to collaborate towards shared goals. Your insights will play a vital role in shaping the event's focus, identifying priorities, and guiding the strategic planning for this landmark conference.
Survey Link: https://forms.gle/en8qSuCvaSxQVD7K6
We kindly request you to dedicate a few moments to complete the survey. Your feedback will significantly contribute to ensuring this conference addresses the community's needs and aspirations.
Deadline to Submit the Survey: 20 January 2025
Your participation is crucial in shaping the future of the Wikimedia SAARC community and fostering regional collaboration. Thank you for your time and valuable input.
Warm regards,<br>
[[:m:User:Biplab Anand|Biplab Anand]]
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:Biplab_Anand/lists&oldid=28078122 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Biplab Anand@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== Thank you for being a medical contributors! ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
{| style="background-color: #fdffe7; border: 1px solid #fceb92;"
|rowspan="2" style="vertical-align: middle; padding: 5px;" | [[File:Wiki Project Med Foundation logo.svg|130px]]
|style="font-size: x-large; padding: 3px 3px 0 3px; height: 1.5em;" |'''The 2024 Cure Award'''
|-
| style="vertical-align: middle; padding: 3px;" |In 2024 you '''[[mdwiki:WikiProjectMed:WikiProject_Medicine/Stats/Top_medical_editors_2024_(all)|were one of the top medical editors in your language]]'''. Thank you from [[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med]] for helping bring free, complete, accurate, up-to-date health information to the public. We really appreciate you and the vital work you do!
Wiki Project Med Foundation is a [[meta:Wikimedia_thematic_organizations|thematic organization]] whose mission is to improve our health content. '''[[meta:Wiki_Project_Med#People_interested|Consider joining for 2025]]''', there are no associated costs.
Additionally one of our primary efforts revolves around translating health content. We invite you to '''[https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/index.php try our new workflow]''' if you have not already. Our dashboard automatically [https://mdwiki.toolforge.org/Translation_Dashboard/leaderboard.php collects statistics] of your efforts and we are working on [https://mdwiki.toolforge.org/fixwikirefs.php tools to automatically improve formating].
|}
Thanks again :-) -- [[mdwiki:User:Doc_James|<span style="color:#0000f1">'''Doc James'''</span>]] along with the rest of the team at '''[[m:WikiProject_Med|Wiki Project Med Foundation]]''' 06:24, 26 जनवरी 2025 (UTC)
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/Top_Other_Language_Editors_2024&oldid=28172893 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Doc James@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
== [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:सुरक्षित इंटरनेट दिवस|सुरक्षित इंटरनेट दिवस]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/सुरक्षित इंटरनेट दिवस]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>मूल शोध।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
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== [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:अभ्यास वायुशक्ति-2024|अभ्यास वायुशक्ति-2024]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 19:34, 27 फ़रवरी 2025 (UTC)
== विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025 परिणाम ==
[[File:Main Barnstar.png|right|90 px]] बधाई हो! <span style="font-size:11pt">प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] में भाग लेकर इसे सफल बनाने तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने के लिए आयोजकों की तरफ से धन्यवाद एवं बधाई। पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए 20 जनवरी 2026 तक [https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSddj_4DywI-lZ0ko_Fj2X1JqWh71cNUaij1nmL63RGx_yOITg/viewform?usp=header पुरस्कार सूचना प्रपत्र] जरूर भरें। पुरस्कार प्राप्त होने की सूचना भी दें। --[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 18:12, 13 जनवरी 2026 (UTC)
:प्रिय {{PAGENAME}} जी, [[विकिपीडिया:सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025|सामग्री संवर्द्धन संपादनोत्सव/अक्टूबर 2025]] की पुरस्कार राशि अमेजन कूपन के रूप में आपके ई-मेल पर भेज दी गई है। यह ई-मेल “हिंदी विकिमीडियन्स यूज़र ग्रुप sent you an Amazon Pay Gift Card!” शीर्षक से भेजा गया है। कूपन नहीं मिलने की स्थिति में अपने ई-मेल के स्पैम मेल को जाँच लें तथा हमें सूचित करें। -[[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 17:31, 29 जनवरी 2026 (UTC)
::जी सर मुझे पुरस्कार राशि प्राप्त हुई है । [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 06:36, 30 जनवरी 2026 (UTC)
== अप्रैल 2026 ==
[[File:Nuvola apps important.svg|25px|alt=|link=]] कृपया [[विकिपीडिया:विघटनकारी सम्पादन|विघटनकारी संपादन]] करना बंद करें। अगर आप विकिपीडिया पर [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देना, विज्ञापन या प्रचार सामग्री जोड़ना]] जारी रखते हैं, जैसा कि आपने [[:गाय]] पर किया है, तो आपको [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|संपादन करने से अवरोधित]] किया जा सकता है। [[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert3 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert3 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:32, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्कार जी,
:मैं '''“गाय”''' लेख के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूँ। मेरे द्वारा पहले किए गए संपादन में यह देखा गया कि गाय के प्रजनन से जुड़े कई तथ्य गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। <u>विशेष रूप से यह कहना कि गाय में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) करना “पाप” है — यह किस दृष्टिकोण से सही ठहराया जा सकता है?</u>
:वास्तविकता यह है कि राजस्थान का पशुपालन विभाग तथा सरकारी पशुपालन केंद्र स्वयं कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देते हैं। यह एक वैज्ञानिक और स्वीकृत विधि है, जिसका उद्देश्य नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है। ऐसे में इसे “पाप” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
:<u>दूसरा, आपके संपादन में थारपारकर गाय को “ड्यूल पर्पस ब्रीड (Dual Purpose Breed )” बताया गया है, जबकि वैज्ञानिक रूप से थारपारकर एक प्रमुख दुग्ध (milch) नस्ल है और राजस्थान की उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्लों में से एक मानी जाती है, जैसा कि पशु चिकित्सा साहित्य में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।</u>
:आपने “self-promoting” की बात कही, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं स्वयं राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग में Livestock Inspector के पद पर कार्यरत हूँ। जब मैंने विकिपीडिया पर कुछ अवास्तविक और गलत जानकारी देखी, तो स्वाभाविक रूप से मुझे आपत्ति हुई।
:विकिपीडिया पर योगदान देने में मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है। यदि आपको ऐसा लगता है कि मेरे योगदान उचित नहीं हैं, तो मैं आज ही विकिपीडिया से हमेशा के लिए अलग होने को तैयार हूँ।
:मेरा उद्देश्य केवल सही और वैज्ञानिक जानकारी को साझा करना है।
:धन्यवाद।
:'''Rakesh Kumar Veterinarian''' [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 16:32, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar Veterinarian]] महोदय,
::मेरी चेतावनी आपके तथ्यों के लिए नहीं थी।
::चेतावनी का एकमात्र कारण '''"The Rajasthan Express"''' के लिंक जोड़ना था। चूँकि यह आपके द्वारा स्व-प्रकाशित लेख/वेबसाइट है, इसलिए विकिपीडिया की [[विकिपीडिया:सत्यापनीयता|स्व-प्रकाशित स्रोत]] और [https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Conflict_of_interest हितों के टकराव] नीतियों के तहत अपनी ही वेबसाइट का लिंक जोड़ना प्रचार माना जाता है।
::कृपया विकिपीडिया न छोड़ें। आप अपना बहुमूल्य योगदान देते रहें, बस भविष्य में संदर्भ के लिए अपनी वेबसाइट के बजाय ICAR, NDDB या अन्य आधिकारिक सरकारी दस्तावेज़ों का ही प्रयोग करें।
::धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 17:03, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
25ehdm8z91jq8ix48vqqt3k37hnzsp8
वार्ता:2023 इज़राइल-हमास युद्ध
1
1508273
6541370
6516784
2026-04-16T19:02:43Z
AMAN KUMAR
911487
/* स्थानान्तरण अनुरोध 31 जनवरी 2026 */ उत्तर
6541370
wikitext
text/x-wiki
== स्थानान्तरण अनुरोध 22 जनवरी 2024 ==
<div class="boilerplate" style="background-color: #efe; margin: 2em 0 0 0; padding: 0 10px 0 10px; border: 1px dotted #aaa;"><!-- Template:RM top -->
:''नीचे इस पृष्ठ के [[WP:स्थानान्तरण अनुरोध|स्थानान्तरण अनुरोध]] पर हुई चर्चा का परिणाम है।<span style="color:red">'''कृपया इसे न बदलें'''</span> अन्य चर्चायें नीचे नए अनुभाग बना कर की जा सकती हैं। इस चर्चा में कोई परिवर्तन न करें। ''
स्थानान्तरण अनुरोध का परिणाम निम्नलिखित रहा: {{cross}} कोई प्रमाण नहीं, कोई फॉलोअप नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:10, 6 अक्टूबर 2024 (UTC)
----
{{नाम बदलें/old|इस्राएल-हमास युद्ध}}
[[:2023 इज़राइल-हमास युद्ध]] → {{no redirect|इस्राएल-हमास युद्ध}} – अंग्रेजी विकिपीडिया में स्थानान्तरण [[सदस्य:Jeaucques Quœure|Jeaucques Quœure]] ([[सदस्य वार्ता:Jeaucques Quœure|वार्ता]]) 14:21, 22 जनवरी 2024 (UTC)
:@[[सदस्य:Jeaucques Quœure|Jeaucques Quœure]] जी, प्रचलित वर्तनी इज़राइल है। आपके अनुरोध का कोई विशेष कारण बताइयेगा? <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 09:42, 24 सितंबर 2024 (UTC)
----
:''ऊपर हुई चर्चा एक स्थानान्तरण अनुरोध का पुरालेख है। <span style="color:red">'''इसमें कोई बदलाव न करें'''</span> आगे की चर्चाएँ, नीचे नए आनुभाग बना कर शुरू की जा सकती हैं, इस अनुभाग में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए''</div><!-- Template:RM bottom -->
== स्थानान्तरण अनुरोध 31 जनवरी 2026 ==
{{नाम बदलें/dated|ग़ज़ा युद्ध}}
[[:2023 इज़राइल-हमास युद्ध]] → {{no redirect|ग़ज़ा युद्ध}} – लेख का नाम सरल रखने के लिए। और यह संघर्ष आज तक सक्रिय है, इसलिए "2023" ज़रा अनावयश्यक है। [[सदस्य:The Sorter|The Sorter]] ([[सदस्य वार्ता:The Sorter|वार्ता]]) 14:20, 31 जनवरी 2026 (UTC)
:{{विरोध}} [[ग़ज़ा युद्ध]]
:{{समर्थन}} [[इज़राइल-हमास युद्ध]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:02, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
2a0anz6m5qadyqz8sf1oy0ffgqo64la
विकिपीडिया:भारतीय संविधान संपादनोत्सव/लेख सूची
4
1522363
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6540798
2026-04-17T04:10:52Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
/* 4 */
6541446
wikitext
text/x-wiki
__NOTOC__
<div style="width: 99%; color: #111; {{box-shadow|0|0|6px|rgba(0, 0, 0, 0.55)}} {{border-radius|2px}}">
<div style="overflow:hidden; height:auto; background: #ADD8E6; width: 100%; padding-bottom:18px;">
<div style="font-size: 36px; margin-top: 24px;margin-left: 16px; margin-right:10px; font-family: 'Linux Libertine',Georgia,Times,serif; line-height: 1.2em;">
<center>भारतीय संविधान संपादनोत्सव<span style="color: #666"></span></center></div>
<div style="font-size: 24px; padding-top: 0px; margin-left: 16px; margin-right:10px; font-family: 'Linux Libertine',Georgia,Times,serif; line-height:1.2em; color: #666; ">
{{/Navbar}}
'''भारतीय संविधान संपादनोत्सव''' (14 अप्रैल से 21 अप्रैल 2024) में बनाए जाने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों संबंधित लेखों की सूची निम्नलिखित है।
[[श्रेणी:भारतीय संविधान संपादनोत्सव]]</div></div>
</noinclude>
== निर्देश ==
इस सूची को संपादन सुविधा के लिए कई अनुभागों में बाँटा गया है। लेख चुनने के लिए संबंधित अनुभाग को संपादित करना बेहतर होगा ताकि संपादन अंतर्विरोध की संभावना कम हो। आप किसी भी अनुभाग के कोई भी लेख बनाने के लिए चुन सकते हैं केवल उन्हें छोड़कर जो दूसरों द्वारा चुन लिए गए हों।
{{center|<big>'''अनुभाग सूची''':<br>[[#1|1]] • [[#2|2]] • [[#3|3]] • [[#4|4]] • [[#5|5]] • [[#6|6]] • [[#7|7]] • [[#8|8]] • [[#9|9]] • [[#10|10]]</big>}}
:सुझाए लेखों को चुनने संबंधित ध्यान देने योग्य बातें:
# इस सूची में से आप जो लेख बनाना चाहते हैं उसके आगे चार टिल्ड <nowiki> (~~~~)</nowiki> लगाकर हस्ताक्षर करें।
# किसी के हस्ताक्षर किए हुए लेख पर कार्य न करें। लेख के नाम में परिवर्तन न करें।
# प्रतिभागी एक दिन या एक बार में अधिकतम पाँच लेख चुनें। लेख की शब्द संख्या जानने के लिए 'गद्य आकार' उपकरण के 'पाठ मात्र' के आँकड़े देखें। 'गद्य आकार' के अंतर्गत न गिने जाने सकने वाले पाठ या उद्धरण आदि के आकार की गणना निर्णायक करेंगे।
# प्रतियोगिता के दौरान किसी अन्य प्रतिभागी के द्वारा बनाए लेख पर कार्य न करें।
# लेख बना लेने के बाद उसे [https://fountain.toolforge.org/editathons/bssapril24 फाउंटेन टूल] पर भी जमा करें। एक दिन में '''अधिकतम 5 लेख''' ही जमा करें।
# फाउंटेन टूल पर जमा करने के तुरंत बाद उसका मूल्यांकन प्रारंभ किया जा सकता है।
# लेख निर्माण में सुविधा तथा एकरूपता के लिए स्वतः निर्मित होने वाले साँचे की व्यवस्था है। आप उसमें संबंधित सही जानकारी भरकर आसानी से लेख बना सकते हैं। लेख के स्वरूप को आप प्रारूप लेख [[अनुच्छेद 1 (भारत का संविधान)]] के जरिए समझ सकते हैं।
</noinclude>
[https://hi.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A4%AF%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A5%80:%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8_(%E0%A5%A7%E0%A5%AF%E0%A5%AB%E0%A5%AD).djvu '''विकिस्रोत की कड़ी''']
== 1 ==
* [[अनुच्छेद 1 (भारत का संविधान)]]
* [[अनुच्छेद 2 (भारत का संविधान)]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:45, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 3 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_3_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 3 बनायें]--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 12:08, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 4 (भारत का संविधान)]] [[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 10:20, 16 अप्रैल 2024 (UTC)• [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_4_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 4 बनायें]
* [[अनुच्छेद 5 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_5_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 5 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 14:00, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 6 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_6_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 6 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 14:28, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 7 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_7_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 7 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 14:28, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 8 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_8_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 8 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 14:28, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 9 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_9_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 9 बनायें]--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 18:48, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 10 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 04:17, 15 अप्रैल 2024 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 12 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 07:30, 15 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 13 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_13_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 13 बनायें] <span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) 08:16, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 14 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 03:02, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 15 (भारत का संविधान)]]
* [[अनुच्छेद 16 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_16_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 16 बनायें]
* [[अनुच्छेद 17 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_17_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 17 बनायें] <span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) 12:00, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 18 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_18_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 18 बनायें] --[[सदस्य:SomnathHealth|SomnathHealth]] ([[सदस्य वार्ता:SomnathHealth|वार्ता]]) 09:00, 15 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 19 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_19_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 19 बनायें] ----[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:48, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 20 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_20_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 20 बनायें] ----[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:52, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 21 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_21_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 21 बनायें] ----[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:52, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 22 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_22_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 22 बनायें] ----[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:52, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 23 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_23_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 23 बनायें]--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 21:09, 16 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 24 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 07:30, 15 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 25 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_25_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 25 बनायें] ----[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 06:52, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 26 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_26_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 26 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:58, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 27 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_27_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 27 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 07:59, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 28 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_28_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 28 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:09, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 29 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_29_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 29 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:17, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 30 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_30_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 30 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 03:54, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 31 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_31_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 31 बनायें]
* [[अनुच्छेद 32 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_32_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 32 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 04:24, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 33 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_33_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 33 बनायें]
* [[अनुच्छेद 34 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_34_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 34 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:28, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 35 (भारत का संविधान)]]
* [[अनुच्छेद 36 (भारत का संविधान)]] • --[[सदस्य:सौरभ तिवारी 05|सौरभ तिवारी 05]] ([[सदस्य वार्ता:सौरभ तिवारी 05|वार्ता]]) 03:46, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 37 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_37_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 37 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 08:37, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 38 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_38_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 38 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 13:13, 19 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 39 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_39_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 39 बनायें]
* [[अनुच्छेद 40 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_40_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 40 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 41 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_41_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 41 बनायें]
* [[अनुच्छेद 42 (भारत का संविधान)]] [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:12, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 43 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_43_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 43 बनायें] - [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) 07:42, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 44 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_44_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 44 बनायें]
* [[अनुच्छेद 45 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_45_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 45 बनायें]--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 11:52, 21 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 46 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_46_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 46 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:01, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 47 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 03:02, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 48 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 03:02, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 49 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_49_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 49 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:16, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 50 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_50_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 50 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:27, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 51 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_51_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 51 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 09:22, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 52 (भारत का संविधान)]] • --[[User:राजकुमार|<span style="color: #E63E62;font-family:Georgia;">'''राज'''</span><span style="color: #414A4C;font-family:Georgia;">'''कुमार'''</span>]][[User talk:राजकुमार|<sup style="color: #E63E62">(talk)</sup>]] 09:03, 14 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 53 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_53_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 53 बनायें]
* [[अनुच्छेद 54 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_54_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 54 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 10:10, 21 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 55 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_55_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 55 बनायें]
* [[अनुच्छेद 56 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_56_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 56 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 10:14, 21 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 57 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_57_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 57 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 09:38, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 58 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_58_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 58 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 76 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_76_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 76 बनायें] - [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) 11:30, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 78 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_78_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 78 बनायें] - [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) 11:30, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 80 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_80_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 80 बनायें] - [[सदस्य:आदेश यादव|आदेश यादव]] ([[सदस्य वार्ता:आदेश यादव|वार्ता]]) 11:30, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 81 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_81_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 81 बनाये] -[[सदस्य:MuskanChaudhary121|MuskanChaudhary121]] ([[सदस्य वार्ता:MuskanChaudhary121|वार्ता]]) 08:23, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 89 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php
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* [[अनुच्छेद 120 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_120_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 120 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 121 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_121_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 121 बनायें] --<span style="color:green;">✍</span>[[u:शीतल सिन्हा|<u><span style="color:Magenta;">शीतल </span></u>]] ([[User talk:शीतल सिन्हा|<span style="color:blue;">talk</span>]]) 08:12, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 123 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_123_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 123 बनायें]
* [[अनुच्छेद 124 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_124_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 124 बनायें]
* [[अनुच्छेद 125 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_125_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 125 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:39, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 127 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_127_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 127 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_141_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 141 बनायें]<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:36, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 142 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_142_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 142 बनायें]<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:36, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 143 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_143_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 143 बनायें]<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 15:49, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 144 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_144_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 144 बनायें]
* [[अनुच्छेद 145 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_145_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 145 बनायें]--[[सदस्य:RiteshRaj25|RiteshRaj25]] ([[सदस्य वार्ता:RiteshRaj25|वार्ता]]) 11:42, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 146 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_146_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 146 बनायें]
* [[अनुच्छेद 147 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_147_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 147 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 05:11, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 148 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_148_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 148 बनायें]
* [[अनुच्छेद 149 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_149_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 149 बनायें]
* [[अनुच्छेद 150 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_150_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 150 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 04:56, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 151 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_151_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 151 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 06:21, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 152 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_152_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 152 बनायें]
* [[अनुच्छेद 153 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_153_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 153 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:39, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 154 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_154_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 154 बनायें]
* [[अनुच्छेद 155 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_155_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 155 बनायें][[सदस्य:Sejalpanwar22|Sejalpanwar22]] ([[सदस्य वार्ता:Sejalpanwar22|वार्ता]]) 08:52, 17 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 156 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_156_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 156 बनायें]
* [[अनुच्छेद 157 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_157_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 157 बनायें]--[[सदस्य: रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''रोहित'''</span>]]<sup>[[User talk:रोहित साव27|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color: black">'''बातचीत'''</span>]]</sup> 14:40, 20 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 158 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_158_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 158 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 160 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_160_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 160 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 06:31, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
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* [[अनुच्छेद 161 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_161_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 161 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:15, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 162 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_162_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 162 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:43, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 163 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_163_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 163 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 07:51, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 164 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_164_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 164 बनायें]
* [[अनुच्छेद 165 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_165_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 165 बनायें][[सदस्य:Bhartiya00|Bhartiya00]] ([[सदस्य वार्ता:Bhartiya00|वार्ता]]) 08:02, 18 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 166 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_166_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 166 बनायें]
* [[अनुच्छेद 167 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_167_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 167 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 170 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_170_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 170 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 200 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_200_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 200 बनायें]
* [[अनुच्छेद 201 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_201_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 201 बनायें]--[[सदस्य:सीमा1|सीमा1]] ([[सदस्य वार्ता:सीमा1|वार्ता]]) 08:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* [[अनुच्छेद 202 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_202_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 202 बनायें]
* [[अनुच्छेद 203 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_203_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 203 बनायें]
* [[अनुच्छेद 204 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_204_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 204 बनायें]
* [[अनुच्छेद 205 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_205_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 205 बनायें]
* [[अनुच्छेद 206 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_206_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 206 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 226 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_226_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 226 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 241 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_241_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 241 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 281 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_281_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 281 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 361 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_361_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 361 बनायें]
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* [[अनुच्छेद 371 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_371_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 371 बनायें]--[[सदस्य:SomnathHealth|SomnathHealth]] ([[सदस्य वार्ता:SomnathHealth|वार्ता]]) 08:59, 15 अप्रैल 2024 (UTC)
* [[अनुच्छेद 372 (भारत का संविधान)]] • [https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=अनुच्छेद_372_(भारत_का_संविधान)&action=edit&redlink=1&preload=सदस्य:SM7/sandbox अनुच्छेद 372 बनायें]
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दुधारू पशु
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AMAN KUMAR
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[[File:Cow female black white.jpg|right|thumb|250px|एक चरती हुई [[होल्स्टीन फ़्रीज़ियन|होलेस्टिन]] गाय।]]
'''दुधारू पशु''' (dairy cattle अथवा '''दुधारू गाय''') विशेष रूप से बड़ी मात्रा में [[दुग्ध उत्पादन|दूध उत्पादन]] के लिए पाली जाती हैं, जिससे [[डेयरी]] उत्पाद बनाए जाते हैं। अधिकांश डेयरी फार्मों में बोस टौरुस प्रजाति की गायों को रखा जाता है।<ref>{{cite web |url=http://www4.uwsp.edu/biology/facilities/vertebrates/Mammals%20of%20Wisconsin/Bos%20taurus/Bos%20taurus%20page.htm |title=Mammals of Wisconsin |trans-title=विसकन्सिन के मैमल |access-date=29 मार्च 2012 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20110609060635/http://www.uwsp.edu/biology/facilities/vertebrates/Mammals%20of%20Wisconsin/Bos%20taurus/Bos%20taurus%20page.htm |archive-date=9 जून 2011 }}</ref> भारत की [[स्वदेशी]] गायों को [[भारतीय गाय|बोस इंडिकस]] कहा जाता है।
= भारतीय गायों की प्रमुख नस्लें (उपयोग के आधार पर वर्गीकरण) =
भारत में गायों की नस्लों को उनके मुख्य उपयोग के आधार पर तीन भागों में बांटा जाता है—दुधारू, द्वि-उद्देशीय और भारवाहक नस्लें।
1. दुधारू नस्लें : (मुख्य रूप से दूध उत्पादन के लिए)
इन नस्लों का पालन मुख्य रूप से अधिक दूध प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
प्रमुख दुधारू नस्लें:
* साहीवाल
* रेड सिंधी
* गिर
2. द्वि-उद्देशीय नस्लें : (दूध उत्पादन और कृषि कार्य दोनों के लिए उपयोगी)
इन नस्लों से दूध भी अच्छा मिलता है और इनके बैल खेती के कार्यों में भी काम आते हैं।
प्रमुख द्वि-उद्देशीय नस्लें:
* कांकरेज
* हरियाणा
3. भारवाहक नस्लें : (मुख्य रूप से कृषि एवं परिवहन कार्यों के लिए)
इन नस्लों के बैल मजबूत और सहनशील होते हैं, जो जुताई, गाड़ी खींचने और अन्य कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त होते हैं।
प्रमुख भारवाहक नस्लें:
* मालवी
* नागौरी
* अमृतमहल
* पुंगनूर
== प्रबंधन ==
डेयरी गायों को या तो [[झुंड|झुंडों]] में या डेयरी फार्मों में पाला जाता है, जहाँ डेयरी [[किसान]] उनकी देखभाल करते हैं और उनसे दुध एकत्रित करते हैं। झुंडों का आकार भूमि की उपलब्धता और सामाजिक संरचना पर निर्भर करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 75,000 डेयरी झुंडों में 90 लाख [[गाय|गायें]] हैं। औसत झुंड का आकार 120 गायों का है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ers.usda.gov/publications/pub-details/?pubid=45870|title=Profits, Costs, and the Changing Structure of Dairy Farming|last=MacDonald|first=James M.|last2=O'Donoghue|first2=Erik|website=www.ers.usda.gov|language=en|access-date=2024-08-11|last3=McBride|first3=William D.|last4=Nehring|first4=Richard|last5=Sandretto|first5=Carmen|last6=Mosheim|first6=Roberto}}</ref> यूनाइटेड किंगडम में कुल मिलाकर लगभग 15 लाख गायें हैं और औसत फार्म पर लगभग 100 गायें होती हैं। न्यूजीलैंड में औसत झुंड में 375 से अधिक गायें होती हैं। ऑस्ट्रेलिया में औसत झुंड में लगभग 220 गायें होती हैं।
== प्रजनन और जीवनचक्र ==
[[दुग्धपायन]] बनाए रखने के लिए, डेयरी गायों को [[प्रजनन]] और बछड़े पैदा करने की आवश्यकता होती है। डेयरी किसान आमतौर पर 13 महीने की उम्र में हीफरों को प्रजनन या [[कृत्रिम गर्भाधान]] शुरू करते हैं। गाय का [[गर्भ काल|गर्भकाल]] लगभग नौ महीने (283 दिन) का होता है। <ref>{{Cite web|title=Artificial Insemination - an overview {{!}} ScienceDirect Topics|url=https://www.sciencedirect.com/topics/biochemistry-genetics-and-molecular-biology/artificial-insemination|access-date=22 May 2021|website=www.sciencedirect.com}}</ref>
आमतौर पर नवजात [[बछड़े]] को [[प्रसव]] के तीन दिनों के भीतर माँ से प्राप्त [[कॉलेस्ट्रोम|खींस]] पिलाया जाता है। बछड़े को तीन माह की उम्र में माँ से अलग कर दिया जाता है ताकि माँ-बछड़े के बंधन के कारण उत्पन्न होने वाले तनाव को कम किया जा सके।<ref>{{cite journal |last1=Flower |first1=Frances C |last2=Weary |first2=Daniel M |title=Effects of early separation on the dairy cow and calf |journal=Applied Animal Behaviour Science |date=January 2001 |volume=70 |issue=4 |pages=275–284 |doi=10.1016/s0168-1591(00)00164-7 |pmid=11179551 }}</ref><ref>{{cite journal |last1=Stěhulová |first1=Ilona |last2=Lidfors |first2=Lena |last3=Špinka |first3=Marek |title=Response of dairy cows and calves to early separation: Effect of calf age and visual and auditory contact after separation |journal=Applied Animal Behaviour Science |date=March 2008 |volume=110 |issue=1–2 |pages=144–165 |doi=10.1016/j.applanim.2007.03.028 }}</ref>
डेयरी गायें आमतौर पर 6 साल की उम्र में डेयरी झुंड से हटा दी जाती हैं और [[मांस]] के लिए बाजार में बेची जाती हैं।
== दूध उत्पादन ==
डेयरी गाय अपने [[जीवनकाल]] में बड़ी मात्रा में दूध उत्पादन करती हैं। डेयरी गाय बछड़े के जन्म के 40 से 60 दिनों के बाद सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करती है।
'''सामान्य उत्पादन अवधि:'''
* 10 महीने तक दूध निकालने के बाद, गायों को 60 दिनों के लिए "सूखा" छोड़ दिया जाता है।
* विभिन्न नस्लें विभिन्न उत्पादन स्तर प्रदान करती हैं, जैसे कि [[होल्स्टीन फ़्रीज़ियन|होलस्टीन फ्रेज़ियन]] नस्ल, जो प्रति वर्ष 10,000 लीटर तक दूध उत्पादन कर सकती है।
== कल्याण और व्यवहार ==
गायें सामाजिक जानवर होती हैं और आमतौर पर मातृ समूहों में रहती हैं। नवजात बछड़ों को बेहतर सामाजिक संबंधों और विकास के लिए समूहों में रखना अधिक लाभकारी होता है।
== मुख्य कारण गायों का वध ==
* [[बांझपन|बांझपन]] : प्रजनन में असफलता और दूध उत्पादन में कमी।
* [[थनैला रोग|मास्टिटिस]] : [[दुग्ध ग्रन्थि|दुग्ध ग्रंथि]] संक्रमण।
* लंगड़ापन : पैर की समस्या के कारण।
* उत्पादन : आर्थिक रूप से उच्च स्तरों पर दूध उत्पादन न कर पाना।
== इन्हें भी देखें ==
* [[गीर गाय|गिर गाय]]
* [[हरियाणा गाय]]
* [[एंथ्राक्स|एंथ्रेक्स रोग]]
* [[थनैला रोग|थनेला रोग]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:दुधारू पशु]]
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आंतरायिक उपवास
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भी होते हैं → "भी कहते हैं" किया गया है, क्योंकि पढ़ने मे अटपटा लग रहा था।
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{{प्रतिलिपि संपादन|for=पाठ सामग्री और लहजे को सुधारने|date=सितंबर 2024}}
'''आंतरायिक उपवास''' खाने और [[उपवास]] करने के लिए नियमित समय अवधि चुनने पर आधारित एक तरीका है। इसमें एक निश्चित अवधि में स्वैच्छिक [[उपवास]] (या कम कैलोरी सेवन) और गैर-उपवास के बीच चक्र किया जाता है। इसे '''सविराम उपवास''' या '''चक्रिय उपवास''' भी कहते हैं।
इस उपवास के कई तरीके हैं, जैसे:
* 16/8: इसमें 16 घंटे तक उपवास करना और 8 घंटे के अंतराल में खाना खाना शामिल है। उदाहरण के लिए, अगर आप रात 8 बजे खाना खाते हैं, तो आपको अगले दिन दोपहर तक उपवास करना होगा।
* 18/6: इसमें 18 घंटे तक उपवास रखना और 6 घंटे के भीतर भोजन करना शामिल है।
* 20/4: इस पद्धति में आपके खाने के समय को घटाकर 4 घंटे कर दिया जाता है, और आप दिन के शेष समय उपवास करते हैं।
* वैकल्पिक-दिन उपवास: एक दिन सामान्य आहार लें और अगले दिन या तो पूरी तरह से उपवास करें या एक छोटा भोजन (500 कैलोरी से कम) लेना है।
* 5:2 उपवास: सप्ताह में पांच दिन सामान्य आहार लें और सप्ताह में दो दिन उपवास करना है।<ref name="j882">{{cite web|url=https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/nutrition-and-healthy-eating/expert-answers/intermittent-fasting/faq-20441303|title=Is intermittent fasting good for you?|date=2022-05-05|website=Mayo Clinic|access-date=2024-06-24}}</ref><ref name="g933">{{cite web|url=https://zoe.com/learn/intermittent-fasting-pros-and-cons|title=The Pros and Cons of Intermittent Fasting Assessed|last=Cassano|first=Olivia|date=2022-02-01|website=ZOE—Understand how food affects your body|access-date=2024-06-24}}</ref><ref name="u242">{{cite web|url=https://www.hopkinsmedicine.org/health/wellness-and-prevention/intermittent-fasting-what-is-it-and-how-does-it-work|title=Intermittent Fasting: What is it, and how does it work?|date=2023-09-29|website=Johns Hopkins Medicine|access-date=2024-06-24}}</ref>
आंतरायिक उपवास का अध्ययन यह पता लगाने के लिए किया गया है कि क्या यह आहार संबंधी बीमारियों, जैसे चयापचय सिंड्रोम के जोखिम को कम कर सकता है। २०१९ की समीक्षा ने निष्कर्ष निकाला कि आंतरायिक उपवास मोटापे, इंसुलिन प्रतिरोध, डिस्लिपिडेमिया, उच्च रक्तचाप और सूजन में मदद कर सकता है। प्रारंभिक साक्ष्य हैं कि आंतरायिक उपवास आम तौर पर सुरक्षित है।<ref name="j886">{{cite journal|last=de Cabo|first=Rafael|last2=Mattson|first2=Mark P.|date=2019-12-26|title=Effects of Intermittent Fasting on Health, Aging, and Disease|journal=New England Journal of Medicine|volume=381|issue=26|pages=2541–2551|doi=10.1056/NEJMra1905136|issn=0028-4793}}</ref><ref name="w826">{{cite journal|last=Cioffi|first=Iolanda|last2=Evangelista|first2=Andrea|last3=Ponzo|first3=Valentina|last4=Ciccone|first4=Giovannino|last5=Soldati|first5=Laura|last6=Santarpia|first6=Lidia|last7=Contaldo|first7=Franco|last8=Pasanisi|first8=Fabrizio|last9=Ghigo|first9=Ezio|date=2018|title=Intermittent versus continuous energy restriction on weight loss and cardiometabolic outcomes: a systematic review and meta-analysis of randomized controlled trials|journal=Journal of Translational Medicine|volume=16|issue=1|page=|doi=10.1186/s12967-018-1748-4|issn=1479-5876|pmc=6304782|pmid=30583725|doi-access=free|last10=Bo|first10=Simona}}</ref><ref name="n782">{{cite journal|last=Sainsbury|first=A.|last2=Wood|first2=R. E.|last3=Seimon|first3=R. V.|last4=Hills|first4=A. P.|last5=King|first5=N. A.|last6=Gibson|first6=A. A.|last7=Byrne|first7=N. M.|date=2018|title=Rationale for novel intermittent dieting strategies to attenuate adaptive responses to energy restriction|journal=Obesity Reviews|volume=19|issue=S1|pages=47–60|doi=10.1111/obr.12787|issn=1467-7881}}</ref><ref name="j365">{{cite journal|last=Harris|first=Leanne|last2=Hamilton|first2=Sharon|last3=Azevedo|first3=Liane B.|last4=Olajide|first4=Joan|last5=De Brún|first5=Caroline|last6=Waller|first6=Gillian|last7=Whittaker|first7=Vicki|last8=Sharp|first8=Tracey|last9=Lean|first9=Mike|year=2018|title=Intermittent fasting interventions for treatment of overweight and obesity in adults: a systematic review and meta-analysis|journal=JBI Database of Systematic Reviews and Implementation Reports|publisher=Ovid Technologies (Wolters Kluwer Health)|volume=16|issue=2|pages=507–547|doi=10.11124/jbisrir-2016-003248|issn=2202-4433|last10=Hankey|first10=Catherine|last11=Ells|first11=Louisa}}</ref>
उपवास विभिन्न धार्मिक प्रथाओं में मौजूद है, जिनमें [[बौद्ध धर्म]], [[ईसाई धर्म]], [[हिन्दू धर्म|हिंदू धर्म]], [[इस्लाम]], [[जैन धर्म]] और [[यहूदी धर्म]] शामिल हैं।<ref name="g933" /><ref name="g195">{{cite journal|last=Persynaki|first=Angeliki|last2=Karras|first2=Spyridon|last3=Pichard|first3=Claude|year=2017|title=Unraveling the metabolic health benefits of fasting related to religious beliefs: A narrative review|journal=Nutrition|publisher=Elsevier BV|volume=35|pages=14–20|doi=10.1016/j.nut.2016.10.005|issn=0899-9007}}</ref>
== आंतरायिक उपवास के तरीके ==
आंतरायिक उपवास के कई तरीके हैं।
* समय-प्रतिबंधित भोजन में प्रत्येक दिन केवल एक निश्चित संख्या में घंटों के दौरान भोजन करना शामिल है, जो अक्सर 8-12 घंटे की समय अवधि के भीतर कैलोरी सेवन का एक सुसंगत दैनिक पैटर्न स्थापित करता है। यह शेड्यूल भोजन के सेवन को सर्कैडियन लय (सूर्योदय के बाद शुरू होने वाली और सूर्यास्त के आसपास समाप्त होने वाली खाने की खिड़कियां स्थापित करना) के साथ संरेखित कर सकता है।
* वैकल्पिक-दिन उपवास में 24 घंटे के "उपवास दिवस" के बीच बारी-बारी से शामिल होता है जब व्यक्ति सामान्य ऊर्जा आवश्यकताओं का 25% से कम खाता है, उसके बाद 24 घंटे का गैर-उपवास "पर्व दिवस" अवधि होती है। इसके दो उपप्रकार हैं:
** पूर्ण वैकल्पिक-दिन उपवास पूर्णतः आंतरायिक ऊर्जा प्रतिबंध है, जिसमें उपवास के दिनों में कोई कैलोरी ग्रहण नहीं की जाती है।
** संशोधित वैकल्पिक-दिन उपवास में आंशिक आंतरायिक ऊर्जा प्रतिबंध शामिल है जो पूर्ण उपवास के बजाय उपवास के दिनों में दैनिक कैलोरी की आवश्यकता का 25% तक उपभोग करने की अनुमति देता है। यह सामान्य खाने वाले दिनों और बहुत कम कैलोरी वाले आहार वाले दिनों को बदलने जैसा है ।
* 5:2 आहार एक प्रकार का आवधिक उपवास है (जो किसी विशेष खाद्य पैटर्न का पालन नहीं करता) जो पूरी तरह से कैलोरी सामग्री पर केंद्रित होता है। दूसरे शब्दों में, सप्ताह के दो दिन लगभग ५०० से ६०० कैलोरी या नियमित दैनिक कैलोरी सेवन का लगभग २५% उपभोग करने के लिए समर्पित होते हैं, सप्ताह के अन्य पाँच दिनों के दौरान सामान्य कैलोरी सेवन होता है। इसे पहली बार 2011 के एक लेख में मिशेल हार्वी , मार्क मैटसन और 14 अतिरिक्त वैज्ञानिकों द्वारा सह-लिखित किया गया था। बाद में इसे यूके और ऑस्ट्रेलिया में माइकल मोस्ले द्वारा 2012 बीबीसी डॉक्यूमेंट्री ''ईट, फास्ट एंड लिव लॉन्गर'' के माध्यम से प्रकाशित किया गया था (जहां उन्होंने मार्क मैटसन से 5:2 आहार के बारे में सीखा )।
* आवधिक उपवास या पूरे दिन के उपवास में 24 घंटे से अधिक समय तक पानी के उपवास की आंतरायिक अवधि शामिल होती है।
आंतरायिक उपवास से संबंधित विज्ञान इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अध्ययन की अनुपस्थिति के कारण प्रारंभिक और अनिश्चित है। प्रारंभिक साक्ष्य इंगित करते हैं कि आंतरायिक उपवास वजन घटाने के लिए प्रभावी हो सकता है, इंसुलिन प्रतिरोध और उपवास इंसुलिन को कम कर सकता है , और हृदय और चयापचय स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है, हालांकि इन प्रभावों की दीर्घकालिक स्थिरता का अध्ययन नहीं किया गया है। <ref name="g195" /><ref name="o669">{{cite journal|last=Parr|first=Evelyn B|last2=Devlin|first2=Brooke L|last3=Hawley|first3=John A|year=2022|title=Perspective: Time-Restricted Eating—Integrating the What with the When|journal=Advances in Nutrition|publisher=Elsevier BV|volume=13|issue=3|pages=699–711|doi=10.1093/advances/nmac015|issn=2161-8313}}</ref><ref name="s917">{{cite journal|last=Patterson|first=Ruth E.|last2=Sears|first2=Dorothy D.|date=2017-08-21|title=Metabolic Effects of Intermittent Fasting|journal=Annual Review of Nutrition|volume=37|issue=1|pages=371–393|doi=10.1146/annurev-nutr-071816-064634|issn=0199-9885}}</ref><ref name="n460">{{cite journal|last=Johnstone|first=A|date=2014-12-26|title=Fasting for weight loss: an effective strategy or latest dieting trend?|url=https://www.nature.com/articles/ijo2014214|journal=International Journal of Obesity|publisher=Nature Publishing Group|volume=39|issue=5|pages=727–733|doi=10.1038/ijo.2014.214|issn=1476-5497|access-date=2024-06-24}}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:भोजन]]
ls760pwt4f53cf2gfw0j1owy38mi1r2
जुराब
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अनिरुद्ध कुमार
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[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:अन्तःवस्त्र]] हटाई; [[श्रेणी:अंतर्वस्त्र]] जोड़ी
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text/x-wiki
[[चित्र:Socken farbig.jpeg|अंगूठाकार|जुराबें ]]
'''जुराब''' पैरों पर पहना जाने वाला कपड़ा होता है।<ref>{{cite news |title=दिल-दिमाग की बीमारी से बचा सकती है जुराब, मगर इस बात का रखें ध्यान, रुक जाएगा ब्लड सर्कुलेशन |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/lifestyle/health/what-happens-if-you-sleep-with-socks-on-know-benefits-and-side-effects/articleshow/106548952.cms |accessdate=20 अगस्त 2024 |work=नवभारत टाइस्म |language=hi}}</ref> यह अक्सर [[टखना|टखने]] या उससे ऊपर कुछ हिस्से को ढकता है। कुछ प्रकार के [[जूता|जूते]] या बूट आमतौर पर जुराब के ऊपर पहने जाते हैं।
जुराब का मुख्यता: पसीने को सोखने का काम है। ठंडे वातावरण में, कपास या [[ऊन]] से बने जुराबें ठंडे पैरों को गर्म रखने में मदद करते हैं। गर्मियों के महीनों में पैरों को ठंडा रखने के लिए पतले जुराबें सबसे ज़्यादा पहने जाते हैं।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:जूते-मोज़े]]
[[श्रेणी:अंतर्वस्त्र]]
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[[File:Cloth diaper3.jpg|right|thumb|विभिन्न प्रकार के बाहरी डायपर]]
[[File:Diapers on a shelf.jpg|thumb|शेल्फ पर डायपर]]
'''डायपर''' एक प्रकार का अंतवस्त्र है जो पहनने वाले को शौचालय का उपयोग किए बिना [[अपमूत्रण|मूत्र]] या [[अपमलन|मल]] त्याग करने की सुविधा प्रदान करता है। यह बाहरी कपड़ों को गंदा होने से बचाने के लिए अपशिष्ट उत्पादों को अवशोषित या रोककर रखता है। जब डायपर गीले या गंदे हो जाते हैं, तो उन्हें बदलने की ज़रूरत होती है। आम तौर पर माता-पिता या देखभाल करने वाले अन्य व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से डायपर न बदलने से डायपर से ढके हुए क्षेत्र के आसपास त्वचा संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
[[File:Unangenehme Vaterpflichten.JPG|thumb|left|एड्रियान ब्रोवर द्वारा ''अनप्लीज़ेंट ड्यूटीज़'' (1631), डायपर बदलने का चित्रण]]
==इतिहास==
===शब्द व्युत्पत्ति===
{{Quote box|width=30%|align=right|quote="''एक और ने सुराही उठाई, तीसरे ने डायपर पहना''"|source=—इस शब्द का सबसे पहला ज्ञात प्रयोग [[विलियम शेक्सपियर|शेक्सपियर]] की ''द टैमिंग ऑफ द श्रू'' में हुआ है।<ref name=Shakespeare>{{cite web |url=http://machaut.uchicago.edu/?action=search&resource=Webster%27s&word=Diaper |title=Diaper |work=Webster's Dictionary |publisher=The University of Chicago Department of Romance Languages and Literature |access-date=2 April 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130525222029/http://machaut.uchicago.edu/?action=search&resource=Webster%27s&word=Diaper |archive-date=May 25, 2013 |url-status=dead |df=mdy-all }}</ref>}}
मध्यकालीन अंग्रेजी शब्द डायपर मूल रूप से कपड़े के प्रकार को संदर्भित करता था न कि उसके उपयोग को; "डायपर" शब्द दोहराए गए समचतुर्भुज आकार के पैटर्न के लिए प्रयोग किया जाता था, और बाद में इस पैटर्न वाले सफेद सूती या लिनन कपड़े को वर्णित करने के लिए प्रयोग किया जाने लगा।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार, यह मुलायम कपड़े या अन्य मोटे पदार्थ का टुकड़ा होता है जिसे बच्चे के नितंबों के चारों ओर और उसके पैरों के बीच में मोड़कर उसके शरीर के मल को सोखने और रोकने के लिए रखा जाता है।<ref>{{cite web |title=diaper noun - Definition, pictures, pronunciation and usage notes {{!}} Oxford Advanced Learner's Dictionary at OxfordLearnersDictionaries.com |url=https://www.oxfordlearnersdictionaries.com/definition/english/diaper?q=diaper |website=www.oxfordlearnersdictionaries.com |accessdate=26 जनवरी 2025 |language=en}}</ref>
===विकास===
19वीं सदी में, आधुनिक डायपर ने आकार लेना शुरू कर दिया और दुनिया के कई हिस्सों में माताएँ सूती कपड़े का इस्तेमाल करने लगीं, जिसे एक बन्धन के साथ जगह पर रखा जाता था - अंततः सेफ्टी पिन। संयुक्त राज्य अमेरिका में कपड़े के डायपर का पहली बार 1887 में मारिया एलन द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन किया गया था।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Authority control}}
[[श्रेणी:अंतर्वस्त्र]]
[[श्रेणी:पर्यावरणीय वादानुवाद]]
[[श्रेणी:स्वास्थ्यता]]
g16jdj23yk7lw4r0u4em5padbiuyyac
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2026-04-17T03:23:35Z
अनिरुद्ध कुमार
18906
टैग {{[[साँचा:सफाई|सफाई]]}} लेख में जोड़ा जा रहा ([[वि:ट्विंकल|ट्विंकल]])
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text/x-wiki
{{सफाई|reason=खराब मशीनी अनुवाद|date=अप्रैल 2026}}
[[File:Cloth diaper3.jpg|right|thumb|विभिन्न प्रकार के बाहरी डायपर]]
[[File:Diapers on a shelf.jpg|thumb|शेल्फ पर डायपर]]
'''डायपर''' एक प्रकार का अंतवस्त्र है जो पहनने वाले को शौचालय का उपयोग किए बिना [[अपमूत्रण|मूत्र]] या [[अपमलन|मल]] त्याग करने की सुविधा प्रदान करता है। यह बाहरी कपड़ों को गंदा होने से बचाने के लिए अपशिष्ट उत्पादों को अवशोषित या रोककर रखता है। जब डायपर गीले या गंदे हो जाते हैं, तो उन्हें बदलने की ज़रूरत होती है। आम तौर पर माता-पिता या देखभाल करने वाले अन्य व्यक्ति द्वारा नियमित रूप से डायपर न बदलने से डायपर से ढके हुए क्षेत्र के आसपास त्वचा संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
[[File:Unangenehme Vaterpflichten.JPG|thumb|left|एड्रियान ब्रोवर द्वारा ''अनप्लीज़ेंट ड्यूटीज़'' (1631), डायपर बदलने का चित्रण]]
==इतिहास==
===शब्द व्युत्पत्ति===
{{Quote box|width=30%|align=right|quote="''एक और ने सुराही उठाई, तीसरे ने डायपर पहना''"|source=—इस शब्द का सबसे पहला ज्ञात प्रयोग [[विलियम शेक्सपियर|शेक्सपियर]] की ''द टैमिंग ऑफ द श्रू'' में हुआ है।<ref name=Shakespeare>{{cite web |url=http://machaut.uchicago.edu/?action=search&resource=Webster%27s&word=Diaper |title=Diaper |work=Webster's Dictionary |publisher=The University of Chicago Department of Romance Languages and Literature |access-date=2 April 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20130525222029/http://machaut.uchicago.edu/?action=search&resource=Webster%27s&word=Diaper |archive-date=May 25, 2013 |url-status=dead |df=mdy-all }}</ref>}}
मध्यकालीन अंग्रेजी शब्द डायपर मूल रूप से कपड़े के प्रकार को संदर्भित करता था न कि उसके उपयोग को; "डायपर" शब्द दोहराए गए समचतुर्भुज आकार के पैटर्न के लिए प्रयोग किया जाता था, और बाद में इस पैटर्न वाले सफेद सूती या लिनन कपड़े को वर्णित करने के लिए प्रयोग किया जाने लगा।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार, यह मुलायम कपड़े या अन्य मोटे पदार्थ का टुकड़ा होता है जिसे बच्चे के नितंबों के चारों ओर और उसके पैरों के बीच में मोड़कर उसके शरीर के मल को सोखने और रोकने के लिए रखा जाता है।<ref>{{cite web |title=diaper noun - Definition, pictures, pronunciation and usage notes {{!}} Oxford Advanced Learner's Dictionary at OxfordLearnersDictionaries.com |url=https://www.oxfordlearnersdictionaries.com/definition/english/diaper?q=diaper |website=www.oxfordlearnersdictionaries.com |accessdate=26 जनवरी 2025 |language=en}}</ref>
===विकास===
19वीं सदी में, आधुनिक डायपर ने आकार लेना शुरू कर दिया और दुनिया के कई हिस्सों में माताएँ सूती कपड़े का इस्तेमाल करने लगीं, जिसे एक बन्धन के साथ जगह पर रखा जाता था - अंततः सेफ्टी पिन। संयुक्त राज्य अमेरिका में कपड़े के डायपर का पहली बार 1887 में मारिया एलन द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन किया गया था।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Authority control}}
[[श्रेणी:अंतर्वस्त्र]]
[[श्रेणी:पर्यावरणीय वादानुवाद]]
[[श्रेणी:स्वास्थ्यता]]
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अंतर्वस्त्र
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अनिरुद्ध कुमार
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'''अंतर्वस्त्र''', जिन्हें '''अंडरगारमेंट्स''' या '''अंडरवस्त्र''' भी कहा जाता है, वो [[कपड़े]] होते हैं जो बाहरी वस्त्रों के नीचे पहने जाते हैं और आम तौर पर सीधे शरीर के संपर्क में होते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बाहरी वस्त्रों को शारीरिक उत्सर्जन से बचाना, शरीर और बाहरी वस्त्रों के बीच घर्षण को कम करना, शरीर का आकार सही करना और कुछ अंगों को सहारा या छिपाना है। ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए लंबे अंतर्वस्त्र पहनने जाते हैं। कुछ धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों के अनुसार विशेष अंतर्वस्त्र पहने जाते हैं।
[[चित्र:Boxer_002.jpg|अंगूठाकार|बॉक्सर्स शॉर्ट्स और बॉक्सर्स ब्रीफ्स]]
[[चित्र:Knickers1.jpg|अंगूठाकार|पैंटी या निकर्स]]
कुछ वस्त्र खासतौर से अंतर्वस्त्र के रूप में डिज़ाइन किए जाते हैं, जबकि कुछ, जैसे टी-शर्ट्स और शॉर्ट्स, दोनों अंतर्वस्त्र और बाहरी वस्त्र के रूप में पहने जा सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री से बने कुछ अंतर्वस्त्र रात के वस्त्र ([[रात्रिवस्त्र]]) या स्विमवियर के रूप में भी पहने जाते हैं। इसके अलावा, कई अंतर्वस्त्र केवल आकर्षण के लिए होते हैं, यानी ये दृश्यात्मक प्रभाव और [[आत्मविश्वास]] बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं।<ref>{{cite book|title=ड्राई सूट डाइविंग|url=https://archive.org/details/drysuitdivinggui0000bars|last1=Barsky|first1=Steven|last2=Long|first2=Dick|last3=Stinton|first3=Bob|publisher=हैमरहेड प्रेस|year=1999|isbn=978-0-9674305-0-8|edition=3rd|location=सांता बारबरा, कैलिफोर्निया}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thestandard.com.hk/news_print.asp?art_id=69373|title=सूक्ष्मजीव युद्ध|last=Voelkel|first=Megan|date=31 जुलाई 2000|newspaper=The Standard|access-date=31 जनवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20090723002652/http://www.thestandard.com.hk/news_print.asp?art_id=69373|archive-date=23 जुलाई 2009|url-status=dead}}</ref>
अंतर्वस्त्र दो मुख्य श्रेणियों में होते हैं:
एक वो जो [[मानव शरीर|शरीर]] के ऊपरी हिस्से यानी धड़ को ढकते हैं, और दूसरे वो जो [[कमर]] और [[पैर|पैरों]] को ढकते हैं। कुछ अंतर्वस्त्र दोनों हिस्सों को कवर करते हैं। महिलाओं के प्रमुख अंतर्वस्त्रों में ब्रा और पैंटी शामिल हैं, जबकि पुरुषों के अंतर्वस्त्रों में बॉक्सर्स, बॉक्सर्स शॉर्ट्स और ब्रीफ्स आम तौर पर पहने जाते हैं। इसके अलावा, कुछ कपड़े दोनों लिंगों के लिए उपयुक्त होते हैं, जैसे कि टी-शर्ट्स, बिना आस्तीन वाली शर्ट्स (जिन्हें सिंगलेट्स, टैंक टॉप्स, ए-शर्ट्स या वेस्ट कहा जाता है), बिकिनी ब्रीफ्स, थोंग्स, जी-स्ट्रिंग्स और टी-फ्रंट्स।
अंतर्वस्त्र सिर्फ आराम और कार्यात्मक उद्देश्य के लिए नहीं पहने जाते, बल्कि यह फैशन, स्वच्छता और आत्मविश्वास का भी हिस्सा होते हैं। यह हमारे व्यक्तिगत व्यक्तित्व, आंतरिक और बाहरी दृष्टिकोण का भी एक हिस्सा होते हैं। इनका चुनाव कभी-कभी हमारी भावनाओं और जरूरतों के अनुसार किया जाता है, और कभी-कभी यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।<ref>{{cite news|url=https://www.bbc.com/news/uk-england-manchester-19385100|title=एलबिस प्रेस्ली के अंतर्वस्त्र नीलामी में £10,000 तक जा सकते हैं|date=26 अगस्त 2012|newspaper=[[BBC]]|access-date=1 नवम्बर 2018}}</ref><ref name="Battersby">{{cite news|url=https://www.independent.co.uk/news/people/news/briefs-reprieve-elvis-presleys-dirty-underpants-fail-to-sell-at-auction-8121734.html|title=ब्रीफ्स की छूट: एलबिस प्रेस्ली के गंदे अंतर्वस्त्र नीलामी में नहीं बिके|last=बैटरसबाई|first=मैटिल्डा|date=10 सितम्बर 2012|newspaper=द इंडिपेंडेंट}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.huffpost.com/entry/elvis-dirty-underwear-up_n_1832904|title=एलबिस प्रेस्ली के गंदे अंतर्वस्त्र नीलामी में $16,000 तक जा सकते हैं|last=डिकर|first=रॉन|date=27 अगस्त 2012|newspaper=हफपोस्ट}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[रात्रिवस्त्र]]
* [[वेशभूषा]]
==संदर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:वस्त्र]]
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अनिरुद्ध कुमार
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'''अंतर्वस्त्र''', जिन्हें '''अंडरगारमेंट्स''' या '''अंडरवस्त्र''' भी कहा जाता है, वो [[कपड़े]] होते हैं जो बाहरी वस्त्रों के नीचे पहने जाते हैं और आम तौर पर सीधे शरीर के संपर्क में होते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बाहरी वस्त्रों को शारीरिक उत्सर्जन से बचाना, शरीर और बाहरी वस्त्रों के बीच घर्षण को कम करना, शरीर का आकार सही करना और कुछ अंगों को सहारा या छिपाना है। ठंडे मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए लंबे अंतर्वस्त्र पहनने जाते हैं। कुछ धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों के अनुसार विशेष अंतर्वस्त्र पहने जाते हैं।
[[चित्र:Boxer_002.jpg|अंगूठाकार|बॉक्सर्स शॉर्ट्स और बॉक्सर्स ब्रीफ्स]]
[[चित्र:Knickers1.jpg|अंगूठाकार|पैंटी या निकर्स]]
कुछ वस्त्र खासतौर से अंतर्वस्त्र के रूप में डिज़ाइन किए जाते हैं, जबकि कुछ, जैसे टी-शर्ट्स और शॉर्ट्स, दोनों अंतर्वस्त्र और बाहरी वस्त्र के रूप में पहने जा सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री से बने कुछ अंतर्वस्त्र रात के वस्त्र ([[रात्रिवस्त्र]]) या स्विमवियर के रूप में भी पहने जाते हैं। इसके अलावा, कई अंतर्वस्त्र केवल आकर्षण के लिए होते हैं, यानी ये दृश्यात्मक प्रभाव और [[आत्मविश्वास]] बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं।<ref>{{cite book|title=ड्राई सूट डाइविंग|url=https://archive.org/details/drysuitdivinggui0000bars|last1=Barsky|first1=Steven|last2=Long|first2=Dick|last3=Stinton|first3=Bob|publisher=हैमरहेड प्रेस|year=1999|isbn=978-0-9674305-0-8|edition=3rd|location=सांता बारबरा, कैलिफोर्निया}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.thestandard.com.hk/news_print.asp?art_id=69373|title=सूक्ष्मजीव युद्ध|last=Voelkel|first=Megan|date=31 जुलाई 2000|newspaper=The Standard|access-date=31 जनवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20090723002652/http://www.thestandard.com.hk/news_print.asp?art_id=69373|archive-date=23 जुलाई 2009|url-status=dead}}</ref>
अंतर्वस्त्र दो मुख्य श्रेणियों में होते हैं:
एक वो जो [[मानव शरीर|शरीर]] के ऊपरी हिस्से यानी धड़ को ढकते हैं, और दूसरे वो जो [[कमर]] और [[पैर|पैरों]] को ढकते हैं। कुछ अंतर्वस्त्र दोनों हिस्सों को कवर करते हैं। महिलाओं के प्रमुख अंतर्वस्त्रों में ब्रा और पैंटी शामिल हैं, जबकि पुरुषों के अंतर्वस्त्रों में बॉक्सर्स, बॉक्सर्स शॉर्ट्स और ब्रीफ्स आम तौर पर पहने जाते हैं। इसके अलावा, कुछ कपड़े दोनों लिंगों के लिए उपयुक्त होते हैं, जैसे कि टी-शर्ट्स, बिना आस्तीन वाली शर्ट्स (जिन्हें सिंगलेट्स, टैंक टॉप्स, ए-शर्ट्स या वेस्ट कहा जाता है), बिकिनी ब्रीफ्स, थोंग्स, जी-स्ट्रिंग्स और टी-फ्रंट्स।
अंतर्वस्त्र सिर्फ आराम और कार्यात्मक उद्देश्य के लिए नहीं पहने जाते, बल्कि यह फैशन, स्वच्छता और आत्मविश्वास का भी हिस्सा होते हैं। यह हमारे व्यक्तिगत व्यक्तित्व, आंतरिक और बाहरी दृष्टिकोण का भी एक हिस्सा होते हैं। इनका चुनाव कभी-कभी हमारी भावनाओं और जरूरतों के अनुसार किया जाता है, और कभी-कभी यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।<ref>{{cite news|url=https://www.bbc.com/news/uk-england-manchester-19385100|title=एलबिस प्रेस्ली के अंतर्वस्त्र नीलामी में £10,000 तक जा सकते हैं|date=26 अगस्त 2012|newspaper=[[BBC]]|access-date=1 नवम्बर 2018}}</ref><ref name="Battersby">{{cite news|url=https://www.independent.co.uk/news/people/news/briefs-reprieve-elvis-presleys-dirty-underpants-fail-to-sell-at-auction-8121734.html|title=ब्रीफ्स की छूट: एलबिस प्रेस्ली के गंदे अंतर्वस्त्र नीलामी में नहीं बिके|last=बैटरसबाई|first=मैटिल्डा|date=10 सितम्बर 2012|newspaper=द इंडिपेंडेंट}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.huffpost.com/entry/elvis-dirty-underwear-up_n_1832904|title=एलबिस प्रेस्ली के गंदे अंतर्वस्त्र नीलामी में $16,000 तक जा सकते हैं|last=डिकर|first=रॉन|date=27 अगस्त 2012|newspaper=हफपोस्ट}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[रात्रिवस्त्र]]
* [[वेशभूषा]]
==संदर्भ==
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[[श्रेणी:वस्त्र]]
[[श्रेणी:अंतर्वस्त्र]]
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वार्ता:2012 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन
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2026-04-16T18:52:57Z
AMAN KUMAR
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/* स्थानान्तरण अनुरोध 11 फ़रवरी 2025 */ उत्तर
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== स्थानान्तरण अनुरोध 11 फ़रवरी 2025 ==
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अनिरुद्ध कुमार
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सूचना: [[:पांचिरा]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
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इस मापदंड के अंतर्गत वे लेख आते हैं जो किसी अन्य भाषा के लेख का अत्यधिक खराब मशीनी अनुवाद हैं जिन्हें सुधारने की तुलना में दुबारा शुरू से लिखना अधिक उचित होगा।
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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== Last Few Days: WikiConference India 2026 Scholarship Applications ==
<div lang="en" dir="ltr" class="mw-content-ltr">
''{{int:please-translate}}''
Dear Wikimedian,
We're happy to share that scholarship applications for '''WikiConference India 2026''' are currently open and the deadline is just around the corner.
[[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026|WikiConference India 2026]] is the fourth edition of the national-level conference that brings together Wikimedians and stakeholders engaged in Indic-language Wikimedia projects and the broader open knowledge movement across India and South Asia. The conference will take place in Kochi, Kerala, from 4–6 September 2026.
* You can find the more information and the application form at the [[m:Special:MyLanguage/WikiConference India 2026/Scholarship|Scholarship page here at Meta wiki]]
* '''Scholarship deadline: 15 April 2026, 11:59 PM IST'''
With only a few days left, we warmly encourage you to apply if you haven’t already and kindly request you to share this with your community and encourage others to apply.
For more information and regular updates, we encourage you to visit the conference Meta page.
Warm regards,
<br>
on behalf of the WikiConference India 2026 Organising Team
''This message was sent with [[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) on 18:30, 11 अप्रैल 2026 (UTC)''
</div>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=Global_message_delivery/Targets/WCI_2026_active_users&oldid=30389801 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:Gnoeee@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
{{subst:db-csd-deleted-custom|1=पांचिरा|2=badtrans}} [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 05:00, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण केंद्र
0
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6404463
2026-04-17T03:05:21Z
अनिरुद्ध कुमार
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[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:प्रसारण]] जोड़ी
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text/x-wiki
[[File:IBC-MUNICH-Satfarm.JPG|thumb|2006 फीफा विश्व कप के दौरान म्यूनिख में आईबीसी में सैटेलाइट डिश फार्म]]
'''अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण केंद्र''' ('''IBC''') प्रमुख खेल आयोजनों के दौरान प्रसारकों के लिए एक अस्थायी केंद्र है। इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रेस केंद्र (IPC) या मुख्य प्रेस केंद्र (MPC) के नाम से भी जाना जाता है।
==फीफा विश्व कप==
===आईबीसी/एमपीसी मेजबान शहर===
[[File:IBC 2010.jpg|thumb|right|[[२०१० फीफा विश्व कप|2010 फीफा विश्व कप]] में आईबीसी का प्रवेश।]]
{{Div col}}
*1958: {{fb|SWE}} – [[गोथनबर्ग]]
*1962: {{fb|CHI}} – [[सेंटियागो]]
*[[1966 फीफा विश्व कप|1966]]: {{fb|ENG}} – [[लंदन]]
*[[1970 फीफा विश्व कप|1970]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1974 फीफा विश्व कप|1974]]: {{fb|FRG}} – [[म्यूनिख]]
*[[1978 फीफा विश्व कप|1978]]: {{fb|ARG}} – [[ब्यूनस आयर्स]]
*[[1982 फीफा विश्व कप|1982]]: {{fb|ESP}} – [[मैड्रिड]]
*[[1986 फीफा विश्व कप|1986]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1990 फीफा विश्व कप|1990]]: {{fb|ITA}} – [[रोम]]
*[[1994 फीफा विश्व कप|1994]]: {{fb|USA}} - [[डलास]] और [[लॉस एंजिल्स]]
*[[1998 फीफा विश्व कप|1998]]: {{fb|FRA}} - [[पेरिस]]
*[[2002 फीफा विश्व कप|2002]]:
** {{KOR}} - [[सियोल]]
** {{fb|JPN}} – [[योकोहामा]]
*[[2006 फीफा विश्व कप|2006]]: {{fb|GER}} - [[म्यूनिख]]
*[[२०१० फीफा विश्व कप|2010]]: {{RSA}} - [[जोहान्सबर्ग]]
*[[2014 फीफा विश्व कप|2014]]: {{fb|BRA}} - [[रियो डी जनेरियो]]<ref>{{cite news|url=https://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20110531042655/http://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|url-status=dead|archive-date=May 31, 2011|title=International Broadcast Centre to be hosted in Rio de Janeiro|date=2011-05-27|accessdate=2011-05-27|publisher=FIFA.com}}</ref>
*[[2018 फीफा विश्व कप|2018]]: {{fb|RUS}} - [[मॉस्को]]
*[[२०२२ फीफा विश्व कप|2022]]: {{fb|QAT}} - [[दोहा]]
*[[2026 फीफा विश्व कप|2026]]:
** {{USA}} – [[डलास]]
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[[श्रेणी:प्रसारण]]
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अनिरुद्ध कुमार
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[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:संचार प्राधिकरण]] जोड़ी
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text/x-wiki
[[File:IBC-MUNICH-Satfarm.JPG|thumb|2006 फीफा विश्व कप के दौरान म्यूनिख में आईबीसी में सैटेलाइट डिश फार्म]]
'''अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण केंद्र''' ('''IBC''') प्रमुख खेल आयोजनों के दौरान प्रसारकों के लिए एक अस्थायी केंद्र है। इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रेस केंद्र (IPC) या मुख्य प्रेस केंद्र (MPC) के नाम से भी जाना जाता है।
==फीफा विश्व कप==
===आईबीसी/एमपीसी मेजबान शहर===
[[File:IBC 2010.jpg|thumb|right|[[२०१० फीफा विश्व कप|2010 फीफा विश्व कप]] में आईबीसी का प्रवेश।]]
{{Div col}}
*1958: {{fb|SWE}} – [[गोथनबर्ग]]
*1962: {{fb|CHI}} – [[सेंटियागो]]
*[[1966 फीफा विश्व कप|1966]]: {{fb|ENG}} – [[लंदन]]
*[[1970 फीफा विश्व कप|1970]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1974 फीफा विश्व कप|1974]]: {{fb|FRG}} – [[म्यूनिख]]
*[[1978 फीफा विश्व कप|1978]]: {{fb|ARG}} – [[ब्यूनस आयर्स]]
*[[1982 फीफा विश्व कप|1982]]: {{fb|ESP}} – [[मैड्रिड]]
*[[1986 फीफा विश्व कप|1986]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1990 फीफा विश्व कप|1990]]: {{fb|ITA}} – [[रोम]]
*[[1994 फीफा विश्व कप|1994]]: {{fb|USA}} - [[डलास]] और [[लॉस एंजिल्स]]
*[[1998 फीफा विश्व कप|1998]]: {{fb|FRA}} - [[पेरिस]]
*[[2002 फीफा विश्व कप|2002]]:
** {{KOR}} - [[सियोल]]
** {{fb|JPN}} – [[योकोहामा]]
*[[2006 फीफा विश्व कप|2006]]: {{fb|GER}} - [[म्यूनिख]]
*[[२०१० फीफा विश्व कप|2010]]: {{RSA}} - [[जोहान्सबर्ग]]
*[[2014 फीफा विश्व कप|2014]]: {{fb|BRA}} - [[रियो डी जनेरियो]]<ref>{{cite news|url=https://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20110531042655/http://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|url-status=dead|archive-date=May 31, 2011|title=International Broadcast Centre to be hosted in Rio de Janeiro|date=2011-05-27|accessdate=2011-05-27|publisher=FIFA.com}}</ref>
*[[2018 फीफा विश्व कप|2018]]: {{fb|RUS}} - [[मॉस्को]]
*[[२०२२ फीफा विश्व कप|2022]]: {{fb|QAT}} - [[दोहा]]
*[[2026 फीफा विश्व कप|2026]]:
** {{USA}} – [[डलास]]
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[[श्रेणी:प्रसारण]]
[[श्रेणी:संचार प्राधिकरण]]
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अनिरुद्ध कुमार
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[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:अंतर्राष्ट्रीय संगठन]] जोड़ी
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text/x-wiki
[[File:IBC-MUNICH-Satfarm.JPG|thumb|2006 फीफा विश्व कप के दौरान म्यूनिख में आईबीसी में सैटेलाइट डिश फार्म]]
'''अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण केंद्र''' ('''IBC''') प्रमुख खेल आयोजनों के दौरान प्रसारकों के लिए एक अस्थायी केंद्र है। इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रेस केंद्र (IPC) या मुख्य प्रेस केंद्र (MPC) के नाम से भी जाना जाता है।
==फीफा विश्व कप==
===आईबीसी/एमपीसी मेजबान शहर===
[[File:IBC 2010.jpg|thumb|right|[[२०१० फीफा विश्व कप|2010 फीफा विश्व कप]] में आईबीसी का प्रवेश।]]
{{Div col}}
*1958: {{fb|SWE}} – [[गोथनबर्ग]]
*1962: {{fb|CHI}} – [[सेंटियागो]]
*[[1966 फीफा विश्व कप|1966]]: {{fb|ENG}} – [[लंदन]]
*[[1970 फीफा विश्व कप|1970]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1974 फीफा विश्व कप|1974]]: {{fb|FRG}} – [[म्यूनिख]]
*[[1978 फीफा विश्व कप|1978]]: {{fb|ARG}} – [[ब्यूनस आयर्स]]
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*[[1986 फीफा विश्व कप|1986]]: {{fb|MEX}} – [[मेक्सिको सिटी]]
*[[1990 फीफा विश्व कप|1990]]: {{fb|ITA}} – [[रोम]]
*[[1994 फीफा विश्व कप|1994]]: {{fb|USA}} - [[डलास]] और [[लॉस एंजिल्स]]
*[[1998 फीफा विश्व कप|1998]]: {{fb|FRA}} - [[पेरिस]]
*[[2002 फीफा विश्व कप|2002]]:
** {{KOR}} - [[सियोल]]
** {{fb|JPN}} – [[योकोहामा]]
*[[2006 फीफा विश्व कप|2006]]: {{fb|GER}} - [[म्यूनिख]]
*[[२०१० फीफा विश्व कप|2010]]: {{RSA}} - [[जोहान्सबर्ग]]
*[[2014 फीफा विश्व कप|2014]]: {{fb|BRA}} - [[रियो डी जनेरियो]]<ref>{{cite news|url=https://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20110531042655/http://www.fifa.com/worldcup/media/newsid=1442394/index.html|url-status=dead|archive-date=May 31, 2011|title=International Broadcast Centre to be hosted in Rio de Janeiro|date=2011-05-27|accessdate=2011-05-27|publisher=FIFA.com}}</ref>
*[[2018 फीफा विश्व कप|2018]]: {{fb|RUS}} - [[मॉस्को]]
*[[२०२२ फीफा विश्व कप|2022]]: {{fb|QAT}} - [[दोहा]]
*[[2026 फीफा विश्व कप|2026]]:
** {{USA}} – [[डलास]]
{{Div col end}}
[[श्रेणी:प्रसारण]]
[[श्रेणी:संचार प्राधिकरण]]
[[श्रेणी:अंतर्राष्ट्रीय संगठन]]
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एलेना आंद्रेचेवा
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=एलेना आंद्रेचेवा|birth_place=[[यूक्रेन]]|education=[[इंपीरियल कॉलेज लंदन]]|occupation=फ़िल्म निर्माता|awards=[[अकेडमी पुरस्कार]]: सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री (शॉर्ट सब्जेक्ट)|image=|caption=एलेना आंद्रेचेवा (बाएं) और कैरल डाइसिंजर "लर्निंग टू स्केटबोर्ड इन ए वारज़ोन" के लिए सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र के ऑस्कर पुरस्कार के साथ (2020)}}
'''एलेना आंद्रेचेवा''' यूक्रेन में जन्मी फ़िल्म निर्माता हैं। वह 11 वर्ष की उम्र में [[यूनाइटेड किंगडम]] चली गईं और बाद में [[इंपीरियल कॉलेज लंदन]] से भौतिकी में स्नातक (बैचलर ऑफ साइंस) और फिर विज्ञान संचार (साइंस कम्युनिकेशन) में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 2006 से टीवी फिल्म निर्माण में काम करना शुरू किया।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.athens-science-festival.gr/en/news_en/elena-andreicheva-science-communication-via-documentaries/|title=Elena Andreicheva {{!}} Science Communication via Documentaries|website=Athens Science Festival|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20220226231013/https://www.athens-science-festival.gr/en/news_en/elena-andreicheva-science-communication-via-documentaries/|archive-date=2022-02-26|access-date=2022-02-26}}</ref>
== जीवनी ==
आंद्रेचेवा 2019 की डॉक्युमेंट्री फ़िल्म ''लर्निंग टू स्केटबोर्ड इन ए वारज़ोन (इफ यू आर ए गर्ल)'' की निर्माता हैं, जिसके लिए उन्होंने और कैरल डाइसिंजर ने 92वें [[अकेडमी पुरस्कार]] में सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट का पुरस्कार जीता। उनकी ऑस्कर पुरस्कार समारोह की ड्रेस पर्यावरण अनुकूल बनाई गई थी, जिसे उन्होंने असमानता और अन्याय जैसे मुद्दों पर अपने काम से जोड़ा।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.latimes.com/lifestyle/story/2020-02-09/oscars-2020-red-carpet-green-dress|title=Oscars 2020: Stars step out in sustainable looks by Louis Vuitton and Laura Basci|last=Schmidt|first=Ingrid|date=2020-02-10|website=Los Angeles Times|language=en-US|archive-url=https://web.archive.org/web/20200210065434/https://www.latimes.com/lifestyle/story/2020-02-09/oscars-2020-red-carpet-green-dress|archive-date=2020-02-10|access-date=2020-02-10}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://oscar.go.com/news/2020/learning-to-skateboard-in-a-warzone-if-you-re-a-girl-is-the-2020-oscar-winner-for-documentary-short-subject|title=Learning to Skateboard in a Warzone (If You're a Girl) is the 2020 Oscar Winner for Documentary (Short Subject)|last=Chianne|first=Breanna|date=2020-02-09|website=oscar.go.com|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20200217145704/https://oscar.go.com/news/2020/learning-to-skateboard-in-a-warzone-if-you-re-a-girl-is-the-2020-oscar-winner-for-documentary-short-subject|archive-date=February 17, 2020|access-date=2020-02-10}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporter.com/news/joaquin-phoenix-kaitlyn-dever-wear-eco-friendly-outfits-oscars-1277797|title=Joaquin Phoenix, Kaitlyn Dever Wear Eco-Friendly Outfits to Oscars|last=Weinberg|first=Lindsay|date=2020-02-09|website=The Hollywood Reporter|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20200210113629/https://www.hollywoodreporter.com/news/joaquin-phoenix-kaitlyn-dever-wear-eco-friendly-outfits-oscars-1277797|archive-date=February 10, 2020|access-date=2020-02-10}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://deadline.com/2020/02/2020-oscars-winners-list-92-academy-awards-1202855067/|title=Oscars: 'Parasite' Wins Best Picture – The Complete Winners List|last=Pedersen|first=Erik|date=2020-02-10|website=Deadline|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20250321162448/https://deadline.com/2020/02/2020-oscars-winners-list-92-academy-awards-1202855067/|archive-date=2025-03-21|access-date=2020-02-10}}</ref>
वर्ष 2021 में, उन्होंने [[एथेंस]] साइंस फेस्टिवल में यह बताया कि डॉक्युमेंट्री फ़िल्में लोगों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी को समझने में मदद कर सकती है।<ref name=":0" />
उन्होंने रेबेका मार्शल द्वारा निर्देशित डॉक्युमेंट्री ''द फॉरेस्ट इन मी'' (अंग्रेज़ी: ''The Forest in Me)'' में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया। यह फ़िल्म [[साइबेरिया]] में फिल्माई गई थी और इसमें 70 वर्षीय अगाफिया लिकोवा को दर्शाया गया था, जो स्टालिन युग से लगभग एकांत जीवन जी रही हैं और सबसे नज़दीकी व्यक्ति से दो सप्ताह की दूरी पर रहती हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.theguardian.com/world/2015/nov/12/russia-recluse-siberia-stalin-agafia-lykova-documentary|title=Stalin, Siberia and salt: Russian recluse's life story made into film|last=Headlines|first=Nick Holdsworth for Russia Beyond the|date=2015-11-12|website=the Guardian|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20221122132804/https://www.theguardian.com/world/2015/nov/12/russia-recluse-siberia-stalin-agafia-lykova-documentary|archive-date=2022-11-22|access-date=2022-02-26}}</ref>
एलेना ने निक रोसेन की किताब हाउ टू लिव ऑफ-ग्रिड (अंग्रेज़ी: ''How to Live Off-Grid)'' के लिए तथ्य जांच (फ़ैक्ट-चेकिंग) में मदद की।<ref>{{Cite book|url=https://www.worldcat.org/oclc/973328775|title=How to live off-grid : journeys outside the system|last=Rosen|first=Nick|date=2007|isbn=978-1-4464-6388-8|location=London|pages=357|language=en|oclc=973328775}}</ref>ऑस्कर जीतने पर, एलेना आंद्रेचेवा स्वतंत्र यूक्रेन के बाद यूक्रेनी मूल की पहली महिला विजेता बनीं।<ref>{{Cite web|url=https://hromadske.ua/en/posts/ukrainian-born-oscar-winner|title=Ukrainian-Born Oscar Winner on Filmmaking and Life in Ukraine|date=2020-03-09|website=hromadske|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20250511095748/https://hromadske.ua/en/posts/ukrainian-born-oscar-winner|archive-date=2025-05-11|access-date=2025-05-11}}</ref>
== पुरस्कार ==
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!वर्ष
!पुरस्कार
!श्रेणी
!काम
!परिणाम
!संदर्भ
|-
|2019
|आई. डी. ए. डॉक्युमेंट्री पुरस्कार
|सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र
| rowspan="3" |लर्निंग टू स्केटबोर्ड इन ए वारज़ोन
|विजेता
|<ref>{{Cite web|url=https://www.hollywoodreporter.com/lists/2019-ida-documentary-awards-winners-list-full-1258853/short-documentary-4/|title=IDA Documentary Awards: 'For Sama' Wins Best Feature|last=Lewis|first=Hilary|date=7 December 2019|website=The Hollywood Reporter|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20250120105024/https://www.hollywoodreporter.com/lists/2019-ida-documentary-awards-winners-list-full-1258853/short-documentary-4/|archive-date=2025-01-20|access-date=13 March 2022}}</ref>
|-
|2020
|[[ब्रिटिश अकादमी फ़िल्म पुरस्कार|बाफ्टा पुरस्कार]]
|ब्रिटिश लघु फिल्म
|विजेता
|<ref>{{Cite web|url=https://www.vulture.com/2020/02/sam-mendes-1917-win-best-director-best-film-at-2020-baftas.html|title=1917 Is No. 1 at This Year's BAFTA Awards|last=Kiefer|first=Halle|date=2 February 2020|website=Vulture|language=en-us|archive-url=https://web.archive.org/web/20240217202323/https://www.vulture.com/2020/02/sam-mendes-1917-win-best-director-best-film-at-2020-baftas.html|archive-date=2024-02-17|access-date=13 March 2022}}</ref>
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|2020
|[[अकेडमी पुरस्कार]]
|सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र
|विजेता
|<ref name=":1" />
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== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात (जीवित लोग)]]
[[श्रेणी:फ़िल्म निर्माता]]
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एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)
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एक्वा लाइन नोएडा मेट्रो की एक लाइन है, जो उत्तर प्रदेश, भारत में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है। इसमें नोएडा के सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा के डिपो तक 21 मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.businesstoday.in/latest/aqua-line-metro-to-be-inaugurated-by-cm-adityanath-today-here-is-all-you-need-to-know/story/313520.html|title=Noida Aqua Metro Line to be inaugurated by CM Adityanath today; here's all you need to know|website=www.businesstoday.in|access-date=2019-01-25}}</ref>
यह लाइन 25 जनवरी 2019 से चालू हो गई है। इसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/india/uttar-pradesh-cm-yogi-adityanath-to-inaugurate-noida-metros-aqua-line-on-friday-2173831.html|title=Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath to inaugurate Noida Metro's 'Aqua line' on Friday|date=2019-01-24|website=Zee News|language=en|access-date=2019-01-25}}</ref>
==स्टेशन==
29.7 किलोमीटर (18.5 मील) एक्वा लाइन मार्ग पर सभी 21 स्टेशन एलिवेटेड ट्रैक पर हैं।<ref name="noidametrorail.com">{{cite web|title=STATIONS BETWEEN NOIDA-GREATER NOIDA|url=http://noidametrorail.com/?page_id=29|website=noidametrorail.com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160326040441/http://noidametrorail.com/?page_id=29|archivedate=26 March 2016|url-status=dead|df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/noida-metro-projects-still-offtrack/article6262485.ece|title=Noida Metro Projects Still Off-Track|author=Damini Nath|date=|work=The Hindu}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|title=Metro rail link between Noida and Greater Noida to be completed by 2017|author=|date=|work=India TV News|access-date=27 दिसंबर 2024|archive-date=27 दिसंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241227122617/https://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|url-status=dead}}</ref> इस लाइन पर नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के साथ एक इंटरचेंज स्टेशन है।<ref>{{cite web |url=http://www.delhimetrorail.com/Phase-III_documetnt/pdf/61PH-III_DMRC_-Model.pdf |title=Metro Network Phase I, II, III & NCR |publisher=[[Delhi Metro Rail Corporation]] (DMRC) |date=February 2015|accessdate=2015-06-28}}</ref> सभी स्टेशनों पर प्लेटफार्म स्क्रीन दरवाजे लगे हैं।
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|16||'''{{stl|Noida Metro|नॉलेज पार्क 2}}'''||'''Knowledge Park II'''
|-
|17||'''{{stl|Noida Metro|परी चौक}}'''||'''Pari Chowk'''
|-
|18||'''{{stl|Noida Metro|अल्फा 1}}'''||'''ALPHA 1'''
|-
|19||'''{{stl|Noida Metro|डेल्टा 1}}'''||'''DELTA'''
|-
|20||'''{{stl|Noida Metro|जीएनआईडीए कार्यालय}}'''||'''GNIDA Office'''
|-
|21||'''{{stl|Noida Metro|डिपो स्टेशन}}'''||'''Depot Station'''||डिपो स्टेशन||भू-स्तरीय
|-
|}
==यह भी देखें==
*[[दिल्ली मेट्रो]]
**[[दिल्ली मेट्रो स्टेशनों की सूची|स्टेशनों की सूची]] (दिल्ली)
*[[नोएडा मेट्रो]]
**[[नोएडा मेट्रो स्टेशनों की सूची|स्टेशनों की सूची]] (नोएडा)
{{Clear}}
{{Portal bar|India|Trains}}
==संदर्भ==
{{reflist}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Wikivoyage|नोएडा}}
* [http://www.delhimetrorail.com/ Delhi Metro Rail Corporation (Official site)]
* [http://www.delhimetrorail.com/annual_report.aspx/ Delhi Metro Annual Reports]
* [http://delhimetromaps.com/noida-metro-aqua-line-route-map/ ''delhimetromaps.com''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200612084442/http://delhimetromaps.com/noida-metro-aqua-line-route-map/ |date=12 June 2020 }} - Descriptions of Noida Metro Aqua Line Route Map Details]
* [http://www.urbanrail.net ''UrbanRail.Net''] – descriptions of all metro systems in the world, each with a schematic map showing all stations.
{{Noida Metro}}
{{Noida Greater Noida Metro stations|aqua line=yes}}
[[श्रेणी:नोएडा मेट्रो]]
[[श्रेणी:एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)]]
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wikitext
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एक्वा लाइन नोएडा मेट्रो की एक लाइन है, जो उत्तर प्रदेश, भारत में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है। इसमें नोएडा के सेक्टर 51 से ग्रेटर नोएडा के डिपो तक 21 मेट्रो स्टेशन शामिल हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.businesstoday.in/latest/aqua-line-metro-to-be-inaugurated-by-cm-adityanath-today-here-is-all-you-need-to-know/story/313520.html|title=Noida Aqua Metro Line to be inaugurated by CM Adityanath today; here's all you need to know|website=www.businesstoday.in|access-date=2019-01-25}}</ref>
यह लाइन 25 जनवरी 2019 से चालू हो गई है। इसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/india/uttar-pradesh-cm-yogi-adityanath-to-inaugurate-noida-metros-aqua-line-on-friday-2173831.html|title=Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath to inaugurate Noida Metro's 'Aqua line' on Friday|date=2019-01-24|website=Zee News|language=en|access-date=2019-01-25}}</ref>
==स्टेशन==
29.7 किलोमीटर (18.5 मील) एक्वा लाइन मार्ग पर सभी 21 स्टेशन एलिवेटेड ट्रैक पर हैं।<ref name="noidametrorail.com">{{cite web|title=STATIONS BETWEEN NOIDA-GREATER NOIDA|url=http://noidametrorail.com/?page_id=29|website=noidametrorail.com|archiveurl=https://web.archive.org/web/20160326040441/http://noidametrorail.com/?page_id=29|archivedate=26 March 2016|url-status=dead|df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/noida-metro-projects-still-offtrack/article6262485.ece|title=Noida Metro Projects Still Off-Track|author=Damini Nath|date=|work=The Hindu}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|title=Metro rail link between Noida and Greater Noida to be completed by 2017|author=|date=|work=India TV News|access-date=27 दिसंबर 2024|archive-date=27 दिसंबर 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20241227122617/https://www.indiatvnews.com/news/india/metro-rail-link-between-noida-and-greater-noida-to-be-completed--36175.html|url-status=dead}}</ref> इस लाइन पर नोएडा सेक्टर 52 मेट्रो स्टेशन पर दिल्ली मेट्रो के साथ एक इंटरचेंज स्टेशन है।<ref>{{cite web |url=http://www.delhimetrorail.com/Phase-III_documetnt/pdf/61PH-III_DMRC_-Model.pdf |title=Metro Network Phase I, II, III & NCR |publisher=[[Delhi Metro Rail Corporation]] (DMRC) |date=February 2015|accessdate=2015-06-28}}</ref> सभी स्टेशनों पर प्लेटफार्म स्क्रीन दरवाजे लगे हैं।
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! हिन्दी||अंग्रेज़ी
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|13||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 146}}'''||'''Noida Sector 146'''
|-
|14||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 147}}'''||'''Noida Sector 147'''
|-
|15||'''{{stl|Noida Metro|नोएडा सेक्टर 148}}'''||'''Noida Sector 148'''
|-
|16||'''{{stl|Noida Metro|नॉलेज पार्क 2}}'''||'''Knowledge Park II'''
|-
|17||'''{{stl|Noida Metro|परी चौक}}'''||'''Pari Chowk'''
|-
|18||'''{{stl|Noida Metro|अल्फा 1}}'''||'''ALPHA 1'''
|-
|19||'''{{stl|Noida Metro|डेल्टा 1}}'''||'''DELTA'''
|-
|20||'''{{stl|Noida Metro|जीएनआईडीए कार्यालय}}'''||'''GNIDA Office'''
|-
|21||'''{{stl|Noida Metro|डिपो स्टेशन}}'''||'''Depot Station'''||डिपो स्टेशन||भू-स्तरीय
|-
|}
==यह भी देखें==
*[[दिल्ली मेट्रो]]
**[[दिल्ली मेट्रो स्टेशनों की सूची|स्टेशनों की सूची]] (दिल्ली)
*[[नोएडा मेट्रो]]
**[[नोएडा मेट्रो स्टेशनों की सूची|स्टेशनों की सूची]] (नोएडा)
{{Clear}}
{{Portal bar|India|Trains}}
==संदर्भ==
{{reflist}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Wikivoyage|नोएडा}}
* [http://www.delhimetrorail.com/ Delhi Metro Rail Corporation (Official site)]
* [http://www.delhimetrorail.com/annual_report.aspx/ Delhi Metro Annual Reports]
* [http://delhimetromaps.com/noida-metro-aqua-line-route-map/ ''delhimetromaps.com''] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200612084442/http://delhimetromaps.com/noida-metro-aqua-line-route-map/ |date=12 June 2020 }} - Descriptions of Noida Metro Aqua Line Route Map Details]
* [http://www.urbanrail.net ''UrbanRail.Net''] – descriptions of all metro systems in the world, each with a schematic map showing all stations.
{{Noida Metro}}
{{Noida Greater Noida Metro stations|aqua line=yes}}
[[श्रेणी:नोएडा मेट्रो]]
[[श्रेणी:एक्वा लाइन (नोएडा मेट्रो)]]
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वार्ता:अज़रबाइजानी मनात
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AMAN KUMAR
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== स्थानान्तरण अनुरोध 12 अगस्त 2025 ==
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: मेरे अनुसार, अज़रबैजानी मनात [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:15, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय का {{समर्थन}} [[वार्ता:अज़रबाइजान]]
: मेरे अनुसार, अज़रबैजानी मनात [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:15, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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The Sorter
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:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय का {{समर्थन}} [[वार्ता:अज़रबाइजान]]
: मेरे अनुसार, अज़रबैजानी मनात [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 19:15, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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वार्ता:तजाकिस्तान के राष्ट्रपति
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AMAN KUMAR
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== स्थानान्तरण अनुरोध 14 अगस्त 2025 ==
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:{{समर्थन}} देश का सही हिंदी नाम और मुख्य लेख का शीर्षक [[ताजिकिस्तान]] है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:04, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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सदस्य वार्ता:KAVI NEAVARATH
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AMAN KUMAR
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सावधानी बरतें: तटस्थ दृष्टिकोण न रखते हुए संपादन करना [[:समस्तीपुर जिला]] पर.
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text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=KAVI NEAVARATH}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:01, 19 सितंबर 2025 (UTC)
== अप्रैल 2026 ==
[[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] कृपया विकिपीडिया लेखों पर अपनी व्यक्तिगत टिप्पणी अथवा [[विकिपीडिया:मूल शोध नहीं|व्यक्तिगत विश्लेषण]] ना जोड़ें, जैसा कि आपने [[समस्तीपुर जिला]] पर किया। ऐसा करना विकिपीडिया की [[विकिपीडिया:तटस्थ दृष्टिकोण|तटस्थता नीति]] के विरुद्ध है व एक ज्ञानकोश में अपेक्षित औपचारिक भाषा के अनुरूप नहीं है। धन्यवाद।<!-- Template:uw-npov2 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:42, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अष्टवर्ग औषधि
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चाहर धर्मेंद्र
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/* अष्टवर्ग औषधि */ उत्तर
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=== [[:अष्टवर्ग औषधि]] ===
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* '''हटायें''' - नामांकन अनुसार।--[[User:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 20:13, 9 मार्च 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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चाहर धर्मेंद्र
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* '''हटायें''' - नामांकन अनुसार।--[[User:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 20:13, 9 मार्च 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/आदिवासी धरोहर
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चाहर धर्मेंद्र
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/* आदिवासी धरोहर */ उत्तर
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text/x-wiki
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* '''हटायें''' - नामांकन अनुसार। --[[User:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 20:10, 9 मार्च 2026 (UTC)
*:मैं इस मत से सहमत हूँ कि लेख मूल शोध एवं संश्लेषण पर आधारित है तथा पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः यह ज्ञानकोशीय मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:14, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
=== [[:आदिवासी धरोहर]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=जनवरी 2026}}
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मूल शोध एवं संश्लेषण; ज्ञानकोशीय नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:00, 24 जनवरी 2026 (UTC)
* '''हटायें''' - नामांकन अनुसार। --[[User:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:VIKRAM PRATAP7|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 20:10, 9 मार्च 2026 (UTC)
* मैं इस मत से सहमत हूँ कि लेख मूल शोध एवं संश्लेषण पर आधारित है तथा पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः यह ज्ञानकोशीय मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:14, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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=== [[:गीताभाष्य]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
[[वि:नहीं|सूची / डायरेक्टरी नहीं]] --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:06, 24 जनवरी 2026 (UTC)
:मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख मात्र सूची/डायरेक्टरी के रूप में प्रस्तुत है और इसमें पर्याप्त ज्ञानकोशीय सामग्री का अभाव है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:16, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
=== [[:गीताभाष्य]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
[[वि:नहीं|सूची / डायरेक्टरी नहीं]] --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 17:06, 24 जनवरी 2026 (UTC)
* मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख मात्र सूची/डायरेक्टरी के रूप में प्रस्तुत है और इसमें पर्याप्त ज्ञानकोशीय सामग्री का अभाव है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:16, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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सदस्य वार्ता:AnaNodal
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AMAN KUMAR
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सावधानी बरतें: विकिपीडिया का प्रोमोशन अथवा प्रचार के लिए प्रयोग करना [[:रोगान कला]] पर.
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text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|name=AnaNodal}} -- [[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 00:00, 27 जनवरी 2026 (UTC)
== अप्रैल 2026 ==
[[Image:Information_orange.svg|25px|alt=|link=]]कृपया विकिपीडिया पर प्रचार सामग्री न जोड़ें, जैसा की आपने [[:रोगान कला]] पृष्ठ पर किया। यहाँ भावनाओं, उत्पादों या सेवाओं का [[विकिपीडिया:तटस्थ दृष्टिकोण|तटस्थ उल्लेख]] स्वीकार्य है, परन्तु विकिपीडिया [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देने और प्रचार करने का मंच]] नहीं है। धन्यवाद।[[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert2 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert2 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:26, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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कैप्रिन आर्थराइटिस एन्सेफेलाइटिस
0
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2026-04-16T14:48:37Z
AMAN KUMAR
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स्व-प्रकाशित,अप्रमाणित और संदर्भ तथा व्याकरण को सुधारा
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'''कैप्रिन आर्थराइटिस-एन्सेफेलाइटिस (CAE)''' [[बकरी|बकरियों]] में होने वाला एक [[विषाणु|वायरस]] जनित रोग है, जो [[लेंटीवायरस]] के संक्रमण से फैलता है। यह रोग मुख्य रूप से संक्रमित दूध और सांस के जरिए निकलने वाले बलगम या कफ् से फैलता है। यह एक दीर्घकालिक (क्रोनिक) बीमारी है, जो लंबे समय तक जानवर को कमजोर करती रहती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.msdvetmanual.com/generalized-conditions/caprine-arthritis-and-encephalitis/caprine-arthritis-and-encephalitis|title=Caprine Arthritis and Encephalitis - Generalized Conditions|website=MSD Veterinary Manual|language=en|access-date=2026-04-16}}</ref>
भेड़ों में इससे मिलता-जुलता रोग पाया जाता है, जिसे '''मैडी-विसना (Maedi-Visna - MV)''' कहते हैं। इन दोनों रोगों को लेंटीवायरस समूह में रखा गया है क्योंकि इनके वायरस आपस में बहुत मिलते-जुलते होते हैं। मैडी-विसना को '''ओवाइन प्रोग्रेसिव न्यूमोनिया (OPP)''' भी कहा जाता है।
== मैडी-विसना नाम का अर्थ ==
“मैडी-विसना” नाम आइसलैंडिक भाषा से लिया गया है और यह दो तरह के लक्षणों को दर्शाता है:
* '''मैडी''' — सांस लेने में परेशानी, जो [[फेफड़ा|फेफड़ों]] की बीमारी से जुड़ी होती है।
* '''विसना''' — शरीर का कमजोर होना या सिकुड़ना, जो दिमाग और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की झिल्लियों में सूजन के कारण होता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[पशुपालन]]
* [[विषाणुजनित रोग]]
== संदर्भ सूची ==
<references />
[[श्रेणी:पशुरोग]]
[[श्रेणी:विषाणु जनित रोग]]
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/* गाय */ उत्तर
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नमस्ते @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी,
ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद। वर्तमान में “से चीज़” पृष्ठ पर जो सामग्री दिखाई दे रही है, वह अंग्रेज़ी वाक्यांश ("say cheese") से संबंधित है, जबकि यह पृष्ठ मूल रूप से 2018 की भारतीय वृत्तचित्र फ़िल्म के लिए बनाया गया था।
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आपके सुझावों का स्वागत है।
धन्यवाद। — [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 07:19, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
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== श्रेणी नाम परिवर्तन अनुरोध ==
महोदय @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी,
मैं हिन्दी विकिपीडिया पर एक श्रेणी के नाम को स्पष्ट करने के लिए सहायता चाहता हूँ। वर्तमान में "श्रेणी:से चीज़" मौजूद है, जिसे अधिक उपयुक्त रूप से "श्रेणी:से चीज़ (फ़िल्म)" में स्थानांतरित करना आवश्यक है, क्योंकि यह एक फ़िल्म से संबंधित श्रेणी है।
कृपया इस श्रेणी को उचित नाम पर स्थानांतरित करने में सहायता करें। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 08:18, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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::कृपया जाँच कर मार्गदर्शन दें। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 08:38, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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== भारत का संविधान की विकिस्रोत प्रति का उपयोग करें। ==
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:संविधान के मूल पाठ के लिए गूगल बुक के बजाय विकिस्रोत पर उपलब्ध भारत का संविधान का उपयोग करें जैसा कि [[अनुच्छेद 82 (भारत का संविधान)]] लेख में किया गया है। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 10:35, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
== लेख सुधार बनाम हटाने पर दृष्टिकोण ==
नमस्कार। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] मेरा मानना है कि [[विकिपीडिया]] पर हमारा उद्देश्य केवल लेखों पर हटाने के टैग लगाना नहीं, बल्कि उनमें सुधार करना और उन्हें बेहतर बनाने में सहयोग करना भी होना चाहिए।
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इसलिए ऐसे मामलों में मैं समर्थन नहीं कर सकता। बेहतर होगा कि हम लेखों को सुधारने, विश्वसनीय स्रोत जोड़ने और रचनात्मक योगदान देने पर ध्यान [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 08:36, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
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@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, @[[सदस्य:Citexji|Citexji]] ने लेख [[प्राकृतिक स्वास्थ्य]] पर बर्बरता की है जिसे मैं पूर्ववत नहीं कर पा रहा हूं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:57, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
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:@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] महोदय, आप जांच लें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 14:00, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
::Tharparkar Cattle Is Milch Breed Not Dual Purpose Breed. [[सदस्य:Rakesh Kumar Veterinarian|Rakesh Kumar]] ([[सदस्य वार्ता:Rakesh Kumar Veterinarian|वार्ता]]) 13:20, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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Rakesh Kumar Veterinarian
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== श्रेणी नाम परिवर्तन अनुरोध ==
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== भारत का संविधान की विकिस्रोत प्रति का उपयोग करें। ==
आपसे दो अनुरोध है:
अनुच्छेद संबंधी लेखों में जब आप एआइ की मदद ले रहे हैं तो उन्हें ठीक से देखें। कम-से-कम अंग्रेजी शब्दों के नाम तो जरूर ही हटा दें। हू-ब-हू अनुवाद विकि नीति के विरुद्ध है।
:संविधान के मूल पाठ के लिए गूगल बुक के बजाय विकिस्रोत पर उपलब्ध भारत का संविधान का उपयोग करें जैसा कि [[अनुच्छेद 82 (भारत का संविधान)]] लेख में किया गया है। [[सदस्य:अनिरुद्ध कुमार|अनिरुद्ध कुमार]] ([[सदस्य वार्ता:अनिरुद्ध कुमार|वार्ता]]) 10:35, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
== लेख सुधार बनाम हटाने पर दृष्टिकोण ==
नमस्कार। @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] मेरा मानना है कि [[विकिपीडिया]] पर हमारा उद्देश्य केवल लेखों पर हटाने के टैग लगाना नहीं, बल्कि उनमें सुधार करना और उन्हें बेहतर बनाने में सहयोग करना भी होना चाहिए।
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== पूर्ववत सहायता - बर्बरता ==
@[[सदस्य:SM7|SM7]] और @[[सदस्य:DreamRimmer|DreamRimmer]] महोदय, @[[सदस्य:Citexji|Citexji]] ने लेख [[प्राकृतिक स्वास्थ्य]] पर बर्बरता की है जिसे मैं पूर्ववत नहीं कर पा रहा हूं| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:57, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
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चंगथांगी बकरी (पश्मीना बकरी)
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स्व-प्रकाशित,अप्रमाणित और संदर्भ तथा व्याकरण को सुधारा
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[[File:Pashmina goat.jpg|right|thumb|250px|लद्दाख के चंगथांग क्षेत्र में एक चंगथांगी बकरी।]]
'''चंगथांगी बकरी''' (Changthangi) जिसे '''पश्मीना बकरी''' भी कहा जाता है, एक विशेष नस्ल है जो अपने कीमती पश्मीना ऊन के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह मुख्य रूप से [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू-कश्मीर]] के [[लद्दाख़|लद्दाख]] क्षेत्र, विशेषकर लेह जिले के चंगथांग पठार में पाई जाती है। यह क्षेत्र [[तिब्बत]] की सीमा के निकट स्थित है, जहाँ का वातावरण अत्यंत ठंडा और दुर्गम होता है।
== विशेषताएँ ==
चंगथांगी और चेगु बकरियों के शरीर पर उगने वाले मुलायम आंतरिक बालों (Undercoat) को 'असली पश्मीना' कहा जाता है। यह फाइबर दुनिया के सबसे महीन और गर्म रेशों में से एक माना जाता है। पश्मीना ऊन हल्का होने के साथ-साथ नमी सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है और इसे रंगना भी आसान होता है।
== पालन-पोषण और वातावरण ==
चंगथांग क्षेत्र के खानाबदोश '''चंगपा समुदाय''' के लोग सदियों से इन बकरियों का पालन कर रहे हैं। यहाँ का मौसम बहुत कठोर होता है, जहाँ गर्मियों में तापमान 40°C और सर्दियों में -40°C तक चला जाता है। इसी अत्यधिक ठंड के कारण इन बकरियों के शरीर पर सुरक्षा के रूप में पश्मीना का बारीक रेशा विकसित होता है।
[[शेरे-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय]] (SKUAST) द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, इन बकरियों का प्रबंधन पूरी तरह से पारंपरिक और प्राकृतिक चराई पर आधारित है। अध्ययन में उनकी शारीरिक बनावट, उत्पादन क्षमता और प्रजनन प्रणालियों का विस्तृत विवरण दिया गया है।<ref name="skuast">{{Cite web|url=https://skuast.org/wmgf/changthangi_jk.html|title=Changthangi Goat of Ladakh|website=skuast.org|access-date=16 अप्रैल 2026}}</ref>
== आर्थिक महत्व ==
पश्मीना के अलावा, इन बकरियों का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए भी किया जाता है:
* '''मांस और दूध:''' स्थानीय आबादी के लिए पोषण का स्रोत।
* '''खाद और खाल:''' कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए उपयोगी।
* '''परिवहन:''' दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सामान ढोने के लिए।
== संरक्षण की स्थिति ==
कठोर जलवायु और सीमित भौगोलिक क्षेत्र के कारण इस नस्ल की संख्या पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में उच्च मृत्यु दर और चारे की कमी इनके पालन में मुख्य चुनौतियाँ हैं।
== इन्हें भी देखें ==
* [[पश्मीना]]
* [[चंगपा]]
* [[कश्मीर की अर्थव्यवस्था]]
* [[लद्दाख़ की संस्कृति]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:बकरी की नस्लें]]
[[श्रेणी:लद्दाख़ का भूगोल]]
[[श्रेणी:पशुपालन]]
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चित्र सुधारा
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text/x-wiki
[[File:Pashmina Goat.jpg|right|thumb|350px|लद्दाख के चंगथांग क्षेत्र में एक चंगथांगी बकरी।]]
'''चंगथांगी बकरी''' (Changthangi) जिसे '''पश्मीना बकरी''' भी कहा जाता है, एक विशेष नस्ल है जो अपने कीमती पश्मीना ऊन के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह मुख्य रूप से [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू-कश्मीर]] के [[लद्दाख़|लद्दाख]] क्षेत्र, विशेषकर लेह जिले के चंगथांग पठार में पाई जाती है। यह क्षेत्र [[तिब्बत]] की सीमा के निकट स्थित है, जहाँ का वातावरण अत्यंत ठंडा और दुर्गम होता है।
== विशेषताएँ ==
चंगथांगी और चेगु बकरियों के शरीर पर उगने वाले मुलायम आंतरिक बालों (Undercoat) को 'असली पश्मीना' कहा जाता है। यह फाइबर दुनिया के सबसे महीन और गर्म रेशों में से एक माना जाता है। पश्मीना ऊन हल्का होने के साथ-साथ नमी सोखने की अद्भुत क्षमता रखता है और इसे रंगना भी आसान होता है।
== पालन-पोषण और वातावरण ==
चंगथांग क्षेत्र के खानाबदोश '''चंगपा समुदाय''' के लोग सदियों से इन बकरियों का पालन कर रहे हैं। यहाँ का मौसम बहुत कठोर होता है, जहाँ गर्मियों में तापमान 40°C और सर्दियों में -40°C तक चला जाता है। इसी अत्यधिक ठंड के कारण इन बकरियों के शरीर पर सुरक्षा के रूप में पश्मीना का बारीक रेशा विकसित होता है।
[[शेरे-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय]] (SKUAST) द्वारा किए गए अध्ययनों के अनुसार, इन बकरियों का प्रबंधन पूरी तरह से पारंपरिक और प्राकृतिक चराई पर आधारित है। अध्ययन में उनकी शारीरिक बनावट, उत्पादन क्षमता और प्रजनन प्रणालियों का विस्तृत विवरण दिया गया है।<ref name="skuast">{{Cite web|url=https://skuast.org/wmgf/changthangi_jk.html|title=Changthangi Goat of Ladakh|website=skuast.org|access-date=16 अप्रैल 2026}}</ref>
== आर्थिक महत्व ==
पश्मीना के अलावा, इन बकरियों का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए भी किया जाता है:
* '''मांस और दूध:''' स्थानीय आबादी के लिए पोषण का स्रोत।
* '''खाद और खाल:''' कृषि और स्थानीय उद्योगों के लिए उपयोगी।
* '''परिवहन:''' दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सामान ढोने के लिए।
== संरक्षण की स्थिति ==
कठोर जलवायु और सीमित भौगोलिक क्षेत्र के कारण इस नस्ल की संख्या पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में उच्च मृत्यु दर और चारे की कमी इनके पालन में मुख्य चुनौतियाँ हैं।
== इन्हें भी देखें ==
* [[पश्मीना]]
* [[चंगपा]]
* [[कश्मीर की अर्थव्यवस्था]]
* [[लद्दाख़ की संस्कृति]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:बकरी की नस्लें]]
[[श्रेणी:लद्दाख़ का भूगोल]]
[[श्रेणी:पशुपालन]]
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वार्ता:अय्यारी (२०१८ फ़िल्म)
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/* स्थानान्तरण अनुरोध 24 फ़रवरी 2026 */ उत्तर
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== स्थानान्तरण अनुरोध 24 फ़रवरी 2026 ==
{{नाम बदलें/dated|अय्यारी}}
[[:अय्यारी (२०१८ फ़िल्म)]] → {{no redirect|अय्यारी}} – Only exact page title match. [[सदस्य:LaundryPizza03|LaundryPizza03]] ([[सदस्य वार्ता:LaundryPizza03|वार्ता]]) 04:44, 24 फ़रवरी 2026 (UTC)
:{{समर्थन}} [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 03:06, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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सुधार
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javascript
text/javascript
// twinkleoptions.js: व्यक्तिगत ट्विंकल वरीयता फ़ाइल
//
// NOTE: The easiest way to change your Twinkle preferences is by using the
// Twinkle preferences panel, at [[विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]].
//
// This file is AUTOMATICALLY GENERATED.
// <nowiki>
window.Twinkle.prefs = {
"twinkle": {
"optionsVersion": 2.1,
"autoMenuAfterRollback": true,
"openTalkPage": [],
"showRollbackLinks": [
"diff",
"others",
"mine",
"recent",
"history"
],
"confirmOnFluff": true,
"markRevertedPagesAsMinor": [
"agf",
"norm",
"vand",
"torev"
],
"watchSpeedyPages": [
"व1", "व2", "व3", "व4", "व5", "व6", "व6फ़", "व6ल", "व6स", "व7",
"ल1", "ल2", "ल4",
"फ़1", "फ़2", "फ़3", "फ़4", "फ़5", "फ़6",
"स1", "स2", "स3",
"सा1", "शीह"
],
"markSpeedyPagesAsPatrolled": true,
"notifyUserOnSpeedyDeletionNomination": [
"व1", "व2", "व3", "व4", "व5", "व6", "व6फ़", "व6ल", "व6स", "व7",
"ल1", "ल2", "ल4",
"फ़1", "फ़2", "फ़3", "फ़4", "फ़5", "फ़6",
"स1", "स2", "स3",
"सा1", "शीह"
],
"welcomeUserOnSpeedyDeletionNotification": [
"व1", "व2", "व3", "व4", "व5", "व6", "व6फ़", "व6ल", "व6स", "व7",
"ल1", "ल2", "ल4",
"फ़1", "फ़2", "फ़3", "फ़4", "फ़5", "फ़6",
"स1", "स2", "स3",
"सा1", "शीह"
],
"logSpeedyNominations": true,
"noLogOnSpeedyNomination": [],
"watchWarnings": true,
"defaultWarningGroup": "1",
"showSharedIPNotice": true,
"oldSelect": true,
"logXfdNominations": true,
"xfdWatchDiscussion": "1 month",
"unlinkNamespaces": [
"0",
"10",
"100"
]
},
"friendly": {
"markTaggedPagesAsMinor": true,
"watchTaggedPages": true,
"customTagList": [
{
"value": "प्रचार",
"label": "{{प्रचार}}: यदि लेख विज्ञापन जैसा है"
},
{
"value": "स्रोतहीन",
"label": "{{स्रोतहीन}}: यदि एक भी संदर्भ नहीं है"
},
{
"value": "अनुवाद",
"label": "{{अनुवाद}}: यदि मशीनी अनुवाद खराब है"
},
{
"value": "सुधार",
"label": "{{सुधार}}: यदि लेख की भाषा शैली खराब है"
},
{
"value": "आधार",
"label": "{{आधार}}: छोटे लेखों के लिए"
}
]
}
};
// </nowiki>
// End of twinkleoptions.js
3xklzfnymxsuf9wtl7oo42i9uf1nqpc
6541302
6541300
2026-04-16T14:08:17Z
AMAN KUMAR
911487
[[विशेष:योगदान/AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] ([[सदस्य वार्ता:AMAN KUMAR|वार्ता]]) के अवतरण 6541139 पर पुनर्स्थापित : तकनीकी समस्या
6541302
javascript
text/javascript
// twinkleoptions.js: व्यक्तिगत ट्विंकल वरीयता फ़ाइल
//
// NOTE: The easiest way to change your Twinkle preferences is by using the
// Twinkle preferences panel, at [[विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]].
//
// This file is AUTOMATICALLY GENERATED. Any changes you make (aside from
// changing the configuration parameters in a valid-JavaScript way) will be
// overwritten the next time you click "save" in the Twinkle preferences
// panel. If modifying this file, make sure to use correct JavaScript.
// <nowiki>
window.Twinkle.prefs = {
"optionsVersion": 2.1,
"autoMenuAfterRollback": true,
"openTalkPage": [],
"showRollbackLinks": [
"diff",
"others",
"mine",
"recent",
"history"
],
"watchSpeedyPages": [
"db",
"g1",
"g2",
"g3",
"g4",
"g5",
"g6",
"g7",
"g6f",
"a1",
"a2",
"a4",
"a5",
"u1",
"u2",
"u3",
"f1",
"f2",
"f3",
"f4",
"f5",
"f6"
],
"markSpeedyPagesAsPatrolled": true,
"welcomeUserOnSpeedyDeletionNotification": [
"a1",
"a2",
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"db",
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"f4",
"f5",
"f6",
"g1",
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"g6",
"g6f",
"g7",
"u3"
],
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"f6",
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"g2",
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"g6",
"g6f",
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"u3"
],
"logSpeedyNominations": true,
"noLogOnSpeedyNomination": [],
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"defaultWarningGroup": "3",
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"xfdWatchDiscussion": "1 month"
};
// </nowiki>
// End of twinkleoptions.js
fnw4pp2j14955lh0u1cory1ghc5r3dn
6541344
6541302
2026-04-16T15:41:04Z
AMAN KUMAR
911487
ट्विंकल वरीयताएँ सहेजी जा रही हैं: [[:विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]] से स्वचालित संपादन
6541344
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text/javascript
// twinkleoptions.js: व्यक्तिगत ट्विंकल वरीयता फ़ाइल
//
// NOTE: The easiest way to change your Twinkle preferences is by using the
// Twinkle preferences panel, at [[विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]].
//
// This file is AUTOMATICALLY GENERATED. Any changes you make (aside from
// changing the configuration parameters in a valid-JavaScript way) will be
// overwritten the next time you click "save" in the Twinkle preferences
// panel. If modifying this file, make sure to use correct JavaScript.
// <nowiki>
window.Twinkle.prefs = {
"optionsVersion": 2.1,
"autoMenuAfterRollback": true,
"openTalkPage": [],
"showRollbackLinks": [
"diff",
"others",
"mine",
"recent",
"history"
],
"watchSpeedyPages": [
"db",
"g1",
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"a5",
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"u2",
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"f6",
"g1",
"g2",
"g3",
"g4",
"g5",
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"g6f",
"g7",
"u3"
],
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"a2",
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"f2",
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"f4",
"f5",
"f6",
"g1",
"g2",
"g3",
"g4",
"g5",
"g6",
"g6f",
"g7",
"u3"
],
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};
// </nowiki>
// End of twinkleoptions.js
oonv89nxy128oi3c3pz0om1huszqn9a
6541407
6541344
2026-04-17T02:26:21Z
AMAN KUMAR
911487
ट्विंकल वरीयताएँ सहेजी जा रही हैं: [[:विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]] से स्वचालित संपादन
6541407
javascript
text/javascript
// twinkleoptions.js: व्यक्तिगत ट्विंकल वरीयता फ़ाइल
//
// NOTE: The easiest way to change your Twinkle preferences is by using the
// Twinkle preferences panel, at [[विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]].
//
// This file is AUTOMATICALLY GENERATED. Any changes you make (aside from
// changing the configuration parameters in a valid-JavaScript way) will be
// overwritten the next time you click "save" in the Twinkle preferences
// panel. If modifying this file, make sure to use correct JavaScript.
// <nowiki>
window.Twinkle.prefs = {
"optionsVersion": 2.1,
"showRollbackLinks": [
"diff",
"others",
"mine",
"recent",
"history"
],
"watchSpeedyPages": [
"db",
"g1",
"g2",
"g3",
"g4",
"g5",
"g6",
"g7",
"g6f",
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"a2",
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"a5",
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"u3",
"f1",
"f2",
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"f4",
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"f6"
],
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"db"
],
"notifyUserOnSpeedyDeletionNomination": [
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"f2",
"f3",
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"f5",
"f6"
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"logSpeedyNominations": true,
"noLogOnSpeedyNomination": [],
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// </nowiki>
// End of twinkleoptions.js
lrj3k2n9f9c3ijwn8t3xswc69hv7wwf
6541410
6541407
2026-04-17T02:28:31Z
AMAN KUMAR
911487
ट्विंकल वरीयताएँ सहेजी जा रही हैं: [[:विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]] से स्वचालित संपादन
6541410
javascript
text/javascript
// twinkleoptions.js: व्यक्तिगत ट्विंकल वरीयता फ़ाइल
//
// NOTE: The easiest way to change your Twinkle preferences is by using the
// Twinkle preferences panel, at [[विकिपीडिया:Twinkle/Preferences]].
//
// This file is AUTOMATICALLY GENERATED. Any changes you make (aside from
// changing the configuration parameters in a valid-JavaScript way) will be
// overwritten the next time you click "save" in the Twinkle preferences
// panel. If modifying this file, make sure to use correct JavaScript.
// <nowiki>
window.Twinkle.prefs = {
"optionsVersion": 2.1,
"showRollbackLinks": [
"diff",
"others",
"mine",
"recent",
"history"
],
"watchSpeedyPages": [
"db",
"g1",
"g2",
"g3",
"g4",
"g5",
"g6",
"g7",
"g6f",
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"a2",
"a4",
"a5",
"u1",
"u2",
"u3",
"f1",
"f2",
"f3",
"f4",
"f5",
"f6"
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"welcomeUserOnSpeedyDeletionNotification": [
"db"
],
"notifyUserOnSpeedyDeletionNomination": [
"db",
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"a1",
"a2",
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"f1",
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"f5",
"f6"
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"logSpeedyNominations": true,
"noLogOnSpeedyNomination": [],
"markTaggedPagesAsMinor": true,
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"defaultWarningGroup": "2",
"logXfdNominations": true,
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};
// </nowiki>
// End of twinkleoptions.js
sxyi1janhxmjunk8voczl4ldzz5u1qh
विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/किआ कोल
4
1609764
6541487
6531123
2026-04-17T07:05:14Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
/* किआ कोल */ उत्तर
6541487
wikitext
text/x-wiki
=== [[:किआ कोल]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मार्च 2026}}
:{{la|1=किआ कोल}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|किआ कोल -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:09, 17 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' - नामांकन के अनुसार तथा संदर्भों की कमी हैं|[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:13, 17 मार्च 2026 (UTC)
*:उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यह विषय उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है। अतः मेरे मत में इस लेख को हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:05, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
hpfqv97re9ghyn4ugz2xlaqjnm75pzi
6541488
6541487
2026-04-17T07:05:35Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
6541488
wikitext
text/x-wiki
=== [[:किआ कोल]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मार्च 2026}}
:{{la|1=किआ कोल}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|किआ कोल -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 16:09, 17 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' - नामांकन के अनुसार तथा संदर्भों की कमी हैं|[[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 16:13, 17 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' - उपलब्ध स्रोतों के आधार पर यह विषय उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है। अतः मेरे मत में इस लेख को हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:05, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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सदस्य:AMAN KUMAR/शीह लॉग
2
1609848
6541413
6541138
2026-04-17T02:28:58Z
AMAN KUMAR
911487
शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]].
6541413
wikitext
text/x-wiki
This is a log of all [[वि:शीह|speedy deletion]] nominations made by this user using [[WP:TW|Twinkle]]'s CSD module.
If you no longer wish to keep this log, you can turn it off using the [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|preferences panel]], and nominate this page for speedy deletion under [[वि:शीह#U1|CSD U1]].
=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Chandan roy Bhirha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:42, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पूर्ति आर्या]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 03:47, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Article wizard/button wizard/sandbox]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 20:33, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:The7unity]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Infobox news organization]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:04, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:गुंजन तिवारी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अन्य भाषा }; सदस्य {{user|1=Yug Sumhadih}} को सूचित किया गया 02:28, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
s6819hhjuscvcox7vfjbcidfwvlwrnf
6541565
6541413
2026-04-17T10:52:04Z
AMAN KUMAR
911487
शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:सदस्य:डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय]].
6541565
wikitext
text/x-wiki
This is a log of all [[वि:शीह|speedy deletion]] nominations made by this user using [[WP:TW|Twinkle]]'s CSD module.
If you no longer wish to keep this log, you can turn it off using the [[Wikipedia:Twinkle/Preferences|preferences panel]], and nominate this page for speedy deletion under [[वि:शीह#U1|CSD U1]].
=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Chandan roy Bhirha]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 03:42, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:पूर्ति आर्या]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 03:47, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Article wizard/button wizard/sandbox]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 20:33, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:The7unity]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Nawada District President of Youth Congress is Mohammad Irshad Ansari]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:14, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Infobox news organization]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:04, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:गुंजन तिवारी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अन्य भाषा }; सदस्य {{user|1=Yug Sumhadih}} को सूचित किया गया 02:28, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 10:52, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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AMAN KUMAR
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शीह नामांकन का लॉग बनाया जा रहा of [[:सदस्य वार्ता:Ajaysingh Mer Rajput]].
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text/x-wiki
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=== मार्च 2026 ===
# [[:चिरंजीवी सरजा]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 20:50, 18 मार्च 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Fper]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 13:51, 19 मार्च 2026 (UTC)
# [[:दिवाण जवाहर सिंह]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 10:52, 20 मार्च 2026 (UTC)
=== अप्रैल 2026 ===
# [[:द्वितीयक रंग]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:09, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Harendra jakhar nagour]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 17:23, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:Protection]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 17:30, 2 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:कंपनी हवलदार मेजर]]: [[वि:शीह#व2|शीह व2]] ({{tl|db-test}}) 22:57, 5 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:विक्रम सिंह मीना]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 01:25, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:रविन्द्र कुमार द्विवेदी]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 08:06, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:वार्ता:डिबेटसिলেটবিডি]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: उचित पृष्ठ नहीं}; सदस्य {{user|1=Spacebangla}} को सूचित किया गया 13:30, 7 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:देओला दादा]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 04:07, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सहायता:IPA/Hindi and Urdu]]: [[वि:शीह#व5|शीह व5]] ({{tl|db-blank}}) 04:09, 9 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:रोहित गिल]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}) 18:00, 10 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:Bjp Junaid Hussain]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 23:48, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:कुश सोगुण]]: [[वि:शीह#स3|शीह स3]] ({{tl|db-notwebhost}}) 14:06, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य वार्ता:Govind Bhana Artist]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 14:38, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:साँचा:Article wizard/button wizard/sandbox]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 20:33, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:सदस्य:The7unity]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 18:28, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साउथ सिटी इंटर्नैशनल स्कूल]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: इसमें उल्लेखनीयता का स्पष्ट अभाव है और कोई भी विश्वसनीय स्रोत नहीं है।}; सदस्य {{user|1=Ahari123}} को सूचित किया गया 19:08, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
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# [[:ऑस्ट्रेलिया के लिए CDR]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}) 08:44, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:साँचा:Infobox news organization]]: [[वि:शीह#व7|शीह व7]] ({{tl|db-spam}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 03:04, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:गुंजन तिवारी]]: [[वि:शीह#ल2|शीह ल2]] ({{tl|db-promo}}); निर्माण-सुरक्षा हेतु ([[WP:SALT|salting]]) अनुरोध किया गया 07:22, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
# [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]]: {{tl|db-reason}}; अन्य अतिरिक्त जानकारी: {Custom rationale: अन्य भाषा }; सदस्य {{user|1=Yug Sumhadih}} को सूचित किया गया 02:28, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/कुतुब बेगम
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चाहर धर्मेंद्र
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/* कुतुब बेगम */ उत्तर
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text/x-wiki
=== [[:कुतुब बेगम]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मार्च 2026}}
:{{la|1=कुतुब बेगम}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|कुतुब बेगम -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
अलग से लेख रखने योग्य उल्लेखनीय होना संदिग्ध। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:48, 21 मार्च 2026 (UTC)
:मैं इस मत से सहमत हूँ कि इस विषय की अलग से लेख के रूप में उल्लेखनीयता संदिग्ध है। उपलब्ध स्रोत पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय कवरेज प्रदान नहीं करते। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:12, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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text/x-wiki
=== [[:कुतुब बेगम]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
अलग से लेख रखने योग्य उल्लेखनीय होना संदिग्ध। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 16:48, 21 मार्च 2026 (UTC)
* मैं इस मत से सहमत हूँ कि इस विषय की अलग से लेख के रूप में उल्लेखनीयता संदिग्ध है। उपलब्ध स्रोत पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय कवरेज प्रदान नहीं करते। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:12, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/चौधरी मंडप दुर्गा पूजा खूंटी
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चाहर धर्मेंद्र
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/* चौधरी मंडप दुर्गा पूजा खूंटी */ उत्तर
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=== [[:चौधरी मंडप दुर्गा पूजा खूंटी]] ===
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:मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह विषय उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है, क्योंकि इसके समर्थन में पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:23, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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* मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह विषय उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है, क्योंकि इसके समर्थन में पर्याप्त स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:23, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/ताजिक नीलकंठ से दृष्टि योग
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चाहर धर्मेंद्र
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:मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख विकिपीडिया के अनुरूप नहीं है तथा विषय भी उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है। उपलब्ध सामग्री न तो पर्याप्त रूप से संदर्भित है और न ही ज्ञानकोशीय शैली में प्रस्तुत है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:24, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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* मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख विकिपीडिया के अनुरूप नहीं है तथा विषय भी उल्लेखनीयता के मानदंडों को पूर्ण नहीं करता है। उपलब्ध सामग्री न तो पर्याप्त रूप से संदर्भित है और न ही ज्ञानकोशीय शैली में प्रस्तुत है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:24, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अबीगैल मॉरिस
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नामांकन के लिये कारण:
विश्वसनीय एवं स्वतंत्र स्रोतों का अभाव; उल्लेखनीयता स्थापित नहीं है। [[सदस्य:Saroj|Saroj]] ([[सदस्य वार्ता:Saroj|वार्ता]]) 08:05, 24 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' - मुझे इसके लिए पर्याप्त स्वतंत्र स्रोत नहीं मिल पाए हैं, अतः विकिपीडिया की नीतियों के अनुसार इसे हटा दिया जाए। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:59, 30 मार्च 2026 (UTC)
*:खोजने पर उल्लेखनीय जानकारी नहीं मिली। हटा देना चाहिए। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:16, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध विहार
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चाहर धर्मेंद्र
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/* अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध विहार */ उत्तर
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text/x-wiki
=== [[:अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध विहार]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मार्च 2026}}
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नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:59, 27 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' नामांकन अनुसार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 30 मार्च 2026 (UTC)
*:नामांकन अनुसार '''हटाया जाय'''। [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] साबित नहीं हो रही। खोजने पर उल्लेखनीय जानकारी नहीं मिली। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:10, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
=== [[:अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध विहार]] ===
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* '''हटाए''' नामांकन अनुसार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 30 मार्च 2026 (UTC)
* नामांकन अनुसार '''हटाया जाय'''। [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] साबित नहीं हो रही। खोजने पर उल्लेखनीय जानकारी नहीं मिली। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:10, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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=== [[:अंतर्राष्ट्रीय बुद्ध विहार]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 02:59, 27 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' नामांकन अनुसार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:26, 30 मार्च 2026 (UTC)
* नामांकन अनुसार '''हटाया जाए'''। [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] साबित नहीं हो रही। खोजने पर उल्लेखनीय जानकारी नहीं मिली। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:10, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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/* भूतचैतन्यवाद */ उत्तर
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=== [[:भूतचैतन्यवाद]] ===
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:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|भूतचैतन्यवाद -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
मूल शोध। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:54, 27 मार्च 2026 (UTC)
:यदि यह [[भौतिकवाद]] के समान है तो इसे अनुप्रेषित किया जा सकता है। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 14:54, 27 मार्च 2026 (UTC)
::@[[सदस्य:संजीव कुमार|संजीव कुमार]] जी, ‘भूतचैतन्यवाद’ की अवधारणा भौतिकवाद के समकक्ष अथवा उससे पर्याप्त रूप से संबद्ध है।[https://www.google.co.th/books/edition/Indian_Knowledge_System_Trilingual_CUET/NEeSEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%9A%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6&pg=PA135&printsec=frontcover] [https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF_%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8_Bhara/wnRMEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%87+%27%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%9A%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%27+%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%27%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6%27+%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE+%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE+%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A5%A4&pg=PA167&printsec=frontcover] इसे ‘भौतिकवाद’ लेख में अनुप्रेषित किया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:23, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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/* 2026 तीरंदाजी विश्व कप में भारत */ उत्तर
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=== [[:2026 तीरंदाजी विश्व कप में भारत]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
लेख को रखने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं। उल्लेखनीयता भी स्पष्ट नहीं। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 15:09, 27 मार्च 2026 (UTC)
:sir udhar 7 april date diya hua hai, 7 april se aapko sabhi dikhayi denge tabtak aap chaahe to ise draft kar de. [[सदस्य:Neeelzzz20|Neeelzzz20]] ([[सदस्य वार्ता:Neeelzzz20|वार्ता]]) 15:12, 27 मार्च 2026 (UTC)
::[[2025 तीरंदाजी विश्व कप में भारत]] लेख के परिप्रेक्ष्य में यह तर्क दिया जा सकता है कि वर्तमान लेख को भी रखा जा सकता है। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:59, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/राजभाषा (विधायी) आयोग
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चाहर धर्मेंद्र
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/* राजभाषा (विधायी) आयोग */ उत्तर
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=== [[:राजभाषा (विधायी) आयोग]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मार्च 2026}}
:{{la|1=राजभाषा (विधायी) आयोग}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|राजभाषा (विधायी) आयोग -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
मूल शोध। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:04, 29 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' नामांकन अनुसार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:28, 30 मार्च 2026 (UTC)
*:यह लेख मूल शोध पर आधारित प्रतीत होता है तथा पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः यह विकिपीडिया के मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:30, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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=== [[:राजभाषा (विधायी) आयोग]] ===
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मूल शोध। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 13:04, 29 मार्च 2026 (UTC)
* '''हटाए''' नामांकन अनुसार [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 04:28, 30 मार्च 2026 (UTC)
* यह लेख मूल शोध पर आधारित प्रतीत होता है तथा पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः यह विकिपीडिया के मानकों के अनुरूप नहीं है और इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:30, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गुरु नानक देव जी की उदासियाँ
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चाहर धर्मेंद्र
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/* गुरु नानक देव जी की उदासियाँ */ उत्तर
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=== [[:गुरु नानक देव जी की उदासियाँ]] ===
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:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|गुरु नानक देव जी की उदासियाँ -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
मूल शोध। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:07, 29 मार्च 2026 (UTC)
:मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख मूल शोध पर आधारित प्रतीत होता है तथा पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:20, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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=== [[:गुरु नानक देव जी की उदासियाँ]] ===
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नामांकन के लिये कारण:
मूल शोध। <span style="color:green;">☆★</span>[[user:संजीव कुमार|<u><span style="color:Magenta;">संजीव कुमार</span></u>]] ([[User talk:संजीव कुमार|<span style="color:blue;">✉✉</span>]]) 17:07, 29 मार्च 2026 (UTC)
* मैं इस मत से सहमत हूँ कि यह लेख मूल शोध पर आधारित प्रतीत होता है तथा पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है। अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 07:20, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/देवरानी दाई मंदिर तुरसी मध्य प्रदेश
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चाहर धर्मेंद्र
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/* देवरानी दाई मंदिर तुरसी मध्य प्रदेश */ उत्तर
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=== [[:देवरानी दाई मंदिर तुरसी मध्य प्रदेश]] ===
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:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|देवरानी दाई मंदिर तुरसी मध्य प्रदेश -विकिपीडिया -wikipedia}}
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चाहर धर्मेंद्र
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/देवनागरी संयुक्तक्षर
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चाहर धर्मेंद्र
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/* देवनागरी संयुक्तक्षर */ उत्तर
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द्विभाषी शब्दकोश
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सुमता
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उपयोग के बारे में जानकारी दी ।
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text/x-wiki
{{सफाई|reason=लेख की शैली, बुलेट पॉइंट्स और लेआउट की सफाई|date=अप्रैल 2026}}
द्विभाषी शब्दकोश एक विशिष्ट प्रकार का शब्दकोश है, जिसका उपयोग एक भाषा के शब्दों या वाक्यांशों का दूसरी भाषा में अनुवाद करने के लिए किया जाता है। द्विभाषी शब्दकोश एकतरफा हो सकते हैं, जिनमें एक भाषा से दूसरी में अनुवाद किया जाता हैं। जैसे - हिंदी से अंग्रेजी। और दो तरफा भी हो सकते हैं, जो दोनों भाषाओं के बीच पारस्परिक अनुवाद करते हैं। जैसे—एक हिंदी-अंग्रेजी, दूसरा अंग्रेजी-हिंदी। <ref name=":0">{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Bilingual_dictionary|title=Bilingual dictionary}}</ref>
दो तरफा द्विभाषी शब्दकोश दो खंडों में विभाजित होते हैं, जिनमें एक खण्ड भाषा के शब्दों और वाक्यांशों को उनके समतुल्य अनुवादित करता है। अनुवाद के अतिरिक्त, द्विभाषी शब्दकोश प्रायः शब्द-भेद, लिंग, क्रिया-प्रकार, विभक्ति-रूप तथा अन्य व्याकरणिक संकेतों को भी निर्दिष्ट करते हैं, जिससे गैर-मातृभाषी वक्ता के लिए शब्दों का उपयुक्त प्रयोग संभव हो सके।<ref name=":0" />
इसके अतिरिक्त, ऐसे शब्दकोशों में कभी-कभी वाक्यांश प्रयोग एवं शैली-निर्देश, क्रिया-रूप , मानचित्र तथा व्याकरण-संदर्भ जैसी सहायक सामग्री भी होती है। और इसके विपरीत, एक तरफा शब्दकोश अनुवाद प्रदान करते समय शब्दों और वाक्यांशों की व्याख्या प्रस्तुत करता है।<ref name=":0" />
=== द्विभाषा शब्दकोश की आवश्यकता ===
•छोटी भाषाओं के समर्थन के लिए।<ref name=":1">{{Cite book|title=BILINGUAL EDUCATION|last=GARCÍA|first=OFELIA|publisher=JOHN BENJAMINS|year=1991|isbn=90 272 2080 8 (Eur.) / 1-55619-116-2 (US) (alk. paper)|location=AMSTERDAM/PHILADELPHIA|pages=5}}</ref>
•समाज में भाषाओं और संस्कृतियों के पारस्परिक सहयोग को सुदृढ़ बनाने में सहायक।<ref name=":1" />
•द्विभाषी शिक्षा ऐसी सामाजिक व्यवस्था को दर्शाती है, जो अलग-अलग संस्कृतियों का सम्मान करती है और छात्रों के बौद्धिक व शैक्षिक अनुभवों को बढ़ाने में मदद करती है।<ref>{{Cite book|title=BILINGUAL EDUCATION|last=GARCÍA|first=OFELIA|publisher=JOHN BENJAMINS|year=1991|isbn=90 272 2080 8 (Eur.) / 1-55619-116-2|location=AMSTERDAM/PHILADELPHIA|pages=5}}</ref>
•बहुल अभिव्यक्ति के रूप में द्वि लिपि-ज्ञान को बढ़ावा देने के रूप में सहायक।<nowiki><ref></nowiki>{{Cite book|title=BILINGUAL EDUCATION|last=GARCÍA|first=OFELIA|publisher=JOHN BENJAMINS PUBLISHING COMPANY|year=1991|isbn=90 272 2080 8 (Eur.) / 1-55619-116-2 (US)|location=AMSTERDAM/PHILADELPHIA|pages=5}}</ref
<nowiki>===</nowiki>
=== द्विभाषी शब्दकोश का इतिहास ===
<nowiki>===</nowiki>
द्विभाषी शब्दकोश का इतिहास विश्व की प्रमुख सभ्यताओं के मध्य भाषाई आदान-प्रदान, व्यापार, धार्मिक प्रसार और राजनीतिक विस्तार का रहा है। <nowiki>''</nowiki>'''प्राचीन काल'''<nowiki>''</nowiki> में सुमेरियन और अक्कादी सभ्यता जो कि विश्व का सबसे प्राचीन ज्ञात द्विभाषी शब्दकोश (लगभग 2300 ईसा पूर्व) का माना जाता है। मेसोपोटामिया में सुमेरियन-अक्कादी शब्द-सूचियाँ मिली हैं, जिनका उपयोग क्यूनिफॉर्म लिपि सीखने और प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था। और हित्ती सभ्यता ने बहु भाषिकता को और विस्तार दिया तथा त्रिभाषी शब्दकोश (हित्ती-सुमेरी-अक्कादी) विकसित किए, जो भाषाई तुलनात्मक अध्ययन के शुरुआती प्रमाण हैं।<nowiki><ref></nowiki>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Dictionary|title=Dictionary}}<nowiki></ref></nowiki>
'''ग्रीक और रोमन काल -''' यूरोपीय संदर्भ में, द्विभाषी शब्दकोशों का विकास शिक्षा और शास्त्रीय ग्रंथों के संरक्षण के इर्द-गिर्द घूमता रहा।रोमन सम्राट क्लॉडियस ने एक एट्रस्कन-लैटिन शब्दकोश संकलित किया था, जो अब लुप्त हो चुका है। और आठवीं से नौवीं शताब्दी ईस्वी में तिब्बत में महाव्युत्पत्ति नामक एक प्रमुख द्विभाषी शब्दकोश तैयार किया गया। इसे "महान ग्रंथ जो शब्दों को सटीक रूप से समझाता है" कहा जाता है। इसमें हजारों संस्कृत और तिब्बती शब्द शामिल थे, जो तिब्बती भाषा में बौद्ध ग्रंथों को मानकीकृत करने के लिए बनाया गया। यह तिब्बती त्रिपिटक का हिस्सा है। इसके साथ मध्यव्युत्पत्ति का भी उपयोग होता था। तथा दसवीं शताब्दी ईस्वी में यूरोप के यहूदी समुदायों में हिब्रू और अरामी से मध्ययुगीन फ्रेंच भाषा में शब्दकोश बनाए गए। ये तालमुद और अन्य यहूदी ग्रंथों को समझने व पढ़ाने के लिए उपयोगी थे।<ref>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Bilingual_dictionary|title=Bilingual dictionary}}</ref><ref name=":3">{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Etruscan_language|title=Etruscan language}}</ref>
'''भारत में द्विभाषी शब्दकोश का इतिहास'''
प्राचीन भारत में 'निघंटु' परंपरा से शब्दकोशों की शुरुआत हुई, जो मध्यकाल तक आते-आते द्विभाषी स्वरूप लेने लगी। 6ठी शताब्दी में अमरसिंह द्वारा रचित 'नामलिंगानुशासन' (अमरकोश) संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए प्रारंभिक आधार बना। इसमें लगभग 10,000 शब्दों को पर्यायवाची रूप में वर्गीकृत किया गया है। और12वीं शताब्दी चूड़ामणि निघंटु में तमिल और संस्कृत के बीच एक व्यवस्थित संकलन किया गया। इसमें मुख्य रूप से चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वनस्पति विज्ञान से संबंधित शब्दावली का संकलन मिलता है। तथा खालिक-ए-बारी (16वीं शताब्दी)में मुगल काल के दौरान (1580 के आसपास) रचित फारसी और हिंदुस्तानी (पुरानी हिंदी/उर्दू) का पहला लोकप्रिय पद्यात्मक कोश था। अमीर खुसरो की परंपरा से प्रेरित इस ग्रंथ में लगभग 5,000 शब्दों का अनुवाद मिलता है।<ref name=":2" />
औपनिवेशिक युग (18वीं-19वीं शताब्दी) में जे. फर्गुसन (1772-73) ने रोमन .लिपि में पहली 'हिंदुस्तानी-अंग्रेजी डिक्शनरी' तैयार की, जिसमें बोलचाल के लगभग 4,000 शब्द शामिल थे। और विलियम कैरी ने (1810) सेरामपुर मिशनरी में 'बंगाली-अंग्रेजी डिक्शनरी' का प्रकाशन किया। 40,000 प्रविष्टियों वाला यह कोश क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बना। तथा जॉन क्लाइव (1830 के दशक) ने 'हिंदी-अंग्रेजी डिक्शनरी' (लगभग 20,000 शब्द) इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसमें पहली बार शब्दों के साथ व्याकरणिक टिप्पणियाँ भी जोड़ी गई थीं।<ref>{{Cite web|url=https://dsal.uchicago.edu/dictionaries/dasa-hindi/frontmatter/introduction.html?utm|title=प्रथम संस्कारण की भूमिका}}</ref>
1947 के बादः - केंद्रीय हिंदी निदेशालय (1950): निदेशालय ने 'हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश' के 12 खंड प्रकाशित किए, जिनका मुख्य केंद्र तकनीकी और प्रशासनिक शब्दावली का मानकीकरण करना था।<ref name=":2" />
सर्वभारती कोश (1960-70): इस परियोजना के अंतर्गत 22 भारतीय भाषाओं को आपस में जोड़ने का प्रयास किया गया, जिसमें हिंदी-तमिल और हिंदी-उर्दू जैसे भाषाई युग्मों पर विशेष कार्य हुआ।<ref name=":2" />
CIIL की भूमिका (1990 के दशक): मैसूर स्थित 'भारतीय भाषा संस्थान' (CIIL) ने 50 से अधिक द्विभाषी कोश विकसित किए, जो आदिवासी और लघु भाषाओं को मुख्यधारा की भाषाओं से जोड़ते हैं।
1947 के पश्चात स्वतंत्रता के बाद प्रशासनिक और शैक्षिक कार्यों के लिए भारतीय भाषाओं के कोश निर्माण में सरकारी संस्थाओं की भूमिका अहम रही।<ref name=":2">{{Cite web|url=https://news.prolingoeditors.com/2025/04/bharat-mein-shabdakosh-itihas.html|title=भारत में शब्दकोशों का गौरवशाली इतिहास: प्राचीन ज्ञान से डिजिटल युग तक का सफ़र है रोमांचक}}</ref>
== चुनौतियां ==
व्यावहारिक तथा सैद्धांतिक शब्दकोश कारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती द्विभाषी शब्दकोश के कार्यों को परिभाषित करना है। एक द्विभाषी शब्दकोश का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को एक भाषा से दूसरी भाषा में पाठ का अनुवाद करने में सहायता प्रदान करना, अथवा विदेशी भाषा के पाठों को समझने में उनकी मदद करना होता है।<ref name=":3" /> ऐसी स्थिती में उपयोगकर्ताओं को ऐसे शब्दकोश की आवश्यकता होगी जिसमें विभिन्न प्रकार के आँकड़े सम्मिलित हों, जिन्हें संबंधित कार्य के उद्देश्य से विशेष रूप से चुना गया हो। यदि उद्देश्य विदेशी भाषा के पाठों को समझना है, तो शब्दकोश में विदेशी भाषा के प्रविष्टि-शब्द तथा मातृभाषा में दी गई परिभाषाएँ होंगी, जिन्हें लक्षित उपयोगकर्ता-समूह द्वारा आसानी से समझे जाने योग्य रूप में प्रस्तुत किया गया होगा।
यदि शब्दकोश का उद्देश्य पाठों के अनुवाद में सहायता प्रदान करना है, तो उसमें केवल समतुल्य शब्द ही नहीं, बल्कि सहप्रयोग और वाक्यांश भी शामिल होने चाहिए, जिन्हें संबंधित लक्ष्य-भाषा में अनूदित किया गया हो। यह भी सिद्ध हो चुका है कि शिक्षार्थियों के लिए बनाए गए विशिष्ट अनुवाद शब्दकोशों में ऐसे आँकड़े भी सम्मिलित होने चाहिए, जो उपयोगकर्ताओं को जटिल वाक्य-संरचनाओं के अनुवाद में सहायता करें, साथ ही भाषा-विशिष्ट विधागत परंपराओं को समझने में भी सहायक हों।<ref name=":4" /><ref name=":4">{{Cite web|url=https://ebooks.inflibnet.ac.in/hinp09/chapter/%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8/?utm|title=कोशविज्ञान - भाषाविज्ञान}}</ref>मानक शब्दकोशीय पारिभाषिकी में, द्विभाषी शब्दकोश की परिभाषा “अनुवाद समतुल्य” प्रदान करती है—अर्थात् ऐसी अभिव्यक्ति, जो किसी एक भाषा में होते हुए दूसरी भाषा की किसी अभिव्यक्ति के समान अर्थ रखती हो, अथवा समान संदर्भ में प्रयुक्त की जा सकती हो, और इस प्रकार उसका अनुवाद करने में सक्षम होती है।<ref>{{Cite book|title=TRANSLATION EQUIVALENT,|last=McArthur|first=Tom|publisher=Concise Oxford Companion to the English Language.|year=(1998)}}</ref>ब्रिटिश शब्दकोशकार रॉबर्ट इल्सन, Collins-Robert French-English English-French Dictionary से उदाहरणात्मक परिभाषाएँ प्रस्तुत करते हैं। चूँकि फ़्रांसीसी chien = अंग्रेज़ी dog तथा dog = chien है, इसलिए chien और dog अनुवाद समतुल्य है ; परन्तु garde champêtre = rural policeman होने के बावजूद, क्योंकि rural policeman अंग्रेज़ी-फ़्रांसीसी शब्दकोश में सम्मिलित नहीं है, अतः ये सांस्कृतिक रूप से समतुल्य नहीं माने जाते।
दोनों अभिव्यक्तियों को उनके अवयवों के आधार पर पर्याप्त रूप से समझा जा सकता है, और फ़्रांसीसी में garde urbain या अंग्रेज़ी में urban policeman के साथ इनके स्पष्ट विरोध भी दिखाई देते हैं। तथापि, garde champêtre का फ़्रांसीसी शब्द-तंत्र के भीतर एक विशिष्ट तथा अप्रत्याशित विरोध है—यह gendarme के साथ विरोध स्थापित करता है। दोनों ही पुलिसकर्मी होते हैं, किन्तु gendarme राष्ट्रीय पुलिस बल का सदस्य होता है, जो तकनीकी रूप से फ़्रांसीसी सेना का भाग है, जबकि garde champêtre स्थानीय कम्यून द्वारा नियुक्त किया जाता है। Rural policeman में इस प्रकार का कोई विशिष्ट विरोध नहीं पाया जाता।<ref>{{Cite book|title="The Explanatory Technique of Translation"|last=Ilson|first=Robert|publisher=International Journal of Lexicography,|year=(2013)|pages=Vol. 26 No. 3, p. 390.}}</ref> द्विभाषी शब्दकोश के निर्माण का संभवतः सबसे जटिल पक्ष यह है कि शब्द-इकाइयाँ अथवा शब्द प्रायः एक से अधिक अर्थ-क्षेत्रों को आवृत्त करते हैं, किन्तु ये बहुविध अर्थ लक्ष्य-भाषा में किसी एक ही शब्द के साथ अनुरूपता नहीं रखते। उदाहरणार्थ, अंग्रेज़ी में ticket शब्द का प्रयोग सिनेमा-गृह में प्रवेश के लिए, बस या रेल-यात्रा की अनुमति के लिए, अथवा निर्धारित गति-सीमा का उल्लंघन करने पर पुलिस अधिकारी द्वारा दिए जाने वाले चालान के अर्थ में किया जा सकता है। स्पेनी भाषा में ये तीनों अर्थ अंग्रेज़ी की भाँति एक ही शब्द द्वारा व्यक्त नहीं होते, बल्कि इनके लिए भिन्न-भिन्न विकल्प प्रयुक्त होते हैं—जैसे boleto या entrada तथा infracción/multa; इसी प्रकार फ़्रांसीसी में billet या ticket तथा procès-verbal, और जर्मन में Eintrittskarte या Fahrkarte तथा Mahnung/Bußgeldbescheid।हाल के समय में द्विभाषी शब्दकोशों की प्रविष्टियों के अर्थ भेद को स्पष्ट करने के लिए एक स्वचालित विधि भी प्रस्तावित की गई है।
=== उपयोग ===
एक ही शब्द के कई अर्थ होने तथा उसके अनुवाद में भी कई अर्थों की समस्या को कम करने के लिए, किंतु अनिवार्यतः परस्पर अनुरूप न होने वाले अर्थों की समस्या को कम करने हेतु उपयोगकर्ता को विलोम खोज (reverse lookup) की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उदाहरणार्थ, अंग्रेज़ी और स्पेनी में ‘ticket’ शब्द के संदर्भ में, जब अंग्रेज़ी–स्पेनी शब्दकोश में ‘ticket’ के लिए ‘boleto’ तथा ‘infracción’ जैसे अनुवाद प्राप्त होते हैं, तब इन दोनों स्पेनी शब्दों को स्पेनी–अंग्रेज़ी खंड में पुनः खोजा जा सकता है। इससे यह निर्धारित करने में सहायता मिलती है कि इच्छित अर्थ किस शब्द से संबद्ध है। सामान्यतः, शब्दकोश-सॉफ़्टवेयर तथा ऑनलाइन शब्दकोशों की सहायता से इस प्रकार की विलोम खोज अधिक तीव्रता और सुविधा के साथ की जा सकती है।<ref name=":0" />
उपयोग की चरणबद्ध विधियाँ
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/प्रबोध कुमार गोविल
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चाहर धर्मेंद्र
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/* प्रबोध कुमार गोविल */ उत्तर
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text/x-wiki
=== [[:प्रबोध कुमार गोविल]] ===
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:{{la|1=प्रबोध कुमार गोविल}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|प्रबोध कुमार गोविल -विकिपीडिया -wikipedia}}
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चाहर धर्मेंद्र
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=== [[:प्रबोध कुमार गोविल]] ===
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Manish Khouriwal
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text/x-wiki
=== [[:प्रबोध कुमार गोविल]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
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सदस्य वार्ता:~2026-22457-40
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== अप्रैल 2026 ==
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:यह चर्चा पहले ही बंद हो चुकी है। कृपया इसे दोबारा न छेड़ें या इसमें बदलाव न करें। [[विशेष:योगदान/~2026-22457-40|~2026-22457-40]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-22457-40|वार्ता]]) 15:54, 12 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अभिदीप चौधरी
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/* अभिदीप चौधरी */ उत्तर
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=== [[:अभिदीप चौधरी]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
:{{la|1=अभिदीप चौधरी}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|अभिदीप चौधरी -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं।[[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 15:20, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
:साफ प्रचार लगता है। हटा देना चाहिए। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:19, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
=== [[:अभिदीप चौधरी]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
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:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|अभिदीप चौधरी -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
उल्लेखनीय नहीं।[[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjeev bot|वार्ता]]) 15:20, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
* साफ प्रचार लगता है। हटा देना चाहिए। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:19, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)
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Khushi200
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text/x-wiki
=== [[:शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
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:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|शेरू (फ़ोटोग्राफ़र) -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
यह लेख 'पेड पीआर' है। उल्लेखनीयता सिद्ध करने के लिए इसमें प्रायोजित संदर्भों का उपयोग किया गया है। यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:57, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते,
:नामांकन के लिए धन्यवाद।
:इस लेख में प्रयुक्त स्रोत स्वतंत्र एवं विश्वसनीय मीडिया प्रकाशनों से लिए गए हैं, जैसे ''The Patriot'', ''Inter Press Service (IPS)'', ''The Hans India'' और ''Punjab Kesari''। ये स्रोत विषय के जीवन और कार्य से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते हैं, जिससे इसका स्वतंत्र उल्लेख स्थापित होता है।
:लेख को तटस्थ दृष्टिकोण (Neutral Point of View) में लिखा गया है तथा इसमें किसी प्रकार की प्रचारात्मक भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। यदि किसी स्रोत की विश्वसनीयता या प्रासंगिकता पर विशेष आपत्ति हो, तो कृपया उसे इंगित करें, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके।
:लेख में सुधार की गुंजाइश हो सकती है, परंतु उपलब्ध स्रोतों के आधार पर विषय को पूर्णतः अनुपयुक्त या हटाने योग्य नहीं माना जाना चाहिए। अतः इसे हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उचित होगा।
:धन्यवाद।
[[सदस्य:Bhashaji|Bhashaji]] ([[सदस्य वार्ता:Bhashaji|वार्ता]]) 18:59, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* {{support}} नमस्कार,
लेख को "पेड पीआर" बताने का कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेख में प्रयुक्त प्रमुख स्रोत जैसे [[हंस इंडिया]], [[पंजाब केसरी]] ''The Patriot'' तथा ''[[इंटर प्रेस सर्विस]]
'' स्वतंत्र एवं संपादकीय रूप से नियंत्रित प्रकाशन हैं, जिन्हें सामान्यतः प्रायोजित सामग्री की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
इन स्रोतों में विषय का उल्लेख और कवरेज उपलब्ध है, विशेष रूप से [[इंटर प्रेस सर्विस]] में "emerging visual storytellers" के संदर्भ में, जो न्यूनतम उल्लेखनीयता का संकेत देता है। अतः विषय को पूर्णतः "पेड पीआर" कहना उचित नहीं प्रतीत होता।
लेख को तटस्थ दृष्टिकोण में लिखा गया है और इसमें प्रत्यक्ष प्रचारात्मक भाषा नहीं है। यह स्वीकार किया जा सकता है कि कुछ स्रोतों को और बेहतर किया जा सकता है, परंतु यह सुधार का विषय है, न कि हटाने का।
अतः लेख को हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उपयुक्त होगा।
धन्यवाद।
--[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] ([[सदस्य वार्ता:Khushi200|वार्ता]]) 09:42, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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/* शेरू (फ़ोटोग्राफ़र) */ उत्तर
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text/x-wiki
=== [[:शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)]] ===
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:{{la|1=शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|शेरू (फ़ोटोग्राफ़र) -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
यह लेख 'पेड पीआर' है। उल्लेखनीयता सिद्ध करने के लिए इसमें प्रायोजित संदर्भों का उपयोग किया गया है। यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:57, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते,
:नामांकन के लिए धन्यवाद।
:इस लेख में प्रयुक्त स्रोत स्वतंत्र एवं विश्वसनीय मीडिया प्रकाशनों से लिए गए हैं, जैसे ''The Patriot'', ''Inter Press Service (IPS)'', ''The Hans India'' और ''Punjab Kesari''। ये स्रोत विषय के जीवन और कार्य से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते हैं, जिससे इसका स्वतंत्र उल्लेख स्थापित होता है।
:लेख को तटस्थ दृष्टिकोण (Neutral Point of View) में लिखा गया है तथा इसमें किसी प्रकार की प्रचारात्मक भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। यदि किसी स्रोत की विश्वसनीयता या प्रासंगिकता पर विशेष आपत्ति हो, तो कृपया उसे इंगित करें, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके।
:लेख में सुधार की गुंजाइश हो सकती है, परंतु उपलब्ध स्रोतों के आधार पर विषय को पूर्णतः अनुपयुक्त या हटाने योग्य नहीं माना जाना चाहिए। अतः इसे हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उचित होगा।
:धन्यवाद।
[[सदस्य:Bhashaji|Bhashaji]] ([[सदस्य वार्ता:Bhashaji|वार्ता]]) 18:59, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* {{support}} नमस्कार,
लेख को "पेड पीआर" बताने का कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेख में प्रयुक्त प्रमुख स्रोत जैसे [[हंस इंडिया]], [[पंजाब केसरी]] ''The Patriot'' तथा ''[[इंटर प्रेस सर्विस]]
'' स्वतंत्र एवं संपादकीय रूप से नियंत्रित प्रकाशन हैं, जिन्हें सामान्यतः प्रायोजित सामग्री की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
इन स्रोतों में विषय का उल्लेख और कवरेज उपलब्ध है, विशेष रूप से [[इंटर प्रेस सर्विस]] में "emerging visual storytellers" के संदर्भ में, जो न्यूनतम उल्लेखनीयता का संकेत देता है। अतः विषय को पूर्णतः "पेड पीआर" कहना उचित नहीं प्रतीत होता।
लेख को तटस्थ दृष्टिकोण में लिखा गया है और इसमें प्रत्यक्ष प्रचारात्मक भाषा नहीं है। यह स्वीकार किया जा सकता है कि कुछ स्रोतों को और बेहतर किया जा सकता है, परंतु यह सुधार का विषय है, न कि हटाने का।
अतः लेख को हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उपयुक्त होगा।
धन्यवाद।
--[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] ([[सदस्य वार्ता:Khushi200|वार्ता]]) 09:42, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
:लेख में प्रयुक्त संदर्भ मुख्यतः गैर-स्वतंत्र प्रतीत होते हैं, जो विषय की उल्लेखनीयता स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उपलब्ध सामग्री स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है।
:अतः यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है और लेख को हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:33, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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चाहर धर्मेंद्र
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text/x-wiki
=== [[:शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
:{{la|1=शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|शेरू (फ़ोटोग्राफ़र) -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
यह लेख 'पेड पीआर' है। उल्लेखनीयता सिद्ध करने के लिए इसमें प्रायोजित संदर्भों का उपयोग किया गया है। यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:57, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते,
:नामांकन के लिए धन्यवाद।
:इस लेख में प्रयुक्त स्रोत स्वतंत्र एवं विश्वसनीय मीडिया प्रकाशनों से लिए गए हैं, जैसे ''The Patriot'', ''Inter Press Service (IPS)'', ''The Hans India'' और ''Punjab Kesari''। ये स्रोत विषय के जीवन और कार्य से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते हैं, जिससे इसका स्वतंत्र उल्लेख स्थापित होता है।
:लेख को तटस्थ दृष्टिकोण (Neutral Point of View) में लिखा गया है तथा इसमें किसी प्रकार की प्रचारात्मक भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। यदि किसी स्रोत की विश्वसनीयता या प्रासंगिकता पर विशेष आपत्ति हो, तो कृपया उसे इंगित करें, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके।
:लेख में सुधार की गुंजाइश हो सकती है, परंतु उपलब्ध स्रोतों के आधार पर विषय को पूर्णतः अनुपयुक्त या हटाने योग्य नहीं माना जाना चाहिए। अतः इसे हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उचित होगा।
:धन्यवाद।
[[सदस्य:Bhashaji|Bhashaji]] ([[सदस्य वार्ता:Bhashaji|वार्ता]]) 18:59, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* {{support}} नमस्कार,
लेख को "पेड पीआर" बताने का कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेख में प्रयुक्त प्रमुख स्रोत जैसे [[हंस इंडिया]], [[पंजाब केसरी]] ''The Patriot'' तथा ''[[इंटर प्रेस सर्विस]]
'' स्वतंत्र एवं संपादकीय रूप से नियंत्रित प्रकाशन हैं, जिन्हें सामान्यतः प्रायोजित सामग्री की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
इन स्रोतों में विषय का उल्लेख और कवरेज उपलब्ध है, विशेष रूप से [[इंटर प्रेस सर्विस]] में "emerging visual storytellers" के संदर्भ में, जो न्यूनतम उल्लेखनीयता का संकेत देता है। अतः विषय को पूर्णतः "पेड पीआर" कहना उचित नहीं प्रतीत होता।
लेख को तटस्थ दृष्टिकोण में लिखा गया है और इसमें प्रत्यक्ष प्रचारात्मक भाषा नहीं है। यह स्वीकार किया जा सकता है कि कुछ स्रोतों को और बेहतर किया जा सकता है, परंतु यह सुधार का विषय है, न कि हटाने का।
अतः लेख को हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उपयुक्त होगा।
धन्यवाद।
--[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] ([[सदस्य वार्ता:Khushi200|वार्ता]]) 09:42, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
* लेख में प्रयुक्त संदर्भ मुख्यतः गैर-स्वतंत्र प्रतीत होते हैं, जो विषय की उल्लेखनीयता स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उपलब्ध सामग्री स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है।
:अतः यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है और लेख को हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:33, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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Manish Khouriwal
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लेख रखा जाना चाहिए
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=== [[:शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=अप्रैल 2026}}
:{{la|1=शेरू (फ़ोटोग्राफ़र)}}
:{{गूगल|खोज|समाचार|पुस्तक|विद्वान|शेरू (फ़ोटोग्राफ़र) -विकिपीडिया -wikipedia}}
नामांकन के लिये कारण:
यह लेख 'पेड पीआर' है। उल्लेखनीयता सिद्ध करने के लिए इसमें प्रायोजित संदर्भों का उपयोग किया गया है। यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 12:57, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते,
:नामांकन के लिए धन्यवाद।
:इस लेख में प्रयुक्त स्रोत स्वतंत्र एवं विश्वसनीय मीडिया प्रकाशनों से लिए गए हैं, जैसे ''The Patriot'', ''Inter Press Service (IPS)'', ''The Hans India'' और ''Punjab Kesari''। ये स्रोत विषय के जीवन और कार्य से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते हैं, जिससे इसका स्वतंत्र उल्लेख स्थापित होता है।
:लेख को तटस्थ दृष्टिकोण (Neutral Point of View) में लिखा गया है तथा इसमें किसी प्रकार की प्रचारात्मक भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। यदि किसी स्रोत की विश्वसनीयता या प्रासंगिकता पर विशेष आपत्ति हो, तो कृपया उसे इंगित करें, ताकि आवश्यक सुधार किया जा सके।
:लेख में सुधार की गुंजाइश हो सकती है, परंतु उपलब्ध स्रोतों के आधार पर विषय को पूर्णतः अनुपयुक्त या हटाने योग्य नहीं माना जाना चाहिए। अतः इसे हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उचित होगा।
:धन्यवाद।
[[सदस्य:Bhashaji|Bhashaji]] ([[सदस्य वार्ता:Bhashaji|वार्ता]]) 18:59, 14 अप्रैल 2026 (UTC)
* {{support}} नमस्कार,
लेख को "पेड पीआर" बताने का कोई स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। लेख में प्रयुक्त प्रमुख स्रोत जैसे [[हंस इंडिया]], [[पंजाब केसरी]] ''The Patriot'' तथा ''[[इंटर प्रेस सर्विस]]
'' स्वतंत्र एवं संपादकीय रूप से नियंत्रित प्रकाशन हैं, जिन्हें सामान्यतः प्रायोजित सामग्री की श्रेणी में नहीं रखा जाता।
इन स्रोतों में विषय का उल्लेख और कवरेज उपलब्ध है, विशेष रूप से [[इंटर प्रेस सर्विस]] में "emerging visual storytellers" के संदर्भ में, जो न्यूनतम उल्लेखनीयता का संकेत देता है। अतः विषय को पूर्णतः "पेड पीआर" कहना उचित नहीं प्रतीत होता।
लेख को तटस्थ दृष्टिकोण में लिखा गया है और इसमें प्रत्यक्ष प्रचारात्मक भाषा नहीं है। यह स्वीकार किया जा सकता है कि कुछ स्रोतों को और बेहतर किया जा सकता है, परंतु यह सुधार का विषय है, न कि हटाने का।
अतः लेख को हटाने के बजाय सुधार के साथ बनाए रखना अधिक उपयुक्त होगा।
धन्यवाद।
--[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] ([[सदस्य वार्ता:Khushi200|वार्ता]]) 09:42, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
* लेख में प्रयुक्त संदर्भ मुख्यतः गैर-स्वतंत्र प्रतीत होते हैं, जो विषय की उल्लेखनीयता स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उपलब्ध सामग्री स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है।
:अतः यह विषय स्वतंत्र रूप से उल्लेखनीय नहीं है और लेख को हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:33, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
* {{support}} [[पंजाब केसरी]], [[हंस इंडिया]], '''Cinestaan''' संदर्भ देखने से ऐसा लग रहा की "पेड पीआर" दावा बिना प्रमाण के है। मुख्य स्रोत संपादकीय रूप से सामग्री स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों हैं लेख का टोन न्यूट्रल है। कमियों को सुधार से ठीक किया जा सकता है। लेख रखा जाना चाहिए।
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विंध्याचल मंडल
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text/x-wiki
[[Image:Uttar Pradesh administrative divisions-hi.svg|right|300px|thumb|उत्तर प्रदेश राज्य में प्रान्त के मंडल]]
'''विंध्याचल मंडल''' [[भारत]] में [[उत्तर प्रदेश]] प्रान्त का एक मंडल है। इसके अंतर्गत [[विंध्याचल जिला|विंध्याचल]],[[भदोही जिला|भदोही]],और [[सोनभद्र जिला|सोनभद्र]] जिले आते हैं।
{{उत्तर प्रदेश के मंडल}}
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के मण्डल]]
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अनुच्छेद 88 (भारत का संविधान)
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text/x-wiki
'''अनुच्छेद 88''' भारत के [[संविधान]] का एक अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद संविधान के भाग V से संबधित है इसमें [[संसद]] के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के [[अधिकार|अधिकारों]] से संबंधित है।
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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text/x-wiki
'''अनुच्छेद 88''' भारत के [[संविधान]] का एक अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद संविधान के भाग V से संबधित है इसमें [[संसद]] के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के [[अधिकार|अधिकारों]] से संबंधित है।
==पृष्ठभूमि==
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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/* पृष्ठभूमि */
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text/x-wiki
'''अनुच्छेद 88''' भारत के [[संविधान]] का एक अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद संविधान के भाग V से संबधित है इसमें [[संसद]] के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के [[अधिकार|अधिकारों]] से संबंधित है।
==पृष्ठभूमि==
अनुच्छेद 72(अनुच्छेद 88)के मसौदे पर 18 मई 1949 को बहस हुई । इसने भारत के मंत्रियों और अटॉर्नी-जनरल को संसद में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्रदान किया।
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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text/x-wiki
'''अनुच्छेद 88''' भारत के [[संविधान]] का एक अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद संविधान के भाग V से संबधित है इसमें [[संसद]] के सदनों के संबंध में मंत्रियों और भारत के महान्यायवादी के [[अधिकार|अधिकारों]] से संबंधित है।
==पृष्ठभूमि==
अनुच्छेद 72 (अनुच्छेद 88) के मसौदे पर 18 मई 1949 को बहस हुई । इसने भारत के मंत्रियों और अटॉर्नी-जनरल को संसद में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्रदान किया।
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान)
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सन्दर्भ
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wikitext
text/x-wiki
{{भारत का संविधान}}
{{ज्ञानसन्दूक संविधान
| title_orig = भारत का संविधान
| part = [[भाग 5 (भारत का संविधान)|भाग 5]]
| subject = संघ न्यायपालिका
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'''[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] का अनुच्छेद 141''' न्यायपालिका की उस केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करता है, जिसके माध्यम से देश में विधि की एकरूपता, निश्चितता और स्थिरता सुनिश्चित की जाती है। यह प्रावधान स्थापित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि पूरे भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।<ref name=":1">{{Cite web |title=Article 141: Law declared by Supreme Court to be binding on all courts |url=https://www.constitutionofindia.net/articles/article-141-law-declared-by-supreme-court-to-be-binding-on-all-courts/ |access-date=2025-12-16 |website=भारत का संविधान |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite news|title=सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस देश की सभी अदालतों के लिए बाध्यकारी : सुप्रीम कोर्ट |url=https://hindi.livelaw.in/category/news-updates/all-courts-in-this-country-are-bound-by-the-judgment-of-the-apex-court-says-supreme-court-165242|access-date=31 अक्टूबर 2020 |work=livelaw.in}}</ref> इस प्रकार यह अनुच्छेद न केवल न्यायिक अनुशासन को स्थापित करता है, बल्कि न्यायिक प्रणाली में एक सुसंगत और सुव्यवस्थित विधिक परंपरा के विकास को भी सुनिश्चित करता है।
==पृष्ठभूमि==
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह चुनौती थी कि एक विशाल और विविधतापूर्ण देश में विधि की व्याख्या और उसका अनुप्रयोग एक समान कैसे रखा जाए। यदि विभिन्न न्यायालय समान विषयों पर भिन्न-भिन्न निर्णय देने लगें, तो इससे विधिक अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। इसी समस्या के समाधान के रूप में अनुच्छेद 141 की परिकल्पना की गई।
यह प्रावधान अंग्रेज़ी विधि परंपरा के “[[पूर्वनिर्णय|नज़ीर]]” के सिद्धांत से प्रेरित है,<ref>{{Cite web |last=मिश्रा |first=अनुषा अग्रवाल और प्रीशा |date=2025-11-15 |title=Diverge and Conquer: Why Judicial Divergence is Healthy for the Indian Judicial Framework |url=https://www.rsrr.in/post/diverge-and-conquer-why-judicial-divergence-is-healthy-for-the-indian-judicial-framework |access-date=2025-12-16 |website= आरएसआरआर |language=en}}</ref><ref name=":0">{{cite book |last1=चौधरी |first1=सुजीत |url=https://www.google.com/books/edition/The_Oxford_Handbook_of_the_Indian_Consti/s5EDDAAAQBAJ?hl=en&gbpv=0 |title=The Oxford Handbook of the Indian Constitution |last2=खोसला |first2=माधव |last3=मेहता |first3=प्रताप भानु |date= मई 3, 2016 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |isbn=978-0-19-105862-2 |page= |access-date= दिसंबर 16, 2025}}</ref> जिसके अनुसार उच्चतम न्यायालय के निर्णय निम्न न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक और बाध्यकारी होते हैं। भारतीय संदर्भ में इसे संवैधानिक मान्यता देकर यह सुनिश्चित किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या ही विधि की अंतिम और प्रामाणिक व्याख्या मानी जाए।<ref name=":1" /><ref>{{Cite news |last=राजगोपाल |first=कृष्णदास |date=2023-01-12 |title=Under Constitution, law declared by the Supreme Court is binding on all |url=https://www.thehindu.com/news/national/under-constitution-law-declared-by-the-supreme-court-is-binding-on-all/article66369225.ece |access-date=2025-12-16 |work=द हिंदू |language=en-IN}}</ref>
अनुच्छेद 141 को अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका) और अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय न केवल अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है, बल्कि उसकी विधिक व्याख्याएँ पूरे देश में न्याय के मानक को निर्धारित करती हैं।
इसके अतिरिक्त, “घोषित विधि” का आशय केवल निर्णय के अंतिम परिणाम से नहीं, बल्कि उस निर्णय में निहित विधिक तर्क और सिद्धांतों से भी है, जिन्हें न्यायालय ने प्रतिपादित किया होता है।
==मूल पाठ==
{{pull quote|सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्य-क्षेत्र के भीतर स्थित सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७}}</ref><ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ. जी. नारायण राजू|title=भारत का संविधान|url=https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf|access-date=9 नवम्बर 2015|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड|page=79}}</ref>}}
{{pull quote|Law declared by Supreme Court to be binding on all courts<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४६}}</ref>}}
==उपयोग==
इस प्रावधान का उपयोग विशेष रूप से उन मामलों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय किसी संवैधानिक या विधिक प्रश्न पर अंतिम व्याख्या प्रस्तुत करता है। उदाहरणस्वरूप, मौलिक अधिकारों की परिधि,<ref>{{Cite news|title=निशिकांत दुबे के बयान पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने दी नसीहत, बोले- संविधान सर्वोच्च, कोई कानून से ऊपर नही|url=https://www.abplive.com/news/india/nishikant-dubey-s-controversial-statement-on-supreme-court-former-judge-ashok-kumar-ganguly-says-nobody-is-above-law-2928390|access-date=20 अप्रैल 2025 |work=एबीपी लाइव}}</ref> अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,<ref>{{Cite news|title=पहलगाम हमले पर 'X' पोस्ट 'PM के खिलाफ', उनके नाम का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
|url=https://hindi.livelaw.in/allahabad-highcourt/x-posts-on-pahalgam-attack-against-pm-his-name-used-disrespectfully-allahabad-hc-denies-anticipatory-bail-to-singer-neha-rathore-312427|access-date=6 दिसंबर 2025 |work=livelaw.in}}</ref> गोपनीयता के अधिकार अथवा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर दिए गए निर्णय पूरे देश में न्याय के मानक निर्धारित करते हैं। इसके पश्चात उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों को उन्हीं सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय देना होता है।
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==टिप्पणी==
अनुच्छेद 141 भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एकरूपता और स्थिरता का आधार स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि देश के विभिन्न भागों में स्थित न्यायालय समान परिस्थितियों में समान विधिक सिद्धांतों का पालन करें, जिससे न्याय में समानता और निष्पक्षता बनी रहे।
हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय स्वयं अपने पूर्व निर्णयों से बंधा हुआ नहीं होता और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें परिवर्तित या पुनर्व्याख्यायित कर सकता है। यह लचीलापन न्याय को समयानुकूल और प्रगतिशील बनाए रखने में सहायक होता है।
इस प्रकार अनुच्छेद 141 न केवल विधिक अनुशासन का आधार है, बल्कि यह भारतीय न्यायपालिका को एक सुसंगत, विश्वसनीय और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।<ref>{{Cite book | title=भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान)
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==बाहरी कड़ियाँ==
{{Wikisource|1=भारत का संविधान}}
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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चाहर धर्मेंद्र
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विकि कड़ियाँ
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wikitext
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{{भारत का संविधान}}
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| part = [[भाग 5 (भारत का संविधान)|भाग 5]]
| subject = संघ न्यायपालिका
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'''[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]] का अनुच्छेद 141''' न्यायपालिका की उस केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करता है, जिसके माध्यम से देश में विधि की एकरूपता, निश्चितता और स्थिरता सुनिश्चित की जाती है। यह प्रावधान स्थापित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि पूरे भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।<ref name=":1">{{Cite web |title=Article 141: Law declared by Supreme Court to be binding on all courts |url=https://www.constitutionofindia.net/articles/article-141-law-declared-by-supreme-court-to-be-binding-on-all-courts/ |access-date=2025-12-16 |website=भारत का संविधान |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite news|title=सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस देश की सभी अदालतों के लिए बाध्यकारी : सुप्रीम कोर्ट |url=https://hindi.livelaw.in/category/news-updates/all-courts-in-this-country-are-bound-by-the-judgment-of-the-apex-court-says-supreme-court-165242|access-date=31 अक्टूबर 2020 |work=livelaw.in}}</ref> इस प्रकार यह अनुच्छेद न केवल न्यायिक अनुशासन को स्थापित करता है, बल्कि न्यायिक प्रणाली में एक सुसंगत और सुव्यवस्थित विधिक परंपरा के विकास को भी सुनिश्चित करता है।
==पृष्ठभूमि==
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह चुनौती थी कि एक विशाल और विविधतापूर्ण देश में विधि की व्याख्या और उसका अनुप्रयोग एक समान कैसे रखा जाए। यदि विभिन्न न्यायालय समान विषयों पर भिन्न-भिन्न निर्णय देने लगें, तो इससे विधिक अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। इसी समस्या के समाधान के रूप में अनुच्छेद 141 की परिकल्पना की गई।
यह प्रावधान अंग्रेज़ी विधि परंपरा के “[[पूर्वनिर्णय|नज़ीर]]” के सिद्धांत से प्रेरित है,<ref>{{Cite web |last=मिश्रा |first=अनुषा अग्रवाल और प्रीशा |date=2025-11-15 |title=Diverge and Conquer: Why Judicial Divergence is Healthy for the Indian Judicial Framework |url=https://www.rsrr.in/post/diverge-and-conquer-why-judicial-divergence-is-healthy-for-the-indian-judicial-framework |access-date=2025-12-16 |website= आरएसआरआर |language=en}}</ref><ref name=":0">{{cite book |last1=चौधरी |first1=सुजीत |url=https://www.google.com/books/edition/The_Oxford_Handbook_of_the_Indian_Consti/s5EDDAAAQBAJ?hl=en&gbpv=0 |title=The Oxford Handbook of the Indian Constitution |last2=खोसला |first2=माधव |last3=मेहता |first3=प्रताप भानु |date= मई 3, 2016 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |isbn=978-0-19-105862-2 |page= |access-date= दिसंबर 16, 2025}}</ref> जिसके अनुसार उच्चतम न्यायालय के निर्णय निम्न न्यायालयों के लिए मार्गदर्शक और बाध्यकारी होते हैं। भारतीय संदर्भ में इसे संवैधानिक मान्यता देकर यह सुनिश्चित किया गया कि सर्वोच्च न्यायालय की व्याख्या ही विधि की अंतिम और प्रामाणिक व्याख्या मानी जाए।<ref name=":1" /><ref>{{Cite news |last=राजगोपाल |first=कृष्णदास |date=2023-01-12 |title=Under Constitution, law declared by the Supreme Court is binding on all |url=https://www.thehindu.com/news/national/under-constitution-law-declared-by-the-supreme-court-is-binding-on-all/article66369225.ece |access-date=2025-12-16 |work=द हिंदू |language=en-IN}}</ref>
अनुच्छेद 141 को अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका) और अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय न केवल अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है, बल्कि उसकी विधिक व्याख्याएँ पूरे देश में न्याय के मानक को निर्धारित करती हैं।
इसके अतिरिक्त, “घोषित विधि” का आशय केवल निर्णय के अंतिम परिणाम से नहीं, बल्कि उस निर्णय में निहित विधिक तर्क और सिद्धांतों से भी है, जिन्हें न्यायालय ने प्रतिपादित किया होता है।
==मूल पाठ==
{{pull quote|सर्वोच्च न्यायालय द्वारा घोषित विधि भारत के राज्य-क्षेत्र के भीतर स्थित सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगी।<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७}}</ref><ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ. जी. नारायण राजू|title=भारत का संविधान|url=https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf|access-date=9 नवम्बर 2015|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड|page=79}}</ref>}}
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==उपयोग==
इस प्रावधान का उपयोग विशेष रूप से उन मामलों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है, जहाँ सर्वोच्च न्यायालय किसी संवैधानिक या विधिक प्रश्न पर अंतिम व्याख्या प्रस्तुत करता है। उदाहरणस्वरूप, मौलिक अधिकारों की परिधि,<ref>{{Cite news|title=निशिकांत दुबे के बयान पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने दी नसीहत, बोले- संविधान सर्वोच्च, कोई कानून से ऊपर नही|url=https://www.abplive.com/news/india/nishikant-dubey-s-controversial-statement-on-supreme-court-former-judge-ashok-kumar-ganguly-says-nobody-is-above-law-2928390|access-date=20 अप्रैल 2025 |work=एबीपी लाइव}}</ref> अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,<ref>{{Cite news|title=पहलगाम हमले पर 'X' पोस्ट 'PM के खिलाफ', उनके नाम का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
|url=https://hindi.livelaw.in/allahabad-highcourt/x-posts-on-pahalgam-attack-against-pm-his-name-used-disrespectfully-allahabad-hc-denies-anticipatory-bail-to-singer-neha-rathore-312427|access-date=6 दिसंबर 2025 |work=livelaw.in}}</ref> गोपनीयता के अधिकार अथवा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर दिए गए निर्णय पूरे देश में न्याय के मानक निर्धारित करते हैं। इसके पश्चात उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों को उन्हीं सिद्धांतों के अनुरूप निर्णय देना होता है।
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==टिप्पणी==
अनुच्छेद 141 भारतीय न्यायिक व्यवस्था में एकरूपता और स्थिरता का आधार स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि देश के विभिन्न भागों में स्थित न्यायालय समान परिस्थितियों में समान विधिक सिद्धांतों का पालन करें, जिससे न्याय में समानता और निष्पक्षता बनी रहे।
हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय स्वयं अपने पूर्व निर्णयों से बंधा हुआ नहीं होता और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें परिवर्तित या पुनर्व्याख्यायित कर सकता है। यह लचीलापन न्याय को समयानुकूल और प्रगतिशील बनाए रखने में सहायक होता है।
इस प्रकार अनुच्छेद 141 न केवल विधिक अनुशासन का आधार है, बल्कि यह भारतीय न्यायपालिका को एक सुसंगत, विश्वसनीय और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।<ref>{{Cite book | title=भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान)
|url=https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC|publisher =भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग| date= 2014}}</ref>
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://www.sci.gov.in/hi/%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8/ संविधान-विधि के स्त्रोत].sci.gov.in
{{Wikisource|1=भारत का संविधान}}
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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गुरु ब्रह्मानंद जयंती
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AMAN KUMAR
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text/x-wiki
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{{Infobox holiday
| holiday_name = गुरु ब्रह्मानंद जयंती
| type = वर्जित
| image = Guru Brahmanand Statue at Kaimla.jpg
| caption = [[कैमला]] में [[गुरु ब्रह्मानंद]] की प्रतिमा
| official_name = गुरु ब्रह्मानंद जयंती
| nickname = ब्रह्मानंद जयंती, गुरु ब्रह्मानंद जयंती
| observedby = मुख्य रूप से [[हरियाणा|हरियाणवी]] <br/> [[भारत]] के अन्य भागों में भी मनाया जाता है।
| significance = [[गुरु ब्रह्मानंद]] की जयंती मनाता है।
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| relatedto = [[गुरु ब्रह्मानंद]], [[रोड़]]
}}
'''गुरु ब्रह्मानंद जयंती''', जिसे '''ब्रह्मानंद जयंती''' के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय राज्य [[हरियाणा]] में हर साल 24 दिसंबर को मनाया जाने वाला एक त्योहार और प्रतिबंधित अवकाश है। यह त्योहार भारतीय गुरु, समाज सुधारक और दार्शनिक [[गुरु ब्रह्मानंद]] के जन्म का स्मरणोत्सव मनाने के लिए मनाया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/cities/chandigarh-news/haryana-cm-announces-development-grants-renames-village-during-guru-brahmanand-birth-anniversary-101766516000169.html|title=Haryana CM announces development grants, renames village during Guru Brahmanand birth anniversary|date=2025-12-24|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/haryana/jind/nine-buses-will-go-to-kaithal-for-the-state-level-guru-brahmanand-jayanti-celebrations-jind-news-c-199-1-sroh1006-145831-2025-12-23|title=Jind News: राज्य स्तरीय गुरु ब्रह्मानंद जयंती समारोह में नौ बसें जाएंगी कैथल|website=Amar Ujala|language=hi|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://haryana.punjabkesari.in/haryana/news/haryana-government-declare-restricted-holiday-on-guru-brahmanand-jayanti-2079440|title=Restricted Holiday In Haryana: हरियाणा में आज सरकारी दफ्तरों समेत बोर्ड, निगमों में रहेगी छुट्टी, जानिए वजह|date=2024-12-24|website=punjabkesari|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/articles/haryana-school-holidays-in-2026-download-pdf-1800007204-1|title=Haryana School Holidays in 2026: Download Complete Public Holiday Calendar PDF|date=2026-01-07|website=Jagranjosh.com|language=en|access-date=2026-04-15}}</ref> लोग इस दिन को बड़े समारोहों और जुलूसों के साथ मनाते हैं।
==पृष्ठभूमि==
[[File:Guru Brahmanand.jpg|thumb|left|[[गुरु ब्रह्मानंद]] (1908–1973)]]
===तिथि===
यह दिन भारतीय गुरु, गुरु ब्रह्मानंद के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, जिनका जन्म 24 दिसंबर 1908 को हुआ था।
===इतिहास===
यद्यपि इस तिथि के उत्सव की शुरुआत का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन उनके जन्मस्थान के लोगों और उनके अनुयायियों द्वारा इसे चुहार माजरा और [[कैमला]] में मनाया जाता था। बाद में, रोड़ महासभा ने [[रोड़|रोड़ों]] को एकजुट करने और पूरे भारत में [[रोड़|रोड़ों]] के लिए एक सर्वव्यापी पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से इसे लोकप्रिय बनाया।<ref>{{Cite web|url=https://www.tribuneindia.com/news/haryana/kaithal-village-renamed-after-guru-brahmanand/|title=Kaithal village renamed after Guru Brahmanand|website=The Tribune|language=en|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://haryana.punjabkesari.in/haryana/news/cm-saini-unveiled-a-treasure-trove-of-gifts-2265624|title=कैथल के गांव चुहड़ माजरा का नाम बदल ब्रह्मानंद माजरा करने सहित कई घोषणाएं कर CM ने खोला सौगातों का पिटारा|date=2025-12-24|website=punjabkesari|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://haryana.punjabkesari.in/chandigarh/news/guru-brahmanand-jayanti-will-be-celebrated-at-the-government-level-2261705|title=सरकारी स्तर पर मनाई जाएगी गुरु ब्रह्मानंद जयंती, स्पीकर कल्याण कर रहे लगातार बैठकें|date=2025-12-16|website=punjabkesari|access-date=2026-04-15}}</ref>
==समारोह==
गुरु ब्रह्मानंद जयंती [[हरियाणा]] में एक सीमित अवकाश है, जहां [[कैथल]] और [[करनाल]] जिलों में गुरु ब्रह्मानंद के सम्मान में विशेष पूजा-अर्चना और शोभायात्रा के साथ जुलूस और रैलियां निकाली जाती हैं। [[उत्तराखंड]] और [[पश्चिमी उत्तर प्रदेश]] में भी यह दिवस मनाया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/haryana/kurukshetra/guru-brahmanand-jayanti-will-be-celebrated-on-23rd-in-chuhadmajra-sudha-kurukshetra-news-c-45-1-kur1007-147133-2025-12-19|title=चुहड़माजरा में 23 को मनाई जाएगी गुरु ब्रह्मानंद जयंती : सुधा|website=Amar Ujala|language=hi|access-date=2026-04-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://haryana.punjabkesari.in/haryana/news/birth-anniversary-of-saint-guru-brahmanand-will-be-celebrated-state-level-2264785|title=23 दिसंबर को राज्य स्तर पर मनाई जाएगी संत गुरु ब्रह्मानंद की जयंती, हरविंद्र कल्याण की अगुवाई में होगा भव्य आयोजन|date=2025-12-22|website=punjabkesari|access-date=2026-04-15}}</ref>
==यह भी देखें==
* [[अंबेडकर जयंती]]
==संदर्भ==
{{Reflist}}
==बाहरी संबंध==
{{Commons category}}
[[श्रेणी:भारत में त्यौहार]]
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वार्ता:पिण्डार नदी
1
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2026-04-16T18:46:53Z
SM7
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सहमति
6541366
wikitext
text/x-wiki
== स्थानान्तरण अनुरोध 15 अप्रैल 2026 ==
{{नाम बदलें/dated|पिंडर नदी}}
[[:पिण्डार नदी]] → {{no redirect|पिंडर नदी}} – स्थानांतरण के लिए संदर्भ-
*[https://www.livehindustan.com/uttarakhand/story-garhwal-pindar-river-water-poured-into-kumaon-kosi-river-jal-jeevan-mission-6775827.html लाइव हिन्दुस्तान]
* [https://www.jagran.com/uttarakhand/almora-pindar-river-water-advocates-for-release-in-nonviolent-rivers-19447355.html दैनिक जागरण]
* [https://www.drishtiias.com/hindi/state-pcs-current-affairs/pindari-glacier-to-make-kumaon-s-drying-rivers-sadaneera दृष्टि आईएएस]
इन संदर्भों के अनुसार इसका नाम स्थानांतरण करके [[पिंडर नदी]] करना चाहिए [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:52, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपका अनुरोध बिल्कुल सही है। नाम बदल देना चाहिए। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:57, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
* [https://www.google.co.in/books/edition/Prachin_Madhya_Himalaya_izkphu_e_fgeky/SeKkhjTwMbcC?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B0%20%E0%A4%A8%E0%A4%A6%E0%A5%80&pg=PA8&printsec=frontcover पुस्तकीय स्रोत भी] इस वर्तनी को ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ किताबों में मुझे वर्तमान शीर्षक भी मिला। फिर भी इस नाम बदलाव को मेरी सहमति है। संभवतः लेख निर्माता ने यह वर्तनी इसके उद्गम के नाम के कारण चुना होगा, क्योंकि जिस हिमनद से यह नदी निकलती है उसे पिंडारी ग्लेशियर कहा जाता है। --[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 18:46, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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प्रमाणित अनुवाद
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Raushan Raj JNU
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'''प्रमाणित [[अनुवाद]]''' लक्ष्य भाषा क्षेत्राधिकार की आवश्यकताओं के अनुसार स्रोत पाठ के अर्थ को दूसरी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे इसे औपचारिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।अनुवादक इसकी सटीकता के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ये आवश्यकताएँ देश-दर-देश व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। जबकि कुछ देश केवल राज्य द्वारा नियुक्त अनुवादकों को इस तरह के अनुवाद करने की अनुमति देते हैं, वहीं कुछ अन्य देश किसी भी सक्षम द्विभाषी व्यक्ति द्वारा किए गए अनुवाद को स्वीकार कर लेते हैं। इन दो व्यापक सीमाओं के बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ किसी भी पेशेवर अनुवादक द्वारा सही प्रमाण पत्र के साथ एक प्रमाणित अनुवाद किया जा सकता है (जिसमें विशिष्ट अनुवाद संघों की सदस्यता या कुछ योग्यताएँ शामिल हो सकती हैं) ।
अंग्रेजी बोलने वाले देश, जैसे कि [[यूनाइटेड किंगडम]], संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]], के स्पेक्ट्रम सख्त या थोड़े अनौपचारिक होते हैं, जिसमें अनुवादक प्रमाणित अनुवाद की अनुशंसा अपने आधिकारिक लेटर पैड आदि पर करता है जिसमें उक्त प्रमाणित अनुवाद की आवश्यकता, अनुवादक का विवरण एवं हस्ताक्षर दिनांक के साथ उपेक्षित होता है।
यह एक प्रकार का प्रमाणिकरण है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों, जैसे कि गृह कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है।
ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों में इस संबंध में बहुत सख्त कानून हैं कि कौन प्रमाणित अनुवाद जारी कर सकता है, जिसमें अधिकांश आधिकारिक प्रमाणित अनुवादकों की नियुक्ति उनके आधार पर स्थानीय राज्य-विनियमित योग्यता प्राप्त करने पर की जाती है।
== कानूनी आवश्यकताएं ==
कानूनी और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए, [[साक्ष्य विधि|साक्ष्य दस्तावेज]] और अन्य आधिकारिक दस्तावेज आमतौर पर [[राजभाषा|आधिकारिक भाषा]] ([[अधिकारिता|अधिकार क्षेत्र]] की भाषा) में आवश्यक होते हैं।
कुछ [[देश]] में, ऐसे दस्तावेजों के अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि एक [[अनुवाद|अनुवादक]] [[शपथ]] लेकर यह प्रमाणित करे कि यह(अनूदित प्रमाणित अनुवाद) स्रोत पाठ के कानूनी समकक्ष है। अक्सर, केवल एक विशेष वर्ग के अनुवादकों को ही ऐसी शपथ लेने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में, अनुवाद को कानूनी समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार किया जाता है जब इसके साथ इसकी मूल या शपथ या प्रमाणित प्रति संलग्न हो।
भले ही कोई अनुवादक कानूनी अनुवाद में माहिर हो या अपने देश में एक वकील हो, यह जरूरी नहीं कि वे एक प्रमाणित अनुवादक बन जाए। कानूनी समतुल्यता में अनुवाद करने की प्रक्रिया देश-दर-देश अलग-अलग होती है।
=== अर्जेंटीना ===
स्थानीय कानूनों के अनुपालन में, स्पेनिश के अलावा अन्य भाषाओं में लिखे गए सभी दस्तावेजों का स्थानीय कानूनों के अनुसार एक प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा स्पेनिश में अनुवाद किया जाना चाहिए। आम तौर पर, अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेजों (व्यक्तिगत कागजात और कुछ वाणिज्यिक अनुबंधों सहित) का अनुवाद और हस्ताक्षर एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसका मुहर और हस्ताक्षर उस संबंधित पेशेवर संघ द्वारा प्रमाणित हो जो अनुवादक का लाइसेंस जारी करता हो। सभी निजी व्यक्ति, कंपनियां, न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभाग विदेशी भाषा में दस्तावेजों या बयानों के संबंध में विभिन्न कानूनों के अधीन हैं, जैसे कि अर्जेंटीना सिविल और वाणिज्यिक संहिता, अर्जेंटीना कोड ऑफ सिविल एंड क्रिमिनल प्रोसीजर, अन्य।<ref>{{Cite web|url=http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|title=Colegio de Traductores Públicos de la Ciudad de Buenos Aires|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001142704/http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|archive-date=October 1, 2009|access-date=March 10, 2010}}</ref> "पब्लिक ट्रांसलेटर" के रूप में प्रमाणित होने के लिए, उम्मीदवारों को "ट्रेडकटोर पब्लिक"/"ट्रेडकटा पब्लिक" की विश्वविद्यालयी डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है।
=== ऑस्ट्रिया ===
शपथ और प्रमाणित विशेषज्ञ, दुभाषिया और अनुवादक अधिनियम #137/1995 (एसडीजी) की धारा 14 के अनुसार, क्षेत्रीय अदालतें [[जर्मन भाषा|जर्मन]] और किसी भी भाषा (सांकेतिक भाषा सहित) के बीच अनुवाद के लिए ऐसे किसी भी प्रमाणित अनुवादकों को नियुक्त करने के हकदार हैं, जिन्होंने एक आधिकारिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अदालत में शपथ ली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|title=SV- und Dolmetschergergesetz|archive-url=https://web.archive.org/web/20190306234811/https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|archive-date=2019-03-06|access-date=2019-03-06}}</ref> प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को किसी विश्वविद्यालय से अनुवाद अध्ययन में स्नातक की डिग्री के साथ-साथ अनुवादक या दुभाषिया के रूप में कम से कम 5 वर्षों के अनुभव या कम से कम 2 वर्षों के अनुभव का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। हालांकि ज्यादातर "गेरिच्ट्सडोल्मेट्सचर" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जबकि उसका सही नाम "ऑलजेमिन बीडेटे/आर उंड गेरिचट्लिच ज़र्टिफाइज़िएर्ट/आर डॉल्मेट्सचर/इन" है। शपथ लिए हुए अनुवादक मूल अनुवाद पर हस्ताक्षर करके और उन पर मुहर लगाकर सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने के हकदार हैं। अनुवादों पर उनके हस्ताक्षर के आगे नोटराइजेशन की आवश्यकता नहीं है, और शपथ लेने वाले अनुवादक एक '''अपोस्टिल''' को जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। पुलिस को सलाह दी जाती है कि जब भी संभव हो भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए दुभाषियों को शामिल करें। ऑस्ट्रिया में अधिकांश सार्वजनिक अधिकारी दस्तावेजों के अनुवाद को कानूनी रूप से समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार करते हैं जब दी गई भाषा के लिए एक शपथ दुभाषिया द्वारा सील और हस्ताक्षर किए जाते हैं।
यदि कोई दुभाषिया नियमित रूप से पेशेवर प्रशिक्षण में भाग नहीं लेगा तो प्राधिकरण समाप्त हो जाएगा।
=== बेल्जियम ===
"शपथ अनुवादक" (एकल [[डच भाषा|डच]] beëdigd vertaler, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] transtuter assermenté अल्लतु "शपथ दुभाषिया" (एकल [[डच भाषा|डच]] beädigd tolk, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] interprète assermente) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस न्यायिक जिले के प्रथम उदाहरण की शपथ लेते हैं जिसमें उनका निवास स्थान है। अतीत में सभी न्यायिक जिलों में "शपथ" का दर्जा पाने के इच्छुक अनुवादकों और दुभाषियों की क्राउन प्रॉसिक्यूटर द्वारा उपयुक्तता के लिए जांच की जाती थी। उम्मीदवार को शपथ लेने के लिए भाषा संयोजनों(किस भाषा से, किस भाषा में अनुवाद करेंगे) बताना होगा। अनुवादक/दुभाषिया की डिग्री को आमतौर पर योग्यता का पर्याप्त प्रमाण माना जाता है। भाषा संयोजनों की कोई सीमा नहीं है जिन्हें पहचाना जा सकता है।
हालांकि, एक अवैध अप्रवासी से जुड़े घोटाले के बाद, जिसने शपथ अनुवादक का दर्जा प्राप्त किया था, [[एंटवर्प]] में प्रथम बार के न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने एक प्रयोगात्मक योजना शुरू की, जिसके तहत शपथ लेने वाले अनुवादकों और दुभाषियों को न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और परीक्षा में उपस्थित होना पड़ता है। भाषा कानूनों की अपनी व्याख्या के आधार पर, उसी राष्ट्रपति ने यह भी फैसला सुनाया कि एक शपथ अनुवादक/दुभाषिया के दर्जे के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र भाषा संयोजन वे थे जिनमें डच या तो मूल भाषा या लक्ष्य भाषा थी। बेल्जियम के अन्य न्यायिक जिलों द्वारा अभी तक इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया है।
=== ब्राजील ===
आधिकारिक दस्तावेजों का अनुवाद केवल सार्वजनिक अनुवादकों और दुभाषियों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा प्रमाणित और मान्यता प्राप्त हैं। आवेदकों को उक्त भाषाओं मेें मौखिक और लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। पंजीकरण संख्या प्राप्त करने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जाती है, जिसे प्रत्येक अनुवाद के शीर्षक में सूचित किया जाना चाहिए।
जब उक्त भाषाओं के लिए कोई सार्वजनिक अनुवादक पंजीकृत नहीं होता है, तो एकल अनुवाद कार्य करने के लिए वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा अस्थायी अनुवादकों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री भी अनुवाद शुल्क निर्धारित करती है।
यद्यपि सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक/दुभाषिया को पंजीकरण की स्थिति में रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुवाद पूरे देश में मान्य हैं। सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक के निवास से अलग शहरों और राज्यों में संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अनुवादक के हस्ताक्षर के नोटरी सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
विदेशी दस्तावेजों को अनुवाद से पहले ब्राजील के वाणिज्य दूतावास या दूतावास द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यदि विदेशी देश की संस्था या सरकारी एजेंसी आवश्यक समझे तो विदेशी भाषा में अनूदित आधिकारिक दस्तावेजों में ब्राजील के विदेश मंत्रालय द्वारा सत्यापित सार्वजनिक शपथ अनुवादक के हस्ताक्षर आवश्यक होता है।[1]
=== कनाडा ===
दस्तावेजों का आधिकारिक अनुवाद दो तरीकों में से एक तरीके से किया जा सकता है। प्रमाणित अनुवाद, एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा पूरा किए जाते हैं और अनुवादक की घोषणा, हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापित होते हैं। "प्रमाणित अनुवादक" का पद कनाडा में एक संरक्षित पद है, जिसमें केवल वे व्यक्ति जो प्रांतीय अनुवादक संघ के सक्रिय सदस्य हैं और एक प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इस पद के लिए योग्य हैं और वही प्रमाणित अनुवाद कर सकते हैं। कनाडा में आधिकारिक अनुवाद प्रस्तुत करने का एक वैकल्पिक तरीका यह है कि अनुवाद का शपथ पत्र लेने के लिए एक नोटरी पब्लिक या आयुक्त की उपस्थिति में अनुवादक द्वारा हस्ताक्षरित एक शपथ पत्र संलग्न करना पड़ता है।
=== जर्मनी ===
जर्मन में वहां के क्षेत्रीय अदालतों (''लैंडगेरिचटे'') को "शपथ लेने वाले अनुवादकों" को नियुक्त करने की शक्ति है। प्रत्येक [[जर्मनी के राज्य|राज्य]] में विशेष पद और अलग-अलग नियुक्ति प्रक्रिया होती है। अधिकांश मामलों में, उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। जर्मनी अपने राज्यों में शपथ लेने वाले सभी अनुवादकों को सूचिबद्ध करने के लिए उनकी आधिकारिक सूचना www.justiz-uebersetzer.de पर ऑनलाइन उपलब्ध रखता है।
=== हंगरी ===
हंगरी में अनुवादकों और दुभाषियों के योग्यतानुसार लिए पाँच प्रकार हैंः तकनीकी अनुवादक, तकनीकी अनुवादक-प्रूफरीडर, दुभाषिया, तकनीकी दुभाषिया और सम्मेलन दुभाषिया( सभा दुभाषिया)। इन डिग्रियों को बीए और एमए प्रोग्राम्स, स्नातकोत्तर और लोक प्रशासन और न्याय मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्राप्त किया जा सकता है।
इस योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन करने में आवेदक उम्र की सीमा या अन्य किसी डिग्री के लिए बाध्य नहीं है। तकनीकी अनुवाद, तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग, तकनीकी विवेचन सम्मेलन विवेचन के लिए योग्यता निम्नलिखित संकायों (क्षेत्रों) में प्राप्त की जा सकती हैः सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र। उपर्युक्त क्षेत्रों में से किसी एक में डिग्री रखने वाला कोई भी व्यक्ति दिए गए क्षेत्र में तकनीकी अनुवाद और तकनीकी व्याख्या में योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। योग्य तकनीकी दुभाषिया और तकनीकी अनुवादक क्रमशः सम्मेलन विवेचन और तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग के लिए भी योग्य हो सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600007.MM|title=Szakfordító és tolmácsképesítések|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
अनुवाद और साक्ष्यांकण (अनुप्रमाणन) राष्ट्रीय कार्यालय (Országos Fordító és Fordítashitelesító Iroda, OFFi′) हंगरी में एक कंपनी है जिसे कार्यालय या किसी अन्य द्वारा बनाए गए हंगेरियन से और हंगेरियन में दोनों अनुवाद को प्रमाणित करने और विदेशी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां बनाने का विशेष अधिकार है।<ref>{{Cite web|url=http://www.offi.hu/company|title=OFFI|publisher=www.offi.hu|access-date=22 August 2015}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600024.MT|title=a szakfordításról és tolmácsolásról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref> बुडापेस्ट की अदालतों में व्याख्या ओ. एफ. एफ. आई. द्वारा प्रदान की जाती है।
यदि कार्यालय दुभाषिया उपलब्ध नहीं करा सकता है तो बुडापेस्ट के बाहर की अदालतों के लिए, स्थानीय अधिकारियों द्वारा पंजीकृत एक दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यक भाषा की अच्छी समझ रखने वाला एक योग्य व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/hjegy_doc.cgi?docid=98600007.IM|title=a szakfordításról és a tolmácsolásról szóló 24/1986. (VI. 26.) MT rendelet végrehajtásáról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
=== भारत ===
यहां कम दस्तावेज और स्रोत ज्ञात हैं। शपथ अधिनियम, 1969 की धारा 6 के अधीन विहित ओ. ए. टी. एच. एस. और ए. एफ. एफ. आई. डी. ए. वी. आई. टी. एस. के महाराष्ट्र न्यायालय सिविल विधि अध्याय 26 के अनुसार शपथ लेने वाला दुभाषिया या अनुवादक प्रपत्र संख्या 3 की सहायता से शपथ पत्र दे सकता है कि वह गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्यों की अच्छी तरह से और सही अर्थ में व्याख्या करेगा और अनुवाद के लिए उसे दिए गए सभी दस्तावेजों का सही और सटीक अनुवाद करेगा।
=== इंडोनेशिया ===
इंडोनेशिया में, शपथ अनुवादक वे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स एंड कल्चरल साइंसेज, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय (एफ. आई. बी., यू. आई.) द्वारा आयोजित कानूनी अनुवाद परीक्षाओं में भाग लिया और उत्तीर्ण हुए हैं।
=== इटली ===
इतालवी अदालतों और वाणिज्य दूतावासों दोनों के पास "''आधिकारिक'' अनुवादकों" (ट्राडुटोरी गियुराटी या आधिकारिक उम्मीदवार) के रूप में उन उम्मीदवारों को नियुक्त करने की शक्ति है जो संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं या भाषा प्रवीणता का प्रमाण दिखाते हैं (यह प्रमाण आमतौर पर एक विश्वविद्यालय की डिग्री होता है) ।
=== मेक्सिको ===
[[मेक्सिको]] में, प्रमाणित अनुवाद एक ऐसे अनुवाद को समझा जाता है जो सरकार द्वारा अधिकृत विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा सील और हस्ताक्षरित होता है (पेरीटो अनुवादक ऑटोरिज़ाडो) इन विशेषज्ञ अनुवादकों को आमतौर पर प्रत्येक राज्य के न्यायालय द्वारा या संघीय न्यायिक परिषद द्वारा अधिकृत किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कार्यालय भी प्रमाणित अनुवाद को सत्यापित कर सकते हैं (जैसे गुआनाजुआटो और जलिस्को में नागरिक रजिस्ट्री कार्यालय) ।<ref name="List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice">{{Cite web|url=https://www.iejcdmx.gob.mx/wp-content/uploads/PERITOS_ACTUALIZADA_MARZO-9.pdf|title=List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref><ref name="List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021">{{Cite web|url=https://www.cjf.gob.mx/resources/index/infoRelevante/2021/pdf/peritos/listaPeritosOrganosPJF_2021.pdf|title=List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref> प्रत्येक राज्य में प्राधिकरण प्रक्रिया अलग-अलग होती है, और ज्यादातर मामलों में उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। यहां अनुवाद की प्रामाणिकता की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है।
=== नीदरलैंड्स ===
डच कानूनी सहायता परिषद का एक विभाग, ब्यूरो फॉर स्वोर्न इंटरप्रेटर एंड ट्रांसलेटर्स, जिसे न्याय मंत्रालय द्वारा स्वोर्न ट्रांसलेटर एंड ट्रांसलेटर एक्ट के संबंध में विभिन्न कार्यान्वयन कार्यों के लिए सौंपा गया है। उनके पास प्रमाणीकरण के दो तरीके हैं, हालांकि सबसे उत्तम तरीका कानूनी वैधता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.bureaubtv.nl/en/|title=Bureau BTV|archive-url=https://web.archive.org/web/20150215134200/http://www.bureaubtv.nl/en/|archive-date=2015-02-15|access-date=2015-01-30}}</ref>
=== नॉर्वे ===
उम्मीदवारों को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकारी अधिकृत अनुवादकों के संघ द्वारा प्रमाणित किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|title=Statsautoriserte translatørers forening - English|website=www.statsaut-translator.no|archive-url=https://web.archive.org/web/20100115221618/http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|archive-date=January 15, 2010}}</ref> इसके बाद ही सफल उम्मीदवारों को नॉर्वे की सरकार द्वारा "सच्चे प्रमाणित अनुवाद " वाक्यांश के बाद अपने अनुवाद पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया जाता है। इस संगठन की स्थापना 1913 में हुई थी।
=== पोलैंड ===
पोलैंड में अनुवाद के मानकों को न्याय मंत्रालय के एक प्रासंगिक विभाग द्वारा विनियमित किया जाता है, और ऐसी सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक प्रत्येक अनुवादक को राज्य परीक्षा उत्तीर्ण करना पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ms.gov.pl/|title=Home|website=ms.gov.pl}}</ref> इसके बाद ऐसे व्यक्ति की एक आधिकारिक सूची में मुहर के साथ प्रविष्टि की जाती है और उसे एक शपथ अनुवादक घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, साधारण अनुवाद (व्यवसाय, प्रशासन, पत्राचार) के लिए इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होना पर्याप्त है।
=== दक्षिण अफ्रीका ===
[[दक्षिण अफ़्रीका|दक्षिण अफ्रीका]] में, अनुवादक को उच्च न्यायालय द्वारा अधिकृत होना चाहिए और उसे अपने स्रोत पाठ (या शपथ की एक मूल प्रति का) उपयोग करना चाहिए। अनुवादक केवल अपने अनुवाद की शपथ ले सकता है। अनुवाद की [[अधिप्रमाणन|प्रामाणिकता]] को प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त गवाह (जैसे एक नोटरी) की कोई आवश्यकता नहीं है।
=== स्पेन ===
स्पेन में, शपथ अनुवाद का मतलब एक ऐसे अनुवाद से है जो स्पेनिश विदेश मंत्रालय, यूरोपीय संघ और सहयोग द्वारा नियुक्त अनुवादक द्वारा अनूदित हो। [[स्पेनी भाषा|कैस्टिलियन]] और दूसरी भाषा के संयोजन के लिए स्पेन में एक शपथ अनुवादक बनने के लिए, उम्मीदवार को विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा "शपथ अनुवादक और दुभाषिया" (ट्रेड्यूक्टर-इंटर्प्रीट जुराडो) के रूप में प्रमाणित होना चाहिए। फिर, अनुवादक को मंत्रालय के साथ अपनी मुहर और हस्ताक्षर पंजीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसमें अनुवादक का डेटा शपथ लेने वाले दुभाषियों की सार्वजनिक सूची में शामिल होता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20090521005233/http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|archive-date=2009-05-21|access-date=2009-06-12}}
[[Category:CS1 maint: archived copy as title]]</ref>
शपथ लिए हुए अनुवादक पेशेवर अनुवादक होते हैं (सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति जो अनुवाद और व्याख्या में डिग्री रखते हैं) जिन्होंने स्पेनिश विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा दी गई परीक्षा उत्तीर्ण की है और इसलिए वे स्पेनिश से अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के लिए अधिकृत होते हैं और अन्य भाषाओं से स्पेनिश में भी। पात्रता या तो राज्य परीक्षा के माध्यम से या स्पेनिश विश्वविद्यालय में अनुवाद और व्याख्या के डिग्री अध्ययन को पूरा करके प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि अनुवादक ने कानून से संबंधित कुछ विषयों को पास किया हो।
स्पेन की अन्य तीन सह-आधिकारिक भाषाओं ([[बास्क भाषा|बास्क]], [[कातालान भाषा|कैटलन]] और गैलिशियन) सहित भाषाई मेल के लिए शपथ लेने वाले अनुवादकों को क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा स्पेनिश विदेश मंत्रालय के समान प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रमाणित किया जाता है।
एक नियम के रूप में, स्पेन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का अनुवाद स्पेन के विदेश मंत्रालय और सहयोग द्वारा प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, हालांकि, कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद किए गए और विभिन्न वाणिज्य दूतावासों और दूतावासों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का प्रस्तुत करने वाले देश के भीतर प्रमाणित अनुवादकों द्वारा संबंधित देश के भीतर अनुवाद किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमाणित अनुवादक संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेनिश वाणिज्य दूतावासों में से एक के लिए दस्तावेजों का अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन यदि दस्तावेज़ स्पेन में प्रस्तुत किए जाने हैं तो नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.sespanish.com/2019/04/02/how-to-get-an-apostille-for-an-fbi-background-check/|title=How to Get an Apostille for an FBI Background Check|date=2019-04-02|website=Southeast Spanish|language=en-US|access-date=2019-10-12}}</ref>
=== स्वीडन ===
कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक सेवा एजेंसी एक आधिकारिक एजेंसी है जो दुभाषियों और अनुवादकों को अधिकृत करती है, जिन्हें संगठन द्वारा आयोजित एक कड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। अधिकृत अनुवादक एक कानूनी रूप से प्रतिबंधित पदनाम है और उनके अनुवाद को सभी कानूनी उद्देश्यों के लिए कानूनी और बाध्यकारी माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|title=Kammarkollegiet | Kammarkollegiet|archive-url=https://web.archive.org/web/20140703053352/http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|archive-date=2014-07-03|access-date=2014-08-13}}</ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
यू. के. में, एक प्रमाणित अनुवाद का अर्थ केवल उस अनुवाद से है जो अनुवादक या अनुवाद एजेंसी द्वारा तारीख, अनुवादक के प्रमाण पत्र, संपर्क विवरण के साथ अनुवाद की सटीकता की गारंटी देता हुआ बयान के साथ संलग्न हो। उन्हें अक्सर हस्ताक्षरित और मुहरबंद किया जाता है और सटीकता की अतिरिक्त गारंटी के लिए उन्हें प्रूफरीड किया जाना चाहिए। यह उस प्रकार का प्रमाणन है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों जैसे गृह कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और यूके में अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है। एक प्रमाणित अनुवाद इसकी सटीकता की गारंटी देता है और इसमें अनुवादक या परियोजना प्रबंधक का नाम और संपर्क सूत्र होता है, जो उस सटीकता की पुष्टि कर सकता है और ऐसा करने के लिए अनुरोध करने वाले संगठन द्वारा संपर्क किया जा सकता है।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
एक प्रमाणित अनुवाद में स्रोत-भाषा पाठ, लक्षित-भाषा पाठ और अनुवादक या अनुवाद कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान होता है कि अनुवादक या अनुवाद कम्पनी के प्रतिनिधि का मानना है कि लक्षित-भाषा के पाठ स्रोत-भाषा के ग्रंथ का सटीक और पूर्ण अनुवाद है। हस्ताक्षर नोटरीकृत होना चाहिए। अनुवादकों के लिए कोई संघीय या राज्य लाइसेंस या प्रमाणन नहीं है। अनुवादकों के लिए कुछ प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं लेकिन वे अन्य देशों में संघीय लाइसेंसिंग या प्रमाणन के समान मान्य नहीं हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.atanet.org/client-assistance/certified-translation-vs-certified-translator/|title=Certified Translation vs. Certified Translator|date=25 May 2016}}</ref>
=== संयुक्त अरब अमीरात ===
संयुक्त अरब अमीरात (यू. ए. ई.) में एक प्रमाणित अनुवाद कानूनी अनुवाद का पर्याय है। कानूनी अनुवाद केवल संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रालय द्वारा लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक अनुवादक को प्रत्येक भाषा जोड़ी(स्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा) के लिए न्याय मंत्रालय, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। एक भाषा जोड़ी में अरबी और एक विदेशी भाषा होती है। संयुक्त अरब अमीरात में केवल 9 विदेशी भाषाओं के लिए कानूनी अनुवादक उपलब्ध हैं जैसे अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इतालवी, रूसी, चीनी, फ़ारसी (फ़ारसी और तुर्की के रूप में भी जाना जाता है) । केवल कानूनी अनुवाद को संयुक्त अरब अमीरात के नोटरी पब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, संयुक्त अरब अरब अमीरात से नोटरीकृत, सत्यापित और वैध किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास केवल कानूनी अनुवाद को वैध बनाते हैं जो विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, यूएई द्वारा सत्यापित हैं। विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, यूएई से कानूनी अनुवाद को वैध बनाने के लिए इसे पहले यूएई के न्याय मंत्रालय या यूएई के नोटरी पब्लिक से वैध किया जाना ज़रूरी होता है। संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय केवल उनके लाइसेंस प्राप्त अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद को वैध बनाता है।
== यह भी देखें। ==
* [[Translation|अनुवाद।]]
* [[Legal translation|कानूनी अनुवाद।]]
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'''प्रमाणित [[अनुवाद]]''' लक्ष्य भाषा क्षेत्राधिकार की आवश्यकताओं के अनुसार स्रोत पाठ के अर्थ को दूसरी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे इसे औपचारिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।अनुवादक इसकी सटीकता के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ये आवश्यकताएँ देश-दर-देश व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। जबकि कुछ देश केवल राज्य द्वारा नियुक्त अनुवादकों को इस तरह के अनुवाद करने की अनुमति देते हैं, वहीं कुछ अन्य देश किसी भी सक्षम द्विभाषी व्यक्ति द्वारा किए गए अनुवाद को स्वीकार कर लेते हैं। इन दो व्यापक सीमाओं के बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ किसी भी पेशेवर अनुवादक द्वारा सही प्रमाण पत्र के साथ एक प्रमाणित अनुवाद किया जा सकता है (जिसमें विशिष्ट अनुवाद संघों की सदस्यता या कुछ योग्यताएँ शामिल हो सकती हैं) ।
अंग्रेजी बोलने वाले देश, जैसे कि [[यूनाइटेड किंगडम]], संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]], के स्पेक्ट्रम सख्त या थोड़े अनौपचारिक होते हैं, जिसमें अनुवादक प्रमाणित अनुवाद की अनुशंसा अपने आधिकारिक लेटर पैड आदि पर करता है जिसमें उक्त प्रमाणित अनुवाद की आवश्यकता, अनुवादक का विवरण एवं हस्ताक्षर दिनांक के साथ उपेक्षित होता है।
यह एक प्रकार का प्रमाणिकरण है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों, जैसे कि गृह कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है।
ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों में इस संबंध में बहुत सख्त कानून हैं कि कौन प्रमाणित अनुवाद जारी कर सकता है, जिसमें अधिकांश आधिकारिक प्रमाणित अनुवादकों की नियुक्ति उनके आधार पर स्थानीय राज्य-विनियमित योग्यता प्राप्त करने पर की जाती है।
== कानूनी आवश्यकताएं ==
कानूनी और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए, [[साक्ष्य विधि|साक्ष्य दस्तावेज]] और अन्य आधिकारिक दस्तावेज आमतौर पर [[राजभाषा|आधिकारिक भाषा]] ([[अधिकारिता|अधिकार क्षेत्र]] की भाषा) में आवश्यक होते हैं।
कुछ [[देश]] में, ऐसे दस्तावेजों के अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि एक [[अनुवाद|अनुवादक]] [[शपथ]] लेकर यह प्रमाणित करे कि यह(अनूदित प्रमाणित अनुवाद) स्रोत पाठ के कानूनी समकक्ष है। अक्सर, केवल एक विशेष वर्ग के अनुवादकों को ही ऐसी शपथ लेने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में, अनुवाद को कानूनी समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार किया जाता है जब इसके साथ इसकी मूल या शपथ या प्रमाणित प्रति संलग्न हो।
भले ही कोई अनुवादक कानूनी अनुवाद में माहिर हो या अपने देश में एक वकील हो, यह जरूरी नहीं कि वे एक प्रमाणित अनुवादक बन जाए। कानूनी समतुल्यता में अनुवाद करने की प्रक्रिया देश-दर-देश अलग-अलग होती है।
=== अर्जेंटीना ===
स्थानीय कानूनों के अनुपालन में, स्पेनिश के अलावा अन्य भाषाओं में लिखे गए सभी दस्तावेजों का स्थानीय कानूनों के अनुसार एक प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा स्पेनिश में अनुवाद किया जाना चाहिए। आम तौर पर, अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेजों (व्यक्तिगत कागजात और कुछ वाणिज्यिक अनुबंधों सहित) का अनुवाद और हस्ताक्षर एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसका मुहर और हस्ताक्षर उस संबंधित पेशेवर संघ द्वारा प्रमाणित हो जो अनुवादक का लाइसेंस जारी करता हो। सभी निजी व्यक्ति, कंपनियां, न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभाग विदेशी भाषा में दस्तावेजों या बयानों के संबंध में विभिन्न कानूनों के अधीन हैं, जैसे कि अर्जेंटीना सिविल और वाणिज्यिक संहिता, अर्जेंटीना कोड ऑफ सिविल एंड क्रिमिनल प्रोसीजर, अन्य।<ref>{{Cite web|url=http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|title=Colegio de Traductores Públicos de la Ciudad de Buenos Aires|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001142704/http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|archive-date=October 1, 2009|access-date=March 10, 2010}}</ref> "पब्लिक ट्रांसलेटर" के रूप में प्रमाणित होने के लिए, उम्मीदवारों को "ट्रेडकटोर पब्लिक"/"ट्रेडकटा पब्लिक" की विश्वविद्यालयी डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है।
=== ऑस्ट्रिया ===
शपथ और प्रमाणित विशेषज्ञ, दुभाषिया और अनुवादक अधिनियम #137/1995 (एसडीजी) की धारा 14 के अनुसार, क्षेत्रीय अदालतें [[जर्मन भाषा|जर्मन]] और किसी भी भाषा (सांकेतिक भाषा सहित) के बीच अनुवाद के लिए ऐसे किसी भी प्रमाणित अनुवादकों को नियुक्त करने के हकदार हैं, जिन्होंने एक आधिकारिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अदालत में शपथ ली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|title=SV- und Dolmetschergergesetz|archive-url=https://web.archive.org/web/20190306234811/https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|archive-date=2019-03-06|access-date=2019-03-06}}</ref> प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को किसी विश्वविद्यालय से अनुवाद अध्ययन में स्नातक की डिग्री के साथ-साथ अनुवादक या दुभाषिया के रूप में कम से कम 5 वर्षों के अनुभव या कम से कम 2 वर्षों के अनुभव का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। हालांकि ज्यादातर "गेरिच्ट्सडोल्मेट्सचर" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जबकि उसका सही नाम "ऑलजेमिन बीडेटे/आर उंड गेरिचट्लिच ज़र्टिफाइज़िएर्ट/आर डॉल्मेट्सचर/इन" है। शपथ लिए हुए अनुवादक मूल अनुवाद पर हस्ताक्षर करके और उन पर मुहर लगाकर सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने के हकदार हैं। अनुवादों पर उनके हस्ताक्षर के आगे नोटराइजेशन की आवश्यकता नहीं है, और शपथ लेने वाले अनुवादक एक '''अपोस्टिल''' को जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। पुलिस को सलाह दी जाती है कि जब भी संभव हो भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए दुभाषियों को शामिल करें। ऑस्ट्रिया में अधिकांश सार्वजनिक अधिकारी दस्तावेजों के अनुवाद को कानूनी रूप से समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार करते हैं जब दी गई भाषा के लिए एक शपथ दुभाषिया द्वारा सील और हस्ताक्षर किए जाते हैं।
यदि कोई दुभाषिया नियमित रूप से पेशेवर प्रशिक्षण में भाग नहीं लेगा तो प्राधिकरण समाप्त हो जाएगा।
=== बेल्जियम ===
"शपथ अनुवादक" (एकल [[डच भाषा|डच]] beëdigd vertaler, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] transtuter assermenté अल्लतु "शपथ दुभाषिया" (एकल [[डच भाषा|डच]] beädigd tolk, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] interprète assermente) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस न्यायिक जिले के प्रथम उदाहरण की शपथ लेते हैं जिसमें उनका निवास स्थान है। अतीत में सभी न्यायिक जिलों में "शपथ" का दर्जा पाने के इच्छुक अनुवादकों और दुभाषियों की क्राउन प्रॉसिक्यूटर द्वारा उपयुक्तता के लिए जांच की जाती थी। उम्मीदवार को शपथ लेने के लिए भाषा संयोजनों(किस भाषा से, किस भाषा में अनुवाद करेंगे) बताना होगा। अनुवादक/दुभाषिया की डिग्री को आमतौर पर योग्यता का पर्याप्त प्रमाण माना जाता है। भाषा संयोजनों की कोई सीमा नहीं है जिन्हें पहचाना जा सकता है।
हालांकि, एक अवैध अप्रवासी से जुड़े घोटाले के बाद, जिसने शपथ अनुवादक का दर्जा प्राप्त किया था, [[एंटवर्प]] में प्रथम बार के न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने एक प्रयोगात्मक योजना शुरू की, जिसके तहत शपथ लेने वाले अनुवादकों और दुभाषियों को न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और परीक्षा में उपस्थित होना पड़ता है। भाषा कानूनों की अपनी व्याख्या के आधार पर, उसी राष्ट्रपति ने यह भी फैसला सुनाया कि एक शपथ अनुवादक/दुभाषिया के दर्जे के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र भाषा संयोजन वे थे जिनमें डच या तो मूल भाषा या लक्ष्य भाषा थी। बेल्जियम के अन्य न्यायिक जिलों द्वारा अभी तक इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया है।
=== ब्राजील ===
आधिकारिक दस्तावेजों का अनुवाद केवल सार्वजनिक अनुवादकों और दुभाषियों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा प्रमाणित और मान्यता प्राप्त हैं। आवेदकों को उक्त भाषाओं मेें मौखिक और लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। पंजीकरण संख्या प्राप्त करने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जाती है, जिसे प्रत्येक अनुवाद के शीर्षक में सूचित किया जाना चाहिए।
जब उक्त भाषाओं के लिए कोई सार्वजनिक अनुवादक पंजीकृत नहीं होता है, तो एकल अनुवाद कार्य करने के लिए वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा अस्थायी अनुवादकों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री भी अनुवाद शुल्क निर्धारित करती है।
यद्यपि सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक/दुभाषिया को पंजीकरण की स्थिति में रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुवाद पूरे देश में मान्य हैं। सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक के निवास से अलग शहरों और राज्यों में संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अनुवादक के हस्ताक्षर के नोटरी सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
विदेशी दस्तावेजों को अनुवाद से पहले ब्राजील के वाणिज्य दूतावास या दूतावास द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यदि विदेशी देश की संस्था या सरकारी एजेंसी आवश्यक समझे तो विदेशी भाषा में अनूदित आधिकारिक दस्तावेजों में ब्राजील के विदेश मंत्रालय द्वारा सत्यापित सार्वजनिक शपथ अनुवादक के हस्ताक्षर आवश्यक होता है।[1]
=== कनाडा ===
दस्तावेजों का आधिकारिक अनुवाद दो तरीकों में से एक तरीके से किया जा सकता है। प्रमाणित अनुवाद, एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा पूरा किए जाते हैं और अनुवादक की घोषणा, हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापित होते हैं। "प्रमाणित अनुवादक" का पद कनाडा में एक संरक्षित पद है, जिसमें केवल वे व्यक्ति जो प्रांतीय अनुवादक संघ के सक्रिय सदस्य हैं और एक प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इस पद के लिए योग्य हैं और वही प्रमाणित अनुवाद कर सकते हैं। कनाडा में आधिकारिक अनुवाद प्रस्तुत करने का एक वैकल्पिक तरीका यह है कि अनुवाद का शपथ पत्र लेने के लिए एक नोटरी पब्लिक या आयुक्त की उपस्थिति में अनुवादक द्वारा हस्ताक्षरित एक शपथ पत्र संलग्न करना पड़ता है।
=== जर्मनी ===
जर्मन में वहां के क्षेत्रीय अदालतों (''लैंडगेरिचटे'') को "शपथ लेने वाले अनुवादकों" को नियुक्त करने की शक्ति है। प्रत्येक [[जर्मनी के राज्य|राज्य]] में विशेष पद और अलग-अलग नियुक्ति प्रक्रिया होती है। अधिकांश मामलों में, उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। जर्मनी अपने राज्यों में शपथ लेने वाले सभी अनुवादकों को सूचिबद्ध करने के लिए उनकी आधिकारिक सूचना www.justiz-uebersetzer.de पर ऑनलाइन उपलब्ध रखता है।
=== हंगरी ===
हंगरी में अनुवादकों और दुभाषियों के योग्यतानुसार लिए पाँच प्रकार हैंः तकनीकी अनुवादक, तकनीकी अनुवादक-प्रूफरीडर, दुभाषिया, तकनीकी दुभाषिया और सम्मेलन दुभाषिया( सभा दुभाषिया)। इन डिग्रियों को बीए और एमए प्रोग्राम्स, स्नातकोत्तर और लोक प्रशासन और न्याय मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्राप्त किया जा सकता है।
इस योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन करने में आवेदक उम्र की सीमा या अन्य किसी डिग्री के लिए बाध्य नहीं है। तकनीकी अनुवाद, तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग, तकनीकी विवेचन सम्मेलन विवेचन के लिए योग्यता निम्नलिखित संकायों (क्षेत्रों) में प्राप्त की जा सकती हैः सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र। उपर्युक्त क्षेत्रों में से किसी एक में डिग्री रखने वाला कोई भी व्यक्ति दिए गए क्षेत्र में तकनीकी अनुवाद और तकनीकी व्याख्या में योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। योग्य तकनीकी दुभाषिया और तकनीकी अनुवादक क्रमशः सम्मेलन विवेचन और तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग के लिए भी योग्य हो सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600007.MM|title=Szakfordító és tolmácsképesítések|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
अनुवाद और साक्ष्यांकण (अनुप्रमाणन) राष्ट्रीय कार्यालय (Országos Fordító és Fordítashitelesító Iroda, OFFi′) हंगरी में एक कंपनी है जिसे कार्यालय या किसी अन्य द्वारा बनाए गए हंगेरियन से और हंगेरियन में दोनों अनुवाद को प्रमाणित करने और विदेशी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां बनाने का विशेष अधिकार है।<ref>{{Cite web|url=http://www.offi.hu/company|title=OFFI|publisher=www.offi.hu|access-date=22 August 2015}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600024.MT|title=a szakfordításról és tolmácsolásról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref> बुडापेस्ट की अदालतों में व्याख्या ओ. एफ. एफ. आई. द्वारा प्रदान की जाती है।
यदि कार्यालय दुभाषिया उपलब्ध नहीं करा सकता है तो बुडापेस्ट के बाहर की अदालतों के लिए, स्थानीय अधिकारियों द्वारा पंजीकृत एक दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यक भाषा की अच्छी समझ रखने वाला एक योग्य व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/hjegy_doc.cgi?docid=98600007.IM|title=a szakfordításról és a tolmácsolásról szóló 24/1986. (VI. 26.) MT rendelet végrehajtásáról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
=== भारत ===
यहां कम दस्तावेज और स्रोत ज्ञात हैं। शपथ अधिनियम, 1969 की धारा 6 के अधीन विहित ओ. ए. टी. एच. एस. और ए. एफ. एफ. आई. डी. ए. वी. आई. टी. एस. के महाराष्ट्र न्यायालय सिविल विधि अध्याय 26 के अनुसार शपथ लेने वाला दुभाषिया या अनुवादक प्रपत्र संख्या 3 की सहायता से शपथ पत्र दे सकता है कि वह गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्यों की अच्छी तरह से और सही अर्थ में व्याख्या करेगा और अनुवाद के लिए उसे दिए गए सभी दस्तावेजों का सही और सटीक अनुवाद करेगा।
=== इंडोनेशिया ===
इंडोनेशिया में, शपथ अनुवादक वे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स एंड कल्चरल साइंसेज, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय (एफ. आई. बी., यू. आई.) द्वारा आयोजित कानूनी अनुवाद परीक्षाओं में भाग लिया और उत्तीर्ण हुए हैं।
=== इटली ===
इतालवी अदालतों और वाणिज्य दूतावासों दोनों के पास "''आधिकारिक'' अनुवादकों" (ट्राडुटोरी गियुराटी या आधिकारिक उम्मीदवार) के रूप में उन उम्मीदवारों को नियुक्त करने की शक्ति है जो संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं या भाषा प्रवीणता का प्रमाण दिखाते हैं (यह प्रमाण आमतौर पर एक विश्वविद्यालय की डिग्री होता है) ।
=== मेक्सिको ===
[[मेक्सिको]] में, प्रमाणित अनुवाद एक ऐसे अनुवाद को समझा जाता है जो सरकार द्वारा अधिकृत विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा सील और हस्ताक्षरित होता है (पेरीटो अनुवादक ऑटोरिज़ाडो) इन विशेषज्ञ अनुवादकों को आमतौर पर प्रत्येक राज्य के न्यायालय द्वारा या संघीय न्यायिक परिषद द्वारा अधिकृत किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कार्यालय भी प्रमाणित अनुवाद को सत्यापित कर सकते हैं (जैसे गुआनाजुआटो और जलिस्को में नागरिक रजिस्ट्री कार्यालय) ।<ref name="List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice">{{Cite web|url=https://www.iejcdmx.gob.mx/wp-content/uploads/PERITOS_ACTUALIZADA_MARZO-9.pdf|title=List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref><ref name="List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021">{{Cite web|url=https://www.cjf.gob.mx/resources/index/infoRelevante/2021/pdf/peritos/listaPeritosOrganosPJF_2021.pdf|title=List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref> प्रत्येक राज्य में प्राधिकरण प्रक्रिया अलग-अलग होती है, और ज्यादातर मामलों में उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। यहां अनुवाद की प्रामाणिकता की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है।
=== नीदरलैंड्स ===
डच कानूनी सहायता परिषद का एक विभाग, ब्यूरो फॉर स्वोर्न इंटरप्रेटर एंड ट्रांसलेटर्स, जिसे न्याय मंत्रालय द्वारा स्वोर्न ट्रांसलेटर एंड ट्रांसलेटर एक्ट के संबंध में विभिन्न कार्यान्वयन कार्यों के लिए सौंपा गया है। उनके पास प्रमाणीकरण के दो तरीके हैं, हालांकि सबसे उत्तम तरीका कानूनी वैधता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.bureaubtv.nl/en/|title=Bureau BTV|archive-url=https://web.archive.org/web/20150215134200/http://www.bureaubtv.nl/en/|archive-date=2015-02-15|access-date=2015-01-30}}</ref>
=== नॉर्वे ===
उम्मीदवारों को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकारी अधिकृत अनुवादकों के संघ द्वारा प्रमाणित किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|title=Statsautoriserte translatørers forening - English|website=www.statsaut-translator.no|archive-url=https://web.archive.org/web/20100115221618/http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|archive-date=January 15, 2010}}</ref> इसके बाद ही सफल उम्मीदवारों को नॉर्वे की सरकार द्वारा "सच्चे प्रमाणित अनुवाद " वाक्यांश के बाद अपने अनुवाद पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया जाता है। इस संगठन की स्थापना 1913 में हुई थी।
=== पोलैंड ===
पोलैंड में अनुवाद के मानकों को न्याय मंत्रालय के एक प्रासंगिक विभाग द्वारा विनियमित किया जाता है, और ऐसी सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक प्रत्येक अनुवादक को राज्य परीक्षा उत्तीर्ण करना पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ms.gov.pl/|title=Home|website=ms.gov.pl}}</ref> इसके बाद ऐसे व्यक्ति की एक आधिकारिक सूची में मुहर के साथ प्रविष्टि की जाती है और उसे एक शपथ अनुवादक घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, साधारण अनुवाद (व्यवसाय, प्रशासन, पत्राचार) के लिए इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होना पर्याप्त है।
=== दक्षिण अफ्रीका ===
[[दक्षिण अफ़्रीका|दक्षिण अफ्रीका]] में, अनुवादक को उच्च न्यायालय द्वारा अधिकृत होना चाहिए और उसे अपने स्रोत पाठ (या शपथ की एक मूल प्रति का) उपयोग करना चाहिए। अनुवादक केवल अपने अनुवाद की शपथ ले सकता है। अनुवाद की [[अधिप्रमाणन|प्रामाणिकता]] को प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त गवाह (जैसे एक नोटरी) की कोई आवश्यकता नहीं है।
=== स्पेन ===
स्पेन में, शपथ अनुवाद का मतलब एक ऐसे अनुवाद से है जो स्पेनिश विदेश मंत्रालय, यूरोपीय संघ और सहयोग द्वारा नियुक्त अनुवादक द्वारा अनूदित हो। [[स्पेनी भाषा|कैस्टिलियन]] और दूसरी भाषा के संयोजन के लिए स्पेन में एक शपथ अनुवादक बनने के लिए, उम्मीदवार को विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा "शपथ अनुवादक और दुभाषिया" (ट्रेड्यूक्टर-इंटर्प्रीट जुराडो) के रूप में प्रमाणित होना चाहिए। फिर, अनुवादक को मंत्रालय के साथ अपनी मुहर और हस्ताक्षर पंजीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसमें अनुवादक का डेटा शपथ लेने वाले दुभाषियों की सार्वजनिक सूची में शामिल होता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20090521005233/http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|archive-date=2009-05-21|access-date=2009-06-12}}
[[Category:CS1 maint: archived copy as title]]</ref>
शपथ लिए हुए अनुवादक पेशेवर अनुवादक होते हैं (सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति जो अनुवाद और व्याख्या में डिग्री रखते हैं) जिन्होंने स्पेनिश विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा दी गई परीक्षा उत्तीर्ण की है और इसलिए वे स्पेनिश से अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के लिए अधिकृत होते हैं और अन्य भाषाओं से स्पेनिश में भी। पात्रता या तो राज्य परीक्षा के माध्यम से या स्पेनिश विश्वविद्यालय में अनुवाद और व्याख्या के डिग्री अध्ययन को पूरा करके प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि अनुवादक ने कानून से संबंधित कुछ विषयों को पास किया हो।
स्पेन की अन्य तीन सह-आधिकारिक भाषाओं ([[बास्क भाषा|बास्क]], [[कातालान भाषा|कैटलन]] और गैलिशियन) सहित भाषाई मेल के लिए शपथ लेने वाले अनुवादकों को क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा स्पेनिश विदेश मंत्रालय के समान प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रमाणित किया जाता है।
एक नियम के रूप में, स्पेन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का अनुवाद स्पेन के विदेश मंत्रालय और सहयोग द्वारा प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, हालांकि, कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद किए गए और विभिन्न वाणिज्य दूतावासों और दूतावासों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का प्रस्तुत करने वाले देश के भीतर प्रमाणित अनुवादकों द्वारा संबंधित देश के भीतर अनुवाद किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमाणित अनुवादक संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेनिश वाणिज्य दूतावासों में से एक के लिए दस्तावेजों का अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन यदि दस्तावेज़ स्पेन में प्रस्तुत किए जाने हैं तो नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.sespanish.com/2019/04/02/how-to-get-an-apostille-for-an-fbi-background-check/|title=How to Get an Apostille for an FBI Background Check|date=2019-04-02|website=Southeast Spanish|language=en-US|access-date=2019-10-12}}</ref>
=== स्वीडन ===
कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक सेवा एजेंसी एक आधिकारिक एजेंसी है जो दुभाषियों और अनुवादकों को अधिकृत करती है, जिन्हें संगठन द्वारा आयोजित एक कड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। अधिकृत अनुवादक एक कानूनी रूप से प्रतिबंधित पदनाम है और उनके अनुवाद को सभी कानूनी उद्देश्यों के लिए कानूनी और बाध्यकारी माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|title=Kammarkollegiet | Kammarkollegiet|archive-url=https://web.archive.org/web/20140703053352/http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|archive-date=2014-07-03|access-date=2014-08-13}}</ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
यू. के. में, एक प्रमाणित अनुवाद का अर्थ केवल उस अनुवाद से है जो अनुवादक या अनुवाद एजेंसी द्वारा तारीख, अनुवादक के प्रमाण पत्र, संपर्क विवरण के साथ अनुवाद की सटीकता की गारंटी देता हुआ बयान के साथ संलग्न हो। उन्हें अक्सर हस्ताक्षरित और मुहरबंद किया जाता है और सटीकता की अतिरिक्त गारंटी के लिए उन्हें प्रूफरीड किया जाना चाहिए। यह उस प्रकार का प्रमाणन है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों जैसे गृह कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और यूके में अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है। एक प्रमाणित अनुवाद इसकी सटीकता की गारंटी देता है और इसमें अनुवादक या परियोजना प्रबंधक का नाम और संपर्क सूत्र होता है, जो उस सटीकता की पुष्टि कर सकता है और ऐसा करने के लिए अनुरोध करने वाले संगठन द्वारा संपर्क किया जा सकता है।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
एक प्रमाणित अनुवाद में स्रोत-भाषा पाठ, लक्षित-भाषा पाठ और अनुवादक या अनुवाद कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान होता है कि अनुवादक या अनुवाद कम्पनी के प्रतिनिधि का मानना है कि लक्षित-भाषा के पाठ स्रोत-भाषा के ग्रंथ का सटीक और पूर्ण अनुवाद है। हस्ताक्षर नोटरीकृत होना चाहिए। अनुवादकों के लिए कोई संघीय या राज्य लाइसेंस या प्रमाणन नहीं है। अनुवादकों के लिए कुछ प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं लेकिन वे अन्य देशों में संघीय लाइसेंसिंग या प्रमाणन के समान मान्य नहीं हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.atanet.org/client-assistance/certified-translation-vs-certified-translator/|title=Certified Translation vs. Certified Translator|date=25 May 2016}}</ref>
=== संयुक्त अरब अमीरात ===
संयुक्त अरब अमीरात (यू. ए. ई.) में एक प्रमाणित अनुवाद कानूनी अनुवाद का पर्याय है। कानूनी अनुवाद केवल संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रालय द्वारा लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक अनुवादक को प्रत्येक भाषा जोड़ी(स्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा) के लिए न्याय मंत्रालय, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। एक भाषा जोड़ी में अरबी और एक विदेशी भाषा होती है। संयुक्त अरब अमीरात में केवल 9 विदेशी भाषाओं के लिए कानूनी अनुवादक उपलब्ध हैं जैसे अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इतालवी, रूसी, चीनी, फ़ारसी (फ़ारसी और तुर्की के रूप में भी जाना जाता है) । केवल कानूनी अनुवाद को संयुक्त अरब अमीरात के नोटरी पब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, संयुक्त अरब अरब अमीरात से नोटरीकृत, सत्यापित और वैध किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास केवल कानूनी अनुवाद को वैध बनाते हैं जो विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, यूएई द्वारा सत्यापित हैं। विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, यूएई से कानूनी अनुवाद को वैध बनाने के लिए इसे पहले यूएई के न्याय मंत्रालय या यूएई के नोटरी पब्लिक से वैध किया जाना ज़रूरी होता है। संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय केवल उनके लाइसेंस प्राप्त अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद को वैध बनाता है।
== [[अनुवाद|यह]] भी देखें। ==
* [[Translation|अनुवाद।]]
* [[Legal translation|कानूनी अनुवाद।]]
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'''प्रमाणित [[अनुवाद]]''' लक्ष्य भाषा क्षेत्राधिकार की आवश्यकताओं के अनुसार स्रोत पाठ के अर्थ को दूसरी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे इसे औपचारिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।अनुवादक इसकी सटीकता के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ये आवश्यकताएँ देश-दर-देश व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। जबकि कुछ देश केवल राज्य द्वारा नियुक्त अनुवादकों को इस तरह के अनुवाद करने की अनुमति देते हैं, वहीं कुछ अन्य देश किसी भी सक्षम द्विभाषी व्यक्ति द्वारा किए गए अनुवाद को स्वीकार कर लेते हैं। इन दो व्यापक सीमाओं के बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ किसी भी पेशेवर अनुवादक द्वारा सही प्रमाण पत्र के साथ एक प्रमाणित अनुवाद किया जा सकता है (जिसमें विशिष्ट अनुवाद संघों की सदस्यता या कुछ योग्यताएँ शामिल हो सकती हैं) ।
अंग्रेजी बोलने वाले देश, जैसे कि [[यूनाइटेड किंगडम]], संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]], के स्पेक्ट्रम सख्त या थोड़े अनौपचारिक होते हैं, जिसमें अनुवादक प्रमाणित अनुवाद की अनुशंसा अपने आधिकारिक लेटर पैड आदि पर करता है जिसमें उक्त प्रमाणित अनुवाद की आवश्यकता, अनुवादक का विवरण एवं हस्ताक्षर दिनांक के साथ उपेक्षित होता है।
यह एक प्रकार का प्रमाणिकरण है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों, जैसे कि गृह कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है।
ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों में इस संबंध में बहुत सख्त कानून हैं कि कौन प्रमाणित अनुवाद जारी कर सकता है, जिसमें अधिकांश आधिकारिक प्रमाणित अनुवादकों की नियुक्ति उनके आधार पर स्थानीय राज्य-विनियमित योग्यता प्राप्त करने पर की जाती है।
== कानूनी आवश्यकताएं ==
कानूनी और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए, [[साक्ष्य विधि|साक्ष्य दस्तावेज]] और अन्य आधिकारिक दस्तावेज आमतौर पर [[राजभाषा|आधिकारिक भाषा]] ([[अधिकारिता|अधिकार क्षेत्र]] की भाषा) में आवश्यक होते हैं।
कुछ [[देश]] में, ऐसे दस्तावेजों के अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि एक [[अनुवाद|अनुवादक]] [[शपथ]] लेकर यह प्रमाणित करे कि यह(अनूदित प्रमाणित अनुवाद) स्रोत पाठ के कानूनी समकक्ष है। अक्सर, केवल एक विशेष वर्ग के अनुवादकों को ही ऐसी शपथ लेने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में, अनुवाद को कानूनी समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार किया जाता है जब इसके साथ इसकी मूल या शपथ या प्रमाणित प्रति संलग्न हो।
भले ही कोई अनुवादक कानूनी अनुवाद में माहिर हो या अपने देश में एक वकील हो, यह जरूरी नहीं कि वे एक प्रमाणित अनुवादक बन जाए। कानूनी समतुल्यता में अनुवाद करने की प्रक्रिया देश-दर-देश अलग-अलग होती है।
=== अर्जेंटीना ===
स्थानीय कानूनों के अनुपालन में, स्पेनिश के अलावा अन्य भाषाओं में लिखे गए सभी दस्तावेजों का स्थानीय कानूनों के अनुसार एक प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा स्पेनिश में अनुवाद किया जाना चाहिए। आम तौर पर, अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेजों (व्यक्तिगत कागजात और कुछ वाणिज्यिक अनुबंधों सहित) का अनुवाद और हस्ताक्षर एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसका मुहर और हस्ताक्षर उस संबंधित पेशेवर संघ द्वारा प्रमाणित हो जो अनुवादक का लाइसेंस जारी करता हो। सभी निजी व्यक्ति, कंपनियां, न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभाग विदेशी भाषा में दस्तावेजों या बयानों के संबंध में विभिन्न कानूनों के अधीन हैं, जैसे कि अर्जेंटीना सिविल और वाणिज्यिक संहिता, अर्जेंटीना कोड ऑफ सिविल एंड क्रिमिनल प्रोसीजर, अन्य।<ref>{{Cite web|url=http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|title=Colegio de Traductores Públicos de la Ciudad de Buenos Aires|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001142704/http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|archive-date=October 1, 2009|access-date=March 10, 2010}}</ref> "पब्लिक ट्रांसलेटर" के रूप में प्रमाणित होने के लिए, उम्मीदवारों को "ट्रेडकटोर पब्लिक"/"ट्रेडकटा पब्लिक" की विश्वविद्यालयी डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है।
=== ऑस्ट्रिया ===
शपथ और प्रमाणित विशेषज्ञ, दुभाषिया और अनुवादक अधिनियम #137/1995 (एसडीजी) की धारा 14 के अनुसार, क्षेत्रीय अदालतें [[जर्मन भाषा|जर्मन]] और किसी भी भाषा (सांकेतिक भाषा सहित) के बीच अनुवाद के लिए ऐसे किसी भी प्रमाणित अनुवादकों को नियुक्त करने के हकदार हैं, जिन्होंने एक आधिकारिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अदालत में शपथ ली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|title=SV- und Dolmetschergergesetz|archive-url=https://web.archive.org/web/20190306234811/https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|archive-date=2019-03-06|access-date=2019-03-06}}</ref> प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को किसी विश्वविद्यालय से अनुवाद अध्ययन में स्नातक की डिग्री के साथ-साथ अनुवादक या दुभाषिया के रूप में कम से कम 5 वर्षों के अनुभव या कम से कम 2 वर्षों के अनुभव का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। हालांकि ज्यादातर "गेरिच्ट्सडोल्मेट्सचर" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जबकि उसका सही नाम "ऑलजेमिन बीडेटे/आर उंड गेरिचट्लिच ज़र्टिफाइज़िएर्ट/आर डॉल्मेट्सचर/इन" है। शपथ लिए हुए अनुवादक मूल अनुवाद पर हस्ताक्षर करके और उन पर मुहर लगाकर सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने के हकदार हैं। अनुवादों पर उनके हस्ताक्षर के आगे नोटराइजेशन की आवश्यकता नहीं है, और शपथ लेने वाले अनुवादक एक '''अपोस्टिल''' को जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। पुलिस को सलाह दी जाती है कि जब भी संभव हो भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए दुभाषियों को शामिल करें। ऑस्ट्रिया में अधिकांश सार्वजनिक अधिकारी दस्तावेजों के अनुवाद को कानूनी रूप से समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार करते हैं जब दी गई भाषा के लिए एक शपथ दुभाषिया द्वारा सील और हस्ताक्षर किए जाते हैं।
यदि कोई दुभाषिया नियमित रूप से पेशेवर प्रशिक्षण में भाग नहीं लेगा तो प्राधिकरण समाप्त हो जाएगा।
=== बेल्जियम ===
"शपथ अनुवादक" (एकल [[डच भाषा|डच]] beëdigd vertaler, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] transtuter assermenté अल्लतु "शपथ दुभाषिया" (एकल [[डच भाषा|डच]] beädigd tolk, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] interprète assermente) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस न्यायिक जिले के प्रथम उदाहरण की शपथ लेते हैं जिसमें उनका निवास स्थान है। अतीत में सभी न्यायिक जिलों में "शपथ" का दर्जा पाने के इच्छुक अनुवादकों और दुभाषियों की क्राउन प्रॉसिक्यूटर द्वारा उपयुक्तता के लिए जांच की जाती थी। उम्मीदवार को शपथ लेने के लिए भाषा संयोजनों(किस भाषा से, किस भाषा में अनुवाद करेंगे) बताना होगा। अनुवादक/दुभाषिया की डिग्री को आमतौर पर योग्यता का पर्याप्त प्रमाण माना जाता है। भाषा संयोजनों की कोई सीमा नहीं है जिन्हें पहचाना जा सकता है।
हालांकि, एक अवैध अप्रवासी से जुड़े घोटाले के बाद, जिसने शपथ अनुवादक का दर्जा प्राप्त किया था, [[एंटवर्प]] में प्रथम बार के न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने एक प्रयोगात्मक योजना शुरू की, जिसके तहत शपथ लेने वाले अनुवादकों और दुभाषियों को न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और परीक्षा में उपस्थित होना पड़ता है। भाषा कानूनों की अपनी व्याख्या के आधार पर, उसी राष्ट्रपति ने यह भी फैसला सुनाया कि एक शपथ अनुवादक/दुभाषिया के दर्जे के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र भाषा संयोजन वे थे जिनमें डच या तो मूल भाषा या लक्ष्य भाषा थी। बेल्जियम के अन्य न्यायिक जिलों द्वारा अभी तक इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया है।
=== ब्राजील ===
आधिकारिक दस्तावेजों का अनुवाद केवल सार्वजनिक अनुवादकों और दुभाषियों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा प्रमाणित और मान्यता प्राप्त हैं। आवेदकों को उक्त भाषाओं मेें मौखिक और लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। पंजीकरण संख्या प्राप्त करने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जाती है, जिसे प्रत्येक अनुवाद के शीर्षक में सूचित किया जाना चाहिए।
जब उक्त भाषाओं के लिए कोई सार्वजनिक अनुवादक पंजीकृत नहीं होता है, तो एकल अनुवाद कार्य करने के लिए वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा अस्थायी अनुवादकों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री भी अनुवाद शुल्क निर्धारित करती है।
यद्यपि सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक/दुभाषिया को पंजीकरण की स्थिति में रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुवाद पूरे देश में मान्य हैं। सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक के निवास से अलग शहरों और राज्यों में संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अनुवादक के हस्ताक्षर के नोटरी सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
विदेशी दस्तावेजों को अनुवाद से पहले ब्राजील के वाणिज्य दूतावास या दूतावास द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यदि विदेशी देश की संस्था या सरकारी एजेंसी आवश्यक समझे तो विदेशी भाषा में अनूदित आधिकारिक दस्तावेजों में ब्राजील के विदेश मंत्रालय द्वारा सत्यापित सार्वजनिक शपथ अनुवादक के हस्ताक्षर आवश्यक होता है।[1]
=== कनाडा ===
दस्तावेजों का आधिकारिक अनुवाद दो तरीकों में से एक तरीके से किया जा सकता है। प्रमाणित अनुवाद, एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा पूरा किए जाते हैं और अनुवादक की घोषणा, हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापित होते हैं। "प्रमाणित अनुवादक" का पद कनाडा में एक संरक्षित पद है, जिसमें केवल वे व्यक्ति जो प्रांतीय अनुवादक संघ के सक्रिय सदस्य हैं और एक प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इस पद के लिए योग्य हैं और वही प्रमाणित अनुवाद कर सकते हैं। कनाडा में आधिकारिक अनुवाद प्रस्तुत करने का एक वैकल्पिक तरीका यह है कि अनुवाद का शपथ पत्र लेने के लिए एक नोटरी पब्लिक या आयुक्त की उपस्थिति में अनुवादक द्वारा हस्ताक्षरित एक शपथ पत्र संलग्न करना पड़ता है।
=== जर्मनी ===
जर्मन में वहां के क्षेत्रीय अदालतों (''लैंडगेरिचटे'') को "शपथ लेने वाले अनुवादकों" को नियुक्त करने की शक्ति है। प्रत्येक [[जर्मनी के राज्य|राज्य]] में विशेष पद और अलग-अलग नियुक्ति प्रक्रिया होती है। अधिकांश मामलों में, उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। जर्मनी अपने राज्यों में शपथ लेने वाले सभी अनुवादकों को सूचिबद्ध करने के लिए उनकी आधिकारिक सूचना www.justiz-uebersetzer.de पर ऑनलाइन उपलब्ध रखता है।
=== हंगरी ===
हंगरी में अनुवादकों और दुभाषियों के योग्यतानुसार लिए पाँच प्रकार हैंः तकनीकी अनुवादक, तकनीकी अनुवादक-प्रूफरीडर, दुभाषिया, तकनीकी दुभाषिया और सम्मेलन दुभाषिया( सभा दुभाषिया)। इन डिग्रियों को बीए और एमए प्रोग्राम्स, स्नातकोत्तर और लोक प्रशासन और न्याय मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्राप्त किया जा सकता है।
इस योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन करने में आवेदक उम्र की सीमा या अन्य किसी डिग्री के लिए बाध्य नहीं है। तकनीकी अनुवाद, तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग, तकनीकी विवेचन सम्मेलन विवेचन के लिए योग्यता निम्नलिखित संकायों (क्षेत्रों) में प्राप्त की जा सकती हैः सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र। उपर्युक्त क्षेत्रों में से किसी एक में डिग्री रखने वाला कोई भी व्यक्ति दिए गए क्षेत्र में तकनीकी अनुवाद और तकनीकी व्याख्या में योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। योग्य तकनीकी दुभाषिया और तकनीकी अनुवादक क्रमशः सम्मेलन विवेचन और तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग के लिए भी योग्य हो सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600007.MM|title=Szakfordító és tolmácsképesítések|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
अनुवाद और साक्ष्यांकण (अनुप्रमाणन) राष्ट्रीय कार्यालय (Országos Fordító és Fordítashitelesító Iroda, OFFi′) हंगरी में एक कंपनी है जिसे कार्यालय या किसी अन्य द्वारा बनाए गए हंगेरियन से और हंगेरियन में दोनों अनुवाद को प्रमाणित करने और विदेशी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां बनाने का विशेष अधिकार है।<ref>{{Cite web|url=http://www.offi.hu/company|title=OFFI|publisher=www.offi.hu|access-date=22 August 2015}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600024.MT|title=a szakfordításról és tolmácsolásról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref> बुडापेस्ट की अदालतों में व्याख्या ओ. एफ. एफ. आई. द्वारा प्रदान की जाती है।
यदि कार्यालय दुभाषिया उपलब्ध नहीं करा सकता है तो बुडापेस्ट के बाहर की अदालतों के लिए, स्थानीय अधिकारियों द्वारा पंजीकृत एक दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यक भाषा की अच्छी समझ रखने वाला एक योग्य व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/hjegy_doc.cgi?docid=98600007.IM|title=a szakfordításról és a tolmácsolásról szóló 24/1986. (VI. 26.) MT rendelet végrehajtásáról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
=== भारत ===
यहां कम दस्तावेज और स्रोत ज्ञात हैं। शपथ अधिनियम, 1969 की धारा 6 के अधीन विहित ओ. ए. टी. एच. एस. और ए. एफ. एफ. आई. डी. ए. वी. आई. टी. एस. के महाराष्ट्र न्यायालय सिविल विधि अध्याय 26 के अनुसार शपथ लेने वाला दुभाषिया या अनुवादक प्रपत्र संख्या 3 की सहायता से शपथ पत्र दे सकता है कि वह गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्यों की अच्छी तरह से और सही अर्थ में व्याख्या करेगा और अनुवाद के लिए उसे दिए गए सभी दस्तावेजों का सही और सटीक अनुवाद करेगा।
=== इंडोनेशिया ===
इंडोनेशिया में, शपथ अनुवादक वे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स एंड कल्चरल साइंसेज, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय (एफ. आई. बी., यू. आई.) द्वारा आयोजित कानूनी अनुवाद परीक्षाओं में भाग लिया और उत्तीर्ण हुए हैं।
=== इटली ===
इतालवी अदालतों और वाणिज्य दूतावासों दोनों के पास "''आधिकारिक'' अनुवादकों" (ट्राडुटोरी गियुराटी या आधिकारिक उम्मीदवार) के रूप में उन उम्मीदवारों को नियुक्त करने की शक्ति है जो संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं या भाषा प्रवीणता का प्रमाण दिखाते हैं (यह प्रमाण आमतौर पर एक विश्वविद्यालय की डिग्री होता है) ।
=== मेक्सिको ===
[[मेक्सिको]] में, प्रमाणित अनुवाद एक ऐसे अनुवाद को समझा जाता है जो सरकार द्वारा अधिकृत विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा सील और हस्ताक्षरित होता है (पेरीटो अनुवादक ऑटोरिज़ाडो) इन विशेषज्ञ अनुवादकों को आमतौर पर प्रत्येक राज्य के न्यायालय द्वारा या संघीय न्यायिक परिषद द्वारा अधिकृत किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कार्यालय भी प्रमाणित अनुवाद को सत्यापित कर सकते हैं (जैसे गुआनाजुआटो और जलिस्को में नागरिक रजिस्ट्री कार्यालय) ।<ref name="List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice">{{Cite web|url=https://www.iejcdmx.gob.mx/wp-content/uploads/PERITOS_ACTUALIZADA_MARZO-9.pdf|title=List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref><ref name="List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021">{{Cite web|url=https://www.cjf.gob.mx/resources/index/infoRelevante/2021/pdf/peritos/listaPeritosOrganosPJF_2021.pdf|title=List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref> प्रत्येक राज्य में प्राधिकरण प्रक्रिया अलग-अलग होती है, और ज्यादातर मामलों में उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। यहां अनुवाद की प्रामाणिकता की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है।
=== नीदरलैंड्स ===
डच कानूनी सहायता परिषद का एक विभाग, ब्यूरो फॉर स्वोर्न इंटरप्रेटर एंड ट्रांसलेटर्स, जिसे न्याय मंत्रालय द्वारा स्वोर्न ट्रांसलेटर एंड ट्रांसलेटर एक्ट के संबंध में विभिन्न कार्यान्वयन कार्यों के लिए सौंपा गया है। उनके पास प्रमाणीकरण के दो तरीके हैं, हालांकि सबसे उत्तम तरीका कानूनी वैधता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.bureaubtv.nl/en/|title=Bureau BTV|archive-url=https://web.archive.org/web/20150215134200/http://www.bureaubtv.nl/en/|archive-date=2015-02-15|access-date=2015-01-30}}</ref>
=== नॉर्वे ===
उम्मीदवारों को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकारी अधिकृत अनुवादकों के संघ द्वारा प्रमाणित किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|title=Statsautoriserte translatørers forening - English|website=www.statsaut-translator.no|archive-url=https://web.archive.org/web/20100115221618/http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|archive-date=January 15, 2010}}</ref> इसके बाद ही सफल उम्मीदवारों को नॉर्वे की सरकार द्वारा "सच्चे प्रमाणित अनुवाद " वाक्यांश के बाद अपने अनुवाद पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया जाता है। इस संगठन की स्थापना 1913 में हुई थी।
=== पोलैंड ===
पोलैंड में अनुवाद के मानकों को न्याय मंत्रालय के एक प्रासंगिक विभाग द्वारा विनियमित किया जाता है, और ऐसी सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक प्रत्येक अनुवादक को राज्य परीक्षा उत्तीर्ण करना पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ms.gov.pl/|title=Home|website=ms.gov.pl}}</ref> इसके बाद ऐसे व्यक्ति की एक आधिकारिक सूची में मुहर के साथ प्रविष्टि की जाती है और उसे एक शपथ अनुवादक घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, साधारण अनुवाद (व्यवसाय, प्रशासन, पत्राचार) के लिए इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होना पर्याप्त है।
=== दक्षिण अफ्रीका ===
[[दक्षिण अफ़्रीका|दक्षिण अफ्रीका]] में, अनुवादक को उच्च न्यायालय द्वारा अधिकृत होना चाहिए और उसे अपने स्रोत पाठ (या शपथ की एक मूल प्रति का) उपयोग करना चाहिए। अनुवादक केवल अपने अनुवाद की शपथ ले सकता है। अनुवाद की [[अधिप्रमाणन|प्रामाणिकता]] को प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त गवाह (जैसे एक नोटरी) की कोई आवश्यकता नहीं है।
=== स्पेन ===
स्पेन में, शपथ अनुवाद का मतलब एक ऐसे अनुवाद से है जो स्पेनिश विदेश मंत्रालय, यूरोपीय संघ और सहयोग द्वारा नियुक्त अनुवादक द्वारा अनूदित हो। [[स्पेनी भाषा|कैस्टिलियन]] और दूसरी भाषा के संयोजन के लिए स्पेन में एक शपथ अनुवादक बनने के लिए, उम्मीदवार को विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा "शपथ अनुवादक और दुभाषिया" (ट्रेड्यूक्टर-इंटर्प्रीट जुराडो) के रूप में प्रमाणित होना चाहिए। फिर, अनुवादक को मंत्रालय के साथ अपनी मुहर और हस्ताक्षर पंजीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसमें अनुवादक का डेटा शपथ लेने वाले दुभाषियों की सार्वजनिक सूची में शामिल होता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20090521005233/http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|archive-date=2009-05-21|access-date=2009-06-12}}
[[Category:CS1 maint: archived copy as title]]</ref>
शपथ लिए हुए अनुवादक पेशेवर अनुवादक होते हैं (सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति जो अनुवाद और व्याख्या में डिग्री रखते हैं) जिन्होंने स्पेनिश विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा दी गई परीक्षा उत्तीर्ण की है और इसलिए वे स्पेनिश से अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के लिए अधिकृत होते हैं और अन्य भाषाओं से स्पेनिश में भी। पात्रता या तो राज्य परीक्षा के माध्यम से या स्पेनिश विश्वविद्यालय में अनुवाद और व्याख्या के डिग्री अध्ययन को पूरा करके प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि अनुवादक ने कानून से संबंधित कुछ विषयों को पास किया हो।
स्पेन की अन्य तीन सह-आधिकारिक भाषाओं ([[बास्क भाषा|बास्क]], [[कातालान भाषा|कैटलन]] और गैलिशियन) सहित भाषाई मेल के लिए शपथ लेने वाले अनुवादकों को क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा स्पेनिश विदेश मंत्रालय के समान प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रमाणित किया जाता है।
एक नियम के रूप में, स्पेन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का अनुवाद स्पेन के विदेश मंत्रालय और सहयोग द्वारा प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, हालांकि, कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद किए गए और विभिन्न वाणिज्य दूतावासों और दूतावासों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का प्रस्तुत करने वाले देश के भीतर प्रमाणित अनुवादकों द्वारा संबंधित देश के भीतर अनुवाद किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमाणित अनुवादक संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेनिश वाणिज्य दूतावासों में से एक के लिए दस्तावेजों का अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन यदि दस्तावेज़ स्पेन में प्रस्तुत किए जाने हैं तो नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.sespanish.com/2019/04/02/how-to-get-an-apostille-for-an-fbi-background-check/|title=How to Get an Apostille for an FBI Background Check|date=2019-04-02|website=Southeast Spanish|language=en-US|access-date=2019-10-12}}</ref>
=== स्वीडन ===
कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक सेवा एजेंसी एक आधिकारिक एजेंसी है जो दुभाषियों और अनुवादकों को अधिकृत करती है, जिन्हें संगठन द्वारा आयोजित एक कड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। अधिकृत अनुवादक एक कानूनी रूप से प्रतिबंधित पदनाम है और उनके अनुवाद को सभी कानूनी उद्देश्यों के लिए कानूनी और बाध्यकारी माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|title=Kammarkollegiet | Kammarkollegiet|archive-url=https://web.archive.org/web/20140703053352/http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|archive-date=2014-07-03|access-date=2014-08-13}}</ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
यू. के. में, एक प्रमाणित अनुवाद का अर्थ केवल उस अनुवाद से है जो अनुवादक या अनुवाद एजेंसी द्वारा तारीख, अनुवादक के प्रमाण पत्र, संपर्क विवरण के साथ अनुवाद की सटीकता की गारंटी देता हुआ बयान के साथ संलग्न हो। उन्हें अक्सर हस्ताक्षरित और मुहरबंद किया जाता है और सटीकता की अतिरिक्त गारंटी के लिए उन्हें प्रूफरीड किया जाना चाहिए। यह उस प्रकार का प्रमाणन है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों जैसे गृह कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और यूके में अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है। एक प्रमाणित अनुवाद इसकी सटीकता की गारंटी देता है और इसमें अनुवादक या परियोजना प्रबंधक का नाम और संपर्क सूत्र होता है, जो उस सटीकता की पुष्टि कर सकता है और ऐसा करने के लिए अनुरोध करने वाले संगठन द्वारा संपर्क किया जा सकता है।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
एक प्रमाणित अनुवाद में स्रोत-भाषा पाठ, लक्षित-भाषा पाठ और अनुवादक या अनुवाद कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान होता है कि अनुवादक या अनुवाद कम्पनी के प्रतिनिधि का मानना है कि लक्षित-भाषा के पाठ स्रोत-भाषा के ग्रंथ का सटीक और पूर्ण अनुवाद है। हस्ताक्षर नोटरीकृत होना चाहिए। अनुवादकों के लिए कोई संघीय या राज्य लाइसेंस या प्रमाणन नहीं है। अनुवादकों के लिए कुछ प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं लेकिन वे अन्य देशों में संघीय लाइसेंसिंग या प्रमाणन के समान मान्य नहीं हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.atanet.org/client-assistance/certified-translation-vs-certified-translator/|title=Certified Translation vs. Certified Translator|date=25 May 2016}}</ref>
=== संयुक्त अरब अमीरात ===
संयुक्त अरब अमीरात (यू. ए. ई.) में एक प्रमाणित अनुवाद कानूनी अनुवाद का पर्याय है। कानूनी अनुवाद केवल संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रालय द्वारा लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक अनुवादक को प्रत्येक भाषा जोड़ी(स्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा) के लिए न्याय मंत्रालय, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। एक भाषा जोड़ी में अरबी और एक विदेशी भाषा होती है। संयुक्त अरब अमीरात में केवल 9 विदेशी भाषाओं के लिए कानूनी अनुवादक उपलब्ध हैं जैसे अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इतालवी, रूसी, चीनी, फ़ारसी (फ़ारसी और तुर्की के रूप में भी जाना जाता है) । केवल कानूनी अनुवाद को संयुक्त अरब अमीरात के नोटरी पब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, संयुक्त अरब अरब अमीरात से नोटरीकृत, सत्यापित और वैध किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास केवल कानूनी अनुवाद को वैध बनाते हैं जो विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, यूएई द्वारा सत्यापित हैं। विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, यूएई से कानूनी अनुवाद को वैध बनाने के लिए इसे पहले यूएई के न्याय मंत्रालय या यूएई के नोटरी पब्लिक से वैध किया जाना ज़रूरी होता है। संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय केवल उनके लाइसेंस प्राप्त अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद को वैध बनाता है।
== यह भी देखें। ==
* [[Translation|अनुवाद।]]
* [[Legal translation|कानूनी अनुवाद।]]
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'''प्रमाणित [[अनुवाद]]''' लक्ष्य भाषा क्षेत्राधिकार की आवश्यकताओं के अनुसार स्रोत पाठ के अर्थ को दूसरी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे इसे औपचारिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।अनुवादक इसकी सटीकता के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ये आवश्यकताएँ देश-दर-देश व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। जबकि कुछ देश केवल राज्य द्वारा नियुक्त अनुवादकों को इस तरह के अनुवाद करने की अनुमति देते हैं, वहीं कुछ अन्य देश किसी भी सक्षम द्विभाषी व्यक्ति द्वारा किए गए अनुवाद को स्वीकार कर लेते हैं। इन दो व्यापक सीमाओं के बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ किसी भी पेशेवर अनुवादक द्वारा सही प्रमाण पत्र के साथ एक प्रमाणित अनुवाद किया जा सकता है (जिसमें विशिष्ट अनुवाद संघों की सदस्यता या कुछ योग्यताएँ शामिल हो सकती हैं) ।
अंग्रेजी बोलने वाले देश, जैसे कि [[यूनाइटेड किंगडम]], संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]], के स्पेक्ट्रम सख्त या थोड़े अनौपचारिक होते हैं, जिसमें अनुवादक प्रमाणित अनुवाद की अनुशंसा अपने आधिकारिक लेटर पैड आदि पर करता है जिसमें उक्त प्रमाणित अनुवाद की आवश्यकता, अनुवादक का विवरण एवं हस्ताक्षर दिनांक के साथ उपेक्षित होता है।
यह एक प्रकार का प्रमाणिकरण है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों, जैसे कि गृह कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है।
ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों में इस संबंध में बहुत सख्त कानून हैं कि कौन प्रमाणित अनुवाद जारी कर सकता है, जिसमें अधिकांश आधिकारिक प्रमाणित अनुवादकों की नियुक्ति उनके आधार पर स्थानीय राज्य-विनियमित योग्यता प्राप्त करने पर की जाती है।
== कानूनी आवश्यकताएं ==
कानूनी और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए, [[साक्ष्य विधि|साक्ष्य दस्तावेज]] और अन्य आधिकारिक दस्तावेज आमतौर पर [[राजभाषा|आधिकारिक भाषा]] ([[अधिकारिता|अधिकार क्षेत्र]] की भाषा) में आवश्यक होते हैं।
कुछ [[देश]] में, ऐसे दस्तावेजों के अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि एक [[अनुवाद|अनुवादक]] [[शपथ]] लेकर यह प्रमाणित करे कि यह(अनूदित प्रमाणित अनुवाद) स्रोत पाठ के कानूनी समकक्ष है। अक्सर, केवल एक विशेष वर्ग के अनुवादकों को ही ऐसी शपथ लेने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में, अनुवाद को कानूनी समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार किया जाता है जब इसके साथ इसकी मूल या शपथ या प्रमाणित प्रति संलग्न हो।
भले ही कोई अनुवादक कानूनी अनुवाद में माहिर हो या अपने देश में एक वकील हो, यह जरूरी नहीं कि वे एक प्रमाणित अनुवादक बन जाए। कानूनी समतुल्यता में अनुवाद करने की प्रक्रिया देश-दर-देश अलग-अलग होती है।
=== अर्जेंटीना ===
स्थानीय कानूनों के अनुपालन में, स्पेनिश के अलावा अन्य भाषाओं में लिखे गए सभी दस्तावेजों का स्थानीय कानूनों के अनुसार एक प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा स्पेनिश में अनुवाद किया जाना चाहिए। आम तौर पर, अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेजों (व्यक्तिगत कागजात और कुछ वाणिज्यिक अनुबंधों सहित) का अनुवाद और हस्ताक्षर एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसका मुहर और हस्ताक्षर उस संबंधित पेशेवर संघ द्वारा प्रमाणित हो जो अनुवादक का लाइसेंस जारी करता हो। सभी निजी व्यक्ति, कंपनियां, न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभाग विदेशी भाषा में दस्तावेजों या बयानों के संबंध में विभिन्न कानूनों के अधीन हैं, जैसे कि अर्जेंटीना सिविल और वाणिज्यिक संहिता, अर्जेंटीना कोड ऑफ सिविल एंड क्रिमिनल प्रोसीजर, अन्य।<ref>{{Cite web|url=http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|title=Colegio de Traductores Públicos de la Ciudad de Buenos Aires|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001142704/http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|archive-date=October 1, 2009|access-date=March 10, 2010}}</ref> "पब्लिक ट्रांसलेटर" के रूप में प्रमाणित होने के लिए, उम्मीदवारों को "ट्रेडकटोर पब्लिक"/"ट्रेडकटा पब्लिक" की विश्वविद्यालयी डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है।
=== ऑस्ट्रिया ===
शपथ और प्रमाणित विशेषज्ञ, दुभाषिया और अनुवादक अधिनियम #137/1995 (एसडीजी) की धारा 14 के अनुसार, क्षेत्रीय अदालतें [[जर्मन भाषा|जर्मन]] और किसी भी भाषा (सांकेतिक भाषा सहित) के बीच अनुवाद के लिए ऐसे किसी भी प्रमाणित अनुवादकों को नियुक्त करने के हकदार हैं, जिन्होंने एक आधिकारिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अदालत में शपथ ली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|title=SV- und Dolmetschergergesetz|archive-url=https://web.archive.org/web/20190306234811/https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|archive-date=2019-03-06|access-date=2019-03-06}}</ref> प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को किसी विश्वविद्यालय से अनुवाद अध्ययन में स्नातक की डिग्री के साथ-साथ अनुवादक या दुभाषिया के रूप में कम से कम 5 वर्षों के अनुभव या कम से कम 2 वर्षों के अनुभव का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। हालांकि ज्यादातर "गेरिच्ट्सडोल्मेट्सचर" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जबकि उसका सही नाम "ऑलजेमिन बीडेटे/आर उंड गेरिचट्लिच ज़र्टिफाइज़िएर्ट/आर डॉल्मेट्सचर/इन" है। शपथ लिए हुए अनुवादक मूल अनुवाद पर हस्ताक्षर करके और उन पर मुहर लगाकर सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने के हकदार हैं। अनुवादों पर उनके हस्ताक्षर के आगे नोटराइजेशन की आवश्यकता नहीं है, और शपथ लेने वाले अनुवादक एक '''अपोस्टिल''' को जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। पुलिस को सलाह दी जाती है कि जब भी संभव हो भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए दुभाषियों को शामिल करें। ऑस्ट्रिया में अधिकांश सार्वजनिक अधिकारी दस्तावेजों के अनुवाद को कानूनी रूप से समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार करते हैं जब दी गई भाषा के लिए एक शपथ दुभाषिया द्वारा सील और हस्ताक्षर किए जाते हैं।
यदि कोई दुभाषिया नियमित रूप से पेशेवर प्रशिक्षण में भाग नहीं लेगा तो प्राधिकरण समाप्त हो जाएगा।
=== बेल्जियम ===
"शपथ अनुवादक" (एकल [[डच भाषा|डच]] beëdigd vertaler, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] transtuter assermenté अल्लतु "शपथ दुभाषिया" (एकल [[डच भाषा|डच]] beädigd tolk, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] interprète assermente) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस न्यायिक जिले के प्रथम उदाहरण की शपथ लेते हैं जिसमें उनका निवास स्थान है। अतीत में सभी न्यायिक जिलों में "शपथ" का दर्जा पाने के इच्छुक अनुवादकों और दुभाषियों की क्राउन प्रॉसिक्यूटर द्वारा उपयुक्तता के लिए जांच की जाती थी। उम्मीदवार को शपथ लेने के लिए भाषा संयोजनों(किस भाषा से, किस भाषा में अनुवाद करेंगे) बताना होगा। अनुवादक/दुभाषिया की डिग्री को आमतौर पर योग्यता का पर्याप्त प्रमाण माना जाता है। भाषा संयोजनों की कोई सीमा नहीं है जिन्हें पहचाना जा सकता है।
हालांकि, एक अवैध अप्रवासी से जुड़े घोटाले के बाद, जिसने शपथ अनुवादक का दर्जा प्राप्त किया था, [[एंटवर्प]] में प्रथम बार के न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने एक प्रयोगात्मक योजना शुरू की, जिसके तहत शपथ लेने वाले अनुवादकों और दुभाषियों को न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और परीक्षा में उपस्थित होना पड़ता है। भाषा कानूनों की अपनी व्याख्या के आधार पर, उसी राष्ट्रपति ने यह भी फैसला सुनाया कि एक शपथ अनुवादक/दुभाषिया के दर्जे के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र भाषा संयोजन वे थे जिनमें डच या तो मूल भाषा या लक्ष्य भाषा थी। बेल्जियम के अन्य न्यायिक जिलों द्वारा अभी तक इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया है।
=== ब्राजील ===
आधिकारिक दस्तावेजों का अनुवाद केवल सार्वजनिक अनुवादकों और दुभाषियों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा प्रमाणित और मान्यता प्राप्त हैं। आवेदकों को उक्त भाषाओं मेें मौखिक और लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। पंजीकरण संख्या प्राप्त करने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जाती है, जिसे प्रत्येक अनुवाद के शीर्षक में सूचित किया जाना चाहिए।
जब उक्त भाषाओं के लिए कोई सार्वजनिक अनुवादक पंजीकृत नहीं होता है, तो एकल अनुवाद कार्य करने के लिए वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा अस्थायी अनुवादकों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री भी अनुवाद शुल्क निर्धारित करती है।
यद्यपि सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक/दुभाषिया को पंजीकरण की स्थिति में रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुवाद पूरे देश में मान्य हैं। सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक के निवास से अलग शहरों और राज्यों में संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अनुवादक के हस्ताक्षर के नोटरी सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
विदेशी दस्तावेजों को अनुवाद से पहले ब्राजील के वाणिज्य दूतावास या दूतावास द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यदि विदेशी देश की संस्था या सरकारी एजेंसी आवश्यक समझे तो विदेशी भाषा में अनूदित आधिकारिक दस्तावेजों में ब्राजील के विदेश मंत्रालय द्वारा सत्यापित सार्वजनिक शपथ अनुवादक के हस्ताक्षर आवश्यक होता है।[1]
=== कनाडा ===
दस्तावेजों का आधिकारिक अनुवाद दो तरीकों में से एक तरीके से किया जा सकता है। प्रमाणित अनुवाद, एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा पूरा किए जाते हैं और अनुवादक की घोषणा, हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापित होते हैं। "प्रमाणित अनुवादक" का पद कनाडा में एक संरक्षित पद है, जिसमें केवल वे व्यक्ति जो प्रांतीय अनुवादक संघ के सक्रिय सदस्य हैं और एक प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इस पद के लिए योग्य हैं और वही प्रमाणित अनुवाद कर सकते हैं। कनाडा में आधिकारिक अनुवाद प्रस्तुत करने का एक वैकल्पिक तरीका यह है कि अनुवाद का शपथ पत्र लेने के लिए एक नोटरी पब्लिक या आयुक्त की उपस्थिति में अनुवादक द्वारा हस्ताक्षरित एक शपथ पत्र संलग्न करना पड़ता है।
=== जर्मनी ===
जर्मन में वहां के क्षेत्रीय अदालतों (''लैंडगेरिचटे'') को "शपथ लेने वाले अनुवादकों" को नियुक्त करने की शक्ति है। प्रत्येक [[जर्मनी के राज्य|राज्य]] में विशेष पद और अलग-अलग नियुक्ति प्रक्रिया होती है। अधिकांश मामलों में, उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। जर्मनी अपने राज्यों में शपथ लेने वाले सभी अनुवादकों को सूचिबद्ध करने के लिए उनकी आधिकारिक सूचना www.justiz-uebersetzer.de पर ऑनलाइन उपलब्ध रखता है।
=== हंगरी ===
हंगरी में अनुवादकों और दुभाषियों के योग्यतानुसार लिए पाँच प्रकार हैंः तकनीकी अनुवादक, तकनीकी अनुवादक-प्रूफरीडर, दुभाषिया, तकनीकी दुभाषिया और सम्मेलन दुभाषिया( सभा दुभाषिया)। इन डिग्रियों को बीए और एमए प्रोग्राम्स, स्नातकोत्तर और लोक प्रशासन और न्याय मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्राप्त किया जा सकता है।
इस योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन करने में आवेदक उम्र की सीमा या अन्य किसी डिग्री के लिए बाध्य नहीं है। तकनीकी अनुवाद, तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग, तकनीकी विवेचन सम्मेलन विवेचन के लिए योग्यता निम्नलिखित संकायों (क्षेत्रों) में प्राप्त की जा सकती हैः सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र। उपर्युक्त क्षेत्रों में से किसी एक में डिग्री रखने वाला कोई भी व्यक्ति दिए गए क्षेत्र में तकनीकी अनुवाद और तकनीकी व्याख्या में योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। योग्य तकनीकी दुभाषिया और तकनीकी अनुवादक क्रमशः सम्मेलन विवेचन और तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग के लिए भी योग्य हो सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600007.MM|title=Szakfordító és tolmácsképesítések|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
अनुवाद और साक्ष्यांकण (अनुप्रमाणन) राष्ट्रीय कार्यालय (Országos Fordító és Fordítashitelesító Iroda, OFFi′) हंगरी में एक कंपनी है जिसे कार्यालय या किसी अन्य द्वारा बनाए गए हंगेरियन से और हंगेरियन में दोनों अनुवाद को प्रमाणित करने और विदेशी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां बनाने का विशेष अधिकार है।<ref>{{Cite web|url=http://www.offi.hu/company|title=OFFI|publisher=www.offi.hu|access-date=22 August 2015}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600024.MT|title=a szakfordításról és tolmácsolásról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref> बुडापेस्ट की अदालतों में व्याख्या ओ. एफ. एफ. आई. द्वारा प्रदान की जाती है।
यदि कार्यालय दुभाषिया उपलब्ध नहीं करा सकता है तो बुडापेस्ट के बाहर की अदालतों के लिए, स्थानीय अधिकारियों द्वारा पंजीकृत एक दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यक भाषा की अच्छी समझ रखने वाला एक योग्य व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/hjegy_doc.cgi?docid=98600007.IM|title=a szakfordításról és a tolmácsolásról szóló 24/1986. (VI. 26.) MT rendelet végrehajtásáról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
=== भारत ===
यहां कम दस्तावेज और स्रोत ज्ञात हैं। शपथ अधिनियम, 1969 की धारा 6 के अधीन विहित ओ. ए. टी. एच. एस. और ए. एफ. एफ. आई. डी. ए. वी. आई. टी. एस. के महाराष्ट्र न्यायालय सिविल विधि अध्याय 26 के अनुसार शपथ लेने वाला दुभाषिया या अनुवादक प्रपत्र संख्या 3 की सहायता से शपथ पत्र दे सकता है कि वह गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्यों की अच्छी तरह से और सही अर्थ में व्याख्या करेगा और अनुवाद के लिए उसे दिए गए सभी दस्तावेजों का सही और सटीक अनुवाद करेगा।
=== इंडोनेशिया ===
इंडोनेशिया में, शपथ अनुवादक वे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स एंड कल्चरल साइंसेज, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय (एफ. आई. बी., यू. आई.) द्वारा आयोजित कानूनी अनुवाद परीक्षाओं में भाग लिया और उत्तीर्ण हुए हैं।
=== इटली ===
इतालवी अदालतों और वाणिज्य दूतावासों दोनों के पास "''आधिकारिक'' अनुवादकों" (ट्राडुटोरी गियुराटी या आधिकारिक उम्मीदवार) के रूप में उन उम्मीदवारों को नियुक्त करने की शक्ति है जो संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं या भाषा प्रवीणता का प्रमाण दिखाते हैं (यह प्रमाण आमतौर पर एक विश्वविद्यालय की डिग्री होता है) ।
=== मेक्सिको ===
[[मेक्सिको]] में, प्रमाणित अनुवाद एक ऐसे अनुवाद को समझा जाता है जो सरकार द्वारा अधिकृत विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा सील और हस्ताक्षरित होता है (पेरीटो अनुवादक ऑटोरिज़ाडो) इन विशेषज्ञ अनुवादकों को आमतौर पर प्रत्येक राज्य के न्यायालय द्वारा या संघीय न्यायिक परिषद द्वारा अधिकृत किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कार्यालय भी प्रमाणित अनुवाद को सत्यापित कर सकते हैं (जैसे गुआनाजुआटो और जलिस्को में नागरिक रजिस्ट्री कार्यालय) ।<ref name="List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice">{{Cite web|url=https://www.iejcdmx.gob.mx/wp-content/uploads/PERITOS_ACTUALIZADA_MARZO-9.pdf|title=List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref><ref name="List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021">{{Cite web|url=https://www.cjf.gob.mx/resources/index/infoRelevante/2021/pdf/peritos/listaPeritosOrganosPJF_2021.pdf|title=List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref> प्रत्येक राज्य में प्राधिकरण प्रक्रिया अलग-अलग होती है, और ज्यादातर मामलों में उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। यहां अनुवाद की प्रामाणिकता की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है।
=== नीदरलैंड्स ===
डच कानूनी सहायता परिषद का एक विभाग, ब्यूरो फॉर स्वोर्न इंटरप्रेटर एंड ट्रांसलेटर्स, जिसे न्याय मंत्रालय द्वारा स्वोर्न ट्रांसलेटर एंड ट्रांसलेटर एक्ट के संबंध में विभिन्न कार्यान्वयन कार्यों के लिए सौंपा गया है। उनके पास प्रमाणीकरण के दो तरीके हैं, हालांकि सबसे उत्तम तरीका कानूनी वैधता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.bureaubtv.nl/en/|title=Bureau BTV|archive-url=https://web.archive.org/web/20150215134200/http://www.bureaubtv.nl/en/|archive-date=2015-02-15|access-date=2015-01-30}}</ref>
=== नॉर्वे ===
उम्मीदवारों को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकारी अधिकृत अनुवादकों के संघ द्वारा प्रमाणित किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|title=Statsautoriserte translatørers forening - English|website=www.statsaut-translator.no|archive-url=https://web.archive.org/web/20100115221618/http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|archive-date=January 15, 2010}}</ref> इसके बाद ही सफल उम्मीदवारों को नॉर्वे की सरकार द्वारा "सच्चे प्रमाणित अनुवाद " वाक्यांश के बाद अपने अनुवाद पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया जाता है। इस संगठन की स्थापना 1913 में हुई थी।
=== पोलैंड ===
पोलैंड में अनुवाद के मानकों को न्याय मंत्रालय के एक प्रासंगिक विभाग द्वारा विनियमित किया जाता है, और ऐसी सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक प्रत्येक अनुवादक को राज्य परीक्षा उत्तीर्ण करना पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ms.gov.pl/|title=Home|website=ms.gov.pl}}</ref> इसके बाद ऐसे व्यक्ति की एक आधिकारिक सूची में मुहर के साथ प्रविष्टि की जाती है और उसे एक शपथ अनुवादक घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, साधारण अनुवाद (व्यवसाय, प्रशासन, पत्राचार) के लिए इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होना पर्याप्त है।
=== दक्षिण अफ्रीका ===
[[दक्षिण अफ़्रीका|दक्षिण अफ्रीका]] में, अनुवादक को उच्च न्यायालय द्वारा अधिकृत होना चाहिए और उसे अपने स्रोत पाठ (या शपथ की एक मूल प्रति का) उपयोग करना चाहिए। अनुवादक केवल अपने अनुवाद की शपथ ले सकता है। अनुवाद की [[अधिप्रमाणन|प्रामाणिकता]] को प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त गवाह (जैसे एक नोटरी) की कोई आवश्यकता नहीं है।
=== स्पेन ===
स्पेन में, शपथ अनुवाद का मतलब एक ऐसे अनुवाद से है जो स्पेनिश विदेश मंत्रालय, यूरोपीय संघ और सहयोग द्वारा नियुक्त अनुवादक द्वारा अनूदित हो। [[स्पेनी भाषा|कैस्टिलियन]] और दूसरी भाषा के संयोजन के लिए स्पेन में एक शपथ अनुवादक बनने के लिए, उम्मीदवार को विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा "शपथ अनुवादक और दुभाषिया" (ट्रेड्यूक्टर-इंटर्प्रीट जुराडो) के रूप में प्रमाणित होना चाहिए। फिर, अनुवादक को मंत्रालय के साथ अपनी मुहर और हस्ताक्षर पंजीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसमें अनुवादक का डेटा शपथ लेने वाले दुभाषियों की सार्वजनिक सूची में शामिल होता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20090521005233/http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|archive-date=2009-05-21|access-date=2009-06-12}}
[[Category:CS1 maint: archived copy as title]]</ref>
शपथ लिए हुए अनुवादक पेशेवर अनुवादक होते हैं (सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति जो अनुवाद और व्याख्या में डिग्री रखते हैं) जिन्होंने स्पेनिश विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा दी गई परीक्षा उत्तीर्ण की है और इसलिए वे स्पेनिश से अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के लिए अधिकृत होते हैं और अन्य भाषाओं से स्पेनिश में भी। पात्रता या तो राज्य परीक्षा के माध्यम से या स्पेनिश विश्वविद्यालय में अनुवाद और व्याख्या के डिग्री अध्ययन को पूरा करके प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि अनुवादक ने कानून से संबंधित कुछ विषयों को पास किया हो।
स्पेन की अन्य तीन सह-आधिकारिक भाषाओं ([[बास्क भाषा|बास्क]], [[कातालान भाषा|कैटलन]] और गैलिशियन) सहित भाषाई मेल के लिए शपथ लेने वाले अनुवादकों को क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा स्पेनिश विदेश मंत्रालय के समान प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रमाणित किया जाता है।
एक नियम के रूप में, स्पेन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का अनुवाद स्पेन के विदेश मंत्रालय और सहयोग द्वारा प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, हालांकि, कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद किए गए और विभिन्न वाणिज्य दूतावासों और दूतावासों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का प्रस्तुत करने वाले देश के भीतर प्रमाणित अनुवादकों द्वारा संबंधित देश के भीतर अनुवाद किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमाणित अनुवादक संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेनिश वाणिज्य दूतावासों में से एक के लिए दस्तावेजों का अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन यदि दस्तावेज़ स्पेन में प्रस्तुत किए जाने हैं तो नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.sespanish.com/2019/04/02/how-to-get-an-apostille-for-an-fbi-background-check/|title=How to Get an Apostille for an FBI Background Check|date=2019-04-02|website=Southeast Spanish|language=en-US|access-date=2019-10-12}}</ref>
=== स्वीडन ===
कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक सेवा एजेंसी एक आधिकारिक एजेंसी है जो दुभाषियों और अनुवादकों को अधिकृत करती है, जिन्हें संगठन द्वारा आयोजित एक कड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। अधिकृत अनुवादक एक कानूनी रूप से प्रतिबंधित पदनाम है और उनके अनुवाद को सभी कानूनी उद्देश्यों के लिए कानूनी और बाध्यकारी माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|title=Kammarkollegiet | Kammarkollegiet|archive-url=https://web.archive.org/web/20140703053352/http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|archive-date=2014-07-03|access-date=2014-08-13}}</ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
यू. के. में, एक प्रमाणित अनुवाद का अर्थ केवल उस अनुवाद से है जो अनुवादक या अनुवाद एजेंसी द्वारा तारीख, अनुवादक के प्रमाण पत्र, संपर्क विवरण के साथ अनुवाद की सटीकता की गारंटी देता हुआ बयान के साथ संलग्न हो। उन्हें अक्सर हस्ताक्षरित और मुहरबंद किया जाता है और सटीकता की अतिरिक्त गारंटी के लिए उन्हें प्रूफरीड किया जाना चाहिए। यह उस प्रकार का प्रमाणन है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों जैसे गृह कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और यूके में अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है। एक प्रमाणित अनुवाद इसकी सटीकता की गारंटी देता है और इसमें अनुवादक या परियोजना प्रबंधक का नाम और संपर्क सूत्र होता है, जो उस सटीकता की पुष्टि कर सकता है और ऐसा करने के लिए अनुरोध करने वाले संगठन द्वारा संपर्क किया जा सकता है।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
एक प्रमाणित अनुवाद में स्रोत-भाषा पाठ, लक्षित-भाषा पाठ और अनुवादक या अनुवाद कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान होता है कि अनुवादक या अनुवाद कम्पनी के प्रतिनिधि का मानना है कि लक्षित-भाषा के पाठ स्रोत-भाषा के ग्रंथ का सटीक और पूर्ण अनुवाद है। हस्ताक्षर नोटरीकृत होना चाहिए। अनुवादकों के लिए कोई संघीय या राज्य लाइसेंस या प्रमाणन नहीं है। अनुवादकों के लिए कुछ प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं लेकिन वे अन्य देशों में संघीय लाइसेंसिंग या प्रमाणन के समान मान्य नहीं हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.atanet.org/client-assistance/certified-translation-vs-certified-translator/|title=Certified Translation vs. Certified Translator|date=25 May 2016}}</ref>
=== संयुक्त अरब अमीरात ===
संयुक्त अरब अमीरात (यू. ए. ई.) में एक प्रमाणित अनुवाद कानूनी अनुवाद का पर्याय है। कानूनी अनुवाद केवल संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रालय द्वारा लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक अनुवादक को प्रत्येक भाषा जोड़ी(स्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा) के लिए न्याय मंत्रालय, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। एक भाषा जोड़ी में अरबी और एक विदेशी भाषा होती है। संयुक्त अरब अमीरात में केवल 9 विदेशी भाषाओं के लिए कानूनी अनुवादक उपलब्ध हैं जैसे अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इतालवी, रूसी, चीनी, फ़ारसी (फ़ारसी और तुर्की के रूप में भी जाना जाता है) । केवल कानूनी अनुवाद को संयुक्त अरब अमीरात के नोटरी पब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, संयुक्त अरब अरब अमीरात से नोटरीकृत, सत्यापित और वैध किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास केवल कानूनी अनुवाद को वैध बनाते हैं जो विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, यूएई द्वारा सत्यापित हैं। विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, यूएई से कानूनी अनुवाद को वैध बनाने के लिए इसे पहले यूएई के न्याय मंत्रालय या यूएई के नोटरी पब्लिक से वैध किया जाना ज़रूरी होता है। संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय केवल उनके लाइसेंस प्राप्त अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद को वैध बनाता है।
== यह भी देखें। ==
* [[अनुवाद|अनुवाद।]]
* [[Legal translation|कानूनी अनुवाद।]]
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सदस्य वार्ता:Khushi200
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* यदि सभी की सहमति हो तो मैं इस विषय को उपयुक्त एवं विश्वसनीय स्रोतों के साथ एक व्यवस्थित सूची के रूप में विकसित कर सकता हूँ। तथापि, वर्तमान स्वरूप में यह लेख ज्ञानकोशीय मानकों को पूर्ण नहीं करता है; अतः इसे हटाया जाना उचित होगा। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 09:22, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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छत्तीसगढ़ी उपन्यासकार यशवंत साहू कोंगानिहा
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{{प्रचार|date=अप्रैल 2026}}
छत्तीसगढ़ी संदर्भ में यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ (Yashwant Sahu Konganiha) एक लोक-आधारित लेखक माने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ ज़्यादातर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककथाओं और इतिहास पर आधारित हैं।
📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
यह जानकारी अलग-अलग स्रोतों से मिलती है:
1. “पलायन (Palayan)” "ISBN - 978-93-9212-909-4"
"छत्तीसगढ़ी लोकगाथा “दसमत कैना” पर आधारित एवं
" मेहनतकश जीवन जीने वाले ओड (Oad) जाति की कथा पर आधारित"
हिंदी साहित्य सदन नई दिल्ली से प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी उपन्यास"|
2. “दसमत (Dasmat)” "छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN is 978-93-5607-661-7 "
"काफी प्रसिद्ध रचना, विश्वविद्यालय स्तर पर भी संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोग"
छत्तीसगढ़ी संस्एकृति से संबंधित एक कालजयी रचना |
3. “दाई (Daai)” छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN 978-81-971726-5-6
"छत्तीसगढ़ी समाज और छत्मतीसगढ की प्रशिध्ध मातृशक्ति माँ बहादुर कलारिन पर आधारित छत्तीसगढ़ी उपन्यास"
"हाल के वर्षों में प्रकाशित "छत्तीसगढ के लोकजीवन से संबंधित उपान्यास|
4. “मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत” "ISBN - 978-93-5396-714-7" छत्तीसगढ के बस्तर पर आधारित काव्य संग्रह में बस्तर के पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
5. “वह धरा जहाँ पर सुर गूँजा” "ISBN - 978-93-5768-172-8" छत्तीसगढ के सरगुजा क्षेत्र पर आधारित काव्य संग्रह में सरगुजा के सुन्दर छवि , पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ की अन्य प्रकाशनाधीन रचनाये
“संगम” '''छत्तीसगढ की पृष्पठभूमि पर आधारित एक छत्तीसगढ़ी नाट्य '''
“राजिम”''छत्तीसगढ पर केंद्रित एक छत्तीसगढ़ी उपान्यास '''
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📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
यह जानकारी अलग-अलग स्रोतों से मिलती है:
1. “पलायन (Palayan)” [https://www.exoticindiaart.com/book/details/palayan-novel-based-on-chhattisgarhi-folk-tale-dasmat-kaina-related-to-oad-caste-haj542/] "ISBN - 978-93-9212-909-4"
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यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ की अन्य प्रकाशनाधीन रचनाये
“संगम” '''छत्तीसगढ की पृष्पठभूमि पर आधारित एक छत्तीसगढ़ी नाट्य '''
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छत्तीसगढ़ी संदर्भ में यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ (Yashwant Sahu Konganiha) एक लोक-आधारित लेखक माने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ ज़्यादातर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककथाओं और इतिहास पर आधारित हैं।
📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
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1. “पलायन (Palayan)” [https://www.exoticindiaart.com/book/details/palayan-novel-based-on-chhattisgarhi-folk-tale-dasmat-kaina-related-to-oad-caste-haj542/] "ISBN - 978-93-9212-909-4"
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हिंदी साहित्य सदन नई दिल्ली से प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी उपन्यास"|
2. “दसमत (Dasmat)” "छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN is 978-93-5607-661-7 "
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📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
यह जानकारी अलग-अलग स्रोतों से मिलती है:
1. “पलायन (Palayan)” [https://www.exoticindiaart.com/book/details/palayan-novel-based-on-chhattisgarhi-folk-tale-dasmat-kaina-related-to-oad-caste-haj542/] "ISBN - 978-93-9212-909-4"
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2. “दसमत (Dasmat)[https://www.amazon.in/Dusmat-Novel-Famous-Chhattisgarh-Dasmat/dp/B0BZLJZJ8Z]” "छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN is 978-93-5607-661-7 "
"काफी प्रसिद्ध रचना, विश्वविद्यालय स्तर पर भी संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोग"
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"छत्तीसगढ़ी समाज और छत्मतीसगढ की प्रशिध्ध मातृशक्ति माँ बहादुर कलारिन पर आधारित छत्तीसगढ़ी उपन्यास"
"हाल के वर्षों में प्रकाशित "छत्तीसगढ के लोकजीवन से संबंधित उपान्यास|[https://rashtrabodh.com/archives/33529]
4. “मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत” "ISBN - 978-93-5396-714-7" छत्तीसगढ के बस्तर पर आधारित काव्य संग्रह में बस्तर के पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
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“संगम” '''छत्तीसगढ की पृष्पठभूमि पर आधारित एक छत्तीसगढ़ी नाट्य '''
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छत्तीसगढ़ी संदर्भ में यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ (Yashwant Sahu Konganiha) एक लोक-आधारित लेखक माने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ ज़्यादातर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककथाओं और इतिहास पर आधारित हैं।
📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
यह जानकारी अलग-अलग स्रोतों से मिलती है:
1. “पलायन (Palayan)” [https://www.exoticindiaart.com/book/details/palayan-novel-based-on-chhattisgarhi-folk-tale-dasmat-kaina-related-to-oad-caste-haj542/] "ISBN - 978-93-9212-909-4"
"छत्तीसगढ़ी लोकगाथा “दसमत कैना” पर आधारित एवं
" मेहनतकश जीवन जीने वाले ओड (Oad) जाति की कथा पर आधारित"
हिंदी साहित्य सदन नई दिल्ली से प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी उपन्यास"|
2. “दसमत (Dasmat)[https://www.amazon.in/Dusmat-Novel-Famous-Chhattisgarh-Dasmat/dp/B0BZLJZJ8Z]” "छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN is 978-93-5607-661-7 "
"काफी प्रसिद्ध रचना, विश्वविद्यालय स्तर पर भी संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोग"
छत्तीसगढ़ी संस्एकृति से संबंधित एक कालजयी रचना |
3. “दाई (Daai)” छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN 978-81-971726-5-6
"छत्तीसगढ़ी समाज और छत्मतीसगढ की प्रशिध्ध मातृशक्ति माँ बहादुर कलारिन पर आधारित छत्तीसगढ़ी उपन्यास"
"हाल के वर्षों में प्रकाशित "छत्तीसगढ के लोकजीवन से संबंधित उपान्यास|[https://rashtrabodh.com/archives/33529]
4. “मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत” "ISBN - 978-93-5396-714-7" छत्तीसगढ के बस्तर पर आधारित काव्य संग्रह में बस्तर के पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
5. “वह धरा जहाँ पर सुर गूँजा” "ISBN - 978-93-5768-172-8" छत्तीसगढ के सरगुजा क्षेत्र पर आधारित काव्य संग्रह में सरगुजा के सुन्दर छवि , पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ की अन्य प्रकाशनाधीन रचनाये
“संगम” '''छत्तीसगढ की पृष्पठभूमि पर आधारित एक छत्तीसगढ़ी नाट्य '''
“राजिम”''छत्तीसगढ पर केंद्रित एक छत्तीसगढ़ी उपान्यास '''
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AMAN KUMAR
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छत्तीसगढ़ी संदर्भ में यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ (Yashwant Sahu Konganiha) एक लोक-आधारित लेखक माने जाते हैं, जिनकी रचनाएँ ज़्यादातर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककथाओं और इतिहास पर आधारित हैं।
📚 इनके प्रमुख किताबें (Chhattisgarhi related)
यह जानकारी अलग-अलग स्रोतों से मिलती है:
1. “पलायन (Palayan)” [https://www.exoticindiaart.com/book/details/palayan-novel-based-on-chhattisgarhi-folk-tale-dasmat-kaina-related-to-oad-caste-haj542/] "ISBN - 978-93-9212-909-4"
"छत्तीसगढ़ी लोकगाथा “दसमत कैना” पर आधारित एवं
" मेहनतकश जीवन जीने वाले ओड (Oad) जाति की कथा पर आधारित"
हिंदी साहित्य सदन नई दिल्ली से प्रकाशित बहुचर्चित हिंदी उपन्यास"|
2. “दसमत (Dasmat)[https://www.amazon.in/Dusmat-Novel-Famous-Chhattisgarh-Dasmat/dp/B0BZLJZJ8Z]” "छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN is 978-93-5607-661-7 "
"काफी प्रसिद्ध रचना, विश्वविद्यालय स्तर पर भी संदर्भ पुस्तक के रूप में उपयोग"
छत्तीसगढ़ी संस्एकृति से संबंधित एक कालजयी रचना |
3. “दाई (Daai)” छत्तीसगढ़ी उपन्यास ISBN 978-81-971726-5-6
"छत्तीसगढ़ी समाज और छत्मतीसगढ की प्रशिध्ध मातृशक्ति माँ बहादुर कलारिन पर आधारित छत्तीसगढ़ी उपन्यास"
"हाल के वर्षों में प्रकाशित "छत्तीसगढ के लोकजीवन से संबंधित उपान्यास|[https://rashtrabodh.com/archives/33529]
4. “मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत” "ISBN - 978-93-5396-714-7" छत्तीसगढ के बस्तर पर आधारित काव्य संग्रह में बस्तर के पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
5. “वह धरा जहाँ पर सुर गूँजा” "ISBN - 978-93-5768-172-8" छत्तीसगढ के सरगुजा क्षेत्र पर आधारित काव्य संग्रह में सरगुजा के सुन्दर छवि , पौराणिक एवं ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह |
यशवंत साहू ‘कोंगनिहा’ की अन्य प्रकाशनाधीन रचनाये
“संगम” '''छत्तीसगढ की पृष्पठभूमि पर आधारित एक छत्तीसगढ़ी नाट्य '''
“राजिम”''छत्तीसगढ पर केंद्रित एक छत्तीसगढ़ी उपान्यास '''
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स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी
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नया लेख निर्माण; परिभाषा, इतिहास एवं विशेषताएँ जोड़ी गईं, विश्वसनीय स्रोत जोड़े गए
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{{Short description|सार्वजनिक स्थानों पर दैनिक जीवन को दर्शाने वाली फ़ोटोग्राफ़ी शैली}}
'''स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Street photography'') [[फ़ोटोग्राफ़ी]] की एक शैली है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर लोगों के दैनिक जीवन, गतिविधियों और क्षणों को स्वाभाविक रूप में कैद किया जाता है।<ref name=":0">{{Cite web |title=Street photography |url=https://www.britannica.com/art/street-photography |website=Encyclopaedia Britannica}}</ref>
यह शैली आमतौर पर बिना पूर्व योजना के, वास्तविक परिस्थितियों में ली गई तस्वीरों पर आधारित होती है और इसमें कृत्रिम प्रकाश या मंचन (staging) का प्रयोग कम किया जाता है।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://18.118.76.217/street-photography/|title=Street Photography - Everything You Need to Know|last=Team|first=N. F. I.|date=2021-11-11|website=NFI|language=en-US|access-date=2026-04-16}}</ref>
== इतिहास ==
स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी का विकास 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ, जब पोर्टेबल कैमरों का उपयोग बढ़ा। 20वीं शताब्दी में यह शैली और लोकप्रिय हुई, विशेष रूप से शहरी जीवन के [[दस्तावेज़ीकरण|दस्तावेजीकरण]] के रूप में।<ref name=":0" />
== विशेषताएँ ==
स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:
* स्वाभाविक (candid) क्षणों को कैद करना
* सार्वजनिक स्थानों पर चित्र लेना
* दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार को दर्शाना
* प्रकाश, छाया और संरचना (composition) का उपयोग
== प्रकार ==
स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी के अंतर्गत विभिन्न उप-शैलियाँ शामिल हैं:
* [[डॉक्यूमेंट्री फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
* शहरी जीवन फ़ोटोग्राफ़ी
* कैंडिड फ़ोटोग्राफ़ी
== महत्व ==
स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी समाज और संस्कृति के दस्तावेजीकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह समय, स्थान और सामाजिक परिवर्तनों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करती है और इतिहास के अध्ययन में सहायक होती है।<ref name=":1" /><ref>{{Cite web|url=https://www.the-independent.com/arts-entertainment/art/reviews/london-street-photography-museum-of-london-2238534.html|title=London Street Photography, Museum of London|date=2011-03-11|website=The Independent|language=en|access-date=2026-04-16}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
* [[डॉक्यूमेंट्री फ़ोटोग्राफ़ी]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी की विधाएँ]]
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पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी
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{{Short description|व्यक्ति के चित्रण पर केंद्रित फ़ोटोग्राफ़ी की शैली}}
'''पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Portrait photography'') फ़ोटोग्राफ़ी की एक शैली है, जिसमें किसी व्यक्ति या समूह के चेहरे, भाव-भंगिमा और व्यक्तित्व को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.vox.com/2015/4/8/8365997/smile-old-photographs|title=Why people never smiled in old photographs|last=Edwards|first=Phil|date=2015-04-08|website=Vox|language=en-US|access-date=2026-04-16}}</ref>
इस प्रकार की फ़ोटोग्राफ़ी में विषय (subject) के भाव, प्रकाश (lighting), पृष्ठभूमि (background) और संरचना (composition) पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि व्यक्ति के व्यक्तित्व और भावनाओं को प्रभावी ढंग से दर्शाया जा सके।
== इतिहास ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी का विकास 19वीं शताब्दी में कैमरे के आविष्कार के बाद हुआ। प्रारंभिक समय में यह चित्रकला (portrait painting) का एक विकल्प बनकर उभरी। समय के साथ यह कला और व्यावसायिक दोनों रूपों में लोकप्रिय हो गई।<ref>{{Cite web |title=History of portrait photography |url=https://www.tate.org.uk/art/art-terms/p/portrait |website=Tate}}</ref>
== विशेषताएँ ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:
* विषय के चेहरे और अभिव्यक्ति पर ध्यान
* प्रकाश और छाया का संतुलित उपयोग
* पृष्ठभूमि का चयन, जो विषय को उभारता है
* संरचना और फ्रेमिंग का प्रभावी उपयोग
== प्रकार ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी के अंतर्गत विभिन्न प्रकार शामिल हैं:
* स्टूडियो पोर्ट्रेट
* पर्यावरणीय पोर्ट्रेट (Environmental portrait)
* कैंडिड पोर्ट्रेट
* औपचारिक पोर्ट्रेट
== उपयोग ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी का उपयोग व्यक्तिगत स्मृति, पहचान, कला, विज्ञापन और मीडिया सहित कई क्षेत्रों में किया जाता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी की विधाएँ]]
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{{Short description|व्यक्ति के चित्रण पर केंद्रित फ़ोटोग्राफ़ी की शैली}}
'''पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Portrait photography'') [[फ़ोटोग्राफ़ी]] की एक शैली है, जिसमें किसी व्यक्ति या समूह के चेहरे, भाव-भंगिमा और व्यक्तित्व को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.vox.com/2015/4/8/8365997/smile-old-photographs|title=Why people never smiled in old photographs|last=Edwards|first=Phil|date=2015-04-08|website=Vox|language=en-US|access-date=2026-04-16}}</ref>
इस प्रकार की [[फ़ोटोग्राफ़ी]] में विषय (subject) के भाव, प्रकाश (lighting), पृष्ठभूमि (background) और संरचना (composition) पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि व्यक्ति के व्यक्तित्व और भावनाओं को प्रभावी ढंग से दर्शाया जा सके।
== इतिहास ==
[[पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी]] का विकास 19वीं शताब्दी में कैमरे के आविष्कार के बाद हुआ। प्रारंभिक समय में यह चित्रकला (portrait painting) का एक विकल्प बनकर उभरी। समय के साथ यह कला और व्यावसायिक दोनों रूपों में लोकप्रिय हो गई।<ref>{{Cite web |title=History of portrait photography |url=https://www.tate.org.uk/art/art-terms/p/portrait |website=Tate}}</ref>
== विशेषताएँ ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:
* विषय के चेहरे और अभिव्यक्ति पर ध्यान
* प्रकाश और छाया का संतुलित उपयोग
* पृष्ठभूमि का चयन, जो विषय को उभारता है
* संरचना और फ्रेमिंग का प्रभावी उपयोग
== प्रकार ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी के अंतर्गत विभिन्न प्रकार शामिल हैं:
* स्टूडियो पोर्ट्रेट
* पर्यावरणीय पोर्ट्रेट (Environmental portrait)
* कैंडिड पोर्ट्रेट
* औपचारिक पोर्ट्रेट
== उपयोग ==
पोर्ट्रेट फ़ोटोग्राफ़ी का उपयोग व्यक्तिगत स्मृति, पहचान, कला, विज्ञापन और मीडिया सहित कई क्षेत्रों में किया जाता है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी]]
* [[फोटो जर्नलिज़्म]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी]]
[[श्रेणी:फ़ोटोग्राफ़ी की विधाएँ]]
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दाई उपन्यास
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Yashwant Sahu Konganiha
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नया पृष्ठ: छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'दाई' भिलाई इस्पात संयंत्र में सहायक महाप्रबंधक के पद में कार्यरत यशवन्त साहू कोंगनिहा द्वारा रचित उपन्यास 'दाई' का विमोचन दिनांक 24.05 2025 को मण्डी प्रागंण अभनपु...
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छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'दाई'
भिलाई इस्पात संयंत्र में सहायक महाप्रबंधक के पद में कार्यरत यशवन्त साहू कोंगनिहा द्वारा रचित उपन्यास 'दाई' का विमोचन दिनांक 24.05 2025 को मण्डी प्रागंण अभनपुर में श्री श्यामबिहारी जायसवाल (स्वास्थ्य मंत्री छ. ग. शासन) , श्री युवराज सिन्हा प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूप नारायन सिन्हा, श्रीमती संगीता सिन्हा (विधायक बालोद), श्री योगेश्वर राजू सिन्हा (विधायक महासमुन्द) श्री इन्द्र कुमार साहू (विधायक अभनपुर), श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली के करकमलों से संपन्न हुआ । इस अवसर पर मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा .ख्याति साहू तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नारी सशक्तिकरण पर आधारित उपन्यास दाई' मूलतः छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी मां बहादुर कलारिन की गाथा पर केन्द्रित है। किस प्रकार मां बहादुर कलारिन ने संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए अपने पुत्र छछानछाड़ू का समुचित लालन पालन किया तथा उसे सोररगढ़़ का राजा बनाया। किंतु स्त्रियों का अपमान करने पर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड दिया। यह इस उपन्यास की कथानक है। नारी शक्ति पर केन्द्रित इस उपन्यास में छत्तीसगढ़ी वन्यजीवन, तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक तथा बारहवीं शताब्दी के राजनैतिक स्थिति का सजीव चित्रण पाठकों को पढ़ने मिलेगी। २०० पृष्ठों में समाहित उपन्यास 'दाई' का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के गौरव शाली इतिहास- संस्कृति व छत्तीसगढ़ की नारी विभूतियों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है । उपन्यास के रचयिता ने उपन्यास में नारी के विविध रुपों का बखूबी चित्रण किया है। विशेषकर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड देने के बाद एक मां की व्यथा का वर्णन अत्यंत मार्मिक है।
ध्यातव्य है कि कोंगनिहा जी के द्वारा लिखित उपन्यास 'दसमत' विश्वविद्धालय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में शामिल है। उनके द्वारा रचित अन्य साहित्य "मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत- काव्य संग्रह , वह धरा जंहा पर सुर गुंजा- काव्य संग्रह , संगम - छत्तीसगढ़ी नाटक , राजिम - छत्तीसगढ़ी उपन्यास व पलायन - हिंदी उपन्यास है।
पुस्तक मोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्याम बिहारी जायसवाल , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने उपन्यास 'दाई' की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के महान विभूतियों के बारे में लेखन कार्य से नई पीढ़ी को उनके संबंध में जानकारी मिलेगी। जिस प्रकार बहादुर कलारिन ने नारियों के अपमान पर अपने पुत्र के वध से पीछे नहीं हटी, यह प्रसंग विरले ही देखने को मिलता है। माता बहादुर कलारिन पर सभी छत्तीसगढ़ वासियो को गर्व है। इस अवसर पर उन्होंने लेखक यशवंत साहू कोंगनिहा की प्रशंसा करते हुए अनछुए पहलू पर उपन्यास लेखन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।
इस अवसर पर माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री युवराज सिन्हा जी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष योग आयोग, श्री योगेश्वर राजू सिंह विधायक महासमुंद, श्री इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर, श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली, मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'दाई'
भिलाई इस्पात संयंत्र में सहायक महाप्रबंधक के पद में कार्यरत यशवन्त साहू कोंगनिहा द्वारा रचित उपन्यास 'दाई' का विमोचन दिनांक 24.05 2025 को मण्डी प्रागंण अभनपुर में श्री श्यामबिहारी जायसवाल (स्वास्थ्य मंत्री छ. ग. शासन) , श्री युवराज सिन्हा प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूप नारायन सिन्हा, श्रीमती संगीता सिन्हा (विधायक बालोद), श्री योगेश्वर राजू सिन्हा (विधायक महासमुन्द) श्री इन्द्र कुमार साहू (विधायक अभनपुर), श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली के करकमलों से संपन्न हुआ । इस अवसर पर मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा .ख्याति साहू तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नारी सशक्तिकरण पर आधारित उपन्यास दाई' मूलतः छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी मां बहादुर कलारिन की गाथा पर केन्द्रित है। किस प्रकार मां बहादुर कलारिन ने संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए अपने पुत्र छछानछाड़ू का समुचित लालन पालन किया तथा उसे सोररगढ़़ का राजा बनाया। किंतु स्त्रियों का अपमान करने पर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड दिया। यह इस उपन्यास की कथानक है। नारी शक्ति पर केन्द्रित इस उपन्यास में छत्तीसगढ़ी वन्यजीवन, तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक तथा बारहवीं शताब्दी के राजनैतिक स्थिति का सजीव चित्रण पाठकों को पढ़ने मिलेगी। २०० पृष्ठों में समाहित उपन्यास 'दाई' का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के गौरव शाली इतिहास- संस्कृति व छत्तीसगढ़ की नारी विभूतियों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है । उपन्यास के रचयिता ने उपन्यास में नारी के विविध रुपों का बखूबी चित्रण किया है। विशेषकर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड देने के बाद एक मां की व्यथा का वर्णन अत्यंत मार्मिक है।
ध्यातव्य है कि कोंगनिहा जी के द्वारा लिखित उपन्यास 'दसमत' विश्वविद्धालय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में शामिल है। उनके द्वारा रचित अन्य साहित्य "मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत- काव्य संग्रह , वह धरा जंहा पर सुर गुंजा- काव्य संग्रह , संगम - छत्तीसगढ़ी नाटक , राजिम - छत्तीसगढ़ी उपन्यास व पलायन - हिंदी उपन्यास है।
पुस्तक मोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्याम बिहारी जायसवाल , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने उपन्यास 'दाई' की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के महान विभूतियों के बारे में लेखन कार्य से नई पीढ़ी को उनके संबंध में जानकारी मिलेगी। जिस प्रकार बहादुर कलारिन ने नारियों के अपमान पर अपने पुत्र के वध से पीछे नहीं हटी, यह प्रसंग विरले ही देखने को मिलता है। माता बहादुर कलारिन पर सभी छत्तीसगढ़ वासियो को गर्व है। इस अवसर पर उन्होंने लेखक यशवंत साहू कोंगनिहा की प्रशंसा करते हुए अनछुए पहलू पर उपन्यास लेखन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।
इस अवसर पर माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री युवराज सिन्हा जी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष योग आयोग, श्री योगेश्वर राजू सिंह विधायक महासमुंद, श्री इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर, श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली, मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'दाई'[https://rashtrabodh.com/archives/33529]
भिलाई इस्पात संयंत्र में सहायक महाप्रबंधक के पद में कार्यरत यशवन्त साहू कोंगनिहा द्वारा रचित उपन्यास 'दाई' का विमोचन दिनांक 24.05 2025 को मण्डी प्रागंण अभनपुर में श्री श्यामबिहारी जायसवाल (स्वास्थ्य मंत्री छ. ग. शासन) , श्री युवराज सिन्हा प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूप नारायन सिन्हा, श्रीमती संगीता सिन्हा (विधायक बालोद), श्री योगेश्वर राजू सिन्हा (विधायक महासमुन्द) श्री इन्द्र कुमार साहू (विधायक अभनपुर), श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली के करकमलों से संपन्न हुआ । इस अवसर पर मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा .ख्याति साहू तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नारी सशक्तिकरण पर आधारित उपन्यास दाई' मूलतः छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी मां बहादुर कलारिन की गाथा पर केन्द्रित है। किस प्रकार मां बहादुर कलारिन ने संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए अपने पुत्र छछानछाड़ू का समुचित लालन पालन किया तथा उसे सोररगढ़़ का राजा बनाया। किंतु स्त्रियों का अपमान करने पर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड दिया। यह इस उपन्यास की कथानक है। नारी शक्ति पर केन्द्रित इस उपन्यास में छत्तीसगढ़ी वन्यजीवन, तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक तथा बारहवीं शताब्दी के राजनैतिक स्थिति का सजीव चित्रण पाठकों को पढ़ने मिलेगी। २०० पृष्ठों में समाहित उपन्यास 'दाई' [https://rashtrabodh.com/archives/33529] का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के गौरव शाली इतिहास- संस्कृति व छत्तीसगढ़ की नारी विभूतियों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है । उपन्यास के रचयिता ने उपन्यास में नारी के विविध रुपों का बखूबी चित्रण किया है। विशेषकर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड देने के बाद एक मां की व्यथा का वर्णन अत्यंत मार्मिक है।
ध्यातव्य है कि कोंगनिहा जी के द्वारा लिखित उपन्यास 'दसमत' विश्वविद्धालय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में शामिल है। उनके द्वारा रचित अन्य साहित्य "मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत- काव्य संग्रह , वह धरा जंहा पर सुर गुंजा- काव्य संग्रह , संगम - छत्तीसगढ़ी नाटक , राजिम - छत्तीसगढ़ी उपन्यास व पलायन - हिंदी उपन्यास है।
पुस्तक मोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्याम बिहारी जायसवाल , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने उपन्यास 'दाई' की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के महान विभूतियों के बारे में लेखन कार्य से नई पीढ़ी को उनके संबंध में जानकारी मिलेगी। जिस प्रकार बहादुर कलारिन ने नारियों के अपमान पर अपने पुत्र के वध से पीछे नहीं हटी, यह प्रसंग विरले ही देखने को मिलता है। माता बहादुर कलारिन पर सभी छत्तीसगढ़ वासियो को गर्व है। इस अवसर पर उन्होंने लेखक यशवंत साहू कोंगनिहा की प्रशंसा करते हुए अनछुए पहलू पर उपन्यास लेखन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।
इस अवसर पर माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री युवराज सिन्हा जी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष योग आयोग, श्री योगेश्वर राजू सिंह विधायक महासमुंद, श्री इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर, श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली, मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ी उपन्यास 'दाई'
भिलाई इस्पात संयंत्र में सहायक महाप्रबंधक के पद में कार्यरत यशवन्त साहू कोंगनिहा द्वारा रचित उपन्यास 'दाई' का विमोचन दिनांक 24.05 2025 को मण्डी प्रागंण अभनपुर में श्री श्यामबिहारी जायसवाल (स्वास्थ्य मंत्री छ. ग. शासन) , श्री युवराज सिन्हा प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूप नारायन सिन्हा, श्रीमती संगीता सिन्हा (विधायक बालोद), श्री योगेश्वर राजू सिन्हा (विधायक महासमुन्द) श्री इन्द्र कुमार साहू (विधायक अभनपुर), श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली के करकमलों से संपन्न हुआ । इस अवसर पर मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा .ख्याति साहू तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारी गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
नारी सशक्तिकरण पर आधारित उपन्यास दाई' मूलतः छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी मां बहादुर कलारिन की गाथा पर केन्द्रित है। किस प्रकार मां बहादुर कलारिन ने संघर्ष पूर्ण जीवन जीते हुए अपने पुत्र छछानछाड़ू का समुचित लालन पालन किया तथा उसे सोररगढ़़ का राजा बनाया। किंतु स्त्रियों का अपमान करने पर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड दिया। यह इस उपन्यास की कथानक है। नारी शक्ति पर केन्द्रित इस उपन्यास में छत्तीसगढ़ी वन्यजीवन, तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक तथा बारहवीं शताब्दी के राजनैतिक स्थिति का सजीव चित्रण पाठकों को पढ़ने मिलेगी। २०० पृष्ठों में समाहित उपन्यास 'दाई' का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के गौरव शाली इतिहास- संस्कृति व छत्तीसगढ़ की नारी विभूतियों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है । उपन्यास के रचयिता ने उपन्यास में नारी के विविध रुपों का बखूबी चित्रण किया है। विशेषकर अपने ही पुत्र को मृत्युदंड देने के बाद एक मां की व्यथा का वर्णन अत्यंत मार्मिक है।
ध्यातव्य है कि कोंगनिहा जी के द्वारा लिखित उपन्यास 'दसमत' विश्वविद्धालय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में शामिल है। उनके द्वारा रचित अन्य साहित्य "मैं बस्तर स्वर्णिम अतीत- काव्य संग्रह , वह धरा जंहा पर सुर गुंजा- काव्य संग्रह , संगम - छत्तीसगढ़ी नाटक , राजिम - छत्तीसगढ़ी उपन्यास व पलायन - हिंदी उपन्यास है।
पुस्तक मोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्याम बिहारी जायसवाल , स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने उपन्यास 'दाई' की प्रशंसा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के महान विभूतियों के बारे में लेखन कार्य से नई पीढ़ी को उनके संबंध में जानकारी मिलेगी। जिस प्रकार बहादुर कलारिन ने नारियों के अपमान पर अपने पुत्र के वध से पीछे नहीं हटी, यह प्रसंग विरले ही देखने को मिलता है। माता बहादुर कलारिन पर सभी छत्तीसगढ़ वासियो को गर्व है। इस अवसर पर उन्होंने लेखक यशवंत साहू कोंगनिहा की प्रशंसा करते हुए अनछुए पहलू पर उपन्यास लेखन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।
इस अवसर पर माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, श्री युवराज सिन्हा जी प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ कलार समाज , श्री रूपनारायण सिन्हा अध्यक्ष योग आयोग, श्री योगेश्वर राजू सिंह विधायक महासमुंद, श्री इंद्र कुमार साहू विधायक अभनपुर, श्रीमती शशि सिन्हा महापौर रिसाली, मौखिक इतिहासकार डॉ. सरिता साहू, श्री जगमोहन सिन्हा तथा छत्तीसगढ़ कलार समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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लोकगाथा की ताकत
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Yashwant Sahu Konganiha
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लोकगाथा की ताक़त
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* विजय वर्तमान
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यह सच है कि लोकगाथाएँ इतिहास से अधिक ताक़तवर सिद्ध होती हैं । वे बिना किसी औपचारिक माध्यम के श्रुति परम्परा के डैनों पर सवार होकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं और लोक की स्मृति में दृढ़ता के साथ विद्यमान रहती हैं । यह भी होता आया है कि यदि लोकगाथा का कोई पात्र लोकमान्यताओं और आस्थाओं के पैमाने पर आदर्श सिद्ध होता है तो वह पात्र जनता की श्रद्धा और भावुकता का अवलम्ब पाकर एक पूज्य पद का अधिकारी हो जाता है । ऐसी ही एक लोकगाथा छत्तीसगढ़ के मानस में पैठी हुई है जिसकी नायिका "बहादुर कलारिन ( दाई ) "अपनी नैतिक ऊँचाइयों और दृढ़ , अडिग संकल्पों की स्वामिनी होने के कारण छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है ।
लोकगाथाएँ वास्तविक अर्थों में इतिहास नहीं होतीं अतः इन्हें लिखते समय इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप से मुक्त रहने के कारण लेखक की रचनात्मकता को खेलने का अवसर मिलता है । सुधी लेखक कथा की आत्मा को अप्रभावित रखते हुए पूरी समझदारी और कौशल के साथ अपनी कल्पनाशीलता का नियंत्रित और अनुशासित प्रयोग करते हुए कथा को रोचक और पठनीय बना लेता है । प्रतीत होता है कि यशवंत जी छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं की नब्ज को एक वैद्य की भाँति जानते - समझते हैं । वे लोकगाथाओं को रोचकता और तन्मयता के साथ सुनाना ( लिखना ) जानते हैं । उनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाखा का सम्यक ज्ञान बेहद प्रामाणिकता और सुंदरता के साथ कथा को आगे बढ़ाता है । उपन्यास में सारे संवाद छत्तीसगढ़ी भाखा में हैं । यशवंत जी की छत्तीसगढ़ी में बेहद सरल , सहज और आडम्बरहीन सौंदर्य है । उनकी छत्तीसगढ़ी भाखा सुखद रूप से आभिजात्य से मुक्त है । सोने पे सुहागा यह कि उपन्यास में संवादों की प्रचुरता है अतः छत्तीसगढ़ी भाखा को अधिकाधिक स्थान मिला हुआ है । क़िताब में हिन्दी भाषा सिर्फ़ लेखकीय वक्तव्य के लिए प्रयुक्त हुआ है जो बहुत कम और संतुलित मात्रा में है । यशवंत जी बेहद अच्छी खाँटी छत्तीसगढ़ी जानने और वापरने के लिए सराहे जा सकते हैं ।
यशवंत जी के लेखन में कहीं भी छत्तीसगढ़ी - पन खंडित अथवा अतिक्रमित नहीं होता । उनकी पैनी और महीन दृष्टि छत्तीसगढ़ को सभी स्तरों के पात्रों में सुरक्षित रखती है । कलार जाति का पारंपरिक रूप से महुआ उत्पादों पर निर्भरता का बढ़िया चित्रण हुआ है । बहुउपयोगी महुआ के लिए प्रयुक्त हुई उपमायें सुंदर , सटीक और नवीन हैं ।ग्रामीण परिवेश के प्रामाणिक चित्रण के साथ साथ तत्कालीन सामन्तों और राजाओं का चित्रण करते समय छत्तीसगढ़ कहीं भी अतिरंजित नहीं हुआ है । राजकुमार एवं राजपरिवार के सदस्यों द्वारा भी चटनी - बासी , नून - बासी , चटनी - अंगाकर और पेज का खाया जाना तत्कालीन छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करने का लेखक के चैतन्य आग्रह को सिद्ध करता है । अपहृत राजकुमारियों को धान कूटने की सज़ा देना कथाकार की सजगता को दिखाती है कि वे छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करते समय छत्तीसगढ़ से बाहर क़दम नहीं रखते । छत्तीसगढ़ के पकवानों में कोई आयातित पकवान के नाम का न होना भी यही सिद्ध करता है । इन अर्थों में यह कथा छत्तीसगढ़ की अपनी होने का गौरव प्राप्त करती है । अतिरंजना के लोभ से बच जाना ही यशवंत जी को सुपात्र बनाता है ।
वास्तव में बहादुर कलारिन स्त्री के सम्मान की रक्षा की शाश्वत नैतिकता की स्थापना करती हुई अद्भुत एवं अछूती कथा है । यशवंत जी ने "दसमत" के बाद "बहादुर कलारिन" की लोकगाथा को उपन्यास के रूप में जनता को समर्पित किया है ।
यह एक घटनाप्रधान कहानी है । घटनाप्रधान कहानी में पात्रों के मनोविज्ञान का खुलासा करने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं बचती । सच तो यह है कि कथा में इसकी ज़रूरत भी महसूस नहीं होती । तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के कारण गम्भीर विचारप्रधान संवाद नहीं बन पाते । जीवन - दर्शन से संपृक्त प्रसंगों के लिए कोई जगह नहीं बचती । घटनाएं तेजी से घटित होती हैं और लगातार नये दृश्य आते चलते हैं । जैसे कि लोकगाथाओं में होता है कि कुछ अस्वाभाविक सा लगने वाला दृश्य भी श्रद्धालु श्रोताओं के द्वारा सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है , वही इस कथा के साथ भी होता है । तेजी से बदलती घटनाओं का रोमांच इतना हावी हो जाता है कि जिज्ञासायें कमज़ोर पड़कर चुप्पी साध लेती हैं ।
राजकुमार उदय का पड़ोसी राज्यों में भ्रमण हेतु निकलना , वहाँ उसे बघवा द्वारा हबक दिया जाना , उसकी मूर्छित देह को पद्मा द्वारा अपने घर लाकर सेवा - सुश्रुषा किया जाना , उदय के चंगा हो जाने पर उसकी स्मृति - लोप का पता चलना , पद्मा और उदय का गंधर्व विवाह होना , पद्मा का गर्भवती होना , उदय को सैनिकों द्वारा बलात राजमहल पहुंचाना , वहाँ राजवैद्य के उपचार से स्मृति लौटना , उदय का युद्ध में शहीद होना , गाँव में छछान का जन्म होना , पिता का नाम न जानने पर गाँव के बच्चों द्वारा उसका उपहास किया जाना , छछान का गुरुकुल जाना , और एक योग्य योद्धा बनकर निकलना , छछान द्वारा सोररगढ़ राज्य राज्य स्थापित करना , छछान द्वारा राजकुमारियों का अपहरण और उन्हें धान कूटने की सज़ा दिया जाना , माँ पद्मा की समझाइश का उस पर असर न होना , छः आगर छः कोरी राजकुमारियों का अपहरण , पहली अपहृत राजकुमारी चित्रा की आत्महत्या , दुर्ग - नरेश का सोररगढ़ पर आक्रमण , माँ पद्मा द्वारा अपने पुत्र छछान को कुएँ में धकेलकर स्वयं भी कुएँ में कूद जाना , माँ पद्मा का " बहादुर कलारिन दाई " के रूप में प्रतिष्ठित होना..... आदि घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि पाठक को अपनी जिज्ञासा प्रकट करने के लिए अवसर ही नहीं मिलता । यह वैसा ही है , जैसे एक पारंपरिक श्रोता हुंकारू भरते हुए 'हव जी , हव जी ' कहते हुए सारी घटनाओं को चमत्कृत भाव से स्वीकार करता चलता है ।
लेकिन आज की पीढ़ी सम्भवतः दो - चार स्थानों पर कुछ पूछने अथवा सन्देह करने की मुद्रा में आ सकती है । राजकुमार उदय को बहुत आसानी से पिता द्वारा पड़ोसी राज्यों में भ्रमण की अनुमति मिलना , घायल - मूर्छित उदय के भारी - भरकम शरीर को पद्मा द्वारा अकेले जंगल से अपने घर तक लाना , बिना किसी वैद्य की मदद के उदय के घावों को ठीक कर देना , गाँव की पंचायत में दसोदा और पद्मा की बातों को बिना ज़िरह अथवा सन्देह किये उदारतापूर्वक स्वीकार करके माफ़ कर दिया जाना , छछान द्वारा यकायक ही अपना राज्य स्थापित कर लेना ....आदि ऐसी बातें हैं जिन पर सहसा विश्वास नहीं होता । अंत में पद्मा की माँ दसोदा के बारे में कुछ भी बताये बिना कथा का अंत हो जाना भी खटकता है क्योंकि पद्मा की माँ ही सहनायिका है जिसने पद्मा को हर हाल में साथ , संबल और बल दिया था । लोकगाथा में ऐसी असहज बातें सहज स्वीकार्य होती हैं । सम्भवतः लोक की मासूमियत इन्हीं बातों में रस लेती है । लोकगाथाएँ अनगढ़ लोक द्वारा गढ़ी गयी होती हैं , जहाँ तर्क करना वर्जित होता है ।
यशवंत जी ने "दाई " लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया है । यह उपन्यास बेशक़ पठनीय है । विश्वास है कि इसे व्यापक लोकप्रियता हासिल होगी ।
* विजय वर्तमान
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Mnjkhan
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लोकगाथा की ताक़त
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यह सच है कि लोकगाथाएँ इतिहास से अधिक ताक़तवर सिद्ध होती हैं । वे बिना किसी औपचारिक माध्यम के श्रुति परम्परा के डैनों पर सवार होकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं और लोक की स्मृति में दृढ़ता के साथ विद्यमान रहती हैं । यह भी होता आया है कि यदि लोकगाथा का कोई पात्र लोकमान्यताओं और आस्थाओं के पैमाने पर आदर्श सिद्ध होता है तो वह पात्र जनता की श्रद्धा और भावुकता का अवलम्ब पाकर एक पूज्य पद का अधिकारी हो जाता है । ऐसी ही एक लोकगाथा छत्तीसगढ़ के मानस में पैठी हुई है जिसकी नायिका "बहादुर कलारिन ( दाई ) "अपनी नैतिक ऊँचाइयों और दृढ़ , अडिग संकल्पों की स्वामिनी होने के कारण छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है ।
लोकगाथाएँ वास्तविक अर्थों में इतिहास नहीं होतीं अतः इन्हें लिखते समय इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप से मुक्त रहने के कारण लेखक की रचनात्मकता को खेलने का अवसर मिलता है । सुधी लेखक कथा की आत्मा को अप्रभावित रखते हुए पूरी समझदारी और कौशल के साथ अपनी कल्पनाशीलता का नियंत्रित और अनुशासित प्रयोग करते हुए कथा को रोचक और पठनीय बना लेता है । प्रतीत होता है कि यशवंत जी छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं की नब्ज को एक वैद्य की भाँति जानते - समझते हैं । वे लोकगाथाओं को रोचकता और तन्मयता के साथ सुनाना ( लिखना ) जानते हैं । उनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाखा का सम्यक ज्ञान बेहद प्रामाणिकता और सुंदरता के साथ कथा को आगे बढ़ाता है । उपन्यास में सारे संवाद छत्तीसगढ़ी भाखा में हैं । यशवंत जी की छत्तीसगढ़ी में बेहद सरल , सहज और आडम्बरहीन सौंदर्य है । उनकी छत्तीसगढ़ी भाखा सुखद रूप से आभिजात्य से मुक्त है । सोने पे सुहागा यह कि उपन्यास में संवादों की प्रचुरता है अतः छत्तीसगढ़ी भाखा को अधिकाधिक स्थान मिला हुआ है । क़िताब में हिन्दी भाषा सिर्फ़ लेखकीय वक्तव्य के लिए प्रयुक्त हुआ है जो बहुत कम और संतुलित मात्रा में है । यशवंत जी बेहद अच्छी खाँटी छत्तीसगढ़ी जानने और वापरने के लिए सराहे जा सकते हैं ।
यशवंत जी के लेखन में कहीं भी छत्तीसगढ़ी - पन खंडित अथवा अतिक्रमित नहीं होता । उनकी पैनी और महीन दृष्टि छत्तीसगढ़ को सभी स्तरों के पात्रों में सुरक्षित रखती है । कलार जाति का पारंपरिक रूप से महुआ उत्पादों पर निर्भरता का बढ़िया चित्रण हुआ है । बहुउपयोगी महुआ के लिए प्रयुक्त हुई उपमायें सुंदर , सटीक और नवीन हैं ।ग्रामीण परिवेश के प्रामाणिक चित्रण के साथ साथ तत्कालीन सामन्तों और राजाओं का चित्रण करते समय छत्तीसगढ़ कहीं भी अतिरंजित नहीं हुआ है । राजकुमार एवं राजपरिवार के सदस्यों द्वारा भी चटनी - बासी , नून - बासी , चटनी - अंगाकर और पेज का खाया जाना तत्कालीन छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करने का लेखक के चैतन्य आग्रह को सिद्ध करता है । अपहृत राजकुमारियों को धान कूटने की सज़ा देना कथाकार की सजगता को दिखाती है कि वे छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करते समय छत्तीसगढ़ से बाहर क़दम नहीं रखते । छत्तीसगढ़ के पकवानों में कोई आयातित पकवान के नाम का न होना भी यही सिद्ध करता है । इन अर्थों में यह कथा छत्तीसगढ़ की अपनी होने का गौरव प्राप्त करती है । अतिरंजना के लोभ से बच जाना ही यशवंत जी को सुपात्र बनाता है ।
वास्तव में बहादुर कलारिन स्त्री के सम्मान की रक्षा की शाश्वत नैतिकता की स्थापना करती हुई अद्भुत एवं अछूती कथा है । यशवंत जी ने "दसमत" के बाद "बहादुर कलारिन" की लोकगाथा को उपन्यास के रूप में जनता को समर्पित किया है ।
यह एक घटनाप्रधान कहानी है । घटनाप्रधान कहानी में पात्रों के मनोविज्ञान का खुलासा करने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं बचती । सच तो यह है कि कथा में इसकी ज़रूरत भी महसूस नहीं होती । तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के कारण गम्भीर विचारप्रधान संवाद नहीं बन पाते । जीवन - दर्शन से संपृक्त प्रसंगों के लिए कोई जगह नहीं बचती । घटनाएं तेजी से घटित होती हैं और लगातार नये दृश्य आते चलते हैं । जैसे कि लोकगाथाओं में होता है कि कुछ अस्वाभाविक सा लगने वाला दृश्य भी श्रद्धालु श्रोताओं के द्वारा सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है , वही इस कथा के साथ भी होता है । तेजी से बदलती घटनाओं का रोमांच इतना हावी हो जाता है कि जिज्ञासायें कमज़ोर पड़कर चुप्पी साध लेती हैं ।
राजकुमार उदय का पड़ोसी राज्यों में भ्रमण हेतु निकलना , वहाँ उसे बघवा द्वारा हबक दिया जाना , उसकी मूर्छित देह को पद्मा द्वारा अपने घर लाकर सेवा - सुश्रुषा किया जाना , उदय के चंगा हो जाने पर उसकी स्मृति - लोप का पता चलना , पद्मा और उदय का गंधर्व विवाह होना , पद्मा का गर्भवती होना , उदय को सैनिकों द्वारा बलात राजमहल पहुंचाना , वहाँ राजवैद्य के उपचार से स्मृति लौटना , उदय का युद्ध में शहीद होना , गाँव में छछान का जन्म होना , पिता का नाम न जानने पर गाँव के बच्चों द्वारा उसका उपहास किया जाना , छछान का गुरुकुल जाना , और एक योग्य योद्धा बनकर निकलना , छछान द्वारा सोररगढ़ राज्य राज्य स्थापित करना , छछान द्वारा राजकुमारियों का अपहरण और उन्हें धान कूटने की सज़ा दिया जाना , माँ पद्मा की समझाइश का उस पर असर न होना , छः आगर छः कोरी राजकुमारियों का अपहरण , पहली अपहृत राजकुमारी चित्रा की आत्महत्या , दुर्ग - नरेश का सोररगढ़ पर आक्रमण , माँ पद्मा द्वारा अपने पुत्र छछान को कुएँ में धकेलकर स्वयं भी कुएँ में कूद जाना , माँ पद्मा का " बहादुर कलारिन दाई " के रूप में प्रतिष्ठित होना..... आदि घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि पाठक को अपनी जिज्ञासा प्रकट करने के लिए अवसर ही नहीं मिलता । यह वैसा ही है , जैसे एक पारंपरिक श्रोता हुंकारू भरते हुए 'हव जी , हव जी ' कहते हुए सारी घटनाओं को चमत्कृत भाव से स्वीकार करता चलता है ।
लेकिन आज की पीढ़ी सम्भवतः दो - चार स्थानों पर कुछ पूछने अथवा सन्देह करने की मुद्रा में आ सकती है । राजकुमार उदय को बहुत आसानी से पिता द्वारा पड़ोसी राज्यों में भ्रमण की अनुमति मिलना , घायल - मूर्छित उदय के भारी - भरकम शरीर को पद्मा द्वारा अकेले जंगल से अपने घर तक लाना , बिना किसी वैद्य की मदद के उदय के घावों को ठीक कर देना , गाँव की पंचायत में दसोदा और पद्मा की बातों को बिना ज़िरह अथवा सन्देह किये उदारतापूर्वक स्वीकार करके माफ़ कर दिया जाना , छछान द्वारा यकायक ही अपना राज्य स्थापित कर लेना ....आदि ऐसी बातें हैं जिन पर सहसा विश्वास नहीं होता । अंत में पद्मा की माँ दसोदा के बारे में कुछ भी बताये बिना कथा का अंत हो जाना भी खटकता है क्योंकि पद्मा की माँ ही सहनायिका है जिसने पद्मा को हर हाल में साथ , संबल और बल दिया था । लोकगाथा में ऐसी असहज बातें सहज स्वीकार्य होती हैं । सम्भवतः लोक की मासूमियत इन्हीं बातों में रस लेती है । लोकगाथाएँ अनगढ़ लोक द्वारा गढ़ी गयी होती हैं , जहाँ तर्क करना वर्जित होता है ।
यशवंत जी ने "दाई " लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया है । यह उपन्यास बेशक़ पठनीय है । विश्वास है कि इसे व्यापक लोकप्रियता हासिल होगी ।
* विजय वर्तमान
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लोकगाथा की ताक़त
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* विजय वर्तमान
यह सच है कि लोकगाथाएँ इतिहास से अधिक ताक़तवर सिद्ध होती हैं । वे बिना किसी औपचारिक माध्यम के श्रुति परम्परा के डैनों पर सवार होकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं और लोक की स्मृति में दृढ़ता के साथ विद्यमान रहती हैं । यह भी होता आया है कि यदि लोकगाथा का कोई पात्र लोकमान्यताओं और आस्थाओं के पैमाने पर आदर्श सिद्ध होता है तो वह पात्र जनता की श्रद्धा और भावुकता का अवलम्ब पाकर एक पूज्य पद का अधिकारी हो जाता है । ऐसी ही एक लोकगाथा छत्तीसगढ़ के मानस में पैठी हुई है जिसकी नायिका "बहादुर कलारिन ( दाई ) [https://rashtrabodh.com/archives/33529]"अपनी नैतिक ऊँचाइयों और दृढ़ , अडिग संकल्पों की स्वामिनी होने के कारण छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है ।
लोकगाथाएँ वास्तविक अर्थों में इतिहास नहीं होतीं अतः इन्हें लिखते समय इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप से मुक्त रहने के कारण लेखक की रचनात्मकता को खेलने का अवसर मिलता है । सुधी लेखक कथा की आत्मा को अप्रभावित रखते हुए पूरी समझदारी और कौशल के साथ अपनी कल्पनाशीलता का नियंत्रित और अनुशासित प्रयोग करते हुए कथा को रोचक और पठनीय बना लेता है । प्रतीत होता है कि यशवंत जी छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं की नब्ज को एक वैद्य की भाँति जानते - समझते हैं । वे लोकगाथाओं को रोचकता और तन्मयता के साथ सुनाना ( लिखना ) जानते हैं । उनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाखा का सम्यक ज्ञान बेहद प्रामाणिकता और सुंदरता के साथ कथा को आगे बढ़ाता है । उपन्यास में सारे संवाद छत्तीसगढ़ी भाखा में हैं । यशवंत जी की छत्तीसगढ़ी में बेहद सरल , सहज और आडम्बरहीन सौंदर्य है । उनकी छत्तीसगढ़ी भाखा सुखद रूप से आभिजात्य से मुक्त है । सोने पे सुहागा यह कि उपन्यास में संवादों की प्रचुरता है अतः छत्तीसगढ़ी भाखा को अधिकाधिक स्थान मिला हुआ है । क़िताब में हिन्दी भाषा सिर्फ़ लेखकीय वक्तव्य के लिए प्रयुक्त हुआ है जो बहुत कम और संतुलित मात्रा में है । यशवंत जी बेहद अच्छी खाँटी छत्तीसगढ़ी जानने और वापरने के लिए सराहे जा सकते हैं ।
यशवंत जी के लेखन में कहीं भी छत्तीसगढ़ी - पन खंडित अथवा अतिक्रमित नहीं होता । उनकी पैनी और महीन दृष्टि छत्तीसगढ़ को सभी स्तरों के पात्रों में सुरक्षित रखती है । कलार जाति का पारंपरिक रूप से महुआ उत्पादों पर निर्भरता का बढ़िया चित्रण हुआ है । बहुउपयोगी महुआ के लिए प्रयुक्त हुई उपमायें सुंदर , सटीक और नवीन हैं ।ग्रामीण परिवेश के प्रामाणिक चित्रण के साथ साथ तत्कालीन सामन्तों और राजाओं का चित्रण करते समय छत्तीसगढ़ कहीं भी अतिरंजित नहीं हुआ है । राजकुमार एवं राजपरिवार के सदस्यों द्वारा भी चटनी - बासी , नून - बासी , चटनी - अंगाकर और पेज का खाया जाना तत्कालीन छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करने का लेखक के चैतन्य आग्रह को सिद्ध करता है । अपहृत राजकुमारियों को धान कूटने की सज़ा देना कथाकार की सजगता को दिखाती है कि वे छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करते समय छत्तीसगढ़ से बाहर क़दम नहीं रखते । छत्तीसगढ़ के पकवानों में कोई आयातित पकवान के नाम का न होना भी यही सिद्ध करता है । इन अर्थों में यह कथा छत्तीसगढ़ की अपनी होने का गौरव प्राप्त करती है । अतिरंजना के लोभ से बच जाना ही यशवंत जी को सुपात्र बनाता है ।
वास्तव में बहादुर कलारिन स्त्री के सम्मान की रक्षा की शाश्वत नैतिकता की स्थापना करती हुई अद्भुत एवं अछूती कथा है । यशवंत जी ने "दसमत" के बाद "बहादुर कलारिन" की लोकगाथा को उपन्यास के रूप में जनता को समर्पित किया है ।
यह एक घटनाप्रधान कहानी है । घटनाप्रधान कहानी में पात्रों के मनोविज्ञान का खुलासा करने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं बचती । सच तो यह है कि कथा में इसकी ज़रूरत भी महसूस नहीं होती । तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के कारण गम्भीर विचारप्रधान संवाद नहीं बन पाते । जीवन - दर्शन से संपृक्त प्रसंगों के लिए कोई जगह नहीं बचती । घटनाएं तेजी से घटित होती हैं और लगातार नये दृश्य आते चलते हैं । जैसे कि लोकगाथाओं में होता है कि कुछ अस्वाभाविक सा लगने वाला दृश्य भी श्रद्धालु श्रोताओं के द्वारा सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है , वही इस कथा के साथ भी होता है । तेजी से बदलती घटनाओं का रोमांच इतना हावी हो जाता है कि जिज्ञासायें कमज़ोर पड़कर चुप्पी साध लेती हैं ।
राजकुमार उदय का पड़ोसी राज्यों में भ्रमण हेतु निकलना , वहाँ उसे बघवा द्वारा हबक दिया जाना , उसकी मूर्छित देह को पद्मा द्वारा अपने घर लाकर सेवा - सुश्रुषा किया जाना , उदय के चंगा हो जाने पर उसकी स्मृति - लोप का पता चलना , पद्मा और उदय का गंधर्व विवाह होना , पद्मा का गर्भवती होना , उदय को सैनिकों द्वारा बलात राजमहल पहुंचाना , वहाँ राजवैद्य के उपचार से स्मृति लौटना , उदय का युद्ध में शहीद होना , गाँव में छछान का जन्म होना , पिता का नाम न जानने पर गाँव के बच्चों द्वारा उसका उपहास किया जाना , छछान का गुरुकुल जाना , और एक योग्य योद्धा बनकर निकलना , छछान द्वारा सोररगढ़ राज्य राज्य स्थापित करना , छछान द्वारा राजकुमारियों का अपहरण और उन्हें धान कूटने की सज़ा दिया जाना , माँ पद्मा की समझाइश का उस पर असर न होना , छः आगर छः कोरी राजकुमारियों का अपहरण , पहली अपहृत राजकुमारी चित्रा की आत्महत्या , दुर्ग - नरेश का सोररगढ़ पर आक्रमण , माँ पद्मा द्वारा अपने पुत्र छछान को कुएँ में धकेलकर स्वयं भी कुएँ में कूद जाना , माँ पद्मा का " बहादुर कलारिन दाई " के रूप में प्रतिष्ठित होना..... आदि घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि पाठक को अपनी जिज्ञासा प्रकट करने के लिए अवसर ही नहीं मिलता । यह वैसा ही है , जैसे एक पारंपरिक श्रोता हुंकारू भरते हुए 'हव जी , हव जी ' कहते हुए सारी घटनाओं को चमत्कृत भाव से स्वीकार करता चलता है ।
लेकिन आज की पीढ़ी सम्भवतः दो - चार स्थानों पर कुछ पूछने अथवा सन्देह करने की मुद्रा में आ सकती है । राजकुमार उदय को बहुत आसानी से पिता द्वारा पड़ोसी राज्यों में भ्रमण की अनुमति मिलना , घायल - मूर्छित उदय के भारी - भरकम शरीर को पद्मा द्वारा अकेले जंगल से अपने घर तक लाना , बिना किसी वैद्य की मदद के उदय के घावों को ठीक कर देना , गाँव की पंचायत में दसोदा और पद्मा की बातों को बिना ज़िरह अथवा सन्देह किये उदारतापूर्वक स्वीकार करके माफ़ कर दिया जाना , छछान द्वारा यकायक ही अपना राज्य स्थापित कर लेना ....आदि ऐसी बातें हैं जिन पर सहसा विश्वास नहीं होता । अंत में पद्मा की माँ दसोदा के बारे में कुछ भी बताये बिना कथा का अंत हो जाना भी खटकता है क्योंकि पद्मा की माँ ही सहनायिका है जिसने पद्मा को हर हाल में साथ , संबल और बल दिया था । लोकगाथा में ऐसी असहज बातें सहज स्वीकार्य होती हैं । सम्भवतः लोक की मासूमियत इन्हीं बातों में रस लेती है । लोकगाथाएँ अनगढ़ लोक द्वारा गढ़ी गयी होती हैं , जहाँ तर्क करना वर्जित होता है ।
यशवंत जी ने "दाई "[https://rashtrabodh.com/archives/33529] लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया है । यह उपन्यास बेशक़ पठनीय है । विश्वास है कि इसे व्यापक लोकप्रियता हासिल होगी ।
* विजय वर्तमान
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{{सिर्फ़ कहानी|date=अप्रैल 2026}}
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}}
लोकगाथा की ताक़त
*******
* विजय वर्तमान
यह सच है कि लोकगाथाएँ इतिहास से अधिक ताक़तवर सिद्ध होती हैं । वे बिना किसी औपचारिक माध्यम के श्रुति परम्परा के डैनों पर सवार होकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं और लोक की स्मृति में दृढ़ता के साथ विद्यमान रहती हैं । यह भी होता आया है कि यदि लोकगाथा का कोई पात्र लोकमान्यताओं और आस्थाओं के पैमाने पर आदर्श सिद्ध होता है तो वह पात्र जनता की श्रद्धा और भावुकता का अवलम्ब पाकर एक पूज्य पद का अधिकारी हो जाता है । ऐसी ही एक लोकगाथा छत्तीसगढ़ के मानस में पैठी हुई है जिसकी नायिका "बहादुर कलारिन ( दाई ) [https://rashtrabodh.com/archives/33529]"अपनी नैतिक ऊँचाइयों और दृढ़ , अडिग संकल्पों की स्वामिनी होने के कारण छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है ।
लोकगाथाएँ वास्तविक अर्थों में इतिहास नहीं होतीं अतः इन्हें लिखते समय इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप से मुक्त रहने के कारण लेखक की रचनात्मकता को खेलने का अवसर मिलता है । सुधी लेखक कथा की आत्मा को अप्रभावित रखते हुए पूरी समझदारी और कौशल के साथ अपनी कल्पनाशीलता का नियंत्रित और अनुशासित प्रयोग करते हुए कथा को रोचक और पठनीय बना लेता है । प्रतीत होता है कि यशवंत जी छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं की नब्ज को एक वैद्य की भाँति जानते - समझते हैं । वे लोकगाथाओं को रोचकता और तन्मयता के साथ सुनाना ( लिखना ) जानते हैं । उनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाखा का सम्यक ज्ञान बेहद प्रामाणिकता और सुंदरता के साथ कथा को आगे बढ़ाता है । उपन्यास में सारे संवाद छत्तीसगढ़ी भाखा में हैं । यशवंत जी की छत्तीसगढ़ी में बेहद सरल , सहज और आडम्बरहीन सौंदर्य है । उनकी छत्तीसगढ़ी भाखा सुखद रूप से आभिजात्य से मुक्त है । सोने पे सुहागा यह कि उपन्यास में संवादों की प्रचुरता है अतः छत्तीसगढ़ी भाखा को अधिकाधिक स्थान मिला हुआ है । क़िताब में हिन्दी भाषा सिर्फ़ लेखकीय वक्तव्य के लिए प्रयुक्त हुआ है जो बहुत कम और संतुलित मात्रा में है । यशवंत जी बेहद अच्छी खाँटी छत्तीसगढ़ी जानने और वापरने के लिए सराहे जा सकते हैं ।
यशवंत जी के लेखन में कहीं भी छत्तीसगढ़ी - पन खंडित अथवा अतिक्रमित नहीं होता । उनकी पैनी और महीन दृष्टि छत्तीसगढ़ को सभी स्तरों के पात्रों में सुरक्षित रखती है । कलार जाति का पारंपरिक रूप से महुआ उत्पादों पर निर्भरता का बढ़िया चित्रण हुआ है । बहुउपयोगी महुआ के लिए प्रयुक्त हुई उपमायें सुंदर , सटीक और नवीन हैं ।ग्रामीण परिवेश के प्रामाणिक चित्रण के साथ साथ तत्कालीन सामन्तों और राजाओं का चित्रण करते समय छत्तीसगढ़ कहीं भी अतिरंजित नहीं हुआ है । राजकुमार एवं राजपरिवार के सदस्यों द्वारा भी चटनी - बासी , नून - बासी , चटनी - अंगाकर और पेज का खाया जाना तत्कालीन छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करने का लेखक के चैतन्य आग्रह को सिद्ध करता है । अपहृत राजकुमारियों को धान कूटने की सज़ा देना कथाकार की सजगता को दिखाती है कि वे छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करते समय छत्तीसगढ़ से बाहर क़दम नहीं रखते । छत्तीसगढ़ के पकवानों में कोई आयातित पकवान के नाम का न होना भी यही सिद्ध करता है । इन अर्थों में यह कथा छत्तीसगढ़ की अपनी होने का गौरव प्राप्त करती है । अतिरंजना के लोभ से बच जाना ही यशवंत जी को सुपात्र बनाता है ।
वास्तव में बहादुर कलारिन स्त्री के सम्मान की रक्षा की शाश्वत नैतिकता की स्थापना करती हुई अद्भुत एवं अछूती कथा है । यशवंत जी ने "दसमत"[https://www.amazon.in/Dusmat-Novel-Famous-Chhattisgarh-Dasmat/dp/B0BZLJZJ8Z] के बाद "बहादुर कलारिन" की लोकगाथा को उपन्यास के रूप में जनता को समर्पित किया है ।
यह एक घटनाप्रधान कहानी है । घटनाप्रधान कहानी में पात्रों के मनोविज्ञान का खुलासा करने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं बचती । सच तो यह है कि कथा में इसकी ज़रूरत भी महसूस नहीं होती । तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के कारण गम्भीर विचारप्रधान संवाद नहीं बन पाते । जीवन - दर्शन से संपृक्त प्रसंगों के लिए कोई जगह नहीं बचती । घटनाएं तेजी से घटित होती हैं और लगातार नये दृश्य आते चलते हैं । जैसे कि लोकगाथाओं में होता है कि कुछ अस्वाभाविक सा लगने वाला दृश्य भी श्रद्धालु श्रोताओं के द्वारा सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है , वही इस कथा के साथ भी होता है । तेजी से बदलती घटनाओं का रोमांच इतना हावी हो जाता है कि जिज्ञासायें कमज़ोर पड़कर चुप्पी साध लेती हैं ।
राजकुमार उदय का पड़ोसी राज्यों में भ्रमण हेतु निकलना , वहाँ उसे बघवा द्वारा हबक दिया जाना , उसकी मूर्छित देह को पद्मा द्वारा अपने घर लाकर सेवा - सुश्रुषा किया जाना , उदय के चंगा हो जाने पर उसकी स्मृति - लोप का पता चलना , पद्मा और उदय का गंधर्व विवाह होना , पद्मा का गर्भवती होना , उदय को सैनिकों द्वारा बलात राजमहल पहुंचाना , वहाँ राजवैद्य के उपचार से स्मृति लौटना , उदय का युद्ध में शहीद होना , गाँव में छछान का जन्म होना , पिता का नाम न जानने पर गाँव के बच्चों द्वारा उसका उपहास किया जाना , छछान का गुरुकुल जाना , और एक योग्य योद्धा बनकर निकलना , छछान द्वारा सोररगढ़ राज्य राज्य स्थापित करना , छछान द्वारा राजकुमारियों का अपहरण और उन्हें धान कूटने की सज़ा दिया जाना , माँ पद्मा की समझाइश का उस पर असर न होना , छः आगर छः कोरी राजकुमारियों का अपहरण , पहली अपहृत राजकुमारी चित्रा की आत्महत्या , दुर्ग - नरेश का सोररगढ़ पर आक्रमण , माँ पद्मा द्वारा अपने पुत्र छछान को कुएँ में धकेलकर स्वयं भी कुएँ में कूद जाना , माँ पद्मा का " बहादुर कलारिन दाई " के रूप में प्रतिष्ठित होना..... आदि घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि पाठक को अपनी जिज्ञासा प्रकट करने के लिए अवसर ही नहीं मिलता । यह वैसा ही है , जैसे एक पारंपरिक श्रोता हुंकारू भरते हुए 'हव जी , हव जी ' कहते हुए सारी घटनाओं को चमत्कृत भाव से स्वीकार करता चलता है ।
लेकिन आज की पीढ़ी सम्भवतः दो - चार स्थानों पर कुछ पूछने अथवा सन्देह करने की मुद्रा में आ सकती है । राजकुमार उदय को बहुत आसानी से पिता द्वारा पड़ोसी राज्यों में भ्रमण की अनुमति मिलना , घायल - मूर्छित उदय के भारी - भरकम शरीर को पद्मा द्वारा अकेले जंगल से अपने घर तक लाना , बिना किसी वैद्य की मदद के उदय के घावों को ठीक कर देना , गाँव की पंचायत में दसोदा और पद्मा की बातों को बिना ज़िरह अथवा सन्देह किये उदारतापूर्वक स्वीकार करके माफ़ कर दिया जाना , छछान द्वारा यकायक ही अपना राज्य स्थापित कर लेना ....आदि ऐसी बातें हैं जिन पर सहसा विश्वास नहीं होता । अंत में पद्मा की माँ दसोदा के बारे में कुछ भी बताये बिना कथा का अंत हो जाना भी खटकता है क्योंकि पद्मा की माँ ही सहनायिका है जिसने पद्मा को हर हाल में साथ , संबल और बल दिया था । लोकगाथा में ऐसी असहज बातें सहज स्वीकार्य होती हैं । सम्भवतः लोक की मासूमियत इन्हीं बातों में रस लेती है । लोकगाथाएँ अनगढ़ लोक द्वारा गढ़ी गयी होती हैं , जहाँ तर्क करना वर्जित होता है ।
यशवंत जी ने "दाई "[https://rashtrabodh.com/archives/33529] लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया है । यह उपन्यास बेशक़ पठनीय है । विश्वास है कि इसे व्यापक लोकप्रियता हासिल होगी ।
* विजय वर्तमान
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चाहर धर्मेंद्र
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#व2|शीह व2]])
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लोकगाथा की ताक़त
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* विजय वर्तमान
यह सच है कि लोकगाथाएँ इतिहास से अधिक ताक़तवर सिद्ध होती हैं । वे बिना किसी औपचारिक माध्यम के श्रुति परम्परा के डैनों पर सवार होकर पीढ़ी - दर - पीढ़ी स्थानांतरित होती हैं और लोक की स्मृति में दृढ़ता के साथ विद्यमान रहती हैं । यह भी होता आया है कि यदि लोकगाथा का कोई पात्र लोकमान्यताओं और आस्थाओं के पैमाने पर आदर्श सिद्ध होता है तो वह पात्र जनता की श्रद्धा और भावुकता का अवलम्ब पाकर एक पूज्य पद का अधिकारी हो जाता है । ऐसी ही एक लोकगाथा छत्तीसगढ़ के मानस में पैठी हुई है जिसकी नायिका "बहादुर कलारिन ( दाई ) [https://rashtrabodh.com/archives/33529]"अपनी नैतिक ऊँचाइयों और दृढ़ , अडिग संकल्पों की स्वामिनी होने के कारण छत्तीसगढ़ के कलार समाज की कुलदेवी की प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुकी है ।
लोकगाथाएँ वास्तविक अर्थों में इतिहास नहीं होतीं अतः इन्हें लिखते समय इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप से मुक्त रहने के कारण लेखक की रचनात्मकता को खेलने का अवसर मिलता है । सुधी लेखक कथा की आत्मा को अप्रभावित रखते हुए पूरी समझदारी और कौशल के साथ अपनी कल्पनाशीलता का नियंत्रित और अनुशासित प्रयोग करते हुए कथा को रोचक और पठनीय बना लेता है । प्रतीत होता है कि यशवंत जी छत्तीसगढ़ की लोकगाथाओं की नब्ज को एक वैद्य की भाँति जानते - समझते हैं । वे लोकगाथाओं को रोचकता और तन्मयता के साथ सुनाना ( लिखना ) जानते हैं । उनका छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाखा का सम्यक ज्ञान बेहद प्रामाणिकता और सुंदरता के साथ कथा को आगे बढ़ाता है । उपन्यास में सारे संवाद छत्तीसगढ़ी भाखा में हैं । यशवंत जी की छत्तीसगढ़ी में बेहद सरल , सहज और आडम्बरहीन सौंदर्य है । उनकी छत्तीसगढ़ी भाखा सुखद रूप से आभिजात्य से मुक्त है । सोने पे सुहागा यह कि उपन्यास में संवादों की प्रचुरता है अतः छत्तीसगढ़ी भाखा को अधिकाधिक स्थान मिला हुआ है । क़िताब में हिन्दी भाषा सिर्फ़ लेखकीय वक्तव्य के लिए प्रयुक्त हुआ है जो बहुत कम और संतुलित मात्रा में है । यशवंत जी बेहद अच्छी खाँटी छत्तीसगढ़ी जानने और वापरने के लिए सराहे जा सकते हैं ।
यशवंत जी के लेखन में कहीं भी छत्तीसगढ़ी - पन खंडित अथवा अतिक्रमित नहीं होता । उनकी पैनी और महीन दृष्टि छत्तीसगढ़ को सभी स्तरों के पात्रों में सुरक्षित रखती है । कलार जाति का पारंपरिक रूप से महुआ उत्पादों पर निर्भरता का बढ़िया चित्रण हुआ है । बहुउपयोगी महुआ के लिए प्रयुक्त हुई उपमायें सुंदर , सटीक और नवीन हैं ।ग्रामीण परिवेश के प्रामाणिक चित्रण के साथ साथ तत्कालीन सामन्तों और राजाओं का चित्रण करते समय छत्तीसगढ़ कहीं भी अतिरंजित नहीं हुआ है । राजकुमार एवं राजपरिवार के सदस्यों द्वारा भी चटनी - बासी , नून - बासी , चटनी - अंगाकर और पेज का खाया जाना तत्कालीन छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करने का लेखक के चैतन्य आग्रह को सिद्ध करता है । अपहृत राजकुमारियों को धान कूटने की सज़ा देना कथाकार की सजगता को दिखाती है कि वे छत्तीसगढ़ को प्रस्तुत करते समय छत्तीसगढ़ से बाहर क़दम नहीं रखते । छत्तीसगढ़ के पकवानों में कोई आयातित पकवान के नाम का न होना भी यही सिद्ध करता है । इन अर्थों में यह कथा छत्तीसगढ़ की अपनी होने का गौरव प्राप्त करती है । अतिरंजना के लोभ से बच जाना ही यशवंत जी को सुपात्र बनाता है ।
वास्तव में बहादुर कलारिन स्त्री के सम्मान की रक्षा की शाश्वत नैतिकता की स्थापना करती हुई अद्भुत एवं अछूती कथा है । यशवंत जी ने "दसमत"[https://www.amazon.in/Dusmat-Novel-Famous-Chhattisgarh-Dasmat/dp/B0BZLJZJ8Z] के बाद "बहादुर कलारिन" की लोकगाथा को उपन्यास के रूप में जनता को समर्पित किया है ।
यह एक घटनाप्रधान कहानी है । घटनाप्रधान कहानी में पात्रों के मनोविज्ञान का खुलासा करने की कोई ख़ास गुंजाइश नहीं बचती । सच तो यह है कि कथा में इसकी ज़रूरत भी महसूस नहीं होती । तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के कारण गम्भीर विचारप्रधान संवाद नहीं बन पाते । जीवन - दर्शन से संपृक्त प्रसंगों के लिए कोई जगह नहीं बचती । घटनाएं तेजी से घटित होती हैं और लगातार नये दृश्य आते चलते हैं । जैसे कि लोकगाथाओं में होता है कि कुछ अस्वाभाविक सा लगने वाला दृश्य भी श्रद्धालु श्रोताओं के द्वारा सहज ही स्वीकार कर लिया जाता है , वही इस कथा के साथ भी होता है । तेजी से बदलती घटनाओं का रोमांच इतना हावी हो जाता है कि जिज्ञासायें कमज़ोर पड़कर चुप्पी साध लेती हैं ।
राजकुमार उदय का पड़ोसी राज्यों में भ्रमण हेतु निकलना , वहाँ उसे बघवा द्वारा हबक दिया जाना , उसकी मूर्छित देह को पद्मा द्वारा अपने घर लाकर सेवा - सुश्रुषा किया जाना , उदय के चंगा हो जाने पर उसकी स्मृति - लोप का पता चलना , पद्मा और उदय का गंधर्व विवाह होना , पद्मा का गर्भवती होना , उदय को सैनिकों द्वारा बलात राजमहल पहुंचाना , वहाँ राजवैद्य के उपचार से स्मृति लौटना , उदय का युद्ध में शहीद होना , गाँव में छछान का जन्म होना , पिता का नाम न जानने पर गाँव के बच्चों द्वारा उसका उपहास किया जाना , छछान का गुरुकुल जाना , और एक योग्य योद्धा बनकर निकलना , छछान द्वारा सोररगढ़ राज्य राज्य स्थापित करना , छछान द्वारा राजकुमारियों का अपहरण और उन्हें धान कूटने की सज़ा दिया जाना , माँ पद्मा की समझाइश का उस पर असर न होना , छः आगर छः कोरी राजकुमारियों का अपहरण , पहली अपहृत राजकुमारी चित्रा की आत्महत्या , दुर्ग - नरेश का सोररगढ़ पर आक्रमण , माँ पद्मा द्वारा अपने पुत्र छछान को कुएँ में धकेलकर स्वयं भी कुएँ में कूद जाना , माँ पद्मा का " बहादुर कलारिन दाई " के रूप में प्रतिष्ठित होना..... आदि घटनाएं इतनी तेजी से घटती हैं कि पाठक को अपनी जिज्ञासा प्रकट करने के लिए अवसर ही नहीं मिलता । यह वैसा ही है , जैसे एक पारंपरिक श्रोता हुंकारू भरते हुए 'हव जी , हव जी ' कहते हुए सारी घटनाओं को चमत्कृत भाव से स्वीकार करता चलता है ।
लेकिन आज की पीढ़ी सम्भवतः दो - चार स्थानों पर कुछ पूछने अथवा सन्देह करने की मुद्रा में आ सकती है । राजकुमार उदय को बहुत आसानी से पिता द्वारा पड़ोसी राज्यों में भ्रमण की अनुमति मिलना , घायल - मूर्छित उदय के भारी - भरकम शरीर को पद्मा द्वारा अकेले जंगल से अपने घर तक लाना , बिना किसी वैद्य की मदद के उदय के घावों को ठीक कर देना , गाँव की पंचायत में दसोदा और पद्मा की बातों को बिना ज़िरह अथवा सन्देह किये उदारतापूर्वक स्वीकार करके माफ़ कर दिया जाना , छछान द्वारा यकायक ही अपना राज्य स्थापित कर लेना ....आदि ऐसी बातें हैं जिन पर सहसा विश्वास नहीं होता । अंत में पद्मा की माँ दसोदा के बारे में कुछ भी बताये बिना कथा का अंत हो जाना भी खटकता है क्योंकि पद्मा की माँ ही सहनायिका है जिसने पद्मा को हर हाल में साथ , संबल और बल दिया था । लोकगाथा में ऐसी असहज बातें सहज स्वीकार्य होती हैं । सम्भवतः लोक की मासूमियत इन्हीं बातों में रस लेती है । लोकगाथाएँ अनगढ़ लोक द्वारा गढ़ी गयी होती हैं , जहाँ तर्क करना वर्जित होता है ।
यशवंत जी ने "दाई "[https://rashtrabodh.com/archives/33529] लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को समृद्ध किया है । यह उपन्यास बेशक़ पठनीय है । विश्वास है कि इसे व्यापक लोकप्रियता हासिल होगी ।
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वार्ता:द्विभाषी शब्दकोश
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सुमता
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== द्विभाषी शब्दकोश ==
द्विभाषी शब्दकोश पेज में सुधार कैसे करें । [[सदस्य:सुमता|सुमता]] ([[सदस्य वार्ता:सुमता|वार्ता]]) 13:14, 16 अप्रैल 2026 (UTC)
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सदस्य वार्ता:Yashwant Sahu Konganiha
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Mnjkhan
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सूचना: [[:दाई उपन्यास]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
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चाहर धर्मेंद्र
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[[श्रेणी:कैमरा]]
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अनुच्छेद 140 (भारत का संविधान)
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चाहर धर्मेंद्र
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अनुच्छेद 140 (भारत का संविधान)
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{{भारत का संविधान}}
{{ज्ञानसन्दूक संविधान
| title_orig = भारत का संविधान
| part = [[भाग 5 (भारत का संविधान)|भाग 5]]
| subject = संघ न्यायपालिका
| followed_by = [[अनुच्छेद 141 (भारत का संविधान)]]
| preceded_by =[[अनुच्छेद 139 (भारत का संविधान)]]
| translator =
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| author = [[भारतीय संविधान सभा]]
| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी|हिंदी]]
| genre = [[:श्रेणी:संविधान]]
| publisher =
| release_date = 1949
| media_type = प्रकाशित
| pages =
}}
'''[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]]''' का अनुच्छेद 140 सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों के विस्तार से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके। यह अनुच्छेद संसद को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह विधि द्वारा सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान कर सके,<ref name=":1">{{Cite web |title=Ancillary powers of Supreme Court
|url=https://www.constitutionofindia.net/articles/article-140-ancillary-powers-of-supreme-court/ |access-date=2025-12-16 |website=भारत का संविधान |language=en-US}}</ref> जो उसके अधिकार-क्षेत्र के सुचारु संचालन और न्यायिक कार्यों के समुचित निष्पादन के लिए आवश्यक हों।<ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ. जी. नारायण राजू|title=भारत का संविधान|url=https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf|access-date=9 नवम्बर 2015|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड|page=79}}</ref>
==पृष्ठभूमि==
संविधान-निर्माण के समय यह स्पष्ट था कि समय के साथ न्यायिक प्रणाली के समक्ष नई चुनौतियाँ और जटिलताएँ उत्पन्न होंगी, जिनका पूर्वानुमान पूर्णतः संभव नहीं है। अतः एक लचीली व्यवस्था की आवश्यकता अनुभव की गई, जिसके माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों का विस्तार परिस्थितियों के अनुरूप किया जा सके।
इसी दृष्टि से अनुच्छेद 140 का निर्माण किया गया, ताकि संसद को यह सामर्थ्य प्राप्त हो कि वह आवश्यकतानुसार न्यायालय को अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान कर सके। यह प्रावधान न्यायपालिका को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ संविधान की गतिशीलता और अनुकूलनशीलता को भी दर्शाता है।
अनुच्छेद 140 को संविधान के अन्य न्यायिक प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 136 (विशेष अनुमति याचिका), अनुच्छेद 141 (घोषित विधि की बाध्यता)<ref>{{Cite news |last=राजगोपाल |first=कृष्णदास |date=2023-01-12 |title=Under Constitution, law declared by the Supreme Court is binding on all |url=https://www.thehindu.com/news/national/under-constitution-law-declared-by-the-supreme-court-is-binding-on-all/article66369225.ece |access-date=2025-12-16 |work=द हिंदू |language=en-IN}}</ref> तथा अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति)<ref>{{cite web |title=Article 142: The Supreme Power or Judicial Overreach? |url=https://ddnews.gov.in/en/article-142-the-supreme-power-or-judicial-overreach/ |access-date=17 दिसंबर 2025 |website=ddnews.gov.in}}</ref> के साथ जोड़कर देखा जाता है। इन प्रावधानों के समन्वय से यह स्पष्ट होता है कि सर्वोच्च न्यायालय को एक सशक्त, लचीली और प्रभावी संस्था के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया है।
==मूल पाठ==
{{pull quote|संसद को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि वह विधि निर्माण के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को ऐसी अनुपूरक शक्तियाँ प्रदान कर सके, जो संविधान के किसी भी प्रावधान से असंगत न हों और जो न्यायालय को अपने प्रदत्त अधिकार-क्षेत्र का अधिक प्रभावी, सक्षम और उद्देश्यपूर्ण ढंग से प्रयोग करने में सहायक हों। यह व्यवस्था इस विचार पर आधारित है कि न्यायपालिका को केवल निर्धारित शक्तियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक साधन भी उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि वह न्याय के उद्देश्य को पूर्णतः साकार कर सके।<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४७}}</ref><ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ० रीटा वशिष्ट|title=भारत का संविधान|url=https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2023/05/2023050186.pdf|access-date=26 नवम्बर 2021|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग)|page=64}}</ref>}}
{{pull quote|Parliament may by law make provision for conferring upon the Supreme Court such suppl-emental powers not inconsistent with any of the provisions of this Constitution as may appear to be necessary or desirable for the purpose of enabling the Court more effectively to exercise the jurisdiction conferred upon it by or under this Constitution.<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४६}}</ref>}}
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==टिप्पणी==
अनुच्छेद 140 भारतीय न्यायिक व्यवस्था की लचीलापन और दूरदर्शिता का परिचायक है। यह सुनिश्चित करता है कि सर्वोच्च न्यायालय समयानुकूल अपनी शक्तियों का विस्तार कर सके और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप न्याय प्रदान करने में सक्षम बना रहे।
हालाँकि यह शक्ति सीधे न्यायालय को नहीं, बल्कि संसद को प्रदान की गई है, जिससे शक्तियों के संतुलन का सिद्धांत भी सुरक्षित रहता है। इस प्रकार यह अनुच्छेद न्यायपालिका और विधायिका के बीच सहयोगात्मक संबंध को सुदृढ़ करता है।<ref>{{Cite book | title=भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान)
|url=https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC|publisher =भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग| date= 2014}}</ref>
अतः अनुच्छेद 140 न केवल एक सहायक प्रावधान है, बल्कि यह भारतीय संविधान की उस जीवंतता को दर्शाता है, जो बदलते समय के साथ स्वयं को ढालते हुए न्याय के उद्देश्य को सर्वोपरि बनाए रखती है।
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Wikisource|1=भारत का संविधान}}
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[मिर्ज़ापुर]]
* [[विंध्याचल|विंध्याचल]]
* [[विंध्याचल मंडल]]
* [[उत्तर प्रदेश]]
* [[उत्तर प्रदेश के ज़िले|उत्तर प्रदेश के जिले]]
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/* इन्हें भी देखें */
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'''[[विंध्याचल|विंध्याचल]] जिला''' [[भारत]] के [[उत्तर प्रदेश]] राज्य का एक जिला है। जिले का मुख्यालय [[विंध्याचल|विंध्याचल]] है। जिले में चार तहसीलें हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=qzUqk7TWF4wC|title=Uttar Pradesh in Statistics|date=1987|publisher=APH Publishing|isbn=978-81-7024-071-6|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|title=Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance|last=Pai|first=Sudha|date=2007|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0797-5|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC|archive-date=2017-04-23}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[मिर्ज़ापुर]]
* [[विंध्याचल|विंध्याचल]]
* [[विंध्याचल मंडल]]
* [[उत्तर प्रदेश]]
* [[उत्तर प्रदेश के ज़िले|उत्तर प्रदेश के जिले]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{उत्तर प्रदेश के मंडल और जिले}}
{{मिर्जापुर जिला}}
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के जिले]]
[[श्रेणी:मिर्ज़ापुर ज़िला|*]]
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भाग 9 (भारत का संविधान)
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चाहर धर्मेंद्र
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भाग 9क (भारत का संविधान)
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भाग 10 (भारत का संविधान)
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भाग 11 (भारत का संविधान)
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भाग 12 (भारत का संविधान)
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#पुनर्प्रेषित [[भारत का संविधान#भारतीय संविधान के भाग]]
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भाग 13 (भारत का संविधान)
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चाहर धर्मेंद्र
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भाग 13 (भारत का संविधान)
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#पुनर्प्रेषित [[भारत का संविधान#भारतीय संविधान के भाग]]
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भाग 14 (भारत का संविधान)
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चाहर धर्मेंद्र
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भाग 14 (भारत का संविधान)
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#पुनर्प्रेषित [[भारत का संविधान#भारतीय संविधान के भाग]]
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सी राचा
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The Sorter
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1325853544|Si Racha]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
| name = सी राचा
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| native_name = ศรีราชา
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<!-- Location ------------------>| coordinates = {{coord|13.174|100.930|display=inline,title}}
<!-- Area/postal codes & others -------->| subdivision_type = देश
| subdivision_name = {{THA}}
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<!-- Politics ----------------->| established_title = <!-- Settled -->
| established_date =
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| leader_title = महापौर
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<!-- Area --------------------->| area_footnotes =
| area_total_km2 = 4.058<!-- ALL fields with measurements are subject to automatic unit conversion-->
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| elevation_footnotes = <!--for references: use <ref> tags-->
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| population_footnotes = <ref>{{cite web |title=Population statistics 2018 |publisher=Department of Provincial Administration |url=https://www.dopa.go.th/}}</ref>
| population_total = 24,127
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<!-- General information --------------->| timezone1 = [[UTC+07:00|ICT]]
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}}
'''सी राचा''' ({{langx|th|ศรีราชา}}) [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]] के [[चोनबुरी प्रान्त|चोनबुरी प्रांत]] में स्थित एक नगर है। [[थाइलैंड की खाड़ी]] के पूर्वी तट पर स्थित, यह बैंकॉक के लगभग 120 km दक्षिणपूर्व स्थित है।
यह नगर [[सी राचा ज़िला]] का केंद्र है। सी राचा [[पटाया]], [[लैम चाबांग]] और [[चोनबुरी]] के साथ औद्योगिक [[पूर्वी समुद्र तट]] क्षेत्र है। यह पटाया-चोनबुरी महानगरीय क्षेत्र का भाग भी है, जहाँ 9,99,092 लोगों रहते हैं।
सी राचा को लोकप्रिय [[हॉट सॉस]] [[सिराचा]] के जन्मस्थान के तौर से जाना जाता है, जिसका नाम शहर के नाम पर रखा गया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bonappetit.com/trends/article/the-original-sriracha|title=The Original Sriracha|date=2013-03-04|website=[[Bon Appétit]]|publisher=[[Condé Nast Publications]]|access-date=2014-11-11}}</ref>
== इतिहास ==
सी राचा बांग लामुंग ज़िले का भाग हुआ करता था, जो आज इसके दक्षिण में है। 1900 को फ़ील्ड मार्शल [[चावफ्राया सुरसकमोंत्री]] शहर में आकर अपनी कंपनी स्रीराचा कैपिटल कंपनी लिमिटेड के तहत एक आरा मिल का निर्माण किया। 1903 में, सुरसकमोंत्री ने बांग फ्रा ज़िले की राजधानी को सी राचा में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया, जो हुआ तथा 1917 को इसका नाम सी राचा ज़िला रखा गया।<ref>{{Cite web|url=https://www.konruksriracha.in.th/15099697/-%E0%B8%9B%E0%B8%A3%E0%B8%B0%E0%B8%A7%E0%B8%B1%E0%B8%95%E0%B8%B4%E0%B8%82%E0%B8%AD%E0%B8%87%E0%B8%A8%E0%B8%A3%E0%B8%B5%E0%B8%A3%E0%B8%B2%E0%B8%8A%E0%B8%B2|title=ประวัติของศรีราชา (รวบรวมและเรียบเรียงจากหนังสือ 100 ปี ศรีราชา)|website=konruksriracha.in.th|language=th|access-date=2023-06-13}}</ref>
नगरपालिका को 1945 में एक उपज़िला नगरपालिका में बनाया गया था।<ref>{{Cite journal|date=1945-07-03|script-title=th:พระราชกฤษฎีกาจัดตั้งเทศบาลตำบลศรีราชา จังหวัดชลบุรี พุทธศักราช ๒๔๘๘|url=https://www.ratchakitcha.soc.go.th/DATA/PDF/2488/A/036/412.PDF|journal=Royal Gazette|language=th|volume=62|issue=36 ก|pages=412–415|archive-url=https://web.archive.org/web/20120528062313/http://www.ratchakitcha.soc.go.th/DATA/PDF/2488/A/036/412.PDF|archive-date=May 28, 2012}}</ref> 1995 को, उपज़िला नगरपालिका को एक शहर नगरपालिका में बनाया गया था।<ref>{{Cite journal|date=1995-09-24|script-title=th:พระราชกฤษฎีกาจัดตั้งเทศบาลเมืองศรีราชา จังหวัดชลบุรี พ.ศ. ๒๕๓๘|url=https://www.ratchakitcha.soc.go.th/DATA/PDF/2538/A/040/45.PDF|journal=Royal Gazette|language=th|volume=112|issue=40 ก|pages=45–48|archive-url=https://web.archive.org/web/20120528062424/http://www.ratchakitcha.soc.go.th/DATA/PDF/2538/A/040/45.PDF|archive-date=May 28, 2012}}</ref>
3 सितंबर 2023 को, [[थाई ऑयल]] की जेटी से एक तेल टैंकर को भरने के लिए उपयोग की जा रही एक तेल पाइपलाइन फट गई, जिससे तेल छलकने लगा। इस रिसाव ने थाईलैंड की खाड़ी को 50-70 m³ के तेल से प्रदूषित कर दिया, जिसमें 5 km का तेल बहा। रिसाव वर्तमान में प्रदूषण नियंत्रण विभाग और समुद्री विभाग के अधिकार में है। थाई ऑयल को बाद में रिसाव पर 6,000 लीटर डिस्पेरेंट का प्रयोग करने की अनुमति दी गई।<ref>{{Cite news|url=https://www.bangkokpost.com/thailand/general/2641214/oil-leak-off-si-racha-clean-up-started|title=Oil leak off Si Racha, clean-up started|date=4 September 2023|work=Bangkok Post|access-date=2023-09-10|language=en}}</ref> 7 सितंबर 2023 तक, खाड़ी में द्वीपों के तट पर मूंगे रिसाव से अप्रभावित हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.bangkokpost.com/thailand/general/2642917/oil-spill-may-trigger-coral-abortions|title=Oil spill may trigger 'coral abortions'|last=Wipatayotin|first=Apinya|date=7 September 2023|work=Bangkok Post|access-date=2023-09-10|language=en}}</ref>
== शिक्षा ==
थाई-जापानी संगठन विद्यालय सी राचा नामक जापानी अंतरराष्ट्रीय विद्यालय सी राचा में है। यह [[बैंकॉक]] में [[थाई-जापानी संगठन विद्यालय]] की एक शाखा है।<ref>"[https://www.tjas.ac.th/sriaccess 学校案内 シラチャ校アクセス ]."</ref> सी राचा में पहले सीराचा-पटाया जापानी पूरक विद्यालय नामक [[होशोकू|जापानी सप्ताहांत विद्यालय]] होता था।<ref name="MEXT20030102Asia2">"[https://web.archive.org/web/20030102204401/http://www.mext.go.jp/a_menu/shotou/clarinet/hasia.html アジアの補習授業校一覧]" ().</ref>
== यह भी देखें ==
* [[खाव खिआव खुला चिड़ियाघर]]
== संदर्भ ==
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==अनुवाद==
किसी भाषा में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन अनुवाद (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है।
संस्कृत में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग शिष्य द्वारा गुरु की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' प्रत्यय जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' उपसर्ग उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार मोनियर विलियम्स ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया।<ref name="">https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6</:0>
==कार्यालयी हिन्दी==
सावैधनिक रूप से कार्यालयी हिन्दी के लिए 'राजभाषा हिन्दी' का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कार्यालयी हिन्दी के उद्देश्य को समझने के लिए राजभाषा हिन्दी तथा उसके संवैधानिक प्रावधानों को जानना आवश्यक है। सामान्य नागरिक 'राजभाषा हिन्दी' को भ्रमवश राज्यों की हिन्दी मानते आए हैं। लेकिन राजभाषा का प्रयोग अंग्रेजी में 'Official Language' के रूप में किया जाता है। इसका तात्पर्य 'राज' की भाषा से है। 'राज की भाषा' से यहाँ अभिप्राय राज-काज की भाषा, प्रशासन की भाषा, सरकारी काम-काज की भाषा या कार्यालय की भाषा से है।<ref>https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80</ref>
==कार्यालयी अनुवाद ==
कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के वैश्वीकृत युग में, विभिन्न भाषाओं के बीच संचार को सुगम बनाने के लिए अनुवाद की आवश्यकता होती है।
'''1:'''संवाद का माध्यम: कार्यालयी हिंदी अनुवाद का मुख्य उद्देश्य विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद को सरल बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी कर्मचारी, चाहे उनकी मातृभाषा कुछ भी हो, कंपनी की नीतियों, प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को समझ सकें।
'''2:'''कानूनी और औपचारिक दस्तावेज: कई बार कार्यालयों में कानूनी और औपचारिक दस्तावेजों का अनुवाद आवश्यक होता है। सही अनुवाद सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी पहलुओं को समझा जाए और कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए।
'''3:'''संस्कृति का सम्मान: अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान भी है। कार्यालयी हिंदी में अनुवाद से यह सुनिश्चित होता है कि स्थानीय संदर्भ और सांस्कृतिक बारीकियों को ध्यान में रखा जाए।
'''4:'''कार्यक्षमता में वृद्धि: जब सभी कर्मचारी एक ही भाषा में संवाद कर पाते हैं, तो कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इससे टीम वर्क में सुधार होता है और कार्यों को पूरा करने में समय की बचत होती है।
'''5:'''शिक्षा और प्रशिक्षण: कार्यालयों में प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के दौरान, अनुवाद की आवश्यकता होती है ताकि सभी प्रतिभागी सामग्री को समझ सकें। इससे सीखने की प्रक्रिया में सुधार होता है।
इस प्रकार, कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता न केवल संचार को सुगम बनाती है, बल्कि यह कार्यस्थल की समग्र उत्पादकता और सामंजस्य को भी बढ़ाती है।<ref>https://brainly.in/question/61779378</ref>
==कार्यालयी अनुवाद का सरलीकरण==
आज सरकारी कार्यालयों में जो भी हिंदी का प्रयोग देखने को मिलता है, वह प्राय: अनुवाद के माध्यम से ही हो रहा है। इसलिए आज राजभाषा मात्र अनुवाद की भाषा बनकर रह गई है। यह मूल रूप से प्रयोग की भाषा नहीं बन पाई। दूसरे, राजभाषा अधिनियम-1963 के प्रावधानों के चलते केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में द्विभाषिक स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें अनुवाद की व्यवस्था अनिवार्य है।
अनुवाद की इस भाषा के कारण कई बार यह सुनने को मिलता है कि हिंदी परिपत्रों, फार्मों और इश्तिहारों की भाषा समझ में नहीं आती और अंग्रेजी पाठ को देखना पड़ता है। फिर, आदेश और परिपत्र किसके लिए है ? इससे ऐसे परिपत्रों को हिंदी में जारी करने का उददेश्य ही समाप्त हो जाता है, जबकि होना यह चाहिए कि जिसे अंग्रेजी न समझ आए, वह इसे हिंदी में पढ़ ले। इसी में हिंदी की सार्थकता है। हिंदी की लोकप्रियता गिरने का बहुत कुछ कारण अनुवाद का ऐसा स्तर ही है। इसे हम आज के संदर्भ में कहें तो हम हिंदी का सही मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं। फिर ऐसी हिंदी को कौन अपनाना चाहेगा। एक दैनिक पत्र ने किसी सरकारी कार्यालय में प्रयुक्त ड्राविंग लाइसेंस के एक फार्म का नमूना प्रस्तुत किया है। देखिए
क्या आवेदक आपके सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार अपस्मार भ्रमि या किसी ऐसे मानसिक रोग के अध्यधीन है, जिससे उसकी चालन कार्य क्षमता पर प्रभाव पड़ने की संभावना है ? यह प्रश्न एक डॉक्टर के लिए है, जिसे पढ़कर डॉक्टर को ही मिर्गी आ जाए। आवेदक से संबंधित भाषा का नमूना देखिए- क्या आप किसी चालन अनुज्ञप्ति या शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति धारण निरहित हए हैं ? मैंने रुपये के विहित शुल्क का संदाय कर दिया है। यह एक बानगी है। मोटर ड्राइवर, जो अधिकतर कम पढ़े-लिखे ही होते हैं, इनका क्या उत्तर देंगे ? जो पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के लोग हैं, क्या वे भी इस भाषा को समझ पाएंगे ? उन्हें तो हारकर अंग्रेजी में ही पढ़ना पड़ेगा। प्रश्न उठता है कि आखिर यह भाषा किसके लिए लिखी जा रही है ? क्या इस भाषा से ही शासन और जनता के बीच दूरी कम हो सकेगी ? क्या यहां "अनुज्ञप्ति ", "निरहित ", "विहित ", "संदाय ", "अध्यधीन ", "अपस्मार ", "सर्वोत्तम निर्णय " जैसे कलिष्ठ शब्दों से नहीं बचा जा सकता था ?
==कार्यालय मे सरल भाषा की प्रयोग ==
सामान्यत: यह कहा जाता है कि जिस भाषा में उर्दू-फारसी के शब्द अधिक हों, वहीं भाषा सरल है। किंतु यह बात सही नहीं है। दक्षिण भारत और पूर्वी भारत के लोगों के लिए संस्कृत के शब्द उर्दू शब्दों की अपेक्षा अधिक सरल हैं, जबकि पश्चिम भारत, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए उर्द-फारसी बहत हिंदी अधिक सरल लगती है। इस प्रकार सरलता एक सापेक्षिक शब्द है। आवश्यकता इस बात की है कि अनुवाद की भाषा कृत्रिम और बोझिल न हो। इसे सप्रयास कलिष्ट और दुरुह न बनाई जाए। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विष्णु प्रभाकर ने ठीक ही कहा है कि भाषा न कभी कठिन होती है, न सरल, वह सहज या असहज होती है। जो शब्द जबान पर चढ़ चुके हैं, चाहे वे किसी भी भाषा के हों, उन्हें रहने दिया जाए। शुदधिकरण की भावना भाषा के निकास को रोकती है। भाषा के संबंध में कबीर ने ठीक ही कहा है- भाषा बहता नीर। इसके अजास् प्रवाह के लिए जहां से भी शब्द आएं उन्हे ग्रहण कर लेना चाहिए। जिस भाषा में अन्य भाषाओं के शब्द ग्रहण करने की जितनी अधिक क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही अधिक समदव और सशक्त होगी। अंग्रेजी की व्यापकता और लोकप्रियता का भी यही कारण है। आज के कम्पयूटर और सूचना प्रोद्योगिकी के युग में नए शब्द अंतरराष्ट्रीय धरोहर है। संसार की सभी भाषाएं इन्हें बेझिझक अपना रही हैं।
जहां तक कार्यालयी अनुवाद के सरलीकरण का प्रश्न है, इसके मार्ग में कुछ बाधाएं हो सकती हैं, जिनपर पार पाया जा सकता है। यदि हम अपने देश की राजभाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विचार करें तो हम देखेंगे कि यहां विदेशी आक्रमण के कारण विदेशी भाषाएं आईं। सिकंदर लोधी के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान जारी हुआ और फारसी को राजभाषा बना दिया गया। अकबर के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान फारसी के लिए पुन: जारी हुआ। अंग्रेजों के आने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंग्रेजी को राजभाषा बना दिया जो स्वतंत्रता के बाद भी किसी न किसी प्रकार आज भी प्रचलित ही नहीं, अधिक प्रचलित भी है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इन विदेशी भाषाओं के कारण हिंदी में अनेक शब्द घुल-मिल गए हैं। कार्यालयी अनुवाद करते समय हमें प्रचलित शब्दों के साथ अधिक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। जैसे हमने फाइल, इंजीनियर, रेलवे, रेडियो, कंप्यूटर जैसे शब्दों को अपना लिया है, इनके स्थान पर नए शब्द लाने की क्या आवश्यकता है ? संविधान के अनुच्छेद 351 का भी यही उद्देश्य है।
==कार्यालयी अनुवाद की समस्या==
'''1:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने सबसे बड़ी समस्या जैसा कि उपर एक दृष्टांत से स्पष्ट किया गया है "शाब्दिक अनुवाद " है। इससे बचना होगा। अनुवाद यदि सांविधिक नहीं है तो इसके लिए सरल और प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाए। जैसा कि अपस्मार के लिए मिर्गी, संदाय के लिए भुगतान, अनुज्ञप्ति के लिए लाइसेंस शब्द लिखने में कोई हानि नहीं थी।
'''2:'''कार्यालयी अनुवाद के कठिन होने का दूसरा कारण है- अंग्रेजी भाषा का रूढिवादी ब्रिटिशकालीन प्रारूप, जो आज तक प्रचलित है। कार्यालयों में प्रयुक्त संहिताओं, मैनुअलों, अधिसूचनाओं, नियमों तथा विनियमों के हिंदी अनुवाद पर भी उस बीते युग की अंग्रेजी की छाप है, जो अब इंग्लैंड या अमेरिका में भी प्रयुक्त नहीं होती। किंतु हमारे देश में लार्ड क्लाइव से लेकर आज तक उसी युग की अंग्रेजी और भाषा शैली का प्रयोग हो रहा है, जिसमें अनेक अनावश्यक शब्दों का बोझ भाषा को जटिल बना देता है। उसका हिंदी अनुवाद भी हिंदी की कलिष्टता को बढ़ाने में सहायक होता है। मुझे याद है जब श्री रमा प्रसन्न नायक, राजभाषा के सचिव थे तो उन्होंने हिंदी भाषा की सरलता पर जोर देते हुए अंग्रेजी प्रारूपों में सुधार की आवश्यकताओं पर बल दिया था। किंतु यह कार्य कौन करे ? अंग्रेजी की पत्थर की लकीरें जो सैकड़ों वर्षों से खीची आ रही हैं, उनमें सुधार कौन करे ? हां, ब्रिटिश एजूकेशन सेक्रेटरी ने 1946 में भारत सरकार के कार्यालयों में चल रही अंग्रेजी को विक्टोरिया युग की भाषा शैली बताते हुए सरकारी प्रारूपो को पुराने ढंग को पूर्णत: संशोधित करने की आवश्यकता बताई थी।
अंग्रेजी में अनेक अनावश्यक वाक्यांशों की कमी नहीं है, जिनका अनुवाद करने से व्यर्थ में हिंदी भी क्लिष्ट और अटपटी हो जाती है। अत: अनवाद करते समय ऐसे शब्दों को छोड़ देना चाहिए और हिंदी की स्वाभाविक प्रकृति के अनुसार अनुवाद करना चाहिए।
कार्यालयीन भाषा की कलिष्टता का रोना भारत में ही नहीं, इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में भी है। कुछ वर्ष पूर्व इंग्लैंड की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती मारग्रेट थेचर ने अपने सरकारी कर्मचारियों को सरल भाषा प्रयोग करने के संबंध में जो निर्देश जारी किए थे, उन्हें यहां उद्धृत करना अप्रासागिक न होगा।
आपकी बात संक्षिप्त, बोधगम्य और थोड़े शब्दों में होनी चाहिए, भारी-भरकम शब्दों, वाक्यों और अन्तहीन पैराग्राफों से बचना चाहिए। संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग करें, लंबे-लंबे शब्दों से शैली में नीरसता आती है और पाठक ऊँघने लगते हैं। आप Attempt न लिखकर Try लिखें, Concerning न लिखकर About और Additional के बजाय More क्यों न लिखें। वाक्य संक्षिप्त और 15-20 शब्दों से अधिक न हो। इतने में भी आप नम्रता के साथ-साथ औपचारिक रूप में दमदार बात कह सकते हैं। अंत में उसने अपने नौकरशाही तंत्र को चेतावनी देते हए कहा था।
"मुझे मजबूरन यह कहना पड़ रहा है कि यदि आप इसके बाद भी कृत्रिम और स्कूली बच्चों जैसी भाषा लिखेंगे और भाषा का सत्यानाश करते रहेंगे तो आपको मूर्ख नहीं तो और क्या कहा जाएगा"
'''3:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने एक बड़ी कठिनाई तकनीकी और प्रशासनिक शब्दों में एकरूपता का अभाव भी है। इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। आज हिंदी केंद्रीय सरकार के अतिरिक्त 10 राज्यों की भी राजभाषा है। किंतु इनके अनेक प्रशासनिक और तकनीकी शब्दों में भी भिन्नता है। जैसे फाइल के लिए केंद्र ने फाइल ही रखा है किंतु राज्यों में कहीं इसे मिसिल, कहीं पत्रावली, कहीं संचिका कहा जाता है। Compulsory शब्द के लिए केंद्र ने अनिवार्य, बिहार ने बाध्यात्मक, मध्य प्रदेश ने आवश्यक अपनाया है। इसी प्रकार Candidate के लिए उम्मीदवार, कहीं प्रत्याशी, कहीं अभ्यर्थी, परीक्षार्थी और कहीं पदाभिलाषी जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
प्रसन्नता का विषय है कि "मातृभाषा विकास परिषद " की जनहित याचिका पर 6 सितंबर, 2004 को उच्चतम न्यायालय ने निर्णय देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र सहित सभी सरकारी निकायों को तकनीकी तथा वैज्ञानिक शब्दावली आयोग द्वारा तैयार की तकनीकी शब्दावली का प्रयोग करने के निदेश दिए हैं। इससे सभी सरकारी कार्यालयों में भी समान शब्दावली प्रयोग में भी सहायता मिलेगी और हिंदी अनुवाद में एकरूपता आएगी।
अंत में मैं कार्यालयी अनुवाद के संबंध में यही कहना चाहूँगा कि यदि अनुवाद सांविधिक प्रकृति का नहीं है तो उसे सरल और प्रचलित भाषा में किया जाए। अनुवादक को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी भाषा का सजक है। उसकी लिखी भाषा कम महत्वपूर्ण नहीं है। उसका भी प्रयोग होगा। अनुवादक को स्रोत भाषा के भावों को अपनी भाषा में व्यक्त करना है। भाषा में स्वाभाविकता बनाए रखना अनुवादक का पहला कर्तव्य है, ताकि वह ऐसी न लगे कि यह कोई अनुवाद है। हिंदी में प्रयायों की कमी नहीं है। संदर्भ को देखते हुए सरल और उपयुक्त शब्दों का यन किया जाए। अनवाद में पांडित्य प्रदर्शन के लिए कलिष्ठ और अप्रचलित शब्दों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। अनुवाद के संबंध में अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। हमें उनसे लाभ उठाना चाहिए -
अनुवाद के संबंध में पास्तरनाक ने ओलगा को पत्र में लिखा था -
"मूल विचार को नंगा करके देखो। फिर उसे नए शब्दों के वस्त्र पहना दो। कम से कम शब्दों में पूरी बात कहने की सामर्थ्य होनी चाहिए। अनुवाद शब्द का नहीं, विचार का होता है। कमाल तब है कि शाब्दिक अनुवाद भी हो और कहने के ढंग में निखार भी हो। बड़ी बारीक रेखा होती है, दोनों के बीच, जो जितना संभाल ले उतना ही श्रेष्ठ अनुवादक माना जाता है।"
अनुवादक के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि उसे इस बात पर ध्यान रखना होगा कि यह अनुवाद किसके लिए है, उसी के उपयुक्त भाषा का उपयोग करना चाहिए। अनुवाद के बाद अनुवादक को स्वयं अपने अनुवाद को तसल्ली के साथ पढ़ना चाहिए और भाषा में जहां प्रवाह नहीं है, उसे लाने का प्रयत्न करना चाहिए और जो शब्द निरर्थक और अटपटे लगें, उन्हें बदल देना चाहिए। अंग्रेजी के वाक्य बहुदा मिश्रित प्रकृति के होते हैं और कई उप-वाक्यों को मिलाकर एक वाक्य बनता है। हिंदी में यथावश्यक ऐसे वाक्य को तोड़ देना चाहिए। इससे जटिलता कम हो जाती है, अनुवाद में सबसे बड़ी कठिनाई शब्दों की न होकर वाक्यांशों और मुहावरों के अनुवाद की होती है। क्योंकि इनका अर्थ अलग-अलग शब्दों के अर्थ से नहीं समझा जा सकता। अनुवादक को इस दिशा में पूर्णत: सचेत रहना चाहिए। अंग्रेजी में But for, Save as provided जैसे अनेक ऐसे वाक्यांश या शब्द समूह हैं, जिनके अर्थ समुच्य रूप में ही निकलते हैं, पृथकपृथक शब्दों के रूप में नहीं। जैसे But का अर्थ है किंतु और For का अर्थ है "के लिए"। किंतु मिलने पर इनका अर्थ बदल जाता है जैसे I would have been ruined but for your help. अर्थात् यदि आप मेरी सहायता न करते तो मैं बर्बाद हो जाता। इसी प्रकार यहां Save का अर्थ बचाना नहीं बल्कि छोड़कर है।
इस प्रकार अनुवादक का दायित्व बड़ा महत्वपूर्ण और मल लेखक से किसी भी प्रकार कम नहीं होता।
==स्रोत==
==https://www.hindivyakran.com/2022/05/blog-post_31.html==
==https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80==
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==अनुवाद==
किसी भाषा में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन अनुवाद (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है।
संस्कृत में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग शिष्य द्वारा गुरु की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' प्रत्यय जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' उपसर्ग उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार मोनियर विलियम्स ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया।<ref name="">https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6</:0>
==कार्यालयी हिन्दी==
सावैधनिक रूप से कार्यालयी हिन्दी के लिए 'राजभाषा हिन्दी' का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कार्यालयी हिन्दी के उद्देश्य को समझने के लिए राजभाषा हिन्दी तथा उसके संवैधानिक प्रावधानों को जानना आवश्यक है। सामान्य नागरिक 'राजभाषा हिन्दी' को भ्रमवश राज्यों की हिन्दी मानते आए हैं। लेकिन राजभाषा का प्रयोग अंग्रेजी में 'Official Language' के रूप में किया जाता है। इसका तात्पर्य 'राज' की भाषा से है। 'राज की भाषा' से यहाँ अभिप्राय राज-काज की भाषा, प्रशासन की भाषा, सरकारी काम-काज की भाषा या कार्यालय की भाषा से है।<ref>https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80</ref>
==कार्यालयी अनुवाद ==
कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के वैश्वीकृत युग में, विभिन्न भाषाओं के बीच संचार को सुगम बनाने के लिए अनुवाद की आवश्यकता होती है।
'''1:'''संवाद का माध्यम: कार्यालयी हिंदी अनुवाद का मुख्य उद्देश्य विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद को सरल बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी कर्मचारी, चाहे उनकी मातृभाषा कुछ भी हो, कंपनी की नीतियों, प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को समझ सकें।
'''2:'''कानूनी और औपचारिक दस्तावेज: कई बार कार्यालयों में कानूनी और औपचारिक दस्तावेजों का अनुवाद आवश्यक होता है। सही अनुवाद सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी पहलुओं को समझा जाए और कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए।
'''3:'''संस्कृति का सम्मान: अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान भी है। कार्यालयी हिंदी में अनुवाद से यह सुनिश्चित होता है कि स्थानीय संदर्भ और सांस्कृतिक बारीकियों को ध्यान में रखा जाए।
'''4:'''कार्यक्षमता में वृद्धि: जब सभी कर्मचारी एक ही भाषा में संवाद कर पाते हैं, तो कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इससे टीम वर्क में सुधार होता है और कार्यों को पूरा करने में समय की बचत होती है।
'''5:'''शिक्षा और प्रशिक्षण: कार्यालयों में प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के दौरान, अनुवाद की आवश्यकता होती है ताकि सभी प्रतिभागी सामग्री को समझ सकें। इससे सीखने की प्रक्रिया में सुधार होता है।
इस प्रकार, कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता न केवल संचार को सुगम बनाती है, बल्कि यह कार्यस्थल की समग्र उत्पादकता और सामंजस्य को भी बढ़ाती है।<ref>https://brainly.in/question/61779378</ref>
==कार्यालयी अनुवाद का सरलीकरण==
आज सरकारी कार्यालयों में जो भी हिंदी का प्रयोग देखने को मिलता है, वह प्राय: अनुवाद के माध्यम से ही हो रहा है। इसलिए आज राजभाषा मात्र अनुवाद की भाषा बनकर रह गई है। यह मूल रूप से प्रयोग की भाषा नहीं बन पाई। दूसरे, राजभाषा अधिनियम-1963 के प्रावधानों के चलते केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में द्विभाषिक स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें अनुवाद की व्यवस्था अनिवार्य है।
अनुवाद की इस भाषा के कारण कई बार यह सुनने को मिलता है कि हिंदी परिपत्रों, फार्मों और इश्तिहारों की भाषा समझ में नहीं आती और अंग्रेजी पाठ को देखना पड़ता है। फिर, आदेश और परिपत्र किसके लिए है ? इससे ऐसे परिपत्रों को हिंदी में जारी करने का उददेश्य ही समाप्त हो जाता है, जबकि होना यह चाहिए कि जिसे अंग्रेजी न समझ आए, वह इसे हिंदी में पढ़ ले। इसी में हिंदी की सार्थकता है। हिंदी की लोकप्रियता गिरने का बहुत कुछ कारण अनुवाद का ऐसा स्तर ही है। इसे हम आज के संदर्भ में कहें तो हम हिंदी का सही मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं। फिर ऐसी हिंदी को कौन अपनाना चाहेगा। एक दैनिक पत्र ने किसी सरकारी कार्यालय में प्रयुक्त ड्राविंग लाइसेंस के एक फार्म का नमूना प्रस्तुत किया है। देखिए
क्या आवेदक आपके सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार अपस्मार भ्रमि या किसी ऐसे मानसिक रोग के अध्यधीन है, जिससे उसकी चालन कार्य क्षमता पर प्रभाव पड़ने की संभावना है ? यह प्रश्न एक डॉक्टर के लिए है, जिसे पढ़कर डॉक्टर को ही मिर्गी आ जाए। आवेदक से संबंधित भाषा का नमूना देखिए- क्या आप किसी चालन अनुज्ञप्ति या शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति धारण निरहित हए हैं ? मैंने रुपये के विहित शुल्क का संदाय कर दिया है। यह एक बानगी है। मोटर ड्राइवर, जो अधिकतर कम पढ़े-लिखे ही होते हैं, इनका क्या उत्तर देंगे ? जो पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के लोग हैं, क्या वे भी इस भाषा को समझ पाएंगे ? उन्हें तो हारकर अंग्रेजी में ही पढ़ना पड़ेगा। प्रश्न उठता है कि आखिर यह भाषा किसके लिए लिखी जा रही है ? क्या इस भाषा से ही शासन और जनता के बीच दूरी कम हो सकेगी ? क्या यहां "अनुज्ञप्ति ", "निरहित ", "विहित ", "संदाय ", "अध्यधीन ", "अपस्मार ", "सर्वोत्तम निर्णय " जैसे कलिष्ठ शब्दों से नहीं बचा जा सकता था ?
==कार्यालय मे सरल भाषा की प्रयोग ==
सामान्यत: यह कहा जाता है कि जिस भाषा में उर्दू-फारसी के शब्द अधिक हों, वहीं भाषा सरल है। किंतु यह बात सही नहीं है। दक्षिण भारत और पूर्वी भारत के लोगों के लिए संस्कृत के शब्द उर्दू शब्दों की अपेक्षा अधिक सरल हैं, जबकि पश्चिम भारत, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए उर्द-फारसी बहत हिंदी अधिक सरल लगती है। इस प्रकार सरलता एक सापेक्षिक शब्द है। आवश्यकता इस बात की है कि अनुवाद की भाषा कृत्रिम और बोझिल न हो। इसे सप्रयास कलिष्ट और दुरुह न बनाई जाए। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विष्णु प्रभाकर ने ठीक ही कहा है कि भाषा न कभी कठिन होती है, न सरल, वह सहज या असहज होती है। जो शब्द जबान पर चढ़ चुके हैं, चाहे वे किसी भी भाषा के हों, उन्हें रहने दिया जाए। शुदधिकरण की भावना भाषा के निकास को रोकती है। भाषा के संबंध में कबीर ने ठीक ही कहा है- भाषा बहता नीर। इसके अजास् प्रवाह के लिए जहां से भी शब्द आएं उन्हे ग्रहण कर लेना चाहिए। जिस भाषा में अन्य भाषाओं के शब्द ग्रहण करने की जितनी अधिक क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही अधिक समदव और सशक्त होगी। अंग्रेजी की व्यापकता और लोकप्रियता का भी यही कारण है। आज के कम्पयूटर और सूचना प्रोद्योगिकी के युग में नए शब्द अंतरराष्ट्रीय धरोहर है। संसार की सभी भाषाएं इन्हें बेझिझक अपना रही हैं।
जहां तक कार्यालयी अनुवाद के सरलीकरण का प्रश्न है, इसके मार्ग में कुछ बाधाएं हो सकती हैं, जिनपर पार पाया जा सकता है। यदि हम अपने देश की राजभाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विचार करें तो हम देखेंगे कि यहां विदेशी आक्रमण के कारण विदेशी भाषाएं आईं। सिकंदर लोधी के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान जारी हुआ और फारसी को राजभाषा बना दिया गया। अकबर के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान फारसी के लिए पुन: जारी हुआ। अंग्रेजों के आने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंग्रेजी को राजभाषा बना दिया जो स्वतंत्रता के बाद भी किसी न किसी प्रकार आज भी प्रचलित ही नहीं, अधिक प्रचलित भी है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इन विदेशी भाषाओं के कारण हिंदी में अनेक शब्द घुल-मिल गए हैं। कार्यालयी अनुवाद करते समय हमें प्रचलित शब्दों के साथ अधिक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। जैसे हमने फाइल, इंजीनियर, रेलवे, रेडियो, कंप्यूटर जैसे शब्दों को अपना लिया है, इनके स्थान पर नए शब्द लाने की क्या आवश्यकता है ? संविधान के अनुच्छेद 351 का भी यही उद्देश्य है।
==कार्यालयी अनुवाद की समस्या==
'''1:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने सबसे बड़ी समस्या जैसा कि उपर एक दृष्टांत से स्पष्ट किया गया है "शाब्दिक अनुवाद " है। इससे बचना होगा। अनुवाद यदि सांविधिक नहीं है तो इसके लिए सरल और प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाए। जैसा कि अपस्मार के लिए मिर्गी, संदाय के लिए भुगतान, अनुज्ञप्ति के लिए लाइसेंस शब्द लिखने में कोई हानि नहीं थी।
'''2:'''कार्यालयी अनुवाद के कठिन होने का दूसरा कारण है- अंग्रेजी भाषा का रूढिवादी ब्रिटिशकालीन प्रारूप, जो आज तक प्रचलित है। कार्यालयों में प्रयुक्त संहिताओं, मैनुअलों, अधिसूचनाओं, नियमों तथा विनियमों के हिंदी अनुवाद पर भी उस बीते युग की अंग्रेजी की छाप है, जो अब इंग्लैंड या अमेरिका में भी प्रयुक्त नहीं होती। किंतु हमारे देश में लार्ड क्लाइव से लेकर आज तक उसी युग की अंग्रेजी और भाषा शैली का प्रयोग हो रहा है, जिसमें अनेक अनावश्यक शब्दों का बोझ भाषा को जटिल बना देता है। उसका हिंदी अनुवाद भी हिंदी की कलिष्टता को बढ़ाने में सहायक होता है। मुझे याद है जब श्री रमा प्रसन्न नायक, राजभाषा के सचिव थे तो उन्होंने हिंदी भाषा की सरलता पर जोर देते हुए अंग्रेजी प्रारूपों में सुधार की आवश्यकताओं पर बल दिया था। किंतु यह कार्य कौन करे ? अंग्रेजी की पत्थर की लकीरें जो सैकड़ों वर्षों से खीची आ रही हैं, उनमें सुधार कौन करे ? हां, ब्रिटिश एजूकेशन सेक्रेटरी ने 1946 में भारत सरकार के कार्यालयों में चल रही अंग्रेजी को विक्टोरिया युग की भाषा शैली बताते हुए सरकारी प्रारूपो को पुराने ढंग को पूर्णत: संशोधित करने की आवश्यकता बताई थी।
अंग्रेजी में अनेक अनावश्यक वाक्यांशों की कमी नहीं है, जिनका अनुवाद करने से व्यर्थ में हिंदी भी क्लिष्ट और अटपटी हो जाती है। अत: अनवाद करते समय ऐसे शब्दों को छोड़ देना चाहिए और हिंदी की स्वाभाविक प्रकृति के अनुसार अनुवाद करना चाहिए।
कार्यालयीन भाषा की कलिष्टता का रोना भारत में ही नहीं, इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में भी है। कुछ वर्ष पूर्व इंग्लैंड की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती मारग्रेट थेचर ने अपने सरकारी कर्मचारियों को सरल भाषा प्रयोग करने के संबंध में जो निर्देश जारी किए थे, उन्हें यहां उद्धृत करना अप्रासागिक न होगा।
आपकी बात संक्षिप्त, बोधगम्य और थोड़े शब्दों में होनी चाहिए, भारी-भरकम शब्दों, वाक्यों और अन्तहीन पैराग्राफों से बचना चाहिए। संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग करें, लंबे-लंबे शब्दों से शैली में नीरसता आती है और पाठक ऊँघने लगते हैं। आप Attempt न लिखकर Try लिखें, Concerning न लिखकर About और Additional के बजाय More क्यों न लिखें। वाक्य संक्षिप्त और 15-20 शब्दों से अधिक न हो। इतने में भी आप नम्रता के साथ-साथ औपचारिक रूप में दमदार बात कह सकते हैं। अंत में उसने अपने नौकरशाही तंत्र को चेतावनी देते हए कहा था।
"मुझे मजबूरन यह कहना पड़ रहा है कि यदि आप इसके बाद भी कृत्रिम और स्कूली बच्चों जैसी भाषा लिखेंगे और भाषा का सत्यानाश करते रहेंगे तो आपको मूर्ख नहीं तो और क्या कहा जाएगा"
'''3:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने एक बड़ी कठिनाई तकनीकी और प्रशासनिक शब्दों में एकरूपता का अभाव भी है। इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। आज हिंदी केंद्रीय सरकार के अतिरिक्त 10 राज्यों की भी राजभाषा है। किंतु इनके अनेक प्रशासनिक और तकनीकी शब्दों में भी भिन्नता है। जैसे फाइल के लिए केंद्र ने फाइल ही रखा है किंतु राज्यों में कहीं इसे मिसिल, कहीं पत्रावली, कहीं संचिका कहा जाता है। Compulsory शब्द के लिए केंद्र ने अनिवार्य, बिहार ने बाध्यात्मक, मध्य प्रदेश ने आवश्यक अपनाया है। इसी प्रकार Candidate के लिए उम्मीदवार, कहीं प्रत्याशी, कहीं अभ्यर्थी, परीक्षार्थी और कहीं पदाभिलाषी जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
प्रसन्नता का विषय है कि "मातृभाषा विकास परिषद " की जनहित याचिका पर 6 सितंबर, 2004 को उच्चतम न्यायालय ने निर्णय देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र सहित सभी सरकारी निकायों को तकनीकी तथा वैज्ञानिक शब्दावली आयोग द्वारा तैयार की तकनीकी शब्दावली का प्रयोग करने के निदेश दिए हैं। इससे सभी सरकारी कार्यालयों में भी समान शब्दावली प्रयोग में भी सहायता मिलेगी और हिंदी अनुवाद में एकरूपता आएगी।
अंत में मैं कार्यालयी अनुवाद के संबंध में यही कहना चाहूँगा कि यदि अनुवाद सांविधिक प्रकृति का नहीं है तो उसे सरल और प्रचलित भाषा में किया जाए। अनुवादक को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी भाषा का सजक है। उसकी लिखी भाषा कम महत्वपूर्ण नहीं है। उसका भी प्रयोग होगा। अनुवादक को स्रोत भाषा के भावों को अपनी भाषा में व्यक्त करना है। भाषा में स्वाभाविकता बनाए रखना अनुवादक का पहला कर्तव्य है, ताकि वह ऐसी न लगे कि यह कोई अनुवाद है। हिंदी में प्रयायों की कमी नहीं है। संदर्भ को देखते हुए सरल और उपयुक्त शब्दों का यन किया जाए। अनवाद में पांडित्य प्रदर्शन के लिए कलिष्ठ और अप्रचलित शब्दों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। अनुवाद के संबंध में अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। हमें उनसे लाभ उठाना चाहिए -
अनुवाद के संबंध में पास्तरनाक ने ओलगा को पत्र में लिखा था -
"मूल विचार को नंगा करके देखो। फिर उसे नए शब्दों के वस्त्र पहना दो। कम से कम शब्दों में पूरी बात कहने की सामर्थ्य होनी चाहिए। अनुवाद शब्द का नहीं, विचार का होता है। कमाल तब है कि शाब्दिक अनुवाद भी हो और कहने के ढंग में निखार भी हो। बड़ी बारीक रेखा होती है, दोनों के बीच, जो जितना संभाल ले उतना ही श्रेष्ठ अनुवादक माना जाता है।"
अनुवादक के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि उसे इस बात पर ध्यान रखना होगा कि यह अनुवाद किसके लिए है, उसी के उपयुक्त भाषा का उपयोग करना चाहिए। अनुवाद के बाद अनुवादक को स्वयं अपने अनुवाद को तसल्ली के साथ पढ़ना चाहिए और भाषा में जहां प्रवाह नहीं है, उसे लाने का प्रयत्न करना चाहिए और जो शब्द निरर्थक और अटपटे लगें, उन्हें बदल देना चाहिए। अंग्रेजी के वाक्य बहुदा मिश्रित प्रकृति के होते हैं और कई उप-वाक्यों को मिलाकर एक वाक्य बनता है। हिंदी में यथावश्यक ऐसे वाक्य को तोड़ देना चाहिए। इससे जटिलता कम हो जाती है, अनुवाद में सबसे बड़ी कठिनाई शब्दों की न होकर वाक्यांशों और मुहावरों के अनुवाद की होती है। क्योंकि इनका अर्थ अलग-अलग शब्दों के अर्थ से नहीं समझा जा सकता। अनुवादक को इस दिशा में पूर्णत: सचेत रहना चाहिए। अंग्रेजी में But for, Save as provided जैसे अनेक ऐसे वाक्यांश या शब्द समूह हैं, जिनके अर्थ समुच्य रूप में ही निकलते हैं, पृथकपृथक शब्दों के रूप में नहीं। जैसे But का अर्थ है किंतु और For का अर्थ है "के लिए"। किंतु मिलने पर इनका अर्थ बदल जाता है जैसे I would have been ruined but for your help. अर्थात् यदि आप मेरी सहायता न करते तो मैं बर्बाद हो जाता। इसी प्रकार यहां Save का अर्थ बचाना नहीं बल्कि छोड़कर है।
इस प्रकार अनुवादक का दायित्व बड़ा महत्वपूर्ण और मल लेखक से किसी भी प्रकार कम नहीं होता।
==स्रोत==
==https://www.hindivyakran.com/2022/05/blog-post_31.html==
==https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80==
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AMAN KUMAR
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==अनुवाद==
किसी भाषा में कही या लिखी गयी बात का किसी दूसरी भाषा में सार्थक परिवर्तन अनुवाद (Translation) कहलाता है। अनुवाद का कार्य बहुत पुराने समय से होता आया है।
संस्कृत में 'अनुवाद' शब्द का उपयोग शिष्य द्वारा गुरु की बात के दुहराए जाने, पुनः कथन, समर्थन के लिए प्रयुक्त कथन, आवृत्ति जैसे कई संदर्भों में किया गया है। संस्कृत के ’वद्‘ धातु सेृृृृ ’अनुवाद‘ शब्द का निर्माण हुआ है। ’वद्‘ का अर्थ है बोलना। ’वद्‘ धातु में 'अ' प्रत्यय जोड़ देने पर भाववाचक संज्ञा में इसका परिवर्तित रूप है 'वाद' जिसका अर्थ है- 'कहने की क्रिया' या 'कही हुई बात'। 'वाद' में 'अनु' उपसर्ग उपसर्ग जोड़कर 'अनुवाद' शब्द बना है, जिसका अर्थ है, प्राप्त कथन को पुनः कहना। इसका प्रयोग पहली बार मोनियर विलियम्स ने अँग्रेजी शब्द ट्रांसलेशन (translation) के पर्याय के रूप में किया। इसके बाद ही 'अनुवाद' शब्द का प्रयोग एक भाषा में किसी के द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री की दूसरी भाषा में पुनः प्रस्तुति के संदर्भ में किया गया।<ref name="">https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6</:0>
==कार्यालयी हिन्दी==
सावैधनिक रूप से कार्यालयी हिन्दी के लिए 'राजभाषा हिन्दी' का प्रयोग किया जाता है। इसलिए कार्यालयी हिन्दी के उद्देश्य को समझने के लिए राजभाषा हिन्दी तथा उसके संवैधानिक प्रावधानों को जानना आवश्यक है। सामान्य नागरिक 'राजभाषा हिन्दी' को भ्रमवश राज्यों की हिन्दी मानते आए हैं। लेकिन राजभाषा का प्रयोग अंग्रेजी में 'Official Language' के रूप में किया जाता है। इसका तात्पर्य 'राज' की भाषा से है। 'राज की भाषा' से यहाँ अभिप्राय राज-काज की भाषा, प्रशासन की भाषा, सरकारी काम-काज की भाषा या कार्यालय की भाषा से है।<ref>https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80</ref>
==कार्यालयी अनुवाद ==
कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज के वैश्वीकृत युग में, विभिन्न भाषाओं के बीच संचार को सुगम बनाने के लिए अनुवाद की आवश्यकता होती है।
'''1:'''संवाद का माध्यम: कार्यालयी हिंदी अनुवाद का मुख्य उद्देश्य विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमियों के लोगों के बीच संवाद को सरल बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी कर्मचारी, चाहे उनकी मातृभाषा कुछ भी हो, कंपनी की नीतियों, प्रक्रियाओं और दस्तावेजों को समझ सकें।
'''2:'''कानूनी और औपचारिक दस्तावेज: कई बार कार्यालयों में कानूनी और औपचारिक दस्तावेजों का अनुवाद आवश्यक होता है। सही अनुवाद सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी पहलुओं को समझा जाए और कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए।
'''3:'''संस्कृति का सम्मान: अनुवाद केवल शब्दों का रूपांतरण नहीं है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों का सम्मान भी है। कार्यालयी हिंदी में अनुवाद से यह सुनिश्चित होता है कि स्थानीय संदर्भ और सांस्कृतिक बारीकियों को ध्यान में रखा जाए।
'''4:'''कार्यक्षमता में वृद्धि: जब सभी कर्मचारी एक ही भाषा में संवाद कर पाते हैं, तो कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इससे टीम वर्क में सुधार होता है और कार्यों को पूरा करने में समय की बचत होती है।
'''5:'''शिक्षा और प्रशिक्षण: कार्यालयों में प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के दौरान, अनुवाद की आवश्यकता होती है ताकि सभी प्रतिभागी सामग्री को समझ सकें। इससे सीखने की प्रक्रिया में सुधार होता है।
इस प्रकार, कार्यालयी हिंदी में अनुवाद की भूमिका और आवश्यकता न केवल संचार को सुगम बनाती है, बल्कि यह कार्यस्थल की समग्र उत्पादकता और सामंजस्य को भी बढ़ाती है।<ref>https://brainly.in/question/61779378</ref>
==कार्यालयी अनुवाद का सरलीकरण==
आज सरकारी कार्यालयों में जो भी हिंदी का प्रयोग देखने को मिलता है, वह प्राय: अनुवाद के माध्यम से ही हो रहा है। इसलिए आज राजभाषा मात्र अनुवाद की भाषा बनकर रह गई है। यह मूल रूप से प्रयोग की भाषा नहीं बन पाई। दूसरे, राजभाषा अधिनियम-1963 के प्रावधानों के चलते केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में द्विभाषिक स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें अनुवाद की व्यवस्था अनिवार्य है।
अनुवाद की इस भाषा के कारण कई बार यह सुनने को मिलता है कि हिंदी परिपत्रों, फार्मों और इश्तिहारों की भाषा समझ में नहीं आती और अंग्रेजी पाठ को देखना पड़ता है। फिर, आदेश और परिपत्र किसके लिए है ? इससे ऐसे परिपत्रों को हिंदी में जारी करने का उददेश्य ही समाप्त हो जाता है, जबकि होना यह चाहिए कि जिसे अंग्रेजी न समझ आए, वह इसे हिंदी में पढ़ ले। इसी में हिंदी की सार्थकता है। हिंदी की लोकप्रियता गिरने का बहुत कुछ कारण अनुवाद का ऐसा स्तर ही है। इसे हम आज के संदर्भ में कहें तो हम हिंदी का सही मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं। फिर ऐसी हिंदी को कौन अपनाना चाहेगा। एक दैनिक पत्र ने किसी सरकारी कार्यालय में प्रयुक्त ड्राविंग लाइसेंस के एक फार्म का नमूना प्रस्तुत किया है। देखिए
क्या आवेदक आपके सर्वोत्तम निर्णय के अनुसार अपस्मार भ्रमि या किसी ऐसे मानसिक रोग के अध्यधीन है, जिससे उसकी चालन कार्य क्षमता पर प्रभाव पड़ने की संभावना है ? यह प्रश्न एक डॉक्टर के लिए है, जिसे पढ़कर डॉक्टर को ही मिर्गी आ जाए। आवेदक से संबंधित भाषा का नमूना देखिए- क्या आप किसी चालन अनुज्ञप्ति या शिक्षार्थी अनुज्ञप्ति धारण निरहित हए हैं ? मैंने रुपये के विहित शुल्क का संदाय कर दिया है। यह एक बानगी है। मोटर ड्राइवर, जो अधिकतर कम पढ़े-लिखे ही होते हैं, इनका क्या उत्तर देंगे ? जो पढ़े-लिखे और शिक्षित वर्ग के लोग हैं, क्या वे भी इस भाषा को समझ पाएंगे ? उन्हें तो हारकर अंग्रेजी में ही पढ़ना पड़ेगा। प्रश्न उठता है कि आखिर यह भाषा किसके लिए लिखी जा रही है ? क्या इस भाषा से ही शासन और जनता के बीच दूरी कम हो सकेगी ? क्या यहां "अनुज्ञप्ति ", "निरहित ", "विहित ", "संदाय ", "अध्यधीन ", "अपस्मार ", "सर्वोत्तम निर्णय " जैसे कलिष्ठ शब्दों से नहीं बचा जा सकता था ?
==कार्यालय मे सरल भाषा की प्रयोग ==
सामान्यत: यह कहा जाता है कि जिस भाषा में उर्दू-फारसी के शब्द अधिक हों, वहीं भाषा सरल है। किंतु यह बात सही नहीं है। दक्षिण भारत और पूर्वी भारत के लोगों के लिए संस्कृत के शब्द उर्दू शब्दों की अपेक्षा अधिक सरल हैं, जबकि पश्चिम भारत, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए उर्द-फारसी बहत हिंदी अधिक सरल लगती है। इस प्रकार सरलता एक सापेक्षिक शब्द है। आवश्यकता इस बात की है कि अनुवाद की भाषा कृत्रिम और बोझिल न हो। इसे सप्रयास कलिष्ट और दुरुह न बनाई जाए। हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री विष्णु प्रभाकर ने ठीक ही कहा है कि भाषा न कभी कठिन होती है, न सरल, वह सहज या असहज होती है। जो शब्द जबान पर चढ़ चुके हैं, चाहे वे किसी भी भाषा के हों, उन्हें रहने दिया जाए। शुदधिकरण की भावना भाषा के निकास को रोकती है। भाषा के संबंध में कबीर ने ठीक ही कहा है- भाषा बहता नीर। इसके अजास् प्रवाह के लिए जहां से भी शब्द आएं उन्हे ग्रहण कर लेना चाहिए। जिस भाषा में अन्य भाषाओं के शब्द ग्रहण करने की जितनी अधिक क्षमता होगी वह भाषा उतनी ही अधिक समदव और सशक्त होगी। अंग्रेजी की व्यापकता और लोकप्रियता का भी यही कारण है। आज के कम्पयूटर और सूचना प्रोद्योगिकी के युग में नए शब्द अंतरराष्ट्रीय धरोहर है। संसार की सभी भाषाएं इन्हें बेझिझक अपना रही हैं।
जहां तक कार्यालयी अनुवाद के सरलीकरण का प्रश्न है, इसके मार्ग में कुछ बाधाएं हो सकती हैं, जिनपर पार पाया जा सकता है। यदि हम अपने देश की राजभाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विचार करें तो हम देखेंगे कि यहां विदेशी आक्रमण के कारण विदेशी भाषाएं आईं। सिकंदर लोधी के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान जारी हुआ और फारसी को राजभाषा बना दिया गया। अकबर के शासन में भी एक ऐसा ही फरमान फारसी के लिए पुन: जारी हुआ। अंग्रेजों के आने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंग्रेजी को राजभाषा बना दिया जो स्वतंत्रता के बाद भी किसी न किसी प्रकार आज भी प्रचलित ही नहीं, अधिक प्रचलित भी है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इन विदेशी भाषाओं के कारण हिंदी में अनेक शब्द घुल-मिल गए हैं। कार्यालयी अनुवाद करते समय हमें प्रचलित शब्दों के साथ अधिक छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। जैसे हमने फाइल, इंजीनियर, रेलवे, रेडियो, कंप्यूटर जैसे शब्दों को अपना लिया है, इनके स्थान पर नए शब्द लाने की क्या आवश्यकता है ? संविधान के अनुच्छेद 351 का भी यही उद्देश्य है।
==कार्यालयी अनुवाद की समस्या==
'''1:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने सबसे बड़ी समस्या जैसा कि उपर एक दृष्टांत से स्पष्ट किया गया है "शाब्दिक अनुवाद " है। इससे बचना होगा। अनुवाद यदि सांविधिक नहीं है तो इसके लिए सरल और प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाए। जैसा कि अपस्मार के लिए मिर्गी, संदाय के लिए भुगतान, अनुज्ञप्ति के लिए लाइसेंस शब्द लिखने में कोई हानि नहीं थी।
'''2:'''कार्यालयी अनुवाद के कठिन होने का दूसरा कारण है- अंग्रेजी भाषा का रूढिवादी ब्रिटिशकालीन प्रारूप, जो आज तक प्रचलित है। कार्यालयों में प्रयुक्त संहिताओं, मैनुअलों, अधिसूचनाओं, नियमों तथा विनियमों के हिंदी अनुवाद पर भी उस बीते युग की अंग्रेजी की छाप है, जो अब इंग्लैंड या अमेरिका में भी प्रयुक्त नहीं होती। किंतु हमारे देश में लार्ड क्लाइव से लेकर आज तक उसी युग की अंग्रेजी और भाषा शैली का प्रयोग हो रहा है, जिसमें अनेक अनावश्यक शब्दों का बोझ भाषा को जटिल बना देता है। उसका हिंदी अनुवाद भी हिंदी की कलिष्टता को बढ़ाने में सहायक होता है। मुझे याद है जब श्री रमा प्रसन्न नायक, राजभाषा के सचिव थे तो उन्होंने हिंदी भाषा की सरलता पर जोर देते हुए अंग्रेजी प्रारूपों में सुधार की आवश्यकताओं पर बल दिया था। किंतु यह कार्य कौन करे ? अंग्रेजी की पत्थर की लकीरें जो सैकड़ों वर्षों से खीची आ रही हैं, उनमें सुधार कौन करे ? हां, ब्रिटिश एजूकेशन सेक्रेटरी ने 1946 में भारत सरकार के कार्यालयों में चल रही अंग्रेजी को विक्टोरिया युग की भाषा शैली बताते हुए सरकारी प्रारूपो को पुराने ढंग को पूर्णत: संशोधित करने की आवश्यकता बताई थी।
अंग्रेजी में अनेक अनावश्यक वाक्यांशों की कमी नहीं है, जिनका अनुवाद करने से व्यर्थ में हिंदी भी क्लिष्ट और अटपटी हो जाती है। अत: अनवाद करते समय ऐसे शब्दों को छोड़ देना चाहिए और हिंदी की स्वाभाविक प्रकृति के अनुसार अनुवाद करना चाहिए।
कार्यालयीन भाषा की कलिष्टता का रोना भारत में ही नहीं, इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में भी है। कुछ वर्ष पूर्व इंग्लैंड की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती मारग्रेट थेचर ने अपने सरकारी कर्मचारियों को सरल भाषा प्रयोग करने के संबंध में जो निर्देश जारी किए थे, उन्हें यहां उद्धृत करना अप्रासागिक न होगा।
आपकी बात संक्षिप्त, बोधगम्य और थोड़े शब्दों में होनी चाहिए, भारी-भरकम शब्दों, वाक्यों और अन्तहीन पैराग्राफों से बचना चाहिए। संक्षिप्त शब्दों का प्रयोग करें, लंबे-लंबे शब्दों से शैली में नीरसता आती है और पाठक ऊँघने लगते हैं। आप Attempt न लिखकर Try लिखें, Concerning न लिखकर About और Additional के बजाय More क्यों न लिखें। वाक्य संक्षिप्त और 15-20 शब्दों से अधिक न हो। इतने में भी आप नम्रता के साथ-साथ औपचारिक रूप में दमदार बात कह सकते हैं। अंत में उसने अपने नौकरशाही तंत्र को चेतावनी देते हए कहा था।
"मुझे मजबूरन यह कहना पड़ रहा है कि यदि आप इसके बाद भी कृत्रिम और स्कूली बच्चों जैसी भाषा लिखेंगे और भाषा का सत्यानाश करते रहेंगे तो आपको मूर्ख नहीं तो और क्या कहा जाएगा"
'''3:'''कार्यालयी अनुवाद के सामने एक बड़ी कठिनाई तकनीकी और प्रशासनिक शब्दों में एकरूपता का अभाव भी है। इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। आज हिंदी केंद्रीय सरकार के अतिरिक्त 10 राज्यों की भी राजभाषा है। किंतु इनके अनेक प्रशासनिक और तकनीकी शब्दों में भी भिन्नता है। जैसे फाइल के लिए केंद्र ने फाइल ही रखा है किंतु राज्यों में कहीं इसे मिसिल, कहीं पत्रावली, कहीं संचिका कहा जाता है। Compulsory शब्द के लिए केंद्र ने अनिवार्य, बिहार ने बाध्यात्मक, मध्य प्रदेश ने आवश्यक अपनाया है। इसी प्रकार Candidate के लिए उम्मीदवार, कहीं प्रत्याशी, कहीं अभ्यर्थी, परीक्षार्थी और कहीं पदाभिलाषी जैसे शब्दों का प्रयोग होता है।
प्रसन्नता का विषय है कि "मातृभाषा विकास परिषद " की जनहित याचिका पर 6 सितंबर, 2004 को उच्चतम न्यायालय ने निर्णय देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र सहित सभी सरकारी निकायों को तकनीकी तथा वैज्ञानिक शब्दावली आयोग द्वारा तैयार की तकनीकी शब्दावली का प्रयोग करने के निदेश दिए हैं। इससे सभी सरकारी कार्यालयों में भी समान शब्दावली प्रयोग में भी सहायता मिलेगी और हिंदी अनुवाद में एकरूपता आएगी।
अंत में मैं कार्यालयी अनुवाद के संबंध में यही कहना चाहूँगा कि यदि अनुवाद सांविधिक प्रकृति का नहीं है तो उसे सरल और प्रचलित भाषा में किया जाए। अनुवादक को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी भाषा का सजक है। उसकी लिखी भाषा कम महत्वपूर्ण नहीं है। उसका भी प्रयोग होगा। अनुवादक को स्रोत भाषा के भावों को अपनी भाषा में व्यक्त करना है। भाषा में स्वाभाविकता बनाए रखना अनुवादक का पहला कर्तव्य है, ताकि वह ऐसी न लगे कि यह कोई अनुवाद है। हिंदी में प्रयायों की कमी नहीं है। संदर्भ को देखते हुए सरल और उपयुक्त शब्दों का यन किया जाए। अनवाद में पांडित्य प्रदर्शन के लिए कलिष्ठ और अप्रचलित शब्दों के प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। अनुवाद के संबंध में अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं। हमें उनसे लाभ उठाना चाहिए -
अनुवाद के संबंध में पास्तरनाक ने ओलगा को पत्र में लिखा था -
"मूल विचार को नंगा करके देखो। फिर उसे नए शब्दों के वस्त्र पहना दो। कम से कम शब्दों में पूरी बात कहने की सामर्थ्य होनी चाहिए। अनुवाद शब्द का नहीं, विचार का होता है। कमाल तब है कि शाब्दिक अनुवाद भी हो और कहने के ढंग में निखार भी हो। बड़ी बारीक रेखा होती है, दोनों के बीच, जो जितना संभाल ले उतना ही श्रेष्ठ अनुवादक माना जाता है।"
अनुवादक के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि उसे इस बात पर ध्यान रखना होगा कि यह अनुवाद किसके लिए है, उसी के उपयुक्त भाषा का उपयोग करना चाहिए। अनुवाद के बाद अनुवादक को स्वयं अपने अनुवाद को तसल्ली के साथ पढ़ना चाहिए और भाषा में जहां प्रवाह नहीं है, उसे लाने का प्रयत्न करना चाहिए और जो शब्द निरर्थक और अटपटे लगें, उन्हें बदल देना चाहिए। अंग्रेजी के वाक्य बहुदा मिश्रित प्रकृति के होते हैं और कई उप-वाक्यों को मिलाकर एक वाक्य बनता है। हिंदी में यथावश्यक ऐसे वाक्य को तोड़ देना चाहिए। इससे जटिलता कम हो जाती है, अनुवाद में सबसे बड़ी कठिनाई शब्दों की न होकर वाक्यांशों और मुहावरों के अनुवाद की होती है। क्योंकि इनका अर्थ अलग-अलग शब्दों के अर्थ से नहीं समझा जा सकता। अनुवादक को इस दिशा में पूर्णत: सचेत रहना चाहिए। अंग्रेजी में But for, Save as provided जैसे अनेक ऐसे वाक्यांश या शब्द समूह हैं, जिनके अर्थ समुच्य रूप में ही निकलते हैं, पृथकपृथक शब्दों के रूप में नहीं। जैसे But का अर्थ है किंतु और For का अर्थ है "के लिए"। किंतु मिलने पर इनका अर्थ बदल जाता है जैसे I would have been ruined but for your help. अर्थात् यदि आप मेरी सहायता न करते तो मैं बर्बाद हो जाता। इसी प्रकार यहां Save का अर्थ बचाना नहीं बल्कि छोड़कर है।
इस प्रकार अनुवादक का दायित्व बड़ा महत्वपूर्ण और मल लेखक से किसी भी प्रकार कम नहीं होता।
==स्रोत==
==https://www.hindivyakran.com/2022/05/blog-post_31.html==
==https://hi.wikibooks.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%80_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80==
==https://brainly.in/question/61779378==
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वार्ता:कार्यालयी अनुवाद
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अनुनाद सिंह
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== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
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श्रेणी:उत्तरी कोरिया के लोग
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হানিফ আলী
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गुड लक, हैव फन, डोंट डाई
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लेख आरम्भ किया
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* गोर वरबन्स्की
* रॉबर्ट कुलज़र
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* ओली ओब्स्ट
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* कॉन्स्टैंटाइन फ़िल्म
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| distributor = ब्रायरक्लिफ़ एंटरटेनमेंट (संयुक्त राज्य अमेरिका)<br>कॉन्स्टैंटाइन फ़िल्म (जर्मनी)
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}}'''''गुड लक, हैव फन, डोंट डाई''''' (Good Luck, Have Fun, Don't Die; अनुवाद: शुभकामनाएँ, मस्ती करो, मरना मत) सन् 2025 में प्रमोचित [[विज्ञान कथा साहित्य|विज्ञान कथा]] [[प्रहसन|हास्य]] फ़िल्म है जिसका निर्देशन [[गोर वरबन्स्की]] ने और लेखन मैथ्यू रॉबिन्सन ने किया है। फ़िल्म में मुख्य अभिनय [[सैम रॉकवेल]], हेली लू रिचर्डसन, [[माइकल पैन्या]], [[ज़ासी बीट्स]], असिम चौधरी और [[जूनो टेम्पल]] ने किया है। यह भविष्य से आए एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अतीत में जाकर [[लॉस एंजेलिस|लॉस एंजिल्स]] के एक भोजनालय के ग्राहकों को एक बेलगाम [[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस]] से लड़ने में मदद के लिए नियुक्त करता है।
''गुड लक, हैव फन, डोंट डाई'' का प्रीमियर फैंटास्टिक फेस्ट में सन् 2025 में किया गया और बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे 13 फ़रवरी 2026 को ब्रायरक्लिफ़ एंटरटेनमेंट द्वारा प्रमोचित किया। फ़िल्म ने $93 लाख की कमाई की जबकि इसकी लागत $2 करोड़ थी।
== कथानक ==
फ़िल्म की शुरूआत एक अजीब व्यक्ति से होती है जो रात 10:10 बजे लॉस एंजिल्स के एक भोजनालय में आता है। वो व्यक्ति आते ही घोषणा करता है कि वह दुनिया को बचाने के लिए भविष्य से आया है। उसे कुछ स्वयंसेवकों की आवश्यकता है। वो भोजनालय में आकर ऐसे तरिके कई बार अपनाता है और यह उसकी 117वीं कोशिश है। वहाँ मौजूद लोगों के बारे में उसकी जानकारी देखकर कुछ लोगों को यकीन हो जाता है कि वह सच कह रहा है। वह स्कॉट, बॉब, मैरी, और पति-पत्नी मार्क और जेनेट को अपने साथ आने के लिए मजबूर करता है।
== कलाकार ==
* [[सैम रॉकवेल]] – भविष्य से आया व्यक्ति<ref name="variety">{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/reviews/good-luck-have-fun-dont-die-review-sam-rockwell-1236534609/|title='Good Luck, Have Fun, Don't Die' Review: Sam Rockwell Is Hilariously Hard to Believe as a Scuzzy Tramp Sent From the Future to Curb AI|last=डेब्रुज|first=पीटर|date=अक्टूबर 6, 2025|website=वैराइटी|language=en-US|access-date=October 23, 2025}}</ref>
* हेली लू रिचर्डसन – इंग्रिड
* [[माइकल पैन्या]] – मार्क
* [[ज़ासी बीट्स]] – जेनेट
* असिम चौधरी – स्कॉट
* टोम टेलर – टिम
* [[जूनो टेम्पल]] – सुसन
* रिकार्डो ड्रेटन – डैरेन
* डिनो फ़ेत्शर – ब्लेज़
* अन्ना एक्टन – जिलियन
* डैनियल बार्नेट – बॉब
* डोमिनिक माहेर – सामंथा
* एडम बर्टन – डेल
* जॉर्जिया गुडमैन – मैरी
* आर्टी विल्किंसन-हंट – एआई लड़का
== सन्दर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
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स्रोत सुधारे
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* [[सैम रॉकवेल]]
* हेली लू रिचर्डसन
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}}
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* कॉन्स्टैंटाइन फ़िल्म
* [[गोर वरबन्स्की|ब्लाइंड विंक प्रोडक्शन्स]]
* 3 आर्ट्स एंटरटेनमेंट
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| budget = $2 करोड़<ref name="GLHFDDDevHist">{{cite web|last= डैलेसेंड्रो|first= एंथनी |url=https://deadline.com/2026/02/good-luck-have-fun-dont-die-gore-verbinski-1236719482/|title='Good Luck, Have Fun, Don't Die': How 3 Arts, Constantin & Briarcliff Took Pic To Screen In Eight Years & Brought Gore Verbinski Back|trans-title=‘गुड लक, हैव फन, डोंट डाई’: कैसे 3 कला, कॉन्स्टेंटिन और ब्रायरक्लिफ ने आठ सालों में एक कहानी को पर्दे पर उतारा और गोर वर्बिंस्की को वापस ले आए|language=en|date=फ़रवरी 14, 2026 |website=डेडलाइन हॉलीवुड|accessdate=फ़रवरी 14, 2026|archive-date= |archive-url= |url-status= live }}</ref>
| gross = $93 लाख<ref>{{Cite web |title=Good Luck, Have Fun, Don't Die (2026) |url=https://www.boxofficemojo.com/release/rl1088585729/?ref_=bo_da_table_8 |access-date=मार्च 20, 2026 |website=[[बॉक्स ऑफ़िस मोजो]]}}</ref><ref>{{Cite web |title=Good Luck, Have Fun, Don't Die (2026) - Financial Information |url=https://www.the-numbers.com/movie/Good-Luck-Have-Fun-Dont-Die-(2026) |access-date=मार्च 20, 2026 |website=द नम्बर्स}}</ref>
}}'''''गुड लक, हैव फन, डोंट डाई''''' (Good Luck, Have Fun, Don't Die; अनुवाद: शुभकामनाएँ, मस्ती करो, मरना मत) सन् 2025 में प्रमोचित [[विज्ञान कथा साहित्य|विज्ञान कथा]] [[प्रहसन|हास्य]] फ़िल्म है जिसका निर्देशन [[गोर वरबन्स्की]] ने और लेखन मैथ्यू रॉबिन्सन ने किया है। फ़िल्म में मुख्य अभिनय [[सैम रॉकवेल]], हेली लू रिचर्डसन, [[माइकल पैन्या]], [[ज़ासी बीट्स]], असिम चौधरी और [[जूनो टेम्पल]] ने किया है। यह भविष्य से आए एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो अतीत में जाकर [[लॉस एंजेलिस|लॉस एंजिल्स]] के एक भोजनालय के ग्राहकों को एक बेलगाम [[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस]] से लड़ने में मदद के लिए नियुक्त करता है।
''गुड लक, हैव फन, डोंट डाई'' का प्रीमियर फैंटास्टिक फेस्ट में सन् 2025 में किया गया और बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे 13 फ़रवरी 2026 को ब्रायरक्लिफ़ एंटरटेनमेंट द्वारा प्रमोचित किया। फ़िल्म ने $93 लाख की कमाई की जबकि इसकी लागत $2 करोड़ थी।
== कथानक ==
फ़िल्म की शुरूआत एक अजीब व्यक्ति से होती है जो रात 10:10 बजे लॉस एंजिल्स के एक भोजनालय में आता है। वो व्यक्ति आते ही घोषणा करता है कि वह दुनिया को बचाने के लिए भविष्य से आया है। उसे कुछ स्वयंसेवकों की आवश्यकता है। वो भोजनालय में आकर ऐसे तरिके कई बार अपनाता है और यह उसकी 117वीं कोशिश है। वहाँ मौजूद लोगों के बारे में उसकी जानकारी देखकर कुछ लोगों को यकीन हो जाता है कि वह सच कह रहा है। वह स्कॉट, बॉब, मैरी, और पति-पत्नी मार्क और जेनेट को अपने साथ आने के लिए मजबूर करता है।
== कलाकार ==
* [[सैम रॉकवेल]] – भविष्य से आया व्यक्ति<ref name="variety">{{Cite web|url=https://variety.com/2025/film/reviews/good-luck-have-fun-dont-die-review-sam-rockwell-1236534609/|title='Good Luck, Have Fun, Don't Die' Review: Sam Rockwell Is Hilariously Hard to Believe as a Scuzzy Tramp Sent From the Future to Curb AI|last=डेब्रुज|first=पीटर|date=अक्टूबर 6, 2025|website=वैराइटी|language=en-US|access-date=अक्टूबर 23, 2025}}</ref>
* हेली लू रिचर्डसन – इंग्रिड
* [[माइकल पैन्या]] – मार्क
* [[ज़ासी बीट्स]] – जेनेट
* असिम चौधरी – स्कॉट
* टोम टेलर – टिम
* [[जूनो टेम्पल]] – सुसन
* रिकार्डो ड्रेटन – डैरेन
* डिनो फ़ेत्शर – ब्लेज़
* अन्ना एक्टन – जिलियन
* डैनियल बार्नेट – बॉब
* डोमिनिक माहेर – सामंथा
* एडम बर्टन – डेल
* जॉर्जिया गुडमैन – मैरी
* आर्टी विल्किंसन-हंट – एआई लड़का
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{IMDb title}}
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बैद्य
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{{For|उपजीविका|वैद्य}}
'''बैद्य''' या '''वैद्य''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[बंगाल|बंगाल क्षेत्र]] का एक प्राचीन उच्च-जातीय [[बंगाली हिन्दू|बंगाली हिंदू]] समुदाय है।<ref name="CasteCulture&Hegemony">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=rlgcrSezHT4C&pg=PA24|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopādhyāẏa|first=Śekhara|publisher=SAGE|year=2004|isbn=978-0-76199-849-5|page=24,25, 240}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=N0AwAQAAIAAJ&pg=PA69|title=Origin and growth of caste in India, Volume 2|last=Dutt|first=Nripendra Kumar|publisher=Firma K. L. Mukhopadhyay|year=1968|pages=69–70}}</ref> [[आयुर्वेद|आयुर्वेदिक]] चिकित्सकों और जानकारों की एक उच्च-जाति के रूप में, बंगाल के समाज में ब्राह्मणों और कायस्थों के साथ बैद्यों का लंबे समय से विशेष स्थान और वर्चस्व रहा है। [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|औपनिवेशिक काल]] के दौरान, '[[भद्रलोक]]' वर्ग मुख्य रूप से इन्हीं तीन उच्च जातियों से उभरा था (यद्यपि विशेष रूप से केवल इन्हीं से नहीं), जो आज भी [[पश्चिम बंगाल]] में अपना सामूहिक आधिपत्य बनाए हुए हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से, वे केवल ब्राह्मणों के बाद दूसरे स्थान पर आते हैं और कई संदर्भों में उनके प्रतिद्वंद्वी भी माने जाते हैं। बंगाली बैद्य [[बंगाली भाषा]] बोलते हैं, जो [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा परिवार]] से संबंधित है। बंगाली बैद्य मुख्य रूप से हिंदू दर्शन के अंतर्गत [[शैव]], [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] परंपराओं के अनुयायी होते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=2PrChFaXgf0C&pg=PA132|title=Mother of My Heart, Daughter of My Dreams: Kali and Uma in the Devotional Poetry of Bengal|last=McDermott|first=Rachel Fell|date=2001-06-28|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803071-3|pages=132|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=GPqHAwAAQBAJ&pg=PA20|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopadhyay|first=Sekhar|date=2004-07-01|publisher=SAGE Publications India|isbn=978-81-321-0407-0|pages=20|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q4k9ILvAcE4C&pg=PA4|title=Nationalizing the Body: The Medical Market, Print and Daktari Medicine|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2011|publisher=Anthem Press|isbn=978-0-85728-935-3|pages=4|language=en}}</ref>
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{{For|उपजीविका|वैद्य}}
'''बैद्य''' या '''वैद्य''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[बंगाल|बंगाल क्षेत्र]] का एक प्राचीन उच्च-जातीय [[बंगाली हिन्दू|बंगाली हिंदू]] समुदाय है।<ref name="CasteCulture&Hegemony">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=rlgcrSezHT4C&pg=PA24|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopādhyāẏa|first=Śekhara|publisher=SAGE|year=2004|isbn=978-0-76199-849-5|page=24,25, 240}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=N0AwAQAAIAAJ&pg=PA69|title=Origin and growth of caste in India, Volume 2|last=Dutt|first=Nripendra Kumar|publisher=Firma K. L. Mukhopadhyay|year=1968|pages=69–70}}</ref> [[आयुर्वेद|आयुर्वेदिक]] चिकित्सकों और जानकारों की एक उच्च-जाति के रूप में, बंगाल के समाज में ब्राह्मणों और कायस्थों के साथ बैद्यों का लंबे समय से विशेष स्थान और वर्चस्व रहा है। [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|औपनिवेशिक काल]] के दौरान, '[[भद्रलोक]]' वर्ग मुख्य रूप से इन्हीं तीन उच्च जातियों से उभरा था (यद्यपि विशेष रूप से केवल इन्हीं से नहीं), जो आज भी [[पश्चिम बंगाल]] में अपना सामूहिक आधिपत्य बनाए हुए हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से, वे केवल ब्राह्मणों के बाद दूसरे स्थान पर आते हैं और कई संदर्भों में उनके प्रतिद्वंद्वी भी माने जाते हैं। बंगाली बैद्य [[बंगाली भाषा]] बोलते हैं, जो [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा परिवार]] से संबंधित है। बंगाली बैद्य मुख्य रूप से हिंदू दर्शन के अंतर्गत [[शैव]], [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] परंपराओं के अनुयायी होते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=2PrChFaXgf0C&pg=PA132|title=Mother of My Heart, Daughter of My Dreams: Kali and Uma in the Devotional Poetry of Bengal|last=McDermott|first=Rachel Fell|date=2001-06-28|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803071-3|pages=132|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=GPqHAwAAQBAJ&pg=PA20|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopadhyay|first=Sekhar|date=2004-07-01|publisher=SAGE Publications India|isbn=978-81-321-0407-0|pages=20|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q4k9ILvAcE4C&pg=PA4|title=Nationalizing the Body: The Medical Market, Print and Daktari Medicine|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2011|publisher=Anthem Press|isbn=978-0-85728-935-3|pages=4|language=en}}</ref>
== व्युत्पत्ति और पहचान ==
[[बंगाली भाषा|बंगाली]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] भाषाओं में ‘बैद्य’ या ‘वैद्य’ शब्द का अर्थ चिकित्सक या चिकित्सा-प्रदाता होता है। बंगाल ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने एक विशिष्ट उच्चवर्गीय और उच्चवर्णीय समूह, या सरल शब्दों में कहें तो एक स्वतंत्र जाति का रूप धारण किया।<ref>{{Citation|last=Seal|first=Anil|title=Glossary|date=1968|url=https://www.cambridge.org/core/books/emergence-of-indian-nationalism/glossary/A87C08FF404B6BD425733ED2AFE120B7|pages=374|periodical=The Emergence of Indian Nationalism: Competition and Collaboration in the Later Nineteenth Century|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-09652-2|access-date=2021-07-30}}</ref> बंगाल की विशिष्ट और पारंपरिक वर्ण-व्यवस्था में बैद्य एक उच्चवर्णीय हिंदू समुदाय के रूप में सुपरिचित हैं। सामाजिक संरचना के अनुसार उनका स्थान ब्राह्मणों के बाद, किंतु कायस्थों के ऊपर है। कहा जाता है कि उनके पूर्वज चिकित्सा शास्त्र में निपुण थे। ऐतिहासिक रूप से उनके बीच [[यज्ञोपवीत|उपनयन या यज्ञोपवीत]] संस्कार प्रचलित था, और वर्तमान में वे इसे केवल विवाह के दिन एक संक्षिप्त अनुष्ठान के रूप में बनाए रखते हैं। उन्हें संस्कृत शिक्षा तथा विशेष रूप से वेदों के अध्ययन और पाठ का भी अधिकार प्राप्त था। यद्यपि वर्तमान में वे यजमानी या अन्य वैदिक अनुष्ठानों में प्रत्यक्ष रूप से पौरोहित्य नहीं करते, तथापि प्रारंभिक काल में वे ऐसा करते थे। कालक्रम में वे बंगाल के ब्राह्मणों के एक विशिष्ट उपविभाग के रूप में तथा अंततः एक पूर्णतः अलग वर्ण के रूप में विकसित हुए; जिनके धार्मिक अनुष्ठानों और पद्धतियों में ब्राह्मणों के साथ कुछ समानताएँ भी हैं और कुछ भिन्नताएँ भी।
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{{For|उपजीविका|वैद्य}}
'''बैद्य''' या '''वैद्य''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[बंगाल|बंगाल क्षेत्र]] का एक प्राचीन उच्च-जातीय [[बंगाली हिन्दू|बंगाली हिंदू]] समुदाय है।<ref name="CasteCulture&Hegemony">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=rlgcrSezHT4C&pg=PA24|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopādhyāẏa|first=Śekhara|publisher=SAGE|year=2004|isbn=978-0-76199-849-5|page=24,25, 240}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=N0AwAQAAIAAJ&pg=PA69|title=Origin and growth of caste in India, Volume 2|last=Dutt|first=Nripendra Kumar|publisher=Firma K. L. Mukhopadhyay|year=1968|pages=69–70}}</ref> [[आयुर्वेद|आयुर्वेदिक]] चिकित्सकों और जानकारों की एक उच्च-जाति के रूप में, बंगाल के समाज में ब्राह्मणों और कायस्थों के साथ बैद्यों का लंबे समय से विशेष स्थान और वर्चस्व रहा है। [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|औपनिवेशिक काल]] के दौरान, '[[भद्रलोक]]' वर्ग मुख्य रूप से इन्हीं तीन उच्च जातियों से उभरा था (यद्यपि विशेष रूप से केवल इन्हीं से नहीं), जो आज भी [[पश्चिम बंगाल]] में अपना सामूहिक आधिपत्य बनाए हुए हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से, वे केवल ब्राह्मणों के बाद दूसरे स्थान पर आते हैं और कई संदर्भों में उनके प्रतिद्वंद्वी भी माने जाते हैं। बंगाली बैद्य [[बंगाली भाषा]] बोलते हैं, जो [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा परिवार]] से संबंधित है। बंगाली बैद्य मुख्य रूप से हिंदू दर्शन के अंतर्गत [[शैव]], [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] परंपराओं के अनुयायी होते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=2PrChFaXgf0C&pg=PA132|title=Mother of My Heart, Daughter of My Dreams: Kali and Uma in the Devotional Poetry of Bengal|last=McDermott|first=Rachel Fell|date=2001-06-28|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803071-3|pages=132|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=GPqHAwAAQBAJ&pg=PA20|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopadhyay|first=Sekhar|date=2004-07-01|publisher=SAGE Publications India|isbn=978-81-321-0407-0|pages=20|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q4k9ILvAcE4C&pg=PA4|title=Nationalizing the Body: The Medical Market, Print and Daktari Medicine|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2011|publisher=Anthem Press|isbn=978-0-85728-935-3|pages=4|language=en}}</ref>
== व्युत्पत्ति और पहचान ==
[[बंगाली भाषा|बंगाली]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] भाषाओं में ‘बैद्य’ या ‘वैद्य’ शब्द का अर्थ चिकित्सक या चिकित्सा-प्रदाता होता है। बंगाल ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने एक विशिष्ट उच्चवर्गीय और उच्चवर्णीय समूह, या सरल शब्दों में कहें तो एक स्वतंत्र जाति का रूप धारण किया।<ref>{{Citation|last=Seal|first=Anil|title=Glossary|date=1968|url=https://www.cambridge.org/core/books/emergence-of-indian-nationalism/glossary/A87C08FF404B6BD425733ED2AFE120B7|pages=374|periodical=The Emergence of Indian Nationalism: Competition and Collaboration in the Later Nineteenth Century|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-09652-2|access-date=2021-07-30}}</ref> बंगाल की विशिष्ट और पारंपरिक वर्ण-व्यवस्था में बैद्य एक उच्चवर्णीय हिंदू समुदाय के रूप में सुपरिचित हैं। सामाजिक संरचना के अनुसार उनका स्थान ब्राह्मणों के बाद, किंतु कायस्थों के ऊपर है। कहा जाता है कि उनके पूर्वज चिकित्सा शास्त्र में निपुण थे। ऐतिहासिक रूप से उनके बीच [[यज्ञोपवीत|उपनयन या यज्ञोपवीत]] संस्कार प्रचलित था, और वर्तमान में वे इसे केवल विवाह के दिन एक संक्षिप्त अनुष्ठान के रूप में बनाए रखते हैं। उन्हें संस्कृत शिक्षा तथा विशेष रूप से वेदों के अध्ययन और पाठ का भी अधिकार प्राप्त था। यद्यपि वर्तमान में वे यजमानी या अन्य वैदिक अनुष्ठानों में प्रत्यक्ष रूप से पौरोहित्य नहीं करते, तथापि प्रारंभिक काल में वे ऐसा करते थे। कालक्रम में वे बंगाल के ब्राह्मणों के एक विशिष्ट उपविभाग के रूप में तथा अंततः एक पूर्णतः अलग वर्ण के रूप में विकसित हुए; जिनके धार्मिक अनुष्ठानों और पद्धतियों में ब्राह्मणों के साथ कुछ समानताएँ भी हैं और कुछ भिन्नताएँ भी।
धार्मिक अनुष्ठानों के समय बैद्य आमतौर पर अपने बीच प्रचलित '-गुप्त' उपनाम-प्रत्यय (जैसे: सेन-, सेनगुप्त, दाशगुप्त, गुप्त, करगुप्त, दत्तगुप्त, आदि) के स्थान पर '-शर्मा' का प्रयोग करते हैं, क्योंकि उनके आदि ब्राह्मणोद्भव (ब्राह्मण जाति या उनके वंश मूल के) वंश-परिचय के अनुसार यही उनका वास्तविक उपनाम-प्रत्यय है। हालाँकि, लौकिक या सांसारिक कार्यों में, जैसे सरकारी दस्तावेज़ों में नाम दर्ज कराने आदि में, लंबे समय के अभ्यास के कारण वे भले ही '-गुप्त' उपनाम-प्रत्यय का प्रयोग करते हों, फिर भी कई बैद्य अपने मूल और वास्तविक उपनाम-प्रत्यय '-शर्मा' का काफ़ी खुलकर उपयोग करते हैं; जैसे कि वे लोग जो स्वयं को 'सेनशर्मा' के रूप में परिचित कराते हैं।
(ध्यान दें: बैद्य सामान्यतः तालव्य 'श' के साथ 'दाशगुप्त' लिखते हैं, जो शास्त्रीय रूप से शुद्ध है।)
सामान्यतः बैद्य शाक्त मतावलंबी होते हैं और वे शैव-शाक्त शास्त्रीय परंपरा का अनुसरण करते हैं; कम से कम बहुसंख्यक आधार पर वे मुख्य रूप से देवी कालिका के उपासक हैं। हालाँकि, ऐसे कई लोग भी हैं जो वैष्णव धर्म का पालन करते हैं, जिसमें शाक्त रीति-रिवाजों का भी एक समन्वय या मिश्रण देखने को मिलता है। यह समुदाय अत्यंत प्रगतिशील और गतिशील माना जाता है। उनकी अनुकूलन क्षमता और नवीनता को स्वीकार करने का गुण अत्यंत प्रखर है। इसके परिणामस्वरूप, समाज के कल्याण के लिए वर्तमान परिस्थितियों में वे नई विचारधाराओं और नई व्यवस्थाओं को सहज ही अपना लेते हैं। दूसरी ओर, वे समान रूप से परंपरावादी और निष्ठावान भी हैं, जिसके कारण वे आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं को अत्यंत जतन से संरक्षित कर रहे हैं और उनका पालन कर रहे हैं।
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{{For|उपजीविका|वैद्य}}
'''बैद्य''' या '''वैद्य''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के [[बंगाल|बंगाल क्षेत्र]] का एक प्राचीन उच्च-जातीय [[बंगाली हिन्दू|बंगाली हिंदू]] समुदाय है।<ref name="CasteCulture&Hegemony">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=rlgcrSezHT4C&pg=PA24|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopādhyāẏa|first=Śekhara|publisher=SAGE|year=2004|isbn=978-0-76199-849-5|page=24,25, 240}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=N0AwAQAAIAAJ&pg=PA69|title=Origin and growth of caste in India, Volume 2|last=Dutt|first=Nripendra Kumar|publisher=Firma K. L. Mukhopadhyay|year=1968|pages=69–70}}</ref> [[आयुर्वेद|आयुर्वेदिक]] चिकित्सकों और जानकारों की एक उच्च-जाति के रूप में, बंगाल के समाज में ब्राह्मणों और कायस्थों के साथ बैद्यों का लंबे समय से विशेष स्थान और वर्चस्व रहा है। [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|औपनिवेशिक काल]] के दौरान, '[[भद्रलोक]]' वर्ग मुख्य रूप से इन्हीं तीन उच्च जातियों से उभरा था (यद्यपि विशेष रूप से केवल इन्हीं से नहीं), जो आज भी [[पश्चिम बंगाल]] में अपना सामूहिक आधिपत्य बनाए हुए हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा की दृष्टि से, वे केवल ब्राह्मणों के बाद दूसरे स्थान पर आते हैं और कई संदर्भों में उनके प्रतिद्वंद्वी भी माने जाते हैं। बंगाली बैद्य [[बंगाली भाषा]] बोलते हैं, जो [[हिन्द-आर्य भाषाएँ|हिंद-आर्य भाषा परिवार]] से संबंधित है। बंगाली बैद्य मुख्य रूप से हिंदू दर्शन के अंतर्गत [[शैव]], [[शाक्त सम्प्रदाय|शाक्त]] और [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] परंपराओं के अनुयायी होते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=2PrChFaXgf0C&pg=PA132|title=Mother of My Heart, Daughter of My Dreams: Kali and Uma in the Devotional Poetry of Bengal|last=McDermott|first=Rachel Fell|date=2001-06-28|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-803071-3|pages=132|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=GPqHAwAAQBAJ&pg=PA20|title=Caste, Culture and Hegemony: Social Dominance in Colonial Bengal|last=Bandyopadhyay|first=Sekhar|date=2004-07-01|publisher=SAGE Publications India|isbn=978-81-321-0407-0|pages=20|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q4k9ILvAcE4C&pg=PA4|title=Nationalizing the Body: The Medical Market, Print and Daktari Medicine|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2011|publisher=Anthem Press|isbn=978-0-85728-935-3|pages=4|language=en}}</ref>
== व्युत्पत्ति और पहचान ==
[[बंगाली भाषा|बंगाली]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] भाषाओं में ‘बैद्य’ या ‘वैद्य’ शब्द का अर्थ चिकित्सक या चिकित्सा-प्रदाता होता है। बंगाल ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ उन्होंने एक विशिष्ट उच्चवर्गीय और उच्चवर्णीय समूह, या सरल शब्दों में कहें तो एक स्वतंत्र जाति का रूप धारण किया।<ref>{{Citation|last=Seal|first=Anil|title=Glossary|date=1968|url=https://www.cambridge.org/core/books/emergence-of-indian-nationalism/glossary/A87C08FF404B6BD425733ED2AFE120B7|pages=374|periodical=The Emergence of Indian Nationalism: Competition and Collaboration in the Later Nineteenth Century|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-09652-2|access-date=2021-07-30}}</ref> बंगाल की विशिष्ट और पारंपरिक वर्ण-व्यवस्था में बैद्य एक उच्चवर्णीय हिंदू समुदाय के रूप में सुपरिचित हैं। सामाजिक संरचना के अनुसार उनका स्थान ब्राह्मणों के बाद, किंतु कायस्थों के ऊपर है। कहा जाता है कि उनके पूर्वज चिकित्सा शास्त्र में निपुण थे। ऐतिहासिक रूप से उनके बीच [[यज्ञोपवीत|उपनयन या यज्ञोपवीत]] संस्कार प्रचलित था, और वर्तमान में वे इसे केवल विवाह के दिन एक संक्षिप्त अनुष्ठान के रूप में बनाए रखते हैं। उन्हें संस्कृत शिक्षा तथा विशेष रूप से वेदों के अध्ययन और पाठ का भी अधिकार प्राप्त था। यद्यपि वर्तमान में वे यजमानी या अन्य वैदिक अनुष्ठानों में प्रत्यक्ष रूप से पौरोहित्य नहीं करते, तथापि प्रारंभिक काल में वे ऐसा करते थे। कालक्रम में वे बंगाल के ब्राह्मणों के एक विशिष्ट उपविभाग के रूप में तथा अंततः एक पूर्णतः अलग वर्ण के रूप में विकसित हुए; जिनके धार्मिक अनुष्ठानों और पद्धतियों में ब्राह्मणों के साथ कुछ समानताएँ भी हैं और कुछ भिन्नताएँ भी।
धार्मिक अनुष्ठानों के समय बैद्य आमतौर पर अपने बीच प्रचलित '-गुप्त' उपनाम-प्रत्यय (जैसे: सेन-, सेनगुप्त, दाशगुप्त, गुप्त, करगुप्त, दत्तगुप्त, आदि) के स्थान पर '-शर्मा' का प्रयोग करते हैं, क्योंकि उनके आदि ब्राह्मणोद्भव (ब्राह्मण जाति या उनके वंश मूल के) वंश-परिचय के अनुसार यही उनका वास्तविक उपनाम-प्रत्यय है। हालाँकि, लौकिक या सांसारिक कार्यों में, जैसे सरकारी दस्तावेज़ों में नाम दर्ज कराने आदि में, लंबे समय के अभ्यास के कारण वे भले ही '-गुप्त' उपनाम-प्रत्यय का प्रयोग करते हों, फिर भी कई बैद्य अपने मूल और वास्तविक उपनाम-प्रत्यय '-शर्मा' का काफ़ी खुलकर उपयोग करते हैं; जैसे कि वे लोग जो स्वयं को 'सेनशर्मा' के रूप में परिचित कराते हैं।
(ध्यान दें: बैद्य सामान्यतः तालव्य 'श' के साथ 'दाशगुप्त' लिखते हैं, जो शास्त्रीय रूप से शुद्ध है।)
सामान्यतः बैद्य शाक्त मतावलंबी होते हैं और वे शैव-शाक्त शास्त्रीय परंपरा का अनुसरण करते हैं; कम से कम बहुसंख्यक आधार पर वे मुख्य रूप से देवी कालिका के उपासक हैं। हालाँकि, ऐसे कई लोग भी हैं जो वैष्णव धर्म का पालन करते हैं, जिसमें शाक्त रीति-रिवाजों का भी एक समन्वय या मिश्रण देखने को मिलता है। यह समुदाय अत्यंत प्रगतिशील और गतिशील माना जाता है। उनकी अनुकूलन क्षमता और नवीनता को स्वीकार करने का गुण अत्यंत प्रखर है। इसके परिणामस्वरूप, समाज के कल्याण के लिए वर्तमान परिस्थितियों में वे नई विचारधाराओं और नई व्यवस्थाओं को सहज ही अपना लेते हैं। दूसरी ओर, वे समान रूप से परंपरावादी और निष्ठावान भी हैं, जिसके कारण वे आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं को अत्यंत जतन से संरक्षित कर रहे हैं और उनका पालन कर रहे हैं।
== उत्पत्ति ==
बैद्यों की उत्पत्ति अनेक परस्पर आच्छादित तथा कभी-कभी परस्पर विरोधी मिथकों से घिरी हुई है, और इस विषय पर व्यापक विवाद भी पाया जाता है। [[उपपुराण|''उपपुराणों'']] तथा दो वंशावलियों (कुलजि या कुलपञ्जि) को छोड़कर, पूर्व-आधुनिक [[बंगाली साहित्य]] में इस जाति की उत्पत्ति के विवरण का उल्लेख नहीं मिलता, और न ही किसी प्राचीन एवं प्रामाणिक [[स्मृति|स्मृतियों]] में इसका स्पष्ट वर्णन है।<ref name=":3">{{Cite book|title=Doctoring Traditions: Ayurveda, Small Technologies, and Braided Sciences|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2016-10-14|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-38182-4|language=en|chapter=A Baidya-Bourgeois World: The Sociology of Braided Sciences|doi=10.7208/9780226381824-003|doi-broken-date=11 July 2025}}</ref> यह समुदाय अपनी वंशावली अर्ध-प्रसिद्ध [[अम्बष्ठ|अम्बष्ठों]] से जोड़ता है, जिन्हें हिंदू शास्त्रों में प्रायः [[क्षत्रिय]] मूल का माना गया है,{{Efn|The Puranas as well as Mahabharata hold them to be Kshatriyas.<ref name=":3" /> Smriti and Shastra texts regard them as a mixed caste—of a Brahmin father and a lower caste wife.<ref name=":3" /> The Jatakas mention them as Vaishyas. Ambastha Sutta, a Buddhist text regards them as Brahmins.<ref name=":3" /> Also, see the next section on Upapuranas.}} किन्तु ऐसे संबंध कुछ हद तक संदिग्ध प्रतीत होते हैं।<ref name=":14">{{Cite book|title=The People And Culture Of Bengal: A Study In Origins|last=Chattopadhyaya|first=Annapurna|publisher=Firma KLM|year=1960|volume=2|location=Kolkata|pages=868–908}}</ref>{{Efn|Nripendra K. Dutt, Pascale Haag as well as Poonam Bala concur that the terms were synonymous.<ref name=":12" /> Jyotirmoyee Sarma hypothesizes both groups might have followed the same profession and eventually merged into one.<ref name=":10" /> [[Dineshchandra Sircar]] and Annapurna Chattopadhyay express skepticism on the connection but consider Sarma's hypothesis to be plausible.<ref name=":132"/> Projit Bihari Mukharji, however, rejects such an equivalence and notes "Ambastha" had meant different things in different contexts across the history of India; it was always a ''post-facto'' label claimed by different groups in their reinvention of themselves.<ref name=":3" />}}
यह संभव है कि बैद्यों का दक्षिण भारत के [[वैद्य|वैद्यों]] से कुछ संबंध रहा हो; [[सेन राजवंश|सेन वंश]] के अभिलेखों में कर्णाट तथा अन्य स्थानों से हुए प्रवासों का उल्लेख मिलता है।<ref name=":14">{{Cite book|title=The People And Culture Of Bengal: A Study In Origins|last=Chattopadhyaya|first=Annapurna|publisher=Firma KLM|year=1960|volume=2|location=Kolkata|pages=868–908}}</ref> [[विक्रमादित्य प्रथम]] (आ. 660 ई.) के तलामंचि अभिलेख का लेखन वज्रवर्मन नामक एक व्यक्ति ने किया था, जिन्हें “प्रख्यात वैद्य” के रूप में वर्णित किया गया है। इसके अतिरिक्त, [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्य वंश]] के तीन दक्षिण भारतीय अभिलेख (आ. 8वीं शताब्दी के उत्तरार्ध) वैद्य-कुल को [[ब्राह्मण]] बताते हैं, जो संगीत और शास्त्रों में अपनी दक्षता के लिए प्रसिद्ध थे; और उनमें से एक व्यक्ति के बारे में उल्लेख है कि उसने युद्ध-सेनापति तथा प्रधान मंत्री - दोनों भूमिकाओं में सेवा दी थी।
=== '''शास्त्रीय आख्यान''' ===
''उपपुराणों'' ने बंगाल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: उन्होंने [[आर्यावर्त]] के अब तक अवैदिक माने जाने वाले सीमांत क्षेत्रों में ब्राह्मणीय आदर्शों का प्रचार और प्रतिस्थापन किया, तथा जनसमुदाय में स्वीकृति प्राप्त करने के लिए लोकभाषायी संस्कृति के तत्वों को भी समाहित किया।<ref name=":2">{{Cite book|title=Mutating Goddesses: Bengal's Laukika Hinduism and Gender Rights|last=Sengupta|first=Saswati|publisher=Oxford University Press|year=2021|chapter=Invoking the Goddesses}}</ref> इस प्रक्रिया में वे उत्तर-मध्यकालीन बंगाल में घटित सामाजिक-सांस्कृतिक संवाद और समायोजन के साक्ष्य बन गए।{{Efn|Refer {{Cite book|last=Chakrabarti|first=Kunal|title=Religious Process: The Puranas and the Making of a Regional Tradition|publisher=Oxford University Press|year=2001}} for an overview. The conclusion is worth noting: "The Brahmanization of Bengal ... seems to have engulfed most of the indigenous local cultures by the time the last redactions to the Puranas were made, and succeeded in forging a common religious cultural tradition, flexible enough to accommodate sub-regional variations and indifference to the emerging consensus on the dominant cultural mode among some social groups, and strong enough to take dissent in its stride."}}
''[[बृहद्धर्म पुराण]]'' (आ. 13वीं शताब्दी ई.) बंगाल में जातियों की श्रेणीबद्ध व्यवस्था का वर्णन करने वाला सबसे प्राचीन ग्रंथ था, और यह जातीय स्थिति के लोक-स्तरीय निर्धारण तथा संवाद का मानक पाठ बन गया।{{Efn|Ludo Rocher however notes the text to contain multiple layers (like all other Puranas) making any dating impossible. However, he agrees with R. C. Hazra that a significant part was composed as a response to the Islamic conquest of Bengal.}}<ref name=":3">{{Cite book|title=Doctoring Traditions: Ayurveda, Small Technologies, and Braided Sciences|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2016-10-14|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-38182-4|language=en|chapter=A Baidya-Bourgeois World: The Sociology of Braided Sciences|doi=10.7208/9780226381824-003|doi-broken-date=11 July 2025}}</ref>{{Efn|Older sources on social setup include inscriptions of the [[Gupta Empire|Gupta]] and the [[Pala Empire|Pala]] periods but Baidyas are not mentioned.<ref name=":10">{{Cite book|last=Sarma|first=Jyotirmoyee|title=Caste Dynamics Among the Bengali Hindus|publisher=Firma KLM|year=1987|pages=14, 20, 111}}</ref>}} इसमें बैद्यों को एक पेशागत जाति के रूप में, [[अम्बष्ठ|अम्बष्ठों]] के समकक्ष, वर्णित किया गया है; उनकी उत्पत्ति एक प्रसिद्ध पौराणिक प्रसंग से जोड़ी गई है, जिसमें ब्राह्मणों ने उन्हें [[शूद्र|शूद्रों]] में सर्वोच्च घोषित किया और [[आयुर्वेद]] के अभ्यास का एकाधिकार प्रदान किया।{{Efn|The myth is very popular across a large set of Indian scriptures. It probably has Indo-European origins.<ref name="Doniger">{{Cite book|last=O'Flaherty|first=Wendy Doniger|title=The Origins of Evil in Hindu Mythology|publisher=University of California Press|year=1976|chapter=THE SPLIT CHILD: Good and Evil Within Men|series=Hermeneutics: Studies in the History of Religions|location=Berkeley|pages=321–369}}</ref>}}<ref name=":6">{{Cite book|title=Revisiting Early India: Essays in Honour of D. C. Sircar|last=Furui|first=Ryosuke|publisher=R. N. Bhattacharya|year=2013|editor-last=Ghosh|editor-first=Suchandra|location=Kolkata|chapter=Finding Tensions in the Social Order: a Reading of the Varṇasaṃkara Section of the Bṛhaddharmapurāṇa|editor-last2=Bandyopadhyay|editor-first2=Sudipa Ray|editor-last3=Majumdar|editor-first3=Sushmita Basu|editor-last4=Pal|editor-first4=Sayantani}}</ref><ref name="KMalakar">{{Cite book|title=Inter-communities Relations Through Castes, Rituals & Marriages|last=Malakara|first=Kalipada|year=1979|quote=It is noticeable that Brihaddharmapurana has treated the Baidya and Ambastha as separate sub - castes ( Upabarna ) having separate history}}</ref>इसके विपरीत, ब्रह्मवैवर्त पुराण--जिसकी एक अत्यंत उत्तरवर्ती बंगाली पाठ-परंपरा (आ. 14वीं/15वीं शताब्दी ई.) विशेष रूप से उल्लेखनीय है--बैद्यों को अम्बष्ठों से पृथक मानता है, किन्तु दोनों को उच्चवर्गीय सत्शूद्र बताता है।{{Efn|In the myth whose central event takes place during the reign of [[Venu]], Ambasthas evolved from the forbidden unions of Brahmin fathers with Vaishya mothers, and got classified as ''Uttama Samkaras'' (highest of mixed classes).<ref name=":7">{{Cite journal |last=Sanyal |first=Hitesranjan |date=1971 |title=Continuities of Social Mobility in Traditional and Modern Society in India: Two Case Studies of Caste Mobility in Bengal |url=https://www.jstor.org/stable/2942917 |journal=The Journal of Asian Studies |volume=30 |issue=2 |pages=315–339 |doi=10.2307/2942917 |issn=0021-9118 |jstor=2942917|s2cid=163001574 |url-access=subscription }}</ref><ref name=":6" /><ref name=":8">{{Cite book |last=Nicholas |first=Ralph W. |title=From the Margins of Hindu Marriage: Essays on Gender, Religion, and Culture |publisher=Oxford University Press |year=1995 |editor-last=Harlan |editor-first=Lindsey |pages=145–152 |chapter=The Effectiveness of the Hindu Sacrament (Samskara): Caste, Marriage, and Divorce in Bengali Culture |editor-last2=Courtright |editor-first2=Paul B.}}</ref> Venu had these mixed-castes further reproduce with other mixed-castes and four ''pure'' varnas with bearing the ''Svarnakara''s from [[Vaishya]] mothers. After Venu was deposed by the Gods, [[Prthu]] was installed as a [[Vishnu]] reincarnate and he sought to integrate the ''Samkaras'' into the four primordial varnas to restore ''dharma''.<ref name=":6" />{{pb}}Thus, the Ambasthas were brought under ''Sudras'' (as were all other castes), and purposed and synonymised to ''Baidyas'' (physicians) in light of "existing capacities" and with help from [[Ashvins|Ashvin]].<ref name=":6" /><ref name=":8" /> Then, they were made to undergo a second birth as penance for birthing the ''Svarnakara''s - this rebirth is noted to be their identifying characteristic.<ref name=":6" /><ref name=":8" /> Pending completion of these rituals, they were branded as among the ''Satsudras'' — in total devotion to Brahmins and bearing a lack of material envy — and thus endowed with the right of inviting Srotriya Brahmins and accepting service from lower Sudras; one stanza even notes them to be ''Saṃkarottama'' (best of ''Saṃkara''s).<ref name=":6" />}}{{Efn|The origin story goes: [[Ashvins|Ashvin]], a Kshatriya, had raped a Brahmin pilgrim and she, along with the illegitimate son, were driven out by her husband. This son, who was brought up by Ashvin and trained in Ayurveda, went on to become the progenitor of Baidyas.<ref name=":11">{{Cite book |last=MAJUMDAR |first=R. C. |url= |title=HISTORY OF ANCIENT BENGAL |date=1971 |publisher=G. BHARADWAJ, CALCUTTA |pages=420–421, 435–437}}</ref>}}<ref name=":14">{{Cite book|title=The People And Culture Of Bengal: A Study In Origins|last=Chattopadhyaya|first=Annapurna|publisher=Firma KLM|year=1960|volume=2|location=Kolkata|pages=868–908}}</ref><ref name=":6" />
रियोसुके फ़ुरुई के अनुसार, बृहद्धर्म पुराण में वर्णित वर्ण-संकर की मिथक और उसके पश्चात संकरों का विधान प्राचीन बंगाल की विद्यमान सामाजिक श्रेणी-व्यवस्था को प्रतिबिंबित और सुदृढ़ करता था-- अर्थात्, ब्राह्मणीकृत-पूर्व प्राचीन बंगदेश में भी बैद्यों का एक प्रतिष्ठित स्थान था और वे चिकित्सा का अभ्यास करते थे-- साथ ही इसने ब्राह्मण लेखकों को एक अवैदिक समाज को परम्परानिष्ठ मानकों के अनुरूप ढालने और स्वयं को किसी हद तक शीर्ष पर स्थापित करने का अवसर भी प्रदान किया।<ref name=":6">{{Cite book|title=Revisiting Early India: Essays in Honour of D. C. Sircar|last=Furui|first=Ryosuke|publisher=R. N. Bhattacharya|year=2013|editor-last=Ghosh|editor-first=Suchandra|location=Kolkata|chapter=Finding Tensions in the Social Order: a Reading of the Varṇasaṃkara Section of the Bṛhaddharmapurāṇa|editor-last2=Bandyopadhyay|editor-first2=Sudipa Ray|editor-last3=Majumdar|editor-first3=Sushmita Basu|editor-last4=Pal|editor-first4=Sayantani}}</ref> सर्कार के अनुसार, ब्रह्मवैवर्त पुराण{{Efn|Furui senses the express prohibitions on Ambastha/Baidyas to read the Puranas despite granting them the Ayurveda as indicative of a fear of encroachment upon Brahmin intellectual domain and a tacit acknowledgement of groups trained in alternate forms of knowledge; the deeming of Ambastha/Baidyas as ''Samkarottama'' were concessional transactions where Brahmins entered into co operational agreements with other groups but commanded nominal authority.<ref name=":6" />}}{{Efn|In any case, whether the Brhaddharma Purana succeeded in materializing and sustaining the Brahminical visions of Bengali society is doubtful; the medieval law commentary [[Dāyabhāga]] shares few things in common with Bṛhaddharma Purana.<ref name=":6" />}} में उल्लिखित बैद्य समुदाय उन पदावनत ब्राह्मणों का एक समूह था, जिन्हें वैद्य या पंडित कहा जाता था; वे [[ओडिशा|ओड़िशा]] के [[गंजाम जिला|गंजाम ज़िले]] में निवास करते थे और संभवतः दक्षिण भारत के वैद्यों तथा बंगाल के बैद्यों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करते रहे होंगे।<ref>{{Cite book|url=|title=Journal of Ancient Indian History, Vol-6|last=Sircar|first=D. C|date=1972–73|publisher=Centre of Advanced Study in AIHC, C.U|pages=173–175}}</ref>
=== '''कुलजि''' या '''कुलपञ्जि''' ===
कुलजि या कुलपंजियाँ -- बंगाल में प्रचलित एक विशिष्ट स्थानिक साहित्यिक रूप -- मूलतः अपरिवर्तनीय वंशावली-पंजी मानी जाती थीं, किंतु वास्तव में वे परिवर्तनशील ग्रंथ थीं, जो समकालीन समाज की आवश्यकताओं और चिंताओं को प्रतिबिंबित करती थीं; उनका मुख्य उद्देश्य अन्य समूहों की तुलना में सामाजिक पदानुक्रम की स्थापना करना था।<ref name=":3">{{Cite book|title=Doctoring Traditions: Ayurveda, Small Technologies, and Braided Sciences|last=Mukharji|first=Projit Bihari|date=2016-10-14|publisher=University of Chicago Press|isbn=978-0-226-38182-4|language=en|chapter=A Baidya-Bourgeois World: The Sociology of Braided Sciences|doi=10.7208/9780226381824-003|doi-broken-date=11 July 2025}}</ref> उपलब्ध दो पूर्व-आधुनिक बैद्य वंशावलियों में से ''चन्द्रप्रभा'' (लगभग 17वीं शताब्दी के उत्तरार्ध ई.) अर्ध-पौराणिक अम्बष्ठों से वंश-उत्पत्ति स्थापित करती है, जबकि उससे कुछ पुरानी ''सद्वैद्यकुलपञ्जिका'' ऐसा नहीं करती।<ref name=":132">{{Cite book|title=Studies in the Society and Administration of Ancient and Medieval India|last=Sircar|first=D. C.|publisher=Firma KLM|year=1959|volume=1|pages=19, 115}}</ref>इसके अतिरिक्त, दोनों ही ग्रंथ आदि सुर और बल्लाल सेन को अपने पूर्वजों में सम्मिलित मानते हैं; इस मत का समर्थन कुछ ब्राह्मण कुल-पंजि करते हैं, किंतु कायस्थ कुल-पंजि इसे अस्वीकार करते हैं।{{Efn|Sadvaidyakulapnjika does not invoke any such connection.<ref name=":132"/> Chandraprabha mentions Bharatamallika's father to be a Vaidya and an Ambastha; it also quotes from Hindu scriptures to prove why Ambasthas and Baidyas are equable.<ref name=":12" /> Annapurna Chattopadhyaya noted the "genuineness and historical bearing" of these passages to be "questionable".<ref name=":3" /> R. C. Majumdar, D. C. Ganguly, and R. C. Hazra reiterate concerns of genuineness but note that Bharatamallika must have reflected contemporary views.}}{{Efn|The particulars of appropriation vary — CP held that the Baidyas gained Kulin status for their ''sadachara'' (good conduct) in due course of time while SV reiterated the popular tradition of Ballāla Sena conferring Kulin status.<ref name=":1" /><ref name=":14" />}}
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नया पृष्ठ: {{Wikidata Infobox|qid=}} '''अमेरिकाना''' ({{Lang-pt|Americana}}) [[ब्राज़ील]] के साओ पाउलो राज्य का शहर है। वर्ष 2025 में इसकी जनसंख्या 247.571 निवासी थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.al.sp.gov.br/documentacao/municipios-paulistas|title=Municípios Paulistas|website=www.al.sp.gov.br|language=pt-br|access-date=2026-04-17}}</ref...
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'''अमेरिकाना''' ({{Lang-pt|Americana}}) [[ब्राज़ील]] के साओ पाउलो राज्य का शहर है। वर्ष 2025 में इसकी जनसंख्या 247.571 निवासी थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.al.sp.gov.br/documentacao/municipios-paulistas|title=Municípios Paulistas|website=www.al.sp.gov.br|language=pt-br|access-date=2026-04-17}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://cidades.ibge.gov.br/brasil/sp/americana/panorama|title=IBGE {{!}} Cidades@ {{!}} São Paulo {{!}} Americana {{!}} Panorama|website=cidades.ibge.gov.br|access-date=2026-04-17}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
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[[श्रेणी:ब्राज़ील के शहर]]
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ब्रह्मानंद जयंती
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[[गुरु ब्रह्मानंद जयंती]] को अनुप्रेषित
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#पुनर्प्रेषित [[गुरु ब्रह्मानंद जयंती]]
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अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)
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चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक
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'''Art 329: Bar to interference by courts in electoral matter'''<ref>Polity Book by M. Laxmikant </ref>
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'''Art 329: Bar to interference by courts in electoral matter'''<ref>Polity Book by M. Laxmikant </ref>
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चाहर धर्मेंद्र
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सन्दर्भ + जानकारी
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{{भारत का संविधान}}
{{ज्ञानसन्दूक संविधान
| title_orig = भारत का संविधान
| part = [[भाग 15 (भारत का संविधान)|भाग 15]]
| subject = निर्वाचन
| followed_by = [[अनुच्छेद 330 (भारत का संविधान)]]
| preceded_by =[[अनुच्छेद 328 (भारत का संविधान)]]
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| genre = [[:श्रेणी:संविधान]]
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}}
'''[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]]''' का अनुच्छेद 329 लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, निरंतरता और स्थिरता को सुनिश्चित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है। यह अनुच्छेद विशेष रूप से निर्वाचन प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं को निर्धारित करता है,<ref>{{cite web |title=भारतीय निर्वाचन आयोग |url=https://www.nextias.com/blog/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97/ |website=nextias.com |accessdate=21 अप्रैल 2024}}</ref> ताकि चुनावों का संचालन बिना अनावश्यक बाधाओं के सुचारु रूप से संपन्न हो सके।<ref name=":1">{{Cite web |title=Bar to interference by courts in electoral matters |url=https://www.constitutionofindia.net/articles/article-329-bar-to-interference-by-courts-in-electoral-matters/|access-date=2025-12-16 |website=भारत का संविधान |language=en-US}}</ref> इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न विवादों का समाधान न कि तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से बल्कि एक निर्धारित विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही हो।<ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ. जी. नारायण राजू|title=भारत का संविधान|url=https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf|access-date=9 नवम्बर 2015|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड|page=227}}</ref>
==पृष्ठभूमि==
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह चुनौती थी कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को कैसे सुनिश्चित किया जाए, साथ ही यह भी कि न्यायिक हस्तक्षेप के कारण चुनाव प्रक्रिया बाधित न हो। यदि प्रत्येक चरण पर न्यायालयों में चुनौती दी जाती, तो चुनावों का समयबद्ध आयोजन कठिन हो सकता था। इसी कारण अनुच्छेद 329 को संविधान में सम्मिलित किया गया, ताकि चुनावों से संबंधित विवादों को एक विशिष्ट और पृथक विधिक तंत्र के अंतर्गत निपटाया जा सके।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह था कि चुनाव प्रक्रिया एक बार प्रारंभ हो जाने के बाद उसे बिना व्यवधान के पूर्ण किया जाए, और उसके पश्चात ही विवादों का समाधान न्यायालयों में किया जाए।<ref>{{Cite news |last=मिश्रा|first=हिमांशु|title=चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक: संविधान का अनुच्छेद 329
|url=https://hindi.livelaw.in/know-the-law/prohibition-of-interference-of-courts-in-electoral-matters-article-329-of-the-constitution-253545|access-date=27 मार्च 2024 |work=livelaw.in}}</ref>
अनुच्छेद 329 को संविधान के अन्य निर्वाचन संबंधी प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ) और जनप्रतिनिधित्व से संबंधित विधियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। यह स्पष्ट करता है कि चुनावों की निगरानी और संचालन का दायित्व निर्वाचन आयोग पर है, जबकि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का एकमात्र माध्यम निर्वाचन याचिका है।
==मूल पाठ==
{{pull quote|(क) किसी निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन या उस हेतु सीटों के आवंटन से संबंधित किसी विधि की वैधता को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा;
(ख) संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदन के लिए किसी निर्वाचन को केवल ऐसे निर्वाचन याचिका के माध्यम से ही प्रश्नगत किया जा सकेगा, जैसा कि संबंधित विधि द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया है।<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/२८७}}</ref><ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ० रीटा वशिष्ट|title=भारत का संविधान|url=https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2023/05/2023050186.pdf|access-date=26 नवम्बर 2021|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग)|page=188}}</ref>}}
{{pull quote|(a) the validity of any law relating to the delimitation of constituencies or the allotment of seats to such constituencies, made or purporting to be made under article 327 or article 328, shall not be called in question in any court;
(b) no election to either House of Parliament or to the House or either House of the Legislature of a State shall be called in question except by an election petition presented to such authority and in such manner as may be provided for by or under any law made by the appropriate Legislature.<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/२८६}}</ref>}}
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==टिप्पणी==
अनुच्छेद 329 भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता और विश्वसनीयता का एक सुदृढ़ स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप से बचा जाए, जिससे चुनाव समय पर और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें। साथ ही, यह विवादों के समाधान के लिए एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित विधिक मार्ग प्रदान करता है।<ref>{{Cite book | title=भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान)
|url=https://www.google.co.th/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE/acGM0AYUDwAC|publisher =भारत सरकार, विधि और न्याय मंत्रालय, विद्या विभाग| date= 2014}}</ref>
हालाँकि, यह प्रावधान न्यायिक समीक्षा को पूर्णतः समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे उचित समय और विधि तक सीमित करता है। इस प्रकार अनुच्छेद 329 लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायिक संतुलन के बीच एक समुचित समन्वय स्थापित करता है, जो भारतीय चुनाव प्रणाली को सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Wikisource|1=भारत का संविधान}}
[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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चाहर धर्मेंद्र
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'''[[भारत का संविधान|भारत के संविधान]]''' का अनुच्छेद 329 लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, निरंतरता और स्थिरता को सुनिश्चित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है। यह अनुच्छेद विशेष रूप से निर्वाचन प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं को निर्धारित करता है,<ref>{{cite web |title=भारतीय निर्वाचन आयोग |url=https://www.nextias.com/blog/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97/ |website=nextias.com |accessdate=21 अप्रैल 2024}}</ref> ताकि चुनावों का संचालन बिना अनावश्यक बाधाओं के सुचारु रूप से संपन्न हो सके।<ref name=":1">{{Cite web |title=Bar to interference by courts in electoral matters |url=https://www.constitutionofindia.net/articles/article-329-bar-to-interference-by-courts-in-electoral-matters/|access-date=2025-12-16 |website=भारत का संविधान |language=en-US}}</ref> इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न विवादों का समाधान न कि तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से बल्कि एक निर्धारित विधिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही हो।<ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ. जी. नारायण राजू|title=भारत का संविधान|url=https://surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf|access-date=9 नवम्बर 2015|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग) राजभाषा खण्ड|page=227}}</ref>
==पृष्ठभूमि==
संविधान-निर्माताओं के समक्ष यह चुनौती थी कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को कैसे सुनिश्चित किया जाए, साथ ही यह भी कि न्यायिक हस्तक्षेप के कारण चुनाव प्रक्रिया बाधित न हो। यदि प्रत्येक चरण पर न्यायालयों में चुनौती दी जाती, तो चुनावों का समयबद्ध आयोजन कठिन हो सकता था। इसी कारण अनुच्छेद 329 को संविधान में सम्मिलित किया गया, ताकि चुनावों से संबंधित विवादों को एक विशिष्ट और पृथक विधिक तंत्र के अंतर्गत निपटाया जा सके।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह था कि चुनाव प्रक्रिया एक बार प्रारंभ हो जाने के बाद उसे बिना व्यवधान के पूर्ण किया जाए, और उसके पश्चात ही विवादों का समाधान न्यायालयों में किया जाए।<ref>{{Cite news |last=मिश्रा|first=हिमांशु|title=चुनावी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक: संविधान का अनुच्छेद 329
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अनुच्छेद 329 को संविधान के अन्य निर्वाचन संबंधी प्रावधानों, विशेषतः अनुच्छेद 324 (निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ) और जनप्रतिनिधित्व से संबंधित विधियों के साथ जोड़कर देखा जाता है। यह स्पष्ट करता है कि चुनावों की निगरानी और संचालन का दायित्व निर्वाचन आयोग पर है, जबकि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का एकमात्र माध्यम निर्वाचन याचिका है।
==मूल पाठ==
{{pull quote|(क) किसी निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन या उस हेतु सीटों के आवंटन से संबंधित किसी विधि की वैधता को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा;
(ख) संसद या राज्य विधानमंडल के किसी सदन के लिए किसी निर्वाचन को केवल ऐसे निर्वाचन याचिका के माध्यम से ही प्रश्नगत किया जा सकेगा, जैसा कि संबंधित विधि द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया है।<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/२८७}}</ref><ref>{{Cite news|last=सचिव, भारत सरकार|first=डॉ० रीटा वशिष्ट|title=भारत का संविधान|url=https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s380537a945c7aaa788ccfcdf1b99b5d8f/uploads/2023/05/2023050186.pdf|access-date=26 नवम्बर 2021|work=भारत सरकार विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग)|page=188}}</ref>}}
{{pull quote|(a) the validity of any law relating to the delimitation of constituencies or the allotment of seats to such constituencies, made or purporting to be made under article 327 or article 328, shall not be called in question in any court;
(b) no election to either House of Parliament or to the House or either House of the Legislature of a State shall be called in question except by an election petition presented to such authority and in such manner as may be provided for by or under any law made by the appropriate Legislature.<ref>{{cite wikisource |title=भारत का संविधान|wslink= भारत का संविधान|last= (संपा॰) प्रसाद|first=राजेन्द्र|date= 1957|publisher= |location= |page=52|scan=पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/२८६}}</ref>}}
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==टिप्पणी==
अनुच्छेद 329 भारतीय लोकतंत्र की स्थिरता और विश्वसनीयता का एक सुदृढ़ स्तंभ है। यह सुनिश्चित करता है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक न्यायिक हस्तक्षेप से बचा जाए, जिससे चुनाव समय पर और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो सकें। साथ ही, यह विवादों के समाधान के लिए एक स्पष्ट और सुव्यवस्थित विधिक मार्ग प्रदान करता है।<ref>{{Cite book | title=भारत का संविधान (25 मार्च, 2014 को यथाविद्यमान)
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हालाँकि, यह प्रावधान न्यायिक समीक्षा को पूर्णतः समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे उचित समय और विधि तक सीमित करता है। इस प्रकार अनुच्छेद 329 लोकतांत्रिक प्रक्रिया और न्यायिक संतुलन के बीच एक समुचित समन्वय स्थापित करता है, जो भारतीय चुनाव प्रणाली को सुदृढ़ और विश्वसनीय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
==बाहरी कड़ियाँ==
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[[श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद]]
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सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih
3
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2026-04-17T02:28:56Z
AMAN KUMAR
911487
सूचना: [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
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text/x-wiki
== [[:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)|अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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वार्ता:अनुच्छेद 329 (भारत का संविधान)
1
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2026-04-17T02:31:53Z
Yug Sumhadih
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/* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ नया अनुभाग
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text/x-wiki
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC) इस संविधान में किसी भी बात के होते हुए भी
(ए) अनुच्छेद 327 या अनुच्छेद 328 के तहत बनाए गए या बनाए जाने का दावा किए गए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों को सीटों के आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा;
(बी) संसद के किसी भी सदन या राज्य के विधानमंडल के किसी भी सदन के चुनाव पर तब तक प्रश्न नहीं उठाया जाएगा जब तक कि उपयुक्त विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा या उसके तहत निर्धारित प्राधिकारी को और उस तरीके से चुनाव याचिका प्रस्तुत न की जाए
--[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC)--[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC) [[चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक]]
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2026-04-17T02:55:32Z
AMAN KUMAR
911487
/* शीघ्र हटाने पर चर्चा */ उत्तर
6541420
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text/x-wiki
== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यहाँ अपना कारण बताएँ) --[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC) इस संविधान में किसी भी बात के होते हुए भी
(ए) अनुच्छेद 327 या अनुच्छेद 328 के तहत बनाए गए या बनाए जाने का दावा किए गए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों को सीटों के आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा;
(बी) संसद के किसी भी सदन या राज्य के विधानमंडल के किसी भी सदन के चुनाव पर तब तक प्रश्न नहीं उठाया जाएगा जब तक कि उपयुक्त विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी कानून द्वारा या उसके तहत निर्धारित प्राधिकारी को और उस तरीके से चुनाव याचिका प्रस्तुत न की जाए
--[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC)--[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] ([[सदस्य वार्ता:Yug Sumhadih|वार्ता]]) 02:31, 17 अप्रैल 2026 (UTC) [[चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक]]
:@[[सदस्य:Yug Sumhadih|Yug Sumhadih]] महोदय,
:आपने यह हिंदी अनुवाद केवल इस चर्चा पृष्ठ पर दिया है, जबकि मुख्य लेख अभी भी अंग्रेजी में ही है। जब तक मुख्य लेख हिंदी में नहीं हो जाता, तब तक उसे हटाने का साँचा वापस नहीं लिया जा सकता।
:धन्यवाद [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 02:55, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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श्रेणी:अंतर्वस्त्र
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2026-04-17T03:11:49Z
अनिरुद्ध कुमार
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नया पृष्ठ: यह अंतर्वस्त्र से संबंधित श्रेणी है।
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यह अंतर्वस्त्र से संबंधित श्रेणी है।
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2026-04-17T03:12:33Z
अनिरुद्ध कुमार
18906
[[WP:HC|HotCat]] द्वारा [[श्रेणी:वस्त्र]] जोड़ी
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text/x-wiki
यह अंतर्वस्त्र से संबंधित श्रेणी है।
[[श्रेणी:वस्त्र]]
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नादोती
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text/x-wiki
'''नाडोती''' [[राजस्थान]] के करौल जिले में एक [[तहसील]]/ब्लॉक है।<ref>{{Cite web|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42554/download/46180/2011-IndiaStateDistSbDistVill-0000.xlsx|title=Basic Population Figures of India, States, Districts, Sub-District and Village, 2011|last=<!-- not stated -->|date=2011|website=censusindia.gov.in|publisher=[[Ministry of Home Affairs (India)|Ministry of Home Affairs]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20220711042331/https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42554/download/46180/2011-IndiaStateDistSbDistVill-0000.xlsx|archive-date=2022-07-11|access-date=May 16, 2025}}</ref> 2011 की जनगणना की जानकारी के अनुसार नाडोती ब्लॉक का उप-जिला कोड 0521 है। नाडोती प्रखंड में लगभग 96 गाँव हैं।
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2026-04-17T03:49:52Z
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Cr
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text/x-wiki
'''नाडोती''' [[राजस्थान]] के करौल जिले में एक [[तहसील]]/ब्लॉक है।<ref>{{Cite web|url=https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42554/download/46180/2011-IndiaStateDistSbDistVill-0000.xlsx|title=Basic Population Figures of India, States, Districts, Sub-District and Village, 2011|last=<!-- not stated -->|date=2011|website=censusindia.gov.in|publisher=[[Ministry of Home Affairs (India)|Ministry of Home Affairs]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20220711042331/https://censusindia.gov.in/nada/index.php/catalog/42554/download/46180/2011-IndiaStateDistSbDistVill-0000.xlsx|archive-date=2022-07-11|access-date=May 16, 2025}}</ref> 2011 की जनगणना की जानकारी के अनुसार नाडोती ब्लॉक का उप-जिला कोड 0521 है। नाडोती प्रखंड में लगभग 96 गाँव हैं।
==संदर्भ==
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सदस्य वार्ता:Dukefanzone
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기나ㅏㄴ
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기나ㅏㄴ ने पृष्ठ [[सदस्य वार्ता:Dukefanzone]] को [[सदस्य वार्ता:Andrew3884]] पर स्थानांतरित किया: "[[Special:CentralAuth/Dukefanzone|Dukefanzone]]" का नाम "[[Special:CentralAuth/Andrew3884|Andrew3884]]" करते समय पृष्ठ स्वतः स्थानांतरित हुआ
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text/x-wiki
#पुनर्प्रेषित [[सदस्य वार्ता:Andrew3884]]
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AMAN KUMAR
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चेतावनी: विकिपीडिया का प्रोमोशन अथवा प्रचार के लिए प्रयोग करना [[:रोगान कला]] पर.
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== अप्रैल 2026 ==
[[File:Nuvola apps important.svg|25px|alt=|link=]] कृपया [[विकिपीडिया:विघटनकारी सम्पादन|विघटनकारी संपादन]] करना बंद करें। अगर आप विकिपीडिया पर [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देना, विज्ञापन या प्रचार सामग्री जोड़ना]] जारी रखते हैं, जैसा कि आपने [[:रोगान कला]] पर किया है, तो आपको [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|संपादन करने से अवरोधित]] किया जा सकता है। [[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert3 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert3 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:26, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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सदस्य वार्ता:Arjun Prasad Singh Prabhat
3
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2026-04-17T05:40:02Z
AMAN KUMAR
911487
सावधानी बरतें: विकिपीडिया का प्रोमोशन अथवा प्रचार के लिए प्रयोग करना [[:समस्तीपुर जिला]] पर.
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== अप्रैल 2026 ==
[[Image:Information_orange.svg|25px|alt=|link=]]कृपया विकिपीडिया पर प्रचार सामग्री न जोड़ें, जैसा की आपने [[:समस्तीपुर जिला]] पृष्ठ पर किया। यहाँ भावनाओं, उत्पादों या सेवाओं का [[विकिपीडिया:तटस्थ दृष्टिकोण|तटस्थ उल्लेख]] स्वीकार्य है, परन्तु विकिपीडिया [[विकिपीडिया:विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया भाषण देने या प्रचार करने का मंच नहीं है|भाषण देने और प्रचार करने का मंच]] नहीं है। धन्यवाद।[[श्रेणी:सदस्य वार्ता पन्नें जिनपर Uw-advert2 सूचना है|{{PAGENAME}}]]<!-- Template:Uw-advert2 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:40, 17 अप्रैल 2026 (UTC)
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2026 तीरंदाजी विश्व कप
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चाहर धर्मेंद्र
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2026 तीरंदाजी विश्व कप
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text/x-wiki
{{Infobox sports season
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}}
'''2026 तीरंदाजी विश्व कप''' तीरंदाजी के वैश्विक मंच पर आयोजित एक प्रतिष्ठित वार्षिक प्रतियोगिता है, जिसे प्रायोजन के कारण हुंडई तीरंदाजी विश्व कप के नाम से भी जाना जाता है। यह आयोजन [[विश्व तीरंदाजी]] द्वारा संचालित किया जाता है और वर्ष 2026 में इसका बीसवाँ संस्करण आयोजित हो रहा है, जो इसकी दीर्घकालीन परंपरा और महत्व को दर्शाता है।
इस वर्ष की प्रतियोगिता में कुल पाँच स्पर्धाएँ सम्मिलित की गई हैं, जिनमें विश्वभर के श्रेष्ठ तीरंदाज अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगे। 7 अप्रैल से प्रारंभ होकर 13 सितंबर तक चलने वाला यह विस्तृत आयोजन विभिन्न चरणों में संपन्न होगा, जहाँ प्रतिस्पर्धा, धैर्य और एकाग्रता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।<ref>{{cite web |title=Calendar released for Archery World Cup stages in 2024-2027 |url=https://www.worldarchery.sport/news/201077/calendar-released-archery-world-cup-stages-2024-2027 |website=worldarchery.sport |date=9 फरवरी 2023 |accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref><ref>{{cite web |title=Puebla to replace Central Florida as opening stage of World Cup in 2026 |url=https://www.worldarchery.sport/news/202070/puebla-replace-central-florida-opening-stage-world-cup-2026 |website=worldarchery.sport |date=18 July 2025 |accessdate=19 अक्टूबर 2025}}</ref><ref>{{cite web |title=World Archery Moves Event From Florida to Mexico|url=https://www.sportstravelmagazine.com/world-archery-moves-event-from-florida-to-mexico/ |website=sportstravelmagazine.com |date=23 July 2025 |accessdate=19 अक्टूबर 2025}}</ref>
==कैलेंडर==
[[विश्व तीरंदाजी]] द्वारा घोषित 2026 तीरंदाजी विश्व कप का कैलेंडर तीरंदाजी के वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक ढाँचे को सुव्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करता है
{| class="wikitable"
|-
! चरण
! तारीख
! जगह
! संदर्भ
|-
! 1
| 7–12 अप्रैल
| {{flagicon|MEX}} पुएब्ला, [[मेक्सिको]]
| <ref>{{cite web |title=PUEBLA 2026 HYUNDAI ARCHERY WORLD CUP STAGE 1|url=https://www.worldarchery.sport/competition/26297/puebla-2026-hyundai-archery-world-cup-stage-1 |website=विश्व तीरंदाजी|accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref>
|-
! 2
| 5–10 मई
| {{flagicon|CHN}} [[शंघाई]], [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]]
| <ref>{{cite web |title=SHANGHAI 2026 HYUNDAI ARCHERY WORLD CUP STAGE 2|url=https://www.worldarchery.sport/competition/26298/shanghai-2026-hyundai-archery-world-cup-stage-2 |website=विश्व तीरंदाजी|accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref>
|-
! 3
| 9–14 जून
| {{flagicon|TUR}} अंताल्या, [[तुर्की]]
| <ref>{{cite web |title=ANTALYA 2026 HYUNDAI ARCHERY WORLD CUP STAGE 3 |url=https://www.worldarchery.sport/competition/26299/antalya-2026-hyundai-archery-world-cup-stage-3 |website=विश्व तीरंदाजी |accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref>
|-
! 4
| 7–12 जुलाई
| {{flagicon|ESP}} [[मद्रिद]], [[स्पेन]]
| <ref>{{cite web |title=MADRID 2026 HYUNDAI ARCHERY WORLD CUP STAGE 4|url=https://www.worldarchery.sport/competition/26300/madrid-2026-hyundai-archery-world-cup-stage-4 |website=विश्व तीरंदाजी|accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref>
|-
! फाइनल
| 12–13 सितंबर
| {{flagicon|MEX}} साल्टिलो, [[मेक्सिको]]
| <ref>{{cite web |title=SALTILLO 2026 HYUNDAI ARCHERY WORLD CUP FINAL|url=https://www.worldarchery.sport/competition/30886/saltillo-2026-hyundai-archery-world-cup-final |website=विश्व तीरंदाजी|accessdate=21 अक्टूबर 2024}}</ref>
|}
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:तीरंदाजी विश्व कप]]
[[श्रेणी:तीरंदाजी]]
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अनुच्छेद 102 (भारत का संविधान)
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नया पृष्ठ: भारतीय संविधान का '''अनुच्छेद 102'''(Article 102) संसद के सदस्यों (सांसदों) की सदस्यता समाप्त होने या उनकी अयोग्यता से संबंधित है। यह अनुच्छेद बताता है कि किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति लोक...
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text/x-wiki
भारतीय संविधान का '''अनुच्छेद 102'''(Article 102) संसद के सदस्यों (सांसदों) की सदस्यता समाप्त होने या उनकी अयोग्यता से संबंधित है। यह अनुच्छेद बताता है कि किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनने के योग्य नहीं रहेगा।
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AMAN KUMAR
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भारतीय संविधान का '''अनुच्छेद 102'''(Article 102) संसद के सदस्यों (सांसदों) की सदस्यता समाप्त होने या उनकी अयोग्यता से संबंधित है। यह अनुच्छेद बताता है कि किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनने के योग्य नहीं रहेगा।
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[[श्रेणी:भारत का संविधान]]
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तिलक राज बेहड़
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Created by translating the opening section from the page "[[:en:Special:Redirect/revision/1334400410|Tilak Raj Behar]]"
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}}
'''तिलक राज बिहार''' (हिन्दीः तिलक राज बिहार, जन्म 1 फरवरी 1957) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] में 67-[[किच्छा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड|किच्छा विधानसभा]] क्षेत्र के विधायक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने [[उत्तराखण्ड सरकार|उत्तराखंड सरकार]] में स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के उपनेता, और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।<ref name="ten">{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2010/20100330/dplus.htm#1|title=The Tribune, Chandigarh, India - Dehradun Plus|date=|website=Tribuneindia.com|access-date=2017-02-24}}</ref><ref name="eleven">{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/newsscroll/ganesh-godiyal-appointed-uttarakhand-cong-chief-pritam-singh-made-clp-leader/2126238|title=Outlook, India|date=|access-date=2021-07-22}}</ref>
वे पांच बार [[उत्तर प्रदेश]]/[[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] की विधानसभा के लिए चुने गए हैं-1993 और 1996 में उत्तर प्रदेश के [[हल्द्वानी]] विधानसभा क्षेत्र से, 2002 और 2007 में उत्तराखंड के [[रुद्रपुर]]<nowiki/>-[[किच्छा]] विधानसभा क्षेत्र से और 2022 में उत्तराखंड के [[किच्छा]] विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं।
बेहर [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के सदस्य हैं, हालांकि वे पहले [[भारतीय जनता पार्टी]] से जुड़े थे। उन्होंने उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, परिवहन, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री, उत्तराखंड की मंडी परिषद के अध्यक्ष और उत्तराखंड राज्य बीज और जैविक उत्पादन प्रमाणन एजेंसी के अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।
बेहर 2002 से 2007 तक [[नारायण दत्त तिवारी]] मंत्रिमंडल में उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय को संभालने के माध्यम से प्रमुखता से आए।
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}}
'''तिलक राज बिहार''' (हिन्दीः तिलक राज बिहार, जन्म 1 फरवरी 1957) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] में 67-[[किच्छा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड|किच्छा विधानसभा]] क्षेत्र के विधायक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने [[उत्तराखण्ड सरकार|उत्तराखंड सरकार]] में स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के उपनेता, और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।<ref name="ten">{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2010/20100330/dplus.htm#1|title=The Tribune, Chandigarh, India - Dehradun Plus|date=|website=Tribuneindia.com|access-date=2017-02-24}}</ref><ref name="eleven">{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/newsscroll/ganesh-godiyal-appointed-uttarakhand-cong-chief-pritam-singh-made-clp-leader/2126238|title=Outlook, India|date=|access-date=2021-07-22}}</ref>
वे पांच बार [[उत्तर प्रदेश]]/[[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] की विधानसभा के लिए चुने गए हैं-1993 और 1996 में उत्तर प्रदेश के [[हल्द्वानी]] विधानसभा क्षेत्र से, 2002 और 2007 में उत्तराखंड के [[रुद्रपुर]]<nowiki/>-[[किच्छा]] विधानसभा क्षेत्र से और 2022 में उत्तराखंड के [[किच्छा]] विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं।
बेहर [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के सदस्य हैं, हालांकि वे पहले [[भारतीय जनता पार्टी]] से जुड़े थे। उन्होंने उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, परिवहन, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री, उत्तराखंड की मंडी परिषद के अध्यक्ष और उत्तराखंड राज्य बीज और जैविक उत्पादन प्रमाणन एजेंसी के अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।
बेहर 2002 से 2007 तक [[नारायण दत्त तिवारी]] मंत्रिमंडल में उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय को संभालने के माध्यम से प्रमुखता से आए।
==संदर्भ==
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| spouse = Veena Behar
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}}
'''तिलक राज बिहार''' ( जन्म 1 फरवरी 1957) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] में 67-[[किच्छा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड|किच्छा विधानसभा]] क्षेत्र के विधायक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने [[उत्तराखण्ड सरकार|उत्तराखंड सरकार]] में स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के उपनेता, और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।<ref name="ten">{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2010/20100330/dplus.htm#1|title=The Tribune, Chandigarh, India - Dehradun Plus|date=|website=Tribuneindia.com|access-date=2017-02-24}}</ref><ref name="eleven">{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/newsscroll/ganesh-godiyal-appointed-uttarakhand-cong-chief-pritam-singh-made-clp-leader/2126238|title=Outlook, India|date=|access-date=2021-07-22}}</ref>
वे पांच बार [[उत्तर प्रदेश]]/[[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] की विधानसभा के लिए चुने गए हैं-1993 और 1996 में उत्तर प्रदेश के [[हल्द्वानी]] विधानसभा क्षेत्र से, 2002 और 2007 में उत्तराखंड के [[रुद्रपुर]]<nowiki/>-[[किच्छा]] विधानसभा क्षेत्र से और 2022 में उत्तराखंड के [[किच्छा]] विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं।
बेहर [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के सदस्य हैं, हालांकि वे पहले [[भारतीय जनता पार्टी]] से जुड़े थे। उन्होंने उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, परिवहन, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री, उत्तराखंड की मंडी परिषद के अध्यक्ष और उत्तराखंड राज्य बीज और जैविक उत्पादन प्रमाणन एजेंसी के अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।
बेहर 2002 से 2007 तक [[नारायण दत्त तिवारी]] मंत्रिमंडल में उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय को संभालने के माध्यम से प्रमुखता से आए।
==संदर्भ==
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| termend1 = 2002
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| spouse = Veena Behar
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}}
'''तिलक राज बिहार''' ( जन्म 1 फरवरी 1957) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वे वर्तमान में [[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] में 67-[[किच्छा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, उत्तराखण्ड|किच्छा विधानसभा]] क्षेत्र के विधायक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने [[उत्तराखण्ड सरकार|उत्तराखंड सरकार]] में स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड विधानसभा में विपक्ष के उपनेता, और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।<ref name="ten">{{Cite web|url=http://www.tribuneindia.com/2010/20100330/dplus.htm#1|title=The Tribune, Chandigarh, India - Dehradun Plus|date=|website=Tribuneindia.com|access-date=2017-02-24}}</ref><ref name="eleven">{{Cite web|url=https://www.outlookindia.com/newsscroll/ganesh-godiyal-appointed-uttarakhand-cong-chief-pritam-singh-made-clp-leader/2126238|title=Outlook, India|date=|access-date=2021-07-22}}</ref>
वे पांच बार [[उत्तर प्रदेश]]/[[उत्तराखण्ड|उत्तराखंड]] की विधानसभा के लिए चुने गए हैं-1993 और 1996 में उत्तर प्रदेश के [[हल्द्वानी]] विधानसभा क्षेत्र से, 2002 और 2007 में उत्तराखंड के [[रुद्रपुर]]<nowiki/>-[[किच्छा]] विधानसभा क्षेत्र से और 2022 में उत्तराखंड के [[किच्छा]] विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जीते हैं।
बेहर [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के सदस्य हैं, हालांकि वे पहले [[भारतीय जनता पार्टी]] से जुड़े थे। उन्होंने उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, परिवहन, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री, उत्तराखंड की मंडी परिषद के अध्यक्ष और उत्तराखंड राज्य बीज और जैविक उत्पादन प्रमाणन एजेंसी के अध्यक्ष जैसे पदों पर कार्य किया है।
बेहर 2002 से 2007 तक [[नारायण दत्त तिवारी]] मंत्रिमंडल में उत्तराखंड राज्य में स्वास्थ्य मंत्रालय को संभालने के माध्यम से प्रमुखता से आए।
==संदर्भ==
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औषधि (कम्पनी)
0
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अनुनाद सिंह
1634
"[[:en:Special:Redirect/revision/1344624925|Oushadhi]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक कम्पनी|name=औषधि|logo=File:Oushadhi Logo.png|caption=|type=सरकारी कम्पनी|genre=[[आयुर्वेद]]|fate=|predecessor=श्री केरल वर्मा शासकीय आयुर्वैदिक फार्मेसी|successor=|foundation=|founder=|defunct=|location_city=[[त्रिशूर]] नगर, [[केरलम्]]|location_country=[[भारत]]|location=[[कुट्टनेल्लूर]], [[त्रिशूर]] नगर|locations=|area_served=[[भारत]]|key_people=[[शोभना जॉर्ज]]|industry=[[औषध उद्योग]]|products=आयुर्वैदिक औषधि|production=|services=|revenue=४० क्रोड़ रुपये|operating_income=|net_income=6.69 करोड़|aum=|assets=|equity=|owner=[[केरलम् सरकार]]|num_employees=|parent=[[केरलम् सरकार]]|divisions=|subsid=|homepage=[http://www.oushadhi.org/ www.oushadhi.org]|footnotes=}}
'''औषधि''' या फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन केरल लिमिटेड, केरलम् राज्य के [[त्रिस्सूर|त्रिशूर]] शहर के कुट्टानेल्लूर में स्थित एक आयुर्वेदिक दवा निर्माण कंपनी है। यह पूरी तरह से केरल सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है और लगभग 450 आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन का उत्पादन करती है।
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अनुनाद सिंह
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{{ज्ञानसन्दूक कम्पनी|name=औषधि|logo=File:Oushadhi Logo.png|caption=|type=सरकारी कम्पनी|genre=[[आयुर्वेद]]|fate=|predecessor=श्री केरल वर्मा शासकीय आयुर्वैदिक फार्मेसी|successor=|foundation=|founder=|defunct=|location_city=[[त्रिशूर]] नगर, [[केरलम्]]|location_country=[[भारत]]|location=[[कुट्टनेल्लूर]], [[त्रिशूर]] नगर|locations=|area_served=[[भारत]]|key_people=[[शोभना जॉर्ज]]|industry=[[औषध उद्योग]]|products=आयुर्वैदिक औषधि|production=|services=|revenue=४० क्रोड़ रुपये|operating_income=|net_income=6.69 करोड़|aum=|assets=|equity=|owner=[[केरलम् सरकार]]|num_employees=|parent=[[केरलम् सरकार]]|divisions=|subsid=|homepage=[http://www.oushadhi.org/ www.oushadhi.org]|footnotes=}}
'''औषधि''' या फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन केरल लिमिटेड, केरलम् राज्य के [[त्रिस्सूर|त्रिशूर]] शहर के कुट्टानेल्लूर में स्थित एक आयुर्वेदिक दवा निर्माण कंपनी है। यह पूरी तरह से केरल सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है और लगभग 450 आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन का उत्पादन करती है।
==इन्हें भी देखें==
*[[औषधि]]
==सन्दर्भ==
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'''औषधि''' या '''फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन केरल लिमिटेड''', [[केरलम्]] राज्य के [[त्रिस्सूर|त्रिशूर]] शहर के कुट्टानेल्लूर में स्थित एक आयुर्वेदिक दवा निर्माण कंपनी है। यह पूरी तरह से केरल सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है और लगभग 450 आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन का उत्पादन करती है।
==इन्हें भी देखें==
*[[औषधि]]
==सन्दर्भ==
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[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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सदस्य:Khushi200
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Khushi200
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Harshdda
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नया पृष्ठ: किरण झेंडे मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने मोटिवेशनल और स्पिरिचुअल विचार शेयर करने के लिए मशहूर हैं। सोलापुर जिले के गुरसाले के रहने वाले झेंडे अपने 'किरण ज़ेंडे विच...
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किरण झेंडे मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने मोटिवेशनल और स्पिरिचुअल विचार शेयर करने के लिए मशहूर हैं। सोलापुर जिले के गुरसाले के रहने वाले झेंडे अपने 'किरण ज़ेंडे विचारधारा' के ज़रिए समाज को एजुकेट करते हैं। किरण झेंडे सोलापुर जिले के गुरसाले के एक सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं, जो मुख्य रूप से ShareChat, गूगल, यूट्यूब, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर अपने इंस्पिरेशनल, स्पिरिचुअल और सोशल विचार शेयर करने के लिए मशहूर हैं। 'किरण झेंडे विचारधारा' नाम से, वे स्टेटस और अच्छे विचार शेयर करते हैं, जो समाज पर पॉजिटिव असर डालने की कोशिश करते हैं।
उनका पूरा नाम किरण महावीर झेंडे है और वे सोलापुर जिले के मालशिरस तालुका के गुरसाले गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने सोलापुर यूनिवर्सिटी से BSC (ECS) एंटायर कंप्यूटर साइंस किया और बाद में पुणे यूनिवर्सिटी से MCS (MAster in computer science) किया। ShareChat, Instagram, प्रतिलिपि, YouTube और Facebook पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
किरण झेंडे के विचारों की खास बातें: प्रेरणा देने वाले विचार: वह ज़िंदगी में मुश्किल हालात से उबरने और पॉजिटिव सोच बनाए रखने के लिए प्रेरणा देने वाले विचार शेयर करते हैं। सोशल कमेंट्री: 'आँखें खोलो - ध्यान से पढ़ो' जैसे कैंपेन के ज़रिए, वह समाज की कड़वी सच्चाई और करंट अफेयर्स पर अपने विचार बताते हैं। स्पिरिचुअलिटी और कल्चर: वह स्टेटस के ज़रिए अच्छी वैल्यूज़ सिखाने और स्पिरिचुअल विचारों को फैलाने का काम करते हैं। लोकल पहचान: क्योंकि वह गुरसाले, सोलापुर (महाराष्ट्र) से हैं, इसलिए उनके वीडियो और स्टेटस लोकल लेवल पर बहुत पॉपुलर हैं।
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#स3|शीह स3]])
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किरण झेंडे मुख्य रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने मोटिवेशनल और स्पिरिचुअल विचार शेयर करने के लिए मशहूर हैं। सोलापुर जिले के गुरसाले के रहने वाले झेंडे अपने 'किरण ज़ेंडे विचारधारा' के ज़रिए समाज को एजुकेट करते हैं। किरण झेंडे सोलापुर जिले के गुरसाले के एक सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं, जो मुख्य रूप से ShareChat, गूगल, यूट्यूब, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर अपने इंस्पिरेशनल, स्पिरिचुअल और सोशल विचार शेयर करने के लिए मशहूर हैं। 'किरण झेंडे विचारधारा' नाम से, वे स्टेटस और अच्छे विचार शेयर करते हैं, जो समाज पर पॉजिटिव असर डालने की कोशिश करते हैं।
उनका पूरा नाम किरण महावीर झेंडे है और वे सोलापुर जिले के मालशिरस तालुका के गुरसाले गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने सोलापुर यूनिवर्सिटी से BSC (ECS) एंटायर कंप्यूटर साइंस किया और बाद में पुणे यूनिवर्सिटी से MCS (MAster in computer science) किया। ShareChat, Instagram, प्रतिलिपि, YouTube और Facebook पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
किरण झेंडे के विचारों की खास बातें: प्रेरणा देने वाले विचार: वह ज़िंदगी में मुश्किल हालात से उबरने और पॉजिटिव सोच बनाए रखने के लिए प्रेरणा देने वाले विचार शेयर करते हैं। सोशल कमेंट्री: 'आँखें खोलो - ध्यान से पढ़ो' जैसे कैंपेन के ज़रिए, वह समाज की कड़वी सच्चाई और करंट अफेयर्स पर अपने विचार बताते हैं। स्पिरिचुअलिटी और कल्चर: वह स्टेटस के ज़रिए अच्छी वैल्यूज़ सिखाने और स्पिरिचुअल विचारों को फैलाने का काम करते हैं। लोकल पहचान: क्योंकि वह गुरसाले, सोलापुर (महाराष्ट्र) से हैं, इसलिए उनके वीडियो और स्टेटस लोकल लेवल पर बहुत पॉपुलर हैं।
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सदस्य:Asimali2003/sandbox
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नया लेख बनाया , पर्यवेक्षित अधिगम पर सारांश जोड़ा
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
* '''भविष्यवाणी''' — नए, अनदेखे डेटा पर मॉडल सही उत्तर देने की कोशिश करता है।
== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki>
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<nowiki>[[श्रेणी:कम्प्यूटर विज्ञान]]</nowiki>
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
* '''भविष्यवाणी''' — नए, अनदेखे डेटा पर मॉडल सही उत्तर देने की कोशिश करता है।
== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki><nowiki>[[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]]</nowiki><nowiki>[[श्रेणी:कम्प्यूटर विज्ञान]]</nowiki>
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
* '''भविष्यवाणी''' — नए, अनदेखे डेटा पर मॉडल सही उत्तर देने की कोशिश करता है।
== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki>
<nowiki>[[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]]</nowiki>
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
[[चित्र:Dall-e 3 (jan '24) artificial intelligence icon.png|अंगूठाकार|A.I]]
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
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== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki>
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<nowiki>[[श्रेणी:कम्प्यूटर विज्ञान]]</nowiki>
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
[[चित्र:Dall-e 3 (jan '24) artificial intelligence icon.png|अंगूठाकार|अ।इ]]
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
* '''भविष्यवाणी''' — नए, अनदेखे डेटा पर मॉडल सही उत्तर देने की कोशिश करता है।
== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki>
<nowiki>[[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]]</nowiki>
<nowiki>[[श्रेणी:कम्प्यूटर विज्ञान]]</nowiki>
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सदस्य:डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय
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डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय
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'''डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय'''
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डॉ इन्दु शेखर उपाध्याय
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= '''अरावली पर्वतमाला का पारिस्थितिक और पर्यावरणीय महत्वः ='''
डॉ0 इन्दु शेखर उपाध्याय
पूर्व प्राचार्य
सन्त तुलसीदास पी0जी0 कालेज
कादीपुर,सुलतानपुर।
अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और पर्यावरणीय ढाल है, जो थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, दिल्ली-एनसीआर के लिए “हरे फेफड़ों“ का काम करती है, और धूल भरी आंधियों को नियंत्रित करती है, जिससे वायु गुणवत्ता बेहतर होती है। यह जैव विविधता का खजाना है, कई नदियों (जैसे बनास, साहिबी) का स्रोत है, और भूजल पुनर्भरण में मदद करती है, जिससे स्थानीय जलवायु और जल सुरक्षा बनी रहती है। अरावली पर्वतमाला सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत के पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के लिए एक ’जीवन-समर्थन प्रणाली’ है, जिसका संरक्षण पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पारिस्थितिक, पर्यावरणीय एवं जैव विविधता में योगदानः अरावली पर्वत थार रेगिस्तान के फैलाव के विपरीत एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है। ये भूजल पुनर्भरण, स्थानीय मौसम की स्थितियों को भी नियंत्रित करती हैं और एनसीआर को हरित फेफड़ों की तरह सेवाएं प्रदान करती हैं। यहाँ वार्षिक वर्षा 500-700 मिमी होती है, अरावली शृंखला प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र के रूप में कार्य करती है और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के जल निकासी क्षेत्रों को अलग करती है। अरावली परिदृश्य शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और आर्द्रभूमि का समर्थन करता है, जिसमें सहारा, प्रायद्वीपीय जैव विविधता का अनोखा मिश्रण पाया जाता है। यहाँ 22 वन्यजीव अभयारण्य और तीन बाघ अभयारण्य हैं तथा यह बाघ, तेंदुआ, भारतीय भेड़िया, स्लॉथ बियर तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिये आवास प्रदान करता है। कृषि, आजीविका और पशुपालनः अरावली क्षेत्र में कृषि वर्षा-निर्भर और जीविकोपार्जन-आधारित है, जिसमें बाज़रा, मक्का, गेहूँ, सरसों तथा दलहन उगाई जाती हैं। वहीं बड़े पैमाने पर पशुपालन और वन संसाधनों पर निर्भरता ग्रामीण आजीविकाओं के लिये पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।आर्थिक और खनिज महत्त्वः अरावली क्षेत्र खनिजों में समृद्ध है, जिसमें 70 से अधिक वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान खनिज शामिल हैं, जैसे जिंक, सीसा, चाँदी, टंगस्टन, संगमरमर और ग्रेनाइट। खनन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि के रूप में उभरा है, विशेषकर राजस्थान में, जो इस शृंखला का लगभग 80þ हिस्सा रखता है। अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण अरावली बेल्ट में गुरुग्राम, फरीदाबाद, जयपुर, अलवर और अजमेर जैसे प्रमुख औद्योगिक तथा शहरी केंद्र स्थित हैं।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्वः अरावली शृंखला में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जैसे चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ किले स्थित हैं।यह पुष्कर, अजमेर शरीफ, माउंट आबू और रानकपुर जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों का भी क्षेत्र है। यह ’भारत की प्राकृतिक हरी दीवार’ है, जो थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है। अरावली पर्वतमाला के बिना, राजस्थान और हरियाणा बहुत ज़्यादा सूखे होते। यह मानसूनी हवाओं को प्रभावित करती है और बारिश बढ़ाती है। अरावली पर्वतमाला से कई सदाबाही नदियाँ प्रवाहित होती हैं। मुख्य नदी बनास जो चंबल में बहती है,साबरमती - पश्चिम दिशा में बहने वाली एक बड़ी नदी है,लूणी नदी - कच्छ के रण में बहती है जबकि साहिबी नदी - यमुना नदी में जाकर मिलती है। ये नदियां स्थानीय सिंचाई, पेयजल और जीविका पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहाँ पर्याप्त खनिज पाए जाते हैं-राजस्थान में खेतड़ी की तांबा खदानें,जावर में जस्ता और सीसा की खदानें, मकराना एवं आबू में संगमरमर एवं ग्रेनाइट की खदाने आदि विशेष महत्व पूर्ण हैं। खनन से राजस्व तो प्राप्त हुआ है, लेकिन इसके कारण वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और भूमि का क्षरण हुआ है।
वर्तमान संकट(विवाद) : यहाँ वर्षा कम हो रही है। सरकार अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट चला रही है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि यहाँ के जंगलों को बचाना और उनका विस्तार करना बहुत ज़रूरी है। माइनिंग को कंट्रोल करना भी ज़रूरी है। पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और विज्ञान में इसका योगदान बहुत ज़्यादा है। हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए। अगर अरावली रेंज गायब हो गयी तो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को रेगिस्तान बनने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। अरावली की पहड़ियां इस वक्त पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच फंसी हुई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी है, जिसके बाद अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षरण के मुद्दे फिर से सुर्खियों में हैं। अरावली विवाद की जड़ें 1990 के दशक तक जाती हैं, जब अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की शिकायतें बढ़ीं। यह पर्वतमाला करीब 692 किलोमीटर लंबी है, जो गुजरात से दिल्ली तक फैली है। राजस्थान में इसका बड़ा हिस्सा है, जहां संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य खनिज प्रचुर हैं। लेकिन इन खनिजों के खनन से पहाड़ियां गायब हो रही हैं, जल स्तर गिर रहा है और वन्यजीवों का आवास नष्ट हो रहा है। पर्यावरणवादियों का कहना है कि नई परिभाषा से 90 प्रतिशत अरावली खनन के लिए खुल जाएगी, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी होगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, सरकारी नीतियों और पर्यावरणविदोंं की याचिकाओं के बीच फंसे इस मामले का पूरा कालक्रम पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करता है।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा से वंचित सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के मार्ग प्रशस्ति करती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है। वस्तुतः अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है एक तरफ सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण व इसे हरित बनाये रखने के उद्देश्य से बजट 2025-26 में, 250 करोड़ रुपये राशि की ’हरित अरावली विकास परियोजना शुरू करने की घोषणा करी गई थी। दूसरी तरफ उसी अरावली पर्वतमाला को अब खनन के लिए सौंपा जा रहा है। ये विडंबना नहीं है तो क्या है? अरावली वह प्राकृतिक दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा लू और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में प्रवेश करने से रोकती है। इस दीवार को कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। कुल मिलाकर, अरावली और खेजड़ी दोनों पर हो रहा यह हमला विकास नहीं, बल्कि विनाश की राजनीति है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि यहां अनियंत्रित खनन “देश की पारिस्थितिकी के लिए एक बड़ा खतरा“ है और इनकी सुरक्षा के लिए समान मानदंड निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसलिए, पारिस्थितिक स्थिरता, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के लिए इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली की एकसमान परिभाषा को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशें स्वीकार करते हुए कहा कि अब केवल 100 मीटर या उससे अधिक स्थानीय ऊंचाई वाले भूभाग को ही ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाएगा। साथ ही, 500 मीटर की दूरी के अंदर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां होने पर उन्हें ‘अरावली रेंज’ की श्रेणी में रखा जाएगा। इनके सहायक ढलान और आसपास के क्षेत्र भी संरक्षित रहेंगे। इस फैसले में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्रों के लिए नई खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक सतत खनन की व्यापक योजना तैयार नहीं हो जाती।
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AMAN KUMAR
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= '''अरावली पर्वतमाला का पारिस्थितिक और पर्यावरणीय महत्वः ='''
डॉ0 इन्दु शेखर उपाध्याय
पूर्व प्राचार्य
सन्त तुलसीदास पी0जी0 कालेज
कादीपुर,सुलतानपुर।
अरावली पर्वतमाला उत्तर-पश्चिमी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक और पर्यावरणीय ढाल है, जो थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती है, दिल्ली-एनसीआर के लिए “हरे फेफड़ों“ का काम करती है, और धूल भरी आंधियों को नियंत्रित करती है, जिससे वायु गुणवत्ता बेहतर होती है। यह जैव विविधता का खजाना है, कई नदियों (जैसे बनास, साहिबी) का स्रोत है, और भूजल पुनर्भरण में मदद करती है, जिससे स्थानीय जलवायु और जल सुरक्षा बनी रहती है। अरावली पर्वतमाला सिर्फ एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत के पारिस्थितिक संतुलन और मानव जीवन के लिए एक ’जीवन-समर्थन प्रणाली’ है, जिसका संरक्षण पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पारिस्थितिक, पर्यावरणीय एवं जैव विविधता में योगदानः अरावली पर्वत थार रेगिस्तान के फैलाव के विपरीत एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती है। ये भूजल पुनर्भरण, स्थानीय मौसम की स्थितियों को भी नियंत्रित करती हैं और एनसीआर को हरित फेफड़ों की तरह सेवाएं प्रदान करती हैं। यहाँ वार्षिक वर्षा 500-700 मिमी होती है, अरावली शृंखला प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र के रूप में कार्य करती है और बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर के जल निकासी क्षेत्रों को अलग करती है। अरावली परिदृश्य शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और आर्द्रभूमि का समर्थन करता है, जिसमें सहारा, प्रायद्वीपीय जैव विविधता का अनोखा मिश्रण पाया जाता है। यहाँ 22 वन्यजीव अभयारण्य और तीन बाघ अभयारण्य हैं तथा यह बाघ, तेंदुआ, भारतीय भेड़िया, स्लॉथ बियर तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के लिये आवास प्रदान करता है। कृषि, आजीविका और पशुपालनः अरावली क्षेत्र में कृषि वर्षा-निर्भर और जीविकोपार्जन-आधारित है, जिसमें बाज़रा, मक्का, गेहूँ, सरसों तथा दलहन उगाई जाती हैं। वहीं बड़े पैमाने पर पशुपालन और वन संसाधनों पर निर्भरता ग्रामीण आजीविकाओं के लिये पारिस्थितिक तंत्र के स्वास्थ्य को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है।आर्थिक और खनिज महत्त्वः अरावली क्षेत्र खनिजों में समृद्ध है, जिसमें 70 से अधिक वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान खनिज शामिल हैं, जैसे जिंक, सीसा, चाँदी, टंगस्टन, संगमरमर और ग्रेनाइट। खनन एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि के रूप में उभरा है, विशेषकर राजस्थान में, जो इस शृंखला का लगभग 80þ हिस्सा रखता है। अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण अरावली बेल्ट में गुरुग्राम, फरीदाबाद, जयपुर, अलवर और अजमेर जैसे प्रमुख औद्योगिक तथा शहरी केंद्र स्थित हैं।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्वः अरावली शृंखला में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जैसे चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ किले स्थित हैं।यह पुष्कर, अजमेर शरीफ, माउंट आबू और रानकपुर जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों का भी क्षेत्र है। यह ’भारत की प्राकृतिक हरी दीवार’ है, जो थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है। अरावली पर्वतमाला के बिना, राजस्थान और हरियाणा बहुत ज़्यादा सूखे होते। यह मानसूनी हवाओं को प्रभावित करती है और बारिश बढ़ाती है। अरावली पर्वतमाला से कई सदाबाही नदियाँ प्रवाहित होती हैं। मुख्य नदी बनास जो चंबल में बहती है,साबरमती - पश्चिम दिशा में बहने वाली एक बड़ी नदी है,लूणी नदी - कच्छ के रण में बहती है जबकि साहिबी नदी - यमुना नदी में जाकर मिलती है। ये नदियां स्थानीय सिंचाई, पेयजल और जीविका पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहाँ पर्याप्त खनिज पाए जाते हैं-राजस्थान में खेतड़ी की तांबा खदानें,जावर में जस्ता और सीसा की खदानें, मकराना एवं आबू में संगमरमर एवं ग्रेनाइट की खदाने आदि विशेष महत्व पूर्ण हैं। खनन से राजस्व तो प्राप्त हुआ है, लेकिन इसके कारण वनों की कटाई, वायु प्रदूषण और भूमि का क्षरण हुआ है।
वर्तमान संकट(विवाद) : यहाँ वर्षा कम हो रही है। सरकार अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट चला रही है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि यहाँ के जंगलों को बचाना और उनका विस्तार करना बहुत ज़रूरी है। माइनिंग को कंट्रोल करना भी ज़रूरी है। पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और विज्ञान में इसका योगदान बहुत ज़्यादा है। हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए। अगर अरावली रेंज गायब हो गयी तो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को रेगिस्तान बनने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा। अरावली की पहड़ियां इस वक्त पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच फंसी हुई है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की नई परिभाषा को मंजूरी दी है, जिसके बाद अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षरण के मुद्दे फिर से सुर्खियों में हैं। अरावली विवाद की जड़ें 1990 के दशक तक जाती हैं, जब अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की शिकायतें बढ़ीं। यह पर्वतमाला करीब 692 किलोमीटर लंबी है, जो गुजरात से दिल्ली तक फैली है। राजस्थान में इसका बड़ा हिस्सा है, जहां संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य खनिज प्रचुर हैं। लेकिन इन खनिजों के खनन से पहाड़ियां गायब हो रही हैं, जल स्तर गिर रहा है और वन्यजीवों का आवास नष्ट हो रहा है। पर्यावरणवादियों का कहना है कि नई परिभाषा से 90 प्रतिशत अरावली खनन के लिए खुल जाएगी, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी होगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, सरकारी नीतियों और पर्यावरणविदोंं की याचिकाओं के बीच फंसे इस मामले का पूरा कालक्रम पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करता है।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल चुका होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ऊँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा से वंचित सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के मार्ग प्रशस्ति करती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है। वस्तुतः अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कटने और बड़े पैमाने पर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है एक तरफ सरकार द्वारा अरावली पर्वतमाला के संरक्षण व इसे हरित बनाये रखने के उद्देश्य से बजट 2025-26 में, 250 करोड़ रुपये राशि की ’हरित अरावली विकास परियोजना शुरू करने की घोषणा करी गई थी। दूसरी तरफ उसी अरावली पर्वतमाला को अब खनन के लिए सौंपा जा रहा है। ये विडंबना नहीं है तो क्या है? अरावली वह प्राकृतिक दीवार है जो पश्चिम से आने वाली जानलेवा लू और थार रेगिस्तान को पूर्वी राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानों में प्रवेश करने से रोकती है। इस दीवार को कमजोर करना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। कुल मिलाकर, अरावली और खेजड़ी दोनों पर हो रहा यह हमला विकास नहीं, बल्कि विनाश की राजनीति है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया है कि यहां अनियंत्रित खनन “देश की पारिस्थितिकी के लिए एक बड़ा खतरा“ है और इनकी सुरक्षा के लिए समान मानदंड निर्धारित करने का निर्देश दिया है। इसलिए, पारिस्थितिक स्थिरता, सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास के लिए इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को अरावली की एकसमान परिभाषा को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशें स्वीकार करते हुए कहा कि अब केवल 100 मीटर या उससे अधिक स्थानीय ऊंचाई वाले भूभाग को ही ‘अरावली पहाड़ी’ माना जाएगा। साथ ही, 500 मीटर की दूरी के अंदर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां होने पर उन्हें ‘अरावली रेंज’ की श्रेणी में रखा जाएगा। इनके सहायक ढलान और आसपास के क्षेत्र भी संरक्षित रहेंगे। इस फैसले में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्रों के लिए नई खनन पट्टे देने पर रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक सतत खनन की व्यापक योजना तैयार नहीं हो जाती।
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'''वोलियन''', [[संघीकृत राज्य माइक्रोनेशिया|माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य]] के याप राज्य में वोलई द्वीप और आसपास के छोटे द्वीपों की मुख्य भाषा है। वोलियन एक चुकिक भाषा है। उस परिवार के भीतर, इसका सबसे करीबी रिश्तेदार सतावली है, जिसके साथ यह काफी हद तक पारस्परिक रूप से समझदार है। लगभग १,७०० लोग वोलियन बोलते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://globalrecordings.net/en/language/18321|title=Woleaian language}}</ref> वोलियन की अपनी एक लेखन प्रणाली है, जो लैटिन वर्णमाला पर आधारित एक पाठ्यक्रम है।
== सन्दर्भ ==
<references />
=== ग्रंथ सूची ===
* {{cite book|title=वोलियन सन्दर्भ व्याकरण|last=सोहन|first=हो-मिन|date=१९७५|publisher=हवाई विश्वविद्यालय मुद्रणालय|isbn=0-8248-0356-6}}
* {{citation|last=कैनेडी|first=रोबर्ट|title=वोलियन पुनरावृत्ति में बलाघात और रूपभेद|date=२००२|url=https://tls.ling.utexas.edu/2002/Robert_Kennedy.pdf|language=en}}
* {{cite book|url=https://izumi-syuppan.co.jp/LLO_PDF/vol_02/10Tsui.pdf|title=वोलियन भाषा में जापानी ऋणशब्द|last=त्सुई|first=त्साज़हिम|publisher=हवाई विश्वविद्यालय|location=होनोलुलु|language=en}}
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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{{Infobox language|name=वोलियन|states=[[माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य]]|region=वोलीआई|speakers=|date=|ref=१,६०० (१९८७) <ref>e18</ref>|familycolor=Austronesian|fam2=[[मलय-पोलेनीशियाई भाषाएँ|मलय-पोलेनीशियाई]]|fam3=[[ओशियानी भाषाएँ|ओशियानी]]|fam4=[[माइक्रोनेशियाई भाषाएँ|माइक्रोनेशियाई]]|fam5=चूकिक|fam6=उलीथन-वोलियन|fam7=|nation=[[माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य]]|script=[[रोमन लिपि|लैटिन]], [[वोलियन लिपि|वोलियन]]|iso3=woe|glotto=wole1240|glottorefname=वोलियन|notice=|map=Lang Status 40-SE.svg|mapcaption={{center|वोलियन को [[यूनेस्को]] के ''[[विश्व के संकटग्रस्त भाषाओं का एटलस]]'' द्वारा 'गंभीर रूप से संकटग्रस्त' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।}}}}
'''वोलियन''', [[संघीकृत राज्य माइक्रोनेशिया|माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य]] के याप राज्य में वोलई द्वीप और आसपास के छोटे द्वीपों की मुख्य भाषा है। वोलियन एक चुकिक भाषा है। उस परिवार के भीतर, इसका सबसे करीबी रिश्तेदार सतावली है, जिसके साथ यह काफी हद तक पारस्परिक रूप से समझदार है। लगभग १,७०० लोग वोलियन बोलते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://globalrecordings.net/en/language/18321|title=Woleaian language}}</ref> वोलियन की अपनी एक लेखन प्रणाली है, जो लैटिन वर्णमाला पर आधारित एक पाठ्यक्रम है।
== सन्दर्भ ==
<references />
=== ग्रंथ सूची ===
* {{cite book|title=वोलियन सन्दर्भ व्याकरण|last=सोहन|first=हो-मिन|date=१९७५|publisher=हवाई विश्वविद्यालय मुद्रणालय|isbn=0-8248-0356-6}}
* {{citation|last=कैनेडी|first=रोबर्ट|title=वोलियन पुनरावृत्ति में बलाघात और रूपभेद|date=२००२|url=https://tls.ling.utexas.edu/2002/Robert_Kennedy.pdf|language=en}}
* {{cite book|url=https://izumi-syuppan.co.jp/LLO_PDF/vol_02/10Tsui.pdf|title=वोलियन भाषा में जापानी ऋणशब्द|last=त्सुई|first=त्साज़हिम|publisher=हवाई विश्वविद्यालय|location=होनोलुलु|language=en}}
[[श्रेणी:माइक्रोनेशियाई भाषाएँ]]
[[श्रेणी:ओशियानी भाषाएँ]]
[[श्रेणी:ऑस्ट्रोनीशियाई भाषाएँ]]
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पर्यवेक्षित अधिगम
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== पर्यवेक्षित अधिगम ==
[[चित्र:Dall-e_3_(jan_'24)_artificial_intelligence_icon.png|अंगूठाकार|अ।इ]]
पर्यवेक्षित अधिगम (अंग्रेज़ी: Supervised Learning) मशीन लर्निंग की एक विधि है<ref>{{cite book|title=Machine Learning|last=Mitchell|first=Tom M.|publisher=McGraw-Hill|year=1997|isbn=978-0070428072}}</ref> जिसमें एक मॉडल को लेबल किए गए डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक इनपुट के साथ उसका सही आउटपुट पहले से दिया होता है, और मॉडल इन उदाहरणों से सीखकर नए डेटा पर भविष्यवाणी करता है।
== कार्यप्रणाली ==
पर्यवेक्षित अधिगम में तीन मुख्य चरण होते हैं: <ref>{{cite web|url=https://scikit-learn.org/stable/supervised_learning.html|title=Supervised Learning|publisher=scikit-learn|access-date=2026-04-17}}</ref>
* '''प्रशिक्षण डेटा''' — मॉडल को लेबल किए गए उदाहरण दिए जाते हैं।
* '''अधिगम''' — मॉडल इन उदाहरणों से पैटर्न पहचानना सीखता है।
* '''भविष्यवाणी''' — नए, अनदेखे डेटा पर मॉडल सही उत्तर देने की कोशिश करता है।
== उदाहरण ==
पर्यवेक्षित अधिगम के कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:
* '''स्पैम पहचान''' — ईमेल को स्पैम या गैर-स्पैम के रूप में वर्गीकृत करना।
* '''छवि वर्गीकरण''' — तस्वीरों में बिल्ली, कुत्ता आदि पहचानना।
* '''चिकित्सा निदान''' — लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना।
== अनुप्रयोग ==
पर्यवेक्षित अधिगम का उपयोग अनेक क्षेत्रों में किया जाता है:
* '''स्वास्थ्य सेवा''' — रोग निदान और चिकित्सा छवि विश्लेषण में।
* '''वित्त''' — धोखाधड़ी पहचान और शेयर बाज़ार भविष्यवाणी में।
* '''प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण''' — भाषा अनुवाद और भावना विश्लेषण में।
* '''स्वचालित वाहन''' — सड़क संकेत और बाधाओं की पहचान में।
== सन्दर्भ ==
<references />
<nowiki>[[श्रेणी:मशीन लर्निंग]]</nowiki>
<nowiki>[[श्रेणी:कृत्रिम बुद्धिमत्ता]]</nowiki>
<nowiki>[[श्रेणी:कम्प्यूटर विज्ञान]]</nowiki>
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